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CBSE Class 12 Question Paper 2023 Solution Hindi Core

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CBSE Class 12 Question Paper 2023 Solution Hindi Core – Text

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Page 1

e s t i o n P a p er
Qu
Solu t i o n
2023

Page 2

अत्यंत गोपनीय - केवल आंतरिक एवं सीमित प्रयोग हे तु
सीननयि सेकेंडिी स्कूल सर्टि फिकेट, ििविी - 2023
अंक-योजना - ववषय : र्हंदी (आधाि)
ववषय कोड संख्या : 302, प्रश्न-पत्र कोड : 2/1/1, 2/1/2, 2/1/3
सािान्य ननदे श :-
1. परीक्षार्थियों के सही और उर्ित आकलन के ललए उत्तर पुस्ततकाओं का मूलयांकन एक महत्त्वपूर्ि प्रक्रिया है ।
मूलयांकन में एक छोटी-सी त्रुटट भी गंभीर समतया को जन्म दे सकती है , जो परीक्षार्थियों के भववष्य, लिक्षा
प्रर्ाली और अध्यापन-व्यवतथा को भी प्रभाववत कर सकती है । इससे बिने के ललए अनुरोध क्रकया जाता है
क्रक मूलयांकन प्रारं भ करने से पूवि ही आप मूलयांकन ननदे िों को पढ़ औि सिझ लें।
2. मूलयांकन नीनत एक गोपनीय नीनत है , क्योंक्रक यह आयोस्जत परीक्षाओं की गोपनीयता, क्रकए गए मल
ू यांकन
तथा कई अन्य पहलुओं से संबंर्धत है | इसका क्रकसी भी तरह से साविजननक होना परीक्षा प्रर्ाली के ललए
उपयुक्त नहीं है , जो लाखों परीक्षार्थियों के भववष्य को प्रभाववत कर सकता है | इस नीनत दततावेज़ को क्रकसी
से भी साझा करना, क्रकसी पत्रत्रका में प्रकालित करना और समािार पत्र/वेबसाइट आटद में छापना IPC के
तहत कायिवाही को आमंत्रत्रत कर सकता है |
3. मूलयांकन अंक-योजना में टदए गए ननदे िों के अनुसार ही क्रकया जाना िाटहए, अपनी व्यस्क्तगत व्याख्या या
क्रकसी अन्य धारर्ा के अनस
ु ार नहीं। यह अननवायि है क्रक अंक-योजना का अनुपालन परू ी तरह से ननष्ठापव
ू क
ि
क्रकया जाए। हालााँफक, िूलयांकन किते सिय नवीनति सूचना औि ज्ञान पि आधारित अथवा नवाचाि पि
आधारित उत्तिों को उनकी सत्यता औि उपयक्
ु तता को पिखते हुए पिू े अंक र्दए जाएाँ ।
4. योग्यता आधाररत प्रश्नों का मूलयांकन करते समय कृपया टदए गए उत्तरों को समझें, भले ही उत्तर माक्रकिंग
तकीम में न हो, छात्रों को उनकी योग्यता के आधार पर अंक टदए जाने िाटहए |
5. अंक योजना में उत्तरों के ललए केवल सुझाए गए मान त्रबंद ु होते हैं | ये केवल टदिा-ननदे िों की प्रकृनत के हैं
और पूर्ि नहीं हैं | यटद परीक्षार्थियों की अलभव्यस्क्त सही है तो उसके अनुसार ननयत अंक टदए जाने िाटहए |
6. मुख्य परीक्षक प्रत्येक मूलयांकनकताि के द्वारा पहले टदन जााँिी गई पााँि उत्तर पुस्ततकाओं के मूलयांकन की
जााँि ध्यानपूवक
ि करें और आश्वतत हों क्रक मूलयांकन-योजना में टदए गए ननदे िों के अनुसार ही मूलयांकन
क्रकया जा रहा है । परीक्षकों को बाकी उत्तर पुस्ततकाएाँ तभी दी जाएाँ, जब वह आश्वतत हों क्रक उनके अंकन में
कोई लभन्नता नहीं है ।
7. परीक्षक सही उत्तर पर सही का र्िह्न (√) लगाएाँ और गलत उत्तर पर गलत का (×)। मल
ू यांकनकताि द्वारा ये
र्िह्न न लगाने से ऐसा समझ में आता है क्रक उत्तर सही है , परं तु उस पर अंक नहीं टदए गए। परीक्षकों द्वारा
यह त्रुटट सवािर्धक की जाती है ।
8. यटद क्रकसी प्रश्न के उपभाग हों तो कृपया प्रश्नों के उपभागों के उत्तरों पर दायीं ओि अंक टदए जाएाँ। बाद में
इन उपभागों के अंकों का योग बायीं ओि के हालिये में ललखकर उसे गोलाकृत कर टदया जाए। इसका
अनुपालन दृढ़तापूवक
ि फकया जाए।
9. यटद क्रकसी प्रश्न के कोई उपभाग न हों तो बायीं ओर के हालिये में अंक टदए जाएाँ और उन्हें गोलाकृत क्रकया
जाए। इसके अनुपालन में भी दृढ़ता का पालन क्रकया जाए।
10. यटद परीक्षाथी ने क्रकसी प्रश्न का उत्तर दो तथानों पर ललख टदया है और क्रकसी को काटा नहीं है तो स्जस उत्तर
पर अर्धक अंक प्राप्त हो रहे हों, उस पर अंक दें और दस
ू रे को काट दें । यटद परीक्षाथी ने अनतररक्त
प्रश्न/प्रश्नों का उत्तर दे टदया है तो स्जन उत्तरों पर अर्धक अंक प्राप्त हो रहे हों, उन्हें ही तवीकार करें , उन्हीं
पर अंक दें ।

