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अक ं -योजना
अत्यतं गोपनीय
(के वल आंतरिक औि प्रततबंतित उपयोग के तलए)
वरिष्ठ माध्यतमक तवद्यालय प्रमाणपत्र पिीक्षा, 2025
तवषय-त दं ी (ऐतछिक)
(प्रश्न-पत्र कोड 29/1/1-3)
सामान्य निदे श:-
1 आप जािते ी ैं कक परीक्षार्थियों के वास्तववक और स ी मल
ू यािंकि में ‘मल
ू यािंकि’ सबसे म त्त्वपर्
ू ि
प्रकिया ै । मल
ू यािंकि में एक िोटी-सी गलती भी गिंभीर समस्याओिं का कारर् बि सकती ै , च्जसका
प्रभाव परीक्षार्थियों के भववष्य, शशक्षा-प्रर्ाली और शशक्षर् पर पड़ सकता ै । आपसे अिरु ोध ै कक
गलनतयों से बचिे के शलए मल
ू यािंकि शरू
ु करिे से प ले ‘मल
ू यािंकि हदशा-निदे शों’ को ध्याि से अवश्य
पढें , समझें और मल
ू यािंकि करते समय उिका पालि अवश्य करें ।
2 "मल
ू यािंकि एक गोपिीय िीनत ै क्योंकक य आयोच्जत परीक्षाओिं, ककए गए मल
ू यािंकि और कई अन्य
प लओ
ु िं की गोपिीयता से सिंबर्िं धत ै । ककसी भी तर से इसे साविजनिक करिे से परीक्षा-प्रर्ाली
पटरी से उतर सकती ै और लाखों परीक्षार्थियों के जीवि और भववष्य को प्रभाववत कर सकती ै।
इस िीनत/दस्तावेज को ककसी से भी साझा करिा, ककसी पत्रिका में प्रकाशशत करिा और समाचार
पि/वेबसाइट में िापिा आहद बोर्ि और आईपीसी के ववशभन्ि नियमों के अिंतगित कायिवा ी को आमिंत्रित
कर सकता ै ।"
3 मल
ू यािंकि अिंक-योजिा में हदए गए निदे शों के अिस
ु ार ककया जािा चाह ए। इसे ककसी की अपिी
व्याख्या या ककसी अन्य ववचार के अिस
ु ार ि ीिं ककया जािा चाह ए। अिंक-योजिा का सख्ती से परू ी
तर पालि ककया जािा चाह ए। मल
ू यािंकि करते समय, जो उत्तर िवीितम जािकारी या ज्ञाि पर
आधाररत ,ैं उिका सत्यता एविं प्रासिंर्गकता के आधार पर मल
ू यािंकि ककया जाए। योग्यता-आधाररत
प्रश्िों का मल
ू यािंकि करते समय हदए गए उत्तर को समझिे का प्रयास करें और उर्चत अशभव्यच्क्त
पर उर्चत अिंक दें ।
4 अिंक-योजिा में उत्तरों के शलए केवल सझ
ु ावात्मक त्रबिंद ु हदए गए ैं। ये केवल हदशा-निदे श ैं।
5 प्रधाि परीक्षक को प ले हदि प्रत्येक मल
ू यािंकिकत्ताि द्वारा मल
ू यािंककत प ली पााँच उत्तर पच्ु स्तकाओिं
का पि
ु रावलोकि अवश्य करिा चाह ए, च्जससे य सनु िच्श्चत ो सके कक मल
ू यािंकि अिंक-योजिा में
हदए गए निदे शों के अिस
ु ार ककया गया ै । यहद मल
ू यािंकि में कोई शभन्िता ै तो ववचार-ववमशि और
चचाि के बाद उसे दरू ककया जािा चाह ए। मल
ू यािंकि के शलए शेष उत्तर पच्ु स्तकाएाँ य सनु िच्श्चत
करिे के बाद ी दी जाएाँ।
6 मल
ू यािंकिकत्ताि उत्तर स ी ोिे पर स ी (✓) का निशाि लगाएाँ, गलत उत्तर के शलए िॉस (X) का
निशाि लगाएाँ। मल
