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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 12 हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान

AglaSem पर कक्षा 6 हिंदी पाठ 12 हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान (मल्हार) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 12 (Malhar).
NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 12 हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान - Page 1 of 37

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NCERT Solutions Class 6 Hindi Chapter 12 हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा6

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 12: हद महासागर म छोटा-सा
हदुस्तान

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

128 – 144 17 37 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 36 pages

Page 2

कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 6 · हद · मल्हार

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 12: हद महासागर म छोटा-सा
हदुस्तान
NCERT कक्षा 6 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह एक यात्रा-वृत्तांत
(गद्य) है, जसे हद के प्र सद्ध लेखक और राष्ट्रक व रामधारी सह ‘ दनकर’ (1908–1974) ने लखा है। इसम लेखक क नैरोबी (केन्या) के
नेशनल पाक क सैर और उसके बाद मॉ रशस क यात्रा का वणन है। पृष्ठ 128 से 144 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से, पं क्तय पर चचा,
सोच- वचार के लए, मलकर कर मलान, यात्रा-वृत्तांत क रचना, अनुमान या कल्पना से, शब्द क बात, आपक बात, कक्षा और घर क भाषाएँ,
प्रशंसा या सराहना व भन्न प्रकार से, चत्रात्मक सूचना, हस्ताक्षर, पत्र, उलझन सुलझाओ, आज क पहेली और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक
हल क गई है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

मल्हार (कक्षा 6) 128 – 144

खं ड प्रश्न
17 37

माध्यम

हन्द

मेरी समझ से — पृष्ठ 133
पाठ से

पाठ से

प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए— (1) हरण समूह म क्य
खड़े थे? • भागने पर उन्ह सह के आक्रमण का डर था। • वे भाग चुके हरण के लौटने क प्रतीक्षा म थे। • वे बीच
खड़े असावधान जराफ क रक्षा कर रहे थे। • सह उनसे उदासीन थे अत: उन्ह कोई खतरा नह था।

सही उत्तर है — भागने पर उन्ह सह के आक्रमण का डर था। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
इसका सीधा प्रमाण पाठ क ये पं क्तयाँ ह —

“बाकी िहरन िठठके हुए इसिलए खड़ े थे िक िसंह उन्हे ं दे ख रहे थे और सहज पवृि िहरनों को यह समझा रही थी
िक खतरा िकसी भी तरफ़ भागने में हो सकता है।”
“िशकार वे झुंड का नही ं करते , बिल्क उस जानवर का करते है ं जो भागते हुए झुंड से िपछड़ जाता है।”

यानी हरन जानते थे क जो भागेगा और पीछे छू ट जाएगा, सह उसी पर झपटगे। इस लए वे भागने के बजाय एक गोल (समूह) म
जमे रहे — यही उनके लए सबसे कम खतरे वाला रास्ता था।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

भागने पर उन्ह सह के आक्रमण सही ★ “खतरा कसी भी तरफ़ भागने म हो सकता है” — लेखक ने स्वयं यही कारण लखा
का डर था। है।

वे भाग चुके हरण के लौटने क ग़लत लौटने या प्रतीक्षा क बात पाठ म कह नह है। कुछ हरन भागे ज़रूर, पर बाक उनके
प्रतीक्षा म थे। लौटने के लए नह रुके थे।

वे बीच खड़े असावधान जराफ क ग़लत जराफ का ज़क्र है — “एक जराफ बल्कुल बेवकूफ क तरह खड़ा था” — पर
रक्षा कर रहे थे। हरन उसक रक्षा कर रहे थे, ऐसा पाठ म नह कहा गया।

सह उनसे उदासीन थे अत: उन्ह ग़लत सह पयटक से उदासीन थे, हरन से नह । हरन के बारे म तो लखा है — “ हरन
कोई खतरा नह था। के झुंड ने ताड़ लया क उन पर सह क नज़र पड़ रही है।”

ऐसे प्रश्न कैसे हल कर: वकल्प चुनने से पहले पाठ म ‘इस लए’, ‘क्य क’, ‘अतएव’ जैसे कारण बताने वाले शब्द
ढूँ ढ़ए। यहाँ पूरा कारण “ ठठके हुए इस लए खड़े थे क…” वाले वाक्य म ही रखा हुआ है।

प्र.2 (2) मॉ रशस छोटे पैमाने पर भारतवष ही है। कैसे? • गन्ने क खेती अ धकतर भारतीय ारा क जाती है। •
अ धकतर जनसंख्या भारत से जाने वाल क है। • सभी भारतवासी परी तालाब पर एक त्रत होते ह। • भारत क
बहुत-सी वशेषताएँ वहाँ दखाई दे ती ह।

सही उत्तर है — भारत क बहुत-सी वशेषताएँ वहाँ दखाई दे ती ह। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।
लेखक ने हवाई अ े पर स्वागत दे खते ही लखा है —

“यह भाव जगे िबना नही ं रहा िक हम जहाँ आए है,ं वह छोटे पैमाने पर भारत ही है।”

और आगे वे एक-एक करके गनाते ह क भारत क कौन-कौन-सी बात वहाँ मलती ह — ग लय के नाम कलकत्ता, मद्रास,
हैदराबाद, बम्बई; एक मोहल्ले का नाम काशी; बनारस, गोकुल, ब्रह्मस्थान; हर प्रमुख गाँव म शवालय; रामच रतमानस का
पाठ; शवरा त्र का पव; और भाषा म भोजपुरी।

बाक तीन वकल्प क्य नह : पहले दो वकल्प (गन्ने क खेती, जनसंख्या) पाठ म सही तो ह, पर वे एक-एक
अलग बात ह — “भारतवष ही है” जैसी बड़ी बात उनसे पूरी नह होती। तीसरा वकल्प तो ग़लत ही है, क्य क परी-
तालाब पर “सभी भारतवासी” नह , मॉ रशस के हदू शवरा त्र पर जाते ह। चौथा वकल्प सबसे बड़ा और सबको
समेटने वाला है, इस लए वही सट क उत्तर है।

ध्यान द: बहु वकल्पीय प्रश्न म जब एक वकल्प बाक वकल्प को अपने भीतर समेट लेता है, तो प्रायः वही सही
उत्तर होता है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 (ख) अपने मत्र के साथ चचा क जए और कारण बताइए क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?

यह चचा का काम है, इस लए इसका एक ही ‘सही’ उत्तर नह होता — पर कारण पाठ से ही नकलना चा हए। चचा म यह तरीका
अपनाइए—

1. पहले वह वकल्प ज़ोर से प ढ़ए जो आपने चुना।
2. फर पाठ म से वह पं क्त खोजकर प ढ़ए जो उसे सद्ध करती है।
3. अंत म बताइए क बाक वकल्प कस बात से कट जाते ह।

नमूना उत्तर:

प्रश्न मने जो उत्तर मेरा कारण (पाठ से)
चुना

(1) हरण समूह म भागने पर उ न्हे ं िसंह मने यह उत्तर इस लए चुना क्य क पाठ म लखा है क सह “उस जानवर का शकार करते
क्य खड़े थे? के आक्रमण का डर ह जो भागते हुए झुंड से पछड़ जाता है”, और हरन क सहज प्रवृ त्त उन्ह बता रही थी क
था। “खतरा कसी भी तरफ़ भागने म हो सकता है।” बाक वकल्प क कोई पं क्त पाठ म नह
मली।

(2) मॉ रशस छोटे भारत की बहुत-सी मने यह उत्तर इस लए चुना क्य क लेखक ने केवल एक बात नह , कई बात गनाई ह —
पैमाने पर भारतवष िवशेषताएँ वहाँ ग लय के नाम, काशी मोहल्ला, शवालय, रामच रतमानस, शवरा त्र, भोजपुरी। एक
ही है। कैसे? िदखाई दे ती है।ं अकेली बात (जैसे केवल खेती या केवल जनसंख्या) से पूरा “भारतवष ही है” नह बनता।

चचा का सुझाव: समूह म हर ब ा अपना चुना हुआ वकल्प बताए और पाठ क एक पं क्त पढ़कर सुनाए। जस
वकल्प के लए कसी को कोई पं क्त न मले, समझ ली जए वह वकल्प ग़लत है।

पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 134
पाठ से

पाठ से भावाथ

प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार अपने समूह म साझा क जए और अपनी लेखन पु स्तका म ल खए।
“भारत म बैठे-बैठे हम यह नह समझ पाते क भारतीय संस्कृ त कतनी प्राणवती और चरायु है। कतु, मॉ रशस
जाकर हम अपनी संस्कृ त क प्राणवत्ता का ान आसानी से प्राप्त कर लेते ह।”

पहले सरल भाषा म अथ — भारत म रहते हुए हम अपनी संस्कृ त क ताकत का पता नह चलता, क्य क वह हमारे चार ओर हर
समय मौजूद है। पर जब हम मॉ रशस जाते ह, जहाँ भारतीय लोग डेढ़ सौ साल पहले मज़दूर बनकर गए थे, तो हम दखता है क
इतनी दूर, इतने क ठन हालात म भी हमारी संस्कृ त जी वत है। तब उसक असली श क्त समझ म आती है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान
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m.
शब्द अथ

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पाणवती
.co
प्राण से भरी हुई, जी वत और सजीव
a g l
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g l a लंबी आयु वाली, जो स दय तक न मटे
a
िचरायु

पाणव ा जीवन-श क्त, प्राण होने का गुण

co m
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l a se
यह बात सच क्य है: पाठ म इसका प्रमाण भी दया गया है। मॉ रशस म हर प्रमुख गाँव म शवालय है,
रामच रतमानस का पाठ और ढोलक-झाँaझg पर गायन होता है, शवरा त्र वष का सबसे बड़ा पव है, एक मोहल्ले का
नाम काशी है और वहाँ बनारस, गोकुल, ब्रह्मस्थान भी ह। मा लक चाहते थे क भारतीय अपना धम छोड़ द, पर

co m
m.
“भारतीय ने अत्याचार तो सहे, ले कन प्रलोभन को ठु करा दया।” जो संस्कृ त परदे स म, बना कसी सहारे के,

m
इतने वष तक टक रहे — वही सचमुच प्राणवती और चरायु कहलाती है।
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a gl अपने जीवन से जो ड़ए: यह ठ क वैसा ही है जैसे अपने घर क खूबी हम तब समझ आती है जब हम कुछ दन घर
से बाहर रहकर लौटते ह। दूर जाकर दे खने पर ही चीज़ का मोल पता चलता है।

m a s
em
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agl क ‘प्राणवत्ता’ है।
चचा के लए: समूह म बताइए क आपके प रवार क कौन-सी बात (कोई त्योहार, गीत, व्यंजन या री त) पीढ़ -दर-
पीढ़ चली आ रही है। वही आपके प रवार

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सोच- वचारm as e
.co
के लए — पृष्ठ 134
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पाठ से
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a gl पाठ से सोच- वचार
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omहै।” नेशनल पाक और च ड़याघर म क्या अंतर है?
(क) “नैरोबी का नेशनल पाक च ड़याघर.cनह g l a
प्र.1
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उत्तर agl

co
सबसे बड़ा अंतर यह है क च ड़याघर म जानवर पजरे या बाड़े म बंद रहते ह और लोग बाहर से दे खते ह, जब क नेशनल
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m .
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पाक म जानवर खुले जंगल म आज़ाद घूमते ह और लोग गाड़ी म बंद होकर उन्ह दे खने जाते ह।

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अ .धक, पेड़ बहुत कम ह… जंगल म सवत्र अच्छ सड़क बछ हुई ह और पयटक कa गा ड़याँ उन पर दौड़ती ही रहती ह।” वहाँ सह
लेखक ने नैरोबी के पाक का जो वणन कया है, वही यह अंतर सद्ध करता है — “शहर से बाहर बहुत बड़ा जंगल है, जसम घास

se m
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कसी पजरे म नह थे — वे खुले म लेटे थे और मोटर उन्ह घेरकर खड़ी थ ।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

आधार च ड़याघर नेशनल पाक (राष्ट्रीय उ ान)

जानवर कहाँ रहते है ं पजरे या बनाए हुए बाड़े म अपने पाकृ ितक जंगल में, खुले

भोजन रखवाले तय समय पर दे ते ह जानवर स्वयं िशकार करते या चरते है ं

कौन बंद रहता है जानवर बंद, आदमी खुला आदमी गाड़ ी में बंद , जानवर खुल ा

आकार शहर के भीतर, थोड़ी-सी ज़मीन कई वग िकलोमीटर का बड़ ा क्षेत्र

उ े श्य जानवर दखाना और उनक दे खभाल पूरे जंगल और उसके जीवों की रक्षा

भारत के उदाहरण दल्ली का च ड़याघर, मैसूर का च ड़याघर िजम कॉबट, काज़ ीरंगा, िगर, रणथंभौर

लेखक ने यह वाक्य क्य लखा: पाठक के मन म ‘ सह दे खने गए’ सुनते ही च ड़याघर क तस्वीर बन सकती थी।
इस लए दनकर ने शुरू म ही चेता दया — “नैरोबी का नेशनल पाक च ड़याघर नह है।” इसी कारण उन्ह सह
ढूँ ढ़ने के लए “दस-बीस मील के भीतर हर सड़क छान” लेनी पड़ी। च ड़याघर म ढूँ ढ़ना नह पड़ता — वहाँ जानवर
का पता पहले से लखा रहता है।

प्र.2 (ख) “हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझे गए।” वे कौन थे जन्ह ने लेखक और अन्य लोग को
पेड़-पौध और खरपात से भी बदतर समझ लया था? उन्ह ने ऐसा क्य समझ लया था?

