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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 6: चतुर चत्रकार
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
61 – 74 15 45 हन्द
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 5 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: चतुर चत्रकार
NCERT कक्षा 5 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 6 चतुर चत्रकार के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह एक क वता है और इसके रचनाकार रामनरेश
त्रपाठ ह — उनका नाम पृष्ठ 62 पर क वता के अंत म छपा है। क वता म एक चत्रकार जंगल म चत्र बना रहा है, तभी वहाँ शेर आ जाता है। चत्रकार
डरता ज़रूर है, पर घबराता नह — वह अपनी चतुराई से अपनी जान बचा लेता है। पृष्ठ 61 से 74 तक के हर अभ्यास — बातचीत के लए, पाठ से
(बहु वकल्पी), सो चए और ल खए, अनुमान और कल्पना, भाषा क बात, क वता से कहानी, बातचीत, तुलना, पाठ से आगे, चत्रकार का व ालय,
खोजबीन, जंगल म शां त और सुरक्षा, पुस्तकालय से तथा आज क पहेली — का हल यहाँ दया गया है। पाठ के बाद पृष्ठ 72 से 74 तक छपी बना
क्रमांक क जापानी लोककथा दो मढक क यात्रा भी पूरी समझाई गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 5) 61 – 74
खं ड प्रश्न
15 45
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 63
क वता पढ़ने के बाद कक्षा म चचा के प्रश्न
बातचीत के लए
प्र.1 चत्रकार क कौन-सी वशेषता आपको सबसे अ धक अ लगी और क्य ?
मुझे चत्रकार क चतुराई — यानी सूझ-बूझ — सबसे अ लगी। शेर सामने खड़ा था, फर भी उसने सोचना बंद नह कया।
पहले वह डरा —
“उसे दे खकर िच त्रकार के , तुरंत उड़ गए होश”
िफर उसने खुद को सँभ ाला —
“िफर उसको कु छ िहम्मत आई, दे ख उसे चुपचाप”
यह वशेषता अ क्य लगी: चत्रकार के पास न ताकत थी, न ह थयार। उसके पास सफ़ कलम, कागज और
अपना दमाग था। उसी दमाग से उसने शेर को पीठ फेरकर बैठा दया और चुपचाप खसक गया। अगर वह
चल्लाता या भागता, तो शेर तुरंत पीछे दौड़ता। यानी उसक चतुराई ने उसक जान बचाई।
उसक दो और वशेषताएँ भी बहुत अ ह—
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
1. धैय — उसने जल्दबाज़ी बलकुल नह क । पहले शेर को बैठाया, फर चत्र बनाने का बहाना बनाया, फर उसे पीठ फेरने को
कहा। एक-एक कदम शां त से उठाया।
2. बात करने का ढं ग — उसने शेर को “जंगल के सरदार” कहकर पुकारा और ‘आप’ कहकर बात क । इससे शेर खुश हो गया
और उसक बात मान ली।
याद रखने क बात: डर लगना बुरी बात नह है। चत्रकार को भी डर लगा था। बुरी बात है डरकर हाथ-पैर छोड़
दे ना।
प्र.2 शेर ने चत्रकार को ‘कायर-डरपोक’ कहा। क्या आपको लगता है क चत्रकार वास्तव म कायर और डरपोक था
या वह चतुर और समझदार था? अपने उत्तर का कारण बताइए।
चत्रकार कायर और डरपोक नह था। वह चतुर और समझदार था। शेर ने उसे कायर इस लए कहा, क्य क वह खुद ठगा गया था
और झुँझलाहट म भरा हुआ था।
कायर का अथ है — जो डरकर मैदान छोड़ दे और कुछ कर ही न पाए। चतुर का अथ है — जो सूझ-बूझ से काम नकाल ले।
अगर वह कायर होता तो... पर उसने असल म क्या कया
शेर को दे खते ही चीखकर भाग जाता वह वही ं रुका और शेर से शािं त से बात की।
काँपता रहता, कु छ सोच ही न पाता उसने एक पूर ी योजना बनाई — िचत्र बनाने का बहाना, िफर पीठ फे रने को कहना, िफर िखसक जाना।
जान बचाकर चुप रह जाता जाते-जाते उसने शेर को चुटीला जवाब भी िदया — “िचत्र कला का आप कीिजए , जंग ल में अभ्यास। ”
असली कारण: शेर के पास ताकत थी, चत्रकार के पास नह । ऐसे म शेर से लड़ना समझदारी नह , मूखता होती।
समझदार आदमी वही रास्ता चुनता है जससे जान भी बचे और कसी को नुकसान भी न हो। चत्रकार ने ठ क यही
कया।
ध्यान द जए: शेर ने ‘कायर डरपोक’ तब कहा, जब वह खुद हार चुका था। हारा हुआ आदमी अकसर दूसरे को बुरा
कह दे ता है। इस लए कसी के कहने भर से कोई कायर नह हो जाता — दे खना यह चा हए क उसने कया क्या।
प्र.3 आपके अनुसार ऐसे कौन-कौन से काय ह जनका नरंतर अभ्यास करने से उनम कुशलता बढ़ जाती है?
लगभग हर काम ऐसा ही है। नरंतर अभ्यास यानी रोज़-रोज़ बना नागा करते रहना। इससे हाथ भी सधता है और मन भी।
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काम अभ्यास से क्या बेहतर होता है
िचत्र बनाना ं किवता में शेर को यही सलाह िमली — “िचत्र कला का
हाथ सधता है, रे खाएँ सीधी और सुंद र बनने लगती है।
आप कीिजए , जंग ल में अभ्यास। ”
सुंद र िलखावट रोज़ एक प ा िलखने से अक्षर बराबर और साफ़ बनने लगते है।
ं
पढ़ ना और सुनाना रोज़ ज़ोर से पढ़ ने पर अटकना कम होता है और उ च्चारण साफ़ होता है।
पहाड़े और जोड़-घटाना रोज़ अभ्यास से िहसाब जल्दी और िबना गलती के होने लगता है।
तैर ना और साइिकल चलाना पहले िदन डर लगता है, कु छ िदन के अभ्यास के बाद अपने आप संतल
ु न बन जाता है।
खेल — िक्रके ट, कब ी, रोज़ के अभ्यास से िनशाना, दौड़ और फु त तीनों बढ़ जाते है।
ं
खो-खो
गाना और वाद्य बजाना िरयाज़ से सुर पक्का होता है और उँ ग िलयाँ अपने आप सही जगह पड़ने लगती है।
ं
रसोई और िसलाई जैसे घर रोटी गोल बनने लगती है और टाँके बराबर पड़ने लगते है।
ं
के काम
नई भाषा बोलना रोज़ बोलने से शब्द याद रहते है ं और िझझक खत्म हो जाती है।
ऐसा होता क्य है: जब हम कोई काम बार-बार करते ह, तो हमारा दमाग उस काम का रास्ता याद कर लेता है। फर
वह काम सोचे बना ही होने लगता है। इसी लए कहावत है — “करत-करत अभ्यास के, जड़म त होत सुजान।”
यानी लगातार अभ्यास से कम बु वाला भी हो शयार बन जाता है।
करके दे खए: एक काम चु नए और 10 दन तक रोज़ 10 मनट क जए। पहले दन और दसव दन का काम
मलाकर दे खए — फ़क़ खुद दख जाएगा।
प्र.4 य द झील के कनारे नाव न होती तो चत्रकार शेर से अपनी जान बचाने के लए क्या उपाय करता?
नाव न होती तो भी चत्रकार वही करता जो उसने कया — अपने दमाग से रास्ता नकालता। नाव तो बस एक साधन थी; असली
चीज़ उसक सूझ-बूझ थी।
पहले यह सम झए: चत्रकार क योजना के दो हस्से थे — (1) शेर को उलट तरफ़ मुँह करके बैठा दे ना, (2) उस
समय म चुपचाप बहुत दूर नकल जाना। नाव सफ़ दूसरे हस्से का सहारा थी। उसक जगह कोई और सहारा भी
काम आ सकता था।
वह ये उपाय कर सकता था —
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार
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1. पेड़ पर चढ़ जाता। जंगल म पेड़ क कमी नह थी। कसी ऊँचे और मज़बूत पेड़ पर चढ़कर वह तब तक बैठा रहता, जब तक
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शेर चला न जाता।
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g — और इसी बीच धीरे-
.c बहाना और लंबा ख चता — “अभी पूँछ बाक है”, “अब थोड़ा और उधर देaखए”
2. पानी म तैरकर दूसरे कनारे चला जाता, य द उसे तैरना आता। शेर आमतौर पर पीछे -पीछे झील पार नह करता।
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seड़य क ओट से खसक जाता।
3. चत्र बनाने का
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धीरे झा
4. शेर को कसी और काम म लगा दे ता, जैसे उसका चत्र बनाकर दूर रख आने का बहाना करता और फर लौटता ही नह ।
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5. आग या तेज़ आवाज़ का सहारा लेता। जंगली जानवर आग और अचानक होने वाले शोर से दूर हट जाते ह।
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6. कसी गुफा या च ान क दरार म छप जाता, जहाँ शेर का बड़ा शरीर घुस न सके। ag
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सबसे ज़रूरी बात: हर उपाय म एक ही चीज़ साझा है — शांत रहना। घबराकर भागते ही शेर पीछा करता।
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चत्रकार क सबसे बड़ी ताकत यही थी क उसने खुद को घबराने नह दया।
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emपृष्ठ 63 और 64
पाठ सेs—
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नीचे दए गए प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर पर तारे का चत्र (✱) बनाइए —
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पाठ से बहु वकल्पी
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प्र.1
a gl चत्र बनाना शुरू कया? (क) नद के कनारे (ख) सुनसान जगह (ग) पेड़ के
चत्रकार ने जंगल के कस ान पर
नीचे (घ) पहाड़ क चोट पर
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तारे का चह्न (✱) केवल एक वकल्प पर बनेगा — (ख) सुनसान जगह।
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ag किवता की पहली ही पंिक्त उत्तर दे दे त ी है —
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“िच त्रकार सुन सान जगह में, बना रहा था िच त्र,
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।.”
इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का िमeत्रm a
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सुनसान का अथ है — जहाँ कोई न हो, बलकुल खाली और चुपचाप जगह।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) नद के ग़लत क वता म ‘नद ’ शब्द आया ज़रूर है, पर वह उस चत्र के बारे म है जो वह बना रहा था — “नद , पहाड़,
कनारे पेड़, पत्त का, रह न गया कुछ जोश।” और बाद म जो पानी आता है वह नद नह , झील है — “झील
कनारे नाव थी।”
(ख) सुनसान सही ✱ यही शब्द क वता म सीधे-सीधे छपा है। सुनसान जगह इस लए भी ठ क बैठती है, क्य क वहाँ आसपास
जगह कोई नह था — तभी तो शेर के आने पर उसक मदद करने वाला भी कोई नह था।
(ग) पेड़ के ग़लत ‘पेड़’ शब्द भी सफ़ चत्र के वषय क सूची म आया है, बैठने क जगह के रूप म नह । क वता कह नह
नीचे कहती क वह पेड़ के नीचे बैठा था।
(घ) पहाड़ क ग़लत ‘पहाड़’ भी उसी सूची का शब्द है। इसके अलावा, पहाड़ क चोट पर बैठा होता तो झील कनारे रखी नाव
चोट पर तक इतनी जल्द न पहुँच पाता।
सीखने क बात: बहु वकल्पी प्रश्न म अकसर वही शब्द वकल्प म रख दए जाते ह, जो पाठ म कसी दूसरे अथ म
आए ह। इस लए हर वकल्प को पाठ क पूरी पं क्त से मलाकर दे खए, अकेले शब्द से नह ।
प्र.2 यमराज का मत्र कसे कहा गया है? (क) शेर को (ख) चत्रकार को (ग) ना वक को (घ) शकारी को
तारे का चह्न (✱) बनेगा — (क) शेर को।
किवता की पंिक्तयाँ साथ-साथ पिढ़ ए —
“इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का िमत्र।
उसे दे खकर िच त्रकार के , तुरंत उड़ गए होश”
यम राजा मृत्यु के दे वता माने जाते ह। जो प्राणी मौत जैसा डरावना हो, उसे ‘यमराज का मत्र’ कह दे ना क व का सुंदर ढं ग है। जंगल
म ऐसा प्राणी शेर ही है।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) शेर को सही ✱ जो आया, उसी को दे खकर चत्रकार के होश उड़े। आगे उसी को ‘जंगल के सरदार’ और फर सीधे ‘शेर’
कहा गया है — “बहुत दे र तक आँख मूँदकर, पीठ घुमाकर शेर”।
(ख) चत्रकार ग़लत चत्रकार तो पहले से वहाँ बैठा था — वह ‘आया’ नह । और डरने वाला भी वही है, डराने वाला नह ।
को
(ग) ना वक ग़लत क वता म कोई ना वक है ही नह । नाव खाली रखी थी और उसे चत्रकार ने खुद चलाया — “जल्द -जल्द
को नाव चलाकर, नकल गया वह दूर”।
(घ) शकारी ग़लत पूरी क वता म शकारी का नाम तक नह आता। यहाँ शकार करने वाला शेर है, कोई मनुष्य नह ।
को
क व ने ऐसा क्य लखा: ‘शेर आ गया’ लखने से बात सीधी-साद होती। ‘यम राजा का मत्र आ गया’ लखने से
पढ़ते ही डर का चत्र मन म बन जाता है। क वता म बात को इसी तरह घुमाकर, चत्र बनाकर कहा जाता है।
प्र.3 चत्रकार ने शेर से अपने प्राण कैसे बचाए? (क) धैय और चतुराई से (ख) क्रोध और श क्त से (ग) डर और
घबराहट से (घ) अहंकार और गव से
तारे का चह्न (✱) बनेगा — (क) धैय और चतुराई से।
धैय यानी घबराए बना शां त से काम लेना। चतुराई यानी सूझ-बूझ।
उसकी योजना तीन कदमों में चली —
1. “बोला — सुंद र िचत्र बना दू ँ, बैठ जाइए आप।” (शेर को बैठा िदया)
2. “अब मुँह आप उधर तो किरए, जंगल के सरदार।” (शेर की पीठ अपनी ओर करा ली)
3. “िचत्रकार चुपके से िखसका, जै से कोई चोर।” (चुपचाप िनकल गया)
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) धैय और सही ✱ उसने एक-एक कदम शां त से उठाया और शेर को पता तक नह चलने दया। यही धैय है, और शेर को
चतुराई से चत्र के बहाने पीठ फेरने को कह दे ना ही चतुराई है।
(ख) क्रोध और ग़लत चत्रकार ने न गुस्सा कया, न ताकत दखाई। ताकत म तो वह शेर के सामने कुछ भी नह था। उसके
श क्त से पास सफ़ कलम और कागज थे।
(ग) डर और ग़लत यह वकल्प धोखा दे सकता है, क्य क डर तो उसे सचमुच लगा था — “तुरंत उड़ गए होश”। पर जान
घबराहट से डर से नह बची। जान तब बची, जब उसने डर पर काबू पाया — “ फर उसको कुछ हम्मत आई”।
(घ) अहंकार ग़लत अहंकार यानी घमंड। चत्रकार म घमंड बलकुल नह था। उसने तो शेर को ‘आप’ कहा और ‘जंगल के
और गव से सरदार’ कहकर पुकारा — यह वनम्रता है, घमंड नह ।
पूरी क वता का सार यही है: जहाँ ताकत काम न आए, वहाँ शांत दमाग काम आता है।
प्र.4 चत्रकार ने शेर को पीठ फेरकर बैठने के लए क्य कहा? (क) ता क वह शेर क पीठ का चत्र बना सके। (ख)
ता क वह भागने क योजना पूरी कर सके। (ग) ता क शेर आराम से बैठ सके। (घ) ता क शेर के साथ आँख-
मचौनी खेल सके।
तारे का चह्न (✱) बनेगा — (ख) ता क वह भागने क योजना पूरी कर सके।
िचत्रकार ने कहा —
“िच त्रकार ने कहा — हो गया, आगे का तै यार,
अब मुँह आप उधर तो किरए, जंगल के सरदार।”
और उसके त रु ंत बाद —
“बैठ गया पीठ िफराकर, िच त्रकार की ओर,
िच त्रकार चुपके से िखसका, जै से कोई चोर।”
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) ता क वह शेर क पीठ ग़लत यह चत्रकार का कहा हुआ बहाना था, असली कारण नह । अगर सचमुच पीठ का चत्र बनाना
का चत्र बना सके। होता, तो वह वह बैठकर बनाता। पर वह तो पीठ फरते ही खसक गया — और अपना कलम-
कागज तक छोड़ गया।
(ख) ता क वह भागने सही ✱ यही असली कारण है। जब तक शेर सामने दे ख रहा था, हलना भी खतरनाक था। पीठ फरते
क योजना पूरी कर ही रास्ता खुल गया। यह पूरी योजना का आ खरी कदम था।
सके।
(ग) ता क शेर आराम से ग़लत शेर पहले ही आराम से बैठा था — “उकड़ू-मुकड़ू बैठ गया वह, सारे अंग बटोर”। उसे और
बैठ सके। आराम दे ने क कोई ज़रूरत नह थी।
(घ) ता क शेर के साथ ग़लत यह खेल का समय नह , जान बचाने का समय था। क वता म कह कसी खेल क बात नह है।
आँख- मचौनी खेल सके।
बहाना और कारण म फ़क़ सम झए: बहाना वह होता है जो हम ऊपर से कहते ह। कारण वह होता है जो मन म
सचमुच चल रहा होता है। यहाँ बहाना था — “पीठ का चत्र बनाना है”, और कारण था — “मुझे यहाँ से नकलना
है”। ऐसे प्रश्न म हमेशा कारण चु नए, बहाना नह ।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 64
नीचे दए गए प्रश्न के उत्तर अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए —
सो चए और ल खए
प्र.1 चत्रकार जस वातावरण म चत्र बना रहा था, उसका वणन क जए।
चत्रकार एक सुनसान जंगल म बैठकर चत्र बना रहा था। वहाँ आसपास कोई आदमी नह था — बस पेड़, पहाड़, पानी और चुप्पी।
किवता से हमें ये चीज़ें िमलती है ं —
“िच त्रकार सुन सान जगह में, बना रहा था िच त्र”
“नदी, पहाड़ , पेड़, पत्तों का, रह न गया कु छ जोश।”
“झील िकनारे नाव थी, एक रखा था बाँस”
उस वातावरण म ये चीज़ थ —
1. सुनसान जंगल — जहाँ मदद के लए पुकारने पर भी कोई नह आता।
2. नद , पहाड़ और पेड़-पत्ते — यही सब वह अपने चत्र म उतार रहा था।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार
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3. एक झील, जसके कनारे एक नाव और एक बाँस रखा था।
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4. जंगली जानवर — तभी तो वहाँ अचानक शेर आ गया।
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नमूना वणन: चार ओर हरे-भरे पेड़ थे और उनके पत्ते हवा म हल रहे थे। दूर पहाड़ दखाई दे रहा था और पास ही एक झील का
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a l क सरसराहट और पानी क हलक आवाज़ सुनाई देती थी। ऐसी शांत और सुंदर जगह देखकर ही चत्रकार वहाँ बैठ गया
साफ़ पानी चमक रहा था। कनारे पर एक पुरानी नाव बँधी थी और उसम नाव खेने वाला बाँस रखा था। जगह इतनी सुनसान थी क
सफ़gपत्त
था।
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यह वातावरण कहानी के लए ज़रूरी क्य था: जगह
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a रखी थी — इसी नाव ने आगे चलकर चत्रकार क जान बचाई।
— इससे डर बढ़ जाता है। और झील कनारे lनाव
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यानी क व ने शुरू म ही वह चीज़ रख द थी, जो अंत म काम आने वाली थी।
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c o mने शेर को जंगल म चत्रकला का अभ्यास करने के लए क्य कहा होगा?glas
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चत्रकार
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प्र.2
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चत्रकार ने यह बात मज़ाक म और चुटक लेते हुए कही। शेर ने उसे ‘कायर डरपोक’ कहा था, तो उसने भी हँसते-हँसते जवाब दे
दया।
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शेर बोला —
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“नाव जरा ले रोक , कलम और कागज तो ले जा, रे कायर डरपोक।”
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िचत्रकार ने कहा —
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“रिखए अपने पास, िच त्रकला का आप कीिजए, जंगल में अभ्यास।”
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इस उत्तर म तीन बात छपी ह:
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1. चुटक : शेर उसे कलम-कागज लौटाना चाहता था। चत्रकार ने कहा — आप ही रख ली जए। यानी “मुझे अब
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इनक ज़रूरत नह , आप ही सीख ली जए।”
2. सीख: जो काम आप खुद नह जानते, उस पर दूसरे को ताना मत द जए। पहले खुद अभ्यास क जए।
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3. चतुराई: इस बात से चत्रकार ने शेर को बात करने म उलझाए रखा और खुद और दूर नकल गया।
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m .cशब्द म, चत्रकार यह कहना चाहता था — “ताकत से चत्र नह बनते, ताकतaसेgलोग जीते भी नह जाते। जो सीखना है,
se उसका अभ्यास करना पड़ता है।”
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ध्यान द जए: इस एक वाक्य ने क वता को हँसी म खत्म कर दया। इसी लए क वता पढ़कर डर नह , मुस्कान आती
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 आपको इस क वता क कौन-सी घटना सबसे रोचक लगी?
मुझे वह घटना सबसे रोचक लगी, जब चत्रकार ने शेर से कहा — “अब मुँह आप उधर तो क रए, जंगल के सरदार” और शेर ने
सचमुच पीठ फेर ली।
“बैठ गया पीठ िफराकर, िच त्रकार की ओर,
िच त्रकार चुपके से िखसका, जै से कोई चोर।”
यह घटना रोचक क्य लगी:
पूरी क वता का मोड़ यह आता है। इससे पहले तक चत्रकार फँसा हुआ था; इसके बाद वह आज़ाद हो जाता है।
जंगल का सबसे ताकतवर जानवर, एक आदमी क बात मानकर, अपनी ही पीठ उसक तरफ़ कर लेता है —
यह सोचकर हँसी आती है।
क व ने ‘जैसे कोई चोर’ कहकर दृश्य आँख के सामने खड़ा कर दया — दबे पाँव, साँस रोककर खसकता हुआ
चत्रकार।
दो और घटनाएँ भी बहुत रोचक ह — आप इनम से कोई भी चुन सकते ह, बस कारण लखना न भू लए —
1. शेर का उकड़ू-मुकड़ू बैठ जाना और बड़े ध्यान से चत्रकार को दे खना, जैसे कोई ब ा अपना चत्र बनवा रहा हो।
2. अंत का जवाब — “ चत्रकला का आप क जए, जंगल म अभ्यास।” यह सुनकर शेर का चेहरा कैसा हुआ होगा, यह सोचकर
ही हँसी आ जाती है।
लखने का तरीका: ऐसे प्रश्न म पहले घटना का नाम ल खए, फर क वता क वह पं क्त ल खए, फर दो-तीन
वाक्य म कारण। कारण के बना उत्तर अधूरा रहता है।
प्र.4 चत्रकार ने शेर से बचने के लए क्या कया?
चत्रकार ने शेर से बचने के लए एक योजना बनाई और उसे शां त से, कदम-दर-कदम पूरा कया। उसने न लड़ाई क , न भागा —
उसने शेर को उसका चत्र बनाने का लालच दया।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
चरण चत्रकार ने क्या कया क वता क पं क्त
1 पहले खुद को सँभाला और डर पर काबू पाया। “ फर उसको कुछ हम्मत आई, दे ख
उसे चुपचाप”
2 शेर को िचत्र बनवाने का सुझाव िदया और आदर से बैठने को कहा। “बोला — सुंदर चत्र बना दूँ , बैठ
जाइए आप।”
3 कु छ दे र सचमुच िचत्र बनाया, तािक शेर को शक न हो। “बड़े ध्यान से लगा दे खने, चत्रकार
क ओर।”
4 कहा िक आगे का िचत्र तैयार है, अब पीठ की ओर से बनाना है — और शेर को ‘जंग ल के “अब मुँह आप उधर तो क रए, जंगल
सरदार ’ कहकर खुश कर िदया। के सरदार।”
5 शेर के पीठ फे रते ही चुपचाप िखसक गया। “ चत्रकार चुपके से खसका, जैसे
कोई चोर।”
6 झील िकनारे रखी नाव पकड़ी और जल्दी-जल्दी चलाकर दू र िनकल गया। “जल्द -जल्द नाव चलाकर, नकल
गया वह दूर”
योजना का सबसे चतुर हस्सा कौन-सा था: शेर को पीठ फेरकर बैठा दे ना। जब तक शेर सामने दे ख रहा था,
चत्रकार का एक कदम भी हलना खतरनाक था। पीठ फरते ही उसे पूरा समय मल गया — और शेर तो आँख भी
मूँदकर बैठ गया था!
एक बात और: उसने कलम और कागज वह छोड़ दए। जान बचाते समय सामान क चता नह क जाती।
अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 64
क वता से आगे बढ़कर सोचने और कल्पना करने वाले प्रश्न
अनु मान और कल्पना
प्र.1 चत्रकार ने शेर को ‘जंगल के सरदार’ नाम से क्य पुकारा होगा?
चत्रकार ने शेर को ‘जंगल के सरदार’ इस लए कहा, ता क शेर खुश हो जाए और उसक बात मान ले। सरदार का अथ है —
मु खया, सबसे बड़ा।
वह ठीक उसी वाक्य में यह नाम बोलता है, िजसमें उसे अपना काम िनकालना है —
“अब मुँह आप उधर तो किरए, जंगल के सरदार।”
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इसके तीन कारण ह:
1. यह बात सच भी है। शेर को जंगल का राजा माना ही जाता है। स ी तारीफ़ जल्द असर करती है।
2. तारीफ़ सुनकर मन नरम पड़ जाता है। जसक बड़ाई हो रही हो, वह गुस्सा भूल जाता है। शेर भी बड़ाई
सुनकर खुश हो गया और बना सोचे पीठ फेर ली।
3. आदर दखाने से भरोसा बनता है। चत्रकार ने पूरे समय ‘आप’ कहकर बात क — “बैठ जाइए आप”, “मुँह
आप उधर तो क रए”। इससे शेर को लगा क यह आदमी उसका सम्मान कर रहा है, डरा नह रहा।
यानी ‘जंगल के सरदार’ कहना भी चत्रकार क चतुराई का ही एक हस्सा था। उसने बना ताकत लगाए, सफ़ मीठे शब्द से शेर को
अपनी बात मनवा ली।
सो चए: अगर वह ‘ए शेर, उधर मुँह कर’ कहता तो क्या होता? शेर शायद गुस्सा हो जाता। यानी बात क्या कही
जाए, यह जतना ज़रूरी है, कैसे कही जाए, यह उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है।
प्र.2 य द चत्रकार जंगल म रुक जाता और शेर से मत्रता करने का प्रयत्न करता तो क्या होता?