ू यािंकि करते समय स ी (✓) का निशाि ि ीिं लगािे पर भ्रम की च्स्थनत उत्पन्ि
ोती ै और य आभास ोता ै कक उत्तर स ी ै और कोई अिंक ि ीिं हदया गया।
7 यहद ककसी प्रश्ि में उपभाग ैं तो प्रत्येक उपभाग के शलए दाईं ओर त्रबिा घेरा लगाए अिंक दें । प्रश्ि
के ववशभन्ि उपभागों पर हदए गए अिंकों को जोड़कर बाएिं ाथ के ाशशए में प्रश्ि सिंख्या के समीप
शलखकर घेरा लगाएाँ। इसका सख्ती से पालि ककया जािा चाह ए।
ह द
िं ी (ऐच्छिक) 29/1/1-3 1
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8 यहद ककसी प्रश्ि में कोई उपभाग ि ीिं ै, तो बाईं ओर ाशशये में प्रश्ि सिंख्या के समीप अिंक हदए
जािे चाह ए और घेरा लगाया जािा चाह ए।
9 यहद ककसी परीक्षाथी िे अनतररक्त प्रश्ि का उत्तर शलखा ै तो अर्धक अिंक पािे वाले प्रश्ि के उत्तर
को ी स्वीकार ककया जािा चाह ए तथा अन्य उत्तर पर ‘अनतररक्त प्रश्ि’ शलखकर काट हदया जािा
चाह ए।
10 वतििी सम्बन्धी एक ी अशद्
ु र्ध के शलए बार-बार अिंक ि काटा जाए।
11 अिंकों के परू े पैमािे 0 से 80 अिंक का उपयोग ककया जाए। यथोर्चत उत्तर पर परू े अिंक दे िे में सिंकोच
ि करें ।
12 प्रत्येक परीक्षक को अनिवायि रूप से परू े कायिसमय अथाित प्रनतहदि 8 घिंटे मल
ू यािंकि कायि करिा ोगा
तथा मख्
ु य ववषयों में प्रनतहदि 20 उत्तर पच्ु स्तकाओिं तथा अन्य ववषयों में प्रनतहदि 25 उत्तर पच्ु स्तकाओिं
का मल
ू यािंकि करिा ोगा (वववरर् हदशा-निदे शों में हदया गया ै )। य पाठ्यिम में कमी तथा प्रश्ि-
पि में प्रश्िों की सिंख्या को ध्याि में रखते ु ए ककया गया ै।
13 सनु िच्श्चत करें कक आप परीक्षक द्वारा अतीत में की गई निम्िशलखखत सामान्य प्रकार की गलनतयााँ
ि करें :-
● उत्तर पच्ु स्तका में उत्तर या उपभाग को त्रबिा मल
ू यािंकि के िोड़ दे िा
● ककसी उत्तर के शलए निधािररत अिंकों से अर्धक अिंक दे िा
● उत्तर पर हदए गए अिंकों का गलत योग
● उत्तर पच्ु स्तका के अिंदर के पष्ृ ठों से मख
ु पष्ृ ठ पर अिंकों का गलत अिंकि
● मख
ु पष्ृ ठ पर प्रश्ि के अिस
ु ार अिंकों का गलत योग
● मख
ु पष्ृ ठ पर दो स्तिंभों के अिंकों का गलत योग
● गलत कुल योग
● शब्दों और अिंकों में शलखे कुल योग का समाि ि ोिा
● उत्तर पच्ु स्तका से ऑिलाइि अिंकताशलका में अिंकों का गलत अिंकि
● उत्तरों को स ी के रूप में र्चच्नित ककया जािा लेककि अिंक ि हदया जािा
● उत्तर का आधा या एक ह स्सा स ी और बाकी को गलत र्चच्नित करिा लेककि कोई अिंक ि दे िा
14 उत्तरपच्ु स्तकाओिं के मल
ू यािंकि के समय यहद उत्तर पर्
ू ति ः गलत पाया जाए तो उस पर िॉस (X) का
निशाि लगाकर शन्
ू य (0) अिंक हदया जािा चाह ए।
15 मल
ू यािंकि ि ककया गया कोई भी भाग, मख
