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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 10: पादप म जैव प्रक्रम
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
137 – 152 22 54 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 44 pages
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कक्षा 7 व ान अध्याय 10 पादप म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 10: पादप म जैव प्रक्रम
कक्षा 7 व ान अध्याय 10 पादप म जैव प्रक्रम (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत एनसीईआरट समाधान। इसम क्रयाकलाप 10.1
से 10.8 तक क पूरी ता लकाएँ (ता लका 10.1, 10.2 और 10.3), गहन चतन और वै ा नक से प रचय बॉक्स, पृष्ठ 137 से 149 तक के सभी
पाठ्य प्रश्न, आइए, और अ धक सीख के दस प्रश्न तथा तीन अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ स म्म लत ह — प्रकाश सं ेषण, रंध्र और दारु–पोषवाह
के नामां कत चत्र के साथ।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (कक्षा 7) 137 – 152
खं ड प्रश्न
22 54
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 137
अध्याय क भू मका
प्र.1 क्या आपने कभी जंतुओं क भाँ त पादप को भोजन ग्रहण करते दे खा है?
नह । कसी ने भी पौधे को भोजन खाते नह दे खा है। जंतु बने-बनाए भोजन को मुख के ारा ग्रहण करते ह, परंतु पौध म न तो मुख
होता है और न पाचन तंत्र — वे कुछ भी नगलते नह ह।
पौधे हरे होते ह और एक ही स्थान पर स्थर रहते ह — यही संकेत है। भोजन ग्रहण करने के स्थान पर वे अपनी प त्तय म अपना
भोजन स्वयं न मत करते ह। पौधे म केवल क ा माल प्रवेश करता है — जड़ से जल और ख नज तथा प त्तय के सूक्ष्म छद्र से
काबन डाइऑक्साइड।
यह क्य महत्त्वपूण है: पौधे भोजन बनाते ह और जंतु नह बना सकते, इस लए मनुष्य स हत प्रत्येक जंतु पौध पर
नभर है — या तो प्रत्यक्ष रूप से (रोट , चावल, सब्ज़ी) अथवा परोक्ष रूप से (दूध, अंडा या माँस, जो पौधे खाने वाले
जंतुओं से मलते ह)।
प्र.2 पादप म वृ द्ध होने पर आपको उनम क्या प रवतन दखाई दे ते ह?
पौधे म वृ द्ध होने पर ये प रवतन दखाई दे ते ह —
क लकाओं से नवीन प त्तयाँ और शाखाएँ नकलती ह।
पौधे क लंबाई (ऊँचाई) बढ़ती है — नवो द एक बड़ा पौधा बन जाता है।
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तना मोटा और दृढ़ हो जाता है जससे पौधा स्वयं को सँभाल पाता है।
जड़-तंत्र म म और गहरा तथा चौड़ा फैलता है।
कुछ समय पश्चात पुष्प और फर फल तथा बीज आते ह।
जंतुओं क भाँ त पौधे का भार भी बढ़ता है।
स्वयं जाँ चए: टमाटर या मच के छोटे पौधे के तने पर एक धागा ढ ला बाँध द जए और एक तीली पर उसक ऊँचाई
अं कत क जए। दो सप्ताह बाद दे खए — धागा कस चुका होगा और नशान पौधे के शीष से काफ़ नीचे रह
जाएगा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 138
10.1 पादप म वृ द्ध कैसे होती है?
प्र.1 अपने आस-पास दे खए। क्या आपने पौधे के जीवनकाल म उसम कुछ प रवतन दे खे ह?
हाँ। पौधे म उसके जीवनकाल म नरंतर प रवतन होते रहते ह। नीम अथवा मनी प्लांट का जो पौधा आप प्र त दन दे खते ह, वह कुछ
महीन बाद बल्कुल भन्न दखाई दे ता है।
दो छोट प त्तय वाला नवो द एक घना पौधा बन जाता है।
प त्तय और शाखाओं क संख्या बढ़ती जाती है।
लंबाई बढ़ती है और वृक्ष म तना मोटा तथा काष्ठीय हो जाता है।
पुरानी प त्तयाँ पीली होकर गरती ह और नई हरी प त्तयाँ नकल आती ह।
उपयुक्त ऋतु म पौधे म पुष्प आते ह और फर फल तथा बीज बनते ह।
यह क जए: अपने घर के पास का कोई एक पौधा चु नए और वष भर प्रत्येक महीने क पहली तारीख़ को उसका
चत्र बनाइए या फ़ोटो ली जए। बारह चत्र म उसका पूरा जीवनकाल दखाई दे गा।
प्र.2 आपके वचार से इन प रवतन के क्या कारण ह? इस वषय पर अपने मत्र से चचा क जए और इन कारण के
स्पष्टीकरण भी द जए।
ये प रवतन इस लए होते ह क्य क पौधा भोजन न मत कर रहा है और उसका उपयोग नए भाग को बनाने म कर रहा है। इसके लए
चार वस्तुएँ आवश्यक ह —
सूय का प्रकाश — भोजन बनाने के लए ऊजा का ोत।
जल — जड़ ारा ग्रहण कया जाता है; भोजन नमाण म तथा पौधे को त रखने म उपयोगी।
वायु — इससे काबन डाइऑक्साइड मलती है, जो भोजन का क ा माल है।
मृदा के ख नज — जड़ जल के साथ इन प्रमुख पोषक को भी अवशो षत करती ह।
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पुस्तक म ब ारा दए गए चार स्पष्टीकरण — जल, सूय का प्रकाश, जड़ ारा म से भोजन, तथा 'कुछ और' — सभी उ चत
प रकल्पनाएँ ह। इनम से दो (जल और सूय का प्रकाश) क जाँच क्रयाकलाप 10.1 म क जाती है। तीसरे म सुधार आवश्यक है
— जड़ म से भोजन नह लेत , वे जल और ख नज ग्रहण करती ह; भोजन तो पौधा अपनी प त्तय म स्वयं बनाता है।
चचा क्य कराई जाती है: व ान म स्पष्टीकरण केवल आरंभ है। वह तब ान बनता है जब उसक जाँच के लए
प्रयोग अ भक ल्पत कया जाए — क्रयाकलाप 10.1 यही करता है।
प्र.3 मेरे वचार से ____________ क कुछ भू मका हो सकती है।
इस रक्त स्थान को अनेक सही प्रकार से भरा जा सकता है। सबसे अच्छे उत्तर और उनक जाँच का तरीक़ा —
रक्त ान म यह अ ा अनुमान क्य है जाँच कैसे कर
वायु (काबन पौधे सदै व वायु से घरे रहते ह एक पत्त ी को कािस्टक सोडा वाली बोतल में बंद कीिजए , जो काबन
डाइऑक्साइड) डाइऑ क्साइड अवशोिषत कर ले ता है — ि याकलाप 10.4
म ृद ा के खिनज उपजाऊ उ ान क म म पौधे बालू एक जैसे नवोिद् भद उ ान की िम ी और ध ल
ु ी बालू में रोिपए तथा दोनों
क अपेक्षा अच्छ वृ द्ध करते ह में समान जल दीिजए
ताप (गरमाहट) कुछ ऋतुओं म पौधे तीव्र ग त से बढ़ते ह एक जैसे गमलों को पकाश में, परंत ु एक गरम और एक ठं डे स्थान पर
रिखए
पित्तयों का हरा रंग वृ द्ध करने वाले लगभग सभी पौधे हरे एक ही पत्त ी के हिरत और अहिरत ध ब्बों पर आयोडीन परीक्षण कीिजए
होते ह — ि याकलाप 10.3
नमूना उत्तर: "मेरे वचार से वायु क कुछ भू मका हो सकती है।" — और क्रयाकलाप 10.4 इसे सही सद्ध करता है, जसम
काबन डाइऑक्साइड से वं चत पत्ती के भाग म मंड नह बनता।
क्रयाकलाप 10.1: आइए, कुछ कारण क जाँच के लए परीक्षण कर — पृष्ठ 138 और 139
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10.1 पादप म वृ द्ध कैसे होती है?
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क्रयाकलाप
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s m तक पौध का अवलोकन क जए और उनक ऊँचाई, प त्तय क संख्या, प त्तय के रंग और पौध म
eसप्ताह
gl aदो
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प्र.1
दखने वाले अन्य प रवतन को भी अ भले खत क जए। अपने अवलोकन को ता लका 10.1 म अ भले खत
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क जए।
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(खm a s
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(क) सीधा सूय के पकाश में ) सीधा सूय के पकाश में (ग) अँधेरे में रखा हुआ
रखा हुआ जलयुक्त
se m जलयुक्त गमला ‘ग’
गमला ‘क’
g l a गमला ‘ख’
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चत्र 10.1, पृष्ठ 138 — पौध क वृ द्ध म सूय के प्रकाश तथा जल क भू मका समझने के लए प्रयोगात्मक व्यव ापन
(सेट-अप)।
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ता लका 10.1 — पौध क वृ द्ध पर सूय के प्रकाश और जल का प्रभाव
व भन्न तय उपलब्धता पौध क ऊँचाई प त्तय क संख्या प त्तय का
म रखे गमले (CM) रंग (हरा/
पीला)
सूय का जल प्रथम दो प्रथम दो
प्रकाश दन सप्ताह दन सप्ताह
पश्चात पश्चात
गमला ‘क ’ — सीधा
सूय के पकाश में
रखा हुआ और
जलयुक्त
गमला ‘ख’ — सीधा
सूय के पकाश में
रखा हआु और
जलरिहत
गमला ‘ग’ — अँधे रे
में रखा हुआ और
जलयुक्त
ता लका 10.1, पृष्ठ 139 — अपने अवलोकन इसी रक्त ता लका म भरने ह।
उ ान क म से भरे एक जैसे तीन गमल म मच या टमाटर के समान आमाप के नवो द रोपे जाते ह और चत्र 10.1 के अनुसार
रखे जाते ह — क सूय के प्रकाश म जलयुक्त, ख सूय के प्रकाश म जलर हत, ग अँधेरे म जलयुक्त। दो सप्ताह बाद प्राय: प्राप्त होने
वाले प्रेक्षण स हत ता लका 10.1 इस प्रकार है —
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ता लका 10.1 — पौध क वृ द्ध पर सूय के प्रकाश और जल का प्रभाव
व भन्न तय म उपलब्धता पौध क ऊँचाई (CM) प त्तय क संख्या प त्तय का
रखे गमले रंग (हरा/
सूय का जल प्रथम दो सप्ताह प्रथम दो सप्ताह पीला)
प्रकाश दन पश्चात दन पश्चात
गमला 'क' — सीधा सूय हाँ हाँ 10 17 6 13 हरा (स्वस्थ,
के पकाश में रखा हुआ और सीधा खड़ा)
जलयुक्त
गमला 'ख' — सीधा सूय हाँ नह 10 10 (मुर झा कर 6 2 (शेष िगर पीला से भूर ा,
के पकाश में रखा हुआ और सूख गया) गई)ं सूखा
जलरिहत
गमला 'ग' — अँधे रे में रखा नह हाँ 10 13 (पतला, 6 8 (छोटी) हल्का पीला-हरा
हआ
ु और जलयुक्त दुबल , झक
ु ा
हुआ )
अ भले खत करने योग्य अन्य प रवतन — गमला 'क' का तना मोटा और दृढ़ हो जाता है; गमला 'ग' का पौधा पतला और दुबल
होकर प्रकाश क ओर झुक जाता है; गमला 'ख' क म कठोर होकर फट जाती है।
ध्यान र खए: गमल को अलग-अलग रखने से पहले ही प्रथम दन क ऊँचाई और प त्तय क संख्या लख ली जए।
केवल अंत म लए गए आँकड़ से वृ द्ध का पता नह चलता।
प्र.2 तीन गमल के पौध म आपने क्या अंतर दे खे?
तीन पौधे आरंभ म एक जैसे थे, परंतु दो सप्ताह बाद पूणत: भन्न हो गए।
गमला 'क' (प्रकाश + जल): सबसे लंबा, सवा धक प त्तयाँ, गहरे हरे रंग क प त्तयाँ, मोटा और सीधा तना — पूणत: स्वस्थ
पौधा।
गमला 'ख' (प्रकाश, जल नह ): प त्तयाँ पहले मुरझाईं, फर पीली और सूखी होकर गर गईं। ऊँचाई म लगभग कोई वृ द्ध
नह हुई। पौधा नष्ट हो गया।
गमला 'ग' (अँधेरा + जल): पौधा जी वत रहा और कुछ लंबा भी हुआ, परंतु पतला, दुबल और हल्के पीले-हरे रंग का हो
गया, प त्तयाँ छोट रह और वह प्रकाश क ओर झुकने लगा।
गमला 'ग' का पौधा पीला क्य पड़ता है: अँधेरे म प त्तयाँ भोजन नह बना पात और उनम पूरा हरा रंग वक सत
नह होता, क्य क पणह रत को प्रकाश चा हए। पौधा कुछ समय अपने भंडा रत भोजन पर जी वत रहता है —
इसी लए वह लंबा तो हो जाता है, पर सुदृढ़ नह हो पाता।
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प्र.3 कस गमले के पौधे म अ धकतम वृ द्ध हुई है?