यह कल्पना का प्रश्न है, इस लए इसका कोई एक उत्तर नह है। दो बात हो सकती थ — एक अ और एक खतरनाक। एक अ े
उत्तर म दोन सोचकर लखी जाती ह।
क्या हो कैसे
सकता था
अच्छा अंत शेर उसका बनाया िचत्र दे खकर खुश हो जाता। िचत्र कार रोज़ आकर जंग ल के जानवरों के िचत्र बनाता। शेर उसकी र क्षा
करता और वह शेर को िचत्र बनाना िसखाता। दोनों पक्के िम त्र बन जाते।
खतरनाक अंत शेर एक जंग ली जानवर है। भूख लगने पर वह िम त्र ता भूल सकता था। किवता में भी उसे ‘यम राजा का िम त्र ’ कहा गया है
— यानी वह मौत जैस ा डरावना है। इसिलए रुकना बहुत बड़ा खतरा मोल ले ना होता।
नमूना उत्तर: य द चत्रकार रुक जाता, तो सबसे पहले उसे शेर का पूरा चत्र बनाकर दखाना पड़ता। हो सकता है शेर अपना चत्र
दे खकर खुश हो जाता और उसे अपना मत्र मान लेता। फर चत्रकार रोज़ जंगल आता, हरन, मोर और तत लय के चत्र बनाता
और शेर उसके पास बैठकर दे खता रहता। पर यह भी हो सकता था क कसी दन शेर भूखा होता और अपनी मत्रता भूल जाता।
इस लए मुझे लगता है क चत्रकार का नकल जाना ही समझदारी थी। जंगली जानवर से मत्रता क कल्पना कहा नय म अ
लगती है, पर सचमुच के जंगल म उससे दूरी बनाए रखना ही सुर क्षत है।
याद र खए: पुस्तक ने पृष्ठ 67 पर खुद यही कल्पना करने को कहा है — “ चत्रकार शेर से मत्रता कर लेता है।”
यानी कहानी को इस तरह मोड़ना बलकुल ठ क है, बस अपने कारण साथ म ल खए।
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प्र.3 य द शेर को भी चत्रकला म रु च होती तो वह कौन-से चत्र बनाना पसंद करता?
शेर वही चत्र बनाता, जो उसक अपनी दु नया के ह — जंगल, उसके साथी जानवर और उसका अपना घर। हम सब वही बनाते
ह, जो हमने दे खा हो।
शेर क्या बनाता क्य
घने पेड़ और लंबी घास जंग ल ही उसका घर है। रोज़ दे खी हुई चीज़ सबसे पहले याद आती है।
झील, नदी और पानी पीते जानवर किवता में झील का िज़क्र है। जंग ल के जानवर वही ं पानी पीने आते होंग े।
िहरन, ज़ेबरा, खरगोश जैसे जानवर ये उसके आसपास रहते है,ं इसिलए उनके रूप-रंग उसे अच्छी तरह याद होंग े।
अपने बच्चों और अपनी माँद का िचत्र पिरवार का िचत्र बनाना सबको अच्छा लगता है।
अपना खुद का िचत्र — बड़े अयाल और गरजते मुँह के साथ वह जंग ल का सरदार है। उसे अपनी शान का िचत्र बनाना सबसे अच्छा लगता।
उगते सूर ज और पहाड़ का िचत्र ं किवता में पहाड़ का िज़क्र भी है।
पहाड़ और सूर ज उसे रोज़ िदखते है।
उस िचत्रकार का िचत्र, जो उसे धोखा दे क र भाग गया यह घटना वह कभी नही ं भूले ग ा! शायद वह उसे नाव में भागते हुए बनाता।
एक ज़रूरी बात: चत्र बनाना सफ़ हाथ का काम नह है, दे खने का काम भी है। क वता म शेर ने चत्रकार को “बड़े
ध्यान से” दे खा था — यानी ध्यान से दे खना उसे आता है। जसे ध्यान से दे खना आता है, वह चत्र बनाना भी सीख
सकता है। इसी लए चत्रकार ने उससे कहा — “ चत्रकला का आप क जए, जंगल म अभ्यास।”
प्र.4 य द चत्रकार के ान पर आप होते तो शेर से बचने के लए क्या करते?
सबसे पहले म घबराता नह । घबराकर भागना सबसे बड़ी गलती होती, क्य क दौड़ते हुए आदमी के पीछे जानवर और तेज़ी से
दौड़ता है।
नमूना उत्तर: य द म चत्रकार क जगह होता, तो सबसे पहले चुपचाप खड़ा रहता और शेर क आँख म लगातार न दे खता। फर म
धीरे-धीरे, बना पीठ दखाए, पीछे क ओर कदम बढ़ाता और कसी ऊँचे पेड़ या बड़ी चट्टान क ओर जाता। मौका मलते ही म पेड़
पर चढ़ जाता और तब तक ऊपर बैठा रहता, जब तक शेर वहाँ से चला न जाता। अगर पास म झील और नाव होती, तो म भी
चत्रकार क तरह उसी का सहारा लेता। और सबसे बड़ी बात — म अकेले ऐसे सुनसान जंगल म जाता ही नह , बड़ के साथ जाता।
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क्या करना चा हए क्या नह करना चा हए
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शांत रहना और धीरे -धीरे पीछे हटना
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चीखना- चल्लाना या दौड़कर भागना
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g l a जानवर क आँख म घूरकर दे खना
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ऊँची जगह — पेड़, च ान या टीले पर चढ़ ना
कोई सुर िक्षत सहारा ढू ँढ़ना, जैसे नाव या ग फ
ु ा पत्थर मारना या उसे छे ड़ना
co m अकेले सुनसान जगह म जाना
बड़ों के साथ ही जंग ल जाना
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असली ज़दगी क सीख: क वता म यह सब मज़ेदार लगता है, पर सचमुच म शेर के सामने पड़ना बहुत खतरनाक
है। इसी लए वन-भ्रमण हमेशा बड़ और वन-रक्षक के साथ, तय रास्ते पर ही करना चा हए।
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laकse बात — पृष्ठ 65, 66 और 67
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भाषा
मुहावरे पहचानना, ‘आने’ और ‘जाने’ के क्रया शब्द, तथा सं ा क जगह सवनाम लगाना
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भाषा क बात ाकरण
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प्र.1 (क) क वता म से चुनकर कुछ पं g l नीचे द गई ह। इनम छपे मुहावरे पहचा नए और उनके नीचे रेखा ख चए
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— (क) “उसे दे खकर चत्रकार के तुरंत उड़ गए होश।”
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mछपा मुहावरा है — होश उड़ना। पं क्त म इसी के नीचे रेखा ख चए — glas e
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इस पं क्त म
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a gla “उसे दे खकर िचत्रकार के त रु ंत उड़ गए होश।”
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अथ — बहुत डर जाना; डर के मारे कुछ न सूझना।
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यह मुहावरा है, इसका पता कैसे चला: मुहावरा वह होता है जसका अथ उसके शब्द से सीधा नह नकलता। यहाँ
‘होश’ कोई च ड़या नह है जो सचमुच उड़ जाए। ‘होश उड़ना’ का सीधा अथ लगाएँ तो बात बेतुक लगती है —
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इसी से पहचान हो जाती है क यह मुहावरा है।
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m .c वाक्य: बजली अचानक चली गई और अँधेरे म आवाज़ सुनकर मेरे होश उड़aगए।
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प्र.1 (ख) (ख) “नद , पहाड़, पेड़, पत्त का, रह न गया कुछ जोश।”
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इस पं क्त म छपा मुहावरा है — जोश न रह जाना (इसे जोश ठं डा पड़ना भी कहते ह)। रेखा इस तरह ख चए —
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“नदी, पहाड़ , पेड़, पत्तों का, रह न गया कु छ जोश।”
अथ — उत्साह और उमंग बलकुल खत्म हो जाना; मन उचट जाना।
यहाँ इसका मतलब क्या है: चत्रकार बड़े उत्साह से नद , पहाड़, पेड़ और पत्त का चत्र बना रहा था। शेर को दे खते
ही वह सारा उत्साह ठं डा पड़ गया। अब उसे चत्र क नह , अपनी जान क चता थी। ध्यान द जए — यह पं क्त
पछली पं क्त से जुड़ी हुई है। पहले होश उड़े, फर जोश खत्म हुआ।
अपना वाक्य: बा रश शुरू होते ही मेला दे खने का सारा जोश ठं डा पड़ गया।
प्र.1 (ग) (ग) “ चत्रकार ने नाव पकड़कर, ली जी भर के साँस।”
इस पं क्त म छपा मुहावरा है — जी भर के साँस लेना (इसी को चैन क साँस लेना भी कहते ह)। रेखा इस तरह ख चए —
“िचत्रकार ने नाव पकड़ कर, ली जी भर के साँस।”
अथ — खतरे से नकल जाने पर राहत महसूस करना।
यहाँ इसका मतलब क्या है: जब तक चत्रकार जंगल म था, उसक साँस अटक हुई थी। नाव हाथ म आते ही उसे
लगा क अब वह बच गया — तब उसने गहरी और चैन क साँस ली। ‘जी भर के’ का अथ है — मन भरकर, पूरी
तरह।
अपना वाक्य: खोया हुआ बस्ता मल जाने पर मने जी भर के साँस ली।
प्र.1 (घ) (घ) “इधर शेर था धोखा खाकर, झुँझलाहट म चूर।”
इस पं क्त म दो मुहावरे छपे ह। दोन के नीचे रेखा ख चए —
“इधर शेर था धोखा खाकर, झुँझ लाहट में चूर।”
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मुहावरा अथ यहाँ का भाव
धोखा खाना ठगा जाना, िकसी की चाल में आ शेर चत्रकार क बात पर भरोसा करके पीठ फेर बैठा और ठगा गया।
जाना
झुँझलाहट में चूर खीझ और िचढ़ से भर जाना चत्रकार को न पाकर शेर खीझ से भर गया। ‘चूर’ यानी पूरी तरह डू बा
होना हुआ।
अपने वाक्य: मीठ -मीठ बात पर भरोसा करके वह धोखा खा गया। · बार-बार गलती होने पर वह झुँझलाहट म चूर हो गया।
ध्यान द जए: एक ही पं क्त म एक से अ धक मुहावरे हो सकते ह। इस लए पहला मुहावरा मलते ही रुक मत
जाइए — पूरी पं क्त प ढ़ए।
प्र.2 अब इन मुहावर का प्रयोग करते हुए अपने मन से नए-नए वाक्य बनाइए।
नीचे हर मुहावरे के दो-दो वाक्य दए गए ह। इन्ह पढ़कर अपने मन से भी ऐसे ही वाक्य बनाइए।
मुहावरा अथ वाक्य
होश उड़ना बहुत डर जाना 1. सामने साँप दे खकर मेरे होश उड़ गए।
2. परीक्षा का पिरणाम सुनते ही मोहन के होश उड़ गए।
जोश न रह जाना / जोश ठं डा पड़ना उत्साह खत्म हो जाना 1. लगातार दो मैच हारने पर टीम का जोश ठं डा पड़ गया।
2. चोट लगते ही दौड़ में भाग ले ने का सारा जोश न रह गया।
जी भर के साँस ले ना राहत महसूस करना 1. बीमार दादी को ठीक दे खकर सबने जी भर के साँस ली।
2. ग मु हुआ छोटा भाई िमल गया, तब माँ ने जी भर के साँस ली।
धोखा खाना ठगा जाना 1. चमकती हुई चीज़ को सोना समझकर वह धोखा खा गया।
2. िबना जाँचे भरोसा करने वाला अकसर धोखा खाता है।
झुँझलाहट में चूर होना खीझ से भर जाना 1. घंटों बस का इंतज़ार करके यात्र ी झुँझलाहट में चूर थे।
2. बार -बार वही सवाल सुनकर वह झुँझलाहट में चूर हो गया।
वाक्य बनाने का तरीका (तीन कदम):
1. पहले मुहावरे का अथ अपने शब्द म सो चए।
2. ऐसी कोई स ी घटना याद क जए जसम वही भाव हो।
3. अब वाक्य ल खए, पर मुहावरे को जस-का-तस र खए — उसके शब्द बद लए मत।
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प्र.3 नीचे द गई पं क्तय को ध्यान से प ढ़ए — • इतने ही म वहाँ आ गया, यम राजा का मत्र। • चत्रकार चुपके से
खसका, जैसे कोई चोर। • जल्द -जल्द नाव चलाकर, नकल गया वह दूर। … आगे दए गए ऐसे ही क्रया शब्द
का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए — (आने के लए) आना, पहुँचना, दा खल होना, प्रवेश करना,
उप त होना; (जाने के लए) नकल पड़ना, रवाना होना, उड़ना, फसलना, खसकना
पहले तीन क्रया शब्द का भाव समझ ली जए, जो पुस्तक ने खुद बताया है —
‘आ गया’ — अचानक आने का भाव।
‘ खसका’ — धीरे-धीरे हटने या बना कसी को पता लगे जाने का भाव।
‘ नकल गया’ — तेज़ी से दूर जाने का भाव।
अब पुस्तक क ता लका के दोन खाने भरे हुए दे खए। ‘आना’ और ‘ नकल पड़ना’ के वाक्य पुस्तक म पहले से दए ह; बाक सब
भरे गए ह।
आने के लए क्रया शब्द जाने के लए क्रया शब्द
आना – वह मेरे पास आया। (पुस्तक में िदया हुआ) िनकल पड़ ना – मैं साहिसक यात्रा के िलए िनकल पड़ा। (पुस्तक में िदया हुआ)
ँ ना – हम ठीक समय पर िवद्य ालय पहच
पहुच ु ँ गए। रवाना होना – बारात सवेरे छह बजे रवाना हुई।
दािखल होना – मेर ी बहन इस वष क क्षा छह में दािखल हईु है। उड़ना – दाना दे खकर कबूतर छत से उड़ गया।
पवेश करना – घंटी बजते ही बच्चों ने क क्षा में पवेश िकया। िफसलना – गीली सीढ़ ी पर पैर िफसल गया।
उपिस्थत होना – सभी िवद्य ाथ पाथना सभा में उपिस्थत थे। िखसकना – वह चुपचाप भीड़ में से िखसक गया।
