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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा6
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 11: चेतक क वीरता
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
122 – 127 10 19 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 20 pages
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 11: चेतक क वीरता
NCERT कक्षा 6 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 11 चेतक क वीरता के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह एक क वता है, जसके रच यता
श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) ह और यह उनक प्र सद्ध काव्यकृ त ‘हल्द घाट ’ का एक अंश है। क वता म महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक
क फुत , नभ कता और स्वा मभ क्त का वीर-रस से भरा चत्र है। पृष्ठ 122 से 127 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से, पं क्तय पर चचा,
मलकर कर मलान, शीषक, क वता क रचना, शब्द के भीतर शब्द, आपक बात, समानाथ शब्द, आज क पहेली और खोजबीन के लए — शीषक-
दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 6) 122 – 127
खं ड प्रश्न
10 19
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 124
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए— (1) चेतक शत्रुओं क
सेना पर कस प्रकार टू ट पड़ता था? • चेतक बादल क तरह शत्रु क सेना पर वज्रपात बनकर टू ट पड़ता था। •
चेतक शत्रु क सेना को चार ओर से घेरकर उस पर टू ट पड़ता था। • चेतक हा थय के दल के समान बादल के रूप
म शत्रु क सेना पर टू ट पड़ता था। • चेतक नद के उफान के समान शत्रु क सेना पर टू ट पड़ता था।
सही उत्तर है — चेतक बादल क तरह शत्रु क सेना पर वज्रपात बनकर टू ट पड़ता था। इसी वकल्प के सामने तारा (★)
बनाइए।
इसका सीधा प्रमाण क वता क यह पं क्त है —
“िवकराल बज्र -मय बादल-सा
अिर की सेन ा पर घहर गया।”
यहाँ क व ने दो शब्द जान-बूझकर चुने ह। बज्र-मय बादल यानी ऐसा बादल जसम वज्र ( बजली) भरा हो, और घहरना यानी
बादल का गरजते हुए छा जाना। दोन मलकर बताते ह क चेतक शत्रु-सेना पर बादल क तरह छाया और वज्रपात क तरह
गरा।
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
बादल क तरह… सही ★ “ वकराल बज्र-मय बादल-सा / अ र क सेना पर घहर गया।” — क व क अपनी उपमा यही है।
वज्रपात बनकर
चार ओर से घेरकर ग़लत घेरने क बात क वता म कह नह आई। चेतक अकेला घोड़ा है; घेरना तो पूरी सेना का काम होता
है।
हा थय के दल के ग़लत क वता म हा थय का कोई ज़क्र ही नह है। ‘बादल’ शब्द सही है, पर उसके साथ जुड़ी उपमा
समान बादल के रूप म हाथी क नह , वज्र क है।
नद के उफान के समान ग़लत यह वकल्प भ्रम म डालता है, क्य क पहले “बढ़ते नद-सा वह लहर गया” आया है। पर वह उपमा
उसके लहराते हुए बढ़ने क है — सेना पर टू ट पड़ने क उपमा अगली ही पं क्त म बादल और
वज्र क है।
ऐसे प्रश्न कैसे हल कर: प्रश्न म जो क्रया पूछ गई है, उसे पक ड़ए। यहाँ क्रया है ‘टू ट पड़ना’। अब क वता म ढूँ ढ़ए
क टू ट पड़ने के साथ कौन-सी उपमा जुड़ी है — “अ र क सेना पर घहर गया” के ठ क ऊपर लखा है “ वकराल
बज्र-मय बादल-सा”। जो उपमा दूसरी क्रया (‘लहर गया’) के साथ जुड़ी है, वह उत्तर नह बन सकती।
प्र.2 (2) ‘लेकर सवार उड़ जाता था।’ इस पं क्त म ‘सवार’ शब्द कसके लए आया है? • चेतक • महाराणा प्रताप •
क व • शत्रु
सही उत्तर है — महाराणा प्रताप। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।
सवार का अथ है — घोड़े क पीठ पर बैठने वाला। इस क वता म घोड़ा चेतक है, इस लए उस पर बैठने वाला ‘सवार’ महाराणा
प्रताप ही हो सकते ह।
“जो तिनक हवा से बाग िहली
लेक र सवार उड़ जाता था।
राणा की पुत ली िफरी नही ं
तब तक चे त क मुड़ जाता था।”
ध्यान द जए — अगली ही पं क्त म क व उसी सवार का नाम खोल दे ता है: राणा। यानी ‘सवार’ और ‘राणा’ एक ही व्य क्त ह।
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
महाराणा सही ★ चेतक उनका ही घोड़ा है — “राणा प्रताप के घोड़े से”। सवार वही ह, और अगली पं क्त म ‘राणा’ नाम
प्रताप आ भी जाता है।
चेतक ग़लत चेतक तो घोड़ा है — वह सवार को लेकर उड़ता है। जो ले जा रहा है और जसे ले जाया जा रहा है, वे एक
नह हो सकते।
कव ग़लत क व श्यामनारायण पाण्डेय युद्ध का वणन कर रहे ह, युद्ध म लड़ नह रहे। वे क वता के बाहर ह, भीतर
नह ।
शत्रु ग़लत शत्रु के लए क वता म ‘अ र’ और ‘वैरी’ शब्द आए ह, और वह चेतक क पीठ पर नह , उसक टाप के
नीचे है — “हय-टाप से खन गया अंग।”
ध्यान र खए: क वता म सवनाम या ऐसे शब्द (सवार, वह, उसका) का अथ हमेशा आगे-पीछे क पं क्तयाँ पढ़कर
तय क जए। अकेली पं क्त भ्रम पैदा कर सकती है, पर उसका पड़ोस उत्तर बता दे ता है।
प्र.3 (ख) अब अपने मत्र के साथ तकपूण चचा क जए क आपने ये ही उत्तर क्य चुने?
