aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि

AglaSem पर कक्षा 6 संस्कृत पाठ 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि (दीपकम्) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Sanskrit Chapter 6 (Deepakam).
NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि - Page 1 of 28

About NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि

NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि is available here for free download. Published by NCERT for Class 6, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (28 pages). Candidates preparing for Class 6 can use NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि?

Open this page and click the Download button to save NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि free to download?

Yes. NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि have?

NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि contains 28 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 6 study material?

You can find more Class 6 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

NCERT Solutions Class 6 Sanskrit Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि – Text

Read the full text of this solution below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (28 pages)

Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 6: अहं प्रातः उ ष्ठा म

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

70 – 76 8 24 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 27 pages

Page 2

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · सं स्कृ त · द पकम्

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: अहं प्रातः उ त्तष्ठा म
NCERT कक्षा 6 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के षष्ठः पाठः — अहं प्रातः उ त्तष्ठा म के सभी अभ्यास , चत्रपाठ, संख्या-सारणी, घड़ी- चत्र ,
शब्दाथ-ता लका, योग्यता वस्तर और प रयोजनाकाय के पूरे हल। पछले पाठ म संख्यागणना सीखी थी; अब वही संख्याएँ घड़ी पर काम आती ह —
सन्द प और खुशी अपनी दनचया सुनाते ह और उसी के साथ संस्कृत म समय बताना सखा जाते ह — पञ्चवादने (५:००), सपाद-पञ्चवादने
(५:१५), साध-पञ्चवादने (५:३०), पादोन-सप्तवादने (६:४५)। पृष्ठ 70 से 76 तक का हर शीषक — दोन चत्रपाठ-पृष्ठ, संख्या (१–१२), इदान कः
समयः ? के बारह घड़ी- चत्र, पादोन-वादन के चार चत्र, वयं शब्दाथान् जानीमः, वयम् अभ्यासं कुमः (प्रश्न १–६, उपभाग (क)–(ङ) स हत),
योग्यता वस्तरः — भारतीय ान-परम्परायां समयः घट यन्त्रा ण च, प्रातःस्मरण एवं भू मवन्दना के ोक तथा प रयोजनाकायम् — क्रम से हल
कया गया है, हर वाक्य के हन्द अथ और व्याकरण-संकेत के साथ।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

द पकम् (कक्षा 6) 70 – 76

खं ड प्रश्न

8 24

माध्यम

हन्द

षष्ठः पाठः — अहं प्रातः उ त्तष्ठा म ( चत्रपाठः) — पृष्ठ 70
पाठ-प्रवेशः — सन्द पस्य खुश्याः च दनचया (५:०० – ६:००)

पाठः

प्र.1 नमो नमः । मम नाम सन्द पः । अहं मम दनचया वदा म । नमो नमः । मम नाम खुशी । अहम् अ प मम दनचया
वदा म । — अहं प्र त दनं प्रातः पञ्चवादने (५:००) उ त्तष्ठा म । प्रथमं भूमेः वन्दनं करो म, माता पतरौ च नमा म ।
ततः उषःपानं करो म, कवोष्णं जलं पबा म । अहं सपाद-पञ्चवादने (५:१५) शौचं करो म, तदनन्तरं मुखप्रक्षालनं
दन्तधावनं च करो म । अहं साध-पञ्चवादने (५:३०) सूय-नमस्कारं योगासनं च करो म । अहं षड् वादने (६:००)
स्वाध्यायं करो म । — अस्य पाठभागस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।

पाठ का पहला पृष्ठ छह चत्र का है। हर चत्र के साथ एक घड़ी बनी है — वही घड़ी बताती है क काम कस समय हो रहा है।

Page 1 of 27

Page 3

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

समयः संस्कृतम् हन्द अनुवादः

— नमो नमः । मम नाम सन्द पः । अहं मम दनचया वदा म । नम स्कार। मेर ा नाम स न्दीप है। मैं अपनी िदनचय बताता हू।
ँ

— नमो नमः । मम नाम खुशी । अहम् अ प मम दनचया नम स्कार। मेर ा नाम खुशी है। मैं भी अपनी िदनचय बताती हू।
ँ
वदा म ।

५:०० अहं प्र त दनं प्रातः पञ्चवादने (५:००) उ त्तष्ठा म । मैं हर िदन सुबह पाँच बजे उठता/उठती हू।
ँ

५:०० प्रथमं भूमेः वन्दनं करो म, माता पतरौ च नमा म । सबसे पहले धरती को पणाम करता/करती हू,ँ और माता-िपता
को नम स्कार करता/करती हू।
ँ

५:०० ततः उषःपानं करो म, कवोष्णं जलं पबा म । उसके बाद उषःपान करता/करती हू ँ — गुनगुना पानी पीता/पीती
हू।
ँ

५:१५ अहं सपाद-पञ्चवादने (५:१५) शौचं करो म, तदनन्तरं मैं सवा पाँच बजे शौच जाता/जाती हू,ँ उसके बाद मुँह धोता/धोती
मुखप्रक्षालनं दन्तधावनं च करो म । हू ँ और दाँत साफ़ करता/करती हू।ँ

५:३० अहं साध-पञ्चवादने (५:३०) सूय-नमस्कारं योगासनं च मैं साढ़ े पाँच बजे सूय-नम स्कार और योगासन करता/करती हू।
ँ
करो म ।

६:०० अहं षड् वादने (६:००) स्वाध्यायं करो म । मैं छह बजे स्वाध् याय (स्वयं पढ़ ाई) करता/करती हू।
ँ

व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): अ स्मन् पाठे सवा ण क्रयापदा न लट् -लकारे उत्तमपुरुषस्य एकवचने स न्त — उ त्तष्ठा म, करो म,
नमा म, पबा म । ‘मम’ इ त अस्मद्-शब्दस्य षष्ठी एकवचनम् (= मेरा/मेरी) । ‘माता पतरौ’ इ त द्वन्द्वसमासः, द्वतीया द्ववचनम्
(माता च पता च = माता पतरौ) । ‘भूमेः’ इ त षष्ठी एकवचनम् (भू म का) ।

‘उषःपानम्’ शब्द को तो ड़ए: उषस् + पानम् — ‘उषा’ यानी भोर, ‘पान’ यानी पीना। तो उषःपान = भोर म पानी
पीना। पाठ इसे और साफ़ कर दे ता है — ‘कवोष्णं जलं पबा म’, यानी कवोष्ण (क + उष्ण = हल्का गरम, गुनगुना)
जल। यह आयुवद क पुरानी सलाह है, और पाठ ने उसे एक वाक्य म सखा दया।

शब्द जो काम आएँगे: प्र त दनम् = हर दन, प्रथमम् = सबसे पहले, ततः = उसके बाद, तदनन्तरम् = उसके प ात्,
वन्दनम् = प्रणाम, स्वाध्यायः = स्वयं पढ़ना।

प्र.2 पृष्ठ 70 इत्यत्र सन्द पः खुशी च क स्मन् समये क कुवतः ? समयसारण रचयन्तु । (पाठ्य-प्रश्नः)

पहले पृष्ठ क पूरी दनचया केवल एक घण्टे क है — ५:०० से ६:०० तक।

Page 2 of 27

Page 4

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

अङ् केषु संस्कृतेन समयः कायम् हन्द

५:०० पञ्चवादने उि ष्ठािम उठना

५:०० पञ्चवादने भूम ेः वन्दनम्, मातािपत्रोः नमनम् भू म-वन्दन, माता- पता को नमस्कार

५:०० पञ्चवादने उषःपानम् गुनगुना जल पीना

५:१५ सपाद-पञ्चवादने शौचम्, मुखपक्षालनम्, द न्तधावनम् शौच, मुँह धोना, दाँत साफ़ करना

५:३० साध-पञ्चवादने सूय-नम स्कारः, योगासनम् सूय-नमस्कार, योगासन

६:०० षड् वादने स्वाध् यायः स्वयं अध्ययन

संस्कृतेन उत्तरम् — सन्द पः खुशी च पञ्चवादने उ त्तष्ठतः, सपाद-पञ्चवादने दन्तधावनं कुरुतः, साध-पञ्चवादने योगासनं
कुरुतः, षड् वादने च स्वाध्यायं कुरुतः । ( हन्द : सन्द प और खुशी पाँच बजे उठते ह, सवा पाँच बजे दाँत साफ़ करते ह, साढ़े पाँच
बजे योगासन करते ह और छह बजे स्वाध्याय करते ह।)

दो जन क बात हो तो क्रया द्ववचन म: एक कहे तो ‘करो त’, दो कह तो ‘कुरुतः’, बहुत कह तो ‘कुव न्त’।
सन्द प और खुशी दो ह — इसी लए ऊपर के वाक्य म ‘उ त्तष्ठतः’ और ‘कुरुतः’ आया, ‘उ त्तष्ठ त/करो त’ नह ।
संस्कृत क यही खूबी है — द्ववचन हन्द और अंग्रेज़ी दोन म नह मलता।

Try This: इसी साँचे पर अपनी सुबह क सारणी बनाइए — बाएँ खाने म अङ् क म समय, दाएँ म संस्कृत रूप।
पाँच पं क्तयाँ बन जाएँ तो प्रश्न ५ का उत्तर अपने-आप तैयार हो जाएगा।