इन शब्द म फ़क़ क्या है: इन सबका मतलब मोटे तौर पर ‘आना’ या ‘जाना’ ही है, पर हर शब्द अपने साथ एक
अलग रंग लाता है —
पहुँचना — मं ज़ल तक आ जाना। दा खल होना / प्रवेश करना — कसी जगह के भीतर आना। उप त
होना — कसी सभा या कक्षा म हा ज़र होना।
रवाना होना — तय करके, बाकायदा चल पड़ना। उड़ना — हवा म जाना या बहुत तेज़ी से जाना। फसलना
— बना चाहे, अपने आप सरक जाना। खसकना — चुपके से हट जाना।
सो चए: क वता म य द ‘ खसका’ क जगह ‘ नकल गया’ लखा होता, तो चोर जैसी चुपचाप चाल का चत्र नह
बनता। इसी लए सही शब्द चुनना बहुत बड़ी बात है।
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प्र.4 (क) अब नीचे दए गए वाक्य म रेखां कत सं ा शब्द को हटाकर उ चत सवनाम शब्द का प्रयोग क जए — (क)
फर शेर को चुपचाप दे खकर चत्रकार को कुछ हम्मत आई। → फर उसे चुपचाप दे खकर उसको कुछ
हम्मत आई।
यह वाक्य पुस्तक म उदाहरण के रूप म पहले से हल कया हुआ है। इसे समझ ली जए, आगे के सब वाक्य आसान हो जाएँगे।
वाक्य: िफर शेर को चुपचाप दे खकर िचत्रकार को कु छ िहम्मत आई।
बदलकर: िफर उसे चुपचाप दे खकर उसको कु छ िहम्मत आई।
सं ा शब्द उसक जगह सवनाम
शेर को उसे
िचत्रकार को उसको
सवनाम क्या है: जस शब्द से कसी व्य क्त, वस्तु या जगह का नाम पता चले, उसे सं ा कहते ह — जैसे शेर,
चत्रकार, नाव। जब हम नाम बार-बार न दोहराकर उसक जगह कोई दूसरा शब्द रख दे ते ह, तो उसे सवनाम कहते
ह — जैसे वह, उसे, उसको, उनके, म, हम, तुम, आप।
यह करते क्य ह: एक ही नाम बार-बार आए तो वाक्य भ ा लगता है — “ चत्रकार ने नाव पकड़ी और चत्रकार
नाव म बैठा और चत्रकार चला गया।” सवनाम लगाते ही वही बात सुंदर हो जाती है — “ चत्रकार ने नाव पकड़ी,
वह उसम बैठा और चला गया।”
प्र.4 (ख) (ख) चत्रकार जल्द -जल्द नाव चलाकर दूर नकल गया। → …………………… जल्द -जल्द नाव चलाकर
दूर नकल गया।
खाली जगह म आएगा — वह।
पूरा वाक्य: वह जल्दी-जल्दी नाव चलाकर दू र िनकल गया।
यहाँ रेखां कत संज्ञा ‘ चत्रकार’ है। वह एक पुरुष है, अकेला है और वाक्य म काम करने वाला (कता) है। ऐसे म उसक जगह ‘वह’
आता है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार
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छोटा-सा गुर: य द नाम वाक्य के शुरू म काम करने वाले क जगह हो, तो ‘वह’ लगाइए। य द वह कसी काम को
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झेल रहा हो (जैसे ‘ चत्रकार को’), तो ‘उसे’ या ‘उसको’ लगाइए।
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प्र.4 (ग) (ग) चत्रकार नाव म बैठ गया। → …………………… नाव म बैठ गया।
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खाली जगह म आएगा — वह। a g
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पूरा वाक्य: वह नाव में बैठ गया।
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‘ चत्रकार’ ही है और वही बैठने का काम कर रहा है। इस लए उसक जगह ‘वह’aआएगा।
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यहाँ भी सं
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ag ध्यान द जए: ‘वह’ शब्द पुरुष और स्त्री, दोन के लए चलता है — “वह नाव म बैठ गया।” और “वह नाव म बैठ
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गई।” काम करने वाला कौन है, यह क्रया से पता चल जाता है।
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(घ) शेर बहुत गुस्से म था। → …………………… बहुत गुस्से म था।
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खाली जगह म आएगा — वह।
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पूरा वाक्य: वह बहुत गुस्से में था।
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यहाँ रेखां कत संज्ञा ‘शेर’ है। वह एक ही है और वाक्य का कता है, इस लए उसक जगह ‘वह’ आएगा।
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एक बात और: अकेले इस वाक्य को पढ़ तो पता नह चलता क ‘वह’ कौन है। इसी लए सवनाम तभी लगाया जाता
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है, जब नाम पहले कसी वाक्य म आ चुका हो। जैसे — “शेर पीठ फेरकर बैठा था। वह बहुत गुस्से म था।”
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(ङ) चत्रकार और शेर के बीच वातालाप हुआ। → …………………… के बीच वातालाप हुआ।
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खाली जगह म आएगा — उन दोन (केवल m
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पूरा वाक्य: उन दोनों के बीच वात लाप हआ
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अथवा — उनके बीच वात लाप हुआ ।
वातालाप का अथ है — आपस म बातचीत।
यहाँ ‘वह’ क्य नह लगेगा: इस वाक्य म दो नाम ह — चत्रकार और शेर। जहाँ एक से अ धक ह , वहाँ बहुवचन
का सवनाम लगता है — वे, उन, उनके, उन दोन । ‘वह’ और ‘उसके’ सफ़ एक के लए चलते ह।
कतने ह कौन-सा सवनाम उदाहरण
एक वह, उसे , उसको, उसके वह नाव म बैठ गया।
एक से अिधक वे, उ न्हे,ं उनको, उनके , उन दोनों उन दोन के बीच वातालाप हुआ।
क वता से कहानी — पृष्ठ 67
क वता को अपने शब्द क कहानी म बद लए और उसका अंत भी बद लए
क वता से कहानी ले ख न
प्र.1 ‘चतुर चत्रकार’ क वता म आपने शेर और चत्रकार क कहानी का आनंद लया। अब इस कहानी को अपने शब्द
म ल खए।
क वता को कहानी बनाने का तरीका यह है — घटनाओं को क्रम से र खए, तुक क चता छोड़ द जए और बातचीत को सीधे संवाद
क तरह लख द जए।
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क्रम घटना
1 िचत्र कार सुनसान जंग ल में िचत्र बना रहा था।
2 वहाँ अचानक एक शेर आ गया।
3 िचत्र कार डर गया, िफर उसने िहम्मत की।
4 उसने शेर से कहा — मैं आपका सुंद र िचत्र बना दू ँ।
5 शेर िसकु ड़कर बैठ गया और ध् यान से दे खने लगा।
6 िचत्र कार ने कहा — अब पीठ की ओर से बनाना है, मुँह उधर कर लीिजए।
7 शेर ने पीठ फे र ली और आँखें मूँद ली ं।
8 िचत्र कार चुपचाप िखसका, नाव पकड़ी और दू र िनकल गया।
9 शेर ने मुड़कर दे खा तो वह गायब था। उसने िखिसयाकर उसे ‘कायर डरपोक ’ कहा।
10 िचत्र कार ने हँस कर कहा — कलम -कागज आप ही रिखए , जंग ल में िचत्र कला का अभ्यास कीिजए।
नमूना कहानी — ‘चतुर चत्रकार’
बहुत पहले क बात है। एक चत्रकार अपने रंग, कलम और कागज लेकर जंगल म चला गया। वहाँ एक सुनसान जगह पर बैठकर
वह नद , पहाड़, पेड़ और पत्त का चत्र बनाने लगा। चार ओर इतनी शां त थी क सफ़ पत्त क सरसराहट सुनाई दे ती थी।
तभी झा ड़य म खड़खड़ाहट हुई और एक बड़ा-सा शेर सामने आ खड़ा हुआ। शेर को दे खते ही चत्रकार के होश उड़ गए। चत्र बनाने
का सारा जोश ठं डा पड़ गया। पर उसने दे खा क शेर चुपचाप खड़ा है, हमला नह कर रहा। इससे उसे थोड़ी हम्मत आई।
उसने साहस करके कहा, “म आपका बहुत सुंदर चत्र बना दूँ ? आप ज़रा बैठ जाइए।” शेर को यह बात अ लगी। वह उकड़ू-
मुकड़ू, अपने सारे अंग समेटकर बैठ गया और बड़े ध्यान से चत्रकार को दे खने लगा।
चत्रकार कुछ दे र चत्र बनाता रहा। फर बोला, “सामने का हस्सा तो तैयार हो गया, जंगल के सरदार! अब ज़रा मुँह उधर कर
ली जए, ता क पीठ क ओर का चत्र भी बन जाए।” शेर खुश होकर पीठ फराकर बैठ गया और आँख मूँद ल ।
बस, चत्रकार को इसी पल का इंतज़ार था। वह कसी चोर क तरह दबे पाँव खसका। झील के कनारे एक नाव और एक बाँस रखा
था। नाव पकड़ते ही उसने जी भर के साँस ली और जल्द -जल्द नाव चलाकर दूर नकल गया।
बहुत दे र बाद शेर ने सोचा — इतनी दे र क्य हो रही है? उसने मुड़कर दे खा तो वहाँ कोई नह था, सफ़ कलम और कागज पड़े थे।
शेर धोखा खाकर झुँझलाहट से भर गया। वह ख सयाकर चल्लाया, “अरे कायर डरपोक! नाव तो रोक, अपनी कलम और कागज
तो लेता जा।”
चत्रकार ने दूर से हँसते हुए जवाब दया, “रहने द जए, आप ही र खए। अब आप जंगल म बैठकर चत्रकला का अभ्यास क जए!”
और नाव आगे बढ़ गई। शेर दे खता रह गया।
लखने का सुझाव: कहानी को शुरू, बीच और अंत — तीन हस्स म बाँटकर ल खए। बीच वाला हस्सा सबसे
रोचक होना चा हए, क्य क वह मुसीबत और उसका हल आता है।
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प्र.2 इस कहानी के अंत म चत्रकार नाव म बैठकर दूर चला जाता है। अपनी कल्पना से इस कहानी का अंत बदलकर
ल खए। उदाहरण के लए — • चत्रकार शेर से मत्रता कर लेता है। • शेर चत्र बनाने म चत्रकार क सहायता
करता है।
पुस्तक ने दो सुझाव दए ह और नीचे दो खाली पं क्तयाँ छोड़ी ह, जनम आपको अपना बदला हुआ अंत लखना है। नीचे दोन
सुझाव पर एक-एक नमूना और साथ म दो और नए अंत दए गए ह।
नमूना अंत 1 — चत्रकार शेर से मत्रता कर लेता है
चत्रकार नाव तक पहुँच तो गया, पर उसने पीछे मुड़कर दे खा। शेर वैसे ही पीठ कए बैठा था और चत्र बनने का इंतज़ार कर रहा था।
चत्रकार को उस पर तरस आ गया। वह लौटा और बोला, “सरदार जी, चत्र अभी अधूरा है। म उसे पूरा करके ही जाऊँगा।” शेर ने
मुड़कर दे खा और उसक आँख चमक उठ । चत्रकार ने पूरा चत्र बनाकर उसे दखाया। अपना इतना सुंदर रूप दे खकर शेर मान गया
क यह आदमी उसका दोस्त है। उस दन से चत्रकार हर हफ़्ते जंगल आता और शेर उसक रखवाली करता।
नमूना अंत 2 — शेर चत्र बनाने म चत्रकार क सहायता करता है
चत्रकार ने कहा, “ चत्र तो बन जाएगा, पर इस जंगल म हरन और मोर मुझसे डरकर भाग जाते ह।” शेर हँसकर बोला, “यह काम
मेरा।” अगले दन शेर ने जंगल के सब जानवर को बुलाकर कहा क यह आदमी हमारा मेहमान है, इससे कोई न डरे। अब हरन
आराम से खड़े रहते और मोर पंख फैलाकर बैठ जाते। चत्रकार ने पूरे जंगल का एक बड़ा चत्र बनाया और उसके नीचे लखा —
“मेरे मत्र, जंगल के सरदार के लए।”
नमूना अंत 3 — शेर भी चत्रकला सीख लेता है
चत्रकार ने जाते-जाते सचमुच अपनी कलम और कागज वह छोड़ दए। शेर ने पंजे से कलम उठाई और टे ढ़ -मेढ़ रेखाएँ ख चने
लगा। पहले दन कुछ नह बना। पर वह रोज़ अभ्यास करता रहा। महीने भर बाद उसने एक पेड़ का चत्र बना ही लया। एक दन
चत्रकार लौटा तो शेर ने अपना चत्र दखाया। चत्रकार ने ताली बजाकर कहा, “दे खा! अभ्यास से सब हो जाता है।”
नमूना अंत 4 — शेर मदद माँगता है
चत्रकार नाव खोल ही रहा था क शेर क दद-भरी आवाज़ आई। मुड़कर दे खा तो शेर के पंजे म एक काँटा चुभा था और वह
लँगड़ाकर चल रहा था। चत्रकार डरा ज़रूर, पर लौट आया। उसने धीरे से काँटा नकाला और प त्तयाँ बाँध द । शेर ने कृतज्ञता से सर
झुका दया। उस दन के बाद जंगल म चत्रकार को कोई खतरा नह रहा।
अंत बदलते समय ध्यान र खए:
1. पात्र वही रह — चत्रकार और शेर।
2. नया अंत कहानी क शुरुआत से मेल खाए, बलकुल अलग-थलग न लगे।
3. अंत म कोई-न-कोई अ बात नकले — दोस्ती, मदद, या सीखने क लगन।
बातचीत — पृष्ठ 68
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
नीचे द गई शेर और चत्रकार के मध्य बातचीत को अपनी कल्पना से पूरा क जए —
बातचीत सं वाद-ले ख न
प्र.1 नीचे द गई शेर और चत्रकार के मध्य बातचीत को अपनी कल्पना से पूरा क जए — चत्रकार: “अरे जंगल के
राजा! आप चुपचाप क्य बैठे ह?” … (आगे क छह खाली पं क्तयाँ भरनी ह)
पुस्तक म सात खाने ह। पहला खाना — चत्रकार का पहला वाक्य — पहले से भरा है। बाक छह खाने आपको भरने ह। खाने
बारी-बारी से शेर और चत्रकार के ह। नीचे पूरी बातचीत भरकर द गई है।
कौन बोल रहा क्या कहता है
है
िचत्रकार (िदया अरे जंगल के राजा! आप चुपचाप क्य बैठे ह?
