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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: भारत क भौगो लक व वधता
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
1 – 25 20 36 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 50 pages
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: भारत क भौगो लक व वधता
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता (पाठ्यपुस्तक समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, कक्षा 7, भाग 1)
के संपूण एनसीईआरट समाधान। यह अध्याय भारत एवं वश्व : भूभाग एवं उनके नवासी वषयवस्तु का पहला अध्याय है। यहाँ अध्याय का प्रत्येक प्रश्न
हल कया गया है — महत्वपूण प्रश्न, सभी दस आइए पता लगाएँ बॉक्स, पुनरावलोकन कर तथा इसे अनदे खा न कर के प्रश्न, पाठ म पूछे गए
मान चत्र-प्रश्न, आगे बढ़ने से पहले… तथा प्रश्न और क्रयाकलाप के सभी नौ प्रश्न।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1) (कक्षा 7) 1 – 25
खं ड प्रश्न
20 36
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 1
वषयवस्तु : भारत एवं वश्व — भूभाग एवं उनके नवासी
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 भारत क कुछ प्रमुख भौगो लक वशेषताएँ क्या ह?
क्षेत्रफल क दृ ष्ट से भारत वश्व का सातवाँ बड़ा दे श है और ए शया महा प का भाग है। सामान्यत: भारत को पाँच प्रमुख भाग म
वभा जत कया जाता है और इनम से प्रत्येक अपने आप म एक प्रमुख भौगो लक वशेषता है।
वशेषता स्थ त स्वरूप
हमालय पवत उत्तरी सीमा लगभग 2500 क.मी. लंबी प्राकृ तक प्राचीर; 8000 मीटर से ऊँची अनेक चो टयाँ; तीन
श्रृंखला श्रे णयाँ — हमा द्र, हमाचल और शवा लक। इन्ह के बीच शीत मरुस्थल ल ाख है।
गंगा के मैदान िहमालय के दिक्षण समतल और अत्यंत उपजाऊ; सधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनक सहायक न दय से
(उत्तरी मैदान) में स चत। भारत क जनसंख्या का बड़ा भाग यह रहता है।
थार मरुस्थल उत्तर-पिश्चम राजस्थान, गुजरात, पंजाब और ह रयाणा म फैला वशाल शुष्क क्षेत्र। इसक पूव सीमा पर
प्राचीन अरावली पहा ड़याँ ह।
प्राय पीय पठार दे श का मध्य और त्रकोणीय प्राचीन भूभाग, जसके दोन ओर प मी घाट और पूव घाट तथा बीच म
दिक्षण भाग दक्कन का पठार है।
तटरेखाएँ और दिक्षण में चारों 7500 क.मी. से भी लंबी तटरेखा, डेल्टा और लैगून; अरब सागर म लक्ष प तथा बंगाल
पसमूह ओर क खाड़ी म अंडमान और नकोबार पसमूह।
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता AglaSem · NCERT Solutions
इनके साथ तीन जलरा शयाँ भी ह — प म म अरब सागर, पूव म बंगाल क खाड़ी और द क्षण म हद महासागर। सुदूर पूव त्तर
म मेघालय पठार क गारो, खासी और जयं तया पहा ड़याँ ह, जो वश्व के सवा धक वषा वाले क्षेत्र म से एक ह।
ऐसा क्य : ये वशेषताएँ संयोग नह ह। हमालय और मैदान — दोन इस लए ह क भारतीय भूभाग उत्तर क ओर
बढ़कर यूरे शया से टकराया; प्राय प उसी भूभाग क बहुत पुरानी च ानी संरचना है; और तट तथा प वहाँ ह जहाँ
यह भूभाग महासागर से मलता है।
प्र.2 भारत क भौगो लक व वधताएँ हमारे जीवन को कस प्रकार प्रभा वत करती ह?
ये लगभग सब कुछ तय करती ह — लोग क्या उगाते और खाते ह, कैसे घर बनाते ह, क्या काम करते ह, कैसे यात्रा करते ह और
कौन-से त्योहार मनाते ह।
क्षेत्र वहाँ के जीवन पर प्रभाव
हमालय ऊँचाई पर बिस्तयाँ बहुत कम; याक से दू ध , मांस , ऊन, गोबर और पिरवहन; पत्थर तथा लकड़ी से बने काठ-कु नी घर जो गम
रहते है ं और हल्के भूकं प सह ले ते है;ं मठ और मंिदर तीथयाित्रयों को आकिषत करते है;ं पवतीय पयटन।
गंगा के मैदान समतल, उपजाऊ और जल से भरपूर — इसिलए सघन कृ िष, बहुफ सलीय खेती, अिधक जनसंख्या, बड़े नगर तथा िवस्ततृ
सड़क और रे ल तंत्र । निदयाँ सह ािब्दयों से यात्रा और व्यापार का माग रही है।
ं
थार मरुस्थल जल का अभाव — इसिलए बतन रे त से रगड़कर साफ िकए जाते है,ं धोने का जल पुनः उपयोग होता है और टांक ा तथा कुं ड
वष जल संिचत करते है।
ं खान-पान, वेशभूषा और िदनचय िदन की गम तथा रात की ठं ड के अनुकू ल है;ं ऊँट यात्रा और
व्यापार का आधार है।
प्राय पीय खिनज, वन और उपजाऊ भूिम — खनन, उ ोग और कृ िष। जलपपातों से जलिव तु और िसंचाई। संथाल, गोंड, बैग ा, भील
पठार और कोरकु जैसे आिदवासी समुद ाय पकृ ित से घिनष्ठ रूप से जुड़े जीवन जीते है।
ं
तट और प मत्स्यन, पत्तन और समुद ी व्यापार; डेल्टा भारत की सव िधक उपजाऊ भूिम दे ते है;ं पिश्चमी तट पर िस्थत मुंबई भारत का िवत्तीय
कें द है।
यह व वधता भारत को सुदृढ़ भी बनाती है। य द कसी एक क्षेत्र म मौसम खराब हो, तो दूसरे क्षेत्र से अन्न, ख नज और रोज़गार
मलते रहते ह।
क्या आप जानते ह? इसी व वधता के कारण भारत म भोजन, भाषाओं, गृह-शै लय , नृत्य और त्योहार क इतनी
वशाल व वधता है — ल ाख के लोसर और हे मस महोत्सव, थार क सीमा पर पुष्कर मेला तथा खासी लोग का
शाद सुक मन सएम, ये तीन इसी अध्याय से ह।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 2
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पुस्तक के अंत म दया गया भारत का भौ तक मान चत्र
आइए पता लगाएँ
प्र.1 इस पुस्तक के अंत म दए गए भारत के मान चत्र का अवलोकन क जए। आपको इसम क्या-क्या दखाई दे रहा
है?
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संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
सबसे पहले यही दखाई दे ता है क भारत कसी एक प्रकार का भूभाग नह , अनेक प्रकार के भूभाग का दे श है। मान चत्र को उत्तर
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से द क्षण क ओर प ढ़ए —
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संपूण उत्तर म भूरे और सफ़ेद रंग क एक लंबी प — हमालय, जो जम्मू-कश्मीर तथा ल ाख से अरुणाचल
धनुषाकार फैलाoहै।
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a s emपूव-प म म फैली चौड़ी हरी प — समतल उत्तरी (गंगा के) मैदान, जनम नीली मोट रेखाएँ ह : सधु, गंगा,
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उसके नीचे
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प म म एक पीला क्षेत्र — थार मरुस्थल — और उसक पूव सीमा पर अरावली क पतली श्रृंखला।
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मध्य और द क्षण म हल्के भूरे रंग का बड़ा त्रकोणीय भूभाग — प्राय पीय पठार, जसके दोन ओर प मी घाट और पूव
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घाट ह।
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तीन ओर नीला रंग — अरब सागर, बंगाल क खाड़ी और हद महासागर — तथा दो पसमूह : लक्ष प एवं अंडमान और
नकोबार।
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संकेत: उँ गली से तटरेखा पर च लए और ग नए क कतने राज्य समुद्र से लगे ह। आपको नौ तट य राज्य तथा कुछ
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कद्रशा सत प्रदे श मलगे।
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प्र.2 क्या आपको पछली कक्षा म पढ़ाई गई व भन्न प्रकार क भू-आकृ तयाँ — पवत, पठार और मैदान स्मरण ह?
आप मान चत्र पर कौन-कौन सी भू-आकृ तय को पहचान सकते ह?
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कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
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बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
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संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
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नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
तीन , और उनके अ त रक्त कुछ और भी —
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भू-आकृ त मान चत्र पर कहाँ
पवत उत्तर में िहमालय; दोनों तटों के साथ पिश्चमी घाट और पूव घाट; उत्तर-पिश्चम में अरावली; पूव त्तर की पहािड़याँ
मैदान िसंध ,ु गंग ा और बह्मपुत्र के उत्तरी मैद ान; सँक रा पिश्चमी तटीय मैद ान और चौड़ा पूव तटीय मैद ान
पठार पाय ीपीय पठार, िजसमें दक्कन का पठार, छोटानागपुर क्षेत्र और मेघ ालय पठार सिम्मिलत है ं
मरुस्थल राजस्थान और िनकटवत राज्यों में थार म रुस्थल
प अरब सागर में ल क्ष ीप; बंग ाल की खाड़ी में अंडमान और िनकोबार ीपसमूह
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प्र.3 मान चत्र पर अलग-अलग रंग का क्या तात्पय है? (संकेत— मान चत्र पर अं कत संकेत सूची प्रत्येक क्षेत्र क
ऊँचाई को दशाती है।)
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संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
भौ तक मान चत्र पर रंग केवल सजावट नह होते — प्रत्येक रंग समुद्र तल से ऊँचाई (उच्चावच) क एक न त सीमा दशाता है।
कौन-सा रंग कतनी ऊँचाई का है, यह संकेत-सूची बताती है।
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रंग लगभग क्या दशाता है भारत म कहाँ
गहरा हरा सबसे नीची भूिम, समुद तल के िनकट उत्तरी मैदान, तट य मैदान, डेल्टा
हल्का हरा / हल्का पीला कु छ ऊँची भूिम, कु छ सौ मीटर तक मैदान के कनारे, थार
हल्का भूरा और ऊँची भूिम, सै क ड़ों मीटर दक्कन तथा अन्य पठार
गहरा भूरा पवत, हज़ारों मीटर हमालय, ऊँचे प मी घाट
सफ़ेद सव िधक ऊँचाई, वष भर िहमाच्छािदत वृहद हमालय
नीला जल — गहरा नीला अथ त अिधक गहरा जल सागर, महासागर, बड़ी न दयाँ और झील
ऐसा क्य : समतल कागज़ पर ऊँचाई जैसी तीसरी वमा को दखाने का सबसे सरल उपाय रंग ही है। एक दृ ष्ट म
पता चल जाता है क उत्तर ऊँचा है और दे श का मध्य भाग एक उठा हुआ समतल भूभाग है।
स्वयं जाँ चए: ऊँचाई क सीमाएँ हर मान चत्र म थोड़ी भन्न होती ह, इस लए उत्तर लखने से पहले अपनी पुस्तक के
मान चत्र पर छपी संकेत-सूची अवश्य प ढ़ए।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 3
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अक्षांश, दे शांतर और भारत क प्राकृ तक सीमाएँ
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a s emआपको अक्षांश और दे शांतर रेखाओं पर अपना पाठ याद है? मान चत्र को दे खए। क्या आप बता सकते ह
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क भारत लगभग कन अक्षांश और दे शांतर रेखाओं के मध्य स्थत है?
