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NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 9 अन्नाद् भवन्ति भूतानि

AglaSem पर कक्षा 7 संस्कृत पाठ 9 अन्नाद् भवन्ति भूतानि (दीपकम्) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Chapter 9 (Deepakam).
NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 9 अन्नाद् भवन्ति भूतानि - Page 1 of 25

About NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 9 अन्नाद् भवन्ति भूतानि

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NCERT Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 9 अन्नाद् भवन्ति भूतानि – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 9: अ ाद् भव न्त भूता न

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

96 – 103 10 49 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 24 pages

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · सं स्कृ त · द पकम्

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: अन्नाद् भव न्त भूता न
NCERT कक्षा 7 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के नवमः पाठः — अन्नाद् भव न्त भूता न के स ूण हल। यह एक संवादात्मक गद्य पाठ है
जसम एक पुत्री अपनी माता से पूछती है क मनुष्य, प्राणी और क ट पृथ्वी पर कैसे आए, और माता तै त्तरीयोप नषद् के अनुसार ब्रह्म → आकाश →
वायु → अ ग्न → जल → पृ थवी → ओष ध/सस्य → आहार → प्राणी-मनुष्य यह सृ ष्टक्रम समझाती है। व्याकरण क दृ ष्ट से पूरा पाठ पञ्चमी
वभ क्त (अपादान कारक) पर के न्द्रत है। नीचे पृष्ठ 96 से 103 तक के पाठगत प्रश्न, वयम् अभ्यासं कुमः के प्रश्न १–७ (हर उपभाग स हत),
योग्यता वस्तारः तथा प रयोजनाकायम् के पाँच काय क्रम से हल कए गए ह — पहले संस्कृत उत्तर, फर कोष्ठक म हन्द अथ।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

द पकम् (कक्षा 7) 96 – 103

खं ड प्रश्न

10 49

माध्यम

हन्द

पाठे वद्यमानाः प्रश्नाः — पृष्ठ 96 – 98
पाठः — अन्नाद् भव न्त भूता न (माता-पुत्र्योः संवादः)

पाठः

प्र.1 अम्ब ! मम का चद् ज ासा अ स्त। वयं मनुष्याः प्रा णनः क टाः च कथं भूलोके आगताः ?

माता उत्तरं ददा त — वत्से ! तदथ भवती प्रथमं पृ थव्याः उत्प त्तक्रमं जानीयात् ।
[बेट ! इसके लए तुम्ह पहले पृथ्वी क उत्प त्त का क्रम जानना चा हए।]

उत्तर का आशय: मनुष्य, प्राणी और क ट अचानक नह आए। पहले ब्रह्म से आकाश, आकाश से वायु, वायु से
अ ग्न, अ ग्न से जल, जल से पृ थवी, पृ थवी से ओष ध-सस्य, सस्य से आहार और आहार से क ट, प्राणी तथा मनुष्य
उत्पन्न हुए। यही ‘उत्प त्तक्रमः’ है।

शब्द-रचना: जानीयात् = ा धातु, व ध लङ् लकार (चा हए-अथ), प्रथमपुरुष एकवचन। तदथम् अव्यय है,
जसका अथ पाठ के शब्दाथ म ‘अतः’ (इस लए) दया गया है।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 ब्रह्म इत्युक्ते कम् अम्ब ?

ब्रह्म इत्युक्ते चेतना-श क्तः, ऊजा वा या सवत्र व्याप्ता अ स्त। यथा — आकाशः अणुः च सवत्र व्याप्तः अ स्त ।
[‘ब्रह्म’ का अथ है वह चेतना-श क्त अथवा ऊजा जो सवत्र फैली हुई है — जैसे आकाश और अणु सब जगह व्याप्त ह।]

क्य यह उत्तर महत्त्वपूण है: पाठ ‘ब्रह्म’ को कसी रूप या मू त के रूप म नह , अ पतु सवव्यापी चेतन ऊजा के
रूप म समझाता है। शब्दाथ-ता लका म भी ब्रह्म = ‘सम ष्ट- च त-श क्तः / सवव्याप्तः परमेश्वरः’ (Omnipresent
Conscious Power & Energy) दया गया है। इसी कारण आगे कहा गया क ब्रह्म से आकाश उत्पन्न हुआ।

व्याकरण: इत्युक्ते = इ त + उक्ते (यण् स न्ध) — ‘ऐसा कहने पर’। ब्रह्मणः पञ्चमी एकवचन है — ‘ब्रह्म से’।

प्र.3 अनन्तरम् ?

आकाशात् वायुः उत्पन्नः ।
[आकाश से वायु उत्पन्न हुई।]

पञ्चमी वभ क्त दे खए: ‘आकाशात्’ म अपादान कारक है — जससे कोई वस्तु नकलती/उत्पन्न होती है, वहाँ
पञ्चमी आती है। प्रश्न बनेगा — कस्मात् वायुः उत्पन्नः ?

शब्दाथ: अनन्तरम् = ततः परम् (उसके बाद)।

प्र.4 अम्ब ! पृ थवी कदा उत्पन्ना ?

शृणोतु, वदा म। वायोः अ ग्नः उत्पन्नः । … (क्रमेण) … अग्नेः जलस्य उत्प त्तः अभवत्, जलात् पृ थव्याः उत्प त्तः अभवत् ।
[सु नए, बताती ँ। वायु से अ ग्न उत्पन्न हुई; अ ग्न से जल क उत्प त्त हुई और जल से पृथ्वी क उत्प त्त हुई।]

ध्यान द: माता सीधे उत्तर नह दे ती, क्रम से बताती है — क्य क पृ थवी सृ ष्ट का पाँचवाँ तत्त्व है। आकाश (1) →
वायु (2) → अ ग्न (3) → जल (4) → पृ थवी (5)। ये ही पञ्चमहाभूत ह।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

रूप: शृणोतु = ु धातु, लोट् लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (आदरपूवक ‘सु नए’)। वायोः = उकारान्त पुं लङ्ग ‘वायु’
का पञ्चमी एकवचन।

प्र.5 एतत् सव कमथम् अम्ब ? साक्षात् मनुष्याणाम् उत्प त्त वदतु।

अ य वत्से ! एतत् सव ना स्त चेत् कथं मनुष्याः प्रा णनः वा जीव न्त ?
[अरी बेट ! य द यह सब न हो तो मनुष्य अथवा प्राणी जएँगे कैसे?]

माता का तक: मनुष्य अकेले जी वत नह रह सकता। जीने के लए वायु, जल, अ ग्न (ताप), पृ थवी और अन्न —
सब चा हए। इसी लए सृ ष्ट म मनुष्य सबसे अन्त म आता है; पहले उसका पूरा जीवन-आधार बनता है।

पुत्री का उत्तर भी दे खए: ‘जलम् आहारः वायुः च अ स्त चेत् पयाप्तं खलु !’ — जल, आहार और वायु ह तो बस
पयाप्त है। इस पर माता कहती है — ‘आम्, अतः तेषाम प उत्प त्त जानातु।’

प्र.6 त ह अग्नेः कस्य उत्प त्तः अभवत् ?

अग्नेः जलस्य उत्प त्तः अभवत् ।
[अ ग्न से जल क उत्प त्त हुई।]

दो वभ क्तयाँ एक ही वाक्य म: अग्नेः — पञ्चमी एकवचन (अपादान, ‘अ ग्न से’); जलस्य — षष्ठी एकवचन
(सम्बन्ध, ‘जल क ’)। इस लए ‘अग्नेः जलस्य उत्प त्तः’ का अथ ‘अ ग्न से जल क उत्प त्त’ है।

प्र.7 जलात् मनुष्यस्य उत्प त्तः खलु ?

