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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 15: माधवस्य प्रयम् अङ्गम्
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
152 – 159 10 18 हन्द
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम् AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · सं स्कृ त · द पकम्
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 15: माधवस्य प्रयम् अङ्गम्
NCERT कक्षा 6 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के पञ्चदशः पाठः — माधवस्य प्रयम् अङ्गम् के स ूण हल। यह पाठ एक मज़ेदार स्वप्न-कथा
है — माधव नाम का बालक सपने म दे खता है क उसके शरीर के अङ्ग आपस म झगड़ रहे ह क ‘सबसे ेष्ठ कौन है’। शब्दभण्डार क दृ ष्ट से पूरा पाठ
शरीराङ्गानां नामा न सखाता है और व्याकरण क दृ ष्ट से तृतीया वभ क्त (करणे तृतीया) तथा सप्तमी वभ क्त (अ धकरणे सप्तमी) का अभ्यास
कराता है। पृष्ठ 152 से 159 तक का हर भाग यहाँ क्रम से हल है — पूरे पाठ का हन्द अनुवाद, वयं शब्दाथान् जानीमः क बाईस शब्द वाली
ता लका, वयम् अभ्यासं कुमः के प्रश्न १–८ (हर उपभाग तथा दोन चत्र-काय स हत), योग्यता वस्तरः का बत्तीस नाम वाला शरीर- चत्र, मधुराष्टकम्
का अन्वय-अथ-भाव, तथा ग त व ध-कायम् एवं प रयोजनाकायम्।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
द पकम् (कक्षा 6) 152 – 159
खं ड प्रश्न
10 18
माध्यम
हन्द
पञ्चदशः पाठः — माधवस्य प्रयम् अङ्गम् — पृष्ठ 152
पाठस्य प्रथमः भागः — स्वप्ने अङ्गानां ववादः : पादः, हस्तः, नयनम्, कणः
पाठः
प्र.1 माधवनामकः एकः बालकः आसीत् । सः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ्गा न दृष्टवान् । ता न परस्परं चचा कुव न्त स्म । …
माधवः मम कारणेन एव शक्षकस्य उपदे शं श्रुत्वा ानं वधय त, सङ्ग तं श्रुत्वा आनन्दं च अनुभव त । — अस्य
पाठभागस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
पाठ का पहला पृष्ठ एक स्वप्न-दृश्य है। माधव सो रहा है और उसके ऊपर बने वचार-बुलबुले म शरीर के अङ्ग — पैर, हाथ, आँख,
कान, मुँह, पेट, भुजा, सर — काटू न बनकर आपस म झगड़ रहे ह। नीचे पूरा अनुवाद पं क्त-दर-पं क्त दया है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम् AglaSem · NCERT Solutions
संस्कृतम् (मूलः पाठः) हन्द अनुवादः
माधवनामकः एकः बालकः आसीत् । माधव नाम का एक बालक था।
सः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ् गािन दृ ष्टवान् । उसने स्वप्न में अपने शरीर के अङ् गों को दे खा।
तािन परस्परं चच ं कु विन्त स्म । वे आपस में चच (बहस ) कर रहे थे।
पादः वदित — अहं श्रेष्ठः । मम कारणेन माधवः चलित । पैर कहता है — मैं श्रेष्ठ हू।
ँ मेरे कारण ही माधव चलता है।
हस्तः अनुक्षणं वदित — अरे अरे ! मम कारणेन माधवः िलखित, हाथ उसी क्षण कहता है — अरे अरे ! मेरे कारण माधव िलखता है, गृहकाय
ग ृहकाय ं करोित, वस्तूिन आनयित च । अतः अहम् एव श्रेष्ठः । करता है और चीज़ें लाता है। इसिलए मैं ही श्रेष्ठ हू।
ँ
मां िवना माधवः िकमिप द ष्टुं शक्नोित िकम् ? इित नयनं वदित । ‘मेरे िबना क्या माधव कु छ भी दे ख सकता है?’ — ऐसा आँख कहती है।
कणः िस्मतं कृ त्वा कथयित — माधवः यदा माग गच्छित तदा कान ज़रा-सा मुस्कु राकर कहता है — माधव जब रास्ते पर जाता है, तब यिद
पष्ृ ठतः यानानां ध्विनं यिद न शण
ृ ोित सावधानः च न भवित, तिह वह पीछे से आते वाहनों की आवाज़ न सुने और सावधान न हो, तो दुघ टना हो
दुघ टना भवेत ् । सकती है।
माधवः मम कारणेन एव िशक्षकस्य उपदे शं श्रुत्वा ानं वधयित, माधव मेरे ही कारण िशक्षक का उपदे श सुनकर ान बढ़ ाता है, और सङ् गीत
सङ् गीतं श्रुत्वा आनन्दं च अनुभवित । सुनकर आनन्द का अनुभव करता है।
ध्यान द जए — हर अङ्ग एक ही ढाँचे म बोलता है: ‘मम कारणेन माधवः … करो त। अतः अहम् एव ेष्ठः।’ यही
दोहराव पूरे पाठ को याद करने क कुंजी है। पहले तीन अङ्ग केवल ड ग हाँकते ह, पर कण पहला है जो स्मतं कृत्वा
(मुस्कुराकर) बोलता है — यानी वह लड़ता नह , समझाता है। लेखक ने यह से कहानी को झगड़े से समझदारी क
ओर मोड़ दया है।
Tip — इन चार रूप को पहचान ली जए:
• दृष्टवान् = ‘दृश्’ + क्तवतु — भूतकाल का कतृवाचक रूप, ‘उसने दे खा’।
• कुव न्त स्म — वतमान क्रया के साथ ‘स्म’ लगने पर अथ भूतकाल का हो जाता है, ‘कर रहे थे’।
• मम कारणेन — तृतीया वभ क्त, एकवचन = ‘मेरे कारण से’।
• द्रष्टु ं शक्नो त — ‘द्रष्टु म्’ तुमुन् प्रत्यय (दे खने के लए / दे खना), ‘शक्नो त’ = समथ होता है।
पञ्चदशः पाठः — माधवस्य प्रयम् अङ्गम् (शेषभागः) — पृष्ठ 153
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम् AglaSem · NCERT Solutions
मुखस्य दावा, उदरस्य सुझावः तथा माधवस्य नणयः
पाठः
प्र.1 झ ट त मुखं सूचय त — ‘भोः ! सव शृण्वन्तु, माधवः मम कारणेन भोजनं करो त … भवन्तः सवऽ प मम प्रयाः’ ।
— अस्य पाठभागस्य हन्द -अनुवादं कुवन्तु ।
दूसरे पृष्ठ पर झगड़ा सुलझ जाता है। पहले मुख अपनी बात कहता है, फर उदर बीच-बचाव करता है और अन्त म माधव स्वयं
नणय सुनाता है।
संस्कृतम् (मूलः पाठः) हन्द अनुवादः
झिटित मुखं सूचयित — ‘भोः ! सव शण्ृ वन्तु, माधवः मम कारणेन झट से मुँह बताता है — ‘अरे ! आप सब सुिनए , मेरे कारण माधव भोजन
भोजनं करोित, भाषणं करोित, िशक्षकस्य पश्नस्य उत्तरं वदित । करता है, भाषण दे ता है और िशक्षक के पश्न का उ त्त र दे ता है।
मम साहाय्येन उदरमिप भोजनं पाप्नोित । भवन्तः सव सबलाः मेर ी सहायता से पेट को भी भोजन िमलता है। (उसी से ) आप सब बलवान्
भविन्त । अतः अहम् एव श्रेष्ठः’ । बनते है।
ं इसिलए मैं ही श्रेष्ठ हू।
ँ ’
उदरं सूचयित ‘भवतु, भवतु, कोलाहलं न कु वन्तु । वयं सव माधवम् पेट कहता है — ‘ठीक है, ठीक है, शोर मत कीिजए। हम सब माधव से ही
एव पच्ृ छाम, कः श्रेष्ठः’ इित । पूछ ले ते है ं िक श्रेष्ठ कौन है। ’
माधवः िवचारयित बोधयित च — ‘मम शरीरस्य सव िण अङ् गािन माधव िवचार करता है और समझाता है — ‘मेरे शरीर के सारे अङ् ग मेरे
मम कृ ते उपकारकािण सिन्त । िलए उपकार करने वाले है।
ं
ृ ोिम, मुखेन भाषणं करोिम
अहं नयनाभ्यां पश्यािम, कण भ्यां शण मैं दोनों आँखों से दे खता हू,ँ दोनों कानों से सुनता हू,ँ मुँह से बोलता हू ँ और
भोजनं करोिम च, उदरे ण पाचनात् शिक्तं पाप्नोिम पादाभ्यां च भोजन करता हू,ँ पेट से पाचन के द्वारा शिक्त पाता हू ँ और दोनों पैर ों से
चलािम । चलता हू।
ँ
अतः भवन्तः सवऽिप श्रेष्ठाः । भवन्तः सवऽिप मम िपयाः’ । इसिलए आप सब-के -सब श्रेष्ठ है।
ं आप सब-के -सब मुझे िपय है।
ं ’
पाठ का शीषक यह खुलता है: पाठ का नाम है ‘माधवस्य प्रयम् अङ्गम्’ — माधव का प्रय अङ्ग। पूरा पाठ पढ़ने
