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NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 5 संख्यागणना ननु सरला

AglaSem पर कक्षा 6 संस्कृत पाठ 5 संख्यागणना ननु सरला (दीपकम्) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Sanskrit Chapter 5 (Deepakam).
NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 5 संख्यागणना ननु सरला - Page 1 of 28

About NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 5 संख्यागणना ननु सरला

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NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 5 संख्यागणना ननु सरला – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 5: संख्यागणना ननु सरला

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

61 – 69 11 26 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 27 pages

Page 2

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · सं स्कृ त · द पकम्

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: संख्यागणना ननु सरला
NCERT कक्षा 6 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के पञ्चमः पाठः — संख्यागणना ननु सरला के सभी अभ्यास , पद्यांश , शब्दाथ-सार णय ,
योग्यता वस्तर, कायकलाप और प रयोजनाकाय के पूरे हल। पछले पाठ म अहम् – त्वम् के रूप सीखे थे; यह पाठ गनती सखाता है — डॉ.
जनादनहेगडे का छह पद्य वाला मधुर संख्यागीत, जसम एक से दस तक क हर संख्या कसी प्र सद्ध वस्तु से जोड़कर याद कराई गई है — एकः सूयः,
े नयने, चतुमुखः ब्रह्मा, पञ्च अङ्गलयः, षण्मुखदे वः, सप्त वासराः, अष्ट दग्गजाः, नव ग्रहाः, दश दशः — और उसके बाद १ से ५० तक क पूरी
संस्कृत संख्यासूची। पृष्ठ 61 से 69 तक का हर शीषक — चत्रकथा, दोन पद्य-पृष्ठ, वयं शब्दाथान् जानीमः, वयं संख्यां गणयामः (१–५०), वयम्
अभ्यासं कुमः (प्रश्न १–७, उपभाग (क)–(ङ) स हत), योग्यता वस्तरः — संख्याप्र स द्धः, कायकलापः — संख्यागीतम् तथा लूडो- चत्र वाला
प रयोजनाकायम् — क्रम से हल कया गया है, हर पद्य के अन्वय, हन्द अथ और भाव के साथ।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

द पकम् (कक्षा 6) 61 – 69

खं ड प्रश्न

11 26

माध्यम

हन्द

पञ्चमः पाठः — संख्यागणना ननु सरला ( चत्रकथा) — पृष्ठ 61
पाठ-प्रवेशः — कक्षायां गणना

पाठः

प्र.1 छात्राः ! अत्र कक्षायां भवन्तः क त जनाः स न्त ? — सु मतः, वश्वनाथः, वीणा, उ दता, कमला, प्री तः, नरुपमा,
प्रशान्तः, दे वेशः अहं च स्मः । — त ह क त छात्राः स न्त ? गणयतु । — एकम् एकम् एकम् एकम् एकम् एकम्
................ । — अहो ! भवन्तः संस्कृतेन गणनां न जान न्त । अस्तु, अधुना संख्यागणनां पठामः । अहम् एकं
सुन्दरं संख्यागीतं गाया म । भवन्तः अनुगायन्तु । — अस्याः चत्रकथायाः हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।

पाठ का पहला पृष्ठ एक कक्षा का दृश्य है। अध्यापक गनती पूछते ह, ब े गन नह पाते — और वह से पूरा पाठ शुरू हो जाता है।

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला AglaSem · NCERT Solutions

कः संस्कृतम् हन्द
वद त

अध्यापकः छात्राः ! अत्र कक्षायां भवन्तः क त जनाः स न्त ? छात्रो ! यहाँ क क्षा में आप िकतने लोग है ं ?

छात्रा सु मतः, वश्वनाथः, वीणा, उ दता, कमला, प्री तः, सुिमत, िवश्वनाथ, वीणा, उिदता, कमला, पीित, िनरुपमा,
नरुपमा, प्रशान्तः, दे वेशः अहं च स्मः । पशान्त, दे वेश और मैं — (इतने) है।ं

अध्यापकः त ह क त छात्राः स न्त ? गणयतु । तो िफर िकतने छात्र है ं ? िगिनए।

छात्रा एकम् एकम् एकम् एकम् एकम् एकम् ................ । एक , एक , एक , एक , एक , एक …… (आगे िगनती नही ं
आती)।

अध्यापकः अहो ! भवन्तः संस्कृतेन गणनां न जान न्त । अस्तु, अधुना अरे ! आप लोग संस्कृ त में िगनती नही ं जानते। ख़ैर , अब
संख्यागणनां पठामः । अहम् एकं सुन्दरं संख्यागीतं गाया म हम संख्या-गणना पढ़ ते है।ं मैं एक सुन्दर संख्यागीत गाता
। भवन्तः अनुगायन्तु । हू।ँ आप लोग साथ-साथ गाइए।

व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): ‘क त’ इ त अव्ययम् (= कतने); तस्य रूपं न प रवतते। ‘भवन्तः’ इ त आदराथकं प्रथमपुरुषस्य
बहुवचनम्, अतः क्रया ‘स न्त’। ‘गणयतु’, ‘अनुगायन्तु’ — लोट् -लकारस्य प्रथमपुरुषे क्रमेण एकवचनं बहुवचनं च (आदरसूचकं
व धवचनम्)। ‘स्मः’ इ त ‘अस्’-धातोः लट् -लकारे उत्तमपुरुषस्य बहुवचनम् — क्य क बोलने वाली अपने को भी गनती म जोड़
रही है।

अध्यापक ने ‘अहो !’ क्य कहा: छात्रा ने नाम तो सब गना दए, पर संख्या नह बता पाई — ‘एकम् एकम्
एकम्…’ कहकर एक-एक करके ही गनती रही। नाम गनाना और संख्या बताना दो अलग बात ह। यही चूक
पकड़कर अध्यापक संख्यागीत गाने लगते ह — और पाठ शुरू हो जाता है।

शब्द जो काम आएँगे: कक्षायाम् = कक्षा म (सप्तमी एकवचन), जनाः = लोग, गणयतु = ग नए, अनुगायन्तु = साथ
म गाइए, अस्तु = ख़ैर/ठ क है, अधुना = अब।

प्र.2 त ह क त छात्राः स न्त ? गणयतु । (पृष्ठ 61, पाठ्य-प्रश्नः)

दश छात्राः स न्त । (कक्षा म दस वद्याथ ह।)

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला AglaSem · NCERT Solutions

सुिमतः – १

िवश्वनाथः – २

वीणा – ३
उिदता – ४

कमला – ५

पीितः – ६

िनरुपमा – ७

पशान्तः – ८

दे वेशः – ९

अहम् (बोलने वाली छात्रा स्वयं) – १०

योगः = दश (१० )

संस्कृतेन उत्तरम् — कक्षायां दश छात्राः स न्त । ( हन्द : कक्षा म दस छात्र ह।)

‘अहं च’ को गनना मत भू लए: छात्रा ने नौ नाम गनाकर अन्त म ‘अहं च स्मः’ कहा — यानी ‘और म (भी)’।
इसी लए क्रया ‘स न्त’ नह , ‘स्मः’ (उत्तमपुरुष बहुवचन) आई। नौ + स्वयं = दश। जो वद्याथ अपने को छोड़ दे ता
है, उसका उत्तर ‘नव’ हो जाता है — यही सबसे आम ग़लती है।

जाँच का तरीक़ा: उत्तर को पूरे वाक्य म बोलकर दे खए — ‘वयं दश छात्राः स्मः।’ (हम दस छात्र ह।) य द आप
कक्षा से बाहर के ह तो — ‘ते दश छात्राः स न्त।’

प्र.3 ‘एकम् एकम् एकम् एकम् एकम् एकम् ................ ।’ — अस्य स्थाने संस्कृतेन शुद्धा गणना कथं करणीया ?
लखन्तु ।

शुद्ध गणना इस प्रकार होगी —

एकम् – े – त्रीिण – च त्वािर – पञ् च – षट् – सप्त – अष्ट – नव – दश ।

छात्रा ने ‘एकम्’ को दस बार दोहराया, जो गनती नह — केवल एक ही संख्या क पुनरावृ त्त है। संस्कृत म हर संख्या का अपना पद
है, जो पृष्ठ 64 क सूची म दया गया है।

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
अङ् कः संस्कृतपदम् हन्द पाठे उदाहरणम्

m एकम् / एकः as e
१
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एक एकः सूयः
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g l a े दो े नयने
a
२

