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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: मातृभू म
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
1 – 12 16 27 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 25 pages
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: मातृभू म
NCERT कक्षा 6 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 1 मातृभू म के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह क वता सोहनलाल वेद (1906–1988) क
लखी हुई है। पृष्ठ 1 से 12 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से, मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, क वता क रचना,
मलान, अनुमान या कल्पना से, शब्द के रूप, थोड़ा भन्न-थोड़ा समान, आपक बात, वंशी-से, आज क पहेली, झरोखे से, साझी समझ, खोजबीन के
लए और पढ़ने के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 6) 1 – 12
खं ड प्रश्न
16 27
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 3
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए— (1) हद महासागर के लए
क वता म कौन-सा शब्द आया है? • चरण • हमालय • वंशी • सधु
सही उत्तर है — सधु। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
चरण ग़लत ‘चरण’ का अथ है पैर। क वता म यह हमालय के पैर के लए आया है — “नीचे चरण तले झुक”।
हमालय ग़लत हमालय भारत क उत्तरी सीमा पर फैली पवत-माला है, समुद्र नह ।
वंशी ग़लत ‘वंशी’ का अथ है बाँसुरी — “ ीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता”।
सधु सही ★ ‘ सधु’ का अथ है समुद्र। पं क्त है — “नीचे चरण तले झुक, नत सधु झूमता है।” हमालय भारत के उत्तर म
सर ऊँचा कए खड़ा है और द क्षण म उसके चरण म हद महासागर झुककर लहर ले रहा है।
ध्यान द जए: ‘ सधु’ शब्द के दो अथ ह — समुद्र और सधु नद । यहाँ हमालय के ‘चरण ’ क बात हो रही है,
इस लए यहाँ अथ ‘समुद्र’ ही है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 मातृभू म क वता म मुख्य रूप से— • भारत क प्रशंसा क गई है। • भारत के महापुरुष क जय क गई है। •
भारत क प्राकृ तक सुंदरता क सराहना क गई है। • भारतवा सय क वीरता का बखान कया गया है।
सबसे सट क उत्तर है — भारत क प्रशंसा क गई है। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।
बाक तीन बात क वता म ह ज़रूर, पर वे क वता के एक-एक टु कड़े क बात कहती ह। ‘भारत क प्रशंसा’ इन सबको अपने भीतर
समेट लेती है।
वकल्प क वता म कहाँ क्य यह पूरा उत्तर नह
भारत के महापुरुष क राम, सीता, ीकृष्ण, गौतम बुद्ध वाला यह केवल दो छं द क बात है; हमालय, न दय और झरन वाले छं द
जय छं द छू ट जाते ह।
प्राकृ तक सुंदरता क हमालय, सधु, गंगा-यमुना, झरने, यह भी आधी क वता है; महापुरुष वाला भाग इसम नह आता।
सराहना अमराइयाँ, मलय पवन
भारतवा सय क वीरता केवल “वह युद्ध-भू म मेरी” पूरी क वता म वीरता का वणन एक ही शब्द म है, और उसके साथ
का बखान ही “बुद्ध-भू म” यानी अ हसा भी जुड़ी है।
भारत क प्रशंसा पूरी किवता में पकृ ित + महापुरुष + वीरता + पिवत्रता — सब िमलकर एक ही काम
करते है,ं भारत का गुणगान।
संकेत: क वता क टे क ही उत्तर बता दे ती है — “वह पुण्य-भू म मेरी, वह स्वण-भू म मेरी।” क व हर छं द के अंत म
भारत को गव से ‘मेरी’ कहकर पुकारता है।
प्र.3 अब अपने मत्र के साथ चचा क जए और कारण बताइए क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
यह चचा का प्रश्न है। चचा करते समय हर उत्तर के लए क वता क एक पं क्त प्रमाण के रूप म सामने र खए — यही सबसे
मज़बूत कारण होता है।
अ े उत्तर म क्या होना चा हए:
चुने गए वकल्प का अथ अपने शब्द म,
क वता क वह पं क्त जससे वह वकल्प सद्ध होता है,
बाक वकल्प क्य छोड़े — इसका एक-एक वाक्य म कारण।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: मने पहले प्रश्न म ‘ सधु’ इस लए चुना क्य क ‘ सधु’ का अथ समुद्र होता है और क वता म लखा है —
“नीचे चरण तले झुक, नत सधु झूमता है।” हमालय ऊपर आकाश छू रहा है और नीचे उसके पैर म समुद्र लहरा
रहा है — यानी वही हद महासागर। ‘चरण’ का अथ पैर है, ‘ हमालय’ पवत है और ‘वंशी’ बाँसुरी है, इस लए वे
तीन ग़लत ह।
दूसरे प्रश्न म मने ‘भारत क प्रशंसा क गई है’ चुना, क्य क क व पूरी क वता म भारत का ही गुणगान करता है —
कह उसक पहा ड़य और न दय का, कह राम, कृष्ण और बुद्ध का, और हर छं द के अंत म वह उसे “वह मातृभू म
मेरी” कहकर पुकारता है। बाक वकल्प क वता के केवल एक-एक हस्से क बात कहते ह, पूरी क वता क नह ।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 4
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म
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पाठ से
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पाठ से शब्दाथ
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a s emम से चुनकर कुछ शब्द नीचे दए गए ह। अपने समूह म इन पर चचा क जए और इन्ह इनके सही अथ या
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पाठ
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प्र.1
संदभ से मलाइए। शब्द: 1. हमालय 2. त्रवेणी 3. मलय पवन 4. सधु 5. गंगा-यमुना 6. रघुप त 7. श्रीकृष्ण 8.
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सीता 9. गीता 10. गौतम बुद्ध — अथ या संदभ: 1. एक प्र सद्ध महापुरुष, बौद्ध धम के प्रवतक। 2. वसुदेव के पुत्र
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वासुदेव। 3. भारत क प्र सद्ध न दयाँ। 4. तीन न दय क मली हुई धारा, संगम। 5. श्री रामचंद्र का एक नाम,
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दशरथ के पुत्र। 6. द क्षणी भारत के मलय पवत
s emसे चलने वाली सुगं धत वायु। 7. एक प्र सद्ध और प्राचीन ंथ
a gl संवाद ह जो महाभारत म श्री कृष्ण और अजुन के बीच हुए थे। 8.
