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NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 2 मौसम को समझना

AglaSem पर कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 मौसम को समझना (समाज का अध्ययन (भाग 1)) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Social Science Chapter 2 Understanding the Weather (Exploring Society (Part I)), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 2 मौसम को समझना - Page 1 of 34

About NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 2 मौसम को समझना

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NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 2 मौसम को समझना – Text

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Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 2: मौसम को समझना

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

27 – 44 23 37 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 33 pages

Page 2

कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 2: मौसम को समझना
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे का अध्याय 2 ( वषयवस्तु — भारत एवं वश्व : भूभाग एवं उनके नवासी) बताता है क मौसम क्या है,
इसके पाँच तत्व कौन-से ह और तापमापी, वषामापी, वायुदाबमापी, वात दक्सूचक यंत्र, पवन वेगमापी तथा आद्रतामापी से उन्ह कैसे मापा जाता है।
अंत म यह समझाया गया है क भारत मौसम व ान वभाग इन्ह आँकड़ से पूवानुमान और रंग-आधा रत चेताव नयाँ कैसे तैयार करता है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1) (कक्षा 7) 27 – 44

खं ड प्रश्न

23 37

माध्यम

हन्द

महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 27
वषयवस्तु — भारत एवं वश्व : भूभाग एवं उनके नवासी

महत्वपू ण प्रश्न

प्र.1 हम अपने आस-पास के मौसम का आकलन एवं नरीक्षण कस प्रकार कर सकते ह?

हम मौसम के पाँच तत्व को मापकर मौसम का आकलन करते ह। प्रत्येक तत्व का अपना उपकरण और अपनी इकाई है। नरीक्षण
का अथ है — इन माप को प्र त दन एक ही न त समय पर लेना और उनका अ भलेख रखना।

मौसम का तत्व उपकरण इकाई

तापमान तापमापी (थमामीटर) ल्
िडग ी से ि सयस (°C)

वषण वषामापी (रेन गेज) िमल ीमीटर (िम .मी.)

वायुम ंडलीय दाब वायुदाबमापी (बैरोमीटर) िमल ीबार (mb)

पवन वात दक्सूचक यंत्र ( दशा), पवन वेगमापी (ग त) /
िकमी घंटा

आद ता आद्रतामापी (हाइग्रोमीटर) सापेि क्षक आद ता (%)

ये सभी उपकरण मौसम कद्र म एक साथ लगे होते ह, जहाँ नय मत अंतराल पर माप ली जाती ह। स्वचा लत मौसम कद्र (AWS)
यही काय संवेदक क सहायता से स्वयं कर लेता है और ऐसे स्थान पर भी काम करता है जहाँ कोई व्य क्त नह रह सकता — जैसे
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्रा धकरण ारा वष 2023 म स क्कम क एक हम-झील पर, समुद्रतल से 4800 मीटर से भी अ धक ऊँचाई
पर स्था पत कद्र।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य : ‘गम’, ‘ ठठु रन’ या ‘भारी वषा’ जैसे शब्द का अथ हर व्य क्त के लए अलग होता है। कतु कसी
सवमान्य पैमाने पर लखी संख्या का अथ सबके लए एक ही होता है — इस लए चेन्नई म लया गया पा ांक
कश्मीर के पा ांक से तुलना योग्य बन जाता है।

क्या आप जानते ह? उपकरण से बहुत पहले से मनुष्य मौसम का नरीक्षण करता आया है — प क्षय का कम
ऊँचाई पर उड़ना, च टय का अपने अंडे ऊँचे स्थान पर ले जाना, मेढ़क क तेज टरटराहट या चीड़ के शंकुओं का
खुलना और बंद होना। यह ान पीढ़ दर पीढ़ आगे बढ़ा है और आज भी भारत के अनेक भाग म, वशेषकर
मानसून के आगमन का अनुमान लगाने के लए, उपयोग होता है।

प्र.2 भारी वषा, तूफान, सूखा और ताप लहर (हीट वेव) जैसी घटनाओं के लए तैयार रहने म मौसम क
भ वष्यवा णयाँ कस प्रकार हमारी सहायता करती ह?

पूवानुमान हम घटना घ टत होने से पहले काय करने का समय दे ता है। मौसम- व ानी तापमान, दाब, पवन, वषा और आद्रता के लंबे
अ भलेख का अध्ययन करते ह और वै ा नक व धय से बताते ह क आने वाले घंट , दन या सप्ताह म मौसम कैसा रहेगा।

समुद्र म तूफान और भारी वषा — मछु आर को नाव न ले जाने क चेतावनी द जाती है और चक्रवात क आशंका होने पर पूरे
तट य क्षेत्र को खाली कराया जा सकता है।
स्थल पर भारी वषा — स्थानीय सरकार नचले क्षेत्र से लोग को हटाती ह, नाव और पंप तैयार रखती ह तथा राहत सामग्री का
भंडारण करती ह।
सूखा — कसान कम पानी म पकने वाली या कम अव ध क फसल चुन सकते ह और तालाब तथा जलाशय का पानी पहले
से ही सोच-समझकर बाँटा जा सकता है।
ताप लहर — वद्यालय का समय बदला जाता है, अस्पताल लू लगने के रो गय के लए तैयार रहते ह और खुले म काम करने
वाल के लए पेयजल क व्यवस्था क जाती है।
दै नक जीवन — वायुयान चालक और ना वक पवन के आँकड़ का उपयोग करते ह, कसान बुआई और कटाई का समय तय
करते ह, और एक प रवार जान पाता है क वद्यालय क यात्रा म छाता ले जाना है या नह ।

आज यह क्य अ धक आवश्यक है: जलवायु प रवतन के कारण सूखा, बाढ़, चक्रवात और ताप लहर जैसी गंभीर
मौसमी घटनाएँ अ धक होती जा रही ह। पूवानुमान चक्रवात को रोक नह सकता, कतु यह तय कर सकता है क
उसके माग म कतने लोग खड़े रह जाएँ।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 28

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

मौसम और इसके तत्व

आइए पता लगाएँ

प्र.1 आप अपनी स्थानीय भाषा म मौसम का वणन करने के लए कन- कन शब्द का प्रयोग करते ह? हॉट, कोल्ड,
वॉम, चली, क्रस्प, प्लेजट आ द सामान्यतः अंग्रेजी भाषा म उपयोग कए जाने वाले शब्द ह।

अपनी भाषा के शब्द क सूची बनाइए और प्रत्येक शब्द के आगे ल खए क वह मौसम के कस तत्व का वणन करता है —
तापमान, वषण, पवन या आद्रता। इसी से यह केवल शब्द-संग्रह न रहकर भूगोल का काय बन जाता है।
नमूना उत्तर:

भाषा मौसम के लए प्रयुक्त शब्द कौन-सा तत्व

िहंद ी गम, ठं डा, सुहावना, उमस भरा, ठठु रन, झमाझम, बूँदाबाँद , लू , आद ता, वषण, पवन
तापमान

मराठी ऊन, गारवा, दमट, रम झम, वादळ , आद ता, वषण, पवन
तापमान

तिमल ெவய ல் (वे यल — कड़ी धूप), குள ர் (कु ळर — ठं ड), ஈரப் ப தம் (ईरप्पदम् — आद्रता) , आद ता
तापमान

बांग्ला গরম (गरम), ঠা া (ठांडा), ভ াপসা (भ्यापसा — उमस), ঝড় (झोड़ — तूफान) , आद ता, पवन
तापमान

यह क जए: अनेक भारतीय भाषाओं म मौसम क कसी वशेष दशा के लए एक ही शब्द होता है — उत्तर भारत
क गम धूल भरी हवा के लए लू, चप चपी वायु के लए उमस, धीमी लगातार फुहार के लए रम झम। ऐसे तीन
शब्द एकत्र क जए जनका अनुवाद अंग्रेजी म पूरे वाक्य से ही हो पाता है।

ऐसा क्य : भाषा वही शब्द गढ़ती है, जनक उसके बोलने वाल को आवश्यकता होती है। जहाँ चार महीने वषा होती
है, वहाँ वषा के अनेक शब्द मलते ह; जहाँ लंबी शुष्क गम पड़ती है, वहाँ गम के।

आइए वचार कर — पृष्ठ 29

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Page 5

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना
a g l AglaSem · NCERT Solutions

मौसम के तत्व
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आइए वचार कर

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a s em क जए क चेन्नई का कृष्णन कश्मीर म रहने वाले आ मर से वातालाप कर रहा है। कृष्णन कह रहा है क
gl
कल्पना
a
प्र.1
पछली रात क वषा के बाद चेन्नई म ठठु रन हो गई है। आ मर पूछता है क वहाँ कतनी ठं ड है। कृष्णन आ मर को

m
कैसे बताएगा क चेन्नई म कतनी ठं ड है? आ खरकार, कृष्णन के लए जो मौसम ठं डा है, वह आ मर के लए
बहुत सुहावना हो सकता है!
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कृष्णन इसे शब्द म समझा ही नह सकता — उसे आ मर को ऐसे पैमाने पर एक संख्या बतानी होगी जसे दोन जानते ह । उसे

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कहना चा हए, “यहाँ 20°C है”, न क “यहाँ ठठु रन है”।

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g करती है क आपका शरीर
ऐसा क्य.c: ‘ ठठु रन’ कोई माप नह , एक अनुभू त है — और यह अनुभू त इस पर नभर
a
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se अभ्यस्त है। चेन्नई लगभग पूरे वष गम और आद्र रहता है, इस लए कृष्णन को 20°C ठं डा लगता है। कश्मीर
g l aकसका
a म हमपात वाली वास्त वक सद पड़ती है, इस लए आ मर के लए वही 20°C एक सुहावना दन है। एक ही वायु

s
दोन को दो वपरीत अनुभू तयाँ दे ती है।
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a s
glउसक तुलना अपने मौसम से कर सकता है। इसी कारण यह पूरा अध्याय सामान्य
जैसे ही कृष्णन “20°C” कहता है, असहम त समाप्त हो जाती है। आ मर को भले ही 20°C सुहावना लगे, अब वह ठ क-ठ क

a
जानता है क चेन्नई का मौसम कैसा है और वह
मानक से मौसम मापने के वषय म है — यही बात वषा ( म.मी.), दाब ( मलीबार), पवन ( कमी/घंटा) और आद्रता (प्र तशत) पर
भी लागू होती है।
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m .
m as e
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संकेत: कृष्णन एक और उपयोगी संख्या जोड़ सकता है — आद्रता। रातभर क वषा के बाद 20°C क नम वायु

a s emत्वचा पर उसी तापमान क शुष्क वायु से कह अ धक ठं डी लगती है।

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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 29
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मौसम मापना क्य आवश्यक है

आइए पता लगाएँ

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s e mकेत – कुछ घंटे अथवा कुछ दन
comपहले la बनाने म कस प्रकार सहायता
प्र.1 आपके अनुसार मौसम के अ धक सट क आकलन के क्या लाभ हो सकते ह? (सं

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मौसम के वषय म पूव जानकारी आपको कुछ ग त व धय क योजना

as em करेगी?)
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सट क मापन से ही पूवानुमान संभव होता है, और पूवानुमान लगभग सभी के काम आता है —

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agले जाना सुर क्षत है या नह ।
कसान — कब बोएँ, कब सचाई कर, कब कटाई कर, और कट हुई फसल को खेत म कब न छोड़।
मछु आरे — कल समुद्र म नाव

m
वायुयान चालक और ना वक — पवन क दशा और ग त से उड़ान भरना, उतरना और जहाज का माग तय होता है।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

