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Board Of School Education Haryana
मॉडल पेपर
उत्तर
2025
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अत्यंत गोपनीय केवल आंतरिक एवं सीमित प्रयोग हे तु
अंक-योजना
ववषय- हहंदी
कक्षा – नौवीं
सािान्य ननदे श :-
1. परीक्षार्थियों के सही और उर्ित आकलन के ललए उत्तर पस्ु ततकाओं का मलू यांकन एक महत्वपर्
ू ि
प्रक्रिया है । मल
ू यांकन में एक छोटी-सी त्रटु ट भी गंभीर समतया को जन्म दे सकती है , जो
परीक्षार्थियों के भववष्य, लिक्षा प्रर्ाली और अध्यापन-व्यवतथा को भी प्रभाववत कर सकती है ।
इससे बिने के ललए अनुरोध क्रकया जाता है क्रक मूलयांकन प्रारं भ करने से पूवि ही आप मल
ू यांकन
ननदे िों को पढ़ और समझ लें।
2. योग्यता आधाररत प्रश्नों का मूलयांकन करते समय कृपया टदए गए उतरों को समझे, भले ही उत्तर
माक्रकिंग तकीम में न हो, छात्रों को उनकी योग्यता के आधार पर अंक टदए जाने िाटहए।
3. अंक योजना में उत्तरों के ललए केवल सुझाए गए मान बबंद ु होते हैं। ये केवल टदिा-ननदे िों की
प्रकृनत के हैं और पूर्ि नहीं हैं। यटद परीक्षार्थियों की अलभव्यस्तत सही है तो उसके अनुसार ननयत
अंक टदए जाने िाटहए।
4. परीक्षक सही उत्तर पर सही का र्िह्न () लगाएँ और गलत उतर पर गलत का () मूलयांकनकताि
द्वारा ये र्िह्न न लगाने से ऐसा समझ में आता है क्रक उत्तर सही है , परं तु उस पर अंक नहीं टदए
गए।
5. यटद क्रकसी प्रश्न के उपभाग हो तो कृपया प्रश्नों के उपभागों के उत्तरों पर दायी ओर अंक टदए
जाएँ। बाद में इन उपभागों के अंकों का योग बायाँ और के हालिये में ललखकर उसे गोलाकृत कर
टदया जाए।
6. यटद क्रकसी प्रश्न के कोई उपभाग न हो तो बायीं ओर के हालिये में अंक टदए जाएँ और उन्हें
गोलाकृत क्रकया जाए।
7. यटद परीक्षाथी ने क्रकसी प्रश्न का उत्तर दो तथानों पर ललख टदया है और क्रकसी को काटा नहीं है तो
स्जस उत्तर पर अर्धक अंक प्राप्त हो रहे हो, उस पर अंक दें और दस
ू रे को काट दें । यटद परीक्षाथी
ने अनतररतत प्रश्न/प्रश्नों का उत्तर दे टदया है तो स्जन उत्तरों पर अर्धक अंक प्राप्त हो रहे हो, उन्हें
ही तवीकार करे , उन्हीं पर अंक है ।
8. एक ही प्रकार की अिद्ु र्ध बार-बार हो तो उसे अनदे खा करें और उस पर हर बार अंक न काटे
जाएँ।
9. यहाँ यह ध्यान रखना होगा क्रक मलू यांकन में पर्
ू ि अंक पैमाना 0-80 (उदाहरर् 0-80 अंक जैसा
क्रक प्रश्न में टदया गया है ) का प्रयोग अभीष्ट है , अथाित परीक्षाथी ने यटद सभी अपेक्षक्षत उत्तर-
बबंदओ
ु ं का उललेख क्रकया है तो उसे परू े अंक दे ने में संकोि न करें ।
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10. ये सुननस्श्ित करें क्रक उत्तर पुस्ततका के अंदर टदए गए अंकों का आवरर् के अंकों के साथ
लमलान हो।
