Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा5
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 10: तीन मछ लयाँ
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
117 – 128 8 36 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 37 pages
Page 2
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 10: तीन मछ लयाँ
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 10 तीन मछ लयाँ के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह पाठ एक कहानी है। कहानी के अंत म, पृष्ठ
120 पर रचनाकार का नाम छपा है — मालती दे वी, और उसके नीचे कोष्ठक म लखा है (पंचतंत्र पर आधा रत)। कहानी उत्तर भारत के एक सुंदर
सरोवर क है, जहाँ तीन मत्र मछ लयाँ रहती थ — अनागत वधाता, प्रत्युत्पन्नम त और यद्भ वष्य। तीन के नाम ही उनका स्वभाव बता दे ते ह। जब
दो मछु आरे जाल लाने क बात करते ह, तब तीन अलग-अलग रास्ता चुनती ह — और तीन का अंत भी अलग होता है। पृष्ठ 117 से 128 तक छपे हर
अभ्यास का पूरा हल यहाँ है — बातचीत के लए, पाठ से, सो चए और ल खए, भाषा क बात, अनुमान और कल्पना, बूझो तो जान,
पुस्तकालय से तथा अं तम पृष्ठ क आपक अ भव्य क्त ग त व ध। ‘पाठ से’ क बहु वकल्पी अभ्यास म नदश है — “सही उत्तर पर मछली का
चत्र बनाइए। एक से अ धक वकल्प भी सही हो सकते ह।” इस लए हर वकल्प क जाँच यहाँ अलग-अलग क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 117 – 128
खं ड प्रश्न
8 36
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 121
कहानी पढ़ने के बाद कक्षा म मलकर बात करने के चार प्रश्न — पानी के कनारे का अपना अनुभव, भाग्य के भरोसे रहना, अपने प्राण बचाने
का उपाय और सबसे अ लगी मछली
बातचीत के लए
प्र.1 क्या आपने कभी नद , पोखर या समुद्र तट का भ्रमण कया है? आपने वहाँ क्या-क्या दे खा?
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। जो आपने सचमुच दे खा हो, वही बताइए। य द आप कभी नह गए ह , तो साफ़ कह द जए
और यह बताइए क आपने चत्र या ट .वी. पर क्या दे खा है। पोखर यानी छोटा तालाब, और भ्रमण यानी घूमने जाना।
अ े उत्तर म ये चार बात होनी चा हए —
1. आप कहाँ गए और कसके साथ गए।
2. पानी कैसा दखा — साफ़ या मटमैला, शांत या लहर वाला।
3. वहाँ कौन-कौन से जीव-जंतु और पेड़-पौधे दखे।
4. लोग वहाँ क्या-क्या कर रहे थे, और आपको कैसा लगा।
नमूना उत्तर:
पछली गरमी क छु य म हम नानी के गाँव गए थे। वहाँ गाँव के कनारे एक बड़ा पोखर है। एक शाम म और मेरे मामा वहाँ घूमने
गए। पानी हरा-सा और बहुत शांत था। कनारे पर क चड़ म बगुले खड़े थे। वे बलकुल हलते नह थे और अचानक च च मारकर
मछली पकड़ लेते थे।
Page 1 of 37
Page 3
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
पानी म छोट -छोट मछ लयाँ झुंड म तैर रही थ । कनारे पर कमल के बड़े-बड़े पत्ते थे और दो-तीन गुलाबी फूल भी खले थे। एक
जगह मढक बैठा था, जो हम दे खकर छपाक से पानी म कूद गया। दो लड़के बंसी लेकर बैठे थे और एक औरत कपड़े धो रही थी।
शाम को पानी पर लाल रंग क चमक फैल गई। मुझे वहाँ बहुत अ ा लगा और म दे र तक पानी क छोट -छोट लहर दे खता रहा।
क्या दे खा नद के कनारे पोखर या तालाब के कनारे समुद्र तट पर
पानी बहता हुआ , एक ओर को जाता ठहरा हुआ और शांत खारा पानी, बड़ी-बड़ी लहरे ं
हुआ
जीव-जंत ु मछिलयाँ, कछु ए , बग ल
ु े , जल - मेंढक , मछिलयाँ, बत्त खें, जल -कीट के कड़े, सीिपयाँ, समुद ी पक्षी
मुग
पेड़-पौधे िकनारे की घास , कास , बड़े पेड़ कमल , िसंघ ाड़ा, जलकुं भी नािरयल और ताड़ के पेड़
ज़मीन गीली िम ी और गोल पत्थर कीचड़ और घास नरम रे त
लोग क्या करते नहाना, कपड़े धोना, नाव चलाना पानी भरना, मछली पकड़ना, पशुओ ं को टहलना, नाव से मछली पकड़ना,
है ं नहलाना खेल ना
आवाज़ें पानी के बहने की धीमी आवाज़ मेंढकों की टर -टर , पिक्षयों की चहचहाहट लहरों के टकराने की गरज
इस प्रश्न का कहानी से नाता: कहानी भी एक सरोवर के कनारे से शुरू होती है। मछु आरे भी इसी तरह कनारे बैठे
और उन्ह ने पानी म तैरती मछ लयाँ दे ख — “क्षण भर म उनका ध्यान पानी म सैर करती हुई मछ लय पर गया।”
जब आप स्वयं कसी जलाशय के कनारे बैठते ह, तभी समझ आता है क वहाँ कतना कुछ दे खने लायक होता है।
ऐसे बताइए: कक्षा म बोलते समय एक-एक बात अलग वाक्य म क हए। पहले जगह बताइए, फर पानी, फर जीव-
जंतु, फर लोग। इससे सुनने वाले के मन म पूरा चत्र बन जाता है।
प्र.2 क्या कसी काय को भाग्य के भरोसे छोड़ना चा हए? अपने उत्तर का कारण द जए।
नह , कसी काम को भाग्य के भरोसे नह छोड़ना चा हए। पहले अपनी ओर से पूरी को शश करनी चा हए। भाग्य यानी वह जो
हमारे हाथ म नह है। जो हमारे हाथ म है, वह तो हम करना ही चा हए।
इसके तीन कारण ह —
1. को शश करने से ही रास्ता नकलता है। अनागत वधाता ने पहले से सोचा, इस लए वह बच गई। प्रत्युत्पन्नम त ने मौके पर
सोचा, इस लए वह भी बच गई।
2. भाग्य के भरोसे बैठने से नुकसान होता है। यद्भ वष्य ने कहा — “भाग्य म जो लखा होगा वही होगा, मुझे कुछ करने क
आवश्यकता नह है।” कहानी का अंत यही बताता है — “यद्भ वष्य क जान नह बच सक ।”
3. मेहनत का फल हम दखाई दे ता है। पढ़ने से ही सवाल हल होता है, बोने से ही फ़सल उगती है। कोई भी काम अपने आप पूरा
नह होता।
कहानी क तीन मछ लय क सोच इस ता लका से सम झए —
Page 2 of 37
Page 4
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
मछली उसक सोच उसने क्या कया क्या हुआ
अनागतिवधाता मुसीबत आने से पहले ही उसका हल रात में ही सरोवर छोड़कर पास के दू स रे पूर ी तरह सुर िक्षत रही।
सोच लो। सरोवर में चली गई।
पत्युत्पन्नमित समय आने पर प र स्थ त दे खकर उपाय जाल में फँ सने पर मरी हुई बनकर पड़ जान बच गई, पर जोिखम
ढूँ ढ़ लूँगी। गई। उठाना पड़ा।
यद् भिवष्य जो होना होगा सो तो होगा ही, कुछ करने कु छ नही ं िकया, वही ं पड़ी रही। जाल में फँ सी और जान नही ं
क ज़रूरत नह । बची।
ध्यान रखने क बात: इसका अथ यह नह क भाग्य कुछ भी नह । कभी-कभी पूरी मेहनत के बाद भी काम नह
बनता — तब भी दुख कम होता है, क्य क मन म यह संतोष रहता है क हमने अपनी ओर से कोई कमी नह छोड़ी।
कहावत भी यही कहती है — “कम करो, फल क चता मत करो।” यह कम न करने क सीख नह है।
अपने जीवन से जो ड़ए: परीक्षा के दन ‘जो होगा दे खा जाएगा’ कहकर सो जाना और पहले से पढ़ लेना — दोन
म अंतर वही है जो यद्भ वष्य और अनागत वधाता म था।
प्र.3 यद्भ वष्य मछु आर से अपने प्राण नह बचा पाई। य द उसके स्थान पर आप होते तो मछु आर से अपने प्राण कैसे
बचाते?
य द म यद्भ वष्य के स्थान पर होता, तो सबसे पहले वही करता जो अनागत वधाता ने कया — सवेरा होने से पहले सरोवर
छोड़ दे ता। जान बचाने का सबसे पक्का उपाय यही था, क्य क जाल म फँसने के बाद बचना क ठन हो जाता है।
म ये कदम उठाता —
1. चेतावनी पर भरोसा करता। मछु आर क बात मने अपने कान से सुनी थी। जब खतरे क बात पक्क हो, तब उसे टालना नह
चा हए।
2. उसी रात सरोवर छोड़ दे ता। पास वाले सरोवर तक जाने का रास्ता तो अनागत वधाता जानती ही थी। उसके साथ चला जाता।
3. दूसरी मछ लय को भी समझाता। जो मछ लयाँ मेरी राय से सहमत होकर रुक गई थ , उनसे कहता — “एक रात क
तकलीफ़ जान से बड़ी नह है।”
4. य द कसी कारण रुकना ही पड़ता, तो सवेरे पानी क तली म, पत्थर या जलकुंभी क जड़ के नीचे छप जाता, क्य क जाल
ऊपर के पानी म डाला जाता है।
5. और य द फर भी जाल म फँस जाता, तो प्रत्युत्पन्नम त क तरह शरीर सकोड़कर, आँख बंद करके नज व बन जाता —
क्य क मछु आर को स्वस्थ और जी वत मछ लयाँ ही चा हए थ ।
Page 3 of 37
Page 5
as e
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
उपाय कब काम आता है कतना सुर क्षत
m as e
.co
पहले ही जगह छोड़ दे ना खतरे की खबर िमलते ही, रात में
a g l
सबसे सुर िक्षत — जाल तक बात पहच
ु ँ ेग ी ही नही ं
se m
g l a
a
तली में या पौधों के नीचे िछपना जाल डलने से ठीक पहले कु छ हद तक सुर िक्षत, पर पक्का नही ं
िनज व बन जाना जाल में फँ स जाने के बाद आिख़री उपाय — बहुत जोिखम भरा
co m
m . ag
l a se ा उपाय वही है जो खतरे से पहले कया जाए। यद्भ वष्य के पास
यह क्रम ही सही क्य है: जान बचाने म सबसे अ
तीन उपाय थे — पर उसने एक भी नह a g
आज़माया। कहानी उसक मौत से यही सखाती है क खतरे क खबर मल
जाने पर चुप बैठना सबसे बड़ी भूल है।
co m
em.
m l as
.co a g
a s em आपको कौन-सी मछली सबसे अ लगी और क्य ?
l
प्र.4
ag
s
m a
.co agl
यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर ब े का अलग हो सकता है। पर पसंद के साथ कारण दे ना ज़रूरी है, और
a s em
अgl लगी।
कारण कहानी से नकलना चा हए।
नमूना उत्तर: मुझे अनागत वधाता सबसे a
इसके तीन कारण ह। पहला, उसने खतरे क बात सुनते ही केवल अपनी नह सोची — उसने तुरंत सारी मछ लय को बुलाकर सभा
. c om
क और सबको बताया। दूसरा, उसने सही उपाय भी बताया — “सवेरा होने से पहले हम सब यह सरोवर छोड़कर पास के दूसरे
s e m उसके साथ जाने वाली
comजाल का सामना ही नह करना पड़ा। gla
सरोवर म चले जाएँ।” तीसरा, उसने कहकर छोड़ नह दया, ब ल्क उस पर चली भी। इसी लए उसे और
.
