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अत्यंत गोपनीय-केवल आंतरिक एवं सीमित प्रयोग हे तु
सीनियर स्कूल सनटि निकेट टर्ि – II परीक्षा, 2022
अंक-योजना
ह द
ं ी (ऐच्छिक)
विषय कोड--002
प्रश्न-पत्र कोड--29/1/1
सािान्य ननर्दे श:-
1. आप जानते ैं कक परीक्षार्थियों के स ी और उर्ित आकलन के ललए उत्तर पुच्ततकाओं का मूलयांकन एक
म त्त्िपूर्ि प्रकिया ै । मूलयांकन में एक िोटी-सी भूल भी गंभीर समतया को जन्म दे सकती ै , जो
परीक्षार्थियों के भविष्य, लिक्षा- प्रर्ाली और अध्यापन-व्यितथा को भी प्रभावित कर सकती ै । इससे
बिने के ललए अनुरोध ककया जाता ै कक मूलयांकन प्रारं भ करने से पूिि ी आप मूलयांकन ननदे िों को पढ़
और समझ लें।
2. मल
ू यांकन नीनत एक गोपनीय नीनत ै क्योंकक य आयोच्जत परीक्षाओं की गोपनीयता, ककये गए
मल
ू यांकन तथा कई अन्य प लओ
ु ं से संबंर्धत ै | इसका ककसी भी तर से साििजननक रूप से लीक ोना
परीक्षा- प्रर्ाली के पटरी से उतरने का कारर् बन सकता ै और लाखों परीक्षार्थियों के जीिन और भविष्य
को प्रभावित कर सकता ै | इस नीनत /दततािेज को ककसी को भी साझा करना, ककसी पत्रत्रका में प्रकालित
करना और समािार पत्र/िेबसाइट आहद में िापना IPC के त त कायििा ी को आमंत्रत्रत कर सकता ै |
3. मल
ू यांकन अंक-योजना में हदए गए ननदे िों के अनस
ु ार ी ककया जाना िाह ए, अपनी व्यच्क्तगत व्याख्या
या ककसी अन्य धारर्ा के अनस
ु ार न ीं। य अननिायि ै कक अंक-योजना का अनप
ु ालन परू ी तर और
ननष्ठापूिक
ि ककया जाए। ालााँकक, मूलयांकन करते समय निीनतम सूिना और ज्ञान पर आधाररत अथिा
निािार पर आधाररत उत्तरों को उनकी सत्यता और उपयुक्तता को परखते ु ए पूरे अंक हदए जाएाँ।
4. मुख्य परीक्षक प्रत्येक मूलयांकनकताि के द्िारा प ले हदन जााँिी गई पााँि उत्तर पुच्ततकाओं के मूलयांकन
की जााँि ध्यानपूिक
ि करे और आश्ितत ो कक मूलयांकन-योजना में हदए गए ननदे िों के अनुसार ी
मूलयांकन ककया जा र ा ै । परीक्षकों को बाकी उत्तर- पुच्ततकाएाँ तभी दी जाएाँ जब ि आश्ितत ो कक
उनके अंकन में कोई लभन्नता न ीं ै ।
5. परीक्षक स ी उत्तर पर स ी का ननिान (√) लगाएाँ और गलत उत्तर पर गलत का (×) । मूलयांकन-कताि
द्िारा ऐसा र्िह्न न लगाने से ऐसा समझ में आता ै कक उत्तर स ी ै परं तु उस पर अंक न ीं हदए गए।
परीक्षकों द्िारा य भूल सिािर्धक की जाती ै ।
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6. यहद ककसी प्रश्न का उपभाग ो तो कृपया प्रश्नों के उपभागों के उत्तरों पर दायीं ओर अंक हदए जाएाँ।
बाद में इन उपभागों के अंकों का योग बायीं ओर के ालिये में ललखकर उसे गोलाकृत कर हदया जाए।
इसका अनुपालन दृढ़तापूििक ककया जाए।
7. यहद ककसी प्रश्न का कोई उपभाग न ो तो बायीं ओर के ालिये में अंक हदए जाएाँ और उन् ें गोलाकृत
ककया जाए। इसके अनुपालन में भी दृढ़ता बरती जाए।
8. यहद परीक्षाथी ने ककसी प्रश्न का उत्तर दो तथानों पर ललख हदया ै और ककसी को काटा न ीं ै तो च्जस
उत्तर पर अर्धक अंक प्राप्त ो र े ों, उस पर अंक दें और दस
ू रे को काट दें । यहद परीक्षाथी ने अनतररक्त
