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अंक योजना (2021-2022)
अभ्यास प्रश्न ऩत्र टभम 2
इतिहास (027)
कऺा-XII
समय: 2 घंटे अधधकिम अंक: 40
खंड क 3x4=12
M
ऱघु उत्तरीय प्रश्न
1. 1) उद्दे श्म प्रस्ताव बें आजाद बायत के भर
ू आदर्शों की रूऩये खा ऩेर्श की गई थी। 3
2) उद्दे श्म प्रस्ताव के बाध्मभ से उस फ्रेभवकम को प्रस्तत
ु ककमा गमा, जजसके अनस
ु ाय
सॊववधान ननभामण के कामम को आगे फढ़ामा गमा।
3) प्रस्ताव भें मह सनु नजश्ित ककमा गमा कक सभस्त बायत के रोंगों के लरए साभाजजक,
आर्थमक औय याजनीनतक प्रनतष्ठा, अवसय औय न्माम की सभानता प्राप्त होगी।
4) अलबव्मजतत,उऩासना, व्मवसाम आदद की भौलरक स्वतन्रता होगी।
5) अल्ऩसॊख्मक एवॊ वऩछड़े वगम के तथा जनजानतमों के लरए यऺात्भक प्रावधान होगा l
6) कोई अन्म भान्म बफन्द ु
(कोई तीन बफन्दु)
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2. संथाऱ विद्रोह:- 3
1. बिदटर्श सयकाय सॊथारों की कृ वि बलू भ ऩय बायी ब-ू याजस्व रगा यही थी।
2. साहूक ाय(ददकू ) ऊॊिी दय ऩय ब्माज़ वसर
ू यहे थे, ददकु ओॊ द्वाया सॊथारों
की ज़भीनों ऩय कब्ज़ा ककमा जा यहा था।
3. जभीॊदायों,साहूक ायों व बिदटर्श अर्धकारयमों द्वाया दालभन-इ-कोह इराके ऩय
अनतक्रभण ककमा जा यहा था।
4. सॊथार ववद्रोह 1855 से 1856 तक साहूक ायों,सयकाय औय जभीॊदायों के
खखराप बागरऩुय से रे कय याजभहर की ऩहाड़ड़मों ऩय िरा।
5. कोई अन्म भान्म बफन्दु
(कोई तीन बफन्दु)
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1. याजस्व की फहुत ऊॉिी भाॊग
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2. उऩज की नीिी कीभते जजससे कय िुक ाना भुजश्कर हो जाता था
3. आसभान याजस्व –
4. सूमामस्त ववर्ध
5. जभीॊदाय की सीलभत र्शजतत
6. जभीॊदाय की सैननक टुकड़ड़माॊ बॊग
7. यै मतों से ज़भीॊदायो द्वाया कय वसूरी भें सभस्मा
8. कोई अन्म भान्म बफन्दु
(कोई तीन)
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3. 1. घोिणाओॊ द्वाया सबी रोगों से बफना जानत औय धभम का बे द ककए ववद्रोह 3
का आह्वान ककमा जाता था।
2. भुजस्रभ याजकु भायों मा नवाफों की ओय से की गई घोिणाओॊ भें दहॊदओ
ु ॊ की
बावनाओॊ का ववर्शे ि ख्मार यखा जाता था l
3. इस ववद्रोह को एक ऐसे मुद्ध के रूऩ भें प्रस्तुत ककमा गमा जजसभें दहॊदुओ ॊ
औय भुसरभानों दोनों का सभान राब औय हानन होनी थीl
4. इश्तहायों भें अॊग्रेजों से ऩहरे के अतीत की ओय ध्मान आकविमत ककमा जाता
था जैसे भुगर साम्राज्म के अॊतगमत धालभमक सहनर्शीरता की नीनत के कायण
सबी सभुदामों भें सह अजस्तत्व की बावना की प्रर्शॊसा की जाती थीl
5. फहादुय र्शाह के नाभ से जायी की गई घोिणाओॊ भें भोहम्भद औय भहावीय
दोनों की दुहाई दे ते हुए जनता से इस रड़ाई भें सजम्भलरत होने का आह्वान
ककमा गमा l
6. कोई अन्म भान्म बफन्दु
(कोई तीन बफन्दु)
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4. 1. िॊऩायन भें ककसानों के लरए काश्तकायी की सुय ऺा औय अऩनी ऩसॊद की 3
पसर उऩजाने की आज़ादी ददराने के लरए
