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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 9: न्याय
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
99 – 116 8 36 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 36 pages
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: न्याय
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 9 न्याय के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह पाठ कहानी नह , नाटक है — यानी ऐसी रचना जो मंच
पर खेली जाती है। इसम पात्र के नाम के आगे उनके संवाद लखे ह और कोष्ठक ( ) म यह लखा है क पात्र उस समय क्या कर रहा है। नाटक के अंत
म पृष्ठ 109 पर रचनाकार का नाम छपा है — वष्णु प्रभाकर। नाटक म दो दृश्य ह। पहला दृश्य क पलवस्तु के राज-उद्यान म है, जहाँ राजकुमार
सद्धाथ घायल हंस को बचाते ह। दूसरा दृश्य महाराज शुद्धोदन क सभा म है, जहाँ हंस पर सद्धाथ और दे वदत्त के दावे का फ़ैसला होता है। पृष्ठ 99
से 116 तक छपे हर अभ्यास का पूरा हल यहाँ है — बातचीत के लए, सो चए और ल खए, अनुमान और कल्पना, भाषा क बात, पाठ से
आगे, पुस्तकालय एवं अन्य ोत, म भी सद्धाथ तथा मेरा पक्षी। ध्यान द जए — इस पाठ म ‘पाठ से’ वाली बहु वकल्पी अभ्यास नह छपी है,
और पाठ के बाद कोई अलग अनुपूरक रचना भी नह है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 99 – 116
खं ड प्रश्न
8 36
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 110
नाटक पढ़ने के बाद कक्षा म मलकर बातचीत करने के चार प्रश्न — शाम क प्रकृ त, पशु-पक्षी को बचाने का अनुभव, अपना न्याय और नाटक
के पात्र म बदलाव
बातचीत के लए
प्र.1 जब शाम होती है तो आपको प्रकृ त म क्या-क्या प रवतन दखाई दे ते ह?
शाम होते ही प्रकृ त म कई बदलाव दखाई दे ते ह। आकाश लाल-सुनहरा हो जाता है, सूरज प म क ओर ढल जाता है, पक्षी
अपने घ सल क ओर लौटने लगते ह और गाय वन से गाँव क ओर आती ह। धीरे-धीरे उजाला कम होता है और ठं डी हवा
चलने लगती है।
यही चत्र नाटक के पहले दृश्य म भी है। वहाँ लखा है —
“(रंगमंच पर राज-उ ान का एक दृ श्य। संध्याकाल। मंच पर लािलमा।
त्र बनाती है।ं पुष्प झूमते है।ं दू र ने पथ्य में वन से लौटती गायों का
िकरणे ं िच
स्वर उठता हुआ । पक्षी िवदा का गान गाते है।ं )”
संध्याकाल यानी शाम का समय। ला लमा यानी लाल रंग क आभा, जो डू बते सूरज से आकाश और मंच पर फैल जाती है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
कसम शाम को क्या होता है नाटक म इसका संकेत
प रवतन
आकाश नीला आकाश लाल , नारंगी और सुनहरा हो जाता है। “मंच पर ला लमा। करण चत्र बनाती ह।”
सूर ज सूर ज पिश्चम िदशा में ढलकर िछप जाता है। “सूरज रोज सवेरे पूरब से नकलता है और शाम को प म म
छप जाता है।”
पक्षी झुंड बनाकर अपने घोंस लों की ओर लौटते है ं और खूब “पक्षी वदा का गान गाते ह।” / “पक्षी लौट रहे ह।”
चहचहाते है।
ं
पशु गाये-ं भैस
ं े ं वन या चरागाह से गाँव लौटती है,ं बछड़ े “दूर नेपथ्य म वन से लौटती गाय का स्वर उठता हुआ।”
रँभाते है। ं
फू ल कई फू ल बंद होने लगते है;ं हवा से पौधे झूम ते है।
ं “पुष्प झूमते ह।”
हवा और उजाला हवा ठं डी हो जाती है और उजाला धीरे -धीरे कम होने “संध्याकाल… कैसा सुहावना समय है! कैसी शां त है!”
लगता है।
आवाज़ें िदन के जीव चुप होने लगते है ं और झी ंगुर बोलने लगते “कैसी शां त है!”
है।
ं
ऐसा क्य होता है: सूरज ढलने पर धूप और गरमी घटती है। इसी से पशु-पक्षी समझ जाते ह क लौटने का समय हो
गया। नाटक म सद्धाथ और सखा इसी पर बात करते ह क हर वस्तु का एक स्वभाव होता है — भूख अपने आप
लगती है, न द अपने आप आती है, और सूरज रोज़ अपने समय पर नकलता- छपता है।
ऐसे बताइए: कक्षा म बोलते समय जो आपने सचमुच दे खा है, वही बताइए — जैसे “हमारी छत से शाम को तोत
का झुंड नीम के पेड़ पर आता है।” अपनी दे खी हुई बात सबसे अच्छ लगती है।
प्र.2 क्या आपने कभी कसी पशु-पक्षी को बचाया है? उनसे जुड़ा कोई अनुभव साझा क जए।
यह आपके अपने जीवन का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर ब े का अलग होगा। जो आपने सचमुच कया हो, वही बताइए। य द आपने
कसी को बचाया न हो, तो साफ़ कह द जए — और यह बताइए क आगे मौका मले तो आप क्या करगे। स ा उत्तर ही अच्छा
उत्तर है।
अच्छे उत्तर म ये चार बात होनी चा हए —
1. कौन-सा पशु या पक्षी था और वह कस मुसीबत म था।
2. आपने क्या-क्या कया — कदम-दर-कदम।
3. कसक मदद ली — बड़ क , या पशु- च कत्सक क ।
4. उस समय आपको कैसा लगा।
नमूना उत्तर:
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पछली गरमी क बात है। दोपहर म मने दे खा क हमारे आँगन म एक छोट गौरैया ज़मीन पर पड़ी है। वह उड़ नह पा रही थी और
उसक साँस तेज़ चल रही थी। मने पहले एक कपड़े के टु कड़े से उसे धीरे-से उठाया, क्य क सीधे हाथ से पकड़ने पर पक्षी और डर
जाता है। फर उसे छाया म एक टोकरी म रखा। माँ ने कहा क पहले पानी दो। मने ढक्कन म थोड़ा पानी रखकर उसके पास सरका
दया। उसने दो-तीन बूँद पी। लगभग आधे घंटे बाद वह अपने आप फुदक और फर उड़कर नीम क डाल पर जा बैठ ।
उस समय मुझे बहुत अच्छा लगा। ऐसा लगा जैसे कसी ने मुझे धन्यवाद कहा हो। उसी दन से हमने छत पर एक म का सकोरा
रख दया है और उसम रोज़ पानी भरते ह। अब वहाँ रोज़ गौरैया, कबूतर और कभी-कभी बुलबुल भी आती ह।
इस प्रश्न का नाटक से नाता: सद्धाथ ने भी यही कया था। उन्ह ने घायल हंस को गोद म लया, तीर नकाला और
मरहम मँगवाया। बचाना कोई बड़ा काम नह होता — बस समय पर क गई थोड़ी-सी दया होती है।
ध्यान र खए: घायल पशु-पक्षी को अकेले न सँभाल। पहले कसी बड़े को बुलाइए। पक्षी को ज़ोर से न पक ड़ए, च च
म ज़बरदस्ती पानी न डा लए और कुत्ते-बंदर जैसे बड़े जानवर के पास बना बड़ के मत जाइए।
प्र.3 य द आप मंत्री के ान पर होते तो न्याय कैसे करते?
पहले यह दे ख ली जए क झगड़ा था क्या। दोन पक्ष क बात नाटक म साफ़ लखी है —
पक्ष दावा क्या है नाटक क पं क्त
दे वद त्त हंस मेर ा है, क्योंिक तीर मैंने मारा था। जो िशकार करता है, िशकार उसी का होता “मने पहले हंस को मारा है इस लए वह मेरा
है। है।”
िस ाथ हंस मेर ा है, क्योंिक जान मैंने बचाई। बचाने वाला मारने वाले से बड़ ा होता है, और “तुमने मारा है परंतु मने बचाया है… इस लए
शरण में आए को छोड़ ा नही ं जाता। यह हंस मेरा है।”
दोन अपनी-अपनी जगह तक दे रहे थे, इस लए महाराज ने कहा — “समस्या ज टल है।” ज टल यानी उलझी हुई।
मंत्री ने असल म क्या कया: उन्ह ने कसी क बात नह मानी। उन्ह ने हंस से ही पूछ लया। हंस को आसन पर बैठाया और दोन
से बारी-बारी बुलवाया। दे वदत्त के बुलाने पर पक्षी डरकर चीखा; सद्धाथ के बुलाने पर उड़कर उनक गोद म आ चपका। मंत्री ने
कहा — “पक्षी ने अपने आप इस प्रश्न का नणय कर दया है।”
नमूना उत्तर: य द म मंत्री के ान पर होता, तो म भी न्याय इसी तरह करता — पर इन चार चरण म:
1. दोन क पूरी बात सुनता। बीच म न रोकता। न्याय क पहली शत यही है क दोन पक्ष कह ल।
2. दे खता क इस झगड़े म सबसे ज़्यादा कस पर बीत रही है। यहाँ वह हंस था — घायल और डरा हुआ।
3. हंस को ही चुनने दे ता। उसे बीच म बैठाकर दोन से बुलवाता। जो जीव जसके पास खुशी से जाए, वह उसी के पास सुर क्षत
है।
4. नणय के साथ कारण भी बताता। दे वदत्त से कहता — “तुम्हारा नशाना ठ क था, पर नशाना लगाने का हक़ कसी क जान
पर नह बनता। हंस जी वत प्राणी है, कोई वस्तु नह ।”
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय
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यह तरीका सबसे अच्छा क्य है: झगड़ा दो लोग का था, पर जान तीसरे क थी। जब न्याय करना हो तो सबसे
पहले उसक सुननी चा हए जस पर बीत रही है। मंत्री ने न कसी राजकुमार का पक्ष लया, न रोबeदेm
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खा — इसी लए
coसभा ने जय-जयकार क और महाराज क आँख भर आईं।
उनके नणय .पर
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aयह भी सो चए: य द हंस दे वदत्त के पास चला जाता तो? तब भी म यह शत रखता क पहले उसका घाव पूरा भरे।
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घायल जीव को उसी के पास रहने दे ना चा हए जो उसका इलाज कर सकता हो।
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इस नाटक म सभी पात्र पुरुष ह। य द कन्ह दो पात्र को म हला पात्र के रूप म प्रस्तुत करना हो तो आप कन्ह
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बदलकर प्रस्तुत करना चाहगे और क्य ?
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यह बात सही है — नाटक के छह पात्र पुरुष ह: सद्धाथ, शुद्धोदन (महाराज), सखा, दे वदत्त, मंत्री और प्र तहारी। इनम से कन्ह दो
a को म हला पात्र बनाया जा सकता है।
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नमूना उत्तर: म सखा और मंत्री को म हला पात्र के रूप म प्रस्तुत करना चा ँगा/चा ँगी।
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पात्र नया रूप क्य
l a se कहानी पर असर
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सखा सखी — सखा का काम है साथ दे ना, प्रकृ त क बात करना, हंस को मरहम कहानी बलकुल नह बदलेगी। बस
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िस ाथ की लगाना और सही समय पर सुझाव दे ना — “हम महाराज के पास संवाद बदलगे — “अभी जाता ँ”
िम त्र चलना चा हए।” यह काम कोई भी कर सकता है। मत्रता लड़का-
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क जगह “अभी जाती ँ”।
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लड़क दे खकर नह होती।
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a s e त्री मंत्री ने वह उपाय नकाला जससे न्याय हुआ। समझदारी और सूझबूझ नणय वैसा ही रहेगा — हंस को
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त्र
— महाराज पर कसी एक का हक़ नह है। मंच पर एक स्त्री को न्याय करते दे खना आसन पर बैठाकर दोन से
की मंत्री ब को यह भी सखाएगा क नणय लेने क जगह पर स्त्रयाँ भी बुलवाना।
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होती ह।
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दूसरा भी सोचा जा सकता है: महाराज शुद्धोदन क जगह महारानी और प्र तहारी क जगह प्र तहा रणी। पर सद्धाथ और
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दे वदत्त को न बदलना ही ठ क है, क्य क ये दोन नाम इ तहास से जुड़े ह — सद्धाथ आगे चलकर गौतम बुद्ध कहलाए।
मंचन के समय ध्यान र खए: पात्र बदलने पर तीन चीज़ बदलनी पड़गी — (1) संबोधन, जैसे “कुमार” क जगह
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“कुमारी” या “सखी”; (2) क्रया के रूप, जैसे “कहता ँ” क जगह “कहती ँ”; (3) वेशभूषा। बाक संवाद और
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कहानी ज्य क त्य रहेगी।
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सो चए और ल खए — पृष्ठ 110
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पाठ क समझ जाँचने वाले प्रश्न तथा पूरी कहानी को प्रवाह चाट (flow chart) के रूप म लखने का अभ्यास
सो चए और ल खए ले ख न
प्र.1 हंस को घायल दे खकर सद्धाथ ने क्या कया?
