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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 8 सत्रिया और बिहू नृत्य

AglaSem पर कक्षा 6 हिंदी पाठ 8 सत्रिया और बिहू नृत्य (मल्हार) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 8 (Malhar).
NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 8 सत्रिया और बिहू नृत्य - Page 1 of 43

About NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 8 सत्रिया और बिहू नृत्य

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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 8 सत्रिया और बिहू नृत्य – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 8: स या और बहू नृत्य

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

75 – 93 16 40 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 42 pages

Page 2

कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

क ा 6 · हद · मल्हार

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 8: स त्रया और बहू नृत्य
NCERT कक्षा 6 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 8 स त्रया और बहू नृत्य के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह पाठ जया मेहता का लखा यात्रा-
वणन है, जसका हद अनुवाद शवद्र कुमार सह ने कया है। लंदन क दस साल क एंजेला अपनी डॉक्यूम - नमाता माँ एलेस ा के साथ असम
आती है और वहाँ बहू तथा स त्रया — दो बलकुल अलग मज़ाज के नृत्य से मलती है। पृष्ठ 75 से 93 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से,
मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, नबंध क रचना, अनुमान या कल्पना से, असम से जुड़े शब्द, तीन बहू, आपक बात,
पूव त्तर क यात्रा, टाइम मशीन, खलौने व भन्न प्रकार के, पत्र, आज क पहेली, झरोखे से/साझी समझ और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक
हल क गई है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

मल्हार (क ा 6) 75 – 93

खं ड प्रश्न

16 40

माध्यम

हन्द

मेरी समझ से — पृष्ठ 82
पाठ से

पाठ से

प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए— (1) माँ एलेस ा के बारे म
कौन-सा कथन सत्य है? • वे असम के जीवन के बारे म बहुत-कुछ जानती थ । • उन्ह असम, बहू और स त्रया
नृत्य से बहुत प्रेम था। • उन्ह ने एंजेला को कुछ अस मया शब्द भी सखाए। • वे अपने काय म सहायता के लए
बेट को लाई थ ।

सही उत्तर है — वे असम के जीवन के बारे म बहुत-कुछ जानती थ । इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
पूरे पाठ म एलेस ा ही वह व्य क्त ह जो असम के बारे म जानकारी दे ती ह, लेती नह । तीन जगह इसका प्रमाण मलता है —

हवाई यात्रा के दौरान — “माँ ने एंजेला को असम क खूबसूरती के बारे म कुछ बात बताईं। असम, भारत के पूव त्तर क्षेत्र म है,
जसे अपने वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागान के लए जाना जाता है।”
मलंग गाँव पहुँचकर — “माँ ने एंजेला को बताया क बहू एक कृ ष आधा रत त्योहार है… असम म बहू साल म तीन बार
मनाया जाता है।”
सत्र म — “माँ ने एंजेला को बताया क बीसव शताब्द के मध्य म कुछ साधु मठ से बाहर आकर पुरुष और म हलाओं को
स त्रया नृत्य सखाने लगे।”

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

वे असम के जीवन के बारे म सही ★ असम क भौगो लक त, बहू का कृ ष से संबंध, तीन बहू, स त्रया परंपरा म आया
बहुत-कुछ जानती थ । बदलाव — यह सब वे एंजेला को स्वयं बताती ह।

उन्ह असम, बहू और स त्रया ग़लत पाठ म कह ऐसा नह लखा। वे असम इस लए आईं क्य क टश अकादमी ने उन्ह
नृत्य से बहुत प्रेम था। डॉक्यूम बनाने के लए वत्तीय मदद द थी।

उन्ह ने एंजेला को कुछ ग़लत यह काम माँ ने नह , अनु ने कया था — “अनु ने एंजेला को कुछ अस मया शब्द भी
अस मया शब्द भी सखाए। सखाए।”

वे अपने काय म सहायता के ग़लत उलटा हुआ था। माँ ने स्कूल से एंजेला क छु ट्टयाँ एक हफ़्ते और बढ़वाईं ता क एंजेला
लए बेट को लाई थ । और पता ायन उनके साथ जा सक — यानी बेट साथ आई, काम म मदद के लए नह ।

ऐसे प्रश्न कैसे हल कर: हर वकल्प के सामने पाठ क एक पं क्त रखकर दे खए। जस वकल्प के लए पाठ म
सीधा प्रमाण मल जाए, वही उत्तर है। जो बात अच्छ तो लगे पर पाठ म लखी न हो (जैसे ‘उन्ह प्रेम था’), वह उत्तर
नह होती।

प्र.2 (2) “अनु और एंजेला ने तुरंत एक-दूसरे क तरफ़ दे खा।” क्य ? • अनु के पास खलौने थे। • दोन क आयु एक
समान थी। • दोन को अंग्रेज़ी भाषा आती थी। • एंजेला अनु से अस मया भाषा सीखना चाहती थी।

सही उत्तर है — दोन क आयु एक समान थी। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।
इसका प्रमाण ठ क अगली पं क्त म ही है। पाठ इस वाक्य के तुरंत बाद कहता है —

“अनु और एंजेला ने त रु ंत एक-दू सरे की तरफ़ दे खा।

उन दोनों की ही उम दस साल थी, दोनों ने अंगेज़ी में बातचीत शुरू की।”

यानी ‘तुरंत दे खने’ का कारण ले खका ने खुद अगली ही साँस म बता दया है — दोन हमउम्र थ । बड़ से भरे उस घर म दोन को
अचानक अपने ही बराबर का कोई मल गया था।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

दोन क आयु एक समान थी। सही ★ पाठ क अगली पं क्त ही यह कारण बताती है — “उन दोन क ही उम्र दस साल थी।”

अनु के पास खलौने थे। ग़लत खलौन क बात बाद म आती है — पहले मुलाक़ात हुई, फर एंजेला ने खलौने दे खे।
कारण और प रणाम का क्रम उलटा मत क जए।

दोन को अंग्रेज़ी भाषा आती थी। ग़लत अंग्रेज़ी से बातचीत शुरू हुई, पर एक-दूसरे क ओर दे खने से पहले तो उन्ह ने बात ही
नह क थी। भाषा का पता तो बात करने पर चला।

एंजेला अनु से अस मया भाषा ग़लत अस मया शब्द सीखना बाद म हुआ और वह एंजेला क पहले से बनी कोई योजना नह
सीखना चाहती थी। थी।

सीखने क बात: जब प्रश्न कसी वाक्य पर ‘क्य ?’ पूछे, तो उस वाक्य के ठ क आगे-पीछे क एक-दो पं क्तयाँ
प ढ़ए। लेखक अक्सर कारण वह छपा दे ते ह।

प्र.3 (ख) अब अपने मत्र के साथ चचा क जए और कारण बताइए क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?

यह चचा का प्रश्न है। यहाँ केवल “मने यह चुना” कहना काफ़ नह — बताना यह है क पाठ क कौन-सी पं क्त आपके उत्तर का
प्रमाण है और बाक़ वकल्प क्य नह चलते।
अ चचा म तीन बात ज़रूर होनी चा हए —

आपने कौन-सा वकल्प चुना;
पाठ क वह पं क्त जो आपके उत्तर को सद्ध करती है (पृष्ठ संख्या के साथ);
कम-से-कम एक ग़लत वकल्प को हटाने का कारण।

नमूना उत्तर:
“पहले प्रश्न म मने चुना — वे असम के जीवन के बारे म बहुत-कुछ जानती थ । मेरा प्रमाण यह पं क्त है — ‘माँ ने एंजेला को
बताया क बहू एक कृ ष आधा रत त्योहार है।’ माँ ने ही एंजेला को असम क भौगो लक त, तीन बहू और स त्रया नृत्य के
बदलाव — तीन बात बताईं। तीसरा वकल्प मने इस लए हटाया क्य क अस मया शब्द माँ ने नह , अनु ने सखाए थे।
दूसरे प्रश्न म मने चुना — दोन क आयु एक समान थी। मेरा प्रमाण अगली ही पं क्त है — ‘उन दोन क ही उम्र दस साल थी।’
‘दोन को अंग्रेज़ी आती थी’ वाला वकल्प मने इस लए हटाया क्य क भाषा का पता तो बात शुरू करने के बाद चला, एक-दूसरे को
दे खने के समय नह ।”

चचा म क्या नया मलेगा: हो सकता है आपके कसी मत्र ने दूसरा वकल्प चुना हो। तब झगड़ने के बजाय दोन
मलकर वह पृष्ठ खो लए और पं क्त प ढ़ए। जस उत्तर के पीछे पाठ क पं क्त खड़ी हो, वही जीतता है — यही इस
ग त व ध का असली उ े श्य है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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मलकर कर मलान — पृष्ठ 82 और 83
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पाठ से
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se m
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पाठ से शब्द- मलान

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पाठ म से कुछ शब्द चुनकर स्तंभ 1 म दए गए ह। उनसे संबं धत वाक्य स्तंभ 2 म दए गए ह। अपने समूह म इन
om
प्र.1

. c ag
पर चचा क जए और रेखा ख चकर शब्द का मलान उपयुक्त वाक्यांश से क जए। — स्तंभ 1: 1. सत्र, 2.
m
बोहाग बहू, 3. लंदन, 4. गुवाहाट , 5. टशeअकादमी,
s
a
6. बीसव शताब्द । स्तंभ 2: 1. ग्रेगरी कैलडर के अनुसार
1 जनवरी 1901 से 31 दसंबर 2000 तक
a gl का समय। 2. ‘यूनाइटेड कगडम’ और ‘इंग्लड’ क राजधानी। 3.
‘यूनाइटे ड कगडम’ दे श क एक सरकारी सं ा। 4. असम म मनाया जाने वाला एक त्योहार। यह असम म नए
साल क शुरुआत और बसंत के आगमन का प्रतीक है। 5. भारत के असम राज्य का एक प्राचीन और सबसे बड़ा
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em.
नगर है। 6. ये असम के मठ ह। इनक संख्या पाँच सौ से भी ज्यादा है। ये पूजा-पाठ और धा मक ग त व धय के

m l as
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ान ह। स त्रया नृत्य क उत्प त्त इन्ह सत्र म हुई है।

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a सही मलान नीचे दया गया है। पुस्तक म इन्ह जोड़ के बीच रेखा ख चए।

m a s
स्तंभ 1 मलेगा स्तंभ 2
em
.co पहचानने का सूत्र agl
a s
l स त्रया नृत्य क उत्प त्त
ये असम के मठgह…
1. स त्र →6
a
इन्ह सत्र म हुई है।
पाठ म ही लखा है — “जहाँ सभी ‘सत्र ’, अथात मठ क
पीठ है।”

. com
mत्योहार मनाते ह, जसे ‘ बहू’
2. बोहाग िबहू
आने क खुशी म वे सभीeएक
→4 असम म मनाया जाने वाला एक त्योहार… पाठ — “असम म यह नए साल का वक्त होता है। बसंत के

a s
com कहा जाता है।”gl
नए साल क शुरुआत और बसंत के आगमन

m. a
का प्रतीक।

l a se3. लंदन
ag →2 ‘यूनाइटे ड कगडम’ और ‘इंग्लड’ क एंजेला “लंदन के जाने-माने इलाके क जग्टन म रहती थी”

m
राजधानी। — यानी लंदन एक शहर है, और वह यू.के. क राजधानी है।

a se
4. गुवाहाटी
.com
भारत के असम राज्य का एक प्राचीन और पाठ — “वह लंदन से नई दल्ली होते हुए गुवाहाट क
a g l
m
→5

ase
सबसे बड़ा नगर है। उड़ान पर थी”, “गुवाहाट के एक होटल म…”। यानी यह

agl
असम का एक नगर है।

5. िबिटश
m
→3 ‘यूनाइटे ड कगडम’ दे श क एक सरकारी पाठ — “उन्ह लंदन क टश अकादमी से… वत्तीय मदद

.co
अकादमी सं ा। द गई थी।” पैसा दे ने वाली सं ा ही हो सकती है।

sem
com
6. बीसवी ं
g l a
.शताब्दी a
→1 ग्रेगरी कैलडर के अनुसार 1 जनवरी 1901 से शताब्द = सौ वष। बीसव शताब्द का अथ है सौ-सौ साल

m
ase
31 दसंबर 2000 तक का समय। के बीस खंड म बीसवाँ खंड।

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बीसव शताब्द 1901 से क्य , 1900 से क्य नह ? गनती 1 से शुरू होती है, 0 से नह । पहली शताब्द = सन् 1
m a s
. co agl
से 100 तक। तो दूसरी = 101–200, तीसरी = 201–300 … इसी क्रम से बीसव = 1901 से 2000 तक।

em
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इसी लए सन् 1950 (जब कुछ साधु मठ से बाहर आकर स त्रया सखाने लगे) बीसव शताब्द का मध्य कहलाता है
— और पाठ म यही लखा है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

ध्यान द जए: स्तंभ 2 का क्रम जान-बूझकर उलट-पुलट रखा गया है, ता क आप संख्या से संख्या न मलाएँ ब ल्क
अथ से अथ मलाएँ। कोई भी जोड़ा क्रम से नह मलता — 1→6, 2→4, 3→2, 4→5, 5→3, 6→1।

पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 83
पाठ से

पाठ से भावाथ

प्र.1 (क) “असम, भारत के पूव त्तर ेत्र म है, जसे अपने वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागान के लए जाना जाता
है। इसके साथ असम म नृत्य क भी एक समृद्ध परंपरा है।”

अथ — यह पं क्त एंजेला क माँ ने हवाई यात्रा के दौरान कही थी। इसम असम क चार पहचान एक साथ गनाई गई ह — वन्य-
जीवन, रेशम, चाय के बागान और नृत्य क समृद्ध परंपरा।

पहचान इसका अथ पाठ म इसका सूत्र कहाँ खुलता है

वन्य-जीवन असम के जंगल म एक स ग वाला गडा, हाथी और अनेक पहेली वाली ग त व ध म भी जंगल-बाघ क बात आती
पक्षी मलते ह। है — “हा ब आसे बाघ नाइ”।

रे शम असम का सुनहरा मूँगा सल्क, जो दु नया म केवल असम ‘झरोखे से’ का पूरा लेख इसी रेशम पर है।
और पूव त्तर म बनता है।

चाय के बागान असम भारत म सबसे अ धक चाय उगाने वाले राज्य म है। इसी से पता चलता है क असम एक कृ ष-प्रधान प्रदे श
है।

नत्ृ य की समृद्ध बहू (लोक) और स त्रया (शास्त्रीय) — दो बलकुल अलग पूरा पाठ इसी वाक्य को खोलकर दखाता है।
परंपरा मज़ाज के नृत्य एक ही राज्य म।

मुझे इसका यह अथ समझ म आया — कसी प्रदे श क पहचान केवल उसक प्रकृ त और उपज से नह बनती, उसक कला से
भी बनती है। इसी लए वाक्य म ‘इसके साथ’ शब्द आया है — मानो ले खका कह रही ह क जंगल, रेशम और चाय तो असम क
बाहरी पहचान ह, नृत्य उसक भीतरी पहचान है। और यह बात इस पूरे पाठ का बीज है, क्य क एलेस ा असम इसी भीतरी पहचान
को फ़ल्म म उतारने आई थ ।

जोड़कर दे खए: अपने राज्य के बारे म ठ क इसी ढाँचे का एक वाक्य बनाइए — “____, भारत के ____ क्षेत्र म है,
जसे अपने ____, ____ और ____ के लए जाना जाता है। इसके साथ यहाँ ____ क भी एक समृद्ध परंपरा है।” यह
अभ्यास बताता है क हर प्रदे श के पास अपनी एक कला ज़रूर है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 (ख) “पूरी दु नया क संस्कृ तय म लोग नृत्य और संगीत से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते ह।”

अथ — यह बात माँ ने तब कही जब एंजेला ने पूछा क क्या संगीत और नृत्य सफ़ त्योहार पर ही होते ह। माँ का उत्तर था — नह ।
नृत्य और संगीत मन क भाषा ह, और यह भाषा दु नया क हर संस्कृ त म बोली जाती है।
मनुष्य के पास भावना कहने के दो रास्ते ह — शब्द और शरीर-स्वर। शब्द क भाषा हर दे श म अलग होती है, इस लए एंजेला
अस मया नह समझ सकती थी। पर नाचते हुए शरीर और बजते ढोल क भाषा उसे तुरंत समझ आ गई — इसी लए लंदन क एक
ब ी असम के गाँव म बैठकर मंत्रमुग्ध हो सक । यही इस पं क्त का सबसे बड़ा प्रमाण स्वयं एंजेला है।
पाठ से तीन उदाहरण —

खुशी — “बसंत के आने क खुशी म वे सभी एक त्योहार मनाते ह, जसे ‘ बहू’ कहा जाता है।” यहाँ नृत्य ऋतु के बदलने क
खुशी कह रहा है।
श्रद्धा — सत्र म साधु नृत्य और नाटक के ज़ रए भगवान वष्णु क कथा कहते ह। यहाँ नृत्य भ क्त क भावना कह रहा है।
श क्त और वीरता — जय- वजय क प्रस्तु त म नृत्यांगनाओं ने “श क्त, बल और आकषण” दखाया। यहाँ नृत्य वीर-भाव कह
रहा है।

इस पं क्त के आगे क बात: माँ ने साथ ही जोड़ा — “असम का बहू नृत्य ग्रामीण जनजीवन के साथ-साथ फसल
लगाने से लेकर बसंत के आगमन तक से जुड़ा हुआ है।” यानी नृत्य केवल मंच क चीज़ नह , वह लोग के रोज़ के
जीवन से नकलता है। जहाँ खेती है, वहाँ फ़सल का नृत्य है; जहाँ मठ है, वहाँ भ क्त का नृत्य है।

सोच- वचार के लए — पृष्ठ 84
पाठ से

पाठ से ले ख न

प्र.1 (क) “एंजेला के मन म कई तरह के वचार चल रहे थे।” उसके मन म कौन-कौन से वचार चल रहे ह गे?