वे थे — नैरोबी के नेशनल पाक म आराम कर रहे सात-आठ सह। उन्ह ने लेखक और बाक पयटक को घास-फूस से भी कम
महत्त्व का समझा।
उन्ह ने ऐसा क्य समझा — पाठ क पं क्तयाँ ही कारण बताती ह—

“त रु यह िक िसंहों को यह जानने की कोई इच्छा ही नही ं थी िक हमें दे खने को आने वाले लोग कौन है?ं ”

“मोटरों और शीशे चढ़ ाकर उनके भीतर बैठे लोगों की ओर िसंहों ने कभी भी दृ िष्ट पात नही ं िकया, मानो हम लोग

त च्ु छाितत च्ु छ हों और उनकी नज़र में आने के योग्य िबल्कु ल नही ं हों।”

सह वहाँ के मा लक ह, मेहमान नह । वह जंगल उनका अपना घर है; आने-जाने वाली मोटर उनके लए रोज़ क बात ह।
वे पयटक के आद हो चुके ह। रोज़ आठ-दस मोटर उन्ह घेरती ह, पर कोई नुकसान नह पहुँचाता — इस लए मोटर उनके
लए न भोजन ह, न खतरा। जो चीज़ न खाने क हो, न डरने क , सह उस पर ध्यान ही नह दे ते।
पेड़-पौधे तो फर भी छाया दे ते ह, घास चरने के काम आती है; मोटर म बंद आदमी सह के कसी काम का नह । इसी लए
लेखक कहते ह क हम खरपात से भी ‘बदतर’ समझे गए।

लेखक ने इसका सबूत भी दया — “इस बीच एक सह ने उठकर जम्हाई ली, दूसरे ने दे ह को ताना, मगर हमारी ओर कसी भी सह
ने नज़र नह उठाई।” आधे घंटे म एक बार भी नज़र न उठाना ही पूरी उपेक्षा है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

वाक्य का मज़ा: यह पं क्त लेखक क वनोदपूण आत्म-मज़ाक (self-mockery) है। इंसान समझता है क वह
सबसे महत्त्वपूण प्राणी है; पर जंगल म जाकर उसे पता चलता है क वहाँ उसक गनती घास-फूस से भी नीचे है।
‘तुच्छा ततुच्छ’ (तुच्छ से भी तुच्छ) शब्द इसी भाव को और गहरा कर दे ता है।

प्र.3 (ग) “मॉ रशस क असली ताकत भारतीय लोग ही ह।” पाठ म इस कथन के समथन म कौन-सा तक दया गया
है?

पाठ म दया गया तक मॉ रशस क अथव्यवस्था से जुड़ा है — ऊख (गन्ने) क खेती और चीनी का उ ोग। लेखक क अपनी
पं क्तयाँ ये ह—

“मॉिरशस में ऊख की खेत ी और उसके व्यवसाय को जो सफलता िमली है, भारतीयों के कारण िमली है।”

“सारा मॉिरशस कृ िष-पधान ीप है, क्योंिक चीनी वहाँ का पमुख अथवा एकमात्र उ ोग है।”

“िकं त ु भारतीय वंश के लोग यिद इस टापू में नही ं गए होते , तो ऊख की खेत ी असंभ व हो जाती और चीनी के

कारखाने बढ़ ते ही नही।ं ”

तक क कड़ी इस तरह जुड़ती है—

क्रम तक क कड़ी

1 मॉ रशस कृ ष-प्रधान प है और चीनी वहाँ का प्रमुख या एकमात्र उद्योग है।

2 चीनी गन्ने से बनती है, इस लए पूरा दे श ऊख क खेती पर टका है।

3 ऊख क खेती भारतीय मूल के लोग ने क और उसी से यह व्यवसाय सफल हुआ।

4 िनष्कष — भारतीय न गए होते तो न खेती होती, न कारखाने; इसिलए मॉिरशस की असली ताकत भारतीय लोग ही है।ं

और भी सहारा: इसी बात को संख्या भी सद्ध करती है — पाठ के अनुसार मॉ रशस क जनसंख्या के 67 प्र तशत
लोग भारतीय खानदान के ह। जस दे श क दो- तहाई आबाद और उसका एकमात्र बड़ा उद्योग जन लोग पर टका
हो, वही उस दे श क ताकत कहलाएँगे।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

प्र.4 (घ) “उस प को उन्ह ने छोटा-सा हदुस्तान बना डाला।” भारत से गए लोग ने मॉ रशस को हदुस्तान जैसा
कैसे बना दया है?

भारत से गए लोग अपने साथ केवल हाथ-पैर नह , अपनी भाषा, धम, त्योहार और नाम भी ले गए — और उन्ह परदे स म भी
जी वत रखा। पाठ म इसके पाँच प्रमाण मलते ह—

कस चीज़ पाठ का प्रमाण
म

जगहों के राजधानी पोटलुई क ग लय के नाम कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद और बम्बई ह; एक पूरे मोहल्ले का नाम काशी है; वहाँ
नाम बनारस, गोकुल और ब्रह्मस्थान भी ह।

भाषा “ हद का मॉ रशस म व्यापक प्रचार है” और क्रेयोल के बाद वहाँ क दूसरी जनभाषा भोजपुरी है — पड़ोस म रहने वाले
चीनी भी भोजपुरी बोल लेते ह।

धम और “मॉ रशस के प्रत्येक प्रमुख ाम म शवालय होता है” और वहाँ हदू तुलसीकृत रामायण (रामच रतमानस) का पाठ करते
मंिदर ह या ढोलक और झाँझ पर उसका गायन करते ह।

पव-त्योहार “भारत के पव-त्योहार मॉ रशस म भी प्रच लत ह,” और वष का सवश्रेष्ठ धा मक पव शवरा त्र है, जब लोग ेत वस्त्र पहनकर
कंध पर काँवर लए परी-तालाब जाते ह।

पहनावा शवरा त्र के दन वयस्क उजली धोती, उजली कमीज़ और उजली गाँधी टोपी पहनते ह; ब े हाफ पट पहन सकते ह, पर
गाँधी टोपी उन्ह भी पहननी पड़ती है।

असली बात: यह सब अपने आप नह हुआ। पाठ बताता है — “मा लक क इच्छा तो यही थी क भारतीय लोग भी
क्रस्तान हो जाएँ, कतु भारतीय ने अत्याचार तो सहे, ले कन प्रलोभन को ठु करा दया। वे अपने धम पर डटे रहे।”
यानी मॉ रशस ‘छोटा-सा हदुस्तान’ इस लए बना क्य क वहाँ गए लोग ने क ठनाई और लालच, दोन के सामने
अपनी पहचान नह छोड़ी।

मलकर कर मलान — पृष्ठ 134 और 135

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से

पाठ से मलान

प्र.1 पाठ म से कुछ शब्द चुनकर स्तंभ 1 म दए गए ह। उनसे संबं धत वाक्य स्तंभ 2 म दए गए ह। अपने समूह म इन
पर चचा क जए और रेखा ख चकर शब्द का मलान उपयुक्त वाक्य से क जए। इसके लए आप शब्दकोश,
इंटरनेट, पुस्तकालय या अपने शक्षक क सहायता ले सकते ह। स्तंभ 1 — 1. अ का 2. नैरोबी 3. रक्तचाप 4.
बी.ओ.ए.सी. 5. भूमध्य रेखा 6. दे शान्तर रेखा 7. तुलसीदास 8. क्रेयोल 9. काँवर। स्तंभ 2 — 1. यह अ का
महा प के एक दे श ‘केन्या’ क राजधानी है। 2. यह ीराम के जीवन पर आधा रत अमर ंथ ‘रामच रतमानस’
लखने वाले क व का नाम है। 3. यह ए शया के बाद दु नया का सबसे बड़ा महा प है। 4. यह रक्त-वा ह नय
अथात नस म बहते रक्त ारा उनक द वार पर डाले गए दबाव का नाम है। 5. यह दो भाषाओं के मलने से बनी
नई भाषा का नाम है। 6. यह ‘ ब्र टश ओवरसीज एयरवेज कॉरपोरेशन’ नाम का छोटा रूप है। यह एक बहुत
पुरानी वदे शी वमान कंपनी थी। 7. यह पृथ्वी के चार ओर एक काल्प नक वृत्त है जो पृथ्वी को दो भाग म बाँटता
है— उत्तरी भाग और द क्षणी भाग। 8. यह बाँस का एक मज़बूत डंडा होता है जसे काँवड़ या बहंगी भी कहा
जाता है, जसके दोन सर पर बँधी हुई दो टोक रय या छ क म यात्री गंगाजल या अन्य वस्तुए ँ भरकर ले जाते
ह। 9. ये ग्लोब पर उत्तर से द क्षण क ओर ख ची जाने वाली काल्प नक रेखाएँ ह। ये उत्तरी ुव को द क्षणी ुव से
मलाती ह।

दोन स्तंभ जान-बूझकर आगे-पीछे कर दए गए ह। सही मलान नीचे दया गया है — पुस्तक म इन्ह के बीच रेखा ख चए।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान
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स्तंभ 1 मलेगा स्तंभ 2 (प रचय) मलान का सुराग़

m a se
(शब्द)

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g l
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ase
1. अफ ीका यह ए शया के बाद दु नया का सबसे बड़ा महा प है। महा प है, दे श या शहर नह ।

agl
इस लए वही वाक्य चलेगा जसम ‘महा प’ क
बात हो।

m
.co ag
2. नैर ोबी →1 यह अ का महा प के एक दे श ‘केन्या’ क राजधानी पाठ म ही लखा है — “नैरोबी (केन्या) क

sem
है। दु नया म मुझे एक रात और दो दन ठहरने का

a
agl
मौका मल गया।”

3. रक्तचाप →4 यह रक्त-वा ह नय अथात नस म बहते रक्त ारा ‘रक्त’ + ‘चाप (दबाव)’ — शब्द अपना अथ
उनक द वार पर डाले गए दबाव का नाम है।
co m
स्वयं बता दे ता है। पाठ म — “मेरा रक्तचाप बढ़

e m.
रहा है।”

m l as
m .co → 6 यह ‘ ब्र टश ओवरसीज एयरवेज कॉरपोरेशन’ नाम का
a g
बी.ओ.ए.सी. = B.O.A.C. — नाम के पहले

se
4.

l a
बी.ओ.ए.सी. छोटा रूप है। यह एक बहुत पुरानी वदे शी वमान अक्षर से बना सं क्षप्त रूप। पाठ म — “हम

a g कंपनी थी। बी.ओ.ए.सी. के जहाज़ म उड़े।”

m और द क्षणी a s
agl
यह पृथ्वी के चार ओर एक काल्प नक वृत्त है जो पृथ्वी ‘भू’ (पृथ्वी) + ‘मध्य’ (बीच) = पृथ्वी के
को दो भाग म बाँटता है— उत्तरीoभाग
5. भूम ध्य →7

. c
em
रे खा बीच बीच क रेखा। इस लए वही वाक्य जसम

a s
भाग। दो भाग म बाँटने क बात हो।

6. दे शान्तर →9 ये ग्लोब पर a
gl
उत्तर से द क्षण क ओर ख ची जाने वाली ध्यान र खए — भूमध्य रेखा एक है (आड़ी),

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रे खा काल्प नक रेखाएँ ह। ये उत्तरी ुव को द क्षणी ुव से दे शांतर रेखाएँ अनेक ह (खड़ी)। वाक्य 9 म
मलाती ह।
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‘रेखाएँ’ बहुवचन म है, यही सुराग़ है।

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. agरतमानस) का पाठ करते ह।” ‘तुलसीकृत’
7. →2 यह श्रीराम के जीवन पर आधा रत अमर ंथ पाठ म — “ हदू तुलसीकृत रामायण

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तुल सीदास ‘रामच रतमानस’ लखने वाले क व का नाम है। (रामच

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यानी तुलसीदास का रचा हुआ।

8. क्रेयोल →5 यह दो भाषाओं के मलने से बनी नई भाषा का नाम है। पाठ म — “जनता वहाँ क्रेयोल बोलती है। क्रेयोल
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का च से वही संबंध है, जो संबंध भोजपुरी का
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हद से है।”
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9. काँवर →8
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यह बाँस का एक मज़बूत डंडा होता है… जसके दोन पाठ म — “कंध पर काँवर लए जुलूस बाँधकर
सर पर बँधी हुई दो टोक रय या छ क म यात्री परी तालाब पर आते ह और परी-तालाब का जल
गंगाजल या अन्य वस्तुएँ भरकर ले जाते ह।
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भरकर… लौट जाते ह।”
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मलान का तरीका: पहले वे जो ड़याँ बनाइए जनका उत्तर आपको पक्का पता है (जैसे नैरोबी → राजधानी,

se m तुलसीदास → रामच रतमानस)। बचे हुए वकल्प अपने आप कम हो जाते ह। दो मलती-जुलती चीज़ (भूमध्य रेखा
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a और दे शांतर रेखा) म एकवचन/बहुवचन और दशा दे खकर फ़क क जए।
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याद रखने का सूत्र: भूमध्य रेखा — आड़ी, एक ही, पृथ्वी को उत्तरी और द क्षणी गोलाध म बाँटती है। दे शांतर agl
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रेखाएँ — खड़ी, अनेक, ुव से ुव तक जाती ह और इन्ह से कसी जगह का समय तय होता है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

