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CBSE Class 12 Question Paper 2024 Solution Hindi Core

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CBSE Class 12 Question Paper 2024 Solution Hindi Core – Text

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Page 1

अत्यंत गोपनीय - केवल आंतरिक एवं सीमित प्रयोग हे तु
सीनियर स्कूल सर्टि फिकेट परीक्षा, िरवरी-2024
अंक-योजिा - ववषय : र् द
ं ी (आधार)
ववषय कोड संख्या : 302, प्रश्ि पत्र कोड : 2/1/1, 2/1/2, 2/1/3
सामान्य निदे श :-
1. आप जानते हैं कक पिीक्षार्थियों के सही औि उर्ित आकलन के मलए उत्ति पुस्ततकाओं का िूलयांकन एक
िहत्त्वपर्
ू ि प्रकिया है । िल
ू यांकन िें एक छोटी-सी त्रटु ट भी गंभीि सितया को जन्ि दे सकती है , जो
पिीक्षार्थियों के भववष्य, मिक्षा प्रर्ाली औि अध्यापन-व्यवतथा को भी प्रभाववत कि सकती है । इससे बिने के
मलए अनुिोध ककया जाता है कक िूलयांकन प्रािं भ किने से पूवि ही आप िूलयांकन ननदे िों को पढ़ और समझ
लें।
2. िूलयांकन नीनत एक गोपनीय नीनत है क्योंकक यह आयोस्जत पिीक्षाओं की गोपनीयता, ककए गए िूलयांकन
तथा कई अन्य पहलुओं से संबंर्धत है | इसका ककसी भी तिह से साविजननक होना पिीक्षा प्रर्ाली के मलए
उपयुक्त नहीं है , जो लाखों पिीक्षार्थियों के भववष्य को प्रभाववत कि सकता है | इस नीनत दततावेज़ को ककसी
से भी साझा किना, ककसी पत्रत्रका िें प्रकामित किना औि सिािाि पत्र/वेबसाइट आटद िें छापना IPC के
तहत कायिवाही को आिंत्रत्रत कि सकता है |
3. िूलयांकन अंक-योजना िें टदए गए ननदे िों के अनुसाि ही ककया जाना िाटहए, अपनी व्यस्क्तगत व्याख्या या
ककसी अन्य धािर्ा के अनुसाि नहीं। यह अननवायि है कक अंक-योजना का अनुपालन पूिी तिह से ननष्ठापूवक
ि
ककया जाए। ालााँफक, मल
ू यांकि करते समय िवीितम सच
ू िा और ज्ञाि पर आधाररत अथवा िवाचार पर
आधाररत उत्तरों को उिकी सत्यता और उपयुक्तता को परखते ु ए पूरे अंक र्दए जाएाँ।
4. अंक योजना िें उत्तिों के मलए केवल सझ
ु ाए गए िल
ू य त्रबंद ु िामिल हैं, ये केवल टदिा ननदे िों की प्रकृनत िें हैं
औि संपूर्ि उत्ति का गठन नहीं किते हैं। पिीक्षाथी अपनी अमभव्यस्क्त कि सकते हैं औि यटद अमभव्यस्क्त
सही है तो उर्ित अंक टदए जाएँ।
5. िुख्य पिीक्षक प्रत्येक िूलयांकन कताि के द्वािा पहले टदन जाँिी गई पाँि उत्ति पुस्ततकाओं के िूलयांकन की
जाँि ध्यानपूवक
ि किें औि आश्वतत हों कक िूलयांकन-योजना िें टदए गए ननदे िों के अनुसाि ही िूलयांकन
ककया जा िहा है । पिीक्षकों को बाकी उत्ति पुस्ततकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आश्वतत हों कक उनके अंकन िें
कोई मभन्नता नहीं है ।
6. पिीक्षक सही उत्ति पि सही का र्िह्न (√) लगाएंगे औि गलत उत्ति पि गलत का (×) र्िह्न लगाएँगे। पिीक्षक
द्वािा िल
ू यांकन किते सिय सही का र्िह्न (√) न लगने पि यह आभास होगा कक उत्ति सही है औि कोई
अंक नहीं टदया गया है । पिीक्षकों द्वािा यह त्रुटट सवािर्धक की जाती है ।
7. यटद ककसी प्रश्न के उपभाग हों तो कृपया प्रश्नों के उपभागों के उत्तिों पि दायीं ओर अंक टदए जाएँ। बाद िें
इन उपभागों के अंकों का योग बायीं ओर के हामिये िें मलखकि उसे गोलाकृत कि टदया जाए। इसका
अिुपालि दृढ़तापूवक
ि फकया जाए।
8. यटद ककसी प्रश्न के कोई उपभाग न हों तो बायीं ओि के हामिये िें अंक टदए जाएँ औि उन्हें गोलाकृत ककया
जाए। इसके अनुपालन िें भी दृढ़ता का पालन ककया जाए।

