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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा6
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: रहीम के दोहे
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
45 – 50 10 17 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 21 pages
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: रहीम के दोहे
NCERT कक्षा 6 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 5 रहीम के दोहे के सभी प्रश्न के पूरे हल। इस पाठ म अब्दुरहीम खानखाना (रहीम) के सात
नी त-दोहे संक लत ह; पुस्तक म इनका संदभ रहीम ंथावली (सं.) व ा नवास मश्र दया गया है। पृष्ठ 45 से 50 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ
से, मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, शब्द-संपदा, शब्द एक अथ अनेक, आपक बात, सरगम, आज क पहेली और
खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 6) 45 – 50
खं ड प्रश्न
10 17
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 46
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सबसे सही (सट क) उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए— (1)
“र हमन ज ा बावरी, क ह गइ सरग पताल। आपु तो क ह भीतर रही, जूती खात कपाल।” दोहे का भाव है— •
सोच-समझकर बोलना चा हए। • मधुर वाणी म बोलना चा हए। • धीरे-धीरे बोलना चा हए। • सदा सच बोलना
चा हए।
सही उत्तर है — सोच-समझकर बोलना चा हए। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
पहले दोहे का अथ दे ख ली जए —
“रिहमन िज ा बावरी, किह गइ सरग पताल।
आपु तो किह भीतर रही, जूत ी खात कपाल॥”
यानी — जीभ बावली (पगली) है, वह बना सोचे स्वग-पाताल एक कर दे ती है, कुछ भी कह जाती है। कहकर वह तो मुँह के भीतर
सुर क्षत बैठ रहती है, पर उसके कहे क मार कपाल यानी सर को सहनी पड़ती है। रहीम यही चेतावनी दे रहे ह क मुँह से नकलने
से पहले बात तौल लो, वरना भुगतना पूरे व्य क्त को पड़ता है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
सोच-समझकर बोलना सही ★ दोहे का पूरा ढाँचा यही है — बना सोचे बोलने का प रणाम दखाना। ‘बावरी’ शब्द का अथ ही
चा हए। है बना सोचे-समझे बोल दे ने वाली।
मधुर वाणी म बोलना ग़लत यह बात सुंदर है, पर इस दोहे क नह । यहाँ बात मठास क नह , सावधानी क है। मधुर वाणी
चा हए। वाला भाव कबीर के “ऐसी बानी बो लए” दोहे का है।
धीरे-धीरे बोलना चा हए। ग़लत दोहे म बोलने क ग त क कोई चचा नह है। ‘बावरी’ का अथ तेज़ बोलना नह , बना वचारे
बोलना है।
सदा सच बोलना चा हए। ग़लत सच-झूठ का प्रश्न ही नह उठाया गया। जीभ सच भी बना सोचे कह दे तो भी कपाल को जूती
खानी पड़ सकती है।
‘जूती खात कपाल’ क चोट कहाँ है: रहीम ने यहाँ एक बहुत बारीक बात पकड़ी है — गलती एक अंग करता है
और सज़ा दूसरे को मलती है। जीभ बोलकर भीतर छप जाती है, जूता सर पर पड़ता है। इसी वषमता से दोहा
चुभने वाला बन जाता है। यही ‘बोलने से पहले सोचो’ को केवल उपदे श न रहने दे कर एक चत्र बना दे ता है।
प्र.2 (2) “र हमन दे ख बड़ेन को, लघु न द जये डा र। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवा र।” इस दोहे का भाव
क्या है? • तलवार सुई से बड़ी होती है। • सुई का काम तलवार नह कर सकती। • तलवार का महत्व सुई से ज्यादा
है। • हर छोट -बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।
सही उत्तर है — हर छोट -बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।
दोहे का अथ — बड़ी वस्तु को दे खकर छोट को फक मत द जए। जहाँ सुई का काम पड़ता है, वहाँ तलवार क्या कर लेगी? रहीम
सुई और तलवार का उदाहरण दे कर एक बड़ा नयम बता रहे ह, केवल सुई-तलवार क तुलना नह कर रहे।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
हर छोट -बड़ी चीज़ का सही ★ यही दोहे क सीख है। पहली पं क्त ‘लघु न द जये डा र’ नयम बताती है, दूसरी पं क्त सुई-
अपना महत्व होता है। तलवार का उदाहरण दे कर उसे समझाती है।
सुई का काम तलवार नह ग़लत यह बात दोहे म है ज़रूर, पर यह उदाहरण है, भाव नह । उदाहरण को ही उत्तर मान लेना
कर सकती। सबसे आम भूल है — पूछा यह गया है क रहीम इस उदाहरण से कहना क्या चाहते ह।
तलवार सुई से बड़ी होती है। ग़लत यह तो सबको पहले से पता है। इतनी साधारण बात कहने के लए दोहा नह लखा जाता।
तलवार का महत्व सुई से ग़लत यह दोहे के ठ क उलटा है। रहीम तो दखा रहे ह क सलाई के मौके पर सुई तलवार से कह
ज्यादा है। अ धक काम क है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
पहचान का सूत्र: ‘इस दोहे का भाव क्या है?’ पूछा जाए तो वह वकल्प चु नए जो दोहे के बाहर भी लागू होता हो
— जीवन के दूसरे मौक पर भी। ‘सुई का काम तलवार नह कर सकती’ केवल सुई-तलवार पर लागू होता है; ‘हर
चीज़ का अपना महत्व है’ हाथी-च ट , बड़े-छोटे भाई, हर जगह लागू होता है। इसी लए वही भाव है।
प्र.3 (ख) अब अपने मत्र के साथ चचा क जए और कारण बताइए क आपने यही उत्तर क्य चुने?