३ त्रीिण तीन त्रनयनमू तः

. coचारm ag
चत्वािर
e m
४ चतुमुखः ब्रह्मा

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५ पञ्च
a पाँच पञ्च अङ्गलयः

षट्
co m
६ छह षण्मुखदे वः

em.
com as
स प्त
l
७ सात सप्त वासराः

. a g
m
ase
८ अष्ट आठ अष्ट दग्गजाः

agl९ नव नौ नव ग्रहाः

m a s
.co agl
१० दश दस दश दशः

se m
g l a
a
‘एकम्’ क जगह ‘एकः’ कब ? संख्यावाचक शब्द जस सं ा के साथ आता है, उसी के लङ्ग म ढल जाता है —
एकः सूयः (पुं लङ्ग), एका बा लका (स्त्री लङ्ग), एकम् ब्रह्म (नपुंसक लङ्ग)। इसी तरह ौ बालकौ / े बा लके / े

co m
नयने। यह लङ्गभेद केवल एक से चार तक चलता है; पञ्च से आगे रूप एक ही रहता है — पञ्च बालकाः, पञ्च
m .
m as e
l
बा लकाः, पञ्च पुस्तका न।
.co a g
a s em
agl Try This: अपनी कक्षा म खड़े होकर बारी-बारी बो लए — एकम्, े , त्री ण, चत्वा र … और जो रुक जाए वह बैठ
m
जाए। दस तक पहुँचने पर फर एकम् से शुरू।

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संख्यागीतम् (पद्यांशाः) — पृष्ठa62
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m
एकः – े – त्री ण – चत्वा र – पञ्च – षट् – सप्त

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पाठः

m l
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a s emप्र.1
gl
एकः सूयः चन्द्रोऽप्येकः मानवकुलमप्येकम् । े नयने ननु जी व न सकले प्रभव त सव द्रष्टु म् ॥ — अस्य पद्यांशस्य

a अन्वयं, हन्द -अथ, भावं च लखन्तु ।
c
m .
s e
. com a gla
m (अ स्त), मानवकुलम् अ प एकम् (अ स्त) । सकले जी व न ननु े नयने (स्तः),
अन्वयः — सूयः एकः (अ स्त), चन्द्रः अ पeएकः
s
a
(अतः) सवः द्रष्टु ं प्रभव त ।
agl

co m
m .
m ase
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला AglaSem · NCERT Solutions

पद- व े दः अथः

चन्द ोऽप्येक ः = चन्द ः + अिप + एकः चन्द्रमा भी एक (है)

मानवकु लमप्येक म् = मानवकु लम् + अिप + एकम् मनुष्य-जा त भी एक ही (है)

ननु नश्चय ही, सचमुच (अव्ययम्)

जीिविन सकले हर प्राणी म (सप्तमी एकवचन)

पभवित द ष्टुम ् दे खने म समथ होता है

हन्द अथ — सूय एक है, चन्द्रमा भी एक ही है, और मनुष्य का कुल भी एक ही है। हर जीव म सचमुच दो आँख होती ह, (इन्ह
से) हर कोई दे ख पाता है।

भावः — क व ने ‘एक’ और ‘दो’ को सखाने के लए ऐसे उदाहरण चुने जो हर ब े क आँख के सामने रहते ह —
आकाश म एक सूरज, एक चाँद, और अपने चेहरे पर दो आँख। साथ ही एक बड़ी बात चुपचाप कह द —
‘मानवकुलम् अ प एकम्’ — रंग, भाषा, दे श चाहे अलग ह , मनुष्य-जा त एक ही है। गनती के गीत म यह वसुधैव
कुटु म्बकम् का बीज है।

व्याकरण-सङ् केतः: ‘ े नयने’ — नपुंसक लङ्गे वचनम् (नयनम् → नयने)। संस्कृत म आँख, कान, हाथ, पैर
जैसे जोड़े वाले अङ्ग के लए वचन ही चलता है — े नयने, ौ कण , ौ हस्तौ, ौ पादौ।

प्र.2 लोकशङ् कर स्त्रनयनमू तः नमाम्यहं तं प्र त दवसम् । चतुमुखोऽयं जगतः स्रष्टा तेन ह सृष्टं जीवकुलम् ॥ — अस्य
पद्यांशस्य अन्वयं, हन्द -अथ, भावं च लखन्तु ।

अन्वयः — लोकशङ् करः त्रनयनमू तः (अ स्त), तम् अहं प्र त दवसं नमा म । अयं चतुमुखः जगतः स्रष्टा (अ स्त), तेन ह जीवकुलं
सृष्टम् ।

पद- व े दः अथः

लोकशङ् करिस्त्रनयनमूितः = लोकशङ् करः + ित्रनयनमूितः संसार का कल्याण करने वाले शव — तीन नेत्र वाली मू त ( वसग-स ः)

नमाम्यहं = नमािम + अहम् म नमस्कार करता ँ (यण्-स ः)

चतुम ुखोऽयं = चतुम ुखः + अयम् यह चार मुख वाला (ब्रह्मा)

स्रष्टा सृ ष्टकता, रचने वाला

तेन िह स ृष्टम् उसी के ारा रचा गया

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला AglaSem · NCERT Solutions

हन्द अथ — संसार का कल्याण करने वाले शव तीन नेत्र वाले ह; म प्र त दन उन्ह प्रणाम करता ँ। ये चार मुख वाले (ब्रह्मा)
जगत् के रच यता ह; उन्ह ने ही जीव-जगत् क रचना क है।

भावः — यहाँ तीन और चार सखाए गए ह — पर सूखे अङ् क क तरह नह । ‘तीन’ के लए त्रनयन शव और
‘चार’ के लए चतुमुख ब्रह्मा — दोन ऐसी छ वयाँ ह जो ब े ने म न्दर म, कैलेण्डर म, कथा म दे खी होती ह। जो
चत्र मन म बस जाए, वह संख्या भूलती नह । साथ ही यह भी बता दया क ‘नमा म’ — नमन करना — प्र त दन
का काम है।

शब्द बनाना सी खए: त्र + नयन = त्रनयनः (तीन आँख वाला), चतुर् + मुख = चतुमुखः (चार मुख वाला), षट्
+ मुख = षण्मुखः (छह मुख वाला)। यह बहु ी ह समास है — समास का अथ कसी तीसरे व्य क्त पर जाता है।

प्र.3 पञ्चाङ्गलयो मम करकमले लोके वदध त गणनाम् । सुरसेनानीः षण्मुखदे वः सततं पात्ययममरगणम् ॥ — अस्य
पद्यांशस्य अन्वयं, हन्द -अथ, भावं च लखन्तु ।

अन्वयः — मम करकमले पञ्च अङ्गलयः (स न्त, याः) लोके गणनां वदध त । सुरसेनानीः षण्मुखदे वः अयम् अमरगणं सततं पा त ।

पद- व े दः अथः

पञ्चाङ् ग ल
ु यो = पञ्च + अङ् ग ल
ु यः पाँच उँ ग लयाँ (द घ-स ः)

करकमले कमल जैसे (सुन्दर) हाथ म (हस्तार वन्दे )

िवदधित करती ह (कुव न्त)

सुर से नानीः दे वताओं के सेनाप त — का तकेय

पात्ययममरगणम् = पाित + अयम् + अमरगणम् यह दे व-समूह क रक्षा करता है (यण्-स ः: इ + अ = य)

हन्द अथ — मेरे कमल-से हाथ म पाँच उँ ग लयाँ ह, जो संसार म गनती करने का काम करती ह। दे वताओं के सेनाप त ये छह मुख
वाले का तकेय दे व दे व-समूह क सदा रक्षा करते ह।

भावः — क व ने ‘पाँच’ के लए सबसे नज़द क वस्तु उठाई — अपना ही हाथ। गनती क पहली पाठशाला
उँ ग लयाँ ही ह, इसी लए ‘लोके वदध त गणनाम्’ कहा गया — दु नया भर म लोग उँ ग लय से ही गनना शुरू करते
ह। और ‘छह’ के लए षण्मुख का तकेय — जनके छह मुख ह, और जो दे वसेना के रक्षक ह। शरीर और दे वता,
दोन संख्या के जीते-जागते चत्र बन जाते ह।

पुस्तक का ही शब्दाथ दे खए (पृष्ठ 63): ‘पा त = रक्ष त = रक्षा करता है’। इसी से सद्ध होता है क ‘पात्ययम्’ का
व े द पा त + अयम् है — और स का नयम है इ + अ = य् (यण् स ), जैसे प्र त + एकः = प्रत्येकः।

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला AglaSem · NCERT Solutions

प्र.4 सप्त वासराः सप्ताहे ननु स्वराः सुमधुराः सप्त । ऊध्वमधस्तात् लोकाः सप्त ख्याता ऋषयः सप्त ॥ — अस्य
पद्यांशस्य अन्वयं, हन्द -अथ, भावं च लखन्तु ।

अन्वयः — सप्ताहे ननु सप्त वासराः (भव न्त) । सुमधुराः स्वराः (अ प) सप्त (स न्त) । ऊध्वम् अधस्तात् (च) लोकाः सप्त (स न्त) ।
ख्याताः ऋषयः (अ प) सप्त (स न्त) ।

‘सप्त’ कसका संस्कृतम् वे सात कौन-से

दन स त वासराः
प् रिवः, सोमः, मङ् गलः, बुध ः, गुरुः, शुक्रः, शिनः

स्वर स त वराः
प् स् षड् जः (सा), ऋषभः (रे ), गान्धारः (ग), मध्यमः (म), पञ्चमः (प), धै वतः (ध ), िनषादः (िन)