‘श्रीमद्भगव ता’, इसम वे प्रश्न-उत्तर और
समुद्र, एक नद का नाम। 9. जनक क पुत्री जानक । 10. भारत क उत्तरी सीमा पर फैली पवत-माला।
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शब्द
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1. हमालय भारत क उत्तरी सीमा पर फैली पवत-माला।
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तीन न दय.cक मली हुई धारा, संगम।
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2. त्रवेणी 4
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gl द क्षणी भारत के मलय पवत से चलने वाली सुगं धत वायु।
3. मलय 6 a
पवन
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4. सधु 8 समुद्र, एक नद का नाम।
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5. गंगा- 3 भारत क प्र सद्ध न दयाँ।
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यमुना
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6. रघुप त ी रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।
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7. श्रीकृष्ण 2
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वसुदेव क पुत्र वासुदेव।
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aseजनक क पुत्री जानक ।
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8. सीता 9
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9. गीता 7 एक प्र सद्ध और प्राचीन ंथ ‘ ीमद्भगव ता’, जसम महाभारत म ीकृष्ण और अजुन के
बीच हुए प्रश्न-उत्तर और संवाद ह।
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10. गौतम 1 एक प्र सद्ध महापुरुष, बौद्ध धम के प्रवतक।
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कैसे पहचान: पहले वे जोड़े मलाइए जनके बारे म आप पक्का जानते ह — जैसे ‘गौतम बुद्ध’ और ‘बौद्ध धम के
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प्रवतक’। फर शब्द के भीतर छपे संकेत दे खए — ‘ त्रवेणी’ म ‘ त्र’ यानी तीन, इस लए ‘तीन न दय क धारा’;
s e m इस लए ‘मलय पवत से चलने वाली वायु’; ‘रघुप त’ यानी रघुवंश के
‘मलय पवन’ म ‘मलय’ यानी मलय पवत,
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स्वामी — राम।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? ीकृष्ण को ‘वासुदेव’ इस लए कहते ह क्य क वे वसुदेव के पुत्र थे, और सीता को ‘जानक ’
इस लए कहते ह क्य क वे राजा जनक क पुत्री थ । पता के नाम से बना ऐसा नाम संस्कृत म पतृनाम कहलाता है।
पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 4
पाठ से
पाठ से
प्र.1 क वता म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार कक्षा म अपने समूह म साझा क जए और अपनी लेखन पु स्तका म
ल खए— “वह युद्ध-भू म मेरी, वह बुद्ध-भू म मेरी। वह मातृभू म मेरी, वह जन्मभू म मेरी।”
भावाथ: क व कहता है क मेरा भारत वह भू म है जहाँ बड़े-बड़े युद्ध लड़े गए और वीर ने दे श क रक्षा म प्राण दए — इस लए यह
युद्ध-भू म है। यही वह भू म भी है जहाँ गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर संसार को दया, करुणा और अ हसा का पाठ पढ़ाया — इस लए
यह बुद्ध-भू म है। ऐसी महान धरती ही मेरी माँ है और मने इसी क गोद म जन्म लया है।
इनम वशेष क्या है:
भारत के दो रूप एक साथ। एक ओर श क्त — शत्रु के सामने न झुकने वाला दे श; दूसरी ओर शां त — पूरी दु नया को
अ हसा सखाने वाला दे श। क व यह कहना चाहता है क भारत क स ी महानता इन दोन के मेल म है। बल तभी सुंदर है जब
उसके साथ करुणा हो।
‘युद्ध’ और ‘बुद्ध’ का चमत्कार। इन दो शब्द म केवल पहले अक्षर का अंतर है (य/ब), पर अथ बलकुल उलटे ह। एक जैसी
ध्व न वाले शब्द को पास-पास रखने से पं क्त म जो संगीत बनता है, उसे अनुप्रास कहते ह। यहाँ अथ के उलटे पन से
वरोधाभास का स दय भी बनता है।
‘मेरी’ क चार बार आवृ त्त। चार पं क्तय के अंत म ‘मेरी’ आता है। इससे लय भी बनती है और अपनेपन तथा गव का भाव
भी गहरा होता है।
‘मातृभू म’ और ‘जन्मभू म’। जन्मभू म यानी जहाँ म पैदा हुआ; मातृभू म यानी जो माँ के समान मेरा पालन करती है। क व
दे श को केवल ज़मीन नह , माँ मानता है — यह रूपक है।
चचा के लए: अपने समूह से पू छए — “युद्ध-भू म” और “बुद्ध-भू म”, इन दोन म से क व ने पहले कसे रखा और
क्य ? कई वद्याथ कहगे क युद्ध पहले और बुद्ध बाद म रखने से यह भाव नकलता है क अंत म जीत करुणा क
ही होती है।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 5
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से
प्र.1 क वता को एक बार फर से प ढ़ए और नम्न ल खत के बारे म पता लगाकर अपनी लेखन पु स्तका म ल खए। 1.
कोयल कहाँ रहती है?
कोयल आम के घने बगीच यानी अमराइय म रहती है।
क वता क पं क्त है — “अमराइयाँ घनी ह, कोयल पुकारती है।” ‘अमराई’ का अथ है आम के पेड़ का झुरमुट। घने पेड़ म कोयल
को छाया भी मलती है, आम के बौर और फल भी, और छपने क जगह भी — इसी लए वह वह रहना पसंद करती है।
जानने योग्य: कोयल अपना घ सला नह बनाती। वह कौए के घ सले म अंडे रख दे ती है और कौआ ही उन्ह सेता है।
प्र.2 तन-मन कौन सँवारती है?
मलय पवन तन-मन सँवारती है।
पं क्त है — “बहती मलय पवन है, तन-मन सँवारती है।” मलय पवन वह हवा है जो द क्षणी भारत के मलय पवत से चलती है। वहाँ
चंदन के वन ह, इस लए यह हवा ठं डी भी होती है और सुगं धत भी। ऐसी हवा शरीर क थकान मटा दे ती है (तन सँवारना) और मन
को ताज़गी तथा प्रसन्नता से भर दे ती है (मन सँवारना)।
प्र.3 झरने कहाँ से झरते ह?
झरने भारत क पहा ड़य से झरते ह।
क व कहता है — “झरने अनेक झरते जसक पहा ड़य म।” यहाँ ‘ जसक ’ शब्द मातृभू म यानी भारत के लए आया है। पहाड़ पर
जमी बफ़ पघलकर और वषा का पानी ऊँचाई से नीचे गरकर अनेक झरने बनाता है, और वही आगे चलकर न दय का रूप ले लेता
है।
प्र.4 श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?
ीकृष्ण ने वंशी (बाँसुरी) क मधुर धुन और प वत्र गीता का उपदे श सुनाया था।
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पं क्त है — “ ीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।” ‘पुनीत’ का अथ है प वत्र। महाभारत के युद्ध के समय जब अजुन का मन
डगमगा गया था, तब ीकृष्ण ने उसे कम और कतव्य का जो उपदे श दया, वही श्रीमद्भगव ता कहलाया।
दो चीज़ एक पं क्त म: बाँसुरी कान को मीठ लगती है और गीता मन को दशा दे ती है। क व दोन को एक साथ
रखकर बताता है क इस भू म पर कला भी जन्मी और ज्ञान भी।
प्र.5 गौतम ने कसका यश बढ़ाया?
गौतम बुद्ध ने अपनी मातृभू म भारत का यश बढ़ाया।
पं क्तयाँ ह — “गौतम ने जन्म लेकर, जसका सुयश बढ़ाया, जग को दया सखाई, जग को दया दखाया।” यहाँ ‘ जसका’ भारत के
लए आया है। बुद्ध ने संसार को दया और अ हसा का पाठ पढ़ाया तथा ज्ञान का द पक दखाया। उनके कारण सारी दु नया भारत को
आदर से दे खने लगी — इसी को क व ‘सुयश बढ़ाना’ कहता है।
प्र.6 “न दयाँ लहर रही ह / पग पग छहर रही ह” — ‘लहर’ का अथ होता है— पानी का हलोरा, मौज, उमंग, वेग,
जोश। ‘छहर’ का अथ होता है— बखरना, छतराना, छटकना, फैलना। क वता पढ़कर पता लगाइए और
ल खए— कहाँ-कहाँ छटा छहर रही ह?
छटा भारत के कोने-कोने म, पग-पग पर छहर रही है।
पं क्तयाँ ह — “जगमग छटा नराली, पग पग छहर रही ह।” ‘पग-पग’ का अथ है ‘हर कदम पर’। यानी भारत म जहाँ भी पैर र खए,
वह कोई-न-कोई सुंदर दृश्य बखरा मलेगा। क वता म ये ान गनाए गए ह—
हमालय क ऊँची चो टय पर, जो आकाश को छू ती ह;
चरण म झूमते सधु यानी समुद्र के कनारे;
गंगा, यमुना और त्रवेणी संगम के तट पर;
पहा ड़य म, जहाँ अनेक झरने झरते ह;
झा ड़य म, जहाँ च ड़याँ मस्त होकर चहक रही ह;
घनी अमराइय म, जहाँ कोयल पुकारती है।
भाषा क बात: ‘छहर’ शब्द का अथ है बखरना या फैलना। सुंदरता को यहाँ पानी क तरह बहता और बखरता
हुआ दखाया गया है — यही इस शब्द का कमाल है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
प्र.7 कसका पानी लहर रहा है?
