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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 1 विज्ञान का निरंतर बढ़ता संसार

AglaSem पर कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 1 विज्ञान का निरंतर बढ़ता संसार (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Science Chapter 1 The Ever-Evolving World of Science (Curiosity), Hindi Medium.
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About NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 1 विज्ञान का निरंतर बढ़ता संसार

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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 1 विज्ञान का निरंतर बढ़ता संसार – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 1: व ान का नरंतर बढ़ता संसार

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

1–6 6 22 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 17 pages

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: व ान का नरंतर बढ़ता संसार
कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत NCERT समाधान। यह पुस्तक का
आरं भक अध्याय है, अतः इसके सभी प्रश्न पाठ के बीच म ही पूछे गए ह — इनके साथ एकमात्र काय क्रयाकलाप 1.1 — उत्तर के प्रश्न बनाइए भी
है। पृष्ठ 1 से 6 तक के हर प्रश्न का उत्तर यहाँ कारण स हत तथा भारतीय दै नक जीवन के उदाहरण के साथ दया गया है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 7) 1–6

खं ड प्रश्न

6 22

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 1
अध्याय का आरंभ — ततली, कागज का हवाई जहाज और ज ासा क उड़ान

प्र.1 क्या आप जानते ह क वै ा नक को वास्त वक वायुयान बनाने क प्रेरणा कागज के एक हवाई जहाज जैसी
साधारण वस्तु से मली?

हाँ — उड़ान का व ान वास्तव म खलौन , पतंग और प क्षय के ध्यानपूवक अवलोकन से ही आरंभ हुआ। कागज के
हवाई जहाज म न कोई इंजन होता है और न चालक, फर भी वह कई सेकंड तक हवा म रहता है। यही पूछना क वह क्य टका
रहता है, हम वायुयान तक ले जाता है।
फका गया कागज का हवाई जहाज वास्त वक उड़ान के सभी वचार को एक साथ दखा दे ता है —

फकना (प्रणोद) — आपका हाथ उसे आगे क ओर धक्का दे ता है। वास्त वक वायुयान को यह धक्का इंजन से मलता है।
उत्थापन ( लफ़्ट) — तरछे पंख से टकराकर वायु नीचे क ओर धकेली जाती है और वायु पंख को ऊपर क ओर धकेलती है।
यही ऊपर क ओर लगने वाला बल उत्थापन है।
भार — गुरुत्व उसे लगातार नीचे ख चता रहता है।
कषण ( ैग) — वायु का घषण उसक ग त कम कर दे ता है, इसी लए उड़ान समाप्त हो जाती है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार AglaSem · NCERT Solutions

उत्थापन

कषण फेंकना (पणोद)

भार

कागज के हवाई जहाज पर लगने वाले चार बल। वास्त वक वायुयान पर भी ठ क यही चार बल लगते ह।

ऐसा क्य होता है: कागज का हवाई जहाज एक छोटा-सा ग्लाइडर है। इसम इंजन नह होता, अतः यह धीरे-धीरे
अपनी ऊँचाई को आगे क ग त म बदलता जाता है। आरं भक अन्वेषक ने यही बात उड़ते प क्षय म दे खी —
लयोनाद दा वची ने प क्षय के पंख के अनेक रेखा चत्र बनाए, सर जॉज केली ने उनका अध्ययन कर ग्लाइडर के
प्र तरूप बनाए और सन् 1903 म राइट बंधुओं ने ग्लाइडर म हल्का इंजन जोड़कर पहली संचा लत उड़ान भरी। आज
भी अ भयंता वास्त वक वायुयान बनाने से पहले कागज और गत्ते के छोटे प्र तरूप का पवन-सुरंग म परीक्षण करते
ह।

करके दे खए: एक ही कागज से तीन हवाई जहाज बनाइए — एक पतले पंख वाला, एक चौड़े पंख वाला और एक
भारी नोक वाला। प्रत्येक को एक ही ान से तीन बार फककर दूरी मा पए। कौन-सा सबसे दूर जाता है और क्य ?
आपने अभी-अभी एक प्रयोग कर लया।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 2
व ान एक प्र क्रया है — कक्षा 7 के गूढ़ प्रश्न

प्र.1 यह संसार कैसे चलता है?

यह कक्षा 7 के तीन गूढ़ प्रश्न म पहला है। “कैसे” वाला प्रश्न व ध पूछता है — अथात् वह क्रम जससे कोई घटना घ टत होती है।
इसका उत्तर पाने का तरीका हर बार एक ही है —

1. वस्तु को भाग म बाँ टए। टॉच = सेल + स्वच + तार + बल्ब।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार AglaSem · NCERT Solutions

2. प्रत्येक भाग का काय पता क जए। सेल धारा को धकेलता है, तार उसे ले जाते ह, बल्ब का पतला तंतु चमकता है।
3. ृंखला का अनुसरण क जए और एक बार म केवल एक भाग बदलकर जाँ चए।

इस पुस्तक म आपक प्रतीक्षा करते कुछ “कैसे” प्रश्न —

सेल से जुड़ने पर बल्ब कैसे प्रका शत होता है?
ऊष्मा ज्वाला से स्ट ल क कड़ाही के हत्थे तक कैसे पहुँचती है?
खाया हुआ भोजन शरीर के कोने-कोने तक कैसे पहुँचता है?
समुद्र का जल आपके गाँव के कुएँ तक कैसे पहुँचता है?

यह प्रश्न क्य महत्वपूण है: जब आप जान लेते ह क कोई वस्तु कैसे काय करती है, तभी आप उसका पूवानुमान
लगा सकते ह, उसक मरम्मत कर सकते ह और उसे सुधार सकते ह। जो साइ कल मरम्मत करने वाला ब्रेक क
काय व ध जानता है, वह कसी भी ब्रेक को ठ क कर लेगा; केवल भाग के नाम रटने वाला नह ।

प्र.2 हमारे आस-पास जो घटनाएँ होती ह, वे ऐसे ही क्य होती ह?