लोक स त लोकाः
प् भूः, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, स त्यम् — ऊपर के ; और नीचे के भी सात (पाताल आिद )

ऋष स त ऋषयः
प् मरीिचः, अित्रः, अिङ् गराः, पुल स्त्यः, पुल हः, क्रतुः, विस ष्ठः (प ृ ठ 68)
ष्

हन्द अथ — सप्ताह म नश्चय ही सात दन होते ह; मीठे स्वर भी सात होते ह; ऊपर और नीचे के लोक भी सात ह; और प्र सद्ध
ऋ ष भी सात ह।

भावः — यह पूरा पद्य केवल एक संख्या — सात — पर टका है, पर उसे चार अलग-अलग दु नयाओं से जोड़ दे ता
है: कैलेण्डर (सप्ताह), संगीत (स्वर), शास्त्र (लोक) और परम्परा (सप्त ष)। एक ही संख्या जब चार जगह दखे, तो
वह पक्क याद हो जाती है। पृष्ठ 62 पर छपे कैलेण्डर और हारमो नयम बजाते व्य क्त के चत्र ठ क यही दो उदाहरण
आँख के सामने रख दे ते ह।

पद- व े दः: ऊध्वमधस्तात् = ऊध्वम् + अधस्तात् (ऊपर + नीचे)। ‘ऊध्वम्’ और ‘अधः’ दोन शब्द अगले पृष्ठ पर
‘दश दशाः’ म फर आएँगे — क्य क आठ दशाओं के साथ ऊपर और नीचे मलाकर ही दस दशाएँ बनती ह।

संख्यागीतम् (शेषपद्यांशौ) तथा दश दशाः — पृष्ठ 63
अष्ट – नव – दश

पाठः

प्र.1 अष्ट दग्गजा धर न्त धरणीम् उपकृ तशीला अतुलबलाः । नव ग्रहा ननु वपुले गगने चर न्त सततं नयततया ॥ —
अस्य पद्यांशस्य अन्वयं, हन्द -अथ, भावं च लखन्तु ।

अन्वयः — उपकृ तशीलाः अतुलबलाः अष्ट दग्गजाः धरण धर न्त । नव ग्रहाः ननु वपुले गगने सततं नयततया चर न्त ।

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पदम् अथः (पुस्तकात्) हन्द

िदग्गजाः दशानां गजाः दशाओं के हाथी

उपकृ ितशीलाः उपकार-स्वभावाः उपकार करने के स्वभाव वाले

अतुल बलाः अतुल्यश क्त-सम्प ाः अतुल नीय बल वाले

िनयततया नय मतरूपेण िनयिमत रूप से

िवपुले गगने वशाले आकाशे िवशाल आकाश में

हन्द अथ — उपकार करने के स्वभाव वाले और अतुलनीय बल वाले आठ दग्गज ( दशाओं के हाथी) पृथ्वी को धारण करते ह। नौ
ग्रह नश्चय ही वशाल आकाश म सदा नय मत रूप से घूमते रहते ह।

भावः — ‘आठ’ के लए परम्परा क कल्पना ली गई — आठ दशाओं म खड़े आठ हाथी पृथ्वी को थामे ह; वे
बलवान भी ह और परोपकारी भी। ‘नौ’ के लए आकाश का सच लया गया — नौ ग्रह सततं नयततया चलते ह,
यानी बना रुके और बना नयम तोड़े। क व यहाँ चुपके से एक जीवन- शक्षा भी दे दे ते ह — बल का उपयोग दूसर
को सँभालने म हो, और काम म नय मतता हो।

नव ग्रहाः कौन (पृष्ठ 68): सूयः, चन्द्रः, मङ्गलः, बुधः, गुरुः, शुक्रः, श नः, राहुः, केतुः। पृष्ठ 63 के चत्र म सूय के चार
ओर कक्षाओं म घूमते ग्रह दखाए गए ह — पद्य का ‘चर न्त’ वही चत्र है।

प्र.2 पूवाद्या दश दशः प्र सद्धाः सङ् ख्यागणना ननु सरला । गायामो वयम मतामोदं कुम बहुधा करतालम् ॥ — अस्य
पद्यांशस्य अन्वयं, हन्द -अथ, भावं च लखन्तु । क वः कः ?

अन्वयः — पूवाद्याः दश दशः प्र सद्धाः (स न्त) । सङ् ख्यागणना ननु सरला (अ स्त) । वयम् अ मतामोदं गायामः, बहुधा करतालं
कुमः ।

पद- व े दः अथः

पूव ाः = पूव + आ ाः पूव आ द (पूव जनम पहली है)

गायामो वयमिमतामोदं = गायामः + वयम् + अिमतामोदम् हम अपार आनन्द से गाते ह

अिमतामोदम् अत्यानन्दपूवकम् — अ त आनन्दपूवक

कु म बहध
ु ा करतालम् = कु मः + बहध
ु ा + करतालम् हम बार-बार ताली बजाते ह

हन्द अथ — पूव आ द दस दशाएँ प्र सद्ध ह। गनती तो सचमुच सरल है ! हम बहुत आनन्द के साथ गाते ह और बार-बार ताली
बजाते ह।

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला
a g l AglaSem · NCERT Solutions

क वः — डॉ. जनादनहेगडे (इस संख्यागीत के रच यता; उनका नाम पृष्ठ 63 पर पद्य के नीचे छपा है।)
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e m.
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भावः — यह अ न्तम पद्य दो काम करता है। पहला — ‘दस’ को दस दशाओं से जोड़कर गनती पूरी करता है।

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दूसरा — पूरे गीत का नष्कष बोल दे ता है: ‘सङ् ख्यागणना ननु सरला’ — गनती सचमुच आसान है। और सीखने

glतरीक़ा भी बता दे ता है — गाकर और ताली बजाकर। जो पाठ ताली के साथ गाया जाए, वह याद रखने के लए
aदोहराना
का
नह पड़ता। पाठ का शीषक भी इसी पं क्त से लया गया है।

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a s emहै — ‘ े नयने ननु’, ‘सप्त वासराः सप्ताहे ननु’, ‘नव ग्रहा
agअथl है — सचमुच, नश्चय ही। यह बात को पक्का करने वाला शब्द है।
‘ननु’ का काम: यह अव्यय पूरे गीत म चार बार आया
ननु’, ‘सङ् ख्यागणना ननु सरला’। हर बार

co m
seय दशा, नैऋत्य दशा, m.
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.c दशा, ऊध्वम्, अधः — (पृष्ठ 63 चत्रम्) । दशानां नामा न तेषाम् अथ aचgलखन्तु ।
प्र.3 गृहस्य दश दशाः — पूव दशा, प म दशा, उत्तर दशा, द क्षण दशा, ईशान दशा, आग्ने

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वायव्य

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agउत्तर
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पृष्ठ 63 के चत्र म एक बालक दोन हाथ फैलाकर खड़ा है और उसके चार ओर दस दशाएँ अङ् कत ह। दस दशाएँ = चार मुख्य +
चार कोण + ऊपर + नीचे।
se m
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क्रमः संस्कृतम् a हन्द ENGLISH प्रकारः

co m
.
१ पूव दशा पूव East मुख्या दक्

e m
c o m प म दशा g l as
.
पिश्चम West
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२ मुख्या दक्

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gl
उत्तर दशा उ त्तर North मुख्या दक्
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४ द क्षण दशा दिक्षण South मुख्या दक्
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उ त्तर -पूव.co
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५ ईशान दशा North-East कोणः ( व दक्)

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६ आग्नेय दशा
agl दिक्षण-पूव South-East कोणः ( व दक्)

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७ नैऋत्य दशा दिक्षण-पिश्चम South-West कोणः ( व दक्)

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उ त्तर -पिश्चम North-West

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८ वायव्य दशा कोणः ( व दक्)

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ऊध्वम् ऊपर Above ऊध्व दक्

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१० अधः नीचे Below अधो दक्

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कोण के नाम दे वताओं से बने ह: ईशान = ईश ( शव) क दशा; आग्नेय = अ ग्न क दशा; नैऋत्य = नऋ त क

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दशा; वायव्य = वायु क दशा। पृष्ठ 68 क सूची म यही आठ दक्पाल गनाए गए ह — इन्द्रः, अ ग्नः, यमः,
नऋ तः, वरुणः, वायुः, कुबेरः, ईशानः। दशा का नाम याद रखना हो तो उसके दे वता का नाम याद कर ली जए।

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला AglaSem · NCERT Solutions

पहचानने का सरल तरीक़ा: सूय जधर उगे वह पूव दशा। पूव क ओर मुँह करके खड़े हो जाइए — तब बायाँ हाथ
उत्तर, दायाँ हाथ द क्षण, पीठ क ओर प म। दोन मुख्य दशाओं के बीच का कोना ही व दक् (कोण) है।