गंगा, यमुना और त्रवेणी — इन न दय का पानी लहर रहा है।
पं क्तयाँ ह — “गंगा यमुन त्रवेणी, न दयाँ लहर रही ह।” ‘लहर’ का अथ है पानी का हलोरा लेना, मौज म बहना। इसी के साथ
क वता के आरंभ म सधु यानी समुद्र भी हमालय के चरण म झूमता हुआ दखाया गया है — “नीचे चरण तले झुक, नत सधु
झूमता है।”
‘लहर’ के दो अथ: यह शब्द पानी क तरंग के लए भी आता है और मन क उमंग के लए भी। यहाँ दोन अथ साथ
चलते ह — न दयाँ पानी क लहर म भी ह और अपनी मौज म भी।
क वता क रचना — पृष्ठ 5
पाठ से
पाठ से काव्य-स दय
प्र.1 “गंगा यमुन त्रवेणी / न दयाँ लहर रही ह” — ‘यमुन’ शब्द यहाँ ‘यमुना’ नद के लए आया है। कभी-कभी क व
क वता क लय और स दय को बढ़ाने के लए इस प्रकार से शब्द को थोड़ा बदल दे ते ह। य द आप क वता को
थोड़ा और ध्यान से पढ़गे तो आपको और भी बहुत-सी वशेषताएँ पता चलगी। आपको जो वशेष बात दखाई द,
उन्ह आपस म साझा क जए और ल खए। जैसे सबसे ऊपर इस क वता का एक शीषक है।
ध्यान से पढ़ने पर इस क वता म ये वशेष बात दखाई दे ती ह—
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म
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वशेषता क वता से उदाहरण इससे क्या होता है
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1. शीषक
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मातभृ िू म
शब्द म बता दे ता है। a g l
सबसे ऊपर लखा है और पूरी क वता का वषय एक ही
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a2.gकl व का नाम — सोहनलाल ि वेद ी क वता के अंत म दाईं ओर लखा है।
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3. चार-चार पं क्तय के पूर ी किवता आठ छोटे-छोटे छंद ों में बँटी है पढ़ने और गाने, दोन म आसानी होती है।
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छं द
4. तुक (तुकांत)
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चूम ता है – झूम ता है; पुक ारती है – सँवारती पं क्तय के अंत क ध्व न मलने से क वता म संगीत आ
है; सुनाई – िसखाई; बढ़ ाया – िदखाया जाता है।
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5. टे क (लौटकर आने “वह जन्मभूिम मेर ी, वह मातभृ िू म मेर ी।” यह हर छं द के बाद लौटती है और मुख्य भाव को बार-बार
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वाली पं क्तयाँ) मन म बैठा दे ती है।
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6. शब्द को लय के लए ‘यमुना’ के स्थान पर ‘यमुन’ एक मात्रा घटने से पं क्त क लय ठ क बैठ जाती है।
बदलना
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पुण् य-भूिम, स्वण-भूिम, जन्मभूिम, मातभृ िू म,
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7. ‘भू म’ से बने अनेक एक ही शब्द के आठ रूप — इससे भारत के आठ अलग-
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शब्द धमभूिम, कमभूिम, युद्ध-भूिम, बुद्ध-भूिम अलग गुण एक साथ सामने आ जाते ह।
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8. मानवीकरण “िहमालय आकाश चूम ता है”, “िसंध ु झूम ता पहाड़ और समुद्र जैसी नज व चीज़ मनुष्य क तरह काम
है”, “कोयल पुक ारती है” करती दखाई जाती ह। इसे मानवीकरण कहते ह।
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9. अनुप्रास “झरने अनेक झरते”, “पग पग छहर”, एक ही ध्व न बार-बार आने से पं क्त कान को मीठ लगती
“जगमग छटा”, “िचिड़याँ चहक” है।
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omशब्द l a
cरुक्त
10. पु.न ag है — ‘पग-पग’ यानी हर कदम पर।
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पग-पग, तन-मन, जगमग अथ म ज़ोर आता
a 11. मलती-जुलती ध्व न
agl युद्ध – बुद्ध; दया – िदया बहुत थोड़े अंतर से अथ पूरा बदल जाता है; यही शब्द-
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वाले उलटे अथ चमत्कार क वता क शोभा है।
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12. रूपक दे श को ‘माँ’ कहना — मात ूम दे श और माँ का भेद मटा दया गया है, इस लए यह रूपक
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है।
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अपने आप दे खए: क वता को ऊँची आवाज़ म प ढ़ए और हर पं क्त के अंत का शब्द अलग से ल खए। तुक अपने
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आप दखाई दे ने लगेगी।
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agl मलान — पृष्ठ 5 और 6
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से
प्र.1 स्तंभ 1 और स्तंभ 2 म कुछ पं क्तयाँ द गई ह। मलते-जुलते भाव वाली पं क्तय को रेखा ख चकर जो ड़ए—
स्तंभ 1: 1. वह जन्मभू म मेरी, वह मातृभू म मेरी। 2. च ड़याँ चहक रही ह, हो मस्त झा ड़य म। 3. अमराइयाँ घनी
ह, कोयल पुकारती है। — स्तंभ 2: 1. यहाँ आम के घने उद्यान ह जनम कोयल आ द पक्षी चहचहा रहे ह। 2. मने
उस भू म पर जन्म लया है। वह भू म मेरी माँ समान है। 3. वहाँ क जलवायु इतनी सुखदायी है क पक्षी पेड़-पौध
के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे ह।
स्तंभ 1 जुड़ेगा स्तंभ 2 क्य
1. वह →2 मने उस भू म पर जन्म लया है। वह भू म ‘जन्मभू म’ का अथ ही है जहाँ जन्म हुआ, और ‘मातृभू म’
जन्मभू म मेरी मेरी माँ समान है। का अथ है माँ के समान भू म। दोन बात इसी वाक्य म ह।
वह मातृभू म
मेरी।
2. च ड़याँ →3 वहाँ क जलवायु इतनी सुखदायी है क ‘मस्त होकर चहकना’ यानी प्रसन्नता से गीत गाना, और
चहक रही ह, पक्षी पेड़-पौध के बीच प्रसन्नता से गीत गा ‘झा ड़याँ’ यानी पेड़-पौधे। पक्षी तभी मस्त होते ह जब
हो मस्त रहे ह। जलवायु सुखदायी हो।
झा ड़य म।
3. अमराइयाँ →1 यहाँ आम के घने उद्यान ह जनम कोयल ‘अमराई’ का अथ ही है आम का घना बगीचा यानी आम का
घनी ह आ द पक्षी चहचहा रहे ह। उद्यान, और वह कोयल पुकार रही है।
कोयल पुकारती
है
मलान क तरक ब: पहले पं क्त का मुख्य शब्द छाँ टए — जैसे ‘अमराइयाँ’। फर स्तंभ 2 म उसी अथ वाला शब्द
ढूँ ढ़ए — ‘आम के घने उद्यान’। एक-दो जोड़े मल जाने पर बचा हुआ जोड़ा अपने आप बन जाता है।
अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 6
पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए— “अमराइयाँ घनी ह / कोयल पुकारती है” — कोयल क्य पुकार रही
होगी? कसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?
