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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 7: प्रकृ त म ऊष्मा का ानांतरण
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
89 – 104 19 48 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 38 pages
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · वज्ञान · जज्ञासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण
कक्षा 7 व ान क पाठ्यपुस्तक ज ासा के अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण के सभी प्रश्न के पूण एनसीईआरट समाधान। क्रयाकलाप
7.1 से 7.5 (ता लका 7.1 से 7.5 भरी हुई), गहन चतन, वैज्ञा नक से प रचय तथा वज्ञान एवं समाज बॉक्स, पृष्ठ 89 से 100 तक के सभी पाठ्य
प्रश्न, आइए, और अ धक सीख के दस प्रश्न और तीन अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — सभी उत्तर पुस्तक क ही भाषा और शैली म।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
जज्ञासा (कक्षा 7) 89 – 104
खं ड प्रश्न
19 48
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 89–90
अध्याय का आरंभ
प्र.1 भोजन बनाने के लए सामान्यतः धातु के पात्र का ही उपयोग क्य कया जाता है?
क्य क धातुएँ ऊष्मा क सुचालक होती ह। जो पदाथ ऊष्मा को अपने म से सरलता से संच रत होने दे ते ह, वे ऊष्मा के सुचालक
कहलाते ह और सभी धातुएँ इसी वग म आती ह — यह बात आपने ‘धातुओं और अधातुओं का संसार’ नामक अध्याय म पढ़ थी।
ऐसा क्य होता है: जब धातु का पात्र आग पर रखा जाता है तो लौ के संपक वाले धातु के कण पहले गरम होते ह।
प्रत्येक गरम कण अपनी ऊष्मा अपने से अगले कण को दे दे ता है और इस प्रकार ऊष्मा शीघ्रता से पात्र क तली से
होकर भोजन तक पहुँच जाती है। इस प्र क्रया को चालन कहते ह। लकड़ी या मृदा के पात्र म ऊष्मा इतनी सरलता से
नह पहुँच पाती, अतः उसम थुक्पा पकाना संभव नह होता।
संकेत: ध्यान द जए क अ े पात्र का हत्था लकड़ी, प्ला स्टक या बेकेलाइट का बना होता है — ये कुचालक ह,
अतः ऊष्मा हाथ तक नह पहुँचती।
प्र.2 इन पदाथ म ऊष्मा का स्थानांतरण कैसे होता है?
ठोस धातु म ऊष्मा का स्थानांतरण चालन ारा होता है — अथात वस्तु के गरम भाग से उसके ठं डे भाग क ओर।
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धात ु का गरम िसरा → कण गरम होता है
गरम कण → अपनी ऊष्मा अगले कण को दे त ा है
अगला कण → उससे अगले कण को दे त ा है
… और इस पकार ठं डा िसरा भी गरम हो जाता है
ऐसा क्य होता है: ठोस के कण एक-दूसरे से कसकर बँधे रहते ह और अपने स्थान से हट नह सकते, अतः वे ऊष्मा
को साथ लेकर नह चल सकते। गरम होने पर वे केवल अ धक तीव्रता से कंपन करते ह और अपने पड़ोसी कण को
भी कं पत कर दे ते ह। इस प्रकार ऊष्मा पदाथ म से होकर आगे बढ़ती है जब क कण स्वयं अपने स्थान पर ही स्थर
रहते ह। क्रयाकलाप 7.1 म पन का एक-एक करके गरना यही दशाता है।
क्रयाकलाप 7.1 — आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 90
7.1 ऊष्मा का चालन
क्रयाकलाप
प्र.1 पन का क्या होगा? क्या वे प से जुड़ी रहगी या नीचे गर जाएँगी?
पन प से जुड़ी नह रहगी — चार पन एक-एक करके नीचे गर जाएँगी।
ऐसा क्य होता है: पन धातु-प पर मोम से चपकाई गई ह। प का जो सरा स्टड से दूर है उसे गरम कया जा
रहा है और ऊष्मा चालन ारा प म आगे बढ़ती है। जैसे ही ऊष्मा कसी पन तक पहुँचती है, उस पन को पकड़े
हुए मोम पघल जाती है और पन नीचे गर जाती है।
स्वयं जाँ चए: सभी पन एक साथ नह गरत । यही एक अवलोकन इस बात का प्रमाण है क ऊष्मा को गरम सरे
से ठं डे सरे तक पहुँचने म समय लगता है।
प्र.2 पन के नीचे गरने के क्रम का अनुमान लगाइए।
मोमबत्ती प के उस सरे पर रखी है जो स्टड से दूर है, और पन उसी गरम सरे से आरंभ करके 1, 2, 3 और 4 से नामां कत ह
( चत्र 7.1)। अतः सही अनुमान होगा —
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िपन 1 सवपथम िगरेगी (लौ के सबसे िनकट)
िफर िपन 2
िफर िपन 3
और अंत में िपन 4 (लौ से सबसे दू र)
यही क्रम क्य : ऊष्मा गरम सरे से बाहर क ओर फैलती है। जो पन लौ के जतनी नकट है, उसके नीचे क प
उतनी ही जल्द इतनी गरम हो जाती है क मोम पघल जाए। अतः क्रम केवल दूरी से तय होता है — जो सबसे
नकट है, वह सबसे पहले गरती है।
प्र.3 अपने अवलोकन को ता लका 7.1 म अं कत क जए।
ता लका 7.1 — पन का गरना
सवप्रथम गरने वाली पन आपने जो अवलोकन कया उसके कारण
अनुमान अवलोकन
पृष्ठ 90 पर छपी ता लका 7.1 — इसे अपनी अभ्यास-पु स्तका म उतारकर भ रए।
क्रयाकलाप करने के बाद भरी हुई ता लका 7.1 इस प्रकार दखाई दे गी।
ता लका 7.1 — पन का गरना
सवप्रथम गरने वाली पन आपने जो अवलोकन कया उसके कारण
अनुमान अवलोकन
िपन 1 — क्योंिक यह िपन 1 सवपथम िगरी, ऊष्मा धातु-प म गरम सरे से ठं डे सरे क ओर चालन ारा आगे बढ़ती है। वह
जलती हुई मोमब ी के उ सके बाद क्र मशः िपन 2, पन 1 तक सबसे पहले पहुँचती है, अतः उसके नीचे क मोम पहले पघलती है।
सबसे िनकट है 3 और 4 िगरी ं पन 2, 3 और 4 क्रमशः दूर होती जाती ह, इस लए वहाँ ऊष्मा पहुँचने म अ धक
समय लगता है।
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क्या आप जानते ह? य द यही क्रयाकलाप मोमबत्ती को प
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समान दूरी पर स्थत दोन पन लगभग एक साथ गरगी। यही बात अभ्यास के प्रश्न 1 (ii) म पूछ eगई
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के मध्य म रखकर कया जाए, तो लौ के दोन ओर
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है।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 91
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7.1 ऊष्मा का चालन
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है?gसभी पन एक साथ क्य नह गरती ह?
पन 1, पन 2 से पहले क्य गरती a
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क्य क ऊष्मा.cको प म आगे बढ़ने म समय लगता है।
पन 1 इस लए पहले गरती है क्य क वह मोमबत्ती क लौ के सबसे नकट है, और सभी पन एक साथ इस लए नह गरत
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ag ऐसा क्य होता है: चालन एक क्र मक प्र क्रया है। गरम सरे का कण गरम होता है, वह अगले कण को ऊष्मा दे ता
om पन 2 के नीचे क मोम से पहले पघलती है और इसी क्रम a s
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है, वह उससे अगले को — और यह क्रम चलता रहता है। अतः प धीरे-धीरे गरम होती है — पहले लौ के पास और
बाद म दूर वाले भाग म। इस लए पन 1 के नीचे क.cमोम,
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म आगे भी। य द ऊष्मा एक सरे से दूसरे aसरे
m तुरंत पहुँच जाती तो चार पन एक ही क्षण गरत — ऐसा नह
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होता, और यही चालन का प्रमाण है।ag
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आप अपने अवलोकन से क्या नष्कष नकाल सकते ह? क्या आपको लगता है क धातु क प
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m स्थानांतरण उस सरे से हो रहा है जहाँ से धातु क प को गरम कया जा रहा है?
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हाँ। अवलोकन स्पष्ट रूप से दशाते ह क ऊष्मा का स्थानांतरण धातु-प म गरम कए जा रहे सरे से ठं डे सरे क ओर हो रहा है।
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नष्कष इस प्रकार ह —
ऊष्मा कसी वस्तु के गरम भाग से उसके ठं डे भाग क ओर जाती है। इस प्र क्रया को चालन कहते ह।
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यह स्थानांतरण तत्काल नह होता — यह प म क्रमशः आगे बढ़ता है, इसी लए पन क्रम से गरती ह।
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न तो धातु स्वयं ग त करती है और न ही उसके कण। गरम कण केवल अपनी ऊष्मा अगले कण को दे दे ता है।
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धातुएँ ऐसा सरलता से होने दे ती ह, अतः वे ऊष्मा क सुचालक ह।
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संकेत: पन का गरना केवल एक संकेतक है। वास्तव म आप मोम का पघलना दे ख रहे ह, और मोम तभी पघलती
है जब उसके नीचे क प गरम हो जाए।
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प्र.3 य द हम धातु क प के स्थान पर लकड़ी अथवा काँच जैसे पदाथ से बनी प का उपयोग करते ह तो
क्रयाकलाप 7.1 म पन नीचे नह गरगी। क्या आप ‘धातुओं और अधातुओं का संसार’ नामक अध्याय के
आधार पर प्राप्त जानकारी का उपयोग करके इसका कारण सोच सकते ह?
क्य क लकड़ी और काँच अधातुए ँ ह और ऐसे पदाथ ऊष्मा को अपने म से सरलता से संच रत नह होने दे ते। ये ऊष्मा के कुचालक
(ऊष्मारोधी) ह।
ऐसा क्य होता है: धातु म ऊष्मा एक कण से दूसरे कण तक बहुत तेजी से पहुँचती है, अतः पूरी प शीघ्र गरम हो
जाती है। लकड़ी या काँच म यह स्थानांतरण अत्यंत धीमा होता है। ऊष्मा लौ के पास ही समट रह जाती है और
पन के नीचे वाला भाग मोम पघलाने योग्य गरम कभी नह हो पाता। इस लए पन चपक ही रहती ह।
क्या आप जानते ह? मृदा और चीनी म (पॉ सलेन) भी ऊष्मा के कुचालक ह। इसी लए कुल्हड़ या चीनी म के
कप म रखी चाय-कॉफ स्ट ल के गलास क तुलना म कह अ धक समय तक गरम रहती है — और स्ट ल का
गलास उँ ग लयाँ जला दे ता है, कुल्हड़ नह ।
प्र.4 अपने आस-पास क कुछ वस्तुओं क सूची बनाइए और उन्ह ता लका 7.2 म ऊष्मा के सुचालक अथवा कुचालक
के रूप म वग कृत क जए।
ता लका 7.2 — ऊष्मा के सुचालक /कुचालक क सूची
क्र.सं. वस्तुए ँ ऊष्मा के सुचालक/कुचालक
1. स्ट ल सुचालक
2. लकड़ी
3.