हंस को घायल दे खकर सद्धाथ ने उसे बचाया। उन्ह ने उसे गोद म लेकर तीर नकाला, मरहम लगवाया और अंत तक उसक रक्षा
क । उन्ह ने जो-जो कया, वह क्रम से यह है —
1. दौड़कर आगे बढ़े और उसे सँभाला। — “ सद्धाथ आगे बढ़ते ह। हंस उनक गोद म आ गरता है… कुमार करुणा से भरकर
उसे सँभालते ह।”
2. दुख और गुस्सा प्रकट कया। — “ कस नदयी ने इस भोले-भाले पक्षी को घायल कया है? इसने कसी का क्या बगाड़ा
था?”
3. शरीर म लगा तीर नकाला। — “(तीर नकालते हुए)…” तीर नकलते ही हंस को चैन मला और वह अनुराग से उनक गोद
म चपक गया। अनुराग यानी प्रेम।
4. स्नेह से हाथ फेरा, ता क पक्षी का डर कम हो — “कुमार स्नेह से उसके शरीर पर हाथ फेरते ह।”
5. दवा मँगवाई। — “तुम दौड़कर राजवैद्य से मरहम तो ले आओ।” सखा मरहम लाया और हंस को लगाया। इसके बाद हंस शांत
हो गया।
6. दे वदत्त को हंस दे ने से मना कर दया। — “तुमने मारा है परंतु मने बचाया है… इस लए यह हंस मेरा है। म तुम्ह नह दूँ गा।”
7. न्याय के लए महाराज क सभा म गए और वहाँ भी हंस को गोद म लए रहे — “राजकुमार सद्धाथ हंस को गोद म लए वहाँ
प्रवेश करते ह।”
8. आसन पर बैठाते समय उसे ढाढ़स दया। — “डरो नह मत्र! तुम्ह कोई कुछ नह कहेगा। म यह ँ।”
इससे सद्धाथ के बारे म क्या पता चलता है: उनके मन म करुणा है — यानी दूसरे का दुख दे खकर उठने वाला
दद। वे केवल दुख जताकर रुके नह , काम भी कया। और उन्ह ने पक्षी को “ मत्र” कहकर बुलाया, वस्तु क तरह
नह समझा। यही आगे चलकर गौतम बुद्ध बनने वाले राजकुमार क पहचान है।
ध्यान दे ने क बात: सद्धाथ ने सखा से यह भी कहा — “कोई भी व्य क्त, जसके पास हृदय है, इन नद ष प क्षय
को नह मार सकेगा।” यानी दया कोई वशेष गुण नह , हर उस व्य क्त म होनी चा हए जसके पास हृदय है।
प्र.2 अंततः हंस सद्धाथ को ही क्य मला?
हंस सद्धाथ को इस लए मला क्य क हंस ने स्वयं सद्धाथ को चुना। मंत्री ने उसे आसन पर बैठाकर दोन राजकुमार से बुलवाया।
दे वदत्त के बुलाने पर वह डरकर चीखा और सद्धाथ के बुलाने पर उड़कर उनक गोद म आ चपका।
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मंत्री का िनणय —
“दे िखए महाराज! पक्षी ने अपने आप इस पश्न का िनणय कर िदया है।
वह राजकु मार िस ाथ के पास रहना चाहता है। वह उ ही ं को िमले।” न्
महाराज का आदे श —
“मंित्रवर! हमें त म्ु हारा िनणय स्वीकार है। हम आ ा दे ते है ं िक
हंस राजकु मार िस ाथ के पास रहे।”
अब दे खए क इस फ़ैसले से पहले दोन पक्ष ने क्या-क्या कहा था —
बात दे वदत्त का पक्ष सद्धाथ का पक्ष
दावे का “मने इसे मारा है। इसके शरीर म मेरा तीर लगा है।” “तुम ने मारा है परंत ु मैंने बचाया है। ”
आधार
बड़ा कौन “मने पहले हंस को मारा है इस लए वह मेरा है।” “बचाने वाला मारने वाले से बड़ ा होता है। ”
वीरता का महाराज ने कहा — “वीर अपना आखेट नह छोड़ “वीर शरणागत को भी नही ं छोड़ सकता। हंस मेर ी शरण में आ
िनयम सकता।” चुक ा है। ”
पक्षी का बुलाने पर पक्षी “डरकर फड़फड़ाता और चीखता है।” बुल ाते ही “हंस एकदम उड़ कर उनकी गोद में आ िचपकता है। ”
व्यवहार
इस लए तीन कारण बनते ह —
1. हंस क अपनी पसंद। जसने डर दया उसके पास वह नह गया; जसने जान बचाई उसी के पास गया।
2. बचाना मारने से बड़ा है। दे वदत्त ने केवल नशाना साधा था; सद्धाथ ने तीर नकाला, मरहम लगवाया और जान बचाई।
3. शरणागत क रक्षा। हंस अपनी जान बचाने के लए सद्धाथ क गोद म गरा था। जो शरण म आ जाए, उसे लौटाया नह
जाता।
मंत्री का उपाय इतना अच्छा क्य था: दोन राजकुमार थे, दोन के पास तक थे। कसी एक क बात मान लेने पर
दूसरे को लगता क पक्षपात हुआ। इस लए मंत्री ने फ़ैसला उस पर छोड़ दया जसक जान का सवाल था — हंस
पर। इसी को स ा न्याय कहते ह।
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प्र.3 कहानी को अपने ढं ग से प्रवाह चाट के रूप म ल खए— (पुस्तक म आठ खाने बने ह; पहले दो भरे हुए ह —
“ सद्धाथ व उसके सखा का प्रकृ त को नहारना।” और “तीर लगे पक्षी का घायल होकर गरना।” शेष छह खाने
भरने ह।)
प्रवाह चाट यानी वह चत्र जसम घटनाएँ क्रम से एक खाने से दूसरे खाने क ओर तीर बनाकर लखी जाती ह। पुस्तक म आठ खाने
ह — बाईं ओर चार, दाईं ओर चार। पहले दो खाने छपे हुए ह। बाक छह इस तरह भ रए —
खाना क्या लख यह कस पृष्ठ क बात
है
1 (छपा सद्धाथ व उसके सखा का प्रकृ त को नहारना। पृष्ठ 99–100
हुआ )
2 (छपा तीर लगे पक्षी का घायल होकर गरना। पृष्ठ 101
हुआ )
3 िस ाथ का हंस को गोद में ले क र तीर िनकालना और सखा से मरहम मँगवाना। पृष्ठ 101–102
4 दे वद त्त का आना और यह कहकर हंस माँगना िक तीर उसका है। पृष्ठ 102–103
5 िस ाथ का मना करना और दोनों में झगड़ ा बढ़ ना। पृष्ठ 103–104
6 सखा के सुझाव पर सबका महाराज शु ोदन की सभा में जाना और दोनों पक्षों का सुना पृष्ठ 104–107
जाना।
7 मंत्री का उपाय — हंस को आसन पर बैठाकर दोनों राजकु मारों से बारी-बारी बुल वाना। पृष्ठ 107–108
8 हंस का िस ाथ की गोद में जा िचपकना और महाराज का आदे श — हंस िस ाथ के पास पृष्ठ 108–109
रहे।
यही बात तीर के चह्न के साथ इस तरह दखती है —
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1. िस ाथ व सखा का 5. िस ाथ का मना करना,
पकृित को िनहारना। झगड़ ा बढ़ ना।
2. तीर लगे पक्षी का 6. महाराज की सभा मे ं
घायल होकर िगरना। जाना, दोनों पक्षों
का सुना जाना।
3. हंस को गोद मे ं लेकर
तीर िनकालना और 7. मंत्री का उपाय — हंस
मरहम मँगवाना। को आसन पर बैठाकर
दोनों से बुलवाना।
4. देवदत्त का आकर
हंस माँगना — “तीर 8. हंस का िस ाथ की
मेरा है।” गोद मे ं जाना; हंस
िस ाथ को िमला।
बाईं ओर के चार खाने ऊपर से नीचे, िफर दाईं ओर के चार खाने ऊपर से नीचे।
‘न्याय’ नाटक क कहानी का प्रवाह चाट — आठ खान म पूरी घटना- ंखला।
प्रवाह चाट बनाने का तरीका: (1) पहले कहानी क मुख्य घटनाएँ अलग काग़ज़ पर लख ली जए। (2) उन्ह समय
के क्रम म जमाइए — जो पहले हुआ, वह पहले। (3) हर खाने म केवल एक घटना ल खए, एक ही वाक्य म। (4)
दो खान के बीच तीर बनाइए, जो यह दखाता है क “इसके बाद यह हुआ”।
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय
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अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 111
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नाटक क घटनाओं से आगे बढ़कर कल्पना करने वाले चार प्रश्न — साथी हंस क बातचीत, हंस का चुनाव, महाराज क बात और सद्धाथ का
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सपना
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अनु मान और कल्पना कल्पना
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प्र.1 जस समय आकाश म हंस को तीर लगा उस समय उसके अन्य सा थय ने आपस म क्या बात क ह गी?
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उत्तर a
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यह कल्पना का प्रश्न है, इस लए उत्तर आपका अपना होगा। पर कल्पना भी पाठ के अनुसार होनी चा हए। पाठ म उस समय के बारे
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म तीन बात लखी ह —
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हंस “ कस तेजी से धरती पर गर रहा है”।
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se बाक पक्षी कैसे प्राण लेकर भाग रहे ह!” — प्राण लेकर भागना यानी जान बचाकर भागना।
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यानी बाक हंस डर गए थे और तेज़ी से उड़ गए थे। उनक बातचीत ऐसी रही होगी —
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नमूना उत्तर (क ल्पत संवाद):
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कौन क्या कहा होगा
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“भागो! नीचे से कु छ आया है… हमारा साथी िगर गया!”
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पहला हंस
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दू स रा हंस “मैंने उसकी चीख सुनी। उसके पंख में कु छ चुभा है। ऊपर उठो, और ऊपर !”
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s e m हंस (बूढ़ा) “यह तीर है, बच्चो। नीचे मनुष्य है।
ं हम आकाश में उड़ रहे थे, िकसी का कु छ नही ं िबगाड़ ा था… िफर यह क्यों?”
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तीसरा
agl पहला हंस “क्या हम लौटकर उसे दे खें? वह अके ला रह गया है। ”
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“अभी नही ं। लौटे तो हम सब मारे जाएँग े। पर हम इस उ ान के ऊपर चक्कर लगाते रहेगं े और दे खते रहेगं े। ”
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बूढ़ा हंस
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एक छोटा हंस
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“दे खो! नीचे एक लड़ के ने उसे उठा िलया है। वह उसे मार नही ं रहा… वह तो उसका तीर िनकाल रहा है!”