प्र.3 ‘पञ्चवादने’, ‘सपाद-पञ्चवादने’, ‘षड् वादने’ — एतेषु पदे षु का वभ क्तः ? कमथ सा प्रयुक्ता ? (पाठ्य-प्रश्नः)

तीन पद म सप्तमी वभ क्त, एकवचन है — और वह भी वशेष प्रकार क काला धकरण-सप्तमी (समय बताने वाली सप्तमी)।

मूलपदम् — वादनम् (नपुंसकिलङ् ग, पथमा एकवचन) = बजना, ‘बजे’

सप्तमी एकवचन — वादने = ‘बजे पर’, यानी ‘बजे’

अतः — पञ्चवादनम् (५:०० होना) → पञ् चवादने (पाँच बजे)

Page 3 of 27

Page 5

as e
कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
प्रथमा (नाम) सप्तमी (समये) हन्द

m as e
पञ्चवादनम्
.co
पञ्चवादने
a g l
पाँच बजे

se m
g l a सपाद -पञ्चवादने सवा पाँच बजे
a
सपाद-पञ्चवादनम्

साध-पञ्चवादनम् साध -पञ्चवादने साढ़े पाँच बजे

co m
m . ag
se
षड् वादनम् षड् वादने छह बजे

l a
g -सप्तवादने
पादोन-सप्तवादनम्
aपादोन पौने सात बजे

co m
m.
क्य सप्तमी: संस्कृत म ‘कहाँ’ और ‘कब’ — दोन के लए सप्तमी आती है (अ धकरणे सप्तमी)। ‘ वद्यालये’ =

o m l a se
वद्यालय म (स्थान), ‘प्रातःकाले’ = सुबह के समय (काल), वैसे ही ‘सप्तवादने’ = सात बजे। इसी लए प्रश्न पूछते

m .c (कब) पूछा जाता है और उत्तर सप्तमी म आता है — यही अभ्यास केaप्रश्नg ४ क कुंजी है।
se
समय ‘कदा’

g l a
a
Check it yourself: जहाँ पाठ म ‘–वादने’ दखे, उसके आगे मन म ‘बजे’ जोड़कर प ढ़ए। य द वाक्य का अथ
m a s
.co agl
बन जाए तो वभ क्त सही पकड़ी।

se m
g l a
a
अहं प्रातः उ त्तष्ठा म ( चत्रपाठः) — पृष्ठ 71
co m
m .
e
दनचयायाः उत्तराधः (६:३० – ८:००)

m l as
.co a g
पाठः

se m
g l a
a प्र.1 अहं साध-षड् वादने (६:३०) मम प रसरं स्वच्छं करो म । ततः पादोन-सप्तवादने (६:४५) स्नानं करो म । अहं
सप्तवादने (७:००) प्राथनां करो म, गीतापाठं च करो म । तदनन्तरं मातुः पतुः च चरणवन्दनं करो म । अहं साध-
se m
com g l a
. a
सप्तवादने (७:३०) प्रातराशं करो म । तत्प ात् अष्टवादने (८:००) वद्यालयं गच्छा म । — अस्य पाठभागस्य
m
ase
हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।

agl

co m
.
दूसरे पृष्ठ पर दनचया ६:३० से ८:०० तक चलती है और वद्यालय जाने पर पूरी होती है।

em
m l as
m .co a g
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 4 of 27

Page 6

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

समयः संस्कृतम् हन्द अनुवादः

६:३० अहं साध-षड् वादने (६:३०) मम प रसरं स्वच्छं करो म मैं साढ़ े छह बजे अपना आस -पास का पिरसर साफ़ करता/करती
। हू।ँ

६:४५ ततः पादोन-सप्तवादने (६:४५) स्नानं करो म । उसके बाद पौने सात बजे स्नान करता/करती हू।
ँ

७:०० अहं सप्तवादने (७:००) प्राथनां करो म, गीतापाठं च मैं सात बजे पाथना करता/करती हू ँ और गीता का पाठ भी करता/
करो म । करती हू। ँ

७:०० तदनन्तरं मातुः पतुः च चरणवन्दनं करो म । उसके पश्चात् माता और िपता के चरण छू कर पणाम करता/करती
हू।
ँ

७:३० अहं साध-सप्तवादने (७:३०) प्रातराशं करो म । मैं साढ़ े सात बजे नाश्ता करता/करती हू।
ँ

८:०० तत्प ात् अष्टवादने (८:००) वद्यालयं गच्छा म । उसके बाद आठ बजे िवद्य ालय जाता/जाती हू।
ँ

व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): ‘मातुः’, ‘ पतुः’ — ऋकारान्तयोः शब्दयोः षष्ठी एकवचनम् (मातृ → मातुः, पतृ → पतुः) ।
‘प रसरम्’, ‘प्राथनाम्’, ‘प्रातराशम्’, ‘ वद्यालयम्’ — सवा ण द्वतीया एकवचने, यतः एता न कमपदा न स न्त । ‘स्वच्छं करो म’
इ त कमणः वशेषणम् — अतः ‘स्वच्छम्’ अ प द्वतीयायाम् ।

‘पादोन-सप्तवादने’ = ६:४५, ७:४५ नह : पाद + ऊन का अथ है ‘एक चौथाई कम’। तो ‘सात म से एक चौथाई
घण्टा कम’ = ६:४५। हन्द का ‘पौने सात’ भी ठ क यही कहता है। इसके उलट ‘सपाद’ (सवा) और ‘साध’ (साढ़े )
म समय जोड़ा जाता है। जो वद्याथ इसे उलट दे ता है, उसक हर घड़ी एक घण्टा आगे चली जाती है।

Did you know? ‘प्रातराश’ = प्रातः + आश (भोजन) — यानी सुबह का भोजन, नाश्ता। शब्दाथ-ता लका
इसका पयाय दे ती है — कल्याहारम्। और ‘प रसरः’ का अथ है आस-पास क जगह — इसी लए ‘स्वच्छ भारत’
को संस्कृत म ‘स्वच्छः प रसरः’ कहा जा सकता है।

प्र.2 सम्पूणपाठे (पृष्ठ 70–71) उक्तां दनचया क्रमेण एकस्यां सारण्यां लखन्तु । (पाठ्य-प्रश्नः)

पूरे पाठ म बारह काम गनाए गए ह — ५:०० से ८:०० तक, यानी केवल तीन घण्ट म।

Page 5 of 27

Page 7

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

क्रमः समयः संस्कृतेन कायम् ( हन्द )

१ ५:०० पञ्चवादने उि ष्ठािम उठना

२ ५:०० भूम ेः वन्दनं करोिम धरती को प्रणाम

३ ५:०० मातािपतरौ नमािम माता- पता को नमस्कार

४ ५:०० उषःपानं करोिम गुनगुना जल पीना

५ ५:१५ सपाद -पञ्चवादने शौचं, मुखपक्षालनं, द न्तधावनम् शौच, मुँह धोना, दाँत साफ़ करना

६ ५:३० साध -पञ्चवादने सूय-नम स्कारं योगासनं च करोिम सूय-नमस्कार और योगासन

७ ६:०० षड् वादने स्वाध् यायं करोिम स्वयं पढ़ाई

८ ६:३० साध -षड् वादने पिरसरं स्वच्छं करोिम प रसर क सफ़ाई

९ ६:४५ पादोन-स प्तवादने स्नानं करोिम स्नान

१० ७:०० स प्तवादने पाथनां गीतापाठं च करोिम , ततः चरणवन्दनम् प्राथना, गीतापाठ, चरण-वन्दन

११ ७:३० साध -स प्तवादने पातराशं करोिम नाश्ता

१२ ८:०० अष्टवादने िवद्य ालयं गच्छािम वद्यालय जाना

क्रम पर ध्यान द जए — पाठ ने उसे शब्द से बाँधा है: प्रथमम् → ततः → तदनन्तरम् → तत्प ात्। ये चार
‘क्रमसूचक अव्यय’ ह और घड़ी के बना भी बता दे ते ह क पहले क्या, बाद म क्या। कसी भी दनचया-लेखन म यही
शब्द उत्तर को सुग ठत बनाते ह।

Tip: परीक्षा म ‘सन्द पः कदा स्नानं करो त ?’ जैसा प्रश्न आए तो पूरा वाक्य ल खए — ‘सन्द पः पादोन-सप्तवादने
स्नानं करो त।’ केवल ‘६:४५’ लखना अधूरा उत्तर माना जाता है।

प्र.3 पाठे आगता न क्रयापदा न चत्वा लखन्तु, तेषां च धातुं पुरुषं वचनं च वदन्तु । (पाठ्य-प्रश्नः)

पूरे पाठ के सब क्रयापद लट् -लकार, उत्तमपुरुष, एकवचन म ह — क्य क सन्द प और खुशी अपनी ही बात कह रहे ह।

Page 6 of 27

Page 8

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

क्रयापदम् धातुः + गणः अथः प्रथमपुरुषे (सः/सा)

वदािम वद् (भ्वा दः) मैं कहता/कहती हू ँ वद त

उि ष्ठािम उद् + स्था (भ्वा दः) मैं उठता/उठती हू ँ उ त्तष्ठ त

करोिम कृ (तना दः) मैं करता/करती हू ँ करो त

नमािम नम् (भ्वा दः) मैं नम स्कार करता/करती हू ँ नम त

िपबािम पा (भ्वा दः) मैं पीता/पीती हू ँ पब त

ग च्छािम गम् (भ्वा दः) मैं जाता/जाती हू ँ गच्छ त

संस्कृतेन उत्तरम् — पाठे षट् क्रयापदा न स न्त — वदा म, उ त्तष्ठा म, करो म, नमा म, पबा म, गच्छा म । सवा ण लट् -
लकारे उत्तमपुरुषस्य एकवचने स न्त । ( हन्द : पाठ म छह क्रयापद ह और सभी वतमान काल, उत्तमपुरुष, एकवचन म ह।)