11. आवरर् पष्ृ ठ पर दो ततंभों के अंकों का योग जाँि लें ।
12. उत्तर पस्ु ततकाओं का मल
ू यांकन करते हुए यटद कोई उत्तर पर्
ू ि रूप से गलत हो तो उस पर (x)
ननिान लगाएँ और िन्
ू य (0) अंक दें ।
13. उत्तर पस्ु ततका में क्रकसी प्रश्न का बबना जाँिे हुए छूट जाना या योग में क्रकसी भल
ू का पता
लगना, मल
ू यांकन सलमनत के सभी लोगों की छवव को और बोर्ि की प्रनतष्ठा को धलू मल करता है ।
परीक्षक सुननस्श्ित करें क्रक सभी उत्तरों का मूलयांकन हुआ है । आवरर् पष्ृ ठ पर तथा योग में कोई
अिुद्र्ध नहीं रह गई है तथा कुल योग को िब्दों और अंकों में ललखा गया है ।
उपयत
ुि त मूलयांकन ननदे ि उत्तर-पस्ु ततकाओं की जाँि हे तु आदे ि नहीं अवपतु केवल ननदे ि हैं।
यटद इन मल
ू यांकन ननदे िों में क्रकसी प्रकार की त्रटु ट हो, क्रकसी प्रश्न का उत्तर तपष्ट न हो, अंक
योजना में टदए गए उत्तर से अनतररतत कोई और भी उत्तर सही हो, तो परीक्षक अपने वववेकानुसार
उस प्रश्न का मूलयांकन करे ।
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उत्तर कुं जी
कोड न. - 2501
कक्षा 9
1.) व्याकरण पर आधाररत निम्ननिखित बहुनिकल्पीय प्रश्नों के उनित निकल्प
िुिकर अपिी उत्तरपुखिका मे निखिए।
(क) (iv) यमक अिोंकार
(ि) (i) अनत
(ग) (i) निया निशेषण
(घ) (i) इच्छा
(ड) (iii) गुरुमुिी
(ि) (ii) पूनणिमा
(छ) (iv) िाक्य
2.) निम्ननिखित प्रश्नों के यथानिनदि ष्ट उत्तर दीनिए।
(क) प्रेम, िम, कमि, िि आनद |
(ि) (i) अपिी प्रशोंसा स्वयों करिा
(ii) नकसी कायि के निए तैयार हनिा
(ग) निस समास मे प्रथम पद ि नितीय पद की प्रधािता ि हन बखि कनई
तीसरा पद प्रधाि हन, उसे बहुब्रीनह समास कहते हैं । उदाहरण : िीिा है कोंठ
निसका (नशि)
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(घ) विकारी: निि शब्नों के निोंग ििि और काि के आधार पीआर रूप
बदि िाते है उन्हें निकारी शब् कहते हैं । िैसे - सोंज्ञा सिििाम निशेषण
आनद।
अविकारी: निि शब्नों में निोंग ििि और काि के प्रभाि में कनई पररितिि
िहीों हनता उन्हें अनिकारी कहते है । िैसे - निया निशेषण, सोंबोंध बनधक और
समुच्चय बनधक |
3.) निम्ननिखित में से कनई एक निषय पीआर निबोंध निखिए।
(क) िृक्षारनपण - भूनमका, प्रकृनत की पूिा, मािि का िीिि, हिा की शुखि,
िि क्षरण और उपसोंहार |
(ि) श्रम का महत्व - भूनमका, पररश्रम का अभाि, आिस्य, पररश्रम,
भाग्यिाद, उपसोंहार
(ग) िारी सशखिकरण - भूनमका, िारी के निनिध रूप, भारतीय िारी का
आदशि, ितिमाि खिनत, सुझाि और उपसोंहार
(घ) स्वदे श प्रेम – भूनमका, स्वदे श प्रेम, स्वदे श का आकषिण, स्वदे श की
उन्ननत, राष्टरीयता और उपसोंहार
(ि) भारत की िैज्ञानिक प्रगनत - भूनमका, िैज्ञानिक इनतहास, िैज्ञानिक
अनिष्कारनों में भारत की भूनमका, िैज्ञानिक प्रगनत में सरकार की भूनमका और
उपसोंहार
4.)