ु पष्ृ ठ पर अिंकि ि ोिा या बाद में प्रकट
ु ई कोई भी
िहु ट मल
ू यािंकि कायि में लगे सभी कशमियों और बोर्ि की प्रनतष्ठा को िक
ु साि प ु ाँचाएगी इसशलए सभी
सिंबर्िं धतों की प्रनतष्ठा को बिाए रखिे के शलए य किर से दो राया जाता ै कक निदे शों का
सावधािीपव
ू क
ि और वववेकपर्
ू ि तरीके से पालि ककया जािा चाह ए।
16 परीक्षकों को वास्तववक मल
ू यािंकि शरू
ु करिे से प ले मल
ू यािंकि के शलए हदए गए हदशानिदे शों से
पररर्चत ोिा चाह ए।
17 प्रत्येक परीक्षक य भी सनु िच्श्चत करे गा कक सभी उत्तरों का मल
ू यािंकि ककया गया ै , अिंक मख
ु पष्ृ ठ
पर अिंककत ककए गए ,ैं अिंकों का स ी योग ककया गया ै तथा कुल योग को मख
ु पष्ृ ठ और शलखे गए
अिंनतम पष्ृ ठ पर अिंकों और शब्दों में स ी शलखा गया ै।
ह द
िं ी (ऐच्छिक) 29/1/1-3 2
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18 परीक्षाथी निधािररत प्रोसेशसिंग िीस का भग
ु ताि करके अिरु ोध पर उत्तर पच्ु स्तका की िोटोकॉपी प्राप्त
करिे के कदार ैं। सभी परीक्षकों/अनतररक्त प्रधाि परीक्षकों/प्रधाि परीक्षकों को एक बार किर याद
हदलाया जाता ै कक उन् ें य सनु िच्श्चत करिा ोगा कक मल
ू यािंकि प्रत्येक उत्तर के शलए अिंकयोजिा
में हदए गए मल
ू य त्रबिंदओ
ु िं के अिस
ु ार सख्ती से ककया गया ै।
ह द
िं ी (ऐच्छिक) 29/1/1-3 3
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Series: YZW1X प्रश्ि-पि कोर् - 29/1/1,2,3
अंक-योजना
ह ंदी (ऐहछिक)
तनिाारित समय : 3 घण्टे अतिकतम अक
ं : 80
प्रश्न प्रश्न-पत्र कोड उत्तर-संकेत ह ंदु अंक
स ं.
खंड - क 18
(अपहित ोध)
29/1/1 29/1/2 29/1/3
1 1 2 1 अपहित गद्ांश पर आधाररत प्र्नों के अपेहतत उत्तर:- 10
(i) (B) प्लातकटक 1
(ii) (A) पृथ्वी कर िक्षा के प्रतत सतेत ो जाए। 1
(iii) (A) पालन-पोषण का गणु 1
(iv) प्राकृ ततक सम्पदा आने वाली पीतियों कर अमानत 2
भावी पीतियों को साफ-सथु िा पयााविण प्रदान किना वतामान
पीिी का दातयत्व
प्रकृ तत का अिं ािंिु दो न न ीं बतकक उसका संिक्षण किना
प्रकृ तत से जरूित पिू ा किने भि ी लेना
(v) पृथ्वी का वाताविण तदन-प्रतततदन दतू षत ोना 2
प्राकृ ततक ससं ािनों के अतववेकपणू ा दो न से जैव
तवतविता को भािी नक ु सान
(vi) गैि-नवीकिणीय ऊजाा –सीतमत संसािन जैसे : कोयला, 2
तेल, प्राकृ ततक गैस आतद
नवीकिणीय ऊजाा—प्राकृ ततक संसािन जैसे : सौि ऊजाा,
पवन ऊजाा, जल-तवद्यतु आतद
(vii) ििती पि जीवन बनाए िखने के तलए 1
ह द
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2 2 1 2 अपतित कावयांश पर पि आिारित प्रननों के अपेतक्षत उत्ति : 8
(i) (A) पृथ्वी पि सब कुि ननवि ै 1
(ii) (D) अतकतत्व न्ट ो जाता ै 1
1