यह चचा का प्रश्न है। चचा म आपका उत्तर तभी मज़बूत माना जाएगा जब आप उसके साथ दोहे का कोई शब्द प्रमाण के रूप म
दखा सक।
अ चचा म तीन बात होनी चा हए —
आपने कौन-सा वकल्प चुना;
दोहे का वह शब्द या पं क्त जससे वह सद्ध होता है;
बाक़ वकल्प क्य नह चुने — कम-से-कम एक का कारण।
नमूना उत्तर:
“पहले प्रश्न म मने चुना — सोच-समझकर बोलना चा हए। कारण यह है क रहीम ने जीभ को ‘बावरी’ कहा है।
बावरी का अथ पगली, यानी बना सोचे बोल दे ने वाली। और अंत म लखा है ‘जूती खात कपाल’ — भुगतना पूरे
आदमी को पड़ता है। ‘मधुर वाणी म बोलना चा हए’ मने इस लए नह चुना, क्य क दोहे म मठास क कोई बात ही
नह आई।
दूसरे प्रश्न म मने चुना — हर छोट -बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है। कारण यह क पहली ही पं क्त म रहीम
कहते ह ‘लघु न द जये डा र’ — छोटे को मत फको। सुई-तलवार तो सफ़ उदाहरण है। इस लए ‘सुई का काम
तलवार नह कर सकती’ को मने उत्तर नह माना — वह उदाहरण है, सीख नह ।”
चचा का असली लाभ: हो सकता है आपके कसी मत्र ने दूसरा वकल्प चुना हो। उससे बहस मत क जए —
पू छए क उसने दोहे के कस शब्द के आधार पर चुना। इस तरह पूरी कक्षा को यह आदत पड़ती है क दोहे का अथ
अनुमान से नह , उसके शब्द से नकाला जाता है।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 47
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे
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पाठ से
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पाठ से भाव- मलान
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a s emम से कुछ दोहे स्तंभ 1 म दए गए ह और उनके भाव स्तंभ 2 म दए गए ह। अपने समूह म इन पर चचा
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पाठ
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प्र.1
क जए और रेखा ख चकर सही भाव से मलान क जए। स्तंभ 1 — 1. “र हमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो
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छटकाय। टू टे से फर ना मले, मले गाँठ प र जाय॥” 2. “क ह रहीम संप त सगे, बनत बहुत बहु रीत। बप त
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कसौट जे कसे, ते ही साँचे मीत॥” 3. “तरुवर फल न ह खात ह, सरवर पय ह न पान। क ह रहीम पर काज हत,
संप त सँच ह सुजान॥” स्तंभ 2 — 1. सज्जन
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पर हत के लए ही संप त्त सं चत करते ह। 2. स े मत्र वप त्त या
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वपदा म भी साथ रहते ह। 3. प्रेम या gरश्त
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सही मलान इस प्रकार है — 1 → 3, 2 → 2, 3 → 1. ध्यान द जए, केवल बीच वाली जोड़ी का क्रमांकm
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c m का भाव आमने-सामने नह , आड़ा- तरछा (क्रॉस) बैठता है। gla
आपस म मलता है;
पहले और तीसरेoदोहे
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aglस्तंभ 1 — दोहा मलान स्तंभ 2 — भाव कौन-सा शब्द इसे सद्ध करता है
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coसहेmजकर रखना चा हए। agl
1. “रिहमन धागा पेम का, मत तोड़ो िछटकाय। →3 प्रेम या रश्त को ‘धागा प्रेम का’ और ‘मत तोड़ो’ — पूरा
टू टे से िफर ना िमले , िमले गाँठ पिर जाय॥”
m . दोहा प्रेम के धागे को बचाकर रखने पर ही है।
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िबपित कसौटी जे कसे , ते ही साँचे मीत॥” a
2. “किह रहीम संपित सगे, बनत बहत
ु बहु रीत। →2 स े मत्र वप त्त या ‘ बप त कसौट ’ और ‘साँचे मीत’ —
वपदा म भी साथ रहते वप त्त ही मत्रता क परख है।
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ह।
‘पर काज m . c o
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3. “तरुवर फल निहं खात है,ं सरवर िपयिहं न →1 सज्जन पर हत के लए
और a s e हत’ (दूसर के काम के लए)
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पान। किह रहीम पर काज िहत, संपित सँचिह ही संप त्त सं चत करते ह।
gl ‘संवही
aलगभग
प त सँच ह सुजान’ — शब्द
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जान॥” ह।
agl तीन दोह का अथ संक्षेप म —
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धागा वाला दोहा: प्रेम का धागा झटका दे कर मत तोड़ो। एक बार टू ट गया तो फर जुड़ता नह ; और अगर जुड़ भी गया तो
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asपर बहुत-से लोग अनेक तरीक़ से अपने बन जाते ह। पर स े मत्र वही ह जो वप त्त
उसम गाँठ पड़ जाती है।
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क कसौट पर कसे जाने पर खरे a
संप त सगे वाला दोहा: धन-दौलत रहने
उतर।
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तरुवर वाला दोहा: पेड़ अपना फल स्वयं नह खाते, सरोवर अपना जल स्वयं नह पीते। इसी तरह सज्जन लोग धन दूसर के
भले के लए जोड़ते ह।
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m .cमलान करने क तरक ब: पहले हर दोहे म से एक कुंजी-शब्द छाँ टए —agयहाँ क्रमशः ‘प्रेम’, ‘मीत’ और ‘पर
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ag काज’। फर स्तंभ 2 म उसी अथ का शब्द खो जए — ‘ रश्ते’, ‘ मत्र’ और ‘पर हत’। मलान अपने आप हो जाएगा,
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अंदाज़ा लगाने क ज़रूरत नह पड़ेगी।
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पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 47
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से भावाथ
प्र.1 नीचे दए गए दोह पर समूह म चचा क जए और उनके अथ या भावाथ अपनी लेखन पु स्तका म ल खए— (क)
“र हमन बपदाहू भली, जो थोरे दन होय। हत अन हत या जगत म, जा न परत सब कोय॥”
शब्दाथ पहले — बपदाहू = वपदा, मुसीबत; भली = अ ; थोरे दन = थोड़े दन क ; हत = भला चाहने वाला; अन हत = बुरा
चाहने वाला; जा न परत = जान पड़ जाता है, पहचान म आ जाता है; सब कोय = सब लोग।
अथ — रहीम कहते ह क वपदा भी अ ही है, बशत वह थोड़े दन क हो। क्य क वपदा म ही इस संसार म यह पता चल
जाता है क कौन हमारा भला चाहने वाला है और कौन बुरा चाहने वाला।
भावाथ — सुख के दन म सब मुस्कराकर मलते ह, इस लए तब कोई परख नह हो पाती। मुसीबत आते ही चेहरे अलग-अलग हो
जाते ह — कुछ लोग आगे बढ़कर हाथ थाम लेते ह, कुछ रास्ता बदल लेते ह। इसी लए रहीम वपदा को ‘भली’ कहते ह — वह दुख
दे ती है, पर साथ म एक बहुत क़ मती चीज़ भी दे ती है: लोग क सही पहचान।
‘जो थोरे दन होय’ — यह शत क्य जोड़ी: रहीम भोले नह ह। वे यह नह कह रहे क मुसीबत जतनी लंबी हो
उतनी अ । लंबी वपदा तो तोड़ दे ती है। इस लए वे साफ़ शत लगाते ह — थोड़े दन क हो तो। इसी एक शत से
दोहा उपदे श न रहकर व्यावहा रक अनुभव क बात बन जाता है। यही रहीम क नी त-काव्य क वशेषता है।
पाठ से जो ड़ए: यही बात रहीम एक और दोहे म दोहराते ह — “क ह रहीम संप त सगे… बप त कसौट जे कसे, ते
ही साँचे मीत।” दोन दोह म वप त्त एक कसौट है, दं ड नह । परीक्षा म इन दोन को साथ लखने पर उत्तर और
मज़बूत हो जाता है।
प्र.2 (ख) “र हमन ज ा बावरी, क ह गइ सरग पताल। आपु तो क ह भीतर रही, जूती खात कपाल॥”
शब्दाथ पहले — ज ा = जीभ; बावरी = बावली, पगली, बना सोचे-समझे काम करने वाली; क ह गइ = कह गई; सरग पताल =
स्वग और पाताल, यानी कुछ भी, कैसी भी बड़ी-छोट बात; आपु = स्वयं; भीतर रही = मुँह के अंदर ही रह गई; जूती खात = जूते
खाती है, मार और अपमान सहती है; कपाल = माथा, सर।
अथ — रहीम कहते ह क यह जीभ बावली है। यह बना सोचे स्वग से पाताल तक क , यानी कुछ भी बात कह जाती है। कहकर वह
तो मुँह के भीतर आराम से बैठ रहती है, पर उसक कही बात का दं ड कपाल यानी सर को भोगना पड़ता है — जूती सर पर पड़ती
है।
भावाथ — बना सोचे बोली गई बात का नुक़सान बोलने वाले को ही उठाना पड़ता है। इस लए मुँह से नकलने से पहले हर बात
तौल लेनी चा हए। तीर और बात, दोन एक बार छू ट जाने पर लौटते नह ।
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भाषा का कमाल — मानवीकरण: रहीम ने जीभ को एक जीता-जागता शरारती पात्र बना दया है, जो शरारत
करके भीतर छप जाता है। शरीर के एक अंग को इस तरह मनुष्य क तरह बरतना मानवीकरण कहलाता है। साथ
ही ‘सरग-पताल’ म वरोधाभासी जोड़ा रखकर उन्ह ने ‘कुछ भी, कैसी भी बात’ को केवल दो शब्द म कह दया
— यही दोहे क कसावट है।
ऐसे प्रश्न म क्या लख: भावाथ लखते समय तीन बात र खए — (1) क ठन शब्द के अथ, (2) सीधा-सादा अथ,
(3) जीवन क वह सीख जो दोहे से नकलती है। इन तीन के बना उत्तर अधूरा माना जाता है।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 47 और 48
पाठ से
पाठ से खोज
प्र.1 दोह को एक बार फर से प ढ़ए और नम्न ल खत के बारे म पता लगाकर अपनी लेखन पु स्तका म ल खए— 1.