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नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा
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पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
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भौ तक मान चत्र के कनार पर छपी रेखाओं को पढ़ने पर भारत का मुख्य भूभाग लगभग इस प्रकार स्थत मलता है —
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता AglaSem · NCERT Solutions
ं : लगभग 8°उ. से 37°उ.
अक्षाश
दे शांत र : लगभग 68°पू. से 97°पू.
अथात संपूण भारत भूमध्य रेखा के उत्तर तथा प्रधान मध्याह्न रेखा के पूव म है — उत्तरी और पूव गोलाध म। पसमूह को भी
जोड़ ल तो दे श नकोबार म लगभग 6°उ. तक पहुँच जाता है।
इसका महत्व: कक रेखा (23½°उ.) भारत के लगभग मध्य से होकर गुजरती है। इसी लए द क्षण भारत वष भर
उष्ण रहता है, जब क उत्तर भारत म ठं डी सद पड़ती है — यही एक बड़ा कारण है क यहाँ इतनी भन्न फसल, वन
और जीवन-शै लयाँ मलती ह।
संकेत: अक्षांश मान चत्र के कनारे (उत्तर-द क्षण स्थ त) पर और दे शांतर ऊपर-नीचे (पूव-प म स्थ त) पढ़े जाते
ह। प्रश्न म केवल अनुमा नत उत्तर अपे क्षत है, इस लए नकटतम छपी रेखा का मान ले ली जए।
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प्र.2 भारत के भौ तक मान चत्र पर उपयुक्त वशेषताओं क पहचान क जए।
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िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
इस बॉक्स से ठ क पहले जन वशेषताओं का उल्लेख है, वे भारत क चार प्राकृ तक सीमाएँ ह। भौ तक मान चत्र पर —
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता AglaSem · NCERT Solutions
वशेषता कहाँ दे खए भू मका
हमालय पवत श्रृंखला संपूण उत्तरी िकनारा, भूरे -सफ़े द रंग का चौड़ा चाप उत्तर म प्राकृ तक प्राचीर
थार मरुस्थल पिश्चम में पीला क्षेत्र , मुख्यतः राजस्थान में सागर के साथ प मी सीमा
अरब सागर पाय ीप के पिश्चम में नीला भाग प मी जल-सीमा
हद महासागर दिक्षण में, क न्याकु मारी के नीचे द क्षणी सीमा
बंगाल क खाड़ी पाय ीप के पूव में नीला भाग पूव सीमा
अध्याय म बताए गए पड़ोसी दे श भी खो जए — उत्तर-प म म पा कस्तान, हमालय के साथ नेपाल, भूटान और चीन, पूव म
बांग्लादे श तथा म्यांमार, और द क्षण म सँकरे समुद्र के पार श्रीलंका।
ऐसा क्य : पवत, मरुस्थल और सागर — तीन आवागमन को क ठन बनाते ह। इन्ह ने मलकर भारत को शेष
ए शया से अलग कया और इसक अपनी जलवायु, संस्कृ त तथा इ तहास को आकार दया — ठ क वही बात जो
अध्याय के आरंभ म श्री अर वद के कथन म कही गई है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 3
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता AglaSem · NCERT Solutions
हमालय पवत श्रृंखला
प्र.1 मान चत्र पर हमालय पवत श्रृंखला क लंबाई को दे खए। यह एक वशाल प्राकृ तक प्राचीर के समान प्रतीत होती
है। क्या आप मान चत्र क संकेत-सूची के माध्यम से हमालय के व भन्न स्थान क ऊँचाई का अनुमान लगा
सकते ह?
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उ
35° N
ल ाख चीन
अफ़ग़ग़ाािन
अफ़ िन स्तान
तान
य
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30° N
पािकस्तान
पािक तान
नेनेपपाल
ाल कं चनजंगा
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भूभूट
टान
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थार म रुस्थल
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गारो पहािड़याँ
िाहप
जयंितया पहािड़याँ
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च ंबल ग ंग ा
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25° N
अ
कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
बांग्लादे
बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
ताप्ती
स त पुड़ा पव
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यां
नद
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20° N अरब सागर दक्कन का पठार
टाघ
गोद ावर
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बंगाल की खाड़ ी
टाघ ी म च
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15° N
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10° N अनाईमुड ी
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
ीलंककाा
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िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
मान चत्र पर यह श्रृंखला संपूण उत्तर म एक लंबे चाप के रूप म फैली है। चत्र 1.2 का शीषक इसक लंबाई बताता है — लगभग
2500 क.मी.
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता
a g l AglaSem · NCERT Solutions
द क्षण से उत्तर क ओर बढ़ने पर रंग बदलते जाते ह और संकेत-सूची उन्ह ऊँचाई म बदल दे ती है —
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em.
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श्रेणी मान चत्र पर रंग अनुमा नत ऊँचाई
m a
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शवा लक (बाह्य हमालय) हरे मैद ानों के ठीक ऊपर हल्का भूर ा कु छ सौ मीटर से लगभग 1500 मीटर
aहमाचल (लघु हमालय)
गहरा भूर ा लगभग 1500–4500 मीटर — पवतीय पयटन स्थलों की प ी
co m 4500 मीटर से ऊपर, चोिटयाँ 8000 मीटर से भी अिधक
हमा द्र (वृहद हमालय)
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सबसे गहरा भूर ा, िफर सफ़े द
m . ag
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a
यह प्राचीर जैसी क्य दखती है: उत्तर-द क्षण थोड़ी-सी दूरी म ही ऊँचाई बहुत तेज़ी से बढ़ती है। मैदान क लगभग
200 मीटर ऊँचाई से 8000 मीटर तक क चढ़ाई मात्र 200–300 क.मी. म हो जाती है — इसी लए मान चत्र पर
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तीन रंग-प याँ एक-दूसरे से सट हुई दखती ह।
em.
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a s emजाँ चए: सही आँकड़े आपक पुस्तक के मान चत्र पर छपी संकेत-सूची पर नभर करते ह, इस लए उत्तर
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स्वयं
a लखने से पहले उसे अवश्य प ढ़ए।
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पुनरावलोकन कर — पृष्ठ 4
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‘आठ हजारी’ चो टयाँ
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पु न रावलोकन कर
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c o m g l as
प्र.1 . क्या आप वश्व के सवा धक ऊँचाई वाले पवत का नाम बता सकते ह? a
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ag उत्तर
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माउंट एवरेस्ट — लगभग 8,849 मीटर ऊँचा, पृथ्वी का सव च्च पवत शखर। यह हमा द्र (वृहद हमालय) म नेपाल और चीन
m
ase
( तब्बत) क सीमा पर स्थत है।
agl
नेपाली म इसे सागरमाथा और तब्बती म चोमोलुंगमा कहा जाता है।
यह इसी बॉक्स म बताई गई ‘आठ हजारी’ चो टय म से एक है।
co m
.
भारत क सबसे ऊँची चोट कंचनजुंगा (लगभग 8,586 मीटर) है, जो स क्कम म है — वश्व क तीसरी सबसे ऊँची चोट और
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यह भी ‘आठ हजारी’ है।
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m क्या आप जानते ह? एवरेस्ट आज भी ऊँचा हो रहा है, क्य क भारतीय भूभाग आज भी यूरे शया को धकेल रहा है
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— प्र तवष लगभग पाँच मलीमीटर, जैसा आपने पृष्ठ 5 पर पढ़ा।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 6 lase
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हमालय क तीन श्रे णयाँ
आइए पता लगाएँ
प्र.1 क्या आप हमालय के व भन्न भाग म स्थत राज्य के नाम ात कर सकते ह? इस अभ्यास के लए भौ तक और
राजनी तक दोन मान चत्र क सहायता ली जए।
भौ तक मान चत्र (जो श्रे णयाँ दखाता है) और राजनी तक मान चत्र (जो राज्य क सीमाएँ दखाता है) को साथ रखकर दे खए।
प म से पूव क ओर —
हमालयी प के राज्य / कद्रशा सत कौन-सी श्रे णयाँ
प्रदे श
ल ाख और जम्मू-कश्मीर िहमािद तथा शीत मरुस्थल; जम्मू के दिक्षण में िशवािलक
हमाचल प्रदे श तीनों — िशवािलक, िहमाचल (िशमला) और िहमािद
उत्तराखंड तीनों — िशवािलक, िहमाचल (नैनीताल, मसूर ी) और िहमािद (गंग ोत्री िहमनद, गोमुख)
स क्कम मुख्यतः िहमािद — कं चनजुंग ा यही ं है
प म बंगाल (उत्तरी ज़ले) िहमाचल — दािजिलंग ; तथा िशवािलक िगिरपाद
अरुणाचल प्रदे श पूव िहमािद और िहमाचल
असम, मेघालय, नगालड, म णपुर, मज़ोरम, िहमालय से आगे बढ़ ी पूव पहािड़याँ (मेघ ालय की गारो, खासी और जयंितया पहािड़याँ
त्रपुरा अलग पठार है)ं
संकेत: इसी पृष्ठ पर दए पवतीय पयटन स्थल याद रखने म सहायक ह — नैनीताल और मसूरी (उत्तराखंड),
दा ज लग (प म बंगाल), शमला ( हमाचल प्रदे श)। ये चार हमाचल अथात लघु हमालय म ह, क्य क रहने योग्य
समशीतोष्ण जलवायु इसी श्रेणी म मलती है।
इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 11
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ब्रह्मपुत्र नद
इसे अनदे खा न कर
प्र.1 भारत म अ धकांश न दय के नाम दे वय के नाम पर रखे गए ह, जैसे– गंगा, यमुना, कावेरी, आ द। जब क
ब्रह्मपुत्र के नाम का अथ है ‘ब्रह्मा का पुत्र’। ग मय म सूखने क अपेक्षा इस नद म जल क मात्रा बढ़ जाती है!
क्या आप अनुमान लगा सकते ह क ऐसा क्य होता है?
क्य क ग मय म ब्रह्मपुत्र को जल केवल वषा से नह , पघलती बफ और हमनद से भी मलता है।
इस नद का उद्गम हमालय क उन ऊँचाइय पर है जहाँ वष भर बफ और हम जमी रहती है।
गम म यही बफ पघलती है, इस लए ठ क उसी समय नद म अ धक जल आता है जब केवल वषा पर नभर छोट न दयाँ
सूखने लगती ह।
भारत म ग्रीष्म ऋतु मानसून क ऋतु भी है, और ब्रह्मपुत्र के जलग्रहण क्षेत्र — अरुणाचल प्रदे श, असम तथा आस-पास क
पहा ड़य — म वश्व क सवा धक वषा होती है। दोन कारण मलकर जल-मात्रा और बढ़ा दे ते ह।
ऐसा क्य : केवल वषा से पो षत न दयाँ एक ही ऋतु पर नभर होती ह और वषा समाप्त होते ही सूख जाती ह।
हमालय से नकलने वाली न दयाँ सदावा हनी होती ह — उनके पास हम के रूप म जल का दूसरा भंडार होता है,
जो सबसे गम महीन म सबसे अ धक जल दे ता है।
क्या आप जानते ह? गंगा और सधु भी इसी कारण सदावा हनी ह। इसी लए अध्याय म हमालय को ‘ए शया का
जल शखर’ कहा गया है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 11
चत्र 1.16 — गंगा के मैदान का रा त्र उपग्रह चत्र
आइए पता लगाएँ
प्र.1 मैदानी क्षेत्र म प्रकाश के संकद्रण पर ध्यान द जए। इस संकद्रण का क्या कारण हो सकता है?
