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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 4: धातुओं और अधातुओं का
संसार
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
41 – 56 20 54 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 42 pages
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 4: धातुओं और अधातुओं का संसार
कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत एनसीईआरट समाधान। पृष्ठ 41 और
42 के लोहार-संवाद, क्रयाकलाप 4.1 से 4.8 तक सभी आठ क्रयाकलाप, समग्र दृ ष्ट का प्रश्न, पृष्ठ 43 से 54 तक के सभी पाठ्य प्रश्न, आइए, और
अ धक सीख के बारह प्रश्न तथा चार अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — प्रत्येक का उत्तर अवलोकन, कारण, भरी हुई ता लका 4.1, 4.2, 4.3 और
प्रश्न 7 के पूण प्रवाह चत्र के साथ।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (कक्षा 7) 41 – 56
खं ड प्रश्न
20 54
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 41 और 42
यशवंत और आनंद क लोहार से भट
पाठ्य प्रश्न
प्र.1 यशवंत — आप सामान्यत: कौन-सी वस्तुए ँ बनाते ह?
सुदशन चाचा लोहे से दै नक उपयोग क वस्तुए ँ और कृ ष उपकरण बनाते ह।
वस्तु का प्रकार उनके ारा बताए गए उदाहरण
दै िनक उपयोग की घरे ल ू वस्तुए ँ तवा, बाल्टी, िचमटा
कृ िष उपकरण फावड़ ा, कु ाड़ ी, खुप , जेल ी
ऐसा क्य होता है: इन सभी वस्तुओं का सुदृढ़ होना और धार या आकार बनाए रखना आवश्यक है। लोहा कठोर
और मजबूत होता है, इस लए खुप प्र त दन म काटने पर भी मुड़ती नह और तवा बार-बार आग पर चढ़ाने पर भी
नह चटकता।
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प्र.2 आनंद — ये वस्तुए ँ कस सामग्री से बनती ह?
लोहार क कायशाला म तीन साम ग्रय का उपयोग होता है और प्रत्येक का कारण अलग है।
लोहा — वस्तु स्वयं इसी धातु से बनती है। यह कठोर, मजबूत और पीटकर आकार दए जाने योग्य है।
लकड़ी — आवश्यकतानुसार हत्थे बनाने के लए, क्य क लकड़ी ऊष्मा क कुचालक है और हाथ नह जलाती।
कोयला — भ म जलाकर लोहे को इतना गरम कया जाता है क वह सुख लाल और नरम हो जाए।
क्या आप जानते ह? कोयला एक अधातु है (मुख्यत: काबन)। अथात् जो कायशाला पूरी तरह एक धातु पर टक
है, वह भी एक अधातु के बना नह चल सकती।
प्र.3 आनंद आश्चयच कत होकर पूछती है — आप इसे क्य पीट रहे ह?
सुदशन चाचा उत्तर दे ते ह — “म इसे कुल्हाड़ी का आकार दे ने के लए पीट रहा ँ।”
वे पहले लोहे के टु कड़े को कोयले क भ म सुख लाल होने तक गरम करते ह। गरम लोहा ठं डे लोहे क तुलना म कह अ धक नरम
होता है, इस लए हथौड़े का प्रत्येक प्रहार धातु को थोड़ा-थोड़ा फैलाता और मोड़ता है। प्रहार दर प्रहार बेडौल टु कड़ा कुल्हाड़ी के चपटे
फलक म बदल जाता है।
ऐसा क्य होता है: लोहा आघातवधनीय है — इसे बना टू टे नया आकार दया जा सकता है। गरम करने पर यह गुण
और बढ़ जाता है। कोयले के टु कड़े के साथ ऐसा करने पर वह केवल चूर-चूर हो जाएगा।
प्र.4 आनंद — वाह! लोहे के एक टु कड़े को पीटकर चपटा आकार दया जा सकता है! क्या हम अन्य धातुओं के साथ
भी ऐसा कर सकते ह?
हाँ — अ धकांश धातुओं को पीटकर चपटा कया जा सकता है। क्रयाकलाप 4.1 इसी प्रश्न क जाँच करता है।
ताँबा, ऐलुिमिनयम, लोहा → पीटने पर चपटे → आघातवधनीय
कोयला, सल्फर → टु क ड़ ों में टू ट जाते है ं → भंगरु
लकड़ ी → न चपटी होती है, न टू टती है → न आघातवधनीय, न भंगरु
सोना और चाँद ी सव िधक आघातवधनीय धातुए ँ है।ं
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स्वयं दे खए: बफ पर लगे चाँद के वक को दे खए। वह एक धातु क इतनी पतली चादर है क छू ते ही फट जाती है
— यही आघातवधनीयता का प्रमाण है।
क्रयाकलाप 4.1 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 42
अनुभाग 4.1.1 आघातवधनीयता
क्रयाकलाप
प्र.1 कक्षा 6 क पाठ्यपुस्तक ज ासा म दए गए अध्याय ‘पदाथ हमारे चार ओर’ का स्मरण क जए और एक त्रत
क गई वस्तुओं के स्वरूप का अवलोकन क जए। क्या वे चमकदार ह? साथ ही ध्यान द जए क वे कठोर ह या
नरम? अपने अवलोकन को ता लका 4.1 म अ भले खत क जए।
क्र.सं. वस्तु/सामग्री प्रगटन (द्यु तमय/ कठोर/ हथौड़े से मारने पर प्रभाव
द्यु तहीन) नरम (चपटा होना/टु कड़ म
टू टना)
1. ताँबे का टु कड़ा
2. ऐलु म नयम का टु कड़ा
3. लोहे क क ल
4. कोयले का टु कड़ा
5. सल्फर का टु कड़ा (मटर के
दाने के आकार का)
6. लकड़ी का टु कड़ा
ता लका 4.1 — व भन्न वस्तुओं अथवा साम ग्रय का स्वरूप, कठोरता एवं उन पर हथौड़े का प्रभाव (पृष्ठ 43 पर छपी
रक्त ता लका)।
हथौड़ा उठाने से पहले प्रत्येक वस्तु को अ े प्रकाश म दे खए। नाखून से और फर लोहे क क ल से खर चकर कठोर या नरम का
नणय क जए।
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क्र.सं. वस्तु/सामग्री स्वरूप (द्यु तमय/द्यु तहीन) कठोर/नरम
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ताँबे का टुक ड़ा द्य िु तमय (लािलमा िलए चमक )
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2. द्य िु तमय (रजत आभा) कठोर
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3. लोहे की कील द्य िु तमय (धूस र चमक ) कठोर
com िु तहीन (मटमैला काला)
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4. कोयले का टुक ड़ा द्य नरम , भुर भुर ा
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सल्फर का टुक ड़ा (मटर के दाने के आकार द्य िु तहीन (फीका पीला) नरम
द्य िु तहीन
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धातुओ ं से नरम
6. लकड़ी का टुक ड़ा
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सुझाव: ताँबे या ऐलु म नयम का पुराना टु कड़ा वायु म बनी परत के कारण फ का दख सकता है। उसे रेगमाल से
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एक बार रग ड़ए और वास्त वक धा त्वक द्यु त सामने आ जाएगी — नणय ताजा सतह दे खकर क जए।
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प्र.2 अब इनम से प्रत्येक वस्तु को एक-एक करके कसी कठोर सतह पर र खए और हथौड़े से पी टए। आपको क्या
लगता है क क्या होगा? क्या वस्तुए ँ कुछ चपट हो जाएँगी अथवा टु कड़ म टू ट जाएँगी? अपने अवलोकन को
ता लका 4.1 म अ भले खत क जए।
चत्र 4.2, पृष्ठ 42 — हथौड़े से लोहे क क ल को पीटना (पुनः चत्रण)।
क्र.सं. वस्तु/सामग्री प्रगटन (द्यु तमय/ कठोर/ हथौड़े से मारने पर प्रभाव
द्यु तहीन) नरम (चपटा होना/टु कड़ म
टू टना)
1. ताँबे का टु कड़ा
2. ऐलु म नयम का टु कड़ा
3. लोहे क क ल
4. कोयले का टु कड़ा
5. सल्फर का टु कड़ा (मटर के
दाने के आकार का)
6. लकड़ी का टु कड़ा
ता लका 4.1 — व भन्न वस्तुओं अथवा साम ग्रय का स्वरूप, कठोरता एवं उन पर हथौड़े का प्रभाव (पृष्ठ 43 पर छपी
रक्त ता लका)।
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पूवानुमान: चमकदार और कठोर वस्तुएँ फैल जाएँगी, फ क वस्तुएँ टू ट जाएँगी। अवलोकन म ठ क यही होता है।
क्र.सं. वस्तु/सामग्री हथौड़े से मारने पर प्रभाव नष्कष
1. ताँबे का टुक ड़ा चपटा हो जाता है आघातवधनीय
2. ऐलुिमिनयम का टुक ड़ा चपटा हो जाता है आघातवधनीय
3. लोहे की कील चपटी हो जाती है आघातवधनीय
4. कोयले का टुक ड़ा टुक ड़ ों में टू ट जाता है भंगुर
5. सल्फर का टुक ड़ा (मटर के दाने के आकार का) टुक ड़ ों में टू ट जाता है भंगुर
6. लकड़ी का टुक ड़ा न चपटी होती है, न टू टती है न आघातवधनीय, न भंगुर
ऐसा क्य होता है: धातु म कण एक-दूसरे पर फसलकर नए स्थान पर बैठ जाते ह, इस लए टु कड़ा फैलकर पतला
हो जाता है। कोयले और सल्फर म कण फसल नह पाते; प्रहार दरार बनकर फैलता है और डली टू ट जाती है।
सावधानी: यह क्रयाकलाप अपने शक्षक या कसी वयस्क के नदशन म ही क जए, हथौड़े को मजबूती से पक ड़ए
और दूसरा हाथ प्रहार-स्थल से दूर र खए।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 43
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अनुभाग 4.1.1 आघातवधनीयता
पाठ्य प्रश्न
प्र.1 ता लका 4.1 का व ेषण क जए। उन वस्तुओं क पहचान क जए जो द्यु तमय और कठोर ह।
क्र.सं. वस्तु/सामग्री प्रगटन (द्यु तमय/ कठोर/ हथौड़े से मारने पर प्रभाव
द्यु तहीन) नरम (चपटा होना/टु कड़ म
टू टना)
1. ताँबे का टु कड़ा
2. ऐलु म नयम का टु कड़ा
3. लोहे क क ल
4. कोयले का टु कड़ा
5. सल्फर का टु कड़ा (मटर के
दाने के आकार का)
6. लकड़ी का टु कड़ा
ता लका 4.1 — व भन्न वस्तुओं अथवा साम ग्रय का स्वरूप, कठोरता एवं उन पर हथौड़े का प्रभाव (पृष्ठ 43 पर छपी
रक्त ता लका)।
द्यु तमय और कठोर वस्तुएँ ह — ताँबे का टु कड़ा, ऐलु म नयम का टु कड़ा और लोहे क क ल।
द्य िु तमय + कठोर → ताँबा, ऐलुिमिनयम, लोहा → ये धातुएँ है ं
द्य िु तहीन + कम कठोर → कोयला, सल्फर, लकड़ ी
ताँबे, ऐलु म नयम और लोहे ारा प्रद शत इस चमक को वशेष नाम दया गया है — धा त्वक द्यु त।
ऐसा क्य होता है: धातु क सतह प्रकाश को समान रूप से पराव तत करती है, इस लए वह चमकती है। कोयला
और सल्फर प्रकाश को चार ओर बखेर दे ते ह, इस लए कतना भी चमकाइए वे फ के ही दखते ह।
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प्र.2 क्या सभी धातुए ँ कठोर और ठोस होती ह?