9. यटद पिीक्षाथी ने अनतरिक्त प्रश्न का उत्ति दे टदया है , तो स्जस उत्ति पि अर्धक अंक प्राप्त हो िहे हों, उसे ही
तवीकाि किें । दस
ू िे उत्ति को “अनतरिक्त प्रश्न” टटप्पर्ी के साथ काट टदया जाना िाटहए।
10. एक ही प्रकाि की अिुद्र्ध बाि-बाि हो तो उस पि एक से अर्धक बाि अंक न काटे जाएँ।

1|Page

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11. यहाँ यह ध्यान िखना होगा कक िूलयांकन िें संपूर्ि अंक पैिाने 0-80 (उदाहिर् 0-80 अंक जैसा कक प्रश्न-पत्र
िें टदया गया है ) का प्रयोग अभीष्ट है अथाित पिीक्षाथी ने यटद सभी अपेक्षक्षत उत्ति-त्रबंदओ
ु ं का उललेख ककया
है तो उसे पूिे अंक दे ने िें संकोि न किें ।
12. प्रत्येक पिीक्षक को पूर्ि कायि-अवर्ध िें अथाित 8 घंटे प्रनतटदन अननवायि रूप से िल
ू यांकन कायि किना है औि
प्रनतटदन 20 उत्ति-पुस्ततकाएँ जाँिनी हैं।
13. यह सनु नस्श्ित किें कक आप ननम्नमलखखत प्रकाि की त्रटु टयाँ न किें , जो वपछले वर्षों िें की जाती िही हैं I
• उत्ति पुस्ततका िें ककसी उत्ति या उत्ति के अंि को जाँिे त्रबना छोड़ दे ना।
• उत्ति के मलए ननधािरित अंकों से अर्धक अंक दे ना।
• उत्ति िें टदए गए अंकों का योग ठीक न होना।
• उत्ति पुस्ततका के अंदि टदए गए अंकों का आविर् पष्ृ ठ पि सही अंतिर् न होना।
• आविर् पष्ृ ठ पि प्रश्नानुसाि योग किने िें अिुद्र्ध होना।
• योग का अंकों औि िब्दों िें िेल न होना।
• उत्ति पुस्ततका से ऑनलाइन अंकसूिी िें सही अंतिर् न होना।
• कुल अंकों के योग िें अिुद्र्ध होना I
• उत्तिों पि सही का र्िह्न (√) लगाना, ककं तु अंक न दे ना (सनु नस्श्ित किें कक (√) या (×) का उपयुक्त र्िह्न
ठीक ढं ग से औि तपष्ट रूप से लगा हो।)
• उत्ति का एक भाग सही औि दस
ू िा गलत हो, ककं तु अंक न टदए गए हों।
14. उत्ति पुस्ततकाओं का िूलयांकन किते हुए यटद कोई उत्ति पूर्ि रूप से गलत हो तो उस पि (x) ननिान लगाएँ
औि िन्
ू य (0) अंक दें ।
15. उत्ति पुस्ततका िें ककसी प्रश्न का त्रबना जाँिे हुए छूट जाना या योग िें ककसी भूल का पता लगना, िूलयांकन
समिनत के सभी लोगों की छवव औि बोर्ि की प्रनतष्ठा को धमू िल किता है ।
16. सभी पिीक्षक वाततववक िूलयांकन कायि से पहले ‘तपॉट इवैलयूएिन’ के ननदे िों से सुपरिर्ित हो जाएँ।
17. प्रत्येक पिीक्षक सनु नस्श्ित किे कक सभी उत्तिों का िल
ू यांकन हुआ है । आविर् पष्ृ ठ पि तथा योग िें कोई
अिुद्र्ध नहीं िह गई है तथा कुल योग को िब्दों औि अंकों िें सही मलखा गया है ।
18. केंद्रीय िाध्यमिक मिक्षा बोर्ि पुन: िूलयांकन प्रकिया के अंतगित पिीक्षार्थियों के अनुिोध पि ननधािरित िुलक
भुगतान के बाद उन्हें उत्ति पुस्ततकाओं की फोटो कॉपी प्राप्त किने की अनुिनत दे ता है । सभी
पिीक्षकों/अनतरिक्त प्रधान पिीक्षकों/प्रधान पिीक्षकों को एक बाि पुनः याद टदलाया जाता है कक उन्हें यह
सुननस्श्ित किना होगा कक िूलयांकन अंक-योजना िें टदए गए प्रत्येक उत्ति के मलए िूलय त्रबंदओ
ु ं के अनुसाि
सख्ती से ककया जाए।

2|Page

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सीननयि सेकेंर्िी तकूल सटटि कफकेट पिीक्षा फिविी -2024
अंक योजना : टहन्दी (आधार) प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या 2/1/1, 2/1/2, 2/1/3
कक्षा : XII
अधधकतम अंक : 80
सामान्य निर्दे श