2. खेड़ा भें पसर िौऩट होने ऩय याज्म से ककसानों का रगान भाफ़ कयने की
भाॉग।
3. अहभदाफाद भें कऩड़े की लभरों भें काभ कयने वारों के लरए काभ कयने की
फे हतय जस्थनतमों की भाॉग।
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4. िॊऩायन, खेड़ा औय अहभदाफाद की इन ऩहरों से गाॊधीजी ऐसे याष्रवादी के
रूऩ भें उबये जजसकी गयीफों के प्रनत गहयी सहानुबूनत
5. कोई अन्म भान्म बफन्दु
(कोई तीन बफन्दु)
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खंड ख 6x3=18
दीघघ उत्तरीय प्रश्न
5. 1) अॊ ग्रेजों औय बायतीमों द्वामा ववद्रोह की कई तस्वीमें- ऩें लसर से फने ये ख ा, स्क्रीन 6
र्िर, ऩोस्टय काटूमन आदद फनाए गए थे इनसे ववद्रोह की ननम्नलरखखत छववमों का
ज्ञान होता हैI
2) र्िरों भें बिदटर्श यऺकों का अलबनॊदन मा अॊ ग्रेज़ नामकों का गण
ु गान ककमा गमा
है।
3) टॉभस जोन्स फाकमय द्वामा फनामा गमा र्िर ‘द रयरीफ़ ऑप रखनऊ’ भें
कैंऩफेर के आगभन ऩय जश्न भनाने का दृश्म है जो मह दर्शामता है कक बिदटर्श सत्ता
औय ननमॊरण स्थावऩत हो िुका था।
4) कुछ र्िरों भें ववद्रोह के दौयान अॊ ग्रेजों की दद
ु म र्शा को दर्शाममा गमा है, जैसे
जोसेप नोएर ऩेटन ने ‘इन भेभोरयमभ’ र्िर भें ववद्रोदहमों की दहॊसा व फफमयता का
प्रदर्शमन है इसके अनतरयतत कुछ र्िर जैसे लभस व्हीरय का ववद्रोदहमों का साभना
ु र्िर, जजसभें धयती ऩय फाइफर ऩड़ी है-अग्रेज औयतों के सॊघिम का र्िरण
कयते हए
है धभम की यऺा का सॊघिम साबफत कयता है।
5) इन र्िरों भें अग्रेजों द्वाया ववद्रोदहमों से प्रनतर्शोध की बावना औय उनको सफक
लसखाने की बावना ऩनऩती है जैसे एक हाथ बें तरवाय औय दूसये हाथ भें ढार
लरए हुए भदहरा का आक्राभक रूऩ भें र्िर, ऩेर्शावय भें ववद्रोदहमों को भत्ृ मद
ु ॊ ड -तोऩ
से उड़ाते हए
ु र्िर प्रदलर्शमत हैंI
6) ववद्रोदहमों को ननभमभ तयीके से भौत के घाट उतायना मा ख र
ु ेआभ पाॊसी ऩय
रटकाना जैसे र्िर रोगों भें दहर्शत मा डय पै राने के लरए ऩर-ऩबरकाओ के द्वामा
ववलबन्न स्थानों ऩय बेजे गए I
ृ ध के रूऩ भें दर्शाम कय उसका भजाक उड़ामा गमा
7) ़ननघभ को एक बव्म नेक वद्
है इससे तात्ऩमम है कक प्रनतर्शोध की आग भें दमा का कोई स्थान नही है औय
ववद्रोदहमों से सख्ती का व्मवहाय कयना िादहएI
8) याष्रवादी दृश्म कल्ऩना-ववद्रोह को प्रथभ स्वतॊर ता सॊग्राभ के रूऩ भें बी ददखामा
गमा, जैसे रक्ष्भीफाई ववदे र्शी र्शासन के ववयोध का प्रतीक थी I
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9) मे तस्वीयें अऩने सभम की बावनाओ, अहसासों औय सॊवेदनाओॊ को प्रनतबफजम्फत
कय मही थी।
10) कोई अन्म भान्म बफन्द ु
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6. 1. गाॊधीजी की बािा औय सादगी ने उन्हें जनता से जु ड़ने भें भदद की। 6
2. ऩोर्शाक औय जीवन र्शैरी भें आभ रोगों के साथ सहानुबूनत औय ऩहिान
फनामी।
3. गाॊधीजी ने तीन जन आॊदोरन कये जजसभें व्माऩक रूऩ से सबी वगों ने
बागीदायी दी।
4. उनके आह्वान ऩय छारों ने सयकाय द्वाया सॊिालरत स्कू रों औय कॉरे ज ों भें