‘करो म’ अकेला अलग क्य दखता है: बाक सब धातुओं म ‘–आ म’ जुड़ता है (वद् → वदा म, नम् → नमा म),
पर कृ धातु तना दगण क है, इस लए उसका रूप करो म बनता है — ‘कर् + ओ म’ जैसा। यही धातु पाठ म सबसे
ज़्यादा — पूरे बारह बार — आई है, क्य क हर काम ‘करना’ ही तो है।

Try This: इन्ह छह क्रयाओं को ‘भवान्/भवती’ के लए बदलकर बो लए — भवान् कदा उ त्तष्ठ त ? भवती क
पब त ? इसी से कक्षा म संस्कृत-संवाद शुरू हो जाता है।

संख्या तथा ‘इदान कः समयः ?’ — पृष्ठ 72
संख्या १–१२ एवं द्वादश घट चत्रा ण

पाठः ACTIVITY

प्र.1 संख्या — १ एकम्, २ द्वे , ३ त्री ण, ४ चत्वा र, ५ पञ्च, ६ षट् , ७ सप्त, ८ अष्ट, ९ नव, १० दश, ११ एकादश, १२
द्वादश । — एतां संख्यासारण पठन्तु, अथ च लखन्तु ।

पृष्ठ 72 के नीले बुलबुल म एक से बारह तक क संख्याएँ द ह। घड़ी पर भी यही बारह अङ् क होते ह — इसी लए पाठ ने बारह पर
ही सूची रोक द ।

Page 7 of 27

Page 9

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

अङ् कः संस्कृतपदम् हन्द वादनरूपम् (‘बजे’)

१ एकम् एक एकवादनम् (१:००)

२ े दो द्ववादनम् (२:००)

३ त्र ीिण तीन त्रवादनम् (३:००)

४ चत्वािर चार चतुवादनम् (४:००)

५ पञ्च पाँच पञ्चवादनम् (५:००)

६ षट् छह षड् वादनम् (६:००)

७ स प्त सात सप्तवादनम् (७:००)

८ अष्ट आठ अष्टवादनम् (८:००)

९ नव नौ नववादनम् (९:००)

१० दश दस दशवादनम् (१०:००)

११ एकादश ग्यारह एकादशवादनम् (११:००)

१२ ादश बारह द्वादशवादनम् (१२:००)

वादन-रूप बनाते समय दो जगह स होती है: षट् + वादनम् = षड् वादनम् (‘ट् ’ का ‘ड् ’ — जश्त्व-स ) और
चतुर् + वादनम् = चतुवादनम्। इसी तरह ‘द्वे ’ का वादन-रूप ‘द्वे वादनम्’ नह , द्ववादनम् बनता है, और ‘त्री ण’
का त्रवादनम् — क्य क समास म संख्या का मूल रूप ( द्व, त्र, चतुर्) लगता है, वभ क्त वाला रूप नह ।

Tip: ११ और १२ को तोड़कर याद क जए — एक + दश = एकादश, द्व + दश = द्वादश। यही साँचा आगे
त्रयोदश (१३), चतुदश (१४) तक चलता है।

प्र.2 इदान कः समयः ? — चत्रेषु द्वादश घ ः दत्ताः — पञ्च-वादनम्, षड् -वादनम्, सप्त-वादनम्, अष्ट-वादनम्;
सपाद-पञ्चवादनम्, सपाद-षड् वादनम्, सपाद-सप्तवादनम्, सपाद-अष्टवादनम्; साध-पञ्चवादनम्, साध-
षड् वादनम्, साध-सप्तवादनम्, साध-अष्टवादनम् । — एतेषां समयम् अङ् कैः लखन्तु ।

बारह घ ड़य को तीन पं क्तय म रखा गया है — पूरा बजा, सवा, और साढ़े । हर पं क्त म केवल पहला शब्द बदलता है।

Page 8 of 27

Page 10

as e
कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
पङ् क्तः संस्कृतम् अङ् केषु हन्द

m l a se पाँच बजे
.co ag
पथमा (पूणः) पञ्च-वादनम् ५:००

se m
g l a षड् -वादनम् ६:०० छह बजे
a
सप्त-वादनम् ७:०० सात बजे

co m
अष्ट-वादनम्
e m . ८:०० आठ बजे ag
g l as
ि तीया (सपाद = +१५)
a
सपाद-पञ्चवादनम् ५:१५ सवा पाँच

com
सपाद-षड् वादनम् ६:१५ सवा छह

.
m सवा सात
ase
com l
सपाद-सप्तवादनम् ७:१५

. a g
m
ase
सपाद-अष्टवादनम् ८:१५ सवा आठ

aglततृ ीया (साध = +३०) साध-पञ्चवादनम् ५:३० साढ़े पाँच

m a s
.co agl
साध-षड् वादनम् ६:३० साढ़े छह

se m
g l a ७:३०
a
साध-सप्तवादनम् साढ़े सात

साध-अष्टवादनम् ८:३० साढ़े आठ

c o m
.
m वादनम् । ( हन्द :
s e
संस्कृतेन उत्तरम् — ‘इदान कः समयः ?’ इ त प्रश्नस्य उत्तरं सदा प्रथमा वभक्त्या द यते — इदान सपाद-षड्

c mबजे ह।)
अभी सवा oछह
. a gla
a s em
agl घड़ी म हाथ कहाँ दे ख: लाल (छोट ) सुई घण्टा बताती है, नीली (बड़ी) सुई मनट। बड़ी सुई १२ पर हो तो ‘पूरा
बजा’ — पञ्चवादनम्। ३ पर हो तो सवा — सपाद। ६ पर हो तो साढ़े — साध। और ९ पर हो तो पौने — पादोन,
se m
com g l a
.
जसके चार चत्र अगले पृष्ठ पर ह।
m a
ase
agl
Tip: ‘इदानीम्’ का पयाय शब्दाथ-ता लका म दया है — सम्प्र त (अभी)। इस लए वही प्रश्न ऐसे भी पूछा जा
सकता है — ‘सम्प्र त कः समयः ?’

co m
m .
m as e
.co a g l
a s emप्र.3 ‘सपाद’, ‘साध’, ‘पादोन’ — एतेषां पदानाम् अथ ववृण्वन्तु, उदाहरणैः च स्पष्टीकुवन्तु । (पाठ्य-प्रश्नः)

agl
.c
s e m
m a
m . co agl
तीन शब्द ‘वादनम्’ के आगे लगकर समय को घटा-बढ़ा दे ते ह। इनका आधार एक ही है — पाद यानी चौथाई (१५ मनट) और अध

ase
l
यानी आधा (३० मनट)।

a g

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 9 of 27

Page 11

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

पदम् पद वच्छे दः अथः क्रया उदाहरणम्

सपाद स + पाद चौथाई सिहत + १५ नमेषाः सपाद-पञ्चवादनम् = ५:१५

साध स + अध आधा सिहत + ३० नमेषाः साध-षड् वादनम् = ६:३०

पादोन पाद + ऊन चौथाई कम − १५ नमेषाः पादोन-सप्तवादनम् = ६:४५

सपाद-सप्तवादनम् = ७:०० + ०:१५ = ७ :१५

साध-सप्तवादनम् = ७:०० + ०:३० = ७ :३०

पादोन-सप्तवादनम् = ७:०० − ०:१५ = ६ :४५

सबसे बड़ी चूक यह होती है: ‘सपाद’ और ‘साध’ म संख्या वही घण्टा रहती है जो लखी है, पर ‘पादोन’ म समय
एक घण्टा पीछे चला जाता है — क्य क वह ‘अगले घण्टे म से कम’ है। ‘ऊन’ शब्द को याद र खए — ‘न्यून/कम’।
उ ीस को संस्कृत म ‘एकोन वश तः’ (बीस म एक कम) कहते ह — वही ‘ऊन’ यहाँ लगा है।

Check it yourself: कोई भी ‘पादोन-X वादनम्’ मले तो उत्तर हमेशा (X−1) : ४५ होगा। पादोन-नववादनम् =
८:४५, पादोन-एकादशवादनम् = १०:४५।

पादोन-वादनम् तथा वयं शब्दाथान् जानीमः — पृष्ठ 73
चत्वा र पादोन-घट चत्रा ण एवं शब्दाथसारणी

पाठः

प्र.1 पादोन-षड् वादनम्, पादोन-सप्तवादनम्, पादोन-अष्टवादनम्, पादोन-नववादनम् — एतेषां चतुणा घट चत्राणां
समयम् अङ् कैः लखन्तु ।

