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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 3: पहली बूद
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एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
25 – 32 15 20 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 24 pages
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: पहली बूद
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NCERT कक्षा 6 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 3 पहली बूँद के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह पाठ बाल सा हत्यकार गोपालकृष्ण कौल (1923–
2007) क एक क वता है, जसम वषा क पहली बूँद धरती पर गरने का अ त दृश्य ख चा गया है। पृष्ठ 25 से 32 तक क हर ग त व ध — मेरी
समझ से, मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, क वता क रचना, शब्द एक अथ अनेक, अनेक शब्द के लए एक शब्द, शब्द
पहेली, आपक बात, समाचार माध्यम से, सृजन, इन्ह भी जान, खोजबीन, आइए इंद्रधनुष बनाएँ और झरोखे से — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 6) 25 – 32
खं ड प्रश्न
15 20
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 27
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए— 1. क वता म ‘नव-जीवन
क ले अँगड़ाई’ कसके लए प्रयुक्त हुआ है? • बादल • अंकुर • बूँद • पावस
सही उत्तर है — अंकुर। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
क वता क पं क्त दे खए — “अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन क ले अँगड़ाई।” दोन पं क्तयाँ एक ही वाक्य ह। पहली पं क्त म
जो कता है (अंकुर), वही दूसरी पं क्त म अँगड़ाई ले रहा है।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
बादल ग़लत बादल का ज़क्र क वता म बहुत आगे, तीसरे छं द म आता है — “बजा नगाड़े जगा रहे ह, बादल…”। इस पं क्त
से उसका कोई संबंध नह ।
अंकुर सही ★ बीज से नकला नन्हा अंकुर ही म फोड़कर बाहर आया है। जैसे सोया हुआ ब ा उठते समय अँगड़ाई लेता है,
वैसे ही धरती के भीतर सोया जीवन जागकर तन गया — यही नव-जीवन क अँगड़ाई है।
बूँद ग़लत बूँद तो कारण है, कता नह । बूँद गरी, उससे अंकुर फूटा। अँगड़ाई अंकुर ले रहा है, बूँद नह ।
पावस ग़लत पावस यानी वषा ऋतु — वह समय बताता है (“वह पावस का प्रथम दवस जब”), कोई क्रया नह करता।
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद AglaSem · NCERT Solutions
यह कौन-सा अलंकार है: अंकुर कोई जीव नह , फर भी वह ‘अँगड़ाई ले रहा है’ — नज व या पेड़-पौधे म मनुष्य
जैसा व्यवहार दखाना मानवीकरण कहलाता है। पूरी क वता ऐसे ही चत्र से भरी है।
प्र.2 2. ‘नीले नयन -सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ म ‘काली पुतली’ है— • बा रश क बूँद • नगाड़ा • वृद्ध
धरती • बादल
सही उत्तर है — बादल। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।
पं क्त म दो उपमाएँ साथ-साथ चलती ह। क व पूरे आकाश को एक आँख मान लेता है —
क वता का उसका अथ कससे तुलना
शब्द
अंबर आकाश नीले नयन — क्य क आकाश नीला है, जैसे कसी क नीली आँख
जलधर बादल (जल को धारण काली पुतली — क्य क नीली आँख के बीच जो काली पुतली होती है, वैसे ही नीले
करने वाला) आकाश के बीच काले बादल तैर रहे ह
शब्द ही उत्तर दे दे ता है: ‘जलधर’ = जल + धर, यानी जल धारण करने वाला। पं क्त म वह आकाश म है, इस लए
यहाँ जलधर का अथ बादल ही है, समुद्र नह । और ‘काली पुतली’ क उपमा उसी जलधर को द गई है।
बाक़ वकल्प क्य नह : ‘बा रश क बूँद’ अगली पं क्त म अ ु कही गई ह, पुतली नह । ‘नगाड़ा’ मेघ-गजना के
लए आया है। ‘वृद्ध धरती’ (बूढ़ धरती) तो अं तम छं द म है और वह आँख नह , आँख से आँसू पाने वाली है।
प्र.3 (ख) अब अपने मत्र के साथ चचा क जए क आपने ये उत्तर क्य चुने?
यह चचा का प्रश्न है। चचा म आपका उत्तर तभी मज़बूत माना जाएगा जब आप उसके साथ क वता क एक पं क्त प्रमाण के रूप
म रख सक।
अ चचा म तीन बात होनी चा हए:
आपने कौन-सा वकल्प चुना;
क वता क वह पं क्त जो उसे सद्ध करती है;
बाक़ वकल्प क्य नह चुने — कम-से-कम एक का कारण।
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर:
“पहले प्रश्न म मने अंकुर चुना, क्य क क वता कहती है — ‘अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन क ले अँगड़ाई।’
दोन पं क्तयाँ एक ही वाक्य ह, इस लए अँगड़ाई लेने वाला अंकुर ही है। बूँद तो उसका कारण है, करने वाली नह ।
दूसरे प्रश्न म मने बादल चुना, क्य क क व ने आकाश को नीली आँख कहा है और आँख क काली पुतली उसके बीच
होती है। नीले आकाश के बीच जो काला दखता है, वह बादल ही है। ‘जलधर’ शब्द का अथ भी जल धारण करने
वाला यानी बादल है।”
चचा का असली लाभ: हो सकता है आपका कोई मत्र दूसरा वकल्प चुनकर आया हो। उससे बहस मत क जए
— उससे पू छए क उसने कौन-सी पं क्त के आधार पर चुना। इस तरह पूरी कक्षा को यह आदत पड़ती है क उत्तर
अनुमान से नह , पाठ से नकाला जाता है।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 27
पाठ से
पाठ से शब्दाथ
प्र.1 क वता क कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन पं क्तय म कुछ शब्द रेखां कत ह। दा हनी ओर रेखां कत शब्द के
भावाथ दए गए ह। इनका मलान क जए। — क वता क पं क्तयाँ: 1. आसमान म उड़ता सागर, लगा बज लय
के स्व णम पर 2. बजा नगाड़े जगा रहे ह, बादल धरती क तरुणाई 3. नीले नयन सा यह अम्बर, काली पुतली-से
ये जलधर। 4. वसुंधरा क रोमाव ल-सी, हरी दूब पुलक -मुसकाई। — भावाथ: 1. मेघ-गजना 2. बादल 3. हरी दूब
4. आकाश
सही मलान इस प्रकार है —
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद
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क्र. क वता क पं क्त सही क्य
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(रेखां कत शब्द) भावाथ
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आसमान में उड़ ता बादल बादल बन जाता है। इस लए
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सागर आकाश म तैरता बादल क व को उड़ता हुआ सागर लगता है। सागर सचमुच उड़ नह
सकता — यह बादल का ही दूसरा नाम है।
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मेघ -गजना
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2. बजा नगाड़ े जगा रहे है ं बादल क गड़गड़ाहट इतनी गहरी और लयदार होती है क लगता है कोई बड़ा नगाड़ा
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पीट रहा हो। नगाड़ क यह आवाज़ ही मेघ-गजना है।
3. नीले नयनों सा यह l a
आकाश ag‘अम्बर’ का अथ ही आकाश है और उसे नीली आँख क उपमा द गई है। यानी
अम्बर रेखां कत शब्द जस चीज़ का वणन कर रहे ह, वह आकाश है।
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हरी दू ब
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4. वसुंध रा की रोमाविल - रोमाव ल यानी शरीर पर उगे रोएँ। धरती के शरीर पर उगी बारीक हरी दूब क व को
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सी वसुंधरा के रोएँ जैसी लगती है — और जब वह पुलकती है, तो मानो धरती रोमां चत हो
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उठ हो।
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a gसंlक्षेप म: 1 → 2, 2 → 1, 3 → 4, 4 → 3.
