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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश — छाया एवं परावर्तन

AglaSem पर कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावर्तन (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Science Chapter 11 Light: Shadows and Reflections (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश — छाया एवं परावर्तन - Page 1 of 45

About NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश — छाया एवं परावर्तन

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Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश — छाया एवं परावर्तन – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 11: प्रकाश — छाया एवं परावतन

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

153 – 168 20 47 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 44 pages

Page 2

कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 11: प्रकाश — छाया एवं परावतन
कक्षा 7 व ान (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन के सभी प्रश्न के वस्तृत एन.सी.ई.आर.ट . समाधान। इसम
क्रयाकलाप 11.1 से 11.10 तक (ता लका 11.1 एवं 11.2 भरी हुई), गहन चतन बॉक्स, पाठ्य प्रश्न, आइए, और अ धक सीख के सभी 12 प्रश्न
तथा अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ स म्म लत ह — छाया, दपण, सूची छद्र कैमरा और प रदश के करण आरेख स हत।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 7) 153 – 168

खं ड प्रश्न

20 47

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 153
अध्याय का आरंभ — केशव के मन म उठते प्रश्न

प्र.1 क्या चंद्रमा वास्तव म स्वयं अपना प्रकाश उत्पन्न करता है? क्या चंद्रमा का प्रकाश सूय का पराव तत प्रकाश ही है?

नह , चंद्रमा स्वयं अपना कोई प्रकाश उत्पन्न नह करता। चाँदनी वास्तव म सूय का वही प्रकाश है जसे चंद्रमा पराव तत करके
हम तक भेजता है।
चंद्रमा एक अद प्त पड है। सूय का प्रकाश चंद्रमा क च ानी सतह पर पड़ता है और उसका कुछ भाग पराव तत होकर पृथ्वी तक
पहुँचता है। इसी कारण रा त्र म चंद्रमा चमकता हुआ दखाई दे ता है।

ऐसा क्य होता है: प्रकाश केवल वही पड उत्स जत कर सकता है जो अत्य धक तप्त हो अथवा जसे कसी व ध
से द प्त कया गया हो — जैसे सूय, तारे या जलती हुई लौ। चंद्रमा ठं डी च ान है, अत: वह प्रकाश बना नह सकता;
वह केवल प्राप्त प्रकाश को आगे भेज सकता है।

क्या आप जानते ह? यही बात ग्रह पर भी लागू होती है। मंगल और शुक्र रा त्र के आकाश म चमक ले तार जैसे
दखते ह, परंतु वे भी सूय के प्रकाश को पराव तत करके ही चमकते ह। यह आपने कक्षा 6 क पाठ्यपुस्तक ज ासा
के अध्याय ‘पृथ्वी से परे’ म पढ़ा था।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 कौन-से पड स्वयं अपना प्रकाश उत्स जत करते ह?

जो पड स्वयं अपना प्रकाश उत्स जत करते ह, वे द प्त पड कहलाते ह।

प्राकृ तक ोत कृ त्रम (मानव- न मत) ोत

सूय, तारे , तिड़त जलती हुई मोमबत्ती, दीपक, लालटेन

अि न, तप्त लावा िव तु बल्ब, ट ूब लाइट, एल.ई.डी. दीप

जुग नू तथा कु छ समुद ी जंत ु टॉच, मोबाइल की स्क्रीन, गैस लै ंप

इनके अ त रक्त शेष सभी वस्तुएँ — चंद्रमा, दपण, मेज, पुस्तक, मंगल, शुक्र — अद प्त पड ह। ये हम इस लए दखाई दे ती ह
क्य क कसी द प्त पड का प्रकाश इन पर पड़कर हमारी आँख तक पहुँचता है।

क्रयाकलाप 11.1: आइए, जाँच कर — पृष्ठ 155
11.2 क्या प्रकाश सरल रेखा म गमन करता है?

क्रयाकलाप

प्र.1 मा चस क कसी एक डब्बी को थोड़ा-सा एक ओर अथवा ऊपर या नीचे क ओर व ा पत क जए। क्या आप
अब भी प्रकाश के चमकदार बदु को पद पर प्राप्त कर पाते ह?

नह । जैसे ही तीन छद्र म से कोई एक छद्र सीधी रेखा से हट जाता है, पद पर बना चमकदार बदु लुप्त हो जाता है।

तीनों िछद एक सीध में — चमकदार िबंद ु पाप्त

िबंद ु

बीच की िडब्बी ऊपर िखसकी — िबंद ु नही ं बनता

िबंद ु नही ं

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन AglaSem · NCERT Solutions

टॉच का प्रकाश पद तक तभी पहुँचता है जब तीन छद्र एक ही सरल रेखा म ह ।

ऐसा क्य होता है: टॉच से नकला प्रकाश केवल सीधा ही जा सकता है। जब तीन छद्र एक सीध म होते ह तब यह
सीधा माग खुला रहता है और प्रकाश पद तक पहुँच जाता है। कसी एक डब्बी को खसकाते ही उसका छद्र इस
माग से बाहर हो जाता है, उस डब्बी का गत्ता प्रकाश को रोक लेता है और पदा अंधकारमय हो जाता है। प्रकाश
डब्बी के चार ओर मुड़कर अगले छद्र तक नह जा सकता।

स्वयं जाँ चए: डब्बी को बहुत धीरे-धीरे वापस सीध म लाइए। ठ क उसी क्षण चमकदार बदु पुन: प्रकट हो जाता है
जब टॉच का द प और तीन छद्र एक रेखा म आ जाते ह।

प्र.2 क्या हम इस तथ्य क जाँच कसी अन्य व ध से भी कर सकते ह?

हाँ। प्रकाश के सरल रेखा म गमन करने क जाँच अनेक सरल व धय से क जा सकती है —

सीधा एवं मुड़ा हुआ पाइप ( क्रयाकलाप 11.2) — सीधे पाइप से मोमबत्ती क लौ दखाई दे ती है, पाइप मोड़ते ही लुप्त हो
जाती है।
दूध मले जल म लेसर पुंज (गहन चतन, पृष्ठ 156) — बीकर के भीतर पुंज एक बल्कुल सीधी चमक ली रेखा के रूप म
दखाई दे ता है।
छाया — प्रत्येक वस्तु क छाया ठ क उसके पीछे , उसी क आकृ त क बनती है — वह जहाँ सीधी करण रुक जाती ह।
सूय क करण — कसी अँधेरे कमरे म छोटे छद्र से अथवा कुहरे म वृक्ष क प त्तय के बीच से आता प्रकाश सीधी करण-
पुंज के रूप म दखता है।

यह क जए: कागज को लपेटकर बनी नली से कसी बल्ब को दे खए। नली को थोड़ा-सा भी मोड़ते ही बल्ब दखाई
दे ना बंद हो जाता है — केवल एक कागज से मला एक और प्रमाण।

क्रयाकलाप 11.2: आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 155

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

11.2 क्या प्रकाश सरल रेखा म गमन करता है?
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em.
m as
क्रयाकलाप

.co a g l
a s emपाइप को मोड़ द जए और मोमबत्ती क लौ को दे खने का प्रयास क जए ( चत्र 11.5 ख)। क्या आप अब भी
gl
अब
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प्र.1
मोमबत्ती क लौ को दे ख पाते ह?

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l aकse) सीधा पाइप — लौ िदखाई देती है
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(

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c o m आँख g l as
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l a se मोमबत्ती
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(ख) मुड़ा पाइप — लौ िदखाई नहीं देती
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आँख
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मोड़ पर पकाश रुक जाता है
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.co a g l मोमबत्ती
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agl चत्र 11.5, पृष्ठ 155 (पुनर चत रेखा चत्र): मोमबत्ती क लौ को (क) एक सीधे पाइप से तथा (ख) मुड़े हुए पाइप से

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दे खना।

. com a g l
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उत्तर agl
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नह , मुड़े हुए पाइप से मोमबत्ती क लौ दखाई नह दे ती — यद्य प मोमबत्ती उसी ान पर जल रही है और पाइप का सरा भी

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उसी क ओर है।

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a s em सीधा पाइप → लौ िद खाई दे ती है

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मुड़ा हुआ पाइप → लौ िद खाई नही ं दे ती

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e m . co agl
as
ऐसा क्य होता है: लौ से आने वाला प्रकाश केवल सरल रेखा म चलता है। सीधे पाइप म लौ से आपक आँख तक

a g l
एक खुला सीधा माग रहता है। पाइप मोड़ने पर यह सीधा माग पाइप क द वार से जा टकराता है; प्रकाश भीतरी
द वार पर पड़कर वह रुक जाता है और आँख तक कुछ भी नह पहुँचता।

com
m .
m ase
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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: इसी कारण प रदश (अनुभाग 11.8.1) के मोड़ पर दपण लगाने पड़ते ह। प्रकाश स्वयं मुड़ता नह — उसे
दपण से मोड़ना पड़ता है।

गहन चतन — पृष्ठ 156
11.2 क्या प्रकाश सरल रेखा म गमन करता है?

गहन चतन

प्र.1 लेसर पुंज को दृश्यमान बनाने के लए एक बीकर अथवा काँच के गलास म जल भरकर उसम कुछ बूँद दूध
मलाइए। अब एक लेसर करण पुंज को इसम से होकर पार जाने द जए। आप क्या अवलोकन करते ह? क्या
आप दे खते ह क जल के भीतर लेसर प्रकाश पुंज एक सरल पथ का अनुगमन करता है?

दूध मले जल के भीतर लेसर पुंज एक पतली, बल्कुल सीधी लाल रेखा के रूप म दखाई दे ता है, जो बीकर के एक सरे से दूसरे
सरे तक जाती है। हाँ — जल के भीतर भी प्रकाश पुंज सरल पथ का ही अनुगमन करता है।

ऐसा क्य होता है: स्वच्छ जल पारदश है, अत: उसम से गुजरता पुंज बगल से दखाई नह दे ता। दूध के अ त सूक्ष्म
वसा-कण प्रकाश का कुछ भाग चार ओर प्रक णत कर दे ते ह और यही प्रक णत प्रकाश हमारी आँख तक पहुँचकर
पुंज का पथ दखा दे ता है। यह पथ एक सरल रेखा ही होता है — अथात जल म भी प्रकाश वायु क भाँ त सीधा ही
गमन करता है।

सावधानी: केवल नम्न-क्षमता लेसर संकेतक का, शक्षक के नदशन म ही प्रयोग क जए और लेसर-पुंज कभी
कसी क आँख पर न डाल।

क्या आप जानते ह? प्रकाश को मोड़ा भी जा सकता है — प्रका शक तंतुओं (ऑ प्टकल फाइबर) के भीतर, जनसे
दूरभाष और इंटरनेट के संकेत भेजे जाते ह। इस प्रक्रम के वषय म आप उच्च कक्षाओं म सीखगे।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 156
11.3 पारदश , पारभासी और अपारदश पदाथ से प्रकाश का संचरण

प्र.1 क्या होता है जब कोई वस्तु प्रकाश के पथ म रखी जाती है?