चार घ ड़य म बड़ी सुई ९ पर है — यही ‘पौने’ का चह्न है।

संस्कृतम् गणना अङ् केषु हन्द

पादोन-षड् वादनम् ६:०० − ०:१५ ५:४५ पौने छह

पादोन-स प्तवादनम् ७:०० − ०:१५ ६:४५ पौने सात

पादोन-अष्टवादनम् ८:०० − ०:१५ ७:४५ पौने आठ

पादोन-नववादनम् ९:०० − ०:१५ ८:४५ पौने नौ

Page 10 of 27

Page 12

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

पाठ म इसका एक ही प्रयोग है: ‘ततः पादोन-सप्तवादने (६:४५) स्नानं करो म।’ पाठ ने कोष्ठक म ६:४५ लखकर
स्वयं जाँच का साधन दे दया है — य द आपका उत्तर ७:४५ आ रहा हो तो सम झए क ‘ऊन’ का अथ ‘कम’ भूल
गए।

Try This: कागज़ पर चार गोल घ ड़याँ बनाइए, चार म बड़ी सुई ९ पर र खए और छोट सुई क्रमशः ५-६, ६-७,
७-८, ८-९ के बीच। नीचे संस्कृत नाम ल खए — यही प रयोजनाकाय का पहला काम भी है।

प्र.2 वयं शब्दाथान् जानीमः — दनचयाम्, वदा म, प्र त दनम्, उ त्तष्ठा म, भूमेः, वन्दनम्, मुखप्रक्षालनम्, तदनन्तरम्,
दन्तधावनम्, योगासनम्, स्वाध्यायम्, स्नानम्, ोकान्, प्रातराशम्, वद्यालयम्, गच्छा म, इदानीम्, उषःपानम् —
एतेषां शब्दानाम् अथान् (संस्कृतपयायं, हन्द , English) लखन्तु ।

पृष्ठ 73 क पूरी शब्दाथ-सारणी — पहले संस्कृत पयाय, फर हन्द , फर अंग्रेज़ी।

Page 11 of 27

Page 13

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

शब्दः अथः (संस्कृतपयायः) हन्द ENGLISH

िदनचय म् दै न न्दन-कायसरणीम् दै िनक काय Daily Routine

वदािम कथया म बोल रहा/रही हू ँ I speak

पितिदनम् नत्यम् हर िदन Daily

उि ष्ठािम जाग म जागता/जागती हू ँ I wake up/get up

भूम ेः पृ थव्याः भूिम का Of the earth

वन्दनम् नमनम् अिभवादन Salutation

मुखपक्षालनम् मुखधावनम् मुँह धोना Facewash

तदनन्तरम् ततः परम् उसके पश्चात् After that

द न्तधावनम् दन्तशोधनम् दाँतों का म ञ्जन Brushing teeth

योगासनम् योगासन क्रया योगासन Yogasana

स्वाध्यायम् स्व-अध्ययनम् स्वयं अध् ययन Self-study

स्नानम् शरीरशु द्धः नहाना Bath

श्लोकान् छन्दोबद्धा न पद्या न श्लोकों को Metred verses

पातराशम् कल्याहारम् अल्पाहार Breakfast

िवद्य ालयम् पाठशालाम् िवद्य ालय को To the school

ग च्छािम या म जाता/जाती हू ँ I go

इदानीम् सम्प्र त अभी Now

उषःपानम् प्रातः कवोष्ण-जलस्य पानम् सुबह गुनगुना जल पीना Drinking warm water in morning

ता लका का आ ख़री खाना खाली क्य छोड़ा गया है: उसका शीषक है ‘मातृभाषया अथ लखन्तु’ — यानी
अपनी मातृभाषा म अथ ल खए। हन्द भाषी वद्याथ के लए वही अथ काम दे गा जो ऊपर ‘ हन्द ’ खाने म है;
मराठ वद्याथ लखेगा — दनचया = दै नं दन कायक्रम, स्नानम् = आंघोळ; बाङ् ला म — स्नानम् = ান, गच्छा म =
যাই। NCERT का उ े श्य यही है क संस्कृत शब्द अपनी घर क भाषा से जुड़कर याद रहे।

Did you know? इनम कई शब्द हन्द म ज्य -के-त्य चलते ह — दनचया, वन्दन, योगासन, स्वाध्याय, स्नान,
ोक, वद्यालय। यही कारण है क संस्कृत का शब्दभण्डार सीखते ही हन्द भी मज़बूत हो जाती है।

Page 12 of 27

Page 14

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 पाठे आगतानां शब्दानां स वच्छे दं समास वग्रहं वा कुवन्तु — उषःपानम्, कवोष्णम्, माता पतरौ, चरणवन्दनम्,
मुखप्रक्षालनम्, दन्तधावनम्, प्रातराशम्, तत्प ात् । (पाठ्य-प्रश्नः)

पाठ के लगभग सारे क ठन शब्द जुड़े हुए शब्द ह। तोड़ते ही अथ खुल जाता है।

पदम् वच्छे दः / वग्रहः प्रकारः अथः

उषःपानम् उषस् + पानम् वसगस ः भोर में जल पीना

कवोष्णम् कु + उष्णम् (‘कु’ इत्यस्य ‘कव्’ आदे शः, ततः अ + उ = ओ) गुणस ः थोड़ ा गरम , गुनगुना

मातािपतरौ माता च पता च द्वन्द्वसमासः माता और िपता (दोनों)

चरणवन्दनम् चरणयोः वन्दनम् तत्पुरुषसमासः चरण छू कर पणाम

मुखपक्षालनम् मुखस्य प्रक्षालनम् तत्पुरुषसमासः मुँह धोना

द न्तधावनम् दन्तानां धावनम् तत्पुरुषसमासः दाँत साफ़ करना

पातराशम् प्रातः + आशम् वसगस ः सुबह का भोजन, नाश्ता

तत्पश्चात् तत् + प ात् अव्ययपदम् उसके बाद

‘प्रातः’ का वसग बार-बार बदलता है: प्रातः + आशम् म वसग ‘र्’ बन गया — प्रातराशम्। ऐसे ही ‘उषस्’ का
‘स्’ वसग बनकर उषःपानम् हुआ, क्य क आगे ‘प’ वग का वण है। नयम सीधा है — वसग के आगे स्वर आए
तो प्रायः ‘र्’, और वग-व्यञ्जन आए तो वसग वैसा ही रहता है।

Tip: समास पहचानने का छोटा उपाय — वग्रह करते समय बीच म य द ‘और’ लगाना पड़े तो द्वन्द्व, और य द ‘का/
क /के’ लगाना पड़े तो तत्पुरुष।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 74

Page 13 of 27

Page 15

as e
कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म
a g l AglaSem · NCERT Solutions

अभ्यासः (प्रश्नाः १–३)
co m
e m.
m as
अभ्यासः

.co a g l
a s em
gl
प कातः शष्टाचारस्य पदा न चत्वा लखन्तु — कलहः, गुरुवन्दनम्, वृद्धसेवा, अ त थसत्कारः, अहङ् कारः,
a
प्र.1
मातृप्रेम, पतृभ क्तः, ज्येष्ठेषु आदरः, क नष्ठेषु प्री तः, परस्परद्वे षः, ब ुषु प्री तः, असूया, स्वा भमानम्, परोपकारः,

m
प्रा णषु दया, प्रयवचनम्, हसा, सत्यकथनम्, सत्पात्रे दानम्, सवषु मैत्रीभावः, अ हसा, समयपालनम्, स्वच्छता,

. co
प्रकृ तरक्षणम्, भ्रातृषु भ गनीषु च स्नेहः । (यथा – गुरुवन्दनम्)
ag
e m
g l as
a
पीली प का म २५ पद ह। इनम से पाँच दुगुण ह — उन्ह छोड़ दे ना है; शेष सब शष्टाचार के पद ह।

co m
m.
शष्टाचारस्य पदा न —

m as e
.co a g l
se m
g l a
a
m a s
m .co agl
l a se
a g

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
m . a
ase
agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 14 of 27

Page 16

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

क्रमः शष्टाचारपदम् हन्द अथ

१ गुरुवन्दनम् (यथा) गुरु को प्रणाम करना

२ वृद्धसे वा बुजग क सेवा

३ अितिथस त्कारः अ त थ का आदर-सत्कार

४ मातपृ ेम माता से प्रेम

५ िपतभृ ि तः पता के प्र त भ क्त

६ ज्येष्ठे ष ु आदरः बड़ के प्र त आदर

७ किनष्ठे ष ु पीितः छोट से स्नेह

८ बन्ध षु ु पीितः सगे-सम्ब य से प्रेम

९ स्वािभमानम् आत्म-सम्मान

१० परोपकारः दूसर का भला करना

११ पािणषु दया सब प्रा णय पर दया

१२ िपयवचनम् मीठा बोलना

१३ स त्यकथनम् सच बोलना

१४ स त्पात्रे दानम् योग्य पात्र को दान

१५ सवषु मैत्रीभावः सबके प्र त मत्रता का भाव

१६ अिहंस ा कसी को न सताना

१७ समयपालनम् समय क पाबन्द

१८ स्वच्छता सफ़ाई

१९ पकृ ितर क्षणम् प्रकृ त क रक्षा

२० भातषृ ु भिगनीषु च स्नेहः भाइय और बहन से स्नेह

एता न पदा न न चेतव्या न (दुगुणाः) —

Page 15 of 27

Page 17

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

त्याज्यपदम् अथः कमथ त्याज्यम्

कलहः झगड़ा िशष्टाचार का उलटा — यह स म्बन्ध तोड़ ता है

अहङ् कारः घमण्ड ‘स्वािभमान’ से अलग — यह दू स रों को छोटा समझता है

पर स्पर ेषः आपसी बैर मैत्रीभाव का िवपरीत

असूया ईष्या, दूसरे के गुण म दोष दे खना पीित का िवपरीत

िहंस ा कसी को कष्ट दे ना अिहंस ा और दया का िवपरीत

‘स्वा भमानम्’ और ‘अहङ् कारः’ का भेद ही इस प्रश्न क असली परीक्षा है: स्वा भमान का अथ है — अपने को
गरने न दे ना, ग़लत काम न करना; यह गुण है। अहङ् कार का अथ है — अपने को दूसर से ऊँचा मानना; यह दोष
है। दोन को एक साथ रखकर पुस्तक ने चुपचाप यह भेद सखा दया।