दू स रा हंस
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“तब वह बच जाएगा। कु छ मनु य मारते है ं और कु छ बचाते भी है।
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m पक्षी डरकर भागे, इस लए
ऐसी कल्पना ही ठ क क्य है: क्य क यह पाठ से मेल खाती है। पाठ कहता है कeबाक
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gl भी था जो बचा रहा था — इस लए
cसंoवाद म डर होना चा हए। और पाठ यह भी दखाता है क नीचे एक मनुष्यaऐसा
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लखने का तरीका: संवाद लखते समय बाईं ओर बोलने वाले का नाम, फर छोट रेखा (–), फर उसक बात —
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ठ क वैसे ही जैसे इस पाठ म “ सद्धाथ – …” और “सखा – …” लखा है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 हंस दे वदत्त के पास उड़कर क्य नह गया?
हंस दे वदत्त के पास इस लए नह गया क्य क दे वदत्त ने ही उसे तीर मारा था और वह उससे डरता था। सभा म जब दे वदत्त ने उसे
पुचकारकर बुलाया, तब पाठ म लखा है —
दे वद त्त – (पुच कारकर) आओ … मेरे पास आओ।
(पक्षी डरकर फड़ फड़ ाता और चीखता है।)
मंत्री – “कु मार दे वदत्त! हंस त म्ु हारे पास नही ं आना चाहता।”
पुचकारना यानी प्यार से आवाज़ करके बुलाना। दे वदत्त ने शब्द तो प्यार के कहे, पर हंस को उसके शब्द नह , उसका कया हुआ
याद था।
इसके तीन कारण ह —
1. डर। उसी व्य क्त ने उसे तीर मारा था। पशु-पक्षी उसे नह भूलते जसने उन्ह चोट पहुँचाई हो। पहले भी, जब सद्धाथ ने हंस को
आगे बढ़ाया था, तब “वह सहसा दे वदत्त को दे खकर चीखता है और सद्धाथ क गोद म दुबक जाता है।”
2. प्यार का न होना। दे वदत्त के मन म हंस के लए प्रेम नह था। उसके लए हंस उसक जीत क नशानी था — “मेरा लक्ष्य अब
पूरी तरह सध गया है।” पशु-पक्षी मन का भाव पहचान लेते ह।
3. दूसरी ओर भरोसा। सद्धाथ ने उसका तीर नकाला, मरहम लगवाया और कहा — “डरो नह मत्र! तुम्ह कोई कुछ नह कहेगा।
म यह ँ।” इस लए सद्धाथ के बुलाते ही “हंस एकदम उड़कर उनक गोद म आ चपकता है।”
इससे नाटक क सबसे बड़ी बात नकलती है: डर से कोई पास नह आता, प्रेम से आता है। दे वदत्त के पास तीर
था, सद्धाथ के पास मरहम। हंस ने मरहम वाले को चुना।
प्र.3 राजा शुद्धोदन ने नणय के बाद सद्धाथ से क्या कहा होगा?
यह भी कल्पना का प्रश्न है। पर पाठ से संकेत मलता है क महाराज उस समय क्या महसूस कर रहे थे —
“महाराज क आँख म स्नेहपू रत गव है।” — यानी प्यार से भरा हुआ गव। उन्ह अपने बेटे पर गव हो रहा था।
“महाराज के नेत्र सजल हो जाते ह।” — सजल यानी आँसुओं से भरे हुए।
“महाराज और मंत्री हष से मुस्कुराते ह।”
इस लए उनक बात प्रेम, गव और आशीवाद से भरी रही होगी।
नमूना उत्तर:
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
“आओ िस ाथ , मेरे पास आओ।
आज त म
ु ने म झ त्र
ु े एक बात िसखा दी है, पु ।
मै ं समझता था िक वीरता तीर चलाने में है।
च्
ु ने िदखा िदया िक स ची वीरता जान बचाने में है।
तम
ु ने कहा — बचाने वाला मारने वाले से बड़ा होता है।
तम
यह बात मै ं जीवन भर याद रखूँगा।
इस हंस को अपने पास रखो। इसका घाव पूरा भरने तक इसकी सेवा करो।
त्त से बैर मत रखना — वह अभी छोटा है, वह भी सीख जाएगा।
और दे वद
िजस िदन त मु राजा बनोगे, किपलवस्त ु का न्याय ऐसा ही होगा।”
यह उत्तर पाठ के अनुसार क्य है: महाराज ने पहले सद्धाथ से यह भी कहा था — “वीर अपना आखेट नह छोड़
सकता।” यानी शुरू म वे पुरानी रीत क ओर थे। पर सद्धाथ के उत्तर के बाद उनक आँख म गव आया। इस लए
उनक बात म यह मान लेना होना चा हए क बेटे ने उन्ह कुछ नया सखाया।
अपना उत्तर लखते समय: तीन बात र खए — (1) महाराज क खुशी, (2) सद्धाथ क कस बात पर गव, (3)
आगे के लए कोई आशीवाद या सीख। यही तीन बात आपके उत्तर को पूरा बना दगी।
प्र.4 एक रात सद्धाथ मीठ न द सो रहे ह। उनके सपने म हंस आता है और सद्धाथ के साथ न्याय वाले दन का अपना
अनुभव सुनाता है। क्या आप कल्पना कर सकते ह क हंस ने सद्धाथ से क्या-क्या बात क ह गी?
यह प्रश्न बड़ा सुंदर है — इसम हंस बोलता है। सो चए क उस दन हंस पर क्या-क्या बीता था: आकाश म उड़ना, तीर लगना, गरना,
तीर नकाला जाना, मरहम, फर सभा, फर आसन पर अकेले बैठना, दो आवाज़ और अंत म गोद।
नमूना उत्तर (सपने का संवाद):
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कौन बात
हंस “कु मार , सो रहे हो? मैं हू ँ — वही हंस । ”
िस ाथ “िम त्र ! तुम बोल भी ले ते हो?”
हंस “सपने में सब बोल ले ते है।
ं मुझे उस िदन की बात कहनी है। उस िदन मैं अपने झुंड के साथ उड़ रहा था। नीचे हरा-भरा उ ान था।
मुझे लगा जैसे मैं हवा में तैर रहा हू।
ँ तभी कु छ चुभा और मेर ा एक पंख काम करना बंद कर गया। ”
िस ाथ “तुम मेर ी गोद में आ िगरे थे। ”
हंस “हाँ। मैं िगर रहा था और सोच रहा था िक अब अंत है। पर मैं िजस गोद में िगरा, वह गरम थी और काँप रही थी — डर से नही,ं दया
से । जब तुम ने तीर खी ंचा तो बहुत दद हुआ, पर उसके बाद साँस लौट आई। ”
िस ाथ “और सभा में? वहाँ तुम बहुत डरे हुए थे। ”
हंस “बहुत। इतने बड़ े-बड़ े लोग , ऊँचा आसन, और मैं अके ला। पर तुम ने कहा था — ‘डरो नही ं िम त्र ! मैं यही ं हू।
ँ ’ बस उसी वाक्य के
सहारे मैं बैठा रहा। ”
िस ाथ “िफर दे वद त्त ने बुल ाया। ”
हंस “उसकी आवाज़ मीठी थी, पर उसकी गंध वही थी जो तीर के साथ आई थी। मेर ा शरीर अपने आप चीख पड़ ा। और जब तुम ने बुल ाया,
तो मुझे सोचना ही नही ं पड़ ा — पंख अपने आप तुम्हारी ओर उड़ चले । ”
िस ाथ “मुझे उस िदन बहुत डर था िक तुम मुझसे छीन िलए जाओगे। ”
हंस “कु मार , एक बात याद रखना — जो जान बचाता है, उसे कोई पहचान-पत्र नही ं चािहए। हम जीव जान ले ते है ं िक कौन अपना है। मेर ा
घाव भर गया है। अब मैं अपने झुंड के पास लौट जाऊँगा, पर हर साल इसी उ ान के ऊपर से उड़ ू ँगा। ”
िस ाथ “तो मैं हर शाम आकाश की ओर दे खा क ँ गा, िम त्र । ”
अपना संवाद लखते समय: कम-से-कम चार बात र खए — (1) उड़ते समय क्या हुआ, (2) गरने और बचाए
जाने का अनुभव, (3) सभा म कैसा डर लगा, (4) दोन के बुलाने पर मन ने क्या कया। हर बात दो-तीन छोटे वाक्य
म। अंत म हंस का धन्यवाद ज़रूर ल खए।
भाषा क बात — पृष्ठ 111 और 112
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अनुस्वार (◌ं) और चंद्र बदु (◌ँ) वाले शब्द, रेखां कत शब्द के वपरीत अथ वाले शब्द से रक्त ान भरना, तथा चत्र और शब्द को जोड़कर
मुहावरे व लोको क्तयाँ बनाना
भाषा क बात व्याकरण
प्र.1 पाठ म हंस और हँस शब्द आए ह। हंस म अनुस्वार ( ◌ं ) का प्रयोग हुआ है और हँस म चंद्र बदु ( ँ ) का प्रयोग हुआ
है। अब आप इस पाठ म आए अनुस्वार एवं चंद्र बदु वाले शब्द को खो जए और अपनी लेखन-पु स्तका म
ल खए। उनका वाक्य म भी प्रयोग क जए।
पहले दोन चह्न पहचान ली जए।
अनुस्वार ( ◌ं ) — केवल एक बदु, अक्षर के ऊपर। इसे बोलते समय नाक के साथ-साथ एक हल्का व्यंजन भी सुनाई दे ता है,
जैसे हंस म ‘न्’ जैसा।
चंद्र बदु ( ◌ँ ) — आधा चाँद और उसके ऊपर बदु। इसे बोलते समय आवाज़ केवल नाक से नकलती है, कोई अलग व्यंजन
नह सुनाई दे ता, जैसे हँस म।
हंस = पक्षी (जो पानी पर तै रता है) | हँस = हँसने वाली ि या
“हंस उनकी गोद में िचपक जाता है।” बनाम “िस ाथ – (हँसकर) सच िमत्र!”