यात्रा-वृत्तांत क रचना — पृष्ठ 136
पाठ से

पाठ से भाषा- शल्प

प्र.1 “इतने म कोई मील-भर क दूरी पर हरन का एक झुंड दखाई पड़ा। अब दो जवान सह उठे और दो ओर को चल
दए। एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, ले कन दूसरा घास के बीच छपता हुआ मोच पर आगे
बढ़ने लगा।” इन वाक्य को पढ़कर ऐसा लगता है मानो हम लेखक क आँख से स्वयं वह दृश्य दे ख रहे ह… इस
पाठ को एक बार फर से प ढ़ए और इसक रचना पर ध्यान द जए। आपको जो वशेष बात दखाई द, उन्ह
आपस म साझा क जए और लख ली जए। जैसे – लेखक ने बताया है क वह एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे
और कब पहुँचा।

यात्रा-वृत्तांत क रचना कैसे पहचान — पाठ म इन बात पर नशान लगाइए: त थ और समय, आने-जाने का साधन, जगह का
नाप-आकार, आँख -दे खा दृश्य, लेखक के अपने मन क बात और सुनी-समझी जानकारी। मल्हार के इस पाठ म ये छह बात
साफ़ मलती ह।

रचना क पाठ से उदाहरण इससे क्या होता है
वशेषता

1. ितिथ और क्रम “ दल्ली से 15 जुलाई को, बंबई (मुंबई) से 16 जुलाई को और पाठक को पता चलता रहता है िक ले खक कब
नैरोबी से 17 जुलाई को मॉ रशस के लए रवाना हुआ।” कहाँ था — यात्रा की डोर टू टती नही ं।

2. साधन और “नैरोबी से मॉ रशस तक हम बी.ओ.ए.सी. के जहाज़ म उड़े। जहाज़ यात्रा स च्ची लगती है, क्योंिक िवमान कं पनी,
समय नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घंट क नरंतर उड़ान के समय और अविध तक बताई गई है।
बाद…”

3. आँखों-दे खा “एक सह ने उठकर जम्हाई ली, दूसरे ने दे ह को ताना, मगर हमारी छोटी-छोटी हरकते ं िलखने से दृ श्य आँखों के
वणन ओर कसी भी सह ने नज़र नह उठाई।” सामने चलने लगता है — मानो हम भी वही ं
खड़ े हों।

4. आँक ड़ े और “मॉ रशस क लंबाई 29 मील और चौड़ाई कोई 30 मील है… रकबा जानकारी पक्की होती है; पाठक को जगह का
नाप 720 वगमील… 67 प्र तशत लोग भारतीय खानदान के ह।” सही अंद ाज़ ा िमल जाता है।

5. ले खक के अपने “मुझे ऐसा महसूस हो रहा था क मेरा रक्तचाप बढ़ रहा है।” / यह वृ ांत को सूचना-पत्र से अलग कर दे ता है
भाव “वहाँ जो कुछ दे खा, वह जन्मभर कभी नह भूलेगा।” — इसमें ‘मै’ं की धड़ कन भी सुनाई दे ती है।

6. अलंक ारपूण “यह प हद महासागर का मोती है, भारत-समुद्र का सबसे वणन सूखा नही ं रहता; उपमा-रूपक से जगह
भाषा खूबसूरत सतारा है।” की सुंद रता मन में बैठ जाती है।

7. वाक्य की लय “मॉ रशस वह दे श है, जसका…”, “मॉ रशस वह दे श है, जहाँ…” एक ही ढाँचा दोहराने से जानकारी हथौड़ े की
(पुनरावृि ) — यह वाक्य बार-बार दोहराया गया है। तरह मन पर पड़ ती है और याद रह जाती है।

8. सुनी-सीखी बात “ शकार सह सूयास्त के बाद कया करते ह और शकार वे झुंड का के वल जो िदखा वही नही,ं जो जाना वह भी
जोड़ ना नह करते…” बताया गया — इसिलए पाठक कु छ नया
सीखता है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

दए गए उदाहरण को गौर से दे खए: “एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, ले कन दूसरा घास के
बीच छपता हुआ मोच पर आगे बढ़ने लगा।” यहाँ लेखक ने दो सह क दो अलग चाल अलग-अलग बताईं। जब
वणन म हर पात्र का अपना काम अलग दखाया जाता है, तभी दृश्य ‘चलती हुई फ़ल्म’ जैसा बनता है। ‘मोच पर
आगे बढ़ना’ — यह युद्ध का शब्द है, जससे शकार का दृश्य और रोमांचक हो उठता है।

चचा के लए: समूह म हर ब ा पाठ से एक ऐसा वाक्य चुनकर पढ़े जससे उसे दृश्य ‘ दखाई’ दया हो, और बताए
क कस शब्द ने वह चत्र बनाया।

अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 136 और 137
पाठ से

पाठ से कल्पना

प्र.1 (क) “मॉ रशस वह दे श है, जहाँ बनारस भी है, गोकुल भी है और ब्रह्मस्थान भी।” मॉ रशस म लोग ने गली-
मोहल्ल के नाम इस तरह के क्य रखे ह गे?

क्य क नाम ही वह सबसे हल्क चीज़ थी जसे वे अपने साथ ले जा सकते थे। भारत से गए मज़दूर अपने खेत, घर और गाँव
पीछे छोड़ आए थे; वे केवल अपनी याद और अपनी भाषा साथ ले गए। नई जगह पर उन्ह ने अपने पुराने तीथ और गाँव के नाम
दोहरा दए, ता क परदे स भी अपना-सा लगे।

घर क याद जी वत रखने के लए — जस गली का नाम ‘काशी’ हो, वहाँ से गुज़रते ही अपना दे श याद आ जाता है। पाठ
बताता है क पोटलुई क ग लय के नाम भी कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद और बम्बई ह — ये वही बंदरगाह-शहर ह जहाँ से
जहाज़ चले थे।
पहचान बचाए रखने के लए — मा लक चाहते थे क वे अपना धम बदल ल। नाम रखना बना झगड़े का, चुपचाप कया जाने
वाला वरोध था — “वे अपने धम पर डटे रहे।”
अगली पीढ़ को जड़ बताने के लए — जो ब े मॉ रशस म ही जन्मे, उन्ह ने भारत कभी नह दे खा। पर ‘बनारस’, ‘गोकुल’
और ‘ब्रह्म ान’ नाम सुनते-सुनते वे जान गए क उनके पुरखे कहाँ से आए थे।
पूजा-स्थल को नाम दे ने के लए — बनारस शव का, गोकुल कृष्ण का और ब्रह्म ान गाँव के दे व ान का नाम है। जस
मोहल्ले म शवालय बना, वह ‘बनारस’ हो गया — नाम अपने-आप उस ान का काम भी बता दे ता है।

यह कोई अनोखी बात नह है: दु नया-भर म लोग नई जगह जाकर पुरानी जगह के नाम दोहराते ह। भारत म भी
नए बसे मोहल्ल के नाम नई दल्ली, नया गाँव, न्यू कॉलोनी रखे जाते ह। नाम रखना सबसे सस्ता और सबसे मज़बूत
तरीका है अपनापन बनाने का।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 (ख) “कोई सात-आठ सह लेटे या सोए हुए थे और उन्ह घेरकर आठ-दस मोटर खड़ी थ ।” आपने पढ़ा क केन्या
का राष्ट्रीय पाक पयटक से भरा रहता है। पयटक जंगली जानवर को घेरे रहते ह। क्या इसका उन पशुओं पर कोई
प्रभाव पड़ता होगा? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। (संकेत— राष्ट्रीय पाक के बंदर , सह का व्यवहार भी
बदल गया है।)

हाँ, ज़रूर पड़ता होगा — और पाठ म उसके दो सबूत साफ़ मौजूद ह।

पशु पाठ म जो बदलाव दखा स्वाभा वक व्यवहार क्या होना चा हए था

बंद र और “दो मोटर खड़ी थ और उन पर तरह-तरह के बंदर और लंगूर जंगली बंद र को पेड़ों से फल -प े ढू ँढ़ने चािहए , न िक मोटर
लंगूर चढ़े हुए थे… मोटर के रुकते ही बंदर उसे घेर लेते ह।” दे खते ही दौड़ कर भीख माँगनी चािहए।

िसंह “ सह को यह जानने क कोई इच्छा ही नह थी क हम दे खने जंगली िसंह को अनजान गंध और आवाज़ पर चौक ा हो
को आने वाले लोग कौन ह?… कसी भी सह ने नज़र नह जाना चािहए। मोटरों के इतने आदी हो जाना स्वाभािवक नही ं
उठाई।” है।

प्रभाव कस- कस तरह के हो सकते ह—

भोजन खोजना छू ट जाना — पयटक “कभी-कभी फल या बस्कुट खाने को दे दे ते ह”, इस लए बंदर मेहनत करना भूल जाते
ह। बस्कुट जैसा बना-बनाया खाना उनके स्वास्थ्य के लए भी ठ क नह होता।
डर मट जाना — जो जानवर आदमी से डरना छोड़ दे ता है, वह पाक से बाहर नकलकर गाँव-सड़क तक चला आता है। तब
उसे और आदमी दोन को खतरा होता है।
शकार और आराम म बाधा — मोटर के शोर, धूल और धुएँ से पशु ठ क से आराम नह कर पाते और शकार का मौका चूक
सकते ह।
ब के पालन म गड़बड़ी — भीड़ के बीच माँ-जानवर अपने शावक को खुलकर दूध नह पला पाते या उन्ह बार-बार जगह
बदलनी पड़ती है।

दूसरा पक्ष भी दे खए: पयटन से जो पैसा आता है, उसी से पाक क रखवाली होती है और शका रय से जानवर
बचते ह। इस लए सही उत्तर ‘पयटन बंद कर दो’ नह , ब ल्क नयम से पयटन है — गाड़ी दूर रोकना, हॉन न बजाना,
जानवर को खाना न दे ना, बाहर न नकलना और एक समय म गनी-चुनी गा ड़याँ ही अंदर जाने दे ना।

भारत से उदाहरण: जम कॉबट और रणथंभौर जैसे हमारे राष्ट्रीय उद्यान म भी सफ़ारी क गा ड़य क संख्या और
समय तय है, और जानवर को खाना दे ना दं डनीय है — कारण ठ क वही है जो ऊपर बताया गया।

प्र.3 (ग) “ हरन का एक झुंड दखाई पड़ा, जनके बीच एक जराफ बल्कुल बेवकूफ क तरह खड़ा था।” सह के
आस-पास होने के बाद भी जराफ क्य खड़ा रहा होगा?

सबसे मज़बूत कारण यह है क जराफ को अपने आकार और अपनी ऊँचाई पर भरोसा था — वह सह के लए आसान
शकार नह होता। इसी लए वह हरन क तरह चौकन्ना होकर भागा नह , ब ल्क जहाँ था वह खड़ा रहा।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

बड़ा और ताकतवर होना — पूरा बड़ा जराफ बहुत ऊँचा और भारी होता है और उसक लात इतनी ज़ोरदार होती है क सह
भी घायल हो सकता है। सह प्रायः जराफ के बजाय हरन जैसे छोटे और तेज़ पर कमज़ोर जानवर चुनते ह।
ऊँचाई से दूर तक दे ख पाना — जराफ क गरदन इतनी ऊँची है क उसे सह बहुत दूर से दख जाते ह। उसे यह भी दख गया
होगा क सह अभी हरन क ओर बढ़ रहे ह, उसक ओर नह — इस लए घबराने क ज़रूरत ही नह समझी।
पाठ का अपना संकेत — “ शकार सह सूयास्त के बाद कया करते ह।” यह दन का समय था और सह अभी-अभी आराम
से उठे थे। जराफ यह ताड़ चुका होगा क यह पूरा शकार नह , बस टोह लेना है।
भागना उलटा नुकसान — जराफ क चाल भारी होती है; दौड़कर भागने पर वह और अ धक ध्यान ख चता। खड़े रहकर र
रहना उसके लए ज़्यादा सुर क्षत था।

‘बेवकूफ क तरह’ क्य लखा: यह लेखक क अपनी नज़र है, जराफ क स ाई नह । हरन डरकर चौकन्ने हो
रहे थे और उनके बीच एक लंबा-सा जराफ बना हले खड़ा था — यह दृश्य दे खने म हास्यास्पद लगा, इस लए
दनकर ने चुटक लेते हुए ऐसा लख दया। असल म जराफ का शांत खड़े रहना उसक समझदारी थी, बेवकूफ़
नह ।

ध्यान द: यह प्रश्न ‘अनुमान या कल्पना से’ शीषक के नीचे है, इस लए इसका एक ही न श्चत उत्तर नह । आप कोई
और तकसंगत कारण भी दे सकते ह — शत यही है क वह पाठ या पशु-व्यवहार क जानकारी से जुड़ा हो।

प्र.4 (घ) “मॉ रशस के मध्य म एक झील है, जसका संबंध हदुओं ने प रय से बठा दया है और उस झील का नाम
अब परी-तालाब हो गया है।” उस झील का नाम ‘परी-तालाब’ क्य पड़ा होगा?