गमला 'क' — जो सीधा सूय के प्रकाश म रखा गया और जसम प्र त दन उपयुक्त मात्रा म जल डाला गया।
यही एकमात्र गमला है जसम जाँची जा रही दोन वस्तुएँ एक साथ उपलब्ध ह। पौधे को भोजन बनाने के लए सूय का प्रकाश और
क े माल तथा त के लए जल — दोन मलते ह, इस लए वह सबसे लंबा होता है, सवा धक प त्तयाँ बनाता है और उन्ह गहरा
हरा बनाए रखता है।
प्र.4 कस गमले के पौधे म सबसे कम वृ द्ध हुई है?
गमला 'ख' — जो सूय के प्रकाश म तो रखा गया परंतु जसम जल नह डाला गया।
जल पौधे को त रखने, जड़ से ख नज ऊपर पहुँचाने तथा भोजन नमाण के क े माल के रूप म आवश्यक है। इसके बना
पौधा मुरझा जाता है, उसक प त्तयाँ सूख कर गर जाती ह और वह नष्ट हो जाता है — इस लए पयाप्त प्रकाश मलने पर भी उसक
वृ द्ध सबसे कम रहती है।
ध्यान द जए: "सबसे कम वृ द्ध" और "सबसे फ का रंग" एक बात नह ह। गमला 'ग' का पौधा फ का है परंतु
ऊँचाई बढ़ाता है; गमला 'ख' के पौधे म तो लगभग कोई वृ द्ध होती ही नह ।
प्र.5 इस क्रयाकलाप म कए गए अवलोकन से आप क्या नष्कष नकालते ह?
पौध को अपनी वृ द्ध के लए जल एवं सूय के प्रकाश दोन क आवश्यकता होती है।
सूय का पकाश + जल (गमला 'क') → सव त्तम वृि
जल है, पकाश नही ं (गमला 'ग') → दुबल, पीली, कमज़ोर वृि
पकाश है, जल नही ं (गमला 'ख') → मुरझाना और नष्ट होना
इनम से कसी एक को हटाने पर पौधे को हा न होती है, अथात कोई भी दूसरे का स्थान नह ले सकता। इसी लए प्रयोग म तीन गमले
लए जाते ह — गमला 'क' तुलना के लए है और 'ख' तथा 'ग' म एक-एक कारक हटाया गया है।
शेष सब समान क्य रखा जाता है: गमल का आमाप, उ ान क म , एक ही पौधे के समान आमाप के नवो द
— सब एक जैसे। य द गमल म एक से अ धक बात भन्न होत तो यह कहना असंभव होता क वृ द्ध म अंतर कस
कारण से आया।
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क्रयाकलाप 10.2: आइए, जाँच कर ( नदशन क्रयाकलाप) — पृष्ठ 140 और 141
10.2.1 प त्तयाँ — पौध क 'भोजन नमाणशाला'
क्रयाकलाप
प्र.1 एक पत्ती को नरम करने के लए 5 मनट तक पानी म उबा लए। एक परखनली म एल्कोहॉल ल और उसम पत्ती
को डु बाइए। उबलते हुए जल वाले बीकर म परखनली को र खए। पत्ती के वण- वहीन होने तक प्रतीक्षा क जए
[ चत्र 10.2 (क)]। पत्ती को बाहर नकाल ली जए और उसे एक प्लेट पर रख द जए। अब एक बदुपाती ( ॉपर)
क सहायता से वण वहीन पत्ती पर आयोडीन के तनुकृत वलयन क कुछ बूँद डा लए [ चत्र 10.2 (ख)]। कुछ
मनट प्रतीक्षा क जए और अवलोकन क जए।
परखनली
पानी
एल्कोहॉल
पत्ती
तार जाली
आयोडीन
िवलयन
िस्पट लैपं
(क) उबालने का व्यवस्थापन (ख) आयोडीन परीक्षण
चत्र 10.2, पृष्ठ 140 — पत्ती का मंड परीक्षण: (क) उबालने का व्यव ापन, (ख) वण- वहीन पत्ती पर आयोडीन
डालना।
अवलोकन: वण वहीन होने के बाद हल्क क्र म रंग क दखने वाली पत्ती, आयोडीन पड़ते ही नीली-काली हो जाती है। यह पत्ती म
मंड क उप त को इं गत करता है।
प्रत्येक चरण का उ े श्य —
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चरण इसका उ े श्य
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5 िमनट तक उबलते पानी में रखना
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पत्त ी नरम हो जाती है िजससे ए ल्कोहॉल और आयोडीन उसमें सरलता से पवेश कर
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gl में एल्कोहॉल, परखनली को उबलते जल में
aपरखनली गरम ए ल्कोहॉल हरे पणहिरत को घोल कर िनकाल दे ता है — पत्त ी वणिवहीन हो
रखना जाती है
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पत्ती पर आयोडीन का तनुकृ त िवलयन
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आयोडीन मंड के साथ नीला-काला रंग दे ता है — यही पत्त ी में भंडािरत भोजन की ag
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सावधानी: एल्कोहॉल को कदा प ऊष्मा के ोत के पास नह रख क्य क यह अत्य धक ज्वलनशील द्रव पदाथ होता
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है और सरलता से आग पकड़ सकता है और जला सकता है। इसी लए एल्कोहॉल वाली परखनली को उबलते जल के
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बीकर म रख कर परोक्ष रूप से गरम कया जाता है और यह क्रयाकलाप शक्षक ारा ही नद शत कया जाता है।
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a gl यह क्य महत्त्वपूण है: नीली-काली पत्ती इस बात का सीधा प्रमाण है क पत्ती ने स्वयं भोजन बनाकर भंडा रत
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कया। यही परीक्षण क्रयाकलाप 10.3 और 10.4 म फर प्रयोग होता है ता क पता चले क प्रकाश सं ेषण के
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लए और क्या-क्या अ नवाय है।
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गहन चतन — पृष्ठ 141
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10.2.1 प त्तयाँ — पौध क 'भोजन नमाणशाला'
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गहन चतन
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ag क्या आपको आश्चय हुआ क इस क्रयाकलाप के आरंभ म हमने पत्ती को वण वहीन क्य कया?
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asछपा दे ता।
क्य क पत्ती का अपना हरा रंग प रणाम l
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आयोडीन मंड को नीला-काला कर दे ता है। गहरी हरी पत्ती पर नीला-काला रंग केवल "और गहरा हरा" जैसा दखेगा और यह पता
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ही नह चलेगा क रंग बदला या नह । गरम एल्कोहॉल से पणह रत नकल जाने पर पत्ती हल्के क्र म रंग क हो जाती है और तब
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se त का अवलोकन स्पष्ट रूप से
हल्का-सा नीला-काला धब्बा भी स्पष्ट दखाई दे ता है।
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पुस्तक के शब्द म — पत्ती के वण वहीन होने पर उसम वण-प रवतन तथा मंड क उप
a s em कया जा सकता है।
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ध्यान द जए: क्रयाकलाप 10.3 भी इसी पर आधा रत है। वण वहीन करने के बाद ही यह दखता है क पत्ती के
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ह रत धब्बे नीले-काले हुए और अह रत धब्बे नह ।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 141
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10.2.1 प त्तयाँ — पौध क 'भोजन नमाणशाला'
प्र.1 सूय का प्रकाश पौध म मंड के उत्पादन म कस प्रकार योगदान दे ता है?
सूय का प्रकाश भोजन बनाने के लए ऊजा प्रदान करता है। पत्ती का पणह रत इस प्रकाश ऊजा को प्रग्रहण करता है और उसक
सहायता से काबन डाइऑक्साइड तथा जल से ग्लूकोस बनता है, जो बाद म भंडारण हेतु मंड म रूपांत रत हो जाता है।
सूय का पकाश
काबन डाइऑक्साइड + जल → ग् लूक ोस + ऑक्सीजन
पणहिरत
भास्कर के इस प्रश्न का उत्तर क्रयाकलाप 10.3 दे ता है — सूय के प्रकाश म रखे पौधे क पत्ती के ह रत धब्बे नीले-काले हो जाते ह,
जब क 36 घंट तक अँधेरे म रखे एक जैसे पौधे क पत्ती म कह भी नीला-काला रंग नह आता। प्रकाश नह तो मंड नह ।
क्रयाकलाप 10.3: आइए, जाँच कर — पृष्ठ 141 से 143
10.2.1 प त्तयाँ — पौध क 'भोजन नमाणशाला'
क्रयाकलाप
प्र.1 सूय के प्रकाश म रखे गए पौधे से ली गई पत्ती के अह रत धब्बे नीले-काले रंग के नह हुए। क्या यह इं गत करता है
क उन धब्ब म पणह रत उप त नह है?
आवश्यक नह । सही नष्कष अ धक सावधानी से नकालना चा हए — संभवत: इन अह रत धब्ब म उ चत मात्रा म पणह रत नह
है जससे आयोडीन परीक्षण ारा पता लगाए जाने योग्य पयाप्त मंड बन सके।
भास्कर ने यह अ भले खत कया —
ता लका 10.2 — पौध क प त्तय के ह रत और अह रत भाग म मंड क उप त
क्र.सं. गमले के पौधे के लए प्रकाश आयोडीन परीक्षण से आयोडीन परीक्षण के बाद का रंग
क तयाँ पहले का रंग
1. सूय के पकाश में रखा पौधा पत्ती पर ह रत और अह रत रंग पत्त ी के हिरत ध ब्बे नीले -काले रंग के (अहिरत ध ब्बों
के धब्बे ह में कोई पिरवतन नही)ं
2. अँधे रे में रखा पौधा पत्ती पर ह रत और अह रत रंग रंग में कोई पिरवतन नही ं
के धब्बे ह
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सावधानी क्य आवश्यक है: आयोडीन परीक्षण मंड क जाँच करता है, पणह रत क नह । "नीला-काला नह
हुआ" केवल यह बताता है क वहाँ इतना कम मंड बना क पकड़ म नह आया। उन धब्ब म थोड़ा पणह रत
उप स्थत हो सकता है — कुछ रंगीन प त्तय म तो अन्य वणक हरे रंग को दबा भी दे ते ह।
रोचक तथ्य: कुछ पौध क प त्तयाँ लाल, बगनी अथवा भूरी दखाई दे ती ह क्य क उनम हरे पणह रत क अपेक्षा
इन रंग के वणक अ धक होते ह जो हरे रंग को दबा दे ते ह। इनम से कुछ वणक प्रकाश सं ेषण म भी सहायक होते
ह — ऐसी प त्तय म आयोडीन परीक्षण से नीला-काला रंग आ सकता है।
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प्र.2 ता लका 10.2 म सूचीबद्ध अवलोकन से हम क्या नष्कष नकाल सकते ह?