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मलान करने का तरीक़ा: पहले उन जो ड़य को मलाइए जो पक्क ह। ‘अम्बर’ का अथ आकाश है — यह
शब्दकोश क बात है, इसम संदेह नह । ‘रोमावem
a s ल-सी’ के ठ क आगे क वता म ही ‘हरी दूब’ लखा है — यह भी
a है,lइस लए वह मेघ-गजना से जुड़ेगा और ‘उड़ता सागर’ अपने आप बादल से।
पक्का। बचे दो म से नगाड़ा एक ध्व न g
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पं क्तय परm as e
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चचा — पृष्ठ 28
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पाठ से
agl पाठ से
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क वता म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे दcगई mह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका glase
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प्र.1
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क्या अथ समझ म आया? अपने वचार
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aसागर,
कक्षा म अपने समूह म साझा क जए और अपनी लेखन पु स्तका म
ल खए— “आसमान म उड़ता
a g लगा बज लय के स्व णम पर, बजा नगाड़े जगा रहे ह, बादल धरती क
तरुणाई।”
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emक व को लगता है मानो पूरा सागर ही आकाश म उड़ रहा हो। उसने उड़ने के लए बजली क चमक के सुनहरे पंख लगा रखे ह।
पहले सीधा-सादा अथ (भावाथ): समुद्र का जल भाप बनकर ऊपर उठ गया है और बादल के रूप म आकाश म तैर रहा है —
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agl बादल गरजते हुए ऐसे चल रहे ह जैसे नगाड़े बजा रहे ह , और उस नाद से वे सोई हुई धरती क तरुणाई यानी जवानी-ह रयाली को
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जगा रहे ह।
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद AglaSem · NCERT Solutions
क वता का शब्द वास्तव म क्या क व ने क्या बना दया अलंकार
उड़ता सागर बादल बादल पर सीधे सागर का नाम रख दया — ‘सागर के समान’ नह कहा, रूपक
‘सागर ही है’ कहा
िबजिलयों के स्विणम बजली क सुनहरी चमक को उड़ने वाले सुनहरे पंख बना दया रूपक
पर चमक
बजा नगाड़े मेघ-गजना गड़गड़ाहट को नगाड़े क थाप बना दया रूपक
जगा रहे है ं बादल वषा से ह रयाली बादल जगाने वाले और धरती सोई हुई युवती मानवीकरण
लौटना
चचा म यह बात ज़रूर उठाइए: ये पं क्तयाँ केवल आँख से नह , कान से भी दखाई दे ती ह। ‘उड़ता सागर’ और
‘स्व णम पर’ हम दृश्य दे ते ह — नीला-काला वस्तार और सुनहरी लक र। ‘बजा नगाड़े’ हम ध्व न दे ता है। यही
मलकर वषा के आगमन को एक उत्सव जैसा बना दे ते ह — जैसे कह मेला लगने वाला हो और उसक सूचना
नगाड़ा पीटकर द जा रही हो।
अपने शब्द म कहने का एक ढं ग: “मुझे लगता है क व बादल के आने को कसी बारात या जुलूस क तरह दे ख
रहा है — आगे-आगे नगाड़े बज रहे ह, ऊपर सुनहरी बजली चमक रही है, और यह पूरा जुलूस धरती को न द से
जगाने आ रहा है।”
प्र.2 “नीले नयन -सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर। करुणा- वग लत अ ु बहाकर, धरती क चर-प्यास
बुझाई।”
भावाथ: नीला आकाश कसी क नीली आँख -सा है और उसम तैरते काले बादल उन आँख क काली पुत लयाँ। धरती को
महीन से प्यासा तड़पते दे खकर उन आँख का मन करुणा से पघल गया और वे आँसू बहाने लग । बरसती वषा ही वे आँसू ह —
और उन्ह ने धरती क चर-प्यास यानी बहुत लंबे समय से चली आ रही प्यास बुझा द ।
क वता का शब्द अथ अलंकार / प्रभाव
नीले नयनों-सा यह अंबर आकाश नीली आँख जैसा उपमा — ‘सा’ वाचक शब्द से तुल ना साफ़ िदखती है
काली पुतली-से ये जलधर बादल आँख क काली पुतली जैसे उपमा — ‘से ’ वाचक शब्द
करुणा-िवगिलत दया से पघला हुआ मानवीकरण — आकाश दुख अनुभव करता है
अ ु बहाकर वषा क बूँद रूपक — बूदँ ों को सीधे आँस ू कह िदया
धरती की िचर-प्यास धरती का बरस पुराना सूखापन मानवीकरण — धरती को प्यास लगती है
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इन पं क्तय क सबसे सुंदर बात: पूरा चत्र एक ही उपमा से बँधा हुआ है। पहले आकाश आँख बना, फर बादल
उस आँख क पुतली बने, और फर उसी आँख से आँसू भी गरे। तीन बात अलग-अलग नह ह — एक ही चत्र
आगे बढ़ता जाता है। जब कोई उपमा इस तरह पूरे छं द म फैलती चली जाए तो क वता कह अ धक गहरी लगती है।
ध्यान द जए: ‘नीले नयन ’ म ‘न’ ध्व न बार-बार आ रही है — यह अनुप्रास है। इसी से पं क्त गाने जैसी लगती है।
पढ़ते समय इसे ज़ोर से बोलकर दे खए।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 28
पाठ से
पाठ से
प्र.1 क वता को एक बार फर से प ढ़ए और नम्न ल खत के बारे म पता लगाकर अपनी लेखन पु स्तका म ल खए—
बा रश क पहली बूँद से धरती का हष कैसे प्रकट होता है?
पहली बूँद गरते ही धरती का हष चार तरह से प्रकट होता है, और क व ने चार को मनुष्य के हाव-भाव क तरह दखाया है —
क वता क पं क्त धरती का हष कस रूप म दखा
“अंकु र फू ट पड़ा धरती से , नव-जीवन धरती न द से जाग जाती है। जैसे सोया आदमी उठते ही अँगड़ाई लेता है, वैसे ही धरती के भीतर
की ले अँग ड़ाई।” का जीवन अंकुर बनकर बाहर नकल आता है।
“धरती के सूखे अधरों पर, िगरी बूदँ प्यास से सूखे ह ठ पर पानी क बूँद पड़ने जैसा सुख। बूँद को ‘अमृत-सी’ कहा गया है, यानी वह
ृ -सी आकर।”
अम त केवल पानी नह , जीवन दे ने वाली चीज़ है।
“वसुंध रा की रोमाविल-सी, हरी दू ब यह सबसे सीधा प्रमाण है। हरी दूब धरती के रोएँ ह — वे पुलक उठे यानी ख़ुशी से रोमां चत हो
पुल की-मुस काई।” गए, और धरती मुसकरा पड़ी।
“बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला बनने को िफर बूढ़ और थक धरती म फर से नई उमंग जाग जाती है — वह दोबारा फ़सल से लहलहाने के
से ललचाई।” लए ललच उठती है।
ध्यान दे ने क बात: क व कह भी सीधे यह नह कहता क “धरती ख़ुश हो गई।” वह ख़ुशी के लक्षण दखाता है —
अँगड़ाई, रोमांच, मुसकान, ललक। इसी को मानवीकरण कहते ह, और यही इस क वता क जान है।
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प्र.2 क वता म आकाश और बादल को कनके समान बताया गया है?