जाना फॊद कय ददमा।
5. वकीरों ने अदारतों भें जाने से इन्काय कय ददमा। भज़दयू वगम ने
र्शहयों भें हड़तार कय दी । जनजानतमों ने वन कानूनों का उल्रॊघन
ककमा है।
6. दहन्द ू भुजस्रभ एकता ऩय ज़ोय ददमा। दहन्दुओ ॊ औय भुसरभानों ने
खऽराफ़त औय असहमोग भें फढ़ िढ़कय बाग लरमा।
7. उन्होंने स्वर्शासन की अवधायणा को बी फढ़ावा ददमा औय सत्माग्रह को
रोकवप्रम फनामा।
8. उन्होंने अदहॊसा को रोकवप्रम फनामा ।
9. उन्होंने स्वदे र्शी औय फदहष्काय ऩय ज़ोय ददमा। स्वदे र्शी औय फदहष्काय ने
रोगों को आकविमत ककमा।
10. उन्होंने ियखे के भाध्मभ से ववकेंद्रीकयण ऩय ज़ोय ददमा ।
11. अस्ऩश्ृ मता के खऽराफ़ आवाज़
12. ियखे के प्रतीक के भाध्मभ से स्वदे र्शी उद्मोगों का ऩुनगमठन
13. भदहराओॊ की जस्थनत भें सुधाय की कोलर्शर्श की
14. उन्होंने दे र्श के ववलबन्न दहस्सों भें काॊग्रेस की नई र्शाखाएॊ स्थावऩत की
ओय यजवाड़ों भें प्रजा भॊडरों की श्ख
ृॊ रा की स्थाऩना कयके काॊग्रेस
का ऩुनगमठन ककमा ।
15. अत्मर्धक प्रनतबार्शारी बायतीमों के एक सभूह ने स्वमॊ के गाॊधी जी से
जोड़ा-भहादे व दे साई ,वल्रब बाई ऩटे र , जवाहय-रार ने हरू, सी
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याजगोऩारािायी ।वे सबी ववलबन्न ऺेरों औय धालभमक ऩयॊ ऩयाओॊ से थे।
16. कोई अन्म भान्म बफन्दु
(सभग्रता भें भूल्माॊक न)
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1. ददसॊफय 1929 भें काॊग्रेस का वाविमक अर्धवे र्शन राहौय भें ।
2. जवाहयरार ने हरु इस अर्धवे र्शन के अध्मऺ िन
ु े गए जो मुवा ऩीढ़ी के
ने तत्ृ व के प्रतीक भाने जाते थे ।
3. अर्धवे र्शन भें ऩण
ू म स्वयाज की भाॉग
4. 26 जनवयी 1930 को ववलबन्न स्थानों ऩय याष्रीम ध्वज पहयाकय
औय दे र्शबजतत के गीत गाकय स्वतॊरता ददवस भनाना।
5. गाॊधीजी के अनुसाय स्वतन्रता ददवस भनाने की उद्घोिणा सबी गाॉवों
औय सबी र्शहयों तक औय ऩूये दे र्श भें एक ही सभम सॊगोजष्ठमों
हो।
6. सभायोह की र्शुरूआत याष्रीम ध्वज पहया कय की जाए औय दे र्शबजतत
गीत गाए जाए।
7. ददन भें यिनात्भक कामम जैसे सूत की कताई ,अछू तों की से वा , दहॊद ू
भुजस्रभ ऩुनलभमरन आदद ककए जाएॊ।
8. रोगों को मह प्रनतऻा बी रे नी िादहए कक- बायतीम रोगों को स्वतॊरता
का अर्धकाय है औय कोई बी सयकाय इन अर्धकायों से उन्हें वॊर्ित
नहीॊ यख सकती है औय अगय कोई सयकाय इसका दभन कयती है तो
जनता को इसे फदरने तथा सभाप्त कयने का बी अर्धकाय है।
9. कोई अन्म भान्म बफन्दु
(सभग्रता भें भूल्माॊक न)
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7. 1. भुगरों के याजत्व लसद्धाॊत को अफुर पज़्र ने सफसे ऊॊिे स्थान ऩय 6
यखा।
2. यानी अरानकु आ की कहानी से मह सभझाने का प्रमास ककमा गमा कक
गबम भें ऩर यही सॊतानों ऩय दैवीम प्रकार्श का प्रबाव स्ऩष्ट है।
3. दैवीम प्रकार्श ऩीढ़ी-दय-ऩीढ़ी हस्ताॊतरयत होता है।
4. भुगर याजत्व के अॊतगमत सॊतानें पय- ए-इजादी अथामत ईश्वयीम प्रकार्श
धायण कयती हैं ।
