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NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 3 भारत की जलवायु

AglaSem पर कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 भारत की जलवायु (समाज का अध्ययन (भाग 1)) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Social Science Chapter 3 Climates of India (Exploring Society (Part I)), Hindi Medium.
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About NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 3 भारत की जलवायु

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Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 3 भारत की जलवायु – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 3: भारत क जलवायु

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

45 – 66 20 45 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 43 pages

Page 2

कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: भारत क जलवायु
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु के सभी प्रश्न के वस्तृत हल — पाठ्यपुस्तक समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
भाग 1 के वषय ‘भारत एवं वश्व : भूभाग एवं उनके नवासी’ से। इसम पाँच महत्वपूण प्रश्न, सभी छह आइए पता लगाएँ बॉक्स, दोन
पुनरावलोकन कर बॉक्स, बादल वाला आइए वचार कर बॉक्स, तीन इसे अनदे खा न कर बॉक्स, पृष्ठ 46, 49, 50, 58 और 62 के पाठ्य प्रश्न,
आगे बढ़ने से पहले... तथा प्रश्न और क्रयाकलाप के सात प्रश्न ( मलान स हत) स म्म लत ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1) (कक्षा 7) 45 – 66

खं ड प्रश्न

20 45

माध्यम

हन्द

महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 45
अध्याय का आरंभ — भारत एवं वश्व : भूभाग एवं उनके नवासी

महत्वपू ण प्रश्न

प्र.1 भारतीय जलवायु को कौन-कौन से तत्व व वध बनाते ह?

वश्व क लगभग हर प्रकार क जलवायु भारत म एक साथ मलती है, क्य क जलवायु बनाने वाले पाँच कारक भारत म बहुत
अ धक बदलते ह — अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से नकटता, पवन और स्थलाकृ त।

कारक भारत म कतना बदलता है प रणाम

अक्षांश भूम ध्य रे खा के िनकट िनकोबार ीपसमूह से ले क र सुदू र कन्याकु मारी और िनकोबार लगभग पूरे वष गम; श्रीनगर
उत्तर के ल ाख तक और ले ह ठं डे
ऊँचाई समुद तल से ले क र कई िकलोमीटर ऊँचे िहमालयी िशखरों िशखरों पर अल्पाइन, नीचे समशीतोष्ण पवतीय स्थल और
तक उनसे नीचे तप्त मैद ान

समुद्र से बहुत लंबी तटरे खा, पर साथ ही तट से बहुत दू र िस्थत स्थान मुंबई का हल्का 32°C–18°C बनाम नागपुर का चरम
नकटता भी 44°C–10°C

पवन अरब से आने वाली गम शुष्क पवने,ं िहमालय पार से ठं डी उ त्तर-पिश्चम में ताप लहर, िगिरपाद में शीत लहर, तटों पर
पवने,ं समुद से नम मानसूनी पवने ं भारी मानसूनी वष
स्थलाकृ त पवत, पठार, मैद ान और समतल मरुस्थल िहमालय मध्य एिशया की ठं ड से बचाता है; पिश्चमी घाट
मानसून से वष िनचोड़ ले ता है

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

इसी का प रणाम है पृष्ठ 48 क सूची — एक ही दे श म सात प्रकार क जलवायु:

अल्पाइन — हमालय पवत : अत्य धक ठं डी, बफ ली शीत ऋतु और शीतल ग्रीष्म।
समशीतोष्ण — हमालय के नचले तथा अन्य पहाड़ी क्षेत्र : कम ठं डी स दयाँ, बहुत गम न होने वाली ग मयाँ। यह पवतीय
पयटन स्थल ह।
उपोष्ण क टबंधीय — उत्तरी मैदान : अत्य धक गम ग्रीष्म, ठं डी शीत ऋतु। यह भारत का अ धकांश गेहूँ उगता है।
शुष्क — प म म थार मरुस्थल : अत्य धक गम दन, ठं डी रात, बहुत कम वषा।
उष्णक टबंधीय आद्र — प मी तट य प : भारी मानसूनी वषा, चावल और मसाल के अनुकूल।
अध-शुष्क — मध्य दक्कन पठार : गम ग्रीष्म, हल्क सद , सामान्य वषा।
उष्णक टबंधीय — पूव भारत एवं द क्षणी प्राय प : हल्क सद तथा मानसूनी पवन ारा नयं त्रत अलग-अलग आद्र और
शुष्क अव धयाँ।

ऐसा क्य होता है: जलवायु कसी एक कारक से नह बनती। ऊट और कोयंबटू र लगभग एक ही अक्षांश पर ह,
फर भी ऊँचाई के कारण ऊट लगभग 15°C ठं डा है। मुंबई और नागपुर भी एक ही अक्षांश पर ह, फर भी समुद्र न
होने से नागपुर का ताप प रसर 34°C तक पहुँच जाता है। पाँच म से कोई एक कारक बद लए और जलवायु बदल
जाएगी — और भारत म यात्रा करते ही ये पाँच बदलते जाते ह।

प्र.2 मानसून क्या है? यह कैसे बनता ह?

‘मानसून’ शब्द अरबी भाषा के शब्द ‘मौ सम’ से आया है, जसका अथ है ऋतु। शा ब्दक रूप से यह हद महासागर, ऑस् े लया,
अ का और द क्षण ए शया स हत आस-पास के क्षेत्र म चलने वाली मौसमी पवन के लए प्रयुक्त होता है। चूँ क ये पवन वषा लाती
ह, इस लए सामान्य बोलचाल म मानसून का अथ मौसमी वषा से लया जाता है।
यह कैसे बनता है — इसका आधार एक साधारण तथ्य है : भू म समुद्र क तुलना म शीघ्रता से गम या ठं डी होती है।

गीष्म ऋतु शीत ऋतु
दिक्ष ण-पिश्चम मानसून उत्तर-पूव मानसून
सम दु से नम पवने ं → वष भूिम से शुष्क पवने ं → कम वष

तप्त भूभाग — िनम्न दाब ठं डा भूभाग — उच्च दाब

ठं डा महासागर उच्च दाब गम महासागर िनम्न दाब

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

चत्र 3.9 के आधार पर मानसून का उलटाव। पवन सदै व उच्च दाब से नम्न दाब क ओर बहती है — तीर बस इसी अंतर का अनुसरण
करते ह।

1. ीष्म ऋतु। ए शयाई भूभाग गम होकर उस पर एक श क्तशाली नम्न-दबाव क्षेत्र बना दे ता है। चूँ क पवन सदै व उच्च दाब से
नम्न दाब क ओर बहती है, इस लए पवन ठं डे, उच्च दाब वाले महासागर से गम भूभाग क ओर खच आती ह। ये समुद्र
पवन नमी लाती ह, जो गम भूभाग पर संघ नत होकर भारी वषा करती है।
2. शीत ऋतु। प्र तरूप उलट जाता है। स्थलभाग समुद्र से शीघ्र ठं डा होता है, इस लए अब भू म पर उच्च दाब और अपेक्षाकृत गम
समुद्र पर नम्न दाब होता है। पवन भू म से समुद्र क ओर चलती ह और ए शया के अ धकांश भाग म शुष्क प र स्थ तयाँ बन
जाती ह।

भारत म ग्रीष्मकालीन या द क्षण-प म मानसून क वषा सामान्यतया जून क शुरुआत म द क्षणी सरे से प्रवेश करती है और
जुलाई के मध्य तक संपूण उपमहा प पर फैल जाती है। प मी घाट एक प्राकृ तक अवरोध का काम करता है — उसके प मी
ढलान पर बहुत अ धक वषा होती है, जब क पूव म दक्कन पठार पर कम और प्रायः अंतराल के साथ। शीत ऋतु म पवन भूभाग से
समुद्र क ओर चलती ह; इनका एक भाग बंगाल क खाड़ी से गुजरते हुए नमी ग्रहण कर पूव और द क्षणी भारत के कुछ भाग म
वषा करता है — यही उत्तर-पूव मानसून है।

प्र.3 जलवायु का समाज, संस्कृ त और आ थक स्थ त पर क्या प्रभाव पड़ता है?

हमारे जीवन का जलवायु से गहन संबंध है और हम इस पर नभर ह। अध्याय इसे तीन स्तर पर दखाता है।

स्तर जलवायु का प्रभाव अध्याय के उदाहरण

संस्कृ त त्योहार, रीित-िरवाज, संग ीत और वसंत पंचमी, शरद पूिणमा; िबहू, पोंगल , ओणम, बैसाखी, लोहड़ ी, छठ पूजा, मकर
भोजन ऋतुओ ं तथा कृ िष-वष के साथ सं ांित, गुडी पड़ वा, हेिमस, लोसुंग, अिव शीतकालीन महोत्सव (िचत्र 3.11); राग
क्र

चलते है ं मेघम ार और अमृतविषणी

अथव्यवस्था कृ िष तथा वे उद्योग जो जल और उपोष्ण उ त्तरी मैद ानों में गेहू;ँ उ ष्ण आद पिश्चमी तट पर चावल और मसाले ;
पूव नुम ािनत मौसम पर िनभर है ं ‘मानसून फे िलयर ’ से फसल की हािन

समाज लोग कहाँ रह सकते है,ं क्या काम जल की तलाश में लंबी दू री तय करते लोग (सामान्यतः मिहलाएँ); कृिष श्रिमकों का
करते है ं और कब पलायन को िववश नगरों की ओर पलायन; अनाज, सि जयों और फलों का महँगा होना और
होते है ं मुद ास्फीित का बढ़ ना

दै नक जीवन भी जलवायु के अनुसार चलता है — हम जो फसल उगाते ह, भोजन करते ह और वस्त्र पहनते ह, सब मौसम के साथ
बदलता है। भारत म सबसे मोटे कपड़े अल्पाइन हमालय म पहने जाते ह, और शुष्क थार के लोग ने जल संग्रह करने और बचाने के
अनोखे उपाय वक सत कए ह।

मानसून फे लयर इतना दूर तक क्य असर करता है: वह खेत पर नह रुकता। कम वषा → कम उपज →
भू महीन श्र मक को कम काम → नगर क ओर पलायन → बाजार म कम अनाज → सबके लए महँगाई, उन
प रवार के लए भी जन्ह ने कभी खेती नह क । इसी ंखला के कारण अध्याय कहता है क वश्व भर म जलवायु
और सामा जक-आ थक स्थ तयाँ आपस म जुड़ी ह।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु
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जलवायु क समझ हम प्राकृ तक आपदा के लए तैयार रहने म कस प्रकार सहायता करती है?
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प्र.4

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क्य gकl अ धकांश जलवायुजन्य आपदाएँ प्रकार, स्थान और ऋतु क दृ ष्ट से पूवानुमेय ह, भले ही उनक सट क त थ न पता हो।
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जलवायु क समझ अचानक आए संकट को एक ऐसी घटना म बदल दे ती है जसके लए तैयारी क जा सके।

. comतब हम क्या कर सकते ह ag
आपदा जलवायु क समझ क्या बताती है
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चक्रवात
agपूव तट, पर
पितवष भारतीय तटरे खा, िवशेषकर भारतीय मौसम िव ान िवभाग उनके बनने, िवकास और पभािवत क्षेत्र
आते है ं और समुद के िनम्न दाब क्षेत्र ों में बनते है ं की पूव सूचना दे ता है; एन.डी.आर.एफ . समय रहते लोगों को हटाता
है
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तटबंध और चेतावनी तंत्र, नािलयों कीseसफाई, जलमाग ं पर िनम ण
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.co आंध पदे श और असम िवशेष रूप से संवेदनशील है ं gla
बाढ़ पायः मानसून में आती है; उत्तर पदे श, िबहार, के रल,

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की रोक
a
ase
agl व ोट
हमनद य िहमनदों के तेजी से िपघलने या कई िदनों की भारी िहमनदीय झीलों की िनगरानी, नदी घािटयों में िनम ण पर िनयंत्रण,
वष के बाद होता है तीथयात्रा माग ं की सावधान योजना
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.co िनमवीकणृ तपरिविधयों agl
से िनम ण, ढलानों पर वृ ारोपण, अ यिधक भवन-
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भूस्खलन पहाड़ी क्षेत्र ों में मानसून के दौरान होते है ं और वनों

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स् क्ष त्

रोक
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की कटाई से बढ़ ते है ं

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दावानल शुष्क पिरिस्थितयों, सूखे और तेज हवाओं से फै लते शुष्क ऋतु से पहले अिग्न-रे खाएँ और िनगरानी मीनारे ं, लापरवाही के
िवरुद्ध चेतावनी
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है ं — इसिलए जोिखम के महीने ात है ं

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mसमझना अ धक पयावरण-
अध्याय एक बड़ी बात भी जोड़ता है — जलवायु प रवतन और आपदा के कारण के बीच के संबंधeको
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o तथा समुदाय म लचीलेपन एवं अनुकूलन के नमाण क आवश्यकता
अनुकूलcआचरण a
glका समथन करता है।
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agl क्या आप जानते ह? राष्ट्रीय आपदा प्र त क्रया बल (एन.डी.आर.एफ.) प्राकृ तक और मानव- न मत दोन प्रकार
क आपदाओं के लए प्र श क्षत है, और उसक बटा लयन भारत म 12 अलग-अलग स्थान पर रखी गई ह, ता क
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सहायता कह भी बहुत दूर न पड़े।
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जलवायु प रवतन क्या है? इसके प रणाम क्या-क्या होते ह?
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प्र.5

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a s emजलवायु प रवतन का तात्पय है जलवायु म महत्वपूण एवं द घका लक प रवतन — तापमान, वषा और मौसम क घटनाओं म
agl बदलाव। यह संपूण पृथ्वी पर या केवल क्षेत्रीय स्तर पर भी हो सकता है।
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कारण। पछली सह ा ब्दय म प्राकृ तक प्र क्रयाएँ इसे प्रे रत करती थ , कतु 19व शताब्द के बाद से यह मुख्यतः मानवीय
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ग त व धय से प्रे रत है :

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जीवाश्म ईंधन का जलना — कोयला, पे ो लयम तेल और प्राकृ तक गैस;
वन क कटाई; a g
पयावरण के लए हा नकारक औ ो गक उत्पादन;

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

अत्य धक या अनावश्यक खपत के प्र तरूप।

इनसे भारी मात्रा म ह रतगृह गैस नकलती ह। प्राकृ तक ह रतगृह प्रभाव ही पृथ्वी को जीवन के लए पयाप्त गम रखता है; समस्या
यह है क उ ोग, प रवहन और कृ ष ने कुछ ही शता ब्दय म इन गैस क भारी मात्रा छोड़ द , जससे अ त रक्त गम रुक गई और
तेजी से वै श्वक तापन हो रहा है।
प रणाम :

मौसम और तापमान क चरम स्थ तयाँ, जनके प्राकृ तक और मानवीय दोन जगत पर गंभीर प रणाम होते ह।
जलवायु प्र तरूप का बा धत होना, जन पर हजार वष से पेड़-पौध , जानवर और मानव समाज ने स्वयं को अनुकू लत
कया था।
अ धक और अ धक भयंकर आपदाएँ — चक्रवात, बाढ़, हमनद य व ोट, दावानल।
अथव्यवस्था को हा न। 2025 के आरंभ म भारत का औसत तापमान सामान्य से 1 से 3 ड ी से ल्सयस अ धक था, जससे
सद बहुत कम और हल्क रही — इसका असर कृ ष उत्पादन तथा अनेक लघु उ ोग पर पड़ा।

क्या कया जा रहा है। भारत स हत वश्व भर क सरकार न्यूनीकरण के उपाय को बढ़ावा दे ती ह — ह रतगृह गैस के उत्सजन म
कटौती, वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊजा, ऊजा दक्षता म सुधार और सतत जीवन-शैली। अध्याय क ठनाई भी स्पष्ट कहता है : ये प्रयास
प्रायः आ थक वकास और उपभोग क बढ़ती आकांक्षाओं से टकराते ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 46
मौसम, ऋतुए ँ और जलवायु

प्र.1 ‘जलवायु’ एक ऐसा शब्द है, जसका प्रयोग लोग सामान्यत: दै नक बातचीत म करते ह। प्राय: इसका तात्पय
मौसम से होता है, जलवायु से नह । दोन म क्या अंतर है?