चत्र 1.16 म प्रकाश एक चौड़ी प म समटा है जो उत्तरी मैदान के साथ-साथ चलती है, जब क उसके ऊपर हमालय और नीचे
पठार बहुत अंधकारमय ह। रात म दखता प्रकाश वस्तुतः जनसंख्या का चह्न है। अथात यह चत्र बताता है क भारत क जनसंख्या
कहाँ सबसे सघन है।
यहाँ इतने लोग क्य रहते ह —
उपजाऊ म । गंगा, सधु, ब्रह्मपुत्र और उनक सहायक न दयाँ हमालय से ख नज लाकर मैदान म फैलाती ह, जससे यह
भू म कृ ष के लए आदश बन जाती है।
वष भर जल। ये सदावा हनी न दयाँ ह, इस लए पेयजल और सचाई कभी पूरी तरह नह रुकते।
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समतल भू म। नमाण सरल है और इसी कारण यहाँ वस्तृत सड़क तथा रेल तंत्र वक सत हुआ — नगर बढ़े और आपस म
जुड़ते चले गए।
प्राचीन इ तहास। ये मैदान सह ा ब्दय से भारतीय सभ्यता का कद्र रहे ह, इस लए यहाँ क ब स्तयाँ पुरानी और बड़ी ह।
ऐसा क्य : अ धक जनसंख्या का अथ है अ धक घर, ग लयाँ, बाज़ार, कारखाने और राजमाग — और इन सभी म
प्रकाश जलता है। पवत और मरुस्थल म लोग कम ह, इस लए प्रकाश भी कम है। यही कारण है क रा त्र के उपग्रह
चत्र म भारत का भूगोल स्वयं ही उभर आता है।
यह क जए: ध्यान से दे खए तो चमकते बदुओं को जोड़ती चमक ली रेखाएँ भी दखगी। ये प्रका शत राजमाग और
उनके कनारे बसे नगर क ंखलाएँ ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 12
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वशाल भारतीय मरुस्थल या थार मरुस्थल
प्र.1 अगर हम भारत के मान चत्र पर प म क ओर बढ़, तो आपको एक पीलापन लए क्षेत्र दखाई दे गा। यह क्षेत्र थार
मरुस्थल है। आपको क्या दखाई दे ता है?
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35° N
ल ाख चीन
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30° N
पािकस्तान
पािक तान
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भूभूट
टान
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उत्तरी मैदान
ँ ाय
थार म रुस्थल
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25° N
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कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
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बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
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स त पुड़ा पव
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20° N अरब सागर दक्कन का पठार
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15° N
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10° N अनाईमुड ी
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िनकोबार ीप समूह
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िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
ठ क वही जो पुस्तक बताती है — सुनहरी रेत के ट ल का एक वशाल वस्तार, ऊबड़-खाबड़ क्षेत्र और ापक खुला आसमान।
चत्र 1.21 और मान चत्र को साथ दे खने पर दखाई दे ता है —
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता
a g l AglaSem · NCERT Solutions
रेत के ट ले लहर जैसी कतार म, कुछ 150 मीटर तक ऊँचे, जनके शखर पवन से तराशे हुए ह।
co m
em.
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ह रयाली लगभग नह — कुछ काँटेदार झा ड़याँ, न वन, न मान चत्र पर न दय क रेखाएँ।
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भौ तक मान चत्र पर पीला रंग, जो नीची, शुष्क और रेतीली भू म दशाता है।
se m
a
एक यात्री और ऊँट — इस भूभाग को पार करने के लए सवा धक उपयुक्त पशु।
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aमान चत्र पर यह पीला क्य है: यह रंग खुली रेत और कम ऊँचाई दखा रहा है। इसक तुलना ठ क पूव म स्थत
co m
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मैदान के गहरे हरे रंग से क जए — मान चत्र एक ही दृ ष्ट म बता दे ता है क आप भारत क सबसे उपजाऊ भू म से
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उसके सबसे शुष्क क्षेत्र म पहुँच गए ह।
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a g l
co m
m.
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 12
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रेत के ट ले का आकार
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आइए पता लगाएँ
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रेत के ट ले का आकार कैसा होता है? पवत च ान से बने होते ह और उनका आकार स्थर होता है। आपको क्य
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प्र.1
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लगता है क रेत के ट ल का आकार भी इनके समान होता है, जब क वे केवल रेत से बने होते ह?
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रेत का ट ला पहाड़ी जैसी आकृ त होता है — जस ओर से पवन आती है उधर लंबा और मंद ढाल, ऊपर तीखा शखर, और आड़
वाली ओर छोटा कतु खड़ा ढाल। ऊपर से दे खने पर अनेक ट ले अधचंद्राकार दखते ह।
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रेत पहाड़ी का आकार क्य ले लेती है: यहाँ वही काम पवन करती है जो पवत म च ान और समय em
करते ह —
. cरेoत के कण को मंद ढाल पर लुढ़काती और उछालती हुई ऊपर ले जाती है। agl
emशखर पर पहुँचकर कण दूसरी ओर क शांत हवा म गरते ह और खड़े ढाल पर जम जाते ह।
पवन
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agl रेत एक न त तीव्रता (लगभग 30–34°) से अ धक खड़ी नह रह सकती, फसल जाती है। इस लए ट ला उसी स्थर आकृ त
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तक बनकर रुक जाता है।
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मुख्य अंतर: पवत का आकार स्थर होता है — वह ठोस च ान है और करोड़ वष म ही बदलता है। ट ले का
आकार स्थर नह , दोहराया जाने वाला है। पवन एक ओर से कण हटाकर दूसरी ओर जमाती रहती है, इस लए
पूरा ट ला अपनी आकृ त बनाए रखते हुए धीरे-धीरे खसकता रहता है। यह ठ क वैसे ही है जैसे कसी पं क्त का
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आकार वही रहता है, यद्य प उसम खड़े लोग बदलते रहते ह।
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a s em यह क जए: कसी थाली म सूखी रेत क पतली परत बछाकर उस पर एक ओर से धीरे-धीरे लगातार फूँक मा रए।
agl एक छोटा-सा ट ला बन जाएगा — आपक ओर मंद ढाल और पीछे खड़ी ढाल, ठ क थार के 150 मीटर ऊँचे ट ले
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जैसा।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 14
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अरावली क पहा ड़याँ
आइए पता लगाएँ
प्र.1 आइए, मान चत्र पर वापस चलते ह। थार मरुस्थल से पूव क ओर धीरे-धीरे अपने रास्ते को दे खए। क्या आपको
अरावली क पहा ड़याँ दख रही ह?
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35° N
ल ाख चीन
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अफ़ िन स्तान
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पािकस्तान
पािक तान
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उत्तरी मैदान
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थार म रुस्थल
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च ंबल ग ंग ा
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कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
बांग्लादे
बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
ताप्ती
स त पुड़ा पव
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म हा सुंद रवन म् यांममारार
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20° N अरब सागर दक्कन का पठार
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15° N
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10° N अनाईमुड ी
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
ीलंककाा
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िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
हाँ। पीले थार क्षेत्र से पूव क ओर उँ गली बढ़ाइए तो एक पतली, कह -कह टू ट हुई भूरी श्रृंखला द क्षण-प म से उत्तर-पूव क ओर
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जाती दखेगी — गुजरात तथा द क्षणी राजस्थान म माउं ट आबू के पास से उदयपुर, अजमेर और जयपुर होते हुए दल्ली क पहाड़ी
( रज) तक। यही अरावली पवत श्रृंखला है।
अरावली के वषय म अध्याय से ववरण
आयु लगभग 2.5 अरब वष — िवश्व की सबसे पाचीन पवत ृ लाओं में से एक
ंख
सबसे ऊँची चोट माउं ट आबू, ऊँचाई 1722 मीटर
अ धकांश पहा ड़याँ 300 से 900 मीटर तक ऊँची
ख नज संग मरमर, ग ेनाइट, जस्ता, ताँबा
ऐ तहा सक कले िचतौड़गढ़ , कुं भलगढ़ , रणथंभौर
मान चत्र पर यह पतली और नीची क्य दखती है: अरावली इतनी प्राचीन है क अरब वष से पवन और जल
इसका अपरदन करते आ रहे ह। हमालय क आयु मात्र लगभग पाँच करोड़ वष है और वह आज भी ऊँचा हो रहा है
— इसी लए उसी मान चत्र पर वह वशाल दखता है।
क्या आप जानते ह? अध्याय बताता है क अरावली म स्थत माउं ट आबू से थार म स्थत जोधपुर क लगभग साढ़े
चार घंटे क यात्रा आपको एक पूणतः भन्न भौगो लक प रदृश्य म पहुँचा दे ती है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 15
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अरावली श्रृंखला कन राज्य म फैली है
आइए पता लगाएँ
प्र.1 पाठ्यपुस्तक म दए गए राजनी तक मान चत्र को दे खए और उन राज्य क पहचान क जए, जनम अरावली
पवत श्रृंखला फैली हुई है। क्या आप इसम दल्ली, राजस्थान, ह रयाणा और गुजरात को दे ख सकते ह?