यह वाक्य उस समय आता है जब बहू दे खकर लौटते हुए माँ ने एंजेला से पूछा क ‘उसे बहू कैसा लगा?’ एंजेला तुरंत उत्तर नह दे
पाई — क्य क उसने एक साथ इतना कुछ दे खा था क मन म कई वचार एक साथ चल रहे थे।
पाठ के आधार पर उसके मन के वचार ये रहे ह गे —

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

मन म उठा वचार पाठ का आधार

यह िकतना अनोखा है िक उ त्सव और नत्ृ य — दोनों का “उसे अच्छा लगा िक इस उ त्सव और नत्ृ य दोनों को ‘िबहू’ कहा जाता है। ”
नाम एक ही है, ‘िबहू’!

क्या संगीत और नत्ृ य िसफ़ त्योहारों पर ही होते है?ं “उसने माँ से पूछा िक क्या संग ीत और नत्ृ य िसफ़ त्योहारों पर ही होते है।
ं ”

एक पेड़ के नीचे इतने सारे लोग! क्या मैं सचमुच िकसी “उसे ऐसा लग रहा था, जैसे वह आ श्चयजनक रूप से िकसी टाइम -मशीन में आकर
टाइम-मशीन या सपनों की दुिनया में आ गई हू?ँ बैठ गई हो! या क्या वह उस वक्त िकसी सपनों की दुिनया में थी?”

लड़ िकयों की लाल -बादामी पोशाक और लड़ कों के “लड़ कों ने वाद्य यंत्र ले रखे है ं और लड़ िकयों ने लाल और बादामी रंग की गहरी
वाद्ययंत्र िकतने सुंद र है!ं िडजाइन वाली खूबसूरत पोशाक पहन रखी है।”

मैं भी अपने घर पर बसंत आने पर ऐसे ही नाचूँगी। “उसकी इच्छा हुई िक वह भी अपने घर पर बसंत के आगमन पर ऐसे ही नत्ृ य
करे गी।”

लंद न का जीवन और यहाँ का जीवन िकतना अलग है! “उसने महसूस िकया िक लंद न के जीवन से यहाँ सब कु छ िकतना अलग था!”

इन सबको एक वाक्य म समेट तो एंजेला के मन म अचरज, ज ासा और खुशी — तीन एक साथ चल रहे थे। अचरज इस बात
का क यह सब उसक कल्पना क कहा नय जैसा था; ज ासा इस बात क क नृत्य आ ख़र होता क्य है; और खुशी इस बात क
क वह इसका हस्सा बन गई।

यहाँ ध्यान दे ने क बात: ले खका ने ‘कई तरह के वचार’ लखकर उन्ह गनाया नह — पर पाठ म आगे-पीछे
बखेर दया। ऐसे प्रश्न म उत्तर आस-पास के दो पैराग्राफ़ से चुनकर बनाना होता है, अपने मन से गढ़कर नह ।

प्र.2 (ख) “ बहू एक कृ ष आधा रत त्योहार है।” कैसे?

बहू को कृ ष आधा रत त्योहार इस लए कहा जाता है क्य क यह कसी दे वता या कसी राजा क स्मृ त से नह , ब ल्क खेत के
काम के कैलडर से बँधा हुआ है। पाठ म इसका सीधा प्रमाण है —

“असम में िबहू साल में तीन बार मनाया जाता है।

सबसे पहले जब िकसान बीज बोते है,ं

िफर जब वे धान रोपते है ं

और िफर तब, जब खेत ों में अनाज तै यार हो जाता है।”

यानी बहू खेती के तीन बड़े पड़ाव पर लौटता है। जहाँ खेती का चरण बदला, वहाँ बहू आ गया। इसी लए यह त्योहार फ़सल का
त्योहार है।
इसके तीन और प्रमाण पाठ म मलते ह —

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

समय — यह अप्रैल म, बसंत के आगमन पर पड़ता है, जो असम म नए साल क शुरुआत है। खेती का नया वष भी यह से शुरू
होता है।
जगह — एंजेला ने इसे कसी शहर के सभागार म नह , गुवाहाट के पास मलंग गाँव म, खुले आसमान के नीचे बरगद के पेड़
तले दे खा।
माँ का कथन — “असम का बहू नृत्य ग्रामीण जनजीवन के साथ-साथ फसल लगाने से लेकर बसंत के आगमन तक से जुड़ा
हुआ है।”

जोड़कर दे खए: भारत के लगभग सारे बड़े लोक-त्योहार इसी तरह खेती से जुड़े ह — पंजाब क बैसाखी,
त मलनाडु का प गल, केरल का ओणम, ओ डशा का नुआखाई। पाठ क यह पं क्त भी यही बताती है — “भारत
म जनसंख्या का एक बड़ा हस्सा कसान का है।” जहाँ इतने कसान ह , वहाँ त्योहार भी फ़सल के साथ चलगे।

प्र.3 (ग) ऐसा लगता है क भारत से जाने के बाद भी एंजेला के मन म असम ही छाया हुआ था। पाठ से इस कथन के
समथन के लए कुछ उदाहरण खोजकर ल खए।

हाँ, यह कथन बलकुल सही है। पाठ के अं तम दो पैराग्राफ़ इसके प्रमाण से भरे ह। नीचे पाँच उदाहरण दए गए ह —

क्रम पाठ का उदाहरण यह क्या सद्ध करता है

1. “वापस लौटने के बाद भी वह चलने, खाना खाने और यहाँ तक िक खेल ने के नत्ृ य उसकी िदनचय में घुल गया — वह अब ‘दे खने
दौरान भी नत्ृ य करती रही।” वाली’ नही,ं ‘करने वाली’ बन गई थी।

2. “वापस लंद न जाने के बाद वह उन सभी िरकॉिडंग्स को दे खती रही, जो असम को बार-बार दे खना ही उसका मनपसंद काम
उसकी माँ ने िरकॉड की थी।” बन गया।

3. “पूरे उत्साह के साथ वह असम की सम ृद्ध नत्ृ य परंपरा को याद करती रही। उसे दोनों नत्ृ यों का अलग-अलग स्वभाव तक याद रह
रंग -िबरंग ा सित्रया और आनंिदत करने वाला िबहू। ” गया था।

4. “एंजेल ा ने लंद न में अपनी कक्षा में, स्वयं िकए गए नत्ृ य की वीिडयो िरकॉिडंग वह असम को के वल अपने पास नही ं रखना चाहती थी,
के साथ उसका पदशन िकया।” दू स रों तक पहचु ँ ाना चाहती थी।

5. “अब एंजेल ा के पास अपने िलए, असम के नत्ृ यों—िबहू और सित्रया के साथ असम अब उसकी यात्रा की याद भर नही,ं उसका
अपना खुद का मनोरंजन था।” अपना शौक़ बन चुक ा था।

सबसे मज़बूत प्रमाण चौथा वाला है — क्य क माँ और पापा ने मलकर “असमी नृत्य पर एक शानदार योजना” बनाई और एंजेला
ने अपनी कक्षा म वह नृत्य कया। “उसके सहपा ठय और शक्षक को यह बहुत पसंद आया।” जो चीज़ मन म सफ़ छाई हो, वह
याद बनकर रह जाती है; जो मन म बस गई हो, वह इस तरह बाहर आती है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य
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(घ) समय के बदलने के साथ-साथ स त्रया नृत्य क परंपरा म क्या बदलाव आया है?
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a glनृत्य क परंपरा म सबसे बड़ा बदलाव यह आया क यह मठ क चारद वारी से नकलकर मंच पर आ गया, और पुरुष
स त्रया
का नृत्य होने से म हलाओं का भी नृत्य बन गया। माँ ने एंजेला को यही बताया था। इसे तीन पड़ाव म दे खए —

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पड़ाव क्या त थी
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स त्रया केवल सत्र (वैष्णव मठ )g l a
पहले a के भीतर “एले से ंडा ने वैष्णव मठ के सभागार में नत्ृ य कर रहे युवा साधुओ ं का
होता था और केवल साधु ही इसे करते थे। िफ़ ल्मांक न िकया।” इसी को दे खकर एंजेल ा ने सोचा — “क्या सित्रया
नत्ृ य िसफ़ लड़ कों और पुरुषों के िलए है?”
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बीसवी ं शताब्द ी
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“शुरू में ऐसे साधुओ ं को मठों से िनकाल िदया गया। ”
कुछ साधु मठ से बाहर आकर पुरुष और
के मध्य में .c
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म हलाओं — दोन को स त्रया सखाने लगे।

l a se इसका वरोध हुआ।

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a आधुिनक दौर म हला कलाकार का मंच पर स त्रया करना “आधुिनक दौर में मिहला सित्र या कलाकारों के िलए मंच पर नत्ृ य करना

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में आम बात हो गई है।”
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सामान्य बात हो गई।

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इस बदलाव का सबसे सुंदर प्रमाण उसी रात एंजेला को मल गया। उसने प्रया और रीता जैसी म हला नृत्यांगनाओं को जय- वजय
क कथा पर नाचते दे खा — “सफ़ेद पगड़ीनुमा टोपी म दो म हलाएँ नृत्य और नाटक क शैली म कमाल का अ भनय कर रही ह।”
और एंजेला को लगा क “उन म हला कलाकार क प्रस्तु त स त्रया नृत्य करने वाले पुरुष कलाकार से भी बेहतर थी।”

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इससे क्या सीख मलती है: परंपराएँ पत्थर क लक र नह होत । जो लोग परंपरा को नएm
s e लोग तक ले जाते ह,
उन्ह शुoरूm
. la पर जो कला और लोग तक
c म वरोध झेलना पड़ता है — जैसे उन साधुओं को मठ से नकाल दयाagगया।
mचती है, वही जी वत रहती है। य द वे साधु बाहर न आते, तो शायद आज स त्रया दु नया भर के मंच पर न होता
eपहुँ
g l as — और एलेस ा क डॉक्यूम भी न बन पाती।
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नबंध क रचना — पृष्ठ 84

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से

पाठ से ले ख न-शै ली

प्र.1 “गुवाहाट के एक होटल म सामान्य होने के बाद वे उसी शाम पास के एक गाँव मलंग म गए। गाँव पहुँचने पर माँ ने
एंजेला को बताया क बहू एक कृ ष आधा रत त्योहार है। असम म बहू साल म तीन बार मनाया जाता है।” —
इन वाक्य म बहू और असम का ऐसा रोचक और सरस वणन कया गया है क लगता है मानो हम कोई कहानी
पढ़ रहे ह। … इस पाठ को एक बार फर से प ढ़ए और इसक बनावट पर ध्यान द जए। इस पाठ क वशेषताएँ
पहचा नए और अपनी क ा म साझा क जए और ल खए, जैसे इस पाठ म लंदन से यात्रा शुरू करने से लेकर
वापस लंदन पहुँचने तक के अनुभव का वणन कया गया है।

पुस्तक ने ‘वणनात्मक नबंध’ क चार पहचान बता द ह — इसम वस्तु, घटना या प्रदे श का वणन होता है, जो स्वयं दे खा गया
उसी का वणन होता है, घटनाओं का एक क्रम होता है, और भाषा सरल होती है। अब इन्ह कसौ टय पर यह पाठ जाँ चए —

वशेषता इस पाठ म यह कैसे दखती है उदाहरण

1. यात्र ा का पाठ लंदन से शुरू होकर लंदन पर ही ख़त्म होता है “वह लंद न से नई िद ल्ली होते हुए गुवाहाटी की उड़ ान पर
िसलिसले वार क्रम — बीच म नई दल्ली, गुवाहाट , मलंग गाँव, उत्तरी थी।” … “वापस लंद न जाने के बाद वह उन सभी
असम का द क्षणापथ सत्र। िरकॉिडग्ं स को दे खती रही।”

2. आँखों दे खा हाल ले खका बताती नह , दखाती ह — रंग, पोशाक, “लड़ िकयों ने लाल और बादामी रंग की गहरी िडजाइन
हलचल सब आँख के सामने आ जाते ह। वाली खूबसूरत पोशाक पहन रखी है।”

3. एक ही पात्र की पूरा असम हम एंजेला क आँख से दखता है — “एंजेल ा ने एक पेड़ के नीचे एक साथ इतने लोगों को पहले
आँख से सब कु छ इसी लए अजनबीपन और अचरज बना रहता है। कभी नही ं दे खा था।”

4. जानकारी को तथ्य भाषण क तरह नह , माँ-बेट के संवाद क ु ँ ने पर माँ ने एंजेल ा को बताया िक िबहू एक कृ िष
“गाँव पहच
बातचीत में घोल दे ना तरह आते ह — इस लए बो झल नह लगते। आधािरत त्योहार है।”

5. भावनाओं का वणन केवल दृश्य नह , मन क हलचल भी लखी गई है। “वह हतपभ थी”, “वह मंत्र मुग्ध होकर … दे ख रही थी”,
“उसे अपनी माँ पर गव हुआ ”।

6. सरल भाषा और क ठन शब्द बहुत कम; तुलना ब क दु नया से ली “जैसे वह आ श्चयजनक रूप से िकसी टाइम -मशीन में
सजीव तुल ना गई है। आकर बैठ गई हो!”

7. दो संस्कृ ितयों की लंदन और असम बार-बार आमने-सामने रखे जाते ह। “उसने महसूस िकया िक लंद न के जीवन से यहाँ सब कु छ
तुल ना िकतना अलग था!”