के बाद पता चलता है क उत्तर कोई एक अङ्ग नह है — ‘भवन्तः सवऽ प मम प्रयाः’। शरीर एक दल (team)
है; हर अङ्ग का अपना काम है और कोई भी अकेला पूरा काम नह कर सकता। यही बात प रवार, कक्षा और समाज
पर भी लागू होती है।
Tip — माधव का उत्तर पूरा ाकरण-पाठ है: उसके एक ही वाक्य म तृतीया वभ क्त के छह प्रयोग ह —
• नयनाभ्यां पश्या म ( द्ववचन) • कणाभ्यां शृणो म ( द्ववचन) • पादाभ्यां चला म ( द्ववचन)
• मुखेन भाषणं करो म (एकवचन) • उदरेण श क्तं प्राप्नो म (एकवचन)
जो अङ्ग शरीर म दो ह उनका द्ववचन, और जो एक है उसका एकवचन — यही पूरे अभ्यास (प्रश्न ६) का आधार है।
पाठ्य-प्रश्नाः (पाठे वद्यमानाः प्रश्नाः) — पृष्ठ 152 – 153
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम्
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पाठस्य भीतरे एव पृष्टाः त्रयः प्रश्नाः
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पाठ्य-प्रश्नाः
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a s emवना माधवः कम प द्रष्टु ं शक्नो त कम् ?’ इ त नयनं वद त । — अस्य प्रश्नस्य उत्तरं संस्कृतेन लखन्तु । (पृष्ठ
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‘मां
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नहg दे ख सकता।)
उत्तरम् — न, नयनाभ्यां वना माधवः कम प द्रष्टु ं न शक्नो त ।
( हन्द — नह , आँख के बना माधव कुछ भी a
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पर उत्तर यह समाप्त नह होता: आँख का कहना सही है, पर अधूरा है। पाठ के अन्त म माधव यही तो समझाता है
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— ‘मम शरीरस्य सवा ण अङ्गा न मम कृते उपकारका ण स न्त’। इस लए पूरा उत्तर यह होगा — नयनाभ्यां वना
c ं न शक्नो त, कन्तु केवलं नयनाभ्यां सव कायम् अ प न भव त । (आँ
माधवः .द्रष्टु a gख के बना दे खना नह होता,
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seकेवल आँख से सारा काम भी नह होता।)
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Tip — ‘ वना’ के साथ कौन-सी वभ क्त? ‘ वना’ के योग म द्वतीया वभ क्त आती है, इस लए पाठ म ‘मां
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वना’ लखा है (माम् = अस्मद् क द्वतीया एकवचन)। तृतीया भी शुद्ध मानी जाती है — ‘मया वना’। पर पुस्तक का
प्रयोग द्वतीया वाला है।
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mआसीत् ? (पृष्ठ 153)
‘वयं सव माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः ?’ इ त उदरं सूचय त । — माधवस्य उत्तरं eकम्
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ag उत्तरम् — माधवः अवदत् — ‘भवन्तः सवऽ प श्रेष्ठाः । भवन्तः सवऽ प मम प्रयाः ।’
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( हन्द — माधव ने कहा — ‘आप सब-के-सब ेष्ठ ह। आप सब-के-सब मुझे प्रय ह।’)
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उसने अपना उत्तर तक स हत दया, केवल टालने के लए नह —
अङ्गम् माधवस्य वचनम् agl हन्द
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नयने अहं नयनाभ्यां पश्या म । मैं आँखों से दे खता हू।
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मैं कानों से सुनता हू।
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कण अहं कणाभ्यां शृणो म ।
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अहं मुखेन भाषणं भोजनं च करो म । मैं मुँह से बोलता और खाता हू।
ँ
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उदरम् अहम् उदरेण पाचनात् श क्तं प्राप्नो म । मैं पेट से पाचन के द्वारा शिक्त पाता हू।
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पादौ अहं पादाभ्यां चला म ।
e m . co मैं पैर ों से चलता हू।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम् AglaSem · NCERT Solutions
Check it yourself: ध्यान द जए क झगड़ा रोकने का उपाय उदर ने सुझाया — ‘कोलाहलं न कुवन्तु’ (शोर
मत क जए)। पाठ म उदर सबसे कम बोलता है पर सबसे समझदारी क बात कहता है।
प्र.3 पाठस्य नाम ‘माधवस्य प्रयम् अङ्गम्’ अ स्त । त ह माधवस्य प्रयम् अङ्गं कम् आसीत् ? स्वमतं लखन्तु ।
उत्तरम् — माधवस्य कोऽ प एकः अङ्गः प्रयः न आसीत्; तस्य सवा ण अङ्गा न तस्मै प्रया ण आसन्, यतः सवा ण अङ्गा न
तस्य कृते उपकारका ण स न्त ।
( हन्द — माधव को कोई एक अङ्ग प्रय नह था; उसके सारे अङ्ग उसे प्रय थे, क्य क हर अङ्ग उसका उपकार करता है।)
प्रश्न म ही चतुराई छपी है: शीषक ‘ प्रयम् अङ्गम्’ एकवचन म है, इस लए पढ़ते समय लगता है क उत्तर कोई एक
अङ्ग होगा। पर पाठ का पूरा ढाँचा इसी भ्रम को तोड़ने के लए बना है — हर अङ्ग बारी-बारी से अपना दावा रखता है,
और अन्त म माधव बहुवचन म उत्तर दे ता है — ‘भवन्तः सवऽ प मम प्रयाः’। इस लए ‘एक ही ेष्ठ है’ यह सोच ही
गलत है।
Try this — पाठ का सन्दे श एक वाक्य म: ‘शरीरस्य सवा ण अङ्गा न परस्परं सहयोगेन एव काय कुव न्त,
अतः सवा ण समानरूपेण महत्त्वपूणा न स न्त ।’ — शरीर के सारे अङ्ग आपस म मलकर ही काम करते ह,
इस लए सब बराबर महत्त्वपूण ह। यही बात प रवार और कक्षा पर भी लागू होती है।
वयं शब्दाथान् जानीमः — पृष्ठ 154
पाठस्य द्वा वश तः शब्दाः — संस्कृत-अथः, हन्द , English तथा ‘मातृभाषया अथ लखन्तु’ स्तम्भः
शब्दाथाः
प्र.1 अधो ल खतानां शब्दानाम् अथ (संस्कृते, हन्द्याम्, आङ् ग्लभाषायां च) लखन्तु, मातृभाषया अ प अथ लखन्तु
— स्वप्ने, स्वशरीरस्य, अङ्गा न, दृष्टवान्, चचाम्, श्रेष्ठः, अनुक्षणम्, गृहकायम्, मां वना, स्मतम्, शक्नो त, माग,
सङ्ग तम्, साहाय्येन, प्राप्नो त, सबलाः, भवेत्, कोलाहलम्, वचारय त, बोधय त, उपकारका ण, श क्तम् ।
पृष्ठ 154 क पूरी ता लका, और साथ म यह भी क हर शब्द पाठ के कस वाक्य म आया है — इससे शब्द अपने-आप याद रह
जाता है।
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शब्दः अथः हन्द ENGLISH पाठे प्रयोगः
(संस्कृतम्)
स्वप्ने स्वप्नसमये स्वप्न में In dream सः स्वप्ने … अङ्गा न दृष्टवान् ।
स्वशरीर स्य नजकायस्य अपने शरीर के Of his own स्वशरीरस्य अङ्गा न दृष्टवान् ।
body
अङ् गािन अवयवाः अङ् ग Body parts स्वशरीरस्य अङ्गा न दृष्टवान् ।
दृ ष्टवान् अपश्यत् दे खा Saw सः स्वप्ने … दृष्टवान् ।
चच म् आलापम् चच को Discussion ता न परस्परं चचा कुव न्त स्म ।
श्रेष्ठः उत्तमः श्रेष्ठ Great अहं श्रेष्ठः ।
अनुक्षणम् सत्वरम् उसी समय Instantly हस्तः अनुक्षणं वद त ।
ग ृहकायम् गृहे पठनकम गृहकाय Homework माधवः … गृहकाय करो त ।
मां िवना मां वहाय मेरे िबना Without me मां वना माधवः कम प द्रष्टु ं शक्नो त कम् ?