नह । “कठोर और ठोस” धातुओं का सामान्य नयम है, अपवादर हत नयम नह ।
सो डयम और पोटै शयम धातुएँ ह, फर भी वे इतनी नरम ह क चाकू से काट जा सकती ह।
पारा एक ऐसी धातु है जो कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था म रहती है — कक्षा 6 ज ासा के अध्याय ‘ताप एवं उसका
मापन’ म आपने इसे तापमापी म दे खा है।
सुझाव: व ान म पहले सामान्य गुण याद क जए, फर प्र सद्ध अपवाद। धातुओं के दो अपवाद अवश्य याद र खए
— सबसे नरम: सो डयम और पोटै शयम; द्रव: पारा।
प्र.3 हथौड़े से पीटने पर कौन-सी वस्तुए ँ सपाट हो गईं ह?
ताँबे का टु कड़ा, लोहे क क ल और ऐलु म नयम का टु कड़ा पीटने पर सपाट हो गए।
िबना टू टे पतली चादर में बदल जाना = आघातवधनीयता
अिधकांश धातुए ँ आघातवधनीय है;ं सोना और चाँद ी सव िधक आघातवधनीय है।ं
इसका प्रमाण आपके चार ओर है — मठाइय पर लगा चाँद का वक और खाद्य वस्तुओं को लपेटने वाला ऐलु म नयम पत्रक
दोन ही धातु क पीट हुई चादर ह।
प्र.4 क्या आप धातुओं से बनी चादर के कुछ उदाहरण दे सकते ह?
बफ और अन्य मठाइय पर चाँद का वक — कागज से भी पतली पीट हुई चाँद ।
रोट लपेटने और भोजन पैक करने का ऐलु म नयम पत्रक।
ताँबे क चादर जनसे तवा, परात और मं दर क छत बनती ह।
छत, बाल्ट और पेट बनाने वाली गैल्वेनाइज्ड लोहे क चादर।
मू तय और पारंप रक सजावट म प्रयुक्त सोने का वक।
क्या आप जानते ह? सोने को इतनी पतली चादर म पीटा जा सकता है क उसके आर-पार प्रकाश हरी आभा लए
नकल जाता है। यह आघातवधनीयता क चरम सीमा है।
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समग्र दृ ष्ट — पृष्ठ 44
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भारत क सभ्यता क उन्न त म लोहे का प्रभाव
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समग्र दृ ष्ट
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सामान्यत: यह माना जाता रहा है क ताँबे क खोज लोहे से पूव हुई। इसका संभा वत कारण क्या हो सकता है?
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प्र.1
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क्य क ताँबा प्राप्त करना और उस पर काय करना लोहे क तुलना म कह सरल है। तीन कारण मलकर इसे समझाते ह।
1. ताँबा प्रकृ त म लगभग शुद्ध रूप म मल जाता है। ताँबे क ड लयाँ सीधे उठाई जा सकती थ और उनक ला लमा लए
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धा त्वक चमक शीघ्र ध्यान ख चती थी। लोहा प्राय: फ के दखने वाले पत्थर जैसे अयस्क के भीतर बंद रहता है।
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2. ताँबे को नकालना और गलाना आसान है। यह साधारण लकड़ी या कोयले क आग म ही अयस्क से नकल आता है और
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lasवक सत होने म बहुत समय लगा।
पघल जाता
ag3. ताँबा अ धक नरम है। इसे ठं डी अवस्था म ही पीटकर पात्र या आभूषण बनाया जा सकता है। लोहे को आकार देने के लए
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पहले सुख लाल करना पड़ता है — ठ क वैसे ही जैसे सुदशन चाचा करते ह।
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यह क्य महत्वपूण है: जब अ धक ताप वाली भ
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भी काट सकते थे, उपज बढ़ और स्थायी कृ ष-ग्राम नगर को सहारा दे ने लगे। हड़प्पावासी ताँबे और
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सोने का उपयोग करते थे, लोहा दै नक जीवन म बहुत बाद म आया।
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semप्रश्न — पृष्ठ 44 और 45
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अनुभाग 4.1.2 तन्यता एवं 4.1.3 ध्वा नकता
पाठ्य प्रश्न
प्र.1 आप धातु के तार का उपयोग कहाँ दे खते ह?
धातु का तार कहाँ दखता है कौन-सी धातु और क्य
घर की िवद्य तु पिरपथ व्यवस्था (िवद्य तु िफिटंग ) ताँबा या ऐलुिमिनयम — िवद्य तु के सुचालक
आभूषण — चूिड़याँ, गले का हार, कानों के झुम के सोना, चाँद ी — अत्यिधक तन्य, इसिलए महीन तार खी ंचकर मोड़ े जा सकते है ं
तंत ु वाद्ययंत्र — वीणा, िसतार, वायिलन, िगटार स्टील , पीतल — तना हुआ धातु का तार कं िपत होकर स्पष्ट स्वर दे ता है
चाय छानने की छलनी, चलनी, तार की जाली स्टील का तार बुनकर बनाई गई जाली
झूल ते से तओ
ु ं और े न की रिस्सयाँ स्टील का तार , जो भारी भार वहन कर सकता है
यह सब जस गुण के कारण संभव है वह है तन्यता — साम ग्रय का वह गुण जसके ारा उन्ह तार म ख चा जा सकता है।
क्या आप जानते ह? सोना इतना तन्य है क इसके एक ग्राम से दो कलोमीटर लंबा तार ख चा जा सकता है।
प्र.2 क्या आपने कभी कोयले या सल्फर से बने हुए तार दे खे ह?
स्पष्ट है क नह । कोयले या सल्फर का तार आज तक कसी ने नह दे खा और न दे ख सकेगा।
ताँबे की छड़ को खी ंिचए → वह पतली होती चली जाती है → तयन्
कोयले या सल्फर की छड़ को खी ंिचए → त रु ंत टू ट जाती है → त न्य नही ं
ऐसा क्य होता है: तार बनने के लए सामग्री का बना टू टे खचना आवश्यक है। धातु म कण एक-दूसरे पर
फसलकर भी जुड़े रहते ह। कोयले और सल्फर म वे फसल नह पाते, इस लए ख चते ही टु कड़ा चटक जाता है।
कोयला और सल्फर अधातुएँ ह, और अधातुएँ न आघातवधनीय होती ह न तन्य।
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प्र.3 क्या आपने कभी ध्यान दया है क जब धातु क चम्मच, धातु क प्लेट या धातु का सक्का धरातल पर गरता है
तो कैसी ध्व न उत्पन्न होती है? यह ध्व न कोयले अथवा लकड़ी के टु कड़े को धरातल पर गरने से उत्पन्न होने वाली
ध्व न से कस प्रकार भन्न है?
अंतर सुनने म सरलता से पकड़ म आता है।
गराई गई वस्तु उत्पन्न ध्व न कतनी दे र रहती है
धातु की चम्मच, धातु की प्ले ट, िसक्का स्पष्ट िननाद (झंक ार वाली) ध् विन गरने के बाद भी क्षण भर गूँजती है
कोयले का टुक ड़ा, लकड़ी का ग टु का हल्की, भोथरी ध् विन गरते ही समाप्त
धातुओं का यह गुण जसके कारण वे ननाद ध्व न उत्पन्न करते ह, ध्वा नकता कहलाता है और धातुओं को ध्वा नक प्रकृ त का
कहा जाता है।
ऐसा क्य होता है: धातु पर आघात होने पर वह कुछ समय तक कं पत होती रहती है और ये कंपन कान तक लंबे,
स्पष्ट स्वर के रूप म पहुँचते ह। कोयला और लकड़ी लगभग तुरंत कंपन बंद कर दे ते ह, इस लए केवल छोट , हल्क
ध्व न सुनाई दे ती है।
क्या आप जानते ह? वद्यालय क घंट क ध्व न और घुँघरुओं क झंकार — दोन धातुओं क ध्वा नकता का ही
प रणाम ह।
क्रयाकलाप 4.2 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 45
अनुभाग 4.1.3 ध्वा नकता
क्रयाकलाप
प्र.1 कुछ वस्तुए ँ ली जए, जैसे — धातु का एक चम्मच, एक सक्का, एक कोयले का टु कड़ा और एक लकड़ी का
गुटका। इन्ह एक न श्चत ऊँचाई से एक-एक करके नीचे गराइए। क्या आपने इन वस्तुओं के गरने पर उत्पन्न होने
वाली ध्व नय म कसी प्रकार के अंतर का अनुभव कया?
हाँ, स्पष्ट अंतर। प्रत्येक वस्तु को समान छोट ऊँचाई से उसी कठोर फश पर गराइए और ध्यान से सु नए।
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वस्तु सामग्री उत्पन्न ध्व न ध्वा नक?
धातु का चम्मच स्ट ल िननाद ध् विन हाँ
िसक्का म श्रत धातु िननाद ध् विन हाँ
कोयले का टुक ड़ा काबन (अधातु) हल्की ध् विन नही ं
लकड़ी का ग टु का लकड़ी हल्की ध् विन नही ं
नष्कष: धातुएँ ध्वा नक होती ह; कोयला और लकड़ी नह ।
क्या आप जानते ह? दृ ष्टबा धत व्य क्त इसी अंतर का उपयोग करते ह। छड़ी जमीन पर टकराने पर ननाद ध्व न
का अथ है धातु — मैनहोल का ढक्कन या जाली, और हल्क ध्व न का अथ है लकड़ी या पत्थर। ध्व न ही माग का
चत्र बना दे ती है।
सावधानी: ध्यान रख क इस क्रयाकलाप से कसी व्य क्त या जीव को कोई हा न न पहुँचे।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 46
अनुभाग 4.1.4 ऊष्मा का चालन
पाठ्य प्रश्न
प्र.1 क्या आपने कभी रसोई म भोजन पकाने के लए उपयोग कए जाने वाले पात्र पर ध्यान दया है?
हाँ — और एक बात तुरंत दखती है: जो भाग आग पर रहता है वह सदा धातु का होता है, और जो भाग हाथ पकड़ता है वह प्राय:
धातु का नह होता।
तवा, कड़ाही, प्रेशर कुकर और पतीला ऐलु म नयम, स्ट ल, लोहे या ताँबे के बनते ह।
उनके हत्थे लकड़ी, बैकेलाइट या प्ला स्टक के होते ह, अथवा धातु के हत्थे पर कपड़ा लपेटा जाता है।
ऐसा क्य होता है: पात्र को ज्वाला से ऊष्मा शीघ्र भोजन तक पहुँचानी है, इस लए वह धातु का बनता है — ऊष्मा
का सुचालक। हत्थे को ऊष्मा उँ ग लय तक पहुँचने से रोकनी है, इस लए वह कुचालक का बनता है।
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प्र.2 क्या आप कुछ धातुओं के नाम बता सकते ह जनका उपयोग खाना पकाने के पात्र को बनाने म कया जाता है?
धातु रसोई म कहाँ क्य उपयुक्त है
ऐलुिमिनयम प्रेशर कुकर, पतीला, तवा बहुत अच्छा सुचालक , हल्का, स स्ता
लोहा कड़ाही, तवा मजबूत, अिधक ताप सहता है, ऊष्मा समान रूप से फै लाता है
ताँबा स्ट ल के पात्र क तली, भगोना सामान्य धातुओ ं में ऊष्मा का सव ेष्ठ सुचालक
स्टील (लोहा + काबन) अ धकांश आधु नक पात्र अच्छा सुचालक और सरलता से जंग नही ं लगता
सुझाव: अ े स्ट ल के पतीले क तली दे खए — प्राय: उस पर ताँबे या ऐलु म नयम क तश्तरी जड़ी होती है।
अकेला स्ट ल ऊष्मा कुछ धीरे चलाता है, इस लए जहाँ ज्वाला लगती है वह बेहतर सुचालक लगा दया जाता है।
प्र.3 क्या आप जानते ह क इन धातुओं का उपयोग इसके लए क्य कया जाता है?