यह इस बात पर नभर करता है क वस्तु कस पदाथ क बनी है —

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वस्तु का पदाथ प्रकाश का क्या होता है पद पर क्या दखता है

पारदश (स्वच्छ काँच) लगभग पूणत: पार हो जाता है पकाश का चकता बना रहता है; अिधक से अिधक ध ंध
ु ली-सी छाया

पारभासी (अनुरे खण पत्र) आं शक रूप से पार होता है हल्की, ध ंध
ु ली छाया

अपारदश (गत्ता) पूणत: अवरुद्ध हो जाता है वस्तु की आकृ ित की गहरी काली छाया

ऐसा क्य होता है: प्रकाश सरल रेखा म चलता है। य द पदाथ इन सीधी करण को पार जाने दे ता है तो पदा
प्रका शत बना रहता है। य द पदाथ इन्ह रोक दे ता है तो वस्तु के ठ क पीछे वाले भाग तक कोई प्रकाश नह पहुँचता
— और यही काली आकृ त छाया कहलाती है।

क्रयाकलाप 11.3: आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 156 और 157
11.3 पारदश , पारभासी और अपारदश पदाथ से प्रकाश का संचरण

क्रयाकलाप

प्र.1 ता लका 11.1 म दए गए पदाथ को पारदश , पारभासी और अपारदश पदाथ के रूप म वग कृत क जए।
ता लका 11.1 — व भन्न पदाथ से प्रकाश का संचरण

पदाथ पारदश / प्रकाश का संचरण — पूणत: / आं शक रूप से / लेशमात्र भी नह , होगा
पारभासी /
अपारदश मेरा पूवानुमान मेरा अवलोकन

गत्त ा

कागज

काँच

अनुरे खण पत्र

मोटा कपड़ा

—

—

पूण क गई ता लका 11.1 इस प्रकार है। अं तम दो पं क्तय म आप अपनी कक्षा क वस्तुएँ जोड़ सकते ह।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन AglaSem · NCERT Solutions

पदाथ पारदश / पारभासी / अपारदश प्रकाश का संचरण — पूणत: / आं शक रूप से /
लेशमात्र भी नह

मेरा मेरा अवलोकन
पूवानुमान

गत्ता अपारदश लेशमात्र भी लेशमात्र भी नह
नह

कागज पतला कागज — पारभासी; मोटा कागज आं शक रूप से आं शक रूप से — पतले कागज से हल्क
— अपारदश आभा दखती है

काँच (स्वच्छ) पारदश पूणत: पूणत: — पद पर चकता बना रहता है

अनुरे खण पत्र पारभासी आं शक रूप से आं शक रूप से — धुंधला प्रका शत भाग

मोटा कपड़ा अपारदश लेशमात्र भी लेशमात्र भी नह
नह

पतली रंग हीन पॉिलथीन पारदश से पारभासी पूणत: लगभग पूणत:, थोड़ा धुंधला
शीट

स्टील की प्ले ट / लकड़ी अपारदश लेशमात्र भी लेशमात्र भी नह
का पैम ाना नह

संकेत: वग करण का आधार यही है क वस्तु के आर-पार कतनी स्पष्टता से दखाई दे ता है — स्पष्ट दखे तो
पारदश , धुंधला दखे तो पारभासी, कुछ भी न दखे तो अपारदश ।

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प्र.2 य द आप टॉच से आने वाले प्रकाश के सामने कसी वस्तु को पकड़ते ह तो पूवानुमान लगाइए क क्या होगा? क्या
आपको अभी भी पद पर प्रकाश का वृत्त दखाई दे गा? ता लका 11.1 म अपना पूवानुमान ल खए।
ता लका 11.1 — व भन्न पदाथ से प्रकाश का संचरण

पदाथ पारदश / प्रकाश का संचरण — पूणत: / आं शक रूप से / लेशमात्र भी नह , होगा
पारभासी /
अपारदश मेरा पूवानुमान मेरा अवलोकन

गत्त ा

कागज

काँच

अनुरे खण पत्र

मोटा कपड़ा

—

—

पूवानुमान पदाथ के प्रकार के अनुसार होना चा हए —

काँच अथवा स्वच्छ प्ला स्टक — हाँ, प्रकाश का वृत्त पहले जैसा ही, लगभग उतना ही चमक ला दखाई दे गा।
अनुरेखण पत्र अथवा पतला कपड़ा — वृत्त तो दखेगा, परंतु मंद और धुंधला।
गत्ता, मोटा कपड़ा अथवा स्ट ल क प्लेट — नह , वृत्त लुप्त हो जाएगा और उसके ान पर काली आकृ त (छाया) बन
जाएगी।

संकेत: पूवानुमान वह अनुमान नह है जो प्रयोग के बाद लगाया जाए। इसे वस्तु रखने से पहले ता लका म ल खए
— तभी अगला चरण वास्त वक परीक्षण बनता है।

प्र.3 क्या आपका पूवानुमान तथा प्रेक्षण समान है? इससे आप क्या नष्कष नकालते ह?

अ धकांश वस्तुओं के लए प्रेक्षण पूवानुमान के समान ही नकलता है। एक-दो आश्चय होना स्वाभा वक है — पतला कागज प्राय:
अपेक्षा से अ धक प्रकाश पार जाने दे ता है, और रंगीन पारदश शीट प्रकाश तो पार करती है परंतु उसका रंग बदल दे ती है।
नष्कष इस प्रकार ह —

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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पदाथ ं से पकाश लगभग पूणत : पार हो जाता है
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पारद श

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पदाथ ं से पकाश आं िशक रूप से पार होता है
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emपदाथ ं से पकाश
पारभासी

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अपारद श पार ही नही ं होता

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ऐसा क्य होता है: पारदश पदाथ म प्रकाश को सीधा माग मल जाता है। पारभासी पदाथ के भीतर प्रकाश बार-बार
ag
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प्रक णत होता है, अत: उसका केवल कुछ भाग, वह emभी चार दशाओं म फैलकर बाहर नकलता है — इसी कारण
a gl पदाथ प्रकाश को सतह पर ही अवशो षत अथवा पराव तत कर
प्रका शत भाग मंद और धुंधला दखता है। अपारदश
दे ता है, इस लए कुछ भी पार नह जाता।

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em.
m l as
.coपृष्ठ 157
पाठ्य प्रश्नm— a g
a seबनना
11.4lछाया
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प्र.1 क्या होता है जब कोई अपारदश वस्तु प्रकाश-पथ को अवरुद्ध कर दे ती है?

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प्रकाश रुक जाता है और वस्तु के पीछे पद पर छाया बन जाती है।

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छाया वस्तुत: पद का वह भाग है जहाँ कोई प्रकाश नह पहुँचता। उसके चार ओर पदा प्रका शत रहता है, क्य क वहाँ ोत से आने

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वाली सीधी करण बना रुके पहुँच जाती ह।

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a s eसंmकेत: छाया म वस्तु क केवल बाहरी आकृ त बनती है — न उसका रंग और न ही उसका कोई ववरण।
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प्र.2
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asृ त दे खी? यह काली आकृ त क्य बनी है?
क्रयाकलाप 11.3 म प्रकाश के माग म कसी अपारदश वस्तु को रखने पर पद पर आपको क्या दखाई दया?

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क्या आपने द वार पर काली आक

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पद पर हम वस्तु क आकृ त जैसी एक काली आकृ त दखाई द , जसके चार ओर पदा प्रका शत था। हाँ, द वार पर यह काली
m l
.co a g
आकृ त दे खी गई।

a s emयह काली आकृ त इस लए बनी क्य क प्रकाश सरल रेखा म गमन करता है। अपारदश वस्तु ने उन सभी करण को रोक लया जो
agl द वार के उस भाग क ओर जा रही थ । प्रकाश वस्तु के चार ओर मुड़कर उस रक्त भाग को भर नह सकता, अत: द वार का वह
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भाग अंधकारमय रह गया — और इसी प्रकार क काली आकृ त को छाया कहते ह।

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ऐसा क्य होता है: करण को टॉच से छोड़े गए सीधे तीर के समान सम झए। जो तीर वस्तु से बचकर नकल जाते
ह वे द वार को प्रका शत कर दे ते ह; जो वस्तु क ओर जाते ह उन्ह वस्तु रोक लेती है। द वार ठ क वह काली रहती है
जहाँ वस्तु क आकृ त माग म आती है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 158
11.4 छाया बनना

प्र.1 क्या पारदश और पारभासी वस्तुए ँ भी छाया बनाती ह? क्या आपने क्रयाकलाप 11.3 म ऐसा दे खा है?

