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CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-5-3 Solutions _Hindi_

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CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-5-3 Solutions _Hindi_ - Page 1 of 16

About CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-5-3 Solutions _Hindi_

CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-5-3 Solutions _Hindi_ is available here for free download. Published by CBSE for Class 12, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (16 pages). Candidates preparing for Class 12 can use CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-5-3 Solutions _Hindi_ to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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Yes. CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-5-3 Solutions _Hindi_ can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

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CBSE Class 12 History Question Paper 2020 Set 61-5-3 Solutions _Hindi_ – Text

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Page 1

अ यतं गोपनीय - के वल आतं रक एव ं सी मत योग हेत ु

सीिनयर ूल सिटिफके ट परी ा - 2020
अंक-योजना HISTORY
SUBJECT CODE : 027 PAPER CODE : 61/5/3

सामा िनदश :-

1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।

2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू याक
ं न करते समय नवीनतम सच
ू ना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए परूे अक ं दए जाएँ।

3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती ह।ै
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।

6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।

7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।

8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदख
े ा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।

Page 2

9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।

10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)

11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –

 उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
 उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
 उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
 उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
 आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
 योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
 उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
 कु ल अंक के योग म अशुि
 उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
 उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।

12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।

13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता ह।ै

14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।

15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।

16. क ीय मा यिमक िश ा बोड पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत शु क
भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित दते ा ह।ै

Page 3

MARKING SCHEME HISTORY-027
CLASS XII
AISSCE MARCH 2020
CODE NO. Set-61/5/3

Q.NO अपेक्षित उत्तर / मूल्य अंक PAGE MA
Part -A NO. RKS

1 A- कार्ल मार्क्ल Pg-132 1

2 जनपद- प्रमुख राज्य थे जहाां र्ोग बस गए Pg-29 1

महाजनपद- प्राचीन भारत में राज्य या प्रशासननक इकाईयोां(सोर्ह

राज्योां पर राजा का शासन था)

3 A-. बडी आबादी, बाजारोां और कुशर् सांचार Pg-126 1

4 A-(i-b,ii-c,iii-d, iv-a) Pg- 1

121,122,

137

5 अर्-ब्रुनी ख्वाररजम / उज़्बेनकस्तान से था और उसने अरबी भाषा में Pg-116 1

नकताब-उर्-नहांद नर्खा था।

अथवा
Pg-118
मुहम्मद नबन तुगर्क इब्न बतूता की निद्वता से प्रभानित था.

6 धम्म Pg-32 1

7 पाटनर्पुत्र Pg-31 1

अथवा

मगध

8 C- निद्वान ( पढ़े नर्खे) उस नर्नप को पढ़ नहीां सके है Pg-15 1

9 मातृ दे िी( हडप्पा) Pg-23 1

नेत्रहीनोां के नर्ए: -उन्नत ( Unicorn.)

