Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: सा ाज्य का उदय
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
83 – 116 17 35 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 34 pages
Page 2
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · सामा जक वज्ञान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: साम्राज्य का उदय
अध्याय 5 अतीत के चत्रपट वषयवस्तु का भाग है। भ वषा और ुव अपने काल-यंत्र ‘इ तहास’ से पाट लपुत्र पहुँचते ह और वह से यह अध्याय एक
बड़ा प्रश्न पूछता है — कोई राज्य साम्राज्य कैसे बन जाता है? इसम मगध तथा नंद वंश का उदय, उत्तर-प म म एलेक्जडर का सं क्षप्त अ भयान,
और चंद्रगुप्त, कौ टल्य तथा अशोक के मौय साम्राज्य क कथा है — और अंत म यह प्रश्न क हर साम्राज्य अंततः क्य बखर जाता है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1) (कक्षा 7) 83 – 116
खं ड प्रश्न
17 35
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 83
अध्याय का आरंभ — अतीत के चत्रपट
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 साम्राज्य क्या होता है?
साम्राज्य अनेक छोटे राज्य या क्षेत्र का वह समूह है, जन पर कोई एक श क्तशाली शासक — अथवा शासक का समूह — अपनी
श क्त का प्रयोग करता है, प्रायः उन पर युद्ध करके। ‘एंपायर’ शब्द लै टन इंपी रयम से बना है, जसका अथ है ‘सव च्च श क्त’।
ध्यान दे ने योग्य बात यह है क छोटे राज्य समाप्त नह होते। उनके अपने शासक बने रहते ह, परंतु वे सम्राट के करद राज्य बन
जाते ह — वे धन, स्वण, अन्न, पशु, हाथी अथवा अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ भट के रूप म दे ते ह, जो समपण, नष्ठा या सम्मान का प्रतीक
होता है, और सम्राट क अ धसत्ता स्वीकार करते ह। सम्राट संपूण भूभाग पर अपनी राजधानी से शासन करता है, जो प्रायः आ थक
और प्रशास नक श क्त का सबसे बड़ा कद्र होती है।
प्राचीन संस्कृत ग्रंथ म ‘सम्राट’ के लए प्रयुक्त शब्द यही बात तीन प्रकार से कहते ह —
शब्द अथ
समाज् ‘सबका स्वामी’ अथवा ‘सव च्च शासक’
अिधराज ‘अ धप त’
राजािधराज ‘राजाओं का राजा’
Page 1 of 34
Page 3
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य : राज्य भू म और जन क एक इकाई है। साम्राज्य बहुस्तरीय होता है — राजाओं के ऊपर एक राजा। यही
अ त रक्त स्तर सेना, प्रशासन, सड़क और कोष क माँग करता है, और यही स्तर साम्राज्य को टकाए रखना इतना
क ठन बना दे ता है।
प्र.2 साम्राज्य का उदय कैसे हुआ और उन्ह ने भारतीय सभ्यता को कैसे आकार दया?
साम्राज्य का उदय महाजनपद क पारस्प रक प्र तस्पधा से हुआ और उन्ह ने भारत को हर स्तर पर — राजनी तक, आ थक,
सामा जक और सांस्कृ तक — आकार दया।
उदय कैसे हुआ (अध्याय क अपनी कथा):
1. सोलह महाजनपद म मगध आगे नकल गया — गंगा के उपजाऊ मैदान, इमारती लकड़ी और हा थय वाले वन, नकटवत
पवत से लौह अयस्क, तथा प रवहन के लए गंगा और सोन न दयाँ।
2. अजातशत्रु जैसे राजाओं ने इसे श क्त का प्रमुख कद्र बनाया; फर महापद्म नंद ने अनेक छोटे राज्य का एक करण कया और
सक्के जारी कए।
3. लगभग 321 सा.सं.पू. म कौ टल्य के मागदशन म चंद्रगुप्त मौय ने नंद को उखाड़ फका और उत्तरी मैदान से दक्कन के पठार
तक साम्राज्य फैलाया।
4. अशोक (268–232 सा.सं.पू.) ने इसे सुदूर द क्षण को छोड़कर लगभग संपूण उपमहा प तक वस्तृत कर दया।
उन्ह ने क्या दया:
स्तर साम्राज्य ने क्या बदला
राजनी तक वशाल भूभाग पर राजनी तक एकता, अ धका रय का वस्तृत प्रशासन, तथा छोटे राज्य के बीच युद्ध म कमी
आ थक सुर क्षत व्यापा रक माग, सक्क का व्यापक प्रयोग, समान माप-तौल, कराधान, अकाल से बचाव हेतु अन्न-भंडार
सामा जक सु नयो जत नगर, स्व-संचा लत े णयाँ, संदेश ले जाने वाले दूत, अ ग्न से बचाव के लए जल-पात्र
सांस्कृ तक स्तूप, चैत्य और वहार, चमकदार पॉ लश कए स्तंभ, टे राकोटा कला, बुद्ध के संदेश का वदे श तक प्रसार, और ाह्मी ल प
— भारत क सभी क्षेत्रीय ल पय क जननी
क्या आप जानते ह? अशोक के सारनाथ स्तंभ-शीष के चार सह आज भी प्र त दन आपके सामने आते ह — वह
शीष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है और उसका धमचक्र हमारे राष्ट्रीय ध्वज के मध्य म अं कत है।
प्र.3 राज्य से साम्राज्य बनने म कौन-कौन से तत्व सहायक हुए?
छह तत्व, और मगध के पास ये सभी एक साथ थे।
Page 2 of 34
Page 4
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
तत्व यह कैसे सहायक हुआ मगध का उदाहरण
उपजाऊ भू म और अ त रक्त अन्न सेना का पेट भरता है और लोग को शल्प के संसाधन से समृद्ध गंगा के मैदान; वष म
अ धशेष अन्न लए मुक्त करता है दो फसल
लोहा लोहे के हल से कृ ष-उत्पादन बढ़ा; हल्के और तेज धार वाले नकट के पवतीय क्षेत्र से लौह अयस्क एवं
शस्त्र से सेना सशक्त हुई ख नज
वन दुग, नौकाओं और गा ड़य के लए इमारती लकड़ी; युद्ध हेतु मगध के चार ओर सघन वन
हाथी
न दयाँ और व्यापा रक सस्ता प रवहन, अ धक व्यापार, शासक को अ धक कर गंगा और सोन न दयाँ; उत्तरापथ
माग
सुदृढ़ अथव्यवस्था और सै नक का वेतन, अश्व -हा थय का पालन, सड़क और महापद्म नंद ने सक्के जारी कए; व्यापार
कोष नौकाओं का नमाण फल-फूल रहा था
योग्य नेतृत्व एवं कूटनी त जो युद्ध नह दला सकता, वह सं ध और गठबंधन दला दे ते अजातशत्रु, फर कौ टल्य के मागदशन म
ह चंद्रगुप्त
ऐसा क्य : वजय महँगी होती है। सै नक को भोजन, वस्त्र, शस्त्र और वेतन चा हए; हा थय -घोड़ क दे खभाल
चा हए; सड़क और नौकाएँ बनानी पड़ती ह। इस लए वही राज्य साम्राज्य बन पाता है जसके पास पहले से अ धशेष
संसाधन और चलती हुई अथव्यवस्था हो। सैन्य श क्त आ थक श क्त का प रणाम है, उसका वकल्प नह ।
प्र.4 छठ शताब्द सा.सं.पू. से दूसरी शताब्द सा.सं.पू. तक का जीवन कैसा था?
यह उत्तर भारत म गहन प रवतन का काल था — नए राज्य, नए नगर, नए सक्के और वश्व के दो महान गुरु।
ग्रामीण जीवन: जनसंख्या का बड़ा भाग कृ ष करता था। वष म दो फसल बोई जाती थ , क्य क ग्रीष्म और शीत दोन ऋतुओं म
वषा होती थी; इस लए अकाल कम पड़ते थे और अन्न-भंडार भरे रहते थे। मेगस्थनीज लखता है क समीप युद्ध होने पर भी कसान
सुर क्षत रहते थे और कृ ष बा धत नह होती थी।
नगरीय जीवन: पाट लपुत्र शासन और वा णज्य का प्रमुख कद्र था — प्रासाद, सावज नक भवन, सु नयो जत सड़क और उन पर
संकेतक, दो मं जल तक ऊँचे लकड़ी के घर, तथा आग लगने क स्थ त के लए नय मत अंतराल पर रखे जल-पात्र। संदेश एक
स्थान से दूसरे स्थान तक दूत ले जाते थे। नगर म लोहार, कुम्हार, बढ़ई, स्वणकार तथा अन्य शल्पकार रहते थे, और उनके साथ
अ धकारी एवं व्यापारी भी।
वेशभूषा: लोग सूती वस्त्र पहनते थे — नीचे का वस्त्र घुटन से नीचे टखन तक और ऊपरी वस्त्र कंध पर डाला हुआ। कुछ लोग
अलंकृत चमड़े के जूते पहनते थे, जनके तलवे मोटे होते थे ता क वे लंबे दख।
वचार का संसार: बुद्ध और महावीर अजातशत्रु के समकालीन थे; नंद के काल म पा ण न ने 3,996 सूत्र वाली अष्टाध्यायी क
रचना क ; और अशोक के समय तक प्राकृत म लखे शलालेख चट्टान और स्तंभ से पढ़कर सुनाए जाने लगे थे।
Page 3 of 34
Page 5
as e
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
स्वयं जाँ चए: पृष्ठ 86–87 पर इरा का वणन फर प ढ़ए — खाई और चलसेतु, लकड़ी के परकोटे और अट्टा लकाएँ,
चीन के रेशम और द क्षण के मसाल -रत्न से भरा बाज़ार, गली के कलाबाज़। इनम से हर ववरणeकmपु ष्ट अध्याय म
m
आगे पुरातत्व.cयाoग्रीक ववरण से होती है। g l as
e m a
g l as
a
com
ag
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 89
m .
साम्राज्य क वशेषताएँ ( चत्र 5.4.1)
as e
आइए पता लगाएँ a g l
co m
em.
साम्राज्य वस्तृत भूभाग म फैले हुए होते थे, जनम अनेक प्रकार क भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृ तय वाले जन
as
प्र.1
m एवं कक्षा म अपने वचार प्रस्तुत क जए।
coकर
रहते थे। आपके वचार म सभी लोग सौहादपूवक रह, यह सम्राट ने कैसे सु न
g l
त कया होगा? समूह म वचार-
. a
sem
वमश
la
agउत्तर
a s
com म है — agl
मुख्यतः हस्तक्षेप न करके — और लोग को असंतोष के स्थान पर नष्ठा के कारण दे कर।
समूह-चचा के लए बदु, जनम से प्रत्येक का आधार इसी .अध्याय
a s em
agl
स्थानीय शासक को बने रहने दया। “सामान्यतः सम्राट स्थानीय राजाओं या प्रमुख को अपने प्र त नष्ठा तथा भट के बदले
अपने क्षेत्र का प्रशासन करने क अनुम त दे ते थे।” प्रजा का अपना राजा, अपनी भाषा और अपनी परंपराएँ बनी रह ।
co m
.
समुदाय को स्वशासन क छू ट द । े णय को अपने आंत रक नयम बनाने क स्वतंत्रता थी और राजा हस्तक्षेप नह करता
e m
as
था। गाँव क अपनी स म तयाँ और प रषद थ ।
m l
.co a g
सभी संप्रदाय के साथ समान व्यवहार। अशोक ने सभी संप्रदाय को एक-दूसरे क उ चत शक्षाओं को स्वीकार करने और
a s em उनका अध्ययन करने के लए प्रोत्सा हत कया और धम्मा धकारी नयुक्त कए, जो बौद्ध संघ, ब्राह्मण , आजीवक , जै नय तथा
agl अन्य संप्रदाय के बीच काय करते थे।
m
प्रजा क अपनी भाषा म बात क । शलालेख प्राकृत म — जनसामान्य क भाषा म — और ाह्मी ल प म उत्क ण थे, न
क कसी दरबारी भाषा म।
o m l a se
m .c पर व ामगृह और कुएँ, फलदार और छायादार वृक्ष, मनुष्य और पशुओं ag
seडार।
केवल आदे श नह , कल्याण भी दया। मुख्य माग
l a
g ने नगर न्यायाध्यक्ष से कहा — “सब मनुष्य मेरी संतान के समान ह” — और प्रत्येक
के लए च कत्सा, अकाल के वरुद्ध अन्न-भं
अ धका रय को नष्पक्ष रखा। a
अशोक
m
पाँचव वष एक नम्र महामात्र भेजने क व्यवस्था क ।
. co
m
माग और व्यापार खुले रखे। व्यापार ने दूर-दूर के लोग , वस्तुओं और वचार को मलाया, और साझी समृ द्ध सबसे सस्ता
m as e
.co l
सौहाद है।
a g
se m ऐसा क्य : जस भूभाग क सीमा तक पहुँचने म घोड़े पर लगभग दो मास लगते ह , उस पर केवल बल से शासन
g l a
a c
.
