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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 12: गंगा क कहानी
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
143 – 160 11 39 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 45 pages
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 12: गंगा क कहानी
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 12 गंगा क कहानी के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह पुस्तक का अं तम पाठ है। यह एक
आत्मकथात्मक वणन है — यानी ऐसी रचना जसम कोई अपनी कहानी अपने ही मुँह से सुनाता है। यहाँ गंगा नद स्वयं ‘म’ कहकर अपनी यात्रा
सुनाती है — हमालय क गोद म जन्म, गोमुख से नकलना, दे वप्रयाग, ऋ षकेश, ह र ार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना, भागलपुर,
कोलकाता होते हुए अंत म बंगाल क खाड़ी म समुद्र से मल जाना। पुस्तक म इस पाठ के साथ कसी रचनाकार का नाम नह छपा है — न पृष्ठ 143
पर, न पाठ के अंत म पृष्ठ 145 पर। इसी अध्याय म पाठ के बाद बना क्रमांक क एक और रचना है — गगनयान (पृष्ठ 153 से 157), जो कक्षा म हुई
बातचीत के रूप म लखा गया एक संवाद है। पृष्ठ 143 से 160 तक छपे हर अभ्यास का पूरा हल यहाँ है — बातचीत के लए, पाठ से, मलान
क जए, भाषा क बात, समझ और अनुभव, कलाकारी, गंगा से बातचीत, पुस्तकालय एवं अन्य ोत, इसे भी जा नए तथा अं तम पृष्ठ क
आपक अ भव्य क्त। ‘पाठ से’ क बहु वकल्पी अभ्यास म नदश छपा है — “ नम्न ल खत प्रश्न के सही उत्तर पर जल क बूँद का चत्र ( 💧)
बनाइए। एक से अ धक वकल्प भी सही हो सकते ह—”, इस लए यहाँ हर वकल्प क जाँच अलग-अलग क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 143 – 160
खं ड प्रश्न
11 39
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 146
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पाठ पढ़ने के बाद कक्षा म मलकर बात करने के चार प्रश्न — चत्र म दखाए पानी के ोत पहचानना, अपने आस-पास क न दयाँ, घर म पानी
कहाँ से आता है, और न दय के जल को प्रदू षत होने से कैसे बचाएँ
बातचीत के लए
प्र.1 नीचे दए गए चत्र को दे खए और इसम दखाए गए पानी के ोत का नाम बताइए —
पृष्ठ 146 पर दए गए छह चत्र। हर चत्र के नीचे नाम लखने के लए एक खाली खाना बना है।
पुस्तक म छह चत्र दए गए ह। हर चत्र म पानी का एक ोत दखाया गया है। ोत यानी वह जगह जहाँ से कोई चीज़ मलती है।
नीचे छह खाने भरे हुए ह — चत्र का क्रम बाएँ से दाएँ, ऊपर से नीचे है।
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क्रम चत्र म क्या दखता है खाने म क्या यह ोत कैसा है
ल खए
1 — ऊपर पेड़ और पहाड़ के बीच बहती हुई टे ढ़ -मेढ़ नदी बहता हुआ मीठा पानी। यही पाठ क गंगा भी
बाएँ जलधारा है।
2 — ऊपर ऊँची च ान से नीचे गरता हुआ पानी झरना (जलपपात) पहाड़ से ऊपर से नीचे गरता पानी।
दाएँ
3 — बीच ठं डे समुद्र म तैरते हुए बफ़ के बड़े-बड़े टु कड़े िहमनद की बफ़ जमी हुई बफ़। पघलकर यही नद बनती है —
बाएँ (िहमखंड) जैसे गंगोत्री हमनद से गंगा।
4 — बीच पत्थर से बना गोल ग ा, ऊपर लकड़ी क कु आँ ज़मीन के भीतर का पानी, जो बाल्ट से ख चा
दाएँ घरनी और रस्सी से लटक बाल्ट जाता है।
5 — नीचे हरे रंग का हडपंप, जसक ट ट से पानी बाल्ट हैडं पंप (नलकू प) ज़मीन के भीतर का पानी, जो हत्थे से ख चा
बाएँ म गर रहा है जाता है।
6 — नीचे पत्थर और घास से घरा छोटा-सा भरा हुआ तालाब (पोखर ) एक जगह ठहरा हुआ पानी, जो प्रायः बरसात से
दाएँ ग ा भरता है।
दो तरह के ोत: इन छह म से नद , झरना, हमनद और तालाब ज़मीन के ऊपर दखाई दे ने वाले ोत ह। कुआँ
और हडपंप ज़मीन के भीतर के पानी तक पहुँचने के रास्ते ह। नद , झरना और तालाब का पानी दूर से भी दख
जाता है, पर कुएँ और हडपंप का पानी खोदकर या पंप लगाकर ही नकालना पड़ता है।
ध्यान द जए: तीसरा चत्र सीधे पाठ से जुड़ता है। गंगा भी गंगोत्री हमनद क बफ़ से ही नकलती है — “म
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद म स्थत गंगोत्री हमनद के उस स्थान से नकली जसे गोमुख कहते ह।” यानी बफ़
पघलती है, तब नद बनती है।
प्र.2 आपके नवास स्थान के आस-पास कौन-सी नद /न दयाँ बहती है/ह?
यह आपके अपने गाँव या शहर का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर ब े का अलग होगा। पता करने के तीन आसान तरीके ह —
1. घर म बड़ से पू छए — “हमारे यहाँ से सबसे पास कौन-सी नद है?”
2. व ालय क द वार पर लगे या पुस्तक म छपे अपने राज्य के मान चत्र म नीली रेखाएँ दे खए। न े म नद नीली रेखा से दखाई
जाती है।
3. अपने आस-पास के पुल, घाट या स्नान-स्थल का नाम पू छए — नाम म प्रायः नद का नाम छपा होता है।
भारत के कुछ नगर के पास बहने वाली न दयाँ नीचे द ह। इससे आपको अपने उत्तर का ढाँचा समझ आ जाएगा —
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी
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नगर पास बहने वाली नद
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वाराणसी, कानपुर , पटना गंगा
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िदल्ली, आगरा, मथुर ा
लखनऊ गोमती
co m साबरमती
अहमदाबाद
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नािसक
a गोदावरी
श्रीरंग पट्टणम, बेगं लुरु के पास कावेर ी
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बह्मपुत्र
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कोलकाता हगु ली (गंगा की धारा)
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नमूना उत्तर: मेरे गाँव के पास गंगा नद बहती है। वह मेरे घर से लगभग तीन कलोमीटर दूर है। बरसात म उसका
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पानी बहुत बढ़ जाता है। गरमी म वह पतली हो जाती है और बीच म रेत के ट ले दखने लगते ह। गाँव के लोग वह
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घाट पर स्नान करने जाते ह। पास ही एक छोट नद भी है जो आगे जाकर गंगा म मल जाती है।
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य द आस-पास कोई नद न हो: तो यही ल खए — “मेरे नवास स्थान के पास कोई नद नह बहती।” फर
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बताइए क पानी कहाँ से मलता है — नहर से, तालाब से, कुएँ से या नलकूप से। सच लखना ही सही उत्तर है।
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a g प्र.3 आपके घर म पानी कहाँ से आता है?
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g l asहै। घर म पानी प्रायः इन रास्त से आता है —
यह भी अपने घर को दे खकर बताने वाला प्रश्न
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रास्ता पानी असल म कहाँ से आता है कहाँ अ धक मलता है
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m शहर और बड़े कस्बे
नगर िनगम या पंचायत का नल
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नदी या बड़ े तालाब का पानी, िजसे साफ़ करके पाइप से भेजा जाता है
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ज़मीन के भीतर का भूजल गाँव
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कु आँ ज़मीन के भीतर का भूजल गाँव और पुराने मुहल्ले
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बोरवेल और मोटर पंप ज़मीन के काफ़ ी नीचे का भूजल गाँव और शहर, दोन
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छत की पानी की टंक ी
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नल या मोटर से भरा गया वही पानी पक्के मकान
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नमूना उत्तर: मेरे घर म पानी नगर नगम के नल से आता है। यह पानी पाइप से आता है और हम उसे छत क टं क
म भर लेते ह। हमारे आँगन म एक हडपंप भी लगा है। बजली चली जाने पर हम उसी हडपंप से पानी भरते ह। पीने
के लए माँ पानी छानकर रखती ह।
पाठ से जो ड़ए: पाठ म गंगा कहती है — “बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए ह। कई कारखाने खुल गए ह। इन
सबको म ही पानी पहुँचाती ँ।” यानी नल का पानी भी अंत म कसी नद से ही आता है। नद साफ़ रहेगी, तभी
हमारे नल का पानी भी साफ़ मलेगा।
प्र.4 आप न दय के जल को प्रदू षत होने से कस प्रकार बचा सकते ह? इस बारे म कक्षा म चचा क जए।
सबसे बड़ी बात यह है क नद म कोई गंद चीज़ न डाली जाए। हम ब े भी बहुत कुछ कर सकते ह। नीचे वे काम दए ह जो
सचमुच हमारे हाथ म ह —
1. नद म कूड़ा न डाल। पॉली थन, प्ला स्टक क बोतल, कागज़ और खाने का बचा हुआ सामान कूड़ेदान म ही डाल।
2. नद म साबुन-शपू लगाकर न नहाएँ और कपड़े नद म न धोएँ। साबुन का झाग पानी को गंदा करता है।
3. जानवर को नद के भीतर ले जाकर न नहलाएँ। कनारे पर बाल्ट से नहलाना ठ क रहता है।
4. पूजा क साम ी — फूल, माला, मू त, तेल — नद म न बहाएँ। इसके लए बने अलग ग े या पात्र म डाल।
5. घर का गंदा पानी सीधे नद या नाले म न जाने द, यह बड़ से कह।
6. पानी बचाएँ। नल खुला न छोड़, टपकते नल को ठ क कराएँ। कम पानी बरतगे तो कम गंदा पानी बनेगा।
7. दूसर को समझाएँ। मत्र और घरवाल से कह, व ालय म पोस्टर बनाएँ, ‘नद हमारी माँ है’ जैसी नारे-प लगाएँ।
8. सफ़ाई म हाथ बँटाएँ। य द व ालय या मुहल्ले म घाट-सफ़ाई का काम हो, तो बड़ के साथ जाकर जुड़।
ऐसा क्य ज़रूरी है: पाठ बताता है क गंगोत्री से नकलते समय गंगा का रूप चाँद जैसा चमक ला रहता है, पर
काशी पहुँचते-पहुँचते वह मटमैला हो जाता है — “कारखान और शहर का गंदा पानी मेरे जल को दू षत कर दे ता
है।” यह गंदगी नद ने नह क , हमने क है। इस लए इसे रोकना भी हमारा ही काम है।
कक्षा म चचा कैसे क जए: कक्षा को चार समूह म बाँ टए। पहला समूह बताए क नद गंद कैसे होती है, दूसरा
बताए क गंदे पानी से क्या नुकसान होता है, तीसरा बताए क हम ब े क्या कर सकते ह, और चौथा एक नारा या
पोस्टर बनाए। अंत म सब मलकर एक ‘नद -प्र त ा’ लखकर कक्षा क द वार पर लगाइए।
पाठ से — पृष्ठ 147 और 148
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तीन अभ्यास — 1. बहु वकल्पी प्रश्न, जनका नदश है “ नम्न ल खत प्रश्न के सही उत्तर पर जल क बूँद का चत्र ( 💧) बनाइए। एक से अ धक
✓
वकल्प भी सही हो सकते ह—”; 2. लेखन-पु स्तका म लखने वाले प्रश्न; 3. सही कथन के आगे ( ) और गलत कथन के आगे ( ) का चह्न ✗
लगाना। यहाँ हर वकल्प और हर कथन क जाँच अलग-अलग क गई है।
पाठ से बहु वकल्पी
प्र.1 (क) “मेरा जन्म हमालय क गोद म हुआ था।” इस वाक्य म ‘मेरा’ शब्द कसके लए आया है? (i) गोमुख (ii)
गंगा नद (iii) पवत (iv) नगर
सही वकल्प — (ii) गंगा नद । इसी के आगे जल क बूँद का चत्र ( 💧) बनाइए।
पूरा पाठ गंगा अपने मुँह से सुनाती है। इस लए हर जगह ‘म’ और ‘मेरा’ का अथ है — गंगा। पाठ क पहली ही पं क्त दे खए —
“मेरा जन्म िहमालय की गोद में हुआ था। न न्ही-सी धारा के रूप में मै ं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में िस्थत
गंगोत्री िहमनद के उस स्थान से िनकली िजसे गोमुख कहते है।ं ”
अब एक-एक वकल्प जाँ चए —
वकल्प सही या कारण
गलत
(i) गोमुख गलत ✘ गोमुख एक स्थान है — गंगोत्री हमनद का वह मुँह जहाँ से गंगा नकलती है। बोलने वाली गंगा है, गोमुख नह ।
पाठ स्वयं कहता है — “म… उस स्थान से नकली जसे गोमुख कहते ह।” यानी गोमुख वह जगह है जहाँ से
‘म’ नकली।
(ii) गंग ा सही ✔ पाठ का शीषक ही ‘गंगा क कहानी’ है और पूरी कहानी गंगा अपने मुँह से सुनाती है — “मेरा नाम भागीरथी
नदी भी है”, “म वाराणसी पहुँचती ँ”, “अंत म म बंगाल क खाड़ी म समुद्र से मल जाती ँ।”
(iii) पवत गलत ✘ पवत का जन्म नह होता और वह बहता भी नह । वाक्य कहता है “ हमालय क गोद म” — यानी बोलने वाली
हमालय के भीतर जन्मी है, वह स्वयं पवत नह है।
(iv) नगर गलत ✘ नगर पाठ म आते ज़रूर ह — ऋ षकेश, ह र ार, कानपुर, प्रयागराज — पर वे गंगा के तट पर बसे ह। गंगा
कहती है — “बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए ह।” इससे साफ़ है क ‘मेरा’ नगर के लए नह आया।
याद रखने क बात: जब कोई रचना ‘म’ कहकर लखी जाए, तो वह आत्मकथा कहलाती है। यहाँ लेखक ने नद
को ही बोलने दया है, इस लए पूरी यात्रा कसी सहेली क सुनाई कहानी जैसी लगती है।
