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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 5 हमारे आस-पास के परिवर्तन — भौतिक एवं रासायनिक

AglaSem पर कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 5 हमारे आस-पास के परिवर्तन — भौतिक एवं रासायनिक (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Science Chapter 5 Changes Around Us: Physical and Chemical (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 5 हमारे आस-पास के परिवर्तन — भौतिक एवं रासायनिक - Page 1 of 44

About NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 5 हमारे आस-पास के परिवर्तन — भौतिक एवं रासायनिक

NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 5 हमारे आस-पास के परिवर्तन — भौतिक एवं रासायनिक is available here for free download. Published by NCERT for Class 7, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (44 pages). Candidates preparing for Class 7 can use NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 5 हमारे आस-पास के परिवर्तन — भौतिक एवं रासायनिक to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 5 हमारे आस-पास के परिवर्तन — भौतिक एवं रासायनिक – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 5: हमारे आस-पास के प रवतन —
भौ तक एवं रासाय नक

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

57 – 72 17 44 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 43 pages

Page 2

कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: हमारे आस-पास के प रवतन —
भौ तक एवं रासाय नक
कक्षा 7 व ान (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक के सभी प्रश्न के वस्तृत NCERT
हल। आठ क्रयाकलाप (5.1 से 5.8), दोन ता लकाएँ, पृष्ठ 57 से 68 तक के सभी पाठ्य प्रश्न एवं व ान एवं समाज बॉक्स, आइए, और अ धक
सीख के सभी 10 प्रश्न तथा अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — प्रत्येक उत्तर के पीछे का कारण भी समझाया गया है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 7) 57 – 72

खं ड प्रश्न

17 44

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 57
अध्याय का आरंभ — व ाथ प रवतन का वणन करते हुए

प्र.1 सभी व ाथ कुछ प रवतन का वणन कर रहे ह। वे कस प्रकार के प रवतन के वषय म वातालाप कर रहे ह?

वे हमारे दै नक जीवन म होने वाले प रवतन क बात कर रहे ह, जन्ह हम अपनी संवेदनाओं से अनुभव करते ह। इनम से दो
भौ तक प रवतन ह (कोई नया पदाथ नह बनता) और दो रासाय नक प रवतन (नया पदाथ बनता है)।

व ाथ का कथन क्या बदल रहा है प रवतन का प्रकार

“आधे घंटे पूव मने यहाँ बफ का एक टु कड़ा रखा था। अब यह ठोस बफ → द व जल (के वल अवस्था भौितक — जमाकर पुनः बफ
जल बन गया है।” बदली) बनाई जा सकती है

“मने कल इस गुलाब के पौधे पर जो कली दे खी थी वह आज कली िखलकर फू ल बनी — नया रंग , रासायिनक (जैिवक पिक्रया)
फूल बन गई है।” नई गंध , पौधे के भीतर नए पदाथ बने — उ त्क्रिमत नही ं

“इस बोतल म रखा ठं डा जल अब ठं डा नह रहा।” के वल जल का तापमान बढ़ ा है भौितक — ठं डा करके पुनः
वैस ा िकया जा सकता है

“कल मने इस केले पर कुछ भूरे रंग के धब्बे दे खे थे। आज वे पकना एवं क्षय — नए पदाथ बनने से रंग रासायिनक — उ त्क्रिमत नही ं
और अ धक हो गए ह तथा केले म से तीव्र गंध भी आ रही है।” और गंध बदले

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: हम प रवतन को दृ (बफ का जल बनना, भूरे धब्बे), स्पश (बोतल का ठं डा न रहना) और गंध
(केले क तीव्र गंध) से पहचानते ह। परंतु संवेदना केवल यह बताती है क कुछ बदला है। प रवतन का प्रकार जानने
के लए एक ही प्रश्न पू छए — क्या कोई नया पदाथ बना? य द हाँ, तो प रवतन रासाय नक है; य द केवल आकार,
आमाप, अव ा या तापमान बदला, तो भौ तक है।

संकेत: तीव्र नई गंध रासाय नक प रवतन का सबसे सरल संकेत है। दूध का खट्टा होना, केले का अ धक पक जाना
और भोजन का खराब होना — सभी अपनी गंध से इसक सूचना दे दे ते ह।

क्रयाकलाप 5.1 — आइए, सोच और वचार कर — पृष्ठ 58

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक AglaSem · NCERT Solutions

ता लका 5.1 — आस-पास हो रहे प रवतन का अवलोकन

क्रयाकलाप

प्र.1 आपने अपने आस-पास अनेक प रवतन का अवलोकन कया होगा। इनम से कुछ प रवतन ता लका 5.1 म
सूचीबद्ध कए गए ह। आप यह दे ख सकते ह क प्रत्येक त म कुछ प रवतन हो रहे ह। प्रत्येक त के इन
प रवतन पर कुछ क्षण के लए वचार क जए और ता लका 5.1 म अपने अवलोकन अ भले खत क जए।

क्र.सं. प रवतन अवलोकन

1. बफ का पघलना

2. स ब्जय का कटना

3. जल का उबलना

4. मक्का से पॉपकॉन बनना

5. कागज का टु कड़ म कटना

6. चुकंदर के रस का जल म मलना

7. लकड़ी का जलना

8. गीले वस्त्र का सूखना

9. गूँधे हुए आटे से छोट -छोट लोइयाँ बनना

10. आटे क लोइय से रो टयाँ बलना

11. कोई अन्य

ता लका 5.1, पृष्ठ 58 — आस-पास हो रहे प रवतन का अवलोकन; ‘अवलोकन’ स्तंभ आपको भरने के लए रक्त
छोड़ा गया है।

पूरी क गई ता लका 5.1 नीचे द गई है। ध्यान द जए क प्रत्येक त म ठ क-ठ क क्या बदलता है — अवलोकन स्तंभ म यही
लखना है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक
g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
क्र.सं. प रवतन अवलोकन

m aाs
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1.
.co
बफ का िपघलना कठोर ठोस बफ धीरे-धीरे द्रव जल म बदल जाती है। केवल अव
ag l बदलती है; पदाथ अब भी

m
ase
जल ही है।

a2.gl सिब्जयों का कटना एक बड़ा टु कड़ा अनेक छोटे टु कड़ म बँट जाता है। केवल आमाप एवं आकृ त बदलती है;
सब्जी वही रहती है।

co m
3. जल का उबलना
em .
बुलबुले उठते ह, वाष्प नकलती है, जल का स्तर घटता है। द्रव जल जलवाष्प म बदलता है — ag
अव
g l as
ा का प रवतन।

4. मक्का से पॉपकोन बनना
a
दाना चटककर फूट जाता है, श्वेत, मुलायम एवं फूला हुआ हो जाता है तथा गंध भी बदल जाती

com
है। नए पदाथ बनते ह।

आमाप एवं आकृ त बदलती है। प्रत्येक टु कड़ा अब भी कागज ही e है।m
.
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cचुoकंm l
5. कागज का टुक ड़ों में कटना

. a g
em दर के रस का जल में
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6. रंगहीन जल गुलाबी अथवा गहरा लाल हो जाता है। रंग पूरे जल म फैल जाता है; कोई नया

a g िमलना पदाथ नह बनता — यह एक मश्रण है।

m a s
7. लकड़ी का जलना लौ, ऊष्मा, प्रकाश, धुआँ तथा अंत म राख शेष रहती है। नए पदाथ बनते ह और लकड़ी सदा

.co agl
के लए समाप्त हो जाती है।

se m त जल वा ष्पत होकर वायु म चला जाता है। वस्त्र हल्का एवं सूखा हो जाता है;
g l a
a वस्त्र स्वयं नह बदलता।
8. गीले वस्त्रों का सूखना वस्त्र म उप

co m
.
9. गूँधे हुए आटे से छोटी-छोटी केवल आटे क आकृ त बदलती है; वह आटा ही रहता है।
लोइयाँ बनना
se m
m
10. .co आटे की लोइयों से रोिटयाँ
l a
m िबलना aृ gत बदलती है — क ी रोट को फर से लोई
ase
लोई चपट एवं गोल हो जाती है। पुनः केवल आक

agl
बनाया जा सकता है।

se m
11. कोई अन्य — वष में पड़ी लोहे चमकती क ल पर खुरदरी, भूरी, परतदार तह (जंग) बन जाती है। एक नया पदाथ बना है।
की कील
com g l a
m . a
gl ase
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स्वयं जाँ चए: अपने अवलोकन स्तंभ को प ढ़ए। जहाँ भी आपने नई गंध, नया रंग, राख, पुनः नह लौटाया जा
सकता जैसे शब्द लखे ह, वहाँ लगभग न त रूप से रासाय नक प रवतन हुआ है।

co m
m .
o m l a se
g कर सकते ह? उन प रवतन क एक
.c क्या आप अपने आस-पास होने वाले अन्य प रवतन के वषय म वचार
a
se mप्र.2

a
agl
सूची भी बनाइए।

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co agl

m .
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हाँ। ता लका 5.1 म जोड़ने योग्य कुछ प रवतन इस प्रकार ह —

g l as
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रसोईघर म: दूध का दही जमना, गे ँ पीसकर आटा बनना, आटा गूँधना, तवे पर रोट सकना, मूँगफली भुनना, दूध उबलना,
चाय म चीनी घुलना, कटे सेब का भूरा होना।

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m as e
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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक AglaSem · NCERT Solutions

घर एवं व ालय म: प सल छ लना, पुरानी कॉपी फाड़ना, कागज क नाव बनाना, चॉक का टू टना, गीले श्यामपट्ट का सूखना,
लोहे के गेट पर जंग लगना, मोमबत्ती का जलना, गैस चूल्हे का जलना।
प्रकृ त म: बीज का अंकु रत होना, पत्ती का पीला होकर गरना, फल का पकना, शीत ऋतु म घास पर ओस जमना, बादल
बनना एवं वषा होना, नद के कंकड़ का चकना होना, सूखी प त्तय का सड़कर खाद बनना।
हमारे शरीर म: हमारी लंबाई बढ़ना, बाल एवं नाखून बढ़ना, घाव भरना, खाए हुए भोजन का पाचन।

ऐसा क्य होता है: इन सभी को एक ही कसौट से छाँटा जा सकता है — क्या नया पदाथ बना? प सल छ लना,
कागज मोड़ना और ओस जमना भौ तक ह। दही जमना, जंग लगना, जलना, पकना, सड़ना और पाचन रासाय नक
ह।

प्र.3 क्या हम इन प रवतन को व भन्न श्रे णय म व्यव त कर सकते ह?

हाँ। प रवतन को एक से अ धक आधार पर श्रेणीबद्ध कया जा सकता है, और एक ही प रवतन कई श्रे णय म आ सकता है।

श्रेणीकरण का आधार श्रे णयाँ उदाहरण

क्या नया पदाथ बनता है? भौितक पिरवतन / रासायिनक बफ का िपघलना (भौितक ) · लकड़ ी का जलना
पिरवतन (रासायिनक )

क्या मूल स्वरूप पुनः प्राप्त हो सकता उत्क्रमणीय / अनुत्क्रमणीय जल का उबलना (उ त्क्रमणीय) · पॉपकॉन बनना
है? (अनुत्क्रमणीय)

क्या हम यह प रवतन चाहते ह? वांछनीय / अवांछनीय दू ध का दही बनना (वांछनीय) · लोहे में जंग लगना
(अवाछं नीय)

प रवतन कतना तीव्र है? तीव / धीमा मैग्नीिशयम का जलना (तीव) · च ानों का अपक्षय (अत्यंत
धीमा)

प रवतन कसने कया? पाकृ ितक / मानव-िनिमत फलों का पकना (पाकृ ितक ) · सिब्जयाँ काटना (मानव-
िनिम त)

इस अध्याय म जस आधार का उपयोग कया गया है वह पहला है — भौ तक प रवतन एवं रासाय नक प रवतन।

क्रयाकलाप 5.2 — आइए, बनाएँ और चचा कर — पृष्ठ 59

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक AglaSem · NCERT Solutions

5.1 कसी पदाथ के स्वरूप म प रवतन हो सकता है परंतु मूल रूप समान रहता है!

क्रयाकलाप

प्र.1 कागज के कुछ पृष्ठ ली जए तथा उन्ह मोड़कर व भन्न वस्तुए ँ बनाइए ( चत्र 5.1)। क्या कागज क बनी वस्तुओं
क तह को खोलकर आप पुनः पहले जैसा कागज प्राप्त कर सकते ह?