सबसे सीधा कारण — झील इतनी सुंदर और शांत रही होगी क लोग को लगा यहाँ प रयाँ उतरती ह गी। पाठ भी यही कहता
है क यह जगह “केवल तीथ ही नह , दृश्य से भी पक नक का ान है।”

सुंदरता का असर — पहाड़ के बीच बना शांत, साफ़ पानी का सरोवर लोकभाषा म सदा ‘प रय का ठकाना’ कहा जाता है।
जो चीज़ इस दु नया क -सी न लगे, उसे लोग अलौ कक नाम दे दे ते ह।
लोककथा का जुड़ जाना — लेखक ने ध्यान से लखा है क झील का संबंध प रय से “ हदुओं ने बठा दया है”। यानी यह
कोई इ तहास नह , लोग क गढ़ हुई कथा है — और जब कथा चल पड़े तो नाम भी उसी के साथ चल पड़ता है।
प वत्रता क भावना — “वहाँ पक नक पर जाने वाले लोग अपने साथ माँस-मछली नह ले जाते, न अप वत्रता का वहाँ कोई
व्यापार करते ह।” जस जगह के साथ इतना संयम जुड़ा हो, उसका नाम भी प वत्र और सुंदर ही रखा जाएगा।
पहचान का सहारा — भारत से गए लोग के मन म तालाब, घाट और तीथ क तस्वीर बसी थी। नई भू म क झील को नाम
दे कर उन्ह ने उसे अपना तीथ बना लया।

जोड़कर दे खए: भारत म भी ऐसे नाम मलते ह — पवत पर ‘परी झील’, ‘ना गन झील’, ‘भीमकुंड’। हर ऐसे
नाम के पीछे एक लोककथा होती है, ठ क वैसे ही जैसे परी-तालाब के पीछे है।

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(ङ) आपको यह जानकार आश्चय होगा क लगभग 50 साल पहले ‘परी-तालाब’ का नाम बदलकर ‘गंगा-तालाब’
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कर दया गया है। मॉ रशस के लोग ने यह नाम क्य रखा होगा?

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क्य क वहाँ के लोग उस तालाब को अपनी ‘गंगा’ मान चुके थे। भारत से हज़ार मील दूर बैठे लोग गंगा-स्नान करने भारत नह

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आ सकते थे, इस लए उन्ह ने अपने प क इसी झील को गंगा का दजा दे दया — और फर नाम भी वही रख दया।

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काम पहले, नाम बाद म — पाठ बताता है क शवरा त्र पर लोग “परी-तालाब का जल भरकर अपने-अपने गाँव के शवालय

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को लौट जाते ह तथा शवजी को जल चढ़ाकर अपने घर म प्रवेश करते ह।” भारत म यही काम गंगाजल से होता है। जब इस
तालाब का जल गंगाजल क जगह ले चुका था, तो नाम भी ‘गंगा-तालाब’ हो जाना स्वाभा वक था।

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काँवर क परंपरा — “कंध पर काँवर लए जुलूस बाँधकर” जाना बलकुल भारत क काँवड़-यात्रा जैसा है, जसम गंगाजल
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लाया जाता है। नाम बदलने से यह जुड़ाव और स्पष्ट हो गया।

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‘परी’ से ‘गंगा’ — भाव म अंतर — ‘परी’ शब्द कल्पना और सुंदरता का है; ‘गंगा’ शब्द श्रद्धा, प वत्रता और भारत से नाते

m .c बदलकर उन्ह ने झील को कहानी से उठाकर तीथ बना दया। a
se जड़ क घोषणा — यह नाम पूरी दु नया को बता देता है क मॉ रशस के लोग कस संस्कृ त से आए ह। यह उसी बात
का है। नाम

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a का प्रमाण है जो लेखक ने लखी — “उस प को उन्ह ने छोटा-सा हदुस्तान बना डाला।”

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नाम इतने ज़रूरी क्य : नाम केवल पहचान नह , भावना भी होता है। जस दन तालाब ‘गंगा-तालाब’ कहलाया,
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उस दन से वहाँ जाने वाले हर व्य क्त के मन म गंगा जैसी श्रद्धा जगने लगी। इसी को हम कहते ह — संस्कृ त नाम
के सहारे यात्रा करती है। ag

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om पर — पृष्ठ 137
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सं ा के स्थान
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agl शब्द क बात
शब्द क बात

व्याकरण

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m .c क नज़र पड़ रही है। अतएव वे चरना भूलकर चौकन्ने हो उठे ।” इन ag
seद जए… जो शब्द सं ा शब्द के स्थान पर उपयोग म लाए जाते ह, उन्ह
प्र.1 (क) “ हरन ने ताड़ लया क उन पर सह

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ag दए गए वाक्य म सवनाम शब्द को पहचा नए और उनके नीचे रेखा ख चए — 1.
पं क्तय म रेखां कत शब्द पर ध्यान
‘सवनाम’ कहते ह। अब नीचे
“हाँ, ब े हाफ पट पहन सकते ह, ले कन गांधी टोपी उस दन उन्ह भी पहननी पड़ती है।”

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इस.cवाक्य म सवनाम है — उन्ह. (‘उस’ यहाँ ‘ दन’ के साथ लगकर उसक ओर संक
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se वशेषण है — कक्षा म शक्षक कह तो उसके नीचे भी रेखा ख च सकते ह।)
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ं ी टोपी उस िदन उन्हे ं भी पहननी पड़ ती है।”
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“हाँ, बच्चे हाफ पैट
ं पहन सकते है,ं लेिकन गाध

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

शब्द कसके स्थान पर आया पहचान

उ न्हे ं बच्चों को पुरुषवाचक सवनाम (अन्य पुरुष, बहुवचन)

उस शवरा त्र के ( दन) सावना मक वशेषण — सं ा ‘ दन’ के साथ आकर उसक ओर संकेत करता है

पहचानने का सरल तरीका: वाक्य म से शब्द हटाकर दे खए क उसक जगह कोई नाम रखा जा सकता है या नह ।
‘उन्ह’ क जगह ‘ब को’ रख द जए — वाक्य पूरा बन जाता है। जो शब्द कसी नाम क जगह खड़ा हो सके,
वही सवनाम है।

अपना उदाहरण: “राधा ने पुस्तक पढ़ और उसने उसका सारांश भी लखा।” — यहाँ ‘उसने’ राधा के ान पर
आया है, इस लए वह सवनाम है।

प्र.2 2. “भारतीय ने अत्याचार तो सहे, ले कन प्रलोभन को ठु करा दया। वे अपने धम पर डटे रहे और जस पम
भगवान ने उन्ह भेज दया था, उस प को उन्ह ने छोटा-सा हदुस्तान बना डाला।”

इस वाक्य म छह सवनाम शब्द ह — वे, अपने, जस, उन्ह, उस, उन्ह ने। इन सबके नीचे रेखा ख चए।

“भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेिकन पलोभनों को ठुक रा िदया। वे अपने धम पर डटे रहे और िजस ीप में

भगवान ने उन्हे ं भे ज िदया था, उस ीप को उन्होंने छोटा-सा िहंद ुस्तान बना डाला।”

सवनाम कसके स्थान पर आया भेद

वे भारतीय पुरुषवाचक सवनाम (अन्य पुरुष)

अपने भारतीयों के (अपना ही) नजवाचक सवनाम

िजस मॉिरशस ( ीप) संबंधवाचक — यहाँ ‘ प’ के साथ आया है, इस लए सावना मक वशेषण

उ न्हे ं भारतीयों को पुरुषवाचक सवनाम

उस मॉिरशस ( ीप) नश्चयवाचक — ‘ प’ के साथ आया है, इस लए सावना मक वशेषण

उ न्होंने भारतीयों ने पुरुषवाचक सवनाम (कता रूप)

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

छोटा नयम: ‘ जस’ और ‘उस’ जब अकेले आएँ तो सवनाम ह (जैसे — “ जसने बुलाया, उसी को जाना है”),
और जब कसी सं ा के साथ आकर उसक ओर संकेत कर तो सावना मक वशेषण कहलाते ह (जैसे — “उस
प को”)। कक्षा 6 के स्तर पर दोन को सवनाम शब्द मानकर रेखां कत करना ठ क है।

प्र.3 (ख) ऊपर दए गए दोन वाक्य को सवनाम क जगह सं ा शब्द लगाकर ल खए।

हर सवनाम क जगह वही नाम (सं ा) रख द जए, जसके बदले वह आया था। दोन वाक्य इस तरह बनगे—

मूल वाक्य (सवनाम के साथ) सं ा लगाकर बदला हुआ वाक्य

“हाँ, बच्चे हाफ पैटं पहन सकते है,ं ले िकन गांध ी टोपी उस िदन “हाँ, बच्चे हाफ पैटं पहन सकते है,ं ले िकन गांध ी टोपी िशवराित्र के िदन बच्चों
उन्हे ं भी पहननी पड़ती है। ” को भी पहननी पड़ ती है।”

“भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, ले िकन पलोभनों को ठुक रा िदया। “भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, ले िकन पलोभनों को ठुक रा िदया। भारतीय,
वे अपने धम पर डटे रहे और िजस ीप में भगवान ने उन्हे ं भेज िदया भारतीयों के धम पर डटे रहे और मॉिरशस ीप में भगवान ने भारतीयों को
था, उस ीप को उन्होंने छोटा-सा िहंद ुस्तान बना डाला।” भेज िदया था, मॉिरशस ीप को भारतीयों ने छोटा-सा िहंद ुस्तान बना
डाला।”

अब असली सीख: दूसरा वाक्य पढ़कर दे खए — उसम ‘भारतीय’ शब्द चार बार और ‘ प’ का नाम दो बार आ
गया। वाक्य भारी, उबाऊ और भ ा हो गया। सवनाम का काम ही यही है — एक ही नाम को बार-बार दोहराने
से बचाना और भाषा को चुस्त बनाना। इसी लए लेखक ने ‘भारतीय ’ केवल एक बार लखा और आगे ‘वे’,
‘उन्ह’, ‘उन्ह ने’ से काम चला लया।

स्वयं आज़माइए: अपनी कॉपी से कोई पाँच पं क्तयाँ चु नए और हर सवनाम क जगह पूरा नाम लख द जए।
पढ़कर दे खए क पैरा ाफ़ कतना बो झल हो गया — यही व्याकरण का सबसे अच्छा प्रमाण है।

पहचान पाठ के आधार पर — पृष्ठ 137

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

शब्द क बात

शब्द क बात खोज

प्र.1 आपने इस यात्रा-वृत्तांत म तीन दे श के नाम पढ़े ह— भारत, केन्या और मॉ रशस। पुस्तकालय या कक्षा म
उपलब्ध मान चत्र पर भारत को तो आप सरलता से पहचान ही लगे। पाठ म द गई जानकारी के आधार पर बाक
दोन दे श को पहचा नए।

यह मान चत्र पर करने का काम है। पाठ म जो सुराग़ दए गए ह, उन्ह से दोन दे श ढूँ ढ़े जा सकते ह। नीचे सुराग़ और खोजने का
तरीका दोन दए ह।

दे श पाठ से मले सुराग़ मान चत्र पर कैसे ढूँ ढ़

के न्या • “नैरोबी (केन्या)” — यानी नैरोबी इसक मानिचत्र पर पहले अफ ीका महा ीप खोिजए , िफर उसका पूव िकनारा दे िखए।
राजधानी है। िहंद महासागर से लगा हुआ, भूमध्य रे खा िजसके ऊपर से गुज़रती है — वही
• स्तंभ 2 म — “यह अ का महा प के के न्या है। उसकी राजधानी नैरोबी के नाम से पुिष्ट कर लीिजए।
एक दे श ‘केन्या’ क राजधानी है।”
• “हम अ का के शेर से मुलाकात कर
लेनी चा हए।”
• शहर से बाहर बड़ा जंगल जसम “घास
अ धक, पेड़ बहुत कम” — यह घास के
मैदान (सवाना) ह।

मॉिरशस • “मॉ रशस प भूमध्य रेखा से कोई बीस मानिचत्र पर िहंद महासागर में, अफ ीका के दिक्षण-पूव की ओर दे िखए। 20°
ड ी द क्खन… और दे शांतर रेखा 60 के दिक्षण अक्षाशं की आड़ ी रे खा और 60° पूव दे शातं र की खड़ ी रे खा जहाँ िमलती है,ं
बल्कुल पास, कतु उससे प म क ओर उससे थोड़ ा-सा पिश्चम में एक छोटा-सा ीप िदखेगा — वही मॉिरशस है। पास
बसा हुआ है।” ही बड़ ा ीप मेडागास्कर और छोटा रीयूिनयन भी िमले ंगे।
• “यह प हद महासागर का मोती है।”
• “लंबाई 29 मील और चौड़ाई कोई 30
मील… रकबा 720 वगमील।”
• “ जसका कोई भी हस्सा समुद्र से पंद्रह
मील से ज्यादा दूर नह है।”
• राजधानी पोटलुई।

छोटा दे श कैसे ढूँ ढ़: मॉ रशस इतना छोटा है (केवल 720 वगमील) क मान चत्र पर बदु जैसा दखता है। इसी लए
उसे अक्षांश-दे शांतर से ढूँ ढ़ना सबसे पक्का तरीका है — पहले आड़ी रेखा (20° द क्षण) पर उँ गली र खए, फर खड़ी
रेखा (60° पूव) तक ले जाइए। दोन के कटान- बदु के आस-पास ही वह मलेगा।

करके दे खए: कक्षा के मान चत्र पर तीन दे श — भारत, केन्या और मॉ रशस — पर पन लगाकर धागे से जो ड़ए।
यही लेखक क यात्रा का रास्ता है: दल्ली → बंबई → नैरोबी → मॉ रशस। धागा नापकर दे खए क हद महासागर
कतना बड़ा है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

आपक बात — पृष्ठ 138
पाठ से आगे

पाठ से आगे अपनी बात

प्र.1 (क) “वहाँ जो कुछ दे खा, वह जन्मभर कभी नह भूलेगा।” क्या आपने कभी ऐसा कुछ दे खा, सुना या पढ़ा है
जसके बारे म आपको लगता है क आप उसे कभी नह भूल सकगे? उसके बारे म अपने समूह म बताइए।