नमूना उत्तर (क ा म बोलने / लखने के लए):
“यह पाठ एक वणनात्मक नबंध है। इसक सबसे बड़ी वशेषता यह है क इसम लंदन से यात्रा शुरू करने से लेकर वापस लंदन
पहुँचने तक के अनुभव का क्रम से वणन कया गया है। दूसरी वशेषता यह है क ले खका ने हर दृश्य ऐसे लखा है मानो हम स्वयं
वहाँ खड़े ह — बरगद का पेड़, उसके नीचे बना मंच, लाल-बादामी पोशाक और वाद्ययंत्र। तीसरी वशेषता यह है क असम क
जानकारी माँ-बेट क बातचीत के भीतर से आती है, इस लए वह पाठ जैसी नह , कहानी जैसी लगती है। चौथी वशेषता है सरल
भाषा और ‘टाइम-मशीन’ जैसी वह तुलना, जो ब को तुरंत समझ आ जाती है। इन्ह सब कारण से यह नबंध पढ़ते हुए हम
लगता है क हम कोई कहानी पढ़ रहे ह।”

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

अपना नबंध लखते समय याद र खए: वणनात्मक नबंध म ‘मुझे अच्छा लगा’ लखने से काम नह चलता —
वह चीज़ ल खए जसे दे खकर अच्छा लगा। ‘मेला बहुत सुंदर था’ कमज़ोर वाक्य है; ‘झूले क लोहे क कु सयाँ
चरमराती हुई ऊपर जात और नीचे से भुट्टे क महक उठती’ — यह मज़बूत वाक्य है।

अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 85
पाठ से

पाठ से कल्पना

प्र.1 (क) “ बहू नृत्य और इसके उत्सव से अचं भत एंजेला और उसके प रवार ने इसके साथ-साथ लजीज पकवान
का पूरा आनंद लया।” — एंजेला और उसका प रवार बहू नृत्य और उसके उत्सव को दे खकर अचं भत क्य हो
गया?

वे इस लए अचं भत हुए क्य क उन्ह ने जीवन म ऐसा कुछ पहले कभी नह दे खा था। लंदन म उत्सव प्रायः बंद हॉल म, टकट
लेकर, कु सय पर बैठकर दे खे जाते ह। यहाँ पूरा गाँव खुले आसमान के नीचे, एक पेड़ के तले इक ा था और सब अपने ही आनंद के
लए नाच रहे थे।
पाठ के आधार पर अचंभे के पाँच कारण —

अपार भीड़ और खुला मंच — “वहाँ एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे मंच बनाया गया था… एंजेला ने एक पेड़ के नीचे एक
साथ इतने लोग को पहले कभी नह दे खा था।”
माहौल का जादू — “वहाँ आस-पास उत्सव जैसा माहौल दे खकर वह हतप्रभ थी।” उसे लगा जैसे वह टाइम-मशीन म या
सपन क दु नया म आ बैठ हो।
रंग और पोशाक — लड़ कय क “लाल और बादामी रंग क गहरी डजाइन वाली खूबसूरत पोशाक” और लड़क के हाथ म
वाद्ययंत्र। “वे सभी काफ़ रंगीन और मस्त लग रहे थे।”
नाचने वाल क मस्ती — “उनका हलता-डु लता शरीर, हाथ-पैर क हलचल से समझ आ रहा था क वे मौज-मस्ती के नृत्य म
खोए हुए ह।”
लजीज पकवान — नृत्य के साथ-साथ मले अस मया पकवान, जनका स्वाद उनके लए बलकुल नया था।

सबसे गहरा कारण यह है क एंजेला के लए यह कहानी का सच हो जाना था। पाठ के आरंभ म ही लखा है — “उसे ऐसी
कहा नय का पात्र बनने म मज़ा आता था, जनम दूर-दराज़ क दु नया का जक्र हो… उसे बल्कुल अंदाज़ा नह था क जल्द ही
यात्राओं क उसक ये कहा नयाँ सच सा बत होने वाली ह।” कल्पना का सच म बदल जाना — इससे बड़ा अचंभा और क्या होगा!

प्र.2 (ख) “जब तक एंजेला कुछ समझ पाती, तब तक वह लंदन से नई दल्ली होते हुए गुवाहाट क उड़ान पर थी।”
— एंजेला और उसक माँ एलेस ा ने भारत क यात्रा से पहले कौन-कौन सी तैया रयाँ क ह गी?

पाठ म दो तैया रय का ज़क्र सीधे मलता है — बाक़ हम अनुमान से जोड़नी ह। इसी लए यह ग त व ध ‘अनुमान या कल्पना से’ के
नीचे रखी गई है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

पाठ म लखी हुई तैया रयाँ —

माँ ने एंजेला के स्कूल से छु बढ़वाई — “उन्ह ने एंजेला के स्कूल से उसक बसंत क छु ट्टय को एक हफ़्ते और बढ़ाने क
अनुम त ले ली, जससे एंजेला और उसके पता ायन भी उनके साथ जा सक।”
सबने जल्द -जल्द सामान बाँधा — “वे सभी जल्द ही तैयार हो गए।” यात्रा क योजना इतनी जल्दबाज़ी म बनी थी क
एंजेला हैरान रह गई।

अनुमान से जोड़ी जाने वाली तैया रयाँ —

कसने क्या तैयारी क होगी क्य ज़रूरी थी

माँ एले से ंडा पासपोट और भारत का वीज़ा बनवाना; लंदन–नई दल्ली–गुवाहाट क हवाई दू स रे दे श में जाने के िलए ये काग़ ज़
टकट बुक कराना; गुवाहाट के होटल म कमरा आर क्षत कराना। अिनवाय है,ं और उनके पास के वल
एक महीना था।

माँ (िफ़ ल्म के कैमरा, ाइपॉड, माइक, बैट रयाँ, मेमोरी काड जुटाना; असम म कन- कन लोग डॉक्यूमेंटी का काम िबना पूव-योजना
िलए ) से मलना है, उनक सूची बनाना; सत्र म ठहरने और रीना सेन के घर रुकने क के एक महीने में पूरा नही ं हो सकता
बात पक्क करना; फ़ल्मांकन क अनुम त लेना। था।

माँ असम, बहू और स त्रया के बारे म पहले से पढ़ना। तभी तो वे रास्ते भर एंजेल ा को असम
(जानकारी) के बारे में बता पा रही थी ं।

एंजेल ा अप्रैल के असम के मौसम के अनुसार हल्के कपड़े रखना; स्कूल का छू टा हुआ उसे तो पहले से ही ताजमहल वाली
काम पूरा करने क योजना; अपने दोस्त जेम्स और क रा को बताना; भारत के बारे कहािनयों से प्यार था।
म — ताजमहल आ द के बारे म — पढ़ना।

िपता बायन अपने काम से छु ट्ट लेना और घर बंद करने क व्यव ा करना। वे भी साथ जा रहे थे।

उत्तर लखते समय: पहले वे दो बात ल खए जो पाठ म सचमुच लखी ह, फर ल खए “इसके अलावा उन्ह ने यह
भी कया होगा…”। इस तरह आपका उत्तर तथ्य और कल्पना दोन दखाएगा, और यही इस ग त व ध का उ े श्य है।

प्र.3 (ग) “वहाँ एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे मंच बनाया गया था।” — बहू नृत्य के लए बरगद के पेड़ के नीचे मंच
क्य बनाया गया होगा?

इसके कई कारण हो सकते ह। सबसे मज़बूत कारण यह है क बहू गाँव का, सबका त्योहार है — इस लए उसका मंच भी ऐसी
जगह बनेगा जहाँ पूरा गाँव बना टकट, बना बुलावे के आ सके। और गाँव म ऐसी जगह बरगद का पेड़ ही होता है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

कारण समझाइए

1. बरगद सबसे बड़ ी छाया अपैल में असम में धूप और गरमी दोनों होती है।ं बरगद की फै ली हुई डाले ं एक साथ सै क ड़ ों लोगों को छाया दे
दे ता है दे ती है ं — “वह जगह लोगों से भरी हईु थी।”

2. गाँव की चौपाल वही ं होती भारत के गाँवों में बरगद या पीपल का पेड़ ही िमलने-बैठने की परंपरागत जगह है। वहाँ मंच बनाने से िकसी को
है बताना नही ं पड़ ता िक काय म कहाँ है।
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3. जगह बड़ ी और खुल ी पेड़ के चारों ओर मैद ान होता है, इसिलए मंच के सामने बहतु लोग बैठ सकते है ं और नाचने वालों को भी जगह
होती है िमल जाती है।

4. िबहू खेती और पकृ ित का जो त्योहार फ़ सल और बसंत के आने की खुशी में मनाया जाता हो, उसका मंच कमरे में नही,ं पेड़ के नीचे ही
त्योहार है सजना चािहए। यहाँ पेड़ स्वयं उ त्सव का िहस्सा बन जाता है।

5. बरगद पूजनीय और शुभ भारत में बरगद को लंबी आयु और शुभता का पतीक माना जाता है, इसिलए मंगल -काय उसके नीचे करना शुभ
माना जाता है समझा जाता है।

6. कोई ख़च नही ं पाकृ ितक छत िमल गई तो न पंडाल लगाना पड़ ा, न िबजली का बड़ ा इंतज़ ाम — गाँव का त्योहार गाँव के साधनों
से ही मन गया।

इसी से पाठ क एक और बात खुलती है: इसी खुले, प्राकृ तक मंच के कारण एंजेला को लगा क वह “ कसी
टाइम-मशीन म आकर बैठ गई हो” — क्य क वहाँ आधु नक कुछ भी नह था। य द वही नृत्य कसी चमचमाते
सभागार म होता, तो शायद यह अनुभव ही न होता। मंच क जगह ने ही अनुभव को इतना अनोखा बना दया।

असम से जुड़े शब्द — पृष्ठ 85 और 86
शब्द क बात

पाठ से शब्द क बात

प्र.1 इस पाठ म अनेक शब्द ऐसे ह जो असम से वशेष रूप से जुड़े ह। अपने समूह म मलकर उन शब्द क पहचान
क जए। इसके बाद उन्ह नीचे दए गए ान पर ल खए— (संकेत— असम के नृत्य, त्योहार, भाषा आ द।)

पुस्तक म ‘असम’ लखा एक सूरज बना है और उससे नकलती छह करण छह ख़ाली बादल तक जाती ह। हर बादल म असम से
जुड़ा एक शब्द भरना है। पाठ म से चुने गए छह सबसे उपयुक्त शब्द ये ह —

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य
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बादल शब्द यह कस प्रकार का शब्द है पाठ म कहाँ आया है

m त्योहार तथा नृत्य ase
1 िबहू
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“बसंत के आने की खुशी में वे सभी एक त्योहार मनाते है,ं िजसे ‘िबहू’ कहा
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जाता है।”

a2gl सित्रया नृत्य (शास्त्रीय) “वे सभी… सित्र या नत्ृ य का िफ़ ल्मांक न करने वाले थे। ”

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3 स त्र ान — वैष्णव मठ “जहाँ सभी ‘स त्र ों’, अथ त मठों की पीठ है। ”

a sem “अनु ने एंजेला को कु छ असिमया श द भी िसखाए।”
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4 असिमया भाषा ब्

5 गुवाहाटी नगर “गुवाहाटी के एक होटल में सामान्य होने के बाद …”

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6 माजुल ी ान — नद - प, जहाँ द क्षणापथ
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िचत्र का शीषक — “दिक्षणापथ स त्र का से ंक्टोिरयम

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सत्र है

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य द और शब्द भरने ह तो ये भी पाठ से लए जा सकते ह —

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शब्द असम से क्या जुड़ाव

coू —mअसिमया नए साल का योहार। a
बोहाग / रोंगाली िबहू बैस ाख (अपैल ) में मनने वाला.िबह
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भोगाली / माघ िबहू ag) काl िबहू — भोज और पकवानों वाला।
माघ (जनवरी

कोंगाली / काटी िबहू काितक (अक्तूबर) का िबहू — दीप जलाने और फ़ सल की रखवाली का समय।
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दिक्षणापथ स त्र वह स त्र जहाँ एंजेल ा का पिरवार ठहरा।
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मलं गुवाहाटी के पास का वह गाँव जहाँ एंजेल ा ने िबहू दे खा।

agl मूँगा िस ल्क असम का सुनहरा रे शम — ‘झरोखे से ’ वाले ले ख का िवषय।
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वैष्णव मठ वह परंपरा िजसमें से सित्रया नत्ृ य िनकला।

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पहचानने का तरीक़ा: ऐसे शब्द ढूँ ढ़ने के लए पाठ पर सरसरी नज़र दौड़ाइए और उन शब्द पर घेरा बनाइए जो —

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(1) हद शब्दकोश म सामान्य रूप से न मल, (2) कसी जगह, त्योहार, नृत्य, भाषा या पहनावे का नाम ह , और

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(3) केवल इसी पाठ म दख। ‘ बहू’, ‘सत्र’, ‘स त्रया’ तीन इसी जाँच पर खरे उतरते ह।

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s e m मज़ेदार बात: ‘सत्र’ और ‘स त्रया’ एक ही मूल के शब्द ह — जैसे ‘गाँव’ से ‘गँवई’, वैसे ही ‘सत्र’ से ‘स त्रया’। यानी
agla नृत्य का नाम उसी जगह पर पड़ा जहाँ वह जन्मा। ऐसे ही ‘ बहू’ एक ही शब्द से त्योहार और नृत्य दोन का नाम बन
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गया — इसी बात पर तो एंजेला को अचरज हुआ था।

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तीन बहू — पृष्ठ 86 और 87

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

शब्द क बात

पाठ से ता लका

प्र.1 (क) एंजेला और उसक माँ एलेस ा कौन-से बहू के अवसर पर भारत आए थे? ल खए।

वे र गाली या बोहाग बहू के अवसर पर भारत आए थे — वही बहू जो बैसाख म, यानी सामान्यतया अप्रैल म मनाया जाता है।
तीन प्रमाण, तीन पाठ से —

महीना — “वे जब यहाँ आ रहे थे तब अप्रैल का महीना चल रहा था।” और पुस्तक क ता लका कहती है क र गाली या बोहाग
बहू “बैसाख, सामान्यतया अप्रैल म” पड़ता है।
नया साल — “असम म यह नए साल का वक्त होता है।” मलान वाली ग त व ध म भी बोहाग बहू क पहचान यही द गई है
— “असम म नए साल क शुरुआत और बसंत के आगमन का प्रतीक है।”
ऋतु — “बसंत के आने क खुशी म वे सभी एक त्योहार मनाते ह” और “वह मंत्रमुग्ध होकर वहाँ लड़के-लड़ कय को बसंत
ऋतु के आगमन पर नृत्य करते दे ख रही थी।”

एक और सुराग़ यह भी है क एंजेला क बसंत क छु याँ चल रही थ , जन्ह माँ ने एक हफ़्ते और बढ़वाया था। यानी यात्रा बसंत म
ही हुई।

तीन नाम याद रखने का तरीक़ा: हर बहू के दो नाम ह — एक भाव बताता है और एक महीना। र गाली (रंग) =
बोहाग (बैसाख); भोगाली (भोग यानी खाना-पीना) = माघ; क गाली (कंगाल यानी अभाव) = काट (का तक)। नाम
म ही त्योहार का मज़ाज छपा है।

प्र.2 (ख) तीन बहू के लए ल खए क उस समय कसान खेत म क्या कर रहे होते ह?

