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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य

AglaSem पर कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Science Chapter 12 Earth, Moon, and the Sun (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य - Page 1 of 39

About NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य

NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य is available here for free download. Published by NCERT for Class 7, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (39 pages). Candidates preparing for Class 7 can use NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 12: पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

169 – 186 17 41 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 38 pages

Page 2

कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 12: पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय
कक्षा 7 व ान क पाठ्यपुस्तक ज ासा के अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय के सभी प्रश्न के पूण एनसीईआरट समाधान। क्रयाकलाप 12.1 से
12.4, सभी छह गहन चतन बॉक्स, व ान एवं समाज तथा वै ा नक से प रचय बॉक्स, पृष्ठ 169 से 180 तक के सभी पाठ्य प्रश्न, आइए, और
अ धक सीख के बारह प्रश्न और तीन अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — अध्याय के चत्र को मु द्रत पृष्ठ पर पढ़कर, पुस्तक क अपनी भाषा म।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 7) 169 – 186

खं ड प्रश्न

17 41

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 169
अध्याय का आरंभ — र श्मका क ज ासा

प्र.1 अब वह संशय म थी क आकाश म सूय ग तमान है अथवा पृथ्वी!

ग तमान पृथ्वी है। सूय केवल ग तमान प्रतीत होता है, क्य क हम उसे एक ऐसी पृथ्वी से दे खते ह जो स्वयं घूणन कर रही है।
र श्मका ने दो बात दे ख और उन्ह आपस म नह जोड़ पाई। उसने दे खा क दन भर ना रयल के वृक्ष क छाया का आमाप बदलता है
— इससे उसे लगा क सूय आकाश म चलता है। दूसरी ओर उसे कक्षा 6 म पढ़ा हुआ यह तथ्य याद था क पृथ्वी सूय के चार ओर
घूमती है। दोन अवलोकन सही ह; बीच क कड़ी है पृथ्वी का घूणन — अपने अक्ष पर लगभग 24 घंटे म एक चक्कर।

ऐसा क्य होता है: वामावत दशा म घूमते चक्र य हडोले पर बैठने पर आस-पास के वृक्ष द क्षणावत दशा म घूमते
प्रतीत होते ह। वृक्ष नह , आप घूम रहे होते ह। ठ क इसी प्रकार पृथ्वी प श्चम से पूव क ओर घूमती है, अतः सूय पूव
म उ दत होकर आकाश पार करता हुआ प श्चम म अस्त होता प्रतीत होता है। सूय क यही बदलती दशा प्रात:काल
छाया को लंबी, मध्याह्न म छोट और संध्या को फर लंबी बनाती है।

दो भन्न ग तयाँ: पृथ्वी अपने अक्ष पर घूणन करती है (लगभग 24 घंटे — इससे दन-रात होते ह) तथा सूय के चार
ओर प रक्रमण भी करती है (लगभग 365 दन और 6 घंटे — इससे वष और झुकाव के साथ ऋतुएँ बनती ह)।
र श्मका को दूसरी ग त याद थी, पहली भूल गई थी।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 170

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

12.1 पृथ्वी का घूमना

प्र.1 आपने यह भी दे खा होगा क सूय पूव म उ दत होता है और प म म अस्त होता है। क्या आपने कभी यह सोचा है
क ऐसा क्य होता है?

ऐसा इस लए होता है क्य क पृथ्वी प श्चम से पूव क ओर घूणन करती है। अतः आकाश म स्थर प्रत्येक पड वपरीत दशा म — पूव
से प श्चम क ओर — ग तमान प्रतीत होता है।
वषुवत रेखा पर स्थत कसी स्थान क कल्पना क जए। पृथ्वी के पूव क ओर घूमने पर वह स्थान अंधकार वाले भाग से प्रकाशमान
भाग म प्रवेश करता है और सूय पूव क्ष तज पर चढ़ता हुआ प्रतीत होता है। लगभग बारह घंटे बाद वही स्थान प्रकाश से बाहर
नकल जाता है और सूय प श्चमी क्ष तज के नीचे चला जाता प्रतीत होता है।

घूणन: पिश्चम → पूव

िदन रात

सूय सूय स्त सूय दय

सूय का प्रकाश सदै व पृथ्वी क आधी सतह पर पड़ता है। पृथ्वी के प श्चम से पूव क ओर घूमने पर कोई स्थान पहले प्रका शत भाग म आता
है (सूय दय) और बाद म उससे बाहर चला जाता है (सूयास्त)।

स्वयं जाँ चए: अँधेरे कमरे म टॉच के प्रकाश म एक गद पक ड़ए और उसे ऊपर से दे खते हुए धीरे-धीरे वामावत
घुमाइए। गद पर बना बदु प्रकाश म आता है और फर अंधकार म चला जाता है — एक घूणन, एक दन और एक
रात।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 जब हम पृथ्वी से दे खते ह तो सूय पूव दशा म प्रकट होता हुआ प्रतीत होता है। यह आकाश म पूव से प मक
ओर ग त करता है और प म म ओझल हो जाता है। क्या यह इं गत करता है क सूय आकाश म ग तमान है?
अथवा यह भी तो हो सकता है क पृथ्वी घूणन कर रही हो और सूय केवल घूमता हुआ प्रतीत हो रहा हो?

दूसरी बात सही है — पृथ्वी घूणन कर रही है और सूय केवल घूमता हुआ प्रतीत होता है।
क्रयाकलाप 12.1 का चक्र य हडोला इसका नणय कर दे ता है। वामावत दशा म घूमते हडोले पर बैठे हुए आपको प्रत्येक वृक्ष और
भवन द क्षणावत दशा म घूमता प्रतीत होता है — बाएँ ओर से प्रकट होकर दाएँ ओर से ओझल होता हुआ। आप भली-भाँ त जानते
ह क वृक्ष स्थर ह, ग तमान आप ह।
पृथ्वी पर हमारी स्थ त भी ऐसी ही है — केवल ग त धीमी है और पैमाना बहुत बड़ा। पृथ्वी हम लगभग 24 घंटे म प श्चम से पूव क
ओर एक चक्कर लगवा दे ती है, इस लए सूय पूव म हमारी दृ ष्ट म आता है और प श्चम म ओझल हो जाता है।

ऐसा क्य होता है: ग त सदै व कसी अन्य वस्तु के सापेक्ष आँक जाती है। पृथ्वी का एकसमान घूणन हम अनुभव
नह होता, अतः हम ग त का ेय सूय को दे दे ते ह। इसे आभासी ग त कहते ह — चंद्रमा और तारे भी इसी कारण
ग तमान प्रतीत होते ह।

क्या आप जानते ह? आयभट ने पाँचव शताब्द म इसे नाव के उदाहरण से समझाया था — आगे बढ़ती नाव म
बैठा व्य क्त स्थर वस्तुओं को पीछे क ओर जाता हुआ दे खता है। उन्ह ने एक पूण घूणन का समय लगभग 23 घंटे
56 मनट 4.1 सेकंड बताया था, जो आज के स्वीकृत मान के आश्चयजनक रूप से नकट है।

क्रयाकलाप 12.1: आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 170
12.1 पृथ्वी का घूमना

क्रयाकलाप

प्र.1 जब आप घूमते हुए हडोले म बैठे हुए ह तब अपने आस-पास दे खए। क्या आपको आस-पास क वस्तुए ँ घूमती
हुई प्रतीत होती ह? ये वस्तुए ँ कस दशा म घूमती हुई प्रतीत होती ह?

हाँ, आस-पास क सभी वस्तुए ँ घूमती हुई प्रतीत होती ह — और वे आपक अपनी घूणन दशा के वपरीत दशा म घूमती
दखती ह।
आप बाहर क ओर मुख करके बैठे ह और कोई व्य क्त हडोले को धीरे-धीरे वामावत दशा म घुमा रहा है। ऐसे म बच, वृक्ष,
व ालय का भवन और आकाश — सब कुछ आपके प रत: द क्षणावत दशा म घूमता प्रतीत होता है।

हडोला घूमता है आस-पास क वस्तुए ँ घूमती प्रतीत होती ह वास्तव म ग तमान कौन

वामावत दिक्षणावत आप ( हडोले के साथ)

दिक्षणावत वामावत आप ( हडोले के साथ)

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय
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ऐसा क्य होता है: आपक आँख आपक अपनी घूणन ग त को नह दे ख पात ; वे केवल यह अनुभव करती ह क
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प्रत्येक वस्तु क दशा बदलती जा रही है। म स्तष्क इस प रवतन को "वस्तु चली" के रूप म पढ़ लेeतm
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ा है। आभासी
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ग त सदै व प्रेक्ष

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आप अपने सामने के इस वृक्ष को कस दशा म घूमते हुए पाते ह? क्या यह प्रत्येक क्षण आपक दृ ष्ट म बना रहता
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प्र.2

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है?

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वृक्ष आपके प रत: द क्षणावत दशा म, अथात आपक वामावत ग त के वपरीत दशा म घूमता हुआ प्रतीत होता है। और नह , यह
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प्रत्येक क्षण आपक दृ ष्ट म नह रहता।
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वृक्ष आपके बाएँ ओर से प्रकट होता है, सामने से होकर गुजरता है और दाएँ ओर से दृ ष्ट से ओझल हो जाता है। इसके बाद प्रत्येक

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चक्कर के एक भाग म वह आपके पीछे रहता है और दखाई ही नह दे ता। कुछ क्षण बाद वह फर बाएँ ओर से प्रकट हो जाता है और

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यही क्रम दोहराया जाता है।

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अध्याय से संबंध: हडोले के स्थान पर पृथ्वी और वृक्ष के स्थान पर सूय रख द जए। उत्तरी ुव के ऊपर से दे खने
पर पृथ्वी वामावत घूमती है, अतः वषुवत रेखा पर .खड़े
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aम)s ओझल होता प्रतीत होता है। जतनी दे र वह दृ ष्ट से बाहर रहता है वही
व्य क्त को सूय बाएँ हाथ क ओर (पूव म) प्रकट होता,

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रात है, और पूरा चक्र लगभग 24 घंटaे का होता है।
आकाश पार करता और दाएँ ओर (प श्चम

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s e mलगे तो रुककर भू म पर
m बदु को दे खए। gla
सुझाव: यह क्रयाकलाप धीरे-धीरे और कसी बड़े क उप स्थ त म ही क जए। चक्कर आने
कसीcoस्थर
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 171
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12.1 पृथ्वी का घूमना

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प्र.1 पृथ्वी अपने ान पर कस दशा म घूम रही है?

