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अत्यंत गोपनीय - केवल आंतरिक एवं सीमित प्रयोग हे तु
सीनियर स्कूल सर्टि फिकेट टर्ि – II परीक्षा, 2022
अंक-योजिा - विषय : र् द
ं ी (आधार)
विषय कोड संख्या : 302, प्रश्ि पत्र कोड : 2/1/1, 2/1/2, 2/1/3
सार्ान्य निदे श :-
1. आप जानते हैं कक पिीक्षार्थियों के सही औि उर्ित आकलन के मलए उत्ति पस्ु ततकाओं का िल
ू यांकन
एक िहत्त्वपर्
ू ि प्रकिया है । िल
ू यांकन िें एक छोटी-सी त्रटु ट भी गंभीि सितया को जन्ि दे सकती है ,
जो पिीक्षार्थियों के भववष्य, मिक्षा प्रर्ाली औि अध्यापन-व्यवतथा को भी प्रभाववत कि सकती है ।
इससे बिने के मलए अनिु ोध ककया जाता है कक िल
ू यांकन प्रािं भ किने से पव
ू ि ही आप िल
ू यांकन
ननदे िों को पढ़ और सर्झ लें।
2. िल
ू यांकन नीनत एक गोपनीय नीनत है क्योंकक यह आयोस्जत पिीक्षाओं की गोपनीयता, ककए गए
िल
ू यांकन तथा कई अन्य पहलओ
ु ं से संबर्ं धत है | इसका ककसी भी तिह से साविजननक होना
पिीक्षा प्रर्ाली के मलए उपयक्
ु त नहीं है , जो लाखों पिीक्षार्थियों के भववष्य को प्रभाववत कि सकता है
| इस नीनत दततावेज़ को ककसी से भी साझा किना, ककसी पत्रत्रका िें प्रकामित किना औि सिािाि
पत्र/वेबसाइट आटद िें छापना IPC के तहत कायिवाही को आिंत्रत्रत कि सकता है |
3. िल
ू यांकन अंक-योजना िें टदए गए ननदे िों के अनस
ु ाि ही ककया जाना िाटहए, अपनी व्यस्क्तगत
व्याख्या या ककसी अन्य धािर्ा के अनस
ु ाि नहीं। यह अननवायि है कक अंक-योजना का अनप
ु ालन पिू ी
तिह से ननष्ठापव
ू क
ि ककया जाए। ालााँफक, र्ल
ू यांकि करते सर्य ििीितर् सच
ू िा और ज्ञाि पर
आधाररत अथिा ििाचार पर आधाररत उत्तरों को उिकी सत्यता और उपयक्
ु तता को परखते ु ए परू े
अंक र्दए जाएाँ ।
4. िख्
ु य पिीक्षक प्रत्येक िल
ू यांकन कताि के द्वािा पहले टदन जााँिी गई पााँि उत्ति पस्ु ततकाओं के
िल
ू यांकन की जााँि ध्यानपव
ू क
ि किें औि आश्वतत हों कक िल
ू यांकन-योजना िें टदए गए ननदे िों के
अनस
ु ाि ही िल
ू यांकन ककया जा िहा है । पिीक्षकों को बाकी उत्ति पस्ु ततकाएाँ तभी दी जाएाँ जब वह
आश्वतत हों कक उनके अंकन िें कोई मभन्नता नहीं है ।
5. पिीक्षक सही उत्ति पि सही का र्िह्न (√) लगाएाँ औि गलत उत्ति पि गलत का (×)। िल
ू यांकन-कताि
द्वािा ऐसा र्िह्न न लगाने से ऐसा सिझ िें आता है कक उत्ति सही है पिं तु उस पि अंक नहीं टदए
गए। पिीक्षकों द्वािा यह त्रटु ट सवािर्धक की जाती है ।
6. यटद ककसी प्रश्न के उपभाग हों तो कृपया प्रश्नों के उपभागों के उत्तिों पि दायीं ओर अंक टदए जाएाँ।
बाद िें इन उपभागों के अंकों का योग बायीं ओर के हामिये िें मलखकि उसे गोलाकृत कि टदया
जाए। इसका अिप
ु ालि दृढ़तापि
ू क
ि फकया जाए।
7. यटद ककसी प्रश्न के कोई उपभाग न हों तो बायीं ओि के हामिये िें अंक टदए जाएाँ औि उन्हें
गोलाकृत ककया जाए। इसके अनप
ु ालन िें भी दृढ़ता का पालन ककया जाए।