आपदा प्रबंधन — चक्रवात या बाढ़ क चेतावनी से जले को लोग को हटाने और राहत जुटाने का समय मल जाता है।
वद्यालय और कायालय — ताप लहर या भारी वषा क चेतावनी पर समय बदला जा सकता है या अवकाश घो षत कया जा
सकता है।
नमाण काय — वषा म न तो कंक्र ट डाली जा सकती है और न सड़क पर तारकोल बछाया जा सकता है।
उद्योग और संग्रहालय — खाद्य प्रसंस्करण म नयं त्रत आद्रता चा हए; संग्रहालय अपनी प्रद शत वस्तुओं क सुरक्षा के लए
शुष्क वातावरण बनाए रखते ह।
आप स्वयं — पक नक, मैच, ववाह, मेला या वद्यालय क यात्रा क योजना बनाने म।

सट कता क्य आवश्यक है: “वषा हो सकती है” से कसी का काम नह चलता। “कल सायं 4 से 8 बजे के बीच
35 म.मी. वषा” कसान को सचाई रोकने, नगरपा लका को नाला साफ करने और आपको छाता उठाने का स्पष्ट
संकेत दे ता है। माप जतनी सट क, नणय उतना ही सट क।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 30
प्रकृ त के संकेत का अवलोकन

आइए पता लगाएँ क्षे त्र -काय

प्र.1 अपने आस-पड़ोस के बुजुग से बात क जए और उनसे पू छए क वे मौसम का पूवानुमान कैसे लगाते ह। वे कन
संकेतक का अवलोकन करते ह? अपनी क्षेत्रीय भाषा म प्रच लत कुछ कहावत, जो मौसम के पूवानुमान से
संबं धत ह , उन्ह ल खए।

इसे अ तरह कैसे कर: दो-तीन बुजुग से बात क जए — य द हो सके तो कसी कसान, मछु आरे या माली से। उनसे पू छए क
(i) वे कौन-सा संकेत दे खते ह, (ii) वह क्या बताता है, (iii) कतने दन पहले, और (iv) क्या वह आज भी सही उतरता है। प्रत्येक
कहावत पहले अपनी ल प म ल खए, फर उसका अथ। अंत म उनके कुछ संकेत क तुलना एक सप्ताह तक भारत मौसम व ान
वभाग के पूवानुमान से क जए।
नमूना उत्तर: हमारी पड़ो सन शांताबाई, जो दो एकड़ खेती करती ह, कहती ह क मानसून के आने का पता लगाने के लए उन्ह कभी
पूवानुमान क आवश्यकता नह पड़ी।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

दे खा गया संकेत कसका संकेत माना जाता है

ची ंिटयों का अपने अंडे ऊँचे स्थानों पर ले जाना -
एक द ो िद न में भारी वष

पिक्षयों का असामान्य रूप से कम ऊँचाई पर उड़ना आने वाल ा त ूफ ान

साँझ को मेढ़कों की तेज टरटराहट उ सी रात वष

चीड़ के शंकु ओं का बंद हो जाना वाय ु में आद ता बढ़ ना — वष िनकट

िगलहिरयों का मेवे एकत्र करना आगे किठन ऋत ु

मोर का बोलना और नाचना मानसून की पहल ी फु हारे ं

चंद मा के चारों ओर घे र ा -
द ो तीन िद न में वष

एकत्र क गई कहावत: “च ट अंडे ले चली, बरसात आने वाली” — जब च टयाँ अंडे ढोने लग तो वषा नकट है। घाघ क प्र सद्ध
उ क्त भी याद र खए — “शुक्रवारी बादरी रहे सनीचर छाय, तो य भाखै भड्डरी बन बरसे ना जाय”।

ये संकेत काम क्य करते ह: यह जादू नह है। जीव-जंतु और पौधे उन्ह तत्व पर प्र त क्रया करते ह, जन्ह मौसम-
व ानी मापते ह। च टयाँ अंडे इस लए हटाती ह क्य क भू म नम होने लगती है; चीड़ के शंकु इस लए बंद होते ह
क्य क वायु क आद्रता बढ़ जाती है; पक्षी इस लए नीचे उड़ते ह क्य क तूफान से पहले वायुदाब गर जाता है।
पारंप रक ान उन्ह संकेत को पढ़ता है — धातु के उपकरण के स्थान पर जी वत उपकरण से।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 30
मौसम- व ानी कैसे काय करते ह

प्र.1 वे यह कैसे करते ह? क्या वे केवल आकाश को दे खकर अनुमान लगाते ह?

नह — वे तुक्का नह लगाते। मौसम व ान मौसम और इसके वकास का व्यव स्थत अध्ययन है, और यही अध्ययन मौसम के
पूवानुमान का आधार है।
मौसम- व ानी तीन चरण म काम करते ह —

1. मापन। मौसम कद्र के उपकरण प्र त दन न त समय पर तापमान, वषा, दाब, पवन और आद्रता दज करते ह।
2. संग्रहण। सैकड़ कद्र के ये पा ांक महीन और वष तक एकत्र कए जाते ह ता क प्र तरूप दखाई द — इसी को अध्याय
सां ख्यक कहता है, अथात प्र तरूप को पहचानने, घटनाओं को समझने अथवा भ वष्यवा णयाँ करने के लए आँकड़ के
संग्रहण और व ेषण क तकनीक।
3. पूवानुमान। इन्ह आँकड़ पर वै ा नक व धयाँ लगाकर बताया जाता है क कसी प्रदे श वशेष म कुछ घंट , कुछ दन या कुछ
सप्ताह बाद मौसम कैसा होगा।

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संकेत: आकाश दे खना आज भी काम का है — घर आया काला बादल एक वास्त वक प्रमाण है। कतु आँख एक
समय म केवल एक स्थान का आकाश दे ख पाती है। उपकरण पूरे दे श को, दन-रात दे खते ह और जो दे खा उसे याद
भी रखते ह।

पुनरावलोकन कर — पृष्ठ 31
क) तापमान

पु न रावलोकन कर

स्मरण कक्षा 6 क व ान क पाठ्यपुस्तक ज ासा म आपने तापमान को मापने वाले व भन्न तापमापी यंत्र के बारे म
पढ़ा है, जैसे – ज्वरमापी (क्ली नकल थमामीटर) और प्रयोगशाला तापमापी (लेबोरेटरी थमामीटर)। आपने
तापमान मापने के पैमान के बारे म भी सीखा है। उनम से एक से ल्सयस पैमाना है और दूसरा फॉरेनहाइट
पैमाना। उदाहरण के लए, य द हमारे पास 15 डग्री से ल्सयस (जो 15°C के रूप म लखा जाता है) का ठं डा
तापमान है, तो वह 59 डग्री फॉरेनहाइट (जो 59°F के रूप म लखा जाता है) के बराबर होता है।

कक्षा 6 क यह बात एक स्थान पर, इस अध्याय म काम आने लायक रूप म —

तापमापी क्या मापता है सामान्य प रसर

ज्वरमापी (क्लीिनकल थम मीटर) मनुष्य के शरीर का तापमान ल गभग 35°C से 42°C

पयोगशाला तापमापी प्रयोग म प्रयुक्त वस्तुओं का तापमान ल गभग −10°C से 110°C

अिधकतम-न्यूनतम तापमापी दन का उच्चतम और नम्नतम वायु तापमान मौसम क क्
े ं द ों में पय ु त

दोन पैमाने एक ही वस्तु को नापने के दो अलग-अलग फ ते ह —

0°C = 32°F (बफ िपघलती है)

15°C = 59°F (ठं डा िदन — पुस्तक का उदाहरण)

100°C = 212°F (जल उबलता है)
°F = (°C × 9 ÷ 5) + 32

पुस्तक का उदाहरण जाँ चए — 15 × 9 ÷ 5 = 27, और 27 + 32 = 59। ✓

दो पैमाने क्य : से ल्सयस पैमाने म 0 पर बफ पघलती है और 100 पर जल उबलता है, अथात इस अंतराल के
ठ क 100 भाग कए गए ह। फॉरेनहाइट पैमाना इससे पहले बना था, उसके नयत बदु अलग थे और वह इसी
अंतराल को 180 भाग म बाँटता है। भारत स हत संसार क लगभग सभी मौसम सेवाएँ °C म ही सूचना दे ती ह।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: मौसम मापने वाले तापमापी को कभी सीधी धूप म नह रखा जाता। तब वह वायु का नह , धूप म तपे काँच
का तापमान बता दे गा।

इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 32
भारत मौसम व ान वभाग

इसे अनदे खा न कर

प्र.1 सूय से वषा क्य होती है? क्या आप इसका कारण सोच सकते ह?

हाँ — जल को आकाश तक पहुँचाने वाला इंजन सूय ही है। सूय क ऊष्मा न हो तो न जलवाष्प बने, न बादल, और न ही वषा हो।

सूय समुद , निदयों, झीलों, नम िम ी और पित्तयों को गम करता है

→ जल वािष्पत होकर अदृ श्य जलवाष्प के रूप में ऊपर उठता है

→ ऊपर वायु ठं डी होती है, इसिलए वाष्प संघिनत होकर सूक्ष्म बूदँ ों में बदलती है

→ लाखों बूदँ े ं िमलकर बादल बनाती है ं

→ बूदँ े ं भारी होकर वष के रूप में िगरती है ं

संघनन → बादल

वाष्पन
वष

समुद , नदी, नम भूिम

जल चक्र — सूय क ऊष्मा से जल वा ष्पत होता है, ऊपर जाकर वाष्प संघ नत होकर बादल बनाती है और बादल वही जल वषा के रूप म
लौटा दे ता है।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना
a g l AglaSem · NCERT Solutions

आदश वाक्य कतना सट क है: भारत मौसम व ान वभाग का आदश वाक्य ‘आ दत्यात् जायते वृ ष्टः’ — अथात
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m होती है, वषा
‘सूय से वषा होती है’ — प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृ त से लया गया है, और पूण वाक्य कहता है, “सूय सेeवषा
s
m a
co प्राप्त होता है और भोजन या अन्न से जीव उत्पन्न होते ह।” यह एक ंखagलाlहै — सूय का प्रकाश
से भोजन या.अन्न

a s em→ वषा → फसल → जीवन। प्राचीन प्रेक्षक ने बना कसी उपकरण के जल चक्र पहचान लया था।
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→ वाष्पन

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क्या आप जानते ह? भारत मौसम व ान वभाग क स्थापना 1875 म हुई थी और यह संसार क सबसे पुरानी

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मौसम सेवाओं म से एक है।

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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 32–33

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तापमान क ता लका पढ़ना

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आइए पता लगाएँ

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यहाँ मध्य प्रदे श म एक नगर के तापमान को एक ता लका ारा प्रस्तुत कया गया है। सप्ताह म अ धकतम और
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प्र.1

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न्यूनतम तापमान कतना है? ताप सीमा (रज) का आकलन क जए।

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ता लका म 28.02.2025 से 06.03.2025 तक के सात दन दए गए ह —

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mसीमा (°C)
दनांक अ धकतम (°C) न्यूनतम (°C)
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उस दन क ताप
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28.02.2025 29 16

agl 01.03.2025 30 15 15

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02.03.2025 14

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03.03.2025 32 18 14

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05.03.2025 14

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06.03.2025 29 15
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सप्ताह का सव िधक अिधकतम तापमान = 32°C (03.03.2025 को)

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सप्ताह का सबसे कम न्यून तम तापमान = 14°C (05.03.2025 को)
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ताप सीमा = 32 − 14
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= 18°C a

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य : ताप सीमा का अथ है अ धकतम म से न्यूनतम घटाना। एक दन क ताप सीमा बताती है क सूयास्त के
बाद वायु कतनी तेजी से ठं डी हुई; पूरे सप्ताह क ताप सीमा बताती है क उस सप्ताह मौसम कतना बदला। 18°C
का यह अंतर शीत ऋतु के अंत म कसी आंत रक (स्थलीय) नगर के लए सामान्य है — स्वच्छ आकाश के कारण
दन म भू म खूब तपती है और रात म उतनी ही तेजी से ऊष्मा खो दे ती है।

यह क जए: 03.03.2025 का औसत दै नक तापमान नका लए — (32 + 18) ÷ 2 = 25°C। सात दन के
लए यही क जए और आपके पास पूरे सप्ताह का तापमान- चत्र होगा।

प्र.2 कृष्णन और आ मर के बीच हुए वातालाप को याद कर। अगर कृष्णन कहता है क चेन्नई म तापमान 20 डग्री
से ल्सयस है और उसे थोड़ी ठं ड लग रही है, तो उसके और आ मर के पास कोई साधन होगा जससे वे दोन इसे
समझ सकते ह । आ मर ारा कृष्णन के कथन पर द गई प्र त क्रया के बारे म आप क्या सोचते ह?