वयं शब्दाथान् जानीमः — पृष्ठ 63–64
शब्दः – अथः – हन्द – English

शब्दाथाः

प्र.1 वयं शब्दाथान् जानीमः (पृष्ठ 63) — दत्तानां शब्दानाम् अथान् लखन्तु ।

पृष्ठ 63 क सारणी म आठ शब्द ह — सब पद्य म आए हुए ह। संस्कृत पयाय के साथ हन्द और अङ् ग्रेज़ी अथ भी दए गए ह।

शब्दः अथः हन्द ENGLISH पद्ये कुत्र
(संस्कृतम्)

जीिविन जीवे पाणी में In the living being े नयने ननु जी व न
सकले

स्रष् टा सृ ष्टकता ब्रह्मा स ृिष्टकत बह्मा Creator of universe चतुमुखोऽयं जगतः स्रष्टा

करकमले हस्तार वन्दे कमल जैसे हाथ में In the lotus like hand पञ्चाङ्गलयो मम
करकमले

िवदधित कुव न्त करते है ं Facilitate लोके वदध त गणनाम्

गणनाम् गणनम् िगनती Counting लोके वदध त गणनाम्

सुरसे नानीः का तकेयः दे वों के से नापित Commander-in-chief of सुरसेनानीः षण्मुखदे वः
(काितके य) Gods

पाित रक्ष त र क्षा करता है Protects सततं पात्ययम्
अमरगणम्

स ताहे
प् दवससप्तके स प्ताह में In a week सप्त वासराः सप्ताहे ननु

अ न्तम स्तम्भ ‘मातृभाषया अथ लखन्तु’ आपके लए ख़ाली है। उसम अपनी मातृभाषा ( हन्द , मराठ ,
बाङ् ला, त मल, गुजराती — जो भी आपक हो) म अथ ल खए। हन्द भाषी वद्याथ ऊपर क ‘ हन्द ’ वाली पं क्त
ही लख सकते ह; जैसे — जी व न = प्राणी म, गणनाम् = गनती, पा त = रक्षा करता है।

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शब्द-रचना पर ध्यान: कर + कमल = करकमलम् (कमल जैसा हाथ — कमधारय समास), सुर + सेनानी =
सुरसेनानीः (दे व का सेनाप त — षष्ठी तत्पुरुष), सप्त + अह = सप्ताहः (सात दन का समूह — गु समास)।

प्र.2 वयं शब्दाथान् जानीमः (पृष्ठ 64) — दत्तानां शब्दानाम् अथान् लखन्तु ।

पृष्ठ 64 पर सारणी आगे बढ़ती है — नौ और शब्द, सब अ न्तम दो पद्य के।

शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द ENGLISH

ऋषयः मुनयः ऋिष-गण Sages

ऊ वम्
ध् उप र ऊपर Above

अधः नम्नभागे नीचे Below

उपकृ ितशीलाः उपकार-स्वभावाः उपकार स्वभाव वाले Those who are of helpful nature

अतुल बलाः अतुल्यश क्त-सम्प ाः अतुल नीय बल वाले Extraordinarily strong

िनयततया नय मतरूपेण िनयिमत रूप से Continuously

िदशः दशाः िदशाएँ Directions

अिमतामोदं अत्यानन्दपूवकम् अित आनन्दपूवक With Great / limitless delight

करतालम् करतलध्व नः ताली Clap

‘अ मत’ और ‘अतुल’ — दोन म ‘नह ’ छपा है: अ + मत = जो नापा न जा सके (अ मत = असीम); अ + तुल
= जसक तुलना न हो सके (अतुल = अतुलनीय)। संस्कृत म ‘अ’ लगाकर उल्टा अथ बनाना बहुत आसान है —
सत्य/असत्य, ान/अ ान, बल/अबल, शा न्त/अशा न्त।

‘करतालम्’ का सुन्दर अथ: कर (हाथ) + तल (हथेली) — दो हथे लय के मलने से जो ध्व न हो, वही ताली। पद्य
कहता है ‘कुम बहुधा करतालम्’ — गाते समय बार-बार ताली बजाइए। यह पाठ याद करने क व ध भी है और
आनन्द भी।

वयं संख्यां गणयामः (१ – ५०) — पृष्ठ 64

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संख्यापदा न

पाठः

प्र.1 वयं संख्यां गणयामः (१ – ५०) — पृष्ठ 64 दत्तां संख्यासूच लखन्तु ।

पाँच स्तम्भ म एक से पचास तक क पूरी सूची —

१ – १० ११ – २० २१ – ३० ३१ – ४० ४१ – ५०

१ – एकम् ११ – एकादश २१ – एकिवंशितः ३१ – एकित्रंशत् ४१ – एकचत्वािरंशत्

२– े १२ – ादश २२ – ािवंशितः ३२ – ाित्रंशत् ४२ – ि चत्वािरंशत्

३ – त्रीिण १३ – त्रयोदश २३ – त्रयोिवंशितः ३३ – त्रयिस्त्रंशत् ४३ – ित्रचत्वािरंशत्

४ – चत्वािर १४ – चतुद श २४ – चतुिवंशितः ३४ – चतुिस्त्रंशत् ४४ – चतुश्चत्वािरंशत्

५ – पञ्च १५ – पञ्चदश २५ – पञ्चिवंशितः ३५ – पञ्चित्रंशत् ४५ – पञ्चचत्वािरंशत्

६ – षट् १६ – षोडश २६ – षिड् वंशितः ३६ – षिट् त्र ंशत् ४६ – षट् चत्वािरंशत्

७ – सप्त १७ – सप्तदश २७ – सप्तिवंशितः ३७ – सप्तित्रंशत् ४७ – सप्तचत्वािरंशत्

८ – अष्ट १८ – अष्टादश २८ – अष्टािवंशितः ३८ – अष्टाित्रंशत् ४८ – अष्टचत्वािरंशत्

९ – नव १९ – नवदश २९ – नविवंशितः ३९ – नवित्रंशत् ४९ – नवचत्वािरंशत्

१० – दश २० – िवंशितः ३० – ित्रंशत् ४० – चत्वािरंशत् ५० – पञ्चाशत्

पचास पद याद करने क ज़रूरत नह — केवल पन्द्रह: इकाइयाँ (एक … नव) और पाँच दहाइयाँ (दश, वश तः,
त्रशत्, चत्वा रशत्, पञ्चाशत्) याद कर ली जए। बाक़ सब जोड़ से बनते ह — इकाई + दहाई। जैसे सप्त +
वश तः = सप्त वश तः (२७), नव + त्रशत् = नव त्रशत् (३९)।

Check it yourself: कुछ रूप स से बदल जाते ह, उन्ह अलग से दे ख ली जए — षट् + दश = षोडश
(१६), अष्ट + दश = अष्टादश (१८), त्र + दश = त्रयोदश (१३), + वश तः = ा वश तः (२२), चतुर् +
वश तः = चतु वश तः (२४)। ये पाँच याद रह गए तो सूची पूरी हो गई।

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प्र.2 संख्यापदानां रचनायाः नयमं लखन्तु — कथं ११ तः ४९ पयन्ता न पदा न नम यन्ते ?

नयम एक ही है — इकाई का पद + दहाई का पद, और जुड़ते समय स लग जाती है।

इकाई-पदम् + दहाई-पदम् → संख्यापदम्

एक + दश → एकादश (११)

पञ्च + िवंशितः → पञ् चिवंशितः (२५)

सप्त + ित्रंशत् → सप्तित्रंशत् (३७)

नव + चत्वािरंशत् → नवच त्वािरंशत् (४९)

दहाई जुड़ने वाला अंश उदाहरणम्

११ – १८ – दश एकादश, ादश, त्रयोदश, चतुद श, पञ्चदश, षोडश, स प्तदश, अष्टादश

२१ – २९ – िवंशितः एकिवंशितः … नविवंशितः

३१ – ३९ – ित्रंशत् एकित्रंशत् … नवित्रंशत्

४१ – ४९ – चत्वािरंशत् एकचत्वािरंशत् … नवचत्वािरंशत्

दहाइय के अन्त पर ध्यान: वश तः का अन्त वसग (◌ः) म है, इस लए २१–२९ के सब पद वसगान्त ह —
एक वश त◌ः। पर त्रशत् और चत्वा रशत् का अन्त ‘त्’ म है, इस लए ३१–३९ और ४१–४९ के पद ‘त्’ पर समाप्त
होते ह — एक त्रशत्। अन्त्य अक्षर बदल दे ने से पूरा पद अशुद्ध हो जाता है, इस लए लखते समय यही सबसे पहले
जाँ चए।

Did you know? पुस्तक म १९ के लए नवदश और २९ के लए नव वश तः दए गए ह — ये नयम से बने
सरल रूप ह। शास्त्रीय संस्कृत म इनके लए एकोन वश तः (= बीस म एक कम) और एकोन त्रशत् (= तीस म एक
कम) भी चलते ह। कक्षा 6 के लए पुस्तक वाला रूप ही ल खए।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 65

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला
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अभ्यासः (प्रश्नाः १–३)
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अभ्यासः

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a s em आधारेण अधो ल खतानां प्रश्नानाम् एकपदे न उत्तरा ण लखन्तु — (क) कः एकः अ स्त ? (ख) कः
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पाठस्य
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प्र.1
षण्मुखदे वः अ स्त ? (ग) कः त्रनयनमू तः अ स्त ? (घ) का सरला अ स्त ? (ङ) के अतुलबलाः स न्त ?