8. यटद पिीक्षाथी ने ककसी प्रश्न का उत्ति दो तथानों पि मलख टदया है औि ककसी को काटा नहीं है तो
स्जस उत्ति पि अर्धक अंक प्राप्त हो िहे हों, उस पि अंक दें औि दस
ू िे को काट दें । यटद पिीक्षाथी
ने अनतरिक्त प्रश्न/प्रश्नों का उत्ति दे टदया है तो स्जन उत्तिों पि अर्धक अंक प्राप्त हो िहे हों उन्हें
ही तवीकाि किें , उन्हीं पि अंक दें ।
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9. एक ही प्रकाि की अिद्
ु र्ध बाि-बाि हो तो उसे अनदे खा किें औि उस पि अंक न काटे जाएाँ।
10. यहााँ यह ध्यान िखना होगा कक िल
ू यांकन िें संपर्
ू ि अंक पैिाने 0-40 (उदाहिर् 0-40 अंक जैसा कक
प्रश्न िें टदया गया है ) का प्रयोग अभीष्ट है अथाित पिीक्षाथी ने यटद सभी अपेक्षक्षत उत्ति-त्रबंदओ
ु ं
का उललेख ककया है तो उसे पिू े अंक दे ने िें संकोि न किें ।
11. प्रत्येक पिीक्षक को पर्
ू ि कायि-अवर्ध िें अथाित 8 घंटे प्रनतटदन अननवायि रूप से िल
ू यांकन कायि
किना है I प्रनतटदन िख्
ु य ववषयों की 30 उत्ति-पस्ु ततकाएाँ तथा अन्य ववषयों की 35 उत्ति पस्ु ततकाएाँ
जााँिनी हैं। (ववततत
ृ ववविर् ‘तपॉट गाइडलाइन’ िें टदया गया है )
12. यह सनु नस्श्ित किें कक आप ननम्नमलखखत प्रकाि की त्रटु टयााँ न किें , जो वपछले वषों िें की जाती िही
हैं I
उत्ति पस्ु ततका िें ककसी उत्ति या उत्ति के अंि को जााँिे त्रबना छोड़ दे ना।
उत्ति के मलए ननधािरित अंकों से अर्धक अंक दे ना।
उत्ति िें टदए गए अंकों का योग ठीक न होना।
उत्ति पस्ु ततका के अंदि टदए गए अंकों का आविर् पष्ृ ठ पि सही अंतिर् न होना।
आविर् पष्ृ ठ पि प्रश्नानस
ु ाि योग किने िें अिद्
ु र्ध होना।
योग किने िें अंकों औि िब्दों िें अंति होना।
उत्ति पस्ु ततकाओं से ऑनलाइन अंकसि
ू ी िें सही अंतिर् न होना।
कुल अंकों के योग िें अिद्
ु र्ध होना I
उत्तिों पि सही का र्िह्न (√) लगाना, ककं तु अंक न दे ना। सनु नस्श्ित किें कक (√) या (×) का
उपयक्
ु त र्िह्न ठीक ढं ग से औि तपष्ट रूप से लगा हो। यह िात्र एक िे खा के रूप िें न हो)
उत्ति का एक भाग सही औि दस
ू िा गलत हो ककं तु अंक न टदए गए हों।
13. उत्ति पस्ु ततकाओं का िल
ू यांकन किते हुए यटद कोई उत्ति पर्
ू ि रूप से गलत हो तो उस पि (x)
ननिान लगाएाँ औि िन्
ू य (0) अंक दें ।
14. उत्ति पस्ु ततका िें ककसी प्रश्न का त्रबना जााँिे हुए छूट जाना या योग िें ककसी भल
ू का पता लगना,
िल
ू यांकन समिनत के सभी लोगों की छवव को औि बोडि की प्रनतष्ठा को धूमिल किता है ।
15. सभी पिीक्षक वाततववक िल
ू यांकन कायि से पहले ‘तपॉट इवैलयए
ू िन’ के ननदे िों से सप
ु रिर्ित हो
जाएाँ।
16. प्रत्येक पिीक्षक सनु नस्श्ित किे कक सभी उत्तिों का िल
ू यांकन हुआ है I आविर् पष्ृ ठ पि तथा योग िें
कोई अिद्
ु र्ध नहीं िह गई है तथा कुल योग को िब्दों औि अंकों िें मलखा गया है ।
17. केंद्रीय िाध्यमिक मिक्षा बोडि पन
ु : िल
