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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम

AglaSem पर कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Science Chapter 9 Life Processes in Animals (Curiosity), Hindi Medium.
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About NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम

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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 9: जंतओं
ु म जैव प्रक्रम

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

121 – 136 16 39 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 37 pages

Page 2

कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: जंतओं
ु म जैव प्रक्रम
कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत एन.सी.ई.आर.ट . समाधान। इसम भोजन क यात्रा
तथा श्वास लेने से संबं धत पाठ्य प्रश्न, क्रयाकलाप 9.1, 9.2 और 9.3 (ता लका 9.1 भरी हुई), व ान एवं समाज बॉक्स, आइए, और अ धक
सीख के सभी दस प्रश्न तथा सभी छह अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ स म्म लत ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 7) 121 – 136

खं ड प्रश्न

16 39

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 122
9.1 जंतुओं म पोषण

प्र.1 व भन्न जंतुओं म ज टल भोजन-घटक कस प्रकार सरल रूप म वघ टत होकर शरीर ारा उपयोग कए जाते
ह? क्या सभी जंतुओं म यह प्रक्रम एक समान होता है अथवा अलग-अलग होता है?

भोजन के ज टल घटक — काब हाइ ेट, प्रोट न और वसा — आहार नाल नामक एक लंबी न लका म वघ टत होते ह। यह न लका
मुख से आरंभ होकर गुदा म समाप्त होती है। जैसे-जैसे भोजन इसम आगे बढ़ता है, व भन्न भाग से ा वत पाचक रस उसे सरल
रूप म वघ टत करते जाते ह। ये सरल रूप रक्त म अवशो षत होकर शरीर के प्रत्येक भाग तक पहुँचाए जाते ह।

आहार नाल प्राप्त होने वाला ाव भोजन पर क्रया
का भाग

मुख लार दाँत संद लन एवं चवण करते है ं (यांित्र क पाचन); लार मंड को शक रा में
बदलने लगती है

आमाशय पाचक रस, अम्ल और ेष्मा पोटीन सरल घटकों में िवघिटत होते है;ं अम्ल हािनकारक जीवाणओ
ु ं
को नष्ट करता है; श्ले ष्म ा आमाशय के आ स्तर की र क्षा करती है

क्षदु ांत्र यकृत से पत्तरस, अग्न्याशय से अग्न्याशयी रस वसा, पोटीन और शेष काब हाइडेट सरलतम रूपों में िवघिटत होते है ं
तथा स्वयं इसक भ त्त से पाचक रस तथा पोषक र क्त में अवशोिषत हो जाते है ं

बहृ दांत्र — जल और कु छ लवण अवशोिषत करती है, शेष अध ठोस मल बनता है

नह , यह प्रक्रम सभी जंतुओं म बलकुल एक समान नह होता। मूल योजना समान है, परंतु आहार नाल क संरचना जंतु के
भोजन के अनुसार भन्न होती है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions

गाय और भस (रोमंथी) घास को आं शक रूप से चबाकर नगल लेते ह और बाद म उसे वापस मुँह म लाकर अच्छ तरह
चबाते ह — इसे रोमंथन कहते ह।
प क्षय के दाँत ही नह होते। वे भोजन को पेषणी नामक माँसपेशीय प्रकोष्ठ म, प्रायः नगले हुए कंकड़ क सहायता से, पीसते
ह।

ऐसा क्य होता है: मंड या प्रोट न के बड़े अणु का शरीर सीधे उपयोग नह कर सकता। उन्ह इतने छोटे और
घुलनशील टु कड़ म तोड़ना आवश्यक है क वे आँत क भ त्त से होकर रक्त म जा सक। पाचक रस यही काम करते
ह।

प्र.2 आप अपने प्रय भोजन के वषय म सो चए। क्या आपके मुँह म पानी आ जाता है?

हाँ। अपने प्रय भोजन — गरम समोसा, रसगुल्ला, आम का अचार — के वषय म सोचते ही मुँह म पानी आ जाता है। ऐसा इस लए
होता है क प्रय भोजन का स्मरण करते ही मुँह म अ धक लार ा वत होने लगती है।

ऐसा क्य होता है: लार वह पहला पाचक रस है जससे भोजन का सामना होता है। शरीर पहले से तैयारी कर लेता
है — भोजन क गंध, उसका दखना अथवा केवल उसक याद ही लार का ाव आरंभ करने के लए पयाप्त है,
ता क भोजन के आते ही वह आद्र हो जाए और उसके मंड का पाचन तुरंत आरंभ हो सके।

क्या आप जानते ह? लार एक साथ दो काम करती है — भोजन को आद्र और मृदु बनाकर नगलने योग्य बनाती है,
तथा उसम उप स्थत पाचक रस मंड को शकरा म बदलने लगता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 123
9.1.1 मानव म पाचन — मुख गुहा से भोजन यात्रा का आरंभ

प्र.1 आपके वचार से आपके मुख म लार क क्या भू मका है? जब आप रोट खाते ह तो आपको क्या अनुभव होता
है?

मुख म लार क दो भू मकाएँ ह —

1. यह भोजन को आद्र करती है। ज ा चबाए गए भोजन को लार के साथ मलाती है जससे वह मृदु और चकना हो जाता है
तथा सरलता से नगला जाकर ग्रासनली म उतर जाता है।
2. यह पाचन आरंभ करती है। लार म एक पाचक रस होता है जो मंड को शकरा म वघ टत करता है।

रोट खाते समय आरंभ म उसका सामान्य स्वाद ही आता है। परंतु य द उसे 30–60 सेकंड तक मुँह म रखकर चबाते रह तो उसम
मठास आने लगती है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: रोट म मंड होता है जो एक प्रकार का काब हाइ ेट है। मंड स्वयं मीठा नह होता। लार म
उप स्थत पाचक रस मंड को शकरा म वघ टत कर दे ता है और शकरा मीठ होती है — इस लए जतनी दे र चबाएँगे,
रोट उतनी ही अ धक मीठ लगेगी।

प्र.2 आप रोट का एक ग्रास (टु कड़ा) ल अथवा इसक समान मात्रा म उबले हुए चावल ल और इन्ह 30-60 सेकंड तक
अच्छ तरह चबाएँ। सबसे पहले आपको रोट अथवा चावल का अपना सामान्य स्वाद आया होगा परंतु इसे चबाते
रहने पर क्या आपको इसके स्वाद म कोई अंतर का अनुभव होता है? इसके स्वाद म मठास आने लगती है। क्या
आपने कभी सोचा है क ऐसा क्य होता है?

हाँ — स्वाद बदल जाता है। चबाते रहने पर रोट अथवा चावल म धीरे-धीरे मठास आने लगती है।

रोटी / उबले चावल → इनमें मंड (काब हाइडेट ) होता है — जो मीठा नही ं है

मंड + लार का पाचक रस → शक रा — जो मीठी है

अथ त् अिधक दे र चबाना → अिधक मंड शक रा में बदलना → अिधक िमठास

ऐसा क्य होता है: लार केवल पानी नह है। उसम एक पाचक रस होता है जो मंड पर क्रया करके उसे सरल शकरा
म तोड़ दे ता है। इसी लए मंड का पाचन आमाशय म नह , मुख म ही आरंभ हो जाता है।

स्वयं क जए: रोट का एक टु कड़ा केवल 5 सेकंड चबाकर स्वाद दे खए, फर दूसरा टु कड़ा पूरे एक मनट तक
चबाइए। अंतर स्पष्ट अनुभव होगा और यही लार क क्रया का प्रमाण है।

व ान एवं समाज — पृष्ठ 123
9.1.1 मानव म पाचन — मुख गुहा से भोजन यात्रा का आरंभ

व ान एवं समाज

प्र.1 उन यु क्तय का पता लगाइए जनसे हमारे बुजुग मुख क स्वच्छता को बनाए रखते थे।

अपने दादा-दाद , नाना-नानी तथा पड़ोस के बुजुग से पू छए और ल खए क टू थपेस्ट-ब्रश के प्रचलन से पहले वे क्या प्रयोग करते
थे। भारत के लगभग हर क्षेत्र क अपनी व ध रही है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
परंपरागत क्या प्रयोग होता था यह क्य प्रभावी थी

m a se
यु क्त

.co नीम, बबूल (कीकर), बरगद या आम की ताजी टहनी, l
agतरह दाँत साफ करते ह; नीम-
दातुन
se m रेशे ब्रश के बाल क

g l a
a
िजसका एक िसरा चबाकर बश जैस ा बना िलया जाता था बबूल का कड़वा रस क टाणुओं को रोकता है

मंजन कोयले का चूण, जली भूस ी, नमक अथवा सरसों के तेल में हल्का खुरदरा होने से दाँत क परत हट जाती है;

m
.co ag
िमला नमक — अँग ल
ु ी से मलना नमक मसूड़ को दृढ़ रखता है

a s eभ्भी)m
agl
जीभ की सफाई ताँबे या पीतल की िज ा-िनल खनी (िज जीभ पर जमी परत ही मुख क दुगध का मुख्य कारण
होती है

कु ल्ला भोजन के बाद सादे अथवा ग नु ग नु े नमक-जल से कु ल्ला
co m
दाँत के बीच फँसे भोजन-कण सड़ने से पहले ही धुल

e m.
जाते ह

m l as
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गंडूष / कवल (तेल ितल या नािरयल के तेल को मुँह में घुम ाना
a g
प्राचीन आयुव दक अभ्यास, जो मसूड़ और मुख को

l a se
कु ल्ला) स्वच्छ रखने के लए कया जाता था

g
a भोजन के बाद सौंफ , लौंग , इलायची साँस ताजा करती है और लार का ाव बढ़ाती है

m a s
agl
चबाना

.co
a s em
l चबाकर मुलायम ब्रश जैसा बनाते और कई मनट तक दाँत साफ करते थे। ताँबे
नमूना उत्तर: "मेरे दादाजी बताते ह क लगभग बीस वष क आयु तक उन्ह ने कभी टू थब्रश का प्रयोग नह कया। प्र त दन प्रातः वे
नीम क एक ताजी टहनी तोड़ते, उसका एक gसरा
a
क जभ्भी से जीभ साफ करते और हर भोजन के बाद कुल्ला करते थे। सत्तर वष क आयु म भी उनके अ धकांश दाँत सुर क्षत ह।"

. c om
संकेत: पुरानी और नई — दोन व धयाँ तीन बात पर सहमत ह: दन म दो बार दाँत साफm
s e करना, जीभ साफ करना

.
और हर
com
भोजन के बाद कुल्ला करना।
a gla
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agl
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क्रयाकलाप 9.1: आइए, जाँच कर — पृष्ठ 123
com g l a
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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions

9.1.1 मानव म पाचन — मुख गुहा से भोजन यात्रा का आरंभ

क्रयाकलाप

प्र.1 एक बदुपाती क सहायता से दोन परखन लय म आयोडीन वलयन क 3-4 बूँद डा लए। इन्ह अच्छ तरह
मलाइए और अवलोकन क जए। अपने अवलोकन को ता लका 9.1 म अ भले खत क जए।

ता लका 9.1 — मंड पर लार क क्रया

परखनली आयोडीन मलाने से आयोडीन मलाने के रंग म प रवतन का संभा वत
पूव मूल रंग प ात रंग कारण (य द कोई हो)

(क ) उबले हएु चावल

(ख) चबाए गए उबले
चावल

ता लका 9.1 जैसी पृष्ठ 123 पर छपी है — इसे स्वयं भ रए।

आयोडीन मंड क जाँच है — जहाँ मंड उप स्थत है वहाँ यह नीला-काला रंग दे ता है और जहाँ मंड नह है वहाँ अपने ही भूरे-नारंगी
रंग म बना रहता है।