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प्रश्नः
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उत्तरम् (एकपदे न) हन्द पाठे प्रमाणम्

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(क) कः एकः अ स्त ? सूयः सूय एकः सूयः चन्द्रोऽप्येकः

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a s eरmसेनानीः षण्मुखदेवः
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(ख) कः षण्मुखदे वः अ स्त ? सुर से नानीः (काितके यः) दे व के सेनाप त का तकेय सु

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(ग) कः त्रनयनमू तः अ स्त ? लोकशङ् करः (िशवः) लोक का कल्याण करने वाले शव लोकशङ् कर स्त्रनयनमू तः

agl(घ) का सरला अ स्त ? सङ् ख्यागणना गनती सङ् ख्यागणना ननु सरला

mदशाओं के आठ हाथी a s
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(ङ) के अतुलबलाः स न्त ? िद ग्गजाः (अष्ट िद ग्गजाः) अष्ट दग्गजा … अतुलबलाः

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व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): प्रश्नपदं ‘कः’ इ त पुं लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्, अतः (क), (ख), (ग) इत्येषाम् उत्तरा ण अ प
पुं लङ्गे प्रथमा-एकवचना न — सूयः, सुरसेनानीः, लोकशङ् करः। ‘का’ इ त स्त्री लङ्गे प्रथमा-एकवचनम्, अतः उत्तरम्
‘सङ् ख्यागणना’ (स्त्री लङ्गम्)। ‘के’ इ त पुं लङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्, अतः उत्तरम् ‘ दग्गजाः’ (बहुवचनम्), क्रया च ‘स न्त’।
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g परीक्षा म आधे अङ् क इसी
.cे ’ पूछा तो बहुवचन म। इसी लए (ङ) का उत्तर ‘ दग्गजः’ नह , दग्गजाः aहोगा।
प्रश्न-शब्द ही उत्तर का साँचा बता दे ता है: ‘कः’ पूछा तो उत्तर एकवचन पुं लङ्ग म; ‘का’ पूछा तो एकवचन स्त्री लङ्ग
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ase मलान पर कटते ह।
म; ‘क

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‘एकपदे न उत्तरम्’ का अथ: केवल एक ही शब्द ल खए — पूरा वाक्य नह । ‘सूयः एकः अ स्त’ लखना यहाँ
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अपे क्षत नह ; केवल सूयः पयाप्त है। पर वह एक शब्द शुद्ध वभ क्त म होना चा हए।

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प्र.2 उदाहरणानुगुणं शब्दानां पुरतः उ चतां संख्यां लखन्तु — यथा – आकाशे १ सूयः वभा त। (१, २, ३, ४) — (क)
मम हस्ते ......... अङ्गलयः स न्त। (९, ५, ८, ७) (ख) सप्ताहे ......... वासराः भव न्त। (६, १०, ७, ५) (ग)
का तकेयस्य ......... मुखा न स न्त। (१, ६, १०, ३) (घ) व्याकरणे ......... वचना न स न्त। (१०, ९, ३, ५) (ङ)
गगने ......... ग्रहाः स न्त। (८, ७, ९, १०)

क्रमः पूण वाक्यम् उ चता संख्या हन्द

यथा आकाशे १ सूयः वभा त । १ (एकः) आकाश म एक सूय चमकता है।

(क) मम हस्ते ५ अङ्गलयः स न्त । ५ (पञ्च) मेरे हाथ म पाँच उँ ग लयाँ ह।

(ख) सप्ताहे ७ वासराः भव न्त । ७ (स प्त) सप्ताह म सात दन होते ह।

(ग) का तकेयस्य ६ मुखा न स न्त । ६ (षट् ) का तकेय के छह मुख ह।

(घ) व्याकरणे ३ वचना न स न्त । ३ (त्रीिण) व्याकरण म तीन वचन ह।

(ङ) गगने ९ ग्रहाः स न्त । ९ (नव) आकाश म नौ ग्रह ह।

प्रमाणा न पाठात् — (क) ‘पञ्चाङ्गलयो मम करकमले’ । (ख) ‘सप्त वासराः सप्ताहे ननु’ । (ग) ‘सुरसेनानीः षण्मुखदे वः’ — षट्
मुखा न यस्य सः षण्मुखः । (घ) योग्यता वस्तरे — ‘त्री ण वचना न (एकवचनम्, वचनम्, बहुवचनम्)’ । (ङ) ‘नव ग्रहा ननु वपुले
गगने’ ।

(घ) का उत्तर पद्य म नह , योग्यता वस्तर म है: संस्कृत व्याकरण म वचन तीन होते ह — एकवचन (एक के लए),
वचन (ठ क दो के लए), बहुवचन (तीन या अ धक के लए)। हन्द और अङ् ग्रेज़ी म केवल दो ही वचन ह;
वचन संस्कृत क अपनी वशेषता है।

Tip: यहाँ हर वकल्प-समूह म तीन उत्तर ग़लत और एक सही है। ग़लत वकल्प भ्रम म डालने के लए रखे जाते ह
— जैसे (ङ) म १० भी है (क्य क दशाएँ दस ह)। इस लए पहले पाठ क पं क्त याद क जए, फर वकल्प दे खए।

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प्र.3 उदाहरणानुसारं सङ् ख्यां सङ् ख्यापदं च लखन्तु — यथा – भवतः प रवारे क त जनाः स न्त ? ५, (पञ्च) — (क)
क त दशः स न्त ? (ख) सप्ताहे क त वासराः भव न्त ? (ग) वष क त मासाः भव न्त ? (घ) भवतः क त दन्ताः
स न्त ? (ङ) स्वराः क त भव न्त ?

क्रमः प्रश्नः सङ् ख्या सङ् ख्यापदम् हन्द

यथा भवतः प रवारे क त जनाः स न्त ? ५ (पञ्च) आपके प रवार म कतने लोग ह ? — पाँच

(क) क त दशः स न्त ? १० (दश) दशाएँ कतनी ह ? — दस

(ख) सप्ताहे क त वासराः भव न्त ? ७ (स प्त) सप्ताह म कतने दन होते ह ? — सात

(ग) वष क त मासाः भव न्त ? १२ ( ादश) वष म कतने महीने होते ह ? — बारह

(घ) भवतः क त दन्ताः स न्त ? ३२ ( ाित्र ंशत्) आपके कतने दाँत ह ? — बत्तीस

(ङ) स्वराः क त भव न्त ? ७ (स प्त) स्वर कतने होते ह ? — सात

पूणवाक्येन उत्तरा ण (अभ्यासाथम्) — (क) दश दशः स न्त । (ख) सप्ताहे सप्त वासराः भव न्त । (ग) वष ादश मासाः भव न्त
। (घ) मम ा त्रशत् दन्ताः स न्त । (ङ) सप्त स्वराः भव न्त ।

(ङ) का उत्तर ‘सप्त’ ही क्य : प्रश्न पाठ पर आधा रत है, और पाठ क पं क्त है — ‘स्वराः सुमधुराः सप्त’, अथात्
संगीत के सात स्वर (सा, रे, ग, म, प, ध, न)। पृष्ठ 62 पर हारमो नयम बजाते व्य क्त का चत्र भी इसी क ओर
सङ् केत करता है। (य द प्रश्न संस्कृत वणमाला के स्वर का होता तो उत्तर १३ — अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ऌ, ए,
ऐ, ओ, औ — होता; पर यहाँ वह अभीष्ट नह ।)

(घ) पर एक ईमानदार बात: पूण वक सत मनुष्य के ३२ ( ा त्रशत्) दाँत होते ह — यही मानक उत्तर ल खए। पर
कक्षा 6 क आयु म अक्ल-दाढ़ नह नकलत , इस लए अपने मुँह म गनने पर प्रायः २८ (अष्टा वश तः) ही मलगे।
जो आप वास्तव म गन, वही लखना भी शुद्ध है — बस संख्या और संख्यापद दोन मेल खाने चा हए।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 66

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अभ्यासः (प्रश्नौ ४–५)

अभ्यासः

प्र.4 अधः प्रदत्तेन पदे न सह सङ् ख्यां योजयन्तु — ‘अ’ स्तम्भः : (क) पञ्च (ख) एकम् (ग) अष्ट (घ) वश तः (ङ)
त्रयोदश । ‘ब’ स्तम्भः : २०, १३, ५, १, ८ ।

‘अ’ म संख्यापद ह, ‘ब’ म अङ् क। सही जो ड़याँ —

क्रमः ‘अ’ (संख्यापदम्) → ‘ब’ (अङ् कः) हन्द

(क) पचञ् — ५ पाँच

(ख) एकम् — १ एक

(ग) अट ष् — ८ आठ

(घ) िवंशितः — २० बीस

(ङ) त्र योदश — १३ तेरह

दो पद म भ्रम हो सकता है — उन्ह तोड़कर दे खए: त्रयोदश = त्र + दश, यानी तीन और दस = १३ (न क ३०)।
और वश तः स्वयं एक दहाई का पद है = २०; इसका ‘ व’ दे खकर इसे २ मत सम झए। तीस के लए अलग पद है
— त्रशत्।

Check it yourself: जोड़ी मलाने के बाद ‘ब’ स्तम्भ के सब अङ् क एक-एक बार ही उपयोग हुए ह या नह , यह
गन ली जए। यहाँ पाँच पद और पाँच अङ् क ह — कोई बचना नह चा हए, कोई दोहराना नह चा हए।

प्र.5 उप स्थ तपत्रं पश्यन्तु । संख्यां वदन्तु लखन्तु च — (क) गणेशस्य उप स्थ तसंख्या का ? (ख) सुभद्रायाः
उप स्थ तसंख्या का ? (ग) स्वयंप्रभायाः उप स्थ तसंख्या का ? (घ) जग ाथस्य उप स्थ तसंख्या का ? (ङ)
बलरामस्य उप स्थ तसंख्या का ?