“र हमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छटकाय। टू टे से फर ना मले, मले गाँठ प र जाय॥” (क) इस दोहे म ‘ मले’ के
ान पर ‘जुड़े’ और ‘ छटकाय’ के ान पर ‘चटकाय’ शब्द का प्रयोग भी लोक म प्रच लत है। जैसे— “र हमन
धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टू टे से फर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय॥” इसी प्रकार पहले दोहे म ‘डा र’ के
ान पर ‘डार’, ‘तलवा र’ के ान पर ‘तरवार’ और चौथे दोहे म ‘मानुष’ के ान पर ‘मानस’ का उपयोग भी
प्रच लत ह। ऐसा क्य होता है?
ऐसा इस लए होता है क ये दोहे सैकड़ वष तक कताब से नह , जबान से चलते रहे। रहीम लगभग साढ़े चार सौ वष पहले हुए
थे। तब न छापाख़ाना था, न घर-घर पुस्तक। लोग दोहे सुनते, याद करते और आगे सुनाते थे। इसी मौ खक परंपरा म शब्द थोड़े-थोड़े
बदलते चले गए।
मुख्य कारण —
सुनकर याद रखना: याद रखते समय आदमी वही रूप पकड़ता है जो उसक अपनी बोली म सहज हो। ‘ छटकाय’ क ठन लगा
तो ‘चटकाय’ हो गया; ‘ मले’ क जगह वही ‘जुड़े’ आ गया जो धागे के साथ रोज़ बोला जाता है।
अलग-अलग बो लयाँ: ये दोहे अवधी, ब्रज, बुंदेली, भोजपुरी — हर इलाक़े म गाए गए। हर बोली ने शब्द को अपने ढं ग से ढाल
लया — ‘तलवा र’ ब्रज का रूप है, ‘तरवार’ बोलचाल का।
अथ वही, ध्व न आसान: ‘डा र → डार’, ‘मानुष → मानस’ — दोन रूप का अथ एक ही है, पर छोटा और चलता हुआ रूप
बोलने म आसान पड़ता है। भाषा हमेशा आसानी क ओर बहती है।
छं द बना रहता है: बदले हुए शब्द भी दोहे क मात्रा और तुक नह तोड़ते — ‘जाय’ क तुक ‘चटकाय’ से भी उतनी ही बैठती है
जतनी ‘ छटकाय’ से। इसी लए लोक ने बदलाव सहज स्वीकार कर लया।
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पाठ का लोक म प्रच लत अथ बदलाव का कारण
रूप रूप
छटकाय चटकाय झटका दे कर / चटकाकर ‘चटकना’ रोज़ क बोली का शब्द है, इस लए जबान पर
तोड़ना जल्द चढ़ा।
मले जुड़े जुड़ना, मल जाना धागे के साथ ‘जुड़ना’ ही स्वाभा वक क्रया लगती है।
डा र डार फक दे ना ब्रज का पुराना रूप छोटा होकर बोलचाल म आ गया।
तलवा र तरवार तलवार क्षेत्रीय उ ारण — ‘ल’ का ‘र’ हो जाना बो लय म आम है।
मानुष मानस मनुष्य संस्कृत-प्रभा वत रूप और तत्सम रूप, दोन साथ-साथ
चलते रहे।
इसे ‘पाठ-भेद’ कहते ह: एक ही रचना के दो अलग-अलग प्रच लत रूप को व ान पाठ-भेद या पाठांतर कहते
ह। इसम कोई रूप ‘ग़लत’ नह होता — जो प्राचीनतम हस्त ल खत प्र तय म मले, वह ‘प्रामा णक पाठ’ माना
जाता है। इसी लए आपक पुस्तक ने पाठ के नीचे ोत लखा है — रहीम ंथावली (सं.) व ा नवास मश्र। परीक्षा
म सदा पुस्तक वाला रूप ही ल खए।
करके दे खए: अपने घर के बड़ से यही दोहा सु नए और उनका बोला हुआ रूप ज्य -का-त्य लख ली जए। फर
पुस्तक वाले रूप से मलाइए। एक ही कक्षा म तीन-चार रूप नकल आएँ, तो सम झए आपने ‘पाठ-भेद’ अपनी
आँख से दे ख लया।
प्र.2 (ख) इस दोहे म प्रेम के उदाहरण म धागे का प्रयोग ही क्य कया गया है? क्या आप धागे के ान पर कोई अन्य
उदाहरण सुझा सकते ह? अपने सुझाव का कारण भी बताइए।
धागा चुना गया, क्य क प्रेम और धागे का स्वभाव आश्चयजनक रूप से एक जैसा है। रहीम को जो चार बात कहनी थ , वे चार धागे
म एक साथ मल जाती ह —
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धागे का गुण प्रेम म वही बात
धागा दो चीज़ को जोड़ता है पेम भी दो लोगों को जोड़ ता है — यही उसका मूल काम है।
धागा महीन और नाजक पेम भी नाज़ क
ु है — ज़ रा-सी कठोरता से चटक जाता है।
होता है
झटका दे ने पर तुरंत टू ट ोध का एक झटका बरसों के संबंध को तोड़ दे ता है। ‘िछटकाय’ श द इसी झटके के िलए है।
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जाता है
टू टकर जुड़े तो गाँठ पड़ यह सबसे गहरी बात है — मनमुटाव के बाद सुल ह हो भी जाए , तो मन में एक गाँठ रह जाती है। िर ता पहले जैस ा
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जाती है िचकना नही ं रहता।
चौथी बात ही असली कारण है। य द रहीम केवल ‘नाजक’ कहना चाहते तो काँच या फूल भी चल जाता। पर काँच टू टकर जुड़ता
ही नह , और फूल मुरझाकर ख़त्म हो जाता है। धागा अकेली ऐसी चीज़ है जो टू टकर फर जुड़ भी सकती है — पर गाँठ के साथ।
रहीम को यही ‘गाँठ’ चा हए थी, इसी लए धागा ही सट क बैठा।
धागे क जगह और कौन-से उदाहरण चल सकते ह —
काँच या दपण: टू टने पर जोड़ भी द तो दरार दखती रहती है — ठ क वैसे ही जैसे मन क गाँठ। पर कमी यह है क काँच
जुड़ता नह , केवल चपकता है।
काग़ज़: एक बार मोड़ द जए, सीधा करने पर भी नशान रह जाता है। मन पर पड़े नशान के लए बहुत अ ा उदाहरण है।
दूध: एक बूँद न बू से फट जाता है और फर कभी दूध नह बनता। यह बताता है क कुछ रश्ते तो लौटते ही नह ।
पौधे क टहनी: हरी टहनी मुड़ भी जाए तो चलती रहती है, पर चटकाने पर सूख जाती है — धैय से रश्ता बचाने क सीख
इसम है।
नमूना उत्तर:
“रहीम ने धागे का उदाहरण इस लए चुना है क धागा जोड़ता है, नाजक है, झटके से टू टता है और टू टकर जुड़ने पर
उसम गाँठ पड़ जाती है। प्रेम के साथ भी ठ क यही चार बात होती ह।
म धागे के स्थान पर काग़ज़ का उदाहरण सुझाऊँगा — ‘ रश्ते काग़ज़ क तरह ह, एक बार मोड़ दो तो नशान रह ही
जाता है।’ कारण यह क काग़ज़ भी हर घर म है, वह भी नाजक है, और उस पर पड़ा सलवट का नशान ठ क वैसा
ही है जैसा मन म पड़ी गाँठ। पर मानना पड़ेगा क धागा फर भी ज़्यादा सट क है, क्य क उसम ‘जोड़ने’ का काम
पहले से मौजूद है, जो काग़ज़ म नह ।”
प्र.3 2. “तरुवर फल न ह खात ह, सरवर पय ह न पान। क ह रहीम पर काज हत, संप त सँच ह सुजान॥” इस दोहे म
प्रकृ त के माध्यम से मनुष्य के कस मानवीय गुण क बात क गई है? प्रकृ त से हम और क्या-क्या सीख सकते
ह?
