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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 10 परीक्षा

AglaSem पर कक्षा 6 हिंदी पाठ 10 परीक्षा (मल्हार) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 (Malhar).
NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 10 परीक्षा - Page 1 of 40

About NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 10 परीक्षा

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Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 10 परीक्षा – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 10: परी ा

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

105 – 121 23 36 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 39 pages

Page 2

कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · हद · मल्हार

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 10: परीक्षा
NCERT कक्षा 6 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 10 परीक्षा के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह एक कहानी है, जसके लेखक प्रेमचंद (1880–
1936) ह। दे वगढ़ रयासत के बूढ़े द वान सरदार सुजान सह अपना उत्तरा धकारी खोजने के लए उम्मीदवार क एक महीने लंबी छपी हुई परीक्षा लेते
ह और अंत म पं डत जानक नाथ को चुनते ह। पृष्ठ 105 से 121 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से, शीषक, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के
लए, खोजबीन, कहानी क रचना, समस्या और समाधान, मन के भाव, अ भनय, वपरीताथक शब्द, कहावत, अनुमान या कल्पना से, व ापन, आगे
क कहानी, आपक बात, नया-पुराना, वाद- ववाद, अच्छाई और दखावा, प रधान तरह-तरह के, आपक परीक्षाएँ, आज क पहेली, झरोखे से और
खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

मल्हार (कक्षा 6) 105 – 121

खं ड प्रश्न

23 36

माध्यम

हन्द

मेरी समझ से — पृष्ठ 112
पाठ से

पाठ से

प्र.1 ★
(क) आपक समझ से नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए— (1)
महाराज ने द वान को ही उनका उत्तरा धकारी चुनने का काय उनके कस गुण के कारण स पा? • सादगी •
उदारता • बल • नी तकुशलता

सही उत्तर है — नी तकुशलता। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
कहानी क दूसरी पं क्त म ही इसका प्रमाण मौजूद है —

“राजा साहब अपने अनुभ वशील नीितकु शल दीवान का बड़ ा आदर करते थे ।”

इसीिलए वे िकसी और पर नही ं, दीवान साहब पर ही यह भार डालते है ं िक नया दीवान वे स्वयं खोजें।

नी तकुशल का अथ है — नी त चलाने म नपुण, यानी सही-ग़लत परखकर समझदारी से नणय लेने वाला। नया द वान चुनना ठ क
यही काम है, इस लए महाराज ने यह काम उन्ह स पा।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

नी तकुशलता सही ★ पाठ म यही शब्द द वान के लए आया है — “अनुभवशील नी तकुशल द वान”। परखने और चुनने का
काम नी त-कुशल व्य क्त को ही स पा जाता है।

सादगी ग़लत सादगी क चचा द वान के बारे म है ही नह । ‘पुरानी सादगी’ शब्द तो उम्मीदवार के पहनावे के लए आया
है — “कोई पुरानी सादगी पर मटा हुआ।”

उदारता ग़लत उदारता उस गुण का नाम है जसे द वान साहब ढूँ ढ़ रहे थे (जानक नाथ म मला), न क वह गुण जसके
कारण महाराज ने उन्ह यह काम स पा।

बल ग़लत बल क शत व ापन म उम्मीदवार के लए रखी गई थी — “हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है।” द वान साहब
तो स्वयं बूढ़े और श क्तहीन हो चुके थे।

ऐसे प्रश्न कैसे हल कर: प्रश्न म दे खए क गुण कसका पूछा गया है और कस काम के लए। यहाँ गुण द वान का है
और काम है ‘उत्तरा धकारी चुनना’। जो वकल्प उम्मीदवार से जुड़े ह (बल, सादगी) या जो बाद म मले गुण ह
(उदारता), वे अपने-आप कट जाते ह।

प्र.2 (2) द वान साहब ारा नौकरी छोड़ने के नश्चय का क्या कारण था? • परमात्मा क याद • राज-काज सँभालने
योग्य श क्त न रहना • बदनामी का भय • चालीस वष क नौकरी पूरा हो जाना

सही उत्तर है — राज-काज सँभालने योग्य श क्त न रहना। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।
द वान साहब ने महाराज से ख़ुद यही कारण कहा —

“अब मेरी अवस्था भी ढल गई, राज-काज सँभ ालने की शिक्त नहीं रही।”

बाक़ तीन बात कहानी म आती तो ह, पर वे नश्चय का कारण नह ह — वे या तो उससे पहले क स्थ त ह या उसके बाद का डर।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

राज-काज सँभालने सही ★ यही द वान साहब का अपना कहा हुआ कारण है। श क्त न रहने से ही बाक़ सारी चताएँ पैदा
योग्य श क्त न रहना हुईं।

परमात्मा क याद ग़लत “बूढ़े हुए तो परमात्मा क याद आई” — यह बुढ़ापे क मनः स्थ त बताता है, नौकरी छोड़ने का
तक नह । तक तो उन्ह ने आगे गनाया है।

बदनामी का भय ग़लत “कह भूल-चूक हो जाय तो बुढ़ापे म दाग लगे” — यह श क्त न रहने का प रणाम है, कारण
नह । पहले श क्त गई, तभी भूल-चूक का डर आया।

चालीस वष क नौकरी पूरा ग़लत चालीस साल क सेवा का ज़क्र वे अपने प रचय के रूप म करते ह — “दास ने श्रीमान क
हो जाना सेवा चालीस साल तक क ।” वष क गनती पूरी होने क कोई शत कहानी म नह है।

ध्यान र खए: ऐसे प्रश्न म ‘कारण’ और ‘प रणाम’ को अलग-अलग पहचानना ज़रूरी है। कारण पहले आता है,
प रणाम बाद म। श क्त न रहना कारण है; बदनामी का भय उसका प रणाम।

प्र.3 (ख) अब अपने मत्र के साथ चचा क जए क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?

यह चचा का प्रश्न है। यहाँ सफ़ “मने यह चुना” कहना काफ़ नह — बताना यह है क कहानी क कौन-सी पं क्त आपके उत्तर
का प्रमाण है और बाक़ वकल्प क्य नह चलते।
अ चचा म तीन बात ज़रूर होनी चा हए —

आपने कौन-सा वकल्प चुना;
कहानी क वह पं क्त जो आपके उत्तर को सद्ध करती है;
कम-से-कम एक ग़लत वकल्प को हटाने का कारण।

नमूना उत्तर:
“पहले प्रश्न म मने नी तकुशलता चुनी। मेरा प्रमाण यह पं क्त है — ‘राजा साहब अपने अनुभवशील नी तकुशल द वान का बड़ा
आदर करते थे।’ नया द वान चुनना परखने का काम है, और परखना नी त-कुशल आदमी ही कर सकता है। ‘बल’ वाला वकल्प मने
इस लए हटाया क्य क बल क शत तो व ापन म उम्मीदवार के लए रखी गई थी, द वान साहब के लए नह ।
दूसरे प्रश्न म मने राज-काज सँभालने योग्य श क्त न रहना चुना। मेरा प्रमाण है — ‘अब मेरी अवस्था भी ढल गई, राज-काज
सँभालने क श क्त नह रही।’ ‘बदनामी का भय’ मने इस लए हटाया क्य क वह डर तभी पैदा हुआ जब श क्त चली गई — यानी
वह कारण नह , नतीजा है।”

चचा से क्या मलेगा: हो सकता है आपके कसी साथी ने ‘बदनामी का भय’ चुना हो। उससे झगड़ने के बजाय पृष्ठ
105 क पहली पं क्तयाँ साथ खोलकर प ढ़ए और पू छए — पहले क्या हुआ? जो उत्तर पाठ क पं क्त के क्रम से
मेल खाए, वही सट क है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा
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शीषक — पृष्ठ 112
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पाठ से
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पाठ से ले ख न

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(क) आपने जो कहानी पढ़ है, इसका नाम प्रेमचंद ने ‘परीक्षा’ रखा है। अपने समूह म चचा करके ल खए क
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प्र.1

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उन्ह ने इस कहानी का यह नाम क्य दया होगा? अपने उत्तर के कारण भी ल खए।
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प्रेमचंद ने यह नाम इस लए रखा क्य क पूरी कहानी एक परीक्षा ही है — पर ऐसी परीक्षा जसम न प्रश्न-पत्र है, न कमरा, न घंट ।

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उम्मीदवार को पता ही नह था क उनक परीक्षा कब हो रही है।

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नाम को सही ठहराने वाले चार कारण —
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g सुशो भत ह गे।” यानी लेखक ने
1. व ापन.cम ही परीक्षा शब्द है — “जो महाशय इस परीक्षा म पूरे उतरगे, वे इस उच्च पदaपर
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se कहानी के भीतर से ही उठाया है।
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शीषक
2. परीक्षा पूरे एक महीने चली — “एक महीने तक उम्मीदवार के रहन-सहन, आचार- वचार क दे खभाल क जाएगी।” जो जाँच

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कताब से नह , आचरण से होती है, उसे ही असली परीक्षा कहते ह।

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3. परीक्षक छपा हुआ था — “मनुष्य का वह बूढ़ा जौहरी आड़ म बैठा हुआ दे ख रहा था क इन बगुल म हंस कहाँ छपा हुआ

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gl — दरबार सजा, उम्मीदवार के “कलेजे धड़क रहे थे”, और फर एक नाम पुकारा
है।” और अं तम परचा तो कसान का वेश धरकर स्वयं सुजान सह ने लया।
4. प रणाम भी परीक्षा क तरह घो षतaहुआ
गया — पं डत जानक नाथ।

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असली बात: कहानी यह सखाती है क परीक्षा वह नह जो हम जानकर दे ते ह, ब ल्क वह
a s emहै जो हम बना बताए ले
co है। जो लोग एक महीना ‘अच्छा दखने’ म लगे रहे, वे उसी क्षण फेल aहोgगएl जब क चड़ म फँसी गाड़ी
ली .जाती
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aseदे खकर आँख मूँदकर आगे बढ़ गए। ‘परीक्षा’ नाम इसी वडंबना को पकड़ लेता है।
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प्र.2 (ख) य द आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम दे ना हो तो क्या नाम दगे? आपने यह नाम क्य सोचा, यह भी

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बताइए?

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नया शीषक सोचते समय दो बात दे खए — (1) नाम कहानी क सबसे कद्र य बात को पकड़े, और (2) वह कहानी का अंत खोल
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न दे । नीचे कुछ नाम और उनके कारण दए गए ह; इनम से कोई भी चुना जा सकता है या इन्ह क तरह अपना नाम बनाइए।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

संभा वत यह नाम क्य कहानी का आधार
शीषक

बग ल
ु ों में हंस िदखावटी लोगों की भीड़ में एक स च्चा गुणी व्यिक्त — पूरी कहानी “इन बगुल म हंस कहाँ छपा हुआ है”
यही है।

असली परखवाला जो बाहर से नही,ं भीतर से आदमी परख ले — सुजानिसंह वही “मनुष्य का वह बूढ़ा जौहरी आड़ म बैठा हुआ
‘जौहरी’ है।
ं दे ख रहा था”

कीचड़ में फँ सी कहानी का िनण यक क्षण यही है; यही ं स च्चा उ म्मीदवार पहचाना नाले म गाड़ी अटकने और युवक के उसे
गाड़ी गया। नकालने का प्रसंग

गहरे पानी में मोती कहानी की कहावत ही शीषक बन जाती है — मेहनत करने वाले को “गहरे पानी म पैठने से ही मोती मलता है।”
ही फल िमलता है।

दया और सुजानिसंह ने िजन दो गुणों की तलाश की थी, नाम उ न्ही ं का हो। “ जसके हृदय म दया हो और साथ-साथ
आ त्मबल आत्मबल”

नमूना उत्तर: “म इस कहानी का नाम ‘बगुल म हंस’ रखूँगा। कारण यह है क दे वगढ़ म सैकड़ उम्मीदवार आए और सब अपने को
उजला दखाने म लगे रहे — ठ क बगुले क तरह, जो सफ़ेद तो होता है पर मछली ताकता रहता है। इन सबके बीच एक ही सच्चा
आदमी था, जानक नाथ। प्रेमचंद ने ख़ुद यह उपमा कहानी म द है, इस लए यह नाम कहानी के भीतर से नकला हुआ लगता है और
अंत का रहस्य भी नह खोलता।”

Tip: ऐसा नाम मत चु नए जो उत्तर बता दे , जैसे ‘जानक नाथ द वान बने’। अच्छा शीषक पढ़ने क ज ासा बढ़ाता
है, बुझाता नह ।

पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 112 और 113
पाठ से

पाठ से भावाथ

प्र.1 कहानी म से चुनकर यहाँ कुछ पं क्तयाँ द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? — “इस पद के लए ऐसे पुरुष क आवश्यकता थी, जसके हृदय म दया हो और साथ-
साथ आत्मबल। हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आप त्त का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले
संसार म कम ह और जो ह, वे क त और मान के शखर पर बैठे हुए ह।”

सरल अथ — द वान के पद के लए ऐसा व्य क्त चा हए था जसम दो गुण एक साथ ह — दया और आत्मबल। दया यानी दूसर
का दुख दे खकर पघल जाने वाला उदार हृदय; आत्मबल यानी मुसीबत आने पर डटकर, हम्मत से उसका सामना करने क मन क
ताक़त। सुजान सह कहते ह क दोन गुण एक ही आदमी म मलना दुलभ है, और जनम मल जाते ह वे संसार म यश और सम्मान
के सबसे ऊँचे स्थान पर पहुँच जाते ह।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

गुण पं क्त म उसक प रभाषा कहानी म उसका प्रमाण

दया / उदार “हृदय वह जो उदार हो” घायल होने पर भी युवक िकसान की मदद के िलए रुका — “मैं तुम्हारी
हृ दय गाड़ ी िनकाल दू ँ?”

