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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा5
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: करन
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
1–7 10 30 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 32 pages
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: करन
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 1 करन के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह नरंकार दे व ‘सेवक’ क लखी एक क वता है। इसम
एक बा लका और सूरज क करन आपस म बात करती ह — बा लका शकायत करती है क करन इतनी जल्द क्य आ गई, और करन बताती है क
वह कभी सोती ही नह , वह तो एक दु नया के ब को सुलाकर दूसरी दु नया के ब को जगाने चली जाती है। पृष्ठ 1 से 7 तक के हर अभ्यास —
बातचीत के लए, पाठ से, सो चए और ल खए, समझ और अनुभव, अनुमान और कल्पना, भाषा क बात, आपक बातचीत, इसे भी जा नए तथा
पुस्तकालय एवं अन्य ोत — का हल यहाँ दया गया है। पाठ के बाद छपी बना क्रमांक क रचना पेड़ का जादू ( वनोद कुमार शुक्ल) भी यहाँ समझाई
गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 1–7
खं ड प्रश्न
10 30
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 2
क वता पढ़ने के बाद कक्षा म चचा
बातचीत के लए
प्र.1 आपको कैसे पता चलता है क सुबह हो गई है?
सुबह होने का पता हम आँख, कान और नाक — तीन से चलता है। सबसे पहला संकेत यही है क अँधेरा हटने लगता है और
उजाला फैलने लगता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
कससे पता चलता क्या दखता या सुनाई दे ता है
है
आसमान से आसमान का काला रंग पहले हल्का नीला होता है, फर पूरब क ओर लाली छा जाती है और सूरज नकल आता
है।
धूप से खड़क या दरवाज़े क झरी से करन कमरे म आ जाती है और द वार पर चमकती है।
पिक्षयों से च ड़याँ चहचहाने लगती ह, कौआ बोलता है और मुगा बाँग दे ता है।
आवाज़ ों से मं दर क घंट , अज़ान या गुरु ारे का पाठ सुनाई दे ता है। सड़क पर गा ड़याँ चलने लगती ह।
घर के कामों से माँ चूल्हा जलाती ह, चाय क महक आती है, दूधवाला और अख़बार वाला आ जाता है।
फू लों से रात म बंद रहने वाले कई फूल — जैसे कमल और सूरजमुखी — सुबह खल जाते ह।
नमूना उत्तर: मुझे सबसे पहले उजाले से पता चलता है क सुबह हो गई है। खड़क से करन आकर मेरे बस्तर पर पड़ती है। बाहर
च ड़याँ चहचहाने लगती ह और दूर से मं दर क घंट सुनाई दे ती है। रसोई से चाय क महक आने लगती है और माँ मुझे उठाने आ
जाती ह। इन सब बात से म समझ जाता हूँ क सुबह हो गई है।
क वता से जो ड़ए: क वता म भी सुबह का पता करन के आने से ही चलता है। बा लका कहती है — “अरी करन
तू उठकर इतनी जल्द आज चली आई।” यानी करन का कमरे म पहुँचना ही उसके लए सुबह होने क ख़बर है।
प्र.2 ऐसे कौन-कौन से काय ह जो सूय के प्रकाश के बना संभव नह ह?
सूय के प्रकाश के बना बहुत-से ज़रूरी काम रुक जाएँगे। सबसे बड़ा काम यह है क पेड़-पौधे अपना भोजन नह बना पाएँगे —
और तब हम भी खाना नह मलेगा।
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काम सूय के प्रकाश के बना क्य नह हो सकता
पेड़-पौधों का भोजन बनाना हरी प त्तयाँ धूप से ही अपना भोजन बनाती ह। धूप न मले तो पौधा पीला पड़कर सूख जाता है।
फ़ सल का उगना और पकना गेहूँ, धान, सरस — सबको बढ़ने और पकने के लए धूप चा हए। इसी लए कसान बुआई का समय धूप
दे खकर तय करता है।
कपड़ े सुखाना धुले कपड़ का पानी धूप क गरमी से ही भाप बनकर उड़ता है।
अनाज, िमच, पापड़ और बिड़ याँ छत पर धूप म सुखाने से ही ये चीज़ ख़राब हुए बना महीन चलती ह।
सुखाना
समुद के पानी से नमक बनाना खारे पानी को उथले खेत म फैलाकर धूप से सुखाया जाता है। पानी उड़ जाता है और नमक बच जाता
है।
सौर ऊज से िबजली बनाना सोलर पैनल और सोलर कुकर सीधे धूप से ही काम करते ह।
बािरश होना धूप से नद और समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठता है, बादल बनते ह और फर वषा होती है।
शरीर का मज़ बूत रहना सुबह क धूप से हमारे शरीर को वटा मन डी मलता है, जससे ह याँ मज़बूत होती ह।
िदन का उजाला और गरमी बना धूप के दन म भी अँधेरा और कड़ाके क ठं ड रहती।
एक बात ध्यान द जए: ऊपर के कुछ काम कृ त्रम रोशनी से थोड़े-बहुत हो सकते ह — जैसे बल्ब जलाकर पढ़ना
या मशीन से कपड़े सुखाना। पर पौध का भोजन बनाना, फ़सल पकना और वषा होना — ये तीन काम सूय के बना
कसी भी तरह संभव नह ह। इसी लए कहा जाता है क सूय पृथ्वी पर जीवन का आधार है।
प्र.3 सुबह और शाम म से आपको कौन-सा समय अ धक अ ा लगता है और क्य ?
यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है। दोन म से कोई भी उत्तर सही है — बस कारण ज़रूर द जए।
कैसे लख — तीन चरण:
चरण 1 — अपना समय चु नए — सुबह या शाम।
चरण 2 — दो-तीन कारण द जए क वह समय आपको क्य अ ा लगता है।
चरण 3 — उस समय का कोई एक दृश्य बताइए जो आपको सबसे प्रय है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन
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समय अ ा लगने के कारण
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सुबह
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हवा ठं डी और साफ़ होती है। शरीर म ताज़गी रहती है। पढ़ा हुआ जल्द याद होता है। प क्षय क आवाज़ सुनाई दे ती ह। पूरा दन
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सामने
aशामgl पढ़ाई और काम खत्म हो चुके होते ह। मैदान म दोस्त के साथ खेलने का समय मलता है। डू बते सूरज का रंग बहुत सुंदर लगता है।
घर के सब लोग साथ बैठते ह।
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m है। उस समय हवा ठं डी और साफ़ होती है और मन एकदम ताज़ा ag
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नमूना उत्तर (सुबह): मुझे सुबह का समय अ धक अ ा लगता
a g laहै। मुझे सबसे अ ा वह दृश्य लगता है जब सूरज क पहली करन आँगन क
रहता है। सुबह पढ़ा हुआ पाठ मुझे दे र तक याद रहता
द वार पर पड़ती है और च ड़याँ एक साथ चहचहाने लगती ह। तब लगता है क पूरा दन अभी बाक है और म बहुत कुछ कर सकता
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हूँ।
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नमूना उत्तर (शाम): मुझे शाम का समय अ धक अ ा लगता है। दन भर क पढ़ाई के बाद यही एक समय होता है जब म मैदान म
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gलए भी यह समय मुझे प्रय है।
लौटते ह। यह.cदृश्य मुझे बहुत भाता है। शाम को घर के सब लोग साथ बैठकर बात करते ह, इस
जाकर अपने दोस्त के साथ खेल सकता हूँ। शाम को आसमान नारंगी हो जाता है और पक्षी झुंड बनाकर अपने घ सल क ओर
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ag क वता से जो ड़ए: क वता क बा लका के लए दोन समय ज़रूरी ह। सुबह करन आती है और उसे जगाती है;
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शाम तक वह करन के साथ खेल खेलती है। करन के चले जाने पर ही वह अकेली पड़ती है — “पर जब तू चल द
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सोने को, तो रह गई अकेली म।”
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पाठ से — पृष्ठ 2
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सही उत्तर पर सूरज का चत्र (☼) बनाइए
पाठ से .cबहु वकल्पी a g
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प्र.1 करन के अनुसार वह मुख्य रूप से कौन-सा काम करती है? (क) सोते ब को जगाना (ख) खेलते ब को
सुलाना (ग) ब
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के साथ खेलना (घ) परी कथाएँ पढ़ना-पढ़ाना
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सूरज का चत्र (☼) बनेगा — (क) सोते ब को जगाना।
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िकरन खुद कहती है —
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.“cबoच्चे जो िबस्तर में सोए a g l
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a होते , उन्हे ं जगाती हूँ।”
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प्रश्न म “ करन के अनुसार” और “मुख्य रूप से” — दो बात कही गई ह। इस लए वही उत्तर चुनना है जो करन ने अपने मुँह से
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अपने मुख्य काम के बारे म कहा हो।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) सोते सही ☼ करन के अपने शब्द ह — “ब े जो बस्तर म सोए होते, उन्ह जगाती हूँ।” यही उसका बताया हुआ
ब को मुख्य काम है, और यही काम वह हर दन, हर जगह करती है।
जगाना
(ख) खेलते ग़लत करन कसी खेलते ब े को सुलाती नह । क वता म बा लका खेल के बाद, रात म परी कथाएँ पढ़ते-
ब को पढ़ते सोई थी। और सोना तो करन के चले जाने के बाद होता है, उसके सुलाने से नह ।
सुलाना
(ग) ब के ग़लत (पर पूरी यह बात क वता म आई तो है — “कल तो तेरे साथ शाम तक, खेल बहुत से खेली म।” पर यह
साथ खेलना तरह झूठ नह ) बा लका ने कहा है, करन ने नह । और यह करन का मुख्य काम नह , दन भर साथ रहने का
नतीजा है। प्रश्न “मुख्य रूप से” पूछ रहा है, इस लए यह उत्तर नह बनता।
(घ) परी कथाएँ ग़लत परी कथाएँ बा लका ने पढ़ थ — “परी कथाएँ पढ़ते-पढ़ते बड़ी दे र म सो पाई।” करन ने न कोई
पढ़ना-पढ़ाना कथा पढ़ , न पढ़ाई।
पढ़ने का तरीका सी खए: बहु वकल्पी प्रश्न म हर शब्द काम का होता है। यहाँ “मुख्य रूप से” शब्द ने ही (ग) को
उत्तर बनने से रोक दया। इस लए वकल्प चुनने से पहले प्रश्न को दो बार प ढ़ए।
प्र.2 बा लका को बहुत दे र तक न द क्य नह आई? (क) क्य क वह दे र रात तक खेल रही थी। (ख) क्य क वह पढ़
रही थी। (ग) क्य क उसे बहुत गरमी लग रही थी। (घ) क्य क वह घूमने गई थी।
सूरज का चत्र (☼) बनेगा — (ख) क्य क वह पढ़ रही थी।
“तू सुख से सोई होगी पर
मुझ को नी ंद नही ं आई।
परी कथाएँ पढ़ ते -पढ़ ते
बड़ ी दे र में सो पाई।”
क वता म कारण साफ़ लखा है — वह परी कथाएँ पढ़ रही थी, इसी लए दे र म सो पाई।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) दे र रात तक ग़लत खेल कल हुआ था और वह भी शाम तक — “कल तो तेरे साथ शाम तक, खेल बहुत से खेली म।”
खेल रही थी करन के चले जाने के बाद खेल बंद हो गया था, क्य क तब वह अकेली रह गई थी।
(ख) क्य क वह सही ☼ क वता क अपनी पं क्त है — “परी कथाएँ पढ़ते-पढ़ते बड़ी दे र म सो पाई।” कहानी पढ़ते समय
पढ़ रही थी आगे क्या होगा, यह जानने क ज ासा बनी रहती है, इस लए न द दे र से आती है।
(ग) उसे बहुत गरमी ग़लत क वता म गरमी क कोई बात ही नह है। जो बात पाठ म नह है, वह उत्तर नह बन सकती।