इस दोहे म प्रकृ त के माध्यम से परोपकार (पर हत, दूसर का भला करना) नामक मानवीय गुण क बात क गई है। इसी के साथ
त्याग और नःस्वाथ भाव भी जुड़े हुए ह।
दोहे का अथ — पेड़ अपने फल स्वयं नह खाते, सरोवर अपना जल स्वयं नह पीते। रहीम कहते ह क इसी प्रकार सज्जन लोग
धन-संप त्त दूसर के काम आने के लए ही जोड़ते ह।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे
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तरुवर → फल दे त ा है, खाता नही ं
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सरवर → जल दे त ा है, पीता नही ं
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a s emसंपित्त जोड़ ता है, अपने िलए नही ं — ‘पर काज िहत’
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स ुजान
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रहीम ने पहले दो उदाहरण प्रकृ त से दए और तीसरी पं क्त म उसी नयम को मनुष्य पर लागू कर दया। इस तरह उपदे श दे ना नह
पड़ा — प्रकृ त ने अपने आप उपदे श दे दया। यही इस दोहे क सुंदरता है।
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प्रकृ त से और क्या-क्या सीख सकते ह —
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प्रकृ त का जो वह करती है हमारी सीख
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उदाहरण
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s -पराया का भेद न करना।
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सूरज बना भेदभाव के सबको एक-सा प्रकाश दे ता है , अपना
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बहती रहती है, रास्ते म पत्थर आए तो मुड़कर आगे िनरंतर पिर म और धै य — कावट से लड़ ने के बजाय
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नकल जाती है रा ता िनकालना।
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फूल काँट के बीच रहकर भी सुगंध बाँटता है किठन पिरि थित में भी िमठास और अ छा वभाव बनाए
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रखना।
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चट
a glचढ़ती है, और मलकर
बार-बार गरकर भी फर लगन, सहयोग और संचय की आदत।
काम करती है
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.cलoकर काम करना।
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मधुमक्खी अनेक फूल से थोड़ा-थोड़ा लेकर शहद बनाती है पिर म, अनुशासन और िमल -जु
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बादल om a
m .c समुद्र से लेकर धरती पर बरसा दे ता है
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जो पाया है उसेgलौटाना
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पहाड़ चुपचाप, अ डग खड़ा रहता है धै य और ि थरता — मुि कल में िवचिलत न होना।
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आज का छोटा याग कल की बड़ ी उपलि ध बनता है।
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बीज मट्ट म गलकर पूरा पेड़ बन जाता है
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g l aनsे: दोन एक जगह टके रहते ह और फर भी सारा जीवन दे ते रहते ह। न वे
a गते ह, न दे खते ह क लेने वाला कौन है। ब ा भी पेड़ का फल तोड़ ले, पक्षी भी।
रहीम ने पेड़ और सरोवर ही क्य चु
मोल-भाव करते ह, न धन्यवाद माँ
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यही नःस्वाथ ‘दे ना’ रहीम को मनुष्य म चा हए — और यह बात एक ब ा भी अपनी आँख से रोज़ दे खता है,
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इस लए दोहा सीधे मन म उतर जाता है।
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m याद र खए: रहीम यह नह कह रहे क धन कमाना बुरा है। वे ‘संप त सँच ह’ — संप त्त जोड़ो — कह ही रहे ह।
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उनका ज़ोर उ े श्य पर है: जोड़ो, पर दूसर के काम आने के लए।
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शब्द-संपदा — पृष्ठ 48
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 क वता म आए कुछ शब्द नीचे दए गए ह। इन शब्द को आपक मातृभाषा म क्या कहते ह? ल खए। (क वता म
आए शब्द — तरुवर, बप त, छटकाय, सुजान, सरवर, साँचे, कपाल)
यह प्रश्न आपक अपनी मातृभाषा का है, इस लए हर व ाथ का उत्तर अलग होगा। तरीक़ा यह है — पहले शब्द का हद अथ
पक्का क जए, फर घर पर माँ, दाद या नानी से पू छए क उसी चीज़ को वे अपनी बोली म क्या कहती ह, और वही शब्द ता लका
म भ रए।
पहले हर शब्द का अथ —
क वता म आया शब्द हद म अथ दोहे क पं क्त
तरुवर पेड़, वृ क्ष “तरुवर फल निहं खात है…
ं ”
बप त िवपि , संक ट, मुस ीबत
त्त “िबपित कसौटी जे कसे …”
छटकाय झटका दे क र, झटककर “मत तोड़ो िछटकाय”
सुजान स जन, समझदार और भला यि त
ज् व् क् “संपित सँचिह सुजान”
सरवर सरोवर, तालाब “सरवर िपयिहं न पान”
साँचे स चे
च् “ते ही साँचे मीत”
कपाल माथा, िसर “जूती खात कपाल”
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर (कुछ भाषाओं के समानाथक शब्द): अपनी भाषा का स्तंभ दे खकर मलाइए, और जो भाषा यहाँ न
हो उसके लए घर के बड़ से पू छए।
शब्द भोजपुरी / अवधी मराठ बांग्ला गुजराती त मल
तरुवर गाछ, पेड़ झाड (वृक्ष) गाछ झाड मरम्
बप त बपत, मुसीबत संकट, आपत्ती बपद आफत, संकट तुन्बम्
छटकाय झट क के हसका दे ऊन झाटका दये झटको मारीने इळु त्तु
सुजान सुजान, भलमानुस सज्जन सज्जन, भालो लोक सज्जन नल्लवर्
सरवर पोखरा, ताल तळे , सरोवर पुकुर, द घ तळाव कुळम्
साँचे साँच, स ा खरे स त्य, खाँ ट साचा उण्मैयान
कपाल माथ, कपार कपाळ, डोके कपाल, माथा कपाळ, माथुं नेट्
यह ग त व ध क्य द गई है: ध्यान द जए क कई शब्द लगभग हर भाषा म एक जैसे ह — ‘कपाल’ हद , मराठ ,
बांग्ला, गुजराती चार म मलता-जुलता है; ‘सरोवर’ भी। इसका कारण यह है क ये सब शब्द संस्कृत से आए ह। जब
आप अपनी मातृभाषा का शब्द लखकर हद से मलाते ह, तो आप अपने आप दे ख लेते ह क भारत क भाषाएँ
आपस म कतनी जुड़ी हुई ह।
कक्षा के लए सुझाव: श्यामपट्ट पर सात शब्द लखकर हर व ाथ से अपनी बोली का शब्द बुलवाइए और उसके