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प्र.1 (ख) “ले कन मुझे अब इस बात क प्रसन्नता है क इस ओर लोग का ध्यान गया है।” यहाँ कस ओर ध्यान जाने
क बात कही गई है? (i) गंगा म प्रदूषण क ओर (ii) गंगा के चमक ले रंग क ओर (iii) गंगा जल क
प वत्रता क ओर (iv) गंगा क धाराओं क ओर
सही वकल्प — (i) गंगा म प्रदूषण क ओर। इसी के आगे जल क बूँद का चत्र ( 💧) बनाइए।
इस वाक्य से ठ क पहले क्या लखा है, वह दे खए। ‘इस ओर’ का अथ उसी पछली बात से खुलता है —
“िकं तु मुझे दुख है िक काशी पहुँच ते -पहुँच ते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है।
कारखानों और शहरों का गंद ा पानी मेरे जल को दू िषत कर दे ता है।
लेिकन मुझे अब इस बात की पसन्नता है िक इस ओर लोगों का ध्यान गया है।
मेरे जल को शुद्ध करने के पयास आरंभ हो गए है।ं ”
यानी ‘इस ओर’ = जल के दू षत होने क ओर, यानी प्रदूषण क ओर।
वकल्प सही या कारण
गलत
(i) गंग ा में पदू षण सही ✔ पछली ही पं क्त म प्रदूषण क बात है — “गंदा पानी मेरे जल को दू षत कर दे ता है।” और अगली पं क्त
की ओर म उसका उपाय — “मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए ह।” दोन के बीच रखा ‘इस ओर’
प्रदूषण क ही ओर संकेत करता है।
(ii) गंग ा के गलत ✘ चमक ला रंग तो गंगा का अपना रूप है — “गंगोत्री से नकलते समय मेरा चाँद जैसा चमक ला रूप रहता
चमकीले रंग की है।” उस पर लोग का ध्यान जाने क कोई बात पाठ म नह है। ध्यान उस पर गया जो बगड़ा है, उस पर
ओर नह जो पहले से अच्छा है।
(iii) गंग ा जल गलत ✘ पाठ कहता है — “मुझे भारतवासी प वत्र नद मानते ह।” यानी प वत्रता तो लोग पहले से ही मानते आए
की पिवत्रता की ह, यह कोई नई बात नह जस पर अब ध्यान गया हो। कुछ ब े इसे इस लए चुन लेते ह क जल शुद्ध
ओर करने का प्रयास प वत्रता से जुड़ा लगता है — पर वाक्य म ‘इस ओर’ सीधे पछली पं क्त क गंदगी क
ओर लौटता है।
(iv) गंग ा की गलत ✘ धाराओं क बात पाठ म बहुत पहले, प म बंगाल के प्रसंग म आई है — “प म बंगाल म मेरी दो धाराएँ
धाराओं की ओर हो जाती ह।” उसका इस वाक्य से कोई संबंध नह है।
पढ़ने का तरीका: जब वाक्य म ‘इस ओर’, ‘यह’, ‘वह’, ‘इसी से’ जैसे शब्द आएँ, तो उत्तर हमेशा ठ क पछले
वाक्य म मलता है। एक पं क्त पीछे लौटकर प ढ़ए — उत्तर अपने-आप दख जाएगा।
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प्र.1 (ग) जल प्रदूषण कन कारण से होता है? (i) कारखान और नगर ारा न दय म डाले जाने वाले अप शष्ट से
(ii) कारखान के धुए ँ से (iii) नद तथा तालाब म स्नान करने से (iv) तेज आवाज म भ पू बजाने से
इस प्रश्न म एक से अ धक वकल्प सही ह — नदश भी यही कहता है। सही वकल्प — (i) और (iii)। दोन के आगे जल क
बूँद का चत्र ( 💧) बनाइए।
पहले यह समझ ली जए क जल प्रदूषण क्या है — जब पानी म कोई ऐसी चीज़ मल जाए जससे वह गंदा और पीने लायक न रहे,
तब जल प्रदूषण होता है। इस लए वही कारण सही ह गे जो पानी के भीतर कुछ गंदा डालते ह।
वकल्प सही या कारण
गलत
(i) कारखानों और नगरों ारा सही ✔ यही पाठ का मुख्य कारण है — “कारखान और शहर का गंदा पानी मेरे जल को दू षत कर
निदयों में डाले जाने वाले दे ता है।” अप शष्ट यानी बचा-खुचा कूड़ा-कचरा जो फक दया जाता है। वह सीधे नद म
अपिशष्ट से जाता है, इस लए जल गंदा होता है।
(ii) कारखानों के ध एु ँ से गलत ✘ धुआँ हवा म मलता है, पानी म नह । इससे वायु प्रदूषण होता है, जल प्रदूषण नह । पाठ ने
भी धुएँ क नह , गंदे पानी क बात क है।
(iii) नदी तथा तालाब में स्नान सही ✔ जब लोग नद या तालाब के भीतर घुसकर साबुन-तेल लगाकर नहाते ह, वह कपड़े धोते ह
करने से और जानवर को नहलाते ह, तो साबुन का झाग, मैल और गंदगी सीधे पानी म मल जाती है।
इसी लए यह भी जल प्रदूषण का एक कारण है।
(iv) तेज आवाज में भोंपू बजाने गलत ✘ तेज़ आवाज़ से ध्व न प्रदूषण होता है। आवाज़ पानी को गंदा नह करती। भ पू यानी हॉन
से — उससे कान को परेशानी होती है, नद को नह ।
तीन तरह के प्रदूषण एक साथ याद क जए: जो चीज़ पानी म मले — जल प्रदूषण। जो हवा म मले — वायु
प्रदूषण। जो आवाज़ से हो — ध्व न प्रदूषण। वकल्प पढ़ते ही सो चए क गंदगी कहाँ जा रही है, उत्तर तुरंत मल
जाएगा।
सुझाव: य द नहाना ही हो तो नद के कनारे बाल्ट म पानी लेकर नहाइए और साबुन का पानी नद म न जाने
द जए। कपड़े भी घाट पर नह , घर पर धोइए।
प्र.1 (घ) “यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।” इस वाक्य म ‘संगम’ शब्द का भाव है — (i) एक से अ धक न दय का
आपस म मलना (ii) वपरीत दशा क ओर बहना (iii) दो धाराओं म बँट जाना (iv) दो धाराओं का मलकर
बहना
इस प्रश्न म भी दो वकल्प सही ह। सही वकल्प — (i) और (iv)। दोन के आगे जल क बूँद का चत्र ( 💧) बनाइए।
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संगम का अथ है — दो या दो से अ धक न दय का आकर आपस म मल जाना और फर एक साथ बहना। पाठ म यह प्रयाग राज
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का प्रसंग है —
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“कानपुर से चलकर मै ं पयागराज पहुँच ती हूँ।
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aयहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।”
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वकल्प सही या कारण
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(i) एक से अिधक निदयों प्रयागराज म गंगा और यमुना — दो न दयाँ — आकर मलती ह। यही संगम का सीधा अथ है।
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का आपस में िमलना पाठ म एक और उदाहरण भी है — “दे वप्रयाग म मुझसे अलकनंदा आ मली।”
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(ii) िवपरीत िदशा की ओर गलत ✘
आकर मलती ह और फर एक ही दशा म साथ बहतीa g l
वपरीत यानी उलट दशा। संगम म न दयाँ उलट दशा म नह जात , ब ल्क एक-दूसरे क ओर
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बहना ह।
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gl(iii) दो धाराओं में बँट
a गलत ✘ यह तो संगम का ठ क उलटा है। बँटना अलग बात है, मलना अलग। पाठ म बँटने का उदाहरण
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जाना अलग जगह आया है — “प म बंगाल म मेरी दो धाराएँ हो जाती ह।” वह संगम नह है।
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(iv) दो धाराओं का संगम के बाद दोन न दय का पानी अलग-अलग नह रहता, एक ही धारा बनकर आगे बहता है।
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गंगा और यमुना प्रयागराज के बाद एक होकर ही आगे जाती ह। इस लए यह वकल्प भी ठ क
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चत्र से सम झए: दो उँ ग लय को अलग-अलग रखकर आगे लाकर जोड़ द जए — यही संगम है। अब एक उँ गली
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को दो ओर फैलाइए — यह बँटना है, जो प म बंगाल म होता है। मलना और बँटना, दोन नद के जीवन म होते ह,
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म’ केवल मलने को कहते ह।
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प्र.2 (क) गंगा नद के कनारे बसे कुछ नगर के नाम ल खए।
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पाठ म गंगा अपनी पूरी यात्रा सुनाती है और रास्ते म पड़ने वाले नगर के नाम बताती जाती है। नीचे वे सब नाम क्रम से दए गए ह —
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क्रम नगर / स्थान कस राज्य पाठ इसके बारे म क्या कहता है
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1 गंगोत्री उत्तराखंड “गोमुख से थोड़ा नीचे गंगोत्री म मेरा भव्य मं दर है जहाँ दे शभर से तीथयात्री आते
ह।”
2 दे वपयाग उत्तराखंड “दे वप्रयाग म मुझसे अलकनंदा आ मली।”
3 ऋिषके श उत्तराखंड “ऋ षकेश और ह र ार मेरे कनार पर बसे प्र सद्ध तीथ ह।”
4 हिर ार उत्तराखंड “ह र ार म हर बारह वष बाद कुंभ का मेला लगता है।”
5 कानपुर उत्तर प्रदे श “कानपुर भारत का प्र सद्ध औ ो गक नगर है।”
6 पयागराज उत्तर प्रदे श “यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।”
7 वाराणसी (काशी) उत्तर प्रदे श “इस नगर का दूसरा नाम काशी है। यह बहुत बड़ा तीथ है।”
8 पटना बहार “यहाँ से पटना, भागलपुर आ द नगर से होती हुई…”
9 भागलपुर बहार “…पटना, भागलपुर आ द नगर से होती हुई म प म बंगाल म प्रवेश करती ँ।”
10 कोलकाता प म बंगाल “दूसरी धारा कोलकाता (कलकत्ता) क ओर जाती है। वहाँ मुझे हुगली भी कहते
(कलक त्त ा) ह।”
पूरी यात्रा एक नज़र म —
गोमख
ु गंगोत्री
देवपयाग
ऋिषकेश
हिर ार
कानपरु
वाराणसी
भागलपरु
पयागराज
पटना
कोलकाता
बंगाल की खाड़ ी
गंगा क यात्रा — गोमुख से नकलकर, तट पर बसे नगर से होती हुई अंत म बंगाल क खाड़ी तक।
कम म उत्तर दे ना हो तो: “गंगा के कनारे बसे प्रमुख नगर ह — ऋ षकेश, ह र ार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी,
पटना, भागलपुर और कोलकाता।” यह वाक्य लख दे ने से पूरा उत्तर हो जाता है।
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प्र.2 (ख) गंगा के तट पर बसे औ ो गक नगर से गंगा को क्या हा न हुई है?
औ ो गक नगर के कारखान का गंदा पानी गंगा म गरता है, जससे गंगा का जल दू षत हो गया है और उसका चाँद
जैसा चमक ला रंग मटमैला पड़ गया है। यही सबसे बड़ी हा न है।
पाठ क पं क्तयाँ दे खए —
“गंगोत्री से िनकलते समय मेरा चाँद ी जै सा चमकीला रूप रहता है।
िकं तु मुझे दुख है िक काशी पहँचु ते -पहँचु ते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है।
कारखानों और शहरों का गंद ा पानी मेरे जल को दू िषत कर दे ता है।”
हा न को तीन हस्स म सम झए —
1. जल दू षत हुआ — कारखान का गंदा पानी सीधे नद म जाता है, इस लए गंगा का जल पीने और नहाने लायक नह रह
जाता।
2. रूप बगड़ा — जो पानी गंगोत्री म चाँद क तरह चमकता था, वह काशी तक आते-आते मटमैला हो जाता है।
3. गंगा को दुख हुआ — पाठ म गंगा स्वयं कहती है “मुझे दुख है”। नद हम पानी दे ती है, पर बदले म हम उसे गंदगी लौटाते ह।
ऐसा क्य होता है: कानपुर जैसे औ ो गक नगर म कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने ह। इन कारखान को धोने,
रँगने और ठं डा करने के लए बहुत पानी चा हए — और वह पानी उन्ह गंगा से ही मलता है। पाठ कहता है — “इन
कारखान को पानी मुझसे ही मलता है।” काम हो जाने के बाद वही पानी रंग, तेल और रसायन के साथ फर नद म
लौटा दया जाता है। लेने म साफ़, लौटाने म गंदा — यही हा न क जड़ है।
आशा क बात: पाठ यह नह रुकता। आगे गंगा कहती है — “मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए ह।
मुझे उस दन क प्रतीक्षा है जब मेरा जल वैसा ही स्वच्छ और नमल हो जाएगा जैसा गंगोत्री से नकलते समय रहता
है।”
प्र.2 (ग) कुंभ का मेला कब-कब और कहाँ-कहाँ लगता है?
पाठ के अनुसार कुंभ का मेला दो स्थान पर लगता है — ह र ार म और प्रयागराज के संगम पर। दोन जगह यह मेला हर
बारहव वष लगता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
कहाँ कब पाठ क पं क्त
हिर ार (उत्तराखंड) हर बारह वष “ह र ार म हर बारह वष बाद कुंभ का मेला लगता है।”
बाद
पयागराज — गंग ा और यमुना के संग म पत्येक “इस संगम पर भी प्रत्येक बारहव वष कुंभ का मेला लगता है। इस मेले म दे श
पर (उत्तर पदे श) बारहवें वष के कोने-कोने से लाख लोग आते ह।”
कुंभ है क्या: कुंभ भारत का सबसे बड़ा मेला है। बारह वष म एक बार लगने के कारण लोग इसक बहुत प्रतीक्षा
करते ह। दे श के कोने-कोने से लाख लोग नद म स्नान करने और मेला दे खने आते ह। नद के कनारे कुछ दन के
लए मानो एक पूरा नगर बस जाता है।
पुस्तक के बाहर क जानकारी: भारत म कुंभ का मेला दो और स्थान पर भी लगता है — उ ैन ( शप्रा नद के
कनारे) और ना सक (गोदावरी नद के कनारे)। पर यह बात इस पाठ म नह छपी है, इस लए परीक्षा म उत्तर पाठ
के अनुसार ही ल खए — ह र ार और प्रयागराज।
प्र.2 (घ)(i) “गंगोत्री से नकलते समय मेरा चाँद जैसा चमक ला रूप रहता है। कतु मुझे दुख है क काशी पहुँचते-
पहुँचते मेरा चमक ला रंग मटमैला हो जाता है।” — यहाँ पर चाँद जैसे चमक ले रूप से क्या तात्पय है?