हआ
ु )
शेर मैं दे ख रहा हू ँ िक तुम कागज पर क्या बना रहे हो। यह क्या जादू है?
िचत्रकार यह जादू नही,ं िचत्र कला है, सरदार जी। जो सामने िदखता है, वही मैं कागज पर उतार दे ता हू।
ँ
शेर तब तो मेर ा िचत्र भी बना दो। मैंने आज तक अपना चेहरा िसफ़ पानी में दे खा है।
िचत्रकार ज़रूर बना दू ँग ा। पर आपको िहलना नही ं है। बस सीधे बैठे रिहए , जैसे िकसी राजा का िचत्र बनता है।
शेर ठीक है, मैं िबलकु ल नही ं िहलूँग ा। पर जल्दी बनाना, मुझे भूख लग रही है।
िचत्रकार बस थोड़ी दे र और , सरदार जी। सामने का िहस्सा बन गया है। अब ज़रा मुँह उधर कर लीिजए , तािक पीठ की ओर का
िचत्र भी पूर ा हो जाए।
यह बातचीत ऐसी ही क्य बनाई गई: क वता म चत्रकार दो काम करता है — शेर को खुश रखता है और उसे
धीरे-धीरे पीठ फेरने तक ले जाता है। इस लए बातचीत का हर वाक्य उसी दशा म बढ़ना चा हए। ध्यान द जए क
आ खरी वाक्य ठ क वही है, जससे क वता का सबसे बड़ा मोड़ आता है — “अब मुँह आप उधर तो क रए, जंगल के
सरदार।”
संवाद लखने के चार नयम:
1. हर वाक्य के पहले बोलने वाले का नाम ल खए।
2. बोली गई बात को उलटे -सीधे अल्प वराम (“ ”) के भीतर र खए।
3. वाक्य छोटे र खए — बातचीत म लोग लंबे भाषण नह दे ते।
4. हर पात्र अपनी तरह बोले — शेर क बात म रौब हो, चत्रकार क बात म आदर और चतुराई।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार
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तुलना — पृष्ठ 69
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चत्रकार और शेर क वशेषताओं क तुलना क जए और उ चत ✓ ✗
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ान पर सही ( ) या गलत ( ) का चह्न लगाइए —
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चत्रकार और शेर क वशेषताओं क तुलना क जए और उ चत ✓
ान पर सही ( ) या गलत ( ) का चह्न ✗
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लगाइए — गुण: बु
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मान, श क्तशाली, डरपोक, चतुर, डरावना, साहसी, भोला, ज ासु
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पुस्तक क ता लका म आठ गुण दए ह और दो खाने ह — चत्रकार और शेर। पहली पं क्त म ‘बु मान’ के आगे चत्रकार वाले
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खाने म सही (✓) का चह्न पहले से लगा है। बाक पंद्रह खाने आपको भरने ह। नीचे पूरी ता लका भरकर द गई है।
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गुण चत्रकार शेर
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अब हर पं क्त का कारण दे खए —
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
गुण कारण
बुि मान चत्रकार ने सोच-समझकर एक पूरी योजना बनाई और उसे पूरा कया। शेर बना सोचे पीठ फेरकर बैठ गया — इसी लए वह
ठगा गया।
शिक्तशाली शेर जंगल का सबसे ताकतवर जानवर है, तभी उसे ‘जंगल के सरदार’ कहा गया। चत्रकार के पास सफ़ कलम और कागज थे।
डरपोक यह चह्न कसी के आगे नह लगेगा। चत्रकार डरा ज़रूर था — “तुरंत उड़ गए होश” — पर डरपोक नह था, क्य क उसने डर
पर काबू पाकर काम कया। शेर तो डरा ही नह । शेर ने चत्रकार को ‘कायर डरपोक’ कहा था, पर वह हार क खीझ म कहा
गया शब्द है, सच नह ।
चतुर पूरे पाठ का शीषक ही ‘चतुर चत्रकार’ है। चत्र बनाने का बहाना बनाना, ‘जंगल के सरदार’ कहकर खुश करना और पीठ फरते
ही खसक जाना — यही चतुराई है।
डरावना शेर को दे खते ही चत्रकार के होश उड़ गए। क व ने उसे ‘यम राजा का मत्र’ कहा है — इससे बड़ा डरावनापन क्या होगा!
चत्रकार से कोई नह डरा।
साहसी यह पं क्त ऐसी है जसम दोन के आगे सही का चह्न लग सकता है। चत्रकार साहसी है, क्य क उसने शेर के सामने डटकर
बात क । शेर भी साहसी है, क्य क वह जंगल म कसी से नह डरता। कक्षा म इस पं क्त पर चचा क जए — और अपने कारण
ज़रूर बताइए।
भोला भोला यानी सीधा-सादा, जो दूसरे क बात पर तुरंत भरोसा कर ले। शेर ने चत्रकार क हर बात मान ली और आँख तक मूँद ल ।
चत्रकार भोला नह , चतुर था।
िज ासु जज्ञासु यानी जानने क इ ा रखने वाला। शेर ने चत्रकार को “बड़े ध्यान से” दे खा, क्य क वह जानना चाहता था क यह
कागज पर क्या बना रहा है। क वता म चत्रकार क ऐसी कोई जज्ञासा नह दखती।
ता लका भरने का तरीका: हर गुण को पढ़कर मन म यह पू छए — “क वता म इसका सबूत कहाँ है?” अगर कोई
पं क्त याद आ जाए तो सही (✓), और अगर कोई पं क्त न मले तो गलत (✗)। बना सबूत के चह्न मत लगाइए।
पाठ से आगे — पृष्ठ 69
अपनी चतुराई और अपनी मदद के अनुभव कक्षा म साझा क जए
पाठ से आगे
प्र.1 चत्रकार अपनी चतुराई का प्रयोग करके संकट से बच गया था। क्या कभी आपने कसी संकट का सामना करने
के लए अपनी चतुराई दखाई है? उस अनुभव को कक्षा म साझा क जए।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। इसम कोई एक ‘सही उत्तर’ नह होता — आपको अपनी स ी घटना बतानी है। संकट यानी
मुसीबत का समय।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
अ े उत्तर म चार बात होनी चा हए:
1. मुसीबत क्या थी।
2. उस समय आपको कैसा लगा।
3. आपने क्या सोचा और क्या कया।
4. अंत म क्या हुआ और आपने क्या सीखा।
नमूना उत्तर: पछली गरमी म म छोटे भाई के साथ बाज़ार गया था। भीड़ म मेरा भाई मेरा हाथ छु ड़ाकर कह खो गया। म घबरा
गया, पर मुझे याद आया क हम रोने के बजाय एक जगह रुकना चा हए। म वापस उसी दुकान पर आया, जहाँ से हम आगे बढ़े थे
और दुकानदार अंकल से कहा क वे लाउड ीकर पर मेरे भाई का नाम बुलवा द। मने उन्ह भाई के कपड़ का रंग भी बता दया। दस
मनट बाद एक अंकल उसे लेकर वह आ गए। घर आकर पताजी ने कहा क घबराने के बजाय सोचना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
और भी ऐसे मौके चतुराई कस तरह काम आती है
रास्ता भूल जाना जहाँ है ं वही ं रुिकए , िकसी दुक ानदार या पुिलस वाले से मदद माँिगए , घर का पता या फ़ ोन नंबर
बताइए।
गली का कु त्ता पीछे पड़ जाना दौिड़ए मत। धीरे -धीरे चलते रिहए और उसकी आँखों में मत दे िखए।
कोई अनजान व्यिक्त साथ चलने को साफ़ मना कीिजए , भीड़ वाली जगह की ओर जाइए और तुर ंत िकसी बड़े को बताइए।
कहे
साइिकल की चेन रास्ते में उतर जाए घबराने के बजाय साइिकल को िकनारे लगाइए और िकसी दुक ान तक पैद ल ले जाइए।
कक्षा म साझा करने का तरीका: दो-दो के जोड़े बनाइए। पहले एक साथी अपनी घटना सुनाए, फर दूसरा। उसके
बाद हर जोड़ा एक सबसे अ घटना चुनकर पूरी कक्षा को सुनाए। सबक बात से एक ‘समझदारी क सूची’
श्यामपट्ट पर बना ली जए।
प्र.2 क्या आपने कभी कसी क संकट म सहायता क है? बताइए क आपने कैसे सहायता क थी।
यह भी आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। सहायता बड़ी ही हो, यह ज़रूरी नह । एक गलास पानी दे ना भी सहायता है।
नमूना उत्तर: पछले महीने हमारी कक्षा क एक सहेली खेलते समय गर पड़ी और उसके घुटने से खून नकलने लगा। सब ब े
इक े होकर दे खने लगे, पर कसी ने कुछ कया नह । मने पहले उसे सहारा दे कर छाया म बैठाया, फर दौड़कर कक्षा- श क्षका को
बुलाया। मेरी दूसरी सहेली पानी ले आई। श क्षका ने घाव साफ़ करके पट्ट बाँध द । छु ट्ट के समय मने उसका बस्ता भी उठाकर
उसके घर तक पहुँचाया। उस दन मुझे लगा क कसी के काम आना सबसे अ ा काम है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
सहायता के मौके आप क्या कर सकते ह
कोई साथी बीमार या घायल हो उसे छाया में बैठाइए , पानी दीिजए और तुर ंत िकसी बड़े को बुल ाइए।
कोई पढ़ ाई में पीछे रह रहा हो अपनी कॉपी िदखाइए , साथ बैठकर समझाइए , उसका मज़ाक कभी मत उड़ाइए।
कोई बुज़गु सड़क पार कर रहे हों बड़ों की मदद से उनका हाथ पकड़कर सुर िक्षत पार कराइए।
गरमी में पशु-पक्षी प्यासे हों छत या आँग न में िम ी के बरतन में रोज़ ताज़ा पानी रिखए।
कोई सामान िगरा दे िबना कहे उठाने में मदद कीिजए।
पाठ से जो ड़ए: क वता म शेर मुसीबत बना, पर सो चए — अगर उस दन शेर के पैर म काँटा चुभा होता और
चत्रकार उसे नकाल दे ता, तो कहानी का रंग ही बदल जाता। इसी लए पुस्तक ने पृष्ठ 67 पर कहानी का अंत बदलने
को कहा है। सहायता से दुश्मन भी मत्र बन जाते ह।
चत्रकार का व ालय — पृष्ठ 70
जंगल के चत्रकला व ालय का नाम र खए और उसका व ापन बनाइए
चत्रकार का व ालय कल्पना
प्र.1 कल्पना क जए क चत्रकार ने जंगल म एक चत्रकला व ालय खोला है। आप इस व ालय का कोई नाम
सुझाइए और इसके बारे म कुछ वाक्य अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।
पुस्तक के चत्र म व ालय के ऊपर एक खाली पट्ट बनी है। उसी म व ालय का नाम लखना है। नीचे कुछ नाम और एक पूरा
नमूना प रचय दया गया है।
सुझाया गया नाम यह नाम क्य अ ा है
हिरत वन िचत्रकला िवद्यालय ‘हिरत’ यानी हरा। नाम सुनते ही जंग ल की हिरयाली याद आ जाती है।
रंग वन रंग + वन। बहुत छोटा नाम है, इसिलए झट याद हो जाता है।
सरदार िचत्रशाला शेर को किवता में ‘जंग ल का सरदार ’ कहा गया है। यह नाम उसी की याद िदलाता है।
तूिलका वन िवद्यालय ‘तूिलका’ यानी िचत्र बनाने वाली कूँ ची। नाम से ही काम पता चल जाता है।
चतुर िचत्रकार िचत्रशाला पाठ के नाम से जुड़ा हआ
ु नाम है, इसिलए सबको पहचाना-सा लगेग ा।
नमूना प रचय (यही अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए):
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
हमारे व ालय का नाम है — ह रत वन चत्रकला व ालय। यह घने जंगल के बीच, झील के कनारे बना है। इसे उसी चत्रकार ने
खोला है, जो कभी शेर से बचकर भागा था। अब वही चत्रकार जंगल के सब जानवर को चत्र बनाना सखाता है। यहाँ न कोई बड़ा
है, न छोटा — हाथी भी सीखता है और गलहरी भी।
यहाँ क कक्षाएँ कसी कमरे म नह , पेड़ क छाया म लगती ह। श्यामपट्ट क जगह चौड़े पत्ते ह और रंग फूल , हल्द और मट्ट से
बनाए जाते ह। सोमवार को पेड़-पौध के चत्र बनते ह, बुधवार को प क्षय के और श नवार को सब मलकर एक बड़ा चत्र बनाते ह।
साल के अंत म झील कनारे एक चत्र-प्रदशनी लगती है, जसे दे खने पूरा जंगल आता है। यहाँ का सबसे बड़ा नयम एक ही है —
रोज़ थोड़ा-सा अभ्यास।
लखने का तरीका: प रचय म ये बात ज़रूर आनी चा हए — व ालय कहाँ है, कसने खोला, कौन पढ़ता है, क्या-
क्या सखाया जाता है, और उसम खास क्या है।
प्र.2 इस व ालय के बारे म एक आकषक व ापन बनाइए जसे पढ़कर जंगल के पशु-प क्षय म इस व ालय म
प्रवेश लेने क इ ा जाग जाए। (जैसे – प्रवेश जारी है। एक अनोखा व ालय, आपके पड़ोस म, आइए और
सी खए…)
व ापन वह होता है जो थोड़े शब्द म बहुत बात कह दे और पढ़ने वाले का मन ख च ले।
अ े व ापन म पाँच चीज़ होती ह:
1. बड़ा-सा शीषक जो एक नज़र म दख जाए।
2. क्या मलेगा — तीन-चार बात, बहुत छोट पं क्तय म।
3. कसके लए है — यहाँ जंगल के सब पशु-पक्षी।
4. कब और कहाँ — समय और जगह।
5. बुलावा — “आइए और सी खए!”