असंभव है। इस लए सफल साम्राज्य ने सौहाद स्वायत्तता और कल्याण से खरीदा और बल को अं तम उपाय के
s e m
m a
रूप म रखा।
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 4 of 34
Page 6
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 एक वशाल साम्राज्य का संचालन करना अनेक प्रकार क क ठनाइय से भरा होता है, फर भी कोई राजा अपना
राज्य बढ़ाकर सम्राट क्य बनना चाहता होगा? नीचे कुछ संभा वत उत्तर दए गए ह, आप चाह तो इसम और भी
उत्तर जोड़ सकते ह। ‘संपूण वश्व पर शासन’ करने क महत्वाकांक्षा अथात् एक बड़े प्रदे श को नयंत्रण म रखना
एक ऐसा रूपक है, जससे संकेत मलता है क वह वशाल क्षेत्र पर अ धकार करना चाहता था तथा यह सु न त
करना चाहता था क भावी पी ढ़याँ उन्ह याद रखगी; एक वशाल भू-प्रदे श को अपने अधीन कर, वहाँ के संसाधन
का प्रयोग कर अपनी आ थक एवं सैन्य श क्त बढ़ाने क इ ा; स्वयं एवं अपने साम्राज्य के लए महान संपदा
प्राप्त करने क उत्कंठा।
पुस्तक तीन कारण दे ती है — यश, संसाधन और संपदा। कुछ और कारण, जनका आधार भी इसी अध्याय म है —
1. सुरक्षा। जो पड़ोसी आज परेशान करता है, वह कल आक्रमण करेगा। इरा के काका उस “पड़ोसी राज्य के वरुद्ध” जा रहे ह
“जो हम नरंतर संकट म डालता है”। शत्रु पड़ोसी को जीतकर खतरनाक सीमा सुर क्षत भीतरी क्षेत्र बन जाती है।
2. व्यापा रक माग पर नयंत्रण। चत्र 5.4.4 कहता है क शासक न दय और व्यापा रक माग पर नयंत्रण चाहते थे, क्य क
इससे मूल्यवान संसाधन और व्यापार से कर-राजस्व दोन मलते थे।
3. साम रक संसाधन पर अ धकार। लौह अयस्क, हाथी, इमारती लकड़ी, खान — सेना इन्ह से बनती है।
4. अ स्तत्व क ववशता। चत्र 5.4.5 — जब अनेक लघु राज्य प्रभुत्व के लए लड़ते ह , तब प्रबल सैन्य बल और अ धशेष
संसाधन वाला राज्य स्वयं अ धप त बन जाता है। जो नह बढ़ता, उसे कोई और नगल लेता है।
5. नरंतर युद्ध का अंत। सुव्यव स्थत साम्राज्य छोटे राज्य क आपसी लड़ाई रोक सकता है और अ धक समृ द्ध ला सकता है।
6. प्र तष्ठा और उपा धयाँ। सम्राज् या राजा धराज कहलाना स्वयं म एक उपल ब्ध थी — और करद राजा भट, हाथी तथा नष्ठा
लेकर आते थे।
7. कसी वचार का प्रसार। अशोक ने अपने साम्राज्य क पहुँच का उपयोग बुद्ध के संदेश को ीलंका, थाईलड और मध्य ए शया
तक पहुँचाने म कया।
सुझाव: कक्षा म अपना कारण जोड़ते समय उसे अध्याय पर क सए — क्या आप कोई वाक्य, चत्र-शीषक या
शलालेख दखा सकते ह जो उसे प्रमा णत करे? इ तहासकार ठ क इसी प्रकार तक करता है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 91
‘व्यापार, व्यापा रक माग तथा श्रे णयाँ’ से पहले
आइए पता लगाएँ
प्र.1 आपके वचार से शासक ने अपने साम्राज्य वस्तार के लए युद्ध के अ त रक्त दूसरे और कौन-कौन से उपाय
अपनाए ह गे? अपने वचार ल खए और अपनी कक्षा म साझा क जए।
युद्ध सबसे शोरगुल वाला उपाय था, सबसे सस्ता नह । शासक के पास कम-से-कम सात शांत उपाय और थे —
Page 5 of 34
Page 7
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
उपाय यह कैसे काम करता था अध्याय से उदाहरण
कूटनी त और गठबंधन पड़ोसी को लक्ष्य बनाने के स्थान पर मत्र बनाना; चंद्रगुप्त ने ग्रीक से कूटनी तक संबंध रखे और
कौ टल्य मत्र को राज्य का एक अंग मानते ह मेगस्थनीज को दरबार म स्थान दया
बना युद्ध के अधीनता छोटा राजा भट दे ने पर सहमत होकर सहासन बचा “ नष्ठा तथा भट के बदले अपने क्षेत्र का प्रशासन
स्वीकार कराना लेता है; न घेराबंद , न क्ष त करने क अनुम त”
वैवा हक संबंध पा रवा रक संबंध दो राजवंश को सेना से कह सस्ते म प्राचीन राजनी त का सामान्य उपाय, सप्तांग के
जोड़ दे ते ह मत्र-अंग म न हत
आ थक आकषण व्यापा रक माग और बाज़ार पर नयंत्रण हो तो छोटे चत्र 5.4.4 — न दय और व्यापा रक माग पर
राज्य समृ द्ध म भागीदारी हेतु स्वयं जुड़ते ह नयंत्रण
श क्त-प्रदशन साम रक स्थल पर दुग और प्र श क्षत सेना दे खकर चत्र 5.4.1 और 5.4.2
पड़ोसी बना लड़े झुक जाते ह
सुशासन ही सबसे बड़ा य द सम्राट क प्रजा सुर क्षत और समृद्ध हो, तो पड़ोसी कौ टल्य — “प्रजा क प्रसन्नता म राजा क
प्रचार जन उसका शासन स्वयं चाह सकते ह प्रसन्नता न हत है”
धा मक-सांस्कृ तक आचाय और दूत को भेजने से सीमाओं के पार भी अशोक के दूत — ीलंका, थाईलड, मध्य ए शया
प्रभाव स ाव बनता है
ऐसा क्य : अध्याय युद्ध क लागत स्पष्ट बताता है — सै नक को भोजन, वस्त्र, शस्त्र और वेतन चा हए, हा थय -
घोड़ क दे खभाल, सड़क और नौकाओं का नमाण। युद्ध पर व्यय कया गया प्रत्येक सक्का साम्राज्य से छना हुआ
सक्का है। इस लए चतुर शासक युद्ध को अं तम उपाय बनाता था, पहला नह ।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 93
व्यापा रक माग का मान चत्र ( चत्र 5.5, पृष्ठ 92)
आइए पता लगाएँ
प्र.1 व्यापा रक माग के मान चत्र का अवलोकन कर। उन भौगो लक वशेषताओं क पहचान कर, जन्ह ने व्यापा रय
को उपमहा प म यात्रा करने म सहायता क ।
चत्र 5.5 को उसके पीछे के धरातलीय रंग के साथ दे खए — माग मैदान , नद -घा टय , दर और तट का अनुसरण करते ह और
ऊँचे पवत तथा घने वन से बचते ह।
Page 6 of 34
Page 8
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
भौगो लक वशेषता सहायता कैसे मली मान चत्र म कहाँ
गंगा का मैदान समतल, उपजाऊ, जल से भरपूर — पैदल और बगनी उत्तरापथ इसी पर है — तक्ष शला → ह स्तनापुर
गा ड़य के लए सबसे सरल भू म → ावस्ती → काशी → पाट लपुत्र → चंपा →
ताम्र ल प्त
न दयाँ नौकाएँ भारी माल सस्ते म ले जाती थ ; तट जल गंगा; तथा पाठ का यह कथन क गंगा और सोन ने मगध
भी दे ते थे और दशा भी को व्यापा रक लाभ दया
उत्तर-प म के हदूकुश– हमालय क द वार म एकमात्र ार, जो तक्ष शला तक आता और मान चत्र से आगे बढ़ता माग
पवतीय दर भारत को मध्य ए शया और भूमध्यसागर से जोड़ते
थे
वध्य तथा दक्कन के द क्षणी माग को पठार चढ़ने के बजाय पार करने पीला द क्षणापथ — कौशांबी → उज्ज यनी → प्र तष्ठान
दर व घा टयाँ दे ते थे क ओर
लंबा समुद्रतट और दूरस्थ दे श तक समुद्र व्यापार; बंदरगाह स्थल- प म म भरुकच्छ, सोपारा, ारका; प्राय प के चार
प्राकृ तक बंदरगाह माग को जहाज़ से जोड़ते थे ओर ताम्र ल प्त, क लगनगर, कावेरीपट्टनम, मु च र, मदुरै
अरब सागर और मानसूनी पवन पालवाले जहाज़ को भारत तक दोन सागर मान चत्र पर अं कत ह, और दोन पर बंदरगाह
बंगाल क खाड़ी लाती और ले जाती थ
स्वयं जाँ चए: दोन माग के नाम ही दशा बता दे ते ह — उत्तर + पथ = उत्तरापथ, अथात् उत्तर का महामाग;
द क्षण + पथ = द क्षणापथ, अथात् द क्षण का माग।
प्र.2 उन सड़क पर तत्कालीन समय म प रवहन के कौन-कौन से साधन उपलब्ध रहे ह गे? अनुमान लगाएँ।
व्यापारी के अपने पैर से लेकर समुद्र पार करने वाले जहाज़ तक — सब कुछ। भूभाग के अनुसार दे खए —
Page 7 of 34
Page 9
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
कहाँ प रवहन का साधन वह क्य उपयुक्त था
स्थल पर पैद ल चलना, िसर पर गठरी और काँवर के साथ सबसे सस्ता; सँकरी वन-पगडं डय पर आज भी एकमात्र उपाय
बैल गािड़याँ मैदान क रीढ़ — अन्न, नमक, वस्त्र, मृ ांड
भारवाहक पशु — बैल , गधे , खच्चर, शुष्क उत्तर- वहाँ भी चल लेते ह जहाँ गाड़ी नह जा सकती
पिश्चम में ऊँट
अश्व और हाथी तीव्रगामी संदेशवाहक और सशस्त्र रक्षक; हाथी अत्यंत भारी भार और
प्र तष्ठा के लए
न दय गंग ा, सोन, यमुना आिद पर नौकाएँ, बजरे और बेड़े जल भार को लगभग नःशुल्क ढोता है — इसी लए गंगा और सोन
पर मगध का लाभ थे
समुद्र पर बंद रगाहों से चलने वाले पालदार जहाज़ “अनेक भारतीय वस्तुएँ स्थल या समुद्र माग से दूरस्थ दे श तक जाती
थ”
ऐसा क्य : व्यापारी अकेले यात्रा नह करते थे। वे कारवाँ म चलते थे, जसे प्रायः उनक ेणी ( गल्ड) संग ठत करती
थी — क्य क समूह म रक्षक का व्यय बँट जाता था, बाज़ार-भाव क सूचना साझा हो जाती थी और पड़ाव सुर क्षत
रहते थे।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 94
मगध का उदय — साँची स्तूप क युद्ध-प ट्टका ( चत्र 5.6)
आइए पता लगाएँ
प्र.1 उपयुक्त शल्प-प ट्टका का सूक्ष्म अवलोकन कर। आप इनम कतने प्रकार के शस्त्र क पहचान कर सकते ह?
आपको लोहे के कौन-कौन से उपयोग दखाई दे ते ह?
ध्यान से दे खने पर लगभग पाँच-छह प्रकार के शस्त्र तथा रक्षा-सामग्री पहचानी जा सकती है।
प ट्टका म दखाई दे ने वाले शस्त्र और साज-सामान:
लंबे भाले / बरछे — पैदल सै नक क भीड़ म सबसे अ धक; कई कंध पर तरछे रखे ह।
तलवार — छोट , चौड़ी फलक वाली, पैदल सै नक और घुड़सवार दोन के पास।
धनुष-बाण — घरे हुए नगर के आस-पास और सै नक क पं क्तय म धनुधर दखते ह।
ढाल — बाएँ हाथ पर आयताकार और गोलाकार ढाल।
फरसे / अंकुशाकार शस्त्र — नगर- ार के पास कुछ आकृ तय के हाथ म।
अंकुश — हा थय पर बैठे महावत के हाथ म; शत्रु का शस्त्र नह , पर युद्ध क अ नवाय सामग्री।
शरस्त्राण (हेलमेट) तथा हा थय -घोड़ का साज।
लोहे के दखाई दे ने वाले उपयोग:
Page 8 of 34
Page 10
as e
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
प ट्टका क वस्तु लोहे का उपयोग कसम
m e s दे र तक चला सकते
aअिधक
.co
भाले क नोक, तलवार का फलक, बाण के फल, फरसे क
g l
शस्त्र — काँसे से हल्के और तेज, इसिलए सै िनक
a
s em थे
धार
a
aढालglक धार और मध्य-चक्र, शरस्त्राण, कवच के जोड़ रक्षा-साधन
comपिरवहन
ag
वाहन और
.
रथ के प हय क हाल, धुरी, क ल और प ट्टयाँ
m
e पशु-संचालन
अश्व क लगाम क क ड़याँ, अंकुश, साज के छल्ले
g l as
a
नगर- ार, दरवाज़ क प ट्टयाँ, परकोटे , घेराबंद क सामग्री िनम ण और दुग करण
. com
m a s emअयस्क ने मगध को
l जनसे सेना सशक्त
ऐसा क्य : इससे पछला पृष्ठ मगध के वषय म यही कहता है। नकटवत पवतीय क्षेत्र के लौह
o वस्तुएँ द — लोहे के हल, जनसे फसल बढ़ , और हल्के, तेज लोहे aकेgशस्त्र,
एक साथ.cदो
a s em
g l
हुई। कथा के आरंभ म इरा के पता लोहार ह, जन्ह ने “कई तलवार को गढ़ने म सहायता” क है। अ धशेष अन्न
a और लोहे के शस्त्र — यही साम्राज्य का सूत्र है।
m a s
m .co agl
l a se
प्र.2
a g
शल्प-प ट्टका के बाएँ भाग म कलश के ऊपर एक छत्र रखा हुआ है, जसम बुद्ध के अवशेष रखे ह। आपके वचार
म ऐसा क्य कया गया होगा?
co m
m .
se
o m l a
g प वत्र और सव प र है।
.ेcऊपर रखा छत्र बना शब्द के कह देता है क जो ले जाया जा रहा है, वह राजोaचत,
क्य क भारतीय कला म छत्र सव च्च सम्मान और प्रभुसत्ता का प्रतीक है — छत्र राजा के ऊपर धारण कया जाता था। अवशेष-
कलशm
se स्तर पर इसका अथ —
क
g l a
a तीन
1. राजक य सम्मान। शोभायात्रा म छत्र सम्राट पर धारण कया जाता था। कलश पर रखा छत्र बुद्ध को नीचे लड़ते राजाओं से भी
se m
com g l a
. a
बड़ा, आध्या त्मक प्रभु घो षत करता है।
m
ase
2. रक्षा और श्रद्धा। छत्र अपने नीचे क वस्तु क रक्षा करता है। यह बताता है क अवशेष केवल ले जाने योग्य नह , रक्षा करने
योग्य ह।
a gl
3. पूरे युद्ध क व्याख्या। प ट्टका म सेनाएँ बुद्ध के अवशेष पाने के लए कुशीनारा क घेराबंद कर रही ह। छत्र दशक को बता दे ता
है क राजा एक छोटे कलश के लए युद्ध क्य करगे — ये अवशेष भू म से भी अ धक मूल्यवान माने जाते थे।
co m
m .
m as e
.co a g l
क्या आप जानते ह? आगे चलकर छत्र स्तूप का ही अंग बन गया — पृष्ठ 111 के चत्र 5.26 म साँची के महास्तूप
s e m के शखर पर पत्थर का छत्र दे खा जा सकता है।
agla
.c
s e m
m a
इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 97
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 9 of 34
Page 11
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
ग्रीक का आगमन — क्षत्रप
इसे अनदे खा न कर
प्र.1 फारसी और ग्रीक साम्राज्य म प्रांत के शासक क्षत्रप थे, जन्ह सम्राट (जैसे – एलेक्जडर) ने सुदूर प्रदे श का
प्रबंधन करने के लए पीछे छोड़ दया था। मात्र अ धकारी होने के बावजूद इन क्षत्रप के पास महत्वपूण श क्त
और स्वतंत्रता थी। क्या आप अनुमान लगा सकते ह क उनके लए इतनी श क्त का प्रयोग करना कैसे संभव था?
