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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा6
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 3: एषः कः ? एषा का ? एतत् कम्
?
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
31 – 46 12 40 हन्द
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · सं स्कृ त · द पकम्
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ?
NCERT कक्षा 6 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के तृतीयः पाठः — एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? के सभी अभ्यास , संवाद , चत्र-काय
और प रयोजना-काय के पूरे हल। यह से द पकम् वणमाला छोड़कर असली भाषा म उतरती है — तीन लङ्ग (पुं लङ्ग, स्त्री लङ्ग, नपुंसक लङ्ग), तीन
वचन (एकवचन, द्ववचन, बहुवचन), सवनाम सः / एषः / कः — सा / एषा / का — तत् / एतत् / कम्, और पठ त–पठतः–पठ न्त जैसे
क्रयापद। पृष्ठ 31 से 46 तक का हर शीषक — पुं लङ्गम्–स्त्री लङ्गम्–नपुंसक लङ्गम्, क्रयापदा न, सवनाम-प्रयोगः, संवाद-पे टकाएँ, उ ैः पठन्तु
स्मरन्तु अवगच्छन्तु च, वयं शब्दाथान् जानीमः, वयम् अभ्यासं कुमः (प्रश्न १–९), योग्यता वस्तरः तथा प रयोजनाकायम् — क्रम से हल कया
गया है, हर संवाद के हन्द अनुवाद के साथ।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
द पकम् (कक्षा 6) 31 – 46
खं ड प्रश्न
12 40
माध्यम
हन्द
पुं लङ्गम् – स्त्री लङ्गम् – नपुस
ं क लङ्गम् — पृष्ठ 31–32
पाठ-प रचयः : लङ्गम् एवं वचनम्
पाठ-प रचयः
प्र.1 पुं लङ्गम् — एकवचनम् / वचनम् / बहुवचनम् ( चत्र-ता लका, पृष्ठ 31) — बालकः, वृक्षः, गजः — एतेषां त्री ण
वचना न लखन्तु ।
उत्तरम् (संस्कृतम्): एक स्मन् एकवचनम्, द्वयोः वचनम्, त्रषु अ धकेषु वा बहुवचनम् भव त। ( हन्द : एक के लए एकवचन,
ठ क दो के लए द्ववचन, और तीन या तीन से अ धक के लए बहुवचन।)
पृष्ठ 31 क चत्र-ता लका इस प्रकार पढ़ जाएगी —
चत्रम् एकवचनम् (1) वचनम् (2) बहुवचनम् (3+)
लड़का बालकः बालकौ बालकाः
पेड़ वृक्षः वृक्षौ वृक्षाः
हाथी गजः गजौ गजाः
तीन शब्द अकारान्त पुं लङ्ग ह, इस लए तीन का साँचा एक ही है —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
पाितपिदकम् + ◌ = एकवचनम् → बालक + ◌ः = बालकः
ः
पाितपिदकम् + औ = ि वचनम् → बालक + औ = बालकौ
पाितपिदकम् + आः = बहुवचनम् → बालक + आः = बालकाः
वचन क्य ज़रूरी है: हन्द और अं ेज़ी म केवल दो वचन ह — एक और अनेक। संस्कृत म ठ क दो के लए
अलग रूप है। इसी लए दो पेड़ को ‘वृक्षाः’ नह , वृक्षौ कहा जाएगा। चत्र गनकर दे खए — दूसरे खाने म हर चत्र
म दो ही आकृ तयाँ ह।
अपने आप क जए: इसी साँचे पर और शब्द बनाइए — छात्रः / छात्रौ / छात्राः, अ ः / अ ौ / अ ाः, सहः /
सहौ / सहाः, मयूरः / मयूरौ / मयूराः।
प्र.2 स्त्री लङ्गम् — एकवचनम् / वचनम् / बहुवचनम् ( चत्र-ता लका, पृष्ठ 31–32) — बा लका, वै ा, अजा —
एतेषां त्री ण वचना न लखन्तु ।
उत्तरम् (संस्कृतम्): आकारान्त-स्त्री लङ्गे एकवचने ‘आ’, द्ववचने ‘ए’, बहुवचने ‘आः’ भव त। ( हन्द : आकारान्त स्त्री लङ्ग शब्द म
एकवचन म ‘आ’, द्ववचन म ‘ए’ और बहुवचन म ‘आः’ आता है।)
चत्रम् एकवचनम् (1) वचनम् (2) बहुवचनम् (3+)
लड़क बािलका बािलके बािलकाः
म हला च कत्सक वै ा वै े वै ाः
बकरी अजा अजे अजाः
बािलका → बािलके → बािलकाः
वै ा → वै े → वै ाः
अजा → अजे → अजाः
ध्यान क बात: स्त्री लङ्ग के एकवचन म वसग नह लगता — ‘बा लकाः’ नह , केवल बा लका। वसग तो
बहुवचन म आता है (बा लकाः)। पुं लङ्ग म उल्टा है — वहाँ एकवचन म ही वसग है (बालकः)। यही सबसे आम भूल
है, इसे बोलकर याद क जए।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
पुं लङ्ग–स्त्री लङ्ग क जो ड़याँ: बालकः – बा लका, शक्षकः – श क्षका, गायकः – गा यका, वैद्यः – वैद्या, अजः –
अजा, छात्रः – छात्रा। पुं लङ्ग म ‘अ’ को ‘आ’ या ‘इका’ करके स्त्री लङ्ग बन जाता है।
प्र.3 नपुंसक लङ्गम् — एकवचनम् / वचनम् / बहुवचनम् ( चत्र-ता लका, पृष्ठ 32) — पत्रम्, चक्रम्, पुस्तकम् —
एतेषां त्री ण वचना न लखन्तु ।
उत्तरम् (संस्कृतम्): अकारान्त-नपुंसक लङ्गे एकवचने ‘म्’, द्ववचने ‘ए’, बहुवचने ‘आ न’ भव त। ( हन्द : अकारान्त नपुंसक लङ्ग
शब्द एकवचन म ‘म्’ पर, द्ववचन म ‘ए’ पर और बहुवचन म ‘आ न’ पर समाप्त होते ह।)
चत्रम् एकवचनम् (1) वचनम् (2) बहुवचनम् (3+)
पत्ता पत्र म् पत्र े पत्र ािण
प हया क्र
च म् च ेक्र क्र
च ािण
पुस्तक पुस्तकम् पुस्तके पुस्तकािन
‘पत्रा ण’ म ‘ण’ क्य , और ‘पुस्तका न’ म ‘न’ क्य : यह णत्व- वधानम् है। य द शब्द म पहले कह ऋ, र् या ष्
आ चुका हो, तो आगे आने वाला ‘न’ बदलकर ‘ण’ हो जाता है — पत्र◌ा ण, चक्र◌ा ण (दोन म ‘र्’ है)। ‘पुस्तक’ म
‘र्’ नह है, इस लए वहाँ ‘न’ ही रहता है — पुस्तका न। इसी नयम से — मत्रा ण, वस्त्रा ण, नेत्रा ण; परन्तु फला न,
भवना न, कमला न।
तीन लङ्ग का एक-नज़र-साँचा:
लङ्गम् एकवचनम् वचनम् बहुवचनम्
पुं लङ्गम् (अकारान्त) –ः (बालकः) –औ (बालकौ) –आः (बालकाः)
स्त्री लङ्गम् (आकारान्त) –आ (बा लका) –ए (बा लके) –आः (बा लकाः)
नपुंसक लङ्गम् (अकारान्त) –म् (फलम्) –ए (फले) –आ न (फला न)
इन नौ खान को कण्ठस्थ कर ली जए — आगे का पूरा पाठ इन्ह पर चलता है।
क्रयापदा न — पृष्ठ 33
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ?
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क्रया के तीन वचन
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पाठ-प रचयः
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a s em न ( चत्र-ता लका, पृष्ठ 33) — पठ त, पब त, खाद त, गच्छ त, क्र ड त — एतेषां क्रयापदानां
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क्रयापदा
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प्र.1
एकवचनम्, वचनम्, बहुवचनं च लखन्तु ।
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उत्तरम् (संस्कृतम्): य स्मन् वचने कता, त स्मन्नेव वचने क्रयापदम् अ प भव त। ( हन्द : कता जस वचन म होगा, क्रया भी उसी
वचन म आएगी।) a
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अथः ( हन्द ) एकवचनम् (एकः) वचनम् ( ौ) बहुवचनम् (बहवः)
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पढ़ना पठित पठतः पठि
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पीना िपबिन्त
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िपबित िपबतः
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खाना खादित खादतः खादिन्त
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जाना ग च्छित ग च्छिन्त
खेलना क्रीडित agl क्रीडतः क्रीडिन्त
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पाँच क्रयाओं का प्रत्यय-साँचा एक ही है —
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धात.ुc+o = एकवचनम् → पठ् + अ + ित = पठित g l as
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aseधात ु + = ि वचनम् → पठ् + अ + तः = पठतः
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धात ु + न् = बहुवचनम् → पठ् + अिन्त = पठिन्त
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as त। (एक लड़का पढ़ता है) — बालकौ पठतः। (दो लड़के पढ़ते ह) —
वाक्य म मलाकर दे खए: बालकःlपठ
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बालकाः पठ न्त। (कई लड़के पढ़ते ह)। य द कता ‘बालकौ’ हो और क्रया ‘पठ त’ लख द, तो वाक्य अशुद्ध हो
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जाएगा — यही इस ता लका क असली सीख है।
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पाठ म आई और क्रयाएँ: करो त / कुरुतः / कुव न्त (करना), पाठय त (पढ़ाना), लख त ( लखना), भ्रम त
m (घूमना), नृत्य त / नृत्यतः (नाचना), गाय त / गाय न्त (गाना), धाव त / धाव न्त (दौड़ना), चर त / चरतः / चर न्त
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(चरना), वहर त (टहलना), वकस त ( खलना), पत त ( गरना), चालय त (चलाना), अ स्त / स्तः / स न्त (है / ह)।
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सवनाम-प्रयोगः — पृष्ठ 34
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
तद् / एतद् सवनाम
पाठ-प रचयः
प्र.1 सवनाम-प्रयोगः ( चत्र-ता लका, पृष्ठ 34) — सः शुकः, एषः बालकः, सा श क्षका, एषा बा लका, तत् फलम्, एतत्
फलम् — एतेषां त्री ण वचना न लखन्तु, ‘तद्’ ‘एतद्’ इत्यनयोः भेदं च वदन्तु ।
उत्तरम् (संस्कृतम्): तद्-शब्दः दूरस्थ-वस्तूनाम् कृते, एतद्-शब्दः तु समीपस्थ-वस्तूनाम् कृते प्रयुज्यते। ( हन्द : ‘तद्’ यानी ‘वह’ —
दूर क वस्तु के लए; ‘एतद्’ यानी ‘यह’ — पास क वस्तु के लए।)
लङ्गम् सवनाम एकवचनम् वचनम् बहुवचनम्
पुं लङ्गम् तद् (वह) सः शुक ः तौ शुक ौ ते शुक ाः
एतद् (यह) एषः बालकः एतौ बालकौ एते बालकाः
स्त्री लङ्गम् तद् (वह) सा िशिक्षका ते िशिक्षके ताः िशिक्षकाः
एतद् (यह) एषा बािलका एते बािलके एताः बािलकाः
नपुंसक लङ्गम् तद् (वह) तत् फलम् ते फले तािन फलािन
एतद् (यह) एतत् फलम् एते फले एतािन फलािन
सवनाम कता के साथ मलकर चलता है: जस लङ्ग और वचन म संज्ञा है, ठ क उसी लङ्ग-वचन म सवनाम
आएगा। ‘शुकौ’ द्ववचन-पुं लङ्ग है, इस लए उसके साथ तौ; ‘फला न’ बहुवचन-नपुंसक लङ्ग है, इस लए उसके साथ
ता न। इसे वशेषण- वशेष्य-भावः कहते ह।
एक चेतावनी — ‘ते’ तीन बार आता है: ते पुं लङ्ग-बहुवचन भी है (ते बालकाः), स्त्री लङ्ग- द्ववचन भी (ते श क्षके)
और नपुंसक लङ्ग- द्ववचन भी (ते फले)। कस अथ म है, यह आगे आई संज्ञा से ही तय होगा। इसी तरह ‘एते’
पुं लङ्ग-बहुवचन, स्त्री लङ्ग- द्ववचन और नपुंसक लङ्ग- द्ववचन — तीन हो सकता है।
पुं लङ्गम् (एकवचनम् / वचनम् / बहुवचनम्) — पृष्ठ 35–36
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पाठः — संवादाः
पाठः
प्र.1 पुं लङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 35 — सः कः ? सः शक्षकः । सः क करो त ? सः पाठय त । क सः भ्रम त ? न, सः
न भ्रम त । सः तु पाठय त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु, व्याकरणं च स्प ीकुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् हन्द
सः कः ? वह कौन है ?