पाठ म इसका सूत्र स्वयं दे दया गया है —

“असम में िबहू साल में तीन बार मनाया जाता है।

सबसे पहले जब िकसान बीज बोते है,ं िफर जब वे धान रोपते है ं

और िफर तब, जब खेत ों में अनाज तै यार हो जाता है।”

इसी सूत्र को पुस्तक क ता लका के तीन महीन पर बठाइए —

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

बहू महीना उस समय कसान खेत म क्या कर रहे होते ह

रोंगाली या बैसाख — यह खेती के नए वष की शुरुआत है। िकसान खेत जोतकर तैयार कर रहे होते है ं और बीज बो रहे होते
बोहाग सामान्यतया अप्रैल है।ं इसीिलए यह सबसे रंगीन और उ त्साह से भरा िबहू है — काम शुरू करने की खुशी का त्योहार।

कोंगाली या का तक — धान के पौधे खेतों में खड़ े होकर बढ़ रहे होते है,ं पर फ़ सल अभी कटी नही ं होती। घर के भंडार लगभग
काटी सामान्यतया ख़ाली होते है।ं िकसान खेतों की रखवाली और दे खभाल करते है ं और फ़ सल की सलामती के िलए
अक्तूबर तुल सी के पौधे के पास दीप जलाते है।ं इसीिलए यह सबसे सादा िबहू है।

भोगाली या माघ — फ़ सल कट चुक ी होती है और अनाज घर आ चुक ा होता है। खेत का बड़ ा काम पूरा है, इसिलए िकसान
माघ सामान्यतया खेतों में िव ाम और साझा भोज करते है।ं इसीिलए इसे भोगाली — यानी भोग यानी खाने-पीने वाला िबहू
जनवरी — कहते है। ं

तीन नाम का मतलब यह खुल जाता है: जब खेत म काम शुरू हो — रंग (र गाली); जब खेत म फ़सल खड़ी हो
और घर ख़ाली — कंगाली (क गाली); जब अनाज घर आ जाए — भोग (भोगाली)। यानी असम का कसान अपने
खेत क हालत के हसाब से त्योहार का मज़ाज तय करता है। यही ‘ बहू एक कृ ष आधा रत त्योहार है’ का असली
अथ है।

ध्यान द जए: पाठ ने तीन काम गनाए ह — बीज बोना, धान रोपना, अनाज तैयार होना। बीज बोना बोहाग म होता
है और अनाज तैयार होकर घर आना माघ तक पूरा हो जाता है; धान क रोपाई इन दोन के बीच के महीन म होती
है, और काट बहू तक वही रोपा हुआ धान खेत म लहलहा रहा होता है।

आपक बात — पृष्ठ 87
पाठ से आगे

पाठ से आगे अपनी बात

प्र.1 (क) “रीना आंट क एक ब टया थी— अनु” — ‘ ब टया’ का अथ है ‘बेट ’। बेट को प्यार से बुलाने के लए
और स्नेह जताने के लए ‘ ब टया’ शब्द का प्रयोग भी कया जाता है। ‘ ब टया’ जैसा ही एक अन्य शब्द ‘ ब ो’
भी है। आपके घर म आपको प्यार से कन- कन नाम से पुकारा जाता है?

यह आपके अपने घर से जुड़ा प्रश्न है, इस लए इसका उत्तर हर वद्याथ का अलग होगा। पहले यह समझ ली जए क प्यार के नाम
बनते कैसे ह —

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

बनने का ढं ग उदाहरण

असली नाम को छोटा कर दे ना सुरेंद → सुरी; किवता → किव; अिभषेक → अिभ; रुिक्मणी → रुक्मी

नाम को दुहरा दे ना मीना → मीनू-मीनू; गोलू-मोलू; टीना-मीना

िरश्ते का ही प्यार-भरा रूप बेटी → िबिटया, िबट्टो, िबिटया रानी; बेटा → बेटवा, बबुआ, ल ल्ला

गुण या आदत से बना नाम गोलू (गोल -मटोल ), चीकू , लाडो, राजा बेटा, नन्ही

अपनी बोली का शब्द भोजपुरी में ‘बबुनी’, अवधी में ‘गु ो’, मराठी में ‘बाळ ’, बांग्ला में ‘खोका/खुक ी’, असिमया में ‘बापु/माजोनी’

नमूना उत्तर:
“मेरा नाम अनुराधा है, पर घर पर मुझे कोई इस नाम से नह बुलाता। माँ मुझे ‘अनु’ कहती ह और जब बहुत प्यार आता है तो
‘ ब टया रानी’। पापा मुझे ‘गु ड़या’ कहते ह। दाद मुझे अपनी बोली म ‘लाडो’ पुकारती ह, और मेरा छोटा भाई मुझे ‘द दू’ कहता
है। मुझे ‘लाडो’ सबसे अच्छा लगता है, क्य क यह नाम केवल दाद के मुँह से नकलता है और इसे सुनते ही लगता है क कोई मुझे
बहुत चाहता है।”

अ े उत्तर म यह ज़रूर हो: (1) आपके सारे प्यार-भरे नाम, (2) कौन-सा नाम कौन बुलाता है, और (3) आपको
कौन-सा सबसे अच्छा लगता है और क्य । तीसरी बात ही उत्तर को आपका अपना बनाती है।

प्र.2 (ख) आपके नाम का क्या अथ है? आपका नाम कसने रखा? पता करके बताइए।

यह पता लगाने वाला काम है। इसे तीन चरण म क जए —

1. घर म पू छए — माँ, पता, दादा-दाद या नाना-नानी से पू छए क नाम कसने चुना, कस दन रखा गया और क्य यही नाम
चुना गया। कई घर म नामकरण क एक छोट -सी कहानी होती है।
2. अथ खो जए — हद शब्दकोश म दे खए। अ धकतर भारतीय नाम संस्कृत, अरबी-फ़ारसी या ानीय बो लय से आते ह और
उनका कोई न कोई सुंदर अथ होता है।
3. ल खए — नाम, अथ, कसने रखा, क्य रखा — चार बात एक साथ।

नाम अथ नाम अथ

अनु अनुराधा — एक नक्षत्र का नाम; ‘अनु’ का अथ ‘पीछे चलने वाला, साथी’ आरव मधुर ध्विन, संगीत

रीना शुद्ध, स्वच्छ दीिपका छोटा दीपक , पकाश दे ने वाली

जया िवजय पाने वाली इशान सूय, िदशा का स्वामी

िशवेंद िशव + इंद — क ल्याणकारी और ेष्ठ सना पशंस ा, स्तुित

नमूना उत्तर:

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

“मेरा नाम द पका है। इसका अथ है — ‘छोटा द पक’ या ‘प्रकाश फैलाने वाली’। यह नाम मेरी दाद ने रखा था। वे बताती ह क
मेरा जन्म द पावली से दो दन पहले हुआ था, जब घर क छत पर द प क कतार सजी थी। उन्ह ने कहा — ‘यह हमारे घर का
द पक है, इसका नाम द पका ही होगा।’ मुझे अपना नाम अच्छा लगता है, क्य क इसके साथ एक कहानी जुड़ी है।”

यह ग त व ध क्य द गई है: नाम केवल पुकारने का शब्द नह होता। उसम प रवार क भाषा, उसका धम- व ास,
उसका इलाक़ा और कभी-कभी उस दन क कोई घटना छपी होती है। अपने नाम का अथ जान लेना अपनी जड़
को जानने का पहला क़दम है।

प्र.3 (ग) “वे एक साथ खेल रहे थे” — आप कौन-कौन से खेल अपने मत्र के साथ मलकर खेलते ह? बताइए।

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। ध्यान द जए क पाठ म अनु और एंजेला ने कोई महँगा खेल नह खेला — उन्ह ने राम और
रावण बनकर लकड़ी के तीर-कमान से खेला। “वे एक साथ खेल रहे थे, उस कूद-फाँद और लड़ाई का कोई अंत नह था।” यानी
सबसे अच्छे खेल वे होते ह जनम कल्पना हो और साथी ह ।

खेल का प्रकार उदाहरण क्या चा हए

दौड़ -भाग वाले कब ी, खो-खो, पकड़ म-पकड़ ाई, आइस -पाइस (छु पा-छु पी), लंगड़ ी टाँग, रस्साकशी खुला मैदान, कुछ
साथी

गेंद वाले ि के ट, फ़ु टबॉल , िप ू (सतोिलया), वॉलीबॉल
क्र एक गद

बैठकर खेले जाने िगट्टे , कं चे, साँप-सीढ़ ी, लूडो, शतरंज, अंत्याक्षरी, नाम-जगह-जानवर-चीज़ बहुत कम सामान
वाले

क ल्पना वाले घर-घर, डॉक्टर-मरीज़ , दुक ान-दुक ान, स्कू ल -स्कू ल , और अनु-एंजेल ा जैस ा राम-रावण का सफ़ कल्पना
खेल

ज़ मीन पर बनाकर स्टापू (िकट-िकट), गोटी, िचिड़ या उड़ एक चॉक या पत्थर

नमूना उत्तर:
“म अपने मत्र के साथ सबसे ज़्यादा पट्ठू और खो-खो खेलती हूँ। शाम को हम गली म सात चपटे पत्थर जमाकर पट्ठू खेलते ह —
गद मारकर ढे र गराना और फर पकड़े जाने से पहले उसे दोबारा जमाना। छु ट्ट के दन हम घर-घर भी खेलते ह, जसम कोई माँ
बनता है, कोई मेहमान। बा रश म जब बाहर नह जा पाते तो हम नाम-जगह-जानवर-चीज़ खेलते ह। मुझे पट्ठू सबसे अच्छा लगता
है, क्य क उसम पूरी ट म को एक साथ दौड़ना पड़ता है और जीत कसी एक क नह होती।”

बताते समय यह भी जो ड़ए: खेल का नाम, वह कैसे खेला जाता है, कतने साथी चा हए, और आपको वही खेल
क्य पसंद है। इससे आपका उत्तर सूची न रहकर एक छोटा-सा वणन बन जाएगा — ठ क वैसा ही, जैसा इस पाठ
क ले खका ने बहू का कया है।

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(घ) “असम म नृत्य क भी एक समृद्ध परंपरा है।” — आपने इस पाठ म बहू और स त्रया नृत्य के बारे म तो पढ़ा
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प्र.4

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है। आपके प्रांत म कौन-कौन से नृत्य प्र सद्ध ह? आपको कौन-सा नृत्य करना पसंद है?

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पहले अपने प्रांत के नृत्य पता क जए — घर के बड़ से, शक्षक से या पुस्तकालय से। नीचे कुछ राज्य के प्र सद्ध नृत्य दए गए ह;

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इनम से अपना राज्य ढूँ ढ़ए।

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राज्य / प्रदे श
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प्र सद्ध लोक नृत्य
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शास्त्रीय नृत्य

असम
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बहू, बगुरुंबा, झुमुर सित्रया

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पंजाब भांगड़ा, ग ा —

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गुजरात
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गरबा, डां डया रास —

asस्थान
lराज
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घूमर, कालबे लया, भवाई —

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उ त्तर पदे श कथक
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राई, चरकुला, धो बया

लावणी, कोली, .तमाशा
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महारा —
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gl गोट पुआ
ओिडशा aछऊ, ओिडसी

तिमलनाडु भरतनाट म
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कुम्मी, कोलाट्टम, करगट्टम

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e , मोिहनीअट्टम
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के रल कथकली
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थेय्यम, कैको ट्टकली

eआंmध पदे श a
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वीरनाट्यम, धीमसा कु िचपुड़ी
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मिणपुर मिणपुरी
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थांग-ता, लाई हराओबा

छऊ, पाइका /oपंm
c थी, ककसार g l a
झारखंड / छत्तीसगढ़
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seकmु ड़ / नाट
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aरौफ़,
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जम्मू-क श्मीर / िहमाचल —

पिश्चम बंगाल
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छऊ, बाउल, गंभीरा —

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नमूना उत्तर:
o g घेरदार घाघरा पहनकर गोल घेरे म घूमती ह।
“म.cराज ान का रहने वाला हूँ। हमारे प्रांत म घूमर सबसे प्र सद्ध नृत्य है, जसम स्त्रयाँ
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se इसके अलावा कालबे लया और भवाई भी बहुत प्र सद्ध ह — भवाई म तो नतक सर पर कई मटके रखकर नाचती है। तीज-
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गणगौर और ववाह के अवसर पर हमारे यहाँ घूमर ज़रूर होता है। मुझे घूमर करना सबसे अच्छा लगता है, क्य क इसम ताली और
घूमने का ताल बहुत जल्द सीखा जा सकता है और सब मलकर करते ह। जैसे असम के लोग बहू म बसंत का स्वागत करते ह, वैसे
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ही हम घूमर से त्योहार का स्वागत करते ह।”

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ध्यान द जए: प्रश्न दो हस्स म है — पहले प्रांत के प्र सद्ध नृत्य गनाइए, फर बताइए आपको कौन-सा करना पसंद
है और क्य । दूसरे हस्से का उत्तर दे ना मत भू लए, यही आपका अपना उत्तर है।

पूव त्तर क यात्रा — पृष्ठ 87
पाठ से आगे

पाठ से आगे जानकारी

प्र.1 असम भारत के पूव त्तर भाग म त है। असम के अ त रक्त पूव त्तर भारत म सात अन्य राज्य भी ह। आपको
अवसर मले तो इनम से कसी राज्य क यात्रा क जए। आठ राज्य के नाम ह— अरुणाचल प्रदे श, स क्कम,
मजोरम, मेघालय, त्रपुरा, नागालड, म णपुर और असम। मान चत्र के लए दे ख:

पुस्तक म दए क्यू.आर. कोड से पूव त्तर भारत का मान चत्र दे खए और आठ राज्य को उस पर पहचा नए। नीचे हर राज्य क एक-
एक पहचान द गई है, जससे मान चत्र दे खते समय नाम याद रह जाएँ।

राज्य राजधानी एक ख़ास पहचान

असम दसपुर िबहू और सित्रया नत्ृ य; काज़ ीरंगा का एक सी ंग वाला गैंडा; मूँगा िस ल्क ; बह्मपुत्र नदी और माजुल ी ीप।

अरुणाचल ईटानगर भारत में सूय की पहली िकरण यही ं पड़ ती है; तवांग का पिस द्ध मठ।
पदे श

िसिक्कम गंगटोक कं चनजंघ ा — भारत की सबसे ऊँ ची चोटी; भारत का पहला पूण जैिवक (ऑगिनक ) राज्य।

िमज़ ोरम आइज़ोल बाँस का नत्ृ य ‘चेराव’; ऊँ ची पहािड़ याँ और बाँस के जंगल।

मेघ ालय शलांग नाम का अथ — ‘बादलों का घर’; चेरापूँजी और मौिसनराम, जहाँ सबसे अिधक वष होती है; जड़ ों से बने
जीिवत पुल ।

ित्रपुरा अगरतला उ ज्जयंत महल ; बाँस और बेतं का िशल्प।

नागालै ंड को हमा हॉनिबल महोत्सव, िजसमें राज्य की सभी जनजाितयाँ एक साथ नत्ृ य करती है।ं

मिणपुर इंफाल मिणपुरी शास्त्रीय नत्ृ य; लोकटक झील के तैरते हुए ‘फु मदी’; पोलो खेल का जन्मस्थान।

याद रखने क तरक ब: सात राज्य को मलाकर ‘सात बहन’ (सेवन सस्टस) कहा जाता है — अरुणाचल प्रदे श, असम, म णपुर,
मेघालय, मज़ोरम, नागालड और त्रपुरा। स क्कम को इनका ‘भाई’ कहा जाता है। इस तरह आठ राज्य पूरे हो जाते ह।
य द यात्रा का अवसर मले तो —

1. जाने से पहले उस राज्य क भाषा के पाँच शब्द सीख ली जए, जैसे अनु ने एंजेला को अस मया शब्द सखाए थे।
2. वहाँ का एक लोक नृत्य और एक पकवान ज़रूर दे खए-च खए।

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3. एक छोट -सी यात्रा-डायरी ल खए — तारीख़, जगह, जो दे खा और जो महसूस हुआ। यही तो इस पाठ क ले खका ने कया
है।
4. लौटकर कक्षा म चत्र के साथ बताइए — जैसे एंजेला ने लंदन म अपनी कक्षा को असम दखाया था।

यह ग त व ध यहाँ क्य है: पाठ ने असम के दो नृत्य दखाए। पर पूव त्तर म आठ राज्य ह और हर राज्य के अपने
नृत्य, भाषाएँ और त्योहार ह। पुस्तक कहना यही चाहती है क असम एक खड़क है, पूरा पूव त्तर उसके पीछे का
आँगन।

टाइम मशीन — पृष्ठ 88
पाठ से आगे

पाठ से आगे कल्पना

प्र.1 (क) य द आपको टाइम-मशीन मल जाए तो आप उसम बैठकर कौन-से समय म और कौन-से ान पर जाना
चाहगे? क्य ?