यह चचा का प्रश्न है। यहाँ केवल “मने यह चुना” कहना काफ़ नह — बताना यह है क क वता क कौन-सी पं क्त आपके उत्तर
का प्रमाण है और बाक़ वकल्प क्य नह चलते। इसी को तकपूण चचा कहते ह।
अ चचा म तीन बात ज़रूर होनी चा हए —
आपने कौन-सा वकल्प चुना;
क वता क वह पं क्त जो आपके उत्तर को सद्ध करती है;
कम-से-कम एक ग़लत वकल्प को हटाने का कारण।
नमूना उत्तर:
“पहले प्रश्न म मने ‘बादल क तरह वज्रपात बनकर टू ट पड़ता था’ चुना। मेरा प्रमाण यह पं क्त है — ‘ वकराल बज्र-मय बादल-
सा / अ र क सेना पर घहर गया।’ ‘घहरना’ बादल का ही काम है और ‘बज्र’ बजली को कहते ह, इस लए दोन बात इसी वकल्प
म मलती ह। ‘नद के उफान’ वाला वकल्प मने इस लए हटाया, क्य क नद क उपमा ‘लहर गया’ के साथ आई है, ‘सेना पर टू ट
पड़ने’ के साथ नह । और ‘हा थय के दल’ वाला वकल्प तो हट ही गया, क्य क पूरी क वता म हाथी शब्द आया ही नह है।
दूसरे प्रश्न म मने महाराणा प्रताप चुना। मेरा प्रमाण है क ठ क अगली पं क्त म ही ‘राणा’ नाम आ जाता है — ‘राणा क पुतली
फरी नह ।’ ‘चेतक’ वाला वकल्प मने इस लए हटाया क्य क चेतक घोड़ा है; वह सवार को ‘लेकर’ उड़ता है, इस लए वह ख़ुद सवार
नह हो सकता।”
चचा से क्या मलेगा: हो सकता है आपके कसी साथी ने पहले प्रश्न म ‘नद के उफान’ चुना हो। उससे बहस करने
के बजाय पृष्ठ 123 क पं क्तयाँ साथ खोलकर प ढ़ए और पू छए — यह उपमा कस क्रया के साथ जुड़ी है? जब
दोन एक ही पं क्त पर उँ गली रखकर पढ़गे, उत्तर अपने-आप साफ़ हो जाएगा।
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता
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पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 124
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पाठ से
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पाठ से भावाथ
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पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह पढ़कर सम झए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
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प्र.1
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क्या अथ समझ म आया? कक्षा म अपने वचार साझा क जए और अपनी लेखन पु स्तका म ल खए। (क)
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“ नभ क गया वह ढाल म, सरपट दौड़ा करवाल
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सरल अथ — चेतक बना ज़रा भी डरे शत्रु-सै नक क ढाल के बीच घुस गया और उनक करवाल यानी तलवार के बीच पूरी
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रफ़्तार से दौड़ता रहा। जहाँ ह थयार चल रहे थे, ठ क उसी भीड़ म वह नडर होकर आ-जा रहा था।
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शब्द अथ वह क्या बताता है
a g िनभ क जसे भय न हो, नडर चेतक का साहस — घायल होने के डर से वह पीछे नही ं हटा।
शत्र-ु सै िनकोंoकीmभीड़ , जो अपने बचाव में ढाले ं ताने खड़ ी थी। a s
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वार रोकने वाला ह थयार
eकmकी गित — वह हिथयारों के बीच भी धीमा नही ं पड़ ा।
ढाल
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सरपट बना रुके, पूरी रफ़्तार से
तलवार युद्ध का सबसे ख़तरनाक िहस्सा, जहाँ जान का जोिखम सबसे य़ ादा था।
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करवाल
क व क कारीगरी — यहाँ क व सै नक का नाम नह लेता, केवल उनके ह थयार का नाम लेता है m
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glaसे बजली-सा नकलता एक सफ़ेद
om पूरा रणक्षेत्र खड़ा हो जाता है: चमकती ढाल, लहराती तलवार और उनकaे बीच
— ढाल और करवाल। इससे
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आँख के सामने
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घोड़ा।
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भाषा म क्या ख़ास है: ‘चाल म – भाल म – ढाल म – करवाल म’ — चार पं क्तय का अंत एक ही ध्व न पर
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. ा नमूना है। a
होता है। यह तुक पं क्तय को घोड़े क टाप जैसी लय दे दे ती है, मानो शब्द भी सरपट दौड़ रहे ह । यह पूरी क वता
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वीर रस क है, और यह पं क्त उसका सबसे अ
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अपने शब्द म क हए तो: जहाँ बड़े-बड़े योद्धा भी ह थयार दे खकर ठठक जाते ह, वहाँ एक घोड़ा बना रुके दौड़ता
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चला गया — यही चेतक क असली वीरता है।
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agl (ख) “भाला गर गया, गरा नषंग, हय-टाप से खन गया अंग।”
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प्र.2
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सरल अथ — चेतक का वेग इतना भयंकरeथा क शत्रु-सै नक के हाथ से भाले छू टकर गर पड़े, उनके नषंग यानी तीर रखने के
g l aसेsउनके अंग खुद-कुचल गए। यानी चेतक अकेले ही शत्रु-सेना को ततर- बतर करता चला
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तरकश भी गर गए, और घोड़े क टाप
गया।
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ चत्र जो बनता है
भाल ा लंबे डंडे वाला नुक ला जो हिथयार वार करने के िलए उठा था, वही हाथ से छू ट गया — शत्र ु के हड़ बड़ ा जाने का
ह थयार संके त।
िनषंग तरकश, तीर रखने का खोल कं धे पर बँधा तरकश तक िगर पड़ ा — यानी सै िनक सँभल ही नही ं पाए।
हय घोड़ा ‘हय-टाप’ यानी चेतक के खुर ों की मार।
खन खुद जाना, छल-कट जाना युद्ध की भयंक रता — टापों से ही शरीर घायल हो गए।
जाना
क व क कारीगरी — ध्यान द जए क यहाँ वाक्य कतने छोटे -छोटे ह — “भाला गर गया,” “ गरा नषंग,” “खन गया अंग।”
छोटे वाक्य पढ़ने म तेज़ी लाते ह, और इसी तेज़ी से युद्ध क अफ़रा-तफ़री महसूस होने लगती है। ‘ गर गया’ और ‘ गरा’ क
पुनरु क्त यह जताती है क गरना एक बार नह , बार-बार हुआ।
