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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा5
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 2: न्याय क कुस
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
8 – 21 10 37 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 33 pages
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 2: न्याय क कुस
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 2 न्याय क कुस के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह लीलावती भागवत क लखी एक कहानी है,
जो राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से छपी पुस्तक स्वग क सैर तथा अन्य कहा नयाँ से ली गई है। उ ैन के मैदान म खेलते ब े, ट ले म गड़ा राजा वक्रमा दत्य
का सहासन और चार बोलती मू तयाँ — कहानी बताती है क न्याय क कुस पर बैठने के लए ताज नह , साफ़ मन चा हए। पृष्ठ 8 से 21 तक के हर
अभ्यास — बातचीत के लए, पाठ से, सो चए और ल खए, अनुमान और कल्पना, भाषा क बात, पाठ से आगे, पुस्तकालय एवं अन्य ोत, पता
लगाकर क जए, बूझो तो जान और मेरा न्याय — का हल यहाँ दया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 8 – 21
खं ड प्रश्न
10 37
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 14
पाठ पढ़ने के बाद कक्षा म चचा
बातचीत के लए
प्र.1 आपका प्रय खेल कौन-सा है? आप उसे कैसे खेलते ह?
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। इसका उत्तर हर ब े का अलग होगा।
कैसे बताएँ — तीन चरण:
चरण 1 — खेल का नाम ली जए।
चरण 2 — बताइए क उसम कतने खलाड़ी होते ह और क्या सामान चा हए।
चरण 3 — खेल के दो-तीन नयम बताइए और यह भी क आपको वह खेल क्य अ ा लगता है।
अ े उत्तर म यह ज़रूर हो — खेल का नाम, खला ड़य क संख्या, खेलने का तरीका और अपनी पसंद का कारण।
नमूना उत्तर: मेरा प्रय खेल कब ी है। इसम दो दल होते ह। हर दल म सात खलाड़ी होते ह। मैदान के बीच एक रेखा ख ची जाती
है। एक खलाड़ी “कब ी-कब ी” कहता हुआ दूसरे दल के पाले म जाता है। वह कसी खलाड़ी को छू कर अपने पाले म लौट आए
तो उसे अंक मलता है। साँस टू ट जाए या वह पकड़ा जाए तो वह बाहर हो जाता है। मुझे यह खेल इस लए अ ा लगता है क्य क
इसम कोई सामान नह चा हए और पूरा दल मलकर खेलता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से जो ड़ए: कहानी के लड़क का प्रय खेल भी अनोखा था — दरबार-दरबार। एक लड़का राजा बनता, बाक
दरबारी। इसी खेल से उनक न्याय करने क समझ बढ़ती गई। इसका मतलब है क खेल केवल समय बताना नह ,
कुछ सीखना भी होता है।
प्र.2 क्या आपने कभी कसी समस्या का समाधान कया है? अपना अनुभव साझा क जए।
यह भी आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। स ी घटना बताइए, चाहे वह छोट ही क्य न हो।
कैसे बताएँ — चार चरण:
चरण 1 — समस्या क्या थी, यह एक वाक्य म क हए।
चरण 2 — कसक समस्या थी, यह बताइए।
चरण 3 — आपने क्या कया, यह क्रम से क हए।
चरण 4 — अंत म क्या हुआ और आपने क्या सीखा, यह बताइए।
अ े उत्तर म यह ज़रूर हो — समस्या, आपका कया हुआ काम, नतीजा और सीख।
नमूना उत्तर: हमारी कक्षा म एक दन दो सा थय म झगड़ा हो गया। दोन एक ही प सल-बॉक्स को अपना बता रहे थे। मने पहले
दोन क बात अलग-अलग सुनी। फर मने पूछा क बॉक्स के अंदर क्या-क्या है। एक साथी ने सही बता दया क उसम एक टू टा
हुआ नीला रबर है। बॉक्स खोलकर दे खा तो वैसा ही नकला। बॉक्स उसी को मल गया और दूसरे साथी ने मान लया क उससे भूल
हुई थी। मने सीखा क झगड़ा सुलझाने के लए पहले दोन क बात शां त से सुननी चा हए।
ध्यान द जए: कहानी का लड़का भी यही करता था — “लड़के ने बड़ी गंभीरता से दोन कसान के बयान सुने।”
पहले पूरी बात सुनना ही अ े फैसले का पहला कदम है।
प्र.3 य द आप राजा के ान पर होते और आपको लड़के के बारे म पता चलता तो आप क्या करते?
म क्रोध न करता। म उस लड़के से मलने जाता और उसे शाबाशी दे ता।
कारण: कहानी का राजा गुस्से म कहता है — “उस छोकरे क यह मजाल क अपने को मुझसे अ ा न्यायकता
समझे?” यही उसक सबसे बड़ी भूल थी। जब प्रजा को कह से न्याय मल रहा हो, तो राजा को खुशी होनी चा हए,
जलन नह । लड़का राजा का प्र त ं नह था; वह तो राजा का ही काम आसान कर रहा था।
अ े उत्तर म यह ज़रूर हो — आप क्या करते, क्य करते, और उससे प्रजा को क्या लाभ होता।
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नमूना उत्तर: राजा के ान पर म सबसे पहले खुद जाकर लड़के का खेल दे खता। फर म उससे पूछता क वह फैसला करने से
पहले क्या-क्या सोचता है। म उसे दरबार म बुलाकर सम्मा नत करता। म यह भी सोचता क लोग मेरे दरबार म क्य नह आ रहे —
शायद वहाँ बहुत दे र लगती हो या लोग डरते ह । म अपने दरबार क यही कमी दूर करता। इस तरह लड़के का सम्मान भी होता और
प्रजा को न्याय भी जल्द मलता।
प्र.4 लड़के के अंदर ऐसे कौन-कौन से गुण ह गे जनके कारण वह सहासन पर बैठ पा रहा था?
सबसे बड़ा गुण था — उसका साफ़ मन। चौथी मू त ने खुद कहा — “जो लड़के इस सहासन पर बैठते थे, वे भोले-भाले थे। उनके
मन म कलुष नह था।” कलुष का अथ है मन का मैल यानी बुरा भाव।
पाठ से पकड़ म आने वाले गुण ये ह —
गुण पाठ से प्रमाण
िनष्कपट , भोल ा मन “उनके मन म कलुष नह था।”
ध् यान से सुनना “लड़के ने बड़ी गंभीरता से दोन कसान के बयान सुने।”
द ोनों पक्ष ों को बराबर मानना वह गवाह बुलाता, गवाही लेता, फर सवाल करता — तभी फैसला सुनाता।
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सोच समझकर बोल ना “उसके बाद उसने जो फैसला दया, उसे सुनकर वे दं ग रह गए।”
िनडरता वह गाँव के बड़े-बूढ़ और कसान के सामने भी बना डरे अपना फैसला सुनाता था।
ल ाल च का न होना वह फैसले के बदले कसी से कुछ नह लेता था — इसी लए कसी को उसके फैसले से असंतोष नह हुआ।
क्य यही गुण ज़रूरी थे: सहासन राजा वक्रमा दत्य का था, जो न्याय और ववेक के लए प्र सद्ध थे। ऐसी कुस
पर वही बैठ सकता है जसके मन म खोट न हो। लड़क म यह खोट थी ही नह , इस लए मू तय ने उन्ह कभी नह
रोका।
पाठ से — पृष्ठ 14 और 15
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस
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सही उत्तर के आगे तारे का चह्न (✱) बनाइए। एक से अ धक वकल्प भी सही हो सकते ह।
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पाठ से बहु वकल्पी
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a s emको लड़के ारा न्याय करने के वषय म कैसे पता चला? (क) लड़के ारा क गई शरारत को सुनकर (ख)
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राजा
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प्र.1
लोग ारा लड़के के न्याय क प्रशंसा सुनकर (ग) लड़के ारा अपने न्याय क बुराई सुनकर (घ) मं त्रय ारा
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लड़के क बु द्ध क प्रशंसा सुनकर
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g ारा लड़के के न्याय क प्रशंसा सुनकर।
तारा (✱) केवल एक वकल्प पर लगेगा — (ख)aलोग
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“बात इधर-उधर फैलने लगी। लोग लड़ के की न्याय-बुि की चच करने लगे…”
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िफर — “धीरे-धीरे यह बात राजा के कानों तक पहुँच ी।”
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ग़लत
कहानी मm
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a s e लड़के क कसी शरारत क बात है ही नह । जो फैली, वह उसके न्याय क चचा थी।
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(क) लड़के क शरारत को ग़लत
सुनकर
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(ख) लोग ारा न्याय क पाठ यही कहता है — पहले लोग म चचा फैली, फर वही बात धीरे-धीरे राजा के कान तक
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सही
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प्रशंसा सुनकर पहुँची।
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क बु.राई a
(ग) लड़के ारा अपने न्याय ग़लत लड़का अपने बारे म कुछ कहता ही नह । और बुराई नह , प्रशंसा हो रही थी।
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a (घ) मं त्रय ारा बु द्ध क
agl ग़लत मंत्री ने राजा से कुछ नह कहा। उलटा, मैदान म जाकर राजा ने अपने मंत्री से कहा —
प्रशंसा सुनकर “लड़का सचमुच बहुत बु द्धमान है।” यह बात पता चलने के बाद क है, पहले क नह ।
