Page 1
Central Board of Secondary Education
SAMPLE PAPER
Class 12
2025
Solutions
Page 2
अंक योजना
प्रतिदर्श प्रश्न पत्र 2024-25
त ंदी (ऐच्छिक)
कोड संख्या (002)
कक्षा-बार वी ं
तनर्ाशररि समय: 03 घं टे पू र्ाांक : 80 अं क
प्रश्न खंड – क (अपतिि बोर्) अं क
1. (क) ii. जीवन को द ाँ व पर लग दे ते हैं । 1
(ख) iii. कथन (A) सही है और क रण (R) कथन (A) की सही व्य ख्य 1
है ।
(ग) ii. स्व वलंबन 1
(घ) गोधूलल व ली दु लनय के लोग बाँधे हुए घ ट क प नी पीते हैं । 1
(ङ) स हस सभी प्रक र के गुणों में सबसे ज्य द महत्वपूणण है क्ोंलक इसके 2
लबन लकसी भी अन्य गुण क लग त र अभ्य स नहीं लकय ज सकत ।
स हसी कभी भी पररस्थथलतयों से ह र नहीं म नत । दु ख-सुख दोनों में
आगे बढ़त रहत है ।
(च) ल ंदगी की दोनों सूरतों में से दू सरी सूरत, लजसमें गरीब एवं असह य 2
व्यस्ियों को खुशी प्रद न करने की कोलशश की ज ती है ,श्रेष्ठ है ।
जीवन में लक्ष्य प्र स्ि के ललए हर व्यस्ि प्रय स करत है और लवपरीत
पररस्थथलतयों क मुक बल भी करत है , परं तु गरीब लोगों के सुख-
दु ख को अपन समझकर उनक स थ दे ते हैं और जो सभी नहीं कर
प ते।
(छ) लेखक ने अकेले चलने व ले की तुलन लसंह से इसललए की है क्ोंलक 2
लसंह जंगल में अकेल लनडर होकर घूमत है । वह भेड़ य भैंस की
तरह जून में नहीं चलत । ठीक उसी प्रक र अकेले चलने व ल व्यस्ि
भी लबलकुल लनडर लबलकुल बेखौफ होत है ।
2. (क) ii. स मने कलठन ई होन 1
(ख) iii. थक हुआ 1
(ग) iii. (I) और (II) 1
(घ) कलव ने जीवन-पथ पर चलने के ललए सभी प्रक र की लवपलियों में 1
भी हमें हाँ सते -हाँ सते आगे बढ़ने की ब त कही है । कलव कहत है लक
अगर ब ध एाँ आती हैं तो आएाँ , भले ही च रों ओर लवपलियों के ब दल
छ ज एाँ , मगर हमें लवचललत नहीं होन च लहए।
(ङ) कलव ने ‘परलहत अलपणत अपन तन-मन’ इसललए कह है , क्ोंलक 2
मनुष्य क जीवन केवल स्वयं के ललए नहीं होत । परलहत य नी
Page 3
परोपक र में ही मनुष्य को परम आनंद प्र ि होत है । कलव अपन
तन मन दू सरों की भल ई के ललए अलपण त करन च हत है ।कलव ने
व्यस्ि से बढ़कर सम ज एवं र ष्ट्र की कल्पन की है ।
(च) प वस य नी वर् ण ऋतु धरती को जल से पररपूणण कर दे ती है , च रों तरफ 2
खु लशय ाँ लबखे रती है । लकस नों से ले कर प्रकृलत के तम म उप द न हलर्ण त हो
ज ते है । उसी प्रक र मनुस्य को भी दू सरों के ललए कुछ कर गुजरने की
इच्छ होनी च लहए। हमें दू सरों की सेव और भल ई करनी च लहए।
खंड- ख (अतिव्यच्छि और माध्यम पु स्तक के आर्ार पर )
3.(क) संप दकीय पृ ष्ठ पर प्रक लशत लेखन 1
सम च र-पत्र की अपनी आव
(ख) स फ सुथरी टं कट प्रलत 2
पृष्ठ के अंत में कोई पंस्ि अधूरी न हो
कलठन शब्ों से बच व
अंको (आाँ कड़ों/संख्य ओं) क लेखन शब्ों में
डे डल इन, संदभण और संलिि िर क सतकणत पूणण प्रयोग
(ग) फ्रील ं स पत्रक र क सं बंध लकसी ख स अखब र से नहीं 2
भुगत न के आध र पर अलग-अलग वगों के ललए लेखन
4. (क) उलट लपर लमड शै ली सम च र लेखन की सव ण लधक लोकलप्रय उपयोगी 2x3=6