ता लका 9.1 — मंड पर लार क क्रया

परखनली आयोडीन आयोडीन मलाने के रंग म प रवतन का संभा वत कारण (य द कोई
मलाने से पूव प ात रंग हो)
मूल रंग

(क) उबले हुए दू धया सफेद नीला-काला चावल चबाए नह गए, अतः उन पर लार क कोई क्रया
चावल (चावल + जल) नह हुई। मंड ज्य -का-त्य उप स्थत है और आयोडीन
मंड के साथ नीला-काला रंग दे ता है।

(ख) चबाए गए दू धया सफेद रंग में कोई पिरवतन नही ं — चबाते समय लार के पाचक रस ने मंड को सरल शकराओं
उबले चावल (चावल + जल) भूर ा-नारंग ी ही रहता है; अथवा म वघ टत कर दया। मंड नह बचा या बहुत कम बचा,
बहुत हल्का नीला-काला इस लए आयोडीन अपना नीला-काला रंग नह दे पाता।

ऐसा क्य होता है: दोन परखन लय म केवल एक ही अंतर है — चावल पर लार क क्रया हुई या नह । अतः रंग म
जो भी अंतर दखे, उसका कारण केवल लार ही हो सकती है। यही बात इस क्रयाकलाप को एक उ चत ( नष्पक्ष)
परीक्षण बनाती है।

स्वयं जाँ चए: य द परखनली 'ख' अब भी काफ गहरी हो जाए तो आपने पयाप्त दे र तक नह चबाया। 60–90
सेकंड तक चबाकर दोहराइए, रंग और हल्का पड़ जाएगा।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 124
9.1.1 मानव म पाचन — भोजन नली (ग्रासनली)

प्र.1 परखनली 'क' म रंग प रव तत होने का क्या कारण है?

इसका कारण उबले चावल म उप स्थत मंड है। कक्षा 6 म हमने सीखा था क आयोडीन मंड के साथ अ भ क्रया करके नीला-
काला रंग दे ता है। परखनली 'क' के चावल कभी चबाए नह गए, अतः उन पर लार क कोई क्रया नह हुई और उनका मंड ज्य -
का-त्य बना रहा। आयोडीन उसी मंड के साथ क्रया करके नीला-काला हो जाता है।

परखनली 'क': उबले चावल (मंड उपिस्थत) + आयोडीन → नीला-काला

परखनली 'ख': चबाए चावल (मंड शक रा में िवघिटत) + आयोडीन → कोई पिरवत न नही ं / बहुत हल्का रंग

ऐसा क्य होता है: लार केवल उसी भोजन पर क्रया करती है जसम वह मली हो। परखनली 'क' नयंत्रण
(कं ोल) है — यह दखाती है क जब लार क क्रया न हो तो चावल कैसा रहता है। 'क' और 'ख' क तुलना ही यह
सद्ध करती है क मंड का पाचन लार ने कया।

प्र.2 य द परखनली 'ख' म अभी भी रंग दखाई दे ता है तो इसम आगे और अन्वेषण करने के लए आप क्रयाकलाप म
क्या प रवतन करगे? क्या चबाने का समय बढ़ाने से उसके रंग म प रवतन होगा?

य द परखनली 'ख' म अब भी नीला-काला रंग दखे तो इसका अथ है क कुछ मंड बना पचा रह गया है। एक बार म केवल एक
बात बद लए और क्रयाकलाप दोहराइए —

अ धक दे र तक चबाइए — 30–60 सेकंड के स्थान पर 90 सेकंड या 2 मनट, ता क लार को अ धक समय मले।
अ धक अच्छ तरह चबाइए, जससे चावल महीन टु कड़ म टू टे और उसका अ धक भाग लार के संपक म आए।
चावल क मात्रा कम ली जए, ता क उपलब्ध लार उसके लए पयाप्त हो।
मश्रण को कुछ मनट रखा रहने द जए और तब आयोडीन डा लए, जससे पहले से मली लार को और समय मल जाए।
आयोडीन क गनी हुई कम बूँद — दोन परखन लय म समान संख्या म — डा लए, जससे तुलना नष्पक्ष रहे।

हाँ, चबाने का समय बढ़ाने से रंग म न त प रवतन होता है। जतनी दे र चबाएँगे, उतना अ धक मंड शकरा म बदलेगा, अतः
नीला-काला रंग उत्तरोत्तर हल्का पड़ता जाएगा और अंत म बलकुल नह आएगा।

स्वयं जाँ चए: चार परखन लयाँ ली जए जनम क्रमशः 15, 30, 60 और 120 सेकंड चबाए चावल ह । आयोडीन
डालकर उन्ह पं क्त म र खए — गहरे से लगभग रंगहीन तक क स्पष्ट श्रेणी दखाई दे गी।

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प्र.3 परंतु भोजन नीचे क ओर कैसे जाता है?

भोजन अपने भार से नीचे नह गरता — उसे धकेला जाता है। भोजन नली क भ त्तयाँ धीरे-धीरे लहरदार ग त से संकु चत और
श थल होती ह और यह चलती हुई तरंग भोजन को आमाशय क ओर आगे ठे ल दे ती है।

संकुचन स्थल िशिथलन स्थल

भोजन आमाशय की ओर

पुस्तक का चत्र 9.2 — भ त्त भोजन के पीछे सकुड़ती और आगे श थल होती है, जससे भोजन आमाशय क ओर धकेला जाता है।

ऐसा क्य होता है: भोजन नली क भ त्त म पे शयाँ होती ह। जब भोजन के पीछे क पेशी सकुड़ती है और आगे क
पेशी ढ ली पड़ती है तो भोजन के पास आगे बढ़ने के अ त रक्त कोई माग नह रहता। यही लहरदार ग त संपूण
आहार नाल म होती है — इसी लए लेटे रहने पर भी भोजन आगे बढ़ता रहता है और अंत रक्ष यात्री भारहीनता म
भी नगल सकते ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 125

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9.1.1 मानव म पाचन — क्षुद्रांत्र (छोट आँत)

प्र.1 चत्र 9.4 को दे खए। यह फैली हुई आहार नाल का चत्र है। इसक लंबाई का अनुमान लगाइए।

मुख
भोजन नली
(गासनली)

आमाशय

यकृत अग्न्याशय

क्ष द
ु ात्र
ं

बृहदात्र
ं

मलाशय
गुदा

चत्र 9.4, पृष्ठ 125 — फैलाकर दशाई गई आहार नाल।

अ धकांश वद्याथ एक-दो मीटर का अनुमान लगाते ह — वास्त वक उत्तर इससे कह अ धक है। अकेली क्षुद्रांत्र ही लगभग 6 मीटर
लंबी होती है, जो आपक कक्षा क छत क ऊँचाई से लगभग दोगुनी है। शेष भाग को जोड़ द तो पूरी आहार नाल और भी लंबी
हो जाती है।

आहार नाल का भाग लगभग लंबाई कल्पना क जए

क्षदु ांत्र लगभग 6 मीटर कक्षा क छत क ऊँचाई से दोगुनी; आहार नाल का सबसे लंबा भाग

बहृ दात्र
ं लगभग 1.5 मीटर क्षुद्रांत्र से छोट , परंतु अ धक चौड़ी

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
ऐसा क्य होता है: इतनी लंबी न लका उदर म मुड़-मुड़कर और कुंडली बनाकर समा जाती है। लंबाई उपयोगी है —

m a s em उतना ही पूण
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भोजन जतनी दे र पाचक रस और अवशोषक भ त्त के संपक म रहेगा, उसका पाचन और अवशोषण
. co a
em
होगा।

a s
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यह क जए: मापन-फ ते या रस्सी से भू म पर 6 मीटर नाप कर उसके पास खड़े होइए। उतनी ही लंबी नली आपके

co m
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भीतर कुंड लत होकर रखी है — वही आपक क्षुद्रांत्र है।

m .
as e
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 126
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9.1.1 मानव म पाचन — बृहदांत्र (बड़ी आँत)

as e
. c omक्षुद्रांत्र से कैसे अवशो षत होते ह? a g l
प्र.1 m
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ये पोषक
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om a
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क्षुद्रांत्र का आंत रक आस्तर पतला होता है और उस पर अँगुली जैसे हजार प्रवध होते ह ( चत्र 9.5)। ये प्रवध आस्तर के सतही

s e m भ त्त से होकर भ त्त क रक्त-वा ह नय म उप स्थत रक्त म पहुँच जाते
a है। पोषक के रक्त म पहुँचने के इसी प्रक्रम को अवशोषण कहते ह।
क्षेत्रफल को बहुत बढ़ा दे ते ह। पचे हुए पोषक इस पतली

agl
ह और रक्त उन्ह शरीर के प्रत्येक भाग तक ले जाता

com
m .
अिधक सतह = अिधक अवशोषण
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ase
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com g l a
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ase
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समतल िभित्त पवधयुक्त िभित्त
. c o
कम क्षेत्रफल
e
कही ं अिधक
s m क्षेत्रफल
. com a gla
as em क्षुद्रांत्र के अँगुली जैसे प्रवध उसी प्रकार काय करते ह जैसे मुड़ा हुआ तौ लया सपाट कागज क तुलना म कह अ धक जल सोखता है।
agl c
m .
m a s e
co agl
ऐसा क्य होता है: अवशोषण वह हो सकता है जहाँ भोजन भ त्त के संपक म आए। 6 मीटर लंबी चकनी नली

m .
ase
भोजन के बहुत कम भाग को छू पाती। हजार सूक्ष्म प्रवध उसी 6 मीटर को कई गुना बड़ी अवशोषक सतह म बदल

a g l
दे ते ह, जससे उपयोगी पदाथ लगभग व्यथ नह जाता।

co m
m .
m ase
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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions

क्या आप जानते ह? इसी लए सी लएक रोग इतना गंभीर है। वह इसी आंत रक आस्तर को क्ष त पहुँचाता है,
अवशोषक सतह नष्ट हो जाती है और रोगी भरपूर खाने पर भी दुबल बना रहता है।

प्र.2 अ धकांश पोषक के क्षुद्रांत्र म अवशो षत होने के तथा पच जाने के प ात शेष बना पचे हुए भोजन का क्या
होता है?

वह बृहदांत्र म चला जाता है। वहाँ —

1. बृहदांत्र उसम से जल और कुछ लवण अवशो षत कर लेती है, जससे तरल अप शष्ट अध ठोस हो जाता है।
2. इस अध ठोस अप शष्ट को मल कहते ह।
3. मल-त्याग होने तक यह मल बृहदांत्र के नचले भाग मलाशय म एक त्रत रहता है।
4. अंततः इसे गुदा के ारा बाहर नकाल दया जाता है — इस प्रक्रम को ब ह:क्षेपण कहते ह।

िबना पचा भोजन → बहृ दांत्र (जल + लवण अवशोिषत)

→ अध ठोस मल → मलाशय में संिचत

→ गुद ा ारा बाहर = बिह:क्षेपण

संकेत: फल , स ब्जय और साबुत अनाज जैसे रेशे-समृद्ध भोजन से बृहदांत्र सुचारू रूप से काय करती है और मल-
त्याग सरल हो जाता है।

प्र.3 इसक लंबाई क्षुद्रांत्र से कम होती है इसके प ात भी इसे बृहदांत्र क्य कहते ह?

