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NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 12 बाजारों की समझ

AglaSem पर कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 12 बाजारों की समझ (समाज का अध्ययन (भाग 1)) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Social Science Chapter 12 Understanding Markets (Exploring Society (Part I)), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 12 बाजारों की समझ - Page 1 of 57

About NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 12 बाजारों की समझ

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NCERT Solutions Class 7 Social Science Chapter 12 बाजारों की समझ – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 12: बाजार क समझ

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

247 – 272 25 50 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 56 pages

Page 2

कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 12: बाजार क समझ
कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ के स ूण एन.सी.ई.आर.ट . समाधान — यह समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
(कक्षा 7, भाग 1) के वषय-खंड हमारे आस-पास का आ थक जीवन का अं तम अध्याय है। अध्याय के सभी प्रश्न यहाँ हल कए गए ह — महत्वपूण
प्रश्न, आठ आइए पता लगाएँ बॉक्स, सात आइए वचार कर बॉक्स, सूरत के मान चत्र वाला इसे अनदे खा न कर प्रश्न, पाठ के भीतर पूछे गए सभी
प्रश्न, आगे बढ़ने से पहले... तथा प्रश्न और क्रयाकलाप के सभी दस प्रश्न।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1) (कक्षा 7) 247 – 272

खं ड प्रश्न

25 50

माध्यम

हन्द

महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 247
अध्याय का आरंभ — हमारे आस-पास का आ थक जीवन

महत्वपू ण प्रश्न

प्र.1 बाजार क्या होते ह और वे कैसे काय करते ह?

बाजार वह स्थान है जहाँ लोग ारा वस्तुओं और सेवाओं का क्रय- वक्रय कया जाता है। अध्याय क अपनी प रभाषा है — “वह
स्थान जहाँ लोग ारा व भन्न वस्तुओं का क्रय और वक्रय कया जाता है, उसे बाजार कहते ह। इसे हद म हाट और कन्नड़ म
‘मारुक े ' कहा जाता है।” आज बाजार का कोई भौ तक स्थान होना भी आवश्यक नह — वह कोई ऐप या वेबसाइट भी हो सकता
है।
बाजार तब काय करता है जब तीन बात एक साथ ह —

क्र
एक े ता, िजसे वस्त ु चािहए

क्र
+ एक िव े ता, िजसके पास वह वस्त ु है

+ एक कीमत , िजस पर दोनों सहमत हों

= लेन -दे न

चत्र 12.4–12.7 के अमरूद के ठे ले पर इसे होते हुए दे खए —

वक्रेता ₹80 प्र त कलोग्राम माँगता है। क्रेता को यह अ धक लगता है और वह कम क मत क माँग करता है।
वक्रेता पहले मना करता है, क्य क बहुत कम क मत पर बेचना उसके लए लाभदायक नह होगा।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

दोन मोल-तोल करते ह और जब परस्पर सहम त बन जाती है, तभी लेन-दे न पूरा होता है। य द सहम त न बने तो “उस स्थ त
म लेन-दे न नह हो सकता।”

यही क्रया हजार बार दोहराई जाए तो एक बड़ी बात सामने आती है — वक्रेताओं ारा लाई गई मात्रा और क्रेताओं ारा चाही गई
मात्रा मलकर वह क मत तय कर दे ती ह “जो वक्रेता के लए पयाप्त रूप से अ धक और क्रेता के लए पयाप्त रूप से कम हो।”
साथ ही वक्रेता यह भी सीख जाता है क बाजार को लगभग कतने कलो अमरूद चा हए, और अगली बार वह उतने ही लाता है।

ऐसा क्य होता है: क मत केवल एक संख्या नह , एक संकेत है। ऊँची क मत वक्रेता से कहती है — “और
लाओ”; कम क मत क्रेता से कहती है — “और खरीदो”। बाजार तब तक समायोजन करता रहता है जब तक दोन
संकेत एक-दूसरे से मेल न खा जाएँ।

प्र.2 व्य क्तय के जीवन म बाजार क क्या भू मका है?

बाजार क पहली भू मका आ थक है — वह लोग को वह सब उपलब्ध कराता है जो वे स्वयं नह बना सकते।

भू मका अध्याय म इसका प्रमाण

वस्तुओ ं और से वाओं तक व्य क्तय , प रवार और व्यापा रय को भोजन, वस्त्र, फोन, ज और सेवाएँ बाजार से ही मलती ह — “बाजार
पहुच
ँ लोग , परंपराओं और वचार को जोड़ते ह।”

उ त्पादक और उपभोक्ता चत्र 12.11 क ंखला कसान के अनाज या सूरत क साड़ी को आपके घर के पास क दुकान तक पहुँचाती है।
को जोड़ना

उ त्पादकों को आगत सूरत के वस्त्र-उत्पादक महाराष्ट्र और गुजरात क कपास मं डय से क ी कपास खरीदते ह; वह बाजार न हो तो
उपल ब्ध कराना पावरलूम रुक जाएँ।

रोजगार और आय इंफाल के इमा कैथल म लगभग 3,000 म हलाएँ दुकान चलाती ह — “हजार प रवार के लए आय का एक
महत्वपूण ोत।”

यह तय करना िक क्या जब बड़ी संख्या म उपभोक्ता कम वद्युत-खपत वाले रे जरेटर माँगने लगते ह, तो उत्पादक को संकेत मल
बने जाता है और वे वैसे ही बनाने लगते ह — जससे समाज को लाभ होता है।

संबंध और संस्कृ ित प रवार के अपने दज , स्वणकार और च कत्सक के साथ दशक पुराने संबंध; कराना दुकानदार के साथ महीने
भर का खाता; इमा कैथल “ व भन्न संस्कृ तय का संगम स्थल”।

इस लए बाजार का गैर-आ थक महत्व भी है। अध्याय के शब्द म — बाजार म होने वाली अंतः क्रयाएँ प्रायः केवल उत्पाद या
मोल-तोल तक सी मत नह रहत ।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 सरकार बाजार म क्या भू मका नभाती है?

बाजार माँग और आपू त क अंतः क्रया से चलता है, परंतु “कुछ ऐसी प र स्थ तयाँ होती ह, जनम यह बहुत सुचारु रूप से काय नह
कर पाता है।” ऐसी स्थ तय म सरकार नणायक क भू मका नभाती है। अध्याय उसके चार काय गनाता है।

सरकार क्या करती है अध्याय से उदाहरण

1. मूल्यों पर िनयंत्र ण — क्रेता और जीवन-र क्षक दवाओं जैस ी आवश्यक वस्तुओ ं पर अिधकतम मूल्य; गेहू,ँ धान और म क्का के िलए
िवक्रेता दोनों की सुर क्षा के िलए न्यूनतम मूल्य तािक िकसानों को हािन न हो; कम चािरयों के िलए न्यूनतम मजदू र ी

2. ग ण
ु वत्त ा और सुर क्षा मानकों को क्र
औषिधयों के अनुम ोदन की पि या तय करना और नमूना परीक्षण करना, तािक उपभोक्ता के
सुिनिश्चत करना स्वास्थ् य को संक ट न हो

3. बाजारों के बाह्य पभावों को कम करना एक बार उपयोग में आने वाले प्लािस्टक जैसे पदू षणकारी उ त्पादन पर कठोर िनयम ; िडब्बाबंद
वस्तुओ ं के भार और माप की िनगरानी

4. सावजिनक सुिवधा और से वाएँ सावजिनक उ द्य ान, सड़कें , सुर क्षा व्यवस्था तथा क ल्याणकारी पावधान, िजनमें उ त्पादक को लाभ की
उपल ब्ध कराना अपेक्षा नही ं होती

ध्यान रख: अध्याय दूसरी ओर का खतरा भी बताता है — “ नयम क बहुलता बाजार के सुचारु रूप से काय करने
म क ठनाई पैदा कर सकती है”, और य द मूल्य-सीमा बहुत कम रख द जाए तो “उत्पादक को उत्पादन करने क
कोई प्रेरणा नह मलेगी।” अ ा नयमन संतुलन है, अ धकतम नह ।

प्र.4 उपभोक्ता अपनी क्रय क गई वस्तुओं तथा सेवाओं क गुणवत्ता का आकलन कस प्रकार कर सकते ह?

तीन व्यावहा रक तरीके, और तीन अध्याय म आते ह।

लेबल प ढ़ए। चत्र 12.29 के बेसन के पैकेट पर दस बात अं कत ह — शुद्ध मात्रा, नमाण त थ, उपभोग क समा प्त त थ,
अ धकतम खुदरा मूल्य, बैच नंबर, व नमाता का नाम और पता, पोषण तथ्य सूची, सामग्री सूची, एलज घोषणा तथा
एफ.एस.एस.ए.आई. चह्न और लाइसस संख्या।
सरकारी प्रमाणन चह्न दे खए। उसक उप स्थ त “सु न श्चत करती है क उत्पाद न्यूनतम गुणवत्ता मानक पर खरा है।”
दूसर के अनुभव का उपयोग क जए — नजी संवाद से बनी प्र स द्ध, और ऑनलाइन क्रय करते समय अन्य उपभोक्ताओं
क समीक्षा एवं प्र त क्रया।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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m.
चह्न पूरा नाम कन वस्तुओं पर

mभारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्रा धकरण as e
एफ .एस .एस .ए .आई.
.co सरकार ारा क गई है a g l
खाद्य पैकेट और गत्ते के डब्बे — अथात् भोजन क जाँच

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aआई.एस.आई. िचह्न भारतीय मानक संस्थान का चह्न, जारी करता है वद्युत उपकरण, नमाण सामग्री, मोटर वाहन के प हये,
भारतीय मानक ब्यूरो कागज

com
एगमाक कृ ष उत्पाद का प्रमाणन चह्न
e m . स ब्जयाँ, फल, अनाज, दाल, मसाले, शहद ag
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बी.ई.ई. स्टार रे िटंग ऊजा दक्षता ब्यूरो
a ट .वी., लैपटॉप, वातानुकू लत उपकरण — अ धक तारे =
कम ऊजा-खपत

. com
m a s emसकता है। प्रमाणन
co का काम एक सरकारी एजसी को स प दे ता है, जस पर क्रेता भरोसा aकरglसके — इस प्रकार
ऐसा क्य होता है: दुकान म खड़ा क्रेता न तो दवा क जाँच कर सकता है, न बंद पैकेट को तौल
.
em का काम एक नजर म हो जाता है।
चह्न परीक्षण

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प्रयोगशाला
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m .co agl
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 250
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बाजार क्या है? — बाजार के अनेक नाम
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.
आपके क्षेत्र म इसे क्या कहा जाता है?
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प्र.1

o m l a se
उत्तर .c a g
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se ही वचार का नाम भारत क लगभग हर भाषा म अलग है — और प्रायः एक से अ धक नाम ह, यह इस पर नभर करता है क
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एक
वह रोज लगने वाली दुकान क गली है या कसी नयत दन लगने वाला बाजार।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

भाषा / क्षेत्र बाजार के लए शब्द

िहंद ी, उदू तथा उत्तर भारत बाजार ; िनयत िदन लगने वाला बाजार हाट या पैठं

कन्नड़ (कन टक) मारुक े , संते

तिमल (तिमलनाडु) कडै वीिध , संदै

तेल ुग ु (आंध पदे श, तेल ंग ाना) बजारु, संत

मलयालम (के रल) चंत, अंग ाडी

मराठी (महारा ) बाजारपेठ, आठवडी बाजार (साप्तािहक बाजार )

बांग्ला, ओिड़या, असिमया बाजार , हाट

गज
ु राती बजार , ग ज
ु री

पंजाबी बाजार , मंडी

स्वयं जाँ चए: घर पर पू छए क सप्ताह म केवल एक दन लगने वाले बाजार को आपके यहाँ क्या कहते ह। वह
शब्द प्रायः दुकान क गली वाले शब्द से कह अ धक पुराना होता है, क्य क नयत दन लगने वाले बाजार ही बाजार
का सबसे पुराना रूप ह।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 251
गौरवशाली हंपी बाजार, कनाटक

आइए पता लगाएँ

प्र.1 क्या आप कल्पना कर सकते ह क यह बाजार अपनी समृ द्ध क चरम सीमा पर कैसा रहा होगा?

हाँ — और अध्याय म उद्धत दोन पुतगाली या त्रय के वणन से यह चत्र बन जाता है।
कल्पना क जए क आप 16व शताब्द म वरूपाक्ष मं दर के सामने खड़े ह। मं दर के गोपुरम से एक लंबी, सीधी, स्तंभ वाली गली
आगे जाती है, जसके दोन ओर पत्थर के मंडप बने ह। उनके नीचे वक्रेता अपने ढे र लगाए बैठे ह —

अन्न और कृ ष-उत्पाद — अनाज, बीज, दूध, तेल।
वस्त्र — रेशम, और “कपड़ के वक्रेताओं के लए कपास”।
पशु-पक्षी — गाय, खरगोश, घोड़े और यहाँ तक क बटे र और तीतर।
बहुमूल्य वस्तुए ँ — “सोने के जवाहरात और कृ त्रम आभूषण… हर प्रकार के मा णक्य, हीरे-मो तय ”।
चारा — “प्रचुर मात्रा म घास और भूसा” घोड़ और पशुओं के लए।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

शल्पकार यहाँ कसी बंद कारखाने म नह थे — “वहाँ शल्पकार भी थे, जो अपनी ग लय म काम करते थे”। अथात् क्रेता स्वणकार
को आभूषण गढ़ते दे खता और वह से तैयार वस्तु खरीद लेता था। इसम अनेक भाषाओं म होते मोल-तोल का शोर, फारस और
पुतगाल से आए व्यापारी, मं दर क घं टयाँ और तेल-मसाल क गंध जोड़ द जए — यही वह बाजार है जसे डो मन्गोस पेस ने
‘ वश्व म उत्कृष्ट उपलब्धता वाला शहर' कहा था।

ऐसा क्य होता है: हंपी वजयनगर सा ाज्य क राजधानी और “समृद्ध व्यापार का कद्र” था। सुदृढ़ और स्थर
राजधानी उत्पादक और दूर-दराज के व्यापा रय को ख चती है, क्य क उन्ह पता होता है क वहाँ क्रय-श क्त वाले
क्रेता मलगे। नु नज को स्वयं आश्चय हुआ था — आस-पास का दे श “बंजर” दखता था, फर भी नगर म “हर चीज
क प्रचुरता” थी। वह प्रचुरता खेती से नह , व्यापार से आई थी।

प्र.2 क्या आप अपने राज्य म कन्ह पुराने बाजार के बारे म जानते ह? वे वतमान बाजार से कस तरह समान या
भन्न ह गे? अपने प रवार और समुदाय के व रष्ठजन के साथ चचा क जए।

व ध। अपने राज्य का ऐसा एक बाजार चु नए जो कम से कम कुछ पीढ़ पुराना हो। अध्याय स्वयं चार बाजार के चत्र दे ता है —
पुरानी दल्ली का खारी बावली मसाला बाजार ( चत्र 12.15), जयपुर का जौहरी बाजार ( चत्र 12.17), बगलुरु का फूल बाजार
( चत्र 12.16) और इंफाल का इमा कैथल ( चत्र 12.26)। फर कसी व रष्ठजन से तीन प्रश्न पू छए — आपके बचपन म यहाँ क्या
बकता था? भुगतान कैसे होता था? माल यहाँ तक कैसे पहुँचता था?
अ ा उत्तर पुराने और नए क तुलना एक ही बदुओं पर करता है, केवल “सब बदल गया” कहकर नह छोड़ दे ता।

तुलना का पुराना बाजार आज का बाजार
बदु

स्थान प्रायः मं दर, कले, नद -घाट या रेलवे स्टे शन वही स्थान — पुराने बाजार हलते नह ; नए बाजार सड़क के साथ बनते
के पास ह

िवक्रेता कौन पी ढ़य से वही प रवार, प्रायः एक गली म पा रवा रक दुकान और साथ ही ांडेड स्टोर, मॉल तथा ऑनलाइन
एक ही व्यवसाय वक्रेता

कीमत हर बार मोल-तोल से तय अ धकतर छपा हुआ अ धकतम खुदरा मूल्य; ठे ल और हाट म मोल-
तोल आज भी जी वत

भुग तान नकद, और महीने के अंत म चुकता होने नकद, काड और यू.पी.आई. / क्यू.आर. कोड — चत्र 12.4 के ठे ले
वाला उधार-खाता पर क्यू.आर. कोड दे खए

माल कै से आता बैलगाड़ी, नाव, सर पर बोझा ट्रक, रेल, शीतागार वाहन, कू रयर
था

जो नही ं बदला एक क्रेता, एक वक्रेता, एक सहमत क मत — और दशक तक चलने वाला भरोसे का संबंध

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नमूना उत्तर: “मेरी दाद बस-स्टड के पीछे लगने वाले साप्ता हक हाट म सामान लेने जाती थ , जो आज भी वह
लगता है। वे बताती ह क तब वहाँ केवल स ब्जयाँ, म के बरतन, रस्सी और चू ड़याँ बकती थ और हर क मत पर
मोल-तोल होता था। व्यापारी तीन गाँव दूर से बैलगाड़ी म आते थे। आज उसी हाट म प्ला स्टक क बा ल्टयाँ और
मोबाइल कवर भी बकते ह, सब्जी वाले ने अपने तराजू पर क्यू.आर. कोड चपका रखा है, और सुबह छह बजे तक
टपो मंडी से सब्जी उतार दे ता है। जो नह बदला वह है दन — वह आज भी मंगलवार ही है, जैसा जाने कब से चला
आ रहा है।”

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 251

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चत्र 12.4 — अमरूद का वक्रेता और क्रेता

आइए पता लगाएँ

प्र.1 चत्र का अवलोकन क जए। ये व्य क्त क्या चचा कर रहे ह? कल्पना क जए क आप और आपका साथी
अमरूद के क्रेता और वक्रेता ह। आप दोन के बीच हुए संवाद को एक नाटक के रूप म तैयार करके अपनी कक्षा
म प्रस्तुत क जए।

चत्र 12.4, पृष्ठ 251 — पुनः बनाया गया: ठे ले पर अमरूद बेचता वक्रेता, ठे ले पर तराजू और क्यू.आर. कोड का पट्ट,
तथा ग्राहक को कागज़ का थैला दे ते हुए।

वे कस बात क चचा कर रहे ह: क मत क । चत्र 12.4 म वक्रेता अमरूद से भरे ठे ले के पीछे खड़ा है, एक ओर तराजू रखा है
और फल के सहारे ड जटल भुगतान का क्यू.आर. कोड टका है। उसने कागज का भरा हुआ थैला आगे बढ़ाया है; क्रेता ने अभी
वह लया नह है और बात कर रही है। यही बाजार का क्षण है — वस्तु तैयार, पैसा तैयार, और दोन तय कर रहे ह क कतना।
नाटक — तैयार संवाद। दो पात्र, लगभग दो मनट।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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पात्र संवाद क्या हो रहा है

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क्रेता
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“भैया, अमरूद कैसे दए?” पूछताछ
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“साठ रुपये कलो, द द । इलाहाबाद ह, कल ही तोड़े गए ह।” क्र
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िवक्रेता िव े ता कीमत बताता है और उसका कारण भी

क्रेता “साठ? नुक्कड़ वाला तो पतालीस म दे रहा है।” क्रे ता पितस्पध का तक दे ती है
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िवक्रेता
em .
“उसके छोटे ह और आधे दागी। मेरे दे खए — एक भी दाग नह । पचपन क्र
िव े ता ग ण
ु वत्त ा पर बचाव करता है और कीमत थोड़ी ag
दे द जए।”
g l as घटाता है

क्रेता “पतालीस, और म दो कलो लूँगी।”
a क्रे ता कम कीमत के बदले अिधक मात्रा का पस्ताव
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दे ती है

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s emहै: उससे नीचे नही ं जा
िवक्रे ता अपनी लागत बताता
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cलएomह।” agl
िवक्रेता “दो कलो पचास म। इससे कम म घाटा होगा — मंडी से मने चालीस म

m . सकता

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a g lक्र “ठ क है, पचास। तौल द जए और ब े के लए दो अमरूद ऊपर से सहमित
डाल द जए।”

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िवक्रेता “ली जए। सौ रुपये हुए। नकद दगी या स्कैन करगी?” ले न-दे न पूण

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िवक्रे ता की पहली माँग: ₹60 पित िकगा a
क्रे ता का पहला पस्ताव: ₹45 पित िकगा
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मंडी से िवक्रे ता की लागत: ₹40 पित िकगा
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a s em सहमत कीमत: ₹50 पित िकगा → 2 िकगा के िलए ₹50 × 2 = ₹100

agl िवक्रे ता का लाभ: (₹50 − ₹40) × 2 = ₹20

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com g l a
m . a
e
सेsकम दो प्रस्ताव, और वह क मत जस पर दोन सहमत हुए। यही तीन बात ही
सुझाव: नाटक म एक ही सामग्री र खए — अमरूद का एक थैला। और ध्यान र खए क कक्षा को तीन बात स्पष्ट
सुनाई द: पहली क मत, बीच के कमla
a g
बाजार ह।

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m .
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om — पृष्ठ 251
पाठ्य.cप्रश्न a g l
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नाटक के बाद — मोल-तोल क प्रकृ त

प्र.1 प्रायः क्रेता और वक्रेता कसी स्वीकाय क मत पर लेन-दे न करने के लए मोल-तोल करते ह। आपके नाटक म
कस तरह का मोल-तोल हुआ था?

