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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा5
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 7: मेरा बचपन
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
75 – 84 13 27 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 33 pages
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: मेरा बचपन
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 7 मेरा बचपन के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह गद्य है — अपने बचपन क याद म लखा हुआ एक
संस्मरण। इसके रचनाकार प्रेमचंद ह। उनका नाम पृष्ठ 77 पर पाठ के अंत म छपा है और नीचे लखा है — “(रत्न सागर प्रकाशन से साभार)”। लेखक
अपने गाँव का क ा टू टा घर, पयाल का बछौना, नंगे पाँव खेत म घूमना, आम के पेड़ पर चढ़ना, रामलीला क तैयारी और सबसे बढ़कर गुल्ली-डंडा
याद करते ह। पृष्ठ 75 से 84 तक छपे हर अभ्यास — बातचीत के लए, पाठ से, समझ और अनुभव, मलान क जए, खान-पान, आइए जान, तमाशा,
रामलीला, भाषा क बात, प्राथ मक च कत्सा पेट , आपके खेल, पुस्तकालय से, इन्ह भी जा नए तथा पता लगाइए — का पूरा हल यहाँ दया गया है।
इस पाठ के साथ बना क्रमांक क कोई अनुपूरक रचना नह छपी है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 75 – 84
खं ड प्रश्न
13 27
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 77
पाठ पढ़ने के बाद कक्षा म आपस म चचा करने के प्रश्न
बातचीत के लए
प्र.1 लेखक को रामलीला क तैया रय म कौन-कौन से काम सबसे अ धक उत्सा हत करते ह गे?
सबसे अ धक उत्साह उन्ह पात्र का रूप-रंग भरते हुए दे खने म आता होगा। पाठ म यही बात सबसे साफ़ लखी है।
पाठ की पंिक्तयाँ —
“िजस घर में लीला पात्रों का रूप-रंग भरा जाता थ ा, वह तो मेरे घर से िबलकु ल िमला हआ
ु थ ा।”
“द ो बजे िद न से पात्रों की सजावट शरू
ु होने लगती। मै ं द ोपहर से ही वहाँ जा बैठ ता।”
“िजस उत्साह से द ौड़कर छोटे -मोटे काम करता, उस उत्साह से तो आ ज अपनी पेंशन लेने भी नही ं जाता।”
‘रूप-रंग भरना’ का अथ है — पात्र का वेश और मेकअप तैयार करना। यानी राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण बनने वाले
लोग को सजाना।
प्रश्न म ‘करते ह गे’ पूछा गया है, इस लए हम पाठ के आधार पर अनुमान भी लगाना है। ये काम उन्ह ज़रूर उत्सा हत करते ह गे —
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काम इसम उत्साह क्य आता होगा
पात्रों का रंग -रोगन और वेशभूषा दे खना आँखों के सामने एक साधारण आदमी धीरे -धीरे राम या हनुमान बन जाता था। यह िकसी
जादू से कम नहीं लगता।
मुकु ट, धनुष-बाण, गदा जैसे सामान उठाकर ये चीज़ ें कहानी की चीज़ ें थीं। इ हे ं हाथ में पकड़ ले ना ही बड़ ी बात लगती होगी।
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लाना-ले जाना
रंग की कटोिरयाँ, कपड़े, दाढ़ ी-मूँछ पकड़ाना इससे वे तैयारी का िह सा बन जाते थे, के वल दे खने वाले नहीं रहते थे।
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मंच सजाना, परदा और ब ी लगवाना मैदान धीरे -धीरे रामलीला का मंच बनता िदखता था।
पात्रों को पानी िपलाना, इधर-उधर का संदे श बड़ े लोग उ हे ं काम कहते थे — इससे अपने बड़ े होने का सुख िमलता होगा।
न्
पहुच
ँ ाना
मैद ान में अच्छी जगह घे र कर बैठना सबसे आगे बैठकर लीला दे खने का मज़ ा ही अलग होता है।
उन्ह इतना उत्साह क्य आता था: रामलीला का घर उनके घर से बलकुल मला हुआ था। यानी सारी तैयारी
उनक आँख के सामने होती थी। जो चीज़ पास होती है, उससे लगाव जल्द हो जाता है। दूसरी बात — वहाँ उन्ह
छोटे -मोटे काम मल जाते थे, और अपने काम से कसी बड़े आयोजन का हस्सा बन जाना ब े को बहुत अ ा
लगता है।
ध्यान द जए: लेखक ने अपने उत्साह को नापने के लए बहुत सुंदर तुलना द है — “उस उत्साह से तो आज अपनी
पशन लेने भी नह जाता।” पशन यानी अपना पैसा। यानी बचपन का वह उत्साह पैसे से भी बड़ा था।
प्र.2 आपको लेखक के बचपन क कौन-कौन सी बात सबसे अ लग ? वे बात आपको अ क्य लग ?
यह आपके अपने मन क बात है, इस लए उत्तर हर ब े का अलग होगा। एक अ े उत्तर म दो चीज़ होनी चा हए — (1) पाठ क
वह बात, और (2) वह आपको अ क्य लगी।
नमूना उत्तर: मुझे लेखक के बचपन क ये बात सबसे अ लग —
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पाठ क बात मुझे यह क्य अ लगी
“नंग े बदन, नंग े पाँव खेतों में घूम ना, आम के पेड़ों पर इसमें कोई रोक-टोक नहीं है। खुल ी हवा, खेत और पेड़ — यह पढ़ कर मुझे भी अपने गाँव-
चढ़ ना” खेत की याद आ गई।
ग ल्ु ली-डंडा — “मजे से िकसी पेड़ से एक टहनी खेल का सामान खुद बना ले ना मुझे बहुत अ छा लगा। इसमें पैसे भी नहीं लगते और अपने
च्
काट ली, ग ल्ु ली बना ली” हाथ से बनाने का सुख अलग ही होता है।
“दो आदमी भी आ गए तो खेल शुरू हो गया” इस खेल के िलए न बड़ ी टीम चािहए, न मैदान बुक करना पड़ ता है। जब मन हो, तभी
खेल शु ।
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रामलीला की तैयारी में दौड़-दौड़कर छोटे-मोटे काम ब चे को भी काम िमल जाना बहुत अ छा लगता है। मुझे भी घर के योहारों की तैयारी में
च् च् त्
करना हाथ बँटाना अ छा लगता है।
च्
“अमीर-गरीब का िबलकु ल भेद न था, अिभमान की यह बात मुझे सबसे अ छी लगी। मैदान में सब बराबर थे। खेल में यही होना भी चािहए —
च्
ग ंज
ु ाइश ही न थी” दो ती बड़ ी चीज़ है, अमीरी नहीं।
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“पातःकाल मटर और जौ का चबेना” सादा, घर का, िबना पैसे वाला ना ता। मुझे लगा िक खुशी महँगी चीज़ ों से नहीं आती।
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इन सब बात म एक ही बात छपी है: लेखक के बचपन क खु शयाँ बना पैसे क खु शयाँ थ — पेड़, खेत,
टहनी क गुल्ली, दोस्त का साथ। इसी लए वे आज भी याद ह। जो खुशी हम खुद बनाते ह, वह सबसे दे र तक याद
रहती है।
ऐसे ल खए: दो-तीन बात चु नए, हर बात के आगे “क्य क…” लगाकर एक वाक्य ल खए। बस, आपका उत्तर
पूरा हो जाएगा।
प्र.3 खेलते समय चोट न लगे, इसके लए आप क्या-क्या कर सकते ह?
खेलना बंद करने क ज़रूरत नह है। बस थोड़ी सावधानी रखनी है। लेखक ने भी माना है क चोट लग सकती है — “गुल्ली से
आँख फूट जाने का भय रहता है” — पर साथ ही पूछा है, “तो क्या क्रकेट से सर टू ट जाने का भय नह रहता!” यानी चोट हर खेल
म लग सकती है, इस लए डरना नह , सँभलकर खेलना चा हए।
खेलने से पहले —
1. मैदान दे ख ली जए। पत्थर, काँच, क ल, ग ा या काँटे ह तो पहले हटा द जए।
2. सड़क पर मत खे लए। खुले मैदान या पाक म ही खे लए। कुएँ, तालाब, नाले और बजली के खंभे के पास खेलना खतरनाक
है।
3. हाथ-पैर थोड़े ढ ले कर ली जए — दौड़ने से पहले हल्का वाम-अप कर लेने से मोच नह आती।
4. जूते पहनकर खे लए और चश्मा या घड़ी जैसी चीज़ उतार द जए।
खेलते समय —
1. नयम पहले तय क जए और सब उनका पालन क जए। ज़्यादातर चोट नयम तोड़ने से लगती है।
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2. गुल्ली-डंडा जैसे खेल म दूर खड़े र हए। मारने से पहले चार ओर दे ख ली जए क कोई सामने तो नह है। यही बात बल्ला, गद
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और पत्थर पर भी लागू है।
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3. धक्का-मुक्क और लड़ाई-झगड़े से ब चए। जीत से बड़ी चीज़ साथी क सुरक्षा है।
4. थक जाएँm
a s e तो रुक जाइए और पानी पी जए। थका शरीर जल्द गरता है।
a l ही जाए तो —
चोटgलग
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1. तुरंत खेल रोक द जए और कसी बड़े को बताइए।
2. घाव को साफ़ पानी से धोकर प्राथ मक च कत्सा पेट से प
e m . क जए। (इसी पाठ म पृष्ठ 82 पर इसी पेट क बात है।)
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3. ज़्यादा चोट हो, आँख या सर पर लगी हो, तो दे र मत क जए — सीधे डॉक्टर के पास जाइए।
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सबसे ज़रूरी नयम: जस खेल म कोई चीज़ हवा म उड़ती है — गुल्ली, गद, पत्थर — उसम आँख सबसे ज़्यादा
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खतरे म रहती है। इस लए ऐसे खेल म खलाड़ी से दूर खड़े होना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
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याद र खए: लेखक के माथे पर गुल्ली का दाग आज तक है और उनके कुछ दोस्त को बैसाखी लेनी पड़ी। यानी यह
a gl डर सचमुच का है, बनाया हुआ नह । सावधानी को डरपोक होना मत सम झए — यह समझदारी है।
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लेखक के पता और घर के अन्य सदस्य चौके म बैठे-बैठे क्या-क्या बात करते ह गे?
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प्र.4
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वे सब लेखक के दे र तक खेलते रहने क बात करते ह गे। पाठ म लखा है — “घरवाले बगड़ रहे ह, पताजी चौके पर बैठे रो टय
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g का अथ है — गुस्सा ब े पर है,
.c रसोई — जहाँ खाना बनता है और बैठकर खाया जाता है। ‘रो टय पर क्रोधaउतारना’
पर अपना क्रोध उतार रहे ह। न नहाने क सुध है, न खाने क ।”
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seवह नकल रहा है रोट बेलने और थाली रखने पर।
चौका यानी
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पर
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नमूना बातचीत:
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: दो बज गए! खाना ठं डा हो रहा है और लड़ का अभी तक नही ं लौटा।
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िपताजी
माँ : सवेरे से गया है। न नहाया, न कु छ खाया। बस डंडा उठाया और चल िदया।
: रहने दो, बच्चा है। मै ं रोटी ढककर रख दे त ी हूँ।
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द ाद ी
: मैद ान से बुलाकर लाऊँ ? हलधर भी वही ं होगा।
se m
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च ाच ा
.c : पढ़ ाई का क्या होगा? मौलवी साहब के यहाँ भी ऐसे ही दे र से पहaँचु gता होगा।
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िपताजी
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agl माँ : कल गुल्ली माथे पर लग गई थी। कही ं आँख में लग जाती तो?
