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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा5
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 4: साङ् केन
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
33 – 45 10 43 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 39 pages
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 4: साङ् केन
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 4 साङ् केन के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह एक कहानी है। पुस्तक म इसके नीचे कसी रचनाकार
का नाम नह छपा है। कहानी म दल्ली से आई लड़क वल्लरी अरुणाचल प्रदे श के चौखाम म अपने मत्र चाऊतान के साथ साङ् केन का त्योहार
दे खती है — वही त्योहार जससे वहाँ नया वष आरंभ होता है और जसम लोग एक-दूसरे पर पानी डालते ह। पृष्ठ 33 से 45 तक के हर अभ्यास —
बातचीत के लए, पाठ से (बहु वकल्पी), पाठ से ( ल खत प्रश्न और भावाथ ता लका), भाषा क बात, पाठ से आगे, सो चए और ल खए, मेरी
कलाकारी, पुस्तकालय से तथा बूझो पहेली — का हल यहाँ दया गया है। पाठ के बाद पृष्ठ 44 और 45 पर छपी बना क्रमांक क क वता होली आई,
होली आई (भवानी प्रसाद मश्र) भी यहाँ पूरी समझाई गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 33 – 45
खं ड प्रश्न
10 43
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 37
पाठ पढ़ने के बाद कक्षा म चचा
बातचीत के लए
प्र.1 त्योहार पर घर म कई प्रकार क मठाइयाँ और नमक न बनाई जाती ह। आपको कौन-सी मठाइयाँ और नमक न
अ लगती ह? वे कस त्योहार पर बनाई जाती ह?
यह आपके अपने घर का प्रश्न है। उत्तर म तीन बात ज़रूर आनी चा हए — मठाई या नमक न का नाम, वह कस त्योहार पर बनती
है, और आपको वह क्य अ लगती है।
त्योहार मठाई नमक न
होली गिु झया, मालपुआ दहीबड़े, नमकपारे
दीपावली ल ू , बफ़ मठरी, चकली, सेव
रक्षाबंध न घे वर , नािरयल के ल ू मठरी
ईद से वइयाँ (िसवैयाँ) समोसे
पोंग ल / मकर सं ांित ु ़ के ल ू , िचक्की
ितल -गड मुरुक्कु
साङ् के न (अरुणाचल पदे श) चावल के आटे की मीठी पीठा बाँस म पकाए चावल-पकवान
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नमूना उत्तर: मुझे गु झया सबसे अ लगती है। वह होली पर बनती है। उसके भीतर खोया, सूजी और मेवा भरा होता है। माँ जब
गु झया तलती ह तो पूरे घर म सुगंध फैल जाती है। नमक न म मुझे मठरी अ लगती है, जो हमारे घर द पावली पर बनती है।
कक्षा म करने का काम: सब ब े अपनी-अपनी मठाई का नाम बोड पर लख। फर ग नए — कस मठाई का
नाम सबसे ज़्यादा बार आया? इससे पता चलेगा क एक ही त्योहार पर अलग-अलग घर म अलग-अलग चीज़ बनती
ह।
प्र.2 आप कौन-से त्योहार मनाते ह? उनम और साङ् केन म कौन-कौन सी समानताएँ ह?
पहले अपने त्योहार के नाम बताइए — जैसे होली, द पावली, ईद, क्रसमस, प गल, बहू, ओणम, गुरुपव। फर उन्ह साङ् केन से
मलाकर दे खए। सबसे ज़्यादा समानता होली से मलती है।
बात साङ् केन म हमारे त्योहार म
नया वष साङ् केन से नया वष आरंभ होता है। होली, गड
ु ़ ी पड़वा, बैस ाखी, िबहू और उगािद से भी नया
वष शुरू माना जाता है।
पानी और लोग एक-दूसरे पर बाल टयाँ भर-भरकर पानी डालते ह और चेहरे होली में हम एक -दू स रे पर रंगीन पानी डालते है ं और
रंग पर चावल का आटा लगाते ह। गल
ु ाल लगाते है।
ं
पकवान घर म कई प्रकार के पकवान बनते ह। हमारे यहाँ भी िमठाइयाँ और नमकीन बनते है।
ं
मेल -िमलाप लोग ताऊजी, बुआजी के यहाँ जाते ह, प्रणाम करते ह, आशीवाद होली-दीवाली पर भी हम बड़ों के पैर छू ते है ं और
लेते ह। िर श्तेद ारों से िमलने जाते है।
ं
पूजा मू तय पर जल चढ़ाया जाता है, भक्षु मंत्र पढ़ते ह। हमारे त्योहारों पर भी पूजा होती है और मंत्र या पाथना
बोली जाती है।
िकतने िदन तीन दन तक चलता है। होली दो िदन (होिलका दहन और ध ल
ु े ंडी), दीपावली
पाँच िदन तक चलती है।
सोचने क बात: भारत बहुत बड़ा दे श है। भाषा, कपड़े और खाना जगह-जगह बदल जाते ह, पर खुशी मनाने का
तरीका बहुत मलता-जुलता है — मलकर गाना, पानी-रंग, मीठा खाना और बड़ का आशीवाद। इसी को हम
‘ व वधता म एकता’ कहते ह।
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प्र.3 हमारे दे श म अनेक अवसर पर शोभायात्राएँ (जुलूस) नकाली जाती ह। आपने कौन-कौन सी शोभायात्राएँ दे खी
ह? उनके बारे म अपने अनुभव बताइए।
अपनी दे खी हुई कसी एक शोभायात्रा को चु नए और चार बात बताइए — कब नकली, कहाँ से कहाँ गई, उसम क्या-क्या था,
और आपको कैसा लगा।
कुछ शोभायात्राएँ जो हमारे दे श म नकलती ह —
गणेश चतुथ और दुगा पूजा के वसजन क शोभायात्रा
रामनवमी, जन्माष्टमी और महावीर जयंती क शोभायात्रा
बुद्ध पू णमा पर बौद्ध- वहार से नकलने वाली शोभायात्रा
ईद- मलादुन्नबी का जुलूस और मुहरम के ता ज़ए
पुरी क रथयात्रा, जसम रथ ख चे जाते ह
गणतंत्र दवस क झाँ कयाँ और वद्यालय क प्रभात-फेरी
नमूना उत्तर: पछले वष मने अपने मुहल्ले म गणेश वसजन क शोभायात्रा दे खी थी। शाम को ढोल बजने लगा। सबसे आगे ब े
नाच रहे थे, बीच म एक सजी हुई गाड़ी पर गणेशजी क मू त थी और पीछे बड़े लोग चल रहे थे। रास्ते म लोग फूल बरसा रहे थे। म
भी अपने पताजी के साथ थोड़ी दूर तक साथ चला। सबके चेहर पर खुशी थी — ठ क वैसी ही, जैसी पाठ म साङ् केन क
शोभायात्रा म थी।
ध्यान रखने क बात: शोभायात्रा म हमेशा बड़ के साथ र हए, सड़क के कनारे च लए और भीड़ म हाथ छु ड़ाकर
आगे मत भा गए।
प्र.4 आप नया वष कब और कैसे मनाते ह?
भारत म नया वष एक ही दन नह मनाया जाता। हर प्रदे श का अपना नया वष है, और वह प्रायः फ़सल कटने या नए मौसम के आने
पर पड़ता है।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
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नए वष का नाम कहाँ कब
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साङ् के न
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अरुणाचल प्रदे श (चौखाम, नामसाई क्षेत्र)
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अप्रैल के मध्य म, तीन दन
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गड
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ु ़ ी पड़वा / उगािद महाराष्ट्र, कनाटक, आंध्र प्रदे श, तेलंगाना चैत्र मास का पहला दन (माच–अप्रैल)
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बैस ाखी पंजाब, ह रयाणा 13 या 14 अप्रैल
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िबहू (रोंगाली) असम
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पोइला बैशाख प म बंगाल
a 14 या 15 अप्रैल
पुथांडु / िवशु
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त मलनाडु / केरल अप्रैल के मध्य म
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नवरे ह कश्मीर चैत्र शुक्ल प्र तपदा
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अंगेज़ी नववष पूरे दे श म 1 जनवरी
agनमूl ना उत्तर: हमारे घर म नया वष गुड़ी पड़वा के दन मनाया जाता है। उस दन माँ सुबह जल्द उठकर आँगन म रंगोली बनाती ह।
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दरवाज़े पर आम के पत्त का तोरण बाँधा जाता है और गुड़ी खड़ी क जाती है। हम सब नए कपड़े पहनते ह, बड़ के पैर छू कर
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आशीवाद लेते ह और घर म पूरन-पोली बनती है। शाम को हम दादा-दाद के घर जाते ह।
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ध्यान द जए: साङ् केन, बैसाखी, बहू, पुथांडु और वशु — ये सब अप्रैल के आसपास ही पड़ते ह। कारण यह है
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क उस समय सद बीत चुक होती है, फ़सल पक जाती है और नया मौसम आरंभ होता है। नया वष असल म नए
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मौसम क खुशी है।
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a l से — पृष्ठ 37 और 38
gपाठ
प्रश्न के उपयुक्त उत्तर के सामने तारे का चह्न (✱) बनाइए—
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पाठ से बहु वकल्पी
प्र.1
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साङ् केन क्य मनाया जाता है? (क) द पावली पव के कारण (ख) नव वष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य म (ग) नए मं दर
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के उ ाटन क प्रसन्नता म (घ) बुद्ध पू णमा के अवसर पर
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s e mतारे का चह्न (✱) केवल एक वकल्प पर बनेगा — (ख) नव वष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य म।
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चाऊतान अपने मुँह से कहता है —
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“तुम्हे ं मालूम नही,ं आज हमारे यहाँ साङ् के न का त्योहार है। agl
a है।”
भ lहोता
आज से हमारा नया वष आरंg
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उपलक्ष्य का अथ है — कसी खास अवसर पर, कसी बात क खुशी म।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) द पावली पव ग़लत पाठ म द पावली का नाम एक बार भी नह आया। साङ् केन अरुणाचल प्रदे श का त्योहार है और
के कारण द पावली उससे बलकुल अलग त्योहार है।
(ख) नव वष सही ✱ यही उत्तर पाठ म साफ़-साफ़ लखा है — “आज से हमारा नया वष आरंभ होता है।” आगे चाऊतान
प्रारंभ होने के यह भी कहता है क तीन दन तक इसी तरह साङ् केन मनाया जाता है।
उपलक्ष्य म
(ग) नए मं दर के ग़लत यह वकल्प धोखा दे सकता है, क्य क गाँव म नया मं दर सचमुच बना है और उसी म मू तयाँ रखी जा
उ ाटन क प्रसन्नता रही ह। पर प ढ़ए — मू तयाँ मं दर म तीन दन के लए आई ह और तीसरे दन वापस बौद्ध- वहार