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c अपने घूणन अक्ष पर घूमती है — यह एक काल्प नक रेखा है जो उसके भौगो aलकg उत्तरी ुव और द क्षणी ुव से गुजरती है।
पृथ्.वी
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se उत्तरी ुव के ऊपर से दे खने पर पृथ्वी वामावत दशा म अथात प म से पूव क ओर घूमती है और लगभग 24 घंटे म एक
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घूणन पूरा करती है।

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यह अंत रक्ष म ठ क वैसे ही घूमती है जैसे लट्टू अपनी धुरी पर, पंखा अपने शाफ्ट पर अथवा उँ गली पर घूमती गद ( चत्र 12.2)।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

घूणन से जुड़ा प्रश्न उत्तर

िकस रे खा के पिरत:? घूणन अक्ष के , जो उ त्त री और दिक्षणी धु व से ग ज
ु रता है

िकस िदशा-बोध में? उ त्त री धु व के ऊपर से दे खने पर वामावत

िकस िदशा में? पिश्चम से पूव की ओर

एक घूणन में िकतना समय? लगभग 24 घंटे

सुझाव: दशा याद रखने का सरल तरीका — सूय पूव म उ दत होता है। जो स्थान पहले सूय के प्रकाश म आएगा,
उसे पूव क ओर मुड़ना होगा; अतः पृथ्वी प श्चम से पूव क ओर घूमती है।

क्रयाकलाप 12.2: आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 171 और 172
12.1 पृथ्वी का घूमना

क्रयाकलाप

प्र.1 उत्तरी ुव के ऊपर से दे खते हुए ग्लोब को उसके अक्ष के प रत: वामावत दशा म धीरे-धीरे घुमाइए। अवलोकन
क जए क आपक अव त पृथ्वी के अक्ष के प रत: कस प्रकार घूणन करती है और एक चक्र पूरा करने के
प ात अपनी मूल त म वापस आ जाती है।

ग्लोब पर अपने नगर क स्थ त पर एक छोटा स्टकर लगाइए। अब ठ क उत्तरी ुव के ऊपर से दे खते हुए ग्लोब को धीरे-धीरे
वामावत दशा म घुमाइए।
अवलोकन: स्टकर ऊपर या नीचे नह जाता — वह एक वृत्त पर चलता है जो वषुवत रेखा के समांतर होता है, और एक पूरा
चक्कर लगाकर ठ क अपनी मूल स्थ त म लौट आता है। ग्लोब का प्रत्येक बदु अपने-अपने वृत्त पर यही करता है और इन सभी वृत्त
के कद्र अक्ष पर होते ह।

ऐसा क्य होता है: घूणन का अथ ही यही है — वस्तु के सभी भाग उससे गुजरती एक काल्प नक रेखा के प रत:
वृत्ताकार पथ पर घूमते ह। केवल दो बदु स्थान नह बदलते — उत्तरी ुव और द क्षणी ुव — क्य क वे स्वयं
अक्ष पर स्थत ह।

यह भी क जए: एक स्टकर वषुवत रेखा के पास और एक उत्तरी ुव के नकट लगाइए। एक चक्कर म दोन
अपना-अपना वृत्त समान समय म पूरा करते ह, परंतु वषुवत रेखा वाले स्टकर का वृत्त कह बड़ा होता है — अथात
वषुवत रेखा पर स्थत स्थान अंत रक्ष म कह अ धक तेज़ी से भाग रहा होता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 अब टॉच से लगभग 1.5 m दूरी पर रखे ग्लोब पर प्रकाश डा लए जैसा क चत्र 12.4 (ख) म दशाया गया है। क्या
आपने ध्यान दया क कस प्रकार ग्लोब का आधा भाग टॉच के प्रकाश से प्रकाशमान होता है जब क दूसरे आधे
भाग म अँधेरा रहता है?

चत्र 12.4 (ख), पृष्ठ 172 — अँधेरे कमरे म ग्लोब से लगभग 1.5 m दूर रखी टॉच। पुनर चत रेखा चत्र।

हाँ। टॉच को सूय मानकर अँधेरे कमरे म दे खने पर ग्लोब का ठ क आधा भाग प्रकाशमान रहता है और दूसरे आधे भाग म अँधेरा
रहता है, तथा दोन के बीच एक स्पष्ट सीमा दखाई दे ती है।

ग्लोब का भाग यह क्या नरू पत करता है

टॉच के सामने वाला आधा भाग िदन का समय

टॉच से परे वाला आधा भाग रात का समय

ऐसा क्य होता है: प्रकाश सीधी रेखाओं म चलता है और पृथ्वी एक अपारदश गोला है। कोई भी गोला कसी दूरस्थ
ोत के सामने अपनी आधी सतह ही रख सकता है; शेष भाग उसी क छाया म रहता है। वास्त वक सूय बहुत दूर है,
इस लए उसक करण हम तक लगभग समांतर पहुँचती ह — यही कारण है क प्रका शत भाग ठ क आधा होता है।

सुझाव: टॉच को कम से कम लगभग 1.5 m दूर र खए। बहुत पास लाने पर प्रकाश-पुंज आधे से कम भाग पर
पड़ता है और दन-रात क सीमा स्पष्ट नह बनती।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 भारत म सूय दय सवप्रथम पूव भाग म होता है और इसके प ात अन्य भाग म होता है। ग्लोब पर भारत के पूव
भाग को दे खते हुए ग्लोब को एक दशा म घुमाइए और इसके प ात इसे वपरीत दशा म घुमाइए। जब प्रकाश
सवप्रथम भारत के पूव भाग पर पड़ता है तब घूणन क दशा क्या होती है?

जब ग्लोब उत्तरी-द क्षणी अक्ष के सापेक्ष प श्चम से पूव क ओर घूमता है, तब प्रकाश सवप्रथम भारत के पूव भाग पर पड़ता है।
ग्लोब को दूसरी दशा म (पूव से प श्चम) घुमाइए तो टॉच का प्रकाश अरुणाचल प्रदे श से पहले गुजरात पर पड़ेगा — जो भारत क
वास्त वक स्थ त के वपरीत है। अतः वह दशा गलत सद्ध हो जाती है।

ऐसा क्य होता है: सूय का प्रकाश सबसे पहले उसी स्थान पर पड़ता है जो सबसे पहले प्रका शत भाग म पहुँचता है।
ग्लोब को पूव क ओर घुमाने पर अंधकार वाले भाग का पूव कनारा पहले प्रकाश म आता है, अतः पूव भारत मध्य
और प श्चमी भारत से पहले सूय दय-रेखा पार कर लेता है।

वास्त वक जाँच: एक ही त थ को इटानगर (अरुणाचल प्रदे श) म सूय दय ारका (गुजरात) से लगभग दो घंटे पहले
होता है — फर भी दोन स्थान क घ ड़याँ एक ही समय दखाती ह, क्य क पूरे भारत म एक ही मानक समय
चलता है।

प्र.4 अब ग्लोब को प म से पूव क ओर घुमाते हुए पृथ्वी पर अपनी अव त का अवलोकन क जए। क्या यह दन
और रात के चक्र से गुजरती है?

हाँ। आपक अव स्थ त दशाने वाला स्टकर ग्लोब के प्रत्येक चक्कर म एक पूरा चक्र पूरा करता है।

स्टकर अंधकार वाले भाग से प्रका शत भाग म प्रवेश करता है — यह सूय दय है।
वह प्रका शत भाग म चलता है — यह दन है, और जब वह टॉच के ठ क सामने होता है तब मध्याह्न होता है।
वह पुन: अंधकार वाले भाग म प्रवेश करता है — यह सूयास्त है।
वह अंधकार वाले भाग म चलता है — यह रात है, और इसके बाद फर सूय दय होता है।

ऐसा क्य होता है: सूय का प्रकाश सदै व रहता है और सदै व पृथ्वी के आधे भाग पर पड़ता है। दन भर म प्रकाश म
कुछ नह बदलता; बदलता यह है क आपका नगर पृथ्वी के कस आधे भाग म है। पृथ्वी का एक घूणन, अथात
लगभग 24 घंटे, ठ क एक दन और एक रात दे ता है।

मुख्य बात: दन और रात पृथ्वी के घूणन के कारण होते ह, सूय के चार ओर प रक्रमण के कारण नह । परीक्षाओं म
यह बहुत सामान्य भूल है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 173

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12.1 पृथ्वी का घूमना

प्र.1 अब आप कल्पना क जए क आप पृथ्वी क वषुवत रेखा पर खड़े ह और पृथ्वी के एक घूणन के दौरान आकाश
का अवलोकन कर रहे ह जब क पृथ्वी प म से पूव क ओर घूणन कर रही है। आप क्या अवलोकन करगे? क्या
आपका अवलोकन चत्र 12.6 म दशाई गई बा लका के अवलोकन के समान होगा?

2. मध्याह्न के समय मै ं घूमकर नई िस्थित मे ं पहुँच जाती हूँ
जहाँ पर सूय उध्व धरत : िसर के ऊपर िदखाई देत ा है।

पूव पिश् चम

3. संध्या समय तक मै ं और आगे घूम
जाती हूँ। सूय पिश्चम से बायी ं ओर पिश् चम पूव 1. मै ं उत्तर की ओर मुहँ करके खड़ ी हूँ
से मेरी दृिष्ट से ओझल होने लगा और मेरी पीठ दिक्षण की ओर है।
है। अब राित्र-आकाश मे ं तारे पात :कालीन सूय पूव िदशा मे ं
िदखाई देने लगे ंगे। मेर े दािहनी तरफ पकट होता है।
उत्तरी धुव

पूव पिश् चम

चत्र 12.6, पृष्ठ 173 — घूणन करती हुई पृथ्वी पर वषुवत रेखा से सूय को दे खती हुई एक बा लका; दृश्य उत्तरी ुव के
ऊपर से। पुनर चत रेखा चत्र।

हाँ — आपका अवलोकन ठ क वही होगा जो चत्र 12.6 क बा लका का है। वषुवत रेखा पर उत्तर क ओर मुँह करके खड़े
होने पर आपका दा हना हाथ पूव क ओर और बायाँ हाथ प श्चम क ओर होगा, और सूय दाएँ से बाएँ आकाश पार करता दखाई
दे गा।

समय वषुवत रेखा पर उत्तर क ओर मुँह करके आप क्या दे खगे

पात:काल सूय आपकी दािहनी ओर, पूव िदशा में, नीचे की ओर पकट होता है।

मध्याह्न आप घूम कर नई िस्थित में पहच
ु ँ जाते है;ं सूय ठीक िसर के ऊपर िदखाई दे ता है।

संध् या आप और आगे घूम जाते है;ं सूय बाईं ओर, पिश्चम िदशा में ओझल हो जाता है।

राित्र आप अंध कार वाले भाग में होते है;ं आकाश में तारे िदखाई दे ने लगते है।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय
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ऐसा क्य होता है: इन घंट म सूय म कुछ नह बदला। बदली तो वह दशा जसक ओर आप मुड़े हुए थे, क्य क

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पृथ्वी ने आपको लगभग आधा चक्कर पूव क ओर घुमा दया। सूय क पूव से प श्चम क यात्रा वास्तव
अपनी प श्चम.cसेoपूव क यात्रा का ही लेखा है।
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aglसुझाव: रात म ुव तारे क सहायता से (या दशासूचक से) उत्तर क ओर मुँह करके खड़े होइए। पूव दा हनी ओर

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और प श्चम बाईं ओर होगा — इस सरल जाँच से चत्र 12.6 आसानी से समझ आ जाता है।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 174
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12.1 पृथ्वी का घूमना

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g नह होने चा हए?
क्य.cक पृथ्वी घूम रही है तो क्या सूय क भाँ त सतारे भी आकाश म घूमते हुएaप्रतीत
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हाँ, बल्कुल — और वे घूमते हुए प्रतीत होते भी ह। पृथ्वी के घूणन से आकाश का प्रत्येक पड ग तमान प्रतीत होता है, केवल
सूय ही नह ।
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कसी स्वच्छ रा त्र म सप्त ष ( बग डपर) कोgदेlखए। क्रयाकलाप 12.3 के अनुसार 7 बजे, 9 बजे और 11 बजे इसका आरेख
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बनाइए — आप पाएँगे क यह उत्तरी आकाश म खसक चुका है। पूरी रात म यह ुव तारे के चार ओर एक बड़े चाप पर चलता
प्रतीत होता है।
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र क्य दखता है: पृथ्वी का घूणन-अक्ष ुव तारे के बहुत नकट के lबदु sकe ओर इं गत करता है। अक्ष
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ुव तारा

s e m सीध म स्थत बदु पृथ्वी के घूमने पर भी अपनी दशा नह बदलता — इस लए ुव तारा लगभग स्थर रहता है
la और शेष सभी तारे उसके प रत: घूमते प्रतीत होते ह।
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क्या आप जानते ह? खगोल-फोटोग्राफर कैमरेcका omशटर घंट खुला रखते ह और ग तमान तारे स्वयं अपना चत्र g l a
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mे सुंदर चाप, जनका कद्र ुव तारा होता है। वह छाया चत्र वस्तुत: पृथ्वी a
स्टार े ल्स के रूप म बना दे ते ह — वृत्तseक
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के घूणन का ही चत्र है। agl

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.om 12.3: आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 174
क्रयाकलाप
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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

12.1 पृथ्वी का घूमना

क्रयाकलाप

प्र.1 दो घंटे प ात सप्त ष का पुन: अवलोकन क जए। क्या यह अपनी त से हट गया है? पुन: इसक त का
आरेख बनाइए और समय अं कत क जए।