यह कल्पना का प्रश्न है, इस लए एक से अ धक उत्तर सही हो सकते ह। पर उत्तर क वता के दृश्य से जुड़ा होना चा हए — घनी
अमराई, वसंत का मौसम और मस्त पक्षी।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
प्रश्न संभव उत्तर
क्य पुकार क्योंिक वसंत आ गया है और आम के पेड़ों पर बौर आ चुक ा है। मौसम की सुंद रता दे खकर उसका मन उमंग से भर गया है
रही होगी? और वह अपनी खुशी रोक नही ं पा रही। कु छ बच्चे यह भी कह सकते है ं िक वह अपने साथी से िबछड़ गई है और उसे ढू ँढ़ रही
है।
कसे पुकार अपने साथी कोयल को; या अमराई के दू स रे पि यों को िक आओ, यह ऋतु िमलकर मनाएँ; या िफर वसंत को ही बुल ा रही है।
रही होगी? किव की दृ िष्ट से वह उन सबको पुक ार रही है जो इस मातभृ िू म की सुंद रता दे खना चाहते है।ं
कैसे पुकार बहतु मीठी, ऊँ ची और लंबी ‘कु हू-कु हू’ की तान में — बार-बार, थोड़ ी-थोड़ ी दे र रुककर, घने प ों में िछपकर। उसकी आवाज़
रही होगी? सुनाई तो दे ती है पर वह िदखाई नही ं दे ती।
नमूना उत्तर: मुझे लगता है क कोयल इस लए पुकार रही होगी क्य क वसंत आ गया है, आम के पेड़ पर बौर लद
गया है और उसका मन खुशी से भर उठा है। वह अपने साथी को पुकार रही होगी, जो अमराई के कसी दूसरे पेड़ पर
बैठा है। वह घने पत्त म छपकर, मीठ और लंबी ‘कुहू-कुहू’ क तान म, थोड़ी-थोड़ी दे र रुक-रुककर पुकार रही होगी
— इसी लए उसक आवाज़ तो सब सुनते ह, पर वह कसी को दखाई नह दे ती।
प्र.2 “बहती मलय पवन है, / तन मन सँवारती है” — पवन कसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?
कसका: मलय पवन इस मातृभू म पर रहने वाले हर प्राणी का तन-मन सँवारती है — यहाँ के लोग का, क व का, और पेड़-पौध
तथा पशु-प क्षय का भी। क वता म इसके ठ क पहले कोयल और च ड़य क बात है, इस लए यह हवा उनके लए भी उतनी ही
सुखदायी है।
कैसे:
ठं डक दे कर। मलय पवन द क्षण के मलय पवत से आती है, जहाँ चंदन के वन ह। इस लए वह शीतल होती है और गरमी क
थकान मटा दे ती है — यही ‘तन सँवारना’ है।
सुगंध दे कर। चंदन और फूल क महक साथ लाने के कारण साँस लेते ही मन प्रसन्न हो जाता है, चड़ चड़ाहट और उदासी दूर
हो जाती है — यही ‘मन सँवारना’ है।
छू कर। हवा जब शरीर से टकराती है तो पसीना सुखा दे ती है और नई ताज़गी भर दे ती है, जैसे कोई माँ थके हुए ब े के सर पर
हाथ फेर दे ।
भाषा क बात: ‘सँवारना’ का सीधा अथ है सजाना-सँभालना, जैसे बाल सँवारना। हवा सचमुच कसी को सजाती
नह — क व ने उसे माँ क तरह काम करते हुए दखाया है। यह मानवीकरण है।
शब्द के रूप — पृष्ठ 6 और 7
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 “जगमग छटा नराली, / पग पग छहर रही ह” — इन पं क्तय म ‘पग’ शब्द दो बार आया है। इसका अथ है ‘हर
पग’ या ‘हर कदम’ पर। शब्द के ऐसे ही कुछ जोड़े नीचे दए गए ह। इनके अथ ल खए— घर-घर, बाल-बाल,
साँस-साँस, दे श-दे श, पवत-पवत
जब कोई शब्द दो बार आता है तो प्रायः उसका अथ ‘हर’ या ‘एक-एक’ हो जाता है। ऐसे शब्द को पुनरुक्त शब्द कहते ह।
शब्द अथ वाक्य म प्रयोग
घर-घर हर घर में, एक -एक घर में स्वतंत्रता दवस पर घर-घर तरंगा लहरा रहा था।
बाल- रोम-रोम, शरीर का एक -एक बाल — यानी पूरा शरीर। मुहावरे माँ का उपकार याद करके म बाल-बाल उनका ऋणी हूँ। /
बाल ‘बाल -बाल बचना’ में इसका अथ है बहुत थोड़े अंतर से बच जाना। गाड़ी सामने से नकल गई और वह बाल-बाल बच गया।
साँस- हर साँस के साथ, पत्येक साँस में साँस-साँस म मुझे अपनी मातृभू म क याद आती है।
साँस
दे श-दे श हर दे श में, एक दे श से दू स रे दे श तक गौतम बुद्ध का संदेश दे श-दे श तक फैल गया।
पवत- हर पवत पर, एक पवत से दू स रे पवत तक बादल पवत-पवत घूमते हुए मैदान तक आ पहुँचे।
पवत
और उदाहरण: गली-गली, कण-कण, क्षण-क्षण, गाँव-गाँव, बूँद-बूँद, नगर-नगर, डाल-डाल। जैसे — “भारत के
कण-कण म इ तहास बसा है।”
प्र.2 “वह युद्ध-भू म मेरी / वह बुद्ध-भू म मेरी” — क वता म ‘भू म’ शब्द म अलग-अलग शब्द जोड़कर नए-नए शब्द
बनाए गए ह। आप भी कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अथ पता क जए— (संकेत— तप, दे व, भारत, जन्म,
कम, कतव्य, मरु, मलय, मल्ल, यज्ञ, रंग, रण, सद्ध आ द)
पुस्तक म ‘भू म’ सूरज के बीच म लखा है और उससे छह बादल नकल रहे ह। हर बादल म एक नया शब्द भ रए। नीचे संकेत म
दए गए सभी शब्द से बने रूप और उनके अथ दए गए ह — इनम से कोई छह चुनकर बादल म ल खए।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
जोड़ा गया शब्द नया शब्द अथ
तप तपोभूिम वह प वत्र ान जहाँ ऋ ष-मु नय ने तप कया हो।
दे व दे वभूिम दे वताओं क भू म; उत्तराखंड को दे वभू म कहा जाता है।
भारत भारतभूिम भारत दे श क धरती।
जन्म जन्मभूिम वह ान जहाँ कसी ने जन्म लया हो।
कम कमभूिम वह ान जहाँ रहकर व्य क्त अपना काम करता है।
कतव्य कतव्यभूिम वह क्षेत्र जहाँ अपना कतव्य नभाना होता है।
मरु मरुभूिम रे गस्तान, बालू से भरी सूखी धरती; जैसे राज ान का थार।
मलय मलयभूिम द क्षण भारत का मलय पवत वाला चंदन-प्रदे श।
मल्ल मल्लभूिम अखाड़ा, कुश्ती लड़ने का मैदान।
यज्ञ यज्ञभूिम वह ान जहाँ यज्ञ कया जाता है।
रंग रंगभूिम रंगमंच, नाटक खेलने क जगह; अखाड़ा भी।
रण रणभूिम युद्ध का मैदान, समरभू म।
सद्ध िस द्धभूिम वह प वत्र ान जहाँ साधक को स द्ध प्राप्त हुई हो।
एक वशेष बात: ‘तप’ के साथ ‘भू म’ जुड़कर तपभू म नह , तपोभू म बनता है। संस्कृत म ‘तपस्’ जैसे शब्द का
‘स्’ जुड़ते समय ‘ओ’ म बदल जाता है — जैसे तपस् + वी = तपस्वी, तपस् + भू म = तपोभू म, मनस् + बल =
मनोबल।
क वता म आए ‘भू म’ वाले शब्द: पुण्य-भू म, स्वण-भू म, जन्मभू म, मातृभू म, धमभू म, कमभू म, युद्ध-भू म,
बुद्ध-भू म — पूरे आठ।
थोड़ा भन्न, थोड़ा समान — पृष्ठ 7 और 8
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म
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पाठ से
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पाठ से शब्द क बात
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a s emको दया सखाई, / जग को दया दखाया।” — ‘दया’ और ‘ दया’ म केवल एक मात्रा का अंतर है, ले कन
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“जग
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प्र.1
इस एक मात्रा के कारण शब्द का अथ पूरी तरह बदल गया है। आप भी अपने समूह म मलकर ऐसे शब्द क सूची
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बनाइए जनम केवल एक मात्रा का अंतर हो, जैसे घड़ा-घड़ी।
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ag दूसर का दुख समझना) और दया ( म का द पक)। ‘द’ के नीचे लगी
पहले क वता वाला उदाहरण दे खए — दया (करुणा,
छोट -सी ‘ि◌’ मात्रा ने पूरा अथ बदल दया।
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शब्द 1 अथ शब्द 2 अथ
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दया
s em िदया द पक
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ag घड़ा पानी भरने का बड़ा म का बरतन घड़ी समय बताने वाला यंत्र
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िदन सूरज नकलने से डू बने तक का समय दीन ग़रीब, दुखी
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कल