‘चाँद जैसा चमक ला रूप’ का तात्पय है — गंगोत्री के पास गंगा का जल बलकुल साफ़, स्वच्छ और नमल रहता है। वह
इतना साफ़ होता है क धूप पड़ने पर चाँद क तरह चमकता है।
यहाँ गंगा के जल क तुलना चाँद से क गई है। चाँद एक चमकदार सफ़ेद धातु है। जब लेखक कहता है ‘चाँद जैसा’, तो हमारे मन
म तुरंत एक चत्र बनता है — पहाड़ के बीच बहता हुआ उजला, चमकता, बलकुल साफ़ पानी।
शब्द क्या बताता है
चाँद ी जैस ा उजला और चमकीला — जल में कोई मैल नही ं
चमकीला रूप धूप पड़ ने पर पानी का चमक उठना
इसका सीधा अथ जल पूर ी तरह स्वच्छ, िनम ल और साफ़ है
ऐसा क्य कहा गया: य द लेखक केवल “जल बहुत साफ़ था” लखता, तो बात कही तो जाती, पर दखती नह ।
‘चाँद जैसा चमक ला’ कहने से वह दृश्य आँख के सामने आ जाता है। जब कसी चीज़ को दूसरी चीज़ जैसा
बताकर समझाया जाए, तो भाषा म चत्र बन जाता है — और पढ़ने वाले को बात याद रह जाती है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
जोड़कर दे खए: पाठ के अंत म गंगा यही आशा करती है — “मुझे उस दन क प्रतीक्षा है जब मेरा जल वैसा ही
स्वच्छ और नमल हो जाएगा जैसा गंगोत्री से नकलते समय रहता है।” यानी ‘चाँद जैसा चमक ला’ और ‘स्वच्छ
और नमल’ — दोन एक ही बात कह रहे ह।
प्र.2 (घ)(ii) काशी पहुँचते-पहुँचते गंगा का चमक ला रंग मटमैला क्य हो जाता है?
क्य क गंगोत्री से काशी तक के लंबे रास्ते म जगह-जगह कारखान और शहर का गंदा पानी उसम आकर मलता जाता
है। यही गंदगी उसके साफ़ जल को दू षत कर दे ती है और उसका रंग मटमैला पड़ जाता है।
पाठ क पं क्त —
“कारखानों और शहरों का गंद ा पानी मेरे जल को दू िषत कर दे त ा है।”
यह कैसे होता है, चरण म दे खए —
1. चरण 1 — गंगोत्री म गंगा पहाड़ से नकलती है। वहाँ आस-पास न कारखाने ह, न बड़े नगर। इस लए जल चाँद जैसा साफ़
रहता है।
2. चरण 2 — मैदान म उतरते ही उसके तट पर नगर बसे मलते ह — ऋ षकेश, ह र ार, कानपुर, प्रयागराज। पाठ कहता है —
“बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए ह। कई कारखाने खुल गए ह।”
3. चरण 3 — इन नगर और कारखान को पानी गंगा से ही मलता है — “इन सबको म ही पानी पहुँचाती ँ।” काम हो जाने के
बाद वही पानी गंदा होकर लौटता है।
4. चरण 4 — जैसे-जैसे गंगा आगे बढ़ती है, यह गंदगी जुड़ती जाती है। काशी तक पहुँचते-पहुँचते इतनी हो जाती है क जल का
रंग ही बदल जाता है — मटमैला यानी म के रंग जैसा गँदला।
मूल बात: गंगा का पानी अपने-आप गंदा नह होता। उसे गंदा हम करते ह — कारखाने, शहर और हमारी अपनी
आदत। इसी लए गंगा कहती है “मुझे दुख है”, और इसी लए उसे साफ़ करना भी हमारा ही काम है।
प्र.3 (क) ✓ ✗
पाठ के आधार पर सही कथन के आगे ( ) का और गलत कथन के आगे ( ) का चह्न लगाइए — गंगा के
कनारे कई तीथ स्थान ह।
सही ✓
पाठ म गंगा के कनारे बसे कई तीथ के नाम आए ह —
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी
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तीथ पाठ क पं क्त
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गंग ोत्री
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“गंग ोत्र ी में मेर ा भव्य मंिदर है जहाँ दे शभर से तीथयात्र ी आते है।
ं ”
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g l a “ऋिषके श और हिर ार मेरे िकनारों पर बसे पिस द्ध तीथ है।
ं ”
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ऋिषके श
हिर ार “हिर ार में हर बारह वष बाद कुं भ का मेल ा लगता है। ”
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“इस संग म पर भी पत्येक बारहवें वष कुं भ का मेल ा लगता है। ” ag
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पयागराज
“इस नगर का दूg l a
वाराणसी (काशी)
a सरा नाम काशी है। यह बहुत बड़ ा तीथ है।”
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तीथ क्या होता है: तीथ वह प वत्र स्थान है जहाँ लोग दशन और स्नान के लए दूर-दूर से आते ह। गंगा को
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भारतवासी प वत्र नद मानते ह, इसी लए उसके कनारे इतने तीथ बसे ह।
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पाठ के आधार पर सही कथन के आगे ( ) का और गलत कथन के आगे ( ) का चह्न लगाइए — गंगा का ✗
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प्र.3 (ख)
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जन्म अरावली क गोद म हुआ है।
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गलत ✗
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गंगा का जन्म अरावली म नह , हमालय म हुआ है। पाठ क पहली ही पं क्त यह बता दे ती है —
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omम िहमालय की गोद में हुआ था। g l as
“मेर.ाcज a
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agl नन्ही-सी धारा के रूप में मै ं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में िस्थत
गंगोत्री िहमनद के उस स्थान से िनकली िजसे गोमुख कहते है। ं ”
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com g l a
m . a
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सही कथन इस तरह होगा — “गंगा का जन्म हमालय क गोद म हुआ है।”
अरावली क्या है: अरावली भारत के प म म, मुख्यतः राजस्थान म फैली हुई एक पुरानी पवत- ंखला है। उस पर
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बफ़ नह जमती, इस लए वहाँ से गंगा जैसी बड़ी बफ़-पो षत नद नकल भी नह सकती। (यह जानकारी पाठ के
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बाहर क है।)
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पाठ के आधार पर सही कथन के आगे ( ) का और गलत कथन के आगे ( ) का चह्न लगाइए — कारखान
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का गंदा पानी गंगा के जल को दू षत कर रहा है।
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सही ✓
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यह बात पाठ म लगभग इन्ह शब्द म छपी है —
“कारखानों और शहरों का गंद ा पानी मेरे जल को दू िषत कर दे त ा है।”
इसी कारण गंगोत्री का चाँद जैसा चमक ला जल काशी तक पहुँचते-पहुँचते मटमैला हो जाता है। दू षत यानी गंदा और बगड़ा हुआ।
ध्यान द जए: पाठ केवल कारखान को दोष नह दे ता — वह “कारखान और शहर ”, दोन का नाम लेता है।
यानी गंदगी म हमारे घर और नगर का हस्सा भी है।
प्र.3 (घ) ✓ ✗
पाठ के आधार पर सही कथन के आगे ( ) का और गलत कथन के आगे ( ) का चह्न लगाइए — गंगा का
एक नाम भागीरथी है।
सही ✓
पाठ इसका कारण भी बताता है —
“राजा भगीरथ ने इसी स्थान पर तपस्या की थी।
इसिलए मेरा नाम भागीरथी भी है।”
यह स्थान गंगोत्री है। ‘भगीरथ’ से बना ‘भागीरथी’ — यानी भगीरथ क लाई हुई। तपस्या यानी बहुत क ठन साधना।
गंगा के पाठ म आए तीन नाम: भागीरथी (गंगोत्री क ओर), प ा (बांग्लादे श जाने वाली धारा का नाम), और
हुगली (कोलकाता क ओर जाने वाली धारा का नाम)। एक ही नद , पर जगह बदलने के साथ नाम भी बदल जाता
है।
प्र.3 (ङ) ✓ ✗
पाठ के आधार पर सही कथन के आगे ( ) का और गलत कथन के आगे ( ) का चह्न लगाइए — प म
बंगाल म गंगा क तीन धाराएँ हो जाती ह।
गलत ✗
प म बंगाल म गंगा क तीन नह , दो धाराएँ होती ह। पाठ क पं क्तयाँ —
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“पिश्चम बंगाल में मेरी दो धाराएँ हो जाती है।
ं
एक धारा बांग्लादे श को चली जाती है। वहाँ उसका नाम प ा पड़ गया है।
दू सरी धारा कोलकाता (कलकत्ता) की ओर जाती है। वहाँ मुझे हुगली भी कहते है।ं ”
धारा कधर जाती है वहाँ का नाम
पहली धारा बांग्लादे श की ओर प ा
दू स री धारा कोलकाता की ओर हुगली
सही कथन इस तरह होगा — “प म बंगाल म गंगा क दो धाराएँ हो जाती ह।”
आगे क्या होता है: दोन धाराएँ अलग-अलग रास्त से चलती हुई अंत म समुद्र तक पहुँचती ह। पाठ कहता है —
“अंत म म बंगाल क खाड़ी म समुद्र से मल जाती ँ।” यह गंगा क यात्रा पूरी होती है।
मलान क जए — पृष्ठ 149
स्तंभ ‘क’ और स्तंभ ‘ख’ का आपस म मलान। पुस्तक म पहली रेखा — ‘गंगा का उद्भव’ से ‘गोमुख’ तक — उदाहरण के रूप म पहले से
खची है।
मलान क जए
प्र.1 स्तंभ ‘क’ और स्तंभ ‘ख’ का आपस म मलान क जए — स्तंभ ‘क’: गंगा का उद्भव, दे वप्रयाग, औ ो गक नगर,
बांग्लादे श, तीथ स्थल। स्तंभ ‘ख’: वाराणसी, गोमुख, प ा नद , अलकनंदा, कानपुर।
पूरा मलान नीचे दया है। पुस्तक म पहली रेखा — गंगा का उद्भव → गोमुख — उदाहरण के रूप म पहले से खची है। बाक चार
रेखाएँ आपको ख चनी ह।
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स्तंभ ‘क’ स्तंभ क्य — पाठ क पं क्त
‘ख’
गंग ा का उद् भव गोमुख उद्भव यानी नकलने क जगह। “म… गंगोत्री हमनद के उस स्थान से नकली जसे गोमुख
(उदाहरण) कहते ह।”
दे वपयाग अलकनंद ा “दे वप्रयाग म मुझसे अलकनंदा आ मली।” यानी दे वप्रयाग वह जगह है जहाँ अलकनंदा गंगा से
मलती है।
औ ोिगक नगर कानपुर “कानपुर भारत का प्र सद्ध औ ो गक नगर है। यहाँ कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने ह।”
बांग्लादे श प ा नदी “एक धारा बांग्लादे श को चली जाती है। वहाँ उसका नाम प ा पड़ गया है।”
तीथ स्थल वाराणसी “म वाराणसी पहुँचती ँ। इस नगर का दूसरा नाम काशी है। यह बहुत बड़ा तीथ है।”
मलान करने का तरीका: पहले वे जोड़े मलाइए जनके बारे म आपको पक्का पता है — जैसे ‘औ ो गक नगर’ के
लए कानपुर। उन्ह काट द जए। बचे हुए कम वकल्प म से सही जोड़ा ढूँ ढ़ना आसान हो जाता है। यही तरीका हर
मलान वाले प्रश्न म काम आता है।
ध्यान र खए: ‘वाराणसी’ को ‘औ ो गक नगर’ से मत जो ड़ए। वाराणसी पाठ म तीथ के रूप म आया है, कारखान
के नगर के रूप म नह । और ‘गोमुख’ को ‘दे वप्रयाग’ से मत जो ड़ए — गोमुख गंगा के नकलने क जगह है, मलने
क नह ।
भाषा क बात — पृष्ठ 149, 150 और 151
चार अभ्यास — ‘होना’ क्रया के व भन्न रूप से रक्त स्थान क पू त, ‘आलय’ जोड़कर नए शब्द बनाना, गंगा के चत्र म लखे शब्द से
अनुच्छेद लखना, तथा एक ही शब्द के भन्न- भन्न अथ (‘कर’ जैसे शब्द ) क सूची बनाना
भाषा क बात व्याकरण
प्र.1 इस वाक्य को प ढ़ए — “यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।” इस वाक्य म ‘होता’ शब्द ‘होना’ क्रया का रूप है।
नम्न ल खत वाक्य म ‘होना’ क्रया के व भन्न रूप का प्रयोग करते हुए रक्त स्थान क पू त क जए — (क)
आप जब भी आते ह, मुझे बहुत प्रसन्नता ......... है। (ख) कुंभ के मेले म लाख लोग स म्म लत ......... । (ग)
आपके माता- पता आपक प्रतीक्षा कर रहे ......... । (घ) पहाड़ का मौसम बड़ा सुहावना ......... है। (ङ) यह
काम कल ही ......... था परंतु कसी कारण से नह ......... पाया।
पहले यह सम झए क ‘होना’ एक क्रया है और वाक्य के अनुसार उसका रूप बदलता रहता है — होता, होती, होते, ह गे, होना,
हो। नीचे सभी छह रक्त स्थान भरे हुए ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
वाक्य रक्त स्थान म क्या भर रूप ऐसा क्य
(क) आप जब भी आते है,ं मुझे बहुत होती ‘प्रसन्नता’ स्त्री लग शब्द है, इस लए क्रया भी
पसन्नता ......... है। पूर ा वाक्य: आप जब भी आते है,ं मुझे स्त्री लग रूप म — ‘होती’।
बहुत पस न्नता होती है।
(ख) कुं भ के मेले में लाखों लोग होते है ं ‘लाख लोग’ बहुवचन है, और बात हर बार होने
सि मिलत ......... । पूर ा वाक्य: कुं भ के मेले में लाखों लोग वाली है — इस लए ‘होते ह’।
सि मिलत होते है।
ं
(ग) आपके माता-िपता आपकी पतीक्षा होंगे यहाँ अनुमान लगाया जा रहा है — शायद ऐसा हो
कर रहे ......... । पूर ा वाक्य: आपके माता-िपता आपकी रहा है। अनुमान के लए ‘ह गे’ आता है।
पतीक्षा कर रहे होंगे।
(घ) पहाड़ों का मौसम बड़ा सुहावना होता ‘मौसम’ पु ल्लंग और एकवचन है, और बात सदा
......... है। पूर ा वाक्य: पहाड़ ों का मौसम बड़ ा सच रहने वाली है — इस लए ‘होता है’।
सुहावना होता है।
(ङ) यह काम कल ही ......... था परंत ु पहला िर क्त स्थान — होना पहले म ‘होना था’ का अथ है — तय था क होगा।
िकसी कारण से नही ं ......... पाया। दू स रा िर क्त स्थान — हो दूसरे म ‘हो पाया’ का अथ है — हो नह सका।
पूर ा वाक्य: यह काम कल ही होना था
परंत ु िकसी कारण से नही ं हो पाया।
नयम एक पं क्त म: ‘होना’ क्रया का रूप तीन बात से तय होता है — कौन (एक या अनेक), लग (पु ल्लंग या
स्त्री लग), और काल (कब हुआ)। भरने से पहले पूरा वाक्य ज़ोर से प ढ़ए — कान अपने-आप सही रूप पकड़ लेता
है।
अभ्यास क जए: इन्ह छह रूप से अपने-आप वाक्य बनाइए — “गरमी म दन बड़ा होता है।”, “मेले म बहुत
भीड़ होती है।”, “ब े कक्षा म ह गे।”, “यह काम आज होना चा हए।”
प्र.2 पाठ म ‘ हमालय’ शब्द ‘ हम’ और ‘आलय’ शब्द से मलकर बना है। इसी प्रकार नीचे लखे शब्द को मलाकर
नया शब्द बनाइए — पुस्तक (उदाहरण: पुस्तकालय), दे व, व ा, भोजन, मेघ। बीच म ‘आलय’ लखा है। अब
अपने बनाए हुए शब्द का अपनी लेखन-पु स्तका म वाक्य म प्रयोग क जए।
पहले यह सम झए — ‘आलय’ का अथ है घर या रहने का स्थान। इसी लए ‘ हम’ (बफ़) + ‘आलय’ (घर) = हमालय, यानी
बफ़ का घर। अब पाँच खाने भरे हुए दे खए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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पहला शब्द उसका बना हुआ नया नए शब्द का अथ अपने वाक्य म प्रयोग
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अथ शब्द
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पुस्तक
a s em पुस्तकालय पुस्तक का घर, यानी लाइब्रेरी व ालय के पुस्तकालय म कहा नय
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(उदाहरण ) क बहुत पुस्तक ह।
दे व दे वता दे वालय दे वता का घर, यानी मं दर गाँव के दे वालय म सवेरे-सवेरे घंट बजती
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है।
a seवmा का घर, यानी स्कूल
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िव ा पढ़ाई, ान िव ालय म रोज़ आठ बजे व ालय पहुँच जाता ँ।
भोजन खाना भोजनालय भोजन का घर, यानी खाना खाने बस अ े के पास एक साफ़-सुथरा
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क जगह भोजनालय है।
.