ू यांकन प्रकिया के अंतगित पिीक्षार्थियों के अनिु ोध पि ननधािरित
िल
ु क भग
ु तान के बाद उन्हें उत्ति पस्ु ततकाओं की फोटो कॉपी प्राप्त किने की अनि
ु नत दे ता है ।
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सीनियर सेकेंडरी स्कूल सर्टि फिकेट परीक्षा
र्ाचि -2022
अंक योजिा : र् द
ं ी आधार प्रश्ि पत्र गच्
ु छ संख्या 2/1/1, 2/1/2, 2/1/3
कक्षा : XII
अधधकतम अंक : 40
सामान्य निर्दे श
अंक योजिा का उद्र्दे श्य मूलयांकि को अधधकाधधक वस्तुनिष्ठ बिािा है ।
िर्ििात्र्क प्रश्िों के अंक योजिा में दर्दए गए उत्तर बबंर्द ु अंनतम िह ं हैं। बल्लक ये सझ
ु ावात्मक एवं सांकेनतक
हैं।
यदर्द पर क्षार्थी इि सांकेनतक बबंदओ
ु से भिन्ि, ककन्तु उपयुक्त उत्तर र्दें , तो उन्हें अंक दर्दए जाएँ।
मूलयांकि कायय निजी व्याख्या के अिुसार िह ं, बल्लक अंक योजिा में र्दए गए निर्दे शािस
ु ार ह ककया जाए।
प्रश्ि सं. प्रश्ि पत्र गच्
ु छ संख्या निधािररत
2/1/1 2/1/2 2/1/3 उत्तर संकेत /र्ूलय बबंद ु अंक
खंड – क
(कायािलयी र् द
ं ी और रचिात्र्क लेखि)
प्रश्ि 1 1 1 1 फकसी एक विषय पर रचिात्र्क लेख अपे क्षक्षत 1
भूमिका 3
ववषयवततु 1
भाषा 5
प्रश्ि 2 2 2 2 पत्र लेखि
आिं भ औि अंत की औपिारिकताऍ 1
ववषयवततु 3
भाषा 1
5
प्रश्ि 3 3i(a) 4i(a) 3i(a) समानता 1½+1½
एक कथानक
पात्र
परिवेश
क्रममक ववकास
संवाद
द्वंद्व औि
चिम उत्कर्ष
अंति
कहानी का संबंध लेखक औि पाठक से है , वह ं नाटक
लेखक , ननदे शक , पात्र , दशषक , श्रोता एवं अन्य लोगों को
एक - दस
ू िे से जोड़ता है |
कहानी कह , पढ़ या सुनी जाती है |
नाटक मंच पि प्रस्तुत ककया जाता है |
नाटक में मंच सज्जा , संगीत, ध्वनन औि प्रकाश की
3
व्यवस्था होती है |
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प्रश्ि सं. प्रश्ि पत्र गुच्छ संख्या उत्तर संकेत /र्ूलय बबंद ु निधािररत
अंक
अथिा अथिा अथिा क ािी के िाट्य रूपांतरर् 3
i(b) 4i(b) i(b) कहानी की कथावस्तु को समय औि स्थान के आधाि पि
ववभाजजत किके
एक स्थान औि समय पि वखर्ित घटना को एक ह दृश्य में
सजमममलत किके
कथाक्रम औि ववकास को ध्यान में िखकि
प्रत्येक दृश्य कथानक के औचचत्य के अनुरूप िखकि
पात्रों की भार्ा एवं परिवेश के आधाि पि
पात्रों के मनोभाव /मानमसक द्वंद्व के दृश्यों की नाटकीय
प्रस्तुनत ‘वॉयस ओवि’ के माध्यम से
कहानी के पात्रों की दृश्यात्मकता औि नाटक के पात्रों में
उसका प्रयोग किके
(कोई िी तीि बबंर्द ु अपेक्षक्षत)
ii(a) 4ii(a) ii(a) िे डडयो नाटक श्रव्य िाध्यि है , मसनेिा व िं गिंि की तिह 1+1=2
इसिें ववजुअलस अथाित ् दृश्य नहीं होते I
िे डडयो नाटक िें सब कुछ संवादों औि ध्वनन प्रभावों के
िाध्यि से संप्रेवर्त होता है I
यहााँ न िंि सज्जा है न वतत्र सज्जा औि न ही भाव-
भंर्गिाएाँ। सब कुछ ध्वनन के िाध्यि से ही संप्रेवर्त होता
है I
िं गमंच एवं मसनेमा की तिह इसमें एक्शन की गुंजाइश नह ं
होती है I