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: हम भी तो बचपन में यही सब खेलते थे । बुला लो, डाँट ो मत — बस खा-नहा ले।
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द ाद ी
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वे कस बात क चचा करते ह गे पाठ से इसका आधार
खाना ठं डा हो रहा है, लड़का अब तक नही ं “िपताजी चौके पर बैठे रोिटयों पर अपना क्रोध उतार रहे है।ं ”
आया
न नहाया, न खाया — िदन भर खेल ही खेल “न नहाने की सुध है, न खाने की।”
चोट लग जाने का डर गु ली से आँख फू ट जाने का भय रहता है”; “हमारे माथे में गु ली का दाग आज तक बना हुआ
“ ल् ल्
है”
पढ़ ाई िपछड़ जाने की िचंता वे दू सरे गाँव में मौलवी साहब के यहाँ पढ़ ने जाते थे।
रामलीला के मैद ान में दे र तक बैठे रहना “मैं दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।”
बड़ों का अपना बचपन याद करना और हँस घर के बड़ े भी कभी ब चे थे — इसीिलए गु सा य़ ादा दे र िटकता नहीं।
च् स्
दे ना
गुस्से के पीछे प्यार है: घरवाले नाराज़ इस लए ह क ब ा भूखा है और उसे चोट लग सकती है। यानी यह गुस्सा
डाँटने के लए नह , फ़क्र के कारण है। इसी लए लेखक ने इसे बुरा नह , अपने बचपन क मीठ याद क तरह लखा
है।
पाठ से — पृष्ठ 77
नीचे दए गए प्रश्न के उत्तर अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए — (इस पाठ का ‘पाठ से’ बहु वकल्पी नह है; यहाँ लखकर उत्तर दे ने वाले प्रश्न
ह)
पाठ से ले ख न
प्र.1 लेखक के चचेरे भाई हलधर क आयु कतनी थी?
हलधर क आयु दस साल थी।
पाठ की पंिक्त —
“मेरी उम आ ठ साल थ ी, हलधर म ुझसे द ो साल जेठे थे ।”
लेखक की उम = 8 साल
हलधर लेखक से बड़ े थे = 2 साल
हलधर की उम = 8 + 2 = 10 साल
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जेठा शब्द का अथ है — उम्र म बड़ा। इस लए ‘दो साल जेठे’ का अथ हुआ ‘दो साल बड़े’।
यहाँ गलती कहाँ हो सकती है: कुछ ब े 8 म से 2 घटा दे ते ह और 6 साल लख दे ते ह। घटाना तब होता, जब
हलधर छोटे होते। पर वे जेठे यानी बड़े थे, इस लए यहाँ जोड़ना है।
एक बात और: हलधर लेखक के चचेरे भाई थे, यानी चाचा के बेटे। दोन साथ-साथ दूसरे गाँव म एक मौलवी साहब
के यहाँ पढ़ने जाते थे।
प्र.2 लेखक ने अपने घरवाल के क्रोध का कारण क्या बताया है?
घरवाल के क्रोध का कारण यह था क लेखक खेल म इतने डू ब जाते थे क उन्ह न नहाने का ध्यान रहता था, न खाने का।
पाठ की पंिक्तयाँ —
“घरवाले िबगड़ रहे है,ं िपताजी च ौके पर बैठे रोिटयों पर अपना क्र ोध उतार रहे है ं।
न नहाने की सुध है, न खाने की।”
यहाँ दो शब्द समझ ली जए —
सुध = ध्यान, होश। ‘नहाने क सुध न होना’ यानी नहाने क बात याद ही न रहना।
चौका = रसोई, जहाँ खाना बनता और खाया जाता है।
‘रो टय पर क्रोध उतारना’ का अथ है — गुस्सा ब े पर है, पर वह नकल रहा है रोट बेलने-सकने पर। यह कहने का बहुत सुंदर ढं ग
है।
घरवाले नाराज़ क्य होते थे: दोपहर हो चुक है, खाना तैयार है और ब ा मैदान म है। खाना ठं डा हो रहा है, नहाना
रह गया है, और गुल्ली से चोट लगने का डर अलग। यानी यह गुस्सा असल म फ़क्र है। पर ब े को उस समय गुल्ली
के आगे कुछ सूझता ही नह — “गुल्ली है जरा-सी, पर उसम दु नया भर क मठाइय क मठास और तमाश का
आनंद भरा है।”
प्र.3 लेखक के अनुसार, गुल्ली-डंडा और वलायती खेल म क्या अंतर है?
सबसे बड़ा अंतर खच का है। गुल्ली-डंडा बना पैसे के खेला जाता है, जब क वलायती यानी वदे शी खेल का सामान महँगा होता
है।
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पाठ की पंिक्तयाँ —
“न लॉन की जरूरत , न कोट की, न थ ापी की, मजे से िकसी पेड़ से एक टहनी काट ली, गल्ु ली बना ली औ र द ो
आ द मी भी आ गए तो खेल श ु रू हो गया। ”
“िवलायती खेलों में सबसे बड़ा ऐब है िक उनके सामान महँगे होते है ं।”
“भारतीय खेल िखलाए ँ जो िबना द ाम, कौड़ी के खेले जाते है ं।”
बात गुल्ली-डं डा वलायती खेल
सामान पेड़ से एक टहनी काटकर खुद बना ली जए तैयार सामान बाज़ ार से खरीदना पड़ ता है
खच बना दाम-कौड़ी के, यानी कुछ भी खच सामान महँगा — यही ले खक के अनुसार उनका सबसे बड़ ा ऐब (दोष) है
नह
मैद ान न लॉन चा हए, न कोट — कोई भी खाली बना-बनाया लॉन या कोट चािहए
जगह चलेगी
िकतने िखलाड़ी दो लोग हो जाएँ तो खेल शुरू पूरी टीम और तय सं या चािहए
ख्
फीस कोई फ स नह “हमारे कू लों में हरे क लड़ के से तीन-चार पये सालाना के वल खेल ने की
स् रु
फीस ली जाती है।”
कौन खेल हर कोई — “अमीर-गरीब का बलकुल िजसके पास पैसा हो, वही सामान जुटा सकता है
सकता है भेद न था”
चोट का डर गुल्ली से आँख फूटने का डर िक्रके ट से िसर टू टने का डर — यानी डर दोनों में है
ले खक की राय “गुल्ली-डंडा सब खेल का राजा है।” “हम अंगेजी चीजों के पीछे ऐसे दीवाने हो रहे है ं िक अपनी सभी चीजों से
अ िच हो गई है।”
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लेखक कहना क्या चाहते ह: वे वदे शी खेल को बुरा नह कह रहे। वे यह कह रहे ह क हमने अपने खेल को
बेकार समझना शुरू कर दया है। जो खेल बना पैसे के खेला जा सके, वह हर ब े तक पहुँच सकता है — गरीब
के ब े तक भी। इसी लए वे पूछते ह क स्कूल म भारतीय खेल क्य नह खलाए जाते।
चोट वाली दलील सम झए: लोग कहते ह क गुल्ली से आँख फूट सकती है। लेखक उत्तर दे ते ह — क्रकेट से भी
तो सर टू ट सकता है। यानी चोट के डर से कसी एक खेल को ही खराब कहना ठ क नह । सावधानी हर खेल म
चा हए।
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प्र.4 इस पाठ म लेखक ने अपने बचपन के कन- कन अनुभव को याद कया है?
लेखक ने अपने बचपन क चार बड़ी याद लखी ह — गाँव और घर, पढ़ने जाना, रामलीला, और गुल्ली-डंडा।
1. गाँव, घर और खुलापन — “वह क ा टू टा घर, वह पयाल का बछौना, वह नंगे बदन, नंगे पाँव खेत म घूमना, आम के पेड़
पर चढ़ना।” (पयाल यानी धान क सूखी डंठल, जसे बछाकर सोते थे।)
2. पढ़ने जाना — वे अपने चचेरे भाई हलधर के साथ दूसरे गाँव म एक मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाते थे। तब उनक उम्र आठ
साल थी और हलधर दस साल के थे। दोन सवेरे मटर और जौ का चबेना लेते थे।
3. रामलीला — घर से थोड़ी दूर रामलीला मैदान था और पात्र का रूप-रंग भरने वाला घर बलकुल सटा हुआ था। वे दोपहर से ही
वहाँ जा बैठते और दौड़-दौड़कर छोटे -मोटे काम करते थे।
4. गुल्ली-डंडा — “गुल्ली-डंडा सब खेल का राजा है।” सवेरे घर से नकल जाना, पेड़ पर चढ़कर टहनी काटना और अपनी
गुल्ली-डंडा बनाना। खला ड़य का जमघट, लड़ाई-झगड़े, और सबका सरल स्वभाव।
अनुभव पाठ क पं क्त उस याद का भाव
कच्चा टू टा घर, पयाल का “वह क ा टू टा घर, वह पयाल का बछौना” घर छोटा और सादा था, पर
िबछौना उसकी याद मीठी है।
नंग े पाँव खेतों में घूम ना, आम के “नंगे पाँव खेत म घूमना, आम के पेड़ पर चढ़ना” खुल ी हवा और पूरी आज़ ादी।
पेड़ पर चढ़ ना
हलधर के साथ पढ़ ने जाना “म अपने चचेरे भाई हलधर के साथ दूसरे गाँव म एक मौलवी भाई का साथ और रोज़ का लंबा
साहब के यहाँ पढ़ने जाया करता था।” रा ता।
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मटर और जौ का चबेना “हम दोन प्रातःकाल मटर और जौ का चबेना लेते थे।” सादा, घर का, िबना पैसे का
ना ता।
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रामलीला की तैयारी “दो बजे दन से पात्र क सजावट शुरू होने लगती। म दोपहर से काम करने का ऐसा उ साह, जो
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ही वहाँ जा बैठता।” अब नहीं रहा।
ग ल्ु ली-डंडा बनाना और खेल ना “प्रातःकाल घर से नकल जाना, पेड़ पर चढ़कर टह नयाँ काटना अपने हाथ से खेल बना ले ने का
और गुल्ली-डंडा बनाना।” सुख।
चोट और उसका दाग “अगर हमारे माथे म गुल्ली का दाग आज तक बना हुआ है” चोट भी अब एक यारी िनशानी बन
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गई है।
सबका बराबर होना “अमीर-गरीब का बलकुल भेद न था, अ भमान क गुंजाइश ही न यही उस बचपन की सबसे बड़ ी
थी।” सुंदरता है।
घरवालों की डाँट “न नहाने क सुध है, न खाने क ।” डाँट भी अब मीठी याद बन गई है।
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इन सब याद म एक बात साझा है: इनम से कसी म पैसा नह लगा। खेत, पेड़, टहनी, चबेना, दोस्त, रामलीला का
मैदान — सब मुफ़्त थे। इसी लए पाठ के अंत म लेखक कहते ह — “गुल्ली है जरा-सी, पर उसम eदुm
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नया भर क
o और तमाश का आनंद भरा है।”
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समझ और अनुभव — पृष्ठ 78
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पाठ को अपने जीवन से जोड़ने वाले प्रश्न
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समझ और अनु भ व अपना अनु भ व a g l
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लेखक के बचपन के कौन-कौन से काम आपने भी कए ह?