हाँ, वे भी छाया बनाती ह — परंतु उनक छाया अपारदश वस्तुओं क छाया से कह अ धक हल्क होती है।

वस्तु का प्रकार छाया कैसी बनती है उदाहरण

अपारदश गहरी काली और स्पष्ट छाया गत्ता, गद, स्वयं आपका शरीर

पारभासी हल्की, ध ंध
ु ली छाया अनुरेखण पत्र, बटर पेपर, पतली चुनरी

पारदश अत्यंत ध ंध
ु ली छाया, कभी-कभी िकनारों पर चमकीली रे खा काँच का गलास, स्वच्छ प्ला स्टक का पैमाना

ऐसा क्य होता है: छाया क गहराई इस बात पर नभर करती है क कतना प्रकाश रोका गया। अपारदश वस्तु पूरा
प्रकाश रोक लेती है, अत: छाया पूणत: काली बनती है। पारभासी वस्तु कुछ प्रकाश पार जाने दे ती है, इस लए छाया
केवल आं शक रूप से काली होती है। पारदश वस्तु लगभग सारा प्रकाश पार जाने दे ती है, फर भी उसके कनारे
और वक्र सतह थोड़ा प्रकाश मोड़ और पराव तत कर दे ती ह — इसी से काँच के गलास क भी धुंधली रूपरेखा पद
पर दख जाती है।

क्रयाकलाप 11.4: आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 158

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11.4 छाया बनना

क्रयाकलाप

प्र.1 क्या सभी तय म छाया बन ? क्या छाया क आकृ त और आमाप संगत वस्तु के समान थी? ता लका 11.2
के तीय स्तंभ म अपने प्रेक्षण अं कत क जए।
ता लका 11.2 — छायाओं का अवलोकन

क्रया छाया के वषय म अवलोकन

पद हटा िदया जाता है।

वस्तु को हटा िदया जाता है।

टॉच को िस्वच ऑफ कर िदया जाता है।

टॉच और पद की िस्थित को िनयत रखते हुए वस्तु को पद की ओर िखसकाया जाता है।

टॉच और पद की िस्थित को िनयत रखते हुए वस्तु को टॉच की ओर िखसकाया जाता है।

टॉच और पद की िस्थित िनयत रखते हएु वस्तु को झुक ाया जाता है।

वस्तु का रंग पिरवितत िकया जाता है।

नह , सभी तय म छाया नह बनी — सात म से तीन क्रयाओं म छाया बनती ही नह । और छाया का आमाप प्राय: वस्तु के
समान नह होता; वह सामान्यत: बड़ी बनती है तथा वस्तु क आकृ त तभी दखाती है जब वस्तु प्रकाश के सामने सीधी रखी हो।

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क्रया छाया के वषय म अवलोकन

पद हटा िदया जाता है। कोई छाया िदखाई नही ं दे ती। पकाश आगे कमरे में चला जाता है; उसे रोकने वाली कोई
सतह न होने पर काली आकृ ित बने भी कहाँ।

वस्तु को हटा िदया जाता है। छाया नही ं बनती। पद पर के वल टॉच के पकाश का चमकीला वृत्त िदखाई दे ता है।

टॉच को िस्वच ऑफ कर िदया जाता है। छाया नही ं बनती — रोकने के िलए पकाश ही नही ं है।

टॉच और पद की िस्थित को िनयत रखते हुए वस्तु छाया छोटी होती जाती है तथा उसके िकनारे अिधक स्पष्ट हो जाते है।
ं उसका आमाप वस्तु
को पद की ओर िखसकाया जाता है। के आमाप के िनकट पहच
ु ँ जाता है।

टॉच और पद की िस्थित को िनयत रखते हुए वस्तु छाया बड़ी हो जाती है और उसके िकनारे ध ंध
ु ले पड़ जाते है।
ं
को टॉच की ओर िखसकाया जाता है।

टॉच और पद की िस्थित िनयत रखते हुए वस्तु को छाया की आकृ ित बदल जाती है। जैसे — गोल चकती सामने रखने पर वृत्त , झक
ु ाने पर
झुक ाया जाता है। दीघ वृत्त और िकनारे की ओर करने पर लगभग एक रे खा जैस ी छाया बनाती है।

वस्तु का रंग पिरवितत िकया जाता है। कोई पिरवतन नही ं। छाया उतनी ही काली, उसी आकृ ित और आमाप की रहती है। समान
आमाप की लाल और हरी गेंद िबल्कु ल एक जैस ी छाया बनाती है।
ं

वस्तु टॉच के समीप — बड़ ी छाया

बड़ ी

वस्तु पद के समीप — छोटी छाया

छोटी

टॉच से करण फैलती हुई चलती ह। टॉच के समीप रखी वस्तु प्रकाश के चौड़े शंकु को रोकती है, अत: द वार पर उसक छाया बड़ी बनती है;
वही वस्तु द वार के समीप रखने पर केवल संक ण भाग रोकती है और छाया छोट बनती है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 इस क्रयाकलाप से आप क्या नष्कष नकालते ह? कसी वस्तु क छाया के अवलोकन के लए हम क्या-क्या
चा हए? वस्तु का रंग प रवतन करने से क्या छाया का रंग प रव तत होता है?

छाया के अवलोकन के लए तीन चीज आवश्यक ह —

एक पकाश ोत + एक अपारद श वस्त ु + एक पद → छाया

इनम से कोई एक भी हटा द तो छाया लुप्त हो जाती है। दै नक जीवन म द वार, फश, धरातल अथवा कोई अन्य सतह पद क भाँ त
काय करती है।
नह — वस्तु का रंग बदलने से छाया का रंग नह बदलता। लाल गद और नीली गद, दोन क छाया एक जैसी काली आकृ त
होती है।

ऐसा क्य होता है: छाया वस्तु से बनी नह होती; वह तो केवल वह क्षेत्र है जहाँ वस्तु ने प्रकाश को पद तक पहुँचने से
रोक दया है। ‘प्रकाश का न होना’ रंगहीन होता है, अत: वस्तु चाहे कसी भी रंग क हो, छाया काली ही रहती है।
छाया क आकृ त, आमाप एवं स्पष्टता प्रकाश ोत और पद के सापेक्ष वस्तु क त पर नभर करती है, उसके रंग
पर नह ।

यह क जए: टॉच के मुख पर लाल पारदश कागज लगाइए। अब द वार का प्रका शत भाग लाल हो जाता है, परंतु
छाया फर भी काली ही रहती है — रंग प्रकाश से आया था, वस्तु से नह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 159
11.5 प्रकाश का परावतन

प्र.1 जब अपारदश वस्तु एक चमकदार वस्तु, जैसे स्ट ल क प्लेट ली गई तो मुझे पद पर एक छाया प्राप्त हुई साथ ही
पद के सामने क द वार पर एक चमकदार चकता भी दखा। ऐसा क्य हुआ?

क्य क पॉ लश क हुई स्ट ल क प्लेट एक साथ दो काम करती है। वह अपारदश है, अत: प्रकाश को रोककर अपने पीछे छाया
बनाती है। वह चमक ली भी है, अत: रुके हुए प्रकाश को अवशो षत न करके नई दशा म लौटा दे ती है — और यही लौटा हुआ
प्रकाश सामने क द वार पर चमकदार चकता बना दे ता है।

टॉच का पकाश → स्टील की प्लेट → परावितत → सामने की दीवार पर चमकदार चकता

प्लेट के पीछे → पकाश नही ं → छाया

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन
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ऐसा क्य होता है: गत्ते जैसी खुरदरी सतह प्रकाश को चार दशाओं म बखेर दे ती है, इस लए कह भी चमक ला
चकता नह बनता। चकनी, पॉ लश क हुई सतह लगभग सारा प्रकाश एक ही दशा म साथ-साथeभेm
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ज दे ती है। कसी
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चमक ली सतह

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क्रयाकलाप 11.5: आइए, जाँच कर — पृष्ठ 159 और
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11.5 प्रकाश का परावतन
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क्रयाकलाप a g l

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इसे बाहर ले जाइए और इसक चमक ली सतह पर धूप पड़ने द जए। जस द वार पर सूय का प्रकाश सीधा नह

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पड़ रहा है उस पर आप प्रकाश कैसे पहुँचा सकते ह?

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a समतल दपण (अथवा चमक ली स्ट ल क प का) को धूप म पकड़कर उसे धीरे-धीरे घुमाइए और झुकाइए, जब तक उससे

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cकomदशा बदलने पर पराव तत प्रकाश क दशा भी बदल जाती है — agl
पराव तत प्रकाश का चकता उस छायादार द वार पर न जा पड़े।
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दपण पर पड़ता सूय का प्रकाश पराव तत हो जाता है। दपण
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इस प्रकार आप उस चमक ले चकते को ऐसी द वार पर भी पहुँचा सकते ह जहाँ सूय का प्रकाश स्वयं नह पहुँच पाता।

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सावधानी: पराव तत सूय-प्रकाश कभी कसी क आँख क ओर न क जए।

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प्र.2 प्रकाश को कसी द वार अथवा समीप क सतह पर प्राप्त करने के लए चमक ली प का अथवा दपण को भन्न-
भन्न दशाओं म घुमाइए ( चत्र 11.8)। क्या आप द वार पर प्रकाश का एक चकता दे खते ह? क्या इसका तात्पय
यह है क चमकदार प्लेट या दपण ने प्रकाश क दशा बदल द है?

सूय

पकाश का चकता
सूय का पकाश

परावितत पकाश
दपण

दीवार

चत्र 11.8, पृष्ठ 160 (पुनर चत रेखा चत्र): चमक ली प का अथवा दपण ारा सूय के प्रकाश क दशा प रव तत
करके उसे कसी द वार पर प्राप्त करना।

हाँ, द वार पर प्रकाश का चमक ला चकता दखाई दे ता है, और हाँ, इसका तात्पय यही है क दपण ने प्रकाश क दशा बदल द है।

ऐसा क्य होता है: सूय का प्रकाश एक सीधी रेखा म दपण तक आता है। स्वयं वह छायादार द वार तक नह पहुँच
सकता, क्य क उसे मोड़ने वाला कुछ है ही नह । पॉ लश क हुई सतह पर पड़ते ही वह एक नई सीधी रेखा के
अनु दश मुड़ जाता है और वही रेखा द वार पर जाकर समाप्त होती है। चमक ला चकता इस बात का प्रमाण है क
प्रकाश पराव तत होकर नई दशा म भेज दया गया है।

प्र.3 अब चमक ली प का अथवा दपण को भन्न- भन्न प्रकार से घुमाइए और द वार पर प्रकाश के चकते का
अवलोकन कर। क्या इसक त प रव तत होती है?

हाँ। दपण को जब भी झुकाया जाता है, चमक ला चकता द वार पर नए ान पर जा पहुँचता है। दपण के थोड़े-से झुकाव से भी
चकता काफ दूर खसक जाता है।

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ऐसा क्य होता है: पराव तत प्रकाश क दशा इस बात पर नभर करती है क दपण कस ओर मुड़ा है। दपण
झुकाते ही पराव तत करण भी उसके साथ घूम जाती है और चकता खसक जाता है। दपण और द वार के बीच
प्रकाश फर भी बल्कुल सीधा ही चलता है — प्रकाश सदै व सरल रेखा म गमन करता है और उसक दशा केवल
वह बदलती है जहाँ वह दपण से टकराता है।

क्रयाकलाप का नष्कष: कोई चमक ली प का अथवा दपण अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश क दशा को
प रव तत कर दे ते ह। दपण ारा प्रकाश क दशा म प रवतन का यह प्रक्रम प्रकाश का परावतन कहलाता है।

क्रयाकलाप 11.6: आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 160

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11.5 प्रकाश का परावतन

क्रयाकलाप

प्र.1 कंघे को र रखते हुए प्रकाश पुंज के पथ म एक दपण र खए [ चत्र 11.9 (ख)]। आप क्या अवलो कत करते
ह?