क्य क इसका नाम इसक चौड़ाई पर रखा गया है, लंबाई पर नह । बृहदांत्र क्षुद्रांत्र के 6 मीटर के मुकाबले केवल लगभग 1.5 मीटर
लंबी है, परंतु वह क्षुद्रांत्र से कह अ धक चौड़ी है — इसी लए उसे "बृहद्" (बड़ी) कहा जाता है।

लक्षण क्षुद्रांत्र बृहदांत्र

लंबाई लगभग 6 मीटर — आहार नाल का सबसे लंबा भाग लगभग 1.5 मीटर

चौड़ाई कम अ धक

मुख्य काय पाचन पूण होता है; पोषक का अवशोषण जल और कुछ लवण का अवशोषण; मल का बनना और संचय

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: दोन नाम नली के व्यास का वणन करते ह — जैसे घर म हम "मोटा पाइप" और "पतला
पाइप" कहते ह, चाहे पतला पाइप दूर तक क्य न जाता हो।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 127
9.1.2 क्या सभी जंतुओं म भोजन का पाचन मनुष्य क भाँ त ही होता है?

प्र.1 मने गाय को अपना भोजन चबाते हुए दे खा है जब क उस समय न तो वे कुछ खा रही थ और न ही चर रही थ ।
ऐसा क्य होता है?

क्य क उस समय गाय रोमंथन कर रही होती है — वह पहले नगले हुए भोजन को चबा रही होती है।

1. गाय और भस घास को आं शक रूप से चबाकर शीघ्र नगल लेती ह जहाँ से वह आमाशय म चली जाती है। चरना खुले मैदान
म शीघ्रता से कया जाता है।
2. आमाशय म भोजन का आं शक पाचन होता है।
3. बाद म, वश्राम के समय, आं शक रूप से पचा हुआ भोजन वापस मुँह म लाया जाता है और धीरे-धीरे अच्छ तरह चबाया
जाता है।
4. इस प्र क्रया को रोमंथन तथा ऐसे जंतुओं को रोमंथी कहते ह। गाय दन के लगभग 8 घंटे केवल भोजन चबाने म लगाती है।
5. पूणतः चबाया गया यह भोजन और अ धक पाचन के लए पुनः आहार नाल म चला जाता है।

ऐसा क्य होता है: घास कठोर और रेश से भरी होती है, एक बार चबाने से उसका वघटन नह हो पाता। पहले
नगल लेने और बाद म चबाने से जंतु खुले मैदान म — जहाँ खतरा रहता है — शीघ्रता से अ धक घास एक त्रत कर
लेता है और फर सुर क्षत स्थान पर बैठकर उसे धीरे-धीरे पीसने का काम करता है।

क्या आप जानते ह? रोमंथी जंतु के आमाशय के पहले बड़े प्रकोष्ठ को रुमेन कहते ह ( चत्र 9.6 म नामां कत)।
अंग्रेजी शब्द "ruminate" का अथ ' कसी बात पर धीरे-धीरे वचार करना' भी गाय क इसी आदत से लया गया
है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 129

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions

9.2.1 मनुष्य म श्वसन

प्र.1 शरीर म इस ऑक्सीजन का उपयोग कैसे कया जाता है? क्या श्वास लेना और श्वसन भन्न ह?

अंत:श्व सत ऑक्सीजन का उपयोग ग्लूकोस को वघ टत करके ऊजा नमुक्त करने म होता है। भोजन पहले पचकर शकरा
(ग्लूकोस) जैसे सरल पदाथ म बदलता है; फर ऑक्सीजन शरीर के अंदर उस ग्लूकोस को वघ टत करने म सहायता करती है। इसी
प्र क्रया को श्वसन कहते ह।

ग्लूक ोस + ऑक्सीजन → काबन डाइऑक्साइड + जल + ऊज

हाँ, श्वास लेना और श्वसन भन्न ह।

आधार श्वास लेना श्वसन

क्या है वायु को अंद र ले ना और बाहर िनकालना ऑ क्सीजन से ग्लूक ोस का िवघटन कर ऊज िनमुक्त करना

पकृ ित एक शारी रक (भौ तक) प्र क्रया एक रासाय नक प्र क्रया

कहाँ होती श्वसन तंत्र म — नाक, श्वासनली, फेफड़े शरीर के अंदर, उसके सभी भाग म
है

पिरणाम ऑक्सीजन अंदर आती है, काबन डाइऑक्साइड बाहर वह ऊजा मलती है जससे हम चलते, दौड़ते, खेलते और
जाती है सोचते ह

ऐसा क्य होता है: श्वास लेना केवल ऑक्सीजन पहुँचाता और अप शष्ट गैस हटाता है। उपयोगी काय — भोजन से
ऊजा प्राप्त करना — श्वसन करता है। श्वास लेना प रवहन है, श्वसन उ े श्य। दोन ही जी वत रहने के लए अ नवाय
ह।

प्र.2 भोजन के बना एक सप्ताह तक और पानी के बना एक अथवा दो दन तक जी वत रहना क ठन है परंतु श्वास
लए बना हम सामान्यत: कुछ मनट से अ धक जी वत नह रह सकते ह। ऐसा क्य है?

क्य क शरीर भोजन और जल का संचय कर सकता है, ऑक्सीजन का नह ।

भोजन शरीर म सं चत रहता है, अतः कई दन तक उसी संचय से ऊजा मलती रहती है।
जल शरीर म रुका रहता है और धीरे-धीरे व्यय होता है, अतः एक-दो दन नकल जाते ह।
परंतु ऑक्सीजन शरीर के प्रत्येक भाग म ग्लूकोस से ऊजा नकालने के लए हर क्षण खच होती रहती है और उसका कोई भंडार
शरीर म नह होता।

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जैसे ही श्वास रुकती है, ऑक्सीजन क आपू त रुक जाती है। शरीर म श्वसन तत्काल मंद पड़ जाता है, ऊजा मलनी बंद हो जाती है
और म स्तष्क जैसे कोमल अंग कुछ ही मनट म काम करना बंद करने लगते ह।

ऐसा क्य होता है: श्वसन कभी-कभार होने वाला काय नह है — यह जागते-सोते, शरीर के हर भाग म नरंतर
चलता रहता है। जो प्र क्रया कभी रुकती ही नह , उसे ऐसी आपू त चा हए जो कभी न रुके।

प्र.3 क्या आपने अपने नासा ार म सूक्ष्म रोम पर ध्यान दया है?

हाँ। नासा ार के भीतर सूक्ष्म रोम होते ह। ये रोम ेष्मा के साथ मलकर श्वास के साथ आने वाली वायु म से धूल और गंदगी को
पा शत कर (फँसा) लेते ह, जससे फेफड़ तक स्वच्छ वायु ही पहुँचती है।

धूल भरी वायु नासा ार में पवेश करती है

↓ सूक्ष्म रोम + िचपिचपी श्लेष्मा धूल को रोक लेते है ं

अपेक्षाकृ त स्वच्छ वायु → नासा पथ → श्वासनली → फेफड़ े

ऐसा क्य होता है: फेफड़ के भीतर क कोमल कू पकाएँ स्वयं क सफाई नह कर सकत । इस लए वायु को वहाँ
पहुँचने से पहले ही छानना आवश्यक है और नाक ही वह छन्ना है। इसी लए हम नाक से श्वास लेनी चा हए, मुख
से नह — मुख म ऐसा कोई छन्ना नह होता।

क्या आप जानते ह? नाक आती हुई वायु को गम और आद्र भी कर दे ती है, जससे ठं डी शुष्क वायु फेफड़ को
झटका नह दे ती।

क्रयाकलाप 9.2: आइए, प्र तरूप बनाएँ — पृष्ठ 130

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम
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9.2.1 मनुष्य म श्वसन — हम श्वास कैसे लेते ह?
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क्रयाकलाप

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a s emशीट को पकड़कर पदे के आधार के कद्र से नीचे क ओर ख चए और गुब्बार को दे खए [ चत्र 9.9(क)]।
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रबर
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प्र.1
आपने क्या दे खा? अब रबर शीट को ऊपर क ओर छो ड़ए और गुब्बार को दे खए [ चत्र 9.9(ख)]। आपको

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गुब्बार म क्या प रवतन दखाई दए?

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(क) अंतःश्वसन (ख) उच् ्वसन
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चत्र 9.9, पृष्ठ 130 — a s e
a g l क्रयाकलाप 9.2 म बनाया गया, श्वास लेने क क्रया व ध दशाने वाला प्र तरूप।

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जब रबर शीट को नीचे क ओर ख चते ह तो गुब्बारे फूल जाते ह। जब रबर शीट को ऊपर क ओर छोड़ते ह तो गुब्बारे पचक
mजाते ह।
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आप क्या करते ह बोतल के भीतर के स्थान गुब्बार म प रवतन शरीर म यह कसका
पर प्रभाव प्रतीक है

रबर शीट नीचे खी ंचना [िचत्र बोतल के भीतर स्थान बढ़ ग ब्ु बारे फू ल जाते है ं — नली से वायु भीतर अंत:श्वसन
9.9(क)] जाता है आती है

रबर शीट ऊपर छोड़ना बोतल के भीतर स्थान घट ग ब्ु बारे िपचक जाते है ं — नली से वायु उच्छवसन
[िचत्र 9.9(ख)] जाता है बाहर िनकल जाती है

ऐसा क्य होता है: बोतल वायुरोधी है, अतः वायु के आने-जाने का एकमात्र माग नली है। शीट नीचे ख चने पर
बोतल के भीतर अ धक स्थान बन जाता है और उसे भरने के लए नली से वायु भीतर आ जाती है — गुब्बारे फूल
जाते ह। शीट छोड़ते ही स्थान घट जाता है और वही वायु दब कर बाहर नकल जाती है — गुब्बारे पचक जाते ह।
आपका वक्ष ठ क इसी प्रकार काय करता है।

स्वयं जाँ चए: य द गुब्बारा न फूले तो कह से वायु नकल रही है। ढक्कन के चार ओर चकनी मट्ट फर से दबाइए
और पदे का रबर बड जाँ चए — प्र तरूप तभी काम करेगा जब बोतल पूरी तरह वायुरोधी हो।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 131

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9.2.1 मनुष्य म श्वसन — हम श्वास कैसे लेते ह?

प्र.1 चत्र 9.9 म दशाए गए प्र तरूप म गुब्बारे कसे प्रद शत करते ह? रबर शीट कसे प्रद शत करती है?

(क) अंतःश् वसन (ख) उच् ्वसन

चत्र 9.9, पृष्ठ 130 — क्रयाकलाप 9.2 म बनाया गया, श्वास लेने क क्रया व ध दशाने वाला प्र तरूप।

इस प्र तरूप म गुब्बारे फेफड़ को और रबर शीट डाया ाम को प्रद शत करती है।

प्र तरूप का भाग शरीर का वह भाग जसे यह प्रद शत करता है

दो ग ब्ु बारे दोनों फे फड़े

पेंदे पर लगी पतली रबर शीट डायाफ ाम

वाई (Y) आकार की खोखली नली श्वासनली और उसकी दो शाखाएँ

चौड़ी प्लािस्टक बोतल पसली िपंजर से िघरी वक्ष-ग हु ा

ऐसा क्य होता है: शीट को नीचे ख चना अंत:श्वसन के समय डाया ाम के नीचे जाने क नकल है, जससे वक्ष के
भीतर स्थान बढ़ता है और वायु फेफड़ म प्रवेश करती है। शीट को छोड़ना उच्छवसन के समय डाया ाम के ऊपर
आने क नकल है, जससे स्थान घटता है और वायु बाहर धकेल द जाती है।

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संकेत: इस प्र तरूप क एक सीमा है — बोतल कठोर है, अतः यह पस लय के ऊपर और बाहर क ओर जाने को
नह दखा सकती। वास्त वक वक्ष म डाया ाम के साथ-साथ पस लयाँ भी ग त करती ह।

क्रयाकलाप 9.3: आइए, खोज कर — पृष्ठ 131
9.2.1 मनुष्य म श्वसन — हम श्वास के ारा क्या छोड़ते ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 क्या आपको चूने के पानी के रंग म कोई प रवतन दखाई दे ता है?