पृष्ठ 91 पर छपी ता लका 7.2 — पहली पं क्त भरी हुई द गई है, शेष रक्त ह।
घर या कक्षा म मलने वाली वस्तुओं से भरी हुई ता लका 7.2 इस प्रकार है।
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ता लका 7.2 — ऊष्मा के सुचालक /कुचालक क सूची
क्र.सं. वस्तुए ँ ऊष्मा के सुचालक/कुचालक
1. स्टील सुचाल क
2. लकड़ी कु चाल क
3. ऐलुिमिनयम (कु कर, तवा) सुचाल क
4. ताँबा (तार, पात्र की तली) सुचाल क
5. लोहा (कील, कलछी) सुचाल क
6. काँच (िगलास, िखड़की का शीशा) कु चाल क
7. म ृद ा / चीनी िम ी (कु ल्हड़, कप) कु चाल क
8. प्लािस्टक (मग, बाल्टी) कु चाल क
9. ऊन (स्वेटर, कं बल) कु चाल क
10. कागज और ग ा कु चाल क
11. रबर (चप्पल का तल्ला, हत्थे की पकड़) कु चाल क
12. वायु कु चाल क
संकेत: एक सरल परीक्षण — एक ही कमरे म रखी धातु क और लकड़ी क वस्तु को छू कर दे खए। दोन का
तापमान समान होने पर भी धातु अ धक ठं डी लगती है। वह केवल इस लए ठं डी लगती है क्य क सुचालक होने के
कारण वह आपके हाथ से ऊष्मा शीघ्रता से ख च लेती है।
प्र.5 क्या आपक सूची म वायु स म्म लत है? अगर यह सूची म है तो आपने इसे कहाँ रखा है?
हाँ — और वायु को ऊष्मा के कुचालक (ऊष्मारोधी) वाले स्तंभ म ही रखना चा हए।
ऐसा क्य होता है: गैस के कण एक-दूसरे से बहुत दूर होते ह, अतः ऊष्मा एक कण से दूसरे कण तक सरलता से
नह पहुँच पाती। इसी लए फँसी हुई वायु हमारे लए उपलब्ध सव त्तम ऊष्मारोधक म से एक है और हम इसका
उपयोग सवत्र करते ह —
ऊनी वस्त्र अपने छद्र म वायु को फँसा लेते ह; यह फँसी हुई वायु हमारे शरीर से प रवेश क ओर ऊष्मा के प्रवाह को कम कर
दे ती है, अतः हम गरमी का अनुभव होता है।
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दो पतले कंबल एक मोटे कंबल से अ धक गरम रखते ह, क्य क उनके बीच वायु क एक परत फँस जाती है ( चत्र 7.2)।
खोखली ईंट अपने भीतर वायु रोक लेती ह, जससे घर स दय म गरम और ग मय म ठं डे रहते ह।
क्या आप जानते ह? वायु कुचालक अवश्य है, परंतु जब वह स्वतंत्र रूप से बह सकती है तो संवहन ारा ऊष्मा
बहुत अ तरह ले जाती है। वह ऊष्मारोधी का काय केवल तभी करती है जब फँसी हुई हो।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 92
7.1 ऊष्मा का चालन / 7.2 संवहन
प्र.1 क्या ऐसे घर का नमाण करना संभव है जो बाहरी गरमी और सरद से अ धक प्रभा वत न ह ?
हाँ, संभव है। बहुत गरम अथवा बहुत ठं डे जलवायु वाले स्थान म बनाए गए घर ऊष्मा-स्थानांतरण क अवधारणा का उपयोग करके
स्वयं को ठं डा या गरम रखते ह — मुख्यतः भीतर और बाहर के बीच ऊष्मा का कोई कुचालक रखकर।
बाहरी द वार म खोखली ईंट: खोखले भाग म फँसी वायु कुचालक होती है, अतः घर स दय म गरम और ग मय म ठं डे रहते
ह।
लकड़ी क दो परत के बीच गोबर और मृदा: जैसा उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थत मोरी वकासखंड म कया जाता है। लकड़ी
और मृदा कुचालक ह, अतः वे ऊष्मा क हा न रोककर भारी हमपात म भी घर को गरम रखते ह।
मोट म क द वार और छप्पर क छत भारत के गरम-शुष्क भाग म, तथा सूय क ऊष्मा को पराव तत करने वाली हल्के
रंग क बाहरी द वार।
यह कैसे काम करता है: ऊष्मा सदै व अ धक गरम ओर से ठं डी ओर बहती है। य द उनके बीच क द वार कुचालक
हो तो यह प्रवाह लगभग रुक जाता है — ग मय म ऊष्मा भीतर नह आ पाती और स दय म बाहर नह जा पाती।
प्र.2 धुआँ ऊपर क्य उठता है?
क्य क धुआँ अपने आस-पास क वायु से अ धक गरम और हल्का होता है।
लकड़ ी जलती है → गरम गैसे ं और सूक्ष्म ठोस कण िनकलते है ं (यही िमश्रण धुआ ँ है)
धुआ ँ आस-पास की वायु से अिधक गरम होता है
गरम गैस फैलती है → अिधक स्थान घेरती है → हल्की हो जाती है
⇒ धुआ ँ ऊपर उठ जाता है
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ऐसा क्य होता है: गरम होने पर गैस फैल जाती है। उतनी ही मात्रा अब अ धक स्थान घेरती है, अतः वह आस-पास
क ठं डी वायु से हल्क हो जाती है और ठं डी, भारी वायु उसे ऊपर धकेल दे ती है। ठं डी वायु कनार से आकर उसका
स्थान ले लेती है — गरम पदाथ के इसी गमन को संवहन कहते ह।
यह करके दे खए: शांत कमरे म अगरबत्ती जलाकर धुएँ क पतली लक र दे खए। वह पहले सीधी ऊपर चढ़ती है
और ठं डी होकर कमरे क वायु म मलते ही मुड़ जाती है।
क्रयाकलाप 7.2 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 92–93
7.2 संवहन
क्रयाकलाप
प्र.1 अवलोकन कर क कप के साथ क्या हुआ?
जस कागज के कप के नीचे जलती हुई मोमबत्ती रखी है, वह ऊपर उठ जाता है और लकड़ी क छड़ झुक जाती है — दूसरा कप
नीचे चला जाता है [ चत्र 7.3 (ख)]।
ऐसा क्य होता है: मोमबत्ती अपनी लौ के आस-पास क वायु को गरम कर दे ती है। यह गरम वायु उल्टे रखे कप म
जाकर उसके भीतर क वायु को गरम करती है। गरम वायु फैलती है, अ धक स्थान घेरती है और आस-पास क वायु
से हल्क हो जाती है, अतः वह कप के भीतरी भाग को ऊपर क ओर धकेलती है और कप उठ जाता है। दूसरे कप
के नीचे केवल सामान्य ठं डी वायु है, अतः वह नीचे ही रहता है और छड़ झुक जाती है।
स्वयं जाँ चए: मोमबत्ती जलाने से पहले छड़ को क्षै तज संतु लत कर ली जए। तभी आप न त हो सकगे क
झुकाव गरम वायु के कारण है, असमान भार के कारण नह ।
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अपने अवलोकन को ता लका 7.3 म अं कत क जए और संभा वत कारण को सो चए।
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कप से संबं धत अवलोकन अवलोकन के संभा वत कारण
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पृष्ठ 93 पर छपी ता लका 7.3 — इसे अपनी अभ्यास-पु स्तका म उतारकर भ रए।
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भरी हुई ता लका 7.3 —
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a ता लका 7.3 — संभा वत कारण स हत अवलोकन को अं कत कर
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कप से संबं धत अवलोकन अवलोकन के संभा वत कारण
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जलती हुई मोमब ी के ऊपर रखा कप ऊपर
उठ जाता है; दू स रा कप नीचे आ जाता है और
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होती है
ी की ल ौ के पास की वाय ु गरम हो जाती है। जैसे ही उ स कप के भीतर की वाय ु गरम
, वह फै ल ती है और अिधक स्थान घे रती है, अतः हल्की होकर ऊपर उ ठती है और कप
लकड़ी की छड़ ैितज नही ं रह पाती।
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, अतः वह कप नीचे ही रह
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को भी साथ ले जाती है। दू सरे कप के नीचे की वाय ु गरम नही ं होती
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जाता है।
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m क्य महत्वपूण है: अध्याय म यह पहला सीधा प्रमाण है क गैस ऊष्मा का स्थानांतरण वास्तव म ग त करके a g
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la करती है — यही संवहन का आरंभ है। इसक तुलना क्रयाकलाप 7.1 से क जए, जहाँ कुछ भी ग त नह करता
यह
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 93 agl
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7.2 संवहन
प्र.1 आप नरीक्षण म पाते ह क जस कप के नीचे मोमबत्ती रखी थी वह ऊपर उठ जाता है [ चत्र 7.3(ख)]। ऐसा क्य
होता है?
लकड़ ी की
छड़
धागा
कागज का कप
जलती हुई
मोमब ी
पृष्ठ 93 के चत्र 7.3 (ख) का पुनः चत्रण — दो कागज के कप म से एक के नीचे जलती हुई मोमबत्ती रखने के बाद क
व्यवस्था।
क्य क उस कप के भीतर क वायु गरम होकर फैल जाती है और हल्क हो जाती है, और ऊपर उठती हुई गरम वायु कप को भी
उठा दे ती है।
मोमब ी की लौ आस-पास की वायु को गरम करती है
कप के भीतर की वायु गरम होती है
गरम वायु फैलती है → अिधक स्थान घेरती है
उतनी ही वायु अिधक स्थान में → हल्की हो जाती है
⇒ वह ऊपर उठती है और कप ऊपर चला जाता है
यह करके दे खए: आं शक रूप से फूले हुए गुब्बारे को धूप म र खए ( चत्र 7.4)। कुछ समय बाद भीतर क वायु
गरम होकर फैलती है और गुब्बारा स्पष्ट रूप से बड़ा हो जाता है — वही फैलाव, आँख से दे खने योग्य रूप म।
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प्र.2 द्रव म ऊष्मा का स्थानांतरण कस प्रकार होता है? क्या द्रव भी गरम करने पर हवा के समान ऊपर उठते ह?