अंतर समय क अव ध का है।

मौसम जलवायु

अव ध िजसे हम पितिदन या हर घंटे अनुभव करते है ं लंबे समय का पितरूप — कम से कम कई दशक

प रवतन समय-समय पर बदलता रहता है लंबे समय तक िस्थर बनी रहती है
उदाहरण ‘आज वष हो रही है’, ‘तेज धूप है’, ‘आज तेज ‘थार म रुस्थल की जलवायु शुष्क है’, ‘उ त्त री मैद ानों की जलवायु उपोष्ण
हवा है’ किटबंधीय है’

कैसे िखड़की से बाहर दे खकर तीस वष या उससे अिधक के तापमान, वष और पवन के अिभले खों का
जान अध्ययन करके

संकेत: याद रखने का सरल सूत्र — मौसम मनोदशा है, जलवायु स्वभाव। हँसमुख व्य क्त का भी कोई दन खराब
जा सकता है (शुष्क क्षेत्र म एक वषा वाला दन), पर इससे उसका स्वभाव नह बदलता।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 अब प्रश्न उठता है क ऋतुओं का संबंध मौसम से है या जलवायु से?

दोन से। पुस्तक स्वयं यही उत्तर दे ती है।

ऋतु और मौसम : मौसम ऋतुओं के अनुसार बदलता है — ग्रीष्म म शुष्क एवं गम, मानसून म आद्र और वषा वाला।
ऋतु और जलवायु : कसी क्षेत्र क ऋतुओं के प्र तरूप का वहाँ क जलवायु से गहरा संबंध होता है। वश्व के अ धकतर क्षेत्र म
चार मुख्य ऋतुएँ होती ह, कतु भारत म इनके साथ वषा ऋतु या ‘मानसून’ भी होती है।

पृथ्वी सूय का प रक्रमण करती है, जससे ऋतुओं का नमाण होता है। प्रत्येक ऋतु कुछ महीन तक रहती है और प्र तवष लौटती है।
पारंप रक रूप से भारत के अनेक भाग म वष को छह ऋतुओं म बाँटा जाता है :

ऋतु अं ेजी म अध्याय म उ ल्ल खत त्योहार

वसंत spring वसंत पंचमी

ग ीष्म summer

वष rainy season

शरद autumn शरद पूिणमा

हेम ंत (शीत-पूव) pre-winter

िशिशर (शीत ऋतु) winter

उत्तर ‘दोन ’ ही क्य है: कोई एक ऋतु वह मौसम है जसे आप इस वष भोगते ह — यह मौसम हुआ। कतु प्रत्येक
वष वही छह ऋतुएँ उसी क्रम म लौटती ह — यह द घका लक प्र तरूप है, और द घका लक प्र तरूप का ही दूसरा
नाम जलवायु है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 47
आपके अपने क्षेत्र क ऋतुए ँ

आइए पता लगाएँ

प्र.1 आपक प्रय ऋतुए ँ कौन-सी ह? अपने कारण स हत इस पर एक सं क्षप्त नबंध ल खए।

यह आपका अपना नबंध है, इस लए इसे कोई और नह लख सकता — कतु अच्छा नबंध तीन काम करता है : वह ऋतु का नाम
लेता है, दो प्रकार के कारण दे ता है (मौसम कैसा रहता है और आप उसम क्या करते ह), और ऋतु को अपने स्थान से जोड़ता है
— वहाँ का भोजन, त्योहार, फूल, खेल।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

लखने क रूपरेखा :

1. ऋतु का नाम और आपके यहाँ वह कन महीन म रहती है।
2. मौसम का वणन — तापमान, वषा, हवा, प्रकाश।
3. आस-पास क्या बदलता है — वृक्ष, पक्षी, फसल, वस्त्र।
4. आप उसम क्या करते ह — त्योहार, भोजन, खेल, छु याँ।
5. अंत म एक वाक्य — यह ऋतु आपको सबसे प्रय क्य है।

नमूना उत्तर: “मेरी प्रय ऋतु वषा है। जून के अंत से सतंबर तक हमारे कस्बे का आकाश धूसर हो जाता है और पहली ही बौछार हर
पत्ते क धूल धो दे ती है। हवा म गीली म क गंध भर जाती है और तापमान 40 डग्री क तपन से उतरकर सुखद 30 डग्री हो
जाता है। घर के पीछे के खेत भूरे से ऐसे हरे हो जाते ह क आँख च धया जाएँ, और रात म मढक बोलने लगते ह। साँझ को गरम
पकौड़े और चाय मलती है और नाली म कागज क नाव चलती ह। मुझे वषा सबसे प्रय है क्य क यही वह ऋतु है जो बाक सब को
जीवन दे ती है — इसके बना न फसल होती, न फसल का त्योहार, और न हमारे कुएँ म पानी।”

संकेत: ‘मुझे गम अच्छ लगती है क्य क वह अच्छ है’ जैसे वाक्य न लख। हर ‘अच्छा’ के स्थान पर एक तथ्य
र खए — कोई तापमान, कोई गंध, कोई भोजन, कोई ध्व न।

प्र.2 आपके क्षेत्र म ऋतुओं से जुड़ी वशेष घटनाओं का पता लगाने के लए तीन या चार व ा थय के समूह म चचा
क जए। इनसे संबं धत गीत, उत्सव से संबं धत भोजन, व भन्न ऋतुओं से संबं धत प्रच लत प्रथाएँ आ द को
ल खए और कक्षा के साथ साझा क जए।

क्रयाकलाप कैसे कर :

1. वष को समूह म बाँट ली जए — एक सदस्य एक ऋतु ले।
2. घर और पड़ोस म पू छए : इस ऋतु म कौन-सा त्योहार आता है? उसम क्या पकता है? कोई गीत, नृत्य, रंगोली या वशेष
वेशभूषा है?
3. यह भी ल खए क वह उत्सव उसी ऋतु म क्य पड़ता है — अ धकांश बुवाई, फसल या पहली वषा से जुड़े होते ह।
4. चार या छह स्तंभ (एक ऋतु के लए एक) का चाट बनाइए और उस पर चत्र या रेखा चत्र लगाइए।

अ े ववरण म क्या होना चा हए — प्रत्येक उत्सव के लए : नाम, ऋतु और महीना, आयोजन का कारण, भोजन, गीत या नृत्य,
और भाग लेने वाले लोग।
नमूना उत्तर (असम का कोई समूह ऐसा लख सकता है):

ऋतु उत्सव उसी ऋतु म क्य भोजन, गीत, प्रथा

वसंत रोंग ाली कृ िष वष का आरंभ, बुवाई का समय पीठा और लारू; ढोल और पेपा के साथ िबहू नत्ृ य
(बोहाग) िबहू

वषा अंबबु ाची माना जाता है िक पहली वष में धरती िवश्राम कर नवीन खेती रुक जाती है; कामाख्या मंिदर तीन िदन बंद
होती है रहता है

शरद/शीत माघ िबहू फसल घर आ चुक ी होती है, भंडार भरे होते है ं सामूिहक भोज, मेजी की अलाव, पारंपिरक खेल

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स्वयं जाँ चए: तुलना के लए अध्याय का चत्र 3.11 ही ग्यारह उत्सव दे ता है — बहू, छठ पूजा, मकर संक्रां त,
बैसाखी, प गल, अ व शीतकालीन महोत्सव, हे मस, लोसुंग, गुडी पड़वा, लोहड़ी और ओणम।

प्र.3 क्या आप जानते ह क आपके क्षेत्र म कौन-से वृक्ष शीत ऋतु के आगमन से पूव अपना रंग बदलते ह? क्या ऐसे
वृक्ष ह, जो इस समय अपने पत्ते गरा दे ते ह? आपके वचार म ऐसा क्य होता है? इन वृक्ष के स्थानीय नाम का
पता लगाइए और उनके वषय म ल खए।

आप क्या पाएँगे। भारत के अ धकांश भाग म पत्ते शरद म नह , ब ल्क शीत के अंत और ीष्म के आरंभ (फरवरी–अप्रैल) म
गरते ह, और नई क पल हरी होने से पहले लाल या ताम्र रंग क होती ह। ये वृक्ष दे खए :

वृक्ष स्थानीय नाम क्या करता है

साल साल, सखुआ शुष्क महीनों में पत्ते िगराता है; नई कोंपले ं गुल ाबी-भूरी

सागौन सागवान, टेकू शीत-शुष्क ऋतु में बड़ े पत्ते भूरे होकर िगर जाते है ं
पलाश पलाश, टेस ू, िकं शुक पत्ते िगराकर ठू ँठ डािलयों पर दहकते नारंगी फू ल िखलाता है

सेमल से म ल, शाल्मिल शीत में नंगा, िफर लाल फू लों से भर जाता है

दे शी बादाम, दे शी बादाम िगरने से पहले पत्ते चटक लाल -पीले हो जाते है ं
बादाम

अमलतास अमलतास, गोल्डन शॉवर टी, पत्ते िवरल होकर पीले फू लों की झालर लटक जाती है — दिक्षण में मानसून का
किणक्कोन्ना संकेत

ऐसा क्य होता है: पत्ते गराना वृक्ष का जल बचाने का उपाय है। पत्ते के सूक्ष्म छद्र से लगातार जल उड़ता रहता
है। जब म सूखी और ठं डी — या सूखी और तपती — हो, तो वृक्ष उस जल क भरपाई नह कर पाता, इस लए
वह पत्ते गराकर प्रतीक्षा करता है। रंग पहले बदलता है : वृक्ष पत्ते से हरा वणक (पणह रत) और उपयोगी भोजन
वापस ख च लेता है, और जो पीले-नारंगी-लाल वणक पहले से थे, वे दखने लगते ह। हमालयी ढलान जैसे
अत्य धक ठं डे स्थान म यही उपाय वृक्ष को पाले से भी बचाता है — इसी लए अध्याय कहता है क शरद के आते ही
कुछ वृक्ष पत्ते गरा दे ते ह या रंग बदल लेते ह।

कैसे लख: प्रत्येक वृक्ष का स्थानीय नाम, य द मल सके तो वानस्प तक नाम, पत्ते गरने का महीना, फूल आने का महीना ल खए
और एक दबाया हुआ पत्ता चपकाइए। जो नाम पुस्तक म न मल, वे कसी वृद्धजन या माली से पू छए।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 49

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु
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जलवायु नधा रत करने वाले कारक
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व भन्न प्रकार क जलवायु का नमाण कन कारण से होता है?
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प्र.1

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अनेक कारक, जो मलकर काम करते ह। कुछ वै श्वक स्तर के सामान्य कारक ह, तो कुछ क्षेत्रीय या स्थानीय। अध्याय इनम से पाँच

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पर वचार करता है।

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क्रम कारक स्तर
ag एक पं क्त का नयम
क) अक्षांश वैिश्वक
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िनम्न अक्षांश गम, उ च्च अक्षांश ठं डे — सूय की िकरणों के कोण के कारण
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समुद तल से ऊँ चाई बढ़ ने पर तापमान घटता है se m.
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ख) ऊँचाई क्षेत्र ीय

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se क्षेत्र ीय समुद तापमान को िनयंि त करता है; भीतरी भाग अिधक चरम होते है ं
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a घ) पवन क्षेत्र ीय पवने ं दू र से ताप, ठं ड और नमी ले कर आती है ं

पवतm a s
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ङ) स्थलाकृ त क्षेत्र ीय एवं स्थानीय पवनों को रोकते है ं या उ हे ं ऊपर उठाकर वष कराते है ं
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a glकहता है क कसी भी क्षेत्र क जलवायु उपयुक्त सभी कारक ारा सामू हक
‘अब यह सब एक साथ दे ख...’ म अध्याय स्पष्ट
रूप से नधा रत होती है। जलवायु के वणन म तीन दशक या उससे अ धक समय के तापमान, वषण (वषा या हमपात, कोहरा
या धुंध) और पवन क दशा के प्र तरूप स म्म लत होते ह।
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क्या आप जानते ह? बहुत छोटे स्तर पर ये कारक सूक्ष्म जलवायु बना दे ते ह — कसी छोटे क्षेत्र क अपनी अलग
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a s em जलवायु, जैसे संक ण घाट , कोई जंगल, या ‘नगरीय ऊष्मा प’ जहाँ कंक्र ट ऊष्मा रोक लेती है और वनस्प त

agl बहुत कम होती है।
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पुनरावलोकन कर — पृष्ठ 49
क) अक्षांश

पु न रावलोकन कर

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हमने कक्षा 6 म अक्षांश के वषय म पढ़ा था। क्या आपको याद है क अक्षां श भूमध्य रेखा क दूरी से मापे जाते ह
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प्र.1

l a se और जैसे-जैसे हम इससे दूर (या तो उत्तर क ओर या द क्षण क ओर) जाते ह, ये बढ़ते जाते ह? वषुवत रेखा के

ag आस-पास क जलवायु बहुत गम होती है ले कन अक्षांश बढ़ने के साथ-साथ यह समशीतोष्ण और फर ठं डी या
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बफ ली हो जाती है। ऐसा क्य होता है?

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ऐसा उस कोण के कारण होता है जस पर सूय क करण कसी क्षेत्र वशेष पर पड़ती ह — और इस लए भी क उन्ह वायुमंडल का
कतना भाग पार करना पड़ता है।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

धुव
िकरणें ितरछी
उतनी ही ऊज बड़ े क्षे त्र पर फैली → ठंड ा
वायुमड
ं ल मे ं सबसे लंबा माग

भूमध्य रेखा

िकरणें लगभग लंबवत

ऊज छोटे क्षे त्र पर केंिदत → गम
वायुमड
ं ल मे ं सबसे छोटा माग

वायुमंडल

चत्र 3.4 का वचार। सूय करण का उतना ही पुंज भूमध्य रेखा पर छोटे -से टु कड़े पर और ध्रुव के पास खचे हुए चौड़े क्षेत्र पर गरता है।

दो कारण, दोन चत्र 3.4 म दखाए गए ह :

1. कोण। भूमध्य रेखा पर करण लगभग लंबवत होती ह, इस लए उनक संपूण ऊजा पृथ्वी क सतह के छोटे -से क्षेत्र पर क द्रत
हो जाती है। ध्रुवीय क्षेत्र म करण झुक हुई या तरछ होती ह और उतनी ही ऊजा बड़ी सतह पर बँट जाती है।
2. वायुमंडल का माग। तरछ करण को पृथ्वी के वायुमंडल के बहुत बड़े भाग से गुजरना पड़ता है, जससे उनक ऊजा और
भी अ धक नष्ट हो जाती है।

प रणामस्वरूप ध्रुवीय क्षेत्र को वषुवत रेखीय क्षेत्र क तुलना म कम ताप मलता है, और अक्षांश बढ़ने के साथ जलवायु अत्य धक
गम से समशीतोष्ण और फर ठं डी या बफ ली होती जाती है।

स्वयं जाँ चए: अध्याय का भारतीय उदाहरण — कन्याकुमारी और नकोबार पसमूह भूमध्य रेखा के नकट होने
के कारण लगभग पूरे वष गम रहते ह, जब क उत्तर म स्थत श्रीनगर जैसे स्थान बहुत ठं डे रहते ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 50
ख) ऊँचाई (एल्ट ूड)

प्र.1 हम जानते ह क ये स्थान मैदान क तुलना म अ धक ऊँचाई पर स्थत ह, ले कन यह उनके ठं डे तापमान क
व्याख्या कैसे करता है?