म चली जाएँगी। यानी यह साङ् केन क एक रीत है, त्योहार का कारण नह ।
(घ) बुद्ध पू णमा के ग़लत पाठ म भगवान बुद्ध क मू तयाँ ज़रूर आती ह, पर ‘बुद्ध पू णमा’ का ज़क्र कह नह है। बुद्ध पू णमा
अवसर पर अलग दन होती है। मू त का आना ही कसी त्योहार को बुद्ध पू णमा नह बना दे ता।
उत्तर पकड़ने का तरीका: प्रश्न ‘क्य ’ पूछ रहा है। ऐसे प्रश्न का उत्तर पाठ म प्रायः कसी पात्र क कही हुई बात म
मलता है। यहाँ चाऊतान क बात ही पूरा उत्तर दे दे ती है।
प्र.2 भगवान बुद्ध का मं दर कहाँ बना हुआ था? (क) च कत्सालय के पास (ख) सरोवर के कनारे (ग) नद के कनारे
(घ) समुद्र के कनारे
तारे का चह्न (✱) बनेगा — (ग) नद के कनारे।
चाऊतान ने बताया —
“अभी एक -दो िदन पहले ही हमारे गाँव के लोगों ने नदी के िकनारे एक मंिदर बनाया है।”
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) च कत्सालय के ग़लत ‘ च कत्सालय’ यानी अस्पताल। पाठ म अस्पताल क कोई बात ही नह है।
पास
(ख) सरोवर के ग़लत ‘सरोवर’ यानी तालाब या झील। पाठ म तालाब नह , नद लखा है। दोन म अंतर है — नद बहती
कनारे है, सरोवर एक ही जगह ठहरा रहता है।
(ग) नद के कनारे सही ✱ पाठ का वाक्य ज्य -का-त्य यही कहता है। इसी कारण ‘भाषा क बात’ के प्रश्न 1 (ख) म भी यही
वाक्य दया गया है।
(घ) समुद्र के कनारे ग़लत चौखाम अरुणाचल प्रदे श म है, जो पहाड़ का प्रदे श है। वहाँ समुद्र है ही नह । अरुणाचल प्रदे श क
सीमा कसी समुद्र से नह लगती।
चार वकल्प जल- ान वाले क्य ह? क्य क प्रश्न बनाने वाले जाँचना चाहते ह क आपने ठ क शब्द पढ़ा या
नह । नद , सरोवर और समुद्र — तीन म पानी है, पर तीन अलग ह। पाठ को ध्यान से पढ़ने वाला ही सही शब्द चुन
पाएगा।
प्र.3 लोग बहुत दे र तक एक-दूसरे पर पानी डालते रहे क्य क— (क) उन्ह गरमी लग रही थी। (ख) वे स्नान कर रहे थे।
(ग) वे गंदे हो गए थे। (घ) वे साङ् केन मना रहे थे।
तारे का चह्न (✱) बनेगा — (घ) वे साङ् केन मना रहे थे।
पाठ की पंिक्त —
“िफर तो लोग बहुत दे र तक एक -दू सरे पर पानी डालते रहे और साङ् के न मनाते रहे।”
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) उन्ह गरमी लग ग़लत गरमी क बात पाठ म कह नह है। और गरमी लगने पर कोई दूसर पर बालट भर पानी नह डालता
रही थी। — वह स्वयं छाँव म बैठता है।
(ख) वे स्नान कर ग़लत स्नान अपने ऊपर पानी डालकर कया जाता है, दूसर के ऊपर नह । यहाँ तो लोग एक-दूसरे पर पानी
रहे थे। डाल रहे थे और साथ म चावल का आटा भी लगा रहे थे। यह स्नान नह , खेल और उत्सव है।
(ग) वे गंदे हो गए ग़लत पाठ म गंदे होने क कोई बात नह । उलटे वे एक-दूसरे के चेहर पर आटा लगा रहे थे — यानी खुशी म
थे। ऐसा कर रहे थे, सफ़ाई के लए नह ।
(घ) वे साङ् केन सही ✱ पाठ यही कहता है। साङ् केन म पानी डालना त्योहार क रीत है, ठ क वैसे ही जैसे होली म रंग डालना।
मना रहे थे।
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जानने क बात: साङ् केन म पानी को शुद्ध करने वाला माना जाता है। पहले भगवान बुद्ध क मू तय पर जल
चढ़ाया जाता है, फर लोग एक-दूसरे पर पानी डालते ह — इसका अथ है क बीते वष क सब कड़वाहट धुल जाए
और नया वष साफ़ मन से शुरू हो।
प्र.4 “यहाँ के लोग के मुख पर सदै व मुस्कान बनी रहती है।” इस वाक्य का क्या अथ है? (क) यहाँ के लोग सदै व
प्रसन्न रहते ह। (ख) यहाँ के लोग सदै व प्रसन्न रहने का अ भनय करते ह। (ग) यहाँ के लोग को खेलना-कूदना
अ ा लगता है। (घ) यहाँ के लोग को नाचना-गाना अ ा लगता है।
तारे का चह्न (✱) बनेगा — (क) यहाँ के लोग सदै व प्रसन्न रहते ह।
वाक्य का सीधा अथ यही है। मुख यानी चेहरा, सदै व यानी हमेशा। चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहना यानी मन का हमेशा खुश रहना।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) यहाँ के लोग सदै व सही ✱ यही वाक्य का अथ है। पूरा पाठ इसी बात का प्रमाण दे ता है — चाऊतान के पताजी सफाई
प्रसन्न रहते ह। छोड़कर स्वागत करते ह, माताजी पकवान लाती ह, शोभायात्रा म सबक “प्रसन्नता का ठकाना
नह था।”
(ख) यहाँ के लोग सदै व ग़लत अ भनय का अथ है — बनावट ढं ग से, नाटक करके। लेखक तो यहाँ के लोग क तारीफ़ कर
प्रसन्न रहने का अ भनय रहा है, उन पर बनावट का आरोप नह लगा रहा। एक शब्द बदलते ही अथ उलटा हो जाता है
करते ह। — यही इस वकल्प का जाल है।
(ग) यहाँ के लोग को ग़लत वाक्य मुस्कान क बात कर रहा है, खेल क नह । खेलना-कूदना पाठ म कह नह आया।
खेलना-कूदना अ ा लगता
है।
(घ) यहाँ के लोग को ग़लत पाठ म लोग नाचते-गाते ज़रूर ह, पर वह शोभायात्रा के समय क बात है। इस वाक्य का अथ
नाचना-गाना अ ा लगता नाचना-गाना नह है। प्रश्न वाक्य का अथ पूछ रहा है, पाठ क कोई और घटना नह ।
है।
दो वकल्प इतने मलते-जुलते क्य ह? (क) और (ख) म केवल एक अंतर है — ‘प्रसन्न रहते ह’ और ‘प्रसन्न रहने
का अ भनय करते ह’। ऐसे प्रश्न म पूरा वकल्प अंत तक प ढ़ए। आधा पढ़कर चुनने पर उत्तर ग़लत हो जाता है।
ध्यान द जए: इस पाठ के चार बहु वकल्पी प्रश्न म एक-एक ही उत्तर सही नकलता है। फर भी नयम वही है —
पहला सही वकल्प मलते ही रु कए मत, बाक तीन को भी पाठ से मलाकर जाँ चए।
पाठ से — पृष्ठ 38
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ल खत प्रश्न और भावाथ क ता लका
पाठ से
प्र.1 (क) नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए— साङ् केन का त्योहार मनाते समय वल्लरी को
होली क याद क्य आई?
वल्लरी को होली क याद इस लए आई, क्य क साङ् केन म लोग वैसे ही खेल रहे थे जैसे होली म खेला जाता है — एक-दूसरे पर
पानी डालना और एक-दूसरे के चेहरे पर कुछ लगाना।
पाठ की पंिक्तयाँ —
“हँसी-खुशी के इस वातावरण में वल्लरी ने दे खा िक लोग एक -दू सरे पर बालिटयाँ भर-भरकर पानी डाल रहे है।
ं
वे एक -दू सरे के चे हरों पर चावल का आटा भी लगा रहे है।
ं
वल्लरी को होली की याद आ गई।”
वल्लरी दल्ली से आई है। वहाँ होली म यही सब होता है — रंगीन पानी डाला जाता है और मुँह पर गुलाल लगाया जाता है। इसी लए
उसने चाऊतान से कहा, “चाऊतान भाई, लगता है क लोग होली का त्योहार मना रहे ह।”
साङ् केन म होली म
बालिटयाँ भर-भरकर पानी डालना एक -दू स रे पर रंगीन पानी फें कना
चेहरों पर चावल का आटा लगाना मुँह पर गल
ु ाल लगाना
घरों में पकवान बनना और िमलना-जुल ना िमठाई-नमकीन बनना और अितिथयों का स्वागत
इसी िदन से नया वष आरंभ होली से ही नया वष आरंभ माना जाता है
असली बात: वल्लरी ने कोई नई चीज़ नह दे खी थी — उसने अपनी जानी-पहचानी बात दूसरे रूप म दे खी। जब
कोई अनजानी जगह क बात हमारी अपनी कसी बात से मल जाती है, तो वह जगह भी अपनी-सी लगने लगती है।
प्र.1 (ख) वल्लरी को चौखाम और दल्ली म क्या अंतर लगा?
वल्लरी को सबसे बड़ा अंतर यह लगा क दल्ली म भीड़ और शोर है, जब क चौखाम खुला, शांत और हरा-भरा है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन
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पाठ की पंिक्तयाँ —
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“कहाँ िद ल्ली की भीड़ भरी सड़ कें , हॉन बजाती हुई कारे ं और बसे,ं आदिमयों की लंबी-लंबी कतारे ं
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se चौखाम का खुला और शांत वातावरण।
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aिजधर दे खो, हिरयाली ही हिरयाली और फूल ही फूल।”
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सड़कें भीड़भरी खुल ी और शांत
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आवाज़ कार और बस के हॉन शांत वातावरण
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लंबी-लंबी कतार म खड़े चेहरों पर सदै व मुस्कान
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a g चारों ओर इमारत और गा ड़याँ हिरयाली ही हिरयाली और फू ल ही फू ल
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भाषा क सुंदरता: लेखक ने “कहाँ … और कहाँ …” का प्रयोग कया है। यह वाक्य-रचना दो चीज़ का बड़ा अंतर
दखाने के लए बरती जाती है। जैसे — “कहाँ m
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मं दर क सजावट कैसे क गई थी?
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seदर क सजावट बाँस, हरी टह नय और रंग- बरंगे फूल से क गई थी। कुछ भी महँगा नह लगाया गया था, फर भी वह बहुत
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सुंदर लग रहा था।
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पाठ की पंिक्तयाँ —
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“मंिदर की जालीदार दीवारे ं बाँस और बाँस की खपिच् चयों से बनी हुई थी ं।
बीच -बीच में पेड़ों की हरी-भरी टहिनयाँ लगाई गई थी ं
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mसादा और सुंदर मंिदर व लरी ने पहले कभी नही ं दे खा था।” glas
और खोंस-खोंसकर उन पर रंग-िबरंगे फूल सजा िदए गए थे । e
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सजावट के तीन चरण थे —
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1. द वार बाँस और बाँस क पतली खप य से जाली क तरह बुनी गईं।
s e m टह नयाँ लगाई गईं।
2. उन जा लय के बीच-बीच म पेड़ क हरी-भरी
3. उन टह नय म ख स-ख सकर रंगl-aबरंगे फूल सजाए गए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन AglaSem · NCERT Solutions
‘सादा और सुंदर’ का अथ: मं दर म न संगमरमर था, न सोना, न बजली क झालर। जो चीज़ वह आसपास
मलती ह — बाँस, टहनी और फूल — उन्ह से सजावट हुई। इसी लए वल्लरी को वह अनोखा लगा। सुंदरता महँगी
चीज़ से नह , सलीके से आती है।
प्र.1 (घ) आपको कौन-कौन आशीवाद दे ते ह? वे क्या आशीवाद दे ते ह?