सः शक्षकः । वह िशक्षक है।
सः क करो त ? वह क्या कर रहा है ?
सः पाठय त । वह पढ़ ा रहा है।
क सः भ्रम त ? क्या वह घूम रहा है ?
न, सः न भ्रम त । नही,ं वह घूम नही ं रहा।
सः तु पाठय त । वह तो पढ़ ा रहा है।
व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): ‘सः’ इ त तद्-शब्दस्य पुं लङ्गे प्रथमा- वभक्तेः एकवचनम्। ‘कः’ इ त कम्-शब्दस्य पुं लङ्गे
प्रथमैकवचनम्। ‘पाठय त’, ‘भ्रम त’ इ त लट् -लकारे प्रथम-पुरुषे एकवचनम्।
दो छोटे शब्द, पूरा अथ: कम् वाक्य के आरम्भ म आए तो वह ‘क्या …?’ वाला प्रश्नवाचक बन जाता है — ‘ क सः
भ्रम त ?’। और न क्रया से पहले आए तो नषेध करता है — ‘सः न भ्रम त’। अन्त म तु (= ब ल्क, तो) सही बात पर
ज़ोर दे ता है — ‘सः तु पाठय त’।
अन्तर पक ड़ए: पठ त = पढ़ता है (स्वयं), पाठय त = पढ़ाता है (दूसरे को)। ‘पाठय त’ म ‘इ’ ( णच्) प्रत्यय है जो
क्रया को ‘करवाने वाली’ बना दे ता है — जैसे चल त (चलता है) → चालय त (चलाता है)।
प्र.2 पुं लङ्गम् ( वचनम्), पृष्ठ 35 — तौ कौ ? तौ मयूरौ । तौ क कुरुतः ? तौ नृत्यतः । क तौ खादतः ? न, तौ न
खादतः । तौ तु नृत्यतः । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
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संस्कृतम् हन्द
तौ कौ ? वे दोनों कौन है ं ?
तौ मयूरौ । वे दोनों मोर है।
ं
तौ क कुरुतः ? वे दोनों क्या कर रहे है ं ?
तौ नृत्यतः । वे दोनों नाच रहे है।
ं
क तौ खादतः ? क्या वे दोनों खा रहे है ं ?
न, तौ न खादतः । नही,ं वे दोनों खा नही ं रहे।
तौ तु नृत्यतः । वे दोनों तो नाच रहे है।
ं
व्याकरण- ववेचनम्: ‘तौ’ = तद्-शब्दस्य पुं लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘कौ’ = कम्-शब्दस्य पुं लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘मयूरौ’ = मयूर-
शब्दस्य पुं लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्। ‘कुरुतः, नृत्यतः, खादतः’ इ त सवा ण लट् -लकारे प्रथम-पुरुषे वचना न।
पूरा वाक्य वचन म: दे खए — सवनाम तौ, संज्ञा मयूरौ, क्रया नृत्यतः — तीन द्ववचन म ह। संस्कृत म यह
मेल अ नवाय है। हन्द म हम ‘वे दोन नाच रहे ह’ कहकर ‘दोन ’ शब्द जोड़ते ह; संस्कृत म यह काम रूप ही कर
दे ता है।
करो त का पूरा प रवार: करो त (एक करता है) – कुरुतः (दो करते ह) – कुव न्त (कई करते ह)। यह ‘कृ’ धातु का
रूप है और तीन वचन म बहुत बदलता है, इस लए इसे अलग से याद र खए।
प्र.3 पुं लङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 35 — ते के ? ते बालकाः । ते क कुव न्त ? ते क्र ड न्त । क ते गाय न्त ? न, ते न
गाय न्त । ते तु क्र ड न्त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
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संस्कृतम् हन्द
ते के ? वे (सब) कौन है ं ?
ते बालकाः । वे लड़के है।
ं
ते क कुव न्त ? वे क्या कर रहे है ं ?
ते क्र ड न्त । वे खेल रहे है।
ं
क ते गाय न्त ? क्या वे गा रहे है ं ?
न, ते न गाय न्त । नही,ं वे गा नही ं रहे।
ते तु क्र ड न्त । वे तो खेल रहे है।
ं
व्याकरण- ववेचनम्: ‘ते’ = तद्-शब्दस्य पुं लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘के’ = कम्-शब्दस्य पुं लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘बालकाः’ =
प्रथमा-बहुवचनम्। ‘कुव न्त, क्र ड न्त, गाय न्त’ — लट् -लकारे प्रथम-पुरुषे बहुवचना न।
चत्र से मलाइए: पृष्ठ 35 के चत्र म चार लड़के गद से खेल रहे ह — इसी लए यहाँ बहुवचन है। य द चत्र म केवल
दो होते तो वाक्य होता — ‘तौ बालकौ। तौ क्र डतः।’ चत्र गनकर वचन तय करना ही इस पूरे पाठ का अभ्यास है।
तीन संवाद का एक साँचा: (1) प रचय-प्रश्न — कः / कौ / के ? (2) उत्तर — सः शक्षकः। (3) क्रया-प्रश्न —
क करो त / कुरुतः / कुव न्त ? (4) क्रया-उत्तर। (5) जाँच-प्रश्न — क सः … ? (6) नषेध — न, सः न …। (7)
सुधार — सः तु …। यही साँचा पूरे पाठ म छह बार दोहराया गया है।
प्र.4 पुं लङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 36 — एषः कः ? एषः शक्षकः । शक्षकः क करो त ? शक्षकः लख त । कम् एषः
पठ त ? न, एषः न पठ त । एषः लख त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ?
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संस्कृतम् हन्द
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यह कौन है ?
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एषः शक्षकः । यह िशक्षक है।
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शक्षकः क करो त ? िशक्षक क्या कर रहा है ?
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शक्षकः लख त ।
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कम् एषः पठ त ?
a क्या यह पढ़ रहा है ?
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न, एषः न पठ त । एषः लख त । नही,ं यह पढ़ नही ं रहा। यह िलख रहा है।
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comप्रथम-पुरुषे एकवचनम्। g
व्याकरण- ववेचनम्: ‘एषः’ = एतद्-शब्दस्य पुं लङ्गे प्रथमा-एकवचनम् (समीपस्थाथ)। ‘ शक्षकः’ प्रथमा-एकवचनम्। ‘ लख त,
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पठ त’ लट् -लकारे
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a gl ‘सः’ और ‘एषः’ का फ़क़: पृष्ठ 35 के चत्र म शक्षक कक्षा म दूर खड़ा है, इस लए वहाँ सः (वह) है। पृष्ठ 36 म दो
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व्य क्त शक्षक क ओर पास से इशारा कर रहे ह, इस लए यहाँ एषः (यह) है। संस्कृत म दूरी ही तय करती है क तद्
लगेगा या एतद्।
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‘ कम्’ का स -रूप: ‘ कम् एषः’ म ‘म्’ ज्य का त्य रहा, क्य क आगे स्वर (ए) है। पर ‘ क सः’, ‘ क तौ’, ‘ क
करो त’ म आगे व्यञ्जन है, इस लए ‘म्’ बदलकर अनुस्वार (◌ं) हो गया। यही पछले पाठ का मोऽनुस्वारः नयम है।
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a s em पुं लङ्गम् ( वचनम्), पृष्ठ 36 — एतौ कौ ? एतौ बालकौ । बालकौ क कुरुतः ? बालकौ पठतः । कम् एतौ
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लखतः ? न, एतौ न लखतः । एतौ तु पठतः । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
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हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् हन्द
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एतौ कौ ? ये दोनों कौन है ं ?
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ये दोनों लड़के है।
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agl बालकौ क कुरुतः ? दोनों लड़के क्या कर रहे है ं ?
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बालकौ पठतः । दोनों लड़के पढ़ रहे है।
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कम् एतौ लखतः ? क्या ये दोनों िलख रहे है ं ?
न, एतौ न लखतः । एतौ तु पठतः । a g
नही,ं ये दोनों िलख नही ं रहे। ये दोनों तो पढ़ रहे है।
ं
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
व्याकरण- ववेचनम्: ‘एतौ’ = एतद्-शब्दस्य पुं लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘बालकौ’ = प्रथमा- द्ववचनम्; ‘कुरुतः, पठतः, लखतः’ =
लट् -लकारे प्रथम-पुरुषे द्ववचना न।
सवनाम क जगह सं ा: बीच म ‘एतौ क कुरुतः ?’ न कहकर पुस्तक ने ‘बालकौ क कुरुतः ?’ कहा है। संस्कृत
म जब बात साफ़ हो चुक हो, तब सवनाम क जगह संज्ञा भी रखी जा सकती है — अथ वही रहता है, पर वाक्य
और स्पष्ट हो जाता है।
वचन के तीन चह्न याद र खए: संज्ञा म –औ (बालकौ), सवनाम म तौ / एतौ / कौ, और क्रया म –तः
(पठतः)। तीन एक साथ आएँ, तभी वाक्य शुद्ध है।
प्र.6 पुं लङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 36 — एते के ? एते बालकाः । बालकाः क कुव न्त ? बालकाः पब न्त । कम् एते जलं
पब न्त ? आम्, एते जलं पब न्त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् हन्द
एते के ? ये (सब) कौन है ं ?
एते बालकाः । ये लड़के है।
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बालकाः क कुव न्त ? लड़के क्या कर रहे है ं ?
बालकाः पब न्त । लड़के पी रहे है।
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कम् एते जलं पब न्त ? क्या ये पानी पी रहे है ं ?