अध्याय दो सरल कारण दे ता है क ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान क्य घटता है।

1. वायु वरल हो जाती है। ऊँचाई बढ़ने के साथ वायुमंडलीय दबाव और उसके प रणामस्वरूप वायु का घनत्व कम हो जाता है
(जैसा हमने ‘मौसम को समझना’ अध्याय म पढ़ा था), और घनत्व घटने पर वायु ठं डी होती जाती है।

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2. तप्त सतह से दूरी। सूय पृथ्वी क सतह को गम करता है और वायु नीचे से गम होती है। इस लए सतह से जतनी अ धक दूरी
होगी, हवा उतनी ही कम गम होगी।

इसी लए हमालय इतना ऊँचा है क उसके कई शखर का तापमान जल के हमांक से नीचे रहता है और वे वष भर हम से ढँ के
रहते ह — और इसी लए पवतीय स्थल लोक प्रय पयटन कद्र ह।

पवतीय पयटन स्थल राज्य / क्षेत्र

मुन्नार, थेनी, उधगमंडलम (ऊटी) के रल और तिमलनाडु — पिश्चमी घाट एवं नीलिगिर

मिदके री, महाबले श्वर कन टक और महारा — पिश्चमी घाट

माउं ट आबू राजस्थान — अरावली शंखृ ला

िशमला, नैनीताल, दािजिलंग िहमाचल पदे श, उ त्तराखंड, पिश्चम बंगाल — िहमालय

तवांग , िशलांग अरुणाचल पदे श और मेघालय — पूव त्तर

संकेत: पवत चढ़ते समय लोग सोचते ह क सूय के पास जाने से गम बढ़नी चा हए। कतु 15 करोड़ कलोमीटर म
से कुछ कलोमीटर घटने का कोई अथ नह है। असली कारण वरल वायु और तप्त धरातल से बढ़ती दूरी है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 51
ख) ऊँचाई — ऊट और कोयंबटू र

आइए पता लगाएँ

प्र.1 उधगमंडलम (ऊट ) एवं कोयंबटू र लगभग समान अक्षांश पर स्थत ह। ऊट म गम का तापमान 10–25 ड ी
से ल्सयस जब क कोयंबटू र म 25–38 ड ी से ल्सयस होता है। इन दो स्थान पर तापमान म यह अंतर क्य है?
इस बारे म आप क्या सोचते ह?

इसका कारण है ऊँचाई। दोन का अक्षांश लगभग समान है, इस लए अक्षांश कारण नह हो सकता — जो एक कारक तीव्र रूप से
भन्न है, वह है समुद्र तल से ऊँचाई।

ऊटी — नीलिगिर की पहािड़ यों में, लगभग 2,200 मीटर की ऊँ चाई पर

कोयंबटू र — पहािड़ यों के नीचे मैद ान में, लगभग 400 मीटर पर

गीष्म के अिधकतम तापमान का अंत र = 38° − 25° = 13°

गीष्म के न्यून तम तापमान का अंत र = 25° − 10° = 15°

पृष्ठ 50 के दोन कारण यहाँ लागू होते ह :

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

ऊट क ऊँचाई पर वायुमंडलीय दबाव और वायु का घनत्व कम है, और वरल वायु ठं डी होती है।
ऊट मैदान क तप्त सतह से बहुत ऊपर है, जब क वायु को गम धरातल ही करता है।

यह जोड़ी इतना अ ा उदाहरण क्य है: दोन नगर मु श्कल से 80 कलोमीटर दूर ह और लगभग समान अक्षांश
पर ह, इस लए सूय दोन पर एक ही कोण से पड़ता है। वै ा नक जन बात को समान रखना चाहेगा, वे सब समान ह
— इस लए केवल ऊँचाई ही व्याख्या बचती है। यही कारण है क ऊट पवतीय पयटन स्थल बना और कोयंबटू र नह ।

यह क जए: अपने नकट के कसी पवतीय स्थल क तुलना मैदान के नकटतम नगर से क जए — शमला और
चंडीगढ़, दा ज लग और सलीगुड़ी, महाबलेश्वर और पुणे। आपको हर बार 10–15 डग्री का यही अंतर मलेगा।

पुनरावलोकन कर — पृष्ठ 52
घ) पवन — जल-चक्र

पु न रावलोकन कर

प्र.1 कक्षा 6 क व ान क पाठ्यपुस्तक ज ासा म आप जल-चक्र के बारे म पढ़ चुके ह! “महासागर और पृथ्वी क
सतह से पानी वाष्प के रूप म वायुमंडल म चला जाता है और वषा, ओले या हम के रूप म वापस पृथ्वी पर
लौटता है...”

याद आ गया — अब दे खए क यह इसी अध्याय म क्य रखा गया है। जल-चक्र ही वह तंत्र है जस पर पवन वाला पूरा भाग
टका है।

बादल

नम पवन वष , ओले या िहम

वाष्पीकरण

समुद स्थल

जल समुद्र से वाष्प बनकर उठता है, पवन उसे स्थल के ऊपर ले जाती है और वह वषण के रूप म लौटता है। बीच म पवन न हो तो जल फर
समुद्र म ही गर जाए।

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तीन चरण, और प्रत्येक का पवन से संबंध :

1. वाष्पीकरण — महासागर और पृथ्वी क सतह से जल अदृश्य वाष्प बनकर उठता है। इसी लए समुद्र पार करके आई पवन नम
होती है, और अरब तथा अफगा नस्तान के मरुस्थल से आई पवन शुष्क।
2. प रवहन — पवन उस वाष्प को स्थल के ऊपर ले जाती है। पवन न केवल तापमान, ब ल्क आद्रता और उसके प रणामस्वरूप
वषण को भी प्रभा वत करती ह।
3. संघनन और वापसी — वाष्प संघ नत होकर बादल बनती है और वषा, ओले या हम के रूप म लौट आती है।

यह अगले भाग के लए क्य जरूरी है: मानसून इसी चक्र का वशाल पैमाने पर और वा षक समय-सारणी पर
चलना है। समुद्र पवन नमी उठाती ह, तप्त भारतीय भूभाग उन्ह ऊपर उठाकर ठं डा करता है, और जल मानसूनी वषा
बनकर गरता है। जल-चक्र याद रहे तो मानसून रहस्य नह रह जाता।

इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 55
मानसून

इसे अनदे खा न कर

प्र.1 मेघालय स्थत मौ सनराम वश्व क सवा धक, लगभग 11000 म.मी. (11 मीटर) औसत वा षक वषा प्राप्त करता
है।

यह संख्या रुककर सोचने योग्य है। एक वष म ग्यारह मीटर वषा का अथ है तीन मं जला भवन से भी ऊँचा जल — और वह भी
एक ही स्थान पर।

11,000 िम.मी. = वष भर में 11 मीटर वष

संपूण भारत का औसत ≈ 1,200 िम.मी.

अथ त मौिसनराम को भारतीय औसत से लगभग 9 गुन ा वष िमलती है

मौ सनराम ही क्य ? यहाँ अध्याय के कारक एक साथ काम करते ह :

नमी से लद पवन बंगाल क खाड़ी से उत्तर क ओर बांग्लादे श के समतल, आद्र मैदान को पार करती ह — जल के ऊपर
इतना लंबा माग क उन्ह सुखाने वाला कुछ नह मलता।
फर वे सीधे खासी पहा ड़य से टकराती ह। यही स्थलाकृ त क भू मका है : पहा ड़याँ वायु को तेजी से ऊपर उठने पर ववश
कर दे ती ह।
ऊपर उठती वायु ठं डी होती है, वाष्प संघ नत होती है और जल उसी ढलान पर, मानसून के महीन तक दन-प्र त दन बरसता
रहता है।

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क्या आप जानते ह? पास ही स्थत चेरापूंजी (सोहरा) के नाम एक ही वष म सवा धक वषा का रकॉड है। इतने
mउतनी ही तेजी
जल के बावजूद दोन स्थान पर शुष्क ऋतु म जल क कमी हो जाती है, क्य क तीखे ढलान वषा eको
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coह जतनी तेजी से वह गरती है। gl a
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से बहा ले जाते

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मानसून ने कनाटक और हदुस्तानी शास्त्रीय संगीत म अनेक राग को प्रे रत कया है। ‘मेघमल्हार’ और
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प्र.2

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‘अमृतव षणी’ उनम से कुछ प्रमुख ह।

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दोन नाम वषा के शब्द से बने ह — और यही इस बॉक्स का संदेश है : भारत म मानसून केवल आ थक घटना नह , दे श क कला
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का अंग है।
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राग परंपरा नाम का अथ

aglमेघमल्हार िहंद ुस्तानी मेघ = बादल ; म ार वष -रागों का पूर ा पिरवार है

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अमृतव षणी कन टक (कन िटक) अम ृत = सुध ा, विषणी = बरसाने वाली — ‘जो अम ृत बरसाए ’

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प्र सद्ध मान्यता है क तानसेन मेघ मल्हार गाकर वषा करा दे ते थे, और मुत्तुस्वामी द क्षतर ने अमृतव षणी गाकर सूखा समाप्त
कया था। इन कथाओं को अक्षरशः ल या न ल, ये दखाती ह क भारतीय संस्कृ त ने मानसून को संगीत म कतनी गहराई से बुना है।

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यह क जए: दोन म से एक-एक रचना सु नए और दे खए क उनम क्या समान है — दोन प्रायः वषा ऋतु म गाए

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जाते ह और दोन बादल फटने क प्रतीक्षा का भाव जगाते ह।

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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 56
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मानसून का पारंप रक ान

आइए पता लगाएँ

प्र.1 भारत म मानसूनी वषा का पूवानुमान सदै व से ही जीवन का एक महत्वपूण पक्ष रहा है। हमारे पूवज ने अपने
आस-पास क प्रकृ त के संकेत को ध्यान से दे खा और अपने अनुभव से स्थानीय पारंप रक ान वक सत
कया। यह पारंप रक ान एक महत्वपूण वरासत है, जसे हम संर क्षत करना चा हए। उदाहरण के लए, क कण
तट पर मछु आरे मानसून के आगमन क भ वष्यवाणी करते ह, जब जल के नीचे रहने वाली मछ लयाँ सतह पर
दखाई दे ने लगती ह। द क्षण भारत के कुछ भाग म यह माना जाता है क मानसून गोल्डन शॉवर या अमलतास
(कै सया फस्टु ला) के खलने के 50 दन के भीतर आ जाता है। कुछ समुदाय का यह भी मानना है क जब कौए
अपने घ सले पेड़ क चोट पर बनाते ह तो यह कम वषा का संकेत दे ता है, जब क अगर घ सले नीचे ह तो भारी
वषा होने क संभावना होती है। अपने क्षेत्र म वषा, कोहरे, हम या स हमवृ ष्ट के बारे म ऐसे स्थानीय ान क एक
सूची बनाइए।

सूची कैसे बनाएँ। उन लोग से बात क जए जनक आजी वका आकाश पढ़ने पर टक है — कसान, मछु आरे, गड़ रए, माली,
कुम्हार और राज मस्त्री। प्रत्येक संकेत के लए चार बात ल खए : संकेत क्या है, वह कसका सूचक माना जाता है, कतने दन
पहले, और कसने बताया। फर एक ऋतु तक डायरी र खए और प्रत्येक संकेत के आगे ल खए ‘सही नकला / नह नकला’।
नमूना उत्तर — एक व ाथ ारा एकत्र क गई सूची :

दे खा गया संकेत माना जाता है क संभा वत वै ा नक कारण

ची ंिटयाँ अंडे ले क र लंबी कतार में ऊँची जगह की एक-दो िदन में भारी वष क ट वायुदाब क गरावट और आद्रता क वृ द्ध को भाँप
ओर जा रही हों लेते ह

मोर का बोलना और नाचना मानसून िनकट है उनका प्रजनन काल पहली वषा से जुड़ा होता है

अबाबील और व्याध-पतंग ों (डै ग नफ्लाई) का बहुत उसी संध्या वष नम, भारी वायु म छोटे क ट जमीन के पास रहते ह
नीचे उड़ना

चंद मा के चारों ओर घे र ा दो-तीन िदन में वष ऊँचे पतले सरस बादल, जो प्रायः वषा तंत्र से आगे चलते
ह

पशुओ ं का बैठने से इनकार करना या िसमटकर तूफ ान आने वाला है पशु दाब और पवन के प रवतन पर प्र त क्रया करते ह
खड़े होना

शीत ऋतु में खेतों पर सवेरे घना कोहरा िदन साफ , ठं डा और कोहरा शांत, स्वच्छ रात म बनता है जब धरती क ऊष्मा
वष रिहत नकल जाती है

अमलतास का पूर ा िखल जाना लगभग 50 िदनों में यह वृक्ष मानसून-पूव तापमान वृ द्ध के साथ फूलता है
मानसून

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यह ान आदर के योग्य क्य है: इन लोग के पास उपग्रह नह थे। उनके पास था एक ही स्थान का पी ढ़य लंबा
सावधान अवलोकन — और जीव-जंतु तथा पौधे सचमुच दाब, आद्रता और तापमान के प रवतन पर हमसे पहले
प्र त क्रया करते ह। आधु नक पूवानुमान बड़े क्षेत्र के लए अ धक सट क है, पर पारंप रक संकेत स्थानीय, नःशुल्क
और तत्काल ह। अध्याय इसे ‘एक महत्वपूण वरासत’ कहता है, और इसे खोने का सबसे सरल तरीका है इसे न
लखना।

स्वयं जाँ चए: संकेत लखते समय उसक त थ और वास्त वक वषा क त थ दोन ल खए। जो संकेत पाँच म से
चार बार सही उतरे, वह वास्त वक स्थानीय ान है; जो पाँच म से एक बार, वह केवल कहावत।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 56
जलवायु और हमारा जीवन — त्योहार और नृत्य

आइए पता लगाएँ

प्र.1 अपने दादाजी-दाद जी या पड़ोस के वृद्धजन से संपक क जए। उनसे उनके बचपन और युवावस्था म मनाए जाने
वाले पारंप रक त्योहार और नृत्य के बारे म पू छए, जो उन्ह याद ह, वशेषकर जो कृ ष और वषा से संबं धत थे।
वे कन री त- रवाज म भाग लेते थे? फर अपने सा थय के साथ एक सांस्कृ तक उत्सव का आयोजन क जए।
आप अपने वयोवृद्ध ारा साझा कए गए कुछ नृत्य , गीत और ग त व धय को वहाँ प्रद शत कर सकते ह —
चाहे वह फसल क रस्म हो या वषा के दे वताओं क प्राथना के बारे म एक सरल कहानी या कोई नृत्य हो। अपने
सहपा ठय के लए इन परंपराओं को जीवंत करने का प्रयास क जए।

चरण 1 — साक्षात्कार। समय तय क जए, कॉपी साथ र खए, और ‘हाँ/नह ’ वाले नह , खुले प्रश्न पू छए :

बचपन म आप कस त्योहार क सबसे अ धक प्रतीक्षा करते थे? वह कस महीने पड़ता था?
क्या पकता था और कौन पकाता था? क्या कुछ ऐसा था जो केवल उसी त्योहार पर बनता था?
कोई गीत या नृत्य था? क्या उसक एक पं क्त गाकर सुना सकते ह?
क्या वषा माँगने या फसल के बाद धरती को धन्यवाद दे ने क कोई रस्म थी?
तब से क्या बदल गया — और क्य ?

