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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 3: व त
ु : प रपथ एवं उनके घटक
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
23 – 40 21 51 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 55 pages
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: व त
ु : प रपथ एवं उनके घटक
नहाल के भाखड़ा नंगल बाँध भ्रमण से आरंभ होने वाला यह अध्याय एक साधारण टॉच को खोलकर समझाता है। इसम आप वद्युत सेल एवं बैटरी,
तापद प्त लप एवं एल.ई.डी., स्वच, प रपथ आरेख बनाने के प्रतीक तथा अंत म व ुत के चालक एवं व ुतरोधी पदाथ के वषय म जानगे।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (कक्षा 7) 23 – 40
खं ड प्रश्न
21 51
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 24–25
अध्याय का आरंभ एवं खंड 3.1 टॉच-लाइट
प्र.1 क्या आप इस सूची म व ुत के कुछ अन्य उपयोग अं कत कर नहाल और उसके सहपा ठय क सहायता कर
सकते ह? व ुत के उपयोग के वग करण क कसी अन्य व ध का सुझाव भी द जए।
हाँ। नहाल के प्रत्येक शीषक के अंतगत और अ धक उपयोग जोड़े जा सकते ह तथा पूरी सूची को अन्य प्रकार से भी वग कृत कया
जा सकता है।
उसके शीषक म जोड़े जा सकने वाले उपयोग:
शीषक जोड़े जा सकने वाले उपयोग
पकाश-व्यवस्था में ूब लाइट, एल.ई.डी. बल्ब, मेज-लप, आपातकालीन लप, यातायात संकेतक, च कत्सालय के ऑपरेशन-कक्ष के लप,
द पावली क झालर
पाक-ि या में इंडक्शन चूल्हा, वद्युत चावल-कुकर, रोट मेकर, जल-शोधक, वद्युत तंदूर
ऊष्मन एवं शीतलन कूलर, हेयर ायर, वद्युत इस्तरी, स ब्जय का शीत-भंडार, बस का वातानुकूलक
में
पिरवहन में मे ो रेल, ई- रक्शा, वद्युत बस, वद्युत स्कूटर, रोपवे
संचार के िलए दूरभाष, दूरदशन प्रसारण, रे डयो कद्र, वाई-फाई राउटर, मोबाइल टॉवर
मनोरंजन के िलए संगीत प्रणाली, वी डयो गेम, सनेमा प्रोजेक्टर, मेले का लाउडस्पीकर
अन्य उपयोग सचाई के लए नलकूप, कपड़े धोने क मशीन, सलाई मशीन, एक्स-रे मशीन, छापाखाना, ए.ट .एम.
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वग करण क अन्य व धयाँ:
ान के आधार पर — घर, वद्यालय, च कत्सालय, खेत, फैक् , दुकान, सड़क।
वद्युत कस रूप म बदलती है, इसके आधार पर — प्रकाश (बल्ब), ऊष्मा (इस्तरी), ध्व न (रे डयो), ग त (पंखा), अथवा म श्रत
(हेयर ायर म ऊष्मा + ग त)।
ोत के आधार पर — सेल या बैटरी से चलने वाली यु क्तयाँ (टॉच, रमोट) तथा द वार के सॉकेट से चलने वाली यु क्तयाँ
(रे जरेटर, गीजर)।
उपयोगकता के आधार पर — घरेलू उपयोग, कृ ष उपयोग, औद्यो गक उपयोग, च कत्सा उपयोग, प रवहन उपयोग।
यह करके दे खए: एक कॉपी लेकर अपने घर म घू मए और उन यु क्तय को ग नए जो वद्युत न होने पर काम
करना बंद कर दगी। प्रायः यह संख्या 20 से अ धक नकलती है।
प्र.2 स्वच क एक त (ऑन त) म टॉच का लप द प्तमान क्य हो जाता है?
क्य क उस त म स्वच प रपथ को पूरा कर दे ता है।
टॉच के भीतर एक सेल (या बैटरी), एक लप तथा एक स्वच होते ह जो धातु क प य और तार से जुड़े रहते ह। स्वच वास्तव म
धातु का एक चल टु कड़ा ही है जो या तो अंतराल को पाट दे ता है या उसे खुला छोड़ दे ता है।
ऑन त — स्वच अंतराल को बंद कर दे ता है, अतः सेल के धन ट मनल से लप होते हुए ऋण ट मनल तक एक अटू ट पथ
बन जाता है। तंतु म धारा प्रवा हत होती है, वह गम होकर द प्त हो जाता है।
ऑफ त — स्वच वायु का अंतराल छोड़ दे ता है। वायु वद्युतरोधी है, अतः पथ भंग हो जाता है, धारा नह बहती और लप
द प्त नह होता।
ऐसा क्य होता है: केवल सेल पास होने से लप द प्त नह होता। धारा को वास्तव म तंतु म से होकर गुजरना पड़ता
है और धारा केवल बंद पाश (लूप) म ही बह सकती है। पाश को कह भी तोड़ द जए — स्वच पर, ढ ले तार पर,
अथवा टू टे तंतु पर — लप बुझ जाएगा।
क्रयाकलाप 3.1 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 24
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खंड 3.1 टॉच-लाइट
क्रयाकलाप
प्र.1 चत्र 3.1 म दशाई गई जैसी एक टॉच ली जए। सावधानीपूवक इसका अवलोकन क जए। क्या आपको इसम
कोई लप और एक स्वच दखाई दे ता है?
ि स्वच
लैप
ं
कलाई प - ी बॉडी (भीतर सेल)
चत्र 3.1, पृष्ठ 24 — टॉच-लाइट; यहाँ नामां कत रेखा चत्र के रूप म पुनः बनाया गया।
हाँ, दोन सरलता से दखाई दे ते ह।
लप टॉच के अगले सरे पर काँच अथवा प्ला स्टक क खड़क के पीछे , एक चमक ले घुमावदार परावतक के भीतर लगा होता
है। यह छोटा तापद प्त बल्ब भी हो सकता है और एक या अ धक एल.ई.डी. भी।
स्वच टॉच के बेलन पर लगा वह छोटा खसकने वाला (अथवा दबाने वाला) बटन है जो ठ क वहाँ होता है जहाँ अंगूठा
स्वाभा वक रूप से टकता है।
स्वयं जाँ चए: लप क ओर दे खे बना स्वच खसकाइए। प्रायः एक हल्क ' क्लक' महसूस होती है — यही वह क्षण
है जब भीतर क धातु क प स्पश करती है और प रपथ पूरा हो जाता है।
प्र.2 इसके स्वच को खसकाइए और अवलोकन क जए। क्या टॉच का लप द प्त होता है? अब स्वच को खसका
कर उसक पूव त म लाइए और टॉच लप का अवलोकन क जए।
हाँ, स्वच क एक त म लप द प्त होता है और पूव त म लाने पर बुझ जाता है।
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िस्वच एक ओर िखसकाया → पिरपथ बंद → धारा पवािहत → लैपं दीप्त (ऑन )
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िस्वच वापस िखसकाया → पिरपथ खुला → धारा नही ं → लैपं दीप्त नही ं (ऑफ)
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aglक जस त म लप द प्त होता है वह उसक 'ऑन'
स्वच त कहलाती है और दूसरी त, जसम लप द प्त नह होता,
'ऑफ' त कहलाती है।
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प्र.3 ag क्या दखाई दया?
अब टॉच को खो लए। इसके अंदर आपको
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टॉच के भीतर दो या दो से अ धक वद्युत सेल एक के पीछे एक लगे दखाई दे ते ह, तथा उन्ह जोड़ने वाले भाग भी।
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ध्यान से दे खने पर ये सब दखाई दे ते ह:
a gl व ुत सेल — एक पं क्त म लगे हुए, एक सेल क + टोपी अगले सेल क – चकती को स्पश करती हुई।
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एक ग पछले सरे पर, जो सेल को दबाकर संपक बनाए रखती है।
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धातु क प याँ अथवा तार जो बेलन के भीतर-भीतर चलकर धारा को लप तक पहुँचाते ह।
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आगे क ओर लप एवं परावतक तथा बीच म स्वच।
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ऐसा क्य होता है: टॉच वास्तव म एक सुव्यव त रूप से पैक कया हुआ वद्युत प रपथ ही है — सेल ( ोत), तार
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एवं धातु क प याँ (पथ), लप (यु क्त) तथा स्वच ( नयंत्रण)। इस अध्याय म आप जो कुछ पढ़गे, वह सब आपके
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हाथ क टॉच म पहले से मौजूद है।
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a क्रयाकलाप 3.2 — आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 25
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खंड 3.2.1 व ुत सेल
क्रयाकलाप
प्र.1 एक व ुत सेल ली जए। इसे सभी तरफ से ध्यानपूवक दे खए ( चत्र 3.2)। क्या आप व ुत सेल पर धन (+)
चह्न और ऋण (–) चह्न अं कत दे खते ह?
धनात्मक िसरा ऋणात्मक िसरा
+ –
चत्र 3.2, पृष्ठ 25 — व ुत सेल, इसके दोन सरे अं कत ह।
हाँ। प्रत्येक सेल के बाहरी आवरण पर एक सरे पर + चह्न और दूसरे सरे पर – चह्न मु द्रत होता है।
ये दोन चह्न सेल के दो ट मनल के नाम बताते ह:
सेल पर अं कत चह्न ट मनल का नाम संक्षेप
+ धनात्मक ट मनल धन (+)
– ऋणात्मक ट मनल ऋण (–)
संकेत: एल.ई.डी. जोड़ते समय तथा बैटरी म सेल लगाते समय ये चह्न अत्यंत महत्त्वपूण होते ह, अतः प रपथ बनाते
समय इनक उपेक्षा कभी न क जए।
प्र.2 क्या आप यह भी दे खते ह क इसके एक सरे पर एक उभरी हुई धातु क टोपी है और दूसरे सरे पर धातु क
डस्क है?
हाँ — और ये केवल सजावट नह , स्वयं ट मनल ही ह।
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सेल का भाग कैसा दखता है कौन-सा ट मनल
धातु की टोपी एक सरे पर बाहर नकली हुई छोट उभरी हुई टोपी धनात्मक (+) टिमनल
धातु की चकती दूसरे सरे को ढकती चपट धातु क डस्क ऋणात्मक (–) टिमनल
अतः य द सेल पर छपे चह्न घस भी जाएँ, तब भी उभरी हुई टोपी को छू कर आप ट मनल क पहचान कर सकते ह।
ऐसा क्य होता है: टोपी और चकती ही सेल के वे दो धातु भाग ह जनसे तार जोड़ा जा सकता है। इनके बीच का
सारा भाग सेल का रासाय नक पदाथ है जो रासाय नक ऊजा को वद्युत ऊजा म बदलता है। इसी लए वद्युत सेल को
वद्युत ऊजा का सुवाह्य ोत कहा जाता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 25
खंड 3.2.2 बैटरी
प्र.1 टॉच म हम सामान्यतः एक से अ धक सेल का उपयोग करते ह। क्या वे इसम कसी वशेष क्रम म लगे होते ह?