क वता म दोन क तुलना दो-दो बार, दो अलग-अलग चत्र म क गई है —
कसक तुलना कसके समान क वता क पं क्त
आकाश (अंबर) नीले नयनों यानी नीली आँखों के समान “नीले नयनों-सा यह अंबर”
बादल (जलधर) आँख की काली पुतली के समान “काली पुतली-से ये जलधर।”
बादल (दूसरा आकाश में उड़ ते हएु सागर के समान, िजसने िबजली के सुनहरे “आसमान में उड़ता सागर, लगा िबजिलयों के
चत्र) पंख लगा रखे हों स्विणम पर।”
बादल क बजते हएु नगाड़ ों के समान “बजा नगाड़े जगा रहे है,ं ”
गजना
दोन चत्र का भाव अलग है: पहला चत्र (सागर, पंख, नगाड़े) बादल क श क्त और उत्सव दखाता है — वह
गरजता है, चमकता है, धरती को जगाता है। दूसरा चत्र (नयन, पुतली, अ ु) बादल क करुणा दखाता है — वह
धरती का दुख दे खकर रो पड़ता है। एक ही बादल क व को कभी योद्धा-सा लगता है, कभी माँ-सा।
याद र खए: जहाँ ‘सा’, ‘से’, ‘जैसा’, ‘समान’ जैसे शब्द आएँ वहाँ उपमा होती है (नीले नयन -सा, काली पुतली-से,
अमृत-सी, रोमाव ल-सी)। जहाँ तुलना का शब्द हटाकर सीधे एक चीज़ को दूसरी कह दया जाए, वहाँ रूपक होता है
(उड़ता सागर, बज लय के पर, नगाड़े)।
क वता क रचना — पृष्ठ 28
पाठ से
पाठ से वधा
प्र.1 ‘आसमान म उड़ता सागर, लगा बज लय के स्व णम पर’ क वता क इस पं क्त का सामान्य अथ दे ख तो समुद्र
का आकाश म उड़ना असंभव होता है। ले कन जब हम इस पं क्त का भावाथ समझते ह तो अथ इस प्रकार
नकलता है— समुद्र का जल बज लय के सुनहरे पंख लगाकर आकाश म उड़ रहा है। ऐसे प्रयोग न केवल क वता
क सुंदरता बढ़ाते ह ब ल्क उसे आनंददायक भी बनाते ह। इस क वता म ऐसे दृश्य को पहचान और उन पर चचा
कर।
इस क वता क लगभग हर पं क्त म ऐसा ही कोई “असंभव-सा” दृश्य छपा है। नीचे उन्ह एक साथ रखा गया है — बाएँ शब्दशः
अथ, बीच म असली भावाथ, दाएँ अलंकार।
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क वता क पं क्त शब्दशः अथ (जो असंभव भावाथ (जो क व कहना चाहता है) अलंकार
लगता है)
“नव-जीवन की ले अँग ड़ाई” अंकुर अँगड़ाई ले रहा है बीज के भीतर सोया जीवन जाग गया और म मानवीकरण
फोड़कर तन गया
“धरती के सूखे अधरों पर” धरती के ह ठ ह और वे सूखे ह धरती क म सूखकर फट गई है, वह प्यासी है मानवीकरण
“िगरी बूदँ अम ृत-सी आकर” बूँद अमृत है वह बूँद मरी-सी धरती म फर से जान डाल दे ती उपमा
है
“वसुंध रा की रोमाविल-सी, धरती के शरीर पर रोएँ उगे ह ज़मीन पर उगी बारीक हरी दूब रोएँ जैसी दखती उपमा
हरी दू ब” है
“हरी दू ब पुल की-मुस काई” घास पुलकती और मुसकराती बा रश पड़ते ही घास ताज़ी और चमकदार हो मानवीकरण
है उठ — मानो हँस पड़ी हो
“बजा नगाड़े जगा रहे है”ं बादल नगाड़े बजा रहे ह बादल गरज रहे ह और वह गजना धरती को रूपक +
जगा रही है मानवीकरण
“नीले नयनों-सा यह अंबर” आकाश क आँख ह नीला आकाश कसी क नीली आँख-सा सुंदर उपमा
लगता है
“करुणा-िवगिलत अ ु आकाश रो रहा है बादल बरस रहे ह — मानो दया से पघलकर मानवीकरण +
बहाकर” आँसू बहा रहे ह रूपक
“बूढ़ी धरती … बनने को िफर धरती बूढ़ है और उसका मन बरस से बंजर पड़ी ज़मीन म फर से फ़सल मानवीकरण
से ललचाई” ललचाता है उगाने क उमंग जाग गई
ऐसे प्रयोग क्य कए जाते ह: य द क व सीधे लखता — “बा रश हुई, घास उग आई, ज़मीन गीली हो गई” — तो
यह समाचार होता, क वता नह । धरती को ह ठ दे कर, घास को मुसकान दे कर और बादल को आँसू दे कर क व
पाठक से कहता है क प्रकृ त भी हमारी ही तरह महसूस करती है। इसी से पढ़ते समय हमारे मन म चत्र बनते ह और
क वता याद रह जाती है।
चचा के लए: अपने समूह म तय क जए क इनम से कौन-सा चत्र आपको सबसे अ ा लगा और क्य । फर एक
नया चत्र स्वयं ग ढ़ए — जैसे “धूप ने चादर तान द ”, “हवा पेड़ से कान म कुछ कह गई”। यही क वता लखने क
पहली सीढ़ है।
शब्द एक अथ अनेक — पृष्ठ 28
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पाठ से
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पाठ से शब्द क बात
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a s eकmु र फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन क ले अँगड़ाई’ क वता क इस पं क्त म ‘फूटने’ का अथ पौधे का अंकुरण
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प्र.1
है। ‘फूट’ का प्रयोग अलग-अलग अथ म कया जाता है, जैसे— फूट डालना, घड़ा फूटना आ द। अब फूट शब्द
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का प्रयोग ऐसे वाक्य म क जए जहाँ इसके भन्न- भन्न अथ नकलते ह , जैसे— अं ेज़ क नी त थी फूट डालो
और राज करो।
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‘फूट’ एक ही शब्द है, पर वाक्य बदलते ही उसका अथ बदल जाता है। ऐसे शब्द को अनेकाथ शब्द कहते ह। नीचे नौ अलग-
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अलग अथ और उनके वाक्य दए गए ह।
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क्र. ‘फूट’ का अथ वाक्य म प्रयोग
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a g 1. अंकु िरत होना, उग आना पहली बा रश पड़ते ही खेत म हरे अंकुर फूट पड़े।
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आपस में मतभेद , अलगाव
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2. अं ेज़ क नी त थी — फूट डालो और राज करो। (पुस्तक का उदाहरण)
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3. टू टना, चटकना हाथ से छू टते ही म का घड़ा फूट गया।
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4. चोट लगने से घाव होना aglगरने से उसका सर फूट गया और ख़ून बहने लगा।
अचानक ज़ ोर से रो पड़ ना
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5. माँ को दे खते ही ब ा फूट-फूटकर रोने लगा।
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िछपी बात का खुल जाना
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6. आ ख़रकार सारा भेद फूट ही गया।