द्रव म ऊष्मा का स्थानांतरण मुख्यतः संवहन ारा होता है — और हाँ, गरम करने पर द्रव भी ठ क वायु क भाँ त ऊपर उठता है।
तली का जल गरम होता है
वह फैलता है → हल्का होता है → ऊपर उठता है
िकनारों का ठं डा, भारी जल नीचे आता है और उसका स्थान ले लेत ा है
अब यह जल गरम होकर स्वयं ऊपर उठता है
⇒ एक संवहन धारा बन जाती है जो संपूण जल को गरम कर दे त ी है
ऐसा क्य होता है: ठोस के वपरीत, द्रव के कण स्वतंत्र रूप से इधर-उधर जा सकते ह। अतः वे ऊष्मा केवल अपने
पड़ोसी को नह दे ते, ब ल्क उसे साथ लेकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते ह। चालन और संवहन का पूरा अंतर
यही है।
स्वयं जाँ चए: क्रयाकलाप 7.3 म बीकर क तली म रखा पोटै शयम परमगनेट का कण इस अदृश्य धारा को रंगीन
धारी के रूप म दखा दे ता है।
क्रयाकलाप 7.3 — आइए, पता कर — पृष्ठ 93–94
7.2 संवहन
क्रयाकलाप
प्र.1 जल म रंगीन धारी क चाल का नरीक्षण क जए।
मोमबत्ती जलाते ही बीकर क तली के मध्य से बगनी रंग क एक धारी सीधी ऊपर उठती है, ऊपर जाकर फैलती है और फर
कनार से नीचे आती है [ चत्र 7.5 (ख)]। यह धारी तब तक चक्कर लगाती रहती है जब तक बीकर का संपूण जल रंगीन नह हो
जाता।
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बीकर
जल
गरम जल ऊपर
ठं डा जल
नीचे
मोमब ी
क्रयाकलाप 7.3 क संवहन धारा — रंगीन धारी लौ के ऊपर मध्य से ऊपर उठती है और ठं डे कनार से नीचे आती है।
ऐसा क्य होता है: पोटै शयम परमगनेट केवल जल को रंग दे ता है ता क उसक ग त दखाई दे सके। लौ के ठ क
ऊपर तली का जल गरम होकर फैलता है, हल्का होकर ऊपर उठता है। कनार का तुलनात्मक रूप से ठं डा और
भारी जल नीचे आकर उसका स्थान ले लेता है, गरम होता है और पुनः ऊपर उठ जाता है। इस नरंतर प रसंचरण को
संवहन कहते ह, और रंगीन धारी ग तशील जल-कण का माग मात्र है।
सावधानी: पोटै शयम परमगनेट और जलती हुई मोमबत्ती का उपयोग शक्षक अथवा कसी वयस्क के नरीक्षण म
ही क जए तथा बीकर को तपाई स्टड पर तार क जाली स हत र खए।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 94
7.2 संवहन
प्र.1 जल क रंगीन धारी मध्य से ऊपर क्य उठती है और कनार से नीचे क्य आती है?
क्य क बीकर म संवहन धारा बन जाती है — गरम जल मध्य से ऊपर उठता है और ठं डा जल कनार से नीचे आता है।
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तली का जल (लौ के ऊपर) गरम होता है
वह फैलता है, हल्का होता है और मध्य से ऊपर उठता है
ु नात्मक रूप से ठं डा और भारी है
िकनारों का जल त ल
⇒ वह िकनारों से नीचे आता है और ऊपर उठते जल का स्थान ले लेत ा है
अब यह जल गरम होकर स्वयं ऊपर उठता है
यह चक्र तब तक चलता है जब तक संपूण जल गरम न हो जाए
ऐसा क्य होता है: मोमबत्ती तली के ठ क मध्य के नीचे रखी है, अतः केवल बीच का जल सीधे गरम होता है। गरम
होने पर जल फैलता है — उतना ही द्रव्यमान अब अ धक आयतन घेरता है, अतः वह आस-पास के जल से हल्का
होकर ऊपर तैर जाता है। पीछे रक्त स्थान नह रह सकता, इस लए कनार का ठं डा, भारी जल नीचे और भीतर क
ओर बहता है। इस प्रकार संपूण जल जल-कण क वास्त वक ग त ारा गरम होता है — संवहन का अथ यही है।
संकेत: इसी लए हम पात्र को नीचे से गरम करते ह, ऊपर से कभी नह । ऊपर से गरम करने पर संवहन धारा बनती
ही नह — यही बात अभ्यास के प्रश्न 6 म पूछ गई है।
क्रयाकलाप 7.4 — आइए, जाँच कर — पृष्ठ 94–95
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
7.2.1 स्थल समीर और समुद्र समीर
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क्रयाकलाप
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दeा व जल के तापमान को प्रत्येक 5 मनट म मा पए और आँकड़ को ता लका 7.4 म अं कत क जए।
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ता लका 7.4 — गरम होने पर जल और मृदा का तापमान
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क्र.सं. समय ( मनट)
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पृष्ठ 95 पर छपी ता लका 7.4 — समय दए गए ह, तापमान वाले दोन स्तंभ रक्त ह।
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em रखे जाते ह ( चत्र 7.6)। कसी खुली धूप वाले दन प्राप्त सामान्य पाठ्यांक इस प्रकार ह गे।
दो समान कटोरे — एक आधा मृदा से और दूसरा आधा जल से भरा — प्रत्येक म एक प्रयोगशाला तापमापी लगाकर तेज धूप म
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साथ-साथ
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ता लका 7.4 — गरम होने पर जल और मृदा का तापमान
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क्र.सं. समय ( मनट) मृदा का तापमान (°C) जल का तापमान (°C)
1. 0 agl 30 30
2. 5 34 31
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5. 20 44 34
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s e m भन्न ह गे — वे दन, स्थान और समय पर नभर करते ह। जो बात समान
: मृa
स्वयं जाँ चए: आपके अपने आँकड़े इनसे
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नकलनी चा हए वह है प्रवृ त्तg दा का स्तंभ जल के स्तंभ से कह तेजी से बढ़ता है। अपने अवलोकन स्वयं अं कत
क जए, इन्ह उता रए नह ।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
मापते समय सावधानी: प्रत्येक तापमापी का बल्ब मृदा म पूरा दबा हुआ और जल म पूरा डू बा हुआ हो तथा कटोरे
के तल या कनार को स्पश न करे — अन्यथा आप मृदा या जल का नह , कटोरे का तापमान मापगे।
प्र.2 क्या जल एवं मृदा के तापमान म समान समय म समान मात्रा म वृ हुई?
नह । समान समय-अंतराल म मृदा के तापमान म जल क तुलना म कह अ धक वृ द्ध होती है।
ऊपर दए गए पाठ्यांक के अनुसार, समान धूप म 20 मनट प ात —
मृद ा के तापमान में वृि = 44 °C − 30 °C = 14 °C
जल के तापमान में वृि = 34 °C − 30 °C = 4 °C
ऐसा क्य होता है: दोन कटोर को सूय से समान ऊष्मा मलती है, परंतु जल का तापमान एक डग्री बढ़ाने के लए
मृदा क तुलना म कह अ धक ऊष्मा चा हए। अतः समान ऊष्मा मृदा म बड़ी वृ द्ध और जल म बहुत छोट वृ द्ध
करती है।
प्र.3 य द नह , तो इनम से कौन अ धक तीव्रता से गरम हुआ?
मृदा अ धक तीव्रता से गरम हुई।
यह क्य महत्वपूण है: यही एक तथ्य आगे के पूरे उपशीषक का आधार है। दन म स्थल (मृदा, बालू, च ान) जल
क तुलना म शीघ्र गरम होता है — और जैसा पुस्तक आगे बताती है, रात म वह शीघ्र ठं डा भी होता है। यही अंतर
तट पर समुद्र समीर और स्थल समीर को जन्म दे ता है।
क्या आप जानते ह? इसी गुण के कारण दोपहर म समुद्र-तट क रेत पर नंगे पाँव चलना क ठन हो जाता है जब क
कुछ ही कदम दूर समुद्र का जल तब भी ठं डा लगता है।
प्र.4 20 मनट म जल और मृदा के तापमान म कतनी वृ हुई?
ता लका 7.4 के नमूना पाठ्यांक से (दोन 30 °C से आरंभ हुए) —
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
मृद ा: 44 °C − 30 °C = 14 °C
जल: 34 °C − 30 °C = 4 °C
अंत र = 14 °C − 4 °C = 10 °C
अथात समान 20 मनट और समान धूप म मृदा जल क तुलना म लगभग 10 °C अ धक गरम हुई — मृदा म वृ द्ध जल क लगभग
तीन से चार गुनी रही।
संकेत: सदै व 20 मनट के पाठ्यांक म से 0 मनट का पाठ्यांक घटाइए। यहाँ अं तम तापमान नह , तापमान म हुई
वृ द्ध महत्वपूण है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 95
7.2.1 स्थल समीर और समुद्र समीर
प्र.1 क्या मृदा जल क तुलना म शीघ्र ठं डी भी होती है?
हाँ। गरम हो चुके सेट-अप को कमरे के भीतर लाकर 20 मनट तक रखने पर तापमापी दशाते ह क मृदा जल क अपेक्षा शीघ्र ठं डी
होती है — उसी प्रकार जैसे वह शीघ्र गरम हुई थी।
भीतर लाने के बाद का समय मृदा का तापमान (°C) जल का तापमान (°C)
0 िमनट 44 34
10 िमनट 36 32
20 िमनट 32 31
ऐसा क्य होता है: तापमान म थोड़े-से प रवतन के लए भी जल बहुत अ धक ऊष्मा लेता और छोड़ता है; मृदा ऐसा
नह करती। अतः मृदा शीघ्र गरम होती है और उतनी ही शीघ्र अपनी गरमी खो दे ती है, जब क जल का तापमान दोन
ही दशाओं म धीरे-धीरे बदलता है।
क्या आप जानते ह? इसी कारण रात म समुद्र के ऊपर क वायु स्थल के ऊपर क वायु से अ धक गरम होती है और
अँधेरा होने पर स्थल से समुद्र क ओर स्थल समीर बहती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 96
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7.3 व करण
प्र.1 मुझे आश्चय होता है क आग से गरमी हम तक कैसे पहुँचती है?
आग क ऊष्मा हम तक व करण ारा पहुँचती है — वह गरम वस्तु (आग) से सीधे हम तक आती है और इस स्थानांतरण के लए
कसी माध्यम क आवश्यकता नह होती।
प्र क्रया ऊष्मा कैसे जाती है माध्यम यहाँ उदाहरण
चा हए?
चालन कण अपने पड़ोसी कण को ऊष्मा दे ता है; कण अपने हाँ लौ → धातु का पात्र
स्थान पर स्थर रहते ह
संवहन गरम कण स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान जाते ह हाँ आग से ऊपर उठता धुआँ और गरम वायु
िविकरण ऊष्मा गरम वस्तु से सीधे हम तक आती है नही ं आग के सामने बैठे पेमा और पालदे न को
लगती गरमी
यह व करण ही क्य है: आग क गरम वायु सीधी ऊपर उठ जाती है, अतः संवहन गरमी को बगल म बैठे ब के
चेहरे तक नह ला सकता। वे आग को छू भी नह रहे, अतः चालन भी नह । गरमी बीच के अंतराल को पार करके
सीधे उन तक पहुँचती है — यही व करण है। सूय क ऊष्मा भी इसी प्रकार पृथ्वी तक आती है, वह भी वहाँ से जहाँ
कोई कण ही नह है।
प्र.2 आपने अवश्य दे खा होगा क जब कोई गरम पात्र आग से दूर हटा कर रखा जाता है तो कुछ समय पश्चात वह ठं डा
हो जाता है। इसका क्या कारण है?