“क्य ” वाला प्रश्न कारण पूछता है — अथात् वह वजह जसके चलते घटना इसी प्रकार घट , कसी और प्रकार नह । “कैसे”
चरण बताता है, “क्य ” उनके पीछे का कारण।

घटना “कैसे” (चरण) “क्य ” (कारण)

िगलास में रखी बफ िपघलती है गरम वायु से ऊष्मा बफ म जाती है ऊ मा सदै व गरम व तु से ठं डी व तु की ओर बहती है
ष् स् स्

दोपहर में परछाईं सबसे छोटी होती है परछाईं सुबह भर घटती है, फर बढ़ती है दोपहर में सूय आकाश में सव िधक ऊँ चाई पर होता है
गरिमयों में आम शीघ पकते है ं फल जल्द मुलायम और मीठा हो जाता है गरम होने पर पिरवतन तीव गित से होते है ं

ऐसा क्य होता है: “क्य ” का उत्तर तभी उपयोगी है जब उसका परीक्षण कया जा सके। य द कारण यह है क
ऊष्मा गरम से ठं डे क ओर बहती है, तो गलास को मोटे तौ लये म लपेटने पर बफ धीरे पघलनी चा हए — और
वास्तव म ऐसा ही होता है। जस कारण क जाँच न हो सके, वह अभी व ान नह है।

संकेत: उलझन हो तो “क्य ” दो बार पू छए। बफ क्य पघली? क्य क उस तक ऊष्मा पहुँची। ऊष्मा क्य पहुँची?
क्य क चार ओर क वायु अ धक गरम थी। दूसरा “क्य ” प्रायः असली उत्तर तक पहुँचा दे ता है।

प्र.3 और प्रकृ त म हम जो प्र तरूप दे खते ह, उनसे हम क्या सीख सकते ह?

प्र तरूप वह है जो नय मत रूप से दोहराया जाता है। व ान म प्र तरूप तीन कारण से बहुमूल्य ह।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

वे पूवानुमान क सु वधा दे ते ह। रात के बाद दन आता है, चंद्रमा लगभग 29–30 दन म घटता-बढ़ता है, मानसून जून के
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आरंभ म केरल पहुँचता है। दोहराव के कारण ही कसान बुवाई क और मछु आरा समुद्र-यात्रा क योजना बना पाता है।
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प्र तरूप वह .हैcजो हम दखता है; घूणन उसके पीछे का नयम है। a
वे कसी छपे नयम क ओर संकेत करते ह। दन-रात इस लए दोहराए जाते ह क्य क पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है।

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e संभव बनाते ह। ताँबा, लोहा और ऐलु म नयम — तीन चमकते ह, वद्युत चालन करते ह और पीटकर चादर
sकरण
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agबनाई जा सकती है। गुणधम का यही दोहराव इन्ह धातु वग म रखता है।

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आज ही दे खे जा सकने वाले प्र तरूप — पत्ती क शराओं का उसी प्रकार शा खत होना जैसे वृक्ष क शाखाएँ, मधुमक्खी के छत्ते के

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षट् भुजी कोष्ठ, सूरजमुखी म बीज का स पल क्रम, और एक ही रंगोली आकृ त का एक बदु के चार ओर चार बार दोहराया जाना।

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ऐसा क्य होता है: प्रकृ त म दोहराव इस लए है क्य क वही कारण बार-बार काय करते ह। जहाँ दोहराव मले, वहाँ
कोई नयम खोजे जाने क प्रतीक्षा म है — और प्र तरूप का टू टना तो और भी रोचक है, क्य क उसका अथ है क
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कोई नया कारण आ जुड़ा है।
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a प्र.4 कुछ फल ख े क्य होते ह?

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क्य क उनम अम्ल होते ह। ख ा स्वाद जीभ का वह संकेत है जससे अम्ल क उप त पता चलती है, और आपके जाने-पहचाने
हर ख े फल या खाद्य म कोई न कोई अम्ल है।

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ख ा पदाथ उसम उप त अम्ल
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.co िसिटक अ ल
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नी ंबू, संतरा, मौसमी

eइमली
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a gl टाटिरक अ ल म्

लै ि टक अ ल
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दही, छाछ

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िसरका म्

आँवला agl ऐ कॉिबक अ ल (िवटािमन C)
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एक ही फल का ख ापन उसक अव
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ा के साथ बदलता भी है। कच्चा हरा आम बहुत ख ा होता है, पका आम मीठा। फल पकने

s e mापन घटता है और मठास
बढ़तीoहैm
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पर उसका अ धकांश अम्ल व्यय हो जाता है और मंड (स्टाच) शकरा म बदल जाता है — अतः ख

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agl ऐसा क्य होता है: ख ापन ठ क वैसे ही पदाथ का एक गुणधम है जैसे चमक या कठोरता। अम्ल एक न त
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प्रकार से व्यवहार करते ह — वे नीले लटमस को लाल कर दे ते ह और क्षार से मलकर अपना ख ापन खो दे ते ह —

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इस लए ख े पन के आधार पर पदाथ को वग म बाँटा जा सकता है। यही कारण है क इस पुस्तक का अगला

s e mभ होता है।
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अध्याय ख और कड़वी वस्तुओं से आरं

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार AglaSem · NCERT Solutions

स्वयं जाँ चए: एक चम्मच जल म थोड़ा-सा न बू का रस डालकर च खए। अब उसम चुटक भर खाने का सोडा
मलाइए। बुदबुदाहट और ख े पन का लुप्त होना बताता है क अम्ल क भट क्षार से हो गई है।

प्र.5 जब हम अपने व ालय के गणवेश (वद ) पर लगे हल्द के दाग धोते ह तो क्या होता है?