नीचे लखते जाइए। एक ही कक्षा म ‘तरुवर’ के आठ-दस रूप नकल आएँगे — यही कक्षा क सबसे सुंदर ‘शब्द-
संपदा’ है।
शब्द एक अथ अनेक — पृष्ठ 49
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 “र हमन पानी रा खये, बनु पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥” इस दोहे म ‘पानी’ शब्द के
तीन अथ ह— सम्मान, जल, चमक। इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दए गए ह। आप भी इन शब्द के तीन-तीन अथ
ल खए। (कल, पत्र, कर, फल)
पहले दोहे को समझ ली जए, क्य क यही इस अभ्यास का नमूना है। रहीम कहते ह — पानी बचाकर र खए, पानी के बना सब
सूना है। पानी चला जाए तो न मोती बचता है, न मनुष्य, न चूना। और मज़ा यह है क तीन के लए ‘पानी’ का अथ अलग है —
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
कसका पानी ‘पानी’ का अथ पानी जाने पर क्या होता है
मोती का चमक , आभा चमक चली जाए तो मोती केवल एक साधारण दाना रह जाता है।
मनुष्य का स मान, पित ठा, इ ज़ ़ त
म् ष् ज् इज़्ज़त चली जाए तो मनुष्य समाज म मुँह दखाने लायक़ नह रहता।
चूने का जल जल के बना चूना बुझता ही नह , बेकार पड़ा रह जाता है।
एक ही शब्द के ऐसे अनेक अथ होने को अनेकाथ शब्द कहते ह। अब दए गए चार शब्द के तीन-तीन अथ —
शब्द अथ 1 अथ 2 अथ 3
कल बीता हुआ या आने वाला िदन चैन, आराम, शांित मशीन, यं , पुज़
त्र
पत्र िच ी, ख़त प ा, पेड़ का पण
त्त समाचार-प , अख़बार
त्र
कर हाथ टै स , राज व, शु क
क् स् ल् िकरण (सूय की)
फल पेड़ का फल , मेवा पिरणाम, नतीजा चाकू या तलवार का धारदार भाग
हर अथ का एक-एक वाक्य — अथ याद रखने का सबसे पक्का तरीक़ा यही है क उसे वाक्य म बरत लया जाए।
शब्द अथ वाक्य म प्रयोग
कल बीता/आने वाला दन कल हमारी िहंद ी की परीक्षा है।
चैन, आराम बच्चे के लौट आने तक माँ को कल न पड़ा।
मशीन, यंत्र िमस्त्री ने आटा-चक्की के कल-पुज़ खोलकर साफ़ िकए।
पत्र च दादी ने अपने हाथ से िलखा पत्र भेजा है।
पत्ता पूजा की थाली में तुल सी का पत्र रखा था।
अख़बार यह समाचार आज के पत्र में छपा है।
कर हाथ माँ ने कर जोड़कर सबका अिभनंद न िकया।
टै क्स हर नागिरक को समय पर कर चुक ाना चािहए।
करण सूय के पहले कर पड़ते ही ओस चमक उठी।
फल पेड़ का फल आम गिमयों का सबसे िपय फल है।
प रणाम मेहनत का फल दे र से िमलता है, पर मीठा िमलता है।
धारदार भाग चाकू का फल इतना तेज़ था िक काग़ ज़ अपने आप कट गया।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
अनेकाथ शब्द पहचानने का सूत्र: अथ शब्द म नह , वाक्य म बैठा होता है। ‘कल’ अकेला बो लए तो कुछ पता
नह चलता; ‘कल आऊँगा’ कहते ही दन का अथ खुल जाता है और ‘कल-पुज़’ कहते ही मशीन का। इसी लए ऐसे
प्रश्न म केवल अथ लखकर मत छो ड़ए — साथ म एक-एक वाक्य ज़रूर बनाइए, तभी उत्तर पूरा माना जाता है।
और भी अनेकाथ शब्द (अपने आप क जए): हार — पराजय / माला / पहाड़ क श्रेणी। अंबर — आकाश /
वस्त्र / एक सुगं धत द्रव्य। नग — रत्न / पहाड़ / वस्तु क गनती। सोना — स्वण / न द लेना / बहुत क़ मती। इन्ह
भी शब्दकोश से जाँचकर वाक्य बनाइए।
आपक बात — पृष्ठ 49
पाठ से आगे
पाठ से आगे ले ख न
प्र.1 “र हमन दे ख बड़ेन को, लघु न द जये डा र। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवा र॥” इस दोहे का भाव है— न
कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम ह, सबक अपनी-अपनी उपयो गता और महत्ता है।
… अपने मनपसंद दोहे को इस तरह क शैली म अपने शब्द म ल खए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो
सकता है।
यह आपक अपनी लेखनी का काम है। पहले तरीक़ा समझ ली जए — पुस्तक ने जो नमूना दया है, उसम चार चीज़ ह, और यही
चार आपके लेखन म भी होनी चा हए।
क्रम क्या करना है पुस्तक के नमूने म यह कहाँ है
1 दोहे क मूल सीख एक वाक्य म “न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। ”
2 उसे खोलकर समझाना “सबके अपने-अपने काम है,ं सबकी अपनी-अपनी उपयोिगता और महत्ता है। ”
3 अपनी ओर से उदाहरण जोड़ना “चाहे हाथी हो या ची ंटी, तलवार हो या सुई…”
4 अंत म जीवन क सीख “कोई वस्तु हो या व्यिक्त, छोटा हो या बड़ा, सबका सम्मान करना चािहए।”
ध्यान रखने क बात —
दोहे का शब्दशः अनुवाद मत क जए; उसका भाव अपने शब्द म क हए।
कम-से-कम एक उदाहरण अपने आसपास से ली जए — अपने घर, खेत, कक्षा या गाँव से। यही आपके लेखन को दूसर से
अलग बनाएगा।
छह-आठ वाक्य पयाप्त ह। लंबाई नह , स्पष्टता दे खी जाती है।
दोहा पहले ज्य -का-त्य उद्धरण- च म ल खए, फर व्याख्या।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे
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नमूना उत्तर 1 (पाठ के भीतर से):
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“र हमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छटकाय।
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टू टे से फर ना.cमले, मले गाँठ प र जाय॥”
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g दोहे का भाव है — प्रेम बहुत नाजक चीज़ है, उसे झटके से मत तो ड़ए। धागा जब तक साबुत है, तब तक जोड़ने
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का काम करता है; एक झटका लगते ही टू ट जाता है। और टू टने के बाद अगर जोड़ भी दया जाए, तो उसम गाँठ पड़
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जाती है — वह पहले जैसा चकना कभी नह रहता। रश्त के साथ भी ठ क यही होता है। क्रोध म कही गई एक
बात बरस क दोस्ती तोड़ दे ती है। बाद म माफ़ माँeगm
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े गाँlव म दो भाइय के बीच खेत क मेड़ को लेकर हुआ झगड़ा दस साल
भी ल, तो भी मन म एक गाँठ बची रह जाती है। इसी लए झगड़े
को बढ़ने से पहले ही रोक लेना चा हए। मेaरg
तक चला — बाद म सुलह तो हो गई, पर वे पहले जैसे कभी नह हो पाए। यही ‘गाँठ पड़ जाना’ है।
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coतोmक्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
नमूना उत्तर 2 (पाठ से बाहर का दोहा):
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“बड़ा हुआ