• अंक योजिा का उद्र्दे श्य मूलयांकि को अधधकाधधक वस्तुनिष्ठ बिािा है ।
• वर्िनात्िक प्रश्नों के अंक योजिा में दर्दए गए उत्तर बबंर्द ु अंनतम िह ं हैं। ये सुझावात्मक एवं सांकेनतक हैं।
• यदर्द पर क्षार्थी इि सांकेनतक बबंर्दओ
ु ं से भिन्ि, ककं तु उपयक्
ु त उत्तर र्दें तो उन्हें अंक दर्दए जाएँ।
• मूलयांकि कायय निजी व्याख्या के अिुसार िह ं, बल्लक अंक योजिा में निदर्दय ष्ट निर्दे शािुसार ह ककया जाए।

खंड अ 40 अंक
(बहुविकल्पीय/िस्‍तुपरक प्रश्‍नों के उत्तर)

प्रश्न सं प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या उत्ति संकेत /िूलय त्रबंद ु ननधािरित
अंक
ववभाजन
2/1/1 2/1/2 2/1/3
1 1 2 1 अपटठत बोध – गद्यांि पि आधारित प्रश्नों के उत्ति 10x1=10

(i) (i) (i) (C) संकुर्ित 1

(ii) (ii) (ii) (A) व्यापक दृस्ष्टकोर् 1

(iii) (iii) (iii) (A) केवल कथन I सही है I 1

(iv) (iv) (iv) (C) वसुधैव कुटुम्बकि ् की भावना 1

(v) (v) (v) (A) लोगों के बीि बढ़ते पाितपरिक भेदभाव के कािर् 1

(vi) (vi) (vi) (B) वैस्श्वक सिझ, सम्िान औि सद्भाव 1

(vii) (vii) (vii) (A) यद्
ु ध औि संघर्षि का आतंक सिाप्त कि सकता है 1

(viii) (viii) (viii) (D) ववश्व-धिोहि बनकि 1

(ix) (ix) (ix) (A) ववश्व बंधुत्व की भावना से 1

(x) (x) (x) (B) जब बंधुत्व की भावना से ववश्व-कलयार् होगा 1

3|Page

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प्रश्न सं प्रश्न पत्र गच्
ु छ संख्या उत्ति संकेत /िल
ू य त्रबंद ु ननधािरित

2/1/1 2/1/2 2/1/3

2 2 1 2 अपटठत बोध – पद्यांि पि आधारित प्रश्नों के उत्ति 5x1=5

(i) (i) (i) (C) हतािा-ननिािा 1

(ii) (ii) (ii) (A) आत्िववश्वास का 1

(iii) (iii) (iii) (B) उत्साहहीन व्यस्क्तयों को 1

(iv) (iv) (iv) (C) 1(iii), 2(ii), 3(i) 1

(v) (v) (v) (C) िस्क्तभि जीने का 1

3 3 3 3 अमभव्यस्क्त औि िाध्यि पि आधारित प्रश्नों के उत्ति 5X1=5

(i) (i) (i) (B) एंकि-बाइट 1

(ii) (ii) (ii) (D) प्रभासाक्षी 1

(iii) (iii) (iii) (B) फोटो या ग्राकफक्स होना 1

(iv) (iv) (iv) (A) ततंभ लेखन 1

(v) (v) (v) (B) वविेर्षीकृत रिपोटटिं ग 1

पाठ्यपत
ु तक पि आधारित प्रश्नों के उत्ति

4 4 4 5 काव्यांि पि आधारित प्रश्नों के उत्ति 5X1=5

(i) (i) (i) (C) एक यात्रा है 1

(ii) (ii) (ii) (A) उड़ान की 1

4|Page

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प्रश्न सं प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या उत्ति संकेत /िूलय त्रबंद ु ननधािरित

(iii) (iii) (iii) (B) र्िडड़या की उड़ान एक सीिा तक है पिं तु कववता की उड़ान 1
असीि है I

(iv) (iv) (iv) (D) कलपनािीलता 1

(v) (v) (v) (B) र्िडड़या 1

5 5 5 4 गद्यांि पि आधारित प्रश्नों के उत्ति 5X1=5

(i) (i) (i) (B) त्यजन 1

(ii) (ii) (ii) (D) तवाथि औि भ्रष्टािाि के दष्ु परिर्ाि 1

(iii) (iii) (iii) (D) जब िनष्ु य ननज तवाथि को सवोपरि िानता है तब वह भी 1
भ्रष्टािाि का अंग बन जाता है I
(iv) (iv) (iv) (A) 1(i), 2(iii), 3(ii) 1