ता लका 10.2 — पौध क प त्तय के ह रत और अह रत भाग म मंड क उप त
क्र.सं. गमले के पौधे के लए आयोडीन परीक्षण से पहले आयोडीन परीक्षण के बाद
प्रकाश क तयाँ का रंग का रंग
1. सूय के पकाश में रखा पौधा पत्त ी पर हिरत और अहिरत रंग के पत्त ी के हिरत ध ब्बे नीले -काले रंग
ध ब्बे है ं के हो गए
2. अँधे रे में रखा पौधा पत्त ी पर हिरत और अहिरत रंग के रंग में कोई पिरवतन नही ं हुआ
ध ब्बे है ं
ता लका 10.2, पृष्ठ 142 — क्रयाकलाप 10.3 म भास्कर ारा अ भले खत अवलोकन। प त्तय के चत्र पुस्तक क
ता लका म छपे चत्र के पुनरखां कत रेखा चत्र ह।
दो स्पष्ट नष्कष —
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1. मंड बनाने के लए पणह रत अ नवाय है। सूय के प्रकाश म रखे पौधे क पत्ती म केवल ह रत धब्बे नीले-काले हुए। मंड ठ क
वह बना जहाँ पणह रत था।
2. मंड बनाने के लए सूय का प्रकाश अ नवाय है। 36 घंट तक अँधेरे म रखे पौधे क पत्ती के ह रत धब्ब म भी नीला-काला
रंग नह आया — केवल पणह रत से, प्रकाश के बना, मंड नह बना।
दोन को मलाकर — सूय के प्रकाश क उप स्थ त म पणह रत मंड न मत करता है। चूँ क मंड प त्तय म बनता है, इस लए प त्तय
को पौध क 'भोजन- नमाण-शाला' (फूड फैक् ) कहा जाता है।
पत्ती का जाँचा गया भाग पणह रत सूय का प्रकाश आयोडीन परीक्षण का प रणाम
हिरत धब्बा, पकाश में रखा पौधा है है नीला-काला — मंड उपिस्थत
अहिरत धब्बा, पकाश में रखा पौधा अपयाप्त है कोई पिरवतन नही ं — मंड पकड़ में नही ं आया
हिरत धब्बा, अँधे रे में रखा पौधा है नह कोई पिरवतन नही ं — मंड नही ं बना
अहिरत धब्बा, अँधे रे में रखा पौधा अपयाप्त नह कोई पिरवतन नही ं — मंड नही ं बना
ध्यान द जए: परीक्षण से पहले भास्कर ारा े सग पेपर से बनाया गया चत्र ही इस क्रयाकलाप क कुंजी है। य द
ह रत धब्बे कहाँ थे इसका अ भलेख न हो तो बाद म नीले-काले भाग का उनसे मलान करना संभव ही नह होगा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 143
10.2.2 भोजन न मत करने म वायु क भू मका
प्र.1 पौध ारा भोजन न मत करने के लए और क्या अ नवाय है? आइए, पता लगाते ह।
अब तक अध्याय म जल, सूय का प्रकाश और पणह रत सद्ध हो चुके ह। शेष रह गया क ा माल वायु से मलने वाली गैस —
काबन डाइऑक्साइड है।
अत: प्रकाश सं ेषण के लए आवश्यक वस्तुओं क पूरी सूची —
काबन डाइऑक्साइड — वायु से, रंध्र के ारा पत्ती म प्रवेश करती है
जल — जड़ ारा अवशो षत और दारु ारा ऊपर पहुँचाया गया
सूय का प्रकाश — ऊजा का ोत
पणह रत — वह हरा वणक जो इस ऊजा को प्रग्रहण करता है
क्रयाकलाप 10.4 इस सूची क चौथी वस्तु क जाँच के लए ही अ भक ल्पत है।
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पौध ारा भोजन नमाण क प्र क्रया के अंतगत वायु म उप त कौन-सी गैस अ नवाय है?
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प्र.2
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aglडाइऑक्साइड।
काबन
वायु अनेक गैस का मश्रण है — मुख्यत: नाइ ोजन और ऑक्सीजन, तथा बहुत कम मात्रा म काबन डाइऑक्साइड। इनम से काबन
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डाइऑक्साइड ही वह गैस है जसे पौधा क े माल के रूप म लेकर ग्लूकोस बनाता है। यह पत्ती म सूक्ष्म छद्र — रंध्र — के ारा
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प्रवेश करती है।
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हम यह कैसे जानते ह: क्रयाकलाप 10.4 म बोतल के अंदर रखा का स्टक सोडा पत्ती के बंद भाग के चार ओर क
काबन डाइऑक्साइड अवशो षत कर लेता है। उस भाग म मंड नह बनता, जब क बाहर वाला भाग — उसी सूय के
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प्रकाश म, उसी पौधे पर, उतने ही पणह रत और जल के साथ — नीला-काला हो जाता है। दोन भाग म अंतर केवल
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काबन डाइऑक्साइड का है।
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क्रयाकलाप 10.4: आइए, जाँच कर ( नदशन क्रयाकलाप) — पृष्ठ 143 और 144
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10.2.2 भोजन न मत करने म वायु क भू मका
क्रयाकलाप
प्र.1 अवलोकन क जए और ता लका 10.3 म जल, सूय के प्रकाश, पणह रत और काबन डाइऑक्साइड क
उपलब्धता को अ भले खत क जए। पत्ती को तोड़ ली जए और क्रयाकलाप 10.2 म कए गए अनुसार आयोडीन
परीक्षण का उपयोग करके मंड क उप त क जाँच क जए। अपने अवलोकन ता लका 10.3 म अ भले खत
क जए।
मंड िवहीन
पौधा
सोिडयम
हाइडॉक्साइड
िवलयन
(क) व्यवस्थापन
चत्र 10.3 (क), पृष्ठ 143 — क्रयाकलाप 10.4 का व्यव ापन।
ता लका 10.3 — पादप ारा मंड बनाने म वायु क भू मका
पत्ती का भाग उपलब्धता क्या मंड उप त
है? (हाँ/नह )
जल सूय का पणह रत काबन
प्रकाश डाइऑक्साइड
पत्त ी का वह भाग जो
बोतल के अंद र है
पत्त ी का वह भाग जो
बोतल के बाहर है
ता लका 10.3, पृष्ठ 144 — क्रयाकलाप 10.4 के लए रक्त अ भलेखन ता लका।
मंडर हत पत्ती का आधा भाग वपा टत कॉक के माध्यम से का स्टक सोडा वाली चौड़े मुँह क बोतल के अंदर और शेष आधा भाग
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बोतल के बाहर वायु म रखा जाता है [ चत्र 10.3(क)]। पूरे व्यवस्थापन को कुछ घंट के लए सूय के प्रकाश म रखा जाता है। पूण
क गई ता लका 10.3 इस प्रकार है —
ता लका 10.3 — पादप ारा मंड बनाने म वायु क भू मका
पत्ती का भाग उपलब्धता क्या मंड है (हाँ/
नह )
जल सूय का पणह रत काबन डाइऑक्साइड
प्रकाश
पत्ती का वह भाग जो बोतल हाँ हाँ हाँ नही ं (कािस्टक सोडा ने अवशोिषत नही ं
के अंद र है कर ली)
पत्ती का वह भाग जो बोतल हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
के बाहर है
आयोडीन परीक्षण के पश्चात [ चत्र 10.3(ख)] बोतल के बाहर वाला भाग नीला-काला हो जाता है; अंदर वाले भाग के रंग म कोई
प रवतन नह होता।
सावधानी: का स्टक सोडा एक प्रबल रसायन है जससे त्वचा जल सकती है। इस रसायन का प्रयोग केवल शक्षक
ारा ही कया जाए।
पौधे को पहले मंडर हत क्य कया जाता है: य द पौधे म पहले से भंडा रत मंड होता तो पत्ती के दोन भाग नीले-
काले हो जाते और प्रयोग से कुछ सद्ध न होता। दो-तीन दन अँधेरे म रखने से यह भंडार समाप्त हो जाता है, अत:
बाद म मलने वाला मंड न श्चत रूप से प्रयोग के दौरान ही बना होगा।
प्र.2 यह प्रयोग क्या दशाता है?
यह प्रयोग दशाता है क मंड बनाने के लए वायु म उप त काबन डाइऑक्साइड पौध के लए अ नवाय है।
दोन भाग एक ही पत्ती के ह, एक ही पौधे पर, उसी सूय के प्रकाश म, समान जल और समान पणह रत के साथ। अंतर केवल एक है
— बोतल के अंदर वाली वायु से का स्टक सोडा ने काबन डाइऑक्साइड हटा द है। उस भाग म मंड नह बनता, दूसरे म बनता है।
एक ही पत्ती क्य , दो पौधे क्य नह : एक ही पत्ती के दो भाग लेने से शेष सभी प र स्थ तयाँ स्वत: समान हो जाती
ह। कसी एक कारक क जाँच का यह सबसे स्वच्छ तरीक़ा है — एक अच्छे नष्पक्ष परीक्षण का उदाहरण।
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प्र.3 क्रयाकलाप 10.3 और 10.4 के आधार पर आप क्या नष्कष नकालगे?
दोन क्रयाकलाप मलकर पौध म भोजन नमाण क चार आवश्यकताएँ बता दे ते ह।
क्रयाकलाप हटाया गया कारक मंड बना? नष्कष
10.3 — अँधे रे में रखा पौधा सूय का प्रकाश नही ं सूय का प्रकाश अ नवाय है
10.3 — पत्ती के अहिरत धब्बे पणह रत (अपयाप्त) नही ं पणह रत अ नवाय है
10.4 — बोतल के अंद र वाला पत्ती का भाग काबन डाइऑक्साइड नही ं काबन डाइऑक्साइड अ नवाय है
10.1 — जलरिहत गमला जल पौधा मुर झा कर नष्ट जल अ नवाय है
नष्कष: पौध म भोजन के सं ेषण के लए सूय का प्रकाश, जल, पणह रत और काबन डाइऑक्साइड अ नवाय ह। यह प्र क्रया,
जसके ारा पौधे सूय के प्रकाश और पणह रत क उप स्थ त म भोजन न मत करते ह, प्रकाश सं ेषण कहलाती है।
सूय का पकाश (ऊज )
काबन डाइऑक्साइड ग्लूकोस
वायु से
पकाश संश्लेषण मंड के रूप मे ं भंडािरत
हरी पत्ती में
जल (पणहिरत + सूय का पकाश) ऑक्सीजन
जड़ों से वायु मे ं िनमुक्त
इनमें से कोई एक हटा दें तो मंड नही ं बनता।
प्रकाश सं ेषण म जाने वाला क ा माल और बनने वाले उत्पाद। क्रयाकलाप 10.1, 10.3 और 10.4 म एक-एक कारक हटाकर दखाया
गया है क तब मंड नह बनता।
प्र.4 पौधे का कौन-सा भाग मंड के सं ेषण म स म्म लत है?
मुख्य रूप से पत्ती। पत्ती प्रकाश सं ेषण का प्रमुख स्थान है — इसी लए प त्तय को पौध क 'भोजन नमाणशाला' कहा जाता है।
पत्ती इस काय के लए इस लए उपयुक्त है क्य क वह —
चौड़ी और चपट होती है — सूय के प्रकाश को प्रग्रहण करने के लए बड़ा पृष्ठ मलता है;
हरी होती है — उसम प्रकाश प्रग्रहण करने वाला पणह रत भरपूर होता है;
रंध्र से युक्त होती है — जनसे काबन डाइऑक्साइड भीतर आती है;
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दारु से जुड़ी होती है — जो जड़ से जल लाता है।
प्र.5 क्या पौधे के अन्य हरे भाग भी प्रकाश सं ेषण करते ह?
हाँ। पौधे के अन्य भाग जनम पणह रत होता है, वे भी प्रकाश सं ेषण करते ह।
नए पौध के हरे तने, तथा नागफनी (कैक्टस) का तना, जसम प त्तयाँ काँट म बदल जाने के कारण तना ही यह काय करता है।
पुष्प के हरे बाह्यदल तथा क े आम और लौक जैसे क े फल का हरा छलका।
पणवृंत और प्रतान (ट ल) के हरे भाग।
स्वयं जाँ चए: मनी प्लांट को मंडर हत करके एक दन सूय के प्रकाश म र खए और फर उसके हरे तने के टु कड़े पर
आयोडीन परीक्षण क जए। वह भी नीला-काला हो जाता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 144 और 145
10.2.2 भोजन न मत करने म वायु क भू मका
प्र.1 क्या पौधे अपने प रवेश से पदाथ को केवल ग्रहण करते ह अथवा वे कुछ नमुक्त भी करते ह?
पौधे ग्रहण भी करते ह और नमुक्त भी। प्रकाश सं ेषण के दौरान वे काबन डाइऑक्साइड और जल ग्रहण करते ह तथा
ऑक्सीजन नमुक्त करते ह।
काबन डाइऑक्साइड + जल → ग्लूक ोस + ऑ क्सीजन
प त्तय से जलवाष्प भी बाहर नकलती है। इसके अ त रक्त पौधे नरंतर श्वसन भी करते ह, जसम वे ऑक्सीजन लेते ह और काबन
डाइऑक्साइड नमुक्त करते ह।
ऑक्सीजन क नमु क्त को दशाने वाला प्रयोग क्रयाकलाप 10.5 है — सूय के प्रकाश म रखे जलीय पौधे के ऊपर उलट रखी
परखनली म गैस के बुलबुले एक त्रत होते ह।
क्रयाकलाप 10.5: आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 145
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10.2.2 भोजन न मत करने म वायु क भू मका
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क्रयाकलाप
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a s em10.4 म व्यव ापन 'क' सूय के प्रकाश म रखा गया है और 'ख' अँधेरे म रखा गया है। इन दोन व्यव ापन
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चत्र
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प्र.1
म आप क्या अंतर दे खते ह?
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बुलबुले
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गई परखनली
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कीप
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जलीय पौधा
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चत्र 10.4, पृष्ठ 145 — व्यव ापन ‘क’ सूय के प्रकाश म तथा व्यव ापन ‘ख’ अँधेरे म रखा गया है।
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दोन व्यवस्थापन एक जैसे ह — बीकर के जल म उलट क प के नीचे एक जलीय पौधा और क प क नली पर जल से भरी उलट
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परखनली। अंतर केवल प्रकाश का है।
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agl व्यव ापन कहाँ रखा क्या दखाई दे ता है
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गया
जलीय पौधे से लगातारoबुm l a se
क सूय के
एकि त होते है ं m
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प्रकाश म
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और परखनली में जल का तल नीचे चला जाता है
ख अँधेरे म agबुलबुला नही ं। परखनली जल से भरी ही रहती है, कोई गैस एकि त नही ं होती
कोई
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क प और उलट परखनली क्य : क प पौधे से उठने वाले प्रत्येक बुलबुले को समेट कर एक पतली धारा म ऊपर
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भेजती है, और जल से भरी उलट परखनली उस गैस को रोक लेती है जससे बाद म उसक जाँच क जा सके।
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प्र.2 क्या आप सूय के प्रकाश म रखे गए व्यव ापन 'क' म उलट कर रखी परखनली से नकलते हुए वायु के बुलबुले
दे खते ह?