चरण 2 — ठ क से अ भलेख बनाइए। वृद्धजन का नाम, आयु, गाँव या नगर और वे कस वष क बात कर रहे ह — यह सब
ल खए। अनुम त हो तो गीत को फोन पर रकॉड क जए। कसी का चत्र लेने से पहले पूछ ली जए।
चरण 3 — सांस्कृ तक उत्सव। टो लयाँ बनाइए : एक नृत्य के लए, एक गीत के लए, एक भोजन के लए और एक चत्र तथा
ल खत ववरण के प्रदशन-पट के लए। एक-दो वृद्धजन को अ त थ के रूप म बुलाइए — और उन्ह बोलने द जए। यही एक
कदम व ालय के कायक्रम को वह बना दे गा जो अध्याय वास्तव म चाहता है।
नमूना उत्तर — एक वृद्धजन का ववरण :

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प्रश्न मेरी दाद ने बताया

त्योहार पोंग ल, जनवरी के मध्य में, फसल कटते ही

रस्म नई फसल का चावल नए िमट्टी के बतन में उबाला जाता; दू ध उफनते ही सब “पोंग लो पोंग ल!” पुक ारते। पहले सूय को धन्यवाद,
िफर मट्टु पोंग ल पर बैल ों को नहलाकर, सी ंग रँग कर और माला पहनाकर सम्मान

गीत / आँग न में डंडों के साथ कोलाट्टम; अगले वष अच्छी वष माँग ता एक गीत
नृत्य

वषा क सूखे वष में गाँव की िस्त्रयाँ मंिदर के पत्थर के नंद ी पर जल चढ़ ाकर वष के िलए गाती थी ं
रस्म

क्या अब बैल कम है ं और बतन स्टील के है,ं पर दू ध का उफनना आज भी सबसे पतीिक्षत क्षण है
बदला

भारत के लगभग सभी त्योहार कसी ऋतु पर क्य बैठे ह: कैलडर और शीतगृह से पहले कृ ष-वष ही वष था।
त्योहार उसी के मोड़ को च त करते ह — बुवाई, पहली वषा, फसल, सूय का उत्तरायण। चत्र 3.11 म असम के
बहू से लेकर केरल के ओणम और स क्कम के लोसुंग तक ग्यारह ऐसे उत्सव ह, और हर एक असल म एक ऋतु का
नाम है।

इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 58
जलवायु और आपदाएँ — क) चक्रवात

इसे अनदे खा न कर

प्र.1 राष्ट्रीय आपदा प्र त क्रया बल (नेशनल डजास्टर र ॉन्स फोस — एन.डी.आर.एफ.) को प्राकृ तक और मानव-
न मत आपदाओं से नपटने के लए वशेष रूप से प्र श क्षत कया जाता है। एन.डी.आर.एफ. बटा लयन भारत
म 12 अलग-अलग स्थान पर स्थत ह। एन.डी.आर.एफ. ने चक्रवात, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं के
दौरान बचाव एवं राहत काय म महत्वपूण भू मका नभाई है।

इस छोटे -से बॉक्स म दो बड़ी बात छपी ह।

बॉक्स क्या कहता है ऐसा क्य रखा गया है

दोन प्रकार के पाकृ ितक और मानव-िनिमत भवन िगरना, रासायिनक िरसाव या रे ल दुघटना — इन सबमें बाढ़ -बचाव जैसे ही
लए प्र शक्षण आपदाएँ कौशल चािहए : रस्सी, नाव, काटने के उपकरण और पाथिमक िचिकत्सा

12 स्थान पर बटािलयने ं पूरे दे श में फै ली है,ं आपदा में पहले कु छ घंटे ही जीवन तय करते है।ं एक ही नगर में खड़ ा बल शेष दे श के
तैनाती एक ही जगह नही ं िलए बहुत दे र से पहचु ँ ता

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ध्यान द जए क यह बॉक्स अपने भाग से कैसे जुड़ा है। भारतीय मौसम व ान वभाग चक्रवात बनते ही बता दे ता है क वह कहाँ
टकराएगा; एन.डी.आर.एफ. उससे पहले ही उस तट पर पहुँचकर लोग को हटाने लगता है। पूवानुमान और तैयारी — यही
महत्वपूण प्रश्न 4 का उत्तर है।

क्या आप जानते ह? 1999 के ओ डशा महाचक्रवात म लगभग दस हजार लोग क मृत्यु हुई थी। 2019 म उसी
तट पर चक्रवात फानी ( चत्र 3.13) आया, कतु समय पर चेतावनी और बड़े पैमाने पर नकासी के कारण मृतक क
संख्या उसका बहुत छोटा अंश रह गई।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 58
क) चक्रवात

प्र.1 चक्रवात कैसे बनते ह?

चक्रवात का आरंभ समुद्र के पास बने नम्न दबाव तंत्र से होता है, और वह तब चक्रवात बनता है जब यह तंत्र तीव्र हो और पवन क
ग त अ धक हो।

बादल कें द की ओर घूमते है ं

आँख
बादलरिहत

नम वायु भीतर िखंचती है नम वायु भीतर िखंचती है

गम समुद

पृष्ठ 59 म व णत और चत्र 3.13 तथा 3.14 म दखाई गई संरचना — भीतर क ओर घूमता बादल का छल्ला और बीच म स्वच्छ कद्र।

अध्याय के क्रम म, चरण-दर-चरण :

1. कुछ वशेष प र स्थ तय म समुद्र के पास वायुमंडलीय दबाव आस-पास के क्षेत्र से कम हो जाता है और नम्न दबाव तंत्र
बनता है।
2. यह स्थ त आस-पास के क्षेत्र से पवन को उस ओर ख चती है; समुद्र से आती वायु अपने साथ नमी और वषा लाती है।
3. जब नम्न दबाव तंत्र तीव्र हो और पवन क ग त अ धक हो, तो इसका प रणाम चक्रवात हो सकता है।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु
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4. जैसे-जैसे पवन नमी एकत्र करती ह, वे बादल बनाती ह और बाहर से अवदाब कद्र क ओर घूमती ह।
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5. यह कद्र बादलर हत होता है और इसे ‘चक्रवात क आँख’ कहा जाता है ( चत्र 3.14)।
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कहाँ और क्या करते ह। प्र तवष भारतीय तटरेखा — वशेष रूप से पूव तट — कई चक्रवात का सामना करती है। वनाशकारी

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agl होता है। भारतीय मौसम व ान वभाग आने वाले चक्रवात पर नजर रखता है और उनके बनने, वकास तथा प्रभा वत
चक्रवात से मानव और पशु जीवन क हा न होती है, संप त्त एवं आधारभूत ढाँचे को नुकसान पहुँचता है, पेड़ उखड़ जाते ह और मृदा
अपरदन
क्षेत्र क पूव जानकारी दे ता है।

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आँख शांत क्य रहती है: भीतर क ओर घूमती वायु
s e mकद्र के चार ओर बने बादल-छल्ले म ऊपर उठती है। ठ क
बीच म वायु धीरे-धीरे नीचे बैठती है, और नीचेla
a g बैठती वायु बादल नह बनाती। इसी लए पृथ्वी के सबसे प्रचंड तूफान
के हृदय म नीले आकाश का एक टु कड़ा होता है। यही सबसे खतरनाक क्षण भी है — जब आँख ऊपर से गुजरती है,
लोग समझते ह क तूफान बीत गया और बाहर नकल आते ह, ठ क उससे पहले क पवन क दूसरी द वार आ
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पहुँचे।
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a वचार कर — पृष्ठ 59
आइए

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क) चक्रवात — बादल कससे बने ह

आइए वचार कर
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प्र.1 बादल क्या ह? आप कह सकते ह क ये आकाश म सफेद गु े ह। ले कन ये कससे बने ह? इसका उत्तर सरल है

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— जल। ले कन ये केवल जल नह ह। बादल जल क बूँद और हम के टु कड़े या दोन का मश्रण होते ह, जो

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वायुमंडल म लटके रहते ह।
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gl बादल जल से बने ह — पर जलवाष्प से नह । वचार करने योग्य बात यही है, और यह अ धकांश लोग भूल करते ह।

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जल का रूप क्या दखाई दे ता है? आकाश म कहाँ

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नही ं — यह पूणतःaअदृ
eश्यmहै
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जलवाष्प इसी समय आपके चारों ओर की वायु में
जल क बूँद हाँ, जब पय प्त संख्या में एक साथ हों नीचे और मध्य के बादलों की सफे दी
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m .co, रे शेदार
ऊँ चे, ठं डे बादल — पतले
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हम के टु कड़े हाँ

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m . बादल जल क सूक्ष्म बूँद , हम के टुकड़ , या दोन के मश्रण का समूह aहै, जो वायुमंडल म लटका रहता है। ये तब बनते
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as ह जब नम वायु ऊपर उठकर ठं डी होती है और अदृश्य वाष्प धूल के कण पर संघ नत होकर इतनी छोट बूँद बना लेती है क वे गर
अथात

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नह पात ।

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जल भारी होने पर भी बादल क्य तैरता है: बूँद अकल्पनीय रूप से छोट होती ह — इस वाक्य के अंत के पूण
वराम पर हजार बूँद समा जाएँ। इतनी छोट वस्तु इतनी धीमी ग त से गरती है क वायु क हल्क -सी ऊपर क ग त
भी उसे थामे रखती है। वषा तभी आरंभ होती है जब बूँद टकराकर इतनी बड़ी हो जाएँ क ऊपर उठती वायु को हरा
सक।

स्वयं जाँ चए: केतली से उठता सफेद धुआँ भाप नह है। ट ट के ठ क ऊपर का अदृश्य अंतराल असली भाप है;
उससे एक सट मीटर दूर दखता सफेद गुच्छा संघ नत बूँद ह — आपक रसोई म बना एक नन्हा बादल।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 60

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ख) बाढ़

आइए पता लगाएँ

प्र.1 क्या आपने कभी बाढ़ दे खी है अथवा इसके वषय म पढ़ा है? भारत के भौ तक मान चत्र को दे खए। समूह म चचा
क जए क बताए गए राज्य म बाढ़ क्य आती है?

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35° N
ल ाख चीन
अफ़ग़ग़ाािन
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सतलजु िह
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30° N
पािकस्तान
पािक तान
नेनेपपाल
ाल कं चनजंगा
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भूभूट
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उत्तरी मैदान
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थार म रुस्थल
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गारो पहािड़याँ
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जयंितया पहािड़याँ
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च ंबल ग ंग ा
वार

25° N
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कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
बांग्लादे
बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
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म हा सुंद रवन म् यांममारार
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नद
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20° N अरब सागर दक्कन का पठार
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बंगाल की खाड़ ी
टाघ ी म च
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कृ ष्णा
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ीटत ी म

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15° N
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च श्िप

अंड मान ीप समूह
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कावेरी

10° N अनाईमुड ी
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
श्र ीलंककाा
ीलं
िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E

संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)

0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक

नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर

पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।

अध्याय म जन राज्य के नाम ह वे ह — असम, बहार, उत्तर प्रदे श, केरल और आंध्र प्रदे श। भौ तक मान चत्र इस सूची के

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सामने र खए और कारण स्वयं दखने लगता है : इनम से हर राज्य या तो वशाल नद -मैदान है या भारी वषा वाला तट — या दोन ।

राज्य भौ तक मान चत्र क्या दखाता है बाढ़ क्य आती है

असम पहािड़यों से िघरी बह्मपुत्र घाटी, िहमालयी िहम- संकरी और लगभग समतल घाटी में जल की िवशाल मात्रा, फै लने को स्थान
जल से भरी; पूव त्तर में अत्यिधक भारी मानसूनी नही;ं नदी बहुत गाद लाती है, िजससे तल ऊपर उठ जाता है
वष

बहार उत्तरी गंग ा मैद ान, िजसे नेपाल से उतरती कोसी, निदयाँ तीखे पवतों से समतल मैद ान पर उतरकर गित खोती है,ं गाद जमा
गंडक और घाघरा काटती है ं करती है ं और िकनारे तोड़ दे ती है।ं माग बदलने के कारण कोसी को ‘िबहार
का शोक’ कहा जाता है

उत्तर गंग ा-यमुना का अत्यंत समतल और सघन बसा ढाल इतना हल्का िक जल धीरे -धीरे िनकलता है; ऊपरी क्षेत्रों की भारी वष
प्रदे श मैद ान एक साथ आ पहचु ँ ती है
केरल संक री तटीय पट्टी और ठीक पीछे पिश्चमी घाट; घाट दिक्षण-पिश्चम मानसून से भारी वष िनचोड़ ते है,ं और छोटी तीव ढाल
उष्णकिटबंध ीय आद जलवायु वाली निदयाँ कु छ ही घंटों में समुद तक पहचु ँ जाती है ं

आंध्र पूव तट पर कृ ष्णा और गोदावरी के डेल्टा नीची, समतल डेल्टा भूिम और साथ ही पूव तट पर िनयिमत आने वाले
प्रदे श च वात, जो मूसलाधार वष और समुद ी उभार दोनों लाते है ं
क्र

अध्याय दो और प्रकार क बाढ़ जोड़ता है :

हमनद य झील क बाढ़ — हमालयी क्षेत्र म। ये झील च ान और हम का अवरोध बनाकर जल रोकती ह। य द हमनद
बहुत तेजी से पघल या बहुत अ धक वषा हो, तो दबाव से जल अवरोध तोड़ दे ता है — इसे हमनद य व ोट कहते ह, जो
लोग और संप त्त के लए वनाशकारी होता है।
नगरीय बाढ़ — भारी वषा म शहर डू ब जाते ह, क्य क जल नकासी व्यवस्था पर अत्य धक बोझ होता है, अ नयो जत
नमाण जलमाग पर अ तक्रमण कर लेता है, और कंक्र ट या डामर क सतह जल को भू म म सोखने नह दे त ।

उत्तर सदै व कारण के मेल का क्य होता है: बाढ़ के लए दो बात चा हए — बहुत अ धक जल, और उसके जाने
के लए कोई स्थान न होना। खाली, तीखी, च ानी घाट म उतनी ही वषा केवल तेज धार बनाती है, आपदा नह । वही
वषा समतल, गाद से भरे, सघन बसे मैदान पर बाढ़ बन जाती है — इसी लए केवल वषा का मान चत्र नह , भौ तक
मान चत्र बताता है क बाढ़ कहाँ आएगी।

इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 60

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ख) बाढ़ — 2013 क उत्तराखंड आपदा

इसे अनदे खा न कर

प्र.1 2013 म उत्तराखंड म कई दन तक लगातार भारी वषा के कारण अचानक हमनद य व ोट हो गया। इसके
बाद कई भूस्खलन हुए। भारत के महत्वपूण प वत्र स्थल म से एक केदारनाथ मं दर के आस-पास का क्षेत्र पूरी
तरह से नष्ट हो गया। बाढ़ म कई गाँव बह गए। साथ ही कई सड़क और पुल भी बह गए। कुल मलाकर लगभग
6000 लोग क मृत्यु हुई, जनम से अ धकतर तीथयात्री थे।

यह बॉक्स पूरा अध्याय एक घटना म समेट दे ता है। इसे एक ंखला क तरह प ढ़ए, क्य क आपदा वास्तव म इसी क्रम म घट :

चरण क्या हुआ अध्याय का कौन-सा भाग

1 जून 2013 में कई िदनों तक लगातार भारी वष मानसून — और जलवायु पिरवतन, जो चरम वष की संभावना
बढ़ ाता है
2 िहमनदीय झील का चट्टान-िहम अवरोध टू टा — िहमनदीय िहमालयी क्षेत्रों की बाढ़ (पष्ृ ठ 60)
िवस्फोट