(iii) (C) (I) औि (II) दोनों ी
(iv) पेड़ 2
तवपिीत परितकथततयों को अपने अनक ु ू ल बना लेना
(v) सत्ता/श परत्त/िन आतद सब नश्वि 2
श परति ीन का नष्ट ोना तय
प्रततकूल परितकथततयों में अतडग बने ि ना
भावी पीिी को अपने जीवन से प्रेिणा देना
(vi) परुु षाथी/सा सी/संघषी वयत्तयों का तविोिी/श परत्तश पराली 1
वयतियों द्वािा भी सम्मान
22
खंड ख
(अहिव्यह्त रर ाा्या प्ु तक पर आधाररत)
3 3 5 4 प्रश्नों के उत्ति अपेतक्षत:- 5
(क) समाताि का सबसे प ला औि म त्त्वपणू ा त कसा, तजसे इट्रं ो 1
भी क ा जाता ै
कम श परब्दों में घटना कर आकषाक जानकािी
(ख) जनसत ं ाि के तवतभन्न माध्यम—तप्रटं , िे तडयो, टेलीतवज़न, 2
इटं िनेट कर अपनी-अपनी खतू बया। औि कतमया।
सबका एक ी लक्ष्य— लोगों को नवीनतम, अद्यतन औि
सटीक जानकािी श परीघ्र उपलब्ि किाना
(ग) ीट- 2
सवं ाददाताओ ं के बीत उनकर रुतत औि ज्ञान को ध्यान में िखकि
तकया गया काम का ब।टवािा
उदा रण :- खेल क्षेत्र में रूतत व जानकािी िखने वाला
सवं ाददाता अपने श पर ि या क्षेत्र में ोने वाली खेल-गतततवतियों
कर रिपोतटंग के तलए तज़म्मेदाि व जवाबदे
(अन्य उपयि ु उदा िण भी कवीकाया)
4 4 6 5 तकन् ीं दो प्रननों के उत्ति लगभग 60 श परब्दों में : 3x2
=6
ह द
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(क) समाताि पत्र-पतत्रकाओ ं में संपणू ता ा लाने ते ु
तवतविता औि वयापक कलेवि ते ु
पािकों कर अलग-अलग रुततयों को ध्यान में िखते ुए तवतभन्न
तवषयों कर तनिंति औि पयााप्त जानकािी देने ते ु
(ख) कथातयत्व
समय औि रुतत के अनसु ाि पिने कर सतु विा
लंबे समय तक सिु तक्षत िखने औि संदभा कर ति इकतेमाल किने
कर सतु विा
तततं न-मनन औि तवनलेषण किने कर सतु विा
(ग) खोजी ररपोटट : मौतलक श परोि औि िानबीन के द्वािा सावाजतनक
तौि पि अनपु लब्ि सतू नाओ ं औि तथ्यों को प्रकाश पर में लाने वाली
रिपोटा जैसे: तकसी भी क्षेत्र में ोने वाले भ्र्टाताि,
अतनयतमतताओ ं औि गड़बतड़यों को प्रकाश पर में लाने वाली खबि
इन डेप्थ ररपोटट : सावाजतनक तौि पि उपलब्ि, सतू नाओ ं औि
तथ्यों कर ग िी िानबीन कि तकसी घटना, समकया या मदे ु े से जड़ु े
म त्त्वपणू ा प लओ ु ं को प्रकाश पर में लाने वाली रिपोटा
5 5 3 6 तकसी एक तवषय पि लगभग 100 श परब्दों में ितनात्मक लेख: 5
तवषय-वकतु : 3 अक ं
भाषा : 1 अक ं
प्रकततु त : 1 अक ं
6 6 4 3 तकन् ीं दो प्रननों के उत्ति लगभग 60 श परब्दों में : 3x2
=6
(क) कतवता अनभु तू तजन्य नैसतगाक अतभवयति
अन्य कलाओ ं कर ति कतवता लेखन में बाह्य उपकिणों (िंग, कूती,
कै नवास, वाद्ययंत्रों आतद) कर आवनयकता न ीं
कतवता लेखन ते ु देखने कर नवीन दृतष्ट, प तानने औि प्रकततु किने