गरम पात्र अपने आस-पास ऊष्मा को व क रत करके ठं डा हो जाता है।
ऐसा क्य होता है: सभी वस्तुओं म ऊष्मा का व करण होता है। जो वस्तु अपने प रवेश से अ धक गरम है वह
जतनी ऊष्मा लेती है उससे अ धक दे ती है, अतः उसका तापमान तब तक घटता है जब तक वह कमरे जतनी गरम
न रह जाए। गरम पात्र नरंतर अपने चार ओर क ठं डी वायु, द वार और मेज को ऊष्मा भेजता रहता है और ठं डा हो
जाता है। (कुछ ऊष्मा उस सतह म चालन ारा और ऊपर क वायु म संवहन ारा भी जाती है, परंतु केवल व करण
से भी पात्र ठं डा हो जाएगा।)
क्या आप जानते ह? यह आदान-प्रदान दोन ओर होता है। गरम कमरे म रखा ठं डे जल का गलास अपने प रवेश से
व करण ारा ऊष्मा ग्रहण करता है और धीरे-धीरे गरम हो जाता है।
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गहन चतन — पृष्ठ 96
7.3 व करण
गहन चतन
प्र.1 ग मय म ेत अथवा हल्के रंग के और स दय म गहरे रंग के वस्त्र पहनना अ धक आरामदायक क्य होता है?
क्य क हल्के और गहरे रंग क सतह अपने ऊपर पड़ने वाली ऊष्मा के साथ अलग-अलग व्यवहार करती ह।
हल्के रंग के वस्त्र अपने ऊपर पड़ने वाली अ धकांश ऊष्मा को पराव तत कर दे ते ह। शरीर तक कम ऊष्मा पहुँचती है, अतः
ग मय म हम अ धक ठं डक और आराम का अनुभव होता है।
गहरे रंग क सतह अ धकांश ऊष्मा को अवशो षत करती है। सूय क अ धक ऊष्मा शरीर के पास बनी रहती है, अतः स दय
म हम अ धक गरमी और आराम क अनुभू त होती है।
वस्त्र का रंग ऊष्मा के साथ क्या करता है हम कैसा लगता है उपयुक्त ऋतु
श्वेत / हल्का अ धकांश ऊष्मा पराव तत कर दे ता है ठं डक ग्रीष्म
काला / गहरा अ धकांश ऊष्मा अवशो षत कर लेता है गरमी शीत
यह करके दे खए: धूप वाले दन एक ेत कागज और एक काला कागज साथ-साथ दस मनट धूप म रखकर छू कर
दे खए। काला कागज स्पष्ट रूप से अ धक गरम मलेगा।
वैज्ञा नक से प रचय — पृष्ठ 99
7.4 जल चक्र
वै ज्ञा नक से प रचय
प्र.1 वराह म हर कौन थे और उन्ह ने अपनी कृ त बृहत् सं हता म वषा के वषय म क्या बताया?
वराह म हर छठ शताब्द के महान खगोलज्ञ और ग णतज्ञ थे, जो उज्ज यनी — वतमान उ ैन, मध्यप्रदे श — म रहते थे।
उन्ह ने अपनी कृ त बृहत् सं हता म मौसमी वषण का अनुमान लगाने क एक पद्ध त का सूत्रपात कया। उनके अनुमान प्राकृ तक
प रघटनाओं के सूक्ष्म अवलोकन पर आधा रत थे, जैसे —
बादल का बनना — उनका आकार, रंग और व्यवहार;
हवा का प्रवाह — पवन क दशा और स्वरूप;
तार तथा चंद्रमा क स्थ त;
तथा अन्य प्राकृ तक प रघटनाएँ।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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यह क्य महत्वपूण है: वराह म हर जन पवन और बादल का अवलोकन करते थे, वे स्वयं ऊष्मा-स्थानांतरण से ही
बनते ह — सूय स्थल और जल को असमान रूप से गरम करता है, वायु संवहन ारा ऊपर उठती eहैm
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gl जल-चक्र को पढ़ रहे
, जल वा ष्पत
. o है और बादल बनते ह। आधु नक उपकरण के आने से बहुत पहले वेaउसी
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m इस अध्याय म पढ़ रहे ह, और उससे कसान को बुवाई क योजना बनाने म सहायता कर रहे थे।
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होकर संघ नत
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क्या आप जानते ह? आज भारत मौसम व ान वभाग यही काय उपग्रह , रडार और कंप्यूटर मॉडल से करता है
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— परंतु मूल वचार वही है: बादल, पवन और आद्रता दे खए और वषा का अनुमान लगाइए।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 99
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7.4.1 जल का धरती म अंतःस्यंदन
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a s emपृथ्वी क सतह से जल का अंतःस्यंदन कस प्रकार होता है?
a gl प्र.1
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m उसका एक भाग मृदा के कण के बीच के सूक्ष्म रक्त स्थान और
पृथ्वी पर गरने वाला वषा-जल पूरा बहकर नह चलाeजाता।
s
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aglनीचे क ओर बढ़ता है। मृदा और च ान से सतही जल के रसने क इस प्र क्रया को
च ान क दरार म समा जाता है और धीरे-धीरे
अंतःस्यंदन कहते ह।
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वष का जल भूिम पर िगरता है
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↓ म.ृद ा और च ान के कणों के बीच के स्थानों में पवेश करता है (अंत ःस्यंद नa g l
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agl ↓ िछद ों से होता हुआ और गहरा उतरता है
↓ अवसादों के िछद ों और च ानों की दरारों में एकत्र हो जाता है
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= भौम जल, जो जलभ ृत नामक परतों में संग.हीत g l a
e m रहता है a
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ग त कससे तय होती है: य द मृदा और च ान के बीच के स्थान अ धक चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े हुए ह तो
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जल अ धक आसानी से अंतःस्यं दत होता है ( चत्र 7.11)। क्रयाकलाप 7.5 म इसी बात क जाँच मृदा, बालू और
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बजरी से क जाती है।
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संकेत: कुँओं और हडपंप से लोग जो जल नकालते ह, वह यही रसा हुआ जल है जसे पुनः सतह पर लाया जाता
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है।
m a s e
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agअन्वेषण कर — पृष्ठ 99
क्रयाकलाप 7.5 — आइए,
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7.4.1 जल का धरती म अंतःस्यंदन
क्रयाकलाप
प्र.1 प्रत्येक बोतल म से प्रवा हत होकर नकलने वाले जल क मात्रा का अनुमान लगाइए।
उल्ट रखी तीन बोतल — एक म मृदा, एक म बालू और एक म बजरी — म 200 mL जल डाला जाता है और 10 मनट तक
बहकर आया जल एकत्र कया जाता है ( चत्र 7.10)। उ चत अनुमान होगा —
बोतल 3 (बजरी) → सबसे अिधक जल, और सबसे तीव गित से
बोतल 2 (बालू) → मध्यम मात्रा में जल
बोतल 1 (मृद ा) → सबसे कम जल, और सबसे धीमी गित से
अनुमान का आधार: कण के बीच का स्थान जतना चौड़ा होगा, जल उतनी ही सरलता से उसम से नकल सकेगा।
बजरी के कण बड़े होते ह और उनके बीच चौड़े अंतराल होते ह; बालू के कण उससे कह छोटे होते ह; मृदा के कण
सबसे महीन होते ह और इतने सटकर बैठते ह क जल के लए खुला माग बचता ही नह ।
स्वयं जाँ चए: तीन के लए बोतल का आकार, 200 mL जल और 10 मनट का समय एक-जैसा र खए, अन्यथा
तुलना उ चत नह होगी।
प्र.2 प्रत्येक बोतल से आने वाले जल क मात्रा क तुलना क जए।
क्रयाकलाप करने पर जल इस क्रम म नकलता है — बजरी > बालू > मृदा। भरी हुई ता लका 7.5 इस प्रकार है।
भरी हुई अनुमान अवलोकन
बोतल
जल का अंतःस्यंदन (बहुत धीमा/ जल का अंतःस्यंदन (बहुत धीमा/धीमा/तीव्र)
धीमा/तीव्र)
बोतल 1 (म ृद ा) बहुत धीमा बहुत धीमा — बीकर में के वल थोड़ा-सा जल टपकता है, अिधकांश जल म ृद ा
के ऊपर ही ठहरा रहता है
बोतल 2 धीमा धीमा — ठीक -ठाक मात्र ा में जल एक त्र होता है, परंत ु समय ल गता है
(बालू)
बोतल 3 तीव्र तीव — ल गभग सारा जल शीघ ता से बहकर बीकर भर दे ता है
(बजरी)
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ऐसा क्य होता है: बजरी के कण के बीच के स्थान बालू और मृदा के कण के बीच के स्थान से अ धक चौड़े होते
ह, अतः बजरी से जल सरलता से रस जाता है। मृदा म कण अत्यंत महीन और सटे हुए होते ह, इस लए जल रुक
जाता है।
क्या आप जानते ह? इसी लए चकनी म वाली भू म म खोदा गया तालाब महीन जल रोके रखता है, जब क
बलुई भू म म वही तालाब कुछ ही दन म सूख जाता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 100
7.4.1 जल का धरती म अंतःस्यंदन
प्र.1 क्या आपके प रणाम का आपके अनुमान के साथ मलान हो रहा है?
हाँ — अ धकांश व ा थय के प रणाम अनुमान से पूरी तरह मलते ह: जल बजरी से सबसे तीव्र ग त से, बालू से धीमे और मृदा से
सबसे धीमे रसता है।
य द मलान न हो तो: यह असफलता नह , उपयोगी जानकारी है। जाँ चए क कह मृदा ढ ली तो नह भरी थी,
कसी एक ढक्कन का छद्र बड़ा तो नह था, या बजरी म महीन धूल तो नह भरी थी। व ान म गलत सद्ध हुआ
अनुमान आपको कारण खोजने के लए वापस भेजता है — और यही क्रयाकलाप आपको सखाता है क शेष सभी
प र स्थ तयाँ समान रखना कतना आवश्यक है।
संकेत: जल डालने से पहले अपना अनुमान लख ली जए। ईमानदारी से लगाए गए अनुमान क अवलोकन से तुलना
करना ही ता लका 7.5 के ‘अनुमान’ और ‘अवलोकन’ स्तंभ का उ े श्य है।
प्र.2 आपने यह अवलोकन कया होगा क जल बजरी से सबसे तीव्रग त से, बालू से धीमे से और मृदा म से अत्यंत धीरे
रसता है। ऐसा क्य होता है?