1|Page

Page 3

11. एक ही प्रकार की अिुद्र्ध बार-बार हो तो उसे अनदे खा करें और उस पर हर बार अंक न काटे जाएाँ।
12. यहााँ यह ध्यान रखना होगा क्रक मल
ू यांकन में पर्
ू ि अंक पैमाना 0-80 (उदाहरर् 0-80 अंक जैसा क्रक प्रश्न में
टदया गया है ) का प्रयोग अभीष्ट है , अथाित परीक्षाथी ने यटद सभी अपेक्षक्षत उत्तर-त्रबंदओ
ु ं का उललेख क्रकया है
तो उसे परू े अंक दे ने में संकोि न करें ।
13. प्रत्येक परीक्षक को पूर्ि कायि-अवर्ध में अथाित 8 घंटे प्रनतटदन अननवायि रूप से मूलयांकन कायि करना है I
प्रनतटदन मुख्य ववषयों की 20 उत्तर-पुस्ततकाएाँ तथा अन्य ववषयों की 25 उत्तर पुस्ततकाएाँ जााँिनी हैं। (ववततत

वववरर् ‘तपॉट गाइडलाइन’ में टदया गया है )
14. यह सुननस्श्ित करें क्रक आप ननम्नललखखत प्रकार की त्रुटटयााँ न करें , जो वपछले वषों में की जाती रही हैं -
उत्तर पुस्ततका में क्रकसी उत्तर या उत्तर के अंि का मल
ू यांकन क्रकए त्रबना छोड़ दे ना।
उत्तर के ललए ननधािररत अंकों से अर्धक अंक दे ना।
उत्तर में टदए गए अंकों का योग ठीक न होना।
उत्तर पुस्ततका के अंदर टदए गए अंकों का आवरर् पष्ृ ठ पर सही अंतरर् न होना।
आवरर् पष्ृ ठ पर प्रश्नानुसार योग करने में अिुद्र्ध होना।
गलत प्रश्नवार आवरर् पष्ृ ठ पर योग।
आवरर् पष्ृ ठ पर दो ततंभों के अंकों का योग ठीक न होना।
योग करने में अंकों और िब्दों में अंतर होना।
उत्तर पस्ु ततकाओं से ऑनलाइन अंकसि
ू ी में सही अंतरर् न होना।
कुल अंकों के योग में अिुद्र्ध होना I
उत्तरों पर सही का र्िह्न (√) लगाना, क्रकं तु अंक न दे ना। सनु नस्श्ित करें क्रक (√) या (×) का उपयक्
ु त र्िह्न
ठीक ढं ग से और तपष्ट रूप से लगा हो। यह मात्र एक रे खा के रूप में न हो।
उत्तर का एक भाग सही और दस
ू रा गलत हो, क्रकं तु अंक न टदए गए हों।
15. उत्तर पुस्ततकाओं का मूलयांकन करते हुए यटद कोई उत्तर पूर्ि रूप से गलत हो तो उस पर (x) ननिान लगाएाँ