नैव वत्से ! जलात् पृ थव्याः उत्प त्तः अभवत् ।
[नह बेट ! जल से पृथ्वी क उत्प त्त हुई।]

पुत्री क भूल और सुधार: पुत्री जल से सीधे मनुष्य क उत्प त्त समझ बैठ । माता ठ क करती है — जल से पृ थवी,
पृ थवी से ओष ध-सस्य-वृक्ष, सस्य से आहार और आहार से क ट, प्राणी तथा मनुष्य। इसी पर पुत्री कहती है —
‘अहो ! सत्यम्, अहं वस्मृतवती एव।’

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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रूप: पृ थव्याः = ईकारान्त स्त्री लङ्ग ‘पृ थवी’ का पञ्चमी/षष्ठी एकवचन। यहाँ ‘उत्प त्तः’ के साथ यह षष्ठी है —

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‘पृथ्वी क उत्प त्त’।

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प्र.8 आहारात् क टाः, प्रा णनः, मनुष्याः उत्पन्नाः खलु अम्ब ?

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ag उक्तवती भवती ।
आम् । अहो ! मम पुत्री बहु चतुरा अ स्त। सत्यम्
[हाँ। अरे! मेरी बेट बहुत चतुर है। तुमने ठ क कहा।]

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यही पाठ का शीषक है: ‘अन्नाद् भव न्त भूता न’ — अन्न से ही समस्त प्राणी उत्पन्न होते ह। eतैm
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om‘ओष धभ्योऽन्नम्। अन्नात् पुरुषः।’ gla
त्तरीयोप नषद् म भी
कहा गयाc—
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a gl स : अन्नात् + भव न्त = अन्नाद् भव न्त (जश्त्व स न्ध — त् के बाद घोष वण आने पर त् → द्)।

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प्र.9
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अम्ब ! भवती एतत् सव कथं जाना त

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अहम् आधु नकं रसायनशास्त्रम् उप नषद्-ग्र ान् च प ठतवती ।
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.c नक रसायनशास्त्र और उप नषद्-ग्रन्थ पढ़े ह।] a g
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se माता उप दश त — सत्यं वत्से ! अवश्यम् उप नषद्-ग्र ाः पठनीयाः। यतः अस्माकं भारतस्य मौ लकं ानं तेषु न हतम्
[मने आधु

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तदा
अ स्त। तेन अस्माकं जीवनस्य अ प उत्कषः भव त ।

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[उप नषद्-ग्रन्थ अवश्य पढ़ने चा हए, क्य क हमारे भारत का मौ लक ान उन्ह म न हत है; उससे हमारे जीवन का उत्कष भी होता

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है।]

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पाठ का नष्कष: प्राचीन उप नषद्- ान और आधु नक व ान परस्पर वरोधी नह ह। माता दोन पढ़ती है —
इसी लए वह सृ ष्टक्रम को भी जानती है और द्रव्य क अव ाओं (States of Matter) को भी।

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.cपoठतवती स्त्री लङ्ग भूतका लक कृदन्त है (पुं लङ्ग — प ठतवान्)। g l
व्याकरण: भवती (आदराथक) के साथ क्रया प्रथमपुरुष म आती है — ‘भवती जाना त’, न क ‘भवती जाना स’।
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वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 99
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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

अभ्यासः — प्रश्नः १ : अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूणवाक्येन उत्तरं लखन्तु —

अभ्यासः

प्र.1 (क) पुत्र्याः ज ासा का ?

पुत्र्याः ज ासा अ स्त यत् — वयं मनुष्याः प्रा णनः क टाः च कथं भूलोके आगताः ।
[पुत्री क ज ासा यह है क हम मनुष्य, प्राणी और क ट भूलोक (पृथ्वी) पर कैसे आए।]

उत्तर कहाँ से मला: पाठ के आरम्भ म ही पुत्री कहती है — ‘अम्ब ! मम का चद् ज ासा अ स्त। वयं मनुष्याः
प्रा णनः क टाः च कथं भूलोके आगताः ?’ इसी वाक्य को पूणवाक्य म ढाल दया।

व्याकरण: पुत्र्याः = ‘पुत्री’ (ईकारान्त स्त्री लङ्ग) का षष्ठी एकवचन — ‘पुत्री क ’। ज ासा = ातुम् इच्छा (जानने
क इच्छा)।

प्र.1 (ख) कस्मात् आकाशस्य उत्प त्तः अभवत् ?

ब्रह्मणः आकाशस्य उत्प त्तः अभवत् ।
[ब्रह्म से आकाश क उत्प त्त हुई।]

पाठ का वाक्य: ‘प्रथमं ब्रह्मणः आकाशस्य उत्प त्तः अभवत्।’ यहाँ ‘ब्रह्म’ का अथ है — सवत्र व्याप्त चेतना-श क्त
अथवा ऊजा।

वभ क्त: प्रश्न म ‘कस्मात्’ पञ्चमी एकवचन है, अतः उत्तर भी पञ्चमी म — ब्रह्मणः (ब्रह्मन् शब्द, नपुंसक लङ्ग,
पञ्चमी एकवचन)। ‘आकाशस्य’ षष्ठी एकवचन है।

प्र.1 (ग) अग्नेः कस्य उत्प त्तः अभवत् ?

अग्नेः जलस्य उत्प त्तः अभवत् ।
[अ ग्न से जल क उत्प त्त हुई।]

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

क्रम याद रख: ब्रह्म → आकाश → वायु → अ ग्न → जल → पृ थवी। तै त्तरीयोप नषद् म भी — ‘वायोर ग्नः।
अग्नेरापः।’ (अ ग्न से जल)।

रूप: अग्नेः = इकारान्त पुं लङ्ग ‘अ ग्न’ का पञ्चमी एकवचन (अग्नेः, अ ग्नभ्याम्, अ ग्नभ्यः)।

प्र.1 (घ) पृ थव्याः केषाम् उत्प त्तः अभवत् ?

पृ थव्याः ओषधीनां सस्यानां वृक्षाद नां च उत्प त्तः अभवत् ।
[पृथ्वी से ओष धय , फसल (सस्य ) तथा वृक्ष आ द क उत्प त्त हुई।]

पुत्री क भूल यह सुधरती है: पुत्री ने समझा था क पृ थवी से सीधे प्राणी और मनुष्य उत्पन्न हुए। माता ने कहा —
‘न ह न ह’ — पृ थवी से पहले ओष ध, सस्य और वृक्ष उत्पन्न हुए; उनसे आहार और आहार से प्राणी।

वभ क्त: ‘केषाम्’ षष्ठी बहुवचन है, इस लए उत्तर भी षष्ठी बहुवचन म — ओषधीनाम्, सस्यानाम्, वृक्षाद नाम्।

प्र.1 (ङ) आहारात् के उत्पन्नाः ?

आहारात् क टाः, प्रा णनः, मनुष्याः च उत्पन्नाः ।
[आहार से क ट, प्राणी और मनुष्य उत्पन्न हुए।]

यही पाठ का शीषक है: ‘अन्नाद् भव न्त भूता न’ — अन्न से ही सारे प्राणी बनते ह। इसी लए अन्न का अपमान नह
करना चा हए और अन्न उपजाने वाली पृ थवी, जल तथा वृक्ष क रक्षा करनी चा हए।

वभ क्त: ‘के’ प्रथमा बहुवचन (पुं लङ्ग) है, अतः उत्तर भी प्रथमा बहुवचन म — क टाः, प्रा णनः, मनुष्याः; क्रया
भी बहुवचन — उत्पन्नाः।

प्र.1 (च) माता क क प ठतवती ?