(v) (v) (v) (C) तवाथि औि भ्रष्टािाि से दिू ी बना लेने से 1

6 6 6 6 पिू क पाठ्यपत
ु तक पि आधारित प्रश्नों के उत्ति 10X1=10

(i) (i) (i) (A) िानस पुत्र 1

(ii) (ii) (ii) (C) बौद्ध ततूप 1

(iii) (iii) (iii) (C) 33 फीट 1

(iv) (iv) (iv) (D) कथन तथा कािर् दोनों सही हैं औि कािर्, कथन की सही 1
व्याख्या किता है ।

(v) (v) (v) (B) कथन (II) सही है । 1

5|Page

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प्रश्न सं प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या उत्ति संकेत /िूलय त्रबंद ु ननधािरित

(vi) (vi) (vi) (C) सांसारिक िानकों के अनुसाि बड़ा आदिी िान मलये जाने के 1
कािर्

(vii) (vii) (vii) (B) िाँ से 1

(viii) (viii) (viii) (C) संघर्षि किने की 1

(ix) (ix) (ix) (A) अपनी गलती तवीकाि किना 1

(x) (x) (x) (B) सिाज-पोवर्षत होने िें 1

खंर् ब 40 अंक
(वर्िनात्िक प्रश्नों के उत्ति)

7 7 7 7 6
ककसी एक ववर्षय पि ििनात्िक लेख

• आिं भ - 1

• ववर्षयवततु - 3

• प्रततनु त - 1

• भार्षा - 1

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प्रश्न सं प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या उत्ति संकेत /िूलय त्रबंद ु ननधािरित

8 8 8 8 2X2=4
(i)(क) - - • कथानक के अनस
ु ाि दृश्य का और्ित्य 2
• कथानुसाि ताककिक ववकास
• सिय एवं तथान के आधाि कहानी का ववभाजन किके
ननधाििर्
• नाटक की गनत को बार्धत किने वाले उबाऊ दृश्यों से
बिना
(कोई दो त्रबंद ु अपेक्षक्षत)
अथवा
(i)(ख) - - अवर्ध - 15 से 30 मिनट 1+1=2

कािर् -
• िे डर्यो पि ननस्श्ित सिय पि ननस्श्ित कायििि का होना
• श्रव्य िाध्यि िें नाटक या वाताि के मलए िनुष्य की
एकाग्रता की अवर्ध 15-30 मिनट (सीमित) होना
(कोई एक त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

(ii)(क) - - कि सिय िें अपने वविािों को संकमलत कि उन्हें सुंदि औि सुघड़ 2
ढं ग से अमभव्यक्त किना I

अथवा
(ii)(ख) - - • मलखखत भार्षा का ववतताि 2
• छपे हुए (िुटद्रत) िब्दों िें तथानयत्व
• र्िंतन एवं वविाि ववश्लेर्षर् का िाध्यि

- (i)(क) - • दोनों िें कथानक, पात्र, परिवेि का होना 2

• कथा का िमिक ववकास
• द्वंद्व, संवाद औि िििोत्कर्षि
• पात्रों के िध्य द्वंद्व होना
अथवा
- अवर्ध 15-30 मिनट 2
(i)(ख) - •
• पात्रों की सीमित संख्या (न्यूनति 5, अर्धकति 20)
• ध्वनन प्रभाव एवं संवाद
• सीधे, सिल एवं संक्षक्षप्त वाक्य
• एक्िन िटहत कहानी

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प्रश्न सं प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या उत्ति संकेत /िूलय त्रबंद ु ननधािरित

- (ii)(क) - • वविािों का साथिक औि सुसंगत होना 2
• िस्ततष्क िें रूपिे खा बनाना
• पितपि एक - दस
ू िे का खंर्न किती हुई बातों के प्रयोग
से बिाव
• दो - तीन मिनट ठहिकि िन िें उभिने वाले वविािों को
ववतताि दे ना
• अपेक्षाकृत तपष्ट फोकस वाले ववर्षय मिलने पि वविाि -
प्रवाह को थोड़ा ननयंत्रत्रत िखना

अथवा
- (ii)(ख) - • पात्रों के िनोभावों एवं पात्र संबंधी ववववध जानकािी की 2

ध्वनन-संकेतों के िाध्यि से ही अमभयस्क्त
• दृश्य एवं संवादों की साथिकता ध्वनन-संकेतों से प्रभाववत
• ककसी भी दृश्य, आवाज़ व िोिांि आटद का ध्वनन के
िाध्यि से व्यक्त होना

2
- - (i)(क) • कहानी की िूल संवेदना से िेल खाना
• पात्र, घटना एवं परिस्तथनत की अनक
ु ू लता
• और्ित्यपूर्ि एवं प्रभाविाली
• संक्षक्षप्तता