हाँ, यह स्पष्ट रूप से अपनी त से हट गया है — और इसका झुकाव भी बदल गया है, अथात सात तार का पूरा पैटन उन्ह
वृक्ष या भवन के सापेक्ष अलग ढं ग से तरछा दखाई दे ता है।
आरेख ईमानदारी से बनाइए — पहले भू म-रेखा और कोई स्थर वृक्ष अथवा भवन बनाइए, फर उसके ऊपर सात तारे, और आरेख
के साथ समय अवश्य ल खए। चत्र 12.7 पुणे के एक व ाथ ारा 1–2 अप्रैल क रा त्र को बनाया गया ऐसा ही अ भलेख है:

समय सप्त ष कहाँ दखाई दे ता है

7 PM उ त्त र-पूव में नीचे की ओर

9 PM कु छ ऊँचा, िफर भी उ त्त र-पूव की ओर

11 PM सबसे ऊँचा, लगभग ठीक उ त्त र में

1 AM उ त्त र से आगे बढ़ कर नीचे उतरता हुआ

3 AM और नीचे, उ त्त र-पिश्चम की ओर

5 AM उ त्त र-पिश्चम में नीचे की ओर

ऐसा क्य होता है: पृथ्वी प्रत्येक घंटे म 15° घूमती है (360° ÷ 24 घंटे)। दो घंटे म यह 30° घूम जाती है, अतः पूरा
आकाश 30° खसका हुआ दखता है। यह बहुत बड़ा और आसानी से दखने वाला प रवतन है — भुजा फैलाकर
रखी लगभग तीन मु य जतना।

सुझाव: सभी अवलोकन एक ही ान से और एक ही रा त्र म क जए, और प्रत्येक बार वही वृक्ष अथवा भवन
बनाइए। खड़े होने का स्थान बदलने पर तुलना बगड़ जाएगी।

प्र.2 उपरोक्त चरण को दो घंटे प ात पुन: दोहराइए। क्या आप अवलोकन कर पाते ह क सप्त ष ुव तारे के चार
ओर घूमता हुआ प्रतीत होता है? (य द आप ुव तारे को नह भी दे ख पाते ह तो केवल अपने ारा नधा रत वृक्ष
अथवा भवन के सापेक्ष सप्त ष क ग त पर ध्यान द जए)।

हाँ। अपने सभी आरेख एक साथ र खए — सप्त ष एक बड़े वृत्त के चाप पर चलता दखाई दे गा, जो उत्तर-पूव म उ दत होकर उत्तर
के ऊपर से होता हुआ उत्तर-प श्चम म अस्त होता है। उस वृत्त का कद्र ुव तारा है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

1 AM 11 PM
9 PM
3 AM

7 PM
5 AM

उत्तर-पिश्चम धु व तारा उत्तर-पूव

एक ही रा त्र म हर दो घंटे पर बनाए गए सप्त ष के आरेख। छह स्थ तयाँ एक ही वृत्त पर ह जसका कद्र ुव तारा है।

ऐसा क्य होता है: पृथ्वी का घूणन-अक्ष लगभग ठ क ुव तारे क ओर इं गत करता है। पृथ्वी के घूमने पर प्रत्येक
तारा उसी दशा के प रत: घूमता प्रतीत होता है — जैसे घूमते प हये के मनके उसक धुरी के प रत: घूमते ह। धुरी से
दूर के तारे बड़े चाप बनाते ह; धुरी पर बैठा ुव तारा लगभग हलता ही नह ।

स्वयं जाँ चए: चंद्रमा भी ऐसा ही करता है। सूय क भाँ त वह भी पूव दशा क ओर उ दत और प श्चम दशा क ओर
अस्त होता प्रतीत होता है, क्य क पृथ्वी प श्चम से पूव क ओर घूमती है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 175
12.2 पृथ्वी का प रक्रमण

प्र.1 परंतु एक वष क अव ध म रा त्र-आकाश के उसी भाग म भन्न- भन्न तारे क्य दखाई दे ते ह?

क्य क पृथ्वी सूय के चार ओर प रक्रमा भी करती है। अपनी कक्षा पर आगे बढ़ने के साथ पृथ्वी का रात वाला भाग भन्न- भन्न
महीन म आकाश के भन्न- भन्न भाग क ओर मुड़ जाता है — अतः सूयास्त के बाद तार का दूसरा समूह दखाई दे ने लगता है।
रा त्र म हम सदै व सूय से परे क ओर दे ख रहे होते ह। माच म वह दशा आकाश के एक क्षेत्र क ओर होती है; तीन महीने बाद पृथ्वी
अपनी कक्षा का एक चौथाई भाग तय कर चुक होती है, अतः रा त्र म हम लगभग 90° दूर के क्षेत्र को दे खते ह।

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माच

जून सूय िदसंबर

तीर मध्यराित्र के
आकाश की ओर है ं

िसतंबर
रात वाला भाग सदै व सूय से परे क ओर होता है। पृथ्वी के कक्षा पर आगे बढ़ने से यह दशा एक वष म पूरे आकाश को नाप लेती है —
इस लए भन्न- भन्न महीन म भन्न- भन्न तारे दखते ह।

ऐसा क्य होता है: पृथ्वी एक प रक्रमण लगभग 365 दन और 6 घंटे म पूरा करती है। इसी लए तार के पैटन एक
वष बाद फर उसी स्थान पर लौट आते ह और इसी लए कक्षा 6 म कुछ तारामंडल को वष के कुछ न श्चत महीन म
ही दे खने के लए कहा गया था।

यह भी क जए: लगातार दो महीन क पहली तारीख को एक ही समय पर आकाश के उसी भाग को दे खए। तारे
लगभग 30° खसक चुके ह गे — इतना अंतर आसानी से दख जाता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 177

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12.2.2 पृथ्वी पर ऋतुए ँ

प्र.1 मने ध्यान दया है क प्रत्येक वष म ऋतुए ँ एक न त चक्र य क्रम म ही आती ह। क्या यह कसी तरह सूय के
चार ओर पृथ्वी क प रक्रमा करने से संबं धत है?

हाँ — परंतु अकेला प रक्रमण पयाप्त नह है। ऋतुएँ प रक्रमण के साथ-साथ दो और तथ्य से बनती ह: पृथ्वी का घूणन अक्ष
झुका हुआ है और पृथ्वी गोल है।
पृथ्वी वष भर अपने झुकाव को एक ही दशा म बनाए रखती है। अतः सूय के चार ओर घूमते समय पहले एक गोलाध और फर
दूसरा गोलाध सूय क ओर झुका होता है।

माह उत्तरी गोलाध प्राप्त सूय-प्रकाश वहाँ क ऋतु

जून सूय क ओर झुका हुआ अिधक तीव, पितिदन 12 घंटे से अिधक ग ीष्म ऋतु

िदसंबर सूय से परे क ओर कम तीव, पितिदन 12 घंटे से कम शीत ऋतु

झुकाव क्य नणायक है: पृथ्वी गोल है, इस लए सूय क करण क समान मात्रा उस गोलाध म छोटे क्षेत्र पर
फैलती है जो सूय क ओर झुका है और वहाँ अ धक गरमी होती है; दूसरे गोलाध म वही करण बड़े क्षेत्र पर फैलती ह
और कम गरमी दे ती ह। झुकाव के कारण झुके हुए गोलाध का आधे से अ धक भाग प्रका शत भाग म रहता है —
इसी लए ग्रीष्मकाल म दन शीतकाल क तुलना म लंबे होते ह, जैसा चत्र म बा लका ने दे खा। अ धक तीव्र प्रकाश
और अ धक समय — दोन मलकर ग्रीष्म ऋतु बनाते ह।

मुख्य बात: द क्षणी गोलाध म ऋतुएँ इसके ठ क वपरीत होती ह — ऑस् े लया म जून म शीतकाल और दसंबर म
ग्रीष्मकाल होता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 179
12.3 ग्रहण

प्र.1 दन और रात का चक्र, ऋतुए,ँ पृथ्वी पर जीवन.... बहुत कुछ सूय पर नभर है। क्या पृथ्वी और सूय के बीच
प रक्रमा करने वाले दो ग्रह ारा सूय से आने वाला प्रकाश अवरुद्ध कया जा सकता है?

नह । पृथ्वी और सूय के बीच प रक्रमा करने वाले दो ग्रह बुध और शुक्र ह, और इनम से कोई भी सूय के प्रकाश को हम तक पहुँचने
से नह रोक सकता।
ये चंद्रमा से आमाप म बहुत बड़े ह, परंतु पृथ्वी से बहुत अ धक दूर भी ह, इस लए आकाश म इनका आभासी आमाप सूय क तुलना
म अत्यंत छोटा होता है। जब शुक्र सूय और पृथ्वी के बीच से गुजरता है तो वह सूय के चमकदार पृष्ठ पर एक सूक्ष्म काले धब्बे क
भाँ त ही दखाई दे ता है — इस दुलभ घटना को शुक्र ग्रह का पारगमन कहते ह।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय
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परंतु चंद्रमा ऐसा कर सकता है। वह वास्त वक आमाप म सूय से बहुत छोटा है, कतु हमारे इतना नकट है क आकाश म उसका
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आभासी आमाप सूय के लगभग बराबर होता है। इसी लए चंद्रमा पूरे सूय को ढक सकता है और सूय-ग्रहण होता है।
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ऐसा क्य होता है: आभासी आमाप वास्त वक आमाप और दूरी — दोन पर नभर करता है। दूरी दुगुनी होने पर
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gl आमाप आधा रह जाता है। शुक्र हमसे चंद्रमा क अपेक्षा लगभग सौ गुना दूर है, इस लए बड़ा होते हुए भी
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आभासी
बदु जैसा दखता है।

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क्या आप जानते ह? शुक्र का पारगमन सूय-ग्रहणem
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से भी अ धक दुलभ है। पछली बार यह 2004 और 2012 म
हुआ था; अगली बार 2117 म होगा।

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m आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 180 l as
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क्रयाकलाप 12.4:
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12.3.1 सूय-ग्रहण

क्रयाकलाप

प्र.1 अब अपनी एक आँख बंद क जए और मत्र क ओर अपने हाथ का अँगूठा ऊपर क जए जैसा चत्र 12.12 म
दशाया गया है। क्या आप अपने मत्र के पूरे सर को अपने अँगूठे से ढक सकते ह?

आपका अँगठू ा

लगभग 5 m दूर खड़ ा आपका िमत्र
चत्र 12.12, पृष्ठ 180 — मत्र के सर को अँगूठे से ढकने का प्रयास; मत्र लगभग 5 मीटर दूर खड़ा है। पुनर चत
रेखा चत्र।

हाँ — एक आँख बंद करके और हाथ फैलाकर रखने पर अँगूठा लगभग 5 मीटर दूर खड़े मत्र के पूरे सर को ढक लेता है, जब क
अँगूठा सर से कह छोटा है।

वस्तु वास्त वक आमाप आँख से दूरी आभासी आमाप

आपका अँग ूठा लगभग 2 cm चौड़ा लगभग 60 cm िसर के लगभग बराबर

िमत्र का िसर लगभग 16 cm चौड़ा लगभग 500 cm (5 m) अँग ूठे के लगभग बराबर

अँगूठा: 60 cm पर 2 cm → 2 ÷ 60 ≈ 0.033

िसर: 500 cm पर 16 cm → 16 ÷ 500 ≈ 0.032

दोनों अनुपात लगभग बराबर है,ं अतः दोनों का आभासी आमाप भी लगभग बराबर है।

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ऐसा क्य होता है: कसी वस्तु का दखाई दे ने वाला आमाप — उसका आभासी आमाप — उसके वास्त वक
भौ तक आमाप और आपसे उसक दूरी, दोन पर नभर करता है। पास रखी छोट वस्तु दूर रखी बड़ी वस्तु के बराबर
दख सकती है।

यही सूय-ग्रहण का पूरा रहस्य है: सूय चंद्रमा से लगभग 400 गुना चौड़ा है, परंतु लगभग 400 गुना दूर भी है।
इस लए दोन आकाश म लगभग एक जैसे आमाप के दखते ह और चंद्रमा रूपी "अँगूठा" पूरे सूय को ढक लेता है।