िे डियो नाटक की अवचध एवं पात्रों की संख्या सीममत होती है I
इसमें पात्र संबंधी ववववध जानकाि संवाद एवं ध्वनन संकेतों
के माध्यम से द जाती है I
(कोई भी र्दो बबंर्द ु अपेक्षक्षत)
अर्थवा अर्थवा अर्थवा कहानी मसर्ष घटना प्रधान न हो 2
ii(b) 4ii(b) ii(b) उसकी अवचध बहुत ज्यादा न हो
पात्रों की संख्या सीममत हो
(कोई िी र्दो बबंर्द ु अपेक्षक्षत)
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प्रश्ि सं. प्रश्ि पत्र गुच्छ संख्या उत्तर संकेत /र्ूलय बबंद ु निधािररत
अंक
4 4i(a) 3i(a) 4i(a) पत्रकाि य लेखन में तथ्यों का महत्त्व होता है | इसका संबंध 3
समसामनयक औि वास्तववक घटनाओं , समस्याओं औि मुद्दों
से होता है , वह ं साहहजत्यक लेखन का संबंध िचनाकाि की
सोच औि कल्पना से होता है |
पत्रकाि य लेखन के पाठकों का क्षेत्र ववस्तत
ृ होता है ,
साहहजत्यक लेखन के पाठकों का क्षेत्र सीममत होता है |
पत्रकाि य लेखन की भार्ा सिल , सहज एवं बोधगमय होती
है , जबकक साहहजत्यक लेखन की भार्ा आलंकारिक व
संस्कृतननष्ठ भी हो सकती है |
पत्रकाि य लेखन तात्कामलक घटनायें, परिस्तथनत औि पाठकों
की रुचचयों एवं ज़रुितों को ध्यान में िखकि ककया जाने वाला
लेखन है , जबकक साहहजत्यक लेखन में िचनाकाि को अपने
ववचाि िखने की स्वतंत्रता होती है I
(कोई िी तीि बबंर्द ु अपेक्षक्षत)
उलटा वपिामिड िैली सिािाि लेखन की सबसे लोकवप्रय,
अथिा अथिा अथिा
उपयोगी औि बुननयादी िैली है। 3
i(b) 3i(b) i(b)
इसिें िहत्त्वपूर्ि तथ्य या सूिना ‘यानी क्लाइिेक्स’ सबसे
पहले आता है ।
िेष बातें ििानस
ु ाि बाद िें आती है ।
ii(a) 3ii(a) ii(a) 2
एक सफल साक्षात्काि के मलए साक्षात्कािकताि के पास केवल ज्ञान ही
नहीं बस्लक उसिें संवेदनिीलता, िद
ृ भ
ु ावषता, कूटनीनतज्ञता, धैयि औि
साहस, सिन्वयता जैसे गर्
ु भी आवश्यक हैंI
(कोई िी र्दो बबंर्द ु अपेक्षक्षत)
अथिा अथिा अथिा ततंभ लेखन वविािपिक लेखन का एक प्रिुख रूप है ।
2
ii(b) 3ii(b) ii(b) ततंभ का ववषय िुनने औि उसिें अपने वविाि व्यक्त किने
की ततंभ लेखक को छूट होती है ।
ततंभ िें लेखक के वविाि अमभव्यक्त होते हैं। यही कािर् है
कक ततंभ अपने लेखकों के नाि से भी जाने जाते हैं।
(कोई िी र्दो बबंर्द ु अपेक्षक्षत)
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प्रश्ि सं. प्रश्ि पत्र गुच्छ संख्या उत्तर संकेत /र्ूलय बबंद ु निधािररत
अंक
खंड - ख
(पाठ्यपुस्तक और पूरक पाठ्यपुस्तक)
प्रश्ि 5 5 (i) -- -- (फकन् ीं दो प्रश्िों के उत्तर अपेक्षक्षत) 3
‘उर्ा’ कववता में प्रयक्
ु त उपमान
नीले शंख के समान
िाख से ल पा हुआ चौका
केसि मल हुई काली मसल
लाल खडड़या िाक मल हुई काल तलेट
उपरिमलखखत सभी उपिान ग्रािीर् जीवन की गनतिीलता को व्यक्त
किते हैं।
(ii) -- -- भाई के िोक िें िाि का ववलाप धीिे -धीिे प्रलाप िें बदल जाता है । यह 3
प्रसंग ईश्वि िाि िें िानव-सुलभ गुर्ों का सिन्वय कि दे ता है । वे