आ मर संभवतः हँसकर कुछ ऐसा कहेगा — “बीस डग्री? यहाँ तो यह वसंत क सुहावनी दोपहर है! श्रीनगर म स दय क सुबह
लगभग 0°C होती है और जनवरी म नल का पानी तक जम जाता है। कश्मीर म 20°C हो जाए तो हम बना जैकेट के खेलने नकल
जाएँ।”
महत्वपूण यह है क वातालाप म क्या बदल गया। पहले आ मर ‘ ठठु रन’ क कल्पना ही नह कर पा रहा था। अब वह ठ क संख्या
जानता है और उसक तुलना अपने अनुभव से कर सकता है — इस लए दोन अनुभू त पर असहमत रहते हुए भी तथ्य पर पूरी तरह
सहमत ह।

ऐसा क्य : ठं ड और गम क हमारी अनुभू त इस पर नभर करती है क शरीर कसका अभ्यस्त है। चेन्नई का शरीर,
जो लगभग पूरे वष 30–35°C सहता है, 20°C को ठं डा मानता है। श्रीनगर का शरीर, जो हमांक के नकट स दयाँ
झेलता है, उसी 20°C को हल्का-सुहावना मानता है। तापमापी तथ्य तय करता है; अनुभू त शरीर तय करता है।

संकेत: इसी लए भारत मौसम व ान वभाग वास्त वक तापमान के साथ ‘सामान्य’ (NOR) तापमान भी छापता है।
श्रीनगर के लए 6.5°C ठं डा दन इस लए है क्य क उस त थ का सामान्य तापमान 8.9°C है — स्थान जाने बना
अकेली संख्या का कोई अथ नह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 33

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

ख) वषण

प्र.1 य द यह समाचार मलता है क कसी स्थान वशेष पर 30 म.मी. वषा हुई, तो इसका क्या तात्पय है?

इसका तात्पय है क य द वह जल न बहता, न रसता और न वा ष्पत होता, तो उस दन क वषा उस पूरे क्षेत्र को 30 मलीमीटर (3
सट मीटर) गहरी जल क परत से ढक दे ती।

वष को आयतन में नही ं, गहराई में मापा जाता है

1 वग मीटर पर 30 िम.मी. वष = 30 लीटर जल

1 हेक्टे यर पर 30 िम.मी. वष = 3,00,000 लीटर जल

गहराई ही क्य : गहराई से कन्ह भी दो स्थान क सीधी तुलना संभव हो जाती है। एक बड़े नगर और एक छोटे खेत
— दोन पर वषा समान तीव्रता क हो तो दोन को “30 म.मी.” ही मलेगा। लीटर क कुल संख्या बहुत भन्न होगी,
कतु गहराई एक ही रहेगी। इसी लए चेन्नई के 30 म.मी. क तुलना चेरापूंजी के 30 म.मी. से क जा सकती है।

संकेत: मोटे तौर पर, एक दन म 10 म.मी. से कम हल्क वषा है, 30 म.मी. अच्छ वषा है, और 100 म.मी. से
अ धक वही ‘मूसलाधार वषा’ है जसे भारत मौसम व ान वभाग अपने चेतावनी मान चत्र पर अं कत करता है।

प्र.2 वषा को कैसे मापा जाता है?

वषामापी (रेन गेज) नामक यंत्र से ( चत्र 2.6)। इसके तीन भाग होते ह और प्रत्येक का अपना काम है —

भाग काय

संग ाहक कीप न त क्षेत्रफल पर गरने वाली वषा को पकड़कर नीचे पहुँचाती है

मापन नली (बेल नाकार िसले ंडर) एक त्रत जल को सं चत रखती है

मापने का पैम ाना नली पर मलीमीटर म अं कत रहता है, जससे जल क गहराई पढ़ जाती है

जब वषा होती है, तब जल संग्राहक क प म गरता है और बेलनाकार नली म एक त्रत हो जाता है। नली पर अं कत मापक से वषा
जल क गहराई पढ़ ली जाती है। जब एक त्रत जल क ऊँचाई 5 म.मी. हो, तो कहा जाता है क उस क्षेत्र म 5 म.मी. वषा
हुई।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: पा ांक सदै व प्र त दन एक ही समय पर लया जाता है — भारत मौसम व ान वभाग 8:30 बजे प्रयोग
करता है — जससे हर दन का आँकड़ा ठ क 24 घंटे का हो। वषा के स्थान पर हमपात हो तो उसे पहले पघलने
दया जाता है, फर मापा जाता है।

क प क्य आवश्यक है: क प नली से चौड़ी होती है, इस लए वषा क थोड़ी-सी गहराई भी पतली नली म जल का
ऊँचा स्तंभ बना दे ती है, जसे पढ़ना सरल होता है। पैमाना इसी अनुपात के अनुसार अं कत होता है, इस लए पढ़ा
गया मान वास्त वक वषा ही होता है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 34
अपना वषामापी बनाइए

आइए पता लगाएँ क्रयाकलाप

प्र.1 ऊपर दशाए गए चत्रानुसार एक वषामापी बनाइए। वषामापी को खुले स्थान म र खए और ऐसी वस्तुओं से दूर
र खए, जो वषा के जल संग्रहण म बाधक हो सकती ह। यह भी सु न त क जए क वषामापी समतल सतह पर
हो और हवा से झुके अथवा गरे नह । मापक क सहायता से वषा क मात्रा को प्र त दन एक ही समय पर एक
महीने तक अ भले खत क जए (य द हमपात होता है, तो उसे मापने से पहले पघलने द जए)। उस महीने के
प्रत्येक सप्ताह म होने वाली औसत वषा क गणना क जए तथा सप्ताह दर सप्ताह म होने वाली वषा के अंतर पर
टप्पणी क जए।

कैसे बनाएँ: सीधी द वार वाली प्ला स्टक क बोतल का ऊपरी एक- तहाई भाग काटकर उसे उलटकर नीचे वाले भाग म बैठा द जए
— यही संग्राहक क प बन जाएगी। नीचे वाले भाग पर मलीमीटर म अं कत कागज क प चपकाइए (या स्केल का उपयोग
क जए), जसक शून्य रेखा भीतर क तली से आरंभ हो। बोतल को कसी भारी डब्बे म बैठा द जए, ता क हवा उसे गरा न सके।
वे नयम जन पर आपके पाठ्यांक क साथकता टक है —

खुला मैदान — पेड़, द वार या छत के कनारे से दूर; ऊपर क कोई भी वस्तु या तो वषा रोक लेगी या अ त रक्त जल टपका
दे गी।
समतल एवं दृढ़ सतह; वषामापी का मुख क्षै तज रहना चा हए।
प्र त दन एक ही घड़ी-समय पर पा ांक ली जए और फर वषामापी खाली कर द जए।
सूखे दन ‘0’ ल खए — खाली स्थान छोड़ना और शून्य लखना एक बात नह है।
हमपात या ओले गर तो उन्ह पघलने के बाद मा पए।

नमूना उत्तर (मानसून के एक महीने का) —

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

सप्ताह दै नक पाठ्यांक ( म.मी.) कुल ( म.मी.) प्र त दन औसत ( म.मी.)

सप्ताह 1 0, 0, 12, 4, 0, 8, 4 28 28 ÷ 7 = 4.0

सप्ताह 2 15, 22, 30, 18, 6, 0, 7 98 98 ÷ 7 = 14.0

सप्ताह 3 2, 0, 0, 5, 11, 3, 0 21 21 ÷ 7 = 3.0

सप्ताह 4 0, 9, 26, 34, 12, 5, 0 86 86 ÷ 7 = 12.3

महीने का कु ल = 28 + 98 + 21 + 86 = 233 िम.मी.

पित सप्ताह औसत = 233 ÷ 4 = 58.25 िम.मी.

अंतर पर टप्पणी: वषा एक समान नह हुई। महीने क कुल वषा का चार-पाँचवाँ भाग सप्ताह 2 और सप्ताह 4 म ही गरा, जब क
सप्ताह 1 और 3 लगभग सूखे रहे। भारत म वषा झ ड़य म आती है, लगातार फुहार के रूप म नह — कुछ दन स क्रय मानसून,
फर सप्ताह भर का वराम, फर दूसरी झड़ी।

यह क्य महत्वपूण है: कसान 233 म.मी. के मा सक औसत पर योजना नह बना सकता। उसके लए यह
महत्वपूण है क सूखा वराम ठ क उसी समय तो नह आया जब नन्ही फसल को जल चा हए था। इसी लए भारत
मौसम व ान वभाग केवल मौसमी कुल नह , ब ल्क झ ड़य और वराम का पूवानुमान दे ता है।

आइए वचार कर — पृष्ठ 35
ग) वायुमंडलीय दाब

आइए वचार कर

प्र.1 आपके अनुसार वायुमंडलीय दाब को मापना क्य महत्वपूण है? वे कौन ह जन्ह इस प्रकार के मापन क
सवा धक आवश्यकता होती है?