अगली पं क्त से जोड़कर दे खए: इसके तुरंत बाद क व कहता है — “वैरी-समाज रह गया दं ग / घोड़े का ऐसा दे ख
रंग।” यानी शत्रु न केवल हारा, ब ल्क हैरान भी रह गया क एक घोड़ा ऐसा भी हो सकता है। क वता क सबसे बड़ी
प्रशंसा यही है — प्रशंसा क व नह कर रहा, शत्रु कर रहा है।
ध्यान द जए: इन पं क्तय म वीर रस के साथ-साथ भयानक रस क झलक भी है, क्य क युद्ध का दृश्य डरावना
है। इसी लए क वता पढ़ते समय जोश भी आता है और युद्ध क भयावहता भी समझ म आती है।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 124 और 125
पाठ से
पाठ से मलान
प्र.1 क वता म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। अपने समूह म इन पर चचा क जए और इन्ह इनके सही भावाथ
से मलाइए। इसके लए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शक्षक क सहायता ले सकते ह। पं क्तयाँ — 1. राणा
प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था। 2. वह दौड़ रहा अ र-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था। 3. जो
त नक हवा से बाग हली लेकर सवार उड़ जाता था। 4. राणा क पुतली फरी नह , तब तक चेतक मुड़ जाता था।
5. वकराल बज्र-मय बादल-सा अ र क सेना पर घहर गया। भावाथ — 1. शत्रु क सेना पर भयानक बज्रमय
बादल बनकर टू ट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता। 2. हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था
मानो हवा और चेतक म प्र तयो गता हो रही हो। 3. शत्रुओं के सर के ऊपर से होता हुआ एक छोर से दूसरे छोर पर
ऐसे दौड़ता जैसे आसमान म दौड़ रहा हो। 4. चेतक क फुत ऐसी क लगाम के थोड़ा-सा हलते ही सरपट हवा म
उड़ने लगता था। 5. वह राणा क पूरी नगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता अथात वह उनका भाव समझ
जाता था।
दोन स्तंभ जान-बूझकर आगे-पीछे कर दए गए ह। सही मलान नीचे दया गया है — पुस्तक म इन्ह के बीच रेखा ख चए।
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पं क्त मलेगी भावाथ मलान का सुराग़
1. राणा पताप के घोड़े →2 हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे ‘पाला पड़ना’ का अथ ही है मुक़ाबला हो जाना। यहाँ
से पड़ गया हवा को दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक मुक़ाबला हवा से है — इस लए वही भावाथ चलेगा
पाला था। म प्र तयो गता हो रही हो। जसम हवा और चेतक क प्र तयो गता क बात हो।
2. वह दौड़ रहा अिर- →3 शत्रुओं के सर के ऊपर से होता हुआ पं क्त म दो बात ह — अ र-मस्तक (शत्रु का सर)
मस्तक पर, या आसमान एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता और आसमान। जस भावाथ म ये दोन बात एक साथ
पर घोड़ा था। जैसे आसमान म दौड़ रहा हो। आती ह, वही सही है।
3. जो तिनक हवा से →4 चेतक क फुत ऐसी क लगाम के ‘बाग’ का अथ है लगाम। भावाथ म ठ क यही शब्द
बाग िहली ले क र सवार थोड़ा-सा हलते ही सरपट हवा म उड़ने ‘लगाम’ आया है — इससे जोड़ा तुरंत पहचाना जाता
उड़ जाता था। लगता था। है।
4. राणा की पुतली िफरी →5 वह राणा क पूरी नगाह मुड़ने से पहले ‘पुतली फरना’ यानी नगाह घूमना। भावाथ म
नही ं, तब तक चेतक मुड़ ही उस ओर मुड़ जाता अथात वह ‘ नगाह’ शब्द आया है, इस लए यही जोड़ा बनेगा।
जाता था। उनका भाव समझ जाता था।
5. िवकराल बज्र-मय →1 शत्रु क सेना पर भयानक बज्रमय ‘बज्र-मय बादल’ और ‘अ र क सेना’ — दोन शब्द
बादल-सा अिर की से ना बादल बनकर टू ट पड़ता और शत्रुओं भावाथ म ज्य -के-त्य दोहराए गए ह। यह सबसे
पर घहर गया। का नाश करता। आसान जोड़ा है।
संक्षेप म मलान —
1→2 | 2→3 | 3→4 | 4→5 | 5→1
मलान करने का तरीक़ा: पहले वे जोड़े बनाइए जनम कोई शब्द दोन तरफ़ एक जैसा हो — जैसे ‘बज्र-मय
बादल’ या ‘लगाम/बाग’। ये आसान जोड़े जब हट जाएँगे, तो बचे हुए वकल्प अपने-आप कम हो जाएँगे और क ठन
जोड़े भी सुलझ जाएँगे। यही तरीक़ा हर मलान-प्रश्न म काम आता है।
ध्यान र खए: यहाँ पाँच जोड़े एक-एक क़दम खसके हुए ह (1→2, 2→3, 3→4, 4→5) और आ ख़री वापस
पहले पर लौट आता है (5→1)। जोड़े बनाने के बाद इसे एक बार जाँच ली जए — कोई भी भावाथ दो बार इस्तेमाल
नह होना चा हए।
शीषक — पृष्ठ 125
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पाठ से
पाठ से ले ख न
प्र.1 यह क वता ‘हल्द घाट ’ शीषक काव्य कृ त का एक अंश है। यहाँ इसका शीषक ‘चेतक क वीरता’ दया गया है।
आप इसे क्या शीषक दे ना चाहगे और क्य ?
नया शीषक सोचते समय दो बात दे खए — (1) नाम क वता क सबसे क य बात को पकड़े, और (2) वह नाम क वता के भीतर
से ही नकला हुआ लगे, बाहर से चपकाया हुआ नह । इस क वता क क य बात है — चेतक क बजली-सी ग त, उसक नडरता
और अपने स्वामी से उसका मौन तालमेल।
संभा वत यह नाम क्य क वता का आधार
शीषक
हवा से पाल ा किवता की सबसे अनोखी क ल्पना यही है — घोड़ े का मुक़ ाबला “पड़ गया हवा को पाला था।”
हवा से ।
आसमान पर घोड़ ा एक ही िचत्र में गित भी है और क ल्पना भी; पढ़ ते ही िज ासा “या आसमान पर घोड़ा था।”
जागती है।
राणा का चेतक घोड़ े और स्वामी का िरश्ता ही किवता की जान है। “राणा क पुतली फरी नह / तब तक चेतक मुड़
जाता था।”
रण का िनराल ा किव ने ख़दु उसे ‘िनराला’ कहा है — शीषक किवता के अपने “रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर / चेतक बन गया
घोड़ ा शब्द से बनता है। नराला था।”
ब ज्र- मय बाद ल किवता का सबसे पभावशाली दृ श्य, िजसमें चेतक शत्र-ु से ना पर “ वकराल बज्र-मय बादल-सा / अ र क सेना पर
टू ट पड़ ता है। घहर गया।”
वैर ी रह गया द ंग वीरता की पशंस ा शत्र ु के मुँह से हो — यह सबसे बड़ ी पशंस ा है। “वैरी-समाज रह गया दं ग / घोड़े का ऐसा दे ख
रंग।”
नमूना उत्तर: “म इस क वता का शीषक ‘आसमान पर घोड़ा’ रखना चा ँगा। कारण यह है क पूरी क वता म क व बार-बार यही
जताता है क चेतक ज़मीन का घोड़ा लगता ही नह — कभी वह हवा से मुक़ाबला करता है, कभी शत्रु के सर के ऊपर से नकल
जाता है, कभी वह ‘यह है, अब यहाँ नह ’ हो जाता है। ‘आसमान पर घोड़ा’ इन सब बात को एक ही चत्र म समेट लेता है। साथ ही
यह पं क्त क वता क अपनी है, इस लए शीषक क वता के भीतर से नकला हुआ लगता है, और पढ़ने से पहले ही मन म ज ासा
जगा दे ता है क आसमान पर घोड़ा भला कैसे?”
