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अंक योजना
प्रतिदर्श प्रश्न पत्र 2025-26
त ंदी (ऐच्छिक)
कोड संख्या (002)
कक्षा-बार वी ं
तनर्ाशररि समय: 03 घं टे अतर्किम अंक : 80
सामान्य तनदे र् :-
अंक योजना का उद्दे श्य मूल्ां कन को अधिकाधिक वस्तु धनष्ठ बनाना है ।
वस्तु परक प्रश्ों के उत्तरों का मूल्ां कन धनधदि ष्ट अंक योजना के आिार पर ही धकया जाए।
वर्ि नात्मक प्रश्ों के अंक योजना में धदए गए उत्तर धबं दु अंधिम नही ं हैं । ये सु झावात्मक एवं सां केधिक हैं ।
यधद परीक्षार्थी इन सां केधिक धबं दुओं से धिन्न, धकंिु उपयु क्त उत्तर दे िो उसे अंक धदए जाएँ ।
मूल्ां कन कायि धनजी व्याख्या के अनुसार नही,ं बल्कि अंक योजना में धनधदि ष्ट धनदे शानुसार ही धकया जाए।
प्रश्न खंड – क (अपतिि बोर्) अं क
1. (क) (iv) सामाधजक प्रधिधष्ठि शैली 1
(ख) (ii) केवल कर्थन (II) और (IV) सही हैं । 1
(ग) (i)असभ्य होना 1
(घ) सभ्य होने की प्रधिया 1
(ङ) धक हम एक धनधिि िरीके से जीवन धजएँ , जो धक हमारी स्वयं की प्रकृधि का 2
एक छोटा सा स्वरूप होिा है ।
(च) हमारे अंदर धछपे सािारर् मानव को हमसे दू र करके संस्कृधि हमें एक जधटल 2
सी शल्कक्त दे दे िी है ।
(छ) क्ोंधक हमारी संस्कृधि हमें एक धवधशष्ट प्रकार से जीने के धलए जोर दे िी है । 2
ज्ञान का िंडार पा लेने के बाद वर्षों की सभ्यिा से शायद यही हमें धवरासि में
धमला है ।
2. (क) (iv) कधव के धवचार 1
(ख) (i) सरल िार्षा में धलखना 1
(ग) (ii) पाप को कर लक्ष्य कर दे झूठ को सपना। 1
(घ) िवानी प्रसाद धमश्र ने प्रकृधि और मानवीय िावनाओं को एक सार्थ धपरोया है । 1
कलम को अपनी िावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम बनाया गया है , और
कहा गया है धक वह जो िी धलखे , वह सच्चा और सार्थि क हो। कधविा में प्रकृधि
के धवधिन्न ित्ों (धवंध्य, रे वा, फूल, फल, बरसाि, गमी) और मानवीय िावनाओं
(प्यार, कष्ट, िोि, नरमी) को एक सार्थ लाकर जीवन की समग्रिा को दशाि या
गया है ।
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(ङ) कधव सृजनात्मकिा का महत् बिा रहे हैं । यहाँ बीज से िात्पयि धवचारों से है । 2
धवचार इिने गहन और सार्थिक हों धक वे व्यापक रूप से फैलें और समाज में
बदलाव लाएँ ।
(च) मनोिावों को स्विंत्र रूप से अधिव्यल्कक्त प्रदान करना एवं समाज में आवश्यक 2
पररवििन लाना।
खंड- ख (अतिव्यच्छि और माध्यम पुस्तक के आर्ार पर )
3.(क) जब घटना के दृश्य या धवजुअल धमल जािे हैं िब उन दृश्यों के आिार 1
पर खबर धलखी जािी है , जो एं कर पड़िा है पूर्ि धवराम पढ़िा है .