हाँ — परंतु दोन म से केवल एक ही परखनली म।

परखनली चूने के पानी म प्रवा हत वायु प्रे क्षत प रवतन

क पचकारी अथवा स रज से प्रवा हत प रवेश क वायु — वही जसे हम चूने का पानी स्वच्छ बना रहता है — कोई
अंत:श्व सत करते ह पिरवतन नही ं

ख स् ॉ से मुँह ारा फूँक गई उच्छव सत वायु चूने का पानी दू िधया हो जाता है

संकेत: दोन परखन लय म ताजा बनाया गया चूने का पानी समान मात्रा म ली जए। खुले म रखा पुराना चूने का
पानी वायु क काबन डाइऑक्साइड से पहले ही अ भ क्रया कर चुका होता है और क्रयाकलाप से पहले ही धुँधला
दख सकता है।

प्र.2 परखनली 'ख' म चूने का पानी दू धया हो गया परंतु परखनली 'क' म चूने का पानी दू धया नह हुआ? यह क्या
इं गत करता है?

यह इं गत करता है क उच्छव सत वायु म अंत:श्व सत वायु क तुलना म अ धक काबन डाइऑक्साइड होती है।

चूने का पानी के वल काबन डाइऑ क्साइड के साथ अिभि या करके दू िधया होता है

परखनली 'ख' (उच्छविसत वायु) → दू िधया → अिधक काबन डाइऑक्साइड

परखनली 'क' (अंत :श्विसत वायु) → स्वच्छ → बहुत कम काबन डाइऑक्साइड

∴ उच् छविसत वायु में काबन डाइऑ क्साइड अिधक होती है

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ऐसा क्य होता है: काबन डाइऑक्साइड श्वसन का अप शष्ट उत्पाद है। ग्लूकोस के वघटन के समय यह शरीर के
सभी भाग म बनती है, रक्त इसे कू पकाओं तक ले जाता है और वहाँ से यह उच्छव सत वायु म नमुक्त हो जाती है।
अतः बाहर आने वाली वायु म उसक मात्रा अंदर जाने वाली वायु से अ धक होनी ही चा हए।

स्वयं जाँ चए: परखनली 'क' नयंत्रण (कं ोल) है। उसके बना कोई कह सकता था क चूने का पानी स्वयं ही
दू धया हो जाता है। ठ क उन्ह प र स्थ तय म 'क' स्वच्छ बनी रहती है, इस लए 'ख' का दू धया होना केवल
उच्छव सत वायु के कारण ही हो सकता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 132
9.2.1 मनुष्य म श्वसन — गैस का व नमय कैसे होता है?

प्र.1 क्या आपने कभी सोचा है क आप जो भोजन ग्रहण करते ह उससे आपको कस प्रकार ऊजा मलती है?

ऊजा केवल भोजन से नह , अ पतु श्वास के साथ ली जाने वाली ऑक्सीजन से भी मलती है। अकेला भोजन ऊजा नह दे
सकता और अकेली ऑक्सीजन के पास क्रया करने को कुछ नह होता — दोन का शरीर के भीतर मलना आवश्यक है।

1. भोजन पचकर शकरा (ग्लूकोस) जैसे सरल पदाथ म वघ टत हो जाता है।
2. ग्लूकोस रक्त म अवशो षत होकर शरीर के हर भाग तक पहुँचता है।
3. अंत:श्व सत वायु क ऑक्सीजन कू पकाओं से रक्त म जाती है और वह भी सवत्र पहुँचाई जाती है।
4. ऑक्सीजन ग्लूकोस को वघ टत करने म सहायता करती है और ऊजा नमुक्त होती है। यही श्वसन है।
5. अप शष्ट के रूप म काबन डाइऑक्साइड और जल बनते ह; रक्त काबन डाइऑक्साइड को कू पकाओं तक लौटा लाता है और
हम उसे बाहर नकाल दे ते ह।

ग्लूक ोस + ऑक्सीजन → काबन डाइऑक्साइड + जल + ऊज

ऐसा क्य होता है: ऊजा ग्लूकोस के अणु के भीतर बंद रहती है और ऑक्सीजन ही उसका ताला खोलती है।
इसी लए दौड़ने के बाद साँस फूलने लगती है — पे शय को अ धक ऊजा चा हए, अतः अ धक ग्लूकोस वघ टत
करना है, अतः अ धक ऑक्सीजन चा हए, अतः श्वास तेज चलने लगती है।

क्या आप जानते ह? यही वह ऊजा है जससे हम चलते, दौड़ते, खेलते और सोचते भी ह। चुपचाप बैठे रहने पर भी
म स्तष्क शरीर क ऊजा का बड़ा भाग खच करता रहता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 133

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

9.2.2 क्या अन्य जंतु भी मानव क भाँ त श्वास लेते ह?
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आपने च ड़य को उड़ते और मछ लय को तैरते दे खा होगा। वे कैसे श्वास लेते ह?
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प्र.1

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पक्षी मनुष्य क भाँ त फेफड़ से श्वास लेते ह। मछ लयाँ क्लोम (गलफड़ ) से श्वास लेती ह। जंतु जस पयावास म रहते ह,

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उसी के अनुसार उनके श्वसन अंग भन्न- भन्न होते ह।

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जंतु श्वसन अंग
ag काय-प्रणाली
पक्षी, हाथी, शेर , गाय, फे फड़े
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सभी म फेफड़े होते ह, परंतु प्रत्येक जंतु म उनक संरचना भन्न होती है

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बकरी, िछपकली, साँप

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अिधकाश
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ं जलीय जंत,ु जैसे क्लोम (गलफड़े)
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इनम रक्त-वा हकाओं क प्रचुर आपू त होती है; रक्त और जल म घुली गैस के बीच

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मछली ऑक्सीजन तथा काबन डाइऑक्साइड का व नमय क्लोम ारा होता है

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a मेंढक — टैडपोल अवस्था क्लोम टै डपोल पूणतः जल म रहता है

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थल पर फे फड़े, उभयचर अपने जीवन क भन्न अवस्थाओं तथा भन्न स्थान म शरीर के भन्न भाग का
m करते ह
मेंढक — वयस्क
जल में त्वचा
a s eउपयोग

कें चुआ नम त्वचा agl ऑक्सीजन और काबन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान सीधे नम शरीर-सतह से होता
है

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.c उस सतह को शरीर के भीतर सुर क्षत रखते ह; क्लोम उसे जल म फैला aदे तgे ह जहाँ ऑक्सीजन घुली रहती है;
ऐसा क्य होता है: प्रत्येक स्थ त म गैस को एक पतली, नम और रक्त से भरपूर सतह से होकर ही जाना पड़ता है।

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aseकचुआ अपनी पूरी त्वचा को नम बनाए रखता है। प्रत्येक रचना अपने पयावास के अनुकूल है — इसी लए कचुआ
फे फड़े

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गरम सूखी भू म पर सूखकर मर जाता है और जल से बाहर नकाली गई मछली चार ओर भरपूर ऑक्सीजन होने पर

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भी श्वास नह ले पाती।
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आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 134 से 136
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अध्याय अभ्यास
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आइए, और अ धक सीख

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agl रक्त बक्स को उपयुक्त भाग से भर कर आहार नाल के ारा भोजन क यात्रा को पूरा क जए। भोजन → मुख
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प्र.1

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→ ______ → आमाशय → ______ → ______ → गुदा

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तीन रक्त बक्से क्रमशः भोजन नली (ग्रासनली), क्षुद्रांत्र और बृहदांत्र ह।

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ं → बहृ दात्रं → गुद ा
भोजन → मुख → भोजन नली (गासनली) → आमाशय → क्षदु ात्र

भोजन नली
भोजन मख
ु आमाशय
(गासनली)

क्षुद ांत्र बहृ दांत्र गदु ा बिह:क्षेपण

नारंगी बक्से वही तीन भाग है ं िजन्हे ं भरना था।

आहार नाल म भोजन क पूरी यात्रा।

बक्सा भाग वहाँ क्या होता है

पहला िरक्त भोजन नली भ त्तय के लहरदार संकुचन और श थलन से भोजन आमाशय म धकेला जाता है
(ग ासनली)

दू स रा िरक्त क्षदु ात्रं पत्तरस, अग्न्याशयी रस और इसका अपना पाचक रस पाचन पूण करते ह; पोषक रक्त म
अवशो षत होते ह

तीसरा बहृ दांत्र जल और कुछ लवण अवशो षत होते ह; मल बनता है और मलाशय म सं चत होता है
िरक्त

संकेत: यकृत और अग्न्याशय कसी बक्से म नह आएँगे। भोजन उनसे होकर नह जाता — वे केवल अपने रस
क्षुद्रांत्र म डालते ह, इसी लए उन्ह आहार नाल के संबद्ध भाग कहा जाता है।

प्र.2 सा हल ने परखनली 'क' म रोट के कुछ टु कड़े डाले। नेहा ने परखनली 'ख' म रोट के टु कड़ को चबा कर डाला
और संतु ने परखनली 'ग' म उबले हुए आलू मसल कर डाले। उन सभी ने क्रमश: परखनली 'क', 'ख' और 'ग'
म आयोडीन वलयन क कुछ बूँद डाल । उनके क्या अवलोकन ह गे? कारण बताइए।

आयोडीन वह नीला-काला होता है जहाँ मंड उप स्थत हो; जहाँ मंड न हो वहाँ वह अपने ही भूरे-नारंगी रंग म बना रहता है।

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परखनली उसम क्या है अवलोकन कारण

क— रोट के सादे टु कड़े नीला-काला रंग रोट म मंड प्रचुर मात्रा म है और उस पर लार क कोई क्रया नह
सािहल (चबाए हुए नह ) हुई, अतः सारा मंड ज्य -का-त्य है

ख — नेहा चबाई हुई रोट रंग में कोई पिरवतन नही ं, चबाते समय लार के पाचक रस ने मंड को सरल शकराओं म
ु हल्का नीला-काला
अथवा बहत वघ टत कर दया, अतः आयोडीन के लए मंड बचा ही नह या
बहुत कम बचा

ग— उबले और मसले नीला-काला रंग आलू म भी मंड प्रचुर होता है; उसे केवल उबाला और मसला
संतिु ष्ट हुए आलू गया है, लार नह मलाई गई, अतः उसका मंड अछू ता है

ऐसा क्य होता है: 'क' और 'ग' म एक ही महत्त्वपूण बात समान है — ऐसा मंड जस पर लार क कोई क्रया नह
हुई। इसी लए एक गे ँ का और दूसरा आलू का होने पर भी दोन का प रणाम एक ही रहता है। केवल 'ख' भन्न है
और वहाँ केवल लार का अंतर है। यही एक तुलना सद्ध करती है क मंड का पाचन लार करती है।

स्वयं जाँ चए: य द नेहा क परखनली 'ख' अब भी गहरी हो जाए तो उसने पयाप्त दे र तक नह चबाया। पूरे एक
मनट चबाने पर अंतर स्पष्ट हो जाता है।

प्र.3 श्वास लेने म डाया ाम क क्या भू मका है? (i) वायु को नस्यं दत करना (ii) ध्व न उत्पन्न करना (iii) अंत:श्वसन
और उच्छवसन म सहायता करना (iv) ऑक्सीजन अवशो षत करना

सही उत्तर है — (iii) अंत:श्वसन और उच्छवसन म सहायता करना।

वाय ु अंद र खी ंची जाती है वाय ु बाहर धकेली जाती है

डायाफाम नीचे की ओर जाता है डायाफाम ऊपर की ओर जाता है
(क) अंत:श्वसन (ख) उच्छवसन

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पुस्तक का चत्र 9.10 — डाया ाम वक्ष के भीतर का स्थान बदलता है और वायु उसी के अनुसार आती-जाती है।