माता आधु नकं रसायनशास्त्रम् उप नषद्-ग्र ान् च प ठतवती ।
[माता ने आधु नक रसायनशास्त्र और उप नषद्-ग्रन्थ पढ़े ह।]

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

‘ क क’ क्य ? दो या अ धक वस्तुएँ पूछनी ह तो संस्कृत म प्रश्नवाचक शब्द क रु क्त (वीप्सा) होती है — ‘ क
क’ = ‘क्या-क्या’। इसी लए उत्तर म भी दो वस्तुएँ आईं।

रूप: प ठतवती स्त्री लङ्ग भूतका लक कृदन्त है; पुं लङ्ग म प ठतवान् होता। ग्र ान् = अकारान्त पुं लङ्ग का तीया
बहुवचन (कम)।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 99
अभ्यासः — प्रश्नः २ : पाठं प ठत्वा रक्त ानेषु समु चतं पदं लखन्तु —

अभ्यासः

प्र.2 (क) अम्ब ! मम का चद् ........................ अ स्त।

अम्ब ! मम का चद् ज ासा अ स्त ।
[माँ! मुझे कोई ज ासा (जानने क इच्छा) है।]

पद चुनने का सूत्र: रक्त ान से पूव का चद् (स्त्री लङ्ग, प्रथमा एकवचन) है, अतः रक्त ान म भी स्त्री लङ्ग प्रथमा
एकवचन का पद चा हए — ‘ ज ासा’। क्रया ‘अ स्त’ भी एकवचन है।

प्र.2 (ख) प्रथमं ........................ आकाशस्य उत्प त्तः अभवत्।

प्रथमं ब्रह्मणः आकाशस्य उत्प त्तः अभवत् ।
[सबसे पहले ब्रह्म से आकाश क उत्प त्त हुई।]

पञ्चमी क्य : ‘ जससे उत्प त्त हुई’ — वहाँ अपादान म पञ्चमी वभ क्त आती है, इस लए ‘ब्रह्म’ का रूप ब्रह्मणः
हुआ।

प्र.2 (ग) साक्षात् ........................ उत्प त्त वदतु।

साक्षात् मनुष्याणाम् उत्प त्त वदतु ।
[सीधे मनुष्य क उत्प त्त बताइए।]

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

सन्दभ: पुत्री को क्रम सुनने म दे र लग रही थी, इस लए वह कहती है — ‘एतत् सव कमथम् अम्ब ? साक्षात्
मनुष्याणाम् उत्प त्त वदतु।’ ‘उत्प त्तम्’ के साथ सम्बन्ध होने से षष्ठी बहुवचन — मनुष्याणाम्।

प्र.2 (घ) ........................ क टाः, प्रा णनः, मनुष्याः उत्पन्नाः खलु अम्ब ?

आहारात् क टाः, प्रा णनः, मनुष्याः उत्पन्नाः खलु अम्ब ?
[आहार से ही क ट, प्राणी और मनुष्य उत्पन्न हुए ह न, माँ?]

संकेत: वाक्य म ‘उत्पन्नाः’ है — अथात् कससे उत्पन्न हुए? अतः पञ्चमी एकवचन ‘आहारात्’ चा हए। यही पाठ
के शीषक ‘अन्नाद् भव न्त भूता न’ का भाव है।

प्र.2 (ङ) अहम् आधु नकं ........................ ........................ च प ठतवती।

अहम् आधु नकं रसायनशास्त्रम् उप नषद्-ग्र ान् च प ठतवती ।
[मने आधु नक रसायनशास्त्र और उप नषद्-ग्रन्थ पढ़े ह।]

दोन रक्त ान कम ह: ‘प ठतवती’ का कम होने से दोन पद द्वतीया म ह — रसायनशास्त्रम् (नपुंसक लङ्ग,
तीया एकवचन) तथा ग्रन्थान् (पुं लङ्ग, तीया बहुवचन)। वशेषण ‘आधु नकम्’ भी वशेष्य के अनुसार तीया
एकवचन म है।

प्र.2 (च) अस्माकं ........................ ानं तेषु एव न हतम् अ स्त।

अस्माकं मौ लकं ानं तेषु एव न हतम् अ स्त ।
[हमारा मौ लक ान उन्ह (उप नषद ) म न हत है।]

वशेषण- वशेष्य मेल: ‘ ानम्’ नपुंसक लङ्ग, प्रथमा एकवचन है, इस लए वशेषण भी मौ लकम् (नपुंसक लङ्ग,
प्रथमा एकवचन) होगा।

पाठ का पूरा वाक्य: ‘यतः अस्माकं भारतस्य मौ लकं ानं तेषु न हतम् अ स्त।’ — इस लए ‘भारतस्य मौ लकम्’
लखना भी ठ क है।

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वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 99 – 100
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अभ्यासः — प्रश्नः ३ : उदाहरणानुसारम् अधः प्रदत्तानां शब्दानां वचनप रवतनं कुवन्तु —
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व्याकरणम्

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शब्दः — एकवचनम् / द्ववचनम् / बहुवचनम् : आहार (उदाहरणम् — आहारात्, आहाराभ्याम्, आहारेभ्यः),
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मनुष्य, वृक्ष, अ ग्न (उदाहरणम् — अग्नेः, अ ग्नभ्याम्, अ ग्नभ्यः), मु न, पे टका (उदाहरणम् — पे टकायाः,
m(उदाहरणम् — कूप्याः, कूपीभ्याम्, कूपीभ्यः), नद , नगरी।
पे टकाभ्याम्, पे टकाभ्यः), वा टका, माला, कeू पी
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दए गए उदाहरण आहारात् / आहाराभ्याम् / आहारेभ्यः दे खए — ये सब पञ्चमी वभ क्त के रूप ह। अतः हर शब्द के तीन

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वचन म पञ्चमी वभ क्त के ही रूप लखने ह।
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शब्दः एकवचनम् द्ववचनम् बहुवचनम्

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a आहार (उदाहरणम्) आहारात् आहाराभ्याम् आहारेभ्यः

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मनुष्यात् मनुष्याभ्याम् मनुष्येभ्यः
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मनुष्य

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वृक्ष
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वृक्षात् वृक्षाभ्याम् वृक्षेभ्यः

अिग्न (उदाहरणम्) अग्नेः अ ग्नभ्याम् अ ग्नभ्यः

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मुिन मुनेः मुिनभ्याम्
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पेिटका (उदाहरणम्) पे टकायाः पे टकाभ्याम् पे टकाभ्यः

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ag वािटका वािटकायाः वािटकाभ्याम् वािटकाभ्यः

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माला मालायाः
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मालाभ्याम् मालाभ्यः
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कू पी (उदाहरणम्) कूप्याः कूपीभ्याम् कूपीभ्यः

नदी नदीभ्याम् नदीभ्यः

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नगरी नगय ः नगरीभ्याम्

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अकारान्त पुं लङ्ग (आहार, मनुष्य, वृक्ष) — –आत् / –आभ्याम् / –एभ्यः

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इकारान्त पुं लङ्ग (अ ग्न, मु न, क व, ह र) — –एः / –इभ्याम् / –इभ्यः
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आकारान्त स्त्री लङ्ग (पे टका, वा टका, माला, लता) — –आयाः / –आभ्याम् / –आभ्यः
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ईकारान्त स्त्री लङ्ग (कूपी, नद , नगरी) — –याः / –ईभ्याम् / –ईभ्यः
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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

ध्यान द: ईकारान्त शब्द के एकवचन म ‘ई’ का यण् हो जाता है — नद + आः = नद्याः, नगरी + आः = नगयाः,
कूपी + आः = कूप्याः। वचन-बहुवचन म ‘ई’ ज्य क त्य रहती है — नद भ्याम्, नद भ्यः।

प्रयोग करके दे ख: ‘बालकः वृक्षात् फलं गृ ा त’, ‘जलं कूप्याः पत त’, ‘छात्राः मु नभ्यः ानं प्रा ुव न्त’।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 100
अभ्यासः — प्रश्नः ४ : उदाहरणानुसारम् अधः रेखाङ् कता न पदा न आ त्य प्रश्न नमाणं कुवन्तु —

व्याकरणम्

प्र.4 (क) माता आपणात् गृहम् आगच्छ त। (उदाहरणम् — माता कुतः गृहम् आगच्छ त ? / माता कस्मात् गृहम्
आगच्छ त ?)

