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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 12: त्वम् आपणं गच्छ
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
121 – 129 11 21 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 25 pages
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · सं स्कृ त · द पकम्
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 12: त्वम् आपणं गच्छ
NCERT कक्षा 6 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के ादशः पाठः — त्वम् आपणं गच्छ के स ूण हल। यह पाठ एक संवाद है — माँ (अम्बा)
राकेश को सूची और थैला दे कर बाजार भेजती है, और दुकानदार (आप णकः) से राकेश का पूरा लेन-दे न होता है। व्याकरण क दृ ष्ट से यह पूरा पाठ
लोट् लकार (आ ा / प्राथना — Imperative Mood) का है — तीन पुरुष के नौ रूप, ‘मा’ के साथ नषेध, और सड़क पर लगे सूचना-फलक क
संस्कृत। पृष्ठ 121 से 129 तक का हर भाग यहाँ क्रम से हल है — पूरे संवाद का हन्द अनुवाद, पठन्तु अवगच्छन्तु के छह चत्र-वाक्य, वयं
शब्दाथान् जानीमः क पन्द्रह शब्द वाली ता लका, पठ् -धातुः (लोट् लकारः) क रूप-ता लका, वयम् अभ्यासं कुमः के प्रश्न १–९ (हर उपभाग, हर
सुभा षत का अन्वय-अथ-भाव, हर चत्र और हर रक्तस्थान स हत), योग्यता वस्तरः का गीत ‘कुरु उपकारं, कुरु उद्धारम्’ तथा प रयोजनाकायम्।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
द पकम् (कक्षा 6) 121 – 129
खं ड प्रश्न
11 21
माध्यम
हन्द
ादशः पाठः — त्वम् आपणं गच्छ (गृहे अम्बायाः राकेशस्य च संवादः) — पृष्ठ 121
पाठस्य प्रथमः भागः — माता पुत्रम् आपणं प्रेषय त
पाठः
प्र.1 अम्बा — राकेश ! कुत्र अ स ? अत्र आगच्छ । राकेशः — आम् अम्ब ! कथय क काय करवा ण ? … अम्बा —
अस्तु । माग यानानां ग त पश्यतु । अनन्तरं सावधानं पारं गच्छतु । राकेशः — आम् । अहं गच्छा म । — अस्य
स ूणस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
पाठ का पहला दृश्य घर का है। माँ राकेश को सूची, थैला और पैसे दे कर बाज़ार भेज रही है — और साथ म सड़क पार करने क
सीख भी दे रही है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
संस्कृतम् (मूल संवादः) हन्द अनुवादः
अम्बा — राकेश ! कु त्र अिस ? अत्र आगच्छ । माँ — राके श! कहाँ हो? यहाँ आओ।
राके शः — आम् अम्ब ! कथय िकं काय ं करवािण ? राके श — हाँ माँ! बताइए , मैं क्या काम क रूँ ?
अम्बा — अद्य तव तातः काय लयात् िवलम्बेन आगिमष्यित । त्वम् आपणं माँ — आज तुम्हारे िपताजी काय लय से दे र से आएँगे। तुम बाज़ार
गच्छ । वस्तूिन आनय । वस्तूनां नामावली अिप अत्र अिस्त । जाओ। सामान ले आओ। सामान की सूची भी यही ं है।
राके शः — अस्तु । स्यूतं ददातु । वस्तूनां नामावलीम् अहं स्वीकरोिम । राके श — ठीक है। थैल ा दीिजए। सामान की सूची मैं ले ले ता हू।
ँ
अम्बा — स्वीकु रु । धनम् अिप नय । माँ — ले लो। पैसे भी ले जाओ।
राके शः — अम्ब ! इतोऽिप एकं वस्तु स्वीकरवािण ? राके श — माँ! इसके अलावा एक चीज़ और ले लूँ?
अम्बा — चाकले हम् इच्छित खलु वत्स ! जानातु, अिधकं चाकले ह-खादनं माँ — चॉकले ट चािहए न, बेटा! (यह भी) जान लो — ज्य़ ादा
स्वास्थ्याय हािनकरं भवित । चॉकले ट खाना स्वास्थ् य के िलए हािनकारक होता है।
राके शः — केवलम् अद्य एव स्वीकरोिम । राके श — के वल आज ही लूँगा।
अम्बा — अस्तु । माग यानानां गितं पश्यतु । अनन्तरं सावधानं पारं माँ — ठीक है। रास्ते में गािड़यों की चाल (आवाजाही) दे ख ले ना।
गच्छतु । उसके बाद सावधानी से (सड़क के ) उस पार जाना।
राके शः — आम् । अहं गच्छािम । राके श — हाँ। मैं जा रहा हू।
ँ
(िचत्रस्य अधः) राके शः िवपिणं ग च्छित । (िचत्र के नीचे) राके श बाज़ार जा रहा है।
दो शब्द का अन्तर समझ ली जए: आपणम् = दुकान/वस्तु- वक्रय-केन्द्र, और वप णम् = बाज़ार क पूरी गली
(आपण-वी थम्)। इसी लए माँ कहती है ‘आपणं गच्छ’ (दुकान जाओ) और चत्र के नीचे लखा है ‘ वप ण गच्छ त’
(बाज़ार जा रहा है)। दोन ही तीया वभ क्त, एकवचन म ह, क्य क ‘गम्’ धातु का कम तीया म आता है।
Did you know? माँ पहले ‘गच्छ, आनय, स्वीकुरु, नय’ (मध्यमपुरुष — ‘तुम जाओ’) कहती है, पर अन्त म
‘जानातु, पश्यतु, गच्छतु’ (प्रथमपुरुष — ‘जान ल, दे ख, जाएँ’) कहती है। यह पुस्तक ने जान-बूझकर कया है, ता क
एक ही संवाद म लोट् लकार के दोन प्रकार के रूप वद्याथ को दख जाएँ। संस्कृत म प्रथमपुरुष का रूप आदर
तथा स्नेह दोन के लए चलता है।
प्र.2 अत्र ूलाक्षरैः ल खता न पदा न पश्यन्तु — पृष्ठे १२१ ूलाक्षरैः मु तानां क्रयापदानां पुरुषं वचनं धातुं च
लखन्तु ।
पुस्तक ने संवाद के जन पद को लाल/मोटे अक्षर म छापा है, वे सब लोट् लकार के ह। पृष्ठ 121 के ग्यारह पद यहाँ खोलकर रखे
ह।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
पदम् धातुः पुरुषः वचनम् हन्द अथः
आगच्छ आ + गम् (गच्छ् ) म ध् यमपुरुषः एकवचनम् (तुम) आओ
करवािण कृ उ त्त मपुरुषः एकवचनम् (म) करूँ
गच्छ गम् (गच्छ् ) म ध् यमपुरुषः एकवचनम् (तुम) जाओ
आनय आ + नी (नय्) म ध् यमपुरुषः एकवचनम् (तुम) ले आओ
ददातु दा पथमपुरुषः एकवचनम् (आप) द जए
वीकु रु
स् स्वी + कृ म ध् यमपुरुषः एकवचनम् (तुम) ले लो
नय नी (नय्) म ध् यमपुरुषः एकवचनम् (तुम) ले जाओ
वीकरवािण
स् स्वी + कृ उ त्त मपुरुषः एकवचनम् (म) ले लूँ
जानातु ा पथमपुरुषः एकवचनम् (आप) जान ली जए
पश्यतु दृश् (पश्य्) पथमपुरुषः एकवचनम् (आप) दे खए
गच्छतु गम् (गच्छ् ) पथमपुरुषः एकवचनम् (आप) जाइए
पहचान का सरल सूत्र: लोट् लकार के एकवचन म — प्रथमपुरुष का अन्त -तु (गच्छतु), मध्यमपुरुष का अन्त कुछ
भी नह , केवल धातु (गच्छ), और उत्तमपुरुष का अन्त -आ न (गच्छा न)। ‘करवा ण / स्वीकरवा ण’ म ‘कृ’ धातु का
वशेष रूप बनता है — ‘कृ’ का लोट् उत्तमपुरुष एकवचन ‘करवा ण’ होता है, ‘करा न’ नह ।
Tip: ‘करवा ण ?’ के अन्त म प्रश्न चह्न है — क्य क यहाँ आ ा नह , अनुम त माँगना है। लोट् लकार का उत्तमपुरुष
प्रायः ‘म करूँ क्या?’ इसी भाव म आता है — ‘अहं पठा न ?’ = ‘म प ँ ?’