और बुलनय दी शै ली
इसमें इं टरो, बॉडी और सम पन के अनुस र क्ल इमेक्स आरं भ में
(ख) फीचर लेखन क कोई लनलित ढ ाँ च नहीं
आमतौर पर तथ्ों, सूचन ओं और लवच रों पर आध ररत कथ त्मक लववरण
भ र् -सरल, रूप त्मक एवं आकर्णक
फीचर में भ वन ओं, लवच रों क सम्यक प्रयोग
(ग) बीट ररपोलटिं ग में संव दद त को उस िेत्र की ज नक री होन आवश्यक
लवशेर्ीकृत ररपोलटिं ग में संव दद त को स म न्य सम च रों से आगे
बढ़कर उस िेत्र से जुड़ी घटन ओं , मुददों और समस्य ओं क ब रीकी
से लवश्लेर्ण करन होत है । इसके क रण और प्रभ व भी बत ने होते
हैं ।
5. लकसी एक लवर्य पर लगभग 100 शब्ों में रचन त्मक लेखन - 5
लवर्यवस्तु : 3 अंक
भ र् : 1 अंक
प्रस्तुलत : 1अंक
6. (क) कलवत क भ व के स थ सं बंध 2x3=6
भ व क संबंध मनुष्य से
Page 4
भ व से ही संवेदन
कलवत के मूल में र ग तत्व तथ भ व तत्व
(ख) रं गमंच जैसी लवद्य क सृजन मूलतः अस्वीक र के भीतर से होत है ।
कोई भी दो चररत्र जब आपस में लमलते हैं , तो वैच ररक टकर हट भी
उत्पन्न होती है । रं गमंच की प्रस्तुलत द्व र सम ज के लवलभन्न मुद्ों को
प्रक लशत करते हुए लोगों को ज गरूक लकय ज सकत है । असंतुलष्ट्,
अस्वीक र, छटपट हट और प्रलतरोध जैसे नक र त्मक तत्वों की लजतनी
ज़्य द उपस्थथलत होगी न टक उतन ही गहर और सशि स लबत
होग ।
(ग) द्वं द्व - मन मस्स्तष्क में उठने व ल वैच ररक मंथन, लकसी क म में
आने व ली ब ध , दो प त्रों क आपसी मतभेद
म त्व -
● द्वं द्व द्व र कथ नक को गलत प्रद न करन
● द्वं द्व के क रण कह नी में रोचकत
● द्वं द्व के लबंदु लजतने स्पष्ट्, कह नी उतनी ही सफल
खंड- ग ( पाठ्य पु स्तकों अं िरा, अं िराल के आर्ार पर )
7. (क) iii. सृजन 1
(ख) iv. कथन और क रण दोनों सही हैं । क रण कथन की सही व्य ख्य 1
है ।
(ग) iv. अधूरी लिय त्मक शस्ि 1
(घ) iii. झंु झल हट 1
(ङ) ii. कथन 1 और 2 1
8. (क) म नव जीवन बेहद लघु , पल के सम न 2x2=4
िणभंगुरत क बोध
लवर ट/समलष्ट् से अलग होकर व्यस्ि की स थणकत
(ख) स ं स्कृलतक लवशेर्त एाँ -
भ रत मधुमय है । यह ाँ के लोगों क व्यवह र अत्यंत मधुरत पूणण है ।भ रत
अनज न लोगों तक को आश्रय प्रद न कर अपनी लवश ल हृदयत क
पररचय दे त है ।भ रत के लोगों के हृदय में करुण की भ वन है तथ
यह आाँ खों से भी प्रकट होती है ।
(ग) कलव को सुज न की च ह
सुज न क इं तज र, लमलन की हठ
उसे लगत है लक सुज न ने उसकी मौस्खक पुक र को भले ही
अनुसन कर लदय हो, पर हृदय की मौन पुक र उसे अवश्य बुल लेगी
Page 5
सुज न च हे अपने क नों में रुई ड लकर बैठी रहे , अंत में उसे कलव
की पुक र सुननी ही पड़े गी।
9. लकसी एक क व्य ं श की सप्रसंग व्य ख्य - 6
संदभण : 1 अंक (कलव और कलवत क न म)
प्रसंग :1 अंक (पूव ण पर संबंध)
व्य ख्य :3 अंक
लवशेर् :1 अंक
10. (क) ii. लजजीलवर् 1
(ख) i. कलठन पररस्थथलतयों में भी जीन सीखें। 1
(ग) iii. कथन सही है लकंतु क रण कथन की सही व्य ख्य नहीं है । 1
(घ) ii. स्व लभम न 1
(ङ) i. अनवरत 1
