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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 9: मैया म न ह माखन खायो
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
94 – 104 15 27 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 32 pages
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: मैया म न ह माखन खायो
NCERT कक्षा 6 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 9 मैया म न ह माखन खायो के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह पाठ एक पद है, जसके रच यता
महाक व सूरदास ह और जो ब्रजभाषा म लखा गया है। इसम बाल-कृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने सफ़ाई दे ते ह क माखन उन्ह ने नह खाया। पृष्ठ
94 से 104 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से, मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, क वता क रचना, अनुमान या
कल्पना से, शब्द के रूप, वण-प रवतन, पं क्त से पं क्त, आपक बात, घर क वस्तुए,ँ समय का माप, हम सब वशेष ह, आज क पहेली और
खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 6) 94 – 104
खं ड प्रश्न
15 27
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 96
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए— (1) म माखन कैसे खा
सकता ँ? इसके लए ीकृष्ण ने क्या तक दया? • मुझे तुम पराया समझती हो। • मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
• मुझे यह लाठ -कंबल नह चा हए। • मेरे छोटे -छोटे हाथ छ के तक कैसे जा सकते ह?
सही उत्तर है — मेरे छोटे -छोटे हाथ छ के तक कैसे जा सकते ह? इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
ध्यान द जए, प्रश्न पूछा गया है — “म माखन कैसे खा सकता हूँ?” यानी उत्तर वही होगा जो माखन तक पहुँचने क बात करे। पद
म कृष्ण ठ क यही कहते ह —
“मै ं बालक बिहयन को छोटो, छीको के िह िबिध पायो।”
अथ — मै ं तो छोटा-सा बालक हूँ, मेरी बाँहे ं छोटी है;ं इतने ऊँ चे टँ गे छी ंके तक मेरा हाथ भला िकस तरह
पहँच
ु ता?
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
मेरे छोटे -छोटे हाथ छ के तक सही ★ यही एकमात्र तक है जो बताता है क माखन तक पहुँचना संभव ही नह था। ‘कैसे खा
कैसे जा सकते ह? सकता हूँ’ का सीधा उत्तर यही है।
मुझे तुम पराया समझती हो। ग़लत यह उलाहना है, तक नह । यह बात कृष्ण बाद म कहते ह — “ जय तेरे कछु भेद उप ज
ह, जा न परायो जायो।” इससे माखन न खाना सद्ध नह होता।
मेरी माता, तुम बहुत भोली हो। ग़लत यह माँ पर टप्पणी है — क तुम दूसर क बात म आ जाती हो। यह ग्वाल-बाल को
दोष दे ता है, कृष्ण के हाथ क पहुँच को नह ।
मुझे यह लाठ -कंबल नह ग़लत यह तो पद के अंत का रूठना है — “ये ले अपनी लकु ट कम रया, बहुत ह नाच
चा हए। नचायो।” यह तक नह , नाराज़गी है।
ऐसे प्रश्न कैसे हल कर: पहले प्रश्न का प्रश्नवाचक शब्द पक ड़ए — यहाँ वह ‘कैसे’ है। फर हर वकल्प से पू छए —
क्या यह ‘कैसे’ का उत्तर दे रहा है? जो वकल्प केवल भावना बताए (पराया समझती हो, भोली हो), वह तक नह
होता।
प्र.2 (2) ीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे? • गाय चरा रहे थे। • माखन खा रहे थे। • मधुबन म भटक रहे थे।
• मत्र के संग खेल रहे थे।
सही उत्तर है — गाय चरा रहे थे। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।
पद क पहली ही पं क्त म कृष्ण अपना पूरा दन गना दे ते ह —
“भोर भयो गैयन के पाछे , मधुबन मोिह पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥”
अथ — सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भे ज िदया गया; चार पहर मै ं बंसीवट पर िबताकर साँझ ढले घर
लौटा।
यानी सुबह से शाम तक उनका काम एक ही था — गाय चराना। घर पर वे थे ही नह , इस लए माखन खाने का सवाल ही नह
उठता।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
गाय चरा रहे थे। सही ★ “भोर भयो गैयन के पाछे , मधुबन मो ह पठायो” — गाय के पीछे -पीछे वन म भेजा जाना ही गाय
चराना है।
माखन खा रहे थे। ग़लत यह तो वह आरोप है जसका खंडन पूरा पद कर रहा है — “मैया म न ह माखन खायो।”
मधुबन म भटक रहे ग़लत पद म भटकने क जगह मधुबन नह , बंसीवट है — “चार पहर बंसीवट भटक्यो।” मधुबन तो वह
थे। वन है जहाँ उन्ह भेजा गया था।
मत्र के संग खेल ग़लत पद म ग्वाल-बाल का ज़क्र मत्र के रूप म नह , बैर रखने वाल के रूप म है — “ग्वाल-बाल सब
रहे थे। बैर परे ह।”
ध्यान र खए: ऐसे प्रश्न म एक-दो वकल्प जान-बूझकर ‘आधे सही’ रखे जाते ह। ‘मधुबन म भटक रहे थे’ लगभग
सही लगता है, पर पद जगह का नाम बदल दे ता है। इसी लए उत्तर चुनने से पहले पं क्त शब्दशः प ढ़ए।
प्र.3 (ख) अब अपने मत्र के साथ चचा क जए और कारण बताइए क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
यह चचा का प्रश्न है। यहाँ केवल “मने यह चुना” कहना काफ़ नह — बताना यह है क पद क कौन-सी पं क्त आपके उत्तर का
प्रमाण है और बाक़ वकल्प क्य नह चलते।
अ चचा म तीन बात ज़रूर होनी चा हए —
आपने कौन-सा वकल्प चुना;
पद क वह पं क्त जो आपके उत्तर को सद्ध करती है;
कम-से-कम एक ग़लत वकल्प को हटाने का कारण।
नमूना उत्तर:
“पहले प्रश्न म मने चुना — मेरे छोटे -छोटे हाथ छ के तक कैसे जा सकते ह? मेरा प्रमाण यह पं क्त है — ‘म बालक ब हयन को
छोटो, छ को के ह ब ध पायो।’ प्रश्न ‘कैसे’ पूछ रहा है, और यही एक उत्तर बताता है क पहुँचना ही असंभव था। ‘मुझे यह लाठ -
कंबल नह चा हए’ वाला वकल्प मने इस लए हटाया क्य क वह तक नह , रूठना है।
दूसरे प्रश्न म मने चुना — गाय चरा रहे थे। मेरा प्रमाण है — ‘भोर भयो गैयन के पाछे , मधुबन मो ह पठायो।’ ‘मधुबन म भटक रहे
थे’ वाला वकल्प मने इस लए हटाया क्य क पद कहता है क भटकना बंसीवट पर हुआ था, मधुबन म नह ।”
चचा म क्या नया मलेगा: हो सकता है आपके कसी साथी ने ‘मधुबन म भटक रहे थे’ चुना हो। तब झगड़ने के
बजाय दोन मलकर पृष्ठ 94 खो लए और पं क्त प ढ़ए। जस उत्तर के पीछे पद क पं क्त खड़ी हो, वही जीतता है
— यही इस ग त व ध का असली उ े श्य है।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 96 और 97
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो
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पाठ से
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पाठ से शब्द- मलान
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a s emम से चुनकर यहाँ कुछ शब्द दए गए ह। अपने समूह म इन पर चचा क जए और इन्ह इनके सही अथ या
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पाठ
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प्र.1
संदभ से मलाइए। — शब्द: 1. जसोदा, 2. पहर, 3. लकु ट कम रया, 4. बंसीवट, 5. मधुबन, 6. छ को, 7. माता,
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8. ग्वाल-बाल। अथ या संदभ: 1. समय मापने क एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दवस म आठ
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पहर होते ह)। 2. एक वट वृक्ष (मान्यता है क ीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर
वंशी क ध्व न से गाय को पुकारकर उन्ह एकem
a s त्रत करते।) 3. गोल पात्र के आकार का र स्सय का बुना हुआ जाल
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जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाताgl है ता क उसम रखी हुई खाने-पीने क चीज़ (जैसे— दूध, दही आ द)
को कुत्ते, बल्ली आ द न पा सक। 4. यशोदा, ीकृष्ण क माँ, जन्ह ने ीकृष्ण को पाला था। 5. जन्म दे ने वाली,
उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ। 6. गाय पालने वाल के ब े,
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ीकृष्ण के संगी साथी। 7. मथुरा के पास यमुना के
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कनारे का एक वन। 8. लाठ और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है क ीकृष्ण लकु ट-कम रया लेकर गाय चराने
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जाया करते थे)।
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a सही मलान नीचे दया गया है। पुस्तक म इन्ह जोड़ के बीच रेखा ख चए।
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शब्द मलेगा अथ या संदभ पहचानने का सूत्र
1. जसोदा →4 a gl
यशोदा, ीकृष्ण क माँ, जन्ह ने ‘जसोदा’ ब्रजभाषा म ‘यशोदा’ का रूप है — य बदलकर ज हो
ीकृष्ण को पाला था। गया। पद क अं तम पं क्त — “सूरदास तब बहँ स जसोदा।”
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2. पहर
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→1 समय मापने क एक इकाई (तीन घंटे “चार पहर बंसीवट भटक्यो” — यहाँ पहर से समय क लंबाई
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का एक पहर; एक दवस म आठ पहर)। नापी गई है।
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a s e3.mलकु िट
gl कमिरया
→8 लाठ और छोटा कंबल, कमली। “ये ले अपनी लकु ट कम रया” — रूठकर कृष्ण चरवाहे का
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सामान लौटा रहे ह। ‘लकु ट’ = लाठ , ‘कम रया’ = कमली/
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कंबल।
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4. बंस ीवट
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→2 एक वट वृक्ष, जस पर चढ़कर कृष्ण नाम म ही उत्तर है — बंसी + वट = वह बरगद जहाँ बाँसुरी
ase
वंशी बजाकर गाय को बुलाते थे। बजती थी।
5. मधुबन →7 agl
मथुरा के पास यमुना के कनारे का एक नाम के अंत म ‘बन’ (वन) है, इस लए यह कोई जगह होगी —
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वन। “मधुबन मो ह पठायो”, यानी वहाँ भेजा गया।
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6. छीको
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→3 र स्सय का बुना हुआ गोल जाल, जो “छ को के ह ब ध पायो” — छ का ऊँचा टँ गा होता है, इसी लए
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छत से लटकाया जाता है। छोटे हाथ वहाँ नह पहुँचते। यही कृष्ण का पूरा बचाव है।
a s em 7. माता
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→5 जन्म दे ने वाली, उत्पन्न करने वाली, “तू माता मन क अ त भोरी” — यहाँ ‘माता’ संबोधन है, नाम
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जननी, माँ। नह । नाम वाला उत्तर (यशोदा) ‘जसोदा’ के हस्से म जा चुका है।
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8. ग्वाल - →6 गाय पालने वाल के ब े, ीकृष्ण के शब्द दो टु कड़ से बना है — ग्वाल (ग्वाला = गाय पालने वाला)
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बाल
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संगी साथी। + बाल (बालक)। “ग्वाल-बाल सब बैर परे ह।”
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो AglaSem · NCERT Solutions
‘जसोदा’ और ‘माता’ म उलझन क्य होती है: दोन का अथ ‘माँ’ ही नकलता है। अंतर यह है क ‘जसोदा’ एक
व्य क्त का नाम है (इस लए उसका अथ भी नाम बताता है — यशोदा), जब क ‘माता’ एक सं ा है (इस लए उसका
अथ भाव बताता है — जन्म दे ने वाली, जननी)। नाम को नाम से और सं ा को प रभाषा से मलाइए, उलझन ख़त्म।
ध्यान द जए: दूसरे स्तंभ का क्रम जान-बूझकर उलट-पुलट रखा गया है, ता क आप संख्या से संख्या न मलाएँ
ब ल्क अथ से अथ मलाएँ। कोई भी जोड़ा सीधे क्रम से नह मलता। सही क्रम एक नज़र म — 1→4, 2→1,
3→8, 4→2, 5→7, 6→3, 7→5, 8→6।
पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 97
पाठ से
पाठ से भावाथ
प्र.1 (क) “भोर भयो गैयन के पाछे , मधुबन मो ह पठायो”
शब्दाथ — भोर = सुबह; भयो = हुई; गैयन के पाछे = गाय के पीछे -पीछे ; मो ह = मुझे; पठायो = भेज दया।
भावाथ — कृष्ण माँ से कहते ह — “सुबह होते ही तो तुमने मुझे गाय के पीछे मधुबन भेज दया था। म दन भर घर पर था ही नह ,
फर माखन खाने का अवसर मुझे मला कहाँ?”