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35° N
ल ाख चीन
अफ़ग़ ािन तान
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अफ़ ग़ ािनस्
जम्मू और कश्मीर चीन
पंजाब िहमाचल पदेश
उत्तराखंड
30° N हिरयाणा
पािक तान
स्तान अरुणाचल पदेश
पािक स्
िद ल्ली नेपाल िसिक्कम
नेपाल
भूटटानान
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असम
उत्तर पदेश नागालैडं
राजस्थान मेघालय
25° N
िबहार मिणपुर
मध्य पदेश झारखंड बां लादेश
बांग्ग्लादेश
गुजरात िमज़ ोरम
ित्रपुरा यांमार
म्म् यांम ार
छत्तीसगढ़
ओिडशा पिश्चम बंगाल
20° N अरब सागर
महारा
तेलंगाना बंगाल की खाड़ ी
15° N गोवा आंध पदेश
कन टक
अंड मान ीप समूह
के रल
तिमलनाडु
10° N
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
ीलंका
ीलंक ा
िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत -िचह्न अंतर ीय सीमा राज्य की सीमा रा ीय राजधानी
अध्याय म उ ल्ल खत भारत के राजनी तक मान चत्र को यहाँ राज्य के नाम स हत पुनः बनाया गया है।
हाँ — अरावली श्रृंखला चार राज्य /कद्रशा सत प्रदे श म फैली है। द क्षण-प मी छोर से उत्तर-पूव छोर तक —
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता AglaSem · NCERT Solutions
राज्य / कद्रशा सत प्रदे श वहाँ श्रृंखला का भाग
गुजरात ृ ला का दिक्षणी छोर
राज्य के उत्तर में ंख
राजस्थान सबसे लंबा और ऊँचा भाग — माउं ट आबू, उदयपुर , कुं भलगढ़ , िचतौड़गढ़ , अजमेर , जयपुर
ह रयाणा राज्य के दिक्षण में नीची, टू टी हुई पहािड़याँ
दल्ली ृ ला का अंितम िसरा — ‘िदल्ली िरज’
ंख
इसका महत्व: यह श्रृंखला थार मरुस्थल को पूव क ओर बढ़ने से रोकने वाली प्राकृ तक प्राचीर है। यह धूल
भरी प मी पवन को रोकती है और अपने पूव भाग म नमी बनाए रखने म सहायक है — इसी लए अरावली के पूव
क भू म कृ ष योग्य है और प म क भू म मरुस्थल।
पुनरावलोकन कर — पृष्ठ 16
प्राय पीय पठार
पु न रावलोकन कर
प्र.1 पठार वह स्थल रूप है, जो अपने चार ओर क भू म से ऊँचा होता है तथा इसक सतह प्राय: समतल होती है।
इसके कुछ कनारे प्राय: खड़ी ढाल वाले होते ह।
इस प रभाषा को सम झए: पठार को कभी-कभी ‘मेजनुमा भू म’ भी कहा जाता है और यह नाम ही उसका आकार बता दे ता है —
मेज़ क तरह वह ऊँचा उठा हुआ होता है और उसका ऊपरी भाग समतल होता है।
स्थल रूप ऊँचाई ऊपरी सतह कनारे
मैदान नीचा समतल कोई स्पष्ट िकनारा नही ं
पठार आस-पास की भूिम से ऊँचा पाय: समतल पाय: खड़ी ढाल
पवत बहुत ऊँचा नुक ीला, समतल नही ं सभी ओर से खड़ी ढाल
इसी अध्याय से भारतीय उदाहरण: प मी और पूव घाट के बीच स्थत दक्कन का पठार, मध्य तथा द क्षण भारत का संपूण
त्रकोणीय प्राय पीय पठार, और गारो, खासी तथा जयं तया पहा ड़य को धारण करने वाला मेघालय पठार।
खड़ी ढाल का महत्व: जब कोई नद समतल ऊपरी सतह पर बहती हुई खड़ी ढाल तक पहुँचती है, तो वह नीचे
गरती है — इसी लए पठार पर इतने जलप्रपात ह, जैसे चत्र 1.1 का जोग जलप्रपात। इसी गरते जल को
जल वद्युत म बदला जाता है।
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता AglaSem · NCERT Solutions
न दय के प्रवाह क दशा
आइए पता लगाएँ
प्र.1 पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को दे खए और न दय के प्रवाह क दशा पर ध्यान द जए।
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उत्तरी मैदान
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कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
बांग्लादे
बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
ताप्ती
स त पुड़ा पव
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म हा सुंद रवन म् यांममारार
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20° N अरब सागर दक्कन का पठार
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10° N अनाईमुड ी
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
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िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
प्रत्येक नीली रेखा को उद्गम से समुद्र तक दे खए और एक स्पष्ट पैटन उभर आता है। भारत क न दयाँ तीन वग म बँट जाती ह —
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता AglaSem · NCERT Solutions
वग न दयाँ दशा और मलन-स्थल
हमालयी न दयाँ गंग ा, यमुना, बह्मपुत्र द क्षण, फर पूव क ओर मैदान को पार करती हुई बंगाल क खाड़ी म
िसंध ु और उसकी प म/द क्षण-प म क ओर अरब सागर म
सहायक निदयाँ
पूव क ओर बहने वाली महानदी, गोदावरी, प मी घाट के पास से नकलकर संपूण पठार को प म से पूव पार
प्राय पीय न दयाँ कृ ष्णा, कावेर ी करती हुई बंगाल क खाड़ी म; डेल्टा बनाती ह
प म क ओर बहने वाली नमदा, ताप्ती पूव से प म बहकर अरब सागर म; ये डेल्टा नह , मुहाने बनाती ह
प्राय पीय न दयाँ
अ धकांश प्राय पीय न दयाँ पूव क ओर क्य बहती ह: यह पठार ढालू है — प मी घाट क ओर ऊँचा और
पूव क ओर धीरे-धीरे नीचा। जल सदै व ढाल क ओर बहता है, इस लए वह पठार पार करके बंगाल क खाड़ी तक
पहुँचता है। नमदा और ताप्ती अपवाद ह, क्य क वे ंश घा टय (लंबी दरारनुमा घा टय ) म होकर प म क ओर
बहती ह।
स्वयं जाँ चए: मंद ढाल पर लंबी दूरी तय करने वाली नद अपने अवसाद धीरे-धीरे जमाती है और डेल्टा बनाती है;
छोट और तेज़ नद शीघ्र समुद्र म पहुँचकर मुहाना बनाती है। इसी लए पूव तट पर डेल्टा और प मी तट पर मुहाने
मलते ह।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 17
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पठार के आ दवासी समुदाय
आइए पता लगाएँ
प्र.1 आ दवासी समुदाय मुख्य रूप से झारखंड, प म बंगाल, ओ डशा, असम, मध्य प्रदे श, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र,
तेलंगाना और गुजरात राज्य म बड़े पैमाने पर फैले हुए ह। इस पुस्तक के अंत म दए गए राजनी तक मान चत्र म
इन राज्य क स्थ त का पता लगाइए और इन्ह भौ तक मान चत्र से जोड़ने का प्रयास क जए।
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पंजाब िहमाचल पदेश
उत्तराखंड
30° N हिरयाणा
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पािक स्
िद ल्ली नेपाल िसिक्कम
नेपाल
भूटटानान
भू
असम
उत्तर पदेश नागालैडं
राजस्थान मेघालय
25° N
िबहार मिणपुर
मध्य पदेश झारखंड बां लादेश
बांग्ग्लादेश
गुजरात िमज़ ोरम
ित्रपुरा यांमार
म्म् यांम ार
छत्तीसगढ़
ओिडशा पिश्चम बंगाल
20° N अरब सागर
महारा
तेलंगाना बंगाल की खाड़ ी
15° N गोवा आंध पदेश
कन टक
अंड मान ीप समूह
के रल
तिमलनाडु
10° N
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
ीलंका
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िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत -िचह्न अंतर ीय सीमा राज्य की सीमा रा ीय राजधानी
अध्याय म उ ल्ल खत भारत के राजनी तक मान चत्र को यहाँ राज्य के नाम स हत पुनः बनाया गया है।
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70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
प्रत्येक राज्य को पहले राजनी तक मान चत्र पर खो जए, फर भौ तक मान चत्र पर उसी स्थान को दे खए। लगभग हर राज्य का वह
भाग वना ा दत पठार या पहाड़ी क्षेत्र नकलता है, खुला मैदान नह ।
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राज्य भौ तक मान चत्र पर वहाँ क्या है
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झारखंड
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छोटानागपुर पठार — वनाच्छािदत, पहाड़ी, खिनजों से सम ृद्ध
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पिश्चमी भाग छोटानागपुर की ऊँची भूिम से िमलता है; उत्तर िहमालय को छू ता है
ओ डशा पूव घाट तथा तटीय मैद ान के पीछे की वनाच्छािदत पहािड़याँ
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छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदे श मध्य भारत का पठार — सतपुड़ा, मैक ल तथा बस्तर की घने वनों वाली पहािड़याँ
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महाराष्ट्र
ag और उनके पीछे दक्कन का पठार
पिश्चमी घाट
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तेलंगाना दक्कन का पठार और पूव घाट
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गुजरात पूव पहाड़ी प ी, जहाँ अरावली, सतपुड़ा और पिश्चमी घाट िमलते है ं
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असम बह्मपुत्र घाटी, िजसके दोनों ओर पहािड़याँ है ं
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agअध्याय म बताई गई जनजा तयाँ — संथाल, ग ड, बैगा, भील और कोरकु — इसी वन प म रहती ह। इनक अपनी व शष्ट
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भाषाएँ, परंपराएँ और जीवन-शै लयाँ ह, जो प्रकृ त से घ नष्ठ रूप से जुड़ी ह।
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दोन मान चत्र मलकर क्या बताते ह: गुजरात से लेकर झारखंड और ओ डशा तक एक चौड़ी वना ा दत पठारी
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तरछ फैली है। राजनी तक सीमाएँ इसे काटती ह, कतु वन और पहा ड़याँ नरंतर ह — इसी लए ये समुदाय
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इतने अलग-अलग राज्य म मलते ह।
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भारत क अ तीय तटरेखाएँ
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अपने वद्यालय क मान चत्रावली (स्कूल एटलस) अथवा ‘ भ त्त-मान चत्र’ को दे खकर बंगाल क खाड़ी क ओर
बहने वाली पाँच न दय के नाम ल खए। भारत के तट य राज्य का पता लगाइए और भारत के प मी तथा पूव
तट य मैदान के मध्य क्या-क्या अंतर ह, इन पर चचा क जए।
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कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
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70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
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बंगाल क खाड़ी म गरने वाली पाँच न दयाँ: गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानद , गोदावरी और कृष्णा। (कावेरी छठ है।)
भारत के तट य राज्य और कद्रशा सत प्रदे श — नौ राज्य तथा चार कद्रशा सत प्रदे श :
प मी तट पूव तट कद्रशा सत प्रदे श
गज
ु रात, महारा , गोवा, तिमलनाडु, आंध पदे श, ओिडशा, दमन और दीव / दादरा और नगर हवेल ी, लक्ष ीप, पुद ुच्चेर ी, अंडमान
कन टक, के रल पिश्चम बंग ाल और िनकोबार ीपसमूह
दोन तट य मैदान म अंतर:
प मी तट य मैदान पूव तट य मैदान
चौड़ाई सँक रा — पिश्चमी घाट सागर के िबलकु ल पास तक आ जाते है ं (िचत्र चौड़ा, िवस्ततृ खुले मैद ान
1.34)
न दयाँ छोटी और तेज़, पिश्चमी घाट से िनकलने वाली लंबी और मंद — महानदी, गोदावरी, कृ ष्णा,
कावेर ी
समुद्र से मलन मुहाने (ए स्चरु ी), सँक री खािड़याँ (क्रीक्स ); नम दा और ताप्ती के मुहाने िवशाल उपजाऊ डेल्टा
सबसे बड़े
अन्य छोटी निदयों के जलोढ़ िनक्षेप; अनेक पत्तन और नगर, जैसे मुंबई लै ग ून — िचल्का झील और पुिलकट झील
वशेषताएँ
सागर अरब सागर बंग ाल की खाड़ी
दोन तट भन्न क्य ह: प्राय प का ढाल पूव क ओर है। प मी न दय को समुद्र तक बहुत छोटा और तीव्र माग
तय करना पड़ता है, इस लए वे कम अवसाद लाती ह और उसे गहरे जल म शीघ्र गरा दे ती ह — मुहाना बनता है।
पूव न दयाँ पूरे पठार को धीरे-धीरे पार करती ह, अवसाद बटोरती ह और उथली बंगाल क खाड़ी म जमा कर दे ती ह
— डेल्टा बनता है।
प्र.2 क्या आप जानते ह क जब ये न दयाँ तट के नकट अनेक धाराओं म वभा जत हो जाती ह, तो इन्ह क्या कहा
जाता है? कक्षा म अपने शक्षक के साथ चचा करके पता लगाइए?