मछ लय को
a
a s emमछ लयाँ इस तरह अलग ह —
gl
तीन
a
मछली नाम का अथ अ बात कमी
se m
com g l a
m . दू रदश ; सबको साथ ले कर चली; a
e
अनागतिवधाता
as सुरि त बच िनकली
जो आगे आने वाली बात का पबंध कु छ भी नही ं — पर उसकी बात सबने
gl
पहले से कर ले नही ं मानी
a
क्ष
पत्युत्पन्नमित िजसकी बुि मौके पर तुर ंत काम
द्ध िहम्मत नही ं हारी; जाल में फँ सकर भी बचाव का काम आिख़री क्षण पर छोड़ा
करे उपाय सोच िलया
co
— बहत
m
ु जोिखम था
m .
m
यद् भिवष्य
l a seआल
.co
जो होना होगा सो होगा कोई नही ं — के वल यह िक वह अपने य; न सोचा, न कु छ िकया; जान
ag
स्
m
घर से बहुत जुड़ी थी गँ वा दी
l a se
ag
.c
m
दूसरा उत्तर भी सही है: य द आपको प्रत्युत्पन्नम त अ लगी, तो यह क हए क उसने जाल म फँसकर भी
m a s e
co agl
हम्मत नह हारी और अपनी सूझ-बूझ से जान बचा ली — “उसने उसी क्षण अपना शरीर सकोड़ लया और आँख
m .
e
बंद करके नज व सी बनकर पड़ गई।” यह उत्तर भी पूरा और सही है, बशत आप कारण द।
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 4 of 37
Page 6
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से — पृष्ठ 121 और 122
बहु वकल्पी प्रश्न — नदश है “ नम्न ल खत प्रश्न के सही उत्तर पर मछली का चत्र बनाइए। एक से अ धक वकल्प भी सही हो सकते ह।” —
तथा स्तंभ ‘क’ और स्तंभ ‘ख’ के शब्द का मलान
पाठ से बहु वकल्पी
प्र.1 (क) अनागत वधाता को बहुत बु मती कस कारण से बताया गया है? (i) नाम के अनुरूप स्वभाव होने के
कारण (ii) सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ दे ने और चता न करने के कारण (iii) भ वष्य क संभा वत
समस्याओं का हल पहले से ही नकाल लेने के कारण (iv) श्रम और चतन से बचने क प्रवृ त्त के कारण
सही वकल्प — (i) और (iii)। इन दोन पर मछली का चत्र बनाइए। याद र खए, पुस्तक ने स्वयं लखा है — “एक से अ धक
वकल्प भी सही हो सकते ह।”
पाठ क यह पं क्त दोन उत्तर एक साथ दे ती है —
“इनमें से पहली मछली का नाम था अनागतिवधाता। वह बहुत बुिद्ध मती थी
और अपने नाम के अनुसार भिवष्य की संभ ािवत समस्याओं का हल पहले से ही
िनकालकर रखती थी।”
अब एक-एक वकल्प दे खए —
वकल्प सही या कारण
गलत
(i) नाम के अनुरूप स्वभाव होने के सही ✔ पाठ म लखा है “अपने नाम के अनुसार”। अनागत वधाता का अथ ही है — जो अभी
कारण आया नह है (अनागत), उसका प्रबंध पहले से करने वाली ( वधाता)। उसका स्वभाव
उसके नाम से पूरा-पूरा मलता था।
(ii) सब कु छ भाग्य के भरोसे छोड़ गलत ✘ यह अनागत वधाता क नह , यद्भ वष्य क बात है — “सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़
दे ने और िचंता न करने के कारण दे ना चा हए और न श्चत होकर आनंद से रहना चा हए।” और भाग्य के भरोसे बैठना
बु द्धमानी नह मानी गई; उसी से यद्भ वष्य क जान गई।
(iii) भिवष्य की संभािवत सही ✔ यह पाठ का शब्द-दर-शब्द कारण है। कहानी म उसने यही करके दखाया भी — मछु आर
समस्याओं का हल पहले से ही क बात सुनते ही सभा बुलाई और सवेरा होने से पहले सरोवर छोड़ दया।
िनकाल ले ने के कारण
(iv) श्रम और िचंतन से बचने की गलत ✘ यह भी यद्भ वष्य का स्वभाव है — “वह कसी भी संकट क संभावना पर ध्यान नह दे ती
पविृ त्त के कारण थी तथा श्रम और चतन से बचती थी।” मेहनत और सोच से बचना बु द्धमानी का उलटा
है।
Page 5 of 37
Page 7
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
दो वकल्प सही क्य ह: (iii) बताता है क उसने क्या कया, और (i) बताता है क उसका स्वभाव कैसा था। पाठ
क एक ही पं क्त म दोन बात जुड़ी हुई ह — “अपने नाम के अनुसार… हल पहले से ही नकालकर रखती थी।”
इस लए दोन पर मछली बनेगी।
नाम म अथ छपा है: तीन मछ लय के नाम संस्कृत से बने ह — अनागत वधाता (आगे का प्रबंध करने वाली),
प्रत्युत्पन्नम त ( जसक बु द्ध तत्काल उपजे), यद्भ वष्य (जो होगा सो होगा)। पाठ स्वयं कहता है क तीन “अपने
नाम के अथ को साथक करती थ ।”
प्र.1 (ख) मछु आर क बात सुनकर सभी मछ लय ने सभा क्य क ? (i) गप-शप के लए (ii) अपने प्राण बचाने हेतु
कोई उपाय ढूँ ढ़ने के लए (iii) मछु आर को अपने जाल म फँसाने के लए (iv) पास के दूसरे सरोवर म जाने
के लए
सही वकल्प — (ii) अपने प्राण बचाने हेतु कोई उपाय ढूँ ढ़ने के लए। इसी पर मछली का चत्र बनाइए। यहाँ केवल एक ही
वकल्प सही है।
पाठ क पं क्तयाँ दे खए —
“मछु आरों की बाते ं तीनों मछिलयों ने सुन ली ं। उन्होंने तुरंत सरोवर की सभी
मछिलयों को बुलाकर एक सभा की।… यह सुन कर सब मछिलयाँ भयभीत हो गईं
और पूछने लगीं िक क्या करना चािहए।”
वकल्प सही या कारण
गलत
(i) गप-शप के िलए गलत ✘ गप-शप यानी य ही बात करना। सभा जल्द म और डर के मारे बुलाई गई थी — “सब मछ लयाँ
भयभीत हो गईं।” डरे हुए लोग गप-शप नह करते।
(ii) अपने पाण बचाने सही ✔ मछ लय ने स्वयं पूछा — “क्या करना चा हए।” और अनागत वधाता ने उत्तर म उपाय बताया —
हेत ु कोई उपाय ढू ँढ़ने के “इस संकट से बचने का सबसे अ ा उपाय यह है…”। सभा का उ े श्य यही था।
िलए
(iii) मछु आ रों को अपने गलत ✘ कहानी म मछ लय ने मछु आर पर कोई वार करने क बात सोची ही नह । मछ लयाँ केवल बचना
जाल में फँ साने के िलए चाहती थ ।
(iv) पास के दू स रे गलत ✘ यह ध्यान से समझने वाली बात है। दूसरे सरोवर म जाना सभा करने का कारण नह था — वह तो
सरोवर में जाने के िलए सभा म नकला हुआ उपाय था, और वह भी केवल अनागत वधाता का सुझाया हुआ। प्रत्युत्पन्नम त
और यद्भ वष्य ने तो जाने से मना कर दया था।
Page 6 of 37
Page 8
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
अंतर पक ड़ए: प्रश्न पूछता है सभा क्य क गई — यानी उ े श्य क्या था। उ े श्य था उपाय ढूँ ढ़ना। दूसरे सरोवर
जाना उस उपाय का प रणाम है। परीक्षा म ऐसे वकल्प अकसर आते ह — कारण और प रणाम म अंतर करना
सी खए।
प्र.1 (ग) मछु आर ने प्रत्युत्पन्नम त को जाल म से बाहर क्य फक दया? (i) उन्ह जी वत मछ लयाँ चा हए थ । (ii) उन्ह
प्रत्युत्पन्नम त सुंदर नह लगी। (iii) जाल म बहुत अ धक मछ लयाँ थ । (iv) उनसे जाल उठाया नह जा रहा
था।
सही वकल्प — (i) उन्ह जी वत मछ लयाँ चा हए थ । इसी पर मछली का चत्र बनाइए।
“मछु आरों की बातचीत से वह समझ गई िक उन्हे ं स्वस्थ और जीिवत मछिलयाँ ही चािहए।
उसने उसी क्षण अपना शरीर िसकोड़ िलया और आँखे ं बंद करके िनज व सी बनकर पड़ गई।
मछु आरे मछिलयों को सँभ ालने लगे तो दे खा िक एक मरी हुई मछली है। उन्होंने त रु ंत
पत् युत् पन्नमित को जाल से िनकालकर सरोवर में फेंक िदया।”
वकल्प सही या कारण
गलत
(i) उन्हे ं जीिवत मछिलयाँ सही ✔ यही पाठ म लखा है। मछु आर ने उसे मरी हुई समझा, इस लए बाहर फक दया। पूरी चतुराई
चािहए थी ं। इसी बात पर टक थी — प्रत्युत्पन्नम त ने उनक बातचीत से यह जान लया था।
(ii) उन्हे ं पत्युत्पन्नमित गलत ✘ मछु आरे सुंदरता नह दे ख रहे थे। वे तो प्रसन्न थे क “इतनी स्वस्थ और बड़ी-बड़ी मछ लयाँ
सुंद र नही ं लगी। उन्ह ने पकड़ ली ह।” उन्ह मछली क सेहत से मतलब था, रूप से नह ।
(iii) जाल में बहुत अिधक गलत ✘ मछ लयाँ अ धक होने से वे खुश थे, दुखी नह । अ धक मछ लयाँ मलने पर कोई मछु आरा उन्ह
मछिलयाँ थी ं। वापस नह फकता।
(iv) उनसे जाल उठाया गलत ✘ पाठ म जाल के भारी होने क कोई बात नह है। अंत म वे सारी मछ लयाँ “लेकर चलते बने”
नही ं जा रहा था। — यानी जाल उठाने म उन्ह कोई क ठनाई नह हुई।
यह उपाय काम क्य कर गया: प्रत्युत्पन्नम त ने पहले सुना, फर समझा, फर कया। उसने वही रूप धर लया जो
मछु आर को नह चा हए था। यही उसक प्रत्युत्पन्न बु है — मौके पर तुरंत काम करने वाली बु द्ध।
Page 7 of 37
Page 9
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.1 (घ) मछु आर के जाल म कौन-कौन सी मछ लयाँ फँस गईं? (i) अनागत वधाता, प्रत्युत्पन्नम त और अन्य सभी
बड़ी-बड़ी मछ लयाँ (ii) प्रत्युत्पन्नम त, यद्भ वष्य और अन्य सभी बड़ी-बड़ी मछ लयाँ (iii) अनागत वधाता
और अन्य सभी बड़ी-बड़ी मछ लयाँ (iv) प्रत्युत्पन्नम त, यद्भ वष्य और अनागत वधाता
सही वकल्प — (ii) प्रत्युत्पन्नम त, यद्भ वष्य और अन्य सभी बड़ी-बड़ी मछ लयाँ। इसी पर मछली का चत्र बनाइए।
“इसके पश्चात अनागतिवधाता और बहुत -सी मछिलयाँ घर छोड़ कर पास के दू सरे
सरोवर में चली गईं। पत्युत्पन्नमित, यद् भिवष्य और कुछ अन्य मछिलयाँ जो
यद् भ िवष्य की राय से सहमत थी,ं वही ं रही ं।…
प यु पन्नमित और यद् भिव य भी जाल में फँ स गई थीं।”
त् त् ष्
वकल्प सही या कारण
गलत
(i) अनागतिवधाता, पत्युत्पन्नमित गलत ✘ अनागत वधाता का नाम इसम है, पर वह तो रात म ही सरोवर छोड़कर चली गई थी। वह
और अन्य सभी बड़ी-बड़ी मछिलयाँ जाल के समय वहाँ थी ही नह ।
(ii) पत्युत्पन्नमित, यद् भिवष्य और सही ✔ ये तीन बात पाठ से मलती ह — दोन नामी मछ लयाँ रुक थ और फँस , और उनके
अन्य सभी बड़ी-बड़ी मछिलयाँ साथ वे मछ लयाँ भी जो यद्भ वष्य क राय से सहमत होकर वह रह गई थ । पाठ कहता
है — “सभी मछ लय को पकड़ लया।”
(iii) अनागतिवधाता और अन्य गलत ✘ फर वही भूल — अनागत वधाता वहाँ थी ही नह । साथ ही इसम प्रत्युत्पन्नम त और
सभी बड़ी-बड़ी मछिलयाँ यद्भ वष्य छू ट गई ह, जो सचमुच फँसी थ ।
(iv) पत्युत्पन्नमित, यद् भिवष्य और गलत ✘ इसम अनागत वधाता को भी फँसा हुआ बताया गया है, जो गलत है। और बाक
अनागतिवधाता मछ लय का ज़क्र छू ट गया है, जब क जाल म वे भी थ ।
याद रखने का सूत्र: जो पहले चली गई — बच गई (अनागत वधाता)। जो रुक पर सोचती रही — बच गई
(प्रत्युत्पन्नम त)। जो रुक और कुछ नह कया — नह बची (यद्भ वष्य)।
प्र.2 स्तंभ ‘क’ और स्तंभ ‘ख’ म आपस म संबंध रखने वाले शब्द व कथन का मलान क जए — स्तंभ ‘क’: सुंदर,
अनागत वधाता, प्रत्युत्पन्नम त, बड़ी-बड़ी, यद्भ वष्य। स्तंभ ‘ख’: बु मती, आलसी, मछ लयाँ, तीक्ष्ण और तीव्र
बु , सरोवर। (पुस्तक म ‘सुंदर’ से ‘सरोवर’ तक क रेखा उदाहरण के रूप म पहले से खची है।)
पूरा मलान नीचे दया है। पुस्तक म पहली रेखा — सुंदर → सरोवर — उदाहरण के रूप म पहले से खची है। बाक चार रेखाएँ
आपको ख चनी ह।
Page 8 of 37
Page 10
ase
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
स्तंभ ‘क’ स्तंभ ‘ख’ क्य — पाठ क पं क्त
m as e
सुंद र
.co
सरोवर
a g l
“उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर म तीन मछ लयाँ रहती थ ।” यहाँ ‘सुंदर’ वशेषण है और वह
m
ase
(उदाहरण) ‘सरोवर’ क वशेषता बता रहा है।
gl
aअनागतिवधाता बुिद्धमती “इनम से पहली मछली का नाम था अनागत वधाता। वह बहुत बु मती थी…”
co m
. ag
पत्युत्पन्नमित तीक्ष्ण और तीव “दूसरी मछली का नाम था प्रत्युत्पन्नम त। जैसा उसका नाम था वैसी ही तीक्ष्ण और तीव्र उसक
se m
बुिद्ध बु थी।”
l a
बड़ी-बड़ी मछिलयाँ
ag और बड़ी-बड़ी मछ लयाँ उन्ह ने पकड़ ली ह।” ‘बड़ी-बड़ी’ भी वशेषण है और
“इतनी स्वस्थ
‘मछ लयाँ’ क वशेषता बताता है।
co m
m.