पाठ म आए अनुस्वार ( ◌ं ) वाले शब्द —
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय
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शब्द पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
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हंस
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“हंस उनक गोद म आ गरता है।”
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तालाब में एक सफ़े द हंस तैर रहा था।
se m “रंगमंच पर राज-उद्यान का एक दृश्य।”
g l a हमारा नाटक िव ालय के रंगमंच पर हुआ।
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रंग मंच
मंच “मंच पर ला लमा।” मुख्य अितिथ मंच पर आकर बैठ गए।
com
संध् याकाल “संध्याकाल। मंच पर ला लमा।”
e m . संध् याकाल में मंिदर की घंिटयाँ बजने लगी ं। ag
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शांित
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“कैसा सुहावना समय है! कैसी शां त है!” पुस्तकालय में पूर ी शांित रहती है।
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सुंद र “ऊपर तो दे खो, कैसे सुंदर पक्षी ह।” दादी ने मेर ी कॉपी पर सुंद र िचत्र बनाया।
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पसन्न “राजकुमार सद्धाथ प्रसन्न मन एक वेद पर बैठे ह।” पिरणाम सुनकर िपता जी बह ुत पस न्न हुए ।
m . मैंने बुल ाया, परंaत ु वह नही ं आया।
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परंत ु “तुमने मारा है परंतु मने बचाया है।”
aglमंत्री “मंत्री जी! समस्या ज टल है।” मंत्री ने गाँव में नया िव ालय खुल वाया।
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शांत “(शांत स्वर) ठ क है दे वदत्त, म ववश ँ।” शोर सुनकर िशक्षक ने क क्षा को शांत कराया।
se m
g l a यह समाचार सुनकर सब स्तंिभत रह गए।
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स्तंिभत “सब लोग स्तं भत होकर एक-दूसरे को दे खते ह।”
कं ठ “ सद्धाथ के कंठ से स्नेहपू रत शब्द नकलते ही…” गाते-गाते उसका कं ठ सूख गया।
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पाठ म आए चंद्र बदु ( ◌ँ ) वाले शब्द —
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शब्द पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
हँस कर “(हँसकर) सच मत्र! तुम तो बहुत बात जानते हो।” भाई ने हँस कर मेर ी बात टाल दी।
सँभालते “कुमार करुणा से भरकर उसे सँभालते ह।” िगरते हुए घड़ े को माँ ने सँभाल िलया।
काँपता “(काँपता-सा) कुमार…” ठं ड से मेर ा हाथ काँपने लगा।
साँस “(साँस ख चकर) नह कुमार! म इसको नह मार सकूँगा।” दौड़ ने के बाद मेर ी साँस तेज़ चलने
लगी।
आँखें “दे खो तो, इसक आँख कतनी भोली ह!” नी ंद में उसकी आँखें बंद हो गईं।
मुँह “दे वदत्त मुँह लटकाए पीछे हटते ह।” खाना खाने से पहले मुँह-हाथ धो लो।
रँभाने “गाय के बछड़े-ब छय के रँभाने के स्वर उठते ह।” शाम को गाय के रँभाने की आवाज़ आई।
दू ँग ा “म यह हंस तुमको कभी नह दूँ गा।” मैं तुम्हे ं अपनी नई पेंिसल दू ँगा।
पूछूँग ा “म गुरुजी से पूछूँगा, योगी कसे कहते ह…” यह सवाल मैं दीदी से पूछूँगा।
सकूँ गा “म इसको नह मार सकूँगा।” इतना भारी बस्ता मैं नही ं उठा सकूँ गा।
लौटाऊँगा “हंस मेरी शरण म आ चुका है। म उसे नह लौटाऊँगा।” तुम्हारी िकताब मैं कल लौटाऊँगा।
कहाँ / यहाँ / “कुमार अब कहाँ ह?”, “हंस यहाँ आसन पर बैठा है।”, “वहाँ प्रवेश करते तुम कहाँ थे? मैं यहाँ हू,ँ वहाँ मत ढू ँढ़ो।
वहाँ ह।”
चह्न पहचानने का आसान तरीका: शब्द को ज़ोर से बो लए। य द नाक क आवाज़ के साथ कोई और अक्षर भी
सुनाई दे (न्, म्, ङ् जैसा) तो अनुस्वार लगेगा — जैसे हंस, मंच, कंठ। य द केवल नाक क गूँज सुनाई दे और कोई
अलग अक्षर न आए तो चंद्र बदु लगेगा — जैसे हँस, साँस, आँख।
सावधानी: चह्न बदलने से अथ भी बदल जाता है — हंस (पक्षी) और हँस (हँसना), अंगना (आँगन/स्त्री) और
अँगना। इस लए लखते समय बदु और चंद्र बदु का ध्यान र खए।
प्र.2 (क) रेखां कत शब्द के वपरीत अथ वाले शब्द से रक्त ान क पू त क जए — (क) सूय का उदय पूव दशा
म और ____ प म दशा म होता है।
रक्त ान म आएगा — अस्त।
सूय का उदय पूव िदशा में और अस्त पिश्चम िदशा में होता है।
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उदय यानी नकलना, ऊपर आना। इसका उल्टा है अस्त — यानी डू बना, छप जाना। सूरज सुबह पूरब म उदय होता है और शाम
को प म म अस्त हो जाता है।
यही बात नाटक म सखा ने कही थी —
“दे खो न , सूरज रोज सवेरे पूरब से िनकलता है और शाम को पिश्चम में िछप जाता है।”
जोड़ी याद र खए: उदय × अस्त, पूव × प म, सवेरा × शाम — इस एक वाक्य म वपरीत शब्द क तीन जो ड़याँ
छपी ह।
प्र.2 (ख) (ख) उसने मारा है परंतु मने ____ है।
रक्त ान म आएगा — बचाया।
उसने मारा है परंत ु मैन
ं े बचाया है।
मारना यानी चोट पहुँचाना या जान लेना। इसका उल्टा है बचाना — यानी जान क रक्षा करना।
यह वाक्य नाटक से ही लया गया है। पृष्ठ 103 पर सद्धाथ ने कहा था —
ं े बचाया है… इसिलए यह हंस मेरा है। मै ं त म्ु हे ं नही ं दू ँगा।”
“त मु ने मारा है परंत ु मैन
यही पूरे नाटक क जान है: सद्धाथ ने आगे कहा — “बचाने वाला मारने वाले से बड़ा होता है।” इसी वाक्य पर
सभा म हष-ध्व न हुई थी, यानी लोग ने खुश होकर आवाज़ क थी।
प्र.2 (ग) (ग) इस नद ष पक्षी को मारने वाला ____ है।
रक्त ान म आएगा — दोषी।
इस िनद ष पक्षी को मारने वाला दोषी है।
नद ष यानी जसका कोई दोष न हो, जसने कुछ गलत न कया हो। इसका उल्टा है दोषी — यानी जससे गलती हुई हो, जो
अपराध का ज़म्मेदार हो। (‘अपराधी’ भी लखा जा सकता है, पर दोषी ही सीधा उल्टा शब्द है, क्य क दोन म ‘दोष’ शब्द है।)
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ध्यान द जए — नर् जोड़ दे ने से शब्द का अथ उलट जाता है: दोष → नर्दोष, बल → नर्बल, भय → नर्भय, धन → नर्धन।
यह वाक्य भी पाठ से जुड़ा है। सद्धाथ ने दे वदत्त से कहा था —
“त मु ने एक िनद ष पक्षी को मारने का पयास िकया है। इसका पमाण यह हंस है।”
प्र.2 (घ) (घ) इस ज टल समस्या का हल बहुत ____ है।
रक्त ान म आएगा — सरल (या आसान)।
इस जिटल समस्या का हल बहुत सरल है।
ज टल यानी उलझा हुआ, क ठन। इसका उल्टा है सरल — यानी आसान, सीधा।
यह वाक्य सीधे नाटक के दूसरे दृश्य से बना है। वहाँ दोन शब्द आमने-सामने आए ह —
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महाराज – “मं ी जी! सम या जिटल है। आप कु छ रा ता सुझ ा सकते है?
ं ”
त्र स्
मं ी – “महाराज! सम या बड़ी आसान है। म झ
ु े आ ा दे ं तो मै ं अभी इसका िनणय िकए दे त ा हूँ।”
दोन शब्द क्य चलगे: ‘सरल’ और ‘आसान’ — दोन का अथ एक ही है। पुस्तक के इसी पाठ म मंत्री ने ‘आसान’
शब्द बोला है, इस लए वह भी ठ क है। परीक्षा म कोई एक लख दे ना काफ़ है।
इस पाठ से वपरीत शब्द क और जो ड़याँ: मारना × बचाना, नद ष × दोषी, ज टल × सरल, उदय × अस्त, हष
× शोक, शांत × क्रो धत, प्रश्न × उत्तर, आगे × पीछे ।
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प्र.3 (क) नीचे दए गए चत्र और शब्द को जोड़कर मुहावरे/लोको क्त बनाइए —
(क ) के बहाना।
पृष्ठ 112 पर द गई चत्र पहेली (क)।
चत्र म मगरमच्छ है और उसके आगे एक आँख है जससे आँसू बह रहा है। दोन को जोड़ने पर मुहावरा बनता है —
मगरमच्छ के आँस ू बहाना
अथ — झूठा दुख दखाना। यानी दुख हो नह , पर ऊपर से रोने का नाटक करना।
वाक्य — पौधा उखाड़ने के बाद वह मगरमच्छ के आँसू बहाने लगा, जब क तोड़ा उसी ने था।
यह मुहावरा बना कैसे: कहते ह क मगरमच्छ जब शकार खाता है तब उसक आँख से पानी बहता है। दुख से
नह , अपने आप। इसी से यह कहावत चली क जो सचमुच दुखी न हो और फर भी रोने का दखावा करे, वह
‘मगरमच्छ के आँसू’ बहा रहा है।
प्र.3 (ख) (ख) [आँख] मचौनी खेलना।
चत्र म एक आँख है। शब्द के साथ जोड़ने पर बनता है —
आँख-िमचौनी खेलना
अथ — कभी सामने आना, कभी छप जाना; सामने आने से बचते रहना।
वाक्य — सावन के महीने म सूरज बादल से दन भर आँख- मचौनी खेलता रहा।
यह भी जा नए: ‘आँख- मचौनी’ ब का एक खेल भी है, जसम एक ब ा आँख बंद करता है और बाक छप
जाते ह। इसी खेल से यह मुहावरा बना।
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(ग) [१] और [१] ग्यारह।
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चत्रgमlलाल रंग के दो १ (एक) के अंक बने ह और बीच म ‘और’ लखा है। दोन ‘एक’ पास-पास आकर ११ (ग्यारह) बन जाते ह।
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इससे लोको क्त बनती है —
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एक और एक ग्यारह (होते है)ं
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अथ — मलकर काम करने से श क्त कई गुना बढ़ जाती है। अकेले जतना हो सकता है, साथ मलकर उससे कह ज़्यादा होता है।
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वाक्य — दोन भाइय ने साथ मलकर खेत सँभाला और सचमुच एक और एक ग्यारह हो गए।
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.cखेल सम झए: जोड़ म 1 + 1 = 2 होता है। पर जब दोन ‘1’ अगल-बगल
a gरख दए जाएँ तो ‘11’ बन
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se है। यही चत्र का मज़ा है — दो का जोड़ नह , दो का साथ।
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(घ) अक्ल बड़ी या [भस]।
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चत्र म भस है। शब्द के साथ जोड़ने पर लोको क्त बनती है —
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agl अथ — शरीर क ताकत से बु द्ध बड़ी होती है। काम ज़ोर से नह , समझ से बनता है।
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वाक्य — पत्थर हटाने के लए सबने ज़ोर लगाया, पर मोहन ने लकड़ी लगाकर उसे सरका दया — सच है, अक्ल बड़ी या भस!
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g l a: देsवदत्त के पास धनुष-बाण और ज़ोर था, पर झगड़ा उससे नह सुलझा। मंत्री
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इस नाटक से इसका सीधा नाता है
ने केवल एक बु द्ध से भरा उपाय नकाला — हंस को खुद चुनने दो — और बात हल हो गई।
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. co(ङ)m (ङ) [बंदर] क्या जाने [अदरक] का स्वाद! a g l
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चत्र म एक ओर बंदर है और दूसरी ओर अदरक। लोको क्त बनती है —
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बंद र क्या जाने अदरक का स्gवाद
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अथ — जसे कसी चीज़ क परख या समझ ही न हो, वह उसका मोल नह जान सकता।
वाक्य — उसने वीणा को कोने म डाल दया — बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद!