समतल दपण

परावितत पकाश पुंज आपितत पकाश पुंज

अिभलं ब

टॉच

श् वे त कागज़
कं घा (के वल एक िझरी खुल ी)
चत्र 11.9 (ख), पृष्ठ 160 (पुनर चत रेखा चत्र): झरी से नकला पतला प्रकाश पुंज समतल दपण पर पड़कर एक नई
सरल रेखा म लौट जाता है।

कागज पर सीधा चलता हुआ पतला प्रकाश पुंज दपण से टकराकर मुड़ जाता है और नई दशा म चल पड़ता है। अब कागज पर
दो सीधे पुंज दखाई दे ते ह — एक दपण क ओर जाता हुआ और दूसरा दपण से लौटता हुआ — जो दपण पर एक ही बदु पर
मलते ह।

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समतल दपण

अिभलंब

िझरी से आता पुंज परावितत

झरी से नकला पुंज दपण पर पड़कर नए सीधे पथ पर चल दे ता है। परावतन केवल दपण पर होता है।

ऐसा क्य होता है: दपण पर पड़ने के पश्चात प्रकाश पुंज का पथ प रव तत हो जाता है — यही प्रकाश का परावतन
है। ध्यान द जए क पुंज दपण से पहले भी सीधा है और बाद म भी; दपण उसे केवल मोड़ता है, वक्र नह करता।

संकेत: कंघे को र रखकर केवल दपण घुमाइए। पराव तत पुंज कागज पर झाड़ू क भाँ त घूमता दखाई दे गा —
वही प्रभाव जो क्रयाकलाप 11.5 म द वार पर सूय के प्रकाश के साथ दे खा था।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 160
11.5 प्रकाश का परावतन

प्र.1 कसी दपण म म अपना चेहरा भी दे ख सकती ँ। क्या यह भी प्रकाश के परावतन के कारण होता है?

हाँ। दपण म अपना चेहरा दखाई दे ना भी ठ क वैसा ही प्रभाव है जैसा द वार पर बना चमक ला चकता — यह प्रकाश का परावतन
ही है।
द पक अथवा सूय का प्रकाश आपके चेहरे पर पड़ता है। आपका चेहरा इस प्रकाश को चार दशाओं म भेजता है; उसका कुछ भाग
दपण तक पहुँचता है और दपण उसे पराव तत करके आपक आँख तक लौटा दे ता है। हमारा म स्तष्क इस प्रकाश को दपण के पीछे
से आता हुआ समझता है, इस लए वहाँ एक चेहरा दखाई दे ता है — यही आपका प्र त बब है।

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ऐसा क्य होता है: समतल दपण क सतह अत्यंत चकनी होती है, अत: चेहरे के एक बदु से आने वाली सभी

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gl है क द वार म अपना
करण व्यव त रूप से पराव तत होकर दपण के पीछे एक ही बदु से आती प्रतीत होती ह। द वार
और करण .को coचार ओर बखेर दे ती है, इस लए उस पर प्र त बब नह बनता — यही कारण
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emदखता।
चेहरा sनह
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क्रयाकलाप 11.7: आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ m .co ag
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11.6 समतल दपण से प्र त बब का बनना
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क्रयाकलाप

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चत्र 11.10 म दशाए अनुसार दपण के सामने उस पेन को र खए। आप दपण म क्या दे खते ह?
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a समतल दपण
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पेन का पितिबंब

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मेज़
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चत्र 11.10, पृष्ठ 161 (पुनर चत रेखा चत्र): समतल दपण के सामने मेज़ पर रखा पेन और दपण म दखाई दे ता उसका

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प्र त बब।

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emमेज पर रखा पेन वस्तु है; दपण के पीछे दखाई देने वाला पेन दपण ारा बना उसका प्र त बब है।
दपण म एक दूसरा पेन दखाई दे ता है, जो दपण के पीछे रखा प्रतीत होता है और बल्कुल असली पेन जैसा ही दखता है।

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ऐसा क्य होता है: पेन के प्रत्येक बदु से चला प्रकाश दपण पर पड़कर पराव तत होता है और आपक आँख तक
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पहुँचता है। पराव तत करण आँख तक ऐसे पहुँचती ह मानो वे दपण के पीछे कसी बदु से चली ह । वहाँ वास्तव म

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कोई पेन नह होता — परंतु आँख यह अंतर नह कर पाती और हम प्र त बब दखाई दे ता है।

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प्र.2 अब दपण के सामने पेन को भन्न- भन्न तय म र खए और प्रत्येक त म दपण म बने प्र त बब के आमाप
क तुलना क जए। क्या वस्तु तथा इसके प्र त बब दोन के आमाप समान ह?

हाँ। प्रत्येक त म प्र त बब का आमाप ठ क पेन के आमाप के बराबर होता है।

पितिबंब का आमाप = वस्त ु का आ माप

पेन को दपण के पास लाइए या दूर ले जाइए — प्र त बब वस्तु क तुलना म कभी न बड़ा होता है, न छोटा।

स्वयं जाँ चए: 15 cm का पैमाना दपण के सामने र खए। उसका प्र त बब भी 15 cm लंबा ही दखेगा। इसी कारण
तैयार होने के लए समतल दपण उपयुक्त रहता है, चम्मच क पीठ जैसा वक्र दपण नह ।

प्र.3 पुनः पेन को दपण के सामने भन्न- भन्न तय म र खए और ध्यान से दे खए क क्या प्रत्येक त म प्र त बब
सीधा बनता है? क्या पेन क नोक प्रत्येक त म ऊपर क ओर इं गत करती हुई दखाई दे ती है?

हाँ। प्रत्येक त म प्र त बब सीधा बनता है और पेन क नोक ऊपर क ओर ही इं गत करती दखाई दे ती है — प्र त बब कभी उल्टा
नह बनता।
जस प्र त बब के ऊपरी व नचले सरे वस्तु के सर के समान ही ह , उसे सीधा प्र त बब कहते ह। कसी समतल दपण ारा बना
प्र त बब सीधा होता है।

संकेत: ‘सीधा’ का अथ ‘अप रव तत’ नह है। दपण का प्र त बब सीधा तो होता है, परंतु बाएँ-दाएँ पलटा हुआ होता
है — यही पा उत्क्रमण है, जसे आप क्रयाकलाप 11.8 म दे खगे।

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प्र.4 अब दपण के पीछे पद को ऊध्वाधर दशा म र खए। इसे सभी ओर घुमाइए। क्या आपको पद पर प्र त बब मल
पाता है? अब दपण के सामने पद को रखकर इसे दोहराइए।

समतल दपण
पेन का पितिबंब

पेन (वस्तु)

मेज़

चत्र 11.10, पृष्ठ 161 (पुनर चत रेखा चत्र): समतल दपण के सामने मेज़ पर रखा पेन और दपण म दखाई दे ता उसका
प्र त बब।

नह । प्र त बब पद पर प्राप्त नह होता — न दपण के पीछे और न ही दपण के सामने। पद को कह भी घुमाइए, उस पर कुछ नह
बनता।

ऐसा क्य होता है: पराव तत करण दपण के पीछे वास्तव म मलती नह ह; वे केवल वहाँ से आती हुई प्रतीत होती
ह। जहाँ प्र त बब बनता दखता है वहाँ वास्तव म कोई प्रकाश पहुँचता ही नह , इस लए पद पर पकड़ने के लए कुछ
होता ही नह । ऐसे प्र त बब को आभासी प्र त बब कहते ह — समतल दपण ारा बने प्र त बब को पद पर प्राप्त
नह कया जा सकता।

तुलना क जए: अनुभाग 11.7 का सूची छद्र कैमरा इसका ठ क उल्टा उदाहरण है — वहाँ करण वास्तव म
अनुरेखण पत्र पर मलती ह, अत: वह प्र त बब पद पर प्राप्त कया जा सकता है।

क्रयाकलाप 11.8: आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 161 और 162

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11.6 समतल दपण से प्र त बब का बनना

क्रयाकलाप

प्र.1 अब दपण के समीप खड़े हो जाइए। क्या प्र त बब भी दपण के अ धक समीप बनता है?

समतल दपण

आप दपण मे ं आपका पितिबंब

चत्र 11.11, पृष्ठ 161 (पुनर चत रेखा चत्र): समतल दपण के सामने खड़ा व ाथ दपण म अपना प्र त बब दे ख रहा है।

हाँ। जब आप दपण के समीप खड़े होते ह तो आपका प्र त बब भी दपण के ठ क पीछे , उतना ही समीप बनता है। पीछे हटते ही
प्र त बब भी उतना ही पीछे चला जाता है।

यह क जए: दपण क ओर धीरे-धीरे च लए। प्र त बब भी उसी चाल से आपक ओर आता है, अत: आपके और
आपके प्र त बब के बीच क दूरी आपके कदम से दुगुनी तेजी से घटती है।

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प्र.2 दपण के सामने भन्न- भन्न दू रय पर खड़े हो जाइए और ध्यान द जए क प्रत्येक त म प्र त बब दपण से
कतनी दूरी पर बनता है। क्या आप दपण से आपक दूरी और दपण से आपके प्र त बब क दूरी म कोई संबंध
पाते ह?