पं क्त का अंश क्या बता रहा है कृष्ण के बचाव म इसका काम
भोर भयो समय — दन क शुरुआत यह िस द्ध करता है िक वे बहुत सवेरे ही घर से िनकल गए थे।
गैयन के पाछे काम — गाय चराना िदन भर उनके पास अपना कोई काम ही नही ं था; वे गायों के पीछे चलते रहे।
मधुबन मोिह पठायो जगह — घर से दूर एक वन माखन घर के छी ंके में था और कृ ष्ण वन में थे — दू री ही उनका सबसे बड़ ा सबूत है।
‘पठायो’ शब्द इतना ज़रूरी क्य है: कृष्ण ने यह नह कहा क “म गया था”, कहा — “मुझे भेजा गया था”। इस
एक शब्द से वे अपने जाने क ज़म्मेदारी भी माँ पर डाल दे ते ह — “तुमने ही तो भेजा था!” यही बाल-सुलभ चतुराई
पूरे पद क जान है।
अपने शब्द म कैसे लख: ऐसी पं क्त का अथ लखते समय तीन बात ज़रूर ल खए — कब (सुबह), क्या (गाय
चराना) और कहाँ (मधुबन)। फर एक वाक्य जो ड़ए क पं क्त यह बात क्य कह रही है।
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प्र.2 (ख) “सूरदास तब बहँ स जसोदा, लै उर कंठ लगायो”
शब्दाथ — बहँ स = मुसकाकर, हँसकर; जसोदा = यशोदा; लै = लेकर; उर = छाती, हृदय; कंठ = गला।
भावाथ — सूरदास कहते ह क कृष्ण क यह भोली-भाली, रूठ हुई सफ़ाई सुनकर माँ यशोदा हँस पड़ और उन्ह ने कृष्ण को
उठाकर छाती और गले से लगा लया। सारा झगड़ा वह ख़त्म हो गया।
अंश क्या दखाता है
सूरदास अं तम पं क्त म क व ने अपना नाम जोड़ा है। यह सूरदास के पद क पहचान है — इसे भ णता या ‘छाप’ कहते ह।
िबहँिस यशोदा को गुस्सा नह , हँसी आई। यानी वे भी जानती थ क माखन कसने खाया — पर बेटे क चतुराई ने उनका मन
जीत लया।
उर कं ठ दं ड क जगह गले लगाना। यहाँ शकायत का अंत सज़ा से नह , प्यार से होता है।
लगायो
इस पं क्त म सबसे सुंदर बात क्या है: पूरा पद एक झगड़े जैसा शुरू होता है — आरोप, सफ़ाई, उलाहना, रूठना।
पर अंत म वह झगड़ा वात्सल्य म बदल जाता है। इसी लए यह पद वात्सल्य रस का माना जाता है — माँ के हृदय का
प्रेम ही यहाँ का असली वषय है।
अपने जीवन से जो ड़ए: क्या कभी घर म आपक शरारत पर डाँट पड़ते-पड़ते रह गई और माँ या दाद हँस पड़ ?
उस पल को दो-तीन वाक्य म ल खए — यही इस पं क्त का अनुभव है।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 98
पाठ से
पाठ से ले ख न
प्र.1 (क) पद म ीकृष्ण ने अपने बारे म क्या-क्या बताया है?
पूरा पद ीकृष्ण के अपने मुँह से कहा गया है, इस लए उसम उनका पूरा दन और उनका स्वभाव — दोन खुलकर सामने आ जाते
ह। उन्ह ने अपने बारे म मुख्य रूप से पाँच बात बताई ह।
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क्या बताया पद क पं क्त
1. मैंने माखन नही ं खाया। “मैया म न ह माखन खायो।”
2. सुबह होते ही मुझे गायों के पीछे मधुबन भेज िदया गया था। “भोर भयो गैयन के पाछे , मधुबन मो ह पठायो।”
3. मैं चार पहर बंस ीवट पर घूम ता रहा और साँझ ढले घर लौटा। “चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥”
4. मैं छोटा बालक हू,ँ मेर ी बाँहे ं छोटी है ं — ऊँ चे छी ंके तक मेर ा हाथ पहच
ु ँ ही नही ं “म बालक ब हयन को छोटो, छ को के ह ब ध
सकता। पायो।”
5. ग्वाल -बाल मुझसे बैर रखते है;ं उ न्होंने ज़ बरद स्ती मेरे मुँह पर माखन लपेट िदया। “ग्वाल-बाल सब बैर परे ह, बरबस मुख लपटायो॥”
इन बात के साथ वे दो शकायत भी करते ह —
माँ बहुत भोली है, इसी लए दूसर क बात पर वश्वास कर लेती है — “तू माता मन क अ त भोरी, इनके कहे प तयायो।”
माँ के मन म ज़रूर कोई भेद है, तभी उसने मुझे पराया समझ लया — “ जय तेरे कछु भेद उप ज ह, जा न परायो जायो।”
ध्यान दे ने क बात: कृष्ण क सफ़ाई म तीन तरह के तक ह — समय का ( दन भर घर ही नह था), शरीर का (हाथ
छोटे ह) और गवाह का (जो कह रहे ह वे मेरे दुश्मन ह)। असली अदालत म भी बचाव इन्ह तीन ढं ग से कया जाता
है! एक छोटे बालक के मुँह से यह पूरी दलील रखवाकर सूरदास ने कमाल कर दया है।
प्र.2 (ख) यशोदा माता ने ीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्य लगा लया?
क्य क कृष्ण क सफ़ाई सुनकर यशोदा को गुस्सा नह , प्यार और हँसी आ गई। पद कहता है —
“ये ले अपनी लकु िट कमिरया, बहुत िहं नाच नचायो।
सूरदास तब िबहँिस जसोदा, लै उर कं ठ लगायो॥”
तीन कारण मलकर यह क्षण बनाते ह —
1. बालक क चतुराई पर मोह — इतना छोटा ब ा और इतनी लंबी, तरतीबवार दलील! माँ उसक बु द्ध पर रीझ गईं।
2. रूठना असहनीय लगा — कृष्ण ने लाठ -कंबल लौटाकर कह दया, “बहुत नाच नचा लया!” अपने बेटे का यूँ रूठकर सब
कुछ छोड़ दे ना माँ से दे खा नह गया।
3. ‘पराया’ शब्द चुभ गया — जब कृष्ण ने कहा, “जा न परायो जायो” (तूने मुझे पराया समझ लया), तो माँ का हृदय भर आया।
इसी बात को झुठलाने के लए उन्ह ने उसे छाती और गले से लगा लया — जैसे कहना चाहती ह , “तू मेरा ही है।”
‘ बहँ स’ का अथ भर जान लेना काफ़ नह : यशोदा हँस , इसका मतलब यह भी है क वे कृष्ण क चोरी जानती
थ — पर उन्ह सद्ध करना ही नह था। जहाँ प्रेम होता है, वहाँ जीत-हार का हसाब नह लगाया जाता। पद यह
सबसे सुंदर बनता है।
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उत्तर लखने का ढं ग: ऐसे ‘क्य ’ वाले प्रश्न म पहले एक वाक्य म सीधा कारण ल खए, फर उसे सद्ध करने वाली
पं क्त उद्धत क जए, और अंत म एक वाक्य म माँ का भाव समझाइए। तीन-चार वाक्य म पूरा उत्तर बन जाता है।
क वता क रचना — पृष्ठ 98
पाठ से
पाठ से काव्य- शल्प
प्र.1 (क) इस पाठ को एक बार फर से प ढ़ए और अपने-अपने समूह म मलकर इस पाठ क वशेषताओं क सूची
बनाइए, जैसे इस पद क अं तम पं क्त म क व ने अपना नाम भी दया है आ द।
पुस्तक ने आपको पहले ही एक वशेषता — तुक — समझा द है और एक उदाहरण — क व का नाम अं तम पं क्त म — दे
दया है। इसी तरह पद को दोबारा पढ़कर बाक़ वशेषताएँ ढूँ ढ़नी ह। नीचे पूरी सूची प्रमाण स हत द गई है।
वशेषता पद से प्रमाण
1. हर पंिक्त के अंत में तुक खायो – पठायो – आयो – पायो – लपटायो – प तयायो – जायो – नचायो – लगायो। पूरे पद म एक ही तुक
चलता है, इस लए इसे गाना बहुत आसान है।
2. अंितम पंिक्त में किव का “सूरदास तब बहँ स जसोदा…” — इसे भ णता या ‘छाप’ कहते ह। इससे पता चल जाता है क पद कसका
नाम है।
3. पूर ा पद कृ ष्ण के अपने मुँह “मैया म न ह माखन खायो” — क व बीच म नह बोलता; केवल अं तम पं क्त म आकर दृश्य पूरा करता है।
से इसे आत्मकथात्मक शैली कहते ह।
4. बजभाषा पाछे (पीछे ), भोरी (भोली), कछु (कुछ), लै (ले), न ह (नह ), मो ह (मुझे) — यह ब्रज क्षेत्र क मीठ बोली है।
5. संवाद जैस ा पवाह पद पढ़ते ही ऐसा लगता है जैसे माँ-बेटे क सचमुच बातचीत सुनाई दे रही हो। यह नाटक यता पद क बड़ी
श क्त है।
6. अनुपास (एक ही ध् विन की “भ◌ोर भयो”, “ब◌ंसीवट भटक्यो”, “ब◌ैर परे… बरबस”, “ग◌्वाल-बाल… गैयन” — इससे पद म लय आ
आवृि ) जाती है।
7. वात्स ल्य रस पूरे पद का भाव माँ का बेटे के प्र त प्रेम है — अंत म “लै उर कंठ लगायो” पर आकर यह भाव पूरा खलता है।
8. दो-दो पंिक्तयों के जोड़ े पद म हर दो पं क्तय के बाद पूण वराम (॥) आता है — एक-एक जोड़ा एक-एक तक पूरा करता है।
9. बाल -सुल भ चतुर ाई “म बालक ब हयन को छोटो” — कृष्ण अपने छोटे पन को ही अपना सबसे बड़ा ह थयार बना लेते ह।
तुक क्या है, एक बार फर: जब दो पं क्तय के अं तम शब्द क अं तम ध्व न एक जैसी हो, उसे तुक कहते ह।
जैसे — पठायो और आयो, दोन के अंत म ‘-आयो’। तुक से क वता कान को अ लगती है और आसानी से याद
हो जाती है — इसी लए लोकगीत, भजन और ब क क वताओं म तुक बहुत मलता है।
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समूह म ऐसे क जए: चार-चार के समूह बनाइए। एक साथी केवल तुक वाले शब्द ढूँ ढ़े, दूसरा ब्रजभाषा के शब्द,
तीसरा एक ही अक्षर से शुरू होने वाले जोड़े (अनुप्रास), और चौथा पद म कौन-कौन बोल रहाem
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है — इसक
co चार सू चयाँ जोड़कर एक बड़ी सूची तैयार क जए।
सूची बनाए। .फर