हाँ। उन्ह एक न त क्रम म ही लगाना पड़ता है — एक सेल का धनात्मक सरा अगले सेल के ऋणात्मक सरे से जुड़ा हुआ।
सही: [– सेल +] [– सेल +] → पहले की + टोपी दू सरे की – चकती से िमलती है
गलत: [– सेल +] [+ सेल –] → समान टिमनल आमने -सामने आ जाते है ं और सेल एक-दू सरे का िवरोध करते
है ं
जब सेल सही क्रम म लगे होते ह तो यह संयोजन बैटरी कहलाता है और लप द प्त होता है। य द एक सेल उलटा लगा दया जाए तो
दोन सेल धारा को वपरीत दशाओं म धकेलते ह, उनके प्रभाव कट जाते ह और लप द प्त नह होता।
संकेत: कसी रमोट या खलौने के सेल-कोष्ठ म झाँककर दे खए — वहाँ सेल को सही क्रम म रखने के लए छोटे -
छोटे '+' और '–' चह्न मु द्रत मलगे।
क्रयाकलाप 3.3 — आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 25
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खंड 3.2.2 बैटरी
क्रयाकलाप
प्र.1 उनके क्रम बदल कर वापस प्रकोष्ठ म र खए। एक सेल क दशा उलट करके भी प्रयोग दोहराइए। स्वच को
खसकाइए और जाँ चए क क्या प्रत्येक प्रकरण म इसका लप द प्त होता है।
लप केवल उन्ह व्यव ाओं म द प्त होता है जनम एक सेल का धन ट मनल दूसरे सेल के ऋण ट मनल को स्पश करता है।
दोन सेल कस प्रकार लगे ह सेल सहयोग करते ह या वरोध? लप
–+ –+ पहले का + दूसरे के – से मलता है — परस्पर सहयोग दीप्त होता है
–+ +– + से + मलता है — परस्पर वरोध दीप्त नही ं होता
+– –+ – से – मलता है — परस्पर वरोध दीप्त नही ं होता
+– +– पहले का – दूसरे के + से मलता है — परस्पर सहयोग दीप्त होता है
ऐसा क्य होता है: + से – जोड़े गए दो सेल अपने प्रभाव को जोड़ दे ते ह, अतः तंतु म इतनी धारा प्रवा हत होती है
क वह द प्त हो जाए। + से + (अथवा – से –) जोड़े गए सेल वपरीत दशाओं म धकेलते ह, उनके प्रभाव कट जाते
ह और लगभग कोई धारा नह बहती।
प्र.2 ध्यान द जए क जब लप द प्त होता है तो टॉच म सेल कस क्रम म लगाए गए थे।
जब लप द प्त होता है तब सेल चत्र 3.3 म दशाए गए क्रम म लगे होते ह — एक सेल का धनात्मक सरा अगले सेल के
ऋणात्मक सरे से जुड़ा होता है।
[ – सेल 1 + ] → [ – सेल 2 + ]
सेल 1 का मुक्त – तथा सेल 2 का मुक्त + ही बैट री के दो टिमनल बनते है।
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दो या दो से अ धक सेल का इस प्रकार का संयोजन बैटरी कहलाता है। चत्र 3.3 (क) म दो सेल क और चत्र 3.3 (ख) म चार
सेल क बैटरी दशाई गई है — दोन म वही + से – वाला नयम लागू है।
क्या आप जानते ह? 'बैटरी' शब्द का उपयोग एकल सेल के लए भी कया जाता है। हमारे मोबाइल फोन को ऊजा
दे ने वाले एकल सेल को भी हम बैटरी ही कहते ह।
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क्रयाकलाप 3.4 — आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 26
खंड 3.2.3 व ुत लप — तापद प्त लप
क्रयाकलाप
प्र.1 टॉच ली जए और इसके लप का ध्यान से नरीक्षण क जए। आप क्या दे खते ह? क्या आपको काँच के बल्ब के
मध्य म लगा एक पतला तार दखाई दे ता है?
हाँ। काँच के छोटे बल्ब के भीतर मध्य म एक बहुत पतला, कुंड लत तार लगा दखाई दे ता है, जसके दोन सरे कह अ धक मोटे
तार पर टके होते ह।
बाहर से भीतर क ओर आपको ये भाग दखाई दे ते ह:
पारदश काँच का बल्ब।
आधार से ऊपर उठते दो मोटे तार — ये केवल पतले तार को थामते और उस तक धारा पहुँचाते ह।
उनके बीच लगा पतला तार, जो प्रायः छोट कमानी क भाँ त कुंड लत होता है।
आधार पर लगा व ुतरोधी का छल्ला जो दोन ट मनल को स्पश करने से रोकता है।
प्र.2 अब टॉच का स्वच ऑन क जए। लप का कौन-सा भाग द प्त होता है?
काँच के बल्ब के भीतर लगा केवल पतला तार द प्त होता है। यही द प्तमान पतला तार लप का तंतु कहलाता है।
मोटे आधार-तार, काँच का बल्ब तथा धातु का आवरण अद प्त और अपेक्षाकृत ठं डे बने रहते ह।
ऐसा क्य होता है: मोटे तार और पतले तंतु — दोन म से वही धारा गुजरती है, कतु पतला तंतु धारा का कह
अ धक वरोध करता है। यही अ त रक्त वरोध तंतु को इतना गम कर दे ता है क वह श्वेत-तप्त होकर प्रकाश दे ने
लगता है। इसी कारण ऐसे लप को तापद प्त लप कहते ह।
प्र.3 अपने शक्षक क सहायता से लप को टॉच से बाहर नका लए और इसका सभी तरफ से नरीक्षण क जए। तंतु
को बल्ब म कस प्रकार लगाया गया है?
तंतु दो अपेक्षाकृत मोटे तार से जुड़ा होता है जो उसे आधार भी दे ते ह और उस तक धारा भी पहुँचाते ह ( चत्र 3.4 क)। ये दोन मोटे
तार नीचे जाकर लप के दो ट मनल बनाते ह:
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मोटा तार कहाँ समाप्त होता है वह ट मनल
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एक िसरा (टिमनल )
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g l a आधार के कद्र पर लगी धातु क नोक से दू स रा िसरा (टिमनल )
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धातु क नोक और धातु के आवरण के बीच वद्युतरोधी पदाथ लगा होता है, अतः ये दोन ट मनल एक-दूसरे के संपक म नह
आते ( चत्र 3.4 ख)।
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ऐसा क्य होता है: य द नोक और आवरणgपरस्पर स्पश कर जाएँ तो धारा उसी सरल पथ से नकल जाएगी और
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तंतु से होकर नह गुजरेगी — लप द प्त ही नह होगा। वद्युतरोधी धारा को ववश करता है क वह एक मोटे तार से
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ऊपर जाए, तंतु से गुजरे और दूसरे मोटे तार से नीचे लौटे ।
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s 3.5 — आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 27
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क्रयाकलाप
खंड 3.2.3 व ुत लप — एल.ई.डी. लप
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क्रयाकलाप
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प्र.1 a
कसी भी रंग का एक एल.ई.डी. ली जए ( चत्र 3.6) और उसका नरीक्षण क जए। क्या आप इसके भीतर कोई
तंतु दे खते ह?
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– + – + – a
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चत्र 3.6, पृष्ठ 27 — व भन्न रंग क एल.ई.डी.। प्रत्येक एल.ई.डी. का लंबा तार इसका धन (+) ट मनल है।
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नह । तापद प्त लप के वपरीत एल.ई.डी. म तंतु नह होते ( चत्र 3.6)।
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agपदाथ सीधे प्रकाश देने लगता है — कसी वस्तु को पहले लाल-गम होने क आवश्यकता नह
रंगीन गुंबद के भीतर केवल एक छोट कटोरी दखाई दे ती है जसम एक कण-सा पदाथ लगा होता है और वह दोन तार से जुड़ा
रहता है। धारा प्रवा हत होने पर वही
पड़ती।
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क्या आप जानते ह? एल.ई.डी. का अथ है प्रकाश उत्सजक डायोड (लाइट ए म टग डायोड)। चूँ क इसम तंतु को
गम करने म ऊजा व्यथ नह होती, अतः यह उतनी ही चमक कह कम वद्युत म दे ता है और अ धक समय तक
चलता है। इसी लए आजकल अ धकांश टॉच, सड़क-ब त्तयाँ तथा घरेलू बल्ब एल.ई.डी. वाले होते ह।
प्र.2 एल.ई.डी. से जुड़े दो तार को ध्यान से दे खए। क्या आप इनम से एक को दूसरे से अ धक लंबा पाते ह?
हाँ। एल.ई.डी. से नकलने वाले दो तार म से एक स्पष्ट रूप से दूसरे से लंबा होता है, और लंबाई का यह अंतर ही ट मनल क
पहचान का संकेत है।
एल.ई.डी. का तार कौन-सा ट मनल कससे जोड़ना चा हए
लंबा तार धनात्मक (+) टिमनल बैटरी का धन ट मनल
छोटा तार ऋणात्मक (–) टिमनल बैटरी का ऋण ट मनल
ऐसा क्य होता है: एल.ई.डी. म धारा केवल एक ही दशा म प्रवा हत हो सकती है। इस लए नमाता एक तार को
लंबा छोड़ दे ते ह ता क बना कसी छपे चह्न के भी दशा पहचानी जा सके। उलटा जोड़ने पर एल.ई.डी. मंद नह
जलती — वह बलकुल भी द प्त नह होती।
क्रयाकलाप 3.6 — आइए, नमाण कर — पृष्ठ 28
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खंड 3.2.4 व ुत सेल अथवा बैटरी का उपयोग करके कसी व ुत लप को द प्तमान करना
क्रयाकलाप
प्र.1 प्रत्येक संयोजन व्यव ा के लए पूवानुमान लगाइए क लप द प्तमान होगा या नह । अपने पूवानुमान ता लका
3.1 म ल खए।
ता लका 3.1 — लप को द प्तमान करने के प्रयास
टप्पणी — कसी भी प रपथ म लप को द प्तमान नह दशाया गया है
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क्र.सं. सेल एवं लप क व्यव ा लप के द प्तमान होने वास्त वक प्रयोग म
संबंधी पूवानुमान अवलोकन
1.
+
–
2.
+
–
3.
+
–
4.
+
–
5.
+
–
6.
+
–
ता लका 3.1, पृष्ठ 29 — सेल एवं लप क छह व्यव ाएँ, छाया चत्र से पुनः बनाई गईं।
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पूवानुमान के लए एक ही सरल नयम काम आता है: लप तभी द प्तमान होगा जब उसका एक सरा सेल के एक ट मनल से और
दूसरा सरा सेल के दूसरे ट मनल से जुड़ा हो, ता क धारा को घूमने के लए अटू ट पथ मल जाए।
क्र.सं. ता लका 3.1 म सेल और लप कस प्रकार जुड़े ह पूवानुमान
1. + से नकला तार लप के एक तार से तथा – से नकला तार लप के दूसरे तार से जुड़ा है — दोन जोड़ बने दीिप्तमान होगा
ह
2. केवल एक जोड़ बना है; – वाला तार और लप का दूसरा तार अलग-अलग पड़े ह दीिप्तमान नही ं
होगा
3. केवल – वाली ओर जोड़ बना है; + से नकला तार मुक्त पड़ा है दीिप्तमान नही ं
होगा
4. लप के दोन तार एक ही बदु पर + वाले तार से जुड़े ह; – वाला तार मुक्त है दीिप्तमान नही ं
होगा
5. लप के दोन तार – वाले तार से जुड़े ह; + वाला तार मुक्त है दीिप्तमान नही ं
होगा
6. पुनः लप का एक तार + से और दूसरा तार – से जुड़ा है — दोन जोड़ बने ह दीिप्तमान होगा
संकेत: पूवानुमान लगाने से पहले + ट मनल से आरंभ करके अपनी उँ गली से पथ पर च लए। य द उँ गली – ट मनल
तक केवल लप से होकर ही पहुँच सके, तो लप अवश्य द प्तमान होगा।
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eेmबल्ब पर पीला रंग
प्र.2 अब लप और सेल को आपस म जो ड़ए और अवलोकन क जए क लप द प्तमान होता है या नह । अपने
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अवलोकन को ता लका 3.1 म ल खए। जो लप द प्तमान होते ह, ता लका म उनके काँच क
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ता लका 3.1 — लप को द प्तमान करने के प्रयास
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टप्पणी — कसी भी प रपथ म लप को द प्तमान नह दशाया गया है
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क्र.सं. सेल एवं लप क व्यव ा लप के द प्तमान होने वास्त वक प्रयोग म
संबंधी पूवानुमान अवलोकन
1.
+
–
2.
+
–
3.
+
–
4.
+
–
5.
+
–
6.