अंत:श्वसन उच्छवसन

पसिलयाँ ऊपर तथा बाहर की ओर गित करती है ं नीचे तथा अंद र की ओर गित करती है ं

डायाफ ाम नीचे की ओर गित करता है ऊपर की ओर गित करता है

वक्ष-ग हु ा का स्थान बढ़ जाता है घट जाता है

वायु फेफड़ म प्रवेश करती है फेफड़ से बाहर धकेली जाती है

शेष वकल्प क्य गलत ह: (i) वायु का नस्यंदन नासा ार के सूक्ष्म रोम और ेष्मा करते ह, डाया ाम नह ; (ii)
ध्व न श्वासनली म स्थत स्वर-यंत्र से उत्पन्न होती है; (iv) ऑक्सीजन का रक्त म अवशोषण कू पकाओं म होता है।
डाया ाम फेफड़ के नीचे स्थत एक गुंबदाकार पेशी है — यहाँ उसका एकमात्र काय वक्ष-गुहा का आकार बदलना
है।

प्र.4 नम्न ल खत का मलान क जए — भाग का नाम: (i) नासा ार (ii) नासा पथ (iii) श्वासनली (iv) कू पकाएँ
(v) पसली पजर; प्रकाय: (क) बाहर से हवा प्रवेश करती है। (ख) गैस का व नमय होता है। (ग) फेफड़ को
सुरक्षा प्रदान करते ह। (घ) सूक्ष्म रोम और ेष्मा हमारे ारा ग्रहण क गई वायु म से धूल और गंदगी को रोकने म
सहायक ह। (ङ) इस भाग से होकर वायु हमारे फेफड़ तक पहुँचती है।

भाग का प्रकाय क्य
नाम

(i) नासा ार (क) बाहर से हवा पवेश करती है। नासारं क यही जोड़ी है जहाँ से श्वसन तंत्र आरंभ होता है

(ii) नासा पथ (घ) सूक्ष्म रोम और श्ले ष्म ा वायु में से धूल और आगे बढ़ने से पहले यह वायु स्वच्छ क जाती है
गंद गी रोकते है।
ं

(iii) (ङ) इस भाग से होकर वायु हमारे फे फड़ों तक यह वायु को नीचे ले जाती है और दो शाखाओं म बँटकर दोन फेफड़
श्वासनली पहुच
ँ ती है। म जाती है

(iv) कू िपकाएँ (ख) गैस ों का िविनमय होता है। पतली भ त्तय वाले गुब्बारे जैसे कोश, जनके चार ओर रक्त से भरी
महीन न लकाएँ होती ह

(v) पसली (ग) फे फड़ों को सुर क्षा पदान करते है।
ं वक्ष के चार ओर क अ स्थय क पजरनुमा रचना जो कोमल फेफड़
िपंजर क रक्षा करती है

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नासा ार

श्वासनली

कूिपकाएँ

दायाँ फेफड़ा बायाँ फेफड़ा

पसली िपंजर

डायाफाम

वायु का पथ: नासा ार → नासा पथ → श्वासनली → कूिपकाएँ

मानव श्वसन तंत्र (पुस्तक का चत्र 9.8) — प्रश्न म दए गए सभी भाग नामां कत ह।

संकेत: वायु क यात्रा का क्रम याद र खए — नासा ार, नासा पथ, श्वासनली, उसक दो शाखाएँ, महीन शाखाएँ,
कू पकाएँ। पाँच म से चार मलान इसी क्रम से बन जाते ह; पसली पजर ही एकमात्र ऐसा भाग है जसम वायु जाती
ही नह , अतः उसे बचा हुआ वकल्प "फेफड़ को सुरक्षा" मल जाता है।

प्र.5 अ नल ने अपनी सहपाठ सान्वी से कहा क श्वसन और श्वास लेना एक ही प्र क्रया है। अ नल को यह समझाने के
लए क यह कथन सही नह है, सान्वी उससे क्या प्रश्न पूछ सकती है?

सान्वी ऐसे प्रश्न पूछे जनके स े उत्तर दे ते ही अ नल को स्वयं मानना पड़े क ये दोन शब्द दो भन्न बात के लए ह।

1. "य द श्वास लेना और श्वसन एक ही ह तो हमारे शरीर म ऊजा कहाँ से आती है? क्या केवल वायु अंदर-बाहर करने से ऊजा
नमुक्त हो जाती है?"
2. "श्वसन का शब्द समीकरण लखो। अब श्वास लेने का समीकरण लखो। ग्लूकोस + ऑक्सीजन → काबन डाइऑक्साइड +
जल + ऊजा — यह एक के लए लखा जा सकता है और दूसरे के लए क्य नह ?"
3. "श्वास लेना नाक, श्वासनली और फेफड़ म होता है। श्वसन शरीर के कस भाग म होता है?"
4. "कचुए के फेफड़े नह होते और मछली नाक से श्वास नह लेती, फर भी दोन जी वत और स क्रय ह। य द दोन शब्द एक
ही होते तो इसक व्याख्या कैसे करोगे?"

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम
a g l AglaSem · NCERT Solutions

5. "क्या भौ तक प रवतन और रासाय नक प रवतन एक ही होते ह? श्वास लेना शारी रक प्र क्रया है और श्वसन रासाय नक।
co m
दो भन्न प्रकार क प्र क्रयाएँ एक कैसे हो सकती ह?"
em.
m l as
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6. "आधे मनट के लए साँस रोक लो — क्या उस समय तुम्हारे शरीर म श्वसन भी रुक जाता है?"

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श्वास लेना श्वसन

ऑ क्सीजन से ग्लूक ोस का िवघटन कर ऊज िनमुक्त करना

comरासाय नक प्र क्रया
वायु को अंद र ले ना और बाहर िनकालना

e m . ag
as
शारी रक (भौ तक) प्र क्रया

श्वसन तंत्र म होती है a g l शरीर के अंदर, सभी भाग म होती है

co m
m.
ऊजा नमुक्त नह होती ऊजा नमुक्त होती है

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केवल ऑक्सीजन पहुँचाता और काबन डाइऑक्साइड हटाता है उसी ऑक्सीजन का उपयोग करके उपयोगी काय करता है

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a gl ऐसा क्य होता है: श्वास लेना पहुँचाना है और श्वसन उपयोग करना। दोन क तुलना ऐसी है जैसे दूधवाले का घर
तक दूध लाना और प रवार का उसे पीना — एक के बाद दूसरा आवश्यक, परंतु दोन एक घटना नह ।
m a s
em
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प्र.6 aglसत्य है और क्य ? अनु—हम वायु को अंत:श्व सत करते ह। शानू—हम
नम्न ल खत म से कौन-सा कथन
ऑक्सीजन को अंत:श्व सत करते ह। तनु—हम ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को अंत:श्व सत करते ह।

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comसत्य है — "हम ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को अंत:श्व सत करते ह।" agla

तनु का.कथन

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अंत:श्विसत वायु
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as तथा अन्य गैसे ं
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नाइटोजन 21% O₂

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उच्छविसत वायु
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se 16–17% O₂
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नाइटोजन तथा अन्य गैसे ं

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a 0.04% काबन डाइऑक्साइड (अंत :श्विसत)
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4–5% काबन डाइऑक्साइड (उच्छविसत)
a s e
वायु एक िमश्रण.cहैo— ऑक्सीजन उसका पाँच वाँ भाग ही है।
em agl
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पुस्तक का चत्र 9.13gस्तंlभ के रूप म — अंत:श्व सत वायु ऑक्सीजन से समृद्ध है, परंतु वह ऑक्सीजन नह है।
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कथन नणय कारण

अनु — हम वायु को अंत:श्विसत स त्य, परंत ु हम वायु ही अंदर लेते ह, कतु यह कथन उस ऑक्सीजन क बात नह करता जसके
करते है।
ं अधूर ा कारण वायु हमारे लए उपयोगी है

शानू — हम ऑक्सीजन को अस त्य हम कभी शुद्ध ऑक्सीजन अंदर नह लेते। वायु एक मश्रण है जसका लगभग 21% ही
अंत:श्विसत करते है।
ं ऑक्सीजन है, और उसका भी पूरा उपयोग नह होता — उच्छव सत वायु म अब भी 16–
17% ऑक्सीजन रहती है

तनु — हम ऑक्सीजन से सम ृद्ध सही यह दोन आवश्यक बात कहता है — हम जो लेते ह वह वायु है, और वह वायु उच्छव सत
वायु को अंत:श्विसत करते है।
ं वायु क तुलना म ऑक्सीजन से समृद्ध है

ऐसा क्य होता है: फेफड़े अपने चार ओर जो भी मश्रण होता है उसी को अंदर ले लेते ह। कू पकाओं म उस मश्रण
से ऑक्सीजन ले ली जाती है और उसम काबन डाइऑक्साइड जोड़ द जाती है, अतः बाहर आने वाली वायु म
ऑक्सीजन कम और काबन डाइऑक्साइड कह अ धक होती है — फर भी वह वायु ही है, कोई एक गैस नह ।

प्र.7 जब हम श्वास के साथ धूल भरी वायु को अंदर लेते ह तो प्राय: हम छ कते ह। इसके संभा वत कारण क्या हो
सकते ह?

छ कना शरीर का धूल को पुनः बाहर फकने का तरीका है। संभा वत कारण —

1. छन्ने पर बोझ बढ़ जाना। नासा ार के सूक्ष्म रोम और ेष्मा सी मत मात्रा म ही धूल रोक सकते ह। वायु बहुत धूल भरी हो तो
उनसे अ धक कण आगे नकल जाते ह।
2. आस्तर म उत्तेजना। नासा पथ के कोमल आस्तर पर बैठे धूल-कण उसे उत्ते जत करते ह और यही उत्तेजना छ क को जन्म दे ती
है।
3. छ क एक सुरक्षात्मक प्र तवत क्रया है। हम इसे सोचकर नह करते। वायु का एक अचानक और तीव्र झ का नाक तथा मुख
से बाहर नकलता है और धूल के कण को अपने साथ बाहर ले जाता है।
4. यह फेफड़ क रक्षा करती है। य द धूल और नीचे चली जाए तो वह श्वासनली और कोमल कू पकाओं तक पहुँच जाएगी जहाँ
से उसे हटाना सरल नह । छ क धूल को प्रवेश- ार के पास ही रोक दे ती है।
5. अ धक ेष्मा का ाव भी होने लगता है जससे और अ धक धूल फँसकर बाहर आ जाती है — इसी लए धूल भरे स्थान पर
नाक बहने लगती है।

ऐसा क्य होता है: संपूण श्वसन तंत्र क रचना एक ही वस्तु क रक्षा के लए हुई है — कू पकाओं क पतली और
नम भ त्तयाँ। नाक के रोम, ेष्मा, खाँसी और छ क — ये सब उसी सुरक्षा क क्रमशः परत ह।

संकेत: छ कते समय नाक और मुँह को रूमाल अथवा मुड़ी हुई कोहनी से अवश्य ढ कए। छ क के साथ नकलने
वाली सूक्ष्म बूँद पास खड़े व्य क्तय तक संक्रमण पहुँचा सकती ह। धूल भरे स्थान पर चेहरे को कपड़े या मास्क से
ढ कए।

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प्र.8 कक्षा 7 क छात्राएँ प र ध और अनुषा ने अपने प्रातःकालीन व्यायाम के लए दौड़ना आरंभ कया। अपनी दौड़
पूरी करने के बाद उन्ह ने प्र त मनट ली जाने वाली श्वास क गनती क । अनुषा प र ध क अपेक्षा अ धक तेजी
से श्वास ले रही थी। प र ध क अपेक्षा अनुषा ारा अ धक तेजी से श्वास लेने के कम से कम दो संभा वत कारण
बताइए।