ऊपर के नाटक म मोल-तोल पाँच पहचानी जा सकने वाली चाल से गुजरा। उत्तर म इन्ह नाम दे कर ल खए — यही वणन को
व्याख्या बना दे ता है।

1. ऊँची शुरुआत। वक्रेता ने ₹60 से आरंभ कया, ता क नीचे आने के बाद भी लाभ बचा रहे।
2. तुलना का तक। क्रेता ने पास के दूसरे ठे ले क क मत (₹45) का हवाला दया — भारतीय बाजार क सबसे आम चाल।
3. गुणवत्ता का तक। वक्रेता ने संख्या से नह , तक से उत्तर दया — उसके फल बेदाग और ताजे ह, इस लए अ धक मूल्य के ह।
4. मात्रा का मोल-तोल। क्रेता ने एक क जगह दो कलो लेने का प्रस्ताव रखा। बड़ी बक्र के लए वक्रेता प्र त कलो कम लेने
को तैयार हो जाता है।
5. लागत क सीमा। वक्रेता ने बताया क उसने मंडी म ₹40 दए ह। उससे नीचे उसे घाटा होगा, इस लए वह उसक सीमा है।

अंततः दोन ₹50 पर मले — वक्रेता क ₹40 क सीमा से ऊपर और क्रेता क आरं भक सीमा से नीचे। ऊपर से दो अमरूद दे कर
सौदा बना क मत बदले पक्का हो गया।

ऐसा क्य होता है: मोल-तोल वास्तव म सूचना का आदान-प्रदान है। कसी को दूसरे क सीमा नह पता होती,
इस लए दोन थोड़ा-थोड़ा बताते ह — लागत, गुणवत्ता, मात्रा, वकल्प — जब तक दोन क सीमाएँ आपस म न
मल जाएँ। य द वे कभी न मल, तो “उस स्थ त म लेन-दे न नह हो सकता”, जैसा अध्याय कहता है।

आइए वचार कर — पृष्ठ 252
मोल-तोल कहाँ रुक जाता है

आइए वचार कर

प्र.1 क्या आप कसी ऐसे बाजार के बारे म सोच सकते ह, जहाँ मोल-तोल कम प्रच लत है और क्य ?

हाँ, अनेक ह। सबसे स्पष्ट उदाहरण है ऑनलाइन बाजार, और उसके बाद हर वह बाजार जहाँ क मत छपी हुई, नयं त्रत या
मशीन ारा तय होती है।

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बाजार वहाँ मोल-तोल क्य नह होता

ऑनलाइन ऐप और वेबसाइट क्रेता और वक्रेता कभी मलते ही नह । संग्राहक का सॉफ्टवेयर एक ही क मत लाख क्रेताओं को एक साथ
दखाता है; दूसरी ओर बहस करने के लए कोई व्य क्त है ही नह ।

मॉल , सुपरमाक ट और बांडेड वस्तु पर अ धकतम खुदरा मूल्य छपा होता है और बल काउं टर पर बनता है। वक्रयकता को क मत
स्टोर बदलने का अ धकार नह होता, और वही क मत हर ग्राहक पर लागू होनी चा हए।

औषिधयाँ और अन्य मूल्य- सरकार जीवन-रक्षक दवाओं क ऊपरी सीमा तय कर दे ती है। दवा वक्रेता उससे अ धक ले नह सकता और
िनयंित्र त वस्तुए ँ कम लेने क गुंजाइश भी कम होती है।

पेटोल पंप, रे ल -बस िटकट, क मत कद्र य रूप से तय होती है और सबके लए एक-सी होती है; वक्रेता स्वयं क मत तय नह करता।
िसनेम ा िटकट

न्यूनतम मूल्य पर गेहू,ँ धान या न्यूनतम मूल्य का उ े श्य ही यह है क उसे नीचे न लाया जा सके — यही कसान क रक्षा करता है।
म क्का की िब ी क्र

मोल-तोल इसके ठ क वपरीत स्थ तय म जी वत रहता है — हाट, सब्जी का ठे ला, मछली बाजार, कपड़े या आभूषण का बाजार
— जहाँ हर वक्रेता अपनी क मत स्वयं तय करता है, कोई दो वस्तुएँ बलकुल एक जैसी नह होत , और क्रेता- वक्रेता आमने-सामने
खड़े होते ह।

ऐसा क्य होता है: मोल-तोल तभी संभव है जब एक वक्रेता दो क्रेताओं से अलग-अलग क मत ले सके। जस
क्षण क मत सबके लए एक होनी अ नवाय हो जाती है — चाहे वह छपी हो, नयं त्रत हो या स्क्र न पर दख रही हो
— मोल-तोल के लए कुछ बचता ही नह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 252–253
क मत और बाजार — अमरूद के तीन प रदृश्य ( चत्र 12.5, 12.6, 12.7)

प्र.1 जब बाजार म अ धक क्रेता और वक्रेता होते ह, तो क्या होता है? बाजार म क्रेताओं और वक्रेताओं क आपसी
बातचीत से क मत कस प्रकार बदलती ह?

जब क्रेता और वक्रेता दोन अ धक ह तो कोई एक व्य क्त क मत तय नह कर सकता। हर क्रेता अगले ठे ले तक जा सकता है;
हर वक्रेता अगले ग्राहक क प्रतीक्षा कर सकता है। ऐसे हजार छोटे -छोटे नणय से एक सवमान्य, चलती हुई क मत बन जाती है।

अमरूद चाहने वाले क्रे ता अिधक → िवक्रे ता अिधक माँग सकते है ं → कीमत बढ़ ती है

अमरूद लेक र बैठे िवक्रे ता अिधक → क्रे ता आगे बढ़ सकते है ं → कीमत घटती है

दोनों शिक्तयाँ िमलकर → वह कीमत जो “िवक्रे ता के िलए पय प्त रूप से अिधक और क्रे ता के िलए पय प्त रूप

से कम हो”

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

क मत दो दशाओं म प्र त क्रया करती ह —

क मत अंतः क्रया के अनुसार बदलती है — जब क्रेता कम अमरूद के लए होड़ कर तो बढ़ती है, और जब वक्रेता कम
क्रेताओं के लए होड़ कर तो घटती है।
अंतः क्रया क मत के अनुसार बदलती है — ऊँची क मत पर क्रेता कम खरीदते ह और वक्रेता अ धक लाते ह; कम क मत
पर उलटा होता है। अध्याय का नष्कष यही है — समय के साथ “ वक्रेता ारा उपलब्ध कराई गई वस्तुओं क मात्रा तथा क्रेता
ारा अपे क्षत मूल्य से वस्तुओं क उस क मत के नधारण म सहायता मलती है”।

ऐसा क्य होता है: य द वक्रेता केवल एक हो तो क्रेता के पास मान लेने या लौट जाने के अलावा कोई वकल्प नह ।
अनेक वक्रेता ह तो क्रेता का असली ह थयार अगला ठे ला है — और यही वकल्प, न क बहस, क मत को एक
साझा स्तर पर ख च लाता है।

प्र.2 क्या होगा य द वक्रेता बहुत अ धक मूल्य तय कर दे ?

चत्र 12.5 को ध्यान से दे खए। मूल्य-प का पर ₹80/- लखा है। ठे ला अब भी अमरूद से भरा हुआ है। चत्र म सात-आठ
व्य क्त ह और उनम से लगभग सभी आगे नकलते जा रहे ह; केवल एक-दो रुके ह, और कोई भी अमरूद का थैला लेकर नह जा
रहा।
अथात् बहुत अ धक क मत पर —

माँग गर जाती है। क्रेताओं को क मत “बहुत अ धक” लगती है और वे या तो कम मूल्य क माँग करते ह या चले जाते ह।
माल बना बका रह जाता है। अमरूद शीघ्र सड़ने वाला फल है — बचा हुआ माल कुछ ही दन म खराब हो जाएगा, इस लए
यह वास्त वक हा न है।
वक्रेता क आमदनी घट जाती है, भले ही प्र त कलो क मत ऊँची हो।

मान लीिजए ठे ले पर 50 िकगा अमरूद है।
ं

₹80/िकगा पर यिद के वल 5 िकगा िबकें → आमदनी = ₹80 × 5 = ₹400

और 45 िकगा सड़ ने के िलए बच जाते है।
ं

सुझाव: ऊँची क मत और ऊँची आमदनी एक बात नह है। वक्रेता घर वास्तव म क मत × बक हुई मात्रा ले जाता
है — और बहुत ऊँची क मत दूसरी संख्या को पहली से कह तेजी से गरा दे ती है।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 क्या होगा य द वक्रेता बहुत कम मूल्य तय कर दे ?

अब चत्र 12.6 दे खए। प का पर ₹20/- है और ठे ला पूरी तरह खाली है — लकड़ी क पाट पर केवल कुछ पत्ते बचे ह। बाईं
ओर क्रेता अमरूद से भरे थैले लेकर जा रहे ह। दाईं ओर एक ग्राहक अब भी नोट बढ़ाए खड़ा है और वक्रेता हाथ फैलाकर
असमथता जता रहा है — बेचने के लए कुछ बचा ही नह । एक ब ा और कई अन्य क्रेता अब भी प्रतीक्षा कर रहे ह।
अथात् बहुत कम क मत पर —

माँग बहुत बढ़ जाती है और सारा माल बहुत जल्द बक जाता है।
अनेक क्रेता खाली हाथ लौटते ह — सस्ता होने का कोई लाभ नह य द वस्तु ही न बचे।
वक्रेता को बहुत कम मलता है, संभवतः अपनी लागत से भी कम। उसे घाटा होता है और कल का माल खरीदना क ठन हो
जाता है।

वही 50 िकगा का ठे ला।

₹20/िकगा पर पूरे 50 िकगा िबक जाएँ → आमदनी = ₹20 × 50 = ₹1,000

यिद उसने मंडी में ₹25/िकगा िदए थे → लागत = ₹25 × 50 = ₹1,250

पिरणाम: ₹250 की हािन — और ऊपर से असंत ष्ु ट गाहकों की कतार।

ऐसा क्य होता है: जो क मत वक्रेता के लए “लाभदायक नह ” है, वह टक नह सकती। य द वक्रेता लगातार
घाटा उठाएँ तो वे अमरूद लाना ही बंद कर दगे — और तब ₹20 क क मत से खुश होने वाले क्रेताओं को अगले
सप्ताह बाजार म अमरूद ही नह मलगे।

प्र.4 समय के साथ अमरूद क एक सही क मत तय हो जाती है, जो न तो क्रेता के लए बहुत अ धक होती है और न
ही वक्रेता के लए बहुत कम।

चत्र 12.7 दखाता है क ₹40/- पर ‘सही क मत' कैसी दखती है। ठे ले पर अब भी पयाप्त अमरूद ह, वक्रेता तराजू पर तौल
रहा है, एक ग्राहक को सामान दया जा रहा है और दूसरा फल परख रहा है, तथा दो क्रेता भरे थैले लेकर जा चुके ह। न कोई खाली
हाथ लौटा, न कुछ सड़ने को बचा। ठे ले पर लगा क्यू.आर. कोड बताता है क भुगतान भी उतना ही सहज है जतनी क मत उ चत।

क मत चत्र दन के अंत म ठे ला क्रेता वक्रेता

₹80/िकग ा 12.5 भरा हुआ आगे नकल जाते ह बना बका, सड़ता माल

₹20/िकग ा 12.6 मनट म खाली अनेक खाली हाथ, पैसा लए खड़े घाटे म बक्र

₹40/िकग ा 12.7 धीरे-धीरे बकता हुआ जसे चा हए, उसे मल जाता है लागत भी नकली और लाभ भी

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₹40 ठीक ₹80 का आधा है और ₹20 का दुगन
ु ा—
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उसी सीढ़ ी का बीच का डंडा िजस पर िवक्रे ता नीचे उतरा और िफर ऊपर चढ़ ा।
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l दूसरा पाठ भी है, जसे अध्याय चत्र के तुरंत बाद कहता है — “इन तीन प रदृश्य से वक्रेता यह आकलन कर सकता है
agएक
और
क क्रेता को लगभग कतनी मात्रा म अमरूद क आवश्यकता है और भ वष्य म वह बाजार म उतनी ही मात्रा उपलब्ध कराता है।”

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सही क मत केवल आज का सौदा तय नह करती, वह वक्रेता को कल क मात्रा भी बता दे ती है।

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ऐसा क्य होता है: बाजार म कोई प्रबंधक नह बैठा जो सही क मत घो षत कर दे । वह प्रयास और भूल से खोजी
जाती है — वक्रेता बहुत ऊँची क मत आजमाता है, बहुत कम आजमाता है, प रणाम दे खता है, और वह आकर
टकता है जहाँ ठे ला भी खाली हो और लाभ भी बचे।
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lasवचार कर — पृष्ठ 254
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आइए
दे र रात क स ब्जयाँ और ऋतु के अंत के ऊनी वस्त्र

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आइए वचार कर

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प्र.1 agसlब्जयाँ दन क तुलना म सस्ती हो जाती ह। आपके वचार म ऐसा क्य होता
साप्ता हक बाजार म दे र रात को
है?

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g है “सस्ता बेचूँ या सब गँवा दूँ”।
क्य क .देcर रात तक वक्रेता के सामने “सस्ता बेचूँ या महँगा” का प्रश्न नह रहता — प्रश्न होता
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सिब्जयाँ शीघ सड़ ने वाली है ं — पालक और टमाटर रात भर ठे ले पर नही ं िटकें गे

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+ साप्तािहक बाजार उठ जाता है; रखने के िलए कोई दुक ान नही ं
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+ बचा माल घर ले जाने में खच है और कल उसका मूल्य और घट जाएगा

→ शून्य से अिधक कोई भी कीमत फेंक दे ने से बेहतर है

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→ िव े ता कीमत घटा दे त ा है
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दो बात और इसी दशा म धकेलती ह —

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क्रेता कम बचे ह। भीड़ छँ टने के साथ माँग गर जाती है, और बचे हुए वक्रेता उन थोड़े ग्राहक के लए कड़ी होड़ करते ह।

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माल भी अब सबसे अच्छा नह रहा। सबसे ताजी ग याँ सुबह के क्रेता ले जा चुके; जो बचा है वह मुरझाया हुआ है और

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उसका मूल्य कम है।

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ऐसा क्य होता है: यह माँग और आपू त का सबसे तीखा रूप है। दे र रात ठे ले पर पड़ी आपू त को संगृहीत नह
कया जा सकता और माँग जा चुक है। जब आपू त प्रतीक्षा न कर सके और माँग बची न हो, तो केवल क मत ही
हल सकती है।

सुझाव: ध्यान द जए क इस छू ट क क मत क्रेता भी चुकाता है — ताजगी म। दे र रात का सस्ता सौदा उसी रात
पकाना पड़ता है।

प्र.2 शीत ऋतु के अंत म कपड़े क दुकान म ऊनी वस्त्र पर भारी छू ट द जाती है। ऐसा क्य होता है?

वही तक, बस एक रात के बदले एक पूरी ऋतु पर फैला हुआ।

ठं ड के साथ माँग समाप्त हो जाती है। माच आते ही स्वेटर कोई नह चाहता, इस लए क्रेताओं क संख्या लगभग शून्य हो
जाती है।
माल रखना महँगा है। बना बके ऊनी वस्त्र को पैक करके, क ड़ और सीलन से बचाकर आठ-नौ महीने रखना पड़ेगा — और
ग्रीष्म ऋतु का माल तो आ ही चुका है, जसके लए जगह चा हए।
फैशन और नाप बदल जाते ह। अगली सद के डजाइन अलग ह गे, इस लए यह माल तब भी क ठनाई से बकेगा।
पूँजी फँसी रह जाती है। जस दुकानदार ने थोक वक्रेता को 500 स्वेटर के पैसे दए ह, उसे वह धन वापस चा हए ता क नया
माल खरीद सके। भरे गोदाम से आज का नकद अ धक मूल्यवान है।

एक स्वेट र की लागत: ₹800 · सामान्य िवक्रय मूल्य: ₹1,500

ऋत ु के अंत में 40% छू ट पर: ₹1,500 − ₹600 = ₹900

अभी बेच ने पर लाभ: ₹900 − ₹800 = ₹100

नौ महीने रखकर सस्ते में बेच ने पर लाभ: लगभग शून्य, ऊपर से भंडारण का खच

ऐसा क्य होता है: यह छू ट उदारता नह है। आज मला छोटा लाभ उस बड़े लाभ से बेहतर है जो शायद कभी न
मले — और साथ ही वह धन तथा जगह मुक्त कर दे ता है जनसे वह माल आएगा जो वास्तव म बकेगा।

आइए वचार कर — पृष्ठ 255

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प्रत्यक्ष और ऑनलाइन बाजार क तुलना

आइए वचार कर

प्र.1 आपके वचार म ऑनलाइन और प्रत्यक्ष क्रय के क्या लाभ और हा न ह? इसका उत्तर वक्रेता और क्रेता दोन के
दृ ष्टकोण से पता क जए।

चार दृ ष्टकोण ह, इस लए उत्तर को चार खान क ता लका म र खए।

लाभ हा न

ऑनलाइन घर बैठे, िकसी भी समय, “हजारों िकलोमीटर दू र ” से भी क्रय; वस्तु को छू कर, सूँघकर या पहनकर नह दे ख सकते;
— े ता क्र बहुत बड़ी िविवधता; कीमतों की सरल तुल ना; अन्य उपभोक्ताओं प्रतीक्षा करनी पड़ती है; गलत या टू टा सामान आने का
की ऑनलाइन समीक्षा; घर तक सामान; ऑनलाइन भुग तान; जो खम; वापसी झंझट भरी; मोल-तोल नह ; फोन,
ऑनलाइन क क्षाओं जैस ी से वाएँ िबना बाहर िनकले इंटरनेट और थोड़ी ड जटल समझ आवश्यक

ऑनलाइन दुक ान के िबना पूरे दे श और िवदे श तक पहच
ु ँ ; दुक ान का महँग ा एक ही स्क्र न पर हजार वक्रेताओं से होड़, प्रायः केवल
— िव े ताक्र िकराया नही;ं चौबीसों घंटे खुल ा; पैिकं ग और िवतरण संग ाहक क मत पर; संग्राहक को कमीशन दे ना पड़ता है; बुरी
सँभाल ले ता है; िविनम ता अपने आगत भी ऑनलाइन खरीद समीक्षा तेजी से फैलती है; वापसी और शीघ्र खराब होने
सकते है ं वाली वस्तुओं क पै कग का खच

पत्यक्ष — भुग तान से पहले दे खना, छू ना और परखना; सामान तुर ंत घर ; समय और आने-जाने का खच; केवल पास क दुकान
क्र
े ता मोल -तोल ; वष ं से भरोसे वाले दुक ानदार से व्यवहार ; बदलना का माल; दुकान के समय क बाध्यता; अनेक दुकान
आसान; िवतरण शुल्क नही ं क क मत तुलना करना क ठन

पत्यक्ष — आमने-सामने ग ाहक को समझा सकता है; लंबा संबंध बनता है, कराया, बजली और कमचा रय का खच; केवल आस-
क्र
िव े ता “कई पीिढ़ यों तक ” भी; भुग तान तुर ंत; पैिकं ग और कू िरयर का पास के ग्राहक; दन भर दुकान पर रहना; दुकान के
खच नही ं आकार जतना ही माल

सुझाव: दोन एक-दूसरे के शत्रु नह ह। आज अनेक प रवार वस्तु दे खते प्रत्यक्ष दुकान म ह और खरीदते ऑनलाइन
ह, या ऑनलाइन मँगाकर दुकान से ले आते ह। अ ा उत्तर यह भी लखता है।

प्र.2 कुछ सेवाओं के लए व्य क्तगत संपक क आवश्यकता होती है, जैसे क कपड़ क सलाई, जसक सेवा
ऑनलाइन प्रदान नह क जा सकती है। क्या आप ऐसी अन्य सेवाओं का सुझाव दे सकते ह, जनके लए प्रत्यक्ष
बाजार क आवश्यकता होती है?