3 जल, मलबा और िशलाखंड घाटी में उतरे ; कई भूस्खलन हुए भूस्खलन (पष्ृ ठ 61)
4 गाँव, सड़कें और पुल बह गए; के दारनाथ के आस-पास का आपदाएँ आधारभूत ढाँचे को क्षित और स्थानीय अथव्यवस्था को
क्षेत्र नष्ट हो गया पभािवत करती है ं

5 लगभग 6000 लोगों की म ृत्यु, िजनमें अिधकतर तीथयात्री जलवायु की समझ क्यों आवश्यक है — महत्वपूण पश्न 4

मृतक क संख्या इतनी अ धक क्य रही: वह जून था — चार धाम यात्रा का चरम। संकरी घा टय म हजार यात्री
थे, जो न माग जानते थे न भूगोल, और बाहर नकलने का केवल एक रास्ता था। यही बात इसे प्राकृ तक घटना से
आपदा बनाती है : बाढ़ प्राकृ तक थी, पर उसके माग म कतने लोग खड़े थे, यह प्राकृ तक नह था।

क्या आप जानते ह? केदारनाथ मं दर स्वयं बच गया, क्य क उसके ठ क पीछे आकर अटके एक वशाल शलाखंड
ने मलबे क धारा को दो भाग म बाँट दया। स्थानीय लोग उसे भीम शला कहते ह।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 62

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घ) दावानल — चत्र 3.15 को पढ़ना
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a s em3.15 को दे खए। आपदा के प्रकार को पहचा नए और लोग , पेड़-पौध , जानवर और आ थक जीवन पर
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चत्र
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प्र.1
पड़ने वाले इसके प्रभाव का वणन क जए।

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a s emछाया चत्र, प्रत्येक पर पुस्तक म नाम छपा है :
gl वृक्ष टूटकर और जड़ से उखड़कर गरे ह; उनके मोटे तने और टूट
चत्र 3.15 म क्या है — चार
चक्रवात (ऊपर बाएँ) —aबड़े
डा लयाँ हरी-सफ़ेद प वाली सड़क के कनारे ढे र ह; ढे र के नीचे नीली पला स्टक क चादर ह और
सड़क पर पत्ते बखरे ह।
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भूस्खलन (ऊपर दाएँ) — घनी ह रयाली वाली खड़ी पहाड़ी, जस पर लाल-भूरm
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la मला पानी बह रहा है।
ी म और च ान

. comसड़क a g
का चौड़ा रेला खसककर नीचे सड़क तक आ गया है; नंगे भाग पर क चड़

a s em के कनारे दो पीली खुदाई मशीन ह, जनम से एक पलट पड़ी है, और गीली सड़क पर कुछ

agl
लोग खड़े ह।
दावानल (नीचे बाएँ) — ऊंचे चीड़ के वृक्ष वाली पहाड़ी ढलान, जस पर ज़मीन के पास नारंगी

omवाले सफ़ेद मकान खड़े ह। a s
cनय agl
लपट क एक लक र फैल रही है और तन के बीच धुए ँ क हल्क परत है; पास ही लाल छत और
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em पानी दूर तक सूखी ज़मीन को ढके हुए है; ट न क छत वाला
बालक
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बाढ़ (नीचे दाएँ) — धूप मaचमकता
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एक घर द वार तक agपानी म खड़ा है, एक ताड़ और कुछ झा ड़याँ पानी के ऊपर दखती ह, दूर

om
कनारे पर घना हरा वन है और आकाश नीला है।

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m a s emगया है, मूल छाया चत्र
agl
चत्र 3.15 (पृष्ठ 61) — प्राकृ तक आपदाओं के चार छाया चत्र; यहाँ केवल वणन दया

m .co पाठ्यपु स्तक म दे खए।

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.cगई ह — चक्रवात (नगर क सड़क पर उखड़े पड़े वशाल वृक्ष), भूस्खलन ag l
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चत्र 3.15 म चार आपदाएँ चार छाया चत्र म दखाई
(राजमाग पर ढहा पहाड़ी ढलान, जसे मशीन s
a e रही ह), जंगल क आग (घर के ठ क पीछे वन ढलान पर दौड़ती आग क रेखा)
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हटा
और बाढ़ (छत तक जल म डू बा घर, a g े चार ओर केवल वृक्ष क चो टयाँ दख रही ह)।
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चक्रवात भूस्खलन दावानल बाढ़

लोग जीवन की हािन; घरों की लोग मलबे में दबना; स्थानीय समुद ायों का िवस्थापन; घर और सामान की हािन;
छते ं उड़ना; कई िदनों तक एकमात्र सड़क बंद होने ध एु ँ से वायु की ग ण
ु वत्ता िबगड़ना राहत िशिवरों में जीवन;
िबजली और संचार ठप से गाँव कट जाना और साँस के रोग दू िषत जल और बीमािरयाँ

पेड़-पौधे वृक्षों का उखड़ना, खड़ी वन और सीढ़ ीदार खेत वन के बड़े क्षेत्र नष्ट; बीज और जल में फसल सड़ना; म ृद ा
फसल का िबछ जाना िमट्टी सिहत बह जाना झािड़याँ जलकर राख या तो कट जाना या रे त से
ढक जाना

जानवर पशुओ ं की म ृत्यु; घोंस ले आवास दब जाना; नाले वन्यजीवों की म ृत्यु या पलायन; पशुध न का डू बना; भूिम पर
और आवास नष्ट रुकने से मछिलयों की पािरिस्थितकी तंत्र का ास घोंस ला बनाने वाले जीवों
म ृत्यु के आवास नष्ट

आ थक मत्स्यन ठप; बंद रगाह, सड़कें , पुल और पयटन इमारती लकड़ी, शहद, चारा और फसल की हािन; बाजार
जीवन सड़कें और िबजली को बंद ; मरम्मत का भारी पयटन की हािन; पिरणाम और कारखाने बंद ; खाद्य
क्षित; म ृद ा अपरदन व्यय पय वरणीय और आिथक दोनों पदाथ ं का महँग ा होना

अं तम पं क्त म एक प्र तरूप दे खए : हर आपदा एक ही तीन चीज पर चोट करती है — लोग का जीवन, कृ ष और आधारभूत
ढाँचा। पृष्ठ 58 पर आपदाओं वाला भाग यही कहकर आरंभ होता है।

प्र.2 चार या पाँच के समूह म ऊपर व णत प्रत्येक आपदा म प्राकृ तक और मानवीय कारण क पहचान क जए।
अपने नष्कष क तुलना क जए।

नमूना उत्तर — आपके समूह को इस वभाजन तक पहुँचना चा हए :

आपदा प्राकृ तक कारण मानवीय कारण

चक्रवात गम समुद पर िनम्न दबाव तंत्र ; पवन की वैिश्वक तापन से गम होते समुद ; खुले तटों पर िनम ण; मैंगोव वनों का िवनाश, जो
अिधक गित पहले लहरों को सोख ले ते थे

बाढ़ भारी मानसूनी वष ; निदयों और झीलों जल िनकासी पर बोझ; जलमाग ं पर अित मण करता िनम ण; कं ीट और डामर
क्र क्र

का उफनना; िहमनदीय झीलों का फू टना जो जल सोखने नही ं दे ते; ऊपरी क्षेत्रों में वनों की कटाई; जलवायु पिरवतन से तेजी से
िपघलते िहमनद

भूस्खलन भारी वष , भूकं प, ज्वालामुखी सिक्रयता; वनों की कटाई; स्वीकृत िविधयों का पालन िकए िबना आधारभूत ढाँचे का िनम ण;
स्वाभािवक रूप से तीखे ढलान जल के पाकृितक पवाह को रोकने वाली अत्यिधक इमारते ं
दावानल शुष्क जलवायुजन्य पिरिस्थितयाँ, सूखा, मानवीय लापरवाही — िबना बुझाई गई आग, फे ं की हुई सुल गती बीड़ ी, फै ल जाने
तेज हवाएँ; आकाशीय िबजली वाली पराली की आग

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तुलना से जो नष्कष नकलना चा हए: आपदा का गर प्रायः प्राकृ तक होता है, पर क्ष त का पैमाना प्रायः
मानवीय। वषा यह तय नह करती क बाढ़ के माग म कतने घर खड़े ह, और बजली यह तय नह करती क जंगल
कतना सूखा और असुर क्षत था। इसी लए अध्याय कहता है क मानवीय ग त व धय के कारण भूस्खलन क
संभावना ‘बढ़ गई है’ — पहाड़ नह बदला, उस पर हमने जो बनाया वह बदला है।

संकेत: नष्कष क तुलना करते समय उन कारण को ढूँ ढ़ए जो एक से अ धक पं क्तय म आते ह। वन क कटाई
और जलवायु प रवतन लगभग हर पं क्त म ह — यही बताता है क रोकथाम कहाँ से आरंभ होनी चा हए।

प्र.3 इन्ह समूह म उन उपाय पर भी चचा क जए जो उपयुक्त आपदाओं से बचने म सहायता कर सकते ह।

नमूना उत्तर — उपाय को तीन स्तर म बाँ टए, क्य क हर स्तर पर काम करने वाले अलग ह।

आपदा सरकार क्या करे समुदाय क्या करे आप क्या कर

चक्रवात मौसम िवभाग की िनगरानी और पूव-चेतावनी तंत्र ; िनकासी का अभ्यास; आश्रय चेतावनी संकेत सी खए; वृद्धजन
चक्रवात आश्रय-ग ृह; एन.डी.आर.एफ. की और माग पहले से तय; जल , को हटाने म सहायता क जए;
तैयारी; मैंग ोव पिट्टयों की रक्षा सूखा भोजन और टॉच का भंडार तूफान दे खने कभी तट पर न जाइए

बाढ़ नालों की गाद िनकालना और चौड़ा करना; नािलयों और नहरों को नाली म प्ला स्टक कभी न फ कए;
जलमाग ं पर िनम ण रोकना; तटबंध ; िहमनदीय प्लािस्टक से मुक्त रखना; गाँव मानसून से पहले जरूरी कागज
झीलों की िनगरानी के तालाब पुनज िवत करना; वष जलरोधी थैली म र खए
जल संचयन
भूस्खलन स्वीकृ त िनम ण िविधयों का पालन कराना; पहाड़ी अवैध िनम ण का िवरोध; ढलानों ढलान पर पत्थर न ढके लए; झुकते
सड़कों पर िनयंत्र ण; ढलानों पर गहरी जड़ वाले या घरों में नई दरारों की सूचना; वृक्ष और गँदला होता झरना — ये
वृक्ष; अवरोधक दीवारे ं और उिचत जल िनकासी पाकृितक जल -माग खुले रखना आरं भक चेताव नयाँ पहचा नए

दावानल शुष्क ऋतु से पहले अिग्न-रे खाएँ; िनगरानी गाँव की अिग्न-िनगरानी पक नक क आग पूरी तरह
मीनारे ं; उपग ह से आग की चेतावनी; वनकिमयों टोिलयाँ; शुष्क और हवादार बुझाइए; वन म काँच या सुलगती
का पिशक्षण और उपकरण मौसम में पराली न जलाना वस्तु कभी न छो ड़ए; धुआँ दखते ही
सूचना द जए

और एक उपाय जो चार पर लागू होता है : अध्याय का अपना उत्तर — न्यूनीकरण और अनुकूलन। ह रतगृह गैस म कटौती,
वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊजा और सतत जीवन-शैली चरम स्थ तय को घटाते ह; समुदाय म लचीलापन बनाना उन स्थ तय के
आने पर हा न को घटाता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 62

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जलवायु प रवतन

प्र.1 जीवाश्म ईंधन के जलने से जलवायु क्य प्रभा वत होती है?

क्य क इससे ह रतगृह गैस प्रकृ त क तुलना म कह अ धक तेजी से नकलती ह, और ये गैस सूय क गम को रोक लेती ह।

कु छ बाहर िनकलती है

हिरतगहृ गैसों की परत (CO₂ आिद)

सूय का प काश ऊष्मा ऊपर उठती है
…पर रुककर लौटा दी जाती है

प ृथ्वी की सतह

ह रतगृह प्रभाव। यह प्राकृ तक और आवश्यक है; समस्या यह है क हमने कुछ ही शता ब्दय म यह कंबल मोटा कर दया।

1. पृथ्वी के प्राकृ तक काबन चक्र म काबन डाइऑक्साइड (CO2) और अन्य गैस धीरे-धीरे वायुमंडल म उत्स जत होती ह और
सूय से प्राप्त गम को रोकती ह।
2. यह प्राकृ तक ह रतगृह प्रभाव पृथ्वी को जीवन के लए आवश्यकतानुसार गम रखता है। इसके बना हमारा ग्रह जमा हुआ
होता।
3. कतु उ ोग, प रवहन और कृ ष जैसी मानवीय ग त व धय ने कुछ ही शता ब्दय म इन गैस क भारी मात्रा छोड़ द —
मुख्यतः कोयला, पे ो लयम तेल और प्राकृ तक गैस जलाकर।
4. यह तीव्र वृ द्ध अ त रक्त गम को रोक लेती है, जससे तेजी से वै श्वक तापन होता है।
5. वै श्वक तापन उन जलवायु प्र तरूप को बा धत कर दे ता है जन पर हजार वष से पेड़-पौध , जानवर और मानव समाज ने
स्वयं को अनुकू लत कया था।

जीवाश्म ईंधन ही क्य : कोयला, तेल और गैस वह काबन है जसे पौध और जीव ने लाख वष पहले हवा से
नकालकर म , शैल और समुद्र के नीचे बंद कर दया था। उन्ह जलाने का अथ है वह सारा प्राचीन काबन दो
शता ब्दय म वापस हवा म लौटा दे ना। काबन नया नह है — ग त नई है, और जीवधारी इतनी ग त से स्वयं को नह
ढाल सकते।

स्वयं जाँ चए: अध्याय का भारतीय उदाहरण — 2025 के आरंभ म दे श का औसत तापमान सामान्य से 1 से 3
ड ी से ल्सयस अ धक था, जससे सद बहुत कम और हल्क रही और कृ ष उत्पादन तथा अनेक लघु उ ोग
प्रभा वत हुए।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 64
अध्याय सात बदुओं म

आगे बढ़ने से पहले . ..