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gl को छाया नह , फल लागे अ त दूर॥” — कबीर
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इस दोहे का भाव है — केवल बड़ा हो जाना कोई गुण नह है। खजूर का पेड़ सबसे ऊँचा होता है, पर उसक छाया
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इतनी पतली होती है क थका हुआ राही उसके नीचे बैठ भी नह सकता, और फल इतने ऊपर लगते ह क कसी के
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हाथ नह आते। बड़ा वही है जो दूसर के काम आए। हमारे स्कूल के आँगन म एक नीम का पेड़ है — खजूर से छोटा
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है, पर दोपहर म पूरी कक्षा उसक छाया म बैठ जाती है। इसी लए मुझे नीम खजूर से बड़ा लगता है। पद, धन या क़द
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से नह , आदमी अपने काम से बड़ा होता है।
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अ ा लेखन कैसे पहचाना जाता है: जस उत्तर म एक भी अपना उदाहरण होता है, वह तुरंत अलग दखता है।
s e m का अथ तो सब लख दगे — नीम का पेड़ या खेत क मेड़ आपके अपने अनुभव से आएगी। इसी लए लखने से
la पहले एक मनट सो चए क यह बात आपने अपने जीवन म कहाँ दे खी है।
दोहे
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सरगम — पृष्ठ 50
पाठ से आगे
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पाठ से आगे गतवध
mse से कई बार सुने ह गे। कक्षा म
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m .c रहीम, कबीर, तु लसी, वृ द
ं आ द के दोहे आपने दृश्य-श्रव्य (ट .वी.-रे
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डयो) माध्यम
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प्र.1
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आपने दोहे भी बड़े मनोयोग से गाए ह गे । अब बारी है इन दोह क रकॉ डग (ऑ डयो या वजुअल) क ।
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रकॉ डग सामान्य मोबाइल से क जा सकती है। इन्ह अपने दोस्त के साथ समूह म या अकेले गा सकते ह। य द
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संभव हो तो वाद्ययंत्र के साथ भी गायन कर। रकॉ डग के बाद दोहे स्वयं भी सुन और लोग को भी सुनाएँ।
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यह करके दे खने क ग त व ध है। नीचे पूरी व ध द गई है — इसी क्रम से क जए तो रकॉ डग एक ही बार म अ बनेगी।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
चरण 1 — दोहा चु नए और अथ सम झए। बना अथ समझे गाया दोहा सपाट सुनाई दे ता है। जस पं क्त म चेतावनी है (‘मत
तोड़ो छटकाय’) वहाँ आवाज़ थोड़ी दृढ़ र खए, और जहाँ कोमल भाव है (‘ मले गाँठ प र जाय’) वहाँ धीमी।
चरण 2 — दोहे क चाल पक ड़ए। दोहे क हर पं क्त दो हस्स म बँट होती है और बीच म ज़रा-सा ठहराव आता है। यह से लय
बनती है —
रिहमन धागा पेम का / मत तोड़ ो िछटकाय
टू टे से िफर ना िमले / िमले गाँठ पिर जाय
पहले बना गाए, केवल ताली बजाते हुए इसी ठहराव के साथ बो लए। लय अपने आप बैठ जाएगी।
चरण 3 — तैयारी।
कम-से-कम पाँच बार रयाज़ क जए; रटा हुआ दोहा ही आत्म वश्वास से गाया जाता है।
समूह म गाना हो तो शुरुआत एक साथ करने के लए कोई एक साथी हाथ से इशारा करे।
ढोलक, मंजीरा, खँजरी या केवल ताली — कोई भी संगत चलेगी। ताल सादा र खए।
चरण 4 — रकॉ डग।
शांत कमरा चु नए; पंखा और खड़क बंद कर ली जए — पंखे क आवाज़ रकॉ डग म सबसे ज़्यादा खलती है।
मोबाइल को मुँह से लगभग एक बत्ता (20–25 स.मी.) दूर र खए और कसी चीज़ पर टका द जए, हाथ म मत पक ड़ए।
शुरू म दो सेकंड चुप र हए, फर बो लए — “यह दोहा रहीम का है।” फर गाइए। अंत म भी दो सेकंड चुप र हए।
वी डयो बना रहे ह तो रोशनी आपके सामने हो, पीछे नह । खड़क क तरफ़ मुँह करके खड़े होइए।
चरण 5 — सु नए और सुधा रए। पहली रकॉ डग सुनकर जाँ चए — शब्द साफ़ सुनाई दे रहे ह? कह जल्दबाज़ी तो नह ? लय
टू ट तो नह ? एक बार सुधार कर दोबारा रकॉड करने से नतीजा बहुत बेहतर हो जाता है।
कक्षा के लए सुझाव: सब ब क रकॉ डग मलाकर एक ‘दोहा-संग्रह’ बना ली जए और उसे व ालय क
प्राथना-सभा म एक-एक दन एक दोहे के हसाब से बजाइए। ब को दोहे बहुत जल्द याद हो जाएँगे और सुनाने
का उत्साह भी बना रहेगा।
दोहा गाया क्य जाता है: दोहा छपने के लए नह , कंठ से कंठ तक जाने के लए बना छं द है। इसक मात्राएँ इतनी
संतु लत ह क एक बार सुनने पर ही याद रह जाती ह। यही कारण है क रहीम और कबीर के दोहे साढ़े चार सौ साल
बाद भी उन लोग को याद ह जन्ह ने कभी उनक कताब नह दे खी।
प्र.2 रहीम, वृन्द, कबीर, तुलसी, बहारी आ द के दोहे आज भी जनजीवन म लोक प्रय ह। दोहे का प्रयोग लोग अपनी
बात पर वशेष ध्यान दलाने के लए करते ह। जब दोहे समाज म इतने लोक प्रय ह तो क्य न इन दोह को एकत्र
कर और अंत्याक्षरी खेल। अपने समूह म मलकर दोहे एकत्र क जए। इस काय म आप इंटरनेट, पुस्तकालय और
अपने शक्षक या अ भभावक क सहायता भी ले सकते ह।
यह समूह-काय है। पहले दोहे इक े क जए, फर अंत्याक्षरी खे लए।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
दोहे कहाँ से मलगे —
घर से: दादा-दाद और नाना-नानी से पू छए। सबसे अ े और सबसे कम मलने वाले दोहे यह मलते ह।
पुस्तकालय से: ‘रहीम ंथावली’, ‘कबीर ंथावली’, ‘ बहारी सतसई’, वृंद के ‘वृंद सतसई’ और ‘रामच रतमानस’ के दोहे।
इंटरनेट से: खोजते समय क व का नाम भी ल खए (‘रहीम के दोहे अथ स हत’), और जो मले उसे शक्षक से एक बार जँचवा
ली जए — जाल पर बहुत-से दोहे ग़लत क व के नाम से चढ़े रहते ह।
कक्षा से: हर व ाथ पाँच दोहे लाए तो चालीस ब क कक्षा म दो सौ दोहे इक े हो जाएँगे।
संग्रह इस तरह बनाइए — केवल दोहा लखने से काम नह चलेगा, तीन खाने बनाइए:
दोहा कव भाव / सीख
“रिहमन दे िख बड़ेन को, लघु न दीिजये डािर। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे रहीम हर छोट -बड़ी वस्तु का अपना महत्व है।
तलवािर॥”
“ऐसी बानी बोिलए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै , आपहु सीतल कबीर मीठ वाणी दूसर को भी सुख दे ती है और
होय॥” स्वयं को भी।