और िून्य (0) अंक दें ।
16. उत्तर पुस्ततका में क्रकसी प्रश्न का त्रबना जााँिे हुए छूट जाना या योग में क्रकसी भूल का पता लगना, मूलयांकन
सलमनत के सभी लोगों की छवव को और बोडि की प्रनतष्ठा को धूलमल करता है ।
17. सभी परीक्षक वाततववक मूलयांकन कायि से पहले ‘तपॉट इवैलयूएिन’ के ननदे िों से सुपररर्ित हो जाएाँ।
18. परीक्षक सुननस्श्ित करें क्रक सभी उत्तरों का मूलयांकन हुआ है I आवरर् पष्ृ ठ पर तथा योग में कोई अिुद्र्ध
नहीं रह गई है तथा कुल योग को िब्दों और अंकों में ललखा गया है ।
19. केंद्रीय माध्यलमक लिक्षा बोडि पुन: मूलयांकन प्रक्रिया के अंतगित परीक्षार्थियों के अनुरोध पर ननधािररत िुलक
भग
ु तान के बाद उन्हें उत्तर-पस्ु ततकाओं की फोटो कॉपी प्राप्त करने की अनम
ु नत दे ता है । समतत परीक्षकों /
अनतररक्त मुख्य परीक्षकों / मुख्य परीक्षकों पुनः तमरर् कराया जाता है – वे सुननस्श्ित करें क्रक प्रत्येक उत्तर
का मल
ू यांकन, माक्रकिंग तकीम में टदए मल
ू त्रबंदओ
ु ं के अनस
ु ार, सख्ती से क्रकया गया है ।

2|Page

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सीननयि सेकेंडिी स्कूल सर्टि फिकेट पिीक्षा
ििविी - 2023
अंक योजना : र्हंदी आधार (302) प्रश्न-पत्र गच्
ु छ संख्या 2/1/1, 2/1/2, 2/1/3
कक्षा : XII
अधधकतम अंक: 80
सामान्य निर्दे श

अंक योजिा का उद्र्दे श्य मल
ू यांकि को अधधकाधधक वस्तनु िष्ठ बिािा है ।
वर्िनात्िक प्रश्नों के अंक योजिा में दर्दए गए उत्तर बबंर्द ु अंनतम िह ं हैं, बल्लक ये सझ
ु ावात्मक एवं सांकेनतक
हैं।
यदर्द पर क्षार्थी इि सांकेनतक बबंदओ
ु ं से भिन्ि, ककन्तु उपयुक्त उत्तर र्दें , तो उन्हें अंक दर्दए जाएँ।
मूलयांकि कायय निजी व्याख्या के अिुसार िह ं, बल्लक अंक योजिा में र्दए गए निर्दे शािस
ु ार ह ककया जाए।

प्रश्न सं. प्रश्न पत्र गुच्छ संख्या उत्ति संकेत /िूलय बबंद ु ननधािरित
2/1/1 2/1/2 2/1/3 अंक ववभाजन