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gयहl आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। पहले पाठ म से लेखक के काम छाँ टए, फर उनके सामने अपना अनुभव ल खए।
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नमूना उत्तर: लेखक ने बचपन म जो कया, उसम से बहुत कुछ मने भी कया है —
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मने भीm
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लेखक ने क्या कया यह कया है या नह
नंग े पाँव खेतों में घूम ना ag हाँ। गरमी की छु ि यों में नानी के गाँव जाकर मैं भी खेत की मेड़ पर नंगे पाँव दौड़ ता हू।ँ
m मैं नीचे िगरे
हाँ, पर छोटी डाल तक ही। बड़ े कहते है ं िक ऊपर चढ़ ना खतरनाक हैo, इसिलए
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आम के पेड़ों पर चढ़ ना
आम बीनता हू।ँ
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हाँ। मैं और मेरी चचेरी बहन रोज़ साथ-साथ िवaालय जाते है।ं
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भाई-बहन े साथ िमलकर पढ़ ने जाना
agl सवेरे चबेना खाना हाँ। घर में भुने चने और मुरमुरे अकसर बनते है,ं और मैं उ हे ं रा ते में चबाता जाता हू।ँ
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आयोजन की तैयारी में दौड़-दौड़कर काम हाँ। िव ालयmके वािषक कायक्रम में मैंने कु िसयाँ लगाईं और मंच सजाने में मदद की।
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करना
रामलीला या नाटक दे खना
agl हाँ। दशहरे पर हमारे मुह ले में रामलीला होती है, मैं हर साल दे खने जाता हू।ँ
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हाँ। मैंने कागज़ की पतंग और लकड़ ी का ब ला खुद बनाया है।
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खेल का सामान खुद बनाना ल्
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m s eहैmऔर घर से बुलावा आ जाता है।
हाँ, कभी-कभी। शाम को खेल ते-खेल ते अँधेरा हो जाता
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खेल में इतना डू ब जाना िक खाना-नहाना भूल
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जाना
ase खेलते समय चोट लगना
a g l हाँ। एक बार दौड़ ते हुए घुटना िछल गया था, माँ ने प ी बाँध दी थी।
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ऐसे ल खए: दो कॉलम क एक ता लका बनाइए। बाईं ओर पाठ का काम, दाईं ओर अपना अनुभव। जो काम
आपने न कया हो, उसके आगे साफ़ m
a s e ल खए — “यह मने नह कया।” उत्तर तभी स ा लगता है।
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प्र.2 लेखक अपने बचपन म खेलने के लए स्वयं गुल्ली बना लेते थे। आप कौन-कौन से खेल- खलौने स्वयं बना लेते
ह? कसी एक को बनाकर कक्षा म लेकर आइए और अपने समूह के साथ मलकर खे लए।
यह करके दखाने वाला काम है। पहले सूची बनाइए, फर एक खलौना चुनकर बनाइए, फर कक्षा म खे लए।
ऐसे खलौने घर क चीज़ से बन जाते ह —
खलौना कस चीज़ से बनेगा कैसे खेलगे
ग ल्ु ली-डंडा पेड़ क एक सूखी टहनी गु ली को डंडे से उछालकर दू र मारना
ल्
पतंग पतला कागज़, दो स क, धागा, लेई खुल ी जगह में उड़ ाना
चरखी या िफरकी गत्ता, पन और प सल हवा में घुमाना
बटन का भँवरा एक बड़ा बटन और धागा धागे को खींचकर बटन को नचाना
िग े या पंचगोटी पाँच चकने छोटे पत्थर उछालकर हाथ के पीछे और आगे
पकड़ ना
इकड़ी-दुक ड़ी के खाने ज़मीन पर चॉक या कोयले से ख ची लक र और एक चपटा एक पैर से कू दते हुए खाने पार करना
पत्थर
कागज़ की नाव और हवाई पुरानी कॉपी का एक पन्ना पानी में तैराना, हवा में उड़ ाना
जहाज़
मािचस की िडब्बी का टेल ीफ़ ोन दो ड ब्बयाँ और लंबा धागा धागा तानकर एक-दू सरे से बात करना
रस्सी पुरानी साड़ी या धोती क बट हुई रस्सी र सी कू दना
स्
एक खलौना बनाकर दे खए — कागज़ क पतंग:
1. चरण 1: एक चौकोर पतला कागज़ ली जए (लगभग एक बा लश्त का)।
2. चरण 2: दो पतली स क ली जए — एक सीधी, एक थोड़ी मुड़ने वाली।
3. चरण 3: सीधी स क को कागज़ के बीच बीच ऊपर से नीचे तक चपकाइए।
4. चरण 4: दूसरी स क को हल्का कमान क तरह मोड़कर आड़ी चपकाइए।
5. चरण 5: बीच म दो छोटे छे द करके कन्नी (धागा) बाँ धए और उसम डोर जो ड़ए।
6. चरण 6: नीचे कागज़ क एक पूँछ लगाइए, ता क पतंग सीधी उड़े।
7. चरण 7: खुले मैदान म, बजली के तार से दूर, हवा क ओर पीठ करके उड़ाइए।
सुरक्षा क बात: काटने-छ लने का काम कसी बड़े के सामने ही क जए। पतंग छत के कनारे या सड़क पर मत
उड़ाइए। माँझा नह , सादा धागा ली जए — तेज़ माँझे से प क्षय और लोग को चोट लगती है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
खुद बनाने का सुख: लेखक ने भी यही कया था — “पेड़ पर चढ़कर टह नयाँ काटना और गुल्ली-डंडा बनाना।”
खरीदा हुआ खलौना टू ट जाए तो बुरा लगता है; बनाया हुआ खलौना टू ट जाए तो हम दूसरा बना लेते ह। बनाना
सीख लेने पर खेल कभी नह रुकता।
प्र.3 अनेक ब े कपड़े धोने के लए काम म आने वाली ‘थापी’ को बल्ले क तरह उपयोग कर लेते ह। आप अपने घर
या पास-पड़ोस क कन वस्तुओं को खेल- खलौने क तरह उपयोग म लेते ह?
घर क बहुत-सी साधारण चीज़ खेल का सामान बन जाती ह। बस उन्ह नए ढं ग से दे खना आना चा हए।
घर या पड़ोस क वस्तु हम उसे कस खेल म उपयोग करते ह
कपड़े धोने की थापी ब ले की तरह — इसी बात का िज़ क्र प न में है।
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बाल्टी या टोकरी उलटकर िवके ट बना ले ते है,ं या उसमें गेंद डालने का िनशाना लगाते है।ं
पुर ानी साड़ी या धोती बटकर र सी बना ले ते है ं — र सी कू दने और खींचातानी के िलए।
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चूड़ी, चप्पल या ईंट के टुक ड़े इकड़ ी-दुकड़ ी में गोटी की तरह और सतोिलया में चि याँ जमाने के िलए।
मोज़े में भरा कपड़ा मुल ायम गेंद — घर के भीतर खेल ने के िलए सबसे सुरि त।क्ष
पुर ाने अख़बार गेंद बनाना, टोपी, नाव और हवाई जहाज़ बनाना।
बोतल के ढक्कन कै रम जैसी गोिटयाँ, या ढे र लगाकर िनशाना लगाने का खेल ।
मािचस की िडिब्बयाँ रे ल गाड़ ी बनाना और धागे वाला टेल ीफ़ ोन बनाना।
पुर ाना टायर या साइिकल का िरम डंडे से चलाकर दौड़ लगाना।
चादर और दो कु िसयाँ तंब ू बनाकर उसमें िछपना और कहानी सुनाना।
आँग न की िम ी और पानी घरौंदा, बतन और छोटी-छोटी मूितयाँ बनाना।
इमली के बीज या कं चे गोिटयों का खेल और िनशाने का खेल ।
यही तो लेखक क बात है: लेखक कहते ह क भारतीय खेल “ बना दाम, कौड़ी के खेले जाते ह।” यानी खेलने के
लए दुकान जाना ज़रूरी नह । आँख खोलकर दे खए तो घर क हर चीज़ म एक खेल छपा है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
तीन नयम याद र खए: (1) कसी क चीज़ लेने से पहले पूछ ली जए। (2) काँच, चाकू, क ल और गरम बरतन को
खलौना मत बनाइए। (3) खेलने के बाद हर चीज़ अपनी जगह वापस रख द जए — तभी अगली बार भी खेलने को
मलेगी।
प्र.4 लेखक बचपन म अनेक काम उत्साह से दौड़-दौड़कर कया करते थे। आप कौन-से काम बहुत उत्साह से करते ह?
पहले पाठ क बात दे ख ली जए — “ जस उत्साह से दौड़कर छोटे -मोटे काम करता, उस उत्साह से तो आज अपनी पशन लेने भी
नह जाता।” उत्साह यानी वह उमंग, जसम काम बोझ नह लगता।
नमूना उत्तर: म ये काम बहुत उत्साह से करता ँ —
काम इसम मुझे उत्साह क्य आता है
शाम को मैद ान में जाकर खेल ना दो त वहीं िमलते है ं और खेल ते समय थकान का पता ही नहीं चलता।
स्
िव ालय के कायक्रम की तैयारी करना मंच सजाना, चाट बनाना और सामान लाना-ले जाना मुझे बहुत अ छा लगता है।
च्
त्योहार पर घर सजाना और रंग ोली बनाना पूरा घर सुंदर िदखने लगता है और सब िमलकर काम करते है।ं
क्यारी में पौधों को पानी दे ना रोज़ थोड़ ी-थोड़ ी बढ़ त िदखती है — यह दे खकर बहुत अ छा लगता है।
च्
नई कहानी की िकताब पढ़ ना आगे या होगा, यह जानने की उ सुकता बनी रहती है।
क् त्
दादी-नानी के साथ बाज़ार जाना रा ते में वे बहुत-सी पुरानी बाते ं सुनाती है।ं
स्
िचत्र बनाना और रंग भरना कोरे कागज़ पर अपनी क पना उतारना अ छा लगता है।
ल् च्
माँ के साथ रसोई में हाथ बँटाना अपने हाथ से बनी चीज़ जब सब खाते है ं तो बहुत खुशी होती है।
उत्साह कहाँ से आता है: जस काम को हम अपना मान लेते ह, उसी म उत्साह आता है। लेखक को रामलीला के
काम इस लए अ े लगते थे, क्य क वे उन्ह अपना आयोजन मानते थे। यही बात हमारे काम पर भी लागू होती है
— और उत्साह से कया हुआ काम जल्द भी होता है और अ ा भी बनता है।
मलान क जए — पृष्ठ 78
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
नीचे दए गए चत्र का उनके उपयुक्त ववरण से मलान क जए —
मलान क जए शब्दाथ
प्र.1 नीचे दए गए चत्र का उनके उपयुक्त ववरण से मलान क जए —
चत्र ववरण
(क) एक समु क ड़े का खोल जसे पुराने समय म मु ा क तरह
उपयोग करते थे।
(ख) काठ का चपटे और चौड़े सरे का डंडा
(ग) भ्रमण करना अथवा इधर-उधर चलना
(घ) चबाकर खाने के लए भुना हुआ अनाज
पृष्ठ 78 पर छपे चार चत्र और उनके सामने दए गए चार ववरण।
चार जोड़े इस प्रकार बनगे —
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन
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चत्र (ऊपर चत्र म क्या है सही ववरण वह शब्द जो पाठ म आया है
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से नीचे)
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aघूgमना — “नंगे पाँव खेत म
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पहला िचत्र
a em ग भमण करना अथवा इधर-उधर चलना
( )
ag l सड़क पर टहलने नकले ह घूमना”
दू स रा िचत्र कटोरे म भरे हुए भुने दाने और घ चबाकर खाने के िलए भुना हुआ अनाज
( ) चबेना — “प्रातःकाल मटर और
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मुरमुरे जौ का चबेना लेते थे”
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mका चपटे और चौड़ े िसरे का डंडा
a काठ
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तीसरा िचत्र लकड़ी का चौड़ा, चपटा डंडा थापी — “न लॉन क जरूरत, न
(कपड़े धोने वाला) कोट क , न थापी क ”
चौथा िचत्र बीच म लंबी दरार वाले क एक समुदी कीड़ े का खोल िजसे पुराने
( )
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कौड़ी — “जो बना दाम, कौड़ी
m.