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ध्यान द जए: इस पाठ म कई प्रश्न के एक से अ धक उत्तर सही ह, पर हर प्रश्न के नह । यहाँ पाठ म कारण एक ही
बताया गया है, इस लए तारा भी एक ही पर लगेगा।
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o m l se कर रहे थे। (ख) लोग राजा के
राजा को सबसे अ धक आश्चय कस बात से हुआ? (क) ब े खेल-खेल मaन्याय
ag करता था। (घ) स्वयं सहासन म ही कोई
.c दरबार म नह आ रहे थे। (ग) सहासन पर बैठने वाला लड़का सही न्याय
प्र.2
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चमत्कारी श क्त वद्यमान थी।
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तारा (✱) दो वकल्प पर लगेगा — (ग) और (घ)। इनम भी “सबसे अ धक” आश्चय (घ) वाला है।
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पहला आश्चय — “इतनी छोटी उम में इतनी बुि का होना आ श्चय की बात है।”
िफर पता चला िक आज कोई नया लड़ का बैठा है।
दू सरा और बड़ ा आश्चय — “यह तो और भी आ श्चय की बात है! हो न हो, पत्थर की इस कु स में ही कोई
चमत्कार है।”
वकल्प सही / ग़लत कारण
(क) ब े खेल-खेल म न्याय ग़लत राजा ने खेल तो बड़ी दे र तक दे खा, पर उसका आश्चय खेल पर नह था। वह लड़के क
कर रहे थे। बु द्ध पर था। खेल तो ब े कई तरह के खेलते ही ह।
(ख) लोग राजा के दरबार म ग़लत इस बात से राजा को आश्चय नह , क्रोध हुआ था — “उसको बहुत क्रोध आया।” गुस्सा
नह आ रहे थे। और आश्चय दो अलग भाव ह।
(ग) बैठने वाला लड़का सही ✱ राजा ने स्वयं इसे आश्चय कहा — “इतनी छोट उम्र म इतनी बु द्ध का होना आश्चय क
सही न्याय करता था। बात है।” वह स्तं भत रह गया था।
(घ) सहासन म ही कोई सही ✱( सबसे जब पता चला क आज दूसरा ही लड़का बैठा है और फैसले फर भी सही ह, तब राजा
चमत्कारी श क्त थी। अिधक ) बोला — “यह तो और भी आश्चय क बात है!” यही उसका सबसे बड़ा आश्चय था।
दो उत्तर क्य : कहानी म आश्चय दो बार होता है। पहले लड़के को दे खकर, फर कुस के बारे म सोचकर। दूसरा
आश्चय पहले से बड़ा है, क्य क पाठ म ही लखा है — “और भी आश्चय क बात”। इसी लए (घ) पहला उत्तर है और
(ग) उसके साथ का उत्तर।
प्र.3 लड़क को यह खेल इतना अ ा क्य लगा क वे प्र त दन इसे खेलने लगे? (क) क्य क वे राजा जैसा बनने का
आनंद ले रहे थे। (ख) क्य क यह अन्य खेल से अ धक मनोरंजक था। (ग) क्य क उन्ह न्याय करने का अनुभव
अ ा लगा। (घ) क्य क इस खेल से वे नगर भर म प्र सद्ध हो गए थे।
तारा (✱) दो वकल्प पर लगेगा — (क) और (ग)।
“यह िसंहासन है मेरा। मै ं राजा हूँ और तुम सब मेरे दरबारी।” → राजा बनने का मज़ा
“िशकायते ं सुन ी जाती ं, अपराधी पेश िकए जाते , बयान िलए जाते , िफर िशला पर बैठा हुआ लड़ का अपना फैसला
सुन ाता।”
“इस खेल में उनको इतना आनंद आया िक वे रोज ही यह खेल खेलने लगे।” → न्याय करने का मज़ा
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) राजा जैसा बनने का सही ✱ खेल क शुरुआत ही इसी वाक्य से होती है — “म राजा ँ और तुम सब मेरे दरबारी।” ब
आनंद को बड़े बनने का अ भनय करना अ ा लगता है।
(ख) अन्य खेल से अ धक ग़लत पाठ म कसी दूसरे खेल से तुलना क ही नह गई। जो पाठ म नह है, वह उत्तर नह बन
मनोरंजक था सकता।
(ग) न्याय करने का सही ✱ खेल का पूरा मज़ा फ रयाद सुनने, गवाही लेने और फैसला सुनाने म था। पाठ साफ़ कहता है
अनुभव अ ा लगा — “इस खेल म उनको इतना आनंद आया…”।
(घ) नगर भर म प्र सद्ध हो ग़लत प्र स द्ध तो बाद म मली — “बात इधर-उधर फैलने लगी।” वह खेल खेलने का कारण नह ,
गए थे खेल का नतीजा थी। और प्र सद्ध पूरा झुंड नह , ट ले वाला लड़का हुआ था।
प्र.4 राजा ने उपवास और प्राय श्चत क्य कया? (क) ता क वह सहासन पर बैठने के योग्य बन सके। (ख) क्य क उसे
अपने कम पर पछतावा था। (ग) क्य क मू तय ने उसे ऐसा करने के लए कहा था। (घ) क्य क जनता ने उसे
ऐसा करने को कहा था।
तारा (✱) दो वकल्प पर लगेगा — (क) और (ग)।
मूित ने कहा — “तुमको तीन िदन तक पायिश्चत करना होगा।”
राजा ने वही िकया — “राजा ने तीन िदन तक उपवास िकया और पाथना की।”
और हर बार उपवास के बाद वह िफर िसंहासन पर बैठने ही आया।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) ता क सहासन सही ✱ हर उपवास के बाद राजा का एक ही काम था — फर सहासन क ओर बढ़ना। तीन दन बीतते ही
पर बैठने के योग्य बन “चौथे दन वह फर दरबार म आया।” उसका लक्ष्य कुस ही था।
सके
(ख) अपने कम पर ग़लत पहली बार राजा ने ल ा से सर तो झुकाया, पर स ा पछतावा उसम नह था। उसने न ज़मीन
पछतावा था लौटाई, न सुधरने क बात कही। अंत म उसने सोचा — “मुझसे ज्यादा धनवान, बलवान और
बु द्धमान भला और कौन होगा?” यह पछतावा नह , अहंकार है।
(ग) मू तय ने ऐसा सही ✱ पहली मू त का आदे श साफ़ था — “तुमको तीन दन तक प्राय श्चत करना होगा।” राजा ने ठ क
करने के लए कहा था वही कया, और आगे भी हर बार तीन-तीन दन का उपवास कया।
(घ) जनता ने ऐसा करने ग़लत जनता ने राजा से कुछ नह कहा। यह पूरी बात दरबार के भीतर, राजा और मू तय के बीच हुई।
को कहा था
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सोचने क बात: स ा प्राय श्चत तब होता है जब मन बदल जाए। राजा ने केवल ऊपर से उपवास कया, भीतर से
वह वैसा ही रहा। इसी लए नौ दन के उपवास के बाद भी वह सहासन पर नह बैठ पाया।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 15
नीचे दए गए प्रश्न के उत्तर अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए
सो चए और ल खए
प्र.1 सभी लड़के सहासन पर बैठ पा रहे थे ले कन राजा नह बैठ पाया। ऐसा क्य ?
लड़के इस लए बैठ पाते थे क्य क उनका मन साफ़ था। राजा इस लए नह बैठ पाया क्य क उसका मन साफ़ नह था।
चौथी मू त ने इसका कारण खुद बता दया —
“जो लड़ के इस िसंहासन पर बैठते थे , वे भोले-भाले थे । उनके मन में कलुष नहीं था।”
अब दे खए, मू तय ने राजा से क्या-क्या पूछा और राजा का क्या हाल हुआ —
मू त प्रश्न राजा का उत्तर
पहली क्या तुमने कभी चोरी नह क ? सर झुका लया — उसने एक दरबारी क ज़मीन पर कब्ज़ा कर लया था।
दूसरी क्या तुमने कभी झूठ नह बोला? सकपका गया — मुसीबत से बचने के लए वह कई बार झूठ बोल चुका था।
तीसरी क्या तुमने कभी कसी को चोट नह चुपचाप पीछे हट गया।
पहुँचाई?
चौथी अगर व ास है क तुम योग्य हो, तो बैठ , बल वान और ब ुि मान है — और िसंहासन उ ड़
घमंड से बोल ा िक वह सबसे धनवान
जाओ। गया।
असली कारण: कुस बड़ी होने से आदमी बड़ा नह होता। यह न्याय क कुस थी, इस लए उस पर बैठने क शत पद
नह , च रत्र थी। ब ने न कभी चोरी क थी, न झूठ बोला था, न कसी को दुख दया था। राजा ने तीन काम कए
थे। इसी लए एक साधारण ब ा बैठ जाता था और एक बड़ा राजा नह बैठ पाया।
याद र खए: राजा ने नौ दन उपवास भी कया, फर भी नह बैठ पाया — क्य क उसने अपनी गलती सुधारी नह ।
जस दरबारी क ज़मीन उसने ली थी, वह उसे लौटाई ही नह ।
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प्र.2 क्या राजा को प्राय श्चत करने के बाद सहासन पर बैठने का अ धकार मलना चा हए था? अपने उत्तर का कारण
भी बताइए।
नह , मेरे वचार से नह मलना चा हए था। राजा ने उपवास तो कया, पर अपनी गलती सुधारी नह ।
तीन कारण —
1. गलती वह क वह रही। राजा ने माना था — “मने अपने एक दरबारी क जमीन पर कब्जा कर लया था।” कहानी म कह
नह लखा क उसने वह ज़मीन लौटाई। जब तक चीज़ लौटाई न जाए, केवल भूखे रहने से अन्याय मट नह जाता।
2. मन नह बदला। अंत म राजा ने मन ही मन कहा — “मुझसे ज्यादा धनवान, बलवान और बु द्धमान भला और कौन होगा?”
यह पछतावे क नह , घमंड क भाषा है।
3. कारण भी गलत था। उसने प्राय श्चत इस लए कया क वह कुस पा सके, इस लए नह क उसे अपने कए पर सचमुच दुख
था।
दूसरा पक्ष भी सु नए: कुछ लोग कह सकते ह — हाँ, अ धकार मलना चा हए था, क्य क राजा ने अपनी गलती
स्वीकार क , वह भागा नह , और नौ दन तक उपवास कया। सुधरने का मौका सबको मलना चा हए। यह बात भी
ठ क है।
फर भी पहला उत्तर मज़बूत क्य है: प्राय श्चत के तीन हस्से होते ह — मानना, सुधारना और दोबारा न करना।
राजा ने केवल पहला हस्सा पूरा कया। इसी लए मू तय ने उसे बार-बार रोका। अगर वह ज़मीन लौटा दे ता और
नम्रता से आगे बढ़ता, तो शायद कहानी का अंत दूसरा होता।
याद र खए: इस प्रश्न म दोन उत्तर लखे जा सकते ह। शत यह है क आप कारण ज़रूर द और कारण पाठ से जुड़ा
हो।
प्र.3 दोन कसान ने अपने झगड़े के नपटारे के लए राजा के दरबार म जाने के बजाय लड़के के पास जाने का फैसला
क्य कया?