+
–
ता लका 3.1, पृष्ठ 29 — सेल एवं लप क छह व्यव ाएँ, छाया चत्र से पुनः बनाई गईं।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
वास्तव म संयोजन करने पर क्र.सं. 1 तथा क्र.सं. 6 क व्यव ाओं म लप द प्तमान होता है और शेष म नह । अतः केवल इन्ह दो
बल्ब पर पीला रंग लगाना है।
क्र.सं. अवलोकन कारण
1. लै ंप दीिप्तमान होता है प रपथ संपू रत — धारा + से लप होते हुए – तक जाती है
2. दीिप्तमान नही ं होता दूसरे जोड़ पर पाश खुला है, अतः धारा नह बहती
3. दीिप्तमान नही ं होता + वाला तार मुक्त है — पाश खुला है
4. दीिप्तमान नही ं होता लप के दोन सरे एक ही तार को छू रहे ह और – वाला तार मुक्त है
5. दीिप्तमान नही ं होता लप के दोन सरे एक ही तार को छू रहे ह और + वाला तार मुक्त है
6. लै ंप दीिप्तमान होता है क्र.सं. 1 क भाँ त ही संपू रत प रपथ
ऐसा क्य होता है: 1 और 6 म लप के दोन सरे सेल के दो भन्न ट मनल से जुड़े ह। 4 और 5 म दोन सरे एक ही
ट मनल से जुड़े ह, अतः एक ओर से दूसरी ओर धकेलने वाला कोई प्रभाव ही नह बनता। 2 और 3 म पाश केवल
खुला छोड़ दया गया है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 30
खंड 3.2.5 व ुत प रपथ
प्र.1 जन व्यव ाओं म लप द प्तमान होता है उन्ह ध्यानपूवक दे खए। इनक तुलना उन व्यव ाओं से क जए
जनम लप द प्तमान नह होता। क्या आप इस अंतर के कारण का पता लगा सकते ह?
हाँ। जन व्यव ाओं म लप द प्तमान होता है उनम संयोजन एक संपू रत, अटू ट पाश बनाते ह; शेष म यह पाश कह -न-कह भंग
रहता है।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
लैपं
धारा
सेल
+ –
बंद पाश — धारा धन ट मनल से नकलकर लप से होती हुई ऋण ट मनल पर लौटती है। पाश कह भी टू टे तो लप बुझ जाता है।
यह अंतर नयम के रूप म इस प्रकार है:
लप द प्तमान होता है — जब लप का एक सरा सेल के एक ट मनल से और दूसरा सरा सेल के दूसरे ट मनल से जुड़ा हो।
लप द प्तमान नह होता — जब या तो कोई जोड़ खुला रह जाए (क्र.सं. 2, 3), या लप के दोन सरे सेल के एक ही ट मनल
से जुड़ जाएँ (क्र.सं. 4, 5)।
पहले प्रकार क व्यव ा व ुत प रपथ कहलाती है। यह लप से होकर वद्युत-धारा के प्रवाह के लए संपू रत पथ प्रदान करती है
और लप तभी द प्तमान होता है जब प रपथ म धारा प्रवा हत होती है। परंपरा के अनुसार धारा क दशा सदै व सेल के धनात्मक
ट मनल से ऋणात्मक ट मनल क ओर मानी जाती है।
क्या आप जानते ह? कभी-कभी सही प रपथ म भी लप द प्तमान नह होता। तब हम कहते ह क लप 'फ्यूज' हो
गया — उसका तंतु टू ट गया है, अतः बल्ब के भीतर ही पथ खुला हो गया है।
क्रयाकलाप 3.7 — आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 31
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
खंड 3.2.5 व ुत प रपथ — एल.ई.डी. को द प्तमान करना
क्रयाकलाप
प्र.1 धारक म दो सेल इस प्रकार लगाइए क प्रत्येक सेल का ऋण ट मनल धारक म लगे ग क ओर रहे ( चत्र 3.10
ख)। अब आपक बैटरी प्रयोग के लए तैयार है। आप यह कैसे सु न त करगे क इस बैटरी का धन ट मनल
कौन-सा है?
+ –
+ –
– +
(क) (ख)
चत्र 3.10 (क) एवं (ख), पृष्ठ 31 — रक्त दो-सेल धारक तथा दो सेल लगा हुआ धारक; प्रत्येक सेल का ऋण ट मनल
ग क ओर है। पुनः बनाया गया।
यह दे खए क धारक के दोन सरे सेल के कस- कस सरे को छू रहे ह।
धारक का वह सरा जो पहले सेल के धनात्मक ट मनल से जुड़ा है, वही बैटरी का धन ट मनल है।
धारक का वह सरा जो दूसरे सेल के ऋणात्मक ट मनल से जुड़ा है, वही बैटरी का ऋण ट मनल है।
धारक का िसरा 'क' — सेल 1 की + टोपी को छू ता है → बैट री का + टिमनल
धारक का िसरा 'ख' — सेल 2 की – चकती को छू ता है → बैट री का – टिमनल
संकेत: सेल-धारक म ग सदै व चपट चकती से दबती है, अतः प्रत्येक सेल का ग वाला सरा उसका ऋण
सरा होता है। ग को दे खकर च लए तो ुवता कभी गलत नह होगी।
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अब बैटरी के धन ट मनल से जुड़े तार के मुक्त सरे को एल.ई.डी. के लंबे तार से तथा दूसरे तार को एल.ई.डी. के
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छोटे तार से जो ड़ए ( चत्र 3.10 ग)। क्या एल.ई.डी. द प्तमान होती है?
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चत्र 3.10 (ग), पृष्ठ 31 — बैटरी का धन ट मनल एल.ई.डी. के लंबे (+) तार से तथा दूसरा तार छोटे (–) तार से जुड़ा है।
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पुनः बनाया गया।
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हाँ, एल.ई.डी. द प्तमान होती है।
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a बैट री का – → एल.ई.डी. का छोटा तार (ऋण टिमनल)
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इस िदशा में धारा पवािहत हो सकती है → एल.ई.डी. दीप्त हो जाती है
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ऐसा क्य होता है: एल.ई.डी. म धारा केवल एक ही दशा म जा सकती है। यहाँ वह दशा बैटरी के धकेलने क दशा
से मेल खाती है, अतः धारा प्रवा हत होती है और एल.ई.डी. प्रकाश उत्स जत करती है। दो सेल इस लए लए जाते ह
क्य क एकल सेल प्रायः एल.ई.डी. को द प्तमान करने के लए पयाप्त नह होता।
प्र.3 अब एल.ई.डी. से जुड़े तार को परस्पर बदल कर उपयुक्त चरण दोहराइए ( चत्र 3.10 घ)। क्या इस बार भी
एल.ई.डी. द प्तमान होती है?
– +
+ –
+ –
– +
चत्र 3.10 (घ), पृष्ठ 31 — वही प रपथ, जसम एल.ई.डी. से जुड़े दोन तार परस्पर बदल दए गए ह। पुनः बनाया गया।
नह , इस बार एल.ई.डी. द प्तमान नह होती।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
बैट री का + → एल.ई.डी. का छोटा तार (ऋण टिमनल)
बैट री का – → एल.ई.डी. का लंबा तार (धन टिमनल)
इस िदशा में धारा नही ं जा सकती → एल.ई.डी. अदीप्त रहती है
ऐसा क्य होता है: एल.ई.डी. म वद्युत-धारा केवल एक ही दशा म प्रवा हत हो सकती है। तार बदल दे ने पर बैटरी
धारा को उलट दशा म धकेलने का प्रयास करती है और एल.ई.डी. उसे रोक दे ती है। अतः एल.ई.डी. को प रपथ म
सदै व सही प्रकार से जोड़ने का ध्यान र खए।
तुलना क जए: तापद प्त लप का व्यवहार भन्न है — वह कसी भी दशा म जोड़ने पर द प्त होता है, क्य क धारा
केवल तंतु को गम करती है और गम होना दशा पर नभर नह करता।
गहन चतन — पृष्ठ 31
खंड 3.2.5 व ुत प रपथ
गहन चतन
प्र.1 कभी-कभी आपको कोई ऐसी यु क्त मल सकती है जसम सेल एक दूसरे के समांतर रखे ह । तब दे ख क सेल
के ट मनल कस प्रकार जुड़े ह?
वहाँ भी जोड़ एक सेल के धन ट मनल से दूसरे सेल के ऋण ट मनल तक ही होता है — अंतर केवल यह है क यह काम सेल स्वयं न
करके एक छपी हुई धातु क प करती है।
य द आप बैटरी-कोष्ठ म ध्यान से दे ख तो आपको प्रायः मलेगा:
एक मोटा तार अथवा धातु क प , जो एक सेल के धन ट मनल को दूसरे सेल के ऋण ट मनल से जोड़ती है।
कोष्ठ के भीतर मु द्रत '+' एवं '–' चह्न, जो प्रत्येक सेल को सही दशा म रखने म सहायता करते ह।
ऐसा क्य होता है: बैटरी बनाने का नयम कभी नह बदलता — एक सेल का + अगले सेल के – तक पहुँचना ही
चा हए। जब सेल अगल-बगल रखे ह और सरे परस्पर न छू सक, तो यह जोड़ धातु क प बनाती है। इसी लए एक
भी सेल उलटा लगा दे ने पर रमोट या खलौना काम करना बंद कर दे ता है।
स्वयं जाँ चए: अनुम त लेकर कसी ट .वी. रमोट का सेल-कोष्ठ खो लए और धातु क प ढूँ ढ़ए। ध्यान द जए क
दोन सेल के लए मु द्रत '+' और '–' चह्न वपरीत दशाओं म ह — यही + से – वाला नयम है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 32
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
खंड 3.2.6 व ुत स्वच
प्र.1 स्वच टॉच-लाइट को कस प्रकार ऑन या ऑफ करता है?
स्वच केवल प रपथ के एक छोटे -से अंतराल को बंद या खुला करके काम करता है — इससे अ धक कुछ नह ।
त भीतर क्या होता है प रपथ क लप
दशा
ऑन धातु का चल भाग अंतराल को पाटकर दोन संपक को छू बंद धारा + से – क ओर बहती है, लप
लेता है द प्त होता है
ऑफ धातु का भाग हट जाता है और संपक के बीच वायु का खुल ा धारा नह बहती, लप द प्त नह होता
अंतराल रह जाता है
स्वच को प रपथ म कह भी लगाया जा सकता है — लप से पहले अथवा बाद म — क्य क पाश को कसी एक ान पर तोड़ दे ने
से उस पूरे पाश म धारा रुक जाती है। घर म प्रकाश एवं अन्य यु क्तय के स्वच भी ठ क इसी ढं ग से काय करते ह, यद्य प उनका
डजाइन अलग होता है और उन पर वद्युतरोधी आवरण चढ़ा होता है।
ऐसा क्य होता है: वायु वद्युतरोधी है। अतः एक मलीमीटर का वायु-अंतराल भी धारा को पूरी तरह रोक दे ने के
लए पयाप्त है। स्वच उसी अंतराल को सु वधाजनक एवं सुर क्षत ढं ग से बनाने और मटाने क यु क्त है।
क्रयाकलाप 3.9 — आइए, परीक्षण कर — पृष्ठ 32
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
खंड 3.2.6 व ुत स्वच
क्रयाकलाप
प्र.1 व ुत सेल, लप और स्वच को चत्र 3.12 (क) म दशाए अनुसार जो ड़ए। क्या लप द प्तमान होता है?
+ सेफ्टी-िपन
–
चत्र 3.12 (क), पृष्ठ 32 — सेफ्ट - पन स्वच ‘ऑफ’ त म लगा व ुत प रपथ। पुनः बनाया गया।
नह , लप द प्तमान नह होता।
चत्र 3.12 (क) म सेफ्ट - पन का मुक्त सरा दूसरी ओर घुमा हुआ है, अतः वह दूसरी ाइंग- पन को स्पश नह करता। दोन ाइंग-
पन के बीच अंतराल है और उसम वायु भरी है।
डाइंग-िपनों के बीच अंत राल → पिरपथ खुला → धारा नही ं → लैपं अदीप्त
यही स्वच क ऑफ त है और हम कहते ह क प रपथ खुला है।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक
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सेफ्ट - पन के मुक्त सरे को इतना घुमाइए क यह दूसरी ाइंग- पन को स्पश करने लगे, जैसा चत्र 3.12 (ख) म
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दशाया गया है। क्या अब लप द प्तमान होता है?
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चत्र 3.12 (ख), पृष्ठ 32 — सेफ्ट - पन को घुमाकर दूसरी ाइंग- पन से स्पश कराया गया (‘ऑन’ त)। पुनः बनाया
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हाँ, अब लप द प्तमान हो जाता है।
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को भर .देcती है और पथ पूरा हो जाता है।
सेफ्ट - पन धातु क बनी है, जो वद्युत क सुचालक है। जब इसका मुक्त सरा दूसरी ाइंग- पन को स्पश करता है तो यह अंतराल
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सेफ्टी-िपन दोनों डाइंग-िपनों को स्पश करती है → पिरपथ बंद
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धारा सेल के धन टिमनल से → लैपं होते हुए → ऋण टिमनल तक बहती है
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ऐसा क्य होता है: जस गत्ते पर पन लगी ह वह वद्युतरोधी है, अतः धारा एक पन से दूसरी पन तक गत्ते से होकर
नह जा सकती। केवल धातु क सेफ्ट - पन ही उसे पार करा सकती है। स्वच का पूरeाm
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वचार यही है — एक र
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 33
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खंड 3.3 प रपथ आरेख
प्र.1 क्या हम प रपथ को अपेक्षाकृत अ धक सरल ढं ग से नरू पत कर सकते ह?