दूरी के कारण। क्षत्रप उस प्रांत का शासक होता था जो सम्राट से सप्ताह या महीन क यात्रा दूर था, और प्राचीन वश्व म दूरी का
अथ था — कागज़ पर पद जो भी हो, व्यवहार म स्वतंत्रता।
कारण व्यवहार म इसका अथ
तीव्र संचार का अभाव आदे श और प्र तवेदन घोड़े क ग त से चलते थे। क्षत्रप अनुम त क प्रतीक्षा नह कर सकता था, इस लए
स्वयं नणय लेना उसक ववशता भी थी और श क्त भी।
स्थानीय सेना उसके पास थी सै नक दूरस्थ सम्राट के नह , उसी के साथ रहते थे। जसके पास सेना है, वास्त वक श क्त उसी के पास है।
कर वही एकत्र करता था राजस्व राजधानी पहुँचने से पहले उसके हाथ से गुज़रता था। धन पर नयंत्रण अथात् सब पर नयंत्रण।
स्थानीय अ धकारी वही प्रांत चलाने वाले लोग अपने पद के लए सम्राट के नह , उसके ऋणी थे।
नयुक्त करता था
सम्राट जाँच नह कर पाता था महीन -वष तक कोई नरीक्षण नह — और नए अ भयान म व्यस्त सम्राट का ध्यान कह और रहता था।
स्थानीय शासक उसी से एलेक्जडर ारा क्षत्रप बनाए गए पुरु अपने क्षेत्र के वास्त वक राजा बने रहे। जनता उसी चेहरे को मानती है
व्यवहार करते थे जो सामने हो।
यह क्य महत्वपूण है: अध्याय के अंत म यही दुबलता लौटकर आती है। बेबीलोन म एलेक्जडर क मृत्यु के बाद
“उसका वशाल साम्राज्य शीघ्र ही उसके सेनाप तय और क्षत्रप के बीच वभा जत हो गया, जन्ह ने अपने स्वतंत्र
राज्य स्था पत कर लए।” जो अ धकारी साम्राज्य को जोड़े रखते थे, वही उसे तोड़ने क सबसे अच्छ स्थ त म भी
थे। इसी समस्या का अशोक का उत्तर था — प्रत्येक पाँचव वष नरीक्षण हेतु महामात्र भेजना।
आइए वचार कर — पृष्ठ 97
Page 10 of 34
Page 12
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
ग्रीक का आगमन — एलेक्जडर क महत्वाकांक्षा
आइए वचार कर
प्र.1 आपके वचार म एलेक्जडर संपूण वश्व पर राज क्य करना चाहता था? इससे वह क्या प्राप्त करना चाहता था?
एक साथ कई कारण — और उनम से अ धकांश अध्याय पृष्ठ 89 पर ही गना चुका है क कोई राजा सम्राट क्य बनना चाहता है।
वह ऐसा क्य चाहता था:
आरंभ म प्र तशोध। उसने फारसी साम्राज्य पर अ भयान “ग्रीस पर हुए पूव के फारसी आक्रमण का बदला लेने” के लए
कया। जो प्र तशोध से आरंभ हुआ, वह वजय-अ भयान बन गया।
यश और भावी पी ढ़य क स्मृ त। ‘संपूण वश्व पर शासन’ वशाल भूभाग पर नयंत्रण और सदा याद रखे जाने का रूपक है
— और वास्तव म 2,300 वष बाद भी वह स्मरण कया जाता है।
‘दु नया के अं तम छोर’ क जज्ञासा। अध्याय कहता है क वह “दु नया के अं तम छोर तक पहुँचने के लए उत्सुक” था।
संपदा और संसाधन। फारस के कोष और फर भारत क प्र सद्ध समृ द्ध — अथात् अ धक धन, अ धक सै नक, अ धक
श क्त।
वजय क ग त। हर वजय अगले अ भयान को सरल दखाती थी और रुकने को पराजय जैसा बना दे ती थी।
इससे उसे क्या मलता: अपार संपदा, वश्व का सबसे बड़ा साम्राज्य — उसका राज्य तीन महा प तक फैला, वश्व इ तहास के
सबसे बड़े साम्राज्य म से एक — ग्रीक संस्कृ त का प्रसार, और ऐसा नाम जसक बराबरी बाद का कोई राजा न कर सके।
इस पर वचार क्य आवश्यक है: दे खए उसे वास्तव म क्या मला। वह एक युद्ध म गंभीर रूप से घायल हुआ; थके
और घर क याद म डू बे उसके सै नक ने गंगा क ओर बढ़ने से इनकार कर दया; तट य माग और ईरान के रे गस्तान
से लौटते हुए प्यास, भूख और बीमारी से भारी क्ष त हुई; फारस लौटकर उसे वद्रोह का सामना करना पड़ा; 32 वष
क आयु म बेबीलोन म उसक मृत्यु हुई; और कुछ ही वष म उसके अपने सेनाप तय ने साम्राज्य बाँट लया। अध्याय
का मौन नणय जम्नोसो फस्ट के उत्तर म है — मनुष्य सबसे अ धक प्रय तब होता है जब वह “सबसे श क्तशाली
हो, फर भी भय उत्पन्न न करे”।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 97
Page 11 of 34
Page 13
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
एलेक्जडर और पुरु
आइए पता लगाएँ
प्र.1 जब युद्ध के उपरांत एलेक्जडर ने राजा पुरु से पूछा क उसके साथ कैसा व्यवहार कया जाए, तब पुरु ने उत्तर
दया — “एक राजा क तरह”। इस उत्तर से प्रभा वत होकर एलेक्जडर ने उन्ह उनके ही राज्य का क्षत्रप नयुक्त
कर दया। अपने शक्षक क सहायता से राजा पुरु और एलेक्जडर के मध्य हुए युद्ध के वषय म और अ धक
ववरण प्राप्त कर। अपने शोध के साथ-साथ अपनी कल्पनाश क्त का उपयोग करते हुए इस युद्ध दृश्य का नाट्य
मंचन कर।
यह शोध और नाट्य-मंचन क ग त व ध है, इस लए यहाँ व ध और एक नमूना दृश्य दया गया है।
चरण 1 — जो ज्ञात है, वह खो जए। इस युद्ध का लगभग सारा ववरण ग्रीक लेखक से आता है, भारतीय ोत से नह । व ालय
के पुस्तकालय या शक्षक क सहायता से जुटाइए —
कहाँ: पंजाब म हाइडेस्पीज़ (झेलम) के तट पर, लगभग 326 सा.सं.पू.। ध्यान द जए क पृष्ठ 96 के चत्र 5.10 म
‘हाइडेस्पीज़’ अं कत है।
कौन: मै सडो नया का एलेक्जडर, अनुभवी ग्रीक तथा सहयोगी सेना के साथ; और पुरु (पौरव), पैदल सेना, अश्वारोही, रथ तथा
युद्ध-हा थय क पं क्त के साथ।
प र स्थ तयाँ: नद उफान पर थी और मानसूनी वषा ने धनुष क डो रयाँ ढ ली और रथ के प हये क चड़ म धँसा दए थे।
प रणाम: पुरु परा जत और घायल हुए, पर अंत तक लड़े; उनके उत्तर “एक राजा क तरह” से प्रभा वत होकर एलेक्जडर ने
उन्ह उनका राज्य लौटाकर क्षत्रप नयुक्त कया।
यह अवश्य बताइए क कथा कौन कह रहा है। ये ग्रीक ववरण ह, वजयी पक्ष के लखे हुए। अच्छ प रयोजना यह भी
बताती है।
चरण 2 — नाटक म क्या-क्या हो: युद्ध से पहले का दृश्य (उफनती नद , हाथी, दो श वर), युद्ध (वषा, बाण, हाथी, क चड़ म फँसे
रथ), घायल पुरु का बंद बनाया जाना, और वह प्र सद्ध संवाद — जो इस दृश्य का सार है।
नमूना उत्तर — अं तम दृश्य:
एलेक्जेंडर (घोड़ े से उतरते हुए): त म
ु तब तक लड़ ते रहे जब तक त म्ु हारे अपने हाथी न िगर गए। बताओ —
त म्ु हारे साथ कै सा व्यवहार िकया जाए?
पुरु (घायल, तनकर खड़ े): एक राजा की तरह।
एलेक्जेंडर: बस इतना ही? कु छ और माँगो।
पुरु : और कु छ है ही नही ं। इन्ही ं शब्दों में सब कु छ आ गया।
एलेक्जेंडर (क्षणभर रुककर, सेनापितयों से): इसने आज अपना राज्य खोया नही ं, बचा िलया है। यह पहले की
भाँित शासन करेगा — और मेरे क्षत्रप के रूप में करेगा।
सूत्रधार: इस पकार जो रणभूिम में हारा, उसका िसंहासन बचा रहा; और जो जीता, वह तीन वष के भीतर
बेबीलोन में, बत्तीस वष की आयु में, चल बसा।
Page 12 of 34
Page 14
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
सुझाव: एक व ाथ को मंच के एक ओर ग्रीक इ तहासकार और दूसरे को दे खते हुए स्थानीय ग्रामवासी क
भू मका द जए। दो सूत्रधार, दो दृ ष्टकोण — इ तहास इसी प्रकार पढ़ाया जाना चा हए।
आइए वचार कर — पृष्ठ 103
कौ टल्य क राज्य-संकल्पना — सप्तांग ( चत्र 5.15)
आइए वचार कर
प्र.1 कौ टल्य कहते ह, “एक राजा को अपनी प्रजा के कल्याण को बढ़ावा दे कर अपनी श क्त म वृ द्ध करनी चा हए,
क्य क श क्त ग्राम-क्षेत्र से आती है, जो समस्त आ थक ग त व धय का स्रोत है। (राजा को) ग्रामीण क्षेत्र म उन
लोग पर वशेष अनुग्रह करना चा हए, जो लोग को लाभ पहुँचाने वाले काय करते ह, जैसे – तटबंध या सड़क-
पुल बनाना, गाँव का स दय करण करना अथवा उनक रक्षा करने म सहायता प्रदान करना।” आपके अनुसार
ग्रामीण क्षेत्र का वशेष ध्यान रखना क्य महत्वपूण था? (संकेत – इस अध्याय के आरंभ म आपने जो पढ़ा है, उस
पर पुनः वचार क जए।)
क्य क साम्राज्य क श क्त वास्तव म ग्राम-क्षेत्र से ही आती थी। अध्याय के आरंभ क ंखला दे खए —
उपजाऊ गाम-क्षेत्र → अिधशेष अन्न → सैिनकों का पोषण और िशल्पकारों की मुिक्त
िशल्प + कृ िष-उपज → व्यापार की वस्त एु ँ → अिधक व्यापार → कोष में अिधक कर
भरा कोष → सेन ा, अिधकारी, सड़ कें → सामाज्य िटका रहता है
छह ठोस कारण:
अन्न। सेना अन्न पर चलती है। अध्याय कहता है क वष म दो फसल होती थ , अकाल कम पड़ते थे और अन्न-भंडार भरे रहते थे
— द घ अ भयान इसी से संभव होते ह।
कर-राजस्व। कृ ष “साम्राज्य के लए राजस्व का महत्वपूण ोत थी”। ग्राम नह तो कोष नह ।
जनश क्त। सै नक, भारवाहक, गाड़ीवान और शल्पकार — सब गाँव से आते थे।
क ा माल। इमारती लकड़ी, औष धयाँ, हाथी, लौह अयस्क और ख नज — जैसा इरा पृष्ठ 86 पर बताती है, ये वन और पवत
से आते थे।
नष्ठा। संतुष्ट ग्राम-क्षेत्र वद्रोह नह करता और आक्रमणकारी का स्वागत नह करता। अध्याय के अंत म प्रांत का असंतोष
साम्राज्य के पतन का कारण गनाया गया है।
लोक- नमाण संप त्त बढ़ाते ह। तटबंध जल रोकते ह, सड़क-पुल व्यापार चलाते ह, रक्षा से ग्रामवासी पलायन नह करते —
प्रत्येक काय अगले वष का राजस्व बढ़ाता है। इन्ह बनाने वाल पर अनुग्रह सबसे सस्ता नवेश है।
Page 13 of 34
Page 15
as e
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ऐसा क्य : कौ टल्य यहाँ दयालुता क बात नह , व्यावहा रकता क बात कर रहे ह। वाक्य का क्रम ध्यान से प ढ़ए
m a s em राजा का
gl प्रजा क प्रसन्नता म
— “राजा को अपनी प्रजा के कल्याण को बढ़ावा दे कर अपनी श क्त म वृ द्ध करनी चा हए।” कल्याण
उपकार नह ,.c o अपनी श क्त का ोत है। उनका मूल दशन भी यही कहता है — “अपनी a
em
उसक
l a s
ag
राजा क प्रसन्नता न हत है, प्रजा क भलाई म उसक भलाई है।”
co m
ag
क्या आप जानते ह? सोहगौरा ताम्रपत्र अ भलेख (चौथी–तीसरी शताब्द सा.सं.पू., उत्तर प्रदे श) म अकाल से
m .
as e
बचाव हेतु अन्न-भंडार क स्थापना का उल्लेख है — यही नी त का ठोस, भौ तक प्रमाण।
a g l
co m
m.