साबुन या अपमाजक लगते ही हल्द का पीला दाग लाल-भूरा हो जाता है — लगता है दाग और बगड़ गया। फर जब खूब जल से
खँगालते ह तो लाल रंग फर से पीला हो जाता है और अ धक धोने पर दाग अंततः छू ट जाता है।

हल्दी + जल → रंग पीला ही रहता है

हल्दी + साबुन का िवलयन (क्षार) → लाल-भूरा हो जाता है

लाल-भूरा दाग + जल या नी ंबू का रस (अम्ल) → पुन ः पीला

ऐसा क्य होता है: हल्द म कक्यू मन होता है, जो एक प्राकृ तक सूचक है — अथात् ऐसा पदाथ जो अम्लीय तथा
उदासीन वस्तुओं के साथ एक रंग और क्षारीय वस्तुओं के साथ दूसरा रंग दखाता है। साबुन और अपमाजक के
वलयन क्षारीय होते ह, अतः वे कक्यू मन को लाल-भूरा कर दे ते ह। जल या न बू क एक बूँद पीला रंग लौटा दे ती है।
कुछ बगड़ा नह है; रंग तो बस यह बता रहा है क उसे कस प्रकार का पदाथ छू गया।

करके दे खए: सोख्ता कागज क एक प को हल्द के लेप म डु बोकर सुखा ली जए — आपक घर क बनी हल्द
सूचक प तैयार है। इसे साबुन के जल, न बू के रस, दही और सोडे के जल से छु आकर रंग नोट क जए। अम्ल और
क्षार वाले अध्याय म आप ठ क यही यु क्त काम म लगे।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 3
बैट रयाँ, बल्ब और तार; हमारे आस-पास के प रवतन

प्र.1 बल्ब को प्रका शत करने के लए हम कस प्रकार के पदाथ क आवश्यकता होती है?

हम ऐसे पदाथ चा हए जनम से वद्युत धारा प्रवा हत हो सके। इन्ह चालक कहते ह — और इनम से लगभग सभी धातुए ँ ह।
अपनी पुस्तक के पृष्ठ 3 का चत्र दे खए — एक सेल, दो तार, धारक म लगा एक छोटा बल्ब और प रपथ म जुड़ा हुआ एक स्ट ल
का चम्मच। बल्ब इस लए प्रका शत होता है क्य क चम्मच धातु का है, अतः प रपथ पूरे चक्र म पूण हो जाता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार AglaSem · NCERT Solutions

सेल बल्ब

जाँची जाने वाली वस्तु

वस्तु चालक हो तभी बल्ब पकािशत होगा

वह सरल परी क्षत्र जो आप बनाएँगे — सेल, तार, बल्ब और बीच म एक रक्त ान। वस्तु को उस रक्त ान म जो ड़ए और बल्ब दे खए।

बल्ब प्रका शत होता है — चालक बल्ब प्रका शत नह होता — व ुतरोधी

ताँबे का तार, लोहे की कील , टील का च मच, ऐलुिमिनयम प ी,
स् म् प्लािस्टक का स्के ल, रबर बैड
ं , सूखी लकड़ी, काँच, चॉक, कागज,
िस काक् कपड़ा

ऐसा क्य होता है: बल्ब के लए धारा का पूण एवं अटू ट पथ आवश्यक है। य द रक्त ान म रखी वस्तु चालक है
तो पथ पूरा हो जाता है और बल्ब जलता है; य द वह वद्युतरोधी है तो पथ टू टा ही रहता है और कुछ नह होता। ध्यान
द जए क यह सरल परीक्षण वास्तव म हम क्या दे ता है — गुणधम के आधार पर पदाथ को छाँटने क व ध।
पयाप्त पदाथ छाँ टए और दो स्पष्ट प रवार सामने आ जाएँगे — धातु और अधातु।

संकेत: य द चम्मच लगाने पर भी बल्ब न जले तो पहले साधारण कारण जाँ चए — तार का ढ ला सरा, समाप्त हो
चुका सेल, या चम्मच के हत्थे पर लगा रंग। अ े वै ा नक चतुर कारण गढ़ने से पहले साधारण कारण को हटाते ह।

प्र.2 हम दे खते ह क बैट रयाँ समाप्त हो जाती ह, बफ पघलकर जल बन जाती है, फल पक जाते ह, च ान टू टकर
पत्थर म प रव तत हो जाती ह आ द-आ द। ये सभी कस प्रकार के प रवतन ह?

ये सभी प रवतन ह, कतु इनके दो प रवार ह — कुछ अ ाई (उत्क्रमणीय) होते ह और कुछ ाई (अनुत्क्रमणीय)।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार AglaSem · NCERT Solutions

प रवतन प्रकार कारण

बफ िपघलकर जल बनना अ थाईस् जल को ठं डा करने पर बफ वापस मल जाती है — पदाथ वही है, केवल अव ा
(उ मणीय)
त्क्र बदली है

टॉच की बैटरी समाप्त होना थाई
स् भीतर के रसायन नए पदाथ म बदल चुके ह; हलाने-डु लाने से वे वापस नह आते
(अनु मणीय)त्क्र

फल का पकना थाई
स् मंड शकरा म बदल गया और अम्ल व्यय हो गए; पका आम फर कच्चा नह होता
(अनु मणीय)त्क्र

च ानों का टू टकर पत्थर थाई
स् पदाथ अब भी च ान ही है, पर टू टे टु कड़े जोड़कर वही मूल च ान नह बनाई जा
बनना (अनु मणीय)त्क्र सकती

अध्याय दो बात क ओर और ध्यान दलाना चाहता है —

ऊष्मा ग त बदल दे ती है। इनम से अनेक प रवतन गरम करने पर ही होते ह या गरम करने पर कह तीव्र ग त से होते ह —
आम मई म दसंबर क अपेक्षा शीघ्र पकते ह और गरम कमरे म बफ जल्द पघलती है।
तीव्र और मंद। बफ मनट म पघल जाती है; च ान को टू टकर पत्थर बनने म हजार वष लगते ह। दोन ही प रवतन ह।

ऐसा क्य होता है: अ ाई प रवतन म पदाथ का केवल रूप या अव ा बदलती है और मूल पदाथ ज्य का त्य
बना रहता है। ाई प रवतन म नए पदाथ बन जाते ह, या टु कड़ को फर से जोड़ा नह जा सकता, अतः लौटने का
कोई माग नह बचता।

स्वयं जाँ चए: दूध से दही जमना, मा चस क तीली का जलना और क ल पर जंग लगना — अ ाई या ाई? तीन
ाई ह। अब दे खए — गीले कपड़ का सूखना और रबर बड का खचना। दोन अ ाई ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 4
जंतुओं और पौध म जै वक प्रक्रम; समय और ग त

प्र.1 वशेषकर व ालय के मध्य स्तर क आयु म शरीर म तीव्रता से प रवतन होते ह! ऐसा क्य ?