हाँ। सेल, बल्ब और तार के चत्र बनाने के ान पर हम प्रत्येक घटक को एक न त प्रतीक से नरू पत करते ह। इन प्रतीक क
सहायता से बनाया गया प रपथ का चत्र उसका प रपथ आरेख कहलाता है।
क्र.सं. व ुत प रपथ का घटक प्रतीक कस प्रकार बनाया जाता है
1. वद्युत सेल एक लंबा रेखाखंड (धन ट मनल) और उसके पास एक छोटा मोटा रेखाखंड (ऋण ट मनल)
2. बैटरी दो या दो से अ धक सेल-प्रतीक एक पं क्त म — लंबा-छोटा, लंबा-छोटा
3. वद्युत लप एक वृत्त जसके भीतर क्रॉस बना हो
4. प्रकाश उत्सजक डायोड एक रेखाखंड से सटा त्रभुज तथा बाहर क ओर जाते दो छोटे तीर, जो प्रकाश उत्सजन
(एल.ई.डी.) दशाते ह
5. 'ऑन' त म स्वच दो छोटे वृत्त जो एक सीधी रेखा से जुड़े ह
6. 'ऑफ' त म स्वच दो छोटे वृत्त, जनम से एक क ओर क रेखा ऊपर उठ हो
7. तार एक सीधी साद रेखा
इन प्रतीक को पढ़ते समय दो बात याद र खए:
सेल के प्रतीक म लंबा रेखाखंड धनात्मक ट मनल तथा छोटा रेखाखंड ऋणात्मक ट मनल को नरू पत करता है ( चत्र
3.13 क)।
एल.ई.डी. के प्रतीक म त्रभुज उस दशा क ओर इं गत करता है जस ओर धारा प्रवा हत हो सकती है, और दो तीर यह
दशाते ह क एल.ई.डी. प्रकाश उत्स जत करती है ( चत्र 3.13 ख)।
ऐसा क्य होता है: प्रतीक बनाने म कम समय लगता है, कम ान घेरते ह और सबके लए एक ही अथ रखते ह।
आई.ई.सी., ए.एन.एस.आई. एवं आई.ई.ई.ई. जैसे संगठन इन मानक प्रतीक को नधा रत करते ह ता क चेन्नई का
इंजी नयर और कनाडा का इंजी नयर एक ही आरेख को एक ही अथ म पढ़ सक।
क्रयाकलाप 3.10 — आइए, आरेख बनाएँ — पृष्ठ 34
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
खंड 3.3 प रपथ आरेख
क्रयाकलाप
प्र.1 ता लका 3.2 म दशाए गए प्रतीक का उपयोग करके चत्र 3.12 (क) एवं चत्र 3.10 (ग) म दए गए व ुत
प रपथ के प रपथ आरेख बनाइए। क्या आपके ारा बनाए गए प रपथ आरेख क्रमशः चत्र 3.14 (क) एवं चत्र
3.14 (ख) म दशाए गए आरेख के समान ह?
ता लका 3.2 — व ुत प रपथ के घटक एवं उनके प्रतीक
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
क्र.सं. व ुत प रपथ के घटक के नाम प्रतीक
1. व ुत सेल
2. बैटरी
3. व ुत लप
4. प्रकाश उत्सजक डायोड
(एल.ई.डी.)
5. ‘ऑन’ त म स्वच
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
6. ‘ऑफ’ त म स्वच
7. तार
ता लका 3.2, पृष्ठ 33 — व ुत प रपथ के घटक एवं उनके प्रतीक।
+ सेफ्टी-िपन
–
चत्र 3.12 (क), पृष्ठ 32 — सेफ्ट - पन स्वच ‘ऑफ’ त म लगा व ुत प रपथ। पुनः बनाया गया।
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चत्र 3.10 (ग), पृष्ठ 31 — बैटरी का धन ट मनल एल.ई.डी. के लंबे (+) तार से तथा दूसरा तार छोटे (–) तार से जुड़ा है।
l a s पुनः बनाया गया।
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हाँ — ठ क ढं ग से बनाने पर ये आरेख बलकुल चत्र 3.14 (क) एवं चत्र 3.14 (ख) जैसे बनते ह।
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(क) िचत्र 3.12 (क) का पिरपथ (ख) िचत्र 3.10 (ग) का पिरपथ
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
(क) एक सेल, एक वद्युत लप तथा 'ऑफ' त म दशाया गया स्वच — चत्र 3.12 (क) का प रपथ आरेख। (ख) दो सेल क बैटरी
तथा एक एल.ई.डी. — चत्र 3.10 (ग) का प रपथ आरेख। यहाँ एल.ई.डी. का त्रभुज बैटरी के धन ट मनल से दूर क ओर इं गत है, अतः
धारा प्रवा हत हो सकती है और एल.ई.डी. द प्तमान होती है।
आरेख बनाने के चरण:
1. पतली सीधी रेखाओं से एक आयत बनाइए — यही संयोजी तार ह।
2. ऊपरी भुजा को तोड़कर चत्र 3.12 (क) के लए लप का प्रतीक (क्रॉस युक्त वृत्त) तथा चत्र 3.10 (ग) के लए एल.ई.डी. का
प्रतीक ( त्रभुज एवं रेखाखंड) लगाइए।
3. नचली भुजा को तोड़कर सेल का प्रतीक ( चत्र 3.12 क) अथवा दो सेल क बैटरी का प्रतीक ( चत्र 3.10 ग) लगाइए। लंबा
रेखाखंड + वाली ओर र खए।
4. चत्र 3.12 (क) के लए नचली भुजा को एक बार और तोड़कर स्वच लगाइए, और उसे 'ऑफ' त म बनाइए क्य क चत्र
3.12 (क) म वह इसी त म है।
5. एल.ई.डी. के लए जाँ चए क त्रभुज बैटरी के धन ट मनल से दूर क ओर इं गत हो, अन्यथा एल.ई.डी. द प्तमान नह होगी।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 34
खंड 3.4 व ुत चालक एवं व ुतरोधी
प्र.1 व ुत प रपथ बनाने म हमने धातु के तार का ही उपयोग क्य कया? क्या हम संयोजी तार के लए कुछ अन्य
पदाथ का उपयोग भी कर सकते ह?
धातुओं का उपयोग इस लए कया जाता है क्य क उनम से वद्युत-धारा सरलता से प्रवा हत हो जाती है — धातुएँ वद्युत क
सुचालक होती ह। अ धकांश अन्य पदाथ म से धारा जाती ही नह , अतः उनसे बना प रपथ कभी काम नह करेगा।
पदाथ क्या धारा प्रवा हत होती है? क्या तार बनाने म उपयोगी?
ताँबा, चाँद ी, सोना, एलुिमिनयम हाँ, सरलता से हाँ — ये िव तु चालक है ं
प्लािस्टक, रबर, लकड़ी, काँच, मोम नह नही ं — ये िव तु रोधी है ं
चाँद , ताँबा और सोना वद्युत के सव त्तम चालक ह। फर भी लगभग सारी तार-व्यव ा ताँबे से बनाई जाती है, क्य क यह चाँद
और सोने से कह सस्ता है और प्रचुर मात्रा म उपलब्ध है। व भन्न उपयोग के लए भन्न- भन्न प्रकार के तार बनाए जाते ह — टॉच के
लए पतले, घर क वाय रग के लए मोटे ।
प्र.2 और व ुत तार पर प्ला स्टक अथवा रबर का ही आवरण क्य चढ़ाया जाता है?
क्य क प्ला स्टक और रबर वद्युतरोधी ह — इनम से धारा प्रवा हत नह हो सकती। यह आवरण धारा को धातु के तार के भीतर ही
बनाए रखता है।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
यह आवरण तीन काम करता है:
व्य क्तय क रक्षा। हमारा शरीर वद्युत का चालक है। नंगे तार को छू ने पर धारा हमारे शरीर से होकर गुजरेगी और गंभीर क्ष त
अथवा मृत्यु तक का कारण बन सकती है।
लघुपथन (शॉट स कट) से बचाव। य द दो नंगे तार परस्पर स्पश कर जाएँ तो धारा यु क्त म जाने के बजाय छोटे रास्ते से
नकल जाएगी।
तार क स्वयं क सुरक्षा — नमी, जंग और टू ट-फूट से।
ऐसा क्य होता है: प्रत्येक वद्युत यु क्त म चालक और वद्युतरोधी, दोन क आवश्यकता होती है। तार, स्वच के
संपक, प्लग क पन और सॉकेट के भाग चालक के बने होते ह ता क धारा बह सके; उनके आवरण, प्लग-टॉप एवं
स्वच के खोल रबर, प्ला स्टक या चीनी म के बने होते ह ता क धारा हमारे हाथ तक न पहुँचे।
सावधानी: गीले हाथ से कभी स्वच या प्लग न छु एँ, गीले ान पर वद्युत उपकरण न चलाएँ और क्ष तग्रस्त
वद्युतरोधन या टू टे प्लग वाले उपकरण का उपयोग न कर।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 35
खंड 3.4 व ुत चालक एवं व ुतरोधी
प्र.1 मान ली जए क हम धातु के अ त रक्त कसी अन्य पदाथ के व ुत तार बनाते ह और उनका उपयोग व ुत
प रपथ बनाने के लए करते ह। आपके वचार से क्या ऐसे प रपथ म उन पदाथ से होकर व ुत-धारा प्रवा हत
होगी?
अ धकांश पदाथ म से नह । धारा तभी प्रवा हत होगी जब वह पदाथ वद्युत का चालक हो।
य द 'तार' ताँबे, एलु म नयम या लोहे जैसी धातु का हो — हाँ, धारा प्रवा हत होगी और लप द प्तमान होगा।
य द वह प्ला स्टक, रबर, लकड़ी, काँच, मोम, कागज या कपड़े का हो — नह , धारा नह जाएगी और लप अद प्त रहेगा।
कुछ अधातुएँ अपवाद ह। प सल क लीड (ग्रेफाइट) धातु नह है, फर भी वह चालक है, अतः उससे लप मंद रूप से द प्त हो
जाता है।
कसी भी पदाथ के वषय म न त रूप से जानने का एकमात्र ईमानदार तरीका है — उसका परीक्षण करना, और क्रयाकलाप
3.11 का परीक्षण-यंत्र इसी के लए है।
क्रयाकलाप 3.11 — आइए, पहचान — पृष्ठ 35
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
खंड 3.4 व ुत चालक एवं व ुतरोधी
क्रयाकलाप
प्र.1 तार के दोन मुक्त सर को क्षण भर के लए परस्पर स्पश कराइए। क्या लप द प्तमान होता है? य द हाँ, तो
हमारा परीक्षण-यंत्र उपयोग के लए तैयार है।
हाँ, उस क्षण लप द प्तमान हो जाता है।
जब तक दोन नंगे सरे अलग ह, प रपथ म अंतराल है और धारा नह बहती। जैसे ही वे परस्पर स्पश करते ह, एक तार क धातु दूसरे
तार क धातु से मल जाती है, पाश पूरा हो जाता है और लप द प्त हो उठता है।
िसरे अलग → पिरपथ खुला → लैपं अदीप्त
िसरे स्पश करते हुए → पिरपथ बंद → लैपं दीप्त
यह परीक्षण सद्ध कर दे ता है क सेल, लप और सभी जोड़ ठ क काम कर रहे ह। अब आपका वद्युत चालन परीक्षण-यंत्र तैयार है
— जो वस्तु आप दोन मुक्त सर के बीच रखगे, वह इसी स्पश का ान ले लेगी।
संकेत: य द सरे मलाने पर भी लप द प्त न हो तो सेल, बल्ब तथा यह जाँ चए क प्रत्येक तार के दोन सर से
लगभग 1 cm प्ला स्टक का आवरण वास्तव म हटाया गया है या नह ।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 अपने परीक्षण-यंत्र के मुक्त तार के दोन सर को आपके ारा एक त्रत क गई प्रत्येक वस्तु के दो सर से स्पश
कराइए (3.15 ख)। यह सु न त क जए क तार परस्पर संपक म न आएँ। क्या लप प्रत्येक प्रकरण म द प्तमान
होता है?