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मुँह से आवाज़ िनकलना डर के मारे उसके मुँह से बोल न फूटा।
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तेज़ी से बाहर िनकलना
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8. पूरब से सूरज क पहली करण फूट नकली।
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ज्वालामुखी का फटना . a
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9. त पड़ा ज्वालामुखी अचानक फूट पड़ा।
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अथ कैसे पहचान: अकेला शब्द कुछ नह बताता — अथ हमेशा संदभ से तय होता है। ‘घड़ा फूटा’ म साथ म
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‘घड़ा’ है, इस लए अथ टू टना हुआ; ‘अंकुर फूटा’ म साथ म ‘अंकुर’ है, इस लए अथ उगना हुआ। इसी लए कोई भी
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नया शब्द सीखते समय उसे पूरे वाक्य के साथ याद क जए, अकेले नह ।
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m अभ्यास क जए: इसी तरह ‘कल’, ‘हार’, ‘सोना’, ‘पर’ और ‘उत्तर’ शब्द के दो-दो अथ सोचकर वाक्य बनाइए।
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संकेत — इसी क वता म ‘पर’ का अथ पंख है (“ बज लय के स्व णम पर”), जब क ‘मेज़ पर’ म उसका अथ
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बलकुल अलग है।
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अनेक शब्द के लए एक शब्द — पृष्ठ 29 a
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पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 ‘नीले नयन -सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ क वता क इस पं क्त म ‘जलधर’ शब्द आया है। ‘जलधर’
दो शब्द से बना है, जल और धर। इस प्रकार जलधर का शा ब्दक अथ हुआ जल को धारण करने वाला। बादल
और समुद्र; दोन ही जल धारण करते ह। इस लए दोन जलधर ह। वाक्य के संदभ या प्रयोग से हम जान सकगे
क जलधर का अथ समुद्र है या बादल। शब्दकोश या इंटरनेट क सहायता से ‘धर’ से मलकर बने कुछ शब्द और
उनके अथ ढूँ ढ़कर ल खए।
‘धर’ का अथ है धारण करने वाला यानी थामने या उठाए रखने वाला। इसे कसी भी शब्द के आगे जोड़ द जए, तो अथ बन जाता
है — “वह, जो उस चीज़ को धारण करे”। नीचे ऐसे बारह शब्द दए गए ह।
शब्द कैसे बना अथ ( कसे कहते ह)
जलधर जल + धर जल को धारण करने वाला — बादल (या समुद )
िगिरधर ग र + धर पवत को धारण करने वाला — ीकृ ष्ण (िजन्होंने गोवधन उठाया)
मुर लीधर मुरली + धर मुरली धारण करने वाला — ीकृ ष्ण
गंगाधर गंगा + धर गंगा को धारण करने वाला — िशव
हलधर हल + धर हल धारण करने वाला — बलराम; िकसान
िवषधर वष + धर िवष धारण करने वाला — साँप
गदाधर गदा + धर गदा धारण करने वाला — िवष्ण;ु भीम
धनुध र धनुष + धर धनुष धारण करने वाला — तीरंद ाज़ , जैसे अजुन
शिशधर श श (चंद्रमा) + धर चंद मा को धारण करने वाला — िशव
वसुंध रा वसु (रत्न) + धरा रत्नों को धारण करने वाली — धरती (यह शब्द इसी किवता में आया है)
पयोधर पयस् (जल) + धर जल धारण करने वाला — बादल
ध रु ंध र धुरा + धर धुरी सँभालने वाला — िकसी काम में सबसे िनपुण व्यिक्त
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद AglaSem · NCERT Solutions
‘जलधर’ का अथ कैसे तय कर — बादल या समुद्र? केवल वाक्य से। दे खए —
“आकाश म काले जलधर उमड़ आए।” — यहाँ ‘आकाश म’ है, इस लए अथ बादल।
“न दयाँ बहकर अंत म जलधर म जा मलती ह।” — यहाँ न दय का मलना है, इस लए अथ समुद्र।
यही बात क वता म भी है — वहाँ जलधर आकाश म है और उसे ‘काली पुतली’ कहा गया है, इस लए वहाँ उसका
अथ बादल ही है।
आगे ब ढ़ए: ‘धर’ क तरह ‘ज’ (जन्मा हुआ) भी शब्द के अंत म जुड़ता है — जलज (जल म जन्मा = कमल),
पंकज (क चड़ म जन्मा = कमल), सरोज, नीरज। शब्दकोश से ऐसे चार शब्द और खो जए।
शब्द पहेली — पृष्ठ 29
पाठ से
पाठ से पहे ली
प्र.1 दए गए शब्द-जाल म प्रश्न के उत्तर खोज— (शब्द-जाल: पं क्त 1 — न, य, न, ल; पं क्त 2 — गा, दू, ब, अं;
पं क्त 3 — ड़ा, अ, ु, ब; पं क्त 4 — ज, ल, ध, र) क. एक प्रकार का वाद्य यंत्र ख. आँख के लए एक अन्य शब्द
ग. जल को धारण करने वाला घ. एक प्रकार क घास ङ. आँसू का समानाथ च. आसमान का समानाथ शब्द
पहले शब्द-जाल को ध्यान से दे खए। यह 4 पं क्त × 4 स्तंभ का जाल है और इसम छह शब्द छपे ह — कुछ बाएँ से दाएँ (पं क्त
म) और कुछ ऊपर से नीचे (स्तंभ म)।
स्तंभ 1 स्तंभ 2 स्तंभ 3 स्तंभ 4
पं क्त 1 न य न ल
पं क्त 2 गा दू ब अं
पं क्त 3 ड़ ा अ ु ब
पं क्त 4 ज ल ध र
छह उत्तर —
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद AglaSem · NCERT Solutions
संकेत उत्तर जाल म कहाँ अथ / क वता से संबंध
क. एक प्रकार का वाद्य नगाड़ ा स्तंभ 1, ऊपर से नीचे — न + गा + चोट मारकर बजाया जाने वाला बड़ा ढोल। क वता म —
यंत्र ड़ा “बजा नगाड़े जगा रहे ह”।
ख. आँख के लए एक नयन पंिक्त 1, बाएँ से दाएँ — न + य + न आँख। क वता म — “नीले नयन -सा यह अंबर”।
अन्य शब्द
ग. जल को धारण करने जलधर पंिक्त 4, बाएँ से दाएँ — ज + ल + बादल (या समुद्र)। क वता म — “काली पुतली-से ये
वाला ध+र जलधर”।
घ. एक प्रकार क घास दू ब पंिक्त 2, स्तंभ 2–3 — दू + ब ज़मीन पर फैलने वाली मुलायम हरी घास। क वता म —
“हरी दूब पुलक -मुसकाई”।
ङ. आँसू का समानाथ अ ु पंिक्त 3, स्तंभ 2–3 — अ + ु आँसू। क वता म — “करुणा- वग लत अ ु बहाकर”।
च. आसमान का अंबर स्तंभ 4, ऊपर से नीचे (पंिक्त 2 से आकाश। क वता म — “नीले नयन -सा यह अंबर”।
समानाथ शब्द 4) — अं + ब + र
पहेली हल करने क तरक ब: पहले उत्तर सो चए, फर जाल म ढूँ ढ़ए — उलटा नह । छह संकेत के उत्तर इसी
क वता के शब्द ह, इस लए क वता एक बार दोबारा पढ़ लेने पर सब उत्तर अपने आप सामने आ जाते ह। फर हर
शब्द का पहला अक्षर जाल म खो जए और वहाँ से दाईं ओर तथा नीचे क ओर पढ़कर दे खए।
ध्यान द जए: यहाँ जाल के खाने म एक-एक वण नह , पूरा अक्षर (मात्रा स हत) रखा गया है — जैसे ‘गा’, ‘ड़ा’,