समय में मुदा की तरह उपयोग करते थे।
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चमक ले सीप जैसे खोल के खेले जाते ह”
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अब हर शब्द.cको थोड़ा और समझ ली जए — g l a
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घूमना — यहाँ इसका अथ है बना कसी काम के इधर-उधर चलना, टहलना। लेखक खेत म यही करते थे।
चबेना — भूनकर तैयार कया हुआ अनाज, जो चलते- फरते चबाया जा सके। इसे बनाने म तेल-मसाला बहुत कम लगता है,
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थापी — कपड़े धोने का चौड़ा लकड़ी का डंडा। पाठ म.cलेखक कहते ह क गुल्ली-डंडा खेलने के लए थापी तक क ज़रूरत agl
इस लए यह सस्ता भी है और सेहत के लए अ ा भी।
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नह पड़ती।
कौड़ी — समु क ड़े का खोल। बहुत पुराने समय म लोग इसी से खरीद- बक्र करते थे, यानी यह उस समय का सक्का थी।
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इसी लए “ बना दाम-कौड़ी के” का अथ हुआ — बना एक पैसा खच कए।
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मलान करने का आसान तरीका: पहले ववरण म से एक पहचान वाला शब्द ढूँ ढ़ए। जैसे — “समु क ड़े का
m .c सुनते ही सीप जैसी चीज़ ध्यान म आती है, और “भुना हुआ अनाज” सुaनतेg ही कटोरे वाले दाने। इस तरह
aseजोड़ी अपने आप बन जाती है।
खोल”
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ध्यान द जए: तीसरा चत्र दे खने म क्रकेट के बल्ले जैसा लगता है, पर ववरण साफ़ कहता है — “काठ का चपटे
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और चौड़े सरे का डंडा”, यानी थापी। पाठ क ‘समझ और अनुभव’ वाली प्रश्न-संख्या 3 भी यही बताती है क ब े
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थापी को बल्ले क तरह उपयोग कर लेते ह।
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खान-पान — पृष्ठ 79
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
‘चबेना’ क जानकारी और अपने दन भर के खान-पान क सूची
खान-पान सू ची बनाइए
प्र.1 लेखक सवेरे-सवेरे सबसे पहले मटर और जौ का चबेना खाते थे। ‘चबेना’ के बारे म नीचे द गई जानकारी प ढ़ए
— (पृष्ठ 79 पर दो बक्से छपे ह — ‘गुणकारी स्वा दष्ट चना-चबेना’ तथा ‘ऐसे बनाया जाता है चना-चबेना’)
दोन बक्स क बात एक साथ पढ़ ली जए। इनसे तीन बात पता चलती ह — चबेना क्या है, वह कैसे बनता है, और घर का
चबेना बाज़ार क चीज़ से बेहतर क्य है।
1. चबेना कसे कहते ह? पहला बक्सा कहता है — “चना-चबेना प्रायः हम उस खाद्य-सामग्री को कहते ह जो चबाकर खाई जाती
है।”
चबेने म क्या-क्या आता है (बक्से से) पहचान
मकई, िचउड़ा, भेल सूखे, ह के और चबाने में कु रकु रे
ल्
कई तरह के भुने हएु दाने, भुने हएु चावल भूनकर तैयार िकए जाते है,ं तला नहीं जाता
चना, मटर और मुर मुरे सबसे आम और सबसे स ता चबेनास्
भुना हुआ हरा व उबला चना जाड़ े में खेतों से सीधे िमल जाता है
कचिरयाँ, कु रकु रे , पापड़, नमकीन ये भी चबेने का िह सा है,ं पर य़ ादातर बाज़ ार से आते है ं
स्
2. चना-चबेना कैसे बनाया जाता है? दूसरा बक्सा तरीका बताता है। उसे चरण म दे खए —
1. चरण 1: सामग्री जुटाइए — मटर, चना, सूखा चना, मच-अदरक, प्याज-लहसुन, मक्का, पोहा, लाई और मूँगफली।
2. चरण 2: इन सबको कड़ाही म नमक डालकर भली प्रकार भून ली जए।
3. चरण 3: भुनने के बाद उसम हल्का तेल मलाइए।
4. चरण 4: मच क चटनी के साथ प्याज और लहसुन भी मलाइए। इनसे स्वाद बढ़ जाता है।
बक्सा यह भी बताता है क “दे श के व भन्न ान म चना-चबेना वशेष ढं ग से बनाया जाता है।” यानी हर इलाके का अपना तरीका
और अपना स्वाद है।
3. घर का चबेना बाज़ार क चीज़ से अ ा क्य है?
घर का बना चबेना बाज़ार से मलने वाले उत्पाद
भूनकर बनता है, तेल बहुत कम लगता है अकसर तले जाते है ं और तेल य़ ादा होता है
ताज़ा बनता है, तुर ंत खाया जाता है बहुत िदनों तक पैकेट में रखे रहते है ं
सस्ता है, घर की चीज़ों से बन जाता है पैसे दे कर खरीदना पड़ ता है
बक्से के शब्दों में — य़ ादा स्वास्थ् यवध क “स्वाद तो बहुत होता है ले िकन ये शरीर के िलए उतने वा यवधक नहीं होते”
स् स्थ्
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पाठ से जो ड़ए: लेखक और हलधर सवेरे-सवेरे “मटर और जौ का चबेना” लेकर दूसरे गाँव पढ़ने नकल जाते थे।
रास्ता लंबा था, इस लए ऐसा नाश्ता चा हए था जो जेब म रखा जा सके, बगड़े नह और चलते-चलते खाया जा सके।
चबेना ठ क ऐसा ही है।
नया शब्द: स्वास्थ्यवधक = जो सेहत बढ़ाए, यानी शरीर के लए अ ा। गुणकारी = जसम गुण ह , फ़ायदा करने
वाला।
प्र.2 आप दन भर क्या-क्या खाते-पीते ह? एक सूची बनाइए — (पृष्ठ 79 पर तीन-तीन खान क तीन पं क्तय वाली
एक सूची छपी है)
पृष्ठ 79 क सूची म तीन पं क्तयाँ और तीन खाने ह, यानी कुल नौ चीज़ लखनी ह। नीचे नमूने के तौर पर सारे नौ खाने भरे गए ह।
आप इनक जगह अपने घर क चीज़ ल खए।
नमूना सूची (भरी हुई):
दू ध और भुने चने रोटी और मौसमी स ज़ ी ब् दाल -चावल
एक मौसमी फल (के ला, अम द या संतरा)
रू दही या छाछ हरी स ज़ ी का सलाद — खीरा, टमाटर, गाजर
ब्
मुरमुरे या चबेना (शाम का ना ता)
श् गुड़ का एक टुकड़ ा िदन भर में 6–8 िगलास साफ़ पानी
अपनी सूची बनाने का तरीका —
1. चरण 1: दन को चार भाग म बाँ टए — सवेरे का नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम का नाश्ता, रात का भोजन।
2. चरण 2: हर भाग के सामने वही ल खए जो आपने कल सचमुच खाया था। याद से ल खए, कल्पना से नह ।
3. चरण 3: पानी, दूध, छाछ जैसे पीने वाली चीज़ भी ल खए — प्रश्न म ‘खाते-पीते’ दोन पूछा गया है।
4. चरण 4: अंत म दे खए क सूची म एक फल, एक हरी सब्ज़ी और एक दूध वाली चीज़ है या नह ।
ऐसी सूची क्य बनवाई गई: लखकर दे खने से अपनी आदत साफ़ दख जाती है। अगर सूची म तली-भुनी और
बाज़ार क चीज़ ज़्यादा ह, तो उन्ह कम करना चा हए। पृष्ठ 79 का बक्सा यही कहता है — घर का बना चबेना बाज़ार
क चीज़ से ज़्यादा स्वास्थ्यवधक होता है।
तीन आसान नयम: (1) रोज़ एक मौसमी फल खाइए। (2) खाने से पहले हाथ धोइए। (3) दन भर म खूब पानी
पी जए — गरमी म और भी ज़्यादा।
आइए जान — पृष्ठ 80
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
“म दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।” — ‘दोपहर’ शब्द बना है ‘पहर’ से। ‘पहर’ का अथ होता है — दन का चौथा भाग या तीन घंटे का समय।
आइए जान शब्द-रचना
प्र.1 एक दन और एक रात म कुल मलाकर कतने पहर होते ह?
एक दन और एक रात म कुल मलाकर आठ पहर होते ह।
1 पहर = 3 घंटे
िदन = 12 घंटे → 12 ÷ 3 = 4 पहर
रात = 12 घंटे → 12 ÷ 3 = 4 पहर
पूरा िदन-रात = 24 घंटे → 24 ÷ 3 = 8 पहर
समय कतने घंटे कतने पहर
िदन (सवेरे 6 बजे से शाम 6 बजे तक) 12 घंटे 4 पहर
रात (शाम 6 बजे से सवेरे 6 बजे तक) 12 घंटे 4 पहर
पूर ा िदन-रात 24 घंटे 8 पहर
‘दोपहर’ शब्द ऐसे बना: दन का पहला पहर सवेरे 6 से 9 बजे तक, दूसरा पहर 9 से 12 बजे तक। यानी जब दो
पहर बीत जाते ह, तब का समय ‘दोपहर’ कहलाता है। इसी लए 12 बजे के आसपास के समय को दोपहर कहते ह।
पाठ म लेखक लखते ह — “म दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।”
यह भी जा नए: ‘आठ पहर’ का अथ होता है — पूरे चौबीस घंटे, हर समय। जैसे — “वह आठ पहर पढ़ाई म लगा
रहता है।” अब आप समझ गए क इस मुहावरे म आठ ही क्य आते ह।
प्र.2 नीचे दन के चार पहर दशाए गए ह। आप इन पहर म क्या-क्या करते ह, ल खए या चत्र बनाइए — (चार बक्से:
प्रातः 6 बजे से 9 बजे · 9 बजे से 12 बजे · 12 बजे से 3 बजे · 3 बजे से 6 बजे)
चार बक्से भरने ह। यह आपक अपनी दनचया है, इस लए उत्तर हर ब े का अलग होगा। नीचे नमूना दया गया है।
नमूना उत्तर (चार पहर भरे हुए):
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
पहर म इस पहर म क्या-क्या करता ँ
पातः 6 बजे से 9 बजे सवेरे उठकर मुँह-हाथ धोता हू ँ और दाँत साफ़ करता हू।ँ थोड़ ी दे र टहलता हू ँ या यायाम करता हू।ँ नहाकर तैयार होता
व्
(िदन का पहला हू।ँ ना ते में दू ध और भुने चने ले ता हू।ँ ब ता जमाकर िव ालय के िलए िनकलता हू।ँ
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पहर)
9 बजे से 12 बजे िव ालय में पाथना-सभा में खड़ ा होता हू।ँ िहंदी, गिणत और पय वरण की क ाएँ होती है।ं म यावकाश में दो तों के साथ
क्ष ध् स्
(दू स रा पहर) म याह्न भोजन करता हू ँ और मैदान में थोड़ ा खेल ता हू।ँ
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12 बजे से 3 बजे बाकी क ाएँ चलती है ं और गृहकाय िलखकर लाता हू।ँ छु ी के बाद घर आकर हाथ-मुँह धोकर खाना खाता हू।ँ थोड़ ी
क्ष
(तीसरा पहर — यही दे र आराम करता हू ँ या कहानी की िकताब पढ़ ता हू।ँ
दोपहर है)
3 बजे से 6 बजे गृहकाय पूरा करता हू।ँ िफर मैदान में जाकर कब ी, इकड़ ी-दुकड़ ी या गु ली-डंडा खेल ता हू।ँ घर लौटकर पौधों में पानी
ल्
(चौथा पहर) दे ता हू ँ और माँ के छोटे-मोटे कामों में हाथ बँटाता हू।ँ
बक्से भरने का तरीका —
1. चरण 1: एक-एक बक्सा ली जए और सो चए क उस समय आप कहाँ होते ह — घर म, रास्ते म या वद्यालय म।
2. चरण 2: हर बक्से म दो-तीन काम ल खए। पूरे वाक्य ल खए।
3. चरण 3: लखने का मन न हो तो चत्र बना द जए — जैसे पहले बक्से म ब्रश और गलास, दूसरे म वद्यालय, तीसरे म थाली,
चौथे म गद।
ध्यान द जए: ये चार पहर मलकर सफ़ दन बनते ह — सवेरे 6 से शाम 6 बजे तक। रात के चार पहर इस पन्ने
पर नह दए गए, क्य क उस समय हम ज़्यादातर सो रहे होते ह।
तमाशा — पृष्ठ 81