खंड ‘अ’
(बहुववकलपी / वस्तुपिक प्रश्न)
1 1 2 1 10x1=10
(i) (i) (i) (a) जलवायु पररवतिन से 1
(ii) (ii) (ii) (c) सोि और व्यवहार में बदलाव 1
(iii) (iii) (iii) (c) प्रकृनत और पयािवरर् 1
(iv) (iv) (iv) (d) भोजन और स्तथरता प्राप्त हुई 1
(v) (v) (v) (c) तीसरी 1
(vi) (vi) (vi) (a) परमार्ु बम बनाकर 1
(vii) (vii) (vii) (b) प्रभुत्व तथावपत करने की इच्छा 1
(viii) (viii) (viii) (c) प्राकृनतक आपदा 1
(ix) (ix) (ix) (c) बेहतर जीवन की तलाि 1
(x) (x) (x) (d) मानवीय गनतववर्धयााँ 1
2 2 1 3 (क) कावयांश – एक 5x1=5
(i) (i) (i) (b) संकुर्ित होना 1
(ii) (ii) (ii) (d) सय
ू ि को 1
(iii) (iii) (iii) (b) प्रकाि रूप में 1
(iv) (iv) (iv) (a) धरती 1
(v) (v) (v) (c) पथ्
ृ वी 1
अथवा अथवा अथवा (ख) कावयांश – दो
(i) (i) (i) (a) आत्मदान करना 1
(ii) (ii) (ii) (d) हररश्िंद्र 1
(iii) (iii) (iii) (c) समय 1
(iv) (iv) (iv) (c) दानी 1

3|Page

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(v) (v) (v) (c) त्याग और दान की मटहमा जानने के ललए 1
3 3 3 2 5x1=5
(i) (i) (i) (a) छापाखाना 1
(ii) (ii) (ii) (c) इंटरनेट से 1
(iii) (iii) (iii) (a) वाततववक घटनाओं से 1
(iv) (iv) (iv) (c) समािार लेखन से 1
(v) (v) (v) (c) सामान्य लेखन से अलग 1
4 4 4 4 5x1=5
(i) - (i) (b) बच्िों से 1
- (i) - (a) बच्िों की व्याकुलता के कारर् 1
(ii) - (ii) (d) कोमलता 1
- (ii) - (d) उसका कोई अपना नहीं हैं 1
(iii) - (iii) (c) कटठनाइयों को आसान बनाना 1
- (iii) - (b) मााँ की प्रतीक्षा में 1
(iv) - (iv) (c) िारों तरफ बच्िों की क्रकलकाररयों का गाँज
ू ना 1
- (iv) - (d) उत्साह नहीं होना 1
(v) - (v) (b) लिीलापन 1
- (v) - (b) उसका अकेलापन 1
5 5 5 5 5x1=5
(i) - (i) (b) इसे अंधववश्वास मानने के कारर् 1
- (i) - (d) रात का सूनापन 1
(ii) - (ii) (b) नाराज़गी के कारर् 1
- (ii) - (a) जीने की िस्क्त 1
(iii) - (iii) (c) परं परा में ववश्वास होने के कारर् 1
- (iii) - (c) ऊजाि का संिार करना 1
(iv) - (iv) (a) मह
ु ावरा 1
- (iv) - (a) मत्ृ यु-भय से मुस्क्त टदलवाकर 1
(v) - (v) (d) लेखक से तनेह होने के कारर् 1
- (v) - (c) गााँव महामारी की िपेट में था 1
6 6 6 6 10x1=10
(i) (i) (i) (b) क्रकिन दा से 1
(ii) (ii) (ii) (d) यादें जुड़ी होने के कारर् 1
(iii) (iii) (iii) (b) ववदे िी ‘कतटम’ मानने के कारर् 1
(iv) (iv) (iv) (c) लिक्षा के महत्त्व को नहीं समझने से 1
(v) (v) (v) (d) अपने से कम उम्र और अक्ल के बच्िों के साथ बैठने 1
की मजबूरी के कारर्
(vi) (vi) (vi) (d) कौआ 1