नमूना व ापन:
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✱ पवेश जारी है ✱
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• रंग बनाना सीिखए — फूलों, पत्तों और िम ी से
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• अपना िचत्र खुद बनाइए — पहली कक्षा में ही!
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• कक्षाएँ पेड़ों की ठं डी छाया में
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• शुल्क कु छ नही ं — बस रोज़ आइए
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समय — हर सवेरे, सूरज िनकलने के बाद।
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agl इंतज़ार कर रहा है!
आइए और सीिखए। आपका िच त्र आपका
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एक और छोटा नमूना (नारे जैसा):
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आज ही आइए — रंगवन िच त्रशाला।
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बनाते समय: अपनी कॉपी म वज्ञापन के चार ओर बॉडर बनाइए, शीषक बड़े और रंगीन अक्षर म ल खए, और
कनारे पर कूँची, रंग क तश्तरी या कसी जानवर का छोटा-सा चत्र बना द जए। वज्ञापन दे खने म जतना सुंदर
होगा, उतना ही असर करेगा।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
पशु-प क्षय पर बना भारतीय वृत्त चत्र दे खए और कक्षा म साझा क जए
खोजबीन गतवध
प्र.1 अपने अ भभावक के साथ पशु-प क्षय से संबं धत भारतीय वृत्त चत्र (डॉक्युम ) दे खए और उससे प्राप्त
जानकारी कक्षा म साझा क जए।
यह दे खने और खोजने का काम है। वृत्त चत्र यानी स ी घटनाओं पर बनी फ़ल्म — इसम कहानी नह होती, असली जानवर और
असली जगह होती ह।
कदम क्या क जए
1 घर के बड़ों के साथ बैठकर पशु-पिक्षयों पर बना कोई भारतीय वृत्त िचत्र दे िखए। दू र दशन और कई भारतीय चैनल ऐसे कायक्रम िदखाते
है।
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2 दे खते समय अपनी कॉपी पास रिखए और नोट कीिजए — जानवर का नाम , वह कहाँ रहता है, क्या खाता है, कोई एक अनोखी बात।
3 दे खने के बाद बड़ों से पूिछए िक उ न्हे ं क्या सबसे रोचक लगा। उनकी बात भी िलख लीिजए।
4 क क्षा में तीन-चार वाक्यों में सुनाइए और हो सके तो उस जानवर का एक िचत्र बनाकर िदखाइए।
नमूना उत्तर: हमने पताजी के साथ काज़ीरंगा रा ीय उ ान पर बना एक वृत्त चत्र दे खा। वह असम म है और वहाँ एक स ग वाला
गडा रहता है। मुझे यह जानकर हैरानी हुई क दु नया के ज़्यादातर एक स ग वाले गडे भारत म ही ह। गडा दखने म बहुत भारी है, पर
वह बहुत तेज़ दौड़ सकता है। वृत्त चत्र म यह भी बताया गया क पहले शकार के कारण गडे बहुत कम रह गए थे, पर अब उनक
रक्षा क जा रही है और उनक संख्या बढ़ रही है। मुझे लगा क जंगल के जानवर क रक्षा करना हम सबका काम है।
और जन पर वृत्त चत्र दे खे जा सकते ह: गर का शेर (गुजरात) · रणथंभौर के बाघ (राज ान) · केवलादे व के
प्रवासी पक्षी (भरतपुर) · सुंदरबन का बाघ (प श्चम बंगाल) · नील ग र का हाथी · ल ाख का हम तदुआ।
पाठ से जो ड़ए: क वता म शेर को दूर से दे खकर डर लगता है। पर जब हम वृत्त चत्र म उसे उसके घर म, उसके
ब के साथ दे खते ह, तो डर क जगह जानने क इ ा आ जाती है। जसे हम जान लेते ह, उससे डरना कम हो
जाता है।
जंगल म शां त और सुरक्षा — पृष्ठ 70
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
शेर और चत्रकार को जंगल म शां त के लए कम से कम तीन उपाय सुझाइए
जं ग ल म शां त और सु र क्षा सु झाव-ले ख न
प्र.1 मान ली जए, शेर और चत्रकार अ े मत्र ह। वे चाहते ह क जंगल म सुख-शां त रहे। आप उन्ह जंगल म शां त
के लए क्या उपाय सुझाएँगे? कम से कम तीन सुझाव अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए। (संकेत – ऐसे उपाय
सो चए जनसे जंगल के पेड़-पौधे, हवा-पानी और पशु-पक्षी सुर क्षत रह।)
पुस्तक ने कम से कम तीन सुझाव माँगे ह। नीचे छह सुझाव दए गए ह — इनम से कोई तीन चुनकर, कारण के साथ अपनी लेखन-
पु स्तका म ल खए।
क्रम सुझाव इससे क्या होगा
1 पेड़ न काटे जाएँ, बिल्क हर वष नए पेड़ लगाए जाएँ। पेड़ ही जंगल के जानवर का घर और भोजन ह। पेड़ रहगे तो हवा भी साफ़
रहेगी और वषा भी समय पर होगी।
2 झील और नदी का पानी गंद ा न िकया जाए। जंगल के सब जानवर उसी एक जगह पानी पीने आते ह। पानी गंदा हुआ तो
सब बीमार पड़ जाएँगे।
3 िशकार पूर ी तरह बंद हो और िशकािरयों की सूचना शकार से जानवर क संख्या घट जाती है। कई जानवर तो हमेशा के लए
वन-िवभाग को दी जाए। खत्म हो चुके ह।
4 जंग ल में आग न जलाई जाए और सूखे पत्त ों के ढे र पर एक चनगारी पूरा जंगल जला सकती है। आग म पेड़, घ सले और छोटे
ध्यान रखा जाए। जीव, सब खत्म हो जाते ह।
5 घूम ने आने वाले लोग प्ल ािस्टक और कचरा जंग ल में जानवर प्ला स्टक को खाना समझकर खा लेते ह और बीमार हो जाते ह।
न छोड़ें।
6 जंग ल में तेज़ आवाज़, गाड़ी का हॉन और शोर से पक्षी घ सले छोड़ दे ते ह और जानवर क न द और आराम दोन
लाउडस्पीकर न बजाया जाए। टू टते ह। शां त भी सुरक्षा का हस्सा है।
नमूना उत्तर (तीन सुझाव, अपने शब्द म):
1. म शेर और चत्रकार से क ँगा क जंगल म एक भी पेड़ न कटने द। हर बरसात म सब मलकर नए पौधे लगाएँ, क्य क पेड़ ही
सबका घर ह।
2. झील का पानी साफ़ रखा जाए। कोई उसम कचरा या साबुन न डाले, क्य क उसी पानी को पूरा जंगल पीता है।
3. जंगल म शकार और आग, दोन पर पूरी रोक हो। शेर सबसे कहे क हम एक-दूसरे से डर नह , और चत्रकार गाँव वाल को
समझाए क जंगल हमारा भी है।
करके दे खए: इन सुझाव का एक पोस्टर बनाइए — ऊपर ल खए “हमारा जंगल, हमारी ज़म्मेदारी” और नीचे
तीन सुझाव चत्र के साथ। इसे कक्षा क द वार पर लगाइए।
पुस्तकालय से — पृष्ठ 71
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
पंचतंत्र या हतोपदे श से पशु-प क्षय और मनुष्य के संवाद वाली कहा नयाँ ढूँ ढ़ए
पु स्तकालय से
प्र.1 पुस्तकालय से अपने शक्षक क सहायता से पंचतंत्र अथवा हतोपदे श म से उन कहा नय को ढूँ ढ़ए जनम पशु-
प क्षय और मनुष्य के मध्य संवाद ह ।
यह पुस्तकालय म जाकर करने वाला काम है। पंचतंत्र और हतोपदे श भारत के बहुत पुराने कहानी-संग्रह ह। इनम पशु-पक्षी आपस
म और मनुष्य से भी बात करते ह, और हर कहानी के अंत म एक सीख मलती है।
कहानी कौन-कौन बात करते ह सीख
बाह्मण और बकरा (पंचतंत्र ) तीन ठग और एक बाह्मण एक ही झूठ बार-बार सुनकर आदमी उसे सच मान लेता है। खुद
दे खकर भरोसा क जए।
शेर और खरगोश (पंचतंत्र ) एक घमंडी शेर और एक छोटा छोटा प्राणी भी अपनी बु से बड़े को हरा सकता है — ठ क
खरगोश हमारे चत्रकार क तरह।
बाह्मण, चोर और राक्षस (पंचतंत्र ) बाह्मण, चोर और राक्षस दो दुश्मन आपस म लड़ जाएँ तो तीसरा बच जाता है।
बंद र और मगरमच्छ (पंचतंत्र ) एक चतुर बंद र और एक मुसीबत म घबराइए मत, दमाग से काम ली जए।
मगरम च्छ
कबूतर और िशकारी / चूहे की िमत्रता कबूतरों का राजा, िशकारी और मलकर काम करने से बड़ी-से-बड़ी मुसीबत टल जाती है।
(िहतोपदे श) चूहा
बूढ़ा बाघ और यात्री (िहतोपदे श) एक चालाक बाघ और एक लालच म आकर खतरे क ओर मत ब ढ़ए।
लालची यात्र ी
नीले िसयार की कथा (पंचतंत्र ) एक िसयार और जंग ल के झूठा रूप दे र तक नह टकता।
जानवर
‘चतुर चत्रकार’ से सबसे मलती-जुलती कहानी: शेर और खरगोश। उसम भी एक शेर है, जो अपनी ताकत पर
घमंड करता है, और एक छोटा-सा खरगोश है, जो उसे कुएँ म उसक अपनी परछाईं दखाकर हरा दे ता है। दोन
कहा नयाँ एक ही बात कहती ह — बु ताकत से बड़ी है।
पुस्तकालय म ढूँ ढ़ने का तरीका:
1. शक्षक से पू छए क कहा नय क कताब कस अलमारी म ह।
2. ‘पंचतंत्र’ और ‘ हतोपदे श’ नाम वाली कताब नका लए।
3. पहले वषय-सूची (कहाँ क्या है) प ढ़ए — नाम से ही पता चल जाता है क कहानी म जानवर ह या नह ।
4. जो कहानी अ लगे, उसका नाम, पात्र और सीख अपनी कॉपी म लख ली जए और कक्षा म सुनाइए।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
आज क पहेली — पृष्ठ 71
क व रामनरेश त्रपाठ क रची हुई पहेली — उत्तर पृष्ठ के नीचे उलटा छपा है: “उत्तर — 1. 16383 आम, 2. पेड़ के नाम — आम, पीपल, नीम,
शीशम, जामुन, बबूल, कटहल, महुआ, बेल, इमली, बरगद, कदं ब”
आज क पहे ली पहे ली
प्र.1 चत्रकार जस जंगल म गया था, वहाँ कौन-कौन से पेड़ हो सकते थे? आइए इस पहेली से पता लगाते ह। इस
पहेली को इसी क वता के क व ने रचा है। अपने समूह म मलकर पहेली बू झए — “बाबूलाल मदन मुरलीधर
इलाचंद्र हुबलाल। ग रजाशंकर बेनीमाधव दं डपा ण यशपाल॥ गणप त काशीराम कलापी टहलराम घनश्याम।
लेकर गए एक से दूने, कतने थे कुल आम?”