लग रही थी
(घ) वह घूमने गई थी ग़लत घूमने जाने का ज़क्र क वता म कह नह है। बा लका तो रात भर अपने घर म, अपने बस्तर पर ही
थी।
यह बात मज़ेदार है: बा लका सोचती है क करन “सुख से सोई होगी”, पर आगे चलकर करन बताती है क वह तो
कभी सोती ही नह । यानी दोन म से एक भी नह सोई — फ़क बस इतना है क बा लका दे र से सो गई और करन
दूसरी दु नया के ब को जगाने चली गई।
प्र.3 जब करन आई, उस समय बा लका क्या कर रही थी? (क) वह सो रही थी। (ख) वह खेल रही थी। (ग) वह गीत
गा रही थी। (घ) वह पढ़ और लख रही थी।
सूरज का चत्र (☼) बनेगा — (क) वह सो रही थी।
“अरी िकरन तू उठकर इतनी
जल्दी आज चली आई।
मै ं तो िबस्तर में से अपने
अब तक िनकल नही ं पाई।”
बा लका खुद कह रही है क वह अभी तक बस्तर से नकल ही नह पाई है। यानी करन के आने के समय वह बस्तर म सो रही
थी।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) वह सो रही सही ☼ “म तो बस्तर म से अपने, अब तक नकल नह पाई” — यह पं क्त सीधे बता दे ती है क करन के
थी आने तक वह बस्तर म ही थी। करन का काम भी यही है — सोते ब को जगाना।
(ख) वह खेल रही ग़लत खेल पछले दन क बात है — “कल तो तेरे साथ शाम तक…”। सुबह करन के आने के समय वह
थी खेल नह रही थी।
(ग) वह गीत गा रही ग़लत क वता म गीत गाने क कोई बात नह है।
थी
(घ) वह पढ़ और ग़लत पढ़ना उसने रात म कया था — परी कथाएँ। लखने का ज़क्र तो क वता म है ही नह । सुबह करन
लख रही थी आई तब वह बस्तर म थी।
ध्यान द जए: बा लका करन से बात कर रही है, इस लए उस पल वह जाग चुक है। पर प्रश्न पूछ रहा है क जब
करन आई, उस समय वह क्या कर रही थी — और तब वह सो ही रही थी। करन के आने से ही उसक न द खुली।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 3
क वता पर सोच- वचार के प्रश्न
सो चए और ल खए
प्र.1 करन ने दूसरी दु नया म जाने क बात क्य कही होगी?
क्य क हमारी धरती गोल है और घूमती रहती है। जब हमारे यहाँ रात होती है, तब धरती के दूसरी ओर दन होता है। करन वह
चली जाती है। उसी हस्से को क वता म “दूसरी दु नया” कहा गया है।
“त म्ु हे ं सुलाकर एक दू सरी
दुिनया में मै ं जाती हूँ।
बच् चे जो िबस्तर में सोए
होते , उन्हे ं जगाती हूँ।”
करन के इस उत्तर के पीछे तीन बात ह —
1. यह व ान क स ी बात है। पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। उसका जो भाग सूरज के सामने आता है, वहाँ दन हो जाता है
और पीछे वाले भाग म रात। यही बात पुस्तक ने पृष्ठ 6 के इसे भी जा नए बक्से म समझाई है।
2. वह बा लका को समझा रही है। बा लका सोच रही थी क करन “सुख से सोई होगी”। करन बताती है क वह सोती नह —
उसका काम कह और चलता रहता है।
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3. “दूसरी दु नया” कहना ज़्यादा सुंदर लगता है। क व चाहते तो लख दे ते “पृथ्वी के दूसरे भाग म जाती हूँ।” पर ब क
क वता म दूसरी दु नया कहने से मन म एक जादू-सा दृश्य बनता है — जैसे करन कोई सहेली हो जो दूर कसी अनजाने दे श क
सैर पर नकल जाती हो।
असली अथ यही है: “दूसरी दु नया” कोई प रय का दे श नह है। वह हमारी ही धरती का दूसरा हस्सा है — कोई
और दे श, जहाँ उस समय सुबह हो रही होती है और ब े बस्तर म सोए होते ह।
प्र.2 “वहाँ शाम हो जाती है तो / लौट यहाँ फर आती ँ।” उपयुक्त पं क्तय म ‘वहाँ’ और ‘यहाँ’ शब्द कसके लए
प्रयुक्त हुए ह?
ये दोन शब्द धरती के दो अलग-अलग हस्स के लए आए ह।
शब्द कसके लए आया है कैसे पता चला
वहाँ वह दूसरी दु नया, यानी धरती का दूसरा भाग — कोई और दे श, इससे ठ क पहले क पं क्तयाँ ह — “तुम्ह सुलाकर एक
जहाँ करन बा लका को सुलाकर जाती है और वहाँ के सोए ब दूसरी दु नया म म जाती हूँ।” तो ‘वहाँ’ का मतलब वही
को जगाती है। दूसरी दु नया है।
यहाँ बा लका का अपना घर, अपना गाँव-शहर, अपना दे श — वह पूरी क वता बा लका के घर पर हो रही बातचीत है। ‘लौट…
जगह जहाँ से करन गई थी। आती हूँ’ का अथ है — जहाँ से गई थी, वह वापस आ
जाती हूँ।
दोन पं क्तय का सरल अथ: जब उस दूसरे दे श म शाम हो जाती है, तब करन वहाँ से चल पड़ती है और लौटकर
फर बा लका के पास आ जाती है। यानी उस दे श क शाम ही यहाँ क सुबह बन जाती है। इसी से पता चलता है क
करन का आना-जाना कभी रुकता नह — वह लगातार घूमती रहती है।
ाकरण क बात: ‘यहाँ’ और ‘वहाँ’ जगह बताने वाले शब्द ह। ‘यहाँ’ पास क जगह के लए आता है और ‘वहाँ’
दूर क जगह के लए — जैसे “मेरी कताब यहाँ रखी है, तुम्हारी वहाँ मेज़ पर है।”
प्र.3 प्रकृ त हम प्रकाश, फल, फूल, लकड़ी, वायु, पानी और बहुत कुछ दे ती है। हम प्रकृ त के लए क्या-क्या कर सकते
ह? सो चए और अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।
प्रकृ त हमसे कुछ माँगती नह । हम बस इतना करना है क उसे नुकसान न पहुँचाएँ और जो लया है, उसे लौटाते रह। ये काम
एक ब ा भी आज से शुरू कर सकता है।
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क्र. हम क्या कर सकते ह इससे प्रकृ त को क्या लाभ होगा
mलगे हुए पेड़ों की as e
1 पेड़ लगाइएoऔर
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पेड़ हवा को साफ़ करते ह, छाया दे ते ह और प क्षय को घर दे ते ह। हर जन्म दन पर एक
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ा कीिजए पौधा लगाना अ आदत है।
a2gl पानी बचाइए ब्रश करते समय नल बंद र खए। टपकते नल क मरम्मत करवाइए। बाल्ट से नहाइए। इससे
न दय और भू म का पानी बचता है।
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3 कू ड़ ा कू ड़ ेदान में ही डािलए
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सड़क, नद और तालाब म फका कूड़ा पानी और म दोन को गंदा करता है और जानवर ag
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उसे खा लेते ह।
4 प्ल ािस्टक की थैल ी कम से कम
aघर से कपड़े का थैला ले जाइए। प्ला स्टक सैकड़ साल तक नह गलता।
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इस्तेमाल कीिजए
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िबजली बचाइए
m a s em खोलकर धूप का
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5 कमरे से नकलते समय पंखा और बत्ती बंद क जए। दन म खड़क
m . उजाला काम म लाइए।
l a se पिक्षयों के िलए पानी और दाना रिखए
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6 गरमी म छत या खड़क पर म के सकोरे म पानी रखने से बहुत-से प क्षय क जान बचती
है।
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जीव-जंतओु ं को मत सताइए
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7 घ सले मत उजा ड़ए, ततली- गलहरी को मत पक ड़ए, कुत्ते- बल्ली को मत मा रए। हर जीव
प्रकृ त m
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का हस्सा है।
8 पास की जगह पैदल या साइिकल से ag गाड़ी का धुआँ हवा को गंदा करता है। पैदल चलने से हवा भी बचती है और सेहत भी बनती
जाइए है।
. comक नई कॉपी
कागज़ बरबाद मत कीिजए
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9 कागज़ पेड़ से बनता है। कॉपी के दोन तरफ़ ल खए और बचे हुए प
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बनाइए।
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eनmा उत्तर: प्रकृ त हम बहुत कुछ देती है, इस लए हम भी उसके लए कुछ करना चा हए। म हर वष अपने जन्म दन पर एक पौधा
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नमू
लगाता हूँ और उसम नयम से पानी डालता हूँ। म ब्रश करते समय नल बंद रखता हूँ, जससे रोज़ बहुत-सा पानी बचता है। म कूड़ा
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हमेशा कूड़ेदान म डालता हूँ और बाज़ार जाते समय घर से कपड़े का थैला ले जाता हूँ। कमरे से नकलते समय म पंखा और बत्ती बंद
कर दे ता हूँ। गरमी म म छत पर एक सकोरे म प क्षय के oलए
.c कर ले तो हमारी धरती बहुत सुंदर हो जाएगी। a g l
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पानी रखता हूँ। म कसी घ सले को नह छे ड़ता और कसी जीव को
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नह सताता। मुझे लगता है क अगर हर ब ा इतना
se भी
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सोचने क बात: प्रकृ त के लए बड़े-बड़े काम करने क ज़रूरत नह है। रोज़ के छोटे -छोटे काम ही सबसे बड़ा फ़क
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डालते ह — क्य क वे रोज़ होते ह। एक दन का बड़ा काम, हर दन के छोटे काम के आगे कम पड़ जाता है।
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agl प्र.4 क वता क कन पं क्तय से पता चलता है क करन बा लका के साथ दन भर रहती है? उन पं क्तय को चुनकर
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ये रह वे पं क्तयाँ —
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
“कल तो ते रे साथ शाम तक
खेल बहुत से खेली मै।
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पर जब तू चल दी सोने को
तो रह गई अके ली मै।
ं ”
इनके साथ क वता क पहली दो पं क्तयाँ भी जोड़ी जा सकती ह —
“अरी िकरन तू उठकर इतनी
जल्दी आज चली आई।”
इन पं क्तय से यह कैसे पता चलता है — दो कदम म सम झए:
पं क्त वह क्या बताती है
“अरी िकरन तू उठकर इतनी जल्दी करन सुबह जल्द आ जाती है — इतनी जल्द क बा लका अभी बस्तर से नकली भी नह ।
आज चली आई।” यानी दन का आरंभ करन के साथ होता है।
“कल तो तेरे साथ शाम तक, खेल बहत
ु बा लका करन के साथ शाम तक खेलती रही। यानी दन का अंत भी करन के साथ ही होता है।
से खेल ी मैं। ”
“पर जब तू चल दी सोने को, तो रह गई बा लका तभी अकेली पड़ी जब करन चली गई। इसका मतलब है क इससे पहले तक वह अकेली
अके ली मैं। ” नह थी — करन उसके साथ थी।
नष्कष: सुबह जल्द आना + शाम तक साथ खेलना + जाने पर अकेलापन — इन तीन बात को जो ड़ए तो साफ़
हो जाता है क करन बा लका के साथ पूरे दन रहती है। असल म यह करन का नह , सूरज के उजाले का दन भर
बने रहना है — सूरज नकलते ही उजाला आता है और डू बते ही चला जाता है।
लखते समय ध्यान र खए: प्रश्न कह रहा है “उन पं क्तय को चुनकर ल खए”। इस लए उत्तर म पं क्तयाँ ज्य क
त्य , उद्धरण चह्न (“ ”) के भीतर ल खए और जैसे क वता म ह वैसे ही अलग-अलग पं क्तय म ल खए।
समझ और अनुभव — पृष्ठ 3
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क वता को अपने आस-पास के जीवन से जो ड़ए
समझ और अनु भ व
प्र.1 “कहने लगी करन यह सुनकर / म ही कब सो पाती ँ। / तुम्ह सुलाकर एक दूसरी / दु नया म म जाती ँ।” करन
कतना प रश्रम करती है, यहाँ से वहाँ नयत समय पर प्र त दन आती-जाती है। आपको अपने आस-पास कौन-
कौन प रश्रम करते दखाई दे ते ह?