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इस लए उत्तर हर ब े का अलग होगा। पर अ े उत्तर म ये चार बात ज़रूर होनी चा हए
—

1. कब और कहाँ — घटना का समय और जगह बताइए, ता क सुनने वाले के मन म दृश्य बने।
2. क्या हुआ — घटना को क्रम से क हए; बीच म कू दए मत।
3. आपने क्या दे खा-सुना — रंग, आवाज़, गंध जैसी छोट बात बताइए। दनकर ने भी यही कया — “एक सह ने उठकर
जम्हाई ली, दूसरे ने दे ह को ताना।”
4. आपको कैसा लगा और क्य नह भूलगे — यही सबसे ज़रूरी हस्सा है। लेखक ने भी अपनी घबराहट छपाई नह — “मुझे
ऐसा महसूस हो रहा था क मेरा रक्तचाप बढ़ रहा है।”

नमूना उत्तर:
पछले साल जुलाई म हमारी कक्षा शै क्षक भ्रमण पर पास के पक्षी अभयारण्य गई थी। सुबह क धुंध म तालाब के कनारे सैकड़
सारस खड़े थे। हमारे शक्षक ने धीरे से कहा — “कोई शोर मत करना।” हम सब साँस रोककर खड़े हो गए। तभी एक सारस ने पंख
फैलाए और दे खते-ही-दे खते पूरा झुंड एक साथ उड़ चला। उनके पंख क आवाज़ ऐसी थी मानो दूर कह ज़ोर क बा रश हो रही हो।
पानी पर उनक परछाइयाँ काँपती रह । उस दन मुझे पहली बार लगा क पक्षी केवल आकाश म उड़ते बदु नह ह — उनका अपना
संसार है। वह दृश्य म जीवन-भर नह भूलूँगा/भूलूँगी, क्य क उसी दन से मने घर क छत पर प क्षय के लए पानी रखना शुरू कर
दया।

सुनाते समय: धीरे और साफ़ बो लए, और अंत म एक वाक्य म यह ज़रूर क हए क उस अनुभव ने आपको क्या
सखाया। इसी से आपक बात दूसर के मन म भी टक जाएगी।

प्र.2 (ख) “हम अ का के शेर से मुलाकात कर लेनी चा हए।” ‘मुलाकात’ शब्द का अथ है ‘ मलना’। ले कन यहाँ
‘मुलाकात’ शब्द का भाव है— शेर को पास से दे खना… आपने अब तक कन- कन पशु-प क्षय से ‘मुलाकात’
क है? वह मुलाकात कहाँ हुई थी? बताइए।

पहले शब्द क बात समझ ली जए। ‘मुलाकात’ आमतौर पर दो व्य क्तय के मलने के लए आता है। दनकर ने उसे शेर के लए
इस्तेमाल कया — इससे शेर पाठक के मन म ‘दे खने क चीज़’ नह , मलने योग्य प्राणी बन जाते ह। यही भाषा का कमाल है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान
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साधारण कहना ‘मुलाकात’ क शैली म कहना अंतर

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हमने िचिड़याघर में शेर दे खा। िचिड़ याघर में शेर से हमारी मुल ाकात हुई।
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शेर अब वस्तु नह , एक ‘कोई’ बन गया।

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g l a छत पर एक िगलहरी से भेटं हो गई। अचानक मलने का सुख वाक्य म आ जाता है।
a
छत पर िगलहरी थी।

मैंने मोर दे खा। मैंने मोर को अपनी आँखों से , सजीव दे खा। चत्र या ट .वी. नह — असली दे खना, यह स्पष्ट हो जाता है।

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अब आपक बारी। अपनी लेखन-पु स्तका म ऐसी ता लकाm
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बनाइए — पशु-पक्षी का नाम / मुलाकात कहाँ हुई / कब हुई / उस

a glaको शा मल क जए।
समय वह क्या कर रहा था। पालतू और जंगली, दोन
नमूना उत्तर:

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कससे कहाँ वह क्या कर रहा था

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मुलाकात

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l a se अपने घर के आँगन के अमरूद
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िगलहरी दोन अगले पंज म अमरूद पकड़कर कुतर रही थी और बीच-बीच म पूँछ

a के पेड़ पर हलाकर चार ओर दे ख लेती थी।

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गम की छु ि यों में दादी के गाँव
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मोर बादल घरते ही उसने पंख फैलाकर नाचना शुरू कर दया — मने पहली बार

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के खेत में असली मोर-नृत्य दे खा।

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बंद रों का झुंड पहाड़ ी मंिदर के रा ते मेg
स् ं वे मुँडेर पर बैठे थे और हाथ म थैला दे खते ही पास चले आते थे।

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बग ल
ु ा गाँव के तालाब के िकनारे एक पैर पर बलकुल नश्चल खड़ा था और अचानक च च डालकर मछली उठा ले

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गया।

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गली का कु ा मेरे घर की गली में
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हर शाम मुझे स्कूल से लौटते दे खकर पूँछ हलाता हुआ साथ-साथ दरवाज़े तक

s e m आता है।
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‘मोती’

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ध्यान र खए: ‘मुलाकात’ शब्द तब और सुंदर लगेगा जब आप बताएँ क उस समय पशु-पक्षी क्या कर रहा था।
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केवल “मने तोता दे खा” कहने से कोई चत्र नह बनता।
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(ग) “यह ऐसी सफलता क बात है, जस पर सभी भारतीय को गव होना चा हए।” आपको कन- कन बात पर

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प्र.3
गव होता है? बताइए। (संकेत— ये बात आपके बारे म हो सकती ह, आपके प रवार के बारे म हो सकती ह और
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कसी अन्य व्य क्त, वस्तु, स्थान, प्राणी आ द के बारे म भी हो सकती ह।)

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पहले सम झए क गव कस बात पर होता है। गव मेहनत, ईमानदारी और भलाई पर होता है — कसी से बड़े होने पर नह ।

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दनकर को भी मॉ रशस के भारतीय पर इस लए गव हुआ क्य क उन्ह ने “अत्याचार तो सहे, ले कन प्रलोभन को ठु करा दया।”

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उत्तर लखते समय संकेत के अनुसार पाँच खाने बनाइए — स्वयं, प रवार, कोई व्य क्त, ान/वस्तु, प्राणी — और हर खाने म एक

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बात + उसका कारण ल खए। कारण के बना गव केवल ड ग बनकर रह जाता है।
नमूना उत्तर: a

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

कस पर कस बात पर क्य
गव

स्वयं पर िपछले साल मैंने िगरते-पड़ ते साइिकल चलाना क्य क हार मान लेना आसान था, पर मने रोज़ अभ्यास कया।
सीखा और छोड़ ा नही ं।

पिरवार पर मेरी माँ ने घर के आँगन में सिब्ज़ याँ उगाकर क्य क उन्ह ने कम जगह और कम पानी म भी दूसर के काम आना सीख
पड़ ोिसयों को भी बाँटी ं। लया।

िकसी हमारे िशक्षक बाढ़ के िदनों में भी नाव से आकर क्य क उन्ह ने हमारी पढ़ाई को अपनी सु वधा से ऊपर रखा।
व्यिक्त पर क क्षा ले ते रहे।

थान/वस्तु
स् अपने दे श के ितरंगे और अपनी मातभृ ाषा पर। क्य क इन्ह से दु नया म मेरी पहचान बनती है — जैसे मॉ रशस के लोग
पर क पहचान भोजपुरी और शवरा त्र से बनी।

पाणी पर हमारे गाँव की गाय ‘कजरी’ पर, और भारत के क्य क कजरी हमारे घर का सहारा है, और बाघ क रक्षा म भारत ने पूरी
रा ीय पशु बाघ पर। दु नया के सामने उदाहरण रखा है।

पाठ से जो ड़ए: लेखक ने गव क बात तब कही जब भारतीय ने क ठनाई म भी अपना धम और अपनी मेहनत नह
छोड़ी। इस लए अपने उत्तर म भी ऐसी बात चु नए जसम कसी ने मु श्कल के बावजूद कुछ अच्छा कया हो। वही
स ा गव है।

कक्षा और घर क भाषाएँ — पृष्ठ 138 और 139
पाठ से आगे

पाठ से आगे प रयोजना

प्र.1 “प्रायः सभी भारतीय भोजपुरी बोलते अथवा उसे समझ लेते ह। यहाँ तक क भारतीय के पड़ोस म रहने वाले
चीनी भी भोजपुरी बखूबी बोल लेते ह।” भारत एक बहुभाषी दे श है। भारत म लगभग सभी व्य क्त एक से अ धक
भाषाएँ बोल या समझ लेते ह। आप कौन-कौन सी भाषाएँ बोल-समझ लेते ह? आपके मत्र कौन-कौन सी भाषाएँ
बोल-समझ लेते ह? इसके बारे म यहाँ द गई ता लका को पूरा क जए— (संकेत— इस ता लका को पूरा करने के
लए आपको अपने मत्र और प रजन से पूछताछ करनी होगी। पहले भाषाओं के नाम लखने ह, बाद म उन
नाम को गनकर उनक कुल संख्या लखनी है।)

यह सवक्षण (पूछताछ) का काम है, इस लए ता लका आपको अपनी पुस्तक म स्वयं भरनी है। करने का तरीका—

1. पहले अपनी भाषाएँ ल खए — जनम आप बोल सकते ह और जन्ह केवल समझ लेते ह, दोन ।
2. फर चार-पाँच मत्र से पू छए और उनके नाम क भाषाएँ ल खए।
3. फर घर म दादा-दाद , नाना-नानी, माता- पता से पू छए — पुरानी पीढ़ अक्सर एक बोली अ धक जानती है (जैसे भोजपुरी,
अवधी, मारवाड़ी, क कणी, तुलु)।
4. अंत म हर स्तंभ क भाषाएँ गनकर ‘कुल संख्या’ वाली पं क्त म संख्या लख द जए। एक ही भाषा दो बार आए तो एक ही बार
ग नए।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

नमूना उत्तर (आप इसे अपने अनुसार बद लए)—

क्रम म जन भाषाओं को बोल- मेरे मत्र जन भाषाओं को मेरे प रजन जन भाषाओं को
संख्या समझ लेता/लेती ँ बोल-समझ लेते ह बोल-समझ लेते ह

1 हद हद हद

2 अं ेज़ी अं ेज़ी भोजपुरी

3 भोजपुरी भोजपुरी अवधी

4 — पंजाबी अं ेज़ी

5 — बांग्ला संस्कृत (पूजा-पाठ क )

6 — त मल —

कुल 3 6 5
संख्या

इस काम से क्या सीखगे: ता लका भरते ही दख जाएगा क आपके छोटे -से समूह म भी कतनी भाषाएँ ज़दा ह।
यही तो बहुभा षकता है — और यही पाठ क बात को सद्ध करता है क भोजपुरी जैसी बोली भारत से नकलकर
मॉ रशस तक पहुँच गई और वहाँ के चीनी मूल के लोग भी उसे बोलने लगे। भाषा जसके पास जाती है, उसी क
हो जाती है।

आगे ब ढ़ए: जन भाषाओं के नाम आपने लखे ह, उनम ‘नमस्ते’, ‘धन्यवाद’ और ‘पानी’ कैसे कहते ह — यह भी
पूछकर लख ली जए। कक्षा म एक ‘भाषा-द वार’ बनाई जा सकती है।

प्रशंसा या सराहना व भन्न प्रकार से — पृष्ठ 139 और 140
पाठ से आगे

पाठ से आगे ले ख न

प्र.1 “यह प हद महासागर का मोती है, भारत-समुद्र का सबसे खूबसूरत सतारा है।” इस पाठ म लेखक ने मॉ रशस
क सराहना म यह वाक्य लखा है। सराहना करने के लए ‘ दनकर’ ने प क तुलना मोती और तारे से क है।
कसी क सराहना अनेक प्रकार से क जा सकती है। आप आगे द गई ता लका को पूरा क जए। पहले नाम
ल खए, फर इनक प्रशंसा म एक-एक वाक्य ल खए। शत यह है क प्रत्येक बार अलग तरह से प्रशंसा करनी है
— (स्वयं, प रजन, शक्षक, मत्र, पशु, स्थान, सब्ज़ी, पेड़)

पहले दे खए क दनकर ने क्या कया — उन्ह ने मॉ रशस को मोती और सतारा कहा। यह प्रशंसा का एक तरीका है: तुलना करके
(रूपक/उपमा)। प्रशंसा और भी कई तरह से क जा सकती है। शत यही है क हर बार तरीका बदलना है।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

प्रशंसा का तरीका कैसे कया जाता है उदाहरण

1. तुल ना से (रूपक/ कसी सुंदर या क मती चीज़ के समान बता दे ना “यह प हद महासागर का मोती है।”
उपमा)

2. ग ण
ु िगनाकर जो अच्छे गुण ह, उन्ह सीधे नाम लेकर बताना “आप बहुत धैयवान और स े ह।”

3. काम बताकर प्रशंसा नह करना, बस उसका कया हुआ काम “उसने अपना ट फ़न आधा करके मुझे दे दया।”
बता दे ना

4. आभार जताकर धन्यवाद के रूप म प्रशंसा “आपक वजह से मुझे ग णत समझ म आया —
धन्यवाद।”

5. पश्न के रूप में ऐसा प्रश्न जसका उत्तर ही प्रशंसा हो “इतनी सुंदर लखावट भला और कसक होगी?”

6. संबोधन से प्यार भरा नाम दे कर पुकारना “आ जाओ मेरे नन्हे पहरेदार!”