“यद्भ वष्य तो स्वभाव से ही आलस्यमयी थी।” आलस्यमयी यानी आलसी — जो मेहनत से बचे।
e
यद् भिवष्य आलसी
m l as
.co a g
a s em करने का तरीका: इस ता लका म दो तरह क जो ड़याँ ह। पहली तरह — वशेषण और उसका सं ा
मलान
a gl (सुंदर–सरोवर, बड़ी-बड़ी–मछ लयाँ)। दूसरी तरह — पात्र और उसका गुण (अनागत वधाता–बु द्धमती,
प्रत्युत्पन्नम त–तीक्ष्ण और तीव्र बु द्ध, यद्भ वष्य–आलसी)। पहले नाम को उनके गुण से जोड़ ली जए, फर बचे हुए
m a s
.co agl
शब्द अपने आप जुड़ जाएँगे।
a s em
gl को एक वाक्य म बोलकर दे खए — “अनागत वधाता बु द्धमती थी”,
जाँच का तरीका: मलान के बाद हरaजोड़ी
“यद्भ वष्य आलसी थी”, “बड़ी-बड़ी मछ लयाँ”। य द वाक्य सही लगे, तो जोड़ी सही है।
co m
m .
m as e
.co a g l
emऔर ल खए — पृष्ठ 123
as क समझ जाँचने वाले पाँच प्रश्न — प्रत्युत्पन्नम त का स्वभाव, मछ लय का डर, ‘जो होना होगा सो तो होगा ही’ कसका मत था,
सो चए
a g l
कहानी
se m
अनागत वधाता का उपाय और प्रत्युत्पन्नम त क चतुराई
com g l a
. a
सो चए और ल खए ले ख न
m
ase
प्र.1 agl
प्रत्युत्पन्नम त पहले से ही समस्या का समाधान करने क आवश्यकता क्य नह समझती थी?
co m
m .
seपर पूरा भरोसा था। उसे लगता था
c o m g l a
क. मुसीबत आने पर वह उसी समय हल नकाल लेगी। पाठ म यह बात इन शब्द मaहै —
प्रत्युत्पन्नम त पहले से समाधान करना ज़रूरी नह समझती थी, क्य क उसे अपनी तेज़ बु
se m
a
agl c
m .
e
“वह भिवष्य की िकसी भी आशंिकत समस्या का पहले से समाधान करने की
m a s
. co
आवश्यकता नही ं समझती थी क्योंिक उसकी सूझ -बूझ इतनी पैन ी थी िक वह
e m agl
l as
समय पड़ने पर िकसी भी उलझन का हल क्षण भर में िनकाल लेत ी थी।”
g
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 9 of 37
Page 11
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
तीन शब्द समझ ली जए — आशं कत यानी जसका डर हो। सूझ-बूझ यानी समझदारी। पैनी यानी बहुत तेज़, चाकू क धार
जैसी।
उसका यह भरोसा झूठा नह था। कहानी म उसने यह करके भी दखाया —
1. जाल म फँसते ही उसने घबराने के बजाय सोचना शुरू कया — “अब प्रत्युत्पन्नम त अपने बचने का उपाय बड़ी तीव्रता से सोचने
लगी।”
2. मछु आर क बातचीत सुनकर उसने पहचान लया क उन्ह स्वस्थ और जी वत मछ लयाँ ही चा हए।
3. उसी क्षण उसने शरीर सकोड़ लया, आँख बंद क और मरी हुई-सी बन गई।
4. मछु आर ने उसे जाल से नकालकर सरोवर म फक दया और उसक जान बच गई।
नाम म ही उत्तर छपा है: प्रत्युत्पन्नम त का अथ है — जसक म त (बु द्ध) उसी क्षण उपज आए। जस मछली क
बु द्ध मौके पर ही काम कर जाती हो, वह पहले से तैयारी करना ज़रूरी नह समझती। पाठ स्वयं कहता है क तीन
मछ लयाँ “अपने नाम के अथ को साथक करती थ ।”
पर सोचने क बात यह भी है: यह तरीका जो खम भरा है। प्रत्युत्पन्नम त बच तो गई, पर उसे जाल म फँसना पड़ा।
अनागत वधाता को तो जाल दे खना भी नह पड़ा। इस लए सबसे अ ा रास्ता यह है — पहले से भी सोचो, और
मौके पर भी तैयार रहो।
प्र.2 सभी मछ लय के भयभीत होने का क्या कारण था?
सभी मछ लयाँ इस लए डर गईं क्य क उन्ह पता चल गया क अगली सुबह दो मछु आरे बड़ा जाल लेकर आएँगे और उन
सबको पकड़ लगे। यह उनक जान का खतरा था।
बात इस तरह उन तक पहुँची —
1. मछु आर ने योजना बनाई। — “भाई कल सवेरे हम यहाँ बड़ा जाल लेकर आएँगे और इन सब मछ लय को पकड़गे।”
2. तीन मछ लय ने वह बात सुन ली। — “मछु आर क बात तीन मछ लय ने सुन ल ।”
3. उन्ह ने तुरंत सभा बुलाकर सबको बताया। — “अनागत वधाता ने सब मछ लय को संबो धत करके बताया क दो मछु आरे
अगले दन सवेरे सरोवर पर जाल डालकर सब मछ लय को पकड़ने क योजना बना रहे ह।”
4. तब सब डर गए। — “यह सुनकर सब मछ लयाँ भयभीत हो गईं और पूछने लग क क्या करना चा हए।”
भयभीत यानी डरा हुआ। उनका डर तीन बात से बना था —
डर क वजह मछ लय के लए इसका अथ
खतरा जान का था पकड़े जाने का मतलब था जीवन का अंत — मछु आ रे मछिलयाँ बेचने के िलए ले जाते है।
ं
खतरा बहत
ु पास था मछु आ रे “कल सवेरे ” आने वाले थे। सोचने और बचने के िलए के वल एक रात थी।
खतरा सब पर था जाल बड़ा था और “इन सब मछिलयों को पकड़ेंग े” कहा गया था। कोई भी अपने को सुर िक्षत नही ं मान सकता था।
Page 10 of 37
Page 12
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
डर का एक अ ा काम भी हुआ: डरकर मछ लयाँ चुप नह बैठ — उन्ह ने पूछा “क्या करना चा हए?” यही सही
सवाल था। डर तभी तक बुरा है जब तक वह हम सोचने से रोके। जो डरकर भी उपाय पूछ ले, वह बच सकता है।
प्र.3 ‘जो होना होगा सो तो होगा ही’, यह कस मछली का मानना या और वह ऐसा क्य मानती थी?
यह यद्भ वष्य नाम क तीसरी मछली का मानना था। वह ऐसा इस लए मानती थी क्य क उसका व ास था क सब कुछ भाग्य
से तय होता है, इस लए मेहनत करने और सोचने- वचारने से कोई लाभ नह ।
“तीसरी मछली का नाम था यद् भ िवष्य।… वह िकसी भी संक ट की संभ ावना पर
ध्यान नही ं दे त ी थी तथा म और िचंत न से बचती थी। उसका मत था िक यत्न
श्र
करने और सोचने -िवचारने से कोई लाभ नही ं क्योंिक ‘जो होना होगा सो तो होगा ही’
इसिलए सब कु छ भाग् य के भरोसे छोड़ दे न ा चािहए और िनिश्चंत होकर आनंद से रहना चािहए।”
शब्द के अथ — श्रम यानी मेहनत। चतन यानी गहराई से सोचना। यत्न यानी को शश। न त यानी बना कसी चता के।
उसने यह बात केवल कही नह , उस पर चली भी। जब सभा म सबको खतरा बताया गया, तब भी उसने कहा —
“मै ं तो अपने इस पुराने िनवास स्थान को छोड़कर कही ं नही ं जाऊँ गी। भाग् य में जो
िलखा होगा वही होगा, मुझे कुछ करने की आवश्यकता नही ं है। यिद भाग्य में बचना
िलखा होगा तो हम सब बच ही जाएँगे। हो सकता है मछु आरे आएँ ही नही ं।”
उसक सोच म तीन क मयाँ थ —
1. उसने खतरे क पक्क खबर को भी टाल दया। मछु आर क बात सुनी हुई थी, फर भी उसने कहा “हो सकता है मछु आरे
आएँ ही नह ।”
2. उसने आलस को भाग्य का नाम दे दया। पाठ साफ़ कहता है — “यद्भ वष्य तो स्वभाव से ही आलस्यमयी थी।”
3. उसने अपने साथ दूसर को भी रोक लया। “कुछ अन्य मछ लयाँ जो यद्भ वष्य क राय से सहमत थ , वह रह ।” वे भी जाल
म फँस ।
कहानी का नणय: कहानी ने उसक सोच को गलत ठहराया — “यद्भ वष्य क जान नह बच सक ।” उसका नाम
भी यही कहता है: यद्भ वष्य = यत् भ वष्य, यानी ‘जो होगा’। नाम, स्वभाव और अंत — तीन एक ही बात कहते ह।
Page 11 of 37
Page 13
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
पुस्तक क एक बात: पुस्तक म यह प्रश्न छपा है — “यह कस मछली का मानना या और वह ऐसा क्य मानती
थी?” यहाँ ‘या’ छपाई क भूल जान पड़ती है; पढ़ना चा हए “यह कस मछली का मानना था”। प्रश्न का अथ वही
रहता है।
प्र.4 अनागत वधाता ने मछु आर क योजना से बचने के लए क्या उपाय सुझाया?
अनागत वधाता ने यह उपाय सुझाया क सवेरा होने से पहले सब मछ लयाँ यह सरोवर छोड़कर पास के दूसरे सरोवर म चली
जाएँ।
“अनागतिवधाता ने कहा िक इस संक ट से बचने का सबसे अच् छा उपाय यह है िक
सवेरा होने से पहले हम सब यह सरोवर छोड़ कर पास के ही दू सरे सरोवर में चले जाएँ।”
यह उपाय उसने एक क्रम म रखा —
1. सबको इक ा कया। — “उन्ह ने तुरंत सरोवर क सभी मछ लय को बुलाकर एक सभा क ।”
2. खतरा साफ़-साफ़ बताया। — क दो मछु आरे कल सवेरे जाल डालकर सबको पकड़ने वाले ह।
3. उपाय बताया। — रात म ही जगह छोड़ दे ना।
4. उपाय पर स्वयं चली। — “अनागत वधाता और बहुत-सी मछ लयाँ घर छोड़कर पास के दूसरे सरोवर म चली गईं।”
यह उपाय अ ा क्य था, इसे ऐसे सम झए —
उपाय क बात इसका लाभ
जाल आने से पहले हट जाना जब मछली वहाँ होगी ही नही,ं तो जाल में फँ सने का पश्न ही नही ं उठे ग ा।
रात में जाना मछु आ रे सवेरे आने वाले थे। रात का समय िबना रुकावट िनकल जाने का सही समय था।
पास के सरोवर में जाना दू र जाने में थकान और नया खतरा होता। पास का सरोवर जल्दी और सुर िक्षत पहच
ु ँ के भीतर था।
सब िमलकर जाना झुंड में जाने पर छोटी और कमज़ोर मछिलयाँ भी पीछे नही ं छू टती ं।
यही उसका स्वभाव था: पाठ के आरंभ म ही लखा है क वह “भ वष्य क संभा वत समस्याओं का हल पहले से ही
नकालकर रखती थी।” यहाँ उसने वही कया — खतरे क खबर मलते ही, खतरा आने से पहले, हल नकाल
लया।
Page 12 of 37
Page 14
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.5 प्रत्युत्पन्नम त ने मछु आर से बचने के लए क्या उपाय कया?