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बीता हुआ या आने वाला दन; मशीन
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मन हृदय, चत्त मान आदर, सम्मान
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तन शरीर तान गाने का लंबा स्वर
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धन रुपया-पैसा, संप त्त धान चावल क फ़सल
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agl सुत पुत्र, बेटा सूत धागा
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मल मैल, गंदगी माल सामान, धन
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हल खेत जोतने का औज़ार; समाधान हाल दशा, त
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कारखाना; ‘ मलना’ का रूप मील दूरी नापने क एक इकाई
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कली बना खला फूल काली काले रंग क
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se क्रया का स्त्री लग रूप
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रोटी आटे क बनी हुई चपाती रोती ‘रोना’
a s em सुर
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स्वर, संगीत का स्वर सूर सूरदास; शूरवीर
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क्य ऐसा होता है: हद म मात्रा केवल सजावट नह है — वह ध्व न बदलती है, और ध्व न बदलते ही शब्द ही बदल
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जाता है। इसी लए लखते समय मात्रा क एक छोट -सी भूल भी वाक्य का अथ उलट सकती है, जैसे “वह द न है”
और “वह दन है”।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
स्वयं क जए: अपनी लेखन पु स्तका के एक पन्ने पर दो खाने बनाइए और एक सप्ताह तक ऐसे जोड़े इक े
क जए। पाठ पढ़ते समय जो जोड़ा दखे, तुरंत लख ली जए — महीने भर म लंबी सूची बन जाएगी।
आपक बात — पृष्ठ 8
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 इस क वता म भारत का सुंदर वणन कया गया है। आप भारत के कस ान पर रहते ह? वह ान आपको
कैसा लगता है? उस ान क वशेषताएँ बताइए। (संकेत— प्रकृ त, खान-पान, जलवायु, प्र सद्ध ान आ द)
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इस लए हर वद्याथ का उत्तर अलग होगा। नीचे द गई रूपरेखा से अपना उत्तर बनाइए।
अ े उत्तर म ये पाँच बात होनी चा हए—
1. ान का नाम और वह कस ज़ले तथा राज्य म है;
2. वहाँ क प्रकृ त — नद , पहाड़, खेत, तालाब, पेड़, ऋतुए;ँ
3. वहाँ का खान-पान — कौन-सा व्यंजन प्र सद्ध है;
4. वहाँ क जलवायु — गरमी, सद और वषा कैसी होती है;
5. कोई प्र सद्ध ान या मेला-त्योहार, और अंत म एक वाक्य क यह ान आपको क्य प्रय है।
नमूना उत्तर: म उत्तर प्रदे श के प्रयागराज ज़ले के एक छोटे -से कस्बे म रहता हूँ। मेरा कस्बा गंगा के कनारे बसा है
और वषा के दन म नद का पाट इतना चौड़ा हो जाता है क दूसरा कनारा दखाई ही नह दे ता। चार ओर गेहूँ और
सरस के खेत फैले ह; फागुन म सरस के पीले फूल दे खकर लगता है मानो धरती ने पीली चादर ओढ़ ली हो।
यहाँ क गरमी बहुत तेज़ होती है, वषा जुलाई से सतंबर तक होती है और जनवरी म इतना कोहरा पड़ता है क
सामने क सड़क भी नह दखती। खान-पान म हमारे यहाँ क कचौड़ी-सब्ज़ी और गुड़ क गजक बहुत प्र सद्ध है।
पास ही त्रवेणी संगम है, जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती मलती ह और हर वष माघ मेला लगता है।
मुझे अपना यह ान इस लए अ ा लगता है क्य क यहाँ लोग एक-दूसरे को नाम से पहचानते ह और त्योहार सब
मलकर मनाते ह। क वता पढ़ते हुए जब मने “गंगा यमुन त्रवेणी, न दयाँ लहर रही ह” पं क्त पढ़ , तो लगा क व मेरे
ही शहर क बात कर रहा है।
सुझाव: उत्तर म कम-से-कम एक ऐसी बात ल खए जो केवल आपके ान पर मलती है — कोई पेड़, कोई मठाई,
कोई मेला या कोई पुरानी इमारत। इसी से उत्तर सजीव बनता है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 अपने प रवार के कसी सदस्य या मत्र के बारे म ल खए। उसक कौन-कौन सी बात आपको अ लगती ह?
यह भी आपका अपना उत्तर होगा।
अ े उत्तर म क्या होना चा हए: केवल “वह बहुत अ ह” लखना पयाप्त नह है। हर गुण के साथ एक छोट घटना द जए
जो उस गुण को सद्ध करती हो। तीन से चार गुण काफ़ ह।
क्या लख कैसे लख
प रचय नाम, आपसे िरश्ता, उम, क्या करते है ं
पहला गुण + उदाहरण जैसे “धै यवान है”ं — और वह घटना जब उ न्होंने डाँटने के बजाय समझाया
दूसरा गुण + उदाहरण जैसे “मेहनती है”ं — उनकी िदनचय का एक िचत्र
तीसरा गुण + उदाहरण जैसे “दू स रों की सहायता करते है”ं — कोई एक स च्ची घटना
अंत आप उनसे क्या सीखना चाहते है ं
नमूना उत्तर: म अपनी दाद के बारे म लखना चाहती हूँ। उनका नाम कमला दे वी है और वे सत्तर वष क ह। वे पढ़ -
लखी नह ह, फर भी उन्ह सैकड़ लोकगीत और कहा नयाँ याद ह।
मुझे उनक सबसे अ बात उनका धैय लगती है। पछले वष ग णत के प्रश्न हल न होने पर म रो पड़ी थी। दाद ने
डाँटा नह , बस पास बठाकर कहा — “एक बार म एक ही सवाल।” फर वे मेरे साथ बैठ रह जब तक मने तीन
सवाल हल नह कर लए। दूसरी बात उनक मेहनत है। वे आज भी सबसे पहले उठकर आँगन बुहारती ह और
तुलसी म पानी दे ती ह। तीसरी बात यह क वे दूसर क सहायता करने से कभी पीछे नह हटत — जब पड़ोस क
चाची बीमार पड़ , तो दाद दस दन तक उनके घर का खाना बनाकर भेजती रह ।
म उनसे यह सीखना चाहती हूँ क मु श्कल आने पर घबराना नह , शांत रहकर एक-एक कदम आगे बढ़ना चा हए।
वंशी-से — पृष्ठ 8 और 9
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 “श्रीकृष्ण ने सुनाई, / वंशी पुनीत गीता” — ‘वंशी’ बाँसुरी को कहते ह। यह मुँह से फूँक कर बजाया जाने वाला
एक ‘वाद्य’ यानी बाजा है। नीचे फूँक कर बजाए जाने वाले कुछ वाद्य के चत्र दए गए ह। इनके नाम शब्द-जाल
से खो जए और सही चत्र के नीचे ल खए।
वाद्यों के नामों का शब्द-जाल
श ह ना ई बाँ
अ भं द शं सु
ल को स्व ख री
गो रा र बी न
जा म सी ं गी
पुस्तक (पृष्ठ 8) म छपा शब्द-जाल — पाँच पं क्तयाँ और पाँच स्तंभ; पाँचव पं क्त का दूसरा खाना पुस्तक म खाली
छपा है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
चत्र चत्र म क्या दखाया गया है चत्र के नीचे छपा
संकेत
1. लाल पृष्ठभू म पर एक-दूसरे से जुड़ी लकड़ी क दो न लयाँ, दोन के नचले अ ______________
सरे कटोरे जैसे चौड़े
2. लकड़ी का गोल तूँबा, जसके एक ओर पतली फूँक-नली और दूसरी ओर बी ______________
छे द वाली नली लगी है
3. बाँस क सीधी नली, ऊपर क ओर छह छे द और दोन सर पर लाल-हरी बाँ ______________
धा रयाँ
4. काले धाग से लपटा हुआ मुड़ा हुआ स ग जैसा वाद्य, साथ म एक ज़ंजीर सी ं ______________
5. गहरे रंग क लंबी शंक्वाकार लकड़ी क नली, नीचे पीतल का चौड़ा मुँह और श ______________
ऊपर पतली फूँक-नली
6. चौड़े लकड़ी के मुँह वाली गहरे रंग क नली, जस पर नारंगी डोरी और फुँदने ना ______________
बँधे ह
7. लंबी सीधी लकड़ी क तुरही — ऊपर पतली और नीचे क ओर धीरे-धीरे भं ______________
चौड़ी होती हुई
8. सफ़ेद, चमकदार और घुमावदार समुद्र घ घे का खोल शं ______________
पुस्तक के पृष्ठ 9 पर आठ वाद्य के छाया चत्र दो पं क्तय म छपे ह और हर चत्र के नीचे नाम का पहला अक्षर तथा भरने