यह प्रश्न आपके अपने घर और आसपास का है। उत्तर म दो बात ल खए — कौन आशीवाद दे ता है, और वह क्या कहकर दे ता है।
पाठ म भी आशीवाद आया है। चाऊतान के पताजी बताते ह क गाँव के लोग बौद्ध- वहार जाकर भक्षुओं को दं डवत प्रणाम करगे
और भक्षु आशीवाद दगे —
“खेत ी फूले-फले तुम्हारी,
तुम्हे ं न हो कोई बीमारी।
िहल-िमलकर सब नाचे ं-गाएँ,
नए साल में खुशी मनाएँ।”
दे खए, इस आशीवाद म तीन कामनाएँ ह — अ फ़सल, अ ा स्वास्थ्य और आपस का मेल-जोल। ये तीन ही कसी गाँव
के जीवन क सबसे बड़ी ज़रूरत ह।
कौन आशीवाद दे ते ह प्रायः क्या कहते ह
दादा-दादी, नाना-नानी “खूब पढ़ो, नाम रोशन करो।” “दूध पीते रहो, ह े -क े रहो।”
माता-िपता “ख़ुश रहो।” “सदा आगे बढ़ो।”
बड़े भाई-बहन, ताऊजी-ताईजी, बुआ जी “जीते रहो।” “परीक्षा अ जाए।”
िशक्षक “ख़ूब मन लगाकर पढ़ो।” “ईमानदार बने रहो।”
पड़ोस के बुज़गु “ईश्वर तुम्ह स्वस्थ रखे।” “सदा सुखी रहो।”
नमूना उत्तर: मुझे मेरे दादाजी, दाद जी, माता- पता और शक्षक आशीवाद दे ते ह। जब म सुबह दाद जी के पैर छू ता हूँ तो वे सर पर
हाथ रखकर कहती ह — “ख़ूब पढ़ो और स्वस्थ रहो।” त्योहार पर ताऊजी कहते ह — “जीते रहो, ख़ुश रहो।” मुझे यह बहुत अ ा
लगता है, क्य क इससे लगता है क सब मेरा भला चाहते ह।
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प्र.2 नीचे पाठ क कुछ पं क्तय के भावाथ दए गए ह। उदाहरण के अनुसार पाठ क उन पं क्तय को ल खए जो दए
गए भावाथ पर आधा रत ह— (भावाथ: शोभायात्रा म लोग बहुत प्रसन्न दखाई दे रहे थे। / मं दर सुंदर सजा था। /
ऐसा लगता है क लोग होली का त्योहार मना रहे ह। / त्योहार म सब एक-दूसरे से मलते-जुलते ह।)
पहली पं क्त पुस्तक म उदाहरण के रूप म भरी हुई है। बाक तीन खाने नीचे भरे गए ह। भावाथ का अथ है — कसी पं क्त म जो
बात कही गई है, उसका सार।
भावाथ पाठ क पं क्तयाँ
शोभायात्रा में लोग बहत
ु पसन्न “शोभायात्रा म सब लोग नाचते-गाते हुए जा रहे थे। लोग म बहुत उत्साह था।” (उदाहरण — पुस्तक म
िदखाई दे रहे थे। दया हुआ)
मंिदर सुंद र सजा था। “मंिदर की जालीदार दीवारे ं बाँस और बाँस की खपिच्चयों से बनी हईु थी ं। बीच-बीच में पेड़ों की हरी-भरी
टहिनयाँ लगाई गई थी ं और खोंस -खोंस कर उन पर रंग-िबरंगे फू ल सजा िदए गए थे। ”
ऐसा लगता है िक लोग होली का “वल्लरी ने दे खा िक लोग एक -दू स रे पर बालिटयाँ भर -भरकर पानी डाल रहे है।
ं वे एक -दू स रे के चेहरों पर
त्योहार मना रहे है।
ं ं वल्लरी को होली की याद आ गई। ”
चावल का आटा भी लगा रहे है।
त्योहारों में सब एक-दू स रे से “होली के दू स रे िदन लोग एक -दू स रे से िमलने जाते है।
ं उस िदन लोग घरों में कई पकार की िमठाइयाँ और
िमलते-जुल ते है।
ं नमकीन बनाते है ं और अितिथयों का स्वागत करते है।
ं ”
एक और सही उत्तर: चौथे खाने म चाऊतान क यह बात भी लखी जा सकती है — “आज शाम को हम लोग भी
अपने ताऊजी के यहाँ जाएँगे। … कल मेरी बुआजी और मेरे फूफाजी भी हमारे यहाँ आएँगे।” यह भी मलने-जुलने
क ही बात है।
ऐसे प्रश्न कैसे हल कर — तीन चरण:
चरण 1 — भावाथ म से मुख्य शब्द छाँ टए (जैसे ‘मं दर’, ‘सजा’)।
चरण 2 — पाठ म उसी शब्द को ढूँ ढ़ए।
चरण 3 — उस शब्द के आसपास क पूरी पं क्तयाँ ज्य -क -त्य ल खए। अपने शब्द मत जो ड़ए — प्रश्न ‘पाठ क
पं क्तयाँ’ माँग रहा है।
भाषा क बात — पृष्ठ 39 और 40
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन AglaSem · NCERT Solutions
समानाथ शब्द, ‘जहाँ दे खो … ही …’ वाले वाक्य, वचन, उद्धरण चह्न और वणमाला-क्रम
भाषा क बात
प्र.1 (क) नीचे दए गए वाक्य म रेखां कत शब्द के समानाथ शब्द का प्रयोग करते हुए अपनी लेखन-पु स्तका म
वाक्य को पुनः ल खए— एक दन वल्लरी को उसके मत्र चाऊतान ने अपने घर बुलाया। (रेखां कत शब्द —
मत्र, घर)
नया वाक्य: एक दन वल्लरी को उसके सखा चाऊतान ने अपने नवास पर बुलाया।
समानाथ शब्द यानी वे शब्द जनका अथ एक जैसा हो।
रेखां कत शब्द समानाथ शब्द
िम त्र सखा, दोस्त, साथी, संगी
घर नवास, मकान, गृह, आवास
एक और तरीके से: एक दन वल्लरी को उसके दोस्त चाऊतान ने अपने मकान पर बुलाया।
ध्यान र खए: समानाथ शब्द बदलने पर बाक वाक्य वैसा ही रहना चा हए। केवल रेखां कत शब्द क जगह नया
शब्द आएगा, और ज़रूरत हो तो ‘पर’, ‘म’ जैसा छोटा शब्द ठ क कर ली जए।
प्र.1 (ख) हमारे गाँव के लोग ने नद के कनारे एक मं दर बनाया है। (रेखां कत शब्द — गाँव, नद , कनारे)
नया वाक्य: हमारे ाम के लोग ने स रता के तट पर एक मं दर बनाया है।
रेखां कत शब्द समानाथ शब्द
गाँव ाम, दे हात
नदी स रता, त टनी, तरं गणी
िकनारा तट, तीर, कगार
छोट -सी सावधानी: ‘ कनारे’ के साथ ‘के’ आता है — ‘नद के कनारे’। पर ‘तट’ के साथ ‘पर’ अ ा लगता है
— ‘स रता के तट पर’। शब्द बदलने पर वाक्य को एक बार बोलकर प ढ़ए; कान स्वयं बता दे गा क कहाँ ‘के’ चा हए
और कहाँ ‘पर’।
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प्र.1 (ग) बीच-बीच म पेड़ क हरी-भरी टह नयाँ सजाई गई थ । (रेखां कत शब्द — पेड़ , टह नयाँ)
नया वाक्य: बीच-बीच म वृक्ष क हरी-भरी शाखाएँ सजाई गई थ ।
रेखां कत शब्द समानाथ शब्द
पेड़ वृक्ष, तरु, दरख़्त
टहनी शाखा, डाली, डाल
एक और तरीके से: बीच-बीच म तरुओं क हरी-भरी डा लयाँ सजाई गई थ ।
प्र.1 (घ) आज हमारे यहाँ साङ् केन का त्योहार है। (रेखां कत शब्द — त्योहार)
नया वाक्य: आज हमारे यहाँ साङ् केन का पव है।
रेखां कत शब्द समानाथ शब्द
त्योहार पव, उत्सव, तीज-त्योहार
थोड़ा-सा अंतर भी सम झए: ‘पव’ और ‘त्योहार’ लगभग एक ही ह। ‘उत्सव’ का प्रयोग कसी भी खुशी के
आयोजन के लए होता है — जैसे वद्यालय का वा षक उत्सव। इसी लए यहाँ ‘पव’ सबसे ठ क बैठता है।
प्र.2 (क) दए गए उदाहरण को समझकर वाक्य को पूरा क जए— जहाँ दे खो ह रयाली ही ह रयाली और फूल ही
फूल! (रेखां कत शब्द — ह रयाली ही ह रयाली, फूल ही फूल)
यह पुस्तक म दया हुआ उदाहरण है। पहले इसक बनावट समझ ली जए, फर बाक वाक्य अपने आप बन जाएँगे।
जहाँ दे खो हिरयाली ही हिरयाली और फूल ही फूल!
बनावट → शब्द + ही + वही शब्द
इसका अथ क्या है? जब कोई चीज़ इतनी अ धक हो क उसके सवा कुछ और दखाई ही न दे , तब हम उस शब्द को दो बार बोलते
ह और बीच म ‘ही’ लगा दे ते ह। इससे बहुतायत यानी बहुत अ धक होने का भाव आ जाता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन
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कुछ और उदाहरण:
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मेले म जहाँ दे खो भीड़ ही भीड़!
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बा रश के बाद जहाँ दे खो पानी ही पानी!
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रे गस्तान म जहाँ दे खो रेत ही रेत!
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ध्यान द जए: यह वाक्य पाठ के पहले ही पृष्ठ का है। लेखक ने चौखाम क ह रयाली दखाने के लए यही तरीका
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बरता था — “ जधर दे खो, ह रयाली ही ह रयाली और फूल ही फूल।”
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म समुद्र के कनारे गई, जहाँ दे खो ……………… पानी!
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प्र.2 (ख)
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l स्थान म ‘पानी ही’ आएगा, क्य क वाक्य के अंत म ‘पानी’ पहले से छपा है। पूरा जोड़ बनता है — पानी ही पानी।
पूरा वाक्य: म समुद्र के कनारे गई, जहाँ दे खो पानी ही पानी!
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क्य ठ क बैठता है: समुद्र के कनारे खड़े होकर जधर भी दे खो, पानी ही दखाई दे ता है — न पेड़, न घर, न सड़क।
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इसी को कहते ह ‘पानी ही पानी’।
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मेरा गाँव केरल म है; जहाँ दे खो ना रयल के पेड़ ……………… !
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प्र.2 (ग)
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gl पूरा वाक्य: मेरा गाँव केरल म है; जहाँ देखो ना रयल के पेड़ ही ना रयल के पेड़!
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यहाँ ‘ना रयल के पेड़’ पहले से लखा है, इस लए रक्त स्थान म ‘ही ना रयल के पेड़’ आएगा।
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जानने क बात: केरल म सचमुच बहुत ना रयल होते ह। ‘केरल’ नाम को कई लोग ‘केरा’ यानी ना रयल से जोड़कर
दे खते ह। वहाँ ना रयल के पेड़ समुद्र के कनारे- कनारे दूर तक फैले रहते ह।
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प्र.2 (घ) मुंबई म जधर दे खो ……………… !
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पूरा वाक्य (नमूना): मुंबई म जधर दे खो भीड़ ही भीड़!
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यहाँ खाली जगह पूरी है, इस लए आप अपनी पसंद का जोड़ा बना सकते ह। बस नयम वही रहे — शब्द + ही + वही शब्द।
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और तरीके:
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मुंबई म जधर दे खो ऊँची इमारत ही ऊँची इमारत!
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मुंबई म जधर दे खो गा ड़याँ ही गा ड़याँ!
मुंबई म जधर दे खो लोग ही लोग!
प्र.2 (ङ) ……………… क दुकान म जहाँ दे खो ……………… !
पूरा वाक्य (नमूना): मठाई क दुकान म जहाँ दे खो मठाई ही मठाई!