प्रत्युत्पन्नम त ने मरी हुई मछली बनने का नाटक कया। उसने अपना शरीर सकोड़ लया और आँख बंद करके नज व-सी पड़ गई,
जससे मछु आर ने उसे मरा हुआ समझकर वापस सरोवर म फक दया।
उसने यह चार चरण म कया —
1. घबराने के बजाय सोचा। — “अब प्रत्युत्पन्नम त अपने बचने का उपाय बड़ी तीव्रता से सोचने लगी और उसे तुरंत सूझ गया क
क्या करना चा हए।”
2. मछु आर क बातचीत से सुराग पकड़ा। — “मछु आर क बातचीत से वह समझ गई क उन्ह स्वस्थ और जी वत मछ लयाँ ही
चा हए।”
3. तुरंत वैसा रूप बना लया जो उन्ह नह चा हए था। — “उसने उसी क्षण अपना शरीर सकोड़ लया और आँख बंद करके
नज व सी बनकर पड़ गई।”
4. चुपचाप पड़ी रही, जब तक फक न गई। — “मछु आरे मछ लय को सँभालने लगे तो दे खा क एक मरी हुई मछली है। उन्ह ने
तुरंत प्रत्युत्पन्नम त को जाल से नकालकर सरोवर म फक दया।”
पाठ का िनष्कष —
“और अपनी पत्युत्पन्न बुिद्ध के कारण उसकी जान बच गई।”
उपाय क असली चतुराई कहाँ थी: उसने मछु आर से लड़ने या भागने क को शश नह क — जाल म यह संभव
भी नह था। उसने वह बात पकड़ी जो मछु आरे चाहते थे, और ठ क उसका उलटा बन गई। जब आप कसी क
चाहत जान ल, तो बचाव का रास्ता वह से नकलता है।
प्रकृ त म भी ऐसा होता है: कई जीव खतरे के समय सचमुच मरा हुआ बनने का ढ ग करते ह — जैसे कुछ भृंग
(क ड़े) और साँप। इसे अं ेज़ी म ‘डेथ फ़ेग नग’ कहते ह। कहानी क यह चतुराई सचमुच क दु नया से ली गई है।
भाषा क बात — पृष्ठ 123, 124 और 125
Page 13 of 37
Page 15
as e
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
‘शब्द सरोवर’ के बीस शब्द को सं ा, सवनाम, वशेषण और क्रया म बाँटना; एकवचन-बहुवचन क ता लका पूरी करना; ने, म, को, के, का,
co m
e m.
क , पर से रक्त स्थान भरना; तथा दए गए वराम चह्न से वाक्य फर से लखना
m l as
.co a g
भाषा क बात व्याकरण
se m
g l a
aप्र.1 कहानी म आए कुछ सं ा, सवनाम, वशेषण तथा क्रया शब्द नीचे शब्द सरोवर म दए गए ह। इनक पहचान
करते हुए उन्ह उनके संबं धत प रवार के स्थान पर ल खए — (शब्द सरोवर: कुछ, सभा, वह, बचना, सुंदर, तीन,
co m
. ag
सरोवर, पहली, रहना, हमने, मछली, सोचना, अ ा, उन्ह ने, मछु आरा, यद्भ वष्य, दो, लखना, जाना, म)
e m
g l as
a
पहले चार प रवार को पहचानने का आसान तरीका दे ख ली जए —
co m
e m.
m as
शब्द- क्या बताता है पहचानने का सवाल
प रवार
.co a g l
em
ag lसंasा कसी व्य क्त, वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव का
नाम
“यह िकसका नाम है?” — िजसका नाम हो, वह सं ा।
m a s
.co ‘वह’। agl
सवनाम सं ा क जगह पर आने वाला शब्द “क्या यह नाम की जगह बोला जा रहा है?” — जैसे मछली की जगह
a s em
िवशेषण सं ा क वशेषता — कैa
l
सा,gकतना, कौन-सा “कै सा? िकतने? कौन-सी?” — इनका उ त्त र दे ने वाला शब्द िवशेषण।
ि या जो काम हो रहा है
co m
“क्या िकया जा रहा है?” — काम बताने वाला शब्द ि या।
m .
m as e
.co
अब बीस शब्द अपनी-अपनी जगह पर। हर खाने म पाँच-पाँच शब्द आते ह —
a g l
a s eसंmा
a gl सवनाम वशेषण क्रया
se m
com a
सभा कु छ सुंद र बचना
. a g l
m
ase
सरोवर वह तीन रहना
मछली agl
हमने पहली सोचना
m
.co
मछु आ रा उ न्होंने अच्छा िलखना
se m
com
यद् भिवष्य मैं दो
g l a जाना
m . a
e
as हर शब्द का कारण, कहानी क पं क्त के साथ —
agl
अब
.c
s e m
m a
em . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 14 of 37
Page 16
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
शब्द प रवार क्य — कहानी म इसका प्रयोग
सभा सं ा एक आयोजन का नाम — “सभी मछ लय को बुलाकर एक सभा क ।”
सरोवर सं ा एक स्थान का नाम — “एक सुंदर सरोवर म तीन मछ लयाँ रहती थ ।”
मछली सं ा एक प्राणी का नाम — “पहली मछली का नाम था अनागत वधाता।”
मछु आ रा सं ा एक व्य क्त का नाम (काम के अनुसार) — “पहला मछु आरा बोला।”
यद् भिवष्य सं ा कसी एक का अपना नाम, यानी व्य क्तवाचक सं ा — “तीसरी मछली का नाम था यद्भ वष्य।”
कु छ सवनाम नाम लए बना अ न श्चत बात के लए — “मुझे कुछ करने क आवश्यकता नह है।” यह अ नश्चयवाचक सवनाम
है।
वह सवनाम मछली के नाम क जगह — “वह बहुत बु द्धमती थी।”
हमने सवनाम ‘हम’ का रूप, बोलने वाल के नाम क जगह — “हमने पहले कभी नह दे ख ।”
उन्होंने सवनाम ‘वे’ का रूप, मछु आर के नाम क जगह — “उन्ह ने आकर जाल डाल दया।”
मैं सवनाम बोलने वाला अपने नाम क जगह कहता है — “म तो यह रहूँगी।”
सुंद र िवशेषण सरोवर कैसा है, यह बताता है — “एक सुंदर सरोवर”।
तीन िवशेषण मछ लयाँ कतनी ह, यह बताता है — “तीन मछ लयाँ”। यह संख्यावाचक वशेषण है।
पहली िवशेषण कौन-सी मछली, यह बताता है — “पहली मछली का नाम था अनागत वधाता।”
अच्छा िवशेषण उपाय कैसा है, यह बताता है — “सबसे अ ा उपाय यह है…”।
दो िवशेषण मछु आरे कतने ह, यह बताता है — “दो मछु आरे नकल रहे थे।”
बचना ि या एक काम — “य द भाग्य म बचना लखा होगा…”।
रहना ि या एक काम — “ न श्चत होकर आनंद से रहना चा हए।”
सोचना ि या एक काम — “सोचने- वचारने से कोई लाभ नह ।”
िलखना ि या एक काम — “अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।”
जाना ि या एक काम — “पास के दूसरे सरोवर म चले जाएँ।”
ध्यान द जए — ‘ना’ वाले शब्द: बचना, रहना, सोचना, लखना, जाना — पाँच के अंत म ‘ना’ है। हद म क्रया
का यह मूल रूप क्रयाथक कहलाता है और इसे पहचानना सबसे आसान है। य द कसी शब्द के अंत म ‘ना’ लगे
और वह कोई काम बताए, तो वह क्रया है।
Page 15 of 37
Page 17
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
एक बात जो उलझाती है: ‘कुछ’ कभी वशेषण भी होता है — जैसे “कुछ अन्य मछ लयाँ”। पर यहाँ इसे सवनाम
के खाने म र खए, क्य क हर खाने म ठ क पाँच शब्द आने ह और सवनाम म पाँचवाँ शब्द यही बचता है। कहानी म
इसका सवनाम वाला प्रयोग भी है — “मुझे कुछ करने क आवश्यकता नह है।”
प्र.2 कहानी म आए एकवचन और बहुवचन शब्द क खोज करते हुए नम्न ता लका को दए गए उदाहरण के अनुसार
पूण क जए — (ता लका म पहली पं क्त ‘मछली – मछ लयाँ’ भरी है; दूसरी पं क्त म बहुवचन ‘ध्व नयाँ’ दया है;
तीसरी पं क्त म एकवचन ‘म’ दया है; चौथी और पाँचव पं क्तयाँ पूरी खाली ह।)
पहले दो शब्द समझ ली जए। एकवचन यानी जो शब्द एक क बात करे। बहुवचन यानी जो शब्द एक से अ धक क बात करे।
पूरी भरी हुई ता लका यह रही —
पं क्त एकवचन बहुवचन कहानी क पं क्त
शब्द शब्द
1 (उदाहरण, छपा मछली मछ लयाँ “पहली मछली का नाम था अनागत वधाता।” / “तीन मछ लयाँ रहती
हुआ ) थ ।”
2 (बहुवचन छपा है) ध् विन ध्व नयाँ “मछु आर क ध्व नयाँ सुनाई पड़ ।”
3 (एकवचन छपा है) म हम “म तो यह रहूँगी।” / “हम सब बच ही जाएँगे।”
4 (दोनों खाली) मछु आ रा मछु आ रे “पहला मछु आरा बोला।” / “दो मछु आरे नकल रहे थे।”
5 (दोनों खाली) बात बाते ं “बहुत समय पहले क बात है।” / “मछु आर क बात तीन मछ लय ने
सुन ल ।”
कहानी से और भी जो ड़याँ मल सकती ह — इनम से कोई भी चौथी-पाँचव पं क्त म लखी जा सकती है —
एकवचन बहुवचन कहानी क पं क्त
समस्या सम स्याओं “भ वष्य क संभा वत समस्याओं का हल”
आँख आँखें “आँख बंद करके नज व सी बनकर पड़ गई”
कहानी कहािनयाँ “इस ंथ म नै तक शक्षा दे ने के उ े श्य से लखी कहा नयाँ ह”
पशु-पक्षी पशु-पिक्षयों “ व भन्न पशु-प क्षय के माध्यम से प्रस्तुत क गई ह”
वह वे “वह बहुत बु द्धमती थी।”
Page 16 of 37
Page 18
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
बहुवचन बनाने के तीन आसान नयम: (1) ई पर खत्म होने वाले स्त्री लग शब्द म ‘ई’ हटाकर इयाँ लगाइए —
मछली → मछ लयाँ, ध्व न → ध्व नयाँ, कहानी → कहा नयाँ। (2) आ पर खत्म होने वाले पु ल्लंग शब्द म ‘आ’ क
जगह ए लगाइए — मछु आरा → मछु आरे, लड़का → लड़के। (3) व्यंजन पर खत्म होने वाले कई स्त्री लग शब्द म
एँ जो ड़ए — बात → बात, आँख → आँख।
ध्यान रहे: कुछ शब्द का रूप बदलता ही नह , जैसे पानी, जल, भाग्य। ऐसे शब्द ता लका म मत र खए, क्य क
यहाँ दोन खाने अलग-अलग भरने ह।
प्र.3 (क) नीचे दए गए उपयुक्त शब्द से रक्त स्थान क पू त क जए — (ने, म, को, के, का, क , पर) — (क)
मछु आर का ध्यान पानी म सैर करती हुई मछ लय ......... गया।
उत्तर: मछु आर का ध्यान पानी म सैर करती हुई मछ लय पर गया।
कहानी म यही वाक्य छपा है —
“क्षण भर में उनका ध्यान पानी में सैर करती हुई मछिलयों पर गया।”
‘पर’ ही क्य : हद म ध्यान हमेशा कसी चीज़ ‘पर’ जाता है — “ध्यान पर जाना”, “ध्यान दे ना”। हम कहते ह
“मेरा ध्यान बोड पर गया”, “उसका ध्यान आवाज़ पर गया”। ‘म’, ‘को’ या ‘क ’ लगाने पर वाक्य कान को गलत
लगेगा।
छोटा-सा जाँच का तरीका: रक्त स्थान भरकर वाक्य को ज़ोर से प ढ़ए। जो शब्द सुनने म सहज लगे, प्रायः वही
सही होता है — और फर उसे पाठ क पं क्त से मला ली जए।
प्र.3 (ख) (ख) मछु आर ......... बात तीन मछ लय ......... सुन ल ।
उत्तर: मछु आर क बात तीन मछ लय ने सुन ल ।
“मछु आरों की बाते ं तीनों मछिलयों ने सुन ली ं।”
इस वाक्य म दो अलग-अलग काम हो रहे ह —
Page 17 of 37
Page 19
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
रक्त स्थान सही कारण
शब्द
मछु आ रों ......... बाते ं की यह बताता है क बात कसक थ । ‘बात’ स्त्री लग और बहुवचन है, इस लए ‘का’ या ‘के’
नह , ‘क ’ लगेगा।
तीनों मछिलयों ......... सुन ने यह बताता है क सुनने का काम कसने कया। बीते हुए काम म करने वाले के साथ ‘ने’ लगता
ली ं है।
‘ने’ कब लगता है: जब काम पूरा हो चुका हो और वाक्य म यह बताना हो क वह काम कसने कया, तब करने
वाले के आगे ‘ने’ आता है — “मछ लय ने सुन ल ”, “उन्ह ने जाल डाल दया”, “मछु आर ने फक दया”। पर हर
बीते वाक्य म नह — “वह चली गई” म ‘ने’ नह आता।
प्र.3 (ग) (ग) वह कहने लगी क म तो अपने इस पुराने नवास स्थान ......... छोड़कर कह नह जाऊँगी।
उत्तर: वह कहने लगी क म तो अपने इस पुराने नवास स्थान को छोड़कर कह नह जाऊँगी।
“वह कहने लगी िक मै ं तो अपने इस पुराने िनवास स्थान को छोड़कर कही ं नही ं जाऊँ गी।”
‘को’ ही क्य : जस चीज़ पर काम कया जा रहा है, उसके आगे प्रायः ‘को’ लगता है। यहाँ काम है ‘छोड़ना’ और
जसे छोड़ा जा रहा है वह है ‘ नवास स्थान’। इसी तरह हम कहते ह — “घर को छोड़कर”, “गाँव को छोड़कर”।
यह कसका कथन है: यह यद्भ वष्य क बात है। नवास स्थान यानी रहने क जगह। उसके इसी हठ ने उसक
जान ले ली — अगली सुबह वह जाल म फँस गई।
प्र.3 (घ) (घ) उत्तर भारत ......... एक सुंदर सरोवर ......... तीन मछ लयाँ रहती थ ।
उत्तर: उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर म तीन मछ लयाँ रहती थ ।
“उत्तर भारत के एक सुंद र सरोवर में तीन मछिलयाँ रहती थी ं।”
Page 18 of 37
Page 20
as e
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
रक्त स्थान सही कारण
m a se
शब्द
. c o यह बताता है क सरोवर कहाँ का है। ‘सरोवर’ पु ल्लंग हैa
g l
सरोवरas
em
उत्तर भारत ......... एक सुंद र के और आगे ‘म’ आ रहा है, इस लए
agl
‘का’ बदलकर ‘के’ हो जाता है।
सरोवर ......... तीन मछिलयाँ में यह बताता है क मछ लयाँ कहाँ रहती थ — सरोवर के भीतर। जगह के भीतर होने के लए
co m
. ag
रहती थी ं ‘म’ लगता है।
se m
l a
g क शुरुआत ही जगह बताकर होती है — पहले दे श का भाग (उत्तर
यह वाक्य कहानी क पहली पं क्त है।aकहानी
भारत), फर ठ क जगह (सुंदर सरोवर), फर पात्र (तीन मछ लयाँ)। कहानी लखते समय आप भी यही क्रम रख
co m
m.