मेरे आस-पास बहुत-से लोग करन क तरह रोज़, नयत समय पर प रश्रम करते दखाई दे ते ह। इनम से कई तो हमारे जागने से
पहले ही काम शुरू कर दे ते ह।
कौन क्या प रश्रम करते ह करन से क्या मेल है
िकसान अँधेरे म ही खेत पहुँच जाते ह। जुताई, बुआई, सचाई और मौसम कोई भी हो, काम रुकता नह ।
कटाई — सब धूप-बा रश म करते ह।
सफ़ ाईकम सुबह सबसे पहले सड़क और ग लयाँ साफ़ करते ह, कूड़ा हमारे उठने से पहले ही उनका आधा काम हो चुका
उठाते ह। होता है।
दू धवाला और हर घर तक समय से पहुँचते ह, चाहे सद हो या बा रश। करन क तरह ये भी नयत समय पर आते ह।
अख़ बार वाला
माँ और घर के बड़ े सबसे पहले उठकर खाना बनाते ह, ब को तैयार करते ह “म ही कब सो पाती हूँ” — यह पं क्त उन पर पूरी
और सबसे बाद म सोते ह। उतरती है।
िशक्षक पढ़ाते ह, कॉ पयाँ जाँचते ह और अगले दन क तैयारी करते रोज़ नए ब को नई बात सखाते ह, जैसे करन
ह। रोज़ नए ब को जगाती है।
डॉक्टर और नस रात क पाली म भी अस्पताल म काम करते ह। रात म भी काम — करन क ही तरह।
बस, ऑटो और िरक्शा दन भर लोग को उनक जगह पहुँचाते ह। पूरा दन आते-जाते रहना।
चालक
मज़ दू र और िमस्त्री धूप म ईंट, गारा और लोहा उठाकर मकान, सड़क और पुल कड़ी धूप म भी काम नह रुकता।
बनाते ह।
डािकया और डा कया घर-घर च पहुँचाता है; चौक दार पूरी रात चौक दार तो सचमुच रात भर जागता है।
चौकीदार जागकर पहरा दे ता है।
पशु-पक्षी भी च ट दाना ढोती है, मधुमक्खी फूल-फूल घूमती है, च ड़या बना कहे, बना रुके, हर दन।
तनके ला-लाकर घ सला बनाती है।
नमूना उत्तर: मेरे आस-पास सबसे अ धक प रश्रम म अपनी माँ को करते दे खता हूँ। वे सबसे पहले उठती ह और सबसे बाद म सोती
ह। हमारे मोहल्ले क सफ़ाई करने वाली द द सुबह छह बजे ही झाड़ू लेकर आ जाती ह। दूधवाले भैया बा रश म भी समय पर दूध
दे कर जाते ह। खेत म कसान सूरज नकलने से पहले पहुँच जाते ह और शाम ढलने पर लौटते ह। मुझे लगता है क ये सब लोग
करन जैसे ही ह — इनका काम भी रोज़ का है और इनके बना हमारा दन चल ही नह सकता।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
क वता का भाव: करन शकायत नह करती। वह अपने काम क बात बड़ी सहजता से कहती है — “म ही कब सो
पाती हूँ।” स ा प रश्रमी यही करता है — वह काम करता है, दखावा नह । इसी लए हम ऐसे लोग को दे खकर
उनका आदर करना चा हए और उनके काम को आसान बनाना चा हए।
प्र.2 वे कौन-कौन से लोग ह जो करन क भाँ त आपको जगाते ह, आपके साथ खेलते ह और प्रोत्सा हत करते ह?
उनके लए आप क्या-क्या करते ह, यह भी ल खए।
करन तीन काम करती है — जगाती है, साथ खेलती है और आगे बढ़ने का उत्साह दे ती है। हमारे जीवन म भी ऐसे कई लोग ह।
नीचे तीन काम के हसाब से उन्ह छाँटा गया है।
कौन वे मेरे लए क्या करते ह म उनके लए क्या करता ँ
माँ रोज़ सुबह प्यार से जगाती ह, नाश्ता और तैयार समय पर उठ जाता हूँ, अपना बस्तर खुद ठ क करता हूँ और
बस्ता दे ती ह। घर के छोटे काम म हाथ बँटाता हूँ।
िपताजी पढ़ाई म मदद करते ह और नई चीज़ आज़माने का उनक बात ध्यान से सुनता हूँ और अपनी गलती छपाता नह ।
हौसला दे ते ह।
दादी-दादा कहा नयाँ सुनाते ह और दुख के समय हौसला उनके पास बैठकर बात करता हूँ, अख़बार पढ़कर सुनाता हूँ
बढ़ाते ह। और उनका सामान ला दे ता हूँ।
बड़ े भाई-बहन मेरे साथ खेलते ह और क ठन सवाल समझा दे ते उनक चीज़ बना पूछे नह लेता और उनके काम म मदद करता
ह। हूँ।
िमत्र मैदान म साथ खेलते ह, कुछ छू ट जाए तो बता दे ते अपना ट फ़न बाँटता हूँ, उनक बात सुनता हूँ और झगड़ा नह
ह। करता।
िशक्षक-िशिक्षका नई बात सखाते ह, गलती सुधारते ह और अ ा समय पर वद्यालय जाता हूँ, गृहकाय पूरा करता हूँ और कक्षा
करने पर शाबाशी दे ते ह। को साफ़ रखता हूँ।
सूरज की िकरन सचमुच रोज़ सुबह मुझे जगाते ह। पेड़ नह काटने दे ता, गरमी म प क्षय के लए पानी रखता हूँ
और पक्षी और पौधे लगाता हूँ।
नमूना उत्तर: मुझे रोज़ सुबह मेरी माँ जगाती ह, ठ क करन क तरह। मेरे पताजी और बड़ी बहन मेरे साथ खेलते ह और पढ़ाई म
मेरी हम्मत बढ़ाते ह। कक्षा म मेरी श क्षका मुझे प्रोत्सा हत करती ह, इस लए म क ठन काम से डरता नह । मेरे मत्र मेरे साथ मैदान
म खेलते ह। म इन सबके लए यह करता हूँ क समय पर उठता हूँ, अपना काम खुद करता हूँ, घर के काम म माँ क मदद करता हूँ,
दाद को अख़बार पढ़कर सुनाता हूँ और अपने दोस्त से कभी झगड़ा नह करता। मुझे लगता है क जो लोग हमारे लए इतना करते
ह, उन्ह बदले म हमारा प्यार और थोड़ी-सी मदद ज़रूर मलनी चा हए।
ध्यान द जए: प्रश्न के दो हस्से ह — पहला यह क वे कौन ह, और दूसरा यह क आप उनके लए क्या करते ह।
दूसरा हस्सा भू लए मत, वरना उत्तर अधूरा रह जाएगा।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 आपके घर या प्रदे श म सूय अथवा चाँद से जुड़े कसी एक त्योहार का पता लगाइए और उसके बारे म ल खए।
यह पता लगाकर लखने वाला काम है। पहले जान ली जए क हमारे दे श म सूय और चाँद से जुड़े कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते
ह।
त्योहार सूय या कहाँ मनाया जाता है क्या कया जाता है
चाँद
छठ पूजा सूय बहार, झारखंड, पूव नद या तालाब के कनारे खड़े होकर डू बते और उगते सूय को अ य
उत्तर प्रदे श दया जाता है। ठे कुआ का प्रसाद बनता है।
मकर सं ांित सूय पूरे भारत म, अलग- सूय के उत्तर क ओर बढ़ने का दन। तल-गुड़ के लड्डू बनते ह और पतंग
अलग नाम से उड़ाई जाती है।
पोंगल सूय त मलनाडु नई फ़सल के चावल से म के बरतन म प गल पकाकर सूय को
चढ़ाया जाता है।
िबहू (माघ िबहू) सूय / असम अलाव जलाकर फ़सल कटने क खुशी मनाई जाती है।
फ़सल
रथ सप्तमी सूय द क्षण और प म भारत इसे सूय का जन्म दन माना जाता है। सुबह स्नान कर सूय क पूजा होती
है।
करवा चौथ चाँद उत्तर भारत दन भर व्रत रखकर रात म चाँद दे खने के बाद ही भोजन कया जाता है।
शरद पूिणमा चाँद पूरे भारत म इस रात चाँद सबसे बड़ा और चमक ला दखता है। चाँदनी म खीर
रखकर खाई जाती है।
ईद-उल -िफ़ तर चाँद पूरे भारत म चाँद दखने पर ही ईद मनाई जाती है। इसी लए इससे पहले क रात को
“चाँद रात” कहते ह।
बुद्ध पूिणमा / गुरु चाँद पूरे भारत म पूरे चाँद वाले दन मनाए जाते ह।
पूिणमा (पू णमा)
पता कैसे लगाइए — तीन चरण:
चरण 1 — घर के बड़ से पू छए क आपके यहाँ ऐसा कौन-सा त्योहार मनाया जाता है।
चरण 2 — पू छए क उस दन क्या-क्या बनता है, क्या पहना जाता है और क्या कया जाता है।
चरण 3 — पुस्तकालय क कताब या कैलडर से उसक त थ दे ख ली जए, फर पाँच-छह वाक्य लख डा लए।
नमूना उत्तर (छठ पूजा): हमारे यहाँ सूय से जुड़ा त्योहार छठ पूजा मनाया जाता है। यह द वाली के छह दन बाद आता है और चार
दन तक चलता है। इसम घर क म हलाएँ क ठन व्रत रखती ह। तीसरे दन शाम को सब लोग नद या तालाब के घाट पर जाते ह और
डू बते हुए सूय को अ य दे ते ह। चौथे दन सुबह अँधेरे म ही फर घाट पर जाकर उगते हुए सूय को अ य दया जाता है। बाँस के सूप म
ठे कुआ, केला, ना रयल और ग ा सजाया जाता है। घाट पर द ये जलते ह और छठ के गीत गाए जाते ह। मुझे यह त्योहार इस लए
अ ा लगता है क्य क इसम डू बते हुए सूय को भी उतना ही मान दया जाता है जतना उगते हुए सूय को।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन
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नमूना उत्तर (मकर संक्रां त): हमारे प्रदे श म मकर संक्रां त मनाई जाती है। यह हर वष 14 या 15 जनवरी को आती है। कहा जाता
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है क इस दन से सूय उत्तर क ओर बढ़ने लगता है और दन धीरे-धीरे बड़े होने लगते ह। इस दन तल और गुड़ के लड्डू बनते ह,
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gके आस-पास मनाया जाता
कपड़े और अनाज.cदान करते ह। यही त्योहार त मलनाडु म प गल, असम म बहू और पंजाब म लोहड़ी
क्य क सद म ये शरीर को गरमी दे ते ह। ब े छत पर चढ़कर पतंग उड़ाते ह। कई जगह लोग नद म स्नान करते ह और गरीब को