पत्र भेििे िािे का पता
नदिाों क
सम्बनधि
अनभिादि
पत्र निििे का कारण
निषय का नििार
समापि
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अथिा
निद्यािय का पता
नदिाों क
निषय
सम्बनधि
निषय का नििार
समापि
खुंड (ख)
5.) वक्षविज (काव्य खुंड )के आधार पर वनम्नविखखि बहुविकल्पीय प्रश्ोुं
के उविि विकल्प िनकर अपनी पखिका मे विखखए।
(क) (iii) मुसिमािनों का
(ि) (iii) सदकमों कन
(ि) (iv) कृष्ण
(घ) (i) मािि िाि ितुिेदी
(ड) (i) मिमि के समाि कनमि
(ि) (iii) नििशता
प्रश् 6 वनम्नविखखि काव्याुंश को पढ़ कर पूछे गए प्रश्ोुं के उत्तर दीवजए।
(क) कबीर दास
(ि) पक्ष - निपक्ष
(ग) ईश्वर कन
(घ) निष्पक्ष भाि से प्रभु श्रमण करिे िािा
(ड) अिुप्रास अिोंकार
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7.)
मािसरनिर से अनभप्राय नकसी भि का मि है िन भखि-रूपी िि से पूरी
तरह भरा हन। सुभर िि से अनभप्राय है नक भि का मि भखि भािनों से
पररपूणि रूप से भर िुका है िहाों अब और नकसी प्रकार के भािनों की िगह
िही है ।
अथिा
मिुष्य का िीिि प्राप्त करिे पर ग्वािनों के रूप में।
पशु की यननि प्राप्त करिे पर िोंद बाबा की गाय के रूप में।
नििीि पत्थर बििे पर गनिधिि पिित पर ही िाि पाए।और पक्षी बििे पर
यमुिा नकिारे ही कदम्ब के पेड़ की शािाओों पर ही बसेरा करे ।
8)
प्रिुत पोंखियनों में पाहुों ि अथाि त दामाद के रूप में प्रकृनत का माििीकरण
हुआ है । नित्रात्मक शैिी में बादिनों के स द
ों यि का मिनरम नित्रण ।भाषा सरि,
सहि ि प्रिाहमय, अिुप्रास,माििीकरण, और उत्प्रेक्षा अिोंकार का प्रयनग।
दे शि और तद्भि शब्ाििी प्रयनग, प्रसाद गुण आनद।
9.) कनि िे अोंग्रेिी शासि की तुििा तम से की है क्यनोंनक अोंग्रेिी शासि
प्रणािी अन्यायपूणि थी। नब्रनिश शासि का स्वरूप भी अोंधकार की भाों नत
कानिमा से युि है पराधीिता के युग में भारतीयनों कन अोंग्रेिन के बहुत से
िुल्नों कन सहिा पड़ा।
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खुंड (ग)
प्रश् 10 वक्षविज (गद्य खुंड) के आधार पीआर वनम्नविखखि बहुविकल्पीय
प्रश्ोुं के उविि विकल्प िनकर अपनी उत्तर पखिका में विखखए:
(क) (iii) ऋनषमुनियनों के
(ि) (i) यात्रा िृताों त
(ग) (iii) आम ििमािस कन।
(घ) (iii) साइिेंि िैिी।
(ड) (iii) प्रेमिोंद का
(ि) (i) सुभद्रा कुमारी ि हाि।
11.)
(क) ल्हासा की ओर, राहुि साों कृत्यायि
(ि) बहुत अनधक छनिे और बड़े िागीरदारनों मे
(ि) स्वय बेगार में नमििे िािे मिदू रनों से
(घ) नभक्षु
(ड़) बेगार उि व्यखियनों कन कहते हैं िन नबिा कनई निनित पाररश्रनमक निए
काम करते है ।
12.)