यह कल्पना का प्रश्न है, इस लए इसका कोई एक ‘सही’ उत्तर नह है। पर अच्छे उत्तर म तीन बात ज़रूर होनी चा हए — कौन-सा
समय, कौन-सी जगह और सबसे ज़रूरी, क्य ।
कुछ दशाएँ, जनम से आप चुन सकते ह —

कहाँ / कब वहाँ जाकर क्या दे खना चाहगे

बीता हुआ समय — हड़ प्पा-मोहनजोदड़ ो के स्नानागार में; नालंद ा के िवश्विवद्यालय की क क्षा में; अशोक के िशलाले ख गढ़ े जाते हुए ;
इितहास 1930 की दाड ं ी यात्रा में गाधं ी जी के साथ चलते हएु ।

बीता हुआ समय — जब दादा-दादी आपकी उम के थे, उनका गाँव और उनका स्कू ल दे खने।
अपना पिरवार

बीता हुआ समय — कला उस िदन जब पहली बार िकसी स त्र में सित्रया नत्ृ य रचा गया, या अजंता की गुफ़ ाओं में िचत्र बनते हुए दे खने।

आने वाला समय सन् 2100 की दुिनया — क्या तब भी िबहू मनाया जाएगा? क्या निदयाँ साफ़ होंगी? क्या स्कू ल ऐसे ही होंगे?

नमूना उत्तर:
“य द मुझे टाइम-मशीन मल जाए तो म आज से लगभग सौ साल पीछे , अपने ही गाँव म जाना चाहूँगी। म दे खना चाहती हूँ क
तब यहाँ बजली नह थी, तो लोग शाम कैसे बताते थे; ब े कौन-से खेल खेलते थे; और वह बरगद का पेड़, जो आज हमारे स्कूल
के सामने है, तब कतना छोटा रहा होगा। म अपनी परदाद से मलना चाहूँगी, जनक सफ़ एक धुँधली तस्वीर हमारे घर म टँ गी है।
म उनसे वे लोकगीत सुनना चाहूँगी जो अब कसी को याद नह । लौटते समय म वे गीत लखकर ले आऊँगी, ता क वे फर से गाए जा
सक।”

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‘क्य ’ का उत्तर ही सबसे ज़रूरी है: ‘म डायनासोर दे खना चाहूँगा’ — यह अधूरा उत्तर है। ‘म डायनासोर दे खना
चाहूँगा क्य क म जानना चाहता हूँ क वे सचमुच कतने बड़े थे और उनक आवाज़ कैसी थी’ — यह पूरा उत्तर है।
कारण ही आपक कल्पना को सोच म बदलता है।

प्र.2 (ख) आपको य द कोई ऐसी वस्तु बनाने का अवसर मले जो अभी तक नह बनाई गई है तो आप क्या बनाएँगे?
क्य बनाएँगे?

यहाँ सोचने का तरीक़ा यह है — पहले कोई ऐसी परेशानी चु नए जो आपके आस-पास सचमुच है, फर उसे हल करने वाली वस्तु
क कल्पना क जए। तब आपका आ वष्कार सफ़ मज़ेदार नह , उपयोगी भी लगेगा।

परेशानी कल्पना क वस्तु वह क्या करेगी

बहुत-सी भाषाएँ, पर समझ भाषा-बटन कान म लगाते ही कोई भी भाषा अपनी भाषा म सुनाई दे ने लगे। एंजेला को
िकसी एक की अस मया समझने के लए यही चा हए था।

कू ड़े का ढे र कू ड़ ा-बदल पेटी जो कूड़ा डालो, वह खाद, काग़ज़ या ईंट बनकर नकले।

सूखा और पानी की कमी हवा से पानी बनाने हवा क नमी ख चकर पीने का पानी बना दे ।
वाली छतरी

दू र बसे गाँवों में डॉक्टर नही ं जेब वाला जाँच-यंत्र हथेली पर रखते ही बता दे क क्या तकलीफ़ है और कौन-सी दवा चा हए।

भारी बस्ता बोलती िकताब-पट्टी एक पतली पट्ट म सारी कताब, जो पढ़कर भी सुना सके।

नमूना उत्तर:
“म एक ‘भाषा-बटन’ बनाना चाहूँगा — कान म लगने वाला एक छोटा-सा बटन, जो कसी भी भाषा को सुनते ही मेरी भाषा म
बदलकर मुझे सुना दे । म इसे इस लए बनाना चाहूँगा क्य क हमारे दे श म सैकड़ भाषाएँ ह और अक्सर हम पड़ोसी राज्य म जाकर
भी कसी से बात नह कर पाते। इस पाठ म भी एंजेला असम पहुँची तो अनु ने उसे कुछ अस मया शब्द सखाए, तभी वे घुल- मल
पाईं। य द भाषा-बटन होता तो हर ब ा कसी भी राज्य म जाकर वहाँ के ब से दोस्ती कर सकता, वहाँ के गीत समझ सकता
और वहाँ क कहा नयाँ सुन सकता। मेरे लए यह सबसे बड़ा काम होगा — लोग को आपस म जोड़ना।”

लखते समय: वस्तु का एक नाम ज़रूर र खए, बताइए वह कैसी दखेगी, और अंत म कसका भला होगा। यही तीन
बात आपके आ वष्कार को जी वत कर दे ती ह।

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प्र.3 (ग) क्या आपने कभी कसी संग्रहालय क यात्रा क है? संग्रहालय ऐसा ान होता है जहाँ व भन्न काल क
प्राचीन वस्तुए ँ दे खने को मलती ह। कभी-कभी संग्रहालय क यात्रा भी ‘टाइम-मशीन’ क यात्रा जैसी लगती है।
अवसर मले तो आप भी कसी संग्रहालय क यात्रा अवश्य क जए और उसके बारे म क ा म बताइए।

संग्रहालय को ‘टाइम-मशीन’ क्य कहा गया है — क्य क वहाँ हज़ार साल पुरानी चीज़ आपके सामने रखी होती ह।
मोहनजोदड़ो क नतक क मू त दे खते ही आप पाँच हज़ार साल पीछे पहुँच जाते ह, बना कह गए। इसी लए एंजेला को भी बरगद
के नीचे बैठकर लगा था — “जैसे वह आश्चयजनक रूप से कसी टाइम-मशीन म आकर बैठ गई हो!”
भारत के कुछ प्र सद्ध संग्रहालय —

संग्रहालय कहाँ क्या दे खने को मलता है

रा ीय संग हालय नई दल्ली हड़ प्पा की नतकी, पाचीन िस क्के , मूितयाँ, वस्त्र

भारतीय संग हालय कोलकाता भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ ा संगहालय; ममी और जीवाश्म

असम राज्य संग हालय गुवाहाट असम की मूितयाँ, वाद्ययंत्र, बुनाई और जनजातीय जीवन की वस्तुए ँ

सालार जंग संग हालय हैदराबाद दुिनया भर से जुटाई गई कलाकृ ितयाँ और पिस द्ध संगीत-घड़ ी

रे ल संग हालय नई दल्ली पुराने भाप-इंजन और शाही िडब्बे

यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान —

1. पहले पता कर ली जए क वहाँ कौन-कौन से कक्ष (गैलरी) ह, ता क समय बँट जाए।
2. हर वस्तु के नीचे लगी नाम-प का ज़रूर प ढ़ए — उसम वस्तु का नाम, काल और जगह लखी होती है।
3. एक छोट कॉपी म तीन चीज़ के नाम और उनका रेखा चत्र बनाइए, जो आपको सबसे अच्छ लग ।
4. वस्तुओं को छू इए मत और जहाँ मना हो वहाँ फ़ोटो मत ली जए — ये चीज़ बहुत नाजक होती ह।

नमूना उत्तर (क ा म बताने के लए):
“ पछले वष हम अपने वद्यालय के साथ रा ीय संग्रहालय, नई दल्ली गए थे। वहाँ मुझे सबसे अच्छ लगी हड़प्पा क नतक क
छोट -सी काँसे क मू त। वह मु श्कल से एक बत्ते क है, पर उसके खड़े होने के ढं ग म इतना आत्म व ास है क लगता है वह अभी
नाचना शुरू कर दे गी। नाम-प ट्टका पर लखा था क यह लगभग साढ़े चार हज़ार साल पुरानी है। उसे दे खकर मुझे लगा क इतने
साल पहले भी लोग नाचते थे — ठ क वैसे ही जैसे आज असम म बहू पर नाचते ह। उस पल मुझे सचमुच लगा क म कसी टाइम-
मशीन म बैठकर बहुत पीछे चला गया हूँ।”

खलौने व भन्न प्रकार के — पृष्ठ 88 और 89

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पाठ से आगे
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पाठ से आगे गतवध

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अनु के खलौने — पाठ म इनका ब्योरा साफ़ दया गया है m
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“गुिड़ या, लकड़ ी के िखलौने और नािरयल की जटा से बने घर। िकतने अनोखे िखलौने !

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अनु का पसंद ीदा िखलौना लकड़ ी का बना तीर-कमान था।”

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c खलौने हाथ से बने थे और प्रकृ त से मली चीज़ — लकड़ी और ना रयलagक जटा — से बने थे। ये खलौने
यानी अनु के.सारे
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e पर अपने आप कुछ नह करते थे; इनसे खेलने के लए ब े को स्वयं कहानी गढ़नी पड़ती थी। इसी लए अनु तीर-कमान
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agलेकर राम बन जाती और एंजेला रावण — “उस कूद-फाँद और लड़ाई का कोई अंत नह था।”
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लंदन म एंजेला के खलौने कैसे रहे ह गे — यह अनुमान का हस्सा है। पाठ म इसका सीधा वणन नह है, पर दो सुराग़ मलते ह

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— “उसने लंदन म ऐसे खलौने कभी नह दे खे थे” और “उसने महसूस कया क लंदन के जीवन से यहाँ सब कुछ कतना अलग
था!”
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तुलना अनु के खलौने एंजेला के खलौने (अनुमान)

लािस्टक , धातु, बैटरी वाले पुज़ .c
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बने िकससे
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लकड़ी, ना रयल क जटा, कपड़ा — प्राकृ तक चीज़ प्

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बनाए .िकसने
m agसेl, इसिलए सब एक जैसे
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गाँव के कारीगर ने हाथ से, इस लए हर खलौना कारख़ाने में मशीन

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अलग

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कहाँ से आए दुक ान या ऑनलाइन ऑडर से
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आस-पास से ही

comका खेल g l a
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कै से खेले जाते ब ा स्वयं कहानी बनाता है — राम-रावण िखलौना स्वयं चलता-बोलता है; वीिडयो गेम में िनयम पहले से
है ं
a s तय

उदाहरण agजटाl का घर
तीर-कमान, गु ड़या, िरमोट वाली कार, बोलने वाली गुिड़ या, वीिडयो गेम, िबिल्डंग-

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ब्लॉक

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एंजेला को अनु के खलौने अ े क्य लगे: क्य क वे उसके लए नए थे और उनम खेलने वाले के लए जगह थी।

s e m जो खलौना सब कुछ ख़ुद कर दे ता है, वहाँ ब े के करने को कुछ नह बचता। लकड़ी का तीर-कमान कुछ नह
agla करता — इसी लए उसके साथ पूरी रामायण खेली जा सकती है।
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प्र.2 (ख) आप घर पर कौन-कौन से खलौन से खेलते रहे ह? उनके नाम बताइए।

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। सोचने म आसानी हो, इसके लए खलौन को तीन ढे रय म बाँट ली जए —

ढे री उदाहरण

दुक ान से आए िखलौने िरमोट वाली कार, गुिड़ या, लूडो, साँप-सीढ़ ी, पहेल ी (पज़ ल ), िबिल्डंग-ब्लॉक , कै रम

हाथ से बने / परंपरागत िमट्टी के बतन और जानवर, लकड़ ी का ल ट्टू , च ापटना के रंगीन िखलौने, कठपुतली, गुिड़ या, डमरू, िफ़ रकी
िखलौने

घर पर ख़दु बनाए िखलौने काग़ ज़ की नाव और हवाई जहाज़ , मािचस की िडब्बी की गाड़ ी, कपड़ े की गेंद , धागे और िडब्बे का टेल ीफ़ ोन, पुराने
चप्पल का पिहया

नमूना उत्तर:
“म घर पर लट्टू, कंचे, लूडो और कैरम से खेलता रहा हूँ। मेरे पास एक म का हाथी भी है जो मेले से आया था, और एक लकड़ी
क गाड़ी जो मेरे नाना ने अपने हाथ से बनाई थी। जब कुछ न हो तो म और मेरी बहन काग़ज़ क नाव बनाकर बा रश के पानी म
तैराते ह। मुझे लट्टू सबसे अच्छा लगता है, क्य क उसे नचाना सीखने म मुझे पूरे दो हफ़्ते लगे थे।”

बताते समय: केवल नाम गनाकर मत रु कए। एक खलौने के बारे म दो वाक्य ज़रूर क हए — वह कहाँ से आया
और उससे जुड़ी कोई याद। तभी सुनने वाल को मज़ा आएगा।

प्र.3 (ग) भारत के प्रत्येक प्रांत म हाथ से बच्च के अनोखे खलौने बनाए जाते ह। आपके यहाँ बच्च के लए हाथ से
बने कौन-कौन से खलौने मलते ह?