पृष्ठ 66 का उप तपत्र (हा ज़री-र जस्टर) — पहले पूरी सारणी दे ख ली जए —

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उप स्थ त-क्रमसंख्या नाम हन्द

१ – एकम् गणेशः गणेश

२– े गीताञ्ज लः गीताञ्ज ल

३ – त्रीिण जग ाथः जग ाथ

४ – चत्वािर दनेशः दनेश

५ – पञ्च प्र ा प्र ा

६ – षट् बलरामः बलराम

७ – सप्त मोहनः मोहन

८ – अष्ट रा धका रा धका

९ – नव सुभद्रा सुभद्रा

१० – दश स्वयंप्रभा स्वयंप्रभा

उत्तरा ण —

क्रमः प्रश्नः उत्तरम् हन्द

(क) गणेशस्य उप तसंख्या का ? एकम् (१) गणेश क उप त-संख्या एक है।

(ख) सुभद्रायाः उप तसंख्या का ? नव (९) सुभद्रा क उप त-संख्या नौ है।

(ग) स्वयंप्रभायाः उप तसंख्या का ? दश (१०) स्वयंप्रभा क उप त-संख्या दस है।

(घ) जग ाथस्य उप तसंख्या का ? त्रीिण (३) जग ाथ क उप त-संख्या तीन है।

(ङ) बलरामस्य उप तसंख्या का ? षट् (६) बलराम क उप त-संख्या छह है।

व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): ‘गणेशस्य, जग ाथस्य, बलरामस्य’ — अकारान्त-पुं लङ्गे षष्ठी- वभक्तेः एकवचनम् (प्रत्ययः ‘–
स्य’)। ‘सुभद्रायाः, स्वयंप्रभायाः’ — आकारान्त-स्त्री लङ्गे षष्ठी- वभक्तेः एकवचनम् (प्रत्ययः ‘–याः’)। एतत् एव कारणं यत्
पुरुषनाम्नाम् अन्ते ‘–स्य’ स्त्रीनाम्नाम् अन्ते च ‘–याः’ दृश्यते ।

‘का’ पूछा गया है, इस लए उत्तर भी स्त्री लङ्ग म: प्रश्न है ‘उप तसंख्या का ?’ — क्य क ‘संख्या’ शब्द
स्त्री लङ्ग है। पूरे वाक्य म उत्तर दे ते समय ल खए — ‘गणेशस्य उप तसंख्या एकम् अ स्त।’ केवल संख्यापद ही
उत्तर है, नाम दोहराना ज़रूरी नह ।

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला
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Try This: अपनी कक्षा क हा ज़री-सूची लेकर यही अभ्यास क जए — ‘मम उप तसंख्या …….. अ स्त।’ और

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अपने मत्र से पू छए — ‘भवतः उप तसंख्या का ?’
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वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 67

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अभ्यासः (प्रश्नौ ६–७) — चत्रात्मकौ अभ्यासौ

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प्र.6 चत्रं पश्यन्तु, संख्याः वदन्तु, तीय चत्रे अङ् कैः च ताः संख्याः लखन्तु — (प्रथमे चत्रे पुष्पाकारे मध्ये ‘त्री ण’,

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प रतः च — पञ्च, चत्वा र, अष्ट, चतुदश, पञ्चाशत्, षोडश, ा वश तः)

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पहले चत्र के फूल म बीच का वृत्त और सात पंखु ड़याँ ह; हर वृत्त म संख्यापद लखा है। दूसरे (ख़ाली) चत्र के उसी ान पर अङ् क

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स्थानम् ( चत्रे) प्रथमे चत्रे — संख्यापदम् तीये चत्रे — अङ् कः हन्द

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मध्ये (ह रतवृत्तम्) त्र
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उप र (ऊपर) पच ५ पाँच

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च वािर ४

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द क्षणोप र (ऊपर-दाएँ) त् चार

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द क्षणे (दाएँ) अट ष् ८ आठ

ag द क्षणाधः (नीचे-दाएँ) चतुद श १४ चौदह

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प चाशत्
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वामाधः (नीचे-बाएँ) ५० पचास

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षोडश ase
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वामे (बाएँ) १६ सोलह

वामोप र (ऊपर-बाएँ) ािवंशितः २२ बाईस

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om हो गया है। ा वश तः =
तीन पद म सावधानी चा हए: षोडश = षट् + दश = १६ (छह और दस), न क ६० — स
l a se से ‘षट् दश’ बदलकर
.c‘षोडश’ ag = ५०, जब क पञ्चदश = १५
m और पञ्च वश तः = २५ — तीन म ‘पञ्च’ है, पर आगे का अंश अलग है, इस लए संख्या भी अलग।
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+ वश तः = २२ (न क २०)। और पञ्चाशत्

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Tip: दूसरे चत्र म अङ् क भरते समय वही स्थान चु नए जहाँ पहले चत्र म वह पद था — रंग मला ली जए। पीली
. agl
पंखु ड़य पर पीली, हल्क पंखु ड़य परmवही — तब कोई संख्या इधर-उधर नह होगी।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला AglaSem · NCERT Solutions

प्र.7 चत्रं पश्यन्तु, संख्याः वदन्तु, तीय चत्रे शब्दै ः च ताः संख्याः लखन्तु — (प्रथमे चत्रे पुष्पाकारे मध्ये २५, प रतः च
— ३६, ११, १७, ९, १४, २०)

यह प्रश्न ठ क उल्टा है — अब अङ् क दए ह और संख्यापद (शब्द) लखने ह।

स्थानम् ( चत्रे) प्रथमे चत्रे — अङ् कः तीये चत्रे — संख्यापदम् हन्द

मध्ये (नीलवण वृत्तम्) २५ पञ्चिवंशितः प ीस

उप र (ऊपर) ३६ षिट् त्रंशत् छत्तीस

द क्षणोप र (ऊपर-दाएँ) ११ एकादश ग्यारह

द क्षणाधः (नीचे-दाएँ) १७ स प्तदश सत्रह

अधः (नीचे) ९ नव नौ

वामाधः (नीचे-बाएँ) १४ चतुद श चौदह

वामोप र (ऊपर-बाएँ) २० िवंशितः बीस

अन्त्य अक्षर ही परीक्षा है: २० = वश तः ( वसगान्त), पर ३६ = षट् त्रशत् (‘त्’-अन्त) और २५ = पञ्च वश तः।
लखते समय वसग या हलन्त ‘त्’ छू ट जाए तो पद अशुद्ध हो जाता है। ‘ वश त’ लखना ग़लत है — ‘ वश तः’ ही
शुद्ध है।

Check it yourself: लखने के बाद हर पद को तोड़कर मलाइए — षट् + त्रशत् = ३० + ६ = ३६ ✓; सप्त +
दश = १० + ७ = १७ ✓; पञ्च + वश तः = २० + ५ = २५ ✓। जोड़ मल जाए तो पद सही है।

योग्यता वस्तरः — पृष्ठ 68
संख्याप्र स द्धः

योग्यता वस्तरः

प्र.1 संख्याप्र स द्धः — एकम् तः दश पयन्तं प्र सद्धानां संख्यानां सूच लखन्तु ।

पृष्ठ 68 क यह सारणी पूरे पाठ का सार है — हर संख्या के साथ एक प्र सद्ध समूह।

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला AglaSem · NCERT Solutions

संख्या प्र स द्धः वे कौन-कौन हन्द

एकम् एकं बह्म — ब्रह्म एक ही है

े े अयने उत्तरायणम्, द क्षणायनम् दो अयन

त्र ीिण त्रीिण एकवचनम्, वचनम्, बहुवचनम् तीन वचन
वचनािन

च वािरत् चत्वािर कृतयुगम्, त्रेतायुगम्, ापरयुगम्, क लयुगम् चार युग
युगािन

पचञ् पञ्च त थः, वासरः, नक्षत्रम्, योगः, करणम् पञ्चाङ्ग के पाँच अङ्ग
अङ् गािन

षट् षट् रसाः मधुरः, अम्लः, लवणः, कटु ः, तक्तः, कषायः छह रस (मीठा, ख ा, नमक न,
तीखा, कड़वा, कसैला)