नाव पक्षी िततली कागज का हवाई जहाज

मेढक प्याला टोपी

चत्र 5.1, पृष्ठ 59 — कागज से बनी हुई वस्तुए ँ (पाठ्यपुस्तक के छाया चत्र का पुनःरेखां कत रेखा चत्र)।

हाँ। नाव, हवाई जहाज, च ड़या अथवा ततली क तह खोलने पर हम वही कागज पुनः प्राप्त हो जाता है — वही आमाप, वही रंग,
वही भार। केवल तह क रेखाएँ शेष रह जाती ह।

ऐसा क्य होता है: मोड़ने से केवल कागज क आकृ त बदलती है। पदाथ — कागज — ज्य का त्य रहता है।
चूँ क कोई नया पदाथ नह बनता, अतः यह एक भौ तक प रवतन है, और इसे पुनः पहले जैसा कया जा सकता है,
अतः यह उत्क्रमणीय भी है।

क्या आप जानते ह? बना काटे और बना चपकाए कागज मोड़कर वस्तुएँ बनाने क कला को ओ रगामी कहते ह।
प्रत्येक ओ रगामी वस्तु यह दशाती है क भौ तक प रवतन स्वरूप को पूणतः बदल सकता है, पदाथ को नह ।

प्र.2 एक गुब्बारा ली जए और उसे फुलाइए। अब अपनी पकड़ ढ़ ली करते हुए गुब्बारे म से वायु बाहर नकलने द जए।
क्या आपको गुब्बारा पुनः मूल त म प्राप्त होता है?

हाँ। वायु बाहर नकलते ही रबर सकुड़ जाती है और हम वही बना फुलाया हुआ गुब्बारा पुनः प्राप्त हो जाता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक AglaSem · NCERT Solutions

फु लाने पर: रबर की िझल्ली फै लती है → गुब्बारा बड़ ा हो जाता है

वायु िनकलने पर: रबर पूववत हो जाती है → गुब्बारा पुन ः छोटा

पहले का पदाथ = बाद का पदाथ = रबर

ऐसा क्य होता है: वायु भरने से केवल रबर तनती है और गुब्बारे का आमाप एवं आकृ त बदलती है। कोई नया
पदाथ नह बनता, अतः यह एक भौ तक तथा उत्क्रमणीय प रवतन है।

प्र.3 एक अन्य गुब्बारा लेकर उसे फुलाइए और उसके मुँह को मजबूती से पकड़े र हए। अब इसम एक सुई चुभाइए।
क्या होता है? क्या आप गुब्बारे को पुनः उसक मूल त म प्राप्त कर सकगे?

गुब्बारा तेज ध्व न के साथ फट जाता है और रबर के टु कड़ म बँट जाता है। नह — पूरा बना फुलाया गुब्बारा हम पुनः प्राप्त नह
होता।

ऐसा क्य होता है: तनी हुई रबर अत्य धक दबाव म होती है। सुई एक छोटा-सा छे द करती है, और दरार क्षण भर म
पूरी झल्ली म फैल जाती है। फर भी टु कड़े रबर ही रहते ह — कोई नया पदाथ नह बनता। अतः गुब्बारे का फटना
भी एक भौ तक प रवतन है, बस यह अनुत्क्रमणीय है।

संकेत: “भौ तक” और “उत्क्रमणीय” को एक न सम झए। गुब्बारे का फटना, चॉक का चूरा होना और कागज का
फटना — तीन ऐसे भौ तक प रवतन ह जन्ह उत्क्र मत नह कया जा सकता। भौ तक प रवतन क कसौट केवल
यही है — कोई नया पदाथ नह बनता।

प्र.4 चॉक के एक छोटे टु कड़े को पीसकर चूरा क जए। क्या आप इस चूरे से पुनः चॉक प्राप्त कर सकते ह?

नह — चूरे को दबाकर पुनः चॉक क छड़ नह बनाई जा सकती। परंतु यह चूरा चॉक ही है: वही श्वेत रंग, श्यामपट्ट पर वैसे ही
लखता है, वही स्पश।

ऐसा क्य होता है: पीसने से एक बड़ा टु कड़ा असंख्य सूक्ष्म कण म बँट जाता है। केवल आमाप बदला है, पदाथ
नह । अतः यह एक भौ तक प रवतन है जसे घर पर उत्क्र मत नह कया जा सकता।

करके दे खए: इस चूरे को उँ गली से श्यामपट्ट पर रग ड़ए। यह उसी प्रकार लखता है जैसे छड़ लखती थी। यही
प्रमाण है क कोई नया पदाथ नह बना।

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प्र.5 क, ख और ग म सूचीबद्ध कए गए प रवतन म क्या कोई समानता है?

हाँ — तीन म केवल स्वरूप बदला, पदाथ वही का वही रहा।

प रवतन क्या बदला पहले का पदाथ बाद का पदाथ

क. कागज से वस्तुएँ बनाना आकृ ित कागज कागज

ख. गुब्बारा फुलाना / फोड़ना आमाप एवं आकृ ित रबर रबर

ग. चॉक का चूरा करना आमाप चॉक चॉक

चूँ क इनम से कसी म भी कोई नया पदाथ नह बनता, अतः ये तीन भौ तक प रवतन ह। पुस्तक क प रभाषा भी यही है —
ऐसे प रवतन जनम केवल भौ तक गुण, जैसे आकार, आमाप और अव ा बदलते ह, भौ तक प रवतन कहलाते ह।

क्रयाकलाप 5.3 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 60
5.2 जब पदाथ के स्वरूप म प रवतन होता है तथा वह अपने मूल रूप म नह रहता!

क्रयाकलाप

प्र.1 अब भन्न- भन्न न लय क सहायता से एक-एक करके प्रत्येक गलास म वायु फूँकते हुए अवलोकन क जए। क्या
आप कोई प रवतन दे खते ह?

नली नली

क काँच के िगलास ख काँच के िगलास
में नल का जल में चूने का पानी

(क) (ख)

चत्र 5.2, पृष्ठ 60 — नली ारा (क) नल के जल म और (ख) चूने के पानी म वायु फूँकते हुए।

हाँ — परंतु केवल गलास ‘ख’ म।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक
g l AglaSem · NCERT Solutions

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गलास उसम वायु फूँकने पर क्या दखता है प रवतन का प्रकार

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क्या है
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क नल का केवल बुलबुले उठते ह। जल पहले जैसा ही दखता है। कोई रासायिनक
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पिरवतन नही ं

ख चूने का बुलबुले उठते ह और स्वच्छ चूने का पानी दू धया हो जाता है। कुछ समय र रासायिनक पिरवतन

co m
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पानी छोड़ने पर श्वेत पदाथ तली म बैठ जाता है।

em
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तली म बैठने वाला श्वेत ठोस एक नया पदाथ है — कै ल्सयम काब नेट, जो जल म अघुलनशील है। चूँ क एक अथवा एक से अ धक
नए पदाथ बनते ह, अतः यह एक रासाय नक प रवतन है, जो रासाय नक अ भ क्रया ारा होता है —

co m
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as
कै िल्सयम हाइडॉक्साइड + काबन डाइऑक्साइड → कै िल्सयम काब ने ट + जल

com
(चूने .का
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पानी) (िनःश्विसत वायु से) (श्वेत , अघुलनशील पदाथ)

a se
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ऐसा क्य होता है: हम जो वायु बाहर छोड़ते ह उसम काबन डाइऑक्साइड अ धक होती है। गलास ‘क’ म यह

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केवल बुलबुल के रूप म नकल जाती है, क्य क साधारण जल के साथ इसक कोई दृश्य अ भ क्रया नह होती।

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गलास ‘ख’ म यह चूने के पानी म घुले कै ल्सयम mहाइ ॉक्साइड से अ भ क्रया कर कै ल्सयम काब नेट के सूक्ष्म श्वेत
a े रहते ह, इसी लए चूने का पानी दू धया दखाई दे ता है।
कण बनाती है। ये कण घुलते नह , द्रव मlलटक
ag

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सावधानी: नली से धीरे-धीरे फूँ कए, कभी ख चए मत। चूने का पानी नगलना हा नकारक है।
m .
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a glक्रयाकलाप 5.4 — आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 61
5.2 जब पदाथ के स्वरूप म प रवतन होता है तथा वह अपने मूल रूप म नह रहता!
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क्रयाकलाप
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प्र.1 agl
एक परखनली म एक चम्मच सरका या न बू का रस ली जए। उसम एक चुटक बे कग सोडा (सो डयम हाइ ोजन

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काब नेट) मलाइए। आपने क्या अवलोकन कया?

. co
se m
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g गैस के बुलबुल का झाग परखनली के
.c म तुरंत बुदबुदाहट आरंभ हो जाती है। हम बुदबुदाहट क ध्व न सुनाई देती हैaऔर

se mमश्रण
a
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ऊपरी भाग म भर जाता है। परखनली स्पश म थोड़ी ठं डी भी लगती है।

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co agl
ऐसा क्य होता है: सरका (और न बू का रस) अम्लीय है तथा बे कग सोडा एक हाइ ोजन काब नेट। मलते ही

m .
e
दोन म अ भ क्रया होती है और एक गैस मुक्त होती है। जन दो पदाथ म गैस थी ही नह , उनके मलने पर गैस

g l as
नकलना इस बात का स्पष्ट संकेत है क नया पदाथ बना है — अथात रासाय नक प रवतन हुआ है।
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संकेत: बे कग सोडा एक चुटक ही डा लए। अ धक डालने पर झाग परखनली से बाहर नकल आता है और गैस का
परीक्षण करने से पहले ही वह उड़ जाती है।

प्र.2 चत्र 5.3 (क) म दशाए अनुसार इस गैस को एक अन्य परखनली म लए गए ताजा चूने के पानी म प्रवा हत
क जए। आपने क्या अवलोकन कया?

चूने का पानी
काबन डाइऑक्साइड गैस
के बुलबुले
िसरका और बेिकं ग
सोडा
चत्र 5.3 (क), पृष्ठ 61 — सरके और बे कग सोडा से बनी गैस को दूसरी परखनली के चूने के पानी म प्रवा हत करना।

स्वच्छ, रंगहीन चूने का पानी दू धया हो जाता है — ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप 5.3 म वायु फूँकने पर हुआ था।

िसरका + बेिकं ग सोडा से बनी गैस → चूने के पानी में पवािहत

स्वच्छ चूने का पानी → दू िधया

कु छ दे र रखने पर तली में श्वेत अघुलनशील ठोस बैठ जाता है

ऐसा क्य होता है: यह गैस चूने के पानी म उप त कै ल्सयम हाइ ॉक्साइड से अ भ क्रया कर कै ल्सयम काब नेट
के सूक्ष्म कण बनाती है, जो जल म नह घुलते। द्रव म लटके ये कण प्रकाश को बखेरते ह, इसी लए चूने का पानी
दू धया दखता है।

स्वयं जाँ चए: चूने का पानी ताजा एवं स्वच्छ होना चा हए। पुराना चूने का पानी वायु क काबन डाइऑक्साइड से
पहले ही अ भ क्रया कर चुका होता है और स्पष्ट प रणाम नह दे ता।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 चूने का पानी दू धया हो जाता है। सरका और बे कग सोडा म श्रत करने पर न मत गैस के वषय म आप क्या
नष्कष नकालते ह?

हम यह नष्कष नकालते ह क न मत गैस काबन डाइऑक्साइड है।

ऐसा क्य होता है: चूने के पानी का दू धया होना काबन डाइऑक्साइड का परीक्षण माना जाता है। क्रयाकलाप
5.3 म जस वायु को हमने फूँका था उसम काबन डाइऑक्साइड क उप त ात थी और उसने चूने के पानी को
दू धया कर दया था। यहाँ एक अ ात गैस ठ क वही करती है, अतः वह वही गैस होगी। चूँ क आरंभ म न सरके म
और न बे कग सोडा म काबन डाइऑक्साइड थी, अतः यह एक नया पदाथ है और यह अ भ क्रया एक रासाय नक
प रवतन है —

िसरका + बेिकं ग सोडा → काबन डाइऑ क्साइड + अन्य पदाथ

यही क्रयाकलाप आप चत्र 5.3 (ख) के अनुसार परखन लय के ान पर दो छोट बोतल एवं एक नम्य नली से भी कर सकते ह।

प्र.4 इस क्रयाकलाप को बे कग सोडा तथा जल के साथ दोहराइए। क्या आप गैस के बुलबुले बनते हुए दे खते ह? क्या
यह एक भौ तक प रवतन है या रासाय नक प रवतन है?