क्य क उस समय पूरे नगर म उसी लड़के के न्याय क चचा थी। कसान को भरोसा हो गया था क सही फैसला वह मलेगा।
“बात इधर-उधर फैलने लगी। लोग लड़ के की न्याय-बुि की चच करने लगे और कहने लगे िक अवश्य ही उस
लड़ के में कोई दै वी शिक्त है।”
“मामला गंभ ीर था। टीलेवाले लड़ के की इतनी चच थी िक वे राजा के दरबार में जाने के बजाय उसी के पास
गए…”
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस
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कारण एक-एक करके —
मामला गंभीर था। ज़मीन का झगड़ा छोटा नह होता, इस लए वे सबसे भरोसेमंद जगह जाना चाहते थे। m
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लड़के क धाक जम चु क थी। लोग उसे दै वी श क्त वाला मानने लगे थे ।
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उसका seरकॉड साफ़ था। पाठ कहता है — “ऐसा कभी नह हुआ क लड़के के फैसले से उन्ह संतोष न हुआ हो।”
agवह पूरी बात सुनता था। वह बयान लेता, गवाही सुनता, सवाल पूछता — तभी फैसला देता। इससे लोग को लगता था क
उनक बात अनसुनी नह जाएगी।
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वहाँ पहुँचना आसान था। ट ला मैदान म ही था। दरबार म जाने के लए न अनुम त चा हए थी, न इंतज़ार।
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और नतीजा क्या नकला: लड़के का फैसला सुनकर “वे दं ग रह गए” — यानी उनक उम्मीद से भी अ
मला। उसके बाद तो नगर के सभी लोग वह जाने लगे और राजा के दरबार म कोई न जाता।
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coमूmत सहासन के साथ आकाश म क्य उड़ गई? g l as
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चौथी
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क्य क राजा चौथी परीक्षा म भी हार गया। वह नम्रता से नह , घमंड से सहासन क ओर बढ़ा।
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चौथी मू त ने शत रखी थी —
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“जो लड़ के इस िसंहासन पर बैठते थे , वे भोले-भाले थे । उनके मन में कलुष नही ं था। अगर तुमको िवश्वास है
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िक तुम इस योग् य हो तो इस िसंहासन पर बैठ सकते हो।”
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मू त चाहती थी क राजा अपना मन टटोले। पर राजा ने अपने मन म यह सोचा —
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“मै ं राजा हूँ। मुझ से ज्यादा धनवान , बलवान और बुि मान भला और कौन होगा?”
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यहाँ राजा ने अपनी योग्यता धन, बल और बु द्ध से नापी — मन क सफ़ाई से नह । यही उसक हार थी।
मू त क्य सहासन भी ले गई: तीन मू तयाँ पहले ही उड़ चुक थ । चौथी आ ख़री रखवाली थी। जब उसने दे ख
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लया क राजा अपनी गलती से कुछ भी नह सीखा, तो उसने सहासन वहाँ छोड़ना ठ क नह समझा। न्याय क
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कुस अन्यायी के हाथ न लगे — इसी लए वह सहासन समेत उड़ गई।
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प्र.5 इस कहानी को एक नया शीषक द जए और बताइए क आपने यह शीषक क्य चुना?
मेरा चुना हुआ नया शीषक है — “साफ़ मन का सहासन”।
शीषक चुनने का तरीका — तीन चरण:
चरण 1 — सो चए क कहानी सबसे ज़्यादा कस बात पर टक है।
चरण 2 — उस बात को दो या तीन शब्द म क हए।
चरण 3 — जाँ चए क शीषक कहानी का अंत खोल तो नह दे ता, और सुनते ही मन म ज ासा जगाता है या नह ।
कुछ और अ े शीषक और उनके कारण —
नया शीषक क्य उपयुक्त है
साफ़ मन का िसंहासन कहानी क पूरी शत यही है — “उनके मन म कलुष नह था।” सहासन उसी को स्वीकार करता है जसका मन साफ़
हो।
चार मूितयों की परीक्ष ा कहानी का सबसे रोचक हस्सा वही है, जहाँ चार मू तयाँ एक-एक करके राजा से प्रश्न पूछती ह।
टीले वाल ा न्यायाधीश कहानी क शुरुआत ट ले से होती है और नायक वही लड़का है, जसे लोग न्याय के लए चुनते ह।
उ ड़ गया िसंहासन यह कहानी के अं तम और सबसे च काने वाले दृश्य को पकड़ता है।
राजा से बड़ ा एक कहानी का मुख्य वरोध यही है — छोटा ब ा बैठ जाता है, बड़ा राजा नह बैठ पाता।
बच्चा
नमूना उत्तर: मने इस कहानी का नया शीषक “साफ़ मन का सहासन” चुना है। मने यह शीषक इस लए चुना क्य क पूरी कहानी
इसी एक बात के चार ओर घूमती है। भोले-भाले लड़के सहासन पर आराम से बैठ जाते थे, क्य क उनके मन म कोई खोट नह थी।
राजा धनवान और बलवान होकर भी नह बैठ पाया, क्य क उसने चोरी क थी, झूठ बोला था और दूसर को दुख पहुँचाया था।
शीषक म “साफ़ मन” शब्द इसी शत को बता दे ता है और “ सहासन” शब्द कहानी क सबसे खास चीज़ को। यह शीषक कहानी का
अंत भी नह खोलता, इस लए पढ़ने क ज ासा बनी रहती है।
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कल्पना करके लखने वाले प्रश्न
अनु मान और कल्पना
प्र.1 कहानी म सहासन क मू तयाँ उड़कर कसी और जगह चली जाती ह। वे कहाँ जाती ह गी और वहाँ क्या करती
ह गी?
यह कल्पना का प्रश्न है। इसका कोई एक “सही” उत्तर नह है। पर आपक कल्पना कहानी से जुड़ी होनी चा हए।
कैसे लख — तीन चरण:
चरण 1 — तय क जए क मू तयाँ कहाँ गईं (कोई एक जगह)।
चरण 2 — बताइए क वहाँ वे क्या करती ह।
चरण 3 — यह भी ल खए क उनका काम कहानी वाले काम से मलता-जुलता क्य है।
अ े उत्तर म यह ज़रूर हो — जगह, काम, और यह बात क मू तयाँ अब भी न्याय क रखवाली कर रही ह।
नमूना उत्तर: मुझे लगता है क चार मू तयाँ आकाश म उड़कर कसी और दे श के कसी और मैदान म उतर गई ह गी। वहाँ भी ब े
खेलते ह गे। मू तयाँ फर से ज़मीन के नीचे छप जाती ह गी और सहासन को अपने साथ छपा लेती ह गी। जब कोई स े मन वाला
ब ा वहाँ खेलते-खेलते ठोकर खाएगा, तभी सहासन बाहर आएगा। तब तक वे चुपचाप दे खती रहती ह गी क कौन सच बोलता है
और कौन दूसर क बात ध्यान से सुनता है। मुझे लगता है क वे कसी क परीक्षा लए बना कभी सहासन कसी को नह दे त ।
दूसरा नमूना (छोटा): चार मू तयाँ राजा वक्रमा दत्य के पास लौट गई ह गी। वहाँ वे उन्ह बताती ह गी क आज के राजाओं म से
कोई भी उनक कुस के योग्य नह नकला। फर वे सहासन को कसी सुर क्षत जगह रख आती ह गी और नए योग्य व्य क्त के जन्म
क प्रतीक्षा करती ह गी।
ध्यान र खए: कल्पना करते समय भी कहानी का नयम मत तो ड़ए। इस कहानी म मू तयाँ रक्षक ह, बदला लेने
वाली नह । इस लए उनका नया काम भी रखवाली या परीक्षा लेने का ही होना चा हए।
प्र.2 य द इस कहानी के अंत म राजा सहासन पर बैठने म सफल हो जाता तो क्या होता?
अगर राजा बैठ जाता, तो कहानी का अथ ही बदल जाता। तब यह पता चलता क कुस ताकत से मलती है, साफ़ मन से नह ।
दो अलग-अलग कल्पनाएँ क जा सकती ह —
अगर… तब क्या होता
राजा घमंड के साथ ही प्रजा का भरोसा और टू ट जाता। लोग फर भी लड़के के पास ही जाते। सहासन तो मल जाता, पर सम्मान नह
बैठ जाता मलता। कहानी क सीख खत्म हो जाती।
राजा सचमुच बद ल वह पहले दरबारी क ज़मीन लौटाता, झूठ बोलना छोड़ता और कसी को दुख न पहुँचाने का वचन दे ता। तब उसका
जाता , िफ र बैठता बैठना ठ क होता। प्रजा को अपने ही राजा से न्याय मलने लगता और लड़के को भी दरबार म सम्मान मलता।
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नमूना उत्तर: य द राजा सहासन पर बैठने म सफल हो जाता तो उसका घमंड और बढ़ जाता। वह सोचता क उसने मू तय को भी
हरा दया। ऐसे म वह पहले जैसे ही काम करता रहता — कसी क ज़मीन ले लेता, बचने के लए झूठ बोल दे ता। प्रजा को न्याय फर
भी न मलता और लोग चुपचाप उसी लड़के के पास जाते रहते। कहानी हम यह न सखा पाती क न्याय क कुस के लए साफ़ मन
चा हए। मुझे लगता है क राजा तभी बैठ पाता जब वह सचमुच सुधर जाता — तब वह दन उसके राज्य के लए सबसे अ ा दन
होता।
क्य यही सही दशा है: कहानी का अंत जान-बूझकर ऐसा रखा गया है। सहासन का उड़ जाना पाठक के मन म
एक सवाल छोड़ जाता है — क्या म इस कुस पर बैठने लायक ँ? अगर राजा बैठ जाता, तो यह सवाल कभी पैदा
ही न होता।
भाषा क बात — पृष्ठ 16 और 17
वराम चह्न, सं ा और वशेषण
भाषा क बात
प्र.1 (क) अब नीचे दए गए वाक्य म उ चत ान पर वराम चह्न लगाइए — (क) चौथी मू त ने कहा ठहरो जो लड़के
इस सहासन पर बैठते थे वे भोले भाले थे उनके मन म कलुष नह था अगर तुमको व ास है क तुम इस
योग्य हो तो इस सहासन पर बैठ सकते हो
वराम चह्न लगाने के बाद वाक्य ऐसा बनेगा —
चौथी मूित ने कहा, “ठहरो! जो लड़ के इस िसंहासन पर बैठते थे , वे भोले-भाले थे । उनके मन में कलुष नही ं
था। अगर त मु को िवश्वास है िक त मु इस योग्य हो तो इस िसंहासन पर बैठ सकते हो।”
कौन-सा चह्न कहाँ और क्य — एक-एक करके:
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चह्न नाम कहाँ लगा क्य लगा
, अल्प वराम “कहा” के बाद अब कसी क कही हुई बात शुरू हो रही है, इस लए ज़रा-सा ठहरना
है।
“” उद्धरण चह्न मू त क पूरी बात के दोन ये बताते ह क यह शब्द मू त के अपने ह, लेखक के नह ।
ओर
! वस्मया दबोधक “ठहरो” के बाद यह रोकने क तेज़ पुकार है। “ठहरो।” कहने म वह ज़ोर नह आता जो
चह्न “ठहरो!” म आता है।
, अल्प वराम “बैठते थे” के बाद वाक्य लंबा है। यहाँ साँस लेने भर का ठहराव चा हए, पूरा वराम नह ।
। पूण वराम “थे”, “था” और “सकते हो” यहाँ बात पूरी हो जाती है, इस लए पूरा ठहराव।
के बाद
- योजक चह्न भोले-भाले दो शब्द मलकर एक ही अथ दे रहे ह, इस लए बीच म छोट लक र
लगती है।
वराम चह्न क्य ज़रूरी ह: बना चह्न वाला वाक्य एक ही साँस म दौड़ता चला जाता है और अथ फसल जाता है।
चह्न बताते ह क कहाँ रुकना है और कस भाव से पढ़ना है — यही पुस्तक ने पृष्ठ 16 के बक्से म समझाया है।
ध्यान द जए: पुस्तक म यह अभ्यास बना क्रमांक के छपा है और इसके बाद सीधे “2.” आ जाता है। इस लए इसे
ही प्रश्न 1 मा नए।
प्र.1 (ख) (ख) राजा बड़ी दे र तक सोचता रहा फर उसने मन ही मन कहा अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है तो
भला म क्य नह बैठ सकता ँ म राजा ँ मुझसे ज्यादा धनवान बलवान और बु द्धमान भला और कौन होगा
म अवश्य इस सहासन पर बैठने योग्य ँ
वराम चह्न लगाने के बाद वाक्य ऐसा बनेगा —
राजा बड़ ी दे र तक सोचता रहा। िफर उसने मन ही मन कहा, “अगर एक लड़ का इस पर बैठ सकता है तो भला
मै ं क्यों नही ं बैठ सकता हूँ? मै ं राजा हूँ। मुझ से ज्यादा धनवान, बलवान और बुि मान भला और कौन होगा? मै ं
अवश्य इस िसंहासन पर बैठने योग्य हूँ।”
कौन-सा चह्न कहाँ और क्य :
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस
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चह्न नाम कहाँ लगा क्य लगा
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। पूण वराम
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“सोचता रहा”, “म राजा ँ”, यहाँ हर बार बात पूरी हो जाती है।
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“योग्य ँ” के बाद
a, gl अल्प वराम “कहा” के बाद इसके बाद राजा क अपनी कही हुई बात शुरू होती है।
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“” उद्धरण चह्न राजा के मन क पूरी बात के यह राजा ने मन ही मन कहा है, इस लए उसक बात अलग दखनी चा हए।
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दोन ओर
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? प्रश्नवाचक
चह्न होगा” के बाद
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“बैठ सकता ँ” और “कौन दोन जगह राजा खुद से सवाल पूछ रहा है, इस लए प्रश्नवाचक चह्न आएगा,
पूण वराम नह ।
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m वराम।
, अल्प वराम “धनवान” के बाद यहाँ तीन शब्द क सूची है — धनवान, बलवान और बु द्धमान। सूची म
आ ख़री से पहले “और” आता है, बाक के बीचeअल्प
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छोटा नयम याद र खए: सूची म जतने शब्द ह , आ ख़री दो को “और” जोड़ता है और बाक को अल्प वराम —
जैसे “आम, केला और अमरूद”।
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a l ड आगे चलकर उसे सहासन से दूर कर दे ता है।
भाव भी बदल जाता है: प्रश्नवाचक चह्न लगते ही पता चलता है क राजा खुद को समझा रहा है। इन्ह दो सवाल
से उसका घमंड दखता है — और यहीgघमं
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.co कौन-सा है?
प्र.2 (क)
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“तीसरी मू त भी उड़ गई।” इस वाक्य के आधार पर प्रश्न के उत्तर ल खए — (क) इस वाक्य म सं ा शब्द
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इस वाक्य म सं ा शब्द है — मू त।
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s क्त, वस्तु, जगह या भाव का नाम बताता है। “मू त” एक वस्तु का नाम है,
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क्य : सं ा वह शब्द होता है जो कसीl
इस लए यही सं ा है।
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जाँचने का आसान तरीका — दो चरण:
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1. वाक्य से पू छए — “कौन उड़ गई?” उत्तर आया — मू त।
s e m2. जो उत्तर आया, वही सं ा है।
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बाक शब्द क्या ह, यह भी दे ख ली जए —
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शब्द वह क्या है
मूित सं ा — वस्तु का नाम
तीसरी वशेषण — मू त के बारे म बताता है
भी जोड़ने वाला छोटा शब्द
उड़ गई क्रया — काम बताती है
प्र.2 (ख) (ख) कौन-सा शब्द इस सं ा शब्द के गुण या वशेषता को बता रहा है?
सं ा “मू त” क वशेषता बता रहा है शब्द — तीसरी।
तीसरी मूित → कौन-सी मूित? तीसरी
जो शब्द सं ा की िवशेषता बताए, उसे िवशेषण कहते है।
ं
क्य यही: मू तयाँ चार थ । “तीसरी” शब्द बता दे ता है क उनम से कौन-सी उड़ी। यह मू त को बाक मू तय से
अलग कर दे ता है — यही वशेषण का काम है।
जानने क बात: जस सं ा क वशेषता बताई जाती है, उसे वशेष्य कहते ह। यहाँ तीसरी वशेषण है और मू त
वशेष्य। “तीसरी” गनती के क्रम को बताता है, इस लए यह संख्यावाचक वशेषण है।
अपने वाक्य बनाकर दे खए: पहली घंट बजी। दूसरा प्रश्न क ठन था। पाँचवाँ खलाड़ी सबसे तेज़ दौड़ा।
प्र.3 (क) कहानी म से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दए गए ह। इनम वशेषण शब्द पहचानकर उनके नीचे रेखा ख चए —
(क) एक दन लड़क का एक झुंड वहाँ खेल रहा था।
वशेषण ह — एक और एक। (पुस्तक म ये दोन पहले से रेखां कत करके नमूने के रूप म दखाए गए ह।)
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एक िदन लड़ कों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था।
पहला एक → बताता है िक कौन-सा िदन → िदन का िवशेषण
दू सरा एक → बताता है िक िकतने झुंड → झुंड का िवशेषण
क्य “एक” वशेषण है: “एक” गनती बताता है, और गनती बताने वाला शब्द भी वशेषण होता है। इसे
संख्यावाचक वशेषण कहते ह। यहाँ यह हर बार अपने आगे आई सं ा के बारे म कुछ बता रहा है।
प्र.3 (ख) (ख) उ ैन क प्राचीन और ऐ तहा सक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ा मैदान था।
वशेषण ह — प्राचीन, ऐ तहा सक, एक और लंबा-चौड़ा।
उज्जै न की पाचीन और ऐितहािसक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ ा मैद ान था।
वशेषण कसक वशेषता बता रहा है क्या बता रहा है
पाचीन नगरी नगरी बहुत पुरानी है।
ऐितहािसक नगरी नगरी का इ तहास से नाता है — यहाँ पुराने समय क बड़ी घटनाएँ हुई ह।
एक मैदान मैदान क गनती — एक।
-
ल ंबा चौड़ ा मैदान मैदान का आकार — बहुत बड़ा।
ध्यान द जए: “उ ैन” वशेषण नह है। यह एक जगह का नाम है, इस लए सं ा है। “लंबा-चौड़ा” दो शब्द को
योजक चह्न (-) से जोड़कर बना एक ही वशेषण है।
प्र.3 (ग) (ग) इतनी छोट उम्र म इतनी बु द्ध का होना आश्चय क बात है।
वशेषण ह — इतनी, छोट और इतनी।
इतनी छोटी उम में इतनी बुि का होना आश्चय की बात है।
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वशेषण कसके बारे म क्या बता रहा है
छोटी उम्र उम्र कम है।
इतनी (पहल ा) छोट कतनी छोट — बहुत ही छोट । यह “छोट ” क मात्रा बढ़ा रहा है।
इतनी (दू सरा) बु द्ध कतनी बु द्ध — बहुत ज़्यादा।
“इतनी” का काम: यह मात्रा बताने वाला शब्द है। मात्रा बताने वाले वशेषण को प रमाणवाचक वशेषण कहते ह
— जैसे थोड़ा दूध, बहुत पानी, इतनी बु द्ध।
प्र.3 (घ) (घ) राजा ने दे खा क वह पत्थर नह , बहुत ही सुंदर सहासन था।
वशेषण है — सुंदर। इसके साथ आया बहुत ही उसक मात्रा बढ़ा रहा है।
राजा ने दे खा िक वह पत्थर नही ं, बहुत ही सुंद र िसंहासन था।
कै सा िसंहासन? → सुंद र
िकतना सुंद र? → बहुत ही
अंतर सम झए: “सुंदर” सीधे सहासन के बारे म बता रहा है, इस लए वही वशेषण है। “बहुत ही” सहासन के बारे
म नह , ब ल्क सुंदर के बारे म बता रहा है। ऐसे शब्द को प्र वशेषण कहते ह — यानी वशेषण क भी वशेषता
बताने वाला शब्द। रेखा “सुंदर” के नीचे ख चए; चाह तो “बहुत ही सुंदर” को साथ रेखां कत कर सकते ह।
ध्यान द जए: “पत्थर” और “ सहासन” दोन वस्तुओं के नाम ह, इस लए वे सं ा ह, वशेषण नह ।
प्र.3 (ङ) (ङ) बात ही बात म वहाँ अ खासी भीड़ जमा हो गई।
वशेषण है — अ खासी (इसे “अ -खासी” भी लखा जाता है)।
बात ही बात में वहाँ अच् छी खासी भीड़ जमा हो गई।
िकतनी भीड़ ? → अच् छी खासी यानी काफ़ी बड़ ी भीड़
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यह जोड़ा क्य बना है: “अ खासी” दो शब्द का जोड़ा है, पर दोन मलकर एक ही अथ दे ते ह — “काफ़
ज़्यादा”। ऐसे जोड़े बोलचाल म बहुत चलते ह, जैसे — भला-चंगा, साफ़-सुथरा, ठ क-ठाक। यह भीड़ क मात्रा बता
रहा है, इस लए वशेषण है।
अपने वाक्य बनाइए: मेले म अ खासी भीड़ थी। उसने अ खासी मेहनत क । आज अ खासी ठं ड है।
प्र.4 आपम कौन-कौन सी वशेषताएँ होनी चा हए जससे आप कहानी के सहासन पर बैठ सक? ल खए—
पुस्तक म सात रक्त पं क्तयाँ द गई ह। सात इस तरह भरी जा सकती ह —
क्र. वशेषता इसका मतलब मेरे रोज़ के जीवन म
1 मैं कभी चोरी न क रू
ँ कसी क प सल, कताब या ट फ़न बना पूछे न लूँ।
2 मैं सच बोल ूँ गलती हो जाए तो डाँट के डर से झूठ न बोलूँ, मान लूँ।
3 मैं िकसी को चोट न पहु ँचाऊँ न मारपीट करूँ, न कसी को चढ़ाकर उसका मन दुखाऊँ।
4 मेरे मन में कल ुष न हो कसी से जलन या बैर न रखूँ; मन साफ़ रखूँ।
5 मैं द ोनों पक्ष ों की बात सुन ूँ झगड़े म एक क सुनकर फैसला न कर दूँ ।
6 मैं िनष्पक्ष रहू ँ अपने दोस्त क गलती हो तो भी उसका पक्ष न लूँ।
7 मुझ में घमंड न हो अपने को सबसे बड़ा न समझूँ; गलती मानने म शम न करूँ।
ये सात ही क्य : ये कोई मनगढ़ं त बात नह ह। पहली तीन ठ क वही ह जो तीन मू तय ने राजा से पूछ थ — चोरी,
झूठ और चोट। चौथी वह है जो चौथी मू त ने कही — “उनके मन म कलुष नह था।” बाक तीन उस लड़के के काम
करने के तरीके से नकली ह, जो बयान सुनकर, गवाही लेकर, बना घमंड के फैसला सुनाता था।
नमूना उत्तर (एक वाक्य म): इस सहासन पर बैठने के लए मुझे सच बोलना होगा, कसी क चीज़ नह लेनी होगी, कसी का दल
नह दुखाना होगा, मन म कसी के लए मैल नह रखना होगा, दोन पक्ष क बात ध्यान से सुननी होगी, बना पक्षपात के फैसला
करना होगा और अपनी गलती मानने म झझकना नह होगा।
पाठ से आगे — पृष्ठ 18
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस
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कहानी को अपने जीवन से जो ड़ए
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पाठ से आगे
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कहानी के पास जाया करते थे। आप अपनी समस्याओं को
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सुलझाने के लए कन- कनके पास जाते ह? आप उन्ह के पास क्य जाते ह?
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यह आपके अपने जीवन का प्रश्न है। इसका उत्तर हर ब े का अलग होगा।
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कैसे लख — तीन चरण:
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चरण 1 — समस्याओं को दो-तीन तरह म बाँ टए (घर क , पढ़ाई क , दोस्त क )।
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coहरmएक के लए कारण द जए — वह व्य क्त यह काम अ l
चरण 2 — हर तरह क समस्या के लए बताइए क आप कसके पास जाते ह।
चरण 3 .— g पाता है।
तरह क्यaकर
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a नमूना उत्तर (ता लका के रूप म सो चए):
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समस्या कसके पास जाता ँ क्य
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पढ़ाई म कुछ समझ न आए
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अपनी िशिक्ष का क
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े पास वे धीरे-धीरे और आसान तरीके से समझाती ह, और डाँटती नह ।
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दोस्त से झगड़ा हो जाए वे दोन क बात सुनते ह और कसी एक का पक्ष नह लेते।
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क क्ष ा के मॉनीटर या बड़ े भाई के पास
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घर क कोई परेशानी - वे मुझे सबसे अ तरह जानते ह और मेरी भलाई चाहते ह।
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माता िपता के पास
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मन उदास द ाद ी के पास वे बना टोके पूरी बात
agl मोहल्ले का कोई झगड़ा गाँव के ब ुज़ ुग ं या पंचायत के पास उनका अनुभव ज़्यादा है और उनक बात सब मानते ह।
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पूरा नमूना उत्तर: म अपनी अलग-अलग समस्याओं के लए अलग-अलग लोग के पास जाता ँ। पढ़ाई क उलझन म म अपनी
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asका पक्ष नह लेता। घर क बात हो तो म माता- पता से कहता ँ। म इन्ह लोग के
श क्षका के पास जाता ँ, क्य क वे बहुत धीरज से समझाती ह। दोस्त से झगड़ा होने पर म कक्षा के मॉनीटर के पास जाता ँ,
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पास इस लए जाता ँ क्य क ये तीन a
क्य क वह दोन क बात सुनता है और कसी
बात इनम ह — ये मेरी बात पूरी सुनते ह, ये सच का साथ दे ते ह और ये मेरी बात दूसर म नह
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फैलाते।
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agतोष नह हुआ।” भरोसा पद से नह ,
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कहानी से जो ड़ए: गाँव वाले भी इसी कारण उस लड़के के पास जाते थे। उसम भी ये तीन बात थ — वह ध्यान से
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इसी व्यवहार से बनता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 क्या कभी ऐसा हुआ है क कसी ने आपके साथ अन्याय कया हो? आपने उस त का सामना कैसे कया?
यह भी अपने अनुभव का प्रश्न है। कोई स ी घटना ल खए और यह भी ल खए क आपने क्या कया।
कैसे लख — चार चरण:
चरण 1 — घटना बताइए — कब, कहाँ, क्या हुआ।
चरण 2 — बताइए क आपको वह अन्याय क्य लगा।
चरण 3 — बताइए क आपने क्या कया — कससे कहा, कैसे कहा।
चरण 4 — बताइए क अंत म क्या हुआ और आपने क्या सीखा।
अ े उत्तर म यह ज़रूर हो — घटना, अपनी भावना, अपना कदम और सीख। यह भी ध्यान रहे क उत्तर म कसी का नाम लेकर
बुराई न हो।
नमूना उत्तर: पछले वष हमारी कक्षा म चत्रकला क प्र तयो गता हुई थी। मने बहुत मेहनत से एक चत्र बनाया था। एक साथी ने वह
चत्र अपना बताकर जमा कर दया और उसे इनाम मल गया। मुझे बहुत बुरा लगा, क्य क मेहनत मेरी थी और नाम कसी और का
हो गया। पहले मुझे बहुत गुस्सा आया, पर मने शोर नह मचाया। म अपनी अभ्यास-पु स्तका लेकर श क्षका के पास गया, जसम
उसी चत्र का क ा खाका बना हुआ था। श क्षका ने दोन क बात सुनी और खाका दे खकर सच जान लया। मेरे साथी ने अपनी
गलती मान ली और मुझसे क्षमा माँगी। मने भी उसे माफ़ कर दया। मने यह सीखा क अन्याय के समय चल्लाने से नह , सबूत और
शां त से बात रखने से न्याय मलता है।
याद रखने क बात: अन्याय होने पर चुप रह जाना भी ठ क नह और लड़ पड़ना भी ठ क नह । सही रास्ता है —
कसी बड़े और भरोसेमंद व्य क्त तक बात पहुँचाना। कहानी के गाँव वाल ने भी यही कया था; वे लड़ते नह , अपनी
फ रयाद लेकर जाते थे।
पुस्तकालय एवं अन्य ोत — पृष्ठ 18
सहासन बत्तीसी और भारत क पारंप रक कथाएँ
पु स्तकालय एवं अन्य ोत
प्र.1 पुस्तकालय म से यह पुस्तक ( सहासन बत्तीसी) खोजकर प ढ़ए और अपनी मनपसंद कहानी कक्षा म सुनाइए।
यह करके दे खने वाला काम है। पहले जान ली जए क आप ढूँ ढ़ क्या रहे ह।
पुस्तक के बारे म (पाठ्यपुस्तक से): आपने जो कहानी पढ़ , वह हमारे दे श क सैकड़ वष पुरानी पुस्तक सहासन
बत्तीसी पर आधा रत है। इसम राजा भोज को ज़मीन म गड़ा राजा वक्रमा दत्य का सहासन मलता है, जसम
बत्तीस मू तयाँ जड़ी होती ह। हर मू त राजा भोज को राजा वक्रमा दत्य क एक कहानी सुनाती है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस AglaSem · NCERT Solutions
कैसे क जए — चार चरण:
1. पुस्तकालय जाकर कहानी-संग्रह वाली अलमारी दे खए, या पुस्तकालय-प्रभारी से “ सहासन बत्तीसी” माँ गए।
2. अनुक्रम णका से कोई एक कहानी चु नए और उसे दो बार प ढ़ए — पहली बार समझने के लए, दूसरी बार सुनाने के लए।
3. कागज़ पर पाँच बदु ल खए — पात्र, समस्या, मोड़, फैसला, सीख।
4. कक्षा म उन्ह पाँच बदुओं के सहारे कहानी सुनाइए। पात्र क बात कहते समय आवाज़ बद लए, इससे सुनने का मज़ा बढ़ता है।
नमूना (कहानी सुनाने क शुरुआत ऐसी हो सकती है): “आज म आपको सहासन बत्तीसी क एक कहानी सुनाऊँगा। इसम
राजा भोज एक बार फर सहासन पर बैठने चलते ह और सत्रहव मू त उन्ह रोक दे ती है। वह कहती है — पहले यह सु नए क राजा
वक्रमा दत्य ने एक भूखे यात्री के लए क्या कया था…”
इस पाठ से जो ड़ए: हमारी कहानी म मू तयाँ केवल चार ह और वे प्रश्न पूछती ह। सहासन बत्तीसी म मू तयाँ
बत्तीस ह और वे कहानी सुनाती ह। दोन जगह मू तय का काम एक ही है — यह जाँचना क बैठने वाला सचमुच
योग्य है या नह ।
प्र.2 सहासन बत्तीसी क तरह भारत म अनेक पारंप रक कहा नयाँ प्रच लत ह, जैसे – पंचतंत्र, हतोपदे श, जातक
कथाएँ आ द। इन्ह भी पुस्तकालय से ढूँ ढ़कर प ढ़ए।
ये तीन भारत के बहुत पुराने कहानी-संग्रह ह। इन्ह पढ़ने से पहले इतना जान ली जए —
पुस्तक इसम क्या मलेगा एक प्र सद्ध कहानी
पंचतंत्र पशु-पक्षी बोलते ह और हर कहानी के अंत म एक सीख मलती है। यह पाँच “एकता म बल” — कबूतर का जाल समेत
भाग (तंत्र ) म बँट है। उड़ जाना
िहतोपदे श यह भी पशु-कथाओं क पुस्तक है। “ हत” यानी भलाई और “उपदे श” मत्रलाभ क कहा नयाँ — कौआ, कछु आ,
यानी सीख — नाम म ही इसका काम छपा है। हरन और चूहे क मत्रता
जातक ये महात्मा बुद्ध के पछले जन्म क कहा नयाँ मानी जाती ह। इनम दया, “बंदर और मगर” जैसी अनेक कथाएँ
कथाएँ स ाई और त्याग क बात आती ह।
कैसे क जए — तीन चरण:
1. पुस्तकालय से इनम से कोई एक पुस्तक ली जए और सप्ताह म कम से कम दो कहा नयाँ प ढ़ए।
2. एक छोट कॉपी बनाइए — कहानी का नाम / पात्र / सीख। हर कहानी के लए तीन पं क्तयाँ ल खए।
3. महीने के अंत म कक्षा म अपनी सबसे पसंद दा कहानी सुनाइए और बताइए क वह सीख आपको क्य अ लगी।
ध्यान द जए: न्याय क कुस भी इसी परंपरा क कहानी है — जसम कोई अनोखी बात होती है और अंत म एक
सीख मलती है। इसी लए पाठ्यपुस्तक ने इन पुस्तक क ओर आपका ध्यान दलाया है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस AglaSem · NCERT Solutions
पता लगाकर क जए — पृष्ठ 18 और 19
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बैठने क चीज़ — वस्तु, वणन और आपक भाषा म नाम
पता लगाकर क जए
प्र.1 “राजा ने आ ा द क सहासन को ले जाकर राजदरबार म रख दया जाए।” सहासन एक वशेष प्रकार क
भव्य कुस हुआ करती थी जस पर राजा-महाराजा बैठा करते थे। आज भी हम बैठने के लए अनेक प्रकार क
वस्तुओं का उपयोग करते ह। इनम से कुछ वस्तुओं के चत्र दए गए ह। इनका वणन क जए और यह भी ल खए
क आपक भाषा म इन्ह क्या कहते ह। (चटाई, दरी, मूढ़ा, चारपाई, पीढ़ा, टाट प )
वस्तु वणन आपक भाषा म
नाम
यह घास , बाँस या प्ल ािस्टक से बनी होती है। इसे भ ूिम पर िबछाकर बैठा
जाता है।
चटाई
यह मोटे कपड़ े या सूती धागों से बनी होती है। यह उ त्सवों या सामािजक
काय क्र मों में उ पयोग की जाती है।
दरी
मूढ़ा
चारपाई
पीढ़ ा
टाट प ी
पृष्ठ 19 पर द गई ता लका। पहली दो पं क्तय का वणन पुस्तक म पहले से लखा है; शेष खाने आपको भरने ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस
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पुस्तक म पहली दो पं क्तय का वणन पहले से भरा है। बाक चार का वणन और सबका “आपक भाषा म नाम” आपको भरना है।
पूरी ता लका इस .तरह a
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भरी जाएगी —
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aवस्तु वणन आपक भाषा म नाम (नमूने)
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चटाई यह घास, बाँस या प्ला स्टक से बनी होती है। इसे भू म पर बछाकर बैठा जाता है। (यह मराठी — चटई · भोजप ुरी/अवधी —
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वणन पुस्तक म पहले से दया है।) · बांग्ल ा — माद ुर · ग ुजराती
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पिटया
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— साद ड़ी
दरी यह मोटे कपड़े या सूती धाग से बनी होती है। यह उत्सव या सामा जक कायक्रम म िहंद ी क्ष ेत्र — सतरंजी · मराठी —
उपयोग क जाती है। (यह वणन पुस्तक म पहले से दया है।)
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· बांग्ल ा — शतरंिच
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सतरंजी
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मूढ़ा यह बाँस, सरकंडे, मूँज या बत क रस्सी से बुना हुआ गोल आसन है। इसम पीठ टकाने
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बांग्ल ा मोड़ ा ओिड़ या — मोढ़ा ·
sem पर कह भी रख लया जाता है।
का सहारा नह होता। यह बहुत हल्का होता है, इस लए इसे उठाकर आँगन या दरवाज़े —
राजस्थानी मूँढ़ ा
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aglचारपाई इसम लकड़ी के चार पाए और चार लंबी लक ड़य क चौखट होती है। उस पर सुतली, िहंद ी क्ष ेत्र — खाट, खिटया · पंजाबी
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नवाड़ या रस्सी बुनी जाती है। यह बैठने और सोने — दोन काम म आती है। ग मय — मंजा · मराठी — बाज · तिमल —
म इसे आँगन म डालकर सोया जाता है।
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l s आसन है। इसे ज़मीन पर रखकर उस पर
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पीढ़ ा
बैठा जाता है। भोजन करते समय
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aऔर पूजा म इसका उपयोग होता है।
यह लकड़ी का छोटा, चौकोर और बहुत मराठी — पाट · बांग्ल ा — िपड़ी ·
िहंद ी क्ष ेत्र — पटा, पीढ़ी · ग ुजराती —
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पाटल ो
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टाट यह जूट यानी सन के मोटे रेश से बुनी हुई लंबी प होती है। यह मज़बूत और सस्ती · बांग्ल ा —
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िहंद ी क्ष ेत्र टाट बोरा
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प ी होती है। व ालय म इसे ज़मीन पर बछाकर ब े पं क्त म बैठते ह। — गोणपाट
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चट मराठी
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ag तीसरा खाना आपका अपना है: ऊपर दए नाम केवल नमूने ह। आपको उसम अपनी भाषा या बोली का नाम
लखना है। घर म दाद -नानी से या पड़ो सय से पू छए — “इसे हमारी बोली म क्या कहते ह?” वही नाम ल खए।
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as— चटाई, दरी, पीढ़ा और टाट प — ज़मीन पर बैठने क ह। मूढ़ा और
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ध्यान दे ने क बात: छह म से चार चीज़
चारपाई ज़मीन से थोड़ा ऊपर बैa ठने क ह। सहासन इन सबसे ऊँचा था। इससे एक बात समझ आती है — कुस
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जतनी ऊँची, ज़म्मेदारी भी उतनी ही बड़ी। यही इस पाठ क सीख भी है।
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करके दे खए: अपने घर और व ालय म दे खए क लोग बैठने के लए और क्या-क्या काम म लाते ह — स्टू ल,
m बच, तख़्त, कुस , झूला, पालथी मारकर ज़मीन। एक सूची बनाइए और हर चीज़ के आगे ल खए क वह कस चीज़
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ag से बनी है।
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बूझो तो जान — पृष्ठ 20
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भारत क अलग-अलग बो लय क पहे लयाँ (जनजातीय लोक कला एवं बोली वकास अकादमी, मध्यप्रदे श संस्कृ त प रषद् से साभार)
बू झो तो जान
प्र.1 ग ड पहेली — “न तो खाय न तो पीवैह, संग मा रगत है।” (न खाती है, न पीती है, संग-संग चलती है)
हद अथ: यह कुछ खाती नह , कुछ पीती नह , फर भी हमेशा हमारे साथ-साथ चलती रहती है।
उत्तर: छाया (परछाईं)
पकड़ म कैसे आया — वह शब्द है “संग मा रगत है”। ग ड बोली म रगना का अथ है चलना। तो पहेली कह रही
है क यह चीज़ हमारे साथ-साथ चलती है। जो चीज़ जी वत न हो, कुछ खाए- पए नह , फर भी हमारे साथ चले —
वह छाया ही हो सकती है।
पहेली का शब्द हद म
खाय खाती है
पीवैह पीती है
संग मा साथ-साथ
रे ंग त है चल ती है
जानने क बात: ग डी मध्य भारत क एक बड़ी जनजातीय बोली है। यह मध्य प्रदे श, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और
तेलंगाना म बोली जाती है।
प्र.2 नमाड़ी पहेली — “हरो माथणो, लाल पेट, रस पी लेव भर-भर पेट।” (हरे मटके का लाल पेट, रस पी लो भर-भर
पेट)
हद अथ: बाहर से यह हरे मटके जैसा दखता है, पर इसका पेट यानी अंदर का भाग लाल है। इसका रस जी भरकर पया जा
सकता है।
उत्तर: तरबूज
पकड़ म कैसे आया — वे शब्द ह “हरो माथणो” और “लाल पेट”। नमाड़ी म माथणो का अथ है मटका। तो
चीज़ बाहर से हरी और गोल है, जैसे मटका। और अंदर से लाल है। जो फल बाहर से हरा, अंदर से लाल और रस से
भरा हो — वह तरबूज ही है।
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पहेली का शब्द हद म
हरो माथणो हरा मटका
लाल पेट लाल अंदरूनी भाग
लेव लो
जानने क बात: नमाड़ी मध्य प्रदे श के नमाड़ क्षेत्र क बोली है — खरगोन, खंडवा और बड़वानी के आस-पास
बोली जाती है।
प्र.3 मालवी पहेली — “एक जानवर ऐसो, जक दूम पे पैसो।” (एक जानवर ऐसा, जसक दुम पर पैसा)
हद अथ: एक ऐसा जीव है जसक पूँछ पर सक्के जैसे गोल नशान बने होते ह।
उत्तर: मोर
पकड़ म कैसे आया — वे शब्द ह “दूम पे पैसो”। मालवी म दूम यानी दुम या पूँछ और पैसो यानी पैसा, सक्का।
मोर के पंख पर चमक ले गोल नशान बने होते ह, जो दे खने म सक्क जैसे लगते ह। इसी से उत्तर पकड़ म आ
जाता है। मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है।
पहेली का शब्द हद म
ऐसो ऐसा
जक जसक
दू म पे पैस ो द ुम पर पैस ा (िस क्के जैस ा िनशान)
जानने क बात: मालवी मध्य प्रदे श के मालवा क्षेत्र क बोली है — उ ैन, इंदौर और रतलाम के आस-पास। ध्यान
द जए, इसी उ ैन से हमारी कहानी भी शुरू होती है।
प्र.4 बुंदेली पहेली — “एक लकड़ी क ऐसी कहानी, ऊम लुको है मीठो पानी।” (एक लकड़ी क ऐसी कहानी, उसम
छपा है मीठा पानी)
हद अथ: एक लकड़ी जैसी चीज़ है, जसके भीतर मीठा पानी छपा हुआ है।
उत्तर: ग ा (ईख)
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पकड़ म कैसे आया — वे शब्द ह “लकड़ी” और “मीठो पानी”। बुंदेली म लुको का अथ है छपा हुआ और ऊम
का अथ है उसम। बाहर से ग ा सूखी लकड़ी जैसा सख़्त दखता है, पर उसे चूसने या पेरने पर मीठा रस नकलता है।
यही “ छपा हुआ मीठा पानी” है।
पहेली का शब्द हद म
ऊम उसम
ल ुक ो िछपा हुआ
मीठो पानी मीठा रस
जानने क बात: बुंदेली मध्य प्रदे श और उत्तर प्रदे श के बुंदेलखंड क्षेत्र क बोली है — सागर, छतरपुर और झाँसी के
आस-पास।
प्र.5 बघेली पहेली — “एक दया सबतर उं जयार।” (एक द पक से चार ओर उ जयारा)
हद अथ: एक ही द पक है, पर उसका उजाला चार ओर फैला हुआ है।
उत्तर: सूय
पकड़ म कैसे आया — वे शब्द ह “एक दया” और “सबतर उं जयार”। बघेली म सबतर यानी सब तरफ़ और
उं जयार यानी उ जयारा, उजाला। साधारण द पक का उजाला तो थोड़ी-सी जगह म रहता है। जस एक ही द पक से
पूरी धरती पर उजाला हो जाए — वह सूय ही हो सकता है।
पहेली का शब्द हद म
दया द पक
सबतर सब तरफ़ , चारों ओर
उं िजयार उ िजयारा , उ जाल ा
पुस्तक क उत्तर-पं क्त: पृष्ठ 20 पर सबसे नीचे उलटा छपा हुआ है — “उत्तर – छाया, तरबूज, मोर, ग ा,
सूय”। पाँच उत्तर ठ क इसी क्रम म ह जस क्रम म पहे लयाँ छपी ह।
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कक्षा 5 हद अध्याय 2 न्याय क कुस AglaSem · NCERT Solutions
जानने क बात: बघेली मध्य प्रदे श के बघेलखंड क्षेत्र क बोली है — रीवा, सतना और शहडोल के आस-पास। इस
पृष्ठ क पाँच बो लयाँ — ग डी, नमाड़ी, मालवी, बुंदेली और बघेली — मध्य प्रदे श क ह। इससे पता चलता है क
एक ही राज्य म कतनी सारी बो लयाँ बोली जाती ह।
मेरा न्याय — पृष्ठ 21
नाटक-मंचन क ग त व ध और अंकयोजना ता लका
मे रा न्याय गतवध
प्र.1 • अपनी कक्षा से कन्ह दो ऐसी समस्याओं को चु नए जन पर न्याय कया जाना है। • कक्षा को दो समूह म
वभा जत क जए। • दोन समूह एक समस्या लेकर उस पर वचार करगे। • तत्पश्चात दोन समूह एक-एक कर
नाटक-मंचन के ारा समस्या को सुलझाएँगे। • दशक समूह प्र तपु प्रदान करगे।
यह पूरी कक्षा के साथ करने वाली ग त व ध है। पाँच नदश को इस क्रम म क जए —
1. समस्या चु नए। दो ऐसी समस्याएँ चु नए जो सचमुच आपक कक्षा म होती ह । जैसे — पानी क बोतल कसक है, खेल म
कसक बारी पहले, कक्षा क सफ़ाई कौन करेगा, टू ट हुई खड़क कसने तोड़ी।
2. दो समूह बनाइए। कक्षा को आधा-आधा बाँट ली जए। हर समूह एक समस्या लेगा।
3. समूह म वचार क जए। तय क जए — कौन फ रयाद बनेगा, कौन दूसरा पक्ष, कौन गवाह और कौन न्याय करने वाला।
संवाद छोटे -छोटे ल खए।
4. नाटक क जए। एक-एक करके दोन समूह अपना नाटक दखाएँ। हर नाटक पाँच मनट से बड़ा न हो।
5. प्र तपु द जए। जो समूह दे ख रहा है, वह अगले प्रश्न क ता लका के चार बदुओं पर अंक दे और एक अ बात तथा एक
सुधार बताए।
अ े नाटक म यह ज़रूर हो — समस्या साफ़ दखे, दोन पक्ष क बात सुनी जाए, कम से कम एक गवाह हो,
फैसला कारण के साथ सुनाया जाए, और अंत म दोन पक्ष फैसला मान ल।
नमूना उत्तर — एक छोटा नाटक “ कसक बोतल?”
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पात्र संवाद
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न्यायकता
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त हो जाइए। एक-एक करके बो लए। पहले र व, तुम अपनी बात कहो।
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सोहन (दूसरा पर यह बोतल तो मेरे बस्ते म थी। म इसे रोज़ लाता ँ।
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पक्ष)
कोई गवाह है? मीना, तुम र व केg l a
न्यायकता
a पास बैठती हो। तुमने क्या देखा?
मीना (गवाह)
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मने सुबह दे खा था क र व के पास नीली बोतल थी। खेल के मैदान से लौटते समय बोतल आपस म मल गई थ ।
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न्यायकता ठ क है। र व, तुम्हारी बोतल पर कोई नशान है?
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रव हाँ, ढक्कन के नीचे मेरा नाम लखा है।
agl न्यायकत बोतल खोल कर दे खी गई। ढ क्कन के नीचे रिव का नाम है , इसिल ए यह बोतल रिव की है। सोहन ने जान-ब ूझकर नही ं ल ी थी,
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(फै सल ा)
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द ोनों बोतले ं एक जैस ी होने से भ ूल हो गई। इसिल ए िकसी को द ोषी नही ं ठहराया जाएगा। आगे से सब अपनी बोतल पर अपना
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नाम िल खेंग े।
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सोहन मुझे खेद है, र व। म ध्यान से नह दे ख पाया था।
रव कोई बात नह । बोतल सचमुच एक जैसी ह।
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m ा क्य है: इसम वही तरीका है जो कहानी के लड़के का था — पहले s
a e के बयान, फर गवाही,
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फर.cसवाल, फर कारण के साथ फैसला। फैसला सफ़ “बोतल र व क है” नहag
यह नाटक अ
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शक्षण-संकेत (पुस्तक से): शक्षक इस ग त व ध म समस्याओं के चुनाव, संवाद-रचना, नाटक-मंचन और कक्षा म
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समूह को व्यव त करने म ब क सहायता कर। यह भी सु न श्चत कर क कक्षा का प्रत्येक ब ा इस ग त व ध
म स म्म लत हो।
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.co का आत्म व ास। अंक 1 से 5 तक। l
प्र तपु के बदुओं पर अंक द जए — (क) प्रस्तुतीकरण (ख) पात्र संवाद (ग) समस्या का समाधान (घ) पात्र
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पुस्तक म यह ता लका खाली द गई है। हर खाने म यह लखा है क कौन-सा अंक कब मलेगा। इससे अंक दे ना आसान और नष्पक्ष
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हो जाता है।
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क्र.सं. प्र तपु के 1 2 3 4 5
बदु
(क) पस्तुतीकरण नाटक अधूरा शुरुआत हुई, पर पूरा हुआ, पर क्रम से चला शरू
ु से अंत तक ब ँधा
रहा; क्रम बीच म उलझ कह -कह और समय म हुआ ; सबने अपना काम
समझ नह गया। रुकावट रही। पूरा हुआ। समय पर िकया।
आया।
(ख) पात्र संवाद संवाद याद बहुत कम बोले; संवाद ठ क साफ़ और संवाद सहज , स्पष्ट और
नह थे; बार-बार अटके। थे, पर आवाज़ सुनाई दे ने वाले भाव के साथ ; हर पात्र की
आवाज़ नह धीमी रही। संवाद। आवाज़ अल ग ल गी।
पहुँची।
(ग) समस्या का समस्या ही समस्या दखी, हल नकला, हल के साथ द ोनों पक्ष ों की बात और
समाधान साफ़ नह हुई। पर हल नह पर कारण नह कारण भी गवाही सुनकर , कारण
नकला। बताया। बताया। सिहत ऐसा हल जो
सबको स्वीकार हो।
(घ) पात्रों का पात्र घबराए बहुत झझक; थोड़ी झझक, सहज खड़े रहे; पूरे भरोसे के साथ
आत्मिवश्वास हुए रहे; मुँह बार-बार सा थय पर काम चला दशक क ओर अिभनय ; हाव-भाव और
छपाते रहे। क ओर दे खा। लया। दे खकर बोले। आँखों का संपक भी
अच्छा।
कु ल अंक = चारों िबंद ुओ ं के अंक ों का जोड़
सबसे अिधक संभ व अंक = 4 × 5 = 20
प्र तपु दे ने के तीन नयम:
1. पहले एक अ बात बताइए।
2. फर एक ऐसी बात बताइए जसे और बेहतर कया जा सकता है।
3. कसी का मज़ाक मत उड़ाइए — नाटक क बात क जए, व्य क्त क नह ।
ऐसी ता लका क्य बनाई जाती है: जब अंक दे ने का आधार पहले से तय हो, तो सबको एक ही पैमाने से नापा
जाता है और पक्षपात नह होता। यही तो न्याय क पहली शत है — और यही इस पूरे पाठ का वषय भी है।
अध्याय — एक नज़र म
न्याय क कुस एक कहानी है। इसे लीलावती भागवत ने लखा है। यह उनक पुस्तक स्वग क सैर तथा अन्य कहा नयाँ से
ली गई है, जो राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से छपी है।
कहानी उ ैन नगरी के बाहर के एक मैदान से शुरू होती है। वहाँ यहाँ-वहाँ ट ले — यानी म के छोटे -छोटे ढे र — थे। एक
लड़का खेलते-खेलते एक ट ले पर चढ़ा और ठोकर खाकर गर पड़ा। ठोकर एक बड़े चकने पत्थर से लगी थी।
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लड़के ने उसी पत्थर को अपना सहासन बना लया। उसने कहा — “यह सहासन है मेरा। म राजा ँ और तुम सब मेरे
दरबारी।” बाक लड़के फ रयाद ( शकायत) लेकर आते, गवाह बुलाए जाते, बयान लए जाते और ट ले पर बैठा लड़का फैसला
सुनाता। यह खेल उन्ह इतना अ ा लगा क वे रोज़ खेलने लगे।
फैसले इतने ठ क होते थे क नगर म चचा फैल गई। एक दन दो कसान ज़मीन के झगड़े म राजा के दरबार जाने के बजाय
उसी लड़के के पास गए। उसका फैसला सुनकर वे दं ग रह गए। इसके बाद सारे लोग वह आने लगे और राजा के दरबार म कोई
न जाता।
राजा को क्रोध आया और वह खुद दे खने पहुँचा। वह स्तं भत — यानी हैरान होकर जड़-सा — रह गया। तभी पता चला क
उस दन ट ले पर रोज़ वाला लड़का नह , कोई नया लड़का बैठा है। राजा ने सोचा क चमत्कार लड़के म नह , कुस म है।
खुदाई हुई तो नकला एक सुंदर सहासन, जसके चार पाय पर चार दे वदूत क मू तयाँ बनी थ । पं डत ने बताया क यह
स दय पुराना, राजा वक्रमा दत्य का सहासन है, जो अपने न्याय और ववेक के लए प्र सद्ध थे।
अब कहानी का असली मोड़ आता है। राजा जब-जब सहासन पर बैठने चला, एक मू त ने “ठहरो!” कहकर एक प्रश्न पूछा —
क्या तुमने कभी चोरी नह क ? क्या कभी झूठ नह बोला? क्या कभी कसी को चोट नह पहुँचाई? राजा हर बार पीछे हट गया
और हर बार तीन दन उपवास और प्राय श्चत कया। एक-एक करके तीन मू तयाँ उड़ गईं।
चौथी मू त ने शत रखी — जो लड़के इस पर बैठते थे, उनके मन म कलुष (मैल) नह था। राजा ने सोचा क वह धनवान,
बलवान और बु द्धमान है, इस लए ज़रूर योग्य है। यही अहंकार था। जैसे ही वह बढ़ा, चौथी मू त सहासन समेत आकाश म
उड़ गई।
कहानी का भाव सीधा है — न्याय क कुस पर बैठने का हक़ पद या ताकत से नह , साफ़ मन से मलता है। इसी लए
भोले-भाले ब े उस पर बैठ पाते थे और राजा नह । भाषा सरल है, वाक्य छोटे ह और बातचीत बहुत है, इस लए कहानी
नाटक क तरह पढ़ जा सकती है। अभ्यास म बहु वकल्पी प्रश्न ( जनम एक से अ धक वकल्प सही हो सकते ह), सोच- वचार
और कल्पना के प्रश्न, वराम चह्न तथा सं ा- वशेषण का व्याकरण, बैठने क चीज़ क ता लका, पाँच बो लय क पहे लयाँ
और नाटक-ग त व ध मेरा न्याय द गई है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
ट ला िम ी या पत्थर का छोटा ऊँचा ढे र “यहाँ-वहाँ ट ले थे।” हम दौड़कर ट ले पर चढ़ गए।
शला बड़ा चपटा पत्थर “अपने मत्र को बुलाकर वह शला दखाई।” नद कनारे एक चौड़ी शला पर हम
बैठ गए।
फ रयाद िशकायत, न्याय पाने के िलए लगाई गई “तुम अपनी-अपनी फ रयाद लेकर आओ।” खोए ब े क फ रयाद पु लस ने
ग हु ार तुरंत सुनी।
दरबारी राजा के दरबार में रहने वाले लोग “म राजा ँ और तुम सब मेरे दरबारी।” नाटक म मेरे दो साथी दरबारी बने।
गवाही िजसने कु छ दे खा या सुना हो, उसका “उनक गवाही ली जाती।” दुघटना क गवाही दुकानदार ने द ।
कहा हुआ सच
बयान अपनी बात कहकर बताना “दोन कसान के बयान सुने।” दोन पक्ष के बयान सुने बना
फैसला ठ क नह होता।
न्याय-बु द्ध सही-गलत परखकर ठीक फै सला करने “लोग लड़के क न्याय-बु द्ध क चचा करने श क्षका क न्याय-बु द्ध पर सब
की समझ लगे” ब को भरोसा है।
दै वी श क्त दे वताओं से िमली हुई अनोखी शिक्त “अवश्य ही उस लड़के म कोई दै वी श क्त है।” कहा नय म प रय के पास दै वी
श क्त होती है।
मजाल िहम्मत, साहस (यहाँ ताने के रूप में) “उस छोकरे क यह मजाल…” कसक मजाल जो कतार तोड़कर
आगे बढ़ जाए!
लाव- साथ चलने वाले िसपाही और से वक, पूर ा “राजा अपने लाव-लश्कर के साथ उस मैदान म बारात अपने पूरे लाव-लश्कर के
लश्कर दल पहुँचा” साथ पहुँची।
स्तं भत हैर ान होकर जड़-सा रह जाना “वह स्तं भत रह गया।” जादू का खेल दे खकर हम स्तं भत
रह गए।
लोहा िकसी की ेष्ठता स्वीकार करना “बड़े-बड़ को लोहा मानना पड़ेगा।” उसक दौड़ का लोहा पूरा गाँव
मानना (मुहावरा) मानता है।
चमत्कार ऐसी अनोखी बात जो समझ में न आए “पत्थर क इस कुस म ही कोई चमत्कार है।” बीज से पेड़ बन जाना कसी
चमत्कार से कम नह ।
दे वदूत दे वताओं का संदे श लाने वाला, पंखों “चार दे वदूत क मू तयाँ बनी हुई थ ।” चत्र म दे वदूत के पंख सुनहरे बने
वाला िदव्य रूप थे।
ववेक भले -बुरे की पहचान “राजा वक्रमा दत्य अपने न्याय और ववेक के ववेक से लया गया नणय बाद म
लए बहुत प्र सद्ध थे।” पछताने नह दे ता।
प्रजा राजा के राज्य में रहने वाले लोग “म इस पर बैठकर अपनी प्रजा क फ रयाद अ ा राजा प्रजा को अपने ब
सुनूँगा” जैसा मानता है।
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शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
प्राय श्चत गलती का पछतावा और उसे सुध ारने के “तुमको तीन दन तक प्राय श्चत करना होगा।” उसने अपने प्राय श्चत म पूरा बगीचा
िलए िकया गया काम साफ़ कया।
उपवास कु छ न खाकर वत रखना “राजा ने तीन दन तक उपवास कया” दाद सोमवार को उपवास रखती ह।
कलुष मन का मैल , बुर ा भाव “उनके मन म कलुष नह था।” छोटे ब के मन म कलुष नह
होता।
सकपकाना अचानक घबरा जाना, बोलती बंद हो “राजा सकपकाया।” झूठ पकड़े जाने पर वह सकपका
जाना गया।
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