प्रश्न/प्रश्नों का उत्तर दे हदया ै तो च्जन उत्तरों पर अर्धक अंक प्राप्त ो र े ों उन् ें ी तिीकार करें /
उन् ीं पर अंक दें ।
9. एक ी प्रकार की अिवु ि बार-बार ो तो उसे अनदे खा करें और उस पर अंक न काटे जाएाँ।
10. य ााँ य ध्यान रखना ोगा कक मल
ू यांकन में संपर्
ू ि अंक पैमाने 0 – 40 (उदा रर् 0--40 अंक जैसा कक
प्रश्न-पत्र में हदया गया ै ) का प्रयोग अभीष्ट ै अथाित परीक्षाथी ने यहद सभी अपेक्षक्षत उत्तर-त्रबंदओ
ु ं
का उललेख ककया ै तो उसे परू े अंक दे ने में संकोि न करें ।
11. प्रत्येक परीक्षक को पूर्ि कायि-अिर्ध में अथाित 8 घंटे प्रनतहदन अननिायि रूप से मूलयांकन कायि करना
ै और प्रनतहदन मुख्य विषयों की 30 उत्तर-पुच्ततकाएाँ तथा अन्य विषयों की 35 उत्तर पुच्ततकाएाँ
जााँिनी ैं। (विततत
ृ वििरर् ‘तपॉट गाइडलाइन’में हदया गया ै )
12. य सुननच्श्ित करें कक आप ननम्नललखखत प्रकार की त्रहु टयााँ न करें जो वपिले िषों में की जाती र ी ैं-
• उत्तर पुच्ततका में ककसी उत्तर या उत्तर के अंि को जााँिे त्रबना िोड़ दे ना।
• उत्तर के ललए ननधािररत अंकों से अर्धक अंक दे ना।
• उत्तर में हदए गए अंकों का योग ठीक न ोना।
• उत्तर-पुच्ततका के अंदर हदए गए अंकों का आिरर् पष्ृ ठ पर स ी अंतरर् न ोना।
• आिरर् पष्ृ ठ पर प्रश्नानुसार योग करने में अिुवि।
• योग करने में अंकों और िब्दों में अंतर ोना।
• उत्तर पुच्ततकाओं से ऑनलाइन अंकसूिी में स ी अंतरर् न ोना।
• कुल अंकों के योग में अिुवि।
• उत्तरों पर स ी का र्िह्न (√) लगाना ककंतु अंक न दे ना।
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MARKING SCHEME
Senior Secondary School Examination
Term–II, 2022
हिन्दी ऐच्छिक ( हिषय कोड : 002 )
[ पेपर कोड : 29/1/1 ]
समय: 2 घंटे पूर्णांक: 40
सणमणन्य हिर्दे श :
अंक-योजना का उद्दे श्य मूल्ां कन को अधिकाधिक वस्तु धनष्ठ बनाना है ।
वर्णनात्मक प्रश्ों के अंक-योजना में धिए गए उत्तर-धबंिु अंधिम नह ं हैं, ये सुझावात्मक एवं सां केधिक हैं ।
यधि पर क्षार्थी इन संकेि-धबंिुओं से धिन्न, धकन्तु उपयुक्त उत्तर िें , िो उसे अंक धिए जाएँ ।
उचित उत्तर चिए जाने पर पूर्ाांक भी चिए जा सकते हैं ।
मू ल्ां कन कायण धनज व्याख्या के अनु सार नह ं बल्कि अंक-योजना के धनिे शानु सार ही धकया जाए।
Q. No. EXPECTED ANSWER / VALUE POINTS Marks
Set—A1
खण्ड—क
1. धकस एक श र्णक पर लगिग 150 शब्ों में रचनात्मक लेख : 5×1 = 5
िूधमका—1 अंक
धवर्यवस्तु —3 अंक
िार्ा—1 अंक
2. र्दो में से धकस एक धवर्य पर पत्र लेखन ( लगिग 120 शब्ों में ) : 5×1 = 5
आरं ि और अंि क औपचाररकिाएँ —1 अंक
धवर्यवस्तु—3 अंक
िार्ा—1 अंक
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3. प्रश्ों के अपेधक्षि उत्तर:- (3×1) +
(शब्-स मा लगिग 50 शब्) (2×1)
=5
(क)
संवाि पात्रों के स्विाव, िररत्र और पूर पृष्ठिूधम के अनुकूल होने चाधहए।
संवाि पात्रों के धवश्वास, आिशों िर्था ल्कथर्थधियों के ि अनुकूल होने चाधहए।
संवाि छोटे , स्वािाधवक और उद्दे श्य के प्रधि स िे लधक्षि होने चाधहए।
संवािों के अनावश्यक धवस्तार से बचना चाधहए।
(कोई तीन अपेचित च िंिु स्वीकार्य )