इस खबर की शुरुआि प्रारं धिक सूचना से होिी है और बाद में कुछ
वाक्ों पर प्राप्त दृश्य धदखाए जािे हैं ।
(ख) सरल,सहज, गररमापूर्ि िार्षा 2
िारिम्यिा आवश्यक
धनम्नधलल्कखि, उपरोक्त, िमां क,अर्थवा,धकंिु ,परं िु जैसी शब्दावली
से बचाव
गैर जरूरी धवशेर्षर्ों, सामाधसक और ित्सम शब्दों से बचाव
(ग) संवाददािाओं के बीच काम का धविाजन आमिौर पर उनकी 2
धदलचस्पी और ज्ञान को ध्यान में रखिे हुए धकया जािा है । मीधडया की
िार्षा में इसे बीट कहिे हैं । उदाहरर् के धलए खेल में रुधच रखने वाले
संवाददािा की बीट खेल है िो उसको खेल संबंिी घटनाओं की
ररपोधटिं ग करनी होगी।
4. (क) 2x3=6
सरल और बोिगम्य
क्षेत्र धवशेर्ष का धवधशष्ट ज्ञान
िकनीकी शब्दावली में धवर्षय से संबंधिि िार्षा पर अधिकार
िकनीकी शब्दावली को िी प्रचधलि सरल शब्दों में धलखना
(ख) फीचर लेखन का कोई धनधिि ढाँ चा नहीं
आमिौर पर िथ्ों, सूचनाओं और धवचारों पर आिाररि कर्थात्मक
धववरर्
िार्षा-सरल, रूपात्मक एवं आकर्षिक
फीचर में िावनाओं, धवचारों का सम्यक प्रयोग
(ग) उलटा धपराधमड शैली समाचार लेखन की सवाि धिक लोकधप्रय उपयोगी
और बुधनयादी शै ली
इसमें इं टरो, बॉडी और समापन के अनुसार क्लाइमेक्स आरं ि
में
5. धकसी एक धवर्षय पर लगिग 100 शब्दों में रचनात्मक लेखन - 5
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धवर्षयवस्तु : 3 अंक
िार्षा : 1 अंक
प्रस्तुधि : 1अंक
6. (क) धकन्ही दो प्रश्ो के उत्तर लगिग 60 शब्दों में आपेधक्षि - 2x3=6
धबंब और छं द (आं िररक लय)
कधविा को इं धियों से पकड़ने में सहायक
बाह्य संवेदनाओं का मन के स्तर पर बदलाव 3
धवशेर्ष शब्दों को सुनकर मन के िीिर धचत्रों का कौंिना, इन्हीं के
द्वारा कधविा के धबंब का धनमाि र्
(ख) कर्थानक के अनुसार कहानी चरम उत्कर्षि अर्थाि ि क्लाइमेक्स की ओर बढ़िी
है । चरम उत्कर्षि का धचत्रर् बहुि ध्यानपूविक करना चाधहए, क्ोंधक िावों या
पात्रों के अधिररक्त अधिव्यल्कक्त चरम उत्कर्षि के प्रिाव को कम कर सकिी है ।
कहानीकार की प्रधिबद्धिा या उद्दे श्य की पूधिि के प्रधि अधिररक्त आग्रह कहानी 3
को िार्षर् में बदल सकिे हैं । सवोत्तम यह होिा है धक चरम उत्कर्षि पाठक को
स्वयं सोचने और लेखकीय पक्षिर की ओर आने के धलए प्रेररि करें लेधकन
पाठक को यह िी लगे धक उसे स्विंत्रिा दी गई है और उसने जो धनर्िय धनकाले
हैं , वे उसके अपने हैं ।
(ग) नाटक कहानी या उपन्यास की िरह वधर्िि धविा नहीं
नाटक में मौन, संधक्षप्त और सां केधिक िार्षा का महत्त्व 3
वधर्िि िार्षा से अधिक मौन में व्यंजनात्मकिा व धियात्मकिा अधिक
खंड- ग ( पाठ्य पुस्तकों अंिरा, अंिराल के आर्ार पर )
7. (क) (i) व्यल्कक्त 1
(ख) (iv)कर्थन और कारर् दोनों सही हैं । कारर् कर्थन की सही व्याख्या है । 1
(ग) (ii) समधष्ट 1
(घ) (i) की सत्ता का सावििौमीकरर् । 1
(ङ) (i) गोिाखोर 1
8. (क) धकन्ही िीन प्रश्ो में से दो प्रश्ो के उत्तर लगिग 40 शब्दों में आपेधक्षि - 2x2=4
हार/धनराशा के कारर् -
हूर्ों के आिमर् में दे वसेना के पररवार का नष्ट होना
स्कंदगुप्त से प्रेम में धमली असफलिा 2
जीवन की धवपरीि पररल्कथर्थधियों में धमली असफलिा
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(ख) सरोज का धववाह अन्य धववाहों से धिन्न - 2
अन्य धववाहों की िरह सगे-संबंिी नहीं बुलाए गए
शादी से पहले के रीधि-ररवाज इत्याधद नहीं हुए
माँ द्वारा धनिाई जाने वाली रस्में िी धनराला ने स्वयं धनिाई
(ग) राम के प्रधि श्रद्धा िाव को प्रकट करने के धलए िरि ने कहा -
राम अपरािी पर िी िोि नहीं करिे
2
िरि पर राम की धवशेर्ष कृपा व स्नेह
श्री राम और िरि का अटू ट सार्थ