आम्, एते जलं पब न्त । हाँ, ये पानी पी रहे है।
ं
व्याकरण- ववेचनम्: ‘एते’ = एतद्-शब्दस्य पुं लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘बालकाः’ = प्रथमा-बहुवचनम्; ‘जलम्’ इ त कम, अतः
द्वतीया- वभक्तेः एकवचनम् — ‘जलम्’ → व्यञ्जनात् पूव ‘जलं’। ‘ पब न्त, कुव न्त’ बहुवचना न।
यह संवाद बाक़ पाँच से अलग क्य है: यहाँ उत्तर ‘न’ से नह , ‘आम्’ (हाँ) से शुरू होता है — क्य क प्रश्न सही
था। यानी पुस्तक दखा रही है क प्रश्न का उत्तर हाँ म भी हो सकता है। आम् = हाँ, न = नह , तु = ब ल्क।
यहाँ पहली बार कम आया है: बाक़ संवाद म केवल कता और क्रया थी। यहाँ ‘जलं’ जुड़ा है — जो पया जा रहा
है, यानी कम। कम म तीया वभ क्त लगती है, जो आगे क कक्षाओं म वस्तार से पढ़ जाएगी। अभी इतना
काफ़ है — जलम् (यह है) → जलं पब त (इसे पीता है)।
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स्त्री लङ्गम् (एकवचनम् / वचनम् / बहुवचनम्) — पृष्ठ 37–38
पाठः — संवादाः
पाठः
प्र.1 स्त्री लङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 37 — सा का ? सा वृ ा । सा क करो त ? सा वहर त । क सा क्र ड त ? न, सा न
क्र ड त । सा तु वहर त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् हन्द
सा का ? वह कौन है ?
सा वृ ा । वह बुज़गु मिहला है।
सा क करो त ? वह क्या कर रही है ?
सा वहर त । वह टहल रही है।
क सा क्र ड त ? क्या वह खेल रही है ?
न, सा न क्र ड त । नही,ं वह खेल नही ं रही।
सा तु वहर त । वह तो टहल रही है।
व्याकरण- ववेचनम्: ‘सा’ = तद्-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्; ‘का’ = कम्-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्; ‘वृद्धा’ =
आकारान्त-स्त्री लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्।
क्रया लङ्ग से नह बदलती: ध्यान द जए — ‘सः पाठय त’ और ‘सा वहर त’ — दोन म क्रया का रूप एक-सा
(– त) है। संस्कृत क क्रया वचन से बदलती है, लङ्ग से नह । हन्द म उल्टा है — ‘वह पढ़ाता है’ / ‘वह पढ़ाती है’।
यह अन्तर पक्का कर ली जए।
शब्दाथ: वृ ा = बुजग स्त्री (पुं लङ्ग रूप ‘वृद्धः’)। वहर त = टहलता/टहलती है, सैर करता/करती है ( व + हृ)।
भ्रम त भी ‘घूमना’ है, पर उसम इधर-उधर घूमने का भाव है, जब क ‘ वहर त’ म आराम से सैर करने का।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 स्त्री लङ्गम् ( वचनम्), पृष्ठ 37 — ते के ? ते अजे । ते क कुरुतः ? ते चरतः । क ते पबतः ? न, ते न पबतः । ते
तु चरतः । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् हन्द
ते के ? वे दोनों कौन है ं ?
ते अजे । वे दोनों बकिरयाँ है।
ं
ते क कुरुतः ? वे दोनों क्या कर रही है ं ?
ते चरतः । वे दोनों चर रही है।
ं
क ते पबतः ? क्या वे दोनों पी रही है ं ?
न, ते न पबतः । नही,ं वे दोनों पी नही ं रही ं।
ते तु चरतः । वे दोनों तो चर रही है।
ं
व्याकरण- ववेचनम्: ‘ते’ = तद्-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘के’ = कम्-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘अजे’ =
अजा-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘चरतः, पबतः, कुरुतः’ = द्ववचना न।
यहाँ ‘ते’ का अथ ‘वे दोन ’ है: पृष्ठ 35 म ‘ते बालकाः’ म ‘ते’ बहुवचन था, पर यहाँ ‘ते अजे’ म वही ‘ते’ स्त्री लङ्ग
द्ववचन है। पहचान का सूत्र सरल है — आगे क संज्ञा दे खए। ‘बालकाः’ बहुवचन है, ‘अजे’ द्ववचन। और क्रया भी
बता दे ती है — ‘क्र ड न्त’ बहुवचन, ‘चरतः’ द्ववचन।
शब्दाथ: अजा = बकरी (संस्कृत म ‘छागी’ भी); चर त = चरता/चरती है, घास खाता है। ‘गौः चर त’, ‘अजाः
चर न्त’ — पशुओं के लए यही क्रया चलती है।
प्र.3 स्त्री लङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 37 — ताः काः ? ताः म हलाः । ताः क कुव न्त ? ताः धाव न्त । क ताः गाय न्त ? न,
ताः न गाय न्त । ताः तु धाव न्त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
संस्कृतम् हन्द
ताः काः ? वे (सब) कौन है ं ?
ताः म हलाः । वे मिहलाएँ है।
ं
ताः क कुव न्त ? वे क्या कर रही है ं ?
ताः धाव न्त । वे दौड़ रही है।
ं
क ताः गाय न्त ? क्या वे गा रही है ं ?
न, ताः न गाय न्त । नही,ं वे गा नही ं रही ं।
ताः तु धाव न्त । वे तो दौड़ रही है।
ं
व्याकरण- ववेचनम्: ‘ताः’ = तद्-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘काः’ = कम्-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘म हलाः’
= म हला-शब्दस्य प्रथमा-बहुवचनम्।
‘ताः’ और ‘काः’ म वसग: स्त्री लङ्ग-बहुवचन क पहचान ही ‘आः’ है — ताः, काः, म हलाः, बा लकाः, अजाः,
श क्षकाः। दूसरी ओर पुं लङ्ग-बहुवचन म सवनाम ‘ते / के’ बना वसग के आते ह, यद्य प संज्ञा म वसग रहता है
(बालकाः)।
शब्दाथ: धाव त = दौड़ता/दौड़ती है; गाय त = गाता/गाती है। दोन के तीन वचन — धाव त / धावतः / धाव न्त;
गाय त / गायतः / गाय न्त।
प्र.4 स्त्री लङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 38 — एषा का ? एषा लता । एषा क करो त ? एषा खाद त । कम् एषा पठ त ? न,
एषा न पठ त । एषा तु खाद त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ?
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संस्कृतम् हन्द
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एषा का ?
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यह कौन है ?
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एषा लता ।
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यह लता है। (‘लता’ यहाँ लड़की का नाम है)
एषा क करो त ? यह क्या कर रही है ?
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एषा खाद त ।
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कम् एषा पठ त ?
a क्या यह पढ़ रही है ?
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न, एषा न पठ त । एषा तु खाद त । नही,ं यह पढ़ नही ं रही। यह तो खा रही है।
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व्याकरण- ववेचनम्: ‘एषा’ = एतद्-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्; ‘लता’ = आकारान्त-स्त्री लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्।
emके दो अथ: पृष्ठ 41 क शब्दाथ-ता लका म लता = वल्ली = बेल (Creeper) दया है। पर पृष्ठ 38 के चत्र a
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agl ‘लता’
म एक बा लका मेज़ पर बैठकर खा रही है — इस लए यहाँ ‘लता’ उस बा लका का नाम है। संस्कृत म बेल -फूल के
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नाम पर लड़ कय के नाम रखने क पुरानी परम्परा है — लता, मालती, कमला, प ा।
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lे लए एषा (यह), दूर क के लए सा (वह)। इसी तरह पुं लङ्ग म एषः / सः
‘एषा’ बनाम ‘सा’: पास क स्त्री-वस्तुgक
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और नपुंसक लङ्ग म एतत् / तत्।
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?gएते भ्रमतः । कम् एते धावतः ? न,
प्र.5 .cस्त्री लङ्गम् ( वचनम्), पृष्ठ 38 — एते के ? एते बा लके । एते क कुरुतःa
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aglas एते न धावतः । एते तु भ्रमतः । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
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हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् agl हन्द
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एते के ? ये दोनों कौन है ं ?
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एते बा लके । ये दोनों लड़िकयाँ है।
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em एते क कुरुतः ? a
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ये दोनों क्या कर रही है ं ?
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एते भ्रमतः । ये दोनों घूम रही है।
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m क्या ये दोनों दौड़ रही है ं ? a s
कम् एते धावतः ?
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न, एते न धावतः । एते तु भ्रमतः । नही,ं ये दोनों दौड़ नही ं रही ं। ये दोनों तो घूम रही है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
व्याकरण- ववेचनम्: ‘एते’ = एतद्-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘बा लके’ = बा लका-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्;
‘भ्रमतः, धावतः, कुरुतः’ = द्ववचना न।
‘बा लके’ को ‘बा लका’ मत प ढ़ए: आकारान्त स्त्री लङ्ग म द्ववचन का चह्न ‘ए’ है — बा लका → बा लके,
अजा → अजे, वैद्या → वै े, श क्षका → श क्षके। यह वही ‘ए’ है जो नपुंसक लङ्ग के द्ववचन म भी आता है
(फलम् → फले)।
चत्र से जाँ चए: पृष्ठ 38 के चत्र म दो लड़ कयाँ बाग़ म घूम रही ह — इसी लए तीन (एते, बा लके, भ्रमतः)
द्ववचन म ह।
प्र.6 स्त्री लङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 38 — एताः काः ? एताः अजाः । एताः क कुव न्त ? एताः चर न्त । कम् एताः
धाव न्त ? न, एताः न धाव न्त । एताः तु चर न्त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् हन्द
एताः काः ? ये (सब) कौन है ं ?
एताः अजाः । ये बकिरयाँ है।
ं
एताः क कुव न्त ? ये क्या कर रही है ं ?
एताः चर न्त । ये चर रही है।
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कम् एताः धाव न्त ? क्या ये दौड़ रही है ं ?
न, एताः न धाव न्त । एताः तु चर न्त । नही,ं ये दौड़ नही ं रही ं। ये तो चर रही है।
ं
व्याकरण- ववेचनम्: ‘एताः’ = एतद्-शब्दस्य स्त्री लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘अजाः’ = अजा-शब्दस्य प्रथमा-बहुवचनम्; ‘चर न्त,
धाव न्त, कुव न्त’ = बहुवचना न।
‘अजे’ और ‘अजाः’ — दो चत्र, दो वचन: पृष्ठ 37 म दो बक रयाँ थ , इस लए ‘ते अजे। ते चरतः।’ पृष्ठ 38 म
पाँच बक रयाँ ह, इस लए ‘एताः अजाः। एताः चर न्त।’ एक ही दृश्य, केवल गनती बदलने से पूरा वाक्य बदल गया
— यही संस्कृत के वचन क ताक़त है।
स्त्री लङ्ग के छह संवाद का सार: सा / ते / ताः (दूर) और एषा / एते / एताः (पास) — तथा प्रश्न म का / के /
काः। संज्ञा म –आ / –ए / –आः और क्रया म – त / –तः / –अ न्त।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
नपुस
ं क लङ्गम् (एकवचनम् / वचनम् / बहुवचनम्) — पृष्ठ 39–40
पाठः — संवादाः
पाठः
प्र.1 नपुंसक लङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 39 — तत् कम् ? तत् चन्द्रयानम् । क तत् वमानम् ? न, तत् वमानं न । तत् तु
चन्द्रयानम् अ स्त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् हन्द
तत् कम् ? वह क्या है ?
तत् चन्द्रयानम् । वह चन्द यान है।
क तत् वमानम् ? क्या वह हवाई जहाज़ है ?