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(ख) अपने समूह क सूची को कक्षा म सबके साथ साझा क जए।
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यह प्रस्तु त क ग त व ध है। इसका उ े श्य यह है क हर समूह को कुछ ऐसी वशेषताएँ मल जो दूसरे समूह ने नह दे ख — और
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अंत म पूरी कक्षा के पास एक साझी, पूरी सूची तैयार हो जाए।
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प्रस्तु त के लए तीन नयम —
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1. हर वशे.षcता के साथ पद क पं क्त पढ़कर सुनाइए, वरना बात सा बत नह होगी। a g
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seवशेषता पछला समूह बता चुका है, उसे दोहराइए मत — क हए “यह हमारी सूची म भी थी” और आगे ब ढ़ए।
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ag 3. बोड पर या एक बड़े चाट पर सबक वशेषताएँ एक साथ लखते जाइए। यही कक्षा क साझी सूची बनेगी।
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नमूना उत्तर (प्रस्तु त के दो मनट):
“नमस्ते! हमारे समूह ने इस पद म छह वशेषताएँ पाईं।m
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पहली — पूरे पद म एक ही तुक चलता है: खायो, पठायो, आयो, पायो,
लपटायो। इसी लए यह पद गाया जा सकता है।lदूसरी
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तीसरी — पूरा पद कृष्ण ख़ुद बोल रहे ह, इस लए वह सफ़ाई जैसा लगता है। चौथी — भाषा ब्रजभाषा है; ‘पीछे ’ को ‘पाछे ’ और
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‘भोली’ को ‘भोरी’ कहा गया है। पाँचव — ‘भोर भयो’, ‘बंसीवट भटक्यो’ म एक ही ध्व न बार-बार आई है, जससे लय बनती है।
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छठ — अंत म माँ का गले लगाना पूरे पद को प्रेम से भर दे ता है। धन्यवाद!”
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m .c का ढं ग: पद क पं क्तयाँ पढ़ते समय ज़रा गाकर प ढ़ए — सूरदास केaपदg गाए ही जाते थे। तुक ख़ुद-ब-ख़ुद
aseसुनाई दे ने लगेगा और आपक बात प्रमाण के साथ पहुँचेगी।
बोलने
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अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 98
पाठ से agl
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पाठ से कल्पना
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m(क) ीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तक क्य दे रहे ह गे? as e
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प्र.1
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क्य क उन पर चोरी का आरोप लगा है और वे उसे झुठलाना चाहते ह। ग्वाल-बाल ने यशोदा से शकायत कर द थी और माँ ने
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उनक बात मान भी ली — “तू माता मन क अ त भोरी, इनके कहे प तयायो।” अब बचने का एक ही रास्ता है — तक।
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पर इसके पीछे तीन और गहरे कारण दखाई दे ते ह —
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो AglaSem · NCERT Solutions
कारण पद म उसका सुराग
1. डाँट से बचना ब ा जब पकड़ा जाए तो पहले सफ़ाई दे ता है। कृष्ण भी दन भर का हसाब गना दे ते ह — “भोर भयो… साँझ परे
घर आयो।”
2. माँ का िवश्वास िफर उन्ह बुरा इस बात का लगा क माँ ने दूसर क बात मानी, उनक नह । इसी लए वे कहते ह — “ जय तेरे कछु भेद
से जीतना उप ज ह, जा न परायो जायो।” असली दुख सज़ा का नह , अ व ास का है।
3. सािथयों की चाल “ग्वाल-बाल सब बैर परे ह, बरबस मुख लपटायो” — कृष्ण बताना चाहते ह क गवाह ही पक्षपाती ह, इस लए
का जवाब दे ना उनक गवाही मानी न जाए।
यही बात इस पद को सुंदर बनाती है: कृष्ण डरकर रोते नह , न झूठ-मूठ माफ़ माँगते ह। वे क्रम से दलील रखते
ह — समय, शरीर और गवाह। एक नन्हे बालक क इस समझदारी को दे खकर ही माँ का गुस्सा हँसी म बदल जाता
है।
चचा के लए: अपने समूह म सो चए — य द कृष्ण चुपचाप मान लेते क “हाँ, मने खाया”, तो पद कैसा होता?
शायद उतना मज़ेदार नह । तक ही इस पद क जान है।
प्र.2 (ख) जब माता यशोदा ने ीकृष्ण को गले से लगा लया, तब क्या हुआ होगा?
यह कल्पना का प्रश्न है — पद यह ख़त्म हो जाता है, इस लए आगे क कहानी आपको जोड़नी है। पर कल्पना पद के भाव से मेल
खानी चा हए: वहाँ प्रेम है, इस लए आगे भी प्रेम ही होना चा हए, बदला या सज़ा नह ।
अ े उत्तर म ये बात आ सकती ह —
कृष्ण का रूठना ख़त्म हुआ; उन्ह ने लाठ -कंबल फर से थाम लया।
यशोदा ने उन्ह आँचल से मुँह प छकर कुछ खाने को दया — शायद वही माखन!
ग्वाल-बाल क शकायत धरी रह गई; माँ ने आगे से पहले बेटे क बात सुनने का मन बना लया।
कृष्ण को यह वश्वास मल गया क माँ उन्ह ‘पराया’ नह समझती।
नमूना उत्तर:
“यशोदा ने कृष्ण को गोद म उठा लया और उनके माथे पर हाथ फेरा। कृष्ण क आँख का पानी उनके आँचल म समा गया। माँ बोल
— ‘अ ा-अ ा, मेरा लाल माखन नह खाता। अब चल, मुँह धो ले।’ कृष्ण मुसकरा दए, पर उनके ह ठ के कोने पर लगा माखन
माँ ने दे ख लया और वे फर हँस पड़ । इस बार कृष्ण भी हँस दए। फर माँ ने अपने हाथ से उन्ह कटोरी भर माखन- म ी खलाई
और कहा — ‘चोरी मत कया कर, माँग लया कर।’ बाहर खड़े ग्वाल-बाल यह सब दे खकर चुपचाप खसक गए।”
कल्पना लखते समय ध्यान र खए: कहानी को वह से आगे बढ़ाइए जहाँ पद छोड़ता है, और पात्र का स्वभाव मत
बद लए — यशोदा कठोर नह हो सकत , कृष्ण डरपोक नह हो सकते। अ कल्पना वही है जो पढ़ने वाले को
लगे, “हाँ, आगे ऐसा ही हुआ होगा।”
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो AglaSem · NCERT Solutions
शब्द के रूप — पृष्ठ 98 और 99
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 (क) “भोर भयो गैयन के पाछे ” — इस पं क्त म ‘पाछे ’ शब्द आया है। इसके लए ‘पीछे ’ शब्द का उपयोग भी
कया जाता है। इस पद म ऐसे कुछ और शब्द ह जन्ह आप कुछ अलग रूप म लखते और बोलते ह गे। नीचे ऐसे
ही कुछ अन्य शब्द दए गए ह। इन्ह आप जस रूप म बोलते- लखते ह, उस प्रकार से ल खए। — परे, छोटो,
ब ध, भोरी, कछु , लै, न ह
ये सब ब्रजभाषा के रूप ह। नीचे इनके खड़ी बोली (आज क हद ) वाले रूप दए गए ह।
पद का शब्द हम जस रूप म पद क पं क्त अपना एक वाक्य
(ब्रजभाषा) बोलते- लखते ह
परे पड़ े “साँझ परे घर आयो” / “ग्वाल- शाम पड़े ही सब ब े मैदान से घर लौट
बाल सब बैर परे ह” आए।
छोटो छोटा “म बालक ब हयन को छोटो” मेरा छोटा भाई अभी अलमारी तक
हाथ नह पहुँचा पाता।
िबिध िविध (तरीक़ ा, ढं ग) “छ को के ह ब ध पायो” दाद ने मुझे अचार डालने क पूरी व ध
बताई।
भोरी भोली “तू माता मन क अ त भोरी” वह इतनी भोली है क हर कसी क
बात मान लेती है।
कछु कु छ “ जय तेरे कछु भेद उप ज ह” मुझे लगता है इस बात म कुछ गड़बड़
ज़रूर है।
लै ले (ले क र) “लै उर कंठ लगायो” माँ ने मुझे गोद म ले लया।
निहं नही ं “मैया म न ह माखन खायो” मने आज तक कसी क चीज़ नह
छु ई।
ब्रजभाषा और खड़ी बोली म फ़क़ कैसे पहचान: ग़ौर क जए, बदलाव ज़्यादातर अंत क मात्रा म है — छोटा →
छोटो, भोली → भोरी, नह → न ह। ब्रजभाषा म ‘आ’ क जगह अक्सर ‘ओ’ आ जाता है (छोटा-छोटो, खाया-
खायो, आया-आयो) और ‘ई’ क जगह ‘इ’ (नह -न ह)। यही मठास सूरदास के पद को गाने लायक़ बनाती है।
और शब्द ढूँ ढ़ए: पद म ऐसे और भी रूप छपे ह — मो ह (मुझे), गैयन (गाय ), के ह ( कस), जय (जी/मन),
ब हयन (बाँह), तब के साथ बहँ स (हँसकर)। इन्ह भी अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) पद म से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 म दए गए ह और स्तंभ 2 म उनके अथ दए गए ह। शब्द का उनके
सही अथ से मलान क जए— स्तंभ 1: 1. उप ज, 2. जा न, 3. जायो, 4. जय, 5. पठायो, 6. प तयायो, 7.