िस्मतम् मन्दहासः थोड़ा हँस के Smile कणः स्मतं कृत्वा कथय त ।
शक्नोित समथः भव त समथ होता है Able to कम प द्रष्टु ं शक्नो त कम् ?
माग वत्म न माग में On road माधवः यदा माग गच्छ त ।
सङ् गीतम् सुन्दरं गीतम् सङ् गीत Music सङ्ग तं ुत्वा आनन्दम् अनुभव त ।
साहाय्येन सहायकारणेन सहायता से With the help of मम साहाय्येन उदरम प भोजनं प्राप्नो त ।
पाप्नोित प्राप्तं करो त पाप्त करता है Gets उदरम प भोजनं प्राप्नो त ।
सबलाः बलवन्तः बलवान् Strong भवन्तः सव सबलाः भव न्त ।
भवेत ् स्यात् हो सकता / सकती May happen त ह दुघटना भवेत् ।
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कोलाहलम् आरवः शोर Quarrel / noise कोलाहलं न कुवन्तु ।
िवचारयित चन्तय त िवचार करता है Thinks माधवः वचारय त बोधय त च ।
बोधयित ापय त समझाता है Advises माधवः वचारय त बोधय त च ।
उपकारकािण सहायका न सहायता करने वाले Helpful सवा ण अङ्गा न मम कृते उपकारका ण स न्त
।
शिक्तम् साम यम् ताकत Strength उदरेण पाचनात् श क्तं प्राप्नो म ।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम् AglaSem · NCERT Solutions
‘मातृभाषया अथ लखन्तु’ स्तम्भ कैसे भर: अ न्तम खाना जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है, क्य क हर व ाथ
क मातृभाषा अलग है। उदाहरण के लए स्वप्ने (स्वप्न म) — मराठ म ‘स्वप्नात’, गुजराती म ‘સપનામાં’, बंगला म
‘ েপ’, त मल म ‘கனவ ல் ’, तेलुगु म ‘కలలో’, पंजाबी म ‘ਸੁ ਪਨੇ ਿਵੱ ਚ’। अपनी भाषा का शब्द अपनी पुस्तक म
ल खए।
Tip — शब्द तोड़कर दे खए:
• स्वशरीरस्य = स्व (अपना) + शरीर + स्य (षष्ठी) — ‘अपने शरीर का’।
• अनुक्षणम् = अनु + क्षणम्, ‘हर क्षण / तुरन्त ही’ — अव्यय है, रूप नह बदलता।
• सबलाः = स (स हत) + बल, ‘बल वाले’ — बहु ी ह समास, पुं लङ्ग बहुवचन।
• उपकारका ण = उपकारक (उपकार करने वाला) का नपुंसक लङ्ग बहुवचन, क्य क ‘अङ्गा न’ नपुंसक लङ्ग
बहुवचन है — वशेषण अपने वशेष्य के लङ्ग-वचन- वभ क्त का अनुसरण करता है।
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 155
प्रश्नाः १–३ : चत्रं दृष्ट् वा अङ्गस्य नाम, अङ्गस्य काय, तथा समु चता संख्या
अभ्यासः
प्र.1 चत्रं दृष्ट् वा अङ्गस्य नाम लखन्तु — (क) …………… (ख) …………… (ग) …………… (घ) …………… (ङ)
……………
पृष्ठ 155 पर पाँच काटू न- चत्र छपे ह — वही हँसते-बोलते अङ्ग जो पाठ के स्वप्न म आए थे। नीचे पहले यह बताया है क हर चत्र म
क्या दखता है, फर उसका संस्कृत नाम।
क्रमः चत्रे कम् दृश्यते उत्तरम् (संस्कृतम्) हन्द
(क) पलक और भ ह वाली एक बड़ी आँख नयनम् (नेत्र म्) आँख
(ख) नीली नकर पहने गोल पेट, ना भ दखती है उदरम् पेट
(ग) पाँच अङ्ग लय वाला पैर का पंजा पादः (चरणः) पैर
(घ) मु बाँधकर मछली दखाती हुई मुड़ी बाँह भुजः (बाहुः) भुजा / बाँह
(ङ) लहरदार तह वाला गोल पण्ड, नीचे छोटा लघुम स्तष्क मिस्तष्कम् म स्तष्क / दमाग़
लङ्ग भी साथ-साथ याद क जए, क्य क आगे वाक्य बनाते समय यही काम आएगा —
• नयनम्, उदरम्, म स्तष्कम् — नपुंसक लङ्ग (अन्त म ‘-म्’)
• पादः, भुजः — पुं लङ्ग (अन्त म ‘-ः’)
इसी लए पाठ म ‘पादः वद त’ (पुं लङ्ग) पर ‘नयनं वद त’ (नपुंसक लङ्ग) लखा है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम् AglaSem · NCERT Solutions
Check it yourself — (ङ) को पहचानने का तरीका: चत्र क बाहरी रेखा फूलगोभी जैसी लहरदार है और
नीचे-दाय ओर एक छोटा अलग गोला है। ये दोन मलकर म स्तष्क का पक्का पहचान- चह्न ह (लहर = म स्तष्क क
सलवट, छोटा गोला = लघुम स्तष्क)। कान का चत्र पाठ म अलग दया है और वह इससे बलकुल अलग दखता है
— इस लए (ङ) को ‘कणः’ मत ल खए।
प्र.2 कोष्ठकात् समु चतं क्रयापदं चत्वा उदाहरणानुसारम् अङ्गस्य काय लखन्तु — यथा – नयनं – पश्य त । (क) मुखम्
– …………… (चल त, हस त, वद त) (ख) पादः – …………… ( लख त, चल त, पश्य त) (ग) कणः –
…………… (हस त, वद त, शृणो त) (घ) ना सका – …………… (आ ाणं करो त, नृत्य त, धाव त) (ङ) ज ा –
…………… (धावनं करो त, आस्वादनं करो त, पश्य त)
हर अङ्ग का मुख्य काम चुनना है। उत्तर के साथ नीचे यह भी दया है क पाठ म वही बात कहाँ आई है।
अङ्गम् उत्तरम् हन्द पाठात् प्रमाणम्
यथा — नयनम् पश्यित दे खता है अहं नयनाभ्यां पश्या म ।
(क) मुखम् वदित बोलता है मुखेन भाषणं करो म ; शक्षकस्य प्रश्नस्य उत्तरं वद त ।
(ख) पादः चलित चलता है मम कारणेन माधवः चल त ।
(ग) कणः ृ ोित
शण सुनता है यानानां ध्व न य द न शृणो त …
(घ) नािसका आघ ाणं करोित सूँघती है अहं ना सकया आ ाणं करो म (प्रश्नः ६) ।
(ङ) िज ा आ स्वादनं करोित स्वाद लेती है जह्वा रसं जाना त — आस्वादनम् = चखना ।
क्रया का वचन क्य नह बदला? सारे उत्तर प्रथमपुरुष एकवचन (लट् लकार) म ह — पश्य त, वद त, चल त,
शृणो त। कारण यह है क कता (मुखम्, पादः, कणः …) हर बार एकवचन म है, और संस्कृत म क्रया सदा कता के
पुरुष-वचन का अनुसरण करती है। य द कता ‘कण ’ ( द्ववचन) होता तो क्रया ‘शृणुतः’ हो जाती।
Check it yourself — (क) म दो उत्तर क्य दख सकते ह? हँसना भी तो मुँह ही करता है, इस लए ‘हस त’
भी गलत नह लगता। पर कोष्ठक म ‘हस त’ जान-बूझकर भ्रम फैलाने वाला वकल्प रखा गया है — पाठ म मुख
स्वयं अपना काम बताता है: ‘माधवः मम कारणेन भोजनं करो त, भाषणं करो त, उत्तरं वद त’। इस लए पुस्तक का
अपे क्षत उत्तर वद त ही है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम्
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प्र.3 कोष्ठकात् समु चतां संख्यां चत्वा रक्तस्थानं पूरयन्तु — (क) मम …………… शरः अ स्त । (एकम्, अनेकं,
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चत्वा र) (ख) मम …………… पादौ स्तः । (त्रयः, द्वौ, पञ्च) (ग) मम …………… केशाः स न्त । (दश, अष्ट, बहवः)
(घ) मम.c……………
em दश, पञ्चदश)
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दन्ताः स न्त । (चत्वारः, अष्टा वश तः, द्वा त्रशत्) (ङ) मम हस्तयोः