प्रेमिोंद - िन्म 1880 िमही गाों ि उत्तर प्रदे श
मूि िाम धिपत राय पहिे उदू ि में नििते थे ।
प्रमख रिनाएुं
उपन्यास - सनिे िति , निमििा , रों गभूनम, कमिभूनम ,सेिा सदि , गबि आनद
िािक - कबििा
कहानियाों - बड़े घर की बेिी , ईदगाह , प्रेम पच्चीसी आनद
भाषा – मुहािरे दार भाषा, उदू ि के शब्नों का प्रयनग, तत्सम तद्भि और दे शि
शब्ाििी का प्रयनग।
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अथिा
राहुि साों कृत्यायि
िन्म 1893, आिमगढ़ उत्तर प्रदे श
मूि िाम केदार पाण्डे य
घुमक्कड़ प्रिृनत्त 1930 में श्रीिोंका िाकर ब ि धमि ग्रहण नकया।
प्रमख रिनाएुं , बनल्गा से गोंगा ,भागन िही दु निया कन बदिन , मेरी िीिि
यात्रा आनद
भाषा बनििाि की भाषा, सहि सरि , तत्सम, तद्भि
शैिी में नित्रात्मक गुण ।
13.)
(क) निज्ञापिनों की िकाि ध
ों से प्रभानित समाि के सोंपन्न और उच्चिगि िारा
प्रदशिि पूणि िीिि शैिी का अपिािे के कारण उच्च िगि और निम्न िगि में
दू ररयनों का बढ़िा और िन सोंपन्न िही है उिका अपिी इच्छाओों की पूनति के
निए गित मागि अपिािा । समाि में अशाों नत और निषमता कन बढ़ाता है ।
निससे हमारे स्वि और साों स्कृनतक मूल्नों का हास हनता है । साथ ही हम
ििुओों की गुणित्ता पर भी ध्याि िही दे ते।
(ि) एक बार बिपि में सानिम अिी मामा की दी हुई एयरगि से िेि रहे
थे। उसी एयरगि से एक ग रै या घायि हनकर नगर पड़ी। इस घििा िे सानिम
अिी के िीिि की नदशा कन बदि नदया। सानिम ग रे या के निषय में िाििा
िाहते थे तब मामा िे उन्हें िैिुरि नहस्ट्र ी सनसायिी (बी.एि.एि.एस) िाकर
ग रै या की पूरी िािकारी प्राप्त करिे कन कहा, िहााँ िािे के बाद उिकी
रूनि पूरे पक्षी- सोंसार की ओर मुड़ गयी और िे पक्षी-प्रेमी बि गए।
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(ग) साधारण व्यखित्व, बेपरिाह, निश्वास से पूणि, सामान्य िेशभूषा पर सोंकनि
िहीों, व्योंग्यपूणि मुस्काि
खुंड -घ
14.)
(क) आधुनिक समाि में सभ्य िागररक हनिे के बाििूद उन्हें अपिी बेिी के
भनिष्य की िानतर रूनििादी िनगनों के दबाि में झुकिा पड़ रहा था। उपयुिि
बात एक नपता की नििशता कन उिागर करती है , िन एक ओर अपिी बेिी
कन पढ़ा-नििा कर सक्षम बिािा िाहता है िेनकि समाि के नियमनों कन
माििे के निए बाध्य है ।
अथिा
'रीढ़ की हड्डी' एक उद्दे श्यपूणि एकाों की है । इस एकाों की में िेिक िे स्पष्ट
नकया है नक िड़के और िड़की में भेदभाि करिा उनित िहीों है । िड़की भी
उच्च नशक्षा के साथ-साथ सम्माि की अनधकाररणी है । नििाह के िाम पर
उससे तरह-तरह के सिाि पूछकर उसे अपमानित करिा उनित िहीों है ।
आि िड़नकयाों भी िड़कनों के हन समाि उच्च नशक्षा प्राप्त कर रही हैं । अतः
उन्हें भी उनित सम्माि नमििा िानहए। िेिक िे गनपािप्रसाद िैसे
रूनढ़िादी नििारधारा के िनगनों पर प्रहार भी नकया है
(ि) बाढ़ की िबर सुिकर िनग अपिी सुरक्षा के प्रबोंध और अत्यािश्यक
सामािनों कन िुिािे में िग गए। उन्हनोंिे आिश्यक ईोंधि, आिू, मनमबत्ती,