ब हयन, 8. ब ध, 9. बहँ स, 10. भटक्यो, 11. लपटायो। स्तंभ 2: 1. मुसकाई, हँसी; 2. उपजना, उत्पन्न होना; 3.
जानकर, समझकर; 4. व ास कया, सच माना; 5. बाँह, हाथ, भुजा; 6. प्रकार, भाँ त, री त; 7. मन, जी; 8.
जन्मा; 9. मला, लगाया, पोता; 10. इधर-उधर घूमा या भटका; 11. भेज दया।
सही मलान इस प्रकार है —
स्तंभ 1 मलेगा स्तंभ 2 पद क पं क्त
1. उपिज →2 उपजना, उत्पन्न होना “ जय तेरे कछु भेद उप ज ह”
2. जािन →3 जानकर, समझकर “जा न परायो जायो”
3. जायो →8 जन्मा “जा न परायो जायो” — यानी कसी और का जन्मा हुआ
4. िजय →7 मन, जी “ जय तेरे कछु भेद उप ज ह”
5. पठायो → 11 भेज दया “मधुबन मो ह पठायो”
6. पितयायो →4 वश्वास कया, सच माना “इनके कहे प तयायो”
7. बिहयन →5 बाँह, हाथ, भुजा “म बालक ब हयन को छोटो”
8. िबिध →6 प्रकार, भाँ त, री त “छ को के ह ब ध पायो”
9. िबहँिस →1 मुसकाई, हँसी “सूरदास तब बहँ स जसोदा”
10. भटक्यो → 10 इधर-उधर घूमा या भटका “चार पहर बंसीवट भटक्यो”
11. लपटायो →9 मला, लगाया, पोता “बरबस मुख लपटायो”
‘जा न’ और ‘जायो’ म गड़बड़ मत क जए: दोन ‘ज’ से शुरू होते ह, पर ‘जा न’ का रश्ता ‘जानना’ से है और
‘जायो’ का रश्ता ‘जन्म’ से (जाया = जन्मा हुआ; इसी से ‘जननी’, ‘जन्म’ बने ह)। पं क्त पूरी प ढ़ए — “जा न
परायो जायो” = “मुझे पराया जन्मा हुआ समझकर”। दोन शब्द एक ही पं क्त म ह और दोन के अथ बलकुल
अलग।
याद रखने क तरक ब: अ धकतर ब्रज शब्द कसी न कसी आज के शब्द से जुड़े ह — उप ज से ‘उपज’ (फ़सल),
प तयायो से ‘प्रती त’, ब हयन से ‘बाँह’, बहँ स से ‘हँसी’, लपटायो से ‘ लपटना’। जोड़ी बना ली जए, अथ ख़ुद
याद हो जाएगा।
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वण-प रवतन — पृष्ठ 100
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 “तू माता मन क अ त भोरी” — ‘भोरी’ का अथ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वण परस्पर बदल गए ह। आपने
ध्यान दया होगा क इस पद म कुछ और शब्द म भी ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ म वण-प रवतन हुआ है। ऐसे शब्द
चुनकर अपनी लेखन पु स्तका म ल खए।
पद म ऐसे तीन शब्द साफ़ दखाई दे ते ह। हर बार ‘र’ ने कसी दूसरे वण क जगह ले ली है।
पद का शब्द आज का रूप कौन-सा वण बदला पद क पं क्त
भोरी भोली ल→र “तू माता मन क अ त भोरी”
परे पड़ े ड़→र “साँझ परे घर आयो” तथा “ग्वाल-बाल सब बैर परे ह”
कमिरया कमली (छोटा कं बल ) ल→र “ये ले अपनी लकु ट कम रया”
ऐसा होता क्य है: ‘ल’, ‘र’ और ‘ड़’ — तीन का उ ारण जीभ के लगभग एक ही हस्से से होता है (जीभ ऊपर
तालु को छू ती है)। इसी लए बोलचाल म ये आपस म फसलकर बदल जाते ह। भाषा व ान म इसी को वण-
प रवतन कहते ह। यह ग़लती नह , बोली क अपनी चाल है।
आज क भाषा म भी यही होता है: बहुत से लोग ‘कल’ को ‘कर’, ‘पहले’ को ‘पहरे’, ‘लालटे न’ को ‘लालटे र’
बोलते सुने जाते ह; इसी तरह ‘बड़ा’ कह ‘बरा’ और ‘पढ़ना’ कह ‘परना’ बन जाता है। Try This: अपने आस-
पास ध्यान से सु नए और ऐसे पाँच शब्द इक े क जए जनम ल, र या ड़ बदल जाता हो — फर कक्षा म सुनाइए।
पं क्त से पं क्त — पृष्ठ 100
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो
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पाठ से
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पाठ से भावाथ
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a s emस्तंभ 1 म कुछ पं क्तयाँ द गयी ह और स्तंभ 2 म उनके भावाथ दए गए ह। रेखा ख चकर सही मलान
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नीचे
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प्र.1
क जए। — स्तंभ 1: 1. भोर भयो गैयन के पाछे , मधुबन मो ह पठायो। 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर
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आयो। 3. म बालक ब हयन को छोटो, छ को के ह ब ध पायो। 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे ह, बरबस मुख
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लपटायो। 5. तू माता मन क अ त भोरी, इनके कहे प तयायो। 6. जय तेरे कछु भेद उप ज है, जा न परायो जायो।
a s emह, म छ के तक कैसे पहुँच सकता ँ? 2. तेरे हृदय म अवश्य कोई
— स्तंभ 2: 1. म छोटा बालक ँ, मेरी बाँह छोट
a glमाँ तुम मन क बड़ी भोली हो, इनक बात म आ गई हो। 4. सुबह होते ही
भेद है, जो मुझे पराया समझ लया। 3.
गाय के पीछे मुझे मधुबन भेज दया। 5. चार पहर बंसीवट म भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। 6. ये सब
सखा मुझसे बैर रखते ह, इन्ह ने मक्खन हठपूवक मेरे मुख पर लपटा दया।
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सही मलान नीचे दया गया है। ध्यान द जए — स्तंभ 2 का क्रम जान-बूझकर उलटा-पुलटा है, इस लए संख्या से संख्या मत
agमलाइए।
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स्तंभ 1 — पद क पं क्त मलेगा स्तंभ 2 — भावाथ मलान का सूत्र
m ही गाय के पीछे मुझे मधुबन भेज
बहeहोते
सुs
1. भोर भयो गैयन के पाछे , मध बु न →4
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gl दया।
‘भोर’ = सुबह, ‘पठायो’ = भेज दया।
मोिह पठायो।
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2. चार पहर बंस ीवट भटक्यो, →5 चार पहर बंसीवट म भटकने के बाद साँझ होने ‘चार पहर’ और ‘साँझ’ — दोन शब्द
पर घर आया।
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भावाथ म ज्य के त्य ह।
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साँझ परे घर आयो।
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m केिह िबिध पायो।
3. मैं बालक बिहयन को छोटो, →1 म छोटा बालक हूँ, मेरी बाँह छोट ह, म छ के
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‘ब हयन’ = बाँह, ‘के ह ब ध’ = कस
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छीको तक कैसे पहुँच सकता हूँ? तरह।
ag
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4. ग्वाल-बाल सब बैर परे है,ं →6 ये सब सखा मुझसे बैर रखते ह, इन्ह ने मक्खन ‘बरबस’ = हठपूवक, ‘लपटायो’ =
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बरबस मुख लपटायो। हठपूवक मेरे मुख पर लपटा दया। लपटा दया।
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माँ तु.म मन क बड़ी भोली हो, इनक बात म a
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as आ गई हो।
5. तू माता मन की अित भोरी, →3 ‘भोरी’ = भोली, ‘प तयायो’ = वश्वास
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इनके कहे पितयायो। कर लया।
6. िजय तेरे कछु भेद उपिज है, →2 तेरे हृदय म अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया ‘ जय’ = हृदय/मन, ‘परायो जायो’ =
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जािन परायो जायो। समझ लया। पराया जन्मा हुआ।
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g जो सबसे अलग हो — जैसे पं क्त 2
.cमलान का सबसे आसान तरीक़ा: हर पं क्त म से एक ऐसा शब्द चुन लीaजए
m म ‘साँझ’, पं क्त 4 म ‘बरबस’, पं क्त 6 म ‘पराया’। फर स्तंभ 2 म उसी शब्द को ढूँ ढ़ए। भावाथ लखने वाले प्रायः
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ag मूल का एक शब्द ज्य का त्य रख दे ते ह — वही आपका सुराग़ है।
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सही क्रम एक नज़र म: 1→4, 2→5, 3→1, 4→6, 5→3, 6→2। ध्यान द जए, कोई भी जोड़ा सीधे क्रम से
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नह मलता — इसी लए यह ग त व ध आपको पं क्तयाँ सचमुच पढ़ने पर मजबूर करती है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो AglaSem · NCERT Solutions
आपक बात — पृष्ठ 101
पाठ से आगे
पाठ से आगे अपनी बात
प्र.1 “मैया म न ह माखन खायो” — यहाँ ीकृष्ण अपनी माँ के सामने सद्ध करने का प्रयास कर रहे ह क उन्ह ने
माखन नह खाया है। कभी-कभी हम दूसर के सामने सद्ध करना पड़ जाता है क यह काय हमने नह कया।
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? कसके सामने? आपने अपनी बात सद्ध करने के लए कौन-कौन
से तक दए? उस घटना के बारे म बताइए।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर व ाथ का अलग होगा। पर प्रश्न ने चार बात साफ़-साफ़ पूछ ह, और अ ा
उत्तर वही है जसम चार का जवाब हो।
प्रश्न पूछता है आपके उत्तर म क्या होना चा हए
क्या ऐसा हआ
ु है? एक स ी, छोट घटना — कोई ऐसा काम जसका इल्ज़ाम आप पर लगा और वह आपने कया नह था।