“गुल्ली है जरा-सी, पर उसम दु नया भर क मठाइय क मठास और तमाश का आनंद भरा है।” तमाशा का अथ है — वह दृश्य जसे दे खने
से मनोरंजन हो, जैसे – मेला, नौटं क आ द।
तमाशा घे रा बनाइए
प्र.1 नीचे दए गए नाम को प ढ़ए। इनम से कौन-कौन से तमाशे आपने दे खे हुए ह? उन पर घेरा बनाइए — (कठपुतली
का खेल · नाटक · बाइस्कोप · करतब)
घेरा उन्ह नाम पर बनाइए जो आपने सचमुच दे खे ह । पहले चार को समझ ली जए, फर घेरा बनाना आसान हो जाएगा।
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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तमाशे का यह होता क्या है कहाँ दे खने को मलता है
नाम
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खेल as
em धागों
कठपुतली का से बँधी लकड़ ी या कपड़ े की गुिड़ याँ, िज हे ं ऊपर से कलाकार धागा िहलाकर
न् मेल ों में, राज थान की लोक-
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a g l नचाता
है।ं
है। पीछे से वही आवाज़ भी दे ता है, इसिलए लगता है िक गुिड़ याँ खुद बोल रही प तुितयों में, िव ालय के कायक्रमों
स्
में
मंच पर लोग पा बनकर कहानी अिभनय करके िदखाते m
c o है।ं रामलीला भी एक पकार िव ालय के मंच पर, गाँव-मुह ले के
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नाटक त्र ल्
का नाटक ही है। रंगमंच पर, दशहरे की रामलीला में
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बाइस्कोप एक बड़ ा रंगीन िड बा, िजसमें छोटेa-gछोटे छे द बने होते है।ं छे द में आँख लगाकर दे खने
ब् मेल ों में और पुराने ज़ माने की गिलयों
पर भीतर के िच एक-एक करके बदलते िदखते है।ं िदखाने वाला साथ-साथ गाकर
त्र में — अब यह कम िदखता है
बताता जाता है।
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मेलsों मेeं, सकस में, सड़ क पर होने
m शरीर को मोड़ कर, संतलु न बनाकर या र सी-बाँस पर चढ़ कर िदखाया जाने वाला
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.co कौशल। इसमें बहुत अ यास लगता है।
करतब
ag वाले नट के खेल में
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sem
भ्
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agनमूl ना उत्तर: मने कठपुतली का खेल, नाटक और करतब देखे ह, इस लए मने इन तीन पर घेरा बनाया। बाइस्कोप मने अभी तक
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नह दे खा — मने उसका चत्र पहली बार इसी पुस्तक म दे खा है।
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पाठ से जो ड़ए: लेखक कहते ह क छोट -सी गुm
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glaअपने खेल म मल जाती थी। इसी लए उन्ह बड़े-बड़े तमाश क ज़रूरत ही
ल्ली म “तमाश का आनंद” भरा है। यानी वह खुशी, जो मेले म
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तमाशा दे खकर मलती है, वही खुशी उन्ह
नह पड़ती थी।
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o m l a se
यह भी क जए: घर के बड़ से पू छए क उन्ह ने बचपन म कौन-कौन से तमाशे दे खे थे — नौटं क , बहरू पया,
g इनम से कई तमाशे अब धीरे-
.c का खेल, जादू का खेल, नट का खेल। उनक बताई हुई बात कक्षा म सुनaाइए।
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aseधीरे कम होते जा रहे ह।
मदारी
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रामलीला — पृष्ठ 81
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अपनी कक्षा या वद्यालय म रामलीला का मंचन क जए — पुस्तक ने इसके लए चार सुझाव भी दए ह
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रामलीला गतवध
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seद पावली के आस-पास ान- m
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.c ान पर ‘रामलीला’ का आयोजन कया जाता है। आप भी अपनी कक्षा ag या वद्यालय म रामलीला का मंचन
प्र.1 आपने पाठ म ‘रामलीला’ के बारे म पढ़ा है। हमारे दे श म और अन्य दे श म भी
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क जए। इसके लए कुछ सुझाव नम्न ल खत ह — (1) आप वद्यालय क वद म भी रामलीला का मंचन कर
सकते ह। कसी अ त रक्त वस्तु या कपड़ क आवश्यकता नह है। (2) पूरी रामकथा का मंचन संभव न हो तो
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प्रत्येक कक्षा या समूह भन्न- भन्न दृश्य को प्रस्तुत कर सकता है। (3) आप अपने संवाद स्वयं बना सकते ह। (4)
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इस काय म आप अपने अ भभावक , शक्षक और पुस्तकालय क सहायता भी ले सकते ह।
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यह करके दखाने वाला काम है। इसे सात चरण म क जए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
1. चरण 1 — एक दृश्य चु नए। पूरी रामकथा एक दन म नह हो सकती। इस लए अपनी कक्षा के लए एक छोटा दृश्य चु नए
— जैसे धनुष-भंग, केवट का प्रसंग, शबरी के बेर, हनुमान का लंका जाना, या राम का अयोध्या लौटना।
2. चरण 2 — पात्र बाँ टए। हर ब े को कोई-न-कोई काम मलना चा हए — पात्र, सूत्रधार (जो बीच-बीच म कहानी बताता है),
मंच सजाने वाले, और आवाज़ या ताल दे ने वाले।
3. चरण 3 — संवाद खुद ल खए। पुस्तक ने यही सुझाव दया है। छोटे -छोटे वाक्य ल खए, ता क याद रखने म आसानी हो।
4. चरण 4 — वेशभूषा क चता मत क जए। पुस्तक साफ़ कहती है क वद्यालय क वद म भी मंचन हो सकता है। एक
दुप ा, एक कागज़ का मुकुट या गत्ते का धनुष — इतना ही बहुत है।
5. चरण 5 — दो-तीन बार अभ्यास क जए। ज़ोर से और साफ़ बो लए। मंच पर पीठ करके मत खड़े होइए।
6. चरण 6 — मंचन क जए। शुरू म सूत्रधार कहानी का प रचय दे और अंत म सब मलकर दशक को धन्यवाद कह।
7. चरण 7 — बाद म बात क जए। कक्षा म चचा क जए क क्या अ ा रहा और अगली बार क्या सुधारगे।
नमूना दृश्य — ‘केवट का प्रसंग’ (चार पात्र):
सू त्र धार: राम, सीता और लक्ष्मण वन जा रहे है।
ं रास्ते में गंगा नदी पड़ ती है। िकनारे पर के वट अपनी नाव िलए
खड़ ा है।
राम : के वट भाई, हमें नदी पार करा दीिजए।
के वट : पभु, पहले मै ं आपके चरण धो लू।
ँ तभी नाव पर चढ़ ाऊँ गा।
ल मणक्ष् : इतनी दे र क्यों, भाई?
के वट : यह दे र नही ं, मेरा पेम है। मेरे पास दे ने को और कु छ नही ं।
सीता : त म्ु हारा पेम सबसे बड़ ा है, के वट।
सू त्र धार: के वट ने चरण धोए, सबको नाव में िबठाया और गंगा पार करा दी। राम ने उसे भाई कहकर गले लगा
िलया।
यह काम इस पाठ के बाद क्य दया गया: लेखक ने रामलीला क तैयारी को अपने बचपन क सबसे उत्साह वाली
याद बताया है — “दो बजे दन से पात्र क सजावट शुरू होने लगती। म दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।” जब आप
खुद मंचन करगे, तभी समझ पाएँगे क उन्ह इतना उत्साह क्य आता था।
पुस्तक का शक्षण-संकेत: पृष्ठ 81 पर शक्षक के लए लखा है क नाटक-मंचन म कई स्तर पर चुनौ तयाँ आती
ह, इस लए शक्षक घटना के चयन, संवाद-रचना, भाव के प्रकट करण और उपलब्ध संसाधन म ही व्यव ा करने म
ब क सहायता कर। इस लए अटकने पर अपने शक्षक से मदद माँगने म झझ कए मत — यह उसी काम के
लए लखा गया है।
भाषा क बात — पृष्ठ 82
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
“ वलायती खेल म सबसे बड़ा ऐब है क उनके सामान महँगे होते ह।” — यहाँ ‘ वलायती’, ‘बड़ा’ और ‘महँगे’ शब्द क्रमशः ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा
‘सामान’ क वशेषता बता रहे ह।
भाषा क बात वशे ष ण और सं ा
प्र.1 अब पाठ म से कुछ अन्य वशेषण तथा सं ा शब्द चुनकर नीचे ल खए — (ता लका म पहला जोड़ा पहले से भरा
है — वशेषण: वलायती, सं ा: खेल। नीचे पाँच खाली पं क्तयाँ ह।)
पहले दोन शब्द समझ ली जए —
सं ा = कसी व्य क्त, वस्तु, ान या भाव का नाम। जैसे — घर, पाँव, खेल, काम।
वशेषण = वह शब्द जो सं ा क वशेषता बताए, यानी बताए क वह कैसा है, कतना है या कसका है। जैसे — क ा घर,
नंगे पाँव, भारतीय खेल।
पहचानने का आसान तरीका: सं ा से पू छए — “कैसा?” जो उत्तर मले, वही वशेषण है। जैसे — घर कैसा? क ा। पाँव
कैसे? नंगे।
पूरी भरी हुई ता लका —
वशेषण सं ा पाठ क पं क्त
वलायती (पुस्तक म पहले से भरा हुआ) खेल “ वलायती खेल म सबसे बड़ा ऐब है”
क चा च् घर “वह क ा टू टा घर”
नंगे पाँव “वह नंगे बदन, नंगे पाँव खेत म घूमना”
छोटे-मोटे काम “ जस उत्साह से दौड़कर छोटे -मोटे काम करता”
सरल वभाव
स् “वह सरल स्वभाव”
भारतीय खेल “ कसी को यह नह सूझता क भारतीय खेल खलाएँ”
पाठ म और भी कई जोड़े मलते ह। आप इनम से कोई भी चुन सकते ह —
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
वशेषण सं ा पाठ क पं क्त
टू टा घर “वह क ा टू टा घर”
नंग े बदन “वह नंगे बदन”
अंग ेजी चीज़ ें “हम अंग्रेजी चीज के पीछे ऐसे द वाने हो रहे ह”
महँग े सामान “उनके सामान महँगे होते ह”
तीन-चार रु पये “हरेक लड़के से तीन-चार रुपये सालाना”
आठ साल “मेरी उम्र आठ साल थी”
दू स रे गाँव “दूसरे गाँव म एक मौलवी साहब के यहाँ”
सारी बाते ं “सारी बात आँख के सामने फर रही ह”
यह ध्यान र खए: एक ही सं ा के आगे एक से अ धक वशेषण भी लग सकते ह। जैसे — “क ा टू टा घर” म
‘क ा’ और ‘टू टा’ दोन ‘घर’ क वशेषता बता रहे ह। इसी तरह ‘तीन-चार’ और ‘आठ’ जैसे शब्द गनती बताते ह,
इस लए ये भी वशेषण ही ह।
खुद करके दे खए: पाठ का कोई एक अनु े द ली जए। हर सं ा के नीचे एक लक र ख चए। फर दे खए क उससे
ठ क पहले कोई शब्द उसक वशेषता बता रहा है या नह । जो बता रहा हो, उसके नीचे दो लक र ख च द जए —
वही वशेषण है।
प्राथ मक च कत्सा पेट — पृष्ठ 82
कावेरी को कब ी खेलते हुए चोट लग जाती है और नीलोफर सबको प्राथ मक च कत्सा पेट दखाती है