अथवा

- - (i)(ख) • मसनेिा औि िं गिंि िें कथानक की संवाद औि अमभनय 2
के द्वािा प्रततुनत, िे डर्यो नाटक िें ध्वनन प्रभाव औि
संवादों द्वािा संप्रेवर्षत
• मसनेिा औि िं गिंि िें कथानक की प्रततुनत वेिभूर्षा, िंि
- सज्जा की सहायता से भी संभव, िे डर्यो नाटक िें िात्र
ध्वनन - संकेतों के िाध्यि से ही संभव
• मसनेिा औि िं गिंि िें एक्िन प्रधान कहानी की
खब
ू सिू ती से प्रततनु त, िे डर्यो नाटक िें ध्वनन संकेत के
िाध्यि से उबाऊ होने की संभावना

8|Page

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प्रश्न सं प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या उत्ति संकेत /िूलय त्रबंद ु ननधािरित

- - (ii)(क) • ववर्षय से जुड़ी जानकारियों औि तथ्यों का अभाव 2
• िब्द-भंर्ाि के अलपज्ञान के कािर् िन के वविािों को
िब्दबद्ध किने की कटठनाई
• लेखन की बनी-बनाई लीक छोड़कि कुछ नया किने िें
आत्िववश्वास की किी
• पठन-पाठन का अभ्यास न होना
• लेखन का अभ्यास न होने से िुद्ध औि सिय - सीिा िें
मलखने की असिथिता
• भार्षा के प्रनत उपेक्षा या अरुर्ि से वाक्य - ननिािर् या
लेखन दोर्षपर्
ू ि होना

अथवा
- - (ii)(ख) फ्लैि या ब्रेककं ग न्यूज - सबसे पहले कोई बड़ी ख़बि न्यूज के रूप 1+1=2
िें तत्काल दििकों तक पहुँिाना तथा कि से कि िब्दों िें सूिना
दे ना
संिाि साधन- टे लीववज़न, इंटिनेट, िे डर्यो

9 9 9 9 (पाठ्यपुततकों पि आधारित प्रश्न) 2X3=6

(क) (क) (क) (ककन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 3
• श्रव्य एवं दृश्य - दोनों िाध्यिों िें उपलब्ध होना
• खबिों की तत्काल पुस्ष्ट
• न केवल खबिों का संप्रेर्षर्, पुस्ष्ट, सत्यापन होना, बस्लक
खबिों का बैकग्राउं र्ि तैयाि किने िें तत्काल सहायता
मिलना
• सभी प्रकाि की सूिनाओं के आदान-प्रदान, ििाि व
परिििािओं का साधन होने के साथ-साथ िनोिं जन का भी
साधन होना
• सबसे तीव्र एवं सटीक िाध्यि
(कोई तीन त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

आिय 1+2=3
(ख) (ख) (ख)
व्यावसानयक रूप से प्रमिक्षक्षत न होने पि भी ककसी ववर्षय वविेर्ष िें
जानकािी औि अनुभव के आधाि पि सिझ को सहजता से

9|Page

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प्रश्न सं प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या उत्ति संकेत /िूलय त्रबंद ु ननधािरित

व्याख्यानयत कि सकने की सीिा तक ववकमसत किना
मभन्न
• रुर्ि एवं सकियता के साथ ववर्षय वविेर्ष की व्यावसानयक
डर्ग्री की आवश्यकता (व्यावसानयक वविेर्षज्ञता)
• पत्रकािीय वविेर्षज्ञता िें जानकािी अनुभव औि रुर्ि के
आधाि पि वविेर्षज्ञता

(ग) (ग) (ग) • साटहस्त्यक लेखन का संबंध कलपना से भी होना, सिािाि 3
लेखन का संबंध सिसािनयक औि वाततववक घटनाओं,
सितयाओं औि िुद्दों से ही होना
• साटहस्त्यक लेखन अर्धकांितः आत्िसंतस्ु ष्ट के मलए मलखा
जाना
• सिािाि लेखन तात्कामलकता औि पाठकों को ध्यान िें
िखकि मलखा जाना
• साटहस्त्यक लेखन िें काल औि अवर्ध के बंधन का न
होना
• सिािाि लेखन िें तात्कामलकता की दृस्ष्ट से सिय का
िहत्वपूर्ि होना
(कोई तीन त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

(पाठ्यपुततकों पि आधारित प्रश्न) 2X3=6
10 10 10 11
(ककन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत)

बच्िों के मलए 1+2=3
(क) (क) (क)
कािर् -
• कपास की तिह कोिल, िल
ु ायि औि लिीला होना
• श्वेत कपास के सिान बच्िों की भावनाओं का तवच्छ एवं
पववत्र होना
• कपास के सािान बच्िों के ििीि का भी हलका होना

• बात का भाव आसानी से सिझ िें आ जाना 3
(ख) (ख) (ख)
• भार्षा का उद्दे श्य भी यही होना
• संप्रेर्षर्-िस्क्त बनाए िखना
• िोिकता बनाए िखना
(कोई तीन त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

10 | P a g e

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प्रश्न सं प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या उत्ति संकेत /िूलय त्रबंद ु ननधािरित