क्य क यही वह आयु है जब शरीर वयस्क शरीर के रूप म वक सत होना आरंभ करता है। शरीर क ग्रं थय से नकलने वाले
रासाय नक संदेशवाहक, जन्ह हॉम न कहते ह, वृ क तीव्र ग त तथा अन्य प रवतन को प्रारंभ कर दे ते ह।

वृ क तीव्र ग त — शैशवाव ा के बाद लंबाई और भार इसी आयु म सबसे तेजी से बढ़ते ह। अ याँ लंबी होती ह,
इस लए प्रायः हाथ और पैर पहले बड़े दखने लगते ह।
शारी रक अनुपात बदलते ह — कंधे, कूल्हे और पे शयाँ वक सत होती ह तथा लड़क म स्वर भारी हो जाता है।
भावनाएँ भी बदलती ह — मन का उतार-चढ़ाव और नई रु चयाँ इसी प्र क्रया का सामान्य भाग ह।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: वृ एक जै वक प्रक्रम है। इतनी तेजी से नई अ और पेशी बनाने के लए शरीर को बहुत
अ धक कच्चा पदाथ और ऊजा चा हए, इसी लए इस आयु म भूख बढ़ जाती है। यह सब सामान्य है, सबके साथ
होता है और प्रत्येक व्य क्त म अलग-अलग ग त से होता है — इसक कोई “सही” ग त नह होती।

संकेत: तीव्र वृ के लए संतु लत आहार (दाल, दूध या दही, हरी स ब्जयाँ, फल, अंडा या मेवे), 8–9 घंटे क न द
और प्र त दन शारी रक क्रया आवश्यक है। इन वष म भोजन छोड़ना कसी भी अन्य आयु क तुलना म अ धक
हा नकारक है।

प्र.2 परंतु ऐसा केवल जंतुओं म ही क्य होता है?

ऐसा केवल जंतुओं म नह होता — पुस्तक यही बात कहलवाना चाहती है। अभी-अभी अनु े द ने जंतुओं के जै वक प्रक्रम गनाए
(भोजन, श्वसन, रक्त ारा पोषक तत्व का पहुँचना) और फर आपको रोक दया — पौधे भी तो सजीव ह, अतः पौध म भी यह सब
होना ही चा हए।

जै वक प्रक्रम जंतुओं म पौध म

पोषण दूसर का बनाया भोजन खाते ह हरी पि यों में अपना भोजन वयं बनाते है ं
त्त स्

श्वसन फेफड़े, क्लोम, त्वचा, वायु-न लकाएँ रंध, वातरंध, जड़ की सतह
पिरवहन हृदय ारा प्रवा हत रक्त तने के भीतर की निलकाओं से जल और भोजन
उत्सजन मूत्र, पसीना, नःश्वास रंधों से गैसें; पुरानी पि यों और छाल में संिचत अपिश ट
त्त ष्

वृि और जनन शशु बढ़कर वयस्क बनते ह बीज अंकुिरत होते है,ं पौधा बढ़ ता है, फू लता और िफर बीज दे ता है

ऐसा क्य होता है: जै वक प्रक्रम वह प्रत्येक प्रक्रम है जो जी वत रहने के लए शरीर को चलाना ही पड़ता है। प्रत्येक
सजीव — हाथी, आम का वृक्ष, कुकुरमुत्ता, जीवाणु — को पदाथ लेना, ऊजा मुक्त करना, चीज़ को इधर-उधर
पहुँचाना और बढ़ना पड़ता है। केवल साधन भन्न होते ह, आवश्यकता कभी नह ।

प्र.3 क्या पौध को वृ के लए भोजन क आवश्यकता नह होती है?

अवश्य होती है। भोजन प्रत्येक सजीव के लए दो काय करता है, और पौधे को दोन चा हए।

ऊजा — जो श्वसन के समय भोजन से मुक्त होती है और वृ , मरम्मत तथा पदाथ के प रवहन म लगती है।
नमाण-सामग्री — पौधे क नई प त्तयाँ, जड़, तना, पुष्प और बीज सब उसी भोजन से बने पदाथ से बनते ह।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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प्रमाण दे खना सरल है। अँधेरी अलमारी म गीली रुई पर रखा चने का बीज अंकु रत तो होता है, पर पीला और दुबला होकर मर जाता
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है। धूप म रखा दूसरा बीज हरा और मजबूत पौधा बनता है। पहले वाले ने बीज म सं चत भोजन समाप्त कर दया और नया भोजन
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बना नह सका।

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aवास्तव म पौधा खाने से कह अ धक चतुर काम करता है — वह जहाँ खड़ा है वह वायु, जल और सूय के प्रकाश से
यह बात क्य छू ट जाती है: हम पौधे को खाते हुए दे खते नह , इस लए लगता है क वह केवल जल पर जीता है।

अपना भोजन स्वयं बनाता है।
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प्र.4 वे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते ह?