पुस्तक का नाम ‘हल्द घाट ’ क्य है, फर यह शीषक क्य : पूरी काव्यकृ त हल्द घाट के युद्ध पर है, इस लए
उसका नाम जगह के नाम पर रखा गया। पर यहाँ जो अंश लया गया है, उसम युद्ध का पूरा हाल नह , केवल चेतक
का पराक्रम है — इसी लए पाठ्यपुस्तक ने इस अंश का नाम ‘चेतक क वीरता’ रखा। अंश का शीषक अंश क
वषय-वस्तु से बनता है, पूरी पुस्तक क वषय-वस्तु से नह ।
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Tip: ऐसा शीषक मत चु नए जो बहुत सामान्य हो, जैसे ‘एक घोड़ा’ या ‘युद्ध’। अ ा शीषक क वता क तरफ़
ख चता है, उसे साधारण नह बनाता।
क वता क रचना — पृष्ठ 125 और 126
पाठ से
पाठ से भाषा- शल्प
प्र.1 “चेतक बन गया नराला था।” “पड़ गया हवा को पाला था।” “राणा प्रताप का कोड़ा था।” “या आसमान पर
घोड़ा था।” — रेखां कत शब्द पर ध्यान द जए। ये शब्द बोलने- लखने म थोड़े मलते-जुलते ह। इस तरह क
तुकांत शैली प्रायः क वता म आती है। कभी-कभी क वता अतुकांत भी होती है। इस क वता म आए तुकांत शब्द
क सूची बनाइए।
रेखां कत शब्द ह — नराला, पाला, कोड़ा, घोड़ा। ‘ नराला’ और ‘पाला’ का अंत एक ही ध्व न -आला पर होता है, और ‘कोड़ा’
तथा ‘घोड़ा’ का अंत -ोड़ा पर। पं क्तय के अंत म आने वाले ऐसे मलते-जुलते शब्द को तुकांत शब्द कहते ह, और जस क वता म
ये मलते ह उसे तुकांत क वता कहते ह। जस क वता म पं क्तय के अंत नह मलते, वह अतुकांत कहलाती है।
‘चेतक क वीरता’ के तुकांत शब्द क पूरी सूची —
छं द तुकांत शब्द मलती हुई ध्व न
1 िनराला – पाला -आला
2 कोड़ ा – घोड़ ा -ोड़ा
3 उड़ (जाता था) – मुड़ (जाता था) -उड़ … जाता था
4 चालों – भालों – ढालों – करवालों -आल (चार पं क्तयाँ एक साथ)
5 यहाँ – वहाँ – जहाँ – कहाँ -अहाँ (चार पं क्तयाँ एक साथ)
6 लहर – ठहर – घहर -अहर
7 िनषंग – अंग – दंग – रंग -अंग (चार पं क्तयाँ एक साथ)
तुक का असर क्या होता है: तुक क वता को लय और ग त दे ती है। इस क वता म तो तुक ख़ुद वषय के साथ
चलती है — ‘चाल –भाल –ढाल –करवाल ’ और ‘यहाँ–वहाँ–जहाँ–कहाँ’ जैसे लगातार मलते हुए अंत पढ़ते समय
ऐसा लगता है मानो घोड़े क टाप एक के बाद एक पड़ रही ह । इसी लए वीर रस क क वताएँ प्रायः कसी हुई तुक म
लखी जाती ह — वे गाने और सुनाने म जोश पैदा करती ह।
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता
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ख़ुद करके दे खए: ‘यहाँ – वहाँ – जहाँ – कहाँ’ वाला छं द ज़ोर से प ढ़ए और हर पं क्त के अंत पर मेज़ पर हल्क
mढ़ए — वहाँ यह
थाप द जए। आपको ख़ुद सुनाई दे गा क तुक कैसे ताल बन जाती है। फर कोई अतुकांत क वताeप
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थाप नह बने.गcी,oपर भाव उतना ही गहरा हो सकता है। gl a
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शब्द के भीतर शब्द — पृष्ठ 126
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पाठ से
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पाठ से शब्द क बात a g l
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“या आसमान का घोड़ा था।” ‘आसमान’ शब्द के भीतर कौन-कौन से शब्द छपे ह— आस, समान, मान, सम,
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आन, नस आ द। अब इसी प्रकार क वता म से कोई पाँच शब्द चुनकर उनके भीतर के शब्द खो जए।
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a तरीक़ा — बड़े शब्द को अक्षर म तो ड़ए, फर पास-पास के अक्षर को जोड़कर दे खए क कोई अथवाला छोटा शब्द बनता है या
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नह । कभी-कभी अक्षर का क्रम उलटने पर भी शब्द नकल आता है (जैसे आसमान से ‘नस’)। नीचे क वता से चुने पाँच शब्द और
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उनके भीतर छपे शब्द दए गए ह।
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क वता क पं क्त भीतर छपे शब्द
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चौकड़ ी “रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर”
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सर, पट, पर, टप, रस
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सरपट “सरपट दौड़ा करवाल म।”
“सरपट दौड़ा करवालco m g l a
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करवाल म।” कर, वाल , करवा, कल , रव, लव
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और भी आज़माइए —
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शब्द भीतर छपे शब्द
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता AglaSem · NCERT Solutions
यह खेल क्य उपयोगी है: इससे आपक नज़र शब्द के अक्षर पर जमने लगती है। वतनी (स्पे लग) सुधरती है, नए
शब्द याद रहते ह, और आगे चलकर सं ध-समास तथा उपसग-प्रत्यय समझना आसान हो जाता है — क्य क वहाँ
भी बड़ा शब्द छोटे टु कड़ से ही बनता है।
Try This: अपने नाम के भीतर छपे शब्द खो जए, फर अपने गाँव या शहर के नाम के भीतर। जैसे — ‘बरेली’ म
बरे, रेली, ली; ‘नागपुर’ म नाग, पुर, गप, नापुर। कक्षा म जो सबसे ज़्यादा शब्द नकाले, वही जीता।
आपक बात — पृष्ठ 126
पाठ से आगे
पाठ से आगे अपनी बात
प्र.1 “जो त नक हवा से बाग हली लेकर सवार उड़ जाता था।” (क) ‘हवा से लगाम हली और घोड़ा भाग चला’