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है।
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क वता से जो ड़ए: क वता म करन रोज़ आती-जाती है और उससे दन-रात बनते ह। ये त्योहार भी सूय और चाँद
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के इसी नयम से चलने पर टके ह — कब दन बड़े होते ह, कब पूरा चाँद नकलता है, कब नई फ़सल आती है। ag
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इससे पता चलता है क हमारे पुरख ने आकाश को कतने ध्यान से दे खा था।
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अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 4
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सोचकर और कल्पना करके लखने वाले प्रश्न
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अनु मान और कल्पना
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प्र.1 य द करन कभी न आए या न जाए तो क्या होगा?
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इस प्रश्न के दो हस्से ह, इस लए दोन का उत्तर अलग-अलग सो चए — एक, अगर करन कभी आए ही नह ; दो, अगर वह कभी
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जाए ही नह ।
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चार ओर हमेशा अँधेरा रहेगा। कड़ाके क ठं ड पड़ेगी। पेड़-पौधे धूप के बना अपना भोजन नह बना पाएँगे और सूखने लगगे।
कभी न आए फ़सल नह उगेगी, इस लए अनाज खत्म हो जाएगा। कपड़े नह सूखगे। ब े खेलने बाहर नह जा सकगे। हम पता ही नह
चलेगा क सुबह हुई या नह । धीरे-धीरे पृथ्वी पर जीवन ही क ठन हो जाएगा।
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(हमेशा रात
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रहे)
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यिद िकरन रात होगी ही नह । लगातार धूप से बहुत गरमी पड़ेगी। तालाब और न दयाँ सूखने लगगी। उजाले म ठ क से न द नह आएगी
कभी न जाए और सब थके-थके रहगे। मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे — कसी को आराम नह मलेगा। रात म खलने वाले फूल, जैसे
(हमेशा िदन रात-रानी और कुमु दनी, कभी नह खलगे। उल्लू और जुगनू जैसे रात के जीव मु श्कल म पड़ जाएँगे। तारे और चाँद कभी
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रहे) दखाई नह दगे।
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.cअसली बात यह है: दोन म से कोई भी हाल अ ा नह है। दन और रात,agदोन ज़रूरी ह। दन काम करने के लए
m है और रात आराम करने के लए। करन का समय पर आना और समय पर जाना — दोन उतने ही ज़रूरी ह।
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इसी लए क वता म करन कहती है क वह “ नयत समय पर” आती-जाती है।
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नमूना उत्तर: य द करन कभी न आए तो हमेशा रात बनी रहेगी। चार ओर अँधेरा और ठं ड होगी। पेड़-पौधे धूप के बना अपना
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भोजन नह बना पाएँगे और सूख जाएँगे। खेeतmम फ़सल नह होगी और सब भूखे रह जाएँगे। और य द करन कभी न जाए तो हमेशा
as-तालाब सूख जाएँगे और कसी को न द नह आएगी। न चाँद दखेगा, न तारे। इससे म
दन ही रहेगा। बहुत तेज़ गरमी पड़ेगgी,lनद
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समझता हूँ क करन का आना जतना ज़रूरी है, उसका समय पर लौट जाना भी उतना ही ज़रूरी है। दन और रात मलकर ही
जीवन को ठ क से चलाते ह।
प्र.2 य द आपको करन के साथ दूसरी दु नया म जाने का अवसर मले तो आप कहाँ जाना चाहगे और क्य ?
यह कल्पना का प्रश्न है। इसका कोई एक “सही” उत्तर नह है। पर आपक कल्पना के साथ कारण ज़रूर होना चा हए।
कैसे लख — तीन चरण:
चरण 1 — एक जगह चु नए (कोई दे श, समुद्र, पहाड़, जंगल, चाँद या कोई कल्पना का लोक)।
चरण 2 — बताइए क आप वहाँ क्या-क्या दे खना और करना चाहगे।
चरण 3 — बताइए क आप उसी जगह क्य जाना चाहते ह और लौटकर क्या बताएँगे।
कुछ अ े वकल्प और उनके कारण —
कहाँ जाएँगे क्य
धरती का वह िहस्सा जहाँ अभी सुबह यह दे खना क वहाँ के ब े कैसे उठते ह, क्या खाते ह, कौन-सा खेल खेलते ह और कस भाषा म बात
हो रही है करते ह।
समुद के भीतर करन पानी के भीतर भी जाती है। वहाँ रंग- बरंगी मछ लयाँ, मूँगे क च ान और समुद्र कछु ए दे खने
को मलगे।
बफ़ वाले दे श (धु व पदे श) वहाँ कई महीने सूरज डू बता ही नह और कई महीने नकलता ही नह । म दे खना चाहूँगा क वहाँ लोग
रहते कैसे ह।
घने जंगल में यह दे खना क सूरज क करन ऊँचे पेड़ के बीच से छनकर ज़मीन तक कैसे पहुँचती है और कौन-
कौन से जीव उससे जागते ह।
चाँद पर वहाँ से अपनी नीली धरती को दे खना और यह जानना क सुनीता व लयम्स जैसे अंत रक्ष यात्री वहाँ
कैसे रहते ह।
अपने दादा-दादी के गाँव क्य क वहाँ क सुबह शहर से बलकुल अलग होती है — मुग क बाँग, खेत क ह रयाली और चूल्हे
का धुआँ।
नमूना उत्तर: य द मुझे करन के साथ दूसरी दु नया म जाने का अवसर मले तो म धरती के उस हस्से म जाना चाहूँगा जहाँ उस
समय सुबह हो रही होगी। म दे खना चाहता हूँ क वहाँ के ब े कस तरह उठते ह, नाश्ते म क्या खाते ह और स्कूल म कौन-सी भाषा
पढ़ते ह। म उनके साथ कोई खेल भी खेलना चाहूँगा और उन्ह अपना खेल कब ी सखाऊँगा। म उन्ह अपने दे श के त्योहार के बारे म
बताऊँगा और उनसे उनके त्योहार के बारे म पूछूँगा। शाम होते ही म करन के साथ लौट आऊँगा और अपने दोस्त को बताऊँगा क
दु नया के दूसरे कोने म भी ब े हमारे जैसे ही ह — बस उनका दन तब शुरू होता है जब हमारी रात होती है।
दूसरा नमूना (छोटा): म करन के साथ समुद्र के भीतर जाना चाहूँगा। मने सुना है क करन पानी म थोड़ी दूर तक ही जा पाती है
और उससे नीचे अँधेरा रहता है। म दे खना चाहूँगा क जहाँ तक करन पहुँचती है, वहाँ मूँगे कैसे रंग बदलते ह और मछ लयाँ कस
तरह चमकती ह। लौटकर म अपनी कक्षा म समुद्र का एक बड़ा चत्र बनाऊँगा।
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ध्यान र खए: कल्पना करते समय भी क वता का नयम मत तो ड़ए। इस क वता म करन रुकती नह — वह जाती
है और शाम होते ही लौट आती है। इस लए आपक यात्रा भी एक दन क होनी चा हए, हमेशा के लए वह रह जाने
क नह ।
भाषा क बात — पृष्ठ 4 और 5
समानाथ शब्द, वपरीत अथ वाले शब्द और गद्य को क वता का रूप दे ना
भाषा क बात
प्र.1 “कल तो तेरे साथ शाम तक / खेल बहुत से खेली म।” ‘शाम’ के लए हम संध्या, साँझ, सायं जैसे शब्द का भी
प्रयोग करते ह। मलते-जुलते या समान अथ वाले ऐसे शब्द को समानाथ शब्द कहते ह। नीचे दए गए शब्द के
समान अथ वाले शब्द पर घेरा बनाइए — • नभ — आकाश, अंबर, नभचर • हवा — वायु, ोम, पवन • पेड़ —
वशाल, वृक्ष, तरु • फूल — कुसुम, स रता, सुमन • दु नया — भू म, संसार, वश्व
हर पं क्त म तीन शब्द दए ह। उनम से दो समानाथ ह और एक मेल नह खाता। घेरा उन्ह दो पर बनेगा।
शब्द दए गए शब्द घेरा कन पर जो छू ट गया, वह क्य नह
(समानाथ )
नभ आकाश, अंबर, आकाश, अंबर नभचर — इसका अथ है नभ म चलने वाला, यानी पक्षी। यह आकाश नह ,
नभचर आकाश म उड़ने वाला जीव है।
हवा वायु, व्योम, वायु, पवन ोम — इसका अथ है आकाश, हवा नह । यह शब्द ‘नभ’ क पं क्त म जाता।
पवन
पेड़ वशाल, वृक्ष, वृक्ष, तरु वशाल — इसका अथ है बहुत बड़ा। यह कसी चीज़ क वशेषता बताता है,
तरु नाम नह । पेड़ वशाल हो सकता है, पर वशाल का अथ पेड़ नह है।
फू ल कुसुम, स रता, कु सुम, सुमन स रता — इसका अथ है नद । नद और फूल म कोई मेल नह ।
सुमन
दुिनया भू म, संसार, संसार, िवश्व भू म — इसका अथ है ज़मीन, धरती क म । दु नया म केवल ज़मीन नह , उस
वश्व पर रहने वाले सब लोग और चीज़ भी आती ह।
पहचानने का आसान तरीका — दो चरण:
चरण 1 — दए गए शब्द को वाक्य म र खए और उसक जगह हर वकल्प रखकर दे खए।
चरण 2 — जससे वाक्य का अथ नह बदले, वही समानाथ है।
जैसे — “नभ म तारे चमक रहे ह।” → “आकाश म तारे चमक रहे ह।” ✓ · “अंबर म तारे चमक रहे ह।” ✓ ·