गहन चतन — पृष्ठ 171 से 186
अध्याय के गहन चतन बॉक्स

गहन चतन

प्र.1 घूणन कसी वस्तु क ऐसी ग त है जसम उसके सभी भाग एक काल्प नक रेखा के प रत: बंद वृत्ताकार पथ पर
घूमते ह। इस रेखा को घूणन-अक्ष कहते ह।

यही वह प रभाषा है जो कंठस्थ करनी चा हए। इसम तीन बात छपी ह:

1. सभी भाग ग त करते ह — केवल एक बदु नह । वस्तु का प्रत्येक कण इसम भाग लेता है।
2. प्रत्येक भाग वृत्ताकार पथ पर चलता है — न सीधी रेखा म, न अव्यव स्थत रूप से।
3. इन वृत्त का कद्र वस्तु से गुजरती एक ही काल्प नक रेखा पर होता है — यही घूणन-अक्ष है।

घूणन करती वस्तु उसका घूणन-अक्ष कौन-से भाग र रहते ह

ल ू उसकी ध रु ी धुरी पर स्थत बदु

छत का पंखा ु रता शाफ्ट
कें द से ग ज हब का कद्र

पथ्ृ वी उ त्त री और दिक्षणी धु व से ग ज
ु रती रे खा दोन ुव

घूणन और प रक्रमण एक नह ह: घूणन म अक्ष वस्तु के भीतर से गुजरता है (पृथ्वी का 24 घंटे म घूमना)।
प रक्रमण म वस्तु कसी अन्य वस्तु के चार ओर घूमती है (पृथ्वी का सूय के चार ओर लगभग 365 दन और 6 घंटे
म घूमना)।

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प्र.2 पृथ्वी पर भन्न- भन्न ऋतुओं के आगमन के प्रायः दो गलत कारण दए जाते ह — जब उत्तरी गोलाध सूय क ओर
झुकता है तो वह सूय के समीप होता है। पृथ्वी क कक्षा अंडाकार होने के कारण सूय उसके कद्र से थोड़ा हटकर
होता है अतः पृथ्वी वषभर म सूय से भन्न- भन्न दू रय पर होती है।

दोन कारण सुनने म ठ क लगते ह, परंतु दोन गलत ह। दोन ही अवस्थाओं म दू रय का अंतर इतना कम है क उससे ऋतु नह बन
सकती।

"झुका हुआ गोलाध पास आ जाता है।" पृथ्वी क त्रज्या लगभग 6,400 km है जब क पृथ्वी-सूय दूरी लगभग 15 करोड़
km। झुकाव से उत्तरी गोलाध कुछ हज़ार कलोमीटर ही पास आता है — 15 करोड़ म से कुछ हज़ार, अथात एक प्र तशत के
सौव भाग से भी कम। इससे ऋतु नह बन सकती।
"पृथ्वी कुछ महीन म सूय के पास होती है।" कक्षा बहुत थोड़ी-सी ही अंडाकार है। पृथ्वी क नकटतम और अ धकतम दूरी
लगभग 14.7 करोड़ km और 15.2 करोड़ km है — अंतर मात्र लगभग 3 प्र तशत।

अिधकतम − िनकटतम = 15.2 − 14.7 = 0.5 करोड़ km

दू री के अनुपात में: 0.5 ÷ 15 ≈ 0.033 = लगभग 3% मात्र।

नणायक तथ्य: पृथ्वी जनवरी माह म सूय के सबसे नकट होती है — जो उत्तरी गोलाध म कड़ाके क शीत ऋतु का
और द क्षणी गोलाध म भरी ग्रीष्म ऋतु का समय है। य द दूरी ही ऋतु तय करती तो जनवरी म दोन गोलाध म एक
साथ ग्रीष्म होना चा हए था। ऐसा नह होता। अतः कारण दूरी नह , ब ल्क अक्ष का झुकाव और पृथ्वी क गोल
आकृ त है।

प्र.3 उत्तरी गोलाध म सबसे लंबा दन लगभग 21 जून को होता है यह उत्तर-अयनांत कहलाता है। उत्तर-अयनांत के
बाद दन क अव ध घटने लगती है जब क रा त्र क अव ध बढ़ने लगती है। इस गोलाध म सबसे छोटा दन और
सबसे लंबी रात 22 दसंबर के आस-पास होती है जसे द क्षण-अयनांत कहा जाता है। 21 माच तथा 23 सतंबर
के आस-पास दन और रात 12–12 घंटे के होते ह। उत्तरी गोलाध म इन दन को क्रमशः वसंत वषुव एवं हेमंत
वषुव कहा जाता है।

ये चार त थयाँ वष के मील के पत्थर ह। इन्ह ता लका के रूप म याद क जए।

त थ (लगभग) उत्तरी गोलाध म नाम यहाँ दन क अव ध क्या हो रहा होता है

21 माच वसंत िवषुव 12 घंटे कोई भी ुव सूय क ओर नह झुका होता

21 जून उ त्त र-अयनांत वष का सबसे लंबा दन उत्तरी गोलाध सवा धक सूय क ओर झुका होता है

23 िसतंबर हेम ंत िवषुव 12 घंटे कोई भी ुव सूय क ओर नह झुका होता

22 िदसंबर दिक्षण-अयनांत वष का सबसे छोटा दन उत्तरी गोलाध सवा धक सूय से परे झुका होता है

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ऐसा क्य होता है: "अयनांत" झुकाव के मोड़- बदु ह और " वषुव" वे दो दन ह जब दन-रात क सीमा दोन ुव
से होकर गुजरती है और सवत्र दन-रात बराबर होते ह। 21 जून से 22 दसंबर तक दन छोटा होता जाता है और 22
दसंबर से 21 जून तक फर बड़ा होता जाता है।

क्या आप जानते ह? उत्तरी ुव पर वषुव दवस 21 माच को सूय उ दत होता है और सतत छ: माह तक आकाश म
बना रहता है; 22 सतंबर को वह अस्त होता है। द क्षणी ुव पर इसके ठ क वपरीत होता है।

प्र.4 यद्य प बुद्ध और शुक्र ग्रह आमाप म चंद्रमा क अपेक्षा बहुत अ धक बड़े ह परंतु वे चंद्रमा क अपेक्षा पृथ्वी से बहुत
अ धक दूरी पर भी ह। अतः उनके आभासी आमाप सूय क अपेक्षा बहुत छोटे होते ह और वे सूय के प्रकाश को
अवरुद्ध नह कर पाते। उदाहरण के लए, जब शुक्र, सूय और पृथ्वी के बीच गमन करता है तो यह सूय के
चमकदार पृष्ठ के सामने से गुजरते हुए एक सूक्ष्म काले धब्बे क भाँ त दखाई पड़ता है। यह एक दुलभ घटना है
जसे शुक्र ग्रह का पारगमन कहा जाता है।

यह बॉक्स वस्तुत: क्रयाकलाप 12.4 का ही दूसरा प्रयोग है — सब कुछ आभासी आमाप तय करता है, और आभासी आमाप
वास्त वक आमाप तथा दूरी दोन पर नभर करता है।

पड वास्त वक व्यास पृथ्वी से दूरी आकाश म आभासी आमाप

चंद मा लगभग 3,500 km — तीन म सबसे लगभग 3.8 लाख km — सबसे सूय के लगभग बराबर — यह सूय को ढक
छोटा नकट सकता है

शुक्र लगभग 12,000 km — चंद्रमा से करोड़ कलोमीटर — बहुत दूर एक सूक्ष्म ध ब्बा
बड़ा

बुध लगभग 4,900 km — चंद्रमा से बड़ा पारगमन के समय शुक्र से भी दूर और भी सूक्ष्म ध ब्बा

ऐसा क्य होता है: केवल बड़ा होना पयाप्त नह है। चंद्रमा इस होड़ म केवल इस लए जीतता है क्य क वह इतना
नकट है। शुक्र का पारगमन दन म अँधेरा नह करता; वह सूय के पटल पर बस एक काला बदु बना दे ता है, जसे
केवल सुर क्षत प्रक्षेपण- व ध से दे खा जा सकता है — सूय को सीधे दे खकर कभी नह ।

ध्यान द जए: पुस्तक के इस बॉक्स म "बुद्ध" छपा है; अ भप्राय बुध ग्रह से है — सूय के सबसे नकट का ग्रह।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय
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m प सूय-ग्रहण क
क्रयाकलाप 11.5 क भाँ त ही इस क्रयाकलाप को भी आपके शक्षक ारा ही ा पत कया जाना चा हए। सूय
के प्र त बब को द वार पर प्रक्षे पत करने के लए एक दपण का उपयोग कया जा सकता है। eतथा
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. gl क ठनाई को दूर करने के
coके दौरान इसे सही कोण पर बनाए रखना एक क ठन काय हो सकता है।aइस
emदपण को कसी चल आधार पर ा पत क जए। एक खोखली गद ली जए जसम एक छोटा छद्र हो। इसे
पूरी घटना

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gl र रखने के लए आधा रेत से भ रए और इस पर एक ऐसा छोटा दपण, जैसा कढ़ाई के डजाइन म लगाने के
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काम आता है, लगाइए। गद को एक वृत्ताकार वलय जैसे क आसंजक टे प के वलय पर टकाइए ता क इसे

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सरलता से चार ओर घुमाया जा सके।

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पद पर बना सूय का पितिबंब om
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गेदं पर लगा दपण m .co agl
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g l a चत्र 12.15, पृष्ठ 181 — त मल नाडु के ऊट म आयो जत एक सावज नक सूय-ग्रहण दशन कायक्रम का दृश्य; दपण
a एक हरी गद पर लगा है और सूय का प्र त बब पद पर पड़ रहा है। पुनर चत रेखा चत्र; मूल छाया चत्र पाठ्यपुस्तक म
दे खए।
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सूय-ग्रहण दे खने क यह सुर क्षत व ध है — आप द वार पर बने सूय के प्र त बब को दे खते ह, सूय को कभी नह । इसे बनाने और
उपयोग करने का तरीका:
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.cलुoढ़कने के बजाय स्थर रहती है। g
1. एक छोटे छद्र वाली खोखली गद ली जए और उसे आधा सूखी रेत से भर द जए। रेत गुरुत्व-कद्र नीचे कर दे ती है जससे गद

em2. गद के बाहर एक छोटा दपण चपकाइए — कढ़ाई म लगने वाला दपण सबसे उपयुक्त है। a
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3. गद को कसी वलय पर, जैसे आसंजक टे प के रोल पर, टका द जए। अब गद को कसी भी दशा म हल्का-सा घुमाया जा

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सकता है और वह वह टक रहती है — यही चल आधार है।

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4. गद को तब तक घुमाइए जब तक पराव तत सूय-प्रकाश छाया म रखी द वार अथवा सफेद पद पर न पड़े। पदा दूर करने पर

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agगोल धब्बा वस्तुत: सूय का प्र त बब है। चंद्रमा का काला कटाव द वार पर ही बढ़ता-घटता
प्र त बब बड़ा कतु मंद और पास लाने पर छोटा कतु चमक ला बनता है।
5. ग्रहण के समय द वार पर बना
दे खए।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

छोटा दपण क्य काम करता है: पद से दूर रखा छोटा समतल दपण सूक्ष्म छद्र ( पनहोल) क भाँ त व्यवहार करता
है — प्रकाश का धब्बा दपण क आकृ त क नकल छोड़कर सूय का गोल प्र त बब बन जाता है। इसी लए ग्रहण के
समय इस धब्बे क आकृ त बदलती दखती है।

सावधानी: यह क्रयाकलाप पूरी तरह शक्षक के मागदशन म ही कया जाना चा हए। पराव तत प्रकाश कसी क
आँख पर न पड़े, और सूय अथवा दपण को सीधे कभी न दे ख।

प्र.6 वास्त वकता यह है क सौर प रवार म ग्रह एक व शष्ट बदु के प रत: प रक्रमा करते ह। ये सूय के बहुत नकट है
कतु ठ क इसके कद्र पर नह है। सूय भी पूणतया ग तहीन नह है। वह भी इस बदु के प रत: स्वल्प ग त करता है।
वै ा नक अन्य तार क ग तय म इस प्रकार क सूक्ष्म डगमगाहट का उपयोग करके उनके प रत: वद्यमान बाह्य
ग्रह क खोज के लए प्रयास करते रहते ह।