इसका कारण कण के बीच के रक्त स्थान का आकार है।
बजरी — बड़ े कण, चौड़ े, खुले और परस्पर जुड़े स्थान → जल सबसे तीव िरसता है
बालू — छोटे कण, सँक रे स्थान → जल धीमे िरसता है
मृद ा — अत्यंत महीन, सटे हुए कण, बहुत सूक्ष्म स्थान → जल सबसे धीमे िरसता है
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: जल केवल कण के बीच के रक्त स्थान से होकर जा सकता है, कण म से होकर नह । बजरी
के कण के बीच के स्थान बालू और मृदा क तुलना म अ धक चौड़े होते ह, अतः जल बजरी से सरलता से रस जाता
है। य द मृदा और च ान के बीच के स्थान अ धक चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े हुए ह तो जल अ धक आसानी से
अंतःस्यं दत होता है ( चत्र 7.11)। मृदा म ये अंतराल इतने महीन और असंबद्ध होते ह क जल लगभग रुक ही जाता
है।
क्या आप जानते ह? भू म के नीचे भी यही नयम चलता है। बालू और बजरी क भू मगत परत अ े जलभृत
बनाती ह, क्य क वे जल को भीतर भी लेती ह और अपने छद्र म बहुत सारा जल रोके भी रखती ह।
वज्ञान एवं समाज — पृष्ठ 101
7.4.1 जल का धरती म अंतःस्यंदन
वज्ञान एवं समाज
प्र.1 हम-स्तूप क्या है? इसे कस प्रकार बनाया जाता है और यह ल ाख के लोग क कस प्रकार सहायता करता है?
हम-स्तूप हम क एक लंबी, शंकु के आकार क संरचना है जसे ल ाख म स दय म बनाया जाता है ता क वसंत के सूखे महीन के
लए जल सं चत रहे ( चत्र 7.13)।
इसे कैसे बनाया जाता है —
1. शीतकाल म पहाड़ी जलधाराओं का जल भू मगत न लकाओं (पाइप) ारा नीचे क ओर प्रवा हत कया जाता है।
2. इस जल को फुहार क तरह ठं डी वायु म गराया जाता है।
3. गरते समय अत्यंत कम ताप के कारण यह जल जम जाता है।
4. हम परत दर परत बढ़ती जाती है और एक लंबी शंकु के आकार क संरचना — हम-स्तूप — बन जाती है।
यह कैसे सहायता करता है: ल ाख म वसंत के मौसम म जलधाराएँ प्रायः सूख जाती ह, क्य क सूय क करण क गरमी पहाड़
पर बफ पघलाने के लए तब पयाप्त नह होती। हम-स्तूप वसंत म धीरे-धीरे पघलता है और खेती तथा ग मय क अन्य
आवश्यकताओं के लए जल प्रदान करता रहता है।
इसके भीतर का वज्ञान: शंकु का आकार ही इसक चतुराई है। शंकु म हम के आयतन क तुलना म सतह-क्षेत्रफल
कम होता है और उसक अपनी छाया भी उसके बड़े भाग को ढकती है, अतः सूय का व करण उसे एक साथ नह ,
धीरे-धीरे पघलाता है — ठ क तभी जब कसान को जल चा हए।
क्या आप जानते ह? भारत के अन्य भाग म उपयोग कए जाने वाले वषा जल संग्रहण ढाँच और पुन:भरण ग के
पीछे भी यही सोच है — जब जल अ धक हो तब उसे रो कए, सं चत क जए और अभाव के समय काम म लाइए।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 102–104
अध्याय अभ्यास
प्र.1 (i) प्रत्येक के लए एक सही वकल्प चु नए — आपके पताजी ने एक सॉसपैन खरीदा जो दो भन्न पदाथ (क)
एवं (ख) से बना है, जैसा क चत्र 7.14 म दशाया गया। पदाथ (क) और (ख) के नम्न ल खत गुणधम ह —
(क) ‘क’ और ‘ख’ दोन ऊष्मा के सुचालक ह। (ख) ‘क’ और ‘ख’ दोन ऊष्मा के कुचालक ह। (ग) ‘क’
ऊष्मा का सुचालक है और ‘ख’ कुचालक है। (घ) ‘क’ ऊष्मा का कुचालक है और ‘ख’ सुचालक है।
ख
क
पृष्ठ 102 के चत्र 7.14 के सॉसपैन का पुनः चत्रण। ‘क’ और ‘ख’ उन दो भन्न पदाथ को दशाते ह जनसे सॉसपैन
बना है।
(ग) ‘क’ ऊष्मा का सुचालक है और ‘ख’ कुचालक है।
चत्र 7.14 म ‘क’ सॉसपैन का पात्र-भाग है — वह भाग जो लौ पर रखा जाता है और भोजन रखता है — तथा ‘ख’ उसका ह ा
है।
भाग उसे क्या करना है आवश्यक गुण प्रयुक्त पदाथ
क — पात्र का भाग लौ से ऊष्मा शीघ्रता से भोजन तक पहुँचाना ष्
ऊ म ा का सुचाल क ऐलु म नयम, स्ट ल, लोहा
ख — हत्था ऊष्मा को पकड़ने वाले हाथ तक न पहुँचने दे ना ष्
ऊ म ा का कु चाल क लकड़ी, प्ला स्टक, बेकेलाइट
अन्य वकल्प गलत क्य ह: य द दोन सुचालक होते (क) तो हत्था इतना गरम हो जाता क पकड़ा ही न जाता।
य द दोन कुचालक होते (ख) तो भोजन कभी पकता ही नह । वकल्प (घ) तो पूरी व्यवस्था उलट दे ता है — पात्र
गरम ही नह होगा और हत्था हाथ जला दे गा।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
हुई मोमबत्ती प के नीचे रखी जाती है। नम्न ल खत म से क्या घ टत होगा? (क) सभीem
प्र.1 (ii) चत्र 7.15 म दशाया अनुसार मोम के साथ एक धातु-प पर पन को चपकाया जाता है और एक जलती
m a s
l 2, पन 3 और 4 से बाद
coपर गरगी। (ख) पन 1 और 2, पन 3 और 4 से पहले गरगी। (ग) पन a1 gऔर
पन लगभग समान
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समय
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म गरगी। (घ) पन 2 और 3 लगभग समान समय पर गरगी।
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धातु-प ी
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स्टै ड
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जलती हुई
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.com मोमब ी
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पृष्ठ 102 के चत्र 7.15 का पुनः चत्रण — धातु-प के नीचे मोम से चपक चार पन, तथा पुस्तक के अनुसार रखी
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जलती हुई मोमबत्ती।
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agl उत्तर
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(घ) पन 2 और 3 लगभग समान समय पर गरगी।
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चत्र 7.15 को ध्यान से दे खए। पन स्टड क ओर से बाहर क ओर 4, 3, 2, 1 के क्रम म ह और मोमबत्ती पन 2 और पन 3 के
ठ क बीच रखी है — क्रयाकलाप 7.1 क तरह
l a seप के सरे पर नह ।
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लौ से िपन 2 की दू री = लौ से िपन 3 की दू री
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⇒ ऊष्मा दोनों तक एक ही समय में पहुँच ती है
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m .⇒coदोनों के नीचे की मोम एक साथ िपघलती है a g
l a se
ag ⇒ िपन 2 और 3 लगभग एक साथ िगरती है,ं उसके बाद िपन 1 और 4
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s e m
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ऐसा क्य होता है: चालन म ऊष्मा गरम कए गए बदु से प
e m . co म दोन दशाओं म फैलती है। कोई पन कब गरेगी,
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यह केवल लौ से उसक दूरी तय करती है। समान दूरी वाली पन एक साथ गरती ह।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
संकेत: य द मोमबत्ती कसी एक सरे पर होती तो वकल्प (ख) या (ग) आकषक लगते। उत्तर दे ने से पहले सदै व
दे खए क लौ कहाँ रखी है।
प्र.1 (iii) एक धूम्र-संसूचक यंत्र वह यंत्र है जो धुए ँ का पता लगाता है और अलाम बजा दे ता है। मान ली जए आप
अपने कमरे म एक धूम्र-संसूचक यंत्र लगा रहे ह। इस यंत्र को लगाने का सबसे उपयुक्त स्थान होगा — (क)
फश के पास (ख) द वार के मध्य म (ग) छत पर (घ) कमरे म कह पर भी
(ग) छत पर।
ऐसा क्य होता है: धुआँ गरम गैस और सूक्ष्म ठोस कण का मश्रण है। आस-पास क वायु से अ धक गरम होने के
कारण वह फैलता है, हल्का हो जाता है और संवहन ारा ऊपर उठ जाता है। अतः कमरे म धुआँ सबसे पहले छत के
ठ क नीचे एकत्र होता है। वहाँ लगा संसूचक धुएँ को सबसे पहले पकड़ लेता है और तभी अलाम बजा दे ता है जब
बचाव का समय शेष होता है।
अन्य वकल्प क्य नह : फश के पास (क) धुआँ तभी पहुँचेगा जब पूरा कमरा भर चुका होगा; द वार के मध्य म
(ख) भी दे र हो जाएगी; और (घ) सत्य ही नह है — स्थान का बहुत महत्व है।
प्र.2 एक दुकानदार आपको एक गलास म ठं डी लस्सी दे ता है। संयोगवश गलास म एक छोटा सा रसाव है। आपको
दुकानदार एक और गलास दे ता है ता क आप रसाव वाला गलास उसम रख ल। क्या यह व्यवस्था आपक
लस्सी को अ धक दे र तक ठं डा रखने म सहायता कर सकती है? व्याख्या क जए।
हाँ, सहायता करेगी। दोहरे गलास वाली यह व्यवस्था लस्सी को अ धक दे र तक ठं डा रखेगी।
ऐसा क्य होता है: जब एक गलास दूसरे गलास के भीतर रखा जाता है तो दोन के बीच वायु क एक पतली परत
फँस जाती है। वायु ऊष्मा क कुचालक है। अब कमरे क गरम वायु क ऊष्मा को पहले बाहरी गलास, फर फँसी
हुई वायु क परत और तब भीतरी गलास पार करना पड़ेगा, तभी वह लस्सी तक पहुँचेगी। वायु क यह परत इस
प्रवाह को बहुत धीमा कर दे ती है, अतः लस्सी एकल गलास क तुलना म कह धीरे गरम होती है।
कमरे की गरम वायु → बाहरी िगलास → फँसी हईु वायु (कु चालक ) → भीतरी िगलास → ठं डी लस्सी
⇒ ऊष्मा धीरे भीतर आती है ⇒ लस्सी अिधक दे र ठं डी रहती है
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? थमस फ्लास्क इसी सद्धांत पर, पर उससे भी बेहतर ढं ग से काय करता है — उसक दो
द वार के बीच क वायु नकाल द जाती है, अतः ऊष्मा का चालन करने वाले कण वहाँ बचते ही नह ।
प्र.3 कारण स हत बताइए क नम्न ल खत कथन सत्य ह अथवा असत्य? (क) ठोस म ऊष्मा का स्थानांतरण संवहन
ारा होता है। [ ] (ख) चालन म ऊष्मा का स्थानांतरण कण क वास्त वक ग त के ारा होता है। [ ] (ग) मृदा क
सतह वाले क्षेत्र से बालू क सतह वाले क्षेत्र क तुलना म जल का रसाव अ धक होता है। [ ] (घ) स्थल से समुद्र
क ओर ठं डी हवा के गमन को स्थल समीर कहते ह। [ ]
कथन सत्य / कारण
असत्य
(क) ठोस में ऊष्मा का स्थानांतरण अस य त् ठोस म ऊष्मा का स्थानांतरण मुख्यतः चालन ारा होता है। संवहन के लए कण का
संवहन ारा होता है। स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना आवश्यक है, जब क ठोस के कण अपने
स्थान पर स्थर रहते ह और केवल कंपन कर सकते ह। अतः संवहन द्रव और गैस म
होता है, ठोस म नह ।
(ख) चालन में ऊष्मा का स्थानांतरण अस य त् कण क वास्त वक ग त ारा ऊष्मा का स्थानांतरण संवहन क प रभाषा है, चालन
कणों की वास्तिवक गित के ारा क नह । चालन म गरम कण अपनी ऊष्मा अपने संपक म आने वाले अगले कण को
होता है। दे दे ता है, परंतु कण स्वयं अपनी स्थ त से नह हटते।
(ग) म ृद ा की सतह वाले ेत्र ों से बालू अस य त् स्थ त इसके वपरीत है। बालू के कण के बीच के स्थान मृदा के अत्यंत महीन, सटे
की सतह वाले ेत्र ों की तुल ना में हुए कण के बीच के स्थान से अ धक चौड़े होते ह, अतः जल का रसाव बालू म
जल का िरसाव अिधक होता है। अ धक और मृदा म सबसे कम होता है ( क्रयाकलाप 7.5)।
(घ) स्थल से समुद की ओर ठं डी त्
स य रात के समय स्थल जल क अपेक्षा शीघ्र ठं डा होता है। समुद्र के ऊपर क गरम वायु
हवा के गमन को स्थल समीर कहते ऊपर उठती है और स्थल से ठं डी वायु समुद्र क ओर बहती है। स्थल से समुद्र क ओर
है।
ं ठं डी वायु के इसी गमन को स्थल समीर कहते ह [ चत्र 7.7 (ख)]।
संकेत: समीर को उसके आने क दशा से याद र खए — समुद्र समीर समुद्र से आती है ( दन म), स्थल समीर स्थल
से आती है (रात म)।
ध्यान द जए: इसी अध्याय के अंग्रेज़ी संस्करण (Curiosity) म कथन (ii) ‘Heat transfer through
convection takes place by the actual movement of particles’ है, जो सत्य है। हद संस्करण म
यहाँ ‘चालन’ छपा है, इस लए हद पुस्तक के अनुसार यह कथन असत्य है। परीक्षा म अपनी पुस्तक म छपे शब्द के
अनुसार ही उत्तर ल खए।
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प्र.4 कसी पात्र म रखे बफ के टु कड़े कुछ समय पश्चात पघलकर जल बन जाते ह। इस रूपांतरण के लए बफ के
टु कड़ को ऊष्मा कहाँ से प्राप्त होती है?