10 A- केिर् 1 और 2 Pg-1 1

11 एस.एन. रॉय (सौरीांद्रनाथ रॉय) Pg-20 1

12 अांडार् Pg-144 1

1

Page 4

13 A- र्ॉडल िैर्ेस्ली Pg-336 1

14 A- - दोनोां (A) और (R) सही हैं और (R), ( A) की सही व्याख्या है Pg-328 1

15 C--1,2 और 3 Pg-319 1

16 A डे निड ररकाडो Pg-277 1

17 इस्तमरारी बांदोबस्त Pg- 1

260/262

18 मनर्क मुहम्मद जायसी Pg-158 1

19 आनद ग्रन्थ सानहब Pg-161 1

20 रै दास / रनिदास Pg-165 1

21

Part -B भाग -B Pg-48 3

अक्षिलेख साक्ष्यं की सीमाएं

तकनीकी सीमाएँ -

i. अनभर्ेख धूनमर् उत्कीर्ल हैं और पुनननलमालर् अनननित हैं।

ii. नशर्ार्ेख क्षनतग्रस्त हो सकता है या पत्र गायब हैं।

iii. नशर्ार्ेख में प्रयुक्त शब्ोां के सटीक अथल के बारे में सुनननित

होना हमेशा आसान नहीां होता है।

iv. अनभर्ेख नष्ट भी हो जाते है नजनसे शब् र्ुप्त हो जाते है 1

v. अनभर्ेखोां के शब्ोां का अथल ननकार् पाना आसान नहीां 1

vi. अनेक अनभर्ेख कार्ाांतर में सुरनक्षत नहीां बचे।

vii. कुछ अनभर्ेख अांश मात्र है ।

viii. अनभर्ेख केिर् उन्ही र्ोगो के निचार व्यक्त करते है जो उन्हें

बनिाते थे।

ix. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु

नकसी भी तीन नबांदुओां की व्याख्या

2

Page 5

अथवा

िूक्षम और नदी मार्ग

i. मागों को निनभन्न नदशाओां में बढ़ाया गया था: - मध्य एनशया,
Pg-44 3
उत्तरी अफ्रीका, पनिम एनशया, दनक्षर् पूिल एनशया और चीन।

ii. शासकोां ने इन मागों को ननयांनत्रत करने का प्रयास नकया।

iii. व्यापाररयोां ने इन मागों पर यात्रा की।

iv. इन मागों के माध्यम से मार् की निस्तृत श्ृांखर्ा को र्े जाया

गया।

v. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु

नकसी भी तीन नबांदुओां की व्याख्या

22

क्षवजयनर्र की क्षकलेबंदी

i. नकर्ेबांदी की सात पांक्तक्तयाँ थीां। Pg-177 3

ii. कृनष में आसपास के क्षेत्र और जांगर्ोां को भी घेरा गया था

iii. सबसे बहरी दीिार पहानडयोां से जोडती थी

iv. यह निशार् सरां चना शुण्डाकार थी

v. िगालकार और आयातकार बुजल बहार की और ननकर्े हुए थे

vi. इसको खेतोां से घेरा गया था

vii. पहर्ी, दू सरी और तीसरी दीिार के बीच में खेती के खेत,

बगीचे और घर थे

viii. धानमलक केंद्र और कृनष केंद्र के बीच एक कृनष क्षेत्र के साक्ष्य

नमर्े है

ix. कृनष क्षेत्र के चारोां ओर निस्तृत सुरक्षा रर्नीनत।

x. एक दू सरी पांक्तक्तयाँ शहरी पररसर के आां तररक कोर के चारोां

ओर थी

xi. एक तीसरी पांक्तक्त ने शाही केंद्र को घेर नर्या था ।

xii. गारे के नबना निशार् नचनाई ननमालर्।

xiii. तुांगभद्रा से पानी ननकार्ने िार्ी निस्तृत नहर प्रर्ार्ी।

3

Page 6

xiv. सांरनक्षत फाटक सडकोां से जुडा हुआ था

xv. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु।

नकन्ही तीन आठ नबांदुओां का िर्लन

23 . सांप्रदाक्षयक सौहादग कय बहाल करने के क्षलए र्ांधीजी के प्रयास

i. उन्होांने अपने नसद्ाांतोां के माध्यम से साांप्रदानयक नहांसा को Pg-365- 3

395
रोकने की कोनशश की।

ii. उन्होांने निनभन्न क्षेत्रोां के दां गाग्रस्त क्षेत्रोां का दौरा नकया।

iii. उन्होांने अल्पसांख्यकोां के कष्टोां के प्रनत अपनी नचांता नदखाई।

iv. उन्होांने सभी िगों की समानता के नर्ए काम नकया।

v. उन्होांने दो समुदायोां के बीच आपसी निश्वास और निश्वास की

भािना का ननमालर् करने की कोनशश की।

vi. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु।

नकन्हीां तीन नबांदुओां की व्याख्या

24 क्षिक्षिश ने 1857 के क्षवद्रयह का दमन

i. नब्रनटश ने निद्रोह को दबाने के नर्ए कानूनोां की श्ृांखर्ा Pg-305 3

पाररत की।

ii. माशलर् र्ॉ र्गाया गया।

iii. कानून और परीक्षर् की प्रनिया को ननर्ांनबत कर नदया

गया।

iv. नब्रनटश ने कर्कत्ता और पांजाब से दो हमर्े नकए।

v. नदल्ली पर कब्जा कर नर्या गया।

vi. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु।

नकन्हीां तीन नबांदुओां की व्याख्या की जाए.