न बुदबुदाहट होती है और न गैस के बुलबुल क धार बनती है। बे कग सोडा केवल जल म घुल जाता है और द्रव स्वच्छ बना
रहता है। (चूण से चपक वायु के कुछ छोटे बुलबुले ऊपर आ सकते ह, परंतु बुदबुदाहट क ध्व न नह होती।) यह एक भौ तक
प रवतन है।

बे कग सोडा + सरका बे कग सोडा + जल

क्या दखता है तेज बुद बुद ाहट, अनेक गैस बुल बुले चूण चुपचाप घुल जाता है

चूने के पानी का परीक्षण चूने का पानी दू िधया चूने का पानी स्वच्छ ही रहता है

नया पदाथ बना? हाँ — काबन डाइऑक्साइड नही ं

प रवतन का प्रकार रासायिनक पिरवतन भौितक पिरवतन

ऐसा क्य होता है: काबन डाइऑक्साइड मुक्त करने के लए बे कग सोडा को कसी अम्ल क आवश्यकता होती है।
सरका एवं न बू का रस अम्ल ह, साधारण जल नह । जल म बे कग सोडा के कण केवल जल-कण के बीच फैल
जाते ह — यही घुलना है, और जल वा ष्पत कर बे कग सोडा पुनः प्राप्त कया जा सकता है। कोई नया पदाथ न
बनने के कारण यह भौ तक प रवतन है।

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क्या आप जानते ह? इसी कारण ढोकला या केक क व ध म सोडा के साथ दही, न बू का रस अथवा ईनो मलाने
को कहा जाता है। अम्ल के बना गैस नह बनेगी और घोल फूलेगा नह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 62
5.3.2 दहन

प्र.1 पूव अध्याय ‘धातुओं और अधातुओं का संसार’ म मैग्नी शयम रबन के जलने वाले क्रयाकलाप का स्मरण
क जए ( चत्र 5.5)। क्या आप पूवानुमान लगा सकते ह क यह प रवतन भौ तक है या रासाय नक?

श् वे त ध ुआ ँ

िचमटे मे ं पकड़ ी

मैग्नीिशयम िरबन

चमकील ा श् वे त प काश

लै ंप की ल ौ वॉच ग्ल ास

चत्र 5.5, पृष्ठ 62 — चमक ले श्वेत प्रकाश के साथ जलती हुई मैग्नी शयम रबन (पाठ्यपुस्तक के छाया चत्र का
पुनःरेखां कत रेखा चत्र)।

यह एक रासाय नक प रवतन है।

मैग् नीिशयम + ऑक्सीजन → मैग् नीिशयम ऑक्साइड + ऊष्मा + पकाश

(िरबन) (वायु) (श्वेत चूण)

तीन अवलोकन इसे सद्ध करते ह —

1. चमक ला, रजत जैसा, लचीला रबन समाप्त हो जाता है और पीछे श्वेत चूण शेष रहता है — एक पूणतः भन्न पदाथ,
मैग्नी शयम ऑक्साइड।

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2. च धया दे ने वाला श्वेत प्रकाश तथा बहुत सी ऊष्मा उत्पन्न होती है।
3. यह प रवतन उत्क्र मत नह कया जा सकता — श्वेत चूण को प्रयोगशाला म पुनः मैग्नी शयम रबन नह बनाया जा सकता।

ऐसा क्य होता है: पयाप्त गरम होने पर मैग्नी शयम वायु क ऑक्सीजन से संयोग कर लेता है। नए पदाथ
मैग्नी शयम ऑक्साइड म मैग्नी शयम का कोई गुण शेष नह रहता — न वह चमकता है, न मुड़ता है, न जलता है।
जस अ भ क्रया म कोई पदाथ ऑक्सीजन से संयोग कर ऊष्मा एवं/अथवा प्रकाश दे ता है उसे दहन कहते ह।

सावधानी: जलते हुए रबन को सीधे मत दे खए; उसका प्रकाश आँख को हा न पहुँचा सकता है। इसी कारण से
लोहे म जंग लगना ( चत्र 5.4) भी रासाय नक प रवतन है — वहाँ भी नया भूरा पदाथ आयरन ऑक्साइड बनता है।

क्रयाकलाप 5.5 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 62
5.3.2 दहन — क्या ऑक्सीजन अ नवाय है?

क्रयाकलाप

प्र.1 दो भन्न- भन्न पे डश पर सावधानीपूवक दो समान मोमब त्तयाँ जलाइए। इनम से कसी एक मोमबत्ती को चत्र
5.6 म दशाए अनुसार काँच के गलास से ढ कए। दोन तय म मोमबत्ती क लौ का क्या होता है?

लौ बुझ जाती है; भीतर धुआँ

काँच का िगलास

जलती हुई मोमब ी

(क) (ख)

चत्र 5.6, पृष्ठ 62 — मोमबत्ती (क) जलती हुई, (ख) काँच के गलास से ढक हुई।

खुली मोमबत्ती जलती रहती है। ढक हुई मोमबत्ती क लौ मंद पड़कर काँपती है और कुछ समय बाद बुझ जाती है।

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मोमबत्ती वायु क आपू त लौ का क्या होता है

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(क) बना ढक
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ताजी वायु िनरंतर िमलती रहती है
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िस्थर लौ के साथ जलती रहती है

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(ख) काँच के गलास से ढक लौ छोटी होती जाती है और कु छ समय बाद बुझ जाती है
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के वल िगलास के भीतर बंद वायु

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ऐसा क्य होता है: जलने म वायु क ऑक्सीजन व्यय होती है। खुली मोमबत्ती को ताजी ऑक्सीजन नरंतर मलती

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रहती है, अतः वह जलती रहती है। गलास के भीतर ऑक्सीजन क मात्रा सी मत है। जलने के साथ वह समाप्त होती
जाती है और उसका
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ान काबन डाइऑक्साइड ले लेती है, अतः लौ बुझ जाती है। इससे सद्ध होता है क दहन के
लए ऑक्सीजन अ नवाय है।

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m मोमबत्ती अ धक
करके दे खए: दो समान मोमब त्तय पर एक बड़ा और एक छोटा गलास ढ कए। बड़े गलासeवाली
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दे र जलतीco la है।
क्य क बड़े गलास म अ धक वायु और इस लए अ धक ऑक्सीजन बंदgहोती
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 63

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5.3.2 दहन · व ान एवं समाज · क्या वायु क उप त दहन के लए अ नवाय है?

व ान एवं समाज

प्र.1 हम अवलोकन करते ह क जस मोमबत्ती को ढका नह गया [ चत्र 5.6 (क)], वह जलती रहती है जब क जस
मोमबत्ती को काँच के गलास से ढका गया [ चत्र 5.6 (ख)] वह कुछ समय बाद जलना बंद कर दे ती है। ऐसा क्य
होता है?

लौ बुझ जाती है; भीतर धुआँ

काँच का िगलास

जलती हुई मोमब ी

(क) (ख)

चत्र 5.6, पृष्ठ 62 — मोमबत्ती (क) जलती हुई, (ख) काँच के गलास से ढक हुई।

क्य क ढक हुई मोमबत्ती को वायु क नरंतर आपू त नह मलती। गलास के भीतर क ऑक्सीजन शीघ्र ही समाप्त हो जाती है
और ऑक्सीजन के बना लौ बुझ जाती है।

मोम + ऑ क्सीजन (वायु से) → काबन डाइऑक्साइड + जलवाष्प + ऊष्मा + पकाश

िगलास के भीतर: ऑक्सीजन समाप्त → अिभिक्रया रुकी → लौ बुझ गई

ऐसा क्य होता है: वायु का जो घटक दहन म सहायक होता है वह ऑक्सीजन है। ढक मोमबत्ती जलते-जलते मोम
के काबन को काबन डाइऑक्साइड म बदल दे ती है, जो गलास के भीतर एकत्र होती जाती है। काबन डाइऑक्साइड
दहन म सहायक नह है, अतः जैसे-जैसे ऑक्सीजन का ान वह लेती जाती है, लौ मंद पड़कर बुझ जाती है।

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प्र.2 मोमबत्ती पर पलट कर रखे गए काँच के गलास के अंदर काबन डाइऑक्साइड क उप त से इसक पु क
जा सकती है। आप काबन डाइऑक्साइड गैस क उप त का परीक्षण कैसे कर सकते ह?

चूने के पानी के परीक्षण ारा। पे डश म थोड़ी मात्रा म ताजा चूने का पानी डा लए (अथवा मोमबत्ती बुझते ही गलास म
डालकर हलाइए)। चूने का पानी दू धया हो जाता है, जससे काबन डाइऑक्साइड क उप त क पु ष्ट होती है।

कै िल्सयम हाइडॉक्साइड + काबन डाइऑक्साइड → कै िल्सयम काब ने ट + जल

(चूने का पानी, स्वच्छ) (श्वेत , अघुलनशील → दू िधया)

ऐसा क्य होता है: गलास के भीतर क काबन डाइऑक्साइड मोम से प्राप्त काबन और वायु म उप त
ऑक्सीजन क अ भ क्रया से बनी थी। कै ल्सयम काब नेट जल म नह घुलता, अतः उसके सूक्ष्म श्वेत कण द्रव म
लटके रहते ह और चूने का पानी दू धया दखाई दे ता है — यही इसे इतना उपयोगी परीक्षण बनाता है, क्य क इसका
प रणाम आँख से दखता है।

प्र.3 य द कसी व्य क्त के वस्त्र म आग लग जाए तो आग बुझाने का सबसे अ ा उपाय क्या है?

व्य क्त के चार ओर एक कंबल या कोई मोटा वस्त्र कसकर लपेट द जए। इससे वायु क आपू त बंद हो जाती है और आग
बुझ जाती है।

व्य क्त को रुकने, गरने और भू म पर लोटने को क हए — लोटने से भी लौ दब जाती है।
य द जल पास हो तो उसे भी डाला जा सकता है।
सहायता के लए पुका रए और जलन छोट दखे तब भी च कत्सक को दखाइए।

ऐसा क्य होता है: आग को तीन चीज चा हए — ईंधन, ऑक्सीजन और ऊष्मा। यहाँ वस्त्र ही ईंधन है जसे तुरंत
हटाया नह जा सकता, अतः सबसे शीघ्र जो हटाया जा सकता है वह है ऑक्सीजन। कंबल जलते वस्त्र और वायु के
बीच एक आवरण बना दे ता है और लौ उसी कारण बुझ जाती है जस कारण ढक हुई मोमबत्ती बुझी थी।

सावधानी: आग बुझाने के लए सं े षत रेश से बने कंबल अथवा वस्त्र का उपयोग कदा प नह करना चा हए —
ये पघलकर त्वचा से चपक सकते ह और चोट कह अ धक गंभीर हो जाती है। सूती, ऊनी अथवा जूट का प्रयोग
क जए। व्य क्त को दौड़ने भी मत द जए — दौड़ने से ताजी वायु मलकर लौ और भड़कती है।

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प्र.4 हम यह भी जानते ह क कागज एक दहनशील पदाथ है परंतु इसे वायु म कतनी भी दे र रखा जाए पर फर भी
इसका दहन नह होता है। दहन प्रारंभ करने के लए और क्या आवश्यक है?

ऊष्मा — इतनी ऊष्मा क पदाथ अपने प्रज्वलन तापमान तक पहुँच जाए, अथात वह न्यूनतम तापमान जस पर वह आग पकड़ता
है।
अतः दहन के लए तीन बात एक साथ आवश्यक ह, जन्ह अ ग्न त्रकोण कहते ह —

कोई एक भुजा हटाइए, आग बुझ जाएगी

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न
सीज

ऊष्
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ं न (दहनशील पदाथ)
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अ ग्न त्रकोण ( चत्र 5.8) — आग के लए ईंधन, ऑक्सीजन और ऊष्मा तीन एक साथ चा हए।

1. एक दहनशील पदाथ, जसे ईंधन भी कहा जाता है — कागज, लकड़ी, कपास, मट्ट का तेल।
2. ऑक्सीजन — जो वायु से प्राप्त होती है।
3. ऊष्मा, जो ईंधन को उसके प्रज्वलन तापमान तक पहुँचाती है।

ऐसा क्य होता है: मेज पर रखे कागज के पास तीन म से दो बात पहले से ह — वह स्वयं ईंधन है और वायु चार
ओर है। कमी तीसरी क है। कमरे का तापमान कागज के प्रज्वलन तापमान से बहुत कम होता है, इस लए वह स्वयं
कभी आग नह पकड़ता। जलती मा चस क तीली अथवा लस से क द्रत सूय क करण वही ऊष्मा प्रदान करती ह।

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संकेत: आग बुझाने का हर उपाय इसी त्रकोण क कोई एक भुजा हटाता है — कंबल या रेत ऑक्सीजन हटाते ह,
जल ऊष्मा हटाता है, और गैस स लडर का रेगुलेटर बंद करना ईंधन हटाता है।

क्रयाकलाप 5.6 — आइए, जाँच कर — पृष्ठ 64
क्या वायु क उप त दहन के लए अ नवाय है?