प्राथ मक च कत्सा पे ट सू ची बनाइए
प्र.1 अब आप प्राथ मक च कत्सा पेट म रखी जाने वाली उन वस्तुओं व दवाइय क एक सूची बनाइए जनके बारे म
नीलोफर ने सभी को बताया होगा। आप भी अपने लए एक प्राथ मक च कत्सा पेट तैयार क जए। इसके लए
आप अपने सहपा ठय तथा अ भभावक क सहायता ले सकते ह।
प्राथ मक च कत्सा यानी चोट लगने पर डॉक्टर के पास पहुँचने से पहले द जाने वाली पहली मदद। इसे अंग्रेज़ी म ‘फ़स्ट ऐड’
कहते ह। इसी काम क चीज़ जस डब्बे म रखी जाती ह, वही प्राथ मक च कत्सा पेट है।
नीलोफर ने सबको ये चीज़ दखाई ह गी —
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वस्तु / दवाई यह कस काम आती है
रुई घाव को ह के हाथ से साफ़ करने और दवा लगाने के िलए
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प ी (रोलर बैड
ं ेज) घाव को ढककर बाँधने के िलए, तािक उसमें िम ी न जाए
िचपकने वाली प ी (बैड
ं -एड) छोटे कटने-िछलने पर तुरंत लगाने के िलए
साफ़ गॉज या जालीदार कपड़ा घाव पर सीधे रखने के िलए
एंटीसे िप्टक घोल या क्रीम (जैसे डेटॉल-सा घोल) घाव के कीटाणु मारने के िलए, तािक पकने न पाए
मलहम िछली हुई वचा और ह की जलन पर लगाने के िलए
त् ल्
कैं ची प ी और टेप काटने के िलए
िचमटी काँटा या काँच का बारीक टुकड़ ा िनकालने के िलए
िचपकने वाला टेप प ी को अपनी जगह िटकाए रखने के िलए
िडस्पोज़ेबल दस्ताने दू सरे के घाव को छू ने से पहले पहनने के िलए
थम मीटर बुखार नापने के िलए
ओ.आर.एस. का पैके ट द त या बहतु पसीना आने पर घोल बनाकर िपलाने के िलए
स्
साफ़ पानी की छोटी बोतल घाव धोने और मुँह धुल ाने के िलए
ितकोना कपड़ा (िस्लंग ) हाथ में चोट लगने पर उसे गले से टाँगकर सहारा दे ने के िलए
आवश्यक फ़ ोन नंबरों की पच माता-िपता, िव ालय, नज़ दीकी अ पताल और एंबलु े ंस (108) का नंबर
स्
अपनी पेट ऐसे बनाइए —
1. चरण 1: ढक्कन वाला एक मज़बूत डब्बा ली जए। उस पर लाल रंग का क्रॉस (+) का नशान बनाइए।
2. चरण 2: ऊपर क सूची म से चीज़ बड़ क मदद से जुटाइए। दवाएँ अपने आप मत खरी दए।
3. चरण 3: हर चीज़ पर छोट पच लगाइए — क्या है और कस काम आती है।
4. चरण 4: डब्बा सूखी, ठं डी और ऐसी जगह र खए जहाँ सबको पता हो, पर छोटे ब के हाथ न पहुँच।
5. चरण 5: हर महीने एक बार खोलकर दे खए। जो दवा पुरानी हो गई हो, उसे बड़ को दखाकर बदल द जए।
यह पेट क्य ज़रूरी है: कहानी म कावेरी को चोट लगी, पर पेट कसी के पास नह थी। इसी कारण सबको उसे
सीधे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। अगर पास म पेट होती, तो घाव तुरंत साफ़ करके प बाँधी जा सकती थी। चोट
लगने के पहले कुछ मनट सबसे ज़रूरी होते ह — पेट उन्ह मनट के लए है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन
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बहुत ज़रूरी बात: प्राथ मक च कत्सा का अथ ‘इलाज’ नह है। यह सफ़ पहली मदद है। कोई भी दवा खुद खाकर
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या दूसरे को खलाकर मत दे खए। चोट गहरी हो, खून न रुके, या सर और आँख पर लगी हो — तो
कसी बड़े को.cबुoलाइए और डॉक्टर के पास जाइए।
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आपके खेल — पृष्ठ 83
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बना महँगे सामान के खेले जाने वाले खेल — चत्र और नाम का m
a s e मलान तथा सबके साथ खेलने क बात
आपके खे ल मलान क जए agl
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ऐसे अनेक खेल आप सभी खेलते ह गे जनम कसी वशेष महँगे सामान क आवश्यकता नह पड़ती ब ल्क
जनक आवश्यकता पड़ती है, उन्ह आप स्वयं ही बना लेते ह। ऐसे ही कुछ खेल s
प्र.1 (क)
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.cरेखा ख चकर इनके सही नाम से मलाइए — ( चत्र क्रम से: 1. ज़मीन परaखg चे खान म एक पैर से कूदती
े चत्र नीचे दए गए ह।
se m लड़क , 2. दो लड़के ज़मीन पर डोरी से कुछ नचाते हुए, 3. दो ब े पतंग उड़ाते हुए, 4. दो लड़के म पर
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a झुककर एक-दूसरे को पकड़ते हुए। नाम क्रम से: कब ी · इकड़ी-दुकड़ी · लट्टू · पतंग)
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चार जोड़े इस प्रकार बनगे —
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चत्र (ऊपर से नीचे) चत्र म क्या हो रहा है खेल का नाम
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m . इकड़ ी-दुकड़ ी
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पहला िचत्र ज़मीन पर खाने ख चे ह, एक लड़क एक पैर पर कूद रही है और एक गोट पड़ी है
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दू स रा िचत्र दो लड़के झुके हुए ह, एक के हाथ म डोरी है और ज़मीन पर छोट -सी चीज़ घूम रही है
agl तीसरा िचत्र दो ब े खुले मैदान म डोर पकड़े ह और ऊपर दो पतंग उड़ रही ह पतंग
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चौथा िचत्र दो लड़के म
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पर झुककर एक-दूसरे को पकड़ने क को शश कर रहे ह कब ी
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पहचानने क एक-एक नशानी: इकड़ी-दुकड़ी म ज़मीन पर ख चे हुए खाने और एक पैर पर कूदना दखता है।
लट्टू म डोरी और ज़मीन पर घूमती छोट -सी चीज़ दखती है। पतंग म आसमान म उड़ती पतंग और हाथ म डोर
दखती है। कब ी म खलाड़ी झुककर एक-दूसरे को छू ने और पकड़ने क को शश करते दखते ह।
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.cध्यान द जए: ‘खेल का नाम’ वाली सूची का क्रम चत्र के क्रम से अलग aहै।gइसी लए रेखाएँ आड़ी- तरछ जाएँगी।
m मलान वाले प्रश्न म पहले हर चत्र को ध्यान से दे खए, फर नाम ढूँ ढ़ए — क्रम से मत जो ड़ए।
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प्र.1 (ख) आपस म चचा क जए क इन खेल को कैसे खेला जाता है तथा यह भी बताइए क आपके क्षेत्र म इन्ह क्या
कहा जाता है।
चार खेल इस तरह खेले जाते ह —
खेल कैसे खेला जाता है क्या-क्या चा हए
इकड़ी- ज़ मीन पर आठ-नौ खाने बनाइए। अपनी गोटी पहले खाने में फे ं िकए। अब एक पैर से कू दते हुए, चॉक या कोयला, और एक
दुक ड़ी गोटी वाले खाने को छोड़ कर, आगे बिढ़ ए और लौटते समय गोटी उठा लीिजए। लकीर पर पैर पड़ ा चपटा प थर या चूड़ी का
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या िगर गए तो बारी दू सरे की। टुकड़ ा
ल ू ल ू पर डोरी लपेिटए। िफर एक झटके से डोरी खींचते हुए ल ू को ज़ मीन पर छोिड़ ए। वह तेज़ी लकड़ ी का ल ू और एक
से घूमने लगता है। िजसका ल ू सबसे दे र तक घूमे, वह जीता। कु छ जगह उसे हथेल ी पर डोरी
उठाकर भी नचाया जाता है।
पतंग खुले मैदान या छत पर, हवा की िदशा दे खकर पतंग को धीरे -धीरे ऊपर चढ़ ाइए। डोर को कभी कागज़ की पतंग और
ढील दीिजए, कभी खींिचए — इसी से पतंग ऊपर उठती और सँभलती है। चरखी में िलपटी डोर
कब ी दो दल बनते है ं और मैदान बीच से बाँटा जाता है। एक दल का िखलाड़ ी साँस रोककर “कब ी- कु छ भी नहीं — बस खुल ा
कब ी” बोलता हुआ दू सरे दल के पाले में जाता है। वह िजस-िजस को छू ले और साँस टू टे िबना मैदान और िखलाड़ ी
लौट आए, वे सब बाहर। पकड़ े जाने पर वह खुद बाहर।
अलग-अलग इलाक म इनके नाम अलग ह। कुछ प्रच लत नाम ये ह —
खेल कह -कह इसे यह भी कहते ह
इकड़ी-दुक ड़ी िकथ-िकथ, टापू, लंगड़ ी टाँग, ए कड़ -दु कड़ , िचिब ी, पंग ु
स् क् क्
ल ू भौंरा, लाटू , िफरकी, चकरी, भँवरा
पतंग गु ी, चंग, कनकौआ, पतंगबाज़ ी
कब ी हु-तू-तू, चीड़ ू -भीड़ ू , सडुगडु ु
यह ज़रूर क जए: ऊपर क सूची अधूरी है — हर इलाके का अपना नाम होता है। अपने दादा-दाद , नाना-नानी
और पड़ोस के बुजग से पू छए क उनके बचपन म इन खेल को क्या कहते थे। जो नाम मल, उन्ह कक्षा म एक बड़े
चाट पर ल खए। यह चाट पूरी कक्षा के लए बहुत मज़ेदार बनेगा।
इन खेल क सबसे बड़ी खूबी: इनम से कसी म महँगा सामान नह लगता। कब ी म तो कुछ भी नह चा हए।
लेखक क बात यह सच होती दखती है — “भारतीय खेल … बना दाम, कौड़ी के खेले जाते ह।”
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 उन आनंदमयी खेल क एक सूची बनाइए जो आप अपने द ांग मत्र के साथ खेल सकते ह। आप इस काय म
मत्र , शक्षक एवं अपने अ भभावक क भी सहायता ले सकते ह।
सबसे पहली बात यह है — खेल बदलने क ज़रूरत कम पड़ती है, नयम थोड़े बदल दे ने से ही सब साथ खेल सकते ह।
खेल कैसे खेला जाए, ता क सब साथ खेल सक
अंताक्षरी और गीत-गायन बैठे-बैठे खेल ा जाता है। इसमें दौड़ ना िबलकु ल नहीं पड़ ता और सबकी बराबर बारी आती है।
पहेल ी-बूझो और शब्द-खेल कागज़ पर या बोलकर, दोनों तरह से खेल ा जा सकता है।
कहानी की कड़ी एक ब चा एक वा य कहता है, अगला उसे आगे बढ़ ाता है। पूरी क ा िमलकर एक कहानी बना ले ती है।
च् क् क्ष
घंटी वाली गेंद से पकड़म- गेंद के भीतर घंटी हो तो आवाज़ से पता चलता रहता है िक गेंद कहाँ है। इससे कम िदखाई दे ने वाले साथी भी
पकड़ाई पूरी तरह खेल में रहते है।ं
कै रम, शतरंज, साँप-सीढ़ ी, लूडो मेज़ पर बैठकर खेले जाते है।ं पिहएदार कु स वाले साथी भी आराम से खेल सकते है।ं
गेंद फें को-पकड़ो (गोले में सब एक गोले में बैठ जाते है ं और नाम पुकारकर गेंद फे ं कते है।ं दौड़ ना नहीं पड़ ता।
बैठकर)
िनशाना लगाओ बा टी या घे रे में मुल ायम गेंद फे ं कनी है। दू री हर िखलाड़ ी की सुिवधा से तय कर लीिजए।
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जोड़ी बनाकर दौड़ दो साथी हाथ पकड़ कर एक साथ चलते है।ं एक साथी दू सरे का सहारा बन जाता है।