श्री राम के प्रधि अनन्य श्रद्धा िाव
9. धकसी एक काव्यां श की सप्रसंग व्याख्या लगिग 100 शब्दों में आपेधक्षि - 6
संदिि : 1 अंक (कधव और कधविा का नाम)
प्रसंग :1 अं क (पूवाि पर सं बंि)
व्याख्या :3 अंक
धवशेर्ष :1 अंक
10. (i) धवथर्थापन की समस्या 1
(क)
(ख) (iii) स्वार्थिलोलुपिा 1
(ग) (ii) नवागाँ व 1
(घ) (iii) अपने मूल थर्थान से उजड़े लोग 1
(ङ) (iv) कर्थन और कारर् दोनों सही हैं । कारर् कर्थन की सही व्याख्या है । 1
11. धकन्ही दो प्रश्ो के उत्तर लगिग 40 शब्दों में आपेधक्षि - 2x2=4
(क) लेखक की िेंट पंधडि केदारनार्थ जी पाठक से काशी में एक बाराि में हुई र्थी।
लेखक केदारनार्थ जी पाठक के पुस्तकालय में िी आया जाया करिे र्थे। जब
लेखक को पिा चला धक केदारनार्थ जी िारिेंदु जी से जब लेखक को यह पिा
चला धक केदारनार्थ जी का पररचय िारिेंदु जी के सार्थ है िो वे िावनाओं में 2
खो गए। वह बड़े कुिूहल िाव से िारिेंदु जी के मकान को धनहारने लगे।
उनकी यह िावुकिा दे खकर केदारनार्थ जी प्रिाधवि हुए और वे दोनों के धमत्र
बन गए। यहीं से लेखक की धहं दी प्रेधमयों की मंडली बननी शुरू हो गई और
यह लेखक के जीवन का महत्पूर्ि पड़ाव र्था।
(ख) हररद्वार के मंधदर में संिव और पारो एक सार्थ प्रार्थिना के धलए खड़े र्थे। पारो ने
स्वयं के धलए 'हम' शब्द का प्रयोग धकया धजसके कारर् पंधडि जी ने दोनों
2
को पधि-पत्नी समझा।
पुजारी ने लड़की के 'हम' को यु गल के अर्थि में सुखी रहने , फूलने -फलने ,
जब िी आना सार्थ ही आना, गंगा मैया मनोरर्थ पूरी करें का आशीवाि द धदया।
(ग) िेदिाव रधहि आधिथ् सत्कार
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धवनम्रिा और सरलिा 2
'अधिधर्थ दे वो िव' की िावना
सेवािाव
12. धकसी एक गद्ां श की सप्रसं ग व्याख्या लगिग 100 शब्दों में आपेधक्षि - 6
संदिि : 1 अंक (पाठ और लेखक का नाम)
प्रसंग :1 अं क (पूवाि पर सं बंि)
व्याख्या :3 अंक
धवशेर्ष :1 अंक
13. धकन्ही दो प्रश्ो के उत्तर लगिग 100 शब्दों में आपेधक्षि - 2x5=10
(क) सूरदास जानिा र्था धक उससे बदला लेने के धलए उसकी झोपड़ी में आग िैरव
ने ही लगाई है । इस कर्थन के आलोक में सूरदास के चररत्र द्वारा धवधिन्न जीवन
मूल् प्राप्त होिे हैं ।
सहनशीलिा
कमिशीलिा 5
दृढ़ संकल्प
िुरंि धनर्िय लेने की क्षमिा जुझारूपन
धवपरीि पररल्कथर्थधियों में हार न मानना
(ख) आज की सभ्यिा नधदयों के प्रधि उदासीन-
कारखाने के रसायन धमधश्रि पानी को नधदयों में बहाना
अपधशष्ट पदार्थि , प्लाल्किक की र्थैधलयों के प्रयोग से नधदयों के प्रवाह
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को बाधिि करना
नधदयों के रखरखाव और सफाई के प्रधि ध्यान न दे ना
नधदयों का रूप धबगड़ना और नालों के समान धदखाई दे ना
(ग) रोचक शैली में ग्रामीर् जीवन और प्राकृधिक पररवेश का वर्िन
वनस्पधियों, पेड़-पौिों, वन्य जीवों और फूलों की नाना प्रकार की
धकस्मों का पररचय
ग्रामीर् जीवन पूरी िरह से प्रकृधि पर आधश्रि
और्षिीय गुर्ों से िरपूर फूल 5
पेड़-पौिे फोड़े फुंधसयाँ ठीक होने में धवशेर्ष लािकारी ग्रामीर्
पररवेश का वर्िन
पाठ मन पर अधमट छाप छोड़िा है
प्रकृधि की और लौटने का संदेश समेटे हुए है
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Study Materials
Notes
Model Papers Class 6 Notes
Sample Papers Class 7 Notes
Half Yearly Sample Papers Class 8 Notes
Class 9 Notes
Important Resources
Class 10 Notes
Periodic Table
Class 11 Notes
Writing Skills / Formats
Maps of India / World Class 12 Notes
Books and Solutions
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