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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 3: चाँद का कुरता
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
22 – 32 15 46 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 52 pages
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: चाँद का कुरता
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 3 चाँद का कुरता के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह रामधारी सह ‘ दनकर’ क लखी एक
क वता है। इसम चाँद अपनी माँ से ज़द करता है क ठं ड से बचने के लए उसे ऊन का एक मोटा झगोला सलवा दया जाए, पर माँ बताती है क चाँद
का नाप तो रोज़ बदलता रहता है — फर कुरता सलवाएँ भी तो कस नाप का? पृष्ठ 22 से 32 तक के हर अभ्यास — बातचीत के लए, क वता से,
सो चए और ल खए, अ भभावक और आप, अनुमान और कल्पना, भाषा क बात, चाँद का झगोला, क वता से आगे, सो चए, सम झए और बताइए,
प ढ़ए और सम झए, आपक कलाकारी, पुस्तकालय एवं अन्य ोत तथा बूझो तो जान — का हल यहाँ दया गया है। पाठ के बाद पृष्ठ 32 पर छपी
बना क्रमांक क रचना जागो प्यारे (अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’) भी यहाँ पूरी समझाई गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 22 – 32
खं ड प्रश्न
15 46
माध्यम
हन्द
क वता का सरल अथ — पृष्ठ 22 और 23
पं क्त → सरल अथ → भाव (रामधारी सह ‘ दनकर’)
क वता क ाख्या
प्र.1 “हठ कर बैठा चाँद एक दन, माता से यह बोला, / ‘ सलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झगोला। / सन-सन
चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता ँ, / ठठु र- ठठु रकर कसी तरह यात्रा पूरी करता ँ। / आसमान का सफर
और यह मौसम है जाड़े का, / न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।’” — इन पं क्तय का सरल अथ और
भाव ल खए।
इन छह पं क्तय म चाँद अपनी माँ से ज़द कर रहा है। वह ठं ड से परेशान है और गरम कपड़ा माँग रहा है।
हठ कर बैठा चाँद एक िदन, माता से यह बोला,
“िसलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक िझंगोला।
सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़ े से मरता हूँ,
िठठुर-िठठुरकर िकसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़ े का,
न हो अगर तो ला दो कु रता ही कोई भाड़ े का।”
पहले क ठन शब्द समझ ली जए —
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ
हठ करना ज़द करना, अपनी बात पर अड़ जाना
िझंग ोला ढ ला-ढाला लंबा कुरता या चोगा
सन-सन तेज़ हवा चलने क आवाज़
जाड़ा सद , ठं ड का मौसम
िठठुर ना ठं ड से काँपना
सफर यात्रा
भाड़े का कराए का, कुछ दन के लए लया हुआ
अब पं क्त-दर-पं क्त अथ दे खए —
पं क्त सरल अथ
“हठ कर बैठा चाँद एक िदन, माता से यह बोला,” एक दन चाँद ज़द पकड़कर बैठ गया और अपनी माँ से यह बात कही।
“िसलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक िझंग ोला।” माँ, मेरे लए ऊन का एक मोटा और ढ ला कुरता सलवा दो।
“सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हू,ँ ” रात भर सन-सन करती ठं डी हवा चलती रहती है। म ठं ड से मरा जा रहा ँ।
“िठठुर -िठठुर कर िकसी तरह यात्रा पूर ी करता हू।
ँ ” ठं ड से काँपते-काँपते म जैसे-तैसे अपनी रात भर क यात्रा पूरी करता ँ।
“आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का,” ऊपर से मेरा सफर खुले आसमान का है, और वह भी जाड़े के मौसम म।
“न हो अगर तो ला दो कु रता ही कोई भाड़े का।” अगर नया न सलवा सको तो कराए का ही कोई कुरता ला दो।
भाव: यहाँ चाँद बलकुल एक छोटे ब े जैसा लगता है। उसे ठं ड लग रही है, इस लए वह माँ के पास जाकर ज़द
कर बैठता है। सबसे मन को छू लेने वाली पं क्त आ खरी है — “ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।” ब ा जानता है क
नया कपड़ा सलवाने म ख़च होता है, इस लए वह कराए के कपड़े पर भी राज़ी हो जाता है। इससे पता चलता है क
उसे ठं ड कतनी सता रही है और वह अपनी माँ को कतना समझता भी है।
ध्यान द जए: “सन-सन” और “ ठठु र- ठठु रकर” — ये दो शब्द ठं ड को सुनाई और दखाई दे जाने वाला बना दे ते
ह। ‘सन-सन’ से हवा क आवाज़ कान म आ जाती है और ‘ ठठु र- ठठु रकर’ से काँपता हुआ चाँद आँख के सामने
आ जाता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 “ब े क सुन बात कहा माता ने, ‘अरे सलोने! / कुशल कर भगवान, लग मत तुझको जादू-टोने। / जाड़े क तो
बात ठ क है, पर म तो डरती ँ, / एक नाप म कभी नह तुझको दे खा करती ँ।’” — इन पं क्तय का सरल अथ
और भाव ल खए।
इन चार पं क्तय म माँ अपना उत्तर दे ना शुरू करती है। वह पहले प्यार जताती है, फर असली समस्या बताती है।
बच्चे की सुन बात कहा माता ने , “अरे सलोने !
कु शल करे ं भगवान, लगें मत त झ
ु को जादू -टोने ।
जाड़ े की तो बात ठीक है, पर मै ं तो डरती हूँ,
एक नाप में कभी नही ं त झ
ु को दे खा करती हूँ।
शब्द अथ
सलोने सुंदर, प्यारे (प्यार से पुकारने का शब्द)
कु शल भला, ख़ै रयत, अच्छा हाल
जादू -टोने टोना-टोटका; कसी क बुरी नज़र
नाप माप, कसी चीज़ का आकार जो नापकर लया जाए
पं क्त सरल अथ
“बच्चे की सुन बात कहा माता ने, ‘अरे सलोने!’” अपने ब े क बात सुनकर माँ ने कहा — अरे मेरे प्यारे, सुंदर बेटे!
“कु शल करे ं भगवान, लगें मत तुझको जादू -टोने। ” भगवान तुझे सदा भला रख। तुझे कसी क बुरी नज़र न लगे।
“जाड़े की तो बात ठीक है, पर मैं तो डरती हू,ँ ” ठं ड लगने वाली तेरी बात तो बलकुल सही है, पर मुझे एक डर है।
“एक नाप में कभी नही ं तुझको दे खा करती हू।
ँ ” मने तुझे कभी एक ही नाप का नह दे खा। तेरा आकार तो बदलता ही रहता है।
भाव: यह पूरी क वता का मोड़ है। माँ बेटे क माँग को मना नह करती — वह तो कहती है “जाड़े क तो बात ठ क
है”, यानी तेरी बात जायज़ है। समस्या माँ क मरज़ी क नह , नाप क है। कोई भी दज़ कपड़ा तभी सी सकता है
जब नाप एक ही रहे। और चाँद का नाप तो रोज़ बदलता है।
माँ का प्यार दे खए: बात चाहे कैसी भी हो, माँ पहले “अरे सलोने!” कहती है और भगवान से बेटे क कुशल माँगती
है। कोई भी माँ ब े क तकलीफ़ सुनकर पहले यही करती है — पहले प्यार, फर समझाना।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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बढ़ता रोज कसी दन ऐसा भी करता है, / नह कसी क भी आँख को दखलाई पड़ता है।e/m
प्र.3 “कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा, / बड़ा कसी दन हो जाता है और कसी दन छोटा। / घटता-
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कस रोज लवाएँ, / सी द एक झगोला जो हर रोज बदन म आए?” — इनgपंl क्तय का सरल अथ और
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अब तू ही तो बता,
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भाव ल खए।
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इन आ खरी छह पं क्तय म माँ बताती है क चाँद का नाप रोज़ क्य बदलता है — और इसी लए कुरता सलवाना क्य मु श्कल
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है।
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कभी एक अंगल
ु -भर चौड़ ा, कभी एक फु ट मोटा,
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बड़ ा िकसी िदन हो जाता है और िकसी िदन छोटा।
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घटता-बढ़
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a gl िकसी की भी आँखों को िदखलाई पड़ ता है।
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अब तू ही तो बता, नाप ते री िकस रोज िलवाएँ,
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सी दे ं एक िझंगोला जो हर रोज बदन में आए?”
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पं क्त सरल अथ
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“कभी एक अंग ल
ु -भर चौड़ा, कभी एक फु ट मोटा,”
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तू कभी एक उँ गली जतना पतला दखता है, तो कभी एक फुट जतना मोटा।
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“बड़ा िकसी िदन हो जाता है और िकसी िदन कसी दन तू बड़ा हो जाता है और कसी दन छोटा रह जाता है।
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छोटा।”
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“घटता-बढ़ ता रोज िकसी िदन ऐसा भी करता है,” तू रोज़ थोड़ा-थोड़ा घटता और बढ़ता रहता है। कसी दन तो तू ऐसा भी कर दे ता है —
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“नही ं िकसी की भी आँखों को िदखलाई पड़ता — क कसी को भी दखाई ही नह दे ता। यानी उस दन तू आसमान से गायब ही हो
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है। ” जाता
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“अब तू ही तो बता, नाप तेर ी िकस रोज िलवाएँ,” अब तू ही बता, तेरा नाप कस दन का लया जाए?
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“सी दे ं एक िझंग ोला जो हर रोज बदन में आए?” और ऐसा कौन-सा झगोला सलवाएँ जो तेरे बदन पर हर रोज़ ठ क बैठ जाए?
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यह बात आप आसमान म दे ख सकते ह। कसी एक शाम चाँद को दे खए, फर रोज़ उसी समय दे खए। आप पाएँगे क उसका
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आकार रोज़ थोड़ा-थोड़ा बदल रहा है —
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
बढ़ ता चाँद — दू ज से पूिणमा तक (लगभग 15 िदन)
अमावस्या दूज आधा चाँद पूिणमा
घटता चाँद — पूिणमा से अमावस्या तक (लगभग 15 िदन)
घटता हुआ आधा चाँद पतली रेखा िफर अमावस्या
चाँद के बदलते रूप। पीला भाग वही है जो हम रात म चमकता दखाई दे ता है।
भाव: क व ने व ान क एक बड़ी बात को कुरता सलवाने क छोट -सी कहानी म कह दया है। चाँद रोज़ घटता-
बढ़ता है — इसे चाँद क कलाएँ कहते ह। इसी लए उसके लए एक ही नाप का कुरता बनाना असंभव है। क वता
हम हँसाते-हँसाते आसमान क एक स ी बात सखा जाती है।
ऐसा होता क्य है? चाँद के पास अपनी रोशनी नह है। उस पर सूरज क रोशनी पड़ती है और वही चमक हम
दखती है। चाँद धरती के चार ओर घूमता रहता है, इस लए हर रात हम उसका चमकता हुआ हस्सा अलग-अलग
मात्रा म दखाई दे ता है। जस रात चमकता हस्सा हमारी ओर होता ही नह , उस रात चाँद दखाई नह दे ता — उसे
अमावस्या कहते ह।
बातचीत के लए — पृष्ठ 24
क वता पढ़ने के बाद कक्षा म चचा
बातचीत के लए
प्र.1 आकाश आपको कब-कब बहुत सुंदर दखाई दे ता है और क्य ?
आकाश मुझे दन म भी सुंदर लगता है और रात म भी। सबसे सुंदर वह तब लगता है जब उसका रंग बदलता है — जैसे सुबह
और शाम को।
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कब आकाश कैसा दखता है सुंदर क्य लगता है
सुबह सूर ज िनकलते पूरब क ओर लाल-नारंगी लाली छा जाती है और धीरे-धीरे रंग हर पल बदलता है और लगता है क पूरा दन
समय सूरज ऊपर आता है। अभी बाक है।
शाम को सूर ज डू बते प म म सुनहरा, नारंगी और गुलाबी रंग फैल जाता है। बादल पर रंग पड़ने से आकाश कसी चत्र जैसा
समय पक्षी झुंड बनाकर घर लौटते ह। लगता है।
पूिणमा की रात पूरा गोल चाँद आकाश म चमकता है और उसक चाँदनी बना बत्ती के भी हल्का उजाला रहता है। बहुत
आँगन तक पहुँच जाती है। शांत लगता है।
िबना बादल वाली अन गनत तारे टम टमाते ह। कभी-कभी टू टता तारा भी तारे इतने ज़्यादा होते ह क गने नह जाते।
अँधे र ी रात दखता है।
बािरश के बाद आकाश धुला-धुला साफ़ हो जाता है और कभी इंद्रधनुष सात रंग का इंद्रधनुष दे खने म सबसे सुंदर लगता
नकल आता है। है।
वष से पहले काले-काले बादल घर आते ह और बगुल क पं क्त उड़ती ठं डी हवा चलने लगती है और मन खुश हो जाता
दखती है। है।
पतंग वाले िदन (मकर पूरा आकाश रंग- बरंगी पतंग से भर जाता है। हर पतंग अलग रंग क होती है और सब मलकर
सं ांित) आकाश को सजा दे ती ह।
नमूना उत्तर: मुझे आकाश सबसे सुंदर शाम के समय दखाई दे ता है। उस समय प म म सूरज डू ब रहा होता है और पूरा आकाश
नारंगी और गुलाबी हो जाता है। बादल पर भी वही रंग चढ़ जाता है। पक्षी झुंड बनाकर अपने घ सल क ओर लौटते ह। इसके बाद
पू णमा क रात मुझे बहुत अच्छ लगती है, जब पूरा गोल चाँद नकलता है और उसक चाँदनी से आँगन चमक उठता है। बा रश के
बाद जब आकाश म इंद्रधनुष नकलता है, तब भी आकाश बहुत सुंदर लगता है। मुझे लगता है क आकाश इस लए सुंदर लगता है
क्य क वह हर दन अलग दखता है।
क वता से जो ड़ए: इसी क वता म आकाश केवल सुंदर नह , चाँद का रास्ता भी है। चाँद कहता है — “आसमान का
सफर और यह मौसम है जाड़े का।” यानी जो आकाश हम बैठे-बैठे सुंदर लगता है, चाँद को उसी म रात भर चलना
पड़ता है।
प्र.2 चाँद को ठं ड लगती है इस लए वह झगोला माँग रहा है। सूरज क्या कहकर अपनी माँ से कपड़े माँगेगा?
सूरज क तकलीफ़ चाँद से बलकुल उलट होगी। चाँद रात म नकलता है, इस लए उसे ठं ड लगती है। सूरज दन म नकलता है और
खुद आग जैसा गरम है, इस लए उसे गरमी और तेज़ धूप सताएगी। तो वह गरम कपड़े नह , पतले और ठं डक दे ने वाले कपड़े
माँगेगा।
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सूरज क तकलीफ़ वह क्या माँगेगा क्य
िदन भर की कड़ी धूप पतला सूती कुरता सूती कपड़ा हवा आने दे ता है और पसीना सोख लेता है।
िसर पर सीधी धूप चौड़े कनारे वाली टोपी या गमछा सर और चेहरा धूप से बचा रहता है।
आँखों में चौंध धूप का चश्मा तेज़ रोशनी से आँख बच जाती ह।
पसीना और थकान पानी क बोतल, न बू-पानी, पंखा गरमी म शरीर को बार-बार पानी चा हए।
िदन भर का लंबा सफर छाता छाया मलती रहे तो चलना आसान हो जाता है।
हल्के कपड़े का रंग सफ़ेद या हल्के रंग का कपड़ा हल्के रंग गरमी को लौटा दे ते ह, काले रंग गरमी सोख लेते ह।
नमूना उत्तर (सूरज क अपनी आवाज़ म):
“िसलवा दो माँ, मुझे सूत ी का पतला एक कु रता।
िदन भर आग बरसती है, मै ं गरमी से मरता।
िसर पर मेरे धूप पड़ े, इक टोपी भी िदलवा दो,
और अगर हो सके तो, माँ, छाता भी िलवा दो।”
या साधारण वाक्य म — “माँ, मुझे बहुत गरमी लगती है। मुझे कोई मोटा कपड़ा मत सलवाना। मेरे लए सफ़ेद रंग का पतला सूती
कुरता सलवा दो, एक टोपी और एक चश्मा भी दला दो, ता क म दन भर क यात्रा आराम से पूरी कर सकूँ।”
सोचने क बात: कपड़े हम मौसम दे खकर चुनते ह। ठं ड म मोटे और ऊनी, गरमी म पतले और सूती। चाँद और
सूरज क यह उलट माँग हम यही बात याद दला दे ती है।
प्र.3 आपने आकाश म क्या-क्या प रवतन होते दे खे ह?