क्य क धातुए ँ ऊष्मा क सुचालक होती ह।
ज्वाला पात्र की तली को गरम करती है
ऊष्मा धात ु में ऊ मा-चालन ारा आगे बढ़ ती है
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ऊष्मा भोजन तक पहुँच कर उसे शीघ और समान रूप से पकाती है
लकड़ ी या िम ी का पात्र कही ं धीमा होगा और लकड़ ी तो जल ही जाएगी।
ऐसा क्य होता है: धातु म ऊष्मा कण से कण तक तेजी से आगे बढ़ती है, इस लए कुछ ही क्षण म पूरा पात्र गरम
हो जाता है। लकड़ी, प्ला स्टक या म म यह प्र क्रया बहुत धीमी है — और इसी लए हत्थे इन्ह साम ग्रय के बनाए
जाते ह।
क्रयाकलाप 4.3 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 46 और 47
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार
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अनुभाग 4.1.4 ऊष्मा का चालन
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क्रयाकलाप
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a s em चम्मच अ धक गरम हुआ?
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कौन-सा
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प्र.1
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m के ऊपरी भाग को स्पश क जए, अंतर स्पष्ट होगा।
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धातु का चम्मच अ धक गरम हुआ। कुछ मनट बाद दोन चम्मच
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चम्मच agl कुछ मनट बाद ऊपरी भाग नष्कष
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m.
धातु का चम्मच स्पश करने पर स्पष्ट रूप से गरम धातु ऊष्मा क सुचालक है
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लकड़ी का चम्मच के वल हल्का-सा गुनगुना
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लकड़ी ऊष्मा क कुचालक है
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गरम लगभग ठं डा
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a गरम जल
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ag का चम्मच
धातु लकड़ ी का चम्मच
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दोन चम्मच समान गरम जल म समान समय तक रहे, फर भी ऊष्मा केवल धातु वाले चम्मच से ऊपर तक पहुँची।
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.cसावधानी: यह क्रयाकलाप शक्षक अथवा कसी वयस्क के नदशन म हीaकg जए और गरम जल का उपयोग करते
m समय सावधानी र खए।
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प्र.2 यह प्रयोग हम दोन चम्मच म ऊष्माचालन के वषय म क्या बताता है?
यह बताता है क ऊष्मा धातु के चम्मच म सरलता से और लकड़ी के चम्मच म बहुत कम चलती है, जब क दोन समान
तापमान के जल म समान समय तक डू बे रहे।
िकसी सामगी में एक िबंद ु से दू सरे िबंद ु तक ऊष्मा का स्थानांत रण = ऊ मा-चालन
ष्
ऊष्मा को स्थानांत िरत करने वाली सामगी = चालक
धातुए ँ → ऊ ष्मा की सुच ालक। लकड़ ी → ऊ ष्मा की कु चालक।
ऐसा क्य होता है: दोन चम्मच म केवल सामग्री का अंतर था — आकार, मोटाई, जल और समय सब समान रखे
गए। अत: प रणाम का अंतर सामग्री से ही आया। यही इसे एक नष्पक्ष प्रयोग बनाता है।
सुझाव: इसी कारण धातु के पात्र पर लकड़ी या प्ला स्टक के हत्थे लगाए जाते ह। इस वषय म आप ‘प्रकृ त म
ऊष्मा का स्थानांतरण’ अध्याय म और अ धक पढ़गे।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 47
अनुभाग 4.1.5 वद्युत का चालन
पाठ्य प्रश्न
प्र.1 क्या आपने कभी कसी वद्युतकम को पेचकस का उपयोग करते दे खा है? उसका हत्था कस सामग्री से बना
होता है?
हाँ। पेचकस क छड़ स्ट ल क होती है, परंतु हत्था प्ला स्टक (अथवा कठोर रबड़ जैसी सामग्री) का बना होता है।
स्टील की छड़ → सुच ालक → पेच पर काय करती है
प्लािस्टक का हत्था → िव तु का कु चालक → हाथ की र ा करता है
द्य
ऐसा क्य होता है: य द पेचकस कसी जी वत (लाइव) तार को छू ले तो वद्युत स्ट ल क छड़ से ऊपर आ सकती
है। प्ला स्टक का आवरण वद्युत को हाथ म नह जाने दे ता, इस लए शरीर से होकर प रपथ पूरा नह होता और
आघात नह लगता।
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प्र.2 आपने यह भी दे खा होगा क वद्युतकम काय करते समय रबड़ के दस्ताने और जूते पहनते ह। इसका क्या कारण
हो सकता है?
रबड़ वद्युत का कुचालक है, इस लए रबड़ के दस्ताने और जूते वद्युतकम को प रपथ से बाहर रखते ह।
कसी व्य क्त को आघात तभी लगता है जब वद्युत को पूरा माग मल जाए — जी वत तार से, शरीर से होकर, भू म तक। रबड़ इस
माग को दोन सर पर रोक दे ता है:
दस्ताने वद्युत को हाथ से भीतर आने से रोकते ह।
जूते उसे पैर से भू म म जाने से रोकते ह।
स्वयं दे खए: ध्यान द जए क लाइनमैन धातु क नह , लकड़ी क सीढ़ पर काम करता है। लकड़ी भी रबड़ और
प्ला स्टक क तरह कुचालक है।
क्रयाकलाप 4.4 — आइए, अ भक ल्पत कर सृजन कर — पृष्ठ 47 और 48
अनुभाग 4.1.5 वद्युत का चालन
क्रयाकलाप
प्र.1 एक प र क्षत्र (टे स्टर) प रपथ जैसे वद्युत प रपथ क अ भकल्पना कर उसे तैयार क जए। इसे अध्याय ‘ वद्युत
— प रपथ एवं उसके घटक’ म दशाया गया है। इसी क्रयाकलाप को नीचे सूचीबद्ध साम ग्रय का उपयोग करके
दोहराइए और अपने अवलोकन को ता लका 4.2 म अ भले खत क जए।
क्र.सं. वस्तु/सामग्री अवलोकन (बल्ब द प्त/ वद्युत का सुचालक अथवा
अद प्त) कुचालक
1. ऐलु म नयम पत्रक का टु कड़ा
2. लोहे क क ल
3. सल्फर का टु कड़ा (मटर के दाने के
आकार का)
4. …
ता लका 4.2 — व भन्न वस्तुओं अथवा साम ग्रय ारा वद्युत का चालन (पृष्ठ 48 पर छपी रक्त ता लका)।
पहले प र क्षत्र बनाइए, फर उससे प्रत्येक वस्तु क जाँच क जए।
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1. एक सेल, होल्डर म लगा एक बल्ब और संयोजक तार इस प्रकार जो ड़ए क प रपथ म एक अंतराल रह जाए जसके दो सरे
खुले ह ।
2. दोन खुले सर को एक बार आपस म स्पश कराइए — बल्ब द प्त होना चा हए। इससे पता चलता है क प र क्षत्र स्वयं ठ क
काम कर रहा है।
3. अब जाँची जाने वाली वस्तु को अंतराल म इस प्रकार र खए क वह प रपथ पूरा कर दे ।
4. य द बल्ब द प्त हो जाए तो वस्तु से वद्युत प्रवा हत हुई है।
बल्ब
अंतराल
सेल ?
प र क्षत्र — जाँची जाने वाली वस्तु अंतराल म रखी जाती है। बल्ब का द प्त होना बताता है क उससे वद्युत प्रवा हत हुई।
सुझाव: पुरानी क ल या कोयले के टु कड़े क सतह जाँच से पहले रगड़कर साफ क जए। मैली या परत चढ़ सतह
संपक रोक दे ती है और गलत नष्कष दे सकती है।
प्र.2 पूवानुमान लगाइए क इनम से कौन-सी वस्तु प र क्षत्र के बल्ब को द प्त कर सकती है और कौन-सी नह । (वस्तुए ँ
— ऐलु म नयम पत्रक का एक टु कड़ा, लोहे क एक क ल, सल्फर का एक टु कड़ा (मटर के दाने के आकार का),
ताँबे का तार, कोयले का टु कड़ा, सूखी लकड़ी का टु कड़ा, पत्थर, रबर से बना रबड़ और नायलॉन क रस्सी का
टु कड़ा।)
पहले पूवानुमान ल खए, फर जाँच क जए। पूरी क गई ता लका 4.2 इस प्रकार होगी।
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क्र.सं. वस्तु/सामग्री अवलोकन (बल्ब द प्त/ वद्युत का सुचालक अथवा
अद प्त) कुचालक
1. ऐलुिमिनयम पत्रक का टुक ड़ा दीप्त सुचालक
2. लोहे की कील दीप्त सुचालक
3. सल्फर का टुक ड़ा (मटर के दाने के आकार अदीप्त कु चालक
का)
4. ताँबे का तार दीप्त सुचालक
5. कोयले का टुक ड़ा अदीप्त कु चालक
6. सूखी लकड़ी का टुक ड़ा अदीप्त कु चालक
7. पत्थर अदीप्त कु चालक
8. रबर से बना रबड़ अदीप्त कु चालक
9. नायलॉन की रस्सी का टुक ड़ा अदीप्त कु चालक
प्र.3 क्या आपको क्रयाकलाप 4.4 म व भन्न साम ग्रय का उपयोग करते हुए बल्ब के द प्त होने म कोई समानता क्रम
दखाई दया?
हाँ — बहुत स्पष्ट क्रम। बल्ब को द प्त करने वाली प्रत्येक सामग्री धातु है।
ऐलुिमिनयम, लोहा, ताँबा → बल्ब दीप्त → धातुएँ
सल्फर, कोयला, लकड़ ी, पत्थर, रबड़ , नायलॉन → बल्ब अदीप्त → अधातुएँ एवं अ य सामिगयाँ
न्
वे साम ग्रयाँ जो सरलता से वद्युत प्रवा हत करती ह, उन्ह वद्युत का सुचालक कहा जाता है। जो साम ग्रयाँ वद्युत प्रवा हत नह
करत और बल्ब को द प्त नह करत , उन्ह वद्युत का कुचालक कहा जाता है।
यह क्य महत्वपूण है: यही एक क्रम वद्युतकम के पूरे साज-सामान क व्याख्या कर दे ता है। तार धातु के ह ता क
धारा बहे, और पेचकस का हत्था, दस्ताने तथा जूते प्ला स्टक-रबड़ के ह ता क धारा शरीर म न जाए।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 48
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार
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अनुभाग 4.2 धातुओं पर वायु और जल का प्रभाव — लोहा
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पाठ्य प्रश्न
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a s emआपने दे खा होगा क लोहे क वस्तुओं को कुछ दन के लए खुले म छोड़ दे ने से उन पर भूरे रंग का नक्षेप
agl वक सत हो जाता है। कन प र स्थ तय म ऐसा होता है? ❖ जब ये केवल वायु के संपक म आती ह। ❖ जब ये
प्र.1 प्राय:
केवल जल के संपक म आती ह। ❖ जब ये वायु और जल दोन के संपक म आती ह।
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aglदोन के संपक म आती ह।
सही प र स्थ त तीसरी है — जब ये वायु और जल
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के वल शुष्क वायु → कोई भूरा िन ेप नही ं
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के वल जल (घुली हुई वायु रिहत) → कोई भूरा िन ेप नही ं
m जल दोनों → भूरा िन ेप बनता है a g
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वायु
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इसे अनुमान मानकर मत छो ड़ए — क्रयाकलाप 4.5 म ठ क यही तीन प र स्थ तयाँ तीन बोतल म बनाई जाती ह और 8-10 दन
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म उत्तर आपक आँख के सामने आ जाता है।
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स्वयं दे खए: अपने मोहल्ले के लोहे के गेट को दे खए। जंग सबसे अ धक नीचे के सरे पर लगता है जहाँ वषा का
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जल रुकता है और वायु भी उपलब्ध रहती है — कसी सूखे, ढके भाग पर नह ।
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a sem 4.5 — आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 49 और 50
क्रयाकलाप
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions
अनुभाग 4.2 धातुओं पर वायु और जल का प्रभाव — लोहा
क्रयाकलाप
प्र.1 सभी काँच क बोतल को कमरे के तापमान पर अबा धत र खए और 8-10 दन तक प रवतन का अवलोकन
क जए। अपने अवलोकन को ता लका 4.3 म अ भले खत क जए।
क धागा ख धागा ग धागा
लोहे की कील तेल
लोहे की कील लोहे की कील
िसिलका जैल
जल जल
त्र 4.4 ( )
िच क त्र 4.4 ( )
िच ख त्र 4.4 ( )
िच ग
चत्र 4.4, पृष्ठ 49 — लोहे क क ल रखी हुई काँच क बोतल।
काँच क बोतल प र स्थ तयाँ अवलोकन
जल क उप स्थ त (हाँ/नह ) वायु क उप स्थ त (हाँ/नह )
1. नह हाँ
2.