कर कला (प्रततभा) प्रकृ तत प्रदत्त, तजसे अभ्यास से के वल तनखािा
जा सकता ै
(ख) दश पराक/प्रेक्षक का वतामान में ी उपतकथत ोना
दश पराक/प्रेक्षक को घटना से अवगत किाना
भतू काल अथवा भतव्यकाल कर घटनाओ ं को नाटक में वतामान
काल में ी मतं पि मतं तत/ संयोतजत/अतभनीत किना
ह द
िं ी (ऐच्छिक) 29/1/1-3 6
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उदा रण:- ऐतत ातसक या पौिातणक घटनाओ ं से जड़ु ी क ातनयों को
नाटक के माध्यम से वतामान काल में प्रकततु किना
(ग) पात्रों के संवाद व तियाकलाप
उदा रण :
(i) ‘कफ़न’ क ानी में घीसू औि माघव का सवं ाद
(ii) सिदी से तििुिते ुए वयत्त को देखकि तकसी पात्र का उसे कंबल
दे देना, ताय तपलवा देना आतद
(iii) एक तमत्र द्वािा अपनी या दसू िे कर समकया के समािान के तलए
अपने तकसी तीसिे तमत्र के पास जाना
(अन्य उपयि ु उदा िण भी कवीकाया)
खंड-ग 40
(पाि्य प्ु तकों अंतरा, अंतराल पर आधाररत)
7 7 9 8 पतित कावयाश पर
ं पि आिारित प्रननों के उपयिु तवककप : 1x5
(i) (C) (I) औि (III) दोनों =5
(ii) (A) कृ पापणू ा
(iii) (D) कथन औि कािण दोनों स ी ैं तथा कािण, कथन कर स ी
वयाख्या किता ै
(iv) (C) अपिािी पि भी िोि न किने कर
(v) (A) भित
8 8 कावय खडं पि आिारित तकन् ीं दो प्रननों के उत्ति लगभग 40 श परब्दों में 2 x 2
अपेतक्षत:- =4
(क) हिडं ना :-
उततत समय पि ककंदगप्तु के प्रेम को प्राप्त न कि पाना
देवसेना का जीवनभि संघषा किना
्यों:-
ककंदगप्ु त को प्राप्त न कि पाना
िा्ट्र सेवा के त कत को पणू ा किने में असफल
(ख) ‘तोड़ो’ के मल ू में भी सृजन
‘तोड़ो’ के माध्यम से नवतनमााण कर प्रेिणा
मन कर बंजि प्रकृ तत (ऊब औि खीझ) को तोड़ने कर बात किना
्योंतक य सृजन में बािक
(ग) सुग ुगाने : जागृतत, तेतना का संताि ोना, नई उमगं औि संककप से
भि उिना
ह द
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पचहखयााँ फें कने : नीिसता, जड़ता का त्याग किना, अप्रकततु में भी
अकं ु िण कर अतभलाषा
7 (क) श परत्त-सामथ्या औि सािनों के सीतमत ोने पि भी परितकथततयों से
ाि न मानना औि उनसे लड़ना
(ख) िरने :
िोज लोगों का बनािस श पर ि में आना, मोक्ष प्रातप्त के तलए व ा।
तनवास किना
खाली ोने :
प्रतततदन लोगों का बनािस श पर ि से जाना, अतं ीन श परवों को गगं ा तट
पि ले जाना अथाात् जीवन-मृत्यु का ति तनिंति तलता ि ना
(ग)
समाज में वयाप्त रूतिया।, अन्ितवश्वास, झिू े बंिनों को तोड़ना
मन में वयाप्त ऊब तथा खीझ को तोड़ना
्यों : सृजन के तलए भीतिी (मन) औि बा िी बािाओ ं (रूतियों)
को तोड़ना आवनयक
9
(क) ककंदगप्तु के प्रतत प्रेम कर आकाक्ष ं ा का पिू ा न ोना
प्रेम में असफलता जन्य तनिाश परा व पीड़ा