यह पुस्तक का दया हुआ उदाहरण है —
1. माता कुतः गृहम् आगच्छ त ?
2. माता कस्मात् गृहम् आगच्छ त ?
[माता कहाँ से घर आती है?]

नयम: जस पद के नीचे रेखा है (यहाँ आपणात्) वह पञ्चमी वभ क्त (अपादान) म है। पञ्चमी वाले पद के ान
पर प्रश्नवाचक कुतः (अव्यय) अथवा कस्मात् ( कम् का पञ्चमी एकवचन, पुं./नपुं.) रखने से प्रश्न बन जाता है। शेष
वाक्य ज्य -का-त्य रहता है और अन्त म प्रश्न चह्न लगता है।

स्मरणीय: स्त्री लङ्ग शब्द के लए कस्याः आता है — ‘बा लका शालायाः आगच्छ त’ → ‘बा लका कस्याः
आगच्छ त ?’ अथवा ‘बा लका कुतः आगच्छ त ?’

प्र.4 (ख) राजेशः वद्यालयात् पुस्तकम् आनय त।

1. राजेशः कुतः पुस्तकम् आनय त ?
2. राजेशः कस्मात् पुस्तकम् आनय त ?
[राजेश कहाँ से पुस्तक लाता है?]

क्य : रेखाङ् कत पद वद्यालयात् पञ्चमी एकवचन (अकारान्त पुं लङ्ग) है — ‘ व ालय से’। उसी के ान पर
कुतः/कस्मात् आया।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

प्र.4 (ग) वकासः महेशात् लेखन स्वीकृतवान्।

1. वकासः कस्मात् लेखन स्वीकृतवान् ?
2. वकासः कुतः लेखन स्वीकृतवान् ?
[ वकास ने कससे लेखनी ली?]

ध्यान द: यहाँ जससे वस्तु ली गई वह व्य क्त (महेशः) है, इस लए कस्मात् (‘ कससे’) अ धक उपयुक्त है; ‘कुतः’
का प्रयोग भी पुस्तक के उदाहरण के अनुसार कया जा सकता है।

शब्द: लेखनी ईकारान्त स्त्री लङ्ग है — तीया एकवचन लेखनीम्। स्वीकृतवान् पुं लङ्ग भूतका लक कृदन्त है।

प्र.4 (घ) माता गृहात् पुत्रं पश्य त।

1. माता कुतः पुत्रं पश्य त ?
2. माता कस्मात् पुत्रं पश्य त ?
[माता कहाँ से पुत्र को दे खती है?]

अपादान यहाँ भी: ‘गृहात्’ का अथ है ‘घर से (खड़े होकर)’ — दे खने क क्रया जहाँ से आरम्भ होती है, वह
अपादान है, अतः पञ्चमी।

प्र.4 (ङ) हमालयात् गङ्गा प्रवह त।

1. कुतः गङ्गा प्रवह त ?
2. कस्मात् गङ्गा प्रवह त ?
[गंगा कहाँ से बहती है?]

यही अपादान का उत्तम उदाहरण है: ‘ ुवमपायेऽपादानम्’ — जससे कोई वस्तु अलग होकर नकलती है, वह
अपादान होता है। गङ्गा हमालय से नकलती है, इस लए हमालयात् पञ्चमी म है।

ऐसे और वाक्य बनाइए: ‘वृक्षात् पत्रा ण पत न्त’ → ‘कुतः पत्रा ण पत न्त ?’; ‘छात्रः व ालयात् आगच्छ त’ →
‘छात्रः कुतः आगच्छ त ?’

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 101
अभ्यासः — प्रश्नः ५ : अधः प्रदत्ता न पदा न पठन्तु, तेषां पदानां पयायपदा न पाठे षु स न्त, ता न चत्वा नदशानुसारं पदरञ्जन्यां लखन्तु —

पदरञ्जनी

प्र.5 (क) वामतः द क्षणम् — (१) जन्म (त्री ण अक्षरा ण) (२) मातः (अक्षरद्वयम्) (३) सत्यम् (अक्षरद्वयम्) (४) अ प
(एकम् अक्षरम्) (५) ओषधीनाम् (त्री ण अक्षरा ण) (६) तदथम् (अक्षरद्वयम्) (७) क स्मन् समये
(अक्षरद्वयम्)

पदरञ्जनी म १. जन्म = उत्प त्तः पहले से भरा हुआ है (उ | त्प | त्तः)। उसी ढं ग से शेष पद पाठ से चुनकर भ रए —

क्रमः दत्तं पदम् पाठे वद्यमानं पयायपदम् अक्षर- वभाजनम्

१ जन्म उत्प त्तः (पुस्तके पू रतम्) उ | त्प | त्तः

२ मातः अम्ब अ | म्ब

३ सत्यम् आम् आ | म्

४ अिप च च

५ ओषधीनाम् स स्यानाम् स | स्या | नाम्

६ तदथम् अतः अ | तः

७ किस्मन् समये कदा क | दा

हर उत्तर पाठ से ही मला है:

अम्ब — ‘अम्ब ! मम का चद् ज ासा अ स्त।’ (शब्दाथ म भी — अम्ब = भोः मातः !)
आम् — ‘आम्, अतः तेषाम प उत्प त्त जानातु।’ — ‘आम्’ का अथ है ‘हाँ, सत्य है’।
च — ‘आकाशः अणुः च’ — ‘च’ का अथ ‘और/भी’ है, अतः वह ‘अ प’ का पयाय है।
सस्यानाम् — ‘पृ थव्याः ओषधीनां सस्यानां वृक्षाद नां च उत्प त्तः अभवत्।’
अतः — शब्दाथ-ता लका म स्पष्ट है — तदथम् = अतः।
कदा — ‘अम्ब ! पृ थवी कदा उत्पन्ना ?’

कहाँ लख: (१) उत्प त्तः पहली पं क्त के आरम्भ म; (२) अम्ब उसी पं क्त म चौथे-पाँचव कोष्ठक म; (३) आम् दूसरी
पं क्त के पाँचव-छठे कोष्ठक म; (४) च तीसरी पं क्त के अ न्तम कोष्ठक म; (५) सस्यानाम् पाँचव पं क्त म; (६) अतः
तीसरी पं क्त के दूसरे-तीसरे कोष्ठक म; (७) कदा अ न्तम पं क्त म।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

प्र.5 (ख) उप र ात् अधः — (१) उन्न तः (त्री ण अक्षरा ण) (२) समाप्तम् (चत्वा र अक्षरा ण) (३) गगनस्य (चत्वा र
अक्षरा ण) (४) बु मती (त्री ण अक्षरा ण) (५) सकलम् (अक्षरद्वयम्) (६) ततः परम् (चत्वा र अक्षरा ण) (८)
कल (अक्षरद्वयम्)

ऊपर से नीचे क ओर भरे जाने वाले पद — १. उन्न तः = उत्कषः पुस्तक म पहले से भरा है (उ | त्क | षः)।