आ त्मबल “आत्मबल वह जो आप त्त का वीरता के साथ “वह घुटने तक ज़ मीन में गड़ गया, ले िकन िहम्मत न हारी। उसने िफर
सामना करे” ज़ ोर िकया।”

दोन गुण साथ क्य ज़रूरी ह: केवल दया हो तो आदमी दुखी तो होगा, पर क चड़ म उतरेगा नह — बाक़
खलाड़ी शायद मन म कसान के लए दुख लेकर ही नकल गए। और केवल आत्मबल हो तो ताक़त तो होगी, पर वह
ग़रीब के काम नह आएगी। दया बताती है क क्या करना चा हए, आत्मबल उसे कर दखाता है। इसी लए सुजान सह
ने कहा क ऐसे लोग “संसार म कम ह”।

अपने शब्द म क हए तो: अच्छा शासक वही है जो ग़रीब का दद भी समझे और उस दद को दूर करने के लए ख़ुद
क चड़ म उतरने से भी न घबराए।

सोच- वचार के लए — पृष्ठ 113
पाठ से

पाठ से ले ख न

प्र.1 (क) नौकरी क चाह म आए लोग ने नौकरी पाने के लए कौन-कौन से प्रयत्न कए?

उम्मीदवार ने असल म सुधरने के बजाय एक महीने तक अ ा दखने के प्रयत्न कए। कहानी उनक पोल एक-एक करके खोलती
है —

कसने पहले क्या था परीक्षा के महीने म क्या करने लगा

िमस्टर ‘अ’ नौ बजे दन तक सोया करते थे सुबह-सुबह बगीचे में टहलकर ऊषा (भोर) का दशन करने लगे

िमस्टर ‘द’, ‘स’ और घर पर नौकर क नाक म दम रहता नौकरों से भी ‘आप’ और ‘जनाब’ कहकर बात करने लगे
‘ज’ था

िमस्टर ‘ल’ कताब से घृणा थी बड़ े-बड़ े गंथ दे खने-पढ़ ने में डू बे रहने लगे

सभी उम्मीदवार साधारण बोल-चाल “िजससे बात कीिजए , वह नम ता और सदाचार का दे वता बना मालूम दे ता
था।”

इनके अलावा —

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वेश-भूषा से प्रभाव डालने क को शश — “रंगीन एमामे, चोगे और नाना प्रकार के अंगरखे और कंटोप दे वगढ़ म अपनी सज-
धज दखाने लगे।”
ड ी का सहारा — व ापन म ग्रेजुएट होने क शत नह थी, फर भी सबसे अ धक संख्या ग्रेजुएट क थी, “क्य क सनद क
कैद न होने पर भी सनद से परदा तो ढका रहता है।”
खेल के बहाने हुनर दखाना — नए फैशनवाल ने हॉक का खेल रखवाया — “यह भी तो आ खर एक व ा है। इसे क्य
छपा रख। संभव है, कुछ हाथ क सफ़ाई ही काम कर जाए।”

पर ये सब प्रयत्न वफल क्य हुए: क्य क ये सब बाहरी थे और थोड़े दन के लए ओढ़े हुए थे। उनक अपनी सोच
यही थी — “एक महीने का झंझट है, कसी तरह काट ल, कह काय सद्ध हो गया तो कौन पूछता है?” जस दन
असली परीक्षा आई — क चड़ म फँसी गाड़ी — उस दन कोई ग्रंथ, चोगा या हॉक काम न आई।

प्र.2 (ख) “उसे कसान क सूरत दे खते ही सब बात ात हो गईं।” खलाड़ी को कौन-कौन सी बात पता चल गईं?

युवक ने कसान का चेहरा दे खते ही बना एक शब्द पूछे यह सब समझ लया —

कसान क अनाज से भरी गाड़ी नाले क चढ़ाई पर फँसी है और वह अपने-आप ऊपर नह चढ़ पा रही;
नाले म क चड़ है, चढ़ाई ऊँची है, बोझ अ धक और बैल कमज़ोर ह — इस लए गाड़ी बार-बार खसककर नीचे आ जाती है;
कसान बहुत दे र से अकेला जूझ रहा है और थक चुका है — इसी लए युवक कहता है, “मालूम होता है, तुम यहाँ बड़ी दे र से
फँसे हो”;
वहाँ कोई सहायक नह है और गाड़ी छोड़कर वह मदद खोजने भी नह जा सकता;
कसान घबराया और नराश है, फर भी संकोच के कारण मदद माँग नह पा रहा — “ कसान ने उनक तरफ़ सहमी हुई
आँख से दे खा; परंतु कसी से मदद माँगने का साहस न हुआ।”

यह पं क्त क्य महत्त्वपूण है: बाक़ खला ड़य ने भी कसान को दे खा था — “ खला ड़य ने भी उसको दे खा मगर
बंद आँख से, जनम सहानुभू त न थी।” यानी दे खना सबने दे खा, पर समझा केवल उसी ने जसके हृदय म दया थी।
‘सब बात ात हो गईं’ आँख क नह , संवेदनशील मन क दे न है।

Did you know? ‘बंद आँख से दे खना’ प्रेमचंद का बड़ा तीखा वाक्य है — आँख खुली थ , पर मन बंद था। यही
इस कहानी का असली अंतर है।

प्र.3 (ग) “मगर उन आँख म सत्कार था, इन आँख म ईष्या।” कनक आँख म सत्कार था और कनक आँख म
ईष्या थी? क्य ?

सत्कार था — रयासत के कमचा रय और रईस क आँख म। ईष्या थी — द वानी के उम्मीदवार क आँख म।

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कौन आँख म क्य
क्या

िरयासत के स त्कार उनका इस पद से कोई स्वाथ नह था। उन्ह इतना ही दे खना था क रयासत को योग्य द वान मला या
कमचारी और (आदर ) नह — और जानक नाथ का चुनाव सुनकर वे संतुष्ट थे। जसे अपना कुछ नह खोना पड़ता, वह दूसरे
रईस क सफलता पर सहज ही आदर करता है।

दीवानी के ईष्य वे पूरा महीना इसी पद के लए मेहनत, दखावा और प्रतीक्षा करते रहे — “उम्मीदवार के कलेजे धड़क
उम्मीदवार (जलन) रहे थे।” जस पद को हर एक अपना मान रहा था, वह कसी और को मल गया, इस लए आदर क
जगह जलन आ गई।

वाक्य क बनावट दे खए: प्रेमचंद ने ‘उन’ और ‘इन’ का प्रयोग करके दोन समूह को आमने-सामने खड़ा कर दया
है — एक ही ख़बर, पर दो बलकुल उलट प्र त क्रयाएँ। इससे पता चलता है क कसी क सफलता पर हमारी आँख
क्या कहती ह, यह इस बात पर नभर करता है क उसम हमारा अपना स्वाथ जुड़ा था या नह ।

खोजबीन — पृष्ठ 113
पाठ से

पाठ से पाठ से खोज

प्र.1 कहानी म से वे वाक्य खोजकर ल खए जनसे पता चलता है क— (क) शायद युवक बूढ़े कसान क अस लयत
पहचान गया था।

ये रहे वे वाक्य (पृष्ठ 109 के अंत म) —

“युवक ने िकसान की तरफ़ गौर से दे खा। उसके मन में एक संदे ह हुआ , क्या यह सुजानिसंह तो नहीं है?ं आवाज़

िमलती है, चे हरा-मोहरा भी वही।”

इनसे कैसे पता चलता है —

“गौर से दे खा” — अब तक वह कसान को केवल एक मुसीबतज़दा आदमी समझ रहा था; इनाम क बात सुनते ही उसने
ध्यान से चेहरा पढ़ा।
“क्या यह सुजान सह तो नह ह?” — यह सीधा-सीधा संदेह है, यानी पहचान क शुरुआत।
“आवाज़ मलती है, चेहरा-मोहरा भी वही” — यह उसके संदेह का कारण है; उसने दो प्रमाण जोड़े — स्वर और चेहरा।

इसके तुरंत बाद वाला वाक्य इस पहचान को और पक्का करता है — कसान भी उसक ओर “तीव्र दृ ष्ट” से दे खता है, “शायद
उसके दल के संदेह को भाँप गया” और मुस्कराकर कहावत कह दे ता है, “गहरे पानी म पैठने से ही मोती मलता है।”

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा
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संकेत कहाँ छपा था: कसान ने साधारण धन्यवाद नह दया, ब ल्क कहा — “नारायण चाहगे तो द वानी
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आपको ही मलेगी।” एक अनजान कसान को यह कैसे पता क सामने खड़ा आदमी द वानी काeउम्मीदवार
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यही वाक्य यु.वcकo के मन म संदेह का बीज बोता है। gl a
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(ख) नौकरी के लए आए लोग कसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे।
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ये रहे वे वाक्य —

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1. “लोग समझते थे िक एक महीने का झंझ ट है, िकसी तरह काट ले,ं कही ं काय िसद्ध हो गया तो कौन पूछता
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है?”

a g 2. “हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुिद्ध के अनुसार अच् छे रूप में िदखाने की कोिशश करता था।”

ं संभ व है, कु छ हाथों की सफ़ाई ही काम कर जाए।”
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3. “यह भी तो आिखर एक िव ा है। इसे क्यों िछपा रखे।
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4. “सबसे िवशेष संख्या गेजएु टों की थी, क्योंिकmसनद की कै द न होने पर भी सनद से परदा तो ढका रहता है।”
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ये वाक्य क्या सद्ध करते ह —

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पहला वाक्य सबसे सीधा प्रमाण है। “कौन पूछता है?” का अथ है — नौकरी मल जाने के बाद फर वही पुरानी आदत लौट

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आएँगी। यानी सुधार दखावट था, स्थायी नह ।
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.c वाक्य बताता है क लक्ष्य ‘अच्छा होना’ नह , ‘अच्छा दखना’ था। a g
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se तीसरा वाक्य दखाता है क हॉक का खेल भी शौक़ से नह , नंबर बटोरने क चाल के रूप म खेला जा रहा था।
दूसरा

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agl चौथा वाक्य बताता है क डग्री तक ान के लए नह , कमी छपाने के परदे क तरह लाई गई थी।

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Tip: ‘खोजबीन’ वाले प्रश्न म उत्तर अपने शब्दco g l a
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emक वह वाक्य प्रश्न क बात को कैसे सद्ध करता है। परीक्षा म पूरे अंक
मत ल खए — पाठ का वाक्य ज्य -का-त्य उद्धरण च म

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ल खए, और नीचे एक पं क्त म समझाइए
इसी तरह मलते ह।

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m रचना — पृष्ठ 113 ase
कहानीoक
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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से

पाठ से भाषा- शल्प

प्र.1 “लोग पसीने से तर हो गए। खून क गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी।” इन वाक्य को पढ़कर आँख के
सामने थकान से चूर खला ड़य का चत्र दखाई दे ने लगता है। यह चत्रात्मक भाषा है। कहानी को एक बार ध्यान
से प ढ़ए। आपको इस कहानी म और कौन-कौन सी वशेष बात दखाई दे रही ह? अपने समूह म मलकर उनक
सूची बनाइए।

‘परीक्षा’ क भाषा म कई वशेष बात ह। नीचे उन्ह नाम दे कर, पाठ के उदाहरण के साथ सूचीबद्ध कया गया है — अपने समूह क
सूची इसी ढाँचे पर बनाइए।

वशेष बात पाठ से उदाहरण वह क्या असर करती है

िचत्र ात्मक भाषा “लोग पसीने से तर हो गए। खून क गरमी आँख और चेहरे से झलक दृ श्य आँखों के सामने खड़ ा हो जाता है
रही थी।”

उपमा (जैस ा / मानो “ऐसा जान पड़ता था क कोई लहर बढ़ती चली आती है”; “रोक लेते खेल का जोश और डटाव एक िचत्र बन
/ तरह) थे क मानो लोहे क द वार है” जाता है

व्यंग्य “गद कसी दफ्तर के अप्र टस क तरह ठोकर खाने लगी” हँस ी के साथ समाज पर चोट भी करता है

पतीक “इन बगुल म हंस कहाँ छपा हुआ है”; “मनुष्य का वह बूढ़ा िबना कु छ कहे पूरी बात कह दे ता है —
जौहरी” िदखावा बनाम असिलयत

मुहावरे तहलका मचा दे ना, नाक म दम होना, हाथ क सफ़ाई, दन काटना भाषा छोटी और असरदार हो जाती है
पहाड़ हो जाना, कलेजा धड़कना, नसीब जागना

कहावत “गहरे पानी म पैठने से ही मोती मलता है।” कहानी का संदे श एक पंिक्त में बाँध दे ती है

सजीव संवाद “म तुम्हारी गाड़ी नकाल दूँ ?” — “हुजूर, म आपसे कैसे क ँ?” पात्रों का स्वभाव उनके बोलने से ही खुल
जाता है

िवरोध की जोड़ी “मगर उन आँख म सत्कार था, इन आँख म ईष्या”; “ व ा का कम, दो बातों का अंतर एक ही साँस में स्पष्ट हो
परंतु कतव्य का अ धक” जाता है

नामों के बदले मस्टर ‘अ’, ‘द’, ‘स’, ‘ज’, ‘ल’ बताता है िक ये कोई ख़ास व्यिक्त नही ं —
अक्षर ऐसे लोग हर जगह िमलते है ं

अंत में चौंक ाने जस ‘ कसान’ क गाड़ी नकाली गई, वही परीक्षक सुजान सह नकले पाठक अंत तक बँधा रहता है
वाला मोड़

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समूह-काय कैसे क जए: सबसे पहले हर सदस्य कहानी के 2–3 पृष्ठ बाँट ले और उनम से ऐसे वाक्य रेखां कत करे
जो कोई चत्र बनाते ह या साधारण बात को नए ढं ग से कहते ह । फर सब वाक्य एक जगह लखकर ऊपर क तरह
श्रे णय म बाँ टए। इस तरह सूची अपने-आप बन जाएगी।

समस्या और समाधान — पृष्ठ 114
पाठ से

पाठ से ले ख न

प्र.1 (क) महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्ह ने इसका क्या समाधान खोजा?