ध्यान द जए: यह कहावत कसी को नीचा दखाने के लए नह बोलनी चा हए। इसका असली मतलब यह है क हर
चीज़ क क़दर वही कर पाता है जो उसे समझता हो।
प्र.3 (च) (च) [९] [२] [११] होना।
चत्र म चार अंक बने ह — नीले रंग म ९ और २, फर लाल रंग म दो १, यानी ११। इन्ह प ढ़ए — नौ, दो, ग्यारह। मुहावरा बनता है
—
नौ दो ग्यारह होना
अथ — चुपचाप भाग जाना, फ़ौरन गायब हो जाना।
वाक्य — शोर सुनते ही खेत से बंदर नौ दो ग्यारह हो गए।
रंग से पढ़ने म आसानी: दो अंक नीले ह — ९ और २। दो अंक लाल ह — १ और १, जो मलकर ११ बनते ह।
इसी लए यह “नौ – दो – ग्यारह” पढ़ा जाता है।
पाठ से जो ड़ए: तीर लगते ही “बाक पक्षी कैसे प्राण लेकर भाग रहे ह!” — यानी बाक हंस नौ दो ग्यारह हो गए।
प्र.3 (छ) (छ) [लाल छ टा] [पीला छ टा] होना।
चत्र म रंग के दो छ टे ह — एक लाल और एक पीला। मुहावरा बनता है —
लाल-पीला होना
अथ — बहुत गुस्सा करना। गुस्से म चेहरा तमतमा जाना।
वाक्य — अपनी कॉपी फट दे खकर वह लाल-पीला हो गया।
यह नाटक म कहाँ दखता है: दे वदत्त बार-बार गुस्से म आता है — “(क्रोध से) म अभी महाराज के पास जाता ँ”
और “( तल मलाकर) कुमार…”। यही लाल-पीला होना है। तल मलाना यानी गुस्से और खीझ से बेचैन हो उठना।
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प्र.3 (ज) (ज) [दाँत] तले [उँगली] दबाना।
चत्र म एक ओर खुले हुए दाँत ह और दूसरी ओर एक उँगली। मुहावरा बनता है —
दाँत ों तले उँ गली दबाना
अथ — बहुत हैरान रह जाना, अचरज से चुप रह जाना।
वाक्य — छोट -सी ब ी को इतनी तेज़ गनती सुनाते दे ख सबने दाँत तले उँ गली दबा ली।
पाठ से मलाइए: जब हंस अपने आप उड़कर सद्धाथ क गोद म जा चपका, तब सभा का यही हाल था — “सब
लोग स्तं भत होकर एक-दूसरे को दे खते ह।” स्तं भत होना और दाँत तले उँ गली दबाना — दोन का भाव एक ही है।
प्र.3 (झ) (झ) [पेट] म [चूहे] कूदना।
चत्र म एक ओर पेट दखाया गया है (तीर उसी क ओर है) और दूसरी ओर दौड़ते हुए चूहे। मुहावरा बनता है —
पेट में चूहे कू दना
अथ — बहुत ज़ोर क भूख लगना।
वाक्य — खेल के मैदान से लौटते-लौटते मेरे पेट म चूहे कूदने लगे।
इसी अथ का दूसरा रूप: “पेट म चूहे दौड़ना” भी बोला जाता है। दोन ठ क ह।
पाठ से जो ड़ए: सद्धाथ ने पहले ही दृश्य म कहा था — “जब भोजन का समय होता है तो हम अपने आप भूख लग
आती है।” भूख का यही अपने आप लगना इस मुहावरे म मज़ेदार ढं ग से कहा गया है।
प्र.3 (ञ) (ञ) [सूरज] को [द पक] दखाना।
चत्र म एक ओर चमकता सूरज है और दूसरी ओर जलता हुआ द पक। मुहावरा बनता है —
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सूरज को दीपक िदखाना
अथ — कसी बहुत बड़े या प्र सद्ध को अपनी छोट -सी चीज़ से बड़ा दखाने क को शश करना; ऐसा काम करना जसक कोई
ज़रूरत ही न हो।
वाक्य — इतने बड़े गायक के सामने गाना गाकर उसे सखाना तो सूरज को द पक दखाना है।
बात सम झए: सूरज अपने आप म सबसे बड़ा प्रकाश है। उसके सामने द पक क रोशनी कुछ भी नह । इस लए यह
मुहावरा उस काम के लए बोला जाता है जो बेकार हो।
प्र.3 — वाक्य प्रयोग साथ ही अपनी रु च के कन्ह पाँच मुहावर और लोको क्तय का वाक्य म प्रयोग भी क जए —
ऊपर के दस म से कोई भी पाँच चु नए। नीचे पाँच चुने हुए दए गए ह, हर एक का अथ और नया वाक्य —
क्रम मुहावरा / लोको क्त अथ वाक्य म प्रयोग
1 मगरमच्छ के आँसू बहाना झूठा दुख दखाना िगलहरी को डराने के बाद वह मगरम च्छ के आँस ू बहाने
(मुहावरा) लगा।
2 दाँत तले उँगली दबाना बहुत हैरान रह जाना हंस को िस ाथ की गोद में जाते दे ख पूर ी सभा ने दाँतों तले
(मुहावरा) उँ गली दबा ली।
3 नौ दो ग्यारह होना (मुहावरा) भाग जाना घंटी बजते ही सारे बच्चे मैद ान से नौ दो ग्यारह हो गए।
4 एक और एक ग्यारह मलकर काम करने से श क्त दोनों बहनों ने िमलकर पूर ा बगीचा साफ़ कर िदया — एक
(लोको क्त) बढ़ जाती है और एक ग्यारह!
5 अक्ल बड़ी या भस ताकत से बु द्ध बड़ी होती है मंत्री ने िबना झगड़ े के फ़ै सला करा िदया — सच ही कहा है,
(लोको क्त) अक्ल बड़ ी या भैसं ।
मुहावरा और लोको क्त म अंतर: मुहावरा पूरा वाक्य नह होता — उसे वाक्य म जोड़ना पड़ता है, जैसे “वह नौ दो
ग्यारह हो गया।” लोको क्त (कहावत) अपने आप म एक पूरी बात होती है, जैसे “अक्ल बड़ी या भस।” उसे जैसा है
वैसा ही बोल दया जाता है।
लखने का तरीका: मुहावरे को वाक्य म उसी रूप म र खए जस रूप म वह बोला जाता है। जैसे “उसने दाँत तले
उँ गली दबाई” ठ क है, पर “उसने दाँत के नीचे उँ गली रखी” गलत — इससे मुहावरा टू ट जाता है।
पाठ से आगे — पृष्ठ 113 और 114
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
सद्धाथ क ओर से दे वदत्त को संदेश लखना, फूल से प्रेम दखाने के दो ढं ग (प्रमोद और करुणा), तथा चत्र के आधार पर प क्षय क घटती
संख्या के कारण और बचाव
पाठ से आगे ले ख न
प्र.1 हंस वाली घटना के बाद सद्धाथ, दे वदत्त को एक संदेश दे ना चाहते ह। आपके अनुसार सद्धाथ ने दे वदत्त को क्या
संदेश लखकर भेजा होगा — (पुस्तक म “ प्रय भाई दे वदत्त” से आरंभ और “आपका भाई सद्धाथ” से अंत होने
वाला ख़ाली पत्र दया गया है।)
पुस्तक म पत्र का ढाँचा पहले से छपा है — ऊपर “ प्रय भाई दे वदत्त” और नीचे “आपका भाई सद्धाथ”। बीच क छह पं क्तयाँ
आपको भरनी ह।
अच्छे संदेश म ये चार बात होनी चा हए —
1. झगड़े का दुख — रश्ता टू टे नह , यह बात पहले आए।
2. अपनी बात का कारण, बना ताना मारे।
3. दे वदत्त क अच्छ बात क तारीफ़ — जैसे उसका नशाना।
4. आगे के लए एक न्योता या सुझाव।
नमूना उत्तर:
िपय भाई दे वद त्त
कल जो हुआ , उससे मेरा मन अब तक भारी है। म झ
ु े तम
ु से झगड़ा नही ं करना था।
मैन
ं े हंस इसिलए नही ं रखा िक मै ं जीतना चाहता था। मैन
ं े इसिलए रखा िक वह
डरकर मेरी गोद में आ िगरा था। जो डरकर शरण में आ जाए, उसे लौटाया नही ं जाता।
म् च्
ु बहुत अ छा है। पर सोचो — वही िनशाना यिद िकसी की
त ु हारा िनशाना सचम च
जान बचाने के काम आए तो िकतना बड़ा हो जाएगा! तीर से के वल जीत िमलती है,
दया से िम त्र िमलते है।ं
हंस का घाव अब भर रहा है। कल सवेरे उ ान में आ जाना। उसे साथ बैठकर दाना
ु दे खोगे — वह त म
िखलाएँगे। त म ु से भी िहल जाएगा।
आपका भाई
िस ाथ
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय
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यह संदेश सद्धाथ जैसा क्य लगता है: क्य क इसम कह भी दे वदत्त को बुरा नह कहा गया। नाटक म भी
सद्धाथ ने दे वदत्त का अपमान नह कया था — उन्ह ने केवल मुस्कुराकर कहा था, “म कब कहताemँ तुम राजकुमार
नह हो।” जो.cसहीomहोता है, उसे ऊँची आवाज़ क ज़रूरत नह पड़ती। g l as
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aपत्र लखने का ढं ग: (1) ऊपर संबोधन — “ प्रय भाई दे वदत्त”। (2) बीच म अपनी बात, दो-तीन छोटे अनुच्छेद
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म। (3) नीचे दाईं ओर अपना नाम। पुस्तक ने संबोधन और नाम पहले ही दे दए ह, इस लए आपको केवल बीच का
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भाग लखना है।
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बगीचे म सुंदर-सुंदर गुलाब के फूल लगे ह। प्रमोद को ये फूल बहुत सुंदर लगते ह। वह उन फूल को तोड़कर अपने
mर उनक दे खभाल करने
प्र.2
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gla के सा थय के साथ चचा
om लेती है। आप इन फूल से अपना प्रेम कैसे दशाएँगे एवं क्य ? अपनीaकक्षा
पास रख लेता है। करुणा को भी फूल बहुत पसंद ह। वह प्र त दन फूल को खाद-पानी दे क
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का नणय
a s emकर अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।
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पहले दोन के तरीके आमने-सामने र खए। दोन को फूल अच्छे लगते ह — पर प्रेम दखाने का ढं ग अलग है।
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प्रमोद का तरीका gla
बात
a करुणा का तरीका
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क्या करता/करती है फूल तोड़कर अपने पास रख लेता है। रोज़ खाद -पानी दे क र दे खभाल करती है।
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mिखला रहेगा और नए फूल भी
पौधे पर लगा फू ल कईeिदन
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तोड़ा हुआ फूल एक-दो दन म मुरझा जाएगा।
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फू ल का क्या होगा
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seपेम िकसके िलए
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अपने लए — “मुझे अच्छा लगता है, इस लए मेरा हो फू ल के िलए — “यह िखला रहे, बढ़ ता रहे। ”
जाए।”
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दू स रों के िलए तोड़ लेने पर बाक लोग वह फूल नह दे ख पाएँगे। पूर ा बगीचा सबके दे खने के िलए िखला रहेगा।
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िततली और फूल टू ट जाने पर उन्ह रस नह मलेगा। उ न्हे ं रस िमलता रहेगा और बीज भी बनेगं े।
मध मु क्खी
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नमूना उत्तर: म फूल से अपना प्रेम करुणा क तरह दखाऊँगा/ दखाऊँगी। म फूल तो ग
ँ ा नह । म यह करूँगा —
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2..cसूoखी प त्तयाँ और घास-फूस हटाता र ँगा, ता क पौधा साफ़ रहे।