हाँ। सूय के प्रकाश म रखे व्यवस्थापन 'क' म जलीय पौधे क प त्तय से नरंतर बुलबुले उठते ह, क प से होकर ऊपर जाते ह और
उलट परखनली म एक त्रत हो जाते ह।
ये बुलबुले केवल 'क' म बनते ह। अँधेरे म रखे व्यवस्थापन 'ख' म कोई बुलबुला नह बनता — क्य क प्रकाश सं ेषण सूय के
प्रकाश क उप स्थ त म ही संपन्न होता है, और वहाँ कोई गैस बन ही नह रही।
यह क जए: हाइ ला क ताज़ा टहनी लेकर व्यवस्थापन 'क' को धूप वाली खड़क के पास र खए। एक मनट म
बुलबुल क संख्या ग नए, फर बीकर को गत्ते से आं शक रूप से ढक कर फर ग नए। प्रकाश घटते ही बुलबुल क
दर घट जाती है।
प्र.3 इस व्यव ापन म उत्पन्न गैस के कारण बुलबुले नकले और उलट कर रखी गई परखनली म एक त्रत हो गए। यह
कौन-सी गैस है?
यह ऑक्सीजन है।
बरखा द द ने इसे सद्ध कया। जब पयाप्त गैस एक त्रत हो गई तो उन्ह ने परखनली के मुँह पर अँगूठा रख कर उसे व्यवस्थापन से
बाहर नकाला, अँगूठा हटा कर तत्काल एक जलती हुई तीली परखनली म डाली और तीली से तीव्र ज्वाला उत्पन्न हुई।
ज्वाला तीव्र क्य होती है: ऑक्सीजन जलने म सहायक है। ऑक्सीजन से समृद्ध गैस म छोट या सुलगती हुई
ज्वाला भी चमक कर तीव्र हो जाती है। यही ऑक्सीजन क मानक जाँच है — और इससे यह भी सद्ध हो जाता है
क गैस काबन डाइऑक्साइड नह है, क्य क वह तो ज्वाला बुझा दे ती।
नष्कष: प्रकाश सं ेषण के दौरान ऑक्सीजन नमुक्त होती है और यह प्र क्रया सूय के प्रकाश क उप स्थ त म ही संपन्न होती है।
वै ा नक से प रचय — पृष्ठ 146
10.2.3 प्रकाश सं ेषण — संक्षेप म
वै ा नक से प रचय
प्र.1 रुस्तम होरमुसजी दस्तूर कौन थे और प्रकाश सं ेषण को समझने म उनका क्या योगदान रहा?
वश्वभर म अनेक वै ा नक ने प्रकाश सं ेषण को समझने म योगदान दया है। भारत म रुस्तम होरमुसजी दस्तूर (1896–1961)
ने इस प्र क्रया का अध्ययन कया।
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वे एक पादप व ानी (वनस्प त वै ा नक) थे।
उन्ह ने 1921 से 1935 तक रॉयल इंस्ट ूट ऑफ साइंस, बॉम्बे (अब व ान संस्थान, मुंबई) के वनस्प त व ान वभाग म
वभागाध्यक्ष के रूप म काय कया।
उन्ह ने प्रकाश सं ेषण क प्र क्रया पर जल क मात्रा और तापमान के प्रभाव का अध्ययन कया।
उन्ह ने इस प्र क्रया म जल, तापमान और प्रकाश के रंग के महत्त्व क भी जाँच क ।
रोचक तथ्य: प्रकाश के रंग पर उनका काय क्रयाकलाप 10.3 से सीधे जुड़ता है — पणह रत सूय के प्रकाश के
प्रत्येक रंग का समान उपयोग नह करता, और यही एक कारण है क प त्तयाँ हरी दखाई दे ती ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 146
10.2.4 प्रकाश सं ेषण के समय प त्तयाँ कस प्रकार गैस का व नमय करती ह?
प्र.1 पौधे का कौन-सा भाग काबन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन के व नमय (आदान-प्रदान) म सहायता करता है?
प त्तयाँ — और अ धक स्पष्ट रूप से कह तो उनक सतह पर उप स्थत सूक्ष्म छद्र, जन्ह रंध्र कहते ह।
वायु से काबन डाइऑक्साइड इन्ह रंध्र से पत्ती म प्रवेश करती है और प्रकाश सं ेषण म बनी ऑक्सीजन इन्ह से बाहर जाती है।
श्वसन के समय यह क्रम उलट जाता है — ऑक्सीजन अंदर, काबन डाइऑक्साइड बाहर। क्रयाकलाप 10.6 म इन छद्र को
सूक्ष्मदश से दे खा जा सकता है।
क्रयाकलाप 10.6: आइए, जाँच कर ( नदशन क्रयाकलाप) — पृष्ठ 147
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10.2.4 प्रकाश सं ेषण के समय प त्तयाँ कस प्रकार गैस का व नमय करती ह?
क्रयाकलाप
प्र.1 आपने क्या दे खा? क्या आपको इस पतली परत पर सूक्ष्म छद्र दखाई दए जैसा क चत्र 10.6 म दशाया गया है?
रंध
0.1 mm
चत्र 10.6, पृष्ठ 147 — रोइओ क पत्ती क नचली सतह पर रंध्र (पुनरखां कत रेखा चत्र)।
हाँ। सूक्ष्मदश म पत्ती क नचली सतह से नकाली गई पतली परत सट हुई को शकाओं क चादर जैसी दखती है और उनके बीच-
बीच म अनेक सूक्ष्म अंडाकार छद्र बखरे दखाई दे ते ह। प्रत्येक छद्र के दोन ओर सेम के बीज जैसी मुड़ी हुई दो को शकाएँ होती
ह।
इन छद्र को रंध्र कहते ह। चत्र 10.6 म दए गए मापक के अनुसार रोइओ क पत्ती म ये लगभग 0.1 mm के ह — नंगी आँख से
दे खने के लए बहुत ही छोटे ।
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रक्षक कोिशका
काबन डाइऑक्साइड ऑक्सीजन
अंद र िछद बाहर
रक्षक कोिशका
पत्ती की परत की अन्य कोिशकाएँ यहाँ नही ं िदखाई गई है।
ं
परत म दखने वाला एक रंध्र — दो रक्षक को शकाओं के बीच का छद्र। ऐसे हज़ार छद्र से ही गैस पत्ती म आती-जाती ह।
स्याही और नचली सतह क्य : स्याही छद्र को नह रँगती, इस लए आस-पास क गहरी को शकाओं के बीच वे
स्पष्ट उभर आते ह। नचली सतह इस लए ली जाती है क्य क चौड़ी पत्ती के अ धकांश रंध्र छायादार नचली सतह पर
होते ह, जहाँ जल क हा न कम होती है।
प्र.2 इन छद्र को क्या कहते ह और ये पौधे क कस प्रकार सहायता करते ह?
इन्ह रंध्र कहते ह। पत्ती क सतह पर उप स्थत रंध्र गैस के व नमय म सहायता करते ह।
प्र क्रया रंध्र से अंदर आने वाली गैस रंध्र से बाहर जाने वाली गैस
पकाश संश्ले षण (सूय के पकाश में) काबन डाइऑ क्साइड ऑ क्सीजन
श्वसन (िनरंतर) ऑ क्सीजन काबन डाइऑ क्साइड
रोचक तथ्य: पत्ती से जलवाष्प भी रंध्र से ही बाहर नकलती है। इसी लए गमले के पौधे को पारदश पॉ लथीन से
ढकने पर कुछ ही दे र म उसके भीतर जल क बूँद दखाई दे ने लगती ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 147
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10.3.1 जल और ख नज का प रवहन
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जड़ ारा ग्रहण कए जाने वाले जल और ख नज पौधे के सभी भाग म कैसे प रवहन करते ह?
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पतली नली जैसी संरचनाओं — दारु (जाइलम) — के ारा, जो जड़ से आरंभ होकर तने, शाखाओं और प त्तय तक नरंतर फैली
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रहती ह।
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ag 10.7 म लाल स्याही क सहायता से यह ग त दखाई देती है।
जड़ ारा अवशो षत जल और उसम घुले ख नज इन न लय म प्रवेश करके ऊपर क ओर प रवहन करते ह और प त्तय , फूल
तथा पौधे के अन्य सभी भाग तक पहुँचते ह। क्रयाकलाप
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m आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 148 l as
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क्रयाकलाप 10.7:
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10.3.1 जल और ख नज का प रवहन
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aक्रयाकलाप
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आपने क्या दे खा? दोन गलास म रखे पौध क तुलना क जए। क्या आपको गलास 'ख' म रखे पौधे के तने,
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प त्तय और फूल म लाल रंग दखाई दया?
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हाँ। एक दन बाद गलास 'ख' (जल + लाल स्याही क कुछ बूँद) म रखी टहनी म लाल आभा स्पष्ट दखती है — तने म महीन लाल
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धा रयाँ चढ़ हुई, प त्तय क शराओं पर लाल रेखाएँ, और सफ़ेद फूल गुलाबी या लाल हो जाते ह [ चत्र 10.7(घ)]।
m .cवाले गलास 'क' क टहनी वैसी ही दखती है जैसी पहले थी [ चत्र 10.7(ग)] a—gतना हरा और फूल सफ़ेद।
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सादे जल
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a गलास उसम क्या है एक दन बाद टहनी क त
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कोई पिरवतन नही ं — तना हरा, पित्त याँ हरी, फू ल सफ़े द
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क केवल जल
जल + लाल स्याही क कुछ बूaँदse
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ख तने में, पित्त यों की िशराओं में और फू लों में लाल रंग िदखाई दे ता है
गलास 'क' क्य आवश्यक है: यह नयं त्रत (कं ोल) प्रयोग है। यह सद्ध करता है क लाल रंग स्याही के पौधे म
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ऊपर चढ़ने से आया है, न क टहनी के सूखने या मुरझाने से।
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ag पौधे के व भन्न भाग ने कस प्रकार इस लाल रंग को अ जत कया?
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टहनी ने अपने कटे सरे से लाल रंग का जल अवशो षत कया और उसे अपने भीतर ही ऊपर पहुँचाया।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 10 पादप म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions
यह रंगयुक्त जल दारु (जाइलम) क पतली न लय से होकर गया, जो तने के आधार से शाखाओं, प त्तय क शराओं और फूल तक
जाती ह। जल जहाँ-जहाँ पहुँचा, वहाँ उसके साथ गया रंग छू टता गया और वह भाग लाल दखने लगा।
ध्यान द जए: तन को तयक रूप से ( तरछा) और जल के भीतर रखते हुए काटा जाता है। तरछा कटान
अवशोषण के लए अ धक पृष्ठ दे ता है और जल के भीतर काटने से दारु क न लय म वायु नह भर पाती जो माग
रोक दे ती।
प्र.3 पौधे के तने के ऊपरी भाग को का टए जो लाल रंग के पानी म डू बा हुआ नह है। कटे हुए तने को आवधक लस से
दे खए। क्या आपको तने म लाल रंग दखाई दया [ चत्र 10.7 (ङ)]?
पोषवाह
दारु
काटे
(ङ) टहनी के कटे िसरे का पिरविधत दृश्य
चत्र 10.7 (ङ), पृष्ठ 148 — टहनी के कटे सरे का प रव धत दृश्य।
हाँ। ताज़ा कट अनुप्रस्थ काट म लाल रंग पूरे तने म फैला हुआ नह दखता। वह तने के भीतर एक वृत्त म सजे छोटे -छोटे लाल
बदुओं या रेखाओं के छल्ले के रूप म दखाई दे ता है [ चत्र 10.7(ङ)]।
प्रत्येक लाल बदु रंगयुक्त जल से भरी एक दारु नली का कटा सरा है। उनके ठ क बाहर न लय का दूसरा समूह — पोषवाह —
होता है, जो बना रंग का रहता है क्य क वह यह जल नह ले जाता।
यह अवलोकन क्य महत्त्वपूण है: इससे पता चलता है क जल पूरे तने म रसकर नह फैला। वह न श्चत न लय
से होकर गया — प रवहन तंत्र का यही अथ है।
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प्र.4 लाल रंग क स्याही कैसे ऊपर क ओर प रवहन करती है?
