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NCERT
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CLASS - 6TH
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Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter-11 Hindi
Class: 6th
Subject : हिन्दी
Chapter : 11
Chapter Name : जो दे खकर भी निी दे खते
Q1 हजन लोगोों के पास आँ खें िैं , वे सचमुच बहुत कम दे खते िैं -िे लेन केलर को ऐसा क्ोों लगता था?
Answer. जैसे जैसे लोग प्राकृहतक सोंसाधनोों का इस्तेमाल करते जाते िैं वैसे वैसे लोग उनकी प्रहत सोंवेदनशीलता
खत्म िोती चली जाती िै । कुछ लोग िोते िैं जो उनके प्रहत कृतज्ञ बने रिते िैं । लोग जब एक िी चीज़ को बार बार
दे खते रिने के बाद उनकी हदल्चस्पी खत्म िो जाती िै । वि उन चीज़ोों के प्रहत आभार व्यक्त निी करते जो ईश्वर से
हमली िै ।
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Q2 प्रकृहत का जादू ’ हकसे किा गया िै ?
Answer. प्रकृहत अपने आप में एक जादू की तरि िै , प्रकृहत की तरि तरि की भोंहगमाओों को दे ख कर लोग अचोंभे
से रि जाते िै । प्रकृहत में कदम कदम पर जादू का अनुभव हकया जा सकता िै । वि जैसे अपने ओर आकहषित
करती िै । प्राकृहतक हवहवधता अपने मनमोिक रूप को िमारे सामने हदल खोल कर प्रदहशित करती िै और िम भी
वैसे िी िम भी िोते िैं । इसमे यिाँ इस पाठ में प्रकृहत का जादू में फूलोों का खखलना , घुमावदार पेड़, पेड़ो पे कान
लगाते िी पहियोों का उड़ जाना आहद से िै ।
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Q3 ‘कुछ खास तो निीों’–िे लेन की हमत्र ने यि जवाब हकस मौके पर हदया और यि सुनकर िे लेन को आश्चयि क्ोों
निीों हुआ?
Answer. लेखखका ने अपने हमत्र से ,जो अभी अभी जोंगल से घूम के आया था, उससे पूछा था हक क्ा क्ा दे खा
आपने विाँ तो उसके दोस्त ने जवाब हदया , कुव्ह खास निी।इसको बताते हुए लेखखका ये किती िै हक आज कल
लोग दे ख कर भी कुछ निी दे खते। लेखखका का तात्पयि यिाँ सोंवेदनशीलता के मर जाने से िै । आज कल लोग प्रकृहत
के प्रहत असोंवेदनशील िोते जा रिे िैं । लेखखका को इहसलए ज्यादा आश्चयि निी हुआ, क्ोोंहक वि ये बात जानती थी।
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Q4 िे लेन केलर प्रकृहत की हकन चीज़ोों को छूकर और सुनकर पिचान लेती थीों? पाठ के आधार पर इसका उत्तर
हलखो।
Answer. लेखखका प्राकृहतक चीज़ोों को छू कर बता सकती हक क्ा चीज़ िै। जैसे फूलोों की मखमली सति को छू
कर और घुमावदार बनावट मिसूस करने में, भोज पत्र, टिहनयोों में नई कहलयाँ, को छू कर मिसूस कर पिचान
लेती थी।
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Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter-11 Hindi
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Q5 'जबहक इस हनयामत से हजोंदगी को खुहशयोों के इों द्रधनुषी रों गोों से िरा-भरा हकया जा सकता िै ’। -तुम्हारी नज़र में
इसका क्ा अथि िो सकता िै ?
Answer. लेखखका अपने मिसूस करने की िमता और सुनने की िमता भर से इतनी चीज़ोों का ओलता लगा लेती िै
सोच लेती,िै समझ, लेती िै तो हजनके पास आँ खे िोती िैं वो क्ा क्ा निी कर सकते। पर लोग उतने िी अमानवीय
व्यविार करते हुए हदखाई दे ते िैं यिी हचोंता लेखखका को सता रिी िै।
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Q1 आज तुमने घर से आते हुए बारीकी से क्ा-क्ा दे खा-सुना? हमत्रोों के साथ सामूहिक चचाि करो।
Answer. आप स्वयों करें ।
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Q2 कान से न सुन पाने पर आस-पास की दु हनया कैसी लगती िोगी? इस पर हटप्पणी हलखो और किा में पढ़कर
सुनाओ।
Answer. आप स्वयों करें ।
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Q3 तुम्हें हकसी ऐसे व्यखक्त से हमलने का मौका हमले हजसे हदखाई न दे ता िो तो तुम उससे सुनकर, सँधकर,
चखकर, छूकर अनुभव की जानेवाली चीज़ोों के सोंसार के हवषय में क्ा-क्ा प्रश्न कर सकते िो? हलखो।
Answer. उनके अनुभव जानने के हलए हनम्नहलखखत प्रश्न कर सकते िैं -हकसी भी आवाज को सुनकर वे कैसे उस
चीज का अनुमान लगाते िैं हक यि आवाज हकसकी िै ? हकसी भी चीज़ को चखकर वे क्ा िैं और कैसा िै ? यि
अनुभव वि कैसे कर पाते िै ? क्ा आप हकसी जानवर की आवाज़ को सुनकर उसका नाम बता सकते िैं ? यि कैसे
सोंभव िो पाता िै ? क्ा आप सूोंघकर बता सकते िैं हक यि कौन-सा फूल िै ? सूोंघकर अच्छी और ख़राब चीजो का
अोंदाजा हकस िद तक लगा सकते िै ?