नम्न ल खत म से कोई भी दो कारण उपयुक्त उत्तर ह।

1. अनुषा अ धक तेज दौड़ी हो या अ धक दूरी तय क हो। अ धक प रश्रम का अथ है पे शय को अ धक ऊजा चा हए, अतः
अ धक ग्लूकोस वघ टत करना पड़ा, अतः अ धक ऑक्सीजन चा हए और अ धक काबन डाइऑक्साइड बाहर नकालनी पड़ी
— और इसका एकमात्र उपाय है तेज श्वास लेना।
2. अनुषा को दौड़ने का अभ्यास प र ध जतना न हो। नय मत व्यायाम करने वाले क श्वसन पे शयाँ अ धक सशक्त होती ह
और वह प्रत्येक श्वास म अ धक वायु लेता है, अतः उसे उसी काम के लए कम श्वास क आवश्यकता होती है।
3. दोन के शरीर भन्न ह। वक्ष का आकार, फेफड़ क धा रता और शरीर का भार व्य क्त-व्य क्त म भन्न होते ह। फेफड़ क
धा रता कम होने पर प्र त श्वास कम वायु मलती है, अतः प्र त मनट श्वास क संख्या बढ़ जाती है।
4. अनुषा ने रुकने के तुरंत बाद गनती क हो। दौड़ने के बाद श्वास-दर धीरे-धीरे घटती है, अतः तुरंत गनने पर संख्या अ धक
आती है और तीन मनट बाद गनने पर कम।
5. अनुषा ने बस्ता उठा रखा हो, चढ़ाई पर या रेत पर दौड़ी हो, जससे उतनी ही दूरी उसके लए अ धक प रश्रम क रही हो।
6. अनुषा का स्वास्थ्य ठ क न रहा हो — जुकाम या बंद नाक से प्रत्येक श्वास उथली रह जाती है, अतः अ धक श्वास लेनी पड़ती
ह।

पेिशयों का अिधक काय → अिधक ग्लूक ोस िवघिटत करना

→ अिधक ऑ क्सीजन की आवश्यकता और अिधक काबन डाइऑ क्साइड िनकालना

→ श्वास-दर बढ़ जाना

स्वयं जाँ चए: शांत बैठकर एक मनट क श्वास ग नए, फर दो मनट रस्सी कूदकर दुबारा ग नए। दोन संख्याएँ
ल खए और सप्ताह भर यही दोहराइए — जैसे-जैसे आपका अभ्यास बढ़े गा, वश्राम क श्वास-दर धीरे-धीरे घटती
दखाई दे गी।

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प्र.9 यदु ने अपने एक वचार के परीक्षण के लए एक प्रयोग कया। उसने दो परखन लयाँ 'क' और 'ख' ल ।
परखन लय को पानी से आधा भरकर और उनम एक चुटक चावल का आटा मला कर उन्ह अच्छ तरह
हलाया। परखनली 'ख' म उसने कुछ बूँद लार क मलाईं। दोन परखन लय को उसने 35–40 मनट के लए
यथावत रहने दया। उसके बाद उसने दोन परखन लय म आयोडीन वलयन डाला। प्रयोग के प रणाम चत्र 9.15
म दशाए गए ह। आपके वचार से वह क्या परीक्षण करना चाहता है?

आयोडीन
िवलयन

क
( ) ख
( )

चत्र 9.15, पृष्ठ 136 — आयोडीन वलयन डालने के तुरंत बाद दोन परखन लयाँ।

यदु यह परीक्षण करना चाहता है क क्या लार मंड का वघटन करती है — अथात् क्या लार म उप स्थत पाचक रस चावल के आटे
के मंड को ऐसे रूप म बदल दे ता है जो अब मंड नह रहता।
चत्र 9.15 म दोन परखन लयाँ बलकुल भन्न दखाई दे ती ह —

परखनली उसम क्या है आयोडीन डालने के बाद रंग इसका अथ
( चत्र 9.15)

क चावल का आटा + जल गहरा नीला-काला मंड अब भी उप स्थत है — उस पर कुछ भी क्रया
नह हुई

ख चावल का आटा + जल + आयोडीन का अपना भूर ा-नारंग ी रंग मंड वघ टत हो चुका है; आयोडीन के लए क्रया
लार क कुछ बूँद ही बना रहता है करने को कुछ बचा ही नह

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'क' और 'ख' म केवल एक बात भन्न है — लार। अतः रंग का अंतर लार क ही क्रया का प रणाम हो सकता है।

यह अ भकल्पना अच्छ क्य है: परखनली 'क' नयंत्रण (कं ोल) है। उसके बना यदु कुछ भी सद्ध नह कर
सकता था, क्य क कोई कह सकता था क चावल के आटे म मंड था ही नह । साथ ही उसने शेष सब कुछ समान
रखा — उतना ही आटा, उतना ही जल, वैसा ही हलाना, वही 35–40 मनट और वही आयोडीन — जससे लार ही
एकमात्र चर (वे रएबल) रह जाए।

क्या आप जानते ह? यह प्रयोग एक बात और दखाता है — लार मुख के बाहर, परखनली म भी काम करती रहती
है। पाचन उस रस क रासाय नक क्रया है, कोई ऐसा जादू नह जसके लए शरीर आवश्यक हो।

प्र.10 र क्षता ने दो स्वच्छ परखन लयाँ 'क' और 'ख' लेकर एक परीक्षण अ भक ल्पत कया। उसने दोन परखन लय
को चत्र म दशाए अनुसार चूने के पानी से भर दया। परखनली 'क' म अंत:श्व सत वायु को नली ारा चू षत
करके प्रवा हत कया गया। परखनली 'ख' म नली के ारा उच्छव सत वायु को फूँक कर प्रवा हत कया गया।
( चत्र 9.16) आपके वचार से वह क्या जाँचना चाहती है? वह कैसे अपने नष्कष क पु कर सकती है?

(क) (ख )

चत्र 9.16, पृष्ठ 136 — र क्षता ारा प्रयुक्त दोन व्यवस्थापन।

र क्षता यह जाँचना चाहती है क क्या उच्छव सत वायु म अंत:श्व सत वायु क तुलना म अ धक काबन डाइऑक्साइड होती है।

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चूने का पानी के वल काबन डाइऑ क्साइड से दू िधया होता है
m ase
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परखनली 'क' (अंत :श्विसत वायु) → स्वच्छ बनी रहती है
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परखनली 'ख' (उच्छविसत वायु) → दू िधया हो जाती है
a∴ उच्छविसत वायु में अिधक काबन डाइऑ क्साइड है
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वह अपने नष्कष क पु इस प्रकार कर सकती है —m . c ag
l a se
दोन परखन लय क साथ-साथ तुलना कg जए। 'क' नयंत्रण है। दोन म ताजा बना चूने का पानी समान मात्रा म हो और
a
वायु समान समय तक प्रवा हत क जाए। य द केवल 'ख' दू धया हो तो अंतर का कारण उच्छव सत वायु ही है।

co m
m.
प्रयोग को दो-तीन बार दोहराइए और दो-तीन सहपा ठय से नई परखन लय म फूँकवाइए। जो प रणाम हर बार आए, वही
वश्वसनीय है।
m as e
.co a g l
अ धक दे र तक फूँ कए। जतनी अ धक उच्छव सत वायु प्रवा हत होगी, 'ख' का दू धयापन उतना ही बढ़ता जाएगा — इससे

a s emहोता है क प्रभाव काबन डाइऑक्साइड क मात्रा के साथ बढ़ता है।
सद्ध

a gl उल्ट दशा से जाँ चए। कसी ात ोत से काबन डाइऑक्साइड ताजा चूने के पानी म प्रवा हत क जए; वह भी दू धया हो
जाता है। इससे पु ष्ट होती है क दू धया होना वास्तव म काबन डाइऑक्साइड क ही जाँच है।

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comहै। agl
हर बार ताजा चूने का पानी प्रयोग क जए। खुले म रखा चूने का पानी वायु क काबन डाइऑक्साइड से पहले ही अ भ क्रया
.
s em
कर चुका होता है और परीक्षण से पहले ही धुँधला हो सकता
a
ऐसा क्य होता है: काबन डाइऑक्साइडagl श्वसन का अप शष्ट उत्पाद है। ग्लूकोस के वघटन के समय यह शरीर भर म

co m
बनती है, रक्त इसे कू पकाओं तक ले जाता है और वहाँ से यह उच्छव सत वायु म नमुक्त हो जाती है। अतः बाहर

m .
e
आने वाली वायु म उसक मात्रा कह अ धक — लगभग 4–5% — होती है जब क अंदर जाने वाली वायु म लगभग
m l as
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0.04%।

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अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — पृष्ठ 136
se m
com g l a
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अंतर वषयक प रयोजनाएँ

agl
अन्वे ष णात्मक प रयोजनाएँ

co m
.
प्र.1 मुख क स्वच्छता को बनाए रखने क उत्तम व धयाँ क्या ह? इस संबंध म पुस्तक या समाचार पत्र से अथवा

e m
as
अपने से बड़े व्य क्तय से वातालाप करके जानकारी एक त्रत क जए। इस पर एक रपोट तैयार क जए।
m l
mउत्तर .co a g
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agla
c
प रयोजना कैसे कर: तीन प्रकार के ोत से जानकारी एक त्रत क जए — कोई व ान या स्वास्थ्य क पुस्तक, कोई समाचार पत्र/

m .
e
प त्रका का लेख, और घर के बुजुग से बातचीत। हर बदु के साथ उसका ोत ल खए। फर रपोट को शीषक म बाँ टए — मुख
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. co agl
क स्वच्छता क्य आवश्यक है → प्र त दन क्या कर → कससे बच → हमारे बुजुग क्या करते थे → नष्कष। दो पृष्ठ और दाँत साफ

e m
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करने क व ध का एक छोटा नामां कत चत्र पयाप्त है।

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अच्छ रपोट म होना चा हए: कम से कम छह व शष्ट व धयाँ, हर एक का एक कारण, कम से कम एक बात कसी बुजुग से ली
हुई, तथा हर तथ्य का ोत स्पष्ट रूप से लखा हुआ।

co m
m .
m ase
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नमूना उत्तर:

उत्तम व ध यह क्य लाभप्रद है

िदन में दो बार दाँत साफ करना — पातः तथा सोने से भोजन की उस िचपिचपी परत को हटा दे ता है िजसमें कीटाण ु पनपकर दंतक्षय करते है ं
पहले

िदन में दो बार जीभ साफ करना ं का मुख्य कारण है
जीभ पर जमी परत ही मुख की दुग ध

हर भोजन के बाद जल से कु ल्ला करना दाँतों के बीच फँ से भोजन-कण सड़ने से पहले ही ध ल
ु जाते है ं

टॉफी, चॉकले ट और मीठे पेय कम करना, िवशेषकर दाँतों पर बची शक रा ही दंतक्षय करने वाले कीटाणओ
ु ं का भोजन है
रात में

कु रकु रे फल-सिब्जयाँ खाना — अमरूद, गाजर, इन्हे ं चबाने से दाँत स्वयं साफ होते है ं और लार का ाव बढ़ ता है
खीरा, से ब

दाँतों से बोतल का ढक्कन या कड़ी सुपारी न तोड़ना दाँतों में दरार पड़ने और टू टने से बचाव

हर तीन महीने में टू थबश बदलना मुड़े और िघसे हुए बश कोनों की सफाई नही ं कर पाते

वष में एक बार दाँतों की जाँच करवाना छोटा ग ा सरलता से भरा जा सकता है; उपेक्षा करने पर वही क ष्टदायक और महँग ा हो
जाता है