न, तत् वमानं न । नही,ं वह हवाई जहाज़ नही ं है।
तत् तु चन्द्रयानम् अ स्त । वह तो चन्द यान है।
व्याकरण- ववेचनम्: ‘तत्’ = तद्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्; ‘ कम्’ = कम्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्;
‘चन्द्रयानम्, वमानम्’ = अकारान्त-नपुंसक लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्; ‘अ स्त’ = अस्-धातोः लट् -लकारे प्रथम-पुरुषे एकवचनम्।
‘ कम्’ यहाँ दो काम करता है: पहली पं क्त म ‘तत् कम् ?’ का अथ है ‘वह क्या है?’ — यह नपुंसक लङ्ग का
प्रश्नवाचक सवनाम है। तीसरी पं क्त म ‘ क तत् वमानम् ?’ का अथ है ‘क्या वह वमान है?’ — यह पूरे वाक्य को
प्रश्न बनाने वाला अव्यय है। एक ही शब्द, दो भू मकाएँ।
नया शब्द: चन्द्रयानम् = चन्द्र + यान, यानी चन्द्रमा पर जाने वाला यान। भारत के चन्द्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023
को चन्द्रमा के द क्षणी ुव पर उतरकर इ तहास रचा था — पुस्तक का चत्र उसी वक्रम लडर का है। इसी साँचे पर
बने और शब्द — वमानम् (हवाई जहाज़), रेलयानम् (रेलगाड़ी), बसयानम् (बस)।
प्र.2 नपुंसक लङ्गम् ( वचनम्), पृष्ठ 39 — ते के ? ते पुस्तके । क ते पत्रे ? न, ते पत्रे न । ते तु पुस्तके स्तः । — अस्य
संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
संस्कृतम् हन्द
ते के ? वे दोनों क्या है ं ?
ते पुस्तके । वे दोनों पुस्तकें है।
ं
क ते पत्रे ? क्या वे दोनों पत्ते है ं ?
न, ते पत्रे न । नही,ं वे दोनों पत्ते नही ं है।
ं
ते तु पुस्तके स्तः । वे दोनों तो पुस्तकें है।
ं
व्याकरण- ववेचनम्: ‘ते’ = तद्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘के’ = कम्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्;
‘पुस्तके, पत्रे’ = नपुंसक लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘स्तः’ = अस्-धातोः लट् -लकारे प्रथम-पुरुषे द्ववचनम्।
‘अ स्त’ का तीन-वचनी प रवार: अ स्त (एक है) – स्तः (दो ह) – स न्त (कई ह)। पूरे पाठ म तीन रूप एक-एक
बार आए ह — ‘तत् तु चन्द्रयानम् अ स्त’, ‘ते तु पुस्तके स्तः’, ‘ता न तु रेलयाना न स न्त’। इस त्रक को अभी ही
याद कर ली जए।
चत्र म क्या है: पृष्ठ 39 के चत्र म दो पुस्तक ह — रामच रतमानस और पञ्चतन्त्रम्। दो ह, इस लए हर शब्द
द्ववचन म है।
प्र.3 नपुंसक लङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 39 — ता न का न ? ता न रेलयाना न । क ता न बसयाना न ? न, ता न
बसयाना न न । ता न तु रेलयाना न स न्त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् हन्द
ता न का न ? वे (सब) क्या है ं ?
ता न रेलयाना न । वे रे ल गािड़याँ है।
ं
क ता न बसयाना न ? क्या वे बसे ं है ं ?
न, ता न बसयाना न न । नही,ं वे बसे ं नही ं है।
ं
ता न तु रेलयाना न स न्त । वे तो रे ल गािड़याँ है।
ं
व्याकरण- ववेचनम्: ‘ता न’ = तद्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘का न’ = कम्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्;
‘रेलयाना न, बसयाना न’ = नपुंसक लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘स न्त’ = अस्-धातोः लट् -लकारे प्रथम-पुरुषे बहुवचनम्।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
‘रेलयाना न’ म ‘न’, ‘पत्रा ण’ म ‘ण’: ‘रेलयान’ म कह ‘र्’ या ‘ऋ’ नह आया (‘रे’ म ‘र’ पूरा व्यञ्जन है, ‘र्’
नह ), इस लए बहुवचन का ‘न’ ज्य का त्य रहा — रेलयाना न। पर ‘पत्र’ म हलन्त ‘र्’ है, इस लए वहाँ ‘न’
बदलकर ‘ण’ हो गया — पत्रा ण। यही णत्व- वधानम् है।
चत्र से जो ड़ए: चत्र म तीन गा ड़याँ ह — वन्दे भारत, तेजस और ग तमान। तीन ह, इस लए बहुवचन। संस्कृत म
रेलयानम् = रेलगाड़ी, बसयानम् = बस, लोहपथगा मनी भी रेल का पुराना संस्कृत नाम है।
प्र.4 नपुंसक लङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 40 — एतत् कम् ? एतत् दूरदशनम् । कम् एतत् सङ्गणकम् ? न, एतत् सङ्गणकं
न । एतत् तु दूरदशनम् अ स्त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
हन्द अनुवाद —
संस्कृतम् हन्द
एतत् कम् ? यह क्या है ?
एतत् दूरदशनम् । यह दू र दशन (टेल ीिवज़न) है।
कम् एतत् सङ्गणकम् ? क्या यह सङ् गणक (क म्प्यूटर ) है ?
न, एतत् सङ्गणकं न । नही,ं यह क म्प्यूटर नही ं है।
एतत् तु दूरदशनम् अ स्त । यह तो दू र दशन है।
व्याकरण- ववेचनम्: ‘एतत्’ = एतद्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्; ‘दूरदशनम्, सङ्गणकम्’ = नपुंसक लङ्गे प्रथमा-
एकवचनम्।
नई वस्तुओं के संस्कृत नाम: दूरदशनम् = दूर + दशन, ‘दूर क चीज़ दखाने वाला’। सङ्गणकम् = सम् + गणक,
‘जो भली-भाँ त गणना करे’। संस्कृत ऐसे ही अथ जोड़कर नए शब्द बनाती है, इसी लए वह आज भी जी वत भाषा है
— जैसे दूरवाणी (टे लीफ़ोन), आकाशवाणी (रे डयो), चन्द्रयानम् (मून- मशन)।
स पर ध्यान: ‘सङ्गणकम्’ का ‘म्’ आगे ‘न’ (व्यञ्जन) आने पर अनुस्वार बन गया — ‘एतत् सङ्गणकं न।’ पर
‘अ स्त’ से पहले स्वर है, इस लए वहाँ ‘म्’ बचा रहा — ‘दूरदशनम् अ स्त।’
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ?
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नपुंसक लङ्गम् ( वचनम्), पृष्ठ 40 — एते के ? एते फले । कम् एते कन्दुके ? न, एते कन्दुके न । एते तु फले स्तः
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एते फले । ये दोनों फल है।
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व्याकरण- ववेचनम्: ‘एते’ = एतद्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘फले, कन्दुके’ = नपुंसक लङ्गे प्रथमा- द्ववचनम्; ‘स्तः’
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= द्ववचनम्।
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‘कन्दुकः’ पुं लङ्ग है, फर ‘कन्दुके’ क्य ? पछले पाठ (पृष्ठ 30) म कन्दुकः = गेन्दुकः (गद) पुं लङ्ग रूप म आया
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था। यहाँ पुस्तक ने उसी का नपुंसक लङ्ग रूप ‘कन्दुकम्’ लेकर द्ववचन ‘कन्दुके’ बनाया है, ता क वाक्य ‘एते फले’
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के लङ्ग से मेल खाए। संस्कृत म कई शब्द दोन लङ्ग म चलते ह — कन्दुकः / कन्दुकम्, पु
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as चत्र म क्या है: थाली म दो सीताफल (शरीफ़ा) रखे ह — इसी लए द्ववचन। गोल होने के कारण वे गद जैसे लगते
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ह, यही इस मज़ेदार प्रश्न का कारण है।
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प्र.6 नपुंसक लङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 40 — एता न का न ? एता न पुस्तका न । कम् एता न सोपाना न स न्त ? न,
एता न सोपाना न न । एता न तु पुस्तका न स न्त । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
संस्कृतम् हन्द
एता न का न ? ये (सब) क्या है ं ?
एता न पुस्तका न । ये पुस्तकें है।
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कम् एता न सोपाना न स न्त ? क्या ये सीिढ़ याँ है ं ?
न, एता न सोपाना न न । नही,ं ये सीिढ़ याँ नही ं है।
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एता न तु पुस्तका न स न्त । ये तो पुस्तकें है।
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व्याकरण- ववेचनम्: ‘एता न’ = एतद्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘का न’ = कम्-शब्दस्य नपुंसक लङ्गे प्रथमा-
बहुवचनम्; ‘पुस्तका न, सोपाना न’ = नपुंसक लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘स न्त’ = बहुवचनम्।
प्रश्न मज़ेदार क्य है: चत्र म पुस्तक एक के ऊपर एक सीढ़ क तरह चढ़ती हुई रखी ह — इसी लए पूछा गया ‘क्या
ये सी ढ़याँ ह?’ सोपानम् = आरोहणम् = सीढ़ (Stairs), जो पृष्ठ 41 क शब्दाथ-ता लका म भी दया है।
पुस्तक क एक छोट छपाई-भूल: पृष्ठ 40 पर दूसरी पं क्त ‘एता न पुस्तका न ?’ छपी है, जब क वह उत्तर है, प्रश्न
नह । शुद्ध रूप होगा — एता न पुस्तका न । बाक़ पाँच संवाद म वही पं क्त पूण- वराम के साथ ही छपी है,
इस लए यह प्रश्न चह्न स्पष्ट रूप से मुद्रण-दोष है।
उ ैः पठन्तु स्मरन्तु अवगच्छन्तु च — पृष्ठ 40
सवनाम-सारणी
कण्ठ ं कु वन्तु
प्र.1 उ ैः पठन्तु स्मरन्तु अवगच्छन्तु च — पुं लङ्गम् / स्त्री लङ्गम् / नपुंसक लङ्गम् इत्येषु सः-एषः-कः, सा-एषा-का,
तत्-एतत्- कम् इत्येषां त्री ण वचना न सारण्यां लखन्तु ।
पृष्ठ 40 के अन्त म द गई यह नौ पं क्तय क सारणी पूरे पाठ का नचोड़ है। इसे ज़ोर से प ढ़ए, याद क जए और सम झए —
शब्दः पुं लङ्गम् स्त्री लङ्गम् नपुंसक लङ्गम्
एक. . बहु. एक. . बहु. एक. . बहु.
तद् (वह) सः तौ ते सा ते ताः तत् ते तािन
एतद् (यह) एषः एतौ एते एषा एते एताः एतत् एते एतािन
कम् (कौन/क्या) कः कौ के का के काः िकम् के कािन
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
याद रखने क तीन कुं जयाँ:
1. ‘एतद्’ = ‘ए’ + ‘तद्’ जैसा। तौ → एतौ, ते → एते, ता न → एता न। केवल एकवचन म थोड़ा बदलाव है —
सः → एषः, सा → एषा, तत् → एतत्।
2. ‘ कम्’ म ‘त’ क जगह ‘क’। तौ → कौ, ते → के, ताः → काः, ता न → का न। केवल नपुंसक लङ्ग-एकवचन
म ‘तत्’ के बदले कम् आता है।
3. दुहराव पहचा नए — ‘ते’ तीन खान म है (पुं.-बहु., स्त्री.- द्व., नपुं.- द्व.), ‘एते’ भी तीन म, और ‘के’ भी तीन
म। इनका अथ हमेशा साथ आई संज्ञा से ही तय होगा।
बोलकर अभ्यास क जए: कक्षा म कोई वस्तु दखाकर पू छए — ‘एषः कः ?’ / ‘एषा का ?’ / ‘एतत् कम् ?’