“तुल सी मीठे बचन ते, सुख उपजत चहु ँ ओर। बसीकरन इक मंत्र है, पिरहरु तुल सीदास मीठे बोल सबको अपना बना लेने का मंत्र ह।
बचन कठोर॥”
“करत-करत अभ्यास के , जड़मित होत सुजान। रसरी आवत जात ते, िसल वृंद नरंतर अभ्यास से मंदबु द्ध भी व ान बन
पर परत िनसान॥” जाता है।
“कनक कनक ते सौ ग नु ी, मादकता अिधकाय। वा खाए बौराय जग, या पाए िबहारी धुतूरे से भी सौ गुना अ धक नशा सोने (धन)
बौराय॥” म होता है।
अंत्याक्षरी के नयम — दोह क अंत्याक्षरी इस तरह खेली जाती है:
1. कक्षा दो दल म बँट जाए।
2. पहला दल कोई दोहा पूरा सुनाए। अधूरा दोहा मान्य नह होगा।
3. दोहे का अं तम अक्षर ली जए। जैसे “…कहा करे तलवा र” का अं तम अक्षर र हुआ।
4. दूसरा दल उसी अक्षर से शुरू होने वाला दोहा सुनाए। अक्षर क ठन पड़े (जैसे ‘ङ’, ‘ञ’) तो उससे पहले वाला अक्षर लया जा
सकता है — यह नयम पहले ही तय कर ली जए।
5. तीस सेकंड म उत्तर न आया तो बारी दूसरे दल क ।
6. दोहे के साथ क व का नाम बताने पर एक अ त रक्त अंक — इससे ब े क व भी याद रखगे।
7. एक दोहा एक ही बार चलेगा; दोहराने पर अंक कट जाएगा।
दोहे इतने लोक प्रय क्य ह: तीन कारण ह — छोटे ह, इस लए याद हो जाते ह; लयदार ह, इस लए जबान पर चढ़
जाते ह; और बात पूरी कह दे ते ह, इस लए बहस म एक दोहा दस वाक्य का काम कर दे ता है। इसी लए आज भी
लोग अपनी बात पर ज़ोर दे ने के लए बीच म दोहा टाँक दे ते ह।
आज क पहेली — पृष्ठ 50
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 1. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम। उल्टा होकर नाच दखाऊँ, म क्य अपना नाम बताऊँ।
उत्तर है — चना।
च + ना = चना — दो अक्षर
उलटकर पिढ़ ए → ना + च = नाच
हर पं क्त कैसे मलती है —
पहेली क पं क्त संकेत चना पर कैसे लागू
“दो अक्षर का मेर ा नाम” नाम म केवल दो अक्षर च–ना, ठीक दो अ र।
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“आता हू ँ खाने के काम” यह कोई खाने क चीज़ है भुना चना, चने की दाल , चने का साग, चने का बेस न — सब खाए जाते
है।ं
“उल्टा होकर नाच अक्षर उलटने पर दूसरा शब्द बनता ‘चना’ को उलटा पिढ़ ए तो ‘नाच’ बन जाता है।
िदखाऊँ” है
“मैं क्यों अपना नाम बताऊँ” यही तो बूझने के लए कहा गया है तीसरी पंि त ही सबसे बड़ ा सुराग़ है — नाम उसी में िछपा है।
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इस पहेली क चाल: यह शब्द को उलटकर बनने वाली पहेली है — इसे ‘ वलोमपद’ या प लद्रोम-जैसा खेल कहते
ह। ऐसी पहे लय म पहले उस शब्द को खो जए जो अथ के संकेत (यहाँ ‘खाने के काम’) पर बैठे, फर उसे उलटकर
दे खए क दूसरा संकेत (यहाँ ‘नाच’) मलता है या नह । दोन मल जाएँ तो उत्तर पक्का।
ऐसे और शब्द (अपने आप उलटकर दे खए): राही ↔ हीरा, नमक ↔ कमन, दाल ↔ लादा, कला ↔ लाक, जग
↔ गज, नल ↔ लन, रस ↔ सर, तन ↔ नत, मन ↔ नम, काला ↔ लाका। इनम से कुछ के दोन रूप अथ रखते
ह — जग–गज और रस–सर जैसे। इन्ह से आप अपनी नई पहेली बना सकते ह।
प्र.2 2. एक कले के दो ही ार, उनम सै नक लकड़ीदार। टकराएँ जब द वार से, जल उठे सारा संसार।
उत्तर है — मा चस ( दयासलाई) क ड बया।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
पहेली क पं क्त मा चस म वह क्या है
“एक िकले के दो ही मािचस की िडिबया एक छोटा-सा िकला है। उसके ऊपरी खोल के दो िसरे खुले रहते है ं — भीतर का ख़ाना इधर से
ार” भी िनकलता है, उधर से भी। यही दो ार है।ं
“उनमें सै िनक भीतर पंि त बाँधकर खड़ ी लकड़ ी की तीिलयाँ — िसपािहयों की कतार जैस ी।
क्
लकड़ीदार”
“टकराएँ जब दीवारों तीली को िडिबया के बग़ ल वाले खुरदरे िह से पर रगड़ ा जाता है — यही दीवार से टकराना है।
स्
से ”
“जल उठे सारा रगड़ ते ही तीली जल उठती है। एक तीली से चू ा, दीपक , अलाव — सब जल जाते है,ं इसिलए ‘सारा संस ार’ कहा
संस ार” गया।
तीली जलती क्य है: तीली के सर पर और ड बया क खुरदरी पट्ट पर अलग-अलग रसायन लगे होते ह। रगड़ से
पैदा हुई घषण क गम इन दोन को मलाकर आग पैदा कर दे ती है। इसी लए तीली चकनी द वार पर नह , केवल
उसी खुरदरी पट्ट पर जलती है।
सावधानी: यह पहेली मज़े क है, पर मा चस खलौना नह है। तीली हमेशा बड़ के सामने ही जलाइए और बुझी हुई
तीली पानी म डालकर ही फ कए।
करके दे खए: इसी ढं ग क अपनी पहेली बनाइए — कसी रोज़ क चीज़ को कोई और रूप दे द जए। जैसे —
“काला घोड़ा, सफ़ेद सवार; जतना चले, उतना छोटा हो जाए।” (उत्तर — प सल या चॉक।) दो पं क्तय म एक तुक
मला द जए, पहेली तैयार।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 50
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 रहीम के कुछ अन्य दोहे पुस्तकालय या इंटरनेट क सहायता से पढ़, दे ख व समझ।
यह पढ़ने और खोजने क प रयोजना है। कैसे खोज —
पुस्तकालय म: रहीम ंथावली (संपादक — व ा नवास मश्र) — आपक पाठ्यपुस्तक ने भी यही ोत दया है। इसके
अलावा रहीम रत्नावली और कक्षा-स्तर क ‘दोहावली’ पुस्तक दे खए।
इंटरनेट पर: क व का नाम साथ लखकर खो जए — “रहीम के दोहे अथ स हत”। NCERT, सा हत्य अकादे मी और
वश्व व ालय क वेबसाइट भरोसेमंद ह।
घर म: बड़ से पू छए। बहुत-से दोहे उन्ह कंठस्थ मलगे, जो कसी कताब म शायद ही ह ।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे
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जाँच ली जए: इंटरनेट पर बहुत-से दोहे ग़लत क व के नाम से चढ़े रहते ह। जो दोहा मले, उसे शक्षक से एक बार अवश्य
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जँचवाइए।
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पढ़ने के लए रहीम के कुछ और प्र सद्ध दोहे —
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अपने मन का दुख मन में ही िछपाकर रखो। सुनकर लोग हँसे ंगे भर, बाँटेगा
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“रिहमन िनज मन की िबथा, मन ही राखो गोय। सुिन इठलै है ं
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लोग सब, बाँिट न लै है ं कोय॥” कोई
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“बड़े बड़ाई ना करै ं, बड़े न बोलै ं बोल। रिहमन हीरा कब कहै, बड़ े लोग अपनी बड़ ाई नही ं करते। हीरा कब कहता है िक मेरा मोल लाख पये रु
लाख टका मेर ो मोल॥” है?