11. (क) हरगोलबन असमंजस के क रण लदश भ्रलमत 2x2=4
बड़ी बहुररय क संदेश म ाँ को न सुन प न
बड़ी बहुररय के ग ाँ व से चले ज ने की कल्पन से व्यलथत
इसी क रण ग ाँ व, नदी, झोंपड़ी इत्य लद भी दे खने में कलठन ई
बेहोशी की-सी स्थथलत
(ख) लोलुप यु ग में लसंगरौली की अप र खलनज संपद लछपी नहीं रही।
कोयले की खद नों और उन पर आध ररत त प लवदयुत ग्रहों की एक
पूरी श्रृंखल ने प्रदे श को अपने में घेर ललय । जह ाँ ब हर से कोई भी
व्यस्ि नहीं आत थ , वह ाँ केंद्रीय और र ज्य सरक रों के अफसरों,
इं जीलनयरों और लवशेर्ज्ों की कत र लग गई। लसं गरौली की घ टी और
जंगलों पर ठे केद रों, वन अलधक ररयों और अन्य लोगों क प्रकृलत
लवन श क आिमण शुरू हो गय ।
(ग) दू सर दे वद स प ठ में गंग तट पर बैस खी की पूवण संध्य पर क फी
भीड़ थी। आरती में श लमल होने के ललए जन सै ल ब उमड़ रह थ ।
स्वयंसेवक लोगों से सीलढ़यों पर बैठने की लवनम्र प्र थणन कर रहे थे।
इस क यण व्यवह र से आज के युव वगण को यह संदेश लमलत है लक
लोगों की भ वन ओं की अपेि न करें तथ भीड़भ ड़ व ले थथ न पर
स्वयं संयलमत रहकर श ं लत व्यवथथ बन ए रखने में सहयोग करें । लोगों
को कलठन इयों से बचकर यथ संभव मदद करें ।
12. लकसी एक गद्य ं श की सप्रसंग व्य ख्य - 6
संदभण : 1 अंक (प ठ और लेखक क न म)
प्रसंग :1 अंक (पूव ण पर संबंध)
Page 6
व्य ख्य :3 अंक
लवशेर् :1 अंक
13. (क) तकनीकी और प्रौद्योलगकी लवक स उज ड़ की अपसभ्यत बन चुक 2x5=10
है । म लव प्रदे श की उपज ऊ लमट्टी, वह ाँ होने व ली भरपूर वर् ण ,
सद नीर और कल-कल बहती नलदयों की शोभ श ली स्थथलत, उनके
उद्गम एवं लवस्त र, वह ाँ के जनजीवन एवं संस्कृलत क सुंदर लचत्रण
करते हुए लेखक ने उसकी समृस्ि को दश ण य जो औद्योगीकरण
के क रण लवन श की ओर बढ़ रही है । अपनी संस्कृलत सभ्यत और
उजड़ती धरती को बच ने के ललए हमें सं युि रूप से प्रय स करन
च लहए।
(ख) न यक- सूरद स
लवशेर्त एाँ -
कमणशीलत
दृढ़ संकल्प
त्वररत लनणणय लेने की िमत
सहनशीलत सहृदयत
सूरद स के चररत्र से प्र ि प्रेरण - लशि थी मत नुस र उिर दें ।
(ग) प ठ क मूल कथ् –
ग्र मीण जीवन एवं प्र कृलतक सौंदयण की अनूठी प्रस्तुलत
ग्र मीण वनस्पलतयों, वन्य जीवों एवं लोकम न्यत ओं के क रण शहरों से
अलग
कमल, कोइय ाँ , हरलसंग र के फूलों की महक और उनके और्धीय
गुणों क वणणन
>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>
Page 7
CBSE STUDY MATERIAL
CBSE Board
INFORMATION CLASS STUDY MATERIAL
1 Time Table 09 Sample Paper
10 Sample Paper
2 Result
11 Sample Paper
3 Syllabus 12 Sample Paper
OTHER RESOURCES
09 Question Paper
Maps of India, Maps of World
Writing Skill Formats 10 Question Paper
Periodic Table 11 Question Paper
12 Question Paper
Class 9 Notes
Class 10 Notes
NCERT Book
Class 11 Notes
Class 12 Notes NCERT Solutions
ENTRANCE EXAMS
JEE Main CLAT CUET UG
JEE Advanced NEET UG Fashion & Design