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यहाँ केवल गनती नह दे खनी है — संख्यावाचक शब्द को उस सं ा के लङ्ग-वचन से मलाना भी है जसक वह गनती कर
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रहा है। इसी लए कोष्ठक म ‘त्रयः / द्वौ / पञ्च’ जैसे भन्न- भन्न रूप दए ह।
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वाक्यम् उत्तरम् पूण वाक्यम् कारणम्
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(क) मम …… िशरः अिस्त । मम एकं शरः अ स्त । शर एक ही होता है; ‘ शरः’ नपुंसक लङ्ग एकवचन है,
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इस लए ‘एकम्’ ।
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l a se द्वौ मम द्वौ पादौ स्तः । ‘पादौ’ तथा ‘स्तः’ दोन द्ववचन म ह, इस लए संख्या भी
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(ख) मम …… पादौ स्तः ।
a द्ववचन — द्वौ (पुं लङ्ग) ।
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(ग) मम …… के शाः सिन्त । बहवः मम बहवः केशाः स न्त । बाल गने नह जाते, इस लए न त संख्या नह — ‘बहवः’
m . (बहुत सारे) ।
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asद्वा त्रशत् दन्ताः
(घ) मम …… दन्ताः सिन्त ।
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द्वाित्र ंशत्
g lमम पूण वक सत मनुष्य के 32 दाँत होते ह — द्वा त्रशत् = 32 ।
स न्त ।
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दश मम हस्तयोः दश अङ्गल्यः एक हाथ म पाँच, दो हाथ म 5 × 2 = 10 ।
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(ङ) मम हस्तयोः ……
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अङ् ग ल्ु यः सिन्त । स न्त ।
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a s eसंmस्कृत क संख्याओं का एक ज़रूरी नयम: एक से चार तक क संख्याएँ वशेषण क तरह चलती ह — वे सं ा
agl के लङ्ग और वभ क्त के अनुसार रूप बदलती ह (एकः/एका/एकम्, द्वौ/द्वे , त्रयः/ त ः/त्री ण, चत्वारः/चत ः/
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om(पुं लङ्ग) आया, पर (ङ) म स्त्री लङ्ग ‘अङ्गल्यः’ के साथ भी a
चत्वा र)। परन्तु पाँच और उससे आगे क संख्याएँ रूप नह बदलत — पञ्च, दश, द्वा त्रशत् सब लङ्ग- नरपेक्ष ह।
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इसी लए (क) म ‘एकम्’ (नपुंसक) और (ख) म
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‘दश’ ज्य -का-त्य रहा।
Did you know? (घ) म ‘अष्टा वश तः’ (28) वकल्प भी जान-बूझकर रखा गया है — क्य क कक्षा 6 के ब े
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क उम्र म अक्सर 28 ही दाँत नकले होते ह, अ न्तम चार दाँत (अक्ल दाढ़) बहुत बाद म आते ह। फर भी शरीर-
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रचना क दृ ष्ट से मनुष्य के दाँत क पूण संख्या 32 है, इस लए पुस्तक का अपे क्षत उत्तर द्वा त्रशत् है।
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वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 156
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम् AglaSem · NCERT Solutions
प्रश्नौ ४–५ : क्रयापदं दृष्ट् वा शरीराङ्गस्य नाम, तथा प कातः शब्दान् चत्वा गणेषु लेखनम्
अभ्यासः
प्र.1 कोष्ठकात् समु चतं क्रयापदं चत्वा उदाहरणानुसारं शरीराङ्गस्य नाम लखन्तु — यथा – पश्य त – नयनम् । (क)
शृणो त – …………… (गुल्फः, चबुकम्, कणः) (ख) धाव त – …………… (पादद्वयम्, हस्तद्वयम्, नयनद्वयम्)
(ग) नम त – …………… ( शरः, कूपरः, जङ् घा) (घ) सूचय त – …………… (अङ्गली, नखः, चरणः) (ङ) लख त
– …………… (हस्तः, म णब ः, क टः)
यह प्रश्न ठ क पछले प्रश्न का उलटा है — वहाँ अङ्ग दे कर काम पूछा था, यहाँ काम दे कर अङ्ग पूछा है।
क्रयापदम् उत्तरम् हन्द अन्ये वकल्पाः कमथम् अशुद्धाः
यथा — पश्यित नयनम् आँख दे खती है —
ृ ोित
(क) शण कणः कान सुनता है गुल्फः = टखना, चबुकम् = ठोड़ी — दोन सुनते नह ।
(ख) धावित पाद द्वयम् दोन पैर दौड़ते ह हाथ या आँख से दौड़ा नह जाता ।
(ग) नमित िशरः सर झुकता है कूपरः = कोहनी, जङ् घा = पडली — प्रणाम सर से होता है ।
(घ) सूचयित अङ् गल
ु ी अङ्गली इशारा करती है नखः = नाखून, चरणः = पैर — इशारा अङ्गली से ही होता है ।
(ङ) िलखित हस्तः हाथ लखता है म णबन्धः = कलाई, क टः = कमर — लखना हाथ का काम है ।
‘पादद्वयम्’ जैसा शब्द कैसे बनता है? द्वयम् = दो का जोड़ा। पाद + द्वयम् = पादद्वयम् (दोन पैर), हस्त + द्वयम् =
हस्तद्वयम्, नयन + द्वयम् = नयनद्वयम्, कुण्डल + द्वयम् = कुण्डलद्वयम् (प्रश्न ७ म), पादुका + द्वयम् = पादुकाद्वयम्।
ऐसा समास बनने पर पूरा शब्द नपुंसक लङ्ग एकवचन हो जाता है — इसी लए ‘पादद्वयम्’ लखा, ‘पादद्वयः’ नह ।
Tip — नए अङ्ग-नाम इसी प्रश्न से मल जाते ह: गुल्फः (टखना), चबुकम् (ठोड़ी), कूपरः (कोहनी), जङ् घा
( पडली), म णबन्धः (कलाई), क टः (कमर), नखः (नाखून), चरणः (पैर), अङ्गली (अङ्गली)। ये सब पृष्ठ 158 के
चत्र म भी दखाए गए ह — वह मलाकर याद क जए।
प्र.2 प कातः शब्दान् चत्वा यथायोग्यं गणेषु लखन्तु — ना सका, म णब ः, चबुकम्, कूपरः, हस्तः, म णब ः,
कपोलः, भुजः, ललाटम्, स्क ः, जङ् घा, नयनम्, जानु, ऊरुः ।
पृष्ठ 156 पर पीली प का के नीचे तीन चत्र छपे ह और हर चत्र के नीचे एक खाली खाना है। तीन चत्र ये ह — (1) बा लका का
मुख, (2) एक बाँह (हाथ से कन्धे तक), (3) एक पैर (जाँघ से पंजे तक)। हर शब्द को उसी चत्र वाले खाने म लखना है जसका
वह अङ्ग है।
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प्रथमः गणः — मुखस्य अङ्गा न द्वतीयः गणः — बाहोः अङ्गा न तृतीयः गणः — पादस्य अङ्गा न
(बा लकायाः मुख चत्रम्) (भुजस्य चत्रम्) (पादस्य चत्रम्)