‘दू’, ‘ ु’, ‘अं’। इसी लए ‘नगाड़ा’ पाँच वण का होकर भी केवल तीन खान म समा जाता है।
आपक बात — पृष्ठ 30
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 बा रश को लेकर हर व्य क्त का अनुभव भन्न होता है। बा रश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इस लए इसका कोई एक “सही” उत्तर नह है। पर एक अ ा उत्तर बनता कैसे है, यह ज़रूर
तय है।
अ े उत्तर म ये चार बात होनी चा हए:
अपनी भावना साफ़ क हए — अ ा लगता है, डर लगता है, या दोन ।
एक स ी घटना बताइए — कोई एक दन जो आपको याद है।
इं द्रय का प्रयोग क जए — बा रश केवल दखती नह ; उसक आवाज़ होती है, गीली म क स धी गंध होती है, ठं डी हवा
छू ती है।
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दूसरा पक्ष भी छू ली जए — बा रश सबके लए ख़ुशी नह लाती। कसान के लए यह जीवन है, पर जसका घर क ा है या
जसे रोज़ बाहर काम करना पड़ता है, उसके लए क ठनाई भी।
नमूना उत्तर:
“गम के दन म जब आसमान अचानक काला होता है और ठं डी हवा चलने लगती है, तो मेरा मन उछलने लगता है।
पहली बूँद जैसे ही गरती ह, गीली म से एक स धी महक उठती है — मुझे दु नया क वही महक सबसे अ
लगती है। म छत पर जाकर हाथ फैला दे ता ँ और बूँद गनने क को शश करता ँ। पछले साल स्कूल से लौटते
समय इतनी तेज़ बा रश हुई क गली म पानी भर गया और हम कागज़ क नाव बहाते रहे। पर उसी शाम मने दे खा क
हमारे मोहल्ले क सब्ज़ी बेचने वाली काक अपनी टोकरी सर पर रखकर भागी जा रही थ — उनका सारा सामान
भीग रहा था। तभी मुझे समझ आया क जो बा रश मेरे लए खेल है, वही कसी और के लए परेशानी भी हो सकती
है। फर भी बा रश मुझे अ लगती है, क्य क उसके बाद पेड़ नहाकर चमकने लगते ह और हवा हल्क हो जाती
है।”
क वता से जो ड़ए: गोपालकृष्ण कौल ने भी बा रश को केवल पानी नह , एक घटना क तरह दे खा — अँगड़ाई,
मुसकान, नगाड़े, आँसू। आप भी अपने उत्तर म एक-दो ऐसे ही चत्र बनाइए, जैसे “छत से गरती धार मानो कोई
चाँद क डोरी हो”। उत्तर तुरंत सुंदर लगने लगेगा।
प्र.2 आपको कौन-सी ऋतु सबसे अ धक प्रय है और क्य ? बताइए।
पहले यह याद कर ली जए क भारत म मुख्य रूप से छह ऋतुए ँ मानी जाती ह। अपनी पसंद बताने से पहले यह जानकारी उत्तर को
मज़बूत बना दे ती है।
ऋतु महीने (लगभग) पहचान
वसंत फागुन–चैत (माच–अप्रैल) नए पत्ते, फूल, न ठं ड न गम
ग ीष्म वैशाख–जेठ (मई–जून) तेज़ धूप, लू, आम
वष (पावस) आषाढ़–सावन (जुलाई–अगस्त) बादल, बा रश, ह रयाली
शरद भाद –क्वार ( सतंबर–अक्तूबर) साफ़ नीला आकाश, सफ़ेद बादल, त्योहार
हेम ंत का तक–अगहन (नवंबर– दसंबर) हल्क ठं ड, ओस
िशिशर पूस–माघ (जनवरी–फ़रवरी) कड़ाके क ठं ड, कोहरा
अ े उत्तर म तीन बात र खए: ऋतु का नाम; दो-तीन ठोस कारण (मौसम, खाना, त्योहार, खेल, अपने घर-गाँव क कोई ख़ास
बात); और एक छोट -सी याद।
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नमूना उत्तर:
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“मुझे वषा ऋतु सबसे अ धक प्रय है। पहला कारण यह क इसी ऋतु म गम क तपन से राहत e
s m है — जो
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l यह क यही ऋतु
मलती
पेड़ जून म धू.लco से भूरे पड़ जाते ह, वे जुलाई आते-आते नहा-धोकर चमकने लगते ह। दूसराgकारण
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eकmे लए सबसे बड़ी है; मेरे नानाजी कहते ह क अ बा रश का मतलब है साल भर का अन्न। तीसरा कारण
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aमेgरlा अपना है — इसी मौसम म तीज और रक्षाबंधन आते ह, आँगन म झूला पड़ता है और शाम को गरम पकौड़े बनते
कसान
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ह। मुझे वह दन आज भी याद है जब पहली बा रश म मोर ने पंख फैलाकर नाचना शुरू कर दया था और हम सब
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खड़क से चपके खड़े रह गए थे। ‘पहली बूँद’ क वता पढ़ते समय मुझे वही दृश्य याद आ गया।”
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सुझाव: कारण जतना नजी होगा, उत्तर उतना ही अ a ा लगेगा। “सद अ लगती है” कहने से बेहतर है —
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“सद अ लगती है क्य क छत पर धूप म बैठकर मूँगफली खाते हुए दाद क कहा नयाँ सुनने का मज़ा कसी
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और मौसम म नह आता।”
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समाचार माध्यम से — पृष्ठ 30
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पाठ से आगे
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पाठ से आगे गतवध
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प्रत्येक मौसम समाचार के व भन्न माध्यम (इलेक् ॉ नक या प्रट या सोशल मी डया) के प्रमुख समाचार म रहता
प्र.1
comत दे खी है उसका
है। संवाददाता कभी बाढ़ तो कभी सूखे या भीषण ठं ड के समाचार दे ते दखाई दे ते ह। आप भी बन सकते ह
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संवाददाता या लख सकते ह समाचार। — अत्य धक गम , सद या बा रश म आपने जो
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आँख दे खा हाल अपनी कक्षा म प्रस्तुत क जए।
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agl उत्तर
‘आँख दे खा हाल’ का अथ है — जो आपने स्वयं दे खा, वह ऐसे बताना क सुनने वाले को दृश्य दखाई दे ने लगे। यह नबंध नह ,
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सीधा प्रसारण है, इस लए इसे वतमान काल म बो लए — “म इस समय खड़ा ँ…”, “दे खए, सामने…”।
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अ े आँख दे खे हाल का ढाँचा:
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क्या कहना है
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1. शुरुआत नमस्कार, अपना नाम, आप कहाँ खड़े ह, कौन-सा दन और समय है।