उत्तर — कुल 16383 आम थे।
पहले पहेली को सरल भाषा म सम झए। पहेली म 14 आद मय के नाम ह। ‘लेकर गए एक से दूने’ का अथ है — पहले आदमी ने
कुछ आम लए, दूसरे ने उससे दुगुने, तीसरे ने दूसरे से दुगुने, और इसी तरह आगे। पहला आदमी सबसे कम, यानी 1 आम लेकर
गया।
पहेली में नाम िगिनए —
पहली पंिक्त: बाबूलाल, मदन, मुरलीधर, इलाचंद , हबु लाल = 5
दू सरी पंिक्त: िगिरजाशंक र, बेन ीमाधव, दंडपािण, यशपाल = 4
तीसरी पंिक्त: गणपित, काशीराम, कलापी, टहलराम, घनश्याम = 5
कु ल = 5 + 4 + 5 = 14 आदमी
अब हर आदमी के आम ग नए। हर बार पछली संख्या को 2 से गुणा क जए —
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार
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क्रम नाम कतने आम
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बाबूल ाल 1
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मदन 2
3 मुर लीधर 4
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6 िगिरजाशंक र 32
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7 बेनीमाधव 64
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8 दंडपािण 128
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10 गणपित 512
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11 काशीराम 1024
12 कलापी 2048
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13 टहलराम 4096
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घनश्याम 8192
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जोड़ इस तरह कीिजए —
1+2=3
3+4=7
7 + 8 = 15
15 + 16 = 31
31 + 32 = 63
63 + 64 = 127
127 + 128 = 255
255 + 256 = 511
511 + 512 = 1023
1023 + 1024 = 2047
2047 + 2048 = 4095
4095 + 4096 = 8191
8191 + 8192 = 16383
एक सुंदर पैटन दे खए: हर बार जोड़ का उत्तर 3, 7, 15, 31, 63… आ रहा है। हर उत्तर अगली संख्या से ठ क 1
कम है! जैसे 8192 से 1 कम = 8191, और 16384 से 1 कम = 16383। इस लए बना पूरा जोड़ लगाए भी उत्तर
नकाला जा सकता है — आ खरी आदमी के आम को दुगुना करके उसम से 1 घटा द जए। 8192 × 2 =
16384, और 16384 − 1 = 16383।
मलान: पुस्तक ने पृष्ठ 71 के नीचे उत्तर उलटे अक्षर म छापा है — “उत्तर – 1. 16383 आम”। प े को घुमाकर
प ढ़ए और अपना उत्तर मला ली जए। पास ही ‘ शक्षण-संकेत’ म यह भी लखा है क ब े अलग-अलग उत्तर दे
सकते ह, इस लए शक्षक धैय से सही उत्तर तक पहुँचने म मदद कर।
प्र.2 ऊपर द गई क वता म 12 पेड़ के नाम छपे ह। उन नाम को ढूँ ढ़ए, जैसे – गणप त, कलापी और टहलराम शब्द
म से ‘पीपल’ नकलता है। कोई एक अक्षर कई नाम के लए भी प्रयुक्त हो सकता है।
पहेली म छपे बारह पेड़ ये ह — आम, पीपल, नीम, शीशम, जामुन, बबूल, कटहल, महुआ, बेल, इमली, बरगद, कदं ब।
ढूँ ढ़ने का तरीका यह है — आद मय के नाम म से एक-एक अक्षर उठाइए और उन्ह जोड़कर पेड़ का नाम बनाइए। एक ही अक्षर
कई पेड़ के लए काम आ सकता है। नीचे पूरी भरी हुई ता लका द गई है।
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क्रम पेड़ का नाम अक्षर कहाँ से मले
1 आम काशीर ◌ाम · टहलर◌ाम · घनश्य◌ाम — इन नामों के अंत में ही ‘आम’ बैठा है।
2 पीपल पी प ल
कला + गण ित + टह राम (यह उदाहरण पुस्तक ने खुद िदया है)
3 नीम नी
बे माधव + काशीरा म
4 शीशम शी श
का राम + य पाल + घनश्या म
5 जामुन जा मु
िगिर शंक र + र लीधर + मद न
6 बबूल ब बू
हु लाल + बा ल ाल + बाबूल ा ल
7 कटहल कलापी + टहलराम + टहल राम
8 महआ
ु मदन + हबु लाल + इल ◌ाचंद (‘◌ा’ की मात्रा से ‘आ’)
9 बेल बेनीमाधव + यशपाल
10 इमली इलाचंद + मदन + मुरलीधर
11 बरगद ब र ग
हु लाल + मुर लीध + णपित + म न द
12 कदंब कलापी + दंडपािण + हुबलाल
मलान: पुस्तक ने पृष्ठ 71 के नीचे उत्तर उलटे अक्षर म छापा है — “2. पेड़ के नाम — आम, पीपल, नीम,
शीशम, जामुन, बबूल, कटहल, महुआ, बेल, इमली, बरगद, कदं ब”। प े को घुमाकर प ढ़ए। हमारे उत्तर से यह
पूरी तरह मल जाता है।
ढूँ ढ़ने का आसान तरीका (तीन कदम):
1. पहले अपने आसपास दखने वाले पेड़ के नाम एक कागज़ पर लख ली जए — आम, नीम, पीपल, बरगद,
इमली, बबूल…
2. अब हर पेड़ के नाम को अक्षर म तो ड़ए — जैसे नी + म।
3. फर पहेली क पं क्तय म वे अक्षर ढूँ ढ़ए। मल जाएँ तो पेड़ का नाम पक्का!
करके दे खए: अपने समूह म यही खेल खुद बनाइए। अपने सा थय के नाम से कोई फल या फूल का नाम
नका लए — जैसे सीता, तारा और बबलू से ‘सीताब’ नह , पर केशव और लाल से ‘केला’ ज़रूर नकल आएगा!
दो मढक क यात्रा — पृष्ठ 72, 73 और 74
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पाठ के बाद छपी बना क्रमांक क रचना — एक जापानी लोककथा ( टनी टॉट प ब्लकेशंस से साभार)
अनु पू र क रचना दो मढक क यात्रा
प्र.1 ‘दो मढक क यात्रा’ कस बारे म है? इस कहानी को अपने शब्द म बताइए।
यह एक जापानी लोककथा है। लोककथा वह कहानी होती है जो लोग म पीढ़ -दर-पीढ़ चलती चली आती है। यह पाठ 6 के बाद,
पृष्ठ 72 से 74 तक, बना क्रमांक के छपी है।
कहानी इस तरह है —
1. कई वष पहले जापान म दो मढक रहते थे। एक ओसाका के पास एक खड्ड — यानी गहरे ग े — म रहता था। दूसरा क्योटो के
पास बहने वाली एक नद म रहता था।
2. एक दन दोन के मन म एक ही वचार आया — “इस जगह पर रहते हुए बहुत दन हो गए। अब बाहर का संसार भी दे खना
चा हए।”
3. संयोग ऐसा हुआ क क्योटो वाले मढक ने ओसाका जाने का और ओसाका वाले मढक ने क्योटो जाने का नश्चय कया।
4. दोन शहर को जोड़ने वाला रास्ता एक ही था। इस लए रास्ते म दोन क भट हो गई। उन्ह ने हाथ मलाया और बात करने लगे।
5. दोन थक चुके थे, इस लए एक बड़ी चट्टान क छाया म बैठ गए।
6. ओसाका के मढक ने कहा — “ कतना अ ा होता, अगर हमारा आकार थोड़ा बड़ा होता! तब हम पहाड़ पर चढ़कर उन शहर
को दे ख लेते, जहाँ हम जा रहे ह।”
7. क्योटो के मढक ने उपाय बताया — “हम पहाड़ पर चढ़कर, एक-दूसरे का सहारा लेकर, अपने पछले पैर पर खड़े हो जाएँ।”
8. दोन उछलते-उछलते पहाड़ के शखर — यानी सबसे ऊँची चोट — पर पहुँच गए और एक-दूसरे के कंध पर अगले पैर रखकर
खड़े हो गए।
9. पर उन्ह ने एक बात पर ध्यान ही नह दया — उनक पीठ उन्ह शहर क ओर थी, जन्ह वे दे खना चाहते थे।
10. इस लए ओसाका से आया मढक ओसाका को ही दे ख रहा था और क्योटो का मढक क्योटो को ही।
11. दोन को लगा क दोन शहर एक जैसे ही ह। ओसाका के मढक ने कहा — “लगता है, मने यहाँ तक आकर अपना समय ही नष्ट
कया है।”
12. नराश होकर दोन मढक अपने-अपने घर लौट गए।
कहानी हँसाती भी है और सोचने पर मजबूर भी करती है: दोन मढक इतनी दूर चलकर आए, पहाड़ पर भी चढ़े
— पर गलत दशा म दे खने के कारण कुछ नया दे ख ही नह पाए। मेहनत पूरी क , पर दशा गलत थी।
प्र.2 दोन मढक पहाड़ क चोट पर एक-दूसरे के कंध पर पैर रखकर क्य खड़े हुए? उनसे कौन-सी गलती हो गई?
वे इस लए खड़े हुए, ता क ऊँचाई मल जाए और वे दूर के शहर दे ख सक। मढक का शरीर छोटा होता है, इस लए बैठे-बैठे उन्ह
कुछ दखता नह था।
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कहानी की पंिक्त —
“यिद हम पास के पहाड़ पर चढ़ कर एक -दू सरे का सहारा लेते हुए अपने िपछले पैरों पर खड़ े हो जाएँ तो िफर हम
आसानी से उन शहरों को दे ख सकें गे, जहाँ हम जाना चाहते है।
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गलती यह हुई —
उन्ह ने क्या सोचा असल म क्या हुआ
ऊँचे खड़े हो जाएँग े तो सामने का शहर िदख जाएगा। ऊँचाई तो िमल गई, पर वे एक -दू स रे की ओर मुँह करके खड़े हुए थे।
दोनों को नया शहर िदखेग ा। दोनों की पीठ उसी शहर की ओर हो गई, िजसे वे दे खना चाहते थे।
यात्रा सफल हो जाएगी। दोनों ने अपना ही पुर ाना शहर दे खा और िनराश होकर लौट गए।
कहानी के अपने शब्द —
“लेिकन उन दोनों ने एक बात की ओर ध्यान ही नही ं िदया था। उन्होंने अपनी पीठ उन्ही ं शहरों की ओर कर
रखी थी, िजन्हे ं वे दे खना चाहते थे ।”
एक और छपी हुई बात: मढक क आँख सर के ऊपर होती ह। जब वह पछले पैर पर सीधा खड़ा होता है, तो
उसका सर पीछे क ओर झुक जाता है और आँख पीछे क ओर दे खने लगती ह। इसी लए दोन को अपना ही शहर
दखा।
प्र.3 दोन मढक को क्योटो और ओसाका एक जैसे क्य दखाई दए?
वे एक जैसे इस लए दखे, क्य क दोन ने नया शहर दे खा ही नह — दोन ने अपना ही पुराना शहर दे खा।
मढक वह दे खना क्या चाहता था उसे दखा क्या
ओसाका का मेंढक क्योटो ओसाका (अपना ही शहर )
क्योटो का मेंढक ओसाका क्योटो (अपना ही शहर )
इसी लए ओसाका के मढक को लगा क “क्योटो तो बलकुल ओसाका क तरह ही दखता है” और क्योटो के मढक को लगा क
“ओसाका भी क्योटो क तरह ही है”।
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ओसाका की ओर देख रहा है क्योटो की ओर देख रहा है
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ओसाका क्योटो
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दोनों की पीठ अपनी मंिज़ल की ओर थी।
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पहाड़ क चोट पर दोन मढक आमने-सामने खड़े थे। इस लए ओसाका से आया मढक ओसाका क ओर और क्योटो से आया मढक क्योटो
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क ओर दे ख रहा था।
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ाई क्या थी: क्योटो और ओसाका सचमुच एक जैसे नह ह। पर मढक को यह पता ही नह चला, क्य क
उन्ह ने गलत दशा म दे खा। यानी उनक बात गलत नह थी — उनक दे खने क दशा गलत थी।
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करके दे खए: कसी साथी के सामने खड़े होकर उसके कंध पर हाथ र खए। अब बना मुड़े बताइए क आपके पीछे
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‘दो मढक क यात्रा’ से हम क्या सीख मलती
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सबसे बड़ी सीख यह है — सफ़ मेहनत करना काफ़ नह , सही दशा म दे खना भी ज़रूरी है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
सीख कहानी म कहाँ से मली
मेहनत के साथ सही िदशा भी चािहए। दोन मढक इतनी लंबी यात्रा करके पहाड़ क चोट तक पहुँचे, पर उलट दशा म
दे खने के कारण कुछ नया दे ख ही न पाए।
िकसी जगह या व्यिक्त के बारे में िबना ठीक से दे खे राय दोन ने एक झलक दे खकर मान लया क दोन शहर एक जैसे ह और लौट गए।
मत बनाइए।
काम शुरू करने से पहले उसे ठीक से जाँच लीिजए। उन्ह ने चढ़ने से पहले यह सोचा ही नह क खड़े होने पर उनका मुँह कस ओर होगा।
बीच में हार मत मािनए। थोड़ा और पयास करने से अगर वे बस घूमकर खड़े हो जाते, तो दोन को नया शहर दख जाता। इतनी छोट -सी
बात बन जाती है। बात ने पूरी यात्रा बेकार कर द ।
जो हम दे खना चाहते है,ं अकसर वही िदख जाता है। दोन ने अपने ही शहर को दूसरा शहर मान लया।
इसिलए जाँच ज़रूरी है।
अपने जीवन से जो ड़ए: मान ली जए आप ग णत का अभ्यास घंट करते ह, पर गलत तरीका दोहराते रहते ह।
मेहनत पूरी है, पर दशा गलत है — इस लए उत्तर सही नह आएगा। इसी लए बीच-बीच म रुककर जाँच लेना चा हए
क हम सही रास्ते पर ह या नह ।
यह कहानी हँसाती भी है: दो मढक का पछले पैर पर खड़े होकर एक-दूसरे को घूरना सो चए — कतना मज़ेदार
दृश्य है! अ लोककथाएँ ऐसी ही होती ह। वे हँसाते-हँसाते सखा जाती ह।
प्र.5 ‘दो मढक क यात्रा’ का ‘चतुर चत्रकार’ पाठ से क्या संबंध है?