आकाश हर दन बदलता है। सबसे बड़ा बदलाव तो यही है क दन म उजाला रहता है और रात म अँधेरा। इसके अलावा भी
बहुत-से बदलाव मने दे खे ह।
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क्र. प रवतन वह कैसा दखता है
1 िदन और रात का बदलना सुबह सूरज पूरब से नकलता है और शाम को प म म डू ब जाता है। फर तारे और चाँद नकल आते
ह।
2 चाँद का घटना-बढ़ ना दूज को चाँद पतली रेखा जैसा, फर रोज़ बड़ा होते-होते पू णमा को पूरा गोल, फर घटते-घटते
अमावस्या को बलकुल गायब। यही बात हमारी क वता म है।
3 आकाश के रंग का भोर म लाली, दन म नीला, शाम को नारंगी और रात म काला।
बदलना
4 बादलों का आना-जाना कभी रुई जैसे सफ़ेद बादल, कभी वषा वाले काले बादल, कभी बलकुल साफ़ आकाश।
5 िबजली चमकना और वषा से पहले बजली कड़कती है और बादल गरजते ह।
गरजना
6 इंद धनुष िनकलना वषा के बाद धूप नकलने पर सात रंग क एक कमान बन जाती है।
7 तारों की जगह बदलना रात के शुरू म जो तारे पूरब म दखते ह, वे सुबह तक प म क ओर खसक जाते ह।
8 टू टता तारा िदखना कभी-कभी रात म एक चमकती लक र तेज़ी से आकाश पार करती दखती है।
9 ग हण लगना कभी सूय ग्रहण और कभी चंद्र ग्रहण होता है। तब सूरज या चाँद कुछ दे र के लए ढक जाता है।
10 कोहरा और ध ंध
ु जाड़े क सुबह आकाश धुँधला हो जाता है और सूरज दे र से दखाई दे ता है।
11 पिक्षयों और हवाई जहाज़ शाम को प क्षय क पं क्त और दन म जहाज़ क सफ़ेद लक र दखाई दे ती है।
का उड़ना
नमूना उत्तर: मने आकाश म सबसे पहले यह प रवतन दे खा है क दन म उजाला रहता है और रात म अँधेरा हो जाता है। सुबह
सूरज पूरब से नकलता है और शाम को प म म डू ब जाता है। चाँद रोज़ अपना आकार बदलता है — कभी पतली रेखा जैसा, कभी
पूरा गोल और अमावस्या को बलकुल गायब। वषा के दन म काले बादल घर आते ह, बजली चमकती है और कभी-कभी इंद्रधनुष
भी नकल आता है। जाड़े क सुबह कोहरे से आकाश धुँधला हो जाता है। मुझे लगता है क आकाश कभी एक-सा नह रहता,
इसी लए उसे रोज़ दे खने म मज़ा आता है।
क वता से जो ड़ए: इन सब प रवतन म से एक ही प रवतन क वता क जान है — चाँद का घटना-बढ़ना। यही
प रवतन चाँद के कुरते क सारी समस्या खड़ी कर दे ता है।
प्र.4 जब आप अपने अ भभावक के साथ नए कपड़े खरीदने जाते ह तब कन- कन बात का ध्यान रखते ह?
कपड़ा खरीदते समय हम सबसे पहले नाप दे खते ह — कपड़ा शरीर म ठ क बैठना चा हए। इसके बाद मौसम, कपड़े का कस्म, रंग
और दाम दे खे जाते ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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कस बात का ध्यान क्य ज़रूरी है
o m बहुत तंग हो तो पहनने म तकलीफ़ होती है, बहुत ढ ला हो तो अच्छा नह लगता। इसीa
l seपहनकर देखना चा हए।
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नाप (साइज़) लए
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g l a जाड़े के लए ऊनी और मोटे कपड़े, गरमी के लए पतले सूती कपड़े, बरसात के लए जल्द सूखने वाले कपड़े।
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मौसम
कपड़े का िक स्म सूती कपड़ा पसीना सोखता है और त्वचा को आराम दे ता है। ऊन गरमी रोके रखता है।
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रंग और िडज़ाइन
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रंग अपनी पसंद का हो। हल्के रंग गरमी म और गहरे रंग जाड़े म अच्छे रहते ह। ag
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दाम
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दाम हमारे बजट म हो। दो-तीन दुकान म दाम पूछ लेना चा हए।
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िसलाई और मज़बूती सलाई सीधी और मज़बूत हो, बटन ठ क से लगे ह , धागे बाहर न नकल रहे ह ।
यह दे खना चा हए क कपड़ा घर म धुल जाएगा या नह , और उसका रंग तो नह छू टे गeा।m
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कपड़ा पहनकर दौड़ने, बैठने और खेलने म आसानी हो।
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कब पहनना है व ालय, त्योहार, शाद — मौके के हसाब से कपड़ा चुना जाता है।
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थोड़ा बड़ा होना ब क लंबाई बढ़ती रहती है, इस लए माता- पता प्रायः थोड़ा बड़ा नाप लेते ह ता क कपड़ा साल भर चले।
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नमूना उत्तर: जब म अपनी माँ के साथ नए कपड़े खरीदने जाता ँ तो सबसे पहले हम नाप दे खते ह। माँ मुझसे कपड़ा पहनकर
दखाने को कहती ह। फर हम दे खते ह क कपड़ा कस मौसम के लए है — जाड़े के लए ऊनी और गरमी के लए सूती। म अपनी
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पसंद का रंग चुनता ँ, पर माँ यह भी दे खती ह क रंग जल्द गंदा न दखे। माँ सलाई और बटन जाँचती ह और दाम दो-तीन दुकान
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म पूछ लेती ह। वे प्रायः थोड़ा बड़ा नाप लेती ह, क्य क मेरी लंबाई बढ़ रही है।
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m .c से जो ड़ए: ऊपर क सूची म पहली ही बात — नाप — वही है जस परagक वता अटक जाती है। चाँद क
aseमाँ बाक सब कर सकती है, पर नाप नह ले सकती, क्य क “एक नाप म कभी नह तुझको दे खा करती ँ।” यह
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प्रश्न पूछा ही इस लए गया है ता क आप समझ क नाप कतनी ज़रूरी चीज़ है।
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क वता से — पृष्ठ 24 और 25agl ase
नीचे दए गए प्रश्न म चार वकल्प ह। इनम एक से अ धक वकल्प सही हो सकते ह। सही वकल्प पर चाँद का चत्र ( 🌙) बनाइए।
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क वता से बहु वकल्पी
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a s emप्र.1 चाँद क माँ उसे झगोला क्य नह दे पा रही है? (क) चाँद के पास पहले से ही बहुत से झगोले ह। (ख) चाँद के
agl शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है। (ग) चाँद अपने वस्त्र सँभालकर नह रखता है। (घ) चाँद क माँ अभी
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कोई नया वस्त्र नह सलवाना चाहती है।
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🌙) केवल एक वकल्प
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चाँद का चत्र ( पर बनेगा — (ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
माँ अपने मुँह से कहती है —
“एक नाप में कभी नही ं त झ
ु को दे खा करती हूँ।
ु -भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
कभी एक अंगल
बड़ा िकसी िदन हो जाता है और िकसी िदन छोटा।”
माँ मना नह कर रही। उसक परेशानी बस इतनी है क नाप कस दन का लया जाए।
वकल्प सही / कारण
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(क) चाँद के पास पहले से ही ग़लत क वता म ऐसा कह नह लखा। उलटे चाँद कहता है क उसके पास कुछ नह — इसी लए
बहुत से झगोले ह। तो वह “भाड़े का” यानी कराए का कुरता तक माँग लेता है। जसके पास बहुत कपड़े ह , वह
कराए का कपड़ा नह माँगता।
(ख) चाँद के शरीर का सही 🌙 यही क वता क असली बात है। माँ कहती है — “एक नाप म कभी नह तुझको दे खा करती
आकार घटता-बढ़ता रहता ँ।” चाँद कभी अंगुल-भर पतला, कभी एक फुट मोटा, कसी दन बड़ा, कसी दन छोटा।
है। जसका नाप ही तय न हो, उसका कुरता कैसे सले?
(ग) चाँद अपने वस्त्र ग़लत क वता म चाँद के कपड़ क या उनके खो जाने क कोई बात ही नह है। यह वकल्प बाहर से
सँभालकर नह रखता है। जोड़ा गया है। जो बात पाठ म न हो, वह उत्तर नह बन सकती।
(घ) चाँद क माँ अभी कोई ग़लत माँ तो कुरता सलवाने के लए तैयार है। वह साफ़ कहती है — “जाड़े क तो बात ठ क है”
नया वस्त्र नह सलवाना — यानी बेटे क माँग जायज़ है। वह रुक हुई है नाप क समस्या से, अपनी मरज़ी से नह ।
चाहती है।
पढ़ने का तरीका सी खए: नदश म लखा है क एक से अ धक वकल्प सही हो सकते ह — इसका अथ यह नह
क हर प्रश्न म एक से अ धक सही ह गे ही। यहाँ जाँचने पर केवल एक ही वकल्प सही नकलता है। इस लए हर
वकल्प को क वता क पं क्तय से मलाकर दे खए, अंदाज़े से मत चु नए।
प्र.2 क वता म चाँद के बदलते आकार का वणन करने के लए कन शब्द का प्रयोग कया गया है? (क) एक अंगुल-
भर चौड़ा (ख) एक फुट मोटा (ग) कसी दन बड़ा (घ) कसी दन छोटा
यहाँ चार वकल्प सही ह — (क), (ख), (ग) और (घ)। चार पर चाँद का चत्र ( 🌙) बनेगा।
“कभी एक अंगल
ु -भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
बड़ा िकसी िदन हो जाता है और िकसी िदन छोटा।”
ये दोन पं क्तयाँ ही चार शब्द-समूह अपने भीतर लए हुए ह। इस लए कसी एक को छोड़ना ग़लत होगा।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) एक अंगुल-भर सही 🌙 यह चाँद का सबसे पतला रूप बताता है — दूज का चाँद, जो नाख़ून जैसी पतली रेखा
चौड़ा दखता है।
(ख) एक फुट मोटा सही 🌙 यह चाँद का सबसे भरा हुआ रूप बताता है — पू णमा का पूरा गोल चाँद।
(ग) कसी दन बड़ा सही 🌙 यह बताता है क कसी दन चाँद बड़ा दखाई दे ता है। यह भी आकार का ही वणन है।
(घ) कसी दन छोटा सही 🌙 यह बताता है क कसी दन वही चाँद छोटा दखाई दे ता है। यह भी आकार का ही वणन है।
दो जो ड़याँ दे खए: ये चार शब्द दो जो ड़य म ह — पतला ↔ मोटा और बड़ा ↔ छोटा। दोन जो ड़य म उलटे
अथ वाले शब्द रखे गए ह। क व ने ऐसा जान-बूझकर कया है, ता क पढ़ते ही समझ आ जाए क चाँद एक जैसा
रहता ही नह ।
यह प्रश्न क्या सखाता है: यही वह प्रश्न है जसके लए नदश म लखा गया था क “एक से अ धक वकल्प सही हो
सकते ह”। पहला सही वकल्प मलते ही रुक मत जाइए — बाक वकल्प भी जाँ चए।
प्र.3 क वता म ठं ड के मौसम का वणन करने के लए कन- कन शब्द का प्रयोग कया गया है? (क) ऊन का मोटा
झगोला (ख) सन-सन चलती हवा (ग) ठठु र- ठठु रकर यात्रा (घ) भाड़े का कुरता
सबसे पक्के उत्तर दो ह — (ख) सन-सन चलती हवा और (ग) ठठु र- ठठु रकर यात्रा। इन दोन पर चाँद का चत्र ( 🌙) ज़रूर
बनाइए। (क) ऊन का मोटा झगोला को भी बहुत-से शक्षक सही मानते ह, क्य क ऊन का मोटा कपड़ा ठं ड म ही माँगा जाता है।
(घ) भाड़े का कुरता ठं ड से बलकुल नह जुड़ा — वह ग़लत है।
“सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,
िठठुर-िठठुरकर िकसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।”
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) ऊन का सही माना जा यह सीधे ठं ड का वणन नह है — यह ठं ड से बचने का उपाय है। पर ऊन का मोटा कपड़ा जाड़े म ही
मोटा झगोला सकता है पहना जाता है, इस लए यह भी ठं ड क ओर ही इशारा करता है। इसे चुनने पर उत्तर ग़लत नह माना
जाएगा।
(ख) सन-सन सही 🌙 यह सीधा ठं ड का वणन है। ‘सन-सन’ शब्द से रात भर चलने वाली तेज़ ठं डी हवा क आवाज़ कान म
चलती हवा आ जाती है। जाड़े क रात क सबसे बड़ी पहचान यही हवा है।
(ग) ठठु र- सही 🌙 ‘ ठठु रना’ का अथ ही है — ठं ड से काँपना। यह शब्द ठं ड को आँख के सामने ला दे ता है। इससे बड़ा
ठठु रकर यात्रा प्रमाण और क्या होगा क मौसम जाड़े का है!
(घ) भाड़े का ग़लत ‘भाड़े का’ का अथ है कराए का। इसका ठं ड से कोई संबंध नह है। यह तो बस यह बताता है क
कुरता चाँद नया कुरता न मलने पर कराए के कुरते से भी काम चला लेगा।
असली अंतर सम झए: प्रश्न पूछ रहा है — ठं ड का वणन कन शब्द से हुआ है। ‘सन-सन चलती हवा’ और
‘ ठठु र- ठठु रकर’ — ये दोन ठं ड को महसूस करा दे ते ह। ‘ऊन का मोटा झगोला’ ठं ड को महसूस नह कराता, वह
ठं ड का इलाज है। और ‘भाड़े का कुरता’ का ठं ड से कोई नाता ही नह ।
एक और बात: क वता म ठं ड बताने वाले दो और शब्द-समूह ह जो वकल्प म नह दए गए — “जाड़े से मरता
ँ” और “यह मौसम है जाड़े का”। उत्तर लखते समय इन्ह भी जोड़ ली जए, आपका उत्तर और पूरा हो जाएगा।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 25
क वता पर सोच- वचार के प्रश्न
सो चए और ल खए
प्र.1 क वता क कन पं क्तय से पता चलता है क चाँद कसी एक दन बलकुल दखाई नह दे ता है?
ये रह वे पं क्तयाँ —
“घटता-बढ़ता रोज िकसी िदन ऐसा भी करता है,
नही ं िकसी की भी आँखों को िदखलाई पड़ता है।”
इनका सरल अथ: चाँद रोज़ थोड़ा-थोड़ा घटता और बढ़ता रहता है। और कसी एक दन तो वह ऐसा कर दे ता है क कसी क भी
आँख को दखाई ही नह दे ता — यानी आसमान से बलकुल गायब हो जाता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
पं क्त का हस्सा वह क्या बताता है
“घटता-बढ़ ता रोज” चाँद हर दन बदलता है — कभी कम, कभी ज़्यादा।
“िकसी िदन ऐसा भी करता है” महीने म एक दन कुछ खास होता है।
“नही ं िकसी की भी आँखों को उस दन वह कसी को भी नह दखता। ‘ कसी क भी’ कहकर क व ने बात पक्क कर द — कसी
िदखलाई पड़ता है” एक को नह , कसी को भी नह ।
वह दन कौन-सा है — यह आप आसमान म दे ख सकते ह: उस रात को अमावस्या कहते ह। महीने म एक बार
ऐसा होता है। द पावली अमावस्या क रात को ही मनाई जाती है — इसी लए उस रात इतने द ये जलाए जाते ह,
क्य क आसमान म चाँद का उजाला बलकुल नह होता। इसके ठ क उलट रात पू णमा होती है, जब चाँद पूरा गोल
दखता है।
खुद करके दे खए: आज शाम चाँद को दे खए और अपनी कॉपी म उसका चत्र बना ली जए। यही काम रोज़ एक ही
समय पर, पंद्रह दन तक क जए। आप अपनी आँख से दे ख लगे क चाँद रोज़ थोड़ा-थोड़ा बदल रहा है — ठ क
वैसे ही जैसे क वता म माँ कह रही है।
प्र.2 सद से बचने के लए चाँद, माँ से ऊन के झगोले के अ त रक्त और कौन-से कपड़े माँग सकता है?