इस वाक्य म दो जगह भरनी ह। पहली जगह म दुकान का नाम आएगा और दूसरी जगह म उसी चीज़ का जोड़ा।
पहली जगह (दुकान) दूसरी जगह (जोड़ा)
चूड़ी चू ड़याँ ही चू ड़याँ!
िकताब कताब ही कताब!
कपड़े कपड़े ही कपड़े!
िखलौने खलौने ही खलौने!
फू ल फूल ही फूल!
एक सावधानी: दोन जगह एक ही चीज़ आनी चा हए। ‘ मठाई क दुकान म जहाँ दे खो चू ड़याँ ही चू ड़याँ!’ — ऐसा
वाक्य हँसी क बात बन जाएगा।
प्र.3 (क) रेखां कत शब्द के वचन बदलकर वाक्य पूरा क जए— शोभायात्रा म बड़ी मू त क पालक सबसे पीछे थी
और छोट मू तय क …………… आगे थ । (रेखां कत शब्द — पालक )
यह पुस्तक म दया हुआ उदाहरण है। खाली जगह म लाल रंग से पहले ही भरा है — पाल कयाँ।
पालकी (एकवचन) → पालिकयाँ (बहुवचन)
वचन का अथ है — शब्द से यह पता चलना क चीज़ एक है या एक से अ धक।
एकवचन — एक चीज़ का बोध (पालक , नद , बालट )
बहुवचन — एक से अ धक चीज़ का बोध (पाल कयाँ, न दयाँ, बाल टयाँ)
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नयम पक ड़ए: जो शब्द ‘◌ी’ पर समाप्त होते ह, उनका बहुवचन प्रायः ‘ि◌याँ’ से बनता है — पालक →
पाल कयाँ, नद → न दयाँ, लड़क → लड़ कयाँ, टोकरी → टोक रयाँ।
प्र.3 (ख) बाँस क खप याँ उधर रखी ह, एक …………… मुझे दे द जए। (रेखां कत शब्द — खप याँ)
पूरा वाक्य: बाँस क खप याँ उधर रखी ह, एक खप ी मुझे दे द जए।
खपिच्चयाँ (बहुवचन) → खपच् ची (एकवचन)
वाक्य म ‘एक’ शब्द आया है, इस लए यहाँ एकवचन ही आएगा। ‘एक खप याँ’ कहना ग़लत होगा।
नयम: जो शब्द ‘इयाँ’ पर समाप्त होते ह, उनका एकवचन प्रायः ‘◌ी’ पर समाप्त होता है — खप याँ → खप ी,
टोक रयाँ → टोकरी, च ड़याँ → च ड़या, लड़ कयाँ → लड़क ।
पाठ से जो ड़ए: मं दर क द वार इन्ह खप य से बनी थ — “मं दर क जालीदार द वार बाँस और बाँस क
खप य से बनी हुई थ ।” खप ी यानी बाँस क पतली-लंबी फ ।
प्र.3 (ग) गंगा एक प वत्र नद है। भारत म अनेक प वत्र …………… ह। (रेखां कत शब्द — नद )
पूरा वाक्य: गंगा एक प वत्र नद है। भारत म अनेक प वत्र न दयाँ ह।
नदी (एकवचन) → निदयाँ (बहवु चन)
वाक्य म ‘अनेक’ शब्द है, इस लए बहुवचन आएगा। साथ म क्रया भी बदल जाती है — ‘है’ क जगह ‘ह’, जो वाक्य म पहले से
छपा है।
जानने क बात: गंगा के अलावा यमुना, गोदावरी, नमदा, कावेरी और ब्रह्मपुत्र भी प वत्र मानी जाती ह। अरुणाचल
प्रदे श से होकर बहने वाली सयांग आगे चलकर असम म ब्रह्मपुत्र कहलाती है।
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प्र.3 (घ) मेरे जन्म दन पर कई प्रकार क मठाइयाँ थ ले कन मुझे रसगुल्ले क …………… सबसे अ लगती है।
(रेखां कत शब्द — मठाइयाँ)
पूरा वाक्य: मेरे जन्म दन पर कई प्रकार क मठाइयाँ थ ले कन मुझे रसगुल्ले क मठाई सबसे अ लगती है।
िमठाइयाँ (बहुवचन) → िमठाई (एकवचन)
वाक्य के अंत म ‘लगती है’ आया है — यह एकवचन क क्रया है। इस लए खाली जगह म एकवचन ‘ मठाई’ ही बैठेगा।
पूरा वाक्य ध्यान से प ढ़ए: इसी एक वाक्य म दोन वचन साथ-साथ आए ह — पहले मठाइयाँ (बहुवचन, क्य क
‘कई प्रकार क ’ थ ) और फर मठाई (एकवचन, क्य क बात केवल रसगुल्ले क हो रही है)।
नयम: मठाइयाँ → मठाई, दवाइयाँ → दवाई, रो टयाँ → रोट । बहुवचन का ‘याँ’ हटते ही शब्द एकवचन बन
जाता है।
प्र.3 (ङ) सारी बाल टयाँ पानी से भर गई ह, केवल एक …………… बची है। (रेखां कत शब्द — बाल टयाँ)
पूरा वाक्य: सारी बाल टयाँ पानी से भर गई ह, केवल एक बालट बची है।
बालिटयाँ (बहुवचन) → बालटी (एकवचन)
‘केवल एक’ का अथ ही एक है, इस लए यहाँ एकवचन आएगा।
पाँच वाक्य क एक ही सीख: वाक्य म कोई-न-कोई शब्द सुराग दे ता है क एकवचन चा हए या बहुवचन —
‘एक’, ‘केवल एक’, ‘अनेक’, ‘सारी’, ‘कई’। पहले उस शब्द को पहचा नए, फर वचन बद लए।
प्र.4 जब कसी क बात ज्य क त्य लखी जाती है तब एक चह्न लगाया जाता है। इसे उद्धरण चह्न कहते ह।
उदाहरण के लए— चाऊतान बोला, “आज से हमारा नया वष आरंभ होता है।” पाठ म आए ऐसे चार वाक्य
खोजकर लेखन-पु स्तका म ल खए।
उद्धरण चह्न ये ह — “ ”। जब हम कसी के बोले हुए शब्द बलकुल वैसे ही लखते ह, तब उन्ह इन्ह चह्न के भीतर रखते ह।
पाठ म से चार वाक्य —
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1. वल्लरी ने चाऊतान से पूछा, “ये लोग कहाँ जा रहे ह? बहुत प्रसन्न दख रहे ह।”
2. “क्या हम लोग भी शोभायात्रा म स म्म लत हो सकते ह?” वल्लरी के पताजी ने पूछा।
3. उसने चाऊतान से कहा, “चाऊतान भाई, लगता है क लोग होली का त्योहार मना रहे ह।”
4. “तीन दन तक इसी तरह साङ् केन मनाया जाता है।” चाऊतान ने बताया।
पाठ म ऐसे और भी वाक्य ह —
“हाँ-हाँ, अवश्य। च लए, हम सब शोभायात्रा म चलते ह।” चाऊतान के पताजी बोले।
वल्लरी ने बताया, “हमारे यहाँ भी होली से ही नया वष आरंभ होता है।”
चाऊतान ने बताया, “आज शाम को हम लोग भी अपने ताऊजी के यहाँ जाएँगे।”
बात कहने वाला ज्य -क -त्य कही गई बात
वल्लरी “ये लोग कहाँ जा रहे ह? बहुत प्रसन्न दख रहे ह।”
वल्लरी के िपताजी “क्या हम लोग भी शोभायात्रा म स म्म लत हो सकते ह?”
चाऊतान के िपताजी “हाँ-हाँ, अवश्य। च लए, हम सब शोभायात्रा म चलते ह।”
चाऊतान “तीन दन तक इसी तरह साङ् केन मनाया जाता है।”
लखने का नयम — दो चरण:
चरण 1 — बोलने वाले का नाम और ‘बोला/पूछा/बताया/कहा’ ल खए, फर अल्प वराम (,) लगाइए।
चरण 2 — बोली हुई बात को उद्धरण चह्न के भीतर र खए और पूण वराम (।) या प्रश्नवाचक चह्न (?) भी उद्धरण
चह्न के अंदर ही र खए।
दोन का क्रम उलटा भी हो सकता है — पहले बात, फर “… चाऊतान ने बताया।”
प्र.5 पाठ म से चुनकर कुछ शब्द नीचे दए गए ह। इन्ह हद वणमाला के क्रम म ल खए, जैसे— कलम, खरगोश,
गगन… (करेला, समय, मठ, तट, नमक न, जल, वन, मटका)
वणमाला के क्रम म:
करेला, जल, तट , नमकीन , मटका, मठ, वन , समय
यह क्रम कैसे नकाला — चरण दर चरण:
1. पहले हर शब्द का पहला अक्षर दे खए।
2. अब उन अक्षर को वणमाला के क्रम म र खए — क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब,
भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह।
3. य द दो शब्द का पहला अक्षर एक ही हो, तो दूसरा अक्षर दे खए।
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क्रम शब्द पहला अक्षर क्य यहाँ
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करे ल ा ‘क’ वणमाला का पहला व्यंजन है।
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2 ज ‘ज’ ‘क’ के बाद और ‘ट’ से पहले आता है।
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3 तट त ‘त’ ‘ज’ के बाद आता है।
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‘न’ ‘त’ वग के बाद आता है। ag
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‘म’ पर दो शब्द ह। दूसरा अक्षर दे खए — मटका म ‘ट’, मठ म ‘ठ’। ‘ट’ पहले आता है।
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6 म ‘ठ’ ‘ट’ के बाद आता है, इस लए मठ बाद म।
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7 वन व ‘व’ ‘म’ के बाद आता है।
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8 स ‘स’ इन सब म सबसे बाद म आता है।
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सबसे ज़रूरी बात: ‘मटका’ और ‘मठ’ म ही असली परीक्षा है। दोन ‘म’ से शुरू होते ह, इस लए दूसरा अक्षर
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दे खना पड़ा — ट पहले, ठ बाद म। शब्दकोश ( डक्शनरी) म शब्द इसी तरीके से जमाए जाते ह।
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पाठ से आगे — पृष्ठ 40
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पाठ को अपने घर और अपने राज्य से जो ड़ए
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पाठ से आगे
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a आपके घर म त्योहार के लए कौन-कौन सी तैया रयाँ क जाती ह?