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 103
m as e
o l
कौ टल्य क राज्य-संकल्पना
. c a g
a s em
आइए पता लगाएँ
agl
s
अपनी कक्षा म एक सामू हक चचा आयो जत कर और कौ टल्य के साम्राज्य के प्र त वचार क वशेषताओं क
m a
प्र.1
.co agl
तुलना आधु नक राष्ट्र से कर।
se m
g l a
a
कौ टल्य के सप्तांग — राज्य के सात अंग — को आधु नक राष्ट्र के समकक्ष र खए। समानता च काने वाली है।
. om या भन्न?
cसमान
e m
as
सप्तांग ( चत्र तब इसका अथ आज भारत जैसे राष्ट्र म
m l
.co a g
5.15)
s m (राजा)
eस्वामी
gl a िभ — शिक्त अब जन्म से
a
राज्य का सव च्च राष्ट्रप त (राज्याध्यक्ष) और प्रधानमंत्री (शासनाध्यक्ष) न्न
शासक — परंतु नवा चत और सं वधान से बँधे हुए नही,ं जनता से आती है
se m
com
बहुत समान
g l a
.
अमात्य (मंत्री, उच्च राजा के परामशदाता मं त्रप रषद और स वल सेवाएँ
m a
ase
अ धकारी) और प्रशासक
जनपद (भूभाग और
जनसंख्या) लोग
agl
भू म तथा उस पर बसे राज्य-क्षेत्र और नाग रक — हर राष्ट्र क दो मूल
पहचान
लगभग समान
. comभाव वही, रूप नया
e m
दुग (दुगयुक्त नगर) रक्षा हेतु कले और सीमा-सुरक्षा, रक्षा प्र तष्ठान, साम रक अवसंरचना
com l as
परकोटे दार नगर
.कोष (राजकोष) a g
e m
as
बहुत समान
agl
राज्य क संपदा कद्र य बजट, कराधान, रज़व बक, लोक- वत्त
समान, पर अब कानून
.c
m
दं ड (सेना, व ध- सेना और दं ड दे ने क सशस्त्र बल, पु लस और न्यायालय
m
शासक को भी बाँधता है
a s e
agl
व्यवस्था) श क्त
. c o
s e m वदे श नी त, सं धयाँ, संयुक्त राष्ट्र, व्यापा रक बहुत समान
a
मत्र (सहयोगी) सं ध से बँधे मत्र-राजा
a g l साझेदा रयाँ
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 14 of 34
Page 16
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
जहाँ कौ टल्य आधु नक लगते ह: राज्य का उ े श्य प्रजा का कल्याण; भ्रष्टाचार के वरुद्ध कानून और जन हत के वरुद्ध काय के
लए दं ड- वधान; नगर- नयोजन, कृ ष, न्याय और अवसंरचना पर ध्यान; तथा स्थानीय संस्थाओं को स्वायत्त रूप से काय करने दे ना।
जहाँ आधु नक राष्ट्र भन्न है: राज्याध्यक्ष नवा चत होता है और हटाया जा सकता है; ल खत सं वधान और मौ लक अ धकार
ह; न्यायपा लका स्वतंत्र है; कोई करद राजा नह होते; और नाग रक प्रजा नह , व ध के समक्ष समान ह।
चचा चलाने का सुझाव: कक्षा को सात समूह म बाँ टए, प्रत्येक को एक अंग। हर समूह पाँच मनट म उसका
आधु नक समकक्ष और एक प रवतन बताए। इस तरह पूरा सप्तांग स म्म लत होगा।
आइए वचार कर — पृष्ठ 104
शां त का चयन करने वाला राजा — अशोक और क लग युद्ध
आइए वचार कर
प्र.1 अशोक ने अपने शलालेख म क लग युद्ध का उल्लेख कया है। वे चाहते तो इसका उल्लेख न करके भ वष्य क
पी ढ़य के समक्ष स्वयं को एक शां तपूण, परोपकारी राजा के रूप म प्रस्तुत कर सकते थे। आपके वचार म
उन्ह ने इस वनाशकारी युद्ध का उल्लेख अपने शलालेख म क्य कया?
क्य क यह स्वीकारो क्त ही उनका संदेश थी। युद्ध के बना हृदय-प रवतन नह — और हृदय-प रवतन ही वह पाठ था जो अशोक
पूरे साम्राज्य को पढ़ाना चाहते थे।
सबसे प्रबल कारण:
1. प ात्ताप ही मूल बात है। “म सदा शां त प्रय था” कहने से कोई कुछ नह सीखता। “मने भयंकर युद्ध कया, मृत्यु और वनाश
दे खा, और हसा त्याग द ” कहने से प्रजा को धम का पालन करने का कारण मलता है — य द सम्राट बदल सकता है, तो कोई
भी बदल सकता है।
2. इससे नई नी त वश्वसनीय बनी। जसने कभी युद्ध कया ही न हो, वह युद्ध त्यागने का दावा कैसे करता? उनका अतीत ही
उनके प रवतन का प्रमाण बना।
3. यह दूसर के लए चेतावनी थी। पड़ोसी राज्य और अपने ही अ धका रय को सावज नक रूप से बताया जा रहा था क युद्ध
क वास्त वक क मत क्या है।
4. यह उनक आत्म-छ व से मेल खाता है। वे स्वयं को पयद स — ‘दूसर के प्र त दयालुता से व्यवहार करने वाला’ — कहते
थे और अ धका रय से कहा, “सब मनुष्य मेरी संतान के समान ह।” जस पता ने संतान को कष्ट दया हो, वह स्वीकार करेगा।
5. सत्य धम का अंग है। धम म “कतव्य का सत्य नष्ठा से नवहन” स म्म लत है। युद्ध छपाना उसी शक्षा के वरुद्ध होता जो वे
चट्टान पर उत्क ण करवा रहे थे।
इ तहासकार के लए इसका महत्व: प्राचीन इ तहास के उन वरल क्षण म से एक, जब कोई शासक अपनी
वफलता दज करता है। राजा सामान्यतः वजय अं कत कराते ह। अध्याय यह भी उ चत ही कहता है क “हम
अशोक के सभी अ भलेख को शा ब्दक रूप से स्वीकारने क आवश्यकता नह ” — शलालेख अंततः शासक का
अपने वषय म कथन है। परंतु क लग वाला कथन ही एकमात्र ऐसा है जो उन्ह कुछ खच करवाता है, और इसी लए
उसका भार अ धक है।
Page 15 of 34
Page 17
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? ओ डशा म धौली के पास — जो कभी क लग था — अशोक का एक शलालेख चट्टान पर
उत्क ण है, और उसके पास जीवंत चट्टान से तराशा गया आदमकद हाथी खड़ा है ( चत्र 5.27, पृष्ठ 111), जो बुद्ध
का प्रतीक है — बु द्धमान, श क्तशाली, धैयवान और शांत।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 105
अशोक के शलालेख — भाषा और ल प
प्र.1 हमने ाह्मी ल प म लखी प्राकृत भाषा का उल्लेख कया है। इसका क्या अथ है? सरल शब्द म, भाषा वह है जो
हम बोलते ह, जब क ल प वह है जसम हम एक भाषा को लखते ह। क्या आप हमारे दै नक जीवन म इसके
उदाहरण सोच सकते ह?
हाँ — भारत ऐसे उदाहरण से भरा है। प्र त दन का प्रमाण यह है क एक ल प अनेक भाषाएँ लख सकती है और एक भाषा
एक से अ धक ल पय म लखी जा सकती है।
एक ल प, अनेक भाषाएँ:
लप इसम लखी जाने वाली भाषाएँ
दे वनागरी हद , मराठ , नेपाली, क कणी, संस्कृत, मै थली, बोडो
रोमन (लै िटन) अंग्रेज़ी, च, जमन, स्पे नश — और मोबाइल पर टाइप क गई हद ‘kaise ho’
फ़ ारसी-अरबी उदू, कश्मीरी, फ़ारसी, अरबी
बांग्ला बांग्ला, अस मया, म णपुरी
एक भाषा, एक से अ धक ल पयाँ:
संस्कृत आज दे वनागरी म छपती है, परंतु बांग्ला, ग्रंथ, शारदा, तेलुगु आ द ल पय म भी लखी जाती रही है।
क कणी दे वनागरी, रोमन और कन्नड ल पय म लखी जाती है।
पंजाबी भारत म गुरुमुखी म और पा कस्तान म फ़ारसी-अरबी ल प म लखी जाती है।
सधी दे वनागरी और फ़ारसी-अरबी दोन म लखी जाती है।
हद के संदेश प्र त दन रोमन ल प म टाइप कए जाते ह।
दै नक जीवन म कहाँ दे ख: रेलवे स्टे शन का नाम-पट्ट, जस पर वही नाम राज्य क भाषा, हद और अंग्रेज़ी म लखा होता है;
करसी नोट, जस पर रा श अनेक भाषाओं म लखी होती है; मील का पत्थर; अपने नगर क दुकान का दो ल पय वाला बोड।
यहाँ इसका महत्व: इसी लए अशोक का चयन बु द्धमत्तापूण था। उन्ह ने प्राकृत चुनी — वह भाषा जो भारत के
अनेक भाग म वास्तव म बोली जाती थी — और उसे ाह्मी म लखवाया, जसे लोग पढ़ सकते थे; “ब्राह्मी भारत
क सभी क्षेत्रीय ल पय क जननी मानी जाती है।” भाषा कान तक पहुँची, ल प आँख तक। ‘महान संचारक’ को
दोन चा हए।
Page 16 of 34
Page 18
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
यह क जए: अपना नाम दो ल पय म ल खए। ध्व न नह बदलेगी, केवल आकृ तयाँ बदलगी। भाषा और ल प का
पूरा अंतर बस इतना ही है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 107
अ धका रय के आचरण संबंधी अशोक का अ भलेख
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अशोक ने अपने एक अ भलेख म अपने अ धका रय के आचरण संबं धत वस्तृत नदश दए ह। उन्ह ने यह
सु न त करने क व्यवस्था क क अ धकारी नष्पक्षता से काय कर। नम्न ल खत अनुवाद को प ढ़ए और
बताइए क क्या ये उपाय साम्राज्य के प्रबंधन म सहायक सद्ध हुए ह गे? य द हाँ, तो कैसे? ‘दे वानाम पय’ के
आदे शानुसार— अ धका रय और नगर न्यायाध्यक्ष को यह नदश दया गया है— (...) तुम लोग अनेक सहस्र
प्रा णय के ऊपर नयुक्त कए गए हो। तुम्ह मनुष्य का स्नेह अ जत करना चा हए। सब मनुष्य मेरी संतान के
समान ह। जस तरह म चाहता ँ क मेरी संतान इस लोक और परलोक दोन म मंगल और सुख प्राप्त करे, उसी
तरह म सब मनुष्य के लए कामना करता ँ। (...) तुम्ह नष्पक्षता से न्याय करना चा हए। (...) इन सबका मूल
क्रोध का त्याग और धैय का पालन है। (...) यह लेख यहाँ इस लए लखवाया गया है क नगर के न्याय शासक
हमेशा सावधान रह क मनुष्य को कभी अकारण कैद या यातना न द जाए। (...) और इस उ े श्य क पू त हेतु म
प्रत्येक पाँचव वष एक नम्र और दयालु महामात्र भेजूँगा जो इसक खोज करने के बाद ..., यह दे खेगा क मेरे
आदे श का पालन कया जाता है या नह ।
हाँ — बहुत हद तक। ध्यान से दे खए तो अशोक ने केवल नै तक उपदे श नह दया; उन्ह ने चार पुज़ वाली एक छोट व्यवस्था
खड़ी क है।
Page 17 of 34
Page 19
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
अ भलेख क्या करता उसके अपने शब्द इससे साम्राज्य-प्रबंधन म सहायता कैसे
है
आचरण का स्पष्ट “तुम्ह नष्पक्षता से न्याय करना दूरस्थ प्रांत के अ धका रय को ठ क-ठ क पता था क उनसे क्या
मानक तय करता है चा हए”; “क्रोध का त्याग और धैय अपे क्षत है। अस्पष्ट अपेक्षाएँ मनमानी को जन्म दे ती ह।
का पालन”
आदे श के साथ कारण “सब मनुष्य मेरी संतान के समान ह… जो अ धकारी कारण को स्वीकार कर ले, वह तब भी उ चत आचरण
भी दे ता है उसी तरह म सब मनुष्य के लए करता है जब कोई दे ख न रहा हो। केवल भय नरीक्षक के जाते ही
कामना करता ँ” समाप्त हो जाता है।
नयम को सावज नक “यह लेख यहाँ इस लए लखवाया यही सबसे तीक्ष्ण भाग है। सामान्य जन िनयम सुन सकते थे और अपने
रूप से उत्क ण कराता गया है क…” अिधकार जानते थे। अब कोई अिधकारी यह नही ं कह सकता था िक
है समाट ने ू रता की अनुमित दी है।
क्र
नरीक्षण क व्यवस्था “प्रत्येक पाँचव वष एक नम्र और बना जाँच का नयम केवल इच्छा है। भ्रमणशील नरीक्षक — और
करता है दयालु महामात्र भेजूँगा” वह भी जानबूझकर सौम्य चुना गया — मानक को वास्त वक बनाता
है।
सबसे बड़े अत्याचार से “मनुष्य को कभी अकारण कैद या अन्यायपूण कैद ही प्रजा को वद्रोही बनाती है। उसे रोकना वद्रोह
रक्षा करता है यातना न द जाए” दबाने से सस्ता है।
यह व्यवस्था कहाँ अपयाप्त रहती:
पाँच वष लंबा अंतराल है। दो नरीक्षण के बीच कोई कठोर न्यायाध्यक्ष बहुत क्ष त कर सकता था।
अ धकांश लोग पढ़ नह सकते थे। अ भलेख तभी काम करता जब कोई पढ़कर सुनाए — और वह प्रायः वही अ धकारी होता
जस पर नगरानी थी।
स्वतंत्र न्यायपा लका नह थी। महामात्र सम्राट का ही अ धकारी था; अपील के लए अलग न्यायालय नह था।
यह एक व्य क्त क इ ा पर टक थी। अध्याय कहता है क अशोक के उत्तरा धकारी साम्राज्य को एकजुट नह रख सके —
जो व्यवस्था शीष के व्य क्तत्व पर नभर हो, वह दुबल होती है।
ऐसा क्य : साम्राज्य उतना ही अच्छा होता है जतने अच्छे उसके अ धकारी, क्य क सम्राट हर जगह नह हो सकता।
अशोक का उत्तर तीन बात का मेल है — सावज नक मानक, कारण स हत आदे श, और नय मत नरीक्षण — और
मोटे तौर पर आधु नक प्रशासन आज भी इसी व ध से अ धका रय को उत्तरदायी बनाए रखने का प्रयास करते ह।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 109
Page 18 of 34
Page 20
as e
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय
a g l AglaSem · NCERT Solutions
मौय काल म जीवन — ‘मौय का कुछ योगदान’, पृष्ठ 110–111
co m
e m.
m as
आइए पता लगाएँ
.co a g l
a s emइ तहासकार के रूप म अगले पृष्ठ पर प्रस्तुत कलाकृ तय को ध्यान से दे ख। मौय युग के लोग और जीवन के
gl
एक
a
प्र.1
बारे म आप इनसे क्या नष्कष नकाल सकते ह?
co m
e m . ag
g l as
इ तहासकार वस्तुओं को उसी तरह पढ़ता है जैसे आप वाक्य पढ़ते ह। पृष्ठ 110–111 क प्रत्येक कलाकृ त क्या बताती है, दे खए
— a
co m
m.