हर वह सेवा जसम व्य क्त, शरीर या वस्तु का वहाँ उप स्थत होना अ नवाय है। अध्याय के अपने चत्र दो उदाहरण पहले ही दे दे ते ह
— सैलून ( चत्र 12.19) और वस्त्र क दुकान ( चत्र 12.18)।

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सेवा ऑनलाइन क्य नह हो सकती

बाल काटना, सै ल ून, मािलश नाई के हाथ आपके बाल तक पहुँचने ही चा हए

दंत-िचिक त्सा, शल्य-िचिक त्सा, िफिजयोथेरे पी, टीकाकरण शरीर क जाँच और उपचार प्रत्यक्ष रूप से करना पड़ता है

साइिकल , कार , मोबाइल या वॉिशंग मशीन की मर म्मत मस्त्री को मशीन खोलनी पड़ती है

नल -मर म्मत, िबजली का काम , बढ़ ईगीरी, घर की पुताई काम उस भवन पर होता है जसे कह भेजा नह जा सकता

रे स्तराँ का भोजन, ठे ले की चाय, चाट-पकौड़ी पका भोजन वह , गम और ताजा खाया जाता है

िसनेम ा हॉल , खेल का मैद ान, नाटक , मेल ा आधा आनंद भीड़ म उप स्थत होने का ही है

आभूषण, चश्मा, जूते या ग ा खरीदना नाप, भार और अनुभव पहले परखना पड़ता है

िववाह के वस्त्र ों की िसलाई नाप और फ टग के लए कई बार प्रत्यक्ष बैठक आवश्यक

ऐसा क्य होता है: कोई सेवा ऑनलाइन तभी जा सकती है जब उसका पूरा रूप सूचना बनकर यात्रा कर सके —
शब्द, चत्र, ध्व न और धन। ऑनलाइन कक्षा चलती है क्य क पढ़ाना सूचना है। बाल काटना सूचना नह है, इस लए
वह प्रत्यक्ष बाजार म ही रहता है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 257

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चत्र 12.11 — बाजार म वस्तुओं का प्रवाह

आइए पता लगाएँ

प्र.1 प्रवाह चत्र 12.11 को ध्यान से दे खए और व नमाता या उत्पादक से उपभोक्ता तक वस्तुओं के प्रवाह का वणन
क जए। इस प्रवाह म थोक वक्रेता और खुदरा वक्रेता क क्या भू मका होती है?

उपभोक्ता

खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता

खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत थोक िवक्रे ता
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत उत्पादक उत्पादक थोक िवक्रे ता
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत थोक िवक्रे ता
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता

खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता

उपभोक्ता

चत्र 12.11, पृष्ठ 257 — हद संस्करण के अनुसार पुनः बनाया गया।

चत्र 12.11 म पाँच स्तर ह, और सबसे ध्यान दे ने योग्य बात यह है क हर स्तर पर बक्स क संख्या बढ़ती चली जाती है —
आगत के 5 बक्से, उत्पादक के 2, थोक वक्रेता के 3, खुदरा वक्रेता के 9 और उपभोक्ता के 11।

आगत 5

उत्पादक 2

थोक िवक्रेता 3

खुदरा िवक्रेता 9

उपभोक्ता 11

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चत्र 12.11 का सार — कुछ उत्पादक से चलकर वस्तुएँ थोक वक्रेताओं से होते हुए अनेक खुदरा वक्रेताओं और उससे भी अ धक
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उपभोक्ताओं तक फैल जाती ह।

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प्रवाह का वणन
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l — कपास, अनाज, लोहा, रसायन आ द क ी सामग्री खरीद जाती है।
agआगत
1.
2. उत्पादक / व नमाता उन्ह तैयार वस्तुओं म बदलते ह — कपड़ा, ज, पैक कया हुआ बेसन।

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3. थोक वक्रेता उत्पादक से “अ धक मात्रा म वस्तुएँ क्रय करते ह”। अनाज, सब्जी और फल के थोक व्यापारी तो सीधे खेत से
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s e m सड़ने वाली वस्तुओं के लए वहाँ शीतागार क सु वधा भी होती है।
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खरीदते ह। यह माल गोदाम म संगृहीत होता है और शीघ्र

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फर इसे मंडी म लाया जाता है।
4. खुदरा वक्रेता — घर के पास क दुकान और स्टोर — थोक वक्रेताओं से माल लेते ह। जहाँ दूरी और क्षेत्र के कारण थोक
वक्रेता सीधे नह पहुँच पाते, वहाँ वतरक यह अंतर पाटते ह।
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5. उपभोक्ता — हम — खुदरा वक्रेता से वस्तुएँ खरीदते ह।
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m .co थोक वक्रेता g
aे ता
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खुदरा वक्र

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a िकससे सीधे उ त्पादक या िविनम ता से — अनाज, स ब्जी और फल “खेतों क्र
थोक िव े ता से , या िवतरक के माध् यम से

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खरीदता है से सीधा”

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m .co agl
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मात्रा अिधक / थोक में कम मात्र ा में

िकसे बेचता
है स्तर पर
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छोटे दुक ानदारों और बड़ी खुद रा दुक ानों को, दे श और अंतर ीय अंितम उपभोक्ता को

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िवक्रय का पुनिव य उपभोग

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उ े श्य

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भंडारण गोदाम और शीतागार (िचत्र 12.12, 12.13, 12.14) दुक ान का काउं टर और पीछे की छोटी कोठरी

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ृ ला में
शंख यह आकलन करना िक खुद रा िव े ताओं को िकतना माल चािहए उपल ब्धता बढ़ ाना — हर घर के पास वस्तुए ँ और से वाएँ

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िवशेष काम — इससे उ त्पादकों को संग ह में सहायता िमलती है और अंितम पहुच
ँ ाना; सै ल ून, िफ ल्म िथएटर और रे स्तराँ जैस ी

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उपभोक्ताओं तक िनब ध आपूित बनी रहती है से वाओं के खुद रा स्टोर भी चलाना

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ऐसा क्य होता है: चत्र म बक्स का बढ़ता क्रम ही उत्तर है। दो उत्पादक लाख उपभोक्ताओं से सीधे व्यवहार नह

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कर सकते, और एक छोटा दुकानदार पूरा कारखाना नह खरीद सकता। थोक वक्रेता बड़ी मात्रा को तोड़ता है और

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खुदरा वक्रेता उसे फर से तोड़ता है — इसी से माल कुछ हाथ से नकलकर असंख्य घर तक पहुँच जाता है।

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s e m ध्यान द जए: ऑनलाइन बाजार म यह ंखला छोट हो जाती है। व नमाता अपने उत्पाद सीधे उस व्यवसाय के
agla गोदाम भेजते ह जो ऐप से बेचता है — इन्ह संग्राहक कहा जाता है — और संग्राहक ही उत्पाद पैक करके
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ऑनलाइन क्रेता तक पहुँचा दे ता है।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 262

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अपने पड़ोस क वास्त वक आपू त- ंखला का पता लगाना

आइए पता लगाएँ

प्र.1 अपने समीप त खुदरा वक्रेता से कसी उत्पाद, उसके मूल ान और दुकान तक पहुँचने क प्र क्रया म
आपू तकताओं क ंखला के बारे म जानकारी प्राप्त क जए। चत्र 12.11 म प्रवाह चत्र (फ्लो चाट) का उपयोग
करके इसका पता लगाइए और इसे कक्षा म साझा क जए।

उपभोक्ता

खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता

खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत थोक िवक्रे ता
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत उत्पादक उत्पादक थोक िवक्रे ता
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत थोक िवक्रे ता
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता

खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता

उपभोक्ता

चत्र 12.11, पृष्ठ 257 — हद संस्करण के अनुसार पुनः बनाया गया।

व ध — चार चरण।

1. ऐसा उत्पाद चु नए जसका मूल ान स्पष्ट हो। चाय का पैकेट, साबुन, चावल क बोरी, कॉपी या मोबाइल चाजर खुली
सब्जी से बेहतर रहेगा, क्य क पैकेट पर ही व नमाता का नाम और पता छपा होता है।
2. दुकानदार से पाँच प्रश्न पू छए और उत्तर लख ली जए — यह आप तक कौन पहुँचाता है — कंपनी क गाड़ी, कोई वतरक,
या आप स्वयं थोक बाजार से लाते ह? वह थोक बाजार कहाँ है? इसे बनाता कौन है और कहाँ? माल कतने दन म आता है?
क्या वष भर आपक खरीद-क मत बदलती है?
3. लेबल प ढ़ए — व नमाता का नाम, पता और नमाण त थ। इससे ंखला का दूसरा सरा मल जाएगा, भले ही दुकानदार को
पता न हो।
4. प्रवाह चत्र बनाइए — चत्र 12.11 क तरह हर कड़ी के लए एक बक्सा, हर ग त के लए एक तीर, और हर तीर पर ल खए
क माल कौन ले जाता है।

अच्छे उत्तर म क्या होना चा हए: कम से कम चार ना मत क ड़याँ; हर कड़ी का वास्त वक ान, केवल ‘कारखाना' शब्द नह ;
तीर पर लखे शब्द (‘क्रय करता है', ‘भेजता है', ‘पहुँचाता है'); और एक वाक्य क य द कोई एक कड़ी हट जाए तो क्या टू ट
जाएगा।

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नमूना उत्तर: “मने कराना दुकान के सुरेश भैया से एक कलो चाय के पैकेट के बारे म पूछा।
असम के जोरहाट जले के चाय बागान → प त्तय क नीलामी → गुवाहाट चाय नीलामी कद्र → थोक म क्रय
करता है → कोलकाता के पास कंपनी का मश्रण और पै कग कारखाना → ट्रक से भेजा जाता है → जला
मुख्यालय म कंपनी का वतरक → जसक गाड़ी हर बृहस्प तवार पहुँचाती है → सुरेश भैया क दुकान → 250
ग्राम और 1 कलो के पैकेट म बकती है → हमारा प रवार।
उन्ह ने कहा क उनके लए सबसे महत्वपूण कड़ी वतरक क गाड़ी है — पछले वष बाढ़ म वह नौ दन नह आई
और कारखाने म चाय होते हुए भी उनक दुकान म चाय नह थी।”

इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 262
सूरत — हीरा नगरी और उसका प रवहन-जाल ( चत्र 12.24)

इसे अनदे खा न कर

प्र.1 क्या आप चत्र 12.24 म दए गए मान चत्र पर बंदरगाह, राजमाग और रेलवे के जाल को दे ख सकते ह? आपके
वचार से इन्ह ने सूरत को व्यापा रक कद्र बनाने म कस प्रकार सहायता प्रदान क ?

नदी
बंदरगाह
वायपु त्तन सूरत नगर
0 2.5 5 10 िक .म ी. रेल माग
वस्त्र बाजार
राज माग

चत्र 12.24, पृष्ठ 261 — सूरत नगर का मान चत्र, उसी सूची के साथ सरल रूप म पुनः बनाया गया।

हाँ — और वे यहाँ ह। पहले चत्र 12.24 (सूरत नगर का मान चत्र) के नीचे दाईं ओर द गई सूची दे खए, फर मान चत्र पर वे चह्न
खो जए।

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वशेषता सूची म चह्न मान चत्र पर कहाँ

बंद रगाह छोटा जहाज नगर के द क्षण-प श्चम म समुद्र-तट पर दो जहाज- चह्न, जहाँ ताप्ती नद अरब सागर म
मलती है

रे ल माग आड़ी धा रय वाली नगर के ठ क बीच से, लगभग उत्तर-पूव से द क्षण-प श्चम क ओर, नद को पार करती हुई
रेखा

राज माग / साद काली रेखा अनेक — नगर से हर दशा म नकलती और बीच म एक-दूसरे को काटती हुई
सड़कें

वायुपत्त न वायुयान बसे हुए क्षेत्र के द क्षण-प श्चम म, तट के पास

वस्त्र बाजार छोटा पीला-हरा वग नगर के हृदय म — लगभग रेल माग के ऊपर ही

नदी (ताप्ती) हलक नीली प पूव से आकर नगर को चीरती हुई समुद्र क ओर

इन्ह ने सूरत को व्यापा रक कद्र कैसे बनाया

बंदरगाह ने संसार को सूरत तक ला दया। नगर प श्चमी तट पर है, इस लए जहाज प श्चमी ए शया, अ का और यूरोप तक
माल ले जाते-लाते रहे। अध्याय यही कहता है — “प श्चमी तट पर नगर के स्थत होने के कारण अनेक बंदरगाह और सड़क के
जाल बछे , जो आज भी अत्यंत महत्वपूण ह।” यहाँ व्यापार “16व शताब्द के बाद से” फला-फूला।
रेल माग क ा माल लाता है और तैयार वस्त्र ले जाता है। कपास महाराष्ट्र और गुजरात के अन्य भाग क कपास मं डय से
यहाँ पहुँचती है ( चत्र 12.23); तैयार सा ड़याँ और प रधान दे श भर क दुकान को जाते ह। वस्त्र बाजार रेल माग के पास
इसी लए है।
सड़क अं तम कड़ी जोड़ती ह। मंडी से पावरलूम तक कपास, पावरलूम से रंगाई इकाई तक कपड़ा, और रंगे कपड़े से थोक
बाजार तक तैयार माल — “उत्पाद एक चरण से दूसरे चरण म बाजार के माध्यम से जाता है”, और हर ऐसा चरण एक सड़क-
यात्रा है।
वायुपत्तन छोट पर बहुमूल्य वस्तुए ँ ले जाता है। सूरत वश्व म हीरा उद्योग का सबसे बड़ा कद्र है, जहाँ लगभग 15 लाख
कारीगर हीरे काटने और चमकाने म लगे ह। हीरे जहाज से नह , वायुयान से जाते ह।
तीन मलकर व्यापार सस्ता कर दे ते ह। जस नगर म माल समुद्र, रेल और सड़क — तीन से आ-जा सके, वहाँ क्रय- वक्रय
सस्ता पड़ता है। इस लए व्यापारी, कारीगर और थोक वक्रेता वह इक ा होते ह, और यह जमावड़ा और अ धक लोग को
ख चता है।

ऐसा क्य होता है: बाजार के लए केवल क्रेता- वक्रेता पयाप्त नह — माल का उन तक पहुँचना भी आवश्यक है।
प रवहन ही अ े स्थान को व्यापा रक कद्र म बदलता है। सूरत के पास दूसरी वस्तु भी थी — “ वशेषज्ञ कारीगर
और कुशल व्य क्तय के समुदाय स दय से यहाँ रहते आए ह। उनके कौशल पी ढ़य से हस्तांत रत होते रहे ह।”

आइए वचार कर — पृष्ठ 263

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लोग के जीवन म बाजार क भू मका

आइए वचार कर

प्र.1 हमने बाजार के अलग-अलग आयाम पर चचा क । क्या हम कल्पना कर सकते ह क हमारा जीवन बाजार के
बना कैसा होगा? य द कसान चावल, गे ँ, दाल, स ब्जयाँ और फल बाजार म न लाएँ तो क्या होगा? अगर सूरत
म वस्त्र बनाने वाले उत्पादक बाजार से कपास जैसी आवश्यक सामग्री न खरीद पाएँ तो क्या होगा?

बाजार के बना जीवन का अथ होगा क हर प रवार केवल वही उपयोग कर सके जो वह स्वयं बना सके। कोई कसी एक काम म
नपुण नह हो पाएगा, और हमारी लगभग सारी वस्तुएँ जीवन से गायब हो जाएँगी।

बाजार नही ं → िविनमय नही ं → हर पिरवार को सब कु छ स्वयं बनाना पड़ ेगा

→ कोई एक काम में िनपुण नही ं हो सके गा

→ उत्पादन कम और गुणवत्ता खराब

→ सब िनधन हो जाएँगे

य द कसान चावल, गे ँ, दाल, स ब्जयाँ और फल बाजार म न लाएँ —

नगर और कस्ब म अन्न ही नह बचेगा, क्य क नगर कुछ उगाता नह । दुकान कुछ ही दन म खाली हो जाएँगी।
जो थोड़ा-बहुत अन्न बचेगा उसके मूल्य आकाश छू लगे, और सबसे पहले नधनतम लोग भूखे रहगे।
कसान को भी हा न होगी। उसे कोई आय नह मलेगी — बीज, खाद, फ स या दवा के लए पैसा नह — और अ त रक्त
अनाज गाँव म ही सड़ जाएगा।
कसान अ त रक्त उपज उगाना ही बंद कर दगे और केवल अपने प रवार भर का अन्न बोएँगे। अगली फसल कह छोट होगी।

य द सूरत के वस्त्र उत्पादक कपास न खरीद पाएँ —

पावरलूम रुक जाएँगे। कताई, बुनाई और रंगाई करने वाले हजार कारखाने बेकार पड़ जाएँगे।
पूरी ंखला प्रभा वत होगी — रंगाई इकाइयाँ, थोक वक्रेता, और दे श- वदे श के वे छोटे दुकानदार तथा बड़ी खुदरा दुकान जो
सूरत क सा ड़य और प रधान पर नभर ह।
सूरत म और कपास उगाने वाले महाराष्ट्र-गुजरात के जल म — दोन जगह रोजगार जाएँगे, क्य क उन कसान का क्रेता ही
चला जाएगा।
उपभोक्ताओं के लए कपड़ा दुलभ और महँगा हो जाएगा।

ऐसा क्य होता है: बाजार एक साथ दो काम करते ह — वे वस्तुएँ जरूरतमंद तक पहुँचाते ह और आगत उत्पादक
तक। इनम से कोई एक टू टे तो चत्र 12.11 क ंखला बीच से ही कट जाती है। इसी लए अध्याय कहता है क
बाजार व्य क्तय , प रवार और व्यवसाय को उन वस्तुओं तक पहुँचने म सहायता करते ह “ जनक उन्ह
आवश्यकता होती है परंतु जन्ह वह स्वयं नह बना सकते।”

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ
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सुझाव: अध्याय के आरंभ का उद्धरण भी यही बात एक पं क्त म कहता है — समृ द्ध उस बाजार से उत्पन्न होती है

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जो तब बनता है जब लोग को वे वस्तुएँ चा हए “ जन्ह वे स्वयं न मत नह कर सकते ह।”

m .co a g
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 263

com
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चत्रकार आकृ त — जस उत्पाद का तैयार बाजार नह है

se m
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मgसोच सकते ह, जनके लए तैयार बाजार नह है?
क्या आप ऐसे अन्य उत्पाद के बारे a
प्र.1

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se m.

o m g l a
स्थानीय क्रेता.cऔर वक्रेता बहुत कम होते ह।” कई और वस्तुएँ भी इसी स्थ त म ह।
आकृ त कैनवास पर तैल- चत्र बनाती है। उसके चत्र क सराहना होती है, पर “अमरूद वाली स्थ त के वपरीत कलाकृ त के लए

m a
l a se
ag उत्पाद या सेवा तैयार बाजार क्य नह है

m a s
.co agl
िचत्र कला, मूितकला, कला-छायािचत्र हर कृ त अनूठ होती है, इस लए तुलना के लए कोई प्रच लत

a s em क मत ही नह

agन्न
हस्तिशल्प — मध बु नी िचत्र कला, बाँस का काम , च पटना के िखलौने,
l क्रेता दूर नगर और वदे श म ह; कारीगर के गाँव म उनक
जनजातीय आभूषण संख्या नगण्य

co m
m .
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हथकरघा सािड़याँ और पारंपिरक वस्त्र सस्ते मल- न मत कपड़े से होड़; उन्ह चाहने वाले क्रेता बखरे

m l
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हुए

eशाmस्त्रीय संगीत, नत्ृ य और नाट पस्तुितयाँ a
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दशक थोड़े और अवसर कभी-कभार

a
se m
पुर ाना मकान, पिरवार की पुर ानी कृ िष-भूिम क्रेता बहुत कम, और हर संप त्त अपने आप म अलग

com g l a
m. a
दुल भ पुस्तकें , पांडुिलिपयाँ, पुर ावस्तुए ँ, पुर ाने िस क्के केवल गने-चुने संग्राहक चाहते ह

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agl
अत्यंत िविशष्ट कौशल — पांडुिलिप-वाचक , रथ बनाने वाला बढ़ ई कसी एक स्थान पर उस कौशल के बहुत कम नयोक्ता

m
िवशेष रूप से बनाई गई मशीन एक ही ग्राहक के लए बनी; दूसरा कोई उसे प्रयोग नह कर
सकता
. co
se m
o m l a
g चाहते ह और अनेक वक्रेता उसे दे
m .cऐसा क्य होता है: बाजार तब सहज बनता है जब अनेक क्रेता एक जैसीaवस्तु
l a se
ag सक — अमरूद, चावल, साबुन। जब हर वस्तु अनूठ हो और क्रेता कम तथा बखरे हुए ह , तो न कोई साझा क मत

.c
m
बनती है और न क्रेता- वक्रेता एक-दूसरे को खोज पाते ह।

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प्र.2 यह त क्रय- वक्रय करने वाले लोग को कैसे प्रभा वत करता है?