4|Page

Page 6

(vii) (vii) (vii) (d) (a) और (b) दोनों 1
(viii) (viii) (viii) (b) मुअनजो-दड़ो 1
(ix) (ix) (ix) (c) कोठार होने से 1
(x) (x) (x) (a) मेलह
ु ा 1
खंड ‘ब’
(वर्िनात्िक प्रश्न)
7 7 7 7 (फकसी एक ववषय पि िचनात्िक लेख) 6
प्रारं भ, समापन 1
ववषयवततु 3
प्रततनु त 1
भाषा 1
8 8 9 8 (फकन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 2x3=6
(क) (क) - कहानी के मल
ू संवादों से मेल खाते संवाद 3
दृश्य अनुसार संवादों की सुननस्श्ितता
कथा सूत्र के ववकास में सहयोग
बोलिाल की भाषा में छोटे और प्रभाविाली संवाद
पात्रानुरूप भाषा का प्रयोग
(कोई तीन बबंद ु अपेक्षक्षत)

- - (क) हााँ, कथानक को तथान, समय के आधार पर 3
दृश्यों में ववभास्जत क्रकया जाता है
कथानक को ववकास और गनत प्रदान करते हैं
पात्रों और पररवेि को संवादों के माध्यम से जोड़ते
हैं

(ख) (ख) - रे डडयो पूरी तरह श्रव्य माध्यम है 3
रे डडयो नाटक में िब्द और ध्वनन के माध्यम से
संप्रेषर् होता है
आवाज के माध्यम से ही कहानी, पात्रों का
पररिय, द्वंद्व-समाधान संभव
आवाज से ही स्तथनतयों, िररत्रों तथा भावों का
ववकास
(कोई तीन बबंद ु अपेक्षक्षत)

- - (ख) रे डडयो एक श्रव्य माध्यम, रे डडयो नाटक में सीलमत समय 3
होता है , अतः कहानी का ियन क्रिया प्रधान न हो, कहानी
में पात्र कम हों व कहानी छोटी हो

5|Page

Page 7

(ग) (ग) - मुक्त कलपना की तवतंत्रता 3
वविारों की मौललक अलभव्यस्क्त
र्िंतन-मनन करने की तवतंत्रता
ववववध ववषयों के समायोजन हे तु
(कोई तीन बबंद ु अपेक्षक्षत)

- - (ग) लेखन का बुननयादी ननयम 3
आपस में खंडन करती दो बातें लेखन/अलभव्यस्क्त
का दोष
लेखन में वविारों का प्रभाव तथा सस
ु ंबद्ध रहने
से तपष्टता

9 9 8 9 (फकन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 4x2=8
(क) (क) - जनसंिार का ऐसा माध्यम, जो छपे हुए रूप में उपलब्ध 2+2=4
हो, जैसे समािार-पत्र, पत्रत्रकाएाँ
ववशेषता –
िब्दों में तथानयत्व
ववषय का ललखखत ववततार
सुववधानुसार पढ़ने का लाभ
र्िंतन-मनन व वविार ववश्लेषर् का माध्यम
अगली पीढ़ी को हततांतरर् संभव
प्रमार्-तवरूप प्रततुत करने की सुववधा

(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत)

- - (क) क्षेत्र – 2+2=4
कृवष, खेल, ववज्ञान, अथि-व्यापार, लिक्षा, पयािवरर्
आटद
(फकन्हीं दो क्षेत्रों की आवश्यकता पि ववचािामभवयल्क्त एवं
ववस्ताि अपेक्षक्षत)

(ख) (ख) - क्या, क्रकसके या कौन, कहााँ, कब, क्यों, कैसे 1+1+2=4
छः ककार के रूप मे
मुखड़े में िार ककार – क्या, कौन, कहााँ और कब
बॉडी और समापन में दो ककार – क्यों और कैसे

- - (ख) उलटा वपरालमड िैली का प्रयोग न होना 4

6|Page

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भाषा में समािारों की सपाटबयानी न होना
फीिर का क्रकसी भी ववषय पर आधाररत होना
(ववषय – क्षेत्र की व्यापकता)
प्रारं भ, मध्य और अंत कहीं से भी िुरू करना
िब्द-सीमा न होना
(कोई चाि बबंद ु अपेक्षक्षत)