7. अितशयोिक्त से बात को बड़ा करके कहना “इसक छाया म बैठकर तो गम भी हार मान जाती
है।”

8. कहावत या मुहावरे से प्रच लत कहावत लगाकर “सचमुच, ‘हीरा है यह लड़क !’”

नमूना उत्तर — सराहना क ता लका (आप नाम अपने अनुसार बदल ली जए)

नाम प्रशंसा या सराहना का वाक्य कौन-सा
तरीका

स्वयं अंज ल मैंने ठान िलया था िक रोज़ दस प े पढ़ ू ँगी, और पूरे महीने एक िदन भी नही ं चूक ी। काम बताकर

पिरजन दाद माँ दादी माँ हमारे घर की वह लालटेन है,ं िजसकी रोशनी में सबको रास्ता िदखता है। रूपक (तुलना)

िशक्षक श्री रमेश सर आपने किठन सवाल को इतना आसान बना िदया िक डर ही िनकल गया — आभार जताकर
धन्यवाद , सर।

िमत्र सलीम जब मैं िगर पड़ ा था, तो सबसे पहले दौड़ कर कौन आया था? सलीम। प्रश्न के रूप म

पशु हमारी गाय आ जाओ, मेरी सीधी-सादी रानी! तुम्हारे िबना तो हमारा आँगन सूना लगता है। संबोधन से
‘कजरी’

स्थान हमारा गाँव यहाँ की हवा इतनी साफ़ है िक शहर से आया मेहमान भी दो िदन में चंगा हो जाता है। अ तशयो क्त से
नयागाँव

स ब्ज़ ी लौक लौकी स स्ती, सुपाच्य और से हत के िलए सबसे िहतकारी स ब्ज़ ी है। गुण गनाकर

पेड़ पीपल का पेड़ सच ही कहा गया है — ‘पीपल की छाँव, माँ का आँचल ’। कहावत से

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

शत कैसे नभाएँ: ता लका भरने के बाद हर वाक्य के आगे प सल से लख ली जए क वह कौन-से तरीके से बना
है। य द दो जगह एक ही तरीका आ गया, तो उनम से एक वाक्य बदल द जए। यही इस ग त व ध क असली शत है
— आठ प्रशंसाएँ, आठ अलग ढं ग।

याद र खए: प्रशंसा तभी स ी लगती है जब वह कसी ठोस बात पर हो। “तुम अच्छे हो” से कह बेहतर है —
“तुमने अपना ट फ़न बाँटकर खाया, यह अच्छा कया।”

चत्रात्मक सूचना (इंफो ा फक्स) — पृष्ठ 140 और 141

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान
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पाठ से आगे
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पाठ से आगे ले ख न

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a s emदए गए चत्र को दे खए। इसम चत्र के साथ-साथ बहुत कम शब्द म कुछ जानकारी द गई है। इसे
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नीचे
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प्र.1
‘ चत्रात्मक सूचना’ कहते ह।

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साल 1834 में 2 नवंबर को एटलस नाम का जहाज़ भारतीय मज़ दूरों को

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लेकर मॉिरशस पहचु ँ ा था, िजसे वहाँ अपवासी िदवस के रूप में मनाया जाता है

जब मॉिरशस मे ं गूजँ ा जय िहंद
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मॉिरशस में भारतीय मूल के लोगों की
आबादी देश में 68% से
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पुरानी श्वेत-श्याम तस्वीर —

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.co agमज़ दूरों का समूह
सफ़ेद कपड़ ों में खड़ े और बैठे
ज्य़ ादा है

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भारतीय

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(छायािचत्र पुस्तक में देिखए)

a g िबिटश शासक ग े के खेतों में काम
करने के िलए भारतीय मज़ दूरों को

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वहाँ ले गए थे
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इनमें से ज्य़ ादातर िबहार के थे, लेिकन
यही वजह है िक मॉिरशस की संस्कृित
se m तिमल, तेलगु ू और मरािठयों की तादाद

में भोजपुरी गीतों और िहंदी िफ़ल्मों का
g l a भी अच्छी-ख़ासी थी
ख़ास योगदान है a
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िचत्र — चश्मा, कोट और टाई

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मॉिरशस के पहले पधानमंत्री पहने एक व्यिक्त का चेहरा
िशवसागर रामगुलाम भी भारतीय
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(छायािचत्र पुस्तक में देिखए)

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मूल के थे

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ag पुस्तक (पृष्ठ 140) क ‘ चत्रात्मक सूचना’ — नीले पोस्टर पर ऊपर एक प , फर शीषक और उसके चार ओर छोटे -

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छोटे तथ्य; इसम छपे दो छाया चत्र क जगह यहाँ उनका वणन दया गया है, छाया चत्र पुस्तक म दे खए।

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(क) इस ‘ चत्रात्मक सूचना’ के आधार पर मॉ रशस के बारे म एक अनु े द ल खए।

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पहले पुस्तक के पृष्ठ 140 पर बनी चत्रात्मक सूचना को ध्यान से प ढ़ए। उसम द गई बात ये ह — इन्ह को जोड़कर अनुच्छेद

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बनेगा।
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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

चत्रात्मक सूचना म क्या लखा है

शीषक — “जब मॉ रशस म गूँजा जय हद”

सन 1834 म 2 नवंबर को एटलस नाम का जहाज़ भारतीय मज़दूर को लेकर मॉ रशस पहुँचा था; वहाँ यह दन अप्रवासी दवस (इं डयन
अराइवल डे) के रूप म मनाया जाता है।

मॉ रशस म भारतीय मूल के लोग क आबाद दे श म 68% से ज़्यादा है।

ब्र टश शासक गन्ने के खेत म काम करने के लए भारतीय मज़दूर को वहाँ ले गए थे।

इनम से ज़्यादातर बहार के थे, ले कन त मल, तेलुगू और मरा ठय क तादाद भी अच्छ -खासी थी।

यही वजह है क मॉ रशस क संस्कृ त म भोजपुरी गीत और हद फ़ल्म का खास योगदान है।

मॉ रशस के पहले प्रधानमंत्री शवसागर रामगुलाम भी भारतीय मूल के थे।

नमूना उत्तर — अनु ेद
मॉ रशस और भारत का नाता आज का नह , लगभग दो सौ साल पुराना है। सन 1834 म 2 नवंबर के दन ‘एटलस’ नाम का
जहाज़ भारतीय मज़दूर को लेकर मॉ रशस पहुँचा था। ब्र टश शासक इन मज़दूर को वहाँ गन्ने के खेत म काम कराने के लए ले गए
थे। मॉ रशस म वह दन आज भी ‘अप्रवासी दवस’ यानी इं डयन अराइवल डे के रूप म मनाया जाता है। जहाज़ पर सवार लोग म
सबसे अ धक बहार के थे, पर त मल, तेलुगू और मराठ लोग क संख्या भी अच्छ -खासी थी। आज मॉ रशस क कुल आबाद म
भारतीय मूल के लोग 68 प्र तशत से भी ज़्यादा ह। यही कारण है क वहाँ क संस्कृ त म भोजपुरी गीत और हद फ़ल्म का खास
योगदान है। मॉ रशस के पहले प्रधानमंत्री शवसागर रामगुलाम भी भारतीय मूल के ही थे। इन्ह बात को दे खकर रामधारी सह
‘ दनकर’ ने मॉ रशस को “ हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान” कहा।

अनु े द कैसे बनाया गया: चत्रात्मक सूचना म बात टु कड़ म बखरी रहती ह। अनुच्छेद बनाते समय उन्ह समय के
क्रम म सजाइए — पहले कब आए, फर क्य आए, फर कौन आए, फर आज क्या त है। अंत म एक वाक्य
अपनी ओर से जो ड़ए जो पूरी बात को समेट ले।

पाठ से जो ड़ए: पाठ म लखा है क मॉ रशस म 67 प्र तशत लोग भारतीय खानदान के ह, जब क चत्रात्मक सूचना
68 प्र तशत से ज़्यादा बताती है। ये आँकड़े अलग-अलग वष के ह, इस लए थोड़ा अंतर स्वाभा वक है — दोन एक
ही बात कहते ह क वहाँ दो- तहाई से अ धक लोग भारतीय मूल के ह।

प्र.2 (ख) अपनी पसंद के कसी वषय पर इसी प्रकार क ‘ चत्रात्मक सूचना’ क रचना क जए, जैसे— आपका
व ालय, कोई वशेष दवस, आपके जीवन क कोई वशेष घटना आ द। (संकेत— यह काय आप अपने समूह म
मलकर कर सकते ह। इसके लए आप कसी कागज़ पर चत्र चपका सकते ह और सूचना को कलात्मक रूप से
कम शब्द म लख सकते ह। चत्र बनाए भी जा सकते ह। आप यह काय कंप्यूटर या मोबाइल फोन क सहायता
से भी कर सकते ह।)

यह बनाने का काम है। अ चत्रात्मक सूचना म ये पाँच बात होती ह—

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

1. एक ज़ोरदार शीषक — बड़ा और आकषक, जैसे पुस्तक म है “जब मॉ रशस म गूँजा जय हद”।
2. चार से छह छोट सूचनाएँ — हर सूचना एक-दो पं क्त क । लंबा पैरा ाफ़ मत ल खए।
3. कम-से-कम एक संख्या या तारीख़ — जैसे ‘68%’ या ‘1834’। अंक बड़े और रंगीन ल खए, ता क पहली नज़र म दख।
4. चत्र या प्रतीक — हर सूचना के साथ एक छोटा चत्र। पुस्तक वाले म तरंगा, पुरानी तस्वीर और नेता का चत्र लगाया गया है।
5. एक रंग-योजना — दो या तीन रंग ही र खए। ज़रूरी शब्द अलग रंग म ल खए।

नमूना उत्तर — वषय: “हमारा व ालय”

शीषक (सबसे ऊपर, बड़े अक्षर म) — “हमारा व ालय : एक नज़र म”

ऊपर बीच में स्थापना का वष — 1972 (अंक बड़ ा और गहरे रंग में) + िव ालय के भवन का िचत्र

बाईं ओर, ऊपर 412 िव ाथ , 14 िशक्षक + बच्चों का पतीक -िचत्र

बाईं ओर, नीचे पुस्तकालय में 2,300 पुस्तकें + खुल ी िकताब का िचत्र

दाईं ओर, ऊपर िव ालय की क्यारी में 36 पौधे — हर िव ाथ एक पौधे का रखवाला + पौधे का िचत्र

दाईं ओर, नीचे हर शिनवार ‘बाल सभा’ — किवता, कहानी और नाटक + माइक का िचत्र

सबसे नीचे िव ालय का ध्येय-वाक्य — “पढ़ े ं, खेले ं, बढ़ े ं”

बनाने क व ध: एक चाट पेपर ली जए। पहले प सल से खाने बनाइए, फर चत्र चपकाइए या बनाइए, और अंत
म स्केच पेन से ल खए। पहले लखकर बाद म जगह ढूँ ढ़ने से चाट बगड़ जाता है — इस लए पहले जगह तय
क जए, फर ल खए। तैयार चाट कक्षा क द वार पर लगाइए।

चत्रात्मक सूचना क्य उपयोगी है: इसम बात पढ़नी नह पड़ती, दख जाती है। जो जानकारी पूरे पैरा ाफ़ म द
जाती, वह चत्र और चार शब्द म सामने आ जाती है — इसी लए आजकल समाचार-पत्र, रेलवे और अस्पताल तक
इसी तरीके से सूचना दे ते ह।

हस्ताक्षर — पृष्ठ 141
पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 आप जानते ही ह क यह पाठ हद के प्र सद्ध लेखक रामधारी सह ‘ दनकर’ ने लखा है। वे अपने नाम को कुछ
इस प्रकार लखते थे— … अपनी पहचान प्रकट करने के लए अपने नाम को कसी वशेष प्रकार से लखने को
हस्ताक्षर कहते ह… नीचे दए गए स्थान पर अपने हस्ताक्षर पाँच बार क जए। ध्यान रख क आपके हस्ताक्षर एक
जैसे ह , अलग-अलग न ह ।

यह पूरी तरह करने का काम है — हस्ताक्षर आपको अपनी पुस्तक म पाँच बार स्वयं करने ह। पहले यह समझ ली जए—

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

प्रश्न उत्तर

हस्ताक्षर क्या है? अपनी पहचान पकट करने के िलए अपने नाम को िकसी िवशेष पकार से िलखना।

पुस्तक में िकसके हस्ताक्षर रामधारी िसंह ‘िदनकर’ के — उ न्होंने अपना पूरा नाम एक ही पवाह में, लहरदार अक्षरों में िलखा है।
िदए है?ं

हस्ताक्षर कहाँ-कहाँ काम आते िव ालय की उपिस्थित और अंक -पत्र पर, पाथना-पत्र के अंत में, बैक
ं के काग़ ज़ों पर, परीक्षा-पत्र पर —
है?ं जीवनभर अनेक काय ं में।

सबसे ज़रूरी शत क्या है? पाँचों हस्ताक्षर एक जैसे हों। जो हस्ताक्षर हर बार बदल जाए , उसकी कोई कीमत नही ं रहती।

अपने हस्ताक्षर कैसे तय कर — तरीका

1. पहले रफ़ काग़ज़ पर अपना नाम तीन-चार ढं ग से लखकर दे खए — पूरा नाम, केवल पहला नाम, नाम + उपनाम का पहला
अक्षर।
2. जो रूप आपको सबसे अच्छा लगे और जल्द बन जाए, उसे चुन ली जए। बहुत उलझा हुआ हस्ताक्षर बार-बार एक जैसा नह
बनता।
3. उसी को दस बार अभ्यास क जए और मलाकर दे खए — क्या सब एक जैसे बने?
4. अब पुस्तक म दए ान पर पाँच हस्ताक्षर क जए।

नमूना (केवल समझने के लए): य द आपका नाम ‘अनुराधा शमा’ है तो हस्ताक्षर हो सकता है — अनुराधा शमा,
या अ. शमा, या केवल अनुराधा जसके नीचे एक सीधी रेखा खची हो। जो भी चुन, आज से वही रहने द जए।

सावधानी: हस्ताक्षर आपक पहचान है, इस लए इसे कसी और से न करवाएँ और न कसी और के हस्ताक्षर क
नकल कर — दूसरे के हस्ताक्षर क नकल करना कानूनन अपराध है।

पत्र — पृष्ठ 142
पाठ से आगे

पाठ से आगे पत्र

प्र.1 यहाँ ‘ दनकर’ का लखा एक पत्र दया जा रहा है। इसे प ढ़ए और प्रश्न के उत्तर ल खए। पत्र पढ़कर नीचे दए
गए प्रश्न के उत्तर अपने समूह म मलकर खो जए— (क) पत्र कसने लखा है?