दोन पक्ष को हा न होती है, और ठ क एक-दूसरे के प्र त बब क तरह।

वक्रेता (आकृ त, कारीगर, अनोखी फसल वाला क्रेता (कला-प्रेमी, संग्राहक)
कसान)

क्रे ता िमलते ही नही ं — आकृित को “क्रे ता िमल पाना किठन लगता कृ ित िमलती नही;ं पायः पता ही नही ं चलता िक वह है भी
है”

पता नही ं चलता िक िकतना मूल्य माँग े; वास्तिवक मूल्य से बहुत कम यह नही ं जान पाते िक माँग ा गया मूल्य उिचत है या नही,ं क्योंिक तुल ना के
पर बेच दे ते है ं िलए कु छ है ही नही ं

आय अिनयिमत और अिनिश्चत; अगली कृ ित की सामग ी खरीदना दू र तक जाना या लंबी पतीक्षा; नकली वस्तु िमलने का जोिखम
किठन

िकसी म ध् यस्थ या गैल री पर िनभरता, जो बड़ा िहस्सा ले ले ती है क्र
उसी म ध् यस्थ का िहस्सा े ता ही चुक ाता है

अनेक कलाकार यह काम छोड़कर दू स रा काम कर ले ते है ं — उपल ब्ध िवक ल्प और घट जाते है,ं और एक परंपरा लुप्त हो जाती है
कौशल समाप्त हो जाता है

सुझाव: इस चक्र को पहचा नए — क्रेता कम → आय कम और अ न श्चत → कलाकार काम छोड़ते ह → वक्रेता
और कम → बाजार और सकुड़ता है। प्रदश नयाँ, मेले और ऑनलाइन मंच इसी चक्र को तोड़ने का प्रयास ह।

प्र.3 वतमान समय म चत्रकार को अपने चत्र के लए कन- कन तरीक से क्रेता मल सकते ह?

इंटरनेट ने कलाकार के लए वही कया है जो मंडी ने कसान के लए कया था — बखरे हुए क्रेताओं को एक स्थान पर ला दया
है।

ऑनलाइन बाजार और संग्राहक ऐप, जो कला और हस्त शल्प बेचते ह, तथा राज्य के हस्त शल्प ए ो रयम और सरकारी ई-
मंच। एक ही सूचीबद्धता “हजार कलोमीटर दूर” के क्रेता तक पहुँच जाती है।
अपना सोशल मी डया और वेबसाइट, जहाँ वह नई कृ तय के चत्र डाल सकती है, बनाने क प्र क्रया दखा सकती है और
सीधे आदे श ले सकती है — बना कसी मध्यस्थ के कमीशन के।
प्रदश नयाँ, कला-द घाएँ और कला-मेले, जहाँ एक ही दन अनेक क्रेता और अनेक कलाकार जुटते ह — यानी जान-बूझकर
बनाया गया बाजार।
शल्प मेले और हाट जैसे दल्ली हाट, राज्य के ए ो रयम, तथा वद्यालय, महा वद्यालय और आवासीय प रसर के मेले।
आदे श पर बनाई गई कृ तयाँ — व्य क्त- चत्र, होटल, कायालय, वद्यालय और मेट्रो स्टे शन क भ त्त- चत्रकारी; पुस्तक ,
प त्रकाओं और पैके जग के लए चत्रांकन।

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सहकारी स म तयाँ और कलाकार समूह, जो अनेक कलाकार क कृ तयाँ एक साथ रखते ह ता क क्रेता को एक ही स्थान
पर व वधता मले — दूध के लए अमूल वाला वचार।
शक्षण — कला क कक्षाएँ, कायशालाएँ और ऑनलाइन पाठ्यक्रम कौशल को स्वयं एक बकाऊ सेवा बना दे ते ह।
नजी संवाद, जो आज भी सबसे सशक्त है — एक संतुष्ट क्रेता जो अपने मत्र को चत्र दखाता है, अगले तीन क्रेता ले आता
है।

ऐसा क्य होता है: आकृ त क समस्या यह कभी नह थी क उसके चत्र कसी को नह चा हए — समस्या यह थी
क जन थोड़े लोग को चा हए थे, वे उस तक पहुँच नह पाते थे। ऊपर का हर उपाय वास्तव म इसी एक समस्या का
हल है — क्रेता और वक्रेता को एक-दूसरे को दखाई दे दे ना।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 263
बाजार समाज को कैसे लाभा न्वत करते ह? — कम बजली खाने वाला रे जरेटर

आइए पता लगाएँ

प्र.1 उपभोक्ता अब कम व ुत-खपत करने वाले रे जरेटर क्रय करना पसंद करते ह। जब बड़ी संख्या म उपभोक्ता
कम व ुत-खपत करने वाले रे जरेटर क माँग करने लगे ह तो आपके वचार से चत्र 12.11 म दशाए गए
नेटवक म क्या प रवतन होता है?

उपभोक्ता

खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता

खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत थोक िवक्रे ता
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत उत्पादक उत्पादक थोक िवक्रे ता
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत थोक िवक्रे ता
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता
आगत
खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता

खुद रा िवक्रे ता उपभोक्ता

उपभोक्ता

चत्र 12.11, पृष्ठ 257 — हद संस्करण के अनुसार पुनः बनाया गया।

माँग चत्र 12.11 क ंखला म उलट दशा म यात्रा करती है — अं तम बक्से से पहले बक्से क ओर — और हर कड़ी अपना काम
बदल दे ती है।

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उपभोक्ता खुद रा िवक्रे ता से अिधक तारों वाले, कम िबजली खाने वाले मॉडल माँगते है ं

↑ खुद रा िवक्रे ता दे खता है िक वही मॉडल िबक रहे है ं और पुराने पड़ े रह गए; वह उन्ही ं का आदे श दे त ा है

↑ मंडी/थोक बाजार और िवतरक यह आदे श आगे पहुँच ाते है ं

क्र
↑ थोक िव े ता — िजनका काम ही यह आकलन करना है िक “खुद रा िवक्रे ताओं को िकतनी मात्रा में उत्पाद

की आवश्यकता है” — पुराने मॉडल कम और नए अिधक खरीदते है ं

↑ उत्पादकों को “संके त िमल जाता है िक उपभोक्ता क्या क्रय करना चाहेगं े” और वे रेिफजरेट र का नया रूप

बनाते है ं

↑ वे अलग आगत मँगाते है ं — बेहतर कं पेसर, मोटी परत वाला ऊष्मारोधन, सुधरी हुई मोटर

→ बाजार ऊज -द क्ष रेिफजरेट रों से भर जाता है

इसके बाद क्या होता है —

जो उत्पादक नह बदलते, उनक बक्र घटती है; जो बदलते ह, उनक बढ़ती है। होड़ दक्षता को और ऊपर ले जाती है और डब्बे
पर छपी बी.ई.ई. स्टार रे टग बक्र का आधार बन जाती है।
उपभोक्ता को दोहरा लाभ — उपकरण चलाने का खच घटता है, अथात् बजली का बल कम आता है।
समाज को लाभ — कम बजली का अथ है कम कोयला, कम प्रदूषण और बजलीघर पर कम दबाव। अध्याय ठ क यही कहता
है — “कम ऊजा खपत वाले रे जरेटर के उत्पादन से समाज को लाभ होता है।”

ऐसा क्य होता है: कसी ने कारखाने को बेहतर रे जरेटर बनाने का आदे श नह दया। साधारण क्रेताओं के
क्रय- नणय ही संदेश बन गए, और आपू त- ंखला उस संदेश को दुकान के काउं टर से लेकर डजाइन क मेज तक
पहुँचा लाई। यही कारण है क बाजार समाज क सेवा कर सकते ह, भले ही ंखला का हर व्य क्त केवल अपना हत
दे ख रहा हो।

यह क जए: घर के रे जरेटर पर लगी स्टार प का दे खए। हर अ त रक्त तारा वास्त वक बचत है — समान
आकार के 2 तारे वाले उपकरण क तुलना म 5 तारे वाला लगभग एक- तहाई कम बजली खा सकता है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 265

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क्रय- वक्रय से आगे क परंपराएँ

आइए पता लगाएँ

प्र.1 क्या आपने अपने समुदाय या पड़ोस म ऐसी कोई प्रथा दे खी है? उस प्रथा का वणन चत्र या लघु अनुच्छेद ारा
क जए।

प्रश्न कस बारे म है। पृष्ठ 264 का ‘इसे अनदे खा न कर' बॉक्स नमूना दे दे ता है — द क्षण भारत म हल्द और कुमकुम के वक्रेता
अपने ग्राहक को “शुभकामनाओं के तौर पर हल्द और कुमकुम क थोड़ी मात्रा अलग से बना कसी शुल्क के” दे ते ह। यह न छू ट
है, न वज्ञापन — यह वह शष्टाचार है जो लेन-दे न को संबंध बना दे ता है।
अच्छे उत्तर म क्या होना चा हए: (i) कौन ऐसा करता है — कस प्रकार का वक्रेता; (ii) क्या दया या कया जाता है; (iii) कब
— हर बार, या त्योहार पर, या दन क पहली बक्र पर; (iv) लोग इसका कारण क्या बताते ह; (v) एक वाक्य क यह बाजार के
बारे म क्या दशाता है।
आपके आस-पास संभवतः ये प्रथाएँ मलगी —

झ गा / झुंगी / दस्तूरी — सब्जी या अनाज का वक्रेता तौलने के बाद एक मु अ त रक्त डाल दे ता है।
बोहनी — दन क पहली बक्र शुभ मानी जाती है; वक्रेता कम क मत पर भी मान जाता है और पैसे को माथे या सामान से
छु आता है।
सब्जी के साथ मुफ्त ध नया और हरी मच; मुफ्त कढ़ पत्ता; मुफ्त न बू।
भोजन के बाद ढाबे या रेस्तराँ म स फ और मश्री।
धनतेरस, प गल, बहू या ओणम पर स्वणकार या कपड़ा व्यापारी ारा दया गया कलश, ना रयल या मठाई।
कराना दुकानदार के यहाँ महीने भर का खाता — पूरे महीने सामान और महीने के अंत म भुगतान, केवल भरोसे पर, जसका
उल्लेख अध्याय स्वयं करता है।
दज ारा जेब म रख दया गया धागा और बटन; गम म दुकान पर मुफ्त पानी।

नमूना उत्तर: “हमारे मं दर के बाहर लक्ष्मी अम्मा जब से मुझे याद है, तब से चमेली के फूल बेचती ह। हम कुछ भी
ल, वे माला से दो ल ड़याँ ख चकर ‘ब े के लए' कहकर थैले म डाल दे ती ह। महीने के पहले दन वे अपने पहले
ग्राहक से पैसे लेने से पहले सक्क को आँख से लगाती ह। वे कहती ह क वे दो ल ड़याँ घाटा नह ह — जस
प रवार को वे मलती ह, वह अगले सप्ताह फर आता है। माँ अठारह वष से उन्ह से फूल लेती ह और लक्ष्मी अम्मा
आज भी मेरी दाद का नाम लेकर उनका हाल पूछती ह। इससे पता चलता है क बाजार केवल क मत क जगह नह
है; वह वह जगह भी है जहाँ लोग एक-दूसरे को जानते ह।”

ऐसा क्य होता है: थोड़ा अ त रक्त दे ने वाला वक्रेता वह चीज खरीद लेता है जो पैसे से नह मलती — व ास
और लौटकर आने वाला ग्राहक। इसी लए अध्याय कहता है क बाजार “अनेक लोग के जीवन म गैर-आ थक
महत्व भी रखता है।”

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 265

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बाजार म सरकार क भू मका — मूल्य पर नयंत्रण; प्याज
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em.
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आइए पता लगाएँ

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a s emभारत के अ धकांश भाग म भोजन का एक महत्वपूण हस्सा है। कुछ ऋतुओं म इसक आपू त बाजार म
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प्याज
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प्र.1
कम हो जाती है। आपके वचार म ऐसा होने पर प्याज के मूल्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

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e m . ag
मूल्य बढ़ जाता है, और प्रायः बहुत तेजी से।
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बाजार में प्याज की आपूित घटती है
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em.
omके पीछे बहुत से क्रे ता as
माँग लगभग वैसी ही रहती है — भारत की लगभग हर रसोई को प्याज चािहए

→ थोड़ .े cप्याज a g l
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ase
agl → क्रे ता िबना प्याज रहने के बजाय अिधक दे ने को तै यार हो जाते है ं
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→ मूल्य ऊपर चढ़ जाता है
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प्याज के मामले म यह वृ द्ध वशेष रूप से तीखी क्य होती है —
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मूल्य बढ़ने पर भी माँग बहुत कम नह होती। रोज प्याज पकाने वाला प रवार खाना बदलने के बजाय ₹60 कलो दे ना पसंद

m
करेगा — बस मात्रा थोड़ी घटा दे गा।

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se m
आपू त जल्द बढ़ाई नह जा सकती। फसल को महीन लगते ह; जस सप्ताह कमी हो, उस सप्ताह प्याज बनाया नह जा

o
सकता।
m l a
m .c लंबे समय तक टकता नह । महीन रखने पर सड़ने और अंकु रत होने से हाaनgहोती है, इस लए भंडार सी मत रहते ह।
se कुछ व्यापारी और ऊँचे मूल्य क आशा म माल रोक लेते ह, जससे कमी और बढ़ जाती है।
प्याज

a
agl
se m
comबहुत कम ह, इस लए मूल्य तब तक चढ़ता है जब तक इतने l a
ऐसा क्य होता है: यह अमरूद वाली कहानी का उलटा रूप है। वहाँ बहुत ऊँची क मत पर बहुत अ धक अमरूद
बचे रह गए थे। यहाँ माँग वैसी क वैसी है और.प्याज
a g
s m बँट जाए।
eसबम
a
agl
क्रेता पीछे न हट जाएँ क थोड़ा-सा प्याज

co m
m .
as e
अगर प्याज के आपू तकता आवश्यक मात्रा म प्याज बाजार म नह लाएँगे, तो क्या होगा? आपके वचार से
mसरकार को इस
प्र.2

. c o त म क्या करना चा हए?
a g l
a s em
agl उत्तर
.c
क्या होगा।
s e m
com gl a
m .
मूल्य तेजी से चढ़गे और ऊँचे बने रहगे; नधन प रवार को प्याज भोजन से हटा ही दे ना पड़ेगा।
a
l a se झकर माल रोक लगे, क्य क कल और ऊँचा मूल्य मलने क आशा है। इससे कमी
कुछ वक्रेता जमाखोरी करगे — जान-बू
केवल फसल क हा न से कहag अ धक तीखी हो जाएगी।
मलावट , सड़े या छोटे प्याज भी अ े मूल्य पर बकने लगगे, क्य क क्रेता के पास वकल्प नह होगा।

co m
m .
m as e
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ढाब , रेस्तराँ और ठे ले वाल क लागत बढ़े गी, इस लए उनके बनाए हर व्यंजन का मूल्य भी बढ़े गा।
जन कसान के पास प्याज बचा है, उन्ह लाभ होगा — पर केवल उन्ह; जनक फसल ही नष्ट हुई, उन्ह कुछ नह मलेगा।

सरकार को क्या करना चा हए। अध्याय का सद्धांत है क सरकार “उपभोक्ताओं और उत्पादक के बीच अंतः क्रया और मूल्य के
उ चत नधारण क नगरानी करती है।” प्याज पर लागू करके दे खए —

उपाय वह क्या करता है

अपना सुर िक्षत भंडार बाजार में उतारे आपूित तुर ंत बढ़ ती है और मूल्य नीचे आते है ं

अिधकतम मूल्य िनध िरत करे , जैसे जीवन-रक्षक दवाओं क्र
िव े ता मनमाना मूल्य नही ं ले सकें गे — पर यह सावधानी से करना होगा, क्योंिक
पर करती है बहत
ु कम सीमा से “उ त्पादकों को उ त्पादन करने की कोई पेर णा नही ं िमले ग ी”

भंडारण की सीमा तय करे और जमाखोरी पर कार वाई करे रोका हआ
ु प्याज बाजार में आने को िववश होता है

दू स रे दे शों से प्याज आयात करे घर की कमी अंतर ीय बाजार से पूर ी होती है

उिचत मूल्य की दुक ानों और सहकारी वाहनों से सीधे प्याज साधारण पिरवारों को िनयत दर पर कु छ प्याज तो िमल ही जाता है
बेचे

कु छ समय के िलए िनय त रोके पहले दे श का बाजार भरता है

दीघ कािलक उपाय: शीतागार और बेहतर गोदाम बनवाए; कम प्याज सड़ेग ा, इसिलए अगली बार कमी कम होगी — और िकसान एक बुरे वष
अच्छे वष ं में िकसानों को न्यूनतम मूल्य का सहारा दे के बाद प्याज उगाना छोड़ेंग े नही ं

सुझाव: पूरा उत्तर दोन पक्ष क रक्षा करता है। उपभोक्ता को इस महीने सस्ता प्याज चा हए; कसान को अगले वष
उगाने लायक मूल्य चा हए। केवल एक क रक्षा क जए तो समस्या लौट आती है।

आइए वचार कर — पृष्ठ 266
कौ टल्य के अथशास्त्र म घी का व्यापार

आइए वचार कर

प्र.1 शासक ारा उपभोक्ताओं के हत क रक्षा करना आधु नक भारत क प्रथा नह है। कौ टल्य के अथशास्त्र म घी
का व्यापार करने वाले व्यापा रय के लए नदश स म्म लत ह। इसम उल्लेख कया गया है क वक्रेता घी क मात्रा
क कमी, जो मापने वाले डब्बे म चपक रह जाती है, क क्ष त-पू त हेतु क्रेताओं को 1/50 वाँ भाग अ धक
मान ाव के रूप म दे गा।

दो हजार वष से अ धक पुराना यह छोटा-सा नयम ठ क वही काम कर रहा है जो आज का भार-माप कानून करता है — यह
सु न श्चत करना क क्रेता को वह मात्रा वास्तव म मले जसका उसने मूल्य चुकाया है।

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समस्या क्या है। घी गाढ़ा और चप चपा होता है। मापने वाले डब्बे से उड़ेलते समय उसक एक परत डब्बे क भीतरी द वार पर
चपक रह जाती है। इस प्रकार जो क्रेता एक माप घी का मूल्य दे ता है, वह घर उससे कुछ कम ले जाता है। कसी ने छल नह कया
— यह हा न घी के अपने स्वभाव से होती है।
उपाय। व्यापारी को 1/50 वाँ भाग अ त रक्त दे ना होगा — जसे मान ाव कहा गया है — ता क जो चपक गया उसक भरपाई हो
जाए।

1 ÷ 50 = 0.02 = 2%

50 माप घी पर क्रे ता को 1 माप अितिरक्त

1 िकगा (1000 गाम) घी खरीदने पर अितिरक्त = 1000 ÷ 50 = 20 गाम → क्रे ता को िमला 1,020 गाम

5 िकगा पर अितिरक्त = 5000 ÷ 50 = 100 गाम → क्रे ता को िमला 5,100 गाम

यह उल्लेखनीय क्य है —

यह उपभोक्ता-संरक्षण का नयम है, कर या मूल्य- नयंत्रण नह । इसका पूरा उ े श्य क्रेता को उ चत माप दे ना है।
यह सट क है — एक न श्चत भन्न, न क ‘उदार रहो' जैसी अस्पष्ट सलाह। सट कता ही कसी नयम को लागू करने योग्य
बनाती है।
यह व्यावहा रक है — यह मान लेता है क कुछ हा न अप रहाय है और केवल यह तय करता है क वह हा न कौन उठाए:
वक्रेता, क्रेता नह ।
यह दखाता है क राज्य ईमानदार भार और माप का उत्तरदा यत्व लेता था — ठ क वही, जो इससे ऊपर का अनु े द आज
डब्बाबंद वस्तुओं के बारे म कहता है।

ऐसा क्य होता है: कसी भी बाजार म वक्रेता को वस्तु के बारे म क्रेता से अ धक पता होता है। क्रेता डब्बे के भीतर
चपके घी को दे ख नह सकता। मान ाव जैसे नयम — और आज एफ.एस.एस.ए.आई. चह्न तथा छपी हुई शुद्ध
मात्रा — इसी जानकारी के अंतर को पाटने के लए ह, ता क भरोसा हर व्यापारी क व्य क्तगत ईमानदारी पर नभर
न रहे।

क्या आप जानते ह? अध्याय इसके तुरंत बाद चेतावनी भी दे ता है — सरकार नयम बनाती है ता क बाजार नष्पक्ष
रहे और उपभोक्ताओं का शोषण न हो, “हालाँ क, नयम क बहुलता बाजार के सुचारु रूप से काय करने म
क ठनाई पैदा कर सकती है।” अथशास्त्र का यह नयम इसी लए सफल है क्य क वह छोटा, स्पष्ट और सरलता से
पालन करने योग्य है।

आइए वचार कर — पृष्ठ 267

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सावज नक सु वधा और सेवाएँ — सरकार कहाँ तक जाए?