क्रमः दत्तं पदम् पाठे वद्यमानं पयायपदम् अक्षर- वभाजनम्

१ उन्नितः उत्कषः (पुस्तके पू रतम्) उ | त्क | षः

२ समाप्तम् अवसानम् अ | व | सा | नम्

३ गगनस्य आकाशस्य आ | का | श | स्य

४ बुि मती चतुर ा च | तु | रा

५ सकलम् सवम् स | वम्

६ ततः परम् अनन्तरम् अ | न | न्त | रम्

८ िकल खलु ख | लु

पाठ के आधार-वाक्य:

उत्कषः — ‘तेन अस्माकं जीवनस्य अ प उत्कषः भव त।’ (उत्कष = उन्न त)
आकाशस्य — ‘प्रथमं ब्रह्मणः आकाशस्य उत्प त्तः अभवत्।’ (गगन = आकाश)
चतुरा — ‘मम पुत्री बहु चतुरा अ स्त।’ (चतुरा = बु द्धमती)
सवम् — ‘एतत् सव कमथम् अम्ब ?’ (सवम् = सकलम्)
अनन्तरम् — ‘पुत्री — अनन्तरम् ?’ (अनन्तरम् = ततः परम्)
खलु — ‘आहारात् क टाः … उत्पन्नाः खलु अम्ब ?’ (खलु = कल = नश्चय ही)

ध्यान रखने योग्य दो बात: (1) संख्या (२) ‘समाप्तम्’ का पयाय पाठ म सीधे नह मलता; कोष्ठक क संख्या
(चार) तथा ऊपर के अक्षर ‘अ’ के अनुसार यहाँ अवसानम् (अथवा ‘अव सतम्’) लखा जा सकता है — इसे अपने
अध्यापक से मला ली जए। (2) पुस्तक क पदरञ्जनी म सस्यानाम् (वामतः द क्षणम् ५) तथा चतुरा (उप रष्टात्
अधः ४) का अ न्तम कोष्ठक एक ही पड़ता है, अतः अपनी पुस्तक के कोष्ठक के अनुसार ही पद लख।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 101 – 102

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न
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अभ्यासः — प्रश्नः ६ : उदाहरणानुसारं कः कस्मात् वद्यां प्राप्तवान् इ त पूणवाक्येन लखन्तु —
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व्याकरणम्

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a s emशष्यः — शुक्राचायः, आचायः — महादे वः (उदाहरणम्)
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प्र.6 (क)

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यह पुस्तक का उदाहरण है —
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शुक्राचायः महादे वात् वद्यां प्राप्तवान् ।
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[शुक्राचाय ने महादे व से व ा प्राप्त क ।]

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वाक्य बनाने का साँचा: शष्यः (प्रथमा) + आचायः (पञ्चमी) + व ां प्राप्तवान्। जससे व ा मलती है, वह
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अपादान है, इस लए आचाय का नाम पञ्चमी वभ क्त म आता है — महादे वः → महादे वात्।

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a नयम: ‘आख्यातोपयोगे’ — गुरु से व ा ग्रहण करने के अथ म गुरुवाचक पद म पञ्चमी होती है, जैसे ‘छात्रः

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उपाध्यायात् अधीते’।

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शष्यः — पद्मपादः, आचायः — शङ् कराचायः
प्र.6 (ख)

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पद्मपादः शङ् कराचायात् वद्यां प्राप्तवान् ।

l a se[पद्मपाद ने शंकराचाय से व ा प्राप्त क ।]

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जानकारी: पद्मपाद आ द शंकराचाय के चार प्रमुख शष्य म से एक थे (अन्य — सुरेश्वरः, हस्तामलकः, तोटकः)।
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प्र.6 (ग) agl
शष्यः — ववेकानन्दः, आचायः — रामकृष्णः

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ववेकानन्दः रामकृष्णात् वद्यां प्राप्तवान् ।

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जानकारी: स्वामी ववेकानन्द के गुरु ीरामकृष्ण परमहंस थे; उन्ह क प्रेरणा से ववेकानन्द ने शकागो (1893) म
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भारतीय ान का प्रसार कया।

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प्र.6 (घ) शष्यः — रामः, आचायः — व सष्ठः

रामः व सष्ठात् वद्यां प्राप्तवान् ।
[राम ने व सष्ठ से व ा प्राप्त क ।]

जानकारी: मह ष व सष्ठ अयोध्या के राजगुरु थे और ीराम तथा उनके भाइय के आचाय थे।

प्र.6 (घ) [ द्वतीयम्] शष्यः — भीष्मः, आचायः — परशुरामः

भीष्मः परशुरामात् वद्यां प्राप्तवान् ।
[भीष्म ने परशुराम से व ा प्राप्त क ।]

पुस्तक क छपाई पर ध्यान द: पृष्ठ 101 पर (घ) रामः – व सष्ठः है और पृष्ठ 102 पर फर से (घ) भीष्मः –
परशुरामः छपा है। क्रम इस प्रकार होना चा हए — (क) शुक्राचायः, (ख) पद्मपादः, (ग) ववेकानन्दः, (घ) रामः, (ङ)
भीष्मः, (च) चन्द्रगुप्तः, (छ) अजुनः।

प्र.6 (ङ) शष्यः — चन्द्रगुप्तः, आचायः — चाणक्यः

चन्द्रगुप्तः चाणक्यात् वद्यां प्राप्तवान् ।
[चन्द्रगुप्त ने चाणक्य से व ा प्राप्त क ।]

जानकारी: आचाय चाणक्य (कौ टल्य/ वष्णुगुप्त) ने चन्द्रगुप्त मौय को श क्षत कर मगध का स ाट् बनाया; उन्ह
का ग्रन्थ है अथशास्त्रम्।

प्र.6 (च) शष्यः — अजुनः, आचायः — द्रोणाचायः

अजुनः द्रोणाचायात् वद्यां प्राप्तवान् ।
[अजुन ने द्रोणाचाय से व ा प्राप्त क ।]

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सात वाक्य का एक ही रूप: शष्य का नाम प्रथमा म, आचाय का नाम पञ्चमी म (–आत्), और क्रया ‘ व ां
प्राप्तवान्’। इसी प्रकार आप लख सकते ह — ‘एकलव्यः द्रोणाचायात् व ां प्राप्तवान्’, ‘कणः परशुरामात् व ां
प्राप्तवान्’।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 102
अभ्यासः — प्रश्नः ७ : अधः प्रदत्ता न वाक्या न प ठत्वा मातृभाषया, प्रान्तीयभाषया आङ् ग्लभाषया वा अनुवादं कुवन्तु —

अभ्यासः

प्र.7 (क) राधा नगरात् आगच्छ त।

हन्द — राधा नगर से आती है।
English — Radha comes from the city.

पञ्चमी का चह्न ‘से’: नगरात् = नगर + आत् (पञ्चमी एकवचन)। हन्द म इसका अनुवाद ‘नगर से’ होता है।

प्र.7 (ख) वनयः वृक्षात् पुष्पा ण चनो त।

हन्द — वनय वृक्ष से फूल चुनता है।
English — Vinay plucks flowers from the tree.

रूप: पुष्पा ण = नपुंसक लङ्ग, तीया बहुवचन (कम)। चनो त = च धातु, लट् लकार, प्रथमपुरुष एकवचन।

प्र.7 (ग) सन्द पः कायालयात् गृहं गतवान्।

हन्द — संद प कायालय से घर गया।
English — Sandeep went home from the office.

रूप: गतवान् भूतका लक कृदन्त है (स्त्री लङ्ग म — गतवती)।

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प्र.7 (घ) भ गनी दूरात् वाहनं पश्य त।

हन्द — बहन दूर से वाहन को दे खती है।
English — The sister sees the vehicle from a distance.