समस्या — उनके अनुभवी और नी तकुशल द वान सरदार सुजान सह बूढ़े हो चुके थे और नौकरी छोड़ना चाहते थे। महाराज ने
“बहुत समझाया”, पर वे नह माने। ऐसे म डर यह था क रयासत ऐसे योग्य द वान से वं चत हो जाएगी और नया द वान कहाँ से
आए।
समाधान — महाराज ने बड़ी चतुराई से दोन बात साध ल —

“हारकर उनकी पाथना स्वीकार कर ली; पर शत यह लगा दी िक िरयासत के िलए नया दीवान आप ही को

खोजना पड़ ेगा।”

द वान साहब क इच्छा का आदर भी हो गया — उन्ह छु मल गई;
और रयासत को योग्य उत्तरा धकारी भी मल गया — क्य क चुनने का काम उसी के हाथ म गया जो सबसे अच्छ परख
रखता था।

यह समाधान बु द्धमानी क्य है: महाराज ने अपना ही कोई आदमी नह थोपा। उन्ह ने सोचा क जौहरी ही हीरा
पहचानता है — चालीस साल राज-काज चलाने वाला व्य क्त ही जानता है क इस पद पर कन गुण क ज़रूरत है।
यही कारण है क आगे चलकर परीक्षा भी इतनी असाधारण हुई।

प्र.2 (ख) द वान के सामने क्या समस्या थी? उन्ह ने इसका क्या समाधान खोजा?

समस्या — द वान साहब को ऐसा उत्तरा धकारी खोजना था जसम दया और आत्मबल दोन ह । क ठनाई यह थी क ये गुण न
कसी डग्री से नापे जा सकते ह, न बातचीत से — क्य क हर उम्मीदवार साक्षात्कार के समय अच्छा ही बोलता है।
समाधान — उन्ह ने तीन चरण क एक अनोखी परीक्षा रची —

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1. व ापन म ही शत बदल द — “यह ज़रूरी नह है क वे ग्रेजुएट ह , मगर हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है… व ा का कम, परंतु
कतव्य का अ धक वचार कया जायेगा।” यानी परीक्षा कताब क नह , आचरण क होगी।
2. एक महीने क छपी हुई नगरानी — “एक महीने तक उम्मीदवार के रहन-सहन, आचार- वचार क दे खभाल क जाएगी।” वे
स्वयं आड़ म बैठकर दे खते रहे — “इन बगुल म हंस कहाँ छपा हुआ है।”
3. वेश बदलकर आ ख़री परचा — उन्ह ने कसान का रूप धरा और अँधेरे म गाड़ी को नाले म फँसा दखाया। जो उम्मीदवार
वहाँ से बंद आँख से नकल गए, वे फेल हो गए; जो घायल पाँव लेकर भी क चड़ म उतरा, वह पास हो गया।

Check it yourself: ध्यान द जए, उन्ह ने कसी से एक भी प्रश्न नह पूछा। उन्ह ने उम्मीदवार को ऐसी
प र स्थ त म डाल दया जहाँ आदमी अपना असली रूप दखा ही दे ता है। यही इस परीक्षा क सबसे बड़ी वशेषता
है।

प्र.3 (ग) नौकरी के लए आए लोग के सामने क्या समस्या थी? उन्ह ने इसका क्या समाधान खोजा?

समस्या — सैकड़ उम्मीदवार थे और पद केवल एक। ऊपर से यह भी साफ़ नह था क परखा क्या जाएगा — न कोई प्रश्न-पत्र, न
साक्षात्कार क तारीख़, बस इतना क “रहन-सहन, आचार- वचार क दे खभाल क जाएगी।” यानी पूरे एक महीने, हर घड़ी, ख़ुद
को योग्य सद्ध करना था।
उन्ह ने जो समाधान खोजा — उन्ह ने अच्छा बनने के बजाय अच्छा दखने का रास्ता चुना:

दनचया बदल ली — मस्टर ‘अ’ नौ बजे तक सोने के बजाय भोर म टहलने लगे;
व्यवहार बदल लया — जो नौकर क नाक म दम रखते थे, वे ‘आप’ और ‘जनाब’ कहने लगे;
आदत ओढ़ ल — कताब से घृणा करने वाले मस्टर ‘ल’ मोटे -मोटे ग्रंथ म डू बे रहने लगे;
सज-धज और सनद का सहारा लया, और हॉक खेलकर हुनर दखाना चाहा।

यह समाधान ग़लत क्य था: उन्ह ने समस्या को एक महीने का नाटक समझ लया — “एक महीने का झंझट है,
कसी तरह काट ल।” पर परीक्षा का असली प्रश्न वहाँ आया जहाँ कोई दे ख नह रहा था — अँधेरे नाले के पास।
ओढ़ा हुआ सदाचार वह उतर गया, क्य क दखावा उतना ही टकता है जतनी दे र कोई दे ख रहा हो। सच्चा गुण
तभी काम आता है जब कोई न दे ख रहा हो — जानक नाथ के साथ यही हुआ।

मन के भाव — पृष्ठ 114

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पाठ से

पाठ से शब्द क बात

प्र.1 “स्वाथ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था।” इस वाक्य म कुछ शब्द के नीचे रेखा खची
हुई है। ये सभी नाम ह, ले कन दखाई दे ने वाली वस्तुओं, व्य क्तय या जगह के नाम नह ह। ये सभी शब्द मन के
भाव के नाम ह। आप कहानी म से ऐसे ही अन्य नाम को खोजकर नीचे दए गए रक्त स्थान म ल खए।

पुस्तक म ‘भाव के नाम’ लखे सूरज के चार ओर सात बादल बने ह। उनम कहानी से चुने हुए ये शब्द भरे जा सकते ह —

बादल भाव का नाम कहानी म कहाँ

1 दया “ जसके हृदय म दया थी और साहस था”

2 साहस “ कसी से मदद माँगने का साहस न हुआ”

3 सहानुभिू त “बंद आँख से, जनम सहानुभू त न थी”

4 ईष्य “उन आँख म सत्कार था, इन आँख म ईष्या”

5 नमता “वह नम्रता और सदाचार का दे वता बना मालूम दे ता था”

6 आत्मबल “ जसके हृदय म दया हो और साथ-साथ आत्मबल”

7 िनराशा “प्रत्येक के चेहरे पर आशा और नराशा के रंग आते थे”

और भी शब्द (य द बादल कम पड़ जाएँ या आपको दूसरे चा हए) —

आशा — “प्रत्येक के चेहरे पर आशा और नराशा के रंग आते थे”
आदर / सत्कार — “अनुभवशील नी तकुशल द वान का बड़ा आदर करते थे”
घृणा — “ मस्टर ‘ल’ को कताब से घृणा थी”
क्षमा — “उसके लए मुझे क्षमा क जए”
उत्साह — “खेल बड़े उत्साह से जारी था”
संदेह — “उसके मन म एक संदेह हुआ”
हम्मत — “ले कन हम्मत न हारी”
वनय, क त, मान, सदाचार, संकल्प, उदारता, वात्सल्य, स्वाथ, मद

इन्ह पहचानने का सूत्र: इन शब्द क ओर उँ गली नह उठाई जा सकती — इन्ह छु आ, दे खा या तौला नह जा
सकता, केवल महसूस कया जा सकता है। ‘गाड़ी’, ‘बैल’, ‘नाला’, ‘दे वगढ़’ दखाई दे ने वाली चीज़ /जगह के नाम
ह; ‘दया’, ‘ईष्या’, ‘साहस’ मन के भाव के नाम ह। व्याकरण म इन्ह भाववाचक सं ा कहते ह।

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Try This: ऐसे शब्द अक्सर -ता, -त्व, -पन, -आई जोड़कर बनते ह — उदार → उदारता, मनुष्य → मनुष्यत्व,
बच्चा → बचपन, अच्छा → अच्छ◌ाई। इसी तरह पाँच नए शब्द बनाकर वाक्य म प्रयोग क जए।em
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अ भनय — पृष्ठ 115

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पाठ से

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पाठ से गतवध
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प्र.1 कहानी म युवक और कसान क बातचीत संवाद के रूप म द गई है। यह भी बताया गया है क उन दोन ने ये

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बात कैसे बोल । अपने समूह के साथ मलकर तैयारी क जए और कहानी के इस भाग को कक्षा म अ भनय के

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comबोलकर दखाएँगे। l
ारा प्रस्तुत क जए। प्रत्येक समूह से अ भनेता या अ भनेत्री कक्षा म सामने आएँगे और एक-एक संवाद अ भनय
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यह मंचन क ग त व ध है। कहानी ने आपका आधा काम पहले ही कर दया है — उसने हर संवाद के साथ यह भी लख दया है क

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वह कस भाव से बोला गया। अ भनय करते समय बस उसी संकेत का पालन क जए।

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1. संवाद और उनके भाव (यही आपक स्क्रप्ट है) —
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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

कौन संवाद पाठ का संकेत — अ भनय म क्या क जए
बोलता है कैसे बोल

युवक “म तुम्हारी गाड़ी नकाल दूँ ?” इससे पहले — डंडा पहले लँगड़ ाकर आइए , गाड़ ी दे खकर
रख दया, कोट उतार िठठिकए , कोट उतारने का अिभनय
डाला कीिजए , िफर सहज स्वर में पूिछए

िकसान “हुजूर, म आपसे कैसे क ँ?” “झुककर बोला” कमर झुक ाकर, हाथ जोड़ ते हुए , संक ोच
भरे धीमे स्वर में

युवक “मालूम होता है, तुम यहाँ बड़ी दे र से फँसे हो। आश्वासन दे ने वाला, हाथ से पिहये और बैल ों की ओर इशारा
अच्छा, तुम गाड़ी पर जाकर बैल को साधो, म योजना बताता हुआ कीिजए ; स्वर में भरोसा हो, जल्दबाज़ ी
प हय को ढकेलता ँ, अभी गाड़ी ऊपर चढ़ जाती स्वर नही ं
है।”

िकसान “महाराज, आपने आज मुझे उबार लया, नह तो “हाथ जोड़कर खड़ा हाथ जोड़ े, कृ तज्ञता से भरा ऊँ चा-सा
सारी रात मुझे यहाँ बैठना पड़ता।” हो गया” स्वर

युवक “अब मुझे कुछ इनाम दे ते हो?” “हँसकर कहा” हल्की हँस ी के साथ, मज़ ाक़ के लहजे में
— यह गंभीर माँग नही ं है

िकसान “नारायण चाहगे तो द वानी आपको ही मलेगी।” “गंभीर भाव से कहा” हँस ी िबलकु ल नही;ं सीधे आँखों में
दे खकर, ठहरे हुए स्वर में — यही ं से
रहस्य खुल ने लगता है

िकसान “गहरे पानी म पैठने से ही मोती मलता है।” “मुस्कराकर बोला” हल्की, रहस्य भरी मुस कान; कहकर
धीरे से मुड़ जाइए — दशक को लगे िक
इसमें कु छ िछपा है

2. तैयारी कैसे क जए —

समूह म तीन काम बाँ टए — युवक, कसान, और सूत्रधार (जो बीच का ववरण पढ़े , जैसे “क चड़ बहुत ज़्यादा था… वह घुटने
तक ज़मीन म गड़ गया”)।
मंच-साम ी सरल र खए — एक लाठ , एक कोट या चादर, कु सय से बनी ‘गाड़ी’। क चड़ और अँधेरा अ भनय से दखाइए,
सामान से नह ।
शरीर क भाषा याद र खए — युवक लँगड़ाकर चलेगा (उसके पाँव म चोट है) और कसान थका और सहमा रहेगा।
दो-तीन बार पूरा अभ्यास क जए, फर बना कताब दे खे बो लए।

Tip: संवाद ज़ोर से बोलना ही अच्छा अ भनय नह है। यहाँ सबसे असरदार क्षण धीमे स्वर वाले ह — “हुजूर, म
आपसे कैसे क ँ?” और “गहरे पानी म पैठने से ही मोती मलता है।” ठहराव (pause) भी अ भनय का हस्सा है।