सत प् स प्त ऋषयः मरी चः, अ त्रः, अ ङ्गराः, पुलस्त्यः, पुलहः, क्रतुः, व सष्ठः सात ऋ ष

अट ष् अष्ट इन्द्रः, अ ग्नः, यमः, नऋ तः, वरुणः, वायुः, कुबेरः, ईशानः आठ दक्पाल
िद क्पालाः

नव नवगहाः सूयः, चन्द्रः, मङ्गलः, बुधः, गुरुः, शुक्रः, श नः, राहुः, केतुः नौ ग्रह

दश दश िदशाः पूव दशा, प श्चम दशा, उत्तर दशा, द क्षण दशा, आग्नेयकोणः, दस दशाएँ
नैऋत्यकोणः, वायव्यकोणः, ईशानकोणः, ऊध्वम्, अधः

दक्पाल और दशा का जोड़ा: आठ दक्पाल का क्रम आठ दशाओं के क्रम से ही चलता है — इन्द्रः (पूव), अ ग्नः
(आग्नेय), यमः (द क्षण), नऋ तः (नैऋत्य), वरुणः (प श्चम), वायुः (वायव्य), कुबेरः (उत्तर), ईशानः (ईशान)। एक
याद हो जाए तो दूसरा अपने-आप याद आ जाता है।

यह से प्रश्न बनते ह: ‘क त वचना न स न्त ?’, ‘क त रसाः स न्त ?’, ‘क त युगा न स न्त ?’ — अभ्यास का प्रश्न
२(घ) ठ क इसी सारणी से आया है। इस लए यह सारणी अभ्यास से कम महत्त्व क नह ।

प्र.2 संख्याप्र स ाः आधारेण संस्कृतेन वाक्या न रचयन्तु ।

साँचा एक ही है — [स्थानम् / वषयः] + [संख्या] + [वस्तु बहुवचने] + स न्त/भव न्त ।

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संस्कृत-वाक्यम् हन्द

याकरणे ीिण वचनािन सि त ।
व् त्र न् व्याकरण में तीन वचन है।ं

च वािर युगािन भवि त ।
त् न् चार युग होते है।ं

प चाङ् गे प च अङ् गािन सि त ।
ञ् ञ् न् पञ्चाङ् ग में पाँच अङ् ग होते है।ं

षट् रसाः भवि त । न् छह रस होते है।ं

आकाशे स त ऋषयः दृ य ते ।
प् श् न् आकाश में सात ऋिष (स प्तिष-मण्डल ) िदखाई दे ते है।ं

अ ट िद पालाः िदशाः र ि त ।
ष् क् क्ष न् आठ िद क्पाल िदशाओं की र क्षा करते है।ं

गगने नव गहाः चरि त । न् आकाश में नौ गह घूमते है।ं

दश िदशः पिस ाः सि त । द्ध न् दस िदशाएँ पिस द्ध है।ं

व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): ‘स न्त, भव न्त, चर न्त, रक्ष न्त’ — सवा ण लट् -लकारे प्रथमपुरुषस्य बहुवचना न; यतः कता
(वचना न, रसाः, ग्रहाः, दक्पालाः) बहुवचने अ स्त। ‘पञ्चाङ्गे , गगने, व्याकरणे, आकाशे’ — सप्तमी- वभक्तेः एकवचना न
(अ धकरणे सप्तमी)।

‘स न्त’ और ‘भव न्त’ म अन्तर: स न्त = ‘ह’ (इस समय वद्यमान ह) — व्याकरणे त्री ण वचना न स न्त। भव न्त
= ‘होते ह’ (सामान्य नयम) — सप्ताहे सप्त वासराः भव न्त। दोन बहुवचन क क्रयाएँ ह; अथ क छाया अलग है।
पाठ के अभ्यास म दोन प्रयुक्त हुए ह।

Try This: अपने आसपास से नए वाक्य बनाइए — ‘मम कक्षायां चत्वा रशत् छात्राः स न्त।’, ‘मम गृहे षट् जनाः
स न्त।’, ‘मम हस्ते पञ्च अङ्गलयः स न्त।’

कायकलापः — संख्यागीतम् — पृष्ठ 68
कायकलापः

कायकलापः

प्र.1 संख्यागीतम् — एकं े , एकं े । पश्यत कम स्त मम हस्ते । त्री ण चत्वा र, त्री ण चत्वा र । हस्ते पात्रं, पात्रे वा र ।
पञ्च षट् , पञ्च षट् । जम्बीररसं योजयत । सप्त अष्ट, सप्त अष्ट । लवणं गुडं च मेलयत । नव दश, नव दश । शनैः
शनैः मन्थयत ॥ — अस्य गीतस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।

यह गनती का गीत भी है और शकंजी बनाने क व ध भी — हर जोड़ी के साथ एक नया काम।

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संख्या संस्कृतम् हन्द

१, २ एकं े , एकं े । पश्यत कम स्त मम हस्ते । एक दो, एक दो। दे खो, मेरे हाथ में क्या है ?

३, ४ त्री ण चत्वा र, त्री ण चत्वा र । हस्ते पात्रं, पात्रे वा र । तीन चार , तीन चार। हाथ में बतन है, बतन में पानी है।

५, ६ पञ्च षट् , पञ्च षट् । जम्बीररसं योजयत । पाँच छह, पाँच छह। (उसमें) नी ंबू का रस िमलाओ।

७, ८ सप्त अष्ट, सप्त अष्ट । लवणं गुडं च मेलयत । सात आठ, सात आठ। नमक और गुड़ िमलाओ।

९, १० नव दश, नव दश । शनैः शनैः मन्थयत ॥ नौ दस , नौ दस। धीरे -धीरे मथो (घोलो)।

व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): ‘पश्यत, योजयत, मेलयत, मन्थयत’ — सवा ण लोट् -लकारे मध्यमपुरुषस्य बहुवचना न (= तुम
सब दे खो / मलाओ / मथो)। ‘हस्ते, पात्रे’ — सप्तमी- वभक्तेः एकवचने। ‘ कम स्त = कम् + अ स्त’ । ‘जम्बीररसम्, लवणम्,
गुडम्’ — तीया- वभ क्तः (कम ण तीया), यतः ता न मेलनस्य कमा ण स न्त ।

यह ‘कायकलापः’ क्य है, ‘पाठः’ नह : क्य क इसे केवल पढ़ना नह — करके दे खना है। पृष्ठ 68 के चत्र म माँ
और बेट रसोई म न बू-पानी बना रही ह। कक्षा म सचमुच पात्र, जल, न बू, नमक और गुड़ लेकर, हर पं क्त गाते हुए
वही क्रया क जए — जो शब्द हाथ से जुड़ जाए, वह कभी नह भूलता।

शब्दाथाः: पात्रम् = बतन; वा र = जल; जम्बीरः = न बू; जम्बीररसः = न बू का रस; लवणम् = नमक; गुडः = गुड़;
मेलयत = मलाओ; मन्थयत = मथो/घोलो; शनैः शनैः = धीरे-धीरे।

प्र.2 संख्यागीते आगतानां संख्यापदानां क्रमं लखन्तु, तेषां च अङ् कान् लखन्तु ।

गीत म एक से दस तक क संख्याएँ जोड़ी-जोड़ी म आई ह, और हर जोड़ी दो-दो बार दोहराई गई है।

एकं – े → १, २
त्रीिण – च त् वािर → ३, ४

पञ् च – षट् → ५, ६
सप्त – अष्ट → ७, ८
नव – दश → ९, १०
कु ल संख्यापदािन = दश

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 5 संख्यागणना ननु सरला
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अङ् कः संख्यापदम् लङ्गम् टप्पणी

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१
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एकम् नपुंसक लङ्गम्
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पुं स ‘एकः’, स्त्रयां ‘एका’

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g l a नपुंसक लङ्गम् पुं स ‘ ौ’, स्त्रयां ‘ े ’
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२

३ त्रीिण नपुंसक लङ्गम् पुं स ‘त्रयः’, स्त्रयां ‘ तस्रः’

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४ चत्वािर
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नपुंसक लङ्गम् पुं स ‘चत्वारः’, स्त्रयां ‘चतस्रः’ ag
s
पञ्च, षट् , स प्त, अष्ट, नव, दश gla
५ – १०
a त्रषु लङ्गे षु समानम् रूप नह बदलता

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गीत म नपुंसक लङ्ग के रूप क्य : क्य क गनती अपने-आप म कसी वस्तु से जुड़ी नह है — केवल संख्या बोली