स्थर सूय और उसके चार ओर घूमते ग्रह का चत्र बहुत अच्छा स न्नकटन है, पूरा सत्य नह ।
सूय और ग्रह एक-दूसरे को ख चते ह। इस लए सूय और ग्रह दोन एक साझा संतुलन- बदु के प रत: घूमते ह — यह बदु सूय के
कद्र के अत्यंत नकट होता है, क्य क सूय कह अ धक द्रव्यमान वाला है, कतु ठ क कद्र पर नह होता। अतः सूय पूणतया स्थर
रहने के बजाय एक छोटा-सा वृत्त बनाता रहता है।

यह इतना उपयोगी क्य है: य द कसी अन्य तारे के चार ओर ग्रह ह तो वह तारा भी इसी प्रकार डगमगाएगा। वे ग्रह
इतने मंद होते ह क उनका चत्र नह लया जा सकता, कतु तारा चमक ला होता है — और उसक सूक्ष्म, नय मत
डगमगाहट को मापकर छपे ग्रह का पता चल जाता है। अन्य तार के प रत: इस व ध से खोजे गए ग्रह बाह्य ग्रह
कहलाते ह।

सरल प्र तरूप: लगभग अपने बराबर भार वाले मत्र का हाथ पकड़कर घू मए — दोन म से कोई भी स्थर नह
रहता, दोन बीच के एक बदु के प रत: घूमते ह। अब कोई भारी व्य क्त कसी छोटे ब े को इसी प्रकार घुमाए तो
वह लगभग स्थर दखेगा, पर पूरी तरह स्थर नह । यही सूय क डगमगाहट है।

व ान एवं समाज — पृष्ठ 183

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12.3.2 चंद्र-ग्रहण

व ान एवं समाज

प्र.1 स्टे लै रयम ऐप एक न:शुल्क कंप्यूटर रूपांतर है। इसका उपयोग करके आप नकट भ वष्य के ऐसे सूय-ग्रहण एवं
चंद्र-ग्रहण के वषय म जानकारी प्राप्त कर सकते ह जो आपक अव त से दे खे जा सकते ह।

स्टे लै रयम कंप्यूटर पर चलने वाला एक न:शुल्क नभोमंडल सॉफ़्टवेयर है। यह कसी भी स्थान से, कसी भी त थ और समय का
आकाश ठ क वैसा ही बना दे ता है जैसा वह दखेगा — अतः आप पहले से जान सकते ह क आपके नगर से कौन-सा ग्रहण दखाई
दे गा।

1. स्टे लै रयम का डेस्कटॉप रूपांतर संस्था पत करके खो लए।
2. अपनी अव त नधा रत क जए — अपने नगर का नाम ल खए अथवा उसका अक्षांश और दे शांतर भ रए।
3. जस त थ और समय क जाँच करनी है, उसे भ रए।
4. सूय अथवा चंद्रमा को खोजकर घड़ी को आगे बढ़ाइए। सूय-ग्रहण म चंद्रमा का पटल सूय पर सरकता दखेगा; चंद्र-ग्रहण म
पृथ्वी क छाया चंद्रमा पर से गुजरती दखेगी।
5. त थ, आरंभ का समय, चरम अवस्था और यह क आपके स्थान से ग्रहण पूण होगा या आं शक — सब अं कत क जए।

कक्षा के लए यह क्य उपयोगी है: भारत से दखने वाला ग्रहण आपके नगर म आं शक ही हो सकता है और हज़ार
कलोमीटर दूर बल्कुल न दखे। पहले से जाँच लेने पर व ालय ग्रहण-चश्म अथवा दपण-प्रक्षेपण के साथ एक
सुर क्षत दशन-कायक्रम क योजना बना सकता है।

पीछे का व ान: यह सॉफ़्टवेयर वस्तुत: सूय, पृथ्वी और चंद्रमा क स्थ तय क गणना ही कर रहा होता है।
भारतीय खगोल वद यही काम स दय पहले हाथ से करते थे — सूय सद्धांत म ग्रहण क भ वष्यवाणी के लए
गणनाएँ छं दबद्ध ोक म द गई ह।

वै ा नक से प रचय — पृष्ठ 184

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

वै ा नक से प रचय: एम. के. वेणु बप्पू

वै ा नक से प रचय

प्र.1 एम. के. वेणु बप्पू आधु नक भारतीय खगो लक के जनक के रूप म जाने जाते ह। उन्ह ने भारत म अनेक यंत्र
और दूरदशक , जैसे — नैनीताल (उत्तराखंड) के नकट मनोरा शखर पर तथा केवलुर (त मल नाडु ) म दूरदशक
क ापना के प्रयास का नेतृत्व कया। केवलुर क वेधशाला का नाम उनके नाम पर रखा गया है। इन्ह ने मुख्यतः
तार पर काय कया और एक धूमकेतु क भी खोज क । इन्ह ने सूय-ग्रहण का अध्ययन करने के लए वश्व के
व भन्न भाग क यात्रा भी क ।

एम. के. वेणु बप्पू (1927–1982) को आधु नक भारतीय खगो लक का जनक इस लए कहा जाता है क उन्ह ने वे सु वधाएँ खड़ी
क जन पर भारतीय खगो लक आज भी टक है।

उन्ह ने क्या कया यह क्य महत्वपूण था

नैनीताल (उत्तराखंड) के िनकट मनोरा िशखर पर िहमालय की तलहटी में भारत को एक आध िु नक वेध शाला िमली
दू र दशकों की स्थापना का नेतत्ृ व

के वलुर (तिमल नाडु) में वेध शाला की स्थापना का नेतत्ृ व यहाँ एक बड़ा पकािशक दू र दशक है; वेध शाला अब उ न्ही ं के नाम से जानी जाती है

तारों पर अनुस ंध ान तारों की चमक संबंध ी उनका काय आज भी उनकी दू र ी आँक ने में उपयोग होता है

एक धूम के तु की खोज यह दुल भ उपलिब्ध है और धै यपूवक िकए गए अवलोकन का पमाण है

सूय-ग हण के अध्ययन हेत ु िवश्व-भमण पूण सूय-ग हण कु छ ही िमनटों का होता है और पथ्ृ वी की एक पतली प ी से ही िदखता
है, अतः वै ािनकों को उस तक जाना पड़ता है

वै ा नक ग्रहण के पीछे क्य जाते ह: उन कुछ मनट म सूय का चकाच ध करने वाला पटल ढक जाता है और
सूय का मंद बाह्य वायुमंडल दखाई दे ने लगता है। जैसा अध्याय म कहा गया है, ग्रहण ऐसी प रघटनाओं के अध्ययन
का अवसर दे ते ह जनका अवलोकन अन्यथा नह कया जा सकता।

क्या आप जानते ह? केवलुर क वेणु बप्पू वेधशाला का संचालन भारतीय खगो लक संस्थान (आई.आई.ए.),
बगलुरु करता है — वही संस्थान जो सामान्य संवत् 1899 म स्था पत कोडाईकनाल सौर वेधशाला का संचालन भी
करता है।

आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 184 से 186

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय के अभ्यास प्रश्न

आइए, और अ धक सीख

प्र.1 चत्र 12.17 म पृथ्वी के एक घूणन के दौरान उत्तरी ुव और द क्षणी ुव पर सूय का प्रकाश कतने- कतने घंटे
रहता है?

उत्तरी धु व

दिक्षणी धु व

चत्र 12.17, पृष्ठ 184 — पृथ्वी, जसका आधा भाग प्रका शत है। झुका हुआ घूणन अक्ष बदुदार रेखा से दखाया गया
है तथा दोन ुव अं कत ह।

चत्र को ध्यान से दे खए। सूय का प्रकाश बाईं ओर से आ रहा है, अतः ग्लोब का बायाँ आधा भाग प्रका शत है और दायाँ आधा
भाग अंधकार म है। अक्ष झुका हुआ है और दोन ुव उसी पर अं कत ह:

उत्तरी ुव का बदु दन-रात क सीमा के अंधकार वाले भाग म है।
द क्षणी ुव का बदु प्रका शत भाग म है।

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ुव अक्ष पर ही स्थत होते ह, अतः पृथ्वी के घूमने पर भी वे इस सीमा को पार नह करते — पूरे घूणन म वे जहाँ ह वह बने रहते ह।
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उत्तरी धु व: सूय का पकाश 0 घंटे (चौबीसों घंटे अंधकार)
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दिक्षणी धु व: सूय का पकाश 24 घंटे (रात होती ही नही ं)
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सूय की िकरणे ं
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a उत्तरी धु व — अंधकार में
सूय का पकाश 0 घंटे
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l a se िदन रात
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दिक्षणी धु व — पकाश मे:ं 24 घंटे
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चत्र 12.17 म उत्तरी ुव अंधकार वाले आधे भाग म और द क्षणी ुव प्रका शत आधे भाग म है। ुव अक्ष पर होने के कारण पूरे घूणन म

a s em वह बने रहते ह।

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यह कौन-सा माह है? उत्तरी ुव सूय से परे क ओर है, अतः चत्र दसंबर क स्थ त दशाता है — इसक तुलना
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चत्र 12.11 (ख) से क जए, जसका शीषक .हैc" दसंबर म प्रत्येक दन उत्तरी ुव पूरे चौबीस घंटे अंधकार म रहता
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e ुव पर 24 घंटे प्रकाश और द क्षणी ुव पर बल्कुल नह ।
है"। जून म स्थ त ठ क उलट होगी —sउत्तरी
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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 रक्त ान क पू त क जए — (i) तारे ........... दशा म उ दत होते ह और ............. दशा म अस्त होते ह।
(ii) दन और रात पृथ्वी के ............... के कारण होते ह। (iii) जब चंद्रमा हमारी दृ ष्ट के सामने सूय को पूरी तरह
ढक कर लेता है तो यह ........... सूय-ग्रहण कहलाती है।

क्रम पूण वाक्य

(i) तारे पूव िदशा में उिदत होते है ं और पिश्चम िदशा में अस्त होते है।
ं

(ii) िदन और रात पथ्ृ वी के घूणन (अपने अक्ष पर) के कारण होते है।
ं

(iii) जब चंद मा हमारी दृ िष्ट के सामने सूय को पूर ी तरह ढक कर ले ता है तो यह पूण सूय-ग हण कहलाती है।

ये उत्तर क्य :

(i) पृथ्वी प श्चम से पूव क ओर घूमती है, अतः आकाश का प्रत्येक पड — सूय, चंद्रमा और तारे — वपरीत
दशा म चलता प्रतीत होता है, पूव म उ दत और प श्चम म अस्त।
(ii) घूणन, प रक्रमण नह । एक घूणन लगभग 24 घंटे का होता है और ठ क एक दन तथा एक रात दे ता है।
प रक्रमण एक वष लेता है और ऋतुएँ दे ता है।
(iii) य द सूय का केवल कुछ भाग ढका हो तो वह आं शक सूय-ग्रहण होता है; जब चंद्रमा का पटल पूरे सूय को
ढक ले तो वह पूण सूय-ग्रहण कहलाता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 बताइए, नम्न ल खत कथन सत्य है अथवा असत्य — (i) जब सूय पृथ्वी और चंद्रमा के बीच आता है तो सूय-
ग्रहण होता है। (ii) गुजरात म सूय दय झारखंड से पहले होता है। (iii) चेन्नई म सबसे लंबा दन ग्रीष्म अयनांत म
होता है। (iv) हम सूय-ग्रहण सीधा अपनी खुली आँख से दे खना चा हए। (v) ऋतु-प रवतन पृथ्वी के घूणन अक्ष
के झुकाव तथा इसक गोल आकृ त के कारण होता है। (vi) सूय के प रत: पृथ्वी के प रक्रमण के कारण दन और
रात होते ह।

क्रम कथन सत्य / कारण
असत्य

(i) जब सूय पृथ्वी और चंद्रमा के बीच अस त्य सूय-ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूय और पृथ्वी के बीच आ जाता है।
आता है तो सूय-ग्रहण होता है सूय कभी बीच म नह आता — और य द पृथ्वी बीच म आए तो चंद्र-
ग्रहण होता है।

(ii) गुजरात म सूय दय झारखंड से पहले अस त्य पृथ्वी प श्चम से पूव क ओर घूमती है, अतः पूव स्थान पर सूय पहले
होता है दखता है। झारखंड गुजरात के पूव म है, इस लए वहाँ सूय दय लगभग
आधा घंटा पहले होता है।

(iii) चेन्नई म सबसे लंबा दन ग्रीष्म स त्य चेन्नई उत्तरी गोलाध म है, अतः वहाँ सबसे लंबा दन लगभग 21 जून
अयनांत म होता है को, अथात उत्तर-अयनांत को होता है। ( वषुवत रेखा के नकट होने से
यह 12 घंटे से थोड़ा ही अ धक होता है।)

(iv) हम सूय-ग्रहण सीधा अपनी खुली अस त्य ग्रहण के दौरान भी सूय का प्रकाश आँख को क्ष त पहुँचा सकता है और
आँख से दे खना चा हए अंधेपन का कारण बन सकता है। धूप का चश्मा, नेत्री दूरबीन अथवा
दूरदश भी सुर क्षत नह ह।

(v) ऋतु-प रवतन पृथ्वी के घूणन अक्ष के स त्य अध्याय म यही कारण दया गया है। सूय से दूरी इसका कारण नह है।
झुकाव तथा इसक गोल आकृ त के
कारण होता है

(vi) सूय के प रत: पृथ्वी के प रक्रमण के अस त्य दन और रात पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूणन के कारण होते ह।
कारण दन और रात होते ह प रक्रमण से वष बनता है और झुकाव के साथ ऋतुए।ँ

सुझाव: कथन (i) और (vi) म केवल एक शब्द बदला गया है। ऐसे वाक्य धीरे-धीरे प ढ़ए और स्वयं से पू छए —
"बीच म कौन-सा पड है?" और "घूणन या प रक्रमण?"