वपरीताथक शब्द — पृष्ठ 115

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पाठ से

पाठ से शब्द क बात

प्र.1 “ व ा का कम, परंतु कतव्य का अ धक वचार कया जाएगा।” ‘कम’ का वपरीत अथ दे ने वाला शब्द है
‘अ धक’। इसी प्रकार के कुछ वपरीताथक शब्द नीचे दए गए ह ले कन वे आमने-सामने नह ह। रेखाएँ ख चकर
वपरीताथक शब्द के सही जोड़े बनाइए— स्तंभ 1: 1. आना, 2. गुण, 3. आदर, 4. स्वस्थ, 5. कम, 6. दयालु, 7.
योग्य, 8. हार, 9. आशा। स्तंभ 2: 1. नदयी, 2. नराशा, 3. जीत, 4. अवगुण, 5. अस्वस्थ, 6. अ धक, 7. जाना,
8. अयोग्य, 9. अनादर।

सही जोड़े नीचे दए गए ह। पुस्तक म इन्ह के बीच रेखा ख चए।

स्तंभ मलेगा स्तंभ 2 वपरीत कैसे बना
1

1. आना →7 जाना दोन बलकुल उलट क्रयाएँ ह — इधर क ओर बढ़ना और उधर क ओर बढ़ना। यह जोड़ा उपसग
से नह , अलग शब्द से बनता है।

2. ग ण
ु →4 अवगुण ‘गुण’ के आगे अव- उपसग लगा — अच्छाई से बुराई बन गई।

3. →9 अनादर ‘आदर’ के आगे अन- उपसग लगा — सम्मान से अपमान।
आदर

4. →5 अस्वस्थ ‘स्वस्थ’ के आगे अ- उपसग लगा — तंदुरुस्त से बीमार।
स्वस्थ

5. कम →6 अ धक यही जोड़ा पाठ के वाक्य म आया है — “ व ा का कम, परंतु कतव्य का अ धक वचार…”

6. →1 नदयी नर्- उपसग का अथ है ‘ बना’ — नर् + दय = जसम दया न हो।
दयालु

7. योग्य →8 अयोग्य ‘योग्य’ के आगे अ- उपसग — लायक़ से नालायक़।

8. हार →3 जीत अलग शब्द से बना जोड़ा। कहानी म दोन एक साथ आए ह — “हार-जीत का नणय न हो सका।”

9. →2 नराशा नर्- + आशा = नराशा। यह जोड़ा भी कहानी म साथ आया है — “चेहरे पर आशा और नराशा के
आशा रंग आते थे।”

एक नज़र म सही क्रम: 1→7, 2→4, 3→9, 4→5, 5→6, 6→1, 7→8, 8→3, 9→2.

पहचानने का आसान तरीक़ा: पहले वे जोड़े छाँ टए जनम दूसरा शब्द पहले शब्द के आगे अ-, अन-, अव-, नर्-
जोड़कर बना हो (गुण–अवगुण, आदर–अनादर, स्वस्थ–अस्वस्थ, योग्य–अयोग्य, दयालु– नदयी, आशा– नराशा)। जो
बच, वे बलकुल अलग शब्द वाले जोड़े ह गे — आना–जाना, हार–जीत, कम–अ धक।

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Try This: इसी तरह पाठ से और जोड़े बनाइए — सुयोग्य × अयोग्य, उदारता × कंजूसी, साहस × कायरता, ईष्या
× प्रेम, स्वाथ × परमाथ, नई × पुरानी, बूढ़ा × जवान। हर जोड़े से एक-एक वाक्य भी बनाइए, जैसे — “प रश्रम से
हार भी जीत म बदल जाती है।”

कहावत — पृष्ठ 116
पाठ से

पाठ से शब्द क बात

प्र.1 नीचे कुछ कहावत और उनके भावाथ दए गए ह। आप इन कहावत को कहानी से जोड़कर अपनी लेखन-
पु स्तका म ल खए— • अधजल गगरी छलकत जाए • अब पछताए होत क्या जब च ड़याँ चुग गई खेत • एक
अनार सौ बीमार • जो गरजते ह वे बरसते नह ह • जहाँ चाह, वहाँ राह (संकेत— व ापन म तो एक नौकरी क
बात कही गई थी, ले कन उम्मीदवार आ गए हज़ार । इसे कहते ह— एक अनार सौ बीमार।)

हर कहावत को कहानी के कसी एक प्रसंग से जो ड़ए और साथ म वह वाक्य या घटना ल खए जससे वह मेल खाती है। पुस्तक ने
‘एक अनार सौ बीमार’ का नमूना दे दया है — बाक़ इसी ढं ग से क जए।

कहावत भावाथ कहानी का कौन-सा प्रसंग

एक अनार सौ एक चीज़, चाहने वाले दीवान का पद एक था और “सै क ड़ ों आदमी अपना-अपना भाग्य परखने के िलए चल खड़ े
बीमार अनेक हुए ”; “पत्येक रे ल गाड़ ी से उ म्मीदवारों का एक मेल ा-सा उतरता।” (पुस्तक का िदया हुआ
संकेत)

अधजल गगरी जसके पास थोड़ा ान िमस्टर ‘ल ’ को िकताब से घ ृणा थी, िफर भी वे “बड़ े-बड़ े गंथ दे खने-पढ़ ने में डू बे रहते थे”;
छलकत जाए होता है, वह उसका और गेजएु टों की भीड़ सनद िदखाने आ गई, “क्योंिक सनद की कै द न होने पर भी सनद से
दखावा करता है परदा तो ढका रहता है।” िजनके पास सच में गुण था — जानकीनाथ — वे चुपचाप अपना
काम कर गए।

जो गरजते है ं वे जो बढ़-चढ़कर बोलते हॉकी के “मँजे हुए िखलाड़ ी” िदन भर अपनी िव ा िदखाते रहे, पर जब सचमुच बल और
बरसते नही ं है ं ह, वे काम नह करते दया की ज़ रूरत पड़ ी तो “िखलािड़ यों ने भी उसको दे खा मगर बंद आँखों से , िजनमें
सहानुभिू त न थी।” डंडे हाथ में थे, पर कोई गाड़ ी ठे ल ने नही ं उतरा।

जहाँ चाह, वहाँ राह करने क इच्छा हो तो युवक के पाँव में चोट थी, अँधेरा था, कीचड़ इतना िक “वह घुटने तक ज़ मीन में गड़ गया”
साधन भी मल जाता है — िफर भी उसने राह िनकाल ली: िकसान बैल ों को साधे , वह पिहया ठे ले । इच्छा थी,
इसिलए रास्ता बन गया और गाड़ ी नाले के ऊपर आ गई।

अब पछताए होत समय नकल जाने पर दरबार में जब जानकीनाथ का नाम पुक ारा गया तो बाक़ ी उ म्मीदवारों की आँखों में “ईष्य ”
क्या जब िचिड़ याँ पछताना व्यथ भर आई। पर अवसर तो उसी रात नाले के िकनारे हाथ से िनकल चुक ा था, जब वे बंद
चुग गई खेत आँखों से आगे बढ़ गए थे। अब पछताने से क्या हो सकता था!

कहावत और मुहावरे म अंतर — कहावत एक पूरा वाक्य होती है और अपने-आप म पूरी बात कहती है (‘जहाँ चाह, वहाँ राह’)।
मुहावरा वाक्य का टु कड़ा होता है, जसे वाक्य म जोड़ना पड़ता है (‘तहलका मचा दे ना’, ‘नाक म दम होना’)।

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Try This: कहानी म एक और कहावत ख़ुद प्रेमचंद ने रखी है — “गहरे पानी म पैठने से ही मोती मलता है।”
अपने घर के बड़ से पाँच ऐसी कहावत पू छए जो वे रोज़ बोलते ह, उनका अथ ल खए और बताइए क उनम से
कौन-सी ‘परीक्षा’ कहानी पर फट बैठती है।

अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 116
पाठ से आगे

पाठ से आगे कल्पना

प्र.1 (क) “दूसरे दन दे श के प्र सद्ध पत्र म यह व ापन नकला” — दे श के प्र सद्ध पत्र म नौकरी का व ापन
कसने नकलवाया होगा? आपको ऐसा क्य लगता है?

यह व ापन द वान सरदार सुजान सह ने ही नकलवाया होगा।
ऐसा लगने के चार कारण —

1. यह काम उन्ह को स पा गया था। महाराज ने त्यागपत्र स्वीकार करते समय शत रखी थी — “ रयासत के लए नया द वान
आप ही को खोजना पड़ेगा।” व ापन उसी खोज का पहला क़दम है।
2. व ापन म उप स्थत होने का पता उन्ह का है — “वे वतमान सरकार सुजान सह क सेवा म उप स्थत ह ।” जो व्य क्त
उम्मीदवार को अपने पास बुला रहा है, व ापन भी उसी ने दया होगा।
3. शत उन्ह क सोच जैसी ह। “ग्रेजुएट होना ज़रूरी नह … व ा का कम, परंतु कतव्य का अ धक वचार कया जायेगा” —
डग्री से ऊपर आचरण को रखना उसी अनुभवी, नी तकुशल आदमी का वचार हो सकता है जसने चालीस साल राज-काज
चलाया हो।
4. व्यवस्था भी उन्ह ने ही क । “सरदार सुजान सह ने इन महानुभाव के आदर-सत्कार का बड़ा अच्छा प्रबंध कर दया था।”
जसने ठहरने-खाने का प्रबंध कया, बुलावा भी उसी का था।

अनुमान कैसे लगाया जाता है: अनुमान का अथ अंदाज़ा लगाना नह , ब ल्क पाठ म बखरे सुराग को जोड़कर
सबसे संभा वत उत्तर तक पहुँचना है। यहाँ चार सुराग — काम स पा जाना, पता उन्ह का होना, शत का मज़ाज,
और प्रबंध — सब एक ही व्य क्त क ओर इशारा करते ह।

प्र.2 (ख) “इस व ापन ने सारे मुल्क म तहलका मचा दया।” व ापन ने पूरे दे श म तहलका क्य मचा दया होगा?

क्य क यह व ापन उस ज़माने के आम व ापन से बलकुल अलग था — उसने वे सारी शत हटा द जो साधारण आदमी को ऐसे
पद से दूर रखती थ ।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा
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व ापन म क्या था इससे तहलका क्य मचा

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दीवानी िरयासत का सबसे बड़ ा पद था — मान, अिधकार और वेतन तीनोंl।aऔर
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“ऐसा ऊँचा पद और िकसी पकार
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a“यहglज़रूरी नही ं है िक वे गेजएु ट हों” िडगी की शत हटते ही वे लाखों लोग भी उ म्मीदवार बन गए जो पढ़ ाई पूरी न कर सके थे। दरवाज़ ा सबके
िलए खुल गया।
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co तो अच्छा है ही — तो मौक़ा मेरा भी है।
हर आदमी को लगा िक मेरा.आचरण ag
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“िव ा का कम, परंत ु कतव्य का

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अिधक िवचार”

“के वल नसीब का खेल है”
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जब चुनाव का आधार साफ़ न हो तो हर यि त अपना भा य आज़ माना चाहता है — “सै क ड़ ों आदमी
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अपना-अपना भाग्य परखने के िलए चल खड़ े हुए ।”
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ख़बर एक शहर तक सीिमत नही ं रही — “कोई पंजाब से चला आता था, sकोई
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दे श के पिस द्ध पत्र ों में छपा

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इसी का नतीजा था क “दे वगढ़ म नए-नए और रंग- बरंगे मनुष्य दखाई दे ने लगे” और “प्रत्येक रेलगाड़ी से उम्मीदवार का एक
मेला-सा उतरता।”

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m तभी प्रयोग होता है जब कोई ख़बर बहुत तेज़ी से फैले और लोग agl
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तहलका का अथ: हलचल, खलबली। यह मुहावरा
को हलाकर रख दे । जैसे — “नए पुल कlे aखुलने क ख़बर ने पूरे क़स्बे म तहलका मचा दया।”
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व ापन — पृष्ठ 117
पाठ से आगे.c a g
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agl पाठ से आगे ग त व ध
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प्र.1
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(क) कहानी म इस व ापन क साम ी को प ढ़ए। इसके बाद अपने समूह म मलकर इस व ापन को अपनी
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कल्पना का उपयोग करते हुए बनाइए। (संकेत— व ापन बनाने के लए आप एक चौकोर कागज़ पर हा शया

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बनाइए। इसके बाद इस हा शए के भीतर के खाली स्थान पर सुंदर लखाई, चत्र , रंग आ द क सहायता से सभी
आवश्यक जानकारी लख द जए। आप बना रंग या चत्र के भी व ापन बना सकते ह।)

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emसजावट आपक कल्पना क होगी।
पहले कहानी (पृष्ठ 106) से व ापन क सारी जानकारी छाँट ली जए, फर उसे सुंदर ढं ग से सजाइए। जानकारी वही रहेगी —

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agl 1. कहानी से नकली आवश्यक जानकारी —
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पद — द वान ( रयासत दे वगढ़)

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कतने — एक सुयोग्य द वान क ज़रूरत

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ag नह ; हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक; मंदा ग्न के रोगी कष्ट न उठाएँ
कहाँ उप स्थत ह — वतमान सरदार सुजान सह क सेवा म
योग्यता — ग्रेजुएट होना ज़रूरी

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चुनाव क व ध — एक महीने तक रहन-सहन और आचार- वचार क दे खभाल

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

कस बात पर ज़ोर — “ व ा का कम, परंतु कतव्य का अ धक वचार कया जायेगा”
प रणाम — जो इस परीक्षा म पूरे उतरगे, वे इस उच्च पद पर सुशो भत ह गे

2. नमूना व ापन (इसे अपने कागज़ पर बड़े अक्षर म उता रए) —

रयासत दे वगढ़ — आवश्यकता है

पद दीवान (एक पद )

कौन आवेद न करे जो स ज्जन अपने को इस पद के योग्य समझें

शैिक्षक योग्यता गेजएु ट होना आवश्यक नही ं

शारीिरक योग्यता ट-पुष्ट होना आवश्यक ; कमज़ ोर पाचनवाले क ष्ट न उठाएँ
हृष्

चुनाव कै से एक मास तक रहन-सहन एवं आचार-िवचार की दे खभाल

िकसे वरीयता िव ा से अिधक कतव्य को महत्त्व िदया जाएगा

कहाँ उपिस्थत हों सरदार सुजानिसंह की से वा में, दे वगढ़

पंिक्त (नारा) “िडग ी नही,ं चिर त्र लाइए !”