नयनम् — आँख हस्तः — हाथ (पंजा) ऊ ः — जाँघ
नािसका — नाक मिणबन्धः — कलाई जानु — घुटना
कपोलः — गाल कू परः — कोहनी जङ् घा — िपंडली
िचबुक म् — ठोड़ी भुजः — बाँह —
ललाटम् — माथा स्क न्धः — क न्धा —
छाँटने का सरल नयम — ऊपर से नीचे च लए:
• मुख — ललाटम् (सबसे ऊपर) → नयनम् → ना सका → कपोलः → चबुकम् (सबसे नीचे)।
• बाँह — स्कन्धः (कन्धा) → भुजः (बाँह) → कूपरः (कोहनी) → म णबन्धः (कलाई) → हस्तः (पंजा)।
• पैर — ऊरुः (जाँघ) → जानु (घुटना) → जङ् घा ( पडली)।
इसी क्रम म लखने से खाने भरने म एक भी गलती नह होगी।
Check it yourself — प का म एक शब्द दो बार छपा है: ‘म णबन्धः’ प का म दो बार आया है (चौदह
शब्द दखते ह, पर अलग-अलग अङ्ग तेरह ही ह)। यह पुस्तक क छपाई क चूक है — म णबन्ध केवल एक बार,
बाँह वाले खाने म ही ल खए। खान म सात-सात पं क्तयाँ छपी ह, पर सब भरनी ज़रूरी नह — शब्द जतने ह
उतने ही ल खए (5 + 5 + 3)।
वयम् अभ्यासं कुमः — पृष्ठ 157
प्रश्नाः ६–८ : तृतीया वभक्तेः वाक्यरचना, सप्तमी वभक्तेः प्रयोगः, तथा शुद्धम्-अशुद्धम् इ त नणयः
अभ्यासः
प्र.1 कोष्ठकात् समु चतं पदं चत्वा वाक्या न रचयन्तु — (क) अहं …………… गायनं करो म । (पादे न, ना सकया,
मुखेन) (ख) अहं …………… धावनं करो म । (पादाभ्यां, ललाटे न, कूपरेण) (ग) अहं …………… आ ाणं करो म ।
(नखैः, ना सकया, चरणेन) (घ) अहं …………… श्रवणं करो म । (कणाभ्याम्, ना सकया, अङ्गष्ठैः) (ङ) अहं
…………… भोजनं करो म । (मुखेन, पादे न, ना सकया)
यह पूरा प्रश्न तृतीया वभ क्त पर है। नयम एक ही है — करणे तृतीया, यानी जस साधन से काम हो, उसम तृतीया वभ क्त लगती
है।
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पूण वाक्यम् हन्द पदस्य ववरणम्
(क) अहं मुखेन गायनं करोिम । मैं मुँह से गाता हू।
ँ मुख (नपुं.) — तृतीया, एकवचन (मुख एक है)
(ख) अहं पादाभ्यां धावनं करोिम । मैं दोनों पैर ों से दौड़ता हू।
ँ पाद (पुं.) — तृतीया, द्ववचन (पैर दो ह)
(ग) अहं नािसकया आघ ाणं करोिम । मैं नाक से सूँघ ता हू।
ँ ना सका (स्त्री.) — तृतीया, एकवचन
(घ) अहं कण भ्यां श्रवणं करोिम । मैं दोनों कानों से सुनता हू।
ँ कण (पुं.) — तृतीया, द्ववचन (कान दो ह)
(ङ) अहं मुखेन भोजनं करोिम । मैं मुँह से भोजन करता हू।
ँ मुख (नपुं.) — तृतीया, एकवचन
तृतीया वभ क्त के तीन साँचे यह पूरे हो जाते ह:
• अकारान्त पुं./नपुं. — एकवचन -ेन (मुखेन, पादे न, चरणेन), द्ववचन -आभ्याम् (पादाभ्याम्, कणाभ्याम्),
बहुवचन -ैः (नखैः, अङ्गष्ठैः)
• आकारान्त स्त्री लङ्ग — एकवचन -या (ना सकया, जह्वया)
• ध्यान द जए — जो अङ्ग शरीर म दो ह उनका द्ववचन ही आएगा, ठ क वैसे ही जैसे पाठ म माधव ने कहा —
‘नयनाभ्यां पश्या म, कणाभ्यां शृणो म, पादाभ्यां चला म’।
Tip — गलत वकल्प भी पढ़ ली जए, ये पहचान पक्क कराते ह: ललाटे न = माथे से, कूपरेण = कोहनी से,
नखैः = नाखून से, अङ्गष्ठैः = अँगूठ से, चरणेन = पैर से। ये सब रूप ाकरण क दृ ष्ट से शुद्ध ह — इनम दोष
केवल यह है क अथ नह बनता। इस लए ऐसे प्रश्न म पहले अथ दे खए, फर रूप।
प्र.2 प कातः समु चतं शरीराङ्गं चत्वा भ गनी कुत्र क धर त इ त सूचयन्तु — (प का : कण्ठे , ललाटे , नयनयोः,
ओष्ठयोः, पादयोः, कणयोः, हस्तयोः, वामहस्ते, अङ्गल्यां, नेत्रयोः) — भ गनी …… पादुकाद्वयं धर त । भ गनी ……
मु द्रकां धर त । भ गनी …… मालां धर त । भ गनी …… उपनेत्रं धर त । भ गनी …… ओष्ठरागं धर त । भ गनी
…… कङ् कणा न धर त । भ गनी …… घट यन्त्रं धर त । भ गनी …… कुण्डलद्वयं धर त । भ गनी …… कुङ् कुमं
धर त । भ गनी …… कज्जलं धर त ।
यह पूरा प्रश्न सप्तमी वभ क्त पर है — नयम है अ धकरणे सप्तमी, यानी जस अङ्ग म / पर कोई वस्तु पहनी जाती है, उसम
सप्तमी लगती है। प का के दस शब्द ठ क दस वाक्य के लए ह।
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पूण वाक्यम् हन्द वभ क्तः तथा वचनम्
भिगनी पादयोः पादुक ाद्वयं धरित । बहन दोनों पैर ों में चप्पलों की जोड़ी पहनती है। पाद — सप्तमी, द्ववचन
भिगनी अङ् ग ल्ु यां मुिद कां धरित । बहन अङ् गल
ु ी में अँगूठी पहनती है। अङ्गली — सप्तमी, एकवचन
भिगनी क ण् ठे मालां धरित । बहन गले में माला पहनती है। कण्ठ — सप्तमी, एकवचन
भिगनी नयनयोः उपनेत्र ं धरित । बहन आँखों पर चश्मा लगाती है। नयन — सप्तमी, द्ववचन
भिगनी ओ ष्ठयोः ओष्ठरागं धरित । बहन होंठों पर िलपिस्टक लगाती है। ओष्ठ — सप्तमी, द्ववचन
भिगनी हस्तयोः कङ् कणािन धरित । बहन दोनों हाथों में कं गन पहनती है। हस्त — सप्तमी, द्ववचन
भिगनी वामहस्ते घटीयन्त्रं धरित । बहन बाएँ हाथ में घड़ी पहनती है। वामहस्त — सप्तमी, एकवचन
भिगनी कणयोः कु ण्डलद्वयं धरित । बहन दोनों कानों में कु ण् डलों की जोड़ी पहनती है। कण — सप्तमी, द्ववचन
भिगनी ललाटे कु ङ् कु मं धरित । बहन माथे पर कु मकु म लगाती है। ललाट — सप्तमी, एकवचन
भिगनी नेत्र योः कज्जलं धरित । बहन आँखों में काजल लगाती है। नेत्र — सप्तमी, द्ववचन
वचन कैसे तय हुआ? जो अङ्ग शरीर म एक है उसका एकवचन — कण्ठे , ललाटे , वामहस्ते, अङ्गल्याम्। जो दो ह
उनका द्ववचन — पादयोः, नयनयोः, ओष्ठयोः, हस्तयोः, कणयोः, नेत्रयोः। ध्यान द जए क द्ववचन का साँचा एक ही
है — सप्तमी द्ववचन म सदा ‘-योः’ (पादयोः, कणयोः, हस्तयोः) चाहे शब्द पुं लङ्ग हो या नपुंसक लङ्ग।
Check it yourself — नयनयोः और नेत्रयोः दोन का अथ ‘आँख म’ ही है। ‘नयनम्’ और ‘नेत्रम्’
पयायवाची ह, इस लए इन दोन को उपनेत्रम् और कज्जलम् वाले वाक्य म आपस म बदलकर लखा जा सकता है
— दोन उत्तर शुद्ध माने जाएँगे। इसी तरह ‘वामहस्ते’ केवल घड़ी वाले वाक्य म ही फट होता है, क्य क घड़ी एक ही
हाथ म पहनी जाती है; इसी लए कंगन वाले वाक्य के लए द्ववचन ‘हस्तयोः’ बचता है।
प्र.3 वाक्यं शुद्धम् अशुद्धं वा इ त सूचयन्तु — (क) अहं कणाभ्यां भोजनं करो म । (ख) अहं ना सकाद्वारा ासं