+
–
तारों के मुक्त िसरे
(क) िव तु चालन परीक्षण-यंत्र
+
–
धातु की चम्मच
(ख) पदाथ की पहचान
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चत्र 3.15, पृष्ठ 35 — (क) व ुत चालन परीक्षण-यंत्र, (ख) परीक्षण-यंत्र का उपयोग करके पदाथ क पहचान। पुनः
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बनाया गया।
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उत्तरgla
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नह । लप कुछ वस्तुओं के लए द प्तमान होता है और कुछ के लए नह ।
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धातु क चम्मच, सक्का, चाबी, पन, सलाई क सुई, एलु म नयम प णका तथा प सल क लीड के लए वह द प्तमान होता है।
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कॉक, रबर, काँच, प्ला स्टक के मापक, लकड़ी के टु कड़े, मोमबत्ती, गत्ते तथा कागज के लए वह द प्तमान नह होता।
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इससे यह पता चलता है क वद्युत-धारा कुछ पदाथ म से सरलता से प्रवा हत हो जाती है कतु कुछ अन्य म से नह — यही इस
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क्रयाकलाप का मुख्य नष्कष है।
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g नकलेगा।
.c और लकड़ी के टुकड़े पर भी लप द प्त हो जाएगा, जससे नष्कष गलत
स्वयं जाँ चए: परीक्षण के समय दोन तार परस्पर स्पश नह करने चा हए। य द वे छू जाएँ तो धारा छोटे रास्ते से
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नकल जाएगी
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प्र.3 अपने अवलोकन को ता लका 3.3 म ल खए।
ता लका 3.3 — व ुत-चालक एवं व ुतरो धय को पहचानना
क्र.सं. वस्तु पदाथ का नाम जससे लप द प्तमान है नष्कष ( व ुत-चालक/
वस्तु बनी है (हाँ/नह ) व ुतरोधी)
1. छड़ी लकड़ी नह
2. पैमाना प्ला स्टक
3. चूड़ी काँच
4. कागज क कागज
प
5. मोमबत्ती मोम
6. चाबी धातु
7. इरेज़र रबर
8.
9.
ता लका 3.3, पृष्ठ 35 — व ुत-चालक एवं व ुतरो धय को अ भले खत करने क ता लका।
पूरी क गई ता लका 3.3 इस प्रकार बनती है। क्रम 8 एवं 9 आपक अपनी चुनी हुई वस्तुओं के लए ह — यहाँ दो उपयोगी उदाहरण
दए गए ह।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
क्र.सं. वस्तु पदाथ का नाम जससे वस्तु लप द प्तमान है (हाँ/ नष्कष ( व ुत-चालक/
बनी है नह ) व ुतरोधी)
1. छड़ी लकड़ी नह िव तु रोधी
2. पैमाना प्ला स्टक नह िव तु रोधी
3. चूड़ी काँच नह िव तु रोधी
4. कागज क प कागज नह िव तु रोधी
5. मोमबत्ती मोम नह िव तु रोधी
6. चाबी धातु हाँ िव तु -चालक
7. इरेज़र रबर नह िव तु रोधी
8. सक्का धातु हाँ िव तु -चालक
9. एलु म नयम एलु म नयम (धातु) हाँ िव तु -चालक
प णका
यह करके दे खए: दोन सर से छ ली हुई एक प सल का परीक्षण क जए। लीड (ग्रेफाइट) से होकर लप द प्त
होता है कतु लकड़ी से होकर नह — एक ही वस्तु, दो अलग-अलग उत्तर।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 36
खंड 3.4 व ुत चालक एवं व ुतरोधी
प्र.1 अपने अवलोकन का व ेषण क जए। क्या लप सभी पदाथ के लए द प्तमान होता है?
नह । लप केवल कुछ ही पदाथ के लए द प्तमान होता है।
इसी एक अवलोकन म इस खंड का पूरा वचार समाया हुआ है:
जन पदाथ म से वद्युत-धारा सरलता से प्रवा हत होती है, वे वद्युत के चालक अथवा सुचालक कहलाते ह।
जन पदाथ म से वद्युत-धारा प्रवा हत नह हो सकती, वे वद्युतरोधी अथवा वद्युत के कुचालक कहलाते ह।
ऐसा क्य होता है: धातु म कुछ सूक्ष्म आवे शत कण पूरे टु कड़े म स्वतंत्र रूप से घूम सकते ह, अतः वे धारा को एक
सरे से दूसरे सरे तक ले जाते ह। लकड़ी, प्ला स्टक, काँच या रबर म ये कण कसकर बँधे रहते ह और चल नह
सकते, इस लए धारा नह बहती।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 ता लका 3.3 म आपके ारा अ भले खत अवलोकन के आधार पर नष्कष नका लए क कौन-से पदाथ व ुत
के चालक ह तथा कौन-से पदाथ व ुतरोधी ह। ता लका 3.3 म इन्ह ल खए।
ता लका 3.3 — व ुत-चालक एवं व ुतरो धय को पहचानना
क्र.सं. वस्तु पदाथ का नाम जससे लप द प्तमान है नष्कष ( व ुत-चालक/
वस्तु बनी है (हाँ/नह ) व ुतरोधी)
1. छड़ी लकड़ी नह
2. पैमाना प्ला स्टक
3. चूड़ी काँच
4. कागज क कागज
प
5. मोमबत्ती मोम
6. चाबी धातु
7. इरेज़र रबर
8.
9.
ता लका 3.3, पृष्ठ 35 — व ुत-चालक एवं व ुतरो धय को अ भले खत करने क ता लका।
ता लका 3.3 क वस्तुओं को पदाथ के आधार पर छाँटने पर स्पष्ट वभाजन मलता है:
व ुत के चालक व ुतरोधी (कुचालक)
धातुए ँ — चाबी, िसक्का, चम्मच, िपन, िसलाई की सुई, एलुिमिनयम पिणका लकड़ी — छड़ी, लकड़ी का टुक ड़ा
पेंिसल की लीड (ग ेफ ाइट) प्लािस्टक — पैम ाना, तार का आवरण
काँच — चूड़ी
रबर — इरे ज़र, कॉक
कागज एवं ग ा — कागज की प ी
मोम — मोमब ी
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
मुख्य नष्कष यह है क धातुए ँ व ुत क चालक होती ह, और इसी लए इनसे तार बनाए जाते ह। चाँद , ताँबा और सोना वद्युत के
सव त्तम चालक ह, फर भी तार मुख्यतः ताँबे के बनाए जाते ह क्य क इसक लागत कम है और यह प्रचुर मात्रा म उपलब्ध है।
प्र.3 ता लका 3.3 से आपने यह भी जान लया होगा क प्ला स्टक और रबर व ुतरोधी पदाथ ह। क्या अब आप यह
समझ गए ह क धातु के तार पर इन पदाथ के आवरण क्य चढ़ाए जाते ह?
ता लका 3.3 — व ुत-चालक एवं व ुतरो धय को पहचानना
क्र.सं. वस्तु पदाथ का नाम जससे लप द प्तमान है नष्कष ( व ुत-चालक/
वस्तु बनी है (हाँ/नह ) व ुतरोधी)
1. छड़ी लकड़ी नह
2. पैमाना प्ला स्टक
3. चूड़ी काँच
4. कागज क कागज
प
5. मोमबत्ती मोम
6. चाबी धातु
7. इरेज़र रबर
8.
9.
ता लका 3.3, पृष्ठ 35 — व ुत-चालक एवं व ुतरो धय को अ भले खत करने क ता लका।
हाँ। भीतर क धातु धारा को ले जाती है; बाहर का प्ला स्टक या रबर यह सु न त करता है क धारा हमारे हाथ तक न पहुँच सके।
यु क्त का भाग कसका बना होता है क्य
तार का भीतरी भाग, िस्वच के संपक , प्लग की िपने,ं सॉके ट के चालक (ताँबा, पीतल) इनमें से धारा का पवाह आवश्यक
संयोजी भाग है
तार का आवरण, प्लग-टॉप, िस्वच का खोल, लै ंप-धारक वद्युतरोधी (प्ला स्टक, रबर, चीनी इनसे धारा बाहर नही ं िनकलनी
म ) चािहए
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ऐसा क्य होता है: हमारा शरीर स्वयं वद्युत का चालक है। शरीर म से प्रवा हत होने वाली धारा गंभीर क्ष त, यहाँ
m वाले
तक क मृत्यु का भी कारण बन सकती है। वद्युतरोधी आवरण ही वह द वार है जो धारा और तार eपकड़ने
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coखड़ी रहती है — इसी लए फटे या उधड़े आवरण वाले तार का उपयोग कभी a
glनह करना चा हए।
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व्य क्त के बीच
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आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 37–39
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अध्याय के अंत के प्रश्न
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असत्य कथन का चयन क जए। (i) व ुत प रपथ म स्वच धारा का ोत होता है। (ii) प रपथ को पूरा करने
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प्र.1
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है.।
अथवा भंग करने म स्वच सहायता करता है। (iii) व ुत के आवश्यकतानुसार उपयोग म स्वच सहायता करता
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है। (iv) जब स्वच ‘ऑफ’ त म होता है तो इसके ट मनल के मध्य वायु अंतराल रहता
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agअसत्य कथन (i) है — ' व ुत प रपथ म स्वच धारा का ोत होता है।'
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स्वच धारा का ोत नह होता। इन प रपथ म ोत व ुत सेल अथवा बैटरी है; स्वच केवल यह नयं त्रत करता है क धारा बहने
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द जाए या नह ।
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कथन
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असत्य?
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(i) िस्वच धारा का ोत होता है ोत सेल या बैटरी है; स्वच कोई ऊजा नह दे ता
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(ii) िस्वच पिरपथ को पूर ा या भंग करता है सत्य स्वच का काम ही यही है
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agl (iii) िस्वच आवश्यकतानुसार िव तु उपयोग में सहायक है सत्य पंखा या लप हम आवश्यकता पड़ने पर ही चला सकते
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(iv) 'ऑफ' िस्थित में टिमनलों के मध्य वायु अंतराल रहता
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सत्य वायु वद्युतरोधी है, अतः यह अंतराल धारा रोक दे ता है
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प्र.2 चत्र 3.16 म सर ‘क’ एवं ‘ख’ के मध्य कौन-सा पदाथ जोड़ने पर लप द प्तमान नह होगा?
क
ख
+
–
चत्र 3.16, पृष्ठ 37 — सर ‘क’ एवं ‘ख’ के मध्य अंतराल वाला परीक्षण प रपथ। पुनः बनाया गया।
य द 'क' एवं 'ख' के मध्य कोई वद्युतरोधी पदाथ जोड़ा जाए तो लप द प्तमान नह होगा।
चत्र 3.16 वास्तव म एक वद्युत चालन परीक्षण-यंत्र है — एक सेल और एक लप तार से जुड़े ह और तार के दो सरे 'क' तथा 'ख'
मुक्त छोड़ दए गए ह। इनके बीच जो भी वस्तु रखी जाएगी वही प रपथ का भाग बन जाएगी।
'क' एवं 'ख' के मध्य जोड़ा गया पदाथ प्रकार लप
रबर, प्लािस्टक, लकड़ी, काँच, कागज, मोम, सूखा कपड़ा, थम कोल िव तु रोधी द प्तमान नह होगा
ताँबे का तार, लोहे की कील, चाबी, िसक्का, एलुिमिनयम पिणका, पेंिसल की लीड िव तु -चालक द प्तमान होगा
ऐसा क्य होता है: वद्युतरोधी म से धारा नह जा सकती, अतः सेल और लप के पूरी तरह ठ क होने पर भी 'क'
और 'ख' के बीच पाश भंग ही रहता है। केवल चालक ही उस अंतराल को पाटकर प रपथ पूरा करता है।
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प्र.3 चत्र 3.17 म य द एक लप का तंतु वखं डत हो जाए तो क्या दूसरा लप द प्तमान होगा? अपने उत्तर का औ चत्य
बताइए।
चत्र 3.17, पृष्ठ 38 — एक ही पाश म दो लप एवं एक बैटरी।
नह , दूसरा लप भी द प्तमान नह होगा।
चत्र 3.17 म दोन लप तथा बैटरी एक के बाद एक एक ही पाश म जुड़े ह — धारा के पास चलने के लए केवल एक ही पथ है और
वह दोन तंतुओं से होकर जाता है।
लै ंप 1 लै ंप 2 — तंत ु िवखंिडत
कही ं धारा नही ं
बैटरी
दोन लप एक ही पाश म ह। एक तंतु के टू टते ही पूरा पाश खुल जाता है, अतः धारा नह बहती और कोई भी लप द प्तमान नह होता।
औ चत्य: टू टा हुआ तंतु उस बल्ब के भीतर अंतराल छोड़ दे ता है। इससे प रपथ खुल जाता है और पाश के कसी भी भाग म धारा
प्रवा हत नह होती — दूसरे लप म भी नह । दूसरा लप पूरी तरह ठ क है, कतु उसके लए धारा ही उपलब्ध नह है।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? पुरानी सजावट झालर इसी प्रकार जुड़ी होती थ , इसी लए एक बल्ब फ्यूज होने पर पूरी
झालर बुझ जाती थी।
प्र.4 व ुत प रपथ बनाते समय कोई व ाथ संयोजी तार से व ुतरोधी आवरण हटाना भूल गया। य द लप और
सेल ठ क काय कर रहे ह तब भी क्या लप द प्तमान होगा?