के लए एक रक्त रेखा द गई है। छाया चत्र यहाँ नह दए जा सकते, इस लए उनका वणन दया गया है — चत्र
पाठ्यपुस्तक म दे खए।
शब्द-जाल म आठ वाद्य के नाम छपे ह। पुस्तक के पृष्ठ 9 पर आठ चत्र दए ह और हर चत्र के नीचे नाम का पहला अक्षर पहले से
छपा है। उसी अक्षर से शुरू होने वाला नाम शब्द-जाल म ढूँ ढ़ए।
चत्र के नीचे लखे जाने वाले नाम (पुस्तक म जस क्रम से चत्र छपे ह)—
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म
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क्रम दया गया अक्षर पूरा नाम यह क्या है
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अलगोजा राज
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ान-पंजाब का युग्म वाद्य — दो बाँसु रयाँ एक साथ मुँह म लेकर बजाई जाती ह।
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2 बीन तूँबे वाला वाद्य, जसे सपेरे बजाते ह; इसे ‘पुंगी’ भी कहते ह।
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3 बाँ ____ बाँस ुरी बाँस क बनी हुई वंशी — ीकृष्ण का प्रय वाद्य।
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4 सी ं ____ सी ंगी
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पशु के स ग से बना मुड़ा हुआ नर सगा जैसा वाद्य। ag
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5 श ____ शहनाई
a मंगल अवसर पर बजने वाला वाद्य; उस्ताद ब स्मल्लाह ख़ाँ इसके प्र सद्ध वादक थे।
नाद स्वरम
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6 ना ____ द क्षण भारत का शहनाई जैसा बड़ा वाद्य, मं दर और ववाह म बजता है।
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भंक ोरा
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7 भं ____ उत्तराखंड (गढ़वाल) का लंबा तुरही जैसा वाद्य।
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8 शंख समुद्र जीव का खोल, जसे फूँककर बजाया जाता है; पूजा और युद्ध दोन म बजता था।
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agशब्द-जाल म ये नाम कहाँ छपे ह — नीचे हर खाने म अक्षर के साथ उस शब्द का क्रमांक दया है—
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स्तंभ 1 स्तंभ 2 स्तंभ 3 स्तंभ 4 स्तंभ 5
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पं क्त 1 श (5) a (5) ना (5, 6) ई (5) बाँ (3)
पं क्त 2 अ (1) भं (7) द (6) शं (8)
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खa(8)se
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पं क्त 3 ल (1) को (7) स्व (6) री (3)
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पं क्त गो (1) रा (7) र (6) बी (2) न (2)
पं क्त 5 जा (1) — (खाली) म (6) सी ं (4) गी (4)
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m . a
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(5) शहनाई — पं क्त 1 म बाएँ से दाएँ: श + ह + ना + ई
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(6) नादस्वरम — स्तंभ 3 म ऊपर से नीचे: ना + द + स्व + र + म
(3) बाँसुरी — स्तंभ 5 म ऊपर से नीचे: बाँ + सु + री
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(1) अलगोजा — स्तंभ 1 म ऊपर से नीचे: अ + ल + गो + जा
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(7) भंकोरा — स्तंभ 2 म ऊपर से नीचे: भं + को + रा
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(8) शंख — स्तंभ 4 म ऊपर से नीचे: शं + ख
se m (2) बीन — पं क्त 4 म बाएँ से दाएँ: बी + न
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a (4) स गी — पं क्त 5 म बाएँ से दाएँ: स + गी
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. c om
मलान क जाँच: शब्द-जाल के 25 खान म से एक खाना (पं क्त 5, स्तंभ 2) खाली है और बाक 24 अक्षर इन्ह
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आठ नाम म खप जाते ह। केवल ‘ना’m
a s e दो शब्द म साझा है — शहनाई और नादस्वरम म।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? ये सभी सु षर वाद्य कहलाते ह, क्य क इनम हवा फूँकने से ध्व न बनती है। तार वाले वाद्य
( सतार, वीणा) तत वाद्य और थाप वाले वाद्य (ढोल, तबला) अवनद्ध वाद्य कहलाते ह।
आज क पहेली — पृष्ठ 9
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 आज हम आपके लए एक अनोखी पहेली लाए ह। नीचे कुछ अक्षर दए गए ह। आप इन्ह मलाकर कोई साथक
शब्द बनाइए। अक्षर को आगे-पीछे कया जा सकता है यानी उनका क्रम बदला जा सकता है। आप अपने मन से
कसी भी अक्षर के साथ कोई मात्रा भी लगा सकते ह। पहला शब्द हमने आपके लए पहले ही बना दया है। 1. स
म ह ग र = महासागर, 2. ह म य ल, 3. ग ग, 4. भ त र, 5. ल क य, 6. व न प
क्रम अक्षर शब्द कैसे बना
संख्या
1 समहग महासागर म + हा + सा + ग + र (‘म’ और ‘स’ को आगे-पीछे कया, ‘हा’ और ‘सा’ म आ क मात्रा
र लगाई)
2 हमयल िहमालय ह + मा + ल + य (‘ह’ म इ क मात्रा, ‘म’ म आ क मात्रा; ‘य’ और ‘ल’ का क्रम बदला)
3 गग गंगा गं + गा (पहले ‘ग’ पर अनुस्वार, दूसरे पर आ क मात्रा)
4 भतर भारत भा + र + त (‘भ’ म आ क मात्रा; ‘त’ और ‘र’ का क्रम बदला)
5 लकय कोयल को + य + ल (क्रम बदलकर ‘क’ पहले, फर ‘य’, फर ‘ल’; ‘क’ म ओ क मात्रा)
6 वनप पवन प + व + न (‘प’ को सबसे आगे लाया)
मज़े क बात: छह शब्द — महासागर, हमालय, गंगा, भारत, कोयल और पवन — इसी क वता म आए ह या
उससे जुड़े ह। ‘महासागर’ के लए क व ने ‘ सधु’ शब्द रखा है, और ‘पवन’ के लए ‘मलय पवन’।
पहेली सुलझाने क तरक ब: पहले ग नए क कतने अक्षर ह। फर सो चए क पाठ का कौन-सा शब्द उतने ही
अक्षर का है। जैसे ‘ग ग’ म दो अक्षर ह और क वता म दो अक्षर वाली नद है — गंगा।
झरोखे से — पृष्ठ 10
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 आप अपने वद्यालय म ‘वंदे मातरम्’ गाते ह गे। ‘वंदे मातरम्’ बं कम चन्द्र च ोपाध्याय ारा रचा गया था। यह
गीत स्वतंत्रता क लड़ाई म लोग के लए प्रेरणा का ोत था। भारत म इसका ान ‘जन गण मन’ के समान है।
क्या आप इसका अथ जानते-समझते ह? आइए, आज हम पहले इसका अथ समझ लेते ह, फर समूह म चचा
करगे—
पूरे गीत का सार: क व अपने दे श को माँ मानकर उसे प्रणाम करता है। वह कहता है — हे माँ, तू नमल जल से भरी है, मीठे फल
से लद है, द क्षण क शीतल-सुगं धत मलय पवन तुझे ठं डक दे ती है और तेरे खेत हरी-भरी फ़सल से लहलहा रहे ह। तेरी रात चाँदनी
से नहा उठती ह, तेरे वृक्ष खले हुए फूल से सजे रहते ह। तू सदा मुस्कुराने वाली, मीठा बोलने वाली, सुख और वरदान दे ने वाली माँ है
— म तुझे प्रणाम करता हूँ।
पं क्त शब्द का अथ भाव
वंदे मातरम् वंदे = वंदना करता हूँ; मातरम् = माता को हे माता, मैं तुम्हे ं पणाम करता हू!ँ
सुजलाम्, सुफ लाम् सु + जल = अ े जल वाली; सु + फल = अ े तुम जल से भरी हुई हो, फलों से पिरपूण हो।
फल वाली
मलयज शीतलाम् मलयज = मलय पवत से उत्पन्न (चंदन/हवा); मलय से आती हुई पवन तुम्हे ं शीतलता दे ती है।
शीतल = ठं डी
शस्यश्यामलाम्, मातरम् शस्य = अन्न, फ़सल; श्यामल = हरी-भरी तुम अ के खेतों से पिरपूण वंद नीय माता हो!