“नभचर म तारे चमक रहे ह।” ✗ — अथ बगड़ गया, इस लए नभचर समानाथ नह है।
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जोड़कर याद क जए: इस पाठ से मले समानाथ शब्द —
शाम = संध्या, साँझ, सायं · नभ = आकाश, अंबर, गगन, व्योम · हवा = वायु, पवन, समीर · पेड़ = वृक्ष, तरु, द्रुम ·
फूल = कुसुम, सुमन, पुष्प · दु नया = संसार, वश्व, जगत
प्र.2 (क) दए गए रक्त ान क पू त रेखां कत शब्द के वपरीत अथ वाले शब्द से क जए — (क) म आज यह
परी-कथा प ँ गा, ................. आप पढ़ लेना।
रक्त ान म आएगा — कल।
मै ं आज यह परी-कथा पढ़ ू ँगा, कल आप पढ़ लेन ा।
क्य : रेखां कत शब्द है आज। ‘आज’ का वपरीत शब्द है कल। वाक्य का अथ भी यही माँग रहा है — कताब एक
ही है, इस लए जस दन एक पढ़े गा, उस दन दूसरा नह पढ़ सकता। इस लए दूसरा उसे अगले दन पढ़े गा।
जानने क बात: हद म ‘कल’ शब्द दो काम करता है — बीता हुआ दन भी और आने वाला दन भी। यहाँ ‘पढ़
लेना’ भ वष्य क बात कह रहा है, इस लए ‘कल’ का अथ आने वाला कल है।
प्र.2 (ख) (ख) म जब तक खेलने के लए आई तब तक ह रका चली ................. थी।
रक्त ान म आएगा — गई।
मै ं जब तक खेलने के िलए आई तब तक हिरका चली गई थी।
क्य : रेखां कत शब्द है आई। ‘आना’ का वपरीत है ‘जाना’, इस लए ‘आई’ का वपरीत हुआ गई। वाक्य का अथ
भी यही है — जब तक एक लड़क खेलने पहुँची, तब तक दूसरी वहाँ से नकल चुक थी। इसी लए “चली गई थी”
लखा जाएगा।
ध्यान द जए: यहाँ ‘ह रका’ एक लड़क का नाम है। स्त्री लग है, इस लए ‘गया’ नह , ‘गई’ लखा जाएगा। वपरीत
शब्द भरते समय वाक्य का लग और काल दोन मलाकर दे खए।
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प्र.2 (ग) (ग) वह ................. आया और शाम को चला गया।
रक्त ान म आएगा — सुबह।
वह सुबह आया और शाम को चला गया।
क्य : रेखां कत शब्द है शाम। ‘शाम’ का वपरीत शब्द है सुबह। वाक्य म एक ही व्य क्त के आने और जाने क बात
है, इस लए दोन समय एक-दूसरे के उलट होने चा हए — आया सुबह, गया शाम को। इसका मतलब वह पूरा दन
वह रहा।
जो ड़ए: ‘सुबह’ के समानाथ शब्द ह — प्रातः, भोर, सवेरा। और ‘शाम’ के — संध्या, साँझ, सायं। यानी प्रातः ×
संध्या भी वपरीत जोड़ी बनती है।
प्र.2 (घ) (घ) मेरे जागने और ................. का समय न त है।
रक्त ान म आएगा — सोने।
मेरे जागने और सोने का समय िनिश्चत है।
क्य : रेखां कत शब्द है जागने। ‘जागना’ का वपरीत है ‘सोना’। वाक्य म ‘जागने’ के साथ ‘का’ लगा है, इस लए
दूसरा शब्द भी उसी रूप म आएगा — सोने, न क ‘सोना’।
इस पाठ से बनी वपरीत जो ड़याँ:
आज × कल · आना × जाना · सुबह × शाम · जागना × सोना · दन × रात · उजाला × अँधेरा · यहाँ × वहाँ
क वता से जो ड़ए: यह वाक्य क वता क करन पर भी पूरा बैठता है। करन का भी आने और जाने का समय
न त है — “ नयत समय पर प्र त दन आती-जाती है।”
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“ च ड़याँ गाती गीत चल / हवा चली, खल उठे पेड़ सब।” इन पं क्तय को सामान्य बातचीत के रूप म लखा
जाए तो ऐसे लखगे — “ च ड़याँ गीत गाती हुई उड़ रही थ , हवा चलने लगी, हवा के चलने e
प्र.3
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l गई बात को क वता का
co हलने लग जैसे क वे प्रसन्नता से झूम रही ह ।” आप भी सामान्य ढं ग aसेgकही
पेड़-पौध क
प त्तयाँ.भी
semदे सकते ह। … “चंद्रमा चमक रहा है, तारे भी चमक रहे ह, आकाश म प्रकाश ही प्रकाश हो गया है।” …
aरूप
agl “चंदा चमका तारे चमके / चमका सारा अंबर”। आप भी सामान्य रूप से कही गई कसी बात को क वता के रूप
म लखने का प्रयास क जए।
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agली जए क पुस्तक ने उदाहरण म क्या-क्या बदला।
यह करके दे खने वाला अभ्यास है। पहले यह समझ
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m.
सामान्य बात क वता का क्या बदला
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रूप
coरहाmहै, तारे भी चमक l a
. ‘चंद्रमा’ क जगह छोटा और मीठा शब्दaचंgदा आया। ‘आकाश’ क जगह अंबर
रहेsहैe
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“चंद मा चमक “चंदा चमका
a तारे चमके
aglगया है।”
,ं आकाश में पकाश ही पकाश हो आया। लंबे वाक्य कटकर छोट पं क्तयाँ बन गए। एक ही शब्द चमका बार-बार
चमका सारा आया, जससे लय बन गई।
अंबर”
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gl-सादे वाक्य म लख ली जए।
क वता बनाने के चार चरण:
चरण 1 — जो कहना है, उसे पहले a
सीधे
चरण 2 — फ़ालतू शब्द हटा द जए। “चमक रहा है” को केवल “चमका” कर द जए।
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चरण 3 — जहाँ हो सके, छोटा या मीठा शब्द रख द जए — चंद्रमा → चंदा, आकाश → अंबर, हवा → पवन।
mआवाज़ (तुक) लाने क
चरण 4 — पं क्तयाँ छोट और लगभग बराबर लंबाई क र खए, और अंत म मलती-जुलeती
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co क जए। gl a
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को शश
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a g ना उत्तर — कुछ जोड़े:
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सामान्य बात क वता का रूप
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g l asिकरने ं मेरे कमरे में आ गई है।ं ” सूरज िनकला िकरन आई
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“सुबह हो गई है, सूर ज िनकल आया है और उसकी “
मेरे कमरे धूप छाई”
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बादल आए िबजली चमकी
. -िरमिझम बरसा पानी”
“बादल िघर आए है,ं िबजली चमक रही है और तेज़ बािरश होने लगी है। ” “
se mिरमिझम
com l a
m .“नदी ag “निदया बहती नाव चले
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बह रही है, उसमें नावें चल रही है ं और िकनारे पर बच्चे खेल रहे है।
ं ”
g l a तट पर बच्चे खेल रहे”
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खेत हरे -हरे लहर उठे
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“खेत में हरी फ़ सल लहरा रही है और िकसान उसे दे खकर बहुत खुश है। ” “
िकसान का मन भी झूम उठे ”
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a s em ितनका-ितनका िचिड़ या लाए
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“िचिड़या ितनके ला रही है और पेड़ पर अपना घों स ला बना रही है। ” “
पेड़ पे अपना घर बनाए”
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ध्यान द जए: क वता बनाने के लए तुक मलाना ज़रूरी नह है — पाठ क क वता करन म भी हर पं क्त म तुक
नह है। क वता तब बनती है जब बात थोड़े शब्द म, लय के साथ और एक चत्र बनाते हुए कही जाए। पहले चत्र
बनाइए, तुक अपने आप आ जाएगी।
आपक बातचीत — पृष्ठ 5
प्रकृ त क कसी चीज़ से बातचीत क कल्पना और अ भनय
आपक बातचीत गतवध
प्र.1 क वता म बा लका, करन से बात कर रही है। य द आपको भी नीचे दए गए वकल्प म से कसी से बात करने
का अवसर मले तो आप कससे बात करना चाहगे? अपने चुने गए वकल्प के सामने सही का चह्न ( ) लगाइए ✓
— वृक्ष, पानी, चाँद, पत्ता, हवा, म , ततली, बादल।
यह आपक अपनी पसंद है। कोई एक गोले म सही का चह्न (✓) लगाइए। नीचे आठ वकल्प के लए बताया गया है क उनसे
क्या-क्या बात क जा सकती है — इससे चुनना आसान हो जाएगा।
वकल्प इससे क्या पूछा या कहा जा सकता है
वृक्ष तुम कतने साल के हो? तुम्हारी शाख पर कतने प क्षय का घर है? कोई तुम्ह काटने आए तो तुम्ह कैसा लगता है? धन्यवाद —
तुम हम छाया, फल और साफ़ हवा दे ते हो।
पानी तुम बादल से नद तक कतनी लंबी यात्रा करते हो? हम तुम्ह बरबाद करते ह तो तुम्ह कैसा लगता है? म आज से नल खुला नह
छोड़ूँगा।
चाँद तुम रोज़ अपना आकार क्य बदलते हो? तुम्ह अकेले रात भर जागकर डर नह लगता? क्या सचमुच तुम पर कोई बु ढ़या चरखा
कातती है?