नह , लप द प्तमान नह होगा।
संयोजी तार पर चढ़ा प्ला स्टक का आवरण वद्युतरोधी है। य द सर से यह आवरण न हटाया जाए तो भीतर का ताँबा सेल अथवा
लप के ट मनल को वास्तव म स्पश ही नह करेगा।
सेल का टिमनल → प्लािस्टक → ताँबा → प्लािस्टक → लैपं का टिमनल
धारा प्लािस्टक को पार नही ं कर सकती → पिरपथ खुला → लैपं अदीप्त
ऐसा क्य होता है: प रपथ के लए सेल के एक ट मनल से दूसरे ट मनल तक चालक का अटू ट पथ चा हए। जोड़
पर लगा वद्युतरोधी प्ला स्टक उस पथ को उतना ही तोड़ दे ता है जतना कोई तार गायब होने पर टू टता। इसी लए
क्रयाकलाप म कहा जाता है क प्रत्येक तार के दोन सर से लगभग 1 cm आवरण हटा द जए।
संकेत: आवरण हटाने के बाद ताँबा चमक ला दखना चा हए। य द वह धुँधला या काला दखे तो रेगमाल से हल्के-से
रगड़ द जए — मैल या ऑक्साइड क परत भी धारा रोक सकती है।
प्र.5 व ुत प रपथ के घटक के प्रतीक का उपयोग करके एक साधारण टॉच का प रपथ आरेख बनाइए।
एक साधारण टॉच म एक ही पाश म केवल तीन घटक होते ह — दो सेल क बैटरी, एक व ुत लप तथा एक स्वच, जो तार से
जुड़े रहते ह।
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िव तु लैपं
धारा
+ –
बैटरी (दो सेल) िस्वच (ऑन)
साधारण टॉच का प रपथ आरेख — दो सेल क बैटरी, 'ऑन' त म स्वच तथा वद्युत लप, सभी एक ही पाश म। धारा धन ट मनल से
नकलकर लप से होती हुई ऋण ट मनल पर लौटती है।
अपने आरेख म ये बात जाँ चए:
प्रत्येक सेल का लंबा रेखाखंड धन ट मनल तथा छोटा रेखाखंड ऋण ट मनल है, और सेल लंबा-छोटा, लंबा-छोटा क्रम म बने
ह।
लप का प्रतीक क्रॉस युक्त वृत्त है।
स्वच दो छोटे वृत्त ह; 'ऑन' के लए उन्ह सीधी रेखा से जो ड़ए, 'ऑफ' के लए रेखा ऊपर उठा द जए।
सभी तार सीधी साद रेखाएँ ह और लप द प्तमान होने के लए पाश बंद होना चा हए।
संकेत: य द आपक टॉच म बल्ब के ान पर एल.ई.डी. है तो लप के प्रतीक के ान पर एल.ई.डी. का प्रतीक
बनाइए और ध्यान र खए क त्रभुज बैटरी के धन ट मनल से दूर क ओर इं गत हो।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक
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चत्र 3.18 म — (i) य द S2 ‘ऑन’ त म और S1 ‘ऑफ’
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mद S1 एवं S2
त म हो तो कौन-कौन से लप द प्त ह गे? (ii)
त म हो तो कौन-कौन से लप द प्त ह गे? (iii)eय
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य द S2 ‘ऑफ’ त म और S1 ‘ऑन’
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. co त म हो तो कौन-कौन से लप द प्त ह गे? (iv) य द S1 एवं S2 दोनag‘ऑफ’
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se से लप द प्त ह गे?
दोन ‘ऑन’ त म हो तो
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चत्र 3.18, पृष्ठ 38 — स्वच S₁ एवं S₂ स हत लप L₁ एवं L₂; दोन स्वच ‘ऑफ’ दशाए गए ह।
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चत्र 3.18 को ध्यान से दे खए: बैटरी, S1, L1, S2 तथा L2 — सभी एक ही पाश म ह। कह कोई शाखा नह है, अतः धारा को या
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तो सभी घटक से होकर जाना पड़ेगा या कसी से भी नह ।
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प्रकरण S1 S2 क्या पाश पूरा है? द प्त होने वाले लप
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co—mS पर भंग g l a
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(i) ऑफ ऑन नह 1 कोई नही ं
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(ii) ऑन
aऑफgl नह — S2 पर भंग कोई नही ं
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L1 एवं L2 दोनों
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(iii) ऑन ऑन हाँ — पाश बंद है
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se कोई नही ं
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(iv) ऑफ ऑफ नह — दो ान पर भंग
a s emएक-एक पं क्त म उत्तर:
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1. कोई लप द प्त नह होगा — S1 खुला है, अतः प रपथ भंग है।
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2. कोई लप द प्त नह होगा — S2 खुला है, अतः प रपथ भंग है।
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3. L1 एवं L2 दोन द प्त ह गे — प रपथ m
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a दोन स्वच पर भंग है।
संपू रत है और वही धारा दोन लप से होकर जाती है।
4. कोई लप द प्त नह होगा —gपlरपथ
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: एक ही पाश म सभी घटक एक ही पथ साझा करते ह। उस पथ म कह भी स्वच खोल दे ने से
पूरे पथ म धारा रुक जाती है। इसी लए स्वच को प रपथ म कह भी लगाकर पूरे प रपथ को नयं त्रत कया जा
सकता है।
प्र.7 एक व ाथ ने चत्र 3.19 म दशाए अनुसार व ुत प रपथ संयो जत कया। प रपथ को बंद करने के बाद भी लप
द प्तमान नह हुआ। इसके क्या संभा वत कारण हो सकते ह? इस दोषपूण प्रचालन के लए अ धक-से-अ धक
कारण क सूची बनाइए। लप के द प्तमान न होने के कारण का पता लगाने के लए आप क्या करगे?
+ सेफ्टी-िपन
–
चत्र 3.19, पृष्ठ 38 — व ाथ ारा बनाया गया प रपथ, गत्ते पर लगे सेफ्ट - पन स्वच स हत। पुनः बनाया गया।
चत्र 3.19 के प रपथ म केवल चार प्रकार के भाग ह — सेल, लप, तार और स्वच। अतः दोष इन्ह म से कसी म होगा।
संभा वत कारण:
भाग क्या गड़बड़ हो सकती है
से ल सेल समाप्त (डेड) हो चुका हो; धारक म उलटा लगा हो; ग एवं संपक से ठ क से न दबा हो
लै ंप लप फ्यूज हो गया हो — तंतु टू टा हो; अथवा धारक म ढ ला लगा हो जससे कोई ट मनल स्पश न कर रहा हो
तार कसी सरे से प्ला स्टक का आवरण न हटाया गया हो; तार आवरण के भीतर से टू टा हो; तार पेच या ाइंग- पन से ढ ला हो गया हो;
खुला ताँबा मैला या जंग लगा हो
िस्वच सेफ्ट - पन वास्तव म दूसरी ाइंग- पन को स्पश न कर रही हो, अतः अंतराल अब भी खुला हो; अथवा ाइंग- पन गत्ते म ढ ली हो
गई ह
धारक लप-धारक अथवा सेल-धारक के पेच ढ ले ह , जससे जोड़ म ठ क संपक न बन रहा हो
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कारण कैसे पता लगाएँ — एक-एक भाग क जाँच क जए:
1. पहले स्वच जाँ चए। उसे हटाकर दे खए — ाइंग- पन तक जाने वाले दोन तार को सीधे परस्पर स्पश कराइए। य द अब
लप द प्त हो जाए तो दोष स्वच म था।
2. सेल जाँ चए। उसके ान पर ऐसा सेल लगाइए जसका काय करना न त हो। लप द प्त हो जाए तो पुराना सेल समाप्त था।
3. लप जाँ चए। सं दग्ध लप को कसी चालू टॉच म लगाकर दे खए, अथवा उसके ान पर ठ क लप लगाइए। बल्ब को प्रकाश के
सामने रखकर टू टे तंतु को भी दे खए।
4. तार और जोड़ जाँ चए। प्रत्येक सरे पर बना हटा आवरण दे खए; सभी पेच एवं ाइंग- पन क सए; प्रत्येक तार को हल्के-से
ख चकर दे खए क वह भीतर से टू टा तो नह ।
5. एक परीक्षण-यंत्र बनाइए। न त रूप से काम करने वाले सेल और लप से परीक्षण-यंत्र बनाकर उसके दोन मुक्त सर को
बारी-बारी से प्रत्येक तार के दोन सर से स्पश कराइए — लप केवल साबुत तार से होकर ही द प्त होगा।
संकेत: एक बार म केवल एक ही वस्तु बद लए और प्रत्येक बदलाव के बाद जाँ चए। य द आप एक साथ दो चीज
बदल दगे और लप द प्त हो जाएगा तो यह कभी पता नह चलेगा क दोष कसम था।
प्र.8 चत्र 3.20 म दशाई गई कस व्यव ा म स्वच ‘ऑन’ करने पर भी बल्ब/एल.ई.डी. द प्तमान नह होगा?
(क) (ख)
(ग) (घ)
चत्र 3.20, पृष्ठ 39 — चार प रपथ। सेल के प्रतीक म लंबा रेखाखंड धन ट मनल तथा छोटा रेखाखंड ऋण ट मनल
नरू पत करता है।
केवल व्यव ा (ग) म एल.ई.डी. द प्तमान नह होगी। (क), (ख) तथा (घ) म स्वच ऑन करने पर बल्ब/एल.ई.डी. द प्त हो
जाती है।
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व्यव ा प रपथ म क्या है द प्त कारण
होगा?