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त्योहार से पहले घर म कई काम होते ह। उन्ह तीन भाग म बाँटकर ल खए — सफ़ाई-सजावट, खरीदारी और खाना बनाना। पाठ
म भी चाऊतान के पताजी साङ् केन से पहले घर क सफाई कर रहे थे और माताजी पकवान बना रही थ ।
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तैयारी क्या-क्या कया जाता है
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पूरे घर क झाड़-प छ, आँगन क धुलाई, पुराना सामान हटाना, कह -कह रंग-रोगन
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agl सजावट दरवाज़े पर तोरण या बंदनवार, आँगन म रंगोली, द ये या झालर लगाना, फूल क माला
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खरीदारी नए कपड़े, पूजा का सामान, मठाई-नमक न क साम ी, ब के लए रंग या पटाखे-र हत सजावट
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s e m मेहमान के लए वशेष भोजन क तैयारी
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रसोई मठाइयाँ और नमक न बनाना,
मेल -िमलाप रश्तेदार को a
बुलाना, पड़ो सय को मठाई भेजना, बड़ से आशीवाद लेना
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नमूना उत्तर: हमारे घर म त्योहार से एक सप्ताह पहले ही तैयारी शुरू हो जाती है। सबसे पहले पूरे घर क सफ़ाई होती है। पताजी
छत और आँगन धोते ह, माँ अलमा रयाँ साफ़ करती ह और म अपनी कताब क मेज़ ठ क करता हूँ। फर बाज़ार से नए कपड़े और
पूजा का सामान आता है। एक दन पहले माँ मठाई और नमक न बनाती ह और म आँगन म रंगोली बनाने म उनक सहायता करता
हूँ।
प्र.2 आपके घर पर त्योहार के समय कौन-कौन, क्या-क्या काम करता है? सूची बनाइए।
यह सूची अपने घर को दे खकर बनाइए। नीचे एक नमूना सूची द गई है — आप इसम अपने घर के लोग के नाम और काम भर
ली जए।
कौन क्या काम करता/करती है
दादीजी पूजा क थाली सजाती ह और सबको तलक लगाती ह।
दादाजी मं दर जाकर प्रसाद लाते ह और मेहमान से बात करते ह।
माँ मठाई और पकवान बनाती ह, घर सजाती ह।
िपताजी बाज़ार से सामान लाते ह, सफ़ाई और मरम्मत का काम करते ह।
बड़ी बहन रंगोली बनाती है और छोटे भाई-बहन को तैयार करती है।
मैं द ये या झालर लगाने म मदद करता/करती हूँ, पड़ो सय के घर मठाई पहुँचाता/पहुँचाती हूँ।
सोचने क बात: त्योहार एक अकेले आदमी का काम नह है। हर व्य क्त थोड़ा-थोड़ा काम करता है, तभी त्योहार
पूरा होता है। पाठ म भी ऐसा ही दखा — पताजी सफाई कर रहे थे, माताजी पकवान ला रही थ , गाँव के लोग ने
मलकर मं दर बनाया और सबने मलकर शोभायात्रा नकाली।
करके दे खए: इस बार त्योहार पर अपने लए एक काम चुन ली जए और उसे अपने आप पूरा क जए — जैसे
आँगन क सफ़ाई या द य को सजाना।
प्र.3 हमारे दे श म लोग अनेक प्रकार से अ भवादन करते ह। उदाहरण के लए, ‘नमस्ते’ बोलकर। आपके राज्य म क्या
बोलकर अ भवादन कया जाता है? एक सूची बनाइए— (ता लका: राज्य/कद्रशा सत प्रदे श — अ भवादन के
लए शब्द; पहली पं क्त म दल्ली — नमस्कार)
पहली पं क्त पुस्तक म भरी हुई है। बाक पं क्तयाँ नीचे भरी गई ह। आप इसम अपने राज्य वाली पं क्त ज़रूर जो ड़ए।
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राज्य/कद्रशा सत प्रदे श अ भवादन के लए शब्द
िदल्ली नमस्कार (पुस्तक म दया हुआ)
पंजाब सत श्री अकाल
राजस्थान खम्मा घणी / राम -राम सा
गज
ु रात के म छो / जय श्री कृ ष्ण
महारा नम स्कार / राम राम
तिमलनाडु वणक्कम
कन टक नम स्कारा
के रल नम स्कारम्
आंध पदे श और तेल ंग ाना नम स्कारम्
पिश्चम बंग ाल नोमोश्कार
ओिडशा नम स्कार
असम नम स्कार
जम्मू-कश्मीर आदाब / असलाम वाले कु म
उत्तर पदे श और िबहार (गाँवों में) राम -राम / पणाम
अ भवादन के तरीके भी अलग-अलग ह: कह दोन हाथ जोड़े जाते ह, कह बड़ के पैर छु ए जाते ह, कह सर
झुकाया जाता है। पाठ म चाऊतान कहता है क वे ताऊजी को प्रणाम करगे और बौद्ध भक्षुओं को दं डवत प्रणाम
करगे।
इस काम को कैसे पूरा कर: पुस्तक ने स्वयं कहा है क आप मत्र , शक्षक और अ भभावक क सहायता ले सकते
ह। कक्षा म जन ब के घर दूसरे राज्य से जुड़े ह, उनसे पू छए। इससे एक ही कक्षा म कई राज्य के शब्द इक े हो
जाएँगे।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 41
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अपनी पसंद, ‘आगे क कड़ी’ और आँख -दे खा वणन
सो चए और ल खए
प्र.1 इस पाठ म आपको सबसे अ ा क्या लगा और क्य ?
इस प्रश्न का उत्तर हर ब े का अलग होगा। बस इतना ध्यान र खए — पहले बताइए क क्या अ ा लगा, फर बताइए क
क्य । ‘क्य ’ के बना उत्तर अधूरा है।
पाठ का हस्सा वह अ ा क्य लग सकता है
मंिदर की सजावट बाँस, हरी टह नय और फूल से बना सादा मं दर — बना महँगी चीज़ के भी इतना सुंदर!
एक -दू स रे पर पानी डालना यह होली जैसा खेल है और इसम कोई कसी से नाराज़ नह होता।
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ु ं का आशीव द उसम खेती, स्वास्थ्य और मेल-जोल — तीन क कामना है।
वल्लरी और चाऊतान की िम त्र ता दो अलग-अलग जगह के ब े इतनी जल्द मत्र बन गए।
शोभायात्र ा ढोल, नाच-गाना, पाल कयाँ — पूरा दृश्य आँख के सामने आ जाता है।
नमूना उत्तर: मुझे इस पाठ म मं दर क सजावट सबसे अ लगी। उसक द वार बाँस क खप य से जाली क तरह बनाई गई
थ और उनम हरी टह नयाँ लगाकर उन पर रंग- बरंगे फूल ख स दए गए थे। मुझे यह इस लए अ ा लगा क्य क उसम कुछ भी
महँगा नह था, फर भी वह इतना सुंदर था क वल्लरी ने ऐसा मं दर पहले कभी नह दे खा था। इससे मने सीखा क आसपास मलने
वाली चीज़ से भी बहुत सुंदर सजावट हो सकती है।
प्र.2 नीचे दए गए उदाहरण को दे खकर आगे क कड़ी बनाइए— (उदाहरण: गे ँ → आटा → रोट /पूरी; गे ँ → द लया
→ हलवा) दूध, गन्ना, चना, चावल
पहले उदाहरण सम झए। गेहूँ एक चीज़ है। उसे पीसने से आटा बनता है और आटे से रोट या पूरी। गेहूँ को मोटा दलने से द लया
बनता है और द लया से हलवा।
गेहूँ → आटा → रोटी/पूरी
गेहूँ → दिलया → हलवा
यानी कड़ी इस तरह बनती है — क ी चीज़ → उससे बनी साम ी → उससे बना खाना। अब इसी तरह चार क क ड़याँ दे खए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन AglaSem · NCERT Solutions
क ी चीज़ पहली कड़ी दूसरी कड़ी तीसरी कड़ी
दू ध दही म क्खन घी
दू ध खोया पेड़ा बफ़
गन्ना गन्ने का रस गड
ु़ गजक / ितल -गड
ु ़ के ल ू
गन्ना गन्ने का रस चीनी िमठाई, शरबत
चना बेस न पकौड़े / कढ़ ी बेस न के ल ू
चना भुना चना स त्त ू स त्त ू का शरबत / िल ी
चावल चावल का आटा चीला / िप ा खीर , िफरनी
चावल पोहा (चूड़ा) पोहे की िखचड़ी िचवड़ा
पाठ से जो ड़ए: साङ् केन म लोग एक-दूसरे के चेहर पर चावल का आटा लगाते ह। यानी चावल क एक कड़ी तो
पाठ म ही आ गई — चावल → चावल का आटा।
यह अभ्यास क्या सखाता है: हमारे खाने क हर चीज़ कसी खेत से आती है। रोट सीधे नह बनती — पहले गेहूँ
उगता है, फर पसता है, तब रोट बनती है। हर नवाले के पीछे कसान क मेहनत है।
प्र.3 अपने मत्र को साङ् केन के बारे म पूरे दन का आँख -दे खा वणन अपनी लेखन-पु स्तका म लखकर बताइए।
आपक सहायता के लए कुछ मुख्य संकेत बदु नीचे दए गए ह— (स्वागत, पकवान, शोभायात्रा, मू तयाँ, मं दर,
एक-दूसरे पर पानी डालना, मल-जुलकर खुशी मनाना, पालक , बाँस क खप याँ, भगवान बुद्ध का मं दर,
बौद्ध भक्षु, होली, आशीवाद, घर, फूल)
आँख -दे खा वणन यानी ऐसा लखना मानो आप वह खड़े होकर दे ख रहे ह । इसम ‘मने दे खा’, ‘मने सुना’, ‘मुझे लगा’ जैसे
शब्द आते ह और घटनाएँ समय के क्रम से आती ह।
अ े वणन म ये बात ज़रूर ह —
1. सुबह से शाम तक का क्रम — पहले क्या हुआ, फर क्या।
2. दए गए संकेत-शब्द का प्रयोग।
3. जो दखा, सुनाई दया और महसूस हुआ — तीन का ज़क्र।
4. अंत म अपनी भावना — आपको कैसा लगा।
नमूना उत्तर:
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन
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िपय िमत्र,
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g l aं े साङ् के न दे खा और पूरा िदन आँखों के सामने से एक िचत्र की तरह गुज़र गया।
आज मैन
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सुबह मै ं अपने िपताजी के साथ चाऊतान के घर गया। उसके िपताजी सफाई कर रहे थे , पर हमें दे खते ही
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उन्होंने काम छोड़ िदया और हमारा स्वागत िकया। चाऊतान की माताजी कई पकार के पकवान ले आईं। वे
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बहुत स्वािदष्ट थे । a
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em.