3.
ता लका 4.3 — लोहे क क ल पर वक सत भूरे रंग का नक्षेप (पृष्ठ 49; पहली पं क्त पुस्तक म भरी हुई है)।
प्रत्येक बोतल केवल एक प र स्थ त बनने दे ती है। ता लका 4.3 इस प्रकार भ रए।
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काँच क भीतर क्या है जल क वायु क अवलोकन
बोतल उप स्थ त (हाँ/ उप स्थ त (हाँ/
नह ) नह )
क लोहे क क ल + स लका जैल, नही ं हाँ कोई भूर ा िन ेप नही ं — कील
ढक्कन कसकर बंद चमकदार बनी रहती है
ख उबालकर ठं डे कए जल म पूणत: हाँ नही ं कोई भूर ा िन ेप नही ं — कील
डू बी क ल, ऊपर तेल क परत, चमकदार बनी रहती है
बोतल बंद
ग जल म आं शक रूप से डू बी क ल, हाँ हाँ भूर ा िन ेप बनता है, िवशेषत:
बोतल खुली जल -रे खा के पास
क: शुष्क वायु ख: जल, वायु नही ं ग: वायु + जल
जंग नही ं जंग नही ं जंग लगता है
बोतल ‘क’ म स लका जैल के साथ बंद शुष्क वायु, बोतल ‘ख’ म तेल क परत के नीचे उबला हुआ जल, बोतल ‘ग’ खुली और क ल आधी
जल म।
सुझाव: बोतल ‘क’ म स लका जैल नमी सोख लेता है, बोतल ‘ख’ म उबालने से जल क घुली हुई गैस नकल जाती
ह और तेल क परत ताजी वायु को फर घुलने नह दे ती। प्रत्येक चरण ठ क एक ही वस्तु हटाता है — यही इसे
नष्पक्ष परीक्षण बनाता है।
प्र.2 इस प्रयोग से आप क्या नष्कष नकाल सकते ह?
नष्कष: लोहे पर भूरे रंग के नक्षेप के वकास के लए जल और वायु दोन क उप स्थ त अ नवाय है।
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बोतल ‘क’ (के वल शुष्क वायु) → िन ेप नही ं
बोतल ‘ख’ (के वल जल, वायु नही ं) → िन ेप नही ं
बोतल ‘ग’ (वायु और जल) → भूरा िन ेप
अत : नम वायु लोहे की वस्तुओ ं पर भूरे िन ेप के िलए उत्तरदायी है।
इस भूरे रंग के नक्षेप को जंग कहते ह और लोहे से बनी वस्तुओं पर इसके बनने क प्र क्रया को जंग लगना कहते ह।
ऐसा क्य होता है: जंग लगना लोहे, वायु क ऑक्सीजन और जल के बीच होने वाली धीमी अ भ क्रया है। इनम से
कोई एक हटा द जए, अ भ क्रया आरंभ ही नह होगी — बोतल ‘क’ और ‘ख’ यही सद्ध करती ह।
क्या आप जानते ह? यह केवल लोहे तक सी मत नह है। ताँबे क वस्तुओं पर हरी और चाँद क वस्तुओं पर काली
परत बन जाती है। वायु, जल अथवा अन्य पदाथ के कारण धातु क सतह के इस धीरे-धीरे ास का सामान्य नाम
संक्षारण है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 50
अनुभाग 4.2 — संक्षारण
पाठ्य प्रश्न
प्र.1 क्या आपने ताँबे क वस्तुओं क सतह पर हरे रंग क परत या चाँद क वस्तुओं क सतह पर काले रंग क परत
बनते हुए दे खी है?
हाँ — बना उपयोग के पड़ा ताँबे का लोटा फ क हरी परत ले लेता है और चाँद के आभूषण या चम्मच धीरे-धीरे काले पड़ जाते ह।
धातु खुले म बनने वाली परत प्र क्रया का नाम
लोहा भूरे रंग का िन ेप (जंग) जंग लगना — संक्षारण का एक रूप
ताँबा हरे रंग की परत सं ारण
चाँद ी काले रंग की परत सं ारण
जल, वायु अथवा अन्य पदाथ के कारण धातुओं क सतह का धीरे-धीरे ास होना संक्षारण कहलाता है।
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यह क्य महत्वपूण है: हमारे दे श म लोहे म जंग लगना एक गंभीर समस्या है। प्र तवष जंग से क्ष तग्रस्त लोहे क
संरचनाओं — पुल, रेल पट रयाँ, गेट, पाइप — के प्र तस्थापन या जीण द्धार पर अत्य धक धन व्यय होता है। बचाव
के उपाय ह रंग-रोगन करना, तेल लगाना, ग्रीज लगाना और गैल्वेनाइजेशन (लोहे पर जक क सुरक्षात्मक
परत)।
क्या आप जानते ह? दल्ली का लौह स्तंभ, जो चंद्रगुप्त तीय के काल म 1600 वष से भी पहले बना, लगभग 8
मीटर ऊँचा है और इसका वजन 6000 कलोग्राम से अ धक है — इतने वष क वायु और वषा के बाद भी इसम जंग
नह लगा है। यह भारत के धातु प्रौद्यो गक के वक सत कौशल को दशाता है।
क्रयाकलाप 4.6 — आइए, अन्वेषण कर ( नदशन क्रयाकलाप) — पृष्ठ 51
अनुभाग 4.3 वायु और जल का अन्य धातुओं पर प्रभाव
क्रयाकलाप
प्र.1 मैग्नी शयम रबन को जलने द जए। आपने क्या अवलोकन कया?
मैग्नी शयम रबन आँख को च धयाने वाली सफेद ज्वाला के साथ जलता है और श्वेत चूण म प रव तत हो जाता है। इस चूण
को वॉच ग्लास पर एक त्रत क जए।
मैग् नीिशयम + वायु की ऑक्सीजन जलने पर → मैग्नीिशयम ऑक्साइड
चमकदार िरबन → चौंिधयाने वाला श्वेत पकाश → श्वेत चूण
ऐसा क्य होता है: मैग्नी शयम वायु म उप स्थत ऑक्सीजन से अ भ क्रया करता है। इतनी ऊजा नकलती है क
प्रकाश आँख को चुभने लगता है, और बना नया पदाथ — मैग्नी शयम ऑक्साइड — श्वेत चूण है, जो आरंभ के
धूसर चमकदार रबन से बलकुल भन्न है।
सावधानी: यह नदशन क्रयाकलाप है, शक्षक ारा कया जाता है। सुरक्षात्मक ऐनक पह नए, सुर क्षत दूरी बनाए
र खए और ज्वाला क ओर सीधे मत दे खए — यह प्रकाश आँख को हा न पहुँचा सकता है। रबन को पहले रेगमाल
से साफ क जए और चमटे से पक ड़ए।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार
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अध्याय ‘पदाथ का अन्वेषण — अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन’ का स्मरण क जए। पता लगाइए क मैग्नी शयम
ऑक्साइड का वलयन अम्लीय है, क्षारीय है अथवा उदासीन? आप कसी भी अम्ल-क्षार सूe
प्र.2
m a s
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क का उपयोग कर
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सकते ह।
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श्वेत चूण म गरम जल क कुछ बूँद डा लए, अ तरह वलो डत क जए और वलयन क जाँच क जए। यह क्षारीय है।
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प्रयुक्त सूचक
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क्या दखता है
g
अथ
लाल िलटमस पत्र
a नीला हो जाता है ारीय
mनही ं
cअoलीय
नीला िलटमस पत्र नीला ही रहता है (कोई पिरवतन नही)ं
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हल्दी का पत्र लाल -भूर ा हो जाता है
a g ारीय
l a se
a g गड
ु ़ हल (चाइना रोज) सूचक हरा हो जाता है ारीय
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प्राय: धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय प्रकृ त के होते ह।
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सुझाव: गरम जल ही ली जए — मैग्नी शयम ऑक्साइड ठं डे जल म बहुत कम घुलता है और मंद वलयन सूचक का
रंग स्पष्ट रूप से नह बदलेगा। a
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इस वलयन का नीले और लाल लटमस पत्र पर क्या प्रभाव होता है?
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m
प्र.3
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a g उत्तर
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नीला हो जाता है m. com g l a
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se ं, नीला ही रहता है
लाल िलटमस पत्र →
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नीला िलटमस पत्र → कोई पिरवतन नही
अत : मैग्नीिशयम ऑ क्साइड का िवलयन ारीय पकृित का है।
. com
mऔर नीला पत्र अप रव तत रहे।
दोन पत्र डु बोइए, केवल एक नह । कोई वलयन क्षारीय तभी सद्ध होता है जब लाल पत्र नीलाeहो
s
co m gl a
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asem
a g l यह क्य महत्वपूण है: यह एक प रणाम पूरे वग का प्र त न धत्व करता है। मैग्नी शयम एक धातु है, उसका
ऑक्साइड घुलकर क्षारीय वलयन दे ता है, और सामान्यत: सभी धातुओं के साथ यही सत्य है — धातुओं के
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s e m
m a
ऑक्साइड क्षारीय होते ह। मैग्नी शयम रबन के जलने क चचा ‘हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं
रासाय नक’ अध्याय म फर होगी।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 52
अनुभाग 4.3 — सो डयम
पाठ्य प्रश्न
प्र.1 क्या आप जानते ह क सो डयम एक ऐसी धातु है जसे म के तेल म संग्र हत कया जाता है क्य क यह
ऑक्सीजन और जल के साथ तीव्र अ भ क्रया करती है। इस अ भ क्रया म अत्य धक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
सो डयम को म के तेल म भंडा रत करने से यह नमी और वायु के संपक म आने से बच जाता है। क्या आप
इसके ऑक्साइड क प्रकृ त का अनुमान लगा सकते ह?