(क) एक सेल एवं एक वद्युत लप दीप्त होगा प रपथ संपू रत है; तापद प्त लप कसी भी ुवता म जलता है
(ख) एक सेल एवं एक वद्युत लप, सेल दीप्त होगा (क) जैसा ही — सेल उलटने से केवल धारा क दशा बदलती है, तंतु
उलटा लगा है फर भी गम होता है
(ग) दो सेल क बैटरी एवं एक दीप्त नही ं एल.ई.डी. उलट जुड़ी है — उसका त्रभुज बैटरी के धन ट मनल क
एल.ई.डी. होगी ओर इं गत है, अतः धारा रुक जाती है
(घ) दो सेल क बैटरी एवं एक दीप्त होगी यहाँ त्रभुज धन ट मनल से दूर क ओर इं गत है, अतः धारा
एल.ई.डी., बैटरी उलट है एल.ई.डी. से होकर जा सकती है
ऐसा क्य होता है: तापद प्त लप दशा क परवाह नह करता — धारा कसी भी दशा म उसके तंतु को गम कर
दे ती है। कतु एल.ई.डी. केवल एक ही दशा म धारा जाने दे ती है। एल.ई.डी. के प्रतीक म त्रभुज वही दशा बताता है;
अतः बैटरी के लंबे रेखाखंड (+) से धारा का पथ ख चए — य द वह त्रभुज क नोक क ओर से मले तो धारा
जाएगी, और य द पहले रेखाखंड (बार) से टकराए तो रुक जाएगी।
स्वयं जाँ चए: (ग) म एल.ई.डी. के दोन तार आपस म बदल दे ने से — अथवा बैटरी उलट दे ने से — वह द प्तमान
हो जाएगी, ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप 3.7 म हुआ था।
प्र.9 य द कसी बैटरी पर ‘+’ एवं ‘–’ चह्न पढ़े नह जा रहे ह तो इस बैटरी के ट मनल को पहचानने क कोई एक व ध
सुझाइए।
इसके लए एल.ई.डी. का उपयोग क जए, क्य क एल.ई.डी. केवल एक ही दशा म धारा जाने दे ती है और इस प्रकार दशा-सूचक
का काम करती है।
व ध:
1. एक एल.ई.डी. ली जए और उसके दोन तार दे खए — लंबा तार उसका धन ट मनल तथा छोटा तार ऋण ट मनल है।
2. दो संयोजी तार क सहायता से एल.ई.डी. के लंबे तार को बैटरी के एक ट मनल से तथा छोटे तार को दूसरे ट मनल से जो ड़ए।
3. य द एल.ई.डी. द प्तमान हो जाए, तो जस ट मनल से लंबा तार जुड़ा है वही बैटरी का धन (+) ट मनल है और दूसरा ऋण
ट मनल है।
4. य द एल.ई.डी. द प्तमान न हो, तो दोन संयोजन परस्पर बदल द जए। जब वह द प्त हो जाए तब उसी नयम से ट मनल
पहचान ली जए।
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अवलोकन नष्कष
एल.ई.डी. दीिप्तमान होती है िजस टिमनल से एल .ई.डी. का लंबा तार जुड़ा है वह धन है
पहले दीप्त नही ं हुई, तार बदलने पर दीप्त हुई अब िजस टिमनल से लंबा तार जुड़ा है वह धन है
एक और सरल जाँच — स्वयं सेल को दे खए। प्रत्येक सेल म उभरी हुई धातु क टोपी धनात्मक ट मनल तथा चपट धातु क
चकती ऋणात्मक ट मनल होती है। सेल-धारक म ग सदै व चपट चकती से दबती है, अतः धारक का ग वाला सरा बैटरी का
ऋण ट मनल होता है।
सावधानी: बैटरी क जाँच जीभ से स्पश कराकर अथवा दोन ट मनल को सीधे तार से जोड़कर कभी न क जए।
एल.ई.डी. या लप का ही उपयोग क जए — यह सुर क्षत भी है और वश्वसनीय भी।
प्र.10 आपको छः सेल दए गए ह जन पर क, ख, ग, घ, ङ और च अं कत ह। इनम से कुछ काय कर रहे ह और कुछ
काय नह कर रहे ह। एक क्रयाकलाप सुझाइए जससे आप यह पहचान सक क कौन-कौन से सेल काय कर
रहे ह। (i) आपको जो वस्तुए ँ चा हए उनक एक सूची बनाइए। (ii) वह काय व ध ल खए जसका अनुसरण
आप करगे। (iii) चरण (i) म सूचीबद्ध वस्तुओं का उपयोग करके पहचा नए क कौन-कौन से सेल काम कर रहे
ह?
मूल वचार यह है क एक ही परीक्षण-प रपथ बनाइए और उसम बारी-बारी से प्रत्येक सेल लगाइए, शेष कुछ भी न बद लए। तब
प रणाम बदलने का एकमात्र कारण सेल ही होगा।
(i) आवश्यक वस्तुए ँ
क, ख, ग, घ, ङ एवं च अं कत छह सेल
एक सेल-धारक (एक सेल के लए)
एक टॉच का लप (तापद प्त बल्ब) एवं एक लप-धारक
वद्युत-तार के चार छोटे टु कड़े, जनके दोन सर से लगभग 1 cm आवरण हटा हो
एक ऐसा सेल जसका काय करना न त हो, ता क परीक्षण-प रपथ क जाँच क जा सके
अवलोकन लखने के लए एक कॉपी
(ii) काय व ध
1. लप को लप-धारक म बैठाइए और धारक के पेच से दो तार जो ड़ए।
2. सेल-धारक के दोन सर से दो तार जो ड़ए।
3. लप-धारक का एक तार सेल-धारक के एक तार से जोड़ द जए। शेष दो सरे मुक्त र खए — प्रत्येक परीक्षण म इन्ह दोन को
जोड़ना है।
4. पहले परीक्षण-यंत्र को जाँ चए। न त रूप से काम करने वाला सेल धारक म इस प्रकार लगाइए क उसका ऋण ट मनल
ग क ओर रहे और दोन मुक्त सरे जोड़ द जए। लप अवश्य द प्त होना चा हए। य द न हो तो आगे बढ़ने से पहले जोड़
क सए और बल्ब जाँ चए।
5. अब वह सेल नकालकर सेल क को उसी प्रकार धारक म लगाइए, मुक्त सरे जो ड़ए और लप दे खए।
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6. 'द प्त होता है' अथवा 'द प्त नह होता' लख ली जए। क को नकालकर ठ क इन्ह चरण को ख, ग, घ, ङ एवं च के लए एक-
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एक करके दोहराइए।
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7. जस सेल के लए लप तेज द प्त हो वह काय कर रहा है; जसके लए लप द प्त न हो (अथवा बहुत मंद द प्त हो) वह काय
m
ase
नह कर रहा।
(iii)glक्रयाकलाप करना — अपने प रणाम इस प्रकार क ता लका म ल खए। नीचे द गई प्र व ष्टयाँ केवल नमूना ह; आप वही
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ल खए जो आपके छह सेल वास्तव म दशाते ह।
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cनष्कष ag
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सेल क्या लप द प्त होता है?
क हाँ, तेज a g l काय कर रहा है
काय नही ं कर रहा
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ख नह
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काय कर रहा है
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ग हाँ, तेज
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se नह काय नही ं कर रहा
a ङg हाँ, तेज काय कर रहा है
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m .co लगभग समा त — काय न करने वाला ही मािनए agl
च बहुत मंद द प्त
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संकेत: छह परीक्षण म वही लप, वही तार और वही जोड़ र खए। य द बीच म बल्ब बदल दया तो अद प्त लप का
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दोष गलत वस्तु पर मढ़ा जा सकता है। कसी सेल को अ धक दे र तक जुड़ा भी न रहने द जए, इससे सेल जल्द
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समाप्त हो जाता है।
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प्र.11 कसी ऐसी एल.ई.डी., जसे द प्तमान करने के लए ेणी-क्रम म लगे दो सेल क आवश्यकता हो, का उपयोग
करके, तान्या ने चत्र 3.21 म दशाए अनुसार प रपथ बनाया। क्या लप द प्तमान होगा? य द नह तो संयोजी
तार को सही वन्यास के लए आरे खत क जए।
– +
–
+
– +
चत्र 3.21, पृष्ठ 39 — तान्या ारा दो सेल एवं एक एल.ई.डी. से बनाया गया प रपथ। पुनः बनाया गया।
नह , एल.ई.डी. द प्तमान नह होगी। तान्या से एक साथ दो भूल हुई ह।
सेल ेणी-क्रम म नह ह। चत्र 3.21 म काला तार एक सेल के ऋण ट मनल को दूसरे सेल के ऋण ट मनल से जोड़ रहा है। –
से – जुड़े दो सेल धारा को वपरीत दशाओं म धकेलते ह, अतः उनके प्रभाव कट जाते ह और बैटरी कोई उपयोगी प्रभाव नह
दे ती।
एल.ई.डी. उलट जुड़ी है। सेल के धन ट मनल से आने वाला तार एल.ई.डी. के ऋण (छोटे ) तार तक पहुँच रहा है, जब क
एल.ई.डी. म धारा केवल एक ही दशा म जा सकती है।
सही संयोजन:
सेल 1 पीला तार → एल.ई.डी. का लंबा (+) तार
+ –
–
जोड़ :
+ से –
+
– + एल.ई.डी.
सेल 2
हरा तार → एल.ई.डी. का छोटा (–) तार
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सही वन्यास: एक सेल को घुमाकर जोड़ने वाला तार एक सेल के धन ट मनल को दूसरे सेल के ऋण ट मनल से जोड़ता है — इससे दो सेल
क श्रेणी-क्रम बैटरी बनती है। फर मुक्त धन ट मनल एल.ई.डी. के लंबे तार से और मुक्त ऋण ट मनल छोटे तार से जोड़ा जाता है।
तार पुनः बनाते समय दो नयम:
1. एक सेल के धन ट मनल को दूसरे सेल के ऋण ट मनल से जो ड़ए। शेष बचे दोन मुक्त ट मनल ही बैटरी के + एवं –
ट मनल ह गे।
2. बैटरी के धन ट मनल को एल.ई.डी. के लंबे तार से और बैटरी के ऋण ट मनल को एल.ई.डी. के छोटे तार से जो ड़ए।
ऐसा क्य होता है: दो सेल तभी एक-दूसरे क सहायता करते ह जब वे + से – जुड़े ह ; – से – जुड़ने पर वे परस्पर
वरोध करते ह। और सही बैटरी भी उलट लगी एल.ई.डी. को द प्त नह कर सकती, क्य क एल.ई.डी. म धारा केवल
एक ही दशा म जाती है। दोन शत एक साथ पूरी होनी चा हए।
अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — पृष्ठ 39–40
अंत वषयक — भूगोल, इ तहास, प्रौ ो गक
अन्वे ष णात्मक प रयोजनाएँ
प्र.1 कल्पना क जए क कसी समस्या के कारण आपके क्षेत्र म दो दन के लए व ुत क आपू त बा धत हो जाती
है। अपने दै नक जीवन क कन- कन क्रयाओं को आप कर पाने म असमथ ह गे, उनक सूची बनाइए।
अपने एक सामान्य दन को घंटे-दर-घंटे याद क जए और उन सब काम पर नशान लगाइए जनम वद्युत लगती है। यही इस सूची
को बनाने का सही तरीका है।
नमूना उत्तर — दो दन व ुत न होने पर:
समय जो काय म नह कर पाऊँगा/पाऊँगी
पातःकाल ऊपर क टं क म पानी चढ़ाना, गीजर से गम पानी लेना, मक्सर म मसाला पीसना, ेड सकना, वद्यालय क पोशाक
इस्तरी करना, दूरदशन पर समाचार दे खना
िव ालय/काय के कक्षा म पंखे एवं प्रकाश का उपयोग, संगणक अथवा प्रोजेक्टर चलाना, मोबाइल चाज करना, लफ्ट का उपयोग,
घंटे वद्यालय का जल-शीतक चलाना
संध् या पढ़ने के लए बत्ती जलाना, पंखा या कूलर चलाना, दूरदशन दे खना, कपड़े धोने क मशीन तथा वद्युत सलाई मशीन
चलाना
राित्र रे जरेटर म दूध एवं स ब्जयाँ रखना, सड़क क ब त्तय के सहारे चलना, आपातकालीन लप चाज करना
िकसी भी समय ए.ट .एम. से पैसे नकालना, फोटोकॉपी कराना, दुकान क काड मशीन का उपयोग, जल-शोधक चलाना
फर भी जो चलता रहेगा — वह सब जो सेल या बैटरी से चलता है: टॉच, द वार-घड़ी, कलाई-घड़ी, बैटरी समाप्त होने तक
मोबाइल फोन, सेल वाला रे डयो। इसी कारण अध्याय म सेल को वद्युत ऊजा का सुवाह्य ोत कहा गया है।
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यह करके दे खए: यह भी ल खए क इसके बदले आप क्या करगे — दन के प्रकाश म पढ़ना, गैस चूल्हे पर खाना
बनाना, बा ल्टय म पानी भर लेना। एक अ प रयोजना म 'क्या रुकेगा' के साथ 'लोग कैसे काम चलाएँगे' क
तुलना भी होती है।
प्र.2 एक सौर-पैनल ( चत्र 3.22 क) को व ुत ऊजा ोत के रूप म उपयोग करते हुए एक खलौने वाले पंखे ( चत्र
3.22 ख) को चलाने के लए चत्र 3.22 (ग) म दशाए अनुसार एक प रपथ बनाइए।
मोटर
(क) सौर-पैनल (ख ) िखलौने वाला पंख ा (ग)
चत्र 3.22, पृष्ठ 40 — (क) सौर-पैनल, (ख) मोटर पर लगा खलौने वाला पंखा, (ग) दोन को जोड़ने पर पंखा चलता
है। पुनः बनाया गया।
सौर-पैनल यहाँ केवल सेल अथवा बैटरी का ान लेता है — प रपथ के वषय म आपने जो कुछ सीखा है, वह सब ज्य -का-त्य
लागू रहता है।
आवश्यक वस्तुए:ँ एक छोटा सौर-पैनल, एक खलौने वाला पंखा (छोट मोटर पर लगा प्ला स्टक का पंखा), दो संयोजी तार जनके
सर से आवरण हटा हो, तथा तेज धूप।
काय व ध:
1. सौर-पैनल के दोन ट मनल पहचा नए; वे प्रायः + (लाल तार) एवं – (काला तार) से च ह्नत होते ह।
2. एक संयोजी तार से पैनल का एक ट मनल खलौना-पंखे क मोटर के एक ट मनल से जो ड़ए।
3. दूसरे तार से पैनल का दूसरा ट मनल मोटर के दूसरे ट मनल से जो ड़ए। अब पाश पूरा हो गया।
4. पैनल को तेज धूप म सीधा र खए। पंखा घूमने लगेगा।
5. अब पैनल को हाथ अथवा गत्ते से ढक द जए। पंखा धीमा होकर रुक जाएगा — इससे सद्ध होता है क ोत तार नह , पैनल
है।
रपोट म लखने योग्य अवलोकन:
पंखा तब सबसे तेज चलता है जब पैनल सूय के सामने सीधा हो; तरछा करने या छाया पड़ने पर धीमा हो जाता है।
दोन तार आपस म बदल दे ने पर पंखा उलट दशा म घूमता है — धारा क दशा बदलने से मोटर क दशा बदल जाती है।
कमरे के साधारण बल्ब के नीचे पंखा नह चलता या बहुत धीमा चलता है — सूय का प्रकाश कमरे के प्रकाश से कह अ धक
तीव्र होता है।
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ऐसा क्य होता है: सौर-पैनल सूय के प्रकाश क ऊजा को सीधे वद्युत ऊजा म बदल दे ता है, ठ क जैसे सेल
रासाय नक ऊजा को वद्युत ऊजा म बदलता है। दोन दष्ट धारा (डी.सी.) दे ते ह, इस लए एक ही सरल प रपथ दोन
के साथ काम कर जाता है।
प्र.3 कसी व ुत-उपकरण क दुकान पर जाइए। दुकानदार क सहायता से दुकान म उपलब्ध व भन्न प्रकार के सेल
क पहचान क जए। प्रत्येक सेल के लए पता लगाइए क यह कस यु क्त (यु क्तय ) म प्रयुक्त होता है (होते ह)?