1. रोज़ सवेरे पौध म पानी दूँ गा और महीने म एक बार खाद डालूँगा।
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a s 3. फूल को तोड़ने के बजाय उसका चत्र बनाऊँगा या उसे देखकर दो पं क्तयाँ लखूँगा।
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4. घर आने वाल को बगीचा दखाऊँगा, ता क सुंदरता सबक हो जाए।
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क्य — क्य क स ा प्रेम पाने का नह , बचाने का नाम है। तोड़ा हुआ फूल मेरा तो हो जाएगा, पर वह मुरझा जाएगा। पौधे पर
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लगा फूल मेरा नह होगा, पर वह जी वत रहेगा और कई दन सबको सुंदर लगेगा।
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इसका ‘न्याय’ नाटक से क्या नाता है: दे वदत्त को भी हंस “सुंदर” लगा था। सखा ने कहा भी था — “यह सुंदर जो
है, प्यारा जो लगता है।” उस पर सद्धाथ ने पूछा — “क्य , क्या सुंदर होना पाप है? क्या प्यारा लगना बुरा है?” यही
बात यहाँ फूल क है। जो चीज़ सुंदर लगे, उसे छ नना नह — उसे बचाना चा हए। प्रमोद दे वदत्त जैसा है, करुणा
सद्धाथ जैसी।
चचा म यह भी क हए: य द कभी फूल क सचमुच ज़रूरत हो — जैसे पूजा म — तो जो फूल अपने आप गर गया
हो, उसे उठाइए। इससे प्रेम भी रहेगा और पौधे को चोट भी नह लगेगी।
प्र.3 कुछ प क्षय क संख्या नरंतर कम होती जा रही है। कई पक्षी तो ऐसे ह जो वलुप्त होने क त म आ गए ह,
उदाहरण के लए गौरैया। चत्र के माध्यम से नीचे कुछ ऐसे संकेत दए गए ह जो प क्षय क दन-प्र त दन कम
होती संख्या के लए उत्तरदायी ह। चत्र को दे खकर अपने सहपा ठय के साथ इन कारण पर चचा क जए। यह
भी पता लगाइए क हम इन प क्षय के बचाव और उनक संख्या म वृ द्ध के लए कैसे योगदान दे सकते ह।
पृष्ठ 114 पर बीच म एक घबराया हुआ पक्षी बना है, जसके चार ओर नीली रेखाएँ उलझी हुई ह — यह उसक परेशानी दखाती
ह। उसके चार ओर चार चत्र ह। हर चत्र एक कारण बताता है। वलुप्त यानी जसक जा त ही खत्म हो जाए, जो अब कह न
बचे।
चत्र चत्र म क्या है यह कैसे नुकसान करता है
ऊपर पतंग और उसक डोर, पास ही उड़ता हुआ पतंग की तेज़ डोर (माँझा) में पक्षी उलझ जाते है।
ं उनके पंख और गरदन कट
बाएँ पक्षी जाते है।
ं कई तो पेड़ों और तारों में फँ सकर मर जाते है।
ं
ऊपर कटे हुए पेड़ के ठूँ ठ और पड़ी हुई पेड़ कटने से पिक्षयों के घोंस ले , अंडे और रहने की जगह खत्म हो जाती है। खाने
दाएँ लक ड़याँ के िलए फल -बीज और कीड़ े भी नही ं बचते।
नीचे कारखान का धुआँ, गंदा पानी और कूड़े ध एु ँ से हवा ज़हरीली होती है और गंदे पानी से बीमारी फै लती है। प्लािस्टक का
बाएँ का ढे र, ऊपर से उड़ते पक्षी कचरा पक्षी खा ले ते है,ं िजससे उनकी जान चली जाती है।
नीचे मोबाइल टावर और उससे नकलती तरंग, टावर की तरंगों से छोटे पक्षी िदशा भूल जाते है ं और उनके अंडों पर भी असर
दाएँ पास म उड़ता पक्षी पड़ ता है। गौरै या इसी से कम होती जा रही है।
हम क्या कर सकते ह — प क्षय को बचाने के आठ काम
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क्रम क्या कर इससे क्या होगा
1 छत या िखड़ की पर िम ी के सकोरे में रोज़ पानी रखें, और गरमी में दाना गरमी म पक्षी प्यास से नह मरगे।
भी।
2 पेड़ों पर या दीवार पर घोंस ले के िलए लकड़ ी या िम ी का घर टाँगें। गौरैया जैसे छोटे प क्षय को रहने क जगह मलेगी।
3 चीनी माँझे वाली पतंग न उड़ ाएँ। सादी सूती डोर काम में ले ं। प क्षय के पंख और गरदन नह कटगे।
4 पेड़ लगाएँ और लगे हुए पेड़ों को कटने से बचाएँ। नीम , पीपल और बरगद घ सले और भोजन दोन मलगे।
पिक्षयों के िपय है।
ं
5 प्लािस्टक कम करे ं और कू ड़ ा खुले में न फें कें । पक्षी प्ला स्टक नह नगलगे।
6 खेतों और बगीचों में कीटनाशक कम डाले ं। प क्षय को साफ़ क ड़े खाने को मलगे, जो उनका
मुख्य भोजन है।
7 पिक्षयों को िपंजरे में न रखें और न ही िकसी को पकड़ ने दे ं। पक्षी खुले म रहगे और उनक संख्या बढ़े गी।
8 क क्षा में ‘गौरै या िदवस ’ (20 माच) पर िचत्र-पदशनी लगाएँ और दू स रों को ज़्यादा लोग जुड़गे तो असर भी ज़्यादा होगा।
बताएँ।
गौरैया का ही नाम क्य लया गया: गौरैया वही छोट भूरी च ड़या है जो पहले हर घर के रोशनदान और आँगन म
दखती थी। अब पक्के मकान म उसके घ सले क जगह नह बची, आँगन म दाना नह गरता और क ड़े भी कम हो
गए ह। इसी लए वह कम होती जा रही है। यह वह पक्षी है जसे बचाने का काम हर ब ा अपने घर से शुरू कर
सकता है।
पुस्तकालय एवं अन्य ोत — पृष्ठ 114 और 115
गौतम बुद्ध से जुड़ी जातक कथाएँ पढ़ना, राजा वक्रमा दत्य के न्याय क कथाएँ खोजना, तथा अपने आस-पास समस्या सुलझाने वाले लोग के
बारे म पता करना
पु स्तकालय एवं अन्य ोत खोज
प्र.1 अपने सहपा ठय के साथ पुस्तकालय म जाइए और गौतम बुद्ध से संबं धत जातक कथाओं को प ढ़ए।
यह करने वाला काम है। पहले यह जान ली जए क जातक कथाएँ ह क्या।
जातक कथाएँ वे कहा नयाँ ह जो गौतम बुद्ध के पछले जन्म के बारे म बताई जाती ह। इनम बुद्ध कभी हरण होते ह, कभी बंदर,
कभी हाथी और कभी राजा। हर कथा के अंत म एक सीख होती है — दया, स ाई, साहस या मत्रता क ।
इस पाठ से इनका सीधा नाता है — इसी नाटक के राजकुमार सद्धाथ आगे चलकर गौतम बुद्ध कहलाए। घायल हंस को बचाने
वाली यह घटना बुद्ध के बचपन क सबसे प्र सद्ध कहानी है।
कैसे क जए — चार चरण:
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1. पुस्तकालय जाकर सहायक से क हए — “हम जातक कथाओं क पुस्तक चा हए।” बाल-सा हत्य वाली अलमारी म ये आसानी
से मल जाती ह।
2. अपने समूह म हर ब ा एक-एक कथा चुने। एक ही कथा दो ब े न ल।
3. कथा पढ़कर तीन बात ल खए — (क) कौन-कौन पात्र थे, (ख) क्या हुआ, (ग) क्या सीख मली।
4. अगले दन कक्षा म सुनाइए। सुनाते समय एक चत्र भी बनाकर दखाइए।
नमूना उत्तर — तीन प्र सद्ध जातक कथाएँ:
कथा क्या होता है क्या सीख मलती है
बंद र और नदी िकनारे जामुन के पेड़ पर रहने वाला बंद र मगरम च्छ को रोज़ मीठे फल दे ता है। मुसीबत म घबराना नह चा हए;
मगरम च्छ मगरम च्छ की पत्नी बंद र का कले जा खाना चाहती है। मगरम च्छ उसे पीठ पर बैठाकर सूझबूझ से जान बच जाती है।
बीच नदी ले जाता है और सच बता दे ता है। बंद र चतुर ाई से कहता है िक उसका
कले जा तो पेड़ पर ही रखा है — और लौटकर बच िनकलता है।
सुनहरा िहरण राजा रोज़ एक िहरण का िशकार करता था। एक िदन बारी एक गभवती िहरणी की दूसरे के लए आगे बढ़कर खड़ा
(िनग ोध म ृग ) आती है। सुनहरा िहरण स्वयं उसकी जगह िसर झुक ाकर खड़ ा हो जाता है। यह होना सबसे बड़ी वीरता है —
दे खकर राजा का मन बदल जाता है और वह िशकार करना ही छोड़ दे ता है। ठ क वैसे ही जैसे सद्धाथ हंस के
लए खड़े हुए।
बटेर और एक हाथी बटेर के अंडे कु चल दे ता है। नन्ही बटेर कौए , म क्खी और मेढक की मदद से छोटे भी मलकर बड़ा काम कर
हाथी उस िवशाल हाथी को हरा दे ती है। सकते ह — “एक और एक
ग्यारह”।
कहाँ मलगी: वद्यालय के पुस्तकालय के अलावा ये कथाएँ पंचतंत्र-जैसी बाल-पुस्तक म, NCERT और NBT
(रा ीय पुस्तक न्यास) क स चत्र कताब म तथा साँची और भरहुत के पत्थर पर खुदे चत्र म भी मलती ह।
प्र.2 राजा वक्रमा दत्य भी अपने न्याय के लए प्र सद्ध थे। राजा वक्रमा दत्य के न्याय से जुड़ी कथाओं को पुस्तकालय
सहायक एवं सहपा ठय क सहायता से ढूँ ढ़ए और उन्ह पढ़कर आपस म इन कथाओं पर बातचीत क जए।
राजा वक्रमा दत्य उ ैन के राजा माने जाते ह। कहा जाता है क वे रात म वेश बदलकर नगर म घूमते थे, ता क लोग क स ी
परेशानी जान सक। उनके न्याय क कहा नयाँ आज भी सुनाई जाती ह।
कहाँ मलगी — दो प्र सद्ध पुस्तक:
सहासन बत्तीसी — वक्रमा दत्य के सहासन म लगी बत्तीस पुत लयाँ ह। हर पुतली राजा क एक न्याय-कथा सुनाती है।
बेताल प ीसी — बेताल राजा वक्रम को प ीस कहा नयाँ सुनाता है और हर कहानी के अंत म एक क ठन प्रश्न पूछता है,
जसका सही उत्तर राजा दे ता है।
नमूना उत्तर — एक कथा जो बातचीत म सुनाई जा सकती है:
एक बार दो स्त्रयाँ एक ही ब े को अपना बता रही थ । राजा ने दोन क बात सुनी। कोई गवाह नह था। तब राजा ने कहा क ब े
को दो भाग म बाँट दया जाए। यह सुनते ही एक स्त्री रो पड़ी और बोली — “मुझे ब ा नह चा हए, बस वह जी वत रहे।” राजा ने
ब ा उसी को दे दया और कहा — “असली माँ वही है जो ब े क जान चाहती है, अपना हक़ नह ।”
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इसका ‘न्याय’ पाठ से क्या मेल है: दोन जगह न्याय एक ही तरीके से हुआ। मंत्री ने हंस से उसक पसंद पुछवाई;
राजा ने माँ के प्रेम को परखा। दोन ने कागज़ के सबूत नह , मन का सबूत दे खा। दोन जगह जीत उसी क हुई जो
दूसरे क भलाई चाहता था।
बातचीत म यह पू छए: “य द राजा सचमुच ब े को बाँट दे ते तो?” — इस पर सोचने से समझ आएगा क न्याय
करने वाले को केवल चतुर नह , दयालु भी होना पड़ता है।
प्र.3 आपके घर अथवा आस-पास ऐसे कौन-से व्य क्त ह जनके पास लोग अपनी समस्याओं को सुलझाने हेतु
सहायता के लए जाते ह? उनके बारे म अ भभावक से पू छए और कक्षा म साझा क जए।
यह पता लगाने वाला काम है। घर पर माता- पता या दादा-दाद से पू छए — “हमारे यहाँ झगड़ा या कोई परेशानी हो तो लोग कसके
पास जाते ह?” उनके बताए नाम और काम लखकर कक्षा म सुनाइए।
पूछने के लए तीन सवाल: (1) वे कौन ह और क्या करते ह? (2) लोग उनके पास कस तरह क परेशानी लेकर जाते ह? (3) वे
बात कैसे सुलझाते ह?