क वता को प्रभावशाली बनाने म इस तरह के प्रयोग काम आते ह। क वता म आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर
बातचीत कर।
जस प्रयोग क बात हो रही है, उसे अ तशयो क्त कहते ह — यानी कसी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना, ता क पढ़ने वाले के
मन पर उसका असर गहरा हो जाए। सचमुच लगाम हवा से नह हलती और घोड़ा उड़ता भी नह ; पर ऐसा कहने से चेतक क फुत
जतनी साफ़ दखती है, उतनी ‘चेतक बहुत तेज़ दौड़ता था’ कहने से कभी नह दखती।
क वता म आए ऐसे प्रयोग —
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता AglaSem · NCERT Solutions
पं क्त बढ़ा-चढ़ाकर क्या कहा गया असर
“पड़ गया हवा को पाला था।” घोड़े का मुक़ाबला सीधे हवा से हो गया चेतक हवा िजतना तेज़ है — यह बात एक ही शब्द
‘पाला’ में आ जाती है।
“िगरता न कभी चेतक-तन पर / राणा चाबुक कभी उसक पीठ तक पहुँचा ही वह मारने से नही,ं अपनी मज़ से दौड़ ता था —
पताप का कोड़ा था।” नह स्वािमभिक्त का संके त।
“या आसमान पर घोड़ा था।” घोड़ा ज़मीन पर नह , आसमान पर दौड़ गित इतनी िक पैर ज़ मीन छू ते ही नही ं िदखते।
रहा है
“राणा की पुतली िफरी नही ं / तब तक आँख घूमने से भी पहले घोड़ा मुड़ जाता है स्वामी और घोड़ े के बीच िबना बोले तालमेल ।
चेतक मुड़ जाता था।”
“है यही ं रहा, अब यहाँ नही ं / वह वही ं रहा है वह एक ही समय म हर जगह है और कह शत्र ु उसे पकड़ ही नही ं पाता — गित का चरम
वहाँ नही ं।” नह िचत्र।
“थी जगह न कोई जहाँ नही ं।” पूरे रणक्षेत्र म एक भी जगह ऐसी नह बची अके ला घोड़ ा पूरे मैद ान पर छा गया।
जहाँ वह न गया हो
“उड़ गया भयानक भालों में। ” भाल के बीच से उड़ जाना िनडरता और गित, दोनों एक साथ।
इनके अलावा क वता म उपमाएँ भी ह — ‘सा’ लगाकर तुलना करना उपमा कहलाता है:
“बढ़ते नद-सा वह लहर गया” — बढ़ती नद से तुलना;
“ वकराल बज्र-मय बादल-सा अ र क सेना पर घहर गया” — गरजते बादल से तुलना।
और ध्व न का एक प्रयोग अनुप्रास भी है — “रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर” म ‘र’ क आवृ त्त टाप क आवाज़ जैसी लगती है।
बातचीत म क्या कह: अपने समूह म एक-एक पं क्त बाँट ली जए और हर कोई बताए — “इसम सच क्या है और
बढ़ाकर क्या कहा गया है?” जैसे — सच यह है क चेतक बहुत तेज़ दौड़ता था; बढ़ाकर यह कहा गया क वह
आसमान पर दौड़ रहा था। इसी अंतर को पहचान लेना ही अलंकार समझना है।
Try This: अपने आसपास क कसी साधारण बात को अ तशयो क्त म क हए — “गम इतनी थी क पंखा भी
पसीना प छ रहा था।” “वह इतना धीरे चलता है क उसक परछाईं आगे नकल जाती है।” कक्षा म सबसे मज़ेदार
वाक्य चु नए।
प्र.2 (ख) कह भी, कसी भी तरह का युद्ध नह होना चा हए। इस पर आपस म बात क जए।
यह अपनी राय रखने और दूसर क राय सुनने का प्रश्न है, इस लए इसका कोई एक ‘सही उत्तर’ नह है। पर अ बातचीत के लए
तीन बात चा हए — अपनी राय, उसका कारण, और दूसरी राय का सम्मान।
दोन पक्ष के तक —
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता AglaSem · NCERT Solutions
“युद्ध नह होना चा हए” — पक्ष म “कभी-कभी लड़ना पड़ता है” — दूसरा पक्ष
युद्ध म सबसे ज़्यादा नुक़सान आम लोग का होता है — ब े, बूढ़े यिद कोई आपके घर या दे श पर ज़ बरद स्ती क़ ब्ज़ा करने आए , तो अपनी
और स्त्रयाँ बेघर हो जाते ह। रक्षा करना अन्याय नही ं है।
जो पैसा ह थयार म लगता है, वही स्कूल, अस्पताल और सड़क पर महाराणा पताप ने अपनी मातभृ िू म की स्वतंत्रता बचाने के िलए लड़ ाई
लग सकता था। लड़ ी — वह हमला नही,ं पितरोध था।
युद्ध खेत, जंगल, न दयाँ और जानवर — सबको नष्ट करता है। इस अन्याय के सामने चुप रह जाना भी अन्याय को बढ़ ावा दे ना है।
क वता म भी घोड़े घायल हो रहे ह।
झगड़े का हल बातचीत, सं ध और समझौते से भी नकल सकता है पर यह भी सच है िक लड़ ाई अंितम उपाय होनी चािहए , पहला नही ं।
— और वह हल टकाऊ होता है।
नमूना उत्तर: “म मानता ँ क युद्ध कसी समस्या का अ ा हल नह है। युद्ध म जीतने वाला भी बहुत कुछ खो दे ता है — इस
क वता म ही दे खए, चेतक जैसा वीर घोड़ा भी घायल हुआ और दोन ओर के सै नक के अंग ‘हय-टाप से खन गए’। जो पैसा और
मेहनत लड़ाई म जाती है, वह अगर पढ़ाई और खेती म लगे तो हज़ार घर सुखी हो सकते ह। हाँ, यह भी सच है क अगर कोई
ज़बरदस्ती हमारी आज़ाद छ नने आए, तो अपनी रक्षा करना ग़लत नह । इस लए मेरी राय है — पहले बातचीत, फर समझौता,
और लड़ाई सबसे आ ख़री उपाय। और सबसे बड़ी बात यह क हम युद्ध का जोश पसंद करना चा हए, पर युद्ध नह — जैसे इस
क वता म हम चेतक क वीरता अ लगती है, न क सै नक का घायल होना।”
बहस को झगड़ा न बनने द: बातचीत म ‘तुम ग़लत हो’ कहने के बजाय पू छए — “तुम ऐसा क्य सोचते हो?” फर
अपनी बात कारण के साथ र खए। कक्षा म दो टो लयाँ बनाकर एक-एक करके तक र खए और अंत म यह दे खए क
कन बात पर दोन टो लयाँ सहमत ह — प्रायः सब इस पर सहमत नकलते ह क नद ष लोग का नुक़सान नह
होना चा हए।
Did you know? महात्मा गांधी ने बना ह थयार उठाए, केवल सत्य और अ हसा के बल पर आज़ाद क लड़ाई
लड़ी और जीती। यानी लड़ाई का एक रास्ता वह भी है जसम कोई घायल नह होता।
समानाथ शब्द — पृष्ठ 126 और 127
पाठ से आगे
पाठ से आगे शब्द क बात
प्र.1 कुछ शब्द समान अथ वाले होते ह, जैसे— हय, अश्व और घोड़ा। इन्ह समानाथ शब्द कहते ह। यहाँ पर दए गए
शब्द से उस शब्द पर घेरा बनाइए जो समानाथ न ह — 1. हवा, अनल, पवन, बयार 2. रण, तुरंग, युद्ध, समर 3.
