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माध्यमिक शिक्षा मंडल,
मध्य प्रदेश
sample Paper
2024
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केवल अभ्यास हे तु नमू ना प्रश्न पत्र
Sample Question Paper for Practice only
हाईस्कूल परीक्षा - 2024
High School Examination-2024
ववषय - वहन्दी
Subject - Hindi
Total Question Total Printed Pages Time Maximum Marks
23 4 3 hours 75
वनर्दे श :-
i. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं |
ii. प्रत्येक प्रश्न के निए आवं नित अंक उसके सम्मुख अंनकत हैं |
iii. प्रश्न क्रमां क 1 से 5 तक 30 वस्तु निष्ठ प्रश्न हैं | प्रत्येक उप-प्रश्न पर 1 अंक निर्ाय ररत हैं |
iv. प्रश्न क्रमां क 6 से 17 तक कुि 12 प्रश्न हैं | प्रत्येक प्रश्न पर 2 अंक निर्ाय ररत हैं | शब्द सीमा िगभग 30 शब्द हैं |
v. प्रश्न क्रमां क 18 से 20 तक कुि 3 प्रश्न हैं | प्रत्येक प्रश्न पर 3 अंक निर्ाय ररत हैं | शब्द सीमा िगभग 75 शब्द हैं |
vi. प्रश्न क्रमां क 21 से 23 तक कुि 3 प्रश्न हैं | प्रत्येक प्रश्न पर 4 अंक निर्ाय ररत हैं | शब्द सीमा िगभग 120 शब्द हैं |
vii. प्रश्न क्रमां क 6 से 23 तक सभी प्रश्ननं के आं तररक नवकल्प निए गए हैं |
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1. सही ववकल्प का चयन कर वलखिए - (1x6=6)
i. आचार्य रामचंद्र शुक्ल िे नहन्दी पद्य सानहत्य कन नवभानित नकर्ा है –
(अ) तीि कािनं में (ब) चार कािनं में (स) सात कािनं में (ि) आठ कािनं में
ii. परशुराम कन व्यं ग्य भरे उत्तर निए –
(अ) राम िे (ब) ििक िे (स) िक्ष्मण िे (ि) नवश्वानमत्र िे
iii. “रमणीर्ार्य प्रनतपािक: शब्द: काव्यं ” पररभाषा है -
(अ) आचार्य नवश्विार् की (ब) पं. िगन्नार् की (स) भरतमुनि की (ि) मम्मि की
iv. ‘सं स्कृनत’ पाठ में न्यूिि कन कहा गर्ा है -
(अ) एक वै ज्ञानिक (ब) निशा निखािे वािा (स) सं स्कृत मािव (ि) आनि मािव
v. नक्रर्ा नवशेषण में नवशेषता बताई िाती है -
(अ) नक्रर्ा की (ब) सवय िाम की (स) काि की (ि) सं ज्ञा की
vi. भनिािार् और उसके सार्ी अपिे घर ि
ं े के नकवाड़ बिाते र्े -
(अ) पेड़ के पत्तनं से (ब) िकड़ी से (स) कागि से (ि) निर्ासिाई की पेनिर्नं से
2. ररक्त स्थान ों की पूवति कर वलखिए – (1x6=6)
i. -----------------कनवता फागु ि की मािकता कन प्रकि कर रही है | (उत्साह/फसि/अि िही ं रही है )
ii. िहााँ एक शब्द का समाि अर्य में एक से अनर्क बार क्रमशः प्रर्नग हनता वहााँ ---------------अिंकार हनता है ।
(दृष्ां त/पुिरुक्तिप्रकाश/मािवीकरण)
iii. निि छं िनं की रचिा मात्राओं की गणिा के आर्ार पर हनती हैं , उन्हें -----------छं ि कहते हैं | (मानत्रक/वनणय क/सवै र्ा)
iv. शहिाई बिािे के निए -----------------का प्रर्नग हनता है | (िकड़ी/रीड/बााँ स)
v. ‘र्शनगाि’---------------सं नर् का उिाहरण है | (स्वर/व्यं िि/नवसगय )
vi. कवी –िनंग स्टॉक में -------------नफल्म की शूनिं ग हुई र्ी | (उपकार/गाइड/बॉडय र)
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3. वनम्नवलखित कथन ों के समक्ष सत्य या असत्य वलखिए – (1x6=6)
i. वात्सल्य और शं गार रस के श्रेष्ठ कनव सू रिास कन मािा गर्ा है |
ii िहााँ नकसी वस्तु र्ा नवषर् का वणय ि बढ़ा-चढ़ाकर नकर्ा िाए वहााँ ‘अन्यनक्ति अिंकार’ हनता है ?