और उत्तर द जए — ‘एषः चषकः।’ / ‘एषा लेखनी।’ / ‘एतत् पुस्तकम्।’ रोज़ पाँच वस्तुओं पर यह अभ्यास
क जए, सारणी अपने-आप कण्ठस्थ हो जाएगी।
वयं शब्दाथान् जानीमः — पृष्ठ 41
शब्दाथाः
शब्दाथाः
प्र.1 मातृभाषया अथ लखन्तु — (शब्दः / अथः / हन्द / English इ त सारण्याः अ न्तमः स्त ः, पृष्ठ 41) ।
पुस्तक क ता लका म चार खाने भरे हुए ह; पाँचवाँ खाना आपको अपनी मातृभाषा म भरना है — वही भाषा जो आप घर म बोलते
ह।
शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द ENGLISH
लता वल्ली बेल Creeper
फलम् फलम् फल Fruit
पुस्तकम् ग न्थः पुस्तक Book
अजा छागी बकरी Goat (Female)
सोपानम् आरोहणम् सीढ़ Stairs
सङ्गणकम् सङ् गणकयन्त्र म् सङ्गणक Computer
दूरदशनम् दू र दशनम् दूरदशन Television
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर (मातृभाषा — मराठ ): लता = वेल, फलम् = फळ, पुस्तकम् = पुस्तक, अजा = शेळ , सोपानम् =
जना, सङ्गणकम् = संगणक, दूरदशनम् = दूर चत्रवाणी।
नमूना उत्तर (मातृभाषा — बांग्ला): लता = লতা, फलम् = ফল, पुस्तकम् = বই, अजा = ছাগল, सोपानम् = িসঁিড় ,
सङ्गणकम् = কি পউটার, दूरदशनम् = টিলিভশন।
नमूना उत्तर (मातृभाषा — त मल): लता = ெகாடி, फलम् = பழம் , पुस्तकम् = புத்தகம் , अजा = ஆடு,
सोपानम् = படிக்கட்டு , सङ्गणकम् = கண ன , दूरदशनम् = ெதா லக்காட்ச ।
ये सात शब्द यह क्य रखे गए: हर शब्द इसी पाठ के कसी-न- कसी संवाद या चत्र म आ चुका है — लता (पृष्ठ
38 क बा लका का नाम), फलम् (पृष्ठ 34, 40), पुस्तकम् (पृष्ठ 32, 39, 40), अजा (पृष्ठ 32, 37, 38),
सोपानम् (पृष्ठ 40), सङ्गणकम् तथा दूरदशनम् (पृष्ठ 40)। यानी शब्दावली पहले प्रयोग म आती है, फर सूची म —
यही भाषा सीखने का सही क्रम है।
तीन शब्द क बनावट दे खए: सोपानम् = स + उपान ( जस पर चढ़ा जाए); सङ्गणकम् = सम् + गणक (भली-
भाँ त गनने वाला); दूरदशनम् = दूर + दशन (दूर का दखाने वाला)। अथ शब्द के भीतर ही छपा है।
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 41–42
अभ्यासः (प्रश्नाः १–४)
अभ्यासः
प्र.1 उदाहरणं दृ ् वा रक्त ाना न पूरयन्तु — यथा – बालकः, बालकौ, बालकाः । (क) चषकः … … (ख) … … दे वाः
(ग) सै नकः … … (घ) … रजकौ … (ङ) तन्त्र ः … …
सभी पाँच शब्द अकारान्त पुं लङ्ग ह, इस लए तीन वचन एक ही साँचे पर बनगे — –ः / –औ / –आः।
क्रमः एकवचनम् वचनम् बहुवचनम् हन्द अथ
यथा बालकः बालकौ बालकाः (पुस्तके दत्तम्) लड़का
(क) चषकः चषकौ चषकाः प्याला, गलास
(ख) दे वः दे वौ दे वाः दे वता
(ग) सै िनकः सै िनकौ सै िनकाः सै नक
(घ) रजकः रजकौ रजकाः धोबी
(ङ) तन्त्र ः तन्त्र ौ तन्त्र ाः तकनी शयन, तन्त्र का जानकार
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
पीछे क ओर भी सोचना पड़ता है: (ख) और (घ) म पुस्तक ने बीच का या अ न्तम खाना भरकर दया है और
एकवचन पूछा है। ‘दे वाः’ से ‘आः’ हटाकर ‘दे व’ बचा, उस पर ‘◌ः’ लगाकर दे वः; ‘रजकौ’ से ‘औ’ हटाकर ‘रजक’
बचा, उस पर ‘◌ः’ लगाकर रजकः। यानी प्रत्यय पहचानकर उसे हटाना ही असली काम है।
शब्द- नमाण: तन्त्र ः = तन्त्रं जाना त इ त — जो तन्त्र (टे क्नोलॉजी) जानता हो। इसी से बना है तन्त्र ानम् =
टे क्नोलॉजी। चषकः = पीने का प्याला; रजकः = कपड़े धोने वाला (‘रज्’ = रँगना/धोना से)।
प्र.2 उदाहरणानुसारं प कातः पदा न चत्वा रक्त ानेषु संयोजयन्तु — यथा – सः शुकः । (प का — शुकः, स्यूतः,
अजा, फलम्, पुष्पम्, म हषी, वृक्षः, कुक्कुरः, पावती, पुस्तकम्) । सः … … … / सा … … … / तत् … … …
पहले हर पद का लङ्ग पहचा नए — जो ‘◌ः’ पर समाप्त हो वह प्रायः पुं लङ्ग, जो ‘आ / ई’ पर वह स्त्री लङ्ग, और जो ‘म्’ पर वह
नपुंसक लङ्ग।
सवनाम लङ्गम् वाक्या न
यथा पुं लङ्गम् सः शुक ः । (पुस्तके दत्तम् — वह तोता है)
सः पुं लङ्गम् सः स्यूतः । (वह थैल ा है) • सः वृक्षः । (वह पेड़ है) • सः कु क्कु रः । (वह कु त्त ा है)
सा स्त्री लङ्गम् सा अजा । (वह बकरी है) • सा मिहषी । (वह भैस
ं है) • सा पावती । (वह पावती है)
तत् नपुंसक लङ्गम् तत् फलम् । (वह फल है) • तत् पुष्पम् । (वह फू ल है) • तत् पुस्तकम् । (वह पुस्तक है)
पहचान का सूत्र: प का के दस पद म — चार पुं लङ्ग (शुकः, स्यूतः, वृक्षः, कुक्कुरः), तीन स्त्री लङ्ग (अजा, म हषी,
पावती) और तीन नपुंसक लङ्ग (फलम्, पुष्पम्, पुस्तकम्) ह। ‘शुकः’ उदाहरण म चला गया, इस लए ‘सः’ क पं क्त
म शेष तीन आते ह और हर पं क्त ठ क तीन-तीन खान म भर जाती है।
दो ईकारान्त शब्द: म हषी (भस) और पावती — दोन ‘ई’ पर समाप्त होते ह और स्त्री लङ्ग ह। यह वही नयम है
जो पृष्ठ 45 के योग्यता वस्तर म दया गया — ‘ईकारान्तः शब्दः प्रायशः स्त्री लङ्गे भव त।’
प्र.3 चत्रा ण दृ ् वा संस्कृतपदा न लखन्तु — (क) … (ख) … (ग) … (घ) … (ङ) … (च) …
पृष्ठ 42 पर छह चत्र दए ह। हर चत्र दे खकर उसका संस्कृत पद इस प्रकार होगा —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ?
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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क्रमः चत्रे कम् अ स्त ? संस्कृतपदम् लङ्गम् / वचनम्
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(क)
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एक नीली पुस्तक पुस्तकम्
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नपुंसक लङ्गम्, एकवचनम्
se m दो लड़के खड़े हुए
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(ख)
l a पुं लङ्गम्, द्ववचनम्
a
बालकौ
(ग) बन्दूक लए एक सै नक सै िनकः पुं लङ्गम्, एकवचनम्
co m
(घ) खुली हुई खड़क
e m .वातायनम् नपुंसक लङ्गम्, एकवचनम् ag
g l as
(ङ) माइक लेकर गाती हुई स्त्री
a गाियका स्त्री लङ्गम्, एकवचनम्
ित्र शूल म्
co m
(च) त्रशूल नपुंसक लङ्गम्, एकवचनम्
e m.
m l as
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(ख) म सावधानी: चत्र म दो लड़के ह, इस लए उत्तर ‘बालकः’ नह , बालकौ होगा। यही इस प्रश्न क असली
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परीक्षा है — पहले ग नए, फर वचन तय क जए, तब ल खए।
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पूरे वाक्य म भी कह सकते ह: (क) एतत् पुस्तकम्। (ख) एतौ बालकौ। (ग) एषः सै नकः। (घ) एतत् वातायनम्।
se m
(ङ) एषा गा यका। (च) एतत् त्रशूलम्। — इससे सवनाम का अभ्यास भी साथ-साथ हो जाएगा।
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प्र.4 उदाहरणानुसारं प कातः पदा न चत्वा रक्त ानेषु लखन्तु — (प का — बालकाः, वृक्षाः, श क्षकाः, पुष्पम्,
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फलम्, अजाः, मा पकाः, गा यका, रजकः, फला न, सः, लेखनी) । यथा – एकवचनम् : पुष्पम्, बहुवचनम् :
m l
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बालकाः । (क) … … (ख) … … (ग) … … (घ) … … (ङ) … …
a s em
agl उत्तर
प का के बारह पद म से दो उदाहरण म चले गए; शेष दस पद को एकवचन और बहुवचन के दो खान म बाँटना है — पाँच-पाँच।
se m
com g l a
m . a
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क्रमः एकवचनम् बहुवचनम्
यथा agl
पुष्पम् (पुस्तके दत्तम्) बालकाः (पुस्तके दत्तम्)
वृक्षाः
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(क) फलम्
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(ख) गाियका िशिक्षकाः
em (ग) a
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रजकः अजाः
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(घ) सः मािपकाः
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(ङ) ले खनी
e m . co फलािन
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
छाँटने का नयम: जन पद के अन्त म ‘आः’ (वृक्षाः, श क्षकाः, अजाः, मा पकाः) या ‘आ न’ (फला न) है, वे
बहुवचन ह। जनके अन्त म ‘◌ः’ (रजकः, सः), ‘म्’ (फलम्), ‘आ’ (गा यका) या ‘ई’ (लेखनी) है, वे एकवचन ह।
‘–ः’ और ‘–आः’ का अन्तर ध्यान से दे खए — यही दोन खान को अलग करता है।
क्रम बदल सकता है: प्रश्न म यह नह कहा गया क कस पं क्त म कौन-सा पद आए — केवल यह क सही खाने म
आए। इस लए य द आपने (क) म ‘रजकः’ और (ग) म ‘फलम्’ लखा है, तो भी उत्तर ठ क है। जाँ चए बस इतना
— बाएँ खाने म पाँच एकवचन ह और दाएँ खाने म पाँच बहुवचन।
शब्दाथ: मा पका = मापने क प /स्केल, अङ् कनी = प सल, लेखनी = कलम।
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 43–44
अभ्यासः (प्रश्नाः ५–९)
अभ्यासः
प्र.5 प कायां का नचन पदा न स न्त, ता न पदा न उ चते घटे पूरयन्तु — (प का — सै नकः, चषकः, गा यका,
म हषी, जलम्, कुक्कुरः, ारम्, फलम्, वृ ा, वृक्षः, अजा, वातायनम्, अङ् कनी, पुस्तकम्, शुकः) । घटाः — एषः
/ एषा / एतत् ।
तीन घड़ पर एषः, एषा और एतत् लखा है, और हर घड़े म पाँच-पाँच पं क्तयाँ ह। प का के पन्द्रह पद ठ क पाँच-पाँच म बँट जाते
ह—
एषः (पुं लङ्गम्) एषा (स्त्री लङ्गम्) एतत् (नपुंसक लङ्गम्)
सै िनकः — सै िनक गाियका — गाियका जलम् — जल
चषकः — प्याला मिहषी — भैस
ं ारम् — दरवाज़ा
कु क्कु रः — कु त्त ा वृ ा — बुज़गु स्त्र ी फलम् — फल
वृक्षः — पेड़ अजा — बकरी वातायनम् — िखड़की
शुक ः — तोता अङ् कनी — पेंिसल पुस्तकम् — पुस्तक
अ न्तम वण ही सबसे बड़ा सुराग़ है: ‘◌ः’ पर समाप्त होने वाले पाँच पद एषः के घड़े म गए; ‘आ’ या ‘ई’ पर
समाप्त होने वाले पाँच एषा के घड़े म; और ‘म्’ पर समाप्त होने वाले पाँच एतत् के घड़े म। यही योग्यता वस्तर (पृष्ठ
45) का अकारान्त–आकारान्त–ईकारान्त नयम है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
बोलकर जाँ चए: हर पद के आगे उसका सवनाम लगाकर पूरा वाक्य क हए — ‘एषः सै नकः।’ ‘एषा गा यका।’
‘एतत् जलम्।’ जो वाक्य कान को अटपटा लगे, वह भूल है।
प्र.6 उदाहरणानुसारं प कातः उपयुक्तपदं चत्वा रक्त ाना न पूरयन्तु — (प का — माला, युवकौ, पाठशाला,
मुखम्, कमले, भवना न, बडालः, छात्राः, लेखन्यौ, मालाः) । यथा – सा का ? सा पाठशाला । — सः कः ? / तौ
कौ ? / ते के ? / सा का ? / ते के ? / ताः काः ? / तत् कम् ? / ते के ? / ता न का न ?