जीवन रूपी संघषा में ाि के कािण उसका करुणा से भि जाना औि
करुणा का य तिम उसके तलए दख ु दायी बन जाना
(ख) अपनी संककृ तत से जड़ु ा श पर ि, आितु नकता कर प्रततकपिाा से मि ु
प्रातीन पिम्पिाओ ं औि मान्यताओ ं में अगाि तवश्वास
िीिे -िीिे ोने कर सामतू क लय से जड़ु ा श पर ि
अपने ढंग से, अपनी गतत से जीना इस श पर ि कर तवश परेषता
(ग) जमीन में गड़ु ाई किके बीजािोपण किने से पवू ा पथिीली जमीन को
उपजाऊ खेत में बदलने के तलए पत्थिों, तट्टानों को तोड़ना
आवनयक, तभी बीज का पोषण संभव
इसी प्रकाि मन में भावों औि तवतािों के पोषण के तलए झझ।ु ला ट,
ततिन, कुिन आतद तवकािों को दिू किना आवनयक, तभी सृजन कर
प्रतिया संभव
9 9 8 7 तकसी एक कावयांश पर कर सप्रसंग वयाख्या : 6
संदभा : 1 अक ं (कतव औि कतवता का नाम)
प्रसंग : 1 अक ं (पवू ाापि संबंि)
वयाख्या : 3 अक ं
तवश परेष : 1 अक ं
ह द
िं ी (ऐच्छिक) 29/1/1-3 8
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(क)
कतव : मतलक मु म्मद जायसी
कतवता : बाि मासा
अथिा
(ख)
कतव : सतछतदानंद ीिानंद वात्कयायन ‘अज्ञेय’
कतवता : य दीप अके ला
10 10 11 11 पतित गद्यांश पर पि आिारित प्रननों के उपयिु उत्ति : 1x5
(i) (D) त दं ी-फ़ािसी भाषा कर उत्तया। तमलाने में =5
(ii) (D) घि के सात तत्यक परिवेश पर से परिपणू ा वाताविण का उकलेख किने
के तलए
(iii) (A) तपता द्वािा ततत्ताकषाक ढंग से उनके नाटकों का सनु ाया जाना
(iv) (C) आयु
(v) (D) कथन तथा कािण दोनों स ी ैं तथा कािण, कथन कर स ी वयाख्या
किता ै
11 गद्य खडं पि आिारित तकन् ीं दो प्रननों के उत्ति लगभग 40 श परब्दों में 2x2
अपेतक्षत:- =4
11 (क) परिवेश पर वयतित्व तनमााण का म त्त्वपणू ा घटक
परिवेश पर से ी वयव ाि, सोत औि भावनाओ ं को आकाि तमलना
घि के सात तत्यक परिवेश पर के कािण आताया श पर्ु ल का त दं ी
सात त्य, त दं ी भाषा औि सात त्यकािों के प्रतत झक
ु ाव
(ख) म्ु त उत्ति
पत ाें : संवतदया ोने से पवू ा िगोतबन एक मन्ु य, उसके भीति भी
मानवीय संवदे नाए।, बड़ी वेली से उसका संपन्नता के तदनों से
जडु ाव, बड़ी ब ुरिया के दख ु ों का वणान उसके घि वालों के सामने
किने से उसकर औि उसके गा।व कर बदनामी
हिपत ाें : िगोतबन संवतदया था, अछिा-बिु ा तकसी भी प्रकाि का
संवाद प तु। ाना ी उसका कत्तावय, बड़ी ब ुरिया कर वाकततवक
तकथतत से परिततत किाना उसका दातयत्व
(ग) प्रकृ तत मन्ु य कर स तिी
प्रकृ तत मन्ु य कर सख
ु दखु कर साझीदाि
मन्ु य के उजड़ने पि पेड़ों को अके लेपन का भय औि उदासी
ह द
िं ी (ऐच्छिक) 29/1/1-3 9
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जब मन्ु य ी अपने गा।व से उजड़ जाए।गे तो पेड़ जीतवत ि कि ्या
किें ग?े