शब्द: दूरात् = दूर से (पञ्चमी); भ गनी = बहन (ईकारान्त स्त्री लङ्ग)।

प्र.7 (ङ) महेशः शालायाः गृहम् आगतवान्।

हन्द — महेश पाठशाला से घर आया।
English — Mahesh came home from the school.

स्त्री लङ्ग म पञ्चमी: ‘शाला’ आकारान्त स्त्री लङ्ग है, अतः पञ्चमी एकवचन शालायाः बना (शालायाः, शालाभ्याम्,
शालाभ्यः)।

प्र.7 (च) बालः कपा टकायाः धनं स्वीकरो त।

हन्द — बालक अलमारी से धन लेता है।
English — The boy takes the money from the cupboard.

सब वाक्य म एक ही सूत्र: छह वाक्य म एक पद पञ्चमी वभ क्त म है — नगरात्, वृक्षात्, कायालयात्, दूरात्,
शालायाः, कपा टकायाः। अनुवाद करते समय हर बार ‘…से’ लगाइए।

योग्यता वस्तारः — पृष्ठ 102 – 103

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योग्यता वस्तारः — ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ तथा ‘आधु नकरसायनशास्त्रम् (Chemistry)’

योग्यता वस्तारः

योग्य.1 अत्र इदम् अवधेयम् — “तस्माद्वा एतस्मात् आत्मनः आकाशः स ूतः। आकाशाद्वायुः। वायोर ग्नः। अग्नेरापः।
अद्भ्यः पृ थवी। पृ थव्या ओषधयः। ओष धभ्योऽन्नम्। अन्नात् पुरुषः॥” — तै त्तरीयोप नषत् २-१-२

अन्वयः — तस्मात् वै एतस्मात् आत्मनः आकाशः सम्भूतः। आकाशात् वायुः (सम्भूतः)। वायोः अ ग्नः (सम्भूतः)। अग्नेः आपः
(सम्भूताः)। अद्भ्यः पृ थवी (सम्भूता)। पृ थव्याः ओषधयः (सम्भूताः)। ओष धभ्यः अन्नम् (सम्भूतम्)। अन्नात् पुरुषः (सम्भूतः)।
अथः ( हन्द ) — उसी इस आत्मा (ब्रह्म) से आकाश उत्पन्न हुआ। आकाश से वायु, वायु से अ ग्न, अ ग्न से जल, जल से पृ थवी,
पृ थवी से ओष धयाँ, ओष धय से अन्न और अन्न से पुरुष (मनुष्य) उत्पन्न हुआ।
भावः — सृ ष्ट कसी क्रम-र हत घटना का प रणाम नह है; उसका एक न श्चत क्रम है। सबका मूल एक ही चेतन तत्त्व (आत्मा/ब्रह्म)
है और उसी से क्रमशः पञ्चमहाभूत, फर वनस्प त, फर अन्न और अन्त म मनुष्य बना। इसका सन्दे श यह है क मनुष्य प्रकृ त का
स्वामी नह , उसक अ न्तम कड़ी है — इस लए वायु, जल, पृ थवी, वृक्ष और अन्न क रक्षा करना ही मनुष्य क रक्षा करना है। यही
पाठ का शीषक भी कहता है — ‘अन्नाद् भव न्त भूता न’।

स पदम् स वच्छे दः स ेः नाम

तस्मा ा तस्मात् + वा जश्त्वस न्धः

आकाशा ायुः आकाशात् + वायुः जश्त्वस न्धः

वायोरिग्नः वायोः + अिग्नः वसगस न्धः (रेफादे शः)

अग्नेर ापः अग्नेः + आपः वसगस न्धः (रेफादे शः)

पिृ थव्या ओषधयः पिृ थव्याः + ओषधयः वसगस न्धः ( वसगलोपः)

ओषिधभ्योऽन्नम् ओषिध भ्यः + अन्नम् वसगस न्धः (पूवरूपम्)

पूरे वचन म एक ही वभ क्त: ‘आकाशात्, वायोः, अग्नेः, अद्भ्यः, पृ थव्याः, ओष धभ्यः, अन्नात्’ — ये सब
पञ्चमी वभ क्त (अपादान) के रूप ह। इसी लए यह वचन इस पाठ के व्याकरण- वषय का सव त्तम उदाहरण है।
अद्भ्यः ‘अप्’ (जल, नत्य बहुवचन) का पञ्चमी बहुवचन है।

तुलना क जए: पाठ का संवाद और यह उप नषद्-वचन एक ही क्रम बताते ह — ब्रह्म/आत्मा → आकाश → वायु
→ अ ग्न → जल → पृ थवी → ओष ध → अन्न → पुरुष।

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आधु नकरसायनशास्त्रम् (Chemistry) — द्रव्यानां- तयः (States of Matter) [ चत्रम्]
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योग्य.2

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a glके पृष्ठ 103 पर चार चत्र क्रम से दए ह और उनके नीचे कण (particles) क रचना दखाई गई है; दोन ओर तीर ह, जो
पुस्तक
बताते ह क एक अव ा दूसरी म बदल सकती है —

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चत्रम् अव ा (संस्कृतम्) STATE OF MATTER कणानां रचना

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िहमशैल ः (बफ का पहाड़) घनाव ा
ag Solid कणाः नयतक्रमेण दृढं सम्बद्धाः — जालकरूपेण

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समुद जलम् द्रवाव ा Liquid कणाः श थलं सम्बद्धाः, चल न्त

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कणाः पृथक् पृथक्,eस्वतन्त्रं
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मेघ ाः (वाष्पः) वाष्पाव ा Gas

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िव तु ् (आकाशे तिडत्) प्लाज्माव ा Plasma धनात्मक-ऋणात्मक-आवेशयुक्ताः कणाः

agसारः (संस्कृतम्) — एकम् एव द्रव्यं (यथा जलम्) तापस्य भेदेन घन-द्रव-वाष्प-प्लाज्म-रूपेण प रवतते। यथा — हमम् उष्णतया

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coइनmचार अव ाओं म बदलता रहता है।] agl
जलं भव त, जलम् उष्णतया वाष्पः भव त, वाष्पः शीतलतया पुनः जलं भव त।
[एक ही द्रव्य ताप के अनुसार ठोस, द्रव, गैस और प्लाज़्मा .—

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यह पाठ के साथ क्य दया गया: a
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पाठ म माता कहती है क उसने आधु नकं रसायनशास्त्रम् तथा उप नषद्-

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ग्र ान् दोन पढ़े ह। उप नषद् जन पञ्चमहाभूत (आकाश, वायु, अ ग्न, जल, पृ थवी) क बात करता है, आधु नक
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रसायनशास्त्र उन्ह को द्रव्य क अव ाओं के रूप म समझाता है — पृ थवी ≈ ठोस, जल ≈ द्रव, वायु ≈ गैस, अ ग्न

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≈ ऊजा/प्लाज़्मा, आकाश ≈ अवकाश। अथात् प्राचीन ान और आधु नक व ान एक-दूसरे के वरोधी नह , पूरक

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स्वयं करके दे खए: एक पात्र म बफ र खए — कुछ दे र म वह जल बनेगा (घन → द्रव); उसे गरम क जए — भाप
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बनेगी (द्रव → वाष्प); भाप को ठं डी प्लेट पर लगाइए — फर बूँद बनगी (वाष्प → द्रव)।
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प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 103
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प रयोजनाकायम् (प्रकल्प-काय)

प रयोजनाकायम्

प र.1 भारतस्य ग णत ानां प्राचीन व ा ननां खगोल व ा ननां चत्रा ण सङ्गह्य अधः तेषां नामा न ल खत्वा एकं
भ त्तपत्रं कुवन्तु।