क्रयाकलाप

प्र.1 कागज के एक टु कड़े को चमटे क सहायता से पक ड़ए और इसके पास जलती हुई मा चस क तीली लाइए। यह
तेजी से आग पकड़ लेता है। क्या हम यह कह सकते ह क दहन-प्र क्रया प्रारंभ करने के लए अ ग्न क
आवश्यकता होती है?

नह । वास्तव म आवश्यकता ऊष्मा क है, लौ क नह । लौ तो वह ऊष्मा दे ने का केवल एक सु वधाजनक साधन है।

ऐसा क्य होता है: मा चस क तीली क लौ कागज के प्रज्वलन तापमान से पहले ही कह अ धक गरम होती है,
अतः कागज क्षण भर म उस तापमान तक पहुँचकर तुरंत आग पकड़ लेता है। परंतु इसी क्रयाकलाप का अगला
चरण सद्ध कर दे ता है क लौ अ नवाय नह है — आवधक लस से क द्रत सूय क करण, जहाँ कह कोई अ ग्न नह
है, कागज को उतनी ही न तता से जला दे ती ह।

सावधानी: यह क्रयाकलाप शक्षक अथवा कसी वयस्क के नदशन म ही क जए और कागज सदै व चमटे से
पक ड़ए।

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eेmलए वह रखा रहने
प्र.2 कागज का दूसरा टु कड़ा ली जए। सूय क करण को आवधक लस क सहायता से कागज पर क त कर एक

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छोटा और चमक ला बदु बनाइए जैसा क चत्र 5.7 (क) म दशाया गया है। इसे कुछ समय क
द जए।.cआपने
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सूय की िकरणें
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कागज

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आवधक लेसं

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a(पाठ्यपुस्तक के छाया चत्र का पुनःरेखां कत रेखा चत्र)।
चत्र 5.7 (क), पृष्ठ 64 — आवधक लस से सूय क करण को कागज पर एक छोटे चमक ले बदु पर क त करना

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gl जलने लगता है [ चत्र 5.7 (ख)] — जब क कोई लौ उसके पास लाई ही नह गई।
क्षण तक कुछ नह होता। फर चमक ला बदु भूरा पड़ता है, कागज से धुआँ नकलना आरंभ हो जाता है और अंत म वह

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comिबंदु पर के ं िदत g l a
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ं पर फैली सूय की िकरणे ं → एक छोटे चमकीले
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emका तापमान िनरंतर बढ़ ता है
लेस

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िबंद ु कागज को गरम करता है → कागज

तापमान पज्वलन तापमान तक पहँच
a ु ा → धुआ ँ → आग

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ag है, अतः उसका तापमान तेजी से
.cआता है। अब वह सारी ऊजा कागज के एक अत्यंत छोटे भाग को गरम करती
ऐसा क्य होता है: आवधक लस अपने पूरे पृष्ठ पर पड़ने वाले सूय के प्रकाश को एकत्र कर एक ही छोटे बदु पर ले

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बढ़ता है। इससे यह नष्कष नकलता है क कसी पदाथ का आग के बना भी दहन हो सकता है।

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स्वयं जाँ चए: प्रकाश का बदु जतना छोटा और तीक्ष्ण होगा, कागज उतनी ही शीघ्र जलेगा। बड़ा धुंधला बदु उसी

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ऊजा को बड़े क्षेत्र म फैला दे ता है और कागज केवल गरम होकर रह जाता है।

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प्र.3 हम अवलोकन करते ह क कागज से धुआँ नकलना आरंभ हो जाता है और यह जलने लगता है [ चत्र 5.7 (ख)]।
इससे यह नष्कष नकलता है क कसी पदाथ का आग के बना भी दहन हो सकता है। हम इस प रवतन क
व्याख्या कैसे कर सकते ह?

सूय की िकरणें
धुआँ
कागज

कागज मे ं आग

आवधक लेसं

चत्र 5.7 (ख), पृष्ठ 64 — कागज से धुआँ नकलना आरंभ होता है और वह जलने लगता है (पाठ्यपुस्तक के छाया चत्र
का पुनःरेखां कत रेखा चत्र)।

प्रज्वलन तापमान क अवधारणा से।
सूय क करण को क द्रत करने से कागज गरम हो जाता है। समय के साथ उसका तापमान बढ़ता जाता है। कुछ समय प ात
कागज इतना गरम हो जाता है क वह जलने लगता है। वह न्यूनतम तापमान जस पर कोई पदाथ आग पकड़ता है, उसका
प्रज्वलन तापमान कहलाता है।

त ऊष्मा का कतना समय कारण
ोत लगा

कागज के पास जलती मा चस क लौ लगभग तत्काल लौ कागज के प्रज्वलन तापमान से पहले ही अ धक
तीली गरम है

लस से क द्रत सूय क करण कें िद त सूय- कु छ समय पश्चात कागज को धीरे-धीरे प्रज्वलन तापमान तक गरम होना
पकाश पड़ता है

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक दहनशील पदाथ का अपना प्रज्वलन तापमान होता है। उससे नीचे पदाथ केवल गरम
होता है; उस तापमान पर अथवा उससे ऊपर वह जलने लगता है। इसी लए कागज वष तक वायु म पड़ा रह सकता
है और आग नह पकड़ता — वह कभी अपने प्रज्वलन तापमान तक पहुँचता ही नह ।

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क्रयाकलाप 5.7 — सो चए, चचा क जए और साझा क जए — पृष्ठ 65
5.4 क्या भौ तक और रासाय नक प रवतन एक ही प्र क्रया म हो सकते ह?

सो चए, चचा क जए और साझा क जए

प्र.1 चत्र 5.9 को दे खए। इसके साथ ही व ेषण क जए क व ाथ जलती हुई मोमबत्ती के वषय म क्या चचा कर
रहे ह। आप क्या सोचते ह?

मोम िपघलता है और मोम िपघलता है, बहता है और िफर
वाष्पीकृत होता है… िभन्न-िभन्न आकार मे ं जम जाता है…

मुझे लगता है िक मोम के
जलने से नए पदाथ बनते हैं…

हो सकता है…

संभावना है िक मोमब ी की
ब ी/धागा तरल मोम को
ऊपर खीच ं लेती है…

चत्र 5.9, पृष्ठ 65 — पाँच व ाथ इस पर चचा करते हुए क मोमबत्ती के जलने पर क्या प रवतन होते ह।

सभी व ाथ आं शक रूप से ठ क कह रहे ह — और मलकर वे पूरी कहानी बता दे ते ह। मोमबत्ती के जलने म भौ तक और
रासाय नक दोन प रवतन एक साथ होते ह।

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व ाथ का कथन क्या यह सही है? प रवतन का
प्रकार

“मोम पघलता है और वाष्पीकृत होता है...” सही — ठोस मोम िपघलता है और लौ के पास द व मोम भौितक
वाष्प बन जाता है

“मोम पघलता है, बहता है और फर भन्न- भन्न आकार म सही — िकनारे से बहा मोम ठं डा होकर पुनः जम जाता भौितक
जम जाता है...” है

“संभावना है क मोमबत्ती क बत्ती/धागा तरल मोम को सही — ब ी िपघले मोम को सोखकर लौ तक भौितक
ऊपर ख च लेती है...” पहुच
ँ ाती है

“मुझे लगता है क मोम के जलने से नए पदाथ बनते ह...” सही — मोम की वाष्प वायु की ऑक्सीजन में जलती है रासायिनक

वास्तव म होता यह है: मोमबत्ती का मोम पघलकर बत्ती म ऊपर चढ़ता है और लौ क ऊष्मा से वा ष्पत हो जाता है। यही मोम क
वाष्प जलकर लौ उत्पन्न करती है।

भौितक पिरवतन रासायिनक पिरवतन

ठोस मोम दव मोम ब ी मोम की वाष्प वाष्प जलती है
िपघलता है मे ं ऊपर चढ़ ता है बनती है → लौ

नया पदाथ नही ं — मोम प ुनः पाप्त हो सकता है नए पदाथ बनते है ं

एक ही जलती मोमब ी मे ं दोनों एक साथ

मोम का पघलना, बहना, जमना और वाष्पीकृत होना भौ तक प रवतन ह; मोम क वाष्प का जलना रासाय नक प रवतन है।

क्या आप जानते ह? माइकल फैराडे को मोमबत्ती इतनी रोचक लगी क 19व शताब्द म उन्ह ने मोमबत्ती का
रासाय नक इ तहास पर व्याख्यान क एक पूरी ंखला द । इसी के ारा उन्ह ने पघलने, वाष्पीकरण और दहन का
अंतर समझाया।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 66
5.5 क्या प रवतन ायी ह?

प्र.1 जब कसी वस्तु म प रवतन हो जाता है तो क्या हम उसे पुनः उसके मूल स्वरूप म ला सकते ह?

कभी हाँ, कभी नह । प रवतन दो समूह म बँट जाते ह — जन्ह उत्क्र मत कया जा सकता है और जन्ह नह ।

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जन्ह उत्क्र मत कया जा सकता है जन्ह उत्क्र मत नह कया जा सकता

बफ का िपघलना — जल को पुनः जमाकर बफ बनाई जा सकती है सिब्जयाँ काटना — कटे टुक ड़ े अपने मूल आमाप एवं आकृ ित में नही ं
लौट सकते

जल का वािष्पत होना — वाष्प को संघ िनत कर पुनः जल बनाया जा पॉपकॉन बनाना — यह कभी पुनः म क्का का दाना नही ं बन सकता
सकता है

रूमाल की तह लगाना, ग ब्ु बारा फु लाना, जल में चीनी घोलना लकड़ ी का जलना, लोहे में जंग लगना, दू ध का फटना

ऐसा क्य होता है: य द प रवतन ने केवल पदाथ क आकृ त, आमाप अथवा अव ा बदली है तो पदाथ अब भी
वद्यमान है और प्रायः पुनः प्राप्त कया जा सकता है। परंतु य द प रवतन म नया पदाथ बना है तो पुराना पदाथ
समाप्त हो चुका है, अतः उसे लौटाया नह जा सकता। इसी लए अ धकांश रासाय नक प रवतन अनुत्क्रमणीय होते
ह।

संकेत: उत्क्रमणीय और भौ तक एक ही बात नह ह। गुब्बारे का फटना और चॉक का चूरा करना भौ तक होते हुए
भी अनुत्क्रमणीय ह। नए पदाथ क जाँच सदै व अलग से क जए।

क्रयाकलाप 5.8 — आइए, सोच — पृष्ठ 66

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक
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ता लका 5.2 — क्या प रवतन को उत्क्र मत कया जा सकता है?
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क्रयाकलाप

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a s emतक हमने जन प रवतन पर चचा क है या जनके वषय म वातालाप कया है उन पर पुनः वचार क जए।
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अब
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प्र.1
इनम से हम कस वस्तु या पदाथ को पुनः उसी स्वरूप म वापस ला सकते ह जस रूप से हमने क्रयाकलाप

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आरंभ कया था? अपने अवलोकन को ता लका 5.2 म अ भले खत क जए।

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क्र.सं. प रवतन ag क्या पदाथ को मूल त म पुनः लाया जा सकता है (हाँ/नह )

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1. बफ के टु कड़ का पघलना हाँ

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2. स ब्जयाँ काटना नह

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l a se जल का उबलना हाँ

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4. मक्का से पॉपकॉन बनाना नह

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5.

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…
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12.