3. बनाते समय ध्यान र खए —

हा शया पहले बनाइए, फर भीतर ल खए — इससे व ापन साफ़-सुथरा दखता है।
सबसे ऊपर सबसे बड़े अक्षर म एक ही बात — “आवश्यकता है: द वान”।
बाक़ जानकारी छोटे -छोटे बदुओं म; पूरा पैराग्राफ़ मत ल खए, कोई नह पढ़ता।
चाह तो एक चत्र बनाइए — राजमहल, तराज़ू या मुहर। रंग न ह तो भी चलेगा।
अंत म पता और “उप स्थत ह ” क पं क्त ज़रूर ल खए।

Tip: अच्छे व ापन म क्या, कसके लए, कहाँ और कब — ये चार बात एक नज़र म दख जानी चा हए। इसे
जाँचने का तरीक़ा: अपना व ापन कसी साथी को पाँच सेकंड दखाइए और पू छए क उसे क्या-क्या याद रहा।

प्र.2 (ख) आपने भी अपने आस-पास द वार पर, समाचार-पत्र म या प त्रकाओं म, मोबाइल फोन या दूरदशन पर
अनेक व ापन दे खे ह गे। अपने कसी मनपसंद व ापन को याद क जए। आपको वह अ ा क्य लगता है?
सोचकर अपने समूह म बताइए। अपने समूह के बदुओं को लख ली जए।

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर व ाथ का अलग होगा। पर अ ा उत्तर वही है जो केवल “मुझे पसंद है”
न कहे, ब ल्क कारण गनाए।
कारण बताने के लए ये बदु काम आएँगे —

पं क्त/नारा — क्या उसक कोई लाइन याद रह जाती है?

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

संगीत या धुन — क्या उसका गीत गुनगुनाने लगते ह?
चत्र या दृश्य — क्या उसम कोई प्यारा या मज़ेदार दृश्य है?
कहानी — क्या 30 सेकंड म एक पूरी छोट कहानी कह द जाती है?
भावना — हँसी, अपनापन, दे शप्रेम या माँ-बच्चे का स्नेह?
उपयोगी संदेश — जैसे ट का लगवाइए, हेलमेट पह नए, पानी बचाइए, बेट पढ़ाइए।
स ाई — क्या वह वही कहता है जो वस्तु सचमुच कर सकती है?

नमूना उत्तर: “मुझे दूरदशन पर आने वाला पो लयो क दवा का व ापन सबसे अच्छा लगता है। इसम एक छोट बच्ची अपने भाई
का हाथ पकड़कर बूथ तक ले जाती है और अंत म एक ही पं क्त आती है — ‘दो बूँद ज़दगी क ’। मुझे यह इस लए अच्छा लगता है
क्य क (1) इसक पं क्त बहुत छोट है और तुरंत याद हो जाती है, (2) इसम डराया नह जाता, ब ल्क बच्च का प्यार दखाया जाता
है, और (3) यह कोई चीज़ बेचता नह , एक ज़रूरी काम याद दलाता है। मेरी दाद को भी यह व ापन याद है, इसी से पता चलता
है क यह कतना असरदार है।”

समूह म क्या क जए: हर सदस्य अपना पसंद दा व ापन और एक कारण बताए। फर दे खए क कस कारण
का नाम सबसे ज़्यादा बार आया — प्रायः ‘याद रह जाने वाली पं क्त’ और ‘भावना’ सबसे आगे नकलते ह। यही
आपके समूह का नष्कष होगा।

प्र.3 (ग) व ापन से लाभ होते ह, हा न होती ह, या दोन ? अपने समूह म चचा क जए और चचा के बदु लखकर
कक्षा म साझा क जए।

सबसे सही उत्तर है — दोन । व ापन एक औज़ार है; लाभ या हा न इस बात पर नभर करता है क उसम कही गई बात सच है या
नह और दे खने वाला उसे सोच-समझकर लेता है या नह ।

लाभ हा न

नई और उपयोगी जानकारी िमलती है — नई दवा, नई सुिवधा, नई वस्तु को बढ़ ा-चढ़ ाकर िदखाया जाता है; कई बार वह वैस ी होती ही
योजना। नही ं।

रोज़गार की सूचना दू र -दू र तक पहच
ु ँ ती है — कहानी का िवज्ञापन पंजाब िबना ज़ रूरत की चीज़ ें ख़रीदने का मन बनता है — िफ़ ज़ ूल ख़च
से मद ास तक पहच
ु ँ गया। बढ़ ती है।

जनिहत के संदे श फै लते है ं — टीकाकरण, स्वच्छता, यातायात के िनयम, बच्चों पर असर पड़ ता है; वे चमकदार पैके ट दे खकर कम पौिष्टक
बेटी की पढ़ ाई। खाने की िज़ द करते है।ं

छोटे व्यापारी और कारीगर अपनी वस्तु दू र के ग ाहकों तक पहच
ु ँ ा पाते है।
ं ‘जो िदखता है वही िबकता है’ — अच्छी पर िबना िवज्ञ ापन वाली वस्तु
पीछे रह जाती है।

दाम, छू ट और ग ण
ु ों की तुल ना करके ग ाहक बेहतर चुनाव कर सकता है। कभी-कभी झूठे दावे या ठगी भी िवज्ञापन के रूप में आ जाते है।ं

चचा के लए नष्कष-वाक्य (कक्षा म यही साझा क जए): “ व ापन से हा न तब होती है जब हम उसे सच मानकर दे खते ह,
और लाभ तब होता है जब हम उसे सूचना मानकर दे खते ह और ख़रीदने से पहले ख़ुद जाँच लेते ह।”

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

कहानी से जो ड़ए: ‘परीक्षा’ का व ापन बलकुल सच्चा था — उसम जो लखा था, ठ क वही हुआ। उम्मीदवार
क भूल यह थी क उन्ह ने व ापन को आधा पढ़ा — “ग्रेजुएट होना ज़रूरी नह ” तो सबने पढ़ लया, पर “कतव्य
का अ धक वचार कया जायेगा” कसी ने गंभीरता से नह लया। व ापन पूरा पढ़ना भी एक कला है।

आगे क कहानी — पृष्ठ 117
पाठ से आगे

पाठ से आगे कल्पना

प्र.1 ‘परीक्षा’ कहानी जहाँ समाप्त होती है, उसके आगे क्या हुआ होगा। आगे क कहानी अपनी कल्पना से बनाइए।

कहानी वहाँ रुकती है जहाँ सरदार सुजान सह दरबार म जानक नाथ के चुनाव का कारण बता रहे ह। आगे क कहानी बनाते समय
पात्र का स्वभाव वही र खए जो प्रेमचंद ने गढ़ा है — तभी आपक कहानी असली लगेगी।
1. आगे बढ़ाने के लए तीन सूत्र आपके पास पहले से ह —

जानक नाथ अब भी नह जानते क कसान ही सुजान सह थे — यह भेद खुलना बाक़ है;
उम्मीदवार क आँख म ईष्या थी — वे चुपचाप नह जाएँगे;
सुजान सह क भ वष्यवाणी — “ऐसा आदमी ग़रीब को कभी न सतावेगा… वह चाहे धोखा खा जाए, परंतु दया और धम से
कभी न हटे गा।” आगे क कहानी को इसी कसौट पर उतरना चा हए।

2. नमूना उत्तर (आगे क कहानी) —
दरबार समाप्त होते ही जानक नाथ सरदार सुजान सह के पास गए और झुककर बोले, “महाराज, कल रात नाले के कनारे जो
कसान मला था, कह वह आप ही तो नह थे?” सुजान सह मुसकराए और वही पं क्त दोहरा द — “गहरे पानी म पैठने से ही मोती
मलता है।” जानक नाथ क आँख भर आईं; उन्ह लगा क उन्ह ने उस रात कोई एहसान नह कया था, ब ल्क अपनी परीक्षा द थी
और उन्ह इसका पता तक नह चला।
द वानी सँभालते ही जानक नाथ ने पहला काम यह कया क उस नाले पर पक्का पुल बनवाया, ता क कसी और कसान क गाड़ी
रात भर क चड़ म न फँसे। फर उन्ह ने गाँव-गाँव जाकर दे खना शुरू कया क लगान वसूलने वाले कमचारी कसान से कैसा
व्यवहार करते ह। कुछ पुराने कमचारी, जो पहले उम्मीदवार रह चुके थे, नाराज़ हुए और महाराज के कान भरने लगे — “यह द वान
बहुत नरम है, रयासत क आमदनी घट जाएगी।”
एक दन ऐसा भी आया जब जानक नाथ धोखा खा गए — एक कमचारी ने झूठा हसाब दखाकर अनाज बेच खाया। पर
जानक नाथ ने न ग़स्से म कसी को दं ड दया, न डरकर काम छोड़ा; उन्ह ने शां त से जाँच करवाई, दोषी को हटाया और कसान का
अनाज लौटवा दया। बरस बाद, जब दे वगढ़ म सूखा पड़ा, उन्ह ने राजकोष खोलकर बीज और अनाज बँटवाया। लोग कहने लगे —
“यह द वान वही है जो एक रात क चड़ म उतरकर कसान क गाड़ी नकाल लाया था।” बूढ़े सुजान सह ने यह सुना तो चैन से आँख
मूँद ल ; उनक परीक्षा का प रणाम आ ख़रकार सही नकला था।

Tip: अपनी कहानी लखते समय एक समस्या ज़रूर र खए — बना समस्या के कहानी नह बनती। और अंत ऐसा
र खए जो मूल कहानी के संदेश से मेल खाए — यानी दया और आत्मबल क जीत हो, वह भी बना उपदे श दए।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

आपक बात — पृष्ठ 117
पाठ से आगे

पाठ से आगे अपनी बात

प्र.1 (क) य द कहानी म द वान साहब के स्थान पर आप होते तो योग्य व्य क्त को कैसे चुनते?

यह आपक अपनी सोच का प्रश्न है, इस लए हर व ाथ का उत्तर अलग होगा। पर अ े उत्तर म तीन बात होनी चा हए — (1)
आप कौन-से गुण दे खना चाहगे, (2) उन्ह परखने का आपका तरीक़ा क्या होगा, और (3) वह तरीक़ा न्यायपूण क्य है।
सोचने म मदद करने वाले बदु —

केवल बातचीत से मत चु नए — इंटरव्यू म हर आदमी अच्छा ही बोलता है, जैसे कहानी म सब “नम्रता और सदाचार का
दे वता बना मालूम” दे ते थे।
काम दे कर पर खए — कोई सचमुच का काम स पए और दे खए क वह कैसे करता है।
बना बताए दे खए — असली स्वभाव तब दखता है जब आदमी को लगे क कोई दे ख नह रहा।
कमज़ोर के साथ व्यवहार दे खए — यह सबसे भरोसेमंद कसौट है।
एक ही मौक़े पर फ़ैसला मत क जए — कई दन, कई प र स्थ तयाँ दे खए।

नमूना उत्तर: “य द म द वान साहब क जगह होता तो म भी ल खत परीक्षा या डग्री को सबसे ऊपर न रखता, क्य क पढ़ाई से यह
पता नह चलता क आदमी का दल कैसा है। म चार तरह से परखता —

1. पहले सचमुच का काम — हर उम्मीदवार को एक-एक गाँव भेजता और कहता क वहाँ क एक समस्या का हल नकालकर
लाओ। जो सुनकर लौट आए और जो सचमुच कुछ करके आए, दोन म फ़क़ अपने-आप दख जाता।
2. फर कमज़ोर के साथ व्यवहार — म दे खता क वे अपने नौकर , चपरा सय और ग़रीब कसान से कैसे बात करते ह। जो
अपने से छोटे से भी आदर से बोले, वही बड़े पद के लायक़ है।
3. फर धैय क जाँच — कसी काम म जान-बूझकर दे र करवाता और दे खता क कौन झुँझलाकर चल्लाने लगता है और कौन
शांत रहकर रास्ता खोजता है।
4. अंत म ईमानदारी — हसाब म जान-बूझकर कुछ रुपये अ धक रख दे ता और दे खता क कौन लौटाता है।

इन चार म जो खरा उतरता, उसे म चुनता — क्य क द वान का काम आदे श दे ना नह , लोग क दे खभाल करना है।”

ध्यान द जए: ये सारे तरीक़े एक ही सद्धांत पर टके ह, वही जो सुजान सह ने अपनाया — कहने से नह , करने
से परखो। इसी लए उन्ह ने भाषण नह करवाया, गाड़ी क चड़ म फँसा द ।

प्र.2 (ख) य द आपको कक्षा का मॉ नटर चुनने के लए कहा जाए तो आप उसे कैसे चुनगे? उसम कन- कन गुण को
दे खगे? गुण क परख के लए क्या-क्या करगे?