इशारों वाला खेल (मूक - िबना बोले , के वल इशारों से श द बताना है। सुनने में किठनाई वाले साथी इसमें सबसे आगे रहते है।ं
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अिभनय)
ताली और ताल का खेल एक ताल दी जाती है, बाकी सब उसे दोहराते है।ं इसमें िकसी को दौड़ ना या िलखना नहीं पड़ ता।
िचत्रकारी और िम ी के िखलौने हाथ से बनाने वाला काम, िजसे सब िमलकर कर सकते है।ं
बनाना
साथ खेलने के पाँच सरल नयम —
1. पहले पू छए, फर मदद क जए। “तुम्ह क्या ठ क लगेगा?” — यह एक वाक्य सब आसान कर दे ता है।
2. दल बनाते समय सबसे पहले साथ ली जए, सबसे आ खर म नह ।
3. नयम शुरू म ही मलकर तय क जए, बीच म नह । जैसे — कसी क दूरी कम, कसी का समय ज़्यादा।
4. ऐसे खेल चु नए जनम दौड़ना ज़रूरी न हो — बैठकर या एक जगह खड़े होकर भी बहुत खेल हो जाते ह।
5. दया नह , दोस्ती। जान-बूझकर हार जाना अपमान है। बराबरी से खे लए।
यह प्रश्न इसी पाठ म क्य है: लेखक ने अपने खेल के मैदान के बारे म लखा है — “अमीर-गरीब का बलकुल भेद
न था, अ भमान क गुंजाइश ही न थी।” अ ा मैदान वही है जहाँ कोई बाहर न रह जाए। यह बात पुस्तक ने चत्र म
भी दखाई है — पृष्ठ 76 पर गुल्ली-डंडा खेलता हुआ जो लड़का बना है, उसके कान पर सुनने वाला यंत्र लगा है।
यानी वह भी उसी खेल म शा मल है।
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आगे प ढ़ए: इसी पाठ के पृष्ठ 84 पर पैरालं पक तैराक मुरलीकांत राजाराम पेटकर क बात है। गो लयाँ लगने से
लकवाग्रस्त हो जाने के बाद भी उन्ह ने तैराक सीखी और भारत को पहला पैरालं पक स्वण पदक दलाया। यानी
सही अवसर मले तो कोई पीछे नह रहता।
पुस्तकालय से — पृष्ठ 83
प्रेमचंद क लखी कहा नयाँ प ढ़ए और कक्षा म उन पर चचा क जए
पु स्तकालय से पढ़ने का काम
प्र.1 अपने पुस्तकालय म जाकर प्रेमचंद क लखी कहा नयाँ प ढ़ए तथा कक्षा म उनके बारे म चचा क जए।
यह पढ़ने और फर बोलने वाला काम है। इसे तीन हस्स म क जए — ढूँ ढ़ए, प ढ़ए, चचा क जए।
1. पुस्तकालय म कहानी कैसे ढूँ ढ़ —
1. चरण 1: पुस्तकालय म हद क अलमारी दे खए। लेखक के नाम से लगी कताब म ‘प्रेमचंद’ खो जए।
2. चरण 2: न मले तो पुस्तकालय अध्यक्ष या अपने शक्षक से क हए — “मुझे प्रेमचंद क बाल-कहा नयाँ चा हए।”
3. चरण 3: पहले पतली और चत्र वाली कताब ली जए। एक बार म एक ही कहानी प ढ़ए।
2. कक्षा 5 के लए प्रेमचंद क ये कहा नयाँ अ रहगी —
कहानी कस बारे म है
ईदगाह हािमद नाम का छोटा ब चा मेले में िमले पैसों से अपने िलए िखलौना नहीं, दादी के िलए िचमटा खरीद लाता है।
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दो बैल ों की कथा हीरा और मोती नाम के दो बैल ों की दो ती और उनकी िह मत की कहानी।
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ग ल्ु ली-डंडा इसी खेल पर िलखी कहानी, जो हमारे पाठ ‘मेरा बचपन’ से सीधे जुड़ती है।
पंच परमेश्वर पंचायत में बैठा आदमी अपने िम के िव भी स चा याय करता है।
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बड़े भाई साहब दो भाइयों की कहानी — पढ़ ाई, खेल और बड़ े भाई की डाँट में िछपा यार।
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बूढ़ी काकी घर की बुज़गु ी के साथ िकया गया यवहार और एक ब ची की समझदारी।
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ठाकु र का कु आँ पानी भरने को ले कर होने वाले भेदभाव पर एक छोटी, गहरी कहानी।
3. कक्षा म चचा ऐसे क जए — इन पाँच बात पर बो लए, एक-एक करके।
1. कहानी का नाम और उसम कौन-कौन पात्र ह।
2. कहानी म क्या हुआ — शुरू, बीच और अंत, तीन-चार वाक्य म।
3. कौन-सा हस्सा सबसे अ ा लगा और क्य ।
4. कहानी से क्या सीख मली।
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5. यह कहानी ‘मेरा बचपन’ पाठ से कहाँ मलती-जुलती है।
नमूना चचा: “मने प्रेमचंद क कहानी ईदगाह पढ़ । इसम हा मद नाम का एक छोटा लड़का है, जो अपनी दाद अमीना के साथ
रहता है। मेले म उसके सब साथी खलौने और मठाई खरीदते ह, पर हा मद अपने तीन पैसे से चमटा खरीद लेता है, ता क रोट
सकते समय दाद के हाथ न जल। मुझे अंत वाला हस्सा सबसे अ ा लगा, जब दाद उसे गले लगाकर रो पड़ती ह। सीख यह मली
क स ा प्यार अपने से पहले दूसरे के बारे म सोचता है। ‘मेरा बचपन’ से यह कहानी इस बात म मलती है क दोन म बचपन क
खु शयाँ बहुत छोट -छोट चीज़ से बनी ह।”
लेखक के बारे म यह भी जान ली जए: प्रेमचंद हद और उदू, दोन म लखते थे। उनका मूल नाम धनपत राय था
और वे बनारस के पास लमही गाँव के रहने वाले थे। उन्ह ने ‘गोदान’ जैसे उपन्यास और सैकड़ कहा नयाँ लख ।
उनक कहा नय म गाँव, कसान, ब े और साधारण लोग ही मुख्य पात्र होते ह — इसी लए वे आज भी इतनी
अपनी-सी लगती ह। (यह जानकारी पुस्तक म नह है; इसे आप पुस्तकालय क कताब या अपने शक्षक से मलाकर
दे ख ली जए।)
यह काम इसी पाठ के बाद क्य दया गया: ‘मेरा बचपन’ प्रेमचंद का ही लखा हुआ है और यह बहुत छोटा-सा
अंश है। इसे पढ़कर मन भर नह जाता — और पढ़ने का मन करता है। पुस्तकालय का यह काम ठ क उसी मन को
पूरा करने के लए है।
इन्ह भी जा नए तथा पता लगाइए — पृष्ठ 84
पैरालं पक तैराक मुरलीकांत राजाराम पेटकर का प रचय, और चत्र म दखाई गई पैरालं पक म हला खलाड़ी के बारे म पता लगाने का काम।
(‘इन्ह भी जा नए’ वाले बक्से के साथ कोई प्रश्न छपा नह है — नीचे उसी क समझ जाँची गई है।)
इन्ह भी जा नए पता लगाइए
प्र.1 ‘इन्ह भी जा नए’ (पृष्ठ 84) म मुरलीकांत राजाराम पेटकर के बारे म क्या-क्या बताया गया है?
मुरलीकांत राजाराम पेटकर भारत के एक प्र सद्ध पैरालं पक तैराक ह। बक्से म उनके जीवन क ये बात द गई ह —
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बात पुस्तक म क्या लखा है
m सन् 1944 में, महारा में as e
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पहचान द्ध
पहले क्या करते थे वे भारतीय से ना के एक जवान थे
mकई गोिलयाँ लगने के कारण वे लकवाग त हो गए
सन् 1965 में हएु भारत-पािक तान यु .केcoसमय ag
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जीवन का मोड़ स् द्ध स्
तैर ाकी कै से शुरू हुई न् त् la पर तैराकी शु कर दी
उ होंने िचिक सकों कीagसलाह रू
कु ती, हॉकी आिद खेल ों में बचपन से ही िच रखते थे
बचपन की रुिच श् रु
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अपनी लगन और पिर म से कु छ ही समय में तैराकी में पवीणता पा त कर ली
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सफलता कै से िमली
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सबसे बड़ी उपलिब्ध वे 1972 के हाइिडलबग पैरालंिपक में भारत को पहला वण पदक िदलाने वाले िद यागं तैराक बने
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त प चात सन् 2018 में भारत सरकार ने उ हे ं प ी से स मािनत िकया
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तीन शब्द समझ ली जए —
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पैरालं पक — बक्से के अनुसार, “ दव्यांग खला ड़य के लए समय-समय पर आयो जत होने वाला ओलं पक खेल का
कायक्रम है।” a
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लकवाग्रस्त — जसे लकवा मार गया हो, यानी शरीर का कोई भाग काम करना बंद कर दे ।
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प्रवीणता — कसी काम म पूरी पकड़, नपुणता।
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c क सबसे बड़ी बात: जस चोट ने उनका शरीर कमज़ोर कया, उसी
इस.कहानी a gके इलाज के लए शुरू क गई
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aseतैराक ने उन्ह दे श का पहला पैरालं पक स्वण पदक दला दया। यानी मु श्कल को उन्ह ने रास्ता बना लया। ध्यान
agl द जए — पुस्तक कहती है क यह “लगन और प रश्रम” से हुआ, कसी चमत्कार से नह ।
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पाठ से जो ड़ए: लेखक ने लखा है क खेल के मैदान म “अमीर-गरीब का बलकुल भेद न था।” पेटकर क कहानी
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उसी बात को आगे बढ़ाती है — मैदान म शरीर का भेद भी नह होना चा हए। सबको खेलने का अवसर मलना
चा हए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 अब आप चत्र म दखाई गई प्र सद्ध पैरालं पक म हला खलाड़ी के बारे म पता लगाइए।
पृष्ठ 84 पर छपा छाया चत्र — यहाँ केवल उसका वणन दया गया है; मूल छाया चत्र पाठ्यपुस्तक म दे खए।
चत्र म एक युवा म हला खलाड़ी तीरंदाज़ी (धनुष-बाण) क प्र तयो गता म नशाना लगा रही है। उसके बाल
पीछे चोट म बँधे ह और सर पर पतला हेयरबड है। वह नीली-सफ़ेद जस और नीली पतलून पहने है; सीने
पर एक प ा (हानस) बँधा है और ठोड़ी के पास डोरी ख चने वाला छोटा हुक लगा है। उसके दोन हाथ नह
ह। वह अपना दा हना पैर ऊपर उठाकर उसी से धनुष को थामे हुए है; बाण धनुष पर चढ़ा है और डोरी खची
हुई है। उसक दृ ष्ट सामने नशाने पर टक है। पीछे खुला नीला आकाश है और पास ही एक और खलाड़ी
खड़ा है।
इसके लए आप अपने अ भभावक , शक्षक अथवा अन्य ोत क सहायता ले सकते ह।
यह पता लगाने वाला काम है। पहले चत्र को ध्यान से दे खए, फर खो जए।
चत्र म क्या दख रहा है: एक युवा खलाड़ी तीरंदाज़ी कर रही है। उसके हाथ नह ह। वह धनुष को पैर से सँभालकर, ठोड़ी और
कंधे क मदद से डोरी ख चकर नशाना लगा रही है। यह पैरा-तीरंदाज़ी का दृश्य है।
पता लगाने का तरीका —
1. चरण 1: चत्र म जो दखता है, उसे कागज़ पर ल खए — खेल कौन-सा है, खलाड़ी क्या कर रही है, वेश कैसा है।
2. चरण 2: घर के बड़ और अपने खेल- शक्षक से पू छए — “भारत क पैरा-तीरंदाज़ी म कौन-सी म हला खलाड़ी प्र सद्ध ह?”