बफ के टु कड़ को यह ऊष्मा अपने प रवेश से प्राप्त होती है — जस पात्र म वे रखे ह उससे, आस-पास क वायु से तथा नीचे क
मेज या सतह से।
पिरवेश (वायु, पात्र, मेज) बफ से अिधक गरम है
⇒ ऊष्मा गरम पिरवेश से ठं डी बफ की ओर बहती है
⇒ बफ यह ऊष्मा अवशोिषत करके िपघलकर जल बन जाती है
ऐसा क्य होता है: ऊष्मा सदै व अ धक गरम वस्तु से कम गरम वस्तु क ओर बहती है। बफ कमरे से कह अ धक
ठं डी है, अतः वह तब तक ऊष्मा लेती रहती है जब तक पघल न जाए। यह ऊष्मा उस तक तीन व धय से एक साथ
पहुँचती है — जस पात्र को वह छू रही है उससे चालन ारा, आस-पास क वायु-धाराओं से संवहन ारा और
नकट क गरम वस्तुओं से व करण ारा।
स्वयं जाँ चए: एक बफ का टु कड़ा स्ट ल के कटोरे म और दूसरा मोटे ऊनी कपड़े म र खए। स्ट ल के कटोरे वाला
टु कड़ा कह जल्द पघलता है, क्य क स्ट ल सुचालक है और उसे शीघ्रता से ऊष्मा पहुँचाता है।
प्र.5 एक अगरबत्ती को नीचे क दशा म उलटा कर के लगाया गया है। इस अगरबत्ती से नकलने वाला धुआँ कस
दशा म जाएगा? एक चत्र बनाकर धुए ँ क ग त क दशा को दशाइए।
धुआँ फर भी ऊपर क ओर ही जाएगा — अगरबत्ती चाहे कसी भी दशा म लगी हो।
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आधार
अगरब ी
(नीचे की ओर)
जलता िसरा
धुआ ँ अगरब ी के चारों ओर घूमकर
ऊपर की ओर उठता है
फश
अगरबत्ती नीचे क ओर लगी है, फर भी धुआँ उसके चार ओर घूमकर सदै व ऊपर क ओर ही जाता है।
ऐसा क्य होता है: धुआँ गरम गैस और सूक्ष्म ठोस कण का मश्रण है। आस-पास क वायु से अ धक गरम होने
के कारण वह फैलता है, हल्का हो जाता है और उसके चार ओर नीचे आती ठं डी, भारी वायु उसे ऊपर धकेल दे ती है।
यह संवहन है और यह केवल इस बात पर नभर करता है क धुआँ गरम है — इस पर नह क अगरबत्ती कस दशा
म लगी है। अतः धुआँ सरे से नकलकर अगरबत्ती के चार ओर घूमता है और ऊपर चढ़ जाता है।
स्वयं जाँ चए: शांत कमरे म जलती अगरबत्ती को आड़ी पक ड़ए। धुआँ सरे से एक-दो सट मीटर के भीतर ही ऊपर
मुड़ जाता है — हर बार।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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m तापमान मापेगा
चत्र 7.16 म दखाए अनुसार जलयुक्त परखन लय को एक मोमबत्ती ारा समान समय तक गरम कया जाता है
[ चत्र 7.16 (क)]। अथवा चत्र 7.16 (ख) म दखाए गए दोन तापमा पय म से कौन-सा अeधक
प्र.6
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तापमापी तापमापी
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जलती हुई
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मोमब ी
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m .co जलती हुई a g
l a se मोमब ी
a g िचत्र 7.16 (क) िचत्र 7.16 (ख)
िचत्र 7.16 — परखनिलयों मे ं लगे हुए तापमापी
m a s
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पृष्ठ 103 के चत्र 7.16 का पुनः चत्रण — जलयुक्त एक जैसी दो परखन लयाँ, जनम मोमबत्ती और तापमापी का बल्ब
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अलग-अलग स्थान पर ह।
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चत्र 7.16 (क) वाला तापमापी अ धक तापमान मापेगा।
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व्यवस्था मोमबत्ती कहाँ है तापमापी का क्या होता है
ag बल्ब कहाँ है
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िचत्र 7.16 परखनली क बंद तली जल म, गरम कए
जा रहे भागcक
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गरम जल ऊपर उ ठकर ब ब के पास से ग ुजरता है और ठं डा जल नीचे
(क) के ठ क नीचे
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ऊपर आकर गरम होता है — संवहन धारा पूर ी परखनल ी का जल गरम कर
a
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दे ती है। अिधक पाठ ांक ।
िचत्र 7.16 कनारे पर, जल क a जल म, परखनली क ल्
गरम जल ह का होने के कारण ऊपर ही ठहरा रहता है। तल ी तक
m
(ख) सतह के पास ऊपरी तली के पास ष् त्र
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ऊ म ा नाममा पहु ँचती है। कम पाठ ांक ।
भाग म
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m ag ऊष्मा को केवल ऊपर क ओर ले जा
.cऐसा क्य होता है: जल मुख्यतः संवहन ारा गरम होता है और संवहन धाराएँ
l a se
ag सकती ह। (क) म जल नीचे से गरम कया जा रहा है, अतः गरम जल पूरी परखनली म ऊपर उठता है और तापमापी
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के बल्ब के पास से गुजरता है — संपूण जल गरम हो जाता है। (ख) म ऊष्मा ऊपरी भाग म द जा रही है; गरम जल
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पहले से ही ऊपर है, अतः उसे ऊपर उठने क आवश्यकता ही नह और वह वह ठहरा रहता है। तली म रखे बल्ब
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तक ऊष्मा केवल जल के अत्यंत धीमे चालन से पहुँच सकती है, और जल ऊष्मा का कुचालक है।
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क्या आप जानते ह? इसी लए केतली, प्रेशर कुकर और कड़ाही सदै व तली से गरम क जाती ह। कनारे से गरम
करने पर लगभग सारा ईंधन व्यथ चला जाएगा।
प्र.7 गरम जलवायु वाले क्षेत्र म घर क बाहरी द वार को खोखली ईंट ारा क्य बनाया जाता है?