ता लका 5.2, पृष्ठ 66 — क्या प रवतन को उत्क्र मत कया जा सकता है? पहली चार पंm
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m a s e क्तयाँ पुस्तक म भरी हुई ह;
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पं क्त 5 से 12 तक आपको भरनी ह।

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इस अध्याय म चचा कए गए बारह प रवतन के साथ.पूcरoी क गई ता लका 5.2 नीचे द गई है। g
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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक AglaSem · NCERT Solutions

क्र.सं. प रवतन क्या पदाथ को मूल त म पुनः लाया जा कैसे, अथवा क्य नह
सकता है (हाँ/नह )

1. बफ के टुक ड़ों का हाँ जल को पुनः शीतक म रखकर जमा
िपघलना द जए

2. सिब्जयाँ काटना नही ं कटे टु कड़े पुनः जोड़े नह जा सकते

3. जल का उबलना हाँ वाष्प को संघ नत कर पुनः जल बनाइए

4. मक्का से पॉपकॉन बनाना नही ं नए पदाथ बन चुके ह; दाना नष्ट हो गया

5. कागज को मोड़कर वस्तुए ँ हाँ तह खो लए, वही कागज पुनः मल
बनाना जाता है

6. ग ब्ु बारा फु लाना हाँ वायु बाहर नकाल द जए

7. फु लाए हएु ग ब्ु बारे का नही ं फट रबर पुनः पूरी नह क जा सकती
फटना

8. चॉक का चूर ा करना नही ं चूरे को दबाकर पुनः छड़ नह बनाई जा
सकती

9. चुकं दर के रस का जल में हाँ जल वा ष्पत कर द जए, रंजक पदाथ
िमलना शेष रह जाता है

10. चूने के पानी में वायु नही ं एक नया पदाथ कै ल्सयम काब नेट बन
फूँ कना चुका है

11. मैग्नीिशयम िरबन का नही ं श्वेत मैग्नी शयम ऑक्साइड पुनः रबन
जलना नह बन सकता

12. लोहे की कील में जंग नही ं एक नया पदाथ आयरन ऑक्साइड बन
लगना चुका है

ऐसा क्य होता है: “नह ” वाली पं क्तयाँ दे खए। क्रमांक 4, 10, 11 और 12 रासाय नक प रवतन ह — पुराना
पदाथ अब है ही नह । क्रमांक 2, 7 और 8 भौ तक प रवतन ह जो फर भी अनुत्क्रमणीय ह, क्य क टु कड़ को
व्यावहा रक रूप से पुनः जोड़ा नह जा सकता। दोन प्रकार के कारण कसी प रवतन को ायी बना सकते ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 67

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5.6 क्या सभी प रवतन वांछनीय ह?

प्र.1 हमारे दै नक जीवन म अनेक उपयोगी प रवतन होते ह। उदाहरण के लए दूध का दही बनना, फल का पकना,
फल को काटना और भोजन पकाना। ये सभी वांछनीय प रवतन ह। क्या आप अपने चार ओर होने वाले कुछ
अन्य वांछनीय प रवतन के वषय म सोच सकते ह?

हाँ — हमारे आस-पास होने वाले अनेक प रवतन उपयोगी एवं वांछनीय ह।

घर म: दही से मक्खन नकलना, खमीर से आटा फूलकर डबल रोट का मुलायम होना, गीले वस्त्र का धूप म सूखना, पीने के
लए जल उबालना, चावल पकना, चाय क पत्ती से जल म रंग आना।
खेत एवं बगीचे म: बीज का अंकु रत होकर पौधा बनना, क लय का खलना, अनाज का पकना, रसोई के अप शष्ट एवं सूखी
प त्तय का सड़कर खाद बनना।
कारखाने एवं कायशाला म: मट्ट से बतन एवं ईंट बनना और पकना, लोहा पघलाकर औजार ढालना, कपास से धागा एवं
धागे से वस्त्र बनना, गन्ने के रस से गुड़ बनना।
हमारे शरीर म: भोजन का पाचन, घाव का भरना, हमारी लंबाई का बढ़ना।

इसके वपरीत कुछ प रवतन अवांछनीय होते ह — लोहे म जंग लगना, भंडारण के दौरान खाद्य पदाथ का क्षय होना, ग्रीष्म ऋतु म
दूध का फटना, रंग-रोगन सूखने के दौरान वाष्पीकरण से वायुमंडलीय प्रदूषण, तथा कार , रेल एवं हवाई जहाज म ईंधन क बढ़ती
खपत से वातावरण म काबन डाइऑक्साइड का बढ़ना।

ऐसा क्य होता है: वांछनीय अथवा अवांछनीय होना प रवतन का अपना गुण नह , ब ल्क प र त पर नभर
करता है। भोजन का अपघटन रसोई म अवांछनीय है, परंतु खाद के ग े म यही हम चा हए। गेट पर जंग लगना
अवांछनीय है, परंतु वही अ भ क्रया बेसाल्ट चट्टान पर वह सुंदर लाल परत बनाती है जो पुस्तक के चत्र 5.10 (ख) म
दखाई गई है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 67

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5.7.1 च ान का अपक्षय

प्र.1 क्या आपने चत्र 5.10 (क) म दशाए अनुसार पहाड़ के धरातल पर रेत, मृदा और पत्थर के ढे र दे खे ह? इन्ह
तलछट कहा जाता है। ये कैसे बने ह?

च ान का धरातल

तलछट — रेत, मदृ ा और पत्थर

चत्र 5.10 (क) — च ान के धरातल पर तलछट: रेत, मृदा और पत्थर के ढे र (पाठ्यपुस्तक के छाया चत्र का
पुनःरेखां कत रेखा चत्र)।

हाँ। ये तलछट बड़ी चट्टान के धीरे-धीरे टू टने से बनते ह — इस प्र क्रया को अपक्षय कहते ह, जसम भौ तक एवं रासाय नक दोन
प रवतन स म्म लत ह।

प रवतन का कसके कारण च ान पर प्रभाव
प्रकार

भौ तक जलवायुग त पिरिस्थितयों के कारण चट्टान दन म फैलती और रात म सकुड़ती है, अंततः दरार पड़ जाती है
तापमान में पिरवतन

भौ तक पेड़ों की बढ़ ती जड़ें जड़ दरार म घुसकर उन्ह चौड़ा करती ह और टु कड़े अलग हो जाते ह

भौ तक दरारों के भीतर जल का जमना जमने पर जल फैलता है और चट्टान को तोड़ दे ता है

रासाय नक जल तथा जल में उपिस्थत रसायनों चट्टान क संरचना ही बदल जाती है — जैसे लोहायुक्त काला बेसाल्ट
की च ान से अिभिक्रया आयरन ऑक्साइड क लाल परत बनाता है [ चत्र 5.10 (ख)]

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ऐसा क्य होता है: बड़ी चट्टान छोटे टु कड़ म टू टती ह, वे और छोटे टु कड़ म, और गुरुत्व उन्ह पहाड़ के धरातल तक
ले आता है जहाँ वे रेत, मृदा और पत्थर के ढे र के रूप म एकत्र हो जाते ह। हजार वष तक चलते रहने पर अपक्षय
से अंततः मृदा का नमाण होता है।

क्या आप जानते ह? चत्र 5.10 (ख) क तलछट-परत का लाल रंग वही आयरन ऑक्साइड है जो जंग लगने पर
लोहे क क ल को भूरा कर दे ता है। जो वषा गेट के साथ करती है, प्रकृ त वही पहाड़ के साथ कर रही है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 68
5.7.2 अपरदन

प्र.1 क्या आपने नद के तल पर अथवा झील म महीन रेत को एक त्रत होते हुए दे खा है?

हाँ। यह महीन रेत तब बनती है जब चट्टान, मृदा, कंकड़ और तलछट टू टकर वायु एवं बहते जल जैसी प्राकृ तक श क्तय ारा एक
ान से दूसरे ान पर चले जाते ह। इस प्र क्रया को अपरदन कहते ह।

बड़ ी च ान → कं कड़ एवं मृद ा में टू टना (अपक्षय)

वायु एवं बहते जल ारा इनका बहकर जाना (अपरदन )

झील अथवा महासागर में जल/वायु की गित घटी → पदाथ नीचे बैठ गया

तलछट हजारों वष ं में कठोर होकर → नई च ाने ं

ऐसा क्य होता है: तीव्र ग त से बहता जल और वायु अपने साथ ढ ला पदाथ ले जा सकते ह। जहाँ उनक ग त
घटती है — जैसे नद के झील अथवा सागर म मलने पर — वहाँ वे उस भार को सँभाल नह पाते और पदाथ तली म
बैठ जाता है। माग म कंकड़ आपस म और नद -तल से टकराते रहते ह, इसी लए नद के कंकड़ चकने एवं गोल
दखाई दे ते ह।

संकेत: भूस्खलन के दौरान होने वाला अपरदन एक भौ तक प रवतन है — चट्टान केवल टू टती और ानांत रत
होती है, कोई नया पदाथ नह बनता। इनम से अ धकतर प रवतन हजार वष म होते ह और उत्क्र मत नह कए जा
सकते।

आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 69

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अध्याय के अंत का अभ्यास, प्रश्न 1–10
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आइए, और अ धक सीख

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a s emल खत म से कौन-से कथन भौ तक प रवतन क वशेषताएँ ह? (i) पदाथ क अव ा प रव तत हो सकती
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नम्न
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प्र.1
है अथवा नह हो सकती है। (ii) भन्न गुण वाला एक पदाथ बनता है। (iii) कोई नया पदाथ नह बनता है। (iv)

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पदाथ म रासाय नक अ भ क्रया होती है। (क) (i) और (ii) (ख) (ii) और (iii) (ग) (i) और (iii) (घ) (iii) और
(iv)
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(ग) (i) और (iii)

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कथन क्या यह भौ तक प रवतन कारण

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a अथवा नह हो सकती है।
(i) पदाथ क अव ा प रव तत हो सकती है हाँ बफ पघलने म अव ा बदलती है; कागज मोड़ने म
नह । दोन भौ तक ह।

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(ii) भन्न गुण वाला एक पदाथ बनता है। नही ं यह रासाय नक प रवतन है — नए पदाथ के गुण

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नए होते ह।

(iii) कोई नया पदाथ नह बनता है। agl हाँ यही भौ तक प रवतन क मूल कसौट है।

नही ं
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(iv) पदाथ म रासाय नक अ भ क्रया होती है। रासाय नक अ भ क्रया से रासाय नक प रवतन

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होता है।

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m क्य होता है: कथन (ii) एवं (iv) दोन रासाय नक प रवतन का वणन करते ह, अतः जस वकल्प म ये ह वह
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agl गलत होगा। केवल (i) और (iii) शेष रहते ह, अथात वकल्प (ग)।
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प्र.2 पूवानुमान लगाइए क नम्न ल खत प रवतन म से कौन-से प रवतन उत्क्र मत कए जा सकते ह और कौन-से
नह । य द कसी प रवतन के वषय म आप आश्वस्त नह ह तो उसका कारण ल खए क क्य नह ह? (i) वस्त्र
सलकर कमीज बनाना (ii) सीधी डोरी को ऐंठना (iii) इडली के घोल से इडली बनाना (iv) जल म चीनी घोलना
(v) कुएँ से जल नकालना (vi) फल का पकना (vii) खुले पात्र म जल उबालना (viii) चटाई समेटना (ix) गे ँ
के दान को पीसकर आटा बनाना (x) च ान से मृदा का बनना

प रवतन क्या उत्क्र मत कया कारण
जा सकता है?