सो डयम ऑक्साइड क्षारीय प्रकृ त का होगा, क्य क सो डयम एक धातु है और धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय होते ह।
सोिडयम (धात )ु + ऑक्सीजन → सोिडयम ऑक्साइड
सोिडयम ऑक्साइड + जल → ऐसा िवलयन जो लाल िलटमस को नीला कर दे
अत : सोिडयम का ऑ क्साइड ारीय है।
ऐसा क्य होता है: आपने अभी दे खा क मैग्नी शयम — एक धातु — क्षारीय ऑक्साइड दे ती है। यह नयम धातुओं
के लए सामान्यत: लागू है, इस लए बना कोई प्रयोग कए आप सो डयम के लए भी उत्तर का अनुमान लगा सकते
ह। वै ा नक सामान्यीकरण का उपयोग इसी प्रकार होता है — एक बार सावधानी से सद्ध क जए, फर लागू
क जए।
सावधानी: सो डयम को कभी स्वयं मत छू इए। यह वायु क नमी और जल से इतनी तीव्र अ भ क्रया करता है क
आग पकड़ लेता है — इसी लए इसे म के तेल म रखा जाता है, जहाँ न वायु पहुँचती है न जल।
क्रयाकलाप 4.7 — आइए, प्रयोग कर ( नदशन क्रयाकलाप) — पृष्ठ 52 और 53
अनुभाग 4.4 पदाथ जो वायु और जल म धातुओं से भन्न व्यवहार करते ह
क्रयाकलाप
प्र.1 अध्याय ‘पदाथ का अन्वेषण — अम्लीय, क्षारीय और उदासीन’ का स्मरण क जए। अम्ल-क्षार सूचक का
उपयोग कर जाँच क जए क गैस-जार म जल डालने के पश्चात प्राप्त वलयन अम्लीय है अथवा क्षारीय है।
उद्दहन चम्मच म थोड़ा सल्फर चूण जलाकर उसे गैस-जार म उता रए, जार को ढ कए, 3-4 मनट बाद थोड़ा जल डालकर ढक्कन
लगाइए और हलाइए जससे गैस घुल जाए। अब उस वलयन क जाँच क जए।
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प्रयुक्त सूचक क्या दखता है अथ
नीला िलटमस पत्र लाल हो जाता है अम्लीय
लाल िलटमस पत्र लाल ही रहता है (कोई पिरवतन नही)ं ारीय नही ं
गड
ु ़ हल (चाइना रोज) सूचक गहरा गुल ाबी हो जाता है अम्लीय
सावधानी: यह शक्षक ारा कया जाने वाला नदशन क्रयाकलाप है और इसे धूम छत्र म अथवा खुले, हवादार क्षेत्र
म ही कया जाना चा हए। सल्फर के जलने से उत्पन्न गैस श्वास म लेने पर हा नकारक हो सकती है।
प्र.2 आप क्या अवलोकन करते ह?
आप अवलोकन करगे क वलयन अम्लीय प्रकृ त का है — यह नीले लटमस को लाल कर दे ता है।
जलने पर → सल्फर डाइऑक्साइड गैस
सल्फर + वायु (ऑक्सीजन)
सल्फर डाइऑक्साइड + जल → स यूरस अ ल ल्फ् म्
अथ त् अधातु का ऑ क्साइड अम्लीय िवलयन दे त ा है।
यह क्य महत्वपूण है: इसे क्रयाकलाप 4.6 के साथ र खए और पूरा अध्याय स्पष्ट हो जाता है। मैग्नी शयम (धातु)
ने क्षारीय ऑक्साइड दया; सल्फर (अधातु) अम्लीय ऑक्साइड दे ता है। कसी तत्व के ऑक्साइड का व्यवहार धातु
और अधातु म भेद करने का सबसे वश्वसनीय उपाय है।
क्या आप जानते ह? यही अ भ क्रया खुले वातावरण म भी होती है जब सल्फरयुक्त ईंधन जलते ह। सल्फर
डाइऑक्साइड वषा जल म घुलकर अम्लीय वषा के रूप म गरता है, जो फसल , भवन और मू तय को क्ष त
पहुँचाता है।
क्रयाकलाप 4.8 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 53
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions
अनुभाग 4.4 पदाथ जो वायु और जल म धातुओं से भन्न व्यवहार करते ह
क्रयाकलाप
प्र.1 क्या सल्फर जल म उसी प्रकार व्यवहार करता है जैसे धातुए ँ करती ह?
नह । वायु के साथ जल म रखी लोहे क क ल धीरे-धीरे जंग म बदल जाती है; जल म रखा सल्फर कुछ भी नह करता।
पदाथ कई दन जल और वायु म रखने पर प रणाम
लोहा (धातु) क ल आधी जल म, बोतल खुली भूर ा िन ेप — जंग बनता है
सल्फर (अधातु) गलास म जल म चूण डाला गया कोई अिभि या नही ं
सामान्यत: अधातुए ँ जल के साथ अ भ क्रया नह करती ह।
प्र.2 काँच के गलास म थोड़ा सल्फर चूण ली जए। इसम अल्प मात्रा म जल डा लए। आप क्या अवलोकन करते ह?
कोई अ भ क्रया नह होती। फ का पीला सल्फर चूण जल म यूँ ही पड़ा रहता है — न घुलता है, न कोई गैस नकलती है, न रंग
बदलता है और न गलास गरम होता है।
सल्फर + जल → कोई पिरवतन नहीं
अधातुए ँ सामान्यत : जल के साथ अिभि या नही ं करती।ं
यह क्य महत्वपूण है: यही इस अनुभाग का सार है। सल्फर और फॉ ोरस जैसे पदाथ वायु और जल के साथ
धातुओं से भन्न व्यवहार करते ह। ये सामान्यत: दखने म नरम और द्यु तहीन होते ह, न आघातवधनीय न तन्य,
अध्वा नक तथा ऊष्मा और वद्युत के कुचालक होते ह। ऐसे पदाथ अधातु कहलाते ह और इनके ऑक्साइड
अम्लीय होते ह।
क्या आप जानते ह? हर अधातु जल क उपेक्षा नह करती। फॉ ोरस को जल म संग्र हत कया जाता है,
क्य क वायुमंडलीय वायु के संपक म आते ही वह आग पकड़ लेता है — यह सो डयम के ठ क वपरीत है, जो धातु है
और जसे जल से बचाने के लए म के तेल म रखा जाता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 54
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions
अनुभाग 4.5 क्या अधातुए ँ दै नक जीवन म महत्वपूण ह?
पाठ्य प्रश्न
प्र.1 हम श्वास म ऑक्सीजन ग्रहण करते ह। यह एक अधातु है और इसके बना हम जी वत नह रह पाएँगे। क्या आप
ऑक्सीजन के कसी अन्य उपयोग के वषय म सोच सकते ह?
च कत्सालय म ऑक्सीजन स लडर उन रो गय के लए जो स्वयं पयाप्त श्वास नह ले पाते।
पवतारोही और गहरे समुद्र के गोताखोर वहाँ ऑक्सीजन स लडर साथ ले जाते ह जहाँ वायु वरल है या है ही नह ।
दहन — ऑक्सीजन के बना कोई ईंधन नह जल सकता। लोहार क भ का कोयला, रसोई गैस और चूल्हे क लकड़ी —
सबको इसक आवश्यकता है।
धातुओं क कटाई और वे ग — ऑक्सीजन क ज्वाला इतनी गरम होती है क स्ट ल पघला दे ।
जलीय जीवन — मछ लयाँ जल म घुली ऑक्सीजन का उपयोग करती ह, इसी लए मछलीघर म वायु-पंप लगाया जाता है।
रॉकेट द्रव ऑक्सीजन साथ ले जाते ह, क्य क अंत रक्ष म ईंधन जलाने के लए वायु नह होती।
क्या आप जानते ह? अन्य अधातुएँ भी उतनी ही उपयोगी ह — काबन सभी जीव क नमाण इकाई है तथा
प्रोट न, वसा और काब हाइ ेट का प्रमुख घटक है; नाइ ोजन उवरक म जाती है; क्लोरीन जल-शोधन करती है;
और आयोडीन का वलयन घाव पर रोगाणुरोधक के रूप म लगाया जाता है।
आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 55 और 56
अध्याय के अंत के प्रश्न
आइए, और अ धक सीख
प्र.1 कस धातु का उपयोग खाद्य पदाथ के संवेष्टन (पैके जग) के लए सामान्यत: कया जाता है क्य क यह धातु
सस्ती है और इसक पतली चादर को सरलता से कसी भी आकार म मोड़ा जा सकता है? (i) ऐलु म नयम (ii)
ताँबा (iii) लोहा (iv) सोना
(i) ऐलु म नयम
वकल्प क्य सही या गलत है
(i) ऐलुिमिनयम सही — स स्ता, हल्का, अत्यिधक आघातवध नीय, जंग नही ं लगता, भोजन के साथ सुर ि त
(ii) ताँबा महँगा है और इसक सतह पर हरी परत बन जाती है जो भोजन के लए सुर क्षत नह
(iii) लोहा भारी है और नम वायु म जंग लग जाता है
(iv) सोना सवा धक आघातवधनीय अवश्य है, परंतु भोजन लपेटने के लए अत्य धक महँगा
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार
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ऐसा क्य होता है: प्रश्न म दो संकेत ह — “सस्ती” और “पतली चादर सरलता से मोड़ी जा सक”। दोन पर केवल
m a s emआपको
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वही धातु खरी उतरती है जो सस्ती और अत्य धक आघातवधनीय हो, अथात् ऐलु म नयम। यही पत्रक
. co और पैक भोजन पर दखता है। a
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चॉकलेट, दवाइय
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नम्न ल खत म से कौन-सी धातु जल के संपक म आने पर आग पकड़ लेती है? (i) ताँबा (ii) ऐलु म नयम (iii)
.