दारु (जाइलम) के ारा — ये पतली न लयाँ तने, शाखाओं और प त्तय म उप स्थत रहती ह। लाल स्याही क तरह ही जल म घुले
हुए ख नज भी जल के साथ दारु ारा ऊपर क ओर प रवहन करते ह।
पित्तयाँ — यहाँ भोजन बनता है
दारु के माध्यम से पोषवाह के माध्यम से
जल का पिरवहन भोजन का पिरवहन
मृद ा तल
जड़ े ं — यहाँ जल और खिनज अवशोिषत होते है ं
पौधे म न लय के दो अलग समूह होते ह — दारु जड़ से जल और ख नज ऊपर ले जाता है, पोषवाह प त्तय से भोजन को सभी दशाओं म
पहुँचाता है।
यह क जए: सफ़ेद ग्लै डओलस या सदाबहार के तने के नचले आधे भाग को लंबाई म चीर कर एक भाग लाल
स्याही म और दूसरा नीली स्याही म डु बोइए। एक दन बाद फूल आधा लाल और आधा नीला दखेगा — प्रमाण क
दारु क अलग-अलग न लयाँ अलग-अलग माग से जल ले जाती ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 148
10.3.2 भोजन का प रवहन
प्र.1 पौधे के अन्य भाग म भोजन का प रवहन कैसे होता है?
पतली नली जैसी संरचनाओं के एक अन्य समूह — पोषवाह (फ्लोएम) — के ारा।
प्रकाश सं ेषण का प्रमुख स्थल प त्तयाँ ह, अत: भोजन वह बनता है। पोषवाह इस भोजन को प त्तय से पौधे के सभी भाग तक
ले जाता है — ऊपर क लकाओं और पुष्प तक तथा नीचे तने और जड़ तक। प रव हत भोजन पौधे के अन्य भाग , जैसे बीज और
जड़ म भंडा रत भी हो सकता है।
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संरचना क्या ले जाती है कहाँ से कहाँ तक
दारु (जाइलम) जल और उसमें घुले खिनज जड़ से प त्तय तथा अन्य भाग तक (केवल ऊपर क ओर)
पोषवाह (फ्लोएम) भोजन (जो पित्त यों में बना) प त्तय से सभी भाग तक — बीज, जड़ और आलू जैसे कंद स हत
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 149
10.4 क्या पौधे श्वसन करते ह?
प्र.1 क्या पौधे भी हमारी तरह श्वसन करते ह?
हाँ। सभी सजीव श्वसन करते ह और पौधे भी इसके अपवाद नह ह। हमारी ही तरह पौधे भी ऑक्सीजन ग्रहण करते ह, उससे
ग्लूकोस का वघटन करते ह और काबन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊजा नमुक्त करते ह।
अंतर केवल व्यवस्था का है, प्र क्रया का नह — हमारे पास फेफड़े और श्वसन तंत्र होते ह, पौध के पास नह । गैस केवल प त्तय के
रंध्र से तथा कोमल तन और जड़ क सतह से वस रत होती रहती ह। पौधे के ह रत और अह रत सभी भाग श्वसन करते ह — दन
म भी और रात म भी।
हम यह दखाई क्य नह दे ता: दन म हरी पत्ती प्रकाश सं ेषण भी कर रही होती है और वह काबन
डाइऑक्साइड का उपयोग श्वसन म बनने वाली मात्रा से कह तेज़ी से करती है। इसी लए क्रयाकलाप 10.8 म अँधेरे
म रखे अंकु रत बीज लए जाते ह — वहाँ प्रकाश सं ेषण संभव ही नह , अत: केवल श्वसन का पता चल जाता है।
क्रयाकलाप 10.8: आइए, पता लगाएँ ( नदशन क्रयाकलाप) — पृष्ठ 149
10.4 क्या पौधे श्वसन करते ह?
क्रयाकलाप
प्र.1 दोन परखन लय क तुलना क जए और दे खए क क्या रंग म कोई प रवतन हुआ है? क्या दोन परखन लय म
चूने का पानी दू धया हो गया है?
नह । चूने का पानी केवल उसी परखनली म दू धया होता है जो शंकु फ्लास्क से जुड़ी है। पास म खुली रखी दूसरी परखनली का चूने
का पानी स्वच्छ बना रहता है।
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परखनली क्या वह बीज वाले फ्लास्क से जुड़ी है? 24 घंटे बाद चूने का पानी
रबड़ की नली से जुड़ी परखनली हाँ दू िधया हो जाता है
दू स री परखनली (िनयंि त) नह — उसके ऊपर केवल सामान्य वायु है स्वच्छ बना रहता है
दूसरी परखनली क्य : यह नयं त्रत (कं ोल) है। सामान्य वायु म काबन डाइऑक्साइड बहुत कम मात्रा म होती है,
इतनी नह क एक दन म चूने का पानी दू धया कर दे । स्वच्छ बनी रहने वाली यह परखनली सद्ध करती है क पहली
परखनली क दू धयापन का कारण फ्लास्क से आई गैस ही है।
प्र.2 फ्लास्क से जुड़ी परखनली म चूने का पानी दू धया क्य हो गया?
क्य क चूने का पानी फ्लास्क म काबन डाइऑक्साइड क उप त के कारण दू धया हो जाता है।
जब फ्लास्क क वायु काँच क नली से होकर चूने के पानी म जाती है तो उसम उप स्थत काबन डाइऑक्साइड चूने के पानी से क्रया
करके एक महीन सफ़ेद अ वलेय पदाथ बनाती है, जससे स्वच्छ द्रव दू धया दखने लगता है। काबन डाइऑक्साइड जतनी अ धक,
दू धयापन उतना ही शीघ्र और घना।
स्वयं जाँ चए: एक गलास म थोड़ा चूने का पानी लेकर स् ॉ से धीरे-धीरे फूँक मा रए। कुछ ही क्षण म वह दू धया हो
जाएगा — आपके अपने श्वसन क काबन डाइऑक्साइड ठ क वही कर रही है जो बीज क काबन डाइऑक्साइड
करती है।
प्र.3 परंतु यह काबन डाइऑक्साइड कहाँ से आई है?
फ्लास्क म रखे अंकु रत होते मूंग के बीज से। वायु म काबन डाइऑक्साइड प्राकृ तक रूप से बहुत कम मात्रा म उप स्थत रहती है;
फ्लास्क म अ त रक्त काबन डाइऑक्साइड बीज ारा उत्पन्न क गई है क्य क वे श्वसन करते ह।
श्वसन के समय ऑक्सीजन क उप स्थ त म ग्लूकोस का वघटन होता है जससे काबन डाइऑक्साइड, जल और ऊजा नमुक्त होते
ह—
ग् लूकोस + ऑ सीजन → काबन डाइऑ साइड + जल + ऊज
क् क्
इस ऊजा का उपयोग पौधा अपनी वृ द्ध और वकास के लए करता है — इसी लए भीगे हुए बीज इतनी तेज़ी से अंकु रत होते ह।
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
व्यव ापन 24 घंटे अँधेरे म क्य रखा जाता है: अँधेरे म बीज प्रकाश सं
. com ेषण नह कर सकते, अत: कोई काबन
mयही इस प्रयोग
डाइऑक्साइड उपयोग म नह आती। फ्लास्क म एक त्रत पूरी गैस केवल श्वसन का उत्पाद होती हैe—
s
m
o परीक्षण बनाता है।
को श्वसन का.cनष्पक्ष gl a
em a
a s
agl
co m
ag
आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 150 से 152
m .
अध्याय के अभ्यास प्रश्न
as e
आइए, और अ धक सीख a g l
. comा माल, 2.
em
नम्न ल खत ता लका को पूरा क जए — क्र.सं. / वशेषता / प्रकाश सं ेषण / श्वसन: 1. क
as
प्र.1
m l
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उत्पाद, 3. शब्द समीकरण, 4. महत्त्व
m a
l a se
ag
क्र.सं. वशेषता प्रकाश सं ेषण श्वसन
m a s
1. क च्चा माल
m .co agl
l a se
2. उ त्पाद
ag
m
3. शब्द समीकरण
. co
em
as
4. महत्त्व
m l
.co a g
a s em पृष्ठ 150 पर छपी ता लका, जसके रक्त खाने आपको भरने ह।
agl
se m
com g l a
. a
प्रकाश सं lेषaण
sem
ag
क्र.सं. वशेषता श्वसन
काबन डाइऑ क्साइड और जल (सूय का पकाश ऊज ग्लूक ोस और ऑक्सीजन
m
1. कच्चा माल
ोत के रूप में तथा पणहिरत वणक के रूप में)
. co
em
m उत्पाद l as
.co g
ग्लूक ोस और ऑक्सीजन काबन डाइऑ क्साइड, जल और ऊज
a
2.
a s em 3.
gl
काबन डाइऑ क्साइड + जल → ग्लूक ोस + ऑ क्सीजन ग्लूक ोस + ऑक्सीजन → काबन डाइऑक्साइड +
a
शब्द
c
(सूय के पकाश और पणहिरत की उपिस्थित में)
.
समीकरण जल + ऊज
s e m
m a
.co agl
4. महत्त्व पौधे के िलए तथा पौधों पर िनभर सभी जीवों के िलए ग्लूक ोस में संिचत ऊज को िनमुक्त करता है,
se m
भोजन बनाता है; ऊज को ग्लूक ोस और मंड के रूप में िजसका उपयोग पौधा अपनी वृि और िवकास में
l a
संिचत करता है; सजीवों के िलए आवश्यक ऑ क्सीजन
िनमुक्तgकरता है
करता है; यह पौधे के सभी भागों में िदन-रात चलता
a रहता है
co m
m .
m as e
.co
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याद रखने का सूत्र: दोन प्र क्रयाएँ लगभग एक-दूसरे क दपण-छ व ह। प्रकाश सं ेषण जो लेता है, श्वसन वही
दे ता है — और जो श्वसन लेता है, वही प्रकाश सं ेषण दे ता है।
प्र.2 ऐसी प र त क कल्पना क जए जहाँ पृथ्वी पर प्रकाश सं ेषण करने वाले सभी जीव वलुप्त हो गए ह।
सजीव पर इसका क्या प्रभाव होगा?
पृथ्वी पर जीवन समाप्त हो जाएगा। प्रकाश सं ेषण करने वाले जीव — हरे पौधे, शैवाल और कुछ जीवाणु — ही ऐसे ह जो सरल
पदाथ से भोजन बनाते ह। शेष सभी उन्ह पर नभर ह।
भोजन समाप्त हो जाएगा। कह भी नया भोजन नह बनेगा। पहले शाकाहारी जंतु भूखे मरगे, फर उन्ह खाने वाले माँसाहारी,
और अंतत: मनुष्य स हत सभी जंतु।
ऑक्सीजन घट जाएगी। वायु म ऑक्सीजन मुख्यत: प्रकाश सं ेषण से ही जुड़ती है। श्वसन और दहन उसे लगातार उपयोग
करते रहगे और उसक पू त नह होगी।
काबन डाइऑक्साइड बढ़ती जाएगी, क्य क उसे हटाने वाला कोई नह बचेगा।
आहार ंखलाएँ और आहार जाल टू ट जाएँगे और उनके साथ प्रकृ त का संपूण संतुलन बगड़ जाएगा।
अनाज, फल, सब्ज़ी, कपास, इमारती लकड़ी और चारा कुछ भी नह मलेगा, अत: कृ ष, वस्त्र और अनेक उ ोग भी
समाप्त हो जाएँगे।
पौध को उत्पादक क्य कहते ह: क्य क वे ही काबन डाइऑक्साइड और जल से सूय के प्रकाश क सहायता से
भोजन का उत्पादन करते ह। जंतु उपभोक्ता ह — वे केवल पहले से बने भोजन का उपयोग कर सकते ह।
प्र.3 आलू का एक टु कड़ा आयोडीन वलयन से परीक्षण करने पर मंड क उप त दशाता है। आलू म मंड कहाँ से
आता है? पौधे म भोजन का सं ेषण कहाँ पर होता है और यह आलू तक कैसे पहुँचता है?