(ग) (ग) - पत्रकािीय लेखन – पाठकों, दििकों और श्रोताओं तक 2+1+1=4
सि
ू नाएाँ पहुाँिाने के ललए लेखन के ववलभन्न रूप पत्रकारीय
लेखन कहलाते हैं ।
पत्रकाि के तीन प्रकाि होते हैं - पूर्क
ि ाललक, अंिकाललक
और तवतंत्र (फ्रीलांसर)
पूर्क
ि ामलक पत्रकाि – क्रकसी समािार संगठन के ननयलमत
वेतनभोगी
स्वतंत्र पत्रकाि - भग
ु तान के आधार पर अलग-अलग
समािार पत्र के ललए कायि करने वाले

- - (ग) एंकि ववजुअल – घटना के वे दृश्य या ववजुअल हैं, स्जनके 1+1+1+1=4
आधार पर एंकर द्वारा पढ़ी जाने वाली खबरें ललखी जाती
हैं ।
एंकि बाइट – समािारों की प्रामाखर्कता हे तु प्रत्यक्षदलिियों
का कथन
एंकि पैकेज – खबर को दृश्य, बाइट और ग्राक्रफक्स के
जररए संपूर्त
ि ा से पेि करना
इनका संबंध टी.वी. खबरों के ववलभन्न िरर्ों से
है

10 10 10 10 (फकन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 3x2=6
(क) (क) (क) अपने बड़े भाई रावर् द्वारा क्रकए गए दष्ु कृत्य के 3
कारर्
सीता की वाततववकता को समझने के कारर्
रावर् की नासमझी के कारर् लंका के ववनाि की
कलपना कर

(ख) (ख) (ख) नमी, ऊजाि और िस्क्त का संिार 3
उम्मीद की क्रकरर्ों का अहसास
जीवन में पररवतिन की आिा

7|Page

Page 9

(ग) (ग) (ग) उषा का जाद ू टूटने का अथि है – उषा का वह 3
अद्भत
ु , मनोहारी दृश्य धीरे -धीरे समाप्त हो जाना,
जो सय
ू ोदय के ठीक पहले आकाि में उपस्तथत
था, जैसे : पल-पल पररवनतित तवरूप
पववत्रता, ननमिलता और उज्‍ज्‍वलता

11 11 11 12 (फकन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 2x2=4

(क) - (क) र्िडड़या की िस्क्त और सीमा ननस्श्ित 2
कववता की उड़ान असीलमत, दे िकाल की सीमा से
परे
(क) भाषा बात (कथ्य) कहने का माध्यम 2
वविारों को भाषा द्वारा अलभव्यक्त करना
हर बात के ललए कुछ खास िब्द ननस्श्ित होते हैं
बात का भाषा के प्रयोग से प्रभाविाली /
प्रभावहीन होना
(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत)

(ख) - (ख) घर लौटने की जलदी 2
बच्िों की र्िंता
टदन का ढलना
(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत)

- (ख) - भाव – 2
यह संसार उन्हीं लोगों को पूछता है , जो उसके
अनुसार िलते हैं और उसका गुर्गान करते हैं
संसार प्रेम पर नहीं तवाथि पर आधाररत

(ग) - (ग) अमानवीयता और हृदयहीनता 2
करुर्ा का बाजारीकरर्
संवेदनहीनता
(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत)

- (ग) - पतंगों के साथ बच्िों के मन का उड़ना 2
बच्िों का उत्साटहत होना
पतंग के साथ बच्िों के मन का अटूट संबंध
पतंग के माध्यम से आकाि की ऊाँिाइयों को छूने

8|Page

Page 10

का प्रयास
(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत)