इस पर एक रपोट बनाइए।
एक कॉपी साथ ले जाइए, दुकानदार से प्रत्येक प्रकार का सेल दखाने को क हए और उसका आकार, आमाप, अं कत ववरण
तथा उपयोग लख ली जए। कसी सेल को खो लए या छे ड़ए मत।
नमूना रपोट — दुकान म सामान्यतः मलने वाले सेल:
सेल का प्रकार कैसा दखता है कन यु क्तय म प्रयुक्त
ए.ए. (पेंिसल से ल ) बेलनाकार, लगभग 5 cm लंबा टॉच, द वार-घड़ी, ट .वी. रमोट, खलौने
ए.ए.ए. बेलनाकार, ए.ए. से पतला एवं छोटा छोटे रमोट, संगणक का माउस, ड जटल थमामीटर
सी एवं डी से ल मोटे बेलन बड़ी टॉच, आपातकालीन लप, ां जस्टर रे डयो
9 V बैटरी छोटा आयताकार खंड जसके ऊपर दो ट मनल मल्ट मीटर, धुआँ-चेतावनी यंत्र, छोट प्रयोग कट
बटन से ल सक्के जैसा चपटा एवं गोल कलाई-घड़ी, श्रवण सहायक यंत्र, कैलकुलेटर, कार
क चाबी
पुनरावेशीय (िलिथयम-आयन) चपटा पैकेट अथवा बेलन, जस पर ' रचाजबल' मोबाइल फोन, लैपटॉप, पावर बक, वद्युत वाहन
बैटरी लखा हो
ले ड-अम्ल बैटरी बड़ा, भारी डब्बा जस पर दो मोटे ट मनल कार, घर का इन्वटर
यह भी पता लगाकर ल खए: प्रत्येक सेल पर अं कत वोल्टता (अ धकांश प सल सेल पर 1.5 V, आयताकार बैटरी पर 9 V,
अनेक बटन सेल पर 3 V), मूल्य, कतने समय चलता है, तथा इनम से कौन-से पुनः आवे शत कए जा सकते ह।
क्या आप जानते ह? प्रयुक्त सेल को साधारण कूड़ेदान म कभी नह डालना चा हए। इनके भीतर के रसायन म
और जल को हा न पहुँचा सकते ह, अतः इन्ह बैटरी-संग्रह अथवा ई-कचरा पात्र म ही डालना चा हए। अपनी रपोट म
इस वषय पर भी एक पं क्त अवश्य जो ड़ए।
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प्र.4 अपने घर म पाई जाने वाली वस्तुओं क सूची तीन शीषक के अंतगत बनाइए — (i) ऐसी वस्तुए ँ जो केवल
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और कु.छco gl
व ुतरोधी ह। (ii) ऐसी वस्तुए ँ जो केवल व ुत क चालक ह। (iii) ऐसी वस्तुए ँ जनके कुछ भाग व ुतरोधी ह
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भाग व ुत के चालक ह।
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उत्तरgl
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घर म घू मए और प्रत्येक वस्तु के लए एक ही प्रश्न पू छए: यह कस पदाथ क बनी है? फर उसे उपयुक्त स्तंभ म रख द जए।
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नमूना उत्तर:
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(I) केवल व ुतरोधी केg
(II) a वल व ुत- (III) दोन प्रकार के भाग वाली
चालक
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प्लािस्टक की बाल्टी इस्पात की चम्मच
se m.
पेचकस — धातु की छड़ एवं प्लािस्टक का हत्था
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लकड़ी की .कुcस , लकड़ी का पैम ाना बा,gबाहर प्लािस्टक
िव तु तार — भीतर ताँa
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लोहे की कील, से फ्टी-िपन
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aglकाँच का िगलास, काँच की चूड़ी एलुिमिनयम पिणका, ताँबे का
िसक्का
प्लग-टॉप — प्लािस्टक के खोल में पीतल की िपने ं
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रबर का इरे ज़र, रबर की चप्पल पीतल का ताला, इस्पात का टॉच — प्लािस्टक के खोल में धातु के संपक
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पैम ाना
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मोमब ी, सूती कपड़ा, कागज, चीनी लोहे की चाबी, इस्पात की िस्वच-बोड, प्लािस्टक के हत्थे वाली िव तु इस्तरी, बेके लाइट के
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िम ी का कप थाली हत्थों वाला पेशर कु कर
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ऐसा क्य होता है: तीसरा वग सबसे रोचक है। जहाँ हम वद्युत का उपयोग भी करना है और यु क्त को छू ना भी है,
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eवहाँ
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gl जाता है। बजली मस्त्री का पेचकस, प्लग-टॉप और वद्युत तार — तीन इसी एक वचार पर बने ह।
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comऔर उँगली से ठ क वह ान दखाइए जहाँ चालक समाप्त g l a
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emउपयोगकता को सुर क्षत रखती है।
यह करके दे खए: स्तंभ (iii) क कोई वस्तु उठाइए
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होकर वद्युतरोधी आरंभ होता है। वही सीमा
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अध्याय
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agl वद्युत सेल वद्युत ऊजा का एक सुवाह्य ोत है। इसक उभरी हुई धातु क टोपी धनात्मक (+) ट मनल तथा चपट धातु क
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चकती ऋणात्मक (–) ट मनल होती है।
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जब दो या दो से अ धक सेल को इस प्रकार जोड़ा जाए क एक सेल का धन ट मनल अगले सेल के ऋण ट मनल से जुड़े, तो
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यह संयोजन बैटरी कहलाता है। बैटरी अ धक समय तक तथा/अथवा अ धक ऊजा प्रदान करती है।
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तापद प्त लप म धारा तंतु को गम कर दे ती है, इस लए वह द प्तमान होता है। एल.ई.डी. म तंतु नह होता और उसम धारा
केवल एक ही दशा म प्रवा हत हो सकती है — इसका लंबा तार धन ट मनल होता है।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 3 वद्युत: प रपथ एवं उनके घटक AglaSem · NCERT Solutions
लप तभी द प्तमान होता है जब प रपथ संपू रत हो, अथात लप का एक सरा सेल के एक ट मनल से और दूसरा सरा सेल के
दूसरे ट मनल से जुड़ा हो। धारा क दशा सेल के धन ट मनल से ऋण ट मनल क ओर मानी जाती है।
स्वच एक सरल यु क्त है जो प रपथ को पूरा (ऑन, बंद प रपथ) अथवा भंग (ऑफ, खुला प रपथ) करती है। इसे प रपथ म
कह भी लगाया जा सकता है।
जन पदाथ म से धारा सरलता से प्रवा हत हो जाती है वे वद्युत के चालक ह (ताँबा, चाँद , सोना जैसी धातुए)ँ ; जनम से धारा
प्रवा हत नह हो सकती वे वद्युतरोधी ह (रबर, प्ला स्टक, काँच, लकड़ी, चीनी म )।
त्व रत पुनरावृ त्त
पद अथ ध्यान रखने योग्य बात अध्याय से उदाहरण
वद्युत सेल दो टिमनल वाला िव तु ऊज का सुवाह्य धातु क टोपी = धन (+), धातु क चकती द वार-घड़ी अथवा टॉच का सेल
ोत = ऋण (–)
बैटरी दो या दो से अिधक से ल ों का संयोजन, एक अ धक समय तक तथा/अथवा अ धक चत्र 3.3 — दो सेल एवं चार सेल
का धन अगले के ऋण से ऊजा दे ती है से न मत बैटरी
ट मनल से ल , लै ंप अथवा एल.ई.डी. के दो िसरे दोन ट मनल परस्पर स्पश नह करने प्रत्येक सेल पर अं कत + एवं –
चा हए चह्न
तंतु लै ंप के काँच के बल्ब के भीतर लगा पतला गम होकर द प्त होता है और प्रकाश दे ता चत्र 3.4 (क) का टॉच बल्ब
तार है
तापद प्त वह लै ंप जो तंत ु के गम होने से पकाश दे ता है कसी भी दशा म जोड़ने पर द प्त होता है पुरानी टॉच का बल्ब
लप
एल.ई.डी. पकाश उत्सजक डायोड — इसमें तंत ु नही ं धारा एक ही दशा म; लंबा तार = धन चत्र 3.6 के व भन्न रंग के
होता ट मनल एल.ई.डी.
वद्युत िव तु -धारा के पवाह के िलए संपूिरत पथ पथ पूरा होने पर ही लप द प्तमान होता है चत्र 3.9
प रपथ
धारा क से ल के धन टिमनल से ऋण टिमनल की यह बाहरी प रपथ म मानी गई दशा है चत्र 3.12 (ख), स्वच ऑन
दशा ओर
स्वच पिरपथ को पूर ा अथवा भंग करने वाली सरल ऑन = बंद प रपथ; ऑफ = खुला प रपथ सेफ्ट - पन एवं ाइंग- पन का
युिक्त (वायु अंतराल) स्वच, चत्र 3.11
प रपथ पतीकों के उपयोग से बनाया गया पिरपथ का लंबा रेखाखंड = धन, छोटा रेखाखंड = चत्र 3.14 (क) एवं (ख)
आरेख िचत्र ऋण
वद्युत वह पदाथ िजसमें से धारा सरलता से पवािहत सभी धातुए;ँ तार ताँबे के बनते ह क्य क चाबी, सक्का, एलु म नयम
चालक होती है यह सस्ता और सुलभ है प णका, प सल क लीड
वद्युतरोधी वह पदाथ िजसमें से धारा पवािहत नही ं हो तार , प्लग एवं स्वच के आवरण इसी के रबर, प्ला स्टक, काँच, लकड़ी, मोम,
सकती बनते ह चीनी म
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