प्र.2
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जक (iv) सो डयम
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(iv) सो डयम
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m → तीव अिभि या + अ यिधक ऊ मा → धात ु आग पकड़ लेती हैglas
सोिडयम.c+oजल
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a glaइसीिलए सोिडयम को िम ी के ते ल में संगिहत िकया जाता है।
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ऐसा क्य होता है: सो डयम ऑक्सीजन और जल के साथ इतनी तीव्र अ भ क्रया करता है क उत्पन्न ऊष्मा से वह
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स्वयं जलने लगता है। म
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का तेल नमी और वायु दोन को उससे दूर रखता है। ताँबा, ऐलु म नयम और जक जल
के साथ ऐसा व्यवहार नह करते। a g
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सुझाव: इसे फॉ ोरस से मत मलाइए, जो अधातु है और जल म रखा जाता है क्य क वह वायु म आग पकड़ लेता
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है। सो डयम: धातु, म के तेल म। फॉ ोरस: अधातु, जल म।
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प्र.3 कारण स हत बताएँ क नम्न ल खत कथन सत्य ह अथवा असत्य। (i) पात्र और मू तय को बनाने के लए
उपयोग क जाने वाली अधातुओं के उदाहरण ऐलु म नयम और ताँबा ह। [ ] (ii) धातुए ँ ऑक्सीजन के साथ
मलकर ऑक्साइड बनाती ह जनका वलयन नीले लटमस पत्र को लाल म प रव तत कर दे ता है। [ ] (iii) श्वसन
के लए ऑक्सीजन एक अ नवाय अधातु है। [ ] (iv) ताँबे के पात्र का उपयोग जल उबालने के लए कया जाता
है क्य क वे वद्युत के सुचालक ह। [ ]
कथन सत्य/ कारण
असत्य
(i) पात्रों और मूितयों को बनाने के िलए अस त्य ऐलु म नयम और ताँबा धातुए ँ ह, अधातुएँ नह । ये द्यु तमय, कठोर,
उपयोग की जाने वाली अधातुओ ं के उदाहरण आघातवधनीय, तन्य और सुचालक ह। उपयोग बताया गया वह सही है,
ऐलुिमिनयम और ताँबा है।
ं केवल “अधातुओं” शब्द गलत है।
(ii) धातुए ँ ऑक्सीजन के साथ िमलकर अस त्य धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय होते ह, अत: उनका वलयन लाल लटमस
ऑक्साइड बनाती है ं िजनका िवलयन नीले को नीला करता है। नीले लटमस को लाल करना अम्लीय वलयन का
िलटमस पत्र को लाल में पिरवितत कर दे ता लक्षण है, जो अधातु के ऑक्साइड (जैसे सल्फर डाइऑक्साइड) से मलता
है। है।
(iii) श्वसन के िलए ऑक्सीजन एक अिनवाय स त्य ऑक्सीजन अधातु है और हम इसे श्वास म ग्रहण करते ह। इसके बना हम
अधातु है। जी वत नह रह सकते।
(iv) ताँबे के पात्रों का उपयोग जल उबालने के अस त्य कारण गलत है। ताँबा इस लए चुना जाता है क्य क वह ऊष्मा का सुचालक
िलए िकया जाता है क्योंिक वे िवद्य तु के है और ज्वाला से ऊष्मा शीघ्र जल तक पहुँचा दे ता है। जल उबालने से उसक
सुचालक है।
ं वद्युत चालकता का कोई संबंध नह ।
सुझाव: सत्य/असत्य प्रश्न म तथ्य के साथ-साथ कारण भी उतनी ही सावधानी से जाँ चए। कथन (iv) म तथ्य सही है
पर कारण गलत — और इसी से पूरा कथन असत्य हो जाता है।
प्र.4 आभूषण बनाने के लए केवल कुछ ही धातुए ँ उपयुक्त क्य ह?
आभूषण क माँग असाधारण ह और उन्ह केवल गनी-चुनी धातुएँ — मुख्यत: सोना, चाँद और प्लै टनम — पूरा कर पाती ह।
1. उनम संक्षारण नह होना चा हए। आभूषण प्र त दन पसीने और नम वायु के संपक म रहते ह। सोना और चाँद संक्षारण का
प्र तरोध करते ह, इस लए पी ढ़य तक चमकते रहते ह। लोहे म जंग लग जाता और ताँबे पर हरी परत बन जाती।
2. वे अत्य धक आघातवधनीय और तन्य ह । हार या झुमके के लए धातु को महीन तार म ख चना और नाजुक आकार म
पीटना पड़ता है। सोना सभी धातुओं म सवा धक आघातवधनीय और सवा धक तन्य है — एक ग्राम से दो कलोमीटर लंबा तार
बनता है।
3. वे इतनी नरम ह क काम हो सके, फर भी टकाऊ ह । सोना और चाँद सुनार साधारण औजार से गढ़ सकता है, जब क
लोहे के लए भ चा हए।
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4. वे द्यु तमय और आकषक ह । सोने क पीली और चाँद क श्वेत आभा फ क नह पड़ती।
5. वे त्वचा के लए सुर क्षत ह । ये धातुएँ शरीर को हा न नह पहुँचात ।
6. वे दुलभ ह । दुलभता से मूल्य मलता है, इसी लए आभूषण प रवार क बचत भी होते ह।
ऐसा क्य होता है: अ धकांश धातुएँ पहली ही शत पर वफल हो जाती ह। साधारण धातुएँ वायु और नमी से धीरे-
धीरे अ भ क्रया करती ह, और संक्षा रत आभूषण अपनी सुंदरता और मूल्य दोन खो दे ता है।
प्र.5 स्तंभ I म द गई धातुओं और अधातुओं के उपयोग को स्तंभ II म दए गए धातुओं और अधातुओं के
अव्यव स्थत नाम से सुमे लत क जए। स्तंभ I: (क) वद्युतीय तार म उपयोग। (ख) प्रबल आघातवधनीय और
तन्य। (ग) जीव इसके बना जी वत नह रह सकते ह। (घ) जब मृदा म इस उवरक को मलाया जाता है तब पौधे
स्वस्थ रूप से वृ द्ध करते ह। (ङ) जल-शु द्धकरण म इसका उपयोग कया जाता है। स्तंभ II: (i) ज न क्सी ऑ
(ii) री न क्लो (iii) बा ताँ (iv) ज ना इ ो न (v) ना सो
पहले स्तंभ II के अव्यव स्थत नाम सुलझाइए, फर सुमे लत क जए।
स्तंभ II (अव्यव स्थत) सही नाम धातु या अधातु
(i) ज न क्सी ऑ ऑ क्सीजन अधातु
(ii) री न क्लो क्लोरीन अधातु
(iii) बा ताँ ताँबा धातु
(iv) ज ना इ टो न नाइटोजन अधातु
(v) ना सो सोना धातु
स्तंभ I सुमेल उत्तर कारण
(क) िवद्य तु ीय तारों में उपयोग। (iii) ताँबा वद्युत का उत्तम सुचालक और इतना तन्य क तार
म ख चा जा सके
(ख) पबल आघातवधनीय और तन्य। (v) सोना सभी धातुओं म सवा धक आघातवधनीय और
सवा धक तन्य
(ग) जीव इसके िबना जीिवत नही ं रह सकते है।
ं (i) ऑ क्सीजन श्वसन के लए अ नवाय
(घ) जब म ृद ा में इस उवरक को िमलाया जाता है तब पौधे (iv) नाइटोजन उवरक के नमाण म प्रयुक्त; पौध क वृ द्ध का
स्वस्थ रूप से विृ करते है।
ं आवश्यक पोषक तत्व
(ङ) जल-शुि करण में इसका उपयोग िकया जाता है। (ii) क्लोरीन पेयजल के शोधन म सामान्यत: प्रयुक्त
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(क ) – (iii), (ख) – (v), (ग) – (i), (घ) – (iv), (ङ) – (ii)
प्र.6 क्या होता है जब ऑक्सीजन, मैग्नी शयम और सल्फर के साथ अ भ क्रया करती है? न मत उत्पाद क प्रकृ त म
प्रमुख अंतर क्या होता है?
दोन ऑक्सीजन म जलते ह और दोन ऑक्साइड बनाते ह — परंतु एक ऑक्साइड क्षारीय है और दूसरा अम्लीय।
मैग् नीिशयम + ऑक्सीजन → मै नीिशयम ऑ साइड (श्वेत चूण)
ग् क्
मैग् नीिशयम ऑक्साइड + जल → ऐसा िवलयन जो लाल िलटमस को नीला कर दे → ारीय
सल्फर + ऑक्सीजन → स फर डाइऑ साइड (गैस)
ल् क्
सल्फर डाइऑक्साइड + जल → सल्फ्यूरस अम्ल, जो नीले िलटमस को लाल कर दे त ा है → अम्लीय
अंतर का बदु मैग्नी शयम (धातु) सल्फर (अधातु)
कै से जलता है चौंिधयाने वाली सफे द ज्वाला के साथ हल्की नीली ज्वाला के साथ, दम घोंटने वाली गैस दे ते हुए
बना उत्पाद मैग्नीिशयम ऑ क्साइड — श्वेत ठोस चूण स ल्फर डाइऑ क्साइड — एक गैस
जल में िवलयन की पकृ ित ारीय अम्लीय
िलटमस पर पभाव लाल िलटमस → नीला नीला िलटमस → लाल
यह क्य महत्वपूण है: यही इस अध्याय का सामान्य नयम है — धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय, अधातुओं के
ऑक्साइड अम्लीय। अत: कसी तत्व के ऑक्साइड क लटमस से जाँच यह तय करने का वश्वसनीय उपाय है क
वह तत्व धातु है या अधातु।
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प्र.7 नम्न ल खत प्रवाह चत्र को पूरा क जए।
? + वायु + ऊष् मा राख
जल
?
नीला और लाल िलटमस िवलयन
अलग -अलग िमलाएं
नीले िलटमस के रंग में लाल िलटमस के रंग में
पिरवतन पिरवतन
? नीला
पृष्ठ 56 पर प्रश्न 7 के साथ छपा प्रवाह चत्र।
जो एक खाना पहले से भरा है, वह से पीछे क ओर च लए। लाल लटमस नीला हो रहा है, अत: वलयन क्षारीय है, अत: राख
धातु का ऑक्साइड है, अत: जलाया गया पदाथ धातु ही होगा। इस अध्याय क जो धातु वायु म जलकर श्वेत राख दे ती है, वह है
मैग्नी शयम।
मैग्नीिशयम + वाय ु + ऊष्मा राख
जल
मैग्नीिशयम ऑक्साइड
का िवलयन ( ारीय)
नीला और लाल िलटमस िवलयन
अलग-अलग िमलाएं
नीले िलटमस के रंग में लाल िलटमस के रंग में
पिरवतन पिरवतन
कोई पिरवतन नही ं (नीला) नीला
पूण कया गया प्रवाह चत्र। बगनी रंग के तीन खाने वही ह जन्ह आपको भरना है।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार
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“?” वाला खाना उत्तर कारण
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पहला खाना (वायु और ऊष्मा के साथ मैग्नीिशयम (एक धातु) वायु म मैग्नी शयम रबन जलाने पर श्वेत राख बनती है
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जलाया गया पदाथ)
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aराखgl+ जल मैग्नीिशयम ऑ क्साइड का िवलयन — राख मैग्नी शयम ऑक्साइड है; धातुओं के ऑक्साइड
ारीय िवलयन क्षारीय वलयन दे ते ह
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नीले िलटमस के रंग में पिरवतन
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कोई पिरवतन नही ं — नीला ही रहता है क्षारीय वलयन नीले लटमस का रंग नह बदलता ag
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सुझाव: नीचे दाईं ओर पहले से भरा “नीला” ही पूरे चत्र क कुंजी है। लाल लटमस का नीला होना केवल क्षार का
लक्षण है, और क्षारीय ऑक्साइड केवल धातु का होता है।
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a s emआपको नम्न ल खत साम ग्रयाँ द गई ह। उनम से जल उबालने हेतु पात्र बनाने के लए आप कस सामग्री का
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प्र.8
चयन सबसे उपयुक्त समझते ह और क्य ? चचा क जए। लोहा, ताँबा, सल्फर, कोयला, प्ला स्टक, लकड़ी, गत्ता
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ताँबा सव त्तम चयन है और लोहा उसके नकट, सस्ता वकल्प। सूची क शेष सभी साम ग्रयाँ अनुपयोगी ह।
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सामग्री उपयुक्त? कारण
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ताँबा सव त्त म धातु — यहाँ ऊष्मा का सवश्रेष्ठ सुचालक, अत: जल शीघ्र उबलेगा; आघातवधनीय, अत: पीटकर पात्र बनाया
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जा सकता है; कठोर, मजबूत, न पघलता है न जलता है
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eलोहा
gl a उपयुक्त अ ा सुचालक और बहुत मजबूत, परंतु भारी और गीला रह जाने पर जंग लग जाता है
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सल्फर नही ं अधातु — भंगुर, पात्र का आकार नह दया जा सकता, कुचालक और जल भी जाता है
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m है, अत: जल जाएगा
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भंगुर, कुचालक — और .स्वयं g l a
कोयला नही ं
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ऊष्मा काgकl a s
प्लािस्टक नही ं
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लकड़ी नही ं कुचालक और आग पकड़ लेती है
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नही ं
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गत्ता कुचालक, जल सोख लेता है और तुरंत जल जाता है
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as ऐसा क्य होता है: जल उबालने वाले पात्र को तीन काम करने ह — ज्वाला से ऊष्मा शीघ्र जल तक पहुँचाना, गरम
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होने पर अपना आकार बनाए रखना, और न जलना न पघलना। ये तीन केवल धातु कर पाती है, और द गई धातुओं
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म ताँबा ऊष्मा का सवश्रेष्ठ सुचालक है।
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सुझाव: हत्था ताँबे का नह होना चा हए। उस पर लकड़ी या प्ला स्टक लगाइए, क्य क वहाँ कुचालक ही हाथ को
सुर क्षत रखेगा।
प्र.9 आपको लोहे क तीन क ल द गई ह जनम से प्रत्येक क ल क्रमश: तेल, जल और सरके म डू बी हुई है। लोहे क
कौन-सी क ल म जंग नह लगेगा और क्य ?