प्रश्न का सवनाम दे खकर उसका लङ्ग और वचन तय क जए, फर प का से ठ क वैसा ही पद चु नए।
प्रश्नः लङ्गम् / वचनम् उत्तरम् हन्द
यथा – सा का ? स्त्री., एकवचनम् सा पाठशाला । (पुस्तके दत्तम्) वह पाठशाला है।
सः कः ? पुं., एकवचनम् सः िबडालः । वह बल्ला है।
तौ कौ ? पुं., द्ववचनम् तौ युवकौ । वे दोन युवक ह।
ते के ? पुं., बहुवचनम् ते छात्र ाः । वे छात्र ह।
सा का ? स्त्री., एकवचनम् सा माला । वह माला है।
ते के ? स्त्री., द्ववचनम् ते ले खन्यौ । वे दोन कलम ह।
ताः काः ? स्त्री., बहुवचनम् ताः मालाः । वे मालाएँ ह।
तत् कम् ? नपुं., एकवचनम् तत् मुखम् । वह मुख है।
ते के ? नपुं., द्ववचनम् ते कमले । वे दोन कमल ह।
ता न का न ? नपुं., बहुवचनम् तािन भवनािन । वे भवन ह।
‘ते के ?’ तीन बार आया है — घबराइए मत: ता लका म यह प्रश्न तीन जगह है, पर तीन का अथ अलग है। पहली
पं क्त म वह पुं लङ्ग बहुवचन है (छात्राः), दूसरी म स्त्री लङ्ग वचन (लेखन्यौ) और तीसरी म नपुंसक लङ्ग
वचन (कमले)। पहचान पं क्त क स्थ त से होती है — पहली पं क्त पुं लङ्ग क , दूसरी स्त्री लङ्ग क , तीसरी
नपुंसक लङ्ग क ।
‘लेखन्यौ’ कैसे बना: ‘लेखनी’ ईकारान्त स्त्री लङ्ग है। ऐसे शब्द म द्ववचन ‘औ’ से बनता है और उससे पहले ‘ई’
बदलकर ‘य्’ हो जाता है — लेखनी + औ = लेखन्यौ। इसी तरह नद + औ = न ौ, घट + औ = घ ौ।
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प्र.7 नम्न ल खता न वाक्या न अ धकृत्य उदाहरणानुसारं प्रश्न नमाणं कुवन्तु — यथा – सः गजः । – सः कः ? (क) सः
बालकः । (ख) सा लता । (ग) सा नद । (घ) तत् फलम् । (ङ) सः वृक्षः ।
नयम एक ही है — वाक्य म जो सं ा है उसे हटाकर उसी लङ्ग-वचन का प्रश्नवाचक सवनाम रख द जए। सवनाम (सः / सा /
तत्) ज्य का त्य रहेगा।
सः + गजः → सः + कः ?
सा + लत ा → सा + का ?
तत् + फलम् → तत् + िक म् ?
क्रमः वाक्यम् प्रश्नः हन्द
यथा सः गजः । सः कः ? (पुस्तके दत्तम्) वह कौन है ?
(क) सः बालकः । सः कः ? वह कौन है ?
(ख) सा लता । सा का ? वह कौन है ? / वह क्या है ?
(ग) सा नद । सा का ? वह क्या है ?
(घ) तत् फलम् । तत् िकम् ? वह क्या है ?
(ङ) सः वृक्षः । सः कः ? वह क्या है ?
संस्कृत म ‘कौन’ और ‘क्या’ का बँटवारा अलग है: हन्द म सजीव के लए ‘कौन’ और नज व के लए ‘क्या’
होता है। संस्कृत म यह बँटवारा सजीव- नज व से नह , लङ्ग से होता है — पुं लङ्ग और स्त्री लङ्ग म कः / का,
नपुंसक लङ्ग म कम्। इसी लए पेड़ (वृक्षः) और नद (नद ) नज व होकर भी ‘कः ?’ और ‘का ?’ से पूछे जाते ह,
‘ कम् ?’ से नह ।
य द वाक्य वचन या बहुवचन म हो: तौ गजौ। → तौ कौ ? | ते गजाः। → ते के ? | ते नद्यौ। → ते के ? |
ता न फला न। → ता न का न ? — प्रश्नवाचक भी उसी वचन म जाएगा।
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प्र.8 परस्परं सम्ब ा न पदा न संयोजयन्तु, रक्त ानेषु पूरयन्तु च — (क) नतक – गाय त (ख) लेखकः – चालय त
(ग) फलम् – नृत्य त (घ) कमलम् – लख त (ङ) चालकः – पत त (च) गा यका – वकस त । यथा – नतक
नृत्य त ।
बाएँ खाने के हर पद के साथ दाएँ खाने से उसक अपनी क्रया जो ड़ए। पुस्तक ने तीर ख चकर ‘नतक – नृत्य त’ का उदाहरण दे
दया है।
क्रमः पदम् क्रयापदम् वाक्यम् हन्द
(क) नतक नत्ृ यित नतकी नत्ृ यित । (पुस्तके दत्तम्) नतक नाचती है।
(ख) लेखकः िलखित ले खकः िलखित । लेखक लखता है।
(ग) फलम् पतित फलं पतित । फल गरता है।
(घ) कमलम् िवकसित कमलं िवकसित । कमल खलता है।
(ङ) चालकः चालयित चालकः चालयित । चालक (वाहन) चलाता है।
(च) गा यका गायित गाियका गायित । गा यका गाती है।
जोड़ी शब्द के अन्दर ही छपी है: दे खए — नतक ‘नृत्’ धातु से बनी है, इस लए वह नृत्य त; लेखकः ‘ लख्’ से,
इस लए लख त; गा यका ‘गै’ से, इस लए गाय त; चालकः ‘चल्’ से, इस लए चालय त। कता का नाम ही बता
दे ता है क वह क्या करता है। बचे दो नज व पद — फल गरता है (पत त) और कमल खलता है ( वकस त)।
‘फलम्’ का ‘फलं’ क्य हुआ: ‘फलम् पत त’ म ‘म्’ के आगे व्यञ्जन ‘प’ है, इस लए ‘म्’ बदलकर अनुस्वार हो
गया — फलं पत त। इसी तरह कमलं वकस त। य द आगे स्वर होता, तो ‘म्’ वैसा ही रहता — जैसे ‘फलम्
अ स्त।’
प्र.9 उदाहरणानुसारं कोष्ठकेभ्यः उ चता न पदा न चत्वा वाक्या न रचयन्तु — यथा – कः / का लख त ? (लेखकः,
छात्रः, सा) → लेखकः लख त । छात्रः लख त । सा लख त । (क) कः / का धाव त ? (बालकः, बा लका,
शुनकः) (ख) कः / का पठ त ? (सुरेशः, जानक , न लनी) (ग) क पत त ? (फलम्, जलम्, कुसुमम्) (घ) का /
कः गच्छ त ? ( श क्षका, बा लका, तन्त्र ः) (ङ) का / कः / कम् अ स्त ? (माता, पता, वाहनम्)
कोष्ठक के हर पद को कता बनाकर, प्रश्न क क्रया जोड़कर एक-एक वाक्य बनाइए। सभी कता एकवचन म ह, इस लए क्रया भी
एकवचन म ही रहेगी।
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क्रमः प्रश्नः वाक्या न हन्द
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कः / का लख त ? ले खकः िलखित । छात्र ः िलखित । सा िलखित ।
लखती a g l
लेखक लखता है। छात्र लखता है। वह
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(पुस्तके दत्तम्) है।
a(क)gl कः / का धाव त ? बालकः धावित । बािलका धावित । शुनकः धावित । लड़का दौड़ता है। लड़क दौड़ती है। कुत्ता
दौड़ता है।
co m
(ख) कः / का पठ त ?
em .
सुरे शः पठित । जानकी पठित । निलनी पठित । सुरेश पढ़ता है। जानक पढ़ती है। न लनी ag
g l as पढ़ती है।
(ग) क पत त ?