पा तुम हरे से पीले कैसे हो जाते हो? टहनी से टू टकर गरते समय तुम्ह कैसा लगता है? तुम धूप से भोजन कैसे बनाते हो?
हवा तुम दखती क्य नह , पर तुम्हारे बना कोई जी भी नह सकता? तुम कहाँ-कहाँ से होकर आई हो? हम तुम्ह धुएँ से गंदा कर दे ते
ह, इसके लए क्षमा करना।
िम ी एक छोटे -से बीज को इतना बड़ा पेड़ बनाने का जादू तुम्ह कसने सखाया? तुम्ह प्ला स्टक से कतनी तकलीफ़ होती है?
िततली तुम्हारे पंख पर इतने रंग कहाँ से आए? तुम एक फूल पर ज़्यादा दे र क्य नह बैठत ? क्या तुम्ह याद है क तुम पहले इल्ली थ ?
बादल तुम पानी लेकर इतनी दूर तक कैसे उड़ते हो? तुम कभी-कभी बरसना क्य भूल जाते हो? कसान तुम्हारी राह दे खता रह जाता है।
नमूना उत्तर (मने ‘वृक्ष’ चुना): म वृक्ष से बात करना चाहूँगा। म उससे पूछूँगा — “तुम कतने वष के हो? तुमने अब तक कतनी
बा रश और कतनी गर मयाँ दे खी ह?” फर म पूछूँगा क उसक डाल पर कतने प क्षय ने घ सले बनाए ह और उसे कौन-सा पक्षी
सबसे प्रय है। म उससे यह भी पूछूँगा क जब कोई उसक डाल तोड़ता है तो उसे कैसा लगता है। अंत म म उसे धन्यवाद कहूँगा,
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
क्य क वह हम छाया, फल, लकड़ी और साफ़ हवा दे ता है और बदले म कुछ माँगता नह । म उससे वादा करूँगा क म हर वष एक
पौधा लगाऊँगा और उसक दे खभाल करूँगा।
क वता से जो ड़ए: क व ने करन को सहेली बनाकर उससे बात करवाई। इसी तरह जब हम पेड़, पानी या हवा से
बात करने क कल्पना करते ह, तो वे हम चीज़ नह , साथी लगने लगते ह। और जो साथी लगता है, उसे हम कभी
नुकसान नह पहुँचाते। यही इस ग त व ध का असली मक़सद है।
प्र.2 अपने सहपा ठय के साथ चचा क जए क आप इनसे क्या बातचीत करगे?
यह कक्षा म करने वाला काम है। इसे इस तरह क जए —
1. समूह बनाइए। चार-पाँच ब का एक समूह बनाइए। हर ब ा बताए क उसने कौन-सा वकल्प चुना और क्य ।
2. सवाल इक े क जए। हर ब ा अपनी चुनी हुई चीज़ से पूछने के लए तीन सवाल लखे। समूह मलकर तय करे क कौन-सा
सवाल सबसे रोचक है।
3. उत्तर क कल्पना क जए। यह सबसे मज़ेदार हस्सा है। एक साथी सवाल पूछे और दूसरा साथी उस चीज़ बनकर उत्तर दे ।
4. एक वादा जो ड़ए। बातचीत के अंत म हर ब ा उस चीज़ से एक वादा करे — जैसे “म पानी बरबाद नह करूँगा।”
चचा के नयम — तीन बात:
1. एक समय म एक ही ब ा बोले।
2. कसी क कल्पना पर हँ सए मत — कल्पना म कोई उत्तर ग़लत नह होता।
3. हर ब े को बोलने का मौका मले, चाहे वह एक ही वाक्य बोले।
नमूना चचा:
कौन क्या कहता है
आ मर मने बादल चुना है। म उससे पूछूँगा — “तुम इतना सारा पानी लेकर उड़ते कैसे हो?”
स रता मने ततली चुनी है। म पूछूँगी — “तुम्हारे पंख म इतने रंग कहाँ से आए?”
राहुल मने पानी चुना है। म पूछूँगा — “जब हम नल खुला छोड़ दे ते ह, तब तुम्ह कैसा लगता है?”
पूरा समूह हम तीन सवाल चुनकर उनके उत्तर क कल्पना करगे और फर कक्षा के सामने सुनाएँगे।
प्र.3 अपने सहपा ठय क सहायता से इस बातचीत का अ भनय भी क जए।
अब इसी बातचीत को छोटा-सा नाटक बना द जए। दो ब े चा हए — एक ब ा और एक वह चीज़ (पेड़, बादल, पानी…)।
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अ भनय क तैयारी — चार चरण:
चरण 1 — जोड़ी बनाइए और तय क जए क कौन क्या बनेगा।
चरण 2 — छह से आठ संवाद लख ली जए। संवाद छोटे र खए।
चरण 3 — जो चीज़ बन रहा है, वह अपनी आवाज़ बदल ले — पेड़ क आवाज़ धीमी और भारी, ततली क हल्क
और चंचल।
चरण 4 — बना कागज़ दे खे दो बार अभ्यास क जए, फर कक्षा के सामने क जए।
नमूना अ भनय — “ब ा और वृक्ष”
पात्र संवाद
ब ा नमस्ते वृक्ष जी! क्या म आपसे कुछ पूछ सकता हूँ?
वृक्ष पूछो बेटा। म तो यह खड़ा रहता हूँ, कह जाता थोड़े ही हूँ।
ब ा आपको यहाँ खड़े-खड़े कतने वष हो गए?
वृक्ष पचास से ऊपर। तुम्हारे दादाजी भी बचपन म मेरी छाया म खेला करते थे।
ब ा अकेले खड़े रहकर आपका मन नह ऊबता?
वृक्ष अकेला कहाँ हूँ! मेरी डाल पर सात घ सले ह, एक गलहरी है और दोपहर म तुम सब आ जाते हो।
ब ा जब कोई आपक डाल तोड़ता है तब क्या होता है?
वृक्ष दुख होता है, पर मैं िफर भी छाया दे ना बंद नहीं करता। बस इतना करना — कोई काटने आए तो उसे रोक दे ना।
बच्चा वादा रहा, वृक्ष जी। और मैं हर वष एक नया पौधा भी लगाऊँ गा, तािक आपका कोई साथी बन जाए।
अ े अ भनय म यह होना चा हए: आवाज़ पीछे बैठे ब े तक पहुँचे, दोन पात्र एक-दूसरे क ओर दे खकर बोल,
संवाद रटे हुए न लग, और अंत म कोई एक बात ऐसी हो जो सुनने वाले को याद रह जाए — जैसे ऊपर का वादा।
इसे भी जा नए — पृष्ठ 6
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
दन और रात कैसे होते ह — जानकारी का बक्सा
इसे भी जा नए
प्र.1 “हमारी धरती गद क तरह गोल है। वह अपनी धुरी पर घूमती हुई सूय क प रक्रमा करती रहती है। सूय नरंतर
प्रका शत रहता है। पृथ्वी का जो भाग सूय क ओर आ जाता है, वहाँ दन हो जाता है।” — इस बक्से को पढ़कर
बताइए क दन और रात कैसे बनते ह।
दन और रात इस लए बनते ह क्य क धरती गोल है और लगातार घूमती रहती है। सूरज हमेशा जलता रहता है, पर उसका
उजाला एक बार म धरती के आधे भाग पर ही पड़ता है।
चार चरण म सम झए —
1. हमारी धरती गद क तरह गोल है।
2. वह अपनी धुरी पर घूमती रहती है। धुरी वह काल्प नक रेखा है जसके चार ओर धरती लट्टू क तरह नाचती है।
3. सूरज लगातार चमकता रहता है। उसका प्रकाश धरती के जस आधे भाग पर पड़ता है, वहाँ दन होता है।
4. बाक आधा भाग उस समय अँधेरे म रहता है — वहाँ रात होती है। धरती घूमती जाती है, इस लए जो भाग अभी उजाले म है वह
कुछ घंट बाद अँधेरे म चला जाता है। इसी से दन के बाद रात और रात के बाद दन आता रहता है।
सूय का पकाश
सूय िदन रात
धरती (बीच की टू टी रेखा उसकी धुरी है )
धरती का जो आधा भाग सूय के सामने है वहाँ दन है, और पीछे वाले आधे भाग म रात है। धरती घूमती रहती है, इस लए दोन भाग बारी-
बारी से सूरज के सामने आते रहते ह।
घर पर करके दे खए: पुस्तक ने यही प्रयोग चत्र म दखाया है। एक अँधेरे कमरे म मेज़ पर टॉच या लप जलाइए —
वही सूरज है। उसके सामने एक गद या ग्लोब र खए — वही धरती है। गद पर एक जगह चपक बद लगाइए, वही
आपका गाँव है। अब गद को धीरे-धीरे घुमाइए। जब बद बत्ती क ओर आएगी, वहाँ दन होगा; जब पीछे चली
जाएगी, वहाँ रात हो जाएगी।
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क वता से जो ड़ए: अब क वता क वह पं क्त एकदम साफ़ हो जाती है — “तुम्ह सुलाकर एक दूसरी दु नया म म
जाती हूँ।” करन कह ग़ायब नह होती। जब हमारे यहाँ रात होती है, तब वह धरती के दूसरे भाग eपरmपड़ रही होती
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है। वह के ब.coको वह जगा रही होती है।
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एन.सी.ई.आर.ट . ऑ फ सयल यू ूब चैनल। .c
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प्र.2 अ धक जानने के लए आप नम्न वी डयो लक पर भी जा सकते ह — ोत: वी डयो — रात और दन,
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यह दे खने-सुनने वाला काम है। पुस्तक कह रही है क दन और रात को और अ
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तरह समझने के लए आप एन.सी.ई.आर.ट . के
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आ धका रक यू ूब चैनल पर “रात और दन” नाम का वी डयो दे ख सकते ह।
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कैसे दे खए — तीन चरण:
a gl चरण 1 — शक्षक या घर के बड़ क सहायता ली जए। पृष्ठ पर दए क्यू.आर. कोड को मोबाइल के कैमरे से
पढ़वाइए, या एन.सी.ई.आर.ट . के आ धका रक चैनल पर “रात और दन” खो जए।
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चरण 2 — वी डयो दे खते समय कॉपी म तीन बात नोट क जए — धरती कैसे घूमती है, दन कहाँ होता है, रात
कहाँ।
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चरण 3 — दे खने के बाद अपने शब्द म चार वाक्य ल खए क आपने क्या नया सीखा।
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वी डयो दे खने के बाद इन प्रश्न के उत्तर आप स्वयं दे पाएँगे —