चाँद ऊन के झगोले के अलावा वे सब चीज़ माँग सकता है जो हम जाड़े म पहनते ह — स्वेटर, मफलर, टोपी, दस्ताने, मोज़े, शॉल
और रजाई।
चीज़ वह कस अंग को बचाएगी चाँद को उसक ज़रूरत क्य
ऊनी स्वेटर या जैके ट छाती और पीठ रात भर सन-सन हवा सीधे उसके शरीर पर लगती है।
मफलर या ग ल
ु ूबंद गला और कान ठं डी हवा सबसे पहले गले और कान को लगती है।
ऊनी टोपी या मंक ी कै प सर सर ढका न हो तो शरीर क गरमी जल्द नकल जाती है।
द स्ताने हाथ और उँ ग लयाँ ठं ड म उँ ग लयाँ सबसे पहले सुन्न होती ह।
ऊनी मोज़े पैर पैर गरम रह तो पूरा शरीर गरम लगता है।
शॉल या लोई पूरा शरीर ऊपर से लपेट लेने पर हवा भीतर नह घुसती।
रजाई या कं बल सोते समय पूरा शरीर दन म जब चाँद आराम करता है, तब ओढ़ने के लए।
ऊँचे जूते पैर और टख़ने लंबी यात्रा म पैर ठं ड से बचे रह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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नमूना उत्तर (चाँद क अपनी आवाज़ म): “माँ, केवल झगोले से मेरा काम नह चलेगा। मुझे एक ऊनी स्वेटर भी चा हए, ता क
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छाती पर हवा न लगे। गले के लए एक मफलर और सर के लए एक ऊनी टोपी दलवा दो। हाथ के लए दस्ताने और पैर के लए
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ऊनी मोज़े भी चा हए, क्य क ठं ड म मेरी उँ ग लयाँ सुन्न हो जाती ह। और हाँ, दन म सोते समय ओढ़ने के लए एक रजाई भी दे
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दे ना।”
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aध्यान द जए: प्रश्न म “अ त रक्त” शब्द है, जसका अथ है के अलावा। इस लए उत्तर म ऊन का झगोला दोबारा
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मत ल खए — केवल बाक चीज़ ल खए।
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जाड़े के मौसम म चाँद को क्या क ठनाई होती है?
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g चलना पड़ता है, और उसके
c सबसे बड़ी क ठनाई यह है क उसे रात भर खुले आसमान म ठं डी हवा के aबीच
जाड़े म चाँद .क
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e गरम कपड़ा नह है।
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“सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़ े से मरता हूँ,
िठठुर-िठठुरकर िकसी तरह यात्रा पूरी करताeहm
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l a s ू ँ।
आसमान का सफर और यह मौसम aहैgजाड़ े का,”
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चाँद क क ठनाइयाँ चार ह। क वता क पं क्तय से चार नकल आती ह —
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क्र. .coक ठनाई क वताaकg कौन-सी बात यह बताती है
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agl 1 रात भर तेज़ ठं डी हवा चलती है “सन-सन चलती हवा रात भर”
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2 वह ठं ड से काँपता रहता है “जाड़े से मरता ँ”, “ ठठु र- ठठु रकर”
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3 िफर भी उसे अपनी यात्र ा पूर ी करनी पड़ती है — काम रुकता नही ं “ कसी तरह यात्रा पूरी करता ँ”
4 यात्र ा खुले आसमान की है, जहाँ कही ं ओट या छाया नही ं “आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का”
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पूरा उत्तर इस तरह ल खए: जाड़े के मौसम म चाँद को बहुत क ठनाई होती है। रात भर सन-सन करती ठं डी हवा चलती रहती है
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और वह ठं ड से मरा जाता है। उसके पास कोई गरम कपड़ा नह है, इस लए वह ठठु र- ठठु रकर कसी तरह अपनी यात्रा पूरी करता
g के लए वह माँ से ऊन का मोटा झगोला
c सफर खुले आसमान का है, जहाँ न कोई छत है, न ओट। इसी क ठनाई सेaबचने
है।.उसका
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se माँगता है।
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सोचने क बात: चाँद ठं ड क शकायत तो करता है, पर अपनी यात्रा नह छोड़ता। “ कसी तरह यात्रा पूरी करता ँ”
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— इस एक पं क्त म उसक लगन दखाई दे ती है। हम भी अपना काम क ठनाई म भी पूरा करना चा हए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 चाँद कस यात्रा को पूरा करने क बात कर रहा है?
चाँद आसमान क यात्रा क बात कर रहा है — यानी वह रोज़ रात भर आकाश म जो सफर करता है, वही।
“िठठुर-िठठुरकर िकसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़ े का,”
‘सफर’ और ‘यात्रा’ — दोन शब्द का एक ही अथ है। क वता क इन दो पं क्तय से साफ़ हो जाता है क यात्रा आसमान क है।
प्रश्न उत्तर
यात्र ा कहाँ की है? खुले आसमान क ।
कब होती है? रात भर — शाम को शुरू होकर सुबह तक।
कै से िदखती है? चाँद आकाश म एक ओर से नकलता है और धीरे-धीरे दूसरी ओर चला जाता है।
िकतनी बार होती है? हर रात। एक भी रात छू टती नह ।
यात्र ा में किठनाई क्या है? जाड़े म सन-सन ठं डी हवा चलती है और चाँद ठठु रता रहता है।
असल म होता क्या है: चाँद धरती के चार ओर घूमता है। साथ ही हमारी धरती भी अपनी जगह पर घूमती रहती है।
इन्ह दोन के घूमने से हम ऐसा लगता है क चाँद रात भर आकाश म चलता जा रहा है। यही उसक वह यात्रा है
जसक बात क वता म हो रही है।
करके दे खए: रात म चाँद को दे खकर याद र खए क वह कस पेड़ या छत के ऊपर है। एक घंटे बाद फर दे खए।
आप पाएँगे क वह अपनी जगह से आगे खसक गया है। यही उसक यात्रा है।
अ भभावक और आप — पृष्ठ 25
जब नीचे द गई बात एवं घटनाएँ होती ह तब आपके अ भभावक क्या-क्या कहते या करते ह? अपने-अपने अनुभव कक्षा म साझा क जए।
अ भभावक और आप अपने अनु भ व
प्र.1 जब आप ठं डी रात म सोते समय अपने पैर से कंबल या रजाई उतार फकते ह।
तब मेरे अ भभावक चुपचाप उठकर मुझे फर से ओढ़ा दे ते ह — और सुबह प्यार से डाँटते भी ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
वे क्या कहते ह वे क्या करते ह
“बेटा, रजाई मत फें को, सद लग जाएगी। ” रात म दो-तीन बार उठकर रजाई फर से ओढ़ा दे ते ह।
“ठं ड में पैर खुले रह गए तो सुबह गला ख़राब हो जाएगा। ” पैर म ऊनी मोज़े पहना दे ते ह।
“रजाई को अच्छी तरह दबा लो। ” रजाई के कनारे शरीर के नीचे दबा दे ते ह, ता क हवा भीतर न आए।
“सद में िखड़की खुल ी मत छोड़ो। ” खड़क और दरवाज़ा बंद कर दे ते ह, कभी परदा भी डाल दे ते ह।
नमूना उत्तर: ठं डी रात म जब म सोते-सोते रजाई पैर से हटा दे ता ँ, तब मेरी माँ उठकर मुझे फर से ओढ़ा दे ती ह। वे कहती ह —
“बेटा, ठं ड लग जाएगी, रजाई मत फको।” कभी-कभी वे मेरे पैर म ऊनी मोज़े पहना दे ती ह। सुबह वे हँसकर बताती ह क रात म
उन्ह तीन बार उठना पड़ा। तब मुझे लगता है क माँ मेरे सोने के बाद भी मेरा ध्यान रखती ह।
क वता से जो ड़ए: जैसे चाँद क माँ को उसक ठं ड क चता है, वैसे ही आपके अ भभावक को आपक ठं ड क
चता रहती है। ब ा सो जाता है, माँ जागती रहती है — यही बात दोन जगह एक जैसी है।
प्र.2 जब आप ठं ड म आइसक्र म खाने का हठ करते ह।
तब मेरे अ भभावक पहले समझाते ह, फर कोई गरम चीज़ का लालच दे ते ह, और कभी-कभी थोड़ी-सी खाने क छू ट भी दे दे ते ह।
वे क्या कहते ह वे क्या करते ह
“इस मौसम में ठं डी चीज़ खाओगे तो गला पकड़ जाएगा। ” आइसक्र म क जगह गरम दूध, हलवा या गजक दे दे ते ह।
“खाँस ी हो गई तो िव ालय नही ं जा पाओगे। ” याद दलाते ह क पछली बार ठं डा खाकर क्या हुआ था।
“अभी नही,ं गरमी आने दो — तब िजतनी चाहे खाना। ” एक दन तय कर दे ते ह, ता क बात टलने पर भी बुरा न लगे।
“ठीक है, पर थोड़ी-सी और धूप में बैठकर। ” दोपहर क धूप म थोड़ी-सी आइसक्र म खाने दे दे ते ह।
नमूना उत्तर: जब म ठं ड म आइसक्र म खाने क ज़द करता ँ तो पताजी कहते ह — “इस मौसम म ठं डी चीज़ खाओगे तो गला
ख़राब हो जाएगा और खाँसी हो जाएगी।” माँ मुझे उसक जगह गरम दूध या गजक दे दे ती ह। कभी-कभी वे कहती ह क दोपहर म
धूप म बैठकर थोड़ी-सी खा लो। तब म मान जाता ँ।
क वता से जो ड़ए: क वता का चाँद भी हठ ही करता है — “हठ कर बैठा चाँद एक दन।” और उसक माँ भी मना
नह करती, बस असली क ठनाई समझा दे ती है। समझदार बड़े लोग यही करते ह — डाँटते नह , कारण बताते ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 जब आप दूध पीने, हरी स ब्ज़याँ और फल आ द खाने से कतराते ह।
तब मेरे अ भभावक बताते ह क इनसे शरीर को क्या मलता है, और उन्ह ऐसे बना दे ते ह क मुझे अच्छे लगने लग।
वे क्या कहते ह वे क्या करते ह
“दू ध िपओगे तो हि याँ मज़बूत होंग ी और लंबाई बढ़ े ग ी। ” दूध म हल्द , केसर या थोड़ा-सा गुड़ मला दे ते ह ता क स्वाद अच्छा लगे।
“हरी सिब्ज़यों से ख़ून बनता है और आँखें अच्छी रहती है।
ं ” पालक को पराँठे म भर दे ते ह, लौक का हलवा या सब्ज़ी क टक्क बना दे ते ह।
“फल खाओगे तो जल्दी बीमार नही ं पड़ोगे। ” फल काटकर, नमक-चाट डालकर सामने रख दे ते ह।
“थोड़ा-सा तो चखकर दे खो। ” पूरी थाली नह , थोड़ी-सी मात्रा दे ते ह और रोज़ थोड़ी बढ़ाते जाते ह।
“दे खो, मैं भी खा रहा हू।
ँ ” सबके साथ बैठकर खाते ह, जससे ब े का मन बन जाता है।
नमूना उत्तर: जब म दूध पीने या हरी सब्ज़ी खाने से कतराता ँ तो माँ मुझे समझाती ह क दूध से ह याँ मज़बूत होती ह और हरी
स ब्ज़य से ख़ून बनता है। वे दूध म थोड़ी-सी हल्द डाल दे ती ह और पालक को पराँठे म भर दे ती ह, जससे मुझे स्वाद अच्छा लगने
लगता है। दाद फल काटकर उस पर थोड़ा-सा नमक डाल दे ती ह। घर के सब लोग साथ बैठकर खाते ह, इस लए म भी खा लेता ँ।
याद र खए: दूध, हरी स ब्ज़याँ और फल हम ताकत, ख़ून और रोग से लड़ने क श क्त दे ते ह। बड़े लोग ये चीज़
ज़बरदस्ती नह , हमारे भले के लए खलाते ह।
प्र.4 जब आप दे र तक सोते ह।
तब मेरे अ भभावक पहले प्यार से जगाते ह, फर याद दलाते ह क दे र हो रही है, और सुबह जल्द उठने के फ़ायदे बताते ह।
वे क्या कहते ह वे क्या करते ह
“उठो बेटा, सूर ज िनकल आया है। ” परदा हटा दे ते ह, जससे धूप कमरे म आ जाए।
“दे र हो जाएगी, बस िनकल जाएगी। ” घड़ी दखाते ह और बस्ता तैयार करने लगते ह।
“सुबह जल्दी उठने से पढ़ ा हुआ याद रहता है। ” रात को जल्द सोने का नयम बनवाते ह।
“सुबह की हवा से हत के िलए अच्छी होती है। ” सुबह टहलने या खेलने साथ ले जाते ह।
“चलो, मुँह धो लो, नाश्ता तैयार है। ” पानी और तौ लया पास रख दे ते ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: जब म दे र तक सोता रहता ँ तो माँ आकर परदा हटा दे ती ह और कहती ह — “उठो बेटा, सूरज नकल आया है।” वे
घड़ी दखाकर बताती ह क व ालय के लए दे र हो रही है। पताजी कहते ह क सुबह जल्द उठने से दन भर मन ताज़ा रहता है
और पढ़ा हुआ याद रहता है। इस लए अब म रात को जल्द सो जाता ँ।
इस पाठ से जो ड़ए: इसी अध्याय के अंत म छपी क वता जागो प्यारे म भी माँ यही कर रही है — “उठो लाल, अब
आँख खोलो। पानी लाई ँ, मुँह धो लो।” वह डाँटती नह , ब ल्क बाहर का सुंदर दृश्य दखाकर ब े को जगाती है।
प्र.5 जब कोई आपके घर आपक शकायत करने आता है।
तब मेरे अ भभावक पहले पूरी बात शां त से सुनते ह, फर मुझसे मेरा पक्ष पूछते ह, और तब कोई नणय लेते ह।
वे क्या कहते ह वे क्या करते ह
“आप बैिठए , पूर ी बात बताइए। ” शकायत करने वाले क बात बना बीच म टोके सुनते ह।
“बेटा, तुम भी अपनी बात कहो। सच-सच बताना। ” मुझसे भी पूछते ह, ता क दोन पक्ष सामने आ जाएँ।
“ग़ ल ती हुई है तो माफ़ ी माँग ो। ” ग़लती मेरी हो तो मुझसे माफ़ मँगवाते ह और नुकसान क भरपाई करवाते ह।
“आगे से ऐसा नही ं होगा। ” बाद म अकेले म समझाते ह क ऐसा क्य नह करना चा हए।
“इसमें मेरे बच्चे की ग़ ल ती नही ं है। ” य द मेरी ग़लती न हो तो वे मेरा साथ भी दे ते ह।
नमूना उत्तर: जब कोई मेरी शकायत लेकर घर आता है तो मेरे पताजी पहले उनक पूरी बात शां त से सुनते ह। वे बीच म नह
बोलते। इसके बाद वे मुझे बुलाकर पूछते ह क असल म क्या हुआ था। य द ग़लती मेरी होती है तो वे मुझसे माफ़ मँगवाते ह और
बाद म अकेले म समझाते ह। य द ग़लती मेरी नह होती तो वे मेरा साथ भी दे ते ह। मुझे यह अच्छा लगता है क वे बना सुने कोई
फ़ैसला नह करते।
अ बात: कसी क शकायत सुनकर तुरंत डाँट दे ना ठ क नह । दोन पक्ष सुनने के बाद ही न्याय होता है। यही
बात इसी पुस्तक के पाठ 2 न्याय क कुस म भी सखाई गई है।
प्र.6 जब आपके अ े काम के लए आपक प्रशंसा होती है अथवा पुरस्कार मलता है।
तब मेरे अ भभावक बहुत खुश होते ह, सबको बताते ह, और साथ ही यह भी कहते ह क घमंड मत करना।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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वे क्या कहते ह वे क्या करते ह
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“शाबाश! तुम्हारी मेहनत काम आई। ” पीठ थपथपाते ह और गले लगा लेते ह।
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g l a दादा-दाद , नाना-नानी और पड़ो सय को फ़ोन करके बताते ह।
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“यह दे खो, हमारे बच्चे को पुर स्कार िमला है। ”
“कु छ मीठा हो जाए !” घर म मठाई या मेरी पसंद का खाना बनवाते ह।
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seअगली बार के लए कोई नया लक्ष्य तय करने म मदद करते ह।
“इसे सँभालकर रखो। ” प्रमाण-पत्र या पदक घर म सबसे दखने वाली जगह पर लगा दे ते ह।
“अब घमंड मत करना, आगे और मेहनत करना। ” g l a
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नमूना उत्तर: जब मुझे मेरे अच्छे काम के लए पुरस्कार मलता है तो मेरे माता- पता बहुत खुश होते ह। माँ मेरी पीठ थपथपाकर
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कहती ह — “शाबाश! तुम्हारी मेहनत काम आई।” पताजी दादा-दाद को फ़ोन करके बताते ह। घर म मेरी पसंद का खाना बनता
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है। मेरा प्रमाण-पत्र द वार पर लगा दया जाता है। साथ ही माँ यह भी कहती ह क इससे घमंड नह करना चा हए और आगे और
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मेहनत करनी
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agl सोचने क बात: प्रशंसा से हम्मत बढ़ती है, इस लए वह ज़रूरी है। पर प्रशंसा सुनकर मेहनत छोड़ दे ना ठ क नह ।
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इसी लए बड़े लोग तारीफ़ के साथ यह भी कह दे ते ह — “आगे और मेहनत करना।”
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अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 26
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अंदाज़ा लगाकर और कल्पना करके लखने वाले प्रश्न
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अनु मान और कल्पना
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agl प्र.1 आप अपनी माँ से चाँद का दुखड़ा कैसे बताएँगे?