इस प्रश्न के तीन हस्से ह — कैसे चुनगे, कौन-से गुण, और परख कैसे। तीन का उत्तर अलग-अलग ल खए, तभी उत्तर पूरा माना
जाएगा।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा
a g l AglaSem · NCERT Solutions

1. गुण और उन्ह परखने के तरीक़े —
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c o mयह क्य ज़रूरी है g l as
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गुण परखने के लए क्या कर

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l a se एक िदन के िलए उसे नाम िलखने का काम दीिजए और दे िखए िक क्या वह
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िनष्पक्षता मॉ नटर को अपने दोस्त और बाक़

a बच्च म फ़क़ नह करना चा हए अपने िमत्र का नाम भी िलखता है

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दे िखए िक जो साथी पीछे रह गया है या िजसकी कॉपी नही ं है, उसकी मदद
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दया / सहयोग जो कमज़ोर साथी क मदद करे, वही
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सबका भरोसा जीतेगा

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िज़म्मेद ारी
मॉ नटर का मुख्य काम है
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काम याद रखना और समय पर करना एक ह ़ ते के िलए कोई छोटी िज़ म्मेद ारी दीिजए — पौधों को पानी दे ना,
पुस्तकालय की िकताबे ं लौटाना — और दे िखए िक याद कौन रखता है

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क क्षा में शोर होने पर दे िखए कौन िबना चीख़े व्यवस्था बना ता है
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शांत स्वभाव शोर म चल्लाने वाला मॉ नटर शोर

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और बढ़ाता है

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सच बोलना शक्षक को सही जानकारी मॉ नटर से

agl ही मलती है

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कोई समूह-काय दीिजए और दे िखए िक वह सब काम ख़दु कर ले ता है या
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सबका साथ अच्छा नेता अकेले काम नह करता,

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ले क र चलना काम बाँटता है सबको जोड़ ता है

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2. नमूना उत्तर (चुनाव क व ध): “म मॉ नटर सफ़ इस लए नह चुनूँगा क कौन सबसे तेज़ पढ़ता है या सबसे ज़ोर से बोलता है।
मेरी व ध यह होगी —

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1. पहले पूरी कक्षा से पूछूँगा क मॉ नटर म कौन-से गुण होने चा हए, और सबक राय से पाँच गुण तय कर लूँगा — नष्पक्षता,

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ज़म्मेदारी, दया, शांत स्वभाव और स ाई।
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2. फर एक-एक हफ़्ते के लए चार-पाँच सा थय को बारी-बारी मॉ नटर का काम दूँ गा, ता क सब दे ख सक क कौन कैसे काम

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la 3. इसके बाद गुप्त मतदान कराऊँगा, ता क कोई दबाव म वोट न दे।
करता है।

ag 4. चुने जाने के बाद भी हर महीने कक्षा से पूछा जाएगा क काम ठ क चल रहा है या नह ।
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इस तरह मॉ नटर बात से नह , काम करके चुना जाएगा o
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m .c ठ क वैसे ही जैसे सुजान सह ने जानक नाथ को चुना था।”
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Check it yourself: अपनीaकक्षाg म यह करके दे खए — एक सप्ताह चुपचाप नोट क जए क बना कहे कौन
झाड़ू उठाता है, कौन गरी हुई कताब उठाकर रख दे ता है, कौन नए बच्चे से बात करता है। यह सूची अक्सर वोट के

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नतीजे से ज़्यादा सच्ची होती है।

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agl नया-पु
राना — पृष्ठ 118
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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 “कोई नए फैशन का प्रेमी, कोई पुरानी सादगी पर मटा हुआ।” हमारे आस-पास अनेक वस्तुए ँ ऐसी ह जन्ह लोग
नया फैशन या पुराना चलन कहकर दो भाग म बाँट दे ते ह। जो वस्तु आपके माता- पता या दादा-दाद के लए नई
हो, हो सकता है वह आपके लए पुरानी हो, या जो उनके लए पुरानी हो, वह आपके लए नई हो। अपने प रवार
या प रजन से चचा करके नीचे द गई ता लका को पूरा क जए—

यह घर पर बातचीत करके भरने वाली ता लका है। पहले घर के बड़ से पू छए — “आपके बचपन म यह चीज़ थी या नह ? तब इसे
क्या कहते थे?” — और फर उनके उत्तर ता लका म ल खए।
नमूना उत्तर (आपक ता लका ऐसी दख सकती है) —

मेरे लए नई मेरे लए पुरानी प रवार के बड़ के लए नई प रवार के बड़ के लए पुरानी
वस्तुए ँ वस्तुए ँ वस्तुए ँ वस्तुए ँ

स्माट घड़ी रे िडयो माट फ़ ोन
स् बैल गाड़ ी

ऑनलाइन कक्षा डाक का पत्र इंटरनेट और यू-पी-आई िच ी और मनीऑडर

एल-ई-डी बल्ब लालटेन एल -पी-जी िसिलंडर चू ा और उपले

रोबोट िखलौना ल ू , िगल्ली-डंडा वॉिशंग मशीन कु एँ से पानी खी ंचना

वीिडयो कॉल काला-सफ़े द टीवी रंगीन टीवी टांिज़ स्टर, गामोफ़ ोन

इले िक्टक स्कू टर साइिकल कार और स्कू टर पैद ल या तागं ा

यह ग त व ध क्या सखाती है: ध्यान द जए, एक ही वस्तु दो स्तंभ म आ सकती है — ट वी दादाजी के लए ‘नई’
चीज़ थी, आपके लए ‘पुरानी’ है। इससे पता चलता है क ‘नया’ और ‘पुराना’ चीज़ का गुण नह , दे खने वाले क
उम्र और समय पर नभर बात है। ठ क इसी लए कहानी म कोई “नए फैशन का प्रेमी” था और कोई “पुरानी सादगी
पर मटा हुआ” — दोन अपनी-अपनी जगह ठ क थे।

Try This: दादा-दाद से एक ऐसी वस्तु के बारे म पू छए जो अब बलकुल लुप्त हो गई है — जैसे स्याही क दवात,
सल-ब ा, हाथ का पंखा, चरखा। उसका चत्र बनाइए और दो पं क्तय म ल खए क वह कस काम आती थी और
अब उसक जगह क्या ले चुका है।

वाद- ववाद — पृष्ठ 118

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 “आपस म हॉक का खेल हो जाए। यह भी तो आ खर एक व ा है।” क्या हॉक जैसा खेल भी व ा है? इस
वषय पर कक्षा म एक वाद- ववाद ग त व ध का आयोजन क जए। (सुझाव— कक्षा म पहले कुछ समूह बनाएँ,
पच नकालकर तय क जए क कौन पक्ष म बोलेगा, कौन वपक्ष म; आधे समूह पक्ष म तक द, आधे वपक्ष म;
सभी समूह को 5-5 मनट का समय; प्रत्येक सदस्य भाग अवश्य ले।)

यह कक्षा म करने क ग त व ध है। नीचे दोन ओर के तक दए गए ह — पच म जो पक्ष मले, उसी स्तंभ से तक उठाइए। वाद-
ववाद म अपनी राय नह , अपने पक्ष क बात रखनी होती है।

पक्ष म — “हाँ, खेल भी व ा है” वपक्ष म — “नह , खेल व ा नह है”

हर िव ा सीखी और अभ्यास से माँजी जाती है — कहानी में भी िखलाड़ी िव ा का अथ है ज्ञान, जो पढ़ ने-सोचने से िमलता है और जीवन भर
“हॉकी के मँजे हुए िखलाड़ी” कहे गए है।
ं िबना ग रु
ु और अभ्यास के हॉकी काम आता है। खेल शरीर का कौशल है, ज्ञान नही ं।
नही ं आती।

खेल से अनुशासन, िनयम-पालन, टीम-भावना और हार-जीत को सहना शरीर की शिक्त उम के साथ घट जाती है; िव ा नही ं घटती।
सीखा जाता है — ये जीवन भर काम आते है।
ं इसिलए दोनों बराबर नही ं।

खेल में तुर ंत िनणय ले ना पड़ता है — यह बुिद्ध का ही काम है। कहानी में कहानी में उ म्मीदवारों ने खेल का सहारा इसीिलए िलया था िक
गेंद रोकने वाले िखलाड़ी “मानो लोहे की दीवार” बन जाते थे, यह सोच- “कु छ हाथों की सफ़ ाई ही काम कर जाए ” — यानी वहाँ खेल िव ा
समझकर बनाई गई रणनीित थी। नही,ं िदखावे का साधन था।

आज खेल एक पूर ा िवषय है — शारीिरक िशक्षा पढ़ ाई जाती है, खेल - पूरे िदन खेल ने से पढ़ ाई का समय चला जाता है; कहानी के
िवश्विव ालय है ं और िखलाड़ी दे श का नाम रोशन करते है।
ं िखलाड़ ी िदन भर खेल कर “हाँफ ते-हाँफ ते बेद म” हो गए , पर एक
ग़ रीब की मदद तक न कर सके ।

सबसे बड़ा तक — जानकीनाथ भी उसी हॉकी के मैद ान से लौट रहा था; पर उसकी असली परीक्षा हॉकी नही ं थी — दया थी। यानी खेल
खेल से िमली शिक्त ही उसके काम आई। अपने-आप में योग्यता का पमाण नही ं।

वाद- ववाद कैसे क जए —

पच से पक्ष तय क जए; तैयारी म हर सदस्य एक-एक तक ले और उसी पर बोले, ता क सबक भागीदारी हो।
हर तक के साथ एक प्रमाण द जए — कहानी क पं क्त, कोई खलाड़ी का उदाहरण, या अपना अनुभव।
पाँच मनट म तीन से अ धक तक मत र खए; कम बात, गहरी बात।
दूसरे पक्ष क बात ध्यान से सु नए और अपनी बारी म उसका उत्तर द जए — यही अच्छे वाद- ववाद क पहचान है।
व्य क्त पर नह , बात पर बो लए। हँसी उड़ाना या शोर मचाना अंक घटाता है।

नष्कष (अंत म शक्षक जो कहलवाना चाहगे): खेल भी एक व ा है, पर अकेली व ा नह । शरीर क व ा, कताब क व ा
और मन क व ा — तीन मलकर पूरा मनुष्य बनाती ह। कहानी यही सखाती है: जानक नाथ के पास बल भी था और दया भी,
इसी लए वह चुना गया।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

Tip: वाद- ववाद जीतने का सबसे आसान तरीक़ा है — दूसरे पक्ष का सबसे मज़बूत तक पहले ख़ुद बो लए और
फर उसका उत्तर द जए। इससे लगता है क आपने पूरी बात सोची है।

अ ाई और दखावा — पृष्ठ 119
पाठ से आगे

पाठ से आगे अपनी बात

प्र.1 (क) हर व्य क्त अपनी बु द्ध के अनुसार स्वयं को अ ा दखाने क को शश करता है। स्वयं को अ ा दखाने के
लए लोग क्या-क्या करते ह? (संकेत— मेहनत करना, कसरत करना, साफ़-सुथरे रहना आ द)

लोग दो तरह के काम करते ह — कुछ ऐसे जो सचमुच अच्छे भी बनाते ह, और कुछ ऐसे जो केवल ऊपर से अच्छा दखाते ह। चचा
म दोन को अलग-अलग र खए।

लोग क्या करते ह यह कस तरह का काम है कहानी का उदाहरण

मेहनत करना, समय पर काम पूर ा सचमुच अच्छा बनाने वाला जानक नाथ का घायल पाँव लेकर भी गाड़ी नकालना
करना

कसरत करना, जल्दी उठना, अच्छा बनाने वाला — पर तभी, जब मस्टर ‘अ’ का बगीचे म टहलकर ऊषा-दशन करना (केवल
टहलना आदत बन जाए एक महीने के लए)

साफ़ -सुथरे रहना, ढं ग के कपड़े अच्छी आदत, पर इससे स्वभाव नही ं “रंगीन एमामे, चोगे और नाना प्रकार के अंगरखे… अपनी
पहनना बदलता सज-धज दखाने लगे”

मीठा बोलना, बड़ों-छोटों से आदर से अच्छा — यिद सबके साथ और मस्टर ‘द’, ‘स’, ‘ज’ का अचानक नौकर को ‘आप’ और
पेश आना हमेशा हो ‘जनाब’ कहना

िकताबे ं ले क र बैठना, अपनी िडिग याँ पायः िदखावा मस्टर ‘ल’ का ग्रंथ म डू बे रहना, जब क उन्ह “ कताब से
िदखाना घृणा थी”

अपनी उपलिब्धयाँ बार-बार सुनाना, शुद्ध िदखावा हॉक खेलकर हुनर दखाना — “संभव है, कुछ हाथ क
शेख़ी बघारना सफ़ाई ही काम कर जाए”

दू स रों की मदद करना, िबना बताए सबसे स च्ची अच्छाई कोट उतारकर क चड़ म उतरना — वहाँ दे खने वाला कोई
काम कर दे ना नह था

चचा का नष्कष: ऊपर क सूची म से जो काम आदमी तब भी करता है जब कोई दे ख न रहा हो, वह अच्छाई है;
जो केवल कसी के दे खते समय होता है, वह दखावा है। कहानी का पूरा महीना यही अंतर परखने म बीता।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 (ख) क्या ‘स्वयं को अ ा दखाने’ म और ‘स्वयं के अ ा होने’ म कोई अंतर है? कैसे?