क्य क खोखली ईंट के भीतर वायु फँसी रहती है, और वायु ऊष्मा क कुचालक है।
बाहर की गरम वायु → दीवार का बाहरी तल
→ खोखली ईंट में फँसी वायु (कु चालक )
→ दीवार का भीतरी तल
ु ती है ⇒ कमरे ठं डे रहते है ं
⇒ ऊष्मा नाममात्र भीतर पहँच
ऐसा क्य होता है: गैस के कण दूर-दूर होते ह, अतः ऊष्मा एक कण से अगले कण तक सरलता से नह जा पाती।
फँसी हुई वायु इसी लए एक अवरोध का काम करती है और बाहर क गरमी को घर के भीतर आने से रोकती है। ठोस
ईंट म ऐसी वायु-कोठरी नह होती, अतः वह ऊष्मा को कह अ धक सरलता से भीतर जाने दे ती है।
क्या आप जानते ह? यही द वार स दय म उलटा काम करती है — वह घर के भीतर क ऊष्मा को बाहर नह जाने
दे ती। इसी लए खोखली ईंट घर को ग मय म ठं डा और स दय म गरम रखती ह। उत्तरकाशी के मोरी वकासखंड
म यही वचार लकड़ी क दो परत के बीच गोबर और मृदा भरकर काम म लाया जाता है।
प्र.8 जल के बड़े नकाय क उप स्थ त कस प्रकार आस-पास के क्षेत्र म तापमान को अ धक बढ़ने से रोकती है।
समझाइए।
चूँ क जल स्थल क तुलना म बहुत धीरे गरम और धीरे ठं डा होता है, इस लए कोई बड़ी झील, समुद्र या महासागर आस-पास के क्षेत्र
के तापमान को संतु लत रखने वाले वशाल ग े क भाँ त काय करता है।
दन म और ग्रीष्म ऋतु म: सूय क ऊष्मा स्थल और जल दोन पर पड़ती है। स्थल शीघ्र ही बहुत गरम हो जाता है, परंतु जल
का तापमान थोड़ा ही बढ़ता है — वह छोट -सी वृ द्ध के लए भी बहुत अ धक ऊष्मा सोख लेता है। तब जल के ऊपर क ठं डी
वायु समुद्र समीर के रूप म स्थल क ओर बहकर तट का तापमान घटा दे ती है।
रात म और शीत ऋतु म: स्थल अपनी ऊष्मा शीघ्र खोकर ठं डा हो जाता है। जल, जसने बहुत ऊष्मा सं चत कर रखी है, बहुत
धीरे ठं डा होता है और अपने ऊपर क वायु को ऊष्मा दे ता रहता है। यह गरम वायु और उससे बनने वाली स्थल समीर तट को
अत्य धक ठं डा नह होने दे ती।
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प्रमाण: क्रयाकलाप 7.4 इसे सीधे दखा दे ता है — समान धूप म 20 मनट म मृदा का तापमान जल क तुलना म
कह अ धक बढ़ा, और ठं डा होते समय मृदा ने ही अपनी ऊष्मा पहले खोई।
क्या आप जानते ह? पेमा और पालदे न के दादा जी का यही आशय था। केरल क समुद्र-तट य रेखा लंबी है, अतः
वहाँ स दयाँ उष्ण और आद्र रहती ह, जब क कसी बड़े जल- नकाय से दूर स्थत गंगटोक अत्यंत ठं डा हो जाता है।
मई क दोपहर म मुंबई और नागपुर क तुलना क जए — एक ही राज्य, पर गरमी म बहुत अंतर।
प्र.9 व्याख्या क जए क कस प्रकार जल पृथ्वी क सतह के नीचे क ओर रसता है और भौम जल के रूप म संग्रहीत
होता है।
पृथ्वी क सतह पर गरने वाला वषा-जल कुछ भाग तालाब , झील , न दय और समुद्र म चला जाता है और कुछ भाग भू म म रस
जाता है। रसाव इन चरण म होता है —
1. जल मृदा के कण के बीच के रक्त स्थान तथा नीचे क च ान क दरार म प्रवेश करता है। मृदा और च ान से सतही जल
के रसने क इस प्र क्रया को अंतःस्यंदन कहते ह।
2. जहाँ ये स्थान अ धक चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े हुए ह वहाँ जल अ धक आसानी से अंतःस्यं दत होता है ( चत्र 7.11) —
बजरी से सबसे तीव्र, बालू से धीमा, मृदा से सबसे धीमा।
3. नीचे उतरता हुआ जल अंततः सतह से नीचे अवसाद के छद्र और च ान क दरार म रुक जाता है। इस प्रकार संग्रहीत
जल भौम जल कहलाता है।
4. अवसाद और च ान क जो भू मगत परत अपने छद्र म जल भंडा रत करती ह, वे जलभृत कहलाती ह ( चत्र 7.12)।
भूिम पर िगरती वष
मदृ ा और च ान — जल नीचे की ओर बढ़ ता है
खुले, जुड़े हुए स्थानों से = अंतःस्यंदन
जलभृत — िछदों मे ं रुका हुआ जल
= भौम जल, कुँ ओं और नलकूपों से पाप्त
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
वषा → मृदा और च ान म अंतःस्यंदन → जलभृत म भौम जल के रूप म संग्रहण।
क्या आप जानते ह? यह भौम जल स्थान के अनुसार कुछ मीटर से लेकर सैकड़ मीटर गहराई तक हो सकता है।
कुँओं, हडपंप और नलकूप से हम यही जल ऊपर लाते ह — और यह असी मत नह है। इसे पुनः भरने के लए
वषा जल संग्रहण और पुन:भरण ग का उपयोग कया जाता है।
प्र.10 जल-चक्र पृथ्वी पर जल के पुन: वतरण और पुन:भरण म सहायता करता है। इस कथन क पु क जए।
यह कथन पूणतः सत्य है, क्य क जल-चक्र जल को वहाँ से जहाँ वह प्रचुर है वहाँ पहुँचाता रहता है जहाँ उसक आवश्यकता है, और
जो जल उपयोग हो जाता है उसे पुनः भरता भी रहता है।
सूय समुद ों, निदयों और झीलों को गरम करता है → जल वािष्पत होकर जलवाष्प बनता है
पेड़-पौधे वाष्पोत्सजन ारा और जलवाष्प जोड़ ते है ं
जलवाष्प ऊपर उठकर ठं डी होती है और संघिनत होकर बादल बनाती है
बादल स्थल के ऊपर जाकर वष , िहम और ओले दे ते है ं (वषण)
जल तालाबों, झीलों, निदयों और समुद ों में जाता है अथवा भूिम में िरस जाता है
⇒ चक्र पुन ः आरंभ
पुन: वतरण — जलवाष्प अ धकतर महासागर के ऊपर बनती है, परंतु बादल उसे हजार कलोमीटर भीतर तक ले जाते ह, जससे
पहाड़ , मैदान , वन और खेत पर वषा होती है। पवत पर गरी हम ग्रीष्म म पघलकर न दय के रूप म बहती है और उन क्षेत्र तक
जल पहुँचाती है जहाँ स्वयं वषा बहुत कम होती है।
पुन:भरण — जन न दय , झील और कुँओं से हम जल लेते ह, वे प्र तवष इसी चक्र से भर जाती ह। भू म म रसा वषा-जल
जलभृत को पुनः भर दे ता है, जससे भौम जल के ोत बने रहते ह।
बड़ी बात: जल-चक्र पृथ्वी पर जल क कुल मात्रा को भी संर क्षत रखता है। एक बूँद भी न बनती है, न नष्ट होती है
— वही जल प्रयोग होता है, लौटता है और फर प्रयोग होता है। हम कसी वशेष स्थान पर जल खो सकते ह,
इसी लए वषा जल संग्रहण और पुन:भरण ग े इतने महत्वपूण ह।
संकेत: परीक्षा म चार प्र क्रयाएँ — वाष्पन, वाष्पोत्सजन, संघनन और वषण — नाम लेकर ल खए और फर स्पष्ट
क जए क क्या पुन वत रत होता है और क्या पुनः भरता है।
अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — पृष्ठ 104
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय प रयोजनाएँ
अन्वे ष णात्मक प रयोजनाएँ
प्र.1 समाज — आस-पास के कसी ऐसे स्थान पर जाइए जहाँ आप जल-संचयन क्षेत्र अथवा पुन:भरण ग ा दे ख
सकते ह। स्थानीय लोग से चचा क जए क जल-संचयन क्षेत्र अथवा पुन:भरण ग े कस प्रकार बनाए जाते ह
और वे कस प्रकार काय करते ह? उ चत चत्रण स हत एक ववरण तैयार क जए।
यह क्षेत्र-प रयोजना है, अतः ववरण उसी पर आधा रत होना चा हए जो आप स्वयं दे ख और सुन। इसे करने क व ध और अ े
ववरण क आवश्यक बात नीचे द गई ह।
कैसे कर
1. पास का कोई स्थल चु नए — व ालय या भवन क छत का वषा जल संग्रहण तंत्र, कॉलोनी का पुन:भरण ग ा या सोख्ता ग ा,
गाँव का तालाब या जोहड़, चेक डैम अथवा बावड़ी।
2. शक्षक या कसी बड़े के साथ जाइए। कॉपी, मापन-फ ता और कैमरा या रेखा चत्र बनाने के लए प सल साथ र खए।
3. बनाने और दे खभाल करने वाले लोग से पू छए — यह कसने और कब बनवाया? लागत कतनी आई? कतना जल
एकत्र होता है? जल कहाँ जाता है? इसक सफाई कौन और कतनी बार करता है? क्या बनने के बाद पास के कुएँ का
जल-स्तर बढ़ा है?
4. भाग का रेखा चत्र बनाइए या चत्र ली जए — जल-ग्रहण क्षेत्र, नाली, उतरती नली, प्रथम-प्रवाह नकास, छन्ना, ग ा या टं क ।
अ े ववरण म क्या-क्या होना चा हए
स्थल का नाम व स्थान तथा भ्रमण क त थ।
ढाँचे का नामां कत चत्र।
नमाण कैसे हुआ — सामग्री, गहराई, छन्ने क परत।
यह कैसे काय करता है — छत या भू म से ग े तक जल का पूरा माग।
लोग ारा बताए गए लाभ और आने वाली क ठनाइयाँ।
अध्याय से जोड़ते हुए आपका अपना नष्कष — अंतःस्यंदन, जलभृत, भौम जल का पुन:भरण।
नमूना उत्तर: “हम अपने व ालय के मैदान के कोने म बने पुन:भरण ग े को दे खने गए। यह लगभग 1.5 मीटर चौड़ा और 3 मीटर
गहरा वगाकार ग ा है। व ालय क छत का वषा-जल एक नली से आकर पहले एक छोट कोठरी म गरता है जहाँ प त्तयाँ और धूल
रुक जाती ह, और फर ग े म जाता है। ग े म परत भरी ह — सबसे नीचे बड़े पत्थर, उनके ऊपर बजरी और सबसे ऊपर मोट बालू।
दे खभाल करने वाले ने बताया क बालू क परत हर वषा-ऋतु से पहले साफ क जाती है। इन परत से होकर जल अंतःस्यंदन ारा
भू म म रसता है और नीचे के जलभृत तक पहुँचता है। चार वष पहले यह ग ा बनने के बाद से व ालय का नलकूप मई म नह
सूखा, जब क पहले सूख जाता था। हमने समझा क बजरी और मोट बालू इसी लए भरी जाती है क्य क चौड़े, खुले और परस्पर
जुड़े स्थान से जल सबसे तीव्र ग त से रसता है — ठ क वही जो हमने क्रयाकलाप 7.5 म दे खा था।”
संकेत: पुन:भरण ग े म बजरी और बालू भरी जाती है, मृदा कभी नह । क्रयाकलाप 7.5 के बाद आप इसका कारण
भली-भाँ त जानते ह।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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em जलता है? अपने
प्र.2 क्रयाकलाप — कसी धातु क छड़ के चार ओर एक पतले कागज क प को कस कर लपे टए। छड़ को
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coव्याख्या क जए। gl
लगातार घुमाते हुए जलती हुई मोमबत्ती ारा कागज को जलाने का प्रयत्न क जए। क्या कागज
प्रेक्षण .क
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नह — कागज जलता नह (वह थोड़ा काला पड़ सकता है, परंतु आग नह पकड़ता), बशत वह धातु क छड़ पर कसकर लपटा
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हो और छड़ लगातार घुमाई जाती रहे।