इन्ह वत रकाएँ (distributaries) कहा जाता है, और ये जस पंखाकार भूभाग पर फैलती ह, वह नद का डेल्टा है।
शब्द अथ जल कस ओर जाता है
सहायक नद वह छोटी नदी जो िकसी बड़ी नदी में िमलती है मुख्य नदी में जल जुड़ता है
वत रका वह शाखा जो समुद के िनकट मुख्य नदी से अलग हो जाती है मुख्य नदी से जल िनकल जाता है
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ऐसा क्य होता है: समुद्र के नकट भू म लगभग समतल हो जाती है, इस लए जल क ग त घट जाती है और वह
अपने साथ लाई रेत तथा गाद को नह ढो पाता। यह अवसाद तल पर जमकर माग रोक दे ता है और नद उसके चार
ओर से बँटकर बहने लगती है — बार-बार। शता ब्दय म यही अनेक धाराएँ मलकर पृष्ठ 20 पर बताया गया
त्रभुजाकार या पंखाकार डेल्टा बनाती ह।
क्या आप जानते ह? गंगा-ब्रह्मपुत्र का डेल्टा, जो भारत और बांग्लादे श म फैला है, वश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है।
इसका भारतीय भाग सुंदरवन है, जहाँ रॉयल बंगाल टाइगर रहता है। कोलकाता के पास बहने वाली हुगली इसी क
एक वत रका है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 22
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता AglaSem · NCERT Solutions
प म बंगाल और सुंदरवन म डेल्टा
प्र.1 नोट— मान चत्र म डेल्टा को च ह्नत क जए।
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कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
बांग्लादे
बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
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बंगाल की खाड़ ी
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10° N अनाईमुड ी
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
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िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
भौ तक मान चत्र पर वह स्थान खो जए जहाँ सुदूर पूव म गंगा और ब्रह्मपुत्र मलकर बंगाल क खाड़ी म गरती ह। वहाँ एक मोट
नीली रेखा अनेक पतली धाराओं के पंखे म बँट जाती है। यही पंखा गंगा-ब्रह्मपुत्र का डेल्टा है।
राज्य: प म बंगाल का द क्षणी भाग, कोलकाता के नीचे।
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता
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दे श: इसका लगभग आधा भाग भारत म और शेष बांग्लादे श म है।
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भारतीय भाग का नाम: सुंदरवन — यूनेस्को वश्व धरोहर स्थल और वश्व का सबसे बड़ा मग्रोव वन।
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यह वशेष क्य है: जैसा अध्याय कहता है, इस डेल्टा म नद , सागर और भू म का अ तीय स म्मश्रण है। ज्वार के
gl दन म दो बार खारा और मीठा जल मलते ह, इस लए यहाँ मग्रोव उगते ह — ऐसे वृक्ष जो खारी क चड़ म जड़
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जमाकर जी वत रह सकते ह। ये वन रॉयल बंगाल टाइगर स हत सैकड़ प्रजा तय को आश्रय दे ते ह और बंगाल क
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खाड़ी से आने वाले हर चक्रवात का पहला आघात स्वयं सहते ह।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 23
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पूव त्तर क पहा ड़याँ
प्र.1 मान चत्र को दे खए और अब हम पूव त्तर क पहा ड़य क तरफ बढ़ रहे ह, जो हमारी यात्रा का अं तम गंतव्य है।
क्या आप मान चत्र पर दखाई गई गारो, खासी और जयं तया पहा ड़य को दे ख सकते ह?
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ल ाख चीन
अफ़ग़ग़ाािन
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30° N
पािकस्तान
पािक तान
नेनेपपाल
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उत्तरी मैदान
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थार म रुस्थल
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गारो पहािड़याँ
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जयंितया पहािड़याँ
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च ंबल ग ंग ा
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25° N
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कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
बांग्लादे
बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
ताप्ती
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म हा सुंद रवन म् यांममारार
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20° N अरब सागर दक्कन का पठार
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10° N अनाईमुड ी
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
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िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
हाँ। बांग्लादे श के पूव म, ब्रह्मपुत्र घाट के ठ क नीचे, प म से पूव क ओर तीन पहाड़ी भाग एक साथ अं कत मलते ह —
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गारो पहािड़ याँ → खासी पहािड़ याँ → जयंितया पहािड़ याँ
ये तीन मेघालय राज्य म ह और मलकर मेघालय पठार बनाती ह। मेघालय शब्द का अथ ही है — ‘मेघ का नवास’।
इन पहा ड़य क ववरण
वशेषता
वषा िवश्व में सव िधक — चेर ापूंजी (सोहरा) और मौिसनराम यही ं है ं
वनस्प त हिरयाली, घने वन, उपजाऊ भूिम, अि तीय वन्यजीव
जलप्रपात लुभावने — से वन िसस्टस जलपपात (िचत्र 1.41)
लोग और संस्कृ त खासी लोगों का शाद सुक िमनिसएम उत्सव, जो पकृ ित के पित आभार व्यक्त करने के िलए मनाया जाता है;
नोंिग याट गाँव के समीप जीिवत जड़ ों के पुल
यहाँ इतनी वषा क्य : बंगाल क खाड़ी से आने वाली नमी भरी पवन सीधे इन खड़ी पहा ड़य से टकराती ह। ऊपर
उठने पर वे ठं डी हो जाती ह और अपनी संपूण नमी यह वषा के रूप म गरा दे ती ह।
आगे बढ़ने से पहले… — पृष्ठ 24
अध्याय क चार मुख्य बात
आगे बढ़ने से पहले …
प्र.1 भारत, जस उपमहा प का अंग है, उसे अपना नाम प्रदान करता है।
जस भूभाग का भारत अंग है, उसे भारतीय उपमहा प कहा जाता है — यह नाम इसी क्षेत्र के सबसे बड़े दे श भारत के नाम पर पड़ा
है।
इसम भारत, पा कस्तान, बांग्लादे श, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार स म्म लत ह।
इसे उपमहा प इस लए कहते ह क यह ए शया महा प का ही भाग है, फर भी पवत, मरुस्थल और सागर इसे शेष महा प
से स्पष्ट रूप से अलग कर दे ते ह।
यह नाम क्य पड़ा: क्षेत्रफल और जनसंख्या — दोन म भारत इस क्षेत्र का सबसे बड़ा दे श है, और इस क्षेत्र का
साझा इ तहास, ापार माग तथा संस्कृ त भी बहुत हद तक भारत से ही फैले ह।
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प्र.2 इसम व वध भौगो लक वशेषताएँ ह, जनम बफ ले हमालय से लेकर गम थार मरुस्थल स म्म लत ह। मैदानी
क्षेत्र को अनेक न दय ारा स चा जाता है। यहाँ एक प्राय पीय पठार भी है, जसके प म म अरब सागर तथा
पूव म बंगाल क खाड़ी स्थत है।
अध्याय के पाँच भाग, एक दृ म:
भाग अध्याय से मुख्य तथ्य
महान पवतीय क्षेत्र िहमालय, लगभग 2500 िक.मी. लंबा; िहमािद , िहमाचल, िशवािलक; 8000 मीटर से ऊँची चोिटयाँ; इन्ही ं के बीच
ल ाख का शीत मरुस्थल
गंगा और सधु का समतल और अत्यंत उपजाऊ; िसंध ,ु गंग ा, बह्मपुत्र तथा उनकी सहायक निदयों से िसंिचत; भारत की जनसंख्या का
मैदान बड़ा भाग यही ं
मरुस्थलीय भूभाग थार — राजस्थान, ग ज
ु रात, पंजाब, हिरयाणा में; 150 मीटर तक ऊँचे टीले ; पूव सीमा पर अरावली
द क्षणी प्राय पीय पाय ीपीय पठार, दोनों ओर पिश्चमी और पूव घाट, बीच में दक्कन का पठार; पिश्चम में अरब सागर, पूव में बंग ाल की
क्षेत्र खाड़ी, दिक्षण में िहंद महासागर
पसमूह लक्ष ीप (मूँग े से बने 36 ीप) तथा अंडमान और िनकोबार ीपसमूह (500 से अिधक ज्वालामुखीय ीप)
संकेत: इस क्रम को याद र खए — पवत, मैदान, मरुस्थल, पठार, तट, प। यही वह यात्रा है जो अध्याय आपको
उत्तर से द क्षण और फर पूव क ओर कराता है।
प्र.3 इन व वध भौगो लक वशेषताओं ने म , वनस्प तय , जीव-जंतुओं, जीवन और आ थक अवसर से संबं धत
अनेक प र स्थ तय का सृजन कया है और एक समृद्ध संस्कृ त का नमाण कया है।
प्रत्येक क्षेत्र अपने लोग को अलग-अलग संभावनाएँ दे ता है और लोग उन्ह के अनुरूप अपना जीवन गढ़ लेते ह।
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क्षेत्र म / प र स्थ त वनस्प त और जीव-जंतु आजी वका
हमालय पतली िम ी, ठं ड, बफ बुर ांश; िहम तेदं ुआ , िहमालयी मोनल, पशुपालन, बागवानी, पयटन, तीथ टन
याक
ल ाख च ानी शीत मरुस्थल, –30°C आइबेक्स, ितब्बती म ृग , िहम तेदं ुआ सादा पशुचारक जीवन, बौद्ध मठ, लोसर और
से नीचे हेिमस जैसे उत्सव
मैदान गहरी, खिनजों से सम ृद्ध जलोढ़ ग े लंग ूर , बाघ, घिड़याल, मोर सघन कृ िष, उ ोग, व्यापार, पिरवहन
िम ी
थार रे तीली, शुष्क; िदन अत्यंत गम, काँटेद ार झािड़याँ; ऊँट पशुपालन, हस्तिशल्प, पुष्कर जैसे मेले , जल-
राते ं ठं डी संचयन
पठार खिनज, वन, उपजाऊ भूिम िसंह-पूँछ वाला वानर, िकं ग कोबरा, खनन, जलिव तु , कृ िष, वनोपज
कीटभक्षी पौधे
तट और डेल्टा, लै ग ून, पवाल िभित्तयाँ मैंग ोव, रॉयल बंग ाल टाइगर, पवाल मत्स्यन, पत्तन, समुद ी व्यापार, पयटन
प जीव
संस्कृ त भूगोल का अनुसरण क्य करती है: घर उसी सामग्री से बनते ह जो पास मलती है ( हमालय म पत्थर
और लकड़ी क काठ-कुनी शैली); भोजन वही होता है जो भू म उपजाती है और जो सुर क्षत रखा जा सके; त्योहार
स्थानीय वष के मोड़ को च ह्नत करते ह। भू म बद लए, तो ये सब भी बदल जाते ह।
प्र.4 इन भौगो लक वशेषताओं ने हमारी सभ्यता को आकार दे ने म महत्वपूण भू मका नभाई है।
भूगोल ने भारत के इ तहास को केवल सजाया नह , उसे दशा द है।
पवत ने रक्षा भी क और जोड़ा भी। हमालय ने उत्तर क अत्यंत ठं डी पवन को रोका और आक्रमण को क ठन बनाया,
जससे यहाँ एक व शष्ट सभ्यता वक सत हो सक । फर भी इसके दर से ापारी, तीथयात्री और वचार आते-जाते रहे।
न दय ने नगर बसाए। भारतीय सभ्यता सधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र के तट पर पनपी, क्य क इन न दय ने जल, उपजाऊ म
और सह ा ब्दय तक यात्रा एवं ापार का सबसे सुगम माग दया।
सागर ने भारत को वश्व से जोड़ा। 7500 क.मी. से भी लंबी तटरेखा और दोन तट के पत्तन ने भारत को बहुत प्राचीन
काल से ही ापा रक दे श बनाया।
भू म पावन बन गई। पवत, न दयाँ और वन पूज्य माने जाते ह — हमालय म असंख्य मं दर और मठ ह और अ धकांश न दय
के नाम दे वय के नाम पर ह।
इसका महत्व: यही बात अध्याय के पहले पृष्ठ पर श्री अर वद के कथन म कही गई है — भूगोल स्वयं भारत को ‘एक
व शष्ट रा ीय च रत्र’ प्रदान करता है।
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प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 24–25
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अध्याय के अंत के अभ्यास प्रश्न
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आपक राय म भारत क दो महत्वपूण भौगो लक वशेषताएँ क्या ह? आपके वचार म वे क्य महत्वपूण ह?