कब? समय — “ पछले महीने”, “जब म चौथी कक्षा म था”, “रक्षाबंधन वाले दन”।
िकसके सामने? वह व्य क्त — माँ, पता, शक्षक, बड़ी बहन, दुकानदार।
कौन-कौन से तक िदए? यह सबसे ज़ रूरी िहस्सा है — कम-से -कम दो तक , ठीक वैसे ही जैसे कृ ष्ण ने िदए थे।
कृष्ण से तक दे ना सी खए — उन्ह ने तीन तरह क बात कह , और यही तीन तरीक़े आप भी काम म ला सकते ह:
समय का तक — “उस समय म वहाँ था ही नह ।” (“भोर भयो… साँझ परे घर आयो।”)
संभावना का तक — “मेरे लए यह करना संभव ही नह था।” (“म बालक ब हयन को छोटो।”)
गवाह का तक — “जो कह रहे ह, उनक बात पर भरोसा क्य ?” (“ग्वाल-बाल सब बैर परे ह।”)
नमूना उत्तर:
“हाँ, पछले वष मेरे साथ ऐसा ही हुआ था। हमारी कक्षा क खड़क का काँच टू ट गया और सबने कहा क गद मने ही मारी थी। मुझे
यह बात अपनी कक्षा- श क्षका के सामने सद्ध करनी पड़ी क काँच मने नह तोड़ा।
मने तीन तक दए। पहला — उस समय म मैदान म था ही नह ; म पुस्तकालय म कताब जमा करा रहा था और वहाँ का र जस्टर
दे खा जा सकता था। दूसरा — मेरा बल्ला और गद उस दन घर पर थे, क्य क माँ ने उन्ह बस्ते से नकाल दया था। तीसरा —
जन दो सा थय ने मेरा नाम लया, वे उसी दन मुझसे झगड़ पड़े थे, इस लए उनक बात अकेले प्रमाण नह मानी जा सकती।
श क्षका ने पुस्तकालय जाकर र जस्टर दे खा और मेरी बात मान ली। मुझे उस दन सबसे अ ा यह लगा क म चल्लाया नह , रोया
नह — बस शां त से सबूत रखता गया।”
असली सीख: अपनी बात सद्ध करने के लए ऊँची आवाज़ नह , प्रमाण चा हए। कृष्ण ने भी यही कया — दन
भर का हसाब गनाया। और एक बात और — य द सचमुच ग़लती आपक हो, तो सबसे अ ा तक है सच बोल
दे ना।
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लखने का ढं ग: तीन अनु े द म ल खए — (1) क्या हुआ, (2) मने क्या-क्या तक दए, (3) अंत म क्या हुआ
और मुझे क्या लगा। आठ-दस वाक्य पयाप्त ह।
घर क वस्तुए ँ — पृष्ठ 101 और 102
पाठ से आगे
पाठ से आगे चत्र-पहचान
प्र.1 “म बालक ब हयन को छोटो, छ को के ह ब ध पायो।” — ‘छ का’ घर क एक ऐसी वस्तु है जसे सैकड़ -वष से
भारत म उपयोग म लाया जा रहा है। नीचे कुछ और घरेलू वस्तुओं के चत्र दए गए ह। इन्ह आपके घर म क्या
कहते ह? चत्र के नीचे ल खए। य द कसी चत्र को पहचानने म क ठनाई हो तो आप अपने शक्षक, प रजन या
इंटरनेट क सहायता भी ले सकते ह।
पृष्ठ 101–102 के पंद्रह चत्र — हर चत्र के नीचे बनी रेखा पर उसका नाम ल खए।
पुस्तक म कुल पंद्रह चत्र दए गए ह — आठ पृष्ठ 101 पर और सात पृष्ठ 102 के ऊपरी हस्से म। नीचे हर चत्र का सबसे प्रच लत
नाम, उसके क्षेत्रीय नाम और उसका काम दया गया है।
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पृष्ठ 101 के चत्र —
क्रम चत्र म क्या है सामान्य और कन नाम से पुकारा कस काम आता है
नाम जाता है
1 चौड़े मुँह वाला पीतल का घड़ा मटका / घड़ ा हंडा, बटलोई, गगरी, गागर, पानी भरकर ठं डा रखने के लए
कलश
2 लोहे क भारी, कोयले वाली इस्तरी प्रेस, कोयले क इस्तरी, इस्त्री कपड़ क सलवट दूर करने के लए
इस्तरी
3 लकड़ी क नीची चौकोर मेज़ चौकी पीढ़ा, पाटा, बाजोट, पटरा बैठने या पूजा का सामान रखने के
लए
4 हाथ से चलाने वाली मशीन िसलाई मशीन मशीन, सलाई का चरखा कपड़े सलने के लए
5 बुनी हुई नवाड़ वाली लकड़ी चारपाई खाट, ख टया, माँजा, म चया सोने-बैठने के लए
क चारपाई
6 ढक्कन वाला म का बड़ा मतबान बरनी, अचारदानी, कुप्पा अचार, मुरब्बा या अनाज रखने के
बतन लए
7 बाँस क बुनी हुई चौड़ी थाली सूप छाज, छाजला, सूपा, ड लया अनाज फटककर भूसा-कंकड़ अलग
करने के लए
8 चौकोर पत्थर और उस पर गोल िसल -ब ा सलौट , लोढ़ा-ब ा, खरल मसाला और चटनी पीसने के लए
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पृष्ठ 102 के ऊपर दए चत्र —
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क्रम चत्र म क्या है सामान्य नाम और कन नाम से कस काम आता है
पुकारा जाता है
9 दो गोल पाट वाला पत्थर, ऊपर चक्की जाँता, घरट, हाथ-चक्क गेहूँ या दाल पीसकर आटा
लकड़ी क मूठ बनाने के लए
10 रंगीन कपड़े का हाथ का पंखा पंखा बीजना, बेना, हाथपंखा, हाथ से हवा करने के लए
वझना
11 लकड़ी का लंबा डंडा, नीचे मथानी रई, मथनी, बलोनी, मंथा दही मथकर मक्खन नकालने
पंखु ड़य जैसा सरा के लए
12 छे द वाली गोल धातु क थाली छलनी चलनी, छन्नी, चालनी आटा या मसाला छानने के लए
13 ढक्कन वाली रंगीन गोल ड बया, पानदान पटारी, ड बया, चंगेरी पान, सुपारी और मसाले रखने
भीतर पान का पत्ता के लए
14 लकड़ी का गहरा कटोरा और मोटा ओखली-मूस ल ऊखल, खल-मूसल, धान कूटने या मसाला कूटने के
डंडा उलूखल, हामदस्ता लए
15 लकड़ी के खंभे से बँधी रस्सी और िबलौना (मथानी लगी रई-मथानी, नेती, दहीदान रस्सी घुमाकर मटक म जमा
म क मटक मटकी) दही मथने के लए
‘आपके घर म क्या कहते ह’ — यही असली प्रश्न है: इन वस्तुओं के नाम हर प्रदे श म बदल जाते ह। जो राज ान
म ‘बाजोट’ है, वह बहार म ‘पीढ़ा’ और महाराष्ट्र म ‘पाट’ है। इस लए ऊपर क ता लका दे खकर अपना उत्तर मत
ल खए — घर जाकर दाद , नानी या माँ से पू छए क वे इसे क्या कहती ह, और वही नाम चत्र के नीचे ल खए।
जो नाम आपके घर म चलता है, वही आपके लए सही उत्तर है।
Try This: कक्षा म एक बड़ा चाट बनाइए — बाईं ओर वस्तु का चत्र, और उसके आगे उतने ख़ाने जतने प्रदे श
आपक कक्षा म ह। हर व ाथ अपने घर का नाम भरे। आपको दखेगा क एक ही चीज़ के दस-दस नाम नकल
आते ह — यही भारत क भाषाई सुंदरता है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो
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emके सदस्य , शक्षक
प्र.2 आप जानते ही ह क ीकृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था। दूध से दही, मक्खन बनाया जाता है और मक्खन से घी
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cटoआ द क सहायता से दूध से घी बनाने क प्र क्रया ल खए। gl
बनाया जाता है। नीचे दूध से घी बनाने क प्र क्रया संबंधी कुछ चत्र दए गए ह। अपने प रवार
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पृष्ठ 102 — दूध से घी बनने तक के नौ चत्र, तीर के क्रम म।
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पृष्ठ 102 पर तीर से जुड़े नौ चत्र दए गए ह। तीर का क्रम पहचान ली जए — पहली पं क्त बाएँ से दाएँ, दूसरी पं क्त दाएँ से
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बाएँ, तीसरी फर बाएँ से दाएँ। इसी क्रम म पूरी प्र क्रया नीचे लखी है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो AglaSem · NCERT Solutions
चरण चत्र म क्या दख रहा है क्या हो रहा है
1 खेत म चरती हुई गाय गाय हरा चारा खाती है — दूध क शुरुआत यह से होती है।
2 एक व्य क्त गाय का दूध दुह गाय से ताज़ा दूध नकाला जाता है।
रहा है
3 चूल्हे पर चढ़ दूध क हाँडी दूध को उबाला जाता है, ता क वह ख़राब न हो और सुर क्षत रहे।
4 बतन म रखा गुनगुना दूध दूध को गुनगुना होने तक ठं डा कया जाता है और उसम थोड़ा-सा पुराना दही (जामन) मलाकर
रातभर ढककर रख दया जाता है — दूध दही म जम जाता है।
5 स्त्री रस्सी वाली मथानी से जमे हुए दही म थोड़ा पानी डालकर मथा जाता है। ऊपर मक्खन तैरकर आ जाता है।
मटक मथ रही है
6 बचा हुआ पतला तरल भरा मक्खन नकाल लेने के बाद जो पतला तरल बचता है, वह छाछ (म ा) है — उसे पीने के काम म
मटका लाया जाता है।
7 मक्खन एक बतन म डाला इक ा कया हुआ मक्खन कड़ाही या भगोने म डाला जाता है।
जा रहा है
8 चूल्हे पर चढ़ मक्खन क मक्खन को धीमी आँच पर गरम कया जाता है। उसका पानी भाप बनकर उड़ जाता है और नीचे
हाँडी भूरे कण (खुरचन) बैठ जाते ह।
9 काँच क बरनी म भरा ऊपर का साफ़, सुनहरा तरल छानकर बरनी म भर लया जाता है — यही घी है।
सुनहरा घी
अपने शब्द म ल खए (नमूना उत्तर):
“सबसे पहले गाय या भस का ताज़ा दूध दुहा जाता है। इस दूध को चूल्हे पर उबाला जाता है और फर गुनगुना होने तक ठं डा कया
जाता है। अब इसम थोड़ा-सा पहले का दही, जसे जामन कहते ह, मलाकर बतन ढककर रात भर रख दे ते ह। सुबह तक दूध
जमकर दही बन जाता है। इस दही को मटक म डालकर मथानी से मथा जाता है। मथते-मथते ऊपर मक्खन तैरने लगता है, जसे
हाथ से इक ा कर लया जाता है; नीचे जो पतला तरल बचता है वह छाछ कहलाती है। इक े कए मक्खन को कड़ाही म डालकर
धीमी आँच पर गरम करते ह। उसका सारा पानी भाप बनकर उड़ जाता है और नीचे भूरे कण बैठ जाते ह। ऊपर बचा हुआ साफ़
सुनहरा तरल छानकर बरनी म भर लया जाता है — यही घी है।”
Did you know? इस पूरी प्र क्रया म कुछ भी बेकार नह जाता — दूध से दही, दही से मक्खन, मक्खन से घी,
और बीच म नकली छाछ गरमी म सबसे अ ा पेय है। घी बनाने के बाद तली म बची भूरी खुरचन भी गुड़ के साथ