कलाकृ त क्या दखता है मौयकालीन जीवन के वषय म क्या पता चलता है
e
s वेशभूषा और आभूषण के पित
नत्ृ य और संगीत जीवन का अंग थेl;aलोग
क नतक .c
om
चत्र 5.21 टे राकोटा अलंकृत शरोभूषा, सँवारे केश, भारी
सजग थे; कु शल स्वणकार a g
s em थे
आभूषण, लहराता अधोवस्त्र
l a
ag चत्र 5.22 टेराकोटा अलंकृत शरोभूषा और फैली हुई भुजाओं घरे ल ू उपासना — के वल िवशाल स्मारकों में नही;ं िम ी की ऐसी
मूितयाँ साधारण पिरवार भी रख सकते थे
s
क दे वी वाली आकृ त
m a
m .co िनपुण मूितकार; चँवर राजसे वा का पतीक है, अतः कला धम और agl
se
चत्र 5.23 चँवर अत्यंत प रष्कृत पत्थर, आगे-बगल-पीछे
धारण कए यक्षी
g
तीन दृश्य, हार, चँवर
l a राजस त्ता दोनों की से वा में थी
चत्र 5.24
a
एक ही प ट्टका पर पं क्तबद्ध सात मातृ- मातदृ े वी की उपासना — और शीषक कहता है ‘एक सतत परंपरा’,
सप्तमातृका प ट्टका दे वयाँ
co
अथ त् कु छ िवश्वास 2,000 वष से चले आ रहे है ं
m
m .
omसर
चत्र 5.25 टे राकोटा
के घोड़ेcका
अत्यंत अलंकृत लगाम
बनाने का िवकिसत िशल्पg; lसंa
seऔर पितष्ठा के िलए — और साज
अश्वों का महत्व — युद्ध, पिरवहन
. a
sem
भवतः बच्चों का िखलौना भी
a चत्र 5.20 सारनाथ
agl
चार सह, नीचे वलय म हाथी, बैल, घोड़ा मौयकालीन पॉिलश अद् भतु तकनीकी कौशल थी; राजस त्ता और बुद्ध
की िशक्षा एक साथ पदिशत
m
का स्तंभ-शीष और सह तथा धमचक्र; दपण जैसी
a se
com
पॉ लश
. a g l
e m
asऔर तोरण
चत्र 5.26 साँची का ईंट का वशाल मूल ढाँचा, बाद म पत्थर राज्य िवशाल िनम ण पिरयोजनाएँ संगिठत कर सकता था; बौद्ध धम
महास्तूप
a g l
से वस्ता रत, वे दका को राजाश्रय था; स्तूप, चैत्य और िवहार उपासना, अध्ययन और ध्यान
के िलए
मूितकला का उपयोग जन-संचार के िलएm
. co
चत्र 5.27 धौली का जीवंत चट्टान से तराशा आदमकद हाथी, — कला और संदे श वही,ं
शैल-हाथी पास ही अशोक का शलालेख जहाँ से लोग गुज़रते थे m
se
m आहत
co5.29 l a
.चत्र agव्यवस्था, तीव व्यापार, और िसक्कों के भार व
sem सक्के
अनेक चह्न से अं कत चाँद के टु कड़े मुद ा-आधािरत अथ
a
agl
शुद्धता की राजकीय गारंटी
.c
इ तहासकार के नष्कष, संक्षेप म:
s e m
m a
m . co agl
se
समाज समृद्ध और वशेषज्ञतापूण था — मू तकार, कुम्हार, स्वणकार, साज बनाने वाले, धातुकम सभी अपने शल्प से
जी वका चलाते थे।
l a
g थी और पॉ लश कया पत्थर राज्य क ; इस लए हम साधारण और राजसी दोन जीवन
टे राकोटा जनसाधारण क a
कला
दखाई दे ते ह।
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 19 of 34
Page 21
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
स्त्रयाँ बार-बार दखती ह — नतक , दे वी, यक्षी के रूप म — अतः कला और उपासना दोन म उनका कद्र य स्थान था।
धा मक जीवन व वध था — मातृदे वयाँ और य क्षयाँ बौद्ध स्तूप के साथ-साथ।
राज्य इतना सशक्त और संपन्न था क स्मारक बनवा सके, सक्के ढाल सके और चट्टान तराशवा सके।
सुझाव: अच्छा इ तहासकार यह भी बताता है क वस्तुएँ क्या नह बता सकत । ये कलाकृ तयाँ इस लए बच क्य क
वे पक मट्ट और पत्थर क थ । वस्त्र, लकड़ी, भोजन और नधन के घर नष्ट हो गए — इस लए यह चत्र सच्चा तो
है, पूण नह ।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 112
मौयकालीन आहत (पंचमाक) सक्के ( चत्र 5.29.1 और 5.29.2)
आइए पता लगाएँ
प्र.1 नीचे दशाए गए सक्क के अलग-अलग चह्न पर ध्यान द जए। इन चह्न का अथ क्या हो सकता है, क्या आप
अनुमान लगा सकते ह?
चत्र 5.29.2 के नीचे बने तीन चह्न को दे खए। ये सक्के पर आहत (ठप्पा लगाए गए) चह्न ह, जन्ह स्पष्ट रूप से दोबारा बनाया
गया है ता क आप उनका अध्ययन कर सक।
सक्के का चह्न वह दखता कैसा है उसका संभा वत अथ
करण वाला चक्र / छोटे कद्र से नकलती अनेक सूय — पकाश, ऊज , राजत्व — अथवा च , जो स त्ता और धम का पतीक है।
क्र
सूय करण वाला वृत्त मौय िस क्कों पर यह सबसे सामान्य िचह्न है।
छह भुजाओं वाला छोटा वृत्त, जससे छह भुजाएँ इसे पायः षडर चक्र कहते है ं — छह अरों वाला च । संभवतः राजकीय या
क्र
चह्न नकलती ह और उनके सरे बाण सामािज्यक अिधकार का िचह्न , या िकसी िवशेष टकसाल अथवा अिधकारी
जैसे ह का।
ऊपर-नीचे जुड़े दो गोलाकार आकृ तयाँ एक के इसे पायः ‘अधचंद सिहत पवत’ या टॉरीन िचह्न पढ़ ा जाता है — पवत, नदी अथवा
अंडाकार / वृषभ- ऊपर एक, बीच म एक रेखा कोई मांगिलक संके त; यह अशोक के िस क्के के दोनों ओर िमलता है, अतः यह
चह्न जारीकत का िचह्न भी हो सकता है।
सामान्यतः इन चह्न के वषय म क्या माना जाता है:
प्रकृ त और भू म — सूय, पवत, वे दका म घरा वृक्ष, न दयाँ, हाथी और बैल जैसे पशु।
सत्ता — चक्र, जो शासक क प्रभुसत्ता का प्रतीक है।
मंगलकामना — ऐसे चह्न जन्ह धारक के लए शुभ माना जाता था।
गारंट — प्रत्येक ठप्पा इस बात क पु ष्ट था क चाँद के उस टु कड़े का भार और शुद्धता जाँच ली गई है।
Page 20 of 34
Page 22
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
एक ही सक्के पर अनेक चह्न क्य ? ये आहत (पंचमाक) सक्के ह — इन पर चह्न एक ही ठप्पे से एक साथ
नह , ब ल्क अलग-अलग ठोके जाते थे, प्रायः भन्न- भन्न अ धका रय ारा — राजक य टकसाल, क्षेत्रीय अ धकारी,
कभी कोई ेणी या व्यापारी जसने सक्का परखा हो। हर अ त रक्त ठप्पा एक और हस्ताक्षर था क ‘यह चाँद खरी
है’। इसी लए संग्रह ( चत्र 5.29.1) के सक्के सुडौल गोल नह , अ नय मत चौकोर ह।
इ तहासकार क ईमानदारी: आज कोई भी इन चह्न को न तता से नह पढ़ सकता — कोई प्राचीन ग्रंथ इनक
व्याख्या नह करता। सव त्तम उत्तर वह है जो संभा वत अथ बताए और यह भी स्वीकार करे क व ान म अब भी
मतभेद है।
आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 114
एक दृ ष्ट म पूरा अध्याय
आगे बढ़ने से पहले . ..
प्र.1 साम्राज्य अनेक छोटे राज्य या क्षेत्र से मलकर बना एक बड़ा क्षेत्र होता है। सम्राट अपने साम्राज्य का वस्तार
मुख्यतः प्र स द्ध प्राप्त करने, श क्त अ जत करने, सैन्य श क्त तथा संसाधन और आ थक जीवन को नयं त्रत
करने के लए करते थे।
यह एक वाक्य म अध्याय क प रभाषा है, और इसका प्रत्येक अंश कुछ कहता है।
कथन का अंश अथ अध्याय म कहाँ
“अनेक छोटे राज्य से मलकर बना छोटे राज्य करद राज्य के रूप म बने रहते ह, समाप्त पष्ृ ठ 87 और 89; ‘करद राज्य’ पर
एक बड़ा क्षेत्र” नह होते हािशये की िटप्पणी
“प्र स द्ध प्राप्त करने” ‘संपूण वश्व पर शासन’ क महत्वाकांक्षा और भावी आइए पता लगाएँ, पष्ृ ठ 89; एले क्जेंडर,
पी ढ़य क स्मृ त म बने रहना पष्ृ ठ 96–97
“श क्त अ जत करने, सैन्य श क्त” करद राज्य पर नयंत्रण, वस्तार और सीमाओं क रक्षा िवशेषता 01, पष्ृ ठ 88; िचत्र 5.4.1,
हेतु सेना 5.4.3, 5.4.5
“संसाधन और आ थक जीवन को खान, वन, कृ ष-उपज, जनश क्त, न दयाँ, व्यापा रक िवशेषताएँ 03 और 04, पष्ृ ठ 88; िचत्र
नयं त्रत करने” माग, सक्के, माप-तौल 5.4.4
पृष्ठ 88 पर द गई साम्राज्य क छह वशेषताएँ याद रखने योग्य ह — वह सेना रखता है; क्षेत्र के प्रबंधन, कर-संग्रह और व ध-
व्यवस्था के लए अ धका रय स हत प्रशासन बनाता है; कानून बनाता, मुद्रा तथा माप-तौल जारी करता और व्यापार को
नयं त्रत करता है; संसाधन तक पहुँच नयं त्रत करता है; कला, सा हत्य, धम, वचारधाराओं और व ा-कद्र को प्रोत्सा हत
करता है; तथा सड़क , नद व समुद्र माग का संचार तंत्र बनाए रखता है।
Page 21 of 34
Page 23
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 भारत के प्रारं भक साम्राज्य प्रचुर प्राकृ तक संसाधन , सचाई और प रवहन के लए न दय क उप स्थ त तथा
व्यापार के लए व भन्न प्रकार के उत्पाद से संपन्न क्षेत्र म उ दत हुए।
मगध इसका प्रमाण है। वह संयोगवश भारत का पहला साम्राज्य नह बना — उसके पास इस सूची क हर वस्तु एक साथ थी।
लाभ मगध म उसका रूप उससे क्या मला
उपजाऊ भू म संसाधन से समृद्ध गंगा के मैदान; वष म दो फसल अिधशेष अ — से ना का पोषण, िशल्पकारों की मुिक्त
न्न
वन इमारती लकड़ी और हा थय से भरे सघन वन परकोटे, गािड़ याँ, नौकाएँ; युद्ध के िलए पकड़ े और पिशिक्षत
हाथी
ख नज नकटवत पवतीय क्षेत्र से लौह अयस्क और अन्य लोहे के हल (अिधक अ ) और हल्के , तेज शस्त्र (सशक्त
न्न
ख नज से ना)
न दयाँ गंगा और सोन व्यापार हेत ु स स्ता पिरवहन; िसंचाई; भौगोिलक लाभ
व्यापार क वस्त्र, मसाले, कृ ष-उपज, रत्न, हस्त शल्प, पशु बढ़ ता व्यापार, बढ़ ता कर-संगह, भरा हआ
ु कोष
वस्तुए ँ
ऐसा क्य : इनम से हर वस्तु एक ही चीज़ को पो षत करती है — कोष। और कोष ही सै नक , अ धका रय और
सड़क का व्यय उठाता है। अ धशेष र हत क्षेत्र एक अ भयान के लए सेना खड़ी कर सकता है; अ धशेष वाला क्षेत्र
सौ वष तक सेना रख सकता है।
प्र.3 उत्तर-प म भारत म एलेक्जडर के अ भयान का राजनी तक प्रभाव सी मत था, ले कन इसने भारतीय-ग्रीक
सांस्कृ तक संपक के ार खोल दए।
इस वाक्य के दोन भाग सही ह, और यह समझना उपयोगी है क क्य ।
राजनी तक प्रभाव सी मत क्य रहा:
वह केवल उत्तर-प म — पंजाब — तक पहुँचा। गंगा के मैदान म, जहाँ मगध क वास्त वक श क्त थी, वह कभी नह गया।
थके और घर क याद म डू बे उसके सै नक ने गंगा क ओर बढ़ने से इनकार कर दया, इस लए अ भयान रुक गया।
वह फारस लौट गया और कुछ ही वष म 32 वष क आयु म बेबीलोन म उसक मृत्यु हो गई।
उसके छोड़े गए क्षत्रप को शीघ्र ही चंद्रगुप्त मौय ने परा जत कर उस क्षेत्र को अपने साम्राज्य म मला लया।