25

Part- C

4

Page 7

सांची स्तूप का संरिण Pg- 4+4=

i. भोपार् के शासकोां (शाहजहाँ बेगम और उनके उत्तरानधकारी 83,9 8

8
सुल्तान जहाँ बेगम) ने इसके सांरक्षर् के नर्ए धन प्रदान नकया।

ii. उसने सांग्रहार्य को नित्त पोनषत नकया।

iii. उन्होांने प्राचीन स्थर् के रख रखाि के नर्ए धन अनुदान नदया ।

iv. अनतनथशार्ा बनाने के नर्ए धन अनुदान नदया जहाां जॉन माशलर्

रहते थे और पुस्तकें नर्खते थे।

v. जॉन मशार् के खांडो के प्रकाशन के नर्ए अनुदान नदए।

vi. एएसआई ने इसे बहार् करने और सांरनक्षत करने में भी मदद की।

अमरावती की क्षनयक्षत

i. स्थानीय राजा स्तूप के खांडहरोां पर मांनदर बनाना चाहते थे।

ii. कॉनर्न मेकानाइज ने अमरािती पर ररपोटल तैयार की र्ेनकन कभी

प्रकानशत नहीां हुई।

iii. गुांटूर के आयुक्त िाल्टर इनर्यट, अमरािती के मद्रास में मूनतलकर्ा

पैनर् र्े गए।

iv. अमरािती के स्लैब को एनशयानटक सोसाइटी ऑफ़ बांगार् को भेजा

गया था।

V अनननितकार्ीन नीनत के कारर् अमरािती के मूर् कायल में नगरािट

आई।

vi कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु।

दोनोां में से चार नबांदुओां की व्याख्या

अथवा

क्षहंदू और बौद्ध कला और मूक्षतगकला

क्षहंदू मूक्षतगकला और कला

i. िैष्णििाद - दस अितारोां की मूनतलकर्ा। उदाहरर् के नर्ए।

शेषनाग के साथ पृथ्वी दे िी (ऐहोर्), िराह,,आनद ।

5

Page 8

ii. शैि मत- नर्ांग में नशि की मूनतलयाां

iii. मानि रूप में भी नशि की मूनतलयाां

iv. महाबर्ीपुरम में दु गाल की छनि

v. मथुरा में िासुदेि-कृष्ण की मूनतल

vi. एर्ोरा की मूनतलयाां

vii. कैर्ाश नाथ मांनदर

viii. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु

बौद्ध कला और मूक्षतगकला

i. ररक्त स्थान बुद् के ध्यान की दशा

ii. स्तूप महाननबनना के प्रतीक

iii. सारनाथ बुद् के पहर्े उपदे श का प्रतीक

iv. पेड बुद् की जीिन की घटना का प्रतीक
Pg- 4+4=
v. स्तूप के तोरर् द्वार पर शैर्भांनजका समृक्तद् का शुभ प्रतीक
99- 8
vi. गजर्क्ष्मी-सौभाग्य की प्रनतमा 106

vii. िृक्ष बुद् के जीिन की एक घटना का प्रतीक है।

viii. बुद् और बोनधसत्ोां की छनियाँ

ix. सपल और पशु रूपाांकनोां

x. हाथी, घोडे , बांदर और झोपडी जैसे जानिरोां की मूनतलयाां स्तूप पर

निनभन्न जातक कहाननयोां से समझा जा सकता है।

xi. कुछ जानिरोां को मानिीय निशेषताओां के प्रतीक के रूप में

इस्तेमार् नकया गया था उदाहरर् के नर्ए हानथयोां को शक्तक्त और ज्ञान को

दशालने के नर्ए नचनत्रत नकया गया था।

xii. कमर् और हानथयोां से नघरी एक मनहर्ा की मूनतल प्रमुख है

xiii. -कुछ र्ोगोां ने गजर्क्ष्मी के रूप में पहचाना, (सौभाग्य की दे िी) और

कुछ के रूप में माया (बुद् की माँ)