स्वीकरो म । (ग) अहम् अङ्गष्ठैः गणनां करो म । (घ) अहं नयनाभ्यां श्रवणं करो म । (ङ) अहं हस्तेन काय करो म ।
यहाँ व्याकरण नह , अथ जाँचना है — क्या वह काम सचमुच उसी अङ्ग से होता है? जहाँ उत्तर ‘अशुद्धम्’ है, वहाँ शुद्ध वाक्य भी
साथ दया है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम्
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वाक्यम् उत्तरम् कारणम् तथा शुद्धं वाक्यम्
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(क) अहं कण भ्यां भोजनं अशुद्धम्
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कान से भोजन नह होता, सुना जाता है । शुद्धम् — अहं मुखेन भोजनं करो म ।
करोिम ।
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a(ख) अहं नािसकाद्वारा श्वासं शुद्धम् साँस नाक से ही ली जाती है । (ना सकाद्वारा = ना सका के द्वारा)
स्वीकरोिम ।
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(ग) अहम् अङ् ग ष्ु ठै ः गणनां अशुद्धम्
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गनती अँगूठ से नह , अङ्ग लय से होती है — और अँगूठे दो ही होते ह, बहुवचन भी गलत है । ag
करोिम ।
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शुद्धम् — अहम् अङ्ग ल भः गणनां करो म ।
(घ) अहं नयनाभ्यां श्रवणं अशुद्धम्
a
आँख से दे खा जाता है, सुना नह । शुद्धम् — अहं कणाभ्यां श्रवणं करो म । (अथवा —
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करोिम । अहं नयनाभ्यां दशनं करो म ।)
हाथ से ही काम होता है । ‘हस्ताभ्यां काय करो म’ भी शुद्ध है । em
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(ङ) अहं हस्तेन काय ं करोिम शुद्धम्
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agl यह प्रश्न पाठ क परीक्षा है: तीन अशुद्ध वाक्य म अङ्ग और उसका काम आपस म बदल दए गए ह। पाठ म माधव
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ने जो सूची द थी, उसी से सारे उत्तर मल जाते ह — ‘नयनाभ्यां पश्या म, कणाभ्यां शृणो म, मुखेन भाषणं करो म
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भोजनं करो म च, उदरेण श क्तं प्राप्नो म, पादाभ्यां चला म’। इसी लए पाठ को केवल पढ़ना नह , याद रखना चा हए।
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Tip — अङ्गष्ठः और अङ्गली का अन्तर: अङ्गष्ठः = अँगूठा (हाथ म एक, पैर म एक — इसी लए ‘पादाङ्गष्ठः’ भी
पृष्ठ 158 म है)। अङ्गली = अङ्गली (एक हाथ म चार, अँगूठे को मलाकर पाँच)। इस लए ‘दश अङ्गल्यः’ ठ क है (प्रश्न
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३ ङ), पर ‘अङ्गष्ठैः गणना’ ठ क नह ।
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a योग्यता वस्तरः — शरीराङ्गानां नामा न — पृष्ठ 158
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चत्रे अङ् कता न द्वा त्रशत् शरीराङ्गनामा न — शरसः पादपयन्तम्
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योग्यता वस्तरः
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शरीराङ्गानां नामा न — चत्रे प्रद शता न सवा ण नामा न पठन्तु, अवगच्छन्तु, स्मरन्तु च । (केशाः, ललाटम्, भ्रूः,
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नेत्रम्, ना सका, कपोलः, कणः, मुखम्, चबुकम्, कण्ठः, ीवा, स्क ः, भुजः, वक्षःस्थलम्, स्तनः, कफो णः/
s e mघा, गुल्फः, पादः, नखाः,
कूपरः, उदरम्, ना भः, म णब ः, हस्तः, अङ्गष्ठः, अङ्गल्यः, क टः, ऊरुः, जानु, जङ्
mअङ्गल्यः, पा ष्णः, पादाङ्गष्ठः) a
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agl उत्तर
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पृष्ठ 158 पर एक बालक का चत्र है और उसके चार ओर बत्तीस अङ्ग के नाम तीर से जोड़े गए ह। नीचे वही सारे नाम ऊपर से
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नीचे के क्रम म, हन्द और अं ेज़ी अथ के साथ दए ह — इसी क्रम म याद क जए, अलग-अलग नह ।
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शरीरभागः संस्कृतम् हन्द ENGLISH
िशरः तथा मुखम् के शाः बाल Hair
(िसर और चेहरा)
ललाटम् माथा Forehead
भूः भह Eyebrow
नेत्र म् (नयनम्) आँख Eye
नािसका नाक Nose
कपोलः गाल Cheek
कणः कान Ear
मुखम् मुँह Mouth / face
िचबुक म् ठोड़ी Chin
ग ीवा क ण् ठः गला Throat
(गदन)
गीवा गदन Neck
बाहःु स्क न्धः कन्धा Shoulder
(कन्धे से अङ् ग ल
ु ी तक)
भुजः बाँह Arm
कफोिणः / कू परः कोहनी Elbow
मिणबन्धः कलाई Wrist
हस्तः हाथ Hand
अङ् गष्ु ठः अँगूठा Thumb
अङ् गल्ु यः अङ्ग लयाँ Fingers
नखाः नाखून Nails
धड़ वक्षःस्थलम् छाती Chest
(छाती से कमर तक)
स्तनः स्तन Breast
उदरम् पेट Stomach / belly
नािभः ना भ Navel
किटः कमर Waist
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शरीरभागः संस्कृतम् हन्द ENGLISH
पादः ऊ ः जाँघ Thigh
(जाँघ से अङ् ग ल
ु ी तक)
जानु घुटना Knee
जङ् घा पडली Shank / calf
गल्ु फः टखना Ankle
पादः पैर Foot / leg
पािष्णः एड़ी Heel
पादाङ् गष्ु ठः पैर का अँगूठा Big toe
अङ् गल्ु यः पैर क अङ्ग लयाँ Toes
लङ्ग के अनुसार छाँटकर याद क जए — तब वाक्य बनाना आसान हो जाएगा:
• पुं लङ्ग (-ः) — कण्ठः, स्कन्धः, भुजः, कूपरः, म णबन्धः, हस्तः, अङ्गष्ठः, कपोलः, कणः, गुल्फः, पादः, स्तनः
• स्त्री लङ्ग — ना सका, ीवा, जङ् घा, भ्रूः, ना भः, क टः, अङ्गली, पा ष्णः
• नपुंसक लङ्ग (-म्) — ललाटम्, नेत्रम्, मुखम्, चबुकम्, उदरम्, वक्षःस्थलम्, जानु
• केवल बहुवचन म प्रयोग होने वाले — केशाः, नखाः, दन्ताः, अङ्गल्यः
Did you know? कोहनी के लए चत्र म दो नाम दए ह — कफो णः और कूपरः — दोन शुद्ध ह। इसी तरह
आँख के लए ‘नेत्रम्’ और ‘नयनम्’, तथा पैर के लए ‘पादः’ और ‘चरणः’ पयायवाची ह। परीक्षा म कोई भी एक
लख सकते ह; परन्तु एक ही उत्तर म दोन को मलाइए मत।