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m .c सं ेषण क प्र क्रया ारा अपना भोजन स्वयं बनाते ह, जो मुख्यतः प त्तय aमgहोती है।
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हरे पौधे प्रकाश

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ag काबन डाइऑक्साइड + जल —सूय का पकाश, पणहिरत→ भोजन (ग् लूक ोज) + ऑक्सीजन
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प्रत्येक सामग्री कहाँ से आती है —

agकlे सूक्ष्म छद्र रं के ारा।
काबन डाइऑक्साइड — वायु से, पत्ती
जल और ख नज — जड़ मृदा से ख चती ह और तने क न लकाओं से प त्तय तक पहुँचते ह।
सूय का प्रकाश — ऊजा का ोत।
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m a s emपत्ती को पौधे का “भोजन
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पणह रत (क्लोरो फल) — पत्ती का हरा वणक, जो सूय के प्रकाश को ग्रहण करता है। इसी लए

. co कहते ह। a
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कारखाना”

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agl लपटती है उसी से भोजन चूसती है; घटपण ( पचर प्लांट) क ट को फँसाकर मृदा क कमी पूरी करती है।
कुछ पौधे ऐसा नह कर पाते और भोजन दूसरे ढं ग से लेते ह — अमरबेल (कस्कूटा) नामक पीली धागे जैसी लता जस पौधे पर

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comसारा भोजन प्रकाश सं ेषण से ही आरंभ होता है। आप g l a
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m कसी न कसी हरी पत्ती ने सूय के प्रकाश से पकड़ी थी। इस समय
यह हमारे लए क्य महत्वपूण है: पृथ्वी का लगभग
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रहेgह, वह भी इसी प्र क्रया से बनी है।
चावल खाएँ या मछली, आपक थाली क
आप जो ऑक्सीजन साँस म ले a

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mक्या वे भी साँस लेते ह? कैसे? as e
.co a g l
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प्र.5

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agl उत्तर
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हाँ। पौधे दन-रात, अपनी प्रत्येक जी वत को शका म श्वसन करते ह। उनके पास फेफड़े या नाक नह होते, अतः गैस का आदान-

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प्रदान पूरे पादप-शरीर पर फैले छोटे छद्र से होता है।

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तना — काष्ठीय तने क छालag
प त्तयाँ — रं से, जो पत्ती क सतह पर बने सूक्ष्म छद्र ह और खुलते-बंद होते रहते ह।
म बने वातरं से।

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जड़ — जड़ क सतह मृदा कण के बीच के रक्त ान से वायु ले लेती है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 1 व ान का नरंतर बढ़ता संसार AglaSem · NCERT Solutions

श्वसन प्रकाश सं ेषण

कब हर समय, िदन और रात केवल प्रकाश म

कहाँ प येक जीिवत कोिशका में
त् केवल हरे भाग म

ली जाने वाली गैस ऑ सीजनक् काबन डाइऑक्साइड

छोड़ी जाने वाली गैस काबन डाइऑ साइड
क् ऑक्सीजन

पौधे श्वसन करते हुए क्य नह दखते: तेज दन के प्रकाश म हरी पत्ती प्रकाश सं ेषण म काबन डाइऑक्साइड
इतनी तेजी से खच करती है क उसका अपना श्वसन जतनी बनाता है वह कम पड़ जाती है। इस लए बाहर से लगता
है क पत्ती केवल ऑक्सीजन छोड़ रही है। श्वसन रुका नह है — वह बस बड़ी प्र क्रया के पीछे छप गया है।

स्वयं जाँ चए: गमले के पौधे को कुछ दन आवश्यकता से अ धक जल द जए, वह मुरझा जाएगा। जल ने मृदा के
वायु- रक्त ान भर दए, अतः जड़ को ऑक्सीजन नह मल पाई। यही प्रमाण है क जड़ सचमुच साँस लेती ह।

प्र.6 अ ा, समय क्या होता है?

समय वह है जसे हम दो घटनाओं के बीच मापते ह। यह दो अलग-अलग बात बताता है — कौन-सी घटना पहले हुई और कोई
घटना कतनी दे र चली।
समय कोई ऐसी वस्तु नह जसे पकड़ा, तौला या डब्बे म रखा जा सके — पर उसे मापा जा सकता है, और व ान के लए इतना
पयाप्त है। हम उसे ठ क वैसे ही मापते ह जैसे लंबाई — एक न त मात्रक चुनकर यह गनकर क वह कतनी बार समाता है।

1 िमनट = 60 सेकं ड

1 घंट ा = 60 िमनट = 3600 सेकं ड

1 िदन = 24 घंटे = 24 × 3600 = 86 400 सेकं ड

समय का SI मात्रक सेकंड (s) है। ध्यान द जए क हमारे दै नक मात्रक आकाश क दोहराई जाने वाली घटनाओं से ही आए ह —
दन पृथ्वी का एक घूणन है, मास लगभग चंद्रमा का एक चक्कर और वष पृथ्वी का सूय के चार ओर एक चक्कर।

ऐसा क्य होता है: घड़ी इसी लए संभव है क्य क कुछ घटनाएँ हर बार समान अव ध म दोहराई जाती ह। य द
सूय दय एक दन छोटे अंतराल पर और दूसरे दन बड़े अंतराल पर होता, तो कोई पंचांग कभी बन ही नह पाता।

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प्र.7 क्या आपने कभी सोचा है क हम समय को कैसे मापते ह?

कसी दोहराई जाने वाली घटना को गनकर। जो भी घटना ठ क समान अंतराल पर दोहराई जाए, उसे घड़ी बनाया जा सकता है;
समय मापन का पूरा इ तहास ऐसी ही अ धका धक वश्वसनीय घटनाओं क खोज है।

उपकरण वह दोहराई जाने वाली घटना जसे वह गनता है

धूपघड़ी (छाया घड़ी) सूय की दै िनक या ा, िजससे परछाईं डायल पर िखसकती है
त्र

जल घड़ी, बालू घड़ी िनि चत पा से जल या बालू का समान गित से िरसना
श् त्र

लोलक घड़ी लोलक का इधर-उधर झूल ना
क्वाट् ज घड़ी, मोबाइल फ़ ोन वाट् ज के सू म ि टल के कं पन
क् क्ष् क्र स्

परमाण ु घड़ी परमाणुओं के भीतर के कं पन — सबसे अिधक िव वसनीय
श्

सबसे प्राचीन व ध वही है जसका उल्लेख आपक पुस्तक के इसी पृष्ठ पर है — वद्युत घ ड़य से बहुत पहले लोग सूय म रखी
वस्तु क परछाईं दे खते थे और परछाईं क त से समय बताते थे। जयपुर और दल्ली के जंतर-मंतर म आज भी इसी वचार पर
बनी वशाल पत्थर क धूपघ ड़याँ खड़ी ह।