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2. दृ श्य
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आँख के सामने क्या दख रहा है — पानी कतना भरा है, लोग क्या कर रहे ह, आवाज़ कैसी ह।
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कतने घंटे से बा रश हो रही है, तापमान कतना है, कतने घर प्रभा वत ह (जो आपको सचमुच पता हो)।
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4. लोगों की बात कसी एक व्य क्त से बातचीत — दुकानदार, वद्याथ , र ा चालक।
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5. राहत और अपील प्रशासन क्या कर रहा है; लोग को क्या सावधानी बरतनी चा हए।
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6. समापन ag कैमरामैन …, यह थी हमारी रपोट।”
“…के साथ,
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नमूना उत्तर (आँख दे खा हाल):
“नमस्कार! म रो हत शमा, आपको दखा रहा ँ शहर के गाँधी नगर मोहल्ले का हाल। पीछे जो सड़क दख रही है,
वह अब सड़क नह , नद लग रही है। कल शाम से लगातार बा रश हो रही है और घुटन तक पानी भर चुका है।
दुकान के आगे लोग ने ईंट रखकर रास्ता बनाया है। स्कूल जाने वाले ब े जूते हाथ म लेकर पानी म चल रहे ह।
नाली का पानी सड़क पर आ गया है, इस लए बदबू भी फैल रही है।
यहाँ कराने क दुकान चलाने वाले ी रमेश जी हमारे पास ह। रमेश जी, आपका क्या कहना है? — ‘बेटा, तीन दन
से दुकान नह खुली। सारा सामान भीग गया।’
नगर नगम क एक ट म अभी-अभी पहुँची है और पंप से पानी नकालने का काम शुरू हुआ है। हमारा सभी दशक
से अनुरोध है — बहुत ज़रूरी न हो तो घर से बाहर न नकल, खुले बजली के तार से दूर रह और पानी उबालकर ही
पएँ।
गाँधी नगर से, म रो हत शमा। नमस्कार।”
प्रस्तु त के समय: धीरे और साफ़ बो लए, बीच-बीच म रु कए, और हाथ से दशा दखाइए — “यह दे खए, इस
ओर…”। एक स्केच-पेन को माइक बना ली जए और कोई मत्र कैमरामैन बन जाए। जो बात आपने सचमुच नह
दे खी, उसे मत जो ड़ए — समाचार म स ाई सबसे पहली शत है।
सृजन — पृष्ठ 30
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 नाम दे ना भी सृजन है। ऊपर दए गए चत्र को ध्यान से दे खए और इसे एक नाम द जए।
पुस्तक (पृष्ठ 30) के इस प्रश्न के ठ क ऊपर एक छाया चत्र छपा है। उसम दूर तक फैले सूखे, रेतीले मैदान के बीच
अकेला उगा हुआ एक पौधा दखाया गया है — उसक लंबी, मोट , हरी-नीली प त्तयाँ रेत पर चार ओर झुक हुई ह और
बीच से नकले सीधे डंठल पर सफ़ेद फूल खला है। पीछे बखरी हुई छोट -छोट सूखी झा ड़याँ और उनके परे भूरे-लाल
पहाड़ दखाई दे ते ह। छाया चत्र यहाँ दया नह जा सकता; उसे पाठ्यपुस्तक म दे खए।
पहले चत्र को ठ क से दे ख ली जए। पुस्तक के पृष्ठ 30 पर जो चत्र छपा है, उसम दूर तक फैली सूखी रेत है, पीछे बंजर-भूरी
पहा ड़याँ ह और बीच बीच रेत से नकला एक हरा पौधा खड़ा है, जस पर एक लंबी डंडी पर सफ़ेद फूल खले ह। आसपास छोटे -
छोटे हरे अंकुर भी बखरे दख रहे ह।
नाम दे ने से पहले तीन प्रश्न पू छए:
चत्र म सबसे पहले आँख कहाँ जाती है? — रेत के बीच खड़े हरे पौधे और उसके सफ़ेद फूल पर।
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद AglaSem · NCERT Solutions
चत्र म सबसे बड़ा वरोध क्या है? — चार ओर सूखा-बंजर, और ठ क बीच म हरा-भरा जीवन।
यह चत्र कौन-सा भाव जगाता है? — आश्चय और आशा। जहाँ कुछ न उगने क उम्मीद हो, वहाँ भी जीवन रास्ता खोज लेता है।
अब जो नाम इन तीन को एक साथ पकड़ ले, वही सबसे अ ा नाम है।
संभा वत नाम यह नाम क्या पकड़ता है
रे त में मुस कान सूखे और जीवन का वरोध, और वह भी कोमल शब्द म — क वता क “हरी दूब पुलक -मुसकाई” क याद दलाता
है।
बंजर में जीवन सीधा, स्पष्ट और चत्र का मुख्य भाव।
एक बूदँ का पाठ से जोड़ता है — शायद यहाँ भी कसी एक बूँद ने ही यह ह रयाली जगाई हो।
चमत्कार
हार नही ं मानी पौधे के साहस को मनुष्य के गुण क तरह दखाता है।
रे िगस्तान का फू ल छोटा, याद रह जाने वाला और चत्र का ठ क-ठ क वणन।
नमूना उत्तर: म इस चत्र को नाम दूँ गा — “रेत म मुसकान”। कारण यह क पूरे चत्र म जहाँ तक नज़र जाती है,
केवल सूखी रेत और नंगी पहा ड़याँ ह। ऐसी जगह पर एक नन्हे पौधे का हरा होकर सफ़ेद फूल खला दे ना ऐसा ही है
जैसे उदास चेहरे पर अचानक मुसकान आ जाए। यह चत्र बताता है क प र त कतनी भी क ठन हो, जीवन
अपना रास्ता बना ही लेता है।
नाम दे ना सृजन क्य है: नाम दे ते समय आप चत्र क सैकड़ चीज़ म से चुनते ह क सबसे ज़रूरी क्या है। यही
चुनाव कला है। इसी लए “एक पौधा” जैसा नाम कमज़ोर है — वह केवल बताता है; जब क “रेत म मुसकान” कुछ
महसूस कराता है।
इन्ह भी जान — पृष्ठ 31
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 इस क वता म नगाड़े क ध्व न का उल्लेख है— “बजा नगाड़े जगा रहे ह, बादल धरती क तरुणाई।” नगाड़ा भारत
का एक पारंप रक वाद्ययंत्र है। कुछ वाद्ययंत्र को उन पर चोट कर बजाया जाता है, जैसे— ढोलक, नगाड़ा, डमरू,
डफली आ द। नगाड़ा प्राय: लोक उत्सव के अवसर पर बजाया जाता है। होली जैसे लोकपव के अवसर पर गाए
जाने वाले गीत म इसका प्रयोग होता है। नगाड़ को जोड़े म भी बजाया जाता है जसम एक क ध्व न पतली तथा
दूसरे क मोट होती है। — इस जानकारी को प ढ़ए और नगाड़े के बारे म जो बात आपने जान , उन्ह अपने शब्द
म ल खए।
इस बॉक्स से नगाड़े के बारे म पाँच बात पता चलती ह —
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नगाड़ा भारत का एक पारंप रक वाद्ययंत्र है।
यह उन वाद्ययंत्र म है जन्ह चोट मारकर बजाया जाता है — जैसे ढोलक, डमरू और डफली।
यह प्रायः लोक उत्सव के अवसर पर बजाया जाता है।
होली जैसे लोकपव के गीत म इसका वशेष प्रयोग होता है।
इसे जोड़े म बजाया जाता है — एक क ध्व न पतली और दूसरे क मोट होती है।
वाद्ययंत्र को बजाने के ढं ग के अनुसार बाँटा जाता है। नीचे वही वग करण दया गया है —