(i) वस्त्र सलकर कमीज हाँ टाँके उधेड़कर कपड़े के टु कड़े पुनः प्राप्त हो जाते ह — केवल सुई के छोटे छे द रह
बनाना जाते ह। यह भौ तक प रवतन है।

(ii) सीधी डोरी को ऐंठना हाँ ऐंठन खो लए, डोरी पुनः सीधी हो जाती है। केवल आकृ त बदली थी।

(iii) इडली के घोल से नही ं खमीरीकरण एवं भाप म पकने से नए पदाथ बनते ह। पक इडली पुनः घोल नह
इडली बनाना बन सकती।

(iv) जल म चीनी हाँ जल वा ष्पत कर चीनी पुनः प्राप्त क जा सकती है। चीनी केवल जल-कण के बीच
घोलना फैली है।

(v) कुएँ से जल हाँ जल को पुनः कुएँ म डाला जा सकता है। केवल उसक त बदली थी।
नकालना

(vi) फल का पकना नही ं नए पदाथ पके फल को रंग, कोमलता, मठास एवं गंध दे ते ह। पका आम पुनः
क ा नह हो सकता।

(vii) खुले पात्र म जल आश्वस्त नही ं — नीचे अव ा-प रवतन के रूप म यह उत्क्रमणीय है; परंतु खुले पात्र म वाष्प कमरे म
उबालना दे िखए उड़ जाती है और उसे एकत्र नह कया जा सकता, अतः व्यवहार म जल लौटता
नह ।

(viii) चटाई समेटना हाँ खो लए, चटाई पुनः समतल हो जाती है।

(ix) गे ँ के दान को नही ं आटा अब भी गे ँ ही है, अतः यह भौ तक प रवतन है — परंतु आटे को दबाकर
पीसकर आटा बनाना पुनः दाने नह बनाए जा सकते।

(x) चट्टान से मृदा का नही ं अपक्षय म रासाय नक प रवतन भी होते ह और इसम हजार वष लगते ह। मृदा को
बनना पुनः मूल चट्टान नह बनाया जा सकता।

(vii) के वषय म आश्वस्त क्य नह : उत्तर खुले शब्द पर नभर करता है। पात्र को ढक द जए तो वाष्प ढक्कन
पर संघ नत होकर टपक जाती है — प रवतन स्पष्ट रूप से उत्क्र मत हो जाता है। खुला छोड़ द जए तो वाष्प कमरे
क वायु म मल जाती है; जल वद्यमान तो रहता है, पर उसे लौटाने का कोई उपाय हमारे पास नह । अतः प रवतन
स्वयं उत्क्रमणीय है, पर व णत प्रयोग नह ।

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संकेत: मद (ix) यह याद दलाती है क अनुत्क्रमणीय का अथ रासाय नक नह होता। गे ँ पीसना एक भौ तक
प रवतन है जसे उत्क्र मत नह कया जा सकता।

प्र.3 बताइए क नम्न ल खत कथन सत्य ह अथवा असत्य। य द कोई कथन असत्य है तो सही कथन ल खए। (i)
मोमबत्ती जलाने के लए मोम का पघलना आवश्यक है। (ii) संघनन ारा जलवाष्प को एक त्रत करने म
रासाय नक प रवतन होता है। (iii) प त्तय को खाद म बदलने क प्र क्रया एक रासाय नक प रवतन है। (iv)
बे कग सोडा को न बू के रस के साथ म श्रत करना एक रासाय नक प रवतन है।

कथन सत्य / सही कथन एवं कारण
असत्य

(i) मोमबत्ती जलाने के लए मोम का स त्य ठोस मोम जल नह सकता। उसे पहले पघलकर बत्ती म ऊपर चढ़ना और
पघलना आवश्यक है। वा ष्पत होना पड़ता है; जलती वाष्प ही है।

(ii) संघनन ारा जलवाष्प को एक त्रत अस त्य सही कथन: संघनन ारा जलवाष्प को एक त्रत करने म भौ तक प रवतन
करने म रासाय नक प रवतन होता है। होता है। केवल अव ा गैस से द्रव म बदलती है; पदाथ पहले भी जल था और
बाद म भी जल है।

(iii) प त्तय को खाद म बदलने क स त्य जीवाणु एवं कवक प त्तय को पूणतः नए पदाथ म बदल दे ते ह। खाद को पुनः
प्र क्रया एक रासाय नक प रवतन है। प त्तयाँ नह बनाया जा सकता।

(iv) बे कग सोडा को न बू के रस के साथ स त्य एक नई गैस, काबन डाइऑक्साइड, बनती है — बुदबुदाहट होती है और वह
म श्रत करना एक रासाय नक प रवतन चूने के पानी को दू धया कर दे ती है।
है।

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प्र.4 नम्न ल खत कथन के रक्त ान भ रए — (i) न लनी ने दे खा क उसक साइ कल के हत्थे पर भूरे रंग का
नक्षेप हो गया है। भूरे रंग का यह नक्षेप ________ के कारण होता है और यह एक ________ प रवतन है। (ii)
रूमाल क तह लगाना एक ________ प रवतन है और यह ________ हो सकता है। (iii) वह रासाय नक प्र क्रया
जसम कोई पदाथ ऑक्सीजन के साथ अ भ क्रया करके ऊष्मा उत्स जत करता है, उसे ________ कहते ह और
यह ________ प रवतन होता है। (iv) मैग्नी शयम जब वायु म जलाया जाता है तो यह एक पदाथ बनाता है जसे
________ कहा जाता है। बनने वाला पदाथ ________ प्रकृ त का होता है। मैग्नी शयम का जलना एक ________
प रवतन है।

कथन उत्तर

(i) भूरे रंग का यह नक्षेप ______ के कारण होता है और यह एक ______ प रवतन है। जंग लगने (भूर ा पदाथ जंग अथ त आयरन
ऑक्साइड है); रासायिनक

(ii) रूमाल क तह लगाना एक ______ प रवतन है और यह ______ हो सकता है। भौितक ; उ त्क्रिमत

(iii) वह रासाय नक प्र क्रया जसम कोई पदाथ ऑक्सीजन के साथ अ भ क्रया करके ऊष्मा दहन; रासायिनक
उत्स जत करता है, उसे ______ कहते ह और यह ______ प रवतन होता है।

(iv) मैग्नी शयम ... पदाथ बनाता है जसे ______ कहा जाता है। बनने वाला पदाथ ______ मैग्नीिशयम ऑक्साइड; क्षारकीय;
प्रकृ त का होता है। मैग्नी शयम का जलना एक ______ प रवतन है। रासायिनक

ऐसा क्य होता है: (i) म साइ कल के हत्थे का लोहा वायु क ऑक्सीजन एवं नमी से संयोग कर एक नया भूरा
पदाथ बनाता है — यही जंग लगना है, और नया पदाथ बनने का अथ है रासाय नक प रवतन। (iv) म रबन के
जलने के बाद बचा श्वेत चूण मैग्नी शयम ऑक्साइड है; जल म घोलने पर यह लाल लटमस को नीला कर दे ता है,
जससे सद्ध होता है क यह क्षारक य प्रकृ त का है।

प्र.5 जल का बफ या वाष्प म प रव तत होना भौ तक प रवतन है अथवा रासाय नक प रवतन? व्याख्या क जए।

दोन भौ तक प रवतन ह।

जल (द व) जमकर → बफ (ठोस) — और बफ िपघलकर पुन ः जल

जल (द व) उबलकर → वाष्प (गैस) — और वाष्प संघिनत होकर पुन ः जल

पहले का पदाथ = बाद का पदाथ = जल

तीन कारण —

1. कोई नया पदाथ नह बनता। बफ, जल और वाष्प एक ही पदाथ क तीन अव ाएँ ह।

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2. केवल अव ा बदलती है, जो एक भौ तक गुण है।
3. दोन प रवतन उत्क्र मत कए जा सकते ह — बफ पघलकर जल बनती है, वाष्प संघ नत होकर जल।

ऐसा क्य होता है: ठोस म कण पास-पास बँधे रहकर केवल कंपन करते ह। गरम करने पर वे ऊजा पाकर दूर हटते
ह और एक-दूसरे पर सरकने लगते ह — यही द्रव है। और अ धक गरम करने पर वे बहुत दूर बखर जाते ह — यही
गैस है। पूरे समय कण स्वयं अप रव तत रहते ह, इसी लए प रवतन भौ तक है।

प्र.6 क्या दूध का फटना एक भौ तक प रवतन है अथवा रासाय नक प रवतन? अपने कथन क पु क जए।

दूध का फटना एक रासाय नक प रवतन है।
पु :

1. एक नया पदाथ — दही — बनता है, जसका स्वाद (खट्टा), गंध एवं गठन (गाढ़ा, जमा हुआ) दूध से पूणतः भन्न होता है।
2. यह प रवतन उत्क्र मत नह कया जा सकता — दही को पुनः दूध नह बनाया जा सकता।
3. यह प रवतन जीवाणुओं ारा होता है, जो दूध क शकरा को अम्ल म बदल दे ते ह और अम्ल दूध क प्रोट न को जमा दे ता है।
यह एक रासाय नक अ भ क्रया है।

ऐसा क्य होता है: गुनगुने दूध म एक चम्मच दही (जामन) डालने पर उसम उप त जीवाणु बढ़ते ह और दूध क
शकरा लैक्टोस को लै क्टक अम्ल म बदल दे ते ह। यह अम्ल दूध क प्रोट न को गुच्छ म जमा दे ता है और दूध एक
कोमल ठोस के रूप म जम जाता है। नए गुण वाले नए पदाथ बने, अतः प रवतन रासाय नक है।

क्या आप जानते ह? ग्रीष्म ऋतु म दूध का स्वयं फट जाना अवांछनीय प रवतन है, परंतु जब हम जान-बूझकर दही
जमाते ह तो वही प रवतन वांछनीय हो जाता है। कोई प रवतन अच्छा है या बुरा, यह प र त तय करती है,
प रवतन नह ।

प्र.7 वायु, वषा आ द जैसे प्राकृ तक कारक च ान से मृदा का नमाण करते ह। क्या यह प रवतन भौ तक है अथवा
रासाय नक और क्य ?

यह दोन है — चट्टान से मृदा का बनना, जसे अपक्षय कहते ह, भौ तक तथा रासाय नक दोन प रवतन से होता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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अपक्षय का भौ तक भाग अपक्षय का रासाय नक भाग

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तापमान में पिरवतन से च ाने ं फै लती-िसकु ड़ती है ं और दरारे ं पड़
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जल तथा जल में घुले रसायन च ान के खिनजों से अिभिक्रया करते है ं

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जाती है ं
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aदरारों में जमा जल जमने पर फैलकर च ान को तोड़ दे ता है काले बेस ाल्ट का लोहा लाल आयरन ऑक्साइड में बदल जाता है [िचत्र
5.10 (ख)]

. cचoानmकी संरचना ही बदल जाती है — नए पदाथ बनते है ं ag
पेड़ों की बढ़ ती जड़ें दरारे ं चौड़ी कर टुक ड़े अलग कर दे ती है ं
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के वल आमाप एवं आकृ ित बदलती है — कोई नया पदाथgनही
a नए पदाथ बनते है ं

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ऐसा क्य होता है: वायु और बहता जल मुख्यतः चट्टान को तोड़ते एवं बहाकर ले जाते ह, जो भौ तक है। परंतु वषा

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का जल केवल जल नह होता — उसम घुली गैस एवं रसायन चट्टान पर आक्रमण कर उसक संरचना बदल दे ते ह,

m .cनक है। दोन मलकर हजार वष म कठोर चट्टान को मृदा म बदल दे ते ह।agयह प रवतन उत्क्र मत नह
se जा सकता।
जो रासाय
aकया
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m ल खत कहानी प ढ़ए और कोष्ठक म दए गए सबसे उपयुक्त agl
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lेaलए अपनी रु च का उपयुक्त शीषक द जए। पृथु रसोई म भोजन तैयार कर
प्र.8 ‘पयावरण- हतैषी — पृथु’ शीषक वाली नम्न

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वकल्प पर चह्न लगाइए। कहानी क
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रहा है। वह स ब्जयाँ काटता है, आलू छ लता है और फल काटता है (भौ तक प रवतन अथवा रासाय नक

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प रवतन)। वह बीज को, फल और स ब्जय के छलक को म के एक पात्र म एक त्रत करता है (भौ तक

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प रवतन अथवा रासाय नक प रवतन)। जीवाणु और कवक क क्रया के कारण फल व स ब्जय के छलके और

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अन्य साम याँ सड़ने लगती ह जससे खाद बनती है (भौ तक प रवतन अथवा रासाय नक प रवतन)। पृथु बीज
.cबोने के समय गमल म खाद डालने एवं उनम नय मत रूप से जल दे ने काagनश्चय करता है। कुछ दन पश्चात वह
m दे खता है क बीज अंकु रत होने लगे ह और छोटे-छोटे पौधे उगने लगे ह जनम अंततः रंग- बरंगे पुष्प खल जाते ह
l a se
ag (भौ तक प रवतन अथवा रासाय नक प रवतन)। प रवार के सभी सदस्य पृथु के प्रयास क प्रशंसा करते ह।

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com g l a
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कहानी का अंश
agl सही वकल्प कारण

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वह स ब्जयाँ काटता है, आलू छ लता है और भौितक पिरवतन केवल आमाप एवं आकृ त बदलती है; कटा आलू अब भी आलू है
फल काटता है
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वह बीज , छलक को मट्ट के पात्र म भौितक पिरवतन केवल पदाथ क त बदलती है; कुछ नया नह बनता

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एक त्रत करता है

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जीवाणु और कवक क क्रया से छलके रासायिनक जीवाणु एवं कवक अप शष्ट को पूणतः नए पदाथ म बदल दे ते ह;
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सड़कर खाद बनते ह पिरवतन खाद पुनः छलके नह बन सकती

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e पिरवतन agl
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बीज अंकु रत होते ह, पौधे उगते ह और रंग- रासायिनक अंकुरण एवं वृ द्ध जै वक प्र क्रयाएँ ह जनम पौधे के भीतर नए पदाथ
बरंगे पुष्प खलते ह
a g l बनते ह