आइए वचार कर

प्र.1 वे कौन-से अन्य क्षेत्र ह, जहाँ आप सरकार को बाजार के कायकलाप म भाग लेते हुए दे खते ह?

अध्याय म गनाई गई चार भू मकाओं के अ त रक्त सरकार बाजार म और भी अनेक रूप म दखाई दे ती है। इन्ह समूह म बाँट
ली जए तो उत्तर याद रखना सरल हो जाएगा।

भू मका रोजमरा के उदाहरण

क्रे ता के रूप में कसान से गेहूँ और धान क खरीद; पाठ्यपुस्तक, गणवेश, औष धयाँ, ट के, बस और रक्षा उपकरण खरीदना

क्र
िव े ता और उ त्पादक के रेलवे, डाकघर, वद्युत बोड, सावज नक क्षेत्र के बक, तेल और इस्पात कंप नयाँ, राशन क दुकान से रसोई गैस
रूप में और म का तेल

बाजार -स्थल बनाने वाले के मं डयाँ और व नय मत कृ ष बाजार, हाट के मैदान, बस अ े, शीतागार और गोदाम, सड़क और बंदरगाह
रूप में

िनयम बनाने वाले के रूप में दुकान का लाइसस; खाद्य सुरक्षा नरीक्षण; तराजू पर सरकारी मुहर; अ धकतम खुदरा मूल्य छापना; दवा
दुकान के नयम; कारखान के लए प्रदूषण अनुम त

उपभोक्ता के र क्षक के रूप उपभोक्ता न्यायालय और हेल्पलाइन; मलावट तथा ामक वज्ञापन पर कारवाई; तंबाकू पर अ नवाय चेतावनी
में

कर लगाने वाले के रूप में वस्तुओं और सेवाओं पर जी.एस.ट .; आयात पर सीमा शुल्क — जससे बाजार म वस्तुओं का मूल्य बदलता है

श्रिमकों के र क्षक के रूप में न्यूनतम मजदूरी, कारखान और खदान म सुरक्षा नयम, काय के घंट क सीमा, बाल श्रम पर रोक

छोटे उ त्पादकों के सहायक कसान , बुनकर और लघु उद्योग के लए ऋण और अनुदान; कारीगर तथा छोट इकाइय के लए सरकारी
के रूप में ई-बाजार

प्र.2 क्या ऐसे क्षेत्र भी ह, जहाँ सरकार को हस्तक्षेप कम करने क आवश्यकता है? प रवार या संबं धय से चचा
क जए।

चचा कैसे क जए। यह वास्त वक बहस का प्रश्न है, जसका एक ही सही उत्तर नह होता — इस लए अ ा उत्तर स्पष्ट पक्ष और
दूसरा पक्ष दोन दे ता है। अध्याय स्वयं संतुलन बताता है: नयम आवश्यक ह ता क “उपभोक्ताओं का शोषण न हो”, परंतु “ नयम
क बहुलता बाजार के सुचारु रूप से काय करने म क ठनाई पैदा कर सकती है।”

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जहाँ लोग हस्तक्षेप कम करने क्य पर सावधानी, क्य क…
क बात कहते ह

छोटी दुक ान या व्यवसाय खोलने- दे री और कागजी कायवाही नए वक्रेताओं को कु छ लाइसे ंस सुर क्षा के िलए है ं — खाने
चलाने के िलए बहुत अिधक लाइसे ंस हतोत्सा हत करती है; वक्रेता कम ह तो होड़ कम का ठे ल ा या दवा की दुक ान िबना जाँच के
और अनुम ितयाँ और मूल्य अ धक नही ं चल सकती

बहुत नीचे रखी गई मूल्य-सीमाएँ “य द मूल्य बहुत कम ह , तो उत्पादक को उत्पादन जीवन-र क्षक दवाओं की सीमा हटा दे ं तो
करने क कोई प्रेरणा नह मलेगी” — और वस्तु रोगी उपचार का खच नही ं उठा पाएगा
दुकान से ही गायब हो जाती है

िकसान कहाँ बेच सकता है, इस पर कसी भी क्रेता को बेचने क छू ट मले तो कसान को िविनयिमत मंडी िकसान को तौल और
बंध न एक नयत मंडी से बेहतर मूल्य मल सकता है भुग तान में ठगे जाने से भी बचाती है

बहुत छोटे व्यापािरयों पर भारी िनयम कागजी कायवाही का खच कभी-कभी कमाई से भी जहाँ खाद्य पदाथ िबकते है,ं वहाँ स्वच्छता
— ठे ल ा, हाट की दुक ान, घर पर अ धक हो जाता है के बुिनयादी िनयम िफर भी लागू रहने
बनने वाला सामान चािहए

नमूना उत्तर: “मेरे चाचा क छोट छपाई क दुकान है। उन्ह ने कहा क उन्ह सबसे क ठन कोई सुरक्षा नयम नह
लगता, ब ल्क यह लगता है क हर वष अलग-अलग तीन कायालय म वही जानकारी लेकर जाना पड़ता है। वे सुरक्षा
और प्रदूषण का हर नयम रखना चाहते ह, पर तीन चक्कर क जगह एक ऑनलाइन फॉम चाहते ह। दवाओं पर
दाद उनसे असहमत थ — उन्ह ने कहा क हृदय क दवाओं पर मूल्य-सीमा ही एकमात्र कारण है क दादाजी का
इलाज हमारे बस म है, और वह कभी नह हटनी चा हए। अंत म हम एक कसौट पर सहमत हुए — य द नयम
हटाने से कसी को हा न या धोखा हो सकता है तो नयम रहे; य द वह केवल समय खाता है तो उसे सरल
कर दया जाए।”

आइए वचार कर — पृष्ठ 267
उपभोक्ता गुणवत्ता का आकलन कैसे कर? — कंच का उदाहरण

आइए वचार कर

प्र.1 आपके और आपके पड़ोस म अगली गली के ब क टोली के मध्य कंचे खेलने क प्र तयो गता है। आप
प्र तयो गता के लए नए कंचे खरीदना चाहते ह। आपने ₹150 बचा रखे ह। आप कंचे खरीदने हेतु दुकान जाते ह।
आप कंच म कौन-से गुण को दे खगे ता क आप प्र तयो गता जीत सक?

यहाँ एक साथ दो नणय लेने ह — कौन-से कंचे अच्छे ह, और ₹150 म कतने आएँगे।
कन गुण को दे ख

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m.
गुण जीतने म कैसे सहायक दुकान म कैसे जाँच

mपहली ही टक्कर म चटकने वाला कंचा पूरी प्र तयो गता के l a se
.co लए बेकार है agखनक सु नए
मजबूती काँच के भीतर दरार या हवा के बुलबुले दे खए; दो

se m कंचे टकराकर साफ

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aआकार खेल के अनुसार होना चा हए — भारी कंचा जोर से मारता है, अँगूठे और उँ गली के बीच पक ड़ए; चोट मारने म
छोटा कंचा नशाना साधने म आसान सहज लगना चा हए

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गोलाई और
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पूरी तरह गोल कंचा सीधा लुढ़कता है; चपटा हस्सा होने पर दुकान के काउं टर पर लुढ़काकर उसक सीध दे खए ag
िचकनी सतह
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वह मुड़ जाता है और नशाना बगड़ता है

भार
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भारी कंचे दूसर को घेरे से दूर धकेलते ह दो कंचे हथेली पर तौलकर तुलना क जए

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सभी कंचे एक जैसा व्यवहार कर तो अभ्यास से नशाना दे खए क पैकेट के सभी कंचे एक ही नाप के ह
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एक रूपता

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सचमुच सुधरता है

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आकषक रंग धूल म अपने कंचे पहचानने म आसानी — और खेल का पैकेट दे खए
आधा आनंद यही है

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मूल्य बजट ₹150 पर नयत है पैकेट का नह , प्र त कंचा मूल्य जो ड़ए

m .co agl
₹150 का सही उपयोग
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पैके ट क: 10 कं चे ₹50 में → ₹50 ÷ 10 = ₹5 पित कं चा → ₹150 में 30 कं चे
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पैके ट ख: 20 कं चे ₹75 में → ₹75 ÷ 20 = ₹3.75 पित कं चा → ₹150 में 40 कं चे
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eपैmकेट क के 30 अच्छे कंचों से भी कम।
परंत ु यिद पैके ट ख के आधे कं चे पहले ही दौर में चटक जाएँ तो के वल 20 बचे ंगे —

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सस्ता कं चा तभी अच् छा सौदा है जब वह िटके भी।
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asरहा है — “हर उपभोक्ता जो वस्तु खरीद रहा है, उसे उस वस्तु क गुणवत्ता
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ऐसा क्य होता है: अध्याय यही सखा
को परखने क आवश्यकता होती a है” — और गुणवत्ता सदा उ े श्य के सामने आँक जाती है। सजावट के लए आप
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सबसे सुंदर कंचे लगे; प्र तयो गता के लए सबसे मजबूत और गोल। वही दुकान, वही ₹150, पर नणय अलग।

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m प्रश्न — पृष्ठ 268 a g
l a se
पाठ्य
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चत्र 12.29 — बेसन के पैकेट का लेबल पढ़ना

प्र.1 मान ली जए क आपके माता- पता आपको पास क एक कराने क दुकान से एक कलो बेसन लाने को कहते
ह। दुकान म व भन्न प्रकार के बेसन के पैकेट उपलब्ध ह, जैसे क एक नीचे भी दशाया गया है। इसे ध्यानपूवक
दे ख। आप ये कैसे सु न त करगे क बेसन क गुणवत्ता उपयुक्त मानक पर सही है?

Net Quantity : 2 kg शुद्ध मात्रा
Mfg. Date :

Expiry Date : िनम ण ितिथ
Batch No. :
बैच नंबर उपभोग की समािप्त ितिथ
M.R.P. :

Unit Sale Price :
अिधकतम खुदरा मूल्य
िविनम ता का नाम
और पता
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MANUFACTURED & MARKETED BY
NUTRITIONAL INFORMATION एफ.एस.एस.ए.आई. िचह्न
और लाइसेंस संख्या
पोषण तथ्य सूची

fssai
Lic No.

सामगी सूची

एलज घोषणा

चत्र 12.29, पृष्ठ 268 — पुनः बनाया गया: पैकेट का पछला भाग और लेबल के वे भाग जनक ओर पुस्तक संकेत
करती है।

पैकेट पलटकर उसका पछला भाग प ढ़ए। चत्र 12.29 म वहाँ अं कत दस बात दशाई गई ह, और हर एक अलग प्रश्न का उत्तर दे ती
है।

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लेबल पर यह क्या बताता है क्या जाँच

एफ .एस .एस .ए .आई. िचह्न और खाद्य पदाथ क जाँच सरकार ारा क गई है सबसे महत्वपूण जाँच। य द चह्न और लाइसस
लाइसे ंस संख्या और वह उपयोग के लए सुर क्षत है संख्या नह है तो पैकेट मत ली जए

शुद्ध मात्र ा पैकेट के भीतर वास्तव म कतना बेसन है, माता- पता ने 1 कलो कहा था — यही संख्या
पैकेट का भार छोड़कर प ढ़ए, थैले के आकार से अनुमान मत लगाइए

िनम ण ितिथ कब पैक हुआ हाल क त थ बेहतर; बेसन पुराना होने पर बासी हो
जाता है

उपभोग की समािप्त ितिथ कब तक ठ क रहेगा पयाप्त आगे क होनी चा हए — समाप्त त थ वाला
पैकेट कभी न ल

अिधकतम खुद रा मूल्य दुकानदार अ धक से अ धक इतना ही ले एक रुपया भी अ धक न द; प्र त कलो मूल्य क
सकता है, सभी कर स हत तुलना दूसरे ांड से क जए

सामग ी सूची पैकेट म वास्तव म क्या है शुद्ध बेसन म केवल चना दाल होनी चा हए — सस्ती
मलावट से सावधान

पोषण तथ् य सूची प्र त 100 ग्राम ऊजा, प्रोट न, वसा और दो ांड क ईमानदार तुलना के लए उपयोगी
काब हाइ ेट

एलज घोषणा घर म जसे कसी वस्तु से एलज हो, उसके य द कसी को खाद्य एलज है तो अवश्य प ढ़ए
लए चेतावनी

बैच नंबर यह वशेष खेप कौन-सी है शकायत करनी हो या पैकेट लौटाना हो तो यही
काम आता है

िविनम ता का नाम और पता इसके लए उत्तरदायी कौन है वास्त वक और पूरा पता होने का अथ है क कंपनी
तक पहुँचा जा सकता है

फर पैकेट को स्वयं दे खए: वह ठ क से सीलबंद हो और कह से फटा न हो; भीतर क ड़े, गुठ लयाँ या नमी के धब्बे न ह ; और रंग
एक समान हलका पीला हो।

स्वयं जाँ चए: चत्र 12.29 म दशाए गए पैकेट को ध्यान से दे खए — उस पर शुद्ध मात्रा 2 कग्रा लखी है, 1 कलो
नह । अथात् यही पैकेट वह नह है जो आपके माता- पता ने मँगाया था। इस अभ्यास का उ े श्य ठ क यही है — आप
क्या खरीद रहे ह, यह थैले क सूरत नह , लेबल बताता है।

ऐसा क्य होता है: आप दुकान म पैकेट खोलकर बेसन चख नह सकते, न उसे प्रयोगशाला भेज सकते ह। खरीदते
समय आपके पास केवल छपा हुआ लेबल और सरकारी चह्न ही प्रमाण होते ह — इसी लए कानून इन्ह अ नवाय
बनाता है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 269

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घर के उपकरण पर बी.ई.ई. स्टार रे टग

आइए पता लगाएँ

प्र.1 अपने घर म सभी इलेक् ॉ नक उपकरण पर बी.ई.ई. स्टार रे टग को जाँच और उनक व ुत दक्षता के बढ़ते हुए
क्रम म सारे उपकरण का एक चाट तैयार कर।

व ध। बी.ई.ई. स्टार रे टग लाल-सफेद रंग का वह लेबल है जस पर ‘POWER SAVINGS GUIDE' लखा होता है और तार क
एक पं क्त छपी होती है। इसे रे जरेटर, वातानुकूलक, वॉ शग मशीन, पंखे, गीजर, ट .वी., एल.ई.डी. बल्ब और इन्वटर के पीछे या
बगल म खो जए। उपकरण का नाम, तार क संख्या और लेबल पर लखा वष नोट क जए। फर सूची को कम तार से अ धक
तार क ओर सजाइए — यही ‘ वद्युत दक्षता के बढ़ते हुए क्रम' है।

क्रम उपकरण बी.ई.ई. स्टार लेबल पर अथ
रे टग वष

1 (सबसे कम दक्ष) शयनकक्ष का पुराना ★ (1 तारा) 2016 अपने काम के लए सबसे अ धक बजली
पंखा लेता है

2 गीजर ★★ 2019

3 वॉ शग मशीन ★★★ 2021

4 रे जरेटर ★★★★ 2022

5 (सबसे अिधक वातानुकूलक ★★★★★ 2024 सबसे कम बजली — ‘अ धक तारे,
दक्ष) अ धक बचत'

अच्छे चाट म क्या होना चा हए: केवल वही उपकरण जो आपने वास्तव म दे खे, हर एक क सही तारा-संख्या, और अंत म एक
पं क्त क कस उपकरण को बदलने से सबसे अ धक बचत होगी। जन उपकरण पर कोई तारा-लेबल नह है, उनका भी उल्लेख
क जए — अनेक पुराने उपकरण पर यह होता ही नह ।

5 तारे वाला रेिफजरेट र लगभग 0.6 यूिनट पितिदन बनाम 2 तारे वाला लगभग 1.0 यूिनट पितिदन

बचत = 0.4 यूिनट /िदन → 0.4 × 365 = 146 यूिनट पित वष

₹7 पित यूिनट की दर से → 146 × 7 = लगभग ₹1,022 की वािषक बचत

ऐसा क्य होता है: बी.ई.ई. का अथ है ऊजा दक्षता ब्यूरो, और यह रे टग एफ.एस.एस.ए.आई. या आई.एस.आई.
जैसा ही सरकारी प्रमाणन है। यह एक अदृश्य बात को — क मशीन दस वष म कतनी बजली खाएगी — दुकान म
एक नजर म दखाई दे ने वाली बात बना दे ती है। उपभोक्ता के बल के लए भी अ ा और पयावरण के लए भी।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 269

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प्र स द्ध, नजी संवाद और ऑनलाइन समीक्षा

प्र.1 क्या आपके प रवार के सदस्य ने कुछ ऐसे उत्पाद खरीदे ह गे, जो उन्ह उनके सा थय या संबं धय ने सुझाएँ
ह गे?