सािान्य िनष्ु यों की भााँनत वविमलत होकि ऐसे विन कहते हैं जो
मानव प्रवनृ त हैं, जैसे वन िें तुम्हािा ववछोह सहन किना पड़ेगा, तो
वपता के विन ही नहीं िानता आटद।
(iii) -- -- ‘गोदभिी’ िब्द-प्रयोग िााँ के वात्सलययुक्त, आनंटदत तवरूप, 3
उत्साह, प्रेि-भाव को प्रकट किता है ।
यह सुंदि दृश्य-त्रबंब का उदाहिर् है ।
गोद भिी होना िााँ के मलए असीि सौभाग्य का सूिक है , जो
िााँ को तस्ृ प्त दे िहा है ।
-- 5(i) -- भोि का नभ िाख से ल पा चौका ( दोनों गहिे सलेट िं ग के 3
हैं औि नमी से युक्त हैं )
लाल केसि से धुल काल मसल (दोनों ह लामलमा युक्त हैं)
लाल खडड़या चाक से मल हुई काल स्लेट
प्रातः काल के स्वच्छ , ननमषल आकाश में सूयष ऐसा प्रतीत
होता है मानो नीले जल में कोई गौि वर्ष वाल यव
ु ती हो | (
वर्ष सामयता के आधाि पि )
-- (ii) -- पेट की आग—अथाित भूख। पेट की आग की वविालता औि भयावहता 3
को तपष्ट किने के मलए तुलसीदास जी ने बड़वास्ग्न (सिुद्र की अस्ग्न)
का सहािा मलया है । पेट की आग सिद्र
ु की अस्ग्न से भी बड़ी है
क्योंकक इससे वववि होकि लोग नैनतक-अनैनतक सभी प्रकाि के कायि
किने के मलए वववि हो जाते हैं। यहााँ तक कक भूख मिटाने के मलए
अपने बच्िों को भी बेि दे ते हैं।
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प्रश्ि सं. प्रश्ि पत्र गुच्छ संख्या उत्तर संकेत /र्ूलय बबंद ु निधािररत
अंक
-- (iii) -- उपरिमलखखत पंस्क्त के आधाि पि िायि का ककतित के साथ तना-तनी 3
का रिश्ता तपष्ट हुआ है । कवव अपने जीवन की असफलताओं के मलए
भाग्य को दोषी ठहिाता है । वह अपने भाग्य से कभी संतुष्ट नहीं िहा।
दस
ू िी ओि उसकी ककतित भी उसकी अकििण्यता को दे खकि झललाती
है । दोनों एक-दस
ू िे को स्जम्िेदाि ठहिाते हैं। कवव अपनी बदहाली के
मलए ककतित को दोषी िानता है औि ककतित उसके पुरुषाथि न किने
को दोषी िानती है ।
-- -- 5(i) ‘उषा’ कववता िें भोि का नभ कभी िंख जैसा प्रतीत होता है , तो कभी 3
िाख से लीपे हुए िौके की भााँनत टदखाई दे ता है , स्जसिें पववत्रता,
ननििलता औि उज्ज्वलता है । सूयि के उटदत होते ही आसिान िें
त्रबखिी लाली कभी काली मसल के केसि से धल
ु ी होने का अहसास
किवाती है तो कभी काली तलेट पि बच्िों द्वािा लाल खडड़या िलने
का। नीले आकाि िें सूयि को दे ख ऐसा लगता है िानो ककसी गौि वर्ि
तत्री की दे ह खझलमिला िही हो। इस प्रकाि कवव ने इस कववता िें
प्रातःकालीन नभ का जादई
ु वर्िन ककया है ।
-- -- (ii) अवध लौटने िें िाि के संकोि का कािर् लक्ष्िर् के प्रनत अपने 3
कतिव्य का ननवािह ठीक से न कि पाना है । वनवास के मलए ननकलने
से पूवि िाता सुमित्रा ने लक्ष्िर् का हाथ, उसकी स्जम्िेदािी िाि को
सौंपी थी। िाि भ्रातप्र
ृ ेि के कािर् लक्ष्िर् की िूच्छाि को तवयं के मलए
लज्जाजनक स्तथनत िान िहे थे। उन्हें ऐसा लग िहा था कक अयोध्या
जाकि िाता सुमित्रा औि अयोध्या वामसयों का सािना कैसे किें गे?