यह पत्र रामधारी सह ‘ दनकर’ ने लखा है।
इसका प्रमाण पत्र के अंत म है — वहाँ लखा है “आपका दनकर”। पत्र के ऊपर पुस्तक ने भी बता दया है — “यहाँ ‘ दनकर’ का
लखा एक पत्र दया जा रहा है।”

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ध्यान द: पत्र म लेखक का नाम सबसे अंत म, बाईं या दाईं ओर आता है — इसे ‘हस्ताक्षर’ या ‘प्रेषक का नाम’
कहते ह। पत्र कसका है, यह जानने के लए सबसे पहले अंत दे खए।

प्र.2 (ख) पत्र कसे लखा गया है?

यह पत्र चतुवद जी को लखा गया है।
पत्र का आरंभ ही इस संबोधन से होता है — “मान्यवर चतुवद जी,”। जसे पत्र लखा जाता है, उसका नाम पत्र के आरंभ म
संबोधन के रूप म आता है।

पत्र के दो सरे: ऊपर का संबोधन बताता है क पत्र कसे लखा गया, और नीचे का नाम बताता है क पत्र कसने
लखा। दोन को दे खते ही पूरा पता चल जाता है क बातचीत कन दो लोग के बीच है।

प्र.3 (ग) पत्र कस त थ को लखा गया है?

पत्र 8-7-67 को लखा गया है, अथात 8 जुलाई 1967 को।
यह त थ पत्र के ऊपरी भाग म, ान के ठ क नीचे लखी है। त थ लखने का यह तरीका दन-महीना-वष का है — 8 ( दन), 7
(जुलाई), 67 (सन 1967)।

यह त थ क्य महत्त्वपूण है: पत्र म दनकर लखते ह — “15 जुलाई को प्र ान करना है।” और पाठ के पहले ही
वाक्य म लखा है — “यात्रा पर म दल्ली से 15 जुलाई को… रवाना हुआ।” यानी यह पत्र मॉ रशस-यात्रा से ठ क
एक सप्ताह पहले लखा गया था। पत्र और पाठ, दोन एक ही यात्रा क बात कर रहे ह।

प्र.4 (घ) पत्र कस स्थान से लखा गया है?

पत्र नई दल्ली से लखा गया है।
यह पत्र म दो जगह मलता है —

सबसे ऊपर, त थ से पहले — “नई दल्ली”।
सबसे नीचे, नाम के बाद पूरा पता — “सफ़दरजंग लेन, नई दल्ली”।

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान
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पत्र का नयम: प्रेषक (भेजने वाला) अपना ान और त थ पत्र के ऊपर दाईं या बाईं ओर लखता है, ता क पाने

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वाले को तुरंत पता चल जाए क पत्र कहाँ से और कब आया है।

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प्र.5 (ङ) पत्र पाने वाले के नाम से पहले कस शब्द का प्रयोग कया गया है?

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agप्रयोग कया गया है — “मान्यवर चतुवद जी,”
पत्र पाने वाले के नाम से पहले ‘मान्यवर’ शब्द का
‘मान्यवर’ का अथ है — मान के योग्य, आदरणीय, सम्मा नत। यह शब्द बताता है क दनकर चतुवद जी को अपने से बड़ा और

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आदरणीय मानते थे। नाम के बाद ‘जी’ लगाकर उन्ह ने आदर और बढ़ा दया।

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कसे पत्र प्रायः प्रयोग होने वाले संबोधन

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a g आदरणीय बड़े / अपिरिचत मान्यवर, आदरणीय, महोदय, ीमान

माता-िपता, ग रु
ु जन पूज्य, पूजनीय, आदरणीय
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िमत्र या बराबर वाले

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छोटों को ag िपय, िचरंजीव, आयुष्मान

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अपना एक वाक्य: प्रधानाचाय को अवकाश के लए पत्र लखते समय हम भी आरंभ म लखते ह — “मान्यवर /
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महोदय,”।

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(च) पत्र-लेखक ने अपने नाम से पहले अपने लए क्या शब्द लखा है?
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पत्र-लेखक ने अपने नाम से पहले ‘आपका’ शब्द लखा है — “आपका दनकर”।
इसका भाव क्या है — ‘आपका’ लखकर लेखक कहता है क ‘म आपका अपना ँ’। यह अपनापन, वनम्रता और स्नेह दखाने
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वाला शब्द है। ध्यान द जए क दनकर ने अपने नाम के आगे ‘राष्ट्रक व’ या कोई उपा ध नह लगाई — इतने बड़े लेखक होकर भी

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उन्ह ने सफ़ ‘आपका दनकर’ लखा। यही स ी वनम्रता है।

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पत्र के अंत म लखे जाने वाले शब्द कब

आपका / आपकी पिरिचत, िमत्र या स्नेह वाले संबंध में

आपका आ ाकारी / आ ाकािरणी माता-िपता या गुरुजन को िलखते समय

भवदीय / भवदीया औपचािरक पत्र में — पधानाचाय, अिधकारी, संपादक को

तुम्हारा / तुम्हारी अपने से छोटों या घिनष्ठ िमत्रों को

पूरा पत्र एक नज़र म: ान (नई दल्ली) → त थ (8-7-67) → संबोधन (मान्यवर चतुवद जी) → वषय-वस्तु
(स्वास्थ्य क बात और मॉ रशस जाने क सूचना) → समापन (आपके आशीवाद क कामना करता ँ) → हस्ताक्षर
(आपका दनकर) → पता (सफ़दरजंग लेन, नई दल्ली)। यही कसी भी पत्र के छह अंग ह — इसी क्रम से आप भी
अपना पत्र लख सकते ह।

उलझन सुलझाओ — पृष्ठ 142 और 143
पाठ से आगे

पाठ से आगे बू झो तो जान

प्र.1 (क) “जहाज़ नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घंट क नरंतर उड़ान के बाद जब वह मॉ रशस पहुँचा,
तब वहाँ रात के लगभग दस बज रहे थे।” जहाज़ नैरोबी से शाम 4 बजे उड़ा तो उसे 5 घंट क उड़ान के बाद रात
9 बजे मॉ रशस पहुँचना चा हए था। ले कन वह पहुँचा लगभग दस बजे। क्य ? आप इसका कारण पता करने के
लए अपने शक्षक या इंटरनेट क सहायता ले सकते ह।

जहाज़ ने दे र नह क — घड़ी बदल गई। नैरोबी (केन्या) और मॉ रशस दो अलग-अलग समय-क्षेत्र (टाइम ज़ोन) म ह। मॉ रशस क
घड़ी नैरोबी क घड़ी से एक घंटा आगे रहती है। इस लए जो समय नैरोबी म रात 9 बजे था, वही मॉ रशस म रात 10 बजे था।

नै रोबी में उड़ ान भरी — शाम 4:00 (नै रोबी का समय)

उड़ ान की अविध — + 5 घंटे

पहुँच ने का समय — रात 9:00 (नै रोबी के समय के िहसाब से)

मॉिरशस की घड़ ी नै रोबी से — + 1 घंट ा

इसिलए मॉिरशस की घड़ ी में समय — रात 10:00

ऐसा क्य होता है —

पृथ्वी अपनी धुरी पर प श्चम से पूव क ओर घूमती है, इस लए सूरज पहले पूव वाली जगह पर नकलता है। जो जगह जतनी
पूव म होगी, उसक घड़ी उतनी आगे रहेगी।

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मॉ रशस, नैरोबी से काफ़ पूव म है। पाठ भी बताता है क मॉ रशस “दे शांतर रेखा 60 के बल्कुल पास” है, जब क नैरोबी
लगभग 37° पूव दे शांतर पर है।
दे शांतर के हर 15 ड ी पर समय म एक घंटे का अंतर आ जाता है। दोन जगह के बीच लगभग इतना ही अंतर है — इसी लए
एक घंटा आगे।

असली सीख: यात्रा म ‘उड़ान का समय’ और ‘घड़ी का समय’ दो अलग चीज़ ह। उड़ान पाँच घंटे क ही थी; बढ़ा
हुआ एक घंटा जहाज़ ने नह लया, वह ानीय घड़ी का अंतर था। इसी कारण लंबी यात्रा म लोग उतरते ही अपनी
घड़ी वहाँ के समय पर मला लेते ह।

करके दे खए: भारत का समय (IST) ीन वच से 5 घंटे 30 मनट आगे है। अपने शक्षक से पू छए क आपके शहर
और लंदन के समय म कतना अंतर है — और फर हसाब लगाइए क दल्ली से लंदन क 9 घंटे क उड़ान सुबह 2
बजे चलकर लंदन क घड़ी म कब पहुँचेगी।

प्र.2 (ख) नीचे दो घ ड़य के चत्र दए गए ह। एक घड़ी भारत के समय को दखा रही है। दूसरी घड़ी दखा रही है क
उसी समय मॉ रशस म कतने घंटे और मनट हुए ह।

12 12
11 1 11 1
10 2 10 2
9 3 9 3
8 4 8 4
7 5 7 5
6 6

भारत मे ं घड़ ी मॉिरशस मे ं घड़ ी

पुस्तक (पृष्ठ 143) म छपी दो घ ड़याँ — बाईं घड़ी के नीचे ‘भारत म घड़ी’ और दाईं के नीचे ‘मॉ रशस म घड़ी’ लखा है।

इन घ ड़य के अनुसार नीचे दए गए प्रश्न के उत्तर द जए— • भारत म क्या समय हुआ है? • मॉ रशस म क्या
समय हुआ है? • मॉ रशस और भारत के समय म कतने घंटे और मनट का अंतर है? • सूय दय भारत म पहले
होगा या मॉ रशस म? • जस समय भारत म दोपहर के 12 बजे ह गे, उस समय मॉ रशस क घ ड़याँ कतना समय
दखा रही ह गी?

पहले पुस्तक के पृष्ठ 143 पर बनी दोन घ ड़य क सुइयाँ ध्यान से दे खए—

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कक्षा 6 हद अध्याय 12 हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान AglaSem · NCERT Solutions

घड़ी छोट सुई (घंटा) बड़ी सुई ( मनट) समय

भारत में घड़ ी 5 और 6 के बीच 4 पर (4 × 5 = 20 मनट) 5 बजकर 20 िमनट

मॉिरशस में घड़ ी 3 और 4 के बीच 10 पर (10 × 5 = 50 मनट) 3 बजकर 50 िमनट

अब एक-एक करके उत्तर—

प्रश्न उत्तर कैसे नकला

भारत में क्या समय हुआ 5 बजकर 20 बड़ी सुई 4 पर है और मनट म हर अंक 5 का होता है, इस लए 4 × 5 = 20 मनट। छोट
है? िमनट सुई 5 पार कर चुक है, इस लए 5 बजे।

मॉिरशस में क्या समय 3 बजकर 50 बड़ी सुई 10 पर है, यानी 10 × 5 = 50 मनट। छोट सुई 3 पार करके 4 क ओर बढ़ रही
हुआ है? िमनट है, इस लए 3 बजे।

दोनों के समय में िकतना 1 घंटा 30 िमनट 3:50 से 4:00 तक 10 मनट, फर 4:00 से 5:00 तक 1 घंटा, फर 5:00 से 5:20 तक
अंतर है? 20 मनट। कुल = 10 मनट + 1 घंटा + 20 मनट = 1 घंटा 30 मनट। भारत आगे है।

सूय दय पहले कहाँ भारत में भारत क घड़ी मॉ रशस से डेढ़ घंटा आगे है, यानी भारत अ धक पूव म है। पृथ्वी प श्चम से
होगा? पूव क ओर घूमती है, इस लए सूरज पूव वाली जगह पर पहले नकलता है।

भारत में दोपहर 12 बजे, सुबह 10 बजकर मॉ रशस भारत से 1 घंटा 30 मनट पीछे है। 12:00 − 1:30 = 10:30 पूवाह्न।
तब मॉिरशस में? 30 िमनट

यह अंतर सचमुच का है: भारत का मानक समय ीन वच से 5 घंटे 30 मनट आगे है और मॉ रशस का 4 घंटे
आगे। 5:30 − 4:00 = 1 घंटा 30 मनट — बलकुल वही अंतर जो घ ड़याँ दखा रही ह। इस लए घड़ी के चत्र
केवल अभ्यास नह , स ी जानकारी ह।

घड़ी पढ़ने का नयम: बड़ी सुई जस अंक पर हो, उसे 5 से गुणा क जए — वही मनट ह गे। छोट सुई जस अंक
को पार कर चुक हो, वही घंटा है (अगले अंक का नह )।