आसमान, आकाश, गगन, नभचर 4. नद, नाद, स रता, त टनी 5. करवाल, तलवार, अ स, ढाल
हर पं क्त म तीन शब्द एक ही अथ के ह और एक शब्द अलग है। उसी अलग शब्द पर घेरा बनाना है। नीचे उत्तर और कारण दोन
दए गए ह।
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क्रम दए गए शब्द घेरा बनाइए उस शब्द का अथ बाक़ तीन का साझा अथ
1. हवा, अनल, पवन, बयार अनल आग, अ न हवा / वायु
2. रण, तुरंग, युद्ध, समर तुरंग घोड़ा (हय, अश्व का पयायवाची) युद्ध / लड़ाई
3. आसमान, आकाश, गगन, नभचर नभचर आकाश म उड़ने वाला, यानी पक्षी आसमान / आकाश
4. नद, नाद, स रता, त टनी नाद ध्व न, गूँजती आवाज़ नद
5. करवाल, तलवार, अ स, ढाल ढाल वार रोकने वाला बचाव का साधन तलवार
ध्यान दे ने लायक़ दो जोड़े —
नद और नाद दे खने-सुनने म लगभग एक जैसे ह, पर अथ बलकुल अलग। ‘नद’ बड़ी नद को कहते ह (जैसे ब्रह्मपुत्र नद), और
‘नाद’ का अथ है आवाज़ — जैसे ‘शंख-नाद’।
नभचर म ‘नभ’ यानी आकाश तो है, पर पूरा शब्द आकाश का नह , आकाश म चलने वाले का नाम है। इसी तरह जल म चलने
वाला ‘जलचर’ और धरती पर चलने वाला ‘थलचर’ कहलाता है।
क वता से जो ड़ए: इस क वता म इनम से कई शब्द ख़ुद आए ह — रण (“रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर”),
करवाल (“सरपट दौड़ा करवाल म”), ढाल (“ नभ क गया वह ढाल म”), हय (“हय-टाप से खन गया अंग”) और
नद (“बढ़ते नद-सा वह लहर गया”)। ध्यान द जए क क व ने ढाल और करवाल दोन अलग-अलग ह थयार के
रूप म इस्तेमाल कए ह — यही सबसे बड़ा सुराग़ है क वे समानाथ नह हो सकते।
याद रखने का तरीक़ा: तलवार के तीन नाम एक साथ याद क जए — अ स, करवाल, कृपाण। और घोड़े के तीन
— हय, अश्व, तुरंग। पयायवाची शब्द जोड़ म नह , तकड़ी म याद करने से जल्द बैठ जाते ह।
आज क पहेली — पृष्ठ 127
पाठ से आगे
पाठ से आगे बू झो तो जान
प्र.1 बूझो तो जान — तीन अक्षर का मेरा नाम, उल्टा सीधा एक समान। दन म जगता, रात म सोता, यही मेरी
पहचान।।
उत्तर है — नयन (आँख)।
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता
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पहेली का सुराग़ ‘नयन’ पर कैसे सही बैठता है
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तीन अक्षर का मेर ा नाम न + य + न — पूरे तीन अक्षर।
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g l a ‘नयन’ को उ ल्टा पिढ़ ए तो भी नयन ही बनता है। ऐसे शब्द ों को पैिलंडोम या िवलोमपद कहते है।
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उल्टा सीधा एक समान
िदन में जगता, रात में सोता आँखें िदन भर खुल ी रहती है ं और रात को नी ंद में बंद हो जाती है।ं
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Try This: ऐसे और शब्द खो जए जो उल्टे -सीधे एक समान पढ़े जाएँ — जहाज, कनक, नमन, डकड… और
ag पक्क करने म बहुत मदद करता है।
अंग्रेज़ी म level, madam। यह खेल वतनी
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प्र.2 एक पक्षी ऐसा अलबेला, बना पंख उड़ रहा अकेला। बाँध गले म लंबी डोर, पकड़ रहा अंबर का छोर।
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उत्तर है — पतंग।
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पहेली का सुराग़ सही
एक पक्षी ऐसा अलबेल ा पतंग पक्षी की तरह आकाश में उड़ ती है, इसिलए उसे मज़ ाक़ में ‘अलबेल ा पक्षी’ कहा गया।
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िबना पंख उड़ रहा अके ला पतंग के पंख नही ं होते; वह के वल हवा और डोर के सहारे उड़ ती है।
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m पतंग में क ी बाँधकर लंबी डोर जोड़ ी जाती है — यही सबसे पक्काlसुaरsाग़ है।
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बाँध गले में लंबी डोर
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वह ऊपर-ऊपर उठती जाती है, मानो आसमान का िसरा छू ने चली हो।
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पहेली कैसे बूझ: पहेली म जो बात वरोधाभास लगे, वही असली कुंजी होती है। यहाँ ‘पक्षी’ कहा गया पर ‘ बना
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पंख’ भी कहा गया — इसका मतलब यह कोई सचमुच का पक्षी नह , उड़ने वाली कोई और चीज़ है। साथ म ‘डोर’
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आते ही उत्तर तय हो जाता है।
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रात म ँ दन म नह , द ये के नीचे ँ ऊपर नह । बोलो, बोलो— म ँ कौन?
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उत्तर है — अँधेरा।
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पहेली का सुराग़ ‘अँधेरा’ पर कैसे सही बैठता है
रात में हू ँ िदन में नही ं अँधेरा रात का साथी है; िदन में सूरज की रोशनी में वह रहता ही नही ं।
दीये के नीचे हू ँ ऊपर नही ं दीये की लौ ऊपर की ओर उजाला फै लाती है, पर ठीक उसके नीचे उसकी अपनी छाया से अँधेरा बना रहता है।
यह कहावत भी यही कहती है: “द पक तले अँधेरा।” इसका अथ है — जो दूसर को रोशनी दे ता है, उसके अपने
पास कमी रह सकती है। जैसे कोई शक्षक पूरे गाँव को पढ़ाए पर अपने ब े को समय न दे पाए, तो कहा जाता है
— द पक तले अँधेरा।
ध्यान द जए: यह पहेली कसी चीज़ क नह , एक अनुप त क है। अँधेरा अपने-आप म कोई वस्तु नह — वह
तो केवल रोशनी का न होना है। पहे लय म ऐसी अमूत चीज़ (छाया, साँस, समय, न द) अक्सर पूछ जाती ह।
प्र.4 मुझम समाया फल, फूल और मठाई। सबके मुँह म आया पानी मेरे भाई।
उत्तर है — गुलाब जामुन।
पहेली का सुराग़ ‘गुलाब जामुन’ पर कैसे सही बैठता है
मुझमें समाया फू ल नाम का पहला िहस्सा — गुल ाब, जो एक फू ल है।
मुझमें समाया फ ल नाम का दू स रा िहस्सा — जामुन, जो एक फल है।
मुझमें समाई िमठाई पूरा शब्द िमलकर एक िमठाई का नाम बन जाता है।