लगभग हर प रवार ने खरीदे ह गे — और गुणवत्ता परखने का यह तरीका कसी भी प्रमाणन चह्न से पुराना है।
सामान्य उदाहरण: वह दज जसे कसी चचेरे भाई ने सुझाया; वह सीमट जो चाचा ने अपने घर म लगवाया था; वह बस्ता जो
पड़ोसी के ब े के तीन वष चला; वह च कत्सक जस पर कसी सहकम ने भरोसा कया; वह ूशन शक्षक जसका नाम बड़ी
बहन क सहेली ने बताया; वह साइ कल जसक तारीफ सहपाठ का प रवार करता है।

ऐसा क्य होता है: अध्याय इसे उत्पाद क प्र स द्ध कहता है, जो “ नजी संवाद ारा संभव होती है”। संबंधी को
आपको गुमराह करने क कोई आवश्यकता नह और उसने महीन तक वह वस्तु स्वयं इस्तेमाल क है — इस लए
उसक राय म वह जानकारी होती है जो कोई वज्ञापन नह दे सकता। यह मुफ्त है, भरोसेमंद है, और उस व्य क्त से
आती है जससे आप और सवाल पूछ सकते ह।

इसका आधु नक रूप। ऑनलाइन खरीदते समय आपके पास कोई मत्र खड़ा नह होता, इस लए मंच हजार अनजान लोग क
राय सामने रख दे ता है — “वस्तुओं और सेवाओं क अन्य उपभोक्ताओं ारा क गई ऑनलाइन समीक्षा एवं प्र त क्रया भी हम
ऑनलाइन क्रय करते समय नणय लेने म सहायता करती है।”

नजी संवाद ऑनलाइन समीक्षा

कौन बताता कु छ जाने-पहचाने और भरोसे म ंद लोग हजारों अनजान लोग
है

शिक्त आगे पश्न पूछ सकते है ं और उनके घर जाकर वस्तु क्र
बहुत बड़ी संख्या, तारांक न, तथा वास्तिवक े ताओं के िचत्र और
दे ख सकते है ं वीिडयो

कमजोरी बहुत थोड़ी राय; हो सकता है आपकी आवश्यकता कु छ समीक्षाएँ नकली या पैसे दे क र िलखवाई हुई होती है;ं िलखने वाला
पर खरी न उतरे कौन है, पता नही ं चलता

सुझाव: समीक्षाओं का उपयोग वैसे ही क जए जैसे मत्र क सलाह का — केवल पाँच तारे और एक तारे वाली नह ,
ब ल्क बीच क कुछ समीक्षाएँ प ढ़ए। वे प्रायः बताती ह क वस्तु वास्तव म कैसी है।

आगे बढ़ने से पहले… — पृष्ठ 270

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ
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अध्याय चार बदुओं म
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आगे बढ़ने से पहले …

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a s em उस मूल्य पर क्रेता और वक्रेता के मध्य व नमय सुगम बनाता है जस पर दोन क सहम त हो और जो
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बाजार
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प्र.1
क्रेता क माँग तथा वक्रेता क आपू त ारा नधा रत होता है।

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यही अध्याय का हृदय है। इसे तीन हस्स म खो लए।
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a
व नमय — बाजार उसे, जसके पास वस्तु है, और उसे, जसे वह चा हए, आमने-सामने लाता है। बाजार न हो तो दोन अटके
रह जाते ह।
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se m.
दोन क सहम त वाला मूल्य — इसे कोई एक पक्ष थोप नह सकता। क्रेता और वक्रेता तब तक मोल-तोल करते ह “जब तक

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gहै जहाँ उपलब्ध मात्रा और चाही
.cआपू त ारा नधा रत — जब क्रेता और वक्रेता अनेक ह तो मूल्य वह ठहरता
क वे क मत पर परस्पर सहमत नह हो जाते”, और सहम त न बने तो “लेन-दे न नह हो सकता।”

m a
seमात्रा मल जाती ह।
माँग और

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गई

माँग = वह मात्रा िजसे उपभोक्ता िकसी िनिश्चत समयm a s
.co agl
पर िकसी िवशेष मूल्य पर क्रय करने को इच्छु क और

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सक्षम है ं
g
a िनिश्चत समय पर िकसी िवशेष मूल्य पर िवक्रय के िलए इच्छु क और
आपूित = वह मात्रा िजसे िवक्रे ता िकसी
सक्षम है ं
co m
m .
अमरूद ₹80 पर → आपूित अिधक, माँग नगण्य → ठे ला भरा रह गया
m as e
c o
. ₹20 पर → माँग अिधक, आपूित कम → ठे ला खाली, क्रे ता वंिचत a g l
e m
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अमरूद

agl अमरूद ₹40 पर → दोनों िमल गईं → बाजार साफ हो गया

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ऐसा क्य होता है: मूल्य ही वह इकलौता संक.े तc है जसे दोन पक्ष दे ख सकते ह। उसे बढ़ाइए तो क्रेता पीछे हटते ह; g l a
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l a sमूeल्य बस वही बदु है जहाँ कोई और पीछे नह हटना चाहता।
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घटाइए तो वक्रेता पीछे हटते ह। सहमत

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बाजार म उत्पादक, थोक वक्रेता, वतरक और खुदरा वक्रेता जैसे भागीदार कm ंखला अं तम उपभोक्ता तक
प्र.2
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वस्तुओं क आपू त सु न त करती है।
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चत्र 12.11 क ंखला एक पं क्त म: आगत → उत्पादक → थोक वक्रेता → (गोदाम, शीतागार, वतरक, मंडी) → खुदरा
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वक्रेता → उपभोक्ता।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

भागीदार ंखला म काम

िविनम ता / आगत खरीदकर उन्ह तैयार वस्तुओं म बदलता है — सूरत के पावरलूम और रंगाई इकाइयाँ
उ त्पादक

क्र
थोक िव े ता उत्पादक से थोक म खरीदता है, संगृहीत करता है, और आकलन करता है क खुदरा वक्रेताओं को कतना चा हए

गोदाम / शीतागार माल को आवश्यकता तक सुर क्षत रखता है; शीघ्र सड़ने वाली वस्तुओं को शीतागार बचाता है

मंडी / थोक बाजार हर वस्तु का अपना व्यापार-स्थल — अनाज, कपास, सब्जी, मसाले, रसायन, स्वचा लत पुज

िवतरक जहाँ दूरी और क्षेत्र के कारण थोक वक्रेता बड़ी संख्या म खुदरा वक्रेताओं तक नह पहुँच पाता, वहाँ का पुल

क्र
खुद रा िव े ता अं तम उपभोक्ता को कम मात्रा म, उपभोग के लए बेचता है; सैलून, थएटर और रेस्तराँ जैसी सेवाओं के स्टोर भी

संग ाहक ऑनलाइन बाजार का छोटा रास्ता — व नमाता थोक माल इसके गोदाम भेजते ह और यह पैक करके क्रेता के घर
पहुँचाता है

ऐसा क्य होता है: उत्पादन क द्रत होता है — एक ही नगर म हजार कारखाने — जब क उपभोग करोड़ लोग म
बखरा होता है। यह ंखला इसी लए है क बड़ी मात्रा को छोट मात्राओं म तोड़ा जा सके और उसे दूरी तथा समय
के पार पहुँचाया जा सके।

प्र.3 बाजार आदान-प्रदान के ान भी ह क्य क वह व्य क्तय को एक साथ लाते ह और वचार एवं परंपराओं के
आदान-प्रदान को संभव बनाते ह।

यह बाजार का दूसरा जीवन है, जसका पैसे से कोई संबंध नह ।

इमा कैथल, इंफाल का ‘मदस माकट', अध्याय का सव त्तम उदाहरण है। लगभग 3,000 म हलाएँ यहाँ क सारी दुकान स्वयं
चलाती ह और स ब्जयाँ, पारंप रक म णपुरी प रधान, हथकरघा व हस्त शल्प तथा दै नक आवश्यकता का सामान बेचती ह। यह
“हजार प रवार के लए आय का एक महत्वपूण ोत” है और साथ ही “ व भन्न संस्कृ तय का संगम स्थल” भी, जहाँ लोग
“ वचार का आदान-प्रदान करने और साझा परंपराओं का आनंद लेने के लए एक साथ आते ह।”
पी ढ़य तक चलने वाले संबंध — प रवार का अपने दज , स्वणकार और च कत्सक के साथ दशक पुराना भरोसा, और
कराना दुकानदार के साथ केवल वश्वास पर चलने वाला महीने भर का खाता।
शुभकामना क परंपराएँ — द क्षण भारत का वह वक्रेता जो हल्द और कुमकुम क थोड़ी मात्रा “शुभकामनाओं के तौर पर”
बना शुल्क दे ता है।
इ तहास म भी बाजार वस्तुओं के साथ वचार ढोते रहे — हंपी के बाजार ने पुतगाली या त्रय को ख चा, जन्ह ने भारत के
बारे म संसार के लए लखा।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: बाजार उन गने-चुने स्थान म है जहाँ अलग-अलग समुदाय के अनजान लोग को नय मत रूप
से, आमने-सामने मलना और एक-दूसरे पर नभर रहना पड़ता है। जहाँ लोग मलते ह, वहाँ वस्तुओं के साथ भाषा,
भोजन, त्योहार और वचार भी यात्रा करते ह। इसी लए अध्याय कहता है क बाजार का “गैर-आ थक महत्व” भी है।

प्र.4 सरकार वस्तुओं एवं सेवाओं के गुणवत्ता मानक को बढ़ावा दे ने तथा बाजार म उ चत मोल-तोल के लए नयामक
भू मका नभाती है। हालाँ क, उपभोक्ता सरकारी सं ाओं के ारा उत्पाद पर दए गए प्रमाणन चह्न तथा
ऑनलाइन समीक्षाओं के माध्यम से वस्तुओं एवं सेवाओं क गुणवत्ता का आकलन भी कर सकते ह।

सुरक्षा क दो परत — एक ऊपर से, दूसरी स्वयं क्रेता के हाथ म।

सरकार क परत उपभोक्ता क परत

जीवन-र क्षक दवाओं जैस ी आवश्यक वस्तुओ ं पर अिधकतम मूल्य और ले बल पढ़ ना — शुद्ध मात्र ा, अिधकतम खुद रा मूल्य, ितिथयाँ, सामग ी
गेहू,ँ धान, म क्का पर न्यूनतम मूल्य; न्यूनतम मजदू र ी सूची, एलज घोषणा, बैच नंबर , िविनम ता का पता

क्र
औषिधयों के अनुम ोदन की पि या और नमूना परीक्षण खाद्य पदाथ पर एफ .एस .एस .ए .आई. िचह्न और लाइसे ंस संख्या दे खना

एक बार उपयोग वाले प्लािस्टक जैसे पदू षणकारी उ त्पादन पर कठोर िवद्य तु उपकरणों, िनम ण सामग ी, पिहयों और कागज पर आई.एस .आई.
िनयम िचह्न दे खना

िडब्बाबंद वस्तुओ ं के भार और माप की िनगरानी सिब्जयों, फलों, अनाजों, दालों, मसालों और शहद पर एगमाक दे खना

सावजिनक वस्तुए ँ — उ द्य ान, सड़कें , सुर क्षा व्यवस्था इले क्टॉिनक उपकरणों पर बी.ई.ई. स्टार रे िटंग की तुल ना — अिधक
तारे , कम िबजली

पर यह भी ध् यान िक “िनयमों की बहुल ता बाजारों के सुचारु रूप से िनजी संवाद और अन्य उपभोक्ताओं की ऑनलाइन समीक्षा का उपयोग
काय करने में किठनाई पैद ा कर सकती है”

सुझाव: दोन परत एक-दूसरे से जुड़ी ह। सरकार चह्न बनाती है और उस पर परीक्षण करती है; उपभोक्ता उस चह्न
का उपयोग करता है। अकेले कोई काम नह करता — जस चह्न को कोई दे खता ही नह , वह कसी क रक्षा नह
करता।

प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 270–272

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अध्याय के अंत का अभ्यास

प्र.1 बाजार क मुख्य वशेषताएँ क्या ह? हाल म जब आप बाजार गए थे, तब आपने वहाँ कौन-कौन सी वशेषताएँ
दे ख ?

बाजार क मुख्य वशेषताएँ

1. क्रेता — जसे वस्तु या सेवा चा हए और जसके पास भुगतान का साधन है।
2. वक्रेता — जसके पास वह वस्तु या सेवा है और जो उसे दे ने को तैयार है।
3. वस्तुए ँ या सेवाएँ, जनका व नमय होना है।
4. एक क मत जस पर दोन सहमत ह — “ कसी भी लेन-दे न को पूण करने के लए क मत एक महत्वपूण वशेषता है।”
5. मोल-तोल, जहाँ क मत पहले से नयत न हो।
6. ान या मंच — हाट, दुकान क गली, मंडी, मॉल, या कोई वेबसाइट अथवा ऐप।
7. भुगतान का साधन — नकद, काड, या चत्र 12.4 के ठे ले जैसा क्यू.आर. कोड।
8. लेन-दे न — वस्तु और मुद्रा का वास्त वक आदान-प्रदान, जससे व नमय पूरा होता है।

अपनी यात्रा वाले उत्तर म क्या होना चा हए: कब और कहाँ गए, क्या खरीदा, क मत कैसे तय हुई, भुगतान कैसे कया, और ऊपर
क कम से कम तीन वशेषताएँ नाम लेकर बताई गई ह ।

नमूना उत्तर: “ पछले र ववार म माँ के साथ बस-स्टड के पास लगने वाले साप्ता हक हाट म एक कॉपी और स ब्जयाँ
लेने गया।
वक्रेता — लगभग चालीस, हर एक के पास ठे ला या चादर; चार सब्जी वाले थे, इस लए होड़ भी थी। क्रेता — बड़ी
भीड़, अ धकतर प रवार। वस्तुए ँ — स ब्जयाँ, फल, प्ला स्टक क बा ल्टयाँ, कॉपी-प सल, चू ड़याँ, और एक व्य क्त
पकौड़े तल रहा था (यह वस्तु नह , सेवा है)। क मत — कॉपी पर ₹40 अ धकतम खुदरा मूल्य छपा था और
दुकानदार ने कम नह कया; टमाटर पर कोई मूल्य छपा नह था और माँ ने कुछ टमाटर नरम होने क बात कहकर
₹40 से ₹35 प्र त कलो करा लया। भुगतान — कॉपी का नकद, और सब्जी वाले के तराजू से बँधे काड पर
क्यू.आर. कोड लगा था। लेन-दे न — स ब्जयाँ सरकारी मुहर लगे तराजू पर तौली गईं, कपड़े के थैले म डाली गईं
और वह भुगतान हो गया।
सबसे रोचक बात यह लगी क मोल-तोल सब्जी पर चला, कॉपी पर नह — क्य क कॉपी क क मत उसके
व नमाता ने छाप द थी।”

प्र.2 इस अध्याय के आरंभ म दए गए एक प्र सद्ध अथशास्त्री के उद्धरण को दे खए। इस अध्याय के संदभ म उस
उद्धरण क प्रासं गकता पर चचा क जए।

यह उद्धरण 18व शताब्द के अथशास्त्री एडम स्मथ का है —
“बाजार से समृ द्ध तभी उत्पन्न होती है, जब व्य क्तय को उन वस्तुओं और सेवाओं क आवश्यकता होती है, जन्ह वे स्वयं न मत
नह कर सकते ह।”
इस एक वाक्य म तीन वचार भरे ह, और अध्याय तीन को प्रमा णत करता है।

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उद्धरण का अध्याय म उसका प्रमाण
वचार

व्यिक्त सब कु छ न्न
नगर अ नही ं उगाता; सूर त के करघे कपास नही ं उगाते; आकृ ित स्वयं कै नवास और रंग नही ं बना सकती। अध् याय
स्वयं नही ं बना कहता है िक बाजार लोगों को उन वस्तुओ ं तक पहच
ु ँ ाते है ं “िजन्हे ं वह स्वयं नही ं बना सकते। ”
सकते

यही आवश्यकता पिरवारों को िनयत िदन स ब्जी चािहए थी, इसिलए साप्तािहक हाट बना। िविनम ताओं को क च्ची कपास चािहए थी, इसिलए
बाजार को जन्म क्र
कपास मंडी बनी। े ता घर से बाहर िनकले िबना खरीदना चाहते थे, इसिलए ऑनलाइन बाजार और संग ाहक बने।
दे ती है

और उससे सम ृिद्ध हंपी बाजार इसका पमाण है। नुिनज को आस -पास का दे श “बंजर ” लगा, िफर भी नगर में “हर चीज की पचुर ता” थी —
आती है और पेस ने उसे ‘िवश्व में उ त्कृ ष्ट उपल ब्धता वाला शहर ' कहा। वह पचुर ता वहाँ की िम ी से नही,ं व्यापार से आई थी।
सूर त आज भी यही कहता है — बंद रगाह, सड़कों और रे ल ने व्यापार लाया, व्यापार ने वस्त्र उ द्य ोग , िवश्व का सबसे बड़ा
हीरा उ द्य ोग और 15 लाख कु शल रोजगार िदए।

यह क्य महत्वपूण है: स्मथ क बात यह है क समृ द्ध केवल उत्पादन से नह , व नमय से बनती है। जब हर
व्य क्त वही एक काम करे जो वह सबसे अ ा कर सकता है और शेष के लए व नमय करे, तो सबके पास उससे
अ धक होता है जतना अकेले-अकेले सब कुछ बनाने पर होता। इसी लए अध्याय का अं तम भाग सरकार ारा इस
व नमय को नष्पक्ष बनाए रखने पर है — जो व नमय एक पक्ष को ठगे, वह उसी वश्वास को नष्ट कर दे ता है जससे
समृ द्ध आती है।

सुझाव: इसका उलटा पक्ष पृष्ठ 263 का ‘आइए वचार कर' है — बाजार के बना जीवन क कल्पना क जए और
उद्धरण अपने आप स्पष्ट हो जाएगा। व नमय नह , तो वशेषज्ञता नह ; वशेषज्ञता नह , तो समृ द्ध नह ।

प्र.3 अमरूद के क्रय- वक्रय के दए गए उदाहरण म य द वक्रेता को अच्छा मूल्य मल रहा है, तब वह कसान से और
अ धक अमरूद क्रय करने का प्रयास करेगा, ता क वह उन्ह उसी मूल्य पर बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा सके।
ऐसी त म कसान क्या करेगा? क्या आपको लगता है क वह अगली ऋतु म अमरूद क माँग के बारे म
सोचना शुरू करेगा? उसक संभा वत प्र त क्रया क्या होगी?