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‘दुखड़ा’ का अथ है — अपनी तकलीफ़ कसी को दुख भरे मन से सुनाना। इस लए यहाँ आपको चाँद क तकलीफ़ अपनी माँ
को इस तरह सुनानी है जैसे वह आपक अपनी तकलीफ़ हो।
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कैसे लख — तीन चरण:
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चरण 1 — पहले बताइए क चाँद कौन है और उसके साथ हो क्या रहा है।
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.cचरण 2 — फर उसक दोन परेशा नयाँ क हए — ठं ड लगना और नाप काagरोज़ बदलना।
m चरण 3 — अंत म माँ से पू छए क अब क्या कया जाए।
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नमूना उत्तर (बातचीत के रूप म):
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
कौन क्या कहता है
मैं माँ, आज मुझे बेचारे चाँद पर बहुत दया आ रही है।
माँ क्य बेटा, क्या हुआ चाँद को?
मैं माँ, वह रोज़ रात भर आसमान म चलता रहता है। जाड़े म सन-सन ठं डी हवा चलती है और उसके पास एक भी गरम कपड़ा नह है।
वह ठठु र- ठठु रकर कसी तरह अपनी यात्रा पूरी करता है।
माँ तो उसक माँ उसे कुरता क्य नह सलवा दे त ?
मैं यही तो असली दुख है, माँ! उसका नाप ही रोज़ बदल जाता है। कभी वह उँ गली जतना पतला होता है, कभी एक फुट मोटा। और
एक दन तो वह कसी को दखाई ही नह दे ता। उसक माँ नाप कस दन का ले?
माँ सच म, यह तो बड़ी मु श्कल है।
मैं माँ, कोई ऐसा कपड़ा नह बन सकता जो अपने आप छोटा-बड़ा हो जाए? चाँद बेचारा कब तक ठठु रता रहेगा?
नमूना उत्तर (एक अनु े द म): माँ, आज मने चाँद के बारे म एक क वता पढ़ और मुझे उस पर बहुत दया आई। बेचारा चाँद रोज़
रात भर खुले आसमान म चलता रहता है। जाड़े म सन-सन ठं डी हवा चलती है और उसके पास ओढ़ने-पहनने को कुछ नह है। वह
ठठु रता हुआ कसी तरह अपनी यात्रा पूरी करता है। उसने अपनी माँ से ऊन का एक मोटा झगोला माँगा, पर उसक माँ लाचार ह
— चाँद का नाप ही रोज़ बदल जाता है। कभी वह पतली रेखा जैसा होता है, कभी पूरा गोल, और अमावस्या को तो दखता ही नह ।
माँ, आप ही बताइए, अब चाँद क्या करे?
प्र.2 गरमी और वषा से बचने के लए चाँद अपनी माँ से क्या कहेगा? वह कस प्रकार के कपड़ एवं वस्तुओं क माँग
कर सकता है?
मौसम बदलेगा तो चाँद क माँग भी बदल जाएगी। गरमी म उसे ठं डक चा हए और वषा म भीगने से बचाव।
मौसम कपड़े अन्य वस्तुए ँ क्य
गरमी पतला सूती कुरता, ब नयान, छाता, धूप का चश्मा, हाथ का सूती कपड़ा पसीना सोखता है और हवा आने दे ता है।
हल्के रंग का कपड़ा, सर पर पंखा, पानी क बोतल, मट्ट हल्के रंग गरमी लौटा दे ते ह। छाता और टोपी सर को
गमछा या टोपी क सुराही धूप से बचाते ह।
वष बरसाती (रेनकोट), प्ला स्टक क छाता, गमबूट या रबड़ क बरसाती और छाता भीगने से बचाते ह। गमबूट से पानी
टोपी, जल्द सूखने वाला कपड़ा चप्पल, बादल से बचने क म चलना आसान होता है। भीगा कपड़ा दे र तक पहनने
ओट से सद लग जाती है।
नमूना उत्तर (गरमी के लए — चाँद क अपनी आवाज़ म): “माँ, अब गरमी आ गई है। मेरा वह ऊन का मोटा झगोला अब रख
दो। मुझे एक पतला सूती कुरता सलवा दो, वह भी सफ़ेद या हल्के रंग का, ता क गरमी न लगे। सर के लए एक टोपी और आँख के
लए एक चश्मा भी दलवा दे ना। और हाँ, रास्ते म प्यास लगे तो पीने के लए पानी क एक बोतल भी साथ रख दे ना।”
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर (वषा के लए): “माँ, अब तो रोज़ बादल घर आते ह और म बीच रास्ते म भीग जाता ँ। भीगे कपड़े म रात भर चलने
से मुझे सद लग जाती है। मेरे लए एक बरसाती सलवा दो और एक मज़बूत छाता दला दो। पैर के लए गमबूट भी चा हए। ऐसा
कपड़ा लेना जो भीग जाए तो जल्द सूख भी जाए।”
ध्यान द जए: कपड़ा हमेशा मौसम दे खकर चुना जाता है। जाड़े म ऊनी और मोटा, गरमी म सूती और पतला,
बरसात म जल्द सूखने वाला। क वता म चाँद ने जाड़े के हसाब से ऊन का झगोला माँगा था — यह प्रश्न वही समझ
बाक दो मौसम पर लगाने को कह रहा है।
प्र.3 चाँद ने माँ से कुरता कराए पर लाने के लए क्य कहा होगा?
क्य क चाँद को ठं ड इतनी सता रही थी क उसे नए-पुराने से कोई मतलब ही नह रह गया था — उसे बस कोई गरम कपड़ा
चा हए था, चाहे वह कसी और का ही क्य न हो।
“आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़ े का,
न हो अगर तो ला दो कु रता ही कोई भाड़े का।”
इस एक पं क्त के पीछे चार कारण हो सकते ह —
1. ठं ड क जल्द थी। नया कुरता सलने म समय लगता है — कपड़ा खरीदो, नाप दो, दज़ के पास दो, तैयार होने का इंतज़ार
करो। कराए का कुरता उसी दन मल जाता है। चाँद को तो आज ही रात नकलना था।
2. वह माँ पर बोझ नह डालना चाहता था। नया कुरता सलवाने म पैसे लगते ह। कराए का कपड़ा सस्ता पड़ता है। ब ा जब
कहता है “न हो अगर तो…”, तो वह माँ को छू ट दे रहा होता है।
3. उसे अपनी समस्या मालूम थी। चाँद जानता है क उसका आकार रोज़ बदलता है। तो नया कुरता सलवाकर भी क्या होगा —
दो दन बाद वह बेकार हो जाएगा। कराए क चीज़ काम नकलने पर लौटा द जाती है।
4. कराए पर चीज़ लेना हमारे यहाँ आम बात है। शाद -ब्याह म लोग कपड़े, बरतन, कु सयाँ और बड सब कराए पर लेते ह —
क्य क उनका काम थोड़े दन का होता है।
सबसे सुंदर बात यही है: यह छोट -सी पं क्त हम बताती है क चाँद ज़ ज़रूर है, पर समझदार भी है। वह अपनी
माँ क मजबूरी सोच रहा है। इसी लए यह पं क्त पढ़ते ही चाँद पर प्यार आ जाता है।
शब्द जा नए: ‘भाड़ा’ का अथ है कराया — यानी कोई चीज़ थोड़े समय के लए इस्तेमाल करने के बदले दया जाने
वाला पैसा। ‘भाड़े का कुरता’ यानी कराए पर लया हुआ कुरता, जसे बाद म लौटाना होता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 य द माँ ने चाँद का कुरता सलवा दया होता तो क्या होता?
तो वह कुरता एक ही दन काम आता। अगले ही दन चाँद का नाप बदल जाता और कुरता या तो तंग हो जाता या ढ ला होकर
लटक जाता।
चाँद उस दन कैसा होता कुरते का क्या होता
िजस िदन नाप िलया गया कुरता बलकुल ठ क बैठता। चाँद खुश हो जाता।
अगले िदन चाँद थोड़ा बड़ा हआ
ु कुरता तंग हो जाता। बटन नह लगते, सलाई उधड़ने लगती।
पूिणमा के िदन पूर ा गोल हुआ कुरता बलकुल छोटा पड़ जाता। पहनना ही असंभव हो जाता।
घटते-घटते पतली रे खा जैस ा हुआ कुरता बहुत ढ ला होकर लटक जाता, जैसे कसी और का पहन लया हो।
अमावस्या को िदखाई ही नही ं िदया कुरता पहनाया कसे जाता? वह खाली आसमान म लटका रह जाता।
पूरा उत्तर इस तरह ल खए: य द माँ ने चाँद का कुरता सलवा दया होता तो वह केवल उसी दन ठ क बैठता जस दन नाप लया
गया था। अगले ही दन चाँद का आकार बदल जाता और कुरता बेकार हो जाता — कभी बहुत तंग, कभी बहुत ढ ला। पू णमा को
वह छोटा पड़ जाता और अमावस्या को पहनने वाला ही नह मलता। तब माँ को रोज़ नया कुरता सलवाना पड़ता, जो न संभव है
और न सही। इसी लए माँ ने पहले ही पूछ लया — “नाप तेरी कस रोज लवाएँ?”
क वता क दृ से: य द कुरता सल जाता तो क वता क सारी मठास ही चली जाती। क वता का मज़ा इसी बात
म है क समस्या का कोई हल नह नकलता — और उसी म हम चाँद के घटने-बढ़ने क स ी बात समझ आ जाती
है।
सो चए तो सही: क्या ऐसा कोई कपड़ा हो सकता है जो अपने आप छोटा-बड़ा हो जाए? हाँ! इला स्टक यानी रबड़
वाला कपड़ा थोड़ा-बहुत फैलता और सकुड़ता है। पर चाँद तो अंगुल-भर से एक फुट तक बदलता है — इतना
खचाव कसी कपड़े म नह होता।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
‘भर’ शब्द, दो बार दोहराए जाने वाले शब्द तथा सं ा, सवनाम, वशेषण और क्रया
भाषा क बात
प्र.1 “सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता ँ।” क वता क इस पं क्त म ‘भर’ शब्द का प्रयोग कया गया है।
अब आप ‘भर’ क सहायता से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए, जैसे – पानी गलास भर है, उसने
दन भर पढ़ाई क आ द।
‘भर’ एक छोटा-सा शब्द है, पर इसके दो काम ह। पहले वे दोन काम समझ ली जए, फर वाक्य बनाना आसान हो जाएगा।
‘भर’ का अथ कैसे पहचान उदाहरण
पूर ा, पूरे समय तक समय बताने वाले शब्द के बाद आता है रात भर, दन भर, साल भर, उम्र भर
पूर ा भरा हुआ , उतनी मात्र ा बरतन या नाप बताने वाले शब्द के बाद आता है गलास भर, मु भर, अंगुल भर, बाल्ट भर
अब पाँच वाक्य —
1. कल रात भर तेज़ हवा चलती रही और मुझे न द नह आई।
2. परीक्षा से पहले उसने दन भर पढ़ाई क ।
3. माँ ने मुझे एक गलास भर दूध पीने को दया।
4. च ड़या अपनी च च म मु भर तनके ले आई।
5. दूज का चाँद केवल अंगुल भर चौड़ा दखाई दे ता है।
पाँच और वाक्य, य द आप अ धक लखना चाह —
6. दाद ने साल भर का अनाज कोठरी म रख दया।
7. बाल्ट भर पानी से मने पूरा आँगन धो दया।
8. वह उम्र भर अपने गाँव म ही रहा।
9. मने हाथ भर लंबा रबन खरीदा।
10. ब े शाम भर मैदान म खेलते रहे।
ध्यान द जए: ‘भर’ को उस शब्द से जोड़कर मत ल खए जसके साथ वह आया है। ‘रातभर’ नह , ‘रात भर’ —
बीच म थोड़ी जगह छो ड़ए, जैसा क वता म छपा है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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mु छ शब्द का प्रयोग
नीचे दए गए वाक्य को ध्यान से प ढ़ए — (क) “ ठठु रकर कसी तरह यात्रा पूरी करता ँ।” (ख) “ ठठु र-
ठठु रकर कसी तरह यात्रा पूरी करता ँ।” अपनी बात पर बल दे ने के लए हम इस प्रकार केeक
प्र.2
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l अपनी लेखन-पु स्तका
co ह, जैसे – जल्द चलो, जल्द -जल्द चलो आ द। अब आप ऐसे ही पाँaचgवाक्य
दो बार .करते
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पहले दोन वाक्य का अंतर दे खए — इसी म पूरा नयम छपा है।
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(क) “िठठुर कर िकसी तरह यात्रा पूर ी करता चाँद ठं ड से काँपा और यात्रा पूरी कर ली। बात एक बार क लगती है।
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हू।
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(ख) “िठठुर -िठठुर कर िकसी तरह यात्रा पूर ी
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चाँद बार-बार, रात भर, लगातार ठठु रता रहा और तब कह जाकर यात्रा पूरी हुई। तकलीफ़
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करता हू।
ँ ” कह अ धक बड़ी लगती है।
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a नयम: जब हम अपनी बात पर बल दे ना होता है — यानी यह बताना होता है क काम बार-बार हुआ, लगातार हुआ या बहुत
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अ धक हुआ — तब हम शब्द को दो बार बोल दे ते ह। ऐसे शब्द को पुनरुक्त शब्द कहते ह (‘पुनरुक्त’ यानी फर से कहा हुआ)।
पाँच वाक्य —
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1. दे र हो रही है, जल्द -जल्द चलो। a
2. ठं ड म मेरे हाथ काँप-काँपकर रुक गए।
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3. वह धीरे-धीरे सी ढ़याँ चढ़ रहा था।
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4. ब े हँसते-हँसते लोटपोट हो गए।
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eचmऔर वाक्य —
5. माँ मुझे बार-बार जगाती रह , पर म सोता ही रहा।
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6. च ड़या चहक-चहककर पूरे पेड़ को जगा रही थी।
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7. वषा म हम भीगते-भीगते घर पहुँचे।
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8. दाद ने समझा-समझाकर मुझे सारा पाठ याद करा दया।
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9. वह दौड़ते-दौड़ते थक गया।
10. आसमान म तारे टम टम- टम टम कर रहे थे।
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क वता म और कहाँ है यह बात: इसी क वता म एक और दोहराया हुआ शब्द है — “सन-सन चलती हवा”। ‘सन’
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.cऔर है — “घटता-बढ़ता रोज” — यहाँ दो अलग शब्द जुड़कर बता रहे हagक यह क्रम रुकता ही नह ।
एक बार कहने से हवा का एक झ का लगता; ‘सन-सन’ कहने से लगता है क हवा रात भर लगातार चलती रही। एक
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 नीचे द गई क वता क पं क्तय म सं ा, सवनाम, वशेषण और क्रया पहचानकर उन्ह दए गए ान म ल खए
और उनका वाक्य म प्रयोग क जए — (पं क्तयाँ) हठ कर बैठा चाँद एक दन, माता से यह बोला। / आसमान का
सफर और यह मौसम है जाड़े का। / सलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झगोला। / ठठु र- ठठु रकर कसी तरह
यात्रा पूरी करता ँ।
पहले चार नाम याद कर ली जए, फर ता लका भरना आसान हो जाएगा।
शब्द-भेद क्या बताता है पहचान का सवाल
सं ा कसी व्य क्त, वस्तु, जगह या भाव का नाम “ कसका नाम है?” — जैसे चाँद, माता, ऊन
सवनाम सं ा क जगह आने वाला शब्द “नाम क जगह क्या आया है?” — जैसे यह, मुझे, कसी
िवशेषण सं ा क वशेषता — कैसा, कतना, कौन-सा “कैसा या कतना?” — जैसे मोटा, एक, पूरी
ि या काम होने या करने का बोध “क्या कया?” — जैसे बोला, सलवा दो, करता ँ
अब पूरी भरी हुई ता लका दे खए — पहली पं क्त पुस्तक म पहले से भरी है, बाक तीन हमने भरी ह।
पं क्त सं ा सवनाम वशेषण क्रया
हठ कर बैठा चाँद एक िदन, माता से हठ, चाँद, दन, माता यह एक कर बैठा, बोला
यह बोला।
आसमान का सफर और यह मौसम है आसमान, सफर , मौसम , यह जाड़े का है
जाड़े का। जाड़ा
िसलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक माँ, ऊन, िझंग ोला मुझे मोटा, एक , ऊन िसलवा दो
िझंग ोला। का
िठठुर -िठठुर कर िकसी तरह यात्रा पूर ी यात्र ा, तरह िकसी (और िछपा हआ
ु पूर ी िठठुर -िठठुर कर ,
करता हू।
ँ ‘मैं’) करता हू ँ
अब इन शब्द का अपने वाक्य म प्रयोग —
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
शब्द शब्द-भेद वाक्य
आसमान सं ा वषा के बाद आसमान बलकुल साफ़ हो गया।
सफर सं ा गाँव तक का सफर बस से दो घंटे म पूरा हुआ।
मौसम सं ा इस बार जाड़े का मौसम बहुत लंबा चला।
ऊन सं ा दाद ऊन से मेरे लए स्वेटर बुन रही ह।
िझंग ोला सं ा ठं ड म उसने ऊन का मोटा झगोला पहन लया।
यात्र ा सं ा हमारी रेल-यात्रा बहुत सुखद रही।
यह सवनाम यह मेरी लेखन-पु स्तका है।
मुझे सवनाम मुझे हरी सब्ज़ी बहुत पसंद है।
िकसी सवनाम कसी ने दरवाज़े पर दस्तक द ।
मोटा वशेषण सद म मोटा कंबल ओढ़ना अच्छा लगता है।
एक वशेषण मने बाज़ार से एक कलम खरीद ।
पूर ी वशेषण मने अपनी पूरी कहानी एक ही दन म पढ़ ली।
है क्रया आज मौसम बहुत सुहावना है।
िसलवा दो क्रया माँ, मेरे लए नई कमीज़ सलवा दो।
करता हू ँ क्रया म रोज़ सुबह उठकर व्यायाम करता ँ।
दो बात ध्यान र खए:
1. दूसरी और तीसरी पं क्त म ‘यह’ और ‘जाड़े का’ जैसे शब्द सं ा के साथ लगकर उसक वशेषता भी बता रहे ह।
‘यह मौसम’ म ‘यह’ बताता है — कौन-सा मौसम। इस लए इसे सवनाम भी कहा जाता है और सावना मक वशेषण
भी।
2. आ खरी पं क्त म कता (‘म’) लखा हुआ नह है, पर ‘करता ँ’ से पता चल जाता है क काम करने वाला ‘म’ ही
है। ऐसे छपे हुए कता को भी पहचानना चा हए।
चाँद का झगोला — पृष्ठ 27, 28 और 29
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
अधूरे संवाद पूरे क जए और उन पर अ भनय क जए
चाँ द का झगोला सं वाद-ले ख न
प्र.1 (क) मान ली जए क चाँद, झगोले के लए माँ, कपड़े के दुकानदार और दज़ से संवाद करता है। बातचीत के कुछ
अंश नीचे दए गए ह। आप इन्ह आगे बढ़ाइए। आप संवाद अपनी मातृभाषा म भी लख सकते ह। — चाँद
और माँ का संवाद (चाँद: माँ, मुझे बहुत ठं ड लगती है। मेरे लए एक मोटा झगोला सलवा दो! / माँ: तुझे सच
म ठं ड सताती होगी ले कन एक समस्या है। / चाँद: समस्या? कैसी समस्या, माँ? / माँ: तेरा आकार तो
प्र त दन बदलता रहता है। कभी छोटा, कभी बड़ा, कभी एकदम गायब! म कैसे नाप लूँ? / चाँद: (सोचकर)
अरे हाँ! ले कन फर भी कोई उपाय तो होगा?) — आगे के संवाद ल खए।
यहाँ चार पं क्तयाँ खाली छोड़ी गई ह — माँ, चाँद, माँ, चाँद। इन्ह इस तरह भरा जा सकता है क बात आगे भी बढ़े और कोई हल
भी नकल आए।
अ ा संवाद कैसे लख — चार बात:
1. जो बात पहले कही जा चुक है, उसी से आगे बढ़ाइए।
2. हर पात्र अपने स्वभाव के हसाब से बोले — चाँद ब जैसा, माँ समझदार।
3. वाक्य छोटे र खए, जैसे लोग सचमुच बोलते ह।
4. अंत म या तो कोई हल नकले या बात हँसी म खत्म हो।
नमूना उत्तर — पूरा संवाद:
कौन क्या कहता है
चाँद माँ, मुझे बहुत ठं ड लगती है। मेरे लए एक मोटा झगोला सलवा दो! (पुस्तक म दया हुआ)
माँ तुझे सच म ठं ड सताती होगी ले कन एक समस्या है। (पुस्तक म दया हुआ)
चाँद समस्या? कैसी समस्या, माँ? (पुस्तक म दया हुआ)
माँ तेरा आकार तो प्र त दन बदलता रहता है। कभी छोटा, कभी बड़ा, कभी एकदम गायब! म कैसे नाप लूँ? (पुस्तक म दया हुआ)
चाँद (सोचकर) अरे हाँ! ले कन फर भी कोई उपाय तो होगा? (पुस्तक म दया हुआ)
माँ एक उपाय तो है, बेटा। तेरे लए ऐसा कपड़ा चुना जाए जो खच भी जाए और सकुड़ भी जाए।
चाँद वाह माँ! फर तो म छोटा होऊँ या बड़ा, झगोला मेरे बदन म आ ही जाएगा।
माँ पर एक बात और है। अमावस्या को तो तू दखता ही नह । उस दन झगोला पहनाऊँगी कसे?