मेरी दाद से: " ववाह होने तक म प्र त दन प्रातः नीम क दातुन करती थी, ताँबे क जभ्भी से जीभ साफ करती थी और हर भोजन
के बाद कुल्ला करती थी। मीठा हम बहुत कम खाते थे और हमारे घर म कसी का दाँत खराब नह हुआ।"

संकेत: रपोट के अंत म अपनी ओर से एक पं क्त अवश्य ल खए — इस प रयोजना के बाद आपने अपनी दनचया
म क्या बदलने का नश्चय कया।

प्र.2 पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने के व भन्न उपाय खो जए। पाचन तंत्र को उत्तम बनाए रखने म सहायता करने
वाली कुछ खाने क वस्तुओं का सुझाव द जए। एक रपोट बनाइए और कक्षा म इसे प्रस्तुत क जए।

प रयोजना कैसे कर: बदु स्वयं इसी अध्याय से ली जए (रेशे, क वत भोजन, चरक सं हता वाला बॉक्स), साथ ही कसी
च कत्सक या बुजुग से तथा कसी स्वास्थ्य-लेख से। फर दो सू चयाँ बनाइए — आदत और खाद्य पदाथ — और उन्ह एक चाट पेपर
के साथ पाँच मनट क कक्षा-प्रस्तु त म बदल द जए।
अच्छ रपोट म होना चा हए: केवल भोजन नह , आदत भी; प्रत्येक का एक कारण; कम से कम दो स्थानीय भारतीय उदाहरण;
और एक बात जससे बचना चा हए।
नमूना उत्तर — आदत:

उपयुक्त समय पर भोजन क जए और भोजन छो ड़ए मत — आधु नक पोषण- व ान और चरक सं हता दोन इस पर बल
दे ते ह।

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भोजन को अच्छ तरह चबाइए और धीरे-धीरे खाइए। पाचन मुख म आरंभ होता है; जल्दबाजी म नगले गए भोजन पर लार
को क्रया करने का समय ही नह मलता।
भूख से अ धक भोजन न क जए। अ धक भरा आमाशय भोजन का ठ क से मंथन नह कर पाता।
पयाप्त जल पी जए। मल को मृदु रखने के लए बृहदांत्र को जल चा हए।
भोजन से पहले हाथ धोइए और ताजा बना भोजन खाइए, जससे क टाणु शरीर म न जाएँ।
शारी रक रूप से स क्रय र हए — पैदल चलना, साइ कल चलाना और खेलना आँत को ग तशील रखते ह।
भारी भोजन के तुरंत बाद ले टए मत; इसके स्थान पर थोड़ा टह लए।

नमूना उत्तर — खाद्य पदाथ:

खाद्य पदाथ यह कैसे सहायक है

फल और सिब्जयाँ — पपीता, अमरूद, के ला, पालक, गाजर रे शे और जल से सम ृद्ध; मल-त्याग सरल बनाते है ं

साबुत अनाज और कदन्न — ज्वार, बाजरा, रागी, चोकर रे शे से भरपूर ; कद न्न पाकृ ितक रूप से ग्लूटेन रिहत भी होते है ं
युक्त गेहू,ँ भूर ा चावल

िकि वत भोजन — दही, छाछ, श्रीखंड, कांजी, अचार, बहृ दांत्र के लाभदायक जीवाणओ
ु ं की सहायता करते है ं जो रे शों को िवघिटत कर
ग ंदु क, पोइता भात आवश्यक पोषक बनाते है ं

दाले ं और फिलयाँ रे शों के साथ-साथ पोटीन भी दे ती है ं

उिचत मात्रा में मसाले — अदरक, काली िमच, जीरा चरक संिहता में पाचन बढ़ ाने के िलए इनके िववेक पूण उपयोग का उ ल्ले ख है

पय प्त सादा जल कठोर मल और क ब्ज से बचाव करता है

संकेत: कससे बच — अ धक तला भोजन, पैकेटबंद नाश्ता और ठं डे पेय। इनम रेशे नाममात्र के होते ह और ये
पाचन को धीमा कर दे ते ह।

प्र.3 रंगीन चकनी म का प्रयोग करके पाचन तंत्र का त्रआयामी (3D) प्र तरूप बनाइए और काले कागज क
प चय का प्रयोग करके पाचन तंत्र के सभी भाग को नामां कत क जए।

प्र तरूप कैसे बनाएँ: आधार के लए एक मोटा गत्ता ली जए और उस पर हल्क रेखा से मानव आकृ त बनाइए। प्रत्येक अंग के
लए रंगीन चकनी मट्ट को उपयुक्त आकार म गढ़कर उसके स्थान पर दबाइए। फर काले कागज क प चय पर सफेद स्याही से
नाम लखकर उन्ह धागे क रेखा के साथ प्रत्येक अंग के पास लगाइए।
अच्छे प्र तरूप म होना चा हए — आहार नाल के सभी भाग सही क्रम म, दोन संबद्ध भाग (यकृत और अग्न्याशय) क्षुद्रांत्र म
अपना रस डालते हुए, तथा सही सापेक्ष माप — क्षुद्रांत्र स्पष्ट रूप से सबसे लंबी और बृहदांत्र स्पष्ट रूप से सबसे चौड़ी।

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बनाने योग्य म का आकार और रंग काली पच पर नामांकन
भाग

मुख छोटा खुला अंडाकार, गुलाबी मुख — दाँत चबाते है;ं लार मंड का पाचन आरंभ करती है

ग ासनली लंबी पतली रस्सी, हल्का गुलाबी, सीधी नीचे भोजन नली (ग ासनली) — भोजन को आमाशय तक
धके लती है

आमाशय J आकार क थैली, गहरा गुलाबी या लाल आमाशय — भोजन का मंथन; पाचक रस, अम्ल और
श्ले ष्मा

यकृ त बड़ा चपटा फन्ना, गहरा भूरा, ऊपर दाईं ओर यकृ त — िपत्त रस का ाव

अग्न्याशय पतला पत्ती जैसा आकार, क्र म रंग, आमाशय के नीचे अग्न्याशय — अग्न्याशयी रस का ाव

क्षदु ांत्र बहुत लंबी पतली रस्सी, नारंगी, बीच म कसकर कुंड लत क्षदु ांत्र — लगभग 6 मीटर; पाचन पूण और पोषकों का
अवशोषण

बहृ दांत्र मोट और छोट नली, बगनी, कुंडली के चार ओर बहृ दांत्र — लगभग 1.5 मीटर; जल और लवणों का
मेहराब जैसी अवशोषण

मलाशय नचले सरे पर छोटा सीधा टु कड़ा मलाशय — मल का संचय

ग दु ा सबसे नीचे एक छोटा छद्र ग दु ा — बिह:क्षेपण

संकेत: क्षुद्रांत्र को कई छोटे टु कड़ म नह , एक ही लंबी रस्सी के रूप म बे लए। प्र तरूप का पूरा उ े श्य ही यह
दखाना है क वह एक नली कतनी आश्चयजनक रूप से लंबी है।

प्र.4 वायु गुणवत्ता और ए.क्यू.आई. क्या ह? व भन्न क्षेत्र म काय करने वाले व्य क्तय के, कसान के, कारखान म
काम करने वाले श्र मक के तथा ठे ले वाल के श्वसन तंत्र पर वायु गुणवत्ता के प्रभाव का पता लगाइए।

वायु गुणवत्ता बताती है क वायु कतनी स्वच्छ अथवा प्रदू षत है। ए.क्यू.आई. का अथ है वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality
Index) — कद्र य प्रदूषण नयंत्रण बोड ारा भारतीय शहर के लए प्र त दन प्रका शत एक ऐसी संख्या जो मुख्य प्रदूषक (महीन
धूल PM2.5 तथा PM10, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइ ोजन डाइऑक्साइड, काबन मोनोऑक्साइड और ओज़ोन) क मात्रा को एक
सरल अंक और रंग म बदल दे ती है।

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ए.क्यू.आई. मान श्रेणी श्वास लेने पर प्रभाव

0–50 अच्छी वायु से लगभग कोई जो खम नह

51–100 संतोषजनक कुछ संवेदनशील व्य क्तय को हल्क श्वास-असु वधा

101–200 म ध् यम दमा तथा फेफड़े-हृदय रो गय को असु वधा

201–300 खराब लंबे समय रहने पर अ धकांश लोग को श्वास-असु वधा

301–400 बहुत खराब द घ अव ध तक रहने पर श्वसन रोग

401–500 गंभीर स्वस्थ व्य क्तय पर भी प्रभाव; पहले से रोगग्रस्त लोग पर गंभीर असर

प रयोजना कैसे कर: एक सप्ताह तक प्र त दन समाचार पत्र या 'समीर' ऐप से अपने नगर का ए.क्यू.आई. ल खए और उसका
स्तंभ-आलेख बनाइए। फर दो-तीन कामकाजी व्य क्तय से बात क जए और उनके अपने शब्द म ल खए क वे अपनी श्वास के
वषय म क्या अनुभव करते ह।
नमूना नष्कष:

कसान — जुताई और मड़ाई के समय क धूल, पराली जलाने का धुआँ तथा क टनाशक का छड़काव। अनेक कसान कटाई
और पराली जलाने के सप्ताह म खाँसी, छ क, आँख से पानी और साँस फूलने क शकायत करते ह।
कारखान के श्र मक — पत्थर कटाई, सीमट, सूती मल या घसाई क महीन धूल तथा रासाय नक धुआँ। लंबे समय के संपक
से फेफड़े क्ष तग्रस्त होते ह और स्थायी फेफड़ा-रोग तक हो सकता है; इसी लए अच्छे कारखाने मास्क और नकास-पंखे उपलब्ध
कराते ह।
ठे ले वाले और यातायात पु लस — पूरे दन वाहन के पास रहकर धुआँ और सड़क क धूल साँस म लेते ह। ये प्रायः गले म
जलन, बार-बार जुकाम और शीत ऋतु म सरदद क शकायत करते ह, क्य क तब धुआँ भू म के पास ही ठहर जाता है।

संकेत: अंत म व्यावहा रक सुझाव द जए — उपयुक्त मास्क (पतला कपड़ा नह ), सड़क के कनारे वृक्षारोपण, पत्ते
या पराली न जलाना, धूल भरी सड़क पर छड़काव, तथा बीच-बीच म स्वच्छ वायु म वश्राम। अध्याय क यह बात
स्मरण र खए क नाक धूल का केवल एक भाग ही रोक पाती है, शेष फेफड़ तक पहुँच जाता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 9 जंतुओं म जैव प्रक्रम
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समावृ त्त प्राणायाम (बॉक्स ी दग) तकनीक के वषय म पढ़ने का प्रयास क जए ( चत्र 9.17)। इसके क्या लाभ
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प्र.5

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चत्र 9.17, पृष्ठ 136 — समावृ त्त प्राणायाम (बॉक्स ी दग) तकनीक।

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समावृ त्त प्राणायाम (बॉक्स ी दग) एक सरल और धीमी श्वास- क्रया है जसके चार समान चरण होते ह — इसी लए पुस्तक ने
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इसे एक वग (बॉक्स) के रूप म दशाया है ( चत्र 9.17)। वग क प्रत्येक भुजा के लए चार क गनती क जए —
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श्वास रोकना — 4 िगनती
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श्वास अंदर लेना श्वास बाहर छोड़ना

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श्वास रोकना — 4 िगनती
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इस वगmको 4 से 6 बार दोहराइए। a
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समावृ त्त प्राणायाम — चार समान चरण, प्रत्येक चार गनती का, धीरे-धीरे नाक से।

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इसके लाभ:

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मन शीघ्र शांत होता है — परीक्षा, मंच-प्रदशन या खेल से पहले क घबराहट और तेज धड़कन को यह शांत कर दे ता है।
एकाग्रता बढ़ती है, क्य क गनती मन को एक ही सरल बात पर टका दे ती है।
श्वास उथली और तेज के स्थान पर गहरी और नय मत हो जाती है, जससे अ धक वायु फेफड़ के नचले भाग तक
पहुँचती है।
नय मत अभ्यास से डाया ाम और श्वसन पे शयाँ सशक्त होती ह।
न द म सहायक — सोने से पहले कुछ मनट करने पर न द अच्छ आती है।
कसी सामग्री क आवश्यकता नह — न कोई उपकरण, न वशेष स्थान; इसे कक्षा म बैठे-बैठे भी कया जा सकता है।

संकेत: नाक से श्वास ली जए, कमर सीधी र खए और कभी जोर न लगाइए। य द चार गनती लंबी लगे तो तीन से
आरंभ क जए। यह उसी परंपरा का अंग है जसे भारत म शता ब्दय से प्राणायाम के रूप म श्वसन-स्वास्थ्य, वश्रां त
और एकाग्रता के लए अपनाया जाता रहा है।

प्र.6 प क्षय और स्तनधा रय दोन म श्वास लेने हेतु फेफड़े होते ह कतु पक्षी ऊँचाई पर उड़ सकते ह जहाँ ऑक्सीजन
का स्तर कम होता है। उनको इन स्थ तय म जी वत रखने के लए उनका श्वसन तंत्र कस प्रकार अनुकू लत होता
है?