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जा रही है। ऐसी स्वतन्त्र गनती म संस्कृत नपुंसक लङ्ग के रूप लेती है — एकम्, े , त्री ण, चत्वा र। पर जैसे ही कोई
सं ा जुड़.c g लकाः।
े, रूप उसी के लङ्ग म ढल जाएगा — एकः सूयः, चत्वारः बालकाः, तस्रःaबा
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a
Try This: गीत को ताली के साथ गाइए — हर संख्या पर एक ताली। ‘एकं े ’ पर दो ताली, ‘त्री ण चत्वा र’ पर दो
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ताली … पद्य क पं क्त ‘कुम बहुधा करतालम्’ का यही अथ है।

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प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 69
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चत्रे रक्तस्थलेषु अङ् कैः संख्यां लखन्तु

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प रयोजनाकायम्

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a प्र.1 चत्रे रक्तस्थलेषु अङ् कैः संख्यां लखन्तु — (पृष्ठ 69, क्र डापटस्य चत्रम् । दत्ताः सङ् ख्याः — १, ९, १४, २२, २७,
३५, ४०, ४८, ५१, ५२)
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पृष्ठ 69 पर लूडो का पट छपा है। उसम चार रंग के घर ह — रक्तः (लाल, कलश-गोट ), ह रतः (हरा, षट् कोण-गोट ), पीतः (पीला,
गज-गोट ) और नीलः (नीला, सूय-गोट )। बीच का माग ५२ खान का है और उसम दस संख्याएँ पहले से छपी ह — १, ९, १४,
२२, २७, ३५, ४०, ४८, ५१, ५२। शेष ४२ खान म क्रम से अङ् क भरने ह।
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m ) म पूरे पट का चक्कर
भरने का नयम — गोट लाल घर के आगे वाले १ से चलती है और घड़ी क सुई क दशा (दeक्षणावतम्
s
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co ५२ पर लौट आती है। gl a
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लगाकर

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पथस्य भागः दशा अङ् काः

लाल भुजा क ऊपरी पं क्त बाएँ से दाएँ १, २, ३, ४, ५ (१ छपा है)

ऊपरी भुजा का बायाँ स्तम्भ नीचे से ऊपर ६, ७, ८, ९, १०, ११ (९ छपा है)

सबसे ऊपर का बीच वाला खाना — १२

ऊपरी भुजा का दायाँ स्तम्भ ऊपर से नीचे १३, १४, १५, १६, १७, १८ (१४ छपा है — हरे की पार भ-कोि ठका)
म् ष्

दाईं भुजा क ऊपरी पं क्त बाएँ से दाएँ १९, २०, २१, २२, २३, २४ (२२ छपा है)

दा हने कनारे का बीच वाला खाना — २५

दाईं भुजा क नचली पं क्त दाएँ से बाएँ २६, २७, २८, २९, ३०, ३१ (२७ छपा है — पीले की पार भ-कोि ठका)
म् ष्

नचली भुजा का दायाँ स्तम्भ ऊपर से नीचे ३२, ३३, ३४, ३५, ३६, ३७ (३५ छपा है)

सबसे नीचे का बीच वाला खाना — ३८

नचली भुजा का बायाँ स्तम्भ नीचे से ऊपर ३९, ४०, ४१, ४२, ४३, ४४ (४० छपा है — नीले की पार भ-कोि ठका)
म् ष्

लाल भुजा क नचली पं क्त दाएँ से बाएँ ४५, ४६, ४७, ४८, ४९, ५० (४८ छपा है)

बाएँ कनारे का बीच वाला खाना — ५१ (छपा है)

बाएँ कनारे का ऊपरी खाना — ५२ (छपा है — इसके बाद िफर १)

संस्कृतेन संख्यापदै ः चतस्रः प्रारम्भ-को ष्ठकाः — रक्तस्य एकम् (१), ह रतस्य चतुदश (१४), पीतस्य सप्त वश तः (२७),
नीलस्य चत्वा रशत् (४०) ।

चार प्रारम्भ-खाने १३–१३ क दूरी पर ह: १ → १४ → २७ → ४० — हर बार १३ का अन्तर। और ४० के बाद
फर १३ जो ड़ए तो ५३ आता है, जो ५२ से एक आगे है — यानी वापस १ । इसी लए पट के चार खलाड़ी बलकुल
बराबर दूरी तय करते ह। ५२ = ४ × १३ — यही लूडो के पट का ग णत है।

प रयोजना कैसे पूरी कर: (१) पहले छपी हुई दस संख्याएँ पे न्सल से घेर ली जए — वे आपक जाँच-चौ कयाँ ह।
(२) १ से शुरू करके घड़ी क दशा म एक-एक खाना गनते हुए अङ् क भ रए। (३) हर छपी संख्या पर पहुँचने पर
मलान क जए — य द मेल न खाए तो पीछे कह खाना छू टा है। (४) पूरा होने पर हर अङ् क के नीचे उसका संस्कृत
संख्यापद भी ल खए — पृष्ठ 64 क सूची से दे खकर। तब यह केवल लूडो नह , गनती का पूरा अभ्यास बन
जाएगा।

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अध्याय — एक नज़र म
पाठ का नाम ही उसका दावा है — ‘संख्यागणना ननु सरला’ = ‘ गनती तो सचमुच सरल है’। ‘ननु’ यहाँ नश्चय का अव्यय है
(= सचमुच, नःसन्दे ह)। पूरा पाठ यही सद्ध करता है क संस्कृत म गनना क ठन नह — बस हर संख्या को कसी जानी-
पहचानी वस्तु से बाँध द जए।
छह पद्य का संख्यागीत, एक से दस तक। डॉ. जनादनहेगडे र चत इस गीत म क्रम से — एकः सूयः → े नयने →
त्रनयनमू तः ( शवः) → चतुमुखः (ब्रह्मा) → पञ्च अङ्गलयः → षण्मुखदे वः (का तकेयः) → सप्त वासराः/स्वराः/लोकाः/
ऋषयः → अष्ट दग्गजाः → नव ग्रहाः → दश दशः आते ह। संख्या याद नह करनी पड़ती, चत्र याद रह जाता है।
पाठ म संख्यावाचक शब्द लङ्ग के अनुसार बदलते ह। एक, दो, तीन, चार तक ही यह भेद दखता है — एकः सूयः (पुं.),
एकम् ब्रह्म (नपुं.), े नयने (नपुं. वचन), त्री ण वचना न, चत्वा र युगा न। पाँच से आगे (पञ्च, षट् , सप्त …) रूप तीन
लङ्ग म एक-सा रहता है।
१ से ५० तक क पूरी सूची पृष्ठ 64 पर है और उसका साँचा साफ़ है — ११–१८ म ‘–दश’, २१–२९ म ‘– वश तः’, ३१–३९
म ‘– त्रशत्’, ४१–४९ म ‘–चत्वा रशत्’ जुड़ता है। दहाइयाँ अलग से याद करनी ह — दश, वश तः, त्रशत्, चत्वा रशत्,
पञ्चाशत्।
योग्यता वस्तर क ‘संख्याप्र स द्धः’ एक छोटा-सा कोश है — एकं ब्रह्म, े अयने, त्री ण वचना न, चत्वा र युगा न, पञ्च
अङ्गा न, षट् रसाः, सप्त ऋषयः, अष्ट दक्पालाः, नव ग्रहाः, दश दशाः। परीक्षा म एकपद-उत्तर अक्सर यह से बनते ह।
अभ्यास का हर प्रश्न ‘दे खो और गनो’ वाला है — रक्त ान-पू त, संख्या-जोड़ी मलाना, उप तपत्र पढ़ना, फूल- चत्र म
अङ् क और शब्द भरना, और अन्त म लूडो-पट के ५२ खान म क्रम से संख्याएँ लखना। कह भी र े क ज़रूरत नह —
केवल गनने क ।

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त्व रत पुनरावृ त्त

संख्या संस्कृतपदम् पाठे क गण्यते हन्द

१ एकम् / एकः एकः सूयः, एकः चन्द्रः, एकम् मानवकुलम्, एकं ब्रह्म एक

२ े े नयने (जी व न सकले), े अयने दो

३ त्रीिण त्रनयनमू तः शवः, त्री ण वचना न तीन

४ चत्वािर चतुमुखः ब्रह्मा, चत्वा र युगा न चार

५ पञ्च पञ्च अङ्गलयः, पञ्च अङ्गा न (पञ्चाङ्गम्) पाँच

६ षट् षण्मुखदे वः का तकेयः, षट् रसाः छह

७ सप्त सप्त वासराः, सप्त स्वराः, सप्त लोकाः, सप्त ऋषयः सात

८ अष्ट अष्ट दग्गजाः, अष्ट दक्पालाः आठ

९ नव नव ग्रहाः ( वपुले गगने) नौ

१० दश दश दशः (पूवाद्याः) दस

२० िवंशितः अभ्यासे प्रश्नः ४ (घ) बीस

५० पञ्चाशत् संख्यासूच्याः अ न्तमं पदम् (पृष्ठ 64) पचास

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Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages28
Updated19 Sep 2026