क्य क वायुमंडलीय दाब हमारी सबसे पहली चेतावनी है। वषा, पवन और बादल बताते ह क मौसम अभी कैसा है; गरता हुआ
वायुदाबमापी बताता है क मौसम आगे कैसा होने वाला है।

समुद तट पर सामान्य वायुद ाब ≈ 1013 िमलीबार

दाब का 1000 िमलीबार से नीचे िगरना → गत (डीपेशन) या िनम्न दाब तं त्र

गहराता हआ
ु गत → तूफान → चक्रवात

इन माप क सवा धक आवश्यकता कन्ह है —

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना
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कौन क्य

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मौसम-िव ानी
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गत बनते ही पहचानकर तूफान या चक्रवात क चेतावनी जारी करने के लए

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g l a यह तय करने के लए क समुद्र म जाना सुर क्षत है या नह
a
मछु आ रे और नािवक

आपदा पबंध न पािधकरण समय रहते तट य क्षेत्र खाली कराने के लए

co m
वायुयान चालक और वायु यातायात िनयंत्र क
em .
वायुयान का ऊँचाईमापी वायुदाब पर ही चलता है; गलत दाब का अथ है गलत ऊँचाई ag
g l as
पवतारोही, टेक र और ऊँचाई पर तैनात
सै न्यकम
a
कम दाब का अथ है कम ऑक्सीजन — पयानुकूलन के लए वश्राम क योजना बनानी
पड़ती है

co m
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गरता दाब वषा का संकेत है — कट फसल खुले म न छोड़
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िकसान

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दाब से मौसम का अनुमान क्य लगता है: पवन तो केवल उच्च दाब से नम्न दाब क ओर बहती वायु है। जहाँ दाब

a gl तेजी से गरता है, वहाँ चार ओर से वायु दौड़कर आती है, ऊपर उठती है, ठं डी होकर संघ नत होती है और घने बादल
बना दे ती है। इस लए वायुदाबमापी का कम पा ांक वास्तव म इस पूरी ंखला के आरंभ का पहला संकेत है।

m a s
em
.co agl
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प्र.2 अ धक ऊँचाई वाले स्थान क a gl करने वाले व्य क्तय को यह सलाह द जाती है क वे शरीर के पयानुकूलन के
यात्रा
लए माग म व ाम कर। हमारे सैन्यकम ऊँचाई वाले स्थान पर सेवाएँ दे ते ह, जैसे – ल ाख म खादुग-ला। यह

c o m
.
स्थान समुद्रतल से 5600 मीटर से भी अ धक ऊँचाई पर है। यह कल्पना करना क ठन है क वे ऐसे स्थान पर कैसे
रहते ह और अनवरत सुरक्षा करते ह। वहाँ ऑक्सीजन का स्तर इतना कम है क वायुm
s e मंडलीय दाब लगभग 650

.
m होता है!
coमलीबार a gla
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aउत्तर
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अध्याय म द गई दोन संख्याओं क तुलना क जए —
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समुद तट पर : लगभग 1013 िमलीबार ase
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खादुगं -ला पर (5600 मीटर से अिधक) : लगभग 650 िमलीबार

co m
.
अंत र = 1013 − 650 = 363 िमलीबार — अथ त लगभग एक -ितहाई वायुद ाब ही नही ं है

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g म लगभग दो- तहाई ही ऑक्सीजन पहुँचती
इस.cलए खादुग-ला पर एक सै नक क प्रत्येक साँस म समुद्रतट क उसी साँस क तुलना
m a
a se है। शरीर इसक भरपाई तेज साँस लेकर और हृदय से अ धक काम लेकर करता है — यही कारण है क ऊँचाई पर लोग साँस
agl c
.
फूलना, चक्कर आना अथवा थकावट अनुभव करते ह।

s e m
om a
पयानुकूलन का अथ: बीच क ऊँचाई पर एक-दो दन रुकना, धीरे चलना, पयाप्त जल पीना और आरंभ के दन म अ धक प रश्रम

. c agl
न करना। यह समय मलने पर शरीर अ धक लाल रक्त क णकाएँ बनाता है और अ धक कुशलता से साँस लेने लगता है, जससे उसी
वरल वायु से पयाप्त ऑक्सीजन मल जातीem
a s है। ल ाख, सया चन आ द म तैनात सै नक ूट संभालने से पहले चरणबद्ध
पयानुकूलन से गुजरते ह।
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co m
m .
m as e
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ऊँचाई पर दाब क्य घटता है: वायुमंडलीय दाब आपके ऊपर क वायु का भार ही है। पवत पर चढ़ते ही वायुमंडल
का एक भाग आपके नीचे रह जाता है, इस लए ऊपर से दबाने वाली वायु कम हो जाती है — वायु ‘हल्क ’ हो जाती
है और उतनी ही साँस म ऑक्सीजन के अणु कम आते ह।

और सो चए: क ठनाई केवल साँस क नह है। वहाँ जल कम तापमान पर ही उबल जाता है, इस लए भोजन पकने
म बहुत समय लगता है; वरल वायु म हे लकॉप्टर को कम उ ापन मलता है; और छोटा-सा घाव भी धीरे भरता है।
हमारे सैन्यकम इन प र स्थ तय म जो कर पाते ह, उसके प्र त आदर ही इस बॉक्स का उ े श्य है।

आइए वचार कर — पृष्ठ 36
घ) पवन

आइए वचार कर

प्र.1 क्या आपने बीज को इस प्रकार से पवन म उड़ते दे खा है? अगर पवन न होती तो इन बीज का क्या होता?

हाँ — सहपण (डडे लयन) के छतरीनुमा बीज, सेमल और मदार (आक) क रुई जैसे बीज, तथा साल, गुलमोहर और मेपल के
पंखदार बीज, जो छोटे हे लकॉप्टर क तरह घूमते हुए उतरते ह। ये सभी चलती वायु पर सवार होने के लए ही बने ह।
य द पवन न होती —

हर बीज सीधे नीचे गरता और अपने ही जनक पौधे क छाया म जा पड़ता।
तब सैकड़ नन्हे पौधे एक ही छोटे -से टु कड़े म भीड़ बनाकर उगते और उसी प्रकाश, जल तथा पोषक तत्व के लए आपस म
संघष करते। अ धकांश नष्ट हो जाते।
प्रजा त नए क्षेत्र म फैल ही नह पाती — पौधा चल नह सकता, इस लए पवन ही उसका वाहन है।
य द उसी स्थान पर आग, बाढ़ या कोई रोग आ जाता, तो पूरी स्थानीय आबाद समाप्त हो सकती थी, क्य क कह और उसक
संत त उगी ही नह होती।
पवन-परा गत पौधे — घास, मक्का, बाजरा, चीड़ — बीज बना ही नह पाते, क्य क उनका पराग भी पवन से ही यात्रा करता
है।

बीज क बनावट क्य ऐसी होती है: महीन रोम क छतरी या पतला कागजी पंख बीज को बहुत कम भार म बड़ा
पृष्ठ दे दे ता है। चलती वायु ऐसे बीज को लंबे समय तक क्षै तज दशा म धकेलती रहती है और गुरुत्व उसे दे र से नीचे
ला पाता है — इसी से कुछ मलीग्राम का बीज जनक पौधे से सैकड़ मीटर दूर जा पहुँचता है।

क्या आप जानते ह? वाहक केवल पवन ही नह है। ना रयल समुद्र के जल पर तैरकर नए तट तक पहुँचता है,
कँट ले बीज पशुओं के रोओं म उलझकर यात्रा करते ह, और पक्षी फल के बीज अपनी बीट के साथ बखेरते ह।
कतु पवन सबसे सस्ता और सबसे सामान्य साधन है।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 36
पवन का मापन

प्र.1 हम पवन क दशा और ग त को कैसे मापते ह?

दो अलग-अलग उपकरण से — एक यह बताता है क पवन कस दशा से आ रही है, दूसरा यह क कतनी तेज है।

उपकरण कैसे काम करता है क्या बताता है

वात िदक्सूचक यंत्र घूमने वाला फलक, जसके एक छोर पर सूचक और दूसरे पर पूँछ होती है। पवन की िद शा

(िवंड वेन) पवन पूँछ पर धक्का मारती है और सूचक पवन क दशा म मुड़ जाता है।
यह मंद पवन म भी प्र त क्रया दे ता है।

वात शंकु (िवंड खंभे पर लगी कपड़े क नली, जो हवाई अड्ड क पक्क सड़क पर तथा राख उ ड़ ान भरते और उ तरते समय

सॉक) या गैस नस्ता रत करने वाले उद्योग म लगाई जाती है। वाय ुयान चाल कों को पवन की िद शा

का त ुरंत संके त

पवन वेग मापी उध्वाधर स्तंभ पर तीन या चार धातु के प्याले। पवन जतनी तेज, घूणन पवन की गित , िकल ोमीटर पित घंटा में
(एनीमोमीटर) उतना अ धक; तल पर लगा मीटर न त समय म घूणन क गनती करता
है।

पूँछ सूचक

वात िदक्सूचक — िदशा पवन वेगमापी — गित
वात दक्सूचक यंत्र का सूचक पवन क दशा म मुड़ जाता है; पवन वेगमापी के प्याले पवन तेज होने पर तेजी से घूमते ह।

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दोन पाठ्यांक क्य चा हए: केवल ग त से वायुयान चालक यह तय नह कर सकता क उतरना सुर क्षत है, और
केवल दशा से कसान यह नह जान सकता क म कतनी जल्द सूखेगी। दोन मलकर बताते ह क मौसम
कधर से और कतने बल से आ रहा है — इसी लए कृषक पवन क दशा से वषा क दशा का अनुमान लगाते ह
और तीव्र ग त वाली पवन म को जल्द सुखा दे ती है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 37
ङ) आद्रता

आइए पता लगाएँ

प्र.1 को च्च और जयपुर म कहाँ अ धक आद्रता होने क संभावना है? इसके बारे म आप क्या सोचते ह? आप अनुमान
लगा सकते ह क समुद्र के नकट होने के कारण को च्च म जयपुर क तुलना म अ धक आद्रता होगी। कतु हम
न त रूप से इसे कैसे जान सकते ह? य द हम को च्च और मंगलुरू के बीच आद्रता क तुलना करनी हो, तो हम
यह कैसे करगे? अपने सहपा ठय के साथ चचा क जए।

दोन म को च्च लगभग न त रूप से अ धक आद्र है — और यह अनुमान सही आधार पर है, क्य क को च्च केरल म अरब सागर
के तट पर बसा है, जहाँ समुद्र का जल नरंतर वा ष्पत होता रहता है; जब क जयपुर राजस्थान म स्थल के भीतर, शुष्क थार क्षेत्र के
नकट है और उसके पास कोई बड़ा जल ोत नह है।
कतु अनुमान प्रमाण नह होता। न त रूप से जानने के लए हम मापन करना होगा, ठ क वैसे ही जैसे तापमान और वषा के
लए करते ह —

1. दोन स्थान पर आद्रतामापी (हाइग्रोमीटर) से सापे क्षक आद्रता मा पए।
2. पा ांक एक ही त थ को और दन के एक ही समय पर ली जए — आद्रता दन भर बदलती रहती है, इस लए एक नगर क
सुबह क माप दूसरे नगर क दोपहर क माप से तुलना योग्य नह होगी।
3. कई दन के पा ांक लेकर औसत क तुलना क जए, केवल एक दन क नह ।
4. अथवा भारत मौसम व ान वभाग ारा दोन कद्र के लए प्रका शत दै नक सापे क्षक आद्रता के आँकड़ क तुलना क जए।

और को च्च तथा मंगलुरू? यहाँ अनुमान काम नह करता, क्य क दोन ही अरब सागर के तट पर, एक ही आद्र प मी तट य प
म स्थत ह। केवल स्थ त के आधार पर इन्ह अलग नह कया जा सकता। एकमात्र ईमानदार उपाय है — दोन क मापी गई
सापे क्षक आद्रता क तुलना, एक ही त थ, एक ही समय, और य द हो सके तो महीने भर के औसत क ; क्य क इनका अंतर
छोटा होगा और छोटे अंतर केवल संख्याओं से ही तय होते ह।

समुद्र से अंतर क्य पड़ता है: आद्रता वायु म जलवाष्प क मात्रा है। गम समुद्र के कनारे सूय का प्रकाश नरंतर
जल को वा ष्पत करता रहता है और समुद्र पवन उस वाष्प को स्थल क ओर ले आती है, इस लए तट य वायु संतृ प्त
के नकट बनी रहती है। स्थल के भीतर, कसी बड़े जल ोत से दूर, वा ष्पत होने को कुछ है ही नह , इस लए वायु
शुष्क रहती है — शुष्क मौसम म सामान्यतः 20 से 40 प्र तशत, जब क आद्र मौसम म 60 से 80 प्र तशत।

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संकेत: यही प्रश्न पूरे अध्याय का सार है — तक से एक समझदार अपेक्षा बनती है, कतु उसक पु ष्ट या खंडन केवल
मापन ही कर सकता है।