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5. पय-ए-इजादी का लसद्धाॊत सवमप्रथभ सूप ी सॊत लर्शहाफुद्दीन सुहयावदी ने
प्रस्तुत ककमा।
6. दैवीम याजत्व के अॊतगमत भुगर फादर्शाह ऩृथ्वी ऩय ईश्वय का प्रनतननर्ध
है।
7. इनतवत्त
ृ ों के वववयणों के साथ र्िरों ने इन वविायों को इस प्रकाय ककमा
कक दे खने वारे के भन-भजस्तष्क ऩय स्थामी प्रबाव ऩड़े ।
8. 17वीॊ र्शताब्दी भें फादर्शाओॊ को प्रबा भॊडरों के सॊग र्िबरत ककमा जाने
रगा।
9. कोई अन्म भान्म बफन्दु
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1. भुार साम्राज्म के र्शासक स्वमॊ को एक ववर्शार औय ववजातीम जनता
ऩय र्शासन के लरए ननमुतत भानते थेI
2. असलरमत भें याजनीनतक ऩरयजस्थनतमाॊ इस बव्म दृजष्ट को सीभाफद्ध
कय दे ती थी कपय बी ऐसी दृजष्ट भहत्वऩूणम यहीI
3. भुार फादर्शाहों द्वाया भुारों व स्थानीम सयदायों के फीि याजनैनतक
भैबरमों के ज़रयए तथा ववलबन्न ऺेरीम याज्मों को लभराकय भुार
साम्राज्म की यिना की गई
4. फादर्शाह अकफय ने अऩने साम्राज्म का ववस्ताय ककमाI
5. उन्होंने इसे अऩने सभम का ववर्शारतभ, दृढ़तभ औय सफसे सभृद्ध
याज्म फनाकय सुदृढ़ बी ककमाI
6. उसने ईयान के सपाववओॊ औय तूय ान भध्म एलर्शमा के उज़फे कों की
ववस्तायवादी मोजनाओॊ ऩय रगाभ रगाए यखीI
7. भुार साम्राज्म भें कक्रमा औय सत्ता रगबग ऩयू ी तयह से एकभार
फादर्शाह भें ननदहत थेI
8. र्शे ि याज्म को फादर्शाह के आदे र्शों का अनुऩारन कयना होता थाI भुार
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याज्म का एक भहत्वऩूणम स्तॊब इसके अर्धकायीमों का दर था जजसे
इनतहासकाय अलबजात वगम बी कहते हैं , अलबजात वगम भें बती ववलबन्न
नृ- जातीम तथा धालभमक सभूहों से होती थी
9. आज बायत भें गणतॊरीम व्मवस्था, दे र्श का सॊववधान सबी नागरयकों को
साभान दजाम दे ता है, धभम , जानत, यॊ ग, लरॊग, ऺेरे के आधाय ऩय कोई
बे द-बाव नहीॊI
10. कोई अन्म भान्म बफन्दु
Theme 2 Page 243-244
खंड ग 4x2=8
केस आधाररि प्रश्न
8. 8.1 भुार बायत की सबी ऩुस्तकें हाथ से लरखी होती थी औय ऩाण्डुलरवऩ 1+1+2=
4
कहराती थी।
8.2 भा
ु रों के अधीन फहुभूल्म ऩाण्डुलरवऩमों की बें ट एक स्थावऩत याजननमक प्रथा
ु यण कयते हुए अवध के नवाफ ने जॉजम तत
थी। इसी का अनक ृ ीम को ऩाॊडुलरवऩ बें ट
की
8.3 अब्दुर हभीद राहौयी फादर्शाहनाभा के रे खक है औय इसभें र्शाहजहाॉ के
र्शासनकार का इनतहास दज़म है।
9. 9.1 भदहराओॊ के लरए न्माम की भाॉग फॊफई की हॊ सा भेहता ने उठाई 1+1+2=
4
ु ि औय भदहरा के फीि वास्तववक सहमोग ऩायस्ऩरयक आदय औय सभझ से
9.2 ऩरु
सॊबव है
9.3 सॊववधान सबा भें भदहराओॊ के लरए साभाजजक न्माम, आर्थम क न्माम औय
याजनीनतक न्माम की भाॊग यखी गई थी
खंड घ 1+1=2
मानधित्र आधाररि प्रश्न
10. I अथवा II 1
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b. ददल्री
2
केिऱ दृष्टटबाधधिों के लऱए:
अजभेय औय अॊ फय
िौयी-िौया , फनायस (अन्म प्रासॊर्गक स्थर बी भान्म)
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