सकते ह।
m as e
.co a g l
a s em दए गए वराम चह्न ( ? , । ! “ ” - ) म से उ चत वराम चह्न का प्रयोग करते हुए नीचे दए गए वाक्य को
a glप्र.4 (क) पुनः अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए — (क) एक समय क बात है
m a s
m .co agl
se
g l a
a
उत्तर: एक समय क बात है।
यह एक सीधा-सादा कथन है — न प्रश्न, न कसी क कही हुई बात, न आश्चय। ऐसे वाक्य के अंत म केवल पूण वराम (।) लगता
है।
co m
m .
m as e
.co
वराम चह्न नाम कब लगता है
a g l
a s e।m
gl
पूण िवराम जब वाक्य पूरा हो जाए और वह सीधा कथन हो।
a
se m
? पश्नवाचक िचह्न जब कुछ पूछा जा रहा हो।
omआश्चय, खुशी या डर प्रकट हो।
cजब g l a
िवस्मयािदबोधक िचह्न
m . a
ase
!
, अल्प िवराम
agl वाक्य के भीतर थोड़ा रुकने के लए, और सूची म शब्द के बीच।
om
“” उ द्धरण िचह्न जब कसी क कही हुई बात ज्य -क -त्य लखी जाए।
दो शब्द को जोड़ने के लए, जैसे बड़ी-बड़ी, m
. c
-
m
योजक िचह्न
a s e मल-जुलकर।
e m . co agl
g l as ध्यान द जए: कहानी का पहला वाक्य भी ऐसा ही है — “बहुत समय पहले क बात है।” कहानी शुरू करने वाले
a c
ऐसे वाक्य के अंत म हमेशा पूण वराम आता है।
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 19 of 37
Page 21
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 (ख) (ख) पहला मछु आरा बोला अरे दे खो इस सरोवर म कतनी बड़ी बड़ी मछ लयाँ ह
उत्तर: पहला मछु आरा बोला, “अरे! दे खो, इस सरोवर म कतनी बड़ी-बड़ी मछ लयाँ ह!”
इस एक वाक्य म पाँच जगह चह्न लगे। एक-एक दे खए —
कहाँ कौन-सा चह्न क्य
“बोला” के बाद , (अल्प िवराम ) बोलने वाले का प रचय पूरा हुआ, अब उसक कही हुई बात शुरू होगी। बीच म थोड़ा
रुकना है।
कही हुई बात के शुरू और “ ” (उ द्धरण िचह्न ) यह मछु आरे के अपने शब्द ह। कसी क कही हुई बात हमेशा उद्धरण चह्न के भीतर
अंत में लखी जाती है।
“अरे ” के बाद ! ‘अरे’ आश्चय का शब्द है। मछु आरा च ककर बोला था।
(िवस्मयािदबोधक )
“दे खो” के बाद , (अल्प िवराम ) बुलाने या पुकारने के बाद ज़रा-सा ठहराव आता है — “दे खो, यह क्या है!”
“बड़ी” और “बड़ी” के बीच - (योजक िचह्न ) एक ही शब्द दो बार आकर एक अथ दे रहा है, इस लए बीच म योजक चह्न — बड़ी-
बड़ी।
“है”ं के बाद ! यह पूछना नह , च कत होकर कहना है। यहाँ ? लगाना भी चल जाएगा, क्य क वाक्य
(िवस्मयािदबोधक ) म ‘ कतनी’ शब्द है।
पुस्तक म यह वाक्य ऐसे छपा है: “अरे! दे खो इस सरोवर म कतनी बड़ी मछ लयाँ ह” पहला मछु आरा बोला। —
वहाँ बोलने वाले का नाम बाद म आया है, इस लए चह्न का क्रम थोड़ा अलग है। अभ्यास म नाम पहले आया है,
इस लए अल्प वराम और उद्धरण चह्न ऊपर बताए क्रम म लगगे।
प्र.4 (ग) (ग) मछु आर ने सरोवर म अनागत वधाता प्रत्युत्पन्नम त यद्भ वष्य और बड़ी बड़ी स्वस्थ मछ लयाँ दे ख
उत्तर: मछु आर ने सरोवर म अनागत वधाता, प्रत्युत्पन्नम त, यद्भ वष्य और बड़ी-बड़ी स्वस्थ मछ लयाँ दे ख ।
Page 20 of 37
Page 22
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
कहाँ कौन-सा क्य
चह्न
अनागतिवधाता के , यह एक सूची है। सूची म नाम के बीच अल्प वराम लगता है।
बाद
पत्युत्पन्नमित के बाद , वही कारण — सूची अभी चल रही है।
यद् भिवष्य के बाद कोई िचह्न नही ं यहाँ ‘और’ शब्द आ गया है। सूची के आ ख़री नाम से पहले ‘और’ आ जाए तो अल्प वराम नह
लगाते।
बड़ी और बड़ी के बीच - दोहराए हुए शब्द को जोड़ने के लए योजक चह्न — बड़ी-बड़ी।
वाक्य के अंत में । यह सीधा कथन है, इस लए पूण वराम।
सूची का नयम याद र खए: तीन या अ धक चीज़ के नाम एक साथ लखने ह तो बीच-बीच म अल्प वराम (,)
लगाइए और आ ख़री से पहले ‘और’ लगाकर अल्प वराम छोड़ द जए — “राम, श्याम, मोहन और सीता आए।”
प्र.4 (घ) (घ) हाँ हाँ और इतनी सारी मछ लयाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नह दे ख दूसरा मछु आरा बोला
उत्तर: “हाँ, हाँ, और इतनी सारी मछ लयाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नह दे ख ।” दूसरा मछु आरा बोला।
कहाँ कौन-सा चह्न क्य
वाक्य के आरंभ में “ यह से मछु आरे क कही हुई बात शुरू होती है।
पहले ‘हाँ’ के बाद , ‘हाँ’ दो बार आया है। दोहराए जाने पर बीच म अल्प वराम लगता है।
दू स रे ‘हाँ’ के बाद , यहाँ कही हुई बात का पहला हस्सा पूरा हुआ और आगे नई बात जुड़ रही है।
“दे खी ं” के बाद ।” कही हुई बात यहाँ पूरी हुई — पहले पूण वराम, फर उद्धरण चह्न बंद।
वाक्य के अंत में । “दूसरा मछु आरा बोला” अपने आप म एक पूरा कथन है, इस लए पूण वराम।
पुस्तक क छपाई दे खए: पृष्ठ 118 पर यह वाक्य ऐसे छपा है — “हाँ, हाँ, और इतनी सारी मछ लयाँ एक ही जगह
हमने पहले कभी नह दे ख ” दूसरा मछु आरा बोला। वहाँ उद्धरण के भीतर अं तम पूण वराम नह है। दोन तरीके
चलते ह, पर उद्धरण के भीतर वाक्य पूरा हो तो चह्न लगाना अ धक अ ा माना जाता है।
Page 21 of 37
Page 23
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 (ङ) (ङ) मछु आर क बात तीन मछ लय ने सुन ल
उत्तर: मछु आर क बात तीन मछ लय ने सुन ल ।
इस वाक्य म केवल एक ही चह्न लगेगा — अंत म पूण वराम (।)। बाक कसी चह्न क ज़रूरत नह , क्य क —
यह कसी क कही हुई बात नह है, इस लए उद्धरण चह्न नह ।
इसम कुछ पूछा नह जा रहा, इस लए प्रश्नवाचक चह्न नह ।
इसम आश्चय नह है, इस लए वस्मया दबोधक चह्न नह ।
इसम कोई सूची या ठहराव नह है, इस लए अल्प वराम नह ।
इसम कोई दोहराया हुआ शब्द नह है, इस लए योजक चह्न नह ।
सबसे बड़ा नयम: वराम चह्न सजावट के लए नह लगाए जाते। जतने ज़रूरी ह उतने ही लगाइए। बना ज़रूरत
का चह्न वाक्य को बगाड़ दे ता है।
पाँच वाक्य एक साथ:
(क) एक समय क बात है।
(ख) पहला मछु आरा बोला, “अरे! दे खो, इस सरोवर म कतनी बड़ी-बड़ी मछ लयाँ ह!”
(ग) मछु आर ने सरोवर म अनागत वधाता, प्रत्युत्पन्नम त, यद्भ वष्य और बड़ी-बड़ी स्वस्थ मछ लयाँ दे ख ।
(घ) “हाँ, हाँ, और इतनी सारी मछ लयाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नह दे ख ।” दूसरा मछु आरा बोला।
(ङ) मछु आर क बात तीन मछ लय ने सुन ल ।
अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 125 और 126
कहानी से आगे बढ़कर सोचने के तीन प्रश्न — प्रत्युत्पन्नम त क दूसरी योजना, समुद्र म इतना जल कहाँ से आता है, और दोन मत्र मछ लय क
क ल्पत बातचीत
अनु मान और कल्पना कल्पना
प्र.1 प्रत्युत्पन्नम त ने मछु आर से बचने क जो योजना बनाई, य द वह उसम सफल न होती तो उसक अन्य योजना
क्या हो सकती थी?