सबके मुँह में आया पानी नाम सुनते ही मुँह में पानी आ जाना िमठाई की ही पहचान है।
पहेली क चालाक : यहाँ ‘मुझम समाया’ का अथ पेट के भीतर समाना नह , नाम के भीतर समाना है। यह ठ क
वैसा ही खेल है जैसा आपने ‘शब्द के भीतर शब्द’ ग त व ध म कया था — बड़े शब्द के भीतर छोटे शब्द छपे रहते
ह।
Try This: ऐसे और नाम सो चए जनम दो अलग चीज़ छपी ह — ‘सीताफल’ (नाम + फल), ‘गुलाबजल’
(फूल + जल), ‘ना रयल पानी’। इन्ह से आप ख़ुद अपनी पहेली बना सकते ह।
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प्र.5 सड़क है पर गाड़ी नह , जंगल है पर पेड़ नह । शहर है पर घर नह , समंदर है पर पानी नह ।
उत्तर है — न ा (मान चत्र)।
पहेली का सुराग़ ‘न े’ पर कैसे सही बैठता है
सड़क है पर गाड़ी नही ं नक्शे पर सड़ कें लकीरों के रूप में बनी होती है,ं पर उन पर कोई गाड़ ी नही ं चलती।
जंग ल है पर पेड़ नही ं जंगल हरे रंग के धब्बे से िदखाया जाता है — असली पेड़ वहाँ नही ं होते।
शहर है पर घर नही ं शहर िसफ़ एक िबंद ु और नाम भर होता है।
समंद र है पर पानी नही ं समुद नीले रंग से िदखाया जाता है, पर वह काग़ ज़ ही रहता है।
असली बात: न ा कसी जगह क तस्वीर नह , संकेत है। वह असली चीज़ क जगह चह्न, रंग और रेखाएँ रख
दे ता है — इसी लए एक छोटे -से काग़ज़ पर पूरा दे श आ जाता है। न े म द गई इन संकेत- चह्न क सूची को
संकेत-सूची कहते ह।
Check it yourself: अपनी सामा जक व ान क पुस्तक का भारत का न ा खो लए और ग नए क उसम
कतने अलग-अलग रंग और चह्न इस्तेमाल हुए ह। फर अपने स्कूल का एक छोटा न ा बनाइए — कक्षाएँ, मैदान,
पानी क टं क और मुख्य ार दखाइए।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 127
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 महाराणा प्रताप कौन थे? उनके बारे म इंटरनेट या पुस्तकालय से जानकारी प्राप्त करके ल खए।
यह खोजबीन का प्रश्न है। पहले जानकारी इक क जए, फर अपने शब्द म ल खए। अ े उत्तर म ये बात होनी चा हए —
कौन थे, कहाँ के थे, कस समय हुए, कस बात के लए प्र सद्ध ह, और उनका इस क वता से क्या संबंध है।
खोजबीन के लए मुख्य तथ्य —
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बदु जानकारी
पूर ा नाम और महाराणा पताप िसंह — मेवाड़ (राजस्थान) के राजपूत शासक , िससोिदया वंश के ।
पद
समय सन 1540 से 1597 तक। वे सन 1572 में मेवाड़ की ग ी पर बैठे।
माता-िपता िपता महाराणा उदयिसंह ि तीय (उदयपुर नगर के संस्थापक ), माता जयवंता बाई।
िकसिलए पिसद्ध उ न्होंने मुग़ल समाट अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर िदया और मेवाड़ की स्वतंत्रता के िलए वष ं संघ ष
िकया।
हल्दीघाटी का सन 1576 में, हल्दीघाटी (राजसमंद , राजस्थान) के दर में, अकबर की ओर से आमेर के राजा मान िसंह की से ना के िवरुद्ध।
युद्ध यही युद्ध इस किवता की पष्ृ ठभूिम है।
चेतक उनका िपय घोड़ ा, जो हल्दीघाटी के युद्ध में घायल होकर भी महाराणा को सुरिक्षत िनकाल ले गया और िफर पाण त्याग िदए।
इसी किवता का नायक वही है।
किठन िदन युद्ध के बाद उ न्होंने वष ं जंगलों-पहाड़ ों में क ष्ट भरा जीवन िबताया, पर हार नही ं मानी। लोक -कथाओं में घास की रोटी का
पसंग बहुत पिस द्ध है।
आज उनका उदयपुर के मोती मगरी में उनकी घोड़ े पर सवार पितमा है (इसी का िचत्र आपकी पुस्तक के पष्ृ ठ 123 पर छपा है)।
स्मरण हल्दीघाटी में चेतक की समािध भी बनी है।
नमूना उत्तर: “महाराणा प्रताप मेवाड़ के एक वीर राजपूत राजा थे। उनका जन्म सन 1540 म हुआ और वे 1572 म मेवाड़ क ग
पर बैठे। उस समय मुग़ल स ाट अकबर चाहता था क सभी राजा उसक अधीनता स्वीकार कर ल, पर महाराणा प्रताप ने ऐसा करने
से साफ़ इनकार कर दया। इसी कारण सन 1576 म हल्द घाट का युद्ध हुआ, जसम उनका सामना अकबर क वशाल सेना से
हुआ। उस युद्ध म उनका घोड़ा चेतक घायल होने पर भी उन्ह सुर क्षत नकाल ले गया — यही घटना ‘चेतक क वीरता’ क वता म
व णत है। युद्ध के बाद उन्ह ने वष जंगल म क ठन जीवन बताया, पर आत्मसम्मान से समझौता नह कया। सन 1597 म उनका
दे हांत हुआ। आज भी वे स्वा भमान, साहस और मातृभू म-प्रेम के प्रतीक माने जाते ह।”
खोजबीन कैसे कर: केवल एक जगह से नक़ल मत क जए। कम-से-कम दो ोत दे खए — पुस्तकालय क एक
इ तहास क पुस्तक और एक वश्वसनीय वेबसाइट — और जो तथ्य दोन जगह एक जैसा मले, उसे ही ल खए।
त थयाँ और ान के नाम वशेष ध्यान से जाँ चए, और अंत म अपने ोत के नाम भी लख द जए।
ध्यान र खए: महाराणा प्रताप के बारे म बहुत-सी बात लोक-कथाओं से आई ह और बहुत-सी इ तहास से। लखते
समय दोन को अलग र खए — “इ तहास बताता है क…” और “लोक-कथाओं म कहा जाता है क…”। यही एक
अ े शोधकता का तरीक़ा है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 इस क वता म चेतक एक ‘घोड़ा’ है। पशु-प क्षय पर आधा रत पाँच रचनाओं को खो जए और अपनी कक्षा क
द वार-प त्रका पर लगाइए।
यह पढ़ने और मलकर करने क प रयोजना है। पहले पुस्तकालय या इंटरनेट से पाँच रचनाएँ खो जए, फर उन्ह सुंदर ढं ग से द वार-
प त्रका पर सजाइए। नीचे कुछ जानी-मानी रचनाएँ द गई ह — इनम से पाँच चुन ली जए या इन्ह क तरह अपनी पसंद क रचनाएँ
ढूँ ढ़ए।
रचना रचनाकार वधा कौन-सा पशु-पक्षी और क्या ख़ास
िगल्ल ू महादे वी वमा संस्मरण एक िगलहरी, िजसे ले िखका ने पाला। जानवर और मनुष्य के स्नेह की
सबसे कोमल कहानी।
नील कं ठ महादे वी वमा रेखा चत्र एक मोर, िजसका नाम नीलकं ठ था। उसकी सुंद रता, नत्ृ य और अंत
का मािमक वणन।
द ो बैल ों की कथा प्रेमचंद कहानी हीरा और मोती नाम के दो बैल , जो िमत्रता और स्वािभमान की िमसाल
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सोना (‘मेर ा महादे वी वमा संस्मरण सोना नाम की एक िहरनी, जो घर की सद स्य जैस ी बन गई थी।
पिरवार’ से )
चीटी
ं सोहनलाल वेद क वता नन्ही ची ंटी की लगन और पिरश्रम से सीख ले ने की किवता।
पंचतंत्र की वष्णु शमा कथा- शेर, खरगोश, कौआ, बगुल ा, बंद र — सारे पात्र पशु-पक्षी है ं और हर