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agसुचालक है। कागज आग तभी पकड़ता है जब उसका अपना तापमान
ऐसा क्य होता है: धातु क छड़ ऊष्मा क
उसके ज्वलन-ताप तक पहुँच जाए। यहाँ लौ जैसे ही कागज को गरम करती है, वह ऊष्मा पतले कागज से होकर
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उससे सट धातु म चली जाती है और धातु उसे चालन ारा छड़ म तेजी से दूर ले जाती है। इस लए कागज कभी
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जलने योग्य गरम हो ही नह पाता। छड़ को घुमाते रहने से लौ के नीचे बार-बार ठं डी धातु आती रहती है और कोई
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एक स्थान
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लौ कागज को ऊष्मा दे त ी है
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कागज पतला है और धात ु से कसकर सटा है
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⇒ ऊष्मा त रु ंत छड़ में चािलत हो जाती है
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⇒ कागज अपने ज्वलन-ताप से नीचे ही रहता है ⇒ वह जलता नही ं
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.cके बीच वायु क परत रह जाए। अब कागज जल जाएगा — क्य क लकड़ी,agकाँच और वायु कुचालक ह और
स्वयं जाँ चए: यही प्रयोग लकड़ी या काँच क छड़ से क जए, अथवा कागज को ढ ला लपे टए ता क कागज और
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धातु
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ऊष्मा को दूर नह ले जा सकते।
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सावधानी: यह प्रयोग शक्षक अथवा कसी वयस्क के नरीक्षण म ही क जए और छड़ को उसके दूसरे सरे से
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पक ड़ए।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 क्रयाकलाप — कागज का एक टु कड़ा ली जए। इस पर 7.17 म दशाए गए चत्र के अनुसार एक स पल
(स्पाइरल) बनाइए। स पल के अनुसार कागज को का टए। दशाए गए चत्र के अनुसार कागज को एक जलती हुई
मोमबत्ती के ऊपर लटकाइए। ध्यान से दे खए क क्या होता है। इसक व्याख्या क जए।
िच त्र 7.17 ( ) —
क सिपल में त्र 7.17 ( ) —
िच ख जलती हुई मोमब ी
कागज काटना के ऊपर सिपल कागज
पृष्ठ 104 के चत्र 7.17 का पुनः चत्रण — कागज पर बनाया और काटा गया स पल, तथा उसे जलती हुई मोमबत्ती के
ऊपर लटकाना।
अवलोकन: कागज का स पल मोमबत्ती के ऊपर लगातार घूमने लगता है, और जब तक नीचे मोमबत्ती जलती रहती है तब तक
घूमता रहता है। मोमबत्ती हटा ली जए तो वह धीमा होकर रुक जाता है।
मोमब ी अपने ऊपर की वायु को गरम करती है
गरम वायु फैलती है → हल्की होती है → ऊपर उठती है
ठं डी, भारी वायु िकनारों से आकर उसका स्थान लेत ी है
= ऊपर उठती वायु की एक सतत धारा, अथ त संवहन धारा
उठती हुई वायु सिपल के ितरछे मोड़ ों से टकराती है
⇒ सिपल घूमने लगता है
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: स पल इस प्रकार काटा जाता है क उसका प्रत्येक मोड़ पंखे या पवनचक्क के ब्लेड क भाँ त
तरछा हो जाता है। जब गरम वायु का ऊपर उठता स्तंभ इन तरछ सतह से टकराता है तो वह गुजरते-गुजरते उन्ह
बगल क ओर धकेलता जाता है और कागज धागे पर घूमने लगता है। वस्तुतः यह स पल संवहन से चलने वाली एक
नन्ही टरबाइन ही है।
यह करके दे खए: इसी स पल को गरम चाय के कप के ऊपर या रूम हीटर के ऊपर पक ड़ए। वहाँ भी वह घूमता है
— प्रमाण क गरम वायु का कोई भी उठता ोत इसके लए पयाप्त है। कागज को लौ से पयाप्त ऊँचाई पर र खए
ता क वह जले नह ।
अध्याय — एक नज़र म
ऊष्मा गरम स्थान से ठं डे स्थान क ओर तीन व धय से स्थानांत रत होती है — चालन, संवहन और व करण। पेमा और
पालदे न एक ही शाम म तीन दे खते ह — आग पर रखा धातु का पात्र, जलती लक ड़य से उठता धुआँ और आग के पास बैठने
पर मलने वाली गरमी।
चालन म ऊष्मा कसी वस्तु के गरम भाग से उसके ठं डे भाग क ओर जाती है। गरम हुआ कण अपनी ऊष्मा अगले कण को दे
दे ता है, परंतु कण स्वयं अपने स्थान से नह हटते। ठोस पदाथ म ऊष्मा मुख्यतः इसी व ध से स्थानांत रत होती है।
जो पदाथ ऊष्मा को सरलता से अपने म से संच रत होने दे ते ह — ऐलु म नयम, लोहा, स्ट ल जैसी धातुएँ — वे ऊष्मा के
सुचालक ह। लकड़ी, काँच, मृदा, चीनी म , प्ला स्टक और वायु ऊष्मा के कुचालक ह। ऊनी वस्त्र, दो पतले कंबल और
खोखली ईंट — तीन वायु को फँसाकर ही काय करते ह।
संवहन म ऊष्मा द्रव या गैस के कण क वास्त वक ग त ारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाती है। गरम होने पर द्रव
फैलता है, हल्का होकर ऊपर उठता है और ठं डा, भारी द्रव उसका स्थान लेने नीचे आता है — यही संवहन धारा क्रयाकलाप
7.3 म रंगीन धारी के रूप म दखाई दे ती है।
स्थल समीर और समुद्र समीर बड़े पैमाने पर होने वाला संवहन ही ह। स्थल जल क अपेक्षा शीघ्र गरम और शीघ्र ठं डा होता है,
अतः दन म स्थल के ऊपर क गरम वायु ऊपर उठती है और समुद्र से ठं डी वायु स्थल क ओर आती है (समुद्र समीर); रात म
यह दशा उलट जाती है और स्थल समीर बहती है।
व करण म ऊष्मा गरम वस्तु से सीधे हम तक पहुँचती है और इसके लए कसी माध्यम क आवश्यकता नह होती। सूय
क ऊष्मा इसी प्र क्रया से पृथ्वी तक आती है और आग से हटाकर रखा गरम पात्र इसी से ठं डा होता है। हल्के रंग ऊष्मा को
पराव तत करते ह, गहरे रंग अवशो षत।
सूय ही जल-चक्र को चलाता है — वाष्पन और वाष्पोत्सजन जल को जलवाष्प बनाकर ऊपर उठाते ह, संघनन से बादल बनते
ह और वषण ारा जल वषा, हम व ओल के रूप म लौटता है। यह चक्र जल का पुन वतरण और पुनःपू त करता है तथा पृथ्वी
पर जल क कुल मात्रा को संर क्षत रखता है।
अंतःस्यंदन ारा भू म म रसा जल जलभृत म भौम जल के रूप म संग्रहीत होता है। रसाव बजरी से सबसे तीव्र और मृदा
( चकनी म ) से सबसे धीमा होता है। अत्य धक नकासी और कंक्र ट क सतह भौम जल का अवक्षय करती ह; वषा जल
संग्रहण, पुन:भरण ग े और ल ाख के हम-स्तूप इसे संर क्षत करने म सहायक ह।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
पद अथ अध्याय से उदाहरण याद रखने योग्य बात
चालन िकसी वस्तु के गरम भाग से ठं डे गरम क गई धातु-प से पन 1, 2, 3, 4 कण ऊष्मा आगे बढ़ाते ह, पर अपना
भाग में ऊष्मा का स्थानांतरण का क्रम से गरना ( क्रयाकलाप 7.1) स्थान नह छोड़ते
ऊष्मा का सुचालक वह पदाथ जो ऊष्मा को सरलता से ऐलु म नयम, लोहा, स्ट ल — भोजन सभी धातुएँ ऊष्मा क सुचालक होती
अपने में से संचिरत होने दे ता है पकाने के पात्र ह
ऊष्मा का कुचालक वह पदाथ जो ऊष्मा को सरलता से लकड़ी, काँच, मृदा व चीनी म के कप, वायु सबसे अ े कुचालक म से है —
(ऊष्मारोधी) संचिरत नही ं होने दे ता प्ला स्टक, वायु ऊन और खोखली ईंट इसी का उपयोग
करती ह
संवहन द व या गैस के कणों की वास्तिवक बीकर म रंगीन धारी का मध्य से ऊपर यह केवल द्रव और गैस म होता है,
गित ारा ऊष्मा का स्थानांतरण उठना और कनार से नीचे आना ठोस म नह
( क्रयाकलाप 7.3)
समुद्र समीर समुद से स्थल की ओर ठं डी वायु दन के समय, जब स्थल समुद्र से अ धक तट य घर क खड़ कयाँ समुद्र क
का गमन गरम होता है [ चत्र 7.7 (क)] ओर रखी जाती ह
स्थल समीर स्थल से समुद की ओर ठं डी वायु रात के समय, जब समुद्र स्थल से अ धक दन और रात म पवन क दशा
का गमन गरम होता है [ चत्र 7.7 (ख)] वपरीत हो जाती है
व करण ऊष्मा का वह स्थानांतरण िजसके सूय क ऊष्मा का पृथ्वी तक पहुँचना; सभी वस्तुएँ अपने प रवेश म ऊष्मा
िलए िकसी माध्यम की आवश्यकता आग के पास बैठने पर गरमी लगना का व करण करती ह
नही ं होती
जल-चक्र जलवाष्प के रूप में जल का िनरंतर वाष्पन, वाष्पोत्सजन, संघनन और वषण यह जल का पुन वतरण करता है और
ऊपर उठना और वषण ारा नीचे ( चत्र 7.9) कुल जल-मात्रा को संर क्षत रखता है
लौटना
वाष्पन जल का जलवाष्प में पिरवतन धूप वाले दन गीले कपड़ का शीघ्र सूय क ऊष्मा वाष्पन को तीव्र कर
सूखना दे ती है
वाष्पोत्सजन पेड़-पौधों से जल का वाष्प के रूप में चत्र 7.9 म पेड़ से ऊपर जाता तीर यह वाष्पन के साथ वायु म जलवाष्प
िनकलना बढ़ाता है
वषण बादलों से जल का वष , िहम अथवा बादल से वषा, हम और ओले यह जल-चक्र का नीचे क ओर वाला
ओलों के रूप में िगरना भाग है
अंतःस्यंदन म ृद ा और च ानों से सतही जल के जल का बजरी से सबसे तीव्र और मृदा से चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े स्थान
िरसने की पिक्रया सबसे धीमा रसना ( क्रयाकलाप 7.5) रसाव को तीव्र करते ह
भौम जल भू-सतह के नीचे अवसादों के िछद ों कुँओं और हडपंप से नकाला जाने वाला यह असी मत नह है — इसका
और च ानों की दरारों में संग हीत जल अवक्षय हो रहा है
जल
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कक्षा 7 व ान अध्याय 7 प्रकृ त म ऊष्मा का स्थानांतरण AglaSem · NCERT Solutions
पद अथ अध्याय से उदाहरण याद रखने योग्य बात
जलभृत अवसादों और च ानों की वह चत्र 7.12 — जलभृत से जल लेता यह कुछ मीटर से सैकड़ मीटर गहराई
भूिमगत परत जो िछद ों में जल कुआँ तक हो सकता है
संग हीत करती है
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