मंड कहाँ से आता है: यह उसी भोजन से बना है जो आलू के पौधे ने अपनी प त्तय म प्रकाश सं ेषण ारा बनाया। इसे म से
नह लया गया।
भोजन का सं ेषण कहाँ होता है: प त्तय म, जो प्रकाश सं ेषण का प्रमुख स्थल ह। वायु से ली गई काबन डाइऑक्साइड और
जड़ से आए जल से, सूय के प्रकाश और पणह रत क उप स्थ त म, ग्लूकोस बनता है।
यह आलू तक कैसे पहुँचता है: यह ग्लूकोस पोषवाह (फ्लोएम) म पहुँचकर प त्तय से नीचे भू मगत तन तक ले जाया जाता है।
वहाँ अ त रक्त भोजन मंड म बदल कर भंडा रत हो जाता है और वही फूले हुए भू मगत तने आलू कहलाते ह।
पत्ती (पकाश संश्लेषण) → ग्लूक ोस
ग्लूक ोस → पोषवाह ारा पिरवहन
भूिमगत तने में मंड के रूप में भंडारण → आलू
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रोचक तथ्य: आलू तना है, जड़ नह । उस पर दखने वाली 'आँख' क लकाएँ ह — इसी लए कोने म पड़ा आलू
अंकु रत हो जाता है।
प्र.4 क्या पत्ती क चौड़ी और सपाट संरचना पौध को प्रकाश सं ेषण के लए अ धक सक्षम बनाती है? इसका
औ चत्य बताइए।
हाँ, बनाती है। चौड़ी और चपट संरचना प्रकाश सं ेषण क प्रत्येक आवश्यकता को एक साथ पूरा करती है।
प्रकाश के लए बड़ा पृष्ठ। आकाश क ओर फैली चौड़ी चपट पणफलक उतने ही पदाथ क पतली या मुड़ी पत्ती से कह
अ धक प्रकाश प्रग्रहण करती है।
पतली, इस लए प्रकाश सारे पणह रत तक पहुँचता है। मोट पत्ती म नीचे क को शकाएँ ऊपर वाली को शकाओं क छाया म
रह जात ।
अ धक रंध्र वायु के संपक म, जससे काबन डाइऑक्साइड शीघ्र अंदर आ सके और ऑक्सीजन बाहर जा सके।
पत्ती के भीतर गैस का माग छोटा। फलक पतली होने से काबन डाइऑक्साइड को रंध्र से उपयोग करने वाली को शका तक
बहुत कम दूरी तय करनी पड़ती है।
शराओं का जाल पूरी चपट फलक म फैलकर सवत्र जल पहुँचाता है और बना हुआ भोजन बाहर ले जाता है।
अपवाद से नयम क पु ष्ट: नागफनी वहाँ उगती है जहाँ जल दुलभ है, इस लए जल बचाने के लए उसक प त्तयाँ
काँट म बदल जाती ह — और प्रकाश सं ेषण का काय उसका हरा तना सँभाल लेता है। जहाँ जल क समस्या
नह , वहाँ चौड़ी चपट पत्ती ही श्रेष्ठ संरचना है।
प्र.5 X, Y के उपयोग ारा वघ टत होकर काबन डाइऑक्साइड Z और ऊजा नमुक्त करती है। X + Y → काबन
डाइऑक्साइड + Z + ऊजा। X, Y और Z प्र क्रया के तीन भन्न घटक ह। X, Y और Z कन्ह प्रद शत करते ह?
यह समीकरण श्वसन का शब्द समीकरण है —
ग् लूकोस + ऑ सीजन → काबन डाइऑ साइड + जल + ऊज
क् क्
पद-दर-पद तुलना करने पर —
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संकेत कसे प्रद शत करता है उसक भू मका
X ग्लूक ोस वह भोजन जसका वघटन होता है — इसी म सं चत ऊजा है
Y ऑ क्सीजन ग्लूकोस के वघटन के लए प्रयुक्त होती है
Z जल काबन डाइऑक्साइड और ऊजा के साथ बनने वाला उत्पाद
न श्चत कैसे ह : प्रश्न कहता है क X का " वघटन" होता है और ऊजा नमुक्त होती है — अत: X भोजन अथात
ग्लूकोस ही होगा। काबन डाइऑक्साइड और ऊजा लख दे ने के बाद श्वसन का केवल एक उत्पाद शेष रहता है, और
वह है जल।
प्र.6 कृष्णा ने दो गमल म लगे समान आमाप के दो पौध से एक प्रयोग का व्यव ापन कया। उसने उनम से एक
गमले को सूय के प्रकाश म रखा और दूसरे को एक अँधेरे कमरे म रखा जैसा क चत्र 10.10 म दशाया गया है।
नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर द जए — (i) इस प्रयोग के ारा वह कसक जाँच कर रही है? (ii) दोन तय म
पौध म क्या अंतर दखाई दे रहे ह? (iii) आपके अनुसार कस पौधे क प त्तयाँ मंड क उप त के लए
आयोडीन परीक्षण क पु ष्ट करगी?
(क) सूय के पकाश में (ख) पूण तः अं धकार में
चत्र 10.10, पृष्ठ 151 — परीक्षण हेतु गमले (पुनरखां कत रेखा चत्र)।
(i) वह कसक जाँच कर रही है: इसी क क पौध क वृ द्ध तथा भोजन (मंड) के नमाण के लए सूय का प्रकाश अ नवाय है।
दोन गमले समान आमाप के ह, पौधे एक जैसे ह और (माना जाता है क) जल तथा म भी समान है; भन्न केवल प्रकाश है। अत:
जो भी अंतर आएगा उसका कारण सूय का प्रकाश ही होगा।
(ii) दखाई दे ने वाले अंतर ( चत्र 10.10 के अनुसार) —
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लक्षण (क) सूय के प्रकाश म रखा पौधा (ख) पूणत: अंधकार म रखा पौधा
पित्तयों का रंग गहरा, स्वस्थ हरा हल्का पीला-हरा
पित्तयाँ चौड़ी, दृ ढ़, भली-भाँित फै ली हुई पतली, दुबल , झक
ु ी हुई
तना मोटा और सीधा पतला, कमज़ोर और िखंचा हुआ
समग रूप घना और स्वस्थ रोगी और िनज व-सा
(iii) कस पौधे क प त्तयाँ पु ष्ट करगी: केवल सूय के प्रकाश म रखे पौधे क प त्तयाँ नीली-काली ह गी और मंड क उप स्थ त
क पु ष्ट करगी। अँधेरे म रखे पौधे क प त्तय के रंग म कोई प रवतन नह होगा, क्य क प्रकाश के अभाव म प्रकाश सं ेषण हुआ
ही नह और मंड बना ही नह ।
अँधेरे वाला पौधा फर भी थोड़ा लंबा क्य हो जाता है: वह अपने पहले से भंडा रत भोजन पर जी वत रहता है
और प्रकाश क खोज म ऊपर क ओर खचता है। परंतु नया भोजन न बना पाने के कारण वह पीला और दुबल हो
जाता है।
प्र.7 वाणी का मानना है क काबन डाइऑक्साइड प्रकाश सं ेषण के लए अ नवाय है। उसने अपने वचार क
स्वीकृ त या अस्वीकृ त के लए चत्र 10.11 म दशाए गए अनुसार एक प्रयोग का व्यव ापन कया। नम्न ल खत
प्रश्न के उत्तर द जए। (i) उपयुक्त व्यव ापन के कन पौध म मंड बनेगा? (ii) उपयुक्त व्यव ापन के कन
पौध म मंड नह बनेगा? (iii) उपयुक्त व्यव ापन के कन पौध म ऑक्सीजन उत्पन्न होगी? (iv) उपयुक्त
व्यव ापन के कस पौधे म ऑक्सीजन उत्पन्न नह होगी?
(क) सूय का पकाश और (ख) सूय का पकाश और (ग) अंधकार और (घ) अंधकार और
काबन डाइऑक्साइड काबन डाइऑक्साइड काबन डाइऑक्साइड काबन डाइऑक्साइड
उपिस्थत अनुपिस्थत उपिस्थत अनुपिस्थत
चत्र 10.11, पृष्ठ 151 — गमले म लगे पयाप्त जलयुक्त पौधे को प्र दष्ट तय म रखा गया है।
प्रकाश सं ेषण के लए सूय का प्रकाश, पणह रत, जल और काबन डाइऑक्साइड — चार अ नवाय ह। चत्र 10.11 के प्रत्येक
पौधे को पयाप्त जल मला है और सभी हरे ह, अत: प रणाम केवल प्रकाश और काबन डाइऑक्साइड से तय होगा।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 10 पादप म जैव प्रक्रम
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m.
व्यव ापन सूय का काबन प्रकाश मंड ऑक्सीजन
m
प्रकाश डाइऑक्साइड सं ेषण?
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s emउपिस्थत
(क) सूय का पकाश और काबन
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हाँ हाँ हाँ बनेग ा न्न होगी
उ त्प
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डाइऑक्साइड
(ख) सूय का पकाश उपिस्थत, काबन हाँ नह नही ं नही ं न्न नही ं
उ त्प
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डाइऑक्साइड अनुपिस्थत बनेग ा होगी
m
e हाँ
(ग) अंध कार और काबन डाइऑक्साइड नह
g l as नही ं नही ं न्न नही ं
उ त्प
उपिस्थत a बनेग ा होगी
(घ) अंध कार और काबन डाइऑक्साइड नह नह नही ं नही ं
mउ त्पन्न नही ं
बनेग ा co होगी
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अनुपिस्थत
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(i) मंड बनेगा — केवल पौधे (क) म, जो सूय के प्रकाश और काबन डाइऑक्साइड दोन क उप स्थ त म है। agl
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(ii) मंड नह बनेगा — पौध (ख), (ग) और (घ) म।
(iii) ऑक्सीजन उत्पन्न होगी — केवल पौधे (क) म, क्य क ऑक्सीजन प्रकाश सं ेषण म ही नमुक्त होती है।
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(iv) ऑक्सीजन उत्पन्न नह होगी — पौध (ख), (ग) और (घ) म।
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क्या प्रयोग वाणी के वचार का समथन करता है? हाँ। नणायक तुलना (क) और (ख) क है — दोन सूय के
प्रकाश म ह, दोन म जल और पणह रत है, भन्न केवल काबन डाइऑक्साइड है। मंड (क) म बनता है और (ख) म
नह — अत: काबन डाइऑक्साइड प्रकाश सं ेषण के लए अ नवाय है।
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m का अभाव है। सदै व ऐसे दो व्यवस्थापन क तुलना क जए जनम केवल एक ही कारक भन्न हो।
ध्यान द जए: पौधे (ग) और (घ) म भी मंड नह बनता, परंतु इससे वाणी का वचार सद्ध नह होता — वहाँ कारण
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प्र.8 अनन्या ने चार परखन लयाँ ल और प्रत्येक परखनली को पानी से तीन-चौथाई भर लया। उसने उन्ह क, ख, ग, घ
नामां कत कया ( चत्र 10.12)। परखनली 'क' म उसने एक घ घे को रखा; परखनली 'ख' म उसने एक जलीय
पौधे को रखा; परखनली 'ग' म उसने घ घे और पौधे दोन को रखा। परखनली 'घ' म केवल जल रखा। अनन्या ने
सभी परखन लय म काबन डाइऑक्साइड सूचक डाला। उसने जल के आरं भक रंग को अ भले खत कया और
2–3 घंटे बाद पुन: दे खा क क्या परखन लय के रंग म कोई प रवतन हुआ है। आपके वचार से वह क्या पता
करना चाहती है? उसे कैसे पता लगेगा क वह सही है?
जल जल +
+ जलीय
घोंघा पौधा
क ख
जल +
घोंघा + जल
जलीय
पौधा
ग घ
चत्र 10.12, पृष्ठ 151 — प्रयोगात्मक व्यव ापन।
वह क्या पता करना चाहती है: यह क सजीव अपने आस-पास के जल म काबन डाइऑक्साइड क मात्रा को कैसे बदलते ह —
अथात जंतु (घ घा) श्वसन करके काबन डाइऑक्साइड बढ़ाता है, हरा पौधा प्रकाश सं ेषण करके उसे घटाता है, और दोन साथ
ह तो एक-दूसरे को संतु लत कर सकते ह। परखनली 'घ' उसका नयं त्रत (कं ोल) है।
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परखनली उसम क्या है प्रकाश म 2–3 घंटे म क्या होता है काबन डाइऑक्साइड
सूचक
क जल + घ घा घोंघ ा श्वसन करके काबन डाइऑ क्साइड िनमुक्त करता है काबन डाइऑ क्साइड में स्पष्ट
वृि दश ता है
ख जल + जलीय पौधा पकाश संश्ले षण करके श्वसन की तुल ना में कही ं अिधक काबन डाइऑ क्साइड में कमी
पौधा काबन डाइऑ क्साइड उपयोग कर ले ता है दश ता है
ग जल + घ घा + घोंघे ारा िनमुक्त काबन डाइऑ क्साइड का अिधकाश
ं भाग पौधा बहत
ु कम या कोई पिरवतन नही ं
जलीय पौधा उपयोग कर ले ता है
घ केवल जल इसमें कोई सजीव नही ं है कोई पिरवतन नही ं — यही
िनयंि त है
उसे कैसे पता लगेगा क वह सही है: 2–3 घंटे बाद के रंग क तुलना आरं भक रंग से तथा परखनली 'घ' से करके।
य द 'घ' म कोई प रवतन नह होता, तो 'क', 'ख' और 'ग' का प रवतन उनम रखे सजीव के कारण ही है, जल या सूचक के
कारण नह ।
य द 'क' म काबन डाइऑक्साइड बढ़ हुई, 'ख' म घट हुई और 'ग' म लगभग अप रव तत मले, तो उसका वचार सही सद्ध
होता है।
और अ धक नश्चय के लए वह यही पूरा प्रयोग अँधेरे म दोहरा सकती है। तब 'ख' म भी वृ द्ध दखनी चा हए, क्य क पौधा
केवल श्वसन ही कर पाएगा — इससे सद्ध होगा क प्रकाश म 'ख' क कमी वास्तव म प्रकाश सं ेषण के कारण थी।
ध्यान द जए: चार परखन लय को समान प्रकाश, समान ताप, समान मात्रा म जल मले और समान समय तक
अवलोकन हो। अन्यथा तुलना नष्पक्ष नह रहेगी।
प्र.9 पौध म जल प रवहन गरम त म अ धक तीव्र ग त से होता है या ठं डी त म? इसके अवलोकन के लए
एक प्रयोग अ भक ल्पत क जए।
जाँचा जाने वाला प्रश्न: क्या पौधे म जल गरम स्थ त म ठं डी स्थ त क अपेक्षा तीव्र ग त से ऊपर चढ़ता है?