लोलक इतना अ ा क्य काम करता है: कसी न त लंबाई के लोलक का प्रत्येक दोलन समान समय लेता है,
चाहे झूला चौड़ा हो या सँकरा। ऐसे 60 दोलन गन ली जए और आपके पास एक वश्वसनीय न त अंतराल है —
यही कारण है क लोलक घ ड़य ने लगभग 300 वष राज कया।

करके दे खए: 1 मीटर धागे म छोटा पत्थर बाँधकर झुलाइए। 20 पूरे दोलन का समय नापकर 20 से भाग द जए
— एक दोलन का समय मल जाएगा। अब आधे मीटर के धागे से दोहराइए। छोटा लोलक तेजी से झूलता है —
आपने अभी एक घड़ी बनाकर उसका परीक्षण भी कर लया।

प्र.8 और कोई क्रयाएँ कतनी तीव्रता से होती है?

“ कतनी तीव्रता से” का प्रश्न दर का प्रश्न है — अथात् एक मात्रक समय म कतना घ टत होता है। ग तमान वस्तु के लए इसे चाल
कहते ह।

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चाल = तय की गई दू री ÷ िलया गया समय

एक धावक 20 s में 100 m दौड़ ता है
चाल = 100 ÷ 20 = 5 m/s

km/h में: 5 × 3600 ÷ 1000 = 18 km/h

चाल क तुलना से ही दौड़ का अथ बनता है। दो धावक म तेज वही है जो समान दूरी कम समय म तय करे, अथवा समान समय म
अ धक दूरी।
“ कतनी तीव्रता से” केवल ग त पर ही नह , प रवतन पर भी लागू होता है —

मा चस क तीली कुछ ही सेकंड म जल जाती है — तीव्र प रवतन।
लोहे के फाटक पर महीन म जंग लगता है — मंद प रवतन।
च ान हजार वष म टू टकर पत्थर बनती है — अत्यंत मंद प रवतन।

ऐसा क्य होता है: तीव्रता बताने के लए लए गए समय से भाग दे ना अ नवाय है। इसी लए अकेला “तेज” शब्द
नरथक है — 60 km चलने वाली बस तब तक न तेज है न मंद, जब तक यह न बताया जाए क उसने एक घंटा
लया या एक दन।

स्वयं जाँ चए: मीटर स्केल से वद्यालय के ग लयारे क लंबाई ना पए और कसी मत्र को उसे पार करने म लगा
समय मा पए। लंबाई म समय का भाग द जए — यही आपके मत्र क चाल मीटर प्र त सेकंड म है। साधारण चलने
क चाल लगभग 1.2–1.5 m/s नकलती है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 5
परछाइयाँ, ग्रहण तथा पृथ्वी और चंद्रमा क ग तयाँ

प्र.1 क्या यह आश्चयजनक नह है क जस अ त संसार म हम रहते ह, उससे हम अचं भत भी हो सकते ह?

हाँ — और संभवतः यही हमारी सबसे उल्लेखनीय वशेषता है। हम उन वस्तुओं के वषय म प्रश्न पूछ सकते ह जन्ह हम न कभी
छू सकते ह, न वहाँ जा सकते ह और न प्रयोगशाला म ला सकते ह — फर भी उत्तर खोज लेते ह।
दे खए, इसी एक पृष्ठ ने अभी क्या-क्या कहा है —

पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है, जससे दन और रात होते ह। आधा भाग सूय के सामने रहता है और आधा अपनी ही परछाईं म
— पृष्ठ 5 का चत्र ठ क यही दखाता है।
चंद्रमा पृथ्वी के चार ओर और पृथ्वी सूय के चार ओर चक्कर लगाती है।
जब इनम से कोई पड दूसरे क परछाईं म आ जाता है तो ग्रहण होता है — पहले चत्र वाली वही रोचक प रघटना।

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इनम से कसी बात क जाँच करने कोई पृथ्वी से बाहर खड़ा होकर फ ता लेकर नह गया। यह सब धैयपूण अवलोकन से नकला —
छड़ी क परछाईं, चंद्रमा का बदलता आकार, ग्रहण का समय — छोटे -छोटे साधारण अवलोकन, ध्यानपूवक जोड़े गए।

ऐसा क्य होता है: ज ासा ही प्रत्येक खोज का आरंभ- बदु है। ृंखला सदै व यही रहती है — अचंभा → प्रश्न →
अवलोकन → परीक्षण → व्याख्या। अचंभा व ान का वरोधी नह , उसका आरंभ है। इसी लए इस पुस्तक का नाम
ज ासा है।

क्या आप जानते ह? भारतीय खगोलशास्त्री आयभट ने लगभग 1500 वष पूव लखा था क पृथ्वी अपने अक्ष पर
घूमती है और ग्रहण परछाइय के कारण होते ह, कसी जीव के सूय को नगलने से नह । यह नष्कष उन्ह ने केवल
अवलोकन और ग णत के बल पर नकाला था।

क्रयाकलाप 1.1 — उत्तर के प्रश्न बनाइए — पृष्ठ 5–6
खंड 1.1 आनंददायक अन्वेषण!

क्रयाकलाप

प्र.1 मान ली जए क आपका उत्तर था — “इसे ठ क आधा कर दो।” यह कस प्रश्न का उत्तर हो सकता है?

यह पुस्तक का दया हुआ उदाहरण है, जो दखाता है क एक ही उत्तर बलकुल भन्न- भन्न अनेक प्रश्न का हो सकता है।
पाठ्यपुस्तक स्वयं तीन प र तयाँ दे ती है —

“कैसे सु न त करगे क हम तरबूज का बराबर भाग प्राप्त हो?”
“मेरा नबंध वस्तृत है, म इसे लफाफे म नह रख सकती।”
“म इतने लंबे गीत पर नृत्य नह कर सकती....”