पहले यह याद कर ली जए क उसक पहली योजना क्या थी — मरी हुई मछली बनकर पड़ जाना, क्य क मछु आर को “स्वस्थ
और जी वत मछ लयाँ ही चा हए” थ । य द यह चाल न चलती, यानी मछु आरे उसे मरी हुई मानकर न फकते, तो उसे कोई दूसरा
उपाय सोचना पड़ता।
यह कल्पना का प्रश्न है, पर कल्पना कहानी से मेल खानी चा हए। प्रत्युत्पन्नम त के पास ये उपाय हो सकते थे —
Page 22 of 37
Page 24
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
अन्य योजना वह कैसे करती यह क्य चल सकती थी
1. जाल के छे द से शरीर को और िसकोड़कर , जाल के िकसी ढीले या वह पहले भी शरीर िसकोड़ चुक ी थी। जाल में जगह-जगह जोड़
िनकल भागना फटे िहस्से से िफसलकर पानी में लौट जाना। होते है ं और जब वह पानी से बाहर उठाया जाता है, तब कही-ं न-
कही ं ढीलापन आ ही जाता है।
2. उछलकर पानी िजस क्षण जाल ऊपर उठे और वह िकनारे के पास मछिलयाँ उछल सकती है।
ं िकनारा पास था, इसिलए एक अच्छी
में िगर जाना हो, पूर ी ताकत से उछलना। छलाँग उसे वापस पानी में पहच
ु ँ ा सकती थी।
3. बीमार -सी पंख ढीले छोड़कर , एक ओर लुढ़ककर , बीमार मछु आ रे बीमार मछली भी नही ं ले जाते, क्योंिक वह िबकती नही ं।
िदखना मछली जैस ी बन जाना। मछु आ रों को “स्वस्थ” मछिलयाँ चािहए थी ं।
4. सबसे नीचे दब जाल की सबसे नीचे की तह में, बाकी मछिलयों के जाल में “इतनी सारी” मछिलयाँ थी ं। मछु आ रे एक -एक को
जाना नीचे दुबक जाना और मौका िमलते ही िनकल दे खने में समय लगाते, और उसी बीच उसे मौका िमल सकता
भागना। था।
5. मछु आ रों का ज़ोर से फड़फड़ाकर जाल का एक कोना िहला यह उसकी ‘क्षण भर में उपाय िनकालने’ वाली बुिद्ध से मेल खाता
ध् यान बँटाना दे ना, तािक मछु आ रे उधर दे खें और वह दू स री ओर है।
से िखसक जाए।
नमूना उत्तर: य द मरी हुई बनने क चाल न चलती, तो प्रत्युत्पन्नम त सबसे नीचे क मछ लय के नीचे दुबक जाती और चुपचाप
मौका दे खती रहती। जैसे ही मछु आरे जाल को कनारे पर पलटते, वह पूरी ताकत से उछलकर पानी म कूद जाती। वह जानती थी क
कनारा पास है और पानी म पहुँचते ही उसे कोई नह पकड़ सकता।
हर योजना म एक बात समान है: हर उपाय म वह पहले दे खती है, फर करती है। यही उसका स्वभाव है —
“समय पड़ने पर कसी भी उलझन का हल क्षण भर म नकाल लेती थी।” अ योजना वही होती है जो सामने क
स्थ त दे खकर बने।
प्र.2 क्या आपने समुद्र दे खा है? अनुमान लगाकर बताइए क समुद्र म इतना अ धक जल कहाँ से आता है।
समुद्र का सारा जल मुख्य रूप से न दय से और वषा से आता है। दु नया क सब बड़ी न दयाँ अंत म समुद्र म ही गरती ह, और
आकाश से गरने वाली वषा का बहुत बड़ा हस्सा सीधे समुद्र पर ही बरसता है।
पहले प्रश्न का पहला हस्सा — य द आपने समुद्र दे खा हो तो बताइए क कहाँ दे खा और कैसा लगा। य द नह दे खा, तो क हए —
“मने अभी तक समुद्र नह दे खा, चत्र म दे खा है।” दोन उत्तर ठ क ह।
अब सम झए क पानी वहाँ पहुँचता कैसे है। यह एक गोल चक्र है, जो कभी रुकता नह —
1. सूरज क गरमी से समुद्र का पानी भाप बनता है। भाप हल्क होती है, इस लए ऊपर उठ जाती है।
2. ऊपर ठं ड म भाप जमकर बादल बन जाती है।
3. बादल हवा के साथ ज़मीन क ओर बढ़ते ह और वषा करते ह।
4. वषा का पानी पहाड़ से नाले और न दयाँ बनकर बहता है। पहाड़ क बफ़ पघलकर भी न दय म मलती है।
5. सारी न दयाँ बहती हुई अंत म समुद्र म जा गरती ह। इस तरह पानी फर वह पहुँच जाता है जहाँ से चला था।
Page 23 of 37
Page 25
as e
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
m l as
.co a g
a s em बादल
ag l बादल
हवा बादल ले जाती है वष
co m
e m . ag
भाप
g l as
a पहाड़
co m
m.
नदी
m as e
.co a g l
m
ase
समुद
agl
m a s
जल-चक्र — समुद्र से भाप उठती है, बादल बनते ह, वषा होती है, न दयाँ बहती ह और पानी फर समुद्र म लौट आता है।
m .co agl
l a se
पानी का ोत
a g
वह समुद्र तक कैसे पहुँचता है
m
निदयाँ गंग ा, बह्मपुत्र , नम दा, कावेर ी — सब अंत में समुद में िमल जाती है।
ं निदयाँ िदन-रात, बारहों महीने पानी लाती रहती
है।
ं
. co
e m
m l as
.co a g
वष धरती का लगभग तीन-चौथाई भाग समुद है, इसिलए बरसने वाला अिधकतर पानी सीधे समुद पर ही िगरता है।
s m़ ों की बफ़
eपहाड
gl a गरमी में िहमालय जैस ी बफ़ िपघलकर निदयों में आती है और निदयों के साथ समुद तक पहच
ु ँ ती है।
a
ज़मीन के भीतर का ज़मीन के नीचे बहता हुआ पानी भी धीरे -धीरे िरसकर समुद में िमलता रहता है।
se m
पानी
com g l a
m . a
gl ase
a
तो समुद्र भरता क्य नह ? क्य क जतना पानी उसम आता है, लगभग उतना ही भाप बनकर उड़ भी जाता है।
इसी लए समुद्र का स्तर लगभग एक-सा बना रहता है। इसी चक्र को जल-चक्र कहते ह।
co m
m .
o m l a se
एक रोचक बात: समुद्र का पानी खारा होता है और न दय का मीठा। न दयाँ बहते-बहते ज़मीन से थोड़े-थोड़े नमक
.cके कण साथ ले आती ह। पानी तो भाप बनकर उड़ जाता है, पर नमक वहaरहg जाता है। लाख वष म यही नमक
m इक ा होकर समुद्र को खारा बना दे ता है।
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 24 of 37
Page 26
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 अपनी सूझ-बूझ के कारण प्रत्युत्पन्नम त मछु आर से बच गई। मान ली जए क वह तैरकर पास के सरोवर म
अपनी मत्र अनागत वधाता के पास पहुँच गई। दोन म आपस म क्या-क्या बातचीत हुई होगी? अपनी लेखन-
पु स्तका म ल खए।
यह कल्पना का प्रश्न है, पर बातचीत कहानी से जुड़ी होनी चा हए। दोन मछ लयाँ मत्र थ , इस लए बातचीत म मलने क खुशी,
बीती घटना, यद्भ वष्य का दुख और आगे क सीख — ये चार बात आनी चा हए।
नमूना उत्तर (क ल्पत संवाद):
कौन क्या कहा होगा
अनागतिवधाता “पत्युत्पन्नमित! तुम ? मुझे तो लगा था िक अब तुम से कभी भेटं न होगी। आओ , पास आओ। ”
पत्युत्पन्नमित “सखी, मैं रात भर तैर ती रही हू।
ँ बहुत थक गई हू।
ँ पर मैं जीिवत हू ँ — यही बहुत है। ”
अनागतिवधाता “मछु आ रे सचमुच आ गए थे क्या?”
पत्युत्पन्नमित “हाँ, ठीक सवेरे । उ न्होंने बड़ा जाल डाला और सरोवर की सारी मछिलयाँ खी ंच ली ं। मैं भी जाल में थी। ”
अनागतिवधाता “िफर तुम िनकली ं कै से ?”
पत्युत्पन्नमित “उनकी बातचीत से मैं समझ गई िक उ न्हे ं के वल जीिवत मछिलयाँ चािहए। मैंने उसी क्षण शरीर िसकोड़ िलया, आँखें बंद कर
ली ं और मरी हईु -सी पड़ गई। उ न्होंने मुझे मरा हआ
ु समझकर पानी में फें क िदया। ”
अनागतिवधाता “तुम्हारी बुिद्ध ने आज तुम्हे ं बचा िलया। पर सच कहू ँ — मेर ा मन काँप रहा है। एक पल की दे र हो जाती तो?”
पत्युत्पन्नमित “सच कह रही हो। उस िदन मैंने तुम्हारी बात नही ं मानी थी। अब समझी िक खतरे से पहले हट जाना ही सबसे अच्छा उपाय
है। ”
अनागतिवधाता “और यद् भिवष्य? वह कहाँ है?”
पत्युत्पन्नमित “(धीमे स्वर में) वह नही ं बच सकी, सखी। वह वही ं पड़ी रही और कहती रही िक भाग्य में जो िलखा होगा वही होगा। मछु आ रे
उसे और उसकी साथी मछिलयों को ले गए। ”
अनागतिवधाता “बहुत बुर ा हुआ । हमने उसे िकतना समझाया था। भाग्य पर भरोसा रखना बुर ा नही,ं पर हाथ-पैर न िहलाना बुर ा है। ”
पत्युत्पन्नमित “अब से हम दोनों एक साथ रहेगं ी। तुम पहले से सोचना, मैं मौके पर सँभालूँग ी। ”
अनागतिवधाता “ठीक कहा। यही दो बाते ं िमलकर जीवन बचाती है ं — पहले से सोचना और समय पर करना। चलो, अब िवश्राम कर लो। ”
यह संवाद ठ क क्य है: इसम कोई बात कहानी से बाहर नह गई। जाल, मछु आर क चाहत, मरी हुई बनने क
चाल, यद्भ वष्य का अंत — सब पाठ से लया गया है। कल्पना केवल इतनी है क दोन क भट हुई और उन्ह ने यह
सब आपस म कहा।
Page 25 of 37
Page 27
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
संवाद लखने का तरीका: (1) बाईं ओर बोलने वाले का नाम ल खए। (2) फर छोट रेखा (–) या अल्प वराम
लगाइए। (3) फर उसक बात ल खए। (4) य द बोलते समय कोई भाव या काम दखाना हो, तो उसे कोष्ठक म
ल खए — जैसे “(धीमे स्वर म)”।
बूझो तो जान — पृष्ठ 126
चत्र-पहेली — पानी म तैरती पाँच मछ लय म से बलकुल एक जैसी दो मछ लयाँ पहचानना। उत्तर पुस्तक म पृष्ठ के नीचे उलटा छपा है।
बू झो तो जान पहे ली
प्र.1 नीचे पानी म तैरती हुई मछ लय को ध्यान से दे खए और बताइए क इनम से बलकुल एक जैसी दो मछ लयाँ
कौन-सी ह?