चाँद (हँसकर) उस दन आप उसे तह करके रख दे ना, माँ। छु ट्ट के दन मुझे कपड़े क क्या ज़रूरत!
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द जए: इस नमूने म दोन समस्याएँ उठाई गई ह — नाप क और अमावस्या क । अच्छे संवाद म बात आगे
बढ़ती है, वह क वह नह रहती। आप चाह तो अपनी मातृभाषा (भोजपुरी, मालवी, अवधी, मराठ , बांग्ला — जो
भी आपक हो) म भी यही संवाद लख सकते ह।
प्र.1 (ख) चाँद और कपड़े का दुकानदार (चाँद: दुकानदार जी, मुझे एक गरम कपड़ा चा हए जससे मेरी सद दूर हो
जाए। / दुकानदार: अवश्य, कतने मीटर चा हए? / चाँद: यही तो समस्या है! म कभी छोटा होता ँ, कभी
बड़ा। आप ही बताइए… कतने मीटर लूँ? / दुकानदार: (हँसकर) अरे छोटू चाँद! जब आपका नाप ही तय
नह तो कपड़ा कैसे दूँ ? पहले नाप तो तय करके आओ!) — आगे के संवाद ल खए।
यहाँ पाँच पं क्तयाँ खाली ह — चाँद, दुकानदार, चाँद, दुकानदार, चाँद।
नमूना उत्तर — पूरा संवाद:
कौन क्या कहता है
चाँद दुकानदार जी, मुझे एक गरम कपड़ा चा हए जससे मेरी सद दूर हो जाए। (पुस्तक म दया हुआ)
दुकानदार अवश्य, कतने मीटर चा हए? (पुस्तक म दया हुआ)
चाँद यही तो समस्या है! म कभी छोटा होता ँ, कभी बड़ा। आप ही बताइए… कतने मीटर लूँ? (पुस्तक म दया हुआ)
दुकानदार (हँसकर) अरे छोटू चाँद! जब आपका नाप ही तय नह तो कपड़ा कैसे दूँ ? पहले नाप तो तय करके आओ! (पुस्तक म दया हुआ)
चाँद दुकानदार जी, नाप तो म कभी तय कर ही नह सकता। पर आप इतना बता द जए — मेरे सबसे बड़े दन का नाप कतना
होगा?
दुक ानदार पू णमा वाले दन का? तब तो आप पूरे गोल हो जाते ह। उतने के लए तीन मीटर कपड़ा चा हए।
चाँद तो तीन मीटर ही दे द जए। बड़े दन का कपड़ा छोटे दन भी काम आ जाएगा — बस थोड़ा ढ ला रहेगा।
दुक ानदार बात तो आपक समझदारी क है! और यह ली जए, ऊन का यह मोटा कपड़ा सबसे गरम है। इसम थोड़ा खचाव भी है।
चाँद बहुत-बहुत धन्यवाद, दुकानदार जी! अब म इसे लेकर सीधे दज़ जी के पास जाता ँ।
क्य यह उत्तर अ ा है: दुकानदार ने कहा था — “पहले नाप तो तय करके आओ।” अच्छे संवाद म इसी बात का
उत्तर मलना चा हए। यहाँ चाँद ने एक व्यावहा रक हल नकाला — सबसे बड़े नाप का कपड़ा ले लो। यही असली
ज़दगी म भी कया जाता है, इसी लए माता- पता ब के कपड़े थोड़े बड़े नाप के लेते ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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mते हुए) तो फर
चाँद और दज़ का संवाद (चाँद: दज़ जी, मेरे लए एक कुरता सल द जए। / दज़ : बलकुल! ले कन पहले
नाप तो दो। / चाँद: यही तो समस्या है! कभी म छोटा, कभी बड़ा हो जाता ँ। / दज़ : (हँeस
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होते हुए) फर तो मुझे प्र त दन नए कपड़े मलगे! ले कन माँ मानगी नह !) — आगे के संवाद ल खए।
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यहाँ चार पं क्तयाँ खाली ह — दज़ , चाँद, दज़ , चाँद। चाँद ने आ खर म एक नई बात कही है — “माँ मानगी नह !” अच्छे उत्तर म
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इसी बात को आगे बढ़ाना चा हए।
नमूना उत्तर — पूरा संवाद: a g
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दज़ जी, मेरे लए एक कुरता सल द जए। (पुस्तक म दया हुआ)
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चाँद यही तो समस्या है! कभी म छोटा, कभी बड़ा हो जाता ँ। (पुस्तक म दया हुआ)
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दज़ (हँसते हुए) तो फर ऐसा करो, प्र त दन मेरे पास आओ और म प्रत्येक दन तुम्हारे नाप का नया कुरता सल दूँ गा! (पुस्तक म दया
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(प्रसन्न होते हुए) फर तो मुझे प्र त दन नए कपड़े मलगे! ले कन माँ मानगी नह ! (पुस्तक म दया हुआ)
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दज़ ठ क कहते हो। रोज़ नया कुरता सलवाना न माँ के बस क बात है, न मेरे। इतना कपड़ा और इतना समय कहाँ से आएगा?
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.co तो फर कोई और उपाय बताइए, दज़ जी। ठं ड तो मुझे आज ही रात लगेगी। a g
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चाँद
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agl दज़ एक उपाय है। म तुम्हारे सबसे बड़े नाप का कुरता सल दे ता ँ और उसम कमर पर नाड़ा तथा कनार पर इला स्टक लगा दे ता ँ।
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जस दन तुम छोटे हो, नाड़ा कस लेना; जस दन बड़े हो, ढ ला कर दे ना।
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चाँद
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(खुश होकर) वाह दज़ जी! यह तो कमाल का उपाय है। अब न माँ को चता होगी, न मुझे ठं ड लगेगी। बहुत-बहुत धन्यवाद!
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तीन संवाद मलाकर दे खए: माँ, दुकानदार और दज़ — तीन एक ही बात कहते ह क नाप तय हुए बना कपड़ा
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नह बनता। पर तीन क बात का ढं ग अलग है। माँ चता करती है, दुकानदार हँसता है, दज़ मज़ाक म हल सुझा दे ता
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है। संवाद लखते समय हर पात्र का यही अपना ढं ग बनाए र खए।
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agl अब आप इन संवाद पर कक्षा म शक्षक क सहायता से अ भनय क जए।
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प्र.2
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यह करके सीखने वाला काम है। नीचे इसे करने का पूरा तरीका दया गया है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
चरण-दर-चरण तैयारी:
चरण 1 — कक्षा को चार-चार ब के समूह म बाँ टए।
चरण 2 — हर समूह म भू मकाएँ बाँट ली जए — चाँद, माँ, दुकानदार, दज़ ।
चरण 3 — अपने-अपने संवाद कागज़ पर लखकर दो-तीन बार प ढ़ए, फर याद क जए।
चरण 4 — बना कपड़े-लत्ते के एक बार पूरा अभ्यास ( रहसल) क जए।
चरण 5 — सामान तैयार क जए — गत्ते का गोल चाँद, फ ता (नापने के लए), कपड़े का एक टु कड़ा, कची।
चरण 6 — कक्षा के सामने तीन दृश्य क्रम से क जए — पहले माँ का, फर दुकान का, फर दज़ का।
चरण 7 — अंत म दशक ब े बताएँ क उन्ह क्या अच्छा लगा और क्या और अच्छा हो सकता था।
पात्र कैसे बो लए क्या पह नए या पक ड़ए
चाँद ब जैसी ज़द भरी और थोड़ी काँपती हुई आवाज़ म। बीच-बीच म गत्ते का गोल सफ़ेद चाँद चेहरे के पास पकड़ या सर
ठं ड से सकु ड़ए। पर बाँध ल।
माँ धीमी, प्यार भरी और समझाने वाली आवाज़ म। सर पर चुनरी या दुपट्टा।
दुक ानदार तेज़ और हँसमुख आवाज़ म, जैसे दुकान पर ग्राहक से बात होती है। कंधे पर गमछा और हाथ म कपड़े का थान (चादर
का टु कड़ा)।
दज़ मज़ाक करते हुए, हँसते-हँसते। गले म नापने का फ ता और हाथ म कची (कागज़
क बनी हुई)।
अ भनय म सबसे ज़रूरी बात: केवल शब्द बोल दे ना अ भनय नह है। आवाज़ का उतार-चढ़ाव, चेहरे के भाव और
हाथ के इशारे मलकर अ भनय बनाते ह। जब चाँद कहे “ ठठु र- ठठु रकर”, तो सचमुच काँपकर दखाइए। जब दज़
हँसे, तो सचमुच हँ सए। और सबसे बड़ी बात — इतनी ऊँची आवाज़ म बो लए क पछली पं क्त तक सुनाई दे ।
क वता से आगे — पृष्ठ 29
क वता को अपने घर और अपने जीवन से जो ड़ए
क वता से आगे
प्र.1 क्या चाँद क तरह आप भी अपनी माँ से कसी वस्तु के लए हठ करते ह? आप अपनी माँ को इसके लए कैसे
मनाते ह?
हाँ, हम सब कभी-न-कभी हठ करते ह। पर हठ करने से बात कम बनती है, समझाने से ज़्यादा।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
मनाने का तरीका वह कैसे काम करता है
कारण बताना बता द जए क वह चीज़ आपको क्य चा हए — जैसे “मेरी पुरानी कॉपी भर गई है।” कारण सुनते ही बड़े लोग
आधे मान जाते ह।
सही समय चुनना जब माँ काम म उलझी ह या थक ह , तब मत क हए। शाम को फुरसत म या खाना खाते समय क हए।
अपना काम करके गृहकाय पूरा करके, कमरा ठ क करके माँ गए। तब आपक बात म वज़न आ जाता है।
िदखाना
इंतज़ार करने को तैयार क हए — “अभी नह तो अगले महीने ले लेना।” इससे माँ को लगता है क आप उनक क ठनाई समझते ह।
रहना
कम में काम चलाना महँगी चीज़ क जगह सस्ती चीज़ मान लेना। क वता म चाँद ने यही कया — “ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।”
रोना-िचल्लाना नही ं ज़द करके रोने से माँ को दुख होता है और बात बनने क जगह बगड़ जाती है।
नमूना उत्तर: हाँ, कभी-कभी म भी चाँद क तरह अपनी माँ से कसी चीज़ के लए हठ कर बैठता ँ। पछली बार मने रंग का डब्बा
माँगा था। मने पहले उन्ह कारण बताया क व ालय म चत्रकला क प्र तयो गता है और मेरे पुराने रंग सूख चुके ह। मने अपना सारा
गृहकाय पूरा करके शाम को फुरसत के समय बात क । जब माँ ने कहा क इस महीने ख़च ज़्यादा है, तो मने कहा क म अगले महीने
तक इंतज़ार कर लूँगा। यह सुनकर माँ खुश हो गईं और उन्ह ने उसी सप्ताह मुझे रंग दला दए। मने सीखा क रोने- चल्लाने से नह ,
प्यार से समझाने से बात बनती है।
क वता से जो ड़ए: चाँद ने भी यही कया। उसने पहले कारण बताया — “सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से
मरता ँ।” फर उसने माँ को छू ट भी द — “न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।” यही मनाने का सबसे
अच्छा तरीका है।
प्र.2 आपक माँ आपको कसी काम के लए कैसे मनाती ह?
माँ प्रायः डाँटकर नह , समझाकर मनाती ह। वे कारण बताती ह, थोड़ा लालच दे ती ह, कभी साथ बैठकर काम करती ह और कभी
काम को खेल बना दे ती ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
माँ का तरीका उदाहरण
कारण बताना “दूध पओगे तो ह याँ मज़बूत ह गी और लंबाई बढ़े गी।”
प्यार से पुक ारना “चलो मेरे राजा बेटा, बस दो मनट का काम है।”
काम को खेल बना दे ना “दे ख, तुम पहले खलौने समेटते हो या म बरतन?”