Tip: पुस्तक म उत्तर के लए १६ रक्त स्थान (चार पं क्तयाँ × चार खाने) छपे ह, जब क प का म शष्टाचार के पद
२० ह। इस लए बचे हुए पद अपनी कॉपी म नीचे लख ली जए — ध्यान रहे, ‘ब ुषु’ और ‘प्री तः’ प का म अलग-
अलग खान म छपे ह, पर वे एक ही पद ह — ब ुषु प्री तः।

प्र.2 उदाहरणानुगुणं समयं संख्या भः लखन्तु — यथा – पादोन-सप्तवादनम् – ६:४५ । (क) साध-दशवादनम् (ख)
दशवादनम् (ग) सपाद-षड् वादनम् (घ) साध-चतुवादनम् (ङ) पादोन-एकादशवादनम् ।

हर शब्द के तीन भाग दे खए — उपसग-जैसा पद (सपाद/साध/पादोन), संख्या, और वादनम्।

क्रमः संस्कृतम् गणना उत्तरम् (अङ् केषु) हन्द

यथा पादोन-सप्तवादनम् ७:०० − ०:१५ ६:४५ पौने सात

(क) साध-दशवादनम् १०:०० + ०:३० १०:३० साढ़े दस

(ख) दशवादनम् पूणः समयः १०:०० दस बजे

(ग) सपाद-षड् वादनम् ६:०० + ०:१५ ६:१५ सवा छह

(घ) साध-चतुव दनम् ४:०० + ०:३० ४:३० साढ़े चार

(ङ) पादोन-एकादशवादनम् ११:०० − ०:१५ १०:४५ पौने ग्यारह

Page 16 of 27

Page 18

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

(ङ) पर सबसे ज़्यादा ग़लती होती है: ‘एकादश’ यानी ग्यारह, और ‘पादोन’ यानी एक चौथाई कम — तो उत्तर
१०:४५ है, ११:४५ नह । मन-ही-मन ऐसा क हए — ‘ग्यारह बजने म पन्द्रह मनट बाक़ ’। वही तो ‘पौने ग्यारह’ है।

Check it yourself: जस उत्तर म मनट :४५ ह , उसम घण्टा शब्द म लखी संख्या से एक कम होना ही
चा हए। जनम :१५ या :३० ह , उनम घण्टा वही रहेगा।

प्र.3 उदाहरणानुगुणं समयम् अक्षरैः लखन्तु — यथा – ०६:०० – षड् वादनम् । (क) ०५:३० (ख) ०९:४५ (ग) १२:००
(घ) ०६:४५ (ङ) ११:३० ।

अब उलटा काम है — अङ् क दे खकर संस्कृत शब्द बनाना। पहले मनट दे खए, फर घण्टा।

क्रमः अङ् केषु नमेषाः क सूचय न्त उत्तरम् (अक्षरैः) हन्द

यथा ०६:०० :०० → पूणः षड् वादनम् छह बजे

(क) ०५:३० :३० → साध साध -पञ्चवादनम् साढ़े पाँच

(ख) ०९:४५ :४५ → पादोन (अ ग्रमः घण्टः) पादोन-दशवादनम् पौने दस

(ग) १२:०० :०० → पूणः ादशवादनम् बारह बजे

(घ) ०६:४५ :४५ → पादोन (अ ग्रमः घण्टः) पादोन-स प्तवादनम् पौने सात

(ङ) ११:३० :३० → साध साध -एकादशवादनम् साढ़े ग्यारह

िनयमः —

िमनट :०० → के वल संख्या + वादनम्

िमनट :१५ → सपाद + उसी घण्टे की संख्या

िमनट :३० → साध + उसी घण्टे की संख्या
िमनट :४५ → पादोन + अगले घण्टे की संख्या

(ख) और (घ) म घण्टा बदलना ही असली चाल है: ०९:४५ म घड़ी पर ‘९’ दख रहा है, पर संस्कृत नाम म ‘दश’
आएगा — पादोन-दशवादनम्। कारण वही — पादोन का अथ है ‘उस घण्टे म से चौथाई कम’, इस लए संख्या
हमेशा एक आगे क लखी जाती है।

Page 17 of 27

Page 19

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

Tip: ‘षट् ’ से ‘षड् वादनम्’ बना — यहाँ ट् का ड् हुआ। इसी तरह ‘चतुर्’ से चतुवादनम्, ‘नव’ से नववादनम्,
‘एकादश’ से एकादशवादनम्। संख्या का मूल रूप ही जोड़ना है।

वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 75
अभ्यासः (प्रश्नाः ४–६)

अभ्यासः

प्र.4 उदाहरणानुगुणं प्रश्न नमाणं कुवन्तु — यथा – सः साध-सप्तवादने अध्ययनं करो त । – सः कदा अध्ययनं करो त ?
(क) सा सपाद-नववादने वद्यालयं गच्छ त । (ख) सतीशः साध-द्वादशवादने भोजनं करो त । (ग) यानं पञ्चवादने
आगच्छ त । (घ) गोपालः षड् वादने गोदोहनं करो त । (ङ) माता दशवादने कायालयं गच्छ त ।

उदाहरण दे खए — समय वाला पद हटाकर उसक जगह ‘कदा’ रख दया गया है, और वाक्य के अन्त म प्रश्न चह्न। बाक़ वाक्य
ज्य -का-त्य रहता है।

क्रमः वाक्यम् प्रश्नः हन्द

यथा सः साध-सप्तवादने अध्ययनं करोित । सः कदा अध् ययनं करोित ? वह कब पढ़ाई करता है ?

(क) सा सपाद-नववादने िवद्यालयं गच्छित । सा कदा िवद्य ालयं गच्छित ? वह (लड़क ) कब वद्यालय जाती है ?

(ख) सतीशः साध- ादशवादने भोजनं करोित । सतीशः कदा भोजनं करोित ? सतीश कब भोजन करता है ?

(ग) यानं पञ्चवादने आगच्छित । यानं कदा आगच्छित ? वाहन कब आता है ?

(घ) गोपालः षड् वादने गोदोहनं करोित । गोपालः कदा गोदोहनं करोित ? गोपाल कब गाय दुहता है ?

(ङ) माता दशवादने काय लयं गच्छित । माता कदा काय लयं गच्छित ? माता कब कायालय जाती है ?

व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): ‘कदा’ इ त कालवाचकम् अव्ययम् — तस्य रूपं कदा प न प रवतते, न लङ्गे न न वचनेन। य स्मन्
पदे सप्तमी वभ क्तः कालसू चका अ स्त, तस्य एव स्थाने ‘कदा’ स्थाप्यते । कता (सः, सा, सतीशः, यानं, गोपालः, माता) क्रया च
अप रव तते एव तष्ठतः ।

यह मत भू लए क कता वैसा ही रहेगा: ‘सा सपाद-नववादने…’ का प्रश्न ‘सः कदा…’ नह , ‘सा कदा…’ बनेगा —
क्य क कता स्त्री लङ्ग है। इसी तरह ‘यानम्’ नपुंसक लङ्ग है, अतः क्रया ‘आगच्छ त’ ही रहेगी। प्रश्न बनाते समय
केवल एक पद बदलता है — समय वाला।

Tip: य द प्रश्न स्थान का हो तो ‘कुत्र’, व्य क्त का हो तो ‘कः/का’, वस्तु का हो तो ‘ कम्’, और समय का हो तो
‘कदा’। इस अभ्यास म हर वाक्य म समय दया है, इस लए हर उत्तर म कदा ही आएगा।

Page 18 of 27

Page 20

as e
कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
स्वस्य दनचया सरलवाक्यैः लखन्तु — यथा – अहं प्रातः षड् वादने उ त्तष्ठा म ।
e
प्र.5

m l as
.co a g
a s em
यह g l बात लखने वाला प्रश्न है, इस लए हर वद्याथ का उत्तर अलग होगा। पर ढाँचा सबका एक ही रहेगा —
a अपनी

co m
. ag
अहम् + (समयः) –वादने + (कायम्) + करोिम / गच् छािम / पठािम …
em
g l as
अच्छे उत्तर म ये बात होनी चा हए — a

co m
सब वाक्य उत्तमपुरुष एकवचन म ह — करो म, गच्छा म, खादा म, पठा म, स्व प म।

em.
हर वाक्य म समय सप्तमी वभ क्त म हो — षड् वादने, साध-सप्तवादने।

m
coदस
समय क्रम से बढ़े — सुबह से रात तक; बीच म ‘ततः, तदनन्तरम्, तत्प ात्’ जैसे अव्यय जोड़।
g l as
कम-से-.कम a
s e m से बारह छोटे वाक्य ह (पुस्तक म उतनी ही पं क्तयाँ छपी ह)।

a gनमूlaना उत्तर (मम दनचया) —
m a s
.co agl
समयः संस्कृतवाक्यम् हन्द

se m
६:००
g
अहं पातः षड् वादने उि ष्ठािम । (यथा)
l a म सुबह छह बजे उठता/उठती ँ।

६:१५
a
अहं सपाद -षड् वादने द न्तधावनं मुखपक्षालनं च करोिम । म सवा छह बजे दाँत साफ़ करता/करती ँ और मुँह धोता/धोती ँ।

co m
अहं साध -षड् वादने योगासनं करोिम ।
m .
e
६:३० म साढ़े छह बजे योगासन करता/करती ँ।

m l as
.co ततः सप्तवादने अहं स्नानं करोिम । a g
em
७:०० उसके बाद सात बजे म स्नान करता/करती ँ।

a s
agl ७:१५ अहं सपाद -स प्तवादने ईश्वर स्य पाथनां करोिम । म सवा सात बजे ईश्वर क प्राथना करता/करती ँ।

se m
com a
७:३० अहं साध -स प्तवादने पातराशं करोिम । म साढ़े सात बजे नाश्ता करता/करती ँ।