a s emबहुत होती है।
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मेघ बादल मेघ ालय बादल का घर — भारत के मेघालय म वषा
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पूव त्तर का एक राज्य
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ध्यान दे ने क बात: ‘आलय’ जोड़ते समय पहले शब्द का अं तम स्वर और ‘आ’ मलकर एक हो जाते ह — व ा
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+ आलय = व ालय (‘आ’ दो बार नह लखा जाता)। इसी तरह पुस्तक + आलय = पुस्तकालय, न क
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‘पुस्तकाआलय’।
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‘आलय’ वाले और शब्द: च कत्सालय ( च कत्सा का घर — अस्पताल), न्यायालय (न्याय का घर — अदालत),
कायालय (काम का घर — दफ़्तर), शवालय ( शव का मं दर), छात्रावास जैसे शब्द भी इसी ढं ग से बने ह। इन्ह
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भी अपनी लेखन-पु स्तका म लखकर वाक्य बनाइए।
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प्र.3 नीचे गंगा नद के दृश्य म कुछ शब्द लखे गए ह। इन शब्द का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद ल खए —
पिवत्र
िहमालय िनमल
तट गोमुख
तीथ औ ोिगक
नगर शांत
चमकीला पिसद्ध
जल
पृष्ठ 150 पर गंगा नद के एक छाया चत्र पर ये बारह शब्द एक अंडाकार घेरे म लखे गए ह। छाया चत्र म हरी पहा ड़य
के बीच बहती हुई नद दखाई गई है; छाया चत्र अपनी पाठ्यपुस्तक म दे खए।
चत्र म बारह शब्द लखे ह। नीचे पहले हर शब्द का अथ दया है, फर पूरा नमूना अनुच्छेद — जसम बारह शब्द आ गए ह।
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शब्द अथ
पिवत्र शुद्ध, पूजनीय
िहमालय बफ़ का घर — भारत के उ त्त र का सबसे ऊँचा पवत
िनमल िबलकु ल साफ़ , िजसमें मैल न हो
तट नदी का िकनारा
गोमुख गंगोत्री िहमनद का वह मुँह जहाँ से गंगा िनकलती है
तीथ पिवत्र स्थान जहाँ लोग दशन-स्नान के िलए जाते है ं
औ ोिगक उ ोगों यानी कारखानों से जुड़ा हुआ
नगर शहर
शांत जहाँ शोर न हो, चुप और सुखद
चमकीला जो चमकता हो
पिसद्ध िजसे बहुत लोग जानते हों, मशहूर
जल पानी
नमूना अनुच्छेद — गंगा क कहानी
गंगा हमारे दे श क सबसे प वत्र नद मानी जाती है। उसका जन्म हमालय क गोद म होता है। वह गोमुख नाम के
स्थान से एक नन्ही-सी धारा बनकर नकलती है। वहाँ उसका जल इतना नमल रहता है क धूप म चाँद क तरह
चमक ला दखाई दे ता है। पहाड़ से उतरकर गंगा मैदान म आ जाती है। उसके तट पर ह र ार और वाराणसी जैसे
बड़े तीथ बसे ह, जहाँ का वातावरण बहुत शांत लगता है। आगे चलकर उसके कनारे कानपुर जैसे प्र सद्ध
औ ो गक नगर भी ह, जहाँ कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने ह। इन कारखान का गंदा पानी गंगा म गरता है
और उसका चमक ला रंग मटमैला पड़ जाता है। यह हम सबका काम है क गंगा का जल फर से नमल बने। तभी
हम कह सकगे क हमने अपनी नद का ऋण चुकाया।
अनुच्छेद लखने क व ध — चार चरण:
चरण 1 — दए गए शब्द को एक बार पढ़कर उनके अथ समझ ली जए।
चरण 2 — उन्ह क्रम म लगाइए, जैसे यात्रा का क्रम — हमालय, गोमुख, जल, तट, तीथ, नगर।
चरण 3 — हर शब्द के लए एक छोटा वाक्य बनाइए। दो-दो शब्द एक ही वाक्य म भी आ सकते ह।
चरण 4 — अंत म एक वाक्य अपने मन क बात का जो ड़ए, जैसे “यह हम सबका काम है…”। इससे अनुच्छेद पूरा
लगता है।
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प्र.4 “म काम कर रहा ँ।” “मेरे कर म लेखनी है।” यहाँ पहले वाक्य म ‘कर’ शब्द का प्रयोग क्रया के रूप म हुआ है
तथा दूसरे वाक्य म ‘कर’ शब्द का अथ ‘हाथ’ है। ‘कर’ का एक अन्य अथ ‘टै क्स’ भी होता है। इस प्रकार आपने
दे खा क अलग-अलग वाक्य म प्रयोग के कारण एक ही शब्द के भन्न- भन्न अथ हो सकते ह। अब आप भी
अपनी पाठ्यपुस्तक और अन्य ोत से ऐसे शब्द क एक सूची तैयार क जए और उनका वाक्य म प्रयोग
क जए।
जन शब्द के एक से अ धक अथ होते ह, उन्ह अनेकाथ शब्द कहते ह — अनेक यानी बहुत, अथ यानी मतलब। नीचे ऐसे शब्द
क सूची अथ और वाक्य स हत द गई है। आप भी इसी ढं ग क सूची अपनी लेखन-पु स्तका म बनाइए।
शब्द पहला अथ और वाक्य दूसरा अथ और वाक्य तीसरा अथ और वाक्य
कर करना (िक्रया) — मैं काम कर रहा हू।
ँ हाथ — मेरे कर म लेखनी है। टै क्स — दुकानदार ने कर
(उदाहरण) जमा कर दया।
जल पानी — गंगा का जल िनम ल है। जलना ( क्रया) — द या रात भर जल रहा —
था।
धारा बहती हुई पानी की लकीर — गंगा की दो बहाव या तेज़ बहती हुई रेखा — छत से —
धाराएँ हो जाती है।
ं पानी क धारा गर रही थी।
तट नदी का िकनारा — नगर गंगा के तट समुद्र का कनारा — हम तट पर बैठकर —
पर बसे है।
ं लहर दे खते रहे।
नाक शरीर का अंग — सद से मेर ी नाक बंद इज़्ज़त — उसने गाँव क नाक रख ली। —
है।
पत्र िच ी — मैंने दादी को पत्र िलखा। पत्ता — पेड़ का हर पत्र हरा था। —
अंक संख्या — इस पष्ृ ठ पर तीन अंक िलखे गोद — ब ा माँ के अंक म सो गया। प्राप्तांक — मुझे ग णत म पूरे
है।
ं अंक मले।
फल खाने वाला फल — आम मेर ा िपय फल प रणाम — मेहनत का फल मीठा होता है। —
है।
सोना नी ंद ले ना — मुझे जल्दी सोना है। स्वण धातु — माँ क अँगूठ सोने क है। —
कल बीता या आने वाला िदन — कल रिववार मशीन — यह कल बहुत पुरानी हो गई। चैन — दुखी मन को कल
है। नह पड़ती।
हार फू लों की माला — उसने अितिथ को पराजय — खेल म हार से घबराना नह —
हार पहनाया। चा हए।
मूल जड़ — पेड़ का मूल गहरा होता है। असली, पहला — यह पुस्तक का मूल रूप —
है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
अथ कैसे पहचान: अकेला शब्द दे खकर अथ नह पकड़ा जा सकता — पूरा वाक्य प ढ़ए। “मेरे कर म लेखनी है”
म ‘म’ शब्द बताता है क ‘कर’ कोई जगह है, यानी हाथ। “म काम कर रहा ँ” म ‘काम’ के साथ आने से पता
चलता है क यह क्रया है। इसी लए कहा जाता है — शब्द का अथ वाक्य से खुलता है।
अपनी सूची बनाइए: अपनी पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ पढ़ते समय जब कोई शब्द दो जगह दो अथ म मले, उसे
तुरंत लख ली जए। हर शब्द के लए तीन खाने बनाइए — शब्द, अथ, वाक्य। महीने भर म आपक अच्छ -खासी
सूची बन जाएगी।
समझ और अनुभव — पृष्ठ 151
तीन वचार-प्रधान प्रश्न — नद के साथ तीथ स्थल का जुड़ाव, न दय के लगातार प्रदू षत होने का प्रभाव, और ‘औ ो गक नगर’ का आशय
समझ और अनु भ व
प्र.1 गंगा नद के साथ तीथ स्थल के जुड़ने के क्या कारण हो सकते ह?
सबसे बड़ा कारण यह है क भारतवासी गंगा को प वत्र नद मानते ह। पाठ म लखा है — “मुझे भारतवासी प वत्र नद मानते
ह।” जस नद को लोग प वत्र मानते ह, उसके कनारे मं दर बनते ह, और जहाँ मं दर बनते ह वहाँ तीथ बस जाता है।
कारण एक-एक करके दे खए —
1. गंगा प वत्र मानी जाती है। लोग उसम स्नान करना पुण्य का काम मानते ह, इस लए उसके कनारे भीड़ जुटती है।
2. जल हमेशा मलता है। तीथ म दूर-दूर से लोग आते ह। उन सबको पीने, नहाने और खाना बनाने के लए पानी चा हए, जो नद
से आसानी से मल जाता है।
3. जगह शांत और सुंदर होती है। पाठ कहता है — “यहाँ का प्राकृ तक दृश्य और वातावरण बहुत शांत है।” शांत जगह पूजा
और साधना के लए ठ क रहती है।
4. साधु-संत वह बसते ह। “मेरे कनार पर साधु-संत और महात्माओं के आश्रम ह।” जहाँ आश्रम बनते ह, वह धीरे-धीरे तीथ
बन जाता है।
5. कथाओं से जुड़ाव है। गंगोत्री म राजा भगीरथ ने तपस्या क थी, इस लए वह स्थान प वत्र माना गया। ऐसी कथाओं से जुड़े
स्थान तीथ बन जाते ह।
6. आने-जाने का रास्ता रहता है। पुराने ज़माने म नद के कनारे- कनारे ही रास्ते चलते थे और नाव से यात्रा होती थी। इस लए
या त्रय का पहुँचना आसान था।
पाठ से प्रमाण: गंगा के कनारे बसे तीथ पाठ म गनाए ही गए ह — गंगोत्री, ऋ षकेश, ह र ार, प्रयागराज और
वाराणसी। ह र ार और प्रयागराज म तो हर बारहव वष कुंभ का मेला लगता है, जसम “दे श के कोने-कोने से लाख
लोग आते ह।”
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी
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य द न दयाँ दन-प्र त दन प्रदू षत होती रहगी तो हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
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प्र.2
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a glसीधा प्रभाव यह होगा क हम पीने के लए साफ़ पानी नह मलेगा और हम बीमार पड़ने लगगे। नद का पानी केवल
सबसे
नद का नह है — वह हमारे नल, हमारे खेत और हमारे भोजन तक पहुँचता है।
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कस पर असर क्या होगा
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हमारी से हत agबीमािरयाँ, उल्टी-दस्त और चम रोग होंगे। नदी में नहाने से भी बीमारी फैल सकती है।
गंद ा पानी पीने से पेट की
पीने का पानी
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नगरों में नल का पानी नदी से ही आता है। नदी गंद ी होगी तो उसे साफ़ करना किठन और महँगा हो जाएगा।
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खेती गंद ा पानी खेतों में जाएगा तो फ़ सल कमज़ोर होगी और अनाज भी दू िषत हो जाएगा।
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गंदे पानी में मछिलयाँ, कछु ए और डॉिल्फ़ न जीिवत नही ं रह पाती ं। मछु आरों की रोज़ी-रोटी िछन जाएगी।
aglपशु-पक्षी
मछिलयाँ और जलचर
नदी का पानी पीने वाले जानवर और पक्षी भी बीमार पड़ ेंगे।
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तीथ और मेले िजस जल को लोग पिवत्र मानकर स्नान करते है,ं वह गंद ा हो जाएगा। तीथ ं की शोभा और श्रद्धा, दोनों घटेंगी।
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हमारे बाद के बच्चों को साफ़ नदी दे खने को ही नही ं िमले गी — के वल िचत्रों में।
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आने वाली पीढ़ ी
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सोचने क बात: पाठ म गंगा कहती है — “बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए ह। कई कारखाने खुल गए ह। इन
s e mजो गंदगी हम नद म
सबको म ही पानी पहुँचाती ँ।” यानी नद हम पानी दे ती है और हम उसे गंदगी लौटाते ह।
डालतेoह,mवह घूम- फरकर हमारे ही घर, हमारे ही गलास तक लौट आती है।
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agl आशा: पाठ नराशा पर नह रुकता। गंगा कहती है — “मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए ह।” य द
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हम सब आज से थोड़ा-थोड़ा ध्यान रख, तो वह दन दूर नह जब गंगा का जल फर स्वच्छ और नमल होगा।
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पाठ म ‘कानपुर’ को भारत का प्र सद्ध औ ो गक नगर कहा गया है। यहाँ ‘औ ो गक नगर’ से क्या आशय है?