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धरती को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने म कतना समय लगता है? (लगभग 24 घंटे — इसी लए एक दन-रात 24 घंटे
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का होता है।)
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la है।)
धरती को सूय क एक प रक्रमा करने म कतना समय लगता है? (लगभग 365 दन — इसी लए एक वष 365 दन का होता
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सूरज पूरब म क्य नकलता है और प म म क्य डू बता है? (क्य क धरती प म से पूरब क ओर घूमती है।)
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aसेsसीधे एन.सी.ई.आर.ट . के आ धका रक यू ूब चैनल पर वी डयो का नाम
ध्यान द जए: कुछ छपी हुई प्र तय म इस जगह क्यू.आर. कोड धुँधला या ख़ाली छपा मल सकता है। ऐसा हो तो
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घबराइए मत — शक्षक क सहायता
खोज ली जए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
सुनीता व लयम्स के बारे म जानकारी एक त्रत क जए
पु स्तकालय एवं अन्य ोत
प्र.1 आपको ात ही होगा क सुनीता व लयम्स भारतीय मूल क अमे रक अंत रक्ष यात्री ह। शक्षक एवं
अ भभावक क सहायता से आप सुनीता व लयम्स के बारे म पुस्तकालय एवं अन्य ोत से जानकारी एक त्रत
क जए।
यह जानकारी जुटाने वाला काम है। पहले यह तय क जए क जानकारी कहाँ से मलेगी, फर उसे क्रम से ल खए।
जानकारी कहाँ से जुटाइए — चार जगह:
1. वद्यालय के पुस्तकालय म “महान वै ा नक” या “अंत रक्ष यात्री” वषय क बाल-पुस्तक।
2. ब क प त्रकाएँ — जैसे चंपक, नंदन, बालहंस, और एन.सी.ई.आर.ट . क प त्रका।
3. पुराने अख़बार क कतरन — जून 2024 और माच 2025 के अख़बार म उनक यात्रा क बहुत चचा हुई थी।
4. शक्षक या अ भभावक क सहायता से नासा और एन.सी.ई.आर.ट . के आ धका रक प े।
जो जानकारी मली, उसे इस तरह क ता लका म सजाइए —
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
बात जानकारी
पूरा नाम सुनीता लन व लयम्स
जन्म 19 सतंबर 1965, यू क्लड (ओहायो), अमे रका
भारत से नाता उनके पता द पक पं ा गुजरात के मेहसाणा ज़ले के झूलासण गाँव के रहने वाले थे। वे डॉक्टर थे और अमे रका जा
बसे। उनक माता उसु लन बोनी स्लोवे नयाई मूल क ह। इसी कारण सुनीता को भारतीय मूल क कहा जाता है।
पहले क्या वे अमे रक नौसेना म अफ़सर थ और हे लकॉप्टर उड़ाती थ । बाद म परीक्षण पायलट बन । सन 1998 म नासा ने उन्ह
करती थीं अंत रक्ष यात्री के लए चुना।
पहली अंतिरक्ष सन 2006–07 म। वे अंतररा ीय अंत रक्ष स्टे शन पर लगभग 195 दन रह ।
यात्रा
दू सरी अंतिरक्ष सन 2012 म, लगभग 127 दन। इस बार वे अंतररा ीय अंत रक्ष स्टे शन क कमांडर बन — यह ज़म्मेदारी सँभालने वाली
यात्रा वे दूसरी म हला थ ।
तीसरी अंतिरक्ष जून 2024 म वे बोइंग स्टारलाइनर यान से गईं। यह यात्रा कुछ ही दन क होनी थी, पर यान म गड़बड़ी आ जाने से उन्ह
यात्रा अंत रक्ष स्टे शन पर ही रुकना पड़ा। वे माच 2025 म सकुशल धरती पर लौट ।
कु ल समय तीन यात्राओं को मलाकर वे लगभग 608 दन अंत रक्ष म रह चुक ह।
स्पेस वॉक उन्ह ने कई बार अंत रक्ष यान से बाहर नकलकर काम कया। म हलाओं म सबसे अ धक समय तक अंत रक्ष म चलने का
क तमान उनके नाम है।
एक रोचक सन 2007 म उन्ह ने अंत रक्ष स्टे शन के ट्रे ड मल पर दौड़कर बोस्टन मैराथन पूरी क । अंत रक्ष म मैराथन दौड़ने वाली वे
बात पहली व्य क्त थ ।
भारत से लगाव वे अपने साथ भगव ता, गणेश जी क छोट मू त और समोसे अंत रक्ष म ले गई थ । भारत आने पर वे अपने पूवज के गाँव
झूलासण भी गईं।
सम्मान सन 2008 म भारत सरकार ने उन्ह पद्म भूषण से सम्मा नत कया।
नमूना उत्तर (लेखन-पु स्तका म इस तरह ल खए): सुनीता व लयम्स भारतीय मूल क अमे रक अंत रक्ष यात्री ह। उनका जन्म
19 सतंबर 1965 को अमे रका के ओहायो राज्य म हुआ था। उनके पता द पक पं ा गुजरात के झूलासण गाँव के थे, इसी लए
भारत उन्ह अपना मानता है। वे पहले अमे रक नौसेना म हे लकॉप्टर पायलट थ । सन 1998 म नासा ने उन्ह अंत रक्ष यात्री चुना। वे
तीन बार अंत रक्ष म जा चुक ह और वहाँ कुल मलाकर लगभग 608 दन रह चुक ह। सन 2012 म वे अंतररा ीय अंत रक्ष स्टे शन
क कमांडर बन । उन्ह ने अंत रक्ष स्टे शन के ट्रे ड मल पर दौड़कर मैराथन भी पूरी क । जून 2024 म वे फर अंत रक्ष गईं, पर यान म
गड़बड़ी के कारण उन्ह वहाँ महीन रुकना पड़ा और वे माच 2025 म सकुशल लौट । भारत सरकार ने उन्ह सन 2008 म पद्म भूषण
दया। उनसे मने यह सीखा क क ठन समय म भी घबराना नह चा हए और अपना काम शां त से करते रहना चा हए।
ध्यान द जए — एक बात जो अकसर गड़बड़ा जाती है: अंत रक्ष म जाने वाली पहली भारतीय मूल क म हला
कल्पना चावला थ । सुनीता व लयम्स दूसरी ह। दोन के नाम अलग-अलग याद र खए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से जो ड़ए: क वता क करन धरती के इस भाग से उस भाग तक जाती है। सुनीता व लयम्स तो धरती से ही
बाहर चली गईं! अंत रक्ष स्टे शन धरती का चक्कर इतनी तेज़ी से लगाता है क वहाँ रहने वाल को एक दन म लगभग
सोलह बार सूरज उगता और डू बता दखाई दे ता है। सो चए, वहाँ करन कतनी बार आती-जाती होगी!
पेड़ का जादू — पृष्ठ 7
पाठ के बाद छपी बना क्रमांक क रचना — वनोद कुमार शुक्ल (इकतारा ट्रस्ट से साभार)
अनु पू र क रचना पे ड़ का जादू
प्र.1 ‘पेड़ का जादू’ म लड़के ने बुआ से क्या पूछा और बुआ ने उसे क्या उत्तर दया?
लड़के ने बुआ से पूछा क उन्ह ने गलहरी कहाँ से खरीद । बुआ ने उत्तर दया क गलहरी खरीद नह जाती — घर म पेड़ हो तो
गलहरी अपने आप आ जाती है।
लड़ के ने कहा — “बुआ ! आपने िगलहरी कहाँ से खरीदी? मै ं भी लूगँ ा। उसे पालूगँ ा।”
बुआ ने कहा — “मेरे घर में पेड़ है। पेड़ के होने से िगलहरी अपने आप आ जाती है।”
बुआ ने आगे और क्या-क्या बताया —
बुआ क बात उसका अथ
“पेड़ पर दे खो। िचिड़याँ बैठी है।
ं िचिड़यों को मैंने नही ं पाला। च ड़याँ भी कसी ने पाली नह । पेड़ ही उन्ह बुला लाया।
पेड़ होने से वे आ गईं। ”
“तुम अपने घर में पेड़ उगा लो तो िगलहरी आ जाएगी। जो चा हए, उसे पकड़ने या ख़रीदने क ज़रूरत नह — उसके रहने क जगह
िचिड़या आएगी।” बना द जए, वह खुद आ जाएगा।
“बाहर धूप होगी तो पेड़ के नीचे छाया आ जाएगी। तब छाया में पेड़ केवल जीव-जंतु नह लाता, छाया भी दे ता है — यानी एक पेड़ से एक
खेल ना अच्छा लगेग ा।” साथ कई फ़ायदे मलते ह।
बुआ ने सीधे “नह ” क्य नह कहा: वे लड़के को डाँट सकती थ क गलहरी पालने क चीज़ नह है। पर उन्ह ने
ऐसा नह कया। उन्ह ने एक बेहतर रास्ता बता दया — पेड़ लगा लो। इस तरह लड़के क इ ा भी पूरी हो जाएगी
और गलहरी भी आज़ाद रहेगी। बड़ का समझाने का यह तरीका सबसे अ ा होता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 इस रचना का नाम ‘पेड़ का जादू’ क्य रखा गया है? वह जादू क्या है?
नाम ‘पेड़ का जादू’ इस लए रखा गया है क्य क पेड़ लगाने भर से बहुत-सी चीज़ अपने आप आ जाती ह — और जो अपने
आप हो जाए, वही तो जादू कहलाता है।
एक पेड़ लगाइए
↓
िगलहरी आ गई · िचिड़ याँ आ गईं · छाया आ गई · खेलने की अच्छी जगह बन गई
यह जादू क्य है — तीन कारण:
1. कुछ ख़रीदना नह पड़ता। लड़का गलहरी ख़रीदना चाहता था। पर पेड़ लगाने के बाद गलहरी बना पैसे के, बना पजरे के
आ जाती है।
2. कुछ पकड़ना नह पड़ता। बुआ कहती ह — “ च ड़य को मने नह पाला। पेड़ होने से वे आ गईं।” कसी को बंद करना नह
पड़ा, फर भी सब पास ह।
3. एक चीज़ से कई चीज़ मलती ह। पेड़ लगाया एक, और मले चार — गलहरी, च ड़या, छाया और खेलने क जगह। इसी को
जादू कहते ह।
रचना का असली भाव: लेखक बहुत सीधे शब्द म एक बड़ी बात कह दे ते ह — प्रकृ त को अपने पास लाने का
तरीका उसे पकड़ना नह , उसके लए जगह बनाना है। गलहरी पजरे म रखी जाए तो वह दुखी होगी; पेड़ पर आए
तो वह भी खुश और हम भी खुश।
लेखक के बारे म: वनोद कुमार शुक्ल हद के प्र सद्ध क व और कहानीकार ह। वे छत्तीसगढ़ के रहने वाले ह। वे
बहुत सरल शब्द म गहरी बात कहने के लए जाने जाते ह। यह रचना इकतारा ट्रस्ट से साभार ली गई है, जो ब के
लए कताब और प त्रकाएँ छापता है।
प्र.3 ‘ करन’ क वता और ‘पेड़ का जादू’ — इन दोन रचनाओं म क्या समानता है? दोन मलकर हम क्या सखाती
ह?