xiv. जातक कहाननयोां और बुद् की जीिनी के दृश्य

xv. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु

कथन का समथलन करने के नर्ए प्रत्येक का कोई चार उदाहरर्

6

Page 9

26

मुर्ल घरे लू दु क्षनया

i. मइसमें सम्राट की पनियोां, ररश्तेदारोां, मनहर्ा सेिकोां और दानसयोां

Pg- 8
का समािेश था।
242
ii. पनियोां के बीच भेद को बनाए रखा गया था -बेगम, अगाह और

अगाछह

iii. मानसक भत्ता नकद,, उपहार नदए जाते थे

iv. स्त्री और पुरुष गुर्ाम, अपनी कौशर् और बुक्तद्मता से अनेक

कायो का सांपादन करते थे

v. उनके द्वारा निनभन्न कायल नकए गए।

vi. गुर्ाम नहजडे व्यापर में रूनच र्ेने िार्ी मनहर्ाओ के एजेंट होते थे

vii. कुछ राननयोां और राजकुमाररयोां ने नित्तीय स्त्रोतोां पर ननयांत्रर् रखा

viii. कुछ के पास मनसबदारी अनधकार ि् ननयांत्रर् और आय भी थी

ix. कुछ राजकुमारी ने नित्तीय सांसाधन रखे।

x. सांसाधनोां पर ननयांत्रर् ने महत्पूर्ल मनहर्ाओां को इमारतोां, बगीचोां

और बाजारोां को िास्तुकर्ात्मक पररयाजनाओां में नहस्सा नर्या

xi. मुगर् राजकुमारी जहाँआरा ने कई िास्तुकर्ा पररयोजनाओां जैसे

शाहजहाांआबाद के चाांदनी चौक की रूपरे खा तैयार की

xii. कुछ नकताबें गुर्बदन बेगम द्वारा नर्खी गई -हुमायूांनामा

xiii. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु।

नकन्ही आठ नबांदुओां की व्याख्या

अथवा

मुर्ल साम्राज्य का शाही संर्ठन

i. मुगर् साम्राज्य का शाही सांगठन निनभन्न सांस्थानोां पर ननभलर था।

ii. शाही सांगठन एक महत्पूर्ल स्तांभ था जो निनभन्न जातीय और

धानमलक समूहोां से भती नकया गया था।

7

Page 10

iii. तुरानी और ईराननयोां ने मुगर्ोां को अपने राजनीनतक प्रभुत् में मदद Pg- 8

की। 244

iv. राजपूत और भारतीय मुसर्मान भी शाही सेिा में शानमर् हुए।

v. अनभजात िगल में भती न्र जातीय ि् धानमलक समूहोां से होती थी

vi. अनभजात िगल को गुर्दस्तेिके रूप में िनर्लत नकया गया है जो

िागफदारी से बादशाह के साथ जुडे थे

vii. नशक्षा और र्ेखा सशत्र में झुकाि िार्े नहन्दू िगरग को पद्दौन्नत

नकया गया

viii. अनधकाररयो को सांख्या निषयक ओहदे नदए जाते थे जैसे

मनसबदारी अनधकार नजसमे जात और सिार जैसे पद होते थे

ix. सैन्य अनभयानोां में ये भाग र्ेते थे

x. प्राांतो में साम्राज्य के अनधकारी होते थे

xi. बादशाह उनकी पदनियोां और ओहदोां का ननरक्षर् खुद करता था

xii. अनभजात िगल के कुछ र्ोगो के साथ मुदीद मुनशलद के आधार पर

आध्याक्तत्मक ररश्ते भी कायम नकये

xiii. शाही सेिा शक्तक्त, धन और उच्च प्रनतष्ठा प्राप्त करने का मागल थी।

xiv. मीर बख्शी, दीिान-ए-आर्ा, सदर-हम-सुदुर महत्पूर्ल मांत्री थे जो

सर्ाहकार ननकाय के रूप में एक साथ काम कर रहे थे।

xi। कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु।

नकन्ही आठ नबांदुओां का िर्लन

27

संक्षवधान सिा द्वारा व्यक्त क्षवचार

i. जिाहर र्ार् नेहरू ने भारत के सांनिधान के आदशों को पररभानषत

Pg- 8
करते हुए उद्दे श्य सांकल्प ’की शुरुआत की।
411-
ii. भारत को 'स्वतांत्र सांप्रभु गर्राज्य' घोनषत नकया।
415
iii. न्याय, समानता और स्वतांत्रता की बात कही गयी।