iii. मन्नू भण्डारी अपिे भाइर्नं के सार् गु ल्ली डं डा भी खेिती र्ी |
iv. रे खानचत्र कन शब्दनचत्र भी कहते है |
v ’राम बािार िाता है |’ एक आज्ञावाचक वाक्य है |
vi. नहरननशमा भारत में है |
4. सही ज ड़ी का वमलान कर वलखिए – (1x6=6)
स्तम्भ (अ) स्तम्भ (ब)
i आर्ुनिक कबीर (क) िन उपिी सन भई हमारी
ii च पाई (ख) अग्रणी
iii बािमखीरा (ग) छ:
iv समास के प्रकार (घ) कबीरिास
v सबसे आगे रहिे वािा (च) सममानत्रक छं ि
vi ऊाँच िीच में बई नकर्ारी (छ) िखिऊ
(ि) िागािुयि
5. वनम्नवलखित प्रश्न ों के उत्तर एक वाक्य में वलखिए – (1x6=6)
i. कनव निरािा का ‘उत्साह’ गीत नकसे सं बननर्त है ?
ii ‘रस’ नकसे कहते हैं ?
iii. ’सं स्कृनत’ निबन्ध हमें नकससे िकरािे की प्रेरणा िे ता है ?
iv. वीर रस की कनवताओं में क ि सा शब्द गु ण हनता है ?
v. रहस्यमर्ी तारनं भरी रात िेक्तखका मर्ु कां कररर्ा के मि में क्या िगा रही र्ी ?
vi. िेखक अज्ञेर् िे ‘नहरननशमा’ कनवता कहााँ बै ठकर निखी र्ी ?
6. रीनतकािीि काव्य की कनई - िन नवशेषताएाँ / प्रवृ नत्तर्ााँ निक्तखए। (2)
िई कनवता की कनई - िन नवशेषताएाँ / प्रवृ नत्तर्ााँ निक्तखए।
7. तु िसीिास अथवा िर्शंकर प्रसाि की काव्यगत नवशेषताएाँ निम्ननिक्तखत नबन्िु ओं के आर्ार पर निक्तखए – (2)
i. िन रचिाएाँ ii. भावपक्ष – किापक्ष
8. परशुराम िे सहस्त्रबाहु का वर् क्यनं नकर्ा र्ा ? निक्तखए | (2)
स्मृनत कन ‘पार्ेर्’ बिािे से कनव िर्शंकर प्रसाि का क्या आशर् है ?
9. कनव िागािुयि िे फसि कन हज़ार –हज़ार खेतनं की नमट्टी का गुण-र्मय क्यनं कहा है ? निक्तखए | (2)
सं गतकार नकि – नकि मुख्य रूपनं में मुख्य गार्क – गानर्काओं की मिि करते हैं ?
10. महाकाव्य और खण्डकाव्य में कनई - िन अंतर निक्तखए | (2)
स्र्ार्ीभाव और सं चारीभाव में कनई - िन अंतर निक्तखए ||
11. िनहा छं ि के िक्षण उिाहरण सनहत निक्तखए | (2)
मािवीकरण अिंकार की पररभाषा उिाहरण सनहत निक्तखए |
12. ‘आिा एक उनि’ सू त्र के अिु सार गद्य की प्रमुख नवर्ाओं के िाम निक्तखए | (2)
िािक और एकां की में कनई –िन अंतर निक्तखए |
13. रामवृ क्ष बे िीपुरी अथवा र्तीन्द्र नमश्र की सानहक्तत्यक नवशेषताएाँ निम्ननिक्तखत नबन्िु ओं के आर्ार पर निक्तखए – (2)
i. िन रचिाएाँ ii. भाषा-शैिी
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14. कैप्टि बार बार मूनतय पर चश्मा क्यनं िगा िे ता र्ा ? निक्तखए | (2)
बािगननबि भगत की पुत्रवर्ु उन्हें अकेिा क्यनं िही ं छनड़िा चाहती र्ी ?
15. सु नषर वाद्यनं से क्या अनभप्रार् है ? शहिाई कन ‘सु नषर-वाद्यनं’ में शाह की उपानर् क्यनं िी गई है ? (2)
नकि महत्त्वपूणय आवश्यकताओं की पूनतय के निए सु ई - र्ागे का आनवष्कार हुआ हनगा ? निक्तखए |
16. निम्ननिक्तखत वाक्यां श के निए एक शब्द निक्तखए – (2)
i. पूरब की और बहिे वािी हवा
ii. निसे बााँ िा ि िा सके
निम्ननिक्तखत मुहावरनं का अर्य निखते हुए वाक्य में प्रर्नग कीनिए –
i. एक और एक ग्यारह हनिा
ii. इनत श्री हनिा
17. भनिािार् अपिे सानर्र्नं कन िे खकर नससकिा क्यनं भू ि िाता हैं ? निक्तखए | (2)
गं तनक कन ‘मेहितकश बािशाहनं का शहर’ क्यनं कहा िाता है |
18. निम्ननिक्तखत काव्यां श का सं िभय -प्रसं ग सनहत भावार्य निक्तखए - (3)
ऊर् , तु म ह ं अनत बड़भागी।
अपरस रहत सिेह तगा तैं , िानहि मि अिुरागी।
पुरइनि पात रहत िि भीतर, ता रस िे ह ि िागी।
ज् ं िि मााँ ह ते ि की गागरर, बूाँ ि ि ताक ं िागी।
प्रीनत ििी मैं पााँ ऊ ि बनरर् , दृनष् ि रूप परागी।
सू रिास अबिा हम भनरी, गुर चनंिी ज् ं पागी।।
तु म्हारी र्ह िं तुररत मुसकाि
मृतक में भी डाि िे गी िाि
र्ू नि-र्ू सर तु म्हारे र्े गात...