प्र.1 भारत क व वधतापूण जलवायु इसक भौगो लक स्थ त से प्रभा वत होती है, जसम पहाड़, पठार और मरुस्थल
स म्म लत ह।

इस पुनरावलोकन का वस्तार। भूगोल केवल दृश्य नह , जलवायु का तंत्र है।

भू-आकृ त जलवायु पर प्रभाव प रणाम

पवत ( हमालय, अत्यिधक ऊँचाई; और मध्य एिशया के ठं डे ऊपर अल्पाइन, नीचे समशीतोष्ण पवतीय स्थल , और उ त्तर भारत
कराकोरम) रे िगस्तानों की पवनों से रक्षा अपने अक्षांश की तुल ना में कही ं अिधक गम

पवत (प मी घाट) दिक्षण-पिश्चम मानसून के िलए पाकृ ितक पिश्चमी ढलानों पर उ ष्णकिटबंधीय आद ; पीछे द क्कन पर कम
अवरोध और अंतरालों वाली वष

मरुस्थल (थार) लगभग समतल स्थलाकृ ित, गम-शुष्क पवनों शुष्क जलवायु — अत्यिधक गम िदन, ठं डी राते,ं बहुत कम वष
से बचाव का कोई अवरोध नही ं

पठार (दक्कन) ऊँचा, भीतरी, घाटों की वृिष्ट-छाया में अध-शुष्क — गम गीष्म, हल्की सद , सामान्य वष

मैदान (उत्तरी) समतल, समुद से दू र , उत्तर में पवतों से िघरे उपोष्ण किटबंधीय — अत्यिधक गम गीष्म, ठं डी शीत ऋतु; भारत
की गेहू ँ पट्टी
तट और प समुद िनकट, जो तापमान िनयंित्रत करता है; उ ष्णकिटबंधीय और उ ष्ण आद — कम ताप पिरसर, अिधक
िनम्न अक्षांश आद ता

प्र.2 मौसम अल्पका लक होता है। ऋतुए ँ प्र तवष आती ह तथा जलवायु दशक तक द घका लक प्र तरूप को
प्र त ब बत करती है।

तीन शब्द, उनक अव ध के क्रम म :

मौसम → घंटे और िदन

ऋत ु → कु छ महीने , पितवष लौटती हईु

जलवायु → दशक — अध्याय के अनुसार कम से कम तीन

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
मौसम ऋतु जलवायु

m ase
तीस वष या lअिधक
.co ag
अव ध एक घंटा या एक िदन कु छ महीने

m
प रवतनse िनरंतर
a
agl
िनिश्चत वािषक चक्र में बहुत धीरे — पायः िस्थर
उदाहरण ‘आज दोपहर कोिच्च में वष हो रही है’ ‘मानसून जून से िसतंबर तक रहता है’ ‘के रल की जलवायु उ ष्णकिटबंध ीय आद है’

o m
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. c
mएक और जोड़ता है — बसंत, ग्रीष्म, वषा, शरद और शीत — और ag
s
यह भी याद र खए क भारत वश्व क सामान्य चार ऋतुओं म
a
agl
पारंप रक रूप से छह ऋतुए ँ गनता है।

c o m
.
m करते ह।
s e
अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से नकटता, पवन और स्थलाकृ त जैसे कारक जलवायु को नधा रत

com gla
प्र.3

m . a
उत्तर se
a
agपाँlच कारक, नयम और अध्याय के अपने उदाहरण के साथ :
m a s
m .co agl
कारक नयम अध्याय का उदाहरण

l a se
अक्षांश
g
a िकरणें बड़े क्षेत्र पर और
िनम्न अक्षांश → िकरणें लगभग लंबवत और कें िद त →
गम। उच्च अक्षांश → ितरछी
कन्याकु मारी और िनकोबार पूरे वष गम; श्रीनगर बहुत ठं डा

m
वायुम ंडल का लंबा माग → ठं डा

. c o
ऊँचाई
s e m बनाम कोयंबटू र 25–38°C
एक ही अ ांश पर ऊटी 10–25°C
m a
ऊपर जाने पर वायुद ाब और घनत्व घटते है ं और तप्त

agl
क्ष

. co
सतह दू र होती जाती है → ठं डा

m
seसमुद्र से
l a
ag नकटता
समुद तापमान को िनयंित्रत करता है; भीतरी भागों में मुंबई का ताप पिरसर लगभग 14°C; नागपुर का 34°C तक
ग ीष्म और शीत दोनों अिधक चरम

se m
पवन
आद ता लाती है,ं जो वष बन सकती है .co
m
पवने ं गम या ठं डी वायुर ािशयाँ संचािलत करती है ं और अरब और अफगािनस्तान से आती गम शुष्क पवने ं पंजाब,
g l a
em
हिरयाणा, राजस्थान और मध्य पदे श में ताप लहर लाती है;ं a
a s
gl
िहमालय से ठं डी पवने ं िगिरपाद में शीत लहर

स्थलाकृ त
a
भू-आकृ ित पवनों को रोकती है या उन्हे ं ऊपर उठाकर िहमालय और कराकोरम मध्य एिशया की ठं ड से बचाते है;ं
m
समतल थार के पास ऐसा कोई बचाव नही;ं पिश्चमी घाट मानसून
.co
वष कराती है

m
को आकार दे ता है
a se
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.संकेत: याद रखने का सूत्र — अ-ऊ-स-प-स्थ : अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र सेaनकटता, पवन, स्थलाकृ त। और इनके g l
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agl साथ छठा वचार भी याद र खए — सूक्ष्म जलवायु, छोटे क्षेत्र क अपनी अलग जलवायु।
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प्र.4 मानसून कृ ष के लए महत्वपूण है। यह फसल-चक्र और आजी वका को प्रभा वत करता है।

मानसून भारतीय कृ ष क धुरी क्य है: भारत क अ धकांश वषा कुछ ही महीन म मलती है, इस लए पूरा कृ ष-पंचांग इसी पर
टका है क वह कब आरंभ हो, कतना दे और कब लौटे ।

मानसून के महीन म न दयाँ जल से भर जाती ह, म म नमी आ जाती है, फसल उगती ह और जीवन फलता-फूलता
है।
द क्षण-प म मानसून जून क शुरुआत म द क्षणी सरे पर आता है और जुलाई के मध्य तक पूरे उपमहा प पर फैल जाता है
— बुवाई भी इसी क्रम म उत्तर क ओर बढ़ती है।
शीत या उत्तर-पूव मानसून पूव और द क्षणी भारत के कुछ भाग म वषा करता है, जससे वहाँ दूसरी फसल संभव होती है।
‘मानसून फे लयर’ का अथ है कृ ष का प्रभा वत होना, लोग (सामान्यतः म हलाओं) का जल के लए लंबी दूरी तय करना,
कृ ष श्र मक का नगर क ओर पलायन और खा ान्न के महँगा होने से मुद्रा त का बढ़ना।

मात्रा जतना ही महत्व समय का क्य है: वषा से ठ क पहले बोया गया बीज अंकु रत होता है; वही बीज तीन
सप्ताह पहले बोया जाए तो तपन से मर जाता है, और तीन सप्ताह दे र से बोया जाए तो दाना भरने का जल नह
पाता। इसी लए पी ढ़य तक भारतीय मछ लय , कौओं और अमलतास के फूल म संकेत खोजते रहे — और
इसी लए मौसम वभाग का पूवानुमान हर मई म सबसे बड़ी खबर बनता है।

प्र.5 जलवायु सांस्कृ तक परंपराओं, त्योहार , कृ ष और आ थक क्रयाकलाप से जुड़ी होती है।

इस संबंध को एक-एक कड़ी करके बाहर क ओर दे खए :

1. जलवायु फसल तय करती है। उपोष्ण उत्तरी मैदान म गेहूँ; उष्ण आद्र प मी तट पर चावल और मसाले।
2. फसल पंचांग तय करती है। पहली वषा पर बुवाई, उसके अंत पर कटाई।
3. पंचांग त्योहार बन जाता है। चत्र 3.11 म ग्यारह त्योहार ह — बहू, छठ पूजा, मकर संक्रां त, बैसाखी, प गल, अ व
शीतकालीन महोत्सव, हे मस, लोसुंग, गुडी पड़वा, लोहड़ी और ओणम — इनके अ त रक्त वसंत पंचमी और शरद
पू णमा पहले ही बताए जा चुके ह।
4. और त्योहार कला बन जाता है। मानसून ने कनाटक तथा हदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के अनेक राग को प्रे रत कया —
मेघमल्हार, अमृतव षणी।
5. वही जलवायु अथव्यवस्था भी चलाती है। औ ो गक ग त व ध पूवानुमा नत मौसम और जल क उपलब्धता पर नभर करती
है, और मानसून फे लयर सबके लए क मत बढ़ा दे ता है।

दै नक जीवन भी यही कहता है — “हम जो फसल उगाते ह, भोजन करते ह, वस्त्र पहनते ह, ये सभी मौसम के अनुसार बदलते रहते
ह।”

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प्र.6 जलवायु क समझ प्राकृ तक आपदाओं जैसे बाढ़ और चक्रवात के लए तैयार रहने म सहायता करती है।

जलवायु क समझ आपदा को ‘जो लोग पर आ पड़ती है’ से बदलकर ‘ जसे लोग आते हुए दे ख सकते ह’ बना दे ती है।

यह जानने से… …यह कया जा सकता है

चक्रवात समुद के िनम्न दाब क्षेत्र ों में बनते है ं और मौसम िव ान िवभाग बनने, िवकास और टकराने के स्थान की सूचना दे ता है; 12 स्थानों पर
पितवष पूव तट पर आते है ं तैनात एन.डी.आर.एफ . समय रहते िनकासी करता है

बाढ़ मानसून में, िवशाल नदी-मैद ानों और भारी चेतावनी तंत्र, तटबंध, साफ नािलयाँ, जलमाग ं पर िनम ण की रोक
वष वाले तटों पर आती है

भूस्खलन कटे और वनिवहीन ढलानों पर भारी वीकृत िनम ण िविधयाँ, ढलानों पर वृक्षारोपण, िनम ण पर िनयंत्रण
स्

वष के बाद होते है ं

दावानल शुष्क, हवादार और सूखे की शुष्क ऋतु से पहले अिग्न-रे खाएँ, िनगरानी मीनारे ं और सावजिनक चेतावनी
पिरिस्थितयों में फै लते है ं

अध्याय एक बड़ी बात भी जोड़ता है : जलवायु प रवतन और आपदा के कारण के संबंध को समझना पयावरण-अनुकूल आचरण
तथा समुदाय म लचीलेपन एवं अनुकूलन क आवश्यकता को भी पुष्ट करता है।

प्र.7 जलवायु प रवतन मौसम अथवा तापमान को अ त क ओर ले जाता है। यह प्राकृ तक और मानवीय जीवन के
लए गंभीर प रणाम ला सकता है।

ध्यान दे ने योग्य शब्द है ‘अ त’। जलवायु प रवतन का अथ केवल ‘सब कुछ थोड़ा गम हो जाना’ नह है; इसका अथ है झूले का
दायरा चौड़ा हो जाना और प्र तरूप का अ वश्वसनीय हो जाना।

अत प्राकृ तक जगत पर मानवीय जगत पर

अ धक गम, छोट फू ल िखलने और पिक्षयों के पवास का 2025 के आरंभ में भारत का औसत तापमान सामान्य से 1–3°C अिधक ,
स दयाँ समय गड़बड़ा जाना िजससे कृिष उ त्पादन और लघु उ द्योग पभािवत

तीव्र वषा और लंबे म ृद ा अपरदन; निदयाँ कभी बाढ़ में, फसल की हािन, नगरीय बाढ़ , जल की कमी
सूखे कभी सूखी

हमनद का तेज िहमनदीय झीलों का बढ़ ना और फू टना िवनाशकारी बाढ़ , जैसे 2013 में के दारनाथ
पघलना

गम होते समुद्र पवाल िभित्तयों और मत्स्य संपदा को पूव तट पर अिधक पचंड च वात क्र

हािन

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और उत्तर: भारत स हत वश्व भर क सरकार न्यूनीकरण के उपाय अपनाती ह — ह रतगृह गैस म कटौती, वृक्षारोपण,
नवीकरणीय ऊजा, ऊजा दक्षता और सतत जीवन-शैली। अध्याय असली क ठनाई भी बताता है : ये उपाय प्रायः आ थक वकास
और उपभोग क बढ़ती आकांक्षाओं से टकराते ह।

यह अं तम पं क्त ही सबसे ईमानदार क्य है: स्वच्छ हवा का वरोध कोई नह करता। क ठनाई यह है क जो
कोयला प्रदूषण करता है वही घर म उजाला और कारखान म ग त भी लाता है, और जो उपभोग पृथ्वी को गम
करता है वही लोग को गरीबी से भी नकालता है। इस लए जलवायु प रवतन केवल व ान क नह , चुनाव और
नणय क समस्या है — और यही कारण है क यह अध्याय व ान नह , सामा जक व ान क पुस्तक म है।

प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 65–66
अध्याय के अंत का अभ्यास

प्र.1 जलवायु के कारक का उनके प्रभाव के साथ नम्न ल खत सूची म मलान क जए — अ : (1) अक्षांश, (2)
ऊँचाई, (3) समुद्र से नकटता, (4) मानसूनी पवन। ब : (क) भारत म गम के दौरान नमीयुक्त पवन को लाता है।
(ख) उत्तर एवं द क्षण म अलग-अलग जलवायु बनाता है। (ग) ऊँचे स्थान को अ धक ठं डा रखता है। (घ)
तापमान को प्रभा वत करता है।

अ उत्तर ब क्य

(1) अक्षांश (ख) उत्तर एवं दिक्षण में अलग-अलग अक्षांश सूय क करण का कोण तय करता है — इसी लए द क्षण म
जलवायु बनाता है। कन्याकुमारी पूरे वष गम और उत्तर म श्रीनगर ठं डा रहता है

(2) ऊँचाई (ग ) ऊँचे स्थानों को अिधक ठं डा ऊँचाई पर वायुदाब और घनत्व घटते ह और तप्त धरातल दूर होता है —
रखता है। ऊट बनाम कोयंबटू र

(3) समुद्र से (घ ) तापमान को पभािवत करता है। समुद्र तापमान को नयं त्रत करता है — मुंबई का ताप प रसर लगभग
नकटता 14°C, नागपुर का 34°C

(4) मानसूनी (क ) भारत में गम के दौरान द क्षण-प म मानसून महासागर से नम वायु को तप्त भूभाग क ओर
पवन नमीयुक्त पवन को लाता है। ख चता है, जो वषा बनकर गरती है

1–ख 2–ग 3–घ 4–क

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प्र.2 नीचे दए गए प्रश्न का उत्तर द जए — क) मौसम और जलवायु म क्या अंतर है?

मौसम वह है जसे हम प्र त दन या हर घंटे अनुभव करते ह — वषा, तेज धूप या तेज हवा। यह समय-समय पर प रव तत होता
रहता है।
जलवायु मौसम का वह प्र तरूप है जो कसी क्षेत्र या प्रदे श म लंबे समय तक — कम से कम कई दशक तक — अनुभव कया
जाता है। यह प्र तरूप क्षेत्रानुसार अलग-अलग होता है और सामान्यतया स्थर बना रहता है।

मौसम जलवायु

अव ध घंटे या िदन तीन दशक या उससे अिधक
स्थरता िनरंतर बदलता है लंबे समय तक िस्थर

क्या बताता है आज की वष , धूप, हवा िकसी क्षेत्र में तापमान, वषण और पवन की दशा का पितरूप

उदाहरण ‘आज जयपुर में बहुत तेज हवा है’ ‘जयपुर की जलवायु अध -शुष्क से शुष्क है’

संकेत: परीक्षक ‘ दन-प्र त दन’ और ‘दशक तक’ — ये दोन शब्द खोजते ह। दोन लख द जए, उत्तर पूरा हो
जाएगा।

प्र.3 ख) समुद्र के नकट स्थत स्थान का तापमान समुद्र से दूर स्थत स्थान क तुलना म कम क्य होता है?