8

Page 11

iv. अल्पसांख्यकोां, नपछडे और आनदिासी क्षेत्रोां और अन्य नपछडे िगों

के नर्ए पयालप्त सुरक्षा उपाय।

v. याांनत्रक रूप से निनभन्न सांनिधान के निनभन्न नसद्ाांतोां को र्ागू नकया

गया

vi. भारतीय सांनिधान का उद्दे श्य र्ोकतांत्र के उदार निचारोां को र्ागू

करना होगा

vii. आनथलक न्याय के समाजिादी निचारोां को भी व्यक्त नकया गया था।

viii. रचनात्मक सोच पर जोर नदया गया।

ix. अनधकारोां और समानता पर चचाल की गई।

x. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु।

समग्र रूप में मूल्ाांकन

अथवा

संक्षवधान सिा में दक्षमत जाक्षतययं के अक्षधकारयं पर चचाग

i. अम्बेडकर ने दनमत िगों के नर्ए अर्ग ननिालचक मांडर् की माांग

की र्ेनकन महात्मा गाांधी ने इसका निरोध नकया।

ii. दनमत जानत के कुछ सदस्ोां के नर्ए अनधक सुनिधाओां पर जोर

नदया।

iii. ननिेदन नकया नक उनकी यह पररक्तस्थनत सामानजक मानदां डोां और

जानत समाज के नैनतक मूल्ोां के कारर् हुई।

iv. जे.नागप्पा ने कुर् आबादी के 20 से 25% के बीच िगल के

सांख्यात्मक गठन पर चचाल की।
Pg- (2+6
v. इस िगल की नशक्षा तक कोई पहुँच नहीां थी। 421- =8)

vi. र्ांबे समय तक प्रशासन में कोई नहस्सा नहीां। 422

vii. कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु।

नकन्हीां दो नबांदुओां की व्याख्या की जाए।

अंबेडकर की िूक्षमका

i. उन्होांने पहर्े पृथक ननिालनचका की माांग की र्ेनकन निभाजन की

नहांसा के बाद उन्होांने अर्ग मतदाताओां के नर्ए तकल नहीां नदया।

9

Page 12

ii. छु आछूत के उन्मूर्न की माांग की

iii. नहांदू मांनदरोां को सभी जानतयोां के नर्ए खोर्ने की माांग की

iv. निधानयका में सीटोां का आरक्षर् ।

v. सरकारी कायालर्योां में नौकररयोां का आरक्षर्।

vi. इस जानत के प्रनत दृनष्टकोर् में पररितलन

vii. सांिैधाननक निधानयका के माध्यम से सामानजक भेदभाि को नमटाना

चाहते थे।

नकन्ही चार आठ नबांदुओां की व्याख्या

(4 x 1½ =6)

28 Part D:

कल हम नमक कानून तयडें र्े

30.1 नमक कानून के प्रक्षत िारतीययं की प्रक्षतक्षियाओं की जााँच करें ।

उत्तर:नमक कर कानून के प्रनत भारतीयोां की प्रनतनियाएँ ।

a) नमक कानून के क्तखर्ाफ व्यापक असांतोष था।

b) नमक पर राज्य का एकानधकार अर्ोकनप्रय था। (2)

30.2 र्ांधीजी कय यह क्षवश्वास क्यं था क्षक सरकार सत्याग्रक्षहययं कय

क्षर्रफ्तार नही ं करे र्ी?

उत्तर: गाांधीजी सत्याग्रनहयोां की नगरफ्तारी पर भरोसा नहीां कर रहे थे

a) िह अपने प्रदशलनकाररयोां को शाांनत की सेना मानता था।

b) अांग्रेजोां पर दु ननया की राय का डर। (2)

30.3 दांडी माचग के आधार की की व्याख्या कीक्षजये

उत्तर:दाांडी माचल का आधार

a) नब्रनटशोां के सबसे व्यापक रूप से नापसांद कानून को तोडने के नर्ए।
Pg-
b) नब्रनटश शासन के क्तखर्ाफ असांतोष को बढ़ाने के नर्ए।
358

c) अांग्रेजोां के क्तखर्ाफ राष्टरिादी अनभयान शुरू करना। 2+2+

d) सभी िगों के समुदायोां को एकजुट करने के नर्ए, 2=6

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e) स्वराज की ओर जाने के नर्ए।