पहले अपने आस-पास पता क जए — मेले म, हाट म, बस अ े के पास या कसी शल्प-दुकान म। नीचे भारत के कुछ प्र सद्ध
हस्त न मत खलौने दए गए ह; अपने प्रांत का नाम इनम ढूँ ढ़ए।

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प्रांत प्र सद्ध हाथ के खलौने कससे बनते ह

असम / पूव त्तर गु ड़या, बाँस-बत के खलौने, ना रयल क जटा से बने घर, मुखौटे (माजुली के) बाँस , बेतं , लकड़ ी, जटा, िमट्टी

कन टक चन्नापटना के चमक ले रंगीन खलौने हल्की लकड़ ी और वनस्पित रंग

आंध पदे श क डापल्ली के लकड़ी के खलौने, ए टकोप्पका के लाख वाले खलौने मुल ायम लकड़ ी, लाख

उ त्तर पदे श वाराणसी के लकड़ी के खलौने, चत्रकूट के काठ के खलौने लकड़ ी

राजस्थान कठपुतली, ऊँट-हाथी क कपड़े क गु ड़या लकड़ ी, कपड़ ा, धागा

पिश्चम बंगाल कृष्णानगर क मट्ट क मू तयाँ, उल्लू-गु ड़या िचकनी िमट्टी

महारा / गुजरात सावंतवाड़ी के लकड़ी के खलौने, कच्छ क कपड़े क गु ड़या लकड़ ी, कपड़ ा, दपण-काम

िबहार / झारखंड मट्ट के घोड़े-हाथी, बाँस क ड लया- खलौने िमट्टी, बाँस

नमूना उत्तर:
“हमारे यहाँ मेले म म के खलौने बहुत मलते ह — घोड़ा, हाथी, सीट वाली च ड़या और छोटे -छोटे बतन। इनके अलावा
लकड़ी का लट्टू, काग़ज़ क फ़रक और कपड़े क गु ड़या भी मलती है। ये सब हमारे गाँव के कुम्हार और बढ़ई चाचा अपने हाथ
से बनाते ह। मने एक बार कुम्हार चाचा को चाक पर मट्ट क च ड़या बनाते दे खा — मट्ट का ल दा घूमते-घूमते च ड़या बन गया,
यह दे खकर मुझे बहुत अचरज हुआ।”

हाथ के खलौने क्य ख़ास ह: ये आस-पास मलने वाली चीज़ से बनते ह, इस लए सस्ते होते ह; ये मट्ट , लकड़ी
और कपड़े के होते ह, इस लए पयावरण को नुक़सान नह पहुँचाते; और हर खलौना हाथ से बना होने के कारण
थोड़ा-थोड़ा अलग होता है — ठ क वैसे ही जैसे अनु का तीर-कमान दु नया म सफ़ एक था।

प्र.4 (घ) भारत के बच्चे स्वयं भी अपने लए अनोखे खलौने बना लेते ह। आप भी तो कागज़, म आ द से कोई न
कोई खलौना बनाना जानते ह गे? आप अपने हाथ से बनाए कसी खलौने को क ा म लाकर दखाइए और उसे
बनाने का तरीका सबको सखाइए।

यह करके दखाने वाली ग त व ध है। इसे तीन चरण म क जए — बनाइए, लाइए, सखाइए। सखाते समय क्रम से बो लए ता क
सुनने वाला साथ-साथ बना सके।
घर क चीज़ से बनने वाले कुछ खलौने —

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

खलौना क्या चा हए कैसे बनेगा

काग़ ज़ की िफ़ रकी चौकोर काग़ज़, पन, प सल काग़ ज़ के चारों कोनों से बीच तक कटाव कीिजए , एक -एक कोना बीच में
मोड़ कर िपन से पेंिसल की रबड़ पर टाँक दीिजए। हवा में दौिड़ ए — िफ़ रकी
घूमेगी।

धागे-िडब्बे का दो मा चस/ दयासलाई के डब्बे या दोनों िडब्बों के पेंदे में छे द करके धागे के दोनों िसरे बाँध दीिजए। धागा
टेल ीफ़ ोन काग़ज़ के गलास, एक लंबा धागा तानकर एक िसरे से बोिलए , दू स रे िसरे पर सुनाई दे गा।

िमट्टी की सीटी वाली चकनी गीली मट्ट िमट्टी की छोटी गोली बनाकर चोंच और पूँछ खी ंिचए , पूँछ में पतला छे द कीिजए
िचिड़ या और धूप में सुखाइए।

काग़ ज़ की नाव और एक काग़ज़ के वल मोड़ ने से बनते है ं — कैं ची या गोंद की भी ज़ रूरत नही ं।
हवाई जहाज़

बोतल के ढक्कनों मा चस क डब्बी, चार ढक्कन, दो सी ंकों को धुरी बनाकर ढक्कनों में डािलए और िडब्बी के नीचे िचपका
की गाड़ ी सक दीिजए।

नमूना उत्तर (क ा म सखाने का तरीक़ा):
“म आज आपको काग़ज़ क फ़रक बनाना सखाऊँगा। इसके लए चा हए — एक चौकोर काग़ज़, एक पन और एक प सल
जसके पीछे रबड़ लगी हो।

1. काग़ज़ को दोन तरछे कोन से मोड़कर खो लए। बीच म एक नशान (×) बन जाएगा।
2. चार कोन से बीच के नशान तक कची से कट लगाइए, पर बीच तक पूरा मत का टए — थोड़ा छोड़ द जए।
3. अब हर कोने का एक-एक सरा उठाकर बीच म लाइए। चार सरे बीच म इक े हो जाएँगे।
4. चार सर को एक साथ पन से बेधकर प सल क रबड़ म टाँक द जए। ध्यान रहे — पन ज़रा ढ ली र खए, तभी फ़रक
घूमेगी।
5. अब इसे हवा म लेकर दौ ड़ए या फूँक मा रए।

मुझे यह खलौना इस लए पसंद है क्य क यह बना पैसे के बन जाता है और इससे यह भी समझ आता है क हवा म कतनी श क्त
होती है।”

सखाते समय ध्यान र खए: पहले सामान गनाइए, फर एक-एक क़दम क्रम से बताइए, और जहाँ ग़लती होने क
आशंका हो वहाँ चेतावनी द जए (जैसे — ‘ पन ज़्यादा कसकर मत लगाइए’)। कची और पन का इस्तेमाल बड़ क
दे ख-रेख म ही क जए।

पत्र — पृष्ठ 89, 90 और 91

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से आगे

पाठ से आगे ले ख न

प्र.1 (क) मान ली जए आप एंजेला ह। आप लंदन लौट चुक ह और आपको भारत क बहुत याद आ रही है। अपनी
सखी अनु को पत्र लखकर बताइए क आपको कैसा अनुभव हो रहा है।

यह अनौपचा रक पत्र ( मत्र को लखा जाने वाला पत्र) है। इसम भाषा घरेलू और भाव भरी होनी चा हए। इसके छह हस्से होते ह
—

हस्सा क्या लख

1. पता और िदनांक ऊपर दाईं ओर — भेजने वाले का पता और नीचे तारीख़।

2. संबोधन िपय अनु / िपय सखी अनु

3. अिभवादन-कु शल क्षेम ‘मैं यहाँ ठीक हू,ँ आशा है तुम भी ठीक होगी। ’

4. मुख्य बात भारत की यादे ं — िबहू, सित्रया, िखलौने, खेल — और यह िक अब कै सा लग रहा है।

5. समापन िफर िमलने की इच्छा, घर के बड़ ों को पणाम।

6. हस्ताक्षर तुम्हारी सखी — एंजेल ा

नमूना उत्तर:
25, क जग्टन
लंदन, यूनाइटे ड कगडम
10 मई, 20××
प्रय सखी अनु,
ढे र सारा प्यार!
म यहाँ लंदन पहुँच गई हूँ और बलकुल ठ क हूँ। आशा है तुम, रीना आंट और सत्र के सब लोग कुशल से ह गे।
अनु, तुम्ह क्या बताऊँ — यहाँ लौटे कई दन हो गए, पर मेरा मन अब भी असम म ही अटका हुआ है। सुबह स्कूल जाते हुए जब म
सड़क पार करती हूँ, तो अचानक कान म ढोल और पेपा क आवाज़ गूँज जाती है और पैर अपने आप बहू क ताल पर चलने लगते
ह। माँ हँसती ह और कहती ह क म खाना खाते हुए भी नाचती रहती हूँ। सच कहूँ तो वे ग़लत नह कहत !
मुझे मलंग गाँव का वह बरगद का पेड़ बहुत याद आता है, जसके नीचे इतने सारे लोग एक साथ बैठे थे। मने लंदन म एक पेड़ के
नीचे कभी इतने लोग नह दे खे। और तुम्हारे वे खलौने — ना रयल क जटा से बना छोटा-सा घर और लकड़ी का तीर-कमान! यहाँ
मेरे सारे खलौने प्ला स्टक के ह, वे बजते तो ह पर उनसे राम-रावण का खेल नह खेला जा सकता। तुम्ह याद है, तुम राम बनती थ
और म श क्तशाली रावण? मुझे वह कूद-फाँद बहुत याद आती है।
एक और बात। पछले हफ़्ते मने अपनी कक्षा म असम के नृत्य पर प्रस्तु त द । माँ ने जो वी डयो बनाया था, वह भी दखाया और
थोड़ा-सा बहू ख़ुद भी करके दखाया। मेरी श क्षका और मेरे सारे सहपाठ बहुत ख़ुश हुए। जेम्स तो कह रहा था क वह भी असम
जाएगा। उस दन मुझे लगा क असम का एक टु कड़ा म अपने साथ लंदन ले आई हूँ।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य
a g l AglaSem · NCERT Solutions

तुमने जो अस मया शब्द सखाए थे, म उन्ह रोज़ दोहराती हूँ ता क भूल न जाऊँ। तुम मुझे अपने पत्र म और नए शब्द लखकर
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भेजना। म तुम्ह अंग्रेज़ी के शब्द भेजूँगी।
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m l as
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अगली बार म भोगाली बहू के समय आना चाहूँगी, ता क वे पकवान चख सकूँ जनक तुम बात करती थ । रीना आंट को मेरा

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प्रणाम कहना।
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a glप्यारी सखी,
तुम्हारी
एंजेला

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अ े पत्र क पहचान: इसम केवल ‘मुझे बहुत यादmआती है’ मत ल खए — वह चीज़ ल खए जो याद आती है। ag
a se का खेल’ — ये ठोस चीज़ ही पत्र को सजीव बनाती ह।
‘बरगद का पेड़’, ‘ना रयल क जटा का घर’, l‘राम-रावण
g
और यह याद र खए क पत्र एंजेला लखaरही है, इस लए उसी क आँख से, उसी के अनुभव ल खए।

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se m.
o m l a
g अंतदशीय लफाफे आ द
(ख)cआप जानते ह गे क पत्र लखने के लए आवश्यक सामग्री, जैसे— पोस्टकाड,
m . a
se डाकघर से खरीदे जा सकते ह। संभव हो तो आप भी अपने घर के पास के डाकघर म जाइए और एक पोस्टकाड
प्र.2

l a
ag खरीदकर पत्र लखने के लए उसका उपयोग क जए।

m a s
m .co agl

l a se
यह करके दे खने वाली ग त व ध है। पहले जान ली जए क डाकघर म मलने वाली सामग्री होती क्या है —

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सामग्री यह क्या है कब काम आती है

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coयह सबसे सस्ता है, पर
.
semहै।
पोस्टकाड खुला, कड़े काग़ज़ का एक पत्ता। एक तरफ़ पता, छोटा-सा संदे श भेजने के िलए।

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m gla
दूसरी तरफ़ संदेश। इसे कोई भी पढ़ सकता

eअंm a
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gl ले टर)
तद शीय पत्र (इनलै ंड नीले रंग का काग़ज़, जसे मोड़कर चपकाया जाता है। दे श के भीतर लंबा और िनजी प भेजने के िलए।
त्र

a
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काग़ज़ रखकर भेजा जाता है। om a
िलफ़ ाफ़ ा जब पत्र लंबा हो या कोई काग़ ज़ भी साथ भेजना हो।
l
अलग से ख़रीदा जाने वाला कवर, जसम अलग

.c a g
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ag
एयरोगाम / एयर-मेल हल्का, हवाई डाक से जाने वाला लफ़ाफ़ा। दू स रे दे श पत्र भेजने के िलए — जैसे एंजेल ा को लंद न।
िलफ़ ाफ़ ा

mअंतदशीय पत्र पर िटकट
िलफ़ ाफ़े पर। पोस्टकाडoऔर
c
.
डाक -िटकट पत्र पर चपकाई जाने वाली छोट पच , जो डाक का
पहले से छपा होताm
m
शुल्क चुकाने का प्रमाण है।
as e है।

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s e mकरने का क्रम —
agla
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1. घर के कसी बड़े के साथ नज़द क डाकघर जाइए और खड़क पर जाकर क हए — “एक पोस्टकाड द जए।”
2. पोस्टकाड के दाईं ओर पाने वाले का पूरा पता ल खए — नाम, मकान/गली, गाँव या शहर, ज़ला, राज्य और पन कोड। पन
s e m
com a
. agl
कोड ज़रूर ल खए, इसी से च सही डाकघर पहुँचती है।
3. बाईं ओर और पीछे क ओर अपना संe
s mल खए। ऊपर अपना पता और तारीख़ छोटे अक्षर म लख द जए।
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agl ट म डाल द जए।
देश
4. लखा हुआ पोस्टकाड लाल डाक-पे
5. अपनी कॉपी म ल खए क पोस्टकाड कतने का मला, आपने कसे भेजा, और उत्तर कतने दन म आया।

co m
m .
m as e
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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

मज़ेदार बात: मोबाइल पर संदेश एक पल म पहुँच जाता है, फर भी च का अपना ही आनंद है — उसम भेजने
वाले क अपनी लखावट होती है, और वह वष तक सँभालकर रखी जा सकती है। इसी लए दु नया भर म लोग
आज भी पत्र लखते ह।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 (ग) क्या आपने कभी डाक- टकट दे खा है? संसार के सभी दे श डाक- टकट जारी करते ह। भारत का डाक- वभाग
भी समय-समय पर डाक- टकट जारी करता है। डाक- टकट कसी दे श क संस्कृ त के बारे म महत्वपूण जानकारी
भी उपलब्ध कराते ह। इस लए अनेक लोग दे श- वदे श के डाक- टकट को एक त्रत करना पसंद करते ह। नीचे
भारत के व भन्न लेखक के सम्मान म जारी कए गए कुछ डाक- टकट के चत्र दए गए ह। इन्ह ध्यान से दे खए
—

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

क्रम डाक- टकट पर छपा नाम टकट पर छपा वष / मूल्य
जीवन-काल

1. डा. वृंदावनलाल वमा / DR. VRINDAVANLAL VERMA 1997 ₹2.00

2. तुलसीदास 1533–1624 1 आ.

3. सूयकांत त्रपाठ ‘ नराला’ / SURYAKANT TRIPATHI 1896–1961 25 पै.
NIRALA

4. सुभद्राकुमारी चौहान / SUBHADRAKUMARI 1904–1948 25 पै.
CHAUHAN

5. कबीर / Kabir — ₹15.00

6. पं. श्रीलाल शुक्ल / Pandit Shrilal Shukla 2017 ₹10.00

7. प्रेमचंद / PREM CHAND 1880–1936 30 पै.

8. मै थलीशरण गुप्त / MAITHILI SHARAN GUPTA 1886–1964 25 पै.

9. बाबू गुलाबराय / BABU GULABRAI — ₹5.00

10. भारतदु ह र ंद्र / BHARATENDU HARISHCHANDRA 1850–1885 25 पै.