3. चरण 3: पुस्तकालय म खेल-प त्रका और पुराने समाचार-पत्र दे खए। पैरालं पक और ए शयाई पैरा खेल के पन्ने सबसे उपयोगी
ह गे।
4. चरण 4: जो नाम मले, उसे कम-से-कम दो जगह मलाकर दे खए। एक ही जगह पढ़कर मान लेना ठ क नह ।
5. चरण 5: अब एक छोटा प रचय-पत्र बनाइए — नाम, राज्य, खेल, बड़ी उपल ब्ध, और एक बात जो आपको सबसे अ लगी।
नमूना उत्तर: चत्र म जस तरह क खलाड़ी दखाई गई है, वैसी भारत क सबसे प्र सद्ध पैरा-तीरंदाज़ शीतल दे वी ह। वे जम्मू-
कश्मीर क रहने वाली ह। उनके जन्म से ही दोन हाथ नह ह, फर भी वे पैर से धनुष सँभालकर तीर चलाती ह और अंतरा ीय
प्र तयो गताओं म भारत के लए पदक जीत चुक ह। उन्ह ने ए शयाई पैरा खेल म स्वण पदक जीता और पैरालं पक म भी भारत के
लए पदक जीता है। उनक सबसे बड़ी बात यह है क उन्ह ने अपनी कमी को कभी रुकावट नह माना — रोज़ के अभ्यास से उन्ह ने
अपने पैर को इतना सधा लया क नशाना कभी नह चूकता।
ईमानदारी क बात: पुस्तक ने इस खलाड़ी का नाम नह छापा है — केवल चत्र दया है। इस लए नाम अपने
शक्षक या अ भभावक से पूछकर पक्का कर ली जए, और उसी नाम पर अपना प रचय-पत्र बनाइए। कसी क
उपल ब्ध लखते समय तारीख़ और प्र तयो गता का नाम जाँच लेना बहुत ज़रूरी है।
ऐसे काम क्य दए जाते ह: इनम उत्तर कताब म नह होता — उत्तर आपको खुद खोजना होता है। पूछना, ढूँ ढ़ना
और मलाकर दे खना — यही तीन मलकर ‘पता लगाना’ कहलाते ह। यह आदत आगे हर वषय म काम आएगी।
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय — एक नज़र म
मेरा बचपन क वता नह , गद्य है। इसे लेखक ने ‘म’ कहकर लखा है, इस लए यह एक संस्मरण है — संस्मरण यानी अपनी
बीती हुई बात क याद, जो लखकर सुनाई जाए। पाठ के अंत म, पृष्ठ 77 पर रचनाकार का नाम छपा है — प्रेमचंद। उनके
नीचे लखा है “(रत्न सागर प्रकाशन से साभार)”, यानी यह अंश उसी प्रकाशन क पुस्तक से लया गया है।
पाठ क पहली ही पं क्त मन को छू लेती है — “हाय बचपन! तेरी याद नह भूलती।” लेखक अब बड़े हो चुके ह, पशन लेने क
उम्र म ह। पर उनक आँख के सामने बचपन का गाँव फर से घूम रहा है — क ा टू टा घर, पयाल का बछौना (पयाल यानी
धान क सूखी डंठल, जसे बछाकर सोते थे), नंगे बदन और नंगे पाँव खेत म घूमना, और आम के पेड़ पर चढ़ना।
लेखक अपने चचेरे भाई हलधर के साथ दूसरे गाँव म एक मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाते थे। उस समय लेखक क उम्र आठ
साल थी और हलधर उनसे दो साल जेठे यानी बड़े थे। दोन सवेरे-सवेरे मटर और जौ का चबेना लेते थे। चबेना यानी चबाकर
खाने के लए भुना हुआ अनाज।
दूसरी बड़ी याद रामलीला क है। लेखक के घर से थोड़ी ही दूर पर रामलीला मैदान था, और जस घर म पात्र का रूप-रंग भरा
जाता था वह तो घर से बलकुल सटा हुआ था। दो बजे दन से सजावट शुरू हो जाती और लेखक दोपहर से ही वहाँ जा बैठते।
वे इतने उत्साह से दौड़-दौड़कर छोटे -मोटे काम करते थे क आज उतने उत्साह से अपनी पशन लेने भी नह जाते।
पाठ का सबसे बड़ा हस्सा गुल्ली-डंडा का है। लेखक कहते ह — “गुल्ली-डंडा सब खेल का राजा है।” आज भी लड़क को
खेलते दे खकर उनका जी लोट-पोट हो जाता है क जाकर खेलने लगूँ। इस खेल म न लॉन चा हए, न कोट, न थापी। बस पेड़ से
एक टहनी काट ली, गुल्ली बना ली, और दो लोग हो गए तो खेल शुरू।
इसी बहाने लेखक एक ज़रूरी बात कहते ह। वलायती यानी वदे शी खेल का सबसे बड़ा ऐब (ऐब यानी दोष) यह है क
उनका सामान महँगा होता है। हम अंग्रेजी चीज़ के पीछे इतने द वाने हो गए ह क अपनी चीज़ से अरु च हो गई है। स्कूल म
हर लड़के से तीन-चार रुपये सालाना केवल खेलने क फ स ली जाती है, पर कसी को यह नह सूझता क भारतीय खेल
खलाएँ, जो बना दाम-कौड़ी के खेले जाते ह।
लेखक चोट क बात भी ईमानदारी से मानते ह। गुल्ली से आँख फूट जाने का डर रहता है — उनके माथे पर आज तक गुल्ली
का दाग है और कई दोस्त को बैसाखी तक लेनी पड़ी। पर वे पूछते ह क क्या क्रकेट से सर टू टने का डर नह रहता? यानी
चोट कसी भी खेल म लग सकती है, इस लए खेल छोड़ना नह , सावधानी बरतना चा हए।
पाठ का सबसे सुंदर भाव अंत म है। खेल के मैदान म अमीर-गरीब का बलकुल भेद न था, अ भमान क गुंजाइश ही न
थी। घर पर घरवाले बगड़ रहे ह, पताजी चौके पर बैठे रो टय पर अपना क्रोध उतार रहे ह — पर ब े को न नहाने क सुध है,
न खाने क । लेखक लखते ह — “गुल्ली है जरा-सी, पर उसम दु नया भर क मठाइय क मठास और तमाश का आनंद भरा
है।”
पाठ के बाद के अभ्यास पूरे पाठ को जीवन से जोड़ते ह। पाठ से म पाठ क सीधी समझ जाँची जाती है (इस पाठ म यह
बहु वकल्पी नह है, लखकर उत्तर दे ने वाले प्रश्न ह)। मलान क जए म चत्र को उनके अथ से जोड़ना है, खान-पान म चबेने
क जानकारी है, आइए जान म ‘पहर’ का अथ, तमाशा म कठपुतली-नाटक-बाइस्कोप-करतब, भाषा क बात म वशेषण
और सं ा, आपके खेल म इकड़ी-दुकड़ी, लट्टू, पतंग और कब ी, तथा इन्ह भी जा नए म पैरालं पक तैराक मुरलीकांत
राजाराम पेटकर का प रचय है। इस पाठ के साथ कोई अनुपूरक ( बना क्रमांक क ) रचना नह छपी है — पाठ पृष्ठ 84 पर
‘पता लगाइए’ के साथ पूरा हो जाता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
पयाल धान की सूखी डंठल, पुआ ल “वह पयाल का बछौना” सद म दादा जी पयाल बछाकर
सो जाते ह।
बछौना िबछाने की चीज़, िबस्तर “वह पयाल का बछौना” माँ ने आँगन म बछौना बछा
दया।
चचेरा भाई चाचा का बेटा “म अपने चचेरे भाई हलधर के साथ” मेरा चचेरा भाई मेरे साथ ही पढ़ता
है।
जेठा उम में बड़ा “हलधर मुझसे दो साल जेठे थे।” मेरी बहन मुझसे तीन साल जेठ
है।
प्रातःकाल सवेरे का समय “हम दोन प्रातःकाल मटर और जौ का प्रातःकाल टहलने से मन ताज़ा
चबेना लेते थे।” रहता है।
चबेना चबाकर खाने के िलए भुना हुआ अनाज “मटर और जौ का चबेना लेते थे।” खेत जाते समय काका जेब म
चबेना रख लेते ह।
रूप-रंग भरना पात्र का वेश और मेक अप तैयार करना “ जस घर म लीला पात्र का रूप-रंग भरा नाटक से पहले सबका रूप-रंग
जाता था” भरा गया।
सजावट सजाने का काम “दो बजे दन से पात्र क सजावट शुरू होने त्योहार पर पूरे बाज़ार क सजावट
लगती।” दे खते ही बनती है।
उत्साह काम करने की उमंग , जोश “ जस उत्साह से दौड़कर छोटे -मोटे काम ब ने बड़े उत्साह से पेड़ लगाए।
करता”
पशन नौकरी पूर ी हो जाने पर हर महीने िमलने “उस उत्साह से तो आज अपनी पशन लेने दादा जी महीने क पहली तारीख
वाला धन भी नह जाता।” को पशन लेने जाते ह।
जी लोट-पोट मन का बहत
ु ललचा जाना, खुशी से भर “तो जी लोट-पोट हो जाता है” मठाई दे खकर छोटे भाई का जी
होना जाना लोट-पोट हो गया।
गुल्ली छोटी लकड़ी, िजसके दोनों िसरे नुक ीले “गुल्ली बना ली और दो आदमी भी आ उसने टहनी छ लकर गुल्ली बना
होते है ं गए” ली।
थापी कपड़े धोने के िलए काम में आने वाला काठ “न लॉन क जरूरत, न कोट क , न थापी धोबी थापी से कपड़े धो रहा था।
का चपटे और चौड़े िसरे का डंडा क”
वलायती िवदे श का, बाहर के दे श का “ वलायती खेल म सबसे बड़ा ऐब है” यह वलायती फल हमारे यहाँ नह
उगता।
ऐब दोष, कमी “सबसे बड़ा ऐब है क उनके सामान महँगे हर चीज़ म कोई-न-कोई ऐब
होते ह।” नकल ही आता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 7 मेरा बचपन AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
द वाना होना िकसी चीज़ के पीछे पागल हो जाना “हम अंग्रेजी चीज के पीछे ऐसे द वाने हो वह क्रकेट का द वाना है।
रहे ह”
अरु च मन न लगना, पसंद न आना “अपनी सभी चीज से अरु च हो गई है।” बीमारी म खाने से अरु च हो जाती
है।
सालाना हर साल का, वािषक “तीन-चार रुपये सालाना केवल खेलने क वद्यालय का सालाना उत्सव
फ स” दसंबर म होता है।
बना दाम- िबना कु छ पैस ा खच िकए “जो बना दाम, कौड़ी के खेले जाते ह।” खो-खो बना दाम-कौड़ी के खेला
कौड़ी के जाने वाला खेल है।
कौड़ी एक समुद ी कीड़े का खोल, िजसे पुर ाने “ बना दाम, कौड़ी के खेले जाते ह।” पुराने समय म लोग कौ ड़य से
समय में मुद ा की तरह उपयोग करते थे खरीद- बक्र करते थे।
बैसाखी लकड़ी की टेक , िजसके सहारे चोट लगने “जो थापी को बैसाखी से बदल बैठे।” पैर टू टने पर उसे कुछ दन बैसाखी
पर चला जाता है लेनी पड़ी।
जमघट भीड़, एक जगह इक े हएु लोग “वह खला ड़य के जमघट” मेले म लोग का जमघट लगा था।
अ भमान घमंड “अ भमान क गुंजाइश ही न थी।” अ े खलाड़ी को अपनी जीत का
अ भमान नह होता।
गुंजाइश जगह, संभावना “अ भमान क गुंजाइश ही न थी।” इस उत्तर म सुधार क गुंजाइश है।
सुध ध्यान, होश “न नहाने क सुध है, न खाने क ।” खेल म उसे समय क सुध ही न
रही।
चौका रसोई; खाना बनाने और खाने की जगह “ पताजी चौके पर बैठे रो टय पर अपना दाद चौके म रो टयाँ सक रही ह।
क्रोध उतार रहे ह।”
तमाशा वह दृ श्य िजसे दे खने से मनोरंजन हो, जैसे “तमाश का आनंद भरा है।” मेले म हमने कठपुतली का तमाशा
— मेल ा, नौटंक ी दे खा।
पहर िदन का चौथा भाग या तीन घंटे का समय “‘पहर’ का अथ होता है — दन का चौथा दोपहर का पहर बीत गया, अब
भाग या तीन घंटे का समय।” धूप ढल रही है।
दव्यांग िजसके शरीर के िकसी अंग में कमी हो, पर “पैरालं पक खेल दव्यांग खला ड़य के हमारे वद्यालय म दव्यांग ब के
जो अपनी लगन से बड़े काम कर िदखाता है लए … आयो जत होने वाला … कायक्रम लए ढलान वाला रास्ता बना है।
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पैरालं पक िदव्यांग िखलािड़यों के िलए समय-समय पर “वे 1972 के हाइ डलबग पैरालं पक म …” पैरालं पक म हमारे दे श के
होने वाला ओलंिपक खेल ों का कायक्रम खलाड़ी पदक जीतते ह।
लकवाग्रस्त िजसे लकवा मार गया हो, यानी शरीर का “कई गो लयाँ लगने के कारण वे लकवाग्रस्त लकवाग्रस्त रोगी को नय मत
कोई भाग काम करना बंद कर दे हो गए।” व्यायाम कराया जाता है।
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