दोन रचनाएँ एक ही बात के दो पहलू दखाती ह — सोच-समझकर काम करने का महत्त्व। क वता म यह बात जीतकर सखाई
गई है, लोककथा म हारकर।
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बात चतुर चत्रकार दो मढक क यात्रा
िवधा क वता — तुकबंद वाली, कहानी क तरह चलती हुई लोककथा — ग द्य में िलखी छोटी कहानी (जापान की)
मुख्य पात्र एक चत्रकार और एक शेर दो मेंढक
पशु की भूिमका शेर बना सोचे पीठ फेर लेता है और ठगा जाता है दोनों मेंढक िबना सोचे खड़े हो जाते है ं और यात्र ा बेक ार कर
ले ते है ं
‘पीठ’ का खेल शेर क पीठ चत्रकार क ओर हो जाती है — और मेंढकों की पीठ उनकी मंिज़ल की ओर हो जाती है — और
चत्रकार बच जाता है यात्र ा बेक ार हो जाती है
जो सोचकर काम चत्रकार — वह जीत जाता है कोई नही ं — इसीिलए दोनों िनराश लौटते है ं
करता है
संदे श ताकत से बड़ी चीज़ सूझ-बूझ है मेहनत से बड़ी चीज़ सही िदशा है
सबसे सुंदर जोड़: दोन रचनाओं म सब कुछ एक ही बात पर टका है — कौन कस दशा म मुँह कए हुए है।
चत्रकार ने दशा का सही उपयोग कया, इस लए बच गया। मढक ने दशा पर ध्यान ही नह दया, इस लए खाली
हाथ लौटे । इसी लए यह लोककथा ठ क इसी पाठ के बाद रखी गई है।
सो चए: अगर चत्रकार मढक के साथ पहाड़ पर होता, तो शायद कहता — “ मत्रो, ज़रा घूमकर खड़े हो जाइए!”
अध्याय — एक नज़र म
चतुर चत्रकार एक क वता है। इसके रचनाकार रामनरेश त्रपाठ ह। उनका नाम क वता के ठ क नीचे, पृष्ठ 62 पर छपा है।
रामनरेश त्रपाठ हद के जाने-माने क व थे। वे ब के लए ऐसी क वताएँ लखते थे जो कहानी क तरह चलती ह और अंत
म एक सीख दे जाती ह। यह क वता भी वैसी ही है।
क वता एक सुनसान जगह से शुरू होती है। सुनसान यानी जहाँ कोई न हो, बलकुल खाली। वहाँ एक चत्रकार बैठकर चत्र
बना रहा है। तभी वहाँ ‘यम राजा का मत्र’ आ जाता है। यम राजा मृत्यु के दे वता माने जाते ह। यानी जो आया है, वह मौत
जैसा डरावना है — वह शेर है।
शेर को दे खते ही चत्रकार के होश उड़ गए। नद , पहाड़, पेड़ और पत्त का चत्र बनाने का सारा जोश खत्म हो गया। पर उसने
दे खा क शेर चुपचाप बैठा है, हमला नह कर रहा। इससे उसे कुछ हम्मत आई और उसने कहा — “सुंदर चत्र बना दूँ , बैठ
जाइए आप।”
शेर मान गया। वह उकड़ू-मुकड़ू — यानी घुटने मोड़कर, सारे अंग समेटकर — बैठ गया और बड़े ध्यान से चत्रकार को दे खने
लगा। थोड़ी दे र बाद चत्रकार ने कहा क आगे का चत्र बन गया, अब आप मुँह उधर कर ली जए, ‘जंगल के सरदार’। शेर ने
पीठ फेर ली और आँख मूँदकर बैठ गया।
यही चत्रकार क चाल थी। शेर के पीठ फेरते ही वह चुपके से खसक गया, जैसे कोई चोर। झील कनारे एक नाव रखी थी
और साथ म एक बाँस। चत्रकार ने नाव पकड़ी, जी भर के साँस ली और जल्द -जल्द नाव चलाकर दूर नकल गया।
इधर शेर बहुत दे र तक आँख मूँदे बैठा रहा। फर उसने सोचा क इतनी दे र क्य हो रही है। मुड़कर दे खा तो चत्रकार गायब! वह
झुँझलाहट — यानी खीझ — म चूर हो गया। ख सयाकर बोला — “नाव जरा ले रोक, कलम और कागज तो ले जा, रे कायर
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
डरपोक।”
चत्रकार ने बहुत सुंदर उत्तर दया — “र खए अपने पास, चत्रकला का आप क जए, जंगल म अभ्यास।” यानी कलम-कागज
आप ही र खए और खुद चत्र बनाना सी खए। इसी चुट ले उत्तर पर क वता खत्म होती है और हम हँसी भी आ जाती है।
क वता का भाव यह है क ताकत से बड़ी चीज़ सूझ-बूझ है। शेर बहुत श क्तशाली था, पर चत्रकार ने बना लड़े, बना
चल्लाए, केवल धैय और चतुराई से अपने प्राण बचा लए। क वता यह भी सखाती है क डर लगना बुरी बात नह है — डरकर
हाथ-पैर छोड़ दे ना बुरी बात है।
क वता क भाषा सरल, चलती- फरती और तुकबंद वाली है — चत्र- मत्र, होश-जोश, चुपचाप-आप, ओर-चोर, बाँस-साँस,
दूर-चूर, रोक-डरपोक, पास-अभ्यास। इसम कई मुहावरे भी आए ह — होश उड़ना, जी भर के साँस लेना और धोखा खाना।
पाठ के बाद पृष्ठ 72 से 74 तक बना क्रमांक क एक जापानी लोककथा दो मढक क यात्रा छपी है, जो बताती है क कसी
जगह को जानने के लए वहाँ जाकर, ठ क दशा म दे खना ज़रूरी है।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
सुनसान जहाँ कोई न हो, िबलकु ल खाली और “ चत्रकार सुनसान जगह म, बना रहा था दोपहर म गाँव क गली सुनसान हो
चुपचाप जगह चत्र” जाती है।
यम राजा म ृत्यु के दे वता; यहाँ ‘यम राजा का िमत्र’ “इतने ही म वहाँ आ गया, यम राजा का कहा नय म यम राजा को न्याय
का अथ है — मौत जैस ा डरावना, यानी मत्र।” करने वाला बताया गया है।
शेर
होश उड़ना बहुत डर जाना, कु छ न सूझना “उसे दे खकर चत्रकार के, तुरंत उड़ गए अँधेरे म अचानक आवाज़ सुनकर
होश” मेरे होश उड़ गए।
जोश उमंग , काम करने का उत्साह “नद , पहाड़, पेड़, पत्त का, रह न गया कुछ मैच जीतने पर पूरी ट म म जोश
जोश।” भर गया।
हम्मत साहस, डर के बाद भी कु छ करने की “ फर उसको कुछ हम्मत आई, दे ख उसे पहली बार मंच पर बोलने के लए
ताकत चुपचाप” हम्मत चा हए।
उकड़ू-मुकड़ू घुटने मोड़कर, िसकु ड़कर बैठने का ढं ग “उकड़ू-मुकड़ू बैठ गया वह, सारे अंग बटोर” ठं ड म दादा जी अलाव के पास
उकड़ू-मुकड़ू बैठ गए।
अंग बटोरना शरीर के हाथ-पैर समेट ले ना “सारे अंग बटोर” बल्ली सद म अंग बटोरकर सो
जाती है।
सरदार मुिखया, सबसे बड़ा; यहाँ शेर को ‘जंग ल “अब मुँह आप उधर तो क रए, जंगल के हमारे दल का सरदार सबसे आगे
का सरदार’ कहा गया है सरदार।” चलता है।
पीठ फराना पीठ की ओर कर ले ना, मुँह दू स री तरफ़ “बैठ गया पीठ फराकर, चत्रकार क ओर” बात पूरी सुने बना पीठ फराकर
कर ले ना मत जाइए।
खसकना धीरे -धीरे , िबना िकसी को पता चले हट “ चत्रकार चुपके से खसका, जैसे कोई भीड़ दे खकर वह चुपचाप पीछे से
जाना चोर।” खसक गया।
आँख मूँदना आँखें बंद कर ले ना “बहुत दे र तक आँख मूँदकर, पीठ घुमाकर आँख मूँदकर कसी क बात मत
शेर” मा नए।
झील चारों ओर ज़मीन से िघरा बड़ा जलाशय “झील कनारे नाव थी, एक रखा था बाँस” नैनीताल क झील म लोग नाव
चलाते ह।
बाँस लंबा, पोला डंडा िजससे नाव खेई जाती है “एक रखा था बाँस” मल्लाह ने बाँस से नाव कनारे लगा
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जी भर के खतरे से बचने पर चैन की गहरी साँस “ चत्रकार ने नाव पकड़कर, ली जी भर के परीक्षा खत्म होते ही मने जी भर के
साँस लेना ले ना, राहत महसूस करना साँस।” साँस ली।
धोखा खाना ठगा जाना, चाल में आ जाना “इधर शेर था धोखा खाकर, झुँझलाहट म दखावे पर भरोसा करके वह धोखा
चूर।” खा गया।
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार
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शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
m l a se पूछने पर उसक
.co ag झुँझलाहट बढ़ गई।
झुँझलाहट खीझ, िचढ़ , ग स्ु से -भरी बेचैनी “झुँझलाहट म चूर।” बार-बार
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होना िकसी भाव में पूर ी तरह डू ब जाना “झुँझलाहट म चूर।” जीत क खुशी म वह चूर था।
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ख सयाना हार या शम के कारण झेंपकर बोलना “शेर बहुत ख सयाकर बोला” चोरी पकड़ी जाने पर वह
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ख सयाकर हँस दया।
a “रे कायर डरपोक।”
कायर जो डरकर लड़ाई से भाग जाए
agl स ा वीर कभी कमज़ोर पर हाथ
नह उठाता, यही कायर करते ह।
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अभ्यास “ चत्रकला का आप क जए, जंगल म
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रोज़ के अभ्यास से लखावट सुंदर
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बार-बार करके सीखना
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अभ्यास।” हो जाती
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चतुर (पाठ का शीषक — ‘चतुर चत्रकार’) चतुर ब ा मु श्कल म भी रास्ता
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ढूँ ढ़ लेता है।
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कुशलता िकसी काम में िनपुणता, अच्छी पकड़ (‘बातचीत के लए’ प्रश्न 3 म) अभ्यास से हर काम म कुशलता
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आ जाती है।
a s em (‘भाषा क बात’ प्रश्न 4 (ङ) म)
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वातालाप आपस में बातचीत दोन मत्र के बीच दे र तक
वातालाप हुआ।
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संकट मुस ीबत, खतरे का समय (‘पाठ से आगे’ प्रश्न 1 म) संकट के समय घबराना नह
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चा हए।
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m सच्ची घटनाओं पर बनी िफ़ल्म g l
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(‘खोजबीन’ म) हमने बाघ पर बना एक वृत्त चत्र
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(डॉक्युम ेंटी) दे खा।
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लोककथा लोगों में पीढ़ ी-दर-पीढ़ ी चली आ रही “दो मढक क यात्रा (जापानी लोककथा)” दाद हम रोज़ एक लोककथा
कहानी
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सुनाती ह।
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खड्ड गहरा ग ा “एक मढक ओसाका के पास एक खड्ड म बा रश का पानी खड्ड म भर गया।
रहता था”
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नवास करना रहना “क्योटो के पास बहने वाली एक नद म मेरे नाना गाँव म नवास करते ह।
नवास करता था।”
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संयोग
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िबना सोचे-समझे एक ही समय पर हो
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“यह संयोग ही था क क्योटो के पास रहने यह संयोग है क हम दोन एक ही
a s em जाने वाली बात वाले मढक ने ओसाका जाने का नश्चय दन जन्मे थे।
agl कया”
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मं ज़ल “दोन ही मढक उसी माग पर अपनी-अपनी चलते र हए, मं ज़ल दूर नह है।
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वह जगह जहाँ पहच
ु ँ ना है
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मं ज़ल क ओर चल दए।”
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भट मुल ाकात
g l a “माग म एक ान पर दोन मढक क भट मेले म बरस बाद उनसे भट हुई।
a हो गई।”
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कक्षा 5 हद अध्याय 6 चतुर चत्रकार AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
आश्चय हैर ानी “क्योटो के मढक ने आश्चय से पूछा” जादू का खेल दे खकर सबको
आश्चय हुआ।
उत्सुक िकसी चीज़ को जानने या दे खने के िलए “ओसाका का मढक क्योटो क झलक दे खने प रणाम जानने के लए सब
बेचैन के लए इतना उत्सुक था” उत्सुक थे।
शखर पहाड़ की सबसे ऊँची चोटी “वे दोन उछलते-उछलते पास म ही त सूरज क पहली करण शखर पर
एक पहाड़ के शखर पर जा पहुँचे।” पड़ती है।
समय नष्ट समय बरबाद करना “लगता है, मने यहाँ तक आकर अपना समय खाली बैठकर समय नष्ट मत
करना ही नष्ट कया है।” क जए।
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