(ग) ग) (ग) • आँगन िें खड़ी िाँ का मििु को हाथों पि झुलाना 3
• हवा िें लोका दे ना
• बच्िे को घुटननयों िें मलटाकि कपड़े पहनाना
• जल से उलझे हुए गेसुओँ िें कंघी किना
• दीपावली की िाि घि के आँगन का साफ-सथ
ु िा औि
सजा-सँविा होना
• िाँ के द्वािा अपने बच्िों के मलए मिट्टी के खखलौने
सजाना औि घिौंदे िें दीया जलाना
• बच्िे का िाँद के मलए स्ज़द किना औि उसे बहलाने के
मलए िाँ द्वािा दपिर् टदखाना
• भाई के हाथों िें बहन द्वािा ििकती िाखी बाँधना
(कोई तीन त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

11 11 11 10 (ककन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 2X2=4

(क) (क) (क) • र्िडड़या का अपने बच्िों के प्रनत िित्व 2
• टदनभि से त्रबछुड़े बच्िों से िीघ्रानतिीघ्र मिलने की िाह
• अपने बच्िों को भोजन, तनेह व सुिक्षा प्रदान किने का
भाव

(ख) (ख) (ख) 2
• लीपा िौका पववत्रता का द्योतक
• भोि के सिय ओस के कािर् आकाि िें निी होना
• भोि के नभ का भी लीपे िौके की भाँनत आद्रि औि पववत्र
होना
• पूर्ि प्रकाि न फैलने की वजह से आकाि िें हलकी
कामलिा व्याप्त होना

(ग) (ग) (ग) • सिुद्र की आग (बड़वानल) से भी भयानक 1+1=2

• िाि रूपी घनश्याि की कृपा से

(ककन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 2X3=6
12 12 12 12

(क) - - • सेवा भाव औि ननष्ठा िें हनुिान जी से प्रनततपधाि के 3
कािर्

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• लेखखका के हि कष्ट को उनसे पहले तवयं झेल लेने की
भावना के कािर्
• अपने जीवन भि की किाई लेखखका को दे दे ने की
तत्पिता के कािर्
• ननःतवाथि सेवा-भाव के कािर्
• लेखखका के प्रनत अपनत्व के कािर्
(कोई तीन त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

(ख) - - गाँव को ित
ृ कहने का कािर् - 1+2=3
• िहािािी औि कष्ट के कािर् गाँव के लोगों की दिा
ित
ृ कों जैसी हो जाना
• ढोलक की आवाज का ग्रािीर्ों को ित्ृ यु से लड़ने की
प्रेिर्ा दे ना
• बूढ़े, बच्िों व जवानों की िस्क्तहीन आँखों के आगे दं गल
का दृश्य उपस्तथत हो जाना
• तपंदन-िस्क्त िून्य तनायुओं िें त्रबजली दौड़ना
• ननिाि हृदयों िें उत्साह का संिाि होना

(ग) - - • कालजयी अवधूत की भाँनत जीवन के अजेय िंत्र का प्रिाि 3
किना
• पथ्
ृ वी का अस्नन की भाँनत ननधि
ूि जलने पि भी फूलों से
लदा, लहलहाते िहना
• ववपिीत परिस्तथनतयों िें भी धैयि
ि ील बने िहना
• प्रिंर् गिी िें भी अपनी अजेय स्जजीववर्षा के साथ ननतपह

भाव से अवविल खड़े िहना
• दृढ़ इच्छा िस्क्त के कािर् ित्ृ यु औि सिय को भी
पिास्जत किने का साहस िखना
• वायुिंर्ल से िस खींिना
(कोई तीन त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

- (क) - िन का बंद न होना 1+1+1=3

इच्छाओं का त्रबलकुल सिाप्त हो जाना जड़ता है अथाित िन िून्य
न हो
िन खाली होना
• िन पि बाजाि के जाद ू का अत्यर्धक प्रभाव,

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• असंतुस्ष्ट का भाव
• पिेस्जंग पावि का टदखावा
िन खाली न होना
• आवश्यकता के अनुरूप खिीददािी किना
• बाजाि के आकर्षिर् िें न आना
• बाजाि को साथिकता प्रदान किना

1 +1 =3
- (ख) - नटदयों का िहत्व -
• भाित के सािास्जक व सांतकृनतक परिवेि िें नटदयों का
वविेर्ष िहत्व
• नटदयों के ककनािे सभ्यता का ववकास
• जल का प्रिुख स्रोत
• धामििक व सांतकृनतक केंद्रों का नटदयों के तट पि ववकास
• िोक्षदानयनी व पूज्य
जय बोलने का कािर् -
• भाितीय जनिानस िें गंगा नदी को वविेर्ष िान-सम्िान
प्राप्त
• प्रत्येक िुभ कायि िें गंगाजल का प्रयोग
• िाँ का दजाि