कसान क्या करेगा। वक्रेता का अ त रक्त आदे श कसान तक एक सीधा-सा संदेश बनकर पहुँचता है — अमरूद अ े बक रहे
ह। इस लए कसान अ धक आपू त करने का प्रयास करेगा।

िवक्रे ता को अच्छा लाभ → वह िकसानों से और अिधक अमरूद माँगता है

→ िकसान के अमरूद सरलता से और बेहतर मूल्य पर िबकते है ं

→ अमरूद से िकसान की आय बढ़ ती है

→ िकसान अगली ऋत ु में अिधक अमरूद उगाने का िनणय करता है

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ
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वह ऐसा करेगा कैसे —
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अपने मौजूदा पेड़ का पूरा फल तोड़कर बेचेगा, वह भी जसे पहले वह पेड़ पर छोड़ दे ता था।

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और अमरूद के पौधे लगाएगा, या कसी खेत का कुछ हस्सा दूसरी फसल से हटाकर अमरूद म लगाएगा।

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बगीचे क दे खभाल पर अ धक खच करेगा — अ े पौधे, खाद, सचाई, क ट- नयंत्रण — ता क हर पेड़ अ धक फल दे ।

a gसीधे थोक वक्रेता या मंडी को बेचने का प्रयास करेगा, ता क ऊँचे मूल्य का बड़ा हस्सा उसके पास रहे।

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हाँ — वह अगली ऋतु क माँग के बारे म अवश्य सोचेगा, और उसे सोचना ही होगा। अमरूद के पौधे को फल दे ने म दो से तीन

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वष लगते ह, इस लए वह आज जो लगा रहा है वह वष बाद क माँग पर लगाया गया दाँव है। और उसे अभी यह चुनना है क उस
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खेत म अमरूद उगे या कोई और फसल।
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उसक संभा वत प्र त क्रया और उसका प रणाम

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चरण क्या होता है

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इस ऋतु
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ऊँचा मूल्य → िकसान और िव े ता दोनों को अच्छा लाभ
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अगली ऋतु यह िकसान और साथ ही हर दू स रा िकसान अिधक अम रूद लगाता है — सबने वही ऊँचा मूल्य दे खा था

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उसके बाद की ऋतु बहुत बड़ी उपज एक साथ आती है → आपूित माँग से अिधक → मूल्य िगर जाता है, कभी-कभी बहुत तेजी से

m है ं → आपूित घटती है → मूल्य िफर चढ़ जाता है a
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और िफर कु छ िकसान अम रूद घटाते है ं या फसल

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ऐसा क्य होता है: मूल्य वह संकेत है जो चत्र 12.11 क ंखला म उलट दशा म चलता है — उपभोक्ता से
खुदरा वक्रेता, थोक वक्रेता और फर कसान तक। पर खेती म एक लंबी दे री अंत न हत है, इस लए कसान पछले
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वष के मूल्य पर प्र त क्रया करता है। यही दे री है जसके कारण भरपूर उपज मूल्य को गरा दे ती है — जैसा प्रश्न 7 के
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टमाटर कसान के साथ होता है।

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a सुझाव: समझदार कसान केवल एक अ ऋतु दे खकर नणय नह करता। वह थोक वक्रेता से पूछेगा क कतनी

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comपर वह चौपट न हो जाए। a
मात्रा क आवश्यकता होगी, कुछ भू म पर दूसरी फसल रखेगा, और भंडारण या प्रसंस्करण (अमरूद का जैम, जूस)

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क ओर भी दे खेगा, ता क ताजे फल का मूल्य गरने

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नम्न ल खत प्रकार के बाजार का उनक वशेषताओं से मलान क जए —
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emसही मलान इस प्रकार है।

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क्र.सं. बाजार सही मानदं ड क्य

(क) प्रत्यक्ष बाजार क्रे ता और िवक्रे ता की पत्यक्ष उपिस्थित “प्रत्यक्ष बाजार वह होता है, जहाँ क्रेता- वक्रेता प्रत्यक्ष रूप
आवश्यक है। से मल सकते ह” — हाट, स्थानीय दुकान, मॉल

(ख) ऑनलाइन क्रे ता और िवक्रे ता आभासी रूप से िमलते है ं वे “एक-दूसरे से हजार कलोमीटर दूर होते हुए भी
बाजार और िकसी भी समय ले न-दे न कर सकते है।
ं सु वधाजनक स्थान से लेन-दे न कर सकते ह”

(ग) घरेलू बाजार िकसी रा की सीमा के भीतर िस्थत क्रय- वक्रय “दे श क भौगो लक सीमा के भीतर” — जैसे
इस पुस्तक के लए भारत क मल से लया गया कागज

(घ) अंतरा ीय वस्तुए ँ और से वाएँ जो रा की सीमा के बाहर एक दे श के वक्रेता नयात करते ह और दूसरे दे श के क्रेता
बाजार भेजी जाती है।
ं आयात

(ङ) थोक बाजार बड़ी मात्र ा में सौदे थोक व्यापारी “उत्पादक या व नमाता से अ धक मात्रा म
वस्तुएँ क्रय करते ह”

(च) खुदरा बाजार अंितम उपभोक्ताओं तक वस्तुए ँ एवं से वाएँ खुदरा वक्रेता “हमारे जैसे अं तम उपभोक्ताओं को वस्तुएँ
पहुच
ँ ाना। बेचते ह”, कम मात्रा म और उपभोग के लए

सुझाव: ये छह बाजार वास्तव म तीन जोड़े ह — प्रत्यक्ष/ऑनलाइन (कहाँ मलते ह), घरेलू/अंतराष्ट्रीय (सीमा के
कस ओर), थोक/खुदरा ( कतनी मात्रा म)। जोड़े याद रह तो मलान कभी गलत नह होगा।

प्र.5 सामान्यतया मूल्य क्रेताओं क माँग और वक्रेताओं क आपू त क अंतः क्रया ारा नधा रत होता है। क्या आप
ऐसे उत्पाद के बारे मे सोच सकते ह, जहाँ कसी उत्पाद क माँग के लए क्रेताओं क संख्या कम होने के बावजूद
उसका मूल्य अ धक होता है? इसके क्या कारण हो सकते ह?

हाँ, अनेक ह। मूल्य केवल तब ऊँचा नह होता जब क्रेता बहुत ह , ब ल्क तब भी होता है जब आपू त थोड़ी-सी माँग से भी कम
हो।

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उत्पाद क्रेता कम होने पर भी मूल्य अ धक क्य

हीरे , सोना, प ान्न अत्यंत दुलभ, और खनन, कटाई तथा चमकाने म भारी लागत। सूरत के 15 लाख कारीगर इसी
कारण इन पर काम करते ह क प्र त ग्राम मूल्य बहुत अ धक होता है।

मूल तैल -िचत्र (आकृ ित की या िकसी आपू त ठ क एक है। क्रेता चाहे कतने भी कम ह , उन्ह उसी एक कृ त के लए आपस म होड़ करनी
पिस द्ध िचत्र कार की कृ ित) पड़ती है।

दुल भ रोगों की जीवन-र क्षक औषिधयाँ रोगी बहुत कम, पर औष ध वक सत करने म वष का अनुसंधान और परीक्षण। वह लागत गने-चुने
क्रेताओं से नकालनी पड़ती है — इसी लए सरकार ऐसे मूल्य क सीमा तय करती है।

के सर , वनीला, कु छ मसाले बहुत थोड़ी उपज के लए बहुत अ धक श्रम — कुछ ग्राम के लए हजार फूल।

बनारसी या कांजीवरम रे शमी साड़ी, घटती संख्या वाले कुशल बुनकर का महीन का हस्तकाय।
बारीक हथकरघा, पश्मीना

पुर ावस्तुए ँ, दुल भ िस क्के , पुर ानी अब और बनाई ही नह जा सकत ।
पांडुिलिपयाँ

नगर के बीचों-बीच की भूिम आपू त पूरी तरह नयत है और कसी भी मूल्य पर बढ़ाई नह जा सकती।

िवशेष रूप से बनी मशीन, िकसी रोगी एक ही ग्राहक के लए बनी; लागत बाँटने के लए दूसरा क्रेता है ही नह ।
के िलए बना पत्यारोपण

कारण, एक साथ —

1. अत्यंत सी मत आपू त — प्राकृ तक दुलभता, या ऐसी नयत मात्रा जसे बढ़ाया नह जा सकता।
2. उत्पादन क ऊँची लागत — दुलभ कौशल, लंबा प्र शक्षण, महँगा क ा माल, वष का अनुसंधान।
3. अनूठापन — एक ही जैसी वस्तु, इस लए कोई सस्ता वकल्प है ही नह ।
4. ऐसे क्रेता जो अ धक दे ने के इच्छु क और सक्षम ह — संख्या म कम, पर सामथ्य म बहुत।
5. ऐसे क्रेता जनके पास वकल्प नह — जस रोगी को वही एक दवा चा हए, वह लौट नह सकता।
6. ांड और प्र स द्ध, जो नजी संवाद से बनती है और स्वयं ही मूल्य बढ़ा दे ती है।

ऐसा क्य होता है: मूल्य माँग और आपू त के आपसी अनुपात पर नभर करता है, केवल माँग पर नह । एक हीरे
के पीछे दस क्रेता उसका मूल्य उससे कह ऊपर ले जाएँगे जतना एक लाख कलो अमरूद के पीछे हजार क्रेता ले
जा सकते ह।

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प्र.6 स ब्जय के एक खुदरा वक्रेता क वास्त वक जीवन- त पर वचार क जए — एक प रवार स ब्जयाँ खरीदने
के लए दुकान पर आया। वक्रेता, जो फ लयाँ ठे ले पर बेच रहा था, उसक क मत ₹30/- प्र त कलोग्राम थी।
म हला ने क मत को ₹25/- प्र त कलोग्राम के नीचे लाने के लए वक्रेता के साथ मोल-भाव करना शुरू कर
दया। वक्रेता ने उस मूल्य पर वक्रय करने से मना कर दया और कहा क उसे उस मूल्य पर घाटा होगा। म हला
वहाँ से चली गई। फर प रवार समीप के सुपरमाकट म गया और वहाँ से स ब्जयाँ क्रय क । सुपरमाकट म अच्छे
ढं ग से पैक क गई फ लय के लए उन्ह ने ₹40/- प्र त कलोग्राम का भुगतान कया। क्या कारण है क प रवार ने
ऐसा कया? क्या क मत के अ त रक्त ऐसे कोई कारक ह, जो क्रय- वक्रय को प्रभा वत करते ह?

पहले यह दे खए क प रवार ने अपने पैसे का कया क्या।

ठे ले का मूल्य: ₹30/िकगा · मिहला की माँग: ₹25/िकगा · सुपरमाक ट में चुक ाया: ₹40/िकगा

₹40 − ₹30 = िजस ठे ले को छोड़ ा उससे ₹10 पित िकगा अिधक → 10 ÷ 30 = 33% अिधक

₹40 − ₹25 = िजस मूल्य के िलए वे लड़ रही थी ं उससे ₹15 पित िकगा अिधक → 15 ÷ 25 = 60% अिधक

उन्होंने ठे ले पर ₹5 अिधक दे ने से मना िकया और दुक ान में स्वेच् छा से ₹15 अिधक दे िदए।

प रवार ने ऐसा क्य कया। स्पष्ट है क यह नणय क मत का था ही नह ।

सु वधा। सप्ताह भर क सब्जी, कराना और अन्य आवश्यकताएँ एक ही छत के नीचे, एक ही चक्कर म, एक ही बल म।
पै कग और स्वच्छता। फ लयाँ “अ े ढं ग से पैक” ह — तौली और सीलबंद, दे खने म साफ और ले जाने म आसान।
नयत मूल्य पर भरोसा। छपा हुआ मूल्य ईमानदार लगता है। न बहस करनी पड़ती है, न यह चता क कसी और ग्राहक को
सस्ता मला होगा।
तौल पर भरोसा। इलेक्ट्रॉ नक तराजू और छपा हुआ बल हाथ के तराजू से अ धक वश्वसनीय लगते ह।
गुणवत्ता क छ व। छाँट हुई, एक-सी फ लयाँ ठं डे रैक म ठे ले के ढे र से बेहतर दखती ह, भले ही दोन एक ही खेत क ह ।
ान का आराम। वातानुकूलन, रोशनी, ट्रॉली, न भीड़, न धूल, न धूप म खड़ा होना। खरीदारी एक सैर बन जाती है।
दुकान के साथ मलने वाली सु वधाएँ। शकायत के लए बल, काड और यू.पी.आई. से भुगतान, खराब नकलने पर बदलना,
कभी-कभी घर तक पहुँचाना, सदस्यता छू ट और प्रस्ताव।
कुछ लोग को मोल-भाव अच्छा नह लगता। ठे ले वाले से ₹5 के लए बहस असहज लगती है; नयत मूल्य उससे बचा दे ता
है।

हाँ — क मत के अ त रक्त अनेक कारक क्रय- वक्रय को प्रभा वत करते ह:

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कारक क्रेता को कधर ख चता है

गण
ु वत्ता, ताजगी और छँटाई िजसका माल बेहतर िदखे, उसकी ओर

पैिकं ग, स्वच्छता और रूप पैक और सीलबंद उ त्पाद की ओर

सुिवधा — दू र ी, पािकं ग, एक ही जगह सब कु छ जो दुक ान बाकी कामों के रास्ते में पड़े

भरोसा और पुर ाना संबंध क्र
वष ं से जाना-पहचाना िव े ता — इसी कारण कु छ पिरवार ठे ले के ही बने रहते है ं

पिसिद्ध, बांड और िनजी संवाद िजस नाम की दू स रे िसफािरश करे ं

पमाणन िचह्न, िबल और वस्तु लौटाने की सुिवधा क्र
िजस िव े ता को उ त्त रदायी ठहराया जा सके

खरीदारी के अनुभव का आराम वातानुकू िलत गिलयारे की ओर

आदत और सामािजक छिव जहाँ पिरवार पहले से जाता आया है

ऐसा क्य होता है: क्रेता कभी केवल फ लय का मूल्य नह चुकाता। वह फ लय के साथ पै कग, आराम, भरोसा,
बल और आश्वासन भी खरीदता है। ठे ले वाला केवल फ लयाँ बेचता है, इस लए उसका मूल्य कम होना ही चा हए।
₹15 का अंतर उन बाक सब चीज का मूल्य है।

सो चए: ठे ले वाला सच कह रहा था — ₹25 पर उसे घाटा होता, क्य क उसने भी थोक वक्रेता से खरीदा था।
प रवार ने उसे झूठा नह माना; उसने बस सु वधा को ₹15 से अ धक महत्व दया। यह बाजार का उ चत प रणाम है,
पर यह दे खना भी आवश्यक है क बक्र अंततः कसे मली।

प्र.7 भारत के कुछ जले टमाटर उगाने के लए प्र सद्ध ह। हालाँ क, कुछ मौसम म कसान के लए त अच्छ नह
होती। अ धक उपज होने पर कृषक ारा अपनी उपज को फकने और उनका सारा श्रम नष्ट होने के समाचार आते
ह। आपके वचार म कसान ऐसा क्य करते ह? ऐसी त म थोक वक्रेता क्या भू मका नभा सकते ह? यह
सु न त करने के संभा वत उपाय क्या हो सकते ह जससे टमाटर बबाद न ह और कसान को नुकसान भी न
पहुँचे?

कसान अपने टमाटर क्य फक दे ते ह। जब तक हसाब न लगाएँ, यह पागलपन लगता है।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ
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भरपूर उपज → आपूित माँग से कही ं अिधक → मूल्य धड़ ाम
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मान लीिजए मंडी का मूल्य िगरकर ₹2 पित िकगा रह जाता है
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पर तोड़ ने , पेट ी में भरने और मंडी तक ले जाने में िकसान को लगभग ₹4 पित िकगा लगते है ं
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aबेचने पर: ₹2 िमले और ₹4 खच हुए → हर िकलो बेचने पर ₹2 की हािन

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फेंक दे ने पर: ₹0 िमला और ₹0 खच हुआ → के वल उतनी हािन िजतना उगाने में लग चुक ा
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→ बेच ना फेंकने से भी महँगा पड़ जाता है
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तीन बात इसे और बगाड़ दे ती ह —
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टमाटर बहुत शीघ्र सड़ने वाला है — कुछ ही दन म खराब हो जाता है, इस लए मूल्य सुधरने क प्रतीक्षा का वकल्प ही नह ।
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रखने क जगह नह है। शीतागार सी मत ह और प्रायः भरे हुए या दूर होते ह।

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फसल सबक एक साथ आती है। जले के हर कसान ने पछले वष के ऊँचे मूल्य के बाद बोया था, इस लए सारा टमाटर एक

a gl पखवाड़े म मंडी पहुँचता है।
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थोक वक्रेता क्या कर सकते ह। अध्याय उन्ह ठ क यही काम स पता है — वे “आकलन करते ह क खुदरा वक्रेताओं को कतनी
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मात्रा म उत्पाद क आवश्यकता है”, जससे “उत्पादक को उत्पाद का संग्रह करने म सहायता मलती है और अं तम उपभोक्ताओं

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को उत्पाद क नबाध आपू त” बनी रहती है।
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aglसे बाहर भेज — उन नगर और राज्य म जहाँ टमाटर क कमी है। इस तरह
थोक म खरीदकर अ त रक्त माल जले
स्थानीय अ धकता राष्ट्रीय आपू त बन जाती है।
शीतागार म संग्रह करके धीरे-धीरे बाजार म उतार, ता क मूल्य एक ही सप्ताह म न गरे।
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कसान को पहले ही बताएँ क कतनी मात्रा क आवश्यकता होगी, ता क सब एक ही फसल m
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ंधm glaसे बच जाए।
न बोएँ।
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खेती — बुवाई से पहले ही कसान के साथ मूल्य तय कर ल, जससे वह गरावट

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प्रसंस्करण इकाइय को बेच — प्यूरी, केचप, पेस्ट और सूखे टमाटर के कारखाने बहुत बड़ी मात्रा खपा सकते ह।
नयात उन पड़ोसी दे श को कर जहाँ फसल खराब हुई हो।

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टमाटर बबाद न ह और कसान को भी हा न न हो — संभा वत उपाय

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उपाय यह कैसे सहायक है

उ त्पादक िजलों के पास शीतागार और अध् याय की अपनी पिरभाषा — शीघ सड़ने वाली वस्तुओ ं के िलए िनम्न तापमान वाले िविशष्ट
छँटाई-पैिकं ग कें द बने ं गोदाम। भंडारण एक स प्ताह की अिधकता को तीन महीने की आपूित में बदल दे ता है।

खाद्य पसंस्करण — प्यूर ी, के चप, पेस्ट, पसंस्कृ त टमाटर वष भर चलता है और कही ं भी बेचा जा सकता है; िजले में रोजगार भी बनते है ं
धूप में सुखाया और चूण िकया टमाटर

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बेहतर पिरवहन और शीत-शंख पशीितत टक और अच्छी सड़कें अितिर क्त माल को सड़ने से पहले दू र के बाजारों तक पहच
ु ँ ा दे ती
है ं

सरकारी मूल्य-सहायता और खरीद जैसे वह गेहू,ँ धान और म क्का के िलए न्यूनतम मूल्य तय करती है “तािक िकसानों को िकसी पकार
की हािन न हो”, वैसे ही िगरावट के समय टमाटर एक न्यूनतम दर पर खरीदे जा सकते है ं

िकसान उ त्पादक संगठन और सहकारी िमलकर बेचने से मोल -भाव की शिक्त िमलती है और अपने भंडारण तथा पसंस्करण इकाइयाँ बनाई
सिमितयाँ जा सकती है ं — दू ध वाला अमूल िवचार टमाटर पर लागू

अलग-अलग समय पर बुवाई और फसल - पूर ा िजला एक ही िदन बोएगा नही,ं तो फसल भी एक ही िदन नही ं आएगी
परामश

सीधी और ऑनलाइन िब ी क्र ृ लाओं को बेचने से बीच की कु छ किड़याँ हट जाती है ं
सीधे उपभोक्ताओं, ऐप या बड़ी खुद रा शंख
और मूल्य का बड़ा िहस्सा िकसान के पास रहता है

फसल बीमा और बाजार -सूचना बीमा बुरे वष का ध क्का सहता है; फोन पर मंडी के ताजा भाव बताते है ं िक आज कौन-सा बाजार
सबसे अिधक दे रहा है

ऐसा क्य होता है: टमाटर क यह गरावट अमरूद वाले पाठ का चरम रूप है। मूल्य माँग और आपू त से तय होता
है — और जब आपू त फट पड़े और माँग वैसी क वैसी रहे, तो मूल्य फसल को मंडी तक लाने क लागत से भी नीचे
चला जाता है। ऊपर का हर उपाय तीन म से कोई एक काम करता है: अ त रक्त माल को संगृहीत करना, उसे
रूपांत रत करना, या उसे वहाँ पहुँचाना जहाँ उसक आवश्यकता है।

प्र.8 क्या आपने अपने या कसी अन्य व ालय ारा आयो जत कसी मेले के बारे म सुना है या उसम गए ह? अपने
मत्र और शक्षक से ऐसे मेल के बारे म चचा क जए क इन मेल म कस तरह से क्रय- वक्रय और मोल-भाव
होता है?