यह भी ध्यान द जए क उस काल का कोई भारतीय ोत उसका उल्लेख नह करता। उसके भारतीय अ भयान क जानकारी
हम लगभग पूरी तरह ग्रीक ववरण से मलती है।
सांस्कृ तक संपक अ धक महत्वपूण क्य रहा:
चंद्रगुप्त ने ग्रीक से कूटनी तक संबंध बनाए रखे और मेगस्थनीज को अपने दरबार म स्थान दया; उसने इं डका लखी, जो
कसी वदे शी ारा भारत का पहला ल खत ववरण है।
Page 22 of 34
Page 24
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
ग्रीक लेखक ने मौयकालीन नगर , कृ ष और समाज के वे ववरण सुर क्षत रखे, जो अन्यथा लुप्त हो जाते।
अध्याय एलेक्जडर के जम्नोसो फस्ट से संवाद को “दो महान परंपराओं — ग्रीक और भारतीय दशन — का मलन” कहता
है।
सक्के, कला और वचार दोन दशाओं म गए; चत्र 5.11 म एक ग्रीक सक्का है, जसम संभवतः एलेक्जडर हाथी पर सवार
पुरु पर आक्रमण करता दखाया गया है।
क्या आप जानते ह? इं डका स्वयं लुप्त हो चुक है। हम उसे केवल उन अंश से जानते ह, जन्ह बाद के ग्रीक
व ान ने उद्धत कया — इसी लए इ तहासकार को उस पर सावधानी से भरोसा करना पड़ता है।
प्र.4 मौय ने एक वशाल साम्राज्य बनाया जसक वरासत शता ब्दय तक चली। उनक वरासत म व्यापा रक माग
और आ थक प्रणा लय को सुदृढ़ करना, व्यापार के लए सक्क का व्यापक उपयोग, उत्कृष्ट रूप से संर चत क
गई नगरीय ब स्तयाँ और प्रशासन क एक वस्तृत प्रणाली स म्म लत है। उन्ह ने कला और वास्तुकला को भी
प्रोत्साहन दया।
पाँच वरासत — और हर एक के लए आप कोई भौ तक वस्तु दखा सकते ह।
वरासत मौय ने वास्तव म क्या कया अध्याय म प्रमाण
व्यापा रक माग उत्तरापथ और द क्षणापथ को सुर क्षत और सुव्यव स्थत रखा; मुख्य िचत्र 5.5, पष्ृ ठ 92; अशोक के अिभले ख,
सड़क पर नय मत अंतराल पर व ामगृह, कुएँ तथा फलदार-छायादार पष्ृ ठ 106
वृक्ष
आ थक सुव्यव स्थत कराधान, सशक्त कोष, अकाल के वरुद्ध अन्न-भंडार, स्व- पष्ृ ठ 108; सोहगौरा ताम पत्र , भारत के
प्रणाली संचा लत े णयाँ आरंिभक पशासिनक अिभले खों में से एक
सक्के चाँद के आहत सक्क का व्यापक प्रचलन, भार और शुद्धता क गारंट िचत्र 5.29.1 और 5.29.2, पष्ृ ठ 112
स हत
नगरीय प्रासाद, सावज नक भवन, सड़क पर संकेतक, दो मं जला लकड़ी के पष्ृ ठ 108–109; िचत्र 5.2 में पाटिलपुत्र
ब स्तयाँ घर, अ ग्न के लए जल-पात्र, संदेश ले जाते दूत
प्रशासन क्षेत्र , कर और व ध-व्यवस्था के लए अ धकारी; धम्मा धकारी; प्रत्येक कौिटल्य का अथशास्त्र , पष्ृ ठ 101–103;
पाँचव वष नरीक्षण अशोक के अिभले ख, पष्ृ ठ 107 और 115
कला और चमकदार पॉ लश कए स्तंभ, स्तूप, चैत्य और वहार, शैलकृत गुफाएँ, िचत्र 5.20 से 5.27; बराबर पहािड़यों की
वास्तुकला टे राकोटा मू तयाँ, शैल-मू तकला गफ
ु ा, िचत्र 5.1
क्या आप जानते ह? अध्याय के पहले ही चत्र क गुफा — बहार क बराबर पहा ड़य क शैलकृत गुफा — ठ क
उसी प्रकार क है जसक ओर पृष्ठ 86 पर इरा संकेत करती है — “हमारे राजा उसे भक्षुओं के लए बनवा रहे ह।”
कथा और पुरातत्व यहाँ आपस म मल जाते ह।
Page 23 of 34
Page 25
as e
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
अशोक अपनी उपल ब्धय का प्रसार करने और एक दयालु सम्राट क छ व प्रस्तुत करने के लए उत्सुक थे। उन्ह ने
e
प्र.5
m l as
.co
अपनी प्रजा को धम का पालन करने के लए प्रोत्सा हत कया।
a g
se m
g l a
a
यह सत्य है — और अध्याय चाहता है क आप उपल ब्ध और उसके प्रचार, दोन को दे ख।
co m
ag
प्रचार कैसे कया: उन्ह ने साम्राज्य के अनेक भाग म चट्टान और स्तंभ पर शलालेख उत्क ण करवाए, वह भी प्राकृत भाषा
m .
e
और ाह्मी ल प म, ता क सामान्य जन उन्ह समझ सक। इसी कारण इ तहासकार ने उन्ह ‘महान संचारक’ कहा है।
g l as
a
कैसी छ व प्रस्तुत क : उन्ह ने स्वयं को दे वानाम पय पयद स कहा — ‘दे वताओं के प्रय’ और ‘दूसर के प्र त दयालुता से व्यवहार
करने वाला’ — और अ धका रय से कहा, “सब मनुष्य मेरी संतान के समान ह।”
उन्ह ने क्या करने का उल्लेख कया:
c o m
साम्राज्य के बाहर भी मनुष्य और पशुओं के लए च कत्सा उपलब्ध कराई और उन द क्षणी राज्य m .
s e के कल्याण का भी
समथन कया
. c omजो साम्राज्य का भाग नह थे। a gla
s m के शकार और क्रूरता पर प्र तबंध लगाया और आवश्यकता होने पर उनके उपचार का आदेश दया — प्रकृ त और
eओं
a
gl वन्यजीव संरक्षण क दशा म आरं भक योगदान।
पशु
a मुख्य सड़क के कनारे नय मत अंतराल पर वश्रामगृह और कुएँ बनवाए तथा फलदार एवं छायादार वृक्ष लगवाए।
m a s
. c o agl
सभी संप्रदाय को एक-दूसरे क उ चत शक्षाओं को स्वीकार करने और उनका अध्ययन करने के लए प्रोत्सा हत कया।
s e m और उससे आगे तक दूत भेजे।
बुद्ध के संदेश के साथ ीलंका, थाईलड, मध्य ए शया
a
agl
इ तहासकार क दृ ष्ट से प ढ़ए: अध्याय क अपनी चेतावनी महत्वपूण है — “हम अशोक के सभी अ भलेख को
शा ब्दक रूप से स्वीकारने क आवश्यकता नह ।” शलालेख अंततः शासक का अपने वषय म कथन है। परंतु उनके
co m
m .
e
दावे कौ टल्य के शासन-दशन से मेल खाते ह, और प्रजा तक पहुँचने का उनका प्रयास असं दग्ध है — क्य क वे
m l as
.co a g
चट्टान और स्तंभ आज भी खड़े ह।
se m
g l a
a
se m
com a
प्रश्न और कायकलाप — पृष्ठ 114–115
. a g l
m
ase
अध्याय के अंत का अभ्यास
प्र.1
agl
साम्राज्य क वशेषताएँ क्या ह और यह राज्य से कस प्रकार भन्न है? इसक व्याख्या क जए।
co m
m .
m as e
.co a g l
mसत्ता का प्रयोग करता है —
साम्राज्य क छह वशेषताएँ, ठ क वैसे ही जैसे अध्याय ने पृष्ठ 88 पर द ह, जहाँ सम्राट अपने करद क्षेत्र और राजाओं पर कद्र य
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 24 of 34
Page 26
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
क्रम वशेषता इसम क्या स म्म लत है
01 सेना करद राज्य को नयंत्रण म रखने, साम्राज्य का वस्तार करने अथवा बाहरी आक्रमण से रक्षा हेतु सेना रखना
02 प्रशासन क्षेत्र के प्रबंधन, कर-संग्रह तथा व ध-व्यवस्था बनाए रखने के लए अ धका रय स हत प्रशासन बनाना और
चलाना
03 कानून और मुद्रा कानून बनाना, मुद्रा तथा माप-तौल जारी करना, व्यापार को नयं त्रत करना
04 संसाधन खान , वन एवं कृ ष-उपज तथा जनश क्त तक पहुँच को नयं त्रत और नय मत करना
05 संस्कृ त और कला, सा हत्य, धम, वचारधाराओं तथा व ा-कद्र को प्रोत्सा हत करना
व ा
06 संचार प्रशासन, व्यापार और लोक-कल्याण हेतु सड़क , नद व समुद्र माग तथा अन्य अवसंरचना का संचार तंत्र
बनाए रखना
साम्राज्य राज्य से कस प्रकार भन्न है:
राज्य साम्राज्य
वस्तार एक भूभाग, प्रायः एक ही जन-समूह का अनेक भूभाग; सीमा तक पहचु ँ ने में घोड़ े पर लगभग दो मास
संरचना राजा सीधे अपनी प्रजा पर शासन करता है समाट अन्य राजाओं पर शासन करता है, जो करद बन जाते है ं
उपा ध राजा सम ाज्, अिधराज, राजािधराज — ‘राजाओं का राजा’
आय अपनी प्रजा से कर कर तथा भेटं — स्वण, अ , पशु, हाथी — करद राजाओं से
न्न
जन प्रायः एक ही भाषा और परंपरा एक ही स त्ता के अधीन अनेक भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृ ितयाँ
नमाण प्रायः उत्तरा धकार से पायः युद्ध, गठबंधन और पड़ ोिसयों की अधीनता से
स्था यत्व तुलनात्मक रूप से स्थर और सुग ठत दुबल — दू रस्थ क्षेत्र सबसे पहले अलग होते है ं
एक पं क्त का अंतर: राज्य के पास प्रजा होती है; साम्राज्य के पास अधीन राजा होते ह।
प्र.2 राज्य से साम्राज्य म प रवतन के लए महत्वपूण कारक क्या ह?
अध्याय इन्ह चार शीषक म रखता है। मगध चार का सद्ध उदाहरण है।
1. भूगोल और प्राकृ तक संसाधन
उपजाऊ मैदान, जनसे अ धशेष अन्न मलता है — गंगा के मैदान, वष म दो फसल।
Page 25 of 34
Page 27
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
वन — इमारती लकड़ी, औष धयाँ और सबसे बढ़कर युद्ध-हाथी।
नकट के पवत से लौह अयस्क और ख नज — लोहे के हल से फसल बढ़ , लोहे के शस्त्र से सेना सशक्त हुई।
सचाई और सस्ते प रवहन के लए न दयाँ — गंगा और सोन।
2. अथव्यवस्था और व्यापार
अ धशेष अन्न से अ धक लोग कला और शल्प क ओर मुड़ सके, जनक माँग साम्राज्य के भीतर और बाहर दोन जगह थी।
व्यापा रक माग पर नयंत्रण से व्यापार क मात्रा और व वधता बढ़ — और इस लए कर-संग्रह भी।
मुद्रा: अथव्यवस्था के फलने-फूलने पर महापद्म नंद ने सक्के जारी करना आरंभ कया।
श्रे णय ने व्यापा रय और शल्पकार को संग ठत कया, और शासक क सहम त से काय कया।
3. सैन्य श क्त
वशाल स्थायी सेना — ग्रीक ववरण के अनुसार नंद वंश ऐसी सेना रखता था।
ेष्ठ लोहे के शस्त्र, अश्वारोही सेना और हाथी।
साम रक स्थल , जैसे साम्राज्य क सीमाओं पर दुगयुक्त ब स्तयाँ ( चत्र 5.4.2)।
4. नेतृत्व, कूटनी त और अवसर
महत्वाकांक्षी, योग्य शासक — अजातशत्रु, महापद्म नंद, चंद्रगुप्त मौय।
कुशल परामशदाता: कौ टल्य, जनके अथशास्त्र म रक्षा, अथव्यवस्था, प्रशासन, न्याय, नगर- नयोजन, कृ ष और लोक-कल्याण
स म्म लत ह।
कूटनी त — नष्ठा और भट के बदले स्थानीय राजाओं को शासन करने दे ना।
प्र त ं क दुबलता: धनानंद अत्यंत धनी होकर भी प्रजा का शोषण करने के कारण अत्यंत अलोक प्रय हो गया, जससे मौय
का माग प्रशस्त हुआ।
अिधशेष संसाधन + लोहा + व्यापार + योग्य ने त ृत्व → ऐसा कोष जो सेन ा का व्यय उठा सके → सामाज्य
प्र.3 एलेक्जडर को वश्व इ तहास म एक महान शासक माना जाता है, आपके वचार से ऐसा क्य है?