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उपयुक्त शीषक: “रसोई के कचरे से रंग- बरंगे फूल तक”।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 5 हमारे आस-पास के प रवतन — भौ तक एवं रासाय नक AglaSem · NCERT Solutions

अन्य समान रूप से अच्छे शीषक: “पृथु क खाद-वा टका”, “कुछ भी कचरा नह ”, “कचरे से खुशहाली”, अथवा “फूल उगाती
रसोई”।

करके दे खए: पृथु क तरह घर पर भी खाद बनाइए — मट्ट के पात्र म स ब्जय के छलके एवं सूखी प त्तयाँ
डालकर उसे नम र खए और कुछ-कुछ दन म उलटते-पलटते र हए। लगभग छह से आठ सप्ताह म गहरे रंग क
भुरभुरी खाद तैयार मलेगी — और आप एक रासाय नक प रवतन को अपनी आँख से होते दे ख लगे।

प्र.9 अगले पृष्ठ पर कुछ प रवतन दए गए ह। च ह्नत क्षेत्र ‘क’ म भौ तक प रवतन और च ह्नत क्षेत्र ‘ख’ म
रासाय नक प रवतन को ल खए। च ह्नत क्षेत्र ‘ग’ म भौ तक और रासाय नक दोन प्रकार के प रवतन को
ल खए। मोमबत्ती जलने क प्र क्रया; कागज का फटना; जंग का लगना; दूध का फटना, फल का पकना, बफ
का पघलना, वस्त्र क तह लगाना, मैग्नी शयम का जलना और बे कग सोडा को सरके म म श्रत करना।

क — केवल भौितक ख — केवल रासायिनक

जंग का लगना

कागज का फटना दूध का फटना
ग — दोनों
बफ का िपघलना फलों का पकना
मोमब ी जलने
वस्त्रों की तह लगाना की पिक्रया मैग् नीिशयम का जलना
बेिकंग सोडा को िसरके
मे ं िमि त करना

नौ प रवतन को क, ख और ग क्षेत्र म बाँटकर दखाया गया है।

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क्षेत्र प रवतन कारण

क — भौ तक कागज का फटना; बफ का िपघलना; वस्त्रों की तह के वल आकृ ित, आमाप अथवा अवस्था बदलती है — कोई
प रवतन लगाना नया पदाथ नही ं

ख — रासाय नक जंग का लगना; दू ध का फटना; फलों का पकना; पत्येक में नया पदाथ बनता है — आयरन ऑक्साइड, दही,
प रवतन मैग्नीिशयम का जलना; बेिकं ग सोडा को िसरके में पकने के पदाथ, मैग्नीिशयम ऑक्साइड, काबन
िमि त करना डाइऑक्साइड

ग — भौ तक एवं मोमब ी जलने की पिक्रया मोम का िपघलना, बहना, जमना एवं वाष्पीकृ त होना भौितक
रासाय नक दोन है; मोम की वाष्प का जलना रासायिनक है

प्र.10 चत्र 5.11 (क), (ख), (ग), और (घ) म दशाए गए प्रयोग कए गए। पता लगाइए क कस प्रयोग म चूने का पानी
दू धया हो गया और क्य ?

िसरका और नीबू
ं का रस और

बेिकं ग सोडा िसरका

चून े का पानी चून े का पानी

(क) (ख)

िसरका और नीबू
ं का रस और

साधारण नमक बेिकं ग सोडा

चून े का पानी चून े का पानी

(ग) (घ)

चत्र 5.11, पृष्ठ 71 — चार समान व्यव ाएँ; प्रत्येक म बाईं परखनली क गैस दाईं परखनली के चूने के पानी म
प्रवा हत क जाती है।

चूने का पानी केवल (क) और (घ) म दू धया होता है।

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प्रयोग पहली परखनली का मश्रण गैस बनी? चूने का पानी

(क) िसरका और बेिकं ग सोडा हाँ — काबन डाइऑक्साइड दू धया हो जाता है

(ख) नी ंबू का रस और िसरका नही ं स्वच्छ ही रहता है

(ग) िसरका और साधारण नमक नही ं स्वच्छ ही रहता है

(घ) नी ंबू का रस और बेिकं ग सोडा हाँ — काबन डाइऑक्साइड दू धया हो जाता है

ऐसा क्य होता है: काबन डाइऑक्साइड तभी मुक्त होती है जब बे कग सोडा कसी अम्ल से मले। सरका और
न बू का रस दोन अम्ल ह, अतः (क) और (घ) म बुदबुदाहट होती है और बनी काबन डाइऑक्साइड चूने के पानी को
दू धया कर दे ती है। (ख) म दोन पदाथ अम्ल ह — दो अम्ल आपस म अ भ क्रया नह करते, अतः कोई गैस नह
बनती। (ग) म साधारण नमक न अम्ल है न हाइ ोजन काब नेट, अतः सरके के पास अ भ क्रया करने के लए कुछ है
ही नह । काबन डाइऑक्साइड न पहुँचने के कारण (ख) एवं (ग) का चूने का पानी स्वच्छ बना रहता है।

बेिकं ग सोडा + अम्ल → काबन डाइऑ क्साइड + अन्य पदाथ

काबन डाइऑक्साइड + चूने का पानी → कै िल्सयम काब ने ट (श्वेत , अघुलनशील) + जल → दू िधया

अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — पृष्ठ 71
अध्याय के अंत क प रयोजनाएँ एवं अन्वेषण

अन्वे ष णात्मक प रयोजनाएँ

प्र.1 न बू के रस का स्याही क तरह उपयोग करके कागज के टु कड़े पर एक संदेश ल खए और उसे सूखने द जए।
संदेश अदृश्य हो जाएगा। अब कागज पर गरम इस्त्री कर अथवा कागज को मोमबत्ती क लौ पर इस प्रकार से रख
क यह आग न पकड़ ले। कागज के गरम होने पर अदृश्य अक्षर गहरे भूरे रंग के हो जाते ह। क्या इनम से कसी भी
प रवतन को उत्क्र मत कया जा सकता है?

पहले प रवतन को उत्क्र मत कया जा सकता है; दूसरे को नह ।

चरण क्या होता है प रवतन का क्या उत्क्र मत हो सकता है?
प्रकार

न बू के रस से लखा संदेश रस का जल वािष्पत हो जाता है और एक भौितक हाँ — कागज को पुनः गीला करने पर
सूखकर अदृश्य हो जाता है पतली रंग हीन परत रह जाती है िनशान हल्का-सा िदखने लगता है

गरम इस्त्री से अक्षर गहरे भूरे सूखा नी ंबू का रस झुल सकर नए भूरे रासायिनक नही ं — भूरे अक्षर पुनः अदृ श्य नही ं िकए
हो जाते ह पदाथ बनाता है जा सकते

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ऐसा क्य होता है: न बू के रस म काबन-युक्त पदाथ (शकरा एवं स क अम्ल) होते ह। ये कागज क अपेक्षा कह
कम तापमान पर टू टकर झुलस जाते ह। इसी लए जहाँ लखा है वही भाग भूरा होता है और शेष कागज केवल गरम
रहता है — यही कारण है क संदेश दखाई दे ने लगता है।

सावधानी: इस क्रयाकलाप को कसी वयस्क के नदशन म क जए। मोमबत्ती का उपयोग कर तो कागज को लौ से
पयाप्त ऊपर तथा हलाते हुए रख, ता क वह आग न पकड़ ले।

प्र.2 इन दन हम पवतीय क्षेत्र म भूस्खलन और च ान के टू टने के बहुत से समाचार सुनते ह जससे जान-माल क
हा न होती है। भूस्खलन और च ान के अपघटन को कम करने के लए सावधानी के रूप म क्या प्रक्रम कए जा
सकते ह। चचा क जए।

चचा क व ध: पहले यह सूचीबद्ध क जए क पहाड़ी ढलान क्य खसकती है — ढ ली मृदा, भारी वषा, सड़क एवं भवन के लए
तीखी कटाई, तथा वृक्ष का कटना। फर प्रत्येक कारण के सामने एक उपाय र खए। अच्छे उत्तर म कम-से-कम चार उपाय ह और
यह भी बताया जाए क प्रत्येक कैसे काम करता है।

उपाय यह कैसे सहायक है

वनरोपण — ढलान पर वृक्ष, घास एवं गहरी जड़ वाले पौधे लगाना जड़ें म ृद ा को बाँधे रखती है ं और पि याँ वष की बूदँ ों का वेग तोड़ती है ं

वनोन्मूलन एवं अ नयं त्रत चराई रोकना नंग ी ढलाने ं ढकी ढलानों की तुल ना में कही ं तेजी से बह जाती है ं

सीढ़ दार खेती — ढलान के साथ जुताई के ान पर समतल सीिढ़ याँ जल की गित घटा दे ती है,ं िजससे वह म ृद ा नही ं बहा
पाता

रोक-द वार, गै बयन (पत्थर भरे तार के पजरे) एवं कटे ढलान पर सड़कों के िकनारे ढीली च ान एवं म ृद ा को अपने स्थान पर रोके
तार क जाली रखती है ं

उ चत जल- नकास — वषा जल को ढलान से बाहर ले जाने वाली पहाड़ में िरसा जल उसे भारी एवं िफसलनदार बनाता है, जो भूस्खलन
ना लयाँ का सबसे सामान्य कारण है

व ोट, खनन एवं तीखी सड़क-कटाई पर नयंत्रण; कमजोर पत्येक कटाई पहाड़ के पैर का सहारा छीन ले ती है
ढलान पर भारी नमाण से बचना

पूव-चेतावनी तंत्र एवं वषा क नगरानी भूस्खलन से पहले ही लोगों को सुर िक्षत स्थान पर ले जाया जा सकता
है

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g l AglaSem · NCERT Solutions

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नमूना उत्तर: “हमारे पहाड़ म भूस्खलन मुख्यतः इस लए बढ़े ह क्य क पेड़ काटे जा रहे ह और सड़क व होटल के
लए ढलान तीखी काट जा रही ह। हम नंगी ढलान पर गहरी जड़ वाले वृक्ष लगाने चा हए, उ चत eनाmलयाँ बनानी
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comजल पहाड़ म न रसे, सड़क-कटाई को रोक-द वार एवं तार क जाली aसेgसुlरaक्षत करना चा हए,
चा हए ता क.वषा

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aचाg हए।”
सीढ़ दार खेती अपनानी चा हए तथा भूस्खलन-संभा वत क्षेत्र म नमाण के नयम का कठोरता से पालन करना

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प्र.3 रसोईघर म हो रहे क्रयाकलाप का अवलोकन क जए और उन प रवतन को अ भले खत क जए जन्ह
उत्क्र मत कया जा सकता है। क्या ये प रवतन भौ तक ह अथवा रासाय नक ह?

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कैसे क जए: एक कॉपी लेकर आधा घंटा रसोईघर म बै ठए। जो भी प रवतन दखे उसके सामने तीन बात ल खए — क्या बदला,

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क्या मूल वस्तु पुनः मल सकती है, और क्या कोई नया पदाथ बना।

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a रसोईघर म दखने वाला प रवतन क्या उत्क्र मत हो सकता है? भौ तक अथवा रासाय नक?