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फलं पतित । जलं पतित । कु सुम ं पतित । फल गरता है। जल गरता है। फूल गरता
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श क्षका जातीeहैm
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(घ) का / कः गच्छ त ? िशिक्षका ग च्छित । बािलका ग च्छित । तन्त्र ः ग च्छित । लड़क जाती है। तन्त्रज्ञ
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(ङ) का / कः / कम् माता अिस्त । िपता अिस्त । वाहनम् अिस्त । माता है। पता ह। वाहन है।
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m म ‘कः / का’ दोन ह, क्य क कोष्ठक म पुं लङ्ग (बालकः, agl
s
प्रश्न म ही उत्तर का लङ्ग बता दया गया है: (क)
शुनकः) और स्त्री लङ्ग (बा लका) दोन ह।la(ग) म केवल ‘ कम्’ है, क्य क तीन पद नपुंसक लङ्ग ह। (ङ) म तीन —
ag
‘का / कः / कम्’ — इस लए ह क माता स्त्री लङ्ग, पता पुं लङ्ग और वाहनम् नपुंसक लङ्ग है।
. com
दो सूक्ष्म बात: (1) ‘फलम् पत त’ म स से फलं पत त बनेगा, पर ‘वाहनम् अ स्त’ मeआगे
s m स्वर ‘अ’ होने से ‘म्’
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gl लए उसके अन्त म वसग नह
o रहेगा। (2) पता ऋकारान्त पुं लङ्ग शब्द ( पतृ) का प्रथमा-एकवचन हैa, इसी
वैस.ाcही
a seहैm। इसी तरह माता = मातृ का प्रथमा-एकवचन।
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m . a
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योग्यता वस्तरः — पृष्ठ 45
अकारान्त – आकारान्त – ईकारान्त शब्दाः; तत् एतत् कम्
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योग्यता वस्तरः
co m
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m a e त । (एतादृशः शब्दः पुं लङ्गे
अकारान्तः शब्दः — यस्य शब्दस्य अन्ते ‘अ’ वणः अ स्त सः अकारान्तः शब्दःsभव
o l
.c अथवा नपुंसक लङ्गे भव त ।) यथा – बालक् + अ, हस्त् + अ, अज् +aअ,g फल् + अ, ान् + अ, गृह् + अ —
प्र.1
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g l a एतेषां पदा न लखन्तु ।
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उत्तरम् (संस्कृतम्): यस्य शब्दस्य अ न्तमः वणः ‘अ’ अ स्त, सः अकारान्तः शब्दः। सः प्रायशः पुं लङ्गे नपुंसक लङ्गे वा भव त।
g l as
( हन्द : जस शब्द के अन्त म ‘अ’ हो वह अकारान्त शब्द कहलाता है, और वह प्रायः पुं लङ्ग या नपुंसक लङ्ग होता है।)
a
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m .
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
वण-संयोगः प्रा तप दकम् लङ्गम् प्रथमा-एकवचनम् अथः
बालक् + अ बालक पुं लङ्गम् बालकः लड़का
हस्त् + अ हस्त पुं लङ्गम् हस्तः हाथ
अज् + अ अज पुं लङ्गम् अजः बकरा
फल् + अ फल नपुंसक लङ्गम् फलम् फल
ान् + अ ान नपुंसक लङ्गम् ानम् ज्ञान
ग ृह् + अ गृह नपुंसक लङ्गम् ग ृहम् घर
एक ही अन्त, दो लङ्ग: ऊपर के छह म से पहले तीन पुं लङ्ग ह और बाद के तीन नपुंसक लङ्ग — यद्य प सबका
अन्त ‘अ’ ही है। इसी लए पुस्तक ने कोष्ठक म लखा है ‘पुं लङ्गे अथवा नपुंसक लङ्गे ’। अन्तर प्रथमा-एकवचन म
दखता है — पुं लङ्ग म –ः (बालकः) और नपुंसक लङ्ग म –म् (फलम्)।
और अकारान्त शब्द: पुं लङ्ग — वृक्षः, गजः, शुकः, सै नकः, चषकः, रजकः, कुक्कुरः, बडालः। नपुंसक लङ्ग —
पत्रम्, चक्रम्, पुस्तकम्, जलम्, द्वारम्, वातायनम्, कमलम्, मुखम्, भवनम्।
प्र.2 आकारान्तः शब्दः — यस्य शब्दस्य अन्ते ‘आ’ वणः अ स्त सः आकारान्तः शब्दः भव त । (एतादृशः शब्दः प्रायशः
स्त्री लङ्गे भव त ।) यथा – बा लक् + आ, रम् + आ, लत् + आ — एतेषां पदा न लखन्तु ।
उत्तरम् (संस्कृतम्): यस्य शब्दस्य अ न्तमः वणः ‘आ’ अ स्त, सः आकारान्तः शब्दः; सः प्रायशः स्त्री लङ्गे भव त। ( हन्द : जस शब्द
के अन्त म ‘आ’ हो वह आकारान्त कहलाता है और प्रायः स्त्री लङ्ग होता है।)
वण-संयोगः पदम् लङ्गम् तीन वचन अथः
बािलक् + आ बािलका स्त्री लङ्गम् बा लका – बा लके – बा लकाः लड़क
रम् + आ रमा स्त्री लङ्गम् रमा – रमे – रमाः लक्ष्मी; एक नाम
लत् + आ लता स्त्री लङ्गम् लता – लते – लताः बेल, वल्ली
‘प्रायशः’ शब्द क्य लखा है: क्य क नयम शत-प्र तशत नह है। कुछ आकारान्त शब्द पुं लङ्ग भी होते ह — जैसे
पता, भ्राता, राजा, आत्मा। इसी लए पुस्तक ने ‘भव त’ के पहले ‘प्रायशः’ (अ धकतर) जोड़ा है। ऐसे अपवाद आगे
क कक्षाओं म पढ़े जाएँगे।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
और आकारान्त स्त्री लङ्ग शब्द: अजा, वृद्धा, म हला, श क्षका, गा यका, माला, पाठशाला, शाखा, खट् वा, पादुका,
पे टका, रो टका, सू चका, मञ्जूषा।
प्र.3 ईकारान्तः शब्दः — यस्य शब्दस्य अन्ते ‘ई’ वणः अ स्त सः ईकारान्तः शब्दः भव त । (ईकारान्तः शब्दः प्रायशः
स्त्री लङ्गे भव त ।) यथा – नद् + ई, लेखन् + ई, घट् + ई — एतेषां पदा न लखन्तु ।
उत्तरम् (संस्कृतम्): यस्य शब्दस्य अ न्तमः वणः ‘ई’ अ स्त, सः ईकारान्तः शब्दः; सोऽ प प्रायशः स्त्री लङ्गे भव त।
वण-संयोगः पदम् लङ्गम् तीन वचन अथः
नद् + ई नदी स्त्री लङ्गम् नद – नद्यौ – नद्यः नद
ले खन् + ई ले खनी स्त्री लङ्गम् लेखनी – लेखन्यौ – लेखन्यः कलम
घट् + ई घटी स्त्री लङ्गम् घट – घ ौ–घ ः घड़ी
ईकारान्त और आकारान्त का साँचा अलग है: आकारान्त म द्ववचन ‘ए’ से बनता है (बा लका → बा लके), पर
ईकारान्त म ‘औ’ से — और ‘ई’ बदलकर ‘य्’ हो जाती है (लेखनी → लेखन्यौ)। बहुवचन म भी अन्तर है —
आकारान्त म ‘आः’ (बा लकाः), ईकारान्त म ‘यः’ (लेखन्यः)।
और ईकारान्त स्त्री लङ्ग शब्द: म हषी, पावती, जानक , न लनी, अङ् कनी, नतक , सखी, नारी, नगरी, गृ हणी,
माजनी, कुमारी, दूरवाणी, आकाशवाणी, कतरी, वेणी। — ध्यान द जए, पृष्ठ 46 क प रयोजना-ता लका का चौथा
पूरा स्तम्भ इन्ह का है।
प्र.4 तत् एतत् कम् — ‘तद्’, ‘एतद्’, ‘ कम्’ इत्येषां शब्दानां त्रषु लङ्गे षु प्रथमैकवचन-रूपा ण लखन्तु (पृष्ठ 45
तः पे टकाब ः नयमः) ।
पृष्ठ 45 क गुलाबी पेट म नौ नयम दए ह। उन्ह एक ता लका म रखकर दे खए — बात बहुत सरल हो जाती है।
शब्दः अन्तः पुं लङ्गे स्त्री लङ्गे नपुंसक लङ्गे
तद् द्कारान्तः सः सा तत्
एतद् द्कारान्तः एषः एषा एतत्
कम् म्कारान्तः कः का िकम्
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
पुस्तक क नौ पं क्तयाँ इस प्रकार पढ़ जाएँगी —
द्कारान्त-पुं लङ्गस्य ‘तद्’-शब्दस्य प्रथमैकवचन-रूपम् ‘सः’ इ त ।
द्कारान्त-पुं लङ्गस्य ‘एतद्’-शब्दस्य प्रथमैकवचन-रूपम् ‘एषः’ इ त ।
द्कारान्त-स्त्री लङ्गस्य ‘तद्’-शब्दस्य प्रथमैकवचन-रूपम् ‘सा’ इ त ।
द्कारान्त-स्त्री लङ्गस्य ‘एतद्’-शब्दस्य प्रथमैकवचन-रूपम् ‘एषा’ इ त ।
द्कारान्त-नपुंसक लङ्गस्य ‘तद्’-शब्दस्य प्रथमैकवचन-रूपम् ‘तत्’ इ त ।
द्कारान्त-नपुंसक लङ्गस्य ‘एतद्’-शब्दस्य प्रथमैकवचन-रूपम् ‘एतत्’ इ त ।
म्कारान्त-पुं लङ्गस्य ‘ कम्’-शब्दस्य प्रथमैकवचन-रूपम् ‘कः’ इ त ।
म्कारान्त-स्त्री लङ्गस्य ‘ कम्’-शब्दस्य प्रथमैकवचन-रूपम् ‘का’ इ त ।
म्कारान्त-नपुंसक लङ्गस्य ‘ कम्’-शब्दस्य प्रथमैकवचन-रूपम् ‘ कम्’ इ त ।
‘सः’ और ‘तत्’ एक ही शब्द के रूप कैसे ह: मूल शब्द (प्रा तप दक) तद् है — ‘द्’ पर समाप्त होने से वह
द्कारान्त कहलाता है। पुं लङ्ग म उसका प्रथमा-एकवचन बनते समय पूरा रूप बदलकर ‘सः’ हो जाता है, स्त्री लङ्ग म
‘सा’, पर नपुंसक लङ्ग म मूल के पास ही रहकर ‘तत्’ बनता है। यही बात ‘एतद्’ क है — एषः / एषा / एतत्।
ध्यान द जए — ‘ कम्’ दो बार: ‘ कम्’ स्वयं प्रा तप दक भी है और नपुंसक लङ्ग का प्रथमा-एकवचन रूप भी।
यानी वहाँ रूप बदलता ही नह । पर पुं लङ्ग म वह ‘कः’ और स्त्री लङ्ग म ‘का’ बन जाता है।
प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 46
प रयोजना
प रयोजनाकायम्
प्र.1 गृहजनानां मत्राणां वा साहाय्येन पञ्चदश (१५) गृहवस्तूनामा न लङ्ग वभागेन लखन्तु ।
यह घर म घूमकर करने वाला काम है, इस लए हर वद्याथ क सूची अलग होगी। करना यह है — घर के पन्द्रह सामान के संस्कृत
नाम पता क जए और उन्ह तीन लङ्ग म बाँटकर ल खए।
करने का ढं ग —
1. कॉपी म तीन खाने बनाइए — पुं लङ्गम् / स्त्री लङ्गम् / नपुंसक लङ्गम्।
2. घर के कमर म घूमकर पन्द्रह चीज़ चु नए और उनके हन्द नाम ल खए।
3. घर के बड़ , शक्षक या पृष्ठ 46 क ता लका क सहायता से हर चीज़ का संस्कृत नाम ढूँ ढ़ए।
4. शब्द का अ न्तम वण दे खकर लङ्ग तय क जए — ‘◌ः’ → पुं लङ्ग, ‘आ / ई’ → स्त्री लङ्ग, ‘म्’ → नपुंसक लङ्ग।
5. हर शब्द के आगे ‘एषः / एषा / एतत्’ लगाकर एक-एक वाक्य भी बनाइए — इससे जाँच अपने-आप हो जाएगी।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर (१५ गृहवस्तू न, लङ्ग वभागेन):
पुं लङ्गम् (5) स्त्री लङ्गम् (5) नपुंसक लङ्गम् (5)
आस दः — कु स
न् पेिटका — सन्दू क वातायनम् — िखड़की
दीपः — दीपक कु ि चका — चाबी ारम् — दरवाज़ा
घटः — घड़ा उ पीिठका — मेज़
त् यजनम् — पंखा
व्
दपणः — दपण स माजनी — झाड़ू
म् पा म् — बतन
त्र
तालः — ताला घटी — घड़ी व म् — कपड़ा
स्त्र
वाक्य-रूप म — एषः आसन्दः। एषा पे टका। एतत् वातायनम्।
अच्छे उत्तर म यह ज़रूर हो: (1) पन्द्रह नाम घर क ही वस्तुओं के ह ; (2) तीन लङ्ग म कम-से-कम चार-चार
शब्द आएँ, केवल एक ही लङ्ग के पन्द्रह नह ; (3) हर शब्द के आगे हन्द अथ लखा हो; (4) जो शब्द पृष्ठ 46 क
ता लका से लए ह , वे सही स्तम्भ से लए गए ह ।
आगे बढ़कर क जए: कागज़ क प चय पर संस्कृत नाम लखकर घर क उन वस्तुओं पर चपका द जए — जैसे
दरवाज़े पर ‘द्वारम्’, खड़क पर ‘वातायनम्’। एक सप्ताह म पन्द्रह शब्द अपने-आप याद हो जाएँगे।
प्र.2 अधः केचन व्यावहा रकाः शब्दाः स न्त । तेषाम् अथ शक्षकस्य साहाय्येन अ न्वष्य लखन्तु । (अकारान्त-पुं लङ्गम्
/ अकारान्त-नपुंसक लङ्गम् / आकारान्त-स्त्री लङ्गम् / ईकारान्त-स्त्री लङ्गम् — चतुःस्त ा सारणी, पृष्ठ 46)
पृष्ठ 46 क ता लका म चार स्तम्भ और इक्क स-इक्क स पं क्तयाँ ह — कुल चौरासी रोज़मरा के शब्द। नीचे चार स्तम्भ अथ स हत
दए गए ह।
1. अकारान्त-पुं लङ्गम् —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ?