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तभी सड़ क पर एक शोभायात्रा िनकली। लोगों के कं धों पर पालकी थी और उसमें भगवान बुद्ध तथा उनके
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िशष्यों की मूित याँ रखी थी ं। सब लोग नाचते -गाते चल रहे थे । हम भी उसमें सिम्मिलत हो गए।
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शोभायात्रा नदी के िकनारे बने नए मंिदर पर पहुँच ी। मैन
ं े दे खा िक उसकी जालीदार दीवारे ं बाँस की खपिच् चयों से
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mउन पर रंग-िबरंगे फूल खोंसे हुए थे । बौ िभ ु मंत्र पढ़ ते हुए agl
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बनी थी ं, बीच-बीच में हरी टहिनयाँ लगी थी ं और
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द्ध क्ष
मूितयों को मंिदर में ले गए और उन aपरglजल चढ़ ाने लगे।
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िफर मज़ा शुरू हुआ । लोग एक -दू सरे पर पानी डालने लगे और चे हरों पर चावल का आटा लगाने लगे। मुझे
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िबलकु ल होली जै सा लगा। िकसी ने मुझ पर भी बालटी भर पानी डाल िदया और मै ं भीग गया, पर िकसी को
a s eगुmस्सा नही ं आया — सब िमल-जुलकर खुशी मना रहे थे ।
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se m
o m g l a
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शाम को चाऊतान अपने ताऊजी के घर गया। बड़ ों ने उसे आशीव द िदया — “खे त ी फू ले -फले त म्
ु हारी, त म्
ु हे ं न
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हो कोई बीमारी।”
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िमत्र, त मु भी कभी चौखाम आना। तब हम दोनों िमलकर साङ् के न मनाएँगे।
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se m तु हारा िम
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म् त्र
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s e m
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co agl
पुस्तक कहती है: आप इन शब्द के अ त रक्त अन्य शब्द क सहायता भी ले सकते ह और ये शब्द आपक अपनी
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भाषा से भी हो सकते ह। यानी अपनी बोली का कोई सुंदर शब्द आ जाए तो उसे लखने म झझ कए मत।
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मेरी कलाकारी — पृष्ठ 42
सूखे पत्त से बने प्रा णय को पहचा नए और अपनी आकृ त बनाइए
मे री कलाकारी गतवध
प्र.1 यहाँ कुछ प्रा णय के चत्र दए गए ह जन्ह सूखे पत्त से बनाया गया है। इन प्रा णय को पहचा नए।
पृष्ठ 42 पर दए गए तीन चत्र, जो सूखे पत्त से बनाए गए ह।
पृष्ठ 42 पर तीन चत्र छपे ह। बाएँ से दाएँ ये ह —
क्रम प्राणी पत्त से क्या-क्या बना है
1 मोर एक लंबे पत्ते का शरीर, सर पर तीन पतली कलगी, नीचे दो पतली टाँग और पीछे कई पत्त क लंबी-फैली हुई पूँछ।
(पक्षी)
2 कछु आ बीच म जाली जैसी लक र वाली गोल पीठ (कवच), चार ओर चार पत्त के पैर और एक छोटे पत्ते का सर, जस पर
दो आँख बनी ह।
3 हाथी बड़े-बड़े पत्त का मोटा शरीर, एक चौड़े पत्ते का कान, लंबे पत्त के चार मोटे पैर और मुड़ी हुई पत्ती क सूँड़।
पहचानने का तरीका: पूरा चत्र मत दे खए — उसका सबसे खास अंग ढूँ ढ़ए। मोर क पहचान उसक लंबी पूँछ
और कलगी है, कछु ए क पहचान उसक जालीदार गोल पीठ है और हाथी क पहचान उसक सूँड़ तथा बड़े कान ह।
कलाकार ने इन्ह खास अंग के लए ठ क आकार के पत्ते चुने ह।
प्र.2 पत्त से कसी भी प्राणी क आकृ त बनाकर नीचे दए गए ान पर चपकाइए।
यह करके दे खने वाला काम है। नीचे पूरी व ध द गई है — इसे चरण दर चरण क जए।
साम ी: अलग-अलग आकार के सूखे पत्ते, ग द या फे वकोल, कची, एक सादा कागज़ और एक प सल।
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1. पत्ते इक े क जए — बगीचे या रास्ते से केवल गरे हुए सूखे पत्ते उठाइए। पेड़ से हरे पत्ते मत तो ड़ए। पीपल, बरगद, आम,
केला और नीम के पत्ते अ े रहते ह।
2. सुखाइए — पत्त को दो-तीन दन कसी मोट कताब के पन्न के बीच दबाकर र खए। इससे वे सीधे और सपाट हो जाएँगे।
3. प्राणी चु नए — पहले तय क जए क क्या बनाना है — मछली, ततली, च ड़या, खरगोश, ऊँट या हाथी।
4. पत्ते जमाइए — ग द लगाने से पहले पत्त को कागज़ पर रखकर दे खए। सबसे बड़ा पत्ता शरीर बनेगा, छोटे पत्ते पैर और कान,
पतला-लंबा पत्ता पूँछ, और नुक ला पत्ता च च।
5. चपकाइए — जब जमावट अ लगे, तब एक-एक पत्ता उठाकर उसके पीछे ग द लगाइए और उसी जगह चपका द जए।
6. अं तम रूप द जए — प सल या काले पेन से आँख बनाइए। नीचे अपने प्राणी का नाम ल खए।
सुझाव: मछली सबसे आसान है — एक बड़ा पत्ता शरीर, एक छोटा पत्ता पूँछ, एक बदु आँख। पहली बार यही
बनाकर दे खए।
यह काम पाठ से क्य जुड़ा है: साङ् केन के मं दर क सजावट भी बाँस, टह नय और फूल से हुई थी — यानी
वह आसपास मलने वाली चीज़ से। यह ग त व ध भी वही सखाती है: प्रकृ त से मली साधारण चीज़ से भी सुंदर
कला बन सकती है।
पुस्तकालय से — पृष्ठ 43
अरुणाचल प्रदे श के बारे म जानकारी जुटाइए
पु स्तकालय से
प्र.1 नीचे दए गए बदुओं के आधार पर अरुणाचल प्रदे श के बारे म शक्षक और पुस्तकालय क सहायता से
महत्वपूण जानकारी जुटाइए। (राजधानी, पड़ोसी राज्य, भाषा, मुख्य फसल, त्योहार, नृत्य, प रधान)
पुस्तक ने सात बदु दए ह। सात क जानकारी नीचे ता लका म भरी गई है। आप इसे अपनी लेखन-पु स्तका म उतार ली जए और
शक्षक या पुस्तकालय क सहायता से इसम और बात जो ड़ए।
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बदु जानकारी
राजधानी ईटानगर
पड़ोसी असम और नागालै ंड। इसकी सीमाएँ तीन दे शों से भी लगती है ं — उ त्त र में चीन (ितब्बत), पिश्चम में भूटान और पूव में म्यांम ार।
राज्य
भाषा यहाँ अनेक जनजातीय भाषाएँ बोली जाती है ं — िनशी, आिद , गालो, आपातानी, मोनपा, खामती, वांचो, नोक्ते आिद। राजकाज की
भाषा अंगेज़ी है और आपस में बात करने के िलए िहंद ी तथा असिमया-िमिश्रत बोली का भी पयोग होता है।
मुख्य धान (चावल ) मुख्य फसल है। इसके अलावा म क्का, बाजरा, दाले ं और ितलहन होते है।
ं फलों में संतरा, अनानास , से ब तथा
फसल मसालों में अदरक और बड़ी इलायची पिस द्ध है।
ं
त्योहार साङ् के न (जो इसी पाठ में है), लोसर , मोिपन, सोलुंग, न्योकु म , द ी, रे ह, सी-दोन्यी और बूर ी-बूट।
नत्ृ य पोनुंग, वांचो युद्ध-नत्ृ य, बद छम , याक छम (याक नत्ृ य), पासी कोंगकी और िरखमपाड़ा।
पिरधान िस्त्र याँ ‘गाले ’ नाम का लपेटकर पहना जाने वाला रंगीन वस्त्र और ऊपर शॉल पहनती है। ं पुरुष घुटनों तक का कु त या जैके ट,
कमर में लपेटा वस्त्र और बेतं -बाँस की टोपी पहनते है।
ं ठं डे ऊपरी क्षेत्र ों में मोनपा लोग ऊन का लंबा वस्त्र पहनते है।
ं
पाठ से जो ड़ए: पाठ का चौखाम अरुणाचल प्रदे श के नामसाई क्षेत्र म है। वहाँ खामती समुदाय के लोग रहते ह, जो
बौद्ध धम मानते ह। इसी लए पाठ म बौद्ध- वहार, भक्षु और भगवान बुद्ध क मू तयाँ आती ह। साङ् केन प्रायः अप्रैल
के मध्य म तीन दन तक मनाया जाता है।
और क्या जोड़ सकते ह: अरुणाचल प्रदे श को ‘उगते सूरज का प्रदे श’ कहा जाता है, क्य क भारत म सूरज क
पहली करण यह पड़ती है। तवांग का बौद्ध मठ और नामदफा राष्ट्रीय उद्यान यहाँ के प्र सद्ध स्थान ह। सयांग नद
आगे चलकर असम म ब्रह्मपुत्र कहलाती है।
बूझो पहेली — पृष्ठ 43
दूध मापने क पहेली — 4 लीटर और 3 लीटर के बरतन से ठ क 5 लीटर
बू झो पहे ली ग णत क पहे ली
प्र.1 ज्यो त को उसके जन्म दन पर मठाई बनाने के लए उसक माताजी ने दूधवाले भैया के पास 5 लीटर दूध लेने
भेजा। दूधवाले भैया के पास दूध को मापने के दो ही बरतन थे— एक 4 लीटर का और दूसरा 3 लीटर का।
दूधवाला कभी इस बरतन म, कभी उस बरतन म और कभी पतीले म दूध डाल रहा था। … अब आप बताइए क
ज्यो त ने अपने मत्र को उत्तर म क्या बताया होगा?
ज्यो त ने बताया होगा क दूधवाले भैया ने पतीले म दूध दो बार म डाला — पहले 4 लीटर और फर 1 लीटर। दोन मलाकर ठ क
5 लीटर हो गए।
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4 लीटर + 1 लीटर = 5 लीटर
पूरी बात यह है क 1 लीटर नापने के लए कोई बरतन नह था। पर 4 लीटर के बरतन म से 3 लीटर नकाल दो, तो जो बचेगा वही 1
लीटर है।
4 − 3 = 1 लीटर
पहला तरीका — तीन चरण म:
1. 4 लीटर वाला बरतन पूरा भरकर सारा दूध पतीले म डाल द जए।
पतीले म अब — 4 लीटर
2. अब 4 लीटर वाला बरतन फर से पूरा भ रए। उसम से 3 लीटर वाला बरतन ऊपर तक भर द जए। 4 लीटर वाले बरतन म अब
केवल 1 लीटर दूध बचेगा।
3. वही बचा हुआ 1 लीटर दूध पतीले म डाल द जए।
पतीले म अब — 4 + 1 = 5 लीटर
चरण 4 लीटर वाला बरतन 3 लीटर वाला बरतन पतीला
शुरू में 0 0 0
4 लीटर वाला बरतन भरा 4 0 0
उसे पतीले में उड़ेल ा 0 0 4
4 लीटर वाला बरतन िफर भरा 4 0 4
उससे 3 लीटर वाला बरतन भरा 1 3 4
बचा 1 लीटर पतीले में डाला 0 3 5
दूसरा तरीका — यह भी ठ क है:
1. 3 लीटर वाला बरतन भरकर पतीले म डाल द जए। पतीले म — 3 लीटर।
2. 3 लीटर वाला बरतन फर भरकर 4 लीटर वाले खाली बरतन म उड़ेल द जए। 4 लीटर वाले म अब 3 लीटर है और 1 लीटर क
जगह खाली है।
3. 3 लीटर वाला बरतन तीसरी बार भ रए और उससे 4 लीटर वाला बरतन ऊपर तक भर द जए। उसम केवल 1 लीटर जाएगा,
इस लए 3 लीटर वाले बरतन म 2 लीटर बचेगा।
4. वही 2 लीटर पतीले म डाल द जए। पतीले म — 3 + 2 = 5 लीटर।
पहेली क असली चाबी: जब सीधे नाप का बरतन न हो, तो दो बरतन के अंतर से काम चलाया जाता है। यहाँ 4
और 3 का अंतर 1 है, इस लए 1 लीटर नापा जा सका। इसी तरह 3 लीटर दो बार भरकर 4 लीटर वाले म डालने से 2
लीटर बचता है, क्य क 3 + 3 − 4 = 2।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
पुस्तक का शक्षण-संकेत: पृष्ठ 43 पर नीचे लखा है — “ग णत क इस पहेली का उत्तर ब
. com ारा अलग-अलग
m a s emउत्तर तक
coसहायता कर।” यानी एक से अ धक तरीके सही हो सकते ह — बसaअंgतl म पतीले म ठ क 5
दए जाने क संभावना है। अतः शक्षक धैयपूवक ब ारा दए जाने वाले उत्तर को सुन और सही
.
emचा हए।
पहुँचने म उनक
लीटर sआना
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घर पर करके दे खए: पानी, एक बड़ा गलास और एक छोटा गलास लेकर यही खेल खे लए। जो बात केवल सोचने
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से क ठन लगती है, वह करके दे खने पर तुरंत समझ आ जाती है।
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होली आई, होली आई — पृष्ठ 44 और 45
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पाठ के बाद छपी बना क्रमांक क क वता — भवानी प्रसाद मश्र
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s e m होली आई, होली आई
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अनु पू र क रचना
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‘होली आई, होली आई’ क वता का सरल अथ ल खए। इसम क ठन शब्द के अथ भी बताइए।
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प्र.1
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यह क वता भवानी प्रसाद मश्र क लखी हुई है। इसम क व बताते ह क होली आने पर चार ओर क्या-क्या बदल जाता है —
खेत, पेड़, हवा, पक्षी, ग लयाँ और लोग, सब।
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होली आई, होली आई
दे खो तो यह क्या-क्या लाई?