प्र.3
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g ह और जहाँ के बहुत से लोग उन्ह
.c ो गक नगर’ का आशय है — ऐसा नगर जहाँ बहुत से उ ोग यानी कारखाने
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se कारखान म काम करते ह ।
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शब्द को तोड़कर दे खए — उ ोग यानी कारखाना, और औ ो गक यानी उ ोग से जुड़ा हुआ। इस लए ‘औ ो गक नगर’ =
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कारखान वाला नगर।
पाठ क पं क्तयाँ —
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
“कानपुर भारत का पिसद्ध औ ोिगक नगर है।
यहाँ कपड़ े, चमड़ े और लोहे के कारखाने है।ं
इन कारखानों को पानी मुझसे ही िमलता है।”
औ ो गक नगर क पहचान कानपुर म यह कैसे दखता है
वहाँ बहुत से कारखाने होते है ं कपड़ े, चमड़ े और लोहे के कारखाने
वहाँ चीज़ें बनाई जाती है ं कपड़ ा बुना जाता है, चमड़ े की वस्तुए ँ और लोहे का सामान बनता है
बहुत लोगों को काम िमलता है आस -पास के गाँवों से लोग काम करने आते है ं
कारखानों को बहुत पानी चािहए होता है “इन कारखानों को पानी मुझसे ही िमलता है” — यानी गंग ा से
दूसरा पहलू भी दे खए: औ ो गक नगर से लोग को काम और दे श को सामान मलता है — यह अच्छ बात है। पर
उन्ह कारखान का गंदा पानी नद म जाता है, जससे गंगा का “चमक ला रंग मटमैला हो जाता है।” इस लए ज़रूरी
है क कारखाने अपना गंदा पानी साफ़ करके ही नद म छोड़।
तीन तरह के नगर पहचा नए: जहाँ कारखाने अ धक ह — औ ो गक नगर (कानपुर)। जहाँ मं दर और श्रद्धालु
अ धक ह — तीथ नगर (ह र ार, वाराणसी)। जहाँ व ालय- वश्व व ालय अ धक ह — शक्षा नगर। एक ही
नगर एक से अ धक तरह का भी हो सकता है।
कलाकारी — पृष्ठ 151
‘जल संरक्षण’ वषय पर पुस्तक म एक चत्र दया है — उलटे छाते म बरसात का पानी इक ा होता हुआ। दए गए खाली खाने म अपना चत्र
बनाकर जल संरक्षण का एक उपाय सुझाना है।
कलाकारी
प्र.1 नीचे ‘जल संरक्षण’ वषय पर एक चत्र दया गया है। आप भी दए गए स्थान पर कोई चत्र बनाकर जल संरक्षण
का एक उपाय सुझाइए —
पहले सम झए क जल संरक्षण क्या है — पानी को बरबाद होने से बचाना और उसे सँभालकर रखना। पुस्तक म जो चत्र छपा है,
उसम एक उलटा छाता है जसम बरसात क बूँद गरकर इक हो रही ह। यानी बरसात का पानी बहकर न जाए, उसे रोक लया
जाए।
अब आपको बगल के खाली खाने म अपना चत्र बनाना है। कुछ आसान वचार —
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
क्या बनाएँ चत्र म क्या-क्या दखाएँ नीचे क्या लख
छत का पानी टंक ी एक घर , छत से नीचे आता हुआ पाइप, और नीचे रखी बड़ ी टंक ी “छत का बरसाती पानी टं क म इक ा
में क जए।”
बंद नल एक नल िजससे पानी नही ं टपक रहा, पास खड़ ा मुस्कु राता बच्चा “ब्रश करते समय नल बंद र खए।”
बाल्टी से नहाना एक बाल्टी और मग, बगल में क्रॉस लगा हुआ फु हारा (शॉवर ) “फुहारे क जगह बाल्ट से नहाइए।”
तालाब भरना गाँव का तालाब, बरसात की बूदँ े ं, तालाब के िकनारे पेड़ “गाँव का तालाब बचाइए, वही भूजल भरता
है।”
पौधों को बचा पानी स ब्ज़ी धोने के बाद बचे पानी से क्यारी सी ंचता बच्चा “बचे हुए पानी से पौध को स चए।”
टपक िसंचाई खेत में पतली नली, िजससे पौधे की जड़ पर बूदँ -बूदँ पानी िगर रहा “खेत म बूँद-बूँद से सचाई क जए।”
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नमूना उत्तर: मने अपने खाने म वषा-जल संचयन का चत्र बनाया। चत्र म एक घर है। उसक छत से एक पाइप
नीचे आ रहा है। पाइप का पानी एक बड़ी टं क म गर रहा है। टं क के पास एक ब ा खड़ा है जो बाल्ट भर रहा है।
ऊपर बादल और बरसात क बूँद बनाई ह। चत्र के नीचे मने लखा — “बरसात का पानी बहने मत द जए, उसे
सँभालकर र खए।” यह उपाय इस लए अच्छा है क्य क बरसात का पानी वैसे तो ना लय म बहकर बरबाद हो
जाता है, पर इक ा कर लेने पर वही पानी नहाने, कपड़े धोने और पौध को स चने के काम आ जाता है।
चत्र बनाने के तीन सुझाव:
1. केवल एक ही वचार बनाइए। बहुत सारी चीज़ एक चत्र म भर दे ने से बात साफ़ नह दखती।
2. पानी को नीला रं गए और उसक दशा दखाने के लए छोटा तीर बनाइए।
3. चत्र के नीचे एक छोट पं क्त ज़रूर ल खए। चत्र और पं क्त साथ ह , तो संदेश तुरंत समझ आ जाता है।
गंगा से बातचीत — पृष्ठ 152
पुस्तक म ब और गंगा नद के चत्र बने ह और बीच म छह खाली संवाद-बुलबुले दए गए ह — तीन ब क ओर से, तीन गंगा क ओर से।
उन्ह भरना है।
गं गा से बातचीत कल्पना
प्र.1 गंगा अपने चमक ले रंग को मटमैला होते दे खकर दुखी है। य द आपको कभी गंगा नद से बात करने का अवसर
मले तो आपक क्या बातचीत होगी?
पुस्तक म छह खाली बुलबुले बने ह — बाईं ओर तीन ब के और दाईं ओर तीन गंगा के। यानी तीन बार ब े कुछ कहगे और
तीन बार गंगा उत्तर दे गी। नीचे छह बुलबुले भरे हुए ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
क्रम कौन बोल बुलबुले म क्या ल खए
रहा है
1 ब े गंगा जी, आप इतनी उदास क्यों िदखती है?ं पहले तो आपका पानी चाँद ी की तरह चमकता था।
2 गंगा बच्चो, गंगोत्री से चली थी तब मैं िबलकु ल िनम ल थी। पर रास्ते के कारखानों और शहरों का गंद ा पानी मुझमें आ
िमला। इसी से मेर ा रंग मटमैल ा हो गया।
3 ब े ं बदले में हमने आपको गंद गी दे दी। हमें बहुत ल ज्जा
यह तो बहुत दुख की बात है। आप तो हम सबको पानी दे ती है।
आ रही है।
4 गंगा मुझे दुख तो है, पर आशा भी है। अब लोगों का ध् यान इस ओर गया है और मेर ा जल शुद्ध करने के पयास आरंभ हो
गए है।ं
5 ब े गंगा जी, हम भी आपकी सहायता करे ंगे। हम न आपमें कू ड़ ा डाले ंगे, न पॉलीिथन बहाएँगे, और अपने िम त्रों को भी
समझाएँगे।
6 गंगा यही सुनना चाहती थी, बच्चो। मुझे उस िदन की पतीक्षा है जब मेर ा जल िफर वैस ा ही स्वच्छ और िनम ल हो जाएगा
जैस ा गंगोत्री से िनकलते समय रहता है।
नमूना उत्तर (लगातार बातचीत के रूप म):
ब े — गंगा जी, नमस्ते! आप आज उदास क्य लग रही ह?
गंगा — ब ो, अपना यह मटमैला रंग दे खकर मुझे दुख होता है। गोमुख से नकलते समय म चाँद जैसी चमकती
थी।
ब े — फर ऐसा हुआ कैसे?
गंगा — कारखान और शहर का गंदा पानी मुझम गरता रहा। काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा रंग बदल गया।
ब े — हम क्षमा क जए। आप हम पानी दे ती ह और हमने आपको गंदा कर दया। अब हम आपके कनारे कूड़ा
नह डालगे और न ही साबुन लगाकर नहाएँगे।
गंगा — तुम्हारी यह बात सुनकर मेरा मन हल्का हो गया। मुझे उस दन क प्रतीक्षा है जब मेरा जल फर स्वच्छ और
नमल हो जाएगा।
संवाद लखने क व ध — तीन बात:
1. बात प्रश्न से शुरू क जए। प्रश्न से बातचीत आगे बढ़ती है।
2. गंगा के उत्तर पाठ क बात पर टकाइए — चाँद जैसा रूप, मटमैला रंग, कारखान का गंदा पानी, शुद्ध करने के
प्रयास।
3. अंत म एक वादा र खए। अच्छा संवाद वही है जो कुछ करने क बात पर पूरा हो।
पुस्तकालय एवं अन्य ोत — पृष्ठ 152
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
दो खोज-काय — गंगा क सहायक न दय , उनके उद्गम स्थान और कनारे बसे नगर का पता लगाना; तथा न दय को साफ़ करने क सरकारी
योजनाओं के बारे म जानकारी जुटाना
पु स्तकालय एवं अन्य ोत खोज-काय
प्र.1 व ालय के पुस्तकालय, अ भभावक तथा अन्य ोत से गंगा क सहायक न दय के बारे म पता लगाइए। साथ
ही यह भी पता क जए क उनका उद्गम स्थान कौन-सा है और उनके कनारे कौन-कौन से प्र सद्ध नगर स्थत ह।
पहले यह सम झए — सहायक नद वह नद है जो आगे चलकर कसी बड़ी नद म आकर मल जाती है। पाठ म गंगा स्वयं कहती है
— “वाराणसी से आगे बढ़ने पर म कई न दय को अपनी गोद म लेती हुई बहार राज्य म पहुँचती ँ।” वे ही न दयाँ उसक
सहायक न दयाँ ह।
पता कैसे लगाएँ — चार चरण:
1. चरण 1 — व ालय के पुस्तकालय से भारत का मान चत्र या भूगोल क पुस्तक ली जए।
2. चरण 2 — मान चत्र म गंगा क मोट नीली रेखा ढूँ ढ़ए और दे खए क उसम कौन-कौन सी पतली नीली रेखाएँ आकर मल रही
ह।
3. चरण 3 — हर नद के लए तीन बात ल खए — नाम, उद्गम स्थान (जहाँ से वह नकलती है), और कनारे बसे नगर।
4. चरण 4 — घर पर बड़ से और शक्षक जी से पूछकर अपनी सूची जाँच ली जए।
आपक सहायता के लए एक भरी हुई ता लका नीचे द है। इसी ढाँचे म अपनी ता लका बनाइए —
सहायक नद उद्गम स्थान कनारे बसे प्र सद्ध नगर गंगा से कहाँ मलती है
अलकनंद ा सतोपंथ िहमनद , उ त्त राखंड बद्र नाथ, जोशीमठ, श्रीनगर (उत्तराखंड) दे वप्रयाग — यह पाठ म भी लखा है
यमुना यमुनोत्री िहमनद , उ त्त राखंड दल्ली, मथुरा, आगरा प्रयागराज का संगम — यह भी पाठ म है
रामगंग ा उ त्त राखंड का पवतीय भाग बरेली, मुरादाबाद कन्नौज के पास
गोमती पीलीभीत, उ त्त र पदे श लखनऊ, जौनपुर ग़ाज़ीपुर के पास
घाघरा िहमालय, ितब्बत की ओर अयोध्या, फ़ैज़ाबाद छपरा ( बहार) के पास
गंडक नेपाल का िहमालयी भाग बे तया, हाजीपुर पटना के पास
कोसी नेपाल का िहमालयी भाग सुपौल, क टहार कुरसेला ( बहार) के पास
सोन अमरकं टक , म ध् य पदे श दे हरी-ऑन-सोन, रोहतास पटना के पास
ध्यान द जए: ऊपर क ता लका म केवल अलकनंदा और यमुना ही पाठ म छपी ह। बाक न दय के नाम
पुस्तकालय और मान चत्र से जुटाई गई जानकारी ह, जन्ह आप स्वयं भी खोजकर जाँच सकते ह। यही इस अभ्यास
का उ े श्य है — कताब से आगे बढ़कर पता लगाना।
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सुझाव: ता लका बनाने के बाद एक बड़े कागज़ पर गंगा क रेखा बनाइए और उसम ये सहायक न दयाँ जोड़ते
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जाइए। ऐसा न ा बना लेने पर पूरी बात एक नज़र म याद हो जाती है। इसे कक्षा क द वार पर भी
सकता है। .co
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coोतmक सहायता ले सकते ह। ag
न दय को साफ करने के लए भारत सरकार ारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे म पता क जए। इसके लए
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आप पुस्तकालय, शक्षक -अ भभावक एवं अन्य
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पाठ म गंगा कहती है — “मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए ह।” ये प्रयास कौन-से ह, यही इस अभ्यास म पता करना
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पता कैसे लगाएँ — चार चरण:
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1. चरण 1 — व ालय के पुस्तकालय से समाचार-पत्र और सामान्य ान क पुस्तक दे खए।
a 2. चरण 2 — शक्षक जी और घर के बड़ से पू छए — “नद साफ़ करने क कौन-सी योजना आपने सुनी है?”