नमूना उत्तर:
कौन लोग कस काम से जाते ह वे कैसे सुलझाते ह
सरपंच / पधान खेत की मेड़ का झगड़ ा, पानी की बारी, रास्ते ाम पंचायत म दोन पक्ष को बुलाकर, गाँव के सामने बात
का िववाद। सुनकर फ़ैसला करते ह।
ग ाम पंचायत / वाड पाषद नल , सड़ क , नाली, िबजली और सफ़ ाई की प्रस्ताव पास कराकर सरकारी वभाग तक बात पहुँचाते ह।
िशकायत।
मुहल्ले के बुज़गु घर -पिरवार की आपसी अनबन। दोन घर को बैठाकर, समझा-बुझाकर सुलह करा दे ते ह।
िव ालय के पधानाचाय बच्चों की पढ़ ाई, आपसी झगड़ े, छात्रवृित्त के दोन ब और माता- पता से बात करके हल नकालते ह।
और िशक्षक काग़ ज़।
थाना (पुिलस) चोरी, मारपीट, कोई चीज़ या व्यिक्त गुम हो शकायत लखकर जाँच करते ह और आगे कारवाई करते ह।
जाना।
न्यायालय और वकील ज़मीन-मकान के काग़ ज़ और बड़ े िववाद। काग़ज़ और गवाह दे खकर न्यायाधीश फ़ैसला सुनाते ह।
पटवारी / ले खपाल खेत की नापजोख और ज़मीन का िरकॉड। न ा और र जस्टर दे खकर सीमा तय करते ह।
आशा कायकत / बीमारी, टीका, गभवती माँओं और छोटे बच्चों अस्पताल तक पहुँचाती ह और सही सलाह दे ती ह।
आँग नवाड़ी बहन की दे खभाल।
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय
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इस पाठ से जो ड़ए: नाटक म सखा ने कहा था — “आपका झगड़ा इस प्रकार नह सुलझ सकता। मेरा सुझाव है
m a s emके पास जाकर
glथाना और न्यायालय ह।
क हम महाराज के पास चलना चा हए।” यानी झगड़ा आपस म लड़कर नह , कसी नष्पक्ष व्य क्त
co यानी जो कसी एक क तरफ़ न हो। आज महाराज क जगह पंचायत,
सुलझता है। .नष्पक्ष
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म भी सद्धाथ — पृष्ठ 115
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a s emऔर लेखन, तथा दे खने-सुनने म असमथ सखा को प्रकृ त का आनंद कराने
सहायता, समझदारी और करुणा दखाने वाले चार चत्र पर संवाद
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क कल्पना
म भी सद्धाथ गतवध
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ादoक जए एवं कसी एक चत्र पर कुछ पं क्तयाँ भी ल खए। l as
नीचे कुछ चत्र दए गए ह जो सहायता, समझदारी और करुणा से संबं धत ह। कक्षा म अपने समूह म इन पर
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se m पृष्ठ 115 पर दए गए चार चत्र।
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पृष्ठ 115 पर चार चत्र छपे ह। हर चत्र म कोई-न-कोई कसी क मदद कर रहा है। पहले चार को पहचान ली जए —
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
चत्र चत्र म क्या हो रहा है कौन-सा गुण दखता है
ऊपर पेड़ के नीचे दीवार पर एक चौड़ ा बरतन रखा है, िजसमें पानी भरा है। उस पर तीन करुणा — बेजबान प क्षय क प्यास
बाएँ िचिड़ याँ बैठी पानी पी रही है।
ं एक उड़ कर आ रही है। का ध्यान रखना।
ऊपर व्यस्त सड़ क पर ज़ेबा ॉिसंग है। एक लड़ का और एक लड़ की हाथ थामकर एक सहायता — बड़ का सहारा बनना।
दाएँ बुज़गु को, िजनके हाथ में छड़ ी है, सड़ क पार करा रहे है।
ं पीछे बस खड़ ी है और
िस ग्नल लाल है।
नीचे ‘पेयजल ’ िलखी एक सावजिनक पानी की टंक ी है। एक लड़ का और एक लड़ की समझदारी — साफ़ पानी का मल-
बाएँ उसकी टोंटी से पानी पी रहे है।
ं पीछे घर और हिरयाली है। बाँटकर उपयोग करना, पानी बहाना
नह ।
नीचे एक लड़ की खेत के पास खड़ ी है और दो गायों को अपने हाथ से रोटी िखला रही है। करुणा — पशुओं को भोजन दे ना।
दाएँ
समूह म संवाद के लए तीन प्रश्न: (1) इस चत्र म कौन कसक मदद कर रहा है? (2) य द यह मदद न होती तो क्या होता? (3)
ऐसा काम आप कब-कब कर सकते ह?
नमूना उत्तर — पहले चत्र (प क्षय का पानी) पर कुछ पं क्तयाँ:
गरमी की दोपहर थी। धूप इतनी ते ज़ थी िक प े भी झ क
ु गए थे । त्त
छत की म ँड
ु ेर पर िकसी ने एक चौड़ा बरतन रखकर उसमें पानी भर िदया था।
पहले एक गौरैया आई। उसने चारों ओर दे खा, िफर चोंच डुबोई और िसर ऊपर उठा िलया।
िफर दू सरी आई, िफर तीसरी। एक अभी हवा में ही थी।
वे पानी पीती रही ं और उनके गले की हलचल दू र से िदखाई दे त ी रही।
बरतन रखने वाले ने कु छ बड़ा नही ं िकया था — बस एक बरतन और थोड़ा-सा पानी।
पर उस दोपहर में वह थोड़ा-सा पानी चार जानों के बराबर था।
अब मैन
ं े भी अपनी छत पर एक सकोरा रख िदया है।
चार चत्र क एक ही बात: मदद करने के लए बड़ा होना ज़रूरी नह है। एक बरतन पानी, एक रोट , एक हाथ का
सहारा — इतना ही काफ़ है। सद्धाथ ने भी कोई बड़ा काम नह कया था। उन्ह ने बस एक तीर नकाला और मरहम
मँगवाया। इसी लए इस अभ्यास का नाम है — “म भी सद्धाथ”।
पं क्तयाँ लखते समय: पहले बताइए क चत्र म क्या दख रहा है, फर यह क वह काम क्य अच्छा है, और अंत
म यह क आप क्या करगे। तीन-चार वाक्य भी काफ़ ह, बशत वे आपके अपने ह ।
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 नाटक के प्रथम दृश्य म सद्धाथ और उनका सखा राज उ ान के स दय का दे ख-सुनकर आनंद ले रहे ह। य द
उनका कोई सखा दे खने-सुनने म असमथ होता तो सद्धाथ उसे इस आनंद का अनुभव कैसे करवाते? कक्षा म
चचा क जए।
पहले याद क जए क पहले दृश्य म आनंद कन चीज़ से मल रहा था — शाम क ला लमा, झूमते फूल, लौटती गाय का स्वर,
बछड़ का रँभाना, प क्षय का गान और आकाश म उड़ते राजहंस।
इनम से कुछ आँख से मलता है और कुछ कान से। पर उद्यान म और भी बहुत कुछ है, जो छू कर, सूँघकर और महसूस करके
जाना जा सकता है। सद्धाथ उसी रास्ते से अपने सखा को यह आनंद दे ते।
य द सखा दे ख न पाता य द सखा सुन न पाता
छू कर — उसका हाथ पकड़ कर पेड़ के तने पर , घास पर और फू ल की पंखडु ़ ी िदखाकर — उँ गली से आकाश में उड़ ते राजहंस ों की कतार
पर रखते। हंस के मुल ायम पंखों पर हाथ िफरवाते। िदखाते और डू बते सूर ज की लािलमा की ओर उसका मुँह
करते।
सुनाकर — कहते — “सुनो, वह बछड़ ा अपनी माँ को पुक ार रहा है”, और महसूस कराकर — उसकी हथेल ी गाय के गले पर रखवाते,
पिक्षयों के िवदा-गान की ओर उसका ध् यान ले जाते। तािक रँभाने की थरथराहट वह हाथ से महसूस कर ले ।
सुँघ ाकर — फू लों के पास ले जाते, गीली िम ी और शाम की ठं डी हवा की गंध संके तों से — हाथ के इशारों से बताते — पंख फै लाकर उड़ ान,
सुँघ ाते। हथेल ी नीचे करके सूर ज का ढलना।
शब्दों से िचत्र बनाकर — कहते — “आकाश अभी नारंगी है, जैसे िकसी ने िलखकर — उसकी हथेल ी पर उँ गली से शब्द िलखकर बात
के सर घोल िदया हो। हंस ों की गरदन आगे को िनकली है, जैसे वे हवा में तैर कहते।
रहे हों। ”
नमूना उत्तर: सद्धाथ अपने सखा का हाथ अपने हाथ म लेते और उसे उद्यान म धीरे-धीरे घुमाते। वे पहले उसका हाथ पेड़ के खुरदरे
तने पर रखते, फर घास पर, फर फूल क मुलायम पंखुड़ी पर। वे उसे शाम क ठं डी हवा म खड़ा करते, ता क वह मौसम बदलना
महसूस कर सके। जो वे दे ख रहे होते, उसे शब्द म इस तरह कहते क सखा के मन म चत्र बन जाए। और सबसे ज़रूरी — वे उसे
अकेला न छोड़ते। नाटक म उन्ह ने डरे हुए हंस से भी यही कहा था — “डरो नह मत्र! म यह ँ।”
असली बात यह है: आनंद केवल आँख और कान से नह आता। वह मन तक पाँच रास्त से पहुँचता है — दे खना,
सुनना, छू ना, सूँघना और चखना। य द एक रास्ता बंद हो, तो बाक रास्ते और खुल जाते ह। इसी लए जो दे ख या सुन
नह पाते, वे छू ने और सूँघने से बहुत-कुछ पहचान लेते ह।
चचा म यह भी क हए: ऐसे साथी क मदद करते समय दया नह , साथ दे ना चा हए। उनसे पूछ लेना चा हए क
उन्ह कस तरह क मदद चा हए। बना पूछे हाथ पकड़ लेना या ज़ोर से बोलना ठ क नह । कक्षा म यह भी बताइए क
दृ बा धत साथी उँ ग लय से पढ़ने वाली ेल ल प से पढ़ते ह और सुनने म असमथ साथी सांके तक भाषा से बात
करते ह।
मेरा पक्षी — पृष्ठ 116
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
पाठ के अंत म द गई कागज़ मोड़ने क ग त व ध — नौ चत्र को दे खकर अपने लए कागज़ का एक पक्षी बनाना
मे रा पक्षी गतवध
प्र.1 अपने अ भभावक और शक्षक क सहायता से नम्न चत्र को दे खते हुए अपने लए कागज का एक पक्षी बनाइए
—
1 2 3
4 5 6
7 8
9
पृष्ठ 116 पर 1 से 9 तक क्रम से दए गए नौ चत्र।
यह हाथ से करने वाली ग त व ध है। कागज़ मोड़कर आकार बनाने क इस कला को ओ रगामी कहते ह। पुस्तक म नौ चत्र क्रम से
दए ह। नीचे हर चत्र म क्या दखाया गया है, वह बताया गया है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
साम ी — एक चौकोर कागज़ (दोन तरफ़ रंग हो तो और अच्छा), और एक काली प सल या स्केच पेन (आँख बनाने के लए)।
कची या ग द क ज़रूरत नह है।
चत्र उसम क्या दख रहा है क्या क जए
1 चौकोर कागज़ हीरे क तरह रखा है। बीच म आड़ी बदुदार रेखा कागज़ को हीरे की तरह रिखए। ऊपर वाला कोना नीचे वाले
है और ऊपर-नीचे के कोन के बीच दुतरफ़ा तीर है। कोने पर लाकर मोिड़ ए , दबाइए , और िफर खोल दीिजए। एक
िनशान बन गया।
2 अब बदुदार रेखा खड़ी है और तीर बाएँ-दाएँ कोन के बीच है। इसी तरह बायाँ कोना दाएँ कोने पर लाकर मोिड़ ए , दबाइए और
खोल दीिजए। अब कागज़ पर दो िनशान बन गए , जो बीच में
कटते है।
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3 अब लाल रंग का त्रभुज है, जसका नुक ला सरा दाईं ओर है। कागज़ को आधा मोड़ कर ित्रभुज बना लीिजए (नुक ीला िसरा
ऊपर क परत पर एक तीर बाईं ओर से दाईं ओर जा रहा है। दाईं ओर )। अब ऊपर वाली परत के बाएँ िहस्से को दाईं ओर
पलटकर मोिड़ ए।
4 आकृ त अब तीर के फल जैसी दखती है — ऊपर और नीचे कागज़ को पलिटए और दू स री ओर भी वैस ा ही मोड़ बनाइए ,
नुक ले सरे। बीच से एक तीर बाईं ओर जा रहा है। तािक दोनों तरफ़ बराबर हो जाएँ। अब ऊपर -नीचे दो पंख-जैसे
िहस्से िनकल आए है।ं
5 बीच म सफ़ेद हीरा दखता है और ऊपर-नीचे लाल नुक ले सरे। कागज़ को खोलकर बीच से थोड़ ा फै लाइए और नीचे वाले
एक तीर नीचे दाईं ओर मुड़ रहा है। नुक ीले िसरे को िदखाए गए तीर की िदशा में मोिड़ ए। यह आगे
चलकर पूँछ बनेगा।
6 अब आकृ त म दोन ओर आड़े पंख ह और नीचे एक सीधा बीच वाले िहस्से को ऊपर की ओर उठाकर मोिड़ ए। यही पंख
हस्सा। एक तीर ऊपर क ओर जा रहा है। बनेगा। दू स री ओर भी ऐसा ही कीिजए।