पुनरावलोकन कर — पृष्ठ 38
वाष्पन और आद्रता

पु न रावलोकन कर

स्मरण जब जल वा ष्पत होता है, तो यह शीतलन प्रभाव उत्पन्न करता है। य द वायु म जल क मात्रा पहले से ही अ धक
(उच्च आद्रता) है, तो जल धीरे-धीरे वा ष्पत होगा। ऐसा सामान्यतया वषा के दन म होता है।

कक्षा 6 व ान के ये दो तथ्य ही पूरी आद्रता क कुंजी ह।

वाष्पन ठं डक दे ता है। जल वाष्प म बदलते समय उस सतह से ऊष्मा ले जाता है जसे वह छोड़ रहा है। इसी लए पसीना त्वचा
को ठं डा करता है, मटका जल को ठं डा रखता है और गीला फश पैर तले ठं डा लगता है।
नम वायु वाष्पन धीमा कर दे ती है। वायु एक सीमा तक ही जलवाष्प रख सकती है। य द वह पहले से लगभग भरी हो, तो और
वाष्प बहुत कम बन पाएगी — इसी लए वषा के दन म गीले कपड़े गीले ही रह जाते ह और पसीना त्वचा पर टका रहता है।

शुष्क वायु (कम आद ता) → ते ज वाष्पन → अिधक ठं डक → आप सहज अनुभ व करते है ं

नम वायु (उच्च आद ता) → धीमा वाष्पन → कम ठं डक → िचपिचपाहट और उमस

‘सापे क्षक’ आद्रता का अथ यही है: जस वायु म बल्कुल भी जलवाष्प न हो उसे 0 प्र तशत कहा जाता है (जो
प्रकृ त म असंभव है), और जलवाष्प से पूरी तरह संतृप्त वायु को 100 प्र तशत। अथात सापे क्षक आद्रता वास्तव म
यह बताती है क वायु पहले से कतनी भरी हुई है — और इसी लए यह भी क वह आपके गीले कपड़ , आपक
त्वचा या कसान क म से अब और कतना जल ले सकती है।

स्वयं जाँ चए: हाथ के पछले भाग को गीला क जए और उस पर फूँक मा रए। ठं डक लगेगी, क्य क आपने वाष्पन
तेज कर दया। अत्य धक आद्र दन म यही क जए — ठं डक कह कम अनुभव होगी।

आइए वचार कर — पृष्ठ 38

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना
a g l AglaSem · NCERT Solutions

सापे क्षक आद्रता
co m
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आइए वचार कर

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a s eदmदल्ली म आद्रता 52 प्र तशत और को च्च म 84 प्र तशत हो, तो दोन स्थान म से कहाँ गीले कपड़ के जल्द
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प्र.1
सूखने क संभावना है? य द दोन स्थान पर तापमान समान है, तो कहाँ आपको अ धक पसीना आने क

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संभावना है?

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agको च्च म अ धक आएगा।

गीले कपड़े दल्ली म जल्द सूखगे, और पसीना

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िदल्ली : 52 पितशत सापेिक्षक आद ता → वायु लगभग आधी ही ‘भरी’ है → और वाष्प के िलए पय प्त स्थान →
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ते ज वाष्पन → कपड़ े जल्दी सूखते है ं
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a s em: 84 पितशत सापेिक्षक आदता → वायु लगभग संतृप्त है → बहुत कम थान शेष → धीमा वाष्पन →
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कोिच्च
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कपड़ े घंट ों नम बने रहते है ं
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को च्च म पसीना अ धक क्य लगता है: वास्तव म शरीर बहुत अ धक पसीना बनाता नह — वह वा ष्पत नह हो
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पाता। पसीना तभी ठं डक दे ता है जब वह वाष्प म बदले। को च्च क 84 प्र तशत आद्र वायु म वह पयाप्त तेजी से
वा ष्पत नह हो पाता, इस लए त्वचा पर टका रहता है, शरीर गम बना रहता है और और पसीना बनाता जाता है।

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दल्ली क 52 प्र तशत वायु म वही पसीना शीघ्र वा ष्पत होकर ऊष्मा ले जाता है और त्वचा सूखी लगती है। इसी लए
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तट य को च्च का 29°C दल्ली के 29°C से कह अ धक असहज लगता है।
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agl संकेत: ध्यान द जए क प्रश्न म कहा गया है — “य द दोन स्थान पर तापमान समान है”। यह शत आवश्यक है,
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अन्यथा आप आद्रता के प्रभाव को तापमान के प्रभाव से अलग नह कर पाते।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 38 agl
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आद्रता का मापन

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c o mले कन हम ऐसी संख्याओं को कैसे मापते ह? g l as
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प्र.1

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agl उत्तर
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आद्रतामापी (हाइग्रोमीटर) नामक उपकरण से। यह सापे क्षक आद्रता को प्र तशत म दशाता है —
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

सापे क्षक आद्रता अथ

0 पितशत बल्कुल जलवाष्प र हत वायु — प्राकृ तक प र स्थ तय म असंभव

20 – 40 पितशत ष्
श ु क मौसम

60 – 80 पितशत आद मौसम

100 पितशत जलवाष्प से संतृप्त वायु — अब और वाष्प नह समा सकती

आद्रतामापी भी कई प्रकार के होते ह, जो अपने-अपने सद्धांत पर नभर करते ह। एक सरल पारंप रक आद्रतामापी म दो तापमापी
साथ-साथ लगे होते ह, जनम से एक के बल्ब पर गीला कपड़ा लपेटा जाता है; वायु जतनी शुष्क होगी, कपड़े से जल उतनी तेजी से
वा ष्पत होगा, वह तापमापी उतना ही ठं डा होगा और दोन पा ांक का अंतर उतना ही अ धक होगा। आधु नक मौसम कद्र म
इसके स्थान पर वैद्युत संवेदक प्रयुक्त होते ह।

इसे मापने क चता कौन करता है: आद्रता का मापन अनेक औद्यो गक प्र क्रयाओं म, जैसे खाद्य प्रसंस्करण म,
बहुत महत्वपूण है, ता क उत्पाद न अ धक सूख और न खराब ह । संग्रहालय म भी आद्रता क नगरानी क जाती है,
क्य क उन्ह अपनी प्रद शत वस्तुओं को बचाने के लए शुष्क वातावरण बनाए रखना पड़ता है। और प्र त दन के
मौसम बुले टन म यह इस लए द जाती है, क्य क तापमान वास्तव म कैसा लगेगा, यह आद्रता ही तय करती है।

इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 39
स्वचा लत मौसम कद्र

इसे अनदे खा न कर

प्र.1 वष 2023 म ‘रा ीय आपदा प्रबंधन प्रा धकरण’ ने समुद्रतल से 4800 मीटर से अ धक ऊँचाई पर स क्कम क
एक हम-झील (ग्ले शयल लेक) पर स्वचा लत मौसम कद्र स्था पत कया। यह कद्र आने वाले मौसम क
प र स्थ तय के बारे म पूव जानकारी प्रदान करता है।

स्वचा लत मौसम कद्र एक ऐसा स्वचा लत तंत्र है, जो संवेदक (ससर ) क सहायता से तापमान, आद्रता, वायु क ग त और दशा,
वषा तथा वायुमंडलीय दाब मापता और दज करता है — और यह सब बना कसी मानवीय हस्तक्षेप के।
हम-झील पर ही क्य , और स्वचा लत कद्र ही क्य —

4800 मीटर से अ धक ऊँचाई पर, हम के बीच, कोई प्रेक्षक पूरे वष दन म चार बार पा ांक लेने के लए नह बैठ सकता।
स्वचा लत कद्र बैठ सकता है।
हम-झील केवल ढ ली बफ और मलबे के बाँध से रुक रहती ह। भारी वषा या अचानक गम उस बाँध को तोड़ सकती है और
घाट म जल क द वार भेज सकती है — इसे हम-झील व ोट बाढ़ कहते ह।
कद्र से नीचे भेजे गए पा ांक पूव जानकारी दे ते ह — तीस्ता घाट के नीचे बसे नगर और जल वद्युत प रयोजनाओं को
चेतावनी के कुछ घंटे मल जाते ह।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

स्वचा लत कद्र क्य बढ़ रहे ह: इनका उपयोग कृ ष, वमानन, नौकायन और पयावरणीय नगरानी म व्यापक रूप
से होता है और ये नय मत अंतराल पर सट क और समयबद्ध जानकारी दे ते ह। इसी से अब मरुस्थल , पवत , समुद्र
म तैरते बोय और हमनद पर भी मौसम मापा जा सकता है — ठ क उन्ह स्थान पर, जहाँ से सबसे खतरनाक
मौसम आरंभ होता है।

क्या आप जानते ह? स क्कम का अपना इ तहास बताता है क यह क्य आवश्यक है — तीस्ता बे सन म हम-
झील से आई वनाशकारी बाढ़ यह राज्य दे ख चुका है। ोत पर लगाए गए उपकरण कसी पवतीय राज्य के लए
सबसे सस्ता सुरक्षा-कवच ह।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 41
मौसम का पूवानुमान

आइए पता लगाएँ

प्र.1 व भन्न प र स्थ तय म मौसम का पूवानुमान कस प्रकार सहायक ह, इसक चचा समूह म क जए। एक सूची
बनाइए और बनाने के बाद अपने नकट बैठे समूह के साथ इसे साझा कर चचा क जए। आप अलग-अलग
प र स्थ तय क कतनी े णय क पहचान कर सकते ह?

इसे अ तरह कैसे कर: केवल लंबी सूची मत बनाइए — उसे श्रे णय म बाँ टए। प्रश्न क अं तम पं क्त यही माँग रही है। अपने
समूह म पाँच मनट काम क जए, फर पास वाले समूह से मलकर दोन सू चयाँ जो ड़ए; जन श्रे णय पर दोन समूह सहमत ह ,
उनक संख्या ही आपका उत्तर है।
नमूना उत्तर — छह े णयाँ:

ेणी वे प र स्थ तयाँ जहाँ पूवानुमान सहायक है

कृ िष ब ुआई , िसंचाई, िछड़काव और कटाई का समय; वष से पहले कटी फ सल खेत में न छोड़ना; ओल ों से बाग की सुर क्षा

यात्रा और पिरवहन कोहरे या त ूफ ान से उ ड़ ानों में िवल ंब ; जहाजों और मछल ी पकड़ने वाल ी नावों का बंद रगाह में रुकना; पहाड़ी माग ं का
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भ ू खल न या िहमपात से बंद होना

आपदा की तैयारी चक्रवात से पहले तट खाल ी कराना ; बाढ़ के मैद ानों से ल ोगों को हटाना; राहत सामग ी और नावें तैयार रखना

स्वास्थ्य और दै िनक ताप ल हर की सल ाह , िव ाल यों का बद ल ा समय , पेयजल कें द , शीत ल हर में रै न-बसे रे
जीवन

काय और उ ोग िनम ण , सड़क िनम ण, अनाज सुखाना, नमक की क्यािरयाँ, ई ंट-भ े , सौर और पवन ऊज की योजना

आयोजन और िक्रके ट मैच , िववाह, ग ामीण मेले , िव ाल य की या त्र ाएँ, टेिकं ग और अमरनाथ या के द ारनाथ जैस ी यात्र ाएँ
मनोरंजन

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ेणी बनाना क्य आवश्यक है: दो समूह प्रायः वही बीस उदाहरण लखगे। अंतर इसम होता है क वे कतने
वास्तव म भन्न प्रकार के उपयोग पहचान पाते ह — और यही इस बात क सच्ची माप है क आपने यह क्य समझा
है क कोई दे श मौसम सेवा क्य चलाता है।

आइए पता लगाएँ ( चत्र 2.13 — चेतावनी मान चत्र) — पृष्ठ 41
19 मई 2024 को भारत म मौसम क चेतावनी

आइए पता लगाएँ मान चत्र काय

प्र.1 आप उस दन क्या-क्या घ टत होते हुए दे खते ह? वे कौन-कौन सी प र स्थ तयाँ ह, जनके बारे म भारतीय मौसम
वभाग लोग को सचेत कर रहा है?