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a s emसशक्त दो वकल्प ह — हमालय और न दय स हत उत्तरी मैदान।
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कोई भी दो चुनी जा सकती ह, बशत कारण स्पष्ट हो। सबसे
1. हमालय — क्य महत्वपूण:
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यह उत्तर म प्राकृ तक प्राचीर है, जो मध्य ए शया क बफ ली पवन को रोकता है और उत्तर भारत को इसी अक्षांश के अन्य
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क्षेत्र क तुलना म बहुत कम ठं डी सद दे ता है।
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.c और हमनद सधु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र को वष भर जल देते ह — इसी लए इसेa‘एgशया का जल शखर’ कहा जाता
यह मानसूनी पवन को रोककर उन्ह भारत पर ही वषा करने को ववश करता है।
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a यह जैव व वधता का घर है और साधना, अचना तथा तीथाटन का कद्र भी।
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2. उत्तरी (गंगा के) मैदान — क्य महत्वपूण:
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l रेल तंत्र बना, और न दयाँ स्वयं सह ा ब्दय से यात्रा तथा ापार का माग रही
यहाँ क न दयाँ ख नज लाकर म को अत्यंत उपजाऊ बनाती ह, जससे दे श के बड़े भाग का पेट भरता है।
समतल भू म के कारण यहाँ सघन सड़कgऔर
ह।
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भारत क जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग यह रहता है और भारत का बहुत-सा इ तहास यह रचा गया।
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नमूना उत्तर: “मेरी राय म भारत क दो सबसे महत्वपूण भौगो लक वशेषताएँ हमालय और गंगा के मैदान ह।
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gl बड़ी न दयाँ वष भर बहती रहती ह। वही न दयाँ गंगा के मैदान का नमाण करती ह, जनक उपजाऊ म
हमालय हम मध्य ए शया क बफ ली पवन से बचाता है और जल को बफ के रूप म सं चत रखता है, जससे हमारी
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अ धकांश भारत का पेट भरती है और जहाँ हमारे अ धकांश लोग रहते ह। एक हम जल दे ता है, दूसरा उसी जल को
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अन्न म बदल दे ता है।”
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प्र.2 आपके वचार म य द हमालय नह होता तो भारत का स्वरूप कैसा होता? अपनी कल्पना को व्यक्त करने के
लए एक सं क्षप्त टप्पणी ल खए अथवा चत्र ारा अ भव्यक्त क जए।।
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se हमालय के बना भारत कह अ धक शुष्क, कह अ धक ठं डा और कह कम हरा-भरा देश होता। क्या-क्या बदल जाता, और क्य
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क्या बदलता क्य
कड़ाके क सद मध्य एिशया से आती बफ ली पवनों को रोकने वाला कु छ न होता। उत्तर भारत में म ृद ु शीत के स्थान पर अत्यंत कड़ी
सद पड़ती।
बहुत कम वषा मानसूनी पवने ं रुककर ऊपर उठने को िववश न होती ं, इसिलए वे अपनी नमी ले क र एिशया के भीतर िनकल जाती ं।
सदावा हनी न दयाँ गिमयों में िपघलने के िलए न िहमक्षेत्र होते, न िहमनद। गंग ा, िसंध ु और बह्मपुत्र आज जैसे है,ं वैसे न होते।
नह
उत्तरी मैदान नह ये मैद ान उन्ही ं निदयों की लाई गाद से बने है।
ं पवत न होते तो गाद न होती और मैद ान भी न होते — उसके स्थान पर
उथला सागर या पथरीली शुष्क भूिम होती।
भन्न जीवन कृ िष बहुत कम , जनसंख्या बहुत कम , उ त्त र में सघन नगर नही ं — और दे श का बड़ा भाग थार म रुस्थल जैस ा िदखता।
भन्न इ तहास पवतों की दीवार न होने से उपमहा ीप में आना-जाना बहुत सरल होता और भारत की संस्कृ ित तथा इितहास का स्वरूप
िबलकु ल िभन्न होता।
नमूना उत्तर: “य द हमालय कभी उठा ही न होता, तो भारत एक कठोर और शुष्क भू म होता। हर सद म उत्तर से
बफ ली पवन सीधे मैदान को पार करत और मानसून के बादल बना बरसे हमारे ऊपर से नकल जाते। पघलती
बफ से पो षत गंगा न होती और न वह मुलायम उपजाऊ म होती जो बहकर आती और मैदान बनाती। उत्तर भारत
का बड़ा भाग आज के राजस्थान जैसा दखता — खुला, रेतीला और वरल आबाद वाला। मैदान से जो पवत
मु श्कल से दखाई दे ते ह, वही मैदान के हरे होने का कारण ह।”
य द चत्र बनाना हो: पृष्ठ के एक भाग म आज का भारत (सफ़ेद चो टयाँ, नीली न दयाँ, हरे मैदान) और दूसरे भाग
म हमालय र हत भारत (खुला क्ष तज, पतली सूखी न दयाँ, पीली झाड़ीदार भू म) बनाइए और अंतर पर नाम
ल खए।
प्र.3 अध्याय म द गई जानकारी के आधार पर बताइए क भारत को ‘लघु महा प’ क्य कहा जाता है?
क्य क एक ही दे श म भारत के भीतर लगभग वे सभी भू-आकृ तयाँ और जलवायुएँ मल जाती ह जो सामान्यत: पूरे महा प म होती
ह।
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महा प म सामान्यत: जो होता है भारत का अपना रूप
ऊँची पवत श्रृंखलाएँ िहमालय, 8000 मीटर से ऊँची चोिटयों सिहत
वशाल नद -मैदान िसंध ,ु गंग ा और बह्मपुत्र के मैद ान
उष्ण मरुस्थल थार
शीत मरुस्थल ल ाख, सिदयों में –30°C से नीचे
प्राचीन पठार पाय ीपीय और दक्कन का पठार; 2.5 अरब वष पुर ानी अरावली
लंबी तटरेखाएँ 7500 िक.मी. से भी अिधक, डेल्टा, मुहानों और लै ग ून सिहत
वषा वन और वश्व के सवा धक वषा वाले स्थान पिश्चमी घाट; मेघ ालय की खासी पहािड़याँ
प, प्रवाल भ त्तयाँ और ज्वालामुखी ल क्ष ीप, अंडमान और िनकोबार ीपसमूह, बैर न ीप
इसम उतनी ही व वध मानवीय दु नया जोड़ ली जए — सैकड़ भाषाएँ, दजन गृह-शै लयाँ और हर क्षेत्र का अपना त्योहार-कैलडर
— तथा इन सबको समेटने वाला वस्तार : भारत वश्व का सातवाँ बड़ा दे श है।
ऐसा क्य : भारत लगभग 8°उ. से 37°उ. तक, अथात लगभग 30 अंश अक्षांश म फैला है, और इसम वश्व के
सव च्च पवत भी ह तथा उष्ण सागर भी। एक ही दे श म अक्षांश और ऊँचाई का इतना वस्तार हो, तो वहाँ महा प
जतनी जलवायुएँ मलना स्वाभा वक है।
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प्र.4 भारत क कसी प्रमुख नद को मान चत्र म दे खए। इसका उद्गम कहाँ है और यह समुद्र म कहाँ मलती है? इसक
यात्रा के दौरान लोग इस नद का व भन्न प्रकार से कैसे उपयोग करते ह? अपनी कक्षा म इस पर चचा क जए।
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कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
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बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
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70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
समूह के लए व ध: एक नद चु नए, भौ तक मान चत्र पर उसे उद्गम से मुहाने तक दे खए, उसे तीन-चार खंड म बाँ टए और
प्रत्येक खंड के लए पू छए — यहाँ नद लोग को क्या दे ती है और लोग उसे क्या लौटाते ह? अ े उत्तर म खंड, स्थान और उपयोग
— तीन का नाम आता है।
नमूना उत्तर — गंगा, गोमुख से बंगाल क खाड़ी तक:
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खंड स्थान लोग नद का उपयोग कैसे करते ह
उद्गम गोमुख, गंग ोत्री िहमनद का मुहाना, पावन तीथ स्थल तथा प्र सद्ध पहाड़ी यात्रा-पथ ( े कग)
उत्तराखंड
पवतीय दे वपयाग, ऋिषके श, हिर ार तीव्र प्रवाह से जल वद्युत; रा टं ग और पयटन; घाट, स्नान और मं दर
माग
ऊपरी कानपुर , पयागराज, वाराणसी गे ँ, धान और गन्ने के लए नहर सचाई; पेयजल; उद्योग; मत्स्यन; घाट पर मेले और
मैदान अनुष्ठान
नचला पटना, फरक्का, कोलकाता अंतदशीय जलमाग से माल ढु लाई; कोलकाता पत्तन; नद क चकनी म से ईंट-
मैदान नमाण; समृद्ध जलोढ़ कृ ष
मुहाना सुंद रवन डेल्टा, पिश्चम बंग ाल मत्स्यन और झ गा पालन; मग्रोव से शहद और ईंधन; पयटन; मग्रोव तट को
चक्रवात से बचाते ह
यह पैटन क्या बताता है: पवत म नद क ग त उपयोगी है — वह टरबाइन घुमाती है। मैदान म उसका जल और
गाद उपयोगी है — वे स चते और उपजाऊ बनाते ह। मुहाने पर उसका अवसाद और आश्रय उपयोगी है — वे भू म
और वन बनाते ह। एक ही नद , तीन अलग-अलग वरदान।
इस पर भी चचा क जए: प्रत्येक उपयोग क क मत नद क्या चुकाती है — नगर का मल-जल, औद्यो गक
अप शष्ट, प्ला स्टक, अत्य धक मत्स्यन और प्रवाह रोकने वाले बाँध। जो समूह अंत म यह बताए क “हम इसका
बेहतर उपयोग कैसे कर सकते ह”, उसका उत्तर सबसे अ ा है।
प्र.5 भारत के द क्षणी भाग को प्राय पीय पठार क्य कहा जाता है?