12 12 12 11 (फकन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 2x3=6
(क) (क) (क) दे हात के खान-पान, रहन-सहन का ज्ञान 3
भस्क्तन की दे हाती परं पराओं को मानने की
ववविता
भस्क्तन की भाषा और उसमें आने वाली अनेक
दं त कथाओं का कंठतथीकरर्
(एक उदाहिर् अपेक्षक्षत)

(ख) (ख) (ख) अपनी जरूरत के अनुसार सामान खरीदने वाले 3
बाज़ार की िकािौंध से भ्रलमत न होने वाले
भरे मन से बाजार जाने वाले
मन से संतुष्ट होने वाले
भगत जी जैसे ननललिप्त लोग
(कोई तीन बबंद ु अपेक्षक्षत )

(ग) (ग) (ग) तपंदन, िस्क्त-िून्य तनायुओं में त्रबजली दौड़ 3
जाना
िस्क्तहीन आाँखों में दं गल का दृश्य
आाँखें मद
ू ते समय कोई तकलीफ न होना
मन से मत्ृ यु का भय दरू होना
(कोई तीन बबंद ु अपेक्षक्षत )

13 13 13 13 (फकन्हीं दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत) 2x2=4
(क) - - इतने मजबूत क्रक नए फूलों के ननकल आने पर 2
भी अपना तथान नहीं छोड़ना
वसंत आगमन पर भी िाखाओं पर खड़खड़ाते
रहना
कालजयी अवधूत की भााँनत जीवन की अजेयता
का प्रिार करना
(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत )

- (क) - वपता का पुत्री के प्रनत अगाध प्रेम 2
वपता द्वारा भस्क्तन को संपवत्त में टहतसा दे ने के
डर / ईष्याि से

9|Page

Page 11

- - (क) भाग्य ने नाम को साथिक नहीं रहने टदया 2
लक्ष्मी नाम धन, संपन्नता का सि
ू क, लेक्रकन
भस्क्तन की ववपरीत स्तथनत
नाम और वाततववक जीवन में ववरोधाभास
(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत )

(ख) - - मनुष्य की इच्छा/रुर्ि को महत्त्व न टदए जाने के 2
कारर् वववितावि कायि को करना और कुिलता
प्राप्त न होना
दे ि की अथिव्यवतथा पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव
पड़ना ।
ववपरीत पररस्तथनतयों में व्यवसाय बदलने की
तवतंत्रता न होने के कारर् भूखे मरने की नौबत
आना ।
(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत )

- (ख) - तवतंत्रता, समता तथा भ्रातत्ृ व 1+1=2
कािर् - जब तक समाज के प्रत्येक वगि को
समानता और भाईिारे के साथ अपनी िस्क्त के
सक्षम और प्रभाविाली उपयोग की तवतंत्रता नहीं
होगी, समाज का ववकास नहीं होगा ।

- - (ख) पानी की ननमिम बबािदी 2
पानी की कमी होने पर भी बालटी भर-भरकर
में ढक मंडली पर पानी उड़ेलना
अंधववश्वासी होना
मेघों के बरसने की आिा में पानी बहाना
(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत )

(ग) - - भस्क्तन का जीवन परे िाननयों से नघरा 2
बिपन में मााँ का नछन जाना
ववमाता का दव्ु यिवहार
जेठाननयों द्वारा सताया जाना
बेटी का कम उम्र मे ववधवा हो जाना
पंिायत द्वारा ववधवा बेटी पर जबरन पनत थोपा
जाना

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(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत )

- (ग) - मौसम की मार से परे रह आठों याम मतत रहना 2
वायम
ु ंडल से रस खींिना
हमेिा हरा-भरा रहना
(कोई दो बबंद ु अपेक्षक्षत )

- - (ग) पलाि के फूलों का कम अवर्ध के ललए खखलना 2
और लिरीष का वसंत आगमन से लेकर आषाढ़
मास तक फूलों से लदे रहना
लेखक का भी कबीरदास की तरह क्षखर्क सौंदयि
का प्रेमी न होना

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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeSolution
Pages12
Updated30 Apr 2026