खाई जाती है। यही भारतीय रसोई क समझदारी है।
Check it yourself: घर पर एक छोट कटोरी दही ली जए, उसम दो चम्मच ठं डा पानी डा लए और चम्मच से
पाँच मनट तेज़ी से फ टए। ऊपर मक्खन के छोटे -छोटे दाने तैरते दखगे। बड़ क मदद से ही आग वाला हस्सा
क जए।
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समय का माप — पृष्ठ 103
पाठ से आगे
पाठ से आगे गणना
प्र.1 (क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ शब्द का प्रयोग समय बताने के लए कया जाता है। समय बताने के लए और कौन-कौन
से शब्द का प्रयोग कया जाता है? अपने समूह म मलकर सूची बनाइए और कक्षा म साझा क जए। (संकेत—
कल, ऋतु, वष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अव ध आ द)
पुस्तक ने आठ शब्द संकेत म दे दए ह। उन्ह से शुरू करके सूची को बड़ा क जए। सु वधा के लए शब्द को पाँच वग म बाँट लेना
सबसे अ ा तरीक़ा है।
वग शब्द उदाहरण वाक्य
1. िदन के िहस्से भोर, पातः, सवेरा, सुबह, दोपहर, तीसरा पहर, साँझ, संध्या, शाम, गोधूिल , रात, गोधू ल क बेला म गाय घर
मध्यराित्र, िनशा, अल स्सुबह, बह्ममुहूत लौटती ह।
2. नापने की इकाइयाँ क्षण, पल , घड़ ी, िमनट, घंटा, पहर , पहर , िदन, स प्ताह, पखवाड़ ा, मास /महीना, ऋतु, एक पखवाड़े म पंद्रह दन
वष, युग, दशक , शताब्द ी, सह ाब्द ी होते ह।
3. आगे-पीछे बताने अब, आज, कल , परसों, नरसों, बीता, आगामी, भूत, वतमान, भिवष्य, पहले , बाद में, परस हमारी वा षक परीक्षा
वाले तत्काल , तुरंत शुरू होगी।
4. लंबाई या दौर अविध, काल , समय, दौर, ज़ माना, कालखंड, अरसा, मुद्द त, सिदयों इस काम क अव ध केवल
बताने वाले दस दन है।
5. िवशेष अवसर या वेल ा, मुहूत, ितिथ, बेल ा, घड़ ी (शुभ घड़ ी), ऋतु के नाम — बसंत, गीष्म, वष , शरद , शुभ मुहूत म ही गृह-प्रवेश
क्ष ण हेमंत, िशिशर कया गया।
‘पहर’ जैसी दे सी इकाइयाँ आज भी कैसे बची ह: घड़ी आने से पहले भारत म समय सूरज क जगह दे खकर
बताया जाता था — भोर, दोपहर, तीसरा पहर, साँझ। इसी लए ये शब्द आज भी मुहावर म चलते ह — ‘दोपहर’,
‘आठ पहर’, ‘पहर भर’। ध्यान द जए, हम आज भी 12 बजे को दो-पहर ही कहते ह, यानी पुरानी इकाई हमारी
भाषा म जी वत है।
समूह-काय का तरीक़ा: हर साथी को एक वग दे द जए और तीन मनट का समय। फर सारी सू चयाँ बोड पर
जो ड़ए। एक शत र खए — हर शब्द के साथ एक वाक्य भी बोलना होगा। इससे शब्द केवल याद नह ह गे, उनका
प्रयोग भी आ जाएगा।
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प्र.2 (ख) ीकृष्ण के अनुसार वे कतने घंटे गाय चराते थे?
बारह घंटे।
पद क पं क्त है — “चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” और पुस्तक ने पृष्ठ 97 पर ‘पहर’ का अथ भी दे दया है —
तीन घंटे का एक पहर।
1 पहर = 3 घंटे
4 पहर = 4 × 3 घंटे
= 12 घंटे
जाँच क जए: पुस्तक यह भी बताती है क एक दवस म आठ पहर होते ह। तो पूरा दन-रात = 8 × 3 = 24 घंटे
— बलकुल सही! इससे पक्का हो जाता है क एक पहर सचमुच तीन घंटे का ही होता है।
Tip: ‘आठ पहर’ मुहावरे का अथ है ‘चौबीस घंटे, हर समय’ — जैसे “वह आठ पहर पढ़ाई म लगा रहता है।”
अब आपको पता है क यह मुहावरा बना कैसे।
प्र.3 (ग) मान ली जए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे । वे सुबह कतने बजे गाय चराने के लए घर से नकले
ह गे?
सुबह छह बजे।
घर लौटने का समय = शाम 6 बजे
गाय चराने में लगा समय = 4 पहर = 12 घंटे
िनकलने का समय = शाम 6 बजे − 12 घंटे
= सुबह 6 बजे
घंटा-घंटा गनकर दे खए — सुबह 6 से दोपहर 12 तक 6 घंटे, और दोपहर 12 से शाम 6 तक 6 घंटे। कुल 6 + 6 = 12 घंटे।
हसाब ठ क बैठ गया।
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पहर समय पद म क्या
पहला पहर सुबह 6 – 9 “भोर भयो गैयन के पाछे ” — नकलना
दू स रा पहर सुबह 9 – दोपहर 12 मधुबन म गाय चराना
तीसरा पहर दोपहर 12 – 3 “बंसीवट भटक्यो”
चौथा पहर दोपहर 3 – शाम 6 “साँझ परे घर आयो” — लौटना
यह उत्तर पद से भी मेल खाता है: कृष्ण कहते ह क वे भोर (सुबह) नकले और साँझ (शाम) लौटे । सुबह 6 बजे
भोर होती है और शाम 6 बजे साँझ — यानी ग णत और पद, दोन एक ही बात कह रहे ह।
प्र.4 (घ) ‘दोपहर’ का अथ है ‘दो पहर’ का समय। जब दूसरे पहर क समा प्त होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता
है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूय सर पर आ जाता है। बताइए दन के पहले पहर का प्रारंभ
लगभग कतने बजे होगा?
लगभग सुबह 6 बजे।
पुस्तक ने ख़ुद बता दया है क दो पहर पूरे होने पर 12 बजते ह। तो उलट गनती क जए —
दो पहर = 2 × 3 घंटे = 6 घंटे
पहले पहर का पारंभ = 12 बजे − 6 घंटे
= सुबह 6 बजे
पहर समय पहचान
पहला पहर सुबह 6 – 9 सूरज नकलता है, दन शुरू
दू स रा पहर सुबह 9 – दोपहर 12 इसके ख़त्म होते ही दो-पहर यानी ‘दोपहर’
तीसरा पहर दोपहर 12 – 3 सूरज सर से ढलने लगता है
चौथा पहर दोपहर 3 – शाम 6 इसके ख़त्म होते ही साँझ
‘दोपहर’ शब्द बना कैसे: दो + पहर = दोपहर। यानी दन के दो पहर बीत जाने का समय। इसी तरह से बने कुछ
और शब्द दे खए — तीसरा पहर (दोपहर बाद का समय) और आठ पहर (पूरे चौबीस घंटे)। शब्द का अथ जान
लेने पर उसे कभी भूलगे नह ।
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो
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ध्यान द जए: यहाँ ‘लगभग’ शब्द ज़रूरी है। सूरज हर दन ठ क 6 बजे नह नकलता — गरमी म जल्द और जाड़े
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म दे र से। इसी लए पुराने समय म पहर सूरज के हसाब से थोड़े छोटे -बड़े हो जाते थे।
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हम सब वशेष ह — पृष्ठ 103 और 104
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पाठ से आगे
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पाठ से आगे अपनी बात
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प्र.1 (क) महाक व सूरदास दृ बा धत थे। उनक वशेष क्षमता थी उनक कल्पना श क्त और क वता रचने क
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कुशलता। हम सभी म कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हम सबसे वशेष और सबसे भन्न बनाता है। नीचे दए गए
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व्य क्तय क वशेष क्षमताएँ क्या ह, वचार क जए और ल खए— आपक ____, आपके कसी प रजन क
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यह आपके अपने अवलोकन का प्रश्न है, इस लए हर व ाथ का उत्तर अलग होगा। पर उत्तर लखने से पहले यह समझ ली जए क
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‘ वशेष क्षमता’ का अथ क्या है।
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वशेष क्षमता का मतलब केवल गाना, नाचना या पढ़ाई म अव्वल आना नह है। कोई भी ऐसी बात जो आप और से बेहतर या अलग
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ढं ग से कर पाते ह, वह आपक वशेष क्षमता है — जैसे कसी क बात ध्यान से सुन लेना, चीज़ व्यव त रखना, जल्द हसाब लगा
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लेना, या सबको हँसा दे ना।
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कसक ढूँ ढ़ने का तरीक़ा नमूना उत्तर
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आपकी सो चए — कौन-सा काम करते समय समय का पता ही “मैं जो एक बार सुन ले ती हू,ँ वह मुझे याद रह जाता है।
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नह चलता? कस काम के लए लोग आपको बुलाते ह? क क्षा में सबको िपछले िदन का पाठ मैं ही याद िदलाती हू।ँ ”
आपके िकसी “मेर ी दादी को सै क ड़ ों लोकगीत और कहावते ं ज़ बानी याद
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घर के कसी सदस्य को दो दन ध्यान से दे खए — वे
पिरजन की
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कौन-सा काम बना थके, बना ग़लती के कर लेते ह? है।ं वे िकसी भी मौक़े पर सही कहावत सुना दे ती है।ं ”
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sआसान कैसे बनाते ह? क्या
दे खए — वे क ठन बातaको
आपके िशक्षक
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aरखते ह?
वे सबका नाम याद
“हमारे गिणत के िशक्षक किठन सवाल को भी रोज़ की चीज़ ों
— रोटी, रुपये, ि के ट — से जोड़ कर समझा दे ते है।ं ”
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.co उसे हँसा दे ता है।”
आपके िमत्र की पू छए मत, दे खए — मु श्कल घड़ी म आपका मत्र क्या “मेर ा िम त्र बहुत अच्छा िचत्र बनाता है। िकसी का मन उदास
करता है?