यही उत्तर और कहाँ-कहाँ चल सकता है, कुछ और उदाहरण —

“यह व ध आठ लोग के लए है, पर हम तो केवल चार ही खाने वाले ह।”
“रंगोली का यह प्रारूप हमारी दे हरी के लए बहुत बड़ा है।”
“मेरा वद्यालय-बस्ता प्र त दन उठाने के लए बहुत भारी है।”
“भाषण 10 मनट का है और मुझे केवल 5 मनट मले ह।”

पुस्तक यहाँ से क्य आरंभ करती है: परीक्षा म प्रश्न न त होता है और उत्तर केवल एक ही सही होता है।
वास्त वक व ान म बात उलट है — उत्तर प्रायः सामने पड़ा होता है और क ठन काम उसके बारे म सही प्रश्न पूछना
है। एक जीवाश्म, एक दाग, मीटर का एक पाठ्यांक — ये सब उत्तर ही तो ह, जो कसी के प्रश्न पूछने क प्रतीक्षा कर
रहे ह।

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संकेत: यह खेल जोड़ी बनाकर खे लए। एक व्य क्त उत्तर बोले, दूसरा 30 सेकंड म उसके तीन प्रश्न बनाए। आप

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पाएँगे क उत्तर जतना मजेदार होगा, प्रश्न उतने ही अ े बनगे।
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agl प्रश्न — ______________________________________________? उत्तर — बस थोड़ा दूध डाल।
प्र.2

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agबन सके — यहाँ कोई प्रश्न गलत नह होता। प्रश्न अ ा तभी है जब दया गया
ऐसा कोई भी प्रश्न सही है जसका यह उ चत उत्तर
उत्तर सचमुच उसका समाधान करता हो।

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नमूना उत्तर:

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coकmे चूण को पीने योग्य कैसे बनाऊँ?” g l
“चाय बहुत कड़क और कड़वी बन गई है — अब क्या करूँ?”
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s eडीmहोते-होते खीर बहुत गाढ़ हो गई है। इसे पतला कैसे करूँ?”
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“रोट का आटा भुरभुरा हो रहा है। इसम क्या मलाऊँ?”

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“कॉफ इतनी गरम है क पी नह सकती और मुझे एक मनट म नकलना है!”

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करके दे खए: ऐसा एक प्रश्न ल खए जसके लए “बस थोड़ा दूध डाल” बहुत बुरा उत्तर होगा — जैसे “इस
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शकंजी को और स्वा दष्ट कैसे बनाऊँ?” यह सोचना क कोई उत्तर कस प्रश्न पर फट बैठता है और कस पर नह ,

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स्वयं म अ वै ा नक सोच है।

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a s em प्रश्न — ______________________________________________? उत्तर — क्य क बल्ली के दाँत टेढ़े थे।
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प्र.3

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.c वाले प्रश्न का ही हो सकता है। यही एक संकेत इसे दखने से कह आसान ag l
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“क्य क…” से आरंभ होने वाला उत्तर कसी “क्य …?”
बना दे ता है।
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नमूना उत्तर: ag
“चूहा बल्ली से बचकर कैसे नकल भागा?” — अथवा “चूहा बल्ली क पकड़ से क्य छू ट गया?”
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“ बल्ली ने आधी मछली क्य छोड़ द ?”

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“इस बल्ली क मुस्कान चत्र म इतनी मजेदार क्य लग रही है?”

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“पशु- च कत्सक ने बल्ली को अगले सप्ताह फर लाने को क्य कहा?”

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यह अ ा अभ्यास क्य है: उत्तर म कारण बताया गया है, अतः आपको उसके साथ चलने वाला प रणाम कल्पना

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करना है। कारण से पीछे क ओर चलकर संभा वत प रणाम खोजना ठ क वही है जो वै ा नक तब करता है जब वह

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पूछता है — “य द यह सत्य है तो हम और क्या-क्या दखना चा हए?”

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प्र.4 प्रश्न — ______________________________________________? उत्तर — घबराइए मत, मेरे पास तौ लया है।

यह उत्तर कसी घबराए हुए व्य क्त को दया गया शांत उत्तर है — अतः प्रश्न म कोई छोट -मोट वप त्त होनी चा हए।
नमूना उत्तर:

“वषा आरंभ हो गई है और घर अभी आधा घंटा दूर है — अब क्या होगा?”
“बस्ते के भीतर पानी क बोतल पूरी छलक गई है!”
“ पक नक के बाद तैरने के लए हम कुछ भी रखना भूल गए।”
“ वद्यालय के समूह- चत्र से पहले अपने बाल कैसे सुखाओगे?”
“खेल के मैदान क बच गीली है — हम बैठगे कहाँ?”

क्या आप जानते ह? “घबराइए मत” और तौ लया, दोन व ान-कथा क मजेदार पुस्तक द हचहाइकस गाइड टु द
गैलेक्सी से आए ह, जसम कहा गया है क अंत रक्ष यात्री के लए तौ लया सबसे उपयोगी वस्तु है। अगले उत्तर म
आपक पाठ्यपुस्तक फर उसी पुस्तक क ओर संकेत कर रही है।

प्र.5 प्रश्न — ______________________________________________? उत्तर — 42

एक संख्या हजार प्रश्न का उत्तर हो सकती है — कतु पुस्तक कहती है क पूवानुमा नत माग (“32+10 कतना होता है?”) मत
ली जए। अतः ऐसे प्रश्न ढूँ ढ़ए जनम 42 कोई वास्त वक और रोचक मात्रा हो।
नमूना उत्तर:

“हमारी कक्षा के कतने वद्या थय ने व ान मेले म भाग लया?”
“ पछले मई म हमारे नगर का उच्चतम तापमान °C म कतना दज हुआ?”
“पूरी कक्षा के खा लेने के बाद कतने लड्डू बचे?”
“ वद्यालय क घंट कतने सेकंड तक बजती है?”
“अप्रैल से अब तक अभ्यास-पु स्तका के कतने पृष्ठ भर चुके ह?”
“ वद्यालय के सभागार म कु सय क कतनी पं क्तयाँ ह?”