तेल म डू बी क ल म जंग नह लगेगा।
क ल कसम जंग लगेगा? कारण
डू बी है
तेल नही ं तेल म जल नह होता और उसम वायु भी नह घुलती, अत: क ल वायु और नमी दोन से कट
जाती है। तेल लगाना जंग से बचाव का एक मान्य उपाय भी है।
जल हाँ साधारण जल म वायु घुली रहती है, अत: क ल तक वायु और जल दोन पहुँच जाते ह
िसरका हाँ — तीनों में सरका जल म अम्ल का वलयन है और अम्ल लोहे क सतह के ास को और तेज कर दे ता है
सबसे तेज
जंग लगने के िलए चािहए वायु + जल दोनों
ते ल दोनों में से कु छ नही ं दे त ा → जंग नही ं लगता
ऐसा क्य होता है: तेल क परत एक भौ तक अवरोध बना दे ती है। इसी लए साइ कल क चेन, औजार और मशीन
के पुज पर तेल या ग्रीज लगाई जाती है, और इसी लए दाद माँ तवा रखने से पहले उस पर थोड़ा तेल मल दे ती ह।
प्र.10 धातुओं एवं अधातुओं के व भन्न गुण के आधार पर उनके उपयोग को दै नक जीवन म कैसे नधा रत कया
जाता है?
कसी काम के लए वही सामग्री चुनी जाती है जसम उस काम क माँग वाला गुण हो। गुण बद लए और उपयोग भी बदल
जाएगा।
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गुण कसम है इससे मलने वाला उपयोग
आघातवधनीयता धातुएँ ऐलुिमिनयम पत्रक , चाँद ी का वक , चादर से पीटकर बने तवे और बािल्टयाँ
तन्यता धातुएँ िवद्य तु तार , िसतार -वीणा के तार , चाय की छलनी, जंजीर और आभूषण
ऊष्मा की सुचालकता धातुएँ खाना पकाने के पात्र, पेशर कु कर , कड़ ाही
ऊष्मा की कु चालकता लकड़ी, प्ला स्टक पात्रों और करछु ल के हत्थे
िवद्य तु की सुचालकता धातुएँ ताँबे और ऐलुिमिनयम की वायिरंग, िस्वच, प्लग की िपने ं
िवद्य तु की रबड़, प्ला स्टक तारों का आवरण, पेचकस के हत्थे, िवद्य तु कम के द स्ताने और जूते
कु चालकता (अधा त्वक साम ग्रयाँ)
ध्वािनकता धातुएँ िवद्य ालय और मंिदर की घंिटयाँ, घुँघ रू, मंजीरे
कठोरता और सुदृ ढ़ता धातुएँ कृ िष उपकरण, गडर , रे ल पटिरयाँ, झूल ते से तओ
ु ं की रिस्सयाँ
द्य िु त और सं ारण- सोना, चाँद आभूषण और िस क्के
पितरोध
रासायिनक अधातुएँ श्वसन के िलए ऑ क्सीजन, उवरकों के िलए नाइटोजन, जल -शोधन के िलए क्लोरीन,
उपयोिगता रोगाणुर ोधक के रूप में आयोडीन, जीवन की िनम ण इकाई काबन
यह क्य महत्वपूण है: कसी भी एक वस्तु को दे खए और उसम छपा व ान पढ़ा जा सकता है। पेचकस वहाँ धातु
का है जहाँ बल लगाना है और वहाँ प्ला स्टक का जहाँ धारा रोकनी है; कड़ाही वहाँ धातु क है जहाँ ज्वाला लगती है
और वहाँ लकड़ी क जहाँ हाथ लगता है। कुछ भी संयोगवश नह चुना गया।
प्र.11 लोहे को जंग लगने से बचाने के उपाय म से एक है क उस पर जक धातु क एक पतली परत चढ़ाई जाए। चूँ क
सल्फर जल के साथ अ भ क्रया नह करता है तो क्या इसका उपयोग इस उ े श्य के लए कया जा सकता है?
अपने उत्तर क पु ष्ट क जए।
नह , सल्फर का उपयोग नह कया जा सकता। जल से अ भ क्रया न करना सुरक्षात्मक परत क केवल एक शत है, और शेष
सभी शत पर सल्फर वफल हो जाता है।
1. सल्फर भंगुर है, न आघातवधनीय है न तन्य। परत को पतली, अखंड और मजबूती से चपक हुई फल्म के रूप म फैलना
होता है। सल्फर नरम, भुरभुरी अधातु है — उसे न पीटकर न ख चकर परत बनाई जा सकती है, और जो परत बनेगी वह
चटककर उखड़ जाएगी।
2. वह लोहे से चपकेगा नह । जक लोहे क सतह से दृढ़ता से जुड़ जाता है; ढ ला सल्फर चूण रगड़ते ही झड़ जाएगा और लोहा
फर नंगा रह जाएगा।
3. चटक हुई परत परत न होने से भी बुरी है। दरार से नम वायु लोहे तक पहुँचते ही वह जंग आरंभ हो जाएगा — और परत के
नीचे छपा होने से क्ष त दे र तक दखाई भी नह दे गी।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार AglaSem · NCERT Solutions
4. जक केवल ढकता नह है। गैल्वेनाइज्ड चादर पर खर च लग जाए तब भी जक खुले लोहे क रक्षा करता रहता है। सल्फर
ऐसी कोई रक्षा नह दे ता।
5. सल्फर जलता है। सल्फर चढ़ लोहे क वस्तु ज्वाला के पास जलकर हा नकारक सल्फर डाइऑक्साइड गैस दे गी।
ऐसा क्य होता है: प्रश्न म दया तक एक जाल है। “सल्फर जल के साथ अ भ क्रया नह करता” सत्य है, परंतु
वै ा नक को पूछना यह चा हए क “क्या वह सुरक्षात्मक परत बना और टका सकता है?” — और वहाँ उत्तर स्पष्ट
‘नह ’ है। सही उपाय वही रहते ह — रंग-रोगन, तेल, ग्रीज और गैल्वेनाइजेशन।
प्र.12 एक लोहार उपकरण बनाने से पूव लोहे को गरम करता है। इस प्र क्रया म गरम करना क्य आवश्यक है?
क्य क गरम लोहा ठं डे लोहे क तुलना म कह अ धक आघातवधनीय होता है। गरम करने पर जद्द टु कड़ा हथौड़े के नीचे
आकार लेने लगता है।
1. ठं डा लोहा कठोर और अकड़ा हुआ होता है। उसे पीटना प रश्रम का अपव्यय है — प्रहार उछलकर लौट आते ह और भारी
प्रहार टु कड़े को मोड़ने के बजाय चटका सकता है।
2. सुख लाल लोहा नरम होता है। अब प्रत्येक प्रहार धातु को फैलाता और मोड़ता है। सुदशन चाचा टु कड़े को सुख लाल होने तक
गरम करते ह और तभी उसे पीटकर कुल्हाड़ी बनाते ह।
3. आकार बार-बार बदला जा सकता है। लोहार चपटा कर सकता है, मोड़ सकता है, छे द कर सकता है और धार नकाल सकता
है — जब भी टु कड़ा ठं डा होकर कड़ा हो, फर गरम कर लेता है।
4. उपकरण अ धक मजबूत बनता है। धातु काटकर नह , पीटकर आकार दे ने से लोहा सघन और सुदृढ़ बना रहता है, इस लए
कुल्हाड़ी क धार टकती है।
ठं डा लोहा + हथौड़ ा → पितरोध, चटक सकता है
गरम (सुख लाल) लोहा + हथौड़ ा → चपटा होकर आकार ले लेता है
गरम करने से लोहे की आघातवधनीयता बढ़ जाती है।
क्या आप जानते ह? यह शल्प हजार वष पुराना है। दल्ली का लौह स्तंभ भी लोहार ने ठ क इसी प्रकार लोहा
गढ़कर बनाया था, और वह 1600 वष से अ धक बीत जाने पर भी लगभग जंगर हत खड़ा है।
अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — पृष्ठ 56
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प रयोजनाएँ और आगे क खोज
अन्वे ष णात्मक प रयोजनाएँ
प्र.1 ढोकरा, बदरीवेयर, पेमबथ और कामरूपी भारत क कुछ प्र सद्ध धातुकला क शै लयाँ ह। उन राज्य का पता
लगाइए जहाँ ये कलाकृ तयाँ बनाई जाती ह। इसके साथ ही एक चत्र-संग्रह भी बनाइए।
धातुकला राज्य प्रयुक्त धातु और स्वरूप
शैली
ढोकरा छत्त ीसगढ़ , ओिडशा, पिश्चम बंगाल , मोम-लोप व ध से ढाली गई पीतल/कांस्य क मू तयाँ — जनजातीय
झारखंड (तेल ंगाना के कु छ भाग भी) आकृ तयाँ, हाथी, द पक, जन पर धागे जैसी महीन रेखाएँ होती ह
िबदरीवेयर कन टक (बीदर ) काली क गई जक-ताँबा म श्रत धातु पर चाँद के तार क जड़ाई —
फूलदान, डब्बे, हुक्के का आधार
पेम बथ तेल ंगाना (पेम बथ गाँव, जनगाँव िजला) पीतल क चादर पीटकर बनाए गए मं दर के द प, था लयाँ और प काएँ —
आघातवधनीयता का सीधा उपयोग
कामरूपी असम (काम रूप ेत्र, िवशेषत: हाजो और कांस्य और पीतल के पात्र — शराई (xorai), बोटा, कटोरे और था लयाँ
सथबारी)
चत्र-संग्रह कैसे बनाएँ:
1. प्रत्येक शैली के चार से छह चत्र एक त्रत क जए — पुरानी प त्रकाओं, समाचार-पत्र , पयटन पु स्तकाओं अथवा प्रटआउट से।
2. एक चाट पेपर को चार भाग म बाँ टए, प्रत्येक शैली के लए एक।
3. चत्र चपकाइए और प्रत्येक पर शैली का नाम, राज्य तथा प्रयुक्त धातु ल खए।
4. एक कोने म भारत का रेखा-मान चत्र बनाकर चार क्षेत्र को च त क जए और तीर से सही खंड से जो ड़ए।
5. प्रत्येक खंड के नीचे एक पं क्त म ल खए क वह शल्प धातु के कस गुण पर टका है — पेमबथ क चादर के लए
आघातवधनीयता, ढोकरा के लए पघले पीतल का साँचे म भर जाना।
प्र.2 भारत के मान चत्र पर उन राज्य को च त क जए जहाँ लोहा, सोना, ऐलु म नयम और अन्य धातुए ँ पाई जाती
ह।
भारत का रेखा राजनी तक मान चत्र ली जए और प्रत्येक धातु के लए एक रंग या संकेत तय क जए।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 4 धातुओं और अधातुओं का संसार
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धातु खनन कया जाने वाला अयस्क प्रमुख राज्य
mहेमेटाइट, मैग्नेटाइट as e
लोहा
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ओिडशा, छत्त ीसगढ़ , झारखंड, कन टक , गोवा, महारा
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g l a स्वण अयस्क कन टक (कोलार , ह ी), आंध पदे श (रामिगिर ), झारखंड
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सोना
ऐलुिमिनयम बॉक्साइट ओिडशा, गुजरात, झारखंड, छत्त ीसगढ़ , महारा
. coराजm थान (खेतड़ ी), झारखंड (िसंहभूम), म य पदे श (मलाजं खंड) ag
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ताँबा ताम्र अयस्क
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मैंग नीज मगनीज अयस्क
a g l ओिडशा, कन टक , म ध् य पदे श, महारा
राजस्थान (जावर , रामपुर ा आगुचा)
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िजंक और सीसा जक-सीसा अयस्क