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3. चरण 3 — य द नकट कोई नद है तो दे खए क वहाँ घाट-सफ़ाई या गंदे पानी को रोकने का कोई काम हो रहा है या नह ।
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4. चरण 4 — जुटाई गई बात को तीन खान म ल खए — योजना का नाम, कस नद के लए, क्या काम करती है।
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एक भरी हुई ता लका नीचे द है, जससे आपको ढाँचा समझ आ जाए —
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योजना / प्रयास कसके लए क्या काम करती है
गंदे पानी को नद म गरने से पहले साफ़ करना, घाटm . c o
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गंगा और उसकी सहायक
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निदयाँ लगाना, लोग को जागरूक करना
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गंगा गंगा क सफ़ाई का पूरा काम दे खना और उसक नगरानी करना
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नगर का गंदा पानी शोधन संयंत्र म साफ़ करके ही नद म छोड़ना
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स्वच्छ भारत अिभयान पूर ा दे श
agl खुले म गंदगी रोकना और शौचालय बनवाना, जससे गंदगी नद तक न पहुँचे
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जल शिक्त अिभयान वषा-जल इक ा करना, तालाब और कुएँ सुधारना, पानी बचाना
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नमूना उत्तर: मने पुस्तकालय क पुस्तक और अपने शक्षक जी से पता कया क गंगा को साफ़ करने के लए भारत
se m सरकार ने नमा म गंगे नाम क योजना चलाई है। इस योजना म नगर का गंदा पानी सीधे नद म नह जाने दया
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a जाता। पहले उसे शोधन संयंत्र म साफ़ कया जाता है, तब छोड़ा जाता है। घाट क सफ़ाई भी क जाती है और
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कनारे पेड़ लगाए जाते ह। मेरी माता जी ने बताया क लोग को जागरूक करने के लए नद के कनारे बोड भी
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लगाए गए ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
याद र खए: बड़ी योजनाएँ सरकार चलाती है, पर सफलता तभी मलती है जब हम भी साथ द। नद म कूड़ा न
डालना, पूजा क सामग्री न बहाना और नल बंद रखना — ये छोटे काम कसी भी योजना जतने ही ज़रूरी ह।
गगनयान — पृष्ठ 153 से 157
पाठ 12 के बाद इसी अध्याय म बना क्रमांक क एक और रचना छपी है — ‘गगनयान’। यह एक संवाद है, जसम अध्या पका कक्षा म ब
को गगनयान मशन के बारे म बताती ह। पुस्तक म इस रचना के साथ कोई अभ्यास नह छपा, केवल अंत म ‘ शक्षण-संकेत’ दया गया है। नीचे
रचना को समझने के प्रश्न और उनके उत्तर ह, तथा शक्षण-संकेत वाला काय भी।
गगनयान अनु पू र क रचना
प्र.1 ‘गगनयान’ रचना कस वधा म लखी गई है और इसम कौन-कौन बातचीत कर रहे ह?
‘गगनयान’ एक संवाद के रूप म लखी गई रचना है। संवाद यानी बातचीत। इसम कसी ने कहानी क तरह वणन नह कया —
बस बोलने वाले का नाम, फर छोट रेखा (–), और फर उसका कहा हुआ लखा गया है।
रचना कक्षा म घटती है। शुरुआत म कोष्ठक म लखा है — “(कक्षा म अध्या पका का प्रवेश और सभी व ा थय ारा
अ भवादन)”। ऐसे कोष्ठक वाले वाक्य बताते ह क उस समय कौन क्या कर रहा है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
बोलने वाले वे क्या करते ह
अध् यािपका बच्चों को गगनयान के बारे में बताती है,ं उनके पश्नों के उ त्त र दे ती है,ं बीच-बीच में मुस्कु राती और हँस ती है ं
शिम ला कहती है िक उसने क ल्पना में अपना अंतिर क्ष िवमान भी सोच िलया है
साधना तारायान का अनुम ान लगाती है; बाद में पूछती है िक गगनयान क्या करे गा
राके श बादलयान का अनुम ान लगाता है; बाद में पिशक्षण के बारे में आश्चय से पूछता है
दीक्षा शिनयान का अनुम ान लगाती है; बाद में व्योमिम त्र और उड़ ान के समय के बारे में पूछती है
सािनया मंगलयान का अनुम ान लगाती है
मनोहर शुक्रयान का अनुम ान लगाता है; बाद में पूछता है िक व्योमिम त्र कौन है
अशरफ़ आकाशयान का अनुम ान लगाता है और बताता है िक वह गरिमयों में छत पर ले टकर आकाश दे खता है
र त्ना कहती है िक बादल दे खकर उसका मन उन पर चढ़ कर आकाश की यात्रा करने का करता है
डोलमा कहती है िक उसका मन कई पकार के यानों के बारे में जानने का करता है
सतिवंद र हँस ते हुए बताता है िक डोलमा सब यानों में बैठकर घूम ना चाहती है
संद ीप कहता है िक उसने गगनयान के बारे में अभी तक कु छ नही ं सुना
िवजय पूछता है िक गगनयान हमें आकाश में घुम ाएगा क्या
पीटर बताता है िक मनुष्य पहले भी अंतिर क्ष जा चुक ा है; बाद में पूछता है िक तीसरे चरण में िकतने यात्री जाएँगे
संवाद पढ़ने का मज़ा: संवाद म हर पात्र अपने ढं ग से बोलता है, इस लए पढ़ते समय लगता है क हम भी उसी
कक्षा म बैठे ह। इसे कक्षा म बाँटकर प ढ़ए — एक व ाथ अध्या पका बने और बाक ब े अलग-अलग नाम ल।
तब रचना और भी जीवंत हो उठती है।
प्र.2 ब ने कन- कन यान के नाम अनुमान लगाकर बताए? अध्या पका ने अशरफ़ का अनुमान ‘लगभग सही’ क्य
कहा?
अध्या पका ने पूछा — “क्या आप अनुमान लगा सकते ह क आज हम कस नए यान के बारे म जानगे?” इस पर ब ने छह नाम
बताए —
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
कसने कहा यान का नाम नाम कैसे बना
साधना तारायान तारा + यान
राके श बादलयान बादल + यान
दीक्षा शिनयान श न + यान
सािनया मंगलयान मंगल + यान
मनोहर शुक्रयान शुक्र + यान
अशरफ़ आकाशयान आकाश + यान
अशरफ़ का अनुमान ‘लगभग सही’ इस लए कहा गया क्य क उसने ‘आकाशयान’ कहा था, और असली नाम ‘गगनयान’
है। ‘गगन’ का अथ भी आकाश ही होता है।
गगन = आकाश
गगन + यान = गगनयान = आकाश में जाने वाला यान
यानी अथ वही था, बस शब्द दूसरा था। इसी लए अध्या पका ने कहा — “अशरफ़ का अनुमान लगभग सही था।”
पयायवाची शब्द: ‘गगन’ और ‘आकाश’ एक ही अथ वाले दो शब्द ह। ऐसे शब्द को पयायवाची कहते ह। आकाश
के और नाम भी ह — नभ, अंबर, व्योम। यह चौथा शब्द याद र खए, क्य क इसी से रोबोट का नाम बना है —
व्योम मत्र, यानी आकाश का मत्र।
प्र.3 गगनयान क्या है? इसका उ े श्य क्या है? पाठ के आधार पर ल खए।
गगनयान भारत क पहली मानव अंत रक्ष उड़ान प रयोजना है। इसका उ े श्य मनुष्य को अंत रक्ष म भेजना है।
अध्या पका के शब्द म —
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
“गगनयान हमें संपूण अंत िरक्ष की यात्रा कराएगा।
इसका उ ेश्य मनुष्य को अंतिरक्ष में भे जना है।”
“िकं तु गगनयान िमशन भारत की पहली मानव अंत िरक्ष उड़ ान पिरयोजना है।
इसमें तीन सद स्यों के चालक दल को तीन िदनों के िलए अंतिरक्ष में भे जा जाएगा
और उन्हे ं भारतीय समुद ी जल में उतारकर सुरिक्षत पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा।”
बात पाठ क्या कहता है
यह है क्या भारत की पहली मानव अंतिर क्ष उड़ ान पिरयोजना
उ े श्य मनुष्य को अंतिर क्ष में भेजना
िकतने लोग जाएँग े तीन सद स्यों का चालक दल
िकतने िदन तीन िदन
वापसी कहाँ भारतीय समुद ी जल में उतारकर सुर िक्षत पथ्ृ वी पर
अभी िस्थित क्या है “हमारे दे श के वै ािनक इस यान के िनम ण काय में लगे हुए है।
ं आशा है िक यह िमशन शीघ ही पूर ा हो जाएगा। ”
सफल होने पर “अंतिर क्ष अनुस ंध ान के क्षेत्र में भारत के िलए यह बहुत बड़ ी उपलिब्ध होगी। ”
पीटर क बात का उत्तर: पीटर ने कहा था — “मनुष्य तो पहले भी अंत रक्ष म जा चुका है।” अध्या पका ने उसे सही
ठहराया, पर एक अंतर बताया — गगनयान भारत क अपनी पहली मानव उड़ान है। यानी अब तक भारतीय
दूसरे दे श के यान से गए ह; इस बार यान भी भारत का होगा।
ध्यान द जए: इस रचना म गगनयान के बारे म केवल वही बात द गई ह जो ऊपर लखी ह। उत्तर लखते समय
इन्ह बात पर टके र हए।
प्र.4 गगनयान मशन कतने चरण म बाँटा गया है? हर चरण म क्या होगा?
गगनयान मशन तीन चरण म बाँटा गया है। पहले दो चरण मानवर हत ह गे और तीसरे चरण म तीन अंत रक्ष या त्रय को
भेजा जाएगा।
अध्या पका के शब्द —
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी
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“गगनयान िमशन तीन चरणों में िवभािजत है।
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पहले दो चरणcमानवरिहत
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om होंगे तथा तीसरे चरण में तीन अंतिरक्ष याित्रयों को भे जा जाएगा। a
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aचरण कौन जाएगा पाठ के अनुसार क्या होगा
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मानवरिहत — “नह , पहले चरण म व्योम मत्र को अंत रक्ष म भेजा जाएगा।” यानी यान खाली नह जाएगा, रोबोट
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पहला
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व्योमिमत्र रोबोट
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चरण जाएगा।
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agइतना कहता है क पहले दो चरण मानवर हत ह गे — यानी इसम भी कोई मनुष्य नह
दू स रा मानवरिहत पाठ बस
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चरण जाएगा।
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तीन अंतिर क्ष यात्री
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तीसरा “तीसरे चरण म तीन अंत रक्ष या त्रय को भेजने क योजना है। उन्ह अंत रक्ष म भेजने से पहले
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अंत रक्ष म रहने का प्र शक्षण प्रदान कया जा रहा है।”
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चरण
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a जाएगा?” उत्तर मला क खाली नह , व्योम मत्र रोबोट जाएगा।
मानवर हत का अथ है — जसम कोई मनुष्य न हो। साधना ने यही पूछा था — “तो क्या पहले चरण म खाली यान अंत रक्ष म भेजा
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पहले रोबोट क्य : क्य क अंत रक्ष म मनुष्य को भेजने से पहले यह जाँच लेना ज़रूरी है क यान सुर क्षत है या नह ।
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यही काम व्योम मत्र करेगा। राकेश ने ठ क ही पूछा था क वहाँ चलने के लए भू म नह होगी और घर का भोजन भी
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नह होगा — इसी लए या त्रय को “अंत रक्ष के वातावरण म रहने के कौशल” सखाए जा रहे ह।
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व्योम मत्र कौन है? वह अंत रक्ष म जाकर क्या-क्या करेगा?