अथिण
नाटककार में रचनाकार के सार्थ-सार्थ कुशल संपािक के गुर्ों क अपेक्षा
इसधलए क जाि है क्ोंधक नाटक मंचन के धलए कहान के रूप को
धकस धशल्प, फॉमण अर्थवा संरचना के ि िर धपरोना होिा है ।
नाटककार को घटनाओं, ल्कथर्थधियों अर्थवा दृश्यों का चुनाव कर उन्हें
क्रमबद्ध करना होिा है ।
नाटककार को धशल्प या संरचना क पूर समझ होती है ।
नाटककार को पात्र, िे शकाल और पररवेश का सम्यक ज्ञान होिा है ।
(कोई तीन अपेचित च िंिु स्वीकार्य )
(ख)
कहान में द्वं द्व िो धवरोि ित्त्ों का टकराव या धकस क खोज में आने
वाल बािाओं, अंिद्वं द्व के कारर् पैिा होिा है ।
द्वं द्व ह कर्थानक को आगे बढािा है ।
द्वं द्व के धबंिुओं क स्पष्टिा ह कहान क सफलिा का आिार होि है ।
द्विं द्व कहानी को रोिक नाकर पाठक को अिंत तक जोड़े रखता है ।
(कोई िो अपेचित च िंिु स्वीकार्य )
अथिण
‘शब्’ को नाटक का शर र कहा जािा है ।
नाटक में कहान शब्ोिं के माध्यम से हमार आँ खों के सामने घधटि होि
है , इसचलए नाटक में शब् का चवशेष महत्त्व होता है ।
शब्ों में दृश्य बनाने क क्षमिा होि है ।
नाटक के शब् शाल्कब्क अर्थण से ज्यािा व्यंजना क ओर ले जाते हैं ।
(कोई िो अपेचित च िंिु स्वीकार्य )
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4. प्रश्ों के अपेधक्षि उत्तर (शब्-स मा लगिग 50 शब् ) : (3×1)+
(2×1) =
(क)
5
समाचार उलटा धपराधमड शैल में धलखे जािे हैं ।
धकस ि घटना, समस्या या धवचार के सबसे महत्त्पूर्ण िथ्य, सूचना या
जानकार को सबसे पहले धलखा जाना।
उसके बाि उससे कम महत्त्पूर्ण जानकार
समािार के समापन तक र्ह प्रचिर्ा जारी रहना
इस शैल में समाचार को ि न िागों में बॉंटा जािा है —
अथिण
गहर छानब न, धवश्लेर्र् और व्याख्या के आिार पर समाचार पत्र-
पधत्रकाओं के धलए िैयार ररपोटण हिशेष ररपोटट कहलाि है ।
मौधलक शोि और छानब न के ज़ररये सावणजधनक िौर पर पहले से न
उपलब्ध सूचनाओं को प्रकाधशि करने वाल ररपोटण , खोज ररपोटण कहलाि
है ।
जबधक इन-डे प्र्थ ररपोटण सावणजधनक िौर पर उपलब्ध िथ्यों, सूचनाओं,
आँ कडों क छानब न के आिार पर िैयार क जाि है ।
(ख)
• फ चर का प्रारं ि आकर्णक और उत्सुकिा पैिा करनेवाला होना चाधहए।
• फ चर का प्रारं ि, मध्य और अंि सहज और स्वािाधवक िर के से एक
सार्थ बँिा होना चाधहए।
• पैराग्राफ छोटे होने चाधहए।
• फ चर क िार्ा सरल, रूपात्मक और मन को छूने वाल होन चाधहए।
अथिण
धिलचस्प /रुचि और ज्ञान को ध्यान में रखकर संवाििािाओं के ब च काम का
बँटवारा ‘ब ट’ कहलािा है । जैसे :
अपराि जगि् से जुडे ररपोटण र को अपने शहर या क्षेत्र में घटने वाल आपराधिक
घटनाओं क ररपोधटं ग करन होि है ।
(अन्य उचित उिाहरर् भी स्वीकार्य हैं )
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खण्ड—ख
5. धकन्ह ं र्दो प्रश्ों के उत्तर अपेधक्षि ( शब्-स मा लगिग 50--60 शब् ) : 3×2 = 6
(क) िाव-सौन्दयण—
• राम वनगमन के पश्चाि् कौशल्ा क ल्कथर्थधि का वर्णन
• ि वार पर अंधकि धचत्र क िरह कौशल्ा का जड हो जाना
• मोरन क िरह उिास हो जाना
धशल्प-सौन्दयण —
• ब्रजिार्ा
• धवयोग वात्सल्य रस, करुर् रस
• अनुप्रास, उपमा अलंकार
• गेयात्मक शैल आधि
(ख) • राजा रत्नसेन क अनुपल्कथर्थधि में रान नागमि क धवरह-वेिना का
अधिशयोल्कक्तपूर्ण वर्णन
• िौंरे और काग के माध्यम से नागमती द्वारा रत्नसेन को संिेश िेजना
• धवरह क आग में जलने से उठने वाले िुएँ के कारर् काग और िौंरे
का काला पड जाना
(ग) • रािा-कृष्ण के माध्यम से लौधकक प्रे म का धचत्रर्
• सल्कखयों का आपस संवाि
• प्रेम क अधिव्यल्कक्त के धलए राजा धशवधसंह और लल्कखमा िे व का
उल्लेख
• लोक व्यवहार के माध्यम से मानव य प्रेम क अधिव्यल्कक्त
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6. धकस एक प्रश् का उत्तर अपेधक्षि ( शब्-स मा लगिग 30–40 शब् ) : 2×1 = 2
(क) • राम के प्रधि अगाि प्रेम
• िावुकिा क पराकाष्ठा
• राम के प्रधि समपण र् का िाव
• राम के सार्थ च ताए समर् को याि करना
• िावाधिरे क में स्वयं को सि के िु खों का मूल समझना
(ख) • नाधयका क धवरह िशा को व्यक्त करने के धलए
• जैसे कृष्ण पि की चिुिणश िक आिे -आिे चाँ ि के आकार और चमक
में कम आने लगि है , वैसे ह नाधयका का कृशकार् होना
7. धकन्ह ं र्दो प्रश्ों के उत्तर अपेधक्षि (शब्-स मा लगिग 50–60 शब्) : 3×2 = 6
(क) • सत्ता का, व्यवथर्था का, शल्कक्तशाल व्यल्कक्त का
• सुधविािोधगयों, छद्म क्रां धिकाररयों, अधहं सावाधियों और सह-
अल्कस्तत्ववाधियों के ढोंग पर व्यंग्य धकया है
(ख) • धसंगरौल से मनुष्य के धवथर्थापन के धवरोि में पेडों के सूख जाने के
रूप में
• धसंगरौल क अपार खधनज संपिा पर सत्तािाररयों और उद्योगपधियों
क नज़र
प्रकृधि को नष्ट कर कोयले क खिानों और उन पर आिाररि िाप
धवद्युि् गृह क शंखला का बनना
प्राकृचतक सिंपिा का अिंधाधुन िोहन व औद्योगीकरर्
(ग) • मंधिर में मनोकामना की गाँ ठ बॉंिकर न चे आना
• संिव और पारो का धमलना
• मन क बाि का पूरा होना
8. धकस एक प्रश् का उत्तर अपेधक्षि (शब्-स मा लगिग 30–40 शब्) : 2×1 = 2
(क) • चनरिं कुश सत्ता थर्थाधपि करने के धलए अंि , गूँग और बहर प्रजा राजा
को पसिंि
• जनता के प्रश् और धवरोि पसंि नह ं होना
• चनचवयरोध शासन की इच्छा
(ख) • प्राकृधिक सािन संपन्न िेत्र धसंगरौल का उजड़ना
• हँ सिे , खेलिे , काम करिे लोगों का अपने मूल पररवेश से धवथर्थाधपि
होने के धलए धववश होना
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• प्राकृधिक मनोरम दृश्य के उजडने से उत्पन्न िु ख
9. धकन्ह ं र्दो प्रश्ों के उत्तर अपेधक्षि (शब्-स मा लगिग 30–40 शब्) : 2×2 =
(क) मालवा क िरि क धवशेर्िा:- 4
• सािन-संपन्न िरि
• िोजन और पान क अधिकिा
• सुख-समृल्कद्ध और संपन्निा से पररपूर्ण
(ख) लेखक को अपने गाँ व क उस औरि क याि हो आई धजसके सौंियण
पर वह लगिग िस वर्ण क उम्र में मुग्ध हो गया र्था, क्ोंधक उस
औरि के ज वन में ि ठु मर क नाधयका क िरह धवयोग क घन
छाया र्थ । अपने पधि के सार्थ उसक कि िेंट नह ं हुई र्थ ।
(ग) • राजथर्थान क चटक िूप क जगह बािलों से िरा आसमान र्था।
चौमासा अि पूर िरह गया नह ं र्था।
जगह-जगह पान नि -नालों और िालाबों के रूप में बरसाि पान
धवद्यमान र्था।
सवणत्र ज वंििा र्थ ।
***
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