. a g l
m
ase
८:०० तदनन्तरम् अष्टवादने अहं िवद्य ालयं गच्छािम । उसके बाद आठ बजे म वद्यालय जाता/जाती ँ।

१२:३० agl
अहं साध - ादशवादने म ध् याह्न भोजनं करोिम । म साढ़े बारह बजे दोपहर का भोजन करता/करती ँ।

co m
.
२:३० अहं साध -ि वादने गृहम् आगच्छािम । म ढाई बजे घर लौटता/लौटती ँ।

e m
m l as
.co g
४:०० अहं चतुव दने ीडाङ् गणे ीडािम । म चार बजे खेल के मैदान म खेलता/खेलती ँ।

a
क्र क्र

a s em ६:००
gl
अहं षड् वादने गृहकाय ं करोिम , पाठान् च पठािम । म छह बजे गृहकाय करता/करती ँ और पाठ पढ़ता/पढ़ती ँ।

a c
m .
e
८:३० अहं साध -अष्टवादने राित्रभोजनं करोिम । म साढ़े आठ बजे रात का भोजन करता/करती ँ।

m a s
१०:०० तत्पश्चात् दशवादने अहं शयनं करोिम ।
e m . co उसके बाद दस बजे म सो जाता/जाती ँ।
agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 19 of 27

Page 21

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

छात्रा हो तो क्या बदलेगा — कुछ नह : ‘अहम्’ और ‘करो म’ दोन लङ्ग- नरपेक्ष ह, इस लए लड़का-लड़क दोन
के वाक्य एक जैसे रहगे। लङ्ग तभी दखेगा जब आप कता का नाम या वशेषण लख — जैसे ‘अहं छात्रः अ स्म’ /
‘अहं छात्रा अ स्म’।

Check it yourself: लखने के बाद हर वाक्य म तीन चीज़ ढूँ ढ़ए — (१) समय का ‘–वादने’ रूप, (२) कम
(क्या कया), (३) ‘– म’ पर ख़त्म होने वाली क्रया। तीन मल जाएँ तो वाक्य शुद्ध है।

प्र.6 वाक्येषु शष्टाचारपदं योजयन्तु — नयमपालनं, सेवां, मैत्रीभावः, साहाय्यं, सत्कारं, दयाभावः । यथा – युवकः
माता पत्रोः सेवां करो त । (क) सा दुबलानां ............. करो त । (ख) सवषु प्रा णषु ............. भवतु । (ग) सव
छात्राः पाठशालायाः ............. कुवन्तु । (घ) वयं सव अ तथीनां ............. कुमः । (ङ) परस्परं छात्रेषु .............
भवतु ।

पहले दे खए क रक्त स्थान के आगे कौन-सी क्रया है — करो त/कुवन्तु/कुमः हो तो कम चा हए ( द्वतीया वभ क्त), और भवतु
हो तो कता चा हए (प्रथमा वभ क्त)। इसी से आधा उत्तर अपने-आप नकल आता है।

क्रमः पूणवाक्यम् यो जतं पदम् हन्द

यथा युवकः मातािपत्रोः से वां करोित । से वां युवक माता- पता क सेवा करता है।

(क) सा दुबलानां साहाय्यं करोित । साहाय्यं वह दुबल क सहायता करती है।

(ख) सवषु पािणषु दयाभावः भवतु । दयाभावः सब प्रा णय पर दया का भाव हो।

(ग) सव छात्राः पाठशालायाः िनयमपालनं कु वन्तु । िनयमपालनं सब छात्र वद्यालय के नयम का पालन कर।

(घ) वयं सव अितथीनां स त्कारं कु मः । स त्कारं हम सब अ त थय का सत्कार करते ह।

(ङ) परस्परं छात्रेष ु मैत्र ीभावः भवतु । मैत्रीभावः छात्र म आपस म मत्रता का भाव हो।

व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): साहाय्यं, नयमपालनं, सत्कारम् — एता न द्वतीया- वभक्तेः एकवचने स न्त, यतः ‘कृ’-धातोः
कमपदा न । दयाभावः, मैत्रीभावः — एते प्रथमा- वभक्तेः एकवचने, यतः ‘भवतु’ (लोट् , प्रथमपुरुष एकवचन) इत्यस्य कतारौ ।
‘दुबलानाम्, अ तथीनाम्’ — षष्ठी बहुवचनम् (–आनाम्/–ईनाम्) ।

दो-दो पद म भ्रम हो सकता है — इस तरह हटाइए: ‘सेवा’ और ‘साहाय्य’ दोन करने के काम ह, पर सेवा बड़
क होती है (माता पत्रोः सेवां — यह उदाहरण म लग चुका), और साहाय्य दुबल का। इसी तरह ‘सत्कार’ अ त थ के
लए ही रूढ़ है (अ त थसत्कारः), और ‘ नयमपालन’ केवल वद्यालय जैसी संस्था के साथ बैठता है।

Page 20 of 27

Page 22

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

Tip: प का म छह पद ह और रक्त स्थान पाँच — छठा पद ‘सेवां’ उदाहरण वाले वाक्य म पहले ही लग चुका है।
इस लए कसी पद को दोबारा मत लगाइए।

योग्यता वस्तरः — भारतीय ान-परम्परायां समयः घट यन्त्रा ण च — पृष्ठ 76
कोणाकसूयम न्दरम्, जन्तरमन्तरम्, प्रातःस्मरणम्, भू मवन्दना

योग्यता वस्तरः

प्र.1 प्राचीनभारते जनाः समय नदशाथ सूयस्य ग त पश्य न्त स्म । तस्य कृते ते बहु वधस्य व ानस्य आ वष्करणं
कृतवन्तः । तादृशा न व ानयन्त्रा ण सामान्यतः वयं प्र सद्धे षु दे वालयेषु पश्यामः । यथा ओ डशाराज्ये कोणाकक्षेत्रे
वद्यमाने सूयम न्दरे चक्रा ण स न्त । — अस्य गद्यांशस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।

हन्द अनुवाद —

संस्कृतम् हन्द

पाचीनभारते जनाः समयिनद शाथ ं सूयस्य गितं पश्यिन्त स्म । पाचीन भारत में लोग समय जानने (बताने) के िलए सूय की गित दे खा करते
थे।

तस्य कृ ते ते बहिु वध स्य िव ानस्य आिवष्क रणं कृ तवन्तः । उसके िलए उ न्होंने अनेक पकार के िव ान का आिवष्कार िकया।

तादृ शािन िव ानयन्त्र ािण सामान्यतः वयं पिस द्धेष ु दे वालयेष ु वैसे वै ािनक यन्त्र पायः हम पिस द्ध दे व-मिन्दरों में दे खते है।
ं
पश्यामः ।

यथा ओिडशाराज्ये कोणाक क्षेत्र े िवद्य माने सूयमिन्दरे चक्रािण जैसे ओिडशा राज्य के कोणाक क्षेत्र में िस्थत सूयमिन्दर में (पत्थर के ) पिहये
सिन्त । बने है।
ं

व्याकरण- ववेचनम् (संस्कृतम्): ‘पश्य न्त स्म’ — लट् -लकारेण सह ‘स्म’ इ त अव्ययं यो जतं चेत् भूतकालस्य अथः भव त (=
दे खा करते थे) । ‘समय नदशाथम्’ = समय नदशाय, चतु यथ ताद यम् । ‘कृतवन्तः’ इ त क्तवतु-प्रत्ययान्तं भूतका लकं रूपम्
(पुं लङ्ग, प्रथमा बहुवचन) । ‘दे वालयेषु’, ‘सूयम न्दरे’, ‘कोणाकक्षेत्रे’ — अ धकरणे सप्तमी ।

यह अंश पाठ से क्य जोड़ा गया: पूरा पाठ ‘ कतने बजे’ पर चलता है — और यह पृष्ठ पूछता है क घड़ी से पहले
भारत म समय कैसे नापा जाता था। उत्तर है — सूय क छाया से। कोणाक के सूयम न्दर के पत्थर के प हये असल म
धूपघड़ी ह; उनके आरे (spokes) और उन पर पड़ती छाया से समय पढ़ा जाता था। यानी व ान म न्दर क द वार
पर ही उकेरा हुआ था।

Did you know? ‘दे वालयः’ = दे व + आलय (द घस ) = दे वता का घर, म न्दर। ‘ वद्यमाने’ का अथ है ‘जो
वद्यमान है, स्थत है’ — यह शतृ/शानच्-प्रत्ययान्त रूप सप्तमी म है।