(2)

नकन्ही दो नबांदुओां की व्याख्या

29

स्रयत आधाररत प्रश्न

िारत में चााँदी कैसे आयी

29.1 मुग़ल साम्राज्य क्षकस प्रकार िारी मात्रा में धन एकक्षत्रत कर सका

उत्तर: मुगर्ोां द्वारा भारी धन का सांचय।

a) िस्तुओां के आयात ननयालत से

b) व्यापार के जीिांत माध्यम से।

c) िस्तु सांरचना और व्यापार में निस्तार के कारर्।

नकन्ही दो नबांदुओां की व्याख्या (2)

29.2 चांदी क्षकस प्रकार दु क्षनयािर में हयते हुए िारत पहुंची?

उत्तर: चाांदी दु ननयाभर में होते हुए भारत पहुांची

क) धातु मुद्रा की उपर्ब्धता।

बी) खनन तकनीक का निस्तार।

c) अथलव्यिस्था में धन का पररसांचरर्।

d) नकदी में करोां और राजस्व की ननकासी।
Pg-
नकन्ही दो नबांदुओां की व्याख्या (2) 217

2+2+

29.3 िारत में वस्तु क्षवक्षनमय क्षकस प्रकार हयता था? 2=6

a) नकद र्ेनदे न के माध्यम से।

b) िस्तुओां के र्ेनदे न के माध्यम से (2)

स्रयत आधाररत प्रश्न

30 एक धनाढ्य शूद्र

२.१ िाह्मण स्वयं कय अन्य जाक्षत से श्रेष्ठ क्यं मानते थे?

i. उत्तर:ब्राह्मर् खुद को अन्य जानत से श्ेष्ठ मानते थे

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a) उनकी बुक्तद् के आधार पर

b) उनचत रां ग के आधार पर।

c) शुद्ता के आधार पर

d) ब्रह्मा के पुत्रोां के रूप में माना जाता है

e) कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु

नकन्ही दो नबांदुओां की व्याख्या (2)

28.2 कच्छना के अनुसार एक शूद्र ने अपनी स्थथक्षत में कैसे सुधार

क्षकया?

उत्तर:कच्छना के अनुसार, एक शूद्र अपनी क्तस्थनत में सुधार कर सकता

था

a) धन के आधार पर

b) आनथलक क्तस्थनत और गररमा के आधार पर (2)

28.3 वणग व्यवथथाता के प्रक्षत बौद्ध दृक्षिकयण के बारे में यह कहानी

क्ा बताती है?

उत्तर: िर्ल व्यिस्थाता के प्रनत बौद् दृनष्टकोर्

a) जानत आधाररत निचारोां की अस्वीकृनत

b) जन्म के आधार पर श्ेष्ठता के निचारोां को खाररज कर नदया।

Pg-70 2+2+
c) सामानजक समानता के नर्ए अनुरोध
2=6
d) कोई अन्य प्रासांनगक नबांदु।

नकन्ही दो नबांदुओां की व्याख्या (2)

31

31.1 & 31.2 मानक्षचत्र पर संलग्न

दृक्षिबाक्षधत परीिाक्षथगययं के क्षलए

31.1 हडप्पा थथल

कार्ीबांगन, र्ोथर्, नागेश्वर, धोर्ािीरा, राखीगढ़ी, बनिार्ी- (भारत)
Pg-2 3
हडप्पा, , बार्ाकोट, चाहँजोदडो ,मोहनजोदडो

कोई तीन

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अथवा

बौद्ध थथल
Pg-95 3
साांची, बरहुत, अजांता, नानसक, कारर्ा, नागाजुलनकोांडा, अमरािती,

बोधगया कोई तीन

31.2

क्षवद्रयह का केंद्र 1857

नदल्ली, मेरठ, आगरा, र्खनऊ, झाँसी, कानपुर, आजमगढ़, बनारस,
Pg-305 3
कर्कत्ता कोई तीन

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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeSolution
Pages16
Updated22 Jul 2026