सामग्री: सफ़ेद फूल वाली एक जैसी दो कोमल टह नयाँ (सफ़ेद सदाबहार या गुलमहद ), एक जैसे दो काँच के गलास, जल, लाल
स्याही, माकर, स्केल, घड़ी, तथा एक गरम और एक ठं डा स्थान (अथवा गरम और ठं डे जल के दो पात्र जनम गलास रखे जा सक)।
व ध:
1. गलास को ग (गरम) और ठ (ठं डा) नामां कत क जए और प्रत्येक को एक- तहाई जल से भ रए।
2. दोन म समान संख्या म लाल स्याही क बूँद डा लए और जल का आरं भक तल गलास पर अं कत क जए।
3. दोन टह नय को जल के भीतर रखते हुए आधार से तयक रूप से का टए और तुरंत एक-एक टहनी प्रत्येक गलास म रख
द जए।
4. गलास 'ग' को गरम स्थान पर (धूप म अथवा लगभग 35–40 °C के गरम जल के पात्र म) और गलास 'ठ' को ठं डे, छायादार
स्थान पर (अथवा ठं डे जल के पात्र म) र खए। शेष सब समान रहना चा हए — एक जैसी टह नयाँ, समान स्याही, समान जल
और यथासंभव समान प्रकाश।
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5. 1 घंटे, 2 घंटे और 3 घंटे बाद प्रत्येक टहनी म दे खए — लाल रंग तने म कतना ऊपर चढ़ा (स्केल से ना पए) और प त्तय क
शराओं तथा फूल म गुलाबी रंग आया या नह ।
6. यह भी नोट क जए क प्रत्येक गलास म जल का तल कतना नीचे गया।
अवलोकन ता लका:
समय टहनी 'ग' (गरम) म लाल रंग क ऊँचाई टहनी 'ठ' (ठं डा) म लाल रंग क ऊँचाई
1 घंटे बाद … …
2 घंटे बाद … …
3 घंटे बाद … …
अपे क्षत प रणाम: गरम गलास वाली टहनी म लाल रंग अ धक ऊपर और अ धक तेज़ी से चढ़ता है, उसके फूल पहले गुलाबी
होते ह और उस गलास से जल भी अ धक घटता है। अत: पौध म जल प रवहन गरम स्थ त म अ धक तीव्र ग त से होता है।
गरमाहट से ग त क्य बढ़ती है: गरम और शुष्क वायु म प त्तय के रंध्र से अ धक जल वा ष्पत होता है। ऊपर से
जल घटते ही नीचे से और जल दारु म खच कर ऊपर आता है — इस लए स्याही तेज़ी से चढ़ती है।
नष्पक्ष परीक्षण क जाँच: केवल ताप बद लए। एक टहनी धूप म और दूसरी अलमारी म मत र खए, अन्यथा आप
प्रकाश और ताप दोन क एक साथ जाँच कर बैठगे और यह पता नह चलेगा क अंतर कससे आया।
प्र.10 प्रकाश सं ेषण और श्वसन प्रकृ त म संतुलन बनाए रखने के लए अ नवाय ह। चचा क जए।
ये दोन प्र क्रयाएँ एक-दूसरे क वपरीत ह और ठ क इसी लए प्रकृ त म संतुलन बनाए रखती ह। एक जो उपयोग करती है, दूसरी
वही उत्पन्न करती है।
प्रकाश सं ेषण श्वसन
ग हण करता है काबन डाइऑ क्साइड और जल ग्लूक ोस और ऑक्सीजन
िनमुक्त करता है ग्लूक ोस और ऑक्सीजन काबन डाइऑ क्साइड, जल और ऊज
ऊज सूय की ऊज को भोजन में संिचत करता है उसी संिचत ऊज को उपयोग के िलए िनमुक्त करता है
कब के वल सूय के पकाश की उपिस्थित में िनरंतर , िदन और रात
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ऑक्सीजन + भोजन
पकाश संश्लेषण श्वसन
हरे पौधे, सूय के पकाश में सभी सजीव, िनरंतर
काबन डाइऑक्साइड + जल
पत्येक पि या दूसरी की आवश्यकता ठीक-ठीक पूरी करती है।
ऑक्सीजन–काबन डाइऑक्साइड चक्र। प्रकाश सं ेषण संसार को ऑक्सीजन और भोजन दे ता है; श्वसन बदले म काबन डाइऑक्साइड
और जल लौटा दे ता है, जन्ह प्रकाश सं ेषण फर उपयोग कर लेता है।
संतुलन कस प्रकार बनता है
गैस का संतुलन: श्वसन (और दहन) वायु से ऑक्सीजन घटाते ह तथा काबन डाइऑक्साइड बढ़ाते ह; प्रकाश सं ेषण काबन
डाइऑक्साइड घटाकर ऑक्सीजन बढ़ाता है। इससे वायु म इन गैस का अनुपात लगभग स्थर बना रहता है।
भोजन और ऊजा का संतुलन: प्रकाश सं ेषण सूय क ऊजा को ग्लूकोस म बाँध दे ता है; श्वसन उसे जहाँ आवश्यकता हो
वहाँ मुक्त कर दे ता है। प्रकाश सं ेषण के बना श्वसन के लए भोजन ही न होता, और श्वसन के बना उस भोजन का उपयोग
ही न हो पाता।
पदाथ का संतुलन: गाय जो काबन डाइऑक्साइड छोड़ती है वही घास का पोषण करती है और वही घास गाय का। काबन और
जल इसी प्रकार चक्र म घूमते रहते ह।
संतुलन बगड़ने पर: वन क कटाई से प्रकाश सं ेषण घट जाता है जब क श्वसन और ईंधन का दहन चलता रहता है, अत: वायु
म काबन डाइऑक्साइड बढ़ती है और ऑक्सीजन घटती है। वृक्षारोपण इस संतुलन को पुन: स्था पत करता है — इसी लए वन को
पृथ्वी के फेफड़े कहा जाता है।
रोचक तथ्य: अन्वेषणात्मक प रयोजना म बताया गया बोतल बगीचा इसी संतुलन का लघु रूप है — बंद बोतल म
पौधे का अपना श्वसन और प्रकाश सं ेषण एक-दूसरे क आपू त करते रहते ह।
अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — पृष्ठ 152
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कक्षा 7 व ान अध्याय 10 पादप म जैव प्रक्रम
a g l AglaSem · NCERT Solutions
अंतर वषयक प रयोजनाएँ
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अन्वे ष णात्मक प रयोजनाएँ
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a s emपारदश बोतल म स्पाइडर प्लांट अथवा जेड प्लांट जैसा एक पौधा रोप कर एक बोतल बगीचा वक सत
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बड़ी
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प्र.1
क जए ( चत्र 10.13)। पौधे के कुछ समय तक सुचारु रूप से वृ द्ध करने के पश्चात बोतल के मुख को बंद कर
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द जए। पौधे क वृ द्ध का अवलोकन क जए।
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चत्र 10.13, पृष्ठ 152 — बोतल बगीचा (पुनरखां कत रेखा चत्र)।
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कैसे बनाएँ
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1. ढक्कन वाली एक बड़ी पारदश चौड़े मुaँहsक काँच क बोतल या मतबान ली जए। उसे धोकर सुखा ली जए।
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2. तल म लगभग 2 cm छोटे कंकड़ क परत (जल- नकास के लए), फर लकड़ी के कोयले के टु कड़ क पतली परत, और
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उसके ऊपर थोड़ी खाद मली 6–8 cm उद्यान क म डा लए।
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3. चम्मच और तीली क सहायता से म म स्पाइडर प्लांट या जेड प्लांट का छोटा पौधा रो पए और जड़ के चार ओर म
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हल्के हाथ से दबा द जए।
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4..cइतना जल छड़ कए क म म केवल नमी रहे — इतना नह क जल तल मaजमा g हो जाए।
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6. अब बोतल का मुख बंद कर द जए। उसे अच्छे प्रकाश वाले स्थान पर र खए, परंतु तीखी सीधी धूप म नह , और कई सप्ताह
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तक अवलोकन क जए।
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क्या अवलोकन कर अ भले खत कर: नई प त्तयाँ और प्ररोह; प त्तय का रंग; प्रात:काल काँच के भीतर बनने वाली धुँध या जल agl
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क बूँद, जो बाद म लुप्त हो जाती ह; और यह क बना जल डाले भी म नम बनी रहती है या नह ।
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यह क्या दशाता है: य द पौधा सुचारु रूप से वृ द्ध कर रहा है तो इसका अथ है क पौधा बंद बोतल के भीतर गैस का व नमय
बनाए हुए है — श्वसन क प्र क्रया म उत्पन्न काबन डाइऑक्साइड का उपयोग प्रकाश सं ेषण म हो रहा है और प्रकाश सं ेषण म
उत्पन्न ऑक्सीजन का उपयोग उसी पौधे ारा श्वसन म हो रहा है।
बूँद क्य बनती ह: प त्तय से नकली जलवाष्प ठं डे काँच पर संघ नत होकर वापस म म चली जाती है और जड़
उसे फर अवशो षत कर लेती ह। गैस और जल दोन चक्र म घूमते रहते ह — एक छोटा-सा आत्म नभर संसार।
ध्यान द जए: य द काँच सदै व धुँधला रहे और प त्तयाँ गलने लग तो जल अ धक है। एक दन ढक्कन खोल कर
अ त रक्त नमी नकल जाने द जए, फर बंद कर द जए।
प्र.2 प्रकाश सं ेषण, श्वसन और जल तथा भोजन के प रवहन जैसी प्र क्रयाएँ फसल उत्पादन के लए कैसे अ नवाय
ह?