मधुराष्टकं पठन्तु स्मरन्तु च — पृष्ठ 159
श्रीवल्लभाचाय-कृतं मधुराष्टकम् — अष्टौ ोकाः, अन्वयः, अथः तथा भावः
स्तोत्रम्
प्र.1 अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं ह सतं मधुरम् । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुरा धपतेर खलं मधुरम् ॥१॥ … गोपा
मधुरा गावो मधुरा य ष्टमधुरा सृ ष्टमधुरा । द लतं मधुरं फ लतं मधुरं मधुरा धपतेर खलं मधुरम् ॥८॥ —
मधुराष्टकस्य अन्वयं, हन्द -अथ भावं च लखन्तु ।
यह श्रीवल्लभाचाय का रचा हुआ प्र सद्ध स्तोत्र है। आठ ोक का ढाँचा एक ही है — हर पं क्त म कुछ वस्तुएँ गनाकर हर बार
‘मधुरम्’ कहा जाता है, और हर ोक इसी टे क पर समाप्त होता है — ‘मधुरा धपतेर खलं मधुरम्’।
सवप्रथम टे क का पदच्छे द —
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मधुरािधपते रिखलं मधुरम्
= मधुरािधपते ः + अिखलम् + मधुरम्
= मधुरा (मथुरा नगरी) + अिधपते ः (के स्वामी का) + अिखलम् (सब कु छ) + मधुरम् (मीठा है)
अथ — मधुरा (मथुरा) के अिधपित श्रीकृष्ण का सब कु छ मीठा है।
अब आठ ोक का अथ —
ोकः यत्र-यत्र माधुयम् हन्द अथः
१ अधरम्, वदनम्, नयनम्, ह सतम्, उनका होंठ मीठा है, मुख मीठा है, नेत्र मीठे है,ं हँस ी मीठी है, हृदय मीठा है, चाल मीठी है —
हृदयम्, गमनम् मथुर ापित का सब कु छ मीठा है।
२ वचनम्, च रतम्, वसनम्, व लतम्, उनकी वाणी मीठी, चिर त्र मीठा, वस्त्र मीठा, बल खाकर मुड़ना मीठा, चलना मीठा, घूम ना
च लतम्, भ्र मतम् मीठा — मथुर ापित का सब कु छ मीठा है।
३ वेणुः, रेणुः, पा णः, पादौ, नृत्यम्, उनकी बाँस ुर ी मीठी, (उनके चरणों की) धूल मीठी, हाथ मीठा, दोनों पैर मीठे , नाच मीठा,
सख्यम् िम त्र ता मीठी — मथुर ापित का सब कु छ मीठा है।
४ गीतम्, पीतम्, भुक्तम्, सुप्तम्, उनका गाना मीठा, पीना मीठा, खाना मीठा, सोना मीठा, रूप मीठा, ितलक मीठा —
रूपम्, तलकम् मथुर ापित का सब कु छ मीठा है।
५ करणम्, तरणम्, हरणम्, रमणम्, उनका करना मीठा, तैर ना मीठा, हरण करना मीठा, ीड़ा करना मीठा, उगलना मीठा,
व मतम्, श मतम् शान्त करना मीठा — मथुर ापित का सब कु छ मीठा है।
६ गु ा, माला, यमुना, वीची, उनकी गंज
ु ा-माला मीठी, (वैजयन्ती) माला मीठी, यमुना मीठी, (उसकी) लहर मीठी, जल
स ललम्, कमलम् मीठा, कमल मीठा — मथुर ापित का सब कु छ मीठा है।
७ गोपी, लीला, युक्तम्, मुक्तम्, दृष्टम्, उनकी गोपी मीठी, लीला मीठी, िमलना मीठा, छोड़ना मीठा, दे खना मीठा, रचना मीठी —
सृष्टम् मथुर ापित का सब कु छ मीठा है।
८ गोपाः, गावः, य ष्टः, सृ ष्टः, द लतम्, उनके ग्वाले मीठे , गाये ं मीठी, लाठी मीठी, स ृिष्ट मीठी, मसलना मीठा, फलना मीठा —
फ लतम् मथुर ापित का सब कु छ मीठा है।
अन्वयः (प्रथम ोकस्य) —
अधरं मधुरम् (अिस्त), वदनं मधुरम् (अिस्त), नयनं मधुरम् (अिस्त), हिसतं मधुरम् (अिस्त),
हृदयं मधुरम् (अिस्त), गमनं मधुरम् (अिस्त), मधुरािधपते ः अिखलं मधुरम् (अिस्त ) ।
शेष सात ोक का अन्वय भी ठ क इसी साँचे पर है — केवल गनाई गई वस्तुएँ बदलती ह, वाक्य-रचना वही रहती है, इस लए इसे
याद करना बहुत सरल है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम् AglaSem · NCERT Solutions
भावः — यह स्तोत्र मधुर भ क्त का सबसे सुन्दर उदाहरण है। क व यह नह कहता क ीकृष्ण का कोई एक गुण
अच्छा है; वह कहता है क जो भी उनसे जुड़ा है — उनक बाँसुरी, उनके पैर क धूल, यमुना का जल, ग्वाल क
लाठ , यहाँ तक क उनक सृ ष्ट भी — सब कुछ मधुर है। भाव यह है क जब हृदय म प्रेम भर जाता है तब प्रय से
जुड़ी हर छोट -से-छोट वस्तु भी मीठ लगने लगती है। सौन्दय वस्तु म नह , दे खने वाली दृ ष्ट म होता है।
Tip — यह स्तोत्र इसी पाठ म क्य दया गया? ध्यान से दे खए क ोक म गनाए गए शब्द अ धकतर शरीर के
अङ्ग ही ह — अधरम् (ह ठ), वदनम् (मुख), नयनम् (आँख), हृदयम्, पा णः (हाथ), पादौ (दोन पैर)। पाठ
‘माधवस्य प्रयम् अङ्गम्’ भी अङ्ग क ही बात करता है — वहाँ अङ्ग आपस म झगड़ते ह, यहाँ सब मलकर मधुर हो
जाते ह। यही पाठ और स्तोत्र का जोड़ है।
Check it yourself — दो स याँ पहचा नए:
• मधुरा धपतेर खलम् = मधुरा धपतेः + अ खलम् → वसग-स न्ध (‘◌ः’ के बाद स्वर आने पर ‘र्’ हो गया)।
• वेणुमधुरो रेणुमधुरः = वेणुः + मधुरः + रेणुः + मधुरः → यहाँ भी वसग-स न्ध है (‘मधुरः + रेणुः’ = ‘मधुरो रेणुः’)
।
ग त व ध-कायम् तथा प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 159
पाठस्य ना ा भनयः तथा ोरकपत्रे शरीर चत्रस्य नमाणम्
ग त व ध-कायम् प रयोजनाकायम्
प्र.1 ग त व ध-कायम् — कक्षायां सव छात्राः शक्षकस्य मागदशनेन अस्य पाठस्य ना ा भनयं कुवन्तु ।
यह पाठ नाटक के लए बना ही हुआ है — इसम सात पात्र ह और हर एक के संवाद पहले से लखे हुए ह। नीचे पात्र का बँटवारा,
वेशभूषा और संवाद-क्रम दया है।
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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 15 माधवस्य प्रयम् अङ्गम्
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पात्रम् वेशभूषा (सरल उपाय) तस्य संवादः (पाठात्)
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माधवः साधारण वस्त्र; एक चटाई या बच पर सोने का ‘मम शरीरस्य सवा ण अङ्गा न मम कृते उपकारका ण स न्त … भवन्तः सवऽ प
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अ भनय मम प्रयाः ।’
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aपादःgl गत्ते पर बना पैर का चत्र गले म लटकाकर ‘अहं ेष्ठः । मम कारणेन माधवः चल त ।’
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हस्तः गत्ते का हाथ / बड़ा दस्ताना ‘अरे अरे ! मम कारणेन माधवः लख त, गृहकाय करो त, वस्तू न आनय त च
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नयनम् गत्ते क बड़ी आँख का मुखौटा
ag ‘मां वना माधवः कम प द्रष्टु ं शक्नो त कम् ?’