वग कैसे बजता है उदाहरण
अवनद्ध / ताल वाद्य चमड़ा मढ़ा होता है, चोट मारकर बजाया जाता है नगाड़ ा, ढोलक , तबला, मृद ंग, डमरू, डफली, ढोल
तत / तंत ु वाद्य तार छे ड़कर या रगड़कर िसतार, वीणा, सारंगी, इकतारा, िगटार
सुिषर वाद्य फूँक मारकर बाँस ुरी, शहनाई, बीन, शंख
घन वाद्य दो टु कड़ को आपस म टकराकर मंजीरा, झाँझ, घंटा, करताल
क वता से जो ड़ए: क व ने मेघ-गजना के लए बाँसुरी या सतार नह चुना — नगाड़ा चुना। क्य ? क्य क नगाड़े क
आवाज़ गहरी, दूर तक जाने वाली और सूचना दे ने वाली होती है। पुराने ज़माने म राजा क घोषणा से पहले नगाड़ा
पीटा जाता था। बादल भी मानो घोषणा कर रहे ह — “वषा आ गई, धरती जाग जाओ!” इसी लए अगली ही पं क्त
है — “जगा रहे ह… धरती क तरुणाई।”
क्या आप जानते ह? शहनाई और नगाड़ा साथ-साथ बजने वाली प्र सद्ध जोड़ी है और भारत के अनेक भाग म
ववाह तथा मेल म यही जोड़ी सुनाई दे ती है। नगाड़े को कह -कह ‘नक़्क़ारा’ भी कहा जाता है — इसी से मुहावरा
बना है “नक़्क़ारख़ाने म तूती क आवाज़”, यानी बहुत शोर म कसी छोट बात का सुनाई न दे ना।
खोजबीन — पृष्ठ 31
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 आपके यहाँ उत्सव म कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते ह? उनके बारे म जानकारी एकत्र कर और अपने समूह म उस
पर चचा कर।
यह खोजबीन क ग त व ध है — उत्तर आपके अपने इलाक़े से आएगा, कताब से नह । पहले जानकारी कैसे जुटानी है, यह तय
क जए।
जानकारी जुटाने के चार रास्ते:
घर के बड़ से पू छए — दाद , नानी, चाचा। शाद -ब्याह और त्योहार म क्या बजता था, यह वे सबसे अ ा बता सकते ह।
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अपने मोहल्ले या गाँव के कसी वादक (बजाने वाले) से म लए और उनसे यंत्र दखाने को क हए।
कसी मेले, जुलूस या मं दर-म स्जद-गुरु ारे के आयोजन म जाकर स्वयं सु नए।
पुस्तकालय क कताब या इंटरनेट से चत्र और नाम मलाकर दे खए।
हर यंत्र के लए इतनी बात नोट क जए: नाम — कस अवसर पर बजता है — कस चीज़ से बना है — कैसे बजाया जाता है —
आवाज़ कैसी है — कौन बजाता है।
वाद्ययंत्र कहाँ / कस अवसर पर कैसे बजाया जाता है
ढोल / ढोलक ववाह, जन्म, तीज-त्योहार, गरबा दोनों हाथों या डंडे से चोट मारकर
नगाड़ा होली, मेले, जुलूस, रामलीला दो डंडों से पीटकर; पायः जोड़ े में
शहनाई ववाह और मंगल अवसर फूँ क मारकर
मंजीरा / झाँझ भजन-क तन दो कटोिरयों को आपस में टकराकर
डफली / डफ होली के फाग, लोकगीत हथेल ी से थाप दे क र
चंग / ढाक / नौबत क्षेत्र के अनुसार — राज ान, बंगाल, उत्तर भारत चोट मारकर
नमूना उत्तर:
“हमारे यहाँ सबसे अ धक ढोल बजता है। शाद क बारात हो या नवरा त्र क झाँक , ढोल के बना कुछ नह होता।
मने अपने पड़ोस के ी भोलाराम जी से बात क , जो पछले तीस साल से ढोल बजा रहे ह। उन्ह ने बताया क ढोल
का ढाँचा आम या शीशम क लकड़ी का होता है और उस पर दोन ओर बकरे क खाल मढ़ जाती है। एक ओर से
हाथ और दूसरी ओर से डंडे से बजाया जाता है। उन्ह ने यह भी बताया क हर अवसर क अपनी अलग ‘ताल’ होती
है — ववाह क ताल अलग है और होली क अलग। इसके अलावा हमारे यहाँ त्योहार पर नगाड़ा, शहनाई और
मं दर म मंजीरा तथा घंटा भी बजते ह।”
चचा को रोचक कैसे बनाएँ: केवल नाम गनाने से बात सूखी रह जाती है। समूह म बारी-बारी से हर यंत्र क आवाज़
मुँह से बनाकर दखाइए — ढोल क “धा- धन-धा”, मंजीरे क “टन-टन”। और य द कसी के घर म कोई यंत्र हो, तो
कक्षा म लाकर दखाइए। यह भी ल खए क आजकल इन्ह बजाने वाले कम क्य होते जा रहे ह — यह एक ज़रूरी
सवाल है।
आइए इंद्रधनुष बनाएँ — पृष्ठ 31
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद
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पाठ से आगे
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पाठ से आगे गतवध
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s m क बूँद न केवल जीव-जंतुओं को राहत पहुँचाती ह ब ल्क धरती को हरा-भरा भी बनाती ह। कभी-कभी ये
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प्र.1
बूँद आकाश म बहुरंगी छटा बखेरती ह जसे ‘इंद्रधनुष’ कहा जाता है। आप भी एक सुंदर इंद्रधनुष बनाइए और
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उस पर एक छोट -सी क वता ल खए। इसे कोई प्यारा सा नाम भी द जए।
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agसे इंद्रधनुष बनाइए। ध्यान र खए क इंद्रधनुष म सात रंग होते ह और उनका क्रम
पहले चत्र — पुस्तक म दए ख़ाली बॉक्स म रंग
तय है, ऊपर से नीचे —
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क्रम रंग याद रखने क तरक ब
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a s em बैगं नी बै–नी–आ–ह–पी–ना–ला
ag 2 l नीला
(बगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी, लाल)
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यही क्रम अं ेज़ी म VIBGYOR कहलाता है।
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नारंगी
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agl चत्र बनाते समय: पहले प सल से सात अधचंद्राकार धा रयाँ बनाइए, सबसे बाहर लाल और सबसे भीतर बगनी। नीचे हरी धरती,
एक-दो पेड़, बरसते बादल और छाता लए ब े जोड़ द जए — चत्र जीवंत हो जाएगा।
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फर क वता — छोट क वता लखने का सबसे आसान तरीक़ा है तुकांत जोड़े ढूँ ढ़ना — जैसे आया/छाया, बरसा/तरसा, धनुष/
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मनुष, रंग/संग, गगन/मगन।
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — क वता का नाम: “सात रंग का पुल”
बरसा पानी, नकली धूप,
आसमान म बना अनूप।
सात रंग का प्यारा पुल,
दे ख-दे खकर मन गया झूल।
लाल, नारंगी, पीला, हरा,
आसमानी, नीला, बगनी भरा।
न ईंट लगी, न कोई खंभा,
फर भी टका है इतना लंबा!