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गलास म बफ के टु कड़ का पघलना भौितक

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जल का उबलना; ढक्कन पर वाष्प का संघ नत होना
a g हाँ भौितक

हाँ (जल वािष्पत कीिजए )
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जल म चीनी अथवा नमक का घुलना भौितक

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आटे क लोइयाँ बनाना और रो टयाँ बेलना
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हाँ (पुनः लोई बना लीिजए )
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भौितक

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गरम तवे पर मक्खन का पघलना हाँ (ठं डा होने पर पुनः जम जाता है) भौितक

agl भीगे चावल एवं दाल को पीसकर घोल बनाना नही ं भौितक, परंत ु अनुत्क्रमणीय

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दूध का दही जमना; भोजन पकना; रसोई गैस का जलना
c o mनही ं रासायिनक
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नष्कष: रसोईघर के जो प रवतन उत्क्र मतas e
आकृ त के प रवतन। जन्ह उत्क्र मत a g l कए जा सकते ह, वे लगभग सभी भौ तक नकलते ह — प्रायः अव ा अथवा
नह कया जा सकता, जैसे भोजन पकना, दही जमना और ईंधन का जलना, वे रासाय नक
होते ह।

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प्र.4 डबल रोट को मुलायम और फूला हुआ बनाने के लए पकाते समय उसम खमीर म श्रत कया जाता है। खमीर
कस प्रकार काय करता है? पता लगाने का प्रयास क जए। एक छोट बोतल, थोड़ी शक्कर, ताजा खमीर, जल
और एक गुब्बारा ली जए। बोतल म दो चम्मच शक्कर और थोड़ा जल म श्रत कर शक्कर का वलयन बनाइए।
अब इसम एक चम्मच खमीर डा लए और बोतल के मुँह पर गुब्बारा लगाइए। इसे लगभग एक घंटे तक अबा धत
रहने द जए। आप क्या अवलोकन करते ह? गुब्बारे को सावधानी से हटाइए। अब गुब्बारे का मुँह कसकर बंद
र खए और उसे ताजा चूने के पानी वाली दूसरी छोट बोतल के मुँह पर लगा द जए। बोतल को हलाइए ता क
गुब्बारे क साम ी चूने के पानी म मल जाए। आप क्या अवलोकन करते ह? आप इस प्रयोग से क्या नष्कष
नकाल सकते ह? इस प्रयोग म होने वाले सभी प रवतन को पहचा नए और बताइए क कौन-से प रवतन
भौ तक ह और कौन-से रासाय नक।

एक घंटे बाद का अवलोकन: मश्रण झागदार एवं बुलबुलेदार हो जाता है, उसम से हल्क खट्ट , डबल रोट जैसी गंध आती है, और
गुब्बारा धीरे-धीरे फूलकर खड़ा हो जाता है। स्पष्ट है क बोतल के भीतर कोई गैस बन रही है।
चूने के पानी के साथ अवलोकन: गुब्बारे क गैस को ताजा चूने के पानी के साथ हलाने पर चूने का पानी दू धया हो जाता है।
नष्कष: खमीर ारा बनाई गई गैस काबन डाइऑक्साइड है। खमीर एक जी वत कवक है; यह शक्कर को अपना भोजन बनाकर
उसका वघटन करता है और काबन डाइऑक्साइड मुक्त करता है। आटे म यही गैस असंख्य छोटे बुलबुल के रूप म फँस जाती है,
आटे को ऊपर उठाती है और उसम छद्र बना दे ती है — इसी से डबल रोट फूली हुई और मुलायम बनती है।

शक्कर + खमीर → काबन डाइऑ क्साइड + अन्य पदाथ

काबन डाइऑक्साइड + चूने का पानी → कै िल्सयम काब ने ट (श्वेत , अघुलनशील) + जल → दू िधया

प्रयोग म होने वाला प रवतन भौ तक अथवा कारण
रासाय नक?

जल म शक्कर का घुलना भौितक शक्कर केवल फैलती है; वाष्पीकरण ारा पुनः प्राप्त क जा
सकती है

खमीर का शक्कर पर क्रया कर गैस रासायिनक एक नया पदाथ, काबन डाइऑक्साइड, बनता है
बनाना

गुब्बारे का तनकर फूलना भौितक रबर का केवल आमाप एवं आकृ त बदलती है

गैस का बोतल से गुब्बारे म जाना भौितक केवल गैस क त बदलती है

चूने के पानी का दू धया होना रासायिनक एक नया पदाथ, कै ल्सयम काब नेट, बनता है

संकेत: गुनगुने जल का उपयोग क जए, अ धक गरम का नह । खमीर जी वत है — बहुत गरम जल उसे मार दे ता है
और फर गुब्बारा कभी नह फूलेगा। बोतल को कसी गरम ान पर रखने से प रणाम शीघ्र मलता है।

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प्र.5 गर गट अपने आस-पास के वातावरण के अनुरूप अपना रंग बदलते ह और जब वे क्रो धत होते ह या संकट का
अनुभव करते ह तो भी अपना रंग बदलते ह। क्या यह ऐसा प रवतन है जसे उत्क्र मत कया जा सकता है?
इंटरनेट से अथवा अपने व ालय के पुस्तकालय से इसके संबंध म सूचना एक त्रत क जए।

चत्र 5.12, पृष्ठ 72 — एक गर गट, जो टहनी पर बैठा है और जसका हरा रंग प त्तय म घुल- मल गया है
(पाठ्यपुस्तक के चत्र का पुनःरेखां कत रेखा चत्र)।

हाँ — इस प रवतन को उत्क्र मत कया जा सकता है। चमक ले एवं गहरे रंग म बदला गर गट कुछ ही मनट म अपने सामान्य
हरे अथवा भूरे रंग म लौट आता है, और एक ही दन म वह अनेक बार रंग बदल सकता है।

ऐसा क्य होता है: यह रंग कोई ऐसा रंजक नह है जो बनता और नष्ट होता हो। गर गट क त्वचा म वशेष
को शकाएँ होती ह जनम सूक्ष्म क्रस्टल एक नय मत क्रम म सजे रहते ह। जब जंतु शांत होता है तो ये क्रस्टल पास-
पास रहते ह और त्वचा नीला-हरा प्रकाश पराव तत करती है; जब वह उत्ते जत, क्रो धत अथवा भयभीत होता है तो
त्वचा थोड़ी तन जाती है, क्रस्टल के बीच क दूरी बढ़ जाती है और अब पीला, नारंगी तथा लाल प्रकाश पराव तत
होता है। एक अन्य परत क रंजक-को शकाएँ भी फैल या सकुड़ सकती ह। चूँ क कोई नया पदाथ नह बनता —
केवल क्रस्टल क दूरी एवं रंजक का फैलाव बदलता है — अतः यह एक भौ तक एवं उत्क्रमणीय प रवतन है।

क्या आप जानते ह? गर गट रंग छपने के लए कम और संवाद तथा ताप- नयंत्रण के लए अ धक बदलते ह।
ठं डी सुबह म गहरा रंग अ धक ऊष्मा सोखता है और चटक ला प्रदशन प्र त ं को चेतावनी दे ता है। कटल फश,
ऑक्टोपस तथा कुछ मछ लयाँ भी इसी प्रकार उत्क्रमणीय रंग-प रवतन कर सकती ह।

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कहाँ खोज: अपने वद्यालय के पुस्तकालय का जंतु- वश्वकोश, NCERT क संदभ पुस्तक अथवा कसी रा ीय संग्रहालय या प्रा ण-
व ान सं ा क वश्वसनीय वेबसाइट। जस ोत का उपयोग कर उसे अवश्य ल खए।

अध्याय — एक नज़र म
भौ तक प रवतन म केवल भौ तक गुण — आकार, आमाप, अव ा — बदलते ह और कोई नया पदाथ नह बनता; जैसे
कागज मोड़ना, चॉक का चूरा करना, बफ का पघलना।
रासाय नक प रवतन म एक अथवा एक से अ धक नए पदाथ बनते ह। यह रासाय नक अ भ क्रया ारा होता है जसे
सं क्षप्त रूप म रासाय नक समीकरण से दशाया जाता है — जैसे चूने के पानी म वायु फूँकना, सरका + बे कग सोडा, जंग
लगना, दहन।
चूने के पानी का दू धया होना काबन डाइऑक्साइड का परीक्षण है। कै ल्सयम हाइ ॉक्साइड + काबन डाइऑक्साइड →
कै ल्सयम काब नेट (श्वेत, अघुलनशील) + जल।
दहन वह रासाय नक अ भ क्रया है जसम पदाथ ऑक्सीजन के साथ अ भ क्रया कर ऊष्मा एवं/अथवा प्रकाश उत्पन्न करता
है। इसके लए तीन बात आवश्यक ह — अ ग्न त्रकोण: दहनशील पदाथ (ईंधन), ऑक्सीजन तथा प्रज्वलन तापमान तक
पहुँचाने वाली ऊष्मा।
एक ही प्र क्रया म दोन प्रकार के प रवतन हो सकते ह। मोमबत्ती के जलने म मोम का पघलना, बहना, जमना और वा ष्पत
होना भौ तक ह; मोम क वाष्प का जलना रासाय नक है।
कुछ प रवतन उत्क्र मत कए जा सकते ह (बफ का पघलना, जल का उबलना) और कुछ नह (स ब्जयाँ काटना, पॉपकॉन
बनाना)। कुछ वांछनीय ह (दूध से दही, भोजन पकाना) और कुछ अवांछनीय (जंग लगना, खाद्य पदाथ का क्षय) — और
पर त बदलने पर वही प रवतन दूसरी श्रेणी म आ सकता है।
धीमी ग त से होने वाले प्राकृ तक प रवतन पृथ्वी को गढ़ते ह — अपक्षय (चट्टान का भौ तक टू टना तथा रासाय नक प रवतन)
से मृदा बनती है, तथा बहते जल एवं वायु ारा होने वाला अपरदन एक भौ तक प रवतन है।

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय म कहाँ पु स्तक से उदाहरण

भौ तक प रवतन ऐसा पिरवतन िजसमें के वल भौितक ग ण
ु (आकार, खंड 5.1, पृष्ठ 59 कागज को मोड़कर वस्तुएँ बनाना; चॉक
आमाप, अवस्था) बदलते है ं और कोई नया पदाथ का चूरा करना; बफ का पघलना
नही ं बनता

रासाय नक प रवतन ऐसा पिरवतन िजसमें एक अथवा एक से अिधक नए खंड 5.2, पृष्ठ 60 चूने के पानी म वायु फूँकने पर श्वेत
पदाथ ं का िनम ण होता है अघुलनशील पदाथ का बैठना

रासाय नक वह पिक्रया िजसके ारा रासायिनक पिरवतन में नए पृष्ठ 60 कै ल्सयम हाइ ॉक्साइड का काबन
अ भ क्रया पदाथ बनते है ं डाइऑक्साइड से अ भ क्रया करना

रासाय नक समीकरण वह संिक्षप्त रूप िजसमें रासायिनक अिभिक्रया पृष्ठ 61 सरका + बे कग सोडा → काबन
िलखी जाती है डाइऑक्साइड + अन्य पदाथ

चूने के पानी का काबन डाइऑक्साइड पवािहत करने पर चूने का क्रयाकलाप 5.3 एवं सरके और बे कग सोडा से बनी गैस क
परीक्षण पानी दू िधया हो जाता है 5.4, पृष्ठ 60–61 पहचान

जंग लगना लोहे पर भूरे रंग के नए पदाथ आयरन ऑक्साइड खंड 5.3.1, पृष्ठ 62 जंग लगी हुई लोहे क क ल, चत्र 5.4
का बनना

दहन वह रासायिनक अिभिक्रया िजसमें पदाथ ऑक्सीजन खंड 5.3.2, पृष्ठ 62 मैग्नी शयम + ऑक्सीजन →
से अिभिक्रया कर ऊष्मा एवं/अथवा पकाश उत्पन्न मैग्नी शयम ऑक्साइड + ऊष्मा +
करता है प्रकाश

दहनशील पदाथ वह पदाथ िजसका दहन होता है; इसे ईंध न भी कहते पृष्ठ 62 लकड़ी, कागज, कपास, मट्ट का तेल
है ं

प्रज्वलन तापमान वह न्यूनतम तापमान िजस पर कोई पदाथ आग क्रयाकलाप 5.6, पृष्ठ आवधक लस से सूय क करण क द्रत
पकड़ता है 64 करने पर कागज इस तापमान तक
पहुँचता है

अ ग्न त्रकोण दहन के िलए आवश्यक तीन बाते ं — ईंध न, चत्र 5.8, पृष्ठ 64 मोमबत्ती को गलास से ढकने पर
ऑक्सीजन एवं ऊष्मा ऑक्सीजन समाप्त होते ही लौ बुझ
जाती है

उत्क्रमणीय / ऐसा पिरवतन िजसमें मूल पदाथ पुनः पाप्त िकया जा खंड 5.5, पृष्ठ 66 बफ का पघलना — हाँ; पॉपकॉन
अनुत्क्रमणीय सकता है / नही ं िकया जा सकता बनाना — नह
प रवतन

अपक्षय च ानों को तोड़ने वाले भौितक एवं रासायिनक खंड 5.7.1, पृष्ठ 67 काले बेसाल्ट पर आयरन ऑक्साइड क
पिरवतन, िजनसे अंततः म ृद ा बनती है लाल परत, चत्र 5.10 (ख)

अपरदन वायु एवं बहते जल ारा टू टी च ान, म ृद ा एवं तलछट खंड 5.7.2, पृष्ठ 68 नद के चकने कंकड़; नद -तल पर
का एक स्थान से दू स रे स्थान जाना — एक भौितक महीन रेत
पिरवतन

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages44
Languagehindi
Updated19 Sep 2026