आज क पहेली — पृष्ठ 143 और 144
पाठ से आगे

पाठ से आगे बू झो तो जान

प्र.1 आज हम आपके लए एक अनोखी पहेली लाए ह। यहाँ एक वाक्य दया गया है। आपको पता करना है क इसका
क्या अथ है— “येला मालथ येला घौलश।” मेरा _______________ (संकेत — क ← ख)

पहेली का उत्तर है —

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मेरा भारत मेरा गौरव।

संकेत को कैसे पढ़: डब्बे म लखा है क ← ख। वणमाला म ‘ख’ के ठ क पहले ‘क’ आता है, और तीर ‘ख’ से ‘क’ क ओर है।
इसका अथ हुआ — हर व्यंजन को वणमाला म एक कदम पीछे ले जाइए। मात्राएँ (ए, आ, औ आ द) जैसी ह, वैसी ही रहने
द जए।
अब मलान क जए। हद वणमाला का यह भाग याद र खए — … प फ ब भ म · य र ल व श ष स ह

पहेली का अक्षर व्यंजन एक कदम पीछे बना

ये य म मे

ला ल र रा

मा म भ भा

ल ल र र

थ थ त त

ये य म मे

ला ल र रा

घौ घ ग गौ

ल ल र र

श श व व

अक्षर जोड़ते ही वाक्य बन जाता है —

येला → मेरा

मालथ → भारत

येला → मेरा

घौलश → गौरव

मेरा भारत मेरा गौरव।

इसी लए पुस्तक म नीचे पहले से ही “मेरा ______” लखा है — वहाँ ल खए भारत मेरा गौरव।

पहेली बनाने का तरीका: जसने यह पहेली बनाई, उसने असली वाक्य के हर व्यंजन को वणमाला म एक कदम
आगे बढ़ा दया — म→य, भ→म, र→ल, त→थ, ग→घ, व→श। सुलझाने वाले को उलटा करना है, यानी एक
कदम पीछे । इसी तरह क गुप्त ल प को ‘कूट भाषा’ या ‘सांके तक ल प’ (कोड) कहते ह।

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स्वयं बनाइए: अपने मत्र का नाम इसी नयम से एक कदम आगे बढ़ाकर ल खए और उसे संकेत ‘क ← ख’ दे कर

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सुलझाने को क हए। ध्यान र खए — मात्रा और अनुस्वार नह बदलते, केवल व्यंजन बदलते ह।
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gl से जो ड़ए: इस पहेली का उत्तर पूरे पाठ का सार भी है। मॉ रशस म बसे भारतीय वंश के लोग आज भी यही
aकहते
पाठ
ह — ‘मेरा भारत मेरा गौरव’। इसी लए दनकर ने लखा — “यह ऐसी सफलता क बात है, जस पर सभी

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भारतीय को गव होना चा हए।”

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खोजबीन के लए — पृष्ठ 144
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पाठ से आगे

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पाठ से आगे
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प रयोजना
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a glप्र.1 नीचे द गई रचनाओं को पुस्तक म दए गए क्यू.आर. कोड क सहायता से पढ़, दे ख व समझ— • चाँद का कुता •
मच का मज़ा • राष्ट्रक व रामधारी सह ‘ दनकर’ क जीवनी • हमालय के पवतीय प्रदे श क मनोरम यात्रा
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agl गया क्यू.आर. कोड मोबाइल या टैबलेट से स्कैन क जए और चार रचनाएँ अपने

यह पढ़ने और दे खने का काम है। पुस्तक म दया
समूह के साथ दे खए। नीचे बताया गया है क हर रचना म क्या ढूँ ढ़ना है — इसी से आपक खोजबीन साथक होगी।

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रचना यह क्या है दे खते-पढ़ते समय क्या ढूँ ढ़ए

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m . ag -बढ़ ता है, इसीिलए उसका नाप ही तय नही ं
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चाँद का रामधारी सह ‘ दनकर’ क प्र सद्ध बाल- दे िखए िक चाँद हर िदन घटता

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क वता, जसम चाँद अपनी माँ से कुता हो पाता। ध्यान दीिजए िक िदनकर ने िव ान की बात को िकतनी सरल
सलवाने क ज़द करता है। क ल्पना में बदल िदया है।

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िमच का मज़ ा
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‘ दनकर’ क ही बाल-क वता, जसका दे िखए िक किवता हँस ाते-हँस ाते सीख कै से दे जाती है। िकसी शब्द की
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ज़क्र पाठ के ‘लेखक से प रचय’ ध् विन और लय पर ध् यान दीिजए — ऊँ ची आवाज़ में पढ़ ने पर मज़ ा दुग न
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है। हो जाएगा।

रा किव रामधारी
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लेखक का जीवन-प रचय (1908– ढू ँिढ़ ए — वे कहाँ जन्मे, उ न्हे ं ‘रा किव’ क्यों कहा गया, उनकी बड़ ी

एक चाट पर समय-रे खा (टाइमलाइन.)cकीom
िसंह ‘िदनकर’ की 1974)। कृ ितयाँ कौन-सी है ं और उ न्हे ं कौन-कौन से स म्मान िमले । इन बातों को
जीवनी
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तरह िलिखए।

omके पवतीय a s
इसे पढ़ ते हुए इस पाठgसेlतुल ना कीिजए — दोनों में ले खक कब-कहाँ
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िहमालय
a है या नही,ं दृ य कैसे खी ंचे गए है,ं और ले खक ने
m पदे श की मनोरम
एक और यात्रा-वृत्तांत / यात्रा-वृत्त।

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पहचु ँ ा यह बताया गया श्

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त्र अपने मन की बात कहाँ-कहाँ जोड़ ी है।
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करने योग्य: चार रचनाएँ दे खने के बाद अपनी लेखन-पु स्तका म एक पृष्ठ का ‘खोजबीन पन्ना’ बनाइए — हर रचना

s e mक्या था, (2) मुझे सबसे अच्छ कौन-सी बात लगी।
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के आगे दो पं क्तयाँ ल खए: (1) इसम

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ये चार साथ क्य द गई ह: पहली दो रचनाएँ बताती ह क जो लेखक ‘हल्द घाट ’ जैसे गंभीर वषय लखता है,
वही ब के लए हँसी-मज़ाक क क वताएँ भी लखता है। तीसरी उस लेखक के जीवन से मलाती है। और चौथी
इसी पाठ क वधा — यात्रा-वृत्तांत — का एक और उदाहरण दे ती है, ता क आप इस वधा को पहचानना सीख
जाएँ।

अध्याय — एक नज़र म
रचना का नाम ‘ हद महासागर म छोटा-सा हदुस्तान’ है और लेखक ह रामधारी सह ‘ दनकर’ (1908–1974)। यह कोई
कहानी या क वता नह , ब ल्क एक यात्रा-वृत्तांत है — यानी लेखक ने जो यात्रा सचमुच क , उसी का आँख -दे खा वणन। पाठ
के बाद दया गया ‘लेखक से प रचय’ बताता है क ‘ दनकर’ क रचनाओं क वशेषता है भारत और भारत क संस्कृ त,
तथा उनम वीरता, उत्साह और दे शप्रेम का भाव अ धक है। ब के लए उन्ह ने मच का मज़ा, पढ़क्कू क सूझ और सूरज
का ब्याह जैसी पुस्तक लख ।
यात्रा का क्रम — लेखक दल्ली से 15 जुलाई को, बंबई (मुंबई) से 16 जुलाई को और नैरोबी से 17 जुलाई को मॉ रशस के
लए रवाना हुए। बीच म नैरोबी (केन्या) म एक रात और दो दन ठहरने का मौका मला, तो वे नैरोबी के नेशनल पाक घूमने
नकल गए।
नेशनल पाक का दृश्य — “नैरोबी का नेशनल पाक च ड़याघर नह है।” वहाँ सात-आठ सह आराम कर रहे थे और उन्ह
घेरकर आठ-दस मोटर खड़ी थ , पर सह ने एक बार भी लोग क ओर नह दे खा — “हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी
बदतर समझे गए।”
हरन और सह का प्रसंग — हरन के झुंड ने ताड़ लया क सह क नज़र उन पर है। कुछ हरन भाग नकले, बाक
ठठके खड़े रहे, क्य क सह झुंड का नह , झुंड से पछड़ जाने वाले जानवर का शकार करते ह। इसी लए भागना उन्ह
नरापद (सुर क्षत) नह लगा।
मॉ रशस का प रचय — यह प भूमध्य रेखा से कोई बीस ड ी द क्खन है, इसक लंबाई 29 मील, चौड़ाई 30 मील और
रकबा 720 वगमील है। लेखक इसे “ हद महासागर का मोती” और “भारत-समुद्र का सबसे खूबसूरत सतारा” कहते ह। वहाँ
67 प्र तशत लोग भारतीय खानदान के और 53 प्र तशत हदू ह।
‘छोटा-सा हदुस्तान’ क्य — पोटलुई क ग लय के नाम कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद और बम्बई ह; एक पूरे मोहल्ले का नाम
काशी है; वहाँ बनारस, गोकुल और ब्रह्म ान भी ह। हर प्रमुख गाँव म शवालय है, रामच रतमानस का पाठ होता है और
शवरा त्र पर लोग ेत वस्त्र पहनकर काँवर लेकर परी-तालाब जाते ह। भोजपुरी वहाँ क दूसरी जनभाषा है।
पाठ का संदेश — भारतीय मज़दूर ने अत्याचार सहे, प्रलोभन ठु कराए, अपने धम और संस्कृ त पर डटे रहे और ऊख (गन्ने)
क खेती से मॉ रशस को खड़ा कया। इसी लए लेखक कहते ह — “मॉ रशस क असली ताकत भारतीय लोग ही ह” और
यह “ऐसी सफलता क बात है, जस पर सभी भारतीय को गव होना चा हए।”

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त्व रत पुनरावृ त्त

पाठ का अथ पाठ क पं क्त अपना एक वाक्य
शब्द

अतएव इसिलए, इस कारण “अतएव, हम जस दन नैरोबी पहुँचे…” बस दे र से आई, अतएव हम पैदल ही
जाना पड़ा।

खरपात खर-पतवार, बेक ार उगी घास-फू स “हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी खेत क मेड़ पर उगा खरपात कसान ने
बदतर समझे गए।” काटकर हटा दया।

दृ ष्टपात नज़र डालना, एक बार दे ख ले ना “ सह ने कभी भी दृ ष्टपात नह कया” प्रधानाचाय ने पत्र पर दृ ष्टपात कया और
करना हस्ताक्षर कर दए।

तुरा सबसे बड़ी बात, ऊपर से यह िक “तुरा यह क सह को यह जानने क वह दे र से आया और तुरा यह क उलटे
कोई इच्छा ही नह थी” हम पर ही नाराज़ हुआ।

ताड़ लेना भाँप ले ना, दू र से ही समझ जाना “ हरन के झुंड ने ताड़ लया…” माँ ने मेरा चेहरा दे खते ही ताड़ लया क
म झूठ बोल रहा ँ।

सहज प्रवृ त्त जन्म से िमली स्वाभािवक समझ “सहज प्रवृ त्त हरन को यह समझा रही चूज़ा बना सखाए ही दाना चुगता है —
(इंिस्टंक्ट) थी…” यह उसक सहज प्रवृ त्त है।

नरापद िजसमें कोई आपदा या खतरा न हो, “ हरन भागने को नरापद नह तेज़ बा रश म पेड़ के नीचे खड़ा होना
सुर िक्षत समझकर…” नरापद नह होता।

रकबा क्षेत्र फल, ज़मीन का फै लाव “पूरे मॉ रशस प का रकबा 720 हमारे गाँव क पंचायत का रकबा दो सौ
वगमील आँका जाता है।” हेक्टे यर है।

व्यापक दू र -दू र तक फै ला हआ ु िवस्ततृ
ु , बहत “ हद का मॉ रशस म व्यापक प्रचार है।” स्वच्छता अ भयान का प्रचार पूरे ज़ले म
व्यापक रहा।

ऊख ग ा, ईख “मॉ रशस म ऊख क खेती और उसके जाड़े म ऊख के रस से गुड़ बनाया जाता
व्यवसाय…” है।

प्राणवती / पाणों से भरी हुई / लंबी आयु वाली “भारतीय संस्कृ त कतनी प्राणवती और लोकगीत आज भी उतने ही प्राणवती ह
चरायु चरायु है” जतने सौ साल पहले थे।

प्रलोभन लालच, ललचाने वाला लोभ “भारतीय ने… प्रलोभन को ठु करा ईमानदार अफ़सर ने हर प्रलोभन ठु करा
दया।” दया।

सुरम्य मन को भाने वाला, बहुत सुंद र “मं दर और शवालय को मने अत्यन्त पहाड़ी झरने के पास का दृश्य बड़ा सुरम्य
स्वच्छ और सुरम्य पाया।” था।

काँवर बाँस का डंडा िजसके दोनों िसरों पर “कंध पर काँवर लए जुलूस बाँधकर परी सावन म काँवर लेकर श्रद्धालु गंगाजल
छी ंके बाँध कर जल ले जाते है ं तालाब पर आते ह” लाते ह।

क्रेयोल मॉिरशस की जनभाषा, दो भाषाओं के “मगर जनता वहाँ क्रेयोल बोलती है।” क्रेयोल का च से वही नाता है जो
मेल से बनी नई भाषा भोजपुरी का हद से है।

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 6
TypeSolution
Pages37
Languagehindi
Updated19 Sep 2026