12 (क) तपता द्वािा ‘िामतरितमानस’ औि ‘िामतंतिका’ के तकए जाने वाले
वातन को ध्यान से सनु ना
भाितेंदु रिनतन्ि के नाटकों का अछिा लगना
घि में आने वाली पत्र-पतत्रकाओ ं को ध्यान से पिना औि पिने के
तलए पकु तकालय जाना
डेि मील का लंबा सफि तय कि प्रेमघन जी कर प ली झलक
देखने के तलए तमत्रों के साथ जाना
(कोई दो तबंदु अपेतक्षत)
(ख) िगोतबन को अपने कत्तावय से अतिक बड़ी ब ुरिया औि अपने गा।व
कर मयाादा कर ततंता
बड़ी ब रु िया के सवं ाद का एक-एक श परब्द उसके मन को पीतड़त किने
वाला
(ग) कान् ा के वन्य कथल में तवतिण किने वाली यवु ा त ितणयों से
जिा सी आ ट पाते ी वे त ितणयों कर भा।तत अजनतबयों को देखकि
भागती न ीं बतकक आनतयाततकत ो अजनतबयों को देखती ैं,
मकु कुिाती ैं औि अपने काम में तसि झक
ु ाकि डूब जाती ैं
12
(क) तौििी सा ब बाततीत कर कला में प्रवीण
उनके म।ु से तनकली ि बात का ढगं तनिाला
उदा रण : नौकि से संवाद, पंतडत जी से संवाद
(ख) बड़ी वेली कर संपन्नता, प्रततष्ठा औि उसके वैभव का
घि के सभी सदकयों के एकजटु ोकि ि ने का
िोटे-बड़े के आदि औि सम्मान का
(कोई दो तबंदु अपेतक्षत)
(ग) अपनी संककृ तत, अपने परिवेश पर से मेश परा के तलए अलग ो जाना
घि औि गा।व के साफ-सथु िे परिवेश पर को िोड़ श पर िों में गदं ी बतकतयों
में जीवन-यापन किने के तलए मजबिू ोना
जीवन कर मल ू भतू सतु विाओ ं के तलए तिसना
बेिोज़गािी कर पीड़ा को झेलना
(कोई दो तबंदु अपेतक्षत)
ह द
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12 12 10 10 तकसी एक गद्यांश पर कर सप्रसंग वयाख्या : 6
संदभा : 1 अक ं (पाि तथा लेखक का नाम)
प्रसंग : 1 अक ं (पवू ाापि संबंि)
वयाख्या : 3 अक ं
तवश परेष : 1 अक ं
(क)
पाि : सवं तदया
लेखक : फणीश्विनाथ ‘िे ण’ु
अथिा
(ख)
पाि : कुटज
लेखक : जािीप्रसाद तद्ववेदी
13 13 ‘अतं िाल’ पि आिारित हकन् ीं दो प्रननों के उत्ति लगभग 100 श परब्दों में 5 x 2
अपेतक्षत: = 10
(क) प चान :-
ाि-जीत से तवततलत न ोना
ाि-जीत के प्रतत समभाव
जीत के तलए पनु : प्रयास किना
उदा रण :-
झोपड़ी के न्ट ो जाने पि पनु : बनाने का संककप किना- “......सौ
लाख बाि बनाऊ।गा”
पोटली न तमलने पि पनु ः पैसे कमाने का तनश्चय किना--“मैंने ी
कमाए थे, तफि न ीं कमा सकता”
दोनों ाथों से झोपड़ी कर िाख उड़ाते ुए तवजय-गवा से भि उिना
(ख)
गा।वों का श पर िों कर ति सतु विाय्ु त न ोकि प्रकृ तत पि अतिक
तनभाि ि ना
गा।व में प्रकृ तत के कोमल व किोि दोनों रूप— एक ओि मनो ािी
ता।दनी िात, िंग-तबिंगे फूलों औि वषाा का सौंदया, दसू िी ओि गा।व
में बाि, सख ू ,े करड़ों-मकोड़ों, सा।प-तबछिुओ ं का डि
तततकत्सा के तलए प्रकृ तत पि तनभाि
लोगों के बीत पािकपरिक लगाव