थोड़ा-सा इनाम “गृहकाय पूरा कर लो, फर एक घंटा खेलने जाना।”
साथ बैठ जाना पढ़ाई के समय पास बैठ जाती ह, जससे मन लगा रहता है।
उदाहरण दे ना “दे खो, द द ने भी अपना काम खुद कया था।”
कहानी सुनाना खाना खलाते समय कहानी सुनाकर पूरी थाली खत्म करवा दे ती ह।
भरोसा जताना “मुझे पता है तुम यह कर लोगे।” यह सुनकर हम्मत आ जाती है।
नमूना उत्तर: मेरी माँ मुझे कसी काम के लए कभी ज़बरदस्ती नह करत । वे पहले कारण बताती ह क वह काम क्य ज़रूरी है।
जब मुझे पढ़ने का मन नह होता तो वे मेरे पास आकर बैठ जाती ह और कहती ह — “बस आधा घंटा पढ़ लो, फर खेलने चले
जाना।” कभी-कभी वे काम को खेल बना दे ती ह और कहती ह क दे खते ह कौन पहले अपना काम पूरा करता है। जब म काम कर
लेता ँ तो वे शाबाशी दे ती ह। इसी तरीके से म आसानी से मान जाता ँ।
ध्यान द जए: प्रश्न 1 म आप माँ को मनाते ह और प्रश्न 2 म माँ आपको मनाती ह। दोन म एक बात एक जैसी है
— जो प्यार से और कारण बताकर कहता है, उसक बात मान ली जाती है।
प्र.3 गरमी, सद या वषा से बचने के लए आपक माँ आपको क्या कहती अथवा क्या-क्या करती ह?
माँ हर मौसम के हसाब से हमारे खाने, कपड़ और आदत को बदल दे ती ह। नीचे तीन मौसम क बात अलग-अलग द गई है।
मौसम माँ क्या कहती ह माँ क्या करती ह
गरमी “धूप म टोपी लगाकर जाना।” “पानी पतले सूती कपड़े नकालती ह, बस्ते म पानी क बोतल रखती ह, न बू-पानी, छाछ,
खूब पीना।” “बाहर का कटा फल मत आम का पना और सत्तू पलाती ह, दोपहर म बाहर नह जाने दे त और खड़ कय
खाना।” पर परदा डाल दे ती ह।
सद “स्वेटर पहने बना बाहर मत नकलना।” ऊनी कपड़े, मोज़े, टोपी और दस्ताने पहनाती ह, रात म रजाई ओढ़ा दे ती ह, गरम
“कान ढककर रखो।” “ठं डा पानी मत दूध, हलवा, गजक और मूँगफली दे ती ह, सुबह क धूप म बैठाती ह और सरस के
पीना।” तेल क मा लश करती ह।
वष “छाता लेकर जाओ।” “पानी म भीगकर बस्ते म छाता या बरसाती रखती ह, भीगकर आने पर तुरंत सर प छकर कपड़े
मत आना।” “गंदे पानी म पैर मत बदलवाती ह, उबला पानी पलाती ह, गरम चाय या अदरक वाला काढ़ा दे ती ह और
डालना।” घर के आस-पास पानी जमा नह होने दे त ।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: मेरी माँ हर मौसम म मेरा बहुत ध्यान रखती ह। गरमी म वे मुझे पतले सूती कपड़े पहनाती ह, बस्ते म पानी क बोतल
रख दे ती ह और कहती ह क धूप म टोपी लगाकर ही नकलना। वे मुझे न बू-पानी और छाछ पलाती ह। सद म वे स्वेटर, मोज़े और
टोपी पहनाकर भेजती ह और रात म रजाई ओढ़ा दे ती ह। वे गरम दूध और गजक दे ती ह और सुबह क धूप म बैठने को कहती ह।
बरसात म वे मेरे बस्ते म छाता रख दे ती ह और भीगकर आने पर तुरंत कपड़े बदलवाती ह। मुझे लगता है क माँ को हमारी चता ठ क
वैसे ही रहती है जैसे क वता म चाँद क माँ को थी।
क वता से जो ड़ए: क वता म चाँद ठं ड क शकायत करता है और माँ तुरंत उपाय सोचने लगती है। आपके घर म
भी यही होता है। मौसम बदलते ही सबसे पहले माँ के काम बदल जाते ह — कपड़े, खाना और नयम, सब बदल
जाते ह।
सो चए, सम झए और बताइए — पृष्ठ 29
कल्पना और समझ के प्रश्न
सो चए, सम झए और बताइए
प्र.1 क वता म चाँद अपनी माँ से बात कर रहा है। मान ली जए क चाँद बोल नह सकता। अब वह अपनी माँ को
अपनी बात कैसे बताएगा?
बोलना ही बात कहने का इकलौता तरीका नह है। य द चाँद बोल न सके तो वह इशार , चेहरे के भाव, चत्र और लखे हुए शब्द
से अपनी बात बता सकता है।
तरीका चाँद क्या करेगा माँ क्या समझ जाएँगी
शरीर से इशारा ठं ड से काँपकर, दाँत कट कटाकर, दोन बाँह अपने शरीर के चार ओर बेटे को ठं ड लग रही है।
लपेटकर दखाएगा।
हाथ से इशारा अपने शरीर क ओर इशारा करके फर कपड़े पहनने का इशारा करेगा। उसे कुछ पहनने को चा हए।
चेहरे के भाव उदास मुँह बनाएगा, माँ क ओर याचना भरी दृ से दे खेगा। वह कुछ माँग रहा है।
िचत्र बनाकर कागज़ पर एक कुरते का चत्र बनाकर माँ को दखाएगा। उसे कुरता चा हए।
िलखकर कागज़ पर लख दे गा — “माँ, मुझे ऊन का मोटा झगोला सलवा दो।” पूरी बात एक बार म।
कोई चीज़ माँ का पुराना ऊनी शॉल उठाकर ले आएगा और अपने ऊपर डाल लेगा। उसे ऐसा ही गरम कपड़ा चा हए।
िदखाकर
साक
ं े ितक भाषा इशार क भाषा म अपनी बात कहेगा। य द माँ भी यह भाषा जानती ह तो
पूरी बात।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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नमूना उत्तर: य द चाँद बोल न सके तो भी वह अपनी बात माँ तक पहुँचा दे गा। वह ठं ड से काँपकर और अपनी बाँह शरीर के चार
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ओर लपेटकर दखाएगा क उसे ठं ड लग रही है। फर वह माँ का पुराना ऊनी शॉल उठाकर अपने ऊपर डाल लेगा, जससे माँ समझ
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सकता है। माँ तो .बc े का चेहरा दे खकर ही उसक बात समझ जाती है।
जाएँगी क उसे भी ऐसा ही गरम कपड़ा चा हए। वह कागज़ पर एक झगोले का चत्र भी बना सकता है या अपनी बात लखकर दे
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g क बात: हमारे आस-पास कई लोग बोल या सुन नह पाते। वे सांके तक भाषा यानी इशार क भाषा से बात
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करते ह — इसम हाथ क मुद्राओं, चेहरे के भाव और शरीर क हरकत से पूरी बात कही जाती है। यह भी एक पूरी
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भाषा है। ऐसे सा थय से बात करते समय धैय र खए, उनका चेहरा दे खकर सु नए और उनका मज़ाक कभी मत ag
उड़ाइए।
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m के बारे म कैसे
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मान ली जए क चाँद का एक मत्र है जो दे ख नह सकता। चाँद उसे अपने बदलते हुए आकार
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समझाएगा?
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जो मत्र दे ख नह सकता, उसे छू कर, सुनकर और रोज़ क जानी-पहचानी चीज़ से मलाकर समझाना होगा। रंग या चमक क
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बात करने से कुछ समझ नह आएगा।
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समझाने क व ध — चार चरण: gl
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चरण 1 — उसके हाथ म ऐसी चीज़ द जए जनका आकार चाँद के अलग-अलग रूप जैसा हो।
चरण 2 — बताइए क कौन-सी चीज़ कस दन के चाँद जैसी है।
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चरण 3 — क्रम से दन गनाइए, ता क उसे बदलाव का सल सला समझ आ जाए।
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चरण 4 — जो चीज़ वह पहले से जानता है (जैसे गरमी, आवाज़, समय), उनसे जोड़ द जए।
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a चाँद का रूप मत्र को क्या छू ने को द चाँद क्या कहेगा
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अमावस्या — कु छ खाली हथेली “इस दन म ऐसा ही ँ — बलकुल कुछ नह ।”
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दू ज — पतली रे खा
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अपने नाख़ून का कनारा या कट हुई नाख़ून-सी पतली “इस दन म इतना ही पतला होता ँ।”
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आधा चाँद आधी कट रोट या आधी कटोरी “इस दन म आधी रोट जतना होता ँ।”
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पूिणमा — पूर ा गोल पूरी गोल रोट या थाली
a g“इस दन म पूरी थाली जतना गोल हो जाता
l a se ँ।”
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िफर घटना आटे के गोले को रोज़ थोड़ा-थोड़ा दबाकर छोटा करना “ फर म रोज़ थोड़ा-थोड़ा ऐसे ही घटता जाता
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ँ।”
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a s em उसे अलग-अलग चीज़ छु आएगा। पहले वह उसक खाली हथेली पर हाथ फेरकर
glहोता ँ, बलकुल कुछ नह ।” फर वह उसे अपने नाख़ून का कनारा छु आकर कहेगा — “दूज
नमूना उत्तर: चाँद अपने मत्र का हाथ पकड़कर
कहेगा — “अमावस्या को म ऐसा ही
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को म इतना ही पतला होता ँ।” इसके बाद आधी कट रोट छु आकर कहेगा — “आठव दन म आधी रोट जतना होता ँ।” और
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
फर पूरी गोल रोट छु आकर कहेगा — “पू णमा को म पूरी थाली जतना गोल हो जाता ँ।” वह आटे का एक गोला बनाकर रोज़
उसे थोड़ा-थोड़ा दबाएगा, जससे मत्र अपनी उँ ग लय से महसूस कर ले क म रोज़ थोड़ा-थोड़ा घटता ँ। इस तरह उसका मत्र बना
दे खे भी मेरे बदलते आकार को समझ जाएगा।
यह सीखने लायक बात है: जो साथी दे ख नह सकते, वे छू कर, सुनकर और सूँघकर दु नया को जानते ह। वे ेल
ल प से पढ़ते ह, जसम कागज़ पर उभरे हुए बदु उँ ग लय से पढ़े जाते ह। इस लए ऐसे मत्र को कुछ समझाना हो
तो चीज़ को उसके हाथ म दे द जए — वही सबसे अच्छा तरीका है।
प ढ़ए और सम झए — पृष्ठ 29 और 30
चाँद क माँ का व ापन प ढ़ए और अपना व ापन बनाइए
प ढ़ए और सम झए व ापन
प्र.1 चाँद के लए कुरता सलना एक क ठन काय है। इस लए चाँद क माँ ने उसका कुरता सलवाने के लए एक
व ापन प्रका शत कया है। इसे प ढ़ए और इसका प्रचार-प्रसार कर चाँद क माँ क सहायता क जए।
पहले यह समझ ली जए क व ापन क्या होता है — कसी बात या ज़रूरत क सूचना बहुत-से लोग तक पहुँचाने के लए जो
छपवाया जाता है, उसे व ापन कहते ह। ‘प्रचार-प्रसार’ का अथ है — उस बात को दूर-दूर तक फैलाना।
अब दे खए क इस व ापन म क्या-क्या है और वह क्य ज़रूरी है —
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
व ापन का उसम क्या लखा है वह क्य ज़रूरी है
भाग
शीषक “चाँद क माँ क वशेष घोषणा!” पहली नज़र म ही पता चल जाए क यह
कसक ओर से है।
पुक ार “क्या आप ह सबसे कुशल दज़ ? क्या आप सल सकते ह ऐसा कुरता जो सीधे सवाल पूछने से पढ़ने वाला रुक
प्र त दन बदलते आकार म भी फट आए?” जाता है और आगे पढ़ता है।
सम स्या “मेरा बेटा चाँद कभी एक अंगुल-भर छोटा तो कभी एक फुट मोटा हो जाता काम क्या है, यह साफ़-साफ़ बताना
है। उसके लए एक ऐसा कुरता चा हए जो हर दन उसके शरीर म फट बैठ ज़रूरी है, वरना कोई आवेदन ही नह
सके।” करेगा।
आवश्यकता “ऐसा कुरता जो अपने-आप छोटा-बड़ा हो सके। ऊन का मोटा झगोला ता क शत एक-एक करके लखी ह, जससे
ठं ड से बच सके। य द कुरता नह बन सकता तो भाड़े का भी चलेगा!” दज़ को पता रहे क क्या-क्या चा हए।
पुर स्कार “जो भी दज़ इस अ त कुरते को सलने म सफल होगा, उसे मलेगा वशेष इनाम क बात सुनकर लोग काम करने
पुरस्कार!” को उत्सुक होते ह।
स्थान “चाँद क माँ का घर” कहाँ जाना है, यह बताना ज़रूरी है।
संपक करे ं “आकाशवाणी से संदेश भेज” बात कैसे करनी है, यह भी बताना
पड़ता है।
अंितम पंिक्त “शीघ्र आवेदन कर क्य क चाँद ठं ड से ठठु र रहा है।” जल्द करने का कारण बता दे ने से लोग
दे र नह करते।
अब प्रचार-प्रसार कैसे कर — सात तरीके:
1. व ापन को बड़े अक्षर म चाट पेपर पर लखकर रंगीन बनाइए और कक्षा के सूचना-पट्ट पर लगाइए।
2. व ालय क प्राथना-सभा म इसे ऊँची आवाज़ म पढ़कर सुनाइए।
3. द वार-प त्रका या हस्त ल खत प त्रका म इसे चाँद के चत्र के साथ छा पए।
4. छोटे -छोटे पच बनाकर दूसरी कक्षाओं म बाँ टए।
5. चाँद और दज़ का नाटक करके यही बात सबको दखाइए।
6. घर जाकर अपने मोहल्ले के दज़ चाचा को यह पढ़कर सुनाइए और उनसे पू छए क क्या ऐसा कुरता बन सकता है।
7. अपने सा थय से क हए क वे भी इसे अपने घर म सुनाएँ — इस तरह बात एक से दस, दस से सौ लोग तक पहुँच जाएगी।
ध्यान द जए: व ापन म बात कम शब्द म और बड़े अक्षर म लखी जाती है, ता क दूर से पढ़ जा सके। ऊपर
वाले व ापन म भी हर बात अलग-अलग शीषक के नीचे, एक-दो पं क्तय म लखी गई है।
प्र.2 अब एक रोचक व ापन तैयार क जए जसम आप अपने लए कोई वस्तु मँगवा रहे ह ।
व ापन बनाना आसान है, बस उसके छह हस्से याद र खए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
व ापन बनाने क व ध — छह चरण:
चरण 1 — शीषक ल खए, बड़े और आकषक अक्षर म।
चरण 2 — समस्या या ज़रूरत बताइए — आपको क्या चा हए और क्य ।
चरण 3 — शत ल खए — वह चीज़ कैसी होनी चा हए।
चरण 4 — पुरस्कार या बदले म क्या — यह ल खए।
चरण 5 — ान और संपक ल खए।
चरण 6 — अंत म एक ज़ोरदार पं क्त जो ड़ए, जससे लोग जल्द कर। कनार पर चत्र बनाकर सजाइए।
नमूना व ापन 1 — ऐसा बस्ता चा हए जो भारी न लगे
िव ापन
क क्षा 5 के एक िव ाथ की िवशेष घोषणा!
क्या आप बना सकते है ं ऐसा बस्ता जो िकताबों से भरा हो, िफर भी कं धे न दुखाएँ?
सम स्या: मेरा बस्ता इतना भारी है िक आधे रास्ते में ही मेरे कं धे दुखने लगते है।
ं वष में िकताबे ं भीग भी जाती
है।
ं
आवश्यकता:
ऐसा बस्ता जो हल्का हो और चौड़ ी पि यों वाला हो।
ऐसा कपड़ ा जो पानी से िकताबों को बचा ले।
भीतर अलग-अलग खाने , तािक कॉपी-िकताबे ं ढू ँढ़नी न पड़ ।
ें
पानी की बोतल के िलए एक अलग जेब।
पुरस्कार: जो भी ऐसा बस्ता बना दे गा, उसे मेरी ओर से एक सुंद र िचत्र भे ंट िकया जाएगा और पूरी कक्षा उसका
धन्यवाद करेगी।
स्थान : कक्षा 5, हमारा िव ालय
संपक करे:ं मध्यावकाश में कक्षा में आकर िमले ं
शीघ आइए, क्योंिक परीक्षा पास है और िकताबे ं रोज़ बढ़ती जा रही है!ं
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
नमूना व ापन 2 — ऐसी छतरी चा हए जो हवा म न उलटे
िव ापन
क्या आप है ं सबसे कु शल छाता बनाने वाले?