सबसे पहले यह दे खए क 19 मई 2024 को भारत का कोई भी उपखंड हरे रंग म नह है। पूरा दे श कम से कम ‘ध्यान द’ क स्थ त
म है और बड़े भाग ‘सतक रह’ या ‘चेतावनी’ म ह। यह भारतीय ग्रीष्म का चरम है और मानसून अभी आना शेष है — इसी लए
मान चत्र एक ही समय म दो वपरीत प्रकार क वप त्तयाँ दखा रहा है।

उपखंड का रंग अथ मोटे तौर पर कहाँ

हरा कोई चेतावनी नह इस मानिच त्र पर कही ं नही ं

पीला ध्यान द (अद्यतन रह) अिधकाश
ं ध्
म य एवं पाय ीपीय भारत, िहमाल यी राज्य, अिधकाश
ं पूव त्त र

नारंग ी सतक रह (तैयार रह) ग ुजरात , उ त्त र पदे श, िबहार , असम –मेघ ाल य, ित्र प ुरा, के रल , तटीय कन टक के भाग

लाल चेतावनी (कारवाई कर) राज स्थान, पंजाब, हिरयाणा–िद ल्ल ी; और सुदू र द िक्षण में तिमल नाडु

प्रतीक जन प र स्थ तय का संकेत दे रहे ह —

ताप लहर (‘+’ चह्न वाला तापमापी) — पूरे उत्तर-प म और उत्तरी मैदान म।
गरज और चमक ( बजली स हत काला बादल) — सबसे अ धक फैला हुआ प्रतीक; हमालयी राज्य , मध्य भारत, पूव राज्य ,
पूव त्तर और प्राय प म।
भारी / बहुत भारी वषा (धूसर और काले वषा-बादल) — पूव त्तर, केरल, त मलनाडु , तट य कनाटक, लक्ष प तथा अंडमान
और नकोबार पसमूह।
तेज धरातलीय हवाएँ (वात शंकु) — त मलनाडु –केरल प और आंत रक कनाटक म।
उष्ण और आद्र (पीले घेरे म तापमापी) — तट य क्षेत्र म, जैसे क कण तट, गंगीय प म बंगाल और आंध्र तट।

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एक ही मान चत्र पर गम और वषा दोन क्य : मई के मध्य म उत्तर-प म भारत शुष्क, नीचे उतरती वायु के नीचे
तप रहा होता है, जब क द क्षण-प म मानसून समुद्र से केरल, त मलनाडु और अंडमान क ओर बढ़ चुका होता है।
दे श सचमुच दो भाग म बँटा होता है — एक ताप लहर वाला और दूसरा वषा वाला। यही बात अगला अध्याय, जो
जलवायु पर है, वस्तार से समझाएगा।

प्र.2 कन राज्य म चेतावनी के संकेत ह?

‘चेतावनी (कारवाई कर)’ इस मान चत्र का सवा धक गंभीर स्तर है और इसका रंग लाल है। 19 मई 2024 को लाल उपखंड ये ह —

लाल (चेतावनी — कारवाई कर) प्रतीक के अनुसार कारण

राजस्थान भीषण ताप ल हर , साथ ही गरज और चमक

पंजाब ताप ल हर

हिरयाणा, चंडीगढ़ और िदल्ली ताप ल हर

तिमलनाडु बहुत भारी वष और तेज धरातल ीय हवाएँ

य द ‘चेतावनी के संकेत’ का अथ व्यापक रूप से “हरे के अ त रक्त कोई भी रंग” लया जाए, तो उत्तर होगा — मान चत्र का
प्रत्येक राज्य, क्य क कोई भी हरा नह है। इससे एक स्तर नीचे, नारंगी (सतक रह — तैयार रह) म गुजरात, उत्तर प्रदे श, बहार,
असम और मेघालय, त्रपुरा, केरल तथा तट य कनाटक का एक भाग आते ह।

संकेत: मान चत्र को दो परत म प ढ़ए। उपखंड का रंग बताता है क स्थ त कतनी गंभीर है; उस पर छपा प्रतीक
बताता है क स्थ त है क्या। इस मान चत्र के कसी भी प्रश्न का उत्तर दे ने के लए दोन चा हए।

प्र.3 भारत के कौन-से भाग भीषण मौसमी घटनाओं से मुक्त ह?

कड़ाई से दे ख तो कोई नह — मान चत्र पर कह भी ‘कोई चेतावनी नह ’ वाला हरा उपखंड नह है।
सामान्य मौसम के सबसे नकट वे भाग ह जो पीले ‘ध्यान द (अद्यतन रह)’ म ह, जहाँ लोग से केवल पूवानुमान पर नजर रखने को
कहा गया है और कसी कारवाई क आवश्यकता नह है। इनम दे श का अ धकांश आंत रक भाग आता है — मध्य प्रदे श, छत्तीसगढ़,
ओ डशा, तेलंगाना, आंत रक कनाटक, महाराष्ट्र, झारखंड — तथा उत्तर म जम्मू-कश्मीर, ल ाख, हमाचल प्रदे श और उत्तराखंड,
जहाँ केवल गरज और चमक का प्रतीक है।

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ये भी ‘चेतावनी र हत’ क्य नह ह: मई का मध्य मानसून-पूव तूफान का चरम समय है। तपती भू म के ऊपर

m a s emम थोड़ी दे र क
gl है जस पर नजर रखी
दोपहर क गम से ऊँचे तूफानी बादल लगभग हर जगह बन जाते ह, इस लए दे श के अ धकांश भाग
. coअपे क्षत रहती है। पीला उपखंड सुर क्षत उपखंड नह होता — वह वहaहोता
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गरज और चमक

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जा रही ।

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संकेत: परीक्षा म उत्तर दे ते समय पहले रंग क श्रेणी बताइए, फर क्षेत्र। इससे पता चलता है क आपने संकेत-सूची

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(लेजड) पढ़ है, केवल मान चत्र क आकृ त से अनुमान नह लगाया।

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प्र.4 कन राज्य म ताप लहर क संभावना है?

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a फैली एक चौड़ी प पर दखाई देता है —
‘+’ चह्न वाले लाल तापमापी का प्रतीक ढूँ ढ़ए। 19 मई 2024 के मान चत्र पर यह उत्तर-प म से उत्तरी मैदान होते हुए पूव तक

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लाल (चेतावनी): राजस्थान, पंजाब, ह रयाणा–चंडीगढ़– दल्ली।
नारंगी (सतक रह): गुजरात, जसम सौराष्ट्र और m
s e कच्छ भी स म्म लत ह, उत्तर प्रदे श, बहार।
पीला (ध्यान द): मध्य प्रदे श, तथा आगे पूlवaऔर द क्षण म वदभ, झारखंड, गंगीय प म बंगाल और ओ डशा तट क ओर
कुछ भाग; हमाचल प्रदे श एवं उत्तराखंa
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ड क तलहट तथा क कण तट पर भी ताप लहर के प्रतीक दखाई दे ते ह।

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यही प क्य , द क्षण क्य नह : ताप लहर के लए शुष्क वायु, स्वच्छ आकाश और समुद्र पवन का अभाव

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g नह होता और समुद्र पवन
.c भी समुद्र से बहुत दूर है। इसके वपरीत प्राय प सँकरा है — समुद्र कभीaदूर
चा हए। मई म उत्तर-प म भारत पर गम शुष्क वायु आती है, धूप को रोकने वाला बादल नह होता और यह क्षेत्र

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कसी
a अ धकतम तापमान को नीचे रखती है।
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संकेत: दोन तापमापी प्रतीक म भ्रम न क जए। ‘+’ वाला तापमापी ताप लहर है; पीले घेरे के भीतर वाला
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तापमापी उष्ण और आद्र है, जो तट य दशा है; और ‘–’ वाला नीला तापमापी शीत लहर है।

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त्रपुरा और लक्ष प म चेतावनी के क्या कारण ह?

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mउत्तर a g
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स्थान मान चत्र पर रंग दशाया गया प्रतीक कस बात क चेतावनी

m बजली स हत काला बादल a s e
ित्रपुर ा नारंगी — सतक रह (तैयार रह)

em . co गरज और चमक के साथ त ूफ ान

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लक्ष ीप प इतने छोटे ह क रंग नह भरा जा सका वषा का बादल तथा बजली वाला बादल भारी वष के साथ गरज और चमक

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त्रपुरा पूव त्तर म है, जहाँ बंगाल क खाड़ी से आती गम और अत्यंत नम वायु पहा ड़य से टकराकर ऊपर उठती है। ऊपर उठती यह
नम वायु ऊँचे तूफानी बादल बना दे ती है, इस लए मई म गरज-चमक वाले मानसून-पूव तूफान और उनके साथ चलने वाली तेज
हवाएँ सामान्य ह। खुले खेत म काम करने वाल के लए बजली गरना यहाँ एक गंभीर संकट है।
लक्ष प अरब सागर म छोटे प्रवाल प का समूह है, जो बढ़ते हुए द क्षण-प म मानसून के सीधे माग म पड़ता है — मानसून
समुद्र के इस भाग म भारतीय मुख्य भू म से पहले पहुँचता है। नम समुद्र वायु और घरते बादल यहाँ भारी वषा और तूफान लाते ह,
जो पवा सय क मछली पकड़ने वाली और प के बीच चलने वाली छोट नाव के लए खतरनाक होते ह।

दोन चेताव नयाँ एक जैसी दखती ह, कतु कारण अलग ह: त्रपुरा के तूफान पहा ड़य पर चढ़ती नम वायु से
बनते ह; लक्ष प के तूफान गम समुद्र के ऊपर उठती नम वायु से, जब मानसून क धारा आगे बढ़ रही होती है। दोन
के पीछे के उपकरण-पा ांक एक ही बात दखाएँगे — उच्च आद्रता और गरता वायुदाब।

आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 41–42
अध्याय चार बदुओं म

आगे बढ़ने से पहले

बदु 1 तापमान, आद्रता, वषण, पवन और वायुमंडलीय दाब मलकर कसी स्थान वशेष पर मौसम को प रभा षत
करते ह।

ये पाँच ही मौसम के तत्व ह। इनम से कोई अकेला मौसम नह है — मौसम तो कसी एक स्थान पर, कसी एक समय पर, इन पाँच
क स म्म लत दशा है।

तत्व क्या है

तापमान वायुमंडल कतना गम अथवा ठं डा है

वषण जल के वे सभी रूप — वषा, हम, स हमवृ ष्ट या ओले — जो आकाश से पृथ्वी पर गरते ह

वायुम ंडलीय दाब वायु का वह दबाव जसे हम पृथ्वी क सतह पर अनुभव करते ह

पवन वायु का संचलन, जसम उसक ग त और दशा स म्म लत ह

आद ता वायु म उप स्थत जलवाष्प क मात्रा

पाँच क्य आवश्यक ह: अकेला 29°C लगभग कुछ नह बताता। इसम 84 प्र तशत आद्रता जो ड़ए तो पता चलता
है क दन चप चपा और उमस भरा रहेगा; गरता वायुदाब जो ड़ए तो पता चलता है क तूफान बन सकता है; तेज
पवन जो ड़ए तो पता चलता है क कपड़े फर भी सूख जाएँगे। मौसम वायुमंडल का ववरण है, और वह ववरण पूरा
करने के लए पाँच संख्याएँ चा हए।

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बदु 2 इन तत्व क स्थ त को वशेष उपकरण का उपयोग करके मापा जाता है। इनसे एक त्रत आँकड़े हम मौसम क
नगरानी और भ वष्यवाणी करने म सहायता करते ह।

प्रत्येक तत्व का अपना उपकरण है और ये सब मौसम कद्र म एक साथ रखे जाते ह —

तापमापी → तापमान (°C)

वष मापी → वषण (िम.मी.)