खेत ों में लाई है सोना,
चमक उठा उनका हर कोना।
सरसों फूली, गेहूँ लहका,
अमराई का आँगन महका॥
हवा नई होकर लहराई,
होली आई, होली आई,
कोयल कु हकी, गूँजे भौंरे,
पत्ते झूमे िचकने कौरे।
फूल गया टे स ू जंगल में,
डू ब गई दुिनया मंगल में॥
सूरज चंद ा सब सुखदाई,
होली आई, होली आई,
इस आँगन में मंजीरे खनके ,
उस आँगन में नूपरु रनके ।
ढोलक ठनकी राह-राह में,
बालक, बूढ़े सब उछाह में॥
गली-गली में ‘फागें’ गाईं,
होली आई, होली आई,
जली ‘होिलका’ चौराहों पर
लोग िमल रहे है ं राहों पर।
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जहाँ दे िखए वही ं प्यार है,
रंग और रस की बहार है॥
नाचो, गाओ, झूमो भाई,
होली आई, होली आई।
— भवानी पसाद िमश्र
पहले क ठन शब्द समझ ली जए —
शब्द अथ
सोना यहाँ सोना असली सोना नह है — पक हुई पीली फ़सल को सोना कहा गया है।
लहका लहलहाया, हवा म लहराया
अमराई आम का बगीचा
महका सुगंध से भर गया
कु हकी कोयल का मीठ आवाज़ म बोलना
भौंरे भ्रमर — फूल पर मँडराने वाले काले क ट
कौरे कोरे, नए-नए नकले हुए (यहाँ — नए, चकने पत्ते)
टेस ू पलाश का चटक लाल-नारंगी फूल, जससे पहले होली का रंग बनाया जाता था
मंगल खुशी, शुभ और भला समय
सुखदाई सुख दे ने वाले
मंजीरे हाथ म बजाया जाने वाला छोटा ताल-वाद्य
नूपरु पायल, घुँघरू
रनके / खनके / ठनकी बजने क आवाज़ — पायल रुनझुन, मंजीरे खनखन, ढोलक ठन-ठन
उछाह उत्साह, उमंग
फाग होली के दन म गाया जाने वाला लोकगीत
होिलका होली से एक दन पहले जलाई जाने वाली लक ड़य क ढे री (हो लका दहन)
बहार रौनक, छटा, खली हुई शोभा
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अब भाग-दर-भाग अथ दे खए —
पं क्तयाँ सरल अथ
“होली आई, होली आई / दे खो तो यह क्या-क्या होली आ गई है। ज़रा दे खो तो, वह अपने साथ क्या-क्या लेकर आई है!
लाई?”
“खेतों में लाई है सोना, / चमक उठा उनका हर खेत म फ़सल पक गई है। पीली फ़सल सोने जैसी चमक रही है, इस लए खेत का कोना-
कोना।” कोना चमक उठा है।
“सरसों फू ली, गेहू ँ लहका, / अमराई का आँग न सरस म पीले फूल आ गए ह, गेहूँ क बा लयाँ हवा म लहरा रही ह और आम के बगीचे म
महका॥” बौर क सुगंध फैल गई है।
“हवा नई होकर लहराई,” सद बीत गई और हवा बदल गई है। अब वह ठं डी नह , हलक और सुहानी है।
“कोयल कु हकी, गूँजे भौंरे , / पत्ते झूम े िचकने कोयल मीठ आवाज़ म बोल रही है, भ रे गुनगुना रहे ह और पेड़ पर नए-नए चकने पत्ते
कौरे । ” झूम रहे ह।
“फू ल गया टेस ू जंग ल में, / डू ब गई दुिनया मंग ल जंगल म पलाश (टे सू) के लाल फूल खल गए ह। सारी दु नया मानो खुशी म डू ब गई है।
में॥ ”
“सूर ज चंद ा सब सुखदाई,” अब न धूप चुभती है, न रात ठं डी लगती है। सूरज और चाँद — दोन सुख दे ने वाले लगते
ह।
“इस आँग न में मंजीरे खनके , / उस आँग न में एक घर के आँगन म मंजीरे बज रहे ह तो दूसरे घर के आँगन म पायल छनक रही है।
नूपरु रनके ।”
“ढोलक ठनकी राह-राह में, / बालक, बूढ़े सब हर रास्ते पर ढोलक बज रही है। ब े ह या बूढ़े — सब उमंग से भरे ह।
उछाह में॥ ”
“गली-गली में ‘फागें’ गाईं,” हर गली म होली के लोकगीत ‘फाग’ गाए जा रहे ह।
“जली ‘होिलका’ चौराहों पर / लोग िमल रहे है ं चौराह पर हो लका जलाई गई है और रास्त पर लोग एक-दूसरे से गले मल रहे ह।
राहों पर।”
“जहाँ दे िखए वही ं प्यार है, / रंग और रस की जधर दे खो उधर प्रेम ही प्रेम है। चार ओर रंग क और आनंद क छटा छाई है।
बहार है॥ ”
“नाचो, गाओ, झूम ो भाई, / होली आई, होली क व सबको बुला रहे ह — आओ, नाचो, गाओ, झूमो; क्य क होली आ गई है।
आई।”
क वता का भाव: होली केवल रंग खेलने का दन नह है। यह उस समय आती है जब सद जाती है, फ़सल पकती है
और प्रकृ त नए सरे से खल उठती है। इसी लए क व पहले खेत, हवा, कोयल और टे सू क बात करते ह और उसके
बाद ढोलक, फाग और गले मलने क । प्रकृ त क खुशी और मनुष्य क खुशी — दोन एक ही ह।
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प्र.2 क व कहता है — “दे खो तो यह क्या-क्या लाई?” क वता के अनुसार होली अपने साथ क्या-क्या लेकर आई है?
क वता के अनुसार होली अपने साथ प्रकृ त क सुंदरता, आवाज़ क खनक और लोग का प्रेम — तीन लेकर आई है। पूरी
सूची यह रही —
क्या लाई क वता क पं क्त
खेतों में पकी सुनहरी फ़ सल “खेत म लाई है सोना, चमक उठा उनका हर कोना।”
फू ली हईु सरसों और लहराता गेहू ँ “सरस फूली, गेहूँ लहका,”
आम के बगीचे की सुगंध “अमराई का आँगन महका॥”
बदली हुई नई हवा “हवा नई होकर लहराई,”
कोयल की कू क और भौंर ों की गूँज “कोयल कुहक , गूँजे भ रे,”
पेड़ों पर नए िचकने पत्ते “पत्ते झूमे चकने कौरे।”
जंगल में िखले टेस ू के फू ल “फूल गया टे सू जंगल म,”
मंजीरे , पायल और ढोलक की आवाज़ें “इस आँगन म मंजीरे खनके, उस आँगन म नूपुर रनके। ढोलक ठनक राह-राह म,”
बच्चों और बूढ़ों की उमंग “बालक, बूढ़े सब उछाह म॥”
गली-गली में गाए जाते फाग “गली-गली म ‘फाग’ गाईं,”
होिलका दहन और लोगों का िमलना “जली ‘हो लका’ चौराह पर, लोग मल रहे ह राह पर।”
चारों ओर पेम और रंगों की बहार “जहाँ दे खए वह प्यार है, रंग और रस क बहार है॥”
ध्यान द जए: क व ने रंग और गुलाल क बात सबसे बाद म क है। सबसे पहले उन्ह ने खेत और पेड़ क बात
कही। इससे पता चलता है क उनके लए होली का असली रंग प्रकृ त का रंग है।
प्र.3 इस क वता म कौन-कौन सी आवाज़ सुनाई दे ती ह? इन शब्द से क वता म क्या असर पैदा होता है?
क वता आँख से पढ़ जाती है, पर इसम कान से सुनाई दे ने वाले इतने शब्द ह क पूरा गाँव कान म बजने लगता है।
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शब्द कसक आवाज़ कैसी आवाज़
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कु हकी
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मीठ , लंबी कूक
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गूँजेa भ रे धीमी गुनगुनाहट
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खनके मंजीरे धातु क खनखन
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रनके
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नूपुर (पायल)
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ठनकी ढोलक
a ठन-ठन, ताल क चोट
गाईं
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ग लय म लोग फाग गीत क सामू हक आवाज़
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इनसे क्या असर होता है?
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1. क वता सुनाई दे ने लगती है। पढ़ते समय लगता है क सचमुच कह ढोलक बज रही है।
gl2. त्योहार का उत्साह बढ़ जाता है — जहाँ इतनी आवाज़ ह , वहाँ सन्नाटा हो ही नह सकता।
a 3. ‘खनके–रनके’ और ‘लहराई–आई–गाईं’ जैसे शब्द क तुक मलती है, इस लए क वता गाने जैसी लगती है और जल्द याद हो
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जाती है।
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4. पूरा गाँव एक साथ दखाई दे ता है — एक आँगन, दूसरा गन, हर राह, हर गली।
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एक सुंदर बात दे खए: क व ने कहाa— “इस आँगन म मंजीरे खनके, उस आँगन म नूपुर रनके।” ‘इस’ और ‘उस’
लगाकर उन्ह ने बता दया क खुशी कसी एक घर क नह है, वह घर-घर पहुँची है।
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a s em ‘साङ् केन’ पाठ और ‘होली आई, होली आई’ क वता — दोन म क्या-क्या समानता है? इन दोन को एक ही पाठ
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दोन रचनाएँ नए वष और नए मौसम क खुशी क बात करती ह। एक कहानी अरुणाचल प्रदे श क है और एक क वता उत्तर
भारत क होली क — पर भाव दोन का एक ही है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन AglaSem · NCERT Solutions
बात साङ् केन (कहानी) होली आई, होली आई (क वता)
िवधा कहानी (गद्य) किवता (पद्य )
रचनाकार पुस्तक म नाम नह दया गया भवानी पसाद िम श्र
कहाँ का त्योहार अरुणाचल प्रदे श का चौखाम पूरे उ त्त र भारत की होली
नया वष “आज से हमारा नया वष आरंभ होता है।” होली भी नए वष और नई फ़ सल के समय आती है।
पानी और रंग लोग बाल टय से पानी डालते ह और चावल का आटा लगाते “रंग और रस की बहार है॥ ”
ह।
आवाज़ और नाच- शोभायात्रा म लोग नाचते-गाते चलते ह। मंजीरे , नूपरु , ढोलक और फाग।
गाना
मेल -िमलाप ताऊजी के घर जाना, प्रणाम करना, आशीवाद लेना। “लोग िमल रहे है ं राहों पर। जहाँ दे िखए वही ं प्यार
है,”
पकृ ित “ जधर दे खो, ह रयाली ही ह रयाली और फूल ही फूल।” सरसों, गेहू,ँ अमराई, कोयल , भौंरे , टेस ू।
दोन को एक साथ क्य रखा गया होगा?
1. ता क आप दे ख सक क भारत के दो कोन के त्योहार अलग-अलग नाम से मनाए जाते ह, पर उनका मन एक ही है — पानी,
रंग, मीठा, गीत और मलना-जुलना।
2. कहानी म वल्लरी को स्वयं होली क याद आती है। क वता उसी याद को आगे बढ़ा दे ती है।
3. एक ही बात को गद्य और पद्य — दोन रूप म पढ़कर आप दोन का अंतर भी समझ जाते ह। कहानी घटना बताती है, क वता
भाव जगाती है।
करने का काम: अपनी लेखन-पु स्तका म दो कॉलम बनाइए — एक म साङ् केन, दूसरे म अपने प्रदे श का कोई
त्योहार। दोन म पाँच समानताएँ और दो अंतर ल खए।
अध्याय — एक नज़र म
साङ् केन एक कहानी है। पुस्तक म इस पाठ के साथ कसी लेखक का नाम नह दया गया है। कहानी अरुणाचल प्रदे श के
एक कस्बे चौखाम म घटती है। ‘साङ् केन’ वहाँ मनाया जाने वाला एक त्योहार है, और यही इस पाठ का शीषक भी है।
कहानी के मुख्य पात्र ह — वल्लरी, उसके पताजी, वल्लरी का मत्र चाऊतान तथा चाऊतान के माता- पता। वल्लरी के
पताजी चौखाम के मंडल कायालय म अ धकारी ह। मंडल कायालय यानी कसी सरकारी वभाग का वह दफ़्तर जो एक पूरे
मंडल यानी क्षेत्र का काम दे खता है। इस बार वे दल्ली से अपने प रवार को भी अपने पास बुला लेते ह।
कहानी क शुरुआत दल्ली और चौखाम के अंतर से होती है। दल्ली म भीड़भरी सड़क ह, हॉन बजाती कार-बस ह और लोग
क लंबी-लंबी कतार ह। चौखाम म खुला और शांत वातावरण है — “ जधर दे खो, ह रयाली ही ह रयाली और फूल ही फूल।”
और वहाँ के लोग के मुख पर सदै व मुस्कान बनी रहती है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन AglaSem · NCERT Solutions
एक दन चाऊतान वल्लरी को अपने घर बुलाता है। चाऊतान के पताजी सफाई का काम छोड़कर दोन का स्वागत करते ह
और माताजी कई प्रकार के स्वा दष्ट पकवान लाती ह। तभी सड़क पर एक शोभायात्रा नकलती है। शोभायात्रा यानी वह जुलूस
जसम लोग सज-धजकर, गाते-बजाते हुए चलते ह। लोग के कंध पर पाल कयाँ ह और उनम भगवान बुद्ध तथा उनके शष्य
क मू तयाँ रखी ह।
चाऊतान बताता है क गाँव के लोग ने नद के कनारे एक नया मं दर बनाया है। ये मू तयाँ बौद्ध- वहार से लाई गई ह और तीन
दन तक इसी मं दर म रहगी। इन दन लोग रोज़ इन पर जल चढ़ाएँगे और पूजा करगे। बौद्ध- वहार यानी वह स्थान जहाँ बौद्ध
भक्षु रहते ह और पूजा-पाठ करते ह।
मं दर का वणन कहानी का सबसे सुंदर हस्सा है। उसक जालीदार द वार बाँस और बाँस क खप य से बनी ह। बीच-
बीच म पेड़ क हरी-भरी टह नयाँ लगाई गई ह और उनम ख स-ख सकर रंग- बरंगे फूल सजा दए गए ह। इतना सादा और
सुंदर मं दर वल्लरी ने पहले कभी नह दे खा था।
फर वल्लरी दे खती है क लोग एक-दूसरे पर बाल टयाँ भर-भरकर पानी डाल रहे ह और चेहर पर चावल का आटा लगा रहे ह।
उसे होली क याद आ जाती है। चाऊतान बताता है — “आज हमारे यहाँ साङ् केन का त्योहार है। आज से हमारा नया वष
आरंभ होता है।” यही इस पाठ क मुख्य बात है — दो अलग-अलग प्रदे श के दो त्योहार, पर दोन म पानी, रंग, मठाई, मेल-
मलाप और नया वष।
साङ् केन तीन दन तक मनाया जाता है। तीसरे दन भक्षु मू तय को फर पाल कय म रखकर बौद्ध- वहार ले जाते ह। गाँव के
लोग वहाँ जाकर भक्षुओं को दं डवत प्रणाम करते ह — यानी ज़मीन पर लेटकर कया जाने वाला प्रणाम। भक्षु आशीवाद दे ते
ह — “खेती फूले-फले तुम्हारी, तुम्ह न हो कोई बीमारी। हल- मलकर सब नाच-गाएँ, नए साल म खुशी मनाएँ।” कहानी का
अंत इसी आशीवाद पर होता है।
अभ्यास म चचा के प्रश्न, तारे का चह्न (✱) बनाकर सही वकल्प चुनने वाले बहु वकल्पी प्रश्न, पाठ पर आधा रत ल खत प्रश्न,
भावाथ से पं क्त पहचानने क ता लका, समानाथ शब्द, ‘जहाँ दे खो … ही …’ वाले वाक्य, वचन बदलना, उद्धरण चह्न,
वणमाला-क्रम, अ भवादन क ता लका, ‘आगे क कड़ी’ बनाना, सूखे पत्त से आकृ त बनाना, अरुणाचल प्रदे श क जानकारी
जुटाना और दूध मापने क एक पहेली — सब कुछ आता है।
पाठ के बाद पृष्ठ 44 और 45 पर बना क्रमांक क एक क वता छपी है — होली आई, होली आई, जसे भवानी प्रसाद मश्र
ने लखा है। इसम होली के आने पर खेत, पेड़, पक्षी, ग लयाँ और लोग — सब बदल जाते ह। कहानी म पानी वाला साङ् केन है
और क वता म रंग वाली होली — दोन नए मौसम और नए वष क खुशी के त्योहार ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 4 साङ् केन AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
साङ् केन अरुणाचल पदे श में मनाया जाने वाला त्योहार, “आज हमारे यहाँ साङ् केन का त्योहार है।” साङ् केन म लोग एक-दूसरे पर
िजससे वहाँ नया वष आरंभ होता है पानी डालते ह।
मंडल िकसी िवभाग का वह द ़ तर जो एक पूरे क्षेत्र “चौखाम के मंडल कायालय म वल्लरी के पताजी मंडल कायालय म काम
कायालय (मंडल) का काम दे खता है पताजी एक अ धकारी ह।” करते ह।
भीड़भरी जहाँ बहुत भीड़ हो “कहाँ दल्ली क भीड़भरी सड़क…” मेले क भीड़भरी गली म म माँ
का हाथ पकड़े रहा।
कतार एक के पीछे एक खड़े लोगों की पंिक्त, लाइन “आद मय क लंबी-लंबी कतार…” टकट के लए लंबी कतार लगी
थी।
वातावरण चारों ओर का माहौल “…चौखाम का खुला और शांत पुस्तकालय का वातावरण बहुत
वातावरण।” शांत रहता है।
सदै व हमेशा “यहाँ के लोग के मुख पर सदै व मुस्कान दाद के चेहरे पर सदै व शां त
बनी रहती है।” रहती है।
पकवान िवशेष अवसर पर बनाया गया स्वािदष्ट भोजन “चाऊतान क माताजी कई प्रकार के द वाली पर घर म कई पकवान
पकवान ले आईं।” बने।
शोभायात्रा सजी-धजी यात्रा, जुल ूस “तभी वल्लरी ने दे खा क सड़क पर एक गाँव म रामलीला क शोभायात्रा
शोभायात्रा नकल रही है।” नकली।
पालक वह डोली िजसे लोग कं धों पर उठाकर ले जाते “कुछ लोग के कंध पर पाल कयाँ थ ।” पहले दुल्हन पालक म बैठकर
है ं जाती थी।
उत्साह मन का जोश, उमंग “लोग म बहुत उत्साह था।” खेल- दवस पर ब म बहुत
उत्साह था।
बौद्ध- वहार वह स्थान जहाँ बौद्ध िभक्ष ु रहते और पूजा करते है ं “ये लोग बौद्ध- वहार से भगवान बुद्ध…क हम बौद्ध- वहार दे खने गए थे।
मू तयाँ लाए ह।”
शष्य पढ़ ने-सीखने वाला, चेल ा “भगवान बुद्ध और उनके शष्य क गुरुजी के शष्य दूर-दूर से आते
मू तयाँ…” ह।
प्र त दन हर िदन, रोज़ “गाँव के लोग इन मू तय पर प्र त दन जल म प्र त दन आधा घंटा पढ़ता हूँ।
चढ़ाएँगे…”
स म्म लत शािमल होना, साथ हो जाना “क्या हम लोग भी शोभायात्रा म स म्म लत म भी सफाई अ भयान म
होना हो सकते ह?” स म्म लत हुआ।
ठकाना न बहुत अिधक होना, सीमा न रहना “उनक प्रसन्नता का ठकाना नह था।” प रणाम सुनकर उसक खुशी
होना का ठकाना न रहा।
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शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
जालीदार िजसमें जाली जैसे छे द हों “मं दर क जालीदार द वार बाँस…से बनी खड़क पर जालीदार परदा
हुई थ ।” लगा है।
खप ी बाँस की पतली-लंबी फ ी “…बाँस क खप य से बनी हुई थ ।” पतंग म बाँस क खप ी लगाई
जाती है।
टहनी पेड़ की पतली डाली “बीच-बीच म पेड़ क हरी-भरी टह नयाँ च ड़या टहनी पर बैठ थी।
लगाई गई थ …”
ख सना िकसी चीज़ के बीच में दबाकर अटका दे ना “…ख स-ख सकर उन पर रंग- बरंगे फूल द द ने बाल म गजरा ख स
सजा दए गए थे।” लया।
एक त्रत इक ा, जमा “दे खते-दे खते भीड़ मं दर के ार पर सभा के लए सब मैदान म
एक त्रत होने लगी।” एक त्रत हुए।
भक्षु बौद्ध साध ु “बौद्ध भक्षुओं ने मंत्र पढ़ते हुए इन मू तय भक्षु सादा जीवन जीते ह।
को…उतारा…”
गुलाल होली में लगाया जाने वाला रंग ीन सूखा चूण “…मुँह पर गुलाल लगाते ह।” होली पर हमने एक-दूसरे को
गुलाल लगाया।
अतथ मेहमान “…अ त थय का स्वागत करते ह।” अ त थ को पानी पलाना अ
बात है।
दं डवत ज़मीन पर सीधे ले टकर िकया जाने वाला पणाम “… भक्षुओं को बार-बार दं डवत प्रणाम उसने मं दर म दं डवत प्रणाम
प्रणाम करगे।” कया।
पुनः िफर से , दुबारा “…इन मू तय को पुनः पाल कय म मने प्रश्न पुनः पढ़ा।
रखकर…”
अ भवादन िमलने पर आदर से िकया जाने वाला नमस्कार “हमारे दे श म लोग अनेक प्रकार से बड़ का अ भवादन करना
अ भवादन करते ह।” चा हए।
उद्धरण चह्न िकसी की बात ज्यों-की-त्यों िलखने पर लगाया “इसे उद्धरण चह्न कहते ह।” संवाद लखते समय उद्धरण
जाने वाला िचह्न “ ” चह्न लगाइए।
अमराई आमों का बगीचा (किवता ‘होली आई, होली “अमराई का आँगन महका॥” अमराई म कोयल बोल रही थी।
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टे सू पलाश का चटक लाल-नारंग ी फू ल, िजससे “फूल गया टे सू जंगल म,” टे सू के फूल से प्राकृ तक रंग
होली का रंग बनता था बनता है।
फाग होली के िदनों में गाया जाने वाला लोकगीत “गली-गली म ‘फाग’ गाईं,” गाँव म ढोलक पर फाग गाई जा
रही थी।
उछाह उत्साह, उमंग “बालक, बूढ़े सब उछाह म॥” वजय क खबर सुनकर सब
उछाह म थे।
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शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
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मंजीरा हाथ में बजाया जाने वाला छोटा ताल-वाद्य “इस आँगन म मंजीरे खनके,” भजन
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