2
1 5
3
4
पृष्ठ 126 क चत्र-पहेली — पानी म तैरती पाँच मछ लयाँ, जन पर 1 से 5 तक अंक लखे ह।
उत्तर: अंक 2 और अंक 4 वाली मछ लयाँ बलकुल एक जैसी ह।
यही उत्तर पुस्तक म पृष्ठ 126 के नीचे दाईं ओर उलटा छपा है — “उत्तर – अंक 2 और 4 क मछ लयाँ”। पुस्तक को घुमाकर दे खने
पर वह सीधा पढ़ा जा सकता है।
पहेली हल करने के लए चार बात एक-एक करके मलाइए — रंग, शरीर का आकार, पंख और पूँछ, तथा शरीर पर बनी
धा रयाँ। पूरी जाँच यह रही —
Page 26 of 37
Page 28
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
मछली सर का शरीर का रंग पंख और मुद्रा (तैरने का ढं ग) नष्कष
रंग पूँछ
1 गहरा हल्का हरा-सफ़ेद गहरे बगनी सर नीचे क ओर, सीधी अलग — इसका रंग बाकी
नीला- खड़ी सब से गहरा नीला है।
बगनी
2 गुलाबी चाँद जैसा सफ़ेद, उस गुलाबी, पूँछ दो सीधी लेट हुई, मुँह दाईं यह 4 से पूर ी तरह िमलती है
पर छोट -छोट शल्क भाग म कट ओर ✔
3 पीला हल्का गुलाबी-सफ़ेद पीले सीधी लेट हुई, मुँह दाईं अलग — के वल यही मछली
ओर पीले रंग की है।
4 गुलाबी चाँद जैसा सफ़ेद, उस गुलाबी, पूँछ दो सीधी लेट हुई, मुँह बाईं यह 2 से पूर ी तरह िमलती है
पर छोट -छोट शल्क भाग म कट ओर ✔
5 गुलाबी सफ़ेद गुलाबी सर ऊपर क ओर, सीधी अलग — रंग तो िमलता है,
खड़ी; शरीर पतला और पूँछ पर शरीर पतला है और पूँछ
छोट छोटी।
2 और 4 म केवल एक फ़क दखता है — दशा। मछली 2 का मुँह दाईं ओर है और मछली 4 का बाईं ओर। पर
दशा बदलने से मछली बदल नह जाती। य द आप मछली 4 का चत्र काग़ज़ पर बनाकर उसे पलट द, तो वह हूबहू
मछली 2 बन जाएगी — वही गुलाबी सर, वही चाँद -सा शरीर, वही गुलाबी पंख और वही कट हुई पूँछ।
ऐसी पहेली हल करने का तरीका: (1) पहले सबसे अलग दखने वाली मछ लय को छाँट द जए — यहाँ 3
(पीली) और 1 (नीली) तुरंत बाहर हो गईं। (2) अब बची हुई मछ लय म केवल एक-एक बात मलाइए — पहले रंग,
फर आकार, फर पंख। (3) दशा और मुद्रा को अंत म दे खए, क्य क वे अकसर आपको भ्रम म डालने के लए ही
बदली जाती ह।
पुस्तकालय से — पृष्ठ 127
व ालय के पुस्तकालय म जाकर शब्दकोश क सहायता से कहानी के छह शब्द के अथ लखना — पहला शब्द ‘गाढ़ ’ उदाहरण के रूप म
भरा हुआ है
पु स्तकालय से शब्दकोश
प्र.1 शब्द : गाढ़ — अथ : ......... (पुस्तक म यह अथ उदाहरण के रूप म पहले से भरा है — घ नष्ठ, गहरी)
अथ: घ नष्ठ, गहरी। यह अथ पुस्तक म उदाहरण के रूप म पहले से छपा है।
पाठ क पं क्त — “उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर म तीन मछ लयाँ रहती थ जनम गाढ़ मत्रता थी।”
इसका मतलब — उनक दोस्ती बहुत पक्क और गहरी थी। ‘घ नष्ठ’ यानी बहुत नज़द क ।
Page 27 of 37
Page 29
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
अपने वाक्य म — रमेश और सलीम क गाढ़ मत्रता पूरे मोहल्ले म जानी जाती है।
ध्यान द जए: ‘गाढ़ा’ शब्द के दो अथ ह। एक — जो पतला न हो, जैसे “गाढ़ दाल”। दूसरा — जो गहरा हो, जैसे
“गाढ़ मत्रता”। यहाँ दूसरा अथ लगेगा। शब्दकोश म अकसर एक ही शब्द के कई अथ मलते ह; उनम से वही चु नए
जो आपके वाक्य म ठ क बैठे।
प्र.2 शब्द : वनोद — अथ : .........
अथ: हँसी-मज़ाक, मन बहलाना, आनंद।
पाठ क पं क्त — “तीन मछ लयाँ सरोवर क अन्य मछ लय के साथ मल-जुलकर वनोद और सैर करती रहती थ ।”
इसका मतलब — तीन मछ लयाँ बाक मछ लय के साथ हँसी-मज़ाक करती थ और घूमती- फरती थ । इस एक शब्द से पता चल
जाता है क सरोवर म जीवन कतना सुखी था — और इसी लए आगे आने वाला खतरा और भी बड़ा लगता है।
अपने वाक्य म — छु के दन दादाजी हम कहा नयाँ सुनाकर वनोद कराते ह।
‘ वनोद’ लड़क का नाम भी होता है। ऐसे कई शब्द ह जो अथ भी रखते ह और नाम भी बनते ह — जैसे आनंद,
प्रकाश, करण, हष।
प्र.3 शब्द : तीक्ष्ण — अथ : .........
अथ: तेज़, पैनी, धारदार।
पाठ क पं क्त — “दूसरी मछली का नाम था प्रत्युत्पन्नम त। जैसा उसका नाम था वैसी ही तीक्ष्ण और तीव्र उसक बु द्ध थी।”
इसका मतलब — उसक बु द्ध चाकू क धार जैसी तेज़ थी। जो बात दूसर को दे र म समझ आती, वह उसे तुरंत समझ आ जाती
थी। इसी तेज़ बु द्ध ने जाल म फँसने पर उसक जान बचाई।
अपने वाक्य म — बाज़ क तीक्ष्ण दृ ष्ट बहुत दूर से भी शकार दे ख लेती है।
प्रयोग अथ
तीक्ष्ण बुिद्ध बहुत तेज़ समझ
तीक्ष्ण धार बहुत पैनी धार
तीक्ष्ण दृ िष्ट बहत
ु तेज़ नज़र
Page 28 of 37
Page 30
as e
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
शब्द : चतन — अथ : .........
e
प्र.4
m l as
.co a g
a s em
aglगहराई से सोचना, मनन करना, कसी बात पर दे र तक वचार करना।
अथ:
पाठ क पं क्त — “वह कसी भी संकट क संभावना पर ध्यान नह दे ती थी तथा श्रम और चतन से बचती थी।”
com
. ag
इसका मतलब — यद्भ वष्य सोचने से भी जी चुराती थी। कसी बात पर बैठकर वचार करना उसे बोझ लगता था। यही आलस्य
se m
a
आगे चलकर उसक जान का दुश्मन बना।
l
अपने वाक्य म — कोई बड़ा नणय लेने से पहलेgथोड़ा चतन कर लेना चा हए।
a
co m
m.
चतन और चता — दोन अलग ह। चतन यानी सोचना, जो अ बात है। चता यानी घबराहट और फ़क्र, जो
मन को दुखी करती है। चतन से हल नकलता है, चता से केवल परेशानी बढ़ती है।
m as e
.co a g l
se m
g l a
a प्र.5 शब्द : वश्राम — अथ : .........
m a s
m .co agl
a se
ag l
अथ: आराम, थकान मटाने के लए रुकना।
पाठ क पं क्त — “इतना रमणीय स्थान दे खकर वे सरोवर के कनारे वश्राम करने बैठ गए।”
co m
.
इसका मतलब — दोन मछु आरे चलते-चलते थक गए थे, इस लए सरोवर के कनारे सुस्ताने बैठ गए। यही वश्राम कहानी का मोड़
e m
m as
बन गया — बैठे-बैठे उनक नज़र मछ लय पर पड़ी और उन्ह ने जाल लाने क योजना बना ली।
.co a g l
m
अपने वाक्य म — दोपहर क धूप म थोड़ी दे र पेड़ क छाया म वश्राम कर ली जए।
l a se
ag यात्रा म एक जगह ऐसी भी होती है जसे वश्रामगृह कहते ह — यानी वह घर जहाँ यात्री रुककर आराम करते ह।
se m
com a
‘ वश्राम’ शब्द से बना यह एक और शब्द है।
. a g l
m
ase
प्र.6
agl
शब्द : श्रम — अथ : .........
co m
m .
m as e
.co a g l
emपाठ क पं क्त — “वह कसी भी संकट क संभावना पर ध्यान नह देती थी तथा श्रम और चतन से बचती थी।”
अथ: मेहनत, प रश्रम, शरीर या मन से कया गया क ठन काम।
a s
agl इसका मतलब — यद्भ वष्य मेहनत से दूर भागती थी। उसे लगता था क “यत्न करने और सोचने- वचारने से कोई लाभ नह ”।
.c
s e m
m a
कहानी इसी सोच को गलत ठहराती है — श्रम करने वाली दोन मछ लयाँ बच गईं, श्रम से बचने वाली नह बची।
m . co
अपने वाक्य म — कसान के श्रम से ही हमारी थाली म अनाज आता है।
e agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 29 of 37
Page 31
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
‘श्रम’ से बने शब्द अथ
पिरश्रम पूर ी मेहनत
श्रिमक मेहनत करके जीिवका चलाने वाला व्यिक्त
श्रमदान िबना पैसे िलए सबके भले के िलए िकया गया काम
शब्दकोश दे खने का तरीका: (1) शब्दकोश म शब्द वणमाला के क्रम म होते ह — अ, आ, इ, ई … से लेकर ह
तक। (2) पहले शब्द का पहला अक्षर दे खए, फर दूसरा, फर तीसरा। जैसे ‘श्रम’ ढूँ ढ़ने के लए ‘श’ वाला पन्ना
खो लए। (3) एक ही शब्द के कई अथ मल तो वाक्य म डालकर दे खए क कौन-सा अथ ठ क बैठता है। (4) मला
हुआ अथ अपनी लेखन-पु स्तका म एक उदाहरण-वाक्य के साथ ल खए — इससे शब्द याद रह जाता है।
आपक अ भव्य क्त — ख े ह अंगरू — पृष्ठ 128
Page 30 of 37
Page 32
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
पाठ के अं तम पृष्ठ क ग त व ध — पंचतंत्र और ईसप क दं तकथाओं का प रचय, तथा दए गए चत्र क सहायता से ‘ख े ह अंगूर’ कहानी को
अपने शब्द म क वता या कहानी के रूप म लखना
आपक अ भव्य क्त ले ख न
प्र.1 दए गए चत्र क सहायता से ‘ख े ह अंगूर’ कहानी को अपने शब्द म क वता या कहानी के रूप म ल खए।
पृष्ठ 128 पर छपा चत्र — पेड़ पर चढ़ अंगूर क बेल और उसके नीचे खड़ी लोमड़ी।
इस ग त व ध म आप अपने शक्षक या अ भभावक क सहायता भी ले सकते ह।
पहले पृष्ठ 128 पर द गई बात समझ ली जए। पुस्तक बताती है क पंचतंत्र का प्रसार समय के साथ अरब दे श और यूरोप तक
हुआ। प्राचीन यूनान (आज का ीस) म रची गई ईसप क दं तकथाएँ भी पंचतंत्र क प्रेरणा से ही बन । दं तकथा यानी वह कहानी
जो पीढ़ -दर-पीढ़ मुँह से मुँह तक चलती आई हो। ‘लोमड़ी और अंगूर’ या ‘ख े ह अंगूर’ इन्ह म से एक है।
चत्र म क्या दख रहा है — एक ऊँचा पेड़ है जस पर अंगूर क बेल चढ़ है। ऊपर अंगूर के हरे-पीले गु े लटक रहे ह। नीचे एक
लोमड़ी अपने पछले पैर पर खड़ी होकर, गदन ऊपर उठाकर उन्ह गु को दे ख रही है। पीछे पहाड़ और हरी घास है।
अ कहानी म ये चार बात ज़रूर होनी चा हए —
1. शुरुआत: लोमड़ी कौन थी, कहाँ थी, और उसे भूख क्य लगी थी।
2. इ ा: उसने अंगूर दे खे और उन्ह पाने क को शश क ।
3. को शश और हार: उसने कई बार उछलकर दे खा, पर अंगूर बहुत ऊँचे थे।
Page 31 of 37
Page 33
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
4. अंत और सीख: हारकर उसने कहा “अंगूर ख े ह” और चली गई।
नमूना उत्तर — कहानी के रूप म:
एक जंगल म एक लोमड़ी रहती थी। एक दन वह सवेरे से भोजन क खोज म घूम रही थी। दोपहर हो गई, पर उसे कुछ नह मला।
भूख से उसका पेट जलने लगा।
घूमते-घूमते वह एक बगीचे के पास पहुँची। वहाँ एक ऊँचा पेड़ था और उस पर अंगूर क बेल चढ़ हुई थी। बेल पर पके हुए अंगूर के
बड़े-बड़े गु े लटक रहे थे। धूप म वे चमक रहे थे। लोमड़ी के मुँह म पानी आ गया।
उसने सोचा — “बस, आज तो पेट भर जाएगा।” वह पछले पैर पर खड़ी हुई और गदन ऊपर उठाकर अंगूर तक पहुँचने क
को शश करने लगी। पर अंगूर बहुत ऊँचे थे। फर वह थोड़ा पीछे हट , दौड़कर आई और ज़ोर से उछली। अंगूर फर भी हाथ न आए।
उसने बार-बार को शश क । कभी पत्थर पर चढ़कर उछली, कभी पेड़ के तने से टे क लगाई। पर हर बार वह नीचे ही गरी। अब वह
थक चुक थी और उसक साँस फूल रही थी।
आ ख़र म उसने अंगूर क ओर दे खा और मुँह बनाकर बोली — “छोड़ो! ये अंगूर तो ख े ह। ऐसे अंगूर भला कौन खाता है!” यह
कहकर वह वहाँ से चल द ।
सीख: जो चीज़ हम नह मलती, उसे बुरा कह दे ना आसान होता है। पर सच यह है क उससे न चीज़ मलती है, न मन को शां त।
ठ क यह है क या तो और को शश करो, या हार मानकर सच बोलो — “मुझसे यह नह हो सका।”
नमूना उत्तर — क वता के रूप म:
Page 32 of 37
Page 34
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
भूखी लोमड़ ी वन में आई,
ऊँ चे पेड़ पर बेल िदखाई।
लटके थे अंगूर सुन हरे,
दे ख-दे खकर मन ललचाई॥
पंजों पर वह खड़ ी हो गई,
गरदन ऊपर बड़ ी हो गई।
उछली, कू दी, दौड़ लगाई,
पर हर बार वही ं िगर आई॥
हाँफ रही थी, थक भी गई थी,
आँखों में बस लालच ही थी।
मुँह बनाकर बोली धीरे —
“ख े है ं ये अंगूर मेरे!”॥
सीख यही है, प्यारे भाई —
िमले नही ं तो दोष न लाई।
या तो िफर से यत्न करो त मु ,
या िफर सच कह दो — “हम हारे”॥
चत्र का भाग कहानी म उसे कैसे लख
ऊँचा पेड़ और उस पर चढ़ ी बेल “एक ऊँचा पेड़ था और उस पर अंग ूर की बेल चढ़ ी हुई थी। ”
अंग ूर के लटकते ग च्ु छे “बेल पर पके अंग ूर के बड़े-बड़े ग च्ु छे लटक रहे थे। ”
िपछले पैर ों पर खड़ी लोमड़ी “वह िपछले पैर ों पर खड़ी होकर अंग ूर तक पहच
ु ँ ने की कोिशश करने लगी। ”
ऊपर उठी हुई गरदन और नज़र “उसकी नज़र अंग ूर ों पर िटकी थी और मुँह में पानी आ रहा था। ”
पीछे के पहाड़ और खुल ा मैद ान “वह जंग ल में भोजन की खोज में दू र -दू र तक घूम आई थी। ”
Page 33 of 37
Page 35
as e
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
.