प्र.4 पद्म ी ने कल रात 8:00 बजे ओरायन तारामंडल को लगभग अपने सर के ऊपर दे खा था। वह आज ओरायन
तारामंडल को अपने सर के ऊपर कस समय दे खेगी?

वह ओरायन को सर के ऊपर लगभग चार मनट पहले — अथात लगभग 7:56 बजे दे खेगी।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

पृथ्वी का पिरक्रमण: लगभग 365 िदनों में 360°

पितिदन अितिरक्त घूणन = 360° ÷ 365 ≈ 1° पितिदन
पृथ्वी एक घंटे में 15° घूमती है, अतः 1° के िलए 60 ÷ 15 = 4 िमनट

आज का समय = 8:00 − 4 िमनट = लगभग 7:56 बजे

ऐसा क्य होता है: पृथ्वी केवल घूमती नह , प्र त दन अपनी कक्षा पर लगभग एक अंश आगे भी बढ़ जाती है। कोई
तारा एक घूणन (लगभग 23 घंटे 56 मनट) के बाद उसी स्थान पर लौट आता है, परंतु सूय को उसी स्थ त म आने
के लए इस एक अंश के कारण लगभग 24 घंटे लगते ह। हमारी घ ड़याँ सूय का अनुसरण करती ह, अतः तारे घड़ी से
प्र त दन लगभग चार मनट आगे नकल जाते ह।

स्वयं जाँ चए: चार मनट प्र त दन एक माह म लगभग दो घंटे और एक वष म पूरे 24 घंटे बन जाते ह। इसी लए
ओरायन शीतकाल क संध्या का तारामंडल है और जून क संध्या के आकाश म दखता ही नह ।

प्र.5 नं दनी ने 21 जून को मध्य रा त्र म एक तारा-समूह को उ दत होते हुए दे खा अगले वष मध्यरा त्र म वह तार के इस
समूह को कब उ दत होते हुए दे खेगी?

वह उसी तारा-समूह को मध्यरा त्र म उ दत होते हुए अगले वष लगभग 21 जून को ही दे खेगी — अथात ठ क एक वष बाद,
लगभग उसी त थ को।

तारे घड़ ी से पितिदन लगभग 4 िमनट आगे िनकलते है ं

एक वष में: 4 िमनट × 365 ≈ 1,460 िमनट ≈ 24 घंटे

पूरे 24 घंटे का िखसकाव तारों को उसी ितिथ, उसी समय पर लौटा दे ता है।

ऐसा क्य होता है: कोई तारा-समूह मध्यरा त्र म तभी उ दत होता है जब पृथ्वी अपनी कक्षा के एक वशेष बदु पर
हो — वह बदु जहाँ से मध्यरा त्र का आकाश अंत रक्ष के उसी भाग क ओर होता है। पृथ्वी उस बदु पर एक पूण
प रक्रमण के बाद लौटती है, जसम लगभग 365 दन और 6 घंटे लगते ह। अतः यह दृश्य वष म एक बार ही
दोहराया जाता है।

सुझाव: बीच के दन म यह समूह प्रत्येक रात लगभग चार मनट पहले उ दत होता जाएगा — दो माह बाद लगभग
10 बजे और चार माह बाद लगभग 8 बजे।

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प्र.6 अभय के ध्यान म यह बात आई क जब भारत म दन होता है तो अमे रका म रहने वाले उसके चाचा जी उस
समय सो रहे होते ह क्य क वहाँ उस समय रात होती है। इस अंतर का क्या कारण है?

इसका कारण यह है क पृथ्वी गोल है और सूय का प्रकाश एक समय म उसके केवल आधे भाग पर ही पड़ सकता है। भारत और
अमे रका पृथ्वी के लगभग आमने-सामने के भाग म ह, अतः जब भारत प्रका शत आधे भाग म होता है तो अमे रका अंधकार वाले
आधे भाग म होता है।

उस क्षण भारत अमे रका

पथ्ृ वी पर िस्थित सूय के सामने वाले आधे भाग में सूय से परे वाले आधे भाग में

लोगों का अनुभव िदन — िव ालय, काय रात — िनद ा

ऐसा क्य होता है: पृथ्वी प श्चम से पूव क ओर घूमती है, अतः प्रत्येक स्थान बारी-बारी से प्रका शत भाग म आता है
और फर उससे बाहर चला जाता है। भारत अमे रका से बहुत पूव म है, इस लए भारत को सूय का प्रकाश लगभग
आधा दन पहले मल जाता है। बारह घंटे बाद स्थ त उलट जाती है — भारत म रात और अमे रका म दन।

प्र त दन का प्रमाण: ऑस् े लया या अमे रका के दौरे का क्रकेट मैच भारत म प्रात: 5 बजे आरंभ होता है, क्य क
वहाँ उस समय दन का उजाला होता है जब क यहाँ अभी अँधेरा रहता है। समय-क्षेत्र इसी कारण बनाए गए ह।

प्र.7 चार मत्र ने सूय-ग्रहण के अवलोकन हेतु नम्न ल खत चार ढ़ं ग अपनाए। इनम से कसने असावधानी बरती? (i)
र व कशन ने सूय-ग्रहण दे खने वाले नजर के चश्मे का उपयोग कया। (ii) ज्यो त ने सूय का प्र त बब पद पर
बनाने के लए दपण का उपयोग कया। (iii) आ दत्य ने सीधे अपनी खाली आँख से सूय का अवलोकन कया।
(iv) अरूणा ने कृ त्रम नभोमंडल ारा आयो जत एक कायक्रम म भाग लया।

आ दत्य — वकल्प (iii) — ने असावधानी बरती।

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मत्र अपनाई गई व ध सुर क्षत? कारण

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रिव सूय-ग्रहण दे खने वाला सुर िक्षत सौर अवलोकन के लए बने वशेष फल्टर सूय के प्रकाश और हा नकारक

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िकशन चश्मा े ह।

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aज्योित दपण से पद पर सूय सुर िक्षत वह पद पर बने प्र त बब को दे खती है, सूय को कभी नह । यही चत्र
का प्र त बब 12.15 क व्यवस्था है।

. omके दौरान भी सूय का प्रकाश आँख को क्ष त पहुँचा सकता है और
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अत्यंत हािनकारक
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आिदत्य सीधे खाली आँख से
दे खा
g l as अंधेपन का कारण बन सकता है।

अरूणा कृ त्रम नभोमंडल का
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सुर िक्षत — और आयोजक व शष्टीकृत नेत्र-सुरक्षा भी दे ते ह और वै ा नक व्याख्या भी
कायक्रम सव त्त म करते ह।
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सीधे दे खना इतना खतरनाक क्य है: आँख क प्रकाश-संवेद परत म पीड़ा का अनुभव कराने वाली तं त्रकाएँ नह

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gl चश्मा, काँच पर लगी का लख, एक्सपोज़ क गई फल्म, नेत्री दूरबीन या दूरदश इसका वकल्प नह ह; दूरबीन
होत , अतः क्ष त चुपचाप हो जाती है और कई घंट बाद पता चलती है — और वह स्थायी हो सकती है। धूप का
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और दूरदश तो प्रकाश को और सांद्र करके हा न बढ़ा दे ते ह।
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चत्र 12.18 के वृत्त म सूय, चंद्रमा तथा पृथ्वी म से चुनकर उपयुक्त शब्द ल खए।

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सूय-गहण
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चंद-गहण
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चंद मा

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चत्र 12.18, पृष्ठ 185 — भरे जाने वाले वृत्त।
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agl उत्तर
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एक ही नयम दोन पं क्तय का नणय कर दे ता है: ग्रहण करने वाला पड सदै व बीच म होता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

चत्र 12.18 क पं क्त पहला वृत्त बीच का वृत्त अं तम वृत्त

सूय-ग हण सूय ( दया हुआ) चंद मा पथ्ृ वी

चंद -ग हण सूय पथ्ृ वी चंद्रमा ( दया हुआ)

सूय-गहण
चंदमा

सूय पृथ्वी

चंद मा की छाया पथ्ृ वी पर

चंद-गहण
चंदमा

सूय पृथ्वी

पथ्ृ वी की छाया चंद मा पर
सूय-ग्रहण: सूय – चंद्रमा – पृथ्वी। चंद्र-ग्रहण: सूय – पृथ्वी – चंद्रमा। दोन म बीच वाला पड छाया डालता है।

यही क्रम क्य : सूय-ग्रहण म हमसे सूय छपता है, अतः चंद्रमा को सूय और हमारे बीच होना ही पड़ेगा। चंद्र-ग्रहण
म चंद्रमा काला पड़ता है, अतः पृथ्वी को सूय और चंद्रमा के बीच आकर उस प्रकाश को रोकना पड़ेगा जो चंद्रमा को
प्रका शत करता।

प्र.9 चंद्रमा सूय क तुलना म बहुत छोटा है फर भी पूण सूय-ग्रहण के समय यह हमारी दृ ष्ट से सूय को पूरी तरह से
ओझल कर दे ता है। ऐसा क्य संभव होता है?