कैसे कर: एक बड़े चाट-पेपर पर ऊपर संस्कृत म शीषक ल खए — ‘भारतस्य ग णत ाः वै ा नकाः खगोल व ा ननः च’।
पुरानी प त्रकाओं, पाठ्यपुस्तक या इंटरनेट से चत्र लेकर तीन स्तम्भ म चपकाइए — ग णत ाः, वै ा नकाः, खगोल व ा ननः।
हर चत्र के नीचे संस्कृत म नाम और एक पं क्त का योगदान ल खए।
नमूना उत्तर ( भ त्तपत्रस्य सामग्री):

वभागः नाम योगदानम् (एकवाक्येन)

गिणत ाः आयभटः ‘आयभट यम्’ ग्रन्थः; शून्यस्य तथा दशमलवपद्धतेः प्रयोगः।

गिणत ाः बह्मगप्ु तः शून्यस्य ग णतीय नयमाः ‘ब्रह्म ु ट सद्धान्ते’ प्र तपा दताः।

गिणत ाः भास्कराचायः ‘लीलावती’ इ त ग णतग्रन्थस्य रच यता।

गिणत ाः बौधायनः ‘शुल्बसूत्रे’ त्रभुजस्य प्रमेयम् (Pythagoras theorem) प्रथमम् उक्तम्।

गिणत ाः ीिनवास -रामानुजः सङ् ख्या सद्धान्ते (Number Theory) अ तं कायम्।

खगोलिव ािननः वराहिमिहरः ‘बृहत्सं हता’ — ज्यो तषम्, ऋतु व ानं च।

खगोलिव ािननः भास्करः (पथमः) ग्रहग णतस्य ववरणम्।

वै ािनकाः चरकः, सु तु ः आयुवदः तथा शल्य च कत्सा (Surgery)।

वै ािनकाः कणादः अणु सद्धान्तस्य (Atomic theory) प्रवतकः।

वै ािनकाः जगदीशचन्द बसुः वनस्पतीनां सजीवत्वं प्रमा णतवान्।

वै ािनकाः सी.वी. रामन् ‘रामन्-प्रभावः’ — नोबेल्-पुरस्कारः।

वै ािनकाः ए .पी.जे. अब्दुल -कलामः भारतस्य अन्त रक्ष-प्रक्षेपास्त्र-कायक्रमाणां नेता।

अच्छे भ त्तपत्र म क्या हो: (1) स्पष्ट शीषक, (2) चत्र और नाम एक-दूसरे के ठ क नीचे, (3) नाम दे वनागरी म
और नीचे कोष्ठक म अंग्रेजी म, (4) कनारे पर रंगीन सजावट, (5) नीचे अपना नाम, कक्षा और वग।

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प र.2 प्राचीनभारतस्य राज्यानां नामा न, तेषाम् आधु नकनामा न च लखन्तु। यथा — इन्द्रप्र ः — दे हली, कणपुरम्
— कानपुर

कैसे कर: भारत का एक रेखा चत्र (outline map) बनाइए। जहाँ-जहाँ प्राचीन नगर या जनपद थे, वहाँ बन्दु लगाकर प्राचीन
नाम ल खए और कोष्ठक म आधु नक नाम। साथ म एक ता लका भी बनाइए।
नमूना उत्तर:

प्राचीनं नाम आधु नकं नाम प्राचीनं नाम आधु नकं नाम

इन्द पस्थः दे हली (िद ल्ली) कणपुर म् कानपुर

पाटिलपुत्र म् पटना कान्यकु ब्जम् क न्नौज

उज्जियनी / अवन्ती उ ज्जैन काशी / वाराणसी बनारस

मुम्बापुर ी मुम्बई चेन्नपुर ी चेन्नई

किलकाता कोलकाता हिस्तनापुर म् हिस्तनापुर (मेर ठ-समीपे)

मगधः (जनपदः) दिक्षण-िबहार किलङ् गः (जनपदः) ओिडशा

कोसलः (जनपदः) अवध (उ .प.) सुर ा ः सौरा (गज
ु रात)

अङ् गः (जनपदः) भागलपुर -क्षेत्र म् िवदभः नागपुर -क्षेत्र म्

सुझाव: ता लका के साथ एक-दो पं क्तयाँ यह भी ल खए क उस ान क प्र स द्ध कस कारण थी — जैसे
‘पाट लपुत्रम् मौयसा ाज्यस्य राजधानी आसीत्’, ‘उज्ज यनी वक्रमा दत्यस्य नगरी आसीत्’।

प र.3 मातृभाषायां प्रान्तीयभाषायां वा पदरञ्जन्याः (SUDOKU) नमाणं कुवन्तु।

कैसे कर ( व ध):

1. कागज़ पर 6 × 6 अथवा 9 × 9 के खाने बनाइए।
2. अपनी मातृभाषा/प्रान्तीय भाषा के कुछ शब्द चु नए — प्रत्येक शब्द के अक्षर ग नए (जैसे ‘पुस्तकम्’ = पु | स्त | कम् = तीन
अक्षर)।
3. शब्द को आड़े (वामतः द क्षणम्) और खड़े (उप रष्टात् अधः) इस प्रकार र खए क जहाँ दो शब्द मल वहाँ एक ही अक्षर पड़े।
4. बचे हुए खाने काले कर द जए और शब्द के आरम्भ-कोष्ठक पर १, २, ३ … संख्या ल खए।
5. नीचे दो सू चयाँ बनाइए — वामतः द क्षणम् तथा उप र ात् अधः; हर संख्या के सामने शब्द का अथ या पयाय और कोष्ठक
म अक्षर क संख्या ल खए।
6. एक शब्द उदाहरण के रूप म लाल स्याही से भर द जए — जैसे इस पाठ क पदरञ्जनी म ‘उत्प त्तः’ भरा हुआ है।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न AglaSem · NCERT Solutions

नमूना उत्तर (लघु पदरञ्जनी के सङ् केत):

दशा सङ् केतः उत्तरम् अक्षरा ण

वामतः दिक्षणम् १. व ालयः पाठशाला चत्वा र

वामतः दिक्षणम् २. जननी माता े

उपिरष्टात् अधः १. पुस्तकम् पुस्तक त्री ण

उपिरष्टात् अधः २. स ललम् जल े

ध्यान रख: पहले उत्तर तय क जए, फर खाने बनाइए — इससे अक्षर क गनती और मलान (crossing) दोन
ठ क बैठते ह। तैयार पदरञ्जनी क एक प्र त उत्तर स हत अलग र खए।

प र.4 कक्षायां संस्कृतस्य वस्तुप्रद शन्याः आयोजनं कुवन्तु।

कैसे कर ( व ध): कक्षा को चार-पाँच समूह म बाँ टए। प्रत्येक समूह एक मेज़ पर अपना वषय सजाए। मेज़ के आगे संस्कृत म
नामप का लगाइए और हर वस्तु के नीचे उसका संस्कृत नाम ल खए। अन्त म दो छात्र संस्कृत म आगन्तुक को प रचय द।
नमूना उत्तर (प्रद शन्याः वभागाः):

१. भूता न च सृ क्रमः — इस पाठ का चाट : ब्रह्म → आकाश → वायु → अ ग्न → जल → पृ थवी → ओष ध → अन्न →
प्रा णनः।
२. वस्तूनां संस्कृतनामा न — लेखनी, पुस्तकम्, कूपी, पे टका, माला, द पः, घटः आ द वास्त वक वस्तुएँ नाम-प का स हत।
३. सुभा षता न — रंगीन प य पर ोक और उनका हन्द अथ।
४. संस्कृते सङ् ख्याः तथा वाराः — एकम्…दश; र ववासरः…श नवासरः।
५. भारतस्य वै ा नकाः — प रयोजना-काय १ म बनाया भ त्तपत्र।
६. स ाषण-कोणः — ‘भवतः नाम कम् ?’, ‘अहं छात्रः अ स्म’ जैसे सरल वाक्य के काड।