वायुद ाबमापी → वायुमंडलीय दाब (mb)

वात िदक्सूच क यंत्र और पवन वेगमापी → पवन की िदशा और गित (िकमी/घंट ा)

आद तामापी → आद ता (सापेिक्षक आद ता, %)

माप नय मत अंतराल पर ली जाती ह, और यही मौसम के मान चत्रण तथा पूवानुमान को संभव बनाता है। स्वचा लत मौसम कद्र
(AWS) यही काम अकेले संवेदक से करता है और कृ ष, वमानन, नौकायन तथा पयावरणीय नगरानी म प्रयुक्त होता है, जससे
मानवीय हस्तक्षेप के बना सट क और समयबद्ध जानकारी मलती है।

एक पाठ्यांक से अ धक महत्वपूण अ भलेख क्य है: एक पा ांक केवल एक क्षण का वणन करता है। प्र तरूप
तो पा ांक क लंबी ंखला से ही उभरते ह, और उन्ह प्र तरूप से मौसम- व ानी बता पाते ह क आगे क्या होने
वाला है।

बदु 3 अलग-अलग समय या प र स्थ तय म मौसम का कोई एक तत्व प्रमुख होता है, उदाहरण के लए, जुलाई म
वषा, मई और दसंबर म तापमान, चक्रवात के ग तशील होने पर वायुमंडलीय दाब, लू (ग मय म उत्तर भारत म
चलने वाली तेज गम और धूल भरी हवाएँ) के चलते समय अथवा जंगल म आग के फैलते समय पवन।

पाँच तत्व सदै व उप स्थत रहते ह, कतु कसी भी क्षण उनम से एक ही सब कुछ तय करता है — और पूवानुमान भी उसी से आरंभ
होता है।

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प र स्थ त प्रमुख तत्व वह क्य प्रमुख हो जाता है

जुल ाई, अिधकांश भारत में वषण मानसून पूरे जोर पर होता है; दन का समाचार यही होता है क कहाँ कतनी वषा हुई

मई, और िफर िदसंबर तापमान ग्रीष्म क चरम गम और शीत का चरम — ताप लहर तथा शीत लहर

चक्रवात के गितशील होने पर वाय ुमंड ल ीय द ाब दाब का गहरा गरना ही चक्रवात को बनाता और आगे बढ़ाता है

उत्तर भारत में लू चलने पर पवन तेज, गम और धूल भरी हवाएँ छाया म भी बैठना क ठन कर दे ती ह

जंग ल में आग फै लते समय पवन पवन क ग त और दशा ही तय करती है क आग कतनी तेज और कधर बढ़े गी

संकेत: लू को याद रखना उपयोगी है, क्य क यह पवन और ताप — दोन क घटना है। यह इसी लए खतरनाक है
क गम वायु तेजी से त्वचा पर से गुजरती है, जससे पसीना अब ठं डक नह दे ता।

बदु 4 मौसम का जलवायु से गहरा संबंध है। इसका अध्ययन हम अगले अध्याय म करगे।

इनका संबंध समय का है। मौसम कसी एक स्थान पर वायुमंडल क इस समय क दशा है। जलवायु वह प्र तरूप है, जो उसी स्थान
के मौसम को अनेक वष तक औसत करने पर मलता है।

मौसम जलवायु

अविध एक क्षण, एक दन, एक सप्ताह द शक — सामान्यतः 30 वष या अिधक

पिरवतन कुछ घंट म बदल सकता है -
बहुत धीरे धीरे बद ल ती है

उदाहरण “आज दोपहर को च्च म 32°C है और वषा हो रही “कोिच्च गम और आद है, जहाँ जून से िसतंबर तक भारी वष होती
है।” है। ”

कै से जानते आज के उपकरण-पा ांक वष ं के संिचत पाठ ांक ों का औसत

है ं

अध्याय का यही क्रम क्य है: जलवायु मौसम के अ भलेख से ही बनती है। जब तक कसी स्थान के मौसम को
वष तक, दन-प्र त दन, मापा न गया हो, तब तक उसक जलवायु का वणन नह कया जा सकता — और यही इस
अध्याय का वषय रहा है।

प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 42–43

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अध्याय के अंत के अभ्यास

प्रश्न और क्रयाकलाप

प्र.1 मौसम के तत्व का उनको मापने वाले उपकरण के साथ मलान क जए। (1) आद्रतामापी (हाइग्रोमीटर) (2)
पवन वेगमापी (एनीमोमीटर) (3) वायुदाबमापी (बैरोमीटर) (4) तापमापी (थमामीटर) (5) वषामापी (रेन गेज) —
(क) वषण (प्रे स पटे शन) (ख) वायुमंडलीय दबाव (ग) वायु क दशा और ग त (घ) आद्रता (ङ) तापमान

प्रयुक्त उपकरण मौसम का तत्व इकाई

(1) आद तामापी (हाइग ोमीटर) (घ ) आद ता सापे क्षक आद्रता (%)

(2) पवन वेग मापी (एनीमोमीटर) (ग ) वाय ु की िद शा और गित कमी/घंटा

(3) वायुद ाबमापी (बैर ोमीटर) (ख) वाय ुमंडल ीय द बाव मलीबार (mb)

(4) तापमापी (थम मीटर) (ङ) तापमान °C (अथवा °F)

(5) वष मापी (रे न गेज) (क ) वषण (पेिसिपटेशन) मलीमीटर ( म.मी.)

1–घ 2–ग 3–ख 4–ङ 5–क

याद रखने का सरल उपाय: अंग्रेजी नाम क ग्रीक जड़ ही उत्तर बता दे ती ह — ग्रोस = नम (हाइग्रोमीटर),
एनेमॉस = पवन (एनीमोमीटर), बैरोस = भार (बैरोमीटर), थम = ऊष्मा (थमामीटर)। वषामापी के लए तो हद नाम
ही पयाप्त है।

एक छोट सावधानी: अकेला पवन वेगमापी केवल पवन क ग त मापता है; दशा उसी खंभे पर लगे वात दक्सूचक
यंत्र या वात शंकु से मलती है। पुस्तक ने दोन को एक साथ रखा है, क्य क मौसम कद्र म ये सदै व जोड़े म ही काम
करते ह।

प्र.2 ज्योत्सना यह सोच रही है क जून म मुंबई म अपनी वद्यालय यात्रा के समय कौन-से कपड़े साथ ले जाए। वह
मौसम के पूवानुमान को दे खती है, जो 29 डग्री से ल्सयस और 84 प्र तशत आद्रता क भ वष्यवाणी करता है।
आप उसको क्या सलाह दगे?

दोन संख्याओं को साथ प ढ़ए। अकेला 29°C बहुत गम नह है — कतु 84 प्र तशत सापे क्षक आद्रता बहुत अ धक है, इस लए
पसीना वा ष्पत ही नह हो पाएगा और दन 29°C से कह अ धक गम तथा चप चपा लगेगा। मुंबई म जून मानसून के आरंभ का
महीना भी है, इस लए भारी वषा क पूरी संभावना है।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना
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29°C + 84 पितशत आद ता → वाष्पन बहत
ु कम → पसीने से ठं डक नही ं
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→ गम, िचपिचपा और उमस भरा अनुभ व, और धुले कपड़ े दे र तक नही ं सूखग
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agl को मेरी सलाह —
ज्योत्सना

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हल्के, ढ ले और पतले सूती कपड़े ले जाए — हल्के रंग के और कह भी कसे हुए नह । सूती कपड़ा पसीना सोखता है और
हवा आने-जाने दे ता है; सथे टक और डे नम असहज लगगे।
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g पानी म खराब न ह — जून म मुंबई म मानसून रहता है।
अपने अनुमान से अ धक जोड़ी कपड़े रखे, क्य क इतनी आद्रता म नम कपड़े रातभर म नह सूखगे।
बरसाती या छाता, और ऐसी चप्पल-सडलaजो

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पुस्तक , फोन और टकट के लए प्ला स्टक क थैली या जलरोधी पाउच, तथा एक जोड़ी सूखे जूते अलग से।

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पानी क बोतल — उमस भरी गम म बना अ धक गम अनुभव कए भी शरीर से बहुत जल नकल जाता है।

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ऊनी कपड़े नह । जून क मुंबई म उनक कोई आवश्यकता नह ।

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a s emनणायक संख्या तापमान नह , आद्रता है: पसीना शरीर को तभी ठं डा करता है जब वह वा ष्पत हो। जो वायु
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यहाँ
a पहले से 84 प्र तशत जलवाष्प से भरी है, उसम वाष्पन बहुत धीमा होता है — इस लए शरीर क शीतलन प्रणाली

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लगभग काम नह करती। यही कारण है क तट य मुंबई का 29°C शुष्क मई क दल्ली के 35°C से भी अ धक
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असहनीय लगता है।
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कल्पना क जए क आपका एक छोटा समूह वषामापी यंत्र स्था पत कर रहा है। यहाँ उसे स्था पत करने के स्थान
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के कुछ वकल्प दए गए ह — 1. वद्यालय का सब्जी उद्यान। 2. वद्यालय भवन क छत। 3. ऊँचे चबूतरे के साथ

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.cक जए और सवा धक उपयुक्त स्थान का नधारण क जए। अपने नणयaकgे कारण को ल खए।
खुला मैदान। 4. वद्यालय प रसर क द वार। 5. वद्यालय प्रयोगशाला का बरामदा। अपने समूह के साथ चचा

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हमारे समूह का नणय : वकल्प 3 — ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान।

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इसे चुनने के कारण —

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यह खुला है, इस लए ऊपर कोई पेड़, द वार या छत नह है जो वषा रोके या अ त रक्त जल टपकाए।
ऊँचा चबूतरा वषामापी को भू म से ऊपर रखता है, जससे क प म म के छ टे नह जाते और भू म पर बहता जल भीतर नह

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आ पाता।
चबूतरा समतल, दृढ़ और स्थर आधार दे ता है, इस लए यंत्र सीधा खड़ा रहेगा और हवा सेm
s e न झुकेगा, न गरेगा — पृष्ठ 34 क

. cगoतmव ध यही आग्रह करती है। a gla
a s em वषा म भी प्र त दन एक ही समय पर वहाँ पहुँचना सरल है और कसी को असु वधा नह होती।
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.
अन्य वकल्प क्य छोड़े —

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

स्थान अनुपयुक्त क्य

1. िव ालय का सब्जी ऊपर उ गे पौधे वष रोक ले ंग े ; क्यािरयों की िसंचाई से अितिर क्त जल आ जाएगा; ख ुद ी हुई नरम िम ी में यंत्र झ ुक
उ ान जाएगा

2. िव ालय भवन की छत वहाँ पवन कही ं अिधक तेज और अिनयिमत होती है , जो वष को कीप के मुख के ऊपर से उ ड़ा ले जाती है और
पाठ ाक
ं कम आ जाता है ; यंत्र िगर भी सकता है

4. िव ालय पिरसर की सँक री और अि स्थर जगह; द ीवार एक ओर से ओट दे ती है और दू सरी ओर छीटें डाल ती है, और यंत्र के िगरने की
दीवार पूर ी आशंक ा रहती है