फसल वस्तुत: वही पौधा है जसे उसके भंडा रत भोजन के लए उगाया जाता है। कसान जो कुछ करता है, वह इन्ह चार प्र क्रयाओं
को भली-भाँ त चलाए रखने के लए करता है।
प्र क्रया फसल को इसक आवश्यकता क्य कसान इसके लए क्या करता है
पकाश संश्ले षण अनाज, फल और कं दों में पहच
ु ँ ने वाला सारा भोजन उिचत ऋतु और उिचत दू र ी पर बुवाई करता है िजससे हर पौधे
यही बनाता है को पकाश िमले ; छाया करने वाले खरपतवार हटाता है
श्वसन वृि , पुष्पन और दाना भरने के िलए आवश्यक ऊज ु ाई करता है िजससे िम ी भुर भुर ी और वायुयक्ु त
खेत की जत
दे ता है; जड़ें भी श्वसन करती है ं रहे; जलभराव वाले खेत का जल िनकालता है तािक जड़ें घुटें
नही ं
जल और खिनजों का पकाश संश्ले षण के िलए जल और वृि के िलए समय पर िसंचाई करता है; खाद और उवरक दे ता है िजनसे
पिरवहन (दारु) खिनज पत्येक पत्त ी तक पहच
ु ँ ाता है खिनज िमलते है ं
भोजन का पिरवहन पित्त यों से भोजन को उन भागों तक ले जाता है पित्त यों और तने को कीटों तथा रोगों से बचाता है िजससे यह
(पोषवाह) न्न
िजन्हे ं हम काटते है ं — दाना, आलू, ग े का तना माग बना रहे
सारांश: स्वस्थ प त्तयाँ, पयाप्त जल, भुरभुरी वायुयुक्त म और सुर क्षत तना — ये मलकर उपज तय करते ह। इनम से कसी एक
प्र क्रया म बाधा आए — क ट ारा प त्तयाँ खा ली जाएँ, खेत सूखा रह जाए या जड़ जल म डू बी रह — तो उत्पादन घट जाता है।
पता लगाइए: अपने पास के कसान से पू छए क बुवाई से पहले खेत क जुताई क्य क जाती है और धान क
कटाई से पहले खेत का जल क्य नकाला जाता है। उत्तर को ऊपर क ता लका से मलाइए।
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प्र.3 य द आपके घर के आस-पास कोई 'पौधा घर' (ग्रीन हाउस) हो तो वहाँ जाइए। अवलोकन क जए क लोग ग्रीन
हाउस म पौध को कैसे उगाते ह। पता लगाइए क वे कस प्रकार पौध को उगाने के लए प्रकाश, जल और काबन
डाइऑक्साइड क मात्रा को नयं त्रत करते ह।
भ्रमण म क्या अवलोकन कर
ढकने वाला पदाथ क्या है — पारदश पॉ लथीन शीट, फ़ाइबरग्लास या काँच — और उसका प्रकाश आने दे ना क्य आवश्यक
है।
भीतर बाहर क अपेक्षा अ धक गरम और अ धक आद्र लगता है या नह , और दन के कस समय।
वहाँ कौन-सी फ़सल उगाई जाती ह (प्राय: टमाटर, शमला मच, खीरा, स् ॉबेरी, जरबेरा, गुलाब, ऑ कड तथा नसरी के
नवो द)।
क्या पूछ और कैसे उत्तर मलगे
कारक ग्रीन हाउस म नयंत्रण कैसे कस प्र क्रया के लए
पकाश ग ीष्म में छाया-जाल (शेड नेट) या छत पर सफ़े दी से तेज़ पकाश कम िकया जाता है; शीत प्रकाश सं ेषण
में शीट स्वच्छ रखी जाती है; कही-ं कही ं िदन की लंबाई बढ़ ाने के िलए कृ ि म लै ंप भी
लगाए जाते है ं
जल टपक (िडप) िसंचाई से पत्येक पौधे की जड़ तक मापी हुई मा ा में जल ; फु हारों और जल और ख नज का
फ़ ॉगर से आद ता; फ़ श से जल -िनकास तािक जड़ें जल में डू बी न रहे ं प रवहन; जड़ का श्वसन
काबन रोशनदान और िनकास पंखों से ताज़ा वायु; बड़े व्यावसाियक ग ीन हाउसों में तो पौधों के प्रकाश सं ेषण
डाइऑक्साइड पास काबन डाइऑ क्साइड की मा ा बढ़ ाने के िलए उसे छोड़ा भी जाता है
ताप ग ीष्म में रोशनदान, पंखे और पैड-कू िलंग ; शीत की रातों में बंद आवरण गरमाहट रोक सभी प्र क्रयाएँ उपयुक्त ताप-
ले ता है परास म सव त्तम चलती ह
खिनज ु मा ा में पोषक घोल िदए जाते है ं (फ़ िटगेशन)
िसंचाई के जल में ही मापी हई वृ द्ध और भोजन नमाण
आपक रपोट के लए नमूना नष्कष: "ग्रीन हाउस प्रकाश सं ेषण और श्वसन को चा हए ऐसे प्रत्येक कारक को नयं त्रत करके
काम करता है। प्रकाश, जल, काबन डाइऑक्साइड, ताप और ख नज — सब अपने सव त्तम मान के पास बनाए रखे जाते ह,
इस लए फ़सल तेज़ी से बढ़ती ह, उपज अ धक होती है और बेमौसम भी उगाई जा सकती ह।"
य द आस-पास ग्रीन हाउस न हो: कोई पौधशाला (नसरी), खेत का पॉलीहाउस, अथवा घर म पारदश शीट से
ढक बीज- े भी यही वचार दशाती है। एक सप्ताह तक ढक और बना ढक े क तुलना क जए।
वै ा नक से प रचय — पृष्ठ 152
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अध्याय के अंत म
वै ा नक से प रचय
प्र.1 कमला सोहोनी कौन थ और पादप के अध्ययन म उनका क्या योगदान रहा?
कमला सोहोनी (1911–1998) एक भारतीय म हला वै ा नक थ ।
उन्ह ने पादप म श्वसन के क्षेत्र म अपने उल्लेखनीय योगदान के लए के म् ज वश्व वद्यालय से पीएचडी क उपा ध प्राप्त
क।
वे भारत लौट और नई दल्ली के लेडी हा डग मे डकल कॉलेज म तथा तत्पश्चात कुन्नूर क पोषण अनुसंधान प्रयोगशाला म
काय कया।
उसके बाद वे तत्कालीन रॉयल इं स्ट ूट ऑफ साइंस, बॉम्बे चली गईं जहाँ उन्ह बाद म नदे शक के रूप म नयुक्त कया
गया।
उनके अ धकांश शोधकाय ने पौध के खाद्य पदाथ के पोषक मूल्य म सुधार करने म सहायता क ।
उन्ह ने ना रयल के रस पर भी काय कया जसे नीरा नामक पौ ष्टक पेय के रूप म प्रयोग कया जाता है।
रोचक तथ्य: नीरा ना रयल के वृक्ष से प्राप्त कया जाता है और वटा मन तथा ख नज से भरपूर होता है। उनके काय
ने दखाया क इसका उपयोग नधन ब और गभवती म हलाओं के आहार को उन्नत करने म कया जा सकता है।
यहाँ यह प्रसंग क्य : इस अध्याय के दोन वै ा नक ने ठ क उन्ह दो प्र क्रयाओं का अध्ययन कया जो आपने पढ़
— रुस्तम दस्तूर ने प्रकाश सं ेषण का और कमला सोहोनी ने पादप म श्वसन का।
अध्याय — एक नज़र म
पौध क वृ द्ध के लए सूय का प्रकाश और जल दोन अ नवाय ह। क्रयाकलाप 10.1 यही दशाता है — सूय के प्रकाश म
रखा जलयुक्त गमला 'क' सबसे अच्छ वृ द्ध करता है, अँधेरे म रखा जलयुक्त गमला 'ग' दुबल और पीला पड़ जाता है तथा
जलर हत गमला 'ख' का पौधा सूख कर नष्ट हो जाता है।
पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते ह। प्रकाश सं ेषण वह प्र क्रया है जसके ारा पौधे सूय के प्रकाश और पणह रत क
उप स्थ त म काबन डाइऑक्साइड तथा जल से भोजन न मत करते ह। शब्द समीकरण — काबन डाइऑक्साइड + जल →
ग्लूकोस + ऑक्सीजन।
प त्तयाँ पौध क 'भोजन नमाणशाला' ह। ये चौड़ी और चपट होती ह तथा पणह रत (क्लोरो फल) के कारण हरी होती ह,
जो सूय के प्रकाश को प्रभावी रूप से प्रग्रहण करता है। भोजन पहले ग्लूकोस के रूप म बनता है और बाद म भंडारण हेतु मंड
म रूपांत रत हो जाता है।
मंड क जाँच आयोडीन परीक्षण से होती है — वण वहीन पत्ती म मंड हो तो वह नीली-काली हो जाती है। क्रयाकलाप 10.3
दशाता है क मंड केवल सूय के प्रकाश म रखे पौधे क पत्ती के ह रत धब्ब म बनता है; क्रयाकलाप 10.4 दशाता है क
का स्टक सोडा वाली बोतल के अंदर रखे पत्ती के भाग म मंड नह बनता, अथात काबन डाइऑक्साइड अ नवाय है।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 10 पादप म जैव प्रक्रम AglaSem · NCERT Solutions
प्रकाश सं ेषण के दौरान ऑक्सीजन नमुक्त होती है। क्रयाकलाप 10.5 म केवल सूय के प्रकाश म रखे व्यवस्थापन 'क'
क उलट परखनली म बुलबुले एक त्रत होते ह और उसम डाली गई जलती हुई तीली से तीव्र ज्वाला उत्पन्न होती है।
पत्ती क सतह पर उप स्थत सूक्ष्म छद्र को रंध्र कहते ह, जो गैस के व नमय म सहायता करते ह — प्रकाश सं ेषण म
काबन डाइऑक्साइड अंदर तथा ऑक्सीजन बाहर, और श्वसन म इसका उल्टा।
दारु (जाइलम) जड़ से जल और घुले हुए ख नज को ऊपर क ओर पौधे के सभी भाग तक ले जाता है। पोषवाह
(फ्लोएम) प त्तय म बने भोजन को पौधे के सभी भाग तक पहुँचाता है, जसम बीज, जड़ और कंद जैसे भंडारण अंग भी
स म्म लत ह।
पौधे श्वसन भी करते ह। श्वसन म ऑक्सीजन क उप स्थ त म ग्लूकोस का वघटन होता है जससे काबन डाइऑक्साइड, जल
और ऊजा नमुक्त होते ह — ग्लूकोस + ऑक्सीजन → काबन डाइऑक्साइड + जल + ऊजा। पौधे के ह रत और अह रत
सभी भाग दन-रात श्वसन करते ह।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 10 पादप म जैव प्रक्रम
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त्व रत पुनरावृ त्त
om अथ l a se
m .cइसका ag रखने योग्य बात
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पद अध्याय म कहाँ ध्यान
agl ेषण
प्रकाश सं वह पि या िजसके ारा पौधे सूय के पकाश खंड 10.2.3, चत्र 10.5,
पृष्ठ 146
क ा माल — काबन डाइऑक्साइड और
जल; उत्पाद — ग्लूकोस और ऑक्सीजन
और पणहिरत की उपिस्थित में भोजन िनिमत
com ag
करते है ं
.
m खंड 10.2.1, पृष्ठ 140;
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पणह रत पित्तयों का हरा वणक जो सूय के पकाश को पत्ती के केवल ह रत धब्ब म ही मंड बनता
(क्लोरो फल) पभावी रूप से पग हण करता है
a g क्रयाकलाप 10.3 है
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मंड (स्टाच) काब हाइडेट का वह पकार िजसमें पौधे भोजन खंड 10.2.1; क्रयाकलाप मंडयुक्त पत्ती आयोडीन से नीली-काली हो
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का भंडारण करते है ं 10.2 का आयोडीन परीक्षण जाती है
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ग्लूकोस
.co पकाश संश्ले षण में वास्तव में बनने वाला सरल
खंड 10.2.3, पृष्ठ 146
a g l
तात्का लक ऊजा का ोत; बाद म
a s em काब हाइडेट भंडारण हेतु मंड म बदल जाता है
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aआयोडीनl क्रयाकलाप 10.2, चत्र नीला-काला रंग = मंड उप स्थत
मंड की जाँच — वणिवहीन पत्ती पर आयोडीन
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परीक्षण के तनुकृ त िवलयन की बूदँ े ं डालना 10.2, पृष्ठ 140–141
पौधे को 2–3 िदन अँधे रे में रखना िजससे .c
omक्रयाकलाप 10.4, पृष्ठ 143 agl
s em
मंडर हत करना ऐसा न करने पर पुराना मंड प रणाम
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भंडािरत मंड समाप्त हो जाए बगाड़ दे गा
का स्टक सोडा सोिडयम हाइडॉक्साइड — यह वायु से काबन क्रयाकलाप 10.4, चत्र यह प्रबल रसायन है; इसका प्रयोग केवल
co m
.
डाइऑक्साइड अवशोिषत कर ले ता है 10.3, पृष्ठ 143 शक्षक ही कर
m
sचौड़ीe पत्ती म अ धकतर रंध्र नचली सतह
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.co के िविनमय में सहायता करते है ं ag पर होते ह
रंध्र पत्ती की सतह पर उपिस्थत सूक्ष्म िछद जो गैस ों क्रयाकलाप 10.6, चत्र
sem
10.6, पृष्ठ 147
a
agl दारु (जाइलम) पतली नली जैस ी संर चनाएँ जो जड़ों से जल क्रयाकलाप 10.7 और चत्र लाल स्याही दारु से ऊपर चढ़ कर तने,
se m
और खिनजों को ऊपर ले जाती है ं 10.8, पृष्ठ 148 प त्तय और फूल को रंग दे ती है
om खंड 10.3.2, चत्र 10.8, l a
पोषवाह पतली नली जैस ी संर चनाएँ जो पित्तयों से cभोजन
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. भोजन बीज, जड़ और आलू जैसे कंद म
ag
a s
agमेlं ग्लूकोस का
(फ्लोएम) को पौधे के सभी भागों तक ले जाती है ं पृष्ठ 148 भंडा रत हो सकता है
श्वसन ऑक्सीजन की उपिस्थित खंड 10.4, क्रयाकलाप ग्लूकोस + ऑक्सीजन → काबन
m
िवघटन िजससे ऊज िनमुक्त होती है 10.8, पृष्ठ 149 डाइऑक्साइड + जल + ऊजा
. c o
mअंकु रत होते बीज श्वसन करते हुए काबन
se डाइऑक्साइड नमुक्त करते ह
m a
चूने के पानी क काबन डाइऑक्साइड की उपिस्थित में चूने का क्रयाकलाप 10.8, चत्र
जाँच
.co
पानी दू िधया हो जाता है 10.9, पृष्ठ 149
ag l
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