समतल दपण

आप दपण में आपका पितिबंब

चत्र 11.11, पृष्ठ 161 (पुनर चत रेखा चत्र): समतल दपण के सामने खड़ा व ाथ दपण म अपना प्र त बब दे ख रहा है।

हाँ, संबंध बहुत सरल है —

दपण के पीछे पितिबंब की दू री = द पण के सामने वस्त ु की दू री

य द आप दपण से 1 m सामने खड़े ह तो प्र त बब दपण से 1 m पीछे बनेगा और आपसे 2 m दूर प्रतीत होगा। 3 m दूर खड़े होने
पर प्र त बब भी दपण से 3 m पीछे बनेगा।

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वस्तु पितिबंब

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दपण
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समतल दपण म प्र त बब सदै व दपण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जतनी दूरी पर वस्तु दपण के सामने होती

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वस्तु के समान होता है।

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क जए और दे खए क दपण म बना प्र त बब.cकौन-से कान को स्पश करता है? agl
प्र.3 अपना बायाँ हाथ उठाइए और दे खए क दपण म बना प्र त बब कौन-सा हाथ उठाता है? अपना दायाँ कान स्पश

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उत्तर agl

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आप बायाँ हाथ उठाते ह तो प्र त बब अपना दायाँ हाथ उठाता हुआ दखाई दे ता है। आप दायाँ कान स्पश करते ह तो प्र त बब

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अपना बायाँ कान स्पश करता दखता है।

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प्र त बब म हुए इस वाम-द क्षण उत्क्रमण को पा उत्क्रमण कहते ह। समतल दपण ारा बने प्र त बब म पा उत्क्रमण होता

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है।

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ऐसा क्य होता है: दपण आपको वास्तव म घुमाता नह ; वह तो आपके प्रत्येक बदु को सीधे उसके सामने वाली

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दशा म लौटा दे ता है। आपके बाएँ पक्ष का नकटतम बदु प्र त बब म उस ओर आता है जसे हम प्र त बब का दायाँ
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पक्ष कहते ह। इस प्रकार पक्ष आपस म बदल जाते ह, जब क ऊपर-नीचे नह बदलते — इसी लए प्र त बब सीधा

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बना रहता है।

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क्या आप जानते ह? इसी कारण रोगी वाहन के अगले भाग पर AMBULANCE उल्टा लखा जाता है। आगे चलते

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omतुरंत समझ म आ जाता है। gla
वाहन का चालक इसे पश्चदश दपण म दे खता है, जहाँ पा उत्क्रमण से यह पुन: ‘AMBULANCE’ पढ़ा जाता है

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 162
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11.7 सूची छद्र कैमरा

प्र.1 क्या कसी वस्तु का प्र त बब हम केवल दपण म ही दे ख सकते ह अथवा इन्ह दे खने क कोई अन्य व ध भी है?

केवल दपण ही एकमात्र व ध नह है। प्र त बब अनेक अन्य प्रकार से भी बनते ह —

सूची छद्र कैमरा — छोटे छद्र से जाता प्रकाश पद पर उल्टा प्र त बब बनाता है (अनुभाग 11.7)।
शांत जल क सतह — तालाब, झील अथवा बाल्ट का जल दपण क भाँ त काय करके प्र त बब दखाता है।
अन्य पॉ लश क हुई सतह — स्ट ल क थाली, चमक ली टाइल, वाहन का शीशा, रा त्र म काँच क खड़क ।
लस — जैसे आवधक लस, चश्मा अथवा कैमरा, जनके वषय म आप उच्च कक्षाओं म पढ़गे।

संकेत: एक बड़ा अंतर याद र खए — दपण का प्र त बब सीधा होता है और पद पर नह मलता; सूची छद्र कैमरे का
प्र त बब उल्टा होता है और पद पर प्राप्त कया जा सकता है।

क्रयाकलाप 11.9: आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 163
11.7 सूची छद्र कैमरा

क्रयाकलाप

प्र.1 आप पद पर क्या दे खते ह? क्या आप कुछ आश्चयजनक दे खते ह?

पद पर मोमबत्ती क लौ का एक छोटा, हल्का प्र त बब दखाई दे ता है। आश्चयजनक बात यह है क यह प्र त बब उल्टा अथात
व्युत्क्र मत बनता है। प्र त बब म लौ क नोक नीचे क ओर होती है।

सूच ीिछद

पद

मोमबत्ती

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लौ के ऊपरी सरे से चला प्रकाश सूची छद्र से होकर नीचे क ओर जाता है और नचले सरे से चला प्रकाश ऊपर क ओर। करण छद्र पर
एक-दूसरे को काटती ह, अत: प्र त बब उल्टा बनता है।

ऐसा क्य होता है: प्रकाश सरल रेखा म चलता है और पद तक केवल वही करण पहुँचती ह जो सूची छद्र से होकर
जाती ह। लौ के ऊपरी सरे से आई सीधी करण छद्र के बाद नीचे क ओर ही जा सकती है और नचले सरे से आई
करण ऊपर क ओर। दोन करण सूची छद्र पर एक-दूसरे को काट दे ती ह, इस लए ऊपर-नीचे बदल जाता है और
प्र त बब उल्टा बनता है।

संकेत: छद्र छोटा करने पर प्र त बब अ धक स्पष्ट परंतु मंद हो जाता है; बड़ा करने पर अ धक चमक ला परंतु
धुंधला।

क्रयाकलाप 11.10: आइए, नमाण कर — पृष्ठ 163
11.7 सूची छद्र कैमरा

क्रयाकलाप

प्र.1 क्या कैमरे म दखाई दे रहा प्र त बब दूसरी ओर क वस्तु के रंग को दशाता है? क्या प्र त बब सीधा है अथवा
उल्टा?

हाँ, प्र त बब वस्तुओं के वास्त वक रंग दशाता है — हरी प त्तयाँ हरी और लाल भवन लाल दखाई दे ता है। और प्र त बब उल्टा
(व्युत्क्र मत) होता है, सीधा नह ।

सूच ीिछद कै मरे का पितिबंब → रंगीन , उल्टा, पद पर पाप्त, तथा पद की दू री के अनुसार छोटा या बड़ ा

ऐसा क्य होता है: सूची छद्र प्रकाश म कोई प रवतन नह करता, वह केवल एक पतला करण-पुंज भीतर आने दे ता
है — अत: छद्र तक पहुँचा प्रत्येक रंग सीधे अनुरेखण पत्र तक पहुँच जाता है। उल्टा होना छद्र पर सीधी करण के
परस्पर काटने के कारण होता है, ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप 11.9 म हुआ था।

यह क जए: छोटे बॉक्स को आगे-पीछे खसकाइए। बाहर ख चने पर (पदा सूची छद्र से दूर) प्र त बब बड़ा परंतु मंद
हो जाता है। खसकने योग्य बॉक्स का उपयोग इसी कारण कया जाता है।

आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 165 से 167

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय के अभ्यास प्रश्न

आइए, और अ धक सीख

प्र.1 नम्न ल खत पड म से कौन-से पड द प्त पड ह? मंगल ग्रह, चंद्रमा, ुव तारा, सूय, शुक्र ग्रह तथा दपण

द प्त पड ह — ुव तारा तथा सूय।

पड द प्त / अद प्त कारण

मंग ल ग ह अदीप्त ग्रह है; सूय के प्रकाश को पराव तत करके चमकता है

चंद मा अदीप्त अपने ऊपर पड़ने वाले सूय के प्रकाश को पराव तत करता है

धु व तारा दीप्त तारा है — स्वयं अपना प्रकाश उत्स जत करता है

सूय दीप्त हमारा नकटतम तारा; पृथ्वी पर प्राकृ तक प्रकाश का मुख्य ोत

शुक्र ग ह अदीप्त ग्रह है; पराव तत सूय-प्रकाश से चमकता है

दपण अदीप्त केवल अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को पराव तत करता है

संकेत: कसौट चमक नह है। शुक्र चंद्रमा के बाद रा त्र के आकाश का सबसे चमक ला पड है, फर भी वह स्वयं
प्रकाश नह बनाता।

प्र.2 स्तंभ ‘I’ म दए गए पद का मलान स्तंभ ‘II’ म दए गए सही वाक्यांश से क जए। स्तंभ I — सूची छद्र कैमरा,
अपारदश वस्तु, पारदश वस्तु, छाया। स्तंभ II — प्रकाश पूणत: अवरुद्ध करती है।, वस्तु के पीछे बना गहरा
काला क्षेत्र।, व्युत्क्र मत प्र त बब बनता है।, प्रकाश लगभग पूणत: संचा रत होता है।

स्तंभ I स्तंभ II

सूचीिछद कै मरा क्रिमत पितिबंब बनता है।
व्युत्

अपारदश वस्तु पकाश पूणत: अवरुद्ध करती है।

पारदश वस्तु पकाश लगभग पूणत: संचािरत होता है।

छाया वस्तु के पीछे बना गहरा काला क्षेत्र ।

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ये युग्म क्य : वस्तु के ऊपरी और नचले सर से आने वाली करण सूची छद्र पर एक-दूसरे को काटती ह, अत:
सूची छद्र कैमरा उल्टा प्र त बब बनाता है। अपारदश वस्तु से प्रकाश बल्कुल पार नह होता, जब क पारदश वस्तु से
लगभग पूरा प्रकाश संचा रत हो जाता है। वस्तु के पीछे जहाँ प्रकाश नह पहुँच पाता, वह गहरा काला क्षेत्र ही छाया
कहलाता है।

प्र.3 सा हल, रेखा, पै क और का समा चत्र 11.16 म दशाए गए पाइप से मोमबत्ती क लौ को दे खने का प्रयास कर
रहे ह। इनम से कौन लौ दे ख पाएगा?