क्य क समुद्र तापमान को नयं त्रत करता है। भू म ऊष्मा का अवशोषण शीघ्रता से करती है और शीघ्रता से छोड़ भी दे ती है; समुद्र
ऊष्मा धीरे-धीरे अवशो षत करता है और धीरे-धीरे ही छोड़ता है।

ऋतु समुद्र क्या करता है तट पर प्रभाव

ीष्म समुद ऊष्मा धीरे अवशोिषत करता है, इसिलए भूिम से ठं डा समुद ी पवन तटीय क्षेत्र को ठं डा करती है — गिमयाँ बहतु गम नही ं
रहता है होती ं

शीत समुद ऊष्मा धीरे छोड़ता है, इसिलए भूिम से गम रहता है समुद ी पवन तटीय क्षेत्र को गम करती है — सिद याँ बहुत ठं डी नही ं
होती ं

तट से स्थल क ओर बढ़ते ही तापमान अ धक चरम होता जाता है — ग्रीष्म म अ धक और शीत म कम। अध्याय क अपनी जोड़ी
इसे सद्ध करती है :

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
मुंबई (समुद के पास) : गीष्म ≈ 32°C, शीत ≈ 18°C
m l as
.co
ताप पिरसर = 32 − 18 = 14°C
m a g
l a se
g
aनागपुर (तट से दू र) : गीष्म 44°C तक, शीत ≈ 10°C

co m
. ag
ताप पिरसर = 44 − 10 = 34°C
e m
g l as
a
अक्षांश एक ही, िफर भी नागपुर का पिरसर 20°C अिधक चौड़ ा।

co m
se अ धक ऊष्मा चा हए, m.
o m
जल ऐसा व्यवहार क्य करता है: उतना ही गम होने के लए जल को म
l a
या च ान से कह
और समु.द्रc अपनी गम सतह को लगातार ठं डी गहराई म मलाता भी रहता है। इस लए gतट केवल वायु से नह , ऊष्मा
m
e वशाल और धीमे भंडार से जुड़ा होता है, जो दोन अ तय को दबा दे ता है। a
कsे एक
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a g l

m a s
ग) भारतीय जलवायु को प्रभा वत करने मm
e
. c o agl
s
मानसूनी पवन क क्या भू मका है?
a
प्र.4

agl

co m
.
मानसूनी पवन ही भारत को उसक पाँचव ऋतु और अ धकांश जल दे ती ह। ये दो वपरीत चरण म काम करती ह।
e m
m l as
.co a g
em
ीष्म / द क्षण-प म मानसून शीत / उत्तर-पूव मानसून

a s
agl दाब तप्त एिशयाई भूभाग = िनम्न दाब; ठं डा महासागर = उच्च दाब ठं डा भूभाग = उ च्च दाब; अपेक्षाकृत गम महासागर =
िनम्न दाब
se m
com g l a
. a
पवन क महासागर से स्थल की ओर थल से महासागर की ओर
m
स्

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दशा

क्या लाती है agl
नमी, जो गम भूभाग पर संघ िनत होती है शुष्क वायु — पर इनका एक भाग बंगाल की खाड़ ी से नमी
गहण कर ले ता है
om
ा शु.ष्कc मौसम, िकं तु पूव और दिक्षणी
दिक्षण भारत में ठं डm
e में वष
भारत के कुaछsभागों
प रणाम भारी मानसूनी वष ; जून के आरंभ में दिक्षणी िसरे पर, जुल ाई के

m
.co agl
मध्य तक पूरे उपमहा ीप पर

a s emभारतीय जलवायु पर इनका प्रभाव :
agl
.c
e m
ये भारत को एक व शष्ट वषा ऋतु दे ती ह, जो वश्व के अ धकांश भाग म नह होती।

m a s
. co agl
ये पूव भारत और द क्षणी प्राय प क उष्णक टबंधीय जलवायु क आद्र और शुष्क अव धयाँ बनाती ह।

e m
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स्थलाकृ त के साथ मलकर ये दे श को बाँट दे ती ह : प मी घाट के प मी ढलान पर भारी वषा (उष्ण आद्र), जब क पीछे

a g l
दक्कन पठार पर कम और अंतराल वाली वषा (अध-शुष्क)।

co m
m .
m as e
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ये पूरे कृ ष-वष को नयं त्रत करती ह — “न दयाँ जल से भर जाती ह, म म नमी आ जाती है, फसल उगती ह और जीवन
फलता-फूलता है।”

प्र.5 घ) चेन्नई पूरे वष गम क्य रहता है, जब क लेह ठं डा रहता है?

दोन म पाँच कारक म से दो तीव्र रूप से भन्न ह — अक्षांश और ऊँचाई — और दोन एक ही दशा म काम करते ह।

कारक चेन्नई लेह

अक्षांश िनम्न — दिक्षणी पाय ीप में, भूम ध्य रे खा के िनकट, इसिलए उ च्च — सुदू र उ त्तर, इसिलए िकरणें ितरछी, बड़ े क्षेत्र पर
िकरणें लगभग लंबवत और ऊज कें िद त फै ली और वायुमंडल के लंबे माग से क्षीण

ऊँचाई तटीय मैद ान पर, लगभग समुद तल के बराबर िहमालय में बहुत ऊँ चाई पर — िवरल वायु और तप्त
धरातल से बहुत दू र, इसिलए कही ं अिधक ठं डा

समुद्र से बंग ाल की खाड़ी के तट पर, इसिलए समुद तापमान को पूणतः भीतरी क्षेत्र, कोई िनयंत्रक समुद नही,ं इसिलए
नकटता िनयंित्रत करता है — कड़ाके की सद नही ं पड़ती सिद याँ अत्यंत कठोर
जलवायु का उ ष्णकिटबंधीय — लगभग पूरे वष गम, आद , उ त्तर-पूव अल्पाइन — अत्यिधक ठं डी बफ ली शीत ऋतु और
प्रकार मानसून से वष शीतल गीष्म

चे न्नई — िनम्न अक्षांश + समुद तल के पास + समुद के िकनारे → पूरे वष गम

लेह — उच्च अक्षाश
ं + बहत ु दू र → ठं डा
ु अिधक ऊँ चाई + तट से बहत

क्या आप जानते ह? लेह अत्यंत शुष्क भी है। यह हमालय के उस पार है, जो मानसून को रोक दे ता है, इस लए यह
एक शीत मरुस्थल है — थार जतना ही शुष्क, पर तपता नह , जमता है।

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प्र.6 इस पुस्तक के अंत म दए गए भारत के मान चत्र को दे खए। लेह, चेन्नई, दल्ली, पणजी, इन शहर क जलवायु
को पहचा नए। क्या यह स्थान समुद्र के समीप ह, पवत पर ह या रे गस्तान म ह? ये कारक वहाँ क जलवायु को
कस प्रकार प्रभा वत करते ह?

के2
उ
35° N
ल ाख चीन
अफ़ग़ग़ाािन
अफ़ िन स्तान
तान

य
ा ल
सतलजु िह
म

30° N
पािकस्तान
पािक तान
नेनेपपाल
ाल कं चनजंगा
ुना
ि

भूभूट
टान
ान
स

यम त्रु
ं
ुध

बह्मप
उत्तरी मैदान
ँ ाय
थार म रुस्थल
ड़
गारो पहािड़याँ
िाहप

जयंितया पहािड़याँ
ील

च ंबल ग ंग ा
वार

25° N
अ

कच्छ का रण माउंट आबू िवंध् य पव त
बांग्लादे
बां लादेशश खासी पहािड़याँ
कक रेखा (23½° N) छोटा नागपुर
नम द ा पठार
ताप्ती
स त पुड़ा पव
त
म हा सुंद रवन म् यांममारार
यां
नद
ी
20° N अरब सागर दक्कन का पठार
टाघ

गोद ावर
ी
वपू

बंगाल की खाड़ ी
टाघ ी म च
ना दै म य

कृ ष्णा
ना
ीटत ी म

दै म
श्िप

15° N
यी
टत
च श्िप

अंड मान ीप समूह
वू प

कावेरी

10° N अनाईमुड ी
लक्ष ीप
िनकोबार ीप समूह
श्र ीलंककाा
ीलं
िहंद महासागर
70° E 75° E 80° E 85° E 90° E 95° E

संकेत-िच ह्न समुद तल से ऊँचाई (मीटर)

0 – 150 150 – 300 300 – 600 600 – 1500 1500 – 3000 3000 – 5000 5000 से अिधक

नदी (तीर = पवाह की िदशा) अंतर ीय सीमा पवत िशखर

पुस्तक के अंत म दए गए भारत के भौ तक मान चत्र को यहाँ संकेत- चह्न तथा अक्षांश और दे शांतर रेखाओं स हत पुनः
बनाया गया है।

पुस्तक के अंत म दए भौ तक मान चत्र पर प्रत्येक नगर खो जए, दे खए वह कस प्रकार क भू म पर है, और फर पृष्ठ 48 क सूची
से उसक जलवायु पढ़ ली जए।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

नगर कहाँ स्थत है जलवायु कारक कैसे काम करते ह

लेह िहमालय में बहुत ऊँचाई पर अल्पाइन — शीत बहुत अ धक ऊँचाई और उच्च अक्षांश इसे ठं डा बनाते ह; पवत
ृ लाओं के
(ल ाख), मुख्य शंख मरुस्थल मानसून को रोक दे ते ह, इस लए यह अत्यंत शुष्क भी है — शीतल
पार, तट से बहुत दू र ग्रीष्म और जमा दे ने वाली, बफ ली स दयाँ

चेन्नई पूव तट पर, बंग ाल की खाड़ी उ ष्णकिटबंधीय नम्न अक्षांश से पूरे वष तेज धूप; समुद्र ताप प रसर छोटा और वायु
के िकनारे आद्र रखता है; उत्तर-पूव मानसून से अक्टू बर– दसंबर म मुख्य वषा

दल्ली उत्तरी मैद ानों में, समुद से बहुत उपोष्ण किटबंधीय नयं त्रत करने वाला समुद्र नह , इस लए ग्रीष्म अत्य धक गम और
दू र शीत ठं डी; प म से आती गम शुष्क पवन ताप लहर और उत्तर क
ठं डी पवन शीत लहर लाती ह; वषा द क्षण-प म मानसून से

पणजी पिश्चमी तटीय पट्टी पर, ठीक उ ष्णकिटबंधीय समुद्र पूरे वष तापमान सम रखता है; प मी घाट द क्षण-प म
पीछे पिश्चमी घाट आद मानसून को ऊपर उठाकर भारी वषा कराता है — चावल और मसाल
के अनुकूल

ध्यान द जए: हद पुस्तक म इस प्रश्न म चार नगर दए गए ह — लेह, चेन्नई, दल्ली और पणजी। अंग्रेजी संस्करण
म इनके साथ जयपुर भी है, जो राजस्थान म थार मरुस्थल के कनारे स्थत है और जसक जलवायु शुष्क से अध-
शुष्क है — मरुस्थल से आती गम शुष्क पवन, समतल स्थलाकृ त और समुद्र से दूरी के कारण दन अत्य धक गम,
रात ठं डी और वषा बहुत कम।

एक ही दे श म ये सब कैसे: इन नगर को मान चत्र पर र खए और आप अध्याय के हर कारक से होकर गुजर जाएँगे
— चेन्नई से लेह तक 3,000 कलोमीटर का अक्षांश, 3,500 मीटर क ऊँचाई, तट से लेकर दे श के भीतरी हृदय तक,
और मरुस्थल से लेकर वषा म भीगे घाट तक। जलवायु क व वधता वास्तव म आकाश से दे खी गई भूगोल क
व वधता है।

प्र.7 भारत के मान चत्र पर गम और सद के मानसून चक्र को प्रद शत क जए। ग मय और स दय म पवन कहाँ
चलती ह, इसके प्रतीक लगाइए। मानसून के दौरान पवन क दशा दखाइए।

कैसे बनाएँ। चत्र 3.9 क तरह भारत के दो रेखा-मान चत्र साथ-साथ बनाइए — एक पर क) ीष्म ऋतु और दूसरे पर ख) शीत
ऋतु ल खए। समुद्र से भीतर आती पवन के लए एक रंग और भू म से बाहर जाती पवन के लए दूसरा रंग ली जए।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

ीष्म वाले मान चत्र पर शीत वाले मान चत्र पर

उत्तर-पिश्चम भारत / एिशयाई भूभाग पर िनम्न दाब िलिखए भूभाग पर उ च्च दाब िलिखए

अरब सागर और बंग ाल की खाड़ी पर उ च्च दाब िलिखए अपेक्षाकृत गम महासागर पर िनम्न दाब िलिखए

समुद से स्थल की ओर तीर बनाइए : एक शाखा अरब सागर से पिश्चमी थल से समुद की ओर तीर बनाइए, जो उ त्तर-पूव से दिक्षण-पिश्चम
स्

घाट से टकराती हुई, दू स री बंग ाल की खाड़ी से पूव त्तर में मुड़कर की ओर जाएँ
िहमालय के साथ उत्तर-पिश्चम की ओर

उन्हे ं दिक्षण-पिश्चम मानसून नाम दीिजए; िलिखए ‘नम पवने ं — भारी वष ’ उ न्हे ं उ त्तर-पूव मानसून नाम दीिजए; िलिखए ‘शुष्क पवने’ं , और एक
तीर बंगाल की खाड़ ी पार करते हुए िदखाइए जो नमी ले कर
कोरोमंडल तट पर वष करता है

आगमन की ितिथयाँ िलिखए : दिक्षणी िसरा जून का आरंभ → पूर ा दे श िलिखए ‘अक्टू बर–िदसंबर, पूव और दिक्षणी भारत के कु छ भागों में
जुल ाई के म ध् य तक वष ’

क) गी म ऋतु
ष् ख) शीत ऋतु

भारत भारत

अरब सागर शुष्क पवने ं सम ुद की ओर
बंगाल की खाड़ ी
स्थल पर िनम्न दाब स्थल पर उच्च दाब

आपको जो दो मान चत्र बनाने ह, उनका मोटा खाका। रेखा चत्र पुस्तक के अंत के मान चत्र से बनाइए और ग्रीष्म मानसून क दोन शाखाएँ
अवश्य दखाइए।

संकेत: नाम यह बताते ह क पवन कहाँ से आती है, कहाँ जाती है यह नह । ‘द क्षण-प म मानसून’ द क्षण-प म
से भारत क ओर चलता है; ‘उत्तर-पूव मानसून’ उत्तर-पूव से समुद्र क ओर जाता है। तीर क दशा उलट दे ना इस
प्रश्न क सबसे आम भूल है।

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु
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ध्यान द जए: हद संस्करण के चत्र 3.9 म शीत ऋतु वाले मान चत्र पर ‘उत्तर-प म मानसून’ छपा है, जब क
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उसी पुस्तक के पृष्ठ 55 का पाठ इसे स्पष्ट रूप से उत्तर-पूव मानसून कहता है (अंग्रेजी संस्करण म
se भी

m .cmonsoon’ है)। अपने उत्तर म उत्तर-पूव मानसून ही ल खए। ag
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‘northeast

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भारत म कृ ष और मौसम से जुड़े त्योहार (जैसे – बैसाखी, ओणम) को दखाते हुए एक रंगीन पोस्टर बनाइए। इन
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प्र.8

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त्योहार क तस्वीर या रेखा चत्र लगाइए।

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पोस्टर कैसे बनाएँ। चत्र यूँ ही बखे रए मत — पोस्टर को ऐसा आकार द जए जो स्वयं कुछ कहे। सबसे अच्छा तरीका है वष का
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एक वृत्त, जसम प्रत्येक त्योहार अपने महीने पर रखा हो, ता क दे खते ही समझ आ जाए क त्योहार कृ ष-पंचांग के साथ चलते ह।
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अ े पोस्टर म हर त्योहार के लए इतना अवश्य हो : नाम, राज्य या क्षेत्र, महीना/ऋतु, और एक पं क्त म वह कस कृ ष-

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घटना का उत्सव है — साथ म चत्र या रेखा चत्र।

a gनमूl ना उत्तर — अध्याय के चत्र 3.11 के ग्यारह त्योहार, वष के क्रम म :
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त्योहार कहाँ कब कसका उत्सव

a s em13 जनवरी
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लोहड़ी पंजाब सबसे कड़ ाके की ठं ड का अंत; ग े और रबी की फसल ;
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न्न