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शब्दः हन्द अथ शब्दः हन्द अथ
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आसन्दः
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कु स दण्डद पः
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ट ूबलाइट
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सुधाखण्डः गजः
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चॉक , खिड़या हाथी
स्यूतः थैल ा नागदन्तः खूँटी (दीवार की)
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coरजकः
व ालयः िव ालय
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वृक्षः पेड़
a धीवरः मछु आ रा
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कटः चटाई युवकः युवक
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तालः ताला प्रश्नः पश्न
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दपणः दपण, शीशा शुनकः कु त्त ा
aglद पः दीपक आचायः आचाय, ग रु
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घटः घड़ा खगः पक्षी
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सागरः समुद
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2. अकारान्त-नपुंसक लङ्गम् —
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शब्दः हन्द अथ शब्दः हन्द अथ
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फलम् ारम्
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फल दरवाज़ा
चश्मा
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उपनेत्रम् वलयम् चूड़ी, कड़ा
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युतकम् कमीज़
.com उ ानम् बग़ ीचा
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म न्दरम् मिन्दर सूच्यौषधम् सुई से दी जाने वाली दवा, इंजेक्शन
भवनम् भवन, इमारत उपांशुकम् ओढ़ नी, दुप ा
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पैर ों तक का वस्त्र — साड़ी / धोती
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वातायनम् िखड़की पादांशुकम्
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पंखा दनम् िदन
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agl भोजनम् भोजन उत्तरम् उ त्त र
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कदलीफलम् के ला उष्णीषम् पगड़ी, साफ़ ा
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पाथेयपात्रम् िटिफ़ न, भोजन-पेिटका वस्त्रम् कपड़ा
नगरम् नगर , शहर
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
3. आकारान्त-स्त्री लङ्गम् —
शब्दः हन्द अथ शब्दः हन्द अथ
बा लका लड़की तू लका कू ची, बश
म हला मिहला म ूषा बक्सा, पेटी
शा टका साड़ी छु रका छु र ी, चाकू
पे टका स न्दू क , पेटी गृहगो धका िछपकली
पादुका चप्पल , खड़ाऊँ धूमन लका िचमनी
उत्पी ठका मेज़ दनद शका कै ले ण् डर
रो टका रोटी खट् वा खाट, चारपाई
ा लका थाली, प्ले ट शाखा डाली, शाखा
कु ञ्चका चाबी श क्षका अध् यािपका
सू चका सुई गु लका गोली (दवा की)
पपी लका ची ंटी
4. ईकारान्त-स्त्री लङ्गम् —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
शब्दः हन्द अथ शब्दः हन्द अथ
लेखनी कलम गृ हणी ग ृहस्वािमनी
अङ् कनी पेंिसल माजनी झाड़न, पोंछा
दूरवाणी टेल ीफ़ ोन सम्माजनी झाड़ू, बुहारी
कूपी शीशी, छोटी बोतल सखी सहेल ी
द्रोणी टब, बड़ा बतन आकाशवाणी रे िडयो
नद नदी वणलेखनी क्र
रंग ीन पेंिसल , े यॉन
घट घड़ी जननी माता
नतक नाचने वाली नारी स्त्री
वेणी चोटी नगरी नगरी, शहर
कतरी कैं ची पुनःपूरणी रीिफ़ ल
कुमारी क न्या, अिववािहता
ता लका को इस तरह प ढ़ए: चार स्तम्भ केवल शब्द-सूची नह , लङ्ग-पहचान का अभ्यास ह। पहला और दूसरा
स्तम्भ दोन अकारान्त ह, फर भी एक पुं लङ्ग है और दूसरा नपुंसक लङ्ग — अन्तर केवल अन्त के ‘◌ः’ और ‘म्’ का
है। तीसरा आकारान्त और चौथा ईकारान्त — दोन स्त्री लङ्ग। यही पृष्ठ 45 के योग्यता वस्तर का नयम यहाँ चौरासी
उदाहरण से सद्ध हो रहा है।
शक्षक से अवश्य मलाइए: प्रश्न ही कहता है — ‘ शक्षकस्य साहाय्येन अ न्वष्य लखन्तु’। कुछ शब्द आधु नक
वस्तुओं के लए नए गढ़े गए ह और अलग-अलग शब्दकोश म उनके अथ थोड़े भन्न मल सकते ह — वशेषतः
उपांशुकम्, पादांशुकम्, तू लका, माजनी तथा घट । इन पाँच का अथ अपने शक्षक से पक्का कर ली जए और
कॉपी म वही ल खए।
शब्द-रचना दे खए: सुधाखण्डः = सुधा (चूना) + खण्ड; दण्डद पः = डंडे जैसा द पक ( ूबलाइट); पाथेयपात्रम्
= पाथेय (रास्ते का भोजन) + पात्र; सूच्यौषधम् = सूची (सुई) + औषध; दनद शका = दन दखाने वाली;
पुनःपूरणी = फर से भरने वाली। संस्कृत के हर नए शब्द म उसका अथ खुला रखा होता है — यही इस भाषा क
सबसे बड़ी सु वधा है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय — एक नज़र म
पाठ का मूल प्रश्न तीन ह — पुरुष/नर वस्तु के लए एषः कः ? (यह कौन है?), स्त्री/नारी वस्तु के लए एषा का ? (यह कौन
है?) और नज व/नपुंसक वस्तु के लए एतत् कम् ? (यह क्या है?)। उत्तर भी उसी लङ्ग म दे ना होता है — एषः बालकः, एषा
बा लका, एतत् फलम्।
संस्कृत म तीन वचन होते ह, हन्द -अं ेज़ी क तरह दो नह । एक के लए एकवचनम् (बालकः), ठ क दो के लए वचनम्
(बालकौ) और तीन या अ धक के लए बहुवचनम् (बालकाः)। यही तीन रूप स्त्री लङ्ग म बा लका–बा लके–बा लकाः और
नपुंसक लङ्ग म पत्रम्–पत्रे–पत्रा ण बनते ह।
क्रया भी वचन के साथ बदलती है (पृष्ठ 33) — पठ त / पठतः / पठ न्त, पब त / पबतः / पब न्त, खाद त / खादतः /
खाद न्त, गच्छ त / गच्छतः / गच्छ न्त, क्र ड त / क्र डतः / क्र ड न्त। कता जस वचन म होगा, क्रया भी उसी वचन म आएगी
— यही कतृ- क्रया-अन्वयः है।
नौ सवनाम-रूप क ता लका (पृष्ठ 40) — दूर क वस्तु के लए ‘तद्’ से सः / तौ / ते, सा / ते / ताः, तत् / ते / ता न;
पास क वस्तु के लए ‘एतद्’ से एषः / एतौ / एते, एषा / एते / एताः, एतत् / एते / एता न; और प्रश्न के लए ‘ कम्’ से
कः / कौ / के, का / के / काः, कम् / के / का न।
शब्द के अ न्तम वण से लङ्ग पहचा नए (योग्यता वस्तरः, पृष्ठ 45) — अकारान्त शब्द प्रायः पुं लङ्ग या नपुंसक लङ्ग होते ह
(बालकः, फलम्), आकारान्त प्रायः स्त्री लङ्ग (बा लका, लता) और ईकारान्त भी प्रायः स्त्री लङ्ग (नद , लेखनी, घट )।
संवाद का साँचा एक ही है — प्रश्न (सः कः ?) → प रचय (सः शक्षकः।) → क्रया-प्रश्न (सः क करो त ?) → क्रया-उत्तर
(सः पाठय त।) → जाँच-प्रश्न ( क सः भ्रम त ?) → नषेध + सुधार (न, सः न भ्रम त। सः तु पाठय त।)। न = नह , तु = ब ल्क,
आम् = हाँ — ये तीन छोटे शब्द ही पूरे संवाद को चलाते ह।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 3 एषः कः ? एषा का ? एतत् कम् ? AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्दः (प्रा तप दकम् ) लङ्गम् / अन्तः एकवचनम् – वचनम् – बहुवचनम् हन्द अथ
बालक पुंिलङ् गम्, अकारान्तः बालकः – बालकौ – बालकाः लड़का
वृक्ष पुंिलङ् गम्, अकारान्तः वृक्षः – वृक्षौ – वृक्षाः पेड़
गज पुंिलङ् गम्, अकारान्तः गजः – गजौ – गजाः हाथी
शुक पुंिलङ् गम्, अकारान्तः शुकः – शुकौ – शुकाः तोता
बा लका स्त्रीिलङ् गम्, आकारान्तः बा लका – बा लके – बा लकाः लड़क
वैद्या स्त्रीिलङ् गम्, आकारान्तः वैद्या – वैद्ये – वैद्याः वैद्या, च क त्सका
अजा स्त्रीिलङ् गम्, आकारान्तः अजा – अजे – अजाः बकरी
लता स्त्रीिलङ् गम्, आकारान्तः लता – लते – लताः बेल, वल्ली
नद स्त्रीिलङ् गम्, ईकारान्तः नद – नद्यौ – नद्यः नद
लेखनी स्त्रीिलङ् गम्, ईकारान्तः लेखनी – लेखन्यौ – लेखन्यः कलम
पत्र नपुंस किलङ् गम्, अकारान्तः पत्रम् – पत्रे – पत्रा ण पत्ता
पुस्तक नपुंस किलङ् गम्, अकारान्तः पुस्तकम् – पुस्तके – पुस्तका न पुस्तक
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