सािहल

रेखा

मोमबत्ती

पै िटक
कािसमा
चत्र 11.16, पृष्ठ 166: चार व ाथ शा खत पाइप से मोमबत्ती क लौ दे खने का प्रयास कर रहे ह।

केवल रेखा ही लौ दे ख पाएगी।
चत्र 11.16 म मोमबत्ती पाइप के दा हने सरे पर रखी है। रेखा क आँख उस सीधी क्षै तज शाखा के दूसरे सरे पर है जो सीधे
मोमबत्ती तक जाती है, अत: लौ से उसक आँख तक एक अखं डत सीधा माग उपलब्ध है।

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व ाथ क्या लौ दखाई दे गी? कारण

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उसक शाखा सीधी शाखा से कोण बनाती है — प्रकाश को मुड़ना पड़ता, जो संभव नह

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उसक शाखा सीधी है और मोमबत्ती क लौ के साथ एक सीध म है
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पैिटक नही ं उसक शाखा भी मुख्य पाइप से कोण बनाती हुई मलती है

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कािसमा नही ं
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उसक शाखा लंबवत नीचे क ओर है; प्रकाश मुड़कर उसम नह जाएगा ag
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ऐसा क्य होता है: प्रकाश सरल रेखा म गमन करता है। वह शा खत पाइप के मोड़ पर मुड़ नह सकता। केवल वही
व्य क्त प्रकाश प्राप्त करता है जसक आँख, पाइप और लौ एक ही सरल रेखा म ह — और वह है रेखा।
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a s emचत्र 11.17 म दशाए गए प्र त बब को दे खए और बालक क छाया को दशाने वाले सही चत्र का चयन क जए।
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प्र.4

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.co (क) (ख) (ग)
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a चत्र 11.17, पृष्ठ 166: धूप म खड़े बालक के चार चत्र; प्रत्येक म सूय क त भन्न है।

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सही चत्र (घ) है।
छाया सदै व वस्तु क उस ओर बनती है जो प्रकाश ोत के वपरीत हो, और वह ोत से वस्तु होकर ख ची गई सीधी रेखा के अनु दश

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होती है। चत्र (घ) म सूय ऊपर दाईं ओर है और बालक क छाया उसके पैर से जुड़ी हुई नीचे बाईं ओर फैली है — वास्तव म ऐसा ही

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होता है।

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वकल्प सूय कहाँ है सही/गलत होने का कारण

(क) लगभग ठ क सर के ऊपर गलत — सूय िसर के ऊपर हो तो छाया छोटी और पैर ों के पास होनी चािहए , इतनी लंबी नही ं

(ख) ऊपर बाईं ओर गलत — छाया दाईं ओर बननी चािहए थी, यहाँ ठीक पैर ों के नीचे िदखाई गई है

(ग) ऊपर दाईं ओर गलत — छाया सूय की ही ओर िदखाई गई है

(घ) ऊपर दाईं ओर सही — छाया िवपरीत (बाईं) ओर , पैर ों से आरंभ होती हईु

स्वयं जाँ चए: धूप म खड़े होकर सूय से अपने सर होकर एक काल्प नक सीधी रेखा ख चए। वह रेखा धरती को
ठ क वह छू ती है जहाँ आपक छाया का शीष होता है।

प्र.5 चत्र 11.18 म दशाया गया है क एक र टॉच के सामने रखी गद क छाया द वार पर बनी है। प रदृश्य (i) म
गद टॉच के समीप है जब क प रदृश्य (ii) म गद द वार के समीप है। दए गए वकल्प (क) और (ख) म से दोन
प रदृश्य का सबसे उपयुक्त प्रदशन करने वाले चत्र का चयन क जए।

(i) (क)

गेदं

(ii) (ख)

टॉच
दीवार (पद )

चत्र 11.18, पृष्ठ 166: (i) गद टॉच के समीप, (ii) गद द वार के समीप; वकल्प (क) और (ख) द वार पर बनी छाया
दशाते ह।

प रदृश्य (i) → वकल्प (ख) (बड़ी छाया) तथा प रदृश्य (ii) → वकल्प (क) (छोट छाया)।

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गेंद टॉच के समीप → बड़ी छाया, िकनारे धुंधले

गेंद द ीवार के समीप → छोटी छाया, िकनारे स्पष्ट

ऐसा क्य होता है: टॉच का प्रकाश शंकु के रूप म फैलता जाता है। टॉच के समीप रखी गद वहाँ होती है जहाँ यह
शंकु अभी संक ण है, अत: वह पुंज का बड़ा भाग रोक लेती है और दूर द वार पर फैलकर उसक छाया बड़ी बनती
है। वही गद द वार के समीप रखने पर चौड़े हो चुके पुंज का बहुत थोड़ा भाग ही रोकती है, इस लए छाया छोट और
लगभग गद के आमाप क बनती है।

यह क जए: टॉच और द वार के बीच अपनी मु रखकर उसे धीरे-धीरे टॉच से द वार क ओर ले जाइए। छाया
लगातार छोट होती जाएगी और उसके कनारे अ धक स्पष्ट होते जाएँगे।

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प्र.6 चत्र 11.18 के आधार पर स्तंभ ‘I’ म टॉच क त का स्तंभ ‘II’ म गद क छाया के अ भलक्षण के आधार पर
मलान क जए। स्तंभ I — य द टॉच गद के समीप है; य द टॉच गद से बहुत दूर है; य द गद को इस व्यव ा से
हटा दया जाए; य द इस व्यव ा म गद के बाईं ओर दो टॉच लए जाएँ। स्तंभ II — छाया बहुत छोट बनेगी;
छाया बहुत बड़ी बनेगी; पद पर दो छाया दखाई दे गी; पद पर एक चमकदार चकता दखाई दे गा।

(i) (क)

गेदं

(ii) (ख)

टॉच
दीवार (पद )

चत्र 11.18, पृष्ठ 166: (i) गद टॉच के समीप, (ii) गद द वार के समीप; वकल्प (क) और (ख) द वार पर बनी छाया
दशाते ह।

स्तंभ I स्तंभ II

यिद टॉच गेंद के समीप है छाया बहुत बड़ी बनेग ी

यिद टॉच गेंद से बहुत दू र है छाया बहुत छोटी बनेग ी

यिद गेंद को इस व्यवस्था से हटा िदया जाए पद पर एक चमकदार चकता िदखाई दे ग ा

यिद इस व्यवस्था में गेंद के बाईं ओर दो टॉच िलए जाएँ पद पर दो छाया िदखाई दे ग ी

ये युग्म क्य : गद के समीप रखी टॉच से करण तीव्रता से फैलती हुई पड़ती ह, अत: द वार पर गद क छाया खचकर
बहुत बड़ी बन जाती है। बहुत दूर से आने वाली करण लगभग समांतर होती ह, इस लए छाया गद के आमाप के
बराबर अथात छोट बनती है। गद हटा दे ने पर प्रकाश रोकने वाला कुछ बचता ही नह और द वार पर केवल टॉच का
चमकदार चकता दखाई दे ता है। दो टॉच दो भन्न दशाओं से प्रकाश भेजती ह, अत: गद प्रत्येक के लए एक अलग
छाया बनाती है — कुल दो छाया।

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क्या आप जानते ह? इसी कारण फ्लडलाइट म खेलते क्रकेट खलाड़ी क अनेक छायाएँ दखाई दे ती ह — प्रत्येक
प्रकाश-स्तंभ के लए एक।

प्र.7 माना क आप चत्र 11.19 म दशाए गए वृक्ष को सूची छद्र कैमरे क सहायता से दे खते ह। वृक्ष के प्र त बब क पद
पर प्राप्त आकृ त क रूपरेखा बनाइए।

चत्र 11.19, पृष्ठ 167: वह वृक्ष जसे सूची छद्र कैमरे से दे खना है।

प्र त बब उसी वृक्ष क उल्ट (व्युत्क्र मत) रूपरेखा होगी — प त्तय वाला नुक ला शीष नीचे क ओर तथा तना ऊपर क ओर।

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m .co वृक्ष (वस्तु) a g
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पद पर पितिबं ब

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सूची छद्र कैमरा चत्र को उल्टा कर दे ता है — वृक्ष का शीष प्र त बब म नीचे और तना ऊपर आ जाता है।

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ऐसा क्य होता है: वृक्ष के शीष से चला प्रकाश सरल रेखा म सूची छद्र से होकर नीचे क ओर जाकर पद के नचले
भाग पर पड़ता है, और तने के आधार से चला प्रकाश ऊपर क ओर जाकर पद के ऊपरी भाग पर। करण सूची छद्र

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पर एक-दूसरे को काट दे ती ह, इस लए पूरा चत्र उल्टा हो जाता है। उसक आकृ त और रंग वही रहते ह।
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संकेत: वृक्ष को अपनी कॉपी म हल्के हाथ से बनाइए, फर पन्ने को उल्टा करके उसक नकल उता रए — वही
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l a se आकृ त सूची छद्र कैमरे का प्र त बब है।

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m .cखए और इसे समतल दपण के सामने इस प्रकार पक ड़ए क कागज ag
seका आरेख बनाइए। कागज पर लखे नाम और दपण म बने इसके प्र त बब
प्र.8 कागज के कसी टु कड़े पर अपना नाम ल

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दपण के समांतर रहे। इसके प्र त बब
के मध्य आप क्या अंतर देa ते ह? इस अंतर के कारण क व्याख्या क जए।

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om है — उसे दूसरे सरे से पढ़ना पड़ता है।
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दपण म नाम बाएँ से दाएँ उलटा दखाई दे ता है। वण सीधे ही रहते ह, परंतु पूरा शब्द पीछे क ओर चलता है और प्रत्येक वण पलटा
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ANITA ATINA
कागज पर िलखा नाम दपण मे ं पितिबंब

दपण
लखे हुए नाम का दपण-प्र त बब पा त: व्युत्क्र मत होता है — बायाँ और दायाँ आपस म बदल जाते ह, ऊपर-नीचे नह ।

ऐसा क्य होता है: यह अंतर पा उत्क्रमण के कारण होता है। समतल दपण कागज के प्रत्येक बदु को सीधे उसके
सामने क ओर लौटा दे ता है, अत: कागज का जो भाग आपक बाईं ओर था वह प्र त बब म दाईं ओर दखाई दे ता है।
इसी से वण का क्रम और उनक आकृ त बाएँ-दाएँ पलट जाती है। वे उल्टे नह होते, क्य क दपण ऊपर और नीचे
को आपस म नह बदलता।

यह क जए: केवल A, H, I, M, O, T, U, V, W, X, Y वण से बना कोई नाम ल खए — जैसे TOM अथवा
MAMA। उसका दपण-प्र त बब बल्कुल वैसा ही पढ़ा जाएगा, क्य क इन वण के दोन पा सम मत होते ह।

प्र.9 अपने मत्र क सहायता से एक समान ान पर अपनी छाया क लंबाई सुबह 9 बजे, दोपहर 12 बजे और दोपहर
पश्चात 4 बजे मा पए। अपने प्रेक्षण को ल खए — (i) आपक छाया कस समय सबसे छोट होती है? (ii)
आपके वचार से ऐसा क्य होता है?