क्य क वह एक साथ प्राय प भी है और पठार भी। यह नाम इन्ह दो तथ्य को जोड़ दे ता है।
पाय ीप = तीन ओर से जल से िघरा भूभाग
पठार = आस-पास की भूिम से ऊँ चा, पाय: समतल शीष और पाय: खड़ ी ढाल वाला स्थल रूप
दिक्षण भारत = दोनों → पाय ीपीय पठार
यह प्राय प क्य है: भारत का द क्षणी भाग कन्याकुमारी पर आकर सँकरा हो जाता है और तीन ओर से जल से घरा है —
प म म अरब सागर,
पूव म बंगाल क खाड़ी,
द क्षण म हद महासागर।
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 1 भारत क भौगो लक व वधता
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यह पठार क्य है: यह बहुत पुरानी च ान का त्रकोणीय भूभाग है, जो तट य मैदान से काफ़ ऊँचा उठा है, जसका शीष मोटे तौर
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पर समतल है (दक्कन का पठार) और जसके कनारे खड़ी ढाल वाले ह — प
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मी घाट और पूव घाट। इसका हल्का ढाल पूव क
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ओर है, इसी लए गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और महानद पूव क ओर बहकर बंगाल क खाड़ी म गरती ह।
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aउनका लगभग सीधे अरब सागर म उतर जाना।
संकेत: पृष्ठ 20 का चत्र 1.34 यह बात एक ही छाया चत्र म दखा दे ता है — प मी घाट क ऊँची पहा ड़याँ और
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प्र.6 ag प्राप्त कौन-से धरोहर स्थल आपको अ धक रू चकर लगे? इसके
इस अध्याय म व णत यूनेस्को ारा मान्यता
रोचक तथ्य का सं क्षप्त म वणन क जए।
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पहले सूची दे खए। अध्याय म चार यूनेस्को वश्व धरोहर स्थल बताए गए ह —
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a g स्थल कहाँ क्य उल्लेखनीय
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ग्रेट हमालयन िहमाचल पदे श वनस्प तय और जीव क अत्य धक व वधता; इसक जैव व वधता सरकार के साथ-
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राष्ट्रीय उद्यान साथ उद्यान म रहने वाले ग्रामीण समुदाय ारा भी संर क्षत क जा रही है
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जैसलमेर कला राजस्थान, थार
a gl ‘स्वण नगरी’ म पीले बलुआ पत्थर से बना जीवंत कला
मरुस्थल के मध्य
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प मी घाट पिश्चमी तट के साथ
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अनेक न दय का उद्गम तथा असाधारण जैव व वधता — सह-पूँछ वाला वानर, कग
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कोबरा, क टभक्षी पौधे
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as e ंदरवन पिश्चम बंग ाल , गंग ा- वश्व का सबसे बड़ा मग्रोव वन; रॉयल बंगाल टाइगर का घर
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बह्मपुत्र डेल्टा में
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नमूना उत्तर (सुंदरवन): “मुझे सबसे रोचक धरोहर स्थल सुंदरवन लगा। यह मनुष्य का बनाया कोई भवन नह ,
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ब ल्क नद का बनाया वन है। जहाँ गंगा और ब्रह्मपुत्र सागर से मलती ह, वहाँ वे इतनी गाद जमा करती ह क भू म
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आज भी बन रही है। हर ज्वार के साथ खारा और मीठा जल मलते ह और मग्रोव वृक्ष उसी खारी क चड़ म जड़
जमाकर उगते ह। यह वन रॉयल बंगाल टाइगर को आश्रय दे ता है — वश्व के वे एकमात्र बाघ जो नय मत रूप से
तैरते ह — और मनुष्य को भी बचाता है, क्य क घने मग्रोव बंगाल क खाड़ी से आने वाले चक्रवात का वेग तोड़ दे ते
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ह। मुझे यह बात रोचक लगती है क एक ही स्थान एक साथ बाघ क भी रक्षा करता है और गाँव क भी।”
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m अ े उत्तर म क्या होना चा हए: स्थल का नाम, उसक स्थ त, अध्याय से दो-तीन व शष्ट तथ्य, और अंत म उसे
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ag चुनने का आपका अपना कारण।
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प्र.7 इस पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक और राजनी तक मान चत्र को दे खए। आप अभी जस क्षेत्र म ह,
उसक पहचान क जए। आप भारत क कस भौ तक वशेषता का उपयोग इस स्थान का वणन करने के लए
करगे?
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उ
35° N
ल ाख चीन
अफ़ग़ग़ाािन
अफ़ िन स्तान
तान
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सतलजु िह
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30° N
पािकस्तान
पािक तान
नेनेपपाल
ाल कं चनजंगा
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भूभूट
टान
ान
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यम त्रु
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ुध
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उत्तरी मैदान
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थार म रुस्थल
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गारो पहािड़याँ
िाहप
जयंितया पहािड़याँ
ील
च ंबल ग ंग ा
वार
25° N
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कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
बांग्लादे
बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
ताप्ती
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म हा सुंद रवन म् यांममारार
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नद
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20° N अरब सागर दक्कन का पठार
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गोद ावर
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बंगाल की खाड़ ी
टाघ ी म च
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15° N
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अंड मान ीप समूह
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कावेरी
10° N अनाईमुड ी
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
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ीलं
िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)
0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक
नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर
पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।
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उ
35° N
ल ाख चीन
अफ़ग़ ािन तान
स्तान
अफ़ ग़ ािनस्
जम्मू और कश्मीर चीन
पंजाब िहमाचल पदेश
उत्तराखंड
30° N हिरयाणा
पािक तान
स्तान अरुणाचल पदेश
पािक स्
िद ल्ली नेपाल िसिक्कम
नेपाल
भूटटानान
भू
असम
उत्तर पदेश नागालैडं
राजस्थान मेघालय
25° N
िबहार मिणपुर
मध्य पदेश झारखंड बां लादेश
बांग्ग्लादेश
गुजरात िमज़ ोरम
ित्रपुरा यांमार
म्म् यांम ार
छत्तीसगढ़
ओिडशा पिश्चम बंगाल
20° N अरब सागर
महारा
तेलंगाना बंगाल की खाड़ ी
15° N गोवा आंध पदेश
कन टक
अंड मान ीप समूह
के रल
तिमलनाडु
10° N
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
ीलंका
ीलंक ा
िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E
संकेत -िचह्न अंतर ीय सीमा राज्य की सीमा रा ीय राजधानी
अध्याय म उ ल्ल खत भारत के राजनी तक मान चत्र को यहाँ राज्य के नाम स हत पुनः बनाया गया है।
व ध: पहले अपने नगर या ज़ले को राजनी तक मान चत्र पर खो जए, क्य क उसम राज्य क सीमाएँ और नगर के नाम होते ह।
फर भौ तक मान चत्र पर ठ क उसी स्थान को दे खए और वहाँ का रंग तथा नकटतम अं कत वशेषता नोट क जए — कोई पवत
श्रृंखला, नद , पठार, तट या मरुस्थल। उसी के आधार पर अपने स्थान का वणन क जए।
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य द आप यहाँ रहते कौन-सी भौ तक वशेषता कैसे क हए
ह… बताइए
दल्ली, लखनऊ, पटना उत्तरी (गंग ा के ) मैद ान “गंगा के समतल, उपजाऊ मैदान म, यमुना/गंगा के नकट।”
जोधपुर, बीकानेर थार मरुस्थल “थार मरुस्थल म, अरावली पहा ड़य के प म म।”
शमला, दे हरादून, गंगटोक िहमालय “लघु हमालय अथात हमाचल श्रेणी म।”
हैदराबाद, नागपुर, बगलुरु दक्कन का पठार “दक्कन के पठार पर, प मी और पूव घाट के बीच।”
को च्च, मुंबई, पणजी पिश्चमी तटीय मैद ान “सँकरे प मी तट पर, प मी घाट और अरब सागर के
बीच।”
चेन्नई, वशाखापत्तनम, पुरी पूव तटीय मैद ान “चौड़े पूव तट पर, बंगाल क खाड़ी के कनारे।”
शलांग, को हमा, ईटानगर पूव त्त र की पहािड़याँ “पूव त्तर क पहा ड़य म, मेघालय पठार पर।”
नमूना उत्तर: “म भोपाल म रहता ँ। राजनी तक मान चत्र पर यह मध्य प्रदे श म, भारत के मध्य म है। भौ तक
मान चत्र पर वही स्थान हल्का भूरा है, जसे संकेत-सूची ऊँची भू म बताती है, और उसके ठ क द क्षण म वध्य तथा
सतपुड़ा पहा ड़याँ अं कत ह। इस लए म अपने स्थान का वणन इस प्रकार करूँगा — प्राय पीय पठार के उत्तरी
कनारे पर, नमदा घाट के ऊपर; ऊँची भू म, कसी भी तट से बहुत दूर।”
प्र.8 भारत म खाद्य संरक्षण के उपाय जगह-जगह पर भन्न ह, जो स्थानीय प र स्थ तय के अनुरूप होते ह। ‘कक्षा
प रयोजना’ के अंतगत खाद्य संरक्षण के व भन्न उपाय के बारे म जानकारी एक त्रत क जए। (संकेत – मौसमी
(ऋतु वशेष म उपलब्ध) स ब्जय को सुखाकर उन्ह अन्य ऋतुओं म उपयोग हेतु सुर क्षत रखना।)
प रयोजना कैसे क जए:
1. कक्षा को अध्याय के क्षेत्र के अनुसार समूह म बाँ टए — हमालय, मैदान, मरुस्थल, पठार, तट, पूव त्तर।
2. प्रत्येक वद्याथ घर पर कसी से — वशेषकर दादा-दाद या नाना-नानी से — साक्षात्कार लेकर पूछे क रे जरेटर से पहले
भोजन कैसे सुर क्षत रखा जाता था।
3. प्रत्येक व ध के लए यह ल खए : कौन-सा खाद्य, कौन-सी व ध, वह क्य काम करती है, और वहाँ क कौन-सी
जलवायु उसे संभव बनाती है।
4. सभी समूह क जानकारी को क्षेत्रवार एक कक्षा-चाट म जो ड़ए। छाया चत्र या छोटे नमूने इसे और अ ा बना दगे।
नमूना उत्तर — भरा हुआ चाट:
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क्षेत्र वध उदाहरण वहाँ क्य संभव है
थार / धूप में सुखाना केर-सांगरी, सूखी ककड़ी (काचरी), तेज़ शुष्क गम और बहुत कम आद ता जल शीघ
राजस्थान पापड़, बड़ी उड़ा दे ती है
हमालय / शुष्क ठं ड में सुखाना; ध एु ँ सूखी खुबानी, सूखी पत्तेदार लंबी िहमशीत ऋतु, िजसमें हवा में नमी लगभग नही ं
ल ाख में पकाना स ब्ज़याँ, कठोर पनीर (छु रपी), सूखा होती
मांस
उत्तरी मैदान तेल और नमक में अचार आम और न बू का अचार, सूखी दो फसलों के बीच लंबी गम शुष्क ग ीष्म ऋतु
डालना; धूप में सुखाना मेथी, वड़ी
तट य क्षेत्र नमक लगाकर सुखाना सूखी मछली (बॉम्बे डक, झ गा), समुद के पास नमक सुल भ है और आद जलवायु में
नमक लगा आम मछली को सुर िक्षत रखना आवश्यक है
पठार / कोिठयों में अनाज म क को ठय म ज्वार-बाजरा, इतनी लंबी शुष्क ऋतु िक पूर ी फसल संिचत की
दक्कन भंडारण; धूप में सुखाना सूखी लाल मच जा सके
पूव त्तर चू े के ऊपर ध एु ँ में धुएँ म पका मांस और मछली, भारी वष और नम हवा के कारण धूप में सुखाना
रखना; िकण्वन क ण्वत बाँस क क पल, अखुनी ु ँ और िक ण् वन अपनाए
संभव नही,ं इसिलए ध आ
जाते है ं
सामान्य सद्धांत: भोजन इस लए खराब होता है क सूक्ष्मजीव को जल चा हए। ऊपर क हर व ध या तो जल हटा
दे ती है (सुखाना), या जल को बाँध दे ती है (नमक, चीनी), या भोजन को हवा से अलग कर दे ती है (तेल), या
उसे इतना अम्लीय बना दे ती है क सूक्ष्मजीव पनप न सक ( कण्वन) — और प्रत्येक क्षेत्र वही व ध अपनाता है जो
उसक जलवायु म सबसे सरल हो।
प्र.9 इतने अलग-अलग भौ तक स्वरूप (पवतीय, मरुस्थलीय, मैदानी, तट य इत्या द) के साथ भारत एक वशाल दे श
है। भारत क भौगो लक स्थ त ने लोग को एकजुट रहने म कस प्रकार सहायता क है। इसके बारे म आपका
क्या वचार है?