हाँ, बहुत बड़ा अंतर है। ‘अच्छा दखना’ दूसर क आँख के लए कया जाता है; ‘अच्छा होना’ अपने मन के लए। पहला कपड़े
क तरह है — पहना और उतार दया; दूसरा स्वभाव क तरह है — साथ ही रहता है।

कसौट स्वयं को अ ा दखाना स्वयं का अ ा होना

कब तक चलता है जब तक कोई दे ख रहा हो हमेशा, अके ले में भी

िकसके िलए दूसर क वाहवाही के लए अपने संतोष और दू स रों के भले के िलए

किठनाई आने पर तुरंत उतर जाता है और मज़ बूत होकर सामने आता है

कहानी का उम्मीदवार — “एक महीने का झंझट है, कसी तरह जानकीनाथ — “वह घुटने तक ज़ मीन में गड़ गया, ले िकन
उदाहरण काट ल” िहम्मत न हारी”

पिरणाम परीक्षा म फेल — आँख म ईष्या रह गई िबना जाने ही परीक्षा पास — दीवानी िमल गई

सबसे साफ़ प्रमाण — उस रात नाले के कनारे अँधेरा था और कोई परीक्षक दखाई नह दे रहा था। जनक अच्छाई ओढ़ हुई थी,
उन्ह ने “बंद आँख से” दे खा और चल दए। जसक अच्छाई भीतर क थी, उसने कोट उतार दया। अँधेरा ही असली परीक्षक है।

अपने लए सो चए: एक सरल कसौट याद र खए — “अगर यह बात कसी को पता न चले, तब भी क्या म
यह करूँगा?” जस काम का उत्तर ‘हाँ’ हो, वह अच्छाई है। इसका अथ यह नह क साफ़-सुथरा रहना या ढं ग से
बोलना बुरा है — बुरा तब है जब वह केवल दखाने के लए हो।

प रधान तरह-तरह के — पृष्ठ 119 और 120

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पाठ से आगे
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पाठ से आगे चत्र-पहचान

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a s emउतार डाला” — ‘कोट’ एक प रधान का नाम है। कुछ अन्य प रधान के नाम और चत्र नीचे दए गए ह।
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“कोट
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प्र.1
प रधान के नाम को इनके सही चत्र के साथ मलाइए। इन्ह आपके घर म क्या कहते ह? ल खए—

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िच त्र नाम और क् या कहते है ं

दुप ा

गमछा

लहँगा

िफरन

धोती

अचकन

पगड़ी

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

पुस्तक (पृष्ठ 119 और 120) क ता लका — पहले खाने म प रधान का चत्र, दूसरे म एक नाम और तीसरा खाना भरने
के लए खाली है।

पुस्तक म चत्र और नाम जान-बूझकर आमने-सामने नह रखे गए ह — हर पं क्त का चत्र कसी दूसरी पं क्त के नाम से मेल खाता
है। सही मलान नीचे दया गया है।
पृष्ठ 119 क ता लका —

चत्र म क्या दखता है उस पं क्त म लखा सही नाम और क्या कहते ह
नाम

चुन्नटोंवाला लंबा, चौड़ा घे र दार घाघरा दुप ा लहँगा घाघरा, च नया, लँहगा, पेट कोट-सा
घेरदार वस्त्र

एक पुरुष के कं धे पर पड़ा पतला-सा गमछा गमछा (यही पंिक्त सही अंगोछा, पटका, तौ लया, पछौरा
कपड़ा है)

कु रते के ऊपर ओढ़ नी डाले एक स्त्री लहँगा दुप ा ओढ़नी, चुन्नी, चूनर, चादर, स्टोल

पृष्ठ 120 क ता लका —

चत्र म क्या दखता है उस पं क्त म लखा सही और क्या कहते ह
नाम नाम

कमर से नीचे लपेटा हुआ िबना िसला सफ़े द फरन धोती धोत, पंचा, वेष्टी (त मल), मुंडु (मलयालम),
वस्त्र पंचे (कन्नड़)

घुटनों से नीचे तक आता ढीला, लंबा चोगा धोती िफरन फेरन (कश्मीर का ऊनी लंबा चोगा), पहेरन
पहने बािलका

िसर पर लपेटी हुई नारंग ी पाग अचकन पगड़ ी साफ़ा, पाग, फटा, मुरैठा, दस्तार

घुटनों तक लंबा, िसला हुआ बंद गले का कोट पगड़ी अचकन शेरवानी, बंदगला, अंगरखा, लंबा कोट

पहचानने के सूत्र: धोती और दुप ा बना सले वस्त्र ह — एक कमर से नीचे लपेटा जाता है, दूसरा ऊपर ओढ़ा
जाता है। लहँगा सला हुआ है और उसम चुन्नट होती ह। फरन कश्मीर का ढ ला लंबा चोगा है, जो जाड़े म गरमी के
लए पहना जाता है। अचकन बंद गले का लंबा कोट है, और पगड़ी सर पर बाँधी जाती है — इस लए वह अकेला
ऐसा नाम है जसका चत्र सर पर दखेगा, शरीर पर नह ।

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

‘और क्या कहते ह’ वाला स्तंभ: इसम वही ल खए जो आपके घर म बोला जाता है — भाषा और इलाक़े के साथ
नाम बदलते ह। जैसे जसे कोई ‘गमछा’ कहता है, कोई उसे ‘अंगोछा’ और कोई ‘पटका’ कहता है। घर के बड़ से
पूछकर ही भ रए; यही इस ग त व ध का असली मज़ा है।

आपक परीक्षाएँ — पृष्ठ 120
पाठ से आगे

पाठ से आगे अपनी बात

प्र.1 हम सभी अपने जीवन म अनेक प्रकार क परीक्षाएँ लेते और दे ते ह। आप अपने अनुभव के आधार पर कुछ
परीक्षाओं के उदाहरण बताइए। यह भी बताइए क कसने, कब, कैसे और क्य वह परीक्षा ली। (संकेत— जैसे,
कसी को व ास दलाने के लए उसके सामने साइ कल चलाकर दखाना, स्कूल या घर पर कोई परीक्षा दे ना,
कसी को कसी काम क चुनौती दे ना आ द।)

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर लखते समय हर उदाहरण के साथ चार बात बताइए — कसने ली, कब ली, कैसे ली
और क्य ली। यही इस प्रश्न क माँग है।
1. सोचने के लए — परीक्षाएँ कतने तरह क होती ह:

परीक्षा का कसने ली कैसे ली क्य ली
प्रकार

िलिखत परीक्षा व ालय / शक्षक पश्न-पत्र दे क र यह दे खने क पाठ समझ म आया या नह

कौशल की परीक्षा पताजी / बड़े भाई साइिकल चलाकर िदखाने को कहकर भरोसा करने क अब अकेले चला सकते हो

िज़म्मेद ारी की माँ छोटे भाई-बहन को कु छ दे र के िलए सौंपकर यह जानने क घर क ज़म्मेदारी उठा सकते
परीक्षा हो या नह

ईमानदारी की दुकानदार / कोई िहसाब में जान-बूझकर या भूल से अिधक यह दे खने क आप लौटाते ह या रख लेते ह
परीक्षा अनजान पैसे लौटाकर

चुनौती वाली मत्र दौड़ , पहेल ी या खेल की चुनौती दे क र मज़े के लए और अपनी क्षमता जाँचने के
परीक्षा लए

धै य की परीक्षा प र स्थ त स्वयं बीमारी, लंबी क़ तार या हार का सामना कोई नह लेता — जीवन ख़ुद ले लेता है
कराकर

2. नमूना उत्तर:
“मेरी सबसे यादगार परीक्षा वह थी जो मेरे पताजी ने ली और मुझे उस समय पता ही नह चला क यह परीक्षा है। कब — पछली
गर मय म, जब म उनसे नई साइ कल क ज़द कर रहा था। कैसे — उन्ह ने कहा क पहले पूरे एक महीने तुम रोज़ सुबह छह बजे
उठकर छत के गमल म पानी डालोगे, बना याद दलाए। क्य — क्य क वे दे खना चाहते थे क म कसी चीज़ क दे खभाल कर

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कक्षा 6 हद अध्याय 10 परीक्षा AglaSem · NCERT Solutions

सकता ँ या नह । शुरू के चार दन मुझे बड़ा उत्साह रहा, फर आलस आने लगा। दो दन म भूल भी गया और पौधे मुरझा गए। तब
मुझे समझ आया क असली बात ज़द नह , नयम है। मने बाक़ दन बना नागा पानी दया। महीने के अंत म पताजी ने साइ कल
तो द ही, साथ म यह भी कहा — ‘साइ कल क दे खभाल भी इन्ह गमल क तरह करनी है।’ ‘परीक्षा’ कहानी पढ़ते हुए मुझे यही
याद आया — क कुछ परीक्षाएँ बना बताए ली जाती ह और वही सबसे सच्ची होती ह।”

लखते समय ध्यान र खए: केवल स्कूल क परीक्षा मत ल खए। इस प्रश्न का असली उ े श्य यह समझाना है क
परीक्षा का अथ प्रश्न-पत्र नह , परख है — और वह घर, खेल के मैदान और दोस्ती म हर दन होती रहती है।

आज क पहेली — पृष्ठ 120 और 121
पाठ से आगे

पाठ से आगे पहे ली

प्र.1 आज आपक एक रोचक परीक्षा है। यहाँ दए गए चत्र एक जैसे ह या भन्न? इन चत्र म कुछ अंतर ह। दे खते ह
आप कतने अंतर कतनी जल्द खोज पाते ह।

पुस्तक (पृष्ठ 121) के दो चत्र — सड़क पार करती एक बुजग म हला और एक लड़क , पीछे टोकरी उठाए एक म हला,
थैला लए एक पुरुष, यातायात-संकेत, पेड़, इमारत और एक कुत्ता।

दोन चत्र एक जैसे नह ह। पहली नज़र म दोन म एक ही दृश्य दखता है — ज़े ा क्रॉ सग पर एक लड़क एक बुजग म हला को
सड़क पार करा रही है, पीछे सर पर टोकरी लए एक स्त्री, एक ै फ़क-लाइट, एक थैला लए आदमी और एक गधा। पर ध्यान से
दे खने पर कम-से-कम नौ अंतर मलते ह।

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क्रम कहाँ दे खए बाएँ चत्र म दाएँ चत्र म

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1 ै फ़क-लाइट क बत्ती हरी बत्ती जल रही है

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2 फ़क-लाइट के बगल के पेड़ एक पेड़ है दो पेड़ है ं

3 गधे के पीछे क पृष्ठभू म एक ऊँचा गहरा हरा पेड़ खड़ा है वह पेड़ नही ं है; वहाँ गुल ाबी दीवार और एक िखड़ की

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िदखती है
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ऊपर उठे चबूतरे पर रखा है; गधे का मुँह उसमें
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4 गधे के पास रखा नारंगी टब ज़मीन पर है और गधा उसम मुँह डाले

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खा रहा है नही ं है

5 लाल कमीज़ वाले आदमी का पीला थैला बड़ा और नीचे तक लटका वही थैल ा छोटा है
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m glaहरी सब्ज़ ी झाँक रही है
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टोकरी के िकनारे
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6 सर पर टोकरी लए स्त्री क टोकरी म कुछ दखाई नह दे ता

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agl7 बुजग म हला का गला गले म कुछ नह गले में एक हार/माला है

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8 बुजग म हला क चू ड़याँ (दोन लाल रंग क नीली-बैगं नी रंग की

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हाथ)

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a बाल म कुछ नह बँधा बालों में लाल िरबन बँधा है

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ऐसी पहेली जल्द हल करने का तरीक़ा: पूरे चत्र को एक साथ मत दे खए। चत्र को मन-ही-मन चार भाग म
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बाँ टए और एक बार म एक ही भाग क तुलना क जए — पहले ऊपर-बाएँ, फर ऊपर-दाएँ, फर नीचे-बाएँ, फर

a s em नीचे-दाएँ। इसके बाद पात्र के गहने, कपड़े और छोट चीज़ (चूड़ी, रबन, थैला, हार) अलग से जाँ चए — अंतर

agl प्रायः वह छपाए जाते ह।
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com है और यह भी एक परीक्षा ही है — ध्यान से दे खने क g l a
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यह पहेली यहाँ क्य द गई है: पाठ का नाम ‘परीक्षा’
परीक्षा। कहानी म खला ड़य ने कसान eको m“दे खा मगर बंद आँख से”। यह पहेली भी यही सखाती है क दे खना a
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aय lद आपको कुछ और अंतर मल तो उन्ह भी अपनी सूची म जो ड़ए।
और ध्यान दे ना दो अलग बात ह। g

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झरोखे सेm— पृष्ठ 121 as e
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पाठ से आगे

पाठ से आगे पठन

प्र.1 पाठ म दए गए क्यू.आर. कोड के माध्यम से आप एक और कहानी पढ़गे। इस कहानी म भी कोई कसी क
परीक्षा ले रहा है। यह कहानी हमारे दे श के बहुत होनहार बालक और उसके गुरु चाणक्य के बारे म है। इसे हद के
प्र सद्ध लेखक जयशंकर प्रसाद ने लखा है।

यह पढ़ने का नदश है — पुस्तक म दए गए क्यू.आर. कोड को मोबाइल या टै बलेट से स्कैन क जए और वह कहानी प ढ़ए।
पढ़ने से पहले इतना जान ली जए —

लेखक — जयशंकर प्रसाद, हद के प्र सद्ध क व, नाटककार और कहानीकार। ‘कामायनी’ उनक सबसे प्र सद्ध रचना है।
पात्र — एक होनहार बालक और उसके गुरु चाणक्य ( जन्ह कौ टल्य या वष्णुगुप्त भी कहा जाता है)। इ तहास म चाणक्य ने
ही एक साधारण बालक को पहचानकर उसे सम्राट बनाया — वह बालक चंद्रगुप्त मौय था।
वषय — इसम भी कोई कसी क परीक्षा ले रहा है, ठ क ‘परीक्षा’ कहानी क तरह।

पढ़ते समय इन बात पर ध्यान द जए (और नोट कर ली जए) —

1. परीक्षा कसने ली और कसक ली?
2. परीक्षा कस गुण क थी — साहस, बु द्ध, नेतृत्व या सच बोलने क ?
3. क्या बालक को पता था क उसक परीक्षा हो रही है? (‘परीक्षा’ कहानी म जानक नाथ को पता नह था।)
4. परीक्षा लेने का तरीक़ा क्या था — प्रश्न पूछना, या कोई प र स्थ त खड़ी कर दे ना?