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हो तो वह उसका िचत्र बनाकर
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सू र दास से यह क्य जोड़ा गया है : सू र दास दे ख नह सकते थे , फर भी उनके पद म रंग, दृश्य और चेहरे इतने
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साफ़ ह क आँख के सामने खड़े हो जाते ह — छ के पर टँ गा माखन, माँ का हँसना, गले लगाना। इसका अथ यह है
क जो नह है उससे बड़ा वह होता है जो है। हर व्य क्त के पास कुछ न कुछ ऐसा है — उसे ढूँ ढ़ना और माँजना ही
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असली काम है।
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लखते समय एक बात का ध्यान: कसी क कमी को क्षमता क जगह मत ल खए, और तुलना मत क जए
(“मुझसे अ ा तो वह है”)। हर पं क्त म केवल एक अ ाई, और उसके साथ एक उदाहरण — बस इतना काफ़
है।
प्र.2 (ख) एक वशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबक सहायता करना, सबके भले
के लए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनक सहायता कैसे करगे— • एक सहपाठ
पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ म नह आ रहा है। • एक सहपाठ को पढ़ना अ ा लगता है और वह
दे ख नह सकता। • एक सहपाठ बहुत जल्द -जल्द बोलता है और उसे कक्षा म भाषण दे ना है। • एक सहपाठ
बहुत अटक-अटक कर बोलता है और उसे कक्षा म भाषण दे ना है। • एक सहपाठ को चलने म क ठनाई है और
वह सबके साथ दौड़ना चाहता है। • एक सहपाठ प्र त दन व ालय आता है और उसे सुनने म क ठनाई है।
छह अलग-अलग तयाँ द गई ह। हर त म सहायता का ढं ग अलग होगा। एक बात हर जगह समान है — सहायता का अथ
काम अपने हाथ म ले लेना नह , ब ल्क साथी को ख़ुद करने लायक़ बना दे ना है। दया दखाना सहायता नह है; साथ दे ना सहायता
है।
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त म क्या करूँगा / करूँगी क्य
पढ़ ना जानता है, उसके साथ बैठकर पाठ को छोटे-छोटे िहस्सों में पढ़ ू ँगा और हर िहस्से के बाद समझ म क ठनाई प्रायः शब्द
पर पाठ समझ नही ं पूछूँगा — “इसमें क्या हआ
ु ?” किठन शब्द ों के अथ शब्द कोश से िमलकर दे खूँगा क होती है, पढ़ने क नह । शब्द
आ रहा और पाठ की कहानी को अपने शब्द ों में सुनाऊँ गा। खुलते ही पाठ खुल जाता है।
पढ़ ना पसंद है, पर उसे पाठ पढ़ कर सुनाऊँ गा, और अपनी आवाज़ में िरकॉड करके दू ँगा तािक वह ठ क सूरदास क तरह — दे ख न
दे ख नही ं सकता जब चाहे सुन सके । िशक्षक से कहकर बेल पुस्तक या ऑिडयो-पुस्तक मँगवाने पाना पढ़ने-रचने म बाधा नह ।
का अनुरोध क रूँ गा। िचत्रों का वणन शब्द ों में क रूँ गा। रास्ता बदलता है, मं ज़ल नह ।
बहतु जल्दी-जल्दी उससे कहूगँ ा िक भाषण में हर वाक्य के बाद मन में एक -दो िगने ं और साँस ले ं। तेज़ बोलना घबराहट से होता है।
बोलता है, भाषण भाषण की पच पर जहाँ रुकना है वहाँ / का िचह्न लगा दू ँगा। दो-तीन बार मेरे ठहराव का अभ्यास होते ही
दे ना है सामने अभ्यास कराऊँ गा और हाथ के इशारे से धीमे होने का संके त दू ँगा। आवाज़ अपने आप सँभल जाती
है।
अटक-अटक कर कभी बीच में टोकूँ गा नही,ं न वाक्य पूरा क रूँ गा — धै य से सुनगूँ ा। भाषण छोटे-छोटे बीच म टोकना और हँसना ही
बोलता है, भाषण वाक्यों में िलखवाऊँ गा और उसे धीरे , आराम से बोलने को कहूगँ ा। क क्षा से पहले अटकने को बढ़ाता है। धैय से
दे ना है उसे मेरे सामने अभ्यास का अवसर दू ँगा और यह बताऊँ गा िक उसकी बात ज़ रूरी सुनना सबसे बड़ी सहायता है।
है, र ़ तार नही ं।
चलने में किठनाई खेल का िनयम ऐसा बनाऊँ गा िक वह भी खेल सके — जैसे जोड़ ी बनाकर दौड़ , उसे तरस नह , खेल म जगह
है, सबके साथ या ऐसा खेल िजसमें उसकी टीम में वह पािसंग या िनशाना लगाने का काम करे । चा हए। खेल बदला जा सकता
दौड़ ना चाहता है उसकी व्हीलचेयर या बैस ाखी के िलए रास्ता ख़ाली रखूँगा और उसकी टीम में है, ता क कोई बाहर न रह जाए।
सबसे पहले उसे चुनगूँ ा।
रोज़ िव ालय बात करते समय उसके सामने खड़ ा होकर, साफ़ और थोड़ ा धीरे बोलूँगा तािक चल्लाने से बात साफ़ नह होती।
आता है, सुनने में वह होंठ पढ़ सके । क क्षा में सबसे आगे उसके साथ बैठूँगा और िशक्षक की कही सामने से, साफ़ बोलना और
किठनाई है बात िलखकर िदखाऊँ गा। ज़ रूरी सूचनाएँ कॉपी में िलखकर दे दू ँगा और कु छ लखकर दे ना कह अ धक काम
सांके ितक भाषा सीखने की कोिशश क रूँ गा। आता है।
नमूना उत्तर (एक त पर, जैसा आप कॉपी म लख सकते ह):
“मेरी कक्षा म एक साथी है जसे सुनने म क ठनाई है। म उससे बात करते समय हमेशा उसके सामने खड़ा होता हूँ और साफ़-साफ़
बोलता हूँ, ता क वह मेरे ह ठ भी पढ़ सके। कक्षा म म उसके पास बैठता हूँ और शक्षक जो बोलते ह, उसका मुख्य हस्सा तुरंत
अपनी कॉपी म लखकर उसे दखा दे ता हूँ। जब खेल के मैदान म सीट बजती है, तो म हाथ उठाकर उसे संकेत कर दे ता हूँ। पछले
महीने मने उससे कुछ सांके तक भाषा भी सीखी — अब हम दोन बना बोले भी बात कर लेते ह।”
सबसे ज़रूरी बात: सहायता करते समय साथी से पूछ ली जए क उसे कस तरह क मदद चा हए। बना पूछे क
गई मदद कई बार अपमान जैसी लगती है। और कभी कसी क क ठनाई पर हँ सए मत — यही इस पूरी ग त व ध
का असली सबक़ है।
Did you know? कक्षा को सबके लए खोल दे ने के इसी वचार को समावेशी शक्षा (inclusive
education) कहते ह। सूरदास दृ बा धत थे, पर उनक क वता आज भी पूरे दे श म गाई जाती है — क्य क उनके
समय म भी लोग ने उन्ह सुना, गाया और आगे बढ़ाया।
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आज क पहेली — पृष्ठ 104
पाठ से आगे
पाठ से आगे पहे ली
प्र.1 दूध से मक्खन ही नह ब ल्क और भी बहुत कुछ बनाया जाता है। नीचे दूध से बनने वाली कुछ वस्तुओं के चत्र
दए गए ह। द गई शब्द-पहेली म उनके नाम के पहले अक्षर दे दए गए ह। नाम पूरे क जए—
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प छा
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घी श
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पृष्ठ 104 क शब्द-पहेली — ऊपर ग्यारह चत्र, नीचे खाने; गहरे रंग के खाने भरने नह ह।
पहेली म दस पहले अक्षर दए गए ह — खो, द, म, ल, प, छा, म, घी, श और आ। ऊपर दए चत्र से मलाकर पूरे नाम इस प्रकार
बनते ह।
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दया गया पूरा नाम चत्र म क्या है यह बनता कैसे है
अक्षर
खो खोया कटोरे म भरा दानेदार सफ़ेद पदाथ दूध को कड़ाही म दे र तक औटाकर गाढ़ा कया जाता है। इसे
मावा भी कहते ह।
द दही म क मटक म जमा सफ़ेद दही, गुनगुने दूध म जामन डालकर जमाया जाता है।
ऊपर चम्मच
म मक्खन नीले काग़ज़ पर रखी पीली ट कया दही मथने पर ऊपर तैरता है — कृष्ण का प्रय ‘माखन’।
ल ल स्सी गलास म भरा पेय, ऊपर स् ॉ दही म पानी, चीनी या नमक मलाकर फटा जाता है।
प पनीर त्रकोण आकार का ठोस टु कड़ा उबलते दूध म न बू या सरका डालकर फाड़ा जाता है, फर
छानकर दबाया जाता है।
छा छाछ मटक से गलास म उँ डेला जाता मक्खन नकाल लेने के बाद जो बचता है — इसे म ा भी
पतला सफ़ेद तरल कहते ह।
िम िमठाई थाली म सजे चौकोर टु कड़े (बफ़ ) खोया, चीनी और मेवे मलाकर बनाई जाती है।
घी घी बरनी म भरा सुनहरा तरल, ऊपर मक्खन को धीमी आँच पर गरम करके।
चम्मच
श ीखंड कटोरे म गाढ़ा मलाईदार पदाथ, ऊपर दही का पानी नथारकर, उसम चीनी, इलायची और केसर
चम्मच मलाकर।
आ आइस ीम कप म जमी हुई मलाईदार मठाई दूध, मलाई और चीनी मलाकर जमाई जाती है।
एक चत्र और है — गलास म भरा दूध। वह इन सबका ोत है, इस लए उसका अक्षर पहेली म नह दया गया। ऊपर क दस
चीज़ उसी एक दूध से बनती ह।
पहेली भरने का तरीक़ा: हर नाम अपने दए गए अक्षर वाले ख़ाने से शुरू होता है और आगे के ख़ान म एक ख़ाने म
एक अक्षर लखा जाता है — जैसे आ | इ | स | क्र | म (पाँच ख़ाने) और घी (केवल एक ख़ाना, इसी लए उसके
आगे का ख़ाना गहरा रंग दया गया है)। गहरे रंग के ख़ाने बताते ह क यहाँ शब्द ख़त्म। कुछ ख़ाने अंत म ख़ाली भी
बचगे — घबराइए मत।
Try This: इस सूची म अपने घर या प्रदे श क और चीज़ जो ड़ए — पेड़ा, रबड़ी, कलाकंद, रसगुल्ला, कुल्फ़ ,
बासुंद , चक्का, छे ना, मलाई, कढ़ , खीर, पनीर क सब्ज़ी, दही-बड़ा। दस मनट म प ीस नाम भी बन सकते
ह!