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(ग) ितटाान ह्थहत:-
अततवृतष्ट या अनावृतष्ट ोना
नदी-नालों का सख ू ना औि अत्यतिक प्रदतू षत ोना
पैदावाि में कमी
कारण:-
तेजी से बिता औद्योगीकिण
भजू ल का अत्यतिक दो न
प्राकृ ततक सम्पदा को क्षतत प तु। ाना
पयााविणीय असतं ल ु न
सध
ु ार ेतु सुझाि:-
जल के पिंपिागत संसािनों का आितु नकरकिण तथा संिक्षण
मन्ु य औि प्रकृ तत के बीत सतं ल
ु न
प्रकृ तत से प्रेम औि उसका सम्मान
13
(क)
कवातभमानी
आत्मतवश्वासी
दृि-प्रततज्ञ
तनडि औि सा सी
सत्य कर पक्षिि
(ख) ितटाान ह्थहत:-
अततवृतष्ट या अनावृतष्ट ोना
नदी-नालों का सख ू ना औि अत्यतिक प्रदतू षत ोना
पैदावाि में कमी
कारण:-
तेजी से बिता औद्योगीकिण
भजू ल का अत्यतिक दो न
प्राकृ ततक सम्पदा को क्षतत प तु। ाना
पयााविणीय असंतल ु न
सध
ु ार ेतु सझ ु ाि:-
जल के पिंपिागत संसािनों का आितु नकरकिण तथा सिं क्षण
मन्ु य औि प्रकृ तत के बीत संतल ु न
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प्रकृ तत से प्रेम औि उसका सम्मान
(ग)
गा।वों का श पर िों कर ति सतु विाय्ु त न ोकि प्रकृ तत पि अतिक
तनभाि ि ना
गा।व में प्रकृ तत के कोमल व किोि दोनों रूप— एक ओि मनो ािी
ता।दनी िात, िंग-तबिंगे फूलों औि वषाा का सौंदया, दसू िी ओि गा।व
में बाि, सख ू ,े करड़ों-मकोड़ों, सा।प-तबछिुओ ं का डि
तततकत्सा के तलए प्रकृ तत पि तनभाि
लोगों के बीत पािकपरिक लगाव
13 (क) जीवन में आगे बिने ते ु सिू दास कर ति सकािात्मक सोत का ोना
अतनवाया ्योंतक सकािात्मक सोत के कािण --
मन में ऊजाा का संताि
कवयं आश परातन्वत ि ना, औिों को भी आगे बिने कर प्रेिणा
कतिनाइयों से लड़ने का सा स
पनु तनामााण का उत्सा
आत्मतवनवास में वृति
(ख)
गा।वों का श पर िों कर ति सतु विाय्ु त न ोकि प्रकृ तत पि अतिक
तनभाि ि ना
गा।व में प्रकृ तत के कोमल व किोि दोनों रूप— एक ओि मनो ािी
ता।दनी िात, िंग-तबिंगे फूलों औि वषाा का सौंदया, दसू िी ओि गा।व
में बाि, सख ू ,े करड़ों-मकोड़ों, सा।प-तबछिुओ ं का डि
तततकत्सा के तलए प्रकृ तत पि तनभाि
लोगों के बीत पािकपरिक लगाव
(ग) ितटाान ह्थहत:-
अततवृतष्ट या अनावृतष्ट ोना
नदी-नालों का सख ू ना औि अत्यतिक प्रदतू षत ोना
पैदावाि में कमी
कारण:-
तेजी से बिता औद्योगीकिण
भजू ल का अत्यतिक दो न
प्राकृ ततक सम्पदा को क्षतत प तु। ाना
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पयााविणीय असंतल
ु न
सध
ु ार ेतु सुझाि:-
जल के पिंपिागत संसािनों का आितु नकरकिण तथा संिक्षण
मन्ु य औि प्रकृ तत के बीत संतल
ु न
प्रकृ तत से प्रेम औि उसका सम्मान
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