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व्योम मत्र इसरो का बनाया हुआ एक मनॉइड रोबोट है, जसे गगनयान मशन के पहले चरण म अंत रक्ष म भेजा जाएगा।
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अध्या पका ने बताया —
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“इसरो (भारतीय अंत िरक्ष अनुसंधान संगठन ) ने व्योमिमत्र नाम का
मू नॉइड रोबोट बनाया है िजसे गगनयान िमशन के अंत गत
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पहले चरण में अंतिरक्ष में भे जा जाएगा।” as e
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a s emमनॉइड रोबोट यानी ऐसा रोबोट जो देखने म मनुष्य जैसा लगता है और मनुष्य जैसे कुछ काम कर सकता है।
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व्योम मत्र अंत रक्ष म जाकर तीन काम करेगा —
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1. जानकारी इक
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करेगा — “व्योम मत्र अंत रक्ष से संबं धत जानकारी एक त्रत करेगा।”
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m रहना मनुष्य के लए सुर क्षत है या नह ।
2. सुरक्षा क जाँच करेगा — दे खेगा कeवहाँ
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a l “अंत रक्ष यान प्रणाली पर नजर रखेगा ता क जब अंत रक्ष यात्री वहाँ जाएँ तो उन्ह अ धक
3. यान-प्रणाली पर नज़र रखेगाg—
परेशा नय का सामना न करना पड़े।”
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नाम का अथ: ‘व्योम’ का अथ है आकाश या अंत रक्ष, और ‘ मत्र’ का अथ है दोस्त। इस लए व्योम मत्र यानी
अंत रक्ष का मत्र। नाम बहुत सोच-समझकर रखा गया है — जो पहले जाकर रास्ता दे ख आए और या त्रय क
सहायता करे, वह मत्र ही तो है।
इसरो क्या है: इसरो का पूरा नाम है — भारतीय अंत रक्ष अनुसंधान संगठन। यही संस्था भारत के उपग्रह और
यान बनाती है। पाठ म इसका उल्लेख इसी रूप म आया है। (पुस्तक म इस स्थान पर ‘अंत रक्ष’ शब्द ‘अतं रक्ष’ छपा
है — यह छपाई क छोट -सी चूक है; शुद्ध वतनी ‘अंत रक्ष’ ही है।)
प्र.6 शक्षण-संकेत — शक्षक व ा थय को ‘इसरो’ के वषय म बताएँ। साथ ही उन्ह टै ब एवं अन्य उपकरण के
माध्यम से इसरो म होने वाली ग त व धय क जानकारी भी द।
पृष्ठ 157 के नीचे यह शक्षण-संकेत छपा है। यह शक्षक जी के लए है, पर व ाथ भी इसे एक ग त व ध क तरह कर सकते ह।
नीचे बताया गया है क इस काय म क्या-क्या आना चा हए।
अच्छे काय म ये बात होनी चा हए —
1. इसरो का पूरा नाम — भारतीय अंत रक्ष अनुसंधान संगठन। अंग्रेज़ी म ISRO।
2. इसरो करता क्या है — उपग्रह और यान बनाना, उन्ह अंत रक्ष म भेजना, और अंत रक्ष के बारे म खोज करना।
3. पहले के अ भयान से जोड़ना — रचना क शुरुआत म ही अध्या पका कहती ह — “कक्षा 3 म हमने चंद्रयान को जाना और
कक्षा 4 म आ दत्य-एल 1 के साथ सूय से भी भट कर आए।” यानी चंद्रयान चंद्रमा के लए, आ दत्य-एल 1 सूय के लए, और
अब गगनयान मनुष्य को अंत रक्ष भेजने के लए।
4. अभी का काम — गगनयान और व्योम मत्र रोबोट।
5. दे खने- दखाने क साम ी — टै ब या कंप्यूटर पर उपग्रह के प्रक्षेपण (लॉन्च) का चत्र या वी डयो दखाना।
नमूना उत्तर (कक्षा म बोलने के लए): इसरो का पूरा नाम है — भारतीय अंत रक्ष अनुसंधान संगठन। यह भारत
सरकार क वह संस्था है जो हमारे दे श के उपग्रह और अंत रक्ष यान बनाती है। इसरो ने चंद्रमा के लए चंद्रयान भेजा
और सूय का अध्ययन करने के लए आ दत्य-एल 1 भेजा। अब इसरो के वै ा नक गगनयान बना रहे ह, जो भारत
का पहला ऐसा यान होगा जो मनुष्य को अंत रक्ष म लेकर जाएगा। इसरो ने ही व्योम मत्र नाम का मनॉइड रोबोट
भी बनाया है। हम गव है क हमारे दे श के वै ा नक इतना बड़ा काम कर रहे ह।
ग त व ध का सुझाव: कक्षा म एक ‘अंत रक्ष कोना’ बनाइए। एक चाट पर तीन खाने बनाइए — चंद्रयान,
आ दत्य-एल 1, गगनयान — और हर खाने म उसका चत्र तथा दो पं क्तयाँ ल खए। जो नई बात पता चले, उसे
उसी चाट म जोड़ते जाइए।
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प्र.7 ‘गंगा क कहानी’ और ‘गगनयान’ — दोन रचनाएँ इसी अध्याय म एक साथ छपी ह। इन दोन म क्या समानता
है?
दोन रचनाएँ यही सखाती ह क जो हमारे पास है उसे जानो, उस पर गव करो और उसक सँभाल करो। एक रचना धरती
क ओर दे खती है और दूसरी आकाश क ओर — पर दोन का भाव एक ही है।
बात गंगा क कहानी गगनयान
िवधा आत्म कथात्म क वणन — गंगा स्वयं ‘मैं’ कहकर सुनाती है संवाद — कक्षा म अध्या पका और ब क बातचीत
िवषय एक नदी की यात्रा — गोमुख से बंगाल की खाड़ ी तक एक यान क यात्रा — पृथ्वी से अंत रक्ष तक
िदशा पहाड़ से नीचे मैद ान और समुद की ओर पृथ्वी से ऊपर आकाश क ओर
भारत की गंगा को भारतवासी पिवत्र नदी मानते है ं गगनयान सफल हुआ तो “भारत के लए यह बहुत बड़ी
बात उपल होगी”
संदे श अपनी नदी को साफ़ रखो — पकृ ित की सँभाल करो व ान से नया जानो — आगे बढ़ो, मन म ज ासा रखो
भिवष्य की “मुझे उस िदन की पतीक्षा है जब मेर ा जल वैस ा ही स्वच्छ और “इसके लए हम अ धक प्रतीक्षा नह करनी होगी।”
आशा िनम ल हो जाएगा। ”
ध्यान दे ने लायक बात: दोन रचनाएँ प्रतीक्षा पर आकर मलती ह। गंगा उस दन क प्रतीक्षा करती है जब वह फर
नमल होगी; ब े उस दन क प्रतीक्षा करते ह जब गगनयान अंत रक्ष म जाएगा। एक प्रतीक्षा हम सँभालना सखाती
है, दूसरी आगे बढ़ना — और अच्छा नाग रक बनने के लए दोन चा हए।
इसे भी जा नए — पृष्ठ 158
‘गगनयान’ के बाद छपा एक जानकारी-बक्स, जसम ए.आई. (आ ट फ शयल इंटे लजस / कृ त्रम मेधा) का प रचय है और अंत म एक खोज-
काय दया गया है
इसे भी जा नए खोज-काय
प्र.1 ए.आई. क्या है? पुस्तकालय, शक्षक-अ भभावक एवं अन्य ोत के माध्यम से इसके उपयोग और सीमाओं के
बारे म पता क जए।
ए.आई. का पूरा नाम ‘आ ट फ शयल इंटे लजस’ है। हद म इसे ‘कृ त्रम मेधा’ कहा जा सकता है। यह एक ऐसी तकनीक
है जसके अंतगत कंप्यूटर अथवा मशीन म मानवीय सूझ-बूझ क प्रणाली डाली जाती है। यही प रचय पुस्तक के पृष्ठ 158
पर छपा है।
पुस्तक के अनुसार ए.आई. वाली मशीन क्या-क्या कर सकती है —
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क्या कर सकती है पुस्तक के शब्द
मनुष्य की तरह सोचना-समझना “कोई मशीन िकसी मनुष्य की तरह सोच-समझ सकती है। ”
पश्नों के उत्तर दे ना “वह आपके ारा पूछे गए पश्नों अथवा िज ासाओं के उ त्त र दे सकती है। ”
समस्याएँ सुल झाना “वह िविभन्न सम स्याओं को सुल झाने के साथ-साथ…”
किवता या कहानी रचना “…िकसी रचनाकार की तरह किवता या कहानी भी रच सकती है। ”
‘कृ त्रम’ यानी बनावट , जो अपने-आप नह बना ब ल्क मनुष्य ने बनाया। ‘मेधा’ यानी बु द्ध। इस लए ‘कृ त्रम मेधा’ का अथ हुआ
— मनुष्य क बनाई हुई बु द्ध।
अब पता लगाने वाला भाग — उपयोग और सीमाएँ। पुस्तक कहती है क आप स्वयं पता क जए। नीचे एक भरी हुई ता लका द
है, जसे आप बड़ और शक्षक जी से पूछकर आगे बढ़ा सकते ह —
उपयोग — कहाँ काम आती है सीमाएँ — कहाँ भरोसा नह कया जा सकता
पूछे गए पश्नों के उत्तर तुर ंत दे दे ती है कई बार गलत उ त्त र भी दे दे ती है, इसिलए जाँचना ज़रूरी है
एक भाषा से दू स री भाषा में अनुवाद करती है मुहावरों और भावों का अनुवाद अकसर बेढंगा हो जाता है
बोली हुई बात को िलख दे ती है जो उसे िसखाया ही नही ं गया, वह नही ं जानती
िचत्र और कहानी रच सकती है उसमें अपने अनुभव और स च्ची भावनाएँ नही ं होती ं
बीमारी की जाँच में डॉक्टरों की सहायता करती है अंितम िनणय मनुष्य को ही ले ना पड़ ता है
मौसम और यातायात का अनुम ान बताती है बहुत उपयोग करने से हमारी अपनी सोचने की आदत घट सकती है
पाठ से जो ड़ए: यह बक्स ‘गगनयान’ के ठ क बाद रखा गया है, और यह अकारण नह है। व्योम मत्र भी एक
मनॉइड रोबोट है — यानी वह भी ऐसी ही तकनीक से चलता है। जो मशीन अंत रक्ष म जाकर जानकारी इक कर
सकती है और सुरक्षा क जाँच कर सकती है, उसम ‘मानवीय सूझ-बूझ क प्रणाली’ ही डाली गई होती है।
नमूना उत्तर: मने अपने शक्षक जी से पूछा तो उन्ह ने बताया क ए.आई. का उपयोग आजकल बहुत जगह होता है
— मोबाइल म बोलकर संदेश लखवाने म, एक भाषा से दूसरी भाषा म अनुवाद करने म, और मौसम का अनुमान
बताने म। पर उन्ह ने यह भी बताया क ए.आई. कभी-कभी गलत उत्तर दे दे ती है, इस लए उसक बात को पुस्तक या
बड़ से जाँच लेना चा हए। सबसे ज़रूरी बात उन्ह ने यह कही क सोचने का काम हम स्वयं करना चा हए, मशीन पर
पूरी तरह नभर नह होना चा हए।
आपक अ भव्य क्त — पृष्ठ 159 और 160
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पुस्तक का अं तम अभ्यास और अं तम पृष्ठ। दो पृष्ठ पर फैला एक चत्र दया गया है — हरे-भरे पेड़, लाल फल से लद डाल, उड़ती हुई और
डाल पर बैठ च ड़याँ, हवा म गरती प त्तयाँ, तत लयाँ और एक गलहरी। चत्र के बीच लखने के लए पं क्तयाँ बनी ह।
आपक अ भव्य क्त ले ख न
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दए गए चत्र को ध्यानपूवक दे खए और इस पर आधा रत कोई अनुच्छेद, कहानी अथवा क वता अपने शब्द म
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पृष्ठ 159 पर दया गया चत्र। बीच का सफ़ेद भाग वह जगह है जहाँ पुस्तक म लखने के लए पं क्तयाँ बनी ह।
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पहले चत्र को ध्यान से दे खए। पृष्ठ 159 और 160, दोन पर एक ही दृश्य फैला है। उसम ये चीज़ दखती ह —
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चत्र म क्या ध्यान से दे खने पर क्या दखता है
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आकाश नीला आकाश, सफ़े द बादल , और बाईं ओर चमकता हुआ सूर ज
पेड़ दोनों ओर घने हरे पेड़; दाईं ओर के पेड़ पर लाल -लाल फल लदे है ं
िचिड़याँ एक िचिड़ या उड़ रही है, दो एक डाल पर साथ बैठी है,ं एक दू स री डाल पर चोंच खोले बोल रही है, और एक नीचे घास पर
चोंच में पत्त ा िलए खड़ ी है
पित्तयाँ हवा में बहुत-सी हरी पित्त याँ घूम ती हुई नीचे िगर रही है ं
ज़मीन पीली-हरी घास , िबखरे हुए पत्थर , रंग-िबरंगे फू ल
और जीव एक धारीदार िगलहरी घास पर बैठी है, और दो-तीन िततिलयाँ उड़ रही है ं
अब तीन म से जो आपको अच्छा लगे, वह ल खए — अनुच्छेद, कहानी या क वता। तीन के नमूने नीचे दए ह।
नमूना 1 — अनुच्छेद : सवेरे का उपवन
सवेरे का समय है। सूरज पेड़ के पीछे से झाँक रहा है और आकाश म सफ़ेद बादल तैर रहे ह। दोन ओर घने हरे पेड़
खड़े ह। एक पेड़ पर लाल-लाल फल लदे ह, जो हरी प त्तय के बीच बहुत सुंदर लगते ह। हवा चलती है तो प त्तयाँ
डाल छोड़कर घूमती हुई नीचे उतरने लगती ह। एक डाल पर दो च ड़याँ पास-पास बैठ ह, जैसे आपस म कुछ बात
कर रही ह । दूसरी डाल पर बैठ च ड़या च च खोलकर गा रही है। नीचे घास पर एक गलहरी बैठ है और एक
च ड़या च च म पत्ता लए घ सले क ओर जा रही है। तत लयाँ फूल पर मँडरा रही ह। यह दृश्य दे खकर मन शांत हो
जाता है। ऐसा लगता है क प्रकृ त हम चुपचाप कुछ सखा रही है।
नमूना 2 — कहानी : च ड़या का घ सला
उस उपवन म एक च ड़या रहती थी। उसका नाम था च । एक दन तेज़ हवा चली और च का घ सला डाल से गर
गया। च उदास होकर घास पर बैठ गई। तभी वहाँ एक गलहरी आई और बोली, “तुम रो क्य रही हो?” च ने अपनी
बात बताई। गलहरी बोली, “ चता मत करो, म तुम्हारी सहायता करूँगी।” गलहरी ने इधर-उधर से सूखी घास इक
क । च एक-एक पत्ता च च म लाकर जोड़ने लगी। तभी एक ततली आई और उसने बताया क लाल फल वाले पेड़
क डाल मोट है, वहाँ हवा कम लगती है। तीन ने मलकर उसी डाल पर नया घ सला बनाया। शाम तक घ सला
तैयार था। च ने कहा, “अकेले म यह कभी न कर पाती।” उस दन उपवन के सब जीव ने जाना क मलकर काम
करने से हर मु श्कल आसान हो जाती है।
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नमूना 3 — क वता : पत्त का नाच
हवा चली तो डाल हली,
पत्ती-पत्ती नाच उठ ।
घूम-घूमकर नीचे आई,
घास पे आकर सो भी गई।
लाल-लाल फल डाल पे झूले,
च ड़या गाए फूले-फूले।
गलहरी बैठ घास कनारे,
ततली उड़ती फूल सहारे।
सूरज हँसकर बोला धीरे —
“सुबह हुई, अब जागो प्यारे!”