प्रत्येक बार उसी ान पर खड़े होइए, मत्र से छाया के शीष पर नशान लगवाइए और पैर से नशान तक क दूरी मा पए। प्रेक्षण
प्राय: इस प्रकार मलते ह —

समय आकाश म सूय क त छाया क लंबाई (नमूना)

सुबह 9 बजे पूव दशा म नीचा लगभग 2 m — लंबी, पिश्चम की ओर

दोपहर 12 बजे आकाश म सवा धक ऊँचा लगभग 0.5 m — सबसे छोटी

दोपहर पश्चात 4 बजे प श्चम दशा म नीचा लगभग 2.5 m — लंबी, पूव की ओर

(i) छाया दोपहर 12 बजे (मध्याह्न के आस-पास) सबसे छोट होती है।

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(ii) क्य क दोपहर म सूय आकाश म अपनी सवा धक ऊँची त म होता है। तब उसका प्रकाश लगभग ऊध्वाधर नीचे क ओर
आता है, अत: शरीर धरती के बहुत छोटे भाग का प्रकाश रोकता है और छाया छोट बनती है। सुबह और शाम को सूय नीचा रहता है,
करण तरछ आती ह और वही शरीर धरती क एक लंबी प का प्रकाश रोक लेता है — इस लए छाया लंबी बनती है।

स्वयं जाँ चए: यही माप दसंबर म और फर जून म ली जए। जाड़ म दोपहर क छाया भी अपेक्षाकृत लंबी मलेगी,
क्य क तब सूय दोपहर म भी उतना ऊँचा नह चढ़ पाता।

प्र.10 नम्न ल खत कथन के आधार पर सही वकल्प चु नए — कथन (क) — कसी समतल दपण ारा बना
प्र त बब पा त: व्युत्क्र मत होता है। कथन (ख) — अंग्रेजी वणमाला के वण T और O के समतल दपण म बने
प्र त बब वैसे ही दखते ह जैसे ये वण ह। (i) दोन कथन सत्य ह। (ii) दोन कथन असत्य ह। (iii) कथन (क)
सत्य है कतु कथन (ख) असत्य है। (iv) कथन (क) असत्य है कतु कथन (ख) सत्य है।

सही वकल्प है — (i) दोन कथन सत्य ह।

कथन (क) सत्य है — समतल दपण ारा बना प्रत्येक प्र त बब पा त: व्युत्क्र मत होता है; आपका बायाँ पक्ष प्र त बब म दायाँ
दखता है।
कथन (ख) भी सत्य है — वण T और O अपने बीच से ख ची गई ऊध्वाधर रेखा के सापेक्ष सम मत ह। उनके बाएँ-दाएँ भाग
आपस म बदल दे ने पर भी वही वण बनता है, अत: दपण म उनके प्र त बब वैसे ही दखाई दे ते ह।

ऐसा क्य होता है: पा उत्क्रमण सदै व होता है, परंतु वह दखाई तभी दे ता है जब आकृ त के दोन पा भन्न ह । T
और O के दोन पा एक जैसे ह, इस लए प रवतन का कोई चह्न नह बचता। B, F, P, R, S जैसे वण और अंक 3
के पा असमान ह, अत: उनके दपण-प्र त बब स्पष्ट रूप से उलटे दखते ह।

संकेत: अंग्रेजी के जो बड़े वण समतल दपण म अपने जैसे ही दखते ह, वे ह — A, H, I, M, O, T, U, V, W, X,
Y।

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प्र.11 मान ली जए क आपको चत्र 11.20 म दशाई गई आकृ त क एक न लका और दो ऐसे समतल दपण दए गए
ह जनका व्यास न लका के व्यास से कम है। क्या इस न लका का उपयोग प रदश बनाने के लए कया जा
सकता है? य द आपका उत्तर हाँ है तो न लका पर वह ान अं कत क जए जहाँ आप समतल दपण लगाएँगे।

चत्र 11.20, पृष्ठ 167: द गई न लका — इसके दोन खुले सरे एक ही ओर ह।

हाँ, इस न लका से प रदश बनाया जा सकता है। न लका के दोन मोड़ (कोन ) पर एक-एक समतल दपण लगाइए, प्रत्येक को
न लका के अक्ष से 45° पर झुका हुआ, तथा उनक चमक ली सतह न लका के भीतर क ओर — इस प्रकार क एक दपण दूसरे के
सामने पड़े।

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वस्तु से आता पकाश
दपण 1 (45°)

आँख की ओर दपण 2 (45°)

प्रत्येक मोड़ पर 45° पर लगा समतल दपण प्रकाश को 90° मोड़ दे ता है; इस प्रकार प्रकाश पूरी न लका से होकर आँख तक पहुँच जाता है।

ऐसा क्य होता है: प्रकाश स्वयं मुड़ नह सकता, परंतु दपण उसे मोड़ सकता है। वस्तु से आया प्रकाश ऊपरी खुले
सरे से भीतर आकर ऊपरी भुजा म सीधा चलता है। पहला 45° दपण उसे ऊध्वाधर भाग म नीचे क ओर भेज दे ता
है और दूसरा 45° दपण उसे नचली भुजा से होकर आपक आँख तक पहुँचा दे ता है। यह वही गुण परावतन है जो
चत्र 11.14 के Z आकृ त वाले प रदश म होता है, अत: यह न लका भी प रदश का काय करती है — इससे वह
वस्तु दखाई दे ती है जो सीधे दृश्यमान नह है।

संकेत: दोन दपण का व्यास न लका के व्यास से कम होना ही चा हए (जैसा प्रश्न म दया है) ता क वे भीतर बैठ
सक, और प्रत्येक ठ क कोने पर तरछा लगाया जाए — न लका के सीधे भाग म लगाया गया दपण तो प्रकाश को
रोक ही दे गा।

प्र.12 बहुत अ धक ऊँचाई पर उड़ते हुए प क्षय क छाया हम धरती पर दखाई नह दे ती है। परंतु जब कोई पक्षी धरती
के नकट उड़ता है तो उसक छाया धरती पर दखाई दे ती है। वचार क जए और बताइए क ऐसा क्य होता है?

क्य क पक्षी जतनी अ धक ऊँचाई पर उड़ता है, उसक छाया उतनी ही बड़ी और धुंधली होती जाती है — इतनी धुंधली क वह
दखाई ही नह दे ती; जब क धरती के नकट वही छाया छोट , गहरी और स्पष्ट बनती है।

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पक्षी बहत
ु ऊँ चाई पर → छाया अत्यंत बड़ ी और धुंधली → िद खाई नही ं दे ती
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पक्षी धरती के िनकट → छाया छोटी, गहरी और स्पष्ट → स्पष्ट िद खाई दे ती है
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aऐसा क्य होता है: सूय बदु- ोत नह , एक बड़ा ( वस्तृत) प्रकाश ोत है। जब पक्षी धरती से बहुत ऊपर होता है तो

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सूय के व भन्न भाग से आने वाला प्रकाश पक्षी के छोटे -से शरीर के चार ओर से फैलकर नीचे क लगभग हर जगह
पहुँच जाता है। कोई भी
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ान पूण अंधकार म नह रहता, अत: छाया बहुत बड़े क्षेत्र म फैलकर इतनी हल्क पड़ ag
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जाती है क धूप म चमकती धरती पर दखाई नह दे ती। पक्षी के नीचे आते ही प्रकाश को उसके पीछे फैलने का
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अवसर नह मलता, इस लए धरती के एक छोटे भाग तक प्रकाश नह पहुँच पाता और हम गहरी, स्पष्ट छाया दखाई

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दे ती है।
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स्वयं जाँ चए: धूप म रखी पुस्तक से कुछ सट मीटर ऊपर अपनी अँगुली र खए — छाया स्पष्ट बनती है। अब अँगुली
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को हाथ भर ऊपर ले जाइए — छाया बड़ी और धुंधली होकर लगभग मट जाती है।

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अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — पृष्ठ 167 और.c168
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अंतर वषयक प रयोजनाएँ

अन्वे ष णात्मक प रयोजनाएँ

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m a s em-बुजुग से पू छए क क्या
gl जनके कारण अब वे दखाई दे ने
जहाँ आप रहते ह, क्या वहाँ आपने कभी कोई जुगनू दे खा है? य द नह , तो अपने बड़े
o क्षेत्र म कभी जुगनू दखाई पड़ते थे। य द हाँ, तो उन कारण का पता aलगाइए
प्र.1

. cउस
a s em बंद हो गए ह। इसके वषय म एक कहानी बनाइए।
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coकmे दो-तीन बुजुग से बात क जए। पू छए क वे जुगनू कहाँ और कन a

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emउस ान पर तब से क्या बदला — नई स् ट लाइट, मकान, पेड़ क कटाई,
प रयोजना कैसे क जए: अपने प रवार अथवा मोहल्ले

a s
aglऔर फर उन्ह एक छोट कहानी म परो द जए।
महीन म दे खते थे, क्या उनक संख्या घट है, और
क टनाशक का प्रयोग। उत्तर नोट क जए
जुगनुओं के लुप्त होने के सामान्यत: मलने वाले कारण —

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प्रकाश-प्रदूषण — तेज स् ट लाइट और व ापन-प के प्रकाश म जुगनू क अपनी चमक दब जाती है, जससे नर-मादा एक-

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दूसरे को ढूँ ढ़ नह पाते।
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.cवनावरण एवं घास के मैदान का घटना — जन नम खेत , झा ड़य और पत्तagक तह म इनके डभक पलते ह, वे मकान
m और सड़क के लए साफ कर दए गए।
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ag क टनाशक का प्रयोग — इनसे जुगनू भी मरते ह और वे घ घे व छोटे क ट भी, जो इनके डभक का भोजन ह।
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अत्य धक पयटन तथा शोर और आस-पास के तालाब व नाल का सूख जाना।

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नमूना उत्तर (छोट कहानी): ‘‘दाद बताती ह क जब वे दस वष क थ , तब घर के पीछे वाले अमरूद के बगीचे म
सावन क रात सैकड़ नन्हे हरे द पक से जगमगा उठती थ । बच्चे उन्ह जुगनू कहते, काँच क शीशी म भरते और
सोने से पहले उड़ा दे ते। आज उसी बगीचे क जगह एक ऊँचा बजली का खंभा खड़ा है। रात कभी पूरी तरह अँधेरी
होती ही नह , और जुगनू वष से नह लौटे । दाद कहती ह — जुगनू हम छोड़कर नह गए, हमने उनका अँधेरा छ न
लया।’’ कहानी के अंत म एक काय ल खए जो आपका प रवार करेगा, जैसे रात म बाहर क बत्ती बुझा दे ना।