3
- (ग) - • तवाभाववक ववभाजन न होना
• वगों औि जानतयों िें बाँटकि लोगों िें भेदभाव बढ़ाना
• िनुष्य को जीवन-भि के मलए एक ही पेिे िें बाँध दे ना
• प्रनतकूल परिस्तथनतयों िें भी िनुष्य को अपना पेिा
बदलने की तवतंत्रता न दे ना
• बेिोजगािी औि भुखििी का कािर् बनना
• श्रमिक का ववभाजन किना
• िनुष्य की तवाभाववक प्रेिर्ा, रुर्ि व आत्ि-िस्क्त को
दबाकि ननस्ष्िय बना दे ना
(कोई तीन त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

(क) कििठ एवं परिश्रिी 3
- - •
• सिवपित सेववका
• तवामभिानननी
• संघर्षििील
• दृढ़ननश्ियी
• धैयव
ि ती

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• ननश्छल एवं व्यवहाि िें तनेटहल
(ककन्हीं तीन त्रबंदओ
ु ं का ववतताि अपेक्षक्षत)

• िाजपहलवान घोवर्षत 3
- - (ख)
• पुत्रों के साथ िाज-दिबाि िें ननवास
• िाजा साहब द्वािा 'लुट्टन मसंह' कहकि पुकािा जाना
• कीनति दिू -दिू तक फैलना
• पौस्ष्टक भोजन एवं व्यायाि की सुववधा
• िाजा की तनेह दृस्ष्ट
• िाज-दिबाि का दििनीय जीव बन जाना
(कोई तीन त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

• ववर्षिताओं िें भी धैयप
ि ूवक
ि कष्टों का सािना किना 3
- - (ग)
• अजेय स्जजीववर्षा के िंत्र का प्रिाि किना
• जीवन-िूलयों को तथावपत किते हुए कतिव्यिील बने िहना
• अर्धकाि-मलप्सा का त्याग किना
• दे हबल के ऊपि आत्िबल के िहत्व को तथावपत किना
(कोई तीन त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

(ककन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 2X2=4
13 13 13 13

(क) - - 1+1=2
तात्पयि - खिीदने की िस्क्त-
बाजाि पि प्रभाव -
• बाजारूपन बढ़ाना
• बाजाि को िैतानी व्यंनय की िस्क्त दे ना
• आवश्यकता से अर्धक खिीददािी किना
(कोई एक त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

2
(ख) - - • तवतंत्रता, सिता, भ्रातत
ृ ा (भाईिािा) पि आधारित
• सिाज िें गनतिीलता
• व्यवसाय ियन की तवतंत्रता
• सिाज के बहुववर्ध टहतों िें सबका भाग तथा उनकी िक्षा
के प्रनत सजगता
• जानतगत भेदभाव की सिास्प्त

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गुड़धानी- गुड़ औि िने (अनाज) से बना एक प्रकाि का लड्र्ू
(ग) - - 1+1=2
िाँग का कािर् -
• सिद्
ृ र्ध औि संपन्नता के मलए
• सिाज-कलयार् के मलए
• अच्छी वर्षाि, अच्छी खेती के मलए
(कोई एक त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

1+1=2
- (क) - संबंध - आत्िीय
भस्क्तन का व्यावहारिक तौि पि सेववका के रूप िें न
होना
तकि -
• लेखखका को अपने अनस
ु ाि ढाल लेना
• एक सेववका की भाँनत लेखखका के सभी आदे िों का पालन
न किना
• अपने संबंध िें ककसी भी प्रकाि के परिवतिन को न
तवीकािना
• लेखखका के साथ सदै व साये की तिह िहना
• लेखखका की प्रत्येक आवश्यकता को पूर्ि किने के मलए
सदै व तत्पि िहना
(कोई एक त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

• साहसी व वीि 2
- (ख) -
• संवेदनिील
• आकर्षिक व्यस्क्तत्व
(ककन्हीं दो त्रबंदओ
ु ं का ववतताि अपेक्षक्षत)

• कटठन परिस्तथनतयों िें भी अवविल िहकि स्जजीववर्षा की 2
- (ग) -
प्रेिर्ा
• धैयि
ि ील, िांत औि सौम्य बने िहना
• िनष्ु य की अजेय स्जजीववर्षा औि ति
ु ल
ु कोलाहल कलह के
बीि धैयप
ि ूवक
ि लोक के साथ र्िंताित, कतिव्यिील बने
िहना

- - (क) • ननस्श्ित सिय पि िूिन बेिने के मलए ननकलना 2

• छह आने की किाई होते ही िेर्ष िूिन बच्िों िें िुफ्त

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बाँट दे ना
• पंसािी से आवश्यकता के अनुसाि िात्र जीिा औि निक
खिीदना
• बाजाि की ििक-धिक से आकवर्षित न होना
• िौक बाजाि से ननकलते वक्त सभी का अमभवादन
तवीकाि किना
• संतोर्षी होना