चार कारण से — और आरंभ म ही यह कह दे ना उ चत है क ‘महत्वपूण’ होना और ‘अच्छा’ होना एक बात नह ।
1. वजय का वस्तार और ग त। 334 से 323 सा.सं.पू. के बीच — मात्र ग्यारह वष म — उसने श क्तशाली फारसी साम्राज्य
को परा जत कर तीन महा प म फैला साम्राज्य खड़ा कया, जो वश्व इ तहास के सबसे बड़े साम्राज्य म से एक था। मृत्यु के
समय भी वह मात्र 32 वष का था।
2. उसने अलग-अलग संसार को जोड़ दया। अध्याय कहता है क “ग्रीक संस्कृ त का प्रभाव फैला”। ग्रीक, फारसी, म ी,
मध्य-ए शयाई और भारतीय जगत एक ही माग- ंखला पर आ गए।
3. उसने भारतीय-ग्रीक संपक के ार खोले। उत्तर-प म के क्षत्रप को चंद्रगुप्त ारा परा जत कए जाने के बाद कूटनी तक
संबंध बने — मेगस्थनीज चंद्रगुप्त के दरबार म आया और इं डका लखी, जो भारत का पहला वदे शी ल खत ववरण है। ग्रीक
अ भलेख नंद क सेना और भारतीय समाज के ववरण भी दे ते ह।
4. वह स्वयं एक कथा बन गया। जम्नोसो फस्ट से उसका संवाद और पुरु के साथ उसका व्यवहार 2,000 वष से श क्त और
ववेक के मलन के उदाहरण के रूप म दोहराए जाते ह।
Page 26 of 34
Page 28
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
दूसरा पक्ष, जो अ े उत्तर म अवश्य हो: अध्याय उसका म हमामंडन नह करता। उसने “कई नगर म नरसंहार
कया”। वह स्वयं गंभीर रूप से घायल हुआ। सै नक ने आगे बढ़ने से इनकार कर दया। लौटते समय प्यास, भूख
और बीमारी से भारी क्ष त हुई। मृत्यु के कुछ ही वष म उसके सेनाप तय ने साम्राज्य बाँट लया। वह इस लए
महत्वपूण है क उसके अ भयान ने क्या-क्या आरंभ कया, इस लए नह क वह टका।
प्र.4 प्रारं भक भारतीय इ तहास म मौय वंश को महत्वपूण माना जाता है। कारण बताएँ।
छह कारण, उसी क्रम म जस क्रम म अध्याय उन्ह रखता है।
1. उन्ह ने भारत का पहला वशाल साम्राज्य बनाया। लगभग 321 सा.सं.पू. म चंद्रगुप्त मौय ारा स्था पत यह साम्राज्य नंद
के क्षेत्र को मलाकर उत्तरी मैदान से दक्कन के पठार तक फैला; अशोक के समय यह सुदूर द क्षण को छोड़कर लगभग संपूण
उपमहा प पर था, जसम वतमान बांग्लादे श, पा कस्तान और अफगा नस्तान के कुछ भाग भी स म्म लत थे। इसने युद्धरत
राज्य क भू म को राजनी तक एकता द ।
2. उन्ह ने भारत को शासन का शास्त्र दया। कौ टल्य के अथशास्त्र ने सप्तांग सद्धांत, भ्रष्टाचार- वरोधी वधान और यह दशन
दया क प्रजा सव प र है — “प्रजा क प्रसन्नता म राजा क प्रसन्नता न हत है।”
3. उन्ह ने चलने योग्य प्रशासन बनाया। क्षेत्र के प्रबंधन, कर-संग्रह और व ध-व्यवस्था के लए अ धकारी; क्षेत्रीय राजधा नयाँ;
दूत; अकाल के वरुद्ध अन्न-भंडार — सोहगौरा ताम्रपत्र भारत के आरं भक प्रशास नक अ भलेख म से एक है।
4. उन्ह ने अथव्यवस्था सुदृढ़ क । सुर क्षत व्यापा रक माग, व्यापक आहत सक्के, सुव्यव स्थत कराधान, सशक्त कोष, और
अपने नयम स्वयं बनाने को स्वतंत्र े णयाँ।
5. अशोक ने राजा क प रभाषा बदल द । क लग के बाद उन्ह ने हसा त्यागी, धम का प्रसार कया, मनुष्य और पशुओं का
ध्यान रखा, सभी संप्रदाय को प्रोत्सा हत कया और वदे श म दूत भेजे — जो उन्ह वश्व इ तहास के सबसे असाधारण शासक
म से एक बनाता है।
6. उनक कला और वास्तुकला आज भी खड़ी है। पॉ लश कए स्तंभ, सारनाथ का स्तंभ-शीष (आज भारत का राष्ट्रीय
प्रतीक), साँची का महास्तूप, धौली का हाथी, बराबर पहा ड़य क शैलकृत गुफाएँ और टे राकोटा कला — साथ ही ाह्मी ल प
का प्रसार, जो भारत क क्षेत्रीय ल पय क जननी है।
क्या आप जानते ह? मौय क दो वस्तुएँ प्र त दन आपके साथ रहती ह — हर सरकारी दस्तावेज़ और सक्के पर
चार सह वाला शीष, और राष्ट्रीय ध्वज के मध्य म धमचक्र।
प्र.5 कौ टल्य के कुछ प्रमुख वचार क्या थे? इनम से कौन-से वचार आप आज भी आस-पास दे ख सकते ह?
कौ टल्य के प्रमुख वचार, अथशास्त्र से — ‘शासन और अथव्यवस्था का शास्त्र’:
1. सप्तांग — राज्य सात अंग से बनता है, जन्ह मलकर काय करना चा हए: राजा (स्वामी), मंत्री एवं उच्च अ धकारी (अमात्य),
भूभाग और उसक जनसंख्या (जनपद), दुगयुक्त नगर (दुग), कोष (कोष), रक्षा एवं व ध-व्यवस्था क श क्तयाँ (दं ड) तथा
सहयोगी ( मत्र)।
Page 27 of 34
Page 29
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
2. कल्याण ही श क्त का स्रोत है। “एक राजा को अपनी प्रजा के कल्याण को बढ़ावा दे कर अपनी श क्त म वृ द्ध करनी चा हए,
क्य क श क्त ग्राम-क्षेत्र से आती है, जो समस्त आ थक ग त व धय का ोत है।”
3. प्रजा सव प र है। “अपनी प्रजा क प्रसन्नता म राजा क प्रसन्नता न हत है, प्रजा क भलाई म उसक भलाई है। राजा को केवल
वही अच्छा नह मानना चा हए जो उसे प्रसन्न करे, ब ल्क जो उसक प्रजा को अच्छा लगे, उसे अपने लए भी वही लाभदायक
मानना चा हए।”
4. व ध-व्यवस्था के लए सशक्त प्रशासन आवश्यक है, साथ ही भ्रष्टाचार से नपटने के वस्तृत कानून और जन हत के वरुद्ध
काय के लए न दष्ट दं ड।
5. युद्ध और शां त दोन साधन ह। राज्य को “युद्ध और शां त के लए गठबंधन के माध्यम से” बनाए रखा जाना चा हए, जैसी
प र स्थ त हो।
6. हर क्षेत्र के लए दशा- नदश — रक्षा, अथव्यवस्था, प्रशासन, न्याय, नगर- नयोजन, कृ ष और लोक-कल्याण।
7. लोक- नमाण करने वाल पर अनुग्रह — तटबंध, सड़क-पुल, गाँव का स दय करण तथा उनक रक्षा।
आज भी क्या दखाई दे ता है:
कौ टल्य का वचार आज कहाँ दखता है
प्रजा का कल्याण ही राज्य का उ े श्य क ल्याणकारी योजनाएँ, जन-स्वास्थ् य, खाद्य सुरक्षा, हमारे संिवधान के नीित-िनदे शक तत्व
मंत्री और उच्च अ धकारी (अमात्य) मंित्रपिरषद और िसिवल से वाएँ
कोष कें द ीय बजट, कराधान, लोक -िवत्त
रक्षा एवं व ध-व्यवस्था (दं ड) सशस्त्र बल , पुिलस , न्यायालय
सहयोगी ( मत्र) िवदे श नीित, संिधयाँ, व्यापार समझौते, संयक्ु त रा
भ्रष्टाचार- वरोधी कानून भष्टाचार िनवारण कानून, सतक ता आयोग, ले खा-परीक्षा
समृ द्ध बढ़ाने वाले लोक- नमाण सरकार ारा बनाए गए बाँध, तटबंध, सड़ कें और पुल
अवसंरचना और नगर- नयोजन नगर-िनयोजन पािधकरण और नगरपािलका के िनयम
उनके वचार क्य टके रहे: कौ टल्य सुशासन का तक इस आधार पर नह दे ते क वह दयालु है, ब ल्क इस आधार
पर क केवल वही वास्तव म काम करता है। उजड़ा हुआ ग्राम-क्षेत्र कर नह दे ता; असंतुष्ट प्रांत वद्रोह करता है। यह
तक कभी पुराना नह पड़ता।
प्र.6 अशोक और उसके साम्राज्य के बारे म असाधारण बात क्या थ ? उनम से कौन-सी बात आज भी भारत को
प्रभा वत करती रही ह और क्य ? अपने वचार लगभग 250 शब्द म ल खए।
नमूना उत्तर (लगभग 250 शब्द):
Page 28 of 34
Page 30
as e
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय
a g l AglaSem · NCERT Solutions
प्राचीन काल के अ धकांश राजा अपनी वजय अं कत कराते थे। अशोक ने अपना प ात्ताप अं कत कराया। यही उनक पहली
co m
se
असाधारण बात है। अपने ही शलालेख म वे क लग पर कए गए भयंकर युद्ध का वणन करते ह और कहते ह क वहाँ का वनाश
m.
o m l a
g म दुलभ है।
सबसे कठोर काय.cलखकर, पत्थर पर, भावी पी ढ़य के पढ़ने के लए छोड़ जाए — वह कसी भीaशताब्द
और मृत्यु दे खकर उन्ह ने हसा त्याग द और यथासंभव बुद्ध ारा बताए शां त और अ हसा के माग को अपनाया। जो राजा अपना
m
se बात यह है क उसके बाद उन्ह ने शासन कैसे कया। उन्ह ने स्वयं को देवानाम पय पयद स कहा — ‘देवताओं
a
दूसरी lअसाधारण
g
केaप्रय’, ‘दूसर के प्र त दयालु’ — और नगर न्यायाध्यक्ष से कहा, “सब मनुष्य मेरी संतान के समान ह।” उन्ह ने साम्राज्य के बाहर
com
भी मनुष्य और पशुओं के लए च कत्सा उपलब्ध कराने क बात कही, पशुओं के शकार और उन पर क्रूरता पर प्र तबंध लगाया,
m .
फलदार और छायादार वृक्ष लगवाए, तथा मुख्य माग पर कुएँ और व ामगृह बनवाए। उन्ह ने हर संप्रदाय को दूसर क उ चत
ag
l a se
g कया। उनके शलालेख जनसामान्य क भाषा प्राकृत म और ब्राह्मी ल प म
शक्षाओं का अध्ययन करने के लए प्रोत्सा हत कया और ीलंका, थाईलड तथा मध्य ए शया तक दूत भेजे।
तीसरी बात यह क उन्ह ने अपनी प्रजा से संवादaही
उत्क ण थे — वही ल प जो भारत क क्षेत्रीय ल पय क जननी है — ता क केवल दरबार नह , प्रजा भी उन्ह समझ सके।
co m
m.
आज क्या शेष है? सारनाथ का सह-शीष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है और धमचक्र हमारे ध्वज के मध्य म है। परंतु गहरी वरासत
o m l a se
एक वचार है — शासक का कतव्य प्रजा का कल्याण है, भन्न मत आदर के योग्य ह, और अ हसा दुबलता नह , श क्त है। बीसव
.c ने ये वचार फर चुने। a g
se m
शताब्द म भारत
l a
ag सुझाव: य द शक्षक ठ क 250 शब्द माँग, तो ऊपर के चार अनुच्छेद के शब्द गनकर अं तम अनुच्छेद समायो जत
m
कर ली जए। ढाँचा वही र खए — क्या असाधारण था (2–3 बदु, प्रत्येक प्रमाण स हत) → आज क्या शेष है
a s
(प्रतीक, ध्वज और वचार) → वह क्य शेष है।
m.co agl
l a se
a g
com
दे वताओं के प्रय राजा पयदसी कहते ह — मेरे धम्मा धकारी सावज नक लाभ के लए अनेक वषय म व्यस्त ह।
.
प्र.7
se m
वे सभी संप्रदाय के सदस्य , तप स्वय और गृहस्थ दोन के बीच व्यस्त ह। मने कुछ को बौद्ध संघ, ाह्मण और
o m l a
.cऔर उनके कई प्रकार के कतव्य ह। मेरे धम्मा धकारी इन और अन्य संप्रदायagके वषय म व्यस्त ह। अशोक के
आजीवक ..... जै नय ..... और व भन्न संप्रदाय के लए नयुक्त कया है। अ धका रय क अनेक श्रे णयाँ ह
se m उपरोक्त शलालेख को पढ़ने के उपरांत, क्या आपको लगता है क वे अन्य धा मक वश्वास और वचारधाराओं
g l a
a के प्र त स हष्णु थे? अपने वचार कक्षा म साझा क जए।
se m
com g l a
m . a
ase
agl
हाँ — और यह शलालेख स हष्णुता से भी आगे क बात दखाता है: स क्रय सहयोग।
शलालेख के भीतर के प्रमाण:
co m
वे अनेक भन्न संप्रदाय का नाम लेते ह — बौद्ध संघ, ब्राह्मण, आजीवक, जैन “और व भन्न संप्रदाय” — और प्रत्येक के लए
m .
as e
अ धकारी नयुक्त करते ह। वे केवल अपने संप्रदाय का नाम नह लेते।
m l
.co a g
वे तप स्वय और गृहस्थ दोन को स म्म लत करते ह, अथात् संन्यासी भी और साधारण प रवार भी। कोई छू टता नह ।
a s em वे इसके पीछे राजक य अ धकारी और राजक य संसाधन लगाते ह। जो स हष्णुता कुछ खच न कराए, वह सरल है;
agl अ धका रय क पूरी ेणी नयुक्त करना नी त है।
.c
e m
इस काय को “सावज नक लाभ” के वषय कहा गया है — संप्रदाय समस्या नह , साम्राज्य के कल्याण का अंग माने गए ह।
om la s
. c
अध्याय के अन्य प्रमाण: अशोक ने “सभी संप्रदाय (उनके समय म प्रच लत व भन्न वचारधाराएँ) को एक-दूसरे क उ चत
a g
s e m करने के लए प्रोत्सा हत कया।” यह केवल दूसर को छोड़ देना नह है; यह उनसे
a
शक्षाओं को स्वीकार करने और उनका अध्ययन
agl
सीखने को कहना है।
com
m .