यह अभ्यास वास्तव म क्या सखा रहा है: अकेली संख्या का कोई अथ नह होता। 42 तभी सूचना बनती है जब
वह कसी प्रश्न और कसी मात्रक से जुड़े — 42 वद्याथ , 42 °C और 42 सेकंड तीन बलकुल अलग तथ्य ह।
इसी लए इस पूरी पुस्तक म हर माप के साथ मात्रक लखने को कहा जाएगा।

क्या आप जानते ह? द हचहाइकस गाइड टु द गैलेक्सी म एक वशाल संगणक लाख वष सोचकर घोषणा करता
है क जीवन, ब्र ांड और सब कुछ का उत्तर 42 है — पर कसी को याद ही नह क प्रश्न क्या था। यही मजाक इस
क्रयाकलाप का मम है — प्रश्न के बना उत्तर व्यथ है।

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अध्याय — एक नज़र म
ज ासा कक्षा 7 केवल तथ्य से भरी पाठ्यपुस्तक नह है। यह प्रश्न पूछने, प्रयोग करने और खोज करने का नमंत्रण है —
व ान एक प्र क्रया है, सोचने क एक व ध जसम ज ासा का स्वागत है और अ ात को जानने का प्रयास कया जाता है।
कक्षा 6 म हमने अ धकतर क्या पूछा था। कक्षा 7 म हम और गूढ़ प्रश्न पूछगे — “यह संसार कैसे चलता है?”, “घटनाएँ
ऐसे ही क्य होती ह?” तथा “प्रकृ त के प्र तरूप से हम क्या सीख सकते ह?”
यह अध्याय पूरी पुस्तक क एक झलक है — पदाथ के गुणधम और ख े फल, वद्युत प रपथ, धातु एवं अधातु, अ ाई तथा
ाई प रवतन, ऊष्मा, जल, जंतुओं और पौध म जै वक प्रक्रम, समय और ग त, प्रकाश एवं परछाइयाँ तथा पृथ्वी और चंद्रमा
क ग तयाँ।
पुस्तक भले ही अलग-अलग अध्याय म छपी हो, पर व ान के सभी क्षेत्र — भौ तक व ान, रसायन व ान, जीव व ान
और भू- व ान — परस्पर जुड़े हुए ह। एक क्षेत्र का वै ा नक- वचार प्रायः दूसरे क्षेत्र म खोज को, या कम से कम एक अ े
प्रश्न को, जन्म दे ता है।
व ान केवल खोज का नह , उत्तरदा यत्व का भी वषय है। मानवीय ग त व धयाँ प्रकृ त से जुड़ी ह, अतः पयावरण-संबंधी
चुनौ तय को हल करके एक उपयुक्त संसार बनाने म व ान क बड़ी भू मका है।
पुस्तक के पृष्ठ के अंक भी यही संदेश दे ते ह — वे एक ततली और एक कागज के हवाई जहाज का अनुसरण करते ह,
क्य क जब ज ासा आगे बढ़ती है तब सीखने को उड़ान मलती है। और जैसा क्रयाकलाप 1.1 बताता है, महान वै ा नक
केवल उत्तर नह दे ते, वे अ त प्रश्न भी पूछते ह।

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय म दै नक जीवन का उदाहरण
कहाँ

व ान एक सोचने और काय करने की िविध — अवलोकन, पश्न, परीक्षण; पृष्ठ 2 चम्मच से बल्ब जलता है या नह , यह
प्र क्रया के वल तथ्यों का संग ह नही ं जाँचना

गूढ़ प्रश्न “कै से ” या “क्यों” वाला पश्न जो नाम नही ं, िविध या कारण पूछता है पृष्ठ 2 “घटनाएँ ऐसे ही क्य होती ह?”

प्रकृ त का जो िनयिमत रूप से दोहराया जाता है, अतः िजसका पूव नुम ान पृष्ठ 2 दन-रात, चंद्रमा क कलाएँ, मानसून
प्र तरूप लगाया जा सकता है

पदाथ का वह लक्षण िजससे एक पदाथ को दू स रे से पहचाना और वग कृ त पृष्ठ 2–3 न बू का ख ापन; धारा प्रवा हत करने
गुणधम िकया जाता है वाला तार

धातु और अधातु िव तु चालन जैसे ग ण
ु धम ं की जाँच से बनने वाले पदाथ ं के दो पृष्ठ 3 ताँबे का तार (धातु), प्ला स्टक का
बड़े वग स्केल (अधातु)

अ ाई प रवतन वह पिरवतन िजसे उलटा िकया जा सके और मूल पदाथ वापस पृष्ठ 3 बफ का पघलना और जल का पुनः
िमल जाए जमना

ाई प रवतन वह पिरवतन िजसे उलटा नही ं िकया जा सकता पृष्ठ 3 टॉच क बैटरी का समाप्त होना; फल
का पकना

जै वक प्रक्रम वह पक्रम जो जीिवत रहने के िलए हर सजीव को करना ही पड़ता है पृष्ठ 4 पोषण, श्वसन, प रवहन, वृ

समय मापन िकसी िनयिमत रूप से दोहराई जाने वाली घटना की िगनती करना पृष्ठ 4 धूपघड़ी पर खसकती परछाई;
झूलता लोलक

चाल कोई िक्रया िकतनी तीवता से होती है — तय की गई दू र ी भाग पृष्ठ 4 20 s म 100 m = 5 m/s
िलया गया समय

परछाईं और अपारदश वस्तु पकाश रोके तो परछाईं बनती है; पथ्ृ वी और चंद मा पृष्ठ 5 सूय ग्रहण; पृथ्वी पर दन-रात क
ग्रहण की भी परछाईं बनती है रेखा

उत्तर के प्रश्न िक्रयाकलाप 1.1 का खेल — उत्तर िदया गया है, पश्न आपको पृष्ठ 5–6 उत्तर — “बस थोड़ा दूध डाल।” प्रश्न
बनाइए बनाना है —?

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages18
Languagehindi
Updated19 Sep 2026