लोग कहें गे कक नािी के मलए िाि ने अपने छोटे भाई का जीवन दााँव
पि लगा टदया। एक तिफ अनुज के ववयोग का दख
ु औि दस
ू िी तिफ
भाई के प्रार् गाँवाने का अपयि ही िाि के संकोि का कािर् था I
-- -- (iii) बालक अपनी िााँ से आसिान िें ििक िहे िााँद को लेने की हठ कि 3
िहा है । वह िायद िााँद को कोई खखलौना सिझ िहा है या उसकी
ििक से प्रभाववत हो गया है ।
िााँ बड़ी ही सझ
ू -बझ
ू से इस स्तथनत को साँभालती है । पहले वो उसे
बहलाने-फुसलाने की कोमिि किती है । सफलता प्राप्त न होने पि वह
दपिर् िें िााँद का प्रनतत्रबंब टदखाकि उसे बहलाती है । बालक दपिर् िें
िााँद की पिछाईं दे खकि िांत हो जाता है , खेलने लग जाता है ।
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प्रश्ि सं. प्रश्ि पत्र गुच्छ संख्या उत्तर संकेत /र्ूलय बबंद ु निधािररत
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प्रश्ि 6 6 (i) -- -- दोनों बेटों की मत्ृ यु के बाद भी ढोलक बजाने के कािर् – 3
है जे से पीडड़त गााँव वालों में जजजीववर्ा पैदा किना
उनमें उत्साह का संचाि किना
मौत के सन्नाटे को चीिना
जीवन के उत्साह को बनाए िखना
(कोई िी तीि बबंद ु अपेक्षक्षत)
(ii) -- -- भले ही सीिाओं के आधाि पि भाित औि पाककततान को 3
भौगोमलक रूप से ववभास्जत कि टदया गया है लेककन दोनों
दे िों के लोगों के हृदय िें आज भी पाितपरिक भाईिािा,
सौहार्द्ष, तनेह औि सहानुभूनत है ।
िाजनैनतक तौि पि भले ही संबंध तनावपूर्ि हों पि सािास्जक
तौि पि आज भी जनता के बीि मोहब्बत का निकीन तवाद
घुला है ।
अित
ृ सि की मसख बीबी, पाककततान का कतटि अर्धकािी
औि भाितीय सीिा पि तैनात कतटि अर्धकािी आज भी
अपनी ज़मीन से प्याि किते हैं।
(iii) -- -- ‘दासता’ केवल कानूनी पिाधीनता को ही नहीं कहा जाता, बस्लक दासता 3
िें वह स्तथनत भी िामिल है , स्जनिें कुछ व्यस्क्तयों को दस
ू िे लोगों
द्वािा ननधािरित व्यवहाि एवं कतिव्य का पालन किने के मलए वववि
होना पड़ता है । इस प्रकाि की स्तथनत िें व्यस्क्त को अपनी इच्छा के
ववरुद्ध पैतक
ृ पेिे अपनाने पड़ते हैं। यह स्तथनत कानूनी पिाधीनता न
होने पि भी पाई जा सकती है ।
(iv) 6(iv) 6(iv) श्रि-ववभाजन िें क्षिता औि कायिकुिलता के आधाि पि काि 3
का बाँटवािा होता है , जबकक श्रमिक ववभाजन िें लोगों को
जन्ि के आधाि पि बााँटकि पैतक
ृ व्यवसाय को अपनाने के
मलए वववि ककया जाता है ।
श्रि-ववभाजन िें व्यस्क्त अपनी रुर्ि के अनुसाि व्यवसाय का
ियन किता है । श्रमिक ववभाजन िें व्यवसाय ियन की
अनुिनत नहीं होती।
-- (i) -- है जे औि िलेरिया के प्रकोप से ग्रमसत पूिा गााँव एक असहाय, 3
साधनहीन मििु की तिह कााँप िहा था। ऐसे िें िात्रत्र के सन्नाटे िें
बजाई जानेवाली पहलवान की ढोलक ग्रािीर्ों को िौत का सािना
किने की आंतरिक िस्क्त दे ती थी। गााँववालों िें एक नई स्जजीववषा