‘तीन मछ लयाँ’ से इस कहानी का नाता: दोन कहा नय म जानवर पात्र ह और दोन के अंत म एक सीख है। यही
com
नी त-कथाओं क पहचान है। ‘तीन मछ लयाँ’ कहती है — सोचो और समय पर करो। ‘ख े ह अंगeूरm
m a s
l “ब को रोचक
’ कहती है —
हार को बहाने.cसेoमत ढको। पुस्तक बताती है क पंचतंत्र क रचना ही इसी उ े श्य से हुई थीg—
eकmे माध्यम से जीवन-मूल्य सखाना।” a
a s
agl
कथाओं
co m
ag
लखते समय याद र खए: (1) कहानी हमेशा भूतकाल म लखी जाती है — “गई”, “दे खा”, “बोली”। (2) हर नई
m .
as e
घटना के लए नया अनु े द बनाइए। (3) बीच म एक-दो संवाद डा लए, इससे कहानी जीवंत हो जाती है। (4) अंत
a g l
म सीख एक अलग पं क्त म ल खए। (5) क वता लखनी हो तो पहले दो-दो पं क्तय के तुक ( मलती हुई आवाज़)
सोच ली जए — जैसे ‘आई – दखाई’, ‘गई – थी’।
co m
e m.
m l as
.co a g
a s em
a l
gअध्याय — एक नज़र म
s
तीन मछ लयाँ एक कहानी है। कहानी यानी ऐसी रचना जसम कोई घटना क्रम से सुनाई जाती है। यह कहानी मालती दे वी ने
m a
.co agl
लखी है और यह पंचतंत्र पर आधा रत है — यानी इसक मूल कथा पंचतंत्र से ली गई है और ले खका ने उसे अपने शब्द म
फर से लखा है।
a s em
कहानी क जगह है उत्तर भारत का एकgसु
a l ंदर सरोवर। सरोवर यानी बड़ा तालाब। वहाँ तीन मछ लयाँ रहती थ जनम गाढ़
मत्रता थी — गाढ़ यानी बहुत गहरी, बहुत पक्क । तीन बाक मछ लय के साथ मल-जुलकर वनोद (हँसी-मज़ाक) और
सैर करती रहती थ ।
co m
m .
se
तीन के नाम ही उनका स्वभाव बताते ह। अनागत वधाता — जो आगे आने वाली मुसीबत का हल पहले से सोच लेती है।
o m l a
.cनह करती। कहानी म लखा है क तीन ‘अपने नाम के अथ को साथक करतीaथg’ — साथक करना यानी नाम को सच
प्रत्युत्पन्नम त — जसक बु द्ध मौके पर तुरंत काम करती है। यद्भ वष्य — जो कहती है ‘जो होना होगा सो तो होगा ही’ और
se m
कुछ
a
agl
कर दखाना।
घटना य शुरू होती है — एक दन शाम को दो मछु आरे सरोवर के कनारे से नकले। इतना रमणीय (सुंदर, मन को भाने
se m
co।m” l a
वाला) स्थान दे खकर वे वश्राम करने बैठ गए। बड़ी-बड़ी मछ लयाँ दे खकर उन्ह ने तय कया — “भाई कल सवेरे हम यहाँ बड़ा
. a g
तुरm
जाल लेकर आएँगे और इन सब मछ लय को पकड़गे
यह बात तीन मछ लय ने सुन ली। उन्ह नेse
l a ंत सब मछ लय क सभा बुलाई। अनागत वधाता ने चेतावनी द और उपाय
agयह सरोवर छोड़कर पास के दूसरे सरोवर म चले जाएँ। प्रत्युत्पन्नम त ने कहा क वह वह
बताया — सवेरा होने से पहले सब
रहेगी और समय आने पर उपाय ढूँ ढ़ लेगी। यद्भ वष्य ने कहा क वह अपना पुराना नवास स्थान नह छोड़ेगी, क्य क भाग्य म
जो लखा होगा वही होगा।
. c om
s e mत्पन्नम त और यद्भ वष्य भी जाल
a
cमoफmँ स गईं। अनागत वधाता पहले ही नकल गई थी, इस लए वह पूरी तरह सुरaक्षतglरही।
अगली सुबह मछु आरे सचमुच आ गए। उन्ह ने जाल डालकर सारी मछ लयाँ पकड़ ल । प्रत्यु
.
as em जाल म फँसकर भी प्रत्युत्पन्नम त ने हार नह मानी। मछु आर क बातचीत से वह समझ गई क उन्ह स्वस्थ और जी वत
agl मछ लयाँ ही चा हए। उसने उसी क्षण अपना शरीर सकोड़ लया, आँख बंद कर ल और नज व सी बनकर पड़ गई — नज व
c
m .
e
यानी जसम जान न हो। मछु आर ने उसे मरी हुई समझकर सरोवर म फक दया। इस तरह उसक जान बच गई। यद्भ वष्य क
m a s
co agl
जान नह बच सक ।
m .
se
कहानी क सीख साफ़ है — सोचने और समय पर काम करने से जान बचती है, आलस्य और ‘जो होगा सो दे खा
l a
पर तुरंत काम करने वाली बुaद्धg(प्रत्युत्पन्नम त)। जसने कुछ नह सोचा, वही मारी गई।
जाएगा’ वाली सोच से नह । दो तरह क बु द्ध दोन काम आईं — पहले से सोच लेने वाली बु द्ध (अनागत वधाता) और मौके
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 34 of 37
Page 36
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
पाठ के अंत म पृष्ठ 120 पर पंचतंत्र का प रचय छपा है — यह नी त सा हत्य का एक व शष्ट ंथ है, जो लगभग 2500 से
3000 वष पूव भारत म रचा गया। इसके लेखक आचाय वष्णु शमा माने जाते ह। यह ब को रोचक कथाओं से जीवन-
मूल्य सखाने के लए बनाया गया था। पुस्तक के अं तम पृष्ठ 128 पर ‘ख े ह अंगूर’ क ग त व ध है, जसम बताया गया है
क ईसप क दं तकथाएँ भी पंचतंत्र क प्रेरणा से रची गईं।
Page 35 of 37
Page 37
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
सरोवर बड़ा तालाब, झील “उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर म तीन मछ लयाँ गाँव के सरोवर म कमल के फूल
रहती थ ” खले ह।
गाढ़ घिनष्ठ, बहुत गहरी “तीन मछ लयाँ रहती थ जनम गाढ़ मत्रता थी” मीना और र ज़या क गाढ़ दोस्ती है।
वनोद हँस ी-मज़ाक, मन बहलाना “ मल-जुलकर वनोद और सैर करती रहती थ ” छु के दन हम सब वनोद करते ह।
बु द्धमती समझदार स्त्री या मादा “वह बहुत बु द्धमती थी” हमारी दाद बहुत बु द्धमती ह।
संभा वत जो आगे हो सकता है “भ वष्य क संभा वत समस्याओं का हल पहले से संभा वत बा रश दे खकर मने छाता
ही नकालकर रखती थी” रख लया।
तीक्ष्ण तेज़, पैनी “वैसी ही तीक्ष्ण और तीव्र उसक बु द्ध थी” चाकू क धार बहुत तीक्ष्ण है।
तीव्र बहुत तेज़ “तीक्ष्ण और तीव्र उसक बु द्ध थी” रेल तीव्र ग त से चली जा रही थी।
आशं कत िजसका डर हो, िजसकी िचंता “भ वष्य क कसी भी आशं कत समस्या का पहले आशं कत तूफ़ान क खबर सुनकर
हो से समाधान” सब घर लौट आए।
सूझ-बूझ समझदारी, मौके पर सही सोच “उसक सूझ-बूझ इतनी पैनी थी” अपनी सूझ-बूझ से उसने आग बुझा
द।
पैनी तेज़, धारदार “उसक सूझ-बूझ इतनी पैनी थी” बाज़ क नज़र बहुत पैनी होती है।
उलझन मुिश्कल, ग त्ु थी “ कसी भी उलझन का हल क्षण भर म नकाल लेती यह सवाल पहले उलझन लगा, फर
थी” आसान हो गया।
साथक िजसका अथ सच हो जाए, “अपने नाम के अथ को वह भी साथक करती थी” उसने मेहनत करके अपना नाम
अथपूण साथक कर दखाया।
श्रम मेहनत “श्रम और चतन से बचती थी” कसान का श्रम ही हम अनाज दे ता
है।
चतन गहराई से सोचना “श्रम और चतन से बचती थी” बड़ा नणय लेने से पहले चतन
ज़रूरी है।
यत्न कोिशश, पयत्न “यत्न करने और सोचने- वचारने से कोई लाभ नह ” बना यत्न कए कुछ नह मलता।
न श्चत िबना िकसी िचंता के “ न श्चत होकर आनंद से रहना चा हए” काम पूरा करके म न श्चत हो गया।
अकस्मात् अचानक, िबना बताए “उस सरोवर के कनारे से अकस्मात् दो मछु आरे अकस्मात् बादल घर आए और वषा
नकल रहे थे” होने लगी।
रमणीय सुंद र, मन को भाने वाला “इतना रमणीय स्थान दे खकर वे वश्राम करने बैठ पहाड़ का यह रमणीय दृश्य भूलता
गए” नह ।
Page 36 of 37
Page 38
कक्षा 5 हद अध्याय 10 तीन मछ लयाँ AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
वश्राम आराम “सरोवर के कनारे वश्राम करने बैठ गए” दोपहर म दाद थोड़ी दे र वश्राम
करती ह।
सहष खुशी-खुशी “दूसरे मछु आरे ने सहष सम्म त दखाई” मने सहष उसक मदद स्वीकार कर
ली।
सम्म त सहमित, राज़ी होना “दूसरे मछु आरे ने सहष सम्म त दखाई” सबक सम्म त से यात्रा क तारीख
तय हुई।
संबो धत िकसी की ओर मुँह करके “अनागत वधाता ने सब मछ लय को संबो धत प्रधानाचाय ने सभा को संबो धत
करना कहना, सबसे कहना करके बताया” कया।
भयभीत डरा हआ
ु “सब मछ लयाँ भयभीत हो गईं” गरज सुनकर छोटा भाई भयभीत हो
गया।
आलस्यमयी आलस से भरी हुई “यद्भ वष्य तो स्वभाव से ही आलस्यमयी थी” आलस्यमयी दनचया से काम बगड़
जाता है।
कदा चत् शायद, हो सकता है “मना रह थ क कदा चत् मछु आरे नह आएँगे” कदा चत् आज वषा हो जाए।
ध्व न आवाज़ “मछु आर क ध्व नयाँ सुनाई पड़ ” घंट क ध्व न सुनते ही सब कक्षा म
चले गए।
नज व िजसमें जान न हो “आँख बंद करके नज व सी बनकर पड़ गई” पत्थर एक नज व वस्तु है।
प्रत्युत्पन्न मौके पर तुर ंत काम करने वाली “अपनी प्रत्युत्पन्न बु द्ध के कारण उसक जान बच प्रत्युत्पन्न बु द्ध से उसने गरता हुआ
बु द्ध बुिद्ध गई” गमला थाम लया।
Page 37 of 37