7 अब पक्षी का ढाँचा बन चुका है — ऊपर उठा हुआ पंख, नीचे बाईं ओर का नुक ीला िसरा ही चोंच बनेगा। उसे थोड़ ा-सा
नाव जैसा शरीर, और बाईं ओर एक नुक ला सरा। उसी सरे पर मोड़ कर दे िखए िक चोंच िकतनी बड़ ी अच्छी लगेगी।
एक छोटा दुतरफ़ा तीर है।
8 वही आकृ त है, पर ऊपर दाईं ओर एक गोले म च च का बड़ा गोले वाले िचत्र को दे खकर िसरे को अंद र की ओर दबाकर
चत्र दखाया गया है। मोिड़ ए , बाहर की ओर नही ं। इससे चोंच साफ़ और नुक ीली
बनती है।
9 पूरा बना हुआ पक्षी — उठे हुए पंख, फैली पूँछ, नुक ली च च अब पेंिसल से दोनों ओर एक -एक आँख बना दीिजए। आपका
और एक गोल आँख। कागज़ का पक्षी तैयार है।
अच्छा पक्षी बनाने के चार सुझाव: (1) हर मोड़ को नाखून से अच्छ तरह दबाइए, तभी आकार साफ़ बनेगा। (2)
कागज़ बलकुल चौकोर हो — आयत से यह आकार नह बनेगा। (3) कोई चरण उलझ जाए तो पछले चरण तक
खोलकर फर से क जए; कागज़ फा ड़ए मत। (4) पहली बार अख़बार के कागज़ पर अभ्यास क जए, फर रंगीन
कागज़ पर बनाइए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय
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यह ग त व ध इसी पाठ के साथ क्य द गई है: पूरा नाटक एक पक्षी के इद- गद है — वह हंस जो सद्धाथ क
m a s emइस पक्षी को न
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गोद म आ गरा था। अपने हाथ से एक पक्षी बनाकर ब ा उसी हंस को अपने पास ले आता है। और
o है, न कोई इसे छ न सकता है।
कोई तीर लग.cसकता
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aglआगे क जए: ऐसे कई पक्षी बनाकर कक्षा म डोरी से टाँग द जए और हर पक्षी के नीचे एक पं क्त लख द जए —
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जैसे “मुझे उड़ने दो”, “मेरा घ सला मत तोड़ो”, “गरमी म मेरे लए पानी रखो”।
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अध्याय — एक नज़र म
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emगया है — कौन-कौन इसम आएगा और वह कौन है। फर पहला दृश्य और दूसरा दृश्य ह। दृश्य यानी नाटक का एक
न्याय एक नाटक है। नाटक वह रचना है जसे मंच पर खेलकर दखाया जाता है। इसी लए इसम सबसे पहले पात्र प रचय
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gl हस्सा, जो एक ही जगह और एक ही समय म घटता है।
दया
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रचनाकार का नाम पाठ के अंत म, पृष्ठ 109 पर छपा है — वष्णु प्रभाकर। वष्णु प्रभाकर हद के प्र सद्ध लेखक थे। उन्ह ने
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कहा नयाँ, नाटक और जीव नयाँ लख । उनक भाषा बहुत सरल है — छोटे -छोटे वाक्य, आसान शब्द, और बात सीधी मन
तक पहुँचने वाली।
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पात्र प रचय इस प्रकार है — सद्धाथ (क पलवस्तु के राजकुमार), शुद्धोदन (क पलवस्तु के महाराजा), सखा ( सद्धाथ का
मत्र), दे वदत्त ( सद्धाथ का चचेरा भाई), मंत्री (महाराजा का मंत्री) और प्र तहारी ( ार पर खड़ा रहने वाला सेवक, जो आने-
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जाने क सूचना दे ता है)। ये वही सद्धाथ ह जो आगे चलकर गौतम बुद्ध कहलाए।
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पहला दृश्य — राज-उद्यान म संध्याकाल का समय है। संध्याकाल यानी शाम का समय। सद्धाथ और उनका सखा प्रकृ त दे ख
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g म राजहंस का झुंड दखता है।
.c आप लगती है, न द अपने आप आती है, सूरज रोज़ पूरब से नकलता है। तभीaआकाश
रहे ह। पक्षी घ सल को लौट रहे ह, गाय वन से लौट रही ह। दोन बात करते ह क हर वस्तु का एक स्वभाव होता है — भूख
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se तभी एक तीर आता है और एक हंस घायल होकर सद्धाथ क गोद म गरता है। सद्धाथ करुणा से भर उठते ह — करुणा
अपने
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agl यानी दूसरे का दुख दे खकर मन म उठने वाला दद। वे तीर नकालते ह, हंस के शरीर पर स्नेह से हाथ फेरते ह और सखा को
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mमाँगते ह और कहते ह — “मने इसे मारा है। इसके शरीर म मेरा तीर glase
राजवैद्य के पास मरहम लाने भेजते ह। मरहम यानी घाव पर लगाने क दवा।
तभी दे वदत्त आते ह। तीर उन्ह ने ही चलाया था। वेco
लगा है।” सद्धाथ मना कर दे ते ह — “तुमनेem
. हंस
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aजाए।
मारा है परंतु मने बचाया है… इस लए यह हंस मेरा है।” झगड़ा बढ़ता है। तब सखा
सुझाव दे ता है क महाराज के पास g
a चला
दूसरा दृश्य — महाराज शुद्धोदन क सभा है। दोन पक्ष सुने जाते ह। सद्धाथ कहते ह — “बचाने वाला मारने वाले से बड़ा
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होता है।” महाराज याद दलाते ह क “वीर अपना आखेट नह छोड़ सकता।” आखेट यानी शकार। सद्धाथ उत्तर दे ते ह —
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“वीर शरणागत को भी नह छोड़ सकता।” शरणागत यानी जो अपनी रक्षा के लए कसी के पास आ गया हो। समस्या ज टल
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हो जाती है, यानी उलझ जाती है।
a s em तब मंत्री एक सुंदर उपाय नकालते ह। वे हंस को आसन पर बैठा दे ते ह और दोन राजकुमार से बारी-बारी उसे बुलाने को
agl कहते ह। दे वदत्त के पुचकारने पर पक्षी डरकर चीखता है। सद्धाथ के प्यार भरे शब्द सुनते ही वह उड़कर उनक गोद म आ
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चपकता है। मंत्री कहते ह — “पक्षी ने अपने आप इस प्रश्न का नणय कर दया है।” महाराज यह नणय स्वीकार कर लेते ह।
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उसक बात सबसे बड़ी है — यहाँ हंस क । .अंcतoका चत्र मन म बस जाता है — “हंस उनक गोद म ऐसे चपका है जैसे ब a ाg
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नाटक का भाव यही है क स ा न्याय ताकत या दावे से नह , दया और स ाई से होता है। जस पर बीत रही है, न्याय म
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माँ क गोद म चपक जाता है।” पाठsक
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है। ag l बाद पृष्ठ 116 पर मेरा पक्षी ग त व ध है, जसम कागज़ का पक्षी बनाना सखाया गया
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
नाटक वह रचना जो मंच पर पात्रों ारा “कक्षा को चार समूह म वभा जत करके सभी हमारी कक्षा ने वा षक उत्सव म
खेल कर िदखाई जाती है समूह से इस नाटक का मंचन करवाएँ।” एक नाटक खेला।
दृश्य नाटक का वह िहस्सा जो एक ही “पहला दृश्य”, “दूसरा दृश्य” नाटक के दूसरे दृश्य म राजा क
जगह और एक ही समय में घटता है सभा दखाई गई।
नेपथ्य मंच के पीछे का भाग, जो दशकों को “दूर नेपथ्य म वन से लौटती गाय का स्वर उठता नेपथ्य से बाँसुरी क आवाज़ आ
िदखाई नही ं दे ता हुआ।” रही थी।
वेद बैठने या पूजा के िलए बनी ऊँची “राजकुमार सद्धाथ प्रसन्न मन एक वेद पर बैठे दाद मं दर क वेद के पास बैठ
चौकोर जगह ह।” गईं।
सखा िमत्र, दोस्त “पास ही उनका एक सखा है।” राम और श्याम बचपन के सखा ह।
व्याकुल बहुत बेचैन, िजससे रुका न जाए “वे अपने ब से मलने को व्याकुल ह।” माँ बेटे क च के लए व्याकुल
थ।
अचरज हैर ानी, आश्चय “ऐसा कैसे हो जाता है मत्र! बड़े अचरज क बात जादूगर का खेल दे खकर मुझे बड़ा
है।” अचरज हुआ।
नयत तय िकया हुआ , ठहराया हुआ “पानी भी हर साल नयत समय पर पड़ता है।” रेल अपने नयत समय पर आ गई।
स्वभाव िकसी का अपना ढं ग , जो अपने आप “ऐसा मालूम होता है क हर वस्तु का एक स्वभाव पानी का स्वभाव है नीचे क ओर
होता रहता है होता है।” बहना।
करुणा दू स रे का दुख दे खकर मन में उठने “कुमार करुणा से भरकर उसे सँभालते ह।” घायल पल्ले को दे खकर मेरा मन
वाला दद और दया करुणा से भर गया।
नदयी िजसके मन में दया न हो “ कस नदयी ने इस भोले-भाले पक्षी को घायल नदयी व्य क्त ने पेड़ क सारी डाल
कया है?” काट द ।
नद ष िजसका कोई दोष न हो, िजसने कु छ “तुमने एक नद ष पक्षी को मारने का प्रयास कया नद ष ब े को य डाँटना ठ क
गलत न िकया हो है।” नह ।
मरहम घाव पर लगाने की दवा “तुम दौड़कर राजवैद्य से मरहम तो ले आओ।” चोट पर मरहम लगाते ही जलन कम
हो गई।
प्रमाण सबूत; वह चीज़ िजससे बात सच “इसका प्रमाण यह हंस है।” अपनी बात के लए मने रसीद
सािबत हो प्रमाण के रूप म दखाई।
आखेट िशकार “तुमने इसका आखेट कया है।” पुराने समय म राजा वन म आखेट
करने जाते थे।
शरणागत जो अपनी रक्षा के िलए िकसी के पास “वीर शरणागत को भी नह छोड़ सकता।” शरणागत क रक्षा करना सबसे बड़ा
आ गया हो धम है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 9 न्याय AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
धस रोब जमाना, डरा-धमकाकर बात “तुम राजकुमार हो इस लए ध स जमाना चाहते बड़े होने क ध स दे कर काम नह
मनवाना हो।” करवाना चा हए।
ववश मजबूर , िजसके पास कोई चारा न “ठ क है दे वदत्त, म ववश ँ।” बा रश के कारण हम घर लौटने को
बचा हो ववश हो गए।
तल मलाना ग स्ु से और खीझ से बेचैन हो उठना “( तल मलाकर) कुमार…”, “दे वदत्त तल मलाता हार जाने पर वह तल मला उठा।
है।”
स्तं भत हैर ानी से जड़ हो जाना, चुपचाप रह “सब लोग स्तं भत होकर एक-दूसरे को दे खते ह।” यह खबर सुनकर पूरी कक्षा स्तं भत
जाना रह गई।
ज टल उलझा हआ
ु , किठन “मंत्री जी! समस्या ज टल है।” यह सवाल पहले ज टल लगा, पर
समझ आते ही सरल हो गया।
प्र तहारी ार पर खड़ा रहने वाला से वक, जो “प्र तहारी प्रवेश करता है। प्रणाम करके वह खड़ा प्र तहारी ने आकर मेहमान के आने
आने-जाने की सूचना दे ता है हो जाता है।” क सूचना द ।
पुचकारना प्यार से मुँह से आवाज़ करके बुल ाना “(पुचकारकर) आओ… मेरे पास आओ।” माँ ने बछड़े को पुचकारकर पास
बुलाया।
सजल आँस ुओ ं से भरा हुआ “महाराज के नेत्र सजल हो जाते ह।” वदाई के समय सबक आँख सजल
थ।
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