मूँगफली-रे वड़ ी के साथ अलाव
मकर संक्रां त पूरे भारत में 14–15
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सूय का उ त्तरायण — िदन बड़ े होने लगते है;ं पतंगबाजी
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जनवरी

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m धान की फसल ; नएgिमlट्टaी के बतन में नया चावल उबालना, मट्टु
m पोंगल पर बैल ों काaसम्मान
प गल तिमलनाडु जनवरी मध्य

l a se
ag फसल ऋतु का अंत, िसिक्कमी नववष
m
लोसुंग िसिक्कम दसंबर

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गुडी पड़वा महारा
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माच–अप्रैल वसंत और नववष; रबी की फसल घर आ चुकी होती है
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पंजाब, हिरयाणाlas
a g गेहू ँ की फसल ; खेतों में भांगड़ ा और िग ा
बैसाखी 13–14
अप्रैल

कृिष वष और बुवाई ऋतु का आरंभ m
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बहू (र गाली) असम अप्रैल मध्य

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जबsऊँeचे दर खुले होते है ं
छोटी गम ऋतु में, a
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हे मस ल ाख जून–जुलाई

a s em ओणम
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के रल अगस्त– दिक्षण-पिश्चम मानसून के अंत की फसल ; नौका दौड़ और
a सतंबर ओणसद्या
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m .
m a s e
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खरीफ की फसल के बाद सूय को धन्यवाद ; नदी में खड़ े होकर
.co नवंबर
छठ पूजा िबहार, पूव उत्तर पदे श, अक्टू बर–

m
अय
sशe
झारखंड

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अ व शीतकालीन
महोत्सव
ag
अरुणाचल पदे शीत ऋतु ठं डे महीनों का सामुद ाियक उ त्सव, नत्ृ य और पारंपिरक वेशभूषा
के साथ

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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 3 भारत क जलवायु AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: पोस्टर के नीचे एक वाक्य अवश्य ल खए, जैसे — “इस पोस्टर का हर त्योहार असल म कृ ष-पंचांग क एक
त थ है : बुवाई, पहली वषा या फसल।” यही एक पं क्त सजी हुई शीट को उत्तर बना दे ती है।

प्र.9 कल्पना क जए क आप भारत म एक कसान ह। बरसात के मौसम के लए आप कैसे तैयारी करगे? इस बारे म
डायरी म संक्षेप म ल खए।

अ डायरी-प्र व ष्ट म क्या चा हए: त थ और स्थान, उत्तम पुरुष (‘म’), सामान्य आशाओं के स्थान पर ठोस काम, एक
चता, और प्रकृ त का एक संकेत क वषा आ रही है — यह अं तम स्पश आपके उत्तर को सीधे पृष्ठ 56 से जोड़ दे ता है।
नमूना उत्तर:

28 मई — गाँव क ढवा, महाराष्ट्र
कुएँ के पास वाला अमलतास दस दन पहले खल गया था, और कल शाम च टयाँ अपने अंडे लेकर मेड़ पर लंबी
कतार म ऊपर जा रही थ । दादाजी कहते थे क इसका अथ है वषा नकट है। रे डयो कहता है मानसून केरल पहुँच
चुका है, तो शायद हमारे पास दो सप्ताह ह।
आज ऊपर वाले खेत क जुताई पूरी कर ली और ढे ल को धूप म तपने दया; कल उसे समतल करूँगा, ता क पानी
बहकर म न ले जाए। पूव क ओर क मेड़, जो पछले वष टू ट गई थी, बाँध द है, और सड़क से तालाब तक जाने
वाली छोट नाली साफ कर द है — वह प्ला स्टक और काँट से भरी पड़ी थी।
सोयाबीन का बीज खरीदकर अटारी म सूखा रखा है, क ड़ से बचाने को नीम के पत्त के साथ। मने अभी बोया नह
है, और पड़ोसी चाहे जो कर, म जल्द नह करूँगा। दो वष पहले पहली बौछार पर आधे गाँव ने बो दया था और
फर तीन सप्ताह वषा ही नह हुई — सब सूख गया और बीज का पैसा भी गया। इस बार वषा जम जाने क प्रतीक्षा
करूँगा।
अभी बाक है : गोशाला क टपकती छत ठ क करना, पंप के लए एक पाइप लाना और बैल को दखाना। य द इस
बार वषा अच्छ रही तो सहकारी स म त का ऋण चुका दूँ गा और शायद एक पुराना छड़काव-यंत्र भी ले लूँ।
वषा समय पर आए, और एक साथ न आए।

संकेत: यहाँ कमजोर और अच्छे उत्तर का अंतर ब्योरे का है। ‘म अपना खेत तैयार करूँगा’ कुछ नह कहता; ‘मने
खेत समतल कया ता क पानी म न बहा ले जाए’ दखाता है क आपने अध्याय समझा है।

प्र.10 कसी प्राकृ तक आपदा (जैसे – चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन या दावानल) क पहचान क जए और एक छोटा
नबंध ल खए, जसम इसके कारण और प्रभाव स म्म लत ह । ऐसे सुझाव द जए जो व्य क्त, समुदाय और
सरकार को इस आपदा के प्रभाव को कम करने म सहायक हो सकते ह।

नबंध क रूपरेखा — पाँच छोटे अनुच्छेद : (1) आपदा का नाम और एक वास्त वक उदाहरण, (2) कारण — प्राकृ तक और
मानवीय, (3) लोग , पेड़-पौध , जानवर और अथव्यवस्था पर प्रभाव, (4) व्य क्त, समुदाय और सरकार के उपाय, (5) समापन
वाक्य।

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नमूना उत्तर — बाढ़
यह क्या है। जब शुष्क भू म पर जल का अ त प्रवाह होने लगता है, तो बाढ़ आती है। ऐसा भारी वषा से हो सकता है, जब सतह पर
इतना जल बह नकले क भू म उसे सोख न पाए, या तब जब न दय और झील म इतना जल जमा हो जाए क वह बाहर बहने लगे
और कनारे टू ट जाएँ। प्रायः बाढ़ मानसून के दौरान आती है और असम, बहार, उत्तर प्रदे श, केरल तथा आंध्र प्रदे श वशेष रूप से
संवेदनशील ह। 2013 म उत्तराखंड म एक अलग प्रकार क बाढ़ आई : कई दन क लगातार भारी वषा से हमनद य व ोट हुआ,
फर भूस्खलन हुए, केदारनाथ मं दर के आस-पास का क्षेत्र नष्ट हो गया और लगभग 6000 लोग — जनम अ धकतर तीथयात्री थे
— क मृत्यु हुई।
कारण। प्राकृ तक कारण ह भारी मानसूनी वषा, हम-जल से भरी न दयाँ, धीमे नकास वाली समतल भू म, और हमनद य झील
का अवरोध तोड़ना। मानवीय कारण क्ष त को कह अ धक बढ़ा दे ते ह : ऊपरी क्षेत्र म वन क कटाई, जससे वषा नंगे ढलान से
तेजी से बह आती है; जलमाग पर अ तक्रमण करता नमाण; शहर क जल नकासी पर अत्य धक बोझ; कंक्र ट और डामर क
सतह जो जल को भू म म सोखने नह दे त ; और जलवायु प रवतन, जो हमनद को तेजी से पघला रहा है और वषा को अ धक
चरम बना रहा है।
प्रभाव। लोग घर और कभी-कभी जीवन खो दे ते ह; प रवार राहत श वर म रहते ह और दू षत जल पीते ह, जससे बीमा रयाँ
फैलती ह। खड़ी फसल सड़ जाती है और कसान तथा श्र मक क पूरे वष क आय चली जाती है, जससे वे नगर क ओर पलायन
करते ह। पशुधन डू ब जाता है। सड़क, पुल, व ालय और बजली क लाइन नष्ट हो जाती ह, और जो धन नया बनाने म लगता, वह
पुराने क मरम्मत म चला जाता है। खा ान्न सबके लए महँगा हो जाता है और मुद्रा त बढ़ती है — बाढ़ सैकड़ कलोमीटर दूर
क रसोइय म भी महसूस होती है।
क्या कया जा सकता है।

व्य क्त समुदाय सरकार

नाली में प्लािस्टक कभी न फें कें ; मानसून से पहले नािलयाँ और नहरे ं साफ बाढ़ पूव नुम ान और पूव-चेतावनी तंत्र ; निदयों की गाद
कागज और मूल्यवान वस्तुए ँ ऊँचाई करे ं; गाँव के तालाब पुनज िवत करे ं; िनकालना और नाले चौड़े करना; तटबंध ों का िनम ण और
पर रखें; चेतावनी संके त और ऊँची ढलानों और िकनारों पर वृक्ष लगाएँ; रखरखाव; भवन-िनयमों का कड़ा पालन और अितक्रमण
जगह तक का रास्ता सीखें; वृद्ध जलमाग ं पर अवैध िनम ण का िवरोध हटाना; िहमालयी िहमनदीय झीलों की िनगरानी;
पड़ोिसयों को समय रहते हटाने में और सूचना दे ं; बचाव तथा पाथिमक एन.डी.आर.एफ. को सुस िज्जत और तैयार रखना; शीघ
सहायता करे ं िचिकत्सा का पिशक्षण चलाएँ राहत और फसल बीमा

नष्कष। बाढ़ का आरंभ वषा से होता है, जसे कोई रोक नह सकता। कतु वषा को आपदा बनाती है एक बंद नाली, एक कटा हुआ
जंगल और नद के माग म बना एक घर — और इनम से हर एक मनुष्य का लया हुआ नणय है। इसी लए जलवायु क समझ
महत्वपूण है : वह जल को हटाती नह , पर बता दे ती है क कहाँ खड़े नह होना चा हए।

अध्याय — एक नज़र म
मौसम वह है जसे हम प्र त दन या हर घंटे अनुभव करते ह; ऋतुए ँ प्र तवष लौटती ह; और जलवायु कसी क्षेत्र म मौसम का
वह प्र तरूप है जो कम से कम कई दशक तक अनुभव कया जाता है। पारंप रक रूप से भारत म वष को छह ऋतुओं —
वसंत, ग्रीष्म, वषा, शरद, हेमंत और श शर — म बाँटा जाता है।
एक ही दे श म सात प्रकार क जलवायु — अल्पाइन ( हमालय), समशीतोष्ण ( हमालय के नचले एवं पहाड़ी क्षेत्र),
उपोष्ण क टबंधीय (उत्तरी मैदान), शुष्क (थार मरुस्थल), उष्णक टबंधीय आद्र (प मी तट य प ), अध-शुष्क (दक्कन
पठार) और उष्णक टबंधीय (पूव भारत एवं द क्षणी प्राय प)।

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जलवायु को पाँच कारक नधा रत करते ह — अक्षांश (सूय क करण का कोण), ऊँचाई (ऊपर जाने पर वायु वरल और
ठं डी), समुद्र से नकटता (समुद्र तापमान को नयं त्रत करता है), पवन (ताप एवं नमी लाती ह) और स्थलाकृ त (पवत पवन
को रोकते या ऊपर उठाते ह)। छोटे क्षेत्र क अपनी अलग जलवायु को सूक्ष्म जलवायु कहते ह, जैसे ‘नगरीय ऊष्मा प’।
मानसून — अरबी शब्द मौ सम अथात ‘ऋतु’ से — इस साधारण तथ्य पर टका है क भू म समुद्र क तुलना म शीघ्रता से गम
या ठं डी होती है। ग्रीष्म म तप्त ए शयाई भूभाग पर नम्न दाब बनता है और समुद्र से नम पवन चली आती ह — यह द क्षण-
प म मानसून है, जो जून के आरंभ म भारत के द क्षणी सरे पर पहुँचकर जुलाई के मध्य तक पूरे उपमहा प को ढक लेता
है। शीत ऋतु म दशा पलट जाती है — शुष्क उत्तर-पूव मानसून, जो फर भी पूव और द क्षणी भारत के कुछ भाग म वषा
करता है।
जलवायु संस्कृ त और अथव्यवस्था दोन को गढ़ती है — बहू, प गल, ओणम, बैसाखी, लोहड़ी और छठ पूजा जैसे त्योहार
कृ ष-वष के साथ चलते ह, जब क ‘मानसून फे लयर’ का अथ है कम उपज, जल के लए लंबी दूरी, नगर क ओर पलायन
और बढ़ती मुद्रा त।
भारत का व वध मौसम आपदाएँ भी लाता है — चक्रवात ( जसका कद्र बादलर हत ‘आँख’ होता है), बाढ़ एवं हमनद य
व ोट, भूस्खलन और दावानल — जनम से कई मानवीय ग त व धय से और भी भयावह हो जाती ह। जलवायु प रवतन,
जो 19व शताब्द से मुख्यतः जीवाश्म ईंधन और वन क कटाई से प्रे रत है, इन चरम स्थ तय को बढ़ा रहा है; इसका उत्तर
है न्यूनीकरण, लचीलापन और सतत जीवन-शैली।

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय म उदाहरण
कहाँ

मौसम िजसे हम पितिदन या हर घंटे अनुभव करते है;ं यह बदलता रहता है पृष्ठ 46 वषा, तेज धूप, तेज हवा

जलवायु िकसी क्षेत्र में लंबे समय — कम से कम कई दशकों — तक पृष्ठ 46 थार मरुस्थल क शुष्क जलवायु
अनुभव िकया गया मौसम का पितरूप

ऋतु पारंपिरक भारतीय छह-ऋतु वष की एक ऋतु पृष्ठ 46 वसंत, ग्रीष्म, वषा, शरद, हेमंत, श शर

अक्षांश भूम ध्य रे खा से दू र ी, जो सूय की िकरणों का कोण तय करती है पृष्ठ 49 कन्याकुमारी गम, श्रीनगर ठं डा

ऊँचाई समुद तल से ऊँचाई; बढ़ ने पर तापमान घटता है पृष्ठ 50 पवतीय पयटन स्थल — ऊट , शमला,
दा ज लग, मुन्नार

स्थलाकृ त िकसी क्षेत्र के धरातल पर अिभलक्षणों की समग ता हा शया, पृष्ठ हमालय जो मध्य ए शया क ठं डी पवन
52 से बचाता है

सूक्ष्म जलवायु छोटे-से क्षेत्र में स्थानीयकृ त जलवायु, जो आस-पास से िभन्न होती पृष्ठ 53 ‘नगरीय ऊष्मा प’; संक ण घाट
है

मानसून िहंद महासागरीय क्षेत्र की मौसमी पवने ं (और उनसे होने वाली पृष्ठ 54 जून के आरंभ म केरल पहुँचता द क्षण-
वष ); अरबी मौिसम = ऋतु प म मानसून

चक्रवात क अवदाब का बादलरिहत कें द , िजसके चारों ओर पवने ं घूम ती है ं पृष्ठ 59 चत्र 3.14
आँख

हमनद य िहमनदीय झील के चट्टान-िहम अवरोध को तोड़कर जल का बह पृष्ठ 60 उत्तराखंड, 2013 — केदारनाथ आपदा
व ोट िनकलना

जीवाश्म ईंधन लाखों वष पहले दबे पौधों-जानवरों के अवशेषों से बने ऊज ोत हा शया, पृष्ठ कोयला, पे ो लयम तेल, प्राकृ तक गैस
62

न्यूनीकरण वैिश्वक तापमान वृिद्ध को धीमा करने और जलवायु पिरवतन के हा शया, पृष्ठ उत्सजन म कटौती, वृक्षारोपण,
कारण घटाने वाले उपाय 64 नवीकरणीय ऊजा

लचीलापन आपदाओं का सामना करने या उनसे शीघ उबरने की क्षमता हा शया, पृष्ठ चक्रवात के बाद पुन नमाण करते
64 समुदाय

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages44
Languagehindi
Updated19 Sep 2026