छू ने को म दौड़ा-दौड़ा,
वह हँसकर धीरे से मुड़ा।
बोला — “ब े, म ँ पल भर,
पर याद र ँगा जीवन भर।”
नाम कैसे चुन: “इंद्रधनुष” नाम रखना सबसे आसान है, पर सबसे कमज़ोर भी — वह तो वषय है, नाम नह । ऐसा
नाम सो चए जो आपक क वता क ख़ास बात पकड़े। य द आपक क वता म इंद्रधनुष को पुल कहा है तो “सात रंग
का पुल”; य द उसे झूला कहा है तो “आसमानी झूला”; य द वह पल भर म मट जाता है तो “पल भर का मेहमान”।
क्या आप जानते ह? इंद्रधनुष तभी दखता है जब सूरज आपक पीठ के पीछे हो और बा रश सामने। सूरज क
सफ़ेद रोशनी हवा म लटक पानी क बूँद से टकराकर सात रंग म बँट जाती है। इसी लए इंद्रधनुष हमेशा सूरज के
ठ क उलट दशा म दखाई दे ता है।
झरोखे से — पृष्ठ 32
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 एक बूँद — “ज्य नकल कर बादल क गोद से, थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ । सोचने फर- फर यही मन म
लगी, आह! क्य घर छोड़कर म य बढ़ ।” — अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’। इस रचना को प ढ़ए और
इसका भाव सम झए।
भावाथ: एक बूँद अभी-अभी बादल क गोद से नकली है और नीचे क ओर बढ़ ही है क उसका मन डगमगा जाता है। वह बार-
बार यही सोचने लगती है — “हाय! मने अपना घर छोड़कर यह क्या कर डाला? कहाँ चली आई म?” यानी नई और अनजानी राह
पर पहला क़दम रखते ही उसे डर और पछतावा घेर लेता है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद AglaSem · NCERT Solutions
पं क्त अथ ध्यान दे ने क बात
“ज्यों िनकल कर बादलों की जैसे ही वह बादल से अलग ‘गोद’ शब्द बहुत सोच-समझकर रखा गया है — बादल यहाँ माँ है और
गोद से ” हुई बूँद उसक संतान।
“थी अभी एक बूदँ कु छ आगे अभी थोड़ी ही दूर आगे बढ़ ‘अभी’ और ‘कुछ’ बताते ह क यात्रा अभी शुरू ही हुई है।
बढ़ ी” थी
“सोचने िफर-िफर यही मन में बार-बार यही बात मन म ‘ फर- फर’ से पता चलता है क यह एक बार का ख़याल नह , लगातार
लगी” उठने लगी सता रही चता है।
“आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों हाय, मने घर क्य छोड़ा! ‘आह!’ पीड़ा और पछतावे क सीधी पुकार है।
बढ़ ी।”
‘पहली बूँद’ से इसका रश्ता: दोन क वताएँ एक ही बूँद क ह, पर दो अलग-अलग जगह से दे खी गई ह।
गोपालकृष्ण कौल बूँद को धरती क ओर से दे खते ह — वहाँ बूँद अमृत है, वरदान है, ख़ुशी है।
‘ह रऔध’ उसी बूँद को बूँद क अपनी ओर से दे खते ह — वहाँ वह एक डरी हुई, घर से बछड़ी नन्ही जान है।
दोन को साथ पढ़ने पर एक बड़ी बात समझ आती है — जो घटना कसी के लए वरदान है, वही कसी और के लए
ब लदान भी हो सकती है।
पूरी क वता का अंत क्या है? ‘ह रऔध’ जी क मूल क वता म यह बूँद आगे समुद्र म गरती है, सीप के मुँह म जा
पहुँचती है और अंततः मोती बन जाती है। यानी जस क़दम पर वह पछता रही थी, वही क़दम उसे मोती बना गया।
इसी लए क वता का संदेश है — नई राह पर नकलते समय डर लगना स्वाभा वक है, पर बढ़े बना कुछ बनना
भी संभव नह ।
क व-प रचय: अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’ (1865–1947) खड़ी बोली हद के आरं भक और बहुत बड़े
क व थे। उनका प्र सद्ध महाकाव्य है प्रयप्रवास।
सो चए और ल खए: क्या आपके जीवन म भी कोई ऐसा क्षण आया है जब कुछ नया शुरू करते समय डर लगा हो
— नया स्कूल, पहली बार मंच पर बोलना, अकेले कह जाना? बाद म क्या हुआ? तीन-चार वाक्य म अपनी लेखन
पु स्तका म ल खए।
अध्याय — एक नज़र म
पहली बूँद गोपालकृष्ण कौल क लखी एक प्रकृ त-क वता है। इसम पावस (वषा ऋतु) के पहले ही दन धरती पर गरी
पहली बूँद और उससे जागे नए जीवन का चत्र है। हर छं द के अंत म एक ही टे क लौटती है — “पहली बूँद धरा पर आई।”
पहला छं द: पावस का प्रथम दवस है, पहली बूँद धरती पर गरती है और उसी क्षण धरती से अंकुर फूट पड़ता है — मानो नया
जीवन अँगड़ाई ले रहा हो।
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दूसरा छं द: धरती के “सूखे अधर ” पर बूँद अमृत-सी आकर गरती है। हरी दूब वसुंधरा क रोमाव ल (शरीर के रोएँ) जैसी
लगती है, जो पुलककर मुसकरा उठती है — यानी धरती रोमां चत हो गई है।
तीसरा छं द: बादल “आसमान म उड़ता सागर” ह, बज लयाँ उनके स्व णम पंख ह और मेघ-गजना नगाड़ क ध्व न है, जो
धरती क तरुणाई यानी जवानी-ह रयाली को जगा रही है।
चौथा छं द: नीला आकाश कसी क नीली आँख -सा है और काले बादल उन आँख क काली पुत लयाँ। करुणा से
पघलकर वे आँसू (वषा) बहाते ह और बूढ़ धरती क चर-प्यास बुझा दे ते ह; धरती फर से शस्य-श्यामला बनने को ललचा
उठती है।
अभ्यास म उपमा-रूपक-मानवीकरण पहचानना, ‘फूट’ शब्द के अनेक अथ, ‘धर’ से बने शब्द (जलधर, ग रधर, वषधर…),
एक 4×4 शब्द-जाल पहेली, नगाड़े क जानकारी और अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’ क क वता ‘एक बूँद’ द गई है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
पावस वष ऋतु, बरसात का मौसम “वह पावस का प्रथम दवस पावस आते ही पहाड़ पर ह रयाली छा
जब,” जाती है।
धरा धरती, पथ्ृ वी “पहली बूँद धरा पर आई।” सूरज क पहली करण धरा पर पड़ी।
अंकुर बीज से िनकलने वाला नन्हा कोंपल “अंकुर फूट पड़ा धरती से,” गमले म डाले चने से दो दन म अंकुर
नकल आया।
अँगड़ाई सोकर उठने पर शरीर को तानना; यहाँ — जाग “नव-जीवन क ले अँगड़ाई।” सुबह उठते ही उसने लंबी अँगड़ाई ली।
उठना
अधर होंठ “धरती के सूखे अधर पर,” प्यास से उसके अधर सूख गए थे।
अमृत वह पेय जो अमर कर दे ; यहाँ — जीवन दे ने वाला “ गरी बूँद अमृत-सी आकर।” माँ के हाथ का पानी भी अमृत-सा लगता है।
जल
वसुंधरा धरती (जो वसु यानी रत्न धारण करती है) “वसुंधरा क रोमाव ल-सी,” वषा के बाद वसुंधरा हरी चादर ओढ़ लेती
है।
रोमाव ल शरीर पर उगे रोएँ की पंिक्त “वसुंधरा क रोमाव ल-सी,” ठं डी हवा लगते ही रोमाव ल खड़ी हो गई।
दूब ज़मीन पर फै लने वाली एक मुल ायम हरी घास “हरी दूब पुलक -मुसकाई।” आँगन क हरी दूब पर ओस क बूँद चमक
रही थ ।
पुलकना रोमांिचत होना, ख़श
ु ी से रोएँ खड़े हो जाना “हरी दूब पुलक -मुसकाई।” अपना नाम सुनकर वह पुलक उठ ।
तरुणाई जवानी, यौवन; यहाँ — धरती की भरपूर हिरयाली “बादल धरती क तरुणाई।” बा रश के बाद खेत पर तरुणाई लौट आई।
अंबर आकाश, आसमान “नीले नयन -सा यह अंबर,” शाम को अंबर सुनहरा हो गया।
जलधर जल को धारण करने वाला — बादल (या समुद ) “काली पुतली-से ये जलधर।” दूर आकाश म काले जलधर उमड़ रहे थे।
वग लत िपघला हुआ , द िवत “करुणा- वग लत अ ु उसक कहानी सुनकर सबका मन वग लत
बहाकर,” हो गया।
अ ु आँस ू “करुणा- वग लत अ ु वदा के समय उसके अ ु रुक ही नह रहे
बहाकर,” थे।
शस्य- फ़ सलों से हरी-भरी (धरती के िलए पयुक्त) “बूढ़ धरती शस्य-श्यामला” वषा के बाद हमारा गाँव शस्य-श्यामला हो
श्यामला उठता है।
नगाड़ा चोट मारकर बजाया जाने वाला एक बड़ा “बजा नगाड़े जगा रहे ह,” होली के दन चौपाल पर नगाड़ा बज रहा
पारंपिरक वाद्ययंत्र था।
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कक्षा 6 हद अध्याय 3 पहली बूँद
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शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
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च ड़या ने अपने पर फैलाए और उड़ चली।
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