न्न
शुभज्योत्स्ना पुल िकत शुभ्र = उजली; ज्योत्स्ना = चाँदनी; या मनी = रात तुम्हारी रमणीय राित्र को चंद मा का पकाश शोभायमान
यािमनीम् करता है।
फु ल्लकु सुिमत द मदल फुल्ल = खले हुए; कुसुम = फूल; द्रुम = वृक्ष तुम िखले हुए फू लों के पेड़ों से सुस िज्जत हो।
शोिभनीम्
सुहािसनीम् सुम ध रु भािषणीम् सुहा सनी = सुंदर हँसने वाली; भा षणी = बोलने सदै व हँस ने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली।
वाली
सुखदाम् वरदाम्, मातरम् सुखदा = सुख दे ने वाली; वरदा = वरदान दे ने वाली सुख दे ने वाली, वरदान दे ने वाली माँ — मैं तुम्हे ं पणाम
करता हू!ँ
चचा के लए जानने योग्य बात:
यह गीत बं कमचंद्र च ोपाध्याय ने लखा था और यह उनके उपन्यास आनंदमठ म आया।
स्वतंत्रता सं ाम म जुलूस और सभाएँ इसी गीत से शुरू होती थ ; इसे गाने पर लोग को जेल तक जाना पड़ता था।
इसे राष्ट्रगीत कहा जाता है, जब क ‘जन गण मन’ हमारा राष्ट्रगान है। सम्मान म दोन बराबर ह।
गीत म दे श को माता कहा गया है — ठ क वैसे ही जैसे ‘मातृभू म’ क वता म।
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म AglaSem · NCERT Solutions
करके दे खए: पुस्तक म द गई इंटरनेट कड़ी (national-song.php) पर या क्यू.आर. कोड से इसे संगीत के
साथ सु नए, और फर बताइए क कौन-सी पं क्त सुनकर आपके मन म सबसे सुंदर चत्र बना।
साझी समझ — पृष्ठ 11
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 आपने ‘मातृभू म’ क वता को भी पढ़ा और ‘वंदे मातरम्’ को भी। अब कक्षा म चचा क जए और पता लगाइए क
इन दोन म कौन-कौन सी बात एक जैसी ह और कौन-कौन सी बात कुछ अलग ह।
एक जैसी बात
दोन म दे श को माँ माना गया है। एक म “वह मातृभू म मेरी”, दूसरे म “वंदे मातरम्” यानी ‘माता को प्रणाम’।
दोन दे शभ क्त क रचनाएँ ह और दोन ने स्वतंत्रता सं ाम म लोग को प्रेरणा द ।
दोन म प्रकृ त का स दय छाया हुआ है — न दयाँ और जल, फल-फूल, हरे-भरे खेत या अमराइयाँ, पक्षी।
दोन म ‘मलय पवन’ का उल्लेख है। ‘मातृभू म’ म “बहती मलय पवन है”, ‘वंदे मातरम्’ म “मलयज शीतलाम्”।
दोन म गव और श्रद्धा का भाव है — क व दे श के आगे झुकता भी है और उसे अपना कहकर छाती भी फुलाता है।
दोन गाए जाने वाले गीत ह — इनम तुक और लय है।
कुछ अलग बात
बदु मातृभू म वंदे मातरम्
रचनाकार सोहनलाल ि वेद ी बंिकमचंद च ोपाध्याय
भाषा सरल खड़ ी बोली िहंद ी संस्कृ तिनष्ठ भाषा (बाग्ं ला उपन्यास ‘आनंद मठ’ से )
मुख्य भाव अपनापन और गव — हर पंिक्त में ‘मेरी’ शब्द लौटता है वंद ना — माँ के चरणों में पणाम का भाव
महापुरुष का उल्लेख है — राम, सीता, ीकृ ष्ण, गौतम बुद्ध नही ं — के वल माँ के रूप और सौंद य का वणन
भूगोल िहमालय, िसंध,ु गंगा-यमुना-ित्रवेणी के नाम आते है ं िकसी नदी या पवत का नाम नही,ं के वल िचत्र
वीरता का भाव “वह युद्ध-भूिम मेर ी” में स्पष्ट रूप से है इस अंश में नही;ं यहाँ माँ स्नेहमयी और वरदाियनी है
ान पाठ पुस्तक की एक किवता भारत का रा गीत
नष्कष: दोन रचनाओं का हृदय एक ही है — भारत माँ है। अंतर केवल कहने के ढं ग का है। ‘वंदे मातरम्’ माँ के
सामने सर झुकाता है, ‘मातृभू म’ माँ क गोद म बैठकर गव से कहता है — “यह सब मेरा है।”
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खोजबीन के लए — पृष्ठ 11
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 नीचे पाठ से संबं धत कुछ रचनाएँ द गई ह, इन्ह पुस्तक म दए गए क्यू.आर. कोड क सहायता से पढ़, दे ख व
समझ। • स्वाधीनता क सरगम— वंदना के इन स्वर म • ना हाथ एक शस्त्र हो • पुष्प क अ भलाषा • यह
म हमामय अपना भारत
यह पढ़ने और खोजने क ग त व ध है। पुस्तक के पहले पन्ने पर छपे क्यू.आर. कोड को शक्षक या घर के कसी बड़े क सहायता से
स्कैन क जए और चार रचनाएँ प ढ़ए या सु नए। हर रचना पढ़ने के बाद अपनी लेखन पु स्तका म यह ता लका भ रए।
रचना यह कस बारे म है ‘मातृभू म’ से क्या मेल
स्वाधीनता क सरगम स्वतंत्रता के समय गाए जाने वाले दे शभिक्त गीतों और इससे पता चलता है क ‘मातृभू म’ जैसी क वताएँ
— वंदना के इन स्वर उनके स्वरों का संगह। केवल पढ़ नह जाती थ , गाई भी जाती थ और
म लोग म जोश भरती थ ।
ना हाथ एक शस्त्र हो िबना िकसी हिथयार के , के वल स त्य और अिहंस ा के ‘मातृभू म’ क पं क्त “वह बुद्ध-भू म मेरी” से सीधा
बल पर लड़ ी गई लड़ ाई की बात। जुड़ती है — भारत क श क्त ह थयार म नह ,
करुणा म है।
पुष्प क अ भलाषा एक फू ल की इच्छा िक उसे दे वताओं या राजाओं पर इसी पाठ के अंत म (पृष्ठ 12) यह पूरी क वता द गई
— माखनलाल चतुवद नही,ं बिल्क उस रास्ते पर डाला जाए िजससे दे श पर है। इसम भी ‘मातृ-भू म’ शब्द आता है।
बिलदान दे ने वाले वीर गुज़रते है।ं
यह म हमामय अपना भारत की महानता, उसकी संस्कृ ित और उसके गौरव ‘मातृभू म’ क तरह यह भी भारत क प्रशंसा क
भारत का गान। रचना है।
पढ़ते समय ये तीन बात नोट क जए:
1. रचना का शीषक और रचनाकार का नाम।
2. वह एक पं क्त जो आपको सबसे अ लगी, और वह क्य अ लगी।
3. उस रचना म आया कोई नया शब्द और शब्दकोश से खोजा हुआ उसका अथ।
सुझाव: चार रचनाओं म से कसी एक को कक्षा म सस्वर पढ़कर सुनाइए। सुनने पर क वता का असर पढ़ने से कह
अ धक होता है।
पढ़ने के लए — पृष्ठ 12
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कक्षा 6 हद अध्याय 1 मातृभू म
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पढ़ने के लए
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पढ़ने के लए
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a s emके लए — ‘पुष्प क अ भलाषा’ (माखनलाल चतुवद ): “चाह नह , म सुरबाला के गहन म गूँथा जाऊँ, /
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पढ़ने
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प्र.1