जो भूगोल भारत को व वध बनाता है, वही उसे बाँधता भी है। चार प्रकार से —
1. प्राकृ तक सीमाओं का एक ढाँचा। उत्तर म पवत, प म म मरुस्थल और अरब सागर, पूव म बंगाल क खाड़ी तथा द क्षण म
हद महासागर — इन्ह ने पूरे उपमहा प को एक स्पष्ट ढाँचे म समेट दया। एक ही ढाँचे के भीतर रहने से लोग म एक ही भू म
का होने का भाव जागा।
2. न दयाँ राजमाग बन । गंगा, ब्रह्मपुत्र, सधु और प्राय पीय न दयाँ सह ा ब्दय से लोग , वस्तुओं और वचार को ढोती रही ह।
फर समतल मैदान ने सड़क और रेल को दे श जोड़ने दया। ापार माग ने हमालय को समुद्र पत्तन से जोड़ा।
3. मानसून सबके लए एक। जून से सतंबर के बीच वही वषा लगभग पूरे दे श तक पहुँचती है। इस लए बुवाई, कटाई और उन्ह
से जुड़े अनेक त्योहार केरल से असम तक एक ही लय म चलते ह — काम और उत्सव का साझा कैलडर।
4. साझा पावन भूगोल। न दयाँ और पवत सवत्र पूज्य माने जाते ह, और तीथ माग जान-बूझकर पूरे दे श को पार करते ह —
हमालय म केदारनाथ, सुदूर द क्षण म रामेश्वरम्, प म म ारका, पूव म पुरी। हर क्षेत्र के लोग एक ही स्थान पर मलते ह।
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भन्नता जोड़ती क्य है, तोड़ती क्य नह : कसी भी एक क्षेत्र के पास सब कुछ नह है। पवत जल और लकड़ी दे ते
mलए उनके बीच
ह, मैदान अन्न, पठार ख नज, तट मछली, नमक और ापार। हर क्षेत्र को दूसरे क उपज चा हए, eइस
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o आवश्यक रहा — और आदान-प्रदान ही साझी संस्कृ त बनाता है। agl
आदान-प्रदान.cसदा
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aनमू ना उत्तर: “हमारा भूगोल हम इस लए जोड़ता है क वह हम एक-दूसरे पर नभर बनाता है। हमालय वह बफ
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सँजोता है जो न दयाँ बनती है; न दयाँ वे मैदान बनाती ह जनसे हमारा अन्न आता है; पठार ख नज दे ता है और तट
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ापार। भारत का कोई भी भाग अकेले पूण नह है। इसम वह एक मानसून जोड़ द जए जो लगभग सबके पास एक
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ही समय पहुँचता है, और वे तीथ माग जो पूरे दे श को पार करते ह — तब समझ आ जाता है क इतने भन्न- भन्न क्षेत्र
इतने लंबे समय से स्वयं को एक ही भू म क्य मानते आए ह।”
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gअध्याय — एक नज़र म
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क्षेत्रफल क दृ ष्ट से भारत वश्व का सातवाँ बड़ा दे श है और ए शया महा प का भाग है। पा कस्तान, बांग्लादे श, नेपाल,
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भूटान, श्रीलंका और म्यांमार के साथ मलकर यह भारतीय उपमहा प बनाता है।
अध्ययन क सु वधा के लए भारत को पाँच प्रमुe खm
a s भाग म बाँटा जाता है — महान पवतीय क्षेत्र, गंगा और सधु का मैदान,
a gत्रl तथा पसमूह।
मरुस्थलीय भूभाग, द क्षणी प्राय पीय क्षे
हमालय उत्तर म लगभग 2500 क.मी. लंबी प्राकृ तक प्राचीर है। इसक कई चो टयाँ 8000 मीटर से ऊँची ह (‘आठ
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हजारी’)। इसक तीन श्रे णयाँ ह — हमा द्र (वृहद हमालय), हमाचल (लघु हमालय) और शवा लक पहा ड़याँ (बाह्य
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हमालय)। पघलती बफ सधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र को जल दे ती है, इस लए इसे ‘ए शया का जल शखर’ कहा जाता है।
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से .हमालय बना। भारत आज भी प्र तवष लगभग पाँच सट मीटर उत्तर क ओर बढ़aरहा है और हमालय प्र तवष लगभग
भारतीय भूभाग ग डवाना से अलग होकर उत्तर क ओर बढ़ा और लगभग पाँच करोड़ वष पूव यूरे शया से टकराया — इसी
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पाँच मलीमीटर ऊँचा हो रहा है।
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ल ाख भारत का शीत मरुस्थल है — स दय म तापमान –30°C से नीचे, बहुत कम वषा, ‘चंद्रभू म’ जैसा भूभाग और खारे
omम फैला है; इसके रेत के ट ले 150 मीटर तक ऊँचे हो सकते ह।
पानी क पग ग त्सो झील। पवत के द क्षण म उपजाऊ गंगा के मैदान ह, जहाँ भारत क जनसंख्या का बड़ा भाग रहता है।
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थार मरुस्थल राजस्थान, गुजरात, पंजाब और ह.c a g
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रयाणा
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प g मी घाट (यूनेस्को वश्व धरोहर स्थल) और अपेक्षाकृत नम्न पूव घाट ह तथा बीच म
लगभग 2.5 अरब वष पुरानी अरावली श्रृ ंख ला मरुस्थल को पूव क ओर बढ़ने से रोकने वाली प्राकृ तक प्राचीर है।
प्राय पीय पठार के दोन ओर a
दक्कन का पठार है। इसका ढाल पूव क ओर है, इस लए गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और महानद पूव क ओर तथा नमदा एवं
ताप्ती प म क ओर बहती ह।
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m a s em36 प) और बंगाल क खाड़ी म
cअंoडमान और नकोबार पसमूह (500 से अ धक ज्वालामुखीय प) ह। पूaवgत्तरl म मेघालय पठार क गारो, खासी और
भारतीय तटरेखा 7500 क.मी. से भी अ धक लंबी है। अरब सागर म लक्ष प (मूँगे से बने
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as em जयं तया पहा ड़याँ वश्व के सवा धक वषा वाले क्षेत्र म ह।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ अध्याय म कहाँ उदाहरण / ववरण
उपमहा प महा ीप का वह बड़ा भाग जो शेष महा ीप से कु छ पृष्ठ 2 — भारत और भारत, पा कस्तान, बांग्लादे श, नेपाल,
अलग पतीत होता है उसके पड़ोसी भूटान, श्रीलंका, म्यांमार
हमा द्र वृहद िहमालय — सव िधक ऊँची और िवकट पृष्ठ 6 — तीन श्रे णयाँ माउं ट एवरेस्ट, कंचनजुंगा
ं ृ ला, वष भर िहमाच्छािदत
ख
हमाचल लघु िहमालय — समशीतोष्ण जलवायु, सम ृद्ध जैव पृष्ठ 6 नैनीताल, मसूरी, दा ज लग, शमला
िविवधता
शवा लक बाह्य िहमालय — घुम ावदार पहािड़याँ और घने पृष्ठ 6 हमालय और गंगा के मैदान के बीच
पहा ड़याँ जंग ल, संक्रमण क्षेत्र
ग डवाना वह पाचीन िवशाल भूभाग िजसका भाग कभी भारत था पृष्ठ 5 — हमालय का भारत अलग होकर उत्तर क ओर बढ़ा
और िजसका पड़ोसी अफ ीका था नमाण
शीत मरुस्थल ऐसा मरुस्थल जो उष्ण नही ं, शीत होता है — बहुत पृष्ठ 8 — ल ाख स दय म –30°C से नीचे; पग ग त्सो;
कम वष , ऊबड़-खाबड़ च ानी भूभाग ‘चंद्रभू म’
रेत का ट ला पवन ारा रे त को समेटकर बनाई गई पहाड़ी जैस ी पृष्ठ 12–13 — थार कभी-कभी 150 मीटर तक ऊँचे
आकृ ित
टांका / कुंड राजस्थान की पारंपिरक जल-संग ह संर चनाएँ जो पृष्ठ 14 — इसे अनदे खा थार म जल-संरक्षण क अनूठ व ध
वष जल संिचत करती है ं न कर
पठार वह स्थल रूप जो आस-पास की भूिम से ऊँचा हो पृष्ठ 16 — दक्कन का पठार
और िजसकी सतह पाय: समतल हो पुनरावलोकन कर
प्राय प वह भूभाग जो तीन ओर से जल से िघरा होता है पृष्ठ 16 — हा शये क प्राय पीय भारत — अरब सागर, बंगाल
टप्पणी क खाड़ी, हद महासागर
मुहाना (एस्चुरी) नदी का चौड़ा मुख जहाँ वह सीधे समुद में िमलती है पृष्ठ 19 — प मी तट नमदा और ताप्ती के मुहाने, इस तट पर
सबसे बड़े
डेल्टा नदी के मुहाने पर अवसादों से बनी ित्रभुजाकार या पृष्ठ 20 — पूव तट महानद , गोदावरी, कृष्णा, कावेरी;
पंखाकार भू-आकृ ित सुंदरवन का डेल्टा
लैगून पाकृ ितक अवरोधक ारा बड़े जलाशय से अलग हुई पृष्ठ 20 पु लकट झील; चल्का झील
झील
पसमूह ीपों का समूह पृष्ठ 21 — लक्ष प केरल के मालाबार तट के पास मूँगे से बने
36 प
जी वत जड़ का कई वष ं तक पेड़ों की जड़ों को आपस में बुनकर पृष्ठ 23–24 — मेघालय न ग्रयाट गाँव, चेरापूंजी; माव लननॉन्ग
पुल तैयार िकया गया पुल गाँव
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