प्र.2 क्रयाकलाप 11.4 को दोहराइए परंतु इस बार टॉच के प्रकाश उत्सजक सरे को रंगीन पारदश कागज से ढक
द जए और छाया का रंग दे खए। यह क्रया व भन्न रंग के पारदश कागज का उपयोग करके दोहराइए।

आप क्या प्रे क्षत करगे —

टॉच पर लगे कागज का रंग पद के प्रका शत भाग का रंग छाया का रंग

लाल लाल काली

हरा हरा काली

नीला नीला काली

पीला पीला काली

नष्कष: रंगीन कागज प्रकाश का रंग बदलता है और इसी से छाया के चार ओर प्रका शत भाग का रंग बदल जाता है। छाया प्रत्येक
त म काली ही रहती है — उसक आकृ त और आमाप भी नह बदलते। छाया का अपना कोई रंग नह होता, क्य क वह तो
केवल वह ान है जहाँ प्रकाश पहुँचा ही नह ।

यह क जए: थोड़ी दूरी पर दो टॉच र खए — एक पर लाल और दूसरे पर हरा कागज। प्रत्येक अपनी अलग छाया
बनाएगी और प्रत्येक छाया दूसरी टॉच के प्रकाश से प्रका शत हो जाएगी — अत: काली के ान पर एक ला लमा
लए और एक हरापन लए क्षेत्र दखाई दगे। कक्षा म दखाने योग्य सुंदर प रणाम।

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प्र.3 एक समतल दपण कसी वस्तु का केवल एक प्र त बब बनाता है। कतु य द दो या दो से अ धक समतल दपण एक
दूसरे से कोई कोण बनाते हुए या एक दूसरे के समांतर रखे ह तो क्या होगा? चत्र 11.21 म दशाए अनुसार दो
दपण रख कर पता लगाइए क इनसे कतने प्र त बब बनते ह।

पितिबंब

समतल दपण समतल दपण

90°

वस्तु (बोतल का ढक्कन)

चत्र 11.21, पृष्ठ 168 (पुनर चत रेखा चत्र): मेज़ पर एक-दूसरे के लंबवत रखे दो समतल दपण और कोने के सामने
रखा बोतल का ढक्कन।

दो दपण मलकर अनेक प्र त बब बनाते ह, क्य क प्रत्येक दपण दूसरे दपण ारा बने प्र त बब का भी प्र त बब बनाता है —
अथात परावतन के परावतन। प्र त बब क संख्या दपण के बीच के कोण पर नभर करती है।

पितिबंबों की संख्या = (360° ÷ द पणों के बीच का कोण) − 1

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन AglaSem · NCERT Solutions

दोन दपण के बीच का कोण दखाई दे ने वाले प्र त बब क संख्या

180° (एक ही सीध में) 1

120° 2

90° (जैस ा िचत्र 11.21 में है) 3

60° 5

45° 7

आमने-सामने समांतर पितिबंबों की बहुत लंबी, पाय: अंतहीन िदखती पंिक्त

चत्र 11.21 के अनुसार 90° पर जुड़े दो दपण के बीच एक बोतल का ढक्कन रखकर ग नए — ढक्कन के साथ आपको तीन
प्र त बब दखाई दगे। दपण को 60° पर लाने पर यह संख्या बढ़कर पाँच हो जाती है।

ऐसा क्य होता है: पहला दपण ढक्कन का प्र त बब बनाता है। यह प्र त बब दूसरे दपण के लए वस्तु का काय
करता है और दूसरा दपण उसका भी प्र त बब बना दे ता है, और यह क्रम आगे चलता जाता है। प्रत्येक परावतन नए
प्र त बब जोड़ता जाता है। समांतर दपण म यह क्रम कभी समाप्त नह होता — प्र त बब केवल क्रमश: मंद पड़ते
जाते ह, क्य क प्रत्येक परावतन पर कुछ प्रकाश खो जाता है।

क्या आप जानते ह? अनुभाग 11.8.2 का बहुमू तदश तीन दपण को 60° पर जोड़कर बनाया जाता है, इसी लए
उसम इतने सुंदर सम मत प्र तरूप बनते ह।

प्र.4 आपको एक छोटा समतल दपण दया गया है। क्या इस दपण म इसके आमाप से बड़ी वस्तु जैसे क कसी
वशाल वृक्ष का प्र त बब बन सकता है? वचार क जए और पूवानुमान लगाइए। इसके पश्चात क्रयाकलाप
क जए।

पूवानुमान एवं प रणाम — हाँ, बन सकता है। दपण का छोटा टु कड़ा बाहर ले जाइए, उसे हाथ फैलाकर पक ड़ए और आँख को
इधर-उधर हलाइए — उसम पूरा वृक्ष, थोड़ा-थोड़ा करके तथा उपयुक्त त म एक साथ भी दखाई दे जाता है।

ऐसा क्य होता है: प्र त बब का आमाप दपण के आमाप पर नभर नह करता। वृक्ष के प्रत्येक भाग से चला प्रकाश
छोटे दपण पर पड़कर पराव तत होता है; दपण अपने पीछे वृक्ष का पूरा प्र त बब, वृक्ष के ही आमाप का, बना दे ता है।
आपक आँख तक केवल वे ही करण पहुँच पाती ह जो उस छोटे टु कड़े से होकर आती ह — अत: दपण उस
प्र त बब को दे खने क एक छोट खड़क जैसा काय करता है। आँख या दपण हलाने पर आप उस खड़क से दूसरा
भाग दे ख लेते ह।

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स्वयं जाँ चए: छोटे दपण को आँख के बल्कुल पास लाकर दे खए — केवल आँख दखाई दे ती है। अब हाथ
फैलाकर वही दपण दे खए — उसम पूरा चेहरा आ जाता है। दपण जतना दूर, दृश्य उतना चौड़ा।

अध्याय — एक नज़र म
जो पड स्वयं अपना प्रकाश उत्स जत करते ह — सूय, तारे, त ड़त, अ ग्न, जुगनू, जलता हुआ बल्ब — वे द प्त पड कहलाते
ह। जो पड अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को केवल पराव तत करते ह, जैसे चंद्रमा, दपण, मंगल और शुक्र, वे अद प्त पड
ह।
प्रकाश सरल रेखा म गमन करता है। मा चस क ड ब्बय वाला क्रयाकलाप, सीधे तथा मुड़े हुए पाइप का प्रयोग और दूध
मले जल म लेसर पुंज — तीन एक ही नष्कष तक ले जाते ह।
पारदश पदाथ से प्रकाश लगभग पूणत: पार हो जाता है, पारभासी पदाथ से आं शक रूप से और अपारदश पदाथ से
बल्कुल भी नह ।
कसी अपारदश वस्तु ारा प्रकाश अवरुद्ध कए जाने पर बनी काली आकृ त छाया कहलाती है। छाया के अवलोकन हेतु तीन
चीज आवश्यक ह — प्रकाश ोत, अपारदश वस्तु और पदा। वस्तु का रंग बदलने से छाया का रंग नह बदलता।
दपण प्रकाश क दशा बदल दे ता है — इसे प्रकाश का परावतन कहते ह। समतल दपण ारा बना प्र त बब वस्तु के समान
आमाप का, सीधा, पद पर न प्राप्त होने वाला, दपण के पीछे उतनी ही दूरी पर तथा पा त: व्युत्क्र मत होता है।
सूची छद्र कैमरा पद पर उल्टा (ऊध्वाधरत: व्युत्क्र मत) प्र त बब बनाता है, क्य क वस्तु के ऊपरी और नचले सर से आने
वाली करण सूची छद्र पर एक-दूसरे को काटती ह। दो समतल दपण से प रदश तथा तीन दपण से बहुमू तदश बनाया
जाता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 11 प्रकाश — छाया एवं परावतन
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त्व रत पुनरावृ त्त

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m .cअथ ag ध्यान रखने योग्य बात
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पद अध्याय से उदाहरण

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द प्त पड जो स्वयं अपना पकाश उत्सिजत करता है सूय, ुव तारा, त ड़त, जुगनू, एल.ई.डी.
दप
चंद्रमा द प्त पड नह है

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अद प्त पड जो स्वयं अपना पकाश उत्सिजत नही ं
em .चंद्रमा, दपण, मंगल, शुक्र, पुस्तक पराव तत प्रकाश से ही दखाई
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करता दे ता है

पारदश
a g स्वच्छ काँच, जल आर-पार स्पष्ट दखाई दे ता है
िजससे पकाश लगभग पूणत: पार हो जाए

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पारभासी िजससे पकाश आंिशक रूप से पार हो अनुरेखण पत्र, पतला कपड़ा हल्क , धुंधली छाया बनाता है

m l a seगहरी काली छाया बनाता है
.co िजससे पकाश पार नही ं होता ag
अपारदश गत्ता, मोटा कपड़ा, स्ट ल क प्लेट

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छाया अपारदश वस्तु ारा पकाश रोके जाने पर धूप म धरती पर बनी अपनी छाया ोत + वस्तु + पदा आवश्यक
बनी काली आकृ ित

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.co( चत्र 11.8) agl
प्रकाश का दपण ारा पकाश की िदशा में पिरवतन स्ट ल क प का से द वार पर धूप पहुँचाना परावतन के बाद भी प्रकाश

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परावतन सीधा चलता है

समतल दपण सपाट दपण, जो विक्रत न हो agl घर म लगा साधारण दपण प्र त बब — समान आमाप,
सीधा, आभासी

. coO,mA, M जैसे वण
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पा उत्क्रमण वस्तु का बायाँ पक्ष पितिबंब में दायाँ िदखना रोगी वाहन पर उल्टा लखा T,

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AMBULANCE
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अप रव तत दखते ह

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सूची छद्र कैमरा युिक्त िजसमें छोटे िछद से पकाश जाकर चत्र 11.12 म मोमबत्ती क लौ का प्र त बब उल्टा बनता है

ag पितिबंब बनाता है प्र त बब

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प रदश Z आकृ ित के बॉक्स में लगे दो समतल पनडु ब्बय , टक और बंकर म उपयोग छपी हुई वस्तुएँ दखाई दे ती ह

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दपण

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s ं रंगीन
aिजसमे
बहुमू तदश
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तीन दपण पि यों वाली नली, चत्र 11.15 परावतन के परावतन से
टुक ड़े हों प्र तरूप बनते ह

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages45
Languagehindi
Updated19 Sep 2026