यह क्रयाकलाप क्य दया गया है। वद्यालय का मेला एक छोटा-सा वास्त वक बाजार है — वद्याथ वक्रेता बन जाते ह,
अ भभावक और सहपाठ क्रेता, और अध्याय क हर वशेषता एक ही दोपहर म सामने आ जाती है।
सामान्य स्टॉल और ग त व धयाँ

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स्टॉल का उदाहरण बाजार का कौन-सा वचार
प्रकार

वस्तुओ ं की खाने का स्टॉल — चाट, शकंजी, केक; शल्प स्टॉल — बुकमाक, शुभकामना उ त्पादक सीधे उपभोक्ता को बेचते हुए
िबक्री काड, गमले; पुस्तक और खलौना व नमय

से वाओं की चेहरे पर चत्रकारी, मेहँद , फोटो बूथ, जादू का खेल से वाओं का खुद रा — जैसे अध् याय के
िबक्री सै ल ून और िसनेम ा

खेल छल्ला फकना, हाउजी, गुब्बारे पर नशाना, लक डप पित पयास मूल्य और पुर स्कार का
पोत्साहन

व्यवस्था थोक वक्रेता से क ा माल खरीदना, कूपन छपवाना, हसाब रखना, पोस्टर से आगत, थोक क्रय, भुगतान का साधन
प्रचार और िवपणन

व ाथ क्रय- वक्रय और मोल-भाव कैसे करते ह

आरं भक मूल्य तय करना। वे सामग्री क लागत जोड़कर उस पर थोड़ा लाभ रखते ह — वही ‘लागत क सीमा' जो अमरूद
वाले वक्रेता के पास थी। मूल्य पूरे अंक (₹10, ₹20) म रखे जाते ह ता क खुले पैसे क झंझट न हो।
ग्राहक ख चना। आवाज लगाना, पोस्टर, संगीत, खाने के मुफ्त नमूने, सजा हुआ स्टॉल — स्टॉल के बीच होड़ वास्त वक होती
है, क्य क आगंतुक के पास सी मत पैसा है।
जोड़े म बेचना। “एक का ₹10, दो का ₹15” — वही मात्रा वाला मोल-भाव जो अमरूद के नाटक म था।
मोल-भाव। शक्षक और अ भभावक से वद्याथ प्रायः मूल्य नह घटाते; मत्र को छू ट दे दे ते ह। कभी-कभी एक साथ खरीदने
वाले समूह को बेहतर दर मल जाती है।
अंत क छू ट। यह पृष्ठ 254 वाला दे र रात का सब्जी बाजार ही है — अं तम आधे घंटे म बचे केक आधी क मत पर बकते ह,
ता क बबाद न ह ।
भुगतान। अनेक वद्यालय म नकद क जगह ार पर मलने वाले कूपन चलते ह, जससे हसाब साफ रहता है — यह छोटा-
सा पाठ है क एक साझा भुगतान-साधन बाजार को कैसे चलाता है।

नमूना उत्तर: “ दसंबर म हमारे वद्यालय का मेला लगा। हमारी कक्षा ने शकंजी और सड वच का स्टॉल लगाया।
हमने ₹500 इक े कए और मंडी के पास के थोक बाजार से न बू, ेड और मक्खन खरीदे — कोने क दुकान से
कह सस्ता। हसाब लगाया तो एक गलास पर ₹6 लागत आई, इस लए मूल्य ₹10 रखा। पहले घंटे कोई नह आया,
तो हमने पोस्टर बनाकर बाहर खड़े होकर आवाज लगाई, उसके बाद बक्र चल पड़ी। छह व रष्ठ वद्या थय के समूह
ने छू ट माँगी और हमने छह गलास ₹50 म दे दए। अं तम बीस मनट म बचे सड वच ₹15 के बजाय ₹5 म बेच
दए, क्य क वे वैसे भी फकने पड़ते। अंत म ₹1,180 मले, अथात् ₹680 का लाभ, जो वद्यालय के पुस्तकालय
कोष म गया। सबसे अ धक आश्चय इस बात का हुआ क हम कतनी जल्द अपनी पाठ्यपुस्तक के अमरूद वाले
वक्रेता क तरह सोचने लगे — मेज पर बचा माल दे खकर मूल्य बदलने लगे।”

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प्र.9 कोई भी पाँच उत्पाद चुन और अध्याय म चचा कए गए प्रमाणन चह्न के साथ उनके लेबल क जाँच कर। क्या
आपको ऐसे उत्पाद मले, जन पर मानक चह्न नह था? यह कस बात का सूचक है?

व ध। अलग-अलग प्रकार के पाँच उत्पाद चु नए, ता क अलग-अलग चह्न सामने आएँ — एक डब्बाबंद खाद्य पदाथ, एक कृ ष
उत्पाद, एक वद्युत उपकरण, एक इलेक्ट्रॉ नक उपकरण, और एक रोजमरा क वस्तु जैसे साबुन, कॉपी या प्ला स्टक क बाल्ट । फर
पैकेट पर या उपकरण के पीछे लगी प का पर दे खए।

उत्पाद अपे क्षत चह्न कहाँ दे ख

िबस्कु ट, आटा, दू ध , मसालों का पैके ट एफ .एस .एस .ए .आई. + लाइसे ंस पैकेट के पीछे , सामग्री सूची के
संख्या पास

शहद, दाले ं, सरसों का तेल , घी एगमाक सामने का लेबल

इस्तरी, हेल मेट, सीमेंट की बोरी, रसोई गैस िसले ंडर, पानी का आई.एस .आई. िचह्न (भारतीय मानक वस्तु पर ढला हुआ या बोरी पर
पाइप, टायर ब्यूर ो) छपा

रे िफ जरे टर, वातानुकू लक, टी.वी., पंखा, एल.ई.डी. बल्ब बी.ई.ई. स्टार रे िटंग लाल-सफेद ‘पावर से वग्स गाइड'
प का

सोने के आभूषण बी.आई.एस . हॉलमाक भीतरी सतह पर बहुत छोट मुहर

हाँ, ऐसे उत्पाद अवश्य मलगे जन पर कोई चह्न नह होगा। इसके कई ईमानदार कारण ह और एक बेईमान भी।

1. उस वस्तु के लए कोई चह्न बना ही नह है। स्ट ल क थाली, सूती तौ लया, लकड़ी का स्टू ल या कॉपी के लए कोई अ नवाय
प्रमाणन नह , क्य क उनम प्रमा णत करने योग्य कोई सुरक्षा-जो खम नह ।
2. अनेक वस्तुओं के लए प्रमाणन स्वै च्छक है। एगमाक अ धकतर स्वै क है — उत्पादक परीक्षण और लाइसस पर खच न
करने का नणय ले सकता है।
3. वस्तु खुली है, पैक नह । ठे ले क सब्जी, खुली बोरी से तौला गया चावल, या स्थानीय डेयरी का दूध — इन पर लेबल होता ही
नह , क्य क छापने के लए पैकेट ही नह है।
4. बनाने वाला बहुत छोटा है। घर पर पापड़ या अचार बनाने वाली, या कोई छोट कायशाला, प्रमाणन क फ स और कागजी
कायवाही भारी पाती है — यही वह ‘ नयम क बहुलता' वाली समस्या है जससे अध्याय सावधान करता है।
5. वस्तु हस्त न मत या अनूठ है — हथकरघा साड़ी, म का घड़ा, कोई चत्र। तुलना के लए कोई मानक व नदश ही नह
होता।
6. वह आया तत वस्तु है या ऐसे रूप म बक रही है जसे भारतीय नयम नह ढँ कते।
7. या फर उत्पाद मानक से नीचे है या चह्न नकली है। कुछ वक्रेता प्रमाणन से इस लए बचते ह क्य क उनका माल परीक्षण म
वफल हो जाएगा — और कुछ ऐसा चह्न छाप दे ते ह जसका उन्ह अ धकार ही नह ।

स्वयं जाँ चए: असली एफ.एस.एस.ए.आई. चह्न के साथ सदा 14 अंक क लाइसस संख्या होती है, और असली
आई.एस.आई. चह्न के साथ आई.एस. संख्या तथा लाइसस संख्या। बना संख्या वाला चह्न आश्वासन नह ,
चेतावनी है।

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यह क्य महत्वपूण है: चह्न सजावट नह है। उसक उप स्थ त “सु न श्चत करती है क उत्पाद न्यूनतम गुणवत्ता
मानक पर खरा है।” जहाँ चह्न कसी ईमानदार कारण से नह है, वहाँ क्रेता को गुणवत्ता कसी और तरीके से
परखनी पड़ती है — वक्रेता क प्र स द्ध से, नजी संवाद से, या स्वयं वस्तु को ध्यान से दे खकर।

प्र.10 आपने और आपके सहपा ठय ने एक साबुन बनाया है। इसक पैके जग के लए एक लेबल डजाइन क जए।
आपके वचार से लेबल पर क्या लखा होना चा हए, ता क उपभोक्ता उत्पाद को बेहतर तरीके से जाँच सक?

व ध। लेबल का नमूना चत्र 12.29 से ली जए। आवरण को दो भाग म बाँ टए — सामने का भाग जो पहचान कराए और
आक षत करे, और पीछे का भाग जो जानकारी दे और उपभोक्ता क रक्षा करे।

लेबल का क्या छपा होना चा हए उपभोक्ता को इसक
भाग आवश्यकता क्य

सामने बांड का नाम और पतीक ; वस्तु क्या है (“नीम एवं तुल सी स्नान साबुन”); एक क्रेता को तुरंत पता चल जाता है क
ईमानदार दावा (“हस्तिनिम त, कृ ित्र म रंग रिहत”); शुद्ध मात्र ा — 100 ग ाम ; सभी वस्तु क्या है, कतनी है और कतने क
करों सिहत अिधकतम खुद रा मूल्य है

पीछे — िविनम ता का नाम और पूर ा पता; संपक नंबर या ई-मेल ; िनम ण का दे श कोई वास्त वक व्य क्त इसके लए
पहचान उत्तरदायी है और उससे शकायत क
जा सकती है

पीछे — पूर ी सामग ी सूची, अिधक से कम मात्र ा के क्रम में; एलज घोषणा (“इसमें संवेदनशील त्वचा या एलज वाला
सामगी नािरयल तेल है”) व्य क्त उपयोग से पहले जाँच सके

पीछे — िनम ण ितिथ, उपभोग की समािप्त ितिथ, बैच नंबर ताजगी, और गड़बड़ी होने पर उस
ितिथयाँ और वशेष खेप तक पहुँचने क सु वधा
खेप

पीछे — उपयोग की िविध ; चेताविनयाँ (“के वल बाहरी उपयोग हेत”ु , “आँखों से बचाएँ”, सुर क्षत और सही उपयोग
उपयोग और “बच्चों की पहच
ु ँ से दू र रखें”); रखने का तरीका
सुर क्षा

पीछे — िचह्न जो पमाणन साबुन के पास वास्तव में हो (भारत में पसाधन सामग ी के िलए यह गुणवत्ता का स्वतंत्र प्रमाण — जो चह्न
बी.आई.एस . / आई.एस .आई. माग है); शाकाहारी/मांस ाहारी का हरा या भूर ा िबंद ु; अ जत न कया हो, वह कभी न छाप
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आवरण पर पुनच ण िचह्न ; बारकोड या क्यू.आर . कोड

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नमूना लेबल:
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सामने — साफ · नीम एवं तुलसी हस्त न मत स्नान साबुन · शुद्ध मात्रा: 100 ग्राम · अ धकतम खुeदm
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रा मूल्य ₹45
(सभी कर स.cहत) o a
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g ना रयल तेल है। · उपयोग व ध: गीली त्वचा पर झाग बनाएँ, जल से धो ल। केवल बाहरी उपयोग हेतु। आँख
पीछे —
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सामग्री: ना रयल तेल, अरंडी तेल, नीम सत्त्व, तुलसी सत्त्व, सो डयम हाइ ॉक्साइड, जल, वटा मन ई।

से बचाएँ। · ठं डे और सूखे स्थान पर रख। · नमाण त थ: 03/2026 · उपभोग क समा प्त त थ: 09/2027 · बैच

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सं. SB-04 · नमाता: कक्षा 7-ख उद्यम, राजक य माध्य मक वद्यालय, [नगर], [राज्य] · ग्राहक सेवा: [दूरभाष] ·
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m पर ही डाल।
आवरण पुनच क्रत कागज का है — कृपया उ चत eस्थान
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यह क्य महत्वपूण है: लेबल वक्रेता का ल खत वचन है। दुकान म सीलबंद पैकेट हाथ म लए खड़े क्रेता के लए

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यही एकमात्र स्थान है जहाँ से वह जान सकता है क वह वास्तव म क्या खरीद रहा है — और इस अध्याय का पूरा

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अं तम भाग इसी समस्या पर है।

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अध्याय — एक नज़र म
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glलोग क्रय- वक्रय करते ह। यही बाजार है, यही हाट है और कन्नड़ म मारुक े। यह
बाजार वह ान — या मंच — है जहाँ
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साप्ता हक हाट भी हो सकता है, मॉल भी, मंडी भी और मोबाइल का कोई ऐप भी। अध्याय का आरंभ वजयनगर सा ाज्य के

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हंपी बाजार से होता है, जसे पुतगाली यात्री डो मन्गोस पेस ने ‘ वश्व म उत्कृष्ट उपलब्धता वाला शहर' कहा था।

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हर बाजार म क्रेता, वक्रेता और दोन को स्वीकाय एक क मत चा हए। अमरूद क कहानी इसे स्पष्ट कर दे ती है —

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gे ता ारा उपलब्ध कराई गई मात्रा और
.c हाथ रह जाते ह; ₹40/ कग्रा पर सबका काम बन जाता है। समय के साथ वक्र
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₹80/ कग्रा पर ठे ला भरा रह जाता है और क्रेता चले जाते ह; ₹20/ कग्रा पर ठे ला तुरंत खाली हो जाता है और अनेक क्रेता

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क्रेता ारा अपे क्षत मात्रा मलकर क मत तय कर दे ती ह।

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बाजार जोड़ म आते ह — प्रत्यक्ष और ऑनलाइन, घरेलू और अंतराष्ट्रीय, थोक और खुदरा। वस्तुएँ एक ंखला से गुजरती

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ह: आगत → उत्पादक → थोक वक्रेता → खुदरा वक्रेता → उपभोक्ता, और बीच म गोदाम, शीतागार, वतरक तथा
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c माल संग्राहक के गोदाम म भेजते ह, जो उसे पैक करके क्रेता के घर ag
मं डयाँ आती ह। ऑनलाइन बाजार म व नमाता .थोक
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ag है। वे प रवार को वह सब देते ह जो वे स्वयं नह बना सकते, और साथ ही वश्वास और
पहुँचा दे ता है।
बाजार केवल पैसे का मामला नह
संस्कृ त भी ढोते ह। इंफाल का इमा कैथल (मदस माकट) लगभग 3,000 म हलाओं का अपना बाजार है; द क्षण भारत म
हल्द -कुमकुम का वक्रेता शुभकामना के रूप म थोड़ी मात्रा बना शुल्क के दे ता है।
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जहाँ बाजार ठ क से काम नह करता, वहाँ सरकार हस्तक्षेप करती है। वह जीवन-रक्षक
s emदवाओं का अ धकतम मूल्य तय
o है, गेहूँ-धान-मक्का का न्यूनतम मूल्य और श्र मक क न्यूनतम मजदूरी aनधाglरत करती है, औष धय का नमूना परीक्षण
.cकरती
se m करती है, एक बार उपयोग वाले प्ला स्टक जैसे प्रदूषणकारी उत्पादन पर कठोर नयम लगाती है, भार-माप क नगरानी करती
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a है और सावज नक वस्तुए ँ — उद्यान, सड़क, सुरक्षा व्यवस्था — उपलब्ध कराती है।
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उपभोक्ता स्वयं भी गुणवत्ता परख सकते ह। लेबल प ढ़ए — शुद्ध मात्रा, अ धकतम खुदरा मूल्य, नमाण तथा उपभोग क

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समा प्त त थ, सामग्री सूची, एलज घोषणा, बैच नंबर — और सरकारी चह्न दे खए: एफ.एस.एस.ए.आई. (खाद्य),

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आई.एस.आई. (भारतीय मानक ब्यूरो), एगमाक (कृ ष उत्पाद) तथा बी.ई.ई. स्टार रे टग (इलेक्ट्रॉ नक उपकरण)। नजी

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संवाद और ऑनलाइन समीक्षाएँ भी सहायक ह।

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय म याद रखने का सूत्र
कहाँ

बाजार वह स्थान — पत्यक्ष या ऑनलाइन — जहाँ पृष्ठ 250, हद म हाट, कन्नड़ म मारुकट्टे
लोगों ारा वस्तुओ ं और से वाओं का क्रय-िवक्रय बाजार क्या है?
िकया जाता है

व्यापार व्यिक्तयों या दे शों के बीच वस्तुओ ं और से वाओं हा शया, पृष्ठ व्यापार के लए क्रेता, वक्रेता और एक तय क मत
का क्रय-िवक्रय या िविनमय 250 चा हए

मूलभूत वे बुिनयादी वस्तुए ँ जो जीिवत रहने के िलए हा शया, पृष्ठ मूलभूत आवश्यकता के बना जीवन नह ;
आवश्यकताएँ आवश्यक है ं — भोजन, पानी, वस्त्र, आवास 250 आवश्यकता के बना जीवन चल जाता है

आवश्यकताएँ वे इच्छाएँ जो जीिवत रहने के िलए आवश्यक नही ं हा शया, पृष्ठ मोबाइल फोन इ ा है, पीने का पानी मूलभूत
है ं 250 आवश्यकता

क मत वह रािश िजस पर िवक्रेता बेचने और क्रेता हा शया, पृष्ठ अमरूद: ₹80 → ₹20 → ₹40
खरीदने को तैयार होता है 251

व नमाता वह व्यिक्त या उद्योग जो िवक्रय के िलए वस्तुए ँ हा शया, पृष्ठ सूरत के पावरलूम और रंगाई इकाइयाँ
िनिमत करता है 254

उत्पादन के वे सामिग याँ या संस ाधन िजनका उपयोग हा शया, पृष्ठ सूती वस्त्र का आगत है क ी कपास
आगत वस्तुओ ं और से वाओं के उत्पादन में िकया जाता 254
है

आयात / अन्य दे शों से वस्तुए ँ क्रय करके अपने दे श में हा शया, पृष्ठ भारत नयात करता है — सॉफ्टवेयर सेवाएँ, औष धयाँ,
नयात लाना / अपने दे श की वस्तुए ँ दू स रे दे श के क्रेता 255; चत्र अ भयां त्रक वस्तुए;ँ आयात करता है — ख नज तेल,
को बेचना 12.10 हीरे, वनस्प त तेल

शीतागार शीघ सड़ने वाली वस्तुओ ं के संर क्षण हेत ु िनम्न हा शया, पृष्ठ इसके बना सब्जी-फल मंडी पहुँचने से पहले ही सड़
तापमान बनाए रखने वाला िविशष्ट गोदाम 258; चत्र जाएँ
12.12

वतरक वे व्यिक्त या व्यवसाय जो िनम ताओं और थोक हा शया, पृष्ठ दूरी और क ठन क्षेत्र का अंतर पाटते ह — जैसे ‘अमूल
िवक्रेताओं से खुद रा िवक्रेताओं तक वस्तुओ ं की 259 क कहानी' के मध्यस्थ
आपूित करते है ं

संग्राहक वेबसाइट या मोबाइल एिप्लके शन जो अनेक हा शया, पृष्ठ ऑनलाइन बाजार क ‘मंडी'
िवक्रेताओं के पस्तावों को एक ही स्थान पर 259
संयोिजत करके उपभोक्ताओं को बेचता है

माँग / आपू त वह मात्रा िजसे उपभोक्ता िकसी िवशेष मूल्य पर हा शया, पृष्ठ दोन जहाँ मलती ह, वह क मत तय होती है
क्रय करने / िवक्रेता िवक्रय करने के िलए 265
इच्छु क और सक्षम है ं

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कक्षा 7 सामा जक वज्ञान अध्याय 12 बाजार क समझ AglaSem · NCERT Solutions

शब्द अथ अध्याय म याद रखने का सूत्र
कहाँ

सावज नक वे वस्तुए ँ या से वाएँ जो समाज के सभी सदस्यों हा शया, पृष्ठ उद्यान, सड़क, सुरक्षा व्यवस्था — इनम उत्पादक को
वस्तुएँ को उपलब्ध है ं और िजनका वतमान उपयोग 267 लाभ क अपेक्षा नह
भिवष्य की उपलब्धता कम नही ं करता

प्रमाणन चह्न सरकारी िचह्न जो िसद्ध करते है ं िक उत्पाद पृष्ठ 268–269 एफ.एस.एस.ए.आई. खाद्य · आई.एस.आई.
न्यूनतम ग ण
ु वत्ता और सुर क्षा मानकों पर खरा है उपकरण · एगमाक कृ ष · बी.ई.ई. स्टार ऊजा

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages57
Languagehindi
Updated19 Sep 2026