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सुझाव: मान चत्र के एक कोने म संकेत-सूची अवश्य बनाइए और केवल बदु नह , पूरे राज्य म रंग भ रए — तब
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a s emदखेगा क ओ डशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ से गुजरती एक चौड़ी प म भारत का अ धकांश लोहा है।
gl इसी लए दे श के बड़े इस्पात संयंत्र वह स्थत ह।
तुरंत
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स्माटफोन म उपयोग क जाने वाली धातुओं और अधातुओं के वषय म पता लगाइए और सूचना एक त्रत क जए
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प्र.3
क वे फोन को ठ क से काय करने म कैसे सहायता करती ह।
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तत्व धातु या अधातु फोन म कहाँ और क्या करता है
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a gl ताँबा धातु तार और पिरपथ पि का की पटिरयाँ — सुचालक और अत्यिधक तन्य होने के कारण
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िवद्य तु ले जाता है
omऔर संपक ं पर पतली परत — अ छा सुचालक और सं ािरत नही ं होता, l a se
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mइसिलए संपक कभी खराब नही ं होता
सोना धातु संयोजकों च्
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ऐलुिमिनयम धातु agl बाहरी ढाँचा — हल्का, मजबूत और िचप की ऊष्मा बाहर िनकालता है
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िलिथयम और धातुएँ पुनभरणीय बैटरी, जो ऊज संिचत कर दे ती है
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कोबाल्ट
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चालक ले प और ि वच के संपक —aिवg तु का सव े ठ सुचालक
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धातु स् द्य ष्
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िसिलकॉन बीच का व्यवहार पोसे स र और मेम ोरी िचप — फोन का “मिस्तष्क ”
(अधचालक)
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m का लाि टक और बैटरी के इले टोड का गेफाइट a
काबन अधातु
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ऑक्सीजन (काँच अधातु
a g l स् ीन का काँच, जो कठोर , पारदश और िवद्य तु का कु चालक है
में)
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यह क्य महत्वपूण है: फोन इस लए काम करता है क्य क धातुएँ और अधातुएँ ठ क वह लगाई गई ह जहाँ उनके
गुण चा हए — धारा ले जाने के लए सुचालक, धारा को रोकने के लए कुचालक, और सबके आगे एक कठोर
पारदश अधा त्वक काँच। इनम से कई धातुएँ दुलभ ह, इसी लए पुराने फोन फकने के बजाय पुनचक्रण के लए दे ने
चा हए।
प्र.4 ‘सुख-साधन एवं वला सता के लए धातुओं के प्रयोग क प्रचुरता अथवा न्यूनता’ वषय पर कक्षा म वाद- ववाद
का आयोजन क जए।
आयोजन कैसे कर: कक्षा को दो दल म बाँ टए, तैयारी के लए 15 मनट द जए, प्रत्येक वक्ता को 3 मनट और अंत म 5 मनट
प्रश्नोत्तर र खए। एक वद्याथ को अध्यक्ष और एक को समय-रक्षक बनाइए। प्रत्येक वक्ता से क हए क केवल वचार नह , एक तथ्य
या आँकड़ा भी लाए।
“प्रचुरता” — पक्ष के तक “न्यूनता” — वपक्ष के तक
धातुओ ं ने जीवन सुर ि त और सरल बनाया — वाहन, अयस्क सीिमत है;ं एक बार समाप्त हो गए तो हमारी संतानों के िलए कु छ
िचिकत्सालय, रसोई, भवन नही ं बचेगा
खनन और धातु उद्योग लाखों लोगों को रोजगार दे ते है ं खनन से वन नष्ट होते है,ं लोग िवस्थािपत होते है ं और निदयाँ पदू िषत होती है ं
धातुए ँ लंबे समय चलती है ं और प्लािस्टक के िवपरीत बार-बार अयस्क से धातु िनकालने में िवशाल ऊज लगती है और वायु पदू षण बढ़ ता है
पुनचि त की जा सकती है ं
आध िु नक तकनीक — फोन, सौर पैनल, रे ल गािड़याँ — धातुओ ं बहत
ु -सी धातु के वल िदखावे में जाती है, आवश्यकता में नही ं — उतना भाग
के िबना असंभव है िबना हािन घटाया जा सकता है
नमूना समापन वक्तव्य (संतु लत पक्ष, जसे आप अपनी भाषा म ढाल सकते ह): “प्रश्न धातु या अधातु का नह , यह है क
कौन-सा उपयोग। रेल क पटरी, पुल या च कत्सालय म लगी धातु सबक सेवा करती है। केवल वैभव दखाने म लगी धातु कसी क
सेवा नह करती और एक वन क क मत लेती है। अत: हमारा दल वला सता के उपयोग म कमी और आवश्यक उपयोग क
रक्षा का पक्ष लेता है, और सबसे बढ़कर पुनचक्रण का — भारत म लोहे और ऐलु म नयम का पुनचक्रण पहले से बड़ी मात्रा म होता
है, और पुनच क्रत प्रत्येक टन वह टन है जसे खोदना नह पड़ा।”
सुझाव: वाद- ववाद प्रमाण और शष्टता से जीता जाता है, ऊँची आवाज से नह । बोलने से पहले दूसरे पक्ष का सबसे
मजबूत तक ल खए और उसका एक ईमानदार उत्तर तैयार क जए।
अध्याय — एक नज़र म
धातुएँ सामान्यत: द्यु तमय (धा त्वक द्यु त वाली), कठोर, आघातवधनीय (पीटकर पतली चादर बनाई जा सकती है), तन्य
(तार म ख ची जा सकती है) और ध्वा नक ( ननाद ध्व न उत्पन्न करने वाली) होती ह। ताँबा, ऐलु म नयम, लोहा, सोना और
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चाँद धातुएँ ह।
हर नयम के अपवाद भी ह — सो डयम और पोटै शयम इतने नरम ह क चाकू से काटे जा सकते ह तथा पारा कमरे के
तापमान पर द्रव अवस्था म रहता है।
धातुएँ ऊष्मा और वद्युत क सुचालक होती ह। इसी लए खाना पकाने के पात्र धातु के और उनके हत्थे लकड़ी के बनाए जाते
ह, तथा वद्युतकम के पेचकस पर प्ला स्टक का आवरण और हाथ म रबड़ के दस्ताने होते ह।
कोयला (काबन), सल्फर और फॉ ोरस जैसी अधातुएँ द्यु तहीन, नरम, भंगुर, अतन्य, अध्वा नक तथा ऊष्मा और वद्युत
क कुचालक होती ह।
धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय होते ह — मैग्नी शयम जलकर मैग्नी शयम ऑक्साइड बनाता है जसका वलयन लाल लटमस
को नीला कर दे ता है। अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय होते ह — सल्फर जलकर सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है जसका
वलयन (सल्फ्यूरस अम्ल) नीले लटमस को लाल कर दे ता है।
लोहे म जंग तभी लगता है जब वायु और जल दोन उप स्थत ह ; वायु, जल अथवा अन्य पदाथ से कसी भी धातु क सतह
का धीरे-धीरे ास संक्षारण कहलाता है। जंग से बचाव रंग-रोगन, तेल, ग्रीज और गैल्वेनाइजेशन ( जक क परत) ारा कया
जाता है।
धातुएँ और अधातुएँ दोन तत्व ह — ऐसे पदाथ जन्ह और सरल पदाथ म नह तोड़ा जा सकता। अब तक 118 तत्व ात ह।
प्ला स्टक, काँच, लकड़ी, रबड़ और कागज तत्व नह ह, अत: वे न धातु ह न अधातु।
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त्व रत पुनरावृ त्त
पद अथ अध्याय म कहाँ दै नक जीवन का उदाहरण
धा त्वक द्यु त धातु की सतह ारा पदिशत चमक अनुभाग 4.1.1, ताजा कटा ऐलु म नयम, चमकाई हुई स्ट ल
पृष्ठ 43 क थाली
आघातवधनीयता वह ग ण
ु िजससे सामग ी को पीटकर पतली चादर में अनुभाग 4.1.1, मठाई पर चाँद का वक, रोट लपेटने का
बदला जा सकता है पृष्ठ 43 ऐलु म नयम पत्रक
भंगुर पीटने पर चपटा होने के स्थान पर टुक ड़ों में टू ट जाना पृष्ठ 44 कोयले का टु कड़ा, सल्फर क डली, म का
कुल्हड़
तन्यता वह ग ण
ु िजससे सामग ी को तार में खी ंचा जा सकता है अनुभाग 4.1.2, पंखे का ताँबे का तार, सतार और वीणा के
पृष्ठ 44 तार
ध्वा नकता धातुओ ं का िननाद ध्विन उत्पन्न करने का ग ण
ु अनुभाग 4.1.3, वद्यालय क घंट , घुँघरू, गरती हुई स्ट ल
पृष्ठ 46 क थाली
ऊष्मा-चालन िकसी सामग ी में एक िबंद ु से दू स रे िबंद ु तक ऊष्मा का अनुभाग 4.1.4, गरम चाय म रखा स्ट ल का चम्मच ऊपर से
स्थानात
ं रण पृष्ठ 47 भी गरम हो जाता है
वद्युत का वह सामग ी जो िवद्य तु को सरलता से पवािहत होने दे ती अनुभाग 4.1.5, घर क ताँबे क वाय रग, प र क्षत्र म लोहे क
सुचालक है पृष्ठ 48 कल
वद्युत का वह सामग ी जो िवद्य तु को पवािहत नही ं होने दे ती अनुभाग 4.1.5, रबड़ के दस्ताने, पेचकस का प्ला स्टक हत्था
कुचालक पृष्ठ 48
जंग वायु और जल दोनों की उपिस्थित में लोहे पर बनने अनुभाग 4.2, पृष्ठ वषा म पड़े पुराने लोहे के गेट पर भूरी पपड़ी
वाला भूरे रंग का िन ेप 50
संक्षारण वायु, जल अथवा अन्य पदाथ ं के कारण धातु की सतह पृष्ठ 50 ताँबे के पात्र पर हरी परत, चाँद पर काली
का धीरे -धीरे ास परत
गैल्वेनाइजेशन लोहे पर िजंक धातु की सुर ात्मक परत चढ़ ाना पृष्ठ 50 गैल्वेनाइज्ड लोहे क बाल्ट और छत क
चादर
तत्व वह पदाथ िजसे और सरल पदाथ ं में नही ं तोड़ा जा पृष्ठ 53 ऑक्सीजन, काबन, लोहा, सोना — परंतु
सकता; अब तक 118 ात है ं प्ला स्टक या काँच नह
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