पैदा किती थी। िहािािी से पीडड़त लोगों की नसों िें त्रबजली दौड़
जाती थी, उनकी आाँखों के आगे दं गल का दृश्य साकाि हो जाता था
औि वे अपनी पीड़ा भूल ित्ृ यु का सािना ननभिय होकि किते थे ।
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प्रश्ि सं. प्रश्ि पत्र गुच्छ संख्या उत्तर संकेत /र्ूलय बबंद ु निधािररत
अंक
-- (ii) -- ‘निक’ कहानी भाित-पाककततान ववभाजन के बाद सीिाओं के दोनों 3
ओि ववतथावपत-पुनवािमसत लोगों के टदलों को टटोलने वाली कहानी है ।
दोनों दे िों की जनता प्रेि औि िैत्री भाव से िहना िाहती है लेककन
दे ि वविोधी ताकतें वैिनतय औि कटुता फैलाकि अपना तवाथि मसद्ध
किना िाहती हैं। सकिया का लाहौि से निक ले जाना औि कतटि
अर्धकािी सुनील दासगुप्त का निक लेकि जाने दे ना यह मसद्ध किता
है कक िाजनीनतक दृस्ष्ट से अलग-अलग दे ि होने के बावजद
ू भाित एवं
पाककततान के लोगों के टदलों िें एक ही भाव मौजूद है I वह आपस
िें मिलने के मलए अत्यंत व्यग्र हैं। दोनों दे िों के लोग मिल-जुलकि
िहना िाहते हैं। उनके टदलों िें कोई भेदभाव नहीं है ।
-- (iii) -- आधाि - 1½+1½=3
व्यस्क्त की रुर्ि के आधाि पि
व्यस्क्त की कायि-कुिलता के आधाि पि
व्यस्क्त की प्रनतभा, क्षिता औि योग्यता के आधाि पि
आवश्यकता – सािास्जक गनतिीलता, लोकतंत्र, तवतंत्रता एवं सिता
-- -- (i) िहािािी से ग्रमसत, सन्नाटे पसिे गााँव िें पहलवान की ढोलक जब िात 3
को बजती थी तब भयानकता को िीिती थी गााँव के ििर्ासन्न लोगों
िें संजीवनी िस्क्त का संिाि हो जाता था। ढोलक बजते ही लोगों की
आाँखों के सािने दं गल का दृश्य नािने लगता था। उनकी नसों िें
त्रबजली-सी दौड़ जाती थी। ढोलक की आवाज़ के कािर् ही गााँव के
ििते हुए प्राखर्यों को आाँख िाँूदते सिय कोई तकलीि नहीं होती थी।
-- -- (ii) ‘निक’ कहानी भाित-पाककततान ववभाजन के बाद सीिा के दोनों तिफ 3
के लोगों के टदलों को टटोलती कहानी है । लोगों को सीिा के आधाि
पि ववभास्जत कि दे ने भि से लोगों के िन की भावनाएाँ ववभास्जत
नहीं हो जातीं। जनसािान्य का लगाव अपने िूल तथान से बना िहता
है । पाककततानी कतटि अर्धकािी, भाितीय कतटि अर्धकािी िििः
टदलली तथा ढाका को आज भी अपना वतन िानते हैं। भेदभाव के
बीि मसख बीबी एवं सकिया तथा सकिया एवं कतटि अर्धकािी सन
ु ील
दासगुप्त के व्यवहाि िें जो प्रेि औि सम्िान है उसके िाध्यि से
लेखखका यही बताना िाहती है कक सीिाओं के बाँट जाने से लोगों के
टदलों का बाँटवािा नहीं हो सकता।
-- -- (iii) ऐसा सिाज जहााँ दध
ू -पानी की तिह लोग पितपि मिलकि िहें 3
। स्जसिें तवतंत्रता, सिानता व भाईिािा हो।
सिाज के बहुववध टहतों िें सबका भाग हो, सब उसकी िक्षा
के प्रनत सजग िहें ।
सािास्जक जीवन िें संपकि के साधन व अवसि सबके पास
उपलब्ध हों। इसी का नाि लोकतंत्र है ।