क्य क ढकने के लए वास्त वक आमाप नह , ब ल्क आभासी आमाप महत्वपूण होता है — अथात वह आमाप जो आँख को दखाई
दे ता है। आभासी आमाप वास्त वक आमाप और दूरी दोन पर नभर करता है।
चंद्रमा सूय से बहुत छोटा है, परंतु हमसे बहुत अ धक नकट भी है। दोन प्रभाव लगभग पूरी तरह एक-दूसरे को संतु लत कर दे ते ह,
इस लए आकाश म चंद्रमा और सूय लगभग एक जैसे आमाप के दखते ह। यही कारण है क चंद्रमा का पटल सूय के पटल को पूरी
तरह ढक सकता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

सूय चंद मा से लगभग 400 गुन ा चौड़ ा

सूय हमसे चंद मा की अपेक्षा लगभग 400 गुन ा दू र

आभासी आमाप ∝ आमाप ÷ दू री → दोनों अनुपात लगभग बराबर िनकलते है ं

क्रयाकलाप 12.4 ही इसका प्रमाण है: आपका अँगूठा मात्र लगभग 2 cm चौड़ा है और मत्र का सर लगभग 16
cm, फर भी अँगूठा 5 मीटर दूर के सर को पूरी तरह ढक लेता है — क्य क अँगूठा आँख से केवल लगभग 60
cm दूर है। चंद्रमा वही कर रहा है जो आपका अँगूठा करता है।

क्या आप जानते ह? बुध और शुक्र चंद्रमा से बहुत बड़े ह पर बहुत अ धक दूर ह, अतः उनका आभासी आमाप
अत्यंत छोटा होता है। शुक्र सूय के सामने से गुजरे तो वह केवल एक काला बदु दखता है — ग्रहण कभी नह ।

प्र.10 ऑस् े लया म भारतीय क्रकेट ट म के मैच प्राय: दसंबर म होते ह। अपनी इस यात्रा के लए उन्ह सरद के कपड़े
ले जाने चा हए या गरमी के।

उन्ह गरमी के कपड़े ले जाने चा हए। दसंबर म ऑस् े लया म ग्रीष्म ऋतु होती है, जब क भारत म उस समय शीत ऋतु होती है।

दसंबर म भारत (उत्तरी गोलाध) ऑस् े लया (द क्षणी गोलाध)

उस गोलाध का झुक ाव सूय से परे की ओर सूय की ओर

सूय का पकाश कम तीव, पितिदन 12 घंटे से कम अिधक तीव, पितिदन 12 घंटे से अिधक

ऋतु शीत ऋतु ग ीष्म ऋतु

ऐसा क्य होता है: पृथ्वी वष भर अपने अक्ष का झुकाव एक ही दशा म बनाए रखती है। दसंबर म द क्षणी गोलाध
सूय क ओर झुका होता है, अतः ऑस् े लया को अ धक तीव्र प्रकाश अ धक समय तक मलता है — ग्रीष्म ऋतु। छह
माह बाद, जून म, स्थ त ठ क उलट जाती है।

क्रकेट से जाँ चए: मेलबन का प्र सद्ध बॉ क्संग डे टे स्ट 26 दसंबर को आरंभ होता है — ऑस् े लयाई ग्रीष्म के
मध्य म। ऊनी कपड़े नह , हल्के सूती कपड़े, टोपी और सनस्क्र न चा हए।

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प्र.11 जब चंद्र-ग्रहण होता है तो इसे पृथ्वी के एक बड़े भाग से दे खा जा सकता है कतु पूण सूय-ग्रहण केवल पृथ्वी के
एक छोटे भाग से ही दे खा जा सकता है। आपके वचार म ऐसा क्य होता है?

इसका कारण दोन स्थ तय म छाया के आमाप म और इस बात म है क छाया के भीतर कसे आना पड़ता है।

सूय-ग्रहण। छोटा चंद्रमा एक पतली छाया डालता है और उसक छाया का सरा पृथ्वी क सतह पर केवल एक छोटा-सा धब्बा
बनाता है। पूण ग्रहण केवल उसी धब्बे म खड़े प्रेक्षक को दखता है। उसके चार ओर, जहाँ सूय का कुछ भाग ही ढका होता है,
आं शक ग्रहण दखाई दे ता है।
चंद्र-ग्रहण। कह बड़ी पृथ्वी एक चौड़ी छाया डालती है और पूरा चंद्रमा उसके भीतर समा जाता है। ग्रहणग्रस्त चंद्रमा तब पृथ्वी
के रात वाले भाग म प्रत्येक व्य क्त को — अथात लगभग आधी पृथ्वी को — एक साथ दखता है।

सूय-गहण — बड़ी पृथ्वी पर छाया का छोटा धब्बा
चंद मा

पथ्ृ वी

पूण गहण केवल इसी छोटे क्षेत्र में

चंद-गहण — बड़ी छाया के भीतर छोटा चंदमा
चंद मा

पथ्ृ वी

रात वाले पूरे भाग से देखा जा सकता है
छोटा पड बड़े पड पर छाया डाले तो पूणता का क्षेत्र छोटा होता है; बड़ा पड छोटे पड पर छाया डाले तो वह पूरा उसम समा जाता है।

"कुछ ही मनट" का एक और कारण: पृथ्वी के घूणन और चंद्रमा क अपनी कक्षा म ग त के कारण चंद्रमा क
छाया पृथ्वी क सतह पर लगातार खसकती रहती है। इस लए भाग्यशाली क्षेत्र म भी पूण ग्रहण कुछ ही मनट का
होता है — जब क पूण चंद्र-ग्रहण एक घंटे या उससे भी अ धक चल सकता है, क्य क चंद्रमा को पृथ्वी क चौड़ी
छाया पार करने म इतना समय लगता है।

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प्र.12 व्याख्या क जए क य द पृथ्वी का घूणन अक्ष इसके प रक्रमण तल के सापेक्ष झुका हुआ ना होता तो ऋतुओं पर
इसका क्या प्रभाव होता?

तब ऋतुए ँ होती ही नह । पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर वष भर एक जैसा मौसम रहता और प्रत्येक दन वषुव दवस जैसा होता।
अक्ष के अ भलंबवत होने पर दन-रात क सीमा सदै व दोन ुव से होकर गुजरती। अतः —

वष के प्रत्येक दन, प्रत्येक ान पर दन और रात 12–12 घंटे के होते। न ग्रीष्म के लंबे दन होते, न शीत के छोटे ।
कोई भी गोलाध कभी सूय क ओर नह झुकता, अतः कसी भी स्थान पर सूय के प्रकाश क तीव्रता वष भर एक जैसी रहती।
वषुवत रेखा के पास सदै व गरमी, मध्य अक्षांश म सदै व सुहावना और ुवीय प्रदे श म सदै व कड़ाके क ठं ड रहती — परंतु इनम
कभी प रवतन नह होता।
न उत्तर-अयनांत होता, न द क्षण-अयनांत, न छह माह का ुवीय दन और न छह माह क ुवीय रात।

झुकाव ही कारण क्य है: झुकाव एक साथ दो काम करता है। यह सूय क करण को उस गोलाध पर अ धक सीधी
बना दे ता है जो सूय क ओर झुका है, जससे करण क समान मात्रा छोटे क्षेत्र पर सांद्र हो जाती है; और यह उस
गोलाध का आधे से अ धक भाग प्रका शत भाग म रखता है, जससे दन लंबा हो जाता है। झुकाव हटा द जए तो
दोन प्रभाव एक साथ समाप्त हो जाते ह — और उनके साथ ऋतुएँ भी।

सामान्य भूल: ऐसी स्थ त म भी पृथ्वी सूय क प रक्रमा करती रहती और जनवरी म सूय के कुछ नकट होती। इससे
ऋतुएँ फर भी नह लौटत , क्य क दूरी का यह अंतर बहुत ही कम है — यही कारण पृष्ठ 178 के गहन चतन बॉक्स
म भी दया गया है।

अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — पृष्ठ 186
अंतर वषयक प रयोजनाएँ

अन्वे ष णात्मक प रयोजनाएँ

प्र.1 क्रयाकलाप 12.2 को दोहराइए कतु टॉच के ान पर वद्युत लप ले ली जए। इसके प ात ग्लोब को इसका
झुकाव बनाए रखते हुए लप के प रत: ख चे गए एक वृत्त पर व भन्न तय म र खए। (i) व भन्न तय म
ग्लोब के उत्तरी और द क्षणी गोलाध का कतना- कतना भाग प्रका शत होता है? यह अवलोकन अ भले खत
क जए। (ii) ग्लोब को घुमाइए और इसके व भन्न भाग पर दन और रात क अव ध अ भले खत क जए। (iii)
वृत्त पर ग्लोब क व भन्न तय के लए चरण (ख) को दोहराइए।

यह प रयोजना पूरे अध्याय को एक मेज़ पर बने प्र तरूप म बदल दे ती है। एक नयम कभी न तो ड़ए: ग्लोब का अक्ष वृत्त क प्रत्येक
स्थ त पर एक ही दशा म — कमरे के एक ही कोने क ओर — झुका रहना चा हए। स्टड को घुमाकर लप क ओर मत क जए।
व्यव ा कैसे कर

1. अँधेरे कमरे म मेज़ के बीच बना शेड का एक व ुत लप र खए। यही सूय है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय
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2. लप के चार ओर लगभग 60–75 cm त्रज्या का वृत्त ख चए और उस पर चार स्थान अं कत क जए — जून, सतंबर,
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दसंबर, माच।
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3. ग्लोब को झुकाव एक ही दशा म बनाए रखते हुए वृत्त पर घुमाइए और प्रत्येक चह्न पर रु कए।

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(i) प्रत्येक गोलाध का कतना भाग प्रका शत होता है

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त उत्तरी गोलाध द क्षणी गोलाध ुव

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जून आधे से अिधक भाग पकािशत
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आधे से कम भाग पकािशत उत्तरी ुव पूणतः प्रका शत; द क्षणी ुव पूणतः अंधकार म
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ठीकgआधा
िसतंबर ठीक आधा
a प्रकाश-अंधकार क सीमा दोन ुव से गुजरती है

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िदसंबर आधे से कम भाग पकािशत आधे से अिधक भाग पकािशत उत्तरी ुव पूणतः अंधकार म; द क्षणी ुव पूणतः प्रका शत

प्रकाश-अंधकार क सीमा दोनem
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ठीक आधा ठीक आधा ुव से गुजरती है

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माच

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a s em(iii) दन-रात क अव ध — प्रत्येक स्थ त पर ग्लोब को धीरे-धीरे घुमाइए और दल्ली, वषुवत रेखा तथा ऑस् े लया पर
gलगेl स्टकर को दे खए। अनुमान लगाइए क प्रत्येक चक्कर का कतना भाग प्रत्येक स्टकर प्रकाश म बताता है।
(ii) और

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ग्लोब पर ान जून क त माच / सतंबर दसंबर क त

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िदल्ली (उत्तरी गोलाध)
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िदन रात से लंबा िदन ≈ रात िदन रात से छोटा
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िवषुवत रे खा पर िदन ≈ रात िदन ≈ रात िदन ≈ रात

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se चौबीसों घंटे रात
ऑस्टेिलया (दिक्षणी गोलाध) िदन रात से छोटा िदन ≈ रात िदन रात से लंबा

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m .co चौबीसों घंटे िदन ठीक सीमा पर
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उत्तरी धु व

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यह प्र तरूप क्या सद्ध करता है: लप कभी नह बदला और दूरी भी नह बदली — बदला केवल लप के सापेक्ष

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झुकाव क दशा। इतने से ही लंबे दन, छोटे दन और चौबीस घंटे का सूय बन गए। यह इस बात का सबसे सशक्त
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प्रमाण है क ऋतुएँ झुकाव से बनती ह, दूरी से.cनह a g
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सुझाव: बना शेड का लप ली जए ता क प्रकाश सब दशाओं म फैले, और कमरा वास्तव म अँधेरा र खए। प्रत्येक
स्थ त पर ग्लोब का छाया चत्र ली जए — चार चत्र साथ रखने पर कक्षा के लए उत्तम चाट बन जाता है।
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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 पृथ्वी सूय के चार ओर एक अंडाकार पथ पर गमन करती है। एक ही कद्र को लेकर दो वृत बनाइए जनम से एक
क त्रज्या 14.7 सट मीटर हो और दूसरे क त्रज्या 15.2 सट मीटर हो। य द 1 सट मीटर एक करोड़ कलोमीटर
दूरी के संगत हो तो ये दो वृत्त सूय से पृथ्वी क नकटतम और अ धकतम दूरी नरू पत करते ह, य द कद्र के ान
पर सूय हो तो पृथ्वी क कक्षा क आकृ त दशाइए। ध्यान द जए क अ धकतम और न्यूनतम दू रय का यह अंतर
कतना न्यून है?