Page 21 of 27

Page 23

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 योग्यता वस्तरे प्रदत्तानां चत्राणां प रचयं लखन्तु — सूयम न्दरम् – कोणाकः (ओ डशा), घ टकायन्त्रम् –
जन्तरमन्तरं जयपुरम्, मश्रयन्त्रम् – जन्तरमन्तरं दे हली ।

पृष्ठ 76 पर चार चत्र ह — दो कोणाक के और दो जन्तर-मन्तर के।

चत्रम् ानम् क दशय त समयेन सह सम्ब ः

सूयमिन्दरम् कोणाक ः, ओिडशा रथ के आकार का म न्दर, जसक द वार चक्र के आर पर पड़ती छाया से दन का समय
पर वशाल पत्थर-चक्र पढ़ा जाता था — प्रस्तर-सूयघट

पत्थर का कोणाक ः, ओिडशा बारह जोड़े प हये, हर प हये म आरे प हये स्वयं धूपघड़ी ह; आरे समय के भाग को
चक्रम् दशाते ह

घिटकायन्त्र म् जन्तरम न्तरम्, ढालू त्रकोणाकार द वार वाला वशाल छाया क स्थ त से समय क सूक्ष्म गणना
जयपुर म् सूयघट -यन्त्र

िम श्रयन्त्र म् जन्तरम न्तरम्, कई यन्त्र को मलाकर बना एक ही ढाँचा समय के साथ-साथ दन क लम्बाई तथा ग्रह-
दे हली स्थ त भी बताता है

संस्कृतेन उत्तरम् — कोणाकस्य सूयम न्दरे प्रस्तरचक्रा ण सूयघ टकारूपेण काय कुव न्त । जयपुरे दे हल्यां च
जन्तरमन्तरनामकेषु वेधशालासु घ टकायन्त्रं मश्रयन्त्रं च वद्येते । ( हन्द : कोणाक के सूयम न्दर म पत्थर के चक्र धूपघड़ी का
काम करते ह। जयपुर और दल्ली क जन्तर-मन्तर नामक वेधशालाओं म घ टकायन्त्र तथा मश्रयन्त्र ह।)

‘घ टका’ शब्द से ही ‘घड़ी’ बना: प्राचीन भारत म समय क एक इकाई थी घ टका (लगभग २४ मनट) — दन-
रात म ६० घ टकाएँ। जस यन्त्र से यह नापी जाती थी, वह घ टकायन्त्रम्। हन्द का ‘घड़ी’ उसी का बचा हुआ रूप
है। जन्तर-मन्तर क वेधशालाएँ महाराजा सवाई जय सह ने अठारहव शताब्द म बनवाईं।

Tip: ‘यन्त्रम्’ नपुंसक लङ्ग है, अतः बहुवचन ‘यन्त्रा ण’ — पाठ म भी ‘घट यन्त्रा ण’, ‘ व ानयन्त्रा ण’, ‘चक्रा ण’
— तीन नपुंसक लङ्ग बहुवचन।

प्र.3 प्रातःस्मरणम् — कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गो वन्दः प्रभाते करदशनम् ॥ भू मवन्दना —
समुद्रवसने दे व पवतस्तनमण्डले । वष्णुप त्न नमस्तुभ्यं पादस्पश क्षमस्व मे ॥ — अनयोः ोकयोः अन्वयं,
हन्द -अथ, भावं च लखन्तु ।

(१) प्रातःस्मरणम्
अन्वयः — कराग्रे लक्ष्मीः वसते, करमध्ये सरस्वती (वसते), करमूले तु गो वन्दः (वस त) ; (अतः) प्रभाते करदशनम् (कतव्यम्) ।

Page 22 of 27

Page 24

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

पदम् अथः

कराग े हाथ के अगले भाग म — उँ ग लय के सरे पर (सप्तमी एकवचन)

करमध्ये हथेली के बीच म

करमूले हाथ के मूल म — कलाई के पास

करदशनम् अपने हाथ को दे खना

हन्द अथ — हाथ के अगले भाग म लक्ष्मी का वास है, हथेली के बीच म सरस्वती का और हाथ के मूल म गो वन्द ( वष्णु) का;
इस लए सुबह उठते ही अपने हाथ के दशन करने चा हए।

भावः — यह ोक कहता है क जो कुछ पाना है, वह अपने ही हाथ म है — धन (लक्ष्मी), वद्या (सरस्वती) और
सफलता का आशीवाद (गो वन्द)। बाहर कसी को खोजने से पहले दन का आरम्भ अपने प रश्रम के साधन —
अपने हाथ — को दे खकर हो। यही कारण है क यह पाठ क दनचया के ठ क साथ रखा गया है : उठते ही पहला
काम है करदशन, फर भू मवन्दन।

(२) भू मवन्दना
अन्वयः — हे समुद्रवसने, पवतस्तनमण्डले, वष्णुप त्न दे व ! तुभ्यं नमः (अस्तु) ; मे पादस्पश क्षमस्व ।

पदम् अथः

समुद वसने जसका वस्त्र समुद्र है (सम्बोधन एकवचन, बहु ी ह)

पवतस्तनमण्डले पवत ही जसका वक्षःस्थल है

िवष्णपु ित्न हे वष्णु क पत्नी (भूदेवी) ! (सम्बोधन)

पादस्पश ं क्षमस्व मे मेरे पैर के स्पश को क्षमा करो (क्षम् धातु, लोट् मध्यमपुरुष एकवचन)

हन्द अथ — हे दे व ! समुद्र तुम्हारा वस्त्र है और पवत तुम्हारा वक्षःस्थल; हे वष्णुपत्नी (पृथ्वी) ! तुम्ह नमस्कार है — मेरे चरण के
स्पश के लए मुझे क्षमा करो।

भावः — पृथ्वी को माता माना गया है, इस लए सुबह बस्तर से उतरकर पहला पैर रखने से पहले यह ोक बोला
जाता है। इसम पूरी पृथ्वी का चत्र एक ही पं क्त म ख च दया गया है — समुद्र उसका वस्त्र, पवत उसका शरीर।
और भाव यह है क जस धरती पर हम चलते ह, उसके प्र त भी वनय हो। पाठ का दूसरा चत्र इसी को दखाता है
— ‘प्रथमं भूमेः वन्दनं करो म’।

अलङ् कारः: ‘समुद्रवसने’ और ‘पवतस्तनमण्डले’ म रूपक अलङ् कार है — समुद्र पर वस्त्र का और पवत पर शरीर
का आरोप कया गया है। ‘करमध्ये सरस्वती’ म भी वही यु क्त है।

Page 23 of 27

Page 25

as e
कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 76
m as e
घट चत्र नमाणम्, दनचयालेखनम्,
.co
ोकसंग्रहः
a g l
se m
l a
प रयोजनाकायम्

a g
ोरकपत्रे घट नां चत्रा ण रचयन्तु, तेषु व वधान् रङ्गान् पूरयन्तु, संस्कृतेन समयं च लखन्तु ।
m
प्र.1

. co ag
e m
g l as
यह हाथ से करने वाला काम है। करने क व ध — a
1. थमाकोल ( ोरकपत्र) क शीट से चार गोल चक्र का टए — व्यास लगभग १५ सेमी।
co m
e m.
as
2. हर चक्र पर दे वनागरी अङ् क म १ से १२ तक ल खए (घड़ी क तरह, १२ ऊपर)।
m l
.co a g
3. मोटे कागज़ क दो सुइयाँ बनाइए — छोट (घण्टा) लाल, बड़ी ( मनट) नीली — और बीच म पन से जो ड़ए ता क वे घूम सक।

se m
a
4. चार घ ड़य म सुइयाँ अलग-अलग र खए और नीचे संस्कृत म समय ल खए।

g l
a नमूना — चार घ ड़याँ और उनके नाम:
m a s
.co agl
घट बड़ी सुई छोट सुई संस्कृतेन लेख्यम् अङ् केषु

se m
g l a
a
१ १२ पर ७ पर स प्तवादनम् ७:००

२ ३ पर ८ – ९ के बीच सपाद -अष्टवादनम् ८:१५

. com४:३०
e m
as
३ ६ पर ४ – ५ के बीच साध -चतुव दनम्

४ .co
m ९ पर पादोन-षड् वादनम् agl
m
ase
५ – ६ के बीच ५:४५

agl
se m
रङ्ग भरते समय एक चतुराई क जए: चार प्रकार को चार अलग रङ्ग से पहचान द जए — पूण वादन के लए

com
हरा, सपाद के लए पीला, साध के लए नीला और पादोन के लए लाल। कक्षा क द वार पर टाँगने पर पूरा वग एक
g l a
m . a
ase
ही नज़र म चार साँचे याद कर लेगा।

agl
Tip: नीचे लखते समय दो पं क्तयाँ र खए — ऊपर संस्कृत (सपाद-अष्टवादनम्) और नीचे अङ् क (८:१५)। जाँचने

co m
.
वाला दोन मलाकर तुरन्त दे ख लेगा क समझ सही है या नह ।

e m
m l as
.co a g
a s em
agl प्र.2 मात्रा / पत्रा सह चचा कृत्वा स्वस्याः / स्वस्य दनचया संस्कृतेन लखन्तु ।