उड़ना अत्यंत प रश्रम का काय है और अ धक ऊँचाई क वायु वरल होती है — वहाँ एक श्वास म कह कम ऑक्सीजन आती है।
पक्षी का श्वसन तंत्र कम वायु से अ धक ऑक्सीजन नकालने के लए अनुकू लत है।

वायु कोश। फेफड़ के अ त रक्त पक्षी के शरीर म पतली भ त्त वाले वायु कोश फैले होते ह। ये ध कनी क भाँ त वायु का संग्रह
और संचालन करते ह, जससे दो श्वास के बीच फेफड़े कभी खाली नह रहते।
फेफड़ म वायु एक ही दशा म बहती है। स्तनधारी म वायु उन्ह बंद कोश म जाती और लौटती है, अतः प्रत्येक ताजी श्वास
बासी वायु से मल जाती है। पक्षी म वायु नरंतर आगे बढ़ती रहती है, इस लए फेफड़े को श्वास लेते समय भी और छोड़ते
समय भी ताजी वायु मलती रहती है।
उच्छवसन के समय भी ऑक्सीजन ग्रहण होती रहती है। इसी एक दश प्रवाह के कारण पक्षी श्वास-चक्र का आधा भाग व्यथ
नह जाने दे ता।
अत्यंत महीन और सघन वायु न लकाएँ फेफड़ म रक्त के संपक का बड़ा क्षेत्रफल दे ती ह, जससे ऑक्सीजन शीघ्र रक्त म
पहुँच जाती है।
ऑक्सीजन को दृढ़ता से पकड़ने वाला रक्त तथा तीव्र और श क्तशाली हृदय ऑक्सीजन को शीघ्र उड़ान-पे शय तक पहुँचाते
ह।
उड़ान के समय बहुत तेज श्वास-दर से बड़ी मात्रा म वायु तंत्र से होकर गुजरती है।

प रणाम: अध्याय म लखा है क "कुछ जंतु श्वसन के दौरान ऑक्सीजन के अ धक भाग का उपयोग कर सकते ह"। पक्षी ऐसे ही
जंतु ह — वे प्रत्येक श्वास से हमारी अपेक्षा ऑक्सीजन का बड़ा भाग ग्रहण कर लेते ह। इसी कारण पट्ट-शीष हंस (बार-हेडेड गूज़)
हमालय के ऊपर उन ऊँचाइय पर उड़ जाते ह जहाँ मनुष्य को ऑक्सीजन स लडर क आवश्यकता पड़ती है।

ऐसा क्य होता है: उड़ान क पे शयाँ चलने वाली पे शय से कह अ धक प रश्रम करती ह, अतः उन्ह बहुत अ धक
ऊजा चा हए और ऊजा ऑक्सीजन से ग्लूकोस के वघटन पर ही मलती है। जस जंतु को कम ऑक्सीजन वाले
स्थान पर अ धक ऑक्सीजन चा हए, वह केवल अपनी आपू त-प्रणाली सुधारकर ही जी वत रह सकता है — पक्षी
का श्वसन तंत्र ठ क यही करता है।

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अन्वेषण कैसे कर: पट्ट-शीष हंस और रुपेल गद्ध के वषय म प ढ़ए और एक सरल तुलना-चाट बनाइए —
स्तनधारी फेफड़ा: वायु उन्ह कोश म आती-जाती है; पक्षी का फेफड़ा: वायु एक ही दशा म बहती है, दोन ओर वायु
कोश।

अध्याय — एक नज़र म
पोषण, श्वसन, प रसंचरण, उत्सजन और जनन — ये जैव प्रक्रम सजीव क उत्तरजी वता के लए अ नवाय ह। इस अध्याय म
पोषण और श्वसन का वस्तार से अध्ययन कया गया है।
काब हाइ ेट, प्रोट न और वसा जैसे ज टल भोजन-घटक आहार नाल नामक एक लंबी न लका म सरल रूप म वघ टत होते
ह। यह न लका मुख से आरंभ होकर गुदा म समाप्त होती है।
पाचन मुख से आरंभ होता है — दाँत यां त्रक पाचन करते ह और लार मंड को शकरा म बदलने लगती है। आमाशय पाचक
रस, अम्ल और ेष्मा दे ता है; यकृत पत्तरस और अग्न्याशय अग्न्याशयी रस दे ता है।
क्षुद्रांत्र (लगभग 6 मीटर) आहार नाल का सबसे लंबा भाग है। इसके पतले आंत रक आस्तर पर अँगुली जैसे हजार प्रवध होते
ह जो पचे हुए पोषक को रक्त म अवशो षत करते ह।
बृहदांत्र (लगभग 1.5 मीटर) छोट तो है परंतु अ धक चौड़ी है। यह जल और कुछ लवण अवशो षत करती है, अध ठोस मल
मलाशय म एक त्रत होता है और गुदा से बाहर नकलता है — इसे ब ह:क्षेपण कहते ह।
जंतुओं म भन्नता होती है — गाय और भस रोमंथी ह जो भोजन को वापस मुँह म लाकर चबाती ह; प क्षय के दाँत नह होते,
वे पेषणी म नगले गए कंकड़ क सहायता से भोजन पीसते ह।
श्वास लेना वायु के फेफड़ म आने-जाने क भौ तक प्र क्रया है। अंत:श्वसन म पस लयाँ ऊपर-बाहर तथा डाया ाम नीचे जाता
है; उच्छवसन म दोन वापस आ जाते ह।
गैस का व नमय गुब्बारे जैसी कू पकाओं म होता है। अंत:श्व सत वायु म लगभग 21% ऑक्सीजन और 0.04% काबन
डाइऑक्साइड होती है; उच्छव सत वायु म लगभग 16–17% ऑक्सीजन और 4–5% काबन डाइऑक्साइड।
श्वसन एक रासाय नक प्र क्रया है — ग्लूकोस + ऑक्सीजन → काबन डाइऑक्साइड + जल + ऊजा। श्वास लेना ऑक्सीजन
लाता है; श्वसन उससे ऊजा नमुक्त करता है।
व भन्न जंतु भन्न- भन्न प्रकार से श्वास लेते ह — पक्षी और स्तनधारी फेफड़ से, मछली क्लोम से, मढक टै डपोल अवस्था म
क्लोम तथा वयस्क अवस्था म फेफड़े एवं त्वचा से, और कचुआ नम त्वचा से।

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त्व रत पुनरावृ त्त

पद अथ अध्याय से उदाहरण / ववरण स्मरणीय बदु

आहार नाल वह लंबी निलका िजसमें भोजन का मुख → ग्रासनली → आमाशय → क्षुद्रांत्र → यकृत और अग्न्याशय संबद्ध भाग
पाचन होता है बृहदांत्र → गुदा ह, न लका के भाग नह

यां त्रक पाचन भोजन को रासायिनक पिरवतन के दाँत ारा संदलन एवं चवण मुख्यतः मुख म होता है
िबना छोटे टुक ड़ों में तोड़ना

लार मुख का वह द व िजसमें पाचक रस रोट या चावल के मंड को शकरा म बदलती है, आयोडीन परीक्षण — मंड पर
होता है इसी लए दे र तक चबाने पर मठास आती है नीला-काला रंग

ग्रासनली मुख से आमाशय तक की लचीली भ त्तयाँ लहरदार ग त से संकु चत और श थल यह ग त संपूण आहार नाल म होती
(भोजन नली) निलका होती ह है

आमाशय पेशीय थैल ी जो भोजन का मंथन पाचक रस, अम्ल और ेष्मा का ाव अम्ल जीवाणुओं को नष्ट करता है;
करती है ेष्मा आस्तर क रक्षा करती है

पत्तरस यकृ त का हल्का क्षारीय ाव आमाशय से आए अम्ल को उदासीन करता है यकृत शरीर क सबसे बड़ी ग्रं थ है
और वसा को छोट गो लकाओं म तोड़ता है

अग्न्याशयी रस अग्न्याशय से ािवत क्षारीय रस काब हाइ ेट, प्रोट न और वसा — तीन पर अम्ल को उदासीन करने म भी
क्रया करता है सहायक

अवशोषण पचे हुए पोषकों का रक्त में पहच
ु ँ ना क्षुद्रांत्र के अँगुली जैसे प्रवध ारा प्रवध सतही क्षेत्रफल बढ़ा दे ते ह

ब ह:क्षेपण िबना पचे अपिशष्ट का ग दु ा ारा बाहर मलाशय म एक त्रत अध ठोस मल रेशेयुक्त भोजन से मल-त्याग सरल
िनकलना होता है

रोमंथन आंिशक रूप से पचे भोजन को पुनः मुँह गाय, भस, बकरी — रोमंथी जंतु गाय दन म लगभग 8 घंटे चबाती
में लाकर अच्छी तरह चबाना है

पेषणी ( गजाड) पिक्षयों का माँस पेशीय पकोष्ठ जो नगले गए छोटे कंकड़ क सहायता से काय प क्षय के दाँत नह होते
भोजन को पीसता है करता है

श्वास लेना वायु को अंद र ले ना (अंत:श्वसन) और अंत:श्वसन म पस लयाँ ऊपर-बाहर, डाया ाम एक शारी रक (भौ तक) प्र क्रया
बाहर िनकालना (उच्छवसन) नीचे

कू पकाएँ फे फड़ों की महीन शाखाओं के िसरों पतली भ त्तयाँ, चार ओर रक्त से भरी महीन यह वास्तव म गैस का व नमय
पर ग ब्ु बारे जैसे कोश न लकाएँ होता है

श्वसन ऑक्सीजन की सहायता से ग्लूक ोस ग्लूकोस + ऑक्सीजन → काबन एक रासाय नक प्र क्रया, शरीर के
के िवघटन ारा ऊज िनमुक्त होना डाइऑक्साइड + जल + ऊजा अंदर होती है

क्लोम अिधकांश जलीय जंतओ
ु ं की मछली तथा मढक के टै डपोल इनम रक्त-वा हकाओं क प्रचुर
(गलफड़े) िवशेषीकृ त श्वसन संर चना आपू त होती है

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages38
Languagehindi
Updated19 Sep 2026