यह रेखा चत्र A4 आकार के पूरे पृष्ठ पर परकार से बनाइए और दोन वृत्त का कद्र एक ही र खए।

पैमाना: 1 cm = 1 करोड़ km

िनकटतम दू री = 14.7 cm × 1 करोड़ = 14.7 करोड़ km

अिधकतम दू री = 15.2 cm × 1 करोड़ = 15.2 करोड़ km

कागज़ पर अंत र = 15.2 − 14.7 = 0.5 cm (5 mm)

वास्तिवक अंत र = 15.2 − 14.7 = 0.5 करोड़ km

अनुपात में = 0.5 ÷ 15.2 ≈ 0.033 = लगभग 3%
आप क्या दे खगे: दोन वृत्त इतने पास-पास होते ह क एक कदम दूर से वे एक ही मोट रेखा जैसे दखते ह। पृथ्वी क कक्षा इन्ह
दोन वृत्त के बीच क पतली प म समा जाती है — अथात वह लगभग वृत्ताकार है। फर भी वह 5 mm का अंतराल पचास लाख
कलोमीटर को दशाता है।

यह रेखा चत्र क्या सद्ध करता है: पृथ्वी क कक्षा लगभग वृत्त ही है। पुस्तक म "अंडाकार" कक्षा जान-बूझकर
बढ़ा-चढ़ाकर बनाई जाती है और इससे व ाथ यह भूल कर बैठते ह क ऋतुएँ बदलती दूरी से बनती ह। 3% का
अंतर ग्रीष्म और शीत नह बना सकता — यह काम अक्ष का झुकाव करता है।

अपने पोस्टर म यह भी जो ड़ए: पृथ्वी जनवरी म सूय के सबसे नकट होती है — उत्तर भारत का सबसे ठं डा
महीना। दोन वृत्त के नीचे यह वाक्य लख द जए; बहस वह समाप्त हो जाएगी।

प्र.3 मान ली जए क पृथ्वी का घूणन अक्ष का झुकाव बढ़ जाता है तो क्या इससे ऋतुए ँ अ धक भीषण होने लगगी?
क्या यूरेनस के घूणन अक्ष का झुकाव पृथ्वी से अ धक है और वहाँ क ऋतुओं के वषय म पता लगाइए। इस
वषय पर कसी समाचार-पत्र अथवा अपने वद्यालय क प त्रका के लए एक रोचक लेख ल खए।

हाँ — झुकाव बढ़ने पर ऋतुए ँ कह अ धक भीषण हो जाएँगी, और यूरेनस इसका शानदार प्रमाण है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

पृथ्वी यूरेनस

अक्ष का झुक ाव लगभग 23.5° लगभग 98° — यह लगभग ले टा हुआ लुढ़कता है

एक पिरक्रमण का समय लगभग 1 वष लगभग 84 पथ्ृ वी-वष

एक ऋतु की अविध लगभग 3 माह लगभग 21 पथ्ृ वी-वष

धु वों पर छह माह िदन, छह माह रात लगभग 42 वष सतत िदन, िफर लगभग 42 वष रात

नमूना लेख — इसे अपने शब्द म ढाल ली जए:

नमूना उत्तर:
वह ग्रह जो लेटकर घूमता है
पृथ्वी पर एक ऋतु लगभग तीन महीने चलती है, और हम जून क गरमी या जनवरी क ठं ड पर बड़बड़ाते रहते ह।
दोष झुकाव का है — हमारा ग्रह अपने अक्ष पर लगभग 23.5° झुका है, इस लए दोन गोलाध बारी-बारी से सूय का
सामना करते ह।
अब कल्पना क जए क यह अक्ष लगभग पूरा लुढ़का दया जाए। यही यूरेनस है। इसका अक्ष लगभग 98° झुका है,
अथात यह लट्टू क तरह नह , ब ल्क गद क तरह सूय के चार ओर लुढ़कता है। अपनी कक्षा के एक भाग म इसका
उत्तरी ुव लगभग सीधे सूय क ओर होता है और आधी प रक्रमा बाद द क्षणी ुव।
यूरेनस को एक प रक्रमा म लगभग 84 पृथ्वी-वष लगते ह, अतः वहाँ एक ऋतु लगभग 21 वष खचती है। इसके
ुव पर लगभग 42 वष तक सूय अस्त ही नह होता — और फर अगले लगभग 42 वष तक उ दत ही नह होता।
यूरेनस के उत्तरी ुव पर जन्मा व्य क्त अधेड़ हो जाएगा तब कह एक सूय दय दे ख पाएगा।
हमारे लए सीख सरल है। ऋतुएँ इस बात से नह बनत क ग्रह सूय से कतना नकट है; वे इस बात से बनती ह क
वह कतना झुका है। थोड़ा झुकाइए तो वसंत और हेमंत मलगे। पूरा लुढ़का द जए तो अनंत ग्रीष्म और अनंत
रा त्रय क दु नया।

अ धक झुकाव से ऋतुए ँ भीषण क्य : झुकाव बढ़ने पर ग्रीष्म का सूय और ऊँचा चढ़ता है (अथात करण और छोटे
क्षेत्र पर सांद्र होती ह) तथा ग्रीष्म का दन और लंबा हो जाता है; दूसरी ओर शीत का सूय और नीचा रहता है और दन
और छोटा। दोन प्रभाव साथ-साथ बढ़ते ह, इस लए ग्रीष्म और अ धक तपती है तथा शीत और अ धक कड़ी हो
जाती है।

अध्याय — एक नज़र म
पृथ्वी अपने घूणन-अक्ष पर — उत्तरी ुव और द क्षणी ुव से गुजरती एक काल्प नक रेखा पर — लगभग 24 घंटे म एक
घूणन पूरा करती है। उत्तरी ुव के ऊपर से दे खने पर यह घूणन वामावत अथात प म से पूव क ओर होता है।
क्य क हम आकाश को एक घूमती हुई पृथ्वी से दे खते ह, इस लए सूय, चंद्रमा और तारे केवल ग तमान प्रतीत होते ह। ये पूव म
उ दत और प म म अस्त होते दखाई दे ते ह — ठ क वैसे ही जैसे चक्र य हडोले पर बैठने पर वृक्ष वपरीत दशा म घूमते
प्रतीत होते ह।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

पृथ्वी के घूणन से दन-रात का चक्र बनता है — सूय के सामने वाले आधे भाग म दन और दूसरे आधे भाग म रात। पृथ्वी का
अक्ष ुव तारे के बहुत नकट इं गत करता है, अतः वह लगभग स्थर प्रतीत होता है और सप्त ष जैसे सभी तारे उसके चार
ओर घूमते दखाई दे ते ह।
पृथ्वी लगभग वृत्ताकार कक्षा म सूय क प रक्रमा भी करती है और एक प रक्रमण लगभग 365 दन और 6 घंटे म पूरा करती
है। इसी कारण सूयास्त के बाद दखाई दे ने वाले तारे वष भर बदलते रहते ह।
ऋतु-प रवतन पृथ्वी के घूणन अक्ष के झुकाव तथा इसक गोल आकृ त के कारण होता है — इस लए नह क पृथ्वी
सूय के पास आ जाती है। वास्तव म पृथ्वी जनवरी म सूय के सबसे नकट होती है। झुकाव के कारण एक गोलाध को अ धक
तीव्र सूय-प्रकाश अ धक समय तक मलता है और वहाँ ग्रीष्म ऋतु होती है।
उत्तरी गोलाध म सबसे लंबा दन लगभग 21 जून (उत्तर-अयनांत) और सबसे छोटा दन लगभग 22 दसंबर (द क्षण-अयनांत)
को होता है; 21 माच और 23 सतंबर के आस-पास दन और रात 12–12 घंटे के होते ह (वसंत वषुव एवं हेमंत वषुव)।
द क्षणी गोलाध म ऋतुएँ इसके वपरीत होती ह।
सूय-ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूय और पृथ्वी के बीच आ जाता है और उसक छाया पृथ्वी पर पड़ती है। एक छोटे क्षेत्र म
यह पूण तथा उसके चार ओर आं शक होता है। सूय-ग्रहण को कभी भी सीधे नह दे खना चा हए — धूप का चश्मा, नेत्री
दूरबीन या दूरदश भी सुर क्षत नह ह।
चंद्र-ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूय और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी क छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूण चंद्र-ग्रहण
म चंद्रमा गहरे लाल रंग का दखाई दे ता है। चंद्र-ग्रहण को खुली आँख से सुर क्षत रूप से दे खा जा सकता है।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूय AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

पद अथ अध्याय से उदाहरण / ववरण ध्यान रखने योग्य बात

घूणन िकसी वस्तु की ऐसी गित िजसमें उसके सभी लट्टू, छत का पंखा, उँ गली पर घूमती यह काल्प नक रेखा घूणन-अक्ष
भाग उससे ग ज
ु रती एक काल्पिनक रे खा के गद — और पृथ्वी, लगभग 24 घंटे म कहलाती है
ृ ाकार पथों पर घूम ते है ं
पिरत: वत्त

पृथ्वी का उत्तरी धु व और दिक्षणी धु व से ग ज
ु रती वह रे खा उत्तरी ुव के ऊपर से दे खने पर पृथ्वी यह कक्षा के सापेक्ष झुका हुआ है
घूणन अक्ष िजस पर पथ्ृ वी घूम ती है वामावत, प श्चम से पूव क ओर घूमती और ुव तारे के बहुत नकट इं गत
है करता है

प रक्रमण िकसी वस्तु की िकसी अन्य वस्तु के चारों ओर पृथ्वी क सूय के चार ओर लगभग घूणन अपने अक्ष पर घूमना है,
की गित 365 दन और 6 घंटे म; चंद्रमा क प रक्रमण कसी अन्य पड के चार
पृथ्वी के चार ओर ओर घूमना

कक्षा वह पथ िजस पर कोई िपंड िकसी अन्य िपंड के ऊपर से दे खने पर सूय के प रत: पृथ्वी पुस्तक म यह द घवृत्ताकार केवल
पिरत: गमन करता है क कक्षा लगभग वृत्ताकार है इस लए दखती है क्य क वह चत्र
पा दृश्य होता है

दन और पथ्ृ वी के पकािशत आधे भाग में िदन, अंध कार अव स्थ त के प्रकाश म आते ही ये घूणन के कारण होते ह —
रात वाले आधे भाग में रात सूय दय, अंधेरे म जाते ही सूयास्त प रक्रमण के कारण नह
( चत्र 12.5)

ुव तारा उत्तरी गोलाध में पथ्ृ वी के अक्ष की िदशा में सप्त ष रात भर इसके चार ओर अक्ष इसी क ओर इं गत करता है,
िस्थत तारा घूमता प्रतीत होता है ( चत्र 12.7) इस लए यह लगभग स्थर दखता है

ऋतुएँ ग ीष्म, शीत आिद का वािषक चक्र जून — उत्तरी गोलाध सूय क ओर कारण अक्ष का झुकाव और पृथ्वी क
झुका, ग्रीष्म ऋतु; दसंबर — शीत गोल आकृ त है
ऋतु

अयनांत वह िदन जब िदन की अविध सबसे लंबी अथवा उत्तरी गोलाध म लगभग 21 जून 21 जून को उत्तरी ुव पर चौबीस
सबसे छोटी होती है (उत्तर-अयनांत) और 22 दसंबर घंटे सूय का प्रकाश रहता है
(द क्षण-अयनांत)

वषुव वह िदन जब िदन की अविध लगभग 12 घंटे उत्तरी गोलाध म लगभग 21 माच वषुवत रेखा पर वष के प्रत्येक दन
होती है (वसंत) और 23 सतंबर (हेमंत) लगभग 12 घंटे दन रहता है

आभासी आँख ारा दे खा गया िकसी वस्तु का आमाप 5 m दूर खड़े मत्र का पूरा सर अँगूठे यह वास्त वक आमाप और प्रेक्षक से
आमाप से ढका जा सकता है ( क्रयाकलाप दूरी — दोन पर नभर करता है
12.4)

सूय-ग्रहण चंद मा सूय और पथ्ृ वी के बीच आकर सूय के छोटे अंधकारमय क्षेत्र म पूण, उसके इसे कभी सीधे न दे ख — केवल
पकाश को हम तक पहच
ु ँ ने से रोक दे ता है चार ओर आं शक ( चत्र 12.13) प्र त बब अथवा प्रमा णत ग्रहण-चश्मे
का उपयोग कर

चंद्र-ग्रहण पथ्ृ वी सूय और चंद मा के बीच आ जाती है और पूण चंद्र-ग्रहण म चंद्रमा गहरे लाल रंग इसे खुली आँख से दे खना पूणतः
उसकी छाया चंद मा पर पड़ती है का दखता है ( चत्र 12.16) सुर क्षत है

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages39
Languagehindi
Updated19 Sep 2026