सम स्या: बरसात में जब ते ज़ हवा चलती है तो मेरा छाता उलट जाता है और मै ं पूरा भीग जाता हूँ।
आवश्यकता:
ऐसा छाता जो ते ज़ हवा में भी सीधा रहे।
जो मोड़ कर बस्ते में रखा जा सके ।
िजसका रंग चटक हो, तािक दू र से िदख जाए।
पुरस्कार: सफल होने वाले का नाम हमारी दीवार-पित्रका पर छापा जाएगा।
स्थान : मेरा घर, गली नंबर 4
संपक करे:ं हमारे िव ालय के पते पर पत्र भे जें
जल्दी कीिजए, वष िकसी िदन भी शुरू हो सकती है!
अ े व ापन क पहचान: वह छोटा, साफ़ और मज़ेदार होता है। उसम केवल काम क बात होती है। बड़े अक्षर,
थोड़े शब्द और एक-दो चत्र — इतना काफ़ है। पूरा अनुच्छेद लखने से व ापन कोई नह पढ़ता।
आपक कलाकारी — पृष्ठ 30 और 31
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Page 40
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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आइए, चाँद के लए एक कुरता बनाएँ
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आपक कलाकारी गतवध
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a s em चाँद के लए एक कुरता बनाएँ। सामग्री: रंगीन कागज, ग द, कची, लटर, कपड़े के छोटे टुकड़े। बनाने क
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आइए,
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व ध — • चाँद के लए कुरते का एक बड़ा चत्र बनाइए। • अब अलग-अलग रंगीन कागज या कपड़े के टु कड़ से
चाँद के लए सुंदर कुरता तैयार क जए। • लटर या सतार क आकृ त बनाकर उसे सजाइए। • अब तैयार कुरते
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को कक्षा म प्रद शत क जए।
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यह हाथ से करने वाला काम है। नीचे पूरी तैयारी और हर चरण अलग-अलग दया गया है, ता क आप दे खकर कर सक।
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सामग्री कस काम आएगी
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रंग ीन कागज़ कुरते का शरीर और उसक बाँह बनाने के लए।
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ag गोंद टु कड़ को चपकाने के लए।
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कैं ची कागज़ और कपड़ा काटने के लए। (बड़ क दे खरेख म ही चलाइए।)
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कुरते पर चमक और सतारे बनाने के लए।
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कपड़े के छोटे टुक ड़े कुरते पर असली कपड़े जैसा कनारा और जेब बनाने के लए।
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एक बड़ा ग ा या चाट पेपर नीचे आधार के लए, जस पर कुरता चपकाया जाएगा।
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m क व ध — छह चरण: a g
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agl चरण 1 — चाट पेपर पर प सल से कुरते का एक बड़ा चत्र बनाइए — गले का घेरा, दोन बाँह और नीचे का घेर।
चरण 2 — उस चत्र को कची से काट ली जए। यही आपके कुरते का आकार है।
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चरण 3 — अब अलग-अलग रंग के कागज़ या कपड़े के छोटे -छोटे टु कड़े का टए और उन्ह कुरते पर चपकाइए। रंग
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मलाकर लगाइए तो कुरता और सुंदर दखेगा।
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चरण 4 — गले, बाँह के कनारे और नीचे के घेर पर कपड़े क एक अलग रंग क पट्ट चपकाइए।
चरण 5 — ग्लटर से सतारे, चाँद और बेल-बूटे बनाकर उसे सजाइए। चाह तो बटन के लए गोल कागज़ चपका
द जए।
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चरण 6 — ग द सूख जाने पर कुरते को कक्षा के सूचना-पट्ट पर लगाइए और अपने नाम क एक पच नीचे चपका
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
यह भी क जए कैसे
कु रते को ‘छोटा-बड़ा’ कुरते के दोन कनार पर मोड़ (प्लीट) रखकर चपकाइए। ख चने पर वह चौड़ा हो जाएगा और छोड़ने पर सकुड़
बनाइए जाएगा — ठ क चाँद क ज़रूरत के अनुसार!
चाँद भी बनाइए सफ़ेद कागज़ का एक बड़ा गोल चाँद काटकर कुरते के ऊपर लगाइए, ता क दख जाए क कुरता कसका है।
नाम की प ी लगाइए नीचे ल खए — “चाँद का झगोला, बनाने वाले: (अपना नाम)”।
क क्षा में पदशनी सब ब के कुरते एक साथ द वार पर लगाइए। सबसे अलग दखने वाले तीन कुरत को कक्षा मलकर चुन सकती
है।
ध्यान रखने क बात: कची हमेशा बड़ क दे खरेख म चलाइए और उसक नोक अपनी या कसी और क ओर मत
क जए। ग द कम मात्रा म लगाइए, वरना कागज़ फूल जाता है। काम खत्म होने पर कागज़ के टु कड़े कूड़ेदान म
डालकर अपनी मेज़ साफ़ कर द जए।
पुस्तकालय एवं अन्य ोत — पृष्ठ 31
चाँद, सूरज, तार पर पुस्तक प ढ़ए और ग्रहण के बारे म जा नए
पु स्तकालय एवं अन्य ोत
प्र.1 पुस्तकालय म चाँद, सूरज, तारे, आकाश आ द पर बहुत-सी रोचक, मनोरंजक और ानवधक पुस्तक अवश्य
उपलब्ध ह गी। उन पुस्तक को ढूँ ढ़कर प ढ़ए और उनके बारे म कक्षा म भी चचा क जए।
यह पुस्तकालय जाकर करने वाला काम है। पहले जान ली जए क कस तरह क पुस्तक ढूँ ढ़नी ह और उन्ह कैसे ढूँ ढ़।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
कस तरह क सामग्री उसम क्या मलेगा
बच्चों की िव ान पित्र काएँ चकमक (एकलव्य), फरक (एनसीईआरट ), व ान प्रग त — इनम आकाश, ग्रह और तार पर सरल
और चत्र वाले लेख छपते ह।
बच्चों की कहानी-पित्र काएँ नंदन, चंपक, बालहंस — इनम चाँद-तार क कहा नयाँ और पहे लयाँ मलती ह।
एनबीटी और एनसीईआरटी की नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीट ) आकाश, ग्रह और अंत रक्ष या त्रय पर ब के लए सस्ती और सुंदर
बाल पुस्तकें पुस्तक छापता है।
िव ान की िचत्र -पुस्तकें (एटलस ) सौरमंडल के चत्र, ग्रह क ता लका, चाँद क सतह क तस्वीर।
अंतिर क्ष याित्र यों की कहािनयाँ राकेश शमा, कल्पना चावला, सुनीता व लयम्स और चंद्रयान क कहा नयाँ।
लोककथाएँ और किवताएँ ‘चंदा मामा’ क कहा नयाँ, चाँद पर लखी बाल-क वताएँ, दाद -नानी क सुनाई कथाएँ।
तारामंडल (प्ले नेटेिरयम ) दल्ली का नेहरू तारामंडल, मुंबई का नेहरू तारामंडल और कोलकाता का बड़ला तारामंडल — यहाँ
गुंबद पर तारे दखाए जाते ह।
पुस्तक ढूँ ढ़ने का तरीका — पाँच चरण:
चरण 1 — पुस्तकालय के प्रभारी से क हए क आपको चाँद और आकाश पर पुस्तक चा हए।
चरण 2 — व ान वाली अलमारी दे खए। पुस्तक वषय के अनुसार रखी होती ह।
चरण 3 — पुस्तक उठाकर पहले उसक वषय-सूची (कहाँ क्या है) दे खए।
चरण 4 — जो पढ़, उसक तीन-चार काम क बात अपनी कॉपी म नोट कर ली जए।
चरण 5 — पुस्तक का नाम और लेखक का नाम भी लख ली जए, ता क कक्षा म बता सक।
नमूना उत्तर (कक्षा म चचा के लए): म अपने व ालय के पुस्तकालय गया और वहाँ मुझे आकाश पर एक चत्र वाली पुस्तक
मली। उसम सौरमंडल का बड़ा चत्र था। मने पढ़ा क चाँद पृथ्वी का उपग्रह है और उसक अपनी रोशनी नह होती — उस पर सूरज
क रोशनी पड़ती है। यह पढ़कर मुझे ‘चाँद का कुरता’ क वता क बात और अच्छ तरह समझ आ गई क चाँद रोज़ अलग क्य
दखता है। मने चकमक प त्रका म तारे पहचानने का एक लेख भी पढ़ा। अब म रात म सप्त ष तारे ढूँ ढ़ने क को शश करता ँ।
प्र.2 अपने शक्षक, पुस्तकालय प्रभारी और मत्र क सहायता से चाँद तथा सूरज क बदलती तय क और भी
जानकारी प्राप्त क जए। यह भी पता लगाइए क चंद्र ग्रहण एवं सूय ग्रहण कब-कब और क्य होते ह। आप अपने
माता- पता या अ भभावक से भी इनके बारे म बात कर सकते ह।
पहले तीन बात समझ ली जए, फर ग्रहण क बात एकदम आसान हो जाएगी।
1. सूरज अपनी रोशनी खुद दे ता है। चाँद और पृथ्वी अपनी रोशनी नह दे ते — उन पर सूरज क रोशनी पड़ती है।
2. पृथ्वी सूरज के चार ओर घूमती है और चाँद पृथ्वी के चार ओर। तीन कभी रुकते नह ।
3. घूमते-घूमते कभी-कभी तीन एक सीध म आ जाते ह। तभी ग्रहण लगता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
सूय गहण — चंद मा सूरज और पथ्ृ वी के बीच आ जाता है
छाया
सूरज चंदमा पथ्ृ वी
चंद गहण — पथ्ृ वी सूरज और चंद मा के बीच आ जाती है
सूरज पथ्ृ वी चंदमा
बीच म जो आ जाता है, उसक छाया पीछे वाले पर पड़ जाती है। यही ग्रहण है।
बात सूय ग्रहण चंद्र ग्रहण
बीच में कौन आता है चंद्रमा — सूरज और पृथ्वी के बीच पृथ्वी — सूरज और चंद्रमा के बीच
छाया िकस पर पड़ती है चंद्रमा क छाया पृथ्वी के एक हस्से पर पृथ्वी क छाया चंद्रमा पर
क्या ढका िदखता है सूरज कुछ दे र के लए ढक जाता है चाँद कुछ दे र के लए काला पड़ जाता है
कब होता है अमावस्या के दन पू णमा के दन
कब िदखता है दन म रात म
कहाँ से िदखता है पृथ्वी के थोड़े-से हस्से से पृथ्वी के जस- जस हस्से म उस समय रात है, वहाँ से
एक ज़रूरी बात — हर अमावस्या को सूय ग्रहण और हर पू णमा को चंद्र ग्रहण नह होता। ऐसा इस लए है क्य क चाँद का रास्ता
पृथ्वी के रास्ते से थोड़ा-सा टे ढ़ा है। इस लए तीन बहुत कम बार पूरी सीध म आ पाते ह। साल म गनती के ही ग्रहण होते ह।
सावधानी: सूय ग्रहण को खाली आँख से कभी मत दे खए — इससे आँख को ायी नुकसान हो सकता है। इसे
केवल वशेष चश्मे से या पानी म परछाईं दे खकर ही दे खना चा हए। चंद्र ग्रहण को खाली आँख से दे खना पूरी तरह
सुर क्षत है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
क वता से जो ड़ए: क वता म माँ कहती है क कसी दन चाँद “ कसी क भी आँख को दखलाई” नह पड़ता। वह
दन अमावस्या है — और मज़े क बात यह है क सूय ग्रहण भी उसी अमावस्या के दन होता है, जब चाँद ठ क
सूरज और हमारे बीच आ जाता है।
बूझो तो जान — पृष्ठ 31
दो पहे लयाँ — पहले अथ, फर उत्तर, फर सुराग-शब्द
बू झो तो जान
प्र.1 तन है मेरा हरा-भरा, / रस से रहता सदा भरा। / भीतर से ँ म लाल, / प्यास बुझाकर पूछूँ हाला।
पहेली का सरल अथ: मेरा शरीर बाहर से हरा है। मेरे भीतर हमेशा रस भरा रहता है। भीतर से म लाल ँ। म तुम्हारी प्यास बुझाकर
तुम्हारा हालचाल पूछता ँ।
उत्तर: तरबूज
पकड़ म कैसे आया — वे शब्द ह “हरा-भरा तन”, “भीतर से लाल” और “प्यास बुझाकर”। सो चए, कौन-सी
चीज़ बाहर से हरी हो, भीतर से लाल हो और उसम इतना रस हो क प्यास बुझ जाए? तरबूज ही ऐसा है। उसका
छलका हरा होता है, भीतर का गूदा लाल होता है और उसम पानी इतना अ धक होता है क गरमी म उसे खाने से
प्यास बुझ जाती है।
पहेली क पं क्त वह तरबूज क कौन-सी बात बताती है
“तन है मेर ा हरा-भरा” तरबूज का छलका बाहर से हरा होता है, जस पर गहरी धा रयाँ भी होती ह।
“रस से रहता सदा तरबूज म बहुत रस होता है — उसका अ धकांश भाग पानी ही होता है।
भरा”
“भीतर से हू ँ मैं लाल” काटने पर भीतर का गूदा चटक लाल दखाई दे ता है।
“प्यास बुझाकर पूछूँ ‘हाल’ यानी हालचाल। मतलब — प्यास बुझाकर पूछता ँ क अब कैसा लग रहा है? गरमी म तरबूज खाने से
हाला” सचमुच राहत मलती है।
जानने क बात: तरबूज गरमी के मौसम का फल है। इसम लगभग नब्बे भाग पानी होता है, इसी लए यह शरीर को
ठं डक दे ता है और गरमी म पानी क कमी नह होने दे ता।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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हम दोन ह पक्के मत्र, / करते रहते काम व चत्र। / पाँच-पाँच सेवक ह साथ, / ले कन करते कभी न बात।
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पहेलgीlका सरल अथ: हम दो ह और आपस म पक्के दोस्त ह। हम मलकर अजीब-अजीब काम करते रहते ह। हम दोन के साथ
पाँच-पाँच सेवक रहते ह, पर वे कभी बोलते नह ।
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उत्तर: हाथ का पंजा — यानी हमारे दोन हाथ, जनम पाँच-पाँच उँ ग लयाँ होती ह।
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पकड़ म कैसे आया — वे शब्द ह “हम दोन ” और “पाँच-पाँच सेवक”। शरीर म ऐसी कौन-सी चीज़ है जो दो
होती है और जनम से हर एक के साथ ठ क पाँच और चीज़ जुड़ी रहती ह? हाथ! हमारे दो हाथ ह और हर हाथ म
पाँच उँ ग लयाँ। उँ ग लयाँ हाथ का हर काम करती ह, इसी लए उन्ह ‘सेवक’ कहा गया है — और उनके मुँह नह होते,
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इस लए वे “कभी बात नह करत ”।
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पहेली क पं क्त वह हाथ क कौन-सी बात बताती है
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a “हम दोनों है ं पक्के िमत्र” हमारे दो हाथ ह और वे हमेशा मलकर काम करते ह। एक अकेला हाथ बहुत-से काम कर ही नह सकता।
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“करते रहते काम िविचत्र”
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हाथ अनोखे-अनोखे काम करते ह — लखना, खाना, ताली बजाना, गद फकना, कपड़े धोना, चत्र बनाना।
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“पाँच-पाँच से वक है ं साथ”
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हर हाथ म पाँच उँ ग लयाँ होती ह, जो हाथ का हर काम पूरा करती ह।
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“ले िकन करते कभी न बात” उँ ग लयाँ बोलती नह । वे चुपचाप अपना काम करती रहती ह।
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पुस्तक क उत्तर-पं क्त: पृष्ठ 31 पर सबसे नीचे, दा हनी ओर उलटा छपा हुआ है — “उत्तर – तरबूज, हाथ का
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agl ह।
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पहेली बूझने का तरीका: पहेली म हमेशा एक-दो
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शब्द सु र ाग होते ह। पहली पहे ल ी म सु र ाग था “भीतर से लाल”,
दूसरी म “पाँच-पाँच सेवक”। पूरी पहेलs
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जागो प्यारे
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
पाठ के बाद छपी बना क्रमांक क क वता — अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’
अनु पू र क रचना जागो प्यारे
प्र.1 ‘जागो प्यारे’ क वता का सरल अथ ल खए। इसम क ठन शब्द के अथ भी बताइए।
यह क वता अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’ क लखी हुई है। इसम एक माँ अपने बेटे को सुबह जगा रही है और उसे बाहर
का सुंदर दृश्य दखाकर उठने को कह रही है।
उठो लाल, अब आँखे ं खोलो।
पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।
बीती रात कमल-दल फूले।
उनके ऊपर भौंरे झूले।
िचिड़ याँ चहक उठी ं पेड़ों पर।
बहने लगी हवा अित सुंद र।
नभ में न्यारी लाली छाई।
धरती ने प्यारी छिव पाई।
भोर हुआ सूरज उग आया।
जल में पड़ ी सुन हरी छाया।
ऐसा सुंद र समय न खोओ।
मेरे प्यारे अब मत सोओ।
पहले क ठन शब्द —
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ
लाल बेटा, प्यारा ब ा (माँ प्यार से पुकार रही है)
कमल -दल कमल के फूल का समूह
भौंरे भ्रमर — फूल पर मँडराने वाले काले क ट
चहकना प क्षय का मीठ आवाज़ म बोलना
अित बहुत
नभ आकाश, आसमान
न्यारी अनोखी, नराली, सबसे अलग
लाली लाल रंग क आभा
छिव सुंदर रूप, शोभा
भोर सुबह, तड़का
सुनहरी छाया सुनहरा प्र त बब, यानी पानी म दखता सूरज का सुनहरा अक्स
अब पं क्त-दर-पं क्त सरल अथ —
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
पं क्त सरल अथ
“उठो लाल, अब आँखें खोलो।” उठो मेरे बेटे, अब आँख खोल दो।
“पानी लाई हू,ँ मुँह धो लो।” म पानी ले आई ँ, अपना मुँह धो लो।
“बीती रात कमल-दल फू ले । ” रात बीत गई है और तालाब म कमल के फूल खल गए ह।
“उनके ऊपर भौंरे झूले । ” उन फूल के ऊपर भ रे मँडरा रहे ह, मानो झूल रहे ह ।
“िचिड़याँ चहक उठी ं पेड़ों पर।” पेड़ पर बैठ च ड़याँ चहचहाने लगी ह।
“बहने लगी हवा अित सुंद र।” बहुत सुंदर और ठं डी हवा बहने लगी है।
“नभ में न्यारी लाली छाई।” आकाश म सुबह क अनोखी लाली फैल गई है।
“धरती ने प्यारी छिव पाई।” उस लाली से धरती भी बहुत सुंदर दखाई दे ने लगी है।
“भोर हुआ सूर ज उग आया।” सुबह हो गई है और सूरज नकल आया है।
“जल में पड़ी सुनहरी छाया।” तालाब के पानी म सूरज क सुनहरी परछाईं पड़ रही है।
“ऐसा सुंद र समय न खोओ।” इतना सुंदर समय सोकर मत गँवाओ।
“मेरे प्यारे अब मत सोओ।” मेरे प्यारे बेटे, अब और मत सोओ।
क व के बारे म: अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’ (सन् 1865–1947) खड़ी बोली हद के बहुत बड़े क व थे।
‘ह रऔध’ उनका उपनाम है। उनका जन्म उत्तर प्रदे श के आज़मगढ़ ज़ले के नज़ामाबाद म हुआ था। उनक सबसे
प्र सद्ध रचना प्रयप्रवास है। उन्ह ने ब के लए भी बहुत सरल और मीठ क वताएँ लख — यह क वता उन्ह म
से एक है।
प्र.2 ‘जागो प्यारे’ क वता का भाव क्या है? इसम माँ अपने बेटे को जगाने के लए क्या-क्या दखाती है?