.c
s e m
om a
. c agl

यह अपने घर से जुड़ा काम है, इस लए उत्तरem
a s हर वद्याथ का अपना होगा। करने क व ध —

1. माता या पता के साथ बैठकरagपूरlे दन क सूची बनाइए — हन्द म, समय के साथ।
2. हर पं क्त के सामने संस्कृत का समय-रूप ल खए — ६:१५ → सपाद-षड् वादने।

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 24 of 27

Page 26

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

3. अब वाक्य बनाइए — अहम् + (समय)वादने + (काय) + क्रया।
4. अन्त म माता- पता को पढ़कर सुनाइए और उनसे हस्ताक्षर करवाइए — इससे यह सचमुच ‘चचा करके लखा गया’ बनता है।

उपयोगी क्रयापद-कोश (उत्तमपुरुष एकवचन) —

कायम् संस्कृत क्रया वाक्य-नमूना

उठना उि ष्ठािम अहं पादोन-षड् वादने उ त्तष्ठा म ।

पढ़ ना पठािम अहं सप्तवादने संस्कृतं पठा म ।

खाना खादािम अहं साध-सप्तवादने प्रातराशं खादा म ।

िलखना िलखािम अहं सायं गृहकाय लखा म ।

खेल ना क्र ीडािम अहं चतुवादने मत्रैः सह क्र डा म ।

सोना स्विपिम अहं साध-नववादने स्व प म ।

सहायता करना साहाय्यं करोिम अहं मातुः गृहकाय साहाय्यं करो म ।

नमूना उत्तर (संक्षेपेण) — अहं प्रातः पादोन-षड् वादने उ त्तष्ठा म । ततः माता पतरौ नमा म । अहं षड् वादने योगासनं करो म
। साध-षड् वादने अहं स्नानं करो म । सप्तवादने अहं पाठान् पठा म । साध-सप्तवादने अहं प्रातराशं खादा म । अष्टवादने
अहं वद्यालयं गच्छा म । सायं पञ्चवादने अहं क्र डाङ्गणे क्र डा म । रात्रौ साध-नववादने अहं स्व प म ।

माता- पता से पूछने को क्य कहा गया: ब ा अपनी दनचया का आधा हस्सा भूल जाता है — कब खाना बना,
कब दवा ली, कब सोया। घर के बड़े ही असली समयसारणी जानते ह। साथ ही यह अभ्यास घर म संस्कृत क बात ले
जाता है — पाठ का यही उ े श्य है।

Tip: दन के भाग बताने वाले अव्यय याद र खए — प्रातः (सुबह), मध्या े (दोपहर), सायम् (शाम), रात्रौ (रात
म)। इनसे वाक्य और स्पष्ट हो जाता है।

प्र.3 शष्टाचारस्य वषये पञ्चानां ोकानां संग्रहं कुवन्तु स्मरन्तु च ।

शष्टाचार पर पाँच सुप्र सद्ध ोक — अथ के साथ। इन्ह कण्ठस्थ कर लेना ही इस काय का असली भाग है।

Page 25 of 27

Page 27

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

क्रमः ोकः अथः ( हन्द ) कः शष्टाचारः

१ सत्यं ूयात् प्रयं ूयात् न ूयात् सच बोलो, िपय बोलो; ऐसा सच मत बोलो जो चुभे, और िपय लगने सत्यकथनम्,
सत्यम प्रयम् । वाला झूठ भी मत बोलो — यही सनातन धम है। प्रयवचनम्
प्रयं च नानृतं ूयात् एष धमः
सनातनः ॥

२ वद्या ददा त वनयं वनयाद् या त िवद्य ा िवनय दे ती है, िवनय से योग्यता आती है, योग्यता से धन, धन वनयः,
पात्रताम् । से धम और धम से सुख िमलता है। गुरुवन्दनम्
पात्रत्वाद् धनमा ो त धनाद् धम
ततः सुखम् ॥

३ अ भवादनशीलस्य नत्यं जो सदा अिभवादन करता है और बड़ ों की से वा करता है, उसकी वृद्धसेवा, ज्येष्ठेषु
वृद्धोपसे वनः । चार वस्तुए ँ बढ़ ती है ं — आयु, िवद्य ा, यश और बल। आदरः
चत्वा र तस्य वधन्ते आयु वद्या
यशो बलम् ॥

४ परोपकाराय फल न्त वृक्षाः वृक्ष दू स रों के िलए फलते है,ं निदयाँ दू स रों के िलए बहती है,ं गाये ं परोपकारः,
परोपकाराय वह न्त नद्यः । दू स रों के िलए दू ध दे ती है ं — यह शरीर भी परोपकार के िलए ही प्रा णषु दया
परोपकाराय दुह न्त गावः है।
परोपकाराथ मदं शरीरम् ॥

५ अयं नजः परो वे त गणना ‘यह अपना है, वह पराया’ — ऐसी िगनती छोटे मन वालों की होती सवषु मैत्रीभावः
लघुचेतसाम् । है; उदार हृदय वालों के िलए तो सारी पथ्ृ वी ही पिरवार है।
उदारच रतानां तु वसुधैव
कुटु म्बकम् ॥

याद करने का सरल तरीक़ा: हर ोक अनुष्टुप् छन्द म है — चार चरण, हर चरण म आठ अक्षर। इस लए इसे
गाकर याद क जए, रटकर नह । दो-दो चरण एक साँस म बो लए; तीन दन म एक ोक — पाँच ोक पन्द्रह दन
म पक्के।

Tip: संग्रह बनाते समय एक छोट कॉपी र खए — बाएँ प े पर ोक, दाएँ प े पर अथ और उससे जुड़ा शष्टाचार-
पद (अभ्यास प्रश्न १ क सूची से)। कक्षा म प्राथना-सभा के लए भी यही संग्रह काम आ जाएगा।

अध्याय — एक नज़र म
पाठ का नाम ही पहला वाक्य है — ‘अहं प्रातः उ त्तष्ठा म’ = ‘म सुबह उठता/उठती ँ’। पूरा पाठ उत्तमपुरुष एकवचन म
कहा गया है — करो म, पबा म, नमा म, गच्छा म — इस लए वद्याथ इसे ज्य -का-त्य अपनी दनचया बताने म काम ले
सकता है।
समय बताने का साँचा एक ही है — ‘संख्या + वादनम्’। पञ्चवादनम् = ५:००, षड् वादनम् = ६:००, अष्टवादनम् = ८:००।
और समय पर कहना हो तो सप्तमी वभ क्त — पञ्चवादने (पाँच बजे)।

Page 26 of 27

Page 28

कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 6 अहं प्रातः उ त्तष्ठा म AglaSem · NCERT Solutions

तीन उपसग-जैसे शब्द सारा खेल पलट दे ते ह — सपाद (स + पाद = सवा, +१५ मनट), साध (स + अध = साढ़े , +३०
मनट) और पादोन (पाद + ऊन = पौने, −१५ मनट)। इसी लए पादोन-सप्तवादनम् ७:४५ नह , ६:४५ होता है।
दनचया ५:०० से ८:०० तक बारह चरण म चलती है — उठना, भू मवन्दन, माता- पता को नमन, उषःपान, शौच-
दन्तधावन, सूयनमस्कार-योगासन, स्वाध्याय, प रसर-स्वच्छता, स्नान, प्राथना-गीतापाठ, चरणवन्दन, प्रातराश और वद्यालय-
गमन।
यह केवल भाषा का पाठ नह , शष्टाचार का पाठ भी है। अभ्यास का प्रश्न १ और प्रश्न ६ पूरी तरह शष्टाचार-पद पर ह —
गुरुवन्दनम्, वृद्धसेवा, अ त थसत्कारः, प्रा णषु दया, समयपालनम्, प्रकृ तरक्षणम् — और उनके सामने रखे ह दुगुण — कलहः,
अहङ् कारः, असूया, हसा, परस्परद्वे षः।
योग्यता वस्तर भारत क समय- वद्या दखाता है — कोणाक का सूयम न्दर, जयपुर का घ टकायन्त्रम् और दल्ली का
मश्रयन्त्रम् (जन्तर-मन्तर)। साथ म दो नत्यपाठ्य ोक — कराग्रे वसते लक्ष्मीः (प्रातःस्मरणम्) और समुद्रवसने दे व
(भू मवन्दना)।

त्व रत पुनरावृ त्त

संस्कृ तपदम् क सूचय त समयः हन्द

पञ्चवादनम् पूरे पाँच बजे ५:०० पाँच बजे

सपाद-पञ्चवादनम् पाँच + एक पाद (चौथाई) ५:१५ सवा पाँच

साध-पञ्चवादनम् पाँच + अध ५:३० साढ़े पाँच

पादोन-षड् वादनम् छह में एक पाद कम ५:४५ पौने छह

षड् वादनम् पूरे छह बजे ६:०० छह बजे

पादोन-सप्तवादनम् सात में एक पाद कम ६:४५ पौने सात

सप्तवादनम् पूरे सात बजे ७:०० सात बजे

साध-सप्तवादनम् सात + अध ७:३० साढ़े सात

अष्टवादनम् पूरे आठ बजे ८:०० आठ बजे

सपाद-नववादनम् नौ + एक पाद ९:१५ सवा नौ

दशवादनम् पूरे दस बजे १०:०० दस बजे

साध-द्वादशवादनम् बारह + अध १२:३० साढ़े बारह

Page 27 of 27

Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages28
Updated19 Sep 2026