5. िव ालय पयोगशाला का यह ढका हुआ है। वष यंत्र तक पहु ँचेग ी ही नही ं — पाठ ांक िनरथक होगा
बरामदा

इन सबके पीछे का नयम: वषामापी को ठ क उतनी ही वषा पकड़नी चा हए जतनी उस भूखंड पर गरती — न
कम, न अ धक। जो भी वस्तु उसे ओट दे , छ टे डाले, झुका दे या असामान्य पवन म डाल दे , वह पा ांक बगाड़
दे गी। भारत मौसम व ान वभाग के मानक इससे भी आगे जाते ह — यंत्र का मुख भू म से लगभग 30 सट मीटर
ऊपर, समतल खुले स्थान पर, और कसी भी वस्तु से उसक ऊँचाई क कम से कम दोगुनी दूरी पर रखा जाता है।

प्र.4 नीचे भारतीय मौसम व ान वभाग, जम्मू और कश्मीर से ली गई एक सारणी है। उपलब्ध आँकड़ को दे खते हुए,
दखाए गए दन को, जम्मू और कश्मीर के व भन्न भाग म मौसम क स्थ त को दज करने हेतु एक लघु आलेख
ल खए। (संकेत – ताप सीमा, अ धकतम और न्यूनतम तापमान, आद्रता, वषा आ द को स म्म लत कर।) ध्यान द
– ACT (एक्चुअल अथात वास्त वक), NOR (नॉमल अथात सामान्य), DEP ( डपाचर अथात सामान्य से
हटकर), R/F (रेनफॉल अथात वृ ), S/N (स्नोफॉल अथात हमपात), TR ( े स अमाउंट अथात वषण क
माप)।

सबसे पहले प्रत्येक कद्र क ताप सीमा नका लए (वास्त वक अ धकतम − वास्त वक न्यूनतम) —

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

कद्र अ धकतम न्यूनतम ताप अ धकतम 24 घंटे क 24 घंटे का आद्रता
(°C) (°C) सीमा का DEP वषा हमपात 8:30 /
(°C) (°C) ( म.मी.) (से.मी.) 17:30
(%)

ीनगर 6.5 0.2 6.3 −2.4 13.4 2.4 89 / 89

काजीग ंड
ु 3.2 −0.4 3.6 −5.3 36.2 22.0 97 / 90

पहलगाम 1.1 −4.1 5.2 −4.5 19.4 23.0 96 / 96

कु पवाड़ा 5.1 −0.7 5.8 −3.4 21.9 10.0 97 / 94

कू के रंग 2.6 −1.4 4.0 −4.0 35.2 30.0 96 / 97

गल
ु मग −2.6 −7.6 5.0 −4.0 35.2 35.0 76 / 100

मुजफ्फराबाद 8.5 5.6 2.9 — 25.8 — 93 / —

नमूना उत्तर — 1 फरवरी 2024 के सायंकालीन बुले टन का आलेख:
“नमस्कार। सु नए 1 फरवरी 2024 का जम्मू और कश्मीर का मौसम समाचार, जो भारत मौसम व ान वभाग के सायंकालीन
आँकड़ पर आधा रत है।
घाट म आज का दन ठं डा, आद्र और हमपात वाला रहा। सभी कद्र का अ धकतम तापमान उस त थ के सामान्य से नीचे रहा।
श्रीनगर का अ धकतम तापमान 6.5 डग्री से ल्सयस दज हुआ, जो सामान्य से 2.4 डग्री कम है, और न्यूनतम 0.2 डग्री रहा —
अथात ताप सीमा 6.3 डग्री। कुपवाड़ा म अ धकतम 5.1 और न्यूनतम −0.7 डग्री रहा, जब क काजीगुंड केवल 3.2 डग्री तक ही
पहुँच सका, जो सामान्य से पूरे 5.3 डग्री कम है, और वहाँ रात का न्यूनतम −0.4 डग्री रहा।
ऊँचाई वाले स्थान और भी ठं डे रहे। पहलगाम म अ धकतम 1.1 और न्यूनतम −4.1 डग्री, तथा कूकेरंग म 2.6 और −1.4 डग्री दज
हुआ। गुलमग क्षेत्र का सबसे ठं डा स्थान रहा — वहाँ तापमान दनभर हमांक से ऊपर गया ही नह ; अ धकतम −2.6 और
कड़कड़ाता न्यूनतम −7.6 डग्री रहा। उधर मुजफ्फराबाद सबसे गम रहा, दन म 8.5 और रात म 5.6 डग्री — और वह दन-रात
का अंतर सबसे कम, केवल 2.9 डग्री रहा।
आज प्रातः साढ़े आठ बजे तक के चौबीस घंट म व्यापक वषण हुआ। सवा धक 36.2 मलीमीटर वषा और 22 सट मीटर हमपात
काजीगुंड म हुआ; कूकेरंग म 35.2 मलीमीटर वषा और 30 सट मीटर हमपात; और सवा धक हमपात गुलमग म, 35
सट मीटर, साथ म 35.2 मलीमीटर वषा। पहलगाम म 19.4 मलीमीटर और 23 सट मीटर, कुपवाड़ा म 21.9 मलीमीटर और 10
सट मीटर, तथा मुजफ्फराबाद म 25.8 मलीमीटर वषा दज हुई। श्रीनगर सबसे कम प्रभा वत रहा — 13.4 मलीमीटर वषा और
2.4 सट मीटर हमपात। दन म भी अ धकांश कद्र पर वषण जारी रहा, यद्य प श्रीनगर म प्रातः साढ़े आठ से सायं साढ़े पाँच बजे के
बीच केवल अत्यल्प (TR) मात्रा ही दज हुई।
वायु सवत्र अत्यंत आद्र रही। प्रातःकालीन सापे क्षक आद्रता 76 से 97 प्र तशत के बीच रही, और सायंकाल तक गुलमग म यह 100
प्र तशत — अथात संतृप्त वायु — तक पहुँच गई, जब क कूकेरंग म 97 और पहलगाम म 96 प्र तशत रही। श्रीनगर म यह दनभर
89 प्र तशत पर स्थर रही।
संक्षेप म — ठं डा, मेघाच्छा दत और हमपात वाला दन, जो इस ऋतु के लए सामान्य से अ धक ठं डा रहा और ऊपरी क्षेत्र म ताजा
भारी हमपात हुआ। जम्मू–श्रीनगर राजमाग तथा गुलमग और पहलगाम क ओर जाने वाले यात्री नकलने से पहले माग क स्थ त
अवश्य दे ख ल, और नवासी ठं ड से बचाव कर। नमस्कार।”

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

DEP स्तंभ कैसे पढ़: DEP सामान्य से वचलन है — अथात आज का दन उस त थ के औसत से कतना दूर रहा।
यहाँ अ धकतम तापमान का DEP हर कद्र पर ऋणात्मक है, और यही सारणी का सबसे स्पष्ट तथ्य है — यह पूरे क्षेत्र
म सामान्य से ठं डा दन था। रोचक बात यह है क न्यूनतम तापमान के DEP धनात्मक ह, क्य क जस घने
मेघाच्छादन ने हमपात कराया, उसी ने कंबल का काम करके रात को उतना ठं डा नह होने दया जतनी वह
सामान्यतः होती है।

संकेत: मुजफ्फराबाद क पं क्त म NOR और DEP के स्थान पर डैश (–) ह — उस कद्र के सामान्य मान उपलब्ध
नह ह, इस लए वचलन नकाला ही नह जा सकता। वास्त वक बुले टन म इसे छपाया नह , बताया जाता है।

अध्याय — एक नज़र म
मौसम कसी समय और स्थान वशेष पर पृथ्वी क वायुमंडलीय दशा है। लगभग सभी मौसमी घटनाएँ क्षोभमंडल म घ टत
होती ह, जो पृथ्वी क सतह से 6 से 18 कमी तक वस्तृत है।
मौसम के पाँच तत्व ह — तापमान, वषण, वायुमंडलीय दाब, पवन और आद्रता।
‘गम’ या ‘ ठठु रन’ जैसे शब्द हर व्य क्त के लए अलग अथ रखते ह, इस लए मौसम को सवमान्य मानक — °C, म.मी.,
मलीबार, कमी/घंटा और प्र तशत — म मापना आवश्यक है।
प्रत्येक तत्व का अपना उपकरण है — तापमापी, वषामापी, वायुदाबमापी, वात दक्सूचक यंत्र और पवन वेगमापी, तथा
आद्रतामापी। मौसम कद्र और स्वचा लत मौसम कद्र (AWS) इन सबको एक स्थान पर लाते ह।
इन्ह आँकड़ के लंबे अ भलेख से मौसम- व ानी पूवानुमान लगाते ह। भारत मौसम व ान वभाग क स्थापना 1875 म
हुई थी और यह ऐसे मान चत्र जारी करता है जनम प्रत्येक उपखंड हरा, पीला, नारंगी या लाल रंग म दशाया जाता है।
सट क पूवानुमान से मछु आरे समुद्र म जाने से बचते ह, सरकार चक्रवात से पहले तट य क्षेत्र खाली करा पाती ह और कसान,
वायुयान चालक तथा ना वक अपनी योजना बना पाते ह — जलवायु प रवतन के इस दौर म यह पहले से कह अ धक
आवश्यक है।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 2 मौसम को समझना AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ उपकरण / इकाई अध्याय म
कहाँ

मौसम िकसी समय और स्थान िवशेष पर पथ्ृ वी की वायुम ंडलीय दशा — पृष्ठ 28

क्षोभमंडल पथ्ृ वी की सतह के सबसे िनकट की परत (6–18 िकमी), जहाँ — पृष्ठ 28
लगभग सभी मौसमी घटनाएँ घिटत होती है ं

तापमान वायुम ंडल िकतना गम अथवा ठं डा है तापमापी; °C या °F पृष्ठ 31–32

वषण जल के वे सभी रूप — वष , िहम, सिहमवृिष्ट या ओले — जो वषामापी; मलीमीटर ( म.मी.) पृष्ठ 33
आकाश से िगरते है ं

वायुमंडलीय दाब वायु का वह दबाव िजसे हम पथ्ृ वी की सतह पर अनुभव करते है ं वायुदाबमापी; मलीबार (mb) पृष्ठ 34–35

पवन उच्च दबाव वाले क्षेत्र से िनम्न दबाव वाले क्षेत्र की ओर वायु का पवाह वात दक्सूचक यंत्र / पवन पृष्ठ 36–37
वेगमापी; कमी/घंटा

आद्रता वायु में उपिस्थत जलवाष्प की मात्रा आद्रतामापी; सापे क्षक आद्रता पृष्ठ 37–38
(%)

ताप सीमा अिधकतम तापमान में से न्यूनतम तापमान घटाना (सामान्यतः 24 घंटे °C पृष्ठ 32
में)

औसत दै नक (अिधकतम + न्यूनतम तापमान) ÷ 2 °C पृष्ठ 32
तापमान

गत (डीप्रेशन) वायुद ाब का 1000 िमलीबार से नीचे िगर जाना, जो तूफ ान या वायुदाबमापी पृष्ठ 35
चक्रवात बन सकता है

स्वचा लत मौसम संवेद कों वाला स्वचािलत तंत्र , जो मानवीय हस्तक्षेप के िबना आँक ड़े — पृष्ठ 39
कद्र दज करता है

मौसम व ान मौसम और इसके िवकास का व्यविस्थत अध्ययन, जो पूव नुम ान का — पृष्ठ 30
आधार है

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages34
Languagehindi
Updated19 Sep 2026