- - (ख) • पानी की किी होने पि भी, कटठनाई से इकट्ठा ककया 2

हुआ पानी इंदि-सेना पि फेंकना
• अंधववश्वास िें आकि पानी की ननििि बबािदी किना

- - (ग) • कायि-कुिलता के मलए श्रि-ववभाजन को आवश्यक िानना 2

• जानत प्रथा को भी श्रि ववभाजन का रूप िानना

14 14 14 14 (ककन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 2X2=4

(क) - - 2
• वतििान सिाज िें एकल परिवाि की संििना पि बल
• नयी पीढ़ी द्वािा पुिानी पीढ़ी की बातों को नकािना
• यिोधि बाबू की पत्नी की तिह िाताओं का अपने बच्िों
के पक्ष िें िहना
• खान-पान, पहनावे िें आधुननकता को अपनाना
• बुजुगों की उपेक्षा किना
(िुक्त उत्ति भी तवीकायि)

(ख) - - 1+1=2
‘जझ
ू ’ िब्द का अथि - संघर्षि
िीर्षिक का और्ित्य -
• आनंदा (लेखक) का आिं भ से अंत तक पढ़ाई के मलए
संघर्षि
• खेत-खमलहान के काि औि पढ़ाई के बीि सािंजतय
तथावपत किने का संघर्षि
• ववद्यालय िें ििािती लड़कों से आत्ििक्षा का संघर्षि
• ववद्यालय िें अपनी पहिान बनाने का संघर्षि
(कोई एक त्रबंद ु अपेक्षक्षत)

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(ग) - - 2
• ‘लो प्रोफाइल सभ्यता’
• िाजा की िूनति का िुकुट बहुत छोटे आकाि का होना
• नावों का आकाि बहुत छोटा होना
• िाजतंत्र को टदखाने वाले िहल, धिि के िस्क्त-तथल, पूजा,
िूनतियों व वपिामिर् का न मिलना
• हर्थयाि / ितत्र का न मिलना
• िाजाओं औि िहं तों की सिार्ध का न मिलना

2
- (क) -
• पीढ़ी के अंतिाल की अमभव्यस्क्त
• बदलते जीवन िल
ू य
• नयी पीढ़ी द्वािा पुिानी पीढ़ी की बातों को नकािना
• युवा पीढ़ी पि पाश्िात्य संतकृनत का प्रभाव
• पुिानी पीढ़ी द्वािा ककसी भी परिवतिन को तवीकािने हे तु
तैयाि न होना

1+1=2
- (ख) - • परिश्रि का िहत्व प्रनतपाटदत किना
• संघर्षि को कायि की सफलता का आधाि बताना
• लगन औि सिपिर् को कायि की मसद्र्ध का िल
ू िंत्र
बताना
(कोई एक त्रबंद ु अपेक्षक्षत)
उदाहिर् -
आनंदा (लेखक) के जीवन का कोई एक उदाहिर् अपेक्षक्षत

2
- (ग) - • मसंधु घाटी की सभ्यता िें नदी, कुएँ, तालाब, तनानागाि
का बहुतायत िें मिलना
• सात सौ से अर्धक कुएँ होना
• पीने के पानी के िुख्य स्रोतों का होना
• जल-संग्रह एवं जल-ननकास की संद
ु ि व्यवतथा होना
• मसंधु नदी के ककनािे सभ्यता का बसना

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- - (क) • बुजुगों का आदि-सम्िान - बज
ु ुगों की उपेक्षा किना 2
• पिं पिाओं से लगाव - पुिाने िीनत-रिवाज, पिं पिा औि
िूलयों के ननविहन िें परिवतिन
• त्याग की भावना - पिटहताय या पिटहत जैसे िूलयों के
तथान पि तवाथि-भाव की प्रबलता

- - (ख) • ििाठी पढ़ाने वाले मिक्षक न. वा. सौंदलगेकि का कववता 2
पाठ सुनकि
• मिक्षकों से सिाहना पाकि
• अपने आस-पास, खेतों से जुड़े अनेक दृश्यों, गाँव एवं
जंगली फूलों आटद पि तुकबंदी किके

- - (ग) • िोहन-जोदड़ो की खुदाई िें उत्कृष्ट नगि-योजना, िकान, 2
खेती, कला, औजाि आटद के अविेर्षों का मिलना
• सभ्यता का पूर्ि ववकमसत होना
• आज की िहिी योजना से अर्धक सुननयोस्जत नगि
व्यवतथा
• उपजाऊ भूमि, उन्नत कृवर्ष
• जल-संिक्षर् एवं जल-ननकासी का सिुर्ित प्रबंध
• आधुननक र्ग्रर्-प्रर्ाली

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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeSolution
Pages18
Updated30 Apr 2026