छनड़कर तािाब मेरी झनंपड़ी में क्तखि रहे िििात
परस पाकर तु म्हारा ही प्राण,
नपघिकर िि बि गर्ा हनगा कनठि पाषाण
19. निम्ननिक्तखत गद्यां श की सं िभय –प्रसं ग सनहत व्याख्या निक्तखए – (3)
हार् उठा उठाकर िारे िगाती, हड़तािें करवाती, िड़कनं के सार् शहर की सड़कें िापती िड़की कन अपिी सारी
आर्ुनिकता के बाविूि बिाय श्त करिा उिके निए मुक्तिि हन रहा र्ा तन नकसी की िी हुई आिािी के िार्रे में
चििा मेरे निए। िब रगनं में िहू की िगह िावा बहता हन तन सारे निषेर् , सारी वियिाएाँ और सारा भर् कैसे ध्वस्त
हन िाता है , र्ह तभी िािा और अपिे क्रनर् से सबकन र्रर्रा िे िे वािे नपता िी से िक्कर िेिे का िन नसिनसिा
तब शुरू हुआ र्ा, रािेन्द्र से शािी की, तब तक वह चिता ही रहा।
सं स्कृनत के िाम से निस कूड़े -करकि के ढे र का बनर् हनता है , वह ि सं स्कृनत है ि रक्षणीर् वस्तु । क्षण-क्षण पररवतय ि हनिे
वािे सं सार में नकसी भी चीि कन पकड़कर बै ठा िही ं िा सकता। मािव िे िब-िब प्रज्ञा और मैत्री भाव से नकसी िए तथ्य
का िशयि नकर्ा है । तन उसिे कनई वस्तु िही ं िे खी है , निसकी रक्षा के निए ििबं निर्नं की िरूरत है । मािव सं स्कृनत एक
अनवभाज् वस्तु है और उसमें नितिा अंश कल्याण का है , वह अकल्याणकर की अपेक्षा श्रेष्ठ ही िही ं स्र्ार्ी भी है ।
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20. हार् घड़ी का एक आकषयक नवज्ञापि तै र्ार कीनिए | (3)
वानषयक परीक्षा की तैर्ारी के सं बंर् में िन नमत्रनं के मध्य सं वाि निक्तखए |
21. निम्ननिक्तखत अपनठत काव्यां श अर्वा गद्यां श कन पढ़कर पूछे गए प्रश्ननं के उत्तर निक्तखए - (4)
पूवय चििे के बिनही,
बाि की पहचाि कर िे।
पुस्तकनं में है िही ं
छापी गर्ी इिकी कहािी,
हाि इिका ज्ञात हनता
है ि औरनं की िबािी,
अिनगित राही गए इस
राह से उिका पता क्या,
पर गए कुछ िनग इस पर
छनड़ पैरनं की निशािी,
प्रश्न – i. उपर्ुय ि पद्यां श का उपर्ु ि शीषयक निक्तखए |
ii. चििे के पूवय बिनही कन क्या करिा चानहए ?
iii. उपर्ुय ि पद्यां श का भावार्य निक्तखए |
मिुष्य का िीवि बहुत सं घषयमर् हनता है । उस पग -पग पर कनठिाइर्नं का सामिा करिा पड़ता है । नफर भी ईश्वर के
द्वारा िन मिुष्य रूपी वरिाि की निनमयनत इस पृथ्वी पर हुई है मािव र्रती का रूप ही बिि गर्ा है र्ह सं सार कम करिे वािे
मिुष्य के आर्ार पर ही निका हुआ है िे वता भी उिसे ईष्याय करते हैं मिुष्य अपिे कमयबि के कारण श्रेष्ठ है । र्न्य है । मिुष्य का
िीवि।
प्रश्न – i. उपर्ुय ि गद्यां श का उपर्ु ि शीषयक निक्तखए |
ii. मिुष्य नकस कारण श्रेष्ठ मािा गर्ा है ?
iii. उपर्ुय ि गद्यां श का सारां श निक्तखए |
22. अपिे नििे के नििार्ीश कन ध्वनि नवस्तारक र्ं त्रनं पर प्रनतबं र् िगािे हे तु आवे िि - पत्र निक्तखए | (4)
हाई स्कूि परीक्षा में प्रावीण्य सू ची में प्रर्म स्र्ाि प्राप्त करिे पर अपिे नमत्र कन एक बर्ाई- पत्र निक्तखए |
23. निम्ननिक्तखत में से नकसी एक नवषर् पर रुपरे खा सनहत सारगनभय त निबं र् निक्तखए – (4)
i. नवद्यार्ी िीवि में अिुशासि का महत्त्व
ii. मनबाइि के िाभ और हानि
iii. िि ही िीवि है
iv. पर्ाय वरण सु रक्षा
v. मेरी नििचर्ाय
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