दोन कहा नय को जो ड़ए: पढ़ने के बाद एक छोट ता लका बनाइए — एक स्तंभ ‘परीक्षा’ का, दूसरा इस नई
कहानी का — और चार प्रश्न के उत्तर आमने-सामने ल खए। आपको दखेगा क दोन कहा नय का सूत्र एक ही
है: बड़ा आदमी वही पहचान पाता है जो कहने पर नह , करने पर ध्यान दे ता है।

य द क्यू.आर. कोड न खुले: घबराइए मत — अपने शक्षक या पुस्तकालय से जयशंकर प्रसाद क कहा नय का
संग्रह माँ गए, या कक्षा म एक साथी को यह कहानी पढ़कर सबको सुनाने के लए क हए।

खोजबीन के लए — पृष्ठ 121

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पाठ से आगे

पाठ से आगे प रयोजना

प्र.1 पुस्तक म दए गए क्यू.आर. कोड क सहायता से आप प्रेमचंद के बारे म और जान-समझ सकते ह, साथ ही
उनक अन्य कहा नय का आनंद भी उठा सकते ह— • ईदगाह • नादान दोस्त • दो बैल क कथा

यह खोजबीन और पढ़ने क प रयोजना है। क्यू.आर. कोड स्कैन क जए, या ये कहा नयाँ पुस्तकालय से लेकर प ढ़ए। नीचे तीन का
छोटा प रचय है, ता क आप जान सक क कसम क्या मलेगा।

कहानी कसके बारे म क्या सखाती है ‘परीक्षा’ से क्या मलता-
जुलता है

ईदगाह चार-पाँच साल का हा मद, जो ईद के मेले म मले स च्चा पेम अपने सुख से पहले दोन म एक व्य क्त चुपचाप दूसरे का
तीन पैस से मठाई- खलौने नह , दाद अमीना दू स रे की तकलीफ़ दे खता है दुख दूर करता है — और कोई दे ख
के लए चमटा ख़रीद लाता है नह रहा होता

नादान केशव और श्यामा नाम के दो बच्चे, जो च ड़या भावना अच्छी हो, पर िबना दोन म यही प्रश्न है क सचमुच
दोस्त के अंड क ‘मदद’ करने चलते ह और अनजाने समझ के की गई मदद हािन मदद करना क्या होता है
म नुक़सान कर बैठते ह कर सकती है

दो बैल ों की हीरा और मोती नाम के दो बैल, जो अन्याय सहने िमत्रता, स्वािभमान और दोन म ‘आत्मबल’ कद्र म है —
कथा के बजाय बार-बार लौटकर अपने मा लक झूरी के अन्याय के िवरुद्ध डटे रहने क ठनाई म हम्मत न हारना
पास आते ह का साहस

प्रेमचंद के बारे म खोजने योग्य बात —

वास्त वक नाम धनपतराय; ‘नवाबराय’ नाम से भी लखा और बाद म ‘प्रेमचंद’ नाम अपनाया।
वे कथा-सम्राट कहलाते ह — यानी कहानी के क्षेत्र के सम्राट। जीवनकाल 1880–1936।
उन्ह ने “समाज-सुधार और रा ीय भावना से ओत-प्रोत” कहा नयाँ और उपन्यास लखे — गोदान, नमला, गबन, कमभू म।
प्र सद्ध कहा नयाँ — ईदगाह, बड़े भाईसाहब, गुल्ली डंडा, दो बैल क कथा, पंच परमेश्वर, पूस क रात।
उनक कहा नय के पात्र प्रायः कसान, मज़दूर और साधारण ब े होते ह — ‘परीक्षा’ का कसान भी इसी परंपरा का है।

कक्षा के लए सुझाव: तीन कहा नयाँ तीन समूह म बाँट ली जए। हर समूह अपनी कहानी पढ़कर कक्षा म पाँच
मनट म सुनाए और अंत म एक वाक्य म बताए क उस कहानी ने क्या सखाया। फर सब मलकर तय क जए —
प्रेमचंद क कहा नय म सबसे बार-बार कौन-सी बात लौटकर आती है? (संकेत: ग़रीब का दुख और साधारण आदमी
क भलाई।)

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अध्याय — एक नज़र म
रचना का नाम ‘परीक्षा’ है और लेखक ह प्रेमचंद। यह एक कहानी है, कोई क वता या पद नह । पाठ के अंत म दया गया
प रचय बताता है क प्रेमचंद कथा-सम्राट कहलाते ह, उनका वास्त वक नाम धनपतराय था और उनका जीवनकाल 1880–
1936 रहा।
कहानी शुरू कैसे होती है — दे वगढ़ रयासत के द वान सरदार सुजान सह बूढ़े हो गए। उन्ह ने महाराज से नौकरी छोड़ने क
वनय क , क्य क “अब मेरी अवस्था भी ढल गई, राज-काज सँभालने क श क्त नह रही।” महाराज ने प्राथना तो मान ली,
पर शत लगा द क नया द वान वे स्वयं खोज।
अनोखा व ापन — दे श के प्र सद्ध पत्र म छपा क दे वगढ़ को एक सुयोग्य द वान चा हए; ग्रेजुएट होना ज़रूरी नह , पर हृष्ट-
पुष्ट होना ज़रूरी है; एक महीने तक उम्मीदवार के रहन-सहन और आचार- वचार क दे खभाल होगी और “ व ा का कम,
परंतु कतव्य का अ धक वचार कया जायेगा।” इसी व ापन ने “सारे मुल्क म तहलका मचा दया।”
दखावे का महीना — हर उम्मीदवार अच्छा दखने म जुट गया। मस्टर ‘अ’ नौ बजे तक सोते थे, अब ऊषा-दशन करने लगे;
मस्टर ‘ल’ को कताब से घृणा थी, अब ग्रंथ म डू बे रहते। लेखक व्यंग्य करता है — “मनुष्य का वह बूढ़ा जौहरी आड़ म बैठा
हुआ दे ख रहा था क इन बगुल म हंस कहाँ छपा हुआ है।”
असली परीक्षा — हॉक के बाद अँधेरे म एक कसान क अनाज से भरी गाड़ी नाले के क चड़ म फँस गई। सारे खलाड़ी बंद
आँख से नकल गए, पर एक घायल युवक रुका, कोट उतारा, घुटन तक क चड़ म धँसकर प हया ठे ला और गाड़ी नकाल द ।
कसान ने कहा — “गहरे पानी म पैठने से ही मोती मलता है।” वही कसान असल म सुजान सह थे।
अंत और संदेश — दरबार म सुजान सह ने पं डत जानक नाथ को द वानी द और कारण बताया — इस पद के लए ऐसा
पुरुष चा हए “ जसके हृदय म दया हो और साथ-साथ आत्मबल।” कहानी का संदेश यही है क व्य क्त क असली परख
उसके कहे से नह , उसके कए से होती है।

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त्व रत पुनरावृ त्त

पाठ का शब्द अथ पाठ का सं दभ अपना एक वाक्य

रयासत छोटा राज्य, दे शी राज “जब रयासत दे वगढ़ के द वान…” पुराने समय म हमारे इलाके म भी
एक छोट रयासत हुआ करती थी।

द वान राज्य का पमुख मंत्र ी, जो सारा राज-काज “…सरदार सुजान सह बूढ़े हुए” राजा ने अपने द वान को खज़ाने
सँभालता है क दे खरेख स पी।

वनय नमता से की गई पाथना “जाकर महाराज से वनय क ” मने शक्षक से वनय क क एक
दन क छु मल जाए।

द नबंधु ग़ र ीबों का सहारा — राजा के िलए आदरसूचक “द नबंधु! दास ने श्रीमान क संत ने भगवान को द नबंधु कहकर
संबोधन सेवा…” पुकारा।

नी तकुशल नीित चलाने में िनपुण, समझदारी से काम “अनुभवशील नी तकुशल द वान का हमारे प्रधानाचाय बहुत नी तकुशल
िनकालने वाला बड़ा आदर” ह, हर झगड़ा शां त से सुलझा दे ते
ह।

नेकनामी अच्छा नाम, सुयश “सारी ज़दगी क नेकनामी म म एक भूल से वष क नेकनामी चली
मल जाए।” जाती है।

सुयोग्य पूर ी तरह योग्य, हर तरह से लायक “दे वगढ़ के लए एक सुयोग्य द वान इस काम के लए हम एक सुयोग्य
क ज़रूरत है” व्य क्त चा हए।

हृष्ट-पुष्ट तंद ुरुस्त और बलवान “मगर हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है” रोज़ खेलने से भाई का शरीर हृष्ट-
पुष्ट हो गया।

मंदा ग्न िजसकी पाचन-शिक्त कमज़ोर हो, बदहज़मी का “मंदा ग्न के मरीज को यहाँ तक कष्ट मंदा ग्न से बचने के लए समय पर
रोगी उठाने क कोई ज़रूरत नह ” भोजन क जए।

तहलका हलचल, खलबली “इस व ापन ने सारे मुल्क म नए खलाड़ी क पारी ने पूरे मैदान
तहलका मचा दया।” म तहलका मचा दया।

सनद पमाण-पत्र, िडग ी “सनद क कैद न होने पर भी सनद उसने अपनी सनद दखाकर नौकरी
से परदा तो ढका रहता है” के लए आवेदन कया।

अंगरखा / चोगा पुर ाने ढं ग के पहनावे — लंबा कु रता-सा वस्त्र, “रंगीन एमामे, चोगे और नाना प्रकार नाटक म राजा के लए चोगा और
/ कंटोप ढीला लबादा और कान ढकने वाली टोपी के अंगरखे और कंटोप…” पगड़ी सलवाई गई।

बगुला और हंस यहाँ पतीक — बग ल
ु ा = ऊपर से उजला िदखने “इन बगुल म हंस कहाँ छपा हुआ भीड़ म बगुले बहुत ह, हंस
वाला िदखावटी व्यिक्त, हंस = सचमुच का ग ण
ु ी है” पहचानना क ठन है।
व्यिक्त

मँजे हुए अभ्यास से िनखरे हएु , अनुभवी “हॉक के मँजे हुए खला ड़य ने पेश वे तबले के मँजे हुए वादक ह।
कया”

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पाठ का शब्द अथ पाठ का सं दभ अपना एक वाक्य

m lवेa seभलेमानुस ह क कसी को
.co और ताश जैसे गंभीर खेल खेलते थे” ag मना ही नह कर पाते।
भलेमानुस भला आदमी, शरीफ़ व्यिक्त “पढ़े - लखे भलेमानुस लोग शतरंज इतने

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अकस्मात अचानक, एकाएक “अकस्मात उसक नगाह गाड़ी पर अकस्मात बादल घर आए और
पड़ी।” मैच रुक गया।

. om और वात्सल्य का नाम भी
c“उदारता ag
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वात्सल्य छोटों के पित उमड़ने वाला स्नेह माँ के वात्सल्य क तुलना कसी से

g l as न था” नह क जा सकती।

मद घमंड, अहंक ार
a “उनम स्वाथ था, मद था…” धन का मद आदमी को अंधा बना

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दे ता है।

.
a s em के सहारे उसने बीमारी
com agl को हरा दया।
आत्मबल मन की शिक्त, किठनाई में डटे रहने का साहस “ जसके हृदय म दया हो और साथ- आत्मबल

.
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साथ आत्मबल”

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नदान अंत में, आिख़रकार “ नदान महीना पूरा हुआ।” नदान सब कुछ ठ क हो गया और
यात्रा शुरू हुई।

m“शहर के रईस और धनाढ्य लोग…” a s
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धनाढ्य बहत
ु धनी उस धनाढ्य प रवार ने व ालय के

a s em लए ज़मीन दान क ।

पैठना ag
गहराई में उतरना, डुबकी लगाना
l “गहरे पानी म पैठने से ही मोती वषय क गहराई म पैठे बना
मलता है।” असली समझ नह आती।

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages40
Languagehindi
Updated19 Sep 2026