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प्रश्ि सं. प्रश्ि पत्र गुच्छ संख्या उत्तर संकेत /र्ूलय बबंद ु निधािररत
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प्रश्ि 7 7i(a) 7i(a) 7i(a) मोहनजोदड़ो के टूटे -फूटे खंडहिों को दे खकि लेखक को यह आभास 3
होता है कक िानो वहााँ अभी जीवन है । वह िहि के ककसी िकान की
दीवाि पि पीठ टटकाकि आिाि कि सकता है । िसोई की खखड़की पि
खड़े होकि खाने की गंध िहसूस कि सकता है । िहि की सन
ू ी सड़कें,
बैलगाड़ी की धीिी आवाज़ का संदेि सन
ु ाती हैं।
खंडहिों औि उनसे मिले अविेषों से मसंधु सभ्यता औि संतकृनत के
साथ वहााँ िानवता के र्िह्न, धड़कती जज़ंदचगयों को िहसूस ककया जा
सकता है । उनके िहन-सहन, काि किने का ढं ग, सोिने के तिीकों की
कलपना की जा सकती है ।
3
अथिा अथिा अथिा
i(b) i(b) i(b) ऐन फ्रैंक की डायिी अपने सिय का एक िहत्त्वपूर्ि दततावेज़ है ।
द्ववतीय ववश्वयद्
ु ध के दौिान नीदिलैंड्स पि जििनी का अर्धकाि हो
जाने के बाद फ्रैंक का परिवाि अज्ञातवास िें िला गया था क्योंकक उस
सिय नास्ज़यों की सांप्रदानयक नतली घर्
ृ ा की अस्ग्न िें लाखों यहूटदयों
को जलना पड़ा था। नाज़ी दिन के दततावेज़ के रूप िें यह डायिी
िहत्त्वपूर्ि है । इनतहास के सबसे भयावह, आतंकप्रद औि ददि नाक
अध्याय के प्रत्यक्ष अनभ
ु व को एक तेिह वषीय बच्िी द्वािा इसिें
प्रनतत्रबंत्रबत ककया गया है । तत्कालीन परिस्तथनतयों एवं सािास्जक-
आर्थिक परिदृश्यों का जीवंत र्ित्रर् प्रस्तुत ककया गया है ।
(छात्रों के अन्य तकयसंगत उत्तर भी स्वीकायय)
ii(a) ii(a) ii(a) खद
ु ाई से प्राप्त अविेषों िें औज़ािों का ममलना पिं तु हचथयािों 2
का नह ं - के आधाि पि
वहााँ की नगि योजना, वास्तुमशल्प, मुहि-ठप्पों, पानी या सार्-
सर्ाई जैसी सामाजजक व्यवस्थाओं आहद में एकरूपता के
आधाि पि
प्रभत्ु व या हदखावे के तेवि के नदािद होने के आधाि पि
भव्य महलों, मंहदिों औि समाचधयों के न होने के आधाि पि
लघुता में भी महत्ता अनुभव किने वाल 'लो प्रोर्ाइल्स’
संस्कृनत के आधाि पि
(कोई िी र्दो बबंर्द ु अपेक्षक्षत)
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अथिा अथिा अथिा
आमतौि पि युद्ध में लड़ने वाले वीि को जजतनी तकल फ़, पीड़ा,
ii(b) ii(b) ii(b) बीमाि औि यंत्रर्ा से गुजिना पड़ता है , उससे कह ं अचधक तकल फ़ें
औितें बच्चे को जन्म दे ते समय झेलती हैं ।
मााँ बनने के बाद ढलते शि ि औि आकर्षर् के कािर् पनत एवं बच्चों
की उपेक्षा का मशकाि होना / उपेक्षक्षत व्यवहाि झेलना ।
औित मानव जानत की ननिं तिता को बनाये िखने के मलए अनेक
तकल फ़ों से गुजिती हुई संघर्ष किती है वह जजतना संघर्ष किती है ,
उतना तो बड़ी-बड़ी िींगे हांकने वाले ये सािे मसपाह ममलकि भी नह ं
किते |
(कोई िी र्दो बबंर्द ु अपेक्षक्षत)
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