कहािनयाँ संग्रह कहानी एक सीख दे ती है।
जंग ल ब ुक रुडयाड कप लग ( हद उपन्यास भेिड़ यों के बीच पला लड़ का मोगली, भालू बलू और चीता बघीरा।
अनुवाद)
द वार-प त्रका कैसे बनाएँ —
1. बँटवारा क जए: पाँच समूह बनाइए, हर समूह एक रचना ले।
2. हर रचना के लए एक काड बनाइए जसम हो — रचना का नाम, रचनाकार, वधा (क वता / कहानी / संस्मरण), कौन-सा
पशु-पक्षी है, और चार-पाँच पं क्तय म उसका प रचय।
3. एक पसंद दा अंश रचना म से चुनकर बड़े अक्षर म ल खए — जैसे इस क वता से “ नभ क गया वह ढाल म, सरपट दौड़ा
करवाल म।”
4. चत्र जो ड़ए — उस पशु या पक्षी का चत्र बनाइए या पुरानी प त्रका से काटकर चपकाइए।
5. प त्रका का नाम र खए — जैसे ‘हमारे संगी-साथी’, ‘पंख और पैर’ या ‘चेतक के दोस्त’।
इस काम से क्या मलेगा: आप दे खगे क हद सा हत्य म पशु-पक्षी केवल ‘जानवर’ नह होते — वे पात्र होते ह,
जनके अपने स्वभाव, अपनी वफ़ादारी और अपना दुख-सुख होता है। चेतक भी क वता म घोड़ा भर नह , एक वीर
पात्र है। यही बात हम अपने आसपास के जीव-जंतुओं को अ धक संवेदनशीलता से दे खना सखाती है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता
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Try This: प त्रका के एक कोने म ‘हमारे अपने’ नाम से जगह र खए, जहाँ हर ब ा अपने घर या मोहल्ले के
m a s emपढ़े जाने वाले
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कसी पशु-पक्षी — गाय, कुत्ता, गौरैया, तोता — पर तीन-चार वाक्य लखकर लगाए। ये सबसे ज़्यादा
पच सा बत ह.cगेo।
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अध्याय — एक नज़र म
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रचना का नाम ‘चेतक क वीरता’ है और क व ह श्यामनारायण पाण्डेय। यह एक क वता है, कोई कहानी नह । क वता के
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बाद दया गया ‘क व से प रचय’ बताता है क वे वीर रस क क वताओं के लए च चत ह, उनक सवा धक लोक प्रय
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काव्यकृ त ‘हल्द घाट ’ सन 1939 म छपी और यह क वता उसी का एक अंश है। क व का जीवनकाल 1907–1991 रहा।
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gग भरता हुआ चेतक सबसे अनोखा
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क वता कसके बारे म है — हल्द घाट के रणक्षेत्र म महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे म। क वता का पहला ही चत्र यह
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aहोseउठा।
है — “रण-बीच
agl चेतक क ग त — “पड़ गया हवा को पाला था” अथात हवा से ही उसका मुक़ाबला हो गया, और “या आसमान पर घोड़ा था”
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अथात वह ज़मीन पर नह , आकाश म दौड़ता लगता था। इतनी तेज़ी क कोड़ा कभी उसक पीठ पर गरा ही नह — “ गरता
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न कभी चेतक-तन पर / राणा प्रताप का कोड़ा था।”
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agl स्वामी का मन पढ़ लेता था। लगाम के ज़रा-से हलते ही वह सवार को लेकर उड़
चेतक क स्वा मभ क्त — “राणा क पुतली फरी नह / तब तक चेतक मुड़ जाता था।” राणा क आँख पूरी घूमने से पहले
ही चेतक उधर मुड़ जाता था, यानी वह अपने
जाता था।
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चेतक क नभ कता — “कौशल दखलाया चाल म / उड़ गया भयानक भाल म। / नभ क गया वह ढाल म / सरपट दौड़ा
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करवाल म।” भाले, ढाल और तलवार के बीच वह बना डरे दौड़ता रहा। शत्रु को वह कह टकता ही नह दखा — “है यह
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रहा, अब यहाँ नह ।”
s e mअंत का दृश्य — “ वकराल बज्र-मय बादल-सा / अ र क सेना पर घहर गया।” चेतक शत्रु-सेना पर वज्र-भरे बादल क तरह
agla टूट पड़ा; भाले और नषंग गर गए, टाप से अंग खुद गए और “वैरी-समाज रह गया दंग / घोड़े का ऐसा देख रंग।”
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कक्षा 6 हद अध्याय 11 चेतक क वीरता AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
क वता का अथ क वता क पं क्त अपना एक वाक्य
शब्द
रण युद्ध, लड़ाई का मैद ान “रण-बीच चौकड़ी भर- हल्द घाट का रण आज भी इ तहास म याद कया
भरकर” जाता है।
चौकड़ी भरना घोड़े का चारों पैर एक साथ उठाकर लंबी “रण-बीच चौकड़ी भर- मैदान म हरन चौकड़ी भरता हुआ नकल गया।
छलाँग लगाना भरकर”
पाला पड़ना मुक़ ाबला हो जाना, टक्कर हो जाना “पड़ गया हवा को पाला इस बार हमारी ट म का पाला ज़ले क सबसे
था।” मज़बूत ट म से पड़ा।
कोड़ा चाबुक , िजससे घोड़े को तेज़ चलने के िलए “राणा प्रताप का कोड़ा सारथी ने कोड़ा उठाया ज़रूर, पर घोड़ पर चलाया
मारा जाता है था।” नह ।
अर शत्र ,ु दुश्मन “वह दौड़ रहा अ र- वीर सै नक अ र के सामने कभी पीठ नह दखाता।
मस्तक पर”
बाग लगाम, घोड़े की रास “जो त नक हवा से बाग घुड़सवार ने बाग ख ची और घोड़ा तुरंत रुक गया।
हली”
सरपट बहत
ु तेज़ र ़ तार से , िबना रुके “सरपट दौड़ा करवाल डा कया साइ कल पर सरपट गाँव क ओर बढ़ा जा
म।” रहा था।
करवाल तलवार “सरपट दौड़ा करवाल संग्रहालय म राजाओं क पुरानी करवाल सजाकर
म।” रखी गई है।
घहरना बादल की तरह गरजते हएु छा जाना, टू ट “अ र क सेना पर घहर सावन का बादल पूरे गाँव पर घहरकर बरस पड़ा।
पड़ना गया।”
नषंग तरकश, तीर रखने का खोल “भाला गर गया, गरा धनुधर ने नषंग से एक तीर नकालकर धनुष पर
नषंग” चढ़ाया।
हय घोड़ा (‘अश्व’ का पय यवाची) “हय-टाप से खन गया ‘हय’ शब्द अब बोलचाल म नह , केवल क वता म
अंग।” मलता है।
दं ग हैर ान, चिकत, अचंिभत “वैरी-समाज रह गया छोटे ब े का ग णत दे खकर सारे शक्षक दं ग रह
दं ग” गए।
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