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जो ग़ रीब से पेम करते है ं वे ध य है।ं बेचारे सुद ामा कहाँ इसoलायक
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“जे गिरब सों िहत करै ं, धिन रहीम ते लोग। कहा सुद ामा
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बापुर ो, कृ ष्ण िमताई जोग॥” उनसे िम ता करते?
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“समय m . c a g
s e पाइ फल होत है, समय पाइ झिर जाय। सदा रहै निहं
a का रहीम पिछताय॥”
समय आने पर फल लगता है और समय आने पर झड़ भी जाता है। कु छ भी
a g lएक सी, सदा एक -सा नही ं रहता, िफर पछताना कै सा?
अ छे वभाव वाले पर बुरी संगित असर नही ं करती — चंद न से साँप िलपटे
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“जो रहीम उत्तम पकृ ित, का किर सकत कु संग । चंद न िवष
mहै,ं िफर भी उसमें ज़ हर नही ं उतरता। a
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व्यापत नही ं, िलपटे रहत भुजंग ॥” रहते
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“रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार। रिहमन िफिर िफिर
l a ठे हएु अपनों को सौ बार भी मनाइए — जैसे मोितयों की माला टू ट जाए तो
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पोइए, टू टे मुक्ताहार॥” उसे बार-बार िपरो िलया जाता है।
“खीरा िसर ते कािटए, मिलयत नमक लगाय। रिहमन करुए
बोलने वालों के िलए भी यही उपचार ठीक है। .co
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खीरे का कड़ वा िसरा काटकर नमक मलकर िमठास लाई जाती है — कड़ वा
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मुखन को, चिहअत इहै सजाय॥”
“रिहमनcoचुपmै बैिठए, दे िख िदनन को फे र। जब नीके िदन
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फे रl दे िखए ; अ छे िदन आएँगे तो काम बनते
बुरे िदनों में चुप बैठकर समय का g
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m ,ं बनत न लिगहै ं दे र॥” a
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दे र नही ं लगेगी।
agl अपनी ‘दोहा-पु स्तका’ बनाइए — कॉपी म तीन खाने बनाइए और हर सप्ताह दो दोहे भ रए:
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दोहा क ठन शब्द के अथ मेरी समझ म इसका भाव
(ज्यों-का-त्यों उतािरए) ag(lदो-तीन श द) ब् (अपने शब्द म दो पं क्त)
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रहीम के बारे म यह भी जा नए: रहीम का पूरा नाम अब्दुरहीम खानखाना था। वे अकबर के दरबार के नवरत्न म
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agजन्म 16व शताब्द म और मृत्यु
.cभ क्त के पद रचे। आपक पुस्तक के ‘क व से प रचय’ म लखा है क उनका
से एक थे। सेनाप त और दरबारी होते हुए भी उन्ह ने हद म — अवधी और ब्रजभाषा म — दोहे लखे और कृष्ण-
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17व शताब्द म हुई। एक मुसलमान क व का रामायण-महाभारत का गहरा जानकार होना और घर-घर लोक प्रय
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होना — यही भारत क साझी संस्कृ त का सबसे सुंदर उदाहरण है।
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कोmएक व ाथ अपना चुना हुआ ‘सप्ताह का दोहा’ श्यामपट्ट पर लखे और
कक्षा के लए सुझाव: हर सोमवार e
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aglसाल भर म चालीस दोहे पूरी कक्षा को कंठस्थ हो जाएँगे।
उसका अथ दो मनट म सुनाए।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय — एक नज़र म
पाठ म रहीम के सात दोहे दए गए ह। दोहा दो पं क्तय का एक छोटा-सा छं द है, जसम बहुत बड़ी बात कह द जाती है।
रहीम के ये दोहे अवधी और ब्रजभाषा के रंग म रँगे ह, इस लए इनम ‘तरुवर’, ‘सरवर’, ‘ बप त’, ‘ ज ा’ जैसे पुराने रूप
मलते ह।
पहला दोहा — “र हमन दे ख बड़ेन को, लघु न द जये डा र” — बड़े को दे खकर छोटे को फक मत दो; जहाँ सुई का काम है
वहाँ तलवार बेकार है। यानी हर छोट -बड़ी चीज़ का अपना महत्व है।
परोपकार पर दो दोहे ह — पेड़ अपना फल नह खाता, सरोवर अपना पानी नह पीता; इसी तरह सज्जन धन दूसर के काम
के लए जोड़ते ह। और स ा मत्र वही है जो वप त्त क कसौट पर खरा उतरे।
प्रेम और वाणी पर भी दो दोहे ह — प्रेम का धागा झटके से मत तोड़ो, टू टने पर जुड़ भी जाए तो गाँठ पड़ जाती है; और
बावली जीभ कुछ भी कह जाती है, पर मार कपाल ( सर) को खानी पड़ती है।
“र हमन पानी रा खये” वाले दोहे म ‘पानी’ शब्द के तीन अथ एक साथ चलते ह — मोती के लए चमक, मनुष्य के लए
सम्मान और चूने के लए जल। यही रहीम क भाषा का कमाल है।
अभ्यास म दो बहु वकल्पीय प्रश्न, दोहा-भाव का मलान, दो दोह का भावाथ, लोक म प्रच लत पाठ-भेद, शब्द-संपदा क
ता लका, ‘कल–पत्र–कर–फल’ के तीन-तीन अथ, अपनी शैली म दोहे क व्याख्या, दोहा-गायन क रकॉ डग, अंत्याक्षरी और
दो पहे लयाँ द गई ह।
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कक्षा 6 हद अध्याय 5 रहीम के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
दोहे का दोहे म अथ आज का शब्द आज क भाषा म वाक्य
शब्द
लघु छोटा, छोटी वस्तु छोटा छोटा-सा द पक भी पूरे कमरे का अँधेरा मटा दे ता
है।
डा र (डारना) फें क दे ना, छोड़ दे ना फकना, त्यागना काम क चीज़ को बेकार समझकर फ कए मत।
तरुवर पेड़, वृक्ष वृक्ष गाँव के बीचोबीच खड़ा वह वृक्ष सौ साल पुराना है।
सरवर सरोवर, तालाब सरोवर सरोवर के कनारे बगुले पं क्त बनाकर खड़े थे।
सुजान सज्जन, समझदार और भला व्यिक्त सज्जन सज्जन व्य क्त अपनी कमाई का कुछ भाग दूसर
पर लगाता है।
सँच ह संिचत करना, जोड़कर रखना संचय करना च ट ग मय म अनाज का संचय कर लेती है।
(सँचना)
छटकाय झटका दे क र, झटककर झटककर गुस्से म उसने झटककर अपना हाथ छु ड़ा लया।
पानी एक साथ तीन अथ — सम्मान, चमक और जल सम्मान / चमक / अपनी बात क हए, पर कसी का पानी मत उता रए।
जल
बप त, िवपित्त, संक ट, मुस ीबत वप त्त वप त्त म ही स े मत्र क पहचान होती है।
बपदा
ज ा बावरी बावली जीभ — िबना सोचे बोल दे ने वाली जीभ बेलगाम जबान बेलगाम जबान बहुत-से बने काम बगाड़ दे ती है।
कपाल माथा, िसर सर, माथा गरते ही उसके माथे पर चोट आ गई।
कसौट वह काला पत्थर िजस पर िघसकर सोना परखा कसौट यह परीक्षा उसक मेहनत क कसौट थी।
जाता है; परख
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