नदयासिाई, पीिे का पािी और कम्पनि की गननियााँ इकट्ठी करिी शुरू कर
दी तानक बाढ़ से नघर िािे पर कुछ नदिनों तक उिका गुिारा िि सके और
रनिमराि के कायों के निए उन्हें इि का अभाि ि झेििा पड़े । दु कािनों के
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निििे नहस्नों से सामाि हिाया िािे िगा तानक िुकसाि कम से कम हन
इसप्रकार सािधािी की दृनष्ट से उन्हनोंिे तैयारी की।
(ग) िेखिका िे अपिी िािी कन कभी दे िा भी िहीों निर भी उिके व्यखित्व
से िे निम्न कारणनों से प्रभानित थीों:
1. िेखिका की िािी अपिी बेिी का नििाह एक िाों नतकारी से करिे की
इच्छु क थी इसनिए िािी िे अपिे िीिि के अोंनतम नदिनों में प्रनसि िाों नतकारी
प्यारे िाि शमाि से भेंि की थी। उस भेंि में उन्हनोंिे यह इच्छा प्रकि की थी नक
िे अपिी बेिी की शादी नकसी िाों नतकारी से करिािा िाहती है । इस घििा
से उिका दे श के प्रनत अिू ि प्रेम पता ििता है ।
2. िीिि-भर परदे में रहकर भी उन्हनोंिे अपिी बेिी की भिाई के निए पर-
पुरुष से नमििे की नहम्मत की। इससे उिके साहसी व्यखित्व और मि में
सुिगती स्वतोंत्रता की भाििा का पता ििा।
3. िेखिका की िािी भिे अिपढ़, पुरािे िों ग और हमेशा परदे में रहिे िािी
मनहिा रहीों हन परन्तु अपिी नििी निोंदगी में िे आिाद नििारनों िािी मनहिा
थीों। उन्हनोंिे कभी भी िािािी के नििारनों का अोंधािुकरण िहीों नकया बखि
अपिे नहसाब से अपिा िीिि नबताया।
15.) आदशि िीिि मूल् माध्यमा के आधार पर निम्ननिखित नकन्ही 4 प्रश्नों के
उत्तर दीनिए:
(क) िीिि के नदव्य िक्षण िहााँ अच्छी पढ़ाई में सहायक हनोंगे िहीों आगे पूरे
िीिि कन एक अच्छा आधार दे कर िीिि में नछपी महािता कन प्रकि करें गे।
िैसे अच्छी पढ़ाई केिि इसी समय के निए िहीों है , अनपतु अच्छे कॅररयर एिों
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िीनतपूणि धिनपाििि के िारा समग्र िीिि का अच्छा आधार है , ऐसे ही ये गुण
मात्र अब के निए िहीों बखि समूिे िीिि की अक्षय निनध हैं |
(ि) बुखि सोंगनत के प्रभाि से बिती या नबगड़ती है । सोंगनत अच्छी हनगी तन
नबगड़ी बुखि भी साँिर िाएगी और सही निणिय करिे िगेगी िेनकि सोंगनत ही
नबगड़ी हुई हनगी तन अच्छी भिी बुखि कन भी नबगाड़ दे |
(ग) गुरुििनों और बड़े -बुिुगों का आशीिाि द बहुत महत्त्वपूणि भूनमका निभाता
है । अपिे आिायि-नशक्षक या गुरुििनों के निकि िािा, उिसे अपिी निज्ञासा
का समाधाि करिािा, प्रश्नों का उत्तर िेिा और उिके अिुभि का अपिे निए
िाभ िेिा बहुत अच्छा भी है और आिश्यक भी है |
(घ) आपसी शत्रुता के बारे में कहा था, "िैर से बुि िे िैर शान्त िहीों हनता।
अिैर से ही िैर शान्त हनता है ।" यह सुिहरा सूत्र सििदा साथिक |
(ड) मिुष्य के िीिि की साथिकता पररश्रम करिे में है । िन व्यखि िीिि में
पुरुषाथि करता है तथा निपरीत पररखिनत आिे पर भी निराश िहीों हनता, उस
व्यखि का िीिि साथिक मािा िाता है |
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