11. कुबेरनाथ राय / KUBERNATH RAY 2019 ₹5.00

12. ह रवंशराय बच्चन / HARIVANSH RAI BACHCHAN — ₹5.00

13. प्रताप नारायण मश्र / Pratap Narayan Mishra 2013 ₹5.00

14. डॉ. श ुनाथ सह / DR. SHAMBHUNATH SINGH 2017 ₹5.00

15. हज़ारी प्रसाद वेद / HAZARI PRASAD DWIVEDI 1997 ₹2.00

16. आचाय महावीर प्रसाद वेद / ACHARYA MAHAVIR 1864–1938 0.15
PRASAD DWIVEDI

17. राहुल सांकृत्यायन / RAHUL SANKRITYAYAN 1893–1963 ₹1.00

18. दुष्यन्त कुमार / DUSHYANT KUMAR 2009 ₹5.00

19. महादे वी वमा / MAHADEVI VERMA — ₹2.00

20. सु मत्रानंदन पंत / SUMITRANANDAN PANT 2015 ₹5.00

21. रामधारी सह ‘ दनकर’ / RAMDHARI SINGH DINKAR — ₹3.00

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

पुस्तक के पृष्ठ 90 और 91 पर इक्क स डाक- टकट के चत्र छपे ह — पृष्ठ 90 पर पाँच-पाँच के तीन क्रम और पृष्ठ 91
पर तीन-तीन के दो क्रम। हर टकट पर लेखक का चत्र, उनका नाम ( हद और अंग्रेज़ी म), ‘भारत INDIA’ तथा टकट
का मूल्य छपा है; कुछ पर जीवन-काल भी दया गया है। टकट के चत्र यहाँ नह दए जा सकते, इस लए उन पर छपी
जानकारी यहाँ उसी क्रम म द गई है — चत्र पाठ्यपुस्तक म दे खए।

पुस्तक के पृष्ठ 90–91 पर छह डाक- टकट छपे ह। ये सब भारत के प्र सद्ध हद लेखक -क वय के सम्मान म जारी कए गए थे।
पहचान इस प्रकार है —

टकट पर नाम मूल्य ये कौन थे टकट पर और क्या दखता है

महावीर पसाद 0.15 हद गद्य और खड़ी बोली को सँवारने वाले लेखक- चश्मा पहने चत्र और ‘1864–1938’
ि वेद ी संपादक; ‘सरस्वती’ प त्रका के संपादक। जीवनकाल।

राहुल सांकृ त्यायन 1.00 घुमक्कड़ लेखक और यात्रा-सा हत्य के पतामह; चत्र के साथ ‘1893–1963’ और पीछे
‘घुमक्कड़ शास्त्र’ के रच यता। यात्रा करते लोग का दृश्य।

दुष्यंत कु मार 5.00 हद ग़ज़ल को नई पहचान दे ने वाले क व। चत्र के साथ कताब का ढे र; जारी वष
2009।

महादे वी वम 2.00 छायावाद क प्रमुख कव यत्री, ‘आधु नक मीरा’ कही चत्र के साथ एक भावपूण रेखा चत्र।
जाती ह।

सुिमत्रानंद न पंत 5.00 छायावाद के प्रमुख क व, प्रकृ त के सुकुमार क व चश्मा पहने चत्र और पीछे बफ़ ले पहाड़;
कहलाते ह। जारी वष 2015।

रामधारी िसंह 3.00 राष्ट्रक व; ‘र श्मरथी’ और ‘उवशी’ के रच यता। गोल घेरे म चत्र और पीछे कुछ मानव-
‘िदनकर ’ आकृ तयाँ; जारी वष 1999।

दे खते समय इन बात पर ध्यान द जए —

1. हर टकट पर ऊपर ‘भारत / INDIA’ लखा है — यह बताता है क टकट कस दे श ने जारी कया।
2. हर टकट पर एक मूल्य छपा है (0.15, 1.00, 2.00, 3.00, 5.00 रुपये) — यही डाक का शुल्क है।
3. नाम हद और अंग्रेज़ी दोन म लखा है, ता क पूरे दे श और वदे श म पढ़ा जा सके।
4. चत्र के पीछे बना दृश्य लेखक के काम क ओर इशारा करता है — जैसे राहुल सांकृत्यायन के टकट पर यात्रा और दुष्यंत कुमार
के टकट पर कताब।

डाक- टकट जमा करना: इस शौक़ को फ़लेटली कहते ह। घर आई च य के टकट काटकर, पानी म भगोकर
लफ़ाफ़े से अलग क जए, सुखाकर एक कॉपी म चपकाइए और नीचे लख द जए — कस दे श का, कस वष का,
कस वषय पर। कुछ ही महीन म आपके पास इ तहास, कला और प्रकृ त का एक छोटा-सा संग्रहालय बन जाएगा।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य
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(क) आपको इनम से कौन-सा डाक- टकट सबसे अ ा लगा और क्य ?
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प्र.4

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a l अपनी पसंद का प्रश्न है — कोई भी टकट चुना जा सकता है, बशत आप कारण बताएँ। कारण देते समय इन तीन म से
आपक
कसी एक पर बात क जए — टकट का चत्र, टकट के रंग, या टकट पर बने उस लेखक का काम।
नमूना उत्तर 1:
. c om ag
“मुझे राहुल सांकृत्यायन वाला डाक- टकट सबसे अच्छा eलगा।
s m इसका कारण यह है क इस टकट पर केवल लेखक का चत्र नह है
a
— उनके पीछे पहाड़ी रास्ते पर चलते हुए या त्रय काl दृश्य भी बना है। यह दृश्य उनके बारे म सब कुछ कह दे ता है, क्य क वे जीवन
ag
भर घूमते रहे और घुमक्कड़ी पर ही उन्ह ने लखा। मुझे लगा क यह टकट लेखक का चेहरा नह , उनका जीवन दखा रहा है। और
यह पाठ भी तो एक यात्रा का ही वणन है — इसी लए यह टकट मुझे इस पाठ के सबसे पास लगा।”
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नमूना उत्तर 2:
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“मुझे सु मत्रानंदन पंत वाला टकट सबसे अच्छा लगा, क्य क उसके पीछे बफ़ से ढके पहाड़ बने ह। पंत जी को प्रकृ त का क व

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कहा जाता है और वे हमालय क गोद म बसे गाँव कौसानी म जन्मे थे। टकट का हल्का नीला रंग मुझे ठं डी हवा जैसा लगा। मुझे यह

a gदेlखकर अच्छा लगा क टकट बनाने वाले ने क व क क वताओं का भाव भी उसम भर दया।”

om a s
कुछ पता नह चलता। ‘मुझे यह अच्छा लगा क्य क.cइसम लेखक के पीछे उनक यात्राओं का दृश्य बना है’ — यह agl
कारण कैसे मज़बूत बनाएँ: ‘मुझे यह अच्छा लगा क्य क यह सुंदर है’ — यह कमज़ोर कारण है, क्य क इससे

a s eमmसचमुच कुछ दे खा है।
agl
मज़बूत कारण है, क्य क इसम आपने टकट

co m
m .
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(ख) डाक- टकट पर लेखक के बारे म कौन-कौन सी जानकारी द गई है?
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प्र.5

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इन डाक- टकट को ध्यान से दे खने पर लेखक के बारे म पाँच तरह क जानकारी मलती है —

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जानकारी टकट पर वह कहाँ दखती उदाहरण

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1. ले खक का नाम
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टकट पर हद gl और अंग्रेज़ी — दोन ल पय ‘महादे वी वम / MAHADEVI VERMA’, ‘सुिम त्र ानंद न पंत
म छपा है। / SUMITRANANDAN PANT’

omिचत्र
महावीर पसाद ि वेद ी का चश्.माcपहने
m
2. ले खक का िचत्र टकट के बीच म उनका मुख- चत्र, जससे

a se
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उनका पहनावा और रूप पता चलता है।

.3. जीवनकाल — जन्म a g
e m
as और मृत्यु के वष
चत्र के आस-पास छोटे अंक म। ‘1864–1938’ (महावीर पसाद ि वेद ी), ‘1893–1963’ (राहल
ु

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सांकृ त्यायन)
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4. उनके काम का संके त राहलु सांकृ त्यायन के पीछे यात्रा-दृ श्य; दुष्यंत कु मार के पास
s e m
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चत्र क पृष्ठभू म म बने दृश्य से।

. co agl
पुस्तकों का ढे र; पंत जी के पीछे िहमालय

se m
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दे शaनेg
5. स म्मान का वष टकट के कनारे छपा वष, यानी वह वष जब 1999 (िदनकर ), 2009 (दुष्यंत कु मार ), 2015 (सुिम त्र ानंद न
उन्ह यह सम्मान दया। पंत)

co m
m .
m as e
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इनके अलावा हर टकट पर ‘भारत / INDIA’ और टकट का मूल्य भी छपा है — पर ये लेखक क जानकारी नह , टकट क
जानकारी ह।

सबसे बड़ी जानकारी जो शब्द म नह लखी: डाक- टकट कसी दे श का सबसे छोटा सम्मान-पत्र है। कसी
लेखक पर टकट जारी होने का अथ है क दे श उन्ह अपनी धरोहर मानता है। इसी लए पुस्तक कहती है क ‘डाक-
टकट कसी दे श क संस्कृ त के बारे म महत्वपूण जानकारी भी उपलब्ध कराते ह’ — इन छह टकट से ही पता चल
जाता है क भारत अपने क वय -लेखक को कतना मान दे ता है।

आज क पहेली — पृष्ठ 91
पाठ से आगे

पाठ से आगे पहे ली

प्र.1 1. अस मया पहेली — “हातीर दाँत, कदमर पात”। हद पहेली — “हाथी के दाँत-सी, कदं ब के पात-सी।”
(संकेत के लए दया गया चत्र दे खए।)

उत्तर — मूली। पुस्तक म इसी पहेली के सामने संकेत के रूप म सफ़ेद मूली का चत्र बना है, जसके ऊपर हरे पत्ते लगे ह।

पहेली क यह कस हस्से क बात मेल कैसे बैठा
पं क्त है

“हाथी के दाँत-सी” मूल ी की जड़ (जो हम खाते है)ं हाथी का दाँत लंबा, मोटा, सफ़ेद और थोड़ा मुड़ा हुआ होता है — बलकुल मूली
जैसा।

“कदंब के पात- मूल ी के हरे पत्ते कदं ब के पत्ते चौड़े और गहरे हरे होते ह — मूली के ऊपर लगे पत्त जैसे।
सी”

यह पहेली कस तरह क है: यह उपमा वाली पहेली है। इसम वस्तु का नाम नह लया जाता, बस दो तुलनाएँ दे द
जाती ह — एक उसके नीचे वाले हस्से क , एक ऊपर वाले हस्से क । दोन तुलनाएँ जोड़ते ही पूरी वस्तु आँख के
सामने खड़ी हो जाती है। ऐसी पहे लयाँ भारत क लगभग हर भाषा म मलती ह।

भाषा क बात: अस मया ‘हातीर दाँत’ का हद म सीधा-सीधा अथ है ‘हाथी के दाँत’ और ‘कदमर पात’ का ‘कदं ब
के पत्ते’। यानी अस मया और हद के शब्द बहुत मलते-जुलते ह, क्य क दोन का मूल संस्कृत है। यही बात एंजेला
को अनु से अस मया सीखते समय भी पता चली होगी।

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प्र.2 2. अस मया पहेली — “पानी आसे मास नाइ, हा ब आसे बाघ नाइ”। हद पहेली — “पानी है पर मछली नह ,
जंगल है पर बाघ नह ” (संकेत के लए दया गया चत्र दे खए।)

उत्तर — ना रयल। पुस्तक म संकेत के रूप म भूरे रेश वाले ना रयल का चत्र दया गया है।

पहेली क पं क्त ना रयल म क्या है मेल कैसे बैठा

“पानी है पर मछली नािरयल के भीतर भरा हुआ पानी पानी तो है, पर वह तालाब या नद का पानी नह — इस लए उसम कोई
नही ं” मछली नह रहती।

“जंग ल है पर बाघ नािरयल के ऊपर उगे घने भूरे रे शे वे रेशे दे खने म घने जंगल जैसे लगते ह, पर उस ‘जंगल’ म कोई जानवर नह
नही ं” (जटा) रहता।

यह पहेली इतनी अ क्य है: इसम दो बार वरोधाभास रचा गया है — पहले कोई चीज़ बताई जाती है (पानी,
जंगल) और तुरंत उससे जुड़ी अपे क्षत चीज़ छ न ली जाती है (मछली, बाघ)। यही उलटफेर सोचने पर मजबूर करता
है। जैसे ही आप सोचना छोड़कर ऐसी चीज़ ढूँ ढ़ते ह जसम ‘पानी और जंगल दोन ह पर जीव कोई न हो’, उत्तर
तुरंत मल जाता है।

पाठ से जो ड़ए: इसी ना रयल क जटा से बने घर अनु के खलौन म थे — “गु ड़या, लकड़ी के खलौने और
ना रयल क जटा से बने घर।” यानी असम म ना रयल घर-घर क चीज़ है, इसी लए वहाँ क पहेली म भी वही आ
गया। पहे लयाँ हम बताती ह क कसी जगह के लोग कन चीज़ के बीच रहते ह।

प्र.3 3. अस मया पहेली — “आई बु लले नेलागे, बोपाइ बु लले लागे”। हद पहेली — “लग-लग कहे तो ना लगे,
बेलग कहे लग जाए” (संकेत के लए दया गया चत्र दे खए।)

उत्तर — ह ठ। पुस्तक म संकेत के रूप म ह ठ का चत्र दया गया है।
यह पहेली सबसे मज़ेदार है, क्य क इसका उत्तर बोलकर ही मलता है। इसे हल करने का तरीक़ा यही है क पहेली म दए शब्द
को ज़ोर से बो लए और आईने म अपने ह ठ दे खए।

शब्द बोलने पर ह ठ का क्या क्य
होता है

“लग - होंठ नही ं िमलते — यानी नही ं ‘ल’ और ‘ग’ जीभ से बनने वाली ध्व नयाँ ह। इन्ह बोलने म ह ठ का काम ही नह
लग” लगते पड़ता।

“बेल ग ” होंठ िमल जाते है ं — यानी लग ‘ब’ बोलने के लए दोन ह ठ आपस म जुड़ते ह। ‘ब’, ‘भ’, ‘प’, ‘फ़’, ‘म’ — ये सब
जाते है ं ह ठ से बनते ह।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

अस मया म यह और भी सुंदर बन जाती है — ‘आई’ का अथ है माँ और ‘बोपाइ’ का अथ है पता। यानी पहेली कहती है —
“माँ कहो तो ह ठ नह लगते, पता कहो तो लग जाते ह।” ‘आई’ बो लए — ह ठ खुले ही रहते ह। ‘बोपाइ’ बो लए — ‘ब’ और ‘प’
दोन पर ह ठ मलते ह!

यहाँ एक व्याकरण क बात छपी है: जो ध्व नयाँ दोन ह ठ को मलाकर बोली जाती ह, उन्ह ओष्ठ्य ध्व नयाँ
कहते ह — प, फ, ब, भ, म। हद म भी यह जाँच क जए — ‘मामा’ बो लए, ह ठ दो बार मलगे; ‘नाना’ बो लए,
एक बार भी नह मलगे। इस छोट -सी पहेली ने आपको ध्व न- व ान का एक नयम सखा दया।

प्र.4 4. अस मया पहेली — “सय चरण कृष्ण वरण, पेट का टलेउ नाई मरण”। हद पहेली — “काला तन और छह ह
चरण, पेट कटे पर भी न मरण” (संकेत के लए दया गया चत्र दे खए।)

उत्तर — च ट । पुस्तक म संकेत के रूप म काली च ट का चत्र दया गया है।

पहेली क च ट म यह कैसे मलता है
पं क्त

“काला तन” आम ची ंटी का रंग काला होता है।

“छह है ं चरण” ची ंटी एक कीट (कीड़ ा) है और हर कीट के छह पैर होते है।ं यही पहेल ी का सबसे बड़ ा सुराग़ है — मकड़ ी के आठ पैर होते
है,ं इसिलए वह उ त्तर नही ं हो सकती।

“पेट कटे पर भी ची ंटी का शरीर तीन िहस्सों में बँटा होता है और िसर तथा पेट के बीच का िहस्सा इतना पतला होता है िक लगता है मानो
न मरण” उसका पेट कटा हुआ है — िफर भी वह जीिवत रहती है और दौड़ ती-भागती रहती है।

पहेली सुलझाने का तरीक़ा: ऐसी पहेली म हर पं क्त एक छननी क तरह काम करती है। ‘काला तन’ से बहुत-से
जीव बचे रहते ह — कौआ, भस, भँवरा, च ट । ‘छह चरण’ लगाते ही कौआ और भस नकल जाते ह, केवल क ट
बचते ह। ‘पेट कटे पर भी न मरण’ लगाते ही च ट बच जाती है, क्य क उसी क कमर इतनी पतली होती है। एक-
एक शत लगाकर सूची छोट करते जाइए — उत्तर अपने आप नकल आएगा।

अस मया शब्द दे खए: ‘सय’ = छह, ‘चरण’ = पैर, ‘कृष्ण वरण’ = काला रंग, ‘मरण’ = मृत्यु। इनम से ‘चरण’,
‘कृष्ण’, ‘वरण’ और ‘मरण’ — चार शब्द हद म भी ठ क इसी अथ म चलते ह। इसी लए यह पहेली हद म
लगभग ज्य -क -त्य उतर आई।