चत्र-वणन लखने क व ध — चार चरण:
चरण 1 — चत्र म जो दखता है, उसक सूची बनाइए — ऊपर क्या, बीच म क्या, नीचे क्या।
चरण 2 — तय क जए क क्या लखना है — अनुच्छेद (जो दखता है वही बताना), कहानी (कोई घटना जोड़ना),
या क वता (लय म लखना)।
चरण 3 — ऊपर से नीचे के क्रम म ल खए — आकाश, फर पेड़, फर ज़मीन। इससे लखा हुआ बखरा नह
लगता।
चरण 4 — अंत म अपने मन क एक पं क्त जो ड़ए — “यह दृश्य दे खकर मन शांत हो जाता है।” इसी से लेखन पूरा
लगता है।
ध्यान द जए: यही वीणा पुस्तक का अं तम पृष्ठ है। पृष्ठ 160 के बाद इस अध्याय म और कुछ नह छपा — न
शब्दकोश, न आभार-पृष्ठ। इस लए इस चत्र पर लखा हुआ आपका अनुच्छेद, कहानी या क वता ही आपक इस
पुस्तक क अं तम रचना होगी। उसे मन लगाकर ल खए।
अध्याय — एक नज़र म
गंगा क कहानी एक आत्मकथा के ढं ग से लखा गया वणन है। आत्मकथा यानी अपनी कहानी अपने ही मुँह से कहना। इस
पाठ म गंगा नद ‘म’ कहकर बोलती है — “मेरा जन्म हमालय क गोद म हुआ था।” पुस्तक म इस पाठ के साथ रचनाकार
का नाम नह छपा है।
जन्म और पहला नाम — गंगा एक नन्ही-सी धारा के रूप म उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद म स्थत गंगोत्री हमनद के
उस स्थान से नकलती है जसे गोमुख कहते ह। हमनद यानी बफ़ क जमी हुई वशाल नद । गोमुख से थोड़ा नीचे गंगोत्री म
गंगा का भव्य मं दर है। यह राजा भगीरथ ने तपस्या क थी, इस लए गंगा का एक नाम भागीरथी भी है।
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पहाड़ से मैदान तक — गंगा पहाड़ को चीरती, च ान से टकराती, उछलती-कूदती आगे बढ़ती है। दे वप्रयाग म उससे
अलकनंदा नद आ मलती है। ऋ षकेश पहुँचकर वह मैदान म उतर आती है। ऋ षकेश और ह र ार उसके कनारे बसे
प्र सद्ध तीथ ह। ह र ार म हर बारह वष बाद कुंभ का मेला लगता है, और वह के पास से गंगानहर नकाली गई है जो लाख
एकड़ भू म स चती हुई कानपुर जनपद तक पहुँचती है।
मैदान के नगर — कानपुर भारत का प्र सद्ध औ ो गक नगर है; वहाँ कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने ह और उन्ह पानी
गंगा से ही मलता है। प्रयागराज म गंगा का यमुना से संगम होता है — संगम यानी न दय का आपस म मलना। इस संगम
पर भी प्रत्येक बारहव वष कुंभ का मेला लगता है। आगे वाराणसी आता है, जसका दूसरा नाम काशी है।
अं तम यात्रा — वाराणसी से आगे गंगा कई न दय को अपनी गोद म लेती हुई बहार पहुँचती है और पटना, भागलपुर होते
हुए प म बंगाल म प्रवेश करती है। यहाँ उसक दो धाराएँ हो जाती ह — एक धारा बांग्लादे श चली जाती है, जहाँ उसका
नाम प ा है; दूसरी धारा कोलकाता क ओर जाती है, जहाँ उसे हुगली कहते ह। अंत म गंगा बंगाल क खाड़ी म समुद्र से
मल जाती है।
पाठ का दुख और आशा — गंगोत्री से नकलते समय गंगा का रूप चाँद जैसा चमक ला रहता है, पर काशी पहुँचते-पहुँचते
वह रंग मटमैला हो जाता है। कारखान और शहर का गंदा पानी उसके जल को दू षत कर दे ता है। फर भी गंगा प्रसन्न है क
अब लोग का ध्यान इस ओर गया है और जल शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए ह। उसे उस दन क प्रतीक्षा है जब उसका
जल फर वैसा ही स्वच्छ और नमल हो जाएगा।
पाठ क भाषा — पूरा पाठ पहले पुरुष म है — म नकली, म पहुँचती ँ, मुझे दुख है। इससे नद एक जीती-जागती सहेली-
सी लगती है। ‘ढु लकती चली’, ‘उछलती-कूदती’, ‘घूमती-घामती’, ‘कोने-कोने से’, ‘पहुँचते-पहुँचते’ जैसे शब्द-जोड़े पढ़ने म
लय पैदा करते ह।
अनुपूरक रचना — गगनयान (पृष्ठ 153–157) — पाठ के बाद बना क्रमांक क एक और रचना छपी है। यह एक संवाद है,
यानी बातचीत के रूप म लखी रचना। कक्षा म अध्या पका ब को गगनयान के बारे म बताती ह। ब े पहले तारायान,
बादलयान, श नयान, मंगलयान, शुक्रयान, आकाशयान के अनुमान लगाते ह। फर अध्या पका बताती ह क गगनयान भारत
क पहली मानव अंत रक्ष उड़ान प रयोजना है, इसम तीन सदस्य के चालक दल को तीन दन के लए अंत रक्ष म भेजा
जाएगा और भारतीय समुद्र जल म उतारकर सुर क्षत वापस लाया जाएगा। मशन तीन चरण म है — पहले दो चरण
मानवर हत, तीसरे म तीन अंत रक्ष यात्री। पहले चरण म इसरो का बनाया व्योम मत्र नाम का मनॉइड रोबोट भेजा जाएगा।
अध्याय के अं तम पृष्ठ — पृष्ठ 158 पर ‘इसे भी जा नए’ म ए.आई. (आ ट फ शयल इंटे लजस / कृ त्रम मेधा) का
प रचय है, और पृष्ठ 159–160 पर ‘आपक अ भव्य क्त’ म पेड़, च ड़य और गरती प त्तय का चत्र दे कर उस पर
अनुच्छेद, कहानी या क वता लखने को कहा गया है। यही वीणा पुस्तक का अं तम पृष्ठ है — इसके आगे इस अध्याय म कोई
शब्दकोश, टप्पणी-पृष्ठ या आभार नह छपा है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
हमनद बफ़ की जमी हुई िवशाल नदी, ग्ले िशयर “उत्तरकाशी जनपद म स्थत गंगोत्री हमनद हमनद क बफ़ पघलकर नद बन
के उस स्थान से नकली” जाती है।
गोमुख गंग ोत्री िहमनद का वह मुँह जहाँ से गंग ा “उस स्थान से नकली जसे गोमुख कहते गोमुख तक पहुँचने के लए बहुत
िनकलती है ह।” चढ़ाई चढ़नी पड़ती है।
जनपद िज़ला “म उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद म हमारा व ालय इसी जनपद म है।
स्थत…”
भव्य बहुत बड़ा और शानदार “गंगोत्री म मेरा भव्य मं दर है” मेले के ार पर भव्य तोरण बना था।
तीथयात्री तीथ की यात्रा करने वाला “जहाँ दे शभर से तीथयात्री आते ह।” बस भरकर तीथयात्री ह र ार गए।
तपस्या किठन साधना, कड़ी तपस्या “राजा भगीरथ ने इसी स्थान पर तपस्या क ऋ ष वष तक वन म तपस्या करते
थी।” रहे।
भागीरथी गंग ा का एक नाम, राजा भगीरथ के नाम “इस लए मेरा नाम भागीरथी भी है।” दे वप्रयाग तक इस धारा को भागीरथी
से बना कहते ह।
ढु लकना लुढ़कते हुए नीचे की ओर बहना “यहाँ से म नीचे ढु लकती चली” पहाड़ी से पानी ढु लकता हुआ नीचे
आ रहा था।
नखरना रूप का और साफ़ तथा सुंद र हो जाना “मेरा रूप और नखरने लगा।” धुलने के बाद कपड़े का रंग नखर
आया।
चीरना बीच से काटते हुए आगे बढ़ ना “पहाड़ को चीरती, च ान से टकराती हुई” नाव लहर को चीरती हुई आगे बढ़ ।
तट नदी का िकनारा “बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए ह।” हम शाम को नद के तट पर बैठे थे।
आश्रम साध -ु संतों के रहने और साधना करने “मेरे कनार पर साधु-संत और महात्माओं आश्रम म सवेरे प्राथना होती है।
का स्थान के आश्रम ह।”
प्राकृ तक पकृ ित का, अपने-आप बना हआ
ु “यहाँ का प्राकृ तक दृश्य और वातावरण बहुत पहाड़ का प्राकृ तक स दय मन मोह
शांत है।” लेता है।
वातावरण चारों ओर का माहौल “दृश्य और वातावरण बहुत शांत है।” परीक्षा के दन म घर का वातावरण
शांत रहता है।
कुंभ बारह वष बाद लगने वाला बहुत बड़ा “ह र ार म हर बारह वष बाद कुंभ का मेला कुंभ म लाख लोग स्नान करने आते
मेल ा लगता है।” ह।
नहर खेतों तक पानी ले जाने के िलए खोदी “एक नहर नकाली गई है जसे गंगानहर नहर का पानी हमारे खेत तक आता
गई धारा कहते ह।” है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी
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शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
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स चना
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खेत या पौधे को पानी दे ना “लाख एकड़ भू म को स चती हुई यह
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a ह।
माँ रोज़ तुलसी के पौधे को स चती
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नहर…”
एकड़ agl खेत की ज़मीन नापने की एक इकाई “लाख एकड़ भू म को स चती हुई” चाचा जी के पास दो एकड़ खेत है।
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औ ो गक वह नगर जहाँ बहुत से उ ोग यानी “कानपुर भारत का प्र सद्ध औ ो गक नगर कानपुर एक बड़ा औ ो गक नगर है।
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नगर कारखाने हों है।”
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संगम दो या अिधक निदयों का आपस में
िमलना
agl “यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।” प्रयागराज के संगम पर बहुत भीड़
थी।
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धारा “प म बंगाल म मेरी दो धाराएँ हो जाती ह।” नद क धारा आज बहुत तेज़ है।
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बहती हुई पानी की लकीर
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खाड़ी
.coसमुद का वह भाग जो ज़मीन के भीतर
m घुसा हो
“अंत म म बंगाल क खाड़ी म समुद्र से मल
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बंगाल क खाड़ी भारत के पूव म है।
l a se जाती ँ।”
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aप वत्र शुद्ध, पूजनीय “मुझे भारतवासी प वत्र नद मानते ह।” लोग गंगाजल को प वत्र मानते ह।
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मटमैला िमट्टी के रंग जैस ा, गँद ला “मेरा चमक ला रंग मटमैला हो जाता है।” बरसात म तालाब का पानी मटमैला
a s em हो गया।
दू षत गंद ा, िबगड़ा हुआ ag l “गंदा पानी मेरे जल को दू षत कर दे ता है।” कूड़ा डालने से तालाब का जल दू षत
हो गया।
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se जाना चा हए।
अप शष्ट बचा-खुचा कू ड़ा-कचरा जो फें क िदया “न दय म डाले जाने वाले अप शष्ट से” कारखाने का अप शष्ट नद म नह
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जाता है
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नमल िबलकु ल साफ़ , स्वच्छ “मेरा जल वैसा ही स्वच्छ और नमल हो झरने का नमल जल पीने योग्य था।
a जाएगा”
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प्रतीक्षा इंतज़ार
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“मुझे उस दन क प्रतीक्षा है” म बस क प्रतीक्षा कर रहा था।
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m . ‘ मलान क जए’ म — “गंगा का उद्भव” a
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उद्भव िनकलने या शुरू होने की जगह, आरंभ गंगा का उद्भव गोमुख से होता है।
अंत रक्ष पथ्ृ वी से बहुत ऊपर का खाली आकाश- गगनयान — “इसका उ े श्य मनुष्य को अंत रक्ष म हवा नह होती।
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पदे श अंत रक्ष म भेजना है।”
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गगनयान — “अंत रक्ष अनुसंधान के क्षेत्र m वै ा नक दवा पर अनुसंधान कर रहे
m a se ह।
अनुसंधान खोज-बीन, नई बाते ं पता करने का काम
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seचालक दल
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यान को चलाने और सँभालने वाले लोगों गगनयान — “इसम तीन सदस्य के चालक वमान का चालक दल या त्रय क
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का समूह दल को…” सहायता करता है।
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मानवर हत िजसमें कोई मनुष्य न हो गगनयान — “पहले दो चरण मानवर हत पहली उड़ान मानवर हत थी।
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उपल बड़ी सफलता a गगनयान — “भारत के लए यह बहुत बड़ी
उपल होगी।”
गाँव म व ालय खुलना बड़ी
उपल है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 12 गंगा क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
व्योम मत्र इसरो का बनाया मू नॉइड रोबोट गगनयान — “व्योम मत्र नाम का मनॉइड व्योम मत्र पहले चरण म अंत रक्ष
रोबोट बनाया है” जाएगा।
कृ त्रम मेधा ए.आई. का िहंद ी नाम — मशीन में डाली ‘इसे भी जा नए’ — “ हद म इसे ‘कृ त्रम कृ त्रम मेधा से मशीन प्रश्न के उत्तर
गई मानवीय सूझ-बूझ मेधा’ कहा जा सकता है।” दे सकती है।
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