m ase
.co
a g l Page 29 of 34
Page 31
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
उ चत आप त्त, जो अ े उत्तर म होनी चा हए: अशोक ने स्वयं बुद्ध क शक्षाओं को अपनाया था और बुद्ध का संदेश फैलाने के
लए दूत भेजे थे। और यह उन्ह का शलालेख है — अध्याय चेतावनी दे ता है क “हम अशोक के सभी अ भलेख को शा ब्दक रूप
से स्वीकारने क आवश्यकता नह ।” अथात् हम शासक का अपने वषय म कथन पढ़ रहे ह।
संतु लत नष्कष: इतना मानकर भी यह शलालेख उल्लेखनीय है। उनके पास एक संप्रदाय का पक्ष लेने क पूरी श क्त थी, फर भी
उन्ह ने सावज नक रूप से, ल खत रूप म, स्थायी रूप से, पत्थर पर इसके वपरीत कया। उपलब्ध प्रमाण के आधार पर वे वास्तव
म स हष्णु थे, और स हष्णुता से भी आगे — उन्ह ने पंथ के बीच आदर को राज्य का कतव्य बनाया।
कक्षा-चचा के लए: पू छए क धम्मा धका रय क नयु क्त (क) धम को अपने हाल पर छोड़ दे ने के अ धक नकट
है, या (ख) उस आधु नक वचार के, जसम राज्य सभी धम के साथ समान व्यवहार करता है और प्रत्येक क रक्षा
करता है? अ धकांश व ाथ (ख) पर पहुँचते ह — और यह ध्यान दे ने योग्य है, क्य क हमारा सं वधान यही करता
है।
प्र.8 ाह्मी ल प एक लेखन प्रणाली थी जसका प्राचीन भारत म व्यापक रूप से उपयोग कया जाता था। इस ल प के
बारे म अ धक जानने का प्रयास क जए। जहाँ भी आवश्यक हो, अपने शक्षक से सहायता ली जए। एक लघु
काय प रयोजना बनाएँ और इस दौरान आपने ाह्मी ल प के बारे म जो कुछ भी सीखा, उसे संलग्न क जए।
यह प रयोजना-काय है, इस लए यहाँ व ध, अच्छ प रयोजना क अ नवाय सामग्री और एक नमूना रूपरेखा द गई है।
खोज कैसे कर: व ालय का पुस्तकालय, कक्षा 6 का ‘भारत क सांस्कृ तक जड़’ अध्याय और संग्रहालय क वेबसाइट दे खए;
शक्षक से अशोक के कसी शलालेख का चत्र खोजने म सहायता ली जए। आपक अपनी पुस्तक के पृष्ठ 106 का चत्र 5.18 —
गरनार शलालेख का एक अंश और दल्ली के टोपरा स्तंभ का ववरण — ब्राह्मी का वास्त वक नमूना है, वह से आरंभ क जए।
अ प रयोजना म क्या-क्या हो:
Page 30 of 34
Page 32
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
खंड उसम क्या रख
1. ाह्मी है क्या यह ल प है, भाषा नह । इसम प्राकृत (और बाद म संस्कृत, त मल आ द) लखी जाती थी। अध्याय इसे “भारत क
सभी क्षेत्रीय ल पय क जननी” कहता है।
2. कब और कहाँ सबसे स्पष्ट त थ वाले नमूने तीसरी शताब्द सा.सं.पू. के अशोक के शलालेख ह — उत्तर-प म म कंदहार और
मानसेहरा से द क्षण म ब्रह्म ग र और मस्क तक, तथा प म म गरनार से पूव म धौली तक (मान चत्र 5.17, पृष्ठ
105)।
3. यह काम कैसे प्रत्येक चह्न एक व्यंजन है जसम ‘अ’ स्वर अंत न हत होता है; अन्य स्वर छोट मात्राओं से दशाए जाते ह — यही
करती है सद्धांत आज दे वनागरी म है। लेखन बाएँ से दाएँ।
4. इसक संतान वंश-वृक्ष बनाइए: ब्राह्मी → दे वनागरी, बांग्ला, गुजराती, गुरुमुखी, ओ ड़या, त मल, तेलुगु, कन्नड, मलयालम, सहल,
तथा थाई और बम जैसी द क्षण-पूव ए शयाई ल पयाँ।
5. यह फर से शता ब्दय तक ब्राह्मी पढ़ने का ान लुप्त रहा। 1837 म जेम्स प्रसेप ने इसे फर से पढ़ा, जससे अशोक के शलालेख
कैसे पढ़ गई अंततः पढ़े जा सके।
6. आपका कुछ ब्राह्मी अक्षर और उनक दे वनागरी संतान क तुलना-ता लका, तथा ब्राह्मी म लखा अपना नाम। साथ म कसी
अपना अभ्यास शलालेख का चत्र या ध्यानपूवक बनाया रेखा चत्र।
7. संदभ-सूची प्रयुक्त प्रत्येक पुस्तक और वेबसाइट का नाम। सदै व।
ाह्मी इतनी महत्वपूण क्य है: इससे पहले हम भारत का अतीत भारत के अपने शब्द म नह पढ़ सकते — सधु
ल प आज भी अप ठत है। ब्राह्मी के साथ 2,300 वष पुराने सम्राट क आवाज़ हम तक सीधे पहुँचती है, बीच म
कसी बाद के लेखक के बना। और आज आप जो भी ल प पढ़ सकते ह, वह लगभग न त रूप से इसी क वंशज
है।
प्र.9 मान ली जए क आपको तीसरी शताब्द सा.सं.पू. म कौशांबी से कावेरीपट्टनम क यात्रा करनी है। आप यह यात्रा
कैसे करगे? इस यात्रा के दौरान आप कहाँ-कहाँ ठहरगे और आपको इसम कतना समय लगेगा?
पृष्ठ 92 के व्यापा रक माग-मान चत्र ( चत्र 5.5) का उपयोग क जए। कौशांबी द क्षणापथ पर है और कावेरीपट्टनम सुदूर द क्षण-
पूव तट का बंदरगाह है। अथात् यह प्राय प क लंबाई भर लगभग 1,800–2,000 कमी क यात्रा है।
यात्रा कैसे करूँगा: अकेले नह । म कसी श्रेणी ( गल्ड) ारा संग ठत व्यापा रय के कारवाँ के साथ चलूँगा — सामान के लए
बैलगा ड़याँ, साथ-साथ पैदल या सवारी, और वन-क्षेत्र के लए सशस्त्र रक्षक। प्रस्थान वषा ऋतु के बाद, शीत मास म, जब न दयाँ
पार करने योग्य ह और माग सूखे ह ।
Page 31 of 34
Page 33
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
चरण माग लगभग पड़ाव और वहाँ क्या
1 कौशांबी → उज्ज यनी, द क्षणापथ से ~600 िकमी, बड़ा व्यापा रक नगर और मौय क क्षेत्रीय राजधानी। व ाम,
लगभग 3–4 गा ड़य क मरम्मत, माल का आदान-प्रदान, आगे के माग क
स प्ताह जानकारी।
2 उज्ज यनी → प्र तष्ठान, नमदा और ~500 िकमी, सबसे क ठन चरण — पहाड़, वन, नद -घाट। केवल दन म
वध्य-सतपुड़ा पार कर दक्कन के पठार लगभग 3 स प्ताह यात्रा; समूह म पड़ाव।
पर
3 प्र तष्ठान → सुवण ग र, दक्कन पार ~450 िकमी, मौय क एक और क्षेत्रीय राजधानी। अन्न और जल क पू त;
करते हुए लगभग 2–3 पठार शुष्क है।
स प्ताह
4 सुवण ग र → कांचीपुर → तट पर ~450 िकमी, कावेरी क्षेत्र और चोल भू म से होते हुए बंदरगाह तक।
कावेरीपट्टनम लगभग 2–3
स प्ताह
कु ल दू री ≈ 2,000 िकमी
बैलगाड़ ी कारवाँ की गित ≈ पितिदन 20–25 िकमी
2,000 ÷ 22 ≈ 90 िदन की यात्रा
+ िवश्राम, पव, नदी की पतीक्षा, बाज़ार के पड़ ाव ≈ 25–35 िदन
≈ 4 मास, या कु छ अिधक
तेज़ और धीमे वकल्प: घोड़े बदलता हुआ अकेला राजक य दूत यह दूरी संभवतः 6–8 सप्ताह म तय कर लेता। हर नगर म क्रय-
वक्रय करता भारी व्यापा रक कारवाँ छह मास भी ले सकता था। यात्रा का कुछ भाग समुद्र से भी हो सकता था — ताम्र ल प्त या
क लगनगर जैसे पूव तट के बंदरगाह से द क्षण क ओर पाल खोलकर — परंतु यह पवन-ऋतु पर नभर था।
उत्तर म ईमानदारी र खए: कसी प्राचीन ोत म इस माग क समय-सारणी नह मलती। हम वही कर सकते ह जो
इ तहासकार करता है — मान चत्र से दूरी ली जए, बैलगा ड़य क व्यावहा रक दै नक ग त ली जए और उ चत पड़ाव
जो ड़ए। अपने उत्तर म यह बात और अपनी गणना अवश्य ल खए।
अध्याय — एक नज़र म
साम्राज्य अनेक छोटे राज्य या क्षेत्र का समूह होता है, जन पर कोई एक श क्तशाली शासक अ धकार रखता है। छोटे राजा
अपने सहासन पर बने रहते थे, परंतु करद (भट दे ने वाले) बन जाते थे और सम्राट क अ धसत्ता स्वीकार करते थे।
साम्राज्य छह स्तंभ पर टका होता है — सेना, प्रशासन, कानून, मुद्रा तथा माप-तौल, संसाधन पर नयंत्रण, कला एवं
व ा का प्रोत्साहन, तथा सड़क और जल-माग का संचार तंत्र।
Page 32 of 34
Page 34
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions
साम्राज्य का खच व्यापार से चलता था। व्यापारी श्रे णय ( गल्ड् स) म संग ठत थे, जनका प्रमुख प्रायः नवा चत होता था
और जो अपने नयम स्वयं बनाती थ ; राजा हस्तक्षेप नह करता था। उत्तरापथ और द क्षणापथ दो प्रमुख व्यापा रक माग थे।
मगध का उदय गंगा के उपजाऊ मैदान , इमारती लकड़ी और हा थय वाले वन , नकटवत पवत के लौह अयस्क तथा गंगा व
सोन न दय के कारण हुआ। अजातशत्रु, फर महापद्म नंद ने इसे सशक्त कया; अलोक प्रय धनानंद ने इसे गँवा दया।
एलेक्जडर 327–325 सा.सं.पू. म पंजाब पहुँचा, पुरु को परा जत कर उसे क्षत्रप बनाया, परंतु थके सै नक ने गंगा क ओर
बढ़ने से इनकार कर दया। 32 वष क आयु म बेबीलोन म उसक मृत्यु हुई। भारत पर उसका राजनी तक प्रभाव सी मत था,
सांस्कृ तक संपक अ धक महत्वपूण रहा।
मौय (लगभग 321–185 सा.सं.पू.) ने भारत का पहला वशाल साम्राज्य बनाया। कौ टल्य के अथशास्त्र ने उसे सप्तांग
सद्धांत और लोक-कल्याण का दशन दया; अशोक (268–232 सा.सं.पू.) ने क लग के बाद युद्ध त्याग दया और ब्राह्मी
ल प म लखे प्राकृत शलालेख से प्रजा तक अपनी बात पहुँचाई।
साम्राज्य एक वरोधाभास ह — वे राजनी तक एकता और समृ द्ध लाते ह, परंतु बल से बनते और बल से ही टके रहते ह,
इस लए भीतर से दुबल होते ह।
Page 33 of 34
Page 35
as e
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 5 साम्राज्य का उदय
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
त्व रत पुनरावृ त्त
m l a se
m .coअथ ag याद रखने का सूत्र
ase
शब्द अध्याय म कहाँ
agl
साम्राज्य अनेक छोटे राज्यों या क्षेत्र ों का समूह, िजन पर एक ‘साम्राज्य क्या है?’, पृष्ठ
87
लै टन imperium = ‘सव च्च
श क्त’
शिक्तशाली शासक अिधकार रखता है और राजधानी से
co m
ag
शासन करता है
m .
as e
l
करद राज्य वह शासक या राज्य जो समाट के अधीन हो गया है और हा शये क टप्पणी, पृष्ठ सहासन बचा, स्वतंत्रता गई
( ब्यूटरी)
a g
भेटं — स्वण, अन्न, पशु, हाथी — दे ता है 87
co m
सम्राज्, अ धराज, समाट के िलए संस्कृ त शब्द — ‘सबका स्वामी’, पृष्ठ 87 तीन शब्द, एक भाव — राजाओं
m.
राजा धराज ‘अिधपित’, ‘राजाओं का राजा’ के ऊपर का राजा
m l a seप्र तस्पध नह , सहयोगी
.co व्यापािरयों, िशल्पकारों, साहूकारों या कषकों का ag
ेणी ( गल्ड) ृ ‘व्यापार, व्यापा रक माग
a s em शिक्तशाली संग ठन, िजसका पमुख िनव िचत होता था तथा े णयाँ’, पृष्ठ 91–93
g / l
aउत्तरापथ चत्र 5.5, पृष्ठ 92 उत्तर + पथ, द क्षण + पथ
उपमहा ीप के उत्तरी और दिक्षणी महामाग
a s
द क्षणापथ
. com agl
जनपद, दुग , कोष, दंड, िमत्र as
em
सप्तांग कौिटल्य के राज्य के सात अंग — स्वामी, अमात्य, चत्र 5.15, पृष्ठ 102 सप्त = सात, अंग = भाग
agl
अथशास्त्र कौिटल्य की पिसद्ध कृ ित — ‘शासन और अथव्यवस्था का पृष्ठ 101–103 प्रजा क प्रसन्नता म राजा क
m
.co
शास्त्र’ प्रसन्नता
se m पुरु एलेक्जडर का क्षत्रप बना
क्षत्रप
com
फारसी और ग ीक सामाज्यों में पांतों का शासक, िजसे
g l a
इसे अनदे खा न कर, पृष्ठ
m . a
e
समाट पीछे छोड़ जाता था 97
a s
agl शलालेख राजा या अिधकािरयों ारा जनिहत के िलए की गई हा शये क टप्पणी, पृष्ठ अशोक के संदेश चट्टान और
se m
आिधकािरक घोषणा 104 स्तंभ पर
अशोक का स्वयं के िलए पयुक्त नाम —c‘दे om g l a
दे वानाम पय
िपय’ तथा ‘दू स रों के पित दयालुe’ m
. वताओं के पृष्ठ 106 राजा स्वयं को कैसे याद
a
l as
पयद स रखवाना चाहता था
धम (धम्म) नैितक िनयम तथा पिरवार,
g
a समुदाय व रा के पित कतव्य; इसे अनदे खा न कर, पृष्ठ कतव्य, नयम, सत्य, व्यवस्था
m
गहरे अथ में ऋतम् के अनुस ार जीवन-यापन 107 और नै तकता — सब एक साथ
इसे अनदे खा न कर, पृm . c o
अंड
m
स्तूप के कें द की बड़ी अधगोलाकार संर चना; यह ब ांड
a s e ष्ठ उपासक इसक प रक्रमा करते
. co
का पितिनिधत्व करती है 112
a g l ह — प्रद क्षणा
e m
g l as
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 34 of 34