झरोखे से और साझी समझ — पृष्ठ 92 और 93

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से आगे

पाठ से आगे पठन

प्र.1 ‘झरोखे से’ — बमल श्रीवास्तव का लेख ‘असम का सुप्र सद्ध मूँगा सल्क’ ( ोत प त्रका, अप्रैल 2008) प ढ़ए।
‘साझी समझ’ — आपको इस लेख म द गई कौन-सी जानकारी सबसे अ लगी? क्य ? अपने समूह म
बताइए।

पहले दे ख ली जए क लेख म कौन-कौन सी जानका रयाँ द गई ह। लेखक बमल ीवास्तव कुछ वष गुवाहाट हवाई अ े पर
नयुक्त थे और उन्ह ने वहाँ स्त्रय को एक चमक ली भूरी-सुनहरी साड़ी पहने दे खा। पूछने पर उनके असमी मत्र ने बताया क वह
मूँगा सल्क है।

क्रम लेख क जानकारी

1. मूँग ा िसल्क सभी पकार के रे शमों में सबसे महँग ा होता है।

2. असिमया भाषा में ‘मूँग ा’ का अथ है पीला या गहरा भूर ा।

3. यह संपूण िवश्व में के वल असम और पूव त्त र राज्यों में ही तैयार होता है — “यह असम को पकृ ित ारा िदया गया अनमोल और अि तीय
उपहार है। ”

4. इसकी सािड़यों को ‘डाई क्लीन’ कराने की ज़ रूरत नही ं — इन्हे ं घर पर ही धोया जा सकता है।

5. हर धुल ाई के बाद इनका िनखार बढ़ ता ही जाता है।

6. एक साड़ी औसतन 50 वष तक ख़राब नही ं होती।

7. यह पाकृ ितक रूप से तैयार होने वाले सभी कपड़ों में सबसे मज़ बूत माना जाता है।

8. इसे गम और सद — दोनों मौसमों में पहना जा सकता है।

9. असम के लोगों का मानना है िक इसमें अनेक औषधीय गुण भी होते है।
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10. पारंपिरक साड़ी पर लाल या काली बॉडर और हरे , लाल या पीले रंग से बूटों की कढ़ ाई होती है; पुरुष भी इसी रंग के कु त पहनते है।
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नमूना उत्तर:
“मुझे इस लेख क यह जानकारी सबसे अच्छ लगी क मूँगा सल्क क एक साड़ी औसतन 50 वष तक ख़राब नह होती और
हर धुलाई के बाद उसका नखार बढ़ता ही जाता है।
यह बात मुझे इस लए सबसे अच्छ लगी क्य क यह आजकल क सोच से बलकुल उलट है। आज ज़्यादातर चीज़ कुछ महीन म
पुरानी लगने लगती ह और हम नई ख़रीद लेते ह। पर यह कपड़ा जतना पुराना होता है, उतना ही सुंदर होता जाता है। इसका मतलब
है क एक ही साड़ी दाद से माँ तक और माँ से बेट तक पहुँच सकती है — कपड़ा ही नह , याद भी साथ चली आती ह। दूसरी बात
जो मुझे इससे जुड़ी अच्छ लगी, वह यह क इसे ाई क्लीन नह कराना पड़ता, घर पर ही धोया जा सकता है। यानी यह कपड़ा
महँगा ज़रूर है, पर उसे सँभालना महँगा नह है। मुझे लगता है क ऐसी चीज़ बनाना ही स ी कारीगरी है — जो टके भी और
पयावरण को नुक़सान भी न पहुँचाए।”

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य
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‘क्य ’ का उत्तर दे ते समय: केवल जानकारी दोहराइए मत। बताइए क वह बात आपको क्य छू गई — क्या उसने

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l समझ’ है।
आपको च काया, क्या वह आपके अनुभव से जुड़ी, या क्या उससे आपको कुछ नया सोचने को मला।
. coद अलग होगी, और यही इस ग त व ध का मज़ा है — इसी लए इसका नाम a g‘साझी
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aपाठ से जो ड़ए: यह लेख यहाँ यूँ ही नह रखा गया। मुख्य पाठ क एक पं क्त थी — “असम… अपने वन्य-जीवन,

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रेशम और चाय के बागान के लए जाना जाता है।” उसी एक शब्द ‘रेशम’ को खोलकर यह पूरा लेख बना है।

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इसी लए इसका शीषक ‘झरोखे से’ है — मानो पाठ क खड़क से बाहर झाँककर असम को और क़रीब से दे खा जा
रहा हो।
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खोजबीन के लए — पृष्ठ 93
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पाठ से आगे
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पाठ से आगे प रयोजना

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प्र.1 असम स हत पूव त्तर भारत के बारे म आप और जान सकते ह और भारत के पारंप रक लोक संगीत का आनंद भी
ले सकते ह, जन्ह इंटरनेट क ड़य तथा क्यूm
s e .आर. कोड क सहायता से पढ़, दे ख व समझ— • असम- बहू
लोकगीत • स त्रया नृत्य • म णपुरी lनृaत्य • भारत के लोक नृत्य • पूव त्तर राज्य के लोक नृत्य • भाषा संगम
अस मया • मुकोली बहू ag

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पुस्तक म दए गए क्यू.आर. कोड को अपने शक्षक या घर के बड़ क सहायता से स्कैन क जए। नीचे बताया गया है क हर कड़ी म

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क्या दे खना-सुनना है और उसे इस पाठ से कैसे जोड़ना है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 8 स त्रया और बहू नृत्य AglaSem · NCERT Solutions

कड़ी यह क्या है दे खते-सुनते समय यह नोट क जए

असम-िबहू बहू के साथ गाए जाने वाले गीत के बोल िकस बारे में है ं — बसंत, फ़ सल , नदी या पेम? और गीत में कौन-
लोकगीत लोकगीत। कौन से वाद्ययंत्र बज रहे है ं — ढोल , पेपा (भैसं के सी ंग का बाजा), गगना,
ताल।

सित्रया नत्ृ य असम का शास्त्रीय नृत्य, जो सत्र म इसकी मुद ाएँ और पोशाक िबहू से िकतनी अलग है।ं पाठ की वह बात जाँिचए
जन्मा। िक आज मंच पर मिहला कलाकार भी सित्रया करती है।ं

मिणपुरी नत्ृ य पूव त्तर का एक और शास्त्रीय नृत्य — इसकी गित कोमल और गोल -गोल घूमने वाली है, जबिक िबहू तेज़ और
म णपुर का। उछलता हुआ। एक ही क्षेत्र में दो िबलकु ल अलग िमज़ ाज।

भारत के लोक पूरे दे श के लोक नृत्य क झलक। अपने पांत का नत्ृ य ढू ँिढ़ ए और दे िखए िक उसका िबहू से क्या िमलता-जुल ता है
नत्ृ य — क्या वह भी फ़ सल या ऋतु से जुड़ा है?

पूव त्तर राज्यों के आठ राज्य के नृत्य। ‘पूव त्त र की यात्र ा’ वाली तािलका के आगे हर राज्य के नत्ृ य का नाम िलख
लोक नत्ृ य लीिजए — आपकी तािलका पूरी हो जाएगी।

भाषा संगम — अस मया भाषा के बोलचाल के वाक्य पाँच वाक्य िलखकर याद कीिजए — जैसे अनु ने एंजेल ा को असिमया शब्द
असिमया सखाने वाली सामग्री। िसखाए थे।

मुक ोली िबहू बहू का वह रूप जो खुले मैदान म, यह ठीक वही दृ श्य है जो एंजेल ा ने मलंग गाँव में बरगद के पेड़ के नीचे दे खा था
गाँव के सबके सामने कया जाता है। — “वहाँ खुले आसमान के नीचे लोगों के बीच बैठकर …”।

दे खने-सुनने के बाद यह क जए —

1. तुलना-ता लका बनाइए: बहू और स त्रया — पोशाक, वाद्ययंत्र, ग त, जगह और अवसर — इन पाँच बात म दोन कैसे अलग
ह, यह ल खए।
2. पाँच अस मया शब्द अपनी लेखन-पु स्तका म उनके हद अथ के साथ ल खए और कक्षा म सबको सखाइए।
3. अपने प्रांत का एक लोक नृत्य चुनकर उस पर पाँच वाक्य ल खए और बताइए क वह कस अवसर पर कया जाता है।
4. क ा म करके दखाइए: बहू क सबसे आसान ताल पर समूह म ताली बजाइए और दो-चार क़दम क जए — ठ क वैसे ही
जैसे एंजेला ने लंदन म अपनी कक्षा म कया था।

ये क ड़याँ साथ क्य द गई ह: ध्यान द जए, इनम तीन तरह क सामग्री है — असम क ( बहू लोकगीत, स त्रया,
मुकोली बहू, भाषा संगम), पूव त्तर क (म णपुरी, पूव त्तर के लोक नृत्य) और पूरे भारत क (भारत के लोक नृत्य)।
यानी पुस्तक आपको एक गाँव से शुरू करके पूरे दे श तक ले जाना चाहती है — और यही इस पाठ क पहली पं क्त
भी कहती है: “भारत एक वशाल दे श है। इसक रंग- बरंगी, सुंदर, प्राचीन और जीवन से भरी संस्कृ त पूरी दु नया म
अनोखी है।”

अध्याय — एक नज़र म
पाठ का नाम ‘स त्रया और बहू नृत्य’ है और ले खका ह जया मेहता (जन्म 1977)। वे स्वयं ओ डसी नृत्य म पारंगत
नृत्यांगना, ले खका और श क्षका ह। यह पाठ उनक पुस्तक ‘नृत्य कथा’ से लया गया है। हद अनुवाद शवद्र कुमार सह का

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और चत्रांकन सुरुबा नता लया का है।
कहानी क्या है — लंदन के क जग्टन म रहने वाली दस साल क एंजेला क माँ एलेस ा डॉक्यूम फ़ल्म बनाती ह। टश
अकादमी से उन्ह असम क नृत्य परंपरा पर फ़ल्म बनाने के लए वत्तीय मदद मलती है, पर समय सफ़ एक महीना है।
इस लए पूरा प रवार — एंजेला, पता ायन और माँ — जल्दबाज़ी म असम पहुँच जाता है।
बहू असम का कृ ष पर आधा रत त्योहार है, जो साल म तीन बार मनाया जाता है — तब जब कसान बीज बोते ह, तब जब
वे धान रोपते ह, और तब जब खेत म अनाज तैयार हो जाता है। एंजेला ने इसे गुवाहाट के पास मलंग गाँव म, एक बड़े बरगद
के पेड़ के नीचे बने मंच पर दे खा। उसे लगा जैसे वह कसी टाइम-मशीन म बैठ गई हो।
स त्रया नृत्य क उत्प त्त असम के ‘सत्र ’, यानी वैष्णव मठ म हुई। प रवार उत्तरी असम के ‘द णापथ सत्र’ गया, जहाँ
ले खका रीना सेन और उनक बेट अनु से मुलाक़ात हुई। अनु और एंजेला क उम्र एक ही — दस साल — थी, इस लए दोन
तुरंत दोस्त बन गईं।
परंपरा म बदलाव — पहले स त्रया केवल मठ के साधु करते थे। बीसव शताब्द के मध्य म कुछ साधु मठ से बाहर आकर
पुरुष और म हलाओं को यह नृत्य सखाने लगे; शुरू म उन्ह मठ से नकाल दया गया, पर आज म हला स त्रया कलाकार
का मंच पर नृत्य करना आम बात है। एंजेला ने जय- वजय क कहानी पर आधा रत म हला-नृत्य दे खा और उसे वह पुरुष
कलाकार से भी बेहतर लगा।
पाठ का अंत — लंदन लौटकर एंजेला माँ क रकॉ डग बार-बार दे खती रही और अपनी कक्षा म स्वयं असमी नृत्य करके,
उसक वी डयो रकॉ डग के साथ प्रस्तु त द । यही इस पाठ का संदेश है — कला कसी दे श क सीमा नह मानती।

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त्व रत पुनरावृ त्त

पाठ का पाठ म अथ पाठ म कहाँ आया है अपना एक वाक्य
शब्द

बहू असम का कृ िष से जुड़ा त्योहार; “बसंत के आने क खुशी म वे सभी एक त्योहार बहू के दन म पूरा असम ढोल क
इसी नाम का नत्ृ य भी मनाते ह, जसे ‘ बहू’ कहा जाता है।” थाप पर झूम उठता है।

सत्र असम के वैष्णव मठ, जहाँ सित्रया “जहाँ सभी ‘सत्र ’, अथात मठ क पीठ है।” माजुली के सत्र म आज भी सुबह-
नत्ृ य जन्मा शाम क तन होता है।

स त्रया सत्रों में उपजा असम का शास्त्रीय “वे सभी एक सत्र के पास रहने के लए जाने वाले स त्रया नृत्य म कथा और नृत्य दोन
नत्ृ य थे और स त्रया नृत्य का फ़ल्मांकन करने वाले थे।” साथ चलते ह।

हतप्रभ हैर ान रह जाना, चिकत रह जाना “वहाँ आस-पास उत्सव जैसा माहौल दे खकर वह इतनी छोट ब ी का इतना सुंदर चत्र
हतप्रभ थी।” दे खकर सब हतप्रभ रह गए।

मंत्रमुग्ध ऐसा मोिहत िक कु छ और सूझे ही “वह मंत्रमुग्ध होकर वहाँ लड़के-लड़ कय को … बाँसुरी क धुन सुनकर पूरी सभा
नही ं नृत्य करते दे ख रही थी।” मंत्रमुग्ध हो गई।

अचं भत अचरज से भरा हुआ “ बहू नृत्य और इसके उत्सव से अचं भत एंजेला जादूगर का खेल दे खकर ब े
और उसके प रवार ने…” अचं भत रह गए।

पेचीदा उलझन भरा, किठन “पेचीदा बात यह थी क उनके पास इस काम को यह सवाल दखने म आसान है, पर है
पूरा करने के लए सफ़ एक महीने का वक्त था।” बहुत पेचीदा।

लजीज स्वािदष्ट, ज़ायके दार “इसके साथ-साथ लजीज पकवान का पूरा आनंद दाद के हाथ के लजीज पकौड़े सबको
लया।” पसंद ह।

छद्म युद्ध नक़ ली लड़ाई, अिभनय में लड़ी “गा सकते, नृत्य कर सकते और छद्म युद्ध लड़ नाटक म दोन सै नक ने छद्म युद्ध
जाने वाली लड़ाई सकते!” लड़कर दशक को रोमां चत कर
दया।

ारपाल दरवाज़े पर पहरा दे ने वाला “भगवान वष्णु के दो ारपाल जय- वजय क कले के ारपाल ने हम भीतर जाने
कहानी थी।” का रास्ता दखाया।

नृत्यांगना नत्ृ य करने वाली स्त्री “उस रात माँ म हला स त्रया नृत्यांगनाओं का मंच पर नृत्यांगना के पैर क घुँघरू-
फ़ल्मांकन करने वाली थ ।” ध्व न दूर तक गूँज रही थी।

साक्षात्कार इंटरव्यू, आमने-सामने बैठकर की “डॉक्यूम के तथ्य जुटाने और साक्षात्कार लेने म पत्रकार ने कसान का साक्षात्कार
गई बातचीत व्यस्त रह ” लेकर उसक कहानी छापी।

मूँगा सल्क असम का सुनहरा रे शम; असिमया “यह असम का सुप्र सद्ध मूँगा सल्क है जो सभी मूँगा सल्क क साड़ी हर धुलाई के
में ‘मूँग ा’ = पीला या गहरा भूर ा प्रकार के रेशम म सबसे महँगा होता है।” बाद और चमक जाती है।

अ तीय िजसके जैस ा दू स रा न हो “यह असम को प्रकृ त ारा दया गया अनमोल ताजमहल क सुंदरता सचमुच
और अ तीय उपहार है।” अ तीय है।

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages43
Languagehindi
Updated19 Sep 2026