चाह नह , प्रेमी-माला म बध प्यारी को ललचाऊँ, / चाह नह , स ाट के शव पर हे ह र डाला जाऊँ, / चाह नह ,
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दे व के सर पर च ँ भाग्य पर इठलाऊँ, / मुझे तोड़ दे ना वनमाली! / उस पथ म दे ना तुम फक। / मातृ-भू म पर
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शीश चढ़ाने, / जस पथ जाव वीर अनेक।” — इस क वता को प ढ़ए और इसका भाव सम झए।
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भावाथ: इस क वता म एक फूल स्वयं बोल रहा है। वह कहता है क मुझे कोई बड़ी जगह नह चा हए —
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म दे वकन्या के गहन म गूँथा जाना नह चाहता;
coकmे शव पर चढ़ाया जाना भी नह चाहता;
म प्रेमी क माला म परोकर कसी को ललचाना नह चाहता;
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म राजाओं
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म दे वताओं के सर पर चढ़कर अपने भाग्य पर इतराना भी नह चाहता।
उसक एक ही इ ा है — “मुझे तोड़ दे ना वनमाली! उस पथ म दे ना तुम फक।” यानी हे माली, मुझे तोड़कर उस रास्ते पर फक दे ना
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जस रास्ते से वे वीर गुज़रते ह जो मातृभू म पर अपना सर चढ़ाने, यानी प्राण न्योछावर करने जा रहे ह। फूल चाहता है क उन वीर
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के चरण क धूल उस पर पड़े — यही उसके जीवन क सबसे
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मुख्य भाव: दे श पर मर मटने वाल का सम्मानla
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दे शभक्त के काम आ जाए तो उसका जन्मaसाथक हो जाता है।
संसार के सारे सुख , सारे वैभव और स्वग से भी बड़ा है। एक छोटा-सा फूल भी य द
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काव्य-स दय:
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m ‘चाह नह ’ क चार बार आवृ त्त — पहले चार बार ‘नह ’ कहकर क व पाँचव पं क्त म जो ‘हाँ’ कहता है, वह
मानवीकरण — फूल मनुष्य क तरह बोल रहा है और अपनी इ ा बता रहा है।
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ag और भी ज़ोरदार हो जाता है।
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‘शीश चढ़ाना’ — यह मुहावरा है, जसका अथ है प्राण का ब लदान कर दे ना।
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‘मातृभू म’ से संबंध: दोन क वताओं म मातृभू म सबसे ऊपर है। सोहनलाल वेद उसे “युद्ध-भू म” और “बुद्ध-
भू म” कहकर उसका गौरव गाते ह; माखनलाल चतुवद उसी भू म पर मर मटने वाल के माग क धूल बनना चाहते
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अध्याय — एक नज़र म
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मातृभू म सोहनलाल वेद क दे शभ क्त क क वता है। इसम क व भारत को अपनी माँ मानकर उसके प्राकृ तक स दय और
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तgका है — ऊँचा हमालय आकाश चूमता है, चरण म सधु (समुद्र) झूमता है, गंगा-यमुना- त्रवेणी
गौरवशाली इ तहास का गान करता है।
क वता का पहला चत्र प्रकृ a
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लहरती ह, पहा ड़य से झरने झरते ह, अमराइय म कोयल पुकारती है और मलय पवन तन-मन सँवारती है।
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दूसरा चत्र महापुरुष का है — इसी भू म पर रघुप त राम और सीता ने जन्म लया, ीकृष्ण ने वंशी और प वत्र गीता सुनाई,
और गौतम बुद्ध ने जग को दया सखाई।
क वता क टे क है — “वह जन्मभू म मेरी, वह मातृभू म मेरी।” यह हर छं द के बाद लौटती है और भारत को पुण्य-भू म, स्वण-
भू म, धमभू म, कमभू म, युद्ध-भू म और बुद्ध-भू म कहकर पुकारती है।
काव्य-स दय म मानवीकरण ( हमालय चूमता है, सधु झूमता है), अनुप्रास (“पग पग छहर”, “झरने अनेक झरते”) और
पुनरुक्त शब्द (पग-पग) दे खने योग्य ह।
भाषा-अभ्यास म पुनरुक्त शब्द के अथ, ‘भू म’ से बने नए शब्द, एक मात्रा के अंतर वाले शब्द-युग्म (दया- दया), फूँककर
बजाए जाने वाले वाद्य का शब्द-जाल और अक्षर से शब्द बनाने क पहेली शा मल ह। अंत म ‘वंदे मातरम्’ का भावाथ और
माखनलाल चतुवद क ‘पुष्प क अ भलाषा’ पढ़ने को द गई है।
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
सधु समुद (यहाँ िहंद महासागर); एक नदी का नाम भी “नीचे चरण तले झुक, नत सधु भारत के तीन ओर सधु फैला हुआ है।
झूमता है।”
त्रवेणी तीन निदयों की िमली हुई धारा, संग म “गंगा यमुन त्रवेणी” प्रयागराज म गंगा, यमुना और सरस्वती
क त्रवेणी है।
छटा शोभा, सुंद रता “जगमग छटा नराली” वषा के बाद पहाड़ क छटा दे खते ही
बनती है।
छहर िबखरना, िछतराना, फै लना “पग पग छहर रही ह।” फूल क महक सारे आँगन म छहर रही
है।
अमराइयाँ आम के घने बगीचे, आमकुं ज “अमराइयाँ घनी ह” गाँव के बाहर क अमराइय म हम खेलने
जाते ह।
मलय दि णी भारत के मलय पवत से आने वाली “बहती मलय पवन है” मलय पवन के स्पश से थकान मट जाती
पवन सुग ंिधत, शीतल हवा है।
पुनीत पिवत्र “वंशी पुनीत गीता” गंगा का जल पुनीत माना जाता है।
सुयश अच्छी कीित, नेक नामी “ जसका सुयश बढ़ाया” अपने काम से उसने वद्यालय का सुयश
बढ़ाया।
रघुप त ी रामचंद , रघुवंश के स्वामी, दशरथ के पुत्र “जन्मे जहाँ थे रघुप त” रघुप त क कथा रामायण म मलती है।
वंशी बाँस ुर ी, फूँ ककर बजाया जाने वाला वाद्य “ ीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत कृष्ण क वंशी सुनकर गो पयाँ दौड़ पड़ती
गीता” थ।
मस्त मगन, पसन्न, बेिफ़ क्र “हो मस्त झा ड़य म।” ब े मस्त होकर बा रश म नहा रहे थे।
पुण्य-भू म पिवत्र धरती “वह पुण्य-भू म मेरी” भारत को संत क पुण्य-भू म कहा जाता
है।
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