खोजबीन के लए — पृष्ठ 104
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो
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पाठ से आगे
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पाठ से आगे प रयोजना
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रeदास ारा र चत कुछ अन्य रचनाएँ खोज व पढ़।
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mह, इस लए शुरुआत के लए नीचे कुछ चुने हुए, कक्षा 6 के लायक़ पद
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यह खोजबीन क ग त व ध है। सूरदास के हज़ार पद उपलब्ध
और ंथ दए गए ह।
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1. सूरदास के प्रमुख ंथ —
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ंथ इसम क्या है
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सूरसागर .c सूरदास की सबसे पिस द्ध रचना। इसी में कृष्ण की बाल -लीलाओं के वे सारे पद है ं िजनक l a
gे िलए वे जाने जाते है ं — यह पाठ भी
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इसी परं परा का पद है ।
ag सूर- एक लंबा पद -गंथ, िजसमें स ृिष्ट और लीलाओं का वणन है।
सारावली
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emअथ पहेली की तरह खोलना पड़ ता है। agl
सािहत्य-
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दृ ष्टकू ट पदों का संगह — ऐसे पद िजनका
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लहरी
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2. पढ़ने-गाने के लए कुछ चुने हुए पद —
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पद क पहली पं क्त कस बारे म है इस पाठ से क्या जुड़ता है
e“मैmया, मोिह दाऊ बहुत a
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gl िखझायो”
बलराम (दाऊ) कृष्ण को चढ़ाते ह क तुम यशोदा यहाँ भी कृ ष्ण माँ से िशकायत कर रहे है ं — और ‘पराया’
a के बेटे नह हो। वाला भाव यहाँ भी है।
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बाल -हठ और बाल -सुल भ िज ासा का सुंद र उदाहरण।
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“मैया कबिहं बढ़ ै ग ी चोटी” नन्हा कृष्ण पूछता है — मेरी चोट कब बड़ी होगी?
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वही माखन — पर इस बार िशकायत नही,ं सौंद य का
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“सोिभत कर नवनीत हाथ म माखन लए कृष्ण क छ व का वणन।
िलए” िचत्र।
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“अब लौं नसानी, अब न अब तक जो समय गँवाया सो गँवाया, आगे नह िवनय के पद — इनसे सूरदास का दू स रा रूप िदखता
गँवाऊँगा। है।
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नसै हौं”
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इसी पाठlकaे ग्वाल -बाल यहाँ िफर िमले ंगे।
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खेल म कौन कसका मा लक? — कृष्ण और
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ग सा थय क नोक-झ क।
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“ऊधौ, मोिह बज िबसरत भ्रमरगीत का पद — गो पय का वरह। थोड़ ा किठन है, पर सूरदास की दू स री बड़ ी उपलिब्ध यही
नाही ं” ‘भमरगीत’ है।
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3. खोजबीन कैसे क जए —
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gरसागर’ या ‘सूर के पद’ नाम क पुस्तक माँ गए। बाल-संस्करण सबसे आसान होते ह।
1. व ालय के पुस्तकालय मa‘सू
2. घर के बड़ से पू छए — कई लोग को सूरदास के भजन ज़बानी याद होते ह। दाद -नानी से एक पद सुनकर लख ली जए।
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कक्षा 6 हद अध्याय 9 मैया म न ह माखन खायो AglaSem · NCERT Solutions
3. बड़ क दे खरेख म भारतवाणी, ई-पाठशाला या हद समय जैसी वश्वसनीय वेबसाइट पर पद ढूँ ढ़ए। जहाँ भी पद मले,
पहले उसका अथ दे खए, फर पं क्तयाँ प ढ़ए।
4. जो पद अ ा लगे, उसे अपनी लेखन-पु स्तका म उतार ली जए और नीचे उसका भाव दो-तीन वाक्य म ल खए।
4. कक्षा म क्या क जए — एक ‘सूर-संध्या’ क जए। हर व ाथ एक पद चुने, उसे गाकर सुनाए और फर एक वाक्य म बताए
क पद म क्या हो रहा है। अंत म सब मलकर दे खए — सूरदास के पद म सबसे ज़्यादा कौन-सी चीज़ आती है? (उत्तर प्रायः
यही नकलेगा — माखन, गाय, माँ और बंसी!)
यह खोजबीन क्य ज़रूरी है: एक पद पढ़कर कसी क व को नह जाना जा सकता। जब आप सूरदास के चार-
पाँच पद पढ़गे, तब आपको उनक अपनी पहचान दखने लगेगी — हर पद म तुक, हर पद के अंत म उनका नाम,
और हर पद म एक छोटा-सा दृश्य जो आँख के सामने खड़ा हो जाता है। यही कसी क व को ‘पहचानना’ कहलाता
है।
Tip: ब्रजभाषा के पद पढ़ते समय ज़ोर से प ढ़ए। ये पद आँख के लए नह , कान के लए बने थे — सूरदास ख़ुद
इन्ह गाकर सुनाते थे।
अध्याय — एक नज़र म
रचना का नाम ‘मैया म न ह माखन खायो’ है और रच यता ह महाक व सूरदास। यह कोई कहानी नह , एक पद है — गाया
जाने वाला छोटा गीत। भाषा ब्रजभाषा है, इस लए ‘पीछे ’ यहाँ ‘पाछे ’ और ‘भोली’ यहाँ ‘भोरी’ बन गया है।
क व से प रचय — पुस्तक बताती है क सूरदास का जन्म 15व शताब्द म हुआ माना जाता है और मृत्यु 16व शताब्द म
हुई। उन्ह ने अपना अ धकांश जीवन मथुरा, गोवधन स हत ब्रज के क्षेत्र म ीकृष्ण के गुणगान म भजन गाते हुए बताया।
उनक अ धकतर क वताओं म ीकृष्ण क बाल-लीलाओं का मनोहारी वणन है। वे दृ बा धत थे, फर भी उनक कल्पना-
श क्त ऐसी थी क दृश्य आँख के सामने खड़ा हो जाता है।
पद म हो क्या रहा है — ग्वाल-बाल ने यशोदा से शकायत कर द क कान्हा ने माखन चुराकर खाया। कृष्ण सफ़ाई दे ते ह —
सुबह होते ही तो मुझे गाय के पीछे मधुबन भेज दया गया, चार पहर म बंसीवट पर भटकता रहा और साँझ पड़े घर लौटा; फर
माखन खाने का समय कहाँ था?
कृष्ण के तीन तक — (1) म छोटा बालक हूँ, मेरी बाँह छोट ह, इतने ऊँचे छ के तक हाथ कैसे पहुँचता; (2) ग्वाल-बाल
मुझसे बैर रखते ह, उन्ह ने ज़बरदस्ती मेरे मुँह पर माखन लपेट दया; (3) माँ, तू बहुत भोली है, इन्ह क बात पर वश्वास कर
लेती है।
पद का चरम — कृष्ण रूठकर लाठ -कंबल लौटाने लगते ह — “ये ले अपनी लकु ट कम रया, बहुत ह नाच नचायो।” यह
सुनकर यशोदा हँस पड़ती ह और उन्ह गले से लगा लेती ह — “सूरदास तब बहँ स जसोदा, लै उर कंठ लगायो।” झगड़ा
वात्सल्य म बदल जाता है।
काव्य- वशेषताएँ — पूरे पद म हर पं क्त के अंत म तुक मलता है (खायो–पठायो–आयो–पायो–लपटायो…), अं तम पं क्त म
क व ने अपना नाम ‘सूरदास’ डाला है, और पूरा पद कृष्ण के अपने मुँह से कहा गया है — यानी यह वात्सल्य रस का पद है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
पद का अथ पद क पं क्त अपना एक वाक्य
शब्द
मैया माँ (बजभाषा का प्यारा संबोधन) “मैया म न ह माखन मैया, आज मुझे अपने हाथ क खचड़ी
खायो।” खला दो।
माखन मक्खन “मैया म न ह माखन ताज़ी रोट पर माखन लगाकर खाने म बड़ा
खायो।” मज़ा आता है।
भोर सुबह, पातःकाल “भोर भयो गैयन के भोर होते ही च ड़याँ चहचहाने लग ।
पाछे …”
गैयन गायों (के ) “भोर भयो गैयन के गाँव म गैयन के गले क घं टयाँ दूर तक
पाछे …” सुनाई दे ती ह।
पाछे पीछे “भोर भयो गैयन के म अपने बड़े भाई के पाछे -पाछे मेले तक
पाछे …” गया।
मधुबन मथुर ा के पास यमुना के िकनारे का एक वन “…मधुबन मो ह मधुबन क छाया म गाय दन भर चरती रहती
पठायो।” ह।
पठायो भेज िदया “…मधुबन मो ह दाद ने मुझे दुकान से सौदा लाने पठायो
पठायो।” (भेजा)।
पहर समय मापने की एक इकाई — तीन घंटे का एक पहर, “चार पहर बंसीवट दो पहर बीत जाने पर सूरज ठ क सर पर आ
िदन-रात में आठ पहर भटक्यो…” जाता है।
बंसीवट एक वट (बरगद) वृक्ष, िजस पर चढ़ कर कृ ष्ण बंस ी “चार पहर बंसीवट बंसीवट क कहानी हम दादाजी ने सुनाई थी।
बजाकर गायों को बुल ाते थे भटक्यो…”
ब हयन बाँह,े ं भुजाएँ “म बालक ब हयन को छोटे ब े क ब हयन इतनी छोट होती ह
छोटो…” क वह मेज़ तक नह पहुँचता।
छ को छी ंका — रिस्सयों का बुना गोल जाल, जो छत से “…छ को के ह ब ध माँ ने दही क मटक छ के पर टाँग द ।
लटकाकर उसमें दू ध -दही रखा जाता है पायो।”
के ह ब ध िकस पकार, िकस तरह “…छ को के ह ब ध इतना भारी पत्थर तुमने के ह ब ध ( कस
पायो।” तरह) उठाया?
ग्वाल-बाल गाय पालने वालों के बच्चे, कृ ष्ण के संग ी-साथी “ग्वाल-बाल सब बैर परे ग्वाल-बाल दन भर गाय के साथ जंगल म
ह…” रहते थे।
बरबस ज़बरदस्ती, िबना मरज़ी के “…बरबस मुख दोस्त ने बरबस मुझे मंच पर गाने के लए
लपटायो।” खड़ा कर दया।
भोरी भोली, सीधी-सादी “तू माता मन क अ त मेरी छोट बहन इतनी भोरी है क हर बात
भोरी…” पर वश्वास कर लेती है।
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पद का अथ पद क पं क्त अपना एक वाक्य
शब्द
प तयायो िवश्वास कर िलया, सच मान िलया “…इनके कहे उसने बना जाँचे ही अफ़वाह पर प तयायो
प तयायो।” ( वश्वास कर लया)।
जय मन, जी, हृदय “ जय तेरे कछु भेद उसके जय म अब भी कोई बात खटक रही
उप ज ह…” है।
परायो जायो पराया जन्मा हआ
ु , िकसी और का बेटा “…जा न परायो अपने ही घर म कसी को परायो समझना
जायो।” ठ क नह ।
लकु ट लाठी और छोटा कं बल (कमली), िजन्हे ं ले क र कृ ष्ण “ये ले अपनी लकु ट चरवाहा लकु ट कम रया लेकर सुबह ही
कम रया गाय चराने जाते थे कम रया…” नकल जाता है।
बहँ स मुस काकर, हँस कर “सूरदास तब बहँ स माँ बहँ स पड़ और मेरा सारा गुस्सा उड़
जसोदा…” गया।
उर कंठ छाती और गले से लगा िलया “…लै उर कंठ वष बाद मले पता ने बेटे को उर कंठ लगा
लगायो लगायो।” लया।
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