दोन रचनाएँ अलग-अलग ह — एक क वता है और दूसरी बातचीत के रूप म लखा गया छोटा-सा गद्य। पर दोन क बात एक ही
है — हमारा जीवन प्रकृ त से जुड़ा हुआ है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन
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बात करन (क वता) पेड़ का जादू (गद्य)
mनरंकार देव ‘सेवक’ as e
रचनाकार
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वनोद कुमार शुक्ल
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क वता छोट बातचीत (गद्य)
पकृित का कौन- सूरज क करन — यानी प्रकाश पेड़ — यानी ह रयाली
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बात कौन करता है बा लका और करन आपस म
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दोन म प्रकृ त को साथी क तरह दे खा गया है। करन सहेली बनकर बात करती है और पेड़ अपने आप गलहरी और
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च ड़य को बुला लाता है। दोन बना माँगे दे ते ह।
दोन म एक ब ा प्रश्न पूछता है और उसे एक सुंदर उत्तर मलता है — बा लका पूछतीeहैm
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दू सरी समानता
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co गई, लड़का पूछता है क गलहरी कहाँ से खरीद । gl
क तू इतनी जल्द क्य आ
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सीख प्रकृ त क हर चीज़ बना कहे अपना काम करती रहती है — करन रोज़ आती-जाती है, पेड़ चुपचाप छाया दे ता है। हम
भी उनका ध्यान रखना चा हए।
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दोन को जोड़कर दे खए: करन के बना पेड़ m
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हरा नह रह सकता, क्य क प त्तयाँ धूप से ही अपना भोजन बनाती
ह। और पेड़ न हो तो उसी करन क धूपlमaखड़ा रहना मु श्कल हो जाए, क्य क छाया ही नह मलेगी। यानी करन
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और पेड़ एक-दूसरे को पूरा करते ह — ठ क वैसे ही, जैसे दन और रात।
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यहाँ जो ड़ए: ‘सो चए और ल खए’ के तीसरे प्रश्न म पूछा गया था क हम प्रकृ त के लए emक्या कर सकते ह। ‘पेड़
co उसका सबसे आसान उत्तर दे दे ती है — एक पेड़ लगा द जए। बाकagकाम
का .जादू’ l पेड़ खुद कर लेगा।
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अध्याय — एक नज़र म
करन एक क वता है। इसे नरंकार दे व ‘सेवक’ ने लखा है। ‘सेवक’ उनका उपनाम है — यानी वह नाम जो क व अपनी
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क वता के नीचे लखते ह। ये ब के लए क वताएँ लखने वाले जाने-माने क व थे।
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क वता म दो पात्र ह — एक बा लका और दूसरी करन, यानी सूरज क करण। पूरी क वता इन दोन क आपस क बातचीत
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.cक वता क शुरुआत बा लका क शकायत से होती है — “अरी करन तू उठकरagइतनी जल्द आज चली आई।” वह कहती है
है। करन को यहाँ एक सहेली क तरह दखाया गया है, जो बोल सकती है, खेल सकती है और थकती भी नह ।
se m क वह अभी बस्तर से नकल ही नह पाई है। कल शाम तक उसने करन के साथ बहुत खेल खेले थे, पर जैसे ही करन सोने
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चली गई, वह अकेली रह गई।
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फर बा लका अपनी रात क बात बताती है। उसे न द नह आई। वह परी कथाएँ पढ़ते-पढ़ते बड़ी दे र म सो पाई। उसे लगता है
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क करन तो सुख से सोई होगी।
a s e यह क वता का असली भाव खुलता है। करन कहती है — “म ही कब सो पाती हूँ।”
aglदु नया म चली जाती है। वहाँ जो ब े बस्तर म सोए होते ह, उन्ह वह जगाती है। जब वहाँ
इसके बाद करन का उत्तर आता है, और
वह ब को सुलाकर एक दूसरी
शाम हो जाती है, तब वह लौटकर फर यहाँ आ जाती है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
यही क वता का सबसे सुंदर वचार है — करन कभी आराम नह करती। जब हमारे यहाँ रात होती है, तब धरती के दूसरे
भाग म दन होता है। क वता इस बड़ी बात को ब क बातचीत जैसी सरल भाषा म कह दे ती है।
भाषा बहुत आसान है। वाक्य छोटे ह, तुक मलती है (आई–पाई, म–म, हूँ–हूँ), और करन को सहेली मानकर बात क गई है।
इसी से क वता गाने जैसी लगती है और जल्द याद हो जाती है।
अभ्यास म चचा के प्रश्न, सूरज का चत्र बनाकर सही उत्तर चुनने वाले बहु वकल्पी प्रश्न, सोच- वचार और कल्पना के प्रश्न,
समानाथ और वपरीत अथ वाले शब्द का व्याकरण, गद्य को क वता का रूप दे ने का अभ्यास, प्रकृ त से बातचीत क
ग त व ध, दन-रात कैसे होते ह यह बताने वाला इसे भी जा नए बक्सा और सुनीता व लयम्स के बारे म जानकारी जुटाने का
काम दया गया है।
पाठ के बाद पृष्ठ 7 पर बना क्रमांक क एक और रचना छपी है — पेड़ का जादू, जसे वनोद कुमार शुक्ल ने लखा है
(इकतारा ट्रस्ट से साभार)। इसम एक लड़का बुआ से पूछता है क उन्ह ने गलहरी कहाँ से खरीद । बुआ बताती ह क गलहरी
खरीद नह जाती — घर म पेड़ हो तो गलहरी और च ड़याँ अपने आप आ जाती ह, और धूप म पेड़ के नीचे छाया भी मल
जाती है। यही पेड़ का जादू है। ‘ करन’ क तरह यह रचना भी प्रकृ त से हमारा नाता जोड़ती है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
करन सूर ज या चाँद से िनकलने वाली पकाश की “अरी करन तू उठकर इतनी जल्द खड़क से आती करन ने मेरा मुँह
पतली रे खा आज चली आई।” चमका दया।
अरी िकसी लड़की या सहेल ी को प्यार से पुक ारने का “अरी करन तू उठकर…” अरी सुधा, ज़रा इधर तो आ।
शब्द
परी कथाएँ पिरयों की कहािनयाँ “परी कथाएँ पढ़ते-पढ़ते बड़ी दे र म सो दाद हर रात मुझे एक परी कथा
पाई।” सुनाती ह।
सुलाकर सुल ा दे ने के बाद “तुम्ह सुलाकर एक दूसरी दु नया म म माँ छोटे भाई को सुलाकर रसोई म
जाती हूँ।” चली गईं।
जगाती नी ंद से उठाती “ब े जो बस्तर म सोए होते, उन्ह मुगा रोज़ सुबह पूरे गाँव को जगाता
जगाती हूँ।” है।
उपयुक्त ऊपर िलखा हुआ “उपयुक्त पं क्तय म ‘वहाँ’ और उपयुक्त सूची म मेरा नाम भी है।
‘यहाँ’ शब्द…”
प्रयुक्त काम में लाया गया, इस्तेम ाल िकया गया “…शब्द कसके लए प्रयुक्त हुए ह?” इस वाक्य म क ठन शब्द बहुत कम
प्रयुक्त हुए ह।
प रश्रम मेहनत “ करन कतना प रश्रम करती है…” प रश्रम करने वाला वद्याथ कभी
पीछे नह रहता।
नयत समय पहले से तय िकया हआ
ु समय “…यहाँ से वहाँ नयत समय पर रेलगाड़ी नयत समय पर मंच पर
प्र त दन आती-जाती है।” आ गई।
प्रोत्सा हत िहम्मत बढ़ ाना, आगे बढ़ ने के िलए उत्साह दे ना “…आपके साथ खेलते ह और श क्षका ने मुझे दौड़ म भाग लेने
करना प्रोत्सा हत करते ह?” के लए प्रोत्सा हत कया।
समानाथ िमलते-जुल ते या समान अथ वाले शब्द “…ऐसे शब्द को समानाथ शब्द ‘पानी’ और ‘जल’ समानाथ शब्द
शब्द कहते ह।” ह।
नभ आकाश, आसमान “नभ — आकाश, अंबर, नभचर” साँझ को नभ लाल हो गया।
अंबर आकाश “चमका सारा अंबर” अंबर म तारे टम टमा रहे थे।
तरु पेड़, वृक्ष “पेड़ — वशाल, वृक्ष, तरु” आँगन म एक छोटा-सा तरु लगाया
है।
सुमन फू ल “फूल — कुसुम, स रता, सुमन” बगीचे म रंग- बरंगे सुमन खले ह।
पवन हवा “हवा — वायु, व्योम, पवन” शाम क ठं डी पवन बहुत भली
लगती है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 1 करन AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
धुरी वह काल्पिनक रे खा िजस पर कोई चीज़ घूम ती है “वह अपनी धुरी पर घूमती हुई सूय क लट्टू अपनी धुरी पर तेज़ी से घूमता
प रक्रमा करती रहती है।” है।
प रक्रमा िकसी के चारों ओर चक्कर लगाना “…सूय क प रक्रमा करती रहती है।” हमने मं दर क तीन बार प रक्रमा
क।
गोलक गोल आकार की वस्तु; यहाँ पथ्ृ वी का नमूना “…बत्ती को सूय मान ल और गोलक कक्षा म रखे गोलक पर मने भारत
(ग्लोब) को पृथ्वी…” ढूँ ढ़ा।
छाया परछाईं; धूप से बची हुई ठं डी जगह “…पेड़ के नीचे छाया आ जाएगी।” दोपहर म हम बरगद क छाया म
बैठ गए।
साभार धन्यवाद के साथ, आभार सिहत (िकसी से ले क र “(इकतारा ट्रस्ट से साभार)” यह चत्र प त्रका से साभार लया
छापी गई सामग ी पर िलखा जाता है) गया है।
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