सफल आयोजन के लए: नमन्त्रण-पत्र संस्कृत म बनाइए — ‘सादरं नमन्त्रयामः। संस्कृतवस्तुप्रद शनी अस्माकं
कक्षायाम् आयोज्यते।’ अन्त म सबका धन्यवाद संस्कृत म क जए — ‘भवद्भ्यः धन्यवादाः।’

प र.5 भवतः अथवा प रवारजनानां जन्म दनोत्सवे न्यूना त-न्यूनम् एकस्य वृक्षस्य आरोपणं कुवन्तु। प्र त दनं जलेन
सञ्चन्तु।

कैसे कर ( व ध): यह करने वाला काय है — इसका उत्तर लखकर नह , पौधा लगाकर दया जाता है। इतना अवश्य क जए —

1. ऐसा पौधा चु नए जो आपके क्षेत्र म सरलता से बढ़े — नीम, आम, अमरूद, तुलसी, अशोक, कदम्ब।

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2. जन्म दन पर घर के आँगन, व ालय के प्रांगण या उ ान म ग ा खोदकर पौधा लगाइए।
3. पौधे के पास एक छोट प का लगाइए — ‘एतत् वृक्षारोपणं मम जन्म दने कृतम्। दनाङ् कः — …’
4. प्र त दन जल द जए और चार ओर छोट बाड़ लगाइए, जससे पशु न खाएँ।
5. एक वृक्ष-दै न न्दनी बनाइए — हर महीने पौधे का चत्र या फोटो, ऊँचाई और पत्त क संख्या ल खए।

नमूना उत्तर (कक्षायां पठनीयम्) — अहं मम जन्म दने गृहस्य प्राङ्गणे एकं नम्बवृक्षम् आरो पतवान्/आरो पतवती। प्र त दनं
प्रातः तं जलेन सञ्चा म। सः इदान मत्तः अ प उन्नतः अ स्त। वृक्षाः अस्माकं मत्रा ण स न्त, यतः तेभ्यः वायुः, छाया,
फला न च प्राप्यन्ते।
[मने अपने जन्म दन पर घर के आँगन म एक नीम का पेड़ लगाया। म प्र त दन सवेरे उसे पानी दे ता/दे ती ँ। अब वह मुझसे भी ऊँचा
हो गया है। वृक्ष हमारे मत्र ह, क्य क उनसे वायु, छाया और फल मलते ह।]

यह काय इसी पाठ के साथ क्य : पाठ कहता है — पृ थवी से ओष ध और सस्य, उनसे अन्न, और अन्न से सब
प्राणी। अथात् वृक्ष और वनस्प त ही हमारे जीवन का आधार ह। एक वृक्ष लगाना ‘अन्नाद् भव न्त भूता न’ को
कायरूप म करना है।

अध्याय — एक नज़र म
पाठ का स्वरूप — यह माता और पुत्री का संवाद है। पुत्री क ज ासा है — ‘वयं मनुष्याः प्रा णनः क टाः च कथं भूलोके
आगताः ?’ माता उत्तर म सृ ष्ट क उत्प त्त का क्रम बताती है, जो उप नषद म व णत है।
सृ क्रम (मुख्य वषय) — ब्रह्मणः आकाशः → आकाशात् वायुः → वायोः अ ग्नः → अग्नेः जलम् → जलात् पृ थवी →
पृ थव्याः ओषधयः/सस्या न → सस्येभ्यः आहारः → आहारात् क टाः, प्रा णनः, मनुष्याः। यही क्रम पाठ के अन्त म
तै त्तरीयोप नषद् (२-१-२) के वचन म भी दया गया है।
‘ब्रह्म’ का अथ — पाठ के अनुसार ब्रह्म कोई मू त नह , अ पतु सवत्र व्याप्त चेतना-श क्त अथवा ऊजा है — ‘ब्रह्म इत्युक्ते
चेतना-श क्तः, ऊजा वा या सवत्र व्याप्ता अ स्त।’ जैसे आकाश और अणु सवत्र व्याप्त ह।
व्याकरण — पञ्चमी वभ क्त — जहाँ से कोई वस्तु अलग होती है, नकलती है या प्राप्त होती है, वहाँ अपादान कारक म
पञ्चमी वभ क्त आती है — आकाशात्, वायोः, अग्नेः, जलात्, पृ थव्याः, सस्येभ्यः, आहारात्, महादे वात्, व ालयात्। प्रश्न
बनाने पर कुतः / कस्मात् (स्त्री लङ्ग म कस्याः) आता है।
पञ्चमी के रूप — अकारान्त पुं.: –आत् / –आभ्याम् / –एभ्यः (आहारात्, आहाराभ्याम्, आहारेभ्यः); इकारान्त पुं.: –एः /
–इभ्याम् / –इभ्यः (अग्नेः, अ ग्नभ्याम्, अ ग्नभ्यः); आकारान्त स्त्री.: –आयाः / –आभ्याम् / –आभ्यः (पे टकायाः);
ईकारान्त स्त्री.: –याः / –ईभ्याम् / –ईभ्यः (कूप्याः, कूपीभ्याम्, कूपीभ्यः)।
पाठ का सन्दे श — अन्न (आहार) ही समस्त प्रा णय का आधार है, इस लए अन्न, जल, वायु, वृक्ष और पृ थवी क रक्षा करनी
चा हए। साथ ही माता कहती है — ‘अवश्यम् उप नषद्-ग्र ाः पठनीयाः’, क्य क हमारे भारत का मौ लक ान उन्ह म
न हत है और उससे जीवन का उत्कष होता है।

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अन्नाद् भव न्त भूता न
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त्व रत पुनरावृ त्त
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m .co पाठे प्रयुक्तः अथः (संस्कृतम्) agव्याकरण-सङ् केतः
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शब्दः हन्द अथ

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भूता न पािणनः समस्त प्रा णगण नपुंसक लङ्गम्, प्रथमा बहुवचनम्

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अम्ब ! भोः मातः ! माँ ! सम्बोधन एकवचनम् (अम्बा)

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ब्रह्म समिष्ट-िचित-शि तः / सवव्याप्तः परमेश्वरः सवत्र व्याप्त चेतन श क्त व ऊजा नपुंसक लङ्गम् (ब्रह्मन्)

ब्रह्मणः सवव्याप्त-परमेश्वरात् सृ ष्टकता से पञ्चमी एकवचनम् — अपादानम्

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का चत् का अिप कोई स्त्री लङ्गम्, प्रथमा एकवचनम्

m a e स्त्री लङ्गः
sआकारान्तः
ज ासा
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ातुम ् इच्छा जानने क इच्छा
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तदथम् अतः इस लए अव्ययम्

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जानीयात् अवगच्छे त ् जानना चा हए व ध लङ् , प्रथमपुरुष एकवचनम्

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m .co बेट ! agl
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वत्से ! हे पुित्र ! सम्बोधन एकवचनम् (वत्सा)

अग्नेः व ेः agl आग से पञ्चमी एकवचनम् (इकारान्तः पुं.)

ओषधीनाम् औषधोपयोिग-पादपानाम् जड़ी-बू टय का
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षष्ठी बहुवचनम् (ईकारान्तः स्त्री.)

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m as e स्त्री लङ्गे भूतका लकं कृदन्तम्
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वस्मृतवती / उक्तवती न स्म ृतवती / अवदत् भूल गयी / बोली

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Board / OrgNCERT
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Updated19 Sep 2026