ादशः पाठः — त्वम् आपणं गच्छ (आपणे राकेशस्य आप णकस्य च संवादः) — पृष्ठ 122
पाठस्य तीयः भागः — वस्तू न, मूल्यम्, अव शष्टं धनं च
पाठः
प्र.1 राकेशः — महोदय ! कृपया एतां नामावल पश्यतु, वस्तू न च ददातु । आप णकः — पश्या म । … आप णकः —
पुनर प आगच्छतु । — अस्य संवादस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
दूसरा दृश्य दुकान का है। राकेश सूची दे ता है, दुकानदार सामान तौलकर थैले म रखता है, और हसाब होता है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ
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संस्कृतम् (मूल संवादः) हन्द अनुवादः
राके शः — महोदय ! कृm as e
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पया एतां नामावली ं पश्यतु, वस्तूिन च ददातु ।
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राके श — महोदय! कृ पया यह सूची दे िखए और सामान दीिजए।
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as—e पश्यािम ।
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आपिणकः दुक ानदार — दे खता हू।
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मुद् ग ः — अधिकलोिमतः । शक रा — एकिकलोिमता । ग ड
ु ः— मूँग — आधा िकलो। चीनी — एक िकलो। गड
ु ़ — एक
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एकिकलोिमतः । ि दलम् — एकिकलोिमतम् । सषपः — पादिकलोिमतः । िकलो। दाल — एक िकलो। सरसों — पाव (चौथाई) िकलो।
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सवं िसद्धम् अिस्त । स्यूतं ददातु, तत्र स्थापयािम । सब तैयार है। थैल ा दीिजए , उसमें रख दे ता हू।
ँ
राके शः — अस्तु, कित रूप्यकािण यच्छािन ? राके श — ठीक है, िकतने रुपये दू ँ?
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आपिणकः — चत्वािर शतािन षिष्टं (४६०) च रूप्यकािण ददातु । दुक ानदार — चार सौ साठ (४६०) रुपये दीिजए।
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. com! नीलवण ले खनी अिस्त िकम् ?
राके शः — महोदय
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राके श — महोदय! नीले रंग की कलम है क्या?
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as — आम्, अिस्त ।
a g lआपिणकः दुक ानदार — हाँ, है।
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राके शः — एकं चाकले हम् एकां ले खनी ं च ददातु । तस्य मूल्यम् अिप योजयतु
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राके श — एक चॉकले ट और एक कलम दीिजए। उसका मूल्य
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। भी (िहसाब में) जोड़ दीिजए।
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च योजयािम । आहत्य नवत्यिधकािन चत्वािर शतािन
lasहस्य दश रूप्यकािण
ag (४९०) रूप्यकािण
आपिणकः — अस्तु । ले खन्याः िवंशितं रूप्यकािण चाकले दुक ानदार — ठीक है। कलम के बीस रुपये और चॉकले ट के
ँ कु ल िमलाकर चार सौ नब्बे (४९०) रुपये
दस रुपये जोड़ता हू।
ददातु । दीिजए।
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राके शः — आम् , पञ्च शतािन (५००) रुप्यकािण सिन्त । स्वीकरोतु,
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राके श — हाँ, (मेरे पास ) पाँच सौ (५००) रुपये है।
ं लीिजए , और
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अविशष्टं च ददातु । बाकी (पैसे ) दे दीिजए।
m — सवं स्यूते स्थािपतम् अिस्त । दश (१०) रुप्यकािण
eआपिणकः a
a s
gl अविशष्टािन, स्वीकरोतु ।
दुक ानदार — सब कु छ थैले में रख िदया गया है। दस (१०)
a रुपये बाकी है,ं ले लीिजए।
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राके शः — अस्तु । धन्यवादः ।
com
राके श — ठीक है। ध न्यवाद।
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आपिणकः — पुनरिप आगच्छतु ।
agl
दुक ानदार — िफर आइएगा।
om (नपुंसक लङ्ग) →
‘ कलो मत’ शब्द लङ्ग बदलता है: ‘ कलो मत’ वशेषण है, इस लए वह अपने वशेष्य के लङ्ग के अनुसार रूप
. cदलम्
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बदलता है — मु ः (पुं लङ्ग) → अध कलो मतः, शकरा (स्त्री लङ्ग) → एक कलो मता,
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एक कलो मतम्। यही संस्कृत का नयम है — वशेषणं वशेष्यानुसा र।
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a Tip — तौल के तीन शब्द: अध कलो मतः = आधा कलो, पाद कलो मतः = पाव (चौथाई) कलो, एक कलो मतः
c
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= एक कलो। ‘पाद’ का अथ यहाँ ‘चौथाई’ है — जैसे ‘पादोन’ = पौन।
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प्र.2 संवादस्य आधारेण गणयन्तु — राकेशः क क क्र तवान् ? तस्य कुल-मूल्यं कयत् ? कयत् धनम् अव शष्टम् ?
पूरा हसाब पाठ म ही है — बस उसे जोड़-घटाकर दे ख ली जए।
वस्तु प रमाणम् हन्द
मुद् ग ः अध िकलोिमतः मूँग — ½ कलो
शक रा एकिकलोिमता चीनी — 1 कलो
गड
ु ः एकिकलोिमतः गुड़ — 1 कलो
ि दलम् एकिकलोिमतम् दाल — 1 कलो
सषपः पादिकलोिमतः सरस — ¼ कलो
ले खनी (नीलवण ) एका नीली कलम — 1
चाकले हः एकः चॉकलेट — 1
नामावल्याः वस्तून ां मूल्यम् = ४६० रूप्यकािण
लेखन्याः मूल्यम् = २० रूप्यकािण
चाकलेहस्य मूल्यम् = १० रूप्यकािण
आहत्य (कु ल मूल्य) = ४६० + २० + १० = ४९० रूप्यकािण
राके शेन दत्तं धनम् = ५०० रूप्यकािण
अविशष्टम् = ५०० − ४९० = १० रूप्यकािण
पाठ से मलान कर ली जए: दुकानदार स्वयं कहता है — ‘आहत्य नवत्य धका न चत्वा र शता न (४९०) रूप्यका ण
ददातु’ और फर ‘दश (१०) रूप्यका ण अव शष्टा न’। हमारी गणना ठ क वही उत्तर दे ती है। आहत्य = कुल
मलाकर, अव शष्टम् = शेष/बाक ।
Try This: कुल तौल भी जोड़ ली जए — ½ + 1 + 1 + 1 + ¼ = 3¾ कलो (पौने चार कलो) सामान। और
ध्यान द जए, राकेश कपड़े का थैला (स्यूतम्) ले जाता है, प्ला स्टक क थैली नह — पाठ का यह छोटा-सा संकेत
बहुत बड़ी सीख है।
पठन्तु अवगच्छन्तु — पृष्ठ 123
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षट् चत्रा ण, षट् वाक्या न — लोट् लकारस्य त्रयः पुरुषाः त्री ण वचना न च
पठन्तु अवगच्छन्तु
प्र.1 चत्रा ण दृष्ट् वा वाक्या न पठन्तु अवगच्छन्तु च — भवान् पबतु । यूयम् उ त्तष्ठत । भवन्तः खादन्तु । अहं संशयं
पृच्छा न । त्वं पठ । वयं गच्छाम ।
छह वाक्य लोट् लकार के ह। हर वाक्य का कता (भवान्, यूयम्, अहम्…) ही बता दे ता है क क्रया कस पुरुष और वचन म है।
वाक्यम् क्रयापदम् पुरुषः / वचनम् हन्द अथः
भवान् िपबतु । िपबतु (पा) प्रथमपुरुषः, एकवचनम् आप पी जए।
यूयम् उित्तष्ठत । उित्तष्ठत (उत् + स्था) मध्यमपुरुषः, बहुवचनम् तुम सब खड़े हो जाओ।
भवन्तः खाद न्तु । खाद न्तु (खाद् ) प्रथमपुरुषः, बहुवचनम् आप सब खाइए।
अहं संशयं पच्ृ छािन । पच्ृ छािन (पच्छ् ) उत्तमपुरुषः, एकवचनम् म (अपनी) शंका पूछूँ?