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Q4 िम अपनी पाँ चो इों हद्रयोों में से आँ खोों का इस्तेमाल सबसे ज़्यादा करते िैं । ऐसी चीज़ोों के एिसासोों की ताहलका
बनाओ जो तुम बाकी चार इों हद्रयोों से मिसूस करते िो।
सुनकर
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Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter-11 Hindi
चखकर
सूँघकर
छूकर
Answer. कान चखकर सूँघकर छूकर
सोंगीत खाना इत्र आग
कहवता अचार फूल पानी
डाँ ट खट्टा पेटरोल पत्थर
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Q1 पाठ में स्पशि से सोंबोंहधत कई शब्द आए िैं । नीचे ऐसे कुछ और शब्द हदए गए िैं । बताओ हक हकन चीजो का
स्पशि ऐसा िोता िै -
हचकना हचपहचपा
मुलायम खुरदरा
सख्त भुरभुर
1. हचकना- टाइल्स
2. हचपहचपा- तेल
3. मुलायम- मखमल
4. खुरदरा- सड़क
5. सख़्त- पेड़
6. भुरभुरा- हमठाई
Page : 83, Block Name : भाषा की बात
Q2 "अगर मुझे इन चीजोों को छूने भर से इतनी खुशी हमलती िै ,तो इनकी सुोंदरता दे खकर तो मेरा मन मुग्ध िी िो
जाएगा"।
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Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter-11 Hindi
ऊपर रे खाोंहकत सोंज्ञाए क्रमशः हकसी भाव और हकसी की हवशेषता के बारे में बता रिी िै । ऐसी सोंज्ञाए भाववाचक
किलाती िै । गुण और भाव के अलावा भाववाचक सोंज्ञाओों का सोंबोंध हकसी की दशा और हकसी कायि से भी िोता िै ।
भाव वाचक सोंज्ञा की पिचान यि िै हक इससे जुड़े शब्दोों को िम हसफि मिसूस कर सकते िै , दे ख या छू निीों
सकते। आगे हलखी भाववाचक सोंज्ञा को पढ़ो और समझो इनमें से कुछ सोंज्ञा और कुछ हक्रया से बने िैं उन्हें भी
पिचान कर हलखो।
हमठास- हक्रया
भूख- सोंज्ञा
शाों हत- सोंज्ञा
भोलापन- हक्रया
बुढापा- सोंज्ञा
घबरािट- सोंज्ञा
बिाव- हक्रया
फुती- हक्रया
ताज़गी- सोंज्ञा
क्रोध- सोंज्ञा
मजदू री- हक्रया
अिसास- सोंज्ञा
Page : 83, Block Name : भाषा की बात
Q3 1. मैं अब इस तरि के उत्तरोों की आदी िो चुकी हों ।
2. उस बगीचे में आम, अमलतास, सेमल आहद तरि-तरि के पेड़ थे।
ऊपर हदए गए दोनोों वाक्ोों में रे खाों हकत शब्द दे खने में हमलते जुलते िैं , पर उनके अथि हभन्न िै । नीचे ऐसे कुछ और
शब्द हदए गए िैं । वाक् बनाकर उनका अथि स्पष्ट करो।
अवहध- अवधी
मैं-में
मेल- मैल
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Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter-11 Hindi
ओर-और
हदन-दीन
हसल- शील
अवहध(समय) - इस अवहध में यि कायि सोंभव निी िै ।
अवधी(एक प्रकार की भाषा) - रामचररतमानस अवधी में हलखी गयी िै ।
मैं(स्वयों)- मैं अपने घर का ख्याल रखता हँ।
में(के अोंदर)- मेरे घर में बगीचा िै ।
मेल(हमलना)- िमने उनसे मेल हमलाप हकया।
मैल(गोंदगी)- सड़क के चारो तरफ मैल पड़ा हुआ था।
ओर(हदशा)- उस ओर मेरा घर सीधे िाथ पे िै ।
और(अलावा)- राम और श्याम घर मे अकेले थे।
हदन(तारीख़)- आज सोमवार का हदन िै ।
दीन(गरीब)- वि आदमी बहुत दीन था।
हसल(चट्टान)- हसल पर बैठै वो आदमी फ़ोटो ले रिा था।
शील(व्यविार)- अक्सर उसके शील की तारीफ़ िोती िै ।
Page : 84, Block Name : भाषा की बात
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