क वता का भाव यह है क सुबह का समय सबसे सुंदर और सबसे क मती होता है, इस लए उसे सोकर नह गँवाना चा हए।
माँ बेटे को डाँटकर नह जगाती — वह उसे बाहर क सुंदरता दखाकर जगाती है।
माँ क्या-क्या दखाती है —
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
क्र. माँ क्या दखाती है क वता क पं क्त
1 तालाब में िखले हुए कमल “बीती रात कमल-दल फूले।”
2 फू लों पर मँडराते भौंरे “उनके ऊपर भ रे झूले।”
3 पेड़ों पर चहचहाती िचिड़याँ “ च ड़याँ चहक उठ पेड़ पर।”
4 सुंद र बहती हईु हवा “बहने लगी हवा अ त सुंदर।”
5 आकाश में छाई सुबह की लाली “नभ म न्यारी लाली छाई।”
6 िनखरी हुई धरती “धरती ने प्यारी छ व पाई।”
7 उगता हुआ सूर ज “भोर हुआ सूरज उग आया।”
8 पानी में पड़ती सुनहरी परछाईं “जल म पड़ी सुनहरी छाया।”
माँ का तरीका दे खए: वह एक बार भी नह कहती क “दे र हो गई” या “उठो वरना डाँट पड़ेगी”। वह पहले पानी
लाकर रख दे ती है, फर एक-एक करके बाहर क आठ सुंदर चीज़ गनाती है, और सबसे अंत म अपनी बात कहती है
— “ऐसा सुंदर समय न खोओ।” यही सबसे अच्छा तरीका है — पहले मन जगाओ, फर शरीर अपने आप जाग
जाएगा।
क वता क्या सखाती है:
1. सुबह जल्द उठना चा हए — तभी हम प्रकृ त का यह सुंदर रूप दे ख पाते ह।
2. सुबह क हवा शुद्ध और ठं डी होती है, जो सेहत के लए अच्छ है।
3. सुबह दे र तक सोने से दन का सबसे अच्छा समय हाथ से नकल जाता है।
4. प्रकृ त क छोट -छोट चीज़ — कमल, भ रा, च ड़या, हवा — दे खने लायक ह, बस उन्ह दे खने का समय
नकालना पड़ता है।
प्र.3 ‘चाँद का कुरता’ और ‘जागो प्यारे’ — इन दोन क वताओं म क्या-क्या समानताएँ और क्या-क्या अंतर ह?
दोन क वताएँ एक ही अध्याय म छपी ह और दोन म माँ और ब े का प्यार है। पर एक रात क क वता है और दूसरी सुबह क ।
पहले समानताएँ —
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता
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क्र. समानता
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दोनों में एक माँ और उसका बच्चा है। दोनों में माँ बच्चे से बात कर रही है।
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3 दोनों किवताएँ आकाश और पकृ ित की बात करती है ं — चाँद , सूर ज, हवा, धरती।
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4 दोनों की भाषा बहत
ु सरल है और हर दो पंिक्तयों में तुक िमलती है।
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दोनों में माँ ब चे को डाँटती नही,ं यार से समझाती
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अब अंतर —
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चाँद का कुरता
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जागो प्यारे
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रचनाकार
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समय रात का — चाँद क यात्रा का समय सुबह का — सूरज नकलने का समय
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बच्चा कौन है चाँद, जसे इंसान के ब े जैसा दखाया गया है घर का एक असली ब ा, जो अपने बस्तर पर
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बात कौन शुरू
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ब ा (चाँद) — वह हठ करके माँग रखता है माँ — वह बेटे को जगाने आती है
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करता है
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कोई भी सुहeावना
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मौसम जाड़े का — ठं ड और सन-सन हवा
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भाव हँसी-मज़ाक के साथ चाँद के घटने-बढ़ने क बात सुबह क सुंदरता और जल्द उठने क सीख
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अंत कै सा है प्रश्न पर खत्म होती है — “नाप तेरी कस रोज लवाएँ?” कोई अनुरोध पर खत्म होती है — “मेरे प्यारे अब
हल नह नकलता।
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मत सोओ।”
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दोन को साथ रखकर दे खए: ‘चाँद का कुरता’ म आसमान का एक जीव हमारे घर जैसा ब ा बन जाता है, और
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‘जागो प्यारे’ म हमारे घर का ब ा आसमान और धरती क सुंदरता दे खने के लए जगाया जाता है। यानी एक
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क वता आसमान को घर तक ले आती है और दूसरी घर के ब े को आसमान तक ले जाती है। इसी लए पुस्तक ने
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इन दोन को एक ही अध्याय म साथ छापा है।
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अध्याय — एक नज़र म
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चाँद का कुरता एक क वता है। इसे रामधारी सह ‘ दनकर’ ने लखा है। ‘ दनकर’ उनका उपनाम है — यानी वह नाम जो
क व अपनी रचना के नीचे लखते ह। दनकर जी बहार के थे और उन्ह राष्ट्रक व कहा जाता है। ‘र श्मरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’ और
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
‘उवशी’ उनक प्र सद्ध रचनाएँ ह। ‘उवशी’ पर उन्ह ानपीठ पुरस्कार मला था।
क वता म दो पात्र ह — एक चाँद और दूसरी चाँद क माँ। पूरी क वता इन दोन क आपस क बातचीत है। चाँद को यहाँ एक
छोटे ब े क तरह दखाया गया है, जो ठं ड म ठठु रता है, माँ से ज़द करता है और कपड़े माँगता है।
क वता क शुरुआत चाँद क ज़द से होती है — “हठ कर बैठा चाँद एक दन, माता से यह बोला।” वह कहता है क रात भर
सन-सन हवा चलती है और वह ठं ड से मर जाता है। ठठु र- ठठु रकर वह कसी तरह आसमान क अपनी यात्रा पूरी करता है।
इस लए माँ उसे ऊन का एक मोटा झगोला सलवा दे । झगोला का अथ है — ढ ला-ढाला लंबा कुरता।
चाँद यह भी कह दे ता है क अगर नया न सलवा सको तो कोई भाड़े का, यानी कराए का कुरता ही ला दो। इस एक पं क्त से
पता चलता है क उसे ठं ड कतनी सता रही है — उसे नया-पुराना कुछ नह चा हए, बस गरमी चा हए।
अब माँ का उत्तर आता है, और यह क वता क असली बात खुलती है। माँ पहले प्यार जताती है — “अरे सलोने! कुशल कर
भगवान।” फर वह असली समस्या बताती है — “एक नाप म कभी नह तुझको दे खा करती ँ।” यानी चाँद कभी एक ही नाप
का रहता ही नह ।
माँ बताती है क चाँद कभी एक अंगुल-भर पतली रेखा जैसा हो जाता है, कभी एक फुट मोटा। कसी दन बड़ा, कसी दन
छोटा। और एक दन तो वह कसी को दखाई ही नह दे ता। तो नाप कस दन का लया जाए, और ऐसा कुरता कैसे सले
जो हर रोज़ बदन म आ जाए?
असल म क वता चाँद क कलाओं क बात कर रही है — यानी चाँद का रोज़ थोड़ा-थोड़ा घटना और बढ़ना। यही बात आप
आसमान म दे ख सकते ह: दूज को चाँद नाख़ून जैसी पतली रेखा दखता है, फर रोज़ बढ़ता जाता है, पू णमा को पूरी थाली
जैसा गोल हो जाता है, फर रोज़ घटता जाता है और अमावस्या को बलकुल गायब हो जाता है। क व ने व ान क इस बड़ी
बात को कुरता सलवाने क छोट -सी कहानी म कह दया है।
भाषा बहुत आसान और घर जैसी है। वाक्य छोटे ह, हर दो पं क्तय म तुक मलती है (बोला– झगोला, ँ– ँ, जाड़े का–भाड़े
का, सलोने–टोने, मोटा–छोटा)। ‘सन-सन’ और ‘ ठठु र- ठठु रकर’ जैसे शब्द ठं ड को सुनाई और दखाई दे जाने वाला बना दे ते
ह। इसी से क वता गाने जैसी लगती है और जल्द याद हो जाती है।
अभ्यास म चचा के प्रश्न, चाँद का चत्र बनाकर सही वकल्प चुनने वाले बहु वकल्पी प्रश्न ( जनम एक से अ धक वकल्प सही
हो सकते ह), सोच- वचार और कल्पना के प्रश्न, ‘भर’ तथा दोहराए जाने वाले शब्द का व्याकरण, सं ा-सवनाम- वशेषण-
क्रया क ता लका, अधूरे संवाद पूरे करने का काम, व ापन पढ़ना और बनाना, कागज़ का कुरता बनाने क कलाकारी,
पुस्तकालय का काम और दो पहे लयाँ द गई ह।
पाठ के बाद पृष्ठ 32 पर बना क्रमांक क एक और क वता छपी है — जागो प्यारे, जसे अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’
ने लखा है। इसम एक माँ अपने बेटे को सुबह जगा रही है और उसे बताती है क बाहर कमल खल गए ह, भ रे झूल रहे ह,
च ड़याँ चहक रही ह और सूरज उग आया है — ऐसा सुंदर समय सोकर मत गँवाओ। ‘चाँद का कुरता’ म रात का आकाश है,
‘जागो प्यारे’ म सुबह का — और दोन म माँ और ब े का प्यार है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
हठ करना िज़द करना, अपनी बात पर अड़ जाना “हठ कर बैठा चाँद एक दन, माता से यह छोटा भाई साइ कल के लए हठ कर
बोला।” बैठा।
झगोला ढीला-ढाला लंबा कु रता या चोगा “ सलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक दादाजी ने सद म ऊन का झगोला
झगोला।” पहन लया।
सलवाना िकसी दज़ से कपड़ा िसलाना “ सलवा दो माँ…” माँ ने मेरे लए नई कमीज़ सलवाई।
सन-सन तेज़ हवा चलने की आवाज़ “सन-सन चलती हवा रात भर…” रात भर सन-सन हवा चलती रही।
जाड़ा सद , ठं ड का मौसम “…जाड़े से मरता ँ।” जाड़े म सुबह क धूप बहुत भली
लगती है।
ठठु रना ठं ड से काँपना, िसकु ड़ जाना “ ठठु र- ठठु रकर कसी तरह यात्रा पूरी बना स्वेटर के म ठं ड म ठठु र गया।
करता ँ।”
सफर यात्रा “आसमान का सफर और यह मौसम है गाँव तक का सफर दो घंटे का है।
जाड़े का।”
भाड़े का िकराए का, कु छ िदन के िलए िलया हुआ “न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई शाद म उसने भाड़े का बड बुलवाया।
भाड़े का।”
सलोने सुंद र, प्यारा (प्यार से पुक ारने का शब्द) “ब े क सुन बात कहा माता ने, ‘अरे माँ ने बेट को सलोनी कहकर गोद म
सलोने!’” उठा लया।
कुशल भला, ख़ैिरयत, अच्छा हाल “कुशल कर भगवान, लग मत तुझको च म सबक कुशल लखी थी।
जादू-टोने।”
जादू-टोने टोना-टोटका; िकसी की बुर ी नज़र “…लग मत तुझको जादू-टोने।” दाद कहती ह क जादू-टोने पर
व ास नह करना चा हए।
नाप माप, िकसी चीज़ का आकार जो नापकर “एक नाप म कभी नह तुझको दे खा दज़ ने मेरी कमीज़ का नाप ले लया।
िलया जाए करती ँ।”
अंगुल-भर एक उँ ग ली िजतना, बहुत थोड़ा “कभी एक अंगुल-भर चौड़ा…” बीज ज़मीन से अंगुल-भर ऊपर नकल
आया।
चौड़ा िजसकी चौड़ाई अिधक हो “कभी एक अंगुल-भर चौड़ा…” यह सड़क पहले से अ धक चौड़ी हो
गई है।
घटना-बढ़ना कम होना और अिधक होना “घटता-बढ़ता रोज कसी दन ऐसा भी बरसात म नद का पानी घटता-बढ़ता
करता है।” रहता है।
लवाना िकसी से कोई काम करवाकर ले ना; यहाँ “अब तू ही तो बता, नाप तेरी कस रोज मने दज़ से कुरते का नाप लवा लया।
— नाप िदलवाना लवाएँ।”
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कक्षा 5 हद अध्याय 3 चाँद का कुरता AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
बदन शरीर “सी द एक झगोला जो हर रोज बदन म ठं ड लगने से उसका बदन काँप रहा
आए?” था।
कलाएँ (चाँद चाँद के रोज़ बदलते हुए रूप क वता का पूरा भाव इसी पर है। चाँद क कलाएँ दे खकर पंचांग बनाया
क) जाता है।
अमावस्या महीने की वह रात जब चाँद िबलकु ल “नह कसी क भी आँख को दखलाई द पावली अमावस्या क रात को मनाई
िदखाई नही ं दे ता पड़ता है।” जाती है।
पू णमा महीने की वह रात जब चाँद पूर ा गोल “…बड़ा कसी दन हो जाता है…” पू णमा क रात आँगन म उजाला-सा
िदखाई दे ता है फैल जाता है।
अ भभावक माता-िपता या घर के वे बड़े जो बच्चे की “…तब आपके अ भभावक क्या-क्या व ालय क सभा म सब अ भभावक
दे खभाल करते है ं कहते या करते ह?” आए थे।
व ापन िकसी बात या चीज़ की जानकारी सबको “…एक व ापन प्रका शत कया है।” अख़बार म पुरानी साइ कल बेचने का
दे ने के िलए छपी सूचना व ापन छपा है।
प्रचार-प्रसार िकसी बात को दू र -दू र तक फै लाना “…इसका प्रचार-प्रसार कर चाँद क माँ स्वच्छता अ भयान का प्रचार-प्रसार
क सहायता क जए।” गाँव-गाँव हुआ।
न्यारी अनोखी, िनराली, सबसे अलग “नभ म न्यारी लाली छाई।” (जागो प्यारे) भोर के आकाश क न्यारी छटा दे खते
ही बनती थी।
छव सुंद र रूप, शोभा “धरती ने प्यारी छ व पाई।” (जागो प्यारे) वषा के बाद खेत क छ व नखर
आई।
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