वं पठ ।
त् पठ (पठ् ) मध्यमपुरुषः, एकवचनम् तुम पढ़ो।
वयं गच्छाम । गच्छाम (गम्) उत्तमपुरुषः, बहुवचनम् हम चल।
‘भवान्’ का चक्कर याद र खए: हन्द म ‘आप’ मध्यमपुरुष (दूसरा पुरुष) है, पर संस्कृत म भवान् / भवती /
भवन्तः हमेशा प्रथमपुरुष लेते ह। इसी लए ‘भवान् पबतु’ (‘भवान् पब’ नह ) और ‘भवन्तः खादन्तु’ (‘भवन्तः
खादत’ नह )।
Check it yourself: इन छह वाक्य म लोट् लकार के नौ म से छह खाने भर जाते ह। शेष तीन — वचन के
रूप (पठताम्, पठतम्, पठाव) — पृष्ठ 124 क ता लका म दे खए।
वयं शब्दाथान् जानीमः — पृष्ठ 123–124
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पाठस्य पञ्चदश शब्दाः — संस्कृत-अथः, हन्द , English तथा ‘मातृभाषया अथ लखन्तु’ स्त ः
शब्दाथाः
प्र.1 अधो ल खतानां शब्दानाम् अथ (संस्कृते, हन् ाम्, आङ् ग्लभाषायां च) लखन्तु, मातृभाषया अ प अथ लखन्तु
— स्यूतम्, नामावली, आपणम्, आनय, नय, चाकलेहः, यानानाम्, ग तम्, मु ः, शकरा, गुडः, दलम्, सषपः,
अव शष्टम्, वप णम् ।
पुस्तक क दोन ता लकाएँ (पृष्ठ 123 क चार पं क्तयाँ और पृष्ठ 124 क ग्यारह पं क्तयाँ) एक साथ, और साथ म एक-एक वाक्य-
प्रयोग जससे शब्द याद रह जाए।
शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द ENGLISH
स्यूतम् प्रसेवम् थैल ा Bag
नामावली नामसू चः सूची List
आपणम् वस्तु- वक्रय-केन्द्रम् बाज़ार को Market
आनय आहर लाओ (You) Bring
नय गृहाण ले जाओ (You) Take away
चाकले हः चाकलेहः चॉकले ट Chocolate
यानानाम् वाहनानाम् गािड़यों की Of vehicles
गितम् गमनम् चलना Movement
मुद् गः धान्य वशेषः मूँग Green Gram
शकरा सता चीनी Sugar
गुडः इक्षुसारः गड
ु़ Jaggery
ि दलम् दलम् दाल Pulses
सषपः सषपः सरसों Mustard seeds
अविशष्टम् शेषभागः बाकी Remaining
िवपिणम् आपण-वी थम् बाज़ार Market
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‘मातृभाषया अथ लखन्तु’ खाना कैसे भर: अ न्तम स्तम्भ जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है, क्य क हर वद्याथ
क मातृभाषा अलग है। जैसे गुडः — मराठ म ‘गूळ’, गुजराती म ‘ગોળ’, त मल म ‘ெவல் லம் ’, बंगला म ‘গড
ু ় ’,
पंजाबी म ‘ਗੁੜ’, तेलुगु म ‘బెలం’। अपनी भाषा का शब्द अपनी पुस्तक म ल खए।
वाक्य-प्रयोग करके दे खए:
• माता पुत्राय स्यूतं ददा त ।
• वस्तूनां नामावली मेजोप र अ स्त ।
• माग यानानां ग तः अ धका अ स्त ।
• आप णकः अव शष्टं धनं ददा त ।
ध्यान द जए — ‘यानानाम्’ म षष्ठी वभ क्त, बहुवचन है और ‘ग तम्’ म तीया वभ क्त, एकवचन।
अवधेयांशः — लोट् लकारः — पृष्ठ 124
‘एता न क्रयापदा न लोट् लकारे आ ा / प्राथना इ त अथयोः स न्त’ तथा पठ् -धातोः रूपा ण
अवधे यां शः
प्र.1 अत्र ूलाक्षरैः ल खता न पदा न पश्यन्तु । एता न क्रयापदा न लोट् लकारे आ ा / प्राथना इ त अथयोः स न्त ।
लोट् लकारः क्रयायाः भावसूचकः (Mood) भव त । — अस्य नयमस्य हन्द -अनुवादं व्याख्यां च कुवन्तु ।
पुस्तक का यह छोटा-सा पैरा ही पूरे पाठ क व्याकरण-कुंजी है।
संस्कृतम् हन्द अनुवादः
अत्र स्थूल ाक्षरै ः िलिखतािन पदािन पश्यन्तु । यहाँ मोटे अक्षरों में िलखे हुए पदों को दे िखए।
एतािन िक्रयापदािन लोट् ल कारे आ ा / पाथना इित अथयोः ये िक्रयापद लोट् ल कार में है ं और ‘आ ा’ तथा ‘पाथना’ — इन दो अथ ं में
सिन्त । पयुक्त है।
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लोट् ल कारः िक्रयायाः भावसूचकः (Mood) भवित । लोट् ल कार िक्रया के ‘भाव’ (Mood) का सूचक होता है।
तस्य रूपािण पश्यन्तु — उसके (लोट् ल कार के ) रूप दे िखए —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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‘लकार’ और ‘भाव’ का अन्तर: लट् , लृट्, लङ् आ द लकार काल बताते ह (वतमान, भ वष्य, भूत)। पर
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m a s em कहा गया है,
लोट् लकार काल नह , भाव बताता है — बोलने वाला क्या चाहता है। इसी लए अंग्रेज़ी म इसे Mood
Tense नह .।cएकo ही रूप ‘गच्छतु’ का अथ स्थ त के अनुसार बदल जाता है — agl
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• आ sा e: ‘बालक ! गृहं गच्छ ।’ (जाओ!)
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l : ‘हे ईश ! सुखं दे ह ।’ (द जए)
a•gप्राथना
• अनुम त : ‘भवान् उप वशतु ।’ (बै ठए)
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• संकल्प/प्रश्न : ‘अहं पठा न ?’ (म प ँ ?)
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Tip: लोट् लकार म ‘मा’ लगाकर नषेध बनता है — ‘मा कुरु’ (मत करो), ‘मा वद’ (मत बोलो), ‘यानं मा स्थापय’
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(गाड़ी मत खड़ी करो)। संस्कृत म नषेध के लए ‘न’ नह , प्रायः मा आता है।
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a s emतस्य रूपा ण पश्यन्तु — पठ् - धातुः (लोट्लकारः) : प्रथमपुरुषः — पठतु, पठताम्, पठन्तु; मध्यमपुरुषः — पठ,
gl पठतम्, पठत; उत्तमपुरुषः — पठा न, पठाव, पठाम । एतां ता लकां स्मरन्तु, अन्येषां धातूनाम् अ प रूपा ण
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रचयन्तु ।
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a —l इसे कण्ठस्थ कर ली जए।
यह नौ खान क ता लका पूरे पाठ क रीढ़ है g
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पठ् - धातुः (लोट् लकारः) एकवचनम् वचनम् बहुवचनम्
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m/ तौ / ते) l a
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पथमपुरुषः (सः
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पठतु पठताम् पठन्तु
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aseम यमपु षः (त्वम् / युवाम् / यूयम्)
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ध् रु पठ पठतम् पठत
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उ त्तमपुरुषः (अहम् / आवाम् / वयम्)
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पठािन पठाव पठाम
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अब वही साँचा तीन और धातुओं पर —
धातुः प्रथमपुरुषः (ए./
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ag./बहु.) मध्यमपुरुषः (ए./ ./बहु.) उत्तमपुरुषः (ए./ ./बहु.)
िलख्
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िलखतु, िलखताम्, िलखन्तु िलख, िलखतम्, िलखत िलखािन, िलखाव, िलखाम
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e ीडािन, ीडाव, ीडाम
क्रीड् m l as
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ीडतु, क्रीडताम्, क्रीडन्तु ीड, क्रीडतम्, क्रीडत
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a s em गम् (ग छ् )
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गच्छतु, गच्छताम्, गच्छन्तु गच्छ, गच्छतम्, गच्छत गच्छािन, गच्छाव, गच्छाम
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बनाने क व ध (पृष्ठ 129 क चह्न-ता लका से): लट् लकार का जो अङ्ग है (पठ् , लख्, क्र ड् , गच्छ् ), उसी म ये
प्रत्यय जोड़ द जए —
प्रथमपुरुषः : अतु, अताम्, अन्तु
मध्यमपुरुषः : अ, अतम्, अत
उत्तमपुरुषः : आ न, आव, आम
ध्यान द जए — मध्यमपुरुष एकवचन म कोई प्रत्यय जुड़ता ही नह , धातु का अङ्ग जैसा है वैसा ही रह जाता है (पठ,
लख, गच्छ)।
Check it yourself: लट् और लोट् क तुलना क जए — पठ त → पठतु, पठतः → पठताम्, पठ न्त →
पठन्तु; पठ स → पठ, पठथः → पठतम्, पठथ → पठत; पठा म → पठा न, पठावः → पठाव, पठामः → पठाम।
हर खाना ठ क अपने सामने वाले खाने से बना है।
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 125
प्रश्नौ १–२ : रूप-ता लकयोः पू तः तथा चतुषु सुभा षतेषु लोट् लकारस्य क्रयापदानां चयनम् (पृष्ठ 125–126)
अभ्यासः
प्र.1 पूवपृष्ठस्य कोष्ठके दत्ता न रूपा ण दृष्ट् वा रक्त ाना न पूरयन्तु — (प्रथमा ता लका) लखतु, लखताम्, ……… /
………, लखतम्, लखत / लखा न, लखाव, ……… ; ( तीया ता लका) ………, क्र डताम्, ……… / ………,
क्र डतम्, ……… / क्र डा न, क्र डाव, क्र डाम ।
‘पठ् ’ क ता लका सामने र खए और वही साँचा ‘ लख्’ तथा ‘क्र ड् ’ पर लगा द जए। नीचे भरे हुए खाने मोटे ह।
लख् - धातुः एकवचनम् वचनम् बहुवचनम्
पथमपुरुषः लखतु लखताम् िलखन्तु
मध्यमपुरुषः िलख लखतम् लखत
उत्तमपुरुषः लखा न लखाव िलखाम
क्र ड् - धातुः एकवचनम् वचनम् बहुवचनम्
पथमपुरुषः क्र ीडतु क्र डताम् क्र ीडन्तु
मध्यमपुरुषः क्र ीड क्र डतम् क्र ीडत
उत्तमपुरुषः क्र डा न क्र डाव क्र डाम
उत्तर-सूची (क्रमशः) — पहली ता लका : लखन्तु, लख, लखाम । दूसरी ता लका : क्र डतु, क्र डन्तु, क्र ड, क्र डत ।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
कैसे पहचान क कस खाने म क्या आएगा: जस पं क्त म ‘…ताम्’ है वह वचन का खाना है, इस लए उसक
पं क्त प्रथमपुरुष क है (अतु–अताम्–अन्तु)। जस पं क्त म ‘…तम्’ है वह मध्यमपुरुष क है (अ–अतम्–अत)। और
जस पं क्त म ‘आ न/आव’ ह वह उत्तमपुरुष क है (आ न–आव–आम)। बस, हर खाली खाना अपने आप भर जाता
है।
Tip: ‘क्र ड’ लखते समय अन्त म कुछ मत जो ड़ए — मध्यमपुरुष एकवचन म धातु का अङ्ग ही रूप बन जाता है।
‘क्र डतु’ (वह खेले) और ‘क्र ड’ (तुम खेलो) का अन्तर एक ‘तु’ का ही है।
प्र.2 नम्न ल खतेषु सुभा षतेषु लोट् लकारस्य क्रयापदा न चत्वा लखन्तु — (क) काले वषतु पजन्यः पृ थवी
सस्यशा लनी । दे शोऽयं क्षोभर हतः सज्जनाः सन्तु नभयाः ॥ (ख) सव भवन्तु सु खनः सव सन्तु नरामयाः । सव
भ ा ण पश्यन्तु मा क श्चद् ःखभाग्भवेत् ॥ (ग) इमा आपः शवाः सन्तु शुभाः स्वच्छाश्च नमलाः । पावनाः शीतलाः
सन्तु पूताः सूयस्य र श्म भः ॥ (घ) नन्दन्तु नी त नपुणा य द वा स्तुवन्तु लक्ष्मीः समा वशतु गच्छतु वा यथेष्टम् ।
अ ैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा न्याय्यात् पथः प्र वचल न्त पदं न धीराः ॥
पहले सीधा उत्तर — हर सुभा षत के लोट् - क्रयापद — फर हर ोक का अन्वय, अथ और भाव।
सुभा षतम् लोट् लकारस्य क्रयापदा न कत?
(क) वषतु, स न्तु २
(ख) भवन्तु, स न्तु, पश्यन्तु ३
(ग) स न्तु, स न्तु २
(घ) िनन्द न्तु, स्तुवन्तु, समािवशतु, गच्छतु, अस्तु ५
(क) काले वषतु पजन्यः …
अन्वयः — पजन्यः काले वषत ु । पृिथवी सस्यशािलनी (भवत )ु । अयं दे शः क्षोभरिहतः (भवत )ु । सज्जनाः
िनभयाः सन्त ु ।
अथ ः — बादल समय पर बरसे।
ं पृथ्वी अन्न से भरपूर हो। यह दे श उपद व से रिहत हो। सज्जन लोग िनभय रहे।
ं
भावः — यह सामूिहक मङ् गल की पाथना है — पकृ ित ठीक चले, दे श शान्त रहे और अच्छे लोग िबना डर के
िजएँ। तीनों बाते ं एक-दू सरे से जुड़ी है।
ं
पुस्तक का संस्कृत-भावाथ: मेघाः उ चते समये वषन्तु । तेन भू मः सस्यैः समृद्धा पूणा च भवतु । एषः दे शः शान्तः
भवतु । सव सज्जनाः भयं वना जीवनं यापयन्तु । (एवं परमेश्वरं प्र त प्राथना अ स्त ।)
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
(ख) सव भवन्तु सु खनः …
अन्वयः — सव सुिखनः भवन्त ु । सव िनरामयाः सन्त ु । सव भद ािण पश्यन्त ु । किश्चद् दुःखभाग् मा भवेत ् ।
अथ ः — सब सुखी हों। सब नीरोग हों। सब कल्याणकारी बाते ं ही दे ख।
े ं कोई भी दुःख का भागी न बने ।
भावः — यह भारत का सबसे पिसद्ध शािन्त-मन्त्र है। इसमें ‘मेरा’ या ‘हमारा’ शब्द एक बार भी नही ं आता —
के वल सव (सब)। यही ‘वसुधैव कु टु म्बकम्’ की भावना है।
पुस्तक का संस्कृत-भावाथ: सव जनाः सुखेन तष्ठन्तु । सव नीरोगाः भवन्तु । सव शुभम् एव पश्यन्तु । कस्या प कृते
दुःखस्य अनुभवः न भवतु ।
सावधान — ‘भवेत्’ लोट् नह है: अ न्तम चरण का ‘ ःखभाग्भवेत्’ व ध लङ् लकार का रूप है (‘होना चा हए /
हो’), लोट् लकार का नह । इस लए उसे उत्तर म मत ल खए। पहचान — व ध लङ् म ‘एत्, एताम्, एयुः’ जैसे प्रत्यय
आते ह, लोट् म ‘तु, ताम्, अन्तु’।
(ग) इमा आपः शवाः सन्तु …
अन्वयः — इमाः आपः िशवाः शुभाः स्वच्छाः िनमलाः च सन्त ु । (ताः आपः) सूयस्य रिश्मिभः पूत ाः पावनाः शीतलाः
सन्त ु ।
अथ ः — ये जल कल्याणकारी, शुभ, स्वच्छ और िनमल हों। सूय की िकरणों से पिवत्र होकर ये जल पावन और
शीतल हों।
भावः — यह वेद की जल-पाथना है। आज की भाषा में यही जल-संरक्षण का सन्दे श है — जल को गन्दा मत
कीिजए, वही जीवन है।
पुस्तक का संस्कृत-भावाथ: जलं सवषां कृते मङ्गलमयं मा लन्यर हतं शुद्धं च भवतु । जलं प वत्रं शीतलं च भवतु ।
जलं सूयस्य प्रकाशस्य स्पशन प वत्रं भवतु ।
Did you know? ‘आपः’ शब्द संस्कृत म सदा स्त्री लङ्ग तथा नत्य-बहुवचन है — इसी लए उसके वशेषण भी
बहुवचन म ह ( शवाः, शुभाः, स्वच्छाः, नमलाः) और क्रया भी बहुवचन म (सन्तु)। ‘आपः’ का एकवचन होता ही
नह ।
(घ) नन्दन्तु नी त नपुणा …
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अन्वयः — नीितिनपुणाः िनन्दन्त ु यिद वा स्त वु न्त ु । लक्ष्मीः यथे ष्टं समािवशत ु वा गच्छत ु । अद्य एव वा युगान्तरे
वा मरणम् अस्त ु । (तथािप) धीराः न्याय्यात् पथः पदं न पिवचलिन्त ।
अथ ः — नीित के जानकार िनन्दा करे ं अथवा पशंसा करे;ं लक्ष्मी (धन) अपनी इच्छा से आए अथवा चली जाए;
मृत्यु आज ही हो जाए अथवा युगों के बाद हो — धीर (साहसी) पुरु ष न्याय के माग से एक कदम भी नही ं हटते ।
भावः — यह भत ृहिर के नीितशतक का पिसद्ध श्लोक है। इसका सन्दे श है — िन न्दा, धन और मृत्यु, तीनों में से
कोई भी डर सच्चे व्यिक्त को सही रास्ते से नही ं हटा सकता।
पुस्तक का संस्कृत-भावाथ: नी तकाराः प्रशंसन्तु अथवा नन्दां कुवन्तु । धनस्य लाभः भवतु अथवा धनहा नः भवतु
। मरणं झ ट त भवतु अथवा वलम्बेन भवतु । न्याय्यात् मागात् धीराः न वचल न्त तत्रैव ते स्थररूपेण तष्ठ न्त ।
‘मरणमस्तु’ म स खो लए: मरणम् + अस्तु = मरणमस्तु। यहाँ लोट् -पद ‘अस्तु’ (अस् धातु, प्रथमपुरुष
एकवचन) छपा है — जल्द म वद्याथ इसे छोड़ दे ते ह। इसी प्रकार ‘दे शोऽयं’ = दे शः + अयम्, ‘अद्यैव’ = अद्य +
एव, ‘स्वच्छाश्च’ = स्वच्छाः + च।
Check it yourself: कुल मलाकर चार सुभा षत म १२ लोट् - क्रयापद ह (२ + ३ + २ + ५)। इनम ‘सन्तु’ तीन
बार आया है — (क) म एक बार और (ग) म दो बार।
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 126
प्रश्नौ ३–४ : लट् लकारात् लोट् लकारस्य रूपा ण तथा एकवचनात् बहुवचनस्य रूपा ण
अभ्यासः
प्र.3 उदाहरणानुगुणं लोट् लकारस्य रूपा ण लखन्तु — पठ त – पठतु ; क्र डा म – ……… ; हस त – ……… ; नृत्य त –
……… ; खाद त – ……… ; पश्य स – ……… ; नय स – ……… ; गच्छा म – ……… ।
नयम एक ही है — पुरुष और वचन बदलने नह ह, केवल लकार बदलना है। जो लट् म जस खाने का है, लोट् म भी उसी खाने
का रहेगा।
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ase
कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
लट् लकारः पुरुषः / वचनम् लोट् लकारः हन्द
m प्रथमपुरुषः, एकवचनम् l a sवहe पढ़े
.co ag
पठित पठतु (उदाहरणम्)
se m
g l a उत्तमपुरुषः, एकवचनम् ीडािन म खेलूँ
a
क्रीडािम क्र
हसित प्रथमपुरुषः, एकवचनम् हसतु वह हँसे
co m नत्ृ यतु
नत्ृ यित प्रथमपुरुषः, एकवचनम्
em . वह नाचे ag
g l as
खादित
a
प्रथमपुरुषः, एकवचनम् खादतु वह खाए
com
पश्यिस मध्यमपुरुषः, एकवचनम् पश्य तुम दे खो
.
mतुम ले जाओ
as e
com l
नयिस मध्यमपुरुषः, एकवचनम् नय
. a g
m
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गच्छािम उत्तमपुरुषः, एकवचनम् गच्छािन म जाऊँ
agl
s
तीन साधारण अदला-बदली याद र खए (एकवचन म):
m a
.co agl
• - त → -तु (पठ त → पठतु, हस त → हसतु)
a s em
• - स → कुछ नह (पश्य स → पश्य, नय स → नय)
a l म → गच्छा न)
• - म → -आ न (क्र डा म → क्र डा न,gगच्छा
यही तीन नयम इस प्रश्न के आठ उत्तर दे दे ते ह।
co m
m .
o m l a se
Tip: ‘पश्य’ और ‘नय’ दे खकर घबराइए मत क क्रया अधूरी लग रही है — मध्यमपुरुष एकवचन का लोट् -रूप
g ु रु’।
ऐसा.cही होता है। पाठ म भी माँ ने यही रूप बोले ह — ‘आनय’, ‘नय’, ‘गच्छ’,a‘स्वीक
m
ase
agl
se m
com g l a
. a
उदाहरणानुगुणं बहुवचनस्य रूपा ण लखन्तु — उ त्तष्ठतु – उ त्तष्ठन्तु ; आगच्छतु – ……… ; उप वशतु – ……… ;
m
प्र.4
ase
गच्छ – ……… ; खादतु – ……… ; पठा न – ……… ; पततु – ……… ।
agl
co m
.
यहाँ लकार वही (लोट् ) रहेगा और पुरुष भी वही रहेगा — केवल वचन एकवचन से बहुवचन हो जाएगा।
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एकवचनम् पुरुषः बहुवचनम् हन्द
उित्तष्ठतु प्रथमपुरुषः उित्तष्ठन्तु (उदाहरणम्) वे सब उठ
आगच्छतु प्रथमपुरुषः आगच्छन्तु वे सब आएँ
उपिवशतु प्रथमपुरुषः उपिवशन्तु वे सब बैठ
गच्छ मध्यमपुरुषः गच्छत तुम सब जाओ
खादतु प्रथमपुरुषः खाद न्तु वे सब खाएँ
पठािन उत्तमपुरुषः पठाम हम सब पढ़
पततु प्रथमपुरुषः पतन्तु वे सब गर
पहले पुरुष पहचा नए, फर वचन बद लए: अन्त दे खकर पुरुष पहचा नए — ‘-तु’ है तो प्रथमपुरुष (बहुवचन ‘-
न्तु’), कोई प्रत्यय नह है तो मध्यमपुरुष (बहुवचन ‘-त’), ‘-आ न’ है तो उत्तमपुरुष (बहुवचन ‘-आम’)। इसी लए
‘गच्छ → गच्छत’ हुआ, ‘गच्छन्तु’ नह ; और ‘पठा न → पठाम’ हुआ, ‘पठन्तु’ नह । यही इस प्रश्न क असली परीक्षा
है।
Check it yourself: हर उत्तर के आगे उसका कता जोड़कर प ढ़ए — ‘छात्राः उ त्तष्ठन्तु’, ‘यूयं गच्छत’, ‘वयं
पठाम’। य द कता और क्रया का वचन मल जाए तो उत्तर ठ क है।
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 127
प्रश्नाः ५–७ : सूचनारूपेण वाक्यप रवतनम्, अनुच्छेदस्य रक्त ानपू तः तथा मागस्य सूचनाफलका न (प्रश्नः ७ पृष्ठ 127–128)
अभ्यासः
प्र.5 व ालयस्य वा षकोत्सवे के-के क- क कुव न्त इ त सूचनारूपेण वाक्या न पुनः लखन्तु — यथा : दशमकक्षायाः
छात्राः वे दकाम् अलङ् कुव न्त । → दशमकक्षायाः छात्राः वे दकाम् अलङ् कुवन्तु । (क) प्रधानाध्यापकः वा षकं
ववरणं पठ त । (ख) बा लकाः नृत्य न्त । (ग) यूयम् आसन्दान् ापयथ । (घ) छात्रनायकः स्वागतं करो त । (ङ)
मम मत्रं धन्यवादं नवेदय त । (च) संस्कृत- श क्षका वे दकां सञ्चालय त । (छ) कायक्रमानन्तरं छात्राः उ ाय
राष्ट्रगीतं गाय न्त ।
वाक्य का शेष भाग ज्य -का-त्य रहेगा — केवल अ न्तम क्रयापद लट् से लोट् म बदलेगा, उसी पुरुष और उसी वचन म।
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वाक्यम् (लट् लकारे) सूचनारूपम् (लोट् लकारे) हन्द
(क) पधानाध्यापकः वािषकं िववरणं पठित । पधानाध् यापकः वािषकं िववरणं पठतु । प्रधानाध्यापक वा षक ववरण पढ़।
(ख) बािलकाः नत्ृ यिन्त । बािलकाः नत्ृ यन्तु । बा लकाएँ नृत्य कर।
(ग) यूयम् आसन्दान् स्थापयथ । यूयम् आस न्दान् स्थापयत । तुम सब कु सयाँ लगाओ।
(घ) छात्रनायकः स्वागतं करोित । छात्र नायकः स्वागतं करोतु । छात्रनायक स्वागत करे।
(ङ) मम िमत्रं धन्यवादं िनवेद यित । मम िम त्र ं ध न्यवादं िनवेद यतु । मेरा मत्र धन्यवाद- ापन करे।
(च) संस्कृ त-िशिक्षका वेिदकां स ञ्चालयित । संस्कृ त-िशिक्षका वेिदकां स ञ्चालयतु । संस्कृत- श क्षका मंच का संचालन कर।
(छ) कायक्रमानन्तरं छात्राः उत्थाय रा गीतं कायक्रमानन्तरं छात्र ाः उ त्थाय रा गीतं कायक्रम के बाद छात्र खड़े होकर राष्ट्रगीत
गायिन्त । गायन्तु । गाएँ।
केवल (ग) अलग है — ध्यान द जए: बाक सब वाक्य का कता प्रथमपुरुष का है (प्रधानाध्यापकः, बा लकाः,
छात्राः…), इस लए ‘- त → -तु’ और ‘- न्त → -न्तु’ हुआ। पर (ग) का कता ‘यूयम्’ है — मध्यमपुरुष बहुवचन।
इस लए ‘स्थापयथ → ापयत’ होगा, ‘स्थापयन्तु’ नह ।
Did you know? ‘सूचना’ का अथ यहाँ ‘घोषणा/ नदश’ है। वा षकोत्सव म संचालक जब माइक पर बोलता है
— ‘अब प्रधानाचाय जी वा षक ववरण पढ़’ — वही भाव संस्कृत म लोट् लकार से आता है।
प्र.6 प कातः उ चतैः क्रयारूपैः अनुच्छेदस्य रक्त ाना न पूरयन्तु — [प का : शृण्वन्तु, गच्छन्तु, लखन्तु, पठन्तु,
पृच्छन्तु, कुवन्तु, वदन्तु, उ त्तष्ठन्तु, उप वशन्तु, अ भवादयन्तु] — यदा अध्यापकः कक्षाम् आगच्छ त तदा प्रथमं
सव ……… । उपचारवाक्येन तम् ……… । यदा सः वद त तदा एव सव ……… । तस्य सूचनानुसारं पाठं ……… ।
गृहपाठं ……… । परस्परं वातालापं न ……… । प्रश्नस्य उत्तरं ……… । संशयं ……… । तस्य उपदे शं ……… । ब हः
मा ……… ।
यह अनुच्छेद कक्षा के अनुशासन का है। प का के दस पद ठ क एक-एक बार लगते ह — इस लए क्रम मलाकर भ रए।
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क्र. वाक्यम् उ चतं क्रयारूपम् हन्द
१ यदा अध्यापकः कक्षाम् आगच्छ त तदा प्रथमं सव ……… उित्तष्ठन्तु सब पहले खड़े हो जाएँ।
२ उपचारवाक्येन तम् ……… अिभवादयन्तु अ भवादन-वाक्य से उनका अ भवादन कर।
३ यदा सः वद त तदा एव सव ……… उपिवशन्तु जब वे कह तभी सब बैठ।
४ तस्य सूचनानुसारं पाठं ……… पठन्तु उनके नदश के अनुसार पाठ पढ़।
५ गृहपाठं ……… िलखन्तु गृहकाय लख।
६ परस्परं वातालापं न ……… कु वन्तु आपस म बातचीत न कर।
७ प्रश्नस्य उत्तरं ……… वद न्तु प्रश्न का उत्तर बोल।
८ संशयं ……… पच्ृ छन्तु शंका पूछ।
९ तस्य उपदे शं ……… शण्ृ वन्तु उनका उपदे श सुन।
१० ब हः मा ……… गच्छन्तु बाहर मत जाएँ।
पूण अनुच्छेदः — यदा अध्यापकः कक्षाम् आगच्छ त तदा प्रथमं सव उ त्तष्ठन्तु । उपचारवाक्येन तम् अ भवादयन्तु । यदा सः वद त
तदा एव सव उप वशन्तु । तस्य सूचनानुसारं पाठं पठन्तु । गृहपाठं लखन्तु । परस्परं वातालापं न कुवन्तु । प्रश्नस्य उत्तरं वदन्तु ।
संशयं पृच्छन्तु । तस्य उपदे शं शृण्वन्तु । ब हः मा गच्छन्तु ।
कम दे खकर क्रया चु नए: हर रक्तस्थान के ठ क पहले जो कम ( तीया वभ क्त का पद) है, वही सही क्रया
बता दे ता है — ‘पाठं ’ के साथ पठन्तु, ‘गृहपाठं ’ के साथ लखन्तु, ‘उत्तरं’ के साथ वदन्तु, ‘संशयं’ के साथ पृच्छन्तु,
‘उपदे शं’ के साथ शृण्वन्तु। जहाँ कोई कम नह (‘ब हः मा …’) वहाँ ग त क क्रया आएगी — गच्छन्तु।
Tip — ‘न’ और ‘मा’ का अन्तर: छठे वाक्य म ‘न कुवन्तु’ है और दसव म ‘मा गच्छन्तु’। लोट् लकार के साथ
नषेध के लए संस्कृत म मा ही अ धक शुद्ध माना जाता है; ‘न’ का प्रयोग भी पुस्तक ने कया है, दोन यहाँ स्वीकाय
ह।
प्र.7 माग सूचनाद पाः फलका न च भव न्त । तेषां चत्रा ण दृष्ट् वा प कापदै ः वाक्या न रक्त ानेषु लखन्तु —
[प का : तष्ठ, प्रतीक्षस्व, वामतः गच्छ, द क्षणतः गच्छ, यानं मा ापय, पदया त्रकाः !, गच्छ, अग्रे व ालयः]
— ( चत्रा ण : वाम दशासूचकः नीलः बाणः; द क्षण दशासूचकः नीलः बाणः; रक्त त्रकोणे छात्रौ माग तरतः;
रक्तवृत्ते ह रतः पदयात्री; रक्त-पीत-ह रतवणाः त्रयः सूचनाद पाः; ‘P’ इ त अक्षरस्य उप र रक्ता तयग्रेखा)
पृष्ठ 127 पर चार चत्र ह और पृष्ठ 128 पर चार रक्तस्थान और — कुल आठ चत्र, और प का म भी ठ क आठ पद। इस लए हर
पद एक ही चत्र पर लगेगा।
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पृष्ठम् चत्रम् (सूचनाफलकम्) वाक्यम् हन्द
127 नीलवृत्ते वाम दशां दशयन् श्वेतः बाणः वामतः गच्छ । बाईं ओर से जाओ।
127 नीलवृत्ते द क्षण दशां दशयन् श्वेतः बाणः दिक्षणतः गच्छ । दाईं ओर से जाओ।
127 रक्त त्रकोणे माग तरन्तौ छात्रौ (School ahead) अगे िवद्य ालयः । आगे वद्यालय है।
127 रक्तवृत्ते ह रतवणः चलन् पदयात्री (Pedestrian green signal) पदयाित्र काः ! पैदल चलने वाले! (अब जाइए)
128 सूचनाद पस्य रक्तः द पः ितष्ठ । रुको।
128 सूचनाद पस्य पीतः द पः पतीक्षस्व । प्रतीक्षा करो (तैयार रहो)।
128 सूचनाद पस्य ह रतः द पः गच्छ । जाओ।
128 ‘P’ इत्यस्य उप र रक्ता तयग्रेखा (No parking) यानं मा स्थापय । यहाँ गाड़ी मत खड़ी करो।
तीन द प का क्रम मत भू लए: सूचनाद प (traffic light) म ऊपर से नीचे — रक्तः (लाल) = तष्ठ, पीतः
(पीला) = प्रतीक्षस्व, ह रतः (हरा) = गच्छ। पाठ म माँ ने यही तो कहा था — ‘माग यानानां ग त पश्यतु । अनन्तरं
सावधानं पारं गच्छतु ।’
Tip: ‘प्रतीक्षस्व’ आत्मनेपद धातु ‘प्र त + ईक्ष्’ का लोट् मध्यमपुरुष एकवचन है — इसी लए इसका अन्त ‘-स्व’ है,
‘-अ’ नह (तुलना क जए : तष्ठ, गच्छ)। हरे पदयात्री- चह्न पर पूरा भाव है — ‘पदया त्रकाः ! गच्छ’ अथात् ‘पैदल
यात्री जाइए’; पर चूँ क प का म आठ पद और आठ ही रक्तस्थान ह, हर चत्र पर एक-एक पद लखना ही अपे क्षत
है।
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 128
प्रश्नौ ८–९ : क्रयापदस्य लोट् -लकाररूपैः वाक्यपू तः तथा वराम चह्नानां प्रयोगः
अभ्यासः
प्र.8 उदाहरणानुसारं क्रयापदस्य लोट् -लकाररूपैः वाक्या न पूरयन्तु — यथा : छात्राः प्रातः शीघ्रम् उ त्तष्ठन्तु । (उत् +
तष्ठ् ) (क) अम्ब ! अहं क्र डाथ ……… (गच्छ् ) (ख) आगच्छन्तु, वयं प्राथनागीतं ……… (गाय्) (ग) ज्वरः अ स्त ।
पुत्र ! वृष्टौ न ……… (क्र ड् ) (घ) लते ! भवती मम उपनेत्रम् ……… (आ + नय्) (ङ) आय ! अहम् अन्तः ………
(प्र वश्) (च) अहं पृच्छा म त्वम् उत्तरं ……… (वद्) (छ) यूयं शीघ्रं नगरम् ……… (आ + गच्छ् ) (ज) तात ! वयं
कदा चल चत्रं ……… (पश्य्)
हर वाक्य म कता पहले ढूँ ढ़ए — वही बता दे गा क क्रया कस पुरुष और वचन म लगेगी।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ
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m.
वाक्यम् कता उत्तरम् पुरुषः / वचनम् हन्द
m l a se! म खेलने जाऊँ?
.co ag
(क) अम्ब ! अहं क्रीडाथं ……… अहम् गच्छािन उत्तमपुरुषः, माँ
m
ase
(गच्छ् ) एकवचनम्
a(ख)glआगच्छन्तु, वयं पाथनागीतं वयम् गायाम उत्तमपुरुषः, आइए, हम प्राथना-गीत
……… (गाय्) बहुवचनम् गाएँ।
. comीड ag
(ग) ज्वरः अिस्त । पुत्र ! वृष्टौ न
em
त्वम् (‘पुत्र!’ इ त मध्यमपुरुषः, बुखार है। बेटा! वषा म मत
as
क्र
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……… (क्रीड् ) सम्बोधनम्) एकवचनम् खेलो।
(घ) लते ! भवती मम उपनेत्र म् ……… भवती
a आनयतु प्रथमपुरुषः, लता! आप मेरा चश्मा ले
com
(आ + नय्) एकवचनम् आइए।
.
mआय! म भीतर आ जाऊँ?
ase
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(ङ) आय ! अहम् अन्तः ……… अहम् पिवशािन उत्तमपुरुषः,
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(पिवश्) एकवचनम्
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agl(वद् )
(च) अहं पच्छािम त्वम् उत्तरं ……… त्वम् वद मध्यमपुरुषः, म पूछता ँ, तुम उत्तर
एकवचनम् बोलो।
m आगच्छत a s
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(छ) यूयं शीघ ं नगरम् ……… (आ + यूयम् मध्यमपुरुषः, तुम सब शीघ्र नगर आ
गच्छ् )
a s em बहुवचनम् जाओ।
(ज) तात ! वयं कदा चलिचत्रं ……… aवयम्g l पश्याम उत्तमपुरुषः, पताजी! हम चल चत्र कब
बहुवचनम् दे ख?
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(पश्य्)
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g(ग) म सम्बोधन ‘पुत्र!’ है — कता
.c लए उत्तर ‘आनय’ (मध्यमपुरुष) नह , ब ल्क ‘आनयतु’ होगा। इसी प्रकार
(घ) म सबसे अ धक भूल होती है: ‘भवती’ का अथ ‘आप’ है, पर संस्कृत म भवान्/भवती सदा प्रथमपुरुष लेते
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ase‘त्वम्’ छपा है, इस लए मध्यमपुरुष एकवचन ‘क्र ड’।
ह। इस
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Tip: (क), (ङ), (ज) के अन्त म प्रश्नवाचक भाव है — ‘जाऊँ?’, ‘आ जाऊँ?’, ‘कब दे ख?’। लोट् लकार का
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उत्तमपुरुष ठ क यही काम करता है: अनुम त माँगना या संकल्प करना। उपसग मत भू लए — ‘आ + नय्’ =
आनयतु, ‘आ + गच्छ् ’ = आगच्छत।
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.co (ख) कः
चह्ना न ( ? ! । , ) भावानुसारं वाक्ये योजयन्तु — यथा : राकेश ! कुत्र अ स ? अत्र आगच्छ । (क) पुत्र क करो ष
agत (ङ) अहो रमणीयः पवतः
प्र.9
se m ोकं वद त (ग) भवान् तत्र तष्ठतु (घ) आचायः कदा आगच्छ
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पहले दे खए वाक्य म सम्बोधन है या नह , फर दे खए वह प्रश्न है, आ ा है या वस्मय।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
वाक्यम् चह्नयुक्तं वाक्यम् कारणम्
(क) पुत्र िकं करोिष पुत्र ! िकं करोिष ? ‘पुत्र’ सम्बोधन है → वस्मया दबोधक ( ! ); ‘ कम्’ प्रश्नवाचक है → प्रश्न चह्न (
?)
(ख) कः श्लोकं वदित कः श्लोकं वदित ? ‘कः’ प्रश्नवाचक सवनाम है → प्रश्न चह्न ( ? )
(ग) भवान् तत्र ितष्ठतु भवान् तत्र ितष्ठतु । यह प्राथना/आ ा है, प्रश्न नह → पूण वराम ( । )
(घ) आचायः कदा आचायः कदा आगच्छित ‘कदा’ प्रश्नवाचक अव्यय है → प्रश्न चह्न ( ? )
आगच्छित ?
(ङ) अहो रमणीयः पवतः अहो ! रमणीयः पवतः । ‘अहो’ वस्मया दबोधक अव्यय है → ( ! ); शेष कथन है → ( । )
प्रश्नवाचक पद ही प्रश्न चह्न का संकेत है: संस्कृत के क-वग के पद — कम्, कः, का, कदा, कुत्र, कथम्, क त,
कयत् — जहाँ आ जाएँ, वहाँ वाक्य के अन्त म ? लगेगा। जहाँ ये न ह और क्रया लोट् म हो, वहाँ केवल । लगेगा
(जैसे (ग))।
अल्प वराम ( , ) कहाँ लगेगा? इन पाँच वाक्य म अल्प वराम क आवश्यकता नह है। उसका प्रयोग तब होता है
जब एक ही वाक्य म दो भाग जोड़ने ह — जैसे पाठ म ही : ‘आम् , पञ्च शता न (५००) रुप्यका ण स न्त ।’
अथवा ‘आगच्छन्तु, वयं प्राथनागीतं गायाम ।’
योग्यता वस्तरः — पृष्ठ 129
वासुदेव वेद -शा स्त्रणः गीतम् ‘कुरु उपकारं, कुरु उ ारम्’ तथा लोट् लकारस्य चह्ना न
योग्यता वस्तरः
प्र.1 कुरु उपकारं, कुरु उ ारम् — मा कुरु दप, मा कुरु गव मा भव मानी, मानय सवम् । मा भज दै न्यं, मा भज शोकं
मु दतमना भव, मोदय लोकम् ॥ … मा नय क्षणम प व्यथ समयं कुरु सकलं नजकाय सभयम् ॥ — वासुदेव वेद
शास्त्री । (एतत् गीतं कण्ठ ीकुरुत, समूहरूपेण गायत लोट् लकाररूपा ण च अवलोकयत ।) — गीतस्य हन्द -
अथ लखन्तु, लोट् लकारस्य रूपा ण च चनुत ।
यह पूरा गीत ही लोट् लकार क पाठशाला है — हर पं क्त म या तो आ ा है (‘कुरु’, ‘भव’, ‘पा ह’) या नषेध (‘मा कुरु’, ‘मा वद’)।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
गीतस्य पङ् क्तः हन्द अथः
मा कु रु दप,ं मा कु रु गव ं मा भव मानी, मानय घमंड मत करो, अिभमान मत करो, अकड़ने वाले मत बनो — सबका स म्मान करो।
सवम् ।
मा भज दै न्यं, मा भज शोकं मुिदतमना भव, दीनता मत अपनाओ , शोक मत करो — पस न्न मन वाले बनो और संस ार को भी आनिन्दत
मोदय लोकम् ॥ करो।
तनयं पाठय, तनयां पाठय िशक्षय सुगणु ं, दुगणंु बेटे को पढ़ ाओ और बेटी को भी पढ़ ाओ ; अच्छे गण
ु िसखाओ और बुरे गण
ु ों को रोको।
वारय ।
कु रु उपकारं, कु रु उ द्धारम् अपनय भारं, त्यज उपकार करो, (दू स रों का) उ द्धार करो; (उनका) बोझ हटाओ , बुर ाई करना छोड़ दो।
अपकारम् ॥
मा वद िमथ् या, मा वद व्यथ ं न चल कु माग, न झूठ मत बोलो, व्यथ मत बोलो; बुरे रास्ते पर मत चलो, अनथ मत करो।
कु रु अनथम् ।
पािह अनाथं, पालय दीनं लालय जननी-जनक- अनाथ की र क्षा करो, दीन का पालन करो; िजसके माता-िपता नही ं है,ं उसे स्नेह से पालो।
िवहीनम् ॥
मा िपब मादकवस्तु अपेयम् मा भज दुव्यसनं न पीने योग्य नशीली वस्तु मत िपओ ; छोड़ने योग्य बुर ी लत मत अपनाओ।
पिरहेयम् ।
मा नय क्षणमिप व्यथ ं समयं कु रु सकलं समय का एक क्षण भी व्यथ मत जाने दो; अपना सारा काम (समय बीत जाने के ) भय के साथ,
िनजकाय ं सभयम् ॥ अथ त् पूर ी सतक ता से करो।
प्रकारः गीते प्रयुक्ता न लोट् लकारस्य रूपा ण
िविध (आ ा) कु रु, मानय, भव, मोदय, पाठय, िशक्षय, वारय, अपनय, त्यज, पािह, पालय, लालय
िनषेध (मा / न सह) मा कु रु, मा भव, मा भज, मा वद , मा िपब, मा नय, न चल , न कु रु
सब रूप एक ही खाने के ह: गीत के सारे क्रयापद लोट् लकार, मध्यमपुरुष, एकवचन के ह — क्य क क व सीधे
‘तुम’ से बात कर रहा है। ‘पा ह’ (पा धातु = रक्षा करना) और ‘कुरु’ (कृ धातु) दो वशेष रूप ह, जो साधारण साँचे से
नह बनते — इन्ह याद कर ली जए।
Did you know? ‘तनयं पाठय, तनयां पाठय’ — क व ने बेटे और बेट दोन के लए ठ क एक ही शब्द
‘पाठय’ दोहराया है। एक ही पं क्त म ‘बेट बचाओ, बेट पढ़ाओ’ का सन्दे श आ गया। ‘तनयः’ = पुत्र, ‘तनया’ =
पुत्री; तीया एकवचन म तनयम् / तनयाम्।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 लोट् लकारस्य क्रयापदे अधो ल खता न चह्ना न भव न्त । — एकवचनम् / वचनम् / बहुवचनम् : प्रथमपुरुषः
— अतु, अताम्, अन्तु ; मध्यमपुरुषः — अ, अतम्, अत ; उत्तमपुरुषः — आ न, आव, आम ।
यही नौ प्रत्यय पूरे पाठ क कुंजी ह। धातु का लट् लकार वाला अङ्ग ली जए और उसम ये जोड़ द जए।
लोट् लकारस्य चह्ना न एकवचनम् वचनम् बहुवचनम्
पथमपुरुषः अतु अताम् अन्तु
मध्यमपुरुषः अ अतम् अत
उ त्तमपुरुषः आिन आव आम
अभ्यास के लए ‘खाद्’ धातु के नौ रूप स्वयं बनाकर दे खए —
पथमपुरु षः : खाद् + अत ु = खादतु | खाद् + अताम् = खादताम् | खाद् + अन्त ु = खाद न्तु
मध्यमपुरु षः : खाद् + अ = खाद | खाद् + अतम् = खादतम् | खाद् + अत = खादत
उत्तमपुरु षः : खाद् + आिन = खादािन | खाद् + आव = खादाव | खाद् + आम = खादाम
लट् और लोट् क तुलना से याद क जए: केवल तीन खाने वास्तव म नए ह — प्रथमपुरुष का अतु/अन्तु (लट् म
अ त/अ न्त), मध्यमपुरुष एकवचन का शून्य प्रत्यय (लट् म अ स), और उत्तमपुरुष का आ न/आव/आम (लट् म
आ म/आवः/आमः)। बाक खाने लट् जैसे ही सुनाई दे ते ह।
Check it yourself: पृष्ठ 124 क ‘पठ् ’ ता लका और यह चह्न-ता लका साथ-साथ र खए — पठ् + अतु =
पठतु, पठ् + आ न = पठा न। दोन ता लकाएँ ठ क मल जाती ह।
प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 129
पुस्तकात् लोट् - क्रयापदानां सङ् ग्रहः तथा मातुः आदे शानां लोट् लकारे लेखनम्
प रयोजनाकायम्
प्र.1 पुस्तकात् लोट् लकारस्य क्रयापदा न चत्वा लखन्तु ।
यह संग्रह-काय है — पूरी पुस्तक द पकम् पलटकर उन क्रयापद पर नशान लगाइए जनका अन्त -तु, -ताम्, -न्तु, -तम्, -त,
-आ न, -आव, -आम हो, या जो केवल धातु-रूप म ह (गच्छ, पठ, वद)।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
ढूँ ढ़ने क व ध: तीन जगह सबसे अ धक फल दे ती ह — (1) संवाद-पाठ, क्य क बातचीत म आ ा और प्राथना
बार-बार आती है; (2) अभ्यास के नदश-वाक्य, जो प्रायः ‘…न्तु’ म समाप्त होते ह; (3) ोक और सुभा षत,
जो प्राथना के होते ह।
नमूना उत्तर (केवल ादश पाठात् सङ्गहीता न) —
ानम् लोट् लकारस्य क्रयापदा न
पाठे (पष्ृ ठ 121–122) आगच्छ, करवािण, गच्छ, आनय, ददातु, स्वीकु रु, नय, स्वीकरवािण, जानातु, पश्यतु, गच्छतु, यच्छािन, योजयतु,
स्वीकरोतु, आग च्छतु
पठन्तु अवगच्छन्तु (पष्ृ ठ िपबतु, उित्तष्ठत, खाद न्तु, पच्ृ छािन, पठ, गच्छाम
123)
अभ्यासस्य िनदशवाक्येष ु पश्यन्तु, पूर यन्तु, िलखन्तु, योजयन्तु, कु वन्तु, गायत, अवलोकयत, क ण् ठस्थीकु रुत
सुभािषतेष ु (पष्ृ ठ 125– वषतु, स न्तु, भवन्तु, पश्यन्तु, िनन्द न्तु, स्तुवन्तु, समािवशतु, गच्छतु, अस्तु
126)
गीते (पष्ृ ठ 129) कु रु, भव, मानय, भज, मोदय, पाठय, िशक्षय, वारय, अपनय, त्यज, वद , चल , िपब, नय, पािह, पालय, लालय
Tip: हर पद के आगे उसका पुरुष और वचन भी लख द जए — तब यह केवल सूची नह , अभ्यास बन जाएगा।
जैसे — ‘गच्छतु — प्रथमपुरुषः, एकवचनम्’, ‘गायत — मध्यमपुरुषः, बहुवचनम्’। पुस्तक के अन्य पाठ से भी
कम-से-कम दस पद जो ड़ए, तभी प रयोजना पूरी मानी जाएगी।
प्र.2 गृहे माता भवन्तं/भवत “ क- कम् आ दश त” इ त लोट् लकारे पञ्च वाक्या न लखन्तु ।
यह आपका अपना उत्तर है — घर म माँ आपको जो कहती है, वही संस्कृत म ल खए। पाँच वाक्य म क्रया लोट् लकार,
मध्यमपुरुष, एकवचन म होनी चा हए, क्य क माँ सीधे ‘तुम’ से कह रही है।
अच्छे उत्तर म क्या-क्या हो: (1) पाँच वाक्य अलग-अलग धातुओं के ह ; (2) कम-से-कम एक वाक्य ‘मा’ वाले
नषेध का हो; (3) हर वाक्य के अन्त म पूण वराम ( । ) हो; (4) कम तीया वभ क्त म हो (पाठं , दुग्धं, गृहकायम्)।
नमूना उत्तर (५ वाक्या न) —
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ
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क्र. संस्कृत-वाक्यम् हन्द धातुः
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पातः शीघ म् उित्तष्ठ । सवेरे जल्द उठो।
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दुeग्धं िपब, फलािन च खाद ।
gl a दूध पओ और फल खाओ। पा, खाद्
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३ गृहकाय ं समये िलख । गृहकाय समय पर लखो। लख्
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seशाम को खेल के मैदान जाओ, वहाँ मत्र के साथ खेलो।
४ अिधकं चाकले हं मा खाद । ज़्यादा चॉकलेट मत खाओ। खाद् ( नषेधे)
सायं ीडाक्षेत्र ं गच्छ, तत्र िम त्र ैः सह ीड ।g l a
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a गम्, क्र ड्
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Try This: इन्ह पाँच वाक्य को आदराथक रूप म भी लखकर दे खए — ‘भवान् प्रातः शीघ्रम् उ त्तष्ठतु ।’,
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‘भवान् दुग्धं पबतु ।’ ठ क ऐसे ही तो पाठ म माँ ने कहा था — ‘माग यानानां ग त पश्यतु ।’
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अध्याय — एक नज़र म
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a gl घर का (पृष्ठ 121) — अम्बा कहती है ‘त्वम् आपणं गच्छ। वस्तू न आनय।’ और
पाठ एक संवाद है, दो दृश्य म। पहला दृश्य
सड़क पार करते समय सावधान रहने को कहती है। दूसरा दृश्य दुकान का (पृष्ठ 122) — राकेशः और आप णकः के बीच
सामान, मूल्य और शेष धन क बात होती है।
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पूरा पाठ लोट् लकार सखाने के लए है। पुस्तक ने संवाद के जन पद को लाल/मोटे अक्षर म छापा है — आगच्छ,
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gउसका अथ है आ ा अथवा प्राथना।
ह।.पुcस्तक स्वयं कहती है — लोट् लकारः क्रयायाः भावसूचकः (Mood) भव त, और
करवा ण, गच्छ, आनय, ददातु, स्वीकुरु, नय, जानातु, पश्यतु, गच्छतु, योजयतु, स्वीकरोतु, आगच्छतु — वे सब लोट् लकार के
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पठ् -धातु के नौ रूप याद कर ली जए। प्रथमपुरुष — पठतु, पठताम्, पठन्तु; मध्यमपुरुष — पठ, पठतम्, पठत; उत्तमपुरुष
— पठा न, पठाव, पठाम। इन्ह के प्रत्यय (पृष्ठ 129) ह — अतु/अताम्/अन्तु, अ/अतम्/अत, आ न/आव/आम। जस
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कसी भी धातु के लट् लकार का ‘पठ् ’ जैसा रूप बनता हो, उसी साँचे म उसके भी नौ रूप बन जाएँगे।
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अभ्यास म नौ प्रश्न ह। दो रूप-ता लकाओं क पूcत,
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चार सुभा षत से लोट् -पद का चयन, लट् से लोट् बनाना (८ पद),
एकवचन से बहुवचन (७ पद), सूचनारूपsमeवाक्य बदलना (७ वाक्य), कक्षा-अनुशासन का अनुच्छेद भरना (१० रक्तस्थान),
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सड़क के आठ सूचना-फलक कaसंgस्lकृत, धातु दे कर वाक्यपू त (८ वाक्य) तथा वराम चह्न का प्रयोग (५ वाक्य)।
बाज़ार का ग णत भी पाठ म है। सामान का मूल्य ४६० रुपये, लेखनी के २०, चाकलेह के १० — कुल ४६० + २० + १० =
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४९० रुपये। राकेश ने ५०० रुपये दए, इस लए शेष ५०० − ४९० = १० रुपये लौटे — पाठ म दुकानदार ठ क यही कहता है,
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‘दश रूप्यका ण अव शष्टा न’।
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योग्यता वस्तरः और प रयोजनाकायम्। वासुदेव वेद शास्त्री का गीत ‘कुरु उपकारं, कुरु उ ारम्’ पूरा-का-पूरा
m लोट्लकार म है — ‘मा कुरु दप’, ‘पा ह अनाथं’, ‘मा वद मथ्या’। प रयोजना म पुस्तक से लोट्- क्रयापद चुनकर लखने ह
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agla और ‘घर पर माँ क्या-क्या आदे श दे ती है’ इस पर लोट् लकार म पाँच वाक्य बनाने ह।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द ENGLISH
स्यूतम् पसे वम् थैला Bag
नामावली नामसूिचः सूची List
आपणम् / वप णम् वस्तु-िवक्रय-के न्द म् / आपण-वीिथम् बाज़ार Market
आनय आहर लाओ (You) Bring
नय ग ृहाण ले जाओ (You) Take away
चाकलेहः चाकले हः चॉकलेट Chocolate
यानानाम् ग तम् वाहनानाम् गमनम् गा ड़य का चलना Movement of vehicles
मु ः धान्यिवशेषः मूँग Green gram
शकरा िसता चीनी Sugar
गुडः इक्षस
ु ारः गुड़ Jaggery
दलम् ि दलम् दाल Pulses
सषपः सषपः सरस Mustard seeds
अव शष्टम् शेषभागः बाक , शेष Remaining
आप णकः िवक्रेता दुकानदार Shopkeeper
लोट् लकारः आ ा-पाथनयोः लकारः आ ा/प्राथना का लकार Imperative mood
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