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कणः गत्ते का बड़ा कान ‘माधवः यदा माग गच्छ त … त ह दुघटना भवेत् ।’ (मुस्कुराकर बोलना है)
‘भोः ! सव शृण्वन्तु, माधवः मम कारणेन भोजनं e
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mत, भाषणं करो त …’
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agसवl माधवम् एव पृच्छाम, कः ेष्ठः ।’
मुखम् गत्ते का हँसता हुआ मुँह करो
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उदरम् m कमीज़ के भीतर त कया रखकर गोल पेट
l a se ‘भवतु, भवतु, कोलाहलं न कुवन्तु । वयं
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मंचन का क्रम (पाठ के अनुसार ही): (1) माधव सोता है — पृष्ठभू म म धीमा सङ्ग त; (2) पादः, हस्तः, नयनम्,
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कणः बारी-बारी से आगे आकर अपना दावा रखते ह; (3) मुखम् ज़ोर से (‘झ ट त’) आकर अपनी बात कहता है;
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gl ह। अन्त म सब मलकर एक वाक्य दोहराएँ — ‘सवा ण अङ्गा न
(4) सब एक साथ बोलने लगते ह — कोलाहल; (5) उदरम् हाथ उठाकर सबको रोकता है; (6) माधव उठकर सबको
समझाता है और सब मलकर ताली a
बजाते
समानरूपेण महत्त्वपूणा न स न्त ।’
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Tip: संवाद रटने से पहले अथ समझ ली जए, तभी अ भनय म भाव आएगा — जैसे कण को ‘ स्मतं कृत्वा’ बोलना
g म। बड़े शब्द पर आवाज़ ज़रा
.cस्कुराते हुए), मुख को ‘झ ट त’ (झट से, उतावली म), और उदर को शान्तaस्वर
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aseऊँची क जए और ‘अहम् एव ेष्ठः’ पर सीने पर हाथ र खए — दशक को बात तुरन्त समझ आ जाएगी।
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प रयोजनाकायम् — योग्यता वस्तरभागे वद्यमानं चत्रं ोरकपत्रे रच यत्वा अङ्गानां नामा न लखन्तु ।
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पृष्ठ 158 वाला शरीर- चत्र ोरकपत्र (थम कोल क शीट) पर बनाकर उस पर अङ्ग के नाम लखने ह। यह याद करने का सबसे
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अच्छा तरीका है — जो हाथ से बनता है, वह भूलता नह ।
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बनाने क व ध — छह चरण:
(1) लगभग दो फुट × डेढ़ फुट क थम कोल शीट ली जए; न मले तो मोटा चाट-पेपर भी चलेगा।
(2) पहले प सल से बालक क सीधी खड़ी आकृ त बनाइए — हाथ दोन ओर फैले हुए, ता क हर अङ्ग अलग
दखे।
(3) आकृ त म रंग भ रए और गहरे रंग से बाहरी रेखा ख चए।
(4) चत्र के बाएँ और दाएँ खाली जगह छो ड़ए — नाम वह लखे जाएँगे।
(5) हर अङ्ग से बन्दु और तीर बनाकर उसे कनारे तक लाइए और वहाँ नाम ल खए।
(6) नाम दो रंग म ल खए — ऊपर संस्कृत नाम बड़े अक्षर म, नीचे छोटे अक्षर म हन्द अथ।
नमूना — कस ओर कौन-सा नाम लख (पुस्तक के चत्र के अनुसार) —
वामभागे (बाईं ओर) द क्षणभागे (दाईं ओर) अधोभागे
(नीचे)
के शाः, नेत्र म्, कणः, मुखम्, क ण् ठः, भुजः, ललाटम्, भूः, नािसका, कपोलः, िचबुक म्, गीवा, स्क न्धः, स्तनः, अङ् गल्ु यः, पािष्णः,
वक्षःस्थलम्, उदरम्, अङ् गल्ु यः, किटः, ऊ ः, कफोिणः/कू परः, नािभः, मिणबन्धः, अङ् गष्ु ठः, हस्तः, जङ् घा, गल्ु फः, पादाङ् गष्ु ठः
जानु, पादः नखाः
Try this — प रयोजना को और अच्छा बनाने के दो सुझाव:
• हर नाम के आगे कोष्ठक म उसका काम भी लख द जए — जैसे ‘कणः (शृणो त)’, ‘नयनम् (पश्य त)’, ‘पादः
(चल त)’। इससे प्रश्न २ और ४ का अभ्यास अपने-आप हो जाएगा।
• चत्र के नीचे पाठ का सन्दे श एक पं क्त म लख द जए — ‘भवन्तः सवऽ प ेष्ठाः, भवन्तः सवऽ प मम प्रयाः ।’
इससे प रयोजना केवल चत्र नह , पूरा पाठ बन जाएगी।
अध्याय — एक नज़र म
कथा का आरम्भ (पृष्ठ 152)। ‘माधवनामकः एकः बालकः आसीत्। सः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ्गा न दृष्टवान्। ता न परस्परं चचा
कुव न्त स्म।’ — सपने म माधव के शरीर के अङ्ग बोलने लगते ह और हर एक कहता है ‘अहम् एव ेष्ठः’।
हर अङ्ग अपना काम गनाता है। पादः — ‘मम कारणेन माधवः चल त।’ हस्तः — ‘मम कारणेन माधवः लख त, गृहकाय
करो त।’ नयनम् — ‘मां वना माधवः कम प द्रष्टु ं शक्नो त कम्?’ कणः — ‘वाहन क ध्व न न सुने तो दुघटना हो जाए।’
मुखम् — ‘मेरे कारण भोजन, भाषण, उत्तर।’ इसी म पाठ का सारा क्रया-शब्दभण्डार आ जाता है।
नणय (पृष्ठ 153)। उदरम् झगड़ा रोकता है — ‘कोलाहलं न कुवन्तु। वयं सव माधवम् एव पृच्छाम, कः ेष्ठः।’ और माधव
उत्तर दे ता है — ‘मम शरीरस्य सवा ण अङ्गा न मम कृते उपकारका ण स न्त … भवन्तः सवऽ प ेष्ठाः। भवन्तः सवऽ प मम
प्रयाः।’ यही पाठ का शीषक और यही उसका सन्दे श है।
शब्दभण्डार — शरीर के अङ्ग के नाम। पाठ के छह अङ्ग (पाद, हस्त, नयन, कण, मुख, उदर) से आगे बढ़कर अभ्यास और
योग्यता वस्तर म बत्तीस नाम आते ह — ललाटम्, भ्रूः, कपोलः, चबुकम्, ीवा, स्कन्धः, कूपरः, म णबन्धः, अङ्गष्ठः, क टः,
ऊरुः, जानु, जङ् घा, गुल्फः, पा ष्णः आ द।
ाकरण — दो वभ क्तयाँ। प्रश्न ६ पूरा तृतीया वभ क्त का है — काम जस अङ्ग से होता है (मुखेन, पादाभ्यां, ना सकया,
कणाभ्याम्) — नयम है करणे तृतीया। प्रश्न ७ पूरा सप्तमी वभ क्त का है — गहना जस अङ्ग म/पर पहना जाता है (कण्ठे ,
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ललाटे , कणयोः, हस्तयोः) — नयम है अ धकरणे सप्तमी।
पाठ का अन्त (पृष्ठ 159)। ीवल्लभाचाय-र चत मधुराष्टकम् दया गया है — ‘अधरं मधुरं वदनं मधुरम्…’। ध्यान द जए क
इस स्तोत्र म भी अधर, वदन, नयन, हृदय, पा ण, पाद जैसे शरीराङ्ग ही गनाए गए ह, इस लए यह पाठ से जुड़ा हुआ है। साथ
म ग त व ध-कायम् (पाठ का ना ा भनय) तथा प रयोजनाकायम् ( ोरकपत्र पर शरीर- चत्र) ह।
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द ENGLISH
स्वप्ने स्वप्नसमये स्वप्न म In dream
अङ्गा न अवयवाः अङ्ग Body parts
दृष्टवान् अपश्यत् दे खा Saw
चचाम् आलापम् चचा को Discussion
ेष्ठः उत्तमः ेष्ठ Great
अनुक्षणम् सत्वरम् उसी समय Instantly
मां वना मां िवहाय मेरे बना Without me
स्मतम् मन्दहासः थोड़ा हँस के Smile
शक्नो त समथः भवित समथ होता है Able to
सबलाः बलवन्तः बलवान् Strong
कोलाहलम् आरवः शोर Quarrel / noise
उपकारका ण सहायकािन सहायता करने वाले Helpful
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