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तदश नप (2022-23)
हंद (ऐि छक) कोड सं या 002
क ा - बारहवीं
नधा रत समय :3 घंटे पण
ू ाक :80
सामा य नदश :-
● इस नप म दो खंड ह - खंड 'अ' और 'ब'। कुल न 14 ह।
● खंड 'अ' म 48 व तप
ु रक न पछ
ू े गए ह। दए गए नदश का पालन करते हुए कुल
40 न के उ र द िजए।
● खंड 'ब' म वणना मक न पछ
ू े गए ह, आंत रक वक प भी दए गए ह।
● नदश को बहुत सावधानी से प ढ़ए और उनका पालन क िजए।
● दोन खंड के न के उ र दे ना अ नवाय है ।
● यथासंभव दोन खंड के न के उ र मशः ल खए।
खंड - अ
न 1 न न ल खत ग यांश को यानपव
ू क पढ़कर सवा धक उपयु त उ र वाले वक प
चुनकर ल खए (1×10 =10)
सं कृ त और स यता ये दो श द ह और इनके अथ भी अलग-अलग ह। स यता मनु य का
वह गुण है , िजससे वह अपनी बाहर तर क करता है । सं कृ त वह गुण है , िजससे वह
अपनी भीतर उ न त करता है और क णा, ेम एवं परोपकार सीखता है । आज रे लगाड़ी,
मोटर और हवाई जहाज़, लंबी-चौड़ी सड़क और बड़े-बड़े मकान, अ छा भोजन और अ छ
पोशाक ये सभी स यता क पहचान ह और िजस दे श म इनक िजतनी ह अ धकता है , उस
दे श को हम उतना ह स य मानते ह। मगर सं कृ त इन सबसे कह ं बार क चीज़ है । वह
मोटर नह ं, मोटर बनाने क कला है . मकान नह ं, मकान बनाने क च है। सं कृ त धन
नह ं, गण
ु है । सं कृ त ठाठ-बाट नह ं, वनय और वन ता है। एक कहावत है क स यता
वह चीज़ है जो हमारे पास है , ले कन सं कृ त वह गुण है जो हमम छपा हुआ है । हमारे
पास घर होता है , कपड़े होते ह, मगर ये सार चीज़ हमार स यता के सबत
ू ह, जब क
सं कृ त इतने मोटे तौर पर दखलाई नह ं दे ती, वह बहुत ह सू म और मह न चीज़ है और
वह हमार हर पसंद, हर आदत म छपी रहती है । मकान बनाना स यता का काम है. ले कन
हम मकान का कौन-सा न शा पसंद करते ह यह हमार सं कृ त बतलाती है । आदमी के
भीतर काम, ोध, लोभ, मद, मोह और म सर-ये छह वकार कृ त के दए हुए ह। परं तु
अगर ये वकार बेरोक-टोक छोड़ दए जाएँ तो आदमी इतना गर जाए क उसम और जानवर
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म कोई भेद नह ं रह जाएगा। इस लए आदमी इन वकार पर रोक लगाता है । इन दग
ु ण
ु पर
जो आदमी िजतना यादा काबू कर पाता है , उसक सं कृ त भी उतनी ह ऊँची समझी जाती
है । सं कृ त का वभाव है क वह आदान- दान से बढ़ती है । जब दो दे श या जा तय के
लोग आपस म मलते ह, तब उन दोन क सं कृ तयाँ एक-दस
ू रे को भा वत करती ह।
इस लए सं कृ त क ि ट से वह जा त या वह दे श बहुत ह धनी समझा जाता है , िजसने
यादा-से- यादा दे श या जा तय क सं कृ तय से लाभ उठाकर अपनी सं कृ त का वकास
कया हो।
(1)ग यांश म 'स यता को बाहर तर क ' बताया गया है य क यह -
(क) इ छापू त म स म है ।
(ख) भौ तक साधन क योतक है ।
(ग) सं कृ त से भ न पहचान लए है ।
(घ) क णा, ेम एवं परोपकार सखाती है ।
(2)स यता और सं कृ त का मूलभूत अंतर मशः है -
(क) रे लगाड़ी, वनय (ख) य ,अ य
(ग) बाहर तर क ,भीतर वं व (घ) रवाज़, सीख
(3)सं कृ त को 'मह न चीज़' कहने से लेखक स ध करना चाहते ह क सं कृ त है -
(क) अ यंत तु छ (ख) अ त मह वह न (ग) अ य धक उपयोगी (घ) अ त सव े ठ
(4) न न ल खत वा य म से स यता के संदभ म कौन-सा वा य सह है ?
(क) स यता मनु य के वाधीन चंतन क गाथा है ।
(ख) स यता मानव के वकास का वधायक गुण है ।
(ग) स यता मानव को कलाकार बना दे ती है ।
(घ) स यता सं कृ त से अ धक मह वपण
ू है ।
(5)सं कृ त क वृ है -
(क) आदाय- दाय (ख) आदाय- ाि त
(ग) य- व य (घ) आबाद-बबाद
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(6)'मकान के लए न शा पसंद करना हमार सं कृ त का प रचायक है ।' ऐसा इस लए कहा
गया है य क-
(क) घर हमार स यता क पहचान है ।
(ख) अ य लोग से जोड़ने का मा यम है ।
(ग) न शे के बना मकान बनाना क ठन है ।
(घ) हमार सोच-समझ को उजागर करता है ।
(7)अ य सं कृ तय का लाभ उठाकर अपनी सं कृ त का वकास करना दशाता है -
(क) समरसता (ख)संपण
ू ता
(ग)सफलता (घ)संप नता
(8)मनु य क मनु यता इसी बात म न हत है क वह-
(क) स यता और सं कृ त का चार- सार करता रहे ।
(ख) सं कृ त क सम ृ ध के लए क टब धता बनाए रहे ।
(ग) स यता क ऊँचाई क ाि त के लए य नशील रहे ।
(घ) मान सक ु टय पर नयं ण पाने के लए चे टावान रहे ।
(9)आदमी और जानवर का भेद समा त होना दशाता है -
(क) सामािजक असमानता (ख) चा र क पतन
(ग) सां दा यक भेदभाव (घ) अणुमा क गरावट
(10) सुसं कृत यि त से ता पय है -
(क) वकार त यि त (ख) वकासशील यि त
(ग) वचारशील यि त (घ) वकारमु त यि त
न 2 नीचे दो अप ठत का यांश दए गए ह कसी एक का यांश पर आधा रत न के
सवा धक उपयु त उ र वाले वक प चुनकर ल खए- (1×8 =8)
का यांश - एक
नमम कु हार क थापी से
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कतने प म कुट - पट ,
हर बार बखेर गई, कंतु
म ट फर भी तो नह ं मट !
आशा म न छल पल जाए, छलना म पड़ कर छल जाए
सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठुमक तो ढल जाए,
य तो ब च क गु ड़या-सी, भोल म ट क ह ती या
आँधी आये तो उड़ जाए, पानी बरसे तो गल जाए!
फसल उगतीं, फसल कटती ले कन धरती चर उवर है
सौ बार बने सौ बार मटे ले कन धरती अ वन वर है ।
म ट गल जाती पर उसका व वास अमर हो जाता है ।
रो दे तो पतझर आ जाए, हँस दे तो मधऋ
ु तु छा जाए
झम
ू े तो नंदन झम
ू उठे , थरके तो तांडव शरमाए
य म दरालय के याले सी म ट क मोहक म ती या
अधर को छू कर सकुचाए, ठोकर लग जाए छहराए।
उनचास मेघ, उनचास पवन, अंबर अव न कर दे ते सम
वषा थमती, आँधी कती, म ट हँसती रहती हरदम,
कोयल उड़ जाती पर उसका न वास अमर हो जाता है
म ट गल जाती पर उसका व वास अमर हो जाता है ।
म ट क म हमा मटने म
मट- मट हर बार सँवरती है
म ट - म ट पर मटती है
म ट - म ट को रचती है ।
(1)कु हार को कठोर कहने से क व कु हार क कस वृ को उजागर करता है ?
(क) अ याचार (ख) ढ़संक पी
(ग) ोधी (घ) वे छाचार
(2) म ट के गल जाने पर भी उसका व वास अमर व अटूट रहता है य क म ट है -
(क) चरवाई (ख) अधी वर
(ग) अ वनीता (घ) चर थायी
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(3) ऋतुओं के अनुसार म ट का रोना, हँसना, झम
ू ना व ले षत करता है क -
(क) मनु य क भाँ त भावक
ु वृ क है ।
(ख) सब के अनुकूल वयं को ढाल लेती है ।
(ग) कृ त म समयानस
ु ार प रवतन होता है ।
(घ) प-रं ग क भ नता भौगो लक भ नता है ।
(4) 'उनचास मेघ, उनचास पवन' के मा यम से क व का आशय है -
(क) मेघ और पवन क सव यापकता
(ख) कृ त के भयावह प का दशन
(ग) कई बार या असं य बार का संकेत
(घ) वषा व आँधी का नरं तर कमरत रहना
(5) 'य तो ब च क गु ड़या-सी भोल म ट ' का भावाथ है -
(क) ब च को म ट और गु ड़या से खेलना य है
(ख) गु ड़या क भाँ त म ट का अि त व यथ है
(ग) मूक म ट को मनु य इ छानस
ु ार प दान करता है
(घ) म ट मूक है और फसल उगा कर लोक सेवा करती है
(6) पेड़-पौध का लहराना म ट क कस या को दशाता है -
(क) थरकना (ख) छलना
(ग) टकराना (घ) बसना
(7) अनेक प धारण करने के बाद फर से म ट म वलय होना क वता क न न ल खत
पंि तय वारा प ट होता है -
(क) सौ बार बने सौ बार मटे (ख) ठोकर लग जाए छहराए
(ग) कतने प म कुट - पट (घ) ले कन धरती चर उवर है
(8)क वता का संदेश है -
(क) म ट के योग से प र चत करवाना
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(ख) म ट क मोहक म ती क सुंदरता
(ग) म ट क म हमा वारा ेरणा दे ना
(घ) म ट के परोपकार प का वणन
अथवा
का यांश - 2
अब म सूरज को नह ं डूबने दँ ग
ू ा ।
दे खो मने कंधे चौड़े कर लए ह
मु ठयाँ मजबूत कर ल ह
और ढलान पर ए ड़याँ जमाकर
खड़ा होना मने सीख लया है ।
घबराओ मत
म तज पर जा रहा हूँ।
सूरज ठ क जब पहाड़ी से लुढ़कने लगेगा
म कंधे अड़ा दँ ग
ू ा
दे खना वह वह ं ठहरा होगा।
अब म सूरज को नह ं डूबने दँ ग
ू ा।
मने सुना है उसके रथ म तम
ु हो
तु ह म उतार लाना चाहता हूँ
तम
ु जो वाधीनता क तमा हो
तम
ु जो साहस क मू त हो
तम
ु जो धरती का सुख हो
तम
ु जो कालातीत यार हो
तम
ु जो मेर धमनी का वाह हो
तम
ु जो मेर चेतना का व तार हो
तु ह म उस रथ से उतार लाना चाहता हूँ ।
रथ के घोड़े
आग उगलते रह
अब प हये टस से मस नह ं ह गे
मने अपने कंधे चौड़े कर लए ह ।
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सूरज जाएगा भी तो कहाँ
उसे यह ं रहना होगा
यह ं हमार साँस म
हमार रग म
हमारे संक प म
हमारे रतजग म
तम
ु उदास मत होओ
अब म कसी भी सूरज को
नह ं डूबने दँ ग
ू ा।
(1) इन पंि तय म क व का न चय कट होता है क वह
(क) पहाड़ी े म जाकर रहे गा
(ख) अपने ल य को पाकर रहे गा
(ग) कृ त के उपादान से े रत है
(घ) जीवन क उहापोह म उलझा है
(2) क व का तैयार होना दशाता है क वह -
(क) शार रक एवं मान सक प से तैयार है ।
(ख) द ु नया से लड़ने का साहस रखता है ।
(ग) नकारा मक भाव से बचाव चाहता है ।
(घ) नरं तर कमरत एवं उपे त रहता है ।
(3) 'घबराओ मत,म तज पर जा रहा हूँ।' पंि त का भाव है -
(क) पाठक के लए स दयता
(ख) सय
ू के लए अटूट धा
(ग) पवतारोहण के लए यासरत
(घ) ा य को पाने के लए सावधान
(4) सूरज वारा लोग के जीवन म सुख, सम ृ ध एवं काश का आगमन होता है । यह
कथन दशाता है क सूरज है -
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(क) च ा मक (ख) तीका मक
(ग) योगा मक (घ) वणना मक
(5) 'सूरज जाएगा भी तो कहाँ
उसे यह ं रहना होगा।' कथन दशाता है -
(क) ववशता (ख) था य व
(ग) आ मबोध (घ) ढ़ न चय
(6) क वता का संदेश या है ?
(क) अनुकूल प रि थ तय म ि थरता रखना
(ख) कृ त के साथ सामंज य था पत करना
(ग) उ दे य ाि त के लए ढ़ संकि पत रहना
(घ) सूया त से पूव काय का समापन करना
(7) न न ल खत कथन कारण को यानपव
ू क प ढ़ए उसके बाद दए गए वक प म से कोई
एक सह वक प चुनकर ल खए -
कथन (A) :तम
ु जो साहस क मू त हो, तुम जो धरती का सुख हो।
कारण ( R) :क व वयं को साहस क मू त मानता है , जो धरती के जीव के लए सुखद
प रि थ तयाँ उ प न कर सकता है ।
(क) कथन (A) तथा कारण(R) दोन सह ह तथा कारण कथन क सह या या करता है ।
(ख) कथन (A) गलत है ले कन कारण(R) सह है ।
(ग) कथन (A) तथा कारण(R) दोन गलत ह।
(घ) कथन (A) सह है ले कन कारण(R) उसक गलत या या करता है ।
(8) क व के संबध
ं म इनम से सह है क वह -
(क) स य क खोज करता है
(ख) भावुक वृ का है
(ग) लघत
ु ा का जानकार है
(घ) अद य साहस का धनी है
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न 3 न न ल खत न के उ र दे ने के लए उपयु त वक प का चयन क िजए ।
(1×5=5)
(1)राज पा नायडू ने एक ति ठत समाचार प के द तर म अपना आवेदन दया। या
पूण होने के प चात उ ह अलग डे क पर काम करने के लए कहा गया। यह दशाता है क
वह ह -
(क) लॉगर (ख) सा ा कारकता
(ग) उपसंपादक (घ) लांसर
(2) वशेष लेखन क श दावल के उ चत मलान को दशाने वाले वक प का चयन क िजए-
अ ब
(I) पयावरण (i) र दा
(II) यापार (ii) ससे स
(III) खेल (iii) आ ता
(IV) शेयर बाज़ार (iv) तेज ड़ए
(क) I-(ii). II-(iii) III-(i) IV-(iv)
(ख) I-(iii). II-(iv) III-(i) IV-(ii)
(ग) I-(i). II-(iii) III-(ii) IV-(iv)
(घ) I-(iv). II-(ii) III-(i) IV-(iii)
(3) दए गए कथन म से अंशका लक प कार के लए सह कथन का चयन क िजए -
(क) कम समय म उलटा परा मड शैल म समाचार लखने क कला म स धह त है ।
(ख) ि ं ग र कसी समाचार संगठन के लए एक नि चत मानदे य पर काम करने वाला
प कार है ।
(ग) अंशका लक प कार कसी समाचार संगठन म काम करने वाला नय मत वेतनभोगी
प कार है ।
(घ) लोकतां क समाज म पहरे दार क भू मका नभाता है , टाचार के वरोध के लए काय
करता है ।
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(4) ाई एंकर वह होता है जो -
(क) समाचार प तक सूचना भजवाता है ।
(ख) लैशबैक यज़
ू के लए लेखन करता है ।
(ग) पहले सा रत यज़
ू का पुनः सारण करता है ।
(घ) च के बना खबर के बारे म दशक को सीधे-सीधे बताता है।
(5)एंकर बाइट कौन दे ता है ?
(क) यज़
ू र डर (ख)एंकर
(ग)अपराधी (घ) य दश
न 4 न न ल खत का यांश को यानपव
ू क पढ़कर पछ
ू े गए न के सह उ र वाले
वक प चु नए - (1 × 6 = 6 )
भर जलद धरा को य अपार;
वे ह सुख-दख
ु म रहे य त,
तेरे हत सदा सम त य त;
वह लता वह ं क , जहाँ कल
तू खल , नेह से हल , पल ,
अंत भी उसी गोद म शरण
ल , मँद
ू े ग वर महामरण!
मझ
ु भा यह न क तू संबल
यग
ु वष बाद जब हुई वकल,
दख
ु ह जीवन क कथा रह
या कहूँ आज जो नह ं कह !
हो इसी कम पर व पात
य द धम रहे नत सदा माथ।
(1)'भर जलद धरा को य अपार' पंि त वारा तपा दत कया गया है –
(क) वैमन य (ख) अनुभव
(ग) नेह (घ) काश
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(2) क व वयं को भा यह न कहकर या स ध करना चाहते ह ?
(क) मनचाह स ध न मलना
(ख) सरोज क आ थक दशा
(ग) सरोज ह एकमा सहारा
(घ) पा रवा रक सद य से बछोह
(3) न न ल खत कथन पर वचार क िजए-
(i) क व सरोज को शकंु तला के समान मानते थे।
(ii) पु ी सरोज क म ृ यु असमय हो गई थी।
(iii) सरोज क म ृ यु अपनी ससरु ाल म हुई थी।
इन कथन म से कौन-सा/कौन-से कथन सह है /ह-
(क) केवल (i)
(ख) (ii) और (iii)
(ग) केवल (ii)
(घ) (ii) और (iii)
(4) 'हो इसी कम पर व पात' के मा यम से क व कहना चाहते ह क वह-
(क) क टदायक जीवन के बाद धा मक बन रहे ह।
(ख) म तक पर व पात सहने का साहस कर रहे ह।
(ग) सम त जीवन दख
ु म ह यतीत करते रहे ह।
(घ) तकूलताओं के आगे आ मसमपण कर रहे ह।
(5)दख
ु ह जीवन क कथा रह के मा यम से कट हो रह है -
(क) शैशवाव था (ख) व ृ धाव था
(ग) वयोगाव था (घ) व लेषणाव था
(6) ' या कहूँ आज, जो नह ं कह !'
पंि त के मा यम से क व क वाभा वक वशेषता बताने के लए सूि त कह जा सकती है -
(क) पर उपदे श कुशल बहुतेरे (ख) बथा मन ह राखो गोय
(ग) मुझसे बुरा न कोय (घ) मन के हारे हार है
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न 5 न न ल खत ग यांश को पढ़कर दए गए न के सह उ र वाले वक प चु नए -
(1 × 6 = 6 )
बालक के मुख पर वल ण रं ग का प रवतन हो रहा था, दय म कृ म और वाभा वक
भाव क लड़ाई क झलक आँख म द ख रह थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकल परदे
के हट जाने पर वयं वि मत होकर बालक ने धीरे से कहा, 'ल डू'। पता और अ यापक
नराश हो गए। इतने समय तक मेरा वास घट
ु रहा था। अब मने सुख से साँस भर । उन
सबने बालक क व ृ य का गला घ टने म कुछ उठा नह ं रखा था। पर बालक बच गया।
उसके बचने क आशा है य क वह 'ल डू' क पुकार जी वत व ृ के हरे प का मधुर ममर
था, मरे काठ क अलमार क सर दख
ु ाने वाल खड़खड़ाहट नह ं।
(1) 'ब चे के मख
ु पर रं ग बदल रहे थे।' इस पंि त के आधार पर आकलन करने से ात
होता है क ब चे म उठ रहे भाव……….. के ह ।
(क) स दयता (ख) घबराहट
(ग) अंतर वं व (घ) रोमांचकता
(2) ग यांश के आधार पर कौन-सा वा य सह है ?
(क) काठ क अलमार सदै व सर दख
ु ाती है ।
(ख) श ा णाल पर यं य कया गया है ।
(ग) ब च को पढ़ाना अ यंत सहज काय है ।
(घ) व ृ के हरे प का संगीत मधुर होता है ।
(3) बालक वारा धीरे से ल डू कहना दशाता है क –
(क) छोट व तु भी पुर कार है ।
(ख) कृ मता का लबादा उतर गया।
(ग) कृ मता का था य व संभव है ।
(घ) लेखक का उ दे य पूरा हो गया।
(4)'अब मने सुख क साँस भर ' के मा यम से कह सकते ह क वह –
(क) अ यंत जाग क नाग रक ह।
(ख) बाल मनो व ान से प र चत ह।
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(ग) तरानस
ु ार श ा के प धर ह।
(घ) अपने सुख क कामना करते ह।
(5)ग यांश हम संदेश दे ता है क -
(क) वाभा वक वकास हे तु सहज एवं आनंदपण
ू वातावरण होना चा हए।
(ख) रटं त णाल के कारण ब चे क दय यथा चंताजनक हो जाती है ।
(ग) बालक म नडरता थी तभी अपनी ल डू क इ छा को कट कर पाया है।
(घ) अ भभावक एवं अ यापक को बालक का चहुँमुखी वकास करना चा हए ।
(6) न न ल खत कथन कारण को यानपव
ू क प ढ़ए उसके बाद दए गए वक प म से कोई
एक सह वक प चन
ु कर ल खए -
कथन (A) :ल डू क पक
ु ार जी वत व ृ के हरे प का मधुर ममर था।
कारण ( R) :बालक वारा ल डू माँगा जाना व ृ के हरे प के समान इं गत करता है ।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोन सह ह तथा कारण कथन क सह या या करता है ।
(ख) कथन (A) गलत है ले कन कारण (R) सह है ।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोन गलत ह।
(घ) कथन (A) सह है ले कन कारण (R) उसक गलत या या करता है।
न 6 न न ल खत न के सह उ र वाले वक प चु नए- (1× 5 = 5 )
(1) ब कोहर क माट पाठ के अनस
ु ार न न ल खत कथन पर वचार क िजए -
(i) पाठ म मनु य के संबध
ं क मा मक पड़ताल न हत है ।
(ii) जीवन क ि थ तयाँ ऋतओ
ु ं के साथ बदलती ह।
(iii) कृ त के कोप को ामीण जीवन झेलता है ।
(iv) ामीण जीवन म कृ त के त अलगाव है ।
इन कथन म से कौन-सा/कौन-से कथन सह है /ह-
(क) केवल (i)
(ख) (ii) और (iii)
(ग) केवल (iv)
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(घ) (i), (ii) और (iii)
(2) वकास क औ यो गक स यता उजाड़ क अपस यता बन गई है । इसका कारण है -
(क) संप नता (ख) दष
ू ण
(ग) न दयाँ (घ) पठार
(3) न न ल खत यु म पर वचार क िजए-
(i) भरभंडा : फूल
(ii) ड डहा : साँप
(iii) कोइयाँ : जलपु प
(iv) धा मन : अनाज
इन यु म म से कौन-से सह सुमे लत ह-
(क) केवल (i)
(ख) (ii) और (iii)
(ग) केवल (iv)
(घ) (i), (ii) और (iii)
(4) अ भलाषाओं क राख से ता पय है -
(क) जमा पँज
ू ी का जल जाना
(ख) इ छा क पू त होना
(ग) आकां ा का अधूरा रह जाना
(घ) च र पर कलंक लगना
(5) 'कोई भी तालाब अकेला नह ं है ।' यह कथन दशाता है -
(क) राजा बहुत से तालाब बनवाते ह।
(ख) तालाब के पास गाँव बस जाते ह।
(ग) इसम कूड़ा-कचरा डाल दया जाता है ।
(घ) अनेक ोत का जल मला होता है ।
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खंड - ब वणना मक न
न 7 न न ल खत दए गए तीन शीषक म से कसी एक शीषक पर लगभग 120 श द
म रचना मक लेख ल खए - (1×5=5)
(1) गरमी क पहल बा रश
(2) जैसे ह मने अलमार खोल
(3) मैच खेलने का अवसर
न 8 क ह ं दो न के उ र लगभग 60 श द म ल खए - (3 ×2 =6)
(क) 'क वता कोने म घात लगाए बैठ है । यह हमारे जीवन म कसी भी ण वसंत क तरह
आ सकती है ।' इस कथन क साथकता स ध क िजए।
(ख) रं गमंच को तरोध का सश त मा यम कहना कहाँ तक उ चत है ? तीन कारण का
उ लेख क िजए।
(ग) कहानी के पा का च र - च ण कथानक क आव यकता के अनुसार भावशाल ढं ग से
कैसे तुत कया जाता है । क ह ं दो तर क का वणन उदाहरण स हत द िजए।
न 9 न न ल खत न के उ र लगभग 60 श द म द िजए - (3 ×2 =6)
(क) अ धकांश समाचार एक वशेष शैल म लखे जाते ह। इसका कारण बताते हुए शैल का
व तत
ृ प रचय द िजए।
(ख) अ छे फ चर क क ह ं तीन वशेषताओं का उ लेख क िजए।
न 10 न न ल खत तीन न म से क ह ं दो न के उ र लगभग 40 श द म
द िजए- (2 ×2 = 4)
(क) 'मने दे खा एक बँद
ू ' क वता का तपा य ल खए।
(ख) आशय प ट क िजए -
अधर लगे ह आ न क र कै पयान ान,
चाहत चलन ये सँदेसो लै सुजान को।
(ग) 'तोड़ो' क वता नवसज
ृ न क ेरणा है । कथन के आलोक म अपने वचार कट क िजए।
न 11 न न ल खत म से कसी एक का यांश क स संग या या क िजए -(6 ×1= 6 )
लघु सुरधनु से पंख पसारे -शीतल मलय समीर सहारे ।
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उड़ते खग िजस ओर मँह
ु कए- समझ नीड़ नज यारा।
बरसाती आँख के बादल-बनते जहाँ भरे क णा जल।
लहर टकराती अनंत क - पाकर जहाँ कनारा।
हे म कंु भ ले उषा सवेरे - भरती ढुलकाती सुख मेरे।
म दर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा ।
अथवा
मह ं सकल अनरथ कर मूला । सो सु न समु झ स हउँ सब सूला।
सु न बन गवनु क ह रघुनाथा। क र मु न बेष लखन सय साथा।।
बन पान ह ह पयादे ह पाएँ। संक सा ख रहे उँ ऐ ह घाएँ।
बहु र नहा र नषाद सनेहू । कु लस क ठन उर भयउ न बेहू।।
अब सबु आँ ख ह दे खउ
े ँ आई । िजअत जीव जड़ सबइ सहाई ।।
िज ह ह नर ख मग साँ प न बीछ । तज हं बषम बषु तापस तीछ ।।
न 12 न न ल खत तीन न म से क ह ं दो न के उ र लगभग 40 श द म
द िजए - (2 ×2 =4)
(क) 'उसके पैर गाँव क ओर बढ़ ह नह ं रहे थे। इसी पगडंडी से बड़ी बहु रया अपने मैके
लौटा आवेगी गाँव छोड़कर चल जावेगी। फर कभी नह ं आवेगी।'
लेखक संव दया और बड़ी बहु रया के मा यम से समाज के एक बड़े वग का वणन करते
तीत हो रहे ह। इसे प ट करते हुए वतमान प र े य के साथ संबध
ं था पत क िजए।
(ख)' भीड़ लड़के ने द ल म भी दे खी थी, बि क रोज़ दे खता था। ले कन इस भीड़ का
अंदाज नराला था।' पंि त के मा यम से भीड़ क तल
ु ना मक ववेचना क िजए।
(ग) शेर के मँह
ु म जानवर का घस
ु ना वसंग त को तपा दत करता है । प ट क िजए।
न 13 न न ल खत ग यांश को पढ़कर स संग या या क िजए - (6 × 1=6 )
वकास का यह 'उजला' पहलू अपने पीछे कतने यापक पैमाने पर वनाश का अंधेरा लेकर
आया था. हम उसका छोटा-सा जायज़ा लेने द ल म ि थत 'लोकायन' सं था क ओर से
संगरौल गए थे। संगरौल जाने से पहले मेरे मन म इस तरह का कोई सुखद म नह ं था
क औ योगीकरण का च का, जो वतं ता के बाद चलाया गया, उसे रोका जा सकता है ।
शायद पतीस वष पहले हम कोई दस
ू रा वक प चुन सकते थे, िजसम मानव सुख क कसौट
भौ तक ल सा न होकर जीवन क ज रत वारा नधा रत होती। पि चम िजस वक प को
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खो चुका था भारत म उसक संभावनाएँ खल
ु थीं, य क अपनी सम त को शश के बावजद
ू
अं ेजी राज हंद ु तान को संपण
ू प से अपनी 'सां कृ तक कॉलोनी' बनाने म असफल रहा
था।
न14 न न ल खत न म से कसी एक का उ र लगभग 60 श द म द िजए -
(3×1=3)
(क) धरती का वातावरण गरम हो रहा है । कारण बताते हुए नवारण के उपाय भी बताइए।
(ख) सूरदास कहाँ तो नैरा य, ला न, चंता और ोभ के अपार जल म गोते खा रहा था,
कहाँ यह चेतावनी सन
ु ते ह उसे ऐसा मालम
ू हुआ कसी ने उसका हाथ पकड़कर कनारे पर
खड़ा कर दया।
नकारा मक मानवीय पहलओ
ु ं पर अकेले सरू